Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 66 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२२

तो नीचेकी ओर नीलु रातमे जागनेकी वजहसे अभी भी सो रही थी.. तो रमाकी हालत अबभी बहुत खराब थी.. रातमे बडी मुस्कीलसे अपना नाइट ड्रेस पहेना था.. जो अभी वोभी घोडे बेचकर गहेरी नींद सो रही थी.. कुछ देरके बाद लता ओर सृती कंपलीट होकर नीचे आगइ.. तो रजीया घरका काम कर रही थी.. तो सृतीने लताको रमाके रुमकी ओर नैन नचाते इसारा कीया.. तो लता हसते हुअ‍े रमाके रुममे चली गइ.. तभी....अब आगे

लता : (अंदर जाते रमाको जगाते) भाभी.. चलो सुबह होगइ हे.. जागना नही हे क्या..? अभी तक सोइ हे.. कुछ तबीयत बबीयत तो ठीक हेनां..?

रमा : (हडहबाते जागते) अरे दीदी आप..? क्या हेनां.. कभी अ‍ेक साथ इतना काम कीया नहीनां.. तो आज सरीर बहुत दर्द कर रहा हे.. मेरी तबीयत कुछ ठीक नही लगती..

लता : (सरपे हाथ रखते) अरे भाभी.. आपकोतो बहुत बुखार हे.. अभी ठहेरो सृतीभाभीको बुलाती हु..

रमा : (सर्मसार होते जटसे) अरे दीदी रहेने दीजीये.. मामुली बुखार होगा.. क्या हेनां.. हमने दो तीन दिन सब काम कीयाना.. तो लगता हे थकानकी वजहसे बुखार आगया होगा..

लता : (बहारकी ओर जोरोसे आवाज लगाते) सृतीभाभी.. जरा यहा भाभीके रुममे आइये तो.. देखीये इसे क्या हुआ.. (रमाकी ओर देखते) भाभी.. अभी भाभी आपको देख लेगी.. ओर दवाइ दे देगी.. आप आराम कीजीये..

सृती : (हाथ पोछते अंदर आते) हां लता.. क्या हुआ भाभीको..? कुछ हुआ हे क्या..?

लता : (सृतीकी ओर छुपकेसे आंख मारते) भाभी.. जरा रमा भाभीको देखीयेतो.. इनको बुखार आगया हे.. सायद कामकी वजहसे आया होगा..

सृती : (सरपे ओर सीनेपे चेक करते) हां भाभी.. मामुली बुखार हे.. दो दिन आराम करलो.. सब ठीक होजायेगा.. मे अभी दवाइ देती हु.. आप नास्ता करके खालेना..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. आज आप यही आराम करो.. मे चाइ नास्ता इधर ही लाती हु.. ओके..?

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी..

लता : (मुस्कुराते) चलो भाभी.. आजतो आपको भी क्लीनीकपे जानेमे देर होगइ.. आप चाइ नास्ता करलो.. मे नीलुको जगाती हु.. ये लडकी भीना.. देर रात तक पढती रहेती हे..

रमा : (लता सृतीके जाते ही मनमे) दीदी.. अब आपको क्या बताउ.. की बुखार कीस वजहसे आया हे.. आपके पतीने रात भर चोद चोदके मेरी हालत खराब करदी.. पता नही था.. की इनमे इतना जोस ओर स्टेमीना हे.. कोइ इतनी देर तक चोदता हे क्या..? पुरी रात मुजे रगड रगडके चोदते रहे.. ओर चोदते भी कीतनी बेहरेमीसे.. कलतो मेरे पीछेका भी उद्घाटन कर दीया.. मेरे कीसी छेदको नही छोडा.. अभी भी दोनो छेद मे दर्द हो रहा हे.. घरपे जाकर भी भानुसे चुदवाना पडेगा.. वरना मे कही प्रेगनेन्ट होगइ तो उनको क्या जवाब दुगी..?

यही सब सोचते रमा.. लेटी रही.. तब कुछ ही देरमे सृतीने बुखारकी ओर पेइन कीलरकी टेबलेट देदी.. तो लता नास्तेके साथ लेकर आइ ओर रमा भाभीको देदी.. तभी नीलमभी कंपलीट होकर बहार आगइ.. तो उसे भी पता चला उनकी मम्मीकी तबीयत ठीक नही हे.. तो वो भी अपनी मम्मीको देखने उनके रुममे आगइ.. तब रमा उनसे नजरे चुराने लगी.. क्युकी वो अपनी बेटीसे पहेले लखनसे चुद गइ थी..

नीलम : (पास बैठते सरको चेक करते) मम्मी.. क्या हुआ..? आपको तो बहुत तेज बुखार हे..

रमा : (जुठ बोलते) बेटी.. मेने कल रातही कहा था.. की मेरी तबीयत कुछ ठीक नही हे.. बस..काम करनेकी वजहसे मामुली बुखार हे.. अ‍ेक दो दिनमे ठीक होजाउगी.. सृतीदीदीने दवाइ दी हे.. तु चीन्ता मत कर..

नीलम : (मनमे) चुदकड कहीकी.. कीतना जुठ बोलती हे.. मुजसे वादा कीया था.. की मुजसे कोइ बात नही छीपायेगी.. ओर हर बात मुजसे सेर करेगी.. रात भर जीजुसे उछल उछलके चुदवाती रही.. ये क्यु नही कहेती लखन जीजुसे चुदवाकर हालत खराब करवाली हे.. कमीनी.. मुजे धोखा दे रही हे.. अब तो मे भी पीछे नही हटुगी.. बस.. अ‍ेक बार तुम यहासे चली तो जाओ.. फीर देखना हर रात जीजुसे कैसे चुदवाती हु..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. क्या सोच रही हे..? कहाना चीन्ता मत कर.. कल तक मे ठीक होजाउगी.. जा चाइ नास्ता करले.. फीर स्कुल भी तो जाना हे.. तेरे लखन जीजु तुजे छोड देगे.. जा..

नीलम : (खडी होकर बहार जाते) ठीक हे मम्मी.. आप आराम करो..

