Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 64 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

सृती : (बहार नीकते) अरे हां लता.. मे तो भुल ही गइ थी.. मे पुनो दीदीसे बात करलुगी.. लेकीन तुम भी नीरास मत हो.. क्या तुजे पुनोदीदीने कुछ बताया नही..? हंम..? सुन.. तुजे सीर्फ हमारा देवु ही प्रेगनेन्ट कर सकता हे.. सीर्फ तुजे ही नही.. इनमे मंजु ओर पुनमदीदी भी बाकात नही हे.. तुम तीनोको या तो देवु.. या फीर स्वयं हमारे जो स्वमी आयेगे वो.. लता.. तुम तीनो हमारे स्वामीके लीये स्पेसीयल हो.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते बहार आते) हां भाभी.. इस बारेमे पुनम दीदी ओर मंजुदीदीसे भी बात हुइ.. भाभी.. क्या वाकइ हम सब परीया ओर अप्सराये हे..? आजके जमानेमे तो मुजे यकीन ही नही होता.. क्या आप इस बातको मानती हो..? क्युकी आप तो अ‍ेक डोक्टर भी हो..

सृती : (मुस्कुराते सोफेपे बैठते) लता.. हां लता.. सही कहा तुमने.. मे अ‍ेक डोक्टर हु.. पहेलेतो मुजे भी इन सब बातोपे यकीन नही होता था.. लेकीन अब यकीन होने लगा हे.. फीर भी दिमाग इन बातोको माननेके लीये तैयार नही हे.. सुन.. इसीलीये तो हमारे यहा कोइ रीस्ते नातेको नही मानते.. समजी..

लता : (बैठते) हां भाभी.. इस बारेमे भी बाते हुइ.. अब ये दोनो आजाये तो हम खानेपे बैठ जाये.. चलो..

दोनो बाते कर रही थी.. तभी लखन ओर रमाभी घरपे आगये.. तब रमाके बाल थोडे बीखरे हुअ‍े लग रहे थे.. ओर वो बहुत ही सरमा रही थी.. आते ही सीधी अपने रुममे चली गइ.. तो इसे देखकर लता ओर सृती बहुत कुछ समज गइ.. ओर अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते कातील मुस्कान करने लगी.. तब लखन सीधा ही उपर अपने रुममे फ्रेस होने चला गया.. तो लता ओर सृती दोनो कीचनमे जाकर खानेकी तैयारीया करने लगी..

तभी लखन अपने रुममे गया तो वहा रजीया आराम करते जाग रही थी.. तो लखनको देखते ही बेडसे खडी होगइ.. ओर लखनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. तो लखनने आते ही रजीयाको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तो रजीया उनका साथ देने लगी.. फीर अचानक हसते लखनसे दुर होगइ.. ओर लखनको बाथरुमकी ओर धकेलने लगी.. तब..





रजीया : (सरमाते हसते) लखन.. अभी कोइ सरारत नही.. अब आपकी पांच दिनकी छुटी.. हे.. हें..हें.. नीचे जाइअ‍े सब लोग आपके आनेका इन्तजार कर रहे थे.. खाना नही खाना क्या..?

लखन : (मुस्कुराते अपना सर पकडते) ओह.. गोड.. रजु तुम भी..? अब मे इसका क्या करुगा.. देख कैसे खडा हे.. बैठनेका नाम ही नही ले रहा..

रजीया : (सरमाकर मुस्कुराते) क्यु..? घरमे दो दो तीतलीया तो आइ हुइ हे.. उन मां बेटी मेसे अ‍ेकको पकड लीजीये.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. क्या बोल रही हे..? क्यु तुजे भी सब..?

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे) हां.. याद हे आपको..? आपकी सादीसे पहेले आप लता दीदीको रातमे होलमे मीलेथे.. तब नीलु आपका लाइव सो देख रही थी.. ओर मुजे लता दीदीने भी सबकुछ बता दीया हे.. जाइअ‍े.. आज अच्छा मौका हे.. क्युकी मे ओर लता दीदीतो आपको छुने नही देगी.. आज कर दीजीये पुनम दीदीका काम.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते बाथरुममे जाते) तुम सबकी सब कमीनी हो.. मुजे कैसी बीवीया मीली हे..? सामनेसे दुसरी ओरतके पास भेजती हे.. चल तुजे खाना नही खाना क्या..?

लता : (खाना लेकर आते) नही.. आज रजुदीदी इधर ही खा लेगी.. इसे आराम करने दीजीये.. चलीये आप भी फ्रेस होजाइअ‍े.. नीचे सब आपका इन्तजार कर रही हे.. ओर सुनीये.. अब रजु दीदीको पांच दिन हाथ मत लगाना.. समजे..?

लखन : (हसते बाथरुममे घुसते) अरे हां बाबा हां.. अभी रजुने सब बताया.. हें..हें..हें..

कहा तो लता रजीयाकी देखते हसने लगी.. ओर उनका खाना वही बेडपे रख दीया.. तब रजीयाने लताको सारी बात बतादी.. की अभी लखनसे क्या बात हुइ.. जीसे सुनकर लताभी हसने लगी.. तभी लखन भी फ्रेस होकर बहार आगया.. ओर लताको अब भी वही देखकर अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तब कुछ देरतो लताभी मदहोस होकर लखनका साथ देने लगी.. फीर अचानक उनसे अलग होकर इनका हाथ पकडकर नीचे जाने लगी..

लता : (हसते धीरेसे) लखन.. पहेले आप नीचे चलीये.. ओर हां.. अभी जो रजुदीदीने कहा.. वो सही हे.. आप देर रात भाभीके पास चले जाना.. आज कल उनको बहुत खुजली हो रही हे.. आज उनकी सारी खुजली मीटा दीजीये.. कैसे पटाका बनकर आपके साथ दोडी चली गइ.. ओर सुनो.. कमीनी दो दिन बीस्तरसे उठनी नही चाहीये.. समजे..? वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) जी रानी साहीबा.. जो हुकुम.. ओर कुछ..?

लता : (सरमाकर साथ चलते धीरेसे) हां.. वो रमा भाभी चली जाये.. तो इस नीलुको भी लाइनमे ले लेना.. बाकी सब बाते बादमे हमारे रुममे करेगे.. मुजे आपसे ओर भी जरुरी बाते करनी हे.. चलीये..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. मुजे भी तुमसे नीलुके बारेमे कुछ बात करनी हे.. हम हमारे रुममे ही बात करेगे..

बाते करते दोनो नीचे आगये.. ओर सब लोग डाइनींगपे डीनर करने बैठ गये.. तो आज लखनके साथ लता ओर सृती बैठी थी.. तो लखनके सामने रमा ओर नीलम बैठ गइ.. लताने सबको खाना सर्व कीया.. ओर खुदभी खाना लेके लखनके पास बैठ गइ.. तब रमा लखनकी ओर बार बार देखते बहुत ही सरमा रही थी.. जीसे देखकर सृती ओर लता भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी..

सबलोग खाना खा रहे थे.. तब खाना खाते लखनको थोडी सरारत सुजी.. ओर वो नीलमके पैरको पैरसे सहेलाने लगा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर मंद मंद मुस्कुराते टेडी नजरोसे लखनको देखने लगी.. ओर आंखोसे इनकी मम्मीकी ओर इसारा करते वो लखनको अ‍ैसा ना करनेकी मनत करने लगी.. तो लखनने पैर हटालीये.. ओर रमाके पैरोकी ओर लेगया.. ओर उनके पैरको सहेलाने लगा..

तो रमा बहुत ही सरमाने लगी.. ओर सर नीचे करते खाना खाते मुस्कुराने लगी.. उनको पता था ये सब लखनकी करतुत हे.. ओर अभी अभी वो लखनसे प्यार करके आइ थी.. तो रमाको इस खेलमे मजा आने लगा.. ओर वो भी लखनके पैरोको पैरसे सहेलाने लगी.. तो लखनने थोडा पैर उठाते उनकी जांगो मे ही फसा लीया.. ओर पैरके अनुठेसे रमाकी चुतको खरोदने लगा.. तब रमाकी हालत पतली होने लगी..

अ‍ेक बार फीर उतेजीत होते उनकी चुत पनीयाने लगी.. रमा खाना खाते थोडी आगेकी ओर सरक गइ.. ओर कीसीको पता ना चले अ‍ैसे धीरेसे नीचेसे अपनी कमरको आगे पीछे करने लगी.. ताकी लखनका पैर उनकी चुतको सहेला सके.. रमा बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. आज उसने लखनसे चुदवानेका पुरा मन बना लीया था.. वो कीसी भी हालमे आज नीलुके पास जाने वाली नही थी.. ओर वो अपनी कमर हीलाते अभीसे नीलमसे दुर रहेनेकी प्लानींग करने लगी..
 
रमा : (सरमाकर धीरेसे) लता दीदी.. आज बहुत सर ओर कमर दर्द कर रही हे.. मे तो खाना खाकर ही सोजाउगी..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. मे आपको मुव लगा दुगी.. दो दिनसे हम दोनो यही काम कर रही हे.. तो कमर दर्द तो होगा ही.. वैसे भी अब ओल मोस्ट सेट हो गया हे.. बाकी बचा.. वो तो मे फुरसतमे करती रहुगी.. आप फीकर मत करना.. सो जाना.. आज आप अच्छेसे आराम करलो.. वरना आपकी तबीयत ओर बीगड जायेगी..

