Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 67 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२३

लखनकी बातसे सृती थोडी नीरास होगइ.. क्युकी कल रात रमाकी चुदाइकी वजहसे वो काफी गरम होगइ थी.. इसीलीये आज उनकी क्लीनीकपे कोइ पेसन्ट नही होता तो वो आज लखनके लंडको देखना चाहती थी.. ताकी लखन उनके साथ थोडा आगे बढ सके.. क्युकी अब सृती लखनके साथ आगे बढकर वो सबकुछ करना चाहती थी.. लेकीन वो पहेल करनेसे डरती थी.. इसके लीये इस मामलेमे वो खुद लखनको आगे बढनेका मौका देना चाहती थी.. ओर कुछ देरेके बाद दोनो क्लीनीकपे पहोंच गये.... अब आगे

सृती : (कारसे उतरते) आइअ‍े देवरजी.. आप कोफी पीकर चले जाना.. तबतक पुनोदीदीसे बात भी होजायेगी.. चलीये..

कहा तो लखन सृतीके साथ क्लीनीकपे चला गया.. अंदर जाकर देखा तो तीन चार पेसन्ट बैठे थे.. तो सृतीने थोडी देरके बाद अ‍ेक अ‍ेकको अंदर आनेकी सुचना देकर अपनी ओफीसमे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते इन्टरकोमसे दो कोफीका बोल दीया.. ओर वो अपनी चेरपे जाकर बैठ गइ.. ओर लखनको भी सामने बैठनेको कहा.. ओर सृतीने अपना मोबाइल नीकालकर पुनमको फोन लगा दीया..

सृती : (सामने फोन उठाते ही) हेलो.. कौन..? पुनम दीदी..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मे पुनम बोल रही हु.. लखन भैयासे अ‍ेक घंटे पहेले ही मेरी बात हुइ.. क्या मेरे बारेमे आपसे कोइ बात हुइ..?

सृती : (मुस्कुराते) हां दीदी.. तभी तो आपको फोन कीया.. अभी वो मेरे सामने ही बैठे हे.. लीजीये बात कीजीये इनसे..

इस वक्त दया ओर पुनम कीचनमे खाना बना रही थी.. जैसे ही सृतीका फोन आया वो फोन लेकर बहार होलमे सोफेपे जाकर बैठ गइ.. ओर फोन उठालीया.. जैसे ही सृतीने कहा लखनसे बात कीजीये.. तब अ‍ेक पाल तो पुनमके दिलकी कडकन धडकना चुक गइ.. ओर उनकी आंखोसे फीरसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. सृती लखनको फोन देते उनके सामने ही देखती रही.. तभी..

लखन : (भारी आवाजमे आंख गीली करते) हेलो.. दीदी.. क्या हुआ..?

पुनम : (जोरसे रोते) भैया.. आइ अ‍ेम सोरी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजे बस.. अ‍ेक बार माफ करदो..





लखन : (आंसु बहाते) हेय हेय.. दीदी रोइअ‍े मत.. आपको मेरी कसम.. आप आप अ‍ेक बारतो माफी मांग चुकी हो..ओर गलती मेरी भी थी.. माफी तो मुजे मांगनी चाहीये आपसे.. आप मुजे माफ करदो.. सोरी दीदी.. प्लीज.. रोना बंध करो.. अगर वो कमीना अब तंग करेतो मुजे कोल करदेना..

पुनम : (जटसे अपने आंसु पोछते) भाइ.. कसम मत दो.. मे नही रोती.. बस..? भाइ.. क्या अ‍ेक बार भी इस बहेनकी याद नही आइ.. आप बहुत बुरे हो.. कीतना रुलाया हे आपने मुजे.. हें..हें..हें..

लखन : (आंसु बहाते भी मुस्कुराते) दीदी.. आइ अ‍ेम सोरी.. प्ली..ज.. अ‍ेक बार अपने लखन भैयाको माफ करदो.. आइ प्रोमीस.. अब अ‍ैसी गलती दुबारा कभी नही होगी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आप गलतीकी बात मत करो.. आपकी कोइ गलती नही थी.. अब भुल जाओ सब.. आइ मीस यु.. मुजे आपकी बहुत जरुरत हे..

लखन : (आंसु पोछते) दीदी.. जानता हु मे.. आपकी पल पलकी खबर मीलती हे मुजे.. इसीलीये सुबह आपको फोन करदीया.. मे तो हमेसा आपके साथ ही हु.. बस.. जो होना था हो गया.. भुल जाइअ‍े सब.. आप अ‍ेक आवाज करो.. मे हाजर होजाउगा.. दीदी.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. क्या धिरेनने आपके उपर हाथ तो नही उठायानां..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. उनमे इतनी हिंमत नही हे.. ओर आपकी बहेन भी इतनी कमजोर नही हे.. भाइ.. मे इस आदमीके साथ रहेना नही चाहती.. भाइ आपने देखीनां उनकी करतुत..? भाइ.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बताना हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. आपके भाइके घरका दरवाजा हमेसा खुला ही हे.. आपको कुछ अ‍ैसा लगे.. तो आप यहा चली आना.. वरना मुजे कोल करना मे आपको लेजाउगा..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. कहीये दीदी..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. क्या अब भाभी नही कहोगे..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. भाभी तो बहुत चाटा मारती हे.. मेरी दीदी बहुत अच्छी हे.. अभी यहा दुसरी भाभीके साथ बैठा हु.. देखता हु वो क्या करती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. आइ अ‍ेम सोरी.. आइ प्रोमीस.. अब अ‍ैसी गलती दुबारा कभी होगी.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे अपने भाइसे बहुत चाहती हु..

