Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 63 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वो.. भी.. का मतलब..? क्या आप मुजे बता सकती हे.. दुसरी कौन मुजे प्यार करने लगी हे..

सृती : (सर्मसार होते नजरे चुराते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. मेरे कहेनेका मतलब.. आप भीतो उनको प्यार करते हेनां..? तो वो भी आपको प्यार करने लगी हे.. मेरा अ‍ैसा कहेना था..

लखन : (सरमाकर धीरेसे) भाभी.. अभी आपने कहा.. की हम दोनोने इस बदलावको स्वीकार करलीया हे.. मतलब..? क्या आप भी..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. हां.. आइ मीन.. अभी नही.. प्लीज.. मेरे खयालसे कुछ बाते आपको समयपे छोड देनी चाहीये.. मतलब.. मंजुने कहा हे.. सायद इसके लीये इतनी जल्दी हम प्रीपेर नही हे.. इसके लीये आपको कुछ दिनोका इन्तजार करना चाहीये.. आपको खुद ब खुद पता चल जायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. गभराइअ‍े नही.. भाभीमांने मुजे अ‍ेक ओर बात भी कही हे.. की जो भी होगा.. अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. जबरदस्तीसे कुछ भी नही.. ओर मेभी जबरदस्तीके प्यारको नही मानता.. इसीलीये तो आज मे मेरे पहेले प्यारसे वंचीत हु..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) देवरजी.. थेन्क्स.. मेरे खयालसे आप अ‍ेक बार पुनोदीदीसे बात कर लीजीये.. सायद वो धिरेनके साथ जगडा ओर वो ओरतके साथ रीलेशनकी बात करना चाहती हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. धिरेनकी जो बात आपको आज पुनोने कही.. वो बाते मे धिरेन हमारे घरपे आया था तबसे जानता हु.. ओर वो ओरत कोइ ओर नही.. हमारे बडे भैयाके दोस्त भीमा भाइकी दुसरी बीवी हे.. पायल नाम हे उनका.. इनकी पहेली बीवी अपने देवरके साथ.. यानीकी भीमा भाइके छोटे भाइके साथ भाग गइ हे.. ओर ये ओरत भीमाभाइके सालेकी बीवी थी.. जो भीमाभाइ इनको पटाकर उठा लाये हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) अरे.. आप तो इस ओरतकी पुरी कुंडली जानते हे.. तो फीर ये बात आपने पुनो दीदीको क्यु नही बताइ..?





लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कहासे कहेता..? ये बात मुजे भी धिरेन हमारे घरपे आया तब पता चली.. आप फीकर मत करो.. इस केसको मे मेरे हिसाबसे हेन्डल कर लुगा.. क्युकी ये बात खुद धिरेनने मुजे बताइ हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? खुद धिरेनने बताइ हे..? मतलब..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मैने धिरेन ओर नीलुको अपने विस्वास मे लेलीया हे.. उनको यकीन दिला दिया हे.. की मे उन दोनोकी सादी करवानेमे मदद करुगा..धिरेनको विस्वास होगया हे की मे उनका सबसे अच्छा दोस्त हु.. तो वो उनकी सभी बाते मेरे साथ सेर करता हे.. क्युकी जब पुनोदीदी ओर धिरेन अलग हो जायेगे तब उनके घरपे जानेका रास्ता मेने खुला छोड रखा हे.. ताकी उनके घरपे मेरा आना जाना लगा रहे..

सृती : (सरमाके मुस्कुराते) क्या आपको यकीन हे पुनोदीदी ओर धिरेन अलग होजायेगे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. इस बारेमे मेरी ओर पुनोदीदीकी चर्चा हो चुकी हे.. खुद पुनो दीदीने मुजे ये बात कही हे.. ओर वो खुद भी धिरेनसे अलग होजाना चाहती हे..

सृती : (मुस्कुराते) मतलब.. इस मामलेमे आप काफी कुछ जानते हे.. ओर आगे भी बढ चुके हो.. क्या इस बारेमे पुनो दीदीको सब पता हे..? की आप उनका काम कर रहे हो..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. दीदी तो सबकुछ जान जाती हे.. ओर वो खुद चाहती हे.. की वो जल्दसे जल्द धिरेनसे अलग होकर वापस हवेलीपे आजाये.. इसीलीये तो पुनो दीदीने वहा नीलुको धिरेनसे मीलवानेके लीये कहा था.. जो मेने वही दोनोकी मुलाकात करवादी थी.. अबतो हम पायल भाभीको भी जरीया बनाकर आसानीसे पुनम दीदीको धिरेनसे अलग कर सकते हे..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? वहा आपने नीलुको धिरेनसे मीलवाया था..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सीर्फ इतना ही नही.. नतीजेके तौरपे आज धिरेन ओर नीलु होस्टेलमे नीलुकी फ्रेन्डके रुममे अ‍ेक ही बेडपे अकेले मील भी चुके हे.. वो भी मेरी आंखोके सामने.. आप समज गहइनां..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) हां.. समज गइ.. मे इतनी भी बुध्धु नही हु.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तब उन दोनोको नही पताथा.. की मे वही राधुकी ओफीसमे था.. तो मैने दोनोकी फील्म बना डाली.. ओर इनकी विडीयो क्लीप भी पुनोदीदीके मोबाइलमे सेन्ड करदी हे.. जो पुनोदीदी उसे हथीयारके तौरपे इस्तेमाल कर सकती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे हसते) देवरजी.. आप वाकइ कमीने हो.. क्या अ‍ैसी फील्म अपनी दीदीको भेजदी..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाके मुस्कुराते) भाभी.. पुनो दीदी सीर्फ मेरी बहेन ही नही हे.. वो मेरी सबकुछ हे..

सृती : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) अरे वाह.. देवरजी.. आपतो छुपे रुस्तम नीकले.. तो फीर आपको अ‍ेक बार पुनोदीदीसे बात करलेनी चाहीये.. वैसे भी वो आपके लीये बहुत आंसु बहा चुकी हे.. बस अ‍ेक बार उनको माफ कर दीजीये.. आइ प्रोमीस हम दोनो अ‍ैसा दुबारा कभी नही करेगी..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. मे आपकी बात नही टाल सकता.. अगर आप इतना कहेती हो तो मे उनसे कल फुरसतमे बात कर लुगा.. क्युकी अभी तो धिरेन भी घरपे जा चुका होगा.. तो अभी पुनोदीदीसे बात करना ठीक नही हे..

सृती : (खुस होते मुस्कुराते) हां ये हुइना बात.. देवरजी.. मेरी बात रखनेके लीये थेन्क्स..

लखन : (हसते) भाभी.. कैसी बाते कर रही हो..? कभी अपनोको थेन्क्स नही कहेते.. मे आप सभीको दिलसे अपना मानता हु..

सृती : (सरमाते हसते) देवरजी.. अब हमसे पहेलेकी तराह खुलकर बाते करते रहीये.. हमसे मस्तीया करते रहीये.. हम भी आपको दिलसे अपना मानती हे.. फीर मे ओर पुनोदीदी तो आपको हमारा चहीता देवर मानती हे.. जो हमारी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) भाभी.. बुरा मत मानीयेगा.. मुजे पहेलेकी तराह नोर्मल होनेमे थोडा वक्त लगेगा.. वैसे थेन्क्स.. आज इस ड्रेसमे आप वाकइ बहुत ही खुबसुरत लग रही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर कातील नजरसे हसते) हां.. बस.. अ‍ैसे ही हमारी तारीफ करते रहीये.. थेन्कयु.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) भाभी.. मे मजाक नही कर रहा हु.. सचमे ये ड्रेस आपकी खुबसुरतीपे चार चांद लगा रहा हे.. हें..हें..हें.. आप बहुत ही छोटी ओर होट लग रही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते लखनको बाजुमे मुका मारते) हटो बदमास.. अभी छुट क्या दी.. आपतो फीरसे सुरु होगये.. अपनी भाभीको होट बोल रहे हे..? लगता हे अब मुजे भी आपको पीटना पडेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) हां.. अब बाकी रहे गइ होतो आप भी पीट लीजीये.. मे तो कबसे आपसे पीटनेके लीये तरस रहा हु.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) देवरजी.. आप भीनां.. अच्छा..? अगर पीटनेके लीये तरस रहे थे.. तो फीर पुनम दीदीसे नाराज क्यु होगये..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. सोरी.. सब कुछ अचानक होगया.. लेकीन आइ प्रोमीस.. अब मे आप दोनोसे कभी नाराज नही होउगा.. क्युकी सीर्फ आप दोनो ही मेरी चहीती भाभी हो..

सृती : (कातील नजरसे हसते) अच्छा..? हें..हें..हें.. तो फीर बाकी सब भाभीया.. ओर आस करके आपकी मंजुभाभी आपकी चहीती भाभी नही हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. सभी भाभीको मे बहुत चाहता हु.. लेकीन भाभीमांका दर्जा आप सभी भाभीओसे उपर हे.. वो सीर्फ मेरी भाभी नही.. मेरी मां भी हे.. ओर मांको कीसीके साथ कंपेयर नही कीया जाता.. कास मैने उनकी कोखसे जन्म लीया होता..

सृती : (प्यारसे मुस्कुराते) अच्छा.. अपनी भाभीमां से इतना प्यार करते हो..? सारा प्यार भाभीमां पे मत लुटा देना.. इनमेसे थोडा प्यार हमारे लीये भी बचाके रखना.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते धीरेस) भाभी.. आप दोनोतो मेरे लीये स्पेसीयल हो.. तो आपको प्यार कैसे नही करता..?

कहातो सृती सरमाके हसने लगी.. उसे पुनमकी कही सभी बाते याद आने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. सृती बार बार लखनकी ओर देख लेती थी.. जैसे वो लखनके साथ डेटपे आइ हो.. वो अब लखनके साथ आगे बढनेका पुरा मन बना चुकी थी.. लेकीन सबसे पहेले वो पहेल करना नही चाहती थी.. इसके लीये लखनको खुद आगे बढनेका इन्तजार कर रही थी.. तभी बातोका दौर आगे बढाते..
 
सृती : (कोल्डड्रीन्कस पीते अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. अभी रमाभाभी ओर नीलु हमारे घरपे हे.. तो पुनोदीदीने कहा हे.. लखन भैयाको कहेना.. ये अच्छा मौका हे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो इसमे इतना सरमानेकी क्या बात हे..? अब तो मुजे अ‍ैसे ही काम करना हे.. तो आप कब तक मुजसे सरमायेगी..? भाभी.. क्या आप भी पुनो दीदीकी तराह मुजसे खुलकर बाते नही कर सकती..? मेरे खयालसे अब अ‍ैसी बातोमे हमारे बीच कोइ पर्दा या सरम नही होनी चाहीये.. दीदीको केह दीजीये मुजे मेरी जीम्जेवारी अच्छी तराह मालुम हे.. उनका काम जल्द होजायेगा..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) देवरजी.. क्या हेना इस तराहकी चर्चा मेने आपके साथ कभी नही की.. तो कहेनेमे सर्म आ रही थी.. अब मे अ‍ैसी बाते खुलकर कहेनीकी कोसीस करुगी.. देवरजी.. अभी आपने कहा.. क्या नीलु सचमे धिरेनसे सादी कर लेगी..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. रमा भाभी नीलुकी सादी मुजसे करवाना चाहती हे.. वो कोइ उल्टा पुल्टा प्लान सोचे इनसे पहेले मे चाहता हु की नीलुकी सादी जल्द से जल्द धिरेनसे होजाये.. तो रमा भाभीका सारा प्लान चोपट होजायेगा.. इसीलीये मे खुद नीलुकी सादी जल्दसे जल्द धिरेनसे करवा देना चाहता हु.. ओर वो सब काम आप मुजपे छोड दीजीये.. आप लोगोको सीकायतका मौका नही मीलेगा..

सृती : (सरमाकर हसते) अरे नही नही देवरजी.. हमे आपपे पुरा भरोसा हे.. मुजे पता हे आप ये काम बखुबी नीभायेगे.. तभी तो पुनो दीदीने आपको जडी बुटी पीलाइ हे.. हें..हें..हें.. (हिंमत करते सर्मसार होते धीरेसे) देवरजी.. क्या.. मे आपको कुछ.. मतलब.. मे आपकी कुछ.. पर्सनल बाते पुछ सकती हु..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. क्या आपको लगता हे..? की अब हमारे बीच कोइ पर्सनल या फीर पर्दा हे..? आप सबके लीये तो मेरी जींदगी खुली कीताब हे.. आप दोनोके बीच मेरा कुछ भी पर्सनल नही हे.. कमसे कम आप ओर पुनो दीदीके के सामने तो बीलकुल नही.. तो दोनोको सबकुछ पुछनेका हक हे.. तो बीन्दास्त पुछीये..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) देवरजी.. थेन्क्स.. पता नही कैसे पुछु..? वो.. वो.. आइ मीन.. क्या आप बता सकते हे..? की आपके अंदर सचमे इतना बडा बदलाव आगया हे..? आइ मीन.. नीचे.. वो.. बुरा मत मानीयेगा.. क्युकी मे अ‍ेक डोक्टर हु.. तो मुजे ये जडी बुटीओपे इतना यकीन नही होता.. इसीलीये पुछ रही हु..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) बस..? सीर्फ इतनीसी बात जाननेके लीये पुछ रही थी..? हां भाभी.. हमारे गुरुजीने दि हुइ जडी बुटीया कभी गलत नही होती.. मेरे अंदर सचमे बहुत बडा बदलाव आगया हे.. जो मेने भी कल्पना नही की थी.. भाभी.. मे इस बदलावसे बहुत खुस हु..

सृती : (थोडा जुठ बोलते धीरेसे) देवरजी.. प्लीज.. बुरा मत मानीयेगा.. ओर इसे गलत भी मत समजना.. क्युकी मे अ‍ेक रीसर्च कर रही हु.. तो अ‍ेक डोक्टर होनेके नाते मुजे ये बात कन्फोर्म करनी हे.. तो क्या इनमे आप मेरी मदद कर सकते हे..? प्लीज..

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. जरुर.. कहीयेनां.. इसमे मे इतना सरमानेकी क्या जरुरत हे.. कहीये.. मे आपकी क्या मदद कर सकता हु..

सृती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते नजरे चुराते धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. क्या मे अ‍ेक डोक्टर होनेके नाते इसे अ‍ेक बार देख सकती हु..?

लखन : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. ये आप क्या बोल रही हे..? आप मेरी भाभी हे.. मे अ‍ैसा नही कर सकता..

सृती : (मुस्कुराते थोडासा जुठ बोलते) अरे..? नही नही.. देवरजी.. आप गलत समज रहे हे.. इसमे सरमाना क्या..? लेकीन यहा या घरपे नही.. मेरी क्लीनीकपे.. ओर भाभी हु तो क्या हुआ.. मे अ‍ेक डोक्टर भी तो हु.. मेरा तो काम ही यही हे.. अभी तो कहा.. मे इसमे रीसर्च भी कर रही हु..

तो मुजे कइ बार कोन्फरन्समे जाना होता हे.. तो मे दावेके साथ सबके सामने अपनी बात रख सकती हु.. इसीलीये आपको केह रही थी.. इसमे मेरा कोइ अलग इन्टेन्स नही हे.. तो प्लीज.. आप कुछ गलत मत सोचना.. आपका ये दीखाकर उल्टा आप मेरी रीसर्चमे मदद करोगे.. प्लीज..

लखन : (सरमाते) नही भाभी.. आपको नही पता अ‍ैसी बातोमे मे बहुत जल्दी कंट्रोल खो देता हु.. तभी तो आप दोनोके साथ वो हादसा होगया.. जीसका खामीयाजा मे अभी तक भुगत रहा हु.. तो भाभी.. प्लीज.. मत कीजीये ये जीद..

सृती : (हाथसे बाजी नीकलते) अरे..? यार मे केह तो रही हु.. की इस बार आपकी कोइ गलती नही होगी.. मुजपे यकीन कीजीये.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर बाय चान्स आप कंट्रोल नही करपाये.. तो मे आपको दोस नही दुगी.. बस..? अब तो हां केह दीजीये..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. तो फीर इसमे मेरी कोइ गलती नही होगी.. ओर देखना कही कीसीको पता ना चल जाये.. क्युकी अ‍ेक बार आप दोनोकी मस्तीया करते मे फस चुका हु.. अब मे आप दोनोकी नजरोमे दुबारा गीरना नही चाहता..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप फीकर मत कीजीये.. ओर मे भी मेरी रीसर्चके लीये केह रही हु.. ओर सीर्फ देखना ही नही.. बस.. साथमे कुछ टेस्ट भी करने हे.. ओर आपको कीसने कहा..? की आप हमारी नजरोमे गीर गये हो..? आपने हमारे

साथ इतना कुछ कीया.. तो क्या तब मेने कोइ अ‍ेतराज कीया था..? ये तो पुनम दीदीने आपको चाटा मार दीया.. वरना मैने कहा आपको कुछ कहा था..? इसमे मेरी क्या गलती थी..? आप फीकर मत करो.. ये बात सीर्फ मेरे तक ही सीमीत रहेगी.. ओके..?

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते धीरेसे) ठीक हे भाभी.. जब आप कहोगी मे क्लीनीकपे आजाउगा.. भाभी.. मुजे आपसे अ‍ेक बात जाननी हे.. तो फीर उस दिन पुजोदीदीकी तराह आपने क्यु अ‍ेतराज नही कीया..? आप भी तो मेरी भाभी हो.. कोइ खास वजह..?

सृती : (थोडी सकपकाते सरमाकर धीरेसे) देवरजी.. वो.. वो.. मैने अभी आपको कहा तो था.. की अ‍ेकतो आप हमारे चहीते देवर हो.. तो भाभी देवरमे कभी कभी अ‍ैसी थोडीसी मस्तीया तो होती ही हे.. ओर दुसरा.. अब हमने सब कुछ स्वीकार करलीया हे.. बस.. मुजे इनमे थोडा सोचनेमे टाइम लगेगा.. मुजे इतना पता हे.. इसमे आपकी कोइ गलती नही थी.. बस..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वही तो.. अगर मेने गलत कीया ही था.. तो फीर आपने मुजे क्यु नही डाटा..? आप भी तो मेरी भाभी हो.. क्या भाभी देवरमे अ‍ैसी मस्तीया जायज हे..? फीर भी अगर आपको अ‍ेतराज नही था तो फीर पुनमदीदी ने क्यु अ‍ेतराज कीया..?

सृती : (मुस्कुराते) देवरजी.. जायज हे या नाजायज हे.. वोतो मुजे नही पता.. कहानां पुनोदीदीसे गलती होगइ.. अभी आप हीने तो कहा.. की उसने डरकी वजहसे कीया.. उस दिन वो सब इतनी जल्द बाजीमे होगया.. अब तो वो भी पछता रही हे.. ओर इसके

लीये बहुत आंसु भी बहा चुकी हे.. तो क्या इतनीसी गलतीके लीये उनको इतनी बडी सजा दोगे..? वो आपकी माफी मांगनेके लीये भी तैयार हे.. कहोतो मे आपकी उनसे फोनपे बात करवाउ..? वरना उनकी ओरसे मे ही आपकी माफी मांग लेती हु.. बस..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही भाभी.. इसमे आप क्यु माफी मांगती हो..? इनकी कोइ आवस्यक्ता नही हे.. गभराइअ‍े नही.. कल मे खुद दीदीसे बात कर लुगा.. अब मुजे आप दोनोसे कोइ गीला सीकवा नही हे.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? जो बात मुजे भाभीमां ने कही.. इस बदलावको मे भी स्वीकार करनेमे डर रहा हु.. क्या आपकी नजरोमे ये सब सही हे..?

सृती : (समसर होते धीरेसे) देवरजी.. सही क्या हे.. ओर गलत क्या हे वो तो मुजे नही पता.. लेकीन इतना बता सकती हु.. मंजु ओर पुनोदीदी के कहेने मुताबीक हम सभी कोइ सामान्य इन्सान नही हे.. ओर दो तीन पीढी पहेलेकी बात होती तो ये सब

मुमकीन ही नही था.. फीर भी यही सचाइ हे.. की हमारे खानदानके सभी मर्दोने अपनी बहेनसे सादी की हे.. ओर इसके लीये हमारे खानदानको उनकी कींमत भी चुकानी पडी.. मंजु केह रही थी.. काफी सालो तक हमारा गांवके साथ कोइ रीलेशन नही था..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. वो सभी बाते मे जानता हु.. मे तो सीर्फ आपकी राय ले रहा हु.. की क्या ये सब सही हे..?

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) अगर मेरी राय जाननी हे.. तो हां.. मेरी नजरमे सब सही हे.. क्युकी आजके जमानेमे तो अ‍ैसा ना जाने क्या क्या देखनेको मील रहा हे.. ओर हमारे इस बदलावका मक्सद भी कुछ ओर हे.. तो फीर इस बदलाव मे गलत भी क्या हे..?

क्युकी आपके भैयाने कीतनी सारी सादीया करली हे.. तो अब उनके पास हमारे लीये टाइम ही नही होगा.. तो मुजे मंजुदीदीकी बात सही लगी.. ओर मैने तो मेरी क्लीनीकपे अ‍ैसा बहुत कुछ देखा हे.. जो आप सोच भी नही सकते..

लखन : (मुस्कुराते) यानी की..? क्या मुजे खुलकर बता सकती हे.. आपने क्या देखा..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां.. अब आपसे क्या छीपाना.. देवरजी मैने तो कुछ रीस्ते अ‍ैसे भी देखे हे जीसके बारेमे हम सोच भी नही सकते.. मेरे यहा बहुत सारी लडकीया ओर ओरते अ‍ेबोर्सनके लीये आती हे.. मे तो अ‍ैसा काम नही करती.. इसी

लीये उनको मेरी सहेलीके वहा भेज देती हु.. वो अ‍ैसा गैर कानुनी काम करती हे.. क्युकी उनका पती अ‍ेक पोलीटीसयन हे.. वो मेरी क्लासमेट थी.. वो आज भी मेरी बहुत अच्छी दोस्त हे.. उनकी हर बाते मुजसे सेर करती हे..
 
लखन : (थोडी मस्तीया करते) अच्छा..? तो फीर उनको अ‍ैसे टेस्ट करनेकी जरुरत नही पडती..? कभी मुलाकात करवाइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) लखन.. अ‍ेक मारुगीनां.. आप अपनी हरकतोसे बाज नही आओगे.. कभी उनके पतीको देखा हे..?

लखन : (हसते) ओह.. सोरी सोरी भाभी.. मे तो मजाक कर रहा था.. लेकीन बताइअ‍ेनां.. आपके पास कौन कौन से रीस्ते आते हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) हां.. अ‍ेक तो हमारे गांवके ही थे.. जो आप उनको अच्छी तराह जानते हे.. क्या नाम हे..? हां.. बनवारीलाल.. वो खुद उनकी बहुको लेकर आते थे.. वो तीन चार बार अपनी बहुका ओबेर्सन करवा चुके हे.. फीर अ‍ेक तो हमारे रमेशभाइ खुद जया भाभीको लेकर आये थे.. तब मेरी आपके भाइके साथ सादी नही हुइ थी.. तो मुजे नही पहेचानते थे.. फीर अ‍ैसे कइ लोग हे.. जो अभी मेने हमारे गांवमे देखा हे.. लेकीन उनको पहेचानती नही..

लखन : (जोरोसे हसते) भाभी.. आपके पास तो गांवकी पुरी कुंडली हे.. हें..हें..हें.. ओर कौन कौन आता था..?

सृती : (हसते) यार.. कहानां.. सबको नही पहेचानती.. वैसे अ‍ैसी बातोमे तो बडा इन्ट्र्रेस हे आपको..? हें..हें..हें.. ठीक हे.. दुसरा अ‍ेक आदमी था.. वो कइ बार अपनी भतीजीको लेकर आता था.. तो अ‍ेक आपकी ही उमरका लडका उनकी चाचीको लेकर आया था..

कोइ अपनी मौसीको तो कोइ अपनी बुआ या मामीको लेकर आते हे.. ओर ज्यादातर लडके उनकी सगी बहेन.. या फीर कजीन बहेनको लेकर ही आते हे.. जब मेरी सहेली उसे अकेलेमे चेक करते पुलीसका डर दीखाती.. तो सब सच बात उगल देती.. पता नही सब आपसी रीस्तोमे कैसे जीस्मानी तालुकात रखते हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वो बात आप नही समजेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते) अच्छा..? तो फीर आपही समजाइअ‍ेनां.. लोग आपसमे रीस्ता क्यु रखते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अ‍ेक तो जवान होते ही सबको अपने जीस्मकी आग बुजानी होती हे.. तो बहार वालोसे आग बुजानेमे बदनामीका डर भी लगता हे.. ओर घरके रीस्तोमे अ‍ैसा कोइ डर नही.. दोनो आसानीसे अपने ही घरपे मील सकते हे.. दुसरा.. हमारा ह्युमन नेचर हे.. की जो चीज हमे जींदगीमे कभी नही मीलने वाली.. उस चीजको पानेके प्रती हमारा आकर्सण ज्यादा होता हे..

सृती : (हसते) मतलब..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) भाभी.. हमे पता हे हमे हमारी बहेन हो.. या फीर भाभी मामी चाची.. बुआ.. ये सभी रीस्ते कभी हमे अपनी जीस्मानी आग बुजानेके काम नही आयेगे.. ओर हम सबसे ज्यादा प्यारभी तो इसीसे करते हे.. तो सबसे पहेले हमारी चाहत इसी रोस्तोमे होती हे.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. आपको भी पता चल जायेगा.. क्युकी अब तो हमारे ही गांवमे आपको अ‍ैसे कइ रीस्ते दीखनेको मीलेगे..

सृती : (सरमाते हसते कातील नजरसे) हें..हें..हें.. देवरजी.. आपतो बडी इन्ट्रेस्टींग बाते करते हे.. हें..हें..हें.. क्या अभी आपकी नजरोमे अ‍ैसा कोइ रीस्ता हे..? तो बताइअ‍ेनां..

लखन : (सरमाते हसते) हां भाभी.. बहुत सारे रीस्ते हे.. अ‍ेक तो मेरा दोस्त मुना ओर श्रीधर.. जो अपनी बहेनको चाहता हे.. दुसरा वो बंसीको तो आप जानती हे.. जीनकी सादीमे हम गये थे.. वो उनकी व्धिरजा बुआ हे.. ओर वो उनकी बहेनसे भी सादी करना चाहता हे.. ओर साहीलसे तो आप मील ही चुकी हे.. उनके बारेम भी आपको सब पता हे.. ओर खुद हमारे भानु भाइने अपनी मामीसे सादी करली हे.. ओर कीतने रीस्ते दीखाउ आपको..? अब चलीये.. बहुत होगइ बाते.. वरना हम यही बेठे रहेगे..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) अरे हां.. चलीये.. आपसे बाते करनेमे बहुत मजा आया.. आपसे बाते करते समयका पता ही नही चलता.. चलीये.. हें..हें..हें..

फीर लखनने बील पे करदीया.. ओर दोनो बहार आगये.. तो सृती लखनके साथ ही चलने लगी.. ओर दोनो कारमे आकर बैठने लगे.. तभी सृतीको कुछ व्होमीट जैसा होने लगा.. तो वो कारके पास ही रुक गइ.. ओर व्होमीट करने लगी.. तो लखन सृतीकी हालत देखकर थोडा गभरा गया.. ओर दोडकर सृतीके पास आगया ओर उनकी पीठको सहेलाने लगा.. तब सृतीको उल्टीया करके थोडी राहत महेसुस हुइ..

लखन : (थोडी चीन्तासे) भाभी.. आप ठीक तो होनां..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे मे बीलकुल ठीक हु.. प्लीज.. अंदरसे थोडा पानी दोनां..

तो लखनने कारमे रखी पानीकी बोतल नीकालकर सृतीको देदी.. ओर सृतीने मुह साफ करके अपने आपको सही करलीया.. इतने दिनोसे वो देवायतके साथ सोती थी.. तब उनको कुछ आसंकाये होने लगी.. तो उसने फौरन अपने पर्ससे अ‍ेक गोली नीकालकर खाली.. ओर पानी पीलीया.. फीर दोनो कारमे बैठ गये.. तब सृती लखनकी ओर देखकर बहुत ही सरमाने लगी.. ओर सरमाके मुस्कुराने लगी.. तबतक लखन उनकी ओर देखता ही रहा.. तभी..

लखन : (थोडी चीन्तासे) भाभी.. क्या आपकी तबीयत ठीक नही हे..? तो फीर हम कीसी होस्पीटलपे चलते हे..? हम स्कुटर खरीदने बादमे आयेगे..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप कारको कीसी शो रुममे ही ले लीजीये.. मे अब ठीक हु.. इसमे इतना गभरानेकी जरुरत नही हे.. चलीये..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. आपको उल्टीया हुइ हे.. तो फीर आपको उल्टीया क्यु हइ..? कुछ उल्टा सीधा खा लीयाथा क्या..? आप क्लीनीकपे बहारका खाना मंगवाकर खाती हेनां..? आजसे वो सब बंध..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लखन.. वो.. वो सब मे कल देख लुगी.. प्लीज.. चलीयेनां.. आप मेरी कीतनी चीन्ता करते हो..? अरे बाबा.. मुजे कुछ नही हुआ.. चलो.. हें..हें..हें..

लखन : भाभी.. जो भी हो.. अब आप घरपे ही खाना खाने आयेगी.. केह देता हु..

सृती : (साथ चलते) अरे हां बाबा हां.. अब घरपे खाना खाउगी बस..? अब चलो.. शो रुमपे लेलो..

कहा तो लखनने मुस्कुराते कारको अ‍ेक शो रुमपे लेली.. वहा दोनोने अ‍ेक अ‍ेक्टीवा स्कुटर सीलेक्ट करलीया.. तो सृती लखनकी कलर चोइस देखकर बहुत ही खुस होगइ.. क्युकी वो इनका भी फेरवीरट कलर था.. फीर लखनने पेमेन्ट करदीया.. ओर कुछ रजीस्ट्रेशनके कागजातपे दस्त खत करदीया.. तब सृतीने अपनी कार लेली.. ओर लखन स्कुटर लेकर उनके पीछे चलने लगा.. ओर रास्तेमे कुछ मीठाइआ लेली..

ओर दोनो घरपे आगये.. तो लता रजीया रमा ओर नीलम चारो ही खुस होकर बहार नीकल गइ.. ओर नये स्कुटरको देखने लगी.. फीर सृतीने लताको पीछे बीठाकर स्कुटरका चकर लगाया.. तो लता बहुत ही खुस होगइ.. फीर लताके कहेने पे लखनने रजीयाको पीछे बीठाया.. तो रजीया बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनने उनको भी चकर लगवाया तो रजीया भी बहुत खुस होगइ..

फीर लखनने रमा ओर नीलुको भी चकर लगवाया तो दोनो भी बहुत खुस होगइ.. तभी सृतीने स्कुटर लेलीया.. ओर उसने सरमाते लखनको पीछे बैठनेके लीये कहा.. तो लखन मुस्कुराते सृतीके पीछे बैठ गया.. तो सृती जान बुजकर थोडा पीछे हट गइ.. तब उनको पीछे लखनका लंड महेसुस होने लगा.. तो वो बहुत ही अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर अ‍ेक लंबी चकर लगाने लेगइ..

सृती अब हर हालमे लखनको रीजाना चाहती थी.. उसने कोफी सोपमे लखनके लंडको देखनेकी बात भी कहेदी.. इस वक्त उनके पीछवाडेमे लखनका लंड फसा हुआ था.. जीसे सृती बहुत ही उतेजीत होते अ‍ेन्जोय करने लगी.. तो लखन भी सृतीकी नीयतको पहेचान चुका था.. तो वो भी सृतीके साथ मजे लेने लगा.. उसने धिरेसे सृतीकी कमरमे हाथ डालकर सृतीको पेटसे पकडलीया..

तो सृती बहुत ही सर्मसार होते हसने लगी.. उनके तनमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोडके चली गइ.. ओर उनकी चुत गीली होने लगी.. तभी सृतीने अपने कंधेपे कुछ भारीपान महेसुस हुआ.. ओर उसने अ‍ेक बार पीछे मुडकर देखा तो लखन उनसे पुरी तराह चीपकते सृतीके कंधेपे सर रखकर बैठा अ‍ेन्जोय कर रहा था.. तो सृती भी अ‍ेक्साइटेड होते लखनकी सभी हरकतोको अन्जोय कर रही थी..

आज लखन ओर सृती पुरे रोमेन्टीक मुड मे थे.. फीर दोनो वापस घरपे आगये.. ओर अंदर चले गये.. फीर सृतीने सबका मुह मीठा करवाया.. तब लखनके मुहमे मीठाइआ देते सृती लखनकी ओर कातीलाना नजरोसे देखते हसती रही.. तो लखनने भी मीठाइका पुरा पीस सृतीके मुहमे ठुस दिया.. तो सृती जोरोसे हसते मीठाइ मुहसे बहार नीकालने लगी.. तो लखनने उनके मुहको पकडकर अपनी बाहोमे दबोच लीया..

ओर मीठाइका पुरा पीस खीला दीया ओर उनका मुह मीठा करवाया.. तब सृती बहुत ही सरमाइ.. ओर कातील नजरोसे देखते हसते हुअ‍े लखनको बाजुमे अ‍ेक मुका भी मार दीया.. फीर लखनने नीलम ओर रमाके मुहमे भी मीठाइ खीलाइ.. तो रमा ओर नीलम भी बहुत सरमाइ.. तब लता भी लखन ओर सृतीकी मस्तीया देखते हसती रही.. फीर लखनने लता ओर रजीयाको भी मीठाइया खीलाइ.. तक रजीयाने राधीकाका खाना भी बनालीया था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१७

ओर ओर मीठाइका पुरा पीस खीला दीया ओर उनका मुह मीठा करवाया.. तब सृती बहुत ही सरमाइ.. ओर कातील नजरोसे देखते हसते हुअ‍े लखनको बाजुमे अ‍ेक मुका भी मार दीया.. फीर लखनने नीलम ओर रमाके मुहमे भी मीठाइ खीलाइ.. तो रमा ओर नीलम भी बहुत सरमाइ.. तब लता भी लखन ओर सृतीकी मस्तीया देखते हसती रही.. फीर लखनने लता ओर रजीयाको भी मीठाइया खीलाइ.. तक रजीयाने राधीकाका खाना भी बनालीया था.... अब आगे

तो वो लखनको राधीकाके लीये टीफीन देती हे.. आज रमाने पुरा दिन घरको सजानेमे लताकी मदद की थी.. ओर उपरसे पुनमके कहेनेपे लता रमाको लखनके साथ अकेलेमे टाइम स्पेन्ड करवाना चाहती थी.. तो लता लखनको अपने साथ रमा भाभीको भी साथ लेजानेको कहेती हे.. ताकी उसे बहार घुमकर थोडा चेन्ज भी मीले.. ओर लखनके साथ अकेलेमे समय भी बता सके.. तो रमा भाभी लताकी बात सुनकर बहुत खुस होते लखनके साथ जानेको राजी होगइ..

लता : (लखनकी ओर कातील नजरोसे स्माइल करते) लखन.. आप रमा भाभीको साथ लेजाओ.. उनको हमारी नइ सौतनसे भी मीलवा देना.. ओर इनको कही घुमा भी देना.. आज सारा दिन घरमे काम करते बोर होगइ होगी.. क्यु भाभी..? हें..हें..हें..

रमा : (मौकेका फायदा उठाते) हां.. अगर हमारे जमाइ मुजे घुमाने लेजाये तो मे मना थोडीना करुगी..? हें..हें..हें.. चलीये मे भी आती हु.. आप थोडा इन्तजार कीजीये मे अभी चेन्ज करके आइ..

कहेते रमा जटसे अपने रुममे चली गइ.. ओर अपने आपको हल्कासा मेक अप करते सजाने लगी.. जैसे वो होस्पीटल नही.. अपने यारके साथ घुमने जा रही हो.. फीर कुछ ही देरमे वो तैयार होकर बहार आगइ.. तो सृतीने लखनको अपनी कारकी चाबी देदी.. तब नीलमको अपनी मम्मीको देखकर थोडी ज्वेलेसी फील होने लगी.. ओर लखन रमाको लेकर बहार चला गया.. तब लता ओर सृती.. दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने रहस्य भरी मुस्कान करने लगे..

लखन रमाके जाते ही सृती फ्रेस होने ओर चेन्ज करने उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर बाथरुममे जाते ही दरवाजा बंध करते उनके पीछे आंख बंध करते खडी होगइ.. आज लखनके साथ उसने कैसी कैसी बाते करली थी.. यहा तक उनको अपना लींग दीखानेके लीये भी केह दीया था.. ओर स्कुटर चलाते उनका लंड भी पीछे महेसुस करलीया.. तब लखन उनकी कमरमे हाथ डालकर कैसे इनके पेटको सहेला रहा था..





यही सब सोचते सृती सरमाकर मुस्कुराने लगी.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर पानीका रीसाव करते गीली होने लगी.. तब सृती बहुत ही सर्मसार होयइ.. फीर धीरेसे आयनेके सामने चली गइ.. ओर अपने आपको आयनेमे नीहारते अलग अलग पोज मे देखने लगी.. फीर अपने बुब्सपे हाथ रखते दुसरे हाथसे अपनी चुतको सहेलाने लगी.. आज लखनसे इतनी सारी बाते करते वो बहुत ही उतेजीत होगइ थी..

फीर भी सृतीने बडी मुस्कीलसे अपने आपको कंट्रोल कीया.. वो फ्रेस होते ही चेन्ज करके नीचे आगइ.. तो लता होलमे अकेली बैठी थी.. नीलम अपने रुममे थी ओर अपना होमवर्क करते अपनी मां रमाके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तभी रजीया सरमाती जटसे उपरकी मंजीलपे चली गइ.. तो सृती लताके पास आकर बैठ गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने हसने लगी.. तो लता सरमाते धीरेसे सृतीके पास सरकते आगइ.. ओर उनसे धीमी आवाजमे बात करने लगी..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी.. मेने रमा भाभीको इनके साथ भेजकर सही कीया हेनां..? क्युकी पुनो दीदीने मुजसे कहा था.. की इन दोनोको मीलनेका पुरा मौका देना हे.. तो मेने भेज दीया..

सृती : (मुस्कुराते) हां लता.. तुमने बीलकुल सही कीया.. ओर देख अभी पास ही नीलु इनके रुममे हे.. कही हमारी बात सुनकर उनको सक ना होजाये.. तो फीर हम उपर ही मेरे कमेरेमे बैठकर बात करते हे.. तु ये बता.. जो मंजु दीदीने मेरे देवरसे बदलावके बारेमे बात की.. उस बारेमे तुम दोनोके बीच कोइ चर्चा हुइ..?

लता : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. कल हम सुबह सब सामान लेने बाजार गये.. तब ही इस बारेमे हम दोनोके बीच चर्चा हुइ.. भाभी.. इनको सब पता हे.. की मैने उनसे सादी क्यु की.. उसने पुनम दीदीके साथ अपने प्यारको भी स्वीकार करलीया.. भाभी.. इस नीर्णयसे उनको कोइ अ‍ेतराज नही हे.. वो खुसी खुसी भाइके साथ मुजे बाटनेके लीये राजी हो गये हे..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) लता.. चलो.. अ‍ेक टेन्शन तो खतम होगइ.. वरना मुजे ओर पुनोदीदीको तेरी ही चीन्ता सता रही थी.. लता.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम तो इनकी बीवी हो.. तो क्या वाकइ इनका देवुसे बडा हो गया हे..? आज मुजे खुलकर बतