Incest RAKSHASH - Page 11 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

मेरे प्यारे दोस्तों, मेरे भाइयो मेरी बहेनो मेरे आशिको और मेरे प्यारे पतियों मैं आप सबसे माफ़ी चाहती हु मैं अपडेट नहीं दे पर रही हु, असल में मेरा एक्सीडेंट हो गया था स्कूटी से, और मेरे हाथ में फ्रैक्चर हो गया, प्लास्टर लगा हुआ ह, मैं कोई भी काम नहीं क्र प् रही हु, और मेरी नानन्द घर में आई हुई ह मेरी सेवा के लिए तो मैं कुछ नहीं लिख प् रही हु, जैसे hi प्लास्टर हटेगा मैं फिर से अपडेट दूंगी, तब तक के लिए अपनी इस रिया को भूल मत जाना
 
ी ऍम बैक माय फ्रेंड्स, आप सबको बहुत मिस किया मैंने, अब मैं ठीक हु और जल्दी hi कहानी को फिर से शुरू करुँगी, बहुत कुछ भूल चुकी हु क्या लिख रही थी, अब फिर से याद करके आगे लिखना शुरू करुँगी और जल्दी hi आप सबको दूंगी

अपडेट



 
अपडेट-46




भौमिक जी- ठीक से याद करो तुमने मुझे क्या बताया था, जब तुम उस गुफा में गिरे तो निहारिका का हाथ तुम्हारे हाथ में था और दूसरे हाथ से तुमने तलवार पकड़ी हुई थी जो उस चीता के पेट में थी, तो जब तुम्हारे शरीर ने उस शक्ति को अपने अंदर समाया तो तुम्हारे द्वारा उस शक्ति का छोटा सा भाग इन दोनों के अंदर भी गया, जिससे ये ठीक हो गए, और शायद तुमने धयान न दिया हो जब भी तुम्हारे शरीर पैर कोई घाव लगता ह वो एक पल में ठीक हो जाता ह,

भौमिक जी ने एक चुरा उठाया और देव के हाथ पैर कटा लेकिन देव को कोई दर्द नहीं हुआ, और उसका घाव तुरंत भर गया, ये देख क्र सब हैरान थे, फिर भौमिक जी ने अपना हाथ कटा लेकिन उनका घाव नहीं भरा,

देव- ये कैसे शक्ति तो आपके अंदर भी ह, फिर आपका घाव क्यों नहीं भरा,

भौमिक जी- क्योकि तीनो शक्तिया अलग तरह से काम कर रही है, जिस शक्ति में हम गिरे थे उससे मेरे और सात्विक के अंदर ज्ञान का भंडार आ गया, लेकिन उसके साथ साथ हमारे अंदर गुस्सा घमंड और महत्वकांशा भी आने लगी, जिसे मैंने अपना धयान लगा कर काबू किया, सात्विक के उप्पेर वो शक्ति हावी होगी और वो बुराई के रस्ते पैर चला गया, लेकिन एक चीज और मिली ह हम सबको,

देव- वो क्या

राजवीर- अनंत जीवन

ये सुनकर सब चौंक गए,

देव- ये क्या बोल रहे हो आप

राजवीर- है बेटे इन शक्तियों से अनंत जीवन मिलता ह,

रीवा- तो क्या देव अब कभी नहीं मर सकता, वो अमर ह

भौमिक जी- ऐसा नहीं ह, अमरता कभी किसी को नहीं मिलती, लेकिन इनकी मृत्यु कैसे हो सकती ह ये सिर्फ भगवान् जानते हैं,

देव- मतलब संशय बहुत बड़ी हो चुकी ह, अब हमारे सामने जो युद्ध करने आएंगे वो सभी अनंत जीवी होंगे, वो मर सकते हैं लेकिन कैसे ये कोई नहीं जनता,

निहारिका- अगर ये शक्तिया भैरव के वरदान के साथ जुडी हैं तो उनका अंत भी उसी वरदान में कही छुपा होगा, भगवान् जो भी करते हैं उसके पीछे कोई कारन होता ह, अगर उन्होंने वरदान दिया ह तो उसके अंत का कारन भी बनाया होगा,

देव- वो वरदान क्या था,

भौमिक जी- भैरव ने वरदान माँगा की

कोई भी देवता, कोई भगवान्, कोई देवी, कोई अवतार, कोई पुरुष, या दिव्या पुरुष, और कोई दिव्या पवित्र नारी, कोई जानवर, कोई बीमारी, और खुद की मृत्यु उसे मार न सके, और मैं सेराव शक्तिशाली बनु,

भगवान्- तथास्तु, ऐसा hi होगा, लेकिन ये वरदान भगवान् के सामने काम नहीं करेगा, तुमने सब कुछ माँगा लेकिन शरीर नहीं माँगा, तू जीवित तो रहेगा लेकिन तेरा शरीर कमजोर होता जायेगा, और जब भगवान् धरती पैर आएंगे तो तेरी उम्र और तेजी से बढ़ेगी,

देव- मतलब उसने तो हर तरह से अपनी मृत्यु पैर विजय हासिल कर ली,

रीवा- लेकिन मृत्यु को जीतने के चक्कर में वो अपनी ताकत और उम्र का ख्याल नहीं रख सका,

भौमिक जी- लेकिन उसने भगवन के जनम का समय सो क्र गुजर दिया ह, और सोते हुए न तो उसकी उम्र बढ़ी होगी न hi ताकत घाटी होगी, अब वो वैसा hi जवान होगा और ताकत तो उसमे बहुत अधिक ह hi,

देव- और उसके साथ सात्विक भी हैं और शायद जो उस गुफा से बहार आएगा वो भी उसके साथ जुड़ जाये,

निहारिका- अगर वो सब एक साथ मिल गए तो हम उनसे लड़ेंगे कैसे,

राजवीर- ये hi दर ह, हम सब मिलकर भी किसी एक का सामना नहीं कर सकते,

अमिता- अगर उस किताब में इतना कुछ लिखा ह तो उसे मारा कैसे जायेगा ये भी लिखा होना छाइये न,

भौमिक जी- वो हमे खुद पता करना होगा,

अक्षरा- भगवान् ऐसे शेतानो को शक्ति देते hi क्यों हैं,

राजवीर- भगवान् अगर ऐसे लोगो को शक्ति देते हैं तो इनके विपरीत अच्छे लोगो को भी शक्ति देते हैं, भगवान् ने देव को शक्ति दी ह,

भौमिक जी- भगवान् केवल रास्ता बताते हैं उस रस्ते पैर हमे खुद चलना होता ह और कैसे चलना ह वो भी हमे सोचना होता ह, भगवान् ने मुझे और देव को शक्ति दी ह अब हमे आगे का रास्ता खुद ढूँढना होगा, और वो रास्ता मैं खोज लूंगा, लिखे हुए इतहास में और मेरे देखे हुए भविष्य में hi रास्ता मिलेगा,

पूरा परिवार घेरि सोच में डूबा हुआ था,

भौमिक जी- मुझे अब जाना होगा, कुछ बाते जिन्हे मैं सिर्फ धयान लगा क्र hi पता कर सकता हु, तब तक देव अपनी पूरी ताकत लगा दो इस राजय को सुरक्षित करने में, क्योकि उन चारो में से जो भी गुफा से बहार आया होगा वो सीधा यही आएगा तुमसे टकराने के लिए, और तुम्हारे अलावा उन्हें कोई नहीं रोक पायेगा, इसलिए पुरे चौकन्ने रो, तब तक मैं सात्विक और भैरव पैर निगरानी रखता हु, उनकी योजना जानने की कोशिश करता हु, जो भी जानकारी मिलेगी मैं तुम्हे देता रहूँगा,

देव- जैसा आप कहे गुरु जी,

भौमिक जी वह से चले गए,

निहारिका- हम एक शंश्य से बहार आते हैं तो दूसरी आ जाती ह, और हर बार पहले से बड़ी होकर आती ह,

राजवीर- घबरा नहीं मेरी बहन, सब ठीक होगा, हमारा परिवार हजारो सल्लो से इस राज को दबाये आ रहा ह, अब हम सब मिलकर उस शैतान का अंत करेंगे,

रीवा- मन की देव के पास ताकत ह भौमिक जी के पास शक्ति ह, लेकिन उधर भी ताकत और शक्ति ह, और सबसे खास बात भैरव को कोई आदमी नहीं मार सकता, कोई दिव्या शक्ति वाला इंसान या देवता नहीं मार सकता, फिर देव उसे कैसे मरेगा,

रीवा की बात से सभी के चेहरे पैर चिंता उभर आई थी,

देव- आप सब इस बारे में मत सोचो अब जाकर आराम करो, कल दिन में चर्चा करेंगे और राजय की सुरक्षा में लोग लगाए जायेंगे,

निहारिका ने सबको उनके कमरे में भेज दिया, निहारिका देव को लेकर अपने कमरे में आ गई,

निहारिका- देव क्या सोचा ह तुमने, ये विपत्ति हमारे राजय को तबाह क्र सकती ह,

देव- माँ अभी तो मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा ह, लेकिन कुछ तो करना hi होगा,

निहारिका- तू चिंता मत क्र हम सब तेरे साथ हैं, हम सब मिलकर इस संशय का सामना करेंगे,

देव- माँ मैं आप सबको इस लड़ाई में नहीं जोड़ सकता,

निहारिका- ये तूने कैसे सोच लिया की हम तुझे अकेला छोड़ देंगे,

निहारिका ने देव को अपने गले से लगा लिया,

देव- माँ मैंने आपसे कुछ चीजे छिपाई हैं,

निहारिका- क्या कोनसी चीजे

देव- मैं नहीं जनता कल क्या होगा, इस युद्ध में मैं रहु या न रहु लेकिन मैं आपसे कुछ छुपाना नहीं चाहता,

निहारिका- ऐसी बाते दुबारा अपने मुँह से मत निकलना तुझे कोई कुछ नहीं क्र सकता,

देव- माँ वो मैं ये बता रहा था की वो मेरे और सोमिया और अमिता के बिच वो

तभी वह रीवा आ गई,

रीवा- माँ मेरा मन बहुत घबरा रहा ह, मुझे बहुत चिंता हो रही ह,

निहारिका- तू क्यों चिंता करती ह देव ह न सब सम्हाल लेगा,

रीवा- देव की hi चिंता हो रही ह, माँ हम यहाँ से कही दूर चले जाते हैं न,

देव- हम दर क्र भाग जाये, ऐसा नहीं होगा,

रीवा- मैं तुम्हे खोना नहीं चाहती, अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मैं न जाने क्या करुँगी,

देव- मुझे कुछ नहीं होगा,

रीवा ने देव को अपने गले से लगा लिया, वो उससे पूरी तरह से चिपक गई थी, रीवा की फूली हुई चूचिया देव की छाती में डाब रही थी, रीवा की कठोर चूचियों का अहसास होते hi देव के लुंड ने झटका मारा, देव एक दम से रीवा से दूर हो गया,

रीवा को बड़ा अजीब लगा

देव- आप आप घबरा नहीं कुछ नहीं होगा सब ठीक होगा, मैं सब ठीक क्र दूंगा,

निहारिका दोनों को धयान से देख रही थी,

निहारिका- रीवा तुम अब आराम करो, काफी रात हो गई ह, कल सुबह बात कर्नेगे

रीवा- मैं आपके पास रहना चाहती हु

देव- मैं अपने कमरे में जाता हु,

रीवा- यही रुक जा न, आज पहेली बार हम तीनो एक साथ हैं, मैं इस पल को जीना चाहती हु,

निहारिका- है देव हम तीनो साथ में यही सो जाते हैं,

देव का लुंड हलचल क्र रहा था, वो बैचैन था, वो वह से जाना चाहता था लेकिन निहारिका की बात कैसे काट सकता था,

देव वही बैठ गया, तीनो बाते करने लगे, रीवा अपनी पुराणी गलतियों का पश्चाताप कर रही थी, फिर तीनो एक hi बिस्टेर पैर लेट गए, और निहारिका दोनों के बिच में आ गई,

निहारिका ने रीवा की तरफ मुँह क्र लिया तो उसकी गांड देव के सामने आ गई, निहारिका ने देव को अपने सत्ता लिया तो उसे महसूस हुआ की देव का लुंड खड़ा ह, ये देख निहारिका मुस्कुरा पड़ी और अपना हाथ देव के कपड़ो में दाल दिया और उसके गरम लुंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया, वही रीवा कुछ hi देर में सो गई,

रीवा के सोते hi निहारिका ने देव की तरफ करवट ली और अपने हॉट देव के होतो से मिला दिए, देव एक दम घबरा गया,

देव धीरे से- माँ रीवा जग जाएगी,

निहारिका- नहीं जागेगी,

दोनों एक दूसरे के होतो का रास पिने लगे, तभी रीवा ने हलचल की तो दोनों शांत हो गए, और तभी रीवा की आवाज आई,

रीवा नींद में hi- देव तुम कहा हो देव, मुझसे दूर मत जाना देव मुझे अकेला मत छोड़ देना देव, तुम मेरे हो देव और मैं तुम्हारी, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती, मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हु, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती, बाकि बहेनो की तरह मुझे भी अपनी पत्नी की जगहदे दो,

रीवा की बात सुनकर देव और निहारिका एक दम उठ क्र बैठ गए और हैरत से एक दूसरे का मुँह देखने लगे, दोनों को hi झटका लगा था, देव तो बुरी तरह चौंक गया था,

देव- माँ ये क्या बोल रही ह,

निहारिका- मुझे शक तो हो रहा था रीवा की हरकतों पैर, इसने खुद की बोल दिया

देव- लेकिन ये कैसे हो सकता ह माँ,

निहारिका- क्यों नहीं हो सकता, तेरे और मेरे बिच भी हो रहा ह न, तेरे और सोमिया और अमिता के बिच भी रहा ह, वो भी तो तेरी बहन हैं, सुगंधा और कस्तूरी भी तेरी बहन लगती हैं, और अक्षरा भी,

अब देव और चौंक गया, जिस बात को वो बताने से दर रहा था उसकी माँ को पहले से वो सब पता था,

देव- आपको पता ह सब

निहारिका- मैं तेरी माँ हु मैं सब जानती हु समझे, और मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, उन्हें भी अधिकार ह तेरे साथ खुशिया पाने का, लेकिन रीवा का प्रेम बहुत अलग ह,

देव और निहारिका लेट गए देव सोचते सोचते सो गया,

अगली सुबह रीवा हमेषा की तरह थी उसे तो कुछ याद hi नहीं था लेकिन देव उससे झिझक रहा था, देव जल्दी उठा और महल और राजय की सुरक्षा का इंतजाम देखने लगा,

उदार दो तरफ से आफ़ते भवनपुराण की तरफ चली आ रही थी, एक थी भराव सिंह जो सात्विक के साथ उधर चला आ रहा था, और दूसरा उत्तर दिशा की तरफ वो लोग जो उस गुफा से बहार निकले थे, सबकी मंजिल थी भवनपुरा,

अभेंद्र और देव महल के चारो तरफ घूम रहे थे,

अभेंद्र- आप कुछ चिंतित लग रहे हैं,

देव- अभद्र मुझे अपने परिवार की चिंता ह, न जाने आने वाला समय कैसा हो, कोनसे खतरे हमारी तरफ आ रहे हो, मैं सबको कसिए सुरक्षित रख पाउँगा

अभेंद्र- आप अकेले कहा हैं हम सब हैं न आपकके साथ,

तभी एक घुड़सवार उनके करी बा पंहुचा

अभेंद्र- तुम यहाँ तुम्हे तो मैंने वह रुकने को कहा था,

घुड़सवार- खबर ह ऐसी ह

देव- क्या हुआ और तुम इतने घबराये हुए क्यों हो,

घुड़सवार- महाराज वो लोग आ रहे हैं,

देव- कोण कोण

घुड़सवार ने जब नाम बताये तो देव और अभेंद्र एक दूसरे का मुँह देखने लगे,

देव- अभेंद्र युद्ध की तैयारी करो, अब कोई रास्ता नहीं बचा ह,

अभेंद्र तुरंत वह से भगा और घुड़सवार को वापस भेज दिया आने वालो पैर नजर रखने के लिए,

देव अंदर पंहुचा और निहारिका और राजवीर को सब बता दिया,

निहारिका- ये कैसे हो सकता ह,

देव- माँ यहाँ कुछ भी हो सकता ह, मां जी आप पुरे परिवार की सुरक्षा का इंतजाम कीजिये, हो सके तो सबको लेकर यहाँ से किसी सुरक्षित जगह पैर निकल जाइये,

निहारिका- ये तू क्या बोल रहा ह, तूने सोचा भी कैसे हम तुझे अकेला छोड़ क्र चले जायेंगे,

राजवीर- ये समय भागने का नहीं ह बीटा सामना करने का ह,

देव- आप अभी कमजोर हैं मां, आप ये युद्ध नहीं लड़ सकते,

निहारिका- हम तो लड़ सकते हैं न, और अब कोई बहस नहीं होगी, तुमयारी करो हम अपनी तैयारी करते हैं,

राजवीर देव को लेकर बहार निकल गया और निहारिका बाकि लड़कियों को बताने चली गई,

युद्ध की तैयारी चल रही थी पुरे राजय में अफरा तफरी मच गई,

अभेंद्र- देव वो आ चुके हैं, राजय के बहार खड़े हैं, युद्ध का आदेश दीजिये,

देव- नहीं अभी नहीं पहले मैं उनसे बात करना चाहता हु, उनके इरादे तो समझ लू,

देव अभेंद्र और राजवीर तीनो घोड़ो पैर सवार होकर महल के बहार आ गए और कुछ hi देर में वो अपनी मंजिल पैर पहुंच गए, उनके सामने तीन लोग घोड़ो पैर बैठे हुए थे, जजिनमे सब आगा खड़ा था चरण सिंह और उसके पीछे संभु और भानु,

तीनो भाई उस गुफा से बहार आ चुके थे,

देव- क्या चाहते हो तुम लोग, यहाँ क्यों आये हो,

चरण सिंह- तुम्हे क्या लगता ह हम यहाँ क्यों आये हैं,

भानु- तेरी जानन लेने आये हैं,

देव- वो तो तुम तीनो मिलकर भी नहीं ले सकते,

संभु- और अब तू भी हमारी जान नहीं ले सकता,

अभेंद्र- तुम तीनो चाहे कोई भी शक्ति पाकर आये हो लेकिन तुम अकेले हमारी पुरे राजय की सेना का सामना नहीं कर सकते,

चरण सिंह- किसने कहा हम अकेले आये हैं,

तभी पीछे से घोड़ो के दौड़ने की आवाज आने लगी, देव राजवीर और अभेंद्र ने उधर देखा तो पाया की प्रताप सिंह की सेना उनकी तरफ डोडी चली आ रही थी, और उसमे सब आगे था प्रताप सिंह और उसके साथ रेणुका,

राजवीर- ये तो पूरी सेना के साथ आये हैं,

प्रताप सिंह- आज में भवनपुरा को बताउगा प्रताप सिंह कितनी बर्बादी लता ह, मेरे बेटे अब अमर होकर आये हैं, मैं अमर नहीं बन पाया तो क्या मेरे बेटे अमर हो गए, और अब ये तुम सबका विनाश करेनेगे,

रेणुका- मैं इसका विनाश होता देखने के लिए hi यहाँ आई हु, मेरा बीटा चरण सिंह इसका विनाश करगेगा, मेरा बीटा अमर ह चिरंजीवी ह, आज से इसका नाम मैं चिरंजीवी रखती हु,

चरण सिंह रेणुका के गले लग गया,

चरण सिंह- मुझे आपका दिया नाम स्वीकार ह माँ, और आज आपके सरे बदले मैं लूंगा,

देव- तुम सबका ये नाटक ख़तम हो गया हो तो यहाँ से वापस लोट जाओ, वर्ण आज जो तांडव होगा उससे तुम सबको बचने वाला कोई नहीं होगा,

भानु - तांडव तो तू देखेगा, तुम तीनो को यही ख़तम क्र देते हैं,

तभी पीछे से घोड़े दौड़ते हुए आये और घोड़ो पैर बैठे हुए इंसानो को देख प्रताप सिंह के लोग हसने लगे,

रेणुका- अब इसकी रक्षा ये लड़किया करेंगी,

घोड़ो पैर निहारिका के साथ बाकि सभी लड़किया बैठी हुई थी, और उनके साथ रेवती भी थी,

रेवती- तुम्हारे राजय के मर्द वह की रानियों की हवस की आग को बुझा बुझा क्र इस लायक बचे hi नहीं ह वो किसी मर्द से लड़ सके, इसलिए हम लड़किया आई हैं उनसे लड़ने के लिए ताकि वो कुछ देर तो मैदान में टिक सके,

रेवती की बात पैर अमिता सोमिया और अक्षरा से जोर से सिटी बजे,

प्रताप सिंह- हरामजादी तुझे तो मैं ऐसी मृत्यु दूंगा की तेरी आत्मा तक कैंप उठेगी,

निहारिका – ये तेरे राजय की कोई आशय लड़की नहीं ह ये भवनपुरा के राजा याने देव की पत्नी ह, इसकी तरफ आँख भी उठाई तो बिच में से चिर दूंगी,

देव की पत्नी सुनकर सभी लड़कियों ने रेवती को देखा, उनके दिल में थोड़ी सी बेचैनी तो थी लेकिन अब वो सब एक थी,

रेणुका- इन सबको मर डालो,

प्रताप सिंह जोर से चिलाय- आक्रमण

प्रताप सिंह की सेना ने हुम्ला क्र दिया, पीछे से देव की सेना भी आ चुकी थी, दोनों सेनाओ में युद्ध शुरू हो चुक्का था, चिरंजीवी और संभु दोनों एक साथ देव पैर हुम्ला कर रहे थे, राजवीर प्रताप सिंह की तरफ लपका, निहारिका और रीवा भानु की तरफ चल दिए, रेवती ने रेणुका पैर हुम्ला कर दिया, बाकि लड़किया भी सेना पैर टूट पड़ी, अभेंद्र चारो तरफ दौड़ क्र लड़कियों की सहायता कर रहा था, युद्ध पुरे जोर पैर था, चिरजीवी और शम्भू बहुत शक्ति लेकर आये थे, लेकिन देव के सामने वो अभी भी बहुत काम थी, कुछ hi देर में चिरंजीवी को इस बात का अहसास हो चुक्का था, भानु भी संभु और चिरंजीवी के साथ मिलकर देव पैर हुम्ला करने लगा, लेकिन वो तीनो मिलकर भी देव को खरोच तक नहीं ला प् रहे थे,

लेकिन प्रताप सिंह की सेना हावी होने लगी थी, उसकी सेना संख्या में बहुत अधिक थी, देव उन तीनो भाइयो के साथ फसा हुआ था, तभी एक चिक सुनाई दी जो थी रेवती की,

रेवती जमीन पैर गिरी हुई थी और रेणुका उसके उप्पेर कड़ी थी तलवार लेकर, सबने रेवती को बचने की कोशिश की लेकिन उन पैर लगातार हमले हो रहे थे कोई कुछ नहीं क्र प् रहा था, रेवती की तरफ धयान जाने की वजह से सब घायल हो चुके थे, देव अगर रेवती की तरफ जाता तो चिरंजीवी संभु और भानु तब तक बाकि परिवार को नुकसान पंहुचा सकते थे, जब सरे रस्ते बंद दिखे तब देव को कुछ ख्याल आया और उसने जोर से एक सिटी बजे, उसकी सिटी की आवाज बहुत तेज थी, देव की सिटी बजता देख सभी चौंक गए, लेकिन कुछ hi पालो बाद उसकी सिटी का परिणाम नजर आने लगा, दूर से कोई चीज धूल ुढती हुई आ रही थी, उसकी राफ्तेर इतनी तेज थी की धूल से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था,

एक तूफान सा अपनी तरफ आता देख प्रताप सिंह की सेना घबरा गई और उस घबराहट में किसी के मुँह से निकल गया राक्षश आ गया, बस ये नाम सुनते hi चारो तरफ हाहाकार मच गया, भागो भागो बचाओ बचाओ का शोर सुनाई देने लगा, रेणुका की तलवार जो रेवती की गार्डन पैर राखी हुई थी भगदड़ में धक्का लगने से गिर गई, रेवती तुरंत उठी और वह से निकल गई,

राक्षश का नाम सुनकर प्रताप सिंह का भी खून ठंडा पद गया, इस भगदड़ में किसी ने ये धयान hi नहीं दिया की उस धूल में आने वाला कोण था, तभी उस धूल को चीरता हुआ दत्त ( चीता) बहार आया और प्रताप सिंह की सेना पैर टूट पड़ा, दत्त भी बहुत ताकतवर जानवर था, वो प्रताप सिंह की सेना को अपने जबड़ो से फाड़ने लगा,

प्रताप सिंह की सेना को जब तक समझ आता की ये राक्षश hi बल्कि एक चीता ह तब तक बहुत देर हो चुकी थी, उसकी सेना को सम्हालने का मौका नहीं मिला, इधर देव ने सभु और भानु को अपनी तलवार से लहू लुहान कर दिया था, उन दोनों का खून पानी की तरह बह रहा था, उनके जखम भर नहीं रहे थे, लेकिन देव को जब भी तलवार का वॉर होता उसका जखम तुरंत भर जा रहा था, ये देख क्र दोनों भाई घबरा गए उन्हें अपने अमर होने पैर शंका होने लगी, वो दोनों तुरंत वह से भाग लिए, उन्हें भागता देख चिरंजीवी गुस्से से भर गया, उसके मन में भी ये दर बन गया था की क्या सच में वो लोग अमर हुए हैं, चिरंजीवी अकेला देव का सामना नहीं क्र सकता था, इसलिए उसने वह से भागना hi सही समझा, वो प्रताप सिंह और रेणुका को लेकर वह से भाग गया, बाकि सेना भी तुरंत भाग कड़ी हुई,

एक बार फिर प्रताप सिंह की सेना को मैदान छोड़ क्र भागना पड़ा, भवन पूरा के भी बहुत सैनिक घायल हुए और बहुत से मरे गए, लेकिन फिर भी उनके अंदर एक ऊर्जा थी, जीत की ख़ुशी थी,

लेकिन देव खुश नहीं था, वो अपने लोगो को मरता देख बहुत दुखी था,

सभी महल में वापस आ गए,

वही दूसरी तरफ सात्विक और भैरव दोनों भवनपुरा के अंदर पहुंच चुके थे, और वह हो रहे युद्ध की जानकरी भी उन्हें हो चुकी थी, सात्विक जल्दी से उस युद्ध में जाना चाहता था लेकिन भैरव को कोई जल्दबाजी नहीं थी, वो बस अपनी अलग hi दिशा में चले जा रहा था,

सात्विक- आप किस दिशा में जा रहे हैं महाराज, ये दिशा को भवनपुरा से बहार की तरफ जाती ह,