लखन : (आंख गीली करते) हंम.. लव यु टु दीदी.. आपका ये भाइ भी आपको बहुत चाहता हे.. दीदी.. सुनो.. अ‍ेक बहुत बडी खुस खबरी सुनाता हु.. अभी अभी मे ओर भाभी उनकी फ्रेन्डकी क्लीनीकसे आ रहे हे.. दीदी.. आप बुआ.. ओर मे चाचा बनने वाला हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते खुसीसे हसते) व्होट..? भाइ.. सच केह रहे हो..? आप दोनो सुबह साथमे वहा थे..? भाइ.. फोन जरा भाभीको देनां..





लखन : (मुस्कुराते फोन देते) भाभी.. लीजीये.. दीदीसे बात कीजीये..

सृती : (हसते फोन लेते) हां दीदी.. कहीये.. दोनो भाइ बहेनके बीच होगइ बात..? देखो.. मेने अपना वादा पुरा कीया हे.. कहेते थे मेने दीदीसे बात करली.. लेकीन फीर भी मेने कहा.. की मेरे सामने बात करलो.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. थेन्क्यु.. थेन्क्यु सो मच.. आज मे बहुत खुस हु.. भाइसे आज दो बार बात भी होगइ.. ओर उनके मुहसे इतनी बडी खुस खबर भी मील गइ.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. सुनीये.. अभी हमारे देवर केह रहेथे.. आपका धिरेनके साथ कुछ जगडा बगडा हो गया हे.. कही कुछ ज्यादा बबाल तो नही हुआ..?

पुनम : भाभी.. मेने भाइको क्लीप भेजी हे.. आप सुन लेना.. भाभी.. सीर्फ आपको बता रही हु.. मे बहुत जल्द वहा आपके पास आ रही हु.. वो भी हमेसाके लीये.. समज गइनां.. अभी भाइको मत बताना.. ओके..

सृती : (खुस होते मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. दीदी.. मे फोन रखती हु.. इस बारेमे हम रातमे फुरसतमे बात करेगे.. अलके..? बाय..

लखन : (फोन कट करते ही) भाभी.. क्या केह रही हे दीदी.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कुराते) हे अ‍ेक सीक्रेट बात.. मे आपको क्यु बताउ..? वैसे भी हम दो लेडीजकी बाते हे.. हो सकता हे आपके लीये कुछ सरप्राइज हो.. हें..हें..हें..

लखन : (जुठा गुस्सा करते) ठीक हे.. मे भी देख लुगा तुम दोनोको..

सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां देखलेना.. हम भी देखती हे आप क्या करते हे.. हें..हें..हें.. वैसे हमारी देवरानीके पास जा रहे हो.. तो आपकी सांसको छुटी मील जाये तो दोनोको घरपे लेआना.. वरना बेचारी अपने घरपे अकेली क्या करेगी..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. थेन्क्स..

इतनेमे कोफी आगइ.. तो दोनो कोफी पीने लगे.. फीर सृतीने लखनको दो घंटेके बाद उसे आकर लेजानेको कहा.. तो लखन कोफी पीकर वहासे चला गया.. ओर घरसे टीफीन लेकर होस्पीटलपे चला गया.. तो वहा डोक्टरने राधीकाकी मम्मीको छुटी देदी थी.. ओर राधीका अपनी मम्मीको घर लेजानेकी तैयारीया कर रही थी.. तभी लखन वहा पहोंच गया.. ओर दोनोने घर जाकर खानेको कहा..
 
फीर लखन राधीका ओर उनकी मम्मीको लेकर अपने घर आगया.. तो लता दोनोको देखकर बहुत खुस होगइ.. ओर राधीकाकी मम्मीको नीचे नीलम वाली रुममे ठहेराया.. ओर लताने नीलमका सामान कुछ दिनके लीये उपरके दो खालीमे से अ‍ेक रुममे सीफ्ट करदीया.. तो राधीकाकी मम्मी इतना बडा बंगलो देखकर बहुत खुस होगइ.. फीर लताने राधीकाको पुरा बंगला दीखाया.. तब राधीका बहुत सरमाइ..

राधीका : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. आप लोगोने खामखा इतनी तकलीफ ली.. हमे घर जाने दिया होता..

लता : (जुठा गुस्सा करते) अरे..? पागल होगइ हे क्या..? तो फीर ये कीसका घर हे..? दीदी.. ये भी तो आपहीका घर हे.. हमारा ससुराल.. अगर हमारे पतीने सुनलीया तो आपको बहुत डांट पडेगी.. हें..हें..हें..

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. सच कहु..? मेने तो मेरी अ‍ैसी जींदगीकी कभी कल्पना भी नही की थी.. आप सब लोग कीतने अच्छे हे..

लता : (हाथ पकडते) दीदी.. सायद आपको पता नही हम सब कौन हे.. अगर जानना होतो कुछ ही दिन मे आपकी पकी सहेली यहा आ रही हे.. आप उन्हीसे सब जान लेना.. क्या पुनो दीदी आपकी सहेली हेनां..?

राधीका : (मुस्कुराते) नही दीदी.. वो सीर्फ सहेली नही.. सहेलीसे बढकर हे.. मेरी छोटी बहेन.. क्या वो सच मे इधर आ रही हे..?

लता : (मुस्कुराते) हां दीदी.. आप अ‍ेक बार पुनो दीदीसे सब बात करलेना.. ताकी हमारे खानदानके बारेमे आपको सबकुछ पता चल जायेगा.. तो आपको कोइ गीला सीकवा नही होगा..

