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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २२५
उस रात भी डीनर करने सीर्फ धिरेन ही अकेला बैठा था.. तो आज भी दयाने उनकी सब्जीमे नींदकी गोलीया मीला दी थी.. जब धिरेनने डीनर करलीया ओर उपर चला गया तब पुनम ओर दयाने भी खाना खालीया.. आज पुनम दयाके साथ ही सोने वाली थी.. तो धिरेन आज रात भी उपर जाते ही नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर इस रात पुनम नीचे दयाके साथ सोनेके लीये उनके रुममे आगइ....अब आगे
तो सहेरमे भी डीनरके वाक्त सबलोग अेकठा बैठकर ठीनर कर रहे थे.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखता था.. तो सृतीने नीचेसे अपना पैर लखनके पैरपे रखा.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती थोडी वीचलीत होगइ.. ओर खाना खाते ही वो उपर अपने रुममे सोने चली गइ.. तो आज रमा भी काफी हद तब ठीक होगइ थी..
लताने नीलमको उपर सोनेके लीये कहा तो नीलम भी उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर राधीका अपनी मम्मीके पास सो गइ.. तो लता रजीया भी लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तभी लता नीलमका फोन लेकर बहार नीकली.. जो धिरेनने नीलमको गीफ्ट दीया था.. जब दोनो पकडे गये.. तब लताने नीलमके पाससे वो फोन लेलीया था.. ओर नीलमके रुममे जाते ही फोन नीलमको दे दीया..
लता : (पास बैठकर सरपे हाथ घुमाकर फोन देते) नीलु.. बेटा.. येले तेरा फोन.. आजसे तु आजाद हे..
नीलम : (आंख गीली करते) दीदी.. आप अैसा क्यु केह रही हो..? मे तो अब धिरेनसे मीलती भी नही.. मुजे आपसे अैसे आजाद मत करो.. मे आपसे प्यार करती हु..
लता : (मुस्कुराते) नीलु.. पता हे मुजे तु मुजसे प्यार करती हे.. तभी तो मे तुजे अपनी भतीजी नही अपनी छोटी बहेन मानती हु.. अब तेरा भवीस्य तुजे तैय करना हे.. तु काफी बडी होगइ हे.. अब तुम धिरेनको मीलो तो भी कुछ फर्क पडने वाला नही हे.. क्युकी अब पुनोदी ओर धिरेन अलग हो रहे हे.. अगर तुम चाहोतो धिरेनसे सादी भ कर सकती हो.. लेकीन अपनी पढाइके बाद.. समजी..?
नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) दीदी.. मानाकी मे धिरेनसे ओर धिरेन मुजसे चाहते हे.. लेकीन पहेले मुजे अपनी पढाइ करनी हे.. अपने पैरपे खडा होना हे.. फीर आप ओर जीजु चाहो वहा मे सादी कर लुगी..
लता : (मुस्कुराते खडी होते) नीलु.. कुछ रीस्ते अैसे होजाते हे जो हमारे हाथमे नही होते.. मेने भी कीसीको चाहा हे.. तो फीर मे तुजपे पाबंधी क्यु लगाउ..? ठीक हे.. सोजा अब बहुत रात हो चुकी हे.. गुड जाइट..
नीलम : (दोडकर गले लगते) दीदी.. गुडनाइट.. आइ लव यु..
लता : (मुस्कुराते सर चुमते) हंम.. गुड नाइट.. चल जा सोजा..
कहेते लता मुस्कुराते बहार नीकल गइ.. ओर अपने कमरेमे चली गइ.. तो इधर देर रात सृतीने पुनमको फोन लगा दीया जो इस वक्त पुनम ओर दया अपने घरमे नीचे लेटी हुइ थी.. तब सृतीने पुनमको लखनके साथ हुइ सभी घटनाके बारेमे पुनमको बता दीया.. तो पुनम हसने लगी.. तब सृतीने लखनको क्या कहा.. ओर लखन उनके साथ कैसा बरताव कर रहा हे वो भी बता दीया.. तब..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. आपने भी वो ही गलती की जो मेने की थी.. क्या जरुरत लखन भैयाको रोकनेकी.. करने देती उसे जो करना चाहे.. अेक दिनतो उनसे मीलना ही हे.. ओर उपरसे लखन भैयाको इतना कुछ सुनादीया..? आपको भी पता हे हम दोनोकी मंजील अब लखन भैया ही हे..
