Incest RAKSHASH - Page 10 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

अपडेट- 36


महल में सोमिया और अमिता की आँख खुली, उन्होंने जैसे hi उठने की कोशिश की उनकी दर्द भरी चीख निकल गई, जैसे तैसे करके वो उठ क्र बैठी, तो उन्हें रात की साडी बात याद आई, दोनों एक दूसरे को देख क्र मुस्कुरा दी, फिर अपनी हालत देखि की वो नंगी hi पड़ी हुई हैं और उनके उप्पेर चादर डाली हुई ह, वो जैसे तैसे करके उठी और एक दूसरे को सहारा देती हुई अपने कपडे पहन क्र लड़खड़ाती हुई अपने कमरे की तरफ चल दी,

कमरे के बहार उनकी खास दसिया कड़ी थी, दोनों राजकमारियो की बिगड़ी हुई हालत देख क्र दसिया उनके पास डोडी और उन्हें सम्हाला, दोनों को वोट क हिकमरे में ले गई,

दासी- राजकुमारी आप ठीक ह न, क्या हुआ आपको,

अमिता- हम ठीक ह तुम लोग चिंता मत लारो, बस इतना बताओ तुममे से सम्भोग का सबसे ज्यादा अनुभव किसके पास ह,

अमिता के मुँह से सम्भोग की बात सुनकर दसिया चौंक गई,

सोमिया- घबराओ नहीं, हमे तुम्हरी सहायता चाहिए इसलिए पूछ रही हैं,

उनमे से एक दासी आगे आई जिसकी उम्र करीब 30 साल की होगी,

अमिता- स्वेता तुम जानती हो

स्वेता- जी राजकुमारी, आपकी दासी बनने से पहले मुझे गणिका ( वैश्य) की शिक्षा दी गई थी, मेरे पिता मुझे गणिका बनाना चाहते थे उस्समे अधिक कमाई थी लेकिन फिर यहाँ महल में काम मिल गया तो यहाँ आ गई,

अमिता- अच्छा हुआ तुम बच गई, तुमने सम्भोग भी किया होगा न,

स्वाति – जी है गणिका बनाते समय राजाओ और राजकुमारों के साथ सम्भोग करने भेजा जाता था, आपके पिता के पास मुझे भेजा जा चुक्का ह, लेकिन उन्हें मैं याद नहीं हूँगी,

अमिता- फिर तुम हमारी मदद कर सकती हो, हम दोनों के कपडे उतरो और हमारे गुप्तांगो का निरिक्षण करो,

स्वाति और बाकि दसियो ने दोनों जरकुमारिओ को नंगा कर दिया, और जैसे hi उन्होंने दोनों के पेअर खोले, सभी दसियो की आँखे फटी रह गई, उन्होंने अपने मुँह पैर हाथ रख लिया, सबके मुँह से एक साथ हैययय की आवाज निकली,

अमिता- क्या हुआ,

दासी- राजकुमारी ये क्या हो गया, क्या आपके साथ किसी ने दुराचार किया ह, क्या वोट क से अधिक लोग थे, या किसी ने कोई मुसल तो नहीं घुसा दिया,

सोमिया- ऐसा कुछ नहीं हुआ ह, हमने अपनी मर्जी से प्यार से सब करवाया ह,

दासी- ये प्यार से किया हुआ नहीं लग रहा, यहाँ तो बहुत बुरी हालत ह, आपकी छूट बुरी तरह फैट चुकी ह, जैसे इसमें गधे का लुंड घुसाया गया हो,

अमिता- जिसका घुसा था उसका गधे से भी मोटा था, तुम ये सबा छोड़ो बस ये बताओ क्या करना ह, क्योकि हमे हिलने डुलने पैर भी बहुत दर्द हो रहा ह,

दासी- दर्द तो होगा hi, हालत जो इतनी बुरी ह,

फिर स्वेता ने बाकि दसियो से गरम पानी साफ़ कपडे और कुछ औषधीय बताई, बाकि दासी तुरंत दौड़ पड़ी,

अमिता- ये कब तक ठीक हो जाएगी,

स्वेता- राजकुमारी इसका आकर वापस पहले जैसा तो कभी नहीं हो पायेगा लेकिन फिर भी काफी हद तक ठीक हो जायेगा, दर्द तो आपका कुछ hi समय में ठीक हो जायेगा, शाम तक आप आराम से बहार घूमने लायक हो जाएँगी,

स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,

स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,

स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,

सोमिया- बस उसके बारे में कुछ मत पूछना और ये बात गलती से भी बहार न जाने पाए,

स्वेता- जान जा सकती ह लेकिन बात नहीं जाएगी,

फिर स्वेता दोनों का उपचार करने लगी,

रीवा और अक्षरा निहारिका के पास बैठी हुई थी,

रीवा- माँ वो लोग नहीं मानेंगे, वो हमारी शादी करवा क्र hi रहेंगे,

निहारिका- जब तक मैं और देव ह ऐसा नहीं होगा, तुम चिंता मत करो,

अक्षरा- लेकिन देव गया कहा, उसने वडा किया था ो यहाँ रहेगा और इस सब को रोकेगा,

निहारिका- अगर देव यहाँ नहीं ह तो कुछ ऐसा काम आ गया ह जिसके लिए उसका जाना बहुत जरुरी हो गया ह,

रीवा- माँ आपको चिंता नहीं होती देव की, वो सुबह से महल से गायब ह, वो भी ऐसे दिन जब वो महाराज के विरुद्ध बोलने वाला था, कही महाराज ने उसे कुछ,

निहारिका- नहीं इन लोगो में इतनी ताकत नहीं ह की वो देव का कुछ बिगड़ सके, वो आता hi होगा,

देव अपने मां के पास बैठा हुआ था,

भौमिक जी- देव राजवीर को ठीक होने में समय लगने वाला ह, तुम्हे महल जाना चाहिए शायद वह तुम्हारी जरुरत हो,

भौमिक जी के इतना बोलते hi देव खड़ा हो गया उसने अपना सर पकड़ लिया,

अभेंद्र- क्या हुआ

देव- आज बहेनो की शादी का फैसला होना था और मैं भूल गया, न जाने वह क्या हुआ होगा, मुझे वह जाना होगा,

देव तुरंत वह से निकल गया, देव महल में पंहुचा उसे उम्मीद थी की वह बहुत बखेड़ा हुआ होगा, लेकिन महल तो बिलकुल शांत था, एक दम शांति पसरी हुई थी, देव जल्दी से निहारिका के कमरे में गया तो देखा रीवा और अक्षरा वह बैठी हुई हैं,

निहारिका- लो ये आ गया देव

अक्षरा- कहा चला गया था, हमे मुसीबत में छोड़ क्र,

देव- माफ़ करना एक ऐसा काम आ गया था जिसे कल के लिए नहीं छोड़ सकता था,

निहारिका- मैं जानती थी, कोई जरुरी काम hi होगा तभी गया होगा,

रीवा- वो काम हो गया,

देव- है हो गया, अब सब ठीक ह, लेकिन यहाँ क्या हुआ, सभा में क्या फैसला हुआ,

अक्षरा- फैसला तो हम सबको पता hi था क्या होना था लेकिन माँ ने हम ेबचा लिया,

माँ सुनकर देव और निहारिका चौंक गए,

देव- माँ ने

अक्षरा- निहारिका माँ ने, अब ये मेरी माँ hi हैं, मैंने अपनी माँ का अधिकार चीन क्र इन्हे दे दिया ह, अब से ये hi मेरी माँ हैं,

अक्षरा और रीवा ने देव को साडी बात बता दी,

देव- इतना कुछ होने के बाद महल में इतना सनता क्यों ह, राजा साहब को तो बवाल मचा देना था अब तक,

निहारिका- पता नहीं हम तब से बहार नहीं गए,

देव- मैं पता करता हु,

देव बहार चला गया, उसने बहार सेनिको से पूछा तो पता चला की भवर सिंह सात्विक और काम्य कुछ सेनिको के साथ महल से बहार गए हैं, और प्रतापगढ़ से आये दोनों राजकुमार वापस चले गए,

देव को बड़ी हैरत हुई, ये कैसे संभव ह, ये बहुत अजीब था,

देव ने वापस आकर सब बताया,

रीवा और अक्षरा ख़ुशी से उछाल पड़ी और देव से लिपट गई,

अक्षरा- मतलब वो लोग अब हमारी शादी नहीं करेंगे

देव- शादी तो तुम्हारी उन लोगो से वैसे भी नहीं होने वाली थी, लेकिन उनका इस तरह से वापस जाना और खुद भवर सिंह और काम्य का महल से जाना वो भी सात्विक के साथ ये कुछ शंका का कारन बन रहा ह,

निहारिका- क्या उन्हें कुछ पता चला ह,

देव- हो सकता ह, क्योकि सात्विक को सब पता ह,

रीवा- किस बारे में,

देव- तुम दोनों अभी जाकर तैयार हो जाओ, तुम लोग अभी युद्ध कला का शिक्षण लेने जाओगी, और रोज वह जाओगी,

अक्षरा- क्या कोई युद्ध होने वाला ह,

देव- हम हर पल एक युद्ध की तरफ बढ़ते जार हे हैं, और मैं न जाने किन परिश्थिति में राहु, इसलिए तुम सबको आत्मरक्षा सीखनी होगी, अगर मैं तुम सबको बचने में रहा तो मेरा धयान भटक सकता ह,

रीवा- ऐसा नहीं होगा, मैं अभी सोमिया और अमिता को बुला क्र तैयार होने को बोलती हु,

देव- उन्हें रहने दो, उन्हें मैं ले आऊंगा, तुम दोनों चलकर तैयार हो जाओ,

देव की बात से अक्षरा को हसी सी आ गई लेकिन उसने अपनी हसी को दबा लिया, फिर भी उसके चेरे पैर मुस्कान आ hi गई, जिसे निहारिका ने देख लिया,

अक्षरा रीवा का हाथ पकड़ क्र ले गई, उनके जाते hi देव निहिरका के पैरो में गिर पड़ा और दोनों पैरो को अपनी बहो में भर लिया,

निहारिका एक दम चौंक गई,

निहिरका- देव क्या हुआ, तू ऐसे क्यों टूट रहा ह,

देव- माँ मैंने उनेह धुंध लिया, माँ वो मिल गए,

निहारिका की आँखे भर आई, उसके हॉट कंपनी लगे, उसके शब्द उसके मुँह में hi दबे रह गए, उसका गाला भर आया था जिस वजह से आवाज बहार नहीं निकली, निहारिका ने भरे हुए गले से कांपते होतो से पूछा-

निहारिका- वाओ ो वो ठीक ह न,

देव- बस किसी तरह जिन्दा हैं माँ, लेकिन जल्दी hi वो एक दम ठीक होंगे, और जैसे hi वो ठीक होंगे हमारे उप्पेर कोई दबाव नहीं होगा, मैं भवर सिंह और उसके इस साम्राज्य को तहस नहस क्र दूंगा,

निहारिका ने देव को उठाया और उस ेअपने गले से लगा लिया,

निहारिका- देव तूने आज मुझे नया जीवन दे दिया ह,

निहारिका देव के माथे को उसके गलो को चूमने लगी और चूमते चूमते निहारिका ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, और जैसे hi दोनों के हॉट मिले तो समझो जैसे समुन्दर में सुनामी आ गया हो, निहारिका को भी विश्वास नहीं हुआ की उसने ऐसा किया, और देव तो पूरी तरह चौंका हुआ था, कुछ पालो तक दोनों एक दूसरे के होतो से हॉट मिलाये बस खड़े रहे, दोनों की धड़कने किसी हथोड़े की तरह धड़ धड़ क्र रही थी, एक दम सनता था कमरे में, दोनों की आँखे बंद हो चुकी थी, बस कुछ आवाज आ रही थी तो उन दोनों की उखड़ी हुई भरी बहरी सांसो की आवाज थी, और तभी दोनों ने वो कदम उठा दिया जो समाज के सरे न्यायम तोड़ दें ेके लिए काफी था,

दोनों बेकाबू हो चुके थे और दोनों के हॉट एक साथ खुले और एक दूसरे के होतो में समां गए, और एक दूसरे के होतो का रसपान करने लगे, दोनों ये hi भूल गए की उनके बिच रिश्ता क्या ह, ऐसा लग रहा था जैसे दो प्रेमियों का जोड़ा पहेली बार एक दूसरे से अपने प्रेम का इजहार कर रहा हो, और दोनों के चूमने में कोई जल्दबाजी नहीं थी, वो दोनों बड़े प्यार से एक दूसरे के चुम रहे थे, निहारिका कितने hi वर्षो बाद किसी के होतो को चूमा था या शायद पहेली बार वो किसी के हॉट चुम रही थी, निहारिका के हाथ देव के बालो में घूमने लगे, देव के हाथ भी निहारिका की कमर पैर थे, जो अब उप्पेर से निचे घूमने लगे थे,

निहारिका ने 20 वर्षो बाद खुद पैर से लगाम हटा दी थी, अचानक मिली एक बड़ी ख़ुशी में निहारिका अपने उप्पेर से काबू खो बैठी थी, या फिर उसके दिल में जो भावनाये उभरती रहती थी आज उन्हें हवा मिल गई थी, और देव वो हमेशा निहारिका से दूर रहने की कोशिश करता था, शायद ये hi वजह थी वो निहारिका के सामने बेकाबू होने लगता था, आज दोनों ने साडी सीमाएं लाँघ दी थी,

आज कल देव की वासना बढ़ती जा रही थी, और रात में दो दो लड़कियों के साथ सम्भोग किया था लेकिन देव संतुष्ट नहीं हुआ था, उसके अंदर वासना का गुब्बार भरा हुआ था, जो निहारिका के होतो के स्पर्श से फूट पाड़ा और देव बेकाबू हो गया, देव के हाथ निहारिका की कमर से फिसलते हुए उसके नितम्बो पैर पहुंच गए, निहारिका के नितम बहार को फैले हुए और पीछे से उभरे हुए थे, जिन्हे देव बहुत बार देख चुक्का था, यहाँ तक की उसके लुंड ने बहुत बार निहारिका के नितम्बो को महसूस किया था, लेकिन आज कपड़ो के उप्पेर से hi अपने हाथ निहिरका के नितम्बो पैर रखते hi देव के लुंड ने एक झटका मारा जो निहिरका को अपनी जांघो के बिच महसूस हुआ,

लुंड का अहसास होते hi निहारिका का धयान चुम्बन से हैट क्र देव के हाथो और लुंड पैर चला गया, और उसे अहसास हुआ वो क्या कर रही ह, निहारिका के हॉट रुक गए, और जैसे hi निहारिका ने देव को चूमना रोका तभी देव को भी अहसास हुआ ये क्या हो रहा था, देव के हाथ तुरंत उसकी जगह से हाथ गए, देव एक दम झटके से सीधा हो गया, दोनों की नजरे मिली और दोनों एक दूसरे से मुँह फेर क्र खड़े हो गए,

सांसे दोनों की उखड़ी हुई थी, दोनों की हालत ख़राब थी, दोनों शर्म से पानी पानी हुए जार हे थे, निहारिका शर्मा रही थी लेकिन देव बौखलाया हुआ था, वोट क सदमे जैसी हालत में था, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था अभी जो हुआ वो सच था या सपना,

काफी देर दोनों ऐसे hi शांत खड़े रहे, निहारिका समझ रही थी ये जो हुआ उससे देव की हालत क्या हो रही होगी, क्योकि उसकी खुद की हालत ख़राब थी, उसे खुद यकीन नहीं था ये सब कैसे हो गया,

निहारिका ने कुछ बोलना चाहा लेकिन देव तेज तेज कदमो से कमरे से बहार निकल गया,

वो सीधा अपने कमरे में पंहुचा और अपने बिस्टेर पैर लेट गया, उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था, सांसे उखड़ी हुई थी, सही गलत जैसी कोई भावना नहीं थी उसके मन में क्योकि सही गलत जैसी बातो से, समाज या किसी रिश्तो से देव और निहारिका बहुत उप्पेर उठ चुके थे, लेकिन फिर भी उसके दिमाग में ग्लानि के भाव आ रहे थे, लेकिन उसका दिल ख़ुशी से धक् धक् क्र रहा था, उसके मन में ख़ुशी और ग्लानि दोनों एक साथ चल रहे थे, उसका दिल बोल रहा था संसार की सबसे खूबसूरत स्त्री ने उसको चूमा, दूसरा मन उसे धिक्कार रहा था, वो सोच hi नहीं प् रहा था तभी उसके कमरे में अक्षरा आ गई,

अक्षरा- तुम यहाँ लेते हो और हम तैयार होकर बैठी हुई हैं,

अक्षरा की आवाज सुनकर देव एक दम खड़ा हो गया, उसका लुंड का उभर उसके कपड़ो में पूरी तरह दिख रहा था, अक्षरा का धयान सीधे वह गया,

अक्षरा- ये क्यों खड़ा ह, और वो दोनों कहा हैं,

देव ने अपने लुंड को देखा, फिर बिस्टेर को देखा जहा खून के बहुत से धभे थे,

अक्षरा ने आगे बढ़ क्र चादर देखि,

अक्षरा- हे लगता ह दोनों का कौमार्य भांग कर दिया तुमने,

देव- वो दोनों शायद अपने कमरे में होंगी, मैं तो सुबह यही छोड़ क्र गया था,

अक्षरा- क्या दोनों यही थी, मर गए,

देव- क्यों क्या हुआ,

अक्षरा- निहारिका माँ आई थी यहाँ, मैं आ रही थी लेकिन दत्त ने मुझे आने नहीं दिया, फिर निहारिका माँ अंदर आई थी, मैं तो भाग गई थी यहाँ से,

देव- क्या ओह्ह्ह, लेकिन माँ ने कुछ कहा नहीं मतलब उन्होंने देखा नहीं होगा, वो पहले hi जा चुकी होंगी,

अक्षरा- है सही बोल रहे हो, अगर माँ देखती तो बहुत मार पड़ती,

देव ने तुरंत बात पलटी,

देव- तुम लोग बहार चलो मैं उन दोनों को लेकर आता हु, अगर वो चलने लायक हैं तो,

अक्षरा हस्ती हुई चली गई,

देव को याद आया उनकी तो हालत ख़राब होगी वो कैसे जाएँगी, देव जल्दी से अमिता के कमरे में गया तो देखा दोनों बहन आराम से बैठ क्र बात क्र रही थी, दोनों के चेहरे से बिलकुल नहीं लग रहा था वो किसी तकलीफ में हैं,

देव को वह देख क्र दोनों ख़ुशी से झूम उठी, और एक दम उठ क्र देव की तरफ चल दी, एक दम उठने से वो थोड़ी सी लड़खड़ा गई,

देव- सम्हाल क्र

सोमिया- हम ठीक हैं,

देव को थोड़ी हैरानी हुई,

देव- क्या बात कर रही हो, तनी जल्दी ठीक कैसेहो सकती हो,

अमिता- हमारे पास जादुई तेल ह जिससे सब कुछ जल्दी ठीक हो जाता ह,

देव- जादुई तेल

सोमिया- अरे स्वेता हमारी दासी को इस बारे में बहुत जानकारी ह, उसने हमे कुछ ऐसी औषधीय बना क्र दी जिससे हम जल्दी ठीक हो गई, बस चलने फिरने में थोड़ा सा दर्द ह,

देव- बहुत बढ़िया, फिर आप दोनों तैयार हो जाओ और जल्दी से बहार आओ, हमे कही जाना ह,

दोनों ने देव की बात मणि और तैयार होकर बहार आ गई, देव उन चारो को रथ पैर बैठा क्र ले गया, सूरज ज्वाला और अभिजीत किन अजर उन पैर बानी हुई थी,

सूरज- देख हरामजादा कैसे चारो को अपने साथ ले जार है ह,

ज्वाला- जल्दी hi हमारे दिन बदल जायेंगे, फिर हम इससे बदला लेंगे, और ऐसा बदला लेंगे की ये याद रखेगा,

अभिजीत- लेकिन सब लोग चले कहा गए, आज तो फैसला होना था फिर महाराज और माँ महल से बहार क्यों गए हैं,

सूरज- जरूर कुछ जरुरी काम होगा,

ज्वाला- इससे ज्यादा जरुरी क्या हो सकता ह, ऐसा लगता ह जैसे हमसे बहुत कुछ छिपाया हुआ ह, यहाँ जो चल रहा ह वो हम ठीक से समझ नहीं प् रहे हैं,

अभिजीत- सही बोल रहे हो, यहाँ बहुत कुछ चल रहा ह,

सूरज- और तुम्हे ऐसा क्यों लगता ह,

अभिजीत- बस लगता ह, कुछ बहुत की खतरनाक पाक रहा ह इस महल में, और कुछ बहुत hi बड़ा होने वाला ह क्योकि माँ ने मुझे,

इतना बोल क्र अभिजीत चुप हो गया,

ज्वाला- माँ ने क्या,

अभिजीत- कुछ नहीं माँ ने मुझे कहा था इस देव से सम्हाल क्र रहना ये बहुत खतरनाक ह,

अभिजीत ने बात बदलने की कोशिश की लेकिन उसमे इतनी अकाल नहीं थी की बात कैसे बदली जाती ह, सूरज और ज्वाला समझ गए की मामला कुछ अलग ह,

देव तो निहारिका से बच क्र चारो बहेनो को लेकर निकल गया लेकिन निहारिका अपने कमरे में बौखलाई सी बैठी हुई थी, वो बार बार अपने होतो पैर उंगलिया फिर रही थी, कभी वो दुखी हो जाती तो कभी मुस्कुरा देती, निहारिके के अंदर एक जवान लड़की जैसे अरमान और भावनाये उभर रही थी, जैसे एक अभी अभी जवान हुई लड़की अपने प्रेमी के साथ पहले चुम्बन के बाद उत्साहित रहती ह, निहारिका के चेहरे पैर कोई पास्चतवा नहीं था, बस एक उलझन थी, देव क्या सोच रहा होगा, इस सब में वो ये भूल hi गई की ये सब शुरू किस बात से हुआ, राजवीर के जिन्दा होने की खबर से,

निहारिका के अरमान जग चुके थे, उसने अपने हर रिश्ते की चिटा जला दी थी, उसके दिल में देव के लिए बेटे से ज्यादा एक मर्द के लिए प्यार पनप चुक्का था, उसने साडी जिंदगी बस खुद को बांध क्र रखा था, ठीक से जवान भी नहीं हो पाई थी की मज़बूरी में शादी करनी पड़ी, और पति से प्यार की जगह बलात्कार जैसा अनुभव मिला था, प्यार क्या होता ह निहारिका को पता hi नहीं था, दुनिया में दो hi लोगो से उसे प्यार मिला था एक उसका भाई राजवीर और दूसरा देव, और देव का प्यार इतना पवित्र था और जो घटनाये निहारिका और देव के बिच घाटी उसके बाद निहारिका का प्यार बदलता चला गया, जिसका इजहार उसने आज के चुम्बन में क्र दिया था,

इधर देव चारो बहेनो को लेकर भौमिक जी के पास पंहुचा, जहा सुगंधा और मनीषा अभी भी अभ्यास कर रही थी,

देव- गुरु जी आज से ये चारो भी युद्ध का अभ्यास करेंगी, इन्हे आत्मरक्षा करना सीखना होगा,

भौमिक जी- क्या महाराज इसकी आज्ञा देंगे,

देव- ये अब महाराज की गुलाम नहीं हैं, हमारे राजय की औरतो को बस अपनी हवस का सामान बनाया हुआ ह इन राजाओ ने, महाभट काल में भी लड़किया योद्धा हुआ करती थी, लेकिन अब तो बस अपनी वासना की आग बुझाने और दूसरे राज्यों से समझौता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता ह,

भौमिक जी ने मुस्कुरा क्र देव के सर पैर हाथ फिराया,

भौमिक जी- शाबाश बीटा, मुझे तुमसे ये hi उम्मीद थी, तुम जरूर इस राजय का भला करोगे,

भौमिक जी ने अभेंद्र को बुलाया और चारो लड़कियों को उसके हवाले क्र दिया,

देव- गुरु जी आज बहुत अजीब घटना घाटी ह, आज महल में राजकुमारियों की शादी का फैसला होना था, लेकिन न जाने क्यों भवर सिंह ने प्रताप सिंह के बेटो को वापस भेज दिया और खुद काम्य और सात्विक के साथ कुछ खास सेनिको को लेकर महल से बहार निकल गए हैं,

भौमिक जी- कहा गए हैं,

देव- कोई नहीं जनता, वो किसी को बता क्र नहीं गए,

भौमिक जी- अचानक ऐसा करना जरूर कुछ बड़ी घटना होने वाली ह,

देव- और राजगुरु महल में नहीं हैं, उनका कार्य सात्विक जी सम्हल रहे हैं,

भौमिक जी- ये और भी ज्यादा खतरनाक ह, सात्विक भवर सिंह को अपनी उंगलियों पैर नचा रहा ह, और भैया महल में क्यों नहीं है, मैं पता करता हु, तुम अपनी तैयारी करो, और खुद को आने वाली हर मुश्किल के लिए तैयार करो, मैं भइया से मिलकर आता हु,

भौमिक जी निकल गए और देव वह सबके साथ खुद को निखारने में लग गया, अक्षरा अमिता और सोमिया से बात करना चाहती थी लेकिन रीवा की वजह से चुप थी,

उधर निहारिका अपने खयालो में बैठी हुई थी, की अचानक उसे याद आया की राजवीर मिल गया ह, वोट क दुखडी हो गई, देव के साथ जो हुआ उस चक्कर में वो राजवीर को भूल hi गई थी, लेकिन देव जा चुक्का था अब वो किस्से पूछे,

वही प्रतापगढ़ से प्रताप सिंह और भानु जो एक सेना लेकर उत्तर दिशा की तरफ दौड़ पड़े, बिना किसी को कुछ बताये, और जब प्रताप सिंह और रेणुका महल में न हो तो समझो पूरा महल आजाद होता था, और वही आजादी रेवती को मिल गई थी, क्योकि प्रताप सिंह के साथ उसके सबसे खास सैनिक गए थे जिनका काम महल के अंदर नजर रखना भी था, उनके जाते hi महल खली सा हो गया था, रेवती को इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला था उसने तुरंत एक दासी के कपडे पहने और महल से निकल गई, लेकिन वो ये भूल गई थी की रेणुका महल में hi ह,

रेवती जैसे hi बहार निकली उसके समाने रेणुका आ गई, जो प्रताप सिंह को विदा करके महल की तरफ आ रही थी, और उसने चल से hi रेवती को पहचान लिया था, रेणुका के खास सेनिको ने रेवती को पकड़ लिया और महल के अंदर ले आये,

रेणुका- हरामजादी फिर से भागने की कोशिश कर रही ह, तुझे पैदा करके इसी दिन के लिए जिन्दा रखा था, तेरे जैसी लड़कियों की वजह से hi महाराज बेटियों को जिन्दा नहीं रखते थे, मेरी जिद की वजह से तू जिन्दा ह और तूने मेरा सर झुका दिया,

रेवती- जब माँ बाप ऐसे हो तो बेटी क्या करे, और किसने कहा मैं बेटी हु यहाँ के राजा की, मुझे तो कभी इस बात का अहसास नहीं हुआ, मैंने तो हमेशा से खुद यहाँ कैदी समझा ह, जब से मैंने होश सम्हाला ह, मैंने कभी पिता का प्यार नहीं देखा, देखा ह तो सिर्फ गुस्सा और कमरे में रहने का आदेश, और आज से पहले मैंने आपको अपनी माँ समझ क्र प्यार दुलार पाया था, आज पता चला वो भी सब झूठा था, मुझे शर्म आ रही ह ये कहने में की मैं इस राजय की राजकुमारी हु,

रेणुका ने रेवती को थप्पड़ मर दिया,

रेणुका- जुबान चलती ह, कोण ह वो जिसके दम पैर तू यहाँ से भागने की कोशिश क्र रही ह, किसने दिए तुझे ये उड़ने के पंख, किसने हमारे राजय में बगावत की ह,

रेवती- इस राजय के नामर्दो में इतनी हिम्मत कहा जो ऐसा कुछ कर सके,

रेणुका- ओह तो महाराज का शक सही तहत ु भवनपुरा के किसी आदमी के साथ भागी थी, तो जरूर अपनी छूट फड़वा कर आई होगी, हरामजादी कलंकनी,

रेवती- कलंकनी कैसी होती हैं, ये मुझे आपसे सिखने की जरुरत नहीं ह,

रेणुका- टब हग रही थी इसका मतलब वो भी इसी महल में आया होगा, तभी तूने भागने की हिम्मत की ह,

रेवती- अभी तो नहीं आया, लेकिन मुझे भरोसा ह वो मुझे लेने जरूर आएगा, और जब वो आएगा तो कसम से वडा करती हु उसी से अपनी छूट फड़वाउंगी, और तुम्हारे देखे सपनो को कभी पूरा नहीं होने दूंगी,

रेणुका ने रेवती को मरना शुरू कर दिया, वो लगातार उसपर थपड मरे जा रही थी, काफी देर पीटने के बाद रेणुका ने उसे कमरे में बंद क्र दिया और अपने सबसे खास आदमी उसकी पहरेदारी में लगा दिए,



उधर राजगुरु पूरी रफ़्तार से घोड़े पैर दौड़े जा रहे थे, रेफर लम्बा था लेकिन वो जल्दी से जल्दी ुए पूरा कर लेना चाहते थे, उनके हाथ में एक नक्शा था जिसके हिसाब से वो चले जार हे थे, उनके पीछे भवर सिंह कमाया और सात्विक जार हे थे अपने सेनिको के साथ, अधिक सैनिक ले जाने की वजह से उनकी रफ़्तार धीमी थी, लेकिन सात्विक अपना धयान लगा क्र राजगुरु किस रस्ते से निकले हैं ये पता कर लेता था और वो लोग भी उसी दिशा में जार हे थे, उनके पीछे थे चरण और संभु जो भवर सिंह की सेना के पीछे पीछे जा रहे थे,
 
अपडेट-37



अँधेरा होना लगा था चारो भेने अब थक चुकी थी,

रीवा- देव घर चले क्या, अब और नहीं होता,

घर का नाम सुनते hi देव घबरा गया क्योकि वह उसे निहारिका का सामना करना था, उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी निहारिका के सामने जाने की, लेकिन घर तो जाना hi था,

देव- है है चलते हैं,

देव उन सबको लेकर महल की तरफ चल दिया, वही भौमिक जी जब राजगुरु के घर पहुंचे तो पता चला की वो सुबह से कही गए हुए हैं और राजा के सैनिक भी राजगुरु को ढूंढ़ने आये थे, और राजगुरु कोई किताब पढ़ रहे थे,

भौमिक जी समझ गए की राजगुरु को कोई जानकारी मिल गई ह, और इसी वजह से सात्विक भवर सिंह को लेकर जरूर उनके पीछे जा रहा ह,

भौमिक को राजगुरु की चिंता होने लगी थी,

देव महल में पहुंच क्र सीधे अपने कमरे में चला गया, वो आज निहारिका से मिलने नहीं गया, वही निहारिका सुबह से बैचैन इधर उधर घूम रही थी, जब रीवा और अक्षरा निहारिका से मिलने आई तो पता चला की देव वापस आ गया ह,

रात में जब सब खाना खाने आये तब भी देव नहीं आया, वो निहारिका का सामना नहीं करना चाहता था, जब देव नहीं आया तो निहारिका अपना और देव दोनों का खाना लेकर देव के कमरे में पहुंच गई, निहारिका को अपने सामने देख क्र देव सर झुका कर खड़ा हो गया, उसकी नजर मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी,

निहारिका देव की हालत को समझ रही थी, निहारिका के चेहरे पैर कोई शर्म या झिझक नहीं थी,

निहारिका- तू आज मिलने नहीं आया मुझसे

देव- वो मैं थोड़ा थक गया था,

निहारिका- इतना थक गया की एक बार माँ से मिलने तक नहीं आ सका, और खाना भी नहीं खाया,

देव- भूक नहीं लगी थी माँ

निहारिका- तू जनता ह न जब तक तू खाना नहीं खता तब तक मैं भी नहीं कहती, तूने ये भी नहीं सोचा की तेरी माँ भुकी रहेगी,

देव को अपनी गलती का अहसास हुआ,

देव- गलती हो गई माँ, माफ़ कर दो,

निहारिका बिना कुछ बोले खाना रख क्र वापस अपने कमरे में चली गई, देव के मन में एक दर्द उभर आया, उसे अहसास हो गया की उसने अपनी माँ का दिल दुख दिया ह,

देव तुरंत खाना लेकर निहारिका के कमरे में पंहुचा,

देव- माँ खाना खा लीजिये,

निहारिका अपनी आँखों में आंसू लिए बैठी थी, निहारिका की आँखों में आंसू देख क्र देव तुरंत उसके पैरो में गिर पड़ा और निहारिका के पेअर पकड़ लिए,

देव- माँ मुझे माफ़ कर दो, मैंने आपका दिल दुखाया ह, मैंने आपको तकलीफ दी ह, आप मुझे सजा दीजिये लेकिन ये आँशु बहा क्र मुझे जिन्दा मत मारिये,

निहारिका ने अपने आंसू पोछे,

निहारिका- तुझे क्या लगता ह मैं क्यों दुखी हु,

देव- मैंने सुबह जो किया उसकी वजह से आप दुखी हैं, मैंने आपका विश्वास तोडा ह, आपका दिल दुखाया ह,

निहारिका- मेरे दुःख का कारन ह किट ु आज तक हमारे बिच के रिश्ते को समझ नहीं पाया, मैंने तुझे संसार के हर रिश्ते से मुक्त किया था, लेकिन शायद मैं उसमे सफल नहीं हो पाई, तू अभी भी उन्ही पुराने रिश्तो में बंधा हुआ ह,

देव- नहीं माँ मैं किसी रिश्ते में नहीं बंधा,

निहारिका- तू अब तक मेरे और अपने रिश्ते से hi बहार नहीं आया ह,

देव- माँ हमारा रिश्ता कैसे भी बदले लेकिन आप मेरी माँ hi रहोगी, और मैंने जो किया वो अपराध ह, मैं खुद को सजा देना चाहता हु, लेकिन मजबूर हु क्योकि मेरी कुछ और भी जिम्मेदारियां हैं,

निहारिका- और मेरे लिए क्या जिम्मेदारी ह तेरी,

देव- ये सब मैं आपके और अपने लिए hi तो क्र रहा हु,

निहारिका- क्या बदला लेना hi मेरा जीवन ह, मैंने जब से जवानी में कदम रखा ह तब से आज तक बस खुद को एक कैदी एक गुलाम बना पाया ह, इस समाज ने इस परिवार ने मुझे हमेशा दर्द hi दिया ह, क्या मेरी जिंदगी हमेशा इसी दर्द में गुजरेगी, क्या मुझे प्यार पाने का अधिकार नहीं ह, क्या मैं इस लायक नहीं की कोई मुझे प्यार करे, मैंने आज तक 3 मर्दो को अपने नजदीक पाया ह, जिसमे से के मेरा भाई था, जिसने मुझे बेटी की तरह प्यार दिया, दूसरा मेरा पति जिसने मुझे कभी इंसान hi नहीं समझा, मैं बस उसके लिए एक खूबसूरत औरत थी जिसका इस्तेमाल वो अपनी वासना की आग ठंडी करने के लिए करता था, और जब से तू पैदा हुआ उसके बाद वो इस काम के लिए भी मेरे पास नहीं आया,

बस तू hi एक सहारा रहा ह मेरा, जो मेरे सबसे करीब था लेकिन एक बेटे के रूप में, सोच में पिछले 20 साल से अपने अंदर की आग को शांत करके बैठी हुई हु, मैंने कभी सोच में भी किसी पराये मर्द को नहीं देखा, भवर सिंह जैसा भी था मेरा पति था, और पति होने के नाते मैंने कभी सामाजिक या धार्मिक अपराध नहीं किया, बस टूट है जिसे मैं अपना दूध पिलाती थी, क्योकि तू मेरा बीटा था, और मेरा दूध आना रुकता नहीं था,

मैंने जीवन भर खुद को रोका ह, क्या मुझे ख़ुशी पाने का अह्दिकर नहीं ह, अब मुझसे बर्दास्त नहीं होता, जब से मैं उस गुफा से वापस आई हु तब से मेरे अंदर की अग्नि अब ज्वालामुखी बन चुकी ह, तू hi बता मैं क्या करू,

देव आंसुओ से भरी आँखों से निहारिका को देख रहा था,

देव- लेकिन माँ मैं आपका बीटा हु,

निहारिका- जिस दिन भवर सिंह ने मुझे और तुझे निर्वस्त्र करके इस राजय से निजकल था उस दिन उससे मेरे सभी रिश्ते ख़तम हो चुके थे, और मैंने खुद को मारा मन लिया था, फिर उसने हमे मरने का आदेश देकर बचा कुछ रिश्ता भी ख़तम क्र दिया था, और जैसा मुझे लगता ह उस रात हम दोनों hi मर चुके थे, भगवान् की कृपा कहो या उस शक्ति की वजह से हम जिन्दा बच गए, लेकिन जब मुझे होश आया तब मैं हर रिश्तो से आजाद थी, और तेरा और मेरा रिश्ता भी था, मरने के बाद कोई रिश्ता नहीं रहता, उस दिन मैं और तू सिर्फ एक मर्द और एक औरत रह गए थे, जैसे तेरे शरीर में बदलाव हुए वैसे मेरे शरीर में भी हुए और मेरे अंदर भी दबी हुई भावनाये ुबाहर आई, और इस सनर में सिर्फ एक तू वो मर्द था जो मेरे करीब था, मेरा अपना था, और हम दोनों का एक दूसरे के साथ नंगे रहना इतना करीब रहना, मेरे अंदर की माँ को मरता चला गया और सिर्फ एक औरत और उसकी िछाये रह गई, जिनमे मैं तुझ प्यार कर बैठी, और मुझे इस बात का कोई पछतावा नहीं ह की मैंने अपने बेटे से प्यार किया ह, मैं इस बात को गर्व से बोल सकती हु की मैंने तुझसे प्यार किया ह, क्योकि इस संसार में तेरे जैसा बीटा और पति प्रेमी दुनिया में कोई नहीं हो सकता,

मैं सिर्फ तुझसे प्यार करती हु, अब तू इस बात को जो चाहे समझ मेरी हवस समझ या मेरे अंदर की गन्दगी समझ लेकिन मैं सिर्फ तेरी हु, ये शरीर सिर्फ तेरा ह, हमारा सिर्ष्ट चाहे हो बन गया हो लेकिन मैं सर्फ तेरे लिए hi पैदा हुई हु,

इतना बोल क्र निहारिका अपने बिस्टेर पैर गिर पड़ी और रोने लगी, देव आँखे फाडे निहारिका को देखता रह गया, उसे समझ नहीं आ रहा था वो अब क्या कहे, और कैसे कहे, वो काफी देर खड़ा रहा फिर वो निहारिका के पास बैठ गया और उसके सर पैर हाथ फिरने लगा,