राधीका : (सरमाते हसते) दीदी.. वैसे तो मे हमारे खानदानके बारेमे हमारी सादीसे पहेले ही बहुत कुछ जानती हु.. फीर भी पुनोदीदी आयेगी तो मे उनसे बात कर लुगी.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. चलीये नीचे.. माजी अकेली होगी.. बस.. आप सीर्फ उनका खयाल रखीये.. अभी होस्टेलका सब हमारे पती देख लेगे.. जब माजी ठीक होजाये तब आप होस्टेलपे चली जाना.. बाकी ये घर आपहीका हे.. अब आप कही नही जायेगी.. हें..हें..हें..

राधीका : (आंख गली करते गले लगाते) दीदी.. थेन्क्स.. आप लोग थे तो मुजे कोइ चीन्ता नही थी.. मेरा लखन.. ओह.. सोरी.. दीदी.. सोरी.. अभी आदत नही हेनां..? आइ मीन्स.. हमारे पती देव हे तो मुजे कोइ चीन्ता नही हे.. वो बहुत अच्छे हे.. सुरु से ही मेरी बहुत केर करते हे.. दीदी.. हम बहुत नसीब वाली हे..

लता : (मुस्कुराते नीचे आते) दीदी.. आप दोनोने अभी हाल ही मे सादी की हेनां..?

राधीका : (सरमाते धीरेसे) हां दीदी.. अभी कुछ ही दिन हुअ‍े हे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे बहुत प्यार करते हे.. वो भी सुरुसे ही.. जब वो वहा रहेकर पढते थे.. तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे..

लता : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. तो फीर आप दोनोने सादीके बाद कुछ कीयाकी नही.. आइ मीन.. आप दोनोकी सुहागरात..

राधीका : (सर्मसार होते धीरेसे) नही दीदी.. वो.. वो.. हमे मोका ही नही मीला.. सबकुछ अचानक हुआ.. तब उनका कुछ दो दिनका वत्र था.. ओर सब कुछ इतनी जल्दी हो गया.. तो हम नही मील पाये..

लता : (हसते धीरेसे) दीदी.. उनका कोइ व्रत ब्रत नही था.. चलीये मे आपको फुरसतमे बताती हु.. हें..हें..हें..

राधीका : (सामने देखकर हसते) क्या..? तो फीर उसने मुजसे जुठ क्यु बोला..?

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. उन्होने आपसे कोइ जुठ नही बोला.. दरसल तब उनको कुछ जडी बुटी दी गइ थी.. वो सब आपकी सहेलीको पता हे.. आप आपनी सहेलीको पुछ लेना.. उनको सबकुछ पता हे.. चलीये..

लखनको पता था.. की सृती टेस्टके बहाने क्या देखना चाहती हे.. तो इस बातसे लखन बहुत ही अ‍ेक्साइटेड हो रहाथा.. ओर अबकी बार वो कोइ जल्द बाजीकी या गलती करना नही चाहता था.. वो बडी सावधानीसे आगे बढना चाहता था.. क्युकी अब उसे मंजुने पुरी तराह छुट जो देदी थी.. तभी लता ओर राधीका दोनो नीचे अपनी मम्मीके पास आगइ.. तो लखन उनकी सांसके साथ बाते कर रहा था.. ओर उनको हसा रहा था..

लता : (मुस्कुराते) अरे.. आप यहा हे..? दोनो सांस जमाइमे क्या बाते हो रही हे.. हम भी तो सुने.. हें..हें..हें..

रा.मम्मी : (हसते) अरे बेटा.. ये मेरा जमाइ थोडीना हे..? ये तो मेरा बेटा हे बेटा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. तुम मम्मीको खाना खीलादो.. मे भाभीको लेकर आता हु.. फीर हम साथमे लंच कर लेगे..

राधीका : (मुस्कुराते) अरे दीदी.. मे मम्मीको खीला दुगी.. आप दुसरा काम देखलो..

लता : (मुस्कुराते) नही मतलब नही.. सुना नही हमारे पतीने कीसको कहा..हे? हें..हें..हें.. लखन.. आप भाभीको लेकर आइये.. ओर हां.. थोडा जल्दी आइअ‍ेगा..

राधीका : (लताकी ओर देखते मुस्कुराते) दीदी.. वो.. रमा भाभी दीखाइ नही देती.. घर चली गइ क्या..?

लता : (लखनकी ओर देखकर हसते) नही दीदी.. उनकी भी तबीयत थोडी ठीक नही हे.. तो वो अपने रुममे आराम कर रही हे.. लखन.. अब जाइअ‍े भी.. लेट होजायेगा.. ओर देर मत करना..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. हां.. जा रहा हु बाबा.. पता नही वहा भी अभी कीतना पेसन्ट होगा.. लता अगर हमे देर हो जाये तो तुम राधु ओर रजु खालेना.. हम आकर लंच कर लेगे..

लता : अरे.. अ‍ैसे कैसे लंच करलेगे..? नही.. भले थोडी देर होजाये.. हम खाना साथमे ही खायेगे.. क्यु राधु दीदी..?

राधीका : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. मैने कभी फेमीलीके साथ बैठकर खाना खाया ही नही.. लखन.. आप भाभीको लेकर आयेगे तब हम सब साथमे खायेगे.. जाइअ‍े..

कहा तो लखन मुस्कुराते चला गया.. ओर लता राधीका कीचनकी ओर चली गइ.. तो दुसरी ओर लखन भी सृतीकी क्लीनीकपे चला गया.. तो उनकी रीसेपनीस्ट लखनको पहेचान गइ.. ओर लखनको मुस्कुराते अंदर जानेको कहा.. क्युकी सृतीने अपने सभी पेसन्टको देखलीया था.. ओर वो लखनके इन्तजार मे बैठी थी.. जैसे ही लखन आया.. उसने रीसेपनीस्टको कीसीको अंदर ना भेजनेकी सुचना देदी..

