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- Dec 5, 2013
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महल में सोमिया और अमिता की आँख खुली, उन्होंने जैसे hi उठने की कोशिश की उनकी दर्द भरी चीख निकल गई, जैसे तैसे करके वो उठ क्र बैठी, तो उन्हें रात की साडी बात याद आई, दोनों एक दूसरे को देख क्र मुस्कुरा दी, फिर अपनी हालत देखि की वो नंगी hi पड़ी हुई हैं और उनके उप्पेर चादर डाली हुई ह, वो जैसे तैसे करके उठी और एक दूसरे को सहारा देती हुई अपने कपडे पहन क्र लड़खड़ाती हुई अपने कमरे की तरफ चल दी,
कमरे के बहार उनकी खास दसिया कड़ी थी, दोनों राजकमारियो की बिगड़ी हुई हालत देख क्र दसिया उनके पास डोडी और उन्हें सम्हाला, दोनों को वोट क हिकमरे में ले गई,
दासी- राजकुमारी आप ठीक ह न, क्या हुआ आपको,
अमिता- हम ठीक ह तुम लोग चिंता मत लारो, बस इतना बताओ तुममे से सम्भोग का सबसे ज्यादा अनुभव किसके पास ह,
अमिता के मुँह से सम्भोग की बात सुनकर दसिया चौंक गई,
सोमिया- घबराओ नहीं, हमे तुम्हरी सहायता चाहिए इसलिए पूछ रही हैं,
उनमे से एक दासी आगे आई जिसकी उम्र करीब 30 साल की होगी,
अमिता- स्वेता तुम जानती हो
स्वेता- जी राजकुमारी, आपकी दासी बनने से पहले मुझे गणिका ( वैश्य) की शिक्षा दी गई थी, मेरे पिता मुझे गणिका बनाना चाहते थे उस्समे अधिक कमाई थी लेकिन फिर यहाँ महल में काम मिल गया तो यहाँ आ गई,
अमिता- अच्छा हुआ तुम बच गई, तुमने सम्भोग भी किया होगा न,
स्वाति – जी है गणिका बनाते समय राजाओ और राजकुमारों के साथ सम्भोग करने भेजा जाता था, आपके पिता के पास मुझे भेजा जा चुक्का ह, लेकिन उन्हें मैं याद नहीं हूँगी,
अमिता- फिर तुम हमारी मदद कर सकती हो, हम दोनों के कपडे उतरो और हमारे गुप्तांगो का निरिक्षण करो,
स्वाति और बाकि दसियो ने दोनों जरकुमारिओ को नंगा कर दिया, और जैसे hi उन्होंने दोनों के पेअर खोले, सभी दसियो की आँखे फटी रह गई, उन्होंने अपने मुँह पैर हाथ रख लिया, सबके मुँह से एक साथ हैययय की आवाज निकली,
अमिता- क्या हुआ,
दासी- राजकुमारी ये क्या हो गया, क्या आपके साथ किसी ने दुराचार किया ह, क्या वोट क से अधिक लोग थे, या किसी ने कोई मुसल तो नहीं घुसा दिया,
सोमिया- ऐसा कुछ नहीं हुआ ह, हमने अपनी मर्जी से प्यार से सब करवाया ह,
दासी- ये प्यार से किया हुआ नहीं लग रहा, यहाँ तो बहुत बुरी हालत ह, आपकी छूट बुरी तरह फैट चुकी ह, जैसे इसमें गधे का लुंड घुसाया गया हो,
अमिता- जिसका घुसा था उसका गधे से भी मोटा था, तुम ये सबा छोड़ो बस ये बताओ क्या करना ह, क्योकि हमे हिलने डुलने पैर भी बहुत दर्द हो रहा ह,
दासी- दर्द तो होगा hi, हालत जो इतनी बुरी ह,
फिर स्वेता ने बाकि दसियो से गरम पानी साफ़ कपडे और कुछ औषधीय बताई, बाकि दासी तुरंत दौड़ पड़ी,
अमिता- ये कब तक ठीक हो जाएगी,
स्वेता- राजकुमारी इसका आकर वापस पहले जैसा तो कभी नहीं हो पायेगा लेकिन फिर भी काफी हद तक ठीक हो जायेगा, दर्द तो आपका कुछ hi समय में ठीक हो जायेगा, शाम तक आप आराम से बहार घूमने लायक हो जाएँगी,
स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,
स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,
स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,
सोमिया- बस उसके बारे में कुछ मत पूछना और ये बात गलती से भी बहार न जाने पाए,
स्वेता- जान जा सकती ह लेकिन बात नहीं जाएगी,
फिर स्वेता दोनों का उपचार करने लगी,
रीवा और अक्षरा निहारिका के पास बैठी हुई थी,
रीवा- माँ वो लोग नहीं मानेंगे, वो हमारी शादी करवा क्र hi रहेंगे,
निहारिका- जब तक मैं और देव ह ऐसा नहीं होगा, तुम चिंता मत करो,
अक्षरा- लेकिन देव गया कहा, उसने वडा किया था ो यहाँ रहेगा और इस सब को रोकेगा,
निहारिका- अगर देव यहाँ नहीं ह तो कुछ ऐसा काम आ गया ह जिसके लिए उसका जाना बहुत जरुरी हो गया ह,
रीवा- माँ आपको चिंता नहीं होती देव की, वो सुबह से महल से गायब ह, वो भी ऐसे दिन जब वो महाराज के विरुद्ध बोलने वाला था, कही महाराज ने उसे कुछ,
निहारिका- नहीं इन लोगो में इतनी ताकत नहीं ह की वो देव का कुछ बिगड़ सके, वो आता hi होगा,
देव अपने मां के पास बैठा हुआ था,
भौमिक जी- देव राजवीर को ठीक होने में समय लगने वाला ह, तुम्हे महल जाना चाहिए शायद वह तुम्हारी जरुरत हो,
भौमिक जी के इतना बोलते hi देव खड़ा हो गया उसने अपना सर पकड़ लिया,
अभेंद्र- क्या हुआ
देव- आज बहेनो की शादी का फैसला होना था और मैं भूल गया, न जाने वह क्या हुआ होगा, मुझे वह जाना होगा,
देव तुरंत वह से निकल गया, देव महल में पंहुचा उसे उम्मीद थी की वह बहुत बखेड़ा हुआ होगा, लेकिन महल तो बिलकुल शांत था, एक दम शांति पसरी हुई थी, देव जल्दी से निहारिका के कमरे में गया तो देखा रीवा और अक्षरा वह बैठी हुई हैं,
निहारिका- लो ये आ गया देव
अक्षरा- कहा चला गया था, हमे मुसीबत में छोड़ क्र,
देव- माफ़ करना एक ऐसा काम आ गया था जिसे कल के लिए नहीं छोड़ सकता था,
निहारिका- मैं जानती थी, कोई जरुरी काम hi होगा तभी गया होगा,
रीवा- वो काम हो गया,
देव- है हो गया, अब सब ठीक ह, लेकिन यहाँ क्या हुआ, सभा में क्या फैसला हुआ,
अक्षरा- फैसला तो हम सबको पता hi था क्या होना था लेकिन माँ ने हम ेबचा लिया,
माँ सुनकर देव और निहारिका चौंक गए,
देव- माँ ने
अक्षरा- निहारिका माँ ने, अब ये मेरी माँ hi हैं, मैंने अपनी माँ का अधिकार चीन क्र इन्हे दे दिया ह, अब से ये hi मेरी माँ हैं,
अक्षरा और रीवा ने देव को साडी बात बता दी,
देव- इतना कुछ होने के बाद महल में इतना सनता क्यों ह, राजा साहब को तो बवाल मचा देना था अब तक,
निहारिका- पता नहीं हम तब से बहार नहीं गए,
देव- मैं पता करता हु,
देव बहार चला गया, उसने बहार सेनिको से पूछा तो पता चला की भवर सिंह सात्विक और काम्य कुछ सेनिको के साथ महल से बहार गए हैं, और प्रतापगढ़ से आये दोनों राजकुमार वापस चले गए,
देव को बड़ी हैरत हुई, ये कैसे संभव ह, ये बहुत अजीब था,
देव ने वापस आकर सब बताया,
रीवा और अक्षरा ख़ुशी से उछाल पड़ी और देव से लिपट गई,
अक्षरा- मतलब वो लोग अब हमारी शादी नहीं करेंगे
देव- शादी तो तुम्हारी उन लोगो से वैसे भी नहीं होने वाली थी, लेकिन उनका इस तरह से वापस जाना और खुद भवर सिंह और काम्य का महल से जाना वो भी सात्विक के साथ ये कुछ शंका का कारन बन रहा ह,
निहारिका- क्या उन्हें कुछ पता चला ह,
देव- हो सकता ह, क्योकि सात्विक को सब पता ह,
रीवा- किस बारे में,
देव- तुम दोनों अभी जाकर तैयार हो जाओ, तुम लोग अभी युद्ध कला का शिक्षण लेने जाओगी, और रोज वह जाओगी,
अक्षरा- क्या कोई युद्ध होने वाला ह,
देव- हम हर पल एक युद्ध की तरफ बढ़ते जार हे हैं, और मैं न जाने किन परिश्थिति में राहु, इसलिए तुम सबको आत्मरक्षा सीखनी होगी, अगर मैं तुम सबको बचने में रहा तो मेरा धयान भटक सकता ह,
रीवा- ऐसा नहीं होगा, मैं अभी सोमिया और अमिता को बुला क्र तैयार होने को बोलती हु,
देव- उन्हें रहने दो, उन्हें मैं ले आऊंगा, तुम दोनों चलकर तैयार हो जाओ,
देव की बात से अक्षरा को हसी सी आ गई लेकिन उसने अपनी हसी को दबा लिया, फिर भी उसके चेरे पैर मुस्कान आ hi गई, जिसे निहारिका ने देख लिया,
अक्षरा रीवा का हाथ पकड़ क्र ले गई, उनके जाते hi देव निहिरका के पैरो में गिर पड़ा और दोनों पैरो को अपनी बहो में भर लिया,
निहारिका एक दम चौंक गई,
निहिरका- देव क्या हुआ, तू ऐसे क्यों टूट रहा ह,
देव- माँ मैंने उनेह धुंध लिया, माँ वो मिल गए,
निहारिका की आँखे भर आई, उसके हॉट कंपनी लगे, उसके शब्द उसके मुँह में hi दबे रह गए, उसका गाला भर आया था जिस वजह से आवाज बहार नहीं निकली, निहारिका ने भरे हुए गले से कांपते होतो से पूछा-
निहारिका- वाओ ो वो ठीक ह न,
देव- बस किसी तरह जिन्दा हैं माँ, लेकिन जल्दी hi वो एक दम ठीक होंगे, और जैसे hi वो ठीक होंगे हमारे उप्पेर कोई दबाव नहीं होगा, मैं भवर सिंह और उसके इस साम्राज्य को तहस नहस क्र दूंगा,
निहारिका ने देव को उठाया और उस ेअपने गले से लगा लिया,
निहारिका- देव तूने आज मुझे नया जीवन दे दिया ह,
निहारिका देव के माथे को उसके गलो को चूमने लगी और चूमते चूमते निहारिका ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, और जैसे hi दोनों के हॉट मिले तो समझो जैसे समुन्दर में सुनामी आ गया हो, निहारिका को भी विश्वास नहीं हुआ की उसने ऐसा किया, और देव तो पूरी तरह चौंका हुआ था, कुछ पालो तक दोनों एक दूसरे के होतो से हॉट मिलाये बस खड़े रहे, दोनों की धड़कने किसी हथोड़े की तरह धड़ धड़ क्र रही थी, एक दम सनता था कमरे में, दोनों की आँखे बंद हो चुकी थी, बस कुछ आवाज आ रही थी तो उन दोनों की उखड़ी हुई भरी बहरी सांसो की आवाज थी, और तभी दोनों ने वो कदम उठा दिया जो समाज के सरे न्यायम तोड़ दें ेके लिए काफी था,
दोनों बेकाबू हो चुके थे और दोनों के हॉट एक साथ खुले और एक दूसरे के होतो में समां गए, और एक दूसरे के होतो का रसपान करने लगे, दोनों ये hi भूल गए की उनके बिच रिश्ता क्या ह, ऐसा लग रहा था जैसे दो प्रेमियों का जोड़ा पहेली बार एक दूसरे से अपने प्रेम का इजहार कर रहा हो, और दोनों के चूमने में कोई जल्दबाजी नहीं थी, वो दोनों बड़े प्यार से एक दूसरे के चुम रहे थे, निहारिका कितने hi वर्षो बाद किसी के होतो को चूमा था या शायद पहेली बार वो किसी के हॉट चुम रही थी, निहारिका के हाथ देव के बालो में घूमने लगे, देव के हाथ भी निहारिका की कमर पैर थे, जो अब उप्पेर से निचे घूमने लगे थे,
निहारिका ने 20 वर्षो बाद खुद पैर से लगाम हटा दी थी, अचानक मिली एक बड़ी ख़ुशी में निहारिका अपने उप्पेर से काबू खो बैठी थी, या फिर उसके दिल में जो भावनाये उभरती रहती थी आज उन्हें हवा मिल गई थी, और देव वो हमेशा निहारिका से दूर रहने की कोशिश करता था, शायद ये hi वजह थी वो निहारिका के सामने बेकाबू होने लगता था, आज दोनों ने साडी सीमाएं लाँघ दी थी,
आज कल देव की वासना बढ़ती जा रही थी, और रात में दो दो लड़कियों के साथ सम्भोग किया था लेकिन देव संतुष्ट नहीं हुआ था, उसके अंदर वासना का गुब्बार भरा हुआ था, जो निहारिका के होतो के स्पर्श से फूट पाड़ा और देव बेकाबू हो गया, देव के हाथ निहारिका की कमर से फिसलते हुए उसके नितम्बो पैर पहुंच गए, निहारिका के नितम बहार को फैले हुए और पीछे से उभरे हुए थे, जिन्हे देव बहुत बार देख चुक्का था, यहाँ तक की उसके लुंड ने बहुत बार निहारिका के नितम्बो को महसूस किया था, लेकिन आज कपड़ो के उप्पेर से hi अपने हाथ निहिरका के नितम्बो पैर रखते hi देव के लुंड ने एक झटका मारा जो निहिरका को अपनी जांघो के बिच महसूस हुआ,
लुंड का अहसास होते hi निहारिका का धयान चुम्बन से हैट क्र देव के हाथो और लुंड पैर चला गया, और उसे अहसास हुआ वो क्या कर रही ह, निहारिका के हॉट रुक गए, और जैसे hi निहारिका ने देव को चूमना रोका तभी देव को भी अहसास हुआ ये क्या हो रहा था, देव के हाथ तुरंत उसकी जगह से हाथ गए, देव एक दम झटके से सीधा हो गया, दोनों की नजरे मिली और दोनों एक दूसरे से मुँह फेर क्र खड़े हो गए,
सांसे दोनों की उखड़ी हुई थी, दोनों की हालत ख़राब थी, दोनों शर्म से पानी पानी हुए जार हे थे, निहारिका शर्मा रही थी लेकिन देव बौखलाया हुआ था, वोट क सदमे जैसी हालत में था, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था अभी जो हुआ वो सच था या सपना,
काफी देर दोनों ऐसे hi शांत खड़े रहे, निहारिका समझ रही थी ये जो हुआ उससे देव की हालत क्या हो रही होगी, क्योकि उसकी खुद की हालत ख़राब थी, उसे खुद यकीन नहीं था ये सब कैसे हो गया,
निहारिका ने कुछ बोलना चाहा लेकिन देव तेज तेज कदमो से कमरे से बहार निकल गया,
वो सीधा अपने कमरे में पंहुचा और अपने बिस्टेर पैर लेट गया, उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था, सांसे उखड़ी हुई थी, सही गलत जैसी कोई भावना नहीं थी उसके मन में क्योकि सही गलत जैसी बातो से, समाज या किसी रिश्तो से देव और निहारिका बहुत उप्पेर उठ चुके थे, लेकिन फिर भी उसके दिमाग में ग्लानि के भाव आ रहे थे, लेकिन उसका दिल ख़ुशी से धक् धक् क्र रहा था, उसके मन में ख़ुशी और ग्लानि दोनों एक साथ चल रहे थे, उसका दिल बोल रहा था संसार की सबसे खूबसूरत स्त्री ने उसको चूमा, दूसरा मन उसे धिक्कार रहा था, वो सोच hi नहीं प् रहा था तभी उसके कमरे में अक्षरा आ गई,
अक्षरा- तुम यहाँ लेते हो और हम तैयार होकर बैठी हुई हैं,
अक्षरा की आवाज सुनकर देव एक दम खड़ा हो गया, उसका लुंड का उभर उसके कपड़ो में पूरी तरह दिख रहा था, अक्षरा का धयान सीधे वह गया,
अक्षरा- ये क्यों खड़ा ह, और वो दोनों कहा हैं,
देव ने अपने लुंड को देखा, फिर बिस्टेर को देखा जहा खून के बहुत से धभे थे,
अक्षरा ने आगे बढ़ क्र चादर देखि,
अक्षरा- हे लगता ह दोनों का कौमार्य भांग कर दिया तुमने,
देव- वो दोनों शायद अपने कमरे में होंगी, मैं तो सुबह यही छोड़ क्र गया था,
अक्षरा- क्या दोनों यही थी, मर गए,
देव- क्यों क्या हुआ,
अक्षरा- निहारिका माँ आई थी यहाँ, मैं आ रही थी लेकिन दत्त ने मुझे आने नहीं दिया, फिर निहारिका माँ अंदर आई थी, मैं तो भाग गई थी यहाँ से,
देव- क्या ओह्ह्ह, लेकिन माँ ने कुछ कहा नहीं मतलब उन्होंने देखा नहीं होगा, वो पहले hi जा चुकी होंगी,
अक्षरा- है सही बोल रहे हो, अगर माँ देखती तो बहुत मार पड़ती,
देव ने तुरंत बात पलटी,
देव- तुम लोग बहार चलो मैं उन दोनों को लेकर आता हु, अगर वो चलने लायक हैं तो,
अक्षरा हस्ती हुई चली गई,
देव को याद आया उनकी तो हालत ख़राब होगी वो कैसे जाएँगी, देव जल्दी से अमिता के कमरे में गया तो देखा दोनों बहन आराम से बैठ क्र बात क्र रही थी, दोनों के चेहरे से बिलकुल नहीं लग रहा था वो किसी तकलीफ में हैं,
देव को वह देख क्र दोनों ख़ुशी से झूम उठी, और एक दम उठ क्र देव की तरफ चल दी, एक दम उठने से वो थोड़ी सी लड़खड़ा गई,
देव- सम्हाल क्र
सोमिया- हम ठीक हैं,
देव को थोड़ी हैरानी हुई,
देव- क्या बात कर रही हो, तनी जल्दी ठीक कैसेहो सकती हो,
अमिता- हमारे पास जादुई तेल ह जिससे सब कुछ जल्दी ठीक हो जाता ह,
देव- जादुई तेल
सोमिया- अरे स्वेता हमारी दासी को इस बारे में बहुत जानकारी ह, उसने हमे कुछ ऐसी औषधीय बना क्र दी जिससे हम जल्दी ठीक हो गई, बस चलने फिरने में थोड़ा सा दर्द ह,
देव- बहुत बढ़िया, फिर आप दोनों तैयार हो जाओ और जल्दी से बहार आओ, हमे कही जाना ह,
दोनों ने देव की बात मणि और तैयार होकर बहार आ गई, देव उन चारो को रथ पैर बैठा क्र ले गया, सूरज ज्वाला और अभिजीत किन अजर उन पैर बानी हुई थी,
सूरज- देख हरामजादा कैसे चारो को अपने साथ ले जार है ह,
ज्वाला- जल्दी hi हमारे दिन बदल जायेंगे, फिर हम इससे बदला लेंगे, और ऐसा बदला लेंगे की ये याद रखेगा,
अभिजीत- लेकिन सब लोग चले कहा गए, आज तो फैसला होना था फिर महाराज और माँ महल से बहार क्यों गए हैं,
सूरज- जरूर कुछ जरुरी काम होगा,
ज्वाला- इससे ज्यादा जरुरी क्या हो सकता ह, ऐसा लगता ह जैसे हमसे बहुत कुछ छिपाया हुआ ह, यहाँ जो चल रहा ह वो हम ठीक से समझ नहीं प् रहे हैं,
अभिजीत- सही बोल रहे हो, यहाँ बहुत कुछ चल रहा ह,
सूरज- और तुम्हे ऐसा क्यों लगता ह,
अभिजीत- बस लगता ह, कुछ बहुत की खतरनाक पाक रहा ह इस महल में, और कुछ बहुत hi बड़ा होने वाला ह क्योकि माँ ने मुझे,
इतना बोल क्र अभिजीत चुप हो गया,
ज्वाला- माँ ने क्या,
अभिजीत- कुछ नहीं माँ ने मुझे कहा था इस देव से सम्हाल क्र रहना ये बहुत खतरनाक ह,
अभिजीत ने बात बदलने की कोशिश की लेकिन उसमे इतनी अकाल नहीं थी की बात कैसे बदली जाती ह, सूरज और ज्वाला समझ गए की मामला कुछ अलग ह,
देव तो निहारिका से बच क्र चारो बहेनो को लेकर निकल गया लेकिन निहारिका अपने कमरे में बौखलाई सी बैठी हुई थी, वो बार बार अपने होतो पैर उंगलिया फिर रही थी, कभी वो दुखी हो जाती तो कभी मुस्कुरा देती, निहारिके के अंदर एक जवान लड़की जैसे अरमान और भावनाये उभर रही थी, जैसे एक अभी अभी जवान हुई लड़की अपने प्रेमी के साथ पहले चुम्बन के बाद उत्साहित रहती ह, निहारिका के चेहरे पैर कोई पास्चतवा नहीं था, बस एक उलझन थी, देव क्या सोच रहा होगा, इस सब में वो ये भूल hi गई की ये सब शुरू किस बात से हुआ, राजवीर के जिन्दा होने की खबर से,
निहारिका के अरमान जग चुके थे, उसने अपने हर रिश्ते की चिटा जला दी थी, उसके दिल में देव के लिए बेटे से ज्यादा एक मर्द के लिए प्यार पनप चुक्का था, उसने साडी जिंदगी बस खुद को बांध क्र रखा था, ठीक से जवान भी नहीं हो पाई थी की मज़बूरी में शादी करनी पड़ी, और पति से प्यार की जगह बलात्कार जैसा अनुभव मिला था, प्यार क्या होता ह निहारिका को पता hi नहीं था, दुनिया में दो hi लोगो से उसे प्यार मिला था एक उसका भाई राजवीर और दूसरा देव, और देव का प्यार इतना पवित्र था और जो घटनाये निहारिका और देव के बिच घाटी उसके बाद निहारिका का प्यार बदलता चला गया, जिसका इजहार उसने आज के चुम्बन में क्र दिया था,
इधर देव चारो बहेनो को लेकर भौमिक जी के पास पंहुचा, जहा सुगंधा और मनीषा अभी भी अभ्यास कर रही थी,
देव- गुरु जी आज से ये चारो भी युद्ध का अभ्यास करेंगी, इन्हे आत्मरक्षा करना सीखना होगा,
भौमिक जी- क्या महाराज इसकी आज्ञा देंगे,
देव- ये अब महाराज की गुलाम नहीं हैं, हमारे राजय की औरतो को बस अपनी हवस का सामान बनाया हुआ ह इन राजाओ ने, महाभट काल में भी लड़किया योद्धा हुआ करती थी, लेकिन अब तो बस अपनी वासना की आग बुझाने और दूसरे राज्यों से समझौता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता ह,
भौमिक जी ने मुस्कुरा क्र देव के सर पैर हाथ फिराया,
भौमिक जी- शाबाश बीटा, मुझे तुमसे ये hi उम्मीद थी, तुम जरूर इस राजय का भला करोगे,
भौमिक जी ने अभेंद्र को बुलाया और चारो लड़कियों को उसके हवाले क्र दिया,
देव- गुरु जी आज बहुत अजीब घटना घाटी ह, आज महल में राजकुमारियों की शादी का फैसला होना था, लेकिन न जाने क्यों भवर सिंह ने प्रताप सिंह के बेटो को वापस भेज दिया और खुद काम्य और सात्विक के साथ कुछ खास सेनिको को लेकर महल से बहार निकल गए हैं,
भौमिक जी- कहा गए हैं,
देव- कोई नहीं जनता, वो किसी को बता क्र नहीं गए,
भौमिक जी- अचानक ऐसा करना जरूर कुछ बड़ी घटना होने वाली ह,
देव- और राजगुरु महल में नहीं हैं, उनका कार्य सात्विक जी सम्हल रहे हैं,
भौमिक जी- ये और भी ज्यादा खतरनाक ह, सात्विक भवर सिंह को अपनी उंगलियों पैर नचा रहा ह, और भैया महल में क्यों नहीं है, मैं पता करता हु, तुम अपनी तैयारी करो, और खुद को आने वाली हर मुश्किल के लिए तैयार करो, मैं भइया से मिलकर आता हु,
भौमिक जी निकल गए और देव वह सबके साथ खुद को निखारने में लग गया, अक्षरा अमिता और सोमिया से बात करना चाहती थी लेकिन रीवा की वजह से चुप थी,
उधर निहारिका अपने खयालो में बैठी हुई थी, की अचानक उसे याद आया की राजवीर मिल गया ह, वोट क दुखडी हो गई, देव के साथ जो हुआ उस चक्कर में वो राजवीर को भूल hi गई थी, लेकिन देव जा चुक्का था अब वो किस्से पूछे,
वही प्रतापगढ़ से प्रताप सिंह और भानु जो एक सेना लेकर उत्तर दिशा की तरफ दौड़ पड़े, बिना किसी को कुछ बताये, और जब प्रताप सिंह और रेणुका महल में न हो तो समझो पूरा महल आजाद होता था, और वही आजादी रेवती को मिल गई थी, क्योकि प्रताप सिंह के साथ उसके सबसे खास सैनिक गए थे जिनका काम महल के अंदर नजर रखना भी था, उनके जाते hi महल खली सा हो गया था, रेवती को इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला था उसने तुरंत एक दासी के कपडे पहने और महल से निकल गई, लेकिन वो ये भूल गई थी की रेणुका महल में hi ह,
रेवती जैसे hi बहार निकली उसके समाने रेणुका आ गई, जो प्रताप सिंह को विदा करके महल की तरफ आ रही थी, और उसने चल से hi रेवती को पहचान लिया था, रेणुका के खास सेनिको ने रेवती को पकड़ लिया और महल के अंदर ले आये,
रेणुका- हरामजादी फिर से भागने की कोशिश कर रही ह, तुझे पैदा करके इसी दिन के लिए जिन्दा रखा था, तेरे जैसी लड़कियों की वजह से hi महाराज बेटियों को जिन्दा नहीं रखते थे, मेरी जिद की वजह से तू जिन्दा ह और तूने मेरा सर झुका दिया,
रेवती- जब माँ बाप ऐसे हो तो बेटी क्या करे, और किसने कहा मैं बेटी हु यहाँ के राजा की, मुझे तो कभी इस बात का अहसास नहीं हुआ, मैंने तो हमेशा से खुद यहाँ कैदी समझा ह, जब से मैंने होश सम्हाला ह, मैंने कभी पिता का प्यार नहीं देखा, देखा ह तो सिर्फ गुस्सा और कमरे में रहने का आदेश, और आज से पहले मैंने आपको अपनी माँ समझ क्र प्यार दुलार पाया था, आज पता चला वो भी सब झूठा था, मुझे शर्म आ रही ह ये कहने में की मैं इस राजय की राजकुमारी हु,
रेणुका ने रेवती को थप्पड़ मर दिया,
रेणुका- जुबान चलती ह, कोण ह वो जिसके दम पैर तू यहाँ से भागने की कोशिश क्र रही ह, किसने दिए तुझे ये उड़ने के पंख, किसने हमारे राजय में बगावत की ह,
रेवती- इस राजय के नामर्दो में इतनी हिम्मत कहा जो ऐसा कुछ कर सके,
रेणुका- ओह तो महाराज का शक सही तहत ु भवनपुरा के किसी आदमी के साथ भागी थी, तो जरूर अपनी छूट फड़वा कर आई होगी, हरामजादी कलंकनी,
रेवती- कलंकनी कैसी होती हैं, ये मुझे आपसे सिखने की जरुरत नहीं ह,
रेणुका- टब हग रही थी इसका मतलब वो भी इसी महल में आया होगा, तभी तूने भागने की हिम्मत की ह,
रेवती- अभी तो नहीं आया, लेकिन मुझे भरोसा ह वो मुझे लेने जरूर आएगा, और जब वो आएगा तो कसम से वडा करती हु उसी से अपनी छूट फड़वाउंगी, और तुम्हारे देखे सपनो को कभी पूरा नहीं होने दूंगी,
रेणुका ने रेवती को मरना शुरू कर दिया, वो लगातार उसपर थपड मरे जा रही थी, काफी देर पीटने के बाद रेणुका ने उसे कमरे में बंद क्र दिया और अपने सबसे खास आदमी उसकी पहरेदारी में लगा दिए,
उधर राजगुरु पूरी रफ़्तार से घोड़े पैर दौड़े जा रहे थे, रेफर लम्बा था लेकिन वो जल्दी से जल्दी ुए पूरा कर लेना चाहते थे, उनके हाथ में एक नक्शा था जिसके हिसाब से वो चले जार हे थे, उनके पीछे भवर सिंह कमाया और सात्विक जार हे थे अपने सेनिको के साथ, अधिक सैनिक ले जाने की वजह से उनकी रफ़्तार धीमी थी, लेकिन सात्विक अपना धयान लगा क्र राजगुरु किस रस्ते से निकले हैं ये पता कर लेता था और वो लोग भी उसी दिशा में जार हे थे, उनके पीछे थे चरण और संभु जो भवर सिंह की सेना के पीछे पीछे जा रहे थे,