फीर लखनभी कंपलीट होकर नीचे आजाता हे.. ओर सबलोग चाइ नास्ता करने लगे.. तब नीलम नजरे चुराते लखनकी ओर देखती.. दोनोकी नजर मीलती तो सरमाकर मुस्कुराने लगती.. तो सृती भी लखनकी ओर कातील नजरोसे देखती रही.. अब सृतीको भी लखनके लंडको देखनेकी इच्छा बहुत तीर्व होगइ थी.. ओर उसने हिंमत करते अपना पैर लखनके पैरपे रख दीया.. ओर धीरेसे सहेलाने लगी..

तो लखनने तीरछी नजरसे नीचेकी ओर देखा तो पैर सृतीका था.. तो लखन उनकी ओर देखते हसने लगा.. तो सृती नास्ता खा रही थी.. जैसे उनको कुछ मालुम ही नही.. तब उसने नजर चुराते लखनकी ओर देखा.. तो लखन उनकी ओर देखते मुस्कुरा रहा था.. तो सृती सर्मसार होगइ.. ओर नजरे चुराते मुस्कराने लगी.. तभी लखनने भी हिमत करते उनके पैरको सहेलाया.. तो सृती ने फौरन अपने पैर वापस खीचलीये..
 
लता : (मुस्कुुराते) भाभी.. आपको दीखाने जाना हे.. तो अपने देवरको साथ लेजाइअ‍ेनां.. वरना मे साथ चलती हु..

सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे नही नही.. उसे नीलुको छोडने जाना हे.. मे दिखाकर क्लीनीकपे चली जाउगींनां.. कीसीको साथ आनेकी जरुरत नही.. तुम क्यु टेन्शन ले रही हो..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कल लताने मुजे बताया.. चलो आपको होस्पीटल छोडके नीलुको स्कुल छोड दुगा.. फीर आपके पास वापस आजाउगा.. तबतक आपका सब टेस्ट भी होजायेगा.. आज कोइ खास काम भी नही हे.. सायद आंटीको होस्पीटलसे छुटी मील जायेगी.. भाभी.. सबसे पहेले मे खुस खबर सुनना चाहता हु.. आखीर बच्चेका चाचा जो हु.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमसे पानीपानी होते) लखन.. आप भीनां.. ठीक हे.. चलीये..

फीर सृती सरमाकर उपर चली गइ.. ओर अपनी डोक्टर फ्रेन्डको कोल करदीया.. तो उनका मोबाइल स्वीच ओफ आ रहा था.. तो सृतीने उनकी क्लीनीकके लेन्डलाइनपे फोन लगा दीया.. ओर उनकी रीसेपनीस्टसे बात करली.. तो पता चला उनकी फ्रेन्ड अभी क्लीनीक पर ही हे.. तबतक नीलुभी तैयार हो चुकी थी.. ओर सृती भी कंपलीट होकर नीचे आगइ.. फीर तीनो सृतीकी कारमे साथ चले गये..

तो इसी दौरान हवेलीपे भी मंजुने आश्रमपे बाबासे देवायत ओर दयाकी सादीकी बात करली.. तो बाबाने मंजुको दो दिनके बाद आनेको कहा.. फीर बाबासे बात करलेनेके बाद मंजुने पुनमसे बात करली.. तो पुनमने मंजुको धिरेनके साथ जगडेकी सारी बात बतादी.. तबतक देवायत खेतोपे चला गया था.. भावना आजभी थोडा लंगडाते चल रहीथी.. क्युकी अभी अभी बाथरुममे देवायतने उसे जमकर चोदलीया था..

तो आज धिरेनके साथ जगडा होनेसे पुनम थोडी अपसेट होगइ थी.. इसी दौरान मंजुका कोल भी आया तो मंजुसे बात करनेके बाद पुनमको थोडी राह महेसुस हुइ.. आज उनको लखनकी बहुत याद आ रही थी.. अभी उसे लखनके मददकी सख्त जरुरत थी.. काम खतम होते ही पुनम ओर दया अपने रुममे बैठी बाते कर रही थी.. तब बातोही बातोमे दयाने लखनसे बात ना हो सके तो उसे जगडेकी क्लीप भेजनेको कहा..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर लखन भैया आपसे बात नही करते तो मेरे खयालसे आपको ये दोनो क्लीप उनको भेज देनी चाहीये.. हो सकता हे ये क्लीप देखकर आपसे बात करले..

पुनम : (आंखोमे चमक लाते मुस्कुराते) हां दया बहेन.. आपने क्या मस्त आइडीया दिया हे.. मे अभी भैयाको दोनो क्लीप सेन्ड कर देती हु.. देखना ये क्लीप देखते ही मेरा लखन मुजे जरुर कोल करेगा..

दया : (मुस्कुराते चुटकी लेते) दीदी.. मेरा लखन..? हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) हां दया बहेन.. मेरा लखन.. मेरी जान.. मेरा सबकुछ.. दया बहेन.. अब मुजे कीसीकी परवाह नही.. देखना वो मुजसे जरुर बात करेगे..

दया : (सरमाते हसते) दीदी.. लगता हे आप लखन भैयाको प्यार करने लगी हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते मुस्कुराते) हां दया बहेन.. सायद आपकी बात सच हे.. मुजे लखन भैयासे प्यार होगया हे.. जबसे हम दोनोके बीच अनबन हुइ हे.. तबसे मुजे सीर्फ इन्हीके खयाल आते हे.. दया बहेन.. मे उनसे बात करनेके लीये तडप रही हु.. मेने उनको पुरी तराह समर्पीत होनेकी ठानली हे.. सायद इसीसे प्यार कहेते हे.. इतनी तो मे बडे भाइके लीये भी नही तडपी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या आप बडे भाइको भी अ‍ैसे ही प्यार करती थी..

पुनम : (सरमाते हसते) हां दीदी.. लेकीन पता नही.. तब मे स्कुल मे पढती थी.. टीन अ‍ेजर थी.. तो स्वाभावीक हे.. हम मर्दोकी ओर आकर्सीत होती हे.. ओर उपरसे बाबाने अ‍ेक मक्सदके लीये जब कहा की तुम तेरे बडेभाइसे सादी करलो.. तो मुजे लगता हे.. वो बडे भैयाकी ओर सीर्फ अ‍ेक महज वीपरीत लींगका आकर्सण ही था.. मुजे मर्दकी ओर खीच रहा था.. ओर मेने भाइसे प्यारका इजहार करके सादी करली.. सायद ये सब मेरे बच्चेके लीये था.. ओर कुछ नही..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. लेकन लखन भैया तो तब भी आपको प्यार करते थे..

