अपडेट 48
प्रताप गड में जब भैरव सिंह उठा और बहार आया तो कुछ दसिया कमरे में गई और दर से चीख पड़ी, प्रताप सिंह और रेणुका वह गए तो उनकी भी दर से आँखे फटी रह गई, जो 10 लड़किया कमरे गई थी वो मरी पड़ी थी, किसी की छूट फटी हुई थी तो किसी की चूचिया कटी पड़ी थी, एक को तो बिच में से चिर दिया था भैरव ने, ये नजारा किसी को भी भयभीत क्र सकता था, लेकिन रेणुका के चेहरे पैर एक मुस्कान थी,
भैरव ने रेणुका के चेहरे की मुस्कान को देखा,
भैरव- तुम्हे भी इस सब में मजा आता ह,
रेणुका- मैं चाहती हु आप उस देव के परिवार की औरतो के साथ ये सब करे,
भैरव- क्या वो सूंदर हैं,
रेणुका- इस समय पूरी धरती पैर उनसे सूंदर औरते किसी राजय में नहीं हैं,
भैरव- ahhhhhhhhhhhh मजा आएगा,
रेणुका- आप वह हुम्ला करने से रुके क्यों हो अब तक,
भैरव- क्योकि पहले मुझे उस राक्षश को मरना ह जिसने मुझसे ज्यादा दर फैलाया हुआ ह,
प्रताप सिंह- राक्षश नहीं नहीं उसे मत टकराना,
भैरव- तू बहुत डरपोक ह, उसे मैं अपने हाथो से मरूंगा,
इधर देव और निहारिका तैयार होकर पुरे परिवार के पास जा रहे थे,
निहारिका- देव अपनी बहेनो का ख्याल रख, इस युद्ध में अगर हमारी हार हुई तो मैं और मेरी बेतिया खुद को ख़तम कर लेंगी, लेकिन किसी दुश्मन के हाथ हमारे शरीर को नहीं छू पाएंगे,
देव- ऐसा कुछ नहीं होगा माँ,
निहारिका- फिर भी मैं बोल रही हु, अपनी सभी प्रेमिकाओ को उनके हिस्से की ख़ुशी दो, उन्होने बहुत कुछ झेला ह, उन्हें ये सुख तो मिलना hi चाहिए, अक्षरा और सुगंधा उनके हिस्से की ख़ुशी उन्हें दो और रीवा के करीब जाओ, उसके दिल की बात उसके होतो पैर लाओ,
देव- ठीक ह माँ, जैसा आप कहे,
सभी नाश्ते पैर एक साथ बैठे हुए थे, अक्षरा और अमिता दोनों देव के बराबर में आकर बैठ गई थी,
सभी युद्ध और भविष्य की चिंता में थे लेकिन अमिता और अक्षरा के हाथ मजे के निचे देव की जांघो पैर घूम रहे थे, देव ने दोनों को देखा और इशारे से रोकने की कोशिश की लेकिन वॉक अहा मैंने वाली थी, देव का लुंड अपने आकर में आने लगा था, और फिर अचानक से दोनों बहेनो ने अपने हाथ हटा लिए और बड़ी बड़ी आखो से एक दूसरे को देखने लगी, क्योकि दोनों के हाथ एक साथ देव के लुंड पैर पहुंचे और दोनों ने एक साथ लुंड को मुठी में भर लिया, तब दोनों को अहसास हुआ की वो दोनों एक साथ देव के लुंड से खेल रही है, दोनों ने एक दूसरे से शर्मा क्र हाथ हाथ लिए, देव ने रहत की साँस ली, लेकिन कुछ hi पालो बाद अमिता और अक्षरा का आपस में इशारा हुआ और दोनों ने फिर एक साथ देव का लुंड पकड़ लिया और मरोड़ने लगी, उन दोनों के बिच कुछ नहीं छिपा था,