भैरव- उस तरफ कुछ ऐसा ह जो मुझे वह खींच रहा ह,

सात्विक बिना कुछ बोले भैरव के साथ चल दिया, कुछ hi देर में भैरव उस झरने के सामने पहुंच गया जहा से देवा ुर निहारिका को गिराया गया था,

सात्विक- यहाँ तो

भैरव- क्या ह यहाँ

सात्विक- जैसा मुझे याद ह इस झरने के निचे hi उस देव को शक्तिया मिली थी, एक गुफा ह वह, लेकिन उस शक्ति को तो देव हासिल क्र चुक्का ह, अब तो वह कुछ नहीं ह,

भैरव- कुछ तो ह वह, मुझे जाना होगा वह,

भैरव पहाड़ी पैर चढ़ने लगा और किसी तरह गुफा में घुस गया, सात्विक गुफा के बहार रुक गया,

कुछ देर बाद भैरव मुस्कुराता हुआ बहार आया,

सात्विक- क्या था वह

भैरव- समय आने पैर बताऊंगा, अब चलो जरा उन सबसे मिला जाये जिनके पास ये शक्तिया हैं,

सात्विक- महाराज आपका ये रूप देख क्र पूरा राजय भय से कैंप उठेगा, आप हजारो वर्षो से सोये हुए थे, आपका ये विशाल शरीर और ये भयानक रूप सबको डरा देगा,

भैरव- वही दर तो देखना ह मुझे सबकी आँखों में,

सात्विक भैरव को लेकर महल की तरफ चल दिया, सात्विक ने अपनी माया शक्ति से खुद का भेस बदल लिया और साधु के रूप में बन गया, भैरव जब राजय के बिच से निकल रहा था तो पूरी परजा उसे आश्चर्य से देख रही थी, इतना लम्बा छोड़ा इंसान वो पहेली बार देख रहे थे, लोग उसे देख क्र सामने से हैट जा रहे थे, भैरव और अकड़ कर चलने लगा, , लेकिन जल्दी hi भैरव और सात्विक को अहसास हो गया की लोग भैरव को देख क्र दर नहीं रहे हैं, बस थोड़ा आश्चर्य चकित हो रहे हैं, ये बात भैरव सिंह को बर्दास्त नहीं हुई, उसे गुस्सा आने लगा, उसने सामने आई एक घोडा गाड़ी को उठाया और दूर फेंक दिया, सभी लोग दर कर पीछे हैट गए,

भैरव गुस्से में चिल्लाया- मैं हु भैरव सिंह राजा भैरव सिंह, तुम सब कीड़े मकोड़े मेरे सामने ऐसे अकड़ क्र घूम रहे हो, तुम्हारी इतनी हिम्मत

उसकी आवाज सुनकर बहुत से लोग इक्कठा हो गए,

तभी एक आदमी बोलै- तुम कहा के राजा हो भाई, और ये फालतू में अपनी ताकत का बखान क्यों क्र रहे हो, तुम्हे कोई काम ह तो बताओ,

भैरव- तुम लोगो को मुझे देख क्र दर नहीं लग रहा,

उसकी बात पैर वह खड़े सभी लोग है पड़े, ये देख क्र बहिराव की आँखे लाल हो गई, वो गुस्से में चिनध उठा,

आदमी- ोू भाई हमारे राजय में दर जैसा कुछ नहीं ह, हम किसी से नहीं डरते, हमारे राजा इतने बलशाली ह की वो चाहे तो तुम्हारे जैसे न जाने कितनो को धूल छठा दे,

तभी एक बच्चा बोलै उठा- राक्षश आ गया

राक्षश का नाम सुनते hi वह भगदड़ मच गई, और वो बच्चा जोर जोर से हसने लगा,

बचा- क्यों काका आप तो बोल रहे थे किसी से दर नहीं लगता,

आदमी- नालायक उस राक्षश के नाम से भी आत्मा कंपनी लगती ह,

भैरव- राक्षश कोण राक्षश

आदमी- इस राजय में अगर किसी से दर लगता ह तो वो ह राक्षश, भाई अगर वो सामने आ जाये तो तुम्हारे जैसे 100 को मूली की तरह काट देगा,

इतना बोलकर आदमी चला गया और बाकि लोग भी,

भैरव- कोण ह ये राक्षश

सात्विक- मैंने उसके बारे में सुना ह, बहुत डरते हैं लोग उसे,

भैरव- मुझे सब कुछ बताओ उस राक्षश के बारे में,

सात्विक ने राक्षश के बारे में जो जेकरि थी सब बता दी, जिसे सुनकर बहिराव सोच में पद गया,

सात्विक- क्या सोच रहे हो महाराज,

भैरव- मेरी याद में कभी कोई ऐसा राक्षश नहीं हुआ, पहले उस राक्षश को hi मरूंगा मैं ताकि सबके दिल में मेरे लिए दर पैदा हो,



कुछ hi देर में सात्विक और भैरव महल के दरवाजे के सामने खड़े थे,
 
अपडेट आ चूका ह फ्रेंड्स, काफी दिनों बाद दुबारा लिख रही हु, काफी कुछ भूल चुकी हु, कुछ गलतिया हो जाये तो माफ़ कर देना, जल्दी hi मैं वापस ट्रैक पैर आ जाउंगी, तब तक के लिए

लव ु आल



 
अपडेट-47




प्रतापगढ़ में आज फिर मातम चाय हुआ था, प्रताप सिंह के तीन बेटे अमरता को प् क्र आये थे फिर भी वो एक देव को नहीं हरा सके, उन्हें आज भी मैदान छोड़ क्र भागना पड़ा, चिरंजीवी गुस्से में आग बबूला होकर संभु और भानु के पास पंहुचा और हंटर उठा क्र उन्हें मरने लगा,

सभी ये देख क्र घबरा गए, रेणुका जल्दी से चिरंजीवी के पास पहुंची और उसे रोकने लगी,

रेणुका- रुक जा बीटा इनकी क्या गलती ह,

चिरंजीवी- ये दोनों उस देव से दर क्र भाग आये,

संभु- हमारे घाव नहीं भर रहे थे तो हम दर गए की हम अमर हैं या नहीं,

चिरंजीवी- इतने घाव के बाद भी तुम दोनों मरे तो नहीं,

भानु- लेकिन भैया ये घबराने वाली बात तो ह न उसके घाव तो तुरंत भर जा रहे थे लेकिन हमारे घाव अब तक नहीं भरे,

चिरंजीवी सोच में खड़ा रह गया,

प्रताप सिंह- हम भवनपुरा से कभी नहीं जीत पाएंगे, मैं कुछ भी क्र लू लेकिन मैं नहीं जीत पाउँगा

रेणुका- क्या उस देव को मरने का और कोई तरीका नहीं ह, क्या मैं उसे उसके घुटनो पैर बैठा नहीं देख पाऊँगी,

चिरंजीवी- देखोगी माँ जरूर देखोगी, लेकिन उसके लिए मुझे सात्विक की सहायता लेनी होगी, राजा बहिराव से मिलना होगा, पहले मैंने सोचा था की मैं खुद hi उसे मर दूंगा लेकिन अब हम सबको एक होना होगा,

तभी एक आवाज गुंजी- मैंने तुम्हे समझाया था उसे अब कोई नहीं हरा सकता,

सबने आवाज को देखा तो प्रताप सिंह ने तुरनत तलवार निकल ली

प्रताप सिंह- तू यहाँ कैसे,

चिरंजीवी- पिताजी अब ये हमारे साथ हैं, मैंने कहा न अब हम सबको एक होना होगा,

उधर भवनपुरा में महल के दरवाजे के सामने भैरव और एक साधु खड़े थे,

महल के सिपाही ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया, सात्विक के कहने पैर वो अंदर चले गए, लेकिन उनसे पहले सिपाही ने महल में पहुंच क्र एक साधु और एक भयंकर से इंसान की जानकरी दी,

देव और अभेंद्र जो युद्ध करके आये थे तुरंत मुख्य दरवाजे की तरफ चल दिए, उनके पीछे राजवीर भी थे, जैसे hi तीनो ने भैरव सिंह को देखा तीनो hi अचंभित रह गए, ऐसा विशाल के शरीर वाला इंसान और इतना भयानक रूप में,

देव- कोण हो तुम लोग और हमारे राजय में क्यों आये हो,

साधु (सात्विक)- हमे यहाँ के राजा से मिलना ह,

देव- मैं hi हु यहाँ का राजा, बताओ क्या काम ह,

साधु (सात्विक)- हम तुम्हारे और तुम्हारे राजय के भले के लिए यहाँ आये हैं,

देव- हमारा भला, हमे किस्से खतरा ह,

भैरव- अगर तुम मेरी बात मान लेते हो तो किसी से नहीं होगा, वर्ण सबसे बड़ा खतरा मैं hi हु,

अभेंद्र ने तुरंत तलवार निकल ली,

सात्विक मुस्कुराया,

सात्विक- ये खिलोने इनका कुछ नहीं बिगड़ सकते, इनके साथ मिलने से hi तुम्हारा फायदा ह, ये पूरा संसार तुम्हारे सामने झुकेगा, ये पूरी पृथ्वी के राजा हैं, इनके साथ होने में तुम्हारी hi भलाई है,

देव- मेरी भलाई सोचने वाले तुम लोग हो कोण?

तभी पीछे से आवाज आई

सात्विक और भैरव

सबने आवाज की तरफ देखा तो वह भौमिक जी खड़े थे, भौमिक जी ने तुरंत शक्ति का इस्तेमाल किया और सात्विक अपने असली रूप में आ गया,

अब देव ने भी तलवार निकल ली,

भैरव- मैं यहाँ युद्ध के लिए नहीं आया हु मित्रता करने आया हु, तुम बलशाली हो और यहाँ के राजा हो, शक्ति धारण किये हुए हो, ये शक्तिया मेरी वजह से hi इस संसार में आई हैं, सही मायने में मैं hi इन सहक्तियो का मालिक हु, लेकिन अब ये शक्तिया बहुत से इंसानो में ह तो उस हिसाब से मैं उन सभी लोगो का मालिक हो गया हु, लेकिन फिर भी मैं मित्रता का हाथ बढ़ा रहा हु, मुझसे मित्रता करलो और मेरे साथ मिलकर इस ससर पैर राज करो,

देव- मैं लोगो की सेवा करने के लिए राजा बना हु राज करने के लिए नहीं, और तुम्हारे इरादे समाज के भले के नहीं लगते तो हमारी मित्रता कभी नहीं हो सकती, और सात्विक ने हमेशा हमे धोखा दिया ह ये इस राजय में घुसने के काबिल नहीं ह, अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो लोट जाओ यहाँ से,

भैरव- हहहहहह हहहहहह हहहहहहह हहहहहहहहह

भैरव जोर जोर से हसने लगा,

भैरव- हमारी मोत बच्चे तू शायद मुझे जनता नहीं ह, मैं हु भैरव अमरत्व को पाने वाला इस पृथ्वी का मालिक,

देव- तुम कोई भी हो मुझे फरक नहीं पड़ता,

सात्विक- लड़के तू इस राजय का सर्वनाश करवाना चाहता ह क्या,

भौमिक जी- हम युद्ध नहीं चाहते, तुम लोग यहाँ से लोट जाओ, हम तुम्हे मार नहीं सकते, लेकिन तुम भी हमे नहीं मार सकते, इसलिए इस युद्ध का कोई अंत नहीं ह,

इस बात पैर भैरव मुस्कुराया,

भैरव- मैं तुम लोगो को मर सकता हु या नहीं ये अभी सोचने वाला विषय नहीं ह, लेकिन मैं तुम्हे एक अवसर दे रहा हु सोचने का, आराम से सोचलो और मुझे बाटना, तुम मेरी मित्रता चाहत हो या अपना अंत, तब तक मैं कुछ और चीजे हैं जिन्हे सुलझा क्र आता हु,

भैरव वापस मुदा और चल दिया, सात्विक भी उसके साथ हो लिया,

देव अभेंद्र और भौमिक जी उन्हें देखते रह गए,

सात्विक- आपने उन्हें ऐसे hi छोड़ दिया,

भैरव- उसे एक मौका तो मिलना चाहिए सोचने का, तब तक बाकि शक्ति धारको से भी मिल लेते हैं, और इस राक्षश का भी पता कर लेते हैं,

इधर

अभेंद्र- ये क्या बाला थी, इतना भयंकर इंसान मैंने कभी नहीं देखा,

भौमिक जी- इसके काम और भी भयानक हैं, सात्विक इसे हमारे राजय में लाया ह अब जरूर वो उसे प्रतापगढ़ लेकर जायेगा, और वो लोग इनका साथ जरूर देंगे,

देव- हालत बिगड़ते जा रहे हैं, लगता ह भविष्यवाणी सही हो जाएगी इस राजय का विनाश निश्चित hi ह, मैं अकेला इन सबको कैसे रोक पाउँगा, अपने परिवार को कैसे बचा पाउँगा,

देव भौमिक जी और अभेंद्र अपनी hi चिंता में खोये हुए थे वही साडी लड़किया युद्ध की जीत की ख़ुशी में एक पानी से बहरे कुंड में हसी मजाक क्र रही थी और अपनी थकन दूर क्र रही थी, सभी लड़कियों के अंगवस्त्र उनके शरीर से चिपक गए थे जिससे उनका शरीर का आकर साफ़ दिख रहा था, और भीगे कपड़ो में से उनकी चूचियों से चिपक गए थे जिससे चूचिया लगभग नंगी सी hi दिख रही थी, लेकिन सभी लड़किया hi थी तो किसी को शर्म नहीं आ रही थी, सब अपने अपने युद्ध का बखान क्र रही थी,

अमिता- आज बहुत मजा आया, मैंने पहेली बार असली युद्ध किया ह,

सोमिया- है यार मुझे तो बहुत दर लग रहा था लेकिन एक बार तलवार चलनी शुरू की फिर तो मजा hi आ गया,

अक्षरा- लेकिन रेवती को खतरा हो गया था आज,

अमिता- है लेकिन उसे देव की पत्नी बनने का अवसर मिल गया,

पत्नी सुनकर सुगंधा और कस्तूरी का सर निचे हो गया, वही रीवा की आँखे भी नाम सी हो गई,

अक्षरा- वैसे राजा की एक से ज्यादा रनिया हो सकती हैं तो देव कितनी रनिया रखेगा,

सोमिया- देव का मन जितनी चाहे रख ले,

अमिता- अक्षरा तेरी चूचिया कुछ ज्यादा hi फूली फूली लग रही हैं क्या बात ह, इनका आकर जल्दी से बड़ा हो रहा ह,

अक्षरा- क्यों झूट बोल रही हो, चूचियों का आकर तो आपका और सोमिया का बढ़ता जार है ह देखो हम सबसे बड़ी हैं, और रेवती की देखो

रेवती एक दम से झेप गई,

रीवा- तुम्हारे पास और कुछ नहीं ह बकवास करने को,

सोमिया- ओहो हमे पता ह तेरी चूचिया हम सबसे ज्यादा सूंदर और मस्त आकर की हैं, अब तक इन पैर किसी मर्द का हाथ नहीं पड़ा न जिस दिन किसी मर्द का हाथ इन्हे मैलेगा न तब तुझ पता चलेगा,

रीवा- ची कैसी बाते करती हो, इन्हे चुने का अधिकार किसी को नहीं ह,

अक्षरा- कोई तो छुएगा, मेरा तो बहुत मन कर रहा ह कोई मेरी इन चूचियों को निचोड़ दे, अब बर्दास्त नहीं हो रहा, कब मैलेगा वो मेरी चूचिया,

अक्षरा जोश में कुछ ज्यादा बोल गई,

रीवा- वो कोण किसकी बात क्र रही ह तू,

अक्षरा- अरे मेरा मतलब ह मेरा होने वाला पति जॉब hi होगा वही मैलेगा न,

रेवती- सुगंधा और कस्तूरी तुम कुछ नहीं बोलती, मैं तुम दोनों को हमेशा खामोश देखती हु,

सुगंधा- मैं क्या बोलू, मैं आप सबके बिच में बोलने का हक़ नहीं रखती,

रीवा- तुमने ऐसा कैसे सोच लिया, सबकी तरह तुम भी हमारी बहन हो, और तुम्हारा पूरा अधिकार ह समझी,

कस्तूरी- मैं तो अपने सभी अधिकार खो चुकी हु,

अक्षरा- तुमने जो गलती की कस्तूरी उसकी सजा तुम्हे मिल चुकी ह, अब पुराणी बातो को भूल जाओ और हमारे साथ इन ख़ुशी के पालो को जियो न जाने फिर कभी ऐसा पल मिलेगा भी या नहीं,

रीवा- सही कहा अक्षरा ने हम एक युद्ध में हैं जिसका क्या परिबनाम हो कोई नहीं जनता, और ये युद्ध ऐसे इंसानो के बिच ह जो अमर हैं, तो इस युद्ध का परिणाम न जाने क्या होगा, इसलिए परिवार के साथ खुल क्र जी लो,

अक्षरा- और जिसके दिल में जो भी राज छिपे हो वो बता दो, काम से काम दिल तो हल्का हो जायेगा, हहहहहहह

अमिता- बात तो सही ह, हम सब भेने हैं हमारे राज एक दूसरे को पता होना चाहिए,

सोमिया और अमिता के दिमाग में कुछ चल रहा था, क्योकि उहे ये तो समझ आ hi गया था की वह साडी लड़किया देव की दीवानी है, रेवती तो पहले सबके शामे देव की पत्नी का दर्जा मिल चुक्का था, कस्तूरी का सबको पता चल hi चुक्का था की वो देव से सबसे पहले चुद चुकी ह, और सुगंधा के बारे में भी सबको पता hi था की वो देव से प्रेम करती ह, वही अमिता सोमिया और अक्षरा तीनो hi एक दूसरे के बारे में जानती थी, बस सिर्फ रीवा बची थी जिसके बारे में किसी को नहीं पता था,

सोमिया और अमिता देव के साथ अपने रिश्ते को खुल क्र जीना चाहती थी, इसलिए वो दोनों एक योजना बना रही थी,

रीवा- अब हमारे बिच क्या राज ह, हम सब तो हमेशा खुली किताब हैं,

सोमिया- अमिता का मतलब ह की हम सब जवान हैं और जैसे हालत बन चुके हैं शायद hi इस दुनिया में कोई हमसे शादी करेगा, तो इस जवानी के उठते तूफ़ान को शांत रखने के लिए कोई प्रेमी तो होगा न सबका,

सुगंधा- हम एक ऐसा युद्ध लड़ रहे हैं जहा कब किसकी मृत्यु हो जाये कोई नहीं जनता और आप प्रेमी और जवानी की चिंता कर रही हैं,

अक्षरा- तभी तो ज्यादा चिंता करनी चाहिए हमे, न जाने कब क्या हो जाये जितना जीना ह अभी जी लो,

कस्तूरी- मैं तो अपना सब कुछ खो चुकी हु, मेरे पास सब कुछ था, माता पिता थे एक बहन और इतना प्यार करने वाला दुनिया का सबसे अच्छा इंसान, और मैंने क्या किया, अपने hi हाथो से अपनी दुनिया बर्बाद क्र दी, जो मेरा था आज वो किसी और का हो चुक्का ह,

कस्तूरी ने रेवती की तरफ देखा क्र बोलै,

अमिता- तुमने खुद कुछ नहीं किया, नियति ने सबकुछ करवाया ह,

अक्षरा- है अगर तुम वो सब न करती तो देव को यहाँ से न निकला जाता और आज जो देव ह वो कभी न बन पता, देव को इतना ताकतवर और यहाँ का राजा बनना था इसलिए जो होना ह होकत hi रहता ह,

रीवा- और तुमने कुछ खोया ह तो बहुत कुछ पाया भी ह, प्रेमलता जैसी माँ खोयी ह तो निहारिका माँ जैसी माँ को पाया ह, और सुगंधा आ भी तुम्हारी बहन ह उसके साथ साथ इतनी साडी भेने भी पाई हैं, रही बात पिता की तो हम पता लगा लेंगे तुम्हारे असली पिता कोण हैं,

सोमिया- और देव को तुमने खोया नहीं ह, देव किसी और का हुआ ह इसका मतलब ये नहीं की वो अब तुम्हारा नहीं रहा, रेवती देव से प्रेम करती ह और तुम भी, देव इस काबिल ह की वो सबको एक साथ प्रेम कर सके,

सबने थोड़ा शरमाते हुए एक दूसरे को देखा, क्योकि वह हर लड़की खुद को देव की प्रेमिका के रूप में hi देख रही थी,

अक्षरा- और जैसा मैंने महसूस किया ह सुगंधा भी देव से प्रेम करती ह,

सुगंधा ने अपना सर झुका लिया,

सुगंधा- जो रिश्ते बने हैं उसे वो हमारा भाई ह

अक्षरा - यहाँ अब ऐसा कोई रिश्ता नहीं ह, और उन रिश्तो की दुहाई मत दो जिनका कोई अस्तित्व hi नहीं ह,

अमिता- तो क्या तुममे से कोई ऐसी ह की जो देव पैर बस अपना अधिकार चाहती ह, क्या कोई ह जो देव के प्रेम को एक दूसरी बहन के साथ बाटना नहीं चाहती,

सबने न में गार्डन हिला दी,

सोमिया के दिमाग में कुछ और भी था की वह मनीषा आ गई,

मनीषा- आप सबका नहाना हो गया हो तो रानी माँ बुला रही हैं,

सोमिया की बात अधूरी रह गई,

सब जल्दी से निकल क्र कपडे बदल क्र निहारिका के पास पहुंचे, वह देव अभेंद्र राजवीर और भौमिक जी भी थे,

सभी आकर बैठ गई,

देव- आप सब यहाँ हैं, मैं आप सबको एक बात बताना चाहता हु की हमारे राजय पैर बहुत बड़ा खतरा आ चुक्का ह, भैरव सिंह हमारे राजय में आ चुक्का ह,

भौमिक जी- और अभी तक मैं उसे रोके का कोई उपाय नहीं जान पाया हु,

निहारिका- फिर हम क्या करे,

देव- आप सबको यहाँ से निकलना होगा, वो कभी भी हुम्ला कर सकता ह,

रीवा- हम तुम्हे छोड़ क्र नहीं जायेंगे,

देव ने सबको बहुत समझने की कोशिश की लेकिन किसी ने देव की बात नहीं मणि, देव को उन सबके सामने झुका hi पड़ा,

रात में देवा ुर निहारिका बिस्टेर पैर एक दूसरे की बहो में लेते हुए थे,

देव- माँ मुझे अब क्या करना चाहिए, मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा,

निहारिका- तेरा जनम इस संसार का भला करने के लिए हुआ ह, तू किस बात की चिंता करता ह, हम नियति को नहीं बदल सकते, जो लिखा ह वही होगा, इसलिए अपना कर्म किये जा, जो हो रहा ह होने दे, भविष्य में क्या होगा हम नहीं जाते लेकिन हम आज तो ख़ुशी से जी सकते हैं न, तो इन ख़ुशी के पालो की जी और सबको खुशिया दे,

निहारिका ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए और देव का हाथ पकड़ क्र अपनी कमर से खिसका क्र अपने नितम्बो पैर रख दिया,

देव ने भी तुरंत निहारिका के कठोर नितम्बो को कास क्र पकड़ लिया और खुद से चिपका लिया, और उसके होतो का रास पिने लगा, निहारिका की चूचिया देव की छाती में डाब रही थी,

निहारिका देव के उप्पेर आ गई, और अपने हाथो से hi अपने कपडे उतरने लगी, निहारिका का ये रूप देख क्र देव का लुंड उछाले मरने लगा था, जो निहारिका की जगहों के बिच गुशा जा रहा था, निहारिका ने देव के कपडे खोले और उसका लुंड उछाल क्र सामने आ गया,

निहारिका- ये हर रोज बड़ा होता जा रहा ह,

देव- आप जब करीब होती ह तो ये ऐसे hi हो जाता ह,

निहारिका- मेरी पूरी जवानी बर्बाद हो गई काश तू मेरी जवानी में मेरे साथ होता,

देव- अब तो आपके hi साथ हु माँ,

निहारिका ने मुस्कुराते हुए अपनी जीभ निकली और लुंड के टोपे पैर घुमाई, जिससे देव की सिसकी निकल गई,






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देव के हाथ निहारिका के सर पैर चले गए, निहारिका भी लुंड को मुँह में लेने लगी, देव ने निहारिका को अपने उप्पेर खींच लिया और दोनों पेअर अपने उप्पेर किये जिससे निहारिका की छूट देव के सामने आ गई,

देव- ये वही छूट ह जिससे मैं पैदा हुआ हु, दुनिया की सबसे खूबसूरत छूट ह ये,

निहारिका- आज यही छूट तेरे सामने ह, तू चाहे तो अपने जैसा एक महाबली निकल दे इस छूट से,

देव जोश में आ गया और उसने निहारिका की छूट को मुँह में भर क्र चूसना शुरू क्र दिया, निहारिका भी पुरे जोश में देव के लुंड को चूस रही थी, दोनों hi थकने का नाम नहीं ले रहे थे, दोनों को चूसै में hi भरपूर मजा आ रहा था,

बहुत देर तक दोनों एक दूसरे के अंगो को चूसते रहे लेकिन निहारिका कब तक बर्दास्त क्र पति और उसकी छूट ने फवारा छोड़ दिया और वो झड़ने लगी और अपनी छूट को देव के मुँह पैर पटकने लगी,

देव ने जल्दी से निहारिका को अपने निचे लिटाया और लुंड एक hi झटके में निहारिका की छूट में घुसा दिया, छूट पूरी तरह से चिकनी हो राखी थी जिस वजह से लुंड आधे से ज्यादा छूट में घुस गया, देव ने तुरंत धक्के लगाने शुरू क्र दिए, उसके धक्के काफी तेज थे, निहारिका ने देव को कास कर पकड़ लिया और निचे से अपनी कमर को उछलने लगी, निहारिका hi थी जो देव के लुंड को इतने मजे से झेल पति थी, और उसके लुंड का पूरा आनंद उठती थी,






कमरे में तूफ़ान सा आ चुक्का था, पुरे कमरे में निहारिका की सिसकिया और थप थप थप थप थप थप की कामुक ाजवज गूंज रही थी, निहारिका झाड़ क्र शांत हुई तो देव ने उसे पलट दिया और घोड़ी बना क्र उसके पीछे आ गया, और एक hi झटके में लुंड घुसा दिया, निहारिका की खूबसूरत मदमस्त गांड देव के सामने थी जिसे देख क्र देव का लुंड और जोश में भर गया, देव ने निहिरका की कमर को पकड़ा और धक्के लगाने लगा,





काफी देर छोड़ने के बाद देव बे निहारिका को अपने उप्पेर बैठा लिया और निचे से धक्के लगाने लगा, दोनों की चुदाई कई घंटो तक चली जिसमे निहारिका 3 बार झड़ी और फिर देव ने भी आप लावा निहारिका की छूट में भर दिया,