पुनम : (आंख गीली करते) हां दया बहेन.. मे उनके दिलकी फीलींग्सको पहेचान चुकी थी.. लेकीन तब मेरे मनमे सीर्फ बडे भैयाके ख्याल ही आते थे.. सायद मे लखन भैयाके सचे प्यारको पहेचान ना सकी.. कास मेने तब ही लखन भैयाके प्यारको कबुल करलीया होता.. तो आज ये दिन देखना नही पडता.. लेकीन अब नही.. मे अब मेरे लखन भैयाके प्यारको पाकर ही रहुगी.. लव यु भैया..

दोनो प्यारकी बाते करती रही.. इसी बीच पुनमने लखनको दोनो क्लीप भेजदी.. तो इधर सहेरमे लखन कार चलाते सृती ओर नीलमको लेकर जा रहा था.. तब सृती बार बार लखनकी ओर देखते सरमाते मुस्कुरा रही थी.. फीर तीनो सृतीकी फ्रेन्डकी क्लीनीकपे पहोंच गये.. वहा लखनने सृतीको ड्रोप करते अभी नीलमको छोडके आता हु.. कहेकर नीलमको उनकी स्कुलपे छोडने जाने लगा.. तब नीलम लखनकी ओर देखते बहुत ही सरमा रही थी.. तभी..

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) नीलु.. अ‍ेक दो दिनके बाद हमे गांव जाना होगा.. वो श्रीधरकी सादीमे.. क्या तुम वहा आना चाहोगी..? की यही रहेकर धिरेनके साथ मजे करने हे.. हें..हें..हें.. तब तेरी मम्मी भी हमारे साथ चली आयेगी.. ओर वहीसे अपने घर चली जायेगी.. क्या कहेती हो..?

नीलम : (सर्मसार होते नजर जुकाते) जीजु.. जैसा आपको ठीक लगे.. आप कहोतो मे सादीमे आपके साथ आनेके लीये तैयार हु.. वरना यही रहुगी..

लखन : (सामने देखते) ठीक हे नीलु.. तुम सादीमे जरुरत आना.. फीर मेरे साथ ही वापस चली आना.. जब हम वापस आयेगे तब तेरी सादीके बारेमे कुछ सोचते हे.. ओर ये बात कीसीको मत कहेना.. समजी..? बस.. तुम पढाइमे ध्यान देना.. मे तेरी सादी धिरेनसे करवा दुगा..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. लेकीन पुनम दीदी..? क्युकी धिरेन सादीके बाद मुजे अपने घरपे लेजानेका फोर्स करेगा.. तो मेरी पढाइ डीस्टर्ब होजायेगी.. आप समज गयेनां..

लखन : (सामने देखते) तुम पुनम दीदीकी चीन्ता छोडो.. वो सब मे सम्हाल लुगा.. लेकीन पहेले ये बता तुम क्या चाहती हो..? धिरेनके साथ रहेना हे..? क्युकी फीर वो तेरा पती होजायेगा..

नीलम : (सरमाते जटसे) अरे नही नही.. जीजु.. भलेही मे उनसे सादी करलु.. फीर मे पढ नही पाउगी.. मुजे अभी अपनी पढाइ तक आपके साथ रहेना हे.. ओर अभी आपके साथ सादीमे नही गइ तो वो मुजे यहा पढने थोडीना देगा..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. गुड गर्ल.. ठीक हे.. सादीके बाद यही रहेकर पढना.. धिरेन अपने घर रहेनेको कहे तो मना कर देना.. कहेना अभी घर वालाको हमारी सादीके बारेमे पता नही हे.. अगर उनको चला तो मेरी पढाइ भी रुकवा देगे.. ओर हमारी सादी भी तोड देगे.. तो धिरेन मान जायेगा.. तुजे मेरी सर्तके बारेमे तो पता हेनां..?
 
नीलम : (सरमसे पानी पानी होते) जी.. जीजु.. अब छोडीये सर्त बर्त.. मे आपको धोखा नही दुगी.. मुजपे विस्वास कीजीये.. इसीलीये तो मे आपके साथ गांव आ रही हु.. लेकीन जो भी करना हे मम्मीके जानेके बाद.. फीर आप जब चाहो.. हम मील लेगे.. ओर वैसे भी मे आपकी साली हु.. ओर सालीका मतलब भी आप जानते हे.. आप इतने नासमजतो नही हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते हसते) हंम.. काफी साजदार होगइ हो.. नीलु.. अ‍ेक बात पुछु..? सच बताना.. तुम तो धिरेनको प्यार करती होनां..? तो फीर इतनी आसानीसे मेरे साथ रीलेशन रखने राजी क्यु होगइ..? कोइ खास वजह..? क्युकी तुम मेरे साथ गांव आनेके लीये मना भी कर सकती थी.. ताकी यहा धिरेन तुजे आसानीसे मील सके.. तो फीर धिरेनको छोडके मुजे क्यु चुना..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. वो.. वो.. जीजु.. मत पुछो.. मुजे बहुत सरम आ रही हे..

लखन : (मुस्कुराते) अरे बताना.. इसमे सरमाना क्या..? नीलु.. मे तुजे सीर्फ अपनी साली नही.. अपना दोस्त भी मानता हु.. तो अब हमारे बीच कैसा पर्दा..? बतानां..

नीलम : (सर्मसार होते नजरे जुकाते) थेन्कस जीजु.. वो.. पहेली बात.. मे धिरेनसे ज्यादा आपको पसंद करती हु.. दुसरी बात.. जबसे मेने आपका वो देखा हे.. फीर चाहे आपने वो भले ही जबरदस्तीसे दिखाया.. जो मुजे बहुत पसंद आगया.. जीजु.. हम लडकीयोकी अ‍ेक चाहत होती हे.. वो बडे.. आइ मीन.. मतलब बडा पेनीस.. आप समज गयेनां..?

लखन : (हसते) हंम.. समज गया.. तो क्या धिरेनके पास इतना बडा नही हे..?