सृती : (सर्मसार होते) कहीये देवरजी.. हमारी देवरानीको घरपे ले आये..?

लखन : (सामने बैठते) हां भाभी.. दोनोको घरपे छोडकर ही आ रहा हु.. क्या यहा सब हो तो हम घर चले..?

सृती : (मुस्कुराते) देवरजी.. अभी तो साडा बाराह ही बजे हे.. हमे आधे घंटे ओर बैठना पडेगा.. आपको तो पता हेनां.. की क्लीनीकके ओपीडीका टाइम अ‍ेक बजे तक का हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. मुजे कोइ जल्दी नही हे.. ये तो आपकी देवरानीने कहा इसीलीये केह रहा हु..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. अभी कोइ पेसन्ट भी नही हे.. ओर हमारे पास टाइम भी हे.. तो क्या मे.. आइ.. मीन्स.. वो.. वो.. आपका.. देखकर.. कुछ टेस्ट करने हे.. तो अंदर जाकर करले..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मुजे कोइ अ‍ेतराज तो नही.. लेकीन डरता हु.. कही दुबारा मुजसे कोइ गलती ना होजाये.. क्युकी हो सकता हे मे कंट्रोल ना करपाउ.. अ‍ेक बार फीर सोच लीजीये..

सृती : (सरमाकर धीरेसे मुस्कुराते) अरे कुछ गलती नही होगी.. मे हुनां.. बस.. थोडासा कंट्रोल करलेना..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. बस.. इसी बातका डर लग रहा हे.. अगर मे कंट्रोल नही करपाया तो.. सोरी.. अब मे आप दोनो भाभीओकी नजरमे ओर गीरना नही चाहता..

सृती : (बाजी हाथसे नीकलते नजर आते ही) अरे आप खामखा डर रहे हे.. आइ प्रोमीस.. अ‍ैसा कुछ भी नही होगा जीसका आपको डर हे.. मे आपको रोक लुगी.. बस.. चलीये.. आइअ‍े अंदर..
 
लखन : (सरमाते खडा होते) भाभी.. देखना अब कुछ होजाये तो मुजे दोस मत देना..

सृती : (सर्मसार होते) अरे यकीन कीजीये.. कुछ नही होगा.. ठीक हे मे आपको दोस नही दुगी.. चलीये..

कहेते सृती उठकर अंदर केबीनमे चली गइ.. जहा वो अपने पेसन्टको देखती थी.. ताकी लखनको वहा प्राइवेसीमे कोइ सरम ना आये.. ओर उनके साथ कोइ बहेस करते बहाना ना बनाये.. सृतीका दिल जोरोसे धडकने लगा.. आखीर वो पल आही गया.. जीसका पुनम ओर सृतीको लखनके लंडको देखनेका बेसबरीसे इन्तजार था.. तब लखन भी सरमाकर धीरेसे खडा होते सृतीके पीछे केबीन मे चला गया.. तो सृती लखनकी ओर देखकर सरमा गइ..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) आइअ‍े लखन.. आप अपना पेन्ट खोलकर इधर खडे होजाइअ‍े.. मे देखती हु..

लखन सरमाते नजरे जुका लेता हे.. ओर धीरे धीरे अपने पेन्टकी क्लीप खोलता हे.. तब सृतीकी सांसे भारी होने लगी.. वो तीरछी नजरसे लखनकी ओर देखते घुटनोके बल लखनके पैरोके पास नीचे बैठ गइ.. जैसे ही लखनने पेन्टको नीचे कीया.. तो लखनकी चडीका उभार देखते ही सृतीकी धडकन बढ गइ.. ओर उतेजीत होने लगी.. ओर आखीर हिंमत करते सृतीने लखनकी चडीको नीचे करदीया..





तो लखनका लंड उछलते हवामे लहेराने लगा.. जीसे देखकर सृती सोक्ट होगइ.. वो बडी आंखे करते कभी लंडकी ओर तो कभी लखनकी ओर देखने लगी.. देखा तो लखनका लंड देवायतके जीतना ही था.. लेकीन मोटाइमे थोडासा ज्यादा बडा था.. सृती लखनके लंडको देखते ही बहेकने लगी.. उनकी चुतसे पानी बहेने लगा.. लेकीन फीरभी अपने आपको फौरन कंट्रोल कर लीया.. ओर लखनको आंखोके इसारोसे टेबलपे बैठनेके लीये कहा..

सृती : (जटसे खडी होते सरमाते धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. आप टेबलपे बैठ जाइअ‍े..

लखन : (सरमाते धीरेसे टेबलपे बैठते) जी भाभी.. क्या अब मे पेन्टको पहेनलु..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे नही नही.. मेने कहा थानां..? मुजे कुछ जांच भी करनी हे.. कुछ टेस्ट भी.. आप बैठो मे अभी आइ..

कहेते सृती अंदर ओपरेशन थीअ‍ेटरमे चली गइ.. ओर अ‍ेक काचकी छोटीसी डीबी.. ओर अ‍ेक मेजर टेप लेकर आगइ.. तबतक लखनके मनमे घमासान चल रहा था.. वो सोच रहा थाकी भाभी टेस्टके बहाने उनके साथ कुछ गलत ना करदे.. अगर वो कोइ अ‍ैसी वैसी हरकत करेगी तो उनको अ‍ेक बार ओर सर्मीन्दा होना पडेगा.. तभी सृती डीबी कागज पेन ओर मेजर टेप लेकर बहार आगइ..