बाकि लड़किया भी बड़ी हसरतो से देव को देख रही थी, लेकिन इस सब के बिच कस्तूरी की नजर अक्षरा के हिलते हुए हाथ पैर चली गई, और जैसे hi उसने ढाया दिया तो उसका मुँह खुला रह गया, उसे यकीन hi नहीं हुआ जो वो देख रही ह वो सच ह या झूट, वो कभी अक्षरा के हाथ को देखती तो कभी देवा ुर अक्षरा के मुँह को देखती, उसे जलन होए लगी थी, कभी उसे बुरा लगता तो कभी उसकी वासना जग उठती,
तभी मनीषा ने आकर सबका धयान भांग किया,
मनीषा- महारानी अभेंद्र जी आये हैं महाराज से मिलना चाहते हैं,
निहारिका- तुझे कितनी बार बोलै ह तू मुझे माँ बोलै क्र, ये महारानी बाकि लोगो के लिए रहने दे,
देव- और मैं तुम्हारा भाई हु समझी, मुझे भैया या सिर्फ देव बोल करो, और अभेंद्र मेरे भाई जैसा ह उसे आज्ञा की जरुरत नहीं ह यहाँ आने के, बुलाओ उसे,
मनीषा अभेंद्र को बुला ले,
देव- क्या हुआ अभेंद्र इतना परेशां क्यों हो,
अभेंद्र- देव वो प्रेमलता वो भाग गई,
सुगंधा एक दम कड़ी हो गई,
सुगंन्धा- क्या कैसे वो कैसे भाग सकती ह,
अभेंद्र- किसी ने उसकी सहायता की ह, एक सैनिक ने उसे किसी के साथ भागते देखा, वो ये तो नहीं जान पाया वो किसके साथ भागी लेकिन ये पक्का ह की वो उसका कोई खास जानकर होगा, क्योकि भागने से पहले दोनों गले लगे थे,
देव- वो मर्द था या औरत
अभेंद्र- अंधेरे में ये पता नहीं चल पाया, लेकिन मैंने आदमी लगा दिए ह पता करने के लिए,
इधर निहारिका अपना सर पकडे हुए बैठी थी,
रीवा- क्या हुआ माँ, आप इतनी परेशां क्यों हैं, वो पकड़ी जाएगी, वैसे भी वो हमारा क्या बिगड़ सकती ह,
निहारिका- बहुत कुछ बिगड़ सकती ह, क्योकि मैंने अत्ति उत्साह में उसको ऐसा कुछ बता दिया था जो दुइया में किसी को पता नहीं होना चाहिए थे,
देव ने निहारिका की तरफ देखा और चौंकते हुए इशारे से पूछा, की हमारे बारे में,
निहारिका ने हां में गर्दन हिला दी,
देव ने भी अपना सर पकड़ लिया, ये बड़ी संशय आ चुकी थी, क्योकि अगर देवा ुर निहारिका के रिश्ते के बारे में किसी को पता चला तो ार्थ हो जायेगा, अब देवा ुर निहारिका किसी को बता भी नहीं सकते की वो क्यों परेशां ह,
देव- अभेंद्र किसी भी तरह से प्रेमलता को ढूंढो, वो जिन्दा या मुर्दा मुझे चाहिए,
अभेंद्र वह से चला गया,
अक्षरा- माँ आप इतना परेशां न हो, उसे कुछ पता भी हो तो भी उसकी बातो पैर कोई यकीन नहीं करेगा,
देव – मुझे भौमिक जी से मिलना ह, मैं उनसे मिलकर आता हु,
अमिता- तुम अब राजा हो, तुम जिसे चाहो अपने पास बुला सकते हो, तुम्हे किसी से मिलने जाने की जरुरत नहीं ह,
देव- वो मेरे गुरु हैं, और कोई राजा हो या खुद भगवान्, कभी गुरु को अपने पास बुलाने का आदेश नहीं दे सकते, गुरु के पास तो खुद जाना होता ह,
अक्षरा- सही कहा, मैं भी साथ चलूंगी,
देव- तुम क्या करोगी,
अक्षरा- कुछ नहीं बस साथ चलुगी,
अक्षरा की जींद के सामने किसकी चलने वाली थी, देव और अक्षरा भौमिक जी के घर की तरफ चल दिए, रस्ते में,
अक्षरा- आज मजा आया तुम्हे,