महल में सोमिया और अमिता की आँख खुली, उन्होंने जैसे hi उठने की कोशिश की उनकी दर्द भरी चीख निकल गई, जैसे तैसे करके वो उठ क्र बैठी, तो उन्हें रात की साडी बात याद आई, दोनों एक दूसरे को देख क्र मुस्कुरा दी, फिर अपनी हालत देखि की वो नंगी hi पड़ी हुई हैं और उनके उप्पेर चादर डाली हुई ह, वो जैसे तैसे करके उठी और एक दूसरे को सहारा देती हुई अपने कपडे पहन क्र लड़खड़ाती हुई अपने कमरे की तरफ चल दी,
कमरे के बहार उनकी खास दसिया कड़ी थी, दोनों राजकमारियो की बिगड़ी हुई हालत देख क्र दसिया उनके पास डोडी और उन्हें सम्हाला, दोनों को वोट क हिकमरे में ले गई,
दासी- राजकुमारी आप ठीक ह न, क्या हुआ आपको,
अमिता- हम ठीक ह तुम लोग चिंता मत लारो, बस इतना बताओ तुममे से सम्भोग का सबसे ज्यादा अनुभव किसके पास ह,
अमिता के मुँह से सम्भोग की बात सुनकर दसिया चौंक गई,
सोमिया- घबराओ नहीं, हमे तुम्हरी सहायता चाहिए इसलिए पूछ रही हैं,
उनमे से एक दासी आगे आई जिसकी उम्र करीब 30 साल की होगी,
अमिता- स्वेता तुम जानती हो
स्वेता- जी राजकुमारी, आपकी दासी बनने से पहले मुझे गणिका ( वैश्य) की शिक्षा दी गई थी, मेरे पिता मुझे गणिका बनाना चाहते थे उस्समे अधिक कमाई थी लेकिन फिर यहाँ महल में काम मिल गया तो यहाँ आ गई,
अमिता- अच्छा हुआ तुम बच गई, तुमने सम्भोग भी किया होगा न,
स्वाति – जी है गणिका बनाते समय राजाओ और राजकुमारों के साथ सम्भोग करने भेजा जाता था, आपके पिता के पास मुझे भेजा जा चुक्का ह, लेकिन उन्हें मैं याद नहीं हूँगी,
अमिता- फिर तुम हमारी मदद कर सकती हो, हम दोनों के कपडे उतरो और हमारे गुप्तांगो का निरिक्षण करो,
स्वाति और बाकि दसियो ने दोनों जरकुमारिओ को नंगा कर दिया, और जैसे hi उन्होंने दोनों के पेअर खोले, सभी दसियो की आँखे फटी रह गई, उन्होंने अपने मुँह पैर हाथ रख लिया, सबके मुँह से एक साथ हैययय की आवाज निकली,
अमिता- क्या हुआ,
दासी- राजकुमारी ये क्या हो गया, क्या आपके साथ किसी ने दुराचार किया ह, क्या वोट क से अधिक लोग थे, या किसी ने कोई मुसल तो नहीं घुसा दिया,
सोमिया- ऐसा कुछ नहीं हुआ ह, हमने अपनी मर्जी से प्यार से सब करवाया ह,
दासी- ये प्यार से किया हुआ नहीं लग रहा, यहाँ तो बहुत बुरी हालत ह, आपकी छूट बुरी तरह फैट चुकी ह, जैसे इसमें गधे का लुंड घुसाया गया हो,
अमिता- जिसका घुसा था उसका गधे से भी मोटा था, तुम ये सबा छोड़ो बस ये बताओ क्या करना ह, क्योकि हमे हिलने डुलने पैर भी बहुत दर्द हो रहा ह,
दासी- दर्द तो होगा hi, हालत जो इतनी बुरी ह,
फिर स्वेता ने बाकि दसियो से गरम पानी साफ़ कपडे और कुछ औषधीय बताई, बाकि दासी तुरंत दौड़ पड़ी,
अमिता- ये कब तक ठीक हो जाएगी,
स्वेता- राजकुमारी इसका आकर वापस पहले जैसा तो कभी नहीं हो पायेगा लेकिन फिर भी काफी हद तक ठीक हो जायेगा, दर्द तो आपका कुछ hi समय में ठीक हो जायेगा, शाम तक आप आराम से बहार घूमने लायक हो जाएँगी,
स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,
स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,
स्वेता- राजकुमारी क्या सच में वो इंसान hi था, क्योकि मैंने आज से पहले ऐसी हालत किसी की नहीं देखि,
सोमिया- बस उसके बारे में कुछ मत पूछना और ये बात गलती से भी बहार न जाने पाए,
स्वेता- जान जा सकती ह लेकिन बात नहीं जाएगी,
फिर स्वेता दोनों का उपचार करने लगी,
रीवा और अक्षरा निहारिका के पास बैठी हुई थी,
रीवा- माँ वो लोग नहीं मानेंगे, वो हमारी शादी करवा क्र hi रहेंगे,
निहारिका- जब तक मैं और देव ह ऐसा नहीं होगा, तुम चिंता मत करो,
अक्षरा- लेकिन देव गया कहा, उसने वडा किया था ो यहाँ रहेगा और इस सब को रोकेगा,
निहारिका- अगर देव यहाँ नहीं ह तो कुछ ऐसा काम आ गया ह जिसके लिए उसका जाना बहुत जरुरी हो गया ह,
रीवा- माँ आपको चिंता नहीं होती देव की, वो सुबह से महल से गायब ह, वो भी ऐसे दिन जब वो महाराज के विरुद्ध बोलने वाला था, कही महाराज ने उसे कुछ,
निहारिका- नहीं इन लोगो में इतनी ताकत नहीं ह की वो देव का कुछ बिगड़ सके, वो आता hi होगा,
देव अपने मां के पास बैठा हुआ था,
भौमिक जी- देव राजवीर को ठीक होने में समय लगने वाला ह, तुम्हे महल जाना चाहिए शायद वह तुम्हारी जरुरत हो,
भौमिक जी के इतना बोलते hi देव खड़ा हो गया उसने अपना सर पकड़ लिया,
अभेंद्र- क्या हुआ
देव- आज बहेनो की शादी का फैसला होना था और मैं भूल गया, न जाने वह क्या हुआ होगा, मुझे वह जाना होगा,
देव तुरंत वह से निकल गया, देव महल में पंहुचा उसे उम्मीद थी की वह बहुत बखेड़ा हुआ होगा, लेकिन महल तो बिलकुल शांत था, एक दम शांति पसरी हुई थी, देव जल्दी से निहारिका के कमरे में गया तो देखा रीवा और अक्षरा वह बैठी हुई हैं,
निहारिका- लो ये आ गया देव
अक्षरा- कहा चला गया था, हमे मुसीबत में छोड़ क्र,
देव- माफ़ करना एक ऐसा काम आ गया था जिसे कल के लिए नहीं छोड़ सकता था,
निहारिका- मैं जानती थी, कोई जरुरी काम hi होगा तभी गया होगा,
रीवा- वो काम हो गया,
देव- है हो गया, अब सब ठीक ह, लेकिन यहाँ क्या हुआ, सभा में क्या फैसला हुआ,
अक्षरा- फैसला तो हम सबको पता hi था क्या होना था लेकिन माँ ने हम ेबचा लिया,
माँ सुनकर देव और निहारिका चौंक गए,
देव- माँ ने
अक्षरा- निहारिका माँ ने, अब ये मेरी माँ hi हैं, मैंने अपनी माँ का अधिकार चीन क्र इन्हे दे दिया ह, अब से ये hi मेरी माँ हैं,
अक्षरा और रीवा ने देव को साडी बात बता दी,
देव- इतना कुछ होने के बाद महल में इतना सनता क्यों ह, राजा साहब को तो बवाल मचा देना था अब तक,
निहारिका- पता नहीं हम तब से बहार नहीं गए,
देव- मैं पता करता हु,
देव बहार चला गया, उसने बहार सेनिको से पूछा तो पता चला की भवर सिंह सात्विक और काम्य कुछ सेनिको के साथ महल से बहार गए हैं, और प्रतापगढ़ से आये दोनों राजकुमार वापस चले गए,
देव को बड़ी हैरत हुई, ये कैसे संभव ह, ये बहुत अजीब था,
देव ने वापस आकर सब बताया,
रीवा और अक्षरा ख़ुशी से उछाल पड़ी और देव से लिपट गई,
अक्षरा- मतलब वो लोग अब हमारी शादी नहीं करेंगे
देव- शादी तो तुम्हारी उन लोगो से वैसे भी नहीं होने वाली थी, लेकिन उनका इस तरह से वापस जाना और खुद भवर सिंह और काम्य का महल से जाना वो भी सात्विक के साथ ये कुछ शंका का कारन बन रहा ह,
निहारिका- क्या उन्हें कुछ पता चला ह,
देव- हो सकता ह, क्योकि सात्विक को सब पता ह,
रीवा- किस बारे में,
देव- तुम दोनों अभी जाकर तैयार हो जाओ, तुम लोग अभी युद्ध कला का शिक्षण लेने जाओगी, और रोज वह जाओगी,
अक्षरा- क्या कोई युद्ध होने वाला ह,
देव- हम हर पल एक युद्ध की तरफ बढ़ते जार हे हैं, और मैं न जाने किन परिश्थिति में राहु, इसलिए तुम सबको आत्मरक्षा सीखनी होगी, अगर मैं तुम सबको बचने में रहा तो मेरा धयान भटक सकता ह,
रीवा- ऐसा नहीं होगा, मैं अभी सोमिया और अमिता को बुला क्र तैयार होने को बोलती हु,
देव- उन्हें रहने दो, उन्हें मैं ले आऊंगा, तुम दोनों चलकर तैयार हो जाओ,
देव की बात से अक्षरा को हसी सी आ गई लेकिन उसने अपनी हसी को दबा लिया, फिर भी उसके चेरे पैर मुस्कान आ hi गई, जिसे निहारिका ने देख लिया,
अक्षरा रीवा का हाथ पकड़ क्र ले गई, उनके जाते hi देव निहिरका के पैरो में गिर पड़ा और दोनों पैरो को अपनी बहो में भर लिया,
निहारिका एक दम चौंक गई,
निहिरका- देव क्या हुआ, तू ऐसे क्यों टूट रहा ह,
देव- माँ मैंने उनेह धुंध लिया, माँ वो मिल गए,
निहारिका की आँखे भर आई, उसके हॉट कंपनी लगे, उसके शब्द उसके मुँह में hi दबे रह गए, उसका गाला भर आया था जिस वजह से आवाज बहार नहीं निकली, निहारिका ने भरे हुए गले से कांपते होतो से पूछा-
निहारिका- वाओ ो वो ठीक ह न,
देव- बस किसी तरह जिन्दा हैं माँ, लेकिन जल्दी hi वो एक दम ठीक होंगे, और जैसे hi वो ठीक होंगे हमारे उप्पेर कोई दबाव नहीं होगा, मैं भवर सिंह और उसके इस साम्राज्य को तहस नहस क्र दूंगा,
निहारिका ने देव को उठाया और उस ेअपने गले से लगा लिया,
निहारिका- देव तूने आज मुझे नया जीवन दे दिया ह,
निहारिका देव के माथे को उसके गलो को चूमने लगी और चूमते चूमते निहारिका ने देव के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, और जैसे hi दोनों के हॉट मिले तो समझो जैसे समुन्दर में सुनामी आ गया हो, निहारिका को भी विश्वास नहीं हुआ की उसने ऐसा किया, और देव तो पूरी तरह चौंका हुआ था, कुछ पालो तक दोनों एक दूसरे के होतो से हॉट मिलाये बस खड़े रहे, दोनों की धड़कने किसी हथोड़े की तरह धड़ धड़ क्र रही थी, एक दम सनता था कमरे में, दोनों की आँखे बंद हो चुकी थी, बस कुछ आवाज आ रही थी तो उन दोनों की उखड़ी हुई भरी बहरी सांसो की आवाज थी, और तभी दोनों ने वो कदम उठा दिया जो समाज के सरे न्यायम तोड़ दें ेके लिए काफी था,
दोनों बेकाबू हो चुके थे और दोनों के हॉट एक साथ खुले और एक दूसरे के होतो में समां गए, और एक दूसरे के होतो का रसपान करने लगे, दोनों ये hi भूल गए की उनके बिच रिश्ता क्या ह, ऐसा लग रहा था जैसे दो प्रेमियों का जोड़ा पहेली बार एक दूसरे से अपने प्रेम का इजहार कर रहा हो, और दोनों के चूमने में कोई जल्दबाजी नहीं थी, वो दोनों बड़े प्यार से एक दूसरे के चुम रहे थे, निहारिका कितने hi वर्षो बाद किसी के होतो को चूमा था या शायद पहेली बार वो किसी के हॉट चुम रही थी, निहारिका के हाथ देव के बालो में घूमने लगे, देव के हाथ भी निहारिका की कमर पैर थे, जो अब उप्पेर से निचे घूमने लगे थे,
निहारिका ने 20 वर्षो बाद खुद पैर से लगाम हटा दी थी, अचानक मिली एक बड़ी ख़ुशी में निहारिका अपने उप्पेर से काबू खो बैठी थी, या फिर उसके दिल में जो भावनाये उभरती रहती थी आज उन्हें हवा मिल गई थी, और देव वो हमेशा निहारिका से दूर रहने की कोशिश करता था, शायद ये hi वजह थी वो निहारिका के सामने बेकाबू होने लगता था, आज दोनों ने साडी सीमाएं लाँघ दी थी,
आज कल देव की वासना बढ़ती जा रही थी, और रात में दो दो लड़कियों के साथ सम्भोग किया था लेकिन देव संतुष्ट नहीं हुआ था, उसके अंदर वासना का गुब्बार भरा हुआ था, जो निहारिका के होतो के स्पर्श से फूट पाड़ा और देव बेकाबू हो गया, देव के हाथ निहारिका की कमर से फिसलते हुए उसके नितम्बो पैर पहुंच गए, निहारिका के नितम बहार को फैले हुए और पीछे से उभरे हुए थे, जिन्हे देव बहुत बार देख चुक्का था, यहाँ तक की उसके लुंड ने बहुत बार निहारिका के नितम्बो को महसूस किया था, लेकिन आज कपड़ो के उप्पेर से hi अपने हाथ निहिरका के नितम्बो पैर रखते hi देव के लुंड ने एक झटका मारा जो निहिरका को अपनी जांघो के बिच महसूस हुआ,
लुंड का अहसास होते hi निहारिका का धयान चुम्बन से हैट क्र देव के हाथो और लुंड पैर चला गया, और उसे अहसास हुआ वो क्या कर रही ह, निहारिका के हॉट रुक गए, और जैसे hi निहारिका ने देव को चूमना रोका तभी देव को भी अहसास हुआ ये क्या हो रहा था, देव के हाथ तुरंत उसकी जगह से हाथ गए, देव एक दम झटके से सीधा हो गया, दोनों की नजरे मिली और दोनों एक दूसरे से मुँह फेर क्र खड़े हो गए,
सांसे दोनों की उखड़ी हुई थी, दोनों की हालत ख़राब थी, दोनों शर्म से पानी पानी हुए जार हे थे, निहारिका शर्मा रही थी लेकिन देव बौखलाया हुआ था, वोट क सदमे जैसी हालत में था, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था अभी जो हुआ वो सच था या सपना,
काफी देर दोनों ऐसे hi शांत खड़े रहे, निहारिका समझ रही थी ये जो हुआ उससे देव की हालत क्या हो रही होगी, क्योकि उसकी खुद की हालत ख़राब थी, उसे खुद यकीन नहीं था ये सब कैसे हो गया,
निहारिका ने कुछ बोलना चाहा लेकिन देव तेज तेज कदमो से कमरे से बहार निकल गया,
वो सीधा अपने कमरे में पंहुचा और अपने बिस्टेर पैर लेट गया, उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था, सांसे उखड़ी हुई थी, सही गलत जैसी कोई भावना नहीं थी उसके मन में क्योकि सही गलत जैसी बातो से, समाज या किसी रिश्तो से देव और निहारिका बहुत उप्पेर उठ चुके थे, लेकिन फिर भी उसके दिमाग में ग्लानि के भाव आ रहे थे, लेकिन उसका दिल ख़ुशी से धक् धक् क्र रहा था, उसके मन में ख़ुशी और ग्लानि दोनों एक साथ चल रहे थे, उसका दिल बोल रहा था संसार की सबसे खूबसूरत स्त्री ने उसको चूमा, दूसरा मन उसे धिक्कार रहा था, वो सोच hi नहीं प् रहा था तभी उसके कमरे में अक्षरा आ गई,
अक्षरा- तुम यहाँ लेते हो और हम तैयार होकर बैठी हुई हैं,
अक्षरा की आवाज सुनकर देव एक दम खड़ा हो गया, उसका लुंड का उभर उसके कपड़ो में पूरी तरह दिख रहा था, अक्षरा का धयान सीधे वह गया,
अक्षरा- ये क्यों खड़ा ह, और वो दोनों कहा हैं,
देव ने अपने लुंड को देखा, फिर बिस्टेर को देखा जहा खून के बहुत से धभे थे,
अक्षरा ने आगे बढ़ क्र चादर देखि,
अक्षरा- हे लगता ह दोनों का कौमार्य भांग कर दिया तुमने,
देव- वो दोनों शायद अपने कमरे में होंगी, मैं तो सुबह यही छोड़ क्र गया था,
अक्षरा- क्या दोनों यही थी, मर गए,
देव- क्यों क्या हुआ,
अक्षरा- निहारिका माँ आई थी यहाँ, मैं आ रही थी लेकिन दत्त ने मुझे आने नहीं दिया, फिर निहारिका माँ अंदर आई थी, मैं तो भाग गई थी यहाँ से,
देव- क्या ओह्ह्ह, लेकिन माँ ने कुछ कहा नहीं मतलब उन्होंने देखा नहीं होगा, वो पहले hi जा चुकी होंगी,
अक्षरा- है सही बोल रहे हो, अगर माँ देखती तो बहुत मार पड़ती,
देव ने तुरंत बात पलटी,
देव- तुम लोग बहार चलो मैं उन दोनों को लेकर आता हु, अगर वो चलने लायक हैं तो,
अक्षरा हस्ती हुई चली गई,
देव को याद आया उनकी तो हालत ख़राब होगी वो कैसे जाएँगी, देव जल्दी से अमिता के कमरे में गया तो देखा दोनों बहन आराम से बैठ क्र बात क्र रही थी, दोनों के चेहरे से बिलकुल नहीं लग रहा था वो किसी तकलीफ में हैं,
देव को वह देख क्र दोनों ख़ुशी से झूम उठी, और एक दम उठ क्र देव की तरफ चल दी, एक दम उठने से वो थोड़ी सी लड़खड़ा गई,
देव- सम्हाल क्र
सोमिया- हम ठीक हैं,
देव को थोड़ी हैरानी हुई,
देव- क्या बात कर रही हो, तनी जल्दी ठीक कैसेहो सकती हो,
अमिता- हमारे पास जादुई तेल ह जिससे सब कुछ जल्दी ठीक हो जाता ह,
देव- जादुई तेल
सोमिया- अरे स्वेता हमारी दासी को इस बारे में बहुत जानकारी ह, उसने हमे कुछ ऐसी औषधीय बना क्र दी जिससे हम जल्दी ठीक हो गई, बस चलने फिरने में थोड़ा सा दर्द ह,
देव- बहुत बढ़िया, फिर आप दोनों तैयार हो जाओ और जल्दी से बहार आओ, हमे कही जाना ह,
दोनों ने देव की बात मणि और तैयार होकर बहार आ गई, देव उन चारो को रथ पैर बैठा क्र ले गया, सूरज ज्वाला और अभिजीत किन अजर उन पैर बानी हुई थी,
सूरज- देख हरामजादा कैसे चारो को अपने साथ ले जार है ह,
ज्वाला- जल्दी hi हमारे दिन बदल जायेंगे, फिर हम इससे बदला लेंगे, और ऐसा बदला लेंगे की ये याद रखेगा,
अभिजीत- लेकिन सब लोग चले कहा गए, आज तो फैसला होना था फिर महाराज और माँ महल से बहार क्यों गए हैं,
सूरज- जरूर कुछ जरुरी काम होगा,
ज्वाला- इससे ज्यादा जरुरी क्या हो सकता ह, ऐसा लगता ह जैसे हमसे बहुत कुछ छिपाया हुआ ह, यहाँ जो चल रहा ह वो हम ठीक से समझ नहीं प् रहे हैं,
अभिजीत- सही बोल रहे हो, यहाँ बहुत कुछ चल रहा ह,
सूरज- और तुम्हे ऐसा क्यों लगता ह,
अभिजीत- बस लगता ह, कुछ बहुत की खतरनाक पाक रहा ह इस महल में, और कुछ बहुत hi बड़ा होने वाला ह क्योकि माँ ने मुझे,
इतना बोल क्र अभिजीत चुप हो गया,
ज्वाला- माँ ने क्या,
अभिजीत- कुछ नहीं माँ ने मुझे कहा था इस देव से सम्हाल क्र रहना ये बहुत खतरनाक ह,
अभिजीत ने बात बदलने की कोशिश की लेकिन उसमे इतनी अकाल नहीं थी की बात कैसे बदली जाती ह, सूरज और ज्वाला समझ गए की मामला कुछ अलग ह,
देव तो निहारिका से बच क्र चारो बहेनो को लेकर निकल गया लेकिन निहारिका अपने कमरे में बौखलाई सी बैठी हुई थी, वो बार बार अपने होतो पैर उंगलिया फिर रही थी, कभी वो दुखी हो जाती तो कभी मुस्कुरा देती, निहारिके के अंदर एक जवान लड़की जैसे अरमान और भावनाये उभर रही थी, जैसे एक अभी अभी जवान हुई लड़की अपने प्रेमी के साथ पहले चुम्बन के बाद उत्साहित रहती ह, निहारिका के चेहरे पैर कोई पास्चतवा नहीं था, बस एक उलझन थी, देव क्या सोच रहा होगा, इस सब में वो ये भूल hi गई की ये सब शुरू किस बात से हुआ, राजवीर के जिन्दा होने की खबर से,
निहारिका के अरमान जग चुके थे, उसने अपने हर रिश्ते की चिटा जला दी थी, उसके दिल में देव के लिए बेटे से ज्यादा एक मर्द के लिए प्यार पनप चुक्का था, उसने साडी जिंदगी बस खुद को बांध क्र रखा था, ठीक से जवान भी नहीं हो पाई थी की मज़बूरी में शादी करनी पड़ी, और पति से प्यार की जगह बलात्कार जैसा अनुभव मिला था, प्यार क्या होता ह निहारिका को पता hi नहीं था, दुनिया में दो hi लोगो से उसे प्यार मिला था एक उसका भाई राजवीर और दूसरा देव, और देव का प्यार इतना पवित्र था और जो घटनाये निहारिका और देव के बिच घाटी उसके बाद निहारिका का प्यार बदलता चला गया, जिसका इजहार उसने आज के चुम्बन में क्र दिया था,
इधर देव चारो बहेनो को लेकर भौमिक जी के पास पंहुचा, जहा सुगंधा और मनीषा अभी भी अभ्यास कर रही थी,
देव- गुरु जी आज से ये चारो भी युद्ध का अभ्यास करेंगी, इन्हे आत्मरक्षा करना सीखना होगा,
भौमिक जी- क्या महाराज इसकी आज्ञा देंगे,
देव- ये अब महाराज की गुलाम नहीं हैं, हमारे राजय की औरतो को बस अपनी हवस का सामान बनाया हुआ ह इन राजाओ ने, महाभट काल में भी लड़किया योद्धा हुआ करती थी, लेकिन अब तो बस अपनी वासना की आग बुझाने और दूसरे राज्यों से समझौता करने के लिए इस्तेमाल किया जाता ह,
भौमिक जी ने मुस्कुरा क्र देव के सर पैर हाथ फिराया,
भौमिक जी- शाबाश बीटा, मुझे तुमसे ये hi उम्मीद थी, तुम जरूर इस राजय का भला करोगे,
भौमिक जी ने अभेंद्र को बुलाया और चारो लड़कियों को उसके हवाले क्र दिया,
देव- गुरु जी आज बहुत अजीब घटना घाटी ह, आज महल में राजकुमारियों की शादी का फैसला होना था, लेकिन न जाने क्यों भवर सिंह ने प्रताप सिंह के बेटो को वापस भेज दिया और खुद काम्य और सात्विक के साथ कुछ खास सेनिको को लेकर महल से बहार निकल गए हैं,
भौमिक जी- कहा गए हैं,
देव- कोई नहीं जनता, वो किसी को बता क्र नहीं गए,
भौमिक जी- अचानक ऐसा करना जरूर कुछ बड़ी घटना होने वाली ह,
देव- और राजगुरु महल में नहीं हैं, उनका कार्य सात्विक जी सम्हल रहे हैं,
भौमिक जी- ये और भी ज्यादा खतरनाक ह, सात्विक भवर सिंह को अपनी उंगलियों पैर नचा रहा ह, और भैया महल में क्यों नहीं है, मैं पता करता हु, तुम अपनी तैयारी करो, और खुद को आने वाली हर मुश्किल के लिए तैयार करो, मैं भइया से मिलकर आता हु,
भौमिक जी निकल गए और देव वह सबके साथ खुद को निखारने में लग गया, अक्षरा अमिता और सोमिया से बात करना चाहती थी लेकिन रीवा की वजह से चुप थी,
उधर निहारिका अपने खयालो में बैठी हुई थी, की अचानक उसे याद आया की राजवीर मिल गया ह, वोट क दुखडी हो गई, देव के साथ जो हुआ उस चक्कर में वो राजवीर को भूल hi गई थी, लेकिन देव जा चुक्का था अब वो किस्से पूछे,
वही प्रतापगढ़ से प्रताप सिंह और भानु जो एक सेना लेकर उत्तर दिशा की तरफ दौड़ पड़े, बिना किसी को कुछ बताये, और जब प्रताप सिंह और रेणुका महल में न हो तो समझो पूरा महल आजाद होता था, और वही आजादी रेवती को मिल गई थी, क्योकि प्रताप सिंह के साथ उसके सबसे खास सैनिक गए थे जिनका काम महल के अंदर नजर रखना भी था, उनके जाते hi महल खली सा हो गया था, रेवती को इससे अच्छा मौका नहीं मिलने वाला था उसने तुरंत एक दासी के कपडे पहने और महल से निकल गई, लेकिन वो ये भूल गई थी की रेणुका महल में hi ह,
रेवती जैसे hi बहार निकली उसके समाने रेणुका आ गई, जो प्रताप सिंह को विदा करके महल की तरफ आ रही थी, और उसने चल से hi रेवती को पहचान लिया था, रेणुका के खास सेनिको ने रेवती को पकड़ लिया और महल के अंदर ले आये,
रेणुका- हरामजादी फिर से भागने की कोशिश कर रही ह, तुझे पैदा करके इसी दिन के लिए जिन्दा रखा था, तेरे जैसी लड़कियों की वजह से hi महाराज बेटियों को जिन्दा नहीं रखते थे, मेरी जिद की वजह से तू जिन्दा ह और तूने मेरा सर झुका दिया,
रेवती- जब माँ बाप ऐसे हो तो बेटी क्या करे, और किसने कहा मैं बेटी हु यहाँ के राजा की, मुझे तो कभी इस बात का अहसास नहीं हुआ, मैंने तो हमेशा से खुद यहाँ कैदी समझा ह, जब से मैंने होश सम्हाला ह, मैंने कभी पिता का प्यार नहीं देखा, देखा ह तो सिर्फ गुस्सा और कमरे में रहने का आदेश, और आज से पहले मैंने आपको अपनी माँ समझ क्र प्यार दुलार पाया था, आज पता चला वो भी सब झूठा था, मुझे शर्म आ रही ह ये कहने में की मैं इस राजय की राजकुमारी हु,
रेणुका ने रेवती को थप्पड़ मर दिया,
रेणुका- जुबान चलती ह, कोण ह वो जिसके दम पैर तू यहाँ से भागने की कोशिश क्र रही ह, किसने दिए तुझे ये उड़ने के पंख, किसने हमारे राजय में बगावत की ह,
रेवती- इस राजय के नामर्दो में इतनी हिम्मत कहा जो ऐसा कुछ कर सके,
रेणुका- ओह तो महाराज का शक सही तहत ु भवनपुरा के किसी आदमी के साथ भागी थी, तो जरूर अपनी छूट फड़वा कर आई होगी, हरामजादी कलंकनी,
रेवती- कलंकनी कैसी होती हैं, ये मुझे आपसे सिखने की जरुरत नहीं ह,
रेणुका- टब हग रही थी इसका मतलब वो भी इसी महल में आया होगा, तभी तूने भागने की हिम्मत की ह,
रेवती- अभी तो नहीं आया, लेकिन मुझे भरोसा ह वो मुझे लेने जरूर आएगा, और जब वो आएगा तो कसम से वडा करती हु उसी से अपनी छूट फड़वाउंगी, और तुम्हारे देखे सपनो को कभी पूरा नहीं होने दूंगी,
रेणुका ने रेवती को मरना शुरू कर दिया, वो लगातार उसपर थपड मरे जा रही थी, काफी देर पीटने के बाद रेणुका ने उसे कमरे में बंद क्र दिया और अपने सबसे खास आदमी उसकी पहरेदारी में लगा दिए,
उधर राजगुरु पूरी रफ़्तार से घोड़े पैर दौड़े जा रहे थे, रेफर लम्बा था लेकिन वो जल्दी से जल्दी ुए पूरा कर लेना चाहते थे, उनके हाथ में एक नक्शा था जिसके हिसाब से वो चले जार हे थे, उनके पीछे भवर सिंह कमाया और सात्विक जार हे थे अपने सेनिको के साथ, अधिक सैनिक ले जाने की वजह से उनकी रफ़्तार धीमी थी, लेकिन सात्विक अपना धयान लगा क्र राजगुरु किस रस्ते से निकले हैं ये पता कर लेता था और वो लोग भी उसी दिशा में जार हे थे, उनके पीछे थे चरण और संभु जो भवर सिंह की सेना के पीछे पीछे जा रहे थे,

