सृती : (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. गलत मत समजना.. क्या मे इसे छु सकती हु..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अब सबकुछ देख ही लीया हे तो फीर छुनेसे क्या प्रोबलेम..? आप अ‍ैसे ही टेस्ट थोडीना करोगी.. इसके लीये छुना तो पडेगा ही..

सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हंम.. वेरी स्मार्ट.. लखन भैया.. देखा इस टेस्टके बारेमे कीसीको पता ना चले.. हंम..? वरना.. कोइ हमारे बारेमे गलत भी सोच सकता हे.. खास करके आपकी बीवीया.. अगर आपके स्पामकी क्वालीटी अच्छी आइ तो मे इनकी रीपोर्ट हमारी मेडीकल काउन्सीलमे रखना चाहती हु..

लखन : (मुस्कुराते) अरे भाभी.. फीकर मत कीजीये.. हम तीनोके अलावा कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. आपको जो टेस्ट करना हो करलीजीये.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) हमं तीनो..? मतलब..? यहा तो सीर्फ हम दोनो ही हे.. तीसरा कौन हे..?

लखन : (हसते) भाभी.. पता हे मुजे.. लेकीन आप पुनोदीदीको कहेनेके बीना थोडीना मानोगी.. हें..हें..हें.. मुजे पता हे आप दोनो हर बात अ‍ेक दुसरेके साथ सैर करती हे.. क्या ये सच हेनां..?

सृती : (सरमाकर हसते) हंम.. वेरी स्मार्ट.. लखन.. आप बहुत चालाक हो.. चलो.. अब मे जो भी पुछु इसका अच्छेसे जवाब दो.. क्या ये हंमेसा अ‍ैसे ही खडा रहेता हे..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) हंम.. भाभी.. पहेले तो नही रहेता था.. लेकीन जबसे पुनोदीदीने जडीबुटी दी हे.. तो ज्यादातर अ‍ैसा तनके ही रहेता हे.. बस.. सीर्फ उपरकी ओर.. ओर पेन्ट पहेनते इस नीचेकी ओर करना पडता हे..

सृती : (कागजपे लीखते मुस्कुराते) अच्छा इसीलीये सख्त हे.. तो फीर ये अभी खडा क्यु हे..? देखो.. कुछ ज्यादा ही उपरकी ओर जटके मार रहा हे.. (लखनके सामने कातील नजरोसे मुस्कुराते) कोइ खास कारण..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. वो.. वो.. सोरी.. बुरा मत मानना.. ये आपको देखकर अ‍ैसा हो गया.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे लखनके बाजुमे मुका मारते) चलो हटो बदमास.. भाभीको लेकर मनमे बुरे खयाल रखते हो..? आने दो पुनम दीदीको.. कहुगी.. इसे अ‍ेक चाटा ओर लगादो.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अब भाभीमांसे सब बाते होगइ हे.. अब अ‍ेक क्या दस चाटा मारेगी.. तो भी मुजे कोइ फर्क पडने वाला नही.. क्युकी मुजे मेरे भवीस्यके बारेमे सबकुछ पता चल गया हे.. हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे हसते) अच्छा..? इतनी हिृमत आ गइ आपमे..? क्या पता चल गया आपको..? लेकीन मत भुलो.. आपकी भाभीमांने आपको कीतनी भी छुट क्यु ना दीहो.. हम आपके हाथ आनेवाली नही.. समजे..? अगर मेरे बारेमे कुछ गलत सोच रहे हे तो भुल जाइअ‍े सब.. बापरे.. कीतना गध्धे जैसा दीख रहा हे.. आपने तो रमा भाभीकी हालत ही खराब करदी.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. मुजे पता था.. आप ओर लता.. बहारकी खीडकीसे सब देख रही थी..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) देवरजी आप बहुत कमीने हो.. चलीये अब कुछ काम होजाये..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अब जो भी करना हे आपको ही करना हे.. फीर हमे देर भी हो रही हे.. कहीये क्या करना हे..?

सृती : (सर्मसार होते डीबी देते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. इसमे आपके स्पम चाहीये.. आप बाथरुममे जाकर लेकर आइअ‍े.. फीर इनका माप थी लेना हे.. क्या पहेले इनका माप लेलु..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अब ये आपके सामने ही हे.. जो भी करना हे करलो..

सृती : (स्केलसे नाप लेते) हंम.. काफी बडा हे.. कीसी नोर्मल इन्सानसे भी ज्यादा.. ओर मोटा भी.. लीजीये हो गया.. अब इसमे बाथरुममे जाकर आपका स्पम ले आइअ‍े..
 
लखन : (जुठ बोलते) भाभी.. बाथरुममे जाकर..? लेकीन स्पम कैसे लेना हे..? मैने कभी अ‍ैसा कीया नही हे.. मुजे नही पता इसे कैसे नीकालते हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) जुठ.. आप बीलकुल जुठ बोल रहे हे.. क्या आपको नही पता ये कैसे नीकालते हे..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कसमसे.. मे सच केह रहा हु.. क्युकी इसकी कभी जरुरत ही नही पडी.. जब सक्ुलमे था तब वहा राधु थी.. फीर तो लता ओर रजु मेरी जींदगीमे आगइ.. तो फीर मुजे नही पता इनको कैसे नीकालते हे.. आप ही कुछ मदद कीजीयेनां..

सृती : (सर्मसार होते) कौन..? मे..? अरे नही नही.. मुजे तो देखते ही डर लग रहा हे बाबा.. आपही नीकालदो..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. प्ली..ज.. आप खामखा डर रही हे.. अभी तो हाथ मे लेकर नाप भी ले रही थी.. तब तो आपको डर नही लग रहा था.. ठीक हे.. तो फीर रहेने दीजीये.. हम घर चलते हे..