देव- माँ शांत हो जाइये माँ, शांत हो जाइये, और मुझे माफ़ कर दीजिये, मेरी गलती ह, मुझे आपकी भावनाओ कोसमझने चाहिए था, मुझे समझना चाहिए था सम्भोग हर इंसान की जरुरत होती ह, लेकिन आपकी इस जरुरत को पूरा करने वाला कोई नहीं था, फिर भी आपन खुद को सम्हाल क्र रखा, और आपका प्यार में गन्दगी कैसे हो सकती ह, आपके प्यार से ज्यादा पवित्र तो कुछ हो hi नहीं सकता, आप मुझे प्रेम करती थी फिर भी आपने मुझे दूसरी औरतो के करीब जाने दिया, मुझे बंधा नहीं, हमारी मंजिल के समाने आपने प्यार को दबा दिया, आप महँ हो माँ, और सबसे बड़ा सच ये ह की मैं भी आपसे उतना hi प्यार करता आया हु, इस संसार में आपसे ज्यादा करीब मेरे कोई नहीं था, जब औरत और मर्द का अंतर जानने लगा तब भी सिर्फ आप थी, आपने मुझे सब कुछ सिखाया मुझे इस काबिल बनाया, न जाने कब मैं आपसे प्यार क्र बैठा लेकिन अपने रिश्ते की वजह से खुद को धिक्कारता रहा लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया,

सुबह जब आपने मुझे चूमा तो मैंने कोई विरोध नहीं किया था, बल्कि मैं खुद आपके प्रेम में खो गया था, मेरा दिल बस आपको की चाहता ह लेकिन दिमाग मैंने को तैयार नहीं था, लेकिन अब मेरा दिल और दिमाग दोनों एक जगह हैं और मैं मंटा हु की मैं सिर्फ आपका हु और आप सिर्फ मेरी हैं,

देव की बात सुनकर निहारिका एक दम उठ क्र बैठ गई और देव की आँखों में झाकने लगी, वो देख रही थी की देव कही उसका मन रखने के लिए तो नहीं बोल रहा, लेकिन निहारिका को उसकी आँखों में वो प्रेम साफ़ साफ़ दिख रहा था, दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे,

निहारिका ने तुरंत अपने हॉट देव के होतो से जोड़ दिए, और उन्हें चूमने लगी, वही देव भी पुरे जोश में निहारिका के होतो को चूमने लगा, दोनों एक दूसरे के होतो को खाये जा रहे थे, दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे,






देव ने निहिरका को अपनी गॉड में लिटा लिया और चूमना शुरू क्र दिया, देव का एक हाथ निहारिका की कमर पैर था और दूसरा हाथ निहारिका के उभरे नितम्बो पैर चला गया, कुछ देर पहले दोनों एक दूसरे के सामने आंसुओ के साथ अपने दुःख व्यक्त कर रहे थे, अब वोट क दूसरे को जीवन के सुख की अनुभूति करवा रहे थे,

आज निहारिका ने अपने सबर बांध तोड़ दिया था, आज जिस तरह से वो देव को चुम रही थी देव को किसी औरत की असली ताकत का अहसास हो रहा था, अब तक जितनी भी औरतो से देव मिला था हमेशा देव उन पैर भरी होती था लेकिन आज पहेली बार कोई औरत देव पैर बहरी पद रही थी, वो भी सिर्फ हॉट चूमने से hi, देव की हालत ख़राब हो रही थी, उसका लुंड फटने को तैयार हो रहा था,

ये था असली प्रेम जिसमे दोनों एक दूसरे को इतना बेकाबू कर दे की वो पूरी दुनिया को hi भूल बैठे, दोनों काफी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे, देव के हाथ निहारिका की कमर और नितम्बो पैर घूम रहे थे, वो बड़े प्यार से निहारिका के अंगो को शेला रहा था, जब दोनों के मुँह थक गए तब जाकर निहारिका ने देव को चूमना बंद किया,

निहारिका की आँखे एक दम लाल और नशीली हो चुकी थी, वो किसी जवान भरे हुए जोवन की कुँअरि लड़की की तरह व्यव्हार क्र रही थी, जैसे वो पहेली बार अपने प्रेमी का पति के सामने आई हो,

देव के लिए भी ये एक अलग hi अनुभव था,

देव- माँ मैंने ऐसा अनुभव आज से पहले कभी नहीं किया,

निहारिका- क्योकि आज से पहले तेरे पास ऐसी कोई नहीं आई जिससे तू प्यार करता हो, तू जिसके पास गया ह बस अपनी मंजिल के लिए लेकिन आज तेरा प्यार तेरे पास ह,

देव- माँ मैं प्यार से दूर भागना चाहता था, लेकिन मैं भूल गया था की प्रेम hi जीवन ह,

निहारिका- आज तुझे असली प्रेम का अनुभव होगा, और मुझे भी,

निहारिका ने देव के कपडे खोलने शुरू क्र दिए,

देव थोड़ा सा झिझक रहा था,

देव- माँ क्या ये जरुरी ह, क्या हमारे प्रेम को इसकी जरुरत ह,

निहारिका- नहीं देव प्रेम को सम्भोग की जरुरत नहीं होती, ये मिले या न मिले लेकिन प्रेम हमेशा रहता ह, लेकिन शरीर की सम्भोग की जरुरत होती ह, और एक साथी का कर्त्तव्य होता ह दूसरे सहती की सभी जरुरत को पूरा करना, और मैं जानती ह उतेरी जरुरत इस समय कितनी अधिक ह, और मेरी भी,

देव- आपको तकलीफ होगी माँ,

निहारिका- मैं सेह लुंगी, मैं तैयार हु, मैंने साडी जिंदगी इस प्यार के पालो का इंतजार किया ह, भवर सिंह के साथ जो हुआ वो मेरा बलात्कार जैसा था, मैं इन पालो को जीना चाहती हु, न जाने कब तक जिंदगी हो,

देव- आपको कुछ नहीं होगा माँ,

निहारिका- माँ मत बोल मुझे, आज मुझे पूरी तरह अपनी बना ले,

देव ने तुरंत निहारिका को अपनी बहो में बाहर लिया और उसकी गार्डन चूमने लगा, नारिका भी जल्दी से देव के कपडे खोलने लगी,

कुछ hi देर में दोनों एक दूसरे के समाने नंगे खड़े थे, अब से पहले वो न जाने कितनी बार एक दूसरे को नंगा देख चुके थे, एक साथ नंगे सो चुके थे, एक दूसरे के अंगो को छू चुके थे, लेकिन आज जो अहसास था वो अलग था, आज दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे को और कामुक कर रहे थे, देव की आँखे निहारिका की चूचियों पैर थी, जिनका वो हमेशा से दूध पिता आ रहा था, लेकिन ाक वो चूचिया उसे उत्तेजित क्र रही थी, निहारिका की चूचिया एक दम गोल और कासी हुई थी, उसके चूचक एक दम गुलाबी थे,






निहारिका की नजरे भी देव के कैसे हुए शरीर से होते हुए उसके लुंड पैर टिक गाइट hi, ऐसा लगता था जैसे देव के लुंड का आकर दिन बा दिन बड़ा होता जार है ह, निहारिका की आँखों में वासना तेर रही थी,

देव- आप कितनी खूबसूरत हो माँ, ये संसार ऐसे hi आपकी तारीफ नहीं करता,

निहारिका- मेरी सुंदरता अधूरी ह, उप्पेर वाले ने मुझे सुंदरता तो दी थी लेकिन ऐसी सुंदरता और यौवन को सम्हाल सके ऐसा मर्द मेरी किस्मत में बहुत देर से भेजा ह, इस धरती पैर सिर्फ तू ह जो इस सुंदरता और यौवन को सम्हाल सकता ह, बस तेरा ये पुरुष hi मेरी सुंदरता के काबिल ह,

देव ने निहिरका को बहो में भर लिया और दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे से चिपक गए, नारिका की चुचिअ देव की छाती से रगड़ रही थी, देव के हाथ नारिका के उभरे हुए नितम्बो पे रपहुच गए, देव ने कास क्र नारिका के नितम्बो को भींच लिया, देव का खड़ा लुंड निहारिका की जांघो के बिच घुस गया, दू फिर से एक दूसरे को चूमने लगे,

फिर देव निहारिका को बिस्टेर पैर ले गया और उसे लिटा केर उसके उप्पेर आ गया, देव ने अपने हॉट नारिका की गार्डन पैर रख दिए, देव निहारिका की गार्डन को चूमता हुआ उसकिचुचियो पैर आ गया और जब उसने अपने हॉट निहारिका की चुकी पैर रखे तो निहिरका के मुँह से एक मीठी सी आठ निकल गई, उसने देव का सर अपनी चूचियों पैर दबा लिया, देव ने भी अपने होइत खोल क्र उसके गुलाबी चूचक को अपने डंडो में दबा लिया, और एक हाथ से दूसरी चुकी को मसलने लगा, निहारिका मस्ती में भर्ती जार hi थी, उसका रोम रोम खिल रहा था,






देव बरी बरी से निहारिका की चूचियों को चूस रहा था, लेकिन आज उनमे से दूध नहीं आ रहा था, देव पूरी कोशिश क्र रहा था दूध पिने की लेकिन वह कुछ नहीं था,

देव- माँ इनमे दूध नहीं आ रहा,

निहारिका- अब इनमे दर्द भी नहीं रहता, जब से हम उस गुफा से बहार आये हैं तब से धीरे धीरे इनमे दूध आना बंद हो गया, तूने शायद धयान नहीं दिया लेकिन काफी समय से तूने भी दूध नहीं पिया ह,

देव- ये बड़ा अजीब ह,

निहारिका- शायद इस लिए क्योकि तू अब मेरा बीटा नहीं मेरा पति बनने जार है ह, जब तक तू मेरा बीटा रहा इनमे दूध रहा लेकिन अब हमारा रिश्ता बदल चुक्का ह इसलिए दूध भी बंद हो गया, भूल जा दूध को और इस पल का मजा ले,

देव फिर से चूचिया चूसने लगा, और उसका एक हाथ निहारिका के पेट पैर फिसल रहा था, जो धीरे धीरे उसकी छूट के उप्पेर पहुंच चुक्का था, देव ने छूट के उप्पेर के हिस्से को अपने हाथ से दबाया, निहारिका के हाथ देव के हाथ के उप्पेर आ गए, उसने देव का हाथ कास क्र पकड़ लिए, देव निहारिका के पेट को चूमने लगा, और अपना हाथ निचे खिसकने लगा, निहारिका उसका हाथ रोकना नहीं चाहती थी लेकिन उसके अंदर की घबराहट उसे रोकने पैर मजबूर क्र रही थी,

देव धीरे धीरे उसकी छूट की तरफ हाथ बढ़ा रहा था, और देव ने अपनी मंजिल को प् लिया, उसका हाथ निहारिका की छूट पैर पहुंच गया, और उसने निहारिका की छूट को अपनी मुट्ठी में कास क्र भींच लिया, छूट पैर हाथ लगते hi निहारिका निढाल सी हो गई, उसकी पकड़ ढीली हो गई, निहिरका का हाथ तुरनत देव के लुंड पैर पहुंच गया, और उसने देव का लुंड कास क्र पकड़ लिए, देव ने उसकी छूट को अपनी उंगलियों से रगड़ा तो निहारिका ने भी लुंड को कास क्र पकड़ा और उसकी चमड़ी को पीछे की तरफ खींचा, जिससे देव को और मजा आया और उसने भी निहारिका की छूट को जोर से रगड़ दिया, निहारिका एकदम उछाल सी पड़ी, छूट पहले से hi गीली थी देव का पूरा हाथ छूट के रास में भीग गया,

देव- कितनी खूबसूरत और कासी हुई ह आपकी

निहारिका- मेरी क्या

देव- आपकी वो,

निहारिका- बोल न एक बार क्या कासी हुई ह,

देव- आपकी छूट

निहारिका- ahahhhhhhhhhh कितना अच्छा लगता ह तेरे मुँह से सुन्ना, आज तू इसे ढीली कर दे, साडी अकड़ निकल दे इसकी,

देव ने तुरंत अपने हॉट छूट से थोड़े से उप्पेर रख दिए, निहारिका ने अपना हाथ हटा लिया था, वो बस देव के लुंड को आगे पीछे किये जार hi थी, देव का लुंड जो उसकी मुट्ठी में भी ठीक से नहीं आ रहा था, गरम लुंड का अहसास निहारिका को और रोमांचित क्र रहा था,

देव ने एक दम निहिरका को पलट दिया, जिससे निहिरका के बड़े बड़े कैसे हुए गोल नितम उसके समाने आ गए, जिन्हे देख क्र देख का लुंड झटके मरने लगा,

निहारिका- क्या हुआ

देव- आपके नितम्ब निकटने खूबसूरत हैं, ऐसा आकर आज तक किसी का नहीं देखा,

देव दोनों नितम्बो को पकड़ क्र हिलने लगा, निहारिका मजे में पागल हुई जार hi थी, फिर देव ने निहिरका की कमर को चूमना शुरू किया और उसके नितम्बो ताका ा गया, वो निहिरका के नितम्बो को भी चूमने लगा अपने दांतो से काटने लगा,

निहारिका से बर्दास्त करना मुश्किल हो गया था, उसकी छूट अब पूरी तरह तैयार थी छोड़ने के लिए, निहिरका उठी और देव के हॉट चूमने लगी,

निहारिका- अब और मत तड़पा,

देव- आज आपको वो प्यार मिलेगा जिसकी आप हक़दार हैं, आज आपको जीवन का असली मजा दूंगा मैं,

देव ने निहारिका को धकेल क्र बिस्टेर पैर लिटाया और उसके पैरो के बिच में आ गया, और मुस्कुराते हुए अपने हॉट निहारिका की छूट पैर रख दिए, निहिरका एक दम उछाल पड़ी, जिस आनंद की अनुभूति उसे हुई थी उसे वो शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती थी,






Ahhhhhhhhhhhhhh देव uuffffffffffffffff क्या कर दिया, देव ने जीभ निकल क्र निहारिका की छूट में घुसा दी और पूरी तरह गीली छूट का रास चूसने लगा, निहारिका कभी देव के बाल खींचती तो कभी अपनी कमर उछलने लगती, आज उसे अहसास हो रहा था सम्भोग में कितना मजा आता ह, ऐसा मजा जो इंसान से कुछ भी करवा सकता ह, देव पुरे जोश में निहिरका की छूट चूस रहा था,

निहारिका से अब बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसे आज तक ये भी नहीं पता था औरत का चरमसुख कैसे होता ह, लेकिन देव इस तरह से निहारिका की छूट चूस रहा था की वो उसी में झड़ने लगी, और अपनी छूट देव के मुँह पैर रगड़ने लगी, देव समझ गया उसकी माँ झाड़ रही ह, तो उसने और तेजी से छूट को कुरेदना शुरू क्र दिया, कुछ देर में निहारिका झाड़ क्र शांत हो गई, उसकी सांसे फूली हुई थी, देव ने अपना मुँह उप्पेर उठाया, तो निहारिका ने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए, और देव के होतो पैर लगे अपने hi छूट क ेरस का सवाद लेने लगी,

निहारिका- कितना आनंद दिया ह तूने, इतना सुख मैंने कभी अनुभव नहीं किया,

देव- अभी आपने असली आनंद लिया hi कहा ह, वो तो अभी बाकि ह,

निहारिका ने देव के बराबर में लिटाया जिससे देव का लुंड हवा में खड़ा हो गया,

निहारिका- ये तो और बड़ा होता जा रहा ह,

देव- ये भी उतावला हो रहा ह,

निहारिका ने देव के लुंड को मुट्ठी में पकड़ा और हिलने लगी, वो बड़े प्यार से लुंड की चमड़ी को उप्पेर निचे कर रही थी, फिर उसने लुंड का टोपा अपनी चूचियों के चुचकों पैर रगड़ना शुरू क्र दिया, निहारिका के नादेर की शर्म बिलकुल ख़तम हो चुकी थी, वो ऐसी हरकते कर रही थी जैसे उसके सामने उसका आशिक लेता हो और आज उसे दुनिया का असली मजा देना हो,

फिर निहारिका ने अपनी जीभ निकल क्र लुंड को चाट लिया, देव के मुँह से अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई,

निहारिका ने एक बार देव को देखा फिर अपना मुँह खोल क्र लुंड को मुँह में लेने की कोशिश करने लगी,






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लुंड मोटा था लेकिन निहारिका फिर भी पूरी कोशिश कर रही थी, उसने काफी लुंड मुँह में ले लिया, देव को हैरत हुई, जिस लुंड के टोपे को भी बड़ी बड़ी चुदकड़ औरते ठीक से मुँह में नहीं ले पति वही उसकी माँ उस लुंड का काफी भाग अंदर ले गाइट hi,

निहारिका ने आधा लुंड मुँह में ले लिया था, लेकिन जब वो बहार निकलने लगी तो लुंड फास गया, उसका मुँह लुंड पैर कास गया था, वो छह क्र भी बहा रही निकल प् रही थी, फिर उसने अपना सर हिला हिला क्र लुंड को बहार निकला, उसकी सांसे उखड चुकी थी, आँखों में आंसू थे लेकिन चेरे पैर मुस्कान थी, वो है रही थी,

देव- आपको तकलीफ होगी माँ

निहारिका- फरक नहीं पड़ता, और मुझे तकलीफ का ज्यादा अहसास नहीं होता,






निहिरका फिर से लुंड गई लुंड चूसने, जो निहारिका कर रही थी वो देव के लिए भी अनोखा था, ऐसा करने की हिम्मत किसी में नहीं थी, निहारिका ने देव को खड़ा किया और लुंड को पूरा मुँह में लेने लगी, और निहारिका ने कमल hi कर दिया, देव का इतना बड़ा लुंड आधे से ज्यादा मुँह में ले लिया था, जो उसके गले तक पहुंच गया था,





निहारिका के मुँह से थूक बह रहा था, पूरा लुंड भीग चुक्का था, निहारिका लुंड हकस रही थी और दोनों हाहतो से उसकी मालिश कर रही थी, देव के दिमाग में कुछ नया आया उसने निहारिका को उठाया और उल्टा कर दिया, निहारिका हवा में hi देव की बहो में थी उसका सर निचे और छूट देव के मुँह के सामने थी,

निहारिका – ये क्या कर रहे हो देव

देव- दोनों काम एक साथ करते हैं न,

देव ने अपना मुँह निहारिका की छूट पैर लगा दिया, निहारिका ने भी लुंड को पकड़ा और मुँह में लेने लगी, दोनों एक दूसरे को मजा दे रहे थे,

एक बहुत hi अलग मजा था,

लेकिन जब निहारीखा थकने लगी उसकी छूट अब लैप लपा रही थी,

निहारिका- बस देव अब दाल दे अपना, मुझसे और बर्दास्त नहीं हो रहा ह,

देव ने निहिरका को बिस्टेर पैर लिटाया, और उसके पैरो एक बिच आ गया, निहारिका ख़ुशी से अपना सर उठा कर देख रही थी,

देव ने अपना लुंड उसकी छूट पैर रगड़ना शुरू क्र दिया,






निहारिका- मत कर, दाल दे इसे मेरे अंदर, और मत तड़पा अपनी माँ को,

देव- क्या दाल दू माँ और कहा दाल दू,

निहारिका- अच्छा शैतानी कर रहा ह,

देव- आपने hi सिखाया

नारिका- तो दाल से अपना ये लुंड मेरी छूट में, उस छूट में जिससे तू पैदा हुआ ह, तेरा ये शरीर और तेरा ये बड़ा सा लुंड इसी छूट में से निकला ह, आज इसी लुंड को अपनी माँ की छूट में, फाड् दे इस छूट को,

निहारिका की बातो से देव जोश में आ गया और उसने लुंड छूट पैर लगा क्र एक जोर दर धक्का मारा, और पहले hi धक्के में लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, जिससे निहारिका की एक चीख निकल गई, लुंड का टोपा और थोड़ा सा भाग छूट में घुस गया था,

निहारिका ने चादर को अपने हाथो में कास लिया था, उसके दन्त भींच गए थे, लेकिन चीख इतनी भयंकर नहीं थी जैसा देव ने उम्मीद किट hi, निहारिका पहला झटका बर्दास्त क्र गाइट hi, देव ने और दबाव बनाया, लुंड थोड़ा और अंदर खिसक गया, छूट लुंड पैर कास चुकी थी, देव हैरत से निहारिका को देख रहा था,






देव- आपको बहुत दर्द हो रहा होगा माँ

निहारिका- है दर्द तो हो रहा ह लेकिन उतना नहीं जिसे मैं बर्दास्त न कर सकू, तू रुक मत दाल दे पूरा अंदर, देव भी दबाव बनता चला गया, और लुंड छूट को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा अंदर घुस गया, अब निहारिका के मुँह से बस बस निकला, लुंड काफी अंदर घुस चुक्का था, छूट का चला लुंड पैर कैसा हुआ था, निहारिका ने हाथ निचे ले जाकर अपनी छूट को छू क्र देखा, उसे अहसास हुआ की लुंड किस तरह से छूट में फसा हुआ ह,

निहारिका- आज मुझे सकूं मिला, आज मैं पूरी तरह औरत बन गई हु,

देव- माँ आप इसे झेल कैसे रही हो, इतना अंदर तक आज तक कोई औरत नहीं ले पाई, और आपने पहेली बार में hi ीनता अंदर ले लिया ह,

निहारिका- क्योकि मैं hi हु जो तेरे लिए बानी हु, मुझे उम्मीद ह तेरे इस बड़े लुंड को झेलने की छमता मुझमे hi ह,

देव ने हल्का सा लुंड बहार खींचा और फिर अंदर धकेल दिया, लुंड बड़ी मुश्किल से अंदर बहार हो प् रहा था, कुछ hi देर में छूट से लुंड के साथ में खून बहार आने लगा था, जिससे छूट में चिकनाहट होने लगी थी, और जल्दी hi निहारिका की छूट भी पानी छोड़ने लगी थी, लुंड थोड़ा थोड़ा अंदर बहार हो रहा था, लेकिन जब भी देव लुंड को बहार खींचता तो निहारिका की छूट भी उसके साथ hi बहार को खींची आ रही थी और लुंड के साथ hi अंदर घुस जाती,






निहारिका के मुँह से बस आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh निकल रही थी, उसे दर्द तो हो रहा था लेकिन वो उसे बर्दास्त कर सकती थी, दोनों को इस बात का अहसास hi नहीं था ऐसा क्यों हो रहा ह, वो दोनों hi भूल गए थे की उनके अंदर शक्ति है, जिसने उन्हें ऐसा बना दिया ह की कोई भी दर्द उन्हें दर्द नहीं दे सकता, इसका फायदा दोनों को हो रहा था, निहारिका ितं ेबड़े लुंड को आराम से झेल जा रही थी और उसका मजा भी ले रही थी, वही देव पहेली बार अपने लुंड को इतना अंदर तक घुसा रहा था, उसे भी मजा आ रहा था,

कुछ hi देर में लुंड अब आराम से अंदर बहार होने लगा और न जाने कब पूरा लुंड निहारिका की छूट में घुस गया था, देव पुरे जोश में आ चुक्का था, उसके धक्के तेज हो चुके थे, वही निहारिका भी उसका पूरा साथ दे रही थी, दोनों की चुदाई को काफी देर हो चुकी थी, देव इस चुदाई को और रंचक बनाना चाहता था उसने लुंड बहार निकला और निहारिका को घोड़ी बना दिया, और लुंड छूट पैर लगा क्र एक hi बार में पूरा अंदर घुसा दिया, इस बार निहारिका की एक दर्द बहरी चीख निकली,






निहारिका- मैंने सिर्फ ये आसान काम शास्त्र की कितम में देखे हैं,

देव- आज मैं आपको सरे आसान करवा दूंगा माँ,

देव ने धक्के लगाने शुरू क्र दिए, और धक्के इतने तेज थे की दोनों के शरीर जब आपस में टकरा रहे थे तो थप थप की आवाज पुरे कमरे में गूंज रही थी,

निहारिका- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhh देव बहुत मजा आ रहा ह, तूने अबसे पहले मुझे क्यों नहीं छोड़ा, मैं कितनी प्यासी थी, ahhhhhhhhhhhhhh तू जवानी में मुझे क्यों नहीं मिला, मेरा कौमार्य तूने भांग क्यों नहीं किया, ahhhhhhhhhhhhhhh

देव- आपकी छूट से खून निकल रहा ह माँ, आपका असली कौमार्य मैंने hi भांग किया ह,

दोनों चुदाई का पूरा आनंद उठा रहे थे, दोनों में से कोई झड़ने को तैयार नहीं था, दोनों को काफी देर हो चुकी थी, फिर देव ने निहारिका को अपनी गॉड में बैठा लिया और निचे से लुंड घुसा दिया, और गॉड में hi उछलने लगा, अब निहारिका भी खुद उसके लुंड पैर उछाल रही थी,






फिर देव निहारिका को गॉड में लिए हुए hi खड़ा हो गया और खड़े खड़े hi उसे अपने लुंड पैर उछलने लगा, निहारिका ने भी उसकी गार्डन में हाथ दाल दिए थे और खुद भी पुरे जोश में उछाल रही थी,





आज पहेली बार देव इतने जोश में किसी को छोड़ प् रहा था, सिर्फ निहारिका hi पहेली चुदाई का अनुभव नहीं कर रही थी देव को भी ऐसा hi लग रहा था जैसे वो पहेली बार चुदाई कर रहा ह,

दोनों में से कोई भी थकने को तैयार नहीं था, दोनों की चुदाई को काफी समय बीत चुक्का था, अब देव और रुकना नहीं चांटा था, वो असली सुख का मजा लेना चाहता था, उसने निहारिका को बिस्टेर पैर लिटाया और उसके उप्पेर आकर लुंड को बड़े प्यार से अंदर घुसाया और बहुत hi धीरे धीरे पूरा लुंड बहार निकलता और धीरे से अंदर घुसा देता, जैसे hi लुंड अंदर जाकर निहारिका की बच्चे दानी को टकराता तो निहारिका मस्ती में उछाल पड़ती, ये चुदाई निहारिका को बहुत मजा दे रही थी, और उस मजे को वो बर्दास्त नहीं कर पाई,






आज से पहले उसके लिए ये hi चुदाई होती थी, लुंड घुसा क्र धक्के लगाना, इसलिए उसे पता hi नहीं था चरमसुख कैसे पाया जाता ह, लेकिन देव उसे असली चुदाई का अनुभव करवा रहा था, और उसका परिणाम ये हुआ की निहिरका का शरीर अकड़ने लगा, उसे खुद समझ नहीं आ रहा था क्या हो रहा ह, और फिर वोट क जोर दर चीख के साथ झाड़न ेलगी, और देव ने अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी,

अहहह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhh छोड़ो छोड़ो जोर से छोड़ो ऐसे हो छोड़ते रहो अपमी माँ को ahhhhhhhhhhh ahahhhhhhhhhh

हे ये मजा आह्ह्हह्ह्ह्ह मैं हवा में उड़ रही हु, ahhhhhhhhhhhhh देव मुझे थम ले, aahhhhhhhhhhh जोर से छोड़ दे मुझे aahhhhhhhhhhhh,

निहारिका बहुत देर तक बड़बड़ाती रही जब तक वो पूरी तरह झाड़ क्र शांत नहीं हो गई, इधर देव पूरी ताकत से धक्के लगा रहा था और जैसे hi निहारिका शांत हुई देव के लुंड ने आपने लावा उगलना शुरू क्र दिया, आज उसे ऐसा लगा जैसे उसकी पूरी ताकत उसके लुंड के रस्ते निकल गई हो,

देव निहारिका के उप्पेर लेट गया, निहारिका ने देव को अपनी बहो में कास लिया, दोनों बहुत देर तक ऐसे hi एक दूसरे से चिपके लेते रहे, कमरे में बस उनकी सांसो की आवाज आ रही थी, लुंड अभी तक छूट में फसा हुआ था,

देव ने लुंड बहार निकला और निहारिका से चिपक क्र लेट गया,

दोनों शांत थे, फिर निहारिका उठी और खुद को साफ़ करने चली गई, उसे चलने में थोड़ी तकलीफ थी जिससे वो अपने पेअर खोल क्र चल रही थी, जिस वजह से उसकी गांड और घूम घूम क्र चल रही थी, देव लेता हुआ निहारिका की गांड को hi देख रहा था, उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था इतनी चुदाई के बाद निअहारिका चल कैसे प् रही ह, निहारिका खुद को साफ़ कारक आई तो देव चला गया, तब तक निहारिका ने बिस्टेर की चादर बदल दी थी, चादर पैर लगा खून देख क्र निहारिका ख़ुशी से मुस्कुरा दी, फिर वो बिस्टेर पैर न लेट क्र जमीन पैर लेट गई जहा वो सोती थी,


देव बहार आया और निहारिका को निचे लेता देख उससे पास जाकर लेट गया,
 
अपडेट- 38




इधर देव और निहारिका की चुदाई चल रही थी वही अक्षरा अमिता और सोमिया के साथ लेती हुई उनकी चुदाई का किस्सा सुन क्र गरम हो रही थी, दोनों भेने अच्छे से तड़का लगा क्र अपनी चुदाई का किस्सा सुना रही थी, उधर एक और प्रेम कहानी पनप रही थी, दो मासूम लोगो के बिच में एक अलग hi रिश्ता पनप रहा था जो थे मनीषा और अभेंद्र, मनीषा के दिल में अभेंद्र के लिए भावनाये बदलने लगी थी, क्योकि अभेंद्र उसे वो सम्मान देता था जो उसके अपनों ने भी नहीं दिया था, लेकिन मनीषा खुद को बंधे हुए थी क्योकि वो जानती थी की उसकी इज्जत वो जानवर लूट चुके हैं, और वो खुद को इस काबिल नहीं समझती थी की कोई उसे प्यार क्र सकता ह, इसलिए उसके दिल में बस सम्मान तो था लेकिन प्यार का अहसास नहीं हो प् रहा था,

वही अभेंद्र के अंदर भी मनीषा के लिए सम्मान से बढ़ क्र कुछ होने लगा था, लेकिन वो डरता था कही मनीषा उसे बाकि मर्दो जैसे फायदा उठाने वाला न समझ ले,

मनीषा की नजरो को सुगंधा ने बहुत बार परखा था, और वो उन नजरो का मतलब अच्छे से समझती थी क्योकि वो खुद देव को हमेशा ऐसी hi नजरो से देखती रहती थी, लेकिन वो उन दोनों के बिच बोलना नहीं छाती थी,

इधर राजगुरु सुबह से भूखे प्यासे चलते हुए एक राजय में रुक गए, उनका घोडा भी बहुत थक चुक्का था, वो एक धरम शाला में रुक गए आराम करने के लिए,

सात्विक लगातार राजगुरु पैर नजर बनाये हुए था, वो राजगुरु से कुछ दूर पहले hi रुक गया,

भवर सिंह- हम रुके क्यों हैं, हमे जल्दी से जल्दी वह पहुंचना होगा,

सात्विक- हम भैया के पीछे जा रहे हैं, अगर हम उनसे आगे निकल गए तो हमे कैसे पता चलेगा वो कहा जा रहे हैं,

काम्य- सात्विक जी सही बोल रहे हैं, हमे सबर करना होगा,

भवर सिंह में अब सबर नहीं था, वो उतावला हो रहा था शक्ति पाने के लिए,

वही उनके पीछे लगा हुआ चरण और संभु लगातार अपने जासूस से प्रताप सिंह और सेना को खबर भिजवा रहा था,

मंजिल अभी दूर थी, लेकिन नजरे सबकी उसी मंजिल पैर तिकी हुई थी,

इधर महल में एक जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों माँ बीटा एक दूसरे से चिपक क्र लेता था, आज पहेली बार देव को कोई उसकी टक्कर की मिली थी, इतनी लम्बी चुदाई में सिर्फ एक बार झड़ी थी निहारिका वो तो तब जब वो इतने सालो बाद सम्भोग क्र रही थी, देव को पहेली बार हलकी सी थकन महसूस हुई थी, लेकिन आज जैसा आनंद उसे कभी नहीं आया था,

निहारिका- तू चुप क्यों ह,

देव- बस ऐसे hi, इस पल को अच्छे से महसूस कर रहा हु,

निहारिका- तेरे लिए ये नया नहीं ह लेकिन मैं जैसा महसूस कर रही हु, वो मैं समझा भी नहीं पाऊँगी, इतना सुख इतना आनंद मिला है की मन करता ह इसके बाद कुछ नहीं चाहिए,

देव- लेकिन आप इतना बड़ा झेल गई वो भी पहेली बार में hi, और दर्द की जगह आपने आनद लिया ह,

निहारिका- मुझे लगता ह, जिस शक्ति की तू बात कर रहा था उसका कुछ अंश मेरे अंदर भी आया ह, जिस वजह से मुझे दर्द ज्यादा महसूस नहीं होता,

देव- लेकिन मुझे याद ह उस रौशनी के बिच में मैं गिरा था, आप और दूत तो अलग गिरे थे,

निहारिका- लेकिन हम भी एक दम ठीक और सवस्थ हैं, मतलब हमारे अंदर भी शक्ति आई ह, हमे कुछ याद नहीं हम तो शायद बेहोश थे,

देव- वह भौमिक जी और सात्विक जी के अंदर भी शक्ति आधी आधी गई ह, क्योकि दोनों उस शक्ति के करीब थे, तो क्या हम तीनो के अंदर भी बराबर शक्ति गई ह, अगर मेरी ताकत बढ़ी ह तो आपकी भी बढ़ी होगी,

निहारिका- ये समय शक्ति की बात करने का नहीं ह, बस इस पल को जीने का ह, मैं छाती हु ये पल यही रुक जाये, मैं जीवन भर के लिए तेरी बहो में ऐसी hi लेती रहु, और ये जीवन कभी ख़तम न हो,

देव- इतना प्रेम करती हैं आप,

निहारिका- मेरा सीना चिर के देख ले बस तू hi दिखेगा,

देव निहारिका से लिपट गया, और उसके होतो को चूमने लगा, और कुछ hi देर में देव का लुंड फिर से खड़ा हो गया, जो सीधे निहारिका छूट पैर रगड़ने लगा,






निहारिका मुस्कुराई और एक दम देव के उप्पेर आ गई और उसका लुंड पकड़ क्र अपनी छूट में लगाया और उस पैर बैठ गई, ये एक और कमल था की इतनी तगड़ी चुदाई के बाद निहारिका फिर से तैयार थी,





निहारिका पुरे जोश में देव के लुंड पैर उछाल रही थी,





फिर देव ने उसे बराबर में लिटा लिया और उसका पेअर उठा क्र अपनी कमर पैर रखा और लुंड छूट में घुसा कर धक्के लगाने लगा,





tanager place

अलग अलग आसान में देव ने निहारिका को बहुत देर तक छोड़ा, इस बार की चुदाई पहले से भी ज्यादा जानलेवा थी, देव के धक्के इतने तेज थे की कोई साधारण लड़की की तो हड्डिया hi टूट जाती, लेकिन निहारिका बड़े आराम से झेल रही थी,

दोनों की चुदाई पूरी रात चली, सुबह होते होते देव नारिका को तीन बार छोड़ चुक्का था, फिर बह दोनों रुकने को तैयार नहीं थे, सुबह महल में चहल पहल होने लगी थी, और निहारिका देव के लुंड पैर अपना मुँह रख क्र लेती हुई थी,

देव- माँ उठिये सुबह हो चुकी ह

निहारिका- होने दे मुझे फरक नहीं पड़ता, मैं तुझसे और इससे दूर नहीं होना चाहती, मेरा अभी मन नहीं भरा ह,

देव को बड़ी हैरत हुई, जिस औरत ने 20 साल खुद को रोक क्र रखा आज वोट क पल के लिए रुकना नहीं चाहती थी, देव ने निहारिका को उठाया और दीवार से लगा कर पीछे से फिर से लुंड दाल दिया, और छोड़ने लगा, ये चुदाई और लम्बी चली,














इधर चारो भेने तैयार होकर देव के कमरे में गई देव वह नहीं था, वो निहारिका के कमरे में गई लेकिन दत्त ने जाने नहीं दिया, अक्षरा बहार कड़ी देव देव चीला रही थी और देव निहारिका की छूट को अपने लुंड से फाड़ रहा था, उसके कानो में बस निहारिका की सिसकियों की आवाज गूंज रही थी,

खेर लम्बी चुदाई के बाद देव जब शांत हुआ तो उसे अक्षरा की आवाज आई वो जल्दी से कपडे पहन क्र बहार आया, तो देखा चारो भेने तैयार कड़ी हैं, और देव की हालत कुछ और hi थी, बाल बिखरे पड़े थे, कपडे भी असत व्यस्त हो रहे थे, आँखे लाल थी

चारो भेने अजीब नजरो से देव को देख रही थी,

रीवा- तू क्या कर रहा था, तेरी सांसे ऐसे क्यों फूली हुई हैं, और ये क्या हुलिया बना रखा ह,

देव- अरे वोट क दम से नींद से जगा न तो हड़बड़ाहट में ऐसा हो रहा ह, तुम लोग चलो मैं कुछ देर में आता हु,

रीवा कमरे के अंदर जाने लगी लेकिन देव ने रोक दिया,

देव- माँ सो रही हैं उन्हें मत जगाओ, वो रात काफी परेशां थी इसलिए देर से सोइ,

रीवा रुक गई, और वापस चली गई, देव ने रहत की साँस ली और कमरे में चला गया तैयार होने,

सभी फिर से युद्ध अभ्यास की जगह पैर पहुंच चुके थे, लेकिन आज वह भौमिक जी नहीं थे, और अभेंद्र कुछ परेशां सा खड़ा था,

देव- अभेंद्र क्या हुआ, ऐसे क्यों परेशां से हो,

अभेंद्र- देव बात hi कुछ ऐसी ह,

देव- क्या हुआ, गुरु जी ठीक हैं,

अभेंद्र- गुरु जी तो ठीक हैं, उन्होंने सन्देश भिजवाया ह की वो किसी चीज के बारे में खोज क्र रहे हैं, जल्दी hi आएंगे, लेकिन

देव- लेकिन क्या

तभी अंदर से एक दासी निकल क्र आई, ये तो रेवती की दासी, देव ने उसे प्रताप सिंह के महल में देखा था, रेवती एक साथ जब वो उस बगीचे में पहेली बार रेवती से मिला था,

देव- ये यहाँ

अभेंद्र- जी, ये कल पुरे दिन का सराफ करके आज सुबह सुबह hi यहाँ पहुंची हैं, और बहुत hi जरुरी सन्देश लेकर आई हैं,