दोनों शांत होकर एक दूसरे से चिपक क्र नंगे hi लेट गए,

निहारिका- दुनिया के लिए हमारा रिश्ता कितना गलत ह लेकिन फिर भी मुझे ये रिश्ता सबसे ज्यादा प्यारा ह, मैं बस तेरी बहो में ऐसे hi साडी उम्र रहना चाहती हु,

देव- आप साडी उम्र मेरी बहो में hi रहोगी,

निहारिका- लेकिन बाकि सबका क्या होगा, उनका भी तो अधिकार ह न तुझ पैर,

देव- किसका माँ, आप किसकी बात क्र रही हो,

निहारिका- रेवती अमिता अक्षरा सोमिया, सुगंधा और कस्तूरी और रीवा, वो सब तुझसे hi प्रेम करती ह,

देव- माँ लेकिन वो सब मेरी भेने ह, उनके साथ वो सब,

निहारिका- मैं तेरी माँ हु, अमिता और सोमिया भी तेरी बहन ह, हमारे साथ भी तो हो चुक्का ह न फिर बाकि लड़कियों की क्या गलती ह, उन्हें भी उनके हिस्से की ख़ुशी मिलनी चाहिए, न जाने भविषा में क्या होना लिखा ह, उन्हें जो चाहिए उन्हें वो ख़ुशी दे दे बीटा,

देव- लेकिन रीवा, उसके लिए मैं कैसे

निहारिका- अगर किस्मत में लिखा ह ये होना ह तो होकर hi रहेगा, ज्यादा मत सोच इस बारे में, बस अपना कर्म किये जा,

देव- ठीक ह माँ जैसा आप कहो,

दोनों एक दूसरे की बहो में चिपक क्र सो गए,

वही दूसरी तरफ भैरव ुर सात्विक प्रतापगढ़ पहुंच चुके थे,

और जैसी hi ये खबर चिरंजीवी तक पहुंची तो वो दौड़ता हुआ उनके पास पाहकः गया, उसके पीछे प्रताप सिंह और रेणुका भी आ गए,

सात्विक- चरणसिंघ ये ह

चिरजीवी- राजा भैरव

भैरव ने मुस्कुरा क्र उसे देखा,

चिरंजीवी- ये सब शक्तिया इन्ही की वजह से तो हैं, मैं तो आपका दास हु, अंदर आइये,

सभी महल के अंदर आ गए, भैरव को एक ुचा स्थान दिया गया बैठने के लिए,

सात्विक- मुझे पता चला की तुमने भवनपुरा पैर हुम्ला किया था, और तुम बुरी तरह हार क्र वापस आये हो,

चुरंजीवी- हम बिना तैयारी के बस अपनी ताकत और अमरता के घमंड में वह चले गए थे, लेकिन हमने उस देव को अकेला समझने की कोशिश की,

सात्विक- शुक्र मनाओ वह भौमिक नहीं था वर्ण तुम्हारी आधी से ज्यादा सेना ख़तम हो चुकी होती, क्र दूंगा

चिरंजीव- मुझे समझ आ गया ह देव को हराना इतना आसान नहीं ह,

भैरव- मैं आ गया हु अब कुछ मुश्किल नहीं ह, उस देव को तो मैं ऐसे hi ख़तम क्र दुगा,

संभु- लेकिन उसे तो मारा नहीं जा सकता,

भैरव- मैं मार सकता हु,

भैरव की बात सुनकर सब चौंक गए, और एक दर भी पैदा हो गया,

चिरंजीवी- फिर क्या योजना ह, हमे जल्द से जल्द देव को ख़तम करना होगा, क्योकि वो हमारे साथ नहीं जुड़ेगा, उसे रस्ते से हटाना hi होगा,

भैरव- मरेगा वो जरूर मरेगा, क्योकि मुझे भवनपुरा को hi अपनी राजधानी बनाना ह, वही से पूरी धरती पैर राज काऊंगा मैं, लेकिन उसे थोड़ा सोचने का समय दिया ह,

रुका- समय क्यों किस लिए मैं उसे तड़पते हुए देखना चाहती हु,

सात्विक- जल्दी hi एक बड़ा युद्ध होगा,

संभु- गुरु जी एक बात समझ नहीं आ रही, हम सभी के पास शक्ति ह एक जैसी hi शक्ति लेकिन देव के घाव तुरंत भर जाते हैं जबकि हमारे घर भरने में समय लगता ह, और खून भेने से कमजोरी भी महसूस होती ह,

भैरव- क्योकि ये तीनो शक्तिया एक जैसी नहीं ह, और उसके पास जो शक्ति ह वो सम्पूर्ण शक्ति ह, तुम सब मिलकर भी उसका सामना नहीं कर सकते, मेरे सिवा उसका कोई सामना नहीं क्र सकता, मैं उसे मरूंगा जरूर मरूंगा लेकिन उसे पहले मुझे लड़किया छाइये बहुत साडी लड़किया जो मेरी काम वासना को शांत क्र सके, कब से मैंने अपनी काम वासना को शांत नहीं किया ह,

प्रताप सिंह ने इशारा किया और भानु भैरव को लेकर चला गया एक कमरे में जहा वो नाहा धोकर खुद को खुद को तैयार करके बहार आया, अब वो एक खूबसूरत मर्द बनकर बहार आया था, जिसे देख क्र कोई भी औरत उस पैर मर मिठे,

रेणुका ने बहुत सी लड़कियों को भैरव के पास भेज दिया, और कुछ hi समय में कमरे के अंदर से लड़कियों के चीखने की आवाजे आने लगी, भैरव के वहशी जवार था, उसे सम्भोग से ज्यादा मजा लड़कियों की चीखे सुनने में आता था,

रेणुका- सात्विक गुरु जी, मैं आपके सामने हाथ जोड़ क्र प्राथना करती हु, जैसी इन लड़कियों की चीखे इस महल में गूंज रही हैं वैसे hi उस देव के परिवार की औरतो की चीखे पुरे राजय में गुंजनि चाहिए, उसके घर की औरतो को पूरा परतापगढ़ छोड़ेगा, वो भी बिच चौराहे पैर,

सात्विक- जितना मैं जनता हु भैरव के बारे में अगर उन्होंने उस घर की औरतो को देख लिया और इनका दिल उन पैर आ गया फिर उन्हें कोई नहीं बचा सकता,

प्रताप सिंह- वो निहारिका मुझे चाहिए, उसे कोई हाथ नहीं लगाएगा,

रेणुका- आप अब भी उस निहारिका के पीछे पड़े हैं,

प्रताप सिंह- ये पूरा संसार भी उसकी बराबरी नहीं कर सकता, लेकिन उसके शरीर की धजिया मई उड़ाना चाहता हु,

चिरंजीवी- ऐसा hi होगा पिता जी, उस निहारिका का तो कोई और भी यही हाल करना चाहता ह,

प्रताप सिंह- और कोण आ गया बिच में,

चिरंजीवी- वो अपने काम पैर लगा हुआ ह, सही समय आने पैर सबके सामने आ जायेगा,

यहाँ भैरव अपनी हजारो वर्षो की वासना की आग को बुझा रहा था उधर देव अपनी माँ के नंगे शरीर से चिपका हुआ था, सात्विक और चिरंजीवी आगे की सोच विचार क्र रहे थे, वही काम्य को भी इस बात की जानकारी लग चुकी थी की उस गुफा से कोण कोण जिन्दा वापस आये हैं, और प्रताप सिंह के बेटे युद्ध के लिए भवन पूरा आये और हार क्र वापस लोट गए,

काम्य – अब होगा असली विनाश, अब होगी तबाही,

अभिजीत- कैसी तबाही माँ,

काम्य- एक ऐसा युद्ध होने वाला ह जिससे ये पूरी धरती याद रखेगी, ऐसे ऐसे योद्धा तकरेंगे जो अकेले hi पूरी धरती पैर राज कर सकते हैं,

अभिजीत- माँ क्या हम भी इस युद्ध में जायेंगे

काम्य- ये इंसानो का युद्ध नहीं ह, हमे तो बस मोके का फायदा उठाना ह, तू बस एक काम करता रह उस राक्षश की जानकारी निकलता रह,

अभिजीत- माँ मैंने पूरी ताकत लगाई हुई ह उस राक्षश को ढूंढने के लिए, न जाने वो कहा से आता ह कहा चला जाता ह कोई नहीं जनता,

काम्य- उसका मिलना बहुत जरुरी ह, इस युद्ध में अगर हम उसे अपनी तरफ कर पाए तो पूरा पैसा hi पलट जायेगा,

अभिजीत- लेकिन वो हमारी तरफ क्यों आएगा,

काम्य- वो मैं क्र लुंगी तू बस उसकी जानकारी निकल,

अगली सुबह देव निहारिका की बहो समाया हुआ था और उसका लुंड खड़ा होकर निहारिका की जांघो के बिच घुसा हुआ उसकी छूट से चिपका हुआ था, निहारिका जग रही थी लेकिन इस पल को ख़राब नहीं करना चाहती थी इसलिए चुप चाप देव के लुंड की गर्माहट का मजा ले रही थी, देव ने धीरे से उठने की कोशिश की लेकिन निहारिका ने उसे कास क्र पकड़ लिया और खुद से चिपका लिया,

निहारिका- जी लेने दो मुझे इस पल में, मेरी जीवन के सबसे खूबसूरत पल हैं ये,



देव ने भी निहारिका का साथ दिया और उसकी चूचियों को अपनी बहो में दबा लिया,
 
अपडेट 48




प्रताप गड में जब भैरव सिंह उठा और बहार आया तो कुछ दसिया कमरे में गई और दर से चीख पड़ी, प्रताप सिंह और रेणुका वह गए तो उनकी भी दर से आँखे फटी रह गई, जो 10 लड़किया कमरे गई थी वो मरी पड़ी थी, किसी की छूट फटी हुई थी तो किसी की चूचिया कटी पड़ी थी, एक को तो बिच में से चिर दिया था भैरव ने, ये नजारा किसी को भी भयभीत क्र सकता था, लेकिन रेणुका के चेहरे पैर एक मुस्कान थी,

भैरव ने रेणुका के चेहरे की मुस्कान को देखा,

भैरव- तुम्हे भी इस सब में मजा आता ह,

रेणुका- मैं चाहती हु आप उस देव के परिवार की औरतो के साथ ये सब करे,

भैरव- क्या वो सूंदर हैं,

रेणुका- इस समय पूरी धरती पैर उनसे सूंदर औरते किसी राजय में नहीं हैं,

भैरव- ahhhhhhhhhhhh मजा आएगा,

रेणुका- आप वह हुम्ला करने से रुके क्यों हो अब तक,

भैरव- क्योकि पहले मुझे उस राक्षश को मरना ह जिसने मुझसे ज्यादा दर फैलाया हुआ ह,

प्रताप सिंह- राक्षश नहीं नहीं उसे मत टकराना,

भैरव- तू बहुत डरपोक ह, उसे मैं अपने हाथो से मरूंगा,

इधर देव और निहारिका तैयार होकर पुरे परिवार के पास जा रहे थे,

निहारिका- देव अपनी बहेनो का ख्याल रख, इस युद्ध में अगर हमारी हार हुई तो मैं और मेरी बेतिया खुद को ख़तम कर लेंगी, लेकिन किसी दुश्मन के हाथ हमारे शरीर को नहीं छू पाएंगे,

देव- ऐसा कुछ नहीं होगा माँ,

निहारिका- फिर भी मैं बोल रही हु, अपनी सभी प्रेमिकाओ को उनके हिस्से की ख़ुशी दो, उन्होने बहुत कुछ झेला ह, उन्हें ये सुख तो मिलना hi चाहिए, अक्षरा और सुगंधा उनके हिस्से की ख़ुशी उन्हें दो और रीवा के करीब जाओ, उसके दिल की बात उसके होतो पैर लाओ,

देव- ठीक ह माँ, जैसा आप कहे,

सभी नाश्ते पैर एक साथ बैठे हुए थे, अक्षरा और अमिता दोनों देव के बराबर में आकर बैठ गई थी,

सभी युद्ध और भविष्य की चिंता में थे लेकिन अमिता और अक्षरा के हाथ मजे के निचे देव की जांघो पैर घूम रहे थे, देव ने दोनों को देखा और इशारे से रोकने की कोशिश की लेकिन वॉक अहा मैंने वाली थी, देव का लुंड अपने आकर में आने लगा था, और फिर अचानक से दोनों बहेनो ने अपने हाथ हटा लिए और बड़ी बड़ी आखो से एक दूसरे को देखने लगी, क्योकि दोनों के हाथ एक साथ देव के लुंड पैर पहुंचे और दोनों ने एक साथ लुंड को मुठी में भर लिया, तब दोनों को अहसास हुआ की वो दोनों एक साथ देव के लुंड से खेल रही है, दोनों ने एक दूसरे से शर्मा क्र हाथ हाथ लिए, देव ने रहत की साँस ली, लेकिन कुछ hi पालो बाद अमिता और अक्षरा का आपस में इशारा हुआ और दोनों ने फिर एक साथ देव का लुंड पकड़ लिया और मरोड़ने लगी, उन दोनों के बिच कुछ नहीं छिपा था,

बाकि लड़किया भी बड़ी हसरतो से देव को देख रही थी, लेकिन इस सब के बिच कस्तूरी की नजर अक्षरा के हिलते हुए हाथ पैर चली गई, और जैसे hi उसने ढाया दिया तो उसका मुँह खुला रह गया, उसे यकीन hi नहीं हुआ जो वो देख रही ह वो सच ह या झूट, वो कभी अक्षरा के हाथ को देखती तो कभी देवा ुर अक्षरा के मुँह को देखती, उसे जलन होए लगी थी, कभी उसे बुरा लगता तो कभी उसकी वासना जग उठती,

तभी मनीषा ने आकर सबका धयान भांग किया,

मनीषा- महारानी अभेंद्र जी आये हैं महाराज से मिलना चाहते हैं,

निहारिका- तुझे कितनी बार बोलै ह तू मुझे माँ बोलै क्र, ये महारानी बाकि लोगो के लिए रहने दे,

देव- और मैं तुम्हारा भाई हु समझी, मुझे भैया या सिर्फ देव बोल करो, और अभेंद्र मेरे भाई जैसा ह उसे आज्ञा की जरुरत नहीं ह यहाँ आने के, बुलाओ उसे,

मनीषा अभेंद्र को बुला ले,

देव- क्या हुआ अभेंद्र इतना परेशां क्यों हो,

अभेंद्र- देव वो प्रेमलता वो भाग गई,

सुगंधा एक दम कड़ी हो गई,

सुगंन्धा- क्या कैसे वो कैसे भाग सकती ह,

अभेंद्र- किसी ने उसकी सहायता की ह, एक सैनिक ने उसे किसी के साथ भागते देखा, वो ये तो नहीं जान पाया वो किसके साथ भागी लेकिन ये पक्का ह की वो उसका कोई खास जानकर होगा, क्योकि भागने से पहले दोनों गले लगे थे,

देव- वो मर्द था या औरत

अभेंद्र- अंधेरे में ये पता नहीं चल पाया, लेकिन मैंने आदमी लगा दिए ह पता करने के लिए,

इधर निहारिका अपना सर पकडे हुए बैठी थी,

रीवा- क्या हुआ माँ, आप इतनी परेशां क्यों हैं, वो पकड़ी जाएगी, वैसे भी वो हमारा क्या बिगड़ सकती ह,

निहारिका- बहुत कुछ बिगड़ सकती ह, क्योकि मैंने अत्ति उत्साह में उसको ऐसा कुछ बता दिया था जो दुइया में किसी को पता नहीं होना चाहिए थे,

देव ने निहारिका की तरफ देखा और चौंकते हुए इशारे से पूछा, की हमारे बारे में,

निहारिका ने हां में गर्दन हिला दी,

देव ने भी अपना सर पकड़ लिया, ये बड़ी संशय आ चुकी थी, क्योकि अगर देवा ुर निहारिका के रिश्ते के बारे में किसी को पता चला तो ार्थ हो जायेगा, अब देवा ुर निहारिका किसी को बता भी नहीं सकते की वो क्यों परेशां ह,

देव- अभेंद्र किसी भी तरह से प्रेमलता को ढूंढो, वो जिन्दा या मुर्दा मुझे चाहिए,

अभेंद्र वह से चला गया,

अक्षरा- माँ आप इतना परेशां न हो, उसे कुछ पता भी हो तो भी उसकी बातो पैर कोई यकीन नहीं करेगा,

देव – मुझे भौमिक जी से मिलना ह, मैं उनसे मिलकर आता हु,

अमिता- तुम अब राजा हो, तुम जिसे चाहो अपने पास बुला सकते हो, तुम्हे किसी से मिलने जाने की जरुरत नहीं ह,

देव- वो मेरे गुरु हैं, और कोई राजा हो या खुद भगवान्, कभी गुरु को अपने पास बुलाने का आदेश नहीं दे सकते, गुरु के पास तो खुद जाना होता ह,

अक्षरा- सही कहा, मैं भी साथ चलूंगी,

देव- तुम क्या करोगी,

अक्षरा- कुछ नहीं बस साथ चलुगी,

अक्षरा की जींद के सामने किसकी चलने वाली थी, देव और अक्षरा भौमिक जी के घर की तरफ चल दिए, रस्ते में,

अक्षरा- आज मजा आया तुम्हे,

देव- तुम्हारी शैतानी बढ़ती जा रही ह आज कल, ये क्या तरीका था अगर कोई देख लेता तो क्या होता,

अक्षरा- देख लेता तो देख लेता मुझे किसी का दर नहीं ह, मैं तुम्हारी हु, और ये बात मैं पूरी दुनिया के सामने बोल सकती हु,

देव- लेकिन वह और भी सब थे,

अक्षरा- साडी की साडी तुम्हारे निचे बिछे को बेताब हैं, तुम hi मौका hi दे रहे किसी को, रेवती कस्तूरी अमिता और सोमिया की तो ले चुके हो, मैं और सुगंधा बची हैं, और तुम जानते hi हम भी तुमसे प्रेम करती हैं, बस तुम hi मौका नहीं दे रहे हमारी लेने के लिए,

देव- की तुम कितनी गन्दी बात करती हो,

अक्षरा- अभी तो बस बात कर रही हु, जब करुँगी तब देखना,

देव- क्या देखना, मैं तो पहले hi सबकुछ देख चुक्का हु,

अक्षरा शर्म से लाल हो गई,

देव- अब क्यों शर्मा गई,

अक्षरा- शर्मा नहीं रही हु, बस इंतजार कर रही हु,

देव- तो तुम्हारा इंतजार जल्दी hi ख़तम करना होगा,

अक्षरा- हे मैं मर जाऊ, कब कहा

देव- कहो तो यही

अक्षरा- चलो फिर

देव- हैट पागल हो क्या, ये जुगल ह, जंगल में कोण करता ह,

अक्षरा- मुझे जुगल पसंद ह, और बिस्टेर पैर तो सभी मजा लेते हैं, मुझे अपना पहला सम्भोग याद गर बनाना ह, तो जंगल से अच्छा क्या होगा,

देव को कस्तूरी के साथ बिताये पल याद आ गए, उसका पहला प्यार और पहेली चुदाई, जिसे देव आज तक नहीं भुला था, वो कस्तूरी से दूर हो गया था लेकिन उसके साथ बिताये पालो को कभी नहीं भूल पाया था,

देव- पहले भौमिक जी के पास चलते हैं फिर सोचना इस बारे में,

कुछ देर में वो भौमिक जी के पास पहुंच गए, लेकिन भौमिक जी तो फेके hi महल की तरफ जा चुके थे,

भौमिक जी महल में निहिरका के सामने खड़े थे,

निहारिका- भौमिक जी आप यहाँ, देवा आपसे hi मिलने गया हुआ ह,

भौमिक जी- महारानी मुझे आपसे कुछ जरुरी बात करनी ह,

निहारिका- बताइये, ऐसी क्या बात हुई जिस वजह से आपको ऐसे आना पड़ा,

भौमिक जी- बहुत कुछ होने वाला ह और बहुत जल्द होने वाला ह, बहुत hi भयंकर होने वाला ह,

निहारिका- मैं भी जानती हु कुछ भयंकर होने वाला ह, आप तो भविष्य के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, आप hi बताइये कुछ,

भौमिक जी- मैं कुछ बाते जनता हु, कुछ झलकियां दिखती हैं मुझे उसी हिसाब से अनुमान लगता हु, मैं अब तक भी पूरी तरह किसी का भविष्य नहीं देख पता हु, लेकिन मुझे उम्मीद ह जल्दी hi मैं सब देख पाउँगा, लेकिन जितना मैं देख पाया हु उस हिसाब से एक बहुत बड़ा विनाश हमारी तरफ आ रहा ह,

निहारिका - उससे बचने का कुछ उपाय गुरु जी,

भौमिक जी- देव ऐसा कुछ करना होगा जो इस समाज और नियम के विरुद्ध होगा, अगर सभी दुश्मनो को हराना ह तो अपने अंदर की पूरी ताकत को जगाना होगा, वो खुद को बंधे हुए हो, अपनी ताकत को रोक रहा h,uske अंदर असीम ताकत ह उसे बहार लाना होगा, उसके लिए उसे अपने शरीर को हल्का करना होगा,

निहारिका - मैं कुछ समझी नहीं,

भौमिक जी- मैं ये बाते मैं आपको कहता अच्छा नहीं लग रहा लेकिन फिर भी बता रहा हु, एक दिन मैंने hi उसे इस कार्य के लिए शाप दिया था, और आज मुझे लग रहा ह की वो शाप hi उसके लिए वरदान ह,

निहारिका - शाप कैसा शाप, आपने देव को शाप क्यों दिया,

भौमिक जी- तुम कन्या हो तुम्हारे सामने मैं ये बोल नहीं सकता लेकिन देव को याद होगा मैंने उसे क्या शाप दिया था, अब समय आ चुक्का ह उस शाप को पूरा करने का,

निहारिका – आप मुझे बता सकते हैं, मैं उसकी सहायता कर सकती हु, वो मेरी बात जरूर मानेगा

भौमिक जी- उसने खुद को बांध रखा ह, उसके अंदर वासना का बवंडर ह, जो मेरे शाप और उस शक्ति की वजह से उत्पन्न हुआ ह, लेकिन उस वजह से उसकी ताकत कमजोर पद जाएगी, क्योकि वो अपने अंदर की पूरी वासना को हल्का नहीं क्र प् रहा ह, उसे सम्भोग करना होगा, और एक बहुत जरुरी बात, वो सब अपनों के साथ hi करना होगा, क्योकि उसके अंदर जो शक्ति ह उसका अंश कही और न जा पाए,

निहारिका को साडी बात अचे से समझ आ चुकी थी,

निहारिका- क्या वो रिश्ता कोई भी हो सकता ह,

भौमिक जी- मैं आपकी बात का मतलब समझ रहा हु, वो मुझे कहते हुए बड़ी ग्लानि हो रही ह की आपको इस सब में शामिल होना होगा, ये बहुत hi जरुरी ह, उसकी बहेनो को शामिल होना होगा, ये युद्ध सिर्फ आज का नहीं ह, जितना मुझे समझ आया ह ये युद्ध जन्मो से भी आगे का ह,

ये बात निहारिका की समझ में नहीं आई,

निहारिका- मैं अपनी तरफ से भरपूर कोशिश करुँगी देव के अंदर की शक्तियों को जगाने की,

भौमिक जी- आपके मन में ह उसी रस्ते पैर चलना, वो रास्ता सही बहेले न हो लेकिन आप सबके लिए वही रास्ता सही ह, और अपने परिवार की बाकि लड़कियों को भी उसी रस्ते पैर लेकर चलना, ये देव के लिए बहुत जरुरी ह, और जल्द से जल्द ये सब होना चाहिए,

इतना बोलकर भौमिक जी वह से निकल गए, निहारिका सोच में दुब गई, उधर देवा ुर अक्षरा भौमिक जी के घर से निकल क्र जंगल में नदी की तरफ निकल गए, आज देव के अंदर कामुकता चरम पैर थी, वो खुद को रोक रहा था लेकिन उसका शरीर बेकाबू हो रहा था, उसका लुंड पुरे तनाव में आया हुआ था,

अक्षरा- कितनी सूंदर जगह ह देव ये,

देव- मैं शांति के लिए यही आया करता था, यहाँ बड़ा सकूं मिलता था,

अक्षरा- इतने समय से सबने कितना कुछ झेला ह, यहाँ आकर सब भूल गई हु मैं, कितना सकूं मिल रहा ह,

अक्षरा ने देव का हाथ अपनी बहो में भर लिया, और अपनी दोनों चूचियों को देव के बाजु पैर रगड़ा, देव की उंगलिया अक्षरा की नाभि से निचे तक पहुंच रही थी, जो कभी कभी उसकी छूट के उप्पेर के हिस्से पैर रगड़ जाती तो अक्षरा मदोष हो जाती,

अक्षरा- काश यहाँ हमारा एक बसेरा हो, जिसमे तुम हो और हम सब तुम्हारी प्रेमिकाए हो,

देव- प्रेमिकाए?