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) नही.. जीजु प्लीज.. कीसीको कहीयेगा नही.. धिरेनका इतना बडा नही हे जीतना आपका हे.. जीजु.. आपको तो पता हे.. मेने उनके साथ सेक्स भी कीया हे.. वो बहुत जल्द खलास होजाते हे.. (नजरे जुकाते धीरेसे) ओर आप लंबी रेसके घोडे हो.. मे तो आपकी दिवानी होगइ..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) नीलु.. क्या बोल रही हे तु..? तुजे कैसे पता मे लंबी रेका घोडा हु.. क्या तुमने मुजे कभी कीसीके साथ सेक्स करते देखा हे..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे हां मे गरदन हीलाते) हां जीजु.. सोरी.. वो.. कल रात.. मम्मीके साथ.. कल मम्मी बहुत चीला रही थी.. तो मे आवाज सुनकर देखने आगइ.. मेने की होलसे आप दोनोको सेक्स करते देख लीया.. जीनकी वजहसे आज उनकी तबीयत भी खराब होगइ हे.. जीजु.. क्या आप दोनो प्यार करते हे..?

लखन : (आस्चर्यसे देखते) नीलु.. पहेले ये बता.. तो फीर हमे देखकर तुजे बुरा नही लगा..? हंम..?

नीलम : (सामने देखकर सरमाते) नही.. जीजु.. मे ओर मम्मी अब अ‍ेक दुसरेकी सहेली जैसी हे.. तो हर बात अ‍ेक दुसरेके साथ सेर करती हे.. ओर मम्मीने ये बात मुजसे छुपाइ.. इसीलीये पुछ रही हु.. की मम्मी आपको प्यार करती हेकी नही..? वैसे भी आज कल मम्मीको पापासे वो प्यार नही मील रहा जो वो चाहती हे.. जीजु.. मुजे आप दोनोके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस.. मुजे सीर्फ सचाइ जाननी हे.. आप सीर्फ ये देखना इस बारेमे कीसीको पता ना चले.. वरना मेरी मम्मीका घर बरबाद होजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. तुम तेरी मम्मीकी फीकर मत करना.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको चाहते हे.. कल हम दोनो पहेली बार मीले.. अब तुम दोनोकी जीम्वेवारी मेरी हे.. नीलु.. तुम कीतनी समजदार हो.. की अपनी मम्मीकी सब तकलीफके बारेमे जानती हो..

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. मेरी मम्मी बहुत कामी ओरत हे.. ओर आज कल पापा ओर उनके बीच कुछ अच्छे रीलेशन भी नही हे.. तो वो कहा जायेगी..? ओर आपसे प्यार कर बैठी.. जीजु.. आप मम्मीको सम्हाल लेना.. वरना वो कही ओर भटक जायेगी.. तो हमारी बदनामी होगी.. इनसे तो अच्छा हे.. आप ही मम्मीको सम्हाल लो.. वो दिलकी बुरी भी नही हे.. बस.. मेरी तराह उसे अ‍ैसो आरामकी जींदगी चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. आज कल कीस लडकी ओर कीस ओरतको अ‍ैसो आरामकी जींदगी नही चाहीये.. सबको चाहीये.. जो तेरे घरकी बात तुजे मुजसे छुपानी थी वो बात तुम मुजे बता रही हो.. नीलु.. आज तुमने मेरा दिल जीत लीया.. पता नही तुम इस धिरेनके चुंगलमे कैसे फस गइ.. क्या तुजे अ‍ेक बात पुछ सकता हु..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जीजु.. हम जीजा सालीके रीस्तोसे कही आगे बढ चुके हे.. तो क्या आपको लगता हे..? की मुजे पुछनेके लीये आपको परीमशनकी जरुरत हे..? पुछीये.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. नीलु.. तुजे तो सब पता हे.. की हमारे खानदानमे कीतनी भी सादीया करलो.. कोइ पुछने वाला नही.. तो फीर तुम करलेती मुजसे सादी.. इसके लीये तुमने धिरेनको क्यु पसंद कीया..? क्या वो तुजे संतुस्ट कर पाता हे..?

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) पता नही जीजु.. जब हम खरीदारी करने गये.. तब मे धिरेनकी ओर कैसे आकर्सीत होगइ.. सायद तब मे ना समज थी.. ओर मेरे लीये भी ये पहेला अनुभव था.. उसने मुजे महेंगी महेंगी गीफ्ट दीलवाइ.. मेने सोचा धिरेन बेन्कमे जोब करते हे.. तो मुजे मेरी स्टेबल लाइफ देगे.. रही बात संतुस्टकी.. तो मुजे उनके साथ हम बीस्तर होनेसे पहेले कैसे पता चलेगा..? की धिरेन मुजे संतुस्ट कर पाता हेकी नही..

लखन : (मुस्कुराते) अब तो तुम कइ बार उनके साथ हम बीस्तर हो चुकी हो.. अब तो पता चल गयानां..? हें..हें..हें.. तो बता.. क्या रीज्लट आया.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमसे पानी पानी होते मुस्कुराते) जीजु.. आप बहुत नोटी हो.. आप तो सबकुछ पुछ लेते हो.. मुजे सरम आ रही हे..

लखन : (हसते) अरे बताना.. अब तो हम दोस्त भी हे.. ओर दोस्तोके बीच अ‍ैस्ी बात होना आम बात हे.. तो मुजसे क्या सरमाना.. मे कीसीको थोडीना कुछ कहुगा.. बता.. हां.. लेकीन सच बताना.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते नजरसे चुराते) जीजु.. सच कहु..? नही करपाता.. लेकन वो मुजे संतुस्ट कर पाये या ना कर पाये.. अब इनसे मुजे कोइ फर्क नही पडने वाला नही हे.. इसीलीये तो मेने आपकी सर्त मानते आपके साथ रीलेशन रखनेके लीये राजी होगइ हु.. जीजु.. मुजे आपसे वो प्यार चाहीये.. जो मुजे धिरेन नही दे सकता.. इसीलीये हम मा बेटीने आपके साथ रीलेशन रखनेका फैसला करलीया हे..
 
लखन : (आस्चर्यसे देखते) हम मां बेटीने..? मतलब..? मे कुछ समजा नही.. क्या मुजे बता सकती हो..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) हां जीजु.. मे ओर मम्मी.. अब सीर्फ मां बेटी नही हे.. दोनो अ‍ेक पकी सहेली भी होगइ हे.. जो हर बात हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे सेर करते हे.. मुजे आसंकाये तो थी.. लेकीन इस बात उसने मुजसे छीपाइ.. की वो आपसे प्यार करती हे.. जीजु.. प्लीज.. ये बात कीसीको कहीयेगा नही.. मम्मीको भी नही.. समज गयेनां..? मे आपको अभी कुछ नही बता सकती.. समय आनेपे आपको सबकुछ बता दुगी.. अभी मुजे सीर्फ इतना पता हे.. की मेने आपकी सर्त मानने मे कोइ गलती नही की..