देव- कैसा सन्देश

दासी की ले हुई चिट्ठी अभेंद्र ने देव को दे दी,

देव ने चिट्ठी खोली और पढ़ने लगा,

मैं बहुत hi शर्मिंदा होकर ये पत्र लिख रही हु, मैं तुम्हारे साथ रही लेकिन तुम्हे समझ नहीं पाई, मैं हु hi मूरख मैं अपने माँ बाप के साथ रह क्र उन्हें hi नहीं समझ पाई आज तक, लेकिन आज मेरी आँखे खुल चुकी हैं, और मैं तुम्हसे माफ़ी मांगना चाहती हु, जैसे यहाँ हालत हैं उस हिसाब से ये मेरा अंतिम समय ह, मैं खुद को मार लुंगी, मेरे पिता मेरे साथ दुराचार करना चाहते हैं, और मेरी माँ वो उस दुराचार का आनंद लेना चाहती है, लेकिन ये मुझे बुल्कुल स्वीकार नहीं ह, मैं खुद को ख़तम कर लुंगी, बस एक hi आस पैर मैं खुद को जिन्दा रखे हुए हु किट ुम मुझे माफ़ कर डोज और मुझे इस कैद से बचा लोगे, आने वाली अमावस तक मैं खुद को बचाये हुए हु, लेकिन उसके बाद मैं खुद को ख़तम कर लुंगी, और मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हु, जब से तुमसे मिली तब से करती आई हु, तुमसे अलग होकर भी मैं तुमसे नाराज थी लेकिन प्रेम सिर्फ तुम्ही से था, अब ये तुम्हारे उप्पेर ह की मेरा प्रेम सफल होता ह या नहीं,

तुम्हारी प्रेम दीवानी रेवती,

चिट्ठी पढ़ क्र देव के दिमाग घूम गया,

देव- अमावस कब ह

अभेंद्र- परसो ह,

देव- अभेंद्र एक चिट्ठी लिखने का इंतजाम करो,

अभेंद्र तुरनत सामान ले आया, देव ने एक चिट्ठी लिखी और दासी को दी,

देव- इस चिट्ठी को अपनी राजकुमारी को दे देना, और जल्दी से जल्दी महल में पहुँचो, अभेंद्र इन्हे अपने साथ ले जाओ और जितना जल्दी हो सके इनके राजय में पंहुचा दो,

अभेंद्र तुरंत उस दासी को लेकर निकल गया,

चारो भेने और सुगंधा कड़ी देख रही थी,

अक्षरा- देव क्या हुआ ह

देव- कुछ नहीं, प्रताप सिंह का अंतिम समय आ गया ह, वो पूरी तरह से गिर चुक्का ह, आप लोग अभ्यास कीजिये, मैं अभी आता हु,

देव अपने मां को देखने चला गया, राजवीर की हालत में काफी सुधर था लेकिन अब तक ठीक से होश नहीं आया था, देव वह से भौमिक जी के पास पंहुचा,

देव- गुरु जी आप किस कार्य में लगे हुए हैं

भौमिक जी- एक युद्ध होने वाला ह, और कुछ बाते हैं जो मुझे परेशां कर रही हैं,

देव- कैसी बाते गुरु जी,

भौमिक जी- ये शक्तिया, इन शक्तियों के बारे में मैं अब तक ठीक से समझ नहीं पाया हु, ये शक्तिया इंसान में क्या क्या बदलाव कर रही हैं, कभी इनका इस्तेमाल बड़ा आसाम दीखता ह कभी बहुत hi मुश्किल, मैं बहुत बार भविष्य देख पता हु लेकिन बहुत बार कुछ नहीं दीखता,

देव- आप क्या देखने की कोशिश कर रहे हैं,

भौमिक जी- तुम्हारा भविष्य,

देव- मेरा भविष्य

भौमिक जी- है क्योकि यहाँ जो भी हो रहा ह उसके केंद्र बिंदु तुम hi हो, क्योकि सिर्फ तुम हो जिसके काबू में ये शक्ति ह, वर्ण ये शक्तिया इंसान को भरष्ट क्र देती हैं, फिर ऐसा क्या हुआ ह जिससे तुम इतने सुरक्षित रहे हो, और तुम्हारे अंदर क्या क्या शक्तिया हैं,

देव- गुरु जी आप भी तो सही रस्ते पैर हो,

भौमिक जी- मुझे सही रस्ते पैर आने के लिए खुद को बहुत सयम में रखना पड़ता ह, बहुत धयान लगाना पड़ता ह, और मैं खुद अपनी शक्तिया पता नहीं कर पाया हु, लेकिन मुझे तुम्हारी शक्तिया जननी हैं, क्योकि आने वाले युद्ध में तुम्हरी शक्तियों के बल पैर hi फैसला होगा,

देव- मैं नहीं जनता गुरु जी,

भौमिक जी- क्या तुम मुझे फिर से बताओगे वह क्या हुआ था,

देव ने फिर से साडी बात बताई,

भौमिक जी- मतलब जब तुम उस गुफा में गिरे तो तुम बेहोश हो चुके थे, और जब उठे तो रानी निहिरका का हाथ तुम्हारे हाथ में था और तलवार उस चीता के पेट में थी जिसे तुमने पकड़ा हुआ था,

देव- जी है गुरु जी और जब मैंने टेलर निकली तो वो चीता भी उठ क्र खड़ा हो गया,

भौमिक जी- क्या तुम्हे उस बेहोशी के बिच कुछ भी याद ह, ऐस ाकुछ जैसे तुम किसी रौशनी में हो, या किसी और दुनिया में हो,

देव- कुछ देर के लिए ऐसा लग रहा था जैसे मैं हवा में उड़ रहा हु, मुझे कुछ नहीं दिख रहा था ाँकेः बंद थी,

भौमिक जी- वो तीसरी शक्ति जल्दी hi सामने आने वाली ह, और वो शक्ति क्या रूप लेगी मुझे नहीं पता, और मैं ये भी नहीं जनता ये तीनो शक्तिया एक सामान ह या काम ज्यादा हैं, तो मैं धयान लगा रहा हु ताकि इन शक्तिया की छमता को जान सकू,

देव- ठीक ह गुरु जी आप धयान लगाइये, मैं एक और कार्य ख़तम करके आता हु, और मां कब तक ठीक हो जायेंगे,

भौमिक जी- फ़िलहाल वो खतरे से बहार ह, होश कब तक आता ह ये पता नहीं,

देव- वो सुरक्षित हैं यही काफी ह,

देव वह से निकला गया और भौमिक जी अपने धयान में लग गए,

देव वापस लड़कियों के पास आया और कुछ देर उनका युद्ध अभ्यास देखता रहा फिर वो अमिता के पास गया,

देव- अमिता दीदी एक काम कर सकती हो क्या,

अमिता- अब भी मुझे दीदी बोलोगे क्या,

देव- हमारे बिच अंदर क्या रिश्ता ह उससे समाज का रिश्ता नहीं बदल सकता, इसलिए कमरे से बहार आप मेरी दीदी hi रहोगी,

अमिता – ठीक ह जैसा तुम कहो, बताओ क्या काम ह,

देव ने अमिता को कुछ बोलै जिसे सुनकर अमिता आँखे बड़ी करके देव को देखने लगी,

अमिता- क्या इरादा ह

देव- मैं जा रहा हु उस प्रताप सिंह की औकात दिखने के लिए, उसने मेरे परिवार की औरतो पैर नजर डाली थी न, अब मैं बताऊंगा इसका क्या परिणाम होता ह,

अमिता- रुको जरा,

अमिता दौड़ क्र अंदर गई और कुछ देव को लेकर दिया,

देव- इसे साथ में रखती हो,

अमिता- रखना पड़ता ह न जाने कब जरुरत पद जाये,

देव मुस्कुरा दिया,

रीवा- क्या बात हो रही ह दोनों में

अमिता- कुछ नहीं बस अपने भाई पैर थोड़ा प्यार लुटा रही हु,

रीवा की समझ में कुछ नहीं आया,

देव- आप सब मेरी बात धयान से सुनो, आप सबको मेरा एक काम करना होगा,

अमिता ने तुरंत सबको आवाज लगा दी, साडी लड़किया वह आ गई,

रीवा- तू बोल क्र देख हम जान भी दे देंगी,

देव- जान नहीं देनी ह बस किसी से जानकारी निकालनी ह,

सुगन्धदा- किस्से

देव- उन्ही से,

सुगंधा समझ गई देव किसकी बात कर रहा ह,

सुगंधा- अब वो हमारा क्या बिगड़ सकती हैं,

देव- वो कुछ बिगड़े या नहीं, अब कोई फरक नहीं पड़ता लेकिन मुझे खुद से जुडी हर कड़ी को जोड़ना ह, जिसने जो भी किया उसके पीछे के कारन जानने हैं,

अक्षरा- ये किसकी बात हो रही ह,

सुगंधा- कस्तूरी और उसकी माँ की

सोमिया- हमे क्या करना होगा,

देव ने उन्हें समझाना शुरू क्र दिया, सब बड़े धयान से देव की बाते सुन रही थी, अपनी बात ख़तम करने के बाद,

सुगंधा- इससे आगे की योजना मैं समझा दूंगी, शाम होने से पहले हम वही चलेंगे,

देव- अभेंद्र को आने दो उसके साथ जाना, और मैं जा रहा हु, मुझे आने में समय लगेगा, अभेंद्र तुम सबको महल में छोड़ देगा, और जब तक मैं नहीं आता महल से बहार नहीं जाना कोई,

देव वह से निकल गया, वो सीधा प्रतापगढ़ के लिए निकला,

अभेंद्र उस दासी को उसके राजय के अंदर छोड़ क्र शाम तक वापस आ गया, और इधर देव शाम तक राजय के अंदर घुस चुक्का था,

इधर अभेंद्र वापस आया तो सुगंधा ने उसे सब समझा दिया, अभेंद्र उन सबको लेकर वह चला गया जहा प्रेमलता और कस्तूरी को रखा गया था,

कस्तूरी को देख क्र साडी बहेनो की आँखों में खून उतर आया, वो गुस्से में उसे देख रही थी, वही प्रेमलता उन सबको गुस्से में देख रही थी, कस्तूरी ने अपना सर निचे कर लिया, इस बात पैर रीवा का धयान गया, उसे ये थोड़ा अजीब लगा,

सुगंधा- आओ आओ राजकुमारियों, बताओ क्या सेवा करू, आज मैं बहुत खुश हु,

अमिता- बात hi इतनी ख़ुशी की ह, आज तो उत्सव होना चाहिए,

सोमिया- लेकिन महल के लोग हमारा उत्सव देख क्र ज्यादा hi दुखी हो जायेंगे,

सुगंधा- इसलिए तो यहाँ ले हु, यहाँ हम मजे से ख़ुशी मन सकते हैं, कोई हमे नहीं देखेगा,

मनीषा- दीदी आप कुछ ज्यादा hi खुश हो रही हो, क्या बात ह

सुगंधा- छोटी बात hi कुछ ऐसी ह, मेरे जीवन का सपना पूरा हो गया, मेरे जीवन की तपश्या पूरी हो गई, मैंने जब से होश सम्हाला ह बस एक hi सपना देखा ह और वो सपना पूरा हो गया ह, मैंने वो पा लिया ह जिसके बाद कोई इच्छा hi नहीं बची ह,

सुगंधा की बात पैर प्रेमलता ने उसे नफरत से देखा लेकिन कस्तूरी ने उसे दर्द बहरी नजरो से देखा, क्योकि वो जानती थी की सुगंधा बचपन सेक्या सपना देखती आ रही थी, वो जानती थी की सुगंधा के लिए सबसे कीमती क्या ह,

सोमिया- तो अब तुम क्या करोगी,

अमिता- करना क्या ह, अब ये महारानी बनेगी और इस राजय पैर राज करेगी,

महारानी सुनकर प्रेमलता ने एक दम चौंक क्र देखा,

प्रेमलता- महारानी?

उसकी बात पैर किसी ने धयान नहीं दिया,

सुगंधा- मुझे महारानी बनने में कोई रूचि नहीं ह, मुझे बस उनकी होना ह जो मैं हो चुकी हु,

सोमिया- ओहो मतलब उसने तुम्हारा प्रेम का दरवाजा खोल दिया ह, मजा आया या नहीं,

सुगंधा शर्मा गई

सुगंधा- आपसे क्या शर्माना, अब आपसे hi मेरा रिश्ता ह, जब उन्होंने मुझे छुआ मुझे अपना बनाया बस जीवन का असली सुख मिल गया, वो पल मैं जेवण में कभी नहीं भूल पाऊँगी, मेरे शरीर के ान गैंग को तोड़ क्र रख दिया, देव सच में कमल के हैं, उनसे भेतरीन इंसान और प्रेमी इस धरती पैर कोई नहीं हो सकता, वो hi यहाँ के राजा बनने लायक हैं,

रीवा- और वो बन रहा ह,

देव का नाम सुनकर प्रेमलता और कस्तूरी दोनों hi अचम्भे से उन्हें देखने लगी, प्रेमलता हैरत से देख रही थी, वही कस्तूरी की आँखों में आंसू थे,

प्रेमलता- वो राजा कैसे बन सकता ह, तुम लोग झूट बोल रहे हो, वो राजा नहीं बन सकता, राजा तो भवर सिंह जी हैं, उनके होते कोई राजा नहीं बन सकता

अक्षरा- ए अम्मा थोड़ा काम बोल लो, मेरा भाई राजा बन रहा ह, कुछ hi दिनों में उसका राज्याभिषेक ह,

सुगंधा- वो राजा बन रहे हैं फिर भी उन्होंने मुझे अपनी पत्नी के रूप में चुना,

रीवा- वो इसलिए की तुम्हारे दिल में उसे प्यार नजर आया, तुमने उसका तब साथ दिया था जब सबने उसे अकेला छोड़ दिया था, सिर्फ तुम थी जो उसके साथ कड़ी रही, और मैं उसे जानती हु वो जिसे एक बार अपना मान लेता ह उसके लिए दुनिया से लड़ सकता ह, और बी तो तुम्हारे बिच रिश्ता भी बन चुक्का ह, अब तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ेगा,

प्रेमलता- रंडी कुटिया हरामजादी, तू उस देव से चुद गई, तुझे पैदा होते hi क्यों नहीं मार दिया मैंने,

सुगंधा- चुप क्र जलील औरत, मेरे और देव जी के बारे में कुछ मत बोलना,

प्रेमलता- मैं तुम सबको मार दूंगी, उसे कभी राजा नहीं बनने दूंगी, और तू बेशरम शादी से पहले किसी मर्द से चुदती फिर रही ह,

सुगंधा- क्यों तुम्हारी ये महँ बेटी भी तो चुद रही थी वो भी एक नहीं सभी राजकुमारों से, तुमने hi बताया था न की ये तीनो राजकुमारों से चूड़ी ह और फिर देव से भी चूड़ी थी, क्यों कस्तूरी चूड़ी थी न देव से,

कस्तूरी की आँखों में आंसू थे,

अक्षरा- छोड़ न इन्हे, निहारिका माँ कितनी खुश ह, उन्हें उनका सम्मान मिल गया,

प्रेमलता- सम्मान उसे सम्मान नहीं मिल सकता, उसकी जिंदगी में सिर्फ अपमान लिखा ह, मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगी, मैंने उसे बर्बाद करने की कसम खाई ह, मैं उसे बर्बाद करुँगी,

रीवा- तू होती कोण ह मेरी माँ को बर्बाद करने वाली, मेरी माँ तुझे जानती तक नहीं ह, तू पागल औरत ह कुछ भी बोलती जाती ह,

प्रेमलता- उसकी वजह से मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद हो गई ह, तो वो खुश कैसे रह सकती ह,

सुगंधा- तुम्हारी जिंदगी बर्बाद, हँ साडी जिंदगी इतना सम्मान मिला तुम्हे,

प्रेमलता- मैं इस राजय की महारानी बन्न सकती थी, या यहाँ के सेनापति की पत्नी बन सकती थी लेकिन उस निहारिका की वजह से मुझे इस दो कोड़ी के आचार्य के साथ शादी करनी पड़ी, जो मुझे जीवन का कोई सुख नहीं दे सका, सिर्फ मुझे ताक़िफ़ hi दी है,

प्रेमलता की बात से सब चौंक गए, कस्तूरी ने भी प्रेमलता को देखा,

सुगंधा का तीर सही जगह लग रहा था,

सुगंधा- चलो बकवास मत करो, तुम्हारी इतनी औकात hi कहा की तुम इस राजय की महारानी बन सको, हहहहहह ये तो सच में पागल हो गई ह, ये हमारी खुशिया बर्बाद कर रही ह, मैं देव से शादी करने वाली हु, मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए,

प्रेमलता- ऐसा मत करना वर्ण अनर्थ हो जायेगा, तुझे ऐसा पाप लगेगा जिसे कभी मिटा नहीं पायेगी,

सुगंधा- पाप मुझे क्यों पाप लगेगा, मैं देव से प्यार करती हु, और इसमें कैसा पाप

प्रेमलता एक दम रोने जैसी हालत में आ गई,

प्रेमलता- मैं तेरे हाथ जोड़ती हु, तू मेरी बेटी ह तू ऐसा मत करना, और सच बता क्या तेरे और उसके बिच कुछ हुआ ह,

सुगंधा- इससे तुम्हे क्या करना,

प्रेमलता- अगर कुछ नहीं हुआ ह तो कुछ मत करना, वर्ण इस कलंक को कभी मिटा नहीं पायेगी,

सुगंधा- कैसा कलंक, तुम बकवास कर रही हो, तुम मेरी खुशिया देखना नहीं चाहती, तुम हमेशा से इस कस्तूरी को hi प्यार करती आई हो, इसे हमेशा बढ़ावा दिया, उन राजकुमारों के साथ रखा और मुझे हमेशा घर में छुपा क्र रखा, इसे सब जगह घूमने की आजादी दी और मुझे कही नहीं जाने दिया, ये हमेशा से तुम्हारी खास थी, जब ये देव से प्यार कर रही थी तब तुमने नहीं रोका, जब ये देव के निचे सो गई तब तुमने इसे नहीं रोका, और मुझे ज्ञान दे रही हो, ये भेद भाव क्यों, क्या मैं तुम्हारी बेटी hi थी, क्या मुझे जीने का अधिकार नहीं था,

प्रेमलता रट हुए चिल्ला कर- बस कर बस कर, सिर्फ तेरे लिए hi ये सब किया, क्योकि क्योकि तू hi मेरी बेटी ह, तुझे सबसे बचा क्र रखने के लिए ये सब किया, और राजकुमारों से दूर रखा, ताकि तेरे और राजकुमारों के बिच कोई रिश्ता न बन जाये,

सुगंधा- सिर्फ मैं hi बेटी हु इसका क्या मतलब हुआ, और इससे दूर रखने का क्या मतलब

प्रेमलता- क्योकि वो सब तेरे भाई लगते हैं,

प्रेमलता की बात सुनकर वह कड़ी सभी लड़कियों को एक जबरदस्त झटका लगा, और सुगंधा और कस्तूरी की तो आँखे hi फटी रह गई, उन्हें यकीन hi नहीं हुआ ये क्या बोल रही ह,

सुगंधा- ये ये ये क्या बोल रही हो,

प्रेमलता- है मैं सच कह रही हु, तू मेरी और राजा भवर सिंह की बेटी ह,

इतना सुनकर सुगंधा के पेअर लड़खड़ा गए वो जमीन पैर गिर पड़ी, मनीषा और अमिता ने उसे सम्हाला,

कस्तूरी- तुमने कहा सिर्फ वो तुम्हारी बेटी ह, तो मैं कोण हु, मैं किसकी बेटी हु,

इतने समय बाद आज कस्तूरी ने कुछ बोलै था,

प्रेमलता चुप हो गई,

कस्तूरी चिल्ला कर- बोलो मैं कोण हु

प्रेमलता- तू भी राजा भवर सिंह की बेटी ह लेकिन तेरी माँ कोण ह मैं नहीं जानती,

ये एक और नया झटका था सबके लिए, किसी को यकीन नहीं हो रहा था ये सब क्या बोल रही ह,

अमिता- तुम बकवास कर रही हो, भवर सिंह की 3 बेतिया ह, और वो हम हैं,

प्रेमलता- तुम वो बेतिया हो जिन्हे वो समाज के सामने रख सकते थे, नहीं तो न जाने कितनी hi बेटे बेतिया ऐसे hi किस किस घर में पल रहे हैं खुद महाराज को भी नहीं पता, कितनी hi दसियो की कोक में राजाओ के बच्चे होते हैं,

सुगंधा- क्या मैं ऐसे hi तुम्हारी कोक में आ गई,

यहाँ से सब प्रेमलता से बहुत कुछ उगलवाने में कामयाब हो चुकी थी, और भी बहुत कुछ प्रेमलता बता रही थी, वही दूसरी तरफ



देव अपना भेस बदला और रात में महल के अंदर घुस गया, महल में घुसते hi उसे अहसास हो गया की महल में आज सुरक्षा कुछ काम ह, ये देव के लिए अच्छा hi हुआ, देव को अब महल के गुप्त रस्ते पता थे, वो अंदर पंहुचा और सीधा रेवती के कमरे की तरफ चल दिया, लेकिन उसके कमरे के बहार रेणुका के सैनिक देख क्र वो चुप गया,
 
अपडेट- 39




प्रेमलता की बातो ने वह भूचाल ला दिया था, सभी भोचके से खड़े रह गए थे,

रीवा- तुम झूट बोल रही हो,

प्रेमलता- हँ मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई, अब क्या झूट बोलूंगी मैं,

सुगंधा- मुझे सच बताओ, क्या तुम भी एक दासी थी जो तुम्हारी कोक में मैं आ गई,

प्रेमलता- नहीं मैं भवर सिंह से प्रेम करती थी, हम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन

सुगंधा- लेकिन क्या

प्रेमलता- वो निहारिका वो हमारे बिच में आ गई, उसके सपने बहुत बड़े थे, उसकी नजर भवर सिंह के राजय पैर थी, वो और उसका भाई दोनों मिलकर भवर सिंह को फ़साने में लगे हुए थे, निहारिका ठीक से जवान भी नहीं हुई थी, लेकिन वो इतनी खूबसूरत थी की कोई भी उसे देखता तो पागल हो जाता, और मैं एक गरीब परिवार से थी, निहारिका के कहने पैर राजवीर ने मेरी शादी जबरदस्ती आचार्य से करवा दी, लेकिन जब शादी हुई तब मेरी कोक में सुगंधा थी, मेने भवर सिंह को बताया लेकिन उन्होंने मुझे समाज का दर दिखा क्र और अपने प्यार की कसम दे कर चुप क्र दिया, और मैं उनके प्यार की निशानी लेकर चली आई

कस्तूरी- और मैं

प्रेमलता- फिर सुगंधा के पैदा होने के कुछ समय बाद महाराज भवर सिंह आये उनके पास एक बच्ची थी, जिसे वो मुझे दे गए और उसे पलने के लिए बोल गए, मैं बच्ची के बारे में पूछा तो बस इतना बताया की वो उनकी बेटी ह, उसकी माँ कोण ह उन्होंने नहीं बताया, और वो बच्ची कस्तूरी ह, उस बच्ची को पलने के बदले उन्होंने आज तक हमे धन भिजवाया ह, उसी धन की वजह से मैं तुम दोनों को पाल सकीय हु, वर्ण आचार्य के पास कुछ था hi नहीं जो हमे कुछ दे सके,

कस्तूरी- जब मैं भवर सिंह की बेटी थी तो तुमने मुझे देव के पास क्यों भेजा, हम दोनों के पिता एक थे तो उस हिसाब से देव मेरा भाई हुआ, तुम्हे पता था देव मेरा भाई ह, फिर तुमने मुझे उसके साथ वो सब करने के लिए क्यों कहा, क्या तुम्हे सिर्फ अपनी बेटी पैर कालक लगता दिख रहा ह, मुझपर जो कलंक लगा उसके बारे में नहीं सोचा, मैं तुम्हारी बेटी नहीं थी, लेकिन तुमने मुझे पला था, पलने वाली भी माँ hi होती ह, लेकिन तुमने क्या किया, तुमने मुझे बाकि राजकुमारी के पास भी भेजने की कोशिश की लेकिन वो तो मैं देव से प्रेम करती थी इसलिए खुद को बचती रही , लेकिन देव मेरा भाई ह,

प्रेमलता ने एक पल में hi भूचाल ला दिया था वह पैर, सच क्या ह झूट क्या ह किसी को समझ में नहीं आ रहा था, और इस सच के बारे में अगर को बता सकता था तो वो था भवर सिंह, लेकिन वो किसी को कुछ बताने वाला था नहीं,

सुगंधा- अगर ऐसा था तो तुमने देव के साथ ऐसा क्यों करवाया

प्रेमलता- निहारिका को बर्बाद करने के लिए, उसकी वजह से मेरी जिंदगी बर्बाद हुई थी, तो मैंने उसकी कर दी,

सुगंधा ने एक जोरदार थपड प्रेमलता के गलो पैर जड़ दिया,

सुगंधा- मूरख औरत तूने अपने स्वार्थ के लिए कितने लोगो की जिंदगी बर्बाद कर दी, तू मुझे कलंक से बचा रही थी जबकि तू खुद सबसे बड़ा कलंक ह हमारी जिंदगी में, मुझे शर्म आ रही ह की तू मेरी माँ ह, आज मैं खुद को इस परिवार का गुन्हेगार महसूस कर रही हु,

कस्तूरी- ये झूट बोल रही ह, इसने मुझे कुछ और hi कहानी सुनाई थी, इसने कहा था राजवीर इसका पति था और रानी निहारिका ने अपने भाई को मरवा दिया, और इनके पेट में राजवीर का बच्चा था जो की मैं थी, इनकी उस कहानी के हिसाब से हम पैर बहुत अत्याचार हुए और उसी का बदला हम निहारिका से ले रहे थे,

रीवा ने प्रेमलता की गार्डन पकड़ ली और दबाने लगी,

रीवा- सच बोल वर्ण यही तेरी जान ले लुंगी,

तभी वह अभेंद्र आ गया, वो बहार खड़ा साडी बात सुन रहा था,

अभेंद्र- आप लोगो को घबराने की जरुरत नहीं ह, जल्दी hi इसकी कहानी खुल जाएगी, इसका सच सबके सामने आ जायेगा,

अमिता- कैसे आएगा, कोण बताएगा,

अक्षरा- निहारिका माँ

अभेंद्र- उन्हें कुछ नहीं पता, देव ने उनसे पूछा था,

सोमिया- फिर तो ऐसा कोई नहीं बचा जो इसका सच बताएगा, महाराज कभी नहीं बोलेंगे, और उनसे कोई पूछ भी नहीं पायेगा,

अभेंद्र- इसकी दोनों कहानियो में एक इंसान ह जिसका जीकर किया ह, वही इसका राज खोलेंगे

अभेंद्र की बात से सब चौंक गए,

सुगंधा- कोण

अभेंद्र- राजवीर जी,

राजवीर का नाम सुनकर प्रेमलता चौंक गई,

प्रेमाता- वो मर गया ह, निहारिका ने भवर सिंह के हाथो उसे मरवा दिया,

अभेंद्र- अब वो अपनी समाधी से वापस आकर सब बताएँगे, आप सब लोग अब चलिए यहाँ से, रात हो चुकी ह आपको महल भी चलना ह,

प्रेमलता- तुम सब मिलकर मुझसे झूट बोल रही थीं ा, देव राजा नहीं बन रहा न, क्योकि भवर सिंह ठीक ह और मैं जानती हु जब तक भवर सिंह जिन्दा ह वो किसी को राजा नहीं बनने देगा,

अमिता- मेरा भाई राजा बनेगा जरूर बनेगा,

प्रेमलता जोर जोर से हसने लगी, वही कस्तूरी जोर जोर से रोने लगी, वो अपना सर दीवार पैर पटकने लगी,

अभेंद्र सभी लड़कियों को लेकर वह से चला गया,

उधर देव रेवती के कमरे में जाने का तरीका धुंध रहा था बिना किसी की नजर में आये हुए, तभी रेवती के कमरे से वही दासी बहार निकल क्र आई,

जैसे hi वो अँधेरे में पहुंची तो देव ने उसका हाथ पकड़ लिया और अँधेरे ले गया, उसके मुँह पैर हाथ रख दिया, वो चीखी लेकिन उसकी चीख देव के हाथो में घुट क्र रह गई,

देव- चिल्लाओ नहीं मैं हु देव

देव का ना सुनकर दासी कुछ शांत हुई, फिर देव उसे थोड़ी रौशनी में ले गया, देव का चेहरा देख क्र वो शांत हुई

दासी- आप आ गए राजकुमार, हमारी राजकुमारी को बचा लीजिये, वो बहुत तकलीफ में है, उसे कैदी बनाया हुआ ह, रानी रेणुका ने उन्हें बहुत मारा ह और यहाँ कैद क्र दिया,

देव- लेकिन क्यों

दासी- क्योकि राजकुमारी यहाँ से भागने की कोशिश कर रही थी,

देव- तुमने रेवती को वो चिट्ठी दी,

दासी- जी दे दी, उन्होंने पढ़ी

देव- कुछ बोलै उसने

दासी- बस इतना hi की वो आपके लिए कुछ भी कर सकती हैं,

देव- तो तुम मुझे उसके कमरे के अंदर जाने का कोई तरीका बताओ,

दासी- ये रानी रेणुका के सैनिक हैं, ये अंदर नहीं जाने देंगे, लेकिन एक तरीका ह आगा राप कर पाए तो,

देव- तुम बस बताओ

दासी- मेरे साथ आओ

दासी देव को एक कमरे में ले गई, और उस कमरे के बहार बने छज्जे पैर ले गई,

दासी- इस छज्जे से आप ुएर चढ़ क्र दूसरे छज्जे से कूद क्र राजकुमारी के कमरे के छज्जे पैर जा सकते हैं, बस यही एक रास्ता ह,

दासी देव के जवाब का इंतजार कर रही थी, लेकिन देव जवाब दिए बिना hi उछाल गया और छज्जे से बहार कूद क्र छज्जे को पकड़ लिया और अगले hi पल उसकी चाट पैर चढ़ गया, दासी देखती रह गई, देव कुछ hi पालो में रेवती के कमरे के छज्जे में उतर गया,

दासी तुरंत बहार आई और तेजी से रेवती के कमरे में जाने लगी, लेकिन ुए सैनिक ने रोक दिया,

सैनिक- अभी तो तू गाइट hi फिर वापस आ गई,

दासी- वो मैं कुछ भूल गई थी,

सैनिक- ऐसे राजकुमारी से बार बार मिलने की अनुमति नहीं ह, जब कुछ काम हो तभी आना, जा यहाँ से,

दासी चुप चली गई, उधर कमरे में देव अंदर पंहुचा तो देखा रेवती जमीन पैर पड़ी ह, देव ने धीरे से रेवती के करीब पंहुचा और उसके कंधे पैर हाथ रखा, रेवती घबरा क्र उठ गई, उसने जैसे hi पलट क्र देव को देखा वो ख़ुशी से चीख पड़ी, देव ने तुरंत उसका मुँह बंद किया,

लेकिन रेवती ने उसका हाथ हटाया और अपने हॉट उसके होतो से जोड़ दिए, वो पागलो की तरह देव को चूमने लगी, देव उसका साथ नहीं दे रहा था लेकिन उसे रोक भी नहीं रहा था, रेवती कभी उसके हॉट चूमती कभी उसके माथे को चूमती कभी गलो को,

देव- रेवती बस करो

रेवती- मुझे माफ़ कर दो देव मुझे माफ़ क्र दो, मैंने तुम पैर विश्वास नहीं किया, लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हु,

देव- शांत हो जाओ रेवती, शांत हो जाओ, सब ठीक ह

रेवती- तुमने मुझे इस कैद से निकला था और मैं वापस यही लोट आई, मेरे परिवार ने तुम्हारे साथ कितना गलत किया फिर भी तुमने मेरे साथ कुछ नहीं किया, और मैंने तुम पैर भरोसा hi नहीं किया,

देव- तुम्हारी गलती नहीं ह रेवती, तुम्हारी जगह कोई भी होता तो ऐसा hi करता, मैं समझता हु तुम्हारी भावनाओ को, देखो मैं यही हु तुम्हारे पास, तुम बिलकुल मत घबराओ,

रेवती- मुझे यहाँ से ले चलो, मैं यहाँ मर जाउंगी,

देव- है जरूर ले चलूँगा, लेकिन मैंने जो तुम्हे लिख क्र भेजा था क्यात ुम उसके लिए तैयार हो, क्या तुम वैसा कर सकती हो, अगर तुम्हे सही न लगे तो भी मैं तुम्हे लेकर जाऊंगा, आज hi ले जाऊंगा,

रेवती- मैं वो सब करना चाहती हु, और मैं कुछ और भी करना चाहती हु,

देव- वो क्या,

रेवती ने कुछ बोलै जिसे सुनकर देव आश्चर्य से रेवती को देखने लगा,

देव- ये बड़ा कदम होगा,

रेवती- मैं तैयार हु, मैं उन्हें सबक सीखना चाहती हु,

देव- जैसा तुम चाहो, प्रताप सिंह और रेणुका को यहाँ लाना होगा,

रेवती- प्रताप सिंह यहाँ नहीं ह, वोट क सेना लेकर कही गया हुआ ह,

आज रेवती ने अपने पिता को नाम से बुलाया वो भी अपमान के साथ

देव- फिर तो सब अधूरा रह जायेगा,

रेवती- रेणुका तो ह न यहाँ,

देव- तुम ये सब सोच समझ क्र कर रही हो न, ऐसा न हो तुम्हे बाद में पास्चतवा हो, क्योकि इसके बाद तुम फिर कभी यहाँ वापस नहीं आ पाओगी, और समाज तुम्हे किस नजर से देखेगा इसका तुम अंदाजा भी नहीं लगा सकती,

रेवती- मैं पिछले 19 साल से यहाँ कैद हु, मुझे नहीं पता समाज क्या होता ह, क्योकि जिस समाज के नियम मुझे सिखाये गए थे वही नियम मेरे माँ बाप मजे लेकर तोड़ रहे थे, फिर मैं कैसे यकीन करू की समाज के ये hi नियम होते हैं, और कोई समाज मेरे लिए कुछ करने नहीं आया, मैंने ये सब अकेले hi झेला ह तो अब आगे भी फैसले मैं अकेली लुंगी, किसी समाज की जरुरत नहीं ह जब तुम मेरे साथ हो,

देव- ठीक ह तो उम्मीद करता हु जैसा मैंने सोचा ह वैसा hi हो, आधी रात में तैयार रहना, और सही समय पैर वह पहुंच जाना, और एक बार अपनी उस दासी को बुला क्र रेणुका वाले कमरे में भेजो, और है उसके हाट कुछ फाटे पुराने कपडे भेज देना,

रेवती फिर से देव से लिपट गई, देव ने इस बार खुद रेवती के होतो को चूमा, और वह से उसी रस्ते से निकल गया,

देव छुपता हुआ रेणुका के उसी कमरे में पंहुचा जहा रेणुका ने उसे रखा था और उसने मल्टी की चुदाई की थी, कमरा खली था,

इधर रेवती ने अपनी दासी को बुलवाया बहार खड़े सेनिको से, रेवती ने दासी को समझा क्र भेज दिया,

दासी उस कमरे में गई डर्टी हुई, देव वह खड़ा था,

दासी- राजकुमार मुझे बहुत दर लग रहा ह, इस कमरे में किसी को आने की अनुमति नहीं ह, महारानी रेणुका मेरी जान ले लेगी,

देव- वो कुछ नहीं करेगी, ये कपडे मुझे दो और तुम बस उस तक एक सन्देश भिजवाओ की तुमने किसी अजीब से फाटे कपड़ो में आदमी को आपके कमरे के पास देखा ह,

दासी- लेकिन इससे क्या होगा,

देव- जैसा कहता हु वैसा करो, और फिर सीधे राजकुमारी से मिलकर इस राजय से कही दूर चली जाना, इतना दूर की कोई तुम्हे दूध न सके,

दासी घबरा गई, उसके चेरे पैर दर साफ़ दिख रहा था, लेकिन अपनी राजकुमारी के लिए वो कुछ भी करने को तैयार थी, वोट क दम वह से निकल गई, देव ने अपने कपडे बदले और अपना सर दीवार में मर क्र खुद को जख्मी किया और वह लेट गया,

दासी रेणुका के पास पहुंची और उसने वैसा hi किया जैसा देव ने कहा था, रेणुका ने तुरंत अपने खास सैनिक लिए और कमरे की तरफ दौड़ पड़ी, देव कमरे में पड़ा हुआ था, सेनिको ने देव को घेर लिया, देव ने बेहोश होने का नाटक किया हुआ था, सेनिको ने जैसे hi उसे सीधा किया तो देव का चेहरा देख क्र रेणुका के चेरे पैर ख़ुशी की लहार दौड़ पड़ी, क्योकि देव ने जो मजा उसे दिया था उससे पहले और उसके बाद कोई उसे इतना सुख नहीं दे सका, देव उसके दिल और दिमाग में बसा हुआ था,

रेणुका दौड़ क्र देव के पास पहुंची,

रेणुका- क्या हुआ तुम्हे, उठो उठो,

रेणुका देव का नाम नहीं जानती थी, और भवनपुरा के राजकुमार को यहाँ किसी ने नहीं देखा था, जिन्होंने देखा था या तो वो मर चुके थे, या फिर सेना का हिस्सा थे, महल में रहने वालो को देव की कोई जानकारी नहीं थी,

रेणुका- पानी लाओ जल्दी से,

एक सैनिक ने पानी दिया, रेणुका ने देव के मुँह पैर पानी डाला, देव ने होश में आने का नाटक किया,

देव- महारानी महारानी मुझे बचाइए, वो मुझे मार देंगे,

रेणुका- कोण मार देगा तुम्हे, किस्से दर रहे हो तुम

देव- वो महाराज के सैनिक वो वो मुझे मार देंगे,

रेणुका- लेकिन महाराज ऐसा क्यों करेंगे, और तुम चले कहा गए थे,

देव ने सेनिको की तरफ देखा,

रेणुका- डरो नहीं ये मेरे आदमी हैं, ये कुछ भी बहार नहीं बोलेंगे,

देव- लेकिन किसी ने तो बोलै था, तभी तो कुछ सैनिक मुझे उस कमरे से उठा क्र ले गए थे, और मुझे एक दूसरे कमरे में बाँध दिया था,

रेणुका- ऐसा कैसे हो सकता ह, फिर तुम वह से निकले कैसे,

देव- कल से वह कोई आया नहीं, जिन सेनिको ने मुझे पकड़ा था ो दरवाजा बंद करके चले गए थे, मुझे मौका मिला और मैं भाग क्र यहाँ पहुंच गया, मुझे और कोई जगह मालूम नहीं थी,

रेणुका- बहुत ाचा किया, अब तुम सुरक्षित हो,

रेणुका देव पैर इतना मोहित थी की वो ये भी नहीं देख पाई की देव के हाथो पैर न रस्सी के निशान हैं, न hi शरीर पैर कोई चोट ह, बस सर पैर बस खून लगा ह लेकिन वह अभी कोई चोट नहीं थी,

देव- महारानी मुझे यहाँ से कही भेज दीजिये, मुझे बहुत दर लग रहा ह, महाराज मुझे मार देंगे,

रेणुका- वो कुछ नहीं करेंगे, मेरे होते वो कुछ नहीं कर सकते, आने दो उन्हें, जब वो उत्तर दिशा से वापस लोट क्र आएंगे तब मैं बात करुँगी, फ़िलहाल तुम आराम करो, मैं तुम्हारे लिए खाने को भिजवाती हु, और नाहा धोकर अच्छे कपडे फेन लो, मैं भिजवाती हु, फिर तुम मुझे वही मिलना, मेरे सैनिक तुम्हे लेने आएंगे, आज तुम मेरे साथ रहोगे, फिर मैं तुम्हे किसी और जगह भिजवा दूंगी,