अक्षरा- है हम सब तुम्हारी प्रेमिकाए hi तो हैं, मैं, अमिता, सोमिया, रेवती, सुगंधा, कस्तूरी,

देव- तुम्हे इस बात से तकलीफ नहीं होती की और भी लड़किया मेरी जिंदगी मैं हैं, और न जाने कीटनियो के साथ मैंने सम्भोग किया होगा,

अक्षरा- नहीं होती, राजमहल की लकड़ियों को एक से ज्यादा रानियों के साथ समझौता करना सिखाया जाता ह, पैर यहाँ समझौते जैसी कोई बात नहीं ह, हम सब तुमसे प्रेम करती हैं, और हम सब भेने हैं, और तुम और तुम्हरा प्यार ितं अनमोल ह की हममे से कोई एक उसे सम्हाल hi नहीं पायेगी, हम सब मिलकर तुम्हे प्यार करेंगी, मेरा बस चले तो सबको एक साथ ले औ और सब मिलकर तुमसे प्यार करे, बस निहारिका माँ और रीवा से दर लगता ह, काश रीवा भी तुमसे प्रेम करती होती तो कितना आनद आता,

रीवा का नाम आते hi देव के लुंड ने झटका मारा,

देव- प्रेम एकांत में hi होना चाहिए, ऐसे सबके साथ तो वासना होती ह,

अक्षरा- हमारा प्रेम वासना से hi उभर क्र आया ह, और मैं ये सोचती हु की आपस में कुछ भी छुपाना ठीक नहीं ह, लेकिन फ़िलहाल तुम मेरे साथ हो तो मैं इस पल को ऐसे बातो में गवाना नहीं चाहती,

अक्षरा ने देव को बहो में बहरा और उसका सर झुका क्र अपने हॉट उसके होतो से मिला दिए, अक्षरा सबसे छोटी थी लेकिन उसका शरीर और उसके मुलायम हॉट बहुत hi कामुक थे, देव तो पहले से hi बेकाबू हो रहा था, देव ने भी अक्षरा को बहो में बहरा और खुद से चिपका लिया, दोनों के शरीर चिपकते hi अक्षरा को देव के खड़े लुंड का अहसास हो गया था, जो सिद्ध उसकी नाभि से निचे बाद रहा था, मोठे लुंड का अहसास होते hi अक्षरा और कामुक हो गई, उसने तेजी से देव के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, देव का एक हाथ अक्षरा की आधी खुली नंगी कमर पैर था और दुशरा हाथ उसकी कड़क गांड पैर पहुंच चुक्का था, देव भी लुंड का दबाव बनाये जार है था,

काफी देर हॉट चूसने के बाद दोनों अलग हुए तो दोनों की आँखे लाल थी उनमे वासना कैद ओरे तैर रहे थे, अक्षरा कुछ पल रुकी फिर देव के कपड़ो पैर टूट पड़ी, देव भी जल्दी जल्दी उसकी चोली खोलने लगा, कुछ hi पालो में अक्षरा की कड़क चूचिया देव की आँखों के समाने थी, वही देव का मजबूत शरीर अक्षरा के समाने था, दोनों एक दूसरे की सुंदरता को निहार रहे थे, देव ने तुरंत अक्षरा की एक चुकी को अपनी मुठी में भरा और दूसरी पैर अपने हॉट रख दिए, अक्षरा की आँखे बंद हो गई, वो मस्ती में मदहोश होने लगी, उसके हाथ देव के सर में घूम रहे थे, फिर नंगी कमर पैर होते हुए उसने अपना हाथ निचे ले जाकर देव के उफान मरते हुए लुंड पैर रख दिया, और जैसे hi कपड़ो के उप्पेर से लुंड उसकी मुठी में आया, अक्षरा घबरा गई,

देव भी समझ गया की अक्षरा लुंड का आकर महसूस क्र के घबरा रही ह,

देव- क्या हुआ दर लग रहा ह,

अक्षरा- दर किस बात का, हमे सिखया गया ह, इसका आकर जितना मोटा होगा सम्भोग का आनंद उतना hi अधिक होगा, बस पहेली बार दर्द थोड़ा ज्यादा होगा,

देव मैं कोशिश करूँगा उतना दर्द न दू,

देव ने अक्षरा के घागरे का नाडा खोल दिया, जिससे घागरा निचे गिर गया, और उसकी ननंगी जंघे देव के सामने आ गई, क्या खूबसूरत चिकनी जंघे थी, अक्षरा ने भी देव के कपडे खोल दिए, और कुछ hi पालो में दोनों एक दूसरे के समाने नंगे खड़े थे, अक्षरा की नजर जब देव के लुंड पैर गई तो वो हैरत से उसे देखती रह गई, जैसे कोई अजूबा देख लिया हो, देव ने अक्षरा का हाथ पकड़ा और खुद से चिपका लिया, अक्षरा का शरीर कैंप रहा था, और जब नंगी शरीर से दोनों के शरीर रगड़े तो काम वासना और बेहद गई, और देव का लुंड अक्षरा की छूट के उप्पेर रगड़ा जिससे अक्षरा और उत्तेजित हो गई, उसका एक पेअर खुद hi उठ गया और देव की कमर पैर लप्पेट लिया, जिससे उसकी छूट लुंड के सामने आ गई, और लुंड की रगड़ सीधे छूट पैर लगी,

अक्षरा पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी,

देव अक्षरा की गार्डन को चूमने लगा, अक्षरा देव की छतो को चूमने लगी, फिर देव ने अक्षरा की गांड को पकड़ा और अपनी गॉड में उठा लिया, अक्षरा की देव से पूरी तरह लिपट गई, देव अक्षरा को लेकर पानी के अंदर चल दिया, देव का उठा हुआ लुंड कभी अक्षरा की छूट पैर रगड़ता कभी उसकी गांड पैर, अक्षरा जब बुझ क्र अपने शरीर को हिला रही थी ताकि लुंड की रगड़ को महसूस क्र सके,

जांघो तक पानी में नाज़े के बाद देव रुक गया और अक्षरा को निचे उतरा, तवसना से तपते हुए शरीर पैर जब ठन्डे पानी का अहसास हुआ तो अक्षरा के शरीर में धुआँ सा उठ गया, देव अक्षरा के शरीर को चूमने लगा उसकी चूचियों को चूमने लगा फिर निचे बैठ गया और उसकी नाभि को चूमने लगा, और फिर छूट के उप्पेर के हिस्से पैर अपनेहोत रगड़े जिससे अक्षरा सिसक उठी और उसने देव का सर वही बड़ा लिया, देव उसके रोके कहा रुकने वाला था, देव ने अक्षरा की जांघ उठाई और अपने कंधे पैर रख ली और अब अक्षरा की छूट सीधे देव के मुँह के सामने थी, अक्षरा का शरीर कैंप रहा था, उसका पेट थिरक रहा था,

देव ने अक्षरा की छूट पैर हल्का सा चुम्बन दिया, जिससे अक्षरा तड़प उठी, उसकी यह से ुउउइइइइइइइ माँ निकल गया,

देव ने तुरंत अक्षरा की छूट को अपने मुँह में भर लिया और ुरका रास चूसने लगा, छूट पहले से hi गीली हो राखी,

कोई भी लड़की ये समझ सकती ह की जब उसका सच्चा प्रेमी उसकी छूट को चूमता ह तो उसे दुनिया की सबसे ज्यादा ख़ुशी का अहसास होता ह,

अक्षरा भी वैसा hi महसूस क्र रही थी, ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh uuummmmmmmmmmmmm ddddeeevvvvvvvvvv नहीं नहीं ahhhhhhhhhhhh माँ

अक्षरा के मुँह से सिसकीय फुट रही थी, देव भी अपना काम किये जार है था, अक्षरा का शरीर अकड़ने लगा था, लेकिन वो अपनी वासना को अभी शांत नहीं करना चाहती थी, लेकिन खुद को मजा लेने से रोक भी नहीं प् रही थी, फिर भी उसने बड़ी हिम्मत का काम किया और अपनीजाण्ड देव के कंधे से उतर ली,

देव ने उप्पेर देखा तो अक्षरा हांफ रही थी, उसकी चूचिया उप्पेर निचे हो रही थी, आँखे भट्टी की तरह लाल थी,

देव की आँखों में सवाल था की रोका क्यों जिसका जवाब अक्षरा ने बिना बोले बस अपने काम से दिया, उसने देव को खड़ा किया और खुद उसके समाने बैठ गई, जैसे hi वो बैठी उसकी छूट ठन्डे पानी से टकराई और वो फिर से मचल उठी लेकिन उसके समाने देव का फौलादी लुंड खड़ा था, अक्षरा हलकी सी डगमगाई तो उसने जल्दी से देव का लुंड पकड़ लिया और खुद को गिरने से बचाया, देव का लुंड उसके हाथो में ठीक से आ भी नहीं रहा था,

अक्षरा बस लुंड को निहारे जार hi थी, फिर उसने अपनी जीभ निकली और हलके से देव के टोपे को चाट लिया, देव मस्ती में बाहर गया,

अक्षरा ने देव को देखा की उसे मजा आ रहा ह तो अक्षरा का जोश बेहद गया और उसने जीभ से पूरा लुंड चाटने लगी, फिर मुँह खोल क्र लुंड को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी, लेकिन लुंड बहुत मोटा था और अक्षरा का मुँह छोटा सा, उसके गाल चीरने लगे,

देव- बस करो तुम्हे तकलीफ होगी,

अक्षरा- अगर मैं इसे मुँह नहीं ले सकती तो नीच एकइसे लुंगी,

देव- निचे का आकर फ़ैल जाता ह, लेकिन होतो को खोले की एक सीमे होती ह,

लेकिन अक्षरा नहीं मणि वो पूरी कोशिश करती रही लुंड को चूसने की, जब थक गई तो लुंड को चाटने लगी, काफी देर चूसने चाटने के बाद देव ने उसे उठाया और अपनी बहो में बाहर लिया,

देव- अब इनका मिलान करवाने का समय आ गया ह,

अक्षरा- मैं तो कबसे तैयार हु,

देव नदी के किनारे पैर ले गया और अक्षरा को मुलायम घास पैर लिटा दिया, अक्षरा की कमर से निचे का हिस्सा पानी में था और बाकि घर पैर, देव अक्षरा की जांघो के बिच आ गया,

देव- तुम्हे दर्द होगा,

अक्षरा- ये दर्द hi लड़की का सबसे बड़ा घेणा होता ह,

देव ने अक्षरा की छूट पैर लुंड रखा और दबाव बनाया, ये देव की बड़ी गलती थी उसे ये अहसास hi नहीं था की पानी की वजह से छूट की चिकनाहट ख़तम हो चुकी होगी, और अक्षरा को ज्यादा दर्द होने वाला था,

देव के लुंड ने जैसे hi छूट पैर दबाव बनाया तो लुंड छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, अक्षरा के मुँह से एक दर्द भरी चीख निकल गई, चीख बहुत जोर डार्ट hi लेकिन भेटे पानी की आवाज में डाब क्र रह गई,

देव एक दम रुक गया,

देव- माफ़ करना अक्षरा, तुम्हे बहुत दर्द हुआ ह, मैं निकल लेता हु,

अक्सहर- नहीं नहीं निकलना नहीं, मैं सेह लुंगी, मुझे ये दर्द चाहिए, तुम रुकना नहीं, मैं जितना भी चिखु बस तुम रुकना नहीं,

देव ने अक्षरा को चूमा और उसकी चूचियों को चूसना शुरू किया, और निचे से दबाव बनाया, और लुंड थोड़ा और अंदर घुसा, अक्षरा दर्द की वजह से उप्पेर खिसक गई और पानी से थोड़ा बहार आ गई,

देव के लुंड का टोपा अक्षरा की छूट में फसा हुआ था, अक्षरा की छूट से खून निकल क्र पानी में भेटा जार है था, देव ने हल्का हल्का दबाव बनाये रखा, पानी से बहार आने के कुछ देर बाद hi छूट ने अपना काम करना शुरू क्र दिया था, अख्सरा के अंदर भरी वासना ने छूट को गिला करना शुरू क्र दिया था, और थोड़ी hi देर में आधे से थोड़ा काम लुंड का हिस्सा छूट के अंदर घुस गया था, अक्षरा की आँखे फटी रह गाइट hi, वो हिल दल भी नहीं प् रही थी, देव कभी उसके होतो को चूमता तो कभी उसकी चूचियों को कुरेदता, इससे अक्षरा को थोड़ी रहत होती, बहुत देर तक दोनों ऐसे hi रहे, और इसी बिच अक्षरा झड़ने लगी, और उसकी छूट ने जब फवारा छोड़ा तो देव के लुंड को भी रहत हुई और उसने लुंड को आगे पीछे करना शुरू किया, अख्सरा को दर्द हो रहा था, जिस वजह से वो झड़ने का पूरा आनंद नहीं उठा प् रही थी, देव लगातार लुंड आगे पीछे करता रहा, जिससे लुंड आधे से ज्यादा छूट में घुस गया था,

अब अक्षरा को भी थोड़ा मजा आने लगा था, उसकी छूट लुंड के साथ hi अंदर बहार हो रही थी, छूट का चला पूरी तरह से लुंड पैर फसा हुआ था, अक्षरा फिर से झड़ने लगी थी, और इस बार वो अपनी छूट को खुद hi हिलने लगी थी, उसने इस बार झड़ने का अहसास अचे से किया था,

लेकिन देव अब तक भी पूरी राफ्तेर में नहीं आ प् रहा था, दोनों की चुदाई बहुत लम्बी चली और इस चुदाई में अक्षरा 4 बार झाड़ गाइट hi, देव ने भी खुद को ज्यादा रोकना सही नहीं समझा और अपने आप को भेने दिया और अपना लावा अक्षरा की छूट में बाहर दिया, और जैसे hi देव ने अपना लुंड बहार निकला एक पुक की तेज आवाज हुई और उसी के साथ, अक्षरा की छूट ने एक जोर दर फवारा छोड़ दिया जिसमे देव का वीर्य और अक्षरा की छूट का रसा ुर खून और पानी बहार निकला,

अक्षरा को बहुत रहत महसूस हुई, अक्षरा बेसूद सी पड़ी रही, देव भी उसके पास लेट गया, देव पूरी तरह शांत नहीं हुआ था, वो झाड़ तो गया था लेकिन उसे सकूं नहीं मिला था, काफी देर लेते रहने के बाद देव ने अक्षरा को अपनी गॉड में उठाया और पानी में ले गया, पानी की धरा जब अक्षरा की छूट पैर गिरी तो उसकी सिरहन सी दौड़ गई, उसके दर्द में बड़ी रहत मिली,



देव ने उसे अचे से नहला क्र कपडे पहनाये, अक्षरा से चलना भी मुश्किल हो रहा था लेकिन महल तो वापस जाना hi था, वो बड़ी मुश्किल से रथ में बैठी और महल में वापस आई,
 
अपडेट-49






जब अक्षरा महल में लंगड़ाती हुई जार hi थी तो सामने से रीवा और अमिता मिल गई,

रीवा- अक्षरा क्या हुआ तुझे ऐसे क्यों लंगड़ा रही ह,

अक्षरा एक दम घबरा गई, और हिचकिचाते हुए बोली,

अक्षरा- वो मेरा पेअर मुद गया था, बहुत दर्द हो रहा ह,

अमिता- तू देव के साथ गाइट hi, वह तेरा पेअर कैसे मुद गया और ये तेरे बाल भीगे हुए क्यों हैं,

अक्षरा ने गुस्से में अमिता को देखा तो अमिता की समझ में सब आगया की अक्षरा को क्याहुआ ह,

अमिता- चल थी ह तू आर्म केर हम आते हैं, चल रीवा निहारिका माँ बुला रही हैं,

रीवा और अमिता चले गए, अक्षरा सहारा लेती हुई अपने कमरे में पहुंची और बिस्टेर पैर उलटी hi लेट गई, और कब सो गई उसे पता hi नहीं चला,

वही देव सिद्ध निहारिका के पास पाहकः और जाते hi उसे अपनी बहो में बाहर लिया, उसका लुंड अभी भी खड़ा था, जो सीधे निहिरका की गांड में घुस रहा था,

अपने बेटे को इतना उतावला देख क्र निहिरका हैरान थी,

निहिरका- देव क्या हुआ बीटा इतना उतावला क्यों हो रहा ह,

देव- माँ मुझसे खुद पैर काबू नहीं हो रहा ह, मैं बहुत समय से खुद को काबू क्र रहा था, लेकिन अब नहीं रुका जार है, मुझे हर समय बस हवस और वासना होइ दिख रही ह, मैं खुद को संतुष्ट नहीं क्र प् रहा हु,

निहारिका- भौमिक जी आये थे उन्होंने बताया ऐसा होगा,

देव- भौमिक जी यहाँ आये थे, क्या कहा उन्होंने,

निहारिका- ये सब उनके दिए शाप और इस शक्ति के प्रभाव की वजह से हो रहा ह,

देव- है उनका दिया शाप, उन्होंने कहा था, मेरे दीमहग में हमेषा वासना भरी रहेगी, मैं अब तक खुद को काबू क्र रहा था, लेकिन अब नहीं हो रहा

निहारिका- तुझे काबू करने की जरुरत नहीं ह, खुद मत बांध अपने अंदर की काम वासना को भेने दे बहार निकलने दे, सम्भोग क्र जितना कर सकता ह कर, और इस परिवार की हर ौरारत हर लड़की के साथ कर, मैं तेरे लिए हमेषा तैयार हु, मेरे साथ जितना चाहे जैसे चाहे उतना सम्भोग कर, बस करता जा

तभी वह रीवा और अमिता आ गई

रीवा- क्या करता जा माँ

निहारिका और देव एक दम झिझक गए,

निहारिका- कुछ नहीं तुम दोनों अकेली आई हो बाकि सब कहा हैं,

अमिता- आ रही हैं सभी

रीवा- अक्षरा नहीं आपएगी

रीवा कुछ बोलपति उसे पहले देव बोल पड़ा

देव- है वो उसकी तबियत ख़राब ह थोड़ी, उसे आराम चाहिए,

देव की बात सुनकर अमिता ने अपना मुँह पकड़ लिया और रीवा की नजरे चढ़ गई,

रीवा- लेकिन अक्षरा ने तो कहा था उसके पेअर में चोट लगी ह, उसे चला भी नहीं जार है था,

अब देव घबरा गया,

अमिता- है उसी वजह से उसकी तबियत ख़राब हुई होगी, छोड़ न इन बातो को,

निहारिका समझ गई अक्षरा को क्या हुआ ह,

निहारिका- अक्षरा से मैं पूछ लुंगी क्या हुआ ह, तुम लोग बाकि सबको बुलाओ और मेरी बात धयान से सुनो, देव तुम जाकर महल का कार्य देखो, जब से राजा बने hi तुमने कोई सभा नहीं की ह,

देव बिना कुछ बोले सभा की तरफ चला गया,

रीवा- ऐसी क्या बात ह माँ जिसके लिए आपने देव को भेज दिया,

निहारिका- ये माँ बेटियों की बात ह,

तभी कस्तूरी सुगंधा सोमिया रेवती भी आ गई,

निहारिका- आओ सभी मेरे पास बैठो, और मेरी बात को धयान से सुनो और समझो, फिर फैसला लो की आगे क्या करना ह,

रीवा- ऐसा क्या हुआ माँ,

निहारिका- तुम सभी जानती हो की हम कैसे हालातो में हैं, और आने वाले समय में क्या हो सकता ह, हमारे सामने ऐसे ऐसे दुश्मन आ चुके हैं जो सीधे बहगवां से भी टकरा सकते हैं, और उनकी संख्या हमसे अधिक ह, हमारे पास बस देव ह और सामने भैरव चिरंजीवी संभु भानु और सात्विक जैसे अमर लोग हैं, और साथ में प्रताप सिंह के सेना, तो ये युद्ध हमारे लिए वीरगति को पाने की hi जगह होगी,

और अगर हम ये युद्ध हरे तो इस राजय पैर प्रताप सिंह या उस भैरव का कब्ज़ा होगा और यहाँ की जमीन और औरतो पैर भी उन्ही का अधिकार होगा, फिर वो हमारे साथ क्या ाकरेंगे ये तुम सब अचे से जानती होगी,

रेवती- वो जानवर ह वो किसी को नहीं बख्शेगा,

निहारिका- इसी लिए मैं जो बताने जार hi हु उसे धयान से सुनो,

अमिता- हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन किसी को हाथ नहीं लगाने देंगे,

निहारिका- हो सकता ह हमे जान भी देनी पड़े, पैर तुम सब क्या कुँअरि मरना चाहती हो,

सबने एक साथ निहारिका को देखा, किसी की समझ में कुछ नहीं आया,

निहारिका- ये युद्ध कभी भी शुरू हो सकता ह, और हमारे पास समय नहीं ह, तुम सब जवान हो और तुम्हारे अंदर कुछ अरमान भी होंगे, इस उम्र में प्रेम वासना सम्भोग सब दिमाग में होता ह, लेकिन तुम सबको उसके लिए कभी मौका hi नहीं मिला, और शायद आगे भी न मिले, तुम सबकी शादिया कितनी hi बार रुक चुकी ह,

सोमिया- हम शादी नहीं करना चाहते,

निहारिका- उसका समय भी नहीं ह अब बेटी,

रीवा- आप कहना क्या चाहती हैं माँ साफ साफ बोलिये,

निहारिका ने घेरि साँस बहरी और अपनी सांसो को सबनातमहालते हुए बोली,

निहारिका- मैं चाहती हु की इस युद्ध से पहले तुम सब अपना कौमार्य भांग क्र लो, तुम जीवन के उस पड़ाव को जी लो जिसे पाने के लिए हर लड़की बैचैन रहती ह, जो पल एक लड़की को औरत बनता,

निहारिका की बात से साडी लड़किया हैरत से उसे देखने लगी, एक माँ अपनी hi बेटियों को प्यार सम्भोग करने की सलाह दे रही थी,

निहारिका- तुम्हे मेरी बाते अजीब लग रही होंगी, लेकिन ये सब मैं तुम्हरे और इस राजय के भले के लिए बोल रही हु, क्या तुम सब नहीं चाहती इस अहसास को जीना, जो ये अहसास जी चुकी हैं उनसे पूछो, इस सुच के बारे में, मैंने अपनी पूरी जिंदगी बिता दी इस सुच से वंचित रह क्र, मैं नहीं चाहती तुम सब ऐसे जियो,

सोमिया- लेकिन माँ हम ऐसे कसिए किसी के साथ क्र सकती हैं, समाज क्या कहेगा,

अमिता- समाज गया भाड़ में, हम जब युद्ध में मर जायेंगे क्या समाज हमे बचा पायेगा, मुझे समाज की चिंता नहीं ह, मैं तो बस ये सोच रही हु की हमे चुने का अधिकार हम ऐसे hi किसी अरे गैर को नहीं दे सकती,

निहारिका- रेवती देव की पत्नी ह,

रीवा- लेकिन उनकी शादी तो नहीं हुई

निहारिका- नहीं हुई तो क्या लेकिन उसे उसकी पत्नी का अधिकार मैंने दिया ह, तो वो उसकी पत्नी ह, और कस्तूरी देव की पहेली प्रेमिका ह, उस हिसाब से कस्तूरी भी देव की पत्नी hi हुई,

रीवा- लेकिन वो उसकी बहन लगती ह न,

निहारिका- यहाँ कोई रिश्ता नहीं ह, अगर रिश्तो की दाल दाल में गए तो कोई रिश्ता hi नहीं बचेगा, यहाँ आज तक ये hi समझ नहीं आया की कोण किसका बाप ह और कोण किसकी माँ, तो ये भाई बहन के रिश्ते भूल जाओ, तुम्हे पिता किन ा जाने कितनी hi संताने इस राजय में घूम रही हैं,

रेवती- मेरे पिता ने न जाने कितनी hi औरतो का जीवन बर्बाद किया ह और उनसे बच्चे पैदा किये हैं, और मेरी माँ रेणुका ने मेरे बाप से पैदा हुई लड़कियों को उसी जानवर के निचे सलवा दिया, और वो मेरे साथ भी वही करने वाली थी, तो ये रिश्ते नाते ऐसे लोगो के लिए कोई मायने नहीं रखते, इसलिए मेरे लिए ऐसे रिश्तो को कोई महोत्सव नहीं ह, और मैं देव से प्रेम करती हु, और कस्तूरी को देव की पत्नी के रूप सवीकार करती हु,

कस्तूरी की आँखों में आंसू आ गए,

अमिता और सोमिया ने चरण ताली बजे,

रीवा- तुम दोनों इतना क्यों खुश हो रही हो,

अमिता- अरे कस्तूरी के लिए बजा रहे हैं तू क्यों नाराज हो रही ह,

निहारिका- रेवती तू बहुत समझदार ह, लेकिन ये बात सिर्फ रेवती या कस्तूरी की नहीं ह, या सुगंधा भी ह जो देव से प्रेम करती ह, लेकिन आगे बढ़ क्र कुछ नहीं बोलती, और मैं चाहती हु की वो देव से शादी करे और अपने प्रेम को नाम दे,

अमिता- तीसरी शादी,

सुगंधा- लेकिन माँ ये संभव नहीं ह, मैं नहीं जानती देव मुझे प्रेम करता भी ह या नहीं, और मैं जबरदस्ती उसके गले नहीं बांधना चाहती, और अपनी hi बहेनो के सुहाग पैर नजर नहीं रखना चाहती,

निहारिका- ये मेरा फैसला ह सुगंधा, न इसमें देव कुछ बोल सकता ह न hi कोई और, अगर इन दोनों को कोई ऐतराज ह तो बताये,

रेवती- नहीं माँ मुझे कोई ऐतराज नहीं ह, एक राजा की कई रनिया हो सकती हैं, यहाँ तो सब अपनी hi हैं तो आपस में क्या मन मुटाव होगा, प्रेम hi बढ़ेगा,

कस्तूरी- सुगंधा में बहन ह और मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी ह, तो उसे मुझे कोई ऐतराज हो hi नहीं सकता,

रीवा- ये चल क्या रहा ह, सबकी शादिया देव से करवा डौगी क्या,

निहारिका- अब जो मैं कहने जार hi हु वो सुनकर शायद तुम लोग के पैरो के निचे से जमीन खिसक जाये,

अमिता- माँ बस हमे किसी ैरे गैर के पल्ले मत बांध देना,

निहारिका- मैं चाहती हु तुम चारो भेने अमिता सोमिया अक्षरा और रीवा, सभी देव का साथ अपना रिश्ता बनाओ,

ये बात सुनते hi सबकी आखे फटी रह गई, मुँह खुला रह गया, सब हैरत से निहारिका को देखने लगी,

रीवा एक दम कड़ी हो गई

रीवा- माँ ये क्या बकवास कर रही हो आप, आपने भांग खा ली ह क्या आज, कुछ भी अनाप शनाप बोले जार hi हो,

निहारिका- मैं जो भी बोलती हु होश में hi बोलती हु, और हर बात का कारन होता ह मेरे पास, पहले मेरी बात धयान से सुन ले,

अमिता- तू इतना गुस्सा क्यों क्र रही ह, पहले माँ की बात सुन तो ले,

रीवा ने हैरत से अमिता को देखा, अमिता छह क्र भी अपनी ख़ुशी को छुपा नहीं प् रही थी,

अमिता- बोलिये माँ बोलिये

निहारिका- रेवती तुम्हे ये बात अजीब नहीं लगी,

रेवती- लगी माँ थोड़ी सी लगी, लेकिन आप जो बोल रही हैं उसके पीछे कोई कारन जरूर होगा,

निहारिका- कस्तूरी और सुगंधा तुम्हे

कस्तूरी- हम भी एक तरह से देव की बहन हैं आपने हमे उसकी पत्नी का अधिकार दिया ह तो वही रिश्ता सबके साथ ह, लेकिन रीवा वो तो

निहारिका- हम्म्म बताउंगी, अमिता और सोमिया तुम्हे

अमिता- नहीं माँ बिलकुल अजीब नहीं लगी, क्योकि जैसे कस्तूरी और सुगंधा के पिता हमारे hi पिता हैं, वो देव की हो सकती हैं तो हम क्यों नहीं, और इन रिश्तो से भाई बहन के रिश्ते से तो हमारा उस दिन विश्वास टूट गया था जब हमारे सेज भाइयो ने हमारे साथ दुराचार करने की कोशिश की थी, उसी दिन हमारे लिए कोई भाई नहीं था,

सोमिया- सही कहा,

निहारिका- और एक सच ये भी ह की अमिता सोमिया और अक्षरा तीनो hi देव कोप रेम करती हैं,

ये सुनकर बाकि लड़किया अचम्भे से अमिता और सोमिया को देखने लगी, अमिता और सोमिया ने शर्म से सर झुका लिया,