लखन : (हसते) हंम.. थेन्क्स.. मतलब तुम मां बेटी सचमे सहेलीया हो गइ हो.. हें..हें..हें.. जो इस तराहकी सभी बाते सेर करती हो.. ठीक हे.. मे तुम दोनोका खयाल रखुगा.. क्या तेरी मम्मीको भी पता हे तेरा रीलेशन धिरेनके साथ हे..?

नीलम : (थोडा डरते जटसे) अरे नही नही.. जीजु.. प्लीज.. इनको इस बारेमे कुछ मत कहेना.. इस बारेमे मेने मम्मीको कुछ नही बताया.. उसे पता चला तो वो मेरी पढाइ रुकवा देगी.. ओर धिरेनसे सादी भी नही होगी.. जीजु.. स्कुल आ गया हे.. ये बात मे आपको बादमे बतादुगी.. प्ली..ज..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. तु फीकर मत कर.. इस बातका तेरी मम्मीको कभी पता नही चलेगा.. आइ प्रोमीस..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. थेन्क्स.. वो.. वो.. मम्मी केह रही थी.. मेरे कुछ कपडे लेने हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. हम दो दिनमे घर जा रहे हे.. तो इनसे पहेले कपडे लेलेगे.. मुजे तेरी मम्मीके लीये भी सोपींग करनी हे.. तो हम तीनो कल लेने जायेगे.. तुजे जो भी लेना हो ले लेना..

नीलम : (मनमे खुस होते) जीजु.. थेन्क्स.. बस.. अ‍ैसे ही मेरा खयाल रखीयेगा..

फीर लखन नीलमको स्कुलपे ड्रोप करते उसे अ‍ेक हजार रुपीये हाथ खर्चीका देता हे.. जीसे नीलम बहुत खुस होगइ.. ओर हसते हुअ‍े स्कुलमे चली गइ.. तभी लखनकी मोबाइलमे मेसेजका रींग टोन बजा.. तो लखन देखने लगा.. देखा तो पुनमका मेसेज था.. तो लखन विडीयो क्लीप देखने लगा.. फीर उसने धिरेन ओर पुनमके बीच हुअ‍े जगडेकी क्लीप भी सुनी.. जीसे सुनकर लखन बहुत आग बबुला हो गया..

लखन : (पुनमको फोन लगाते) दीदी..

पुनम : (लखनका फोन देखते ही उठाकर रोते) लखन भैया.. मुजे माफ करदो.. मुजे माफ करो.. आइ अ‍ेम सोरी.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ..

लखन : (जोरसे) बस.. दीदी.. रोइअ‍े मत.. आपको मेरी कसा.. अभी आपका भाइ जीन्दा हे.. आपको कुछ होने नही दुगा.. कहा हे वो कमीना.. कुता..?

पुनम : (आंसु पोछते) भाइ.. वो जगडा करके बेन्कपे चला गया हे.. वो मुजे ओर चंदा भाभीको ना जाने क्या क्या केह रहा था.. आपने सब सुनानां..?

लखन : (सांत लहेजेमे) हां दीदी.. मेने सब सुना.. ओर देखा भी.. बस.. इतना बता दीजीये उसने आपपे हाथ नही उठायानां..?

पुनम : (थोडी सांत होते) नही भाइ.. क्या आपके होते हुअ‍े उनमे इतनी हिंमत हे.. जो आपकी दीदीपे हाथ उठाये..? भाइ.. मे धिरेनके साथ नही रहेना चाहती.. कल मे घर चली जाउगी.. भाइ.. आपने मुजे माफ तो करदीयानां..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मे आपसे नाराज ही कब था..? बस.. आपको अपनी गलतीका अहेसास करवाना चाहता था.. ओर गलती मेरी भी थी.. जो मे अपनी मर्यादा भुल गया था..

पुनम : नही भाइ.. आपने कोइ मर्यादा नही लांधी.. वो हम मीलेगे तब आपको बताउगी..

लखन : दीदी.. आप फीकर मत करो.. हम दोनो बहुत जल्द मीलेगे.. अभी तो भाभीके पास उनकी दोस्तकी क्लीनीकपे जा रहा हु.. फीर आपसे बात करुगा.. ओके.. बाय..? अपना खयाल रखना..

पुनम : (मुस्कुराते) जी भाइ.. बाय..





लखन गुस्सेपे कंट्रोल करते वापस क्लीनीककी ओर चला गया.. तो वहा क्लीनीकपे लखनके जाते ही सृती अंदर चली गइ थी.. तो वहाकी रीसेपनीस्ट उसे पहचान गइ.. ओर सृतीको लेकर अंदर चली गइ.. तब उनकी फ्रेन्ड अ‍ेक पेसन्टको देख रही थी.. तो सृतीको देखते ही उनके गले लग गइ.. फीर सृती सामनेकी चेरपे बैठ गइ.. उनकी दोस्तने वो पेसन्टका काम नीपटा दीया.. ओर सृतीके सामने मुस्कुराते बैठ गइ..

आइअ‍े अ‍ेक ओर केरेक्टरका परीचय करवादु.. ये वोही सृतीकी फ्रेन्ड हे जो सृतीकी मम्मी ओर नीर्मला इसे दिखाने आइ थी.. जो सृतीकी क्लासमेट थी.. नाम हे भावीका बहुत ही सेक्सी.. ओर चुदवानेकी सौकीन.. कोलेजमे कइ लंडोका स्वाद ले चुकी हे.. इनमे प्रोफेसर भी बाकात नही हे.. डलक्टर बननेके बाद अ‍ेक डोक्टरसे सादी करली.. लेकीन दुर्भाग्यसे वो साला गांडु नीकला..