देव ने सर झुका है हामी भरी, यही तो वो चाहता था, उसे उम्मीद थी की रेणुका अपनी प्यास बुझाने के चक्कर में कुछ भी कर जाएगी,

रेणुका वह से चली गई, और सैनिक भी चले गए, दो सैनिक कमरे के बहार खड़े हो गए, कुछ देर में एक सैनिक कुछ कपडे और खाना ले आया,

इधर भौमिक जी उन शक्तियों के बारे में जानने में लगे हुए थे, कुछ बाते उन्हें पता चली, रात में वो घर चले गए, भौमिक जी काफी दिन से अपने घर नहीं आये थे,

घर पहुंचते hi उनकी पत्नी सुनिधि उनके पास आई,

सुनिधि- आप कहा थे नाथ, मैं कब से आपका इंतजार क्र रही हु,

भौमिक जी- मैंने कितनी बार समझाया ह की मेरा इंतजार मत किया करो,

सुनिधि- मैं तो इसलिए बोल रही हु की जेठ जी आये थे और कुछ सामान देकर गए थे, वही देने के लिए इंतजार कर रही थी,

भौमिक जी- भैया आये थे, क्या दे गए हैं,

सुनिधि- एक संदूक

संधि ने संदूक लेकर भौमिक जी को दिया, ये वही संदूक था जिसमे वो किताब राखी हुई थी, राजगुरु उस किताब को भौमिक जी को देकर गए थे,

भौमिक जी ने संदूक खोला और उसमे से किताब निकली,

भौमिक जी किताब लेकर अपने कमरे में चले गए, उन्होंने जल्दी से वो किताब खोली जिसमे से एक चिट्ठी निकली, भौमिक जी ने चिट्ठी खोली, चिठ्ठी देखते hi वो लिखावट पहचान गए की ये राजगुरु की लिखावट ह,

राजगुरु जाने से पहले भौमिक के लिए चिट्ठी लिख गए थे,

भौमिक जी चिठ्ठी पढ़ने लगे,

भौमिक मेरे भाई मैंने इस कहानी को समझ लिया ह, एक मुसीबत इस राजय पैर आ रही ह, इस राजय पैर क्या पूरी दुनिया पैर आ रही ह, हमे उसे रोकना होगा, अगर वो जग गया तो सब तबाह क्र देगा, मुझे लगता ह सात्विक हमसे झूट बोल रहा ह, ये शक्तिया जगनि hi नहीं चाहिए थी, हमारे पूर्वजो को पता था इन शक्तियों के बारे में फिर भी उन्होंने उन शक्तियों को हासिल करने की कोशिश नहीं की, क्योकि उसके बाद जो आएगा उसका उन्हें पता था, इसलिए मैं उस तीसरी शक्ति को ढूंढने जार है हु, क्योकि मुझे अंदाजा लग गया ह की वो शक्ति कहा ह, सात्विक से पहले मैं उस शक्ति को ऐसी जगह छुपा दूंगा ताकि कोई खोज न सके, तुम इस किताब को पढ़ो और सब जान जाओगे,

अगर मुझे कुछ हो जाता ह तो तुम इस लड़ाई का लड़ना, तुम मेरे पीछे मत आना, तुम्हे यही रह क्र ये लड़ाई लड़नी ह, उसे जागने मत देना, मुझे बहुत गलतिया हुई हैं, मन उन सभी गलतियों को सुधर दूंगा, देव का ख्याल रखना अब वही हमारी रक्षा कर सकता ह,

भौमिक जी के हाथ कंपनी लगे उनके हाथ से चिट्ठी गिर गई, औरमुह से निकला भैयाआ,

भौमिक जी ने किताब खोली और उसे पढ़ने लगे,

इधर देव पूरी तरह तैयार था, उसने पूरी योजना तैयार क्र ली थी, उसके पास एक सैनिक आया,

सैनिक- चल महारानी ने बुलाया ह तुझे,

देव खड़ा हो गया,

देव- बाकि सैनिक कहा हैं,

सैनिक- क्यों तुझे क्या करना ह,

देव- वो मुझे दर लगता ह, कही राजा के सेनिको ने मुझे फिर से पकड़ लिया तो, क्यात ुम सब मेरी रक्षा कर पाओगे,

सैनिक- हाहाहाहा, अब कोई नहीं पकड़ेगा तुझे, राजा के सरे खास सैनिक महल में नहीं हैं, हम रानी के 20 खास सैनिक यहाँ हैं, और हमारे होते हुए कोई तुझे चूब hi नहीं सकता, हमसे ज्यादा ताकतवर सैनिक इस पुरे राजय में नहीं हैं,

देव मुस्कुराया और उस सैनिक के साथ बहार आ गए, वह 4 सैनिक और खड़े थे,

देव- तुम यहाँ 5 हो और बाकि सब कहा हैं,

सैनिक- वो सब उस कमरे के बहार खड़े हैं,

देव- बहदिया है,

देव तुरंत कमरे में वापस गया,

सैनिक- अरे क्या हुआ,

देव- कुछ भूल गया हु,

दो सैनिक उसके साथ अंदर आ गए, देव कुछ पल के लिए रुक गया,

सैनिक- क्या हुआ बे, रुक क्यों गया,

दूसरा सैनिक- लगता ह आज इसका खड़ा नहीं हो रहा, महारानी के सामने अच्छा अच्छा का खड़ा होना बंद हो जाता ह, शायद इसका भी खड़ा नहीं हो रहा, हहहहहहह

तभी देव ने उसकी गार्डन पकड़ी और एक hi झटके में मरोड़ दी, और उसका हस्ता हुआ मुँह खुला hi रह गया, दूसरा सैनिक कुछ समझ hi नहीं आया, वोट क दम सदमे जैसी हालत में आ गया, देव ने उसे सदमे से बहार आने का टाइम भी नहीं दिया, देव ने सैनिक की तलवार निकली और एक hi वॉर में उसका सर धड़ से अलग क्र दिया, उसके बाद वो तलवार लेकर बहार आया, बहार खड़े सैनिक आराम से खड़े थे, उनके साथ क्या होने वाला ह इसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी,

देव ने बहार आते hi एक सैनिक पैर वॉर किया और उसके कंधे पैर वॉर हुआ जिससे उसका आधा धड़ बिच में से चिर गया, बाकि दोनों सैनिक जब तक अपनी तलवार निकलते देव ने एक सैनिक के मुँह में hi तलवार घुसा दी और तीसरे सैनिक की गार्डन पकड़ क्र कमरे में ले गया और उसकी गार्डन तोड़ दी,

फिर देव ने उन्हें वही कमरे में दाल दिया, और फिर रेवती के कमरे की तरफ चल दिया, वह दो सैनिक खड़े थे, देव को देख क्र दोनों चौकन्ने हो गए, लेकिन वो देव को पहचानते थे की ये रानी रेणुका का खास ह, लेकिन इधर क्यों आ रहा ह,

सैनिक- अरे लड़के तू यहाँ क्या कर रहा ह,

देव ने कोई जवाब नहीं दिया वो तेजी से बढ़ता हुआ उनके पास पाहकः और दोनों की गार्डन पकड़ी और रेवती के कमरे में लेकर घुस गया, और दोनों की गार्डन पैर घुटने रख क्र बैठ गया, ये देख क्र रेवती एक दम घबरा गई,

उन दोनों के मरने के बाद,

देव- चलो खेल शुरू हो चुक्का ह,

रेवती- वह रेणुका के आदमी होंगे,

देव- 20 में से 7 ऊपर जा चुके हैं, बाकि को भी मैं उप्पेर भेज दूंगा,

देव ने रेवती का हतः पकड़ा और उसे अपने साथ ले गया, उस कमरे की तरफ जहा रेणुका की चुदाई लीला हुआ करती थी,

उस रस्ते में काफी अँधेरा रहता था, देव ने रेवती को अपने पीछे किया और आगे बढ़ने लगा, आगे 4 सैनिक खड़े हुए थे, देव ने तलवार निकली और एक एक वॉर में hi सबकी गार्डन उदा दी, उन्हें आवाज तक करने का समय नहीं दिया, फिर वो दरवाजे पैर पंहुचा जहा 2 सैनिक खड़े थे, वो देव को देख क्र मुकुसराये,

सैनिक- आ गया तू, जा रानी तेरा इंतजार कर रही ह,

तभी सेनिको किन अजर देव के पीछे छिपी रेवती पैर गई, वो दोनों हरकत में ए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, देव एक को अपनी बगल में दबाया और दूसरे का मुँह दबा लिया, अउ रेज hi दोनों की साँस रुक गई और वही मर गए,

ये वो 20 सैनिक थे जिनसे ताकतवर सैनिक इस पुरे राजय में कोई नहीं था, लेकिन ये सब देव के लिए मट्टी के खिलोने जैसे थे,

20 में 11 जा चुके थे, अब बचे थे 9, वो 9 कहा थे ये जानकरी नहीं थी, क्योकि अंदर तो सैनिक होते नहीं थे, देव अंदर घुसा उसने सबसे पहले रेवती को अँधेरे में छुपा दिया, और खड़ रेणुका के पास पंहुचा,

रेणुका बिलकुल नंगी बिस्टेर पैर पड़ी हुई थी, उसके हाथ में शराब थी, वो अपने पेअर फैलाये शर्म का मजा ले रही थी,

रेणुका- तुम अकेले अंदर आये हो, मेरे सैनिक कहा रह गए,

देव- वो बहार रुक गए,

रेणुका- बहुत समझदार हैं,

रेणुका ने आवाज लगाई तो दो सैनिक अँधेरे में से बहार आये और सर निचे करके खड़े हो गए,

रेणुका- तुम लोग भी जाओ और कुछ समय बाद मल्टी को लेकर आ जाना, वो भी बड़ी प्यासी ह, आज उसकी भी प्यास बुझवा दूंगी, और बहुत दिन से कोई जबरदस्त चुदाई नहीं देखि, आज मल्टी और इस पहलवान की चुदाई भी देखूंगी,

सैनिक बहार को जाने लगे, देव घबरा गया, क्योकि बहार सेनिको की लाश पड़ी हुई थी, उसकी योजना ख़राब होने वाली, देव ने नै योजना बना ली थी, उसने उन सेनिको को भी मरने का फैसला कर लिया था, तभी रेणुका बोल पड़ी,

रेणुका- उधर से नहीं, वह सैनिक खड़े हुए ह न, तुम लोग अपने रस्ते जाओ, और जब तक मैं न बुलाऊ कोई डारवाजा नहीं खोलेगा, मैं खुद बुलवा लुंगी,

सैनिक सर झुका कर चले गए,

रेणुका ने शर्म का प्याला हवा में उछाला और देव की बहो में झूल गई,

रेणुका- कितनी तदपि हु मैं तेरे लिए, तूने ऐसा जादू कर दिया था मुझपर की मैं तेरे बिना पागल सी हो रही थी, जीवन का असली सुख दिया था तूने मुझे, मैंने तेरे जैसा मर्द आज तक नहीं देखा,

देव- और देखोगी भी नहीं

रेणुका- क्या

देव- मतलब महारानी मैं बना hi आपके लिए हु, लेकिन यहाँ मुझे दर लगता ह,

रेणुका- मेरे रहते डरने की जरुरत नहीं ह, आज तुम मुझे खुश कर दो, उसके बाद मैं तुम्हे ऐसी जगह रखूंगी जहा कोई नहीं पहुंच सकता,

रेवती अँधेरे में ऐसी जगह चुप गई थी जहा से वो सब कुछ साफ़ साफ़ देख सके और वो किसी को दिखाई न दे,

रेवती अपनी माँ का ये रूप देख क्र उससे नफरत कर रही थी, और उसे जलन भी हो रही थी की उसके प्रेमी की बहो में उसकी hi माँ मजे कर रही थी, रेवती का गुस्सा और बढ़ रहा था,



वही देव ने रेणुका को अपनी बहो में उठा लिया और एक हाथ से उसकी गांड को पकड़ रखा था,
 
अपडेट- 40




चारो राजकुमारिया महल में एक कमरे में बैठी हुई थी,

अमिता- ये क्या खेल चल रहा ह, सुगंधा और कस्तूरी हमारी बहन ह, हमारे बाप ने कहा कहा मुँह मरे हुए हैं,

अक्षरा- अगर तुमने उनके मुँह मरने की साडी जानकरी मिल गई न तो तुम्हारी फैट जाएगी,

अमिता- क्या क्या कहा,

अक्षरा- अरे दिमाग की नसे फैट जाएँगी, जितना भूचाल उस आदमी ने मचाया हुआ ह उतना तो हमारे भाई भी नहीं मचा पाए,

सोमिया- तू कहना क्या चाहती ह,

अक्षरा- बस और मत पुछु, अगर उस आदमी के राज सामने आ गए तो सब कुछ बदल जायेगा,

रीवा- अब और क्या बदलेगा, कितना कुछ तो बदल चुक्का ह,

सोमिया- यार तुम ये सोचो अगर प्रेमलता सच बोल रही ह तो देव ने सबसे पहेली चुदाई अपनी hi बहन के साथ की थी,

सोमिया की बात से वह एक दम सनता च गया, अमिता और अक्षरा गुस्से में सोमिया को देखने लगी, क्योकि वह रीवा बैठी हुई थी, और रीवा के सामने देव की ऐसी बात वो लोग नहीं करते थे,

रीवा आश्चर्य से सोमिया को देख रही थी, सोमिया को समझ आ गया की गलती हो गई ह,

सोमिया- मेरा कहने का वो मतलब नहीं था,

रीवा- नहीं तुम ठीक बोल रही हो, ये इस प्रेमलता ने क्या करवा दिया देव से, भाई बहन के रिश्ते पैर कलंक लगवा दिया,

अमिता- ऐसा नहीं ह,

रीवा- मतलब

अमिता- अच्छा सोच अगर दुनिया में किसी को पता hi नहीं की वो दोनों भाई बहन हैं तो कलंक कोण लगाएगा, ये सब रिश्ते यहाँ के लोगो ने hi तो बनाये हैं और ये कलंक भी तो यही के लोगो ने लगाए हैं, अगर कोई समाज हो hi न, फिर ये कलंक कोण लगाएगा,

अमिता की बात से सभी सोच में पद गए,

रीवा- लेकिन भगवन तो देखता ह न,

अमिता- अब देव और कस्तूरी के रिश्ते में किसकी गलती ह, क्या कस्तूरी की गलती ह जिसे उसकी माँ ने झूट बोलकर देव को फ़साने के लिए भेजा, या देव की गलती ह की वो कस्तूरी से प्यार करने लगा,

रीवा- देव की कोई गलती नहीं ह,

अमिता- लेकिन वो भाई बहन हैं, अगर उनकी गलती नहीं ह तो कलां किसके उप्पेर लगेगा,

अमिता की बाते हथोड़े की चोट की तरह लग रही थी,

अमिता- कोई भी रिश्ता हमारी सोच और पहचान से बनता ह, क्या हमने कभी देव को अपना भाई मन था क्या, हमने सिर्फ उससे नफरत की थी, हमारा तो सिर्फ नफरत का रिश्ता था उससे, आज उसने हमारी सहायता क्र दी तो क्या वो रिश्ता भाई बहन का बन गया, मेरे मन में कभी उसके लिए भाई जैसी भावनाये नहीं आती, उसकी अच्छे ने वो नफरत को प्यार में बदल दिया ह, लेकिन भाई बहन का रिश्ता जनम से दिल में बनाया जाता ह, ऐसे नहीं बनता की कोई कहे ये तुम्हारा भाई ह आज से तुम भाई बहन की तरह रहो,

रीवा- तो क्या हमारा उससे भाई बहन का रिश्ता नहीं ह,

अमिता- इस समाज के लिए, क्योकि इस समाज के लोग हमे उस रिश्ते से देखते आये हैं, लेकिन हमारा दिल उस रिश्ते को नहीं मंटा इसलिए मैं वो रिश्ता मानती हु जो मेरा दिल मंटा ह,

सोमिया और अक्षरा अमिता को देखे जा रहे थे, अक्षरा कभी अमिता को देखती कभी रीवा को देखती, अक्षरा की नजरो से कभी कोई नहीं बच सकता था, इस परिवार में वो एक ऐसी थी जो इंसान की नजरो से सब पता कर लेती थी,

अक्षरा- ये सब छोड़ो मैं तो ये सोच रही हु की सुगंधा पैर क्या बीत रहा होगा, ऐसी हालत में हम उसे अकेली छोड़ आये, वो कैसे ये सब सहन कर रही होगी,

अक्षरा की सोच सही थी, सुगंधा अकेली जमीन में पड़ी हुई सिसक रही थी, रो रो कर उसके आंसू भी सुख चुके थे, आज जो पहाड़ उसके सर पैर टुटा था उसे बर्दास्त करना हर किसी के बास्की नहीं था, सुगंधा को फरक नहीं पद रहा था उसका बाप कोण ह या माँ कोण है, वो आचार्य जी को hi पिता मानती थी तो उनकी जगह कोई नहीं ले सकता था, क्योकि जितना प्यार आचार्य जी ने सुगंधा और कस्तूरी को दिया था उतना तो चारो राजकुमारियों को अपने परिवार से नहीं मिला था, सुगंधा की तकलीफ थी देव और उसका रिश्ता, सुगंधा को ऐसा लग रहा था जैसे उसे साँस hi नहीं आ रही ह, उसके सीने में बहुत दर्द हो रहा था, उसे दर लग रहा था, जब देव को पता चलेगा की मैं उसकी बहन हु तो वो क्या करेगा, क्या वो मुझसे दूर हो जायेगा, मुझे इतने साल लग गए उसके इतना करीब आने में, और मैं आज तक अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाई हु, और जब समय आ रहा ह तो वो मुझसे इतना दूर हो जायेगा,

मैं नहीं मानती इस भाई बहन के रिश्ते को, मुझे फरक नहीं पड़ता उससे मेरा क्या रिश्ता ह, मैं बस इतना जानती हु की देव मेरा ह और मैं देव की, लेकिन क्या देव भी ऐसा hi सोचेगा, और कस्तूरी कस्तूरी के साथ तो उसका सम्भोग भी हो चुक्का ह, वो भी तो उसकी बहन हुई, कही देव ये सब सुनकर टूट न जाये, नहीं नहीं मैं उसे पता नहीं चलने दूंगी, लेकिन अगर राजकुमारियों ने बता दिया तो क्या होगा, और प्रेमलता ने बता दिया तो क्या होगा,

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

सुगंधा जोर से चीख पड़ी, उसका सर फटा जा रहा था, उसकी चीख सुनकर अभेंद्र और मनीषा दौड़ क्र उसके पास आ गए,

मनीषा- दीदी क्या हुआ, दीदी उठिये

सुगंधा ने दोनों को देखा, उसकी आँखे रो रो क्र सूजी हुई थी,

अभेंद्र- क्या हुआ आपको,

सुगंधा मनीषा से लिपट गई और जोर से रोने लगी,

अभेंद्र और माणसीः दोनों घबरा गए,

मनीषा- दीदी पहले शांत हो जाइये,

अभेंद्र पानी ले आया, उन्होंने सुगंधा को पानी पिलाया,

अभेंद्र- अब आप बताएंगी क्या हुआ ह,

सुगंधा- मैं उसे नहीं खो सकती, मैं उसे अपना भाई नहीं मानती, वो मेरा भाई नहीं हो सकता, मैं मैं उससे बहुत प्यार करती हु, मैं मर जाउंगी, अगर मैं उसकी नहीं हुई तो मैं इस दुनिया में नहीं जियूँगी,

अभेंद्र और मनीषा ने एक दूसरे को देखा, दोनों hi जानते थे की सुगंधा देव से प्यार करती ह, वो दोनों सुगंधा का दर्द समझ प् रहे थे,

अभेंद्र- मैं सिर्फ एक बात बोलूंगा बहुत ज्यादा नहीं समझाऊंगा, क्योकि उससे ज्यादा बताना और समझना मेरा अधिकार नहीं ह, आप बस इतना धयान रखिये की आप इस दुनिया समाज में नहीं रहती हो, हम सब एक ऐसी दुनिया में हैं जहा कोई रिश्ता कोई समाज कोई परिवार मायने नहीं रखता, गुरु जी और देव के साथ रह क्र मैं इतना समझ गया हु की आने वाला समय बहुत खतरनाक ह, और कब क्या हो जाये कोई नहीं जनता, इसलिए किस्से क्या रिश्ता ह भूल जाइये, और सच कहु देव भी कोई रिश्ता नहीं मानते, खुद को मजबूत कीजिये और अगर देव से इतना प्यार ह तो अपने रिश्ते को भूल क्र उनके लिए लड़िये, क्योकि उन्हें अपनों की बहुत जरुआत ह, आप उनकी क्या हो फरक नहीं पड़ता, फरक पड़ता ह आप उनकी अपनी हैं, और उनके लिए मर भी सकती हो और किसी को मार भी सकती हो, हो सकता ह आने वाले समय में आपके अपने hi आपके सामने खड़े मिले, तो बस अपने प्यार को अपनी ताकत बनाओ और देव के लिए उसे न्योछावर कर दो,

अभेंद्र की बाते सुगंधा के लिए मरहम का काम कर रही थी, उसके अंदर एक जोश भर रही थी, सुगंधा का आत्मविस्वास फिर से लोट रहा था, वही मनीषा की आँखे भरी हुई थी, वो बस एक तक अभेंद्र को निहार रही थी, उसकी बाते मनीषा के मन में उसके लिए सम्मान बढ़ा रही थी,

सुगंधा- बहुत बहुत धन्यवाद मेरे भाई, तुमने आज मेरी अंतरात्मा तक की आँखे खोल दी हैं, तुम बहुत समझदार हो, मेरा कोई भाई नहीं था, लेकिन मैं तुम्हे अपना भाई मानती हु, और उप्पेर वाले से प्राथना करुँगी, हर जनम में तुम मेरे भाई बनो या मेरे अपने बनो,

अब जाकर तीनो के चेरे पैर मुस्कान वापस लोटी थी,

उधर प्रतापगढ़ में देव खड़ा था और रेणुका उसके सामने बैठी हुई उसका लुंड चूस रही थी, देव के दिल में कोई रहम नहीं था, वो रेणुका के मुँह को छोड़ रहा था, रेणुका की सांसे रुक रही थी, लेकिन देव उसका मुँह चोदे जा रहा था,






रेणुका से जब बर्दास्त करना मुश्किल हो गया तो उसने देव को रोका,

रेणुका- क्या कर रहे हो, जान लोगे क्या,

देव- माफ़ करना महारानी, इतने समय से कैद में था और आपके साथ सम्भोग करने केबाद खुद को रोक्न ामुश्किल हो गया था, अब आप सामने हो तो रुका नहीं जा रहा, बहुत उतावला हो रहा हु,

रेणुका खुश हो गई,

रेणुका- आओ जल्दी से मेरे उप्पेर चढ़ जाओ, और मेरी प्यास बुझा दो, मैं कब से तड़प रही हु,

देव रेणुका को वह ले गया जहा वो चीजे बानी हुई थी जिन पैर अलग अलग आसान लगाए जाते थे,






देव ने रेणुका को एक मेज पैर लिटा दिया जिससे रेणुका की छूट उभर क्र सामने आ गई, देव सामने खड़ा था छूट बिलकुल लुंड के सामने थी, देव के चेहरे पैर एक गुस्सा सात है, उसने पलट क्र देखा वो रेवती को धुंध रहा था, लेकिन रेवती उसे दिखी नहीं, क्योकि जहा वो लोग थे वह रौशनी थी, बाकि जगह अँधेरा था, देव ने लुंड को छूट पैर लगाया और एक जोर दर धक्का लगाया, लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, रेणुका की छूट काफी खुली हुई थी, वो पहले देव का लुंड ले चुकी थी, इसलिए वो थोड़ा बहुत झेल गई, लेकिन उसकी एक जोर दर चीख निकल गई,





देव- आज आपको एक जबरदस्त चुदाई का मजा दूंगा महारानी,

देव ने पूरा लुंड रेणुका की छूट में उतर दिया, रेणुका की आँखे बहार आ गई थी, रेणुका अपनी कमर उठाने लगी, लेकिन देव ने कास क्र उसकी कमर को पकड़ लिया और धक्के लगाने लगा, रेणुका अपनी चीखो को रोकने को बहुत कोशिश कर रही थी लेकिन देव की रफ़्तार बहुत तेज थी, रेणुका जोर जोर से चीखने लगी थी, ऐसी चुदाई रेणुका ने दूसरी लड़कियों की बहुत देखि थी, लेकिन इतने बड़े लुंड से नहीं, उसे ऐसी चीखे सुनने का बहुत शोक था, आज वो खुद ऐसे hi चीख रही थी,

कुछ देर ऐसे छोड़ने के बाद देव ने उसे दूसरी मेज पैर ले गया, जहा रेणुका को उसने दोनों घुटनो पैर बैठाया और पीछे से लुंड घुसा दिया, और पूरी रफ़्तार से छोड़ने लगा, रेणुका फिर से चीखने लगी, और कुछ hi देर में झड़ने लगी,






देव- महारानी आप तो बड़ी जल्दी झाड़ गई,

रेणुका- ऐसा दर्द और उस दर्द का मजा पहले कभी नहीं मिला,

देव- अभी और दर और मजा आएगा, लेकिन उसके लिए आपको कुछ और करना होगा,

रेणुका- क्या

देव ने पास में पड़ी एक चमड़े की पट्टी (बेल्ट) उठाई और रेणुका के हाथ बांधने लगा,

रेणुका मुस्कुरा कर अपने हाथ बंधवा रही थी, वो देव से इतनी सम्मोहित थी की वो क्या कर रही थी उसे पता hi नहीं था, देव ने उसके हाथ एक लोहे के खम्बे से बांध दिए और उसे मेज पैर झुका दिया, फिर पीछे से लुंड घुसा कर छोड़ने लगा,






रेणुका को बहुत मजा आ रहा था, उसे दर्द हो रहा था, लुंड छूट को अच्छे से फाड् रहा था लेकिन वो दर्द में मजा ले रही थी, कुछ देर ऐसी hi छोड़ने के बाद, देव आगे आया और अपना लुंड रेणुका के मुँह में दे दिया, उसी की छूट में भीगा लुंड रेणुका से hi साफ़ करवाया, फिर उसने एक तेल की शीशी उठाई और अपने लुंड पैर डालने लगा,

रेणुका- इसे और चिकना क्यों क्र रहे हो, छूट के रास ने पहले से hi इतना चिकना किया हुआ ह, इसमें hi बहुत मजा आ रहा ह,

देव- अभी और मजा आएगा,

देव ने एक पट्टी उठाई और रेणुका के मुँह पैर बांध दी, रेणुका रोक रही थी लेकिन देव ने बांध hi दी, उस पट्टी में एक gaind(ball) बंधी हुई थी जो रेणुका के मुँह में घुस गई थी, अब रेणुका का मुँह बंद नहीं हो सकता था, अब उसकी चीख नहीं निकल सकती थी, अगर वो चीखेगी भी तो आवाज बहार नहीं आने वाली थी,

रेणुका थोड़ी सी घबराई, लेकिन फिर उसने सोचा चलो इसका भी मजा लेते हैं, देव रेणुका के पीछे आ गया, रेणुका के नितम्ब बहार को फैले हुए थे, रेणुका की छूट और गांड देव के लुंड के सामने खुली हुई थी, देव ने अपना चिंका हुआ लुंड रेणुका की छूट पैर लगाया, और अचानक उसने लुंड के निशाना बदला और सीधे गांड पैर लगाया और एक जोर दर झटका मर दिया, तेल की वजह से लुंड पूरा चूकना हुआ पड़ा था जिस वजह से लुंड गांड को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, रेणुका की गांड में पहेली बार लुंड घुस रहा था वो भी इतना बड़ा लुंड,






रेणुका पूरी ताकत से चीख पड़ी थी, लेकिन उसकी चीख उसके मुँह में hi डाब क्र रह गाइट hi, वो बिन पानी मछली की तरह फड़फड़ाने लगी, लेकिन देव कहा रुकने वाला था, उसने एक और धक्का मारा और अपने लुंड और अंदर घुसा दिया, रेणुका इस धक्के को बर्दास्त नहीं कर सकीय और बेहोश हो गई,

उसके बेहोश होते hi उसके चेरे पैर पानी पड़ा जिससे वो होश में आ गई, और वो दर्द से फिर चटपटा गई, लेकिन उसकी आँखे तब आश्चर्य से फटी रह गई जब उसके सामने पानी से बहरा बरतें लेकर रेवती को देखा,

वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन मुँह में फांसी गेंद की वजह से बोल नहीं पाई, तभी उसके पीछे से एक और झटका लगा, रेणुका की आँखों से आंसू बह रहे थे, वो दर्द से तड़प रही थी,






देव ने एक बार लुंड को बहार खींच और फिर से धकेल दिया, रेणुका फिर से बेहोश हो गई, उसे नहीं पता वो कितनी देर बेहोश रही थी, जब उसे होश आया तो देखा वो बिस्टेर पैर बंधी हुई ह, उसका मुँह अभी भी वैसे hi बंधा हुआ था, उसकी गांड में बहुत hi भयानक दर्द हो रहा था, वो अपने कमर को हिलने की कोशिश कर रही थी लेकिन गांड में इतना बड़ा लुंड जाने की वजह से उसकी कमर से निचे का हिस्सा एक दम सुन्न हो चुक्का था, वो अपनी कमर को हिला भी नहीं प् रही थी, वैसे भी उसके पेअर भी बंधे हुए थे,





तभी उसकी नजर सामने गई जिसे देख क्र वो और बोखला गई, क्योकि सामने खड़े थे देव और रेवती वो भी बिलकुल नंगे, रेवती देव से चिपकी हुई थी,

देव धीरे से- तुम सच में तैयार हो न

रेवती- पूरी तरह से, अब मैं तुम्हरी हु, और ये मेरे प्रेम का इनाम ह,

देव ने रेवती के होतो को चूमना शुरू क्र दिया,

रेणुका अपना सर हिला क्र रेवती को रोकना चाहती थी, लेकिन रोक नहीं प् रही थी,

फिर देव रेवती की चूचियों को चूसने लगा, उन्हें निचोड़ने लगा, कुछ देर बाद रेवती निचे बैठ गई और देव के लुंड को अपने हाथ ले लेकर उससे खेलने लगी, दोनों रेणुका की तरफ देख भी नहीं रहे थे,

रेवती- ये कितना बड़ा ह, मैं कितनी खुशकिस्मत हु जो मेरी किस्मत में तुम हो, तुमने मेरे प्यार को अपना कर मुझ पैर अहसान किया ह,






देव- ये तो मेरी खुश किस्मती ह की तुम मुझसे प्यार करती हो,

रेवती- तो आज मुझ पैर अपने प्यार की मोहर लगा दो, मुझे पूरी तरह अपना बना लो, मुझे लड़की से औरत बना दो,

देव ने रेवती को उठाया और मेज पैर लिटा दिया, और अपना मुँह उसकी छूट पैर लगा दिया, रेवती के मुँह से सिसकिया निकल गई, देव ने कुछ देर रेवती की छूट को चूसा, फिर वो खड़ा हुआ और बहुत सात ेल उसकी छूट पैर डाला और कुछ अपने लुंड पैर डाला, और लुंड को रेवती की छूट पैर लगाया, रेणुका न में गार्डन हिलने लगी उसके मुँह से बस उम्म्म्म उम्म्म की आवाज निकल रही थी,

रेवती ने रेणुका की तरफ देखा और मुस्कुराई,

रेवती- देखो माँ आप ये hi देखना चाहती थीं ा, अपनी बेटी को इसी जगह पैर चुड़ते हुए देखना चाहती थीं ा, अपनी मेरी चुदाई देख क्र मजा आएगा न माँ, देखो माँ आज आपकी बेटी उस जगह आ गई ह, और वो तैयार भी ह छोड़ने के लिए, बस एक फरक ह मुझे छोड़ने वाला आपकी नामर्द पति प्रताप सिंह नहीं ह, ये मेरे पति हैं, जिन्हे मैंने प्यार किया ह, जिन्हे मैंने चुना ह, भवन पूरा के राजकुमार देववववववव,

भवनपुरा के राजकुमार देव सुनकर रेणुका की आँखे फटी रह गई, वोट क दम सुन्न रह गई, ऐसा लगा जैसे उसके कानो में किसी ने गरम तेल दाल दिया हो, उसकी आँखों में खून बरस रहा था, तभी एक चीख सुनाई दी जो रेवती किट hi, देव का मोटा लुंड रेवती की छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया था,






रेवती- देखो माँ आपकी बेटी की छूट फैट गई ह, ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

रेणुका खुद को छुड़वाने के लिए हाथ पाव मरने लगी,

रेवती- माँ मज ालो अपनी बेटी की चुदाई का, aahhhhhhhhhhhhh आप तो जानती हैं न, आपके दामाद के लुंड के बारे में, कितना बड़ा ह, ये क्या कर सकता ह, ये मेरी छूट को फाड़ सकता ह, बल्कि ahhhhhhhhhhhh इसने मेरी छूट को फाड़ भी दिया ह, वो छूट जिसे प्रताप सिंह छोड़ना चाहता था, ahhhhhhhhhhhhhh माँ देखिये न आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

रेवती के अंदर एक गुस्सा भरा हुआ था, एक नफरत भरी हुई थी, जिस वजह से वो देव के लुंड घुसने पैर होने वाले दर्द को भी झेल जार hi थी, क्योकि उसे जीतन दर्द होता वो उतने hi गुस्से में उल्टा सीधा बोले जार hi थी, उसका धयान अपनी नफरत पैर था,

देव का आधा लुंड रेवती की छूट में घुस चुक्का था, देव ने आगे बढ़ना सही नहीं समझा, क्योकि वो जनता था रेवती जिस गुस्से में ह वो उसे रोकेगी नहीं, लेकिन उसे बहुत तकलीफ होगी, देव कुछ देर रुका और रेवती की चूचियों को चूसने लगा,

रेवती- देखो माँ मेरी चूचियों को देखो, कैसे देव इन्हे चूस रहे हैं,

रेवती लगातार रेणुका को देखे जार hi थी,

देव- बस रेवती, अब वह भूल जाओ, वर्ण हमारा फेल अमिलन बस नफरत की निशानी बनेगा, इसे प्यार की निशानी बनाना ह,

रेवती रोने लगी, देव ने उसे शांत किया, और हलके हलके कमर चली शुरू की, देव बड़े प्यार से रेवती को छोड़ रहा था, रेवती को बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन उसका प्यार और रेणुका से नफरत उसे बर्दास्त करने की ताकत दे रहे थे, और जल्दी hi उसकी छूट ने पानी छोड़ना शुरू क्र दिया था, और छूट चिकनी हो चुकी थी, दोनों की चुदाई काफी देर चली जिस बिच रेवती 3 बार झाड़ चुकी थी,






रेवती- देखो माँ मैं झाड़ रही हु, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह देव के लुंड से झाड़ रही हु, आह्ह्ह्हह माँ रोक सको तो रोक लो माआआआआ,

आखिर में देव ने भी अपना रास रेवती की छूट में भर दिया, दोनों शांत हो गए, लेकिन देव ने जैसे hi लुंड बहार निकला तो रेवती की हालत ख़राब हो गई, देव ने रेवती को गॉड में उठाया और वह रखे पानी से उसकी छूट को साफ़ किया, फिर उस पैर एक मलहम लगाया, और एक औषधि उसे खाने को दी, ये वही औषधि थी जो अमिता के पास थी, जिसे वो अमिता से लेकर आया था,

मलहम लगने के बाद रेवती को बड़ी ठंडक महसूस हुई, वोट क दम शांत लेट गई, देव भी उसके पास बैठ गया, रेणुका अब एक दम शांत होकर उन्हें hi देखे जा रही थी, देव ने अपने कपडे पहन लिए थे, और रेवती को भी कपडे पहना दिए थे,

तभी दरवाजा खुलने की आवाज और एक सैनिक के साथ मल्टी अंदर आ रही थी, और जैसे hi मल्टी करीब आई और उसने रेणुका को बिस्टेर पे रबँधे देखा, वो दर गई, उसे कुछ समझ नहीं आया, उसे साथ खड़ा सैनिक भी जैसे आगे बढ़ा तभी एक तलवार आई और उसके सर जमीन पैर पड़ा हुआ था, तभी मल्टी की चीख निकल गई, उसकी चिक की आवाज से बहार से 3 सैनिक और गए, वो जल्दी से उनके पास पहचुहे लेकिन देव ने एक के पेट में तलवार घुसाई और उसे बिच में से चिर दिया,

ये नजारा देख क्र वह खड़े सभी की आँखे फटी रह गई, देव ने दूसरे सेनिको को सम्हालने का मौका hi नहीं दिया, उसने एक मुक्का दूसरे सैनिक के सर में मारा और मुक्कलाग्ते hi वो जमीन में गिर पड़ा, तीसरे को देव ने हवा में उठाया और अपने घुटने पैर पटक दिया उसकी कमर की हड्डी टूट गई, फिर देव ने उसकी गार्डन पैर पेअर रखा और उसका पेअर पकड़ क्र तोड़ दिया, उस सैनिक ने भी वही अपने प्राण त्याग दिए,

मल्टी दर के मरे रेणुका से लिपट गई थी, रेणुका की हालत भी ख़राब थी, उसने ऐसा नरसंघार कभी नहीं देखा था, तभी लड़खड़ाती हुई रेवती देव के करीब आई,

रेवती को देख क्र मल्टी हैरत में पद गई,

रेवती- तुमने आज तक असली ताकत नहीं देखि ह, तुम्हे जानना थान ा ऐसा कोण हो गया जिसने प्रताप सिंह के बेटो को किसी कुत्ते की तरह मार दिया, वो ये शेर ह, जिसने प्रताप सिंह के वंश का नस क्र दिया ह,

अब मल्टी और घबरा गई थी, रेणुका फिर से छटपटाने लगी, मल्टी ने उसके मुँह पैर बंधी पट्टी खोल दी,

पट्टी खुलते hi रेणुका जोर से चिल्लाई- हरामजादे मैं तेरी जान निकल लुंगी, तू यहाँ से जिन्दा वापस नहीं जायेगा,

रेवती- इन्हे रोक से उतनी औकात तुम्हरी नहीं ह,

रेणुका ने जोर से चिल्लाकर अपने सेनिको को आवाज लगाई,

देव- तेरे 20 सैनिक हैं उनमे से 15 मर चुके हैं, बाकि 5 को भी यही बुला ले, नहीं तो मुझे ढूँढना पड़ेगा,

रेणुका की आवाज पैर कोई नहीं आया क्योकि जिन सेनिको को यहाँ लगाया था ो सब मर चुके थे, बाकि 5 कही और लगे हुए थे,

रेणुका- तूने अच्छा नहीं किया लड़के, इसका परिणाम तुझे बहुत भरी पड़ेगा, जब महाराज वापस आएंगे तब तेरी मोत पक्की ह, मेरा बीटा तुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा,