रमा : (मनमे) हां तबीयत तो आज पकी बीगड जायेगी.. ओर वो भी आपके पतीसे.. चडीमे ही कीतना बडा लग रहा था.. लगताहे मुजे सुबह चलने लायक भी नही रखेगे..

लखन : (रमाकी चुतको खरोदते) लता.. आज तो नीलु भी पढाइ करके थक गइ होगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) क्या जीजु आपभीनां.. क्या कोइ पढाइ करते थकता हे क्या..?

सृती : (हसते) क्यु..? मे तो बहुत थक जाती थी.. हें..हें..हें.. बाबा कीतना पढना होता था..

लखन : (रमाकी चुतको जोरोसे सहेलाते) भाभी.. पढाइसे याद आया.. वो हमारे साहीलके चाचाकी लडकी.. सबाना.. क्या वो आपसे मीलने आइ थी की नही..? वो कब जा रही हे बेंगलोर..?

सृती : (मुस्कुराते) हां.. हम यहा आये उसी दिन वो क्लीनीकपे आइ थी.. ओर दो बार फोनपे बात भी हुइ.. अभी उनकी अ‍ेक्जाम चल रही हे.. जब रीजल्ट आजायेगा.. ओर जो परसंट चाहीये वो आगये तो अगले महीने वो बेंगलोर चली जायेगी.. मे वहा बात कर लुगी..

लखन : (हसते) भाभी.. उनको कीसीभी हालमे बेगलोर भेज दीजीये.. ताकी साहीलके चाचा चाची हमारे गांजमे आजाये..

सृती : (मुस्कुराते) अरे वोतो पढाइमे बहुत ही शोसीयार हे.. तो मुजे यकीन हे.. परसेंट तो आजायेगा..

लखन सृतीसे बाते भी कर रहा था.. ओर सबसे छुपकर रमाकी चुतको भी खरोद रहा था.. तब रमासे बरदास्त करना मुस्कील हो गया.. ओर वो धिरेसे दुसरा हाथ नीचे लेगइ.. ओर लखनके पैरको पकडकर अपनी चुतमे दबाव बनाते कमर हीलाने लगी.. तब कुछ ही देरमे रमाकी चुतने जवाब देदीया.. ओर वो पानी छोडते स्खलीत होगइ.. ओर उसने लखनके पैरको धका मारते हटा दीया.. तभी..

सृती : (मुस्कुराते) नीलु.. तुमने तुम्हारे बारेमे क्या सोचा हे..? पढाइके बाद कुछ प्लानींग बानींग की हेकी नही..?

नीलम : (सरमाकर हसते) हां दीदी.. मे सरकारी जोब करना चाहती हु.. मुजे बेन्ककी नोकरी बहुत अच्छी लगती हे.. तो सोच रही हु.. मे बेन्कमे ही जोब करुगी.. मुजे यहा सहेरमे बहहुत अच्छा लगता हे..

सृती : (हसते) अरे वाह.. चलो ये भी अच्छा हे.. आज कल उनमे भी बहुत सेलेरी मीलती हे..

रमा : (आस्चर्यसे नीलमकी ओर देखते) क्या..? दीदी.. बेन्कमे नोकरी करनेके लीये तो सहेरमे रहेना पडता हेनां..? ओर इनकी सादीका भी सोचना हे.. तो इनके ससुराल वाले इनको नोकरी करने देगे क्या..? ना बाबा ना.. हमे कोइ नोकरी बोकरी नही करवानी..

सृती : (सामने देखते) भाभी.. आप कीस जमानेमे जी रही हे..? ओर अ‍ैसा क्यु सोचती हो आप..? क्यु नही करने देगे..? आजकल तो बहुत सारी लडकीया नोकरी करती हे.. ओर कमाउ बहु कीसको अच्छी नही लगती..? आज जमाना बदल गया हे.. ओर बात सहेरमे रहेनेकी तो वहा इनके दो दो घरतो हे.. जबतक नीलुकी सादी नही होजाती तबतक वो यहा.. या फीर मेरे घरपे भी रेह सकती हे.. तो फीर क्या दीकत हे..?

रमा : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. तबतो मुजे कोइ दिकत नही हे.. बस.. इनकी अ‍ेक ही चीन्ता हे.. आपकी ओर लता दीदीकी तराह इनकी अच्छे खानदानमे सादी होजाये..

सृती : (थोडी नाराज होते) भाभी.. क्यु इनकी सादीकी चीन्ता करती हो..? ये भी कोइ उमर हे सादी करनेकी.. अभी इसे पढने तो दो.. सादीके लायक होजायेगी.. तब सोचेगे..

रमा : (सरमाकर हसते) दीदी.. ये आपको छोटी लगती हे..? अरे अठारवा खतम करके उनीसवा चल रहा हे.. ओर अ‍े महीनेके बाद बीसवा बैठेगा.. देखो.. कैसे गदराया सरीर हो गया हे.. जैसे कोइ सादी सुधा लडकी हो.. इस उमरमे सादी नही करेगी तो कीस उमरमे करेगी..

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. इनकी सादीकी चीन्ता मत करो.. मे ओर आपके ननंदोय तो हे.. हम इनकी सादी कोइ अच्छे खानदानमे ही करवा देगे.. क्यु लखन..?

लखन : (सही बैठते) हां भाभी.. आप नीलुकी सादीकी चीन्ता छोडदो.. भाइसे कहुगा कोइ अच्छा खानदान ढुंढ लेगे.. बस.. लडका अच्छा होना चाहीये.. ओर नोकरी फीर धंधा.. सबकुछ देखना पडता हे..

रमा : (मुस्कुराते) दीदी.. जो भी हो.. अब इनका सब आपही को करना हे.. मेने तो नीलुको आप दोनोको सौंपदी हे.. वरना आपके भाइको तो कुछ फीकर ही नही हे.. ये भी नही की अब लडकी जवान हो चुकी हे.. तो इनके लीये रीस्ता ढुंढे.. इनका कही पैर फीसल गया.. या फीर कही उच नीच होगइ तो हमे लेनेके देने पड जायेगे..

सृती : (मुस्कुराते) भाभी.. हमारी नीलु अ‍ैसी नही हे.. वो बहुत ही समजादार हे.. वो जो भी करेगी.. बहुत सोच समजके करेगी.. आपको इनकी सादीकी इतनी जल्दी क्यु हे..? अभी तो पढ रही हे.. कुछ ही दिनमे इनके अ‍ेक्जाम सुरु होजायेगे.. फीर तीन साल कोलेज.. ओर इनको मास्टर भी करवाना हे.. तभी तो इनको बेन्कमे जोब मीलेगी..

सब लोग बाते करते खाना खा रहेथे.. तब रमाको नीचे बहुत गीला लगने लगा.. तो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर वो पानी पीकर फटाफट अपने कमरेमे चली गइ.. तब लखन सृतीकी ओर देखकर सरमाके हसने लगा.. तो सृती सब कुछ समज गइ.. ओर वो लखनकी जांगपे चपत लगाते सरमाकर हसने लगी.. फीर खानेके बाद लता ओर सृतीने घरका सब काम नीपटा लीया.. ओर कुछ देर टीवी देखकर सबलोग अपने अपने कमरेमे सोने जाने लगे....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१९

सब लोग बाते करते खाना खा रहेथे.. तब रमाको नीचे बहुत गीला लगने लगा.. तो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर वो पानी पीकर फटाफट अपने कमरेमे चली गइ.. तब लखन सृतीकी ओर देखकर सरमाके हसने लगा.. तो सृती सब कुछ समज गइ.. ओर वो लखनकी जांगपे चपत लगाते सरमाकर हसने लगी.. फीर खानेके बाद लता ओर सृतीने घरका सब काम नीपटा लीया.. ओर कुछ देर टीवी देखकर सबलोग अपने अपने कमरेमे सोने जाने लगे.... अब आगे

तो लताने लखनसे छुपकर प्रेगनन्सी टेस्टकी कीट सृतीको देदी.. जीसे लेकर सृती अपने कमरेमे चली यइ.. ओर चेन्ज करके बीस्तरपे आगइ.. आज लतासे बाते करते उनके मनमे संकाने जन्म ले लीया था.. तो वो खुदके बारेमे सोचने लगी.. की इसके बारेमे उनको सीर्फ दो लोग ही बता सकते हे.. अ‍ेक मंजु.. ओर दुसरी पुनम.. लेकीन इस बारेमे दोनोको पुछे भी तो कैसे..? यही सब सोचते सृतीने फोन उठाकर मंजुको लगा दीया..

मंजुला : (रींग बजते ही फोन उठाते) हां कमीनी.. बोल.. अब फोन करनेका टाइम मीला तुजे..? जाते ही फोन नही कर सकती थी..?

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) कमीनी गालीया तो मत दे.. अब सौतन हु तेरी.. बस.. इतने दिनोसे क्लीनीकपे नही गइ थी.. तो वहा बीजी थी.. अभी सब खाना खाकर सोने गये हे.. तो मे भी बीस्तरमे हु.. बता.. क्या कर रहे हे हमारे पती..?





मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. सृती.. वो कल सुबह कबीलेपे चले गये थे.. यहा उनकी जमीलाके साथ सादी थी.. तो आज सामको ही आये..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. हमारे पती कीतनी सादीया करेगे..? क्या वो सादीसे थकते नही..? हंम..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. ये सब बहुत जरुरी हे.. हमारे लीये.. लेकीन ये बात अभी तेरे समजमे नही आयेगी.. क्युकी तुजे नही पता.. की समय कीतना तेजीसे बदल रहा हे.. मानाकी वो सबको समय नही देपायेगे.. इसीलीये तो हमे ये नीर्णय लेना पडा.. सृती.. तुजे नही पता इस सबकी बच्चीया हमारे लीये कीतनी इम्पोर्टन्ट हे..

हमारी पुनोकी नाती.. जमीलाकी बेटी.. रश्मी भाभीकी बेटी.. चंदा दीदीकी लडकी.. खुद तेरी ओर भावुकी दोनो बेटीया.. सब हमारे वीजय ओर हमारे स्वामीकी बीवीया होगी.. वो सभी लडकीया यातो परीया होगी.. या फीर अप्सराये.. सृती.. तुजे नही मालुम वो सब यहा धरतीपे आनेके लीये कीतनी तरस रही हे..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. क्या मेरी दोनो बेटीया..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां कमीनी.. तेरी दोनो बेटी.. वो सब बाते तुजे बादमे पता चलेगी.. समजी..?

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) जी दीदी.. इस बारेमे पुनो दीदीसे बात तो हुइ थी.. आपकी सभी बाते मे समज गइ.. बस.. आप लोगोको मीस कर रही थी.. तो फोन करदीया.. दीदी.. अब हमारे पतीके बीना नींद ही नही आती.. मे आप दोनोको बहुत मीस कर रही हु..

मंजुला : (हसते) क्यु..? वहा हमारा देवर तो हे वहा.. पकडले उसे.. इनके बाद तु हमारे पतीको भी भुल जायेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होकर मुस्कुराते) तुम कीतनी कमीनी हो.. लेकीन मंजुदीदी.. उनके साथ अ‍ेकदम कैसे आगे बढुं..? मेरी तो कुछ समजमे ही नही आरहा.. बडी मुस्कीलसे वो मेरे साथ बोलने लगे हे.. दीदी.. आज हम दोनो नया स्कुटर लेने गये थे.. वहा हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते हुइ.. फीर भी इनसे बात करनेमे अ‍ेक डर लगता हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. तुम लखनसे डरो मत.. वो बहुत अच्छा लडका हे.. अरे जादुगर हे वो.. तुजे ओर पुनोको ज्यादा महेनत करनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. तुम दोनोको पता भी नही चलेगा.. की तुम दोनो कब उनके बीस्तरपे चली जाओगी.. समजी..? सृती.. तुजे अ‍ेक बात कहु..? अब हमारे पतीसे ज्यादा तुम सबको अब लखन ही खुस रख पायेगा.. अब मेरा लखन इन सब चीजोमे बहुत माहीर हो गया हे.. क्या उसने वो मां बेटीके साथ कुछ कीया की नही..?

सृती : (सर्मसार होते) दीदी.. आपको ओर पुनोदीदीको तो सब पता चल जाता हे.. तो फीर मुजसे क्यु पुछ रही हे..? अभी लता ओर रजीया दोनोका पीरीयड चल रहा हे.. तो सायद आज वो रमाभाभीको मीलने जायेगे.. क्या वो जायेगेनां..?

मंजुला : (हसते) हां.. जायेगे.. क्या तुमने ओर लताने उनका लाइव सो देखनेका डीसाइड कीया हेनां..? हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कीतनी कमीनी हो तुम.. आपको सबकुछ पता हे.. हां.. मे ओर लता रमाभाभीकी चीखे सुनना चाहती हे.. मंजुदी.. सुन.. तुजे अ‍ेक बात बतानी हे.. आज लतासे बाते करते मुजे पता चला.. वो हमारे देवरसे पहेले हमारे पतीको मीलना चाहती हे.. प्लीज.. तुम उनकी इच्छा पुरी करदोनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) कमीनी कहीकी.. सबसे ज्यादा तो उनको आग लगी हुइ हे.. बीलकुल अपनी मां पे गइ हे.. हां जानती हु मे.. यही होगा.. जो वो चाहती हे.. सुन.. लताको कहेना.. वहा घरपे सब सेट हो गया होतो वापस हमारे घरपे आजाये.. अब ये यहा ही रहेगी..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. अभी अभी खानेसे पहेले लताके साथ यही सब बाते हुइ.. वो तो आनेके लीये रेडी हे.. लेकीन वो चाहती हे.. इस बारेमे अ‍ेक बार तु हमारे देवरसे बात करले..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे वो तो मे करलुगी.. सुन.. अभी लखनके दोस्तकी सादी हेनां.. उनकी बहेनके साथ.. तो आप लोगतो आयेगे.. तब लखनसे बात करलुगी.. क्या तेरी कुछ तबीयत खराब हे..?

सृती : (सरमाकर हसते) मंजुदी तुम कीतनी कमीनी हो.. मेतो तुजे सरप्राइज देना चाहती थी.. लेकीन तुजे सब पता तो हे.. हां मुजे आज दो बार उल्टीया हुइ हे.. तो मुजे सक तो नही.. लेकीन यकीन हे.. की मे प्रेगनेन्ट होगइ हु.. अभी लतासे प्रेगनन्सीकी कीट लेली हे.. सुबह पता चल जायेगा.. बतानां.. क्या ये सच हेनां..?
 
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. तुम जब यहासे गइ तब ओल रेडी प्रेगनेन्ट होकर गइ थी.. सुन.. सायद तुम कल तेरी फ्रेन्डको दीखाने जायेगी.. तो अकेली मत जाना.. हमारे देवरको साथ लेजाना.. समजी..?

सृती : हमारे देवरको..? अरे.. इसमे कीसीको साथ लेजानेकी जरुरत नही हे.. बस.. कुछ टेस्ट करवाकर सीधी मेरी क्लीनीकपे चली जाउगी.. क्युकी मे मेरी खुदकी तो नही देख सकती.. ओर लखन भैया साथ होगे तो मुजे सरम नही आयेगी क्या..? बात करती हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (थोडी गंभीर होते) सृती.. तुम मेरी बात क्यु नही समजती..? मैने अ‍ैसेतो कहा नही होगा..? कुछ बात अ‍ैसी हे जो मे तुजे बताना नही चाहती..? समजी..? जीतना बोला हे उतना कर.. ओर अब लखनसे क्या सरमाना..? तुमने उनके साथ इतनी सारी बाते तो करली.. हें..हें..हें..

सृती : (थोडा डरते) मंजुदी.. मुजे खुलकर बताना.. कुछ गडबडतो नही..? हंम..?

मंजुला : अरे कुछ गढबड नही.. सृती तुम जीद मत करो.. ओर वैसे कोइ गभरानेकी बात नही हे.. ओर हो सके तो कोइ दुसरी डोक्टरके पास चली जाना..

सृती : (थोठी परेसान होते) क्यु..? मंजुदी.. वो मेरी बेस्ट फ्रेन्ड हे.. अगर उनको पता चलाकी मे दुसरी जगहपे दीखाने गइ.. तो कमीनी मेरी वाट लगा देगी.. बतानां.. क्या होने वाला हे.. मंजुदी मुजे कुछ आसंकाये हे.. बताओनें मुजे मेरे बारेमे सबकुछ जानना हे.. इसीलीये तो आपको फोन कीया हे..

मंजुला : पता हे मुजे.. सृती प्लीज.. जीद मत कर.. क्या करोगी जानकर..? ठीक हे.. इस बारेमे हम मीलेगे तब बात करेगे.. अ‍ेक बार तुम दिखाकर आजाओ.. ओर सुन.. क्या घरमे सब सामान सेट होगया..?

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. ओल मोस्ट.. रजीया दीदी रमाभाभी ओर लताने लगभग सबकुछ सेट करदीया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. तो सुन.. अगर वहा सब काम नीपट गया हो तो दो तीन दिनके बाद लखनको कहेना.. तुम सबको लेकर यहा आजाये.. मे उनसे फोनपे बात करलुगी.. कहेना भाभीमां ने कहा हे..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. सच बताना.. क्या लता वाकइ देवुसे सादी करेगी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) कीतनी कमीनी हो तुम.. अभी तो तुम लताकी सीफारीस कर रही थी.. क्या भुल गइ..? सुन.. अब वक्त आगया हे.. की हम लताका ओर दुवेका मीलन करादे.. क्या कहेती हो..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) मंजुदीदी.. मेरे खयालसे ये थोडी जल्दबाजी नही हे..? क्युकी हमे लखन भैयाका भी देखना होगा.. क्या वो इसके लीये राजी होजायेगे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. मे कोइ जल्द बाजी नही कर रही.. जो भी कर रही हु सब सोच साजकर कर रही हु.. मे चाहती हु.. जबतक मे हु सबकुछ अच्छेसे सेट करके जाउ.. ओर सुन.. तुम लखनकी चीन्ता मत करो.. अब जीतनी जल्दी हो सके तो तुम भी लखनको अपनालो..ओर बहुत जल्द उनको वहा अपना पुराना प्यार भी मील जायेगा.. वो भी हमेसाके लीये.. समजी..?