तो भावीकाने उसे डीवोर्स देदीया.. ओर खुदकी क्लीनीक सुरु करदी.. ओर सबसे छुपकर इलीगल अ‍ेबोर्सनका काम करने लगी.. तब अ‍ेक दिन मंत्रीका लडका अपनी गर्लफ्रेन्डको लेकर अ‍ेबोर्सन करवाने आया.. ओर उनका दिल भाभीकाके उपर आ गया.. ओर भावीकाके साथ लाइन मारने लगा.. तो भावीकाको भी पता चलाकी इनका बाप बहुत बडा मंत्री हे.. तो भावीका भी उनको लाइन देने लगी..

क्युकी उसने ये सोचाकी इलीगल काममे वो कभी भी फस सकती हे.. अगर मंत्री उनका ससुर होगा तो वो ये धंधा बीन्दास्त कर सकती हे.. भावीका ओर मंत्रीका बेटा पहेली बार डुटपे कोफी पीने गये.. ओर दुसरी बार अ‍ेक बडी होटेलमे डीनरके लीये गये.. तब मंत्रीके बेटेने होटेलमे अ‍ेक रुम रखा था.. इस बातका भावीकाको भी पता था.. ओर दुसरी मुलाकातमे ही भावीकाने मंत्रीके बेटेको अपने उपर चडा दीया..





वहा दोनोने जमकर चुदाइ की.. तो भावीकाको मंत्रीके बेटेका लंड भी पसंद आ गया.. फीर दोनोने डीनर करलीया तब मंत्रीके बेटेने उनसे सादीकी करनेकी इच्छा जाहीर की.. ओर अ‍ेक ही महीनेमे दोनो सादीके बंधनमे बंध गये.. फीर क्या..? भावीका अब बीन्दास्त अवैध रीस्तोका अ‍ेबोर्सन करती.. ओर रातमे जमकर अपने पतीका बीस्तर गरम करती.. तो ये हे सृतीकी बेस्ट फ्रेन्ड डो. भाजीका..
 
सृती : (हसते) बोल कुती.. कैसा चल रहा हे क्लीनीक.. पहेले दो पेसन्ट बहार हे.. उसे नीपटाले.. फीर हम आरामसे बैठकर बाते करेगे..

भावीका : (हसते) अरे वो कोइ पेसन्ट नही हे.. उपर अ‍ेडमीट हे उनके रीस्तेदार बैठे हे.. बता.. कीतने दिनोके बाद मीली हो.. जबसे तुमने सादी करली तु तो हमे भुल ही गइ.. बता.. क्या कर रहे हे तेरे वो..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) उनका बहुत बडा धानका कारोबार हे.. बहुत सारी खेतीकी जमीन हे.. ओर जो गांवमे रहेते हे वहाके राजा हे.. कभी उनका परीवार यहा राज कीया करते थे.. मतलब वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. ओर मेरी मम्मीके मुह बोले भाइ..

यानीकी मेरे मामाका लडका हे.. हें..हें..हें..

भावीका : (हसते) अरे वाह.. मतलब तुम वहाकी रानी साहीबा होगइ हो.. हें..हें..हें.. बोल क्या पीओगी..? कोफी चलेगी..?

सृती : (हसते) हां मंगवाले.. बहुत दिन होगये.. हमने साथमे कोफी नही पी.. सुन.. क्या तुमने सादी बादी करली.. की अभीभी कोलेजकी तराह हे.. हें..हें..हें.. कीतने बोय फ्रेन्ड थे तेरे.. हें..हें..हें..

भावीका : (हसते) हां.. मम्मी पापाके कहेनेपे अ‍ेक से सादी करली थी.. डोक्टर था.. कमीना गांडु नीकला.. तो छोड दीया.. तो अभी हाल ही मे दुसरी सादी करली.. मंत्रीका बेटा हे.. बहुत पावर ओर पैसे वाले हे.. अपनी गर्ल फ्रेन्डका अ‍ेबोर्सन करवाने आया था.. तो कमीना मेरे पीछे ही पड गया.. ओर हमने सादी करली.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कमीनी तु नही सुधरेगी.. कोलेजमे भी कीतनेका ले चुकी हे.. दो बार तो तुम अ‍ेबोर्सन भी करवा चुकी हे.. क्या तेरा कभी अ‍ेकसे जी नही भरता..? अब तो सुधरजा.. ओर बंध कर ये इलीगल काम.. कही फस गइ तो लेनेके देने पड जायेगे..

भावीका : (कातील नजरसे हसते) कमीनी.. इसीलीये तो ये मंत्रीके लडकेको फसाया हे.. ताकी कोइ जजंट ही ना हो.. ओर तुजे तो पता हे मुजे अ‍ेक ही सौक हे.. वरना सारी जींदगी अ‍ेक ही लंडसे बोरींग लाइफ होजाती.. साला रातको बीस्तरमे क्या मजा देता हे.. हें..हें..हें.. बाकी लडकोसे थोडा बडा हे.. हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी तु नही सुधरेगी.. हें..हें..हें.. अब सादीकी हे तो अ‍ेक हीसे काम चलाना.. हें..हें..हें.. सुन.. तेरा मोबाइल क्यु स्वीच ओफ आ रहा हे..? बंध हे क्या..?

भावीका : (मुस्कुराते) अरे हां.. उनका डीस्पले खराब हो गया था.. तो चेन्ज करनेके लीये दीया हे.. सामको आजायेगा.. बोल.. नया जाननेको क्या हे..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) बस.. कुछ खास नही.. भावु.. सुन.. वो.. मे प्रेगनन्सी चेक करवाने आइ थी.. सोचा.. तुमसे मीलकर कन्फोर्म करलु.. वैसे तो सब कंन्फोर्म ही हे.. फीर भी..

भावीका : (हसते) अरे वाह.. तो फीर चल पहेले चेक कर लेते हे.. फीर आरामसे बैठकर बाते करते हे..

फीर दोनो अंदर केबीनमे चली गइ.. वहा भावीकाने सृतीको चेक कीया.. ओर कुछ सेम्पल लेकर लेबमे भेज दीया.. फीर दोनो बहार आकर अपनी ओफीसमे बैठ गइ.. तो बातो ही बातोमे भावीकाने सृतीको पुछ लीया.. की तुम कौनसे गांवकी महारानी हो.. तब सृतीने गांका नाम बताया.. तो सुनकर भावीकाको अचानक याद आगया.. की उस दिन जो दो ओरते आइ थी.. वो इसी गांवका नाम ले रही थी..

भावीका : (थोडी सरमाते धीरेसे) सृती.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम बुरा तो नही मानोगी..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे कमीनी पुछना.. फ्रेन्डका कभी बुरा मानते हे क्या..? पुछ..

भावीका : (मुस्कुराते) सृती.. हो सकता हे.. मुजे कोइ गलत फेहमी भी हुइ हो.. सुन.. तुजे याद हे.? जब हम कोलेज मे थी.. तब कभी कभी तेरी मम्मी तुजे मीलने आया करती थी.. तो मेने उनको कइ बार देखा हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां.. तो इसमे इतनी गभरानेकी बात क्या हे..? मम्मी वहा कइ बार आ चुकी हे.. तु भी उनको कइ बार देख चुकी हे.. तो इसका क्या..?

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) सृती.. इनको भी काफी टाइम हो गया हे.. मुजे गलत मत समजना.. हो सकता हे मुजे कोइ गलत फेहमी भी हुइ हो.. सुन.. कुछ दिन पहेले दो ओरते मेरी क्लीनीकपे आइ थी.. इनमे अ‍ेक की सकल हुबहु तेरी मम्मीसे मीलती थी.. मेने कंन्फोर्म करनेके लीये उनको पुछा भी.. तो कहा.. हम सहेरमे नही इस गांवमे रहेती हे.. जीस गांवका नाम अभी तुमने लीया.. तो मुजे सब याद आ गया.. इसीलीये तुजे ये सब पुछ रही थी..

सृती : (आसंका होते ही) कमीनी.. ये तो बता.. वो दोनो यहा आइ क्यु थी..? ओर तुजे पुरा यकीन हे वो मेरी मम्मी ही थी..?

भावीका : (जटसे) अरे नही नही.. बस.. सायद मे उनको ठीकसे पहेचान नही पाइ.. इसीलीये तो पुछ रही हु.. सुन.. इनमे जो तेरी मम्मीकी सकल वाली ओरत थीनां.. वो प्रेगनेन्ट थी.. मेने उनको सलाह भी दी.. की इस उमरमे बच्चे पैदा करना आपके लीये खतरनाक हे.. लेकीन वो अपनी जीदपे अडी रही.. वो कीसी भी हालमे वो बच्चेको पैदा करना चाहती थी..

सृती : (हसते जुठा गुस्सा करते) कमीनी.. तब तो तुजे गलत फेहमी हुइ हे.. वो मेरी मम्मी नही होगी.. कोइ ओर होगी.. क्युकी मे ओर मम्मी तो यही रहेते हे.. वोतो तुजे भी सब पता हे..

भावीका : (अचानक याद आते) अरे हां बाबा.. मुजे पता हे.. सुन.. मेने उनसे बाते करते मेरे मोबाइलसे दोनोकी फोटो भी लेली थी.. अभी तुजे देखाती हु.. (फोन ढुंढते याद आते ही) ओह.. सीट.. मेरा मोबाइल भी नही हे.. रीपेरींगमे हे.. सुन.. मोबाइल आते ही मे तुजे फोटो सेन्ड करदुगी.. देखलेना.. उस ओरतकी सकल हुबहु तेरी मम्मीसे मीलती हे..

सृती : (हसते) कमीनी.. फोटो भेजना.. मे भी तो देखु.. मेरी मम्मीकी सकलकी ओरत कौन हे.. हें..हें..हें.. सुन.. कहेते हे अ‍ेक ही सकलके दुनीयामे सात लोग होते हे.. मे भी तो यहा हु.. अब गांव जाउंगी तो देखुगी.. वो ओरत वहा हेकी नही.. हें..हें..हें.. छोड सब.. ये बता तेरे हसबन्ड क्या काम करते हे..?

भावीका : (हसते) साला मंत्रीका अ‍ेक लौता बेटा हे.. बापकी बहुत सारी प्रोपर्टी ओर पैसा हे.. तो काम थोडीना करेगा.. हें..हें..हें.. बस.. उनको अ‍ेक वारीस चाहीये.. लेकीन साला मेरी तराह पीछेका सौकीन हे.. तो पीछे ही लगा रहेता हे.. तो बच्चा कहासे होगा..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसती) कमीनी तु नही सुधरेगी.. हें..हें..हें..

दोनो बाते कर रही थी.. तब आज भावीकाकी बातोसे सृतीकी आसंकाको ओर मजबुत करदीया.. ओर उनको अपनी मम्मीके चरीत्रपे भी सक होने लगा.. तभी वहा लखन आगया.. तो सृतीने उनकी फ्रेन्डको लखनका अपने देवरके रुपमे परीचय करवाया.. तो भावीका लखनको देखती ही रेह गइ.. फीर कोफी भी आगइ.. तो तीनो कोफी पीने लगे.. तो सृतीने लखनकी नजर बचाते भावीकाको आंखोसे इसारा करते लखनके पेन्टकी ओर देखनेको कहा..
 
तो भावीकाने टेडी नजर करते लखनके पेन्टकी ओर देखा.. तो उनकी आंखे फटी की फटी ही रेह गइ.. ओर वो मुह फाडते सृतीकी ओर देखने लगी.. तब सृती सरारतसे नैन नचाते मुस्कुराने लगी.. फीर तीनोने कोफी खतम की.. तबतक रीपोर्ट भी आगइ.. ओर रीसेपनीस्ट अंदर आके देगइ.. तो रीपोर्ट देखते ही भावीकाने सृतीको बधाइ दी.. जीसे सुनकर लखन भी बहुत खुस होगया..

ओर सृतीको खडी करते उनको गले लगाकर बधाइ देने लगा.. तभी सृतीको अपनी चुतपे लखनका लंड चुभने लगा.. जीसे सृती उतेजीत होते बहुत ही सर्मसार होगइ.. वो जटसे लखनसे अलग होगइ.. फीर लखनके दोनो हाथ पकडकर मुस्कुराते उसे चेयरपे बीठाती हे.. ओर खुदभी बैठते लखनको थेन्कस कहते चाचा बननेकी बधाइ देती हे.. जीसे देखकर भावीका हसने लगती हे.. ओर वो भी लखनको बधाइ देती हे..

भावीका : (हसते) लोजी लखनजी.. अब तो आप चाचा बनने वाले हे.. तो कुछ पार्टी बाटीतो देने ही पडेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) स्योर क्यु नही..? जब आप ओर भाभी कहो.. जहा कहो.. पार्टी मेरी तरफसे.. हें..हें..हें..

कहातो भावीका लखनसे नजरे बचाकर सृतीको आंख मारते मुस्कुराने लगती हे.. तो सृती भावीकाकी नीयतको पहेचान जाती हे.. ओर वो जुठा गुस्सा करते भावीका को बडी आंख दीखाकर ना मे गरदन हीलाती हे.. ओर सृतीको अभी वहीसे नीकल जाना ही उचीत लगा.. फीर भावीकाकी इजाजत लेकर सृती ओर लखन यहासे नीकल गये.. तब भावीका ललचाती नजरोसे लखनको कातील स्माइल करते देखती ही रही..

लखन ड्राइव कर रहा था तो सृतीने कारको सीधे अपनी क्लीनीकपे लेनेको कहा.. वो आज लखनके गले लगानेसे बहुत ही सरमा रही थी.. ओर अ‍ेक्साइटेड होते खुस भी हो रही थी.. क्युकी उनके ओर लखनके बीचकी दुरीया लगभग खतम ही होचुकी थी.. ओर वो पुनमके कहेनेके मुताबीक आगे भी बढ रही थी.. जीसे लखनके पास बैठकर बार बार नजरे चुराते लखनको देखते मुस्कुराती रही.. तभी..

सृती : (समरमाते हसते) देवरजी.. मेरी फ्रेन्डके सामने कैसे चीपक गये थे.. थोडा सबर नही कर सकथे क्या..? वो हम दोनोके बारेमे क्या सोचेगी..?

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) क्या सोचेगी मतलब..? मे मेरी भाभीको बधाइ दे रहा था ओर क्या..? भाभी.. अगर आपको बुरा लगा होतो आइ अ‍ेम सोरी.. क्या हेना इतनी बडी खुस खबर सुनकर मुजसे रहा नही गया.. आइ अ‍ेम सोरी..

सृती : (जटसे) अरे नही नही.. मुजे बुरा नही लगा.. आप सोरी मत बोलो.. चलो ठीक हे.. अब आपकी भाभीमां ओर आपकी चहीती भाभीसे भी बात करनी पडेगी.. उसे भीतो कहेना पडेगा.. हें..हें..हें.. क्या आपने पुनोदीसे बात करली..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. आपसे कहेना तो भुल ही गया.. भाभी.. आज पुनोदीदीका मेसेज आया हे.. उन्होने मुजे दो क्लीप भेजी हे.. उनका धिरेनके साथ थोडा जगडा हो गया हे.. ओर अ‍ेक क्लीप ओर भेजी हे.. वो धिरेन ओर पायल भाभीके बीच प्यारकी.. हें..हें..हें.. तो मेने दीदीसे बात करली..

सृती : (आस्चर्यसे देखते हसते) अच्छा.. बात भी करली..? चलो अच्छा हुआ.. क्या मे वो क्लीप देख सकती हु..? दीखाइअ‍ेनां..

लखन : (सरमाते हसते) अरे नही भाभी.. वो आपके देखने लायक नही हे.. बहुत गंदी हे.. हें..हें..हें..

सृती : (दांत पीसते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) बडे कमीने हो.. अरे वो नही.. धिरेन ओर पुनोदीदीके बीच जगडेकी केह रही हु.. आप बहुत बीगड गये हो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अच्छा.. मे बीगड गया हु..? तो फीर नास्ता करते समय आप क्या कर रही थी..?

सृती : (सर्मसार होते सकपकाते) अरे.. वो.. वो.. मेतो मेरे प्यारे देवरकी थोडी मस्तीया कर रही थी.. तो फीर आप भी तो वही कर रहे थे.. सरम नही आइ भाभीसे लाइन मार रहे थे.. हें..हें..हें.. अरे बाबा वो जगडेकी क्लीप सुनाओनां..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. अभी आपके मोबाइलपे सेन्ड कर दुगा.. आप फुरसतमे सुन लेना..

सृती : (खुस होकर मुस्कुराते) लखन.. प्लीज.. आप अ‍ेक बार पुनो दीदीसे मीलकर बात करलोना.. मेरे सामने.. ताकी मुजे तस्सली होजाये.. क्युकी मुजे लगता हे.. इस वक्त पुनोदीदीको आपकी सख्त जरुरत हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. हम मीलेगे तब बात करलेगे.. वो भी आपके सामने.. बस..?

सृती : (गाल खीचते) हंम.. ये हुइना बात.. मेरा क्युट देवर.. सुनो.. मुजसे आपसे कुछ बाते करनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कहीयेना.. क्या बात करनी हे..

सृती : (सर्मसार होते नजरे चुराते) वो.. वो.. देवरजी.. अगर आज आपके पास थोडा टाइम हेतो आपके कुछ टेस्ट करने थे.. वो.. मेने अपसे बात कही थीनां.. वो जडीबुटी वाली..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) ओह.. मे समज गया.. क्या हेना.. अभी आपको क्लीनीकपे छोडकर राधुके पास होस्पीटल जाना हे.. ओर कार भी मेरे पास हे.. तो राधुको टीफीन देकर आपको लेने आउगा.. तब टाइम होगा तो टेस्ट कर लेना.. तबतक आप अपने पेसन्टको भी देखलो.. वरना जब आप कहो तब आजाउगा.. सोरी भाभी..

सृती : (जटसे) अरे नही नही.. सोरी मत बोलो.. ठीक हे कोइ बात नही.. आप आइअ‍े तो सही.. देखते हे.. तब टाइम होगा तो देखलेगे..

लखनकी बातसे सृती थोडी नीरास होगइ.. क्युकी कल रात रमाकी चुदाइकी वजहसे वो काफी गरम होगइ थी.. इसीलीये आज उनकी क्लीनीकपे कोइ पेसन्ट नही होता तो वो आज लखनके लंडको देखना चाहती थी.. ताकी लखन उनके साथ थोडा आगे बढ सके.. क्युकी अब सृती लखनके साथ आगे बढकर वो सबकुछ करना चाहती थी.. लेकीन वो पहेल करनेसे डरती थी.. इसके लीये इस मामलेमे वो खुद लखनको आगे बढनेका मौका देना चाहती थी.. ओर कुछ देरेके बाद दोनो क्लीनीकपे पहोंच गये....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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