देव- ह कहा वो, मैं उसी के लिए तो आया था यह पैर, प्रताप सिंह को उसके वंश का अंतिम चिराग भी अपनी आँखों से बुझते हुए देखना होगा, उसके बाद मैं प्रताप सिंह को मरूंगा,

रेणुका- ये तेरी खुशकिस्मती ह की वो सब लोग यहाँ नहीं हैं,

देव- ये तो उन सबकी की खुश किस्मती ह, लेकिन फिर भी अगर तुझमे और प्रताप सिंह में हिम्मत हो तो आ जाना, अब तुझे पता ह मैं कोण हु, कहा से आया हु, और जीवन भर याद रखना की प्रताप सिंह की पत्नियों को छोड़ने वाला मैं हु भवन पूरा का राजकुमार निहारिका का बीटा देव, और है अगर गांड में ज्यादा दर्द रहे तो इसका अलाज करवा लेना, शर्माना मत,

रेणुका की आँखों में खून उतर आया था,

देव- अब मैं जा रहा हु अपनी पत्नी को लेकर, अपने बेटे को तैयार करके भेज देना मेरे पास, लेकिन अगर उसे जिन्दा रखना चाहती हो तो ुए कही छुपा देना,

रेवती- देव हमे चलना चाहिए, रात का आखरी पहर बीतने वाला ह, हमे सुबह से पहले पहुंचना होगा,

देव ने मल्टी को भी रेणुका के पास hi बांध दिया, ताकि वो बहार जाकर चिल्ला न दे, उनके मुँह बांध क्र देव रेवती को अपनी गॉड में उठा क्र ले गया, रस्ते उसे पता थे, वो रात में hi रेवती को लेकर महल से निकल गया,

देव तेजी से घोड़े पैर देदे जार है था, रेवती को उसने आगे बैठाया हुआ था, तभी अचानक उसे कुछ याद आया, देव ने घोडा रोक लिया,

देव- रेवती क्या चरण और संभु यहाँ वापस नहीं आये,

रेवती- नहीं वो लोग नहीं आये,

देव- और प्रताप सिंह और भानु भी यहाँ से गायब हैं सेना लेकर

रेवती- है

देव- उधर भवर सिंह और काम्य और सात्विक भी सेना लेकर कही गए हैं, कही ये लोग सब एक जगह तो नहीं गए,

रेवती- क्या हुआ

देव- कुछ नहीं, हमे जल्दी से घर पहुंचना होगा,

देव ने घोडा पूरी रफ़्तार से बहेगा दिया, वह रेणुका और मल्टी बिस्टेर पैर बंधी पड़ी थी, रेणुका गुस्से में पागल हुई जा रही थी, वो दोनों सुबह होने तक वही बंधी पड़ी रही,

देव सुबह होते होते अपने राजय में पहुंच चुक्का था, वो रेवती को लेकर सीधे अभेंद्र के घर की तरफ चला गया, रेवती लड़खड़ाती हुई घोड़े से उत्तरी तो मनीषा ने उसे सम्हाला,

देव- अभेंद्र इसका ख्याल रखना, कुछ बड़ा होने वाला ह, तैयार रहना,



इतना बोल क्र देव तुरंत भौमिक जी के पास जाने के लिए मुद गया,
 
अपडेट- 41



भौमिक जी पूरी रात उस किताब को पढ़ते रहे, और किताब पढ़ क्र उनके बहुत से सवालो के जवाब मिल चुके थे, किताब पढ़ने के बाद वो आँखे बंद करके बैठ गए, तभी बहार से घोड़े की आवाज आई, और देव गुरु जी गुरु जी आवाज लगता हुआ अंदर आ रहा था, देव की आवाज सुनकर भौमिक जी जल्दी से बहार को दौड़े,

भौमिक जी- देव क्या हुआ, तुम ऐसे घबराये हुए क्यों हो,

देव- गुरु जी कुछ बड़ी शंशय ह

भौमिक जी- क्या हुआ बताओ मुझे,

देव- गुरु जी, चरण सिंह और संभु हमारे राजय से वापस अपने राजय में नहीं गए हैं, और जिस दिन भवर सिंह काम्य और सात्विक यहाँ से गए हैं उसी दिन प्रताप सिंह भानु के साथ एक सेना लेकर अपने राजय से उत्तर दिशा की तरफ गया ह,

भौमिक जी- क्या, ये गलत हो रहा ह, वह युद्ध होने की संभावना ह,

देव- इससे हमे क्या नुकसान हो सकता ह,

भौमिक जी- भैया को खतरा हो सकता ह,

देव- लेकिन भवर सिंह राजगुरु को क्यों नुकसान पहुचायेगा,

भौमिक जी- क्योकि भैया जान चुके हैं की यहाँ क्या हो रहा ह, और वो भवर सिंह को रोकने की कोशिश करेंगे, और भवर सिंह रुकने वाला नहीं ह, वो भैया को नुकसान पंहुचा सकता ह,

देव- हमे क्या करना चाहिए,

भौमिक जी- हमे वह पहुंचना होगा,

देव- लेकिन हम कैसे पता कर्नेगे वो लोग कहा हैं,

भौमिक जी- मुझे पता ह की वो कहा हैं, जिस किताब को पढ़ क्र भैया वह गए हैं, वो किताब मैंने पढ़ी ह, होनी को कोई ताल नहीं सकता, लेकिन कुछ समय के लिए उसे रोका जा सकता ह, हमे अभी निकलना होगा,

देव- मैं हमेशा आपके साथ हु, जैसा आप कहे मैं तैयार हु,

दोनों पूरी रात के जगे हुए थे लेकिन चेहरे पैर कोई थकन नहीं थी, दोनों ने सबसे अच्छे घोड़े लिए और सबसे पहले अभेंद्र के पास गए और उसे वह का सब समझा कर निकल लिए अपने घोड़ो पैर उत्तर दिशा की तरफ, दोनों के अंदर भरपूर शक्ति थी, तो उन्हें तो कोई चीज थका नहीं सकती थी, बस उन्हें घोड़ो को आराम देना था, वो पूरी रफ़्तार से दौड़े जा रहे थे,

वही राजगुरु अब तक उत्तेर दिशा के अंतिम राजय में पहुंच चुके थे, वो किताब में बताई हुई जगह के हिसाब से पहाड़ो पैर पहुंच चुके थे, बर्फ से ढके हुए पहाड़, बहुत hi खूबसूरत नजारा था, एक शांति थी वह, ये बहुत hi धार्मिक राजय था, यहाँ दूर दूर से सन्याशी धयान लगाने आते थे, राजगुरु पैदल hi पहाड़ो में चले जा रहे थे, ठण्ड से उनकी हालत ख़राब होने लगी थी,

किताब में ये तो बताया गया था की वो शक्ति किस दिशा में किस राजय में ह, लेकिन ये किसी को नहीं पता असल में वो शक्ति ह कहा, राजगुरु उस शक्ति को खोज रहे थे, शक्ति को खोजते खोजते पूरा दिन निकल गया लेकिन मंजिल नहीं मिली,

सात्विक एक जगह बैठ क्र राजगुरु की गतिविधियों पैर नजर रखे हुए था, जब राजगुरु को कुछ नहीं मिला तो सात्विक समझ गया की राजगुरु को शक्ति की असली जगह का नहीं पता ह, मतलब अब आगे बढ़ क्र शक्ति को खोजना होगा,

सात्विक भवर सिंह और काम्य के साथ उस दिशा में चल दिया, अँधेरा होने वाला था, राजगुरु थक क्र एक जगह बैठ गए थे, वो बताई हुई जगह के आस पास hi थे, तभी वह भवर सिंह सात्विक और काम्य पहुंच गए,

उन तीनो को अपने सामने देख क्र राजगुरु घबरा गए, जिन लोगो से वो उस शक्ति को बचने आये थे, वो लोग उसके पीछे यहाँ तक पहुंच चुके थे,

राजगुरु- आप लोग यहाँ

भवर सिंह- ये सवाल तो मुझे पूछना चाहिए राजगुरु, आप यहाँ क्या कर रहे हैं, अपने राजय को छोड़ क्र आप इतनी दूर चले आये, वो भी अपने राजा को बताये बिना,

राजगुरु- महाराज वो मैं किसी जरुरी काम से आया था,

भवर सिंह- मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी, मैंने सबसे ज्यादा भरोसा आप पैर hi किया था, आपने जो कहा मैंने किया, मैंने आपके हाथो में अपना भविष्य रख दिया था, आप मेरे लिए वो शक्ति खोजने वाले थे, और आप मुझे धोखा देकर यहाँ आ गए, अकेले उस शक्ति को पाने के लिए,

राजगुरु- क्योकि तुमने साडी जिंदगी झूट का सहारा लेकर मुझे अँधेरे में रखा, मैं मूरख था जो तुम्हारी कहानी पैर विश्वास कर बैठा, हमेशा हमारे राजय का भविष्य तुम्हारी कहानी से कुछ अलग hi दिखता था, लेकिन मैं समझ नहीं पाया,

भवर सिंह – मैंने क्या झूट बोलै,

राजगुरु- तुम वो नहीं हो जिसकी बात महाराज सूर्यभान ने की थी, बल्कि तुम तो वो हो जिसकी वजह से इस राजय का विनाश होगा,

भवर सिंह- हाहाहाहा लगता ह आप कुछ ज्यादा hi भावनाओ में बाह चुके हो,

सात्विक- भैया मुझे बताइये वो जगह कहा ह, इन बातो का कोई फायदा नहीं ह,

राजगुरु- तू इसका साथ दे रहा ह, सात्विक इस जहरीले नाग से दूर हो जा, ये तुझे दस लेगा,

सात्विक- भैया मुझे डसने सके ऐसा कोई नाग hi नहीं पैदा हुआ, मैं आपका भाई हु मुझ पैर भरोसा कीजिये,

राजगुरु- अगर वो शक्ति जागृत हुई तो वो जग जायेगा, और अगर वो जग गया तो कोई राजा नहीं बचेगा, सिर्फ एक राजा होगा वो होगा राजा भैरव,

राजगुरु की बात पैर सात्विक मुस्कुराया,

सात्विक की मुस्कान देख क्र राजगुरु ने अपना सर पकड़ लिया,

राजगुरु- मतलब तेरा लक्ष्य हमेशा से उसे hi जगाना था,

भवर सिंह- सात्विक ये क्या बोल रहे हैं,

सात्विक- कुछ नहीं महाराज, मैंने आपको बताया था न एक शक्तिशाली राजा के बारे में जो आपको हमेशा के लिए अमर कर सकते हैं, इस शक्ति के मिलने पैर वो हमारा साथ देंगे पूरी दुनिया को जीतने में,

राजगुरु- ये सब तेरा किया हुआ ह, तुम सब इस संसार के लिए खतरा हो, वो शक्ति तुम्हारे हाथ नहीं आणि चाहिए,

सात्विक- वो शक्ति तो हमारे हाथ आ hi जाएगी, क्योकि मैं उस शक्ति को महसूस कर रहा हु, अब मुझे आपकी जरुरत नहीं ह मैं उस शक्ति को खुद hi खोज लूंगा,

राजगुरु- मैं ऐसा नहीं होने दूंगा,

भवर सिंह – सेनिको बंदी बना लो राजगुरु को, इन्होने राजद्रोह किया ह, इसकी सजा इन्हे महल जाकर दी जाएगी,

सेनिको ने राजगुरु को बंदी बना लिया,

काम्य- सात्विक जी जल्दी ढूंढिए उस शक्ति को अब इंतजार नहीं हो रहा,

सात्विक ने अपनी आँखे बंद की और शक्ति की ऊर्जा को महसूस करने लगा, वो उस ऊर्जा को खोजने लगा, वो चारो तरफ घूम रहा था लेकिन कुछ नहीं दिख रहा था,

भवर सिंह- क्या हुआ

सात्विक- मैं ऊर्जा को महसूस क्र प् रहा हु लेकिन यहाँ चारो तरफ बर्फ hi बर्फ ह, दूर दूर तक कुछ नहीं ह, शक्ति आस पास hi महसूस हो रही ह लेकिन यहाँ कुछ दिख नहीं रहा, और अँधेरा भी होने वाला ह,

काम्य- हम जहा ह वह से कोई भी गाओं बहुत दूर ह, हमे जल्दी से वो शक्ति खोजनी होगी वर्ण हम यहाँ बर्फ में जैम जायेंगे,

तभी सैनिक भवर सिंह के पास आया- महाराज कोई हमारी तरफ आ रहा ह,

भवर सिंह- कोण आ रहा ह,

सैनिक- कहना मुश्किल ह महाराज, इस बर्फ की चमक में किसी को पहचान पाना मुश्किल ह, लेकिन 2 लोग हैं,

सात्विक समझ गया ये कोण हैं,

सात्विक- आने दो उन्हें

भवर सिंह- आप जानते हो कोण ह वो,

सात्विक- उन्हें आने दो वो हमारी सहायता कर सकते हैं,

दो आदमी मुँह धक् क्र उनके करीब आ गए, और जैसे hi उन्होंने अपने मुँह से कपडा हटाया तो काम्य और भवर सिंह चौंक गए,

भवर सिंह- ये दोनों यहाँ क्या कर रहे हैं, सात्विक तुमने हमे धोखा दिया ह,

सात्विक- मेरी बात सुनिए महाराज,

भवर सिंह- चरना सिंह के साथ मिलकर तुम मुझे hi धोखा दे रहे थे, बंदी बना लो सबको,

सैनिक तुरंत चरण और संभु की तरफ दौड़े, लेकिन सात्विक ने अपनी शक्ति से सबको रोक दिया,

सात्विक- मेरी बात सुन लो भवर सिंह, उस शक्ति को पाने के लिए हमे चरण की जरुरत पड़ेगी, इसे काफी जानकरी ह उस शक्ति के बारे में,

सात्विक की शक्ति के सामने भवर सिंह खुद को कमजोर पाने लगा, उसने समझौता करना hi सही समझा,

भवर सिंह- ये कैसे सहायता कर सकता ह,

चरण सिंह- क्योकि मैं जाता हु उस शक्ति कैसे खोजना ह, मैं इन शक्तियों की कहानी को सिर्फ एक कहानी मान कर पढता था लेकिन ये सब सच ह, तो मेरे पास तरीका ह उसे खोजने का,

सात्विक- कैसे

चरण- आपके हिसाब से वो शक्ति आस पास hi ह,

सात्विक- है ह तो,

चरण- वो शक्ति अब से कई हजार साल पहले यहाँ आई थी, तो क्या ये जगह हजारो सालो से पहले जैसी hi रही होगी, इस पैर बर्फ की परत जैम चुकी होगी, हो न हो वो जगह हमारे निचे ह,

भवर सिंह- लेकिन हम खोदे भी तो कहा,

चरण- गुरु जी आप जरा धयान लगाइये और अपनी शक्ति की ऊर्जा को जागृत कीजिये, मेरा विश्वास ह की आपकी ऊर्जा से उस शक्ति की ऊर्जा भी जाग्रित हो सकती ह,

सात्विक- बहुत सही कहा तुमने ये तो मैंने इस तरह से क्यों नहीं सोचा,

सात्विक तुरंत धयान लगाने बैठ गया, और जल्दी hi उसकी ऊर्जा जागृत होने लगी थी, चरण चारो तरफ देखने लगा, और चरण का विचार बिलकुल सही निकला, कुछ hi दुरी पैर एक सफ़ेद रौशनी बर्फ से बहार आने लगी, पूरी बर्फ एक दम चमक उठी थी, भवर सिंह और चरण संभु सब उस जगह की तरफ दौड़ पड़े,

वही देव और भौमिक जी को भी अपने अंदर उस ऊर्जा को महसूस क्र लिया था,

भौमिक जी- वो शक्ति मिल गई ह, हमे जल्दी पहुंचना होगा,

उन्होंने घोड़े डोडा दिए,

भवर सिंह ने सेनिको को वह खोदने का काम दे दिया, सैनिक हाथो और तलवारो से hi खुदाई करने लगे, वो जितना खोदते जा रहे थे रौशनी बढ़ती जा रही थी, लेकिन अब सात्विक से अपनी hi ऊर्जा बर्दास्त नहीं हो रही थी, उसका धयान टूट गया, धयान टूटते hi वो रौशनी भी आणि बंद हो गई, लेकिन जगह का पता चल चुक्का था, खुदाई करते गए, बर्फ की खुदाई करना आसान काम नहीं था, उन्हें खुदाई करने में काफी समय लग गया, और फिर एक निचे से पहाड़ निकलना शुरू हो गया, और उस पहाड़ी के बिच में एक रास्ता सा नजर आने लगे, जल्दी hi समझ आ गया ये एक गुफा ह जो बर्फ में धक् चुकी ह, सभी सैनिक जल्दी जल्दी उस गुफा का रास्ता खोलने लगे, रास्ता साफ़ होते hi भवर सिंह जल्दी से अंदर घुसने लगा तो चरण सिंह ने उसकी गार्डन पैर तलवार रख दी,

चरण- रुकिए रुकिए महाराज, ऐसे कैसे अकेले अकेले अंदर चल दिए,

भवर सिंह- ये क्या हो रहा ह,

चरण- इस शक्ति पैर हमारा भी अधिकार ह, ये मुझे भी चाहिए,

तभी कमाया ने चरण की गार्डन पैर तलवार रख दी,

काम्य- पीछे हैट जा लड़के वर्ण तेरी गार्डन अलग हो जाएगी,

भवर सिंह ने चरण की तलवार चीन ली,

भवर सिंह- पकड़ लो इन दोनों को और मार दो,

सैनिक आगे बढे तभी पीछे से प्रताप सिंह की आवाज आई,

प्रताप सिंह – ख़बरदार दो मेरे बेटो को हाथ लगाया,

प्रताप सिंह अपनी सेना को लेकर बहुत देर से वह छिपा हुआ इंतजार कर रहा था,

भवर सिंह- देखा सात्विक ये हमे धोखा दे रहा था,

सात्विक- इस शक्ति पैर सबका अधिकार ह, लेकिन मैं ये शक्ति उसे hi लेने दूंगा जो मुझे वचन देगा की इस शक्ति को पाने के बाद वो मेरी हर बात मानेगा, वार्ना ये शक्ति किसी के हाथ नहीं आएगी,

भवर सिंह- कहना क्या छाते हो, तुम मुझे अपना गुलाम बनाना चाहते हो, ये हरगिज नहीं होगा,

चरण- मैं तैयार हु गुरु जी,

प्रताप सिंह- बीटा ये शक्ति मुझे चाहिए,

चरण- मैं आपको शक्ति जरूर दूंगा पिता जी,

सात्विक- ये शक्ति उसी को मिलेगी जो मुझे वचन देगा की वो मेरी हर बात मानेगा,

भवर सिंह- ठीक ह मान लूंगा

सात्विक- ऐसे नहीं यहाँ आओ और मेरे हाथ पैर अपना हाथ रखो और वचन दो,

भवर सिंह काम्य चरना भानु संभु और प्रताप सिंह सबने सात्विक को वचन दे दिया,

राजगुरु- तुम सब एक दूसरे को धोखा दे रहे हो, इस शक्ति को पाने के बाद तुम इस संसार को तकलीफ hi डोज, मत आओ इस सात्विक की बातो में वार्ना साडी जिंदगी के लिए गुलाम बन जाओगे, वो जग उठेगा और सबको अपना गुलाम बना लेगा,

तभी सात्विक ने एक शक्ति राजगुरु पैर छोड़ दी, और राजगुरु के सीने से खून भेने लगा, राजगुरु हैरत से सात्विक को देखते रह गए, वह खड़े बाकि सब भी हैरत में थे,

सात्विक- जाओ ले लो शक्ति, ये याद रखना तुम सब में से कोई इस काबिल नहीं ह की अकेला उस शक्ति की ऊर्जा को सम्हाल सके,

चरण तुरंत उस गुफा की तरफ दौड़ पड़ा उसके पीछे प्रताप सिंह और भवर सिंह भी था, भवर सिंह के भागते hi काम्य भी गई, संभु और भानु खड़े देखते रह गए, जब उन्हें समझ आया तो वो भी पीछे भागे,

सबके हाथ में तलवार थी, प्रताप सिंह ने भवर सिंह पैर हुम्ला किया, भवर सिंह ने भी उस पैर हुम्ला कर दिया, काम्य ने अपने भाई को बचने की जगह उस गुफा में घुसने की कोशिश की, लेकिन पीछे से आ रहे संभु ने काम्य को पकड़ क्र दूर फेंक दिया, वही प्रताप सिंह और भवर सिंह के सैनिक आपस में लड़ने लगे, भवर सिंह अकेला पद रहा था,

चरण का धयान हर लड़ाई से दूर सिर्फ उस शक्ति को पाने में था, वो गुफा में घुस गया उसके पीछे भानु घुस गया, भवर सिंह और प्रताप सिंह एक दूसरे से लड़ रहे थे, संभु ने काम्य को धकेला और गुफा में घुस गया, जब काम्य उठ क्र आई तो भवर सिंह ने काम्य को पकड़ा और प्रताप सिंह के उप्पेर धकेल दिया, प्रताप सिंह थोड़ा सा हड़बड़ाया इसका मौका देख क्र भवर सिंह गुफा में घुस गया,

सात्विक ने उनके पीछे गुफा में घुसने गया लेकिन उसे एक झटका लगा और वो दूर जाकर गिरा, ये देख क्र सब घबरा गए, अब न काम्य ने हिम्मत की अंदर जाने की न hi प्रताप सिंह की हिम्मत हुई दोनों गुफा के दरवाजे पैर खड़े रह गए,

खुद सात्विक आश्चर्य से देखता रह गया, काम्य की आँखों में गुस्सा और आंसू थे, वही प्रताप सिंह अपनी हाथो को मसल रहा था, प्रताप सिंह गुस्से में आ गया,

प्रताप सिंह – मार दो सबको, कोई जिन्दा नहीं रहना चाहिए,

प्रताप सिंह के आदमियों ने भवर सिंह की सेना पैर हुम्ला फिर शुरू क्र दिया, और प्रताप सिंह ने काम्य पैर तलवार तान दी,

सात्विक कुछ रोकने की कोशिश नहीं क्र रहा था, वो बस जो हुआ उसे समझने की कोशिश कर रहा था,

काम्य निचे गिरी पड़ी थी और प्रताप सिंह उस पैर वॉर करने hi वाला था की वह देव और भौमिक जी आ गए, देव ने कूद क्र प्रताप सिंह को लात मरी वो दूर जाकर गिरा, भौमिक जी ने जब राजगुरु को घायल देखा तो वो जल्दी से दौड़ क्र उनके पास गए, राजगुरु अपनी अंतिम सांसे गईं रहे थे,

देव और भौमिक को वह आया देख सात्विक घबरा गया, वो जल्दी से वह से भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उस झटके ने उसके शरीर को ऐसा कर दिया था जैसे उसे लखवा मर गया हो,

प्रताप सिंह के सैनिक देव की तरफ दौड़े लेकिन देव पैर तो खून सवार था, उसके हाथ में तलवार थी वो एक hi वॉर में सब को काट ता हुआ चला गया, देव की मर काट देख क्र सैनिक वह से भागने लगे,

प्रताप सिंह मौका देख क्र गुफा में घुसने लगा तो काम्य ने उसे धक्का दिया और गुफा में घुसने लगी, तभी गुफा में से एक तेज रौशनी निकली और चारो तरफ एक सूरज जैसी रौशनी कर दी, सबकी आँखे चौंधिया गई, बस एक अकेला देव था जो साफ़ साफ़ देख प् रहा था, फिर वो रौशनी धीमी होती गई, और जब काम्य ने अंदर घुसना चाहा तो एक अदृश्य दीवार बन गई उस गुफा के रस्ते पैर, अब कोई उसमे नहीं जा सकता था,

काम्य जोर से चीख padi—nhiiiiiiiiiiiiiiiiii

इधर राजगुरु की हालत ख़राब हो रही थी, भौमिक जी गुस्से से आग बाबुल अहोने लगे थे, भौमिक जी ने गुस्से में सात्विक को देखा और उसकी तरफ उठ क्र चलने लगे, लेकिन राजगुरु ने उन्हें रोक लिया,

राजगुरु- रुक जा मेरे भाई, तू उसके जैसा मत बन, अपने क्रोध को अपने उप्पेर हावी मत होने दे, तेरी ताकत तेरे संयम में ह, तेरे प्रेम में ह, ये शक्तिया इंसान को भरष्ट करती हैं, तेरे अंदर का प्रेम तुझे भ्रष्ट नहीं होने दे रहा, अगर तू करोड़ के वश में चला गया तो इन शक्तियों के वश में हो जायेगा, जैसे सात्विक हो चुक्का ह, उसके किये की सजा समय उसे देगा,

भौमिक जी- भैया आप मुझे साथ लेकर क्यों नहीं आये, आपने ये क्यों किया,

राजगुरु- ये मेरी जिम्मेदार थी, ये सब मेरी वजह से hi तो हुआ ह, मैं इसे ठीक करना चाहता था लेकिन कर नहीं पाया, मैंने बहुत पाप किये हैं, न छाते हुए भी बहुत गलत किया ह,

देव दौड़ क्र राजगुरु के पास आया,

देव- गुरु जी राजगुरु को उठाइये इन्हे जल्दी से लेकर चलते हैं, इनका इलाज जरुरी ह,

राजगुरु- नहीं देव अब समय निकल चुक्का ह, और मैं अब जीना नहीं चाहता, बस तुमसे और तुम्हारी माँ से माफी मांगना चाहता हु, मेरी गलती की वजह से तुम दोनों के साथ बहुत अत्याचार हुए हैं, मैं कभी समझ hi नहीं पाया की जिस राजा की बात महारज सूर्यभान क्र रहे थे वो तुम थे न की भवर सिंह,

अब सर्फ तुम इस राजय को बचा सकते हो, सिर्फ तुम हो जो उसे रोक सकते हो, अपनी माँ से कहना की मुझे चमा कर दे, मैंने अगर फिरसे जनम लिया तो मैं अपने कर्मो का फल जरूर भुगतने वापस आऊंगा, और अपना पूरा जीवन तुम्हारी सेवा में लगा दूंगा,

देव- आप ठीक हो जायेंगे, मैं आपको जल्दी से यहाँ से ले चलता हु, गुरु जी उठिये जल्दी kariye,bhomik जी बस रोये जा रहे थे,

तभी राजगुरु ने भौमिक के हाथो में अपना दम तोड़ दिया, भौमिक जी जोर से चिल्लाये, bhaiyaaaaaaaaaaaaaa

सात्विक का धयान भी उधर गया, अब तक सात्विक का शरीर ठीक सा हो चुक्का था, वो उठने लगा, इधर देव की आँखों में गुस्सा उतर आया था, वो उठा और सात्विक की तरफ चल दिया, तभी उस गुफा में से एक जोर से हवा सा बवंडर सा आया और susususususuusuuuuuuuuuuuuuuuuu की आवाज करता हुआ हवा में उड़ गया, उसके निकलते hi आसमान से गड़गड़ाहट होने लगी, चारो तरफ जानवरो के रोने की आवाज आने लगी, बिजली चमकने लगी, तेज हवाएं चलने लगी, बड़ा hi भयानक नजारा था, तेज बारिश आने लगी, बर्फ पैर बारिश की वजह से वह की हालत ख़राब हो गई, तभी उप्पेर के पहाड़ पैर एक बिजली गिरी और धमाका इतना तेज था की शायद पुरे राजय में आवाज फ़ैल गई हो, और तभी गड़गड़ाने की आवाज आने लगी,

अँधेरा हो चुक्का था तो किसी को समझ नहीं आया क्या हुआ, लेकिन देव की तेज नजरो ने उधर देखा तो पाया की उप्पेर से बर्फ खिसकती हुई आ रही ह,

देव- गुरु जी यहाँ से निकालिये बर्फ खिसक रही ह,

भौमिक जी ने राजगुरु को गॉड में उठाया और चल दिए, तभी पीछे से काम्य के चिल्लाने की आवाज आई,

देव ने पलट क्र देखा तो काम्य बर्फ में फास चुकी थी,

काम्य- देव मुझे बचाओ,

देव- क्यों बचाओ मैं आपको, आपने साडी जिंदगी मुझे और मेरी माँ को सिर्फ दर्द और तकलीफ दी ह,

काम्य- मैंने जो किया उसकी सजा तुम मुझे दे देना लेकिन मैं यहाँ इस बर्फ में नहीं मरना चाहती, मुझे बचा ले देव तुझे तेरी माँ की कसम,

देव ने गुस्से में काम्य को देखा फिर उसके पास गया और बर्फ से निकला और कंधे पैर उठा क्र वह से निचे की तरफ भाग लिया, वही प्रताप सिंह भी निचे की तरफ भगा, सात्विक ने उसकी सहायता की, क्योकि सात्विक चरण को अपनी तरफ रखना चाहता था,

बाकि सैनिक पहले hi भाग लिए थे, वो सब वह से निचे तो आ गए, लेकिन वो गुफा फिर से बर्फ में दुब गई थी, सात्विक ने प्रताप सिंह को निचे सुरक्षित जगह पैर छोड़ दिया और खुद वह से कही निकल गया, इधर देव और भौमिक जी राजगुरु के शरीर को लेकर अपने राजय की तरफ चल दिए थे, काम्य भी उनके पीछे पीछे चली आ रही थी,

भौमिक जी का मन बहुत दुखी था, जिस रफ़्तार से वो लोग गए थे, अब उनके अंदर सब उत्साह ख़तम हो चुक्का था, बस एक हार बची हुई थी, वो हरी हुई सेना की तरह वापस अपने राजय की तरफ चले जार हे थे, जो सफर उन्होंने एक दिन में कर लिया था, उस सफर को वापस करने में उन्हें 4 दिन लग गए, वो बिना कुछ खाये पिए बस चले जार हे थे, भौमिक जी ने अपनी शक्ति से राजगुरु के शरीर को ऐसा कर दिया था की वो गले सादे नहीं,

जब वो राजय में पहुंचे तो पुरे राजय में खबर फ़ैल गई की राजगुरु मरे गए, और भवर सिंह बर्फ में डाब गए, पुरे राजय में मातम सा च गया था,

भौमिक जी ने राजगुरु का अंतिम संस्कार किया, राजय में शोक का माहौल रखा गया, लेकिन अब नै लड़ाई शुरू हो चुकी थी की राजा कोण बनेगा, न राजगुरु थे न hi राजा, देव को राजा बनने में कोई रूचि नहीं थी, उसका मन बहुत दुखी था,

इधर सूरज ज्वाला और अभिजीत के अंदर राजा बनने की इच्छा उठ रही थी, अमरावती और सौमित्र अपने बेटो को राजा बनाना चाहती थी, काम्य फिलाहल शांत थी, जब से वो वापस आई थी वो एक दम खामोश हो गई थी, वो अपने कमरे से बहार नहीं निकल रही थी, क्योकि शक्ति को पाने का मौका उसके हाथ से निकल चुक्का था, वो भवर सिंह के साथ मिलकर शक्ति पाना चाहती थी, लेकिन भवर सिंह ने उसका साथ छोड़ दिया और अकेला hi अंदर चला गया, वो जिन्दा ह या मर गया कोई नहीं जनता लेकिन उसने काम्य को धोखा दिया ये बात काम्य को खाये जा रही थी,

इधर राजय के बाकि बड़े व्यापारी और सेनापति मिलकर फैसला लेने लगे की किसे राजा बनाया जाये, सूरज और ज्वाला ने अपने अपने देव खेलने शुरू क्र दिए, उनकी माओ ने भी अपने अपने आदमी लगा दिए ताकि परजा में उनके बेटे को राजा बनाना की मांग हो सके, अभिजीत की माँ ने खुद को कमरे में कैद किया हुआ था, और वो इस राजय का बीटा भी नहीं था तो उसके बारे में कोई नहीं सोच रहा था,

आस पास के राजय भी इस बात पैर धयान लगाने लगे की राजा कोण बनेगा किस्से ज्यादा फायदा ह, सूरज और ज्वाला ने अपने अपने दोस्त राजाओ को सन्देश भेज दिए थे,

लेकिन इस सब के विपरीत राजय की परजा में देव को राजा बनाने की मांग उठने लगी थी, क्योकि देव की ताकत और अच्छे की चर्चा अब पुरे राजय में हो चुकी थी, लेकिन भोली परजा के अलावा कोई देव को राजा बनते नहीं देखना चाहता था, क्योकि अगर देव राजा बनेगा तो ये राजय बहुत मजबूत राजय बन जायेगा और पडोसी राजय इस पैर हुम्ला नहीं कर पाएंगे, तो कोई पडोसी राजय नहीं चाहता था की देव राजा बने,

अभिजीत पागलो की तरह शराब के नशे में घूम रहा था, क्योकि वो सब तरफ से खुद को हरा हुआ महसूस कर रहा था, अब महल में तनाव का माहौल था, इस सब में 3 दिन गुजर गए, सूरज और ज्वाला एक दूसरे के दुश्मन बन गए थे, दोनों अपने अपने साथ सैनिक रखने लगे the,kahi कोई उन पैर हुम्ला न कर दे,

भौमिक जी अपने दुःख में चले गए थे, देव इस माहौल से निकलना चाहता था, उसने निहारिका से बात की और महल को छोड़ने का फैसला कर लिया, देव निहारिका को लेकर महल से निकल गया, अमरावती और सौमित्र को दुःख था लेकिन इस समय वो अपने बेटे को राजा बनाने के चाकर में कुछ नहीं सोच प् रही थी,


देव के साथ चारो राजकुमारियों ने साथ जाने का फैसला कर लिया था, देव उन्हें लेकर निकल गया और महल से दूर एक घर में चले गए, ये घर था तो राजा का hi, वही देव ने रेवती को बुलवा लिया, और निहारिका और बाकि राजकुमारियों से मिलवाया, निहारिका ने बहुत अच्छे से रेवती का स्वागत किया था, देव ने निहारिका को सब कुछ बता दिया था, अब देव की सेना में एक और योद्धा का नाम जुड़ गया था जो थी रेवती,
 
अपडेट- 42




अगले कुछ दिनों तक राजय में तनाव का माहौल बना रहा, सबको पता चल चुक्का था की देव राजा बनना नहीं चाहता उसने महल त्याग दिया ह, धीरे धीरे पडोसी राजय भवनपुरा पैर हुम्ला करने के लिए सेना तैयार करने लगे थे, इस समय भवनपुरा एक कमजोर राजय दिख रहा था, जल्दी से जल्दी राजा बनाने की बात चलने लगी,

अभिजीत अपनी माँ काम्य के कमरे बहार बैठा रो रहा था तो उसके रोने की आवाज से काम्य अपनी दुनिया में वापस लोट क्र आई, उसे अहसास हुआ की जो बीत गया ह उसके लिए अपने बेटे का भविष्य कैसे बर्बाद करे,

काम्य कमरे से बहार निकली और साडी जानकरी पता की, उसने एक सभा बुलाई, राजय के सभी बड़े लोग उस सभा में बैठे हुए थे, राजय के राजा को चुनने का फैसला होना था,

सभी अपने अपने पक्ष रखने लगे, कुछ लोग सूरज को राजा बनाना चाहते थे तो कुछ ज्वाला को, अभिजीत का कही नाम hi नहीं था, काम्य का दिमाग ख़राब हो रखा था, लेकिन पूरी सभा के सामने कुछ बोल नहीं प् रही थी, तब उसने एक नै योजना चली,

काम्य- मैं अब तक एक सदमे में थी, लेकिन अब मैं होश में आ गई हु, और जैसा की पूरी परजा जानती ह की राजा भवर सिंह मुझसे ज्यादा किसी को प्यार नहीं करते थे, और उन्होंने कोई युवराज भी नहीं बनाया था, और हमारे राजय में राजा वही बनता ह जो युवराज हो, तो जब तक कोई नया युवराज नहीं बनता तब तक मैं भैया की जगह इस राजय को चलूंगी, और अगले युवराज का चयन करुँगी, जब युवराज बन जायेगा तो उसे राजा बनाया जायेगा,

काम्य की बात ने एक धमाका सा क्र दिया, उसकी बातो में कुछ सचाई थी जिसका फायदा उसने उठा लिया था, और राजय में अभी भी उसके बहुत लोग थे, जिन्होंने तुरंत काम्य का समर्थन क्र दिया, अमरावती और सौमित्र ने इसका विरोध किया, सूरज और ज्वाला भी विरोध करने लगे,

काम्य- ये सभा आज यही ख़तम होती ह कल फिर से ये सभा लगेगी और फैसला होगा, तब तक आप सभी को सोचने का मौका दिया जा रहा ह,

सभा के ख़तम होते hi काम्य ने अपना एक जासूस कही भेज दिया,

इधर देव को प्रेमलता की कहानी का पता चल चुक्का था, देव ने कस्तूरी और प्रेमलता को अलग अलग कर दिया था, ताकि दोनों को कमजोर किया जा सके,

निहारिका अपने भाई की सेवा में लग गई थी, और बाकि लड़किया अपनी युद्ध कला सिख रही थी,

वही प्रताप गड का माहौल भी भवनपुरा जैसा hi था, प्रताप सिंह के सरे बेटे जा चुके थे, प्रताप सिंह अपने तीनो बेटो को मारा हुआ मान रहा था, क्योकि किसी को नहीं पता अंदर क्या हुआ था, और जब वो राजय में आया तो उसे पता चला की देव रेवती को अपने साथ ले गया ह, प्रताप सिंह पूरी तरह टूट गया था, वो जिन्दा तो था लेकिन एक लाश की तरह पड़ा रहता था, वही रेणुका का भी यही हाल था, उसे उम्मीद थी की उसका बीटा वापस आएगा और देव से बदला लेगा, लेकिन उसका भी सब कुछ लूट चुक्का था,

देव और निहारिका पुरे परिवार से साथ बैठे हुए थे, जिसमे अमिता सोमिया रीवा अक्षरा रेवती अभेंद्र मनीषा और सुगंधा थी,

निहारिका- तुम सब अब मेरा hi परिवार हो, हम सब एक hi परिवार हैं,

अमिता- हमने अपने परिवार को छोड़ क्र आपको और देव को चुना ह माँ,

सोमिया- उन लोगो के बिच अब दम घुटने लगा था, उस महल में वो 3 जानवर रहते हैं, पिता जी के जाने के बाद उनमे से एक राजा बनेगा और वो न जाने कैसा व्यव्हार करेगा,

अक्षरा- मेरी माँ किसी को राजा नहीं बनने देगी, वो धरती आसमान एक क्र देगी,

रेवती- मैं भी आपकी शरण में आ गई हु माँ, देव ने वह मेरी माँ के सामने मुझे अपनी पत्नी कहा था, समाज मुझे चाहे कोई भी रिश्ते से बुलाये, लेकिन मैं खुद को देव की पत्नी hi मानती हु, मुझे शादी करने की जरुरत नहीं ह, न hi कोई अधिकार चाहिए, बस आप सब के साथ रहने का सौभाग्य चाहिए,

निहारिका- देव की शादी के बारे में मैं कुछ नहीं कह सकती, उसका जीवन सिर्फ मेरे अधिकार में नहीं ह, लेकिन तुम हमेशा हमारे साथ रहोगी ये मेरे अधिकार में ह,