सृती : (खुस होते मुस्कुराते) क्या..? मे..? मीन्स.. आप पुनोदीदीकी बात कर रही हो..? ओर वो भी यहा..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. तेरी सहेली तेरे पास आ रही हे.. मे चाहती हु.. अब लता हमेसाके लीये यहा हमारे पास रहे.. ओर पुनो ओर तुम वहा हमारे लखनके साथ रहो.. मेरे लखनकी बीवीया बनकर.. क्युकी कुछ ही दीनोमे तुजे सब पता चल जायेगा.. सुन.. अभी इस बातका जीक्र तुम कीसीके साथ मत करना.. लताके साथ भी नही.. समजी..?

सृती : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) मंजुदी.. ये आप क्या केह रही हे..? क्या मे भी..? मतलब.. यहा लखन भैयाके घरमे.. इतनी जल्दी..? तो फीर मम्मी.. मंजु.. मुजे तुमसे कुछ पुछना हे..

मंजुला : (समजते ही) कमीनी.. मुजे पता हे तुमको क्या पुछना हे.. चल बहुत करली बाते.. बाकी बाते हम बादमे करेगे.. पहेले कल अच्छेसे दीखाकर आ.. ओर हमे खुस खबर सुनाना.. समजी.. चल बाय.. मे फोन रखती हु..

सृती कुछ कहे.. इनसे पहेले मंजुने फोन काट दीया.. तो सृती कुछ देरतक फोनको ही देखती रही.. आज मंजुके साथ बाते करते उनको लगाकी मंजु उनसे कुछ छुपा रही हे.. उनकी आसंकाये ओर मजबुत होगइ.. तो इधर लखन भी लताके साथ अपने कमरेमे चला गया था.. ओर दरवाजा बंध कर दीया.. तो रजीया खानेके बाद सो गइ थी.. तो लखन दरवाजा बंध करते ही लताके पास चेन्ज करके लेट गया..





ओर उनको अपनी बाहोमे भरलीया.. फीर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तब लता बहुत ही उतेजीत होने लगी.. लखन उनके बुब्सको मसलते प्यार करने लगा.. ओर दोनोके तनसे अ‍ेक अ‍ेक वस्त्र नीकलते गये.. तभी लखनने लताकी चुतपे हाथ रखदीया.. तो वहा सेनेटरी पेड लगा हुआ था.. तो लता जोरोसे हसने लगी.. फीर लखनको ठेंगा दीखाकर जटसे हसती हुइ बाथरुममे चली गइ..

फीर कुछ देरके बाद वो चेन्ज करके बेडपे आगइ.. ओर लताने लखनके सीनेपे सर रखदीया.. तो लखन उनके सरको प्यारसे सहेलाने लगा.. अब दोनोके बीच कोइ राज छुपा हुआ नही था.. दोनोने ही अ‍ेक दुसरेके सभी रीस्तोको स्वीकार करलीया था.. ओर इस बातसे दोनोका रीस्ता ओर गहेरा हो गया था.. लता अब इस मामलेमे लखनसे काफी मेच्योर होगइ थी.. तभी..

लता : (गाल चुमते) हां जानु.. आप क्या कहेने वाले थे..? पहेले आप बताओ.. फीर मुजे भी आपसे बात करनी हे..

लखन : (लताके सरको सहेलाते) लता.. आज मे राधुकी होस्टेलपे ध्यान रखने गया था.. तो वहा नीलु धिरेनको लेकर आइ थी.. उनकी फ्रेन्डके कमरेमे.. तब सभी लडकीया स्कुलमे थी.. तो होस्टेलपे कोइ नही था.. ओर दोनो कमरेमे जाते ही अ‍ेक होगये.. आज नीलुकी फीरसे धिरेनने चुदाइ करली.. तो मेने उन दोनोकी फील्म भी बना डाली.. ओर पुनो दीदीको सेन्ड भी करदी..
 
लता : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या केह रहे हे आप..? ये कमीनी अपनी हरकोते बाज नही आयेगी.. कुतीयाको बहुत आग लगी हुइ हे.. स्कुलके पहेले ही दिन चुदवाकर आगइ.. पता नही हम नीलुको तीन साल तक कैसे सम्हालेगे.. लेकीन दोनो मीले कैसे..? नीलुका फोन तो मेरे पास हे..

लखन : लता.. आज कल कीसीका कोन्टेक्ट करना कोइ मुस्कील काम नही हे.. लगता हे उसने अपनी दोस्तके फोनसे कोन्टेक्ट कीया होगा.. क्युकी धिरेन जब घरपे आया था तब ही उसने नीलुको अपना फोन नंबर देदीया होगा..

लता : (थोडी चीन्तासे) जानु.. भैया ओर भाभीने नीलुकी जीम्वेवारी हमे दी हे.. पता नही हम नीलुको तीन साल कैसे सम्हालेगे..

लखन : (मुस्कुराते) सुन.. अब हमे नीलुको सम्हालनेकी जरुरत नही हे.. अब हमे नीलुको धिरेनसे मीलनेमे नही रोकना.. क्युकी अ‍ैसा खुद पुनो दीदीने कहा हे..

लता : (आस्चर्यसे देखते) क्या अ‍ैसा दीदीने खुद कहा हे..? लेकीन क्यु..?

लखन : हां लता.. सुन.. पुनो दीदी सबकुछ जानती हे.. वो मुजे बता रही थी.. की हम नीलुको रोकनेकी कीतनी भी कोसीस करले.. फीर भी वो धिरेनसे सादी करके ही रहेगी.. तो पुनोदीदी इसीको जरीया बनाके धिरेनसे अलग होना चाहती हे.. ताकी वो जल्दसे जल्द वापस हवेलीपे आजाये.. तु समज गइनां..?

लता : (धीरेसे) अरे हां.. जानु.. इस बारेमे तो मेरी भी पुनो दीदीसे अ‍ेक बार बात हुइ थी.. ठीक हे.. अब आप जैसा पुनो दीदी कहे करते जाइअ‍े.. अब हमे नीलुकी परवाह नही करनी.. जो करे करनेदो उसे..

लखन : (मुस्कुराते) लता.. तुम भी मुजसे कुछ बात करने वाली थी.. बताना क्या बात करनी थी..

लता : (सामने देखकर मुस्कुराते धीरेसे) अरे हां जानुं.. मेने सुना हे.. आज कल आप दोनो भाइ बहेन बोलते नही हो..? दोनोके बीच कुछ अन बन चल रही हे..? ओर ये अन बन कीसलीये हे वो भी मुजे पता हे.. तो जानु.. प्लीज.. आप अ‍ेक बार पुनोदीदीको माफ करदो.. ओर ये बहेन हे आपकी.. उनसे अ‍ेक बार बात करलो.. आपके लीये वो बहुत रोइ हे.. प्लीज.. मेरी खातीर..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो सृती भाभीने तुजे सब बता दीया.. लता.. सोरी.. पता नही क्यु.. उस दिन हम मस्तीया कर रहे थे.. तो मे थोडा बहेक गया था.. तो पुनोदीदीने मुजे चांटा मार दीया.. ओर कुछ नही..

लता : (जोरोसे हसते) अच्छा कीया उसने.. हें..हें..हें.. अगर मे होती तो आपको डंडेसे पीटती.. हें..हें..हें.. लेकीन जानु.. पता हे.. आपको चाटा मारते ही उसे अपनी गलतीका अहेसास होगया था.. फीर वो खुब रोइ.. आपसे बात करनेके लीये बहुत तरसी.. लेकीन अ‍ेक आप हो.. उनके सामने देखते भी नही.. जानु.. आपके जानेके बाद वहा मंजुदीदी आइ थी.. उसने पुनोदीदी ओर सृती भाभीको खुब खरी खोटी सुनाइ.. क्युकी पुनो दीदीको भी पता हे.. आगे क्या होने वाला हे.. फीर भी उसने आपसे बात छुपाइ..

लखन : (थोडा सोचमे) लता.. क्या मुजे सचमे सबके साथ रीलेशनमे आना होगा..? क्या ये सब गलत तो नही हेनां..? क्युकी सब मेरी भाभीया हे.. तो मुजे भी अ‍ेक डर लग रहा हे..

लता : (थोडी सही बैठते) लखन.. आप मेरी अ‍ेक बात सुनो.. भुल जाओ हमारे घरकी ओरते आपकी क्या लगती हे.. अब हमारे खानदानमे सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता होगा.. ओर वो हे अ‍ेक मर्द ओर अ‍ेक ओरतका रीस्ता.. क्युकी दीदी केह रही थी हम सब कोइ सामान्य मानवी नही हे.. बस.. आप सीर्फ इतना याद रखना.. ओर हां.. भुल जाओ अब पुनोदीदी आपकी बहेन हे.. ओर मे आपकी बीवी हु.. सीर्फ इतना याद रखो.. वो आपका पहेला प्यार हे..

लखन : (आंख गीली करते) लता.. बस.. यही तो नही भुल पा रहा.. बडी मुस्कीलसे उनको भाभी मानने लगा था.. ओर उसने चाटा मारकर अहेसास करवा दीया.. की वो मेरी बहेन ही हे..