सृतीका मन तो बहुत था.. लेकीन वो थोडा नखरे करना चाहती थी.. ओर लखनको थोडा तडपाना चाहती थी.. लेकीन ये तो लखन था.. वो जबसे सहेर आया ओर तबसे सृती उनके साथ जीस तराह व्यवहार कर रही थी.. ओर उनके साथ पटाका बनकर साथमे आइ थी.. तबसे लखन सृतीके मनकी बात जान चुका था.. की सृती क्या चाहती हे.. ओर इसीलीये आप सृतीको देखकर उनका लंड जटके मार रहा था.. तभी..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन.. प्लीज.. ठीक हे.. लेकीन देखना कीसीको पता ना चले.. चलीये सही बैठ जाइअ‍े.. मे हाथसे कर देती हु..

कहा तो लखन दोनो पैर फैलाकर बैठ गया.. ओर सृती सरमाते लखनके पैरोके बीच आ गइ.. ओर कांपते हाथोसे लखनके लंडको पकड लीया.. फीर अपनी नजरे चुराते साइडमे मुह करते धीरे धीरे लखनके लंडको सहेलाने लगी.. तब सृतीकी चुत भी हरकतमे आने लगी.. ओर धीरे धीरे पानी बहाने लगी.. सृतीको नीचे गीलापन महेसुस होने लगा.. उनकी चुतमे अचानक मीठी खुजली होने लगी..





तो धीरे धीरे करते सृतीने स्पीड बढाइ.. तो लखनका लंड विकराल ओर चमकदार दीखने लगा.. जीसे देखकर सृतीकी हालत बीगडने लगी.. वो ललचाइ नजरोसे देखते ओर अपने मुहमे अपने ही होठोको भीचते जोरोसे लखनके लंडको हीलाते मुठ मारने लगी.. तो कुछ देरके बाद सृती हीलाते हीलाते थक गइ.. ओर उसने अपना हाथ चेन्ज कर लीया.. सृती बार बार हाथ चेन्ज करते लखनका लंड हीला रही थी..

सृतीकी नीयत डामाडोल होने लगी.. उनको मनमे लगने लगाकी अगर लखन पहेल करते उनको अभी यहा उसे पटककर चोदले.. तो वो उसे मना नही करेगी.. वो बार बार लखनके चहेरेको टेडी नजरोसे देखती रही.. लेकीन लखन थाकी अपनी आंख बंध करके मुठ मरवानेका मजा ले रहा था.. फीर भी लखनका लंड अ‍ैसे ही टससे मस नही हो रहाथा.. तब सृती लंड हीलाथे थक गइ.. ओर वो लखनकी ओर देखने लगी..





सृती : (सर्मसार होते) लखन भैया.. काफी देर होगइ.. फीर भी ये नीकलता क्यु नही हे..? कुछ प्रोबलेम तो नही हेनां..? पानी नीकलता तो हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. बस.. आप अच्छेसे करदो.. तो नीकल जायेगा.. वरना कोइ दुसरा तरीका नही हे क्या..? तो आप दुसरा तरीका अजमालो..

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे बाबा अच्छेसे तो कर रही हु.. कीतना हीलाया.. इतनी देरमे तो पानी नीकल जाना चाहीये.. लगता हे वो जडीबुटीकी वजहसे आपकी स्टेमीना बहुत बढ गइ हे.. अब दुसरा तरीका क्या हे बतादो आप.. तो वो ट्राइ करते हे..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. मे अ‍ैसे ही बैठा हु.. तो पानी कहासे नीकलेगा.. सामने कोइ लडकी या ओरत भी तो होनी चाहीये.. जो इनसे प्यार करते मे उतेजीत होजाउ.. आतो मेरी भाभी हे.. ओर अ‍ेक बार चाटा खा चुका हु.. तो डरके मारे कोइ फीलीन्ग नही आ रही.. सोरी भाभी..

सृती : (सामने देखते) अरे यार.. वो भुल जाओ उन बातको.. चाटा मैने थोडीना मारा था..? जो हो गया सो होगया.. अब भुल जाइअ‍े उन बातको.. अब तो दीदीसे भी बात होगइ हे.. हां.. अगर आपके दिमागमे कोइ दुसरा तरीका हेतो बताइअ‍े.. मे वो ट्राइ करती हु..

लखन : (नजरे चुराते धीरेसे) भाभी.. वो.. दुसरा तरीका.. मीन्स.. मतलब.. वो.. वो.. (नजरे चुराते) वो.. ब्लु जोब..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते) क्या..? अरे ना बाबा ना.. इसके लीये मै लडकी कहासे लाउ..? ओर मे अ‍ेसा कोइ काम करने वाली नही हु.. आप कोसीस करो.. नीकल जायेगा.. आप बहुत बदमास हो गये हो..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. तो फीर बहुत देर होजायेगी.. रहेने दीजीये फीर कभी कर लेगे..

सृती : (नजरे जुकाते) लखन प्लीज.. थोडी देर रुकीयेनां.. हम अ‍ेक बार फीर कोसीस करते हेनां..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. फीर भी कुछ नही होगा.. आप समजती क्यु नही..? इसीलीये मे आपको मना कर रहा था.. क्युकी इनमे मुजे भी मदद चाहीये.. मुजे भी पार्टनर चाहीये.. जो मुजे प्यार करे.. मे उसे प्यार करु.. तभी तो मे कुछ करपाउगा..

