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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २२३
लखनकी बातसे सृती थोडी नीरास होगइ.. क्युकी कल रात रमाकी चुदाइकी वजहसे वो काफी गरम होगइ थी.. इसीलीये आज उनकी क्लीनीकपे कोइ पेसन्ट नही होता तो वो आज लखनके लंडको देखना चाहती थी.. ताकी लखन उनके साथ थोडा आगे बढ सके.. क्युकी अब सृती लखनके साथ आगे बढकर वो सबकुछ करना चाहती थी.. लेकीन वो पहेल करनेसे डरती थी.. इसके लीये इस मामलेमे वो खुद लखनको आगे बढनेका मौका देना चाहती थी.. ओर कुछ देरेके बाद दोनो क्लीनीकपे पहोंच गये.... अब आगे
सृती : (कारसे उतरते) आइअे देवरजी.. आप कोफी पीकर चले जाना.. तबतक पुनोदीदीसे बात भी होजायेगी.. चलीये..
कहा तो लखन सृतीके साथ क्लीनीकपे चला गया.. अंदर जाकर देखा तो तीन चार पेसन्ट बैठे थे.. तो सृतीने थोडी देरके बाद अेक अेकको अंदर आनेकी सुचना देकर अपनी ओफीसमे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते इन्टरकोमसे दो कोफीका बोल दीया.. ओर वो अपनी चेरपे जाकर बैठ गइ.. ओर लखनको भी सामने बैठनेको कहा.. ओर सृतीने अपना मोबाइल नीकालकर पुनमको फोन लगा दीया..
सृती : (सामने फोन उठाते ही) हेलो.. कौन..? पुनम दीदी..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मे पुनम बोल रही हु.. लखन भैयासे अेक घंटे पहेले ही मेरी बात हुइ.. क्या मेरे बारेमे आपसे कोइ बात हुइ..?
सृती : (मुस्कुराते) हां दीदी.. तभी तो आपको फोन कीया.. अभी वो मेरे सामने ही बैठे हे.. लीजीये बात कीजीये इनसे..
इस वक्त दया ओर पुनम कीचनमे खाना बना रही थी.. जैसे ही सृतीका फोन आया वो फोन लेकर बहार होलमे सोफेपे जाकर बैठ गइ.. ओर फोन उठालीया.. जैसे ही सृतीने कहा लखनसे बात कीजीये.. तब अेक पाल तो पुनमके दिलकी कडकन धडकना चुक गइ.. ओर उनकी आंखोसे फीरसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. सृती लखनको फोन देते उनके सामने ही देखती रही.. तभी..
लखन : (भारी आवाजमे आंख गीली करते) हेलो.. दीदी.. क्या हुआ..?
पुनम : (जोरसे रोते) भैया.. आइ अेम सोरी.. आइ अेम सोरी.. मुजे बस.. अेक बार माफ करदो..

लखन : (आंसु बहाते) हेय हेय.. दीदी रोइअे मत.. आपको मेरी कसम.. आप आप अेक बारतो माफी मांग चुकी हो..ओर गलती मेरी भी थी.. माफी तो मुजे मांगनी चाहीये आपसे.. आप मुजे माफ करदो.. सोरी दीदी.. प्लीज.. रोना बंध करो.. अगर वो कमीना अब तंग करेतो मुजे कोल करदेना..
पुनम : (जटसे अपने आंसु पोछते) भाइ.. कसम मत दो.. मे नही रोती.. बस..? भाइ.. क्या अेक बार भी इस बहेनकी याद नही आइ.. आप बहुत बुरे हो.. कीतना रुलाया हे आपने मुजे.. हें..हें..हें..
लखन : (आंसु बहाते भी मुस्कुराते) दीदी.. आइ अेम सोरी.. प्ली..ज.. अेक बार अपने लखन भैयाको माफ करदो.. आइ प्रोमीस.. अब अैसी गलती दुबारा कभी नही होगी..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आप गलतीकी बात मत करो.. आपकी कोइ गलती नही थी.. अब भुल जाओ सब.. आइ मीस यु.. मुजे आपकी बहुत जरुरत हे..
लखन : (आंसु पोछते) दीदी.. जानता हु मे.. आपकी पल पलकी खबर मीलती हे मुजे.. इसीलीये सुबह आपको फोन करदीया.. मे तो हमेसा आपके साथ ही हु.. बस.. जो होना था हो गया.. भुल जाइअे सब.. आप अेक आवाज करो.. मे हाजर होजाउगा.. दीदी.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. क्या धिरेनने आपके उपर हाथ तो नही उठायानां..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. उनमे इतनी हिंमत नही हे.. ओर आपकी बहेन भी इतनी कमजोर नही हे.. भाइ.. मे इस आदमीके साथ रहेना नही चाहती.. भाइ आपने देखीनां उनकी करतुत..? भाइ.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बताना हे..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. आपके भाइके घरका दरवाजा हमेसा खुला ही हे.. आपको कुछ अैसा लगे.. तो आप यहा चली आना.. वरना मुजे कोल करना मे आपको लेजाउगा..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. कहीये दीदी..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. क्या अब भाभी नही कहोगे..? हंम..?
लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. भाभी तो बहुत चाटा मारती हे.. मेरी दीदी बहुत अच्छी हे.. अभी यहा दुसरी भाभीके साथ बैठा हु.. देखता हु वो क्या करती हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. आइ अेम सोरी.. आइ प्रोमीस.. अब अैसी गलती दुबारा कभी होगी.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे अपने भाइसे बहुत चाहती हु..
लखन : (आंख गीली करते) हंम.. लव यु टु दीदी.. आपका ये भाइ भी आपको बहुत चाहता हे.. दीदी.. सुनो.. अेक बहुत बडी खुस खबरी सुनाता हु.. अभी अभी मे ओर भाभी उनकी फ्रेन्डकी क्लीनीकसे आ रहे हे.. दीदी.. आप बुआ.. ओर मे चाचा बनने वाला हु.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते खुसीसे हसते) व्होट..? भाइ.. सच केह रहे हो..? आप दोनो सुबह साथमे वहा थे..? भाइ.. फोन जरा भाभीको देनां..

लखन : (मुस्कुराते फोन देते) भाभी.. लीजीये.. दीदीसे बात कीजीये..
सृती : (हसते फोन लेते) हां दीदी.. कहीये.. दोनो भाइ बहेनके बीच होगइ बात..? देखो.. मेने अपना वादा पुरा कीया हे.. कहेते थे मेने दीदीसे बात करली.. लेकीन फीर भी मेने कहा.. की मेरे सामने बात करलो.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. थेन्क्यु.. थेन्क्यु सो मच.. आज मे बहुत खुस हु.. भाइसे आज दो बार बात भी होगइ.. ओर उनके मुहसे इतनी बडी खुस खबर भी मील गइ.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. सुनीये.. अभी हमारे देवर केह रहेथे.. आपका धिरेनके साथ कुछ जगडा बगडा हो गया हे.. कही कुछ ज्यादा बबाल तो नही हुआ..?
पुनम : भाभी.. मेने भाइको क्लीप भेजी हे.. आप सुन लेना.. भाभी.. सीर्फ आपको बता रही हु.. मे बहुत जल्द वहा आपके पास आ रही हु.. वो भी हमेसाके लीये.. समज गइनां.. अभी भाइको मत बताना.. ओके..
सृती : (खुस होते मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. दीदी.. मे फोन रखती हु.. इस बारेमे हम रातमे फुरसतमे बात करेगे.. अलके..? बाय..
लखन : (फोन कट करते ही) भाभी.. क्या केह रही हे दीदी.. हें..हें..हें..
सृती : (मुस्कुराते) हे अेक सीक्रेट बात.. मे आपको क्यु बताउ..? वैसे भी हम दो लेडीजकी बाते हे.. हो सकता हे आपके लीये कुछ सरप्राइज हो.. हें..हें..हें..
लखन : (जुठा गुस्सा करते) ठीक हे.. मे भी देख लुगा तुम दोनोको..
सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां देखलेना.. हम भी देखती हे आप क्या करते हे.. हें..हें..हें.. वैसे हमारी देवरानीके पास जा रहे हो.. तो आपकी सांसको छुटी मील जाये तो दोनोको घरपे लेआना.. वरना बेचारी अपने घरपे अकेली क्या करेगी..
लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. थेन्क्स..
इतनेमे कोफी आगइ.. तो दोनो कोफी पीने लगे.. फीर सृतीने लखनको दो घंटेके बाद उसे आकर लेजानेको कहा.. तो लखन कोफी पीकर वहासे चला गया.. ओर घरसे टीफीन लेकर होस्पीटलपे चला गया.. तो वहा डोक्टरने राधीकाकी मम्मीको छुटी देदी थी.. ओर राधीका अपनी मम्मीको घर लेजानेकी तैयारीया कर रही थी.. तभी लखन वहा पहोंच गया.. ओर दोनोने घर जाकर खानेको कहा..
अध्याय - २२३
लखनकी बातसे सृती थोडी नीरास होगइ.. क्युकी कल रात रमाकी चुदाइकी वजहसे वो काफी गरम होगइ थी.. इसीलीये आज उनकी क्लीनीकपे कोइ पेसन्ट नही होता तो वो आज लखनके लंडको देखना चाहती थी.. ताकी लखन उनके साथ थोडा आगे बढ सके.. क्युकी अब सृती लखनके साथ आगे बढकर वो सबकुछ करना चाहती थी.. लेकीन वो पहेल करनेसे डरती थी.. इसके लीये इस मामलेमे वो खुद लखनको आगे बढनेका मौका देना चाहती थी.. ओर कुछ देरेके बाद दोनो क्लीनीकपे पहोंच गये.... अब आगे
सृती : (कारसे उतरते) आइअे देवरजी.. आप कोफी पीकर चले जाना.. तबतक पुनोदीदीसे बात भी होजायेगी.. चलीये..
कहा तो लखन सृतीके साथ क्लीनीकपे चला गया.. अंदर जाकर देखा तो तीन चार पेसन्ट बैठे थे.. तो सृतीने थोडी देरके बाद अेक अेकको अंदर आनेकी सुचना देकर अपनी ओफीसमे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते इन्टरकोमसे दो कोफीका बोल दीया.. ओर वो अपनी चेरपे जाकर बैठ गइ.. ओर लखनको भी सामने बैठनेको कहा.. ओर सृतीने अपना मोबाइल नीकालकर पुनमको फोन लगा दीया..
सृती : (सामने फोन उठाते ही) हेलो.. कौन..? पुनम दीदी..
पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मे पुनम बोल रही हु.. लखन भैयासे अेक घंटे पहेले ही मेरी बात हुइ.. क्या मेरे बारेमे आपसे कोइ बात हुइ..?
सृती : (मुस्कुराते) हां दीदी.. तभी तो आपको फोन कीया.. अभी वो मेरे सामने ही बैठे हे.. लीजीये बात कीजीये इनसे..
इस वक्त दया ओर पुनम कीचनमे खाना बना रही थी.. जैसे ही सृतीका फोन आया वो फोन लेकर बहार होलमे सोफेपे जाकर बैठ गइ.. ओर फोन उठालीया.. जैसे ही सृतीने कहा लखनसे बात कीजीये.. तब अेक पाल तो पुनमके दिलकी कडकन धडकना चुक गइ.. ओर उनकी आंखोसे फीरसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. सृती लखनको फोन देते उनके सामने ही देखती रही.. तभी..
लखन : (भारी आवाजमे आंख गीली करते) हेलो.. दीदी.. क्या हुआ..?
पुनम : (जोरसे रोते) भैया.. आइ अेम सोरी.. आइ अेम सोरी.. मुजे बस.. अेक बार माफ करदो..

लखन : (आंसु बहाते) हेय हेय.. दीदी रोइअे मत.. आपको मेरी कसम.. आप आप अेक बारतो माफी मांग चुकी हो..ओर गलती मेरी भी थी.. माफी तो मुजे मांगनी चाहीये आपसे.. आप मुजे माफ करदो.. सोरी दीदी.. प्लीज.. रोना बंध करो.. अगर वो कमीना अब तंग करेतो मुजे कोल करदेना..
पुनम : (जटसे अपने आंसु पोछते) भाइ.. कसम मत दो.. मे नही रोती.. बस..? भाइ.. क्या अेक बार भी इस बहेनकी याद नही आइ.. आप बहुत बुरे हो.. कीतना रुलाया हे आपने मुजे.. हें..हें..हें..
लखन : (आंसु बहाते भी मुस्कुराते) दीदी.. आइ अेम सोरी.. प्ली..ज.. अेक बार अपने लखन भैयाको माफ करदो.. आइ प्रोमीस.. अब अैसी गलती दुबारा कभी नही होगी..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आप गलतीकी बात मत करो.. आपकी कोइ गलती नही थी.. अब भुल जाओ सब.. आइ मीस यु.. मुजे आपकी बहुत जरुरत हे..
लखन : (आंसु पोछते) दीदी.. जानता हु मे.. आपकी पल पलकी खबर मीलती हे मुजे.. इसीलीये सुबह आपको फोन करदीया.. मे तो हमेसा आपके साथ ही हु.. बस.. जो होना था हो गया.. भुल जाइअे सब.. आप अेक आवाज करो.. मे हाजर होजाउगा.. दीदी.. आपकी बहुत याद आ रही हे.. क्या धिरेनने आपके उपर हाथ तो नही उठायानां..?
पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. उनमे इतनी हिंमत नही हे.. ओर आपकी बहेन भी इतनी कमजोर नही हे.. भाइ.. मे इस आदमीके साथ रहेना नही चाहती.. भाइ आपने देखीनां उनकी करतुत..? भाइ.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बताना हे..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. आपके भाइके घरका दरवाजा हमेसा खुला ही हे.. आपको कुछ अैसा लगे.. तो आप यहा चली आना.. वरना मुजे कोल करना मे आपको लेजाउगा..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. कहीये दीदी..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. क्या अब भाभी नही कहोगे..? हंम..?
लखन : (मुस्कुराते) नही दीदी.. भाभी तो बहुत चाटा मारती हे.. मेरी दीदी बहुत अच्छी हे.. अभी यहा दुसरी भाभीके साथ बैठा हु.. देखता हु वो क्या करती हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. आइ अेम सोरी.. आइ प्रोमीस.. अब अैसी गलती दुबारा कभी होगी.. भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे अपने भाइसे बहुत चाहती हु..
लखन : (आंख गीली करते) हंम.. लव यु टु दीदी.. आपका ये भाइ भी आपको बहुत चाहता हे.. दीदी.. सुनो.. अेक बहुत बडी खुस खबरी सुनाता हु.. अभी अभी मे ओर भाभी उनकी फ्रेन्डकी क्लीनीकसे आ रहे हे.. दीदी.. आप बुआ.. ओर मे चाचा बनने वाला हु.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते खुसीसे हसते) व्होट..? भाइ.. सच केह रहे हो..? आप दोनो सुबह साथमे वहा थे..? भाइ.. फोन जरा भाभीको देनां..

लखन : (मुस्कुराते फोन देते) भाभी.. लीजीये.. दीदीसे बात कीजीये..
सृती : (हसते फोन लेते) हां दीदी.. कहीये.. दोनो भाइ बहेनके बीच होगइ बात..? देखो.. मेने अपना वादा पुरा कीया हे.. कहेते थे मेने दीदीसे बात करली.. लेकीन फीर भी मेने कहा.. की मेरे सामने बात करलो.. हें..हें..हें..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. थेन्क्यु.. थेन्क्यु सो मच.. आज मे बहुत खुस हु.. भाइसे आज दो बार बात भी होगइ.. ओर उनके मुहसे इतनी बडी खुस खबर भी मील गइ.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. सुनीये.. अभी हमारे देवर केह रहेथे.. आपका धिरेनके साथ कुछ जगडा बगडा हो गया हे.. कही कुछ ज्यादा बबाल तो नही हुआ..?
पुनम : भाभी.. मेने भाइको क्लीप भेजी हे.. आप सुन लेना.. भाभी.. सीर्फ आपको बता रही हु.. मे बहुत जल्द वहा आपके पास आ रही हु.. वो भी हमेसाके लीये.. समज गइनां.. अभी भाइको मत बताना.. ओके..
सृती : (खुस होते मुस्कुराते) हंम.. ठीक हे.. दीदी.. मे फोन रखती हु.. इस बारेमे हम रातमे फुरसतमे बात करेगे.. अलके..? बाय..
लखन : (फोन कट करते ही) भाभी.. क्या केह रही हे दीदी.. हें..हें..हें..
सृती : (मुस्कुराते) हे अेक सीक्रेट बात.. मे आपको क्यु बताउ..? वैसे भी हम दो लेडीजकी बाते हे.. हो सकता हे आपके लीये कुछ सरप्राइज हो.. हें..हें..हें..
लखन : (जुठा गुस्सा करते) ठीक हे.. मे भी देख लुगा तुम दोनोको..
सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां देखलेना.. हम भी देखती हे आप क्या करते हे.. हें..हें..हें.. वैसे हमारी देवरानीके पास जा रहे हो.. तो आपकी सांसको छुटी मील जाये तो दोनोको घरपे लेआना.. वरना बेचारी अपने घरपे अकेली क्या करेगी..
लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. थेन्क्स..
इतनेमे कोफी आगइ.. तो दोनो कोफी पीने लगे.. फीर सृतीने लखनको दो घंटेके बाद उसे आकर लेजानेको कहा.. तो लखन कोफी पीकर वहासे चला गया.. ओर घरसे टीफीन लेकर होस्पीटलपे चला गया.. तो वहा डोक्टरने राधीकाकी मम्मीको छुटी देदी थी.. ओर राधीका अपनी मम्मीको घर लेजानेकी तैयारीया कर रही थी.. तभी लखन वहा पहोंच गया.. ओर दोनोने घर जाकर खानेको कहा..