निहारिका- ऐसे मत देखो इन्हे देव ह hi ऐसा,

रीवा की आँखे नाम थी, उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था,

निहारिका- अब बची रीवा, तो इस पूरी धरती पैर ऐसा कोई लड़का अब तक नहीं ह जो रीवा की जोड़ी बन सके, देव को अलावा, और ये भी सच ह की ये लड़की जो यहाँ सबको भाई बहन रिश्तो की दुहाई दे रही ह, वो खुद देव से बहुत प्रेम करती ह, लेकिन रिश्तो की मर्यादा में बांध क्र कभी बोल नहीं पाई,

रीवा अपना नाम सुनकर भोचकी सी कड़ी रह गई, वही बाकि लड़किया भी हैरत से मुँह फाडे रीवा को कभी निहारिका को देख रही थी, किसी को यकीन hi नहीं हो रहा था निहारिका ने ये क्या बोल दिया,

रीवा- माँ आपका दिमाग ख़राब ह क्या, ये क्या बोल रही हो आप,

निहारिका- तो खा कसम देव की और बता सबको तेरे दिल में उसके लिए कुछ नहीं ह,

अब रिबवा फास गाइट hi, वो देव की झूटी कसम नहीं खा सकती थी, रीवा ने वह से बहगना सही समझा, वो जल्दी से वह से बहगी लेकिन अमिता ने उसे पकड़ लिया,

अमिता- हमे बड़ा ज्ञान दे रही थी, और खुद चुप चुप क्र आशिकी कर रही थी,

रीवा- अमिता छोड़ो मुझे, जाने दो,

निहारिका- रीवा शांत हो जाओ और आराम से बैठो, यहाँ कुछ शर्माने वाली बात नहीं ह, हम सब एक दूसरे के भले के लिए ये सब कर रहे हैं,

रीवा- माँ ये सब गलत ह,

निहारिका- कुछ गलत नहीं ह, तुम सब बताओ क्या ये गलत ह,

रेवती- पहले मैं इस सब को गलत मानती लेकिन अब फर्क नहीं पड़ता,

कस्तूरी- मैं तो खुद अपने रिश्ते में उलझ रही हु तो मैं क्या गलत सही बताऊ,

सुगंधा- मैं भी ऐसी hi नव में सवार हु,

अमिता- मैं और सोमिया तो पहले से hi यही चाहती हैं,

निहारिका- तुम क्या सोचती ह ये तुम सब खुद फैसला करो, लेकिन मैं ऐसा क्यों कर रही हु ये पहले सुन लो,

सबने निहारिका की बात पैर धयान दिया,

निहारिका- मैं ये सब इसलिए बोल रही हु क्योकि देव अब एक दिव्या पुरुष ह, उसके अंदर बहुत सी शक्तिया ह, लेकिन उसकी शक्तिया पूरी तरह से जागृत नहीं हो रही हैं, क्योकि वोट क शाप से बंधा ह, जिसके बारे में कस्तूरी जानती ह,

रीवा- शाप कैसा शाप,

निहारिका- जब देव कस्तूरी के साथ पहेली बार सम्भोग क्र रहा था तो भौमिक जी ने उस एहसाप दिया था की देव के दिमाग में हमेशा सम्भोग hi रहेगा, वो वासना से भरा रहेगा, अगर वो सम्भोग नहींकरेगा तो उसका वीर्य उसे हिकमजोर क्र देगा,

अब उसके अंदर शक्ति आ गई ह तो उसके अंदर वासना और बढ़ गई ह, और वो खुद को रोक रहा ह, अगर वो ऐसे hi खुद को रोकता रहा तो उसका शरीर उसे hi कमजोर क्र देगा, इसलिए उसका वीर्य उसके अंदर से निकलना जरुरी ह, और जितना वीर्य बहार निकलेगा उतना hi नया बनेगा और उसका शरीर और तेजी से काम करेगा,

मैं उसे किसी और के साथ भी सम्भोग करने को बोल सकती थी लेकिन उसके अंदर एक दिव्यता ह, जिसे हर कोई लड़की शी नहीं सकती, और उसका वीर्य हर किसी के अंदर नहीं जाना चाहिए, जिसके अंदर उसका वीर्य जायेगा उसके कुछ अलग अपरिणाम भी हो सकता ह, इसलिए मैंने तुम सबको इस कार्य के लिए चुना ह, देव के अंदर की शक्तियों को पूरी तरह जगाना बहुत जरुरी ह, और उसके अंदर से वासना को काम करना भी बहुत जरुरी ह, अब तुम सब खुद सोच लो तुम देव से कितना प्यार करती हो, उसके लिए क्या आकर सकती हो,

साडी लड़किया घेरि सोच में दुब गई,

निहारिका- मैं तुम पैर कोई दबाव नहीं बना रही हु, तुम्हारा मन न हो तो मत करो,

कस्तूरी- मैं देव के लिए कुछ भी करुँगी, उसके लिए अपनी जान भी दे दूंगी,

अमिता- मैं अपने देव पैर सब कुछ वर दूंगी,

सुगंधा- मेरी आत्मा तक देव की ह, ये शरीर मैं उसके सामने खसुहि ख़ुशी बिछा दूंगी,

रेवती- मैं तो पहले hi उसकी हु,

रीवा- मैं अपने बही के लिए सब कुछ न्योछावर कर दूंगी माँ, उसे कुछ नहीं होगा,

निहारिका- खुश रो मेरी बच्चियों, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी,

कस्तूरी- हमे कब करना ह ये सब

निहारिका- जब भी जिसको भी मौका मिले वो देव के साथ सम्भोग करेगी और कोशिश करेगी की वो अपनी पूरी ऊर्जा का इस्तेमाल करे और अपने वीर्य को अचे से बहार निकले,

अमिता- अगर उसने अपनी पूरी ऊर्जा का इस्तेमाल किया सम्भोग करने में तो वो हमारी जान ले लेगा,

रीवा- तुम्हे कैसे पता

निहारिका- क्योकि वो पहले hi उसके साथ

रीवा- kyaaaaaaaaaaaaa

निहारिका- ये सब बात तुम लोग अकेले में पूछ लेना कोण कोण ये सब कर चुकी ह, और है जॉब hi करना मुझे जरूर बताना मैं तुम सबकी माँ होने के साथ साथ दोस्त भी हु, मैं एक माँ होकर तुमसे ये सब बात क्र रही हु, इसलिए मुझे कोई झिझक मत रखना,

निहारिका वह से उठी और अक्षरा के पास चली गई, बाकि लड़किया वही बैठी रह गई,

कमरे में एक दम सनता था, कोई भी कुछ भी नहीं बोल रहा था, सब नजरे चुरा चुरा क्र एक दूसरे को देख रही थी, जब काफी देर हो गई तो सोमिया ने शांति को भांग किया,

सोमिया- यार देखो मुझसे और नहीं छिपाया जार है, मैं देव से प्रेम करती हु, और उसके लिए कुछ भी कर सकती हु, और मैं देव से चुद चुकी हु,

सबने सोमिया को हैरत से देखा,

अमिता- और मैं भी, और मुझे यकीन ह आज अक्षरा भी वही करके आई ह, हम तीनो ने एक साथ hi ये फैसला किया था की हम देव के साथ सम्भोग कर्नेगे, हम तीनो उसे प्रेम करते हैं,

अमिता ने उन तीनो बहेनो के साथ हुई घटना और देवा क उन्हें बचाना सब कुछ बता दिया,

सोमिया- अब तुम hi बताओ हमने कुछ गलत किया क्या,

रीवा- लेकिन तुमने मुझसे सब कुछ छिपाया,

अमिता- हमे नहीं पता तहत ेरे दिल में भी देव के लिए प्रेम ह, हम तो देव को भाई नहीं मानते लेकिन तू तो सगी बहन थीं ा तुझे कैसे बताते,

रीवा- फिर भी बताना चाहिए था,

सोमिया- अब इस बात से फर्क नहीं पड़ता, अब निहारिका माँ हमसे खुद बोल रही हैं ये सब करने के लिए तो हम खुल क्र सब कर सकती हैं, लेकिन क्या हम सब एक दूसरे के साथ देव को बाटने के लिए तैयार हैं,

फिर सब शांत हो गए,

अमिता- मुझे कोई तकलीफ नहीं ह मुझे बस देव का प्यार चाहिए,

सोमिया- मुझे भी कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं देव भी प्यार करती हु और तुम सबसे भी,

रेवती- वैसे तो ये सब ह तो गलत लेकिन देव के भले के लिए कुछ भी गलत नहीं ह, मैं तैयार हु

कस्तूरी- देव के लिए मैं भी तैयार हु,

सुगंधा- देव के लिए मैं भी तैयार हु

रीवा- मैं भी, मुझे उम्मीद ह इससे हम सब का प्यार एक दूसरे के लिए भी बढ़ेगा,

अमिता- तो पहले कोण जार hi ह,

रेवती- वो जाएँगी जिन्हे मौका नहीं मिला,

सोमिया- उस हिसाब से तो सुगंधा और रीवा hi बचे हैं

सुगंधा- मैं बिन शादी के देव के साथ सम्भोग का रिश्ता नहीं बना पाऊँगी,

कस्तूरी- लेकिन शादी कैसे,

रीवा- शादी होगी, और हम सबकी होगी, जब हम देव के लिए एक दूसरे के साथ बाटने को तैयार हैं तो हमारे रिश्ते का भी कोई नाम होना चाहिए, चाहे समाज के सामने न हो, लेकिन हमारे लिए तो होना चाहिए,

रेवती- सही कहा,

रीवा- इस बारे में माँ से बात करेंगे,

साडी बहेनो ने एक दूसरे को गले से लगा लिया और ख़ुशी से झूमने लगी, रीवा खुश थी, बहुत समय बाद वो दिल से मुस्कुरा रही थी,

वही दूसरी तरफ एक औरत नंगी होकर कुटिया की तरह झुकी हुई थी और एक मर्द उसके पीछे से अपना लुंड उसकी छूट में दाल क्र धक्के लाये जार है था,

मर्द- तू सच बोल रही ह,

औरत- अह्ह्ह अह्ह्ह बिलकुल सच बोल रही हु, मैंने आपसे कभी झूट बोलै ह क्या, वो हराम जड़ी खुद अपने मुँह से बता क्र गई थी,

आदमी- मैं सबको ऐसी सजा दूंगा की इस बार पूरा खंडन रोयेगा,

औरत- मुझे उनसे बदला चाहिए, मैं बहुत समय तक तदपि हु,

आदमी- मिलेगा जरूर मिलेगा,

औरत- aahhhhhhhhhhhhhh छोड़ो मुझे मेरे राजा छोड़ो, और जोर से छोड़ो ahahhhhhhhhhhhhhh मैं आ रही हु, झाड़ रही हु, aahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh छोड़ते रहो ऐसे hi छोड़ते रहो, aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh, आज तो कमल क्र दिया, बहुत वर्षो से प्यासी थी मैं आज सकूं मिला ह, मैं तो आपकी दासी हु, aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

इनकी चुदाई लम्बी चली और औरत 3 बार झाड़ गई,

जब तक इनकी चुदाई चलती ह तब तक हम चलते हैं प्रताप गड जहा भैरव सिंघासन पैर बैठा हुआ था, और वह कड़ी प्रताप सिंह के घर की हर औरत बस भैरव को hi देख रही थी,

भैरव- कुछ पता चला क्या उस राक्षश का,

सात्विक- नहीं महाराज, मैं अपनी शक्तियों से भी उस राक्षश को नहीं देख प् रहा हु, ऐसा लगता ह जैसे इस धरती पैर उसका कोई अस्तित्व hi नहीं ह,

प्रताप सिंह- वो सच का राक्षश ह, मैंने ऐसा विनाशकारी कभी नहीं देखा, वो चलता फिरता विध्वंश ह,

भैरव- जब वो मेरे सामने आएगा तब पता चलेगा वो मेरे सामने क्या ह,

चिरंजीवी- लेकिन उसे ढूंढे कैसे,

भैरव- वो कभी तो बहार आता होगा,

प्रताप सिंह- बस तभी आता ह जब हम जीतनेय वाले होते हैं,

सात्विक- जीतनेय वाले होते हैं मतलब

प्रताप सिंह- जब भी हमारी सेना भवनपुरा को जीतनेय वाली होती ह न जाने वॉक अहा से आ जाता ह और सब तहस नहस क्र देता ह, हमेशा युद्ध के समय hi आता ह,

भैरव और सात्विक ने एक दूसरे को देखा,

सात्विक- मतलब वो उसी राजय के आस पास ह, और वो युद्ध के समय आता ह तो हमे युद्ध करना होगा,

रेणुका- भवनपुरा पैर हुम्ला करते हैं न,

भैरव- है लगता ह अब दोनों कार्य इ साथ करने होंगे, बहुत आराम कर लिया, अब समय आ चुक्का ह इस दुनिया पैर राज करने का,

सात्विक- प्रताप सिंह अपनी सेना को आदेश दो हमले की तैयारी करे,

युद्ध का बिगुल बज चुक्का था,

इधर देव राजवीर और अभेंद्र भी अपनी सेना का निरिक्षण कर रहे थे और युद्ध से बचाव के लिए गावो को खली करवा रहे थे, ताकि युद्ध में परजा को कोई नुकसान न हो,

चारो तरफ बहुत कुछ चल रहा था लेकिन इस बिच में सूरज और ज्वाला दोनों गायब थे, काम्य की सेना ने जब से हुम्ला किया था तब से वो गायब थे, किसी ने उन्हें महल में घूमते हुए भी नहीं देखा था, किसी को अब फरक भी नहीं पड़ता था वो कहा गए, लेकिन वो दोनों अलग hi योजना बनाने में लगे हुए थे, वो धीरे धीरे राज्य की परजा में कुछ अफवाह फ़ैलाने में लगे हुए थे, लोगो को उन बातो पैर यकीन नहीं था लेकिन एक बार कोई अफवाह उठ गई तो फिर वो चार तरफ आग की तरह फ़ैल जाती ह, और वही हुआ, अफवाह तो फ़ैल गई और चर्चा भी शुरू हो गई, लेकिन ये सच ह या झूट इस पैर कोई फैसला नहीं कर प् रहा था,

शाम को निहारिका अक्षरा के कमरे में बैठी हुई थी, और उसके सर पैर हाथ फिर रही थी,

निहारिका- अब कुछ आराम ह, जो औषधि दी थी उसे आराम मिला,

अक्षरा शरमाते हुए- जी माँ अब आराम ह,

निहारिका- मुझे बताइये क्या हुआ था,

अक्षरा- वो माँ मेरा पेअर मुद गया था,

निहारिका- ये कहानी तू अपनी बहेनो को सुना चुकी ह, मुझे सच बता, मुझे अपनी सहेली hi समझ

अक्षरा- माँ वो मैं वो नदी के पास

निहारिका- क्या तूने और देव ने नदी के पास सम्भोग किया, खुले आसमान के निचे, क्या तेरे पास कोई चिकनाई वाली चीज थी वह,

अक्षरा देव के साथ सम्भोग का नाम सुनकर घबरा गई, वो आँखे फाडे निहारिका को देखने लगे,

निहारिका- घबरा नहीं मैं सब जानती हु, मुझसे कुछ नहीं छिपा और मैं नाराज भी नहीं हु, मैं यही चाहती थी, लेकिन क्या देव पूरी तरह संतुष्ट हो पाया

अक्षरा ने न में गार्डन हिलाई और सर निचे क्र लिया,

निहारिका- अच्छा ये औषधि ले और आराम क्र, सुबह तक तक दम ठीक हो जाएगी,

निहारिका बहार जाने लगी तभी वह साडी लड़किया आ गई,

निहारिका- तुम सब यहाँ

अमिता- हम आपसे कुछ बात करना चाहते हैं, अक्षरा के सामने hi,

निहारिका- है बोलो

रीवा- माँ हम आपके फैसले के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारी एक शर्त ह,

निहारिका- वो क्या

सोमिया- सुगंधा और रीवा बिना शादी के अपने कौमार्य भांग नहीं करना चाहती, वो पहले देव से शादी करना चाहती हैं,

शादी का नाम सुनकर अक्षरा एक दम चौंक गई,

अक्षरा- क्या शादी वो भी देव से रीवा की,

रीवा- तू तो चुप hi रह मुझे पता ह तू क्या रंगरलिया मन क्र आई ह, तुझसे तो बाद में निपटूंगी मैं,

निहारिका- अच्छा विचार ह, तो तुम सब तैयारी करो, आज hi तुम सबकी शादी होगी,

रीवा- सबकी

निहारिका- है सबकी, तुम सब देव की पत्नी बनोगी, रेवती पुरे राजय के सामने पत्नी होगी और तुम सब भेने अकेले में,

सुगंधा- लेकिन हमारी शादी करवाएगा कोण, अगर किसी पंडित को बुलाया तो बहार सबको पता चल जायेगा,

निहारिका- नहीं चलेगा, तुम सब तैयारी करो, आज रात hi शादी होगी,



साडी लड़किया ख़ुशी से चहक उठी,
 
अपडेट-50




रात में देव महल में आया तो सिद्ध निहारिका के कमरे में गया, निहारिका वह नहीं थी, वो बहार आया तो सामने मनीषा मिल गई,

मनीषा- देव भैया आपको माँ ने महल के मंदिर में बुलाया ह,

देव- इस समय महल के मंदिर में, क्यों क्या हुआ,

मनीषा- मुझे नहीं पता, उन्होंने आदेश दिया था की आप जब वापस आये तो नाहा धोकर अचे से तैयार होकर राजा की तरह उस मंदिर में आ जाये, वो भी बिना किसी सेवक या साथी के,

देव सोच में पद गया, फिर वो कमरे में गया और नाहा धोकर मंदिर की तरफ चल दिया, ये मंदिर सिर्फ महल के राजा के लिए था, यहाँ कोई नहीं आता था, न कोई सैनिक न hi कोई सेवक,

देव तैयार होकर वह पहुंच गया, उसने जैसे hi मंदिर में पेअर रखा और सामने देखा तो स्तब्ध रह गया, उसके सामने निहारिका किसी दुल्हन की तरह साझी हुई थी, देव की नजर जब निहारिका पैर गई तो उसकी आँखे चौंधिया गई, ऐसा सूंदर रूप देख क्र कोई भी पागल हो सकता था, देव ने निहारिका को बिना कपड़ो के भी देखा ह, उसकी प्राकर्तिक सुंदरता को अचे से महसूस किया ह, लेकिन आज जो सिंगर निहारिका ने किया हुआ था ो किसी दुल्हन की तरह लग रही थी, इतनी चमक थी उसके चेहरे पैर की कोई छह क्र भी वह से नजर न हटा पाए,






देव टकटकी लगाए निहारिका को देखता hi रहा, निहारिका की नजर भी जब देव पैर पड़ी तो शर्म गई, लेकिन उनके इस प्रेम को किसी की आवाज ने भांग किया, वो थे भौमिक जी,

भौमिक जी- आओ देव बैठो यहाँ,

देव एक दम चौंक गया, क्योकि भौमिक जी एक हवन कुंड के सामने बैठे हुए थे,

देव- गुरु जी आप यहाँ, ये क्या हो रहा ह,

भौमिक जी- युद्ध की तैयारी हो रही ह बीटा, बिना सवाल किये यहाँ बैठ जाओ और जो हो रहा ह शांति से होने दो,

देव ने निहारिका को देखा वो चुप कड़ी थी, देव बिना कुछ बोले हवन कुंड के सामने बैठ गया,

भौमिक जी ने मन्त्र पढ़ने शुरू किये, देव चुप चाप भौमिक जी के बताये हुए तरीके से हवन करता रहा, कुछ देर बाद भौमिक जी ने निहारिका को इशारा किया, महारानी आइये बैठिये,

देव चौंक गया लेकिन कोई सवाल नहीं किया, कुछ देर बाद जब भौमिक जी बोले की दोनों फेरो के लिए खड़े हो जाओ, अब देव भोचका दे भौमिक जी को देखने लगा,

देव- गुरु जी ये क्या बोल रहे हो, ये ये कैसे हो सकता ह, ये आप क्या करा रहे हो,

भौमिक जी- तुम्हारी और रानी निहारिका की शादी,

देव- ये नहीं हो सकता ये मेरी माँ हैं, माँ के साथ शादी ये अधरम ह,

भौमिक जी- और जो तुम दोनों के बिच हो रहा ह वो अधरम नहीं ह क्या, तुम्हारा और इस राजय का आने वाला जीवन इस अधरम पैर hi टिका हुआ ह, अगर ये जरुरी न होता तो मैं तुमसे ये अधरम करने को कभी न कहता,

देव- लेकिन मैं अकेला उसे लड़ सकता हु,

भौमिक जी- ये तुम्हारे लिए नहीं ह, ये निहारिका के लिए ह, और तुम्हारी बहेनो के लिए ह,

देव- ऐसा क्यों आप मुझे साफ़ साफ़ बताइये,

भौमिक जी- मैं जो ककर रहा हु सोच समझ क्र hi कर रहा हु, सब कुछ नहीं बता सकता, लेकिन ये बहुत जरुरी ह, इसलिए जो हो रहा ह होने दो,

देव ने निहारिका की तरफ देखा वो शर्मा रही थी लेकिन उसके चेहरे पैर अलग hi ख़ुशी थी, देव ने उसकी ख़ुशी को समझते हुए मुँह बंद रखना hi सही समझा, और फेरो के लिए खड़ा हो गया, दोनों कैफ ेरे शुरू हो गए, फिर देव ने निहारिका की मांग में सिन्दूर बाहर दिया और गले में मंगल सूत्र पहना दिया,

भौमिक जी- अब तुम दोनों पति पत्नी बन चुके हो, तुम दोनों का जीवन का अनंत ह, अब से तुम दोनों अनंत कल के लिए जीवन साथी हो,

निहारिका देव के पेअर चुने लगी,

देव- नहीं माँ ऐसा मत करना, ये अनर्थ मत करो,

निहारिका- अब मुझे माँ मत बोल, अब मैं आपकी पत्नी हु, आज से आप hi मेरे लिए सब कुछ हैं,

देव- आपका और मेरा कोई भी रिश्ता बन जाये लेकिन आप मेरी माँ को मुझसे दूर मत करना, मैं आपको माँ मन्ना नहीं छोड़ सकता

भौमिक – कभी भूलना भी मत ये तुम्हारी माँ ह और पत्नी भी, और रानी देव आपका बेट भी ह और पति भी, आपको ये दोनों रिश्ते एक साथ लेकर चलने होंगे, आपको अपने चरित्र गिरना hi होगा,

देव और निहारिका ने भौमिक जी का आशीर्वाद लिया,

भौमिक जी- महारानी अब आप ये सिंगर काम कीजिये और बाकि लड़कियों को बुलाइये,

देव- बाकि लड़कियों को,

निहारिका- है आपकी शादी बाकि लड़कियों से भी होगी,

देव- मतलब

भौमिक जी- जो हो रहा ह होने दो, बस शांत रहो,

निहारिका ने जल्दी से अपना सिंदूर छुपाया और अपने मंगल सूत्र को धक् लिया, फिर बहार चली गई और कुछ देर बाद वापस आई तो उसके साथ साडी लड़किया थी, सबसे आगे थी अमिता जो दुल्हन बानी हुई चहकती हुई आ रही थी, उसके पीछे सोमिया, वो भी ख़ुशी से उछलती हुई आ रही थी, भौमिक जी- पहले तुम दोनों के साथ शादी होगी,

भौमिक जी ने मंत्र पढ़े और दोनों बहेनो की एक साथ देव के साथ शादी की, दोनों ख़ुशी से झूम रही थी,

निहारिका उन्हें ले गई और उसके बाद वो अक्षरा को लेकर आई, अक्षरा बड़े धीरे धीरे कदमो से चली आ रही thi,wo आते hi देव को देख क्र मुस्कुराई देव ने भी मुस्कुरा कर अक्षरा का स्वागत किया, फिर आई कस्तूरी, एक दम शांत सी, लेकिन उसे देख क्र देव उसी में खो गया, अब से पहले उसने कस्तूरी को बस एक साधारण रूप में देखा था, लेकिन आज पुरे सिंगर में वो एक अप्सरा सी लग रही थी, कस्तूरी झिझकते हुए देव को देख रही थी, लेकिन आज देव ने बड़े प्यार से मुस्कुरा कर उसक अस्वागत किया,

कस्तूरी को थोड़ी हिम्मत आई,

फिर भौमिक जी ने उनकी शादी करवा दी, निहारिका उन्हें लेकर चली गई, उसके बाद आई सुगंधा और सुगंधा को देख क्र देव उसमे खो सा गया, क्या रूप था उसका, देव बस उसे देखे जा रहा था, लेकिन जब पीछे से रीवा ने मंदिर में कदम रखा तो मंदिर की घंटिया बजने लगी, जैसे किसी देवी ने कदम रख दिया हो, क्या रूप था उसका क्या सिंगर था, क्या यौवन था, खुद देवताओ का भी मन दोल जाये, अगर निहारिका को कोई रूप में टक्कर दे सका था तो सिर्फ रीवा थी, रीवा को देख क्र देव खड़ा हो गया, और रीवा ने जब देव को देखा तो वो वही रुक गई, उसकी गार्डन झुक गई, वो छह क्र भी अपना सर नहीं उठा प् रही थी,






जिस भाई से वो नफरत करती थी, जिसका हमेषा अपमान करती थी, कब उसे प्रेम करने लगी उसे पता भी नहीं चला, आज तक वो अपने भाई से ठीक से बात तक नहीं कर पाई थी, और आज सीधे उसे शादी करने जा रही थी,

निहारिका ने रीवा का हाथ पकड़ा और अंदर ले आई, दोनों माँ बेटी एक दूसरे की बहन लग रही थी, निहारिका ने रीवा को देव के पास बैठा दिया, रीवा का शरीर कैंप रहा था, वही हाल सुगंधा का भी था, खुद देव भी उनके सामने बैचैन सात है, उसकी भी हिम्मत नहीं हो रही थी, रीवा की तरफ नजर उठाने की,

भौमिक जी ने मंत्र पढ़ने शुरू किये, जल्दी hi उनकी भी शादी हो गई, उसके बाद निहिरका बाकि लड़कियों को भी ले आई, साडी लड़किया देव के सामने कड़ी थी, सबने भौमिक जी और निहिरका के पेअर छुए, देव जब निहारिका के पेअर छू रहा था तो निहारिका हलके से पीछे हो गई, क्योकि देव अब उसका पति था तो वो अपने पति से पेअर नहीं चुआना चाहती थी,

भौमिक जी- देखो लड़कियों आज जो हमने किया ह वो धरम समाज और हमारी संस्कर्ति के विरुद्ध ह, लेकिन फिर भी हमने किया ह, और तुम लोगो के बिच जो अनैतिक सम्बन्ध बने हैं आज उसको एक नाम दिया ह, लेकिन वो बस तुम सबके लिए है, समाज के सामने तुम किसी को नहीं बता सकती, तुम सब देव के प्रेम में पद गई ये सब नियति में लिखा हुआ ह, ये क्यों हुआ इसके आगे क्या परिणाम होंगे ये मैं भी पूरी तरह नहीं जनता लेकिन जितना जनता हु उस हिसाब से ये बहुत जरुरी था, आज से तुम एक दूसरे के बन चुके हो, और हर जनम में एक दूसरे के hi रहोगे, तुम अलग होना भी चाहोगे तब भी नहीं हो पाओगे ये मेरा आशीर्वाद ह, तुम सबको हर जनम में एक दूसरे का होना hi ह,