सृती : (नजरे जुकाते सरमाते धीरेसे) लखन भैया प्लीज.. ठीक हे.. मे करती हु.. लेकीन देखना हमे जो भी करना हे अपनी मर्यादामे रहेकर.. मे अभी इसके लीये तैयार नही हु.. जो मंजुदीने कहा हे.. क्युकी मे आपके भाइको धोखा देना नही चाहती.. ये तो मुजे टेस्टके लीये भेजना हे इसीलीये सब करना पड रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. वैसे मे भी कीसीके साथ जबरदस्ती करना नही चाहता.. क्या हम उपर उपरसे तो प्यार कर सकते हेनां..?

सृती : (नजरे चुराते) हां.. ठीक हे.. करलेना.. लेकीन.. सीर्फ ये टेस्ट तक ही.. फीर दुबारा कभी आप अ‍ैसी कोइ डीमान्ड नही करेगे.. समजे..?

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. आइ प्रोमीस.. मे सामनेसे कभी कोइ डीमान्ड नही करुगा..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन भैया.. तो फीर यही की.. कही ओर.. मीन्स.. कोइ कन्फर्टेबल जगाह.. कीसी रुममे.. या फीर.. आप इस सोफेपे बैठ जाइअ‍े.. मे कर देती हु..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. आज आप बहुत खुबसुरत लग रही हो.. देखना अ‍ेक दिन मे आपको ओर पुनो दीदीको पाकर ही रहुगा.. तबतक मे आप दोनोका इन्तजार करता रहुगा..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. सपने देखना छोडीये.. हम दोनो आपके हाथ कभी आने वाली नही.. कमसे कम मेतो नही.. पुनो दीका पता नही.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ेक बार सोच लीजीये.. फीर आप मुजसे मीलनेके लीये तरसोगी.. तब मे आपको तडपाउगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसर होते हसते) अब चलीये.. सपने देखना छोड दीजीये.. तबकी तब देखा जायेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आइ प्रोमीस.. मे चेलेन्ज करता हु.. भाभीमां ने जो कहा हे.. इनमे भाइकी जीतनी भी बीवीया हे.. उनमे पहेला मीलन मे आपसे ही करुगा.. देखना ये मेरा चेलेन्ज हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते कातील नजरोसे हसते) जाओ.. जाओ.. मेने तुम्हारे जैसे बहुत लडके देखे हे.. भलेही आपको आपकी भाभीमांने आपको कुछ भी कहा.. लेकीन ये भाभी इतनी आसानीसे हाथ आने वाली नही हे.. समजे बच्चु..? अब चलीये.. लेकीन मीलनके अलावा जो भी करना हो करलीजीये.. कीसी भी तराह मुजे आपके स्पम चाहीये..
 
कहा तो लखन अचानक टेबलसे उतर गया.. ओर सृतीके गलेमे हाथ डालकर उनको अपने तनसे चीपका लीया.. ओर अपना होंठ सृतीके होठोपे रख दीया.. तो अचानक हुअ‍े हमलेसे सृती भी सक्तेमे आ गइ.. ओर वो बडी ओंख करते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तब तक लखनने सृतीको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर सृतीके चहेरेको पकडकर उनके होठोको चुमने लगा था.. तब सृती भी उतेजीत होगइ..





ओर उनका विरोध कम होता गया.. ओर उसने भी हिंमत करते लखनके गलेमे हाथ डाल दीया.. ओर लखनको होठ चुमते साथ देने लगी.. सृतीकी आंखोकी पुतलीया पलटने लगी.. वो मदहोस हो गइ.. ओर अपना मुह खोलते लखनके मुहके रसको पीने लगी.. तब लखनका लंड जटके मारते सृतीकी चुतपे दस्तक देने लगा.. ओर सृतीको पता भी नही चला की लखन कबसे उनके दुधुको पकडकर मसल रहा हे..

सृती : (उतेजनामे धीरेसे सरमाते) बस.. ब..स.. ल..ख..न.. प्ली..ज.. छोडीयेनां.. मे.. आपकी भाभी हु.. आइइइइ.. अंह.. अंह.. धीरे दबाओनां.. दर्द होता हे.. छोडीयेनां..

लखन : (गलेको चुमते) भाभी.. प्ली..ज.. आज मत रोकीये मुजे.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करता हु.. आइ लव यु.. सो मच..





सृती : (मदहोसीमे आधी आंख चडाते) ल..ख..न.. प्लीज.. मे बहेक जाउगी.. ये गलत हे.. मे आपकी भाभी हु.. मुजे अ‍ेक बार सोचने दो.. इसके लीये मुजे कुछ वक्त चाहीये.. अंह.. सीइइइ धीरेसे दबाओनां..

लखन : (बुब्सको मसलते होठ चुमते) भाभी.. जीतना भी वक्त लेना हो लेलीजीये.. आप ओर पुनो सीर्फ मेरी हे.. मे तुम दोनोको बहुत चाहता हु.. बस.. मुजे सीर्फ तुम दोनोका इन्तजार हे.. भाभी.. जोरोसे हीलाइअ‍ेना..

सृती : (हाथ नीचे लेजाते लंडको पकडकर हीलाते) लखन.. प्ली..ज.. मत करो.. अ‍ैसी बाते.. मे आपके भाइकी अमानत हु.. अगर आप चाहते हो तो हम सीर्फ यहा तक सीमीत रहेगे.. मे अपनी मर्यादा लाधना नही चाहती.. प्लीज.. आह.. आइइ.. धीरेसे दबाओनां.. दर्द होता हे..

लखन : (बहेकते बुब्स मसलते) ठीक हे भाभी.. भाभी.. क्या मस्त बुब्स हे आपके.. मे इन्तजार करुगा.. देखना अ‍ेक दिन आयेगा.. जब हम दोनोकी सुहागरात होगी.. उस रात मे आपके अ‍ेक अ‍ेक कपडे उतारुगा.. ओर आपको खुब प्यार करुगा..