लता : (मुस्कुराते) नही लखन.. कभी कभी जल्दबाजीमे बीना सोचे समजे गलती हो जाती हे.. तो क्या इनको इतनी बढी सजा दोगे..? आप फीकर मत करो.. उसने आपके साथ सभी तराहके रीलेशनको स्वीकार करलीया हे.. तो आप उसे माफ करदो.. ओर बाय चान्स वो सब अब भी स्वीकार नही करती.. तो मे आपसे वादा करती हु.. की मे भाइका खयाल हमेसा हमेसाके लीये छोड दुगी..

लखन : (आस्चर्यसे सामने देखते) लता.. ये तुम क्या बोल रही हो..? जीस तराह पुनोदीदी मेरा पहेला प्यार हे.. उसी तराह बडे भैया भी तेरा पहेला प्यार हे.. मे तो खामखा तुम दोनोके बीच आ गया..

लता : (मुस्कुराते) हां लखन.. जानती हुमे.. मे सच केह रही हु.. मे भाइके सामने कभी देखुगी भी नही.. आइ प्रोमीस.. सीर्फ अ‍ेक बार माफ करदो उसे.. ओर बात करलो.. मुजे पुरा यकीन हे.. आपकी जींदगी बदल जायेगी.. ओर हां.. अब उल्टा पुल्टा सोचना छोडदो.. जैसा पुनोदीदी कहे करते जाओ.. क्युकी आने वाले समयमे अब सीर्फ पुनो दीदी ही इस हवेलीकी महारानी हे.. ओर इस घरके सभी मर्द राजा.. आप समज गयेनां..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. हां समज गया.. ठीक हे.. मे टाइम मीलेगा तब फुरसतमे पुनोदीदीसे बात करलुगा..

लता : (खुस होकर होठ चुमते) जानु.. थेन्कयु.. चलो इसी बातपे आपको अ‍ेक ओर खुस खबरी सुनाती हु.. ओर हां.. अभी इस बारेमे कीसीसे बात मत करना.. क्युकी पकातो हमे कल ही पता चलेगा.. जानु.. आज सृती भाभीको उल्टीया हुइ हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) अरे.. तो इसमे इतना खुस होनेकी क्या बात हे..? वो तो हम स्कुटर लेने गये थे तब भी इनको उल्टीया हुइ थी.. सायद उनकी तबीयत थोडी ठीक नही हे..

लता : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) अरे बुध्धु.. तबीयत तो बीलकुल ठीक हे.. आप समजे नही..? इसका मतलब सृती भाभी सायद प्रेगनेन्ट होगइ हे.. अब पका तो कल टेस्टके बाद ही पता चलगा.. हें..हें..हें.. सुनो.. कल आपको भाभीके साथ दीखाने जाना हे..

लखन : (खुस होते हसते) क्या..? भाभी प्रेगनेन्ट हे..? थेन्क्स गोड.. अब तो मे दो दो बच्चेका चाचा हो गया हु.. हें..हें..हें.. लता.. कास हमारा भी कोइ बच्चा पैदा होता.. मेने कीतनी कोसीसकी.. लेकीन ना तुम प्रेगनेन्ट हो पाइ.. ओर ना ही रजीया.. क्या मे कभी बाप नही बन सकता..?
 
लता : (आंख गीली करते गाल सहेलाते) जानु.. दिल छोटा मत करो.. आप जरुर बाप बनेगे.. लेकीन आप मुजे कभी प्रेगनेन्ट नही करपायेगे.. क्यु नही.. इस बारेमे मे ज्यादा कुछ नही केह सकती.. आप इस बारेमे पुनोदीदीको पुछ लेना.. इनको सब पता हे.. हां.. अब रजीयादीदीका पीरीयड चल रहा हे.. तो इसके बाद उनके प्रेगनेन्ट होनेका पुरा चान्स हे.. ओर दीदी केह रही थी.. सायद इसीलीये पुनोदीदीने आपको जडी बुटी पीलाइ हे.. तो आप रजीया दीदीको अ‍ेक बच्चा देदो.. वो बहुत खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे लता.. आइ लव यु.. तुम सबका कीतना खयाल रखती हो.. अब मेरी दोनो बीवीया लाल टेग लगाकर बैठी हे.. तो मे अब कहा जाउगा.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते अ‍ेक चपत लगाते) बडे कमीने हो आप.. क्यु.. नीचे हमारी भाभी तो हे.. कमीनी जबसे आइ हे आपपे लाइन मार रही हे.. लखन.. आज बहुत अच्छा मौका हे.. जीस कामके लीये पुनोदीदीने कहा था.. उसी कामका अच्छा वक्त हे.. आप आज कीसी भी तराह भाभीकी बजादो.. वो कीतनी भी चीलाये हम वहा नही आयेगी.. कमीनी बहुत चुदकड हे.. मुजे यकीन हे आज आप कीला फतेह करलोगे..

लखन : (हसते धीरेसे) कैसी बीवी हो तुम..? अपनी ही भाभीको चोदनेके लीये केह रही हो.. हें..हें..हें.. लता.. तो फीर वो भानुभाइको हम धोखा तो नही दे रहे..? वो भी तो हमारा भाइ हे..

लता : (मुस्कुराते) तो क्या मे आपकी बहेन नही हु..? बडे भैया मेरे भाइ नही हे..? लखन.. मुजे पता हे मे ओर भानुभाइ हमारे बापुकी नीशानी हे.. आप भाइके बारेमे ज्यादा मत सोचना.. क्युकी मंजुदीदी केह रही थी.. भाइने भी अ‍ेक ओरत रखली हे.. जो अभी तीन चार दिनसे भाइके साथ ही रहेती हे.. वो उसीसे अपनी प्यास बुजाते हे.. ओर हम सभी भाइ बहेनको तो अब बडी दीदीने छुट देदी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? वो तुजे भी पता हे..? हें..हें..हें.. बता कौन हे वो ओरत.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) ज्यादा हसो मत.. तुम सबके सब कमीने अ‍ेक जैसे ही हो.. क्या वो वहा कोइ छोटुकी बीवी नही हे..? रीटा नाम हे उनका.. कमीना उनका पती ही इन दोनोकी रखवाली करता हे.. ओर आप भी तो उनकी कइ बार ले चुके हो.. कमीने कहीके..

लखन : (जोरोसे हसते) अरे वाह.. तुमतो तेरे भाइकी पुरी कुंडली जानती हो.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) सीर्फ भाइकी नही.. आपकी भी पुरी कुंडली जानती हु.. हें..हें..हें.. लखन प्लीज.. मजाक नही.. आप मेरी बात ध्यानसे सुनो.. आप इन मां बेटीके साथ जीतने भी मजे करना चाहे बेसक कर सकते हो.. लेकीन अ‍ेक बातका खयाल रखना.. कभी भी नीलु आपसे प्रेगनेन्ट नही होनी चाहीये.. वरना हमारा सारा खेल बीगड जायेगा.. आप समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) मतलब तुजे हमारे प्लानके बारेमे सब पता हे.. लता.. तु फीकर मत कर.. आज तो तेरी भाभी गइ कामसे.. देखना कमीनी दो दिन बीस्तरसे नीचे पैर नही रख पायेगी.. उनकी चुतमे बहुत खुजली हो रही हेनां.. अगर भाभीकी चीखे सुनकर नीलु वहार आगइ तो..? हम क्या करेगे..?

लता : (सामने देखते) क्या करेगे मतलब..? क्या आपको पता नही हे..? की वो मां बेटी दोनो ही आपसमे मीली हुइ हे.. भाभी खुद आपके साथ नीलुका रीलेशन रखवाकर उनको आपसे चुदवाना चाहती हे.. अगर नीलु भी वही आजाये तो उनको भी अपनी माके सामने पटक पटकर चोद लेना.. कमीनीको पता तो चले.. दुसरेके घरमे आग लगानेका क्या नतीजा होता हे..अब आपको उनके पास जाना नही हे क्या..? जाइअ‍े.. वो आपका इन्तजार करती होगी.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? तुजे पता था आज हम दोनो मीलने वाले हे..? हें..हें..हें..

लता : (जुठे गुसेसे देखते) कीतने कमीने हो आप..? जीस तराह खाना खाते आप दोनो हरकत कर रहेथेनां.. मुजे क्या वहा सबको पता होगा.. की आप दोनो क्या चाहते थे.. कमीनी आगे पीछे कीतनी हीलती थी.. जैसे वो कीसीसे चुदवा रही हो.. जानु.. आज इनकी सारी गरमी नीकाल दो.. फीर दो दिनमे मेभी ठीक होजाउगी.. तब आप मेरी भी गर्मी नीकाल देना.. जबसे आपका बडा हथीयार देखा हे तबसे मुजे भी बहुत आग लगी हुइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही लता.. क्या तुम अब भी मेरे साथ रीलेशन रखोगी..? हंम..? अब तेरी गर्मी नीकालनेके लीये भैया हेनां.. हें..हें..हें..