देव- तुम्हारी शैतानी बढ़ती जा रही ह आज कल, ये क्या तरीका था अगर कोई देख लेता तो क्या होता,
अक्षरा- देख लेता तो देख लेता मुझे किसी का दर नहीं ह, मैं तुम्हारी हु, और ये बात मैं पूरी दुनिया के सामने बोल सकती हु,
देव- लेकिन वह और भी सब थे,
अक्षरा- साडी की साडी तुम्हारे निचे बिछे को बेताब हैं, तुम hi मौका hi दे रहे किसी को, रेवती कस्तूरी अमिता और सोमिया की तो ले चुके हो, मैं और सुगंधा बची हैं, और तुम जानते hi हम भी तुमसे प्रेम करती हैं, बस तुम hi मौका नहीं दे रहे हमारी लेने के लिए,
देव- की तुम कितनी गन्दी बात करती हो,
अक्षरा- अभी तो बस बात कर रही हु, जब करुँगी तब देखना,
देव- क्या देखना, मैं तो पहले hi सबकुछ देख चुक्का हु,
अक्षरा शर्म से लाल हो गई,
देव- अब क्यों शर्मा गई,
अक्षरा- शर्मा नहीं रही हु, बस इंतजार कर रही हु,
देव- तो तुम्हारा इंतजार जल्दी hi ख़तम करना होगा,
अक्षरा- हे मैं मर जाऊ, कब कहा
देव- कहो तो यही
अक्षरा- चलो फिर
देव- हैट पागल हो क्या, ये जुगल ह, जंगल में कोण करता ह,
अक्षरा- मुझे जुगल पसंद ह, और बिस्टेर पैर तो सभी मजा लेते हैं, मुझे अपना पहला सम्भोग याद गर बनाना ह, तो जंगल से अच्छा क्या होगा,
देव को कस्तूरी के साथ बिताये पल याद आ गए, उसका पहला प्यार और पहेली चुदाई, जिसे देव आज तक नहीं भुला था, वो कस्तूरी से दूर हो गया था लेकिन उसके साथ बिताये पालो को कभी नहीं भूल पाया था,
देव- पहले भौमिक जी के पास चलते हैं फिर सोचना इस बारे में,
कुछ देर में वो भौमिक जी के पास पहुंच गए, लेकिन भौमिक जी तो फेके hi महल की तरफ जा चुके थे,
भौमिक जी महल में निहिरका के सामने खड़े थे,
निहारिका- भौमिक जी आप यहाँ, देवा आपसे hi मिलने गया हुआ ह,
भौमिक जी- महारानी मुझे आपसे कुछ जरुरी बात करनी ह,
निहारिका- बताइये, ऐसी क्या बात हुई जिस वजह से आपको ऐसे आना पड़ा,
भौमिक जी- बहुत कुछ होने वाला ह और बहुत जल्द होने वाला ह, बहुत hi भयंकर होने वाला ह,
निहारिका- मैं भी जानती हु कुछ भयंकर होने वाला ह, आप तो भविष्य के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, आप hi बताइये कुछ,
भौमिक जी- मैं कुछ बाते जनता हु, कुछ झलकियां दिखती हैं मुझे उसी हिसाब से अनुमान लगता हु, मैं अब तक भी पूरी तरह किसी का भविष्य नहीं देख पता हु, लेकिन मुझे उम्मीद ह जल्दी hi मैं सब देख पाउँगा, लेकिन जितना मैं देख पाया हु उस हिसाब से एक बहुत बड़ा विनाश हमारी तरफ आ रहा ह,
निहारिका - उससे बचने का कुछ उपाय गुरु जी,
भौमिक जी- देव ऐसा कुछ करना होगा जो इस समाज और नियम के विरुद्ध होगा, अगर सभी दुश्मनो को हराना ह तो अपने अंदर की पूरी ताकत को जगाना होगा, वो खुद को बंधे हुए हो, अपनी ताकत को रोक रहा h,uske अंदर असीम ताकत ह उसे बहार लाना होगा, उसके लिए उसे अपने शरीर को हल्का करना होगा,