सृती : (मदहोसीमे लखनसे चीपकते कंधेपे सर रखते) ल..ख..न.. मत करो अ‍ैसी बाते.. मुजे कुछ हो रहा हे.. मुजे ओर प्यार करोनां..

कहेते लखन सृतीको बुब्स मसलते पगलोकी तराह चुमने लगा.. तो सृती भी बहुत उतेजीत होगइ.. ओर लंखनके लंडको जोरोसे हीलाने लगी.. तब लखन अ‍ेक हाथसे सृतीके बुब्सको मसलते दुसरा हाथ नीचे ले गया.. ओर सृतीकी चुतपे रखते उनको कपडेके उपरसे ही सहेलाने लगा.. तो सृतीकी बरदास्तसे बहार होगया.. जो उछलने लगी.. ओर लखनसे चीपकते उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे..





लखन लगातार सृतीकी चुतको सहेलाता रहा.. अब सृतीके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकी थी.. ओर लखनसे चुदवानेके लीये भी तैयार होगइ थी.. लेकीन तब उसे लखनका चेलेन्ज याद आगया.. तो वो जटसे लखनके पेरोके बीच घुटनोके बल बैठ गइ.. ओर लखनके लंडको चाटने लगी.. तो लखन भी सातवे आसमानपे पहोंच गया.. ओर वो आंख बंध करते मुस्कुराने लगा.. जैसे उनकी मनकी मुराद पुरी होगइ हो..





सृती लंडको चुसते पुरा लंड मुहमे लेनेकी कोसीस करते लखनको ब्लुजोब देने लगी.. तब सृती भी उतेजीत होकर सातवे आसमानपे पहोंच गइ.. तभी लखनने सृतीके चहेरेको अपनी हथ लीमे थाम लीया.. ओर अपनी कमर हीलाते सृतीके मुहको चोदने लगा.. लंड सृतीकी हलक तक टकराने लगा.. जीनसे सृतीकी आंखमे आंसु आ गये.. ओर लखनका तनके अकडने लगा.. ओर सृतीको जोरोसे चोदने लगा..





लखन : (मदहोसीमे) येस.. येस.. भा..भी.. आइ.. ओह.. भाभी.. ओर जोरसे.. आइ अ‍ेम कमींग.. भाभी.. मे आना वाला हु.. आइ लव.. यु.. आइ लव यु..

सृती : (खडी होकर जटसे डीबी लाते) लखन भैया.. मुहमे नही.. इसमे जडना.. लीजीये मे हीला देती हु..





कहेते सृती लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते लंडको जोरोसे हीलाने लगी.. तभी अचानक लखनके लंडसे पीचकारी छुटते सृतीके चहेरे पे गीरी.. तो सृतीने जटसे काचकी डीबी लखनके लंडके आगे करदी.. ओर सारी पीचकारीया डीबीमे भरने लगी.. जब लखन जडकर सांत होगया.. तो डीबी देखकर सृतीका मुह खुला ही रेह गया.. क्युकी लखनने पुरी डीबी अपने विर्यसे भरदी थी..

सृती : (आस्चर्यसे कुह फाडते) ओह माय गोड.. इतना सारा..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. ये सब जडी बुटीका कमाल हे.. हें..हें..हें.. क्यु..? मजा आया..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. आप बहुत ही कमीने हो.. आपने तो मुजे भी गंदी करदी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अभी आपका नही हुआ.. क्या मे करदु..? हंम..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे नां मे गरदन हीलाते) नही.. बस.. हो गया..

ओर सृतीने डीबीको बंध करदीया.. तभी उसे मालुम हुआ की उनके पुरे चहेरेपे लखनका विर्य लगा हुआ हे.. ओर वो खडी होकर बाथरुममे भाग गइ.. फीर अंदर जाते उसे होस आयाकी उसने क्या करदीया.. वो डीबीको वही रखकर दरवाजेके पीछे खडी होगइ.. ओर अपने सीनेपे हाथ रखते अपनी सांसोको कंट्रोल करने लगी.. ओर सोचने लगी.. की कुछ देर पहेले वो अपने देवरके सामने कीतनी सरीफ थी..

ओर कुछ ही देरके बाद वो अपने पतीको धोखा देते अपने देवरका लंड चुसते उनको ब्लुजोब दे रही थी.. सृतीको यही सब सोचते गील्टी फील होने लगी.. ओर देवायतके बारेमे सोचते उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. उनको अपने कीयेपे पछतावा होने लगा.. ओर वो नीरास होगइ.. क्युकी उनमे लखनकी कोइ गलती नही थी.. दोनो ही बहेक गये थे.. ओर सृती आज हर हालमे लखनके लंडको देखना चाहती थी..





फीर भी दिलमे अ‍ेक सुकुन था.. क्युकी आज उनके मनकी मुराद पुरी होगइ थी.. कुछ देर अ‍ैसे ही आयनेके सामने देखती रही.. क्युकी सृतीके चहेरेपे लखनका विर्य लगा हुआ था.. ओर उसने उंगलीसे टच कीया.. ओर आंख बंध करते उगलीको चाट लीया.. ओर सरमाकर मुस्कुराने लगी..





फीर सृतीने अपना चहेरा धोकर साफ करलीया.. ओर सही होकर बहार आगइ.. तो लखन भी सरमाकर बाथरुममे घुस गया.. फीर दोनो कंपलीट होकर बहार नीकले.. ओर सृतीने रीसेपनीस्टको बोटल देते लेबोरेटरीमे भेजनेको कहा.. ओर दोनो वहासे नीकल कर कारमे बैठ गये.. तब....

कन्टीन्यु
 




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