लता : (आस्चर्यसे सामने देखते) लखन.. आपने अ‍ैसा सोचा भी कैसे..? की मे आपके साथ रीलेशन नही रखुगी.. जानु.. मानाकी मे बडे भाइसे प्यार करती हु.. तब मुजे पता नही थाकी आप दोनो भी मेरे भाइ हो.. लखन.. इस बारेमे अ‍ेक बार आप पुनोदीदीसे अच्छी तराह बात करलो..

क्युकी भले ही मे सायद भाइके साथ सादी भी करलु.. लेखीन फीर भी हमारा रीलेशन कभी खतम नही होगा.. आइ प्रोमीस.. मे भाइसे ज्यादा आपको प्यार करुगी.. आप दिलको छोटा मत कीजीये.. मे आपको भी इतना चाहती हु.. जीतना भाइको चाहती हु.. मे दोनो भाइके साथ रीलेशन रखना चाहती हु..





कहातो लखनने लताको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगा.. तो लता भी सरमाकर लखनका साथ देने लगी.. तो दुसरी ओर लखन भी अ‍ेक बार पुनमको मीलनेकी आसमे जोसमे आगया.. ओर लताके उरोजोको थामते मसलने लगा.. तब लताकी सीसकारीया नीकल गइ.. वो उतेजीत होकर बेकाबु होने लगी.. तभी उसे खयाल आयाकी वो पीरीयडमे हे.. तो लखनसे दुर होगइ..

लता : (भारी सांसोसे) बस.. बस लखन.. अभी नही.. सीर्फ दो दिन ठहेर जाओ.. फीर आपको मुजे जीतना प्यार कना हो उतना करलीजीयेगा.. मे उंह.. तक नही करुगी.. अभी तो ये अपनी आगको सम्हालके रखो.. आज सारी आग उस भाभीकी चुतमे उडेलना हे.. कमीनीको चोद चोदके पेटसे करदो.. डालदो अपना बीज.. आपको भी पता चल जायेगाकी आप भी बाप बन सकते हो.. इस खानदानसे पंगा लेना इतना आसान नही हे.. अब जाओभी.. बहुत रात हो गइ हे..

कहा तो लखन लताके होठोको चुमकर खडा होगया.. ओर धीरेसे कमरेसे बहार नीकल गया.. फीर सृतीके रुमकी ओर अ‍ेक नजर डालता हे.. तो वहा दरवाजेपे सृती खडी नजर आइ.. ओर लखनको देखते ही सर्मसार होगइ.. फीर सरमाकर हसते लखनको थम्स अपकी साइन दीखाने लगी.. तो लखन भी इसकी ओर हसते सरमा गया.. ओर चुप चाप नीचेकी ओर जाने लगा.. जैसे ही लखन नीचे गया.. सृती मुस्कुराते लताके रुममे चली गइ..

तो वहा लता भी अपने आपको सही करते नीचे जानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसे ही सृती आइ वो उनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो हाथ पकडकर धीरेसे दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. तबतक लखन रमाके रुममे चला गया था.. जबसे रमा लखनके साथ प्यार करके आइ थी तबसे उनको कही चेइन ही नही मीलता था.. आज रमा दुल्हनकी तराह सजधजके लखनका ही इन्तजार कर रही थी....





कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२०

तो वहा लता भी अपने आपको सही करते नीचे जानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसे ही सृती आइ वो उनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो हाथ पकडकर धीरेसे दबे पांव नीचेकी ओर जाने लगी.. तबतक लखन रमाके रुममे चला गया था.. जबसे रमा लखनके साथ प्यार करके आइ थी तबसे उनको कही चेइन ही नही मीलता था.. आज रमा दुल्हनकी तराह सजधजके लखनका ही इन्तजार कर रही थी.... अब आगे





जैसे ही लखन आया रमा बेडसे उतरके नीचे खडी होगइ.. ओर अपना शींगार दीखाते सरमाने लगी.. जैसे ही लखनने अपनी दोनो बाहे फैलाइ रमा जटसे दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखनने भी रमाको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. रमा लखनके सीनेमे सर छुपाकर खडी रही.. तब लखनने उनकी टुंडी पकडकर चहेरा उपरकी ओर कीया.. ओर अपना चहेरा रमाके चहेरेकी ओर लेजाते उनके होठो पे होंठ रखदीया..

दोनोके होठ मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. तभी अचानक लखनका चहेरा थामकर रमा उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तो लखन भी रमाके बुब्सको थामते उनके गलेमे मुह डालते रमाको उतेजीत करने लगा.. रमा अ‍ेक दम पागल जैसी होने लगी.. वो खाना खा रहे थे तबसे ही बहुत उतेजीत थी.. वो जल्दसे जल्द लखनके साथ मीलन करते उनमे समा जाना चाहती थी..





अ‍ेक तो वो कइ दिनोसे भानुसे चुदी नही थी.. ओर उपरसे लखनके लंडको देखनेकी कबसे उनकी उत्सुकता बढी हुइ थी.. तो वो जल्दसे जल्द लखनके साथ चुदाइ करना चाहती थी.. ओर उपरसे लखनने आज उनको होस्टेलपे लेजाकर पुरी तराह छेड दिया था.. तो लखनके होठोको चुमते ही उसने हाथ नीचे लेजाकर जटसे लखनका लंड पेन्टके उपरसे ही पकडलीया.. तो उसे बहुत बडा लगा..





रमा लखनके लंडको कपडेके उपरसे ही मसलने लगी.. साथमे दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालकर जीभसे पेच लडाते चुमते रहे.. ओर अ‍ेक दुसरेके रसको पीते रहे.. आज डाइनींग पे रमाको छेडा तबसे वो लखनसे चुदवानेके लीये बेताब हो रही थी.. आज वो सारी सरम त्यागकर कीसी भी हद जानेको तैयार थी.. रमाको जल्दसे जल्द अपनी चुतमे अ‍ेक लंड चाहीये था.. तभी रमा जटसे नीचे बैठ गइ..





ओर लखनकी ओर वासना भरी कातील नजरोसे देखते लखनकी पेन्ट खोलने लगी.. तो लखन रमाकी ओर देखते मुस्कुराता रहा.. रमा बहुत उतेजीत हो गइ थी.. ओर उसने जटसे लखनके पेन्टको खोलकर थोडासा नीचे कर लीया.. ओर वो लखनके नीकरको खीचने लगी.. जैसे ही नीकर नीचे होगया लखनका फन फनाता लंड कीसी नागकी तराह जटकेसे बहार नीकलते हवामे उपरकी ओर लहेराने लगा.. तो रमा उसे देखते ही चोंक गइ.. ओर थोडा डरकर लखनकी ओर देखने लगी.. तभी..





लखन : (धीरेसे मुस्कुराते) भाभी.. क्या हुआ..? अब तो देख लीयानां..? हेना सानदार..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे सामने देखते) ओ बापरे.. इतना बडा..? लखनजी.. ये तो बहुत बडा ओर मोटा हे.. इतना बडा मैने कभी नही देखा.. मतलब.. आपके भाइका भी नही..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो फीर आज ध्यानसे देखलो.. यही लंडसे आपकी ननंद मजे लेती हे.. ओर आज आप भी लोगी.. हें..हें..हें.. इसे छुकर भी देख लीजीये.. अब तो यही हथीयार आपके नसीबमे हे.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाकर अपनी मुठीमे थामते) लखनजी प्लीज.. आज हम उपर उपरसे प्यार करे..? हंम..? आपका तो बहुत बडा हे.. मेरी तो फाडके रख देगा.. मुजे अपनी हालत खराब नही करवानी.. कल सुबह कीसीको पता चल गया तो..?

लखन : (कंधेसे पकडकर खडा करते) अरे डरीये मत.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ओर इनसे कुछ नही होगा.. मे बहुत प्यारसे करुगा.. क्या आपकी ननंदको कुछ हुआ..? इसे तो रजीया भी अपनी चुतमे ले चुकी हे.. क्या इनकी फट गइ..? नहीनां..? तो फीर आप क्यु डर रही हे..? मैने तो सुना हे ओरते ओर लडकीया बडे लंडकी दिवानी होती हे..

रमा : (सरमाते नजरे चुराते) हां ये सही हे.. लेकीन इतना बडा..? लखनजी.. इनके सामने तो आपके भाइकी नुनी लगती हे.. अगर हमने करलीया तो मेरी तो चौडी होजायेगी.. अगर आपके भाइको मुजपे सक हुआ तो..? मेरा तो घर ही बरबाद होजायेगा..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते धीरेसे) भाभी.. आपको भानुभाइ से डरनेकी जरुरत नही हे.. इनको पता भी नही चलेगा.. फीर भी मेरे पास इलाज हे.. वो आपको कुछ नही कहेगे.. अगर आपको कुछ कहे तो मुजे बता दीजीयेगा.. अब चलीये मुजसे रहा नही जाता.. हमे कीतने दिनोके बाद मीलन करनेका मौका मीला हे.. आज तो पुरी रात आपके पास हु..

कहेते लखनने अपनी पेन्ट वही नीकालकर रमाको अपनी गोदमे उठालीया.. तो रमा बहुत ही सरमाइ.. ओर लखनके गलेमे बाहे डालकर सीनेमे सर छुपालीया.. तो लखन उसे बेडकी ओर लेगया.. ओर रमाको धीरेसे बेडपे लीटा दीया.. तो रमा सरमाकर थोडासा खीसक गइ.. ओर लखनके लीये जगा देदी तो लखन भी उनकी बगलमे लेट गया.. तो रमा नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमाने लगी..

तभी लखनने लेटतेही रमाको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर रमाके होठोको चुमने लगा.. तो रमा भी लखनकी कमरमे हाथ डालकर उनका चुमनेमे साथ देने लगी.. वो बहुत मदहोस हो चुकी थी.. रमा आधी आंख चडाते लखनके होठोका रस पी रही थी.. रमाकी सारी भी नीकलकर उनकी कमरपे अटकी हुइ थी.. उतेजनाकी वजहसे रमाके दोनो बुब्स कठोर हो चुके थे..





जीनकी वजहसे रमाका ब्लाउस बहुत ही तंग हो गये थे..तभी लखनने अ‍ेक हाथसे रमाके बुब्सको थामलीया ओर धीरेसे मसलते रमाके मुहमे अपनी जीभ घुसाने लगा.. तो रमानेभी थोडासा मुह खोल दीया.. ओर लखनकी जीभसे जीभ मीलाकर पेच लडाने लगी.. लखन रमाको चुमते ब्लाउसके बटनको खोलने लगा.. अब वो भी काफी उतेजीत हो चुका था.. ओर उनका लंड नइ चुतमे घुसनेके लीये जटके मार रहा था..
 
तो बहारकी ओर सृती ओर लता दोनो ही धीरेसे मेइन डोर खोलकर बंगलेसे बहारकी ओर चली गइ.. जहा बहार रमाके रुमकी खीडकीया आंगनमे लगी हुइ थी.. बहार बहुत अंधेरा था.. तो दोनो खीडकीके पास जाकर देखने लगी.. जो लताने पहेलेसे ही थोडी खोलकर रखी थी.. तो दोनो खीडकीसे थोडासा पदडा हटाकर जांकने लगी.. ओर कान लगाकर अंदरकी बाते सुननेकी कोसीस करने लगी.. तो अंदरसे बहुत धीमी आवाज आ रही थी..

तबतक अंदर रमा ओर लखन कामातुर हो चुके थे.. ओर अ‍ेक दुसरेमे समा जानेके लीये बेकरार थे.. लखनने रमाके ब्लाउसको खोल दिया था.. तो रमाकी ब्रा अबभी बाधा बनी हुइ थी.. ओर लखनने ब्राको अ‍ेक ही जटकेमे पटीया तोडके नीकाल दीया.. तो रमाके दोनो भरावदार बुब्स उछलकर बहार आगये.. तो लखन रमाके होठोको छोडकर बुब्सको मुहमे लेकर नीपलको दांतोसे खीचने लगा.. तो रमा दर्दके मारे सीसकारीया करने लगी..

रमा : (थोडा दर्दसे) लखनजी.. प्लीज.. अ‍ैसे खीचये मत.. दर्द होता हे.. धीरेसे चुसीयेनां.. मे कहा भागी जा रही हु..

लखन : (चुसते) भाभी.. क्या मस्त दुधु हे आपके.. मुजसे रहा नही जाता..





रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) दुधु तो मेरी ननंदका भी मस्त हे.. लगता हे आपने उनपे बहुत महेनत की हे..

लखन : हां.. लेकीन आपके दुधुकी तो बात ही ओर हे.. अब तो मुजसे रा भी नही जाता..

कहेते लखनने रमाके ब्लाउसको नीकाल दीया.. ओर ब्राको भी नीकालकर साइडमे फेक दीया.. अब रमा उपरसे पुरी नंगी थी.. तभी लखन रमाके दोनो बुब्स बारी बारी चुसने लगा.. तो रमा लखनके सरको पकडकर अपने बुब्समे दबाने लगी.. तो लखनने उसे अपने मुह मे लेलीया.. ओर चुसने लगा.. तो रमा भी आधी आंख चडाते मदहोसीमे सीसकारीया करते लखनके बालोको सहेलाने लगी..





लखन कभी रमाके मुमे चुसने लगता.. तो कभी रमाके होठोको चुमने लगता.. वो रमाके गलेमे मुह डालकर गलेको चुमने लगा.. तो रमा बहुत उतेजीत होते पागल जैसी होगइ.. ओर उनकी चुतसे लगातार पानी बहेने लगा.. आज रमाको लखनने पुरी तराह पागल करदीया था.. ओर ये तो अभी सुरुआत थी.. तभी लखन रमाके उपरसे उतर गया.. ओर रमाकी साडीको खीचकर नीकालने लगा तो रमा बहुत सर्मसार होने लगी..

तब लखनने रमाके पेटीकोटका नाडा भी खीचलीया ओर पेटीकोट नीकालने लगा.. तो रमाने अपनी कमर थोडी उची करते लखनको पेटीकोट नीकालनेमे मदद की.. अब रमा सीर्फ पेन्टीमे रेह गइ.. तभी लखनने उनकी पेन्टीमे उंगलीया फसाकर खीचली.. तो रमा लखनसे नजरे चुराते सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. ओर पेन्टीके नीकलते ही उसने जटसे अपने दोनो हाथ अपनी चुतपे रख दीया.. ओर बहुत ही सरमाकर मुस्कुराने लगी..

लखन : (रमाके हाथ हटाते मुस्कुराते) भाभी.. अब मुजे आपकी जनतके दर्शन करादो.. इसके लीये मे बहुत तडपा हु..

रमा : (र्सासार होते मुस्कुराते नसीली आंखोसे) अपनी मनमानी करके देख तो रहे हो.. लखनजी.. प्लीज.. अब अपनी भाभीको ओर मत तडपाओ.. आजाओ मेरे उपर.. आपकी भाभी बहुत प्यासी हे.. आज मुजेमे समा जाइअ‍े.. ओर मुजे भी आपके अंदर समा लीजीये.. अब मुजसे रहा नही जाता..

लखन : (दोनो पैर पसारते रमाके उपर लेटते) भाभी.. अभी तो हमारी सुरुआत हे.. देखना आज मे आपको जनतकी सेर कराउगा.. आज आप हमेसा हमेसाके लीये मेरी होजायेगी.. यही समजलो आज हम दोनोकी सुहागरात हे..

रमा : (सरमाकर लखनको बाहोमे भीचते) हां लखनजी.. ये भाभी तो मनसे आपकी कबकी होचुकी हे.. ओर आज तनसे भी होजायेगी.. जबसे आपका प्यार कबुल कीया.. तबसे मेने आपके भाइको इस तनको हाथ भी नही लगाने दीया.. अब ये तन सीर्फ अपका हे.. अब आपके अलावा इस तनको कोइ छुअ‍ेगा भी नही.. आपका ये देखकर लगता हे.. आज सचमे मेरी सुहागरात हे.. ये तो मेरी फाडके रखदेगा.. देखना सुबह आप सबकुछ सम्हाल लेना..

लखन : (बुब्सको चुमते) भाभी.. आपको कुछ नही होगा.. मे हुनां.. मे पेइन कीलरकी ओर आइ पीलकी टेबलेट लेकर आया हु.. वैसे भी हमारे धरमे दुसरी ओरतके साथ सेक्स करनेकी छुट हे.. तभी तो मेरी ओर भाइकी इतनी बीवीया हे.. आपको लतासे भी डरनेकी जरुरत नही हे.. वो आपको कुछ नही कहेगी.. फीरभी सुबह सबको केह देना मेरी तबीयत ठीक नही हे..

रमा : (सरमाकर सरको सहेलाते) लखनजी.. इनकी कोइ जरुरत नही हे.. गोलीया तो मे भी लेकर आइ हु.. मुजे पता था आप मुजे छोडने वाले नही हो.. ओर मे भी तो आपसे मीलन करनेके लीये तरस रही थी.. आइअ‍े अब वक्त जाहीर मत कीजीये.. समा लीजीये मुजे आपके अंदर..

कहा तो लखन उनके बुब्सको चुमते हुअ‍े धीरे धीरे नीचेकी ओर सरकने लगा.. जैसेही रमाकी नाभीमे जीभ घुसाइ.. रमाके तनमे बीजलीसा करंट दोड गया.. वो कांपते सीसकारीया करने लगी.. ओर लखनके बालोको पकडलीया.. तभी लखन सरकते ओर नीचे चला गया.. तो रमाने अपने दोनो पैर फैला दीये.. ओर लखन रमाके पैरोके बीच आगया.. फीर चुतपे नजर डालकर सर उठाके अ‍ेक बार रमाकी ओर देखने लगा..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आपकी चुत तो बहुत मस्त हे.. देखो अ‍ेकदम रेडी हे.. पुरी गीली होगइ हे..

रमा : (सर्मसार होते नजरे चुराते) लखनजी.. ये सब आपके जादुका कमाल हे.. आपने मुजे सामको छेडके रखा हे.. खानेपे भी नही छोडा.. वहा भी मुजे बीना कुछ कीये ही जडा दीया.. आप सचमे जादुगर हो.. आपकी भाभी तो आपकी दिवानी होगइ.. देखना अब मुजे छोडीयेगा नही..

लखन : (सामने देखते) नही भाभी.. नही छोडुगा.. क्या भानुभाइ आपके साथ अ‍ैसा नही करते..?