निहारिका - मैं कुछ समझी नहीं,
भौमिक जी- मैं ये बाते मैं आपको कहता अच्छा नहीं लग रहा लेकिन फिर भी बता रहा हु, एक दिन मैंने hi उसे इस कार्य के लिए शाप दिया था, और आज मुझे लग रहा ह की वो शाप hi उसके लिए वरदान ह,
निहारिका - शाप कैसा शाप, आपने देव को शाप क्यों दिया,
भौमिक जी- तुम कन्या हो तुम्हारे सामने मैं ये बोल नहीं सकता लेकिन देव को याद होगा मैंने उसे क्या शाप दिया था, अब समय आ चुक्का ह उस शाप को पूरा करने का,
निहारिका – आप मुझे बता सकते हैं, मैं उसकी सहायता कर सकती हु, वो मेरी बात जरूर मानेगा
भौमिक जी- उसने खुद को बांध रखा ह, उसके अंदर वासना का बवंडर ह, जो मेरे शाप और उस शक्ति की वजह से उत्पन्न हुआ ह, लेकिन उस वजह से उसकी ताकत कमजोर पद जाएगी, क्योकि वो अपने अंदर की पूरी वासना को हल्का नहीं क्र प् रहा ह, उसे सम्भोग करना होगा, और एक बहुत जरुरी बात, वो सब अपनों के साथ hi करना होगा, क्योकि उसके अंदर जो शक्ति ह उसका अंश कही और न जा पाए,
निहारिका को साडी बात अचे से समझ आ चुकी थी,
निहारिका- क्या वो रिश्ता कोई भी हो सकता ह,
भौमिक जी- मैं आपकी बात का मतलब समझ रहा हु, वो मुझे कहते हुए बड़ी ग्लानि हो रही ह की आपको इस सब में शामिल होना होगा, ये बहुत hi जरुरी ह, उसकी बहेनो को शामिल होना होगा, ये युद्ध सिर्फ आज का नहीं ह, जितना मुझे समझ आया ह ये युद्ध जन्मो से भी आगे का ह,
ये बात निहारिका की समझ में नहीं आई,
निहारिका- मैं अपनी तरफ से भरपूर कोशिश करुँगी देव के अंदर की शक्तियों को जगाने की,
भौमिक जी- आपके मन में ह उसी रस्ते पैर चलना, वो रास्ता सही बहेले न हो लेकिन आप सबके लिए वही रास्ता सही ह, और अपने परिवार की बाकि लड़कियों को भी उसी रस्ते पैर लेकर चलना, ये देव के लिए बहुत जरुरी ह, और जल्द से जल्द ये सब होना चाहिए,
इतना बोलकर भौमिक जी वह से निकल गए, निहारिका सोच में दुब गई, उधर देवा ुर अक्षरा भौमिक जी के घर से निकल क्र जंगल में नदी की तरफ निकल गए, आज देव के अंदर कामुकता चरम पैर थी, वो खुद को रोक रहा था लेकिन उसका शरीर बेकाबू हो रहा था, उसका लुंड पुरे तनाव में आया हुआ था,
अक्षरा- कितनी सूंदर जगह ह देव ये,
देव- मैं शांति के लिए यही आया करता था, यहाँ बड़ा सकूं मिलता था,
अक्षरा- इतने समय से सबने कितना कुछ झेला ह, यहाँ आकर सब भूल गई हु मैं, कितना सकूं मिल रहा ह,
अक्षरा ने देव का हाथ अपनी बहो में भर लिया, और अपनी दोनों चूचियों को देव के बाजु पैर रगड़ा, देव की उंगलिया अक्षरा की नाभि से निचे तक पहुंच रही थी, जो कभी कभी उसकी छूट के उप्पेर के हिस्से पैर रगड़ जाती तो अक्षरा मदोष हो जाती,
अक्षरा- काश यहाँ हमारा एक बसेरा हो, जिसमे तुम हो और हम सब तुम्हारी प्रेमिकाए हो,
देव- प्रेमिकाए?