सुगंधा घबराई हुई सी बैठी हुई थी, अब तक उसे नहीं पता था की देव को ये बात पता ह या नहीं जो प्रेमलता ने बताई थी,

निहारिका- सुगंधा बेटी तू इतनी चुप क्यों ह,

सुगंधा- कुछ नहीं महारानी, बस ऐसे hi,

निहारिका- मैं कोई महारानी नहीं हु, मैं इन सबकी माँ हु, तो तू भी मुझे माँ hi बुलाया कर, तुम सब मेरे hi बच्चे हो,

सुगंधा की आँखों में आंसू आ आगये, और मनीषा भी नाम आँखों से मुस्कुरा दी,

अभेंद्र- देव हमे अब क्या करना ह, हम जिस राजय को बचने के लिए साथ आये थे, आपने वादा किया था अपनी परजा को आजाद करवाने का आपने उस राजय से hi दुरी बना ली,

देव- ये किसने कह दिया की मैंने अपनी परजा से दुरी बना ली ह, या राजय से दूर जा रहा हु, मैं इसी राजय में हु, बस उस महल से दूर हुआ हु, वह की राजनीती का हिस्सा बनना नहीं चाहता, क्योकि मुझे राजा नहीं बनना, इस राजय की सेवा हम बिना राजा बने भी क्र सकते हैं, हमारा काम ह राजय पैर आये हुए खतरे को मिटाना, अगर वो महल इस राजय के लिए खतरा बनेगा तो सबसे आगे मैं खड़ा रहूँगा,

अभेंद्र- माफ़ करना मैंने आपकी सोच पैर शक किया,

निहारिका- इसमें माफ़ी मांगने की जरुरत नहीं ह बीटा, अच्छा सलाहकार वही होता ह जो अपने राजा की सोच पैर भी शक कर सकता हो, और अच्छा राजा वही हो सकता ह जो अपने सलाहकार की हर शक का निवारण करे, तुम दोनों का साथ हमेशा ऐसा hi बना रहे,

अभेंद्र- धन्यवाद रानी माँ

निहारिका- बस माँ

मनीषा- भैया उन माँ बेटी का क्या करना ह, उन्हें कब तक ऐसे hi बांध क्र रखेंगे,

मनीषा के सवाल से सुगंधा का दिल घबरा गया,

देव- आज उनसे मैं और माँ दोनों मिलेंगे, उसने माँ को इस सबके बिच में घुसाया ह तो अब उससे जवाब माँ hi मांगेंगी,

सुगंधा के चेहरे की घबराहट साफ़ दिख रही थी, उसे देव को खोने का दर लगने लगा था,

देव – चलो माँ जरा एक बार उनसे मिले तो सही, अब उनसे सही जवाब मांगने का समय आ गया ह,

देव निहारिका और अभेंद्र वह के लिए निकल गए,

सुगंधा घबराई हुई बैठी थी,

अमिता- तुम क्यों घबरा रही हो, वह जो भी बात होगी उससे तुम्हारे और देव के बिच कुछ नहीं बदलेगा,

सुगंधा- ये आप कैसे कह सकती हो,

अक्षरा- हम कह सकती हैं, तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं ह, जो हो रहा ह उसे होने दो, ये राज खुलने दो, देव के जीवन से जुड़ा हर राज अब खुलने दो, तभी वो जीवन में आगे बढ़ पायेगा, और हम सब तुम्हारे साथ हैं, चाहे कुछ भी हो लेकिन हम तुम्हे तुम्हारी मंजिल तक जरूर पहुचवायेंगे,

रीवा बड़ी अजीब नजरो से अक्षरा और अमिता को देख रही थी, क्योकि उनकी बाते रीवा को समझ आ रही थी, और इसलिए उसका शक उन पैर घेरा हो रहा था,

निहारिका और देव पहले प्रेमलता के पास गए, अभेंद्र बहार hi रुक गया,

निहारिका को देख क्र प्रेमलता गुस्से में उन्हें घूरने लगी,

निहारिका- प्रेमलता मैंने सुना ह की मैंने तुम्हारे प्रेम पैर डाका डाला ह, जब तुम प्रेम करने की उम्र में थी तब मैं एक बच्ची थी, मुझे क्या पता की तुम किस्से प्रेम करती हो, और दूसरा मैंने ये भी सुना ह की तुम राजवीर से प्रेम करती थी और उसका बच्चा तुम्हारे पेट में था, और मैंने राजवीर को मरवा दिया, अब तुम्हारा असली प्रेमी था कोण राजवीर या भवर सिंह, और सुआगंधा किसी की बेटी ह,

प्रेमलता- ये सब तेरी वजह से हुआ ह, मेरी जिंदगी तेरी वजह से बर्बाद हुई ह, वर्ण मैं इस महल की रानी होती,

निहारिका- हाहाहाहा मेरी वजह से, लेकिन मुझे तो इस बारे में कुछ जानकरी नहीं ह,

प्रेमलता- तू मुझसे कुछ नहीं जान पायेगी, तुम सबकी यही सजा ह तुम ऐसे hi तड़पते रहो और सोचते रहो की तुमने मेरा क्या बिगाड़ा था,

देव- हम क्यों सोचेंगे, हम अपनी जिंदगी में खुश हैं, तकलीफ में तुम हो, अपने hi गुस्से और नफरत में खुद hi मरती जा रही हो, तुम छह क्र भी हमारा कुछ नहीं बिगड़ पाओगी,

प्रेमलता- बिगड़ तो दिया ह मैंने, वो दोनों तुझसे प्रेम करती थी मैंने तेरे प्यार को बर्बाद कर दिया, मेरा प्यार पूरा नहीं हुआ तो तेरा भी नहीं होगा, तू और तेरी माँ दोनों प्यार के लिए तरसोगे,

निहारिका- प्यार हँ तू प्यार को समझती hi कहा ह, मेरा जीवन तो तब बर्बाद हुआ था जब भवर सिंह ने मुझसे जबरदस्ती शादी की थी, लेकिन मेरा प्यार अब मेरे जीवन में आया ह, और वो मुझे मिल गया ह, तो मेरा प्यार तो अधूरा रहा hi नहीं, वो मुझसे बहुत प्यार करता ह और मैं उससे,

देव- और रही बात सुगंधा के प्यार की, तो उससे मेरा क्या रिश्ता ह मुझे उससे फरक नहीं पड़ता, उसका प्यार पूरा होकर रहेगा, वो मेरी होगी उसे वो सबकुछ मिलेगा जो उसे चाहिए,

प्रेमलता- वो तेरी बहन ह

देव- मैं कैसे मान लू की वो मेरी बहन ह, और ह भी तो मुझे फरक नहीं पड़ता, मैं कोई रिश्ता नहीं मंटा,

निहारिका- और इनके रिश्ते को मंजूरी मैं दूंगी, ये बात सिर्फ तू जानती ह की इनके बिच क्या रिश्ता ह पूरी दुनिया नहीं जानती, पूरी दुनिया सिर्फ ये जानेगी की सुगंधा देव की पत्नी ह,

प्रेमलता- ये क्या बोल रही ह तू, भाई बहन की शादी करवाएगी, तू पागल हो चुकी ह, तू खुद शादी शुदा होकर किसी और से प्रेम क्र रही ह, तू रंडी बन चुकी ह,

निहारिका- तू इस लायक नहीं ह की मैं तुझे कोई सफाई दू, लेकिन तुझे एक बात जरूर बताउंगी शायद उससे तुझे और सकूं मिले,

निहारिका ने देव का सर पकड़ा और प्रेमलता के सामने hi देव के हॉट चुम लिए, ये देख क्र प्रेमलता की आँखे फटी रेहगाई, उसे यकीन hi नहीं हुआ की उसने क्या देख लिया ह,

निहारिका- देव hi मेरा प्रेमी ह, और सुगंधा उसकी पत्नी बनेगी और कस्तूरी भी,

प्रेमलता एक सदमे जैसी हालत में चली गई थी, उसे उसी हालत में छोड़ क्र निहारिका और देव वह से बहार आ गए,

देव- माँ आपने उसके सामने ऐसा क्यों किया,

निहारिका- उसके अंदर का गुस्सा और भड़केगा, अब वो सब सच बताएगी, इस बार जब हमारा उससे सामना होगा तब वो सब बोलेगी, लेकिन मुझे कस्तूरी से मिलना ह,

देव निहारिका को कस्तूरी के पास ले गया,

निहारिका- देव तू बहार इंतजार क्र,

देव बहा चला गया,

कस्तूरी बेसुध सी पड़ी हुई थी,

निहारिका- कैसी हो बेटी,

कस्तूरी ने निहारिका को देखा उसकी आँखों में दर्द और आंसू थे,

निहारिका- बहुत सेह लिया तूने, क्यों सेह रही ह ये सब, सब बोलकर खुद को आजाद क्यों नहीं कर देती, कब तक इस बोझ को उठाएगी तू, मैंने उस दिन भी तेरी आँखों में दर्द देखा था जब तूने देव पैर इल्जाम लगाए थे, और आज भी तेरी आँखों में वही दर्द ह, किसके लिए इस दर्द को सेह रही ह तू,

कस्तूरी- मैं नहीं जानती सच क्या ह, झूट क्या ह, लेकिन अब मेरा अस्तित्व hi नष्ट हो चुक्का ह, मुझे जो बताया गया था वो कुछ और था और सुगंधा के लिए कुछ और hi बताया गया ह, मैं समझ नहीं प् रही हु, किस बात पैर यकीन करू,

निहारिका- तुझे क्या सही लगता ह, तेरा मन क्या कहता ह, कोण सच्चा लगता ह, तू पहले अपने मन की सुन और फिर सोच क्या सही ह क्या गलत ह

कस्तूरी- मेरा मन क्या कहता ह इससे किसको फरक पड़ता ह,

निहारिका- पड़ता ह बहुत फरक पड़ता ह, वो जो बहार खड़ा ह न उसे फरक पड़ता ह, उसके जीवन में पहला प्यार ह तू, और शायद अभी तुझे समझ नहीं आएगा की पहले प्यार से कितना प्यार होता ह इंसान को, वो सब कुछ भूल सकता ह लेकिन न तेरे प्यार को भूल पायेगा और न hi तेरे धोखे को, इस सब में उसकी क्या गलती ह, वो तो पैदा भी तुम सबसे बाद में हुआ ह, अगर किसी ने गलत किया भी होगा वो कोई और होगा वो देव नहीं होगा, फिर देव के साथ गलत क्यों, किसी और के किये की सजा देव को क्यों, तेरी माँ ने मेरी गलती बताई ह तो उसकी सजा मुझे दे, और शायद दे भी चुकी ह, लेकिन देव को क्यों

निहारिका की बात सुनकर कस्तूरी ने रोना शुरू क्र दिया,

कस्तूरी- मैं उसे कोई दर्द नहीं देना चाहती थी, मैं उसे दर्द देने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी, लेकिन मैंने उसे दर्द दिया, मैंने उसके जीवन को नरख बना दिया, मेरी वजह से उसे क्या क्या झेलना पड़ा,

निहारिका- जब तुम उससे इतना प्यार करती हो तो तुमने ऐसा क्यों किया,

कस्तूरी- अपने पिता के लिए,

निहारिका- कोण ह तुम्हारे पिता,

कस्तूरी- राजवीर सिंह, और वो आपकी वजह से उस काम्य की कैद में हैं, अगर मैं ऐसा नहीं करती तो वो उन्हें मार देती,

निहारिका- राजवीर तुम्हारे पिता हैं, और मेरी वजह से वो कैद में कैसे हैं,

कस्तूरी- आपने भवर सिंह को अपनी सुंदरता के जाल में फसा लिया था, जिसका विरोध आपने भाई राजवीर जी ने किया और आपने भवर सिंह के साथ मिलकर उन्हें कैद करवा दिया,

निहारिका- हाहाहाःहाहा, ये सब तुम्हे प्रेमलता ने बताया,

कस्तूरी- है और काम्य देवी ने भी,

निहारिका- और तुमने यकीन कर लिया, तुमने एक बार भी नहीं सोचा अगर मैं ये सब करवाती तो क्या इस राजय की सबसे ताकतवर रानी मैं होती, अगर बहवर सिंह मेरी बात मंटा तो मैं यहाँ राज किया करती, न की मैं और मेरा बीटा यहाँ अपमान झेल रहे होते,

कस्तूरी सोच में पद गई,

निहारिका- तुझे मैं भोली कहु या मूरख समझ नहीं आता, इतनी बड़ी बात थी और तूने देव से पूछने की कोशिश भी नहीं की,

कस्तूरी- मैं उसके जरिये आपको बर्बाद करना चाहती थी लेकिन मुझे देव से प्यार हो गया,

निहारिका- तो उस प्यार पैर यकीन करके hi पूछ लेती, खेर अब क्या हो सकता ह, फिर भी मैं तुझे बता दू की जब मेरे बही को कैद किया गया तब मैं एक बच्ची थी, मेरा पहला यौवन आना hi शुरू हुआ था, उस समय मुझे मर्द और औरत के बिच के अंतर का भी ठीक से नहीं पता था, और मैं अपने भाई से इस दुनिया में सबसे ज्याद ाप्यार करती थी, वो hi मेरी माँ मेरे पिता थे, मैं उनके लिए जान भी दे सकती थी, और खास बात ये की राजवीर और प्रेमलता के बिच कोई रिश्ता नहीं था, बल्कि राजवीर ने hi प्रेमलता की शादी आचार्य जी से करवाई थी, भैया ने मुझे कभी बताया तो नहीं लेकिन अब मुझे थोड़ा बहुत याद आता ह की प्रेमलता बहुत बार भवर सिंह के साथ देखि थी मैंने, शायद इसीलिए भाई ने उसकी शादी करवा दी थी, और है राजवीर अब काम्य की कैद में नहीं ह, तुम्हारे बाकि सवालो के जवाब वो खुद देंगे जब वो होश में आ जायेंगे, वैसे भी अब प्रेमलता ने जो कहानी बताई ह उस हिसाब से तो तुम्हारे पिता न राजवीर हैं और न hi माँ प्रेमलता ह,

निहारिका की बातो ने कस्तूरी को झकझोड़ दिया था, वो एक सदमे जैसी हालत में चली गई थी,

निहारिका- तूने जो किया उसकी सजा तू बहुत झेल चुकी ह, अब तू इस तकलीफ से बहार निकल और चल मेरे साथ, तेरे हर सवाल का जवाब तुझे वही मिलेगा,

कस्तूरी- नहीं महारानी मैं देव का सामना नहीं क्र सकती, मैंने किसके कहने पैर किया सही किया या गलत किया इन सब बातो का फरक नहीं पड़ता, लेकिन मैंने देव के साथ जो किया वो माफ़ी के लायक नहीं ह, मैं कभी खुद को hi माफ़ नहीं कर पति हु तो देव के सामने कैसे जाउंगी,

निहारिका- देव को तेरी जरुरत ह, तू उसका पहला प्यार ह, और तुझसे की हुई नफरत ने उसे प्यार करना hi भुला दिया ह, अगर देव के अंदर के प्यार को वापस लाना ह तो तुझे उसके पास आना hi होगा, और तेरे जीवन का सच भी वही पता चलेगा,

निहारिका ने देव को आवाज लगाई, देव अंदर आ गया,

निहारिका- देव इसे खोल दो और अपने साथ लेकर चलो,

देव- लेकिन माँ

निहारिका- मैं बोल रही हु न, मुझे पता ह मैं क्या क्र रही हु, इसने जो किया ह वो इसकी नासमझी थी, इसे इसके सवालो के जवाब मिलने चाहिए, और इसके जवाब hi हमारे जवाब हैं,

देव ने दुबारा कुछ नहीं कहा, अपनी माँ की बात मान ली और कस्तूरी को खोल दिया, कस्तूरी कड़ी हुई और लड़खड़ा क्र गिर गई, लेकिन देव के हाथो ने उसे सम्हाल लिया,

निहारिका- इसे घर लेकर चलो और प्रेमलता से हम फिर मिलने आएंगे,

अभेंद्र ने कस्तूरी को अपने साथ बैठाया और घर की तरफ चल दिए, कस्तूरी लगभग बेसुध सी hi अभद्र के उप्पेर गिरी पड़ी थी, जैसे hi वो घर पहुंचे तो कस्तूरी को वह देख क्र सब चौंक गए,

कस्तूरी- मनीषा बीटा कस्तूरी को अंदर लेकर जा और इसका ख्याल रख,

रीवा- माँ आप इसे यहाँ क्यों ले हो, इसने तो

निहारिका- इसने जो गलती की थी उसकी सजा इसे मिल चुकी ह,

अमिता- लेकिन माँ इसने देव के साथ कितना बुरा किया था,

निहारिका- वो तो तुम सबने भी किया था न बीटा, लेकिन तुम सब भी बदल गई हो न, तुम्हे भी दूसरा मौका मिला न फिर इस बेचारी को क्यों नहीं मिल सकता,

अक्षरा- लेकिन माँ इसने अब तक नहीं बताया की इसने ऐसा क्यों किया,

निहारिका- इसने बता दिया ह, और मुझे इस पैर यकीन ह, इसे बहकाया गया ह, इसे बचपन से hi हमारे खिलाफ बहकाया गया ह, जैसे तुम सब को बहकाया गया था,

देव- लेकिन इसका रिश्ता उन तीनो से भी था माँ

निहारिका- क्या तेरा मन कहता ह ऐसा हुआ होगा,

देव ने सर झुका लिया, वही सुगंधा बैचैन सी एक कोने में कड़ी थी,

रीवा- माँ आप बोल रही हो तो हम उसका ख्याल रखेंगे, आपकी बात हमारे लिए सबसे उप्पेर ह,

देव- मैं जरा भौमिक जी के पास होकर आता हु, काफी समय से उनसे मिला नहीं हु, राजगुरु के जाने के बाद वो बहुत तकलीफ में होंगे,

देव वह से निकल गया,

निहारिका- ये सच से भाग रहा ह, लेकिन कस्तूरी इसके जीवन का पहला प्यार ह, और उसी के धोखे ने इसके अंदर नफरत को भर दिया ह, वही फिर से इसके अंदर के प्यार को जगा सकती ह, ये हम सबसे बहुत प्यार करता ह, लेकिन मैंने महसूस किया ह, इसका प्यार हमेशा अधूरा सा रहता ह, एक कमी सर यह जाती ह इसके प्यार में, मैंने hi इसे इतना कठोर बनने के लिए कहा था, लेकिन अब मैं महसूस कर रही हु की कठोर बनाना के चक्कर में मैंने अपने बेटे की मासूमियत को खो दिया ह,

अक्षरा- सही बोल रही हो माँ, मैंने भी वो अधूरा पैन महसूस किया ह,

निहारिका- हमे मिलकर देव को दो जिंदिगियो में अंतर करना सीखना होगा, उसकी नफरत तभी सामने आणि चाहिए जब उसके दुश्मन उसके सामने हो, लेकिन जब उसके अपने उसके पास हो तो उसकी मासूमियत और प्यार बहार आना चाहिए, वर्ण कही उस नफरत में अपने देव की हसी न खो दे,

साडी लड़किया- हम आपके साथ हैं माँ, जैसा आप कहे हम वैसा करेंगे,

निहारिका- बस जो भी हालत हो तुम सब देव का साथ मत छोड़ना

सब एक साथ- कभी नहीं माँ हम मरते दम तक देव के साथ हैं,

वही भौमिक जी अपने दुःख से निकल आये थे, उन्होंने खुद को सम्हाला देव उनसे मिलने आया हुआ था,

देव- गुरु जी अब हमे आगे का सोचना होगा, वह महल में राजनीती का खेल चल रहा ह, राजा बनने की लड़ाई में वो राजय का विनाश कर देंगे,

भौमिक जी- उनके चाहने या सोचने से कुछ नहीं होता, होगा वही जो उप्पेर वाला चाहता ह, जो नियति में लिखा हुआ ह, लेकिन उससे पहले बहुत कुछ घटने वाला ह,

देव- अब क्या होने वाला ह, अब तो वो सब उस बर्फ में दफ़न हो चुके हैं,

भौमिक जी- सब नहीं देव सब नहीं, क्योकि देव वो शक्ति आजाद हो चुकी ह, और मुझे लगता ह जल्दी hi एक तूफ़ान हमारी जिंदगी में आने वाला ह, वो शक्ति किसके पास ह ये मुझे नहीं पता, लेकिन उस गुफा में जो लोग गए वो सभी अत्याचारी हैं,

देव- गुरु जी मैं तैयार हु, किसी भी युद्ध के लिए,

भौमिक जी- ये युद्ध आसान नहीं होगा, अब जो चीजे सामने आने वाली हैं उनसे देवता भी नहीं टकराते,

देव- गुरु जी ये जीवन उप्पेर वाले ने किसी मकसद से hi दुबारा दिया ह, और मैं उस मकसद पीछे नहीं हटूंगा,

भौमिक जी- मुझे लगता ह कल का सूरज कुछ बदलाव लेकर आएगा, तुमने जीतनेय भी साथी बनाये हैं सबको तैयार करो, जल्दी hi सबकी जरुरत पद सकती ह, और हमे राजवीर से मिलना होगा, उसे जल्दी होश में लाना होगा हमे उसकी भी जरुरत पड़ेगी,

देव- है गुरु जी उनसे बहुत सवालो के जवाब लेने हैं,

रात हो चुकी थी, और महल में अभी भी सब तनाव में थे, काम्य ने ऐसा धमाका जो किया था, जिसका जवाब सूरज और ज्वाला पैर नहीं था, वो और उनकी माँ गुस्से में पागल हुई घूम रही थी,

काम्य ने अपनी सुरक्षा में सैनिक तैनात किये हुए थे, उसे दर था कही उसके भतीजे उसे मरने की कोशिश न करे, उसका दर सही भी था, क्योकि वो दोनों hi ये योजना बना रहे थे, कुछ समय पहले तक इस महल में बस काम्य का राज चलता था, आज वो अपनी जान बचा रही थी,

पुरे भारतवर्ष में जिन दो राजयो को सबसे ताकतवर समझा जा रहा था, आज व सबसे कमजोर हालत में थे, सेना में अविश्वास की माहौल था, कुछ अधिकारी एक औरत को गद्दी पैर बैठना नहीं चाहते थे, सूरज और ज्वाला ने ऐसे लोगो को अपने साथ जोड़ना शुरू क्र दिया था, उन्होंने राजय में बहावत करवाने की तैयारी कर लिट् hi, वही अभिजीत और कमाया अपने कमरे में बैठे हुए थे,

अभिजीत- माँ ये लोग हमे मार देंगे,

काम्य- तू फ़िक्र मत कर बीटा, मैं इस राजय की महारानी बनूँगी, चाहे उसके लिए मुझे पुरे परिवार को hi तबाह क्यों न करना पड़े, मैंने ऐसा नहीं चाहा था मैंने जो स ः वो मुझसे चीन लिया गया ह, अब मैं सबसे सब कुछ चीन लुंगी, मैंने वो पाने के लिए क्या क्या नहीं किया, हर तरह से बहवर सिंह का साथ दिया, लेकिन वो मुझे धोखा देकर उस गुफा में घसु गया,

अभिजीत- ये तो अच्छा hi हुआ न माँ, अगर आप उस गुफा में जाती तो वापस नहीं आ पति,

काम्य- तुझे नहीं पता उस गुफा में क्या ह, उसने से जॉब hi बहार आएगा, वो बहुत शक्तिशाली होगा, और मैंने वो मौका खो दिया,

अभिजीत- अब आप यहाँ की रानी बनेंगी, फिर मैं राजा बनूँगा,

काम्य- तुझे तो राजा बनना hi ह, तेरे पास अपना राजय ह, लेकिन अब तू यहाँ का hi राजा बनेगा, ये hi समझौता ह,

अभिजीत- समझौता कैसा समझौता,

कामय- कल सुबह समझ जायेगा,

अभिजीत- एक बात तो अच्छी हो गई की वो देव खुद यहाँ से चला गया, वर्ण एक और खड़ा हो जाता इस राजय को पाने के लिए, उसने अपनी जान बचा ली वर्ण उसे मैं मार क्र hi रस्ते से हटाना पड़ता,

काम्य- ये हमारी खुशकिस्मती ह की उसे इस राजय का लालच नहीं ह, कभी नहीं था, वो अकेला hi किसी महा सेना से काम नहीं ह, मैंने उसे लड़ते देखा ह, वो चाहे तो पूरी धरती को जीत ले, तू कभी भूल क्र भी उससे लड़ने की गलती मत करना, वो चाहे तो क्या नहीं कर सकता,

अभिजीत- आप उससे दरी हुई हैं माँ

काम्य- अब हम अकेले हैं, सात्विक भी हमारे साथ नहीं ह, अब देखना ह उस गुफा से बहार कोण आता ह, जॉब hi उस गुफा से बहार आएगा, उस हिसाब से हमारी आने वाली जिंदगी काम करेगी,

अभिजीत- आपको उम्मीद ह उस गुफा से कोई बहार आएगा,



काम्य- है उस गुफा से जरूर कोई बहार आएगा, और उसके आने पैर क्या क्या बदलाव होंगे इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल ह, मैं जो लड़ाई लड़ रही हु वो कब बदल जाएगी कहना मुश्किल ह,
 
अपडेट- 43


भौमिक जी और देव राजवीर के पास बैठे हुए थे,

देव- गुरु जी इनका शरीर पहले से काफी स्वस्थ दिख रहा ह,

भौमिक जी- है अब ये पूरी तरह स्वस्थ ह, लेकिन जो औषधीय हम दे रहे हैं, उनकी वजह से ये होश में नहीं आ रहा था क्योकि जब ये होश में आएगा तो इसके शरीर को बहुत पीड़ा का अहसास होगा, मैं चाहता था पहले ये पूरी तरह ठीक हो जाये, उसके बाद hi होश में लाया जाये, अब ये पूरी तरह तैयार ह,

देव- ये कब होश में आ सकते हैं,

भौमिक जी ने एक औषधि तैयार करने लगे, और वो राजवीर को पीला दी,

भौमिक जी- कुछ समय में ये औषधि अपना काम कर देगी, और जल्दी hi इसे होश आ जायेगा, अब इसे यहाँ से लेकर चलो,

देव- क्यों गुरु जी,

भौमिक जी- क्योकि जब हम यहाँ आ रहे थे तो हमारे पीछे कुछ सैनिक लगे हुए थे, उन्होंने इस जगह को देख लिया ह,

देव- मैं अभी उन्हें धुंध क्र ख़तम कर देता हु,

भौमिक जी- नहीं कुछ नहीं करना ह, फ़िलहाल बहुत कुछ चल रहा ह, हम कुछ गड़बड़ नहीं करेंगे, हमे इससे बहुत बड़ी लड़ाई लड़नी ह, ये छोटी लड़ाइयों के लिए हमारे पास समय नहीं ह, तुम राजवीर को उठाओ और पीछे के रस्ते से निकलो मैं जरा इनका धयान भटकता हु,

देव ने राजवीर को कंधे पैर उठाया, इधर भौमिक जी ने अपनी शक्ति से वह चारो तरफ धुआँ धुआँ कर दिया, उसके बाद भौमिक जी भी निकल गए, कुछ देर बाद जब धुआँ हटा तो वह जो घर बना हुआ था उसमे आग लगी हुई थी, सब जल रहा था, जो सैनिक निगरानी क्र रहे थे वो हैरान थे, देव और भौमिक जी वह से राजवीर को लेकर जा चुके थे,

रात के अँधेरे में किसी को पता नहीं चला वो कहा गए, किसे लेकर गए, देव राजवीर को लेकर अपने घर पहुंच गया, उस घर की निगरानी भी करवाई जा रही थी, सूरज और ज्वाला को दर था देव कही कोई योजना न बना रहा हो, उसने राजा बनने के लिए मन तो कर दिया, लेकिन सबके मन में देव का दर बना हुआ था,

जब देव राजवीर को लेकर घर पंहुचा तो साडी लड़किया चौंक गई, और निहारिका घबरा गई,

निहारिका- देव क्या हुआ इन्हे, ये ठीक तो ह न,

देव- है माँ ये ठीक हैं, लेकिन हम पैर नजर राखी जा रही थी, इसलिए मैं इन्हे यही ले आया, अब ये बिलकुल ठीक हैं, जल्दी hi इन्हे होश आ जायेगा,

रीवा- माँ ये कोण हैं,

निहारिका- ये वो हैं जिनके लिए मैं 20 साल भवर सिंह का अत्याचार सहा ह,

अक्षरा- मतलब हम कुछ समझे नहीं,

निहारिका- ये मेरे भाई राजवीर हैं,

राजवीर नाम सुनकर सभी चौंक गए, और सबसे ज्यादा हैरान खड़ी थी कस्तूरी, वो अब तक सबसे पीछे कड़ी थी, वो तुरंत आगे आ गई, और राजवीर को निहारने लगी,

निहारिका- बेटी मैं तुझे विश्वास दिलाते हु ये तेरे पिता नहीं हैं, प्रेमलता ने सबसे झूट बोलै ह, ये बहुत hi शरीफ और नियम से चलने वाले इंसान हैं, जिस उम्र में लड़के जीवन का आनंद उठाना चाहते हैं, ये उस उम्र में कठोर जीवन जी रहे थे, खुद को मजबूत बना रहे थे, इस राजय की सुरक्षा करने के लिए खुद को तैयार कर रहे थे, हमारे पिता जी ने बहुत नियमो से हमे पला था,

रीवा- माँ ये मेरे मां हैं, ये कहा थे अब तक, हमे तो सुना था इन्हे मृत्यु दंड मिला था,

अमिता- इन्हे महाराज पैर हुम्ला करने के इल्जाम में मरवा दिया गया था न,

भौमिक जी- इन बच्चियों को इस राजय का सच जानना होगा, तभी ये तुम्हारे परिवार का त्याग समझ पाएंगे,

निहारिका- नहीं इन्हे मारा नहीं गया था, इन्हे कैद क्र लिया गया था, और इन्हे जिन्दा रखने की शरत पैर मुझसे जबरदस्ती शादी की थी भवर सिंह ने,

सभी लड़कियों के मुँह खुले रह गए,

रीवा- ये क्या कह रही हो माँ,

देव- माँ सच बोल रही हैं, भवर सिंह ने एक बहुत बड़ी साजिश के तहत मां को फसाया था, और माँ को मजबूर किया था,

अक्षरा- और उसमे मेरी माँ काम्य भी शामिल रही होगी,

सबने अक्षरा को देखा,

निहारिका- बेटी मुझे हमेषा ऐसा क्यों लगता ह की तू काम्य के बारे में कुछ ऐसा जानती ह जो हम सब नहीं जानते,

अक्षरा- ऐसी बात नहीं ह माँ,

अक्षरा मन तो कर रही थी लेकिन उसकी आँखे उसका साथ नहीं दे रही थी,

सोमिया- असल में हुआ क्या था माँ, हम जानना चाहेंगे,

निहारिका- क्या करोगे वो सब जान कर,

अमिता- हमे पता होना चाहिए हमारा परिवार कैसा ह,

तभी राजवीर के करहाने की आवाज आने लगी,

अह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मैं कुछ नहीं बताऊंगा, चाहे जितना मर लो, मैं नहीं बताऊंगा,

सब राजवीर के पास पहचुहे, निहारिका दौड़ क्र राजवीर के पास पहुंची और उसका हाथ पकड़ क्र बैठ गई,

निहारिका- भैया सब ठीक ह भैया, आप ठीक हो भैया,

भौमिक जी ने राजवीर के सर पैर हाथ रखा और उसके दिमाग को शांत करने लगे, धीरे धीरे राजवीर शांत होने लगा,

भौमिक जी- अब वो ठीक ह, लेकिन तुम सब पीछे हो जाओ, वो किसी पल होश में आएगा, और तुम सभी को वो नहीं पहचानता,

सब पीछे हाथ गए, बस सामने खड़े थे भौमिक जी और निहारिका,

राजवीर ने धीरे धीरे अपनी आँखे खोली, वो एक दम शांत लेता रहा, फिर अचानक उठ क्र बैठ गया, और इधर उधर देखने लगा,

भौमिक जी- शांत हो जाओ राजवीर तुम अब आजाद हो, और ठीक भी हो,

राजवीर ने भौमिक जी को देखा और उनके साथ कड़ी निहारिका को, राजवीर बड़े धयान से दोनों को देखने लगा, निहारिका की आँखों में आंसू बाह रहे थे,

राजवीर- आप अप्प मैं मैं आपको जनता हु, आप भौमिक जी हैं न, और ये ये लड़की ये निहारिका ,

निहारिका दौड़ क्र राजवीर से लिपट गई- भैया आप ठीक हैं भैया, आप वापस आ गए,

राजवीर- मेरी बहन तू तू ठीक ह न,

निहारिका- मैं ठीक हु भैया, अब सब ठीक ह भैया,

दोनों रो रहे थे, उन्हें देख क्र बाकि सब भी रो रहे थे,

राजवीर- मैं तो भवर सिंह की कैद में था, यहाँ कैसे पंहुचा, किसने बचाया मुझे,

निहारिका- आपके भांजे ने,

देव सामने आ गया,

राजवीर- मेरा भांजा,

निहारिका- है भैया आपका भांजा मेरा बीटा देव,

राजवीर- देव देव तेरा बीटा इतना बड़ा हो गया, मैं कब से कैद में था,

देव- लगभग 20 साल से,

राजवीर- मैं उसे जान से मार दूंगा, मैं उन दोनों भें भाई को मार दूंगा,

भौमिक जी- शांत हो जाओ राजवीर, तुम्हे अभी आराम की जरुरत ह, तुम कैद में थे तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुक्का ह, और मुझे लगता ह जिस वजह से तुम्हे कैद किया गया था, वो हो चुक्का ह, वो शक्तिया आजाद हो चुकी हैं,

राजवीर- क्या नहीं ऐसा नहीं हो सकता, ऐसा नहीं होना चाहिए था, ये दुनिया ख़तम हो जाएगी,

देव- नहीं होगी,

भौमिक जी- एक युद्ध शुरू होने वाला ह, और हमे तुम्हारी जरुआत पड़ने वाली ह,

राजवीर ने उठने की कोशिश की, लेकिन खुद को सम्हाल नहीं पाया,

राजवीर- युद्ध कैसा युद्ध,

भौमिक जी- वो जागने वाला ह, और उसे रोकना होगा,

राजवीर- हमारे पूर्वजो ने जिसे रोकने के लिए इतना कुछ किया वो सब बर्बाद हो गया,

रीवा- कोई हमे भी समझायेगा क्या होने वाला ह, कोण आ रहा ह, और सब इतना डरे हुए क्यों हैं, जब हमारे साथ देव ह उसकी ताकत के सामने कोई नहीं टिक सकता, क्या उस राक्षश की बात हो रही ह,

भौमिक जी- नहीं बेटी ये उस राक्षश के बारे में नहीं ह, ये हैवान के बारे में हैं,

कस्तूरी- माफ़ करना मैं आप सबको बिच में रोक रही हु, लेकिन आप जो बाते कर रहे हैं मैं उन्हें समझ नहीं प् रही हु, क्योकि मेरे दिमाग में बस एक सवाल गूंज रहा ह, प्रेमलता की कही हुई बाते घूम रही हैं, जिनका जवाब सिर्फ ये दे सकते हैं,

कस्तूरी राजवीर के सामने बैठ गई,

कस्तूरी- क्या आप इस हालत में हैं जो मेरी बातो का जवाब दे सके,

राजवीर- ये लड़की क्या बोल रही ह निहारिका, इसे क्या जवाब छाइये मुझसे, कोण ह ये बच्ची,

निहारिका- आपको प्रेमलता याद ह न,

राजवीर- प्रेमलता हमारे आचार्य जी की बेटी,

निहारिका- है वही, कस्तूरी और सुगढ़ा उसकी की बेतिया हैं, और प्रेमलता ने इस बच्ची को हमारे खिलाफ कुछ कहानी सुनाई ह, ये बची सच जानना चाहती ह, आपके और प्रेमलता के रिश्ते के बारे में, और भवर सिंह के बारे में,

राजवीर- क्या वो अब तक नहीं सुधरी, मैंने उसे समझाया था, अगर जीवन में खुश रहना चाहती ह तो असल जिंदगी में जीना शुरू क्र दे,

सुगंधा- क्या हुआ था, हम जानना चाहते हैं,

राजवीर- भवर सिंह, काम्य, मैं और निहारिका और हमारे साथ और भी काफी बच्चे आचार्य जी के पास शिक्षा लिया करते थे, निहारिका तब काफी छोटी थी, हमारे साथ आचार्य जी की बेटी प्रेमलता भी होती थी, भवर सिंह राजा का बीटा था तो वह की सभी लड़किया उसे अपना बनाना चाहती थी, क्योकि सबको उसकी रानी बनना था, उनमे से एक प्रेमलता भी थी, लेकिन भवर सिंह के लिए ये सब मजे की चीजे थी, उस समय बस वो एक hi लड़की को प्रेम करता था, जिसका पता मुझे भी बाद में चला,

भवर सिंह ज्यादा तर लड़कियों के साथ रंगरलिया मनाता रहता था, और उनमे से एक प्रेमलता भी थी, एक बार प्रेमलता और भवर सिंह को मैंने अतरंग हालत में देख लिया था, भवर सिंह को समझने का कोई फायदा नहीं था, आचार्य जी से मेरा सम्बन्ध बहुत अच्छे थे, इसलिए मैंने प्रेमलता को समझने की कोशिश की लेकिन उसकी समझ में भी कुछ नहीं आया, वो भवर सिंह के पीछे पागल थी, कुछ समय बाद hi हम सब शिक्षा पूरी करके वह से आ गए, भवर सिंह की शादी करवा दी गई, लेकिन प्रेमलता का पागलपन ख़तम नहीं हुआ, वो फिर भी बहवर सिंह से मिलती रही,

वो जवान थी और उसकी हरकते अब आचार्य जी की बदनामी करवाने लगी थी, तो आचार्य जी ने मुझसे प्रेमलता की शादी की बात कही लेकिन मैंने शादी न करने का परं लिया हुआ था, क्योकि मेरा उद्देश्य कुछ और था, लेकिन इधर प्रेमलता भवर सिंह से गर्भवती हो गई, और वो भवर सिंह के पास गई लेकिन बहवर सिंह ने उसे अपनाने से मन कर दिया क्योकि उसकी दूसरी शादी होने जा रही थी, प्रेमलता ने राजमहल में अपनी बात रखने का फैसला कर लिया था, ये बात भवर सिंह के पिता को पता चल गई, उन्होंने प्रेमलता को मरवाने का फैसला कर लिया था, वो नहीं चाहते थे की भवर सिंह पैर कोई इल्जाम आये,

मैं बड़ी दुविधा में था क्योकि मैं राजा के खिलाफ भी नहीं जाना चाहता था, और न hi मैं आचार्य जी का बुरा देख प् रहा था, तब मेरी hi सलाह पैर भवर सिंह को महल से कुछ समय के लिए दूर भेज दिया गया था और मैंने एक बहुत hi पढ़े लिखे और सुलझे हुए लड़के से प्रेमलता की शादी करवा दी, उस लड़के को पता था प्रेमलता पहले से गरबवती ह फिर भी उसने शादी को है कर दी, क्योकि मैंने उसे यहाँ का आचार्य बनाने का वडा किया था,

लेकिन प्रेमलता ने मुझे अपना दुश्मन समझ लिया था, वो मुझसे नफरत करने लगी थी, मैंने जो भी किया उसके भले के लिए किया था, फिर बहवर सिंह वापस आ गया, क्योकि महाराज की मृत्यु हो गई थी, और भवर सिंह राजा बन गया था, और उसने कुछ समय बाद hi प्रेमलता से मिलना शुरू क्र दिया, अब तक प्रेमलता को एक बेटी पैदा हो चुकी थी, और फिर भवर सिंह ने निहारिका से शादी करने का प्रस्ताव रखा मेरे सामने, और…………….