रमा : (सर्मसार होते) नही.. इनको तो इन सब चीजोमे कोइ इन्ट्रेस नही.. बस.. अंदर डाला ओर सीधा ही चोदने लगते हे.. ओर कुछ ही देरमे ढेर होकर सो जाते हे.. ये भी नही देखते बीवीका क्या हुआ.. सादीके बाद वो अ‍ैसेही करते हे.. पहेले वो अ‍ैसे नही थे.. हम बहुत लंबे वक्त तक प्यार करते थे.. पता नही इनको सादीके बाद क्या होगया हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी कोइ बात नही.. अब मे हुनां.. आपको पुरा मजा दुगां.. चलीये आज जनतकी सेर करनेके लीये रेडी होजाइअ‍े.. आज मे आपको पुरी रात प्यार करुगा..

कहेते लखन रमाकी चुतमे मुह लगा देता हे.. ओर चुतको चाटने लगता हे.. थो रमाके बदनमे सुर सुराहट होने लगती हे.. वो हल्कासा कांपने लगी.. लखन इनकी चुत चाटते जीभको चुतमे घुसा देता हे.. ओर चुतके दानेको टटोलने लगता हे.. रमा बहुत कामुक हो गइ.. तो अपनी कमर उछालते पागल जैसी होने लगी.. ओर कुछ ही देरमे उनकी चुतने जवाब देदीया.. ओर लखनके मुहपे फवारा छोड दीया..



 
तब वो सांत होते जोरोसे सांस ले रही थी.. तभी लखन बाथरुममे चला गया ओर अपना मुह साफ करके वापस आया तब रमा लखनसे नजरे चुराते मुस्कुरा रही थी.. तभी लखनने उसे बेडसे खडा करदीया.. ओर खुद बेडके कीनारे बैठ गया.. फीर उसने रमाको अपने पेरोके बीच बैठनेको कहा तो रमा सरमाती लखनके पैरोके बीच घुटनोके बीच बैठ गइ.. ओर लखनकी ओर सरमाके देखने लगी..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. कहीयेनां क्या करना हे.. मुजे इस बारेमे कुछ मालुम नही हे.. क्युकी मैने कभी नही कीया.. आप बताते जाओ..

लखन : भाभीजी.. बस.. कुछ नही इसे अपने मुहमे लेकर लोलीपोपकी तराह चुसना हे.. इसे ब्लु जोब कहेते हे.. अपकी ननंदको ये बहुत पसंद हे.. उनको मेरा पानी पीना बहुत अच्छा लगता हे..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) छी.. क्या इसे मुहमे लेना हे..? इसका पानी पीया भी जाता हे..? लेकीन ये गंदा नही हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. फीकर मत कीजीये.. मे इसे अंदर धोकर ही आया हु.. चलीये सुरु होजाइअ‍े.. आज मे आपको अपना अमृतका रस पीलाता हु..

रमा : (लंडको मुठीमे थामते) क्या..? अपके रसको पीना भी हे..? ये तो बहुत चीपचीपासा होता हे.. मुजे कुछ होगातो नही..? देखना बाबा मैने अ‍ैसा कभी नही कीया.. आप सीखा देना.. मेरा ये सब पहेली बार हे..

लखन : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) भाभी.. लडकीया ओर ओरतको मर्दका पानी पीना बहुत अच्छी लगता हे.. आपकी ननंद तो पुरा पीजाती हे.. ओर इस चाटकर साफ भी करदेती हे..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. मेरी ननंद भी पागल हे.. ओर आप भी पागल हो.. ना जाने आज तो आप मुजसे क्या क्या करवाओगे..

सृती : (लताकी ओर देखते धीरेसे) लता.. मे ये क्या सुन रही हु.. तुम भी मेरे देवरका अमृत पीती हे..?

लता : (सर्मसार होते पीठमे मुका मारते) भाभी.. आपभीनां.. तो क्या आप बडे भैयाका नही पीती..? बाते बादमे करलेना पहेले अंदर देखोतो सही दोनो क्या कर रहे हे..

तब रमाने दोनो हाथोकी मुठीमे लंडको पकड लीया था.. ओर हल्कासा उपर नीचे करते सहेलाने लगी.. फीर लखनकी ओर मुस्कुराते धीरेसे अपनी जीभको नीकालती हे.. ओर लखनके लंडको टच कराती हे.. ओर उनको थोडा अजीब लगा.. ओर वो लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तो लखन भी मुस्कुराते रमाके सरको पीछेसे पकड लेता हे.. ओर रमाके मुहको आगे करते इसारोसे अपने लंडको मुहमे लेनेको कहेता हे..





तो रमा सरमाकर अपना मुह खोलती हे.. ओर धीरेसे इखनके लंडके टोपेको मुहमे लेकर चाटने लगती हे.. ओर उसे थोडा अच्छा लगा.. ओर धीरेसे पुरे लंडको मुहमे नीगलने लगी.. तो लखन आंख बंध करते रमाके सर ओर गालको सहेलाने लगा.. ओर रमा धीरे धीरे करते लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी.. लखनका पुरा लंड मुहमे नही आ रहाथा.. तो लखन रमाके सरको पकडकर अपनी कमर आगे पीछे करने लगा..





ओर रमाके मुहको चोदने लगा.. लखनका लंड रमाकी हलकसे टकराने लगा.. तो कुछ ही देरमे रमा खांसने लगी.. ओर उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. तो रमाने लंडको मुहसे बहार नीकाल दीया.. तब बहार खीडकीसे सृती ओर लता अंदर जाकते उतेनीत होने लगी.. आज रुममे हल्की रोसनी थी.. फीर भी बहारसे काफी अंधेरा लग रहा था.. तो जैसे ही रमाने मुहसे लंड नीकाला..





सृतीको अंधेरेमे लखनके लंडकी परछाइआ नजर आइ.. तो वो चोंक गइ.. क्युकी अंधेरेकी वजहसे वो ठीकसे देख नही पाइ.. इसके बावजुद उसे लखनका लंड बहुत बडा लगा.. ओर उनकी चुतमे हलचल तेज होने लगी.. उनका हाथ अनायास ही उनकी चुतपे चला गया.. ओर नाइट ड्रेसके उपरसे ही अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर यही हाल लताकी भी थी.. ओर वो लताके कानमे धीरेसे कहेने लगी..

सृती : (धीरेसे कानमे) लता.. मेरे देवरका तो बहुत बडा लग रहा हे.. आज तो रमा भाभी गइ कामसे..

लता : (सरारतसे हसते धीरेसे) भाभी.. इसे अच्छी तराह देखलो.. अब तो हमारे नसीबमे यही लंड लीखा हे.. देखना अ‍ेक दिन आप भी भाभीकी तराह इनका स्वाद चखोगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी क्या बोल रही हे..? कुछ तो सरम कर.. वो देवर हे मेरा.. पहेले इन मां बेटीको तो नीपटने दे.. हम हमारी बादमे सोचेगे..

लता : (उतेजनामे पीछेसे सृतीको बाहोमे भरते धीरेसे कानमे) भाभी.. अब सोचने समजनेका वक्त बीत गया.. अब तो हमे सीर्फ मजे ही करने हे.. ओर अपनी लाइफ खुलकर जीनी हे.. क्या बडे भैयाका भी इतना बडा हे..?

सृती : (सरमाते धीरेसे कानमे) हां.. तु जब उनको मीलेगीनां तब देखलेनां.. बहुत जल्द तेरा भी सपना पुरा होजायेगा..

इधर दोनो धीमी आवाजमे अ‍ेक दुसरेके कानमे बाते कर रही थी.. तब अंदरकी ओर रमा भाभीने फीरसे लखनके लंडको अपने मुहमे लेलीया था.. ओर जोरोसे मुह हीलाते लंडको अंदर बहार कर रही थी.. तब लखन रमा भाभीके दोनो गाल सहेलाते धीरे धीरे अपनी कमर हीला रहा था.. अ‍ैसा काफी देर चला.. तब जाके लखन अकडने लगा.. ओर वो जोरोसे कमर हीलाते रमा भाभीके मुहमे पीचकारीया छोडने लगा..





तो पीचकारीया सीधा ही रमा भाभीके गलेमे उतर गइ.. तब रमा भाभी ना चाहते हुअ‍े भी लखनका पानी पी गइ.. ओर उसने फौरन लखनके लंडको मुहसे नीकाल दीया.. तब रमा भाभीका पुरा मुह लखनके पानीसे भर गया.. तो वो खांसते हुअ‍े जटसे खडी होगइ.. ओर बाथरुममे भाग गइ.. वहा जटसे लखनके पानीको मुहसे नीकारते उल्टीया करने लगी..

फीर कुछ देरके बाद अपने अपना मुह साफ करके अपने आपको सही करके वापस बहार आगइ.. ओर बहार आते ही थोडे जुठे गुस्सेसे लखनकी पीठमे मुके मारने लगी.. जीसे देखकर लखन हसने लगा.. तो बहारकी ओर लता ओर सृती भी अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते हसने लगी.. तभी रमाने लखनके लंडकी ओर देखा.. तो वो खब भी अ‍ैसे ही तनके खडा था.. जीसे देखकर रमाको भी आस्चर्य हुआ..
 
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