सृती : (आंख गली करते) दीदी.. क्या करु..? मे उनका वो.. वो.. देखकर बहुत डर गइ थी.. ओर उपरसे दुसरी टेन्शन थी.. दीदी.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ हे.. अब तो मेरे सामने भी नही देखते.. क्या करु..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आपने तो उनका देख लीया हे.. तो क्या जाकइ बडे भैयासे भी बडा हे..? बताइअेनां.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. बडा..? ओ बापरे.. सायद देवुसे थोडा लंबा हे.. लेकीन चौडा देवुसे काफी बडा हे.. कल रात मेने ओर लताने भी देखा.. रमा भाभी कैसे चीला रही थी.. दीदी.. उनका स्टेमीना कीतना बढ गया हे.. कल.. वो पुरी रात रमा भाभीको करते रहे.. सुबह रमा भाभीकी हालत काफी खराब होगइ थी.. वो अभी भी ठीकसे चल भी नही रही.. सुबह तो उनको बुखार भी आगया था.. इसीलीये मे थोडा डरी हुइ थी..
पुनम : (खुस होते मुस्कुराते) भाभी.. क्या केह रही हो..? पुरी रात..? लगता हे वाकइ उनका स्टेमीना बढ गया हे.. भाभी.. इसमे डरने वाली कोइ बात नही थी.. हम दोनो तो बडे भैयाका ले चुकी हे.. तो हमे इतनी तकलीफ नही होगी.. आपके पास कीतना अच्छा मौका था.. जो आपने गवा दीया..
सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. तो क्या करती मे..? हम मेरी क्लीनीकपे थे.. अगर हमारे घरपे या मेरे घरपे होते तो बात कुछ ओर थी.. आपने उनका देखा नही हेनां..? इसीलीये अैसा केह रही हे.. बापरे मेतो देखते ही डर गइ थी.. जब हम मीलेगेनां.. तो वोतो पका मुजे बेहोस करदेगे.. दीदी.. हम कबसे प्लानींग कर रहेथे.. जब मौका मीला तो बात बीगड गइ.. अब तो मेरे सामने तक नही देखते..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब जाने दीजीये पुरानी बातको.. आप तो अब उधर ही हे.. लखन भैयाको मनाते रहीये.. वो मान जायेगे..
सृती : (थोडी परेसानीसे) अरे वो सामने देखे तबनां..? मैने कीतनी कोसीस की.. वोतो सामने भी नही देखते.. तो मे उनको कैसे मनाउ..? दीदी.. आपको तो पता हे मे इतने दिनोसे हमारे पतीसे दुर हु.. ओर जो यहा हे.. उनसे बात नही बनती.. दीदी.. प्लीज.. अगर आपसे दुबारा बात होतो उनको मनाइअेनां..
पुनम : (हसते) ठीक हे भाभी.. अब आपने मेरे लीये बहुत महेनत की.. तो मुजे भी आपके लीये महेनत तो करनी ही पडेगी.. देखती हु.. सायद दो तीन दिनमे हम सब सादीमे मीलेगे.. तब मे आपकी बात उनसे करवा दुगी..
सृती : (धीरेसे) दीदी.. मेने तो यहा सबको मना करदीया हे.. की मे नही आ सकती.. तो मे नही आ रही..
पुनम : (आस्चर्यसे) अरे पागल होगइ हो क्या..? ओर सायद आपने तो उसे ये भी केह दीया हे.. की मे अपने घर जा रही हु.. क्या ये सच हेनां..?
सृती : (आंख गली करते) हां दीदी.. तब मे उनसे थोडी नाराज थी.. तो मुहसे नीकल गया.. आपको तो सब पता चल जाता हे.. तो हम दोनोकी कौनसी बात आप नही जानती.. दीदी.. अब आप ही बताओ मे क्या करु..? अब तो उनके बीना रहा भी नही जाता..
पुनम : क्या करु मतलब..? अरे आप हमारे देवरके साथ ही सादीमे चली आइअे.. तबतक वहा भुमी आंटी नीर्मला आटी भी वापस आजायेगी.. भाभी.. मुजे उसी दिन अपनी जींदगीका फैसला लेना हे.. मे धिरेनको छोडकर हमेसाके लीये वहा आपके पास आ रही हु.. फीर हमे कोइ दिकत नही होगी..
सृती : (आंख पोछते) दीदी.. कल मंजुदीके साथ बात हुइ.. तब वो भी यही केह रही थी.. क्या आप सचमे इधर आ रही हो..? तो आजाइअेना.. हम दोनो मीलकर इनको खुब प्यार देगे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सही कहा आपने.. अब जबतक हमारा विजय बडा नही होजाता तबतक हम दोनोकी मंजील सीर्फ लखन भैया ही हे.. भाभी.. अब लता हमेसाके लीये हवेलीमे रहेगी.. भाइकी बीवी बनकर.. ओर हम दोनो वहा.. हमारे लखनकी बीवीया बनकर.. क्या कहेती हो..? हें..हें..हें..
सृती : (हसते) दीदी.. ये बात आप कीतनी सहजतासे बोल गइ.. लेकीन कल मेने देखा.. हमारे देवरको जेलना हमारे लीये इतनी आसान बात नही होगी.. जीतना आप समज रही हो.. रमा भाभीके साथ कीतना जोसमे करते थे.. जो पुरी रात चीखती चीलाती रही.. सायद कल उन दोनोके रीस्तेके बारेमे नीलुको भी पता चल गया होगा..
पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. मुजे ज्यादा कुछ नही पता.. बस इतना पता हे.. नीलुको सब पहेलेसे ही पता हे.. अब उनको अपनी मांके साथ साजीसमे साथ देते पछतावा हो रहा हे.. ओर रही बात हम दोनोकी.. तो जब हम दोनोके साथ भैयाका मीलन होजायेगानां.. उनके बाद हर रात हमारे लीये सुहागरात होगी.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते धीरेसे चुतको सहेलाते) दीदी.. आपने तो बाते करते ही मुजमे जोस भर दीया.. कास मेने गलती ना की होती.. देखना अब कीसी भी हालमे मे उनका प्यार पाकर ही रहुगी.. देखती हु अब वो मुजसे कबतक दुर रेह पाते हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब आपको पता चल गयानां..? की तडप क्या होती हे..? मे भी पीछले कइ दिनो तक लखन भैयाके लीये तडप रही हु.. भाभी.. जुदाइके बाद ही मीलनका मजा आता हे.. अगर जोस भर गया हे तो भैयाको याद करते बाथरुममे चली जाइअे.. नींद अच्छी आयेगी.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते हसते) क्या दीदी आपभी.. आप भी मंजु दीदीकी तराह कमीनी हो.. क्या आप भी अैसा करती थी..? हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) हाये.. भाभी.. मे आपसे जुठ नही बोलुगी.. जबसे हम दोनोके बीच अनबन हुइ.. तबसे मुजे भाइके प्यारकी अहेमीयतका पता चला.. दीदी.. मे उनको चाहने लगी हु.. बस.. मीलते ही मे भाइसे सामनेसे अपने प्यारका इजहार करदुगी.. मेने भाइको याद करते दो तीन बार कीया.. भाइको याद करते उंगली करते हुअे बहुत मजा आता हे.. क्या आपने अैसा कीया हे..?
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. सच कहु.. कइ बार.. जबसे मंजुदीने हम सबको छुट दीहे.. तबसे लगभग हमारे देवर ही मनमे छाये हुअे हे.. जबसे यहा आइ हु.. तबसे अेक रात भी नही छोडी.. उनको याद करते मास्टरबेट करनेके बहुत मजा आता हे.. अब तो वो मेरी आगको मीटायेगे तब ही मुजे चैन मीलेगा..
पुनम : (हसते) भाभी.. आप तो बीलकुल रेडी हो.. देखना हमारे देवरका बलात्कार मत कर देनां.. हें..हें..हें.. अच्छा ये बताओ.. आज आप दोनो रीपोर्ट करवाने गयेथे.. क्या हुआ..? हें..हें..हें..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. आप ओर मंजुदीदी.. दोनो वाकइ कमीनी हो.. दोनोको सबकुछ पता हे फीर भी पुछ रही हो.. दीदी.. रीपोर्ट पोजीटीव आइ हे.. आइ अेम प्रेगनेन्ट.. मे हमारे पतीके बच्चेकी मां बनने वाली हु.. लेकीन..
पुनम : (मुस्कुराते) लेकीन क्या..? भाभी.. कुछ हुआ हे क्या..? सच बताना..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. पता नही क्यु..? आम तौरपे जब कोइ पहेली बार प्रेगनेन्ट होती हे.. तो वो रीपोर्ट देखकर बहुत खुस होजाती हे.. लेकीन मुजे अैसी खुसीकी कोइ खास फीलींग्स नही हुइ.. अैसा क्यु..? आपतो सब जानती हेनां..? क्या मुजे बता सकती हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कुछ बाते अैसी होती हे.. जो ना जानोतो ही बहेतर हे.. आगे आपको खुद पता चल जायेगा.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. अब हम दोनोकी जींदगी लखन भैयाके साथ जुडी हुइ हे.. फीर चाहे इस जन्ममे हो या पीछले जन्ममे.. ओर वो सब आपको मंजुदी मीलेगी तब बता देगी.. क्युकी मेरी भी बतानेकी अेक मर्यादा हे..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. मुजे पता हे आपकी बतानेकी मर्यादा हे.. आपको मंजुदीकी परमीशनकी जरुरत पडती हे.. मे आपकी बात समज सकती हु.. अब कहीये आगे मे क्या करु..?
पुनम : (हसते) भाभी.. ओर कुछ नही.. अब आप जीतनी हो सके लखन भैयाके पास रहे.. ओर उनके साथ ज्यादासे ज्यादा टाइम स्पेन्ड करे.. मेरे खयालसे वो मान जायेगे.. चलो अब मे रखती हु.. परसो मीलेगे आश्रमपे.. तब बात करेगे..
सृती : (आस्चर्यसे) आश्रमपे..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. परसो दया बहेन ओर बडे भैयाकी सादी हे आश्रमपे.. तो आप लोग सीधा यही चले आइअे.. फीर यहासे सबलोग हमारे गांव चले जायेगे..
सृती : (हसते) दीदी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मुजे कुछ ओर जानना हे.. दीदी.. कमसे कम आपतो बता दीजीये.. क्युकी मुजे कुछ टेन्शन होने लगी हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब कीस बातकी टेन्शन..? क्या जानना चाहती हे आप..? बताइअे..
सृती : (धीरेसे) दीदी.. मेरे बारेमे.. मम्मीके बारेमें.. क्या आप मुजे मेरे ओर मेरी मम्मीके बारेमे बता सकती हे..? अभी मंजुदीदीने तो इस बारेमे कोइ बात नही की.. कमसे कम आप तो बता दीजीये..
पुनम : (थोडी सीरीयस होते धीरेसे) नही भाभी.. आपको भी पता हे मेरी क्या मर्यादा हे.. ये बात मंजुदीदी बताये वो ही बहेतर हे.. मे अभी आपको नही बता सकती.. फीर भी जानना हे तो पहेले दीदीसे बात करलीजीये.. फीर मे आपको सबकुछ बता दुगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. लेकीन अभी नही.. जब सही वक्त आयेगा.. ओर फीकर मत कीजीये.. वो वक्त भी बहुत जल्द आने वाला हे.. सायद हम गांवसे वापस आजाये तब..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. आपने तो अैसा कहेके मेरी टेन्शन ओर बढादी.. खैर जाने दीजीये.. चलो मंजुदीदीसे ही पुछ लुगी.. मे फोन रखती हु.. गुड नाइट अेन्ड स्वीट ड्रीम.. आप भी हमारे नये पतीके सपने देखीये.. हें..हें..हें..
बात करते दोनो ही सो गइ.. लेकीन आज सृतीकी आंखोसे नीद कोसो दुर थी.. क्युकी पुनमकी बातोसे उनका सक ओर मजबुत हो गया.. उनको अपने बारेमे ओर अपनी मम्मीके बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता ओर बढ गइ.. ओर गांव जाते ही इस बारेमे पहेले मंजुसे सबकुछ जाननेका फैसला करलीया.. वो अपने ओर अपनी मम्मीके बारेमे सोचते बीस्तरपे करवटे बदलती रही..
अध्याय - २२५
उस रात भी डीनर करने सीर्फ धिरेन ही अकेला बैठा था.. तो आज भी दयाने उनकी सब्जीमे नींदकी गोलीया मीला दी थी.. जब धिरेनने डीनर करलीया ओर उपर चला गया तब पुनम ओर दयाने भी खाना खालीया.. आज पुनम दयाके साथ ही सोने वाली थी.. तो धिरेन आज रात भी उपर जाते ही नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर इस रात पुनम नीचे दयाके साथ सोनेके लीये उनके रुममे आगइ....अब आगे
तो सहेरमे भी डीनरके वाक्त सबलोग अेकठा बैठकर ठीनर कर रहे थे.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखता था.. तो सृतीने नीचेसे अपना पैर लखनके पैरपे रखा.. तो लखनने अपना पैर पीछे खीच लीया.. तो सृती थोडी वीचलीत होगइ.. ओर खाना खाते ही वो उपर अपने रुममे सोने चली गइ.. तो आज रमा भी काफी हद तब ठीक होगइ थी..
लताने नीलमको उपर सोनेके लीये कहा तो नीलम भी उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर राधीका अपनी मम्मीके पास सो गइ.. तो लता रजीया भी लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. तभी लता नीलमका फोन लेकर बहार नीकली.. जो धिरेनने नीलमको गीफ्ट दीया था.. जब दोनो पकडे गये.. तब लताने नीलमके पाससे वो फोन लेलीया था.. ओर नीलमके रुममे जाते ही फोन नीलमको दे दीया..
लता : (पास बैठकर सरपे हाथ घुमाकर फोन देते) नीलु.. बेटा.. येले तेरा फोन.. आजसे तु आजाद हे..
नीलम : (आंख गीली करते) दीदी.. आप अैसा क्यु केह रही हो..? मे तो अब धिरेनसे मीलती भी नही.. मुजे आपसे अैसे आजाद मत करो.. मे आपसे प्यार करती हु..
लता : (मुस्कुराते) नीलु.. पता हे मुजे तु मुजसे प्यार करती हे.. तभी तो मे तुजे अपनी भतीजी नही अपनी छोटी बहेन मानती हु.. अब तेरा भवीस्य तुजे तैय करना हे.. तु काफी बडी होगइ हे.. अब तुम धिरेनको मीलो तो भी कुछ फर्क पडने वाला नही हे.. क्युकी अब पुनोदी ओर धिरेन अलग हो रहे हे.. अगर तुम चाहोतो धिरेनसे सादी भ कर सकती हो.. लेकीन अपनी पढाइके बाद.. समजी..?
नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) दीदी.. मानाकी मे धिरेनसे ओर धिरेन मुजसे चाहते हे.. लेकीन पहेले मुजे अपनी पढाइ करनी हे.. अपने पैरपे खडा होना हे.. फीर आप ओर जीजु चाहो वहा मे सादी कर लुगी..
लता : (मुस्कुराते खडी होते) नीलु.. कुछ रीस्ते अैसे होजाते हे जो हमारे हाथमे नही होते.. मेने भी कीसीको चाहा हे.. तो फीर मे तुजपे पाबंधी क्यु लगाउ..? ठीक हे.. सोजा अब बहुत रात हो चुकी हे.. गुड जाइट..
नीलम : (दोडकर गले लगते) दीदी.. गुडनाइट.. आइ लव यु..
लता : (मुस्कुराते सर चुमते) हंम.. गुड नाइट.. चल जा सोजा..
कहेते लता मुस्कुराते बहार नीकल गइ.. ओर अपने कमरेमे चली गइ.. तो इधर देर रात सृतीने पुनमको फोन लगा दीया जो इस वक्त पुनम ओर दया अपने घरमे नीचे लेटी हुइ थी.. तब सृतीने पुनमको लखनके साथ हुइ सभी घटनाके बारेमे पुनमको बता दीया.. तो पुनम हसने लगी.. तब सृतीने लखनको क्या कहा.. ओर लखन उनके साथ कैसा बरताव कर रहा हे वो भी बता दीया.. तब..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. आपने भी वो ही गलती की जो मेने की थी.. क्या जरुरत लखन भैयाको रोकनेकी.. करने देती उसे जो करना चाहे.. अेक दिनतो उनसे मीलना ही हे.. ओर उपरसे लखन भैयाको इतना कुछ सुनादीया..? आपको भी पता हे हम दोनोकी मंजील अब लखन भैया ही हे..
सृती : (आंख गली करते) दीदी.. क्या करु..? मे उनका वो.. वो.. देखकर बहुत डर गइ थी.. ओर उपरसे दुसरी टेन्शन थी.. दीदी.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ हे.. अब तो मेरे सामने भी नही देखते.. क्या करु..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. आपने तो उनका देख लीया हे.. तो क्या जाकइ बडे भैयासे भी बडा हे..? बताइअेनां.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर धीरेसे) दीदी.. बडा..? ओ बापरे.. सायद देवुसे थोडा लंबा हे.. लेकीन चौडा देवुसे काफी बडा हे.. कल रात मेने ओर लताने भी देखा.. रमा भाभी कैसे चीला रही थी.. दीदी.. उनका स्टेमीना कीतना बढ गया हे.. कल.. वो पुरी रात रमा भाभीको करते रहे.. सुबह रमा भाभीकी हालत काफी खराब होगइ थी.. वो अभी भी ठीकसे चल भी नही रही.. सुबह तो उनको बुखार भी आगया था.. इसीलीये मे थोडा डरी हुइ थी..
पुनम : (खुस होते मुस्कुराते) भाभी.. क्या केह रही हो..? पुरी रात..? लगता हे वाकइ उनका स्टेमीना बढ गया हे.. भाभी.. इसमे डरने वाली कोइ बात नही थी.. हम दोनो तो बडे भैयाका ले चुकी हे.. तो हमे इतनी तकलीफ नही होगी.. आपके पास कीतना अच्छा मौका था.. जो आपने गवा दीया..
सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. तो क्या करती मे..? हम मेरी क्लीनीकपे थे.. अगर हमारे घरपे या मेरे घरपे होते तो बात कुछ ओर थी.. आपने उनका देखा नही हेनां..? इसीलीये अैसा केह रही हे.. बापरे मेतो देखते ही डर गइ थी.. जब हम मीलेगेनां.. तो वोतो पका मुजे बेहोस करदेगे.. दीदी.. हम कबसे प्लानींग कर रहेथे.. जब मौका मीला तो बात बीगड गइ.. अब तो मेरे सामने तक नही देखते..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब जाने दीजीये पुरानी बातको.. आप तो अब उधर ही हे.. लखन भैयाको मनाते रहीये.. वो मान जायेगे..
सृती : (थोडी परेसानीसे) अरे वो सामने देखे तबनां..? मैने कीतनी कोसीस की.. वोतो सामने भी नही देखते.. तो मे उनको कैसे मनाउ..? दीदी.. आपको तो पता हे मे इतने दिनोसे हमारे पतीसे दुर हु.. ओर जो यहा हे.. उनसे बात नही बनती.. दीदी.. प्लीज.. अगर आपसे दुबारा बात होतो उनको मनाइअेनां..
पुनम : (हसते) ठीक हे भाभी.. अब आपने मेरे लीये बहुत महेनत की.. तो मुजे भी आपके लीये महेनत तो करनी ही पडेगी.. देखती हु.. सायद दो तीन दिनमे हम सब सादीमे मीलेगे.. तब मे आपकी बात उनसे करवा दुगी..
सृती : (धीरेसे) दीदी.. मेने तो यहा सबको मना करदीया हे.. की मे नही आ सकती.. तो मे नही आ रही..
पुनम : (आस्चर्यसे) अरे पागल होगइ हो क्या..? ओर सायद आपने तो उसे ये भी केह दीया हे.. की मे अपने घर जा रही हु.. क्या ये सच हेनां..?
सृती : (आंख गली करते) हां दीदी.. तब मे उनसे थोडी नाराज थी.. तो मुहसे नीकल गया.. आपको तो सब पता चल जाता हे.. तो हम दोनोकी कौनसी बात आप नही जानती.. दीदी.. अब आप ही बताओ मे क्या करु..? अब तो उनके बीना रहा भी नही जाता..
पुनम : क्या करु मतलब..? अरे आप हमारे देवरके साथ ही सादीमे चली आइअे.. तबतक वहा भुमी आंटी नीर्मला आटी भी वापस आजायेगी.. भाभी.. मुजे उसी दिन अपनी जींदगीका फैसला लेना हे.. मे धिरेनको छोडकर हमेसाके लीये वहा आपके पास आ रही हु.. फीर हमे कोइ दिकत नही होगी..
सृती : (आंख पोछते) दीदी.. कल मंजुदीके साथ बात हुइ.. तब वो भी यही केह रही थी.. क्या आप सचमे इधर आ रही हो..? तो आजाइअेना.. हम दोनो मीलकर इनको खुब प्यार देगे..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सही कहा आपने.. अब जबतक हमारा विजय बडा नही होजाता तबतक हम दोनोकी मंजील सीर्फ लखन भैया ही हे.. भाभी.. अब लता हमेसाके लीये हवेलीमे रहेगी.. भाइकी बीवी बनकर.. ओर हम दोनो वहा.. हमारे लखनकी बीवीया बनकर.. क्या कहेती हो..? हें..हें..हें..
सृती : (हसते) दीदी.. ये बात आप कीतनी सहजतासे बोल गइ.. लेकीन कल मेने देखा.. हमारे देवरको जेलना हमारे लीये इतनी आसान बात नही होगी.. जीतना आप समज रही हो.. रमा भाभीके साथ कीतना जोसमे करते थे.. जो पुरी रात चीखती चीलाती रही.. सायद कल उन दोनोके रीस्तेके बारेमे नीलुको भी पता चल गया होगा..
पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. मुजे ज्यादा कुछ नही पता.. बस इतना पता हे.. नीलुको सब पहेलेसे ही पता हे.. अब उनको अपनी मांके साथ साजीसमे साथ देते पछतावा हो रहा हे.. ओर रही बात हम दोनोकी.. तो जब हम दोनोके साथ भैयाका मीलन होजायेगानां.. उनके बाद हर रात हमारे लीये सुहागरात होगी.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाते धीरेसे चुतको सहेलाते) दीदी.. आपने तो बाते करते ही मुजमे जोस भर दीया.. कास मेने गलती ना की होती.. देखना अब कीसी भी हालमे मे उनका प्यार पाकर ही रहुगी.. देखती हु अब वो मुजसे कबतक दुर रेह पाते हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब आपको पता चल गयानां..? की तडप क्या होती हे..? मे भी पीछले कइ दिनो तक लखन भैयाके लीये तडप रही हु.. भाभी.. जुदाइके बाद ही मीलनका मजा आता हे.. अगर जोस भर गया हे तो भैयाको याद करते बाथरुममे चली जाइअे.. नींद अच्छी आयेगी.. हें..हें..हें..
सृती : (सर्मसार होते हसते) क्या दीदी आपभी.. आप भी मंजु दीदीकी तराह कमीनी हो.. क्या आप भी अैसा करती थी..? हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) हाये.. भाभी.. मे आपसे जुठ नही बोलुगी.. जबसे हम दोनोके बीच अनबन हुइ.. तबसे मुजे भाइके प्यारकी अहेमीयतका पता चला.. दीदी.. मे उनको चाहने लगी हु.. बस.. मीलते ही मे भाइसे सामनेसे अपने प्यारका इजहार करदुगी.. मेने भाइको याद करते दो तीन बार कीया.. भाइको याद करते उंगली करते हुअे बहुत मजा आता हे.. क्या आपने अैसा कीया हे..?
सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. सच कहु.. कइ बार.. जबसे मंजुदीने हम सबको छुट दीहे.. तबसे लगभग हमारे देवर ही मनमे छाये हुअे हे.. जबसे यहा आइ हु.. तबसे अेक रात भी नही छोडी.. उनको याद करते मास्टरबेट करनेके बहुत मजा आता हे.. अब तो वो मेरी आगको मीटायेगे तब ही मुजे चैन मीलेगा..
पुनम : (हसते) भाभी.. आप तो बीलकुल रेडी हो.. देखना हमारे देवरका बलात्कार मत कर देनां.. हें..हें..हें.. अच्छा ये बताओ.. आज आप दोनो रीपोर्ट करवाने गयेथे.. क्या हुआ..? हें..हें..हें..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. आप ओर मंजुदीदी.. दोनो वाकइ कमीनी हो.. दोनोको सबकुछ पता हे फीर भी पुछ रही हो.. दीदी.. रीपोर्ट पोजीटीव आइ हे.. आइ अेम प्रेगनेन्ट.. मे हमारे पतीके बच्चेकी मां बनने वाली हु.. लेकीन..