भौमिक जी के कहने पैर सभी वापस चली गई, वह भौमिक जी देवा ुर निहारिका रह गई,

देव- गुरु जी अब तो मुझे बता दीजिये

भौमिक जी- सब बताऊंगा, लेकिन उसे पहले ये ख्याल रहे तुम आज hi इन सभी लड़कियों का कौमार्य बंग करोगे, और अपने अंदर से जितनी भी रुकी हुई वासना की ऊर्जा ह उसे बहार निकलोगे, क्योकि जब तक तुम्हारे अंदर रुकी हुई वासना बहार नहीं निकलेगी तब तक तुम्हारी ताकत असली रूप में भी नहीं आएगी, और है तुम्हारी शक्ति इन लड़कियों के अंदर जनि बहुत जरुरी ह, ये समझ लो जिस जिस के अंदर तुम्हरी शक्ति जाएगी भविष्य में वही तुम्हे शक्ति दे पायेगी,

ये बात देव और निहारिका की समझ में नहीं आई,

भौमिक जी- जाओ अब समय काम ह, ाढी रात हो चुकी ह, कल क्या होगा कोई नहीं जनता, मुझे कुछ और यज्ञ करने हैं, इसलिए मैं आगे 2 दिन उपस्थित नहीं हो पाउँगा,

इतना बोल क्र भौमिक जी वह से निःकाल गए,

देव- माँ लगता ह भौमिक जी बहुत कुछ छुपा रहे हैं, उनकी कुछ बाते समझ नहीं आई,

निहारिका- मुझे भी नहीं आई, लेकिन हमे भौमिक जी पैर भरोसा रखना होगा, और आज प्रेम की रात ह, आज सुहागरात ह, अब आपको अपनी पत्नियों के पास जाना होगा और उन्हें आज पुरे अधिकार के साथ प्रेम करना होगा, ऐसा पल जो आपके और उनके बिच के प्रेम को और बढ़ा दे,

देव- लेकिन एक रात में सबके पास कैसे जाऊंगा,

निहारिका- उसके लिए मैंने कुछ सोचा ह, कस्तूरी , अमिता, सोमिया और अक्षरा के साथ सम्भोग हो चुक्का ह तो उनसे पहले रीवा और सुगंधा के पास जाना चाहिए,

देव- लेकिन कस्तूरी के साथ शक्ति मिलने से पहले हुआ था,

निहारिका- हम्म्म्म तो ऐसा करो पहले कस्तूरी के पास जाओ, फिर रीवा या सुगंधा के पास उसके बाद अमिता सोमिया के पास अक्षरा अभी ठीक नहीं ह,

देव- और आपके पास कब औ

निहारिका- मैं तो आपकी hi हु, साडी जिंदगी आपकी रहूंगी, लेकिन अगर ये सब मिलकर भी आपको संतुष्ट न कर पाए तो मैं इंतजार करुँगी, आपकी शक्ति को मैं hi सम्हाल सकती हु, लेकिन आज आपको अपनी पूरी ऊर्जा का उपयोग करना होगा, उन्हें दर्द होगा लेकिन ये दर्द उन्हें सेना होगा,

फिर निहारिका देव को लेकर चल दी,

वही दूसरी तरफ साडी लड़किया एक साथ बैठी हुई थी,

अमिता- कुछ समय पहले तक हम सब एक दूसरे के लिए अनजान थे, फिर हम दुश्मन बने और फिर हम एक साथ आ गए देव की वजह से, फिर पता चला हम सब तो भेने हैं, लेकिन आज हमारा फिर से रिश्ता बदल गया ह, एक ऐसा रिश्ता तो समाज में सौतन का खेलता ह,

सोमिया- लेकिन हमारे बिच ऐसा रिश्ता होगा जो मिस्साल बनेगा,

अक्षरा- हम एक दूसरे की जान बनेंगी,

रेवती- मैं बहुत खुश हु आप सबकी बहन की गिनती में शामिल होकर,

कस्तूरी- मुझे देव ने माफ़ कर दिया और अपनी पत्नी ीके रूप में स्वीकार कर लिया ये hi मेरे लिए बहुत बड़ा ह, मुझे देव मिल गए, आप सब जैसी बहाने मिल गई और निहारिका माँ जैसी माँ मिल गई, और कुछ नहीं चाहिए,

रीवा- एक hi दिन के अंदर मेरे तो सरे सपने पुरे हो गए, जो बाते मैं अपने ख्याल में लेन से भी डर्टी थी वो सब आज पूरी हो गई,

सुगंधा- मैं तो अब तक यकीन नहीं क्र प् रही हु ये सब हो गया ह, मैं देव की पत्नी बन चुकी हु,

अमिता- सब यकीन होजायेगा, जब देव मोटा और एक हाथ जितना लम्बा लुंड तुम्हारे अंदर घुसेगा न फिर यकीन होगा,

अमिता की बात पैर सभी शर्मा गई,

सोमिया- शर्माओ नहीं, हमे ले रखा ह इसलिए बता रही हैं, फाड़ देगा उनका, उप्पेर वाले एक अजूबा लगा क्र भेजा ह देव जी के निचे, अक्षरा की हालत देख लो,

अक्षरा- वह मेरी गलती ह, हमने पानी के किनारे किया जहा कोई ऐसी चीज नहीं थी जिससे चिकना किया जा सके,

कस्तूरी- क्या तुम नदी किनारे गयी थी,

अक्षरा- है क्यों

कस्तूरी- मैं और देव ने पहेली बार वही किया था,

अमिता- मेरे पास इंतजाम ह, ये लो तेल इसका इस्तेमाल करना तो सुहागरात का असली मजा ले पाओगी,

अक्षरा- वो तो ठीक ह लेकिन पहले कोण जाएगी,

सोमिया- तेरी तो फटी पड़ी ह तू तो जा नहीं पायेगी आज,

अक्षरा- क्यों नहीं जा पाऊँगी, अब मैं काफी ठीक हु, और आपका तेल लेकर जाउंगी,

अक्षरा की बात पैर सब है पड़े,

रेवती- मेरे हिसाब से पहले उसे जाना चाहिए जिसके साथ अभी तक कुछ नहीं हुआ, यानि रीवा या सुगंधा,

रीवा और सुगंधा की धड़कने तेज हो गई,

रीवा- नहीं नहीं मैं पहले नहीं जाउंगी, मुझे दर लगता ह, सुगंध आजायेगी,

सुगंधा- नहीं मैं सबसे आखिर में जाउंगी, क्योकि मैं चाहती हु जब मैं उठी तो देव की बहो में राहु, इसलिए चाहे मेरी सुहागरात कल बने लेकिन मैं सबसे आखिर में जाउंगी,

अमिता- तो क्या मैं जाऊ,

रेवती- मेरे हिसाब से कस्तूरी को पहले जाना चाहिए, वो कस्तूरी hi थी जिसने देव को पहेली बार सम्भोग का असली मतलब समझाया, और देव जी कीपहली प्रेमिका, उस हिसाब से कस्तूरी का अधिकार ह देव जी पैर, क्योकि जब हम सब देव को जानते भी नहीं थे तब से कस्तूरी देव जी से प्रेम करती ह,

रीवा- सही कहा, कस्तूरी को जाना चाहिए,

सबने एक साथ है में जवाब दिया, जिसे बहार खड़ी निहारिका सुन रही थी,

निहारिका- बहुत सही सोचा ह तुमने, इसलिए तुम सब खुद कस्तूरी को उसके कमरे में लेकर जाओ तुम्हारे पति देव वही आ जायेंगे, और इन पालो को अचे से जीना,

साडी लड़किया दौड़ क्र निहारिका से लिपट गई,

सब एक साथ- आप दुनिया की सबसे अच्छी माँ हैं,

निहारिका- ज्यादा माखन न लगाओ और तैयारी करो, और है एक बात धयान से सुनो, जिसका भी पहेली बार ह वो अपने कमरे में जाकर इस तेल से अपनी योनि को अचे से चिकना कर लेना ताकि दर्द ज्यादा न हो,

निहारिका की बात पैर सभी शर्मा गई, फिर वो कस्तूरी को लेकर निकल गई,

सब कस्तूरी के साथ थी, कस्तूरी की हालत ख़राब हो रही थी तभी वह देवा ा गया, देव को देख क्र साडी पहले तो शर्मा गई, रीवा सबसे पीछे हो गई जिसे देव ने भी देख लिया था,

अमिता- आइये आइये पति देव आपकी पहेली दुल्हन तैयार ह, जरा हल्का हाथ रखना और थोड़ा जल्दी करना हम सब भी इंतजार कर रही है,

इतना बोल क्र सब बहार चली गई, कस्तूरी बिस्टेर पैर बैठी रह गई और देव उसके सामने खड़ा था, कमरे में एक दम सनता था, उस शांति को देव ने hi भांग किया,

देव- कैसी हो

देव की प्यार भरी आवाज सुनकर कस्तूरी का रोना निकल गया और वो उठ क्र देव के गले से लग गई, और रोने लगी,

देव- शांत हो जाओ कस्तूरी, शांत हो जाओ,

कस्तूरी- आपने मुझे जो सम्मान दिया ह मैं उसके लायक नहीं हु,

देव- तुम मेरी पत्नी हो, और तुम पुरे सम्मान के लायक हो, अतीत में क्या हुआ हम उसकी बात नहीं करेंगे, हम अपना नया भविष्य बनाएंगे, और उस नए भविष्य की शुरुआत आज हम अपने प्रेम से करेंगे,

देव ने कस्तूरी को बहो में लिया और कास क्र जकड लिया, कस्तूरी के मुँह से सिसकी निकल गई, अह्ह्ह्हह्हह

देव ने कस्तूरी की थोड़ी को पकड़ा और चेहरा उप्पेर किया, कस्तूरी ने गीली आँखों से देव को देखा, देव ने अपने हॉट कस्तूरी के होतो पैर रख दिए, कस्तूरी की आँखे बंद हो गई, उसका शरीर ढीला पद गया और उसके हाथ देव की गार्डन में जकड गए, अगले hi पल वो देव का साथ देने लगी, देव ने अपना हाथ कस्तूरी की गांड पैर रक्खा और कास कर पकड़ लिया, कस्तूरी ने भी अपनी कमर देव से चिपका दी, देव का खड़ा लुंड कस्तूरी की नाभि के पास महसूस हो रहा था,

कुछ देर हॉट चूमने के बाद देव कस्तूरी की चोली को डोरी खोने लगा और उसकी गार्डन चूमने लगा, कस्तूरी एक दम शांत कड़ी मदहोश हो रही थी, चोली खुलते hi कस्तूरी की नंगी चूचिया देव के सामने ा गई, जो एक दम ठोस और कड़क थी, कस्तूरी की चूचियों के चूचक एक दम तन कर खड़े थे, कस्तूरी शर्मा रही थी, ये वही कस्तूरी ह जिसने पहेली बार देव को hi चुदाई का ज्ञान दिया था, आज वो खुद शर्मा रही थी, लेकिन देव अब पहले वाला देव नहीं रहा अब वो बदल चुक्का था, उसने तुरनत कस्तूरी की चूचियों को मुँह में भर लिया और चूसने लगा,

कस्तूरी सिसकिया भरने लगी, वो देव के सर को अपनी चूचियों पैर दबाने लगी, देव का हाथ कस्तूरी की नंगी कमर पैर घूम रहा था और फिर उसने हाथ नीच ेकिया और कस्तूरी के लहंगे की डोरी खोल दी, डोरी खुलते hi लहना निचे गिर गया, और अब कस्तूरी सिर्फ एक छोटी सी कच्ची में देव के सामने कड़ी थी, देव ने तुरंत कस्तूरी को अपनी बहो में उठा लिया और उसे बिस्टेर पैर लिटा दिया, कस्तूरी शर्मा कर खुद को समेटने लगी, देव में अपने कपडे खोले और कुछ hi पालो में नंगा हो गया, देव का विशाल भयंकर लुंड हवा में खड़ा सलामी दे रहा था, कस्तूरी ने देव को नंगा देखा और जब उसकी नजर लुंड पैर गई तो उसे अहसास हुआ की ये तो पहले से भी ज्यादा बड़ा और मोटा हो चुक्का ह, कस्तूरी ने अपना मुँह धक् लिया,

देव ने कस्तूरी का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पैर रख दिया,

देव- कस्तूरी देखो न ये तुम्हारे पास आकर कितना खुश ह, तुम hi हो जिसने इसे प्यार का मतलब समझाया था, आज ये फिर से अपनी प्रेमिका के पास आया ह,

देव की बात सुनकर कस्तूरी की मुठी बंद हो गई और उसने देव के लुंड को मुठी में जकड लिया,

कस्तूरी ने धीरे से आँखे खोली और देव को देखने लगी,

कस्तूरी- आपको अब भी हमारे पल याद हैं,

देव- मैं कुछ भी भूल सकता हु लेकिन उन पालो को कभी नहीं भूल पाउँगा, तुम्हारे प्यार को कभी नहीं भूल पाउँगा,

कस्तूरी उठी और नंगी देव से लिप्त गई, दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे से रगड़ने लगे,

कस्तूरी का हाथ देव के लुंड पैर था, कस्तूरी नीच ेबैत गई और देव के लुंड को अपनी मुठी में लेकर निहारने लगी, फिर वो उस लुंड को आगे पीछे करने लगी, फिर कस्तूरी ने मुँह खोला और जीभ बहार निकल क्र लुंड को चाट लिया, वो उप्पेर से निचे तक लुंड को चाटने लगी, फिर मुँह में भर क्र चूसने लगी, कस्तूरी bah=di तलीनता से लुंड को चूस रही थी, देव कुछ देर और लुंड चुसवाने का मजा लेना चाहता था लेकिन उसक एपस समय काम था, उसने कस्तूरी को उठाया और बिस्टेर पैर लिटा दिया, और उसका आखरी कपड़ अभी कस्तूरी के शरीर से अलग कर दिया, कस्तूरी की चिकनी माखन जैसी छूट देव के सामने आ गई,

देव ने कस्तूरी को देखा कस्तूरी भी कामुक नजरो से देव को देख रही थी, देव ने अपना सर कस्तूरी की जांघो के बिच्घुसा दिया और अपने हॉट कस्तूरी की छूट पैर रख दिए, कस्तूरी की सिसकी निकल गई, देव अपनी जीभा से उसकी छूट को चाटने लगा, कस्तूरी मदहोश होकर अपनी कमर को उछलने लगी और अपनी छूट देव के मुँह पैर रगड़ने लगी,

कस्तूरी- अब और न तड़पाओ, मैं बर्दास्त नहीं क्र प् रही हु, बहुत तदपि हु तुम्हारे लिए अब आ जाओ समां जाओ मेरे अंदर, देव उठा और कस्तूरी की जांघो के बिच आ गया,

कस्तूरी- वो तेल लगा लो, मैं तुम्हारे पुरे लुंड को अपने अंदर महसूस करना चाहती हु,

देव ने तेल की शीशी उठाई और कस्तूरी की छूट पैर अचे से भर दिया, और अपने लुंड पैर भी डाला,

देव- तैयार हो न

कस्तूरी- हमेशा से,

देव ने लुंड को छूट पैर लगाया और धीरे से धकेल दिया, लुंड छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, कस्तूरी पहले देव का लुंड ले चुकी थी और इस समय काफी चिकनी भी थी इसलिए लुंड का आधे से काम हिस्सा छूट में घुस गया, लेकिन कस्तूरी की दर्द भरी चीख निकल गई,

कस्तूरी- बहुत मोटा ह, aahhhhhhhhhhhhh माआ पहले से भी मोटा हो गया ह ये

देव- तुम्हारे इंतजार में नाराज होकर फूल गया ह,

कस्तूरी दर्द में भी मुस्कुरा दी,

देव ने हलके से दबाव बनाया और आधा लुंड कस्तूरी की छूट में घुसा दिया,

कस्तूरी- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh मर गई, उउउउउउफफ्फ

देव- रुक जाऊ

कस्तूरी- नहीं नहीं रुकना नहीं, मुझे ये पूरा अंदर चाहिए,

देव ने लुंड को हल्का सा बहार खींचा और फिर अंदर धकेल दिया, लुंड और अंदर घुस गया, अब लुंड पूरी तरह से फास चुक्का था, और अंदर जाने की जगह नहीं थी,

देव- और अंदर नहीं जा पायेगा,

कस्तूरी- जायेगा जरूर जायेगा ये मुझे पूरा अंदर चाहिए,

देव ने लुंड को अंदर धकेलना बंद किया और वही हलके हलके धक्के लगाने लगा, वो बस लुंड को हल्का हलक अहिला रहा था, इससे hi कस्तूरी को पूरा मजा आ रहा था क्योकि छूट पूरी तरह से लुंड पैर कासी हुई थी, लुंड के हिलने से छूट को पूरी रगड़ मिल रही थी, कुछ देर देव ऐसे hi कस्तूरी को छोड़ता रहा और इसका असर ये हुआ की कस्तूरी झड़ने लगी,

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह देव करो करो करो छोड़ो मुझे ahhhhhhhhhhhhhh कितना मोटा ह तुम्हरा लुंड ahahhhhhhhhhh छोड़ते रहो बस छोड़ते रो, aahhhhhhhhhhhhhha aahahhhhhhhhhhhhhh,

कस्तूरी झाड़ रही थी जिस वजह से उसकी छूट बहुत पानी छोड़ रही थी और काफी खुल चुकी थी, देव ने मोके का फायदा उठा क्र लुंड को और अंदर धकेल दिया, और इस बार पूरा लुंड कस्तूरी की छूट में घुस गया, कस्तूरी दर्द से चीख उठी, उसने अपने नाख़ून देव की कमर इ गदा दिए,

देव कुछ पल के लिए शांत हुआ और कस्तूरी की चूचिया चूसने लगा, लुंड का दबाव इतना था की कस्तूरी फिर से झड़ने लगी, और अपनी कमर हिलने लगी, देव ने भी अपनी कमर हिलाई और कुछ hi देर में देव लुंड को अंडे रबहार करने लगा, कस्तूरी को तकलीफ हो रही थी, लेकिन मजा जितना आ रहा तो उसे वो शब्दों में बयां नहीं क्र सकती थी, कस्तूरी की चुदाई बहुत देर तक चली जिसमे वो 5 बार झड़ी, देव जहदना चाहता था लेकिन वो खुल क्र धक्के नहीं लगा प् रहा था, लेकिन फिर भी कस्तूरी जब पांचवी बार झड़ी तो देव ने भी अपने लुंड का पानी उसकी छूट में भर दिया, और कस्तूरी के उप्पेर hi लेट गया, कस्तूरी ने देव को कास क्र खुद में भींच लिया, दोनों काफी देर तक एक दूसरे की बहो में लेते रहे,

देव- तुम खुश हो न

कस्तूरी- आज मैं सबस ेज्यादा खुश हु, आज के बाद भगवान् से कुछ नहीं मांगूंगी,

देव- चलो तुम्हे साफ़ कर दू तुम्हे उठने में दर्द होगा,

कस्तूरी- नहीं आज नहीं आज आपके पास समय काम ह, आपको बाकि दुल्हनों के पास भी जाना ह, फिर किसी दिन हम दोनों साथ में नहाएंगे, अभी आप जाओ,

देव- बहुत प्यारी हो तुम,

कस्तूरी- लेकिन जाओगे किसके पास,

देव- वही सोच रहा हु, बड़ा अजीब लग रहा ह ये सब,

कस्तूरी- अभी आप जाओ रीवा के पास, और उसके बाद अमिता सोमिया फिर रेवती और फिर अक्षरा और आखिर में सुगंधा के पास, क्योकि वो चाहती ह की वो सुबह का सूरज आपकी बहो में hi देखे,

देव- ठीक ह,



देव उठा और अपने कपडे पहन क्र खुद को ठीक करके कस्तूरी के माथे पैर प्यार भरी चूमि देकर बहार निकल गया, वो रीवा के कमरे के सामने पहुंच गया, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अंदर जाने की, ये सबसे मुश्किल पल था देव के जीवन का, क्यों उसका सामना उसकी सगी बहन से होने वाला था वो भी बिस्टेर पैर, आज से पहले उन्होंने एक दूसरे से ठीक से बात तक नहीं की, आज वो बात कर्नेगे तो क्या सुहागरात की, कैसे वो रीवा को नंगी क्र पायेगा, कैसे वो उसके शरीर को छू पायेगा,
 
अपडेट- 51




देव वह अपनी पत्नियों के साथ सुहागरात मन रहा था, वही दूसरी तरफ सूरज और ज्वाला राजय की गलियों में घूम रहे थे, तभी उनके सामने कोई आकर खड़ा हो गया, जिसे देख क्र वो दोनों कैंप उठे, लेकिन अगले hi पल ख़ुशी से झूमने लगे, वह 4 इंसान थे जिसमे एक था सूरज और एक था ज्वाला और तीसरी थी प्रेमलता, और चौथा इंसान बहुत hi खास था, वो चारो वह से एक साथ एक सुमसान जगह पहचुहे और एक योजना बनाने लगे,

वही प्रतापगढ़ में पूरी सेना तैयार हो रही थी, आस पास के राजय भी जुड़ रहे थे, ये एक बहुत बड़ी सेना थी जिसमे सबसे आगे आने वाले योद्धा भैरव सिंह सात्विक चिरंजीवी, सभु और भानु, सभी अमर थे, जिन्हे मरने का तरीका किसी के पास नहीं था, ऐसी सेना से लड़ने के लिए इस धरती पैर कोण सामने आ सकता था,

सेना तैयार हो रही थी और भैरव रेणुका के उस कमरे में था जहा रेणुका और प्रताप सिंह अयाशी करते थे, भैरव के सामने 5 लड़किया खड़ी थी, और भैरव नंगा खड़ा था, पांचो लड़किया उसे देख क्र दर से कैंप रही थी, वही रेणुका उसी बिस्टेर पैर लेती हुई सब देख रही थी जहा से वो हमेषा नजारा देखती थी,

भैरव ने एक लड़की को पकड़ा और जबरदस्ती अपना लुंड उसके मुँह में भर दिया,






भैरव का लुंड बहुत मोटा था, भैरव एक खूबसूरत इंसान था लेकिन वो खुद को क्रूर दिखने के लिए हमेशा क्रूरता करता था, उसने दूसरी लड़की को पकड़ा और अपनी गॉड में उठा के उसकी छूट को मुँह से लगा लिया, बाकि लड़कियों को इशारा किया की आये और उसका लुंड चूसे,

लड़कियों के पास कोई रास्ता नहीं था, वो चुप चाप आई और भैरव का लुंड चूसने लगी, रेणुका बैठी हुई ये नजारा देख रही थी, उसके हाथ खुद hi उसकी छूट पैर चले गए,

कुछ देर में भैरव ने लड़की को झुकाया और लुंड एक बार में hi उसकी छूट में घुसा दिया, लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया और लड़की जोर से चीखी, उसकी चीख इतनी दर्दभरी थी की किसी की भी आत्मा तक कैंप उठे लेकिन भैरव और रेणुका के चेहरे पैर कोई शिकन नहीं थी, लड़की एक बार चीखी और शांत हो गई, बहिराव ने उसकी कमर को पकड़ा और धक्के लगाने लगा, बाकि लड़किया ये देख क्र दर से कैंप रही थी, उनकी आँखों में आंसू थे, क्योकि जिस लड़की को बहिराव छोड़ रहा था वो मर चुकी थी, और भैरव उस मरी हुई लड़की को भी चोदे जा रहा था, काफी देर छोड़ने के बाद भैरव ने उस लड़की को दूर फेंक दिया, वो नाजुक सी लड़की अब लाश बन क्र पड़ी हुई थी उसकी छूट से खून भी रहा था, भैरव ने दूसरी लड़की को पकड़ा तो वो डार्क र भागने लगी तो भैरव ने उसकी गार्डन पकड़ी और जमीन में पटक दिया, वो बेचारी भी वही मर गई,

बाकि लड़कियों को पता चल गया को मरना तो तय ह, भैरव ने तीसरी लड़की को अपने सामने लिटाया और लुंड छूट पैर लगा क्र धकेल दिया लड़की चीख क्र बेहोश हो गई, लेकिन भैरव उसे छोड़ता रहा, कुछ पालो बाद उसे होश आया लेकिन दर्द से फिर बेहोश हो गई, ये देख क्र चौथी लड़की ने पास में पड़ी तलवार उठाई और सीधे अपनी गार्डन पैर फिर ली, पांचवी उठ क्र भागने लगी तो रेणुका ने एक चाकू फेंक क्र मारा और वो वही मर गई, बहिराव ने रेणुका को देखा तो रेणुका नंगी होकर भैरव के पास चली आ रही थी,

ऐसा पहेली बार हुआ था की कोई औरत खुद बहिराव के पास आ रही हो, रेणुका ने बहिराव का हाथ पकड़ा और बिस्टेर पैर ले गई, और बिस्टेर पैर लिटा दिया, बहिराव देखता रहा, फिर रेणुका उसके उप्पेर आ गई और अपने हाथ से बहिराव का लुंड पकड़ा और अपनी छूट पैर लगाया और उस पैर बैठ गई, लुंड छूट में घुसता चला गया, भैरव हैरत से रेणुका को देखता रह गया,

भैरव- ये कैसे संभव ह, मेरे लुंड को एक बार में बड़ी बड़ी रंडिया नहीं ले सकीय, तूने कैसे ले लिया,

रेणुका- क्योकि मुझे इससे भी बड़े लुंड ने छोड़ा ह और मेरी छूट का रास्ता खोल रहा ह, इसलिए प्यार से असली चुदाई का मजा लो,

रेणुका धीरे धीरे भैरव के लुंड पैर उछलने लगी,






भैरव को पहेली बार इतना आनंद आ रहा था, रेणुका और भैरव की चुदाई काफी देर तक चली, भैरव ने अपना लावा रेणुका की छूट में भर दिया और आराम से लेट गया, इस बिच रेणुका 2 बार जहद चुकी थी, लेकिन वो और भी छोड़ना चाहती थी, भैरव के झड़ते hi उसे देव याद आ गया, कैसे वो घंटो तक रेणुका को छोड़ता था, एक साथ सबको छोड़ देता था, फिर भी नहीं झाड़ता था,

रेणुका की आँखों में नफरत और प्यार दोनों था उस समय देव के लिए,

वही देव रीवा के कमरे के सामने खड़ा था, तभी उसके कंधे पैर निहारिका ने हाथ रखा,

निहिरका- दर लग रहा ह

देव- बहुत अजीब लग रहा ह

निहारिका- अब वो आपकी पत्नी ह, ाउब अब एक पति की तरह की व्यव्हार करना,

निहारिका ने देव को ाड़नेर धकेल दिया, देव अंदर पंहुचा तो रीवा अपने बिस्टेर के कोने में सिकुड़ी हुई सी बैठी थी, किसी के आने की आहात से उसने उप्पेर सर किया तो देव को सामने पाया, उसकी नजर तुरंत निचे हो गई,