पुरे कमरे में सनता च गया,

सुगंधा- क्या वासना इतना अँधा कर देती ह की सही गलत पता hi न चले, लेकिन हमारे पिता वो कितने महँ हैं उन्हें पता था हम उनकी संताने नहीं हैं, फिर भी वो हमे अपनी बेटियों की तरह पल रहे थे, और इतना प्रेम से हमारा पालन पोषण कर रहे थे,

कस्तूरी- अगर उस समय प्रेमलता गर्भवती थी तो वो सुगंधा पैदा हुई होगी, फिर मैं कोण हु, मैं कैसे पैदा हुई,

राजवीर- हो सकता ह उत्तम आचार्य जी की बेटी हो,

कस्तूरी- प्रेमलता ने तो मुझे दो कहानिया सुनाई हैं, कोनसी सच ह मैं नहीं जानती, उसने पहले कहा था की मैं प्रेमलता और आपकी बेटी हु, और दूसरी बार बताया की मुझे भवर सिंह उन्हें दे गया था, अब ये नहीं पता की मैं भवर सिंह की बेटी हु या किसी और की, और अगर भवर सिंह की बेटी हु तो मेरी माँ कोण ह, मेरा अस्तित्व मेरी पहचान hi मेरे पास नहीं ह,

राजवीर- जब भवर सिंह मेरे पास निहारिका से शादी का प्रस्ताव लेकर आया था, वह कुछ ऐसा हुआ की मैंने भवर सिंह पैर हाथ उठा दिया था, और उसने मुझे जेल में डलवा दिया, उसके बाद क्या हुआ मुझे नहीं पता,

देव- क्या हुआ था वह,

राजवीर- मैं तुम सबके सामने बताना नहीं चाहता, लेकिन उसने मेरे सामने ऐसा प्रस्ताव रखा की मैं गुस्से में पागल हो गया,

निहारिका- मुझे भी नहीं पता भैया उसने क्या कहा था जिस वजह से आप इतना गुस्सा हो गए की आपने राजद्रोह क्र दिया,

राजवीर- उस दिन भवर सिंह काम्य के साथ हमारे घर आया, बात करते करते उसने निहारिका से शादी करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ये बहुत छोटी थी शादी के लायक नहीं थी तो मैंने उसे मन कर दिया, फिर उसने मुझे एक लालच दिया की मैं काम्य से शादी कर लू और वो मेरी बहन से शादी क्र लेगा, मैंने गुस्से में भवर सिंह को आगे बोलने से रोक दिया, लेकिन काम्य मुझसे लिपट गई, और बोली की

काम्य- राजवीर मैं तुमसे प्रेम करती ह,

राजवीर- ये क्या बकवास ह तुम शादी शुदा हो, और एक बच्चे की माँ हो,

काम्य- लेकिन मैं उसके साथ सुखी नहीं हु, और वो अपने राजय गया हुआ ह,

राजवीर- ये संभव नहीं ह, मैंने आजीवन शादी न करने का प्राण लिया हुआ ह,

भवर सिंह- अच्छा ठीक ह मत करो शादी, एक और काम कर सकते हो,

राजवीर- क्या

भवर सिंह- तुम मेरी बहन के साथ मजे कर सकते हो इससे उसका प्यार भी पूरा हो जायेगा और तुम्हे भी मजे मिल जायँगे और जो संतान होगी उसे हम पाल लेंगे, और मैं तेरी बहन के साथ शादी करके अपनी संतान पैदा कर लूंगा, उससे सूंदर लड़की इस संसार में नहीं ह, वो मेरे बिस्टेर की सोभा बढ़ाएगी, और मेरी बहन तेरे बिस्टेर की,

भवर सिंह के ये शब्द मेरे अंदर इतना गुस्सा भर गए की मैं अपना आप खो बैठा, और मैंने उस पैर हुम्ला कर दिया,

तब तक भवर सिंह की दोनों पत्निया एक एक बच्चा पैदा कर चुकी थी और वो दोनों दुबारा गरबवती थी, और काम्य उसका भी एक बीटा था और वो भी गर्भवती थी, और प्रेमलता की भी बेटी हो चुकी थी,

कस्तूरी- तो मैं हु कोण,

अक्षरा- यहाँ कुछ गलत ह,

सबने अक्षरा को देखा,

देव- क्या मतलब क्या गलत ह,

अक्षरा- काम्य की दो संताने हैं, मैं और अभिजीत, और ये कहानी जिस समय की चल रही ह मैं उस समय पैदा हो नहीं सकती क्योकि मैं सबसे छोटी हु, मैं तो रीवा के बाद में पैदा हुई हु, उस घटना के लगभग 3 साल बाद,

राजवीर- ओह्ह्ह्हह्ह नहीं,

निहारिका- क्या हुआ भैया,

रेज्वीर- अब समझ आया,

देव- क्या मां जी,

राजवीर- बेटी मैं नहीं जनता तू ये कैसे बर्दास्त कर पायेगी, लेकिन तुझे बर्दास्त करना होगा,

कस्तूरी- आप बस बतिये, मैंने बहुत कुछ सहा ह, ये भी सेह लुंगी,

राजवीर- तू काम्य की बेटी ह,

राजवीर के मुँह से निकले शब्दों ने वह धमाका कर दिया था, सब मुँह खोले आँखे फाडे खड़े रह गए,

अमिता- ये ये कैसे हो सकता ह, बुआ की बेटी कैसे, वो तो तब शादी शुदा थी तो उन्हें ये सब करने की जरुरत क्या थी,

सोमिया- कही बेटी हो जाने की वजह से उन्होंने इसे दूर तो नहीं क्र दिया,

देव- मां जी ये बात कुछ हजम नहीं हो रही, जब उन्होंने अक्षरा को पला तो पहेली बेटी को क्यों दूर कर दिया,

राजवीर- जब काम्य का बीटा पैदा हुआ, उसके बाद उसका पति कुणाल अपने राजय में चला गया था और वो वह काफी समय तक रुक गया था क्योकि वह आंतरिक कलह चल रही थी, और इस बिच काम्य फिर से गर्भवती हो गई थी,

ये एक और धमाका था,

कस्तूरी- लेकिन बिना अपने पति के वो कैसे,

अक्षरा- किसी और मर्द के साथ सम्बन्ध बना क्र, और पिता जी महल में थे नहीं तो वो कैसे बता सकती थी की ये बच्चा किसका ह, क्योकि पिता जी को पता चल जाता, इसलिए शायद उनके वापस आने से पहले hi बच्ची को पैदा करते hi कही दूर भेज दिया गया, ताकि किसी को पता न चले, और भवर सिंह उस समय राजा बन चुके थे तो उनके लिए बात छुपानी आसान थी,

सुगंधा- और प्रेमलता भवर सिंह की रखैल थी hi, उसने धन और भवर सिंह के पास रहने के लालच में उस बच्ची को अपना लिया, और हमारे पिता चुपचाप सब सेह गए, और हमे अपनी बेटियों की तरह पलने लगे,

कस्तूरी कड़ी कड़ी hi जमीन पैर गिर पड़ी, अक्षरा ने उसे सम्हाला, हर कोई हैरान था, सुगंधा और कस्तूरी दोनों hi राजमहल की संताने थी, उन्होंने अपना जीवन इतनी तकलीफो में बिताया था,

अक्षरा- तुम क्यों रोटी हो, तुम्हे तो खुश होना चाहिए,

कस्तूरी- खुश किस बात से खुश होना चाहिए, ये की मेरी माँ ने मुझे पैदा होते hi त्याग दिया, मैं महल में जी सकती थी लेकिन मैंने अपना पूरा जीवन उस गरीबी में बीता दिया, किसी अनजान को अपने माँ बाप बोलते हुए, जबकि तुम सब महल का जीवन जीते रहे,

अक्षरा- अच्छा तुम बताओगी तुम्हारे पास जीवन में किस चीज की कमी रही ह, कोनसा सुख तुम्हे नहीं मिला,

कस्तूरी- क्या मिला मुझे, उस गरीबी में उस झोपडी में जीवन बीता दिया,

अक्षरा- लेकिन तुम्हारे पास माँ बाप थे, असली नहीं थे लेकिन तुम्हे जीवन भर अहसास नहीं होने दिया की वो असली नहीं हैं, लेकिन यहाँ बहुत से लोग हैं जिनके पास असली माँ बाप हैं लेकिन उन्हें अपने माँ बाप से बात तक करने को नहीं मिला कभी, तुम्हारे साथ सुगंधा भी थी उसके पिता भी कोई और थे, तुम्हारे सामने देव ह जिसके पास सब कुछ था लेकिन उसका कोई नहीं था, उसकी माँ को भी उससे चुप क्र अपनी ममता लुटानी पड़ती थी, तुमने जो जीवन जिया ह पुरे अधिकार से जीया ह, लेकिन हमने तो बस दुसरो पैर अत्याचार करके hi अपने जीवन को सुखी मन ह,

अक्षरा की बातो से कस्तूरी चुप हो गई,

अक्षरा- और हम सब यहाँ ऐसी hi तकलीफो से गुजर क्र आये हैं, इसीलिए हम सब साथ हैं, और एक दूसरे के लिए मरने मारने को तैयार हैं, मैं तुम्हारे सामने हाथ बढाती हु क्या तुम मेरी बड़ी बहन बनकर हमारे साथ शामिल होना चाहोगी, शायद दुनिया में दूसरी बहन मिलने पैर लोगो को लगता होगा उसके अह्दिकर काम हो रहे हैं, लेकिन मुझे ख़ुशी हो रही ह की मुझे के और बहन मिली ह,

सुगंधा- तू बहुत खुशकिस्मत ह कस्तूरी,

अमिता- तुम खुद को अलग क्यों समझ रही हो सुगंधा, हम सब भेने हैं,

निहारिका- हम सब एक hi परिवार हैं, और कभी खुद को अकेला मत समझना, भूल जाओ पहले क्या हुआ था, अब मैं तुम सबकी माँ हु समझे,

निहारिका ने कस्तूरी और सुगंधा को गले से लगा लिया,

कस्तूरी- लेकिन मेरे पिता कोण ह ये कभी पता नहीं चल पायेगा,

राजवीर- तुम्हारे पिता..

राजवीर बोलने hi वाले थे की अक्षरा ने उनका हाथ पकड़ लिया और आँखों से न का इशारा किया, राजवीर हैरान थे, उन्होंने अक्षरा को देखा, अक्षरा की आँखों में नमी थी,

कस्तूरी- क्या आप जानते हैं वो कोण ह,

Rajveer-aaaaa नहीं नहीं अभी नहीं जनता, लेकिन हम पता लगा लेंगे,

राजवीर की लड़खड़ाई आवाज को निहारिका ने परख लिया, लेकिन वो भी शांत रही, सभी लोग एक दूसरे के गले लगे हुए थे और अपने आंसुओ से एक दूसरे के कंधे भिगो रहे थे,

रेवती- मैं तो सोचती थी मेरा परिवार hi सबसे बुरा ह, मेरे साथ hi इतने अत्याचार हुए हैं, लेकिन यहाँ तो दुखो की नदिया बह रही हैं,

मनीषा- सही कहा, मेरी तकलीफ भी इनके सामने बहुत छोटी सी ह,

सोमिया- लेकिन काम्य बुआ आपसे शादी क्यों करना चाहती थी, अगर वो कस्तूरी को पिता का नाम देना चाहती तब भी आप ऐसा नहीं करते ये बात उन्हें भी पता होगी,

राजवीर- ये बात मेरी भी समझ में नहीं आई, लेकिन जब उसने मुझे बंदी बनाया और ऐसी जगह भेज दिया जहा सिर्फ राजा को hi जानकारी होती थी, और भवर सिंह ने मुझसे शक्ति के बारे में पूछना शुरू क्र दिया, मुझे तब समझ आया की वो ये सब उस शक्ति को पाने के लिए कर रहा था, उसने निहारिका को अपने कब्जे में किया और मुझसे शक्ति के बारे में जाने की कोशिश करता रहा, लेकिन मैं चुप रहा मैंने उसे कुछ नहीं बताया,

भौमिक जी- लेकिन अब उसे शक्ति का पता चल चुक्का ह,

राजवीर- लेकिन कैसे,

भौमिक जी- क्योकि उस किताब के हिसाब से देव ने उस शक्ति को प् लिया ह, और दूसरी शक्ति दक्षिण दिशा में थी जिसके पास मैं और सात्विक पहुंच गए, अनजाने में hi हमने उस शक्ति को अपने अंदर बसा लिया, और अब तीसरी शक्ति के लिए 4 लोग अंदर गए हैं, भवर सिंह और प्रताप सिंह के 3 बेटे चरण संभु और भानु, अब उनमे से कोण कोण उस शक्ति को पाकर वापस आता ह ये देखना ह, लेकिन उनमे से एक को मैं जनता हु जिसे ये शक्ति मिलेगी hi मिलेगी,

देव- किसे गुरु जी,

भौमिक जी बोलने hi वाले थे की तभी घर का दरवाजा जोर जोर से पिता जाने लगा, अभेंद्र ने जल्दी से दरवाजे पैर पंहुचा, बाकि सब भी बहार आये

देव- अभेंद्र क्या हुआ कोण था,

अभेंद्र- हम न जाने कब से अंदर इस चर्चा में लगे हुए थे की हमे पता hi नहीं चला, सबेरा हो चुक्का ह, और एक बड़ी संशय हमारे राजय के बहार आ कड़ी हुई ह,

देव- क्या हुआ,

उधर महल में सभा बैठी हुई थी, काम्य रानी बनने के लिए तैयार थी लेकिन सूरज और ज्वाला ने बगावत करवा दी थी, परजा और बहुत से सैनिक काम्य को रानी मैंने से इंकार करने लगे थे,

सूरज- माफ़ करना बुआ आपकी ये चल तो विफल हो गई, अब आप रानी नहीं बल्कि नोकरनी बनेंगी,

काम्य- ोये लड़के शायद तू मुझे अच्छी तरह अभी तक जनता नहीं ह, अगर मैं इस गद्दी पैर नहीं बैठूंगी तो ये गाड़ी hi नहीं रहेगी, न hi ये राजय रहेगा,

तभी एक सैनिक दौड़ता हुआ आया,

सैनिक- सेनापति जी सेनापति जी,

सेनापति- क्या हुआ सैनिक

सैनिक- हम पैर हुम्ला हुआ ह,

सूरज- हुम्ला किसने किया हुम्ला

सैनिक- पता नहीं राजकुमार, एक बहुत hi विशाल सेना हमारे राजय को घेर क्र कड़ी ह, और ये इतनी बड़ी सेना ह की पुरे राजय को तबाह क्र देगी, हमारे सैनिक मैदान छोड़ क्र भाग रहे हैं, कोई उस सेना के समाने खड़ा नहीं रह सकता,

सूरज- इतनी बड़ी सेना किसकी हो सकती ह,

काम्य- हहहहहहहहहा

सब काम्य को देखने लगे,

कमाया- मैंने कहा था न अगर मैं इस गद्दी पैर नहीं बैठूंगी तो ये राजय hi नहीं रहेगा,

सूरज ने तलवार निकली और काम्य की तरफ बढ़ा तभी कुछ सैनिक और बड़े योद्धा बिच में आ गए,

काम्य- अगर चाहते हो की ये राजय बचा रहे तो झुक जाओ मेरे सामने,

सूरज- हम नहीं झुकेंगे, कोई सेना हमे नहीं हरा सकती, हम युद्ध कर्नेगे, बंदी बना लो इन सबको,

काम्य के योद्धाओ ने हुम्ला कर दिया और काम्य को लेकर वह से भाग गए, अभिजीत पहले से राजय से बहार जा चुक्का था,

काम्य अपने साथियो को लेकर उस सेना में चली गई,

सूरज और ज्वाला ने सेना तैयार की और मैदान में आ गए, लेकिन सामने कड़ी सेना को देख क्र सेनिको को अपनी मोत दिखाई देने लगी, उनके अंदर दर घुस गया था, और सेनिको में बाते होने लगी की इन सबकी आपस की लड़ाई में हम क्यों अपनी बलि दे, अब इस गद्दी का कोई राजा नहीं ह, हम क्यों अपनी जान दे,

सैनिक युद्ध के मैदान से पीछे हटने लगे,

इधर ये घटना हो रही थी और दूसरी तरफ

देव- क्या हु अभेंद्र



अभेंद्र- एक बहुत hi बड़ी सेना हमारे राजय को घेर क्र कड़ी हुई ह, और हमारे सैनिक मैदान छोड़ क्र भाग रहे हैं, और वो सेना हमारे राजय के खेतो और गाओं को रोंधती हुई अंदर घुसी चली आ रही ह,
 
अपडेट- 44



सूरज और ज्वाला अपनी सेना को भागते हुए देख रहे थे,

सूरज- ये किसकी सेना ह, जो काम्य का साथ दे रही ह, ऐसा कोण हो गया जो एक औरत के लिए हमारे राजय से दुश्मनी लेने आ गया,

सेनापति- महाराज से आपके फूफा के राजय की सेना ह जो पूर्व दिशा में है, और शायद उनके साथ आस पास के राजा भी जुड़ गए हैं

जवाला- लेकिन वो हम पैर हुम्ला क्यों करेंगे, और काम्य तो वह कभी गेन hi फिर वो काम्य का साथ देने कैसे आ गए,

सेनापति- ये तो मैं नहीं कह सकता राजकुमार, लेकिन ये सेना हमारे पुरे राजय को तहस नहस क्र देगी, हुमैर पूरी सेना पीछे हाथ चुकी ह, कोई भी सैनिक इस सेना के सामने खड़े रहने की हिम्मत नहीं कर रहा ह,

वही सामने कड़ी सेना में काम्य और अभिजीत पहुंच चुके थे, वो वह के राजा के सामने खड़े थे,

काम्य- धन्यवाद आप सही समय पैर आ गए

राजा- वडा जो किया था भाभी, हमे तो आना hi था यही समझौता हुआ था न,

अभिजीत- कैसा समझौता माँ, चाचा जी किस समझौते की बात कर रहे हैं,

काम्य- ये सब राजगद्दी का खेल ह बीटा, तुझे यहाँ का राजा बनाने के लिए हमने क्या कुछ नहीं किया ह, और मैं तुझे राजा बना क्र रहूंगी,

अभिजीत- मैं कुछ समझा नहीं,

काम्य- तेरे पिता कुणाल अपने राजय के राजा बनने वाले थे, उसके बाद तू राजा बनता लेकिन मुझे तुझे यहाँ का राजा बनाना था, इसलिए मैंने कुणाल के छोटे भाई सोहन से समझौता किया की वो मेरी मदद करे तुझे यहाँ का राजा बनाने में तो कुणाल वापस उस राजय में नहीं आएंगे और सोहन वह का राजा बन जायेगा, तुझे याद होगा मैंने तुझे एक सन्देश लेकर भेजा था इनके पास, उस समय भी ऐसे hi हालत थे, तब इनकी जरुरत पद सकती थी लेकिन उस समय हालत बदल गए, लेकिन अब हमे इनकी जरुरत पड़ी तो ये पूरी सेना लेकर यहाँ आ गए, अब ये इस राजय को जीत क्र तुझे यहाँ का राजा बना देंगे, और यहाँ से लेकर पूर्व दिशा तक बस इन्ही दोनों राज्यों का राज होगा, फिर पूरा भारतवर्ष हमारे सामने झुकेगा,

सोहन- समझे भतीजे, अब तुम देखो मैं कैसे इस राजय को तबाह करता हु, और सूरज और ज्वाला को जला क्र रख करता हु,

काम्य- भवर सिंह के बिना इस सेना में इतनी हिम्मत नहीं ह की ये हमारी सेना से टकरा सके, देखो सब कैसे भाग रहे हैं,

सोहन- क्या हम अब रुक जाये,

काम्य- नहीं रुकना नहीं ह, यहाँ की परजा के अंदर मेरा दर पैदा करना होगा, उन लोगो ने मेरे सामने झुकने से मन कर दिया, उन्हें मेरा सामने झुकना होगा,

सोहन ने सेना को आगे बढ़ने का आदेश दिया, सूरज और ज्वाला अपने कुछ सेनिको के साथ वह खड़े रह गए,

ज्वाला- सूरज हम इस सेना का सामना नहीं कर पाएंगे, राजा बनने से पहले hi उप्पेर जा चुके होंगे,

सूरज- सही बोल रहा ह तू, हमे तो अभी युद्ध लड़ने का कोई खास अनुभव भी नहीं ह,

संपत्ति- राजकुमार अगर आप युद्ध नहीं लाडे तो ये सेना हमारी पूरी फसल और गावो को उजाड़ देगी,

सूरज- हम पहले अपनी जान बचाये या परजा की,

सूरज और ज्वाला ने अपने घोड़े मोड और वापस दौड़ लिए,

सोहन के सैनिक ने आकर उसे खबर दी की दोनों राजकुमार वापस भाग गए हैं,

काम्य- चलो महल में और रस्ते में जो कुछ आये सब बर्बाद कर दो,

सोहन – भाभी आप सेना के पीछे हमारे तम्बू लगे हैं उनमे जाकर आराम कीजिये, हम यहाँ सब का विनाश करके आपको अंदर लेकर जायेंगे,

काम्य वह से चली गई,

तभी दूसरा सैनिक दौड़ता हुआ आया,

सैनिक- महाराज कोई रस्ते में आ खड़ा हुआ ह

सोहन- मतलब

सैनिक- कोई योद्धा हमारी सेना का रास्ता रोक क्र खड़ा ह,

सोहन- कितनी बड़ी सेना के साथ

सैनिक- अकेला ह,

सोहन और काम्य- अकेला

सोहन- एक अकेले से हमारी सेना दर गई, ख़तम करो उसे, और आगे बढ़ो,

अभिजीत- अकेला कोण आएगा,

देव अकेला hi पूरी सेना के सामने खड़ा था, उसकी आँखों में कोई दर नहीं था, उसके हाथ तलवार थी,






वही दूसरी तरफ भौमिक जी और अभेंद्र अपनी सेना में जा पहुंचे थे,

भौमिक जी- सब रुक जाओ, कहा भागे जा रहे हो,

सैनिक- साधु बाबा उस सेना के सामने हम नहीं लड़ सकते, ये राजकुमार तो दर क्र भाग जायेंगे, फिर हम किसके लिए लाडे,

अभेंद्र- उसके लिए जो तुम सबके लिए अकेला उस सेना के सामने खड़ा ह, और जब तक वो खड़ा ह महाकाल की सौगंध काल भी इस राजय में नहीं घुस सकता,

सबने पलट क्र देखा तो पाया की देव अकेला खड़ा ह और सेना उसकी तरफ डोडी चली आ रही ह,

दूसरा सैनिक- वो अकेले क्या कर लेंगे,

अभेंद्र- शायद तुम प्रताप सिंह की सेना का हाल भूल चुके हो, वो अकेला hi पूरी सेना के लिए काफी था,

पूरी सेना रुक गई,

भौमिक जी- अपने राजकुमार का साथ दो, वो किसी राजय के लिए नहीं लड़ रहा ह, बस आप सबके लिए और आपके परिवार के लिए लड़ रहा ह, उनमे से उसे कोई नहीं मर सकता, और तुम सबका साथ उसे मिला तो वो अकेला पूरी सेना को हरा सकता ह,

सेना में एक जोश सा आने लगा था,

अभेंद्र- आओ मेरे साथ बता दो उन्हें की हमारे राजय की सेना किसी राजा या सेनापति के पीछे चलने वाले कायर लोग नहीं ह, हम अपने देश के लिए मरना जानते हैं, सबसे पहले हमारा देश ह,

सभी सैनिक वापस मुद गए,

इधर दूसरी सेना की एक टुकड़ी देव के नजदीक आ चुकी थी, उधर काम्य की धड़कने तेज हो रही थी, वो जानती थी अब क्या होने वाला ह, उसके हाथ पाव ठन्डे हो चुके थे, वो सेना को रोकना भी चाहती थी लेकिन रोक नहीं प् रही थी,

और सेना देव के नजदीक आई और उस पैर हुम्ला किया और तभी चीखो की आवाज गूंजने लगी, देव के हाथ में तलवार किसी बिजली की तरह चमकने लगी, वो जिधर तलवार घुमा देता सामने वाले सेनिको के शरीर के अंग काट क्र दूर जा गिरते, खून हवा में उड़ने लगा था, सेनिको की चीखे दूर दूर तक फैलने लगी थी, सामने की सेना की ऐसी हालत देख क्र भवनपुरा के सेनिको का जोश और बढ़ गया, और वो सब एक जूथ होने लगे,

इधर देव ने कुछ hi पालो में काम्य की सेना के सेंकडो सैनिक मार गिराए थे, ये देख क्र सोहन भी घबरा गया,

सोहन- क्या बाला ह ये, एक अकेला इतने सेनिको को नहीं मार सकता,

सेनापति- महाराजा बी क्या करे,

सोहन- और सैनिक भेजो, हमारे पास सेना की कमी नहीं ह, कब तक लड़ेगा वो,

सेनापति ने आगे बढ़ क्र और सैनिक भेज दिए, सेना जैसे hi देव के नजदीक आई तभी देव के पीछे से अभेंद्र अपनी सेना को लेकर आ चुक्का था और वो दुश्मन सेना पैर टूट पड़े,






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अभेंद्र देव के पास आया,

अभेंद्र- आप इस राजय के साथ खड़े हैं तो ये राजय भी आपके साथ खड़ा होगा,

देव- हमे अंदर जाना होगा, सीधा हुम्ला उनके राजा पैर करना होगा, हम अपने सेनिको को मरने नहीं दे सकते, ये सेना बहुत बड़ी ह, हमारे सैनिक जल्दी hi थकने लगेंगे,

अभेंद्र- आप चलिए मैं आपके कदम से कदम मिला कर चलूँगा,

देव और अभेंद्र ने घोडा लिया और सोहन की सेना के अंदर मार काट मचाते हुए घुसते चले गए, अभेंद्र उनसे लड़ रहा था, लेकिन देव उसके लिए ये कोई लड़ाई नहीं थी, उसकी तलवार सबको एक hi वॉर में चीरती हुई जा रही थी,

दुश्मन सेना में हाहाकार मच गया था, देव को अपनी तरफ आता देख दुश्मन सैनिक दर से कंपनी लगे थे, उनके हथिया उनके हाथो से छूटने लगे थे, वही हालत दूर बैठे सोहन की भी थी,

एक सैनिक दौड़ता हुआ काम्य को खबर देने पहुंच गया था,

काम्य- क्या हुआ सैनिक, हम महल में पहुंच गए क्या,

सैनिक- नहीं महारानी, ये आफत हमारे उप्पेर टूट पड़ी ह,

सैनिक ने साडी बात काम्य को बताई,

काम्य समझ गई की वो देव होगा, उसे उम्मीद नहीं थी की देव लड़ने आएगा, क्योकि देव पहले hi महल छोड़ चुक्का था, काम्य के दिल में दर बैठ गया था,

काम्य- सैनिक अपने महाराज से कहो की जल्दी से अपनी सेना को वापस बुल्ये और चले यहाँ से, वर्ण ये किसी को जिन्दा नहीं छोड़ेगा,

सैनिक- लेकिन महाराज को कैसे कहु मैं, वो मुझे कायर समझेंगे, एक योद्धा से डरकर पूरी सेना वापस भाग गई,

काम्य- उनसे कहना मैंने बोलै ह, इसके बारे में बताने का समय नहीं ह, अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो निकल चलो यहाँ से, मुझे उम्मीद नहीं थी की वो लड़ने आएगा, वो अकेला hi पूरी सेना का नाश कर सकता ह,

सैनिक सोहन के पास भाग लिया, और काम्य ने तुरंत घोडा लिया और वह से भाग निकली, सोहन के खबर पहुंचते hi वो भी तुरंत वह से निकल भगा, सोहन के भागते hi उसके साथ आई उसकी अपनी सेना भी वापस मुद गई, लेकिन उसके साथ आये छोटे राजा और उनकी सेना बिना किसी कारन के देव की तलवार का शिका रो गए थे, लेकिन सोहन के भागते hi बाकि राजाओ ने हथियार रख दिए, पूरी सेना ने आतम समर्पण कर दिया,

सोहन काम्य और अभिजीत वह से बहुत दूर निकल चुके थे,

दुश्मन सेना के हथियार डालते hi पुरे भवनपुरा के सैनिक ख़ुशी से झूमने लगे, आज उनके अंदर से एक और दर ख़तम हो चुक्का था, सामने कोण खड़ा ह इससे फरक नहीं पड़ता, बस तुम्हारी हिम्मत कितनी बड़ी ह बस वही सामने वाले दुश्मन को हरा देती ह,

देव खून से लथपथ था, ये सब खून उसके सामने आये सेनिको का था, उसके करीब तक तो कोई तलवार पहुंच hi नहीं पाई,

दुश्मन सेना के ज्यादातर सैनिक वह से भाग गए, कुछ सैनिक और उनके राजा वह बचे जिन्हे बंदी बना लिया गया था, तभी वह सूरज ज्वाला और सेनापति और उनके खास सैनिक आ गए,

सूरज- बहुत खूब मुझे यकीन था हमारी सेना कभी नहीं हर सकती, हमारा राजय सबसे शक्ति शैली राजय ह, मेरा सौभाग्य ह की मैं ऐसी सेना का राजा बनूँगा,

ज्वाला- जब मैं राजा बनूँगा तो पूरी सेना को इनाम दिया जायेगा, मैं हर कदम पैर अपनी सेना का साथ दूंगा, आझमने इतनी बड़ी सेना को हराया ह की कोई सोच भी नहीं सकता, ये घटना इतहास के पन्नो में लिखी जाएगी, आने वाले समय में लोग पढ़ेंगे कैसे हमने इतनी बड़ी सेना को हराया,

सूरज- हमने जो बंदी बनाये हैं, उन्हें हम मृत्यु दंड देंगे, उनके सर काट क्र महल के बहार टंगवा दो, ताकि आने जाने वाले लोग देख सके की हमने किसे हराया ह,

देव- ख़बरदार जो किसी को हाथ भी लगाया,

सूरज- ये दुश्मन हैं, इन्होने हमारे राजय पैर हुम्ला किया ह,

देव- फिर भी ये इंसान हैं, और तुम अभी तक राजा नहीं हो तुम्हे सजा देने का अधिकार नहीं ह,

ज्वाला- अब तुम्हे ये इंसान दिख रहे हैं, कुछ समय पहले तो तुमने इन्हे मूली गाजर की तरह काट दिया था,

देव- वो एक युद्ध था, और वो सब अपने राजय को बचने केलिए किया था, लेकिन अब इन्होने हःतियार रख दिए हैं, अब इन्होने आत्मसमर्पण कर दिया ह, अब ये दुश्मन नहीं रहे, सिर्फ इंसाने हैं,

देव की बात सुनकर वह खड़े हर किसी ने तालियों से देव का स्वागत किया, दुश्मन सेना ने भी हाथ जोड़ लिए,

सूरज- अभी यहाँ कोई राजा नहीं ह, तो बड़ा बीटा होने के नाते मेरे पास अधिकार ह राजा बनने का, और फैसला सुनाने का,

तभी सेनिको में से एक आवाज आई- हम तुम्हे राजा नहीं मानते,

सेनापति- कोण बोलै, किसने इतनी हिम्मत की,

दूसरी आवाज आई- है हम इन दोनों को hi राजा नहीं मानते,

तीसरी आवाज- जो अपनी सेना को छोड़ क्र भाग जाये वो राजा बनने लायक नहीं ह,

ऐसे hi चारो तरफ से आवाज आने लगी, पूरी सेना एक hi सवार में बोलने लगी,

ये राजा बनने लायक नहीं ह, हम इन्हे राजा नहीं मानते, अगर ये राजा बने तो हम विदोर्ह क्र देंगे, हम कोई युद्ध नहीं लड़ेंगे, हम सब ये राजय छोड़ देंगे,

भौमिक जी- सब शांत हो जाओ, ये चर्चा महल में होगी,

भौमिक जी की बात मान कर पूरी सेना वापस लोट आई, बंदी सेनिको को साथ ले आये, और राजय में भी सबा खबर फ़ैल चुकी थी इस युद्ध के बारे में, तो राजधानी की पूरी परजा भी महल के बहार आ गई,

सूरज और ज्वाला दोनों के अंदर चिंता फैली हुई थी, क्योकि वो छह क्र भी देव का सामना नहीं कर सकते थे, और बी पूरी परजा उन दोनों के विरोध में थी तो सरे रस्ते बंद हो चुके थे,

शाम होते होते पूरा माहौल बदल चुक्का था, और एक आवाज उठ चुकी थी की अगर कोई राजा बनेगा तो देव होगा, देव के अलावा और किसी को राजा नहीं बनने देंगे, देव सबको समझने की कोशिश कर रहा था लेकिन अब कोई सुनने को तैयार नहीं था, भौमिक जी के कहने पैर अभेंद्र निहारिका और बाकि सभी को महल में ले आया,

भौमिक जी ने देव से बात की,

भौमिक जी- देव तुम्हे सबकी बात मान लेनी चाहिए,

देव- गुरु जी आप जानते हैं मुझे राजा बनने का कोई इच्छा नहीं ह,

तभी निहारिका और राजवीर भी वही आ गए,

निहारिका- लेकिन इस राजय के भले के लिए तुझे राजा बनना चाहिए बीटा,

राजवीर- है बेटे इस राजय ने बहुत अत्याचार देख लिए हैं, अब समय ह यहाँ के लोगो को सुख का जीवन दो,

देव- लेकिन

भौमिक जी- देव हम तीनो तुमसे बड़े हैं, हमारी बात मनो,

देव- आप तीनो मेरे पूजनीय हैं, आपकी बात hi मेरे लिए आदेश ह, ठीक ह जैसा आप कहे,

भौमिक जी ने बहार जाकर पूरी परजा और सेना के सामने अलेना कर दिया की आपक अरजा देव hi होगा, और कल सुबह उसका राज्याभिषेक किया जायेगा, ये पहला राजा होगा जिसे परजा की इच्छा पैर चुना जायेगा, और शायद ये hi आने वाला समय बन जाये, राजा वही होना छाइये जिसे परजा चुनना चाहे, कोई जनम से राजा नहीं होता, करम से राजा बनता ह, और आप सबने जन्मो पुराणी पार्था को बदल दिया ह आज, खुशिया मनाओ डीप जलाओ,

रात में पुरे महल को दीपको से सजा दिया गया था, पूरी परजा अपने अपने घरो को सजा रही थी, चारो तरफ रौशनी थी, बस अँधेरा था तो दो कमरों में वो थे सूरज और ज्वाला के, वो शराब पि रहे थे और अपने कमरों में तोड़ फोड़ क्र रहे थे, उनके पास उनकी माये थी लेकिन वो भी उन्हें नहीं रोक प् रही थी, अब सभी रस्ते बांध हो चुके थे, क्योकि देव का सामना करने की ताकत किसी के पास नहीं थी,

वही दूसरी तरफ सोहन और काम्य अपनी सेना को लेकर अपने राजय में पहुंच चुके थे, पूरी सेना की हालत ख़राब थी, हर और दर उसके अंदर ऐसा घुस गया था की वो सब सहमे हुए थे, वही हालत सोहन की भी थी, उसके सामने बार बार देव और उसकी वो मार काट आ रही थी, वो भय से सिकुड़ा हुआ बैठा था,

काम्य उसके पास आई, काम्य को देख क्र

सोहन- वो क्या था,

काम्य- बस मुझे उसी का दर था, लेकिन वो महल छोड़ चुक्का था, मुझे उम्मीद नहीं थी वो लड़ने आएगा,

सोहन- लेकिन वो ह कोण,

काम्य- देव भवर सिंह और निहारिका का बीटा, और इस समय इस धरती का सबसे ताकतवर इंसान, उसके पास कुछ ऐसा ह जिस वह से उसे कोई नहीं हरा सकता,

सोहन- तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया,

काम्य- मैंने कहा न मुझे नहीं पता था वो वह आएगा,

सोहन- उसने मेरी पूरी सेना को तबाह कर दिया, हमारे साथ के राजा बंदी बन गए, एक छोटे से युद्ध में हम इतने कमजोर हो गए हैं की कोई भी हमे आकर हरा सकता ह,

काम्य- हमे सयम रखना होगा, जल्दी hi बहुत कुछ बदल सकता ह,

सोहन- अब क्या बदलेगा

काम्य- मुझे इंतजार ह किसी का, बस देखना ह वह से कोण आता ह,

इधर महल में पूरा परिवार देव को घेरे हुए बैठा था,

अमिता- अब तुम असली राजा बनोगे, सच में किस्मत में जो लिखा होता ह वही मिलता ह,

रेवती- जब ये मुझसे पहेली बार मिले थे तो एक ग्रीन किसान के रूप में मिले थे, और आज ये राजा बनने वाले हैं,

रीवा- ये उसका हक़दार ह, इसने बहुत कुछ खोया ह अपने जीवन में

सभी देव के सम्मान में बोल रहे थे, सुगंधा और कस्तूरी चुप बैठे थे,

निहारिका- तुम दोनों इतनी खामोश क्यों हो, क्या तुम खुश नहीं हो,

सुगंधा- मैं बहुत खुश हु माँ, बस एक दर ह की राजा बनने के बाद क्या देव वैसा hi रहेगा, क्या हम उसके लिए वाइस एही रहेंगे,

देव मुस्कुरा दिया, लेकिन इसका जवाब अक्षरा ने दिया,

अक्षरा- तुम जानती हो सुगंधा ये वो इंसान ह जिसे दुनिया भर की तकलीफे तने अत्याचार नहीं बदल सके, फिर ये राजा की गद्दी कैसे बदल सकती ह,

निहारिका- कस्तूरी तुम चुप क्यों ह, बीटा पुराणी बाते भूल जाओ अब,

कस्तूरी- ये अह्दिकर देव को उसी दिन मिल सकता था, अगर मैं वो अपराध न करती, मेरी वजह से ये सब हुआ ह,

निहारिका- नहीं तुम उस कार्य में निमित बानी हो जो होना जरुरी था, अगर देव के साथ वो सब न होता तो मेरा देवदत्त कभी देव न बन पता, आज इससे बड़ा योद्धा संसार में नहीं ह और ये सब तभी हुआ जब हमे राजय से निकला गया, न हमे निकलते न hi देव ऐसा बन पता, तो तुम अपने दिल पैर से बोझ क्र हल्का करो, तुम बस एक माद्यम बानी हो उस घटना की,