अक्षरा- है हम सब तुम्हारी प्रेमिकाए hi तो हैं, मैं, अमिता, सोमिया, रेवती, सुगंधा, कस्तूरी,
देव- तुम्हे इस बात से तकलीफ नहीं होती की और भी लड़किया मेरी जिंदगी मैं हैं, और न जाने कीटनियो के साथ मैंने सम्भोग किया होगा,
अक्षरा- नहीं होती, राजमहल की लकड़ियों को एक से ज्यादा रानियों के साथ समझौता करना सिखाया जाता ह, पैर यहाँ समझौते जैसी कोई बात नहीं ह, हम सब तुमसे प्रेम करती हैं, और हम सब भेने हैं, और तुम और तुम्हरा प्यार ितं अनमोल ह की हममे से कोई एक उसे सम्हाल hi नहीं पायेगी, हम सब मिलकर तुम्हे प्यार करेंगी, मेरा बस चले तो सबको एक साथ ले औ और सब मिलकर तुमसे प्यार करे, बस निहारिका माँ और रीवा से दर लगता ह, काश रीवा भी तुमसे प्रेम करती होती तो कितना आनद आता,
रीवा का नाम आते hi देव के लुंड ने झटका मारा,
देव- प्रेम एकांत में hi होना चाहिए, ऐसे सबके साथ तो वासना होती ह,
अक्षरा- हमारा प्रेम वासना से hi उभर क्र आया ह, और मैं ये सोचती हु की आपस में कुछ भी छुपाना ठीक नहीं ह, लेकिन फ़िलहाल तुम मेरे साथ हो तो मैं इस पल को ऐसे बातो में गवाना नहीं चाहती,
अक्षरा ने देव को बहो में बहरा और उसका सर झुका क्र अपने हॉट उसके होतो से मिला दिए, अक्षरा सबसे छोटी थी लेकिन उसका शरीर और उसके मुलायम हॉट बहुत hi कामुक थे, देव तो पहले से hi बेकाबू हो रहा था, देव ने भी अक्षरा को बहो में बहरा और खुद से चिपका लिया, दोनों के शरीर चिपकते hi अक्षरा को देव के खड़े लुंड का अहसास हो गया था, जो सिद्ध उसकी नाभि से निचे बाद रहा था, मोठे लुंड का अहसास होते hi अक्षरा और कामुक हो गई, उसने तेजी से देव के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, देव का एक हाथ अक्षरा की आधी खुली नंगी कमर पैर था और दुशरा हाथ उसकी कड़क गांड पैर पहुंच चुक्का था, देव भी लुंड का दबाव बनाये जार है था,
काफी देर हॉट चूसने के बाद दोनों अलग हुए तो दोनों की आँखे लाल थी उनमे वासना कैद ओरे तैर रहे थे, अक्षरा कुछ पल रुकी फिर देव के कपड़ो पैर टूट पड़ी, देव भी जल्दी जल्दी उसकी चोली खोलने लगा, कुछ hi पालो में अक्षरा की कड़क चूचिया देव की आँखों के समाने थी, वही देव का मजबूत शरीर अक्षरा के समाने था, दोनों एक दूसरे की सुंदरता को निहार रहे थे, देव ने तुरंत अक्षरा की एक चुकी को अपनी मुठी में भरा और दूसरी पैर अपने हॉट रख दिए, अक्षरा की आँखे बंद हो गई, वो मस्ती में मदहोश होने लगी, उसके हाथ देव के सर में घूम रहे थे, फिर नंगी कमर पैर होते हुए उसने अपना हाथ निचे ले जाकर देव के उफान मरते हुए लुंड पैर रख दिया, और जैसे hi कपड़ो के उप्पेर से लुंड उसकी मुठी में आया, अक्षरा घबरा गई,
देव भी समझ गया की अक्षरा लुंड का आकर महसूस क्र के घबरा रही ह,
देव- क्या हुआ दर लग रहा ह,
अक्षरा- दर किस बात का, हमे सिखया गया ह, इसका आकर जितना मोटा होगा सम्भोग का आनंद उतना hi अधिक होगा, बस पहेली बार दर्द थोड़ा ज्यादा होगा,
देव मैं कोशिश करूँगा उतना दर्द न दू,
देव ने अक्षरा के घागरे का नाडा खोल दिया, जिससे घागरा निचे गिर गया, और उसकी ननंगी जंघे देव के सामने आ गई, क्या खूबसूरत चिकनी जंघे थी, अक्षरा ने भी देव के कपडे खोल दिए, और कुछ hi पालो में दोनों एक दूसरे के समाने नंगे खड़े थे, अक्षरा की नजर जब देव के लुंड पैर गई तो वो हैरत से उसे देखती रह गई, जैसे कोई अजूबा देख लिया हो, देव ने अक्षरा का हाथ पकड़ा और खुद से चिपका लिया, अक्षरा का शरीर कैंप रहा था, और जब नंगी शरीर से दोनों के शरीर रगड़े तो काम वासना और बेहद गई, और देव का लुंड अक्षरा की छूट के उप्पेर रगड़ा जिससे अक्षरा और उत्तेजित हो गई, उसका एक पेअर खुद hi उठ गया और देव की कमर पैर लप्पेट लिया, जिससे उसकी छूट लुंड के सामने आ गई, और लुंड की रगड़ सीधे छूट पैर लगी,
अक्षरा पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी,
देव अक्षरा की गार्डन को चूमने लगा, अक्षरा देव की छतो को चूमने लगी, फिर देव ने अक्षरा की गांड को पकड़ा और अपनी गॉड में उठा लिया, अक्षरा की देव से पूरी तरह लिपट गई, देव अक्षरा को लेकर पानी के अंदर चल दिया, देव का उठा हुआ लुंड कभी अक्षरा की छूट पैर रगड़ता कभी उसकी गांड पैर, अक्षरा जब बुझ क्र अपने शरीर को हिला रही थी ताकि लुंड की रगड़ को महसूस क्र सके,
जांघो तक पानी में नाज़े के बाद देव रुक गया और अक्षरा को निचे उतरा, तवसना से तपते हुए शरीर पैर जब ठन्डे पानी का अहसास हुआ तो अक्षरा के शरीर में धुआँ सा उठ गया, देव अक्षरा के शरीर को चूमने लगा उसकी चूचियों को चूमने लगा फिर निचे बैठ गया और उसकी नाभि को चूमने लगा, और फिर छूट के उप्पेर के हिस्से पैर अपनेहोत रगड़े जिससे अक्षरा सिसक उठी और उसने देव का सर वही बड़ा लिया, देव उसके रोके कहा रुकने वाला था, देव ने अक्षरा की जांघ उठाई और अपने कंधे पैर रख ली और अब अक्षरा की छूट सीधे देव के मुँह के सामने थी, अक्षरा का शरीर कैंप रहा था, उसका पेट थिरक रहा था,
देव ने अक्षरा की छूट पैर हल्का सा चुम्बन दिया, जिससे अक्षरा तड़प उठी, उसकी यह से ुउउइइइइइइइ माँ निकल गया,
देव ने तुरंत अक्षरा की छूट को अपने मुँह में भर लिया और ुरका रास चूसने लगा, छूट पहले से hi गीली हो राखी,
कोई भी लड़की ये समझ सकती ह की जब उसका सच्चा प्रेमी उसकी छूट को चूमता ह तो उसे दुनिया की सबसे ज्यादा ख़ुशी का अहसास होता ह,
अक्षरा भी वैसा hi महसूस क्र रही थी, ahhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh uuummmmmmmmmmmmm ddddeeevvvvvvvvvv नहीं नहीं ahhhhhhhhhhhh माँ