पुनम : (मुस्कुराते) लेकीन क्या..? भाभी.. कुछ हुआ हे क्या..? सच बताना..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. पता नही क्यु..? आम तौरपे जब कोइ पहेली बार प्रेगनेन्ट होती हे.. तो वो रीपोर्ट देखकर बहुत खुस होजाती हे.. लेकीन मुजे अैसी खुसीकी कोइ खास फीलींग्स नही हुइ.. अैसा क्यु..? आपतो सब जानती हेनां..? क्या मुजे बता सकती हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कुछ बाते अैसी होती हे.. जो ना जानोतो ही बहेतर हे.. आगे आपको खुद पता चल जायेगा.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. अब हम दोनोकी जींदगी लखन भैयाके साथ जुडी हुइ हे.. फीर चाहे इस जन्ममे हो या पीछले जन्ममे.. ओर वो सब आपको मंजुदी मीलेगी तब बता देगी.. क्युकी मेरी भी बतानेकी अेक मर्यादा हे..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. मुजे पता हे आपकी बतानेकी मर्यादा हे.. आपको मंजुदीकी परमीशनकी जरुरत पडती हे.. मे आपकी बात समज सकती हु.. अब कहीये आगे मे क्या करु..?
पुनम : (हसते) भाभी.. ओर कुछ नही.. अब आप जीतनी हो सके लखन भैयाके पास रहे.. ओर उनके साथ ज्यादासे ज्यादा टाइम स्पेन्ड करे.. मेरे खयालसे वो मान जायेगे.. चलो अब मे रखती हु.. परसो मीलेगे आश्रमपे.. तब बात करेगे..
सृती : (आस्चर्यसे) आश्रमपे..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. परसो दया बहेन ओर बडे भैयाकी सादी हे आश्रमपे.. तो आप लोग सीधा यही चले आइअे.. फीर यहासे सबलोग हमारे गांव चले जायेगे..
सृती : (हसते) दीदी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मुजे कुछ ओर जानना हे.. दीदी.. कमसे कम आपतो बता दीजीये.. क्युकी मुजे कुछ टेन्शन होने लगी हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. अब कीस बातकी टेन्शन..? क्या जानना चाहती हे आप..? बताइअे..
सृती : (धीरेसे) दीदी.. मेरे बारेमे.. मम्मीके बारेमें.. क्या आप मुजे मेरे ओर मेरी मम्मीके बारेमे बता सकती हे..? अभी मंजुदीदीने तो इस बारेमे कोइ बात नही की.. कमसे कम आप तो बता दीजीये..
पुनम : (थोडी सीरीयस होते धीरेसे) नही भाभी.. आपको भी पता हे मेरी क्या मर्यादा हे.. ये बात मंजुदीदी बताये वो ही बहेतर हे.. मे अभी आपको नही बता सकती.. फीर भी जानना हे तो पहेले दीदीसे बात करलीजीये.. फीर मे आपको सबकुछ बता दुगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. लेकीन अभी नही.. जब सही वक्त आयेगा.. ओर फीकर मत कीजीये.. वो वक्त भी बहुत जल्द आने वाला हे.. सायद हम गांवसे वापस आजाये तब..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. आपने तो अैसा कहेके मेरी टेन्शन ओर बढादी.. खैर जाने दीजीये.. चलो मंजुदीदीसे ही पुछ लुगी.. मे फोन रखती हु.. गुड नाइट अेन्ड स्वीट ड्रीम.. आप भी हमारे नये पतीके सपने देखीये.. हें..हें..हें..
बात करते दोनो ही सो गइ.. लेकीन आज सृतीकी आंखोसे नीद कोसो दुर थी.. क्युकी पुनमकी बातोसे उनका सक ओर मजबुत हो गया.. उनको अपने बारेमे ओर अपनी मम्मीके बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता ओर बढ गइ.. ओर गांव जाते ही इस बारेमे पहेले मंजुसे सबकुछ जाननेका फैसला करलीया.. वो अपने ओर अपनी मम्मीके बारेमे सोचते बीस्तरपे करवटे बदलती रही..