कस्तूरी- आप सच में बहुत महँ को माँ

निहारिका- अब तुम्हे आराम करना चाहिए, सुबह बहुत तैयारी करनी हैं,

सभी लड़किया देव के साथ समय बिताना चाहती थी लेकिन बोल नहीं प् रही थी, क्योकि अभी तक सभी के राज छुपे हुए थे, और अक्षरा और सुगंधा तो बेचारी देव के प्रेम के लिए अब तक तरस रही थी,

भौमिक जी ने सलाह देकर गए थे की सबको एक साथ रहना चाहिए, क्योकि सूरज ज्वाला राजा बनने के लिए कुछ भी करेंगे, और देव के राजा बनने तक राजवीर को किसके सामने नहीं आने देना ह, देव के राजा बन जाने के बाद hi हम कुछ और बाते कर्नेगे,

पूरा परिवार एक hi कमरे में था जिस वजह से किसी भी लड़की को देव के नजदीक आने का मौका नहीं मिल रहा था, कोई भी सोने को तैयार नहीं था, सबकी आपस में खुसर पुसार बाते चल रही थी, ऐसे hi सुबह हो गई,

और जल्दी hi सभा भी सज गई, राजय के बड़े बड़े लोग सभा में आ चुके थे, आस पास के मित्र राजा भी अपना समर्थन देने आ चुके थे, क्योकि सबको देव की ताकत का अंदाजा हो चुक्का था, कोई भी उससे दुश्मनी करना नहीं चाहता था, ये सभा खुले मैदान में लगाई गई थी ताकि पूरी परजा देव को राजा बनते हुए देख सके,

पूरी परजा वह आ चुकी थी, देव के राजा बनने का इंतजार क्र रही थी,

राजय के पुरोहित हवन कर रहे थे, गीत गए जा रहे थे, और फिर सभा में देव ने प्रवेश किया, आज उसे उसकी माँ ने तैयार किया था, उसका रूप देख क्र ऐसा कोई नहीं था जो सम्मोहित न हुआ हो, उसके एक तरफ चल रही थी निहारिका और दूसरी तरफ थी रीवा, और उनके बराबर में बाकि भेने अक्षरा अमिता और सोमिया थी, पीछे रेवती और सुगंधा चल रही थी, उनके पीछे अभेंद्र और मनीषा थे, और उनके पीछे था दत्त जिसे देख क्र वह बैठे सभी में दर सा फ़ैल गया था, सिर्फ कस्तूरी वह नहीं थी, क्योकि सबको डार्ट है कही परजा उस पैर हुम्ला न कर दे, क्योकि उसने देव पैर इल्जाम लगाए थे,

लेकिन वो सभी इतने खूबसूरत लग रहे थे की किसी की नजर hi नहीं हैट रही थी उन सभी पैर से, ऐसा लग रहा था जैसे देवताओ की सभा में कोई देवता अपनी अप्सराओ के साथ चला आ रहा हो,

देव राजगद्दी के पास पहुंच गया, फिर प्रोहित जी ने मंतर पढ़े और फिर निहारिका ने राजमुकुट देव को पहना दिया, सब तरफ से फूलो की वर्षा होने लगी, देव के जैकारे लगने लगे, बहार कड़ी परजा भी जैकारे लगाने लगी, चारो तरफ बस एक hi नाम गूंज रहा था वो था देव,

देव ने सबसे आशीर्वाद लिया, वही एक कोने में अमरावती और सौमित्र भी कड़ी थी, देव ने हाथ जोड़कर उन्हें भी प्रणाम किया, दोनों के मन में बहुत कुछ था लेकिन उन्हें वह मुस्कुराना hi था,

देव- आप सबकी इच्छा से मैं इस गद्दी पैर बैठा हु, तो उम्मीद करता हु आप सब मेरे फैसलों का सम्मान करेंगे, अभी मुझे कोई अनुभव नहीं ह इसलिए मैं आप सभी व्यापारियों से शहयोग की उम्मीद करता हु, और इस राजय में सबकुछ सही तरह से चले उसके लिए कुछ अधिकार बाटना चाहता हु,

राजगुरु जी की मृत्यु के बाद ये पद खली ह, वो बहुत hi विद्वान् इंसान थे, उनकी जगह कोई वैसा hi बुद्धिमान इंसान ले सकता ह, इसलिए मैं भौमिक जी से प्राथना करुनाग की वो राजगुरु का पद सम्हाल ले,

भौमिक जी ने मन करना चाहा लेकिन उन्होंने खुद देव को जिमेदारी उठाने की सलाह दी थी तो खुद पीछे कैसे हाथ सकते थे,

देव- और इस राजय को कोई ऐसा व्यक्ति चाहिए जिसके अंदर इस राजय के भले के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा हो, जो सबसे पहले अपने देश को रखता हो, इसलिए मैं अभेंद्र को इस राजय का सेनापति नियुक्त करता हु,

किसी को यकीन नहीं हुआ की एक गाओं से निकला साधारण सा लड़का अभेंद्र को देव सेनापति बना देगा,

इससे देव का सम्मान और बढ़ा और परजा में देव के जैकारे लगने लगे,

देव- और इस महल की सुरक्षा की जिम्मेदारी मनीषा की होगी, इस महल के अंदर सुरक्षा से जुड़े सभी फैसले मनीषा hi लेगी,

और आज से राजय की सभी लड़कियों को शिक्षा दी जाएगी, और उन्हें युद्ध कला भी सिखाई जाएगी, ताकि वो खुद की रक्षा करना सिख सके,

देव- आज से हमारे राजय में दस पार्था ख़तम होगी, आज से कोई भी मर्द या औरत दस दासी नहीं रहेंगे,

देव के इस ऐलान से वह एक दम सनता च गया, क्योकि जीतनेय भी बड़े लोग थे सबको दस दासी रखने का शोक था, उनके सभी काम दस दासी hi करते थे,

तभी एक व्यापारी उठा

व्यापारी- महाराज अगर दस दासी नहीं रहेंगे तो हमारे कार्य कोण करेगा,

देव- काम करने के लिए आप लोग होंगे लेकिन वो अपनी मर्जी से काम कर्नेगे, उन्हें उनके काम का म्हणताना दिया जायेगा, वो किसी के दस नहीं होंगे, वो चाहे काम करे या अपने घर में खेती करे, ये उनकी मर्जी होगी, कोई किसी का गुलाम नहीं होगा, और इस राजय में किसी इंसान को खरीदा या बेचा नहीं जायेगा, यहाँ सब आजाद हैं, सबको खुल क्र जीने का अधिकार ह,

देव की इस बात से कुछ लोग नराजहए लेकिन वो कुछ कर नहीं सकते थे, लेकिन परजा में ख़ुशी की लहार दौड़ गई, फिर से देव के जैकारे लगने लगे,

देव ने और भी कई फैसले लिए, और फिर पूरी परजा का अभिवादन किया,

पुरे भारतवर्ष में ये बात फ़ैल गई की देव भवनपुरा का राजा बन चुक्का ह और उसने अपने राजय में काफी बदलाव किये हैं, ये खबर प्रताप सिंह तक भी पहुंच गई थी,

प्रताप सिंह- हमारे बेटो का हथियार राजा बन गया ह, हमे बर्बाद करके खुद राजा बन गया,

रेणुका- उसे उसके कर्मो की सजा जरूर मिलेगी

प्रताप सिंह- उसे कोई सजा नहीं दे सकता, उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता, वो इंसान नहीं ह,

रेणुका- वो इंसान हो या राक्षश, लेकिन एक दिन वो अपने घुटनो पैर आएगा, और उस दिन हम वह खड़े होंगे,

इधर ये खबर काम्य के पास भी पहुंच गई,


काम्य खुद से hi- सब ख़तम हो गया, सब ख़तम हो गया, उसे राजा बनने से रोकने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया, लेकिन नियति को कोई नहीं बदल सकता, मतलब अब विनाश होकर hi रहेगा, ऐसा विनाश की पूरा भवनपुरा तबाह हो जायेगा, हाहाहाःहाहा भैया तुम भी कुछ नहीं कर पाए, मैंने कहा था उससे शादी मत करो, लेकिन तुमने मेरी बात नहीं सुनी, देखो क्या हो गया ह, अब अगर तुम कामयाब हो भी गए तब भी वो दिन जरूर आएगा, जरूर आएगा, और मैं उस दिन का इंतजार करुँगी, भवनपुरा के लोगो ने खुद अपने विनाश को अपने सर पैर बैठा लिया ह,
 
अपडेट-45

सात्विक धयान लगाए बैठा था, ये वही गुफा थी जहा भैरव था,

वह के लोग जो कब से भैरव के बहार आने का इंतजार कर रहे थे, वो सभी सात्विक के सामने बैठे हुए थे, फिर सात्विक ने आँखे खोली,

बूढ़ा आदमी- महाराज क्या हुआ, हमारे राजा अब तक नहीं जगे, और कितना समय लगेगा,

सात्विक- बस कुछ समय और, जल्दी hi ये जागने वाले हैं, इनके लिए भोजन का इंतजाम करो, ये हजारो सालो से भूके हैं,

आदमी- अब हमारा जीवन बदलने वाला ह,

पहले सात्विक ने अपनी उंगली को थोड़ा सा कटा और उसमे से थोड़ा सा खून निकल क्र भैरव के मुँह में डाला फिर उसने थोड़ा जल लिया और भैरव के शरीर पैर डालने लगा, जल के चेतते लगते hi भैरव ने एक जोर दर हुंकार भरी, जिससे पूरी गुफा गूंज उठी, सब आदमी ख़ुशी से उछाल पड़े,

और तभी भैरव ने आँखे खोल दी, जैसी hi उसने आँखे खोली तभी उत्तर दिशा में उस गुफा के मुँह पैर से बर्फ गिरने लगी, आसमान में काळा बदल च गए थे, बिजली कड़कड़ाने लगी, बड़ा hi भयानक नजारा हो गया था, बड़े बड़े ज्ञानी घबरा गए थे, ये बहुत hi अशुभ संकेत थे,

इधर राजा भैरव उस ताबूत में से उठा, जैसे hi वो उठा उसका शरीर की हर एक हड्डी कड़कड़ाने लगी, जैसे वो सब आपस में जुड़ गई हो, तभी उधर बर्फ को हतः क्र गुफा में से कुछ लोग बहार आये, और जोर जोर से थका मर क्र हसने लगे,

पूरी पृथ्वी पैर अशुभ संकेत आने लगे थे, कुछ भयानक होने वाला था, और ऐसा hi कुछ भौमिक जी और देव भी महसूस क्र रहे थे, देव के शरीर में बेचैनी हो रही थी,

राजा बनने के बाद रात में पूरा परिवार साथ में बैठा हुआ था, सभी एक साथ भोजन क्र रहे थे, लेकिन देव बैचैन था उसे पसीना आ रहा था, निहारिका भी कुछ बैचैन सी थी, दत्त भी इधर उधर घूम रहा था,

रेवती- देव क्या हुआ तुम कुछ परेशां से लग रहे हो,

रीवा- है तुझे तो पसीना भी बहुत आ रहा ह, क्या बात ह,

सभी खाना छोड़ क्र देव के पास आ गई,

देव- पता नहीं कुछ अच्छा नहीं लग रहा, ऐसा लग रहा ह जैसे कुछ बहुत बुरा होने वाला ह,

तभी एक सैनिक आया,

सैनिक- महाराज राजगुरु भौमिक जी आये हैं,

निहारिका- इस समय,

देव- कुछ हुआ ह, कुछ बुरा हुआ ह,

निहारिका- उन्हें अंदर ले आओ सभा कक्ष में,

सैनिक चला गया,

सभी लोग वह आ गए,

देव- गुरु जी क्या हुआ, आप इस समय, सब ठीक तो ह न

भौमिक जी- वो जग गया ह, ये संकेत बता रहे हैं की वो जग चुक्का ह,

राजवीर- अगर वो जग गया ह तो बहुत बड़ी विपदा आने वाली ह,

निहारिका- आप लोग किसकी बात कर रहे हैं, ऐसा कोण ह जिससे आप इतना घबराये हुए हैं,

भौमिक जी- राजा भैरव, एक विनाश करि योद्धा,

देव- गुरु जी क्या वो सच में इतना शक्तिशाली ह की पूरी दुनिया को हरा दे, और अगर वो हजारो साल से जिन्दा ह तो महाभारत काल में कैसे बचा रहा,

भौमिक जी- अगर हमे उससे लड़ना ह तो उसके बारे में सब कुछ जानना होगा, उसके बारे में हमारे पूर्वज जानते थे, उन्होंने जो किताबो में लिखा ह और मैंने जो अपनी विद्या से जाना ह वो सब मैं तुम्हे बताता हु,

राजवीर- उसमे कुछ कहानी मुझे भी पता ह, मैं भी आपके साथ साथ बताता रहूँगा,

सभी भौमिक जी के सामने बैठ गए,

भौमिक जी ने बोलना शुरू किया,

ये कहानी शुरू हुई थी हजारो साल पहले, जब जब युग परिवर्तन होता ह तो सबसे ज्यादा नुकसान मानवता और सभ्यताओं को होता ह, क्योकि नए युग को शुरू करने के लिए परमात्मा को पुराणी रीतियों को ख़तम करना होता ह, तो हमेशा एक विनाश होता ह जिससे धरती के जीने वाले लोग भी ख़तम हो जाते हैं, और फिर कोई ऐसा आता ह जो नै दुनिया का निर्माण करता ह, और अपनी रीतिया सिखाता ह, ऐसे hi जब युग परिवर्तन हुआ तो बहुत से शक्ति शैली राजाओ ने अपना वर्चस्व फैलाना शुरू किया, उन्ही में से दक्षिण दिशा में एक था राजा भैरव, कहा जाता ह की वो जनम से hi दिव्या था, उसके पिता एक देवता थे और उसकी माँ एक ऋषि पुत्री थी, वो देवता धरती पैर आये तो ऋषि पुत्री की सुंदरता पैर सम्मोहित हो गए और अपनी शक्तियों से उस कन्या को अपने वश में किया और उसके साथ सम्भोग किया, और उस लड़की को गर्भ ठहर गया, लड़की के पिता ने लड़की को स्वीकार करने से मन कर दिया और अपने आश्रम से निकल दिया, वो लड़की जंगलो में भटकती रही, उस लड़की को एक राक्षश जाती के परिवार ने अपने पास रख लिया, और मात्रा 7 माह में hi उसने एक बच्चे को जनम दे दिया, जनम देने के बाद hi वो लड़की मर गई, फिर उस बचे का पालन पोषण उसी परिवार ने किया, वो बच्चा बड़ा hi शक्ति शैली हुआ, लेकिन उसके अंदर न hi किसी के पार्टी दया थी न hi सम्मान था, उसने अपनी ताकत के बल पैर एक राजय पैर कब्ज़ा कर लिया, और वह का राजा बन गया,

फिर उसने बाकि राज्यों को भी जितना शुरू क्र दिया, वो अकेला hi किसी भी सेना के लिए काफी होता था, सभी राज्यों में उसकी दहशत फैलने लगी थी, और जल्दी hi उसने लगभग आधे भारत वर्ष पैर राज क्र लिया था, उसके अंदर अहंकार भरा हुआ था, दुनिया की हर कीमती चीज वो अपने पास रखना चाहता था, सभी ज्ञानी लोगो को उसने अपने पास रख लिया था, उसके सामने जब भी कोई सूंदर औरत आती वो उसे अपने महल में उठवा लेता, और फिर वो कभी महल से बहार नहीं आती थी,

उसके राजय पैर कोई हुम्ला नहीं करता था, इसलिए परजा बाहरी हमलो से सुरक्षित थी लेकिन वो खुद पूरी परजा के लिए खतरा था, उसके अंदर चक्रवर्ती समरथ बनने की इच्छा जागने लगी, क्योकि उसके पास संसार की सबसे बड़ी सेना थी, तो उसने ासवमेघ यज्ञ करने का फैसला किया, उसने अपने अशव्मेघ यज्ञ का घोडा छोड़ दिया, ज्यादातर राजाओ ने उसके सामने हार मान ली, जिन्होंने नहीं मणि उन्हें भैरव ने हरा दिया, लेकिन उत्तर दिशा में एक छोटे से राजय में एक महात्मा ने के आश्रम में वो घोडा पहुंच गया, जब राजा के लोग वह पहुंचे तो उन्होंने महात्मा का अपमान किया और घोडा ले जाने लगे,

महात्मा- लगता ह तुम्हे अपनी शक्ति पैर कुछ ज्यादा hi अभिमान हो गया ह,

सैनिक- ये राजा भैरव का घोडा ह, इसे बड़े बड़े राजा नहीं पकड़ सके, और तुम एक ऋषि होकर हमारा घोडा पकड़ लिया,

महात्मा- हम तो साधु हैं, हम किसी राजा या किसी राजय को नहीं मानते, पूरी पृथ्वी हमारा घर ह, बस परमात्मा हमारे राजा हैं,

सैनिक- हमारे राजा hi तुमसे बात करेंगे,

सैनिक महात्मा को पकड़ क्र भैरव के पास ले गए, भैरव का पंडाल कुछ दुरी पैर थी लगा हुआ था,

सैनिक- महाराज इस साधु ने हमारा घोडा पकड़ा हुआ था, हमने माँगा तो हमे ज्ञान देने लगा.

भैरव- महात्मा आपको घोडा पकड़ने की क्या आवश्यकता पद गई, आप तो साधु हैं, अपनी तपश्या कीजिये,

महात्मा- हमारे आश्रम में आने वाला हर जीव हमारे लिए अथिति ह, और तुम्हारा घोडा हमारे आश्रम में आ गया तो वो हमारा अतिथि हो गया, हमने तो बस उसका सत्कार किया था,

सैनिक- महाराज ये साधु आपको अपना राजा नहीं मंटा,

भैरव- क्यों महात्मा ाको मुझे राजा मैंने में कोई संशय ह,

महात्मा- तुम इस धरती के छोटे से भाग पैर कब्ज़ा करके खुद को उसका राजा बोलते ho,lekin हम तपश्वी हैं, हम तो सिर्फ परमात्मा को अपना राजा मानते हैं,

भैरव- परमात्मा ने मुझे hi भेजा ह इस धरती पैर राज करने के लिए, मेरे पिता एक देवता थे,

महात्मा- मैं जनता हु तुम्हारे पिता कोण थे, और उन्होंने तुम्हे सिर्फ लोगो के लिए नियम बना क्र उन्हें जीना सीखने के लिए भेजा ह, और तुम खुद को उनका मालिक समझने लगे हो,

भैरव- तुम्हे अपनी मृत्यु का दर नहीं ह,

महात्मा- मृत्यु से क्या डरना, वो तो एक दिन सबको आणि hi ह, तुम कब तक इस धरती पैर राज करोगे, एक दिन मृत्यु तुम्हारी भी होगी, कब तक इस शरीर में ताकत रहेगी, ये शरीर नष्ट हो जायेगा, फिर किस पर राज करोगे,

भैरव- मैं नहीं मरूंगा, मुझे कोई नहीं हरा सकता, मैं देवता की संतान हु, मुझे कोई नहीं मार सकता, इस धरती के लिए मैं hi भगवान् हु, ये पूरी धरती मेरी hi पूजा किया करेगी,

महात्मा- जिसे कोई नहीं मरता वो खुद मर जाता ह, लेकिन मरता जरूर ह, इस धरती को जीत क्र क्या हासिल करोगे अगर जीत सकते हो तो मृत्यु को जीत क्र दिखाओ, तब ये संसार तुम्हे असली राजा मानेगा, अगर मृत्यु को नहीं जीत सकते तो सिर्फ लोगो के सेवक बन क्र रो, जिसने मृत्यु को जीता ह वही भगवान् खेलाया ह, भगवान् बनने के लिए खुद को त्यागना पड़ता ह,

भैरव गुस्से में आग बबूला हो गया, किसी ने सच hi कहा ह जब विनाश होना होता ह तो सबसे पहले इंसान की बूढी हर ली जाती ह, भैरव ने गुस्से में तलवार निकली और उस महात्मा की गार्डन काट दी,

लेकिन एक चमत्कार हो गया, गार्डन काटने के बाद भी महात्मा की आँखे खुली थी, सर हवा में रुक गया था, और महात्मा का कटा हुआ सर भी बोलने लगा,

महात्मा- मूरख तुझे क्या लगता ह तुमने मुझे मार दिया, हम तो तपश्वी हैं, हम अपनी मृत्यु अपनी मर्जी से हासिल करते हैं, तेरे जैसा मूरख हमे नहीं मर सकता, लेकिन तूने एक साधु की हत्या करके अपने लिए जो पाप कमाया ह वो तू भुगतेगा, मैं तो चला परमात्मा की शरण में लेकिन तू साडी जिंदगी राजा बना रहेगा लेकिन कही राज नहीं कर पायेगा,

इतना बोल क्र महात्मा ने आँखे बंद क्र ली और उनका शरीर वही भसम हो गया,

भैरव बोखला सा गया, उसने तपस्वियों के चमत्कार सुने थे लेकिन आज खुद अपनी आँखों देख लिए, वो तुरंत अपने राजय में वापस लत आया और उसने अपने राजय के सभी ज्ञानी और ऋषियों को बुलवा लिया,

भैरव ने साडी घटना उन्हें बताई, अब जितने भी ज्ञानी थे वो तो समझ गए की राजा ने बड़ा पाप क्र दिया ह, लेकिन सच बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी,

भैरव- आप लोग मुझे बताइये उस साधु ने वो सब कैसे किया,

एक ऋषि बोले- महाराज जो सिद्ध महात्मा होते हैं उन्हें अपनी मृत्यु पैर काबू हो जाता ह, वो जब चाहे अपनी मर्जी से अपना शरीर छोड़ सकते हैं, और जब तक चाहे जिन्दा रह सकते हैं,

भैरव- मैं देवता का पुत्र हु तो मेरे अंदर ये शक्ति होनी चाहिए, क्या मेरी मृत्यु हो सकती ह,

इस बात पैर सब चुप हो गए,

भैरव- आप लोग बिना झिझक बोलिये,

दूसरा ऋषि- महाराज इस धरती पैर जॉब hi जन्मा ह उसकी मृत्यु निश्चित ह, आप देवता के पुत्र हैं लेकिन जन्मे इस धरती पैर हैं, और जब वो देवता इस धरती पैर आये थे तब वो खुद एक इंसान के रूप में थे,

भैरव- तो मुझे तरीका बताओ की मैं कैसे अमर बन सकता हु, अपनी मृत्यु को कैसे हरा सकता हु,

ऋषि- महाराज केवल परमात्मा की तपश्या करके hi ये वरदान पाया जा सकता ह, लेकिन अमरता का वरदान आज तक किसी को नहीं मिला,

कुछ ऋषि भैरव के खास हुआ करते थे, जिसका नाम था कपिल,

ऋषि कपिल- महाराज अगर मांगने वाले की इच्छा और जींद पक्की हो तो परमात्मा भी कुछ नहीं क्र सकते,

भैरव- क्या ऐसा संभव ह,

कपिल- है महाराज ये संभव ह, इस धरती पैर 4 चिरंजीवी हैं, और जितना इतहास में पढ़ा ह और भी हो सकते थे अगर वो अपना वरदान मांगने में गलती न करते,

भैरव- मुझे क्या करना ह,

कपिल- मैं आपको बताता हु क्या करना ह, बस आप तपश्या शुरू कीजिये, आप देवता के पुत्र हैं आपसे परमात्मा जल्दी खुश हो जायेंगे,

भैरव के मन में अमर होने की इच्छा जग उठी और वो उसी दिन तपश्या के लिए निकल गया, और उसने घोर तपश्या शुरू क्र दी, बहुत वर्षो तक उसने तपश की जिससे परमात्मा ने उसे दर्शन दे hi दिए,

परमात्मा- आँखे खोलो वाटस, तुम्हारी तपश्या सफल हुई अपना वर मानगो,

भैरव- भगवन मुझे अमरता चाहिए,

परमात्मा- ये वरदान संभव नहीं ह, कुछ और मांग लो,

भैरव- नहीं मुझे बस अमरता चाहिए, इसके अलावा और कुछ नहीं चाहिए,

परमात्मा- ये संभव नहीं ह,

भैरव गुस्से में आ गया- अगर आप अमरता नहीं दे सकते तो फिर आप यहाँ आये hi क्यों हो चले जाओ,

परमात्मा- जैसी तुम्हारी इच्छा, इतना बोल क्र भगवान् चले गए,

उनके जाते hi भैरव को अहसास हुआ की उसने क्या मूरखता कर दी ह, लेकिन अब तो देर हो चुकी थी,

लेकिन वो फिर से तपश्या पैर बैठ गया और त्रिदेव में से दूसरे देव की तपश्या करने लगा, उसकी तपश्या से वो भी प्रशन्न हुए और उसे दर्शन दिए,

भगवान्- वर मानगो पुत्र

भैरव- भगवान् मुझे अपरता चाहिए,

भगवान्- ये संभव नहीं ह पुत्र,

भैरव – मुझे सिर्फ अमरता चाहिए, अगर आप सच्चे भगवान् ह तो मुझे अमरता दीजिये

भगवान्- ये वरदान देना मेरे हाथ में नहीं ह, ये संसार के नियमो के विरुद्ध ह, तू कुछ और मांग लो,

भैरव- अगर ऐसा ह मैं आप दोनों भगवानो से एक साथ वर मांगूंगा,

भगवान्- उसके लिए तुम्हे घोर तप करना होगा,

भैरव फिर से तपश्या करने लग गया, और उसने इस बार त्रिदेवो में से दो देवो को प्रसन्न कर लिया, और दोनों भगवान् एक साथ धरती पैर आये,

भैरव- मैंने जो तपश्या की ह ऐसी तपश्या आज से पहले किसी ने नहीं की होगी, इसलिए मुझे वर भी ऐसा चाहिए जो किसी को नहीं मिला होगा,

भगवान्- तुम अमरता के अलावा जो चाहो मांग सकते हो,

और तब भैरव ने वरदान माँगा, और भगवान् वो वरदान देकर चले गए,

और तब एक नया शैतान बना जिसका नाम था भैरव,

भौमिक जी- ये ह भैरव

राजवीर- उसने तीन बार भगवान् को धरती पैर बुला लिया था, और जब जब भगवान् धरती पैर आये तब तब उसका एक अंश धरती में समां गया, क्योकि दो बार वो बिना वरदान दिए लोट गए थे, तो उनका अंश धरती में एक ऊर्जा बन क्र रुक गया, और जब दोनों भगवान् एक साथ आये तो इतनी ऊर्जा उत्पन्न हुई की फिर से एक अंश यही रह गया, इस तरह से तीन शक्तिया बानी, और तीनो अलग अलग दिशा में धरती में समां गई,

देव- लेकिन वो वरदान क्यात है, क्या उसे अमर होने का वरदान मिला, क्योकि मुझे जितनी जानकारी ह उस हिसाब से कभी किसी को अमरता का वरदान नहीं मिला ह,

भौमिक जी- उसने वरदान ऐसा माँगा की मृत्यु के सभी रस्ते बंद से हो गए थे,

देव- फिर वो इतने समय से कैद में कैसे था, जब वो इतना शक्ति शैली हो गया तो उसे रोका किसने,

भौमिक जी- उसकी मूरखता ने,

निहारिका- मतलब,

भौमिक जी- उसने त्रिदेवो में से दो देवो को प्रसन्न तो कर लिया, लेकिन वो भूल गया की तीनो देव मिलकर hi श्रष्टि को चलते हैं, तो तीसरे देव का भी योगदान जरुरी था, कहा जाता ह की उसने वरदान में सब कुछ मांग लिया लेकिन अपनी मूर्खता में अमरता मांगे के चक्कर में वो असली चीज माँगा भूल गया,

देव- वो क्या

भौमिक जी- अपना शरीर, उसके वरदान का तो जीकर नहीं ह लेकिन इतना पता ह की वो मर तो नहीं सकता था लेकिन उसका शरीर साधारण शरीर की तरह बूढ़ा हो जायेगा, जब भगवान् वापस गए तो उसे बता क्र गए की तुमने लबा जीवन तो मांग लिया लेकिन शरीर नहीं मांग पाए, और जब तीसरे देव धरती पैर अवतार लेंगे तो उनके अवतार लेते hi तुम्हारा शरीर की आयु बढ़ने लगेगी और तुम पूरी तरह वृद्ध हो जाओगे तुम मरोगे नहीं लेकिन तुम इतने वृद्ध हो जाओगे की तुम्हारा शरीर तुम्हारा साथ hi नहीं देगा, और भगवान् जो अवतार लेंगे उनके सामने कोई वरदान कोई आशीर्वाद कार्य नहीं करेगा, उनक अजनम hi संसार में लोगो को मिले वरदानो को नष्ट करना ह, अगर तुम उनके सामने आये तो कोई नहीं बचा पायेगा,

इतना बोलकर भगवान् चले गए,

लेकिन बहिराव के मन में एक ऐसा दर बैठा गए जिससे वो कभी उभर नहीं पाया,

तपश्या पूरी करके जब बहिराव आया तो उसने धरती पैर बहुत आतंक मचाया, वो जहा जाता सब नष्ट कर देता, उसका अहंकार सर पैर चढ़ गया था, उसने एक फैसला कर लिया की आने वाले समय में इस धरती पैर बस उसकी संताने होंगी, हर औरत के अंदर उसके पुत्र होने चाहिए, इसलिए वो रोज किसी न किसी औरत के साथ बाटकर करने लगा, दुनिया की हर सूंदर औरत उसके महल में कैद होने लगी थी, उसका अत्याचार इस कदर बढ़ गया था की चारो तरफ हाहाकार मचने लगा था, उसने सभी उसने सभी वैशल्या बंद करवा दिए और नियम बनाया की कोई भी औरत किसी मर्द के साथ सम्बन्ध नहीं बनाएगी, शादियों पैर रोक लगा दी,

अब भैरव और कपिल दोनों मिलकर अत्याचार करने लगे, कपिल भैरव का सबसे कहस बन चुक्का था, जो कपिल बोलता भैरव वैसा hi करता, तब भैरव के राजय के बाकि ज्ञानियों ने संसार को बचने का एक तरीका सोचा और उन्होंने धरती के सभी ऋषि महात्मा के साथ योजना बनाई और सब जगह खबर फैलवाणी शुरू क्र दी की धरती पैर अत्याचार बढ़ रहा ह, इसलिए भगवान् अवतार लेने वाले हैं,

ये खबर भैरव तक भी पहुंच गई, अब तक भैरव की उम्र बहुत धीरे धीरे बढ़ रही थी, लेकिन जैसे hi उसे पता चला की भगवान् अवतार लेने वाले हैं तो वो घबरा गया, और उसके अंदर एक दर बैठ गया, और उस दर की वजह से उसे लगने लगा की उसकी उम्र तेजी से बढ़ रही h,usne कपिल को भेजा ताकि वो आने वाली शंश्य से छुटकारा प् सके, कपिल ने तंत्र विद्या का सहला लेना शुरू क्र दिया, और कपिल तंत्र विद्या की तपश्या करने लगा, इधर भैरव का दर बढ़ता जार है था तब उसने इससे बचने का उपाय सोचा, और सभी ऋषि महात्माओ को बुलवा लिया,

ये सबसे अच्छा मौका था, सभी महात्माओ ने उसे सलाह दी की जब तक भगवान् का युग बीत नहीं जाता आप एक घोर नींद्र में चले जाओ, इससे आपकी उम्र भी यही रुक जाएगी और आप बहगवां के समाने भी नहीं आएंगे, और हम मंत्रो से बांध देंगे ताकि कोई आपको खोज न सके,

भैरव ने हामी भर ली, तब महात्माओ ने यज्ञ शुरू क्र दिया, और भैरव को एक घेरि नींद में भेज दिया, भैरव के नींद में जाते hi, उन्होंने उसे एक ताबूत में बंद करके एक गुफा में छुपा दिया, और उस गुफा को बंद क्र दिया, और भैरव की नींद्र को इस तरह बांध दिया की जब तक तंत्र और मंत्र दोनों की शक्ति रखने वाला इंसान यहाँ आकर इन्हे जगायेगा तब तक इसकी नींद नहीं खुलेगी,

और महात्माओ ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी उसे बांधने में, और उन्होंने अपने पूरी ऊर्जा का त्याग कर दिया, वह सेंकडो महात्माओ ने अपना त्याग कर दिया, और उनसे एक ऊर्जा निकली और धरती में समां गई,

देव- लेकिन उससे ये शक्तिया कैसे जुडी हुई हैं,

राजवीर- वो कपिल एक बड़ा तांत्रिक बनकर जा वापस आया तो उसे पता चला यहाँ क्या हुआ, तब उसने अपनी तंत्र विद्या से भैरव को खोजना शुरू किया, उसने भैरव की ऊर्जा को खोज लिया लेकिन वो उस पहाड़ के अंदर की गुफा का रास्ता नहीं खोल सका, तब उसने भैरव के खास योद्धाओ को उस पहाड़ की सुरक्षा में लगा दिया, और खुद और विद्या पाने चला गया ताकि गुफा खोल सके,

भौमिक जी- लेकिन वो नाकामयाब रहा और हजारो वर्ष बीत गए, कपिल ने अपनी तंत्र विद्या आगे बॉटनी शुरू क्र दी, और हर बार पहले से शक्ति शैली तांत्रिक तैयार होता गया, कपिल तो मर गया लेकिन उसकी दी हुई तत्र विद्या पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही, सिर्फ भैरव को जिन्दा करने के लिए,

इस बिच में भगवान् का युग आया और धरती पैर महाविनाश हुआ, भगवान् ने उन सभी लोगो का अंत करवा दिया जिनसे आने वाले समय में खतरा हो सकता था, लेकिन बहिराव उसम बच गया, तब भगवान् ने उस समय युद्ध से बचे कुछ योद्धाओ को बुलाया और भैरव के बारे में बताया, और उन्होंने hi भवनपुरा को बसवाया ताकि यहाँ जो शक्ति आई थी उसकी सुरक्षा की जा सके, भगवान् ने बताया की भैरव की नींद्र सिर्फ मंत्रो सिर्फ मंत्रो ने नहीं बंधी ह, उसकी नींद्र इन तीनो शक्तियों से बंद चुकी ह, जब तक ये शक्ति जागृत नहीं होंगी तब तक वोन hi उठेगा, इसलिए इन शक्तियों को हमेशा छुपी रहने देना,

राजवीर- तब से हमारे पूर्वज इस शक्ति का राज छुपाते आये हैं, तीन परिवो ने ये जिमेदारी ली जिसमे एक ने राजा का पद सम्हाला तो एक ने सेनापति का और तीसरे ने राजगुरु का, और ये पद ऐसे hi पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे परिवार सम्हालते आ रहे हैं,

देव- लेकिन इस सबसे मैं कैसे जुड़ा हुआ हु,

भौमिक जी- इस बारे में इस किताब में नहीं लिखा अगर लिखा भी हो तो इसके पैन फाटे हुए हैं,

राजवीर- भगवान् ने जब ये जिम्मेदारी तब उन्होंने hi बताया की हमारी पीढ़ियों में तीन ऐसे लोग होंगे जो इन शक्तियों को जागृत करेंगे,

भौमिक जी- जैसे राजगुरु की पीढ़ी से मैंने और सात्विक ने एक साथ उस शक्ति को छुआ, और वो शक्ति जागृत हो गई,

राजवीर- उससे पहले तुमने उस शक्ति को जागृत क्र दिया था जिससे वो दोनों शक्ति जुडी हुई थी, सबसे शक्ति शैली ताकत जिसकी सुरक्षा करने की जिमेदारी हमे दी गाइट hi, दोनों भगवानो को मिली हुई ऊर्जा से उत्पन्न हुई शक्ति, भगवान् ने कहा था की ये शक्ति सही हाथो में होनी चाहिए, अगर ये गलत हाथो में गई तो विनाश हो जायेगा,

देव- हमर तीनो परिवारों को शक्ति मिलनी थी न, लेकिन ये तो दो को hi मिली,

भौमिक- तुम दोनों परिवारों में हो देव राजा के परिवार से भी और सेनापति के परिवार से भी,

राजवीर- इन शक्तियों के जागृत होने के बाद विनाश भी होना तय ह, इसलिए इन शक्तियों को छुपाया जा रहा था, महाराज सूर्यभान ने जब ज्योतिष से भविष्य दिखवाया तो उन्हें पता चला की हमारे hi परिवारों में से एक इस राजय का विनाशक होगा, इसलिए उन्होंने इस शक्ति के राज को आगे बताने से मन कर दिया, और ये राज एक किताब में लिख क्र छुपा दिया गया, लेकिन मेरे पूर्वजो ने ये राज आगे बताया, जिससे मुझे इसकी जानकारी हुई, लेकिन भवर सिंह के पिता को इस राज का पता चल गया, उसके हाथ वो किताब लग गई थी जो महाराज की समाधी में छुपाई गई थी, उन्होंने ये अफवाह फैलवा दी की हमारी परिवार में भवर सिंह वो राजा होगा जो अमर होगा और इस राजय को बचाएगा,

भौमिक जी- ये खली अफवाह नहीं थी, इसमें सच था, एक ऐसा सच जिसे कोई नहीं जनता था, लेकिन मुझे उम्मीद ह भवर सिंह को इस बारे में पता था, और इस किताब के पन्नो में वही लिखा होगा जिसे भवर सिंह ने या किसी और ने फाड़ दिया ह,

राजवीर- कैसा सच

भौमिक जी- निहारिका का सच उसके जनम का सच और उससे जुड़े वरदान का सच,

निहारिका- मेरा सच, कैसा सच राजगुरु

भौमिक जी- तुम कोई साधारण कन्या नहीं हो, तुम्हारा जनम उस शक्ति से हुआ ह जो उन महात्माओ के बलिदान से उत्पन्न हुई थी, तुम जनम से hi दिव्या हो, और तुम्हारा पति अमरत्व की शक्ति को प्राप्त करेगा, और सिर्फ तुम उस ताकत को जनम दे सकती थी जो इन शक्ति को अपने अंदर समां सकता था, और वो देव ह ह जो उस शक्ति को अकेले अपने अंदर समां सकता ह, वर्ण मेरे और सात्विक के अंदर ज्ञान का भंडार होने के बाद भी हम उस शक्ति को नहीं शी पाए थे, उस शक्ति ने सात्विक को पूरी तरह से भरष्ट क्र दिया

और मुझे कितनी तपश्या करनी पड़ी इस शक्ति को काबू करने के लिए, लेकिन देव को कुछ भी करना नहीं पड़ा, इसके शरीर ने शक्ति को अपने अंदर सम्मान के साथ समां लिया, और वो भी उस शक्ति को जिसमे दोनों भगवानो की ऊर्जा का अंश समाया हुआ था,

ऐसे hi तीसरी शक्ति को पाने के लिए अंदर 4 लोग घुसे थे, उनमे से कोई अकेला उस शक्ति को नहीं प् सकता,


देव- लेकिन वो शक्ति मेरे अकेले के अंदर नहीं ह गुरु जी, हम तीन थे वह,
 
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