अक्षरा के मुँह से सिसकीय फुट रही थी, देव भी अपना काम किये जार है था, अक्षरा का शरीर अकड़ने लगा था, लेकिन वो अपनी वासना को अभी शांत नहीं करना चाहती थी, लेकिन खुद को मजा लेने से रोक भी नहीं प् रही थी, फिर भी उसने बड़ी हिम्मत का काम किया और अपनीजाण्ड देव के कंधे से उतर ली,
देव ने उप्पेर देखा तो अक्षरा हांफ रही थी, उसकी चूचिया उप्पेर निचे हो रही थी, आँखे भट्टी की तरह लाल थी,
देव की आँखों में सवाल था की रोका क्यों जिसका जवाब अक्षरा ने बिना बोले बस अपने काम से दिया, उसने देव को खड़ा किया और खुद उसके समाने बैठ गई, जैसे hi वो बैठी उसकी छूट ठन्डे पानी से टकराई और वो फिर से मचल उठी लेकिन उसके समाने देव का फौलादी लुंड खड़ा था, अक्षरा हलकी सी डगमगाई तो उसने जल्दी से देव का लुंड पकड़ लिया और खुद को गिरने से बचाया, देव का लुंड उसके हाथो में ठीक से आ भी नहीं रहा था,
अक्षरा बस लुंड को निहारे जार hi थी, फिर उसने अपनी जीभ निकली और हलके से देव के टोपे को चाट लिया, देव मस्ती में बाहर गया,
अक्षरा ने देव को देखा की उसे मजा आ रहा ह तो अक्षरा का जोश बेहद गया और उसने जीभ से पूरा लुंड चाटने लगी, फिर मुँह खोल क्र लुंड को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी, लेकिन लुंड बहुत मोटा था और अक्षरा का मुँह छोटा सा, उसके गाल चीरने लगे,
देव- बस करो तुम्हे तकलीफ होगी,
अक्षरा- अगर मैं इसे मुँह नहीं ले सकती तो नीच एकइसे लुंगी,
देव- निचे का आकर फ़ैल जाता ह, लेकिन होतो को खोले की एक सीमे होती ह,
लेकिन अक्षरा नहीं मणि वो पूरी कोशिश करती रही लुंड को चूसने की, जब थक गई तो लुंड को चाटने लगी, काफी देर चूसने चाटने के बाद देव ने उसे उठाया और अपनी बहो में बाहर लिया,
देव- अब इनका मिलान करवाने का समय आ गया ह,
अक्षरा- मैं तो कबसे तैयार हु,
देव नदी के किनारे पैर ले गया और अक्षरा को मुलायम घास पैर लिटा दिया, अक्षरा की कमर से निचे का हिस्सा पानी में था और बाकि घर पैर, देव अक्षरा की जांघो के बिच आ गया,
देव- तुम्हे दर्द होगा,
अक्षरा- ये दर्द hi लड़की का सबसे बड़ा घेणा होता ह,
देव ने अक्षरा की छूट पैर लुंड रखा और दबाव बनाया, ये देव की बड़ी गलती थी उसे ये अहसास hi नहीं था की पानी की वजह से छूट की चिकनाहट ख़तम हो चुकी होगी, और अक्षरा को ज्यादा दर्द होने वाला था,
देव के लुंड ने जैसे hi छूट पैर दबाव बनाया तो लुंड छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, अक्षरा के मुँह से एक दर्द भरी चीख निकल गई, चीख बहुत जोर डार्ट hi लेकिन भेटे पानी की आवाज में डाब क्र रह गई,
देव एक दम रुक गया,
देव- माफ़ करना अक्षरा, तुम्हे बहुत दर्द हुआ ह, मैं निकल लेता हु,
अक्सहर- नहीं नहीं निकलना नहीं, मैं सेह लुंगी, मुझे ये दर्द चाहिए, तुम रुकना नहीं, मैं जितना भी चिखु बस तुम रुकना नहीं,
देव ने अक्षरा को चूमा और उसकी चूचियों को चूसना शुरू किया, और निचे से दबाव बनाया, और लुंड थोड़ा और अंदर घुसा, अक्षरा दर्द की वजह से उप्पेर खिसक गई और पानी से थोड़ा बहार आ गई,
देव के लुंड का टोपा अक्षरा की छूट में फसा हुआ था, अक्षरा की छूट से खून निकल क्र पानी में भेटा जार है था, देव ने हल्का हल्का दबाव बनाये रखा, पानी से बहार आने के कुछ देर बाद hi छूट ने अपना काम करना शुरू क्र दिया था, अख्सरा के अंदर भरी वासना ने छूट को गिला करना शुरू क्र दिया था, और थोड़ी hi देर में आधे से थोड़ा काम लुंड का हिस्सा छूट के अंदर घुस गया था, अक्षरा की आँखे फटी रह गाइट hi, वो हिल दल भी नहीं प् रही थी, देव कभी उसके होतो को चूमता तो कभी उसकी चूचियों को कुरेदता, इससे अक्षरा को थोड़ी रहत होती, बहुत देर तक दोनों ऐसे hi रहे, और इसी बिच अक्षरा झड़ने लगी, और उसकी छूट ने जब फवारा छोड़ा तो देव के लुंड को भी रहत हुई और उसने लुंड को आगे पीछे करना शुरू किया, अख्सरा को दर्द हो रहा था, जिस वजह से वो झड़ने का पूरा आनंद नहीं उठा प् रही थी, देव लगातार लुंड आगे पीछे करता रहा, जिससे लुंड आधे से ज्यादा छूट में घुस गया था,
अब अक्षरा को भी थोड़ा मजा आने लगा था, उसकी छूट लुंड के साथ hi अंदर बहार हो रही थी, छूट का चला पूरी तरह से लुंड पैर फसा हुआ था, अक्षरा फिर से झड़ने लगी थी, और इस बार वो अपनी छूट को खुद hi हिलने लगी थी, उसने इस बार झड़ने का अहसास अचे से किया था,
लेकिन देव अब तक भी पूरी राफ्तेर में नहीं आ प् रहा था, दोनों की चुदाई बहुत लम्बी चली और इस चुदाई में अक्षरा 4 बार झाड़ गाइट hi, देव ने भी खुद को ज्यादा रोकना सही नहीं समझा और अपने आप को भेने दिया और अपना लावा अक्षरा की छूट में बाहर दिया, और जैसे hi देव ने अपना लुंड बहार निकला एक पुक की तेज आवाज हुई और उसी के साथ, अक्षरा की छूट ने एक जोर दर फवारा छोड़ दिया जिसमे देव का वीर्य और अक्षरा की छूट का रसा ुर खून और पानी बहार निकला,
अक्षरा को बहुत रहत महसूस हुई, अक्षरा बेसूद सी पड़ी रही, देव भी उसके पास लेट गया, देव पूरी तरह शांत नहीं हुआ था, वो झाड़ तो गया था लेकिन उसे सकूं नहीं मिला था, काफी देर लेते रहने के बाद देव ने अक्षरा को अपनी गॉड में उठाया और पानी में ले गया, पानी की धरा जब अक्षरा की छूट पैर गिरी तो उसकी सिरहन सी दौड़ गई, उसके दर्द में बड़ी रहत मिली,
देव ने उसे अचे से नहला क्र कपडे पहनाये, अक्षरा से चलना भी मुश्किल हो रहा था लेकिन महल तो वापस जाना hi था, वो बड़ी मुश्किल से रथ में बैठी और महल में वापस आई,