देव धीरे धीरे कदमो से रीवा की तरफ बढ़ रहा था, वो भी बिस्टेर के दूसरे कोने में जाकर बैठ गया, दोनों एक दम खामोश थे,

समय बीत रहा था, देव को और भी दुल्हनों के पास जाना था, भौमिक जी का आदेश था, वर्ण वो पूरी रात ऐसे hi बैठा रहता, वो मजबूर था उसे शुरुआत तो करनी hi थी, देव ने हिम्मत करके बोलने की कोशिश की

देव- तुम ठीक हो न, ये सब तुम्हरी मर्जी से हुआ ह न रीवा, किसी के दबाव में आकर तो तुमने ये शादी नहीं की न, अगर मैं तुम्हे पसंद नहीं हु तो बता दो, मैं कुछ नहीं करूँगा,

रीवा चुप रही वो कुछ नहीं बोली,

देव को लगा शायद वॉक हश नहीं ह इसलिए वो कुछ देर चुप बैठा रहा फिर खड़ा हो गया और दरवाजे की तरफ मुद गया, वो निहिरका से बात करना छटा थे, लेकिन तभी मीठी सी आवाज उसके कानो में पड़ी,

रीवा- रुक जाओ,

देव रुक गया और पलट क्र रीवा को देखा, वो धीरे से उठ क्र देव के पास आ रही थी, देव की धड़कन बढ़ रही थी,

दोनों एक दूसरे के सामने आ गए,

रीवा- आप कहा जा रहे हैं,

रीवा के मुँह से आप सुनकर देव को काफी अजीब सा लगा, ये पहेली बार था,

देव- वो मैं माँ के पास

रीवा- आज हमारी सुहागरात ह, तो आप माँ के पास जाओगे,

रीवा के मुँह से सुहागरात सुनकर hi देव के लुंड ने जोर का झटका मारा,

देव- नहीं वो मैं मुझे लगा,

रीवा- क्या लगा, क्या साडी उम्र मुझसे दूर रहोगे, क्या मैं इतनी बुरी हु, है मैंने बहुत बुरा किया ह आपके साथ लेकिन अब मैं वो रीवा नहीं हु,

रीवा की आँखों में आंसू थे,

देव- तुम तुम रो क्यों रही हो, मैं तुम्हे बुरा कब बता रहा हु, मुझे लगा शायद माँ ने जबरदस्ती तुम्हे शादी के लिए मजबूर किया ह,

रीवा- हम दोनों का रिश्ता ितं अजीब ह की मैं खुद उस रिश्ते को समझ नहीं प् रही हु, मेरे दिल में कब आपके लिए प्रेम उभर आया मुझे पता hi नहीं चला, ये विचार भी मेरे मन में नहीं आने चाहिए थे लेकिन मैं खुद को रोक नहीं पाई और आपकी तरफ आकर्षित होती चली गई, मैं कभी आपको अपना भाई नहीं मन पाई, हमेशा आपको खुद से दूर और लग मानती रही, कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी, और जब रिश्ता जुड़ा तो सिद्ध प्रेम का जुड़ गया, भाई के लिए जगह रही hi नहीं, मैं आपसे बहुत प्रेम करती हु,

देव- जनता हु,

रीवा चौंक गई- क्या आप कैसे जानते हैं,

देव- तुम रातो को मेरा नाम लेकर अपने प्यार का इजहार किया करती हो, मैंने भी सुना और माँ ने भी,

रीवा शर्मा क्र देव से लिपट गई,

देव- अगर शर्माती रहोगी तो पूरी रात शर्माने में hi निकलजाएगी,

रीवा ने नशीली आँखों से देव को देखा,

रीवा- ये आपका काम ह मेरी शर्म तो आप hi उतरोगे,

देव का दिल जोर जोर से धड़क रहा था लेकिन उसे करना तो था hi, उसने हिम्मत की और रीवा को बहो में भर लिया, रीवा भी देव से लिपट गई, दोनों एक दूसरे की बहो में समां जाना चाहते थे,

देव को रीवा की कठोर चूचियों का अहसास अपने साइन में हो रहा था, देव का लुंड पहले से hi कड़क हो रखा था ो और उछाले मरने लगा और रीवा को अपने लहंगे के उप्पेर से hi अपनी जांघो में उसका अहसास हो रहा था, देव का लुंड रीवा के भरी भरकम लहंगे को भी उछाल दे रहा था, रीवा का दिल भी देव के लुंड की तरह उछाल रहा था, देव ने अपने हॉट रीवा की गार्डन पैर रख दिए, रीवा का शरीर की भाटी की तरह तप रहा था, उस पैर ठन्डे हॉट लगते hi रीवा की सिसकी निकल गई, देव के हॉट भी कैंप रहे थे, लेकिन उस अजीब से अहसास में भी दोनों hi ख़ुशी में उतावले थे, रिश्ता अजीब था लेकिन दोनों की पसनद का था,

देव तो वैसे hi वासना से घिरा हुआ था जब वो अपनी सभी बहेनो को माँ को भी छोड़ चुक्का था तो रीवा को छोड़ने में उसे कोई ऐतराज नहीं था अगर कुछ नया था तो रीवा के लिए, लेकिन वो बहुत खुश थी,

देव ने रीवा को बिस्टेर पैर लिटाया और उसके कपडे खोलने लगा, रीवा देव को रोक रही थी लेकिन उसका रोकना रोकना जैसा नहीं था, वो बस अपनी शर्म की वजह से औपचाररिक्ता कर रही थी, देव ने रीवा को चोली जैसे hi खोली रीवा ने दोनों हाथ अपनों चूचियों पैर रख लिए, और अपना सर दूसरी तरफ घुमा लिया, देव मुस्कुराया और रीवा का लहंगा खोला दिया, रीवा ने अपने दोनों पेअर उप्पेर निचे क्र लिए, लेकिन उसमे भी रीवा का दूध जैसा सफ़ीद खूबसूरत सांचे में ढला हुआ शरीर की चिंकी मछली की तरह लग रहा था, देव ने रीवा की जांघो पैर अपने हॉट रख दिया, रिबवा सिसक उठी, देव चूमता हुआ रीवा की जांघो के बिच तक पहुंच गया लेकिन रीवा ने जंघे भींच राखी थी,

देव ने रीवा की आखरी कपडे में हाथ डाला और निचे खिसकने लगा तो रीवा ने उसका हाथ पकड़ लिया जिस वजह से उसके हाथ उसकी चूचियों से हैट गए, और देव ने उसका फायदा उठाया और तुरंत रीवा की चुकी को मुठी में भर लिया, रीवा का हाथ वापस चुकी पैर आया तो देव ने तुरंत हाथ आगे बढ़ाया और रीवा की कच्ची को खींच दिया, अब रीवा बिलकुल नंगी हो चुकी थी,

रीवा पैर दोहरा हुम्ला हो रहा था, रीवा को इस सब में मजा भी बहुत आ रहा था, देव ने अपना हाथ रीवा की जांघो में घुसा दिया, रीवा ने जंघे भींच राखी थी फिर भी वो देव के हाथ को नहीं रोक पाई, देव का हाथ सिद्ध रीवा की छूट पैर पहुंच गया, और दूसरे हाथ में रीवा की चुकी थी,

रीवा को मजा आ रहा था लेकिन फिर भी वो देव को रोकने की नाकाम कोशिश कर रही थी, देव ने अपने हॉट रीवा की नाभि पैर रख दिए, अब तो रीवा से बर्दास्त hi नहीं हुआ, उसकी छूट पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसके चूचक अकड़ चुके थे, उसने देव के बालो को पकड़ा और अपने उप्पेर चीच लिया और उसके होतो से अपने हॉट मिला दिए, और पागलो की तरह चूमने लगी, और देव को चूमते चूमते hi उसके कपडे खोलने लगी, देव भी उसका साथ देने लगा, और कुछ hi पालो में देव भी बिलकुल नंगा था वो रीवा के उप्पेर आ गया और उसका लुंड रीवा की जांघो में घुस गया था जो सिद्ध रीवा की छूट पैर रगड़ रहा था,

दोनों एक दूसरे को चूमे जा रहे थे, देव ने रीवा को अपने उप्पेर किया और उसके निचे आ गया, और उसे चूमने लगा, देव का लुंड रीवा की जांघो के बिच से होता हुआ उसके नितम्बो के भी बहार दिख रहा था,






फिर देव ने रीवा की चूचियों को चुमन शुरू किया वो रीवा की चूचियों को निचोड़ रहा था, रीवा की चूचिया थी hi इतनी खूबसूरत और कठोर की देव वह से हैट hi नहीं प् रहा था, उसे तो वैसे भी चूचिया चूसने का बहुत शोक था, फिर देव उसकी छूट के पास पाहकः और अपनी उंगली उसकी छूट पैर फिरै, रीवा आँहे भरने लगी, फिर देव ने अपने हॉट उसकी छूट पैर रख दिए, रीवा की छूट ताप्ती हुई भट्टी बानी हुई थी, उसकी छूट पानी बहाये जार hi थी, देव की जीभ जैसे hi रीवा की छूट में घुसी रीवा सुच बर्दास्त नहीं क्र सकीय और झाड़ गई, वो अपनी छूट उछलने लगी, अपनी कमर को पटकने लगी,

देव ने जल्दी जल्दली अपनी जीभ चलाई और जैसी hi रीवा झाड़ क्र शांत होने लगी तो देव ने तुरंत उठा और तेल उठाया और रीवा की छूट पैर बहुत सात ेल भर दिया फिर अपने लुंड पैर भी लगाया और लुंड छूट पैर लगा क्र धक्का लगा दिया, रीवा अभी तक अपने झड़ने के अहसास में थी की तभी उसकी चीख निकल गई, लुंड का टोपा छूट में घुस चुक्का था, रीवा की आँखे फैट गाइट hi, उसकी आँखे में आंसू आने लगे थे,

देव रुक गया,

देव- बहुत दर्द हो रहा ह क्या,

रीवा- आपके प्यार से ज्यादा नहीं ह, आप रुको नहीं

देव ने और दबाव बनाया और लुंड और अंडर घुस गया, रीवा ने तकिया उठाया और अपने मुँह पैर रख लिया,

रीवा- आप घुसते रहो, रुकना नहीं,

देव ने हल्का हल्का लुंड हिलाया और धीरे धीरे अंदर घुसता रहा, और रीवा अपन ामुह दबाये बस अपने शरीर को अकड़ा रही थी, और देव ये देख क्र हैरत में आ गया की उसक आधा लुंड रीवा की छूट में घुस गया था, पहेली बार में hi देव का आधा लुंड रीवा की छूट में समां चुक्का था, और रीवा उसे बर्दास्त क्र गई थी,

रीवा- घुस गया क्या पूरा

देव- जितना घुसा ह उतना काफी ह,

रीवा- नहीं पूरा घुसा दो

देव- जब अंदर रास्ता बनेगा तो खुद घुस जायेगा,

देव ने रीवा के मुँह से तकिया हटाया तो रीवा की आँखे लाल थी आंसू बह रहे थे, चेहरे पैर मुस्कान थी,

देव- बहुत हिम्मत ह तुम्हारे अंदर

रीवा- बहन किसकी हु

बहन सुनकर देव के लुंड ने एक जोर दर झटका मारा, रीवा चिहुँक उठी, उसे भी महसूस हुआ की बहन सुनकर देवा ुर रोमांचित हो गया ह,

देव ने हलके हलके कमर चलाई और लुंड को हिलने लगा, रीवा को तकलीफ हो रही थी, लेकिन वो देव का साथ दे रही थी, रीवा की छूट से खून लिकल रहा था जो छूट को और चिकना कर रहा था, कुछ समय बाद देव का लुंड अंदर बहार होने लगा था, रीवा की छूट पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, रीवा को भी मजा आने लगा था, रीवा भी अपनी कमर हिलने लगी थी, देव अचंभित था रीवा बिना किसी चीख क्र उसका लुंड झेल जार hi थी, शायद रीवा बानी hi देव के लिए थी, देव को भी बहुत सकूं मिल रहा था अपनी बहन की छूट में लुंड घुसा कर,

काफी देर तक ऐसे hi दोनों की चुदाई चली और फिर रीवा झड़ने लगी और वो अपनी कमर को उछलने लगी, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhh छोड़िये मुझे और जोर से छोड़िये ahhhhhhhhhhhhhhhh छोड़िये अपनी बहन को ahhhhhhhhhhhhhhh छोड़िये

देव को भी जोश आ गया और उसने धक्के थोड़े से तेज किये और इस सब में देव का पूरा लुंड कब रीवा की छूट में समां गया पता hi नहीं चला, रीवा को दर्द हो रहा था लेकिन चरमसुख की खुमारी ऐसी थी की वो दर्द को हस्ते हस्ते झेल गई, देव भी आधा लुंड बहार करता और फिर रीवा की छूट में घुसा देता, हर धक्के पैर रीवा को ऐसा लगता जैसे लुंड बहार आते हुए उसकी छूट को भी बहार खींच लाएगा,

देव को बहुत मजा आ रहा था, और उस मजे में वो खुद से काबू खो बैठ और धक्के तेज कर दिए, रीवा ने देव को कास कर पकड़ लिया, वो देव की राफ्तेर को काम करना चाहती थी लेकिन देव काबू खो बैठा था, वो धक्के लगता रहा और एक जोर दर हुंकार के साथ झड़ने लगा, झड़ते जाहदते उसकी राफ्तेर और तेज हो गई, और जैसे hi देव का लावा रीवा की छूट में गिरा और उस ठन्डे अहसास से रीवा भी झड़ने लगी और उसका दर्द कहा गायब हो गया उसे पता hi नहीं चला, वो भी निचे से अपनी कमर उछलने लगी, और दोनों बहन भाई या पति पत्नी एक साथ झड़ने लगे, और एक दूसरे के होतो को चूमने लगे,

रीवा के लिए तो ये चुदाई ये रात सबसे भेतरीन थी, वो मदहोश होकर देव की बहो में समां गई, देव के लिए भी ये बहुत hi जबरदस्त अहसास था, ये अहसास सिर्फ निहारिका hi दे पाई थी,

कुछ देर दोनों लेते रहे, फिर देव ने उठने की कोशिश की और उसका लुंड पुक की आवाज के साथ बहार आ गया, जिससे रीवा के मुँह से अह्ह्ह्हह्हह निकल गई, उसकी छूट से खून और वीर्य मिल क्र बहार आने लगा, रीवा नेउठने चाहा लेकिन वो अपनी कमर भी नहीं हिला प् रही थी,

देव- तुम्हे आराम की जरुरत ह, अभी हिलो नहीं,

रीवा- आप चिंता न करो, माँ ने दवाई दी हुई थी, शायद उन्हें पता था ऐसा होगा,

देव मुस्कुराया और मन में सोचा- उन्हें hi तो सबसे ज्यादा पता ह,

रीवा- आप जैसए मैं सम्हाल लुंगी,

देव वह से निकल क्र बहार आया और पहले अपने कमरे जाकर एक बार नेहरा और खुद को हल्का किया, फिर बिस्टेर पैर लेट गया, दोनों बार झड़ने के बाद भी देव को कोई थकावट नहीं थी, बल्कि उसका शरीर हल्का महसूस क्र रहा था, वो उठने लगा तभी निहारिका कमरे में आ गई, उसके हाथ में भोजन था, माँ जानती ह औलाद को कब क्या चाहिए, देव को जोर की भूक लगी थी, निहारिका ने खुद अपने हाथ से देव को खाना खिलाया,

देव वह से अमिता के कमरे में गया तो देखा अमिता पहले से hi अपने बिस्टेर पैर नंगी होकर लेती थी, देव मुस्कुरा दिया,






देव- तुम तो पहले से तैयार हो,

अमिता- आपका समय बचा रही हु, तेल लगा क्र तैयार हु, सिद्ध आकर सवारी कर लो, मैंजनती हु समय काम ह और गिनती लाबी ह,

देव ने अपने कपडे उतर दिए और बिस्टेर पैर चढ़ गया, अपने अपने घुटो पैर आकर देव के लुंड को मुँह में भर क्र चूसने लगी, वो कभी लुंड को चुस्ती कभी उसके टैटू से खेलती, उन्हें मुँह इ लेकर चूमती, काफी देर लुंड चूसने के बाद अमिता ने अपनी गांड उप्पेर करके घोड़ी की तरह अपने घुटनो पैर आ गई,

देव- तुम्हे दर्द होगा,

अमिता- आप मेरी छूट को पहले hi खोल चुके हो, तो सोचा कुछ नया करू,

देव ने लुंड पैर तेल लगाया और लुंड छूट में टिका कर जोर दर धक्का मारा और आधा लुंड छूट में घुस गया, अमिता मुँह के बल गिर पड़ी, लेकिन उसने अपनी गांड निचे नहीं की, देव ने लुंड बहार खींचा और फिर से धक्का मारा और लुंड और अंदर घुस गया,






अमिता पूरा साथ दे रही थी, देव हलके हलके धक्के लगाने लगा, कुछी देर में लुंड पूरा छूट में घुसा हुआ था और देव पुरे जोश में अमिता को छोड़ रहा था, काफी लम्बे समय तक दोनों की चुदाई चली, जब तक देव झाड़ा अमिता 5 बार झाड़ चुकी थी,

देव अमिता को लिटा कर सोमिया के कमरे में गया वो भी अमिता की तरह नंगी hi टंगे फैलाये लेती अपनी छूट को रगड़ रही थी, देव ने जाते hi कपडे उतरे और सोमिया पैर चढ़ गया, सोमिया की चुदाई और भी लम्बी चली, देव ने सोमिया को अपने उप्पेर बिठा क्र लुंड की सवारी करवाई, और अपना लावा सोमिया की छूट में भर क्र बहार निकल गया,

ये भी अजूबा hi था की देव 4 लड़कियों को छोड़ चुक्का था, वो जिंटा छोड़ रहा था उसका लुंड ूटन यही खूंखार होता जा रहा था, 4 बार अपने लुंड का पानी निकलने के बाद भी देव पैर कोई फरक नहीं था,

फिर देव रेवती के कमरे में गया, रेवती पारदर्शी कपडे में देव का इंतजार कर रही थी, सबेरा होने में ज्यादा समय नहीं बचा था देव को कस्तूरी के पास भी जाना था,

देव ने रेवती को बहो में बहरा और दीवार से चिपका लिया, और उसकी छूट को अपनी मुठी में लेकर रगड़ने लगा, रेवती तो पहले से hi गीली हो राखी थी, देव ने खड़े खड़े अपना लुंड रेवती की छूट में लगाया और घुसा दिया, रेवती ने अपनी टंगे उठा ली, जिन्हे देव ने अपने हाथो में रोक लिया, और लुंड पूरा रेवती की छूट में घुसा दिया, रेवती को देव के लुंड का अनुभव था वो झेल गई थी, देव a;ag a;ag आसन में रेवती कोछोड रहा tha,kyoki देव 4 बार झाड़ चुक्का था तो उसे झड़ने इ समय लगने वाला था,

इधर देव अपनी पत्नियों की चुदाई में लगा रहा था वही सूरज ज्वाला प्रेमलता और एक अनजान इंसान राजय को इकठा करने में लगे हुए थे, सब चुप चाप हो रहा था, वही भैरव रेणुका की चुदाई करके एक नींद लेकर उठ चुक्का था और चिरंजीवी के साथ पूरी सेना लेकर भवन पूरा की तरफ निकलने की तैयारी कर रहा था, एक विशाल सेना भवन पूरा के विनाश की तैयारी में थी, वही भौमिक जी यज्ञ में बैठे हुए थे,

देव रेवती को छोड़ क्र अपना वीर्य उसकी छूट में भर क्र बहार आ गया और अक्षरा के कमरे में चला गया, अक्षरा तो वैसे hi दिन की चुदाई से थकी हुई थी उसकी छूट पहले से hi सूजी हुई थी, लेकिन वो फिर भी उतावली थी छोड़ने के लिए सुहागरात मानाने के लिए, देव ने अक्षरा को अपनी गॉड में बैठा लिया,

देव- तुम अब भी तैयार हो,

अक्षरा- आपके लिए तो मैं हमेषा तैयार हु, और हमारी शादी अभी हुई ह शादी के बाद तो सुहागरात होनी ह ह, सुबह तो प्रेमिका और प्रेमी का मिलान था, अब पति पत्नी का मिलान होगा, देव मुस्कुराया और उसे हॉट चूमने लगा, फिर अक्षर और खुद के कपडे उतरे और अक्षरा की छूट पैर बहुत सा तेल भरा ताकि अक्षरा को तकलीफ न हो, लेकिन छूट सूजी हुई थी दर्द तो होना hi था, लुंड छूट में घुसते hi अक्षरा चीख उठी, लेकिन उसने देव को रोका नहीं, देव भी बड़े प्यार से अक्षरा को छोड़ता रहा, ये चुदाई बहुत hi लम्बी चली , अक्षरा 4 बार झाड़ गई, वो थक कर चूर हो गई, देव ने अपना रास उसकी छूट में भरा और वह से निकल क्र अपने कमरे में पंहुचा, अब सिर्फ कस्तूरी बची थी, सबेरा होने में समय था, देव उसे पहले निहारिका के कमरे में चला गया,

निहारिका अपने बिस्टेर पैर बैठी हुई थी, वो अभी तक जग रही थी, देव को देख क्र उसके चेहरे पैर मुस्कान आ गई,

देव- आप अब तक जग रही हो,

निहारिका- आप जग रहे हैं तो मैं कैसे सो सकती हु, और आज हमारी शादी हुई ह, आज से आपके सोये बिना मैं कैसे सो सकती हु,

देव को अहसास हुआ की आह उसकी माँ के साथ भी तो सुहागरात ह, चाहे पहले कितनी बार सम्भोग हो चुक्का हो लेकिन शादी की रात तो खास hi होती ह, लेकिन उसकी माँ ने एक बार भी उसे कुछ नहीं कहा, अपनी बेटियों के लिए वो अपनी इच्छाओ का त्याग क्र रही ह,

देव- आज आपकी भी सुहागरात ह न

निहारिका- उसे क्या फरक पड़ता ह, मेरी बेटियों का ख्याल रखिये आप

देव- मेरे लिए तो आज से आप सब एक सामान hi हो गई हो, सब मेरी पत्नियों हो तो सबका ख्याल तो रखना मेरा कर्त्तव्य ह,

निहारिका- पहले उनके साथ अपनी सुहाग रात पूरी क्र लीजिये,

देव- बस सुगंधा बची ह, और वो चाहती ह की मैं सबसे आखिर में उसके पास औ, वो मेरे साथ सुहागरात के बाद सोना चाहती ह,

निहारिका- तो आप क्या चाहते हैं,

देव- जो सही ह वही चाहता हु, आज के दिन मुझ पैर आपका भी अधिकार ह, और सुहागरात तो हम दोनों की भी होनी ह,

निहारिका मुस्कुरा दी,

निहारिका- हमारे बिच तो काफी बार सम्भोग हो चुक्का ह, फिर क्या बचा ह सुहागरात के लिए,



देव- फिर भी आज की रात सुनी सुनी तो नहीं जनि चाहिए,
 
अपडेट-52






प्रताप गड की सेना भवनपुरा के नजदीक पहुंच चुकी थी,

चरणजीवी सात्विक से- गुरु जी इस बार हम ये युद्ध जीतेंगे न,

सात्विक- जरूर जीतेंगे,

संभु- अगर इस बार भी वो राक्षश आ गया तो,

भैरव- मुझे उसी का इंतजार ह,

चिरंजीवी- गुरु जी आप सबका अतीत देख सकते हो, फिर इस राक्षश का अतीत क्यों नहीं देख प् रहे,

सात्विक- मैं भी नहीं जनता, मैं बहुत कोशिश की उसके बारे में जानने की लेकिन मैं उसके बारे में कुछ नहीं जान पाया हु,

संभु- आप उस देव के बारे में hi पता लगाइये कुछ

सात्विक- ये भी अचम्भे की बात ह की जिस दिन वो उस गुफा में गिरा था तब से उसके बारे में भी कुछ जानकारी नहीं मिलती, मैं छह क्र भी उसके बारे में कुछ नहीं जान प् रहा हु,

चिरंजीवी- शायद उसकी शक्तियों की वजह से,

सात्विक- नहीं शक्तिया तो और लोगो के पास भी ह लेकिन मैं उनके बारे में जानकरी हासिल कर सकता हु लेकिन देव और निहारिका के बारे में कुछ नहीं जान प् रहा हु,

कुछ तो ह जो मुझे उनके बारे में जानने से रोक रहा ह,

भैरव- आज उसका अंत हो जायेगा फिर कुछ जानने की जरुरत नहीं होगी,

संभु- लेकिन वो अमर ह उसे कैसे मरेंगे आप,

भैरव- मैंने बताया न मेरे सिवा कोई और अमर नहीं ह, सबकी मृत्यु हो सकती ह, लेकिन एक खास तरीके से,

सात्विक- कुछ हो रहा ह, कुछ बदल रहा ह,

भैरव- क्या बदल रहा ह,

सात्विक- मैं नहीं जनता लेकिन मुझे अहसास हो रहा ह जैसे संसार में कुछ बदलाव हो रहे हैं, कोई अपनी दिव्या शक्तियों का उपयोग क्र रहा ह, लेकिन कैसे ये मुझे पता नहीं चल प् रहा ह,

भैरव- बदलाव अब होगा जब वो देव मरेगा, उसकी शक्ति को मैं हासिल करूँगा,

चिरंजीवी- क्या ऐसे किसी दूसरे की शक्ति हासिल की जा सकती ह,

भैरव- ये तुम्हारा सोचने का विषय नहीं ह,

भैरव ने चिरंजीवी की बात वही काट दी, लेकिन चिरंजीवी के दिमाग में ये बात बैठ गई,

वही दूसरी तरफ देव और निहारिका एक दूसरे की बहो में एक दूसरे के होतो का रास पैन कर रहे थे,

देव- माँ आप इस संसार की सबसे खूबसूरत औरत हैं, मैं आपको प् कर धन्य हो गया,

निहारिका- मुझे माँ मत बोलो, मैं आपकी पति हु,

देव- आप मेरी माँ हो और सबसे पहले माँ hi रहोगी, हमारी शादी भले हो जाये लेकिन हमारा रिश्ता वही रहेगा, इसलिए आप भी मुझे बीटा hi बोलै कीजिये, मुझे आपके मुँह से बीटा सुन्ना hi अच्छा लगता ह,

निहारिका ने देव को कास कर गले लगा लिया,

निहारिका- फिर आज मैं आपने बेटे को एक उपहार दूंगी,

देव- उपहार कैसा उपहार,

निहारिका- आज हमारी सुहागरात ह, और एक पत्नी का कर्त्तव्य ह अपने पति को उपहार देने का,

देव- लेकिन उपहार तो पति देता ह न

निहारिका- लेकिन तुम मेरे पति हो उसे पहले बेटे हो, इसलिए आज उपहार मैं दूंगी,

निहारिका देव के कपडे खोलने लगी, और देव के नंगे शरीर को चूमने लगी, देव जो अब तक 6 लड़कियों को छोड़ चुक्का था, निहारिका के चुनते hi उत्तेजित होने लगा, निहारिका का बहो में होना hi किसी मुर्दे में भी जान दाल सकता था, ये तो खुद निहिरका देव को चुम रही थी, देव का लुंड तुरनत hi खड़ा हो चुक्का था,

देव ने निहारिका की चोली में हाथ डाला और उसकी चूचियों को मसल दिया, निहारिका सिसक उठी, देव का दूसरा हाथ निहारिका की उभरी हुई गांड पैर पंहुचा और उसने गांड को कास क्र अपनी मुट्ठी में भींच लिया, देव की उंगलिया निहिरका की गांड की दरार में घुसी जा रही थी, निहारिका ने देव के कपडे उतरने की जगह फाड़ दिए, देव ने भी वही किया और निहारिका की चोली पकड़ी और फाड़ दी, निहारिका की चूचिया उछाल क्र देव के सामने आ गई, देव ने दोनों चूचियों को मुठी में भरा और अपने हॉट उसके चूचक पैर लगा दिया,

निहारिका के चूचक कड़क हो रखे थे, देव का नंगा लुंड निहारिका के पेट पैर रगड़ रहा था, लुंड की गर्माहट से निहारिका मदहोश हो रही थी, उसने लुंड को अपनी मुठी में भर लिया और जोश में आकर उसे मरोड़ने लगी, वो कभी लुंड को अपने पेट पैर रगड़ती तो कभी दबा क्र निचे छूट के पास ले जाने की कोशिश करती,

फिर देव के अपना हाथ निहारिका के घाघरे में डाला और नाडा तोड़ दिया, घाघरा निचे गिर गया, निहारिका ने निचे कुछ नहीं पहना था, वो भी अब एक दम नंगी देव की बहो में थी, देव ने निहारिका की गांड को कास का रपकडा और अपनी बहो में उठा लिया, निहारिका भी देव की कमर में पेअर दाल क्र उसे चिपक गया, दोनों एक दूसरे को चूमने लगे,

फिर निहारिका निचे उतरी और देव के सामने बैठ गई, और उसके लुंड को पकड़ क्र हिलने लगी,






देव निहारिका को hi देखे जा रहा था, काम देवी खुद देव की काम वासना को शांत करने आई थी, निहारिका ने जीभ लिकली और लुंड को चाटने लगी, फिर वो लुंड को मुँह में भर क्र चूसने लगी, जितना मजा निहारिका के साथ आता था उतना मजा कभी किसी के साथ नहीं आया देव को, निहारिका लुंड को पूरा अंदर तक ली की कोशिश कर रही थी, ऐसा करनी की हिम्मत किसी में नहीं थी, देव का लुंड जोश में उछाले मार रहा था, देव ने निहारिका का सर पकड़ लिया और खुद hi लुंड को अंदर घुसाने लगा, देव के अंदर की वासना पूरी तरह जाग्रित हो चुकी थी, उसका खुद पैर से काबू हटने लगा था जिस वजह से वो निहारिका के मुँह को छूट की तरह छोड़ने लगा, अपना लुंड उसके मुँह में अंदर बहार करने लगा,

निहारिका उसे रोक नहीं रही थी, उसे तकलीफ तो हो रही थी, लेकिन उसकी बर्दास्त करने की छमता बहुत बढ़ चुकी थी, नारिका उसके अंडकोषों को शेला रही थी,






कुछ देर मुँह छोड़ने के बाद देव ने निहारिका को गॉड में उठाया और सिद्ध उसकी छूट को अपने मुँह के समाने कर लिया, और अपनी जीभ उसकी छूट में घुसा दी,

निहिरका- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बीटा ये सब कहा से सिख लेता ह तू,

देव पुरे जोश में छूट को चूस रहा था, कभी अपने दांतो से कुरेद रहा था, निहारिका भी देव का सर पकड़ क्र अपनी छूट पैर दबाये जा रही थी, काफी देर चूसै के बाद देव का लुंड बगावत करने लगा, देव ने निहारिका को बिस्टेर पैर लिटाया

निहारिका- नहीं बिस्टेर पैर नहीं बिस्टेर पैर तुम्हारे उपहार के लिए जायेंगे, तब तक पूरा प्यार ऐसे hi करो, वैसे मेरी बहुत इच्छा थी खुले आसमान के निचे अपनी सुहागरात मानाने की लेकिन ये संभव नहीं ह,

देव- ऐसे आपकी दर्द होगा माँ

निहारिका- आज तुम खुल क्र मेरी चुदाई करो, अपनी पूरी ताकत के साथ, अपने अंदर की साडी गर्मी साडी वासना निकल दो, और उसे मेरे अंदर भर दो, आज ऐसे चुदाई करो जिसे मैं जीवन भर याद राखु,

देव ने निहारिका को दीवार से लगया और उसकी गांड को बहार की तरफ निकला और अपना लुंड छूट पैर लगाया और एक hi झटके में अंदर घुसा दिया, लुंड छूट को चीरता हुआ आधे से ज्यादा अंदर घुस गया, निहारिका दीवार से चिपक गई उसकी चूचिया दीवार से रगड़ने लगी, देव ने लुंड बहार खींचा कर फिर जोर दर धक्का लगाया और पूरा लुंड छूट में घुसा दिया, इस धरती पैर सिर्फ निहारिका hi थी जो देव के इतने बड़े लुंड को एक बार में hi पूरा अंदर ले सकती थी, निहारिका की चीख सी निकल गई,






देव की जंघे निहिरका की जांघो और गांड से चिपक गई, एक ठंडा ठंडा अहसास देव को हुआ, देव ने निहारिका hi गांड पैर हाथ फिराया और एक थपड उसकी गांड पैर मारा,

देव- आपके नितम्ब कितने खूबसूरत हैं,

निहारिका मुस्कुराई

निहारिका- इन पैर तुम्हारा की अधिकार ह, मसल दो इन्हे,

देव ने निहारिका की कमर को पकड़ा और धक्के लगाने लगा, निहारिएक की छूट बहुत गीली हुई पड़ी थी, और वो देव के लुंड को बहुत बार ले चुकी थी, जिस वजह से उसे किसी तेल की जरुआत नहीं थी,






वो बड़े आराम से देव के लुंड को झेल जा रही थी, देव शुरू में तो हलके धक्के लगा रहा था लेकिन कुछ hi देर में उसके धक्को की राफ्तेर बढ़ गई, हर धक्के पैर जब देव का शरीर निहारिका की गांड से टकराता तो थप थप की आवाज गुजने लगती, निहारिका का इतना बड़ा कर्मा भी चुदाई की मादक आवाजी से गूंज उठा था, कमरे में अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhh थप थप की आवाजे गूंज रही थी,

देव- माँ कोई परेशानी तो नहीं हो रही आपको,

निहारिका- नहीं बीटा तू छोड़ पूरी ताकत से छोड़, आज मेरे और अपने अंदर की पूरी गर्मी निकल दे,

देव ने निहारिका को सीधे किया और उसकी एक तंग उठा के लुंड को छूट में घुसा दिया और धक्के लगाने लगा इस तरह से धक्के की राफ्तेर थोड़ी धीमी थी, लेकिन मजा बहुत आ रहा था, इस तरह से लुंड छूट में पूरी तरह फास कर जा रहा था,






कुछ देर ऐसे hi छोड़ने के बाद देव ने निहारिका को गॉड में उठाया और लुंड निचे से छूट में दाल क्र निहारिका को अपने हाथो पैर hi उछलने लगा,





इससे लुंड पूरा बच्चे दानी तक निहारिका की छूट में जार है था,

निहारिका- aahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh देव तुम एक सम्पूर्ण मर्द हो, ऐसा मर्द जो किसी भी औरत की पहेली इच्छा होता ह, मैं जनम जनम तक तुम्हारी रहना चाहती हु, जन्मो जन्मो तक ऐसे hi तुम्हरे इस लुंड पैर उछलना चाहती हु,

देव- मैं भी जन्मो जन्मो तक आपका hi होना छटा हु माँ,

दोनों की बातो से निहारिका उत्तेजित हो गई और देव की बहो में hi झड़ने लगी, और सिसकिया भरने लगी, और अपनी कमर को तेजी से चलने लगी,

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhhh aahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhh ahahhhhhhhhhhhhhhhhha, छोड़ो छोड़ो छोड़ो, और जोर से छोड़ो, छोड़ो मुझे अपनी माँ को छोड़ो अपनी बीवी को छोड़ो, ahhhhhhhhhhhhhhhh बस छोड़ते रो,

निहारिका जब झाड़ क्र शांत हुई तो उसने देव को रोका,

निहारिका- अब बिस्टेर पैर चलते हैं, अब आपके उपहार का समय ह,

देव- लेकिन मेरा अभी नहीं हुआ माँ,

निहारिका- पहले उपहार मिलेगा फिर अपने आप हो जायेगा,

देव की समझ में कुछ नहीं आया, देव बिस्टेर पैर चला गया, निहारिका नंगी hi दूसरी तरफ गई और गांड हिलती हुई वापस आ गई, उसने देव के लुंड को पानी से धोया क्योकि वो निहारिका के छूट के रास में सना हुआ था, और छूट का रास लुंड पैर सूखने लगा था, फिर उसने तेल लिया और देव के लुंड पैर लगा दिया,

देव- अब तेल की क्या जरुरत ह,

निहारिका कुछ नहीं बोली और बिस्टेर पैर कुटिया की तरह बन क्र अपने घुटनो पैर झुक गई, उसने अपनी गांड को बहार निकल लिया,

निहारिका- अब ये तेल मेरी गुदा पैर दाल दे,

देव- माँ लेकिन

निहारिका- ये hi उपहार ह तुम्हारा, पत्नी का कर्त्तव्य ह अपने पति को अपना कौमार्य देना, लेकिन मैं ऐसा नहीं क्र सकीय, लेकिन हर औरत के पास दूसरा रास्ता भी होता ह, और कोई भी औरत यहाँ किसी को हाथ भी नहीं लगाने देती, लेकिन अपने सबसे प्रिय इंसान को इस उपहार को देती ह, और आज मैं ये तुम्हे दूंगी, इसलिए देर न करो, और मेरे इस दरवाजे को तोड़ क्र मेरा कौमार्य भांग करो, और मुझे पूरी तरह अपना बना लो,

देव- लेकिन आपको दर्द होगा,

निहारिका- तुम भूल रहे हो, मेरे पास भी शक्तिया हैं, मैं hi हु जो इस फौलादी हथियार को झेल सकती हु,

देव निहारिका के दर्द की वजह से झिझक रहा था नहीं तो वो निहारिका की गांड को देख क्र उत्तेजित हो रहा था, देव ने तेल निहारिका की गांड में भरा और अपना लुंड गांड में लगा क्र दबाव बनाया, लुंड गांड को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, निहारिका की दर्द भरी चीख निकल गई,






देव रुक गया,

निहारिका- रुकना नहीं घुसा दो अंदर मैं झेल लुंगी,

देव ने फिर दबाव बनाया और लोड आदर घुसता चला गया, निहारिका ने अपना मुँह बिस्टेर में दबा लिया, आधा लुंड गांड में घुस गया, गांड का चला लुंड पैर पूरी तरह कास गया था,

देव को भी बहुत मजा आ रहा था, देव ने लुंड बहार खींचा तो गांड भी उसके साथ खींची चली आई, लुंड गांड में फास सा गया था,

निहारिका- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह रुक जाओ, कुछ पल ऐसे hi रहो,

कुछ देर में निहारिका का दर्द कुछ काम हुआ,

निहारिका- अब करो

देव ने हलके हलके कमर को हिलाया, तेल की वजह से लुंड और अंदर घुसा जा रहा था, निहारिका ने अपने दोनों नितम्ब पकडे और बहार को फ़ैलाने लगी, जिससे लुंड रास्ता मिल जाये, कुछ देर में जब निहारिका को रहत हुई तो गांड क अछेद खुलने लगा, और लुंड अंदर बहार होने लगा, देव को बहुत मजा आ रहा था, कुछ hi देर में निहारिका को भी मजा आने लगा, देव ने एक हाथ निचे लेजाकर निहारिका की छूट पैर रख दिया, और उसमे उंगली दाल कर रगड़ने लगा, निहारिका का मजा दुगना हो गया, देव को भी पूरा मजा आ रहा था, वो खुद को रोक नहीं रहा था, वैसे भी वोट क लम्बी चुदाई कर चुक्का था, उसने थोड़ी राफ्तेर बधाई, इसी बिच निहारिका झड़ने लगी, देव को लगा वो भी झाड़ जायेगा उसने लुंड गांड से निकला और एक hi बार में पूरा निहारिका की छूट में घुसा दिया, और पूरी राफ्तेर से धक्के लगाने लगा, देव के धक्के निहारिका सेह नहीं प् रही थी, वो बिस्टेर पैर गिर पड़ी, देव लगातार छोड़ता रहा, निहारिका झाड़ क्र फिर से झड़ने लगी, और देव ने भी अपने लुंड का लावा निहारिका की छूट में भर दिया,






और उसके उप्पेर hi लेट गया,

एक धमाकेदार चुदाई के बाद दोनों शांत हो गए, और काफी देर ऐसी hi पड़े रहे,

निहारिका- थक गए क्या,

देव- नहीं माँ, थका नहीं हु, बस ऐसा आनंद आज से पहले कभी नहीं मिला, शरीर बहुत हल्का हल्का लग रहा ह, एक सकूं सा मिल रहा ह,

निहारिका- सुबह होने वाली ह, सुगंधा इंतजार कर रही होगी,

देव- जी अब उसी के पास जाऊंगा, लेकिन आपको छोड़ क्र जाने का मन नहीं क्र रहा,

निहारिका- मैं तो आपकी hi हु अब, साडी जिंदगी सिर्फ आपकी,

देव उठा और निहारिका को चुम क्र उठ गया, निहारिका भी उठने लगी लेकिन उसकी गांड में भयंकर दर्द हुआ, ahhhhhhhhhhhhh

देव- क्या हुआ माँ

निहारिका मुस्कुराई- कुछ नहीं आपका दिया हुआ प्यार ह, ये दर्द hi तो सुहागरात की पहचान होती ह, आप जाओ मैं ठीक हु, मेरा दर्द जल्दी hi ठीक हो जाता ह, आप चिंता मत कीजिये,

देव ने खुद को साफ़ किया और कपडे पहन क्र सुगंधा के कमरे में चला गया, सुगंधा जो पूरी रात से देव का इंतजार कर रही थी, उसकी आँखों में नींद थी शरीर थका हुआ था, लेकिन उसने सोने की कोशिश भी नहीं किट hi, वो बस देव के आने का इनतजार कर रही थी, जैसी hi देव ने कमरे में कदम रखा वो ख़ुशी से गड गड हो गई,

सुगंधा- आ गए आप,

देव- तुमने hi तो समय दिया था, मैंने देर तो नहीं की,

सुगंधा- आप जब भी आये वही समय में लिए खास होता ह, आपको कभी देर नहीं हो सकती,

देव- सबेरा होने वाला ह,

सुगंधा- हो जाने दो, पहले मुझे आपकी बहो में सकूं से लेटना ह,

देव ने सुगंध ाको बहो में बाहर लिया,

देव- तुम आईटीआई अच्छी क्यों हो, तुमने हमेषा त्याग किया ह, कभी कस्तूरी के लिए ओट कभी मेरे लिए, और आज सभी लड़कियों के लिए, और अब भी कोई इच्छा नहीं ह,

सुगंधा- क्योकि मेरा प्यार कुछ पाने के लिए नहीं ह, बस आपका हो जाने के लिए ह, मैं आज आपकी हु और सिर्फ आपकी हु, आने वाले जन्मो में भी सिर्फ आपकी हु, इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए,

देव ने सुगंधा के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, सुगंधा की आँखे बंद हो गई, वो तो जैसे सवर्ग में पहुंच चुकी थी, देव ने उसे अपनी बहो में उठाया और बिस्टेर पैर ले गया और उसे अपनी बहो में भर क्र लेट गया, सुगंधा भी उसे चिपक गई, और उसकी बहो में समां गई, काफी देर दोनों ऐसे hi लेते रहे,

देव- क्या आगे का शुरू करे,

सुगंधा- मुझे शर्म आती ह,

देव- आज की रात कोई लड़की नहीं शर्माती, और सुबह होने वाली ह, और गुरु जी ने कहा था आज hi सुहागरात होनी ह,

सुगंधा- मैं कुछ नहीं करुँगी जो करना ह आपको hi करना ह,

देव मुस्कुराया और सुगंधा के नंगे पेट पैर हाथ फिराया जिससे सुगंधा के पुरे शरीर में सिरहन सी दौड़ गई, उसके रोंगटे खड़े हो गए, देव का लुंड सुगंधा के नितम्बो में डाब रहा था, जिससे सुगंधा और रोमांचित हो रही थी,

देव ने सुगंधा को अपनी तरफ घुमाया और उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए, सुगंधा मदोष हो गई और देव के होतो में खो गई, देव के हाथ सुगंधा के नितम्बो पैर चले गए, देव ने उसके नितम्बो को कास कर पकड़ा और अपनी तरफ खींच क्र चिपका लिया,

देव ने सुगंध ाको अपने उप्पेर खींच लिया और अपने हाथ से उसकी चोली की डोरी खोलने लगा, सुगंधा शर्म से सिमटी जा रही थी, चोली खुलते hi देव ने घाघरे को भी खोल दिया, और उसे निचे खिसका दिया, और अपने हाथ सुगंध ाकि नंगे नितम्बो पैर रख दिए,

देव- तुम बहुत खूबसूरत हो सुगंधा

सुगंधा- तभी तो आज तक मुझे ठीक से देखा नहीं आपने,

देव- तुम बहुत पवित्र हो, तुम पैर मैं कभी कैसे गलत नजर रख सकता था,

सुगंधा- आज मैं आपकी पत्नी हो, आज तो आप जो चाहे क्र सकते हो,

देव- वो तो मैं करूँगा hi,

देव ने सुगंधा को लिटाया और जैसे hi उसकी चोली को उसके शरीर से अलग किया तभी बहार से शोर मचने की आवाजे आने लगी,

देव और सुगंधा चौंक गए, देव जल्दी से उठा और अपने कपडे ठीक करके बहार निकला सुगंधा भी जल्दी से कपडे पहनने लगी,

देव जैसे hi बहार आया तो देखा बहुत से सैनिक महल की सुरक्षा में खड़े हैं उनके साथ अभेंद्र और मनीषा ह,

देव- क्या हुआ अभेंद्र ये शोर कैसा ह,

अभेंद्र- देव परजा बगावत कर रही ह,

देव- बगावत, लेकिन क्यों, हमने ऐसा क्या कर दिया, जिसके लिए वो बगावत कर रहे हैं,

अभेंद्र- जी वो सूरज और ज्वाला पूरी परजा को भड़का क्र लाये हैं,

देव- सूरज और ज्वाला उनके कहने पैर परजा क्यों भड़केगी, चलो आओ बात करते हैं,

अभेंद्र- आपका जाना ठीक नहीं ह, परजा हुम्ला न कर दे,

देव- मेरा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता,

देव महल के बहार आ गया, निहारिका भी शोर सुनकर बहार आ चुकी थी, वो महल की खिड़की से सब देख रही थी, सुगंधा भी उसके साथ कड़ी थी, वही अमरावती और सौमित्र भी दूसरी खिड़की पैर कड़ी थी,

देव परजा के पास पंहुचा,

देव- क्या हुआ आप सब लोग इतना सुबह सुबह यहाँ,

चारो तरफ सनता च गया था,

देव- आप सब लोग चुप क्यों हैं, बोलिये क्या हुआ ह,

सूरज- मैं बताता हु क्या हुआ ह,

देव- तुम दोनों , तुम लोगो को क्या चाहिए,

ज्वाला- न्याय चाहिए,

देव- क्या मतलब

सूरज- हमारे राजय पैर एक कलंकित राजा बैठा हुआ ह, एक अयाश व्यब्चारी राजा, और नारियो को अपनी हवस का सामान समझता ह,

देव- क्या बकवास कर रहे हो,

तभी वह प्रेमलता आ गई,

प्रेमलता- ये सब सच हैं, राजकुमार सब सच बोल रहे हैं, ये ऐसा राजा ह जिसने मेरी बेटी के साथ दुराचार किया, और मेरी दूसरी बेटी को भी उठवा लिया, मेरे पति को गायब करवा दिया, और इस दुराचारी ने अपनी माँ को भी नहीं बक्शा, उसके साथ भी ची ची इसे तो मर जाना चाहिए,

वह खड़े सभी आदमी और औरते है है के नारे लगाने लगे,

देव को गुस्सा आ रहा था लेकिन वो परजा के सामने कुछ बोल नहीं सकता था,

देव- आप लोग इन झूठे लोगो की बातो पैर यकीन क्र रहे हैं,

प्रेमलता- ये मेरी बातो पैर यकीन क्र रहे हैं, मैं काचर्या जी की पत्नी हु, और हम कभी झूट नहीं बोलते,

सूरज- अगर ये सच्चा ह तो खाये अपनी माँ की कसम की इसके और इसकी माँ के बिच अनैतिक सम्बन्ध नहीं ह,

देव- मैं तुम लोगो की इस बकवास के लिए कस्मे नहीं खाऊंगा, चले जाओ यहाँ से वर्ण मेरे क्रोध की आग में जल jaoge,jwala- अब हम तुझसे डरने वाले नहीं ह, अब तेरी ताकत से लड़ने वाले आ चुके हैं,

परजा में से एक आदमी बोलै- इसको और इसकी माँ को राजय से बहार निकालो,

अभेंद्र- ये हमारे राजा हैं इनके बारे में सोच समझ क्र बोलो,

तभी एक आवाज आई, एक राजा के होते हुए कोई और राजा कैसे बन सकता ह,

सबने आवाज को देखा तो पाया की एक आदमी भीड़ में से चलता हुआ आ रहा ह, उसे देख क्र हर कोई चौंक गया,

और सभी एक साथ बोले राजा भवर सिंह जिन्दा हैं,

जी है राजा भवर सिंह ये वो चौथा इंसान था जो सूरज और ज्वाला के साथ योजा बना रहा था,

भवर सिंह को देख क्र निहारिका घबरा गई, भवर सिंह ने निहरिका की तरफ देखा और मुस्कुराया, फिर देव की तरफ देखा, देव के चेहरे पैर कोई आश्चर्य नहीं था,

देव- तो ये योजना थी तुम्हारी, इस लिए अब तक छुपे थे, मैं जनता था उस गुफा से 4 लोग बहार निकले हैं, लेकिन युद्ध के लिए तीन लोग आये, तभी मैं समझ गया था की कुछ योजना बना क्र आओगे,

भवर सिंह हँसा- फिर भी तू मुझे रोक नहीं पाया,

सूरज- तुम्हारे असली राजा जिन्दा हैं, इनके होते हुए कोई और राजा कैसे बन सकता ह, और वो भी ऐसा इंसान जो अपनी hi माँ के साथ रंगरलिया मनाता हो,

ज्वाला- इसकी माँ भी तो विषय ह जो अपने hi बेटे से चुदती ह,

देव जोर से चिल्लाया- jwalaaaaaaaaaaaaaaa मेरे सबर का इम्तेहा मत लो, अगर मेरी माँ को कुछ कहा तो सबको चिर दूंगा,

सूरज- इसमें गलत क्या ह तेरी माँ और भेने सब रंडिया ह

देव ने गुस्से में सूरज की गुर्दे पकड़ी और उसे हवा में उठा लिया, पूरी परजा डार्क र पीछे हैट गई,

ज्वाला- देखो हमे hi मार रहा ह, मारो इसे,

लोग आगे बढे तो अभेंद्र ने तलवार निकल ली, देव ने उसे पीछे रहने का इशारा किया,

अब तक निहारिका और सुगंधा दौड़ क्र निचे आ चुकी थी, उनके पीछे अमरावती और सौमित्र भी आ गई, अब तक बाकि लड़किया भी जग चुकी थी, वो भी लंगड़ाती हुई बहार आ गई,

भवर सिंह ने देव को मुक्का मारा जिससे देव एक कदम पीछे हैट गया, देव ने भवर सिंह को देखा और वो घमंड से देव को देख रहा था,

देव भवर सिंह की तरफ बढ़ा, तो उसे निहारिका ने रोक दिया,

निहारिका- रुक जाओ देव, हम लोगो को ऐसे इनसो से लड़ने की जरुरत नहीं ह, हमे परजा को जवाब देना ह, आप लोगो को इन सबकी बातो पैर यकीन ह, अपने राजा पैर नहीं जिसने आप सबको मुसीबतो से बचाया था, जो हमेशा आपके साथ खड़ा रहा,

प्रेमलता- आरी रंडी करम जेल शर्म कर अपने hi बेट ेके ीचे सोती ह,

तभी आगे बढ़ क्र सुगढ़ा ने प्रेमलता को थपड मर दिया,

प्रेमलता- देखो देखो इस करमजली ने मुझ पैर हाथ उठाया, ीके साथ रह क्र मेरी बेतिया भी रंडिया बन गई हैं,

भवर सिंह- इन सबको मार दो, इन्हे जिन्दा मत छोड़ो,

अब सैनिक असमंजस में पद गए वो किसका आदेश मने क्योकि उनके लिए तो दोनों hi राजा थे,

ज्वाला- अरे इससे कहो ये अपनी माँ की कसम खाये की इसके और इसकी माँ के बिच चुदाई नहीं होती,

सब ने एक साथ है में है मिले,

देव और निहारिका चुप हो गए, उनके पास जवाब नहीं था,

उनके चुप होने से वह खड़े सभी लोग यहाँ तक की साडी लड़किया भी अचंभित हो गई , सब आश्चर्य से देव और निहारिका को देखने लगे,

भवर सिंह- अब भी खड़े देख रहे हो, मार दो इन माँ बेटो को,

परजा देव की तरफ डोडी तो देव चिल्लाया

देव- होश में आकर अपने कदम बढ़ाना, तुम जानते हो किस्से लाडे की बात कर रहे हो, मई किसी को नुकसान पहुंचना नहीं चाहता, लेकिन किसी ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो बहुत बुरा होगा,

सूरज- सेनिको बंदी बना लो इसे, तुम्हारे पहले राजा अभी जिन्दा हैं, इस हिसाब से ये तुम्हारा राजा नहीं ह,



सेनिको की मज़बूरी हो गई, वो देव को पकड़ने के लिए आगे बढे, तो अभेंद्र ने तलवार निकल ली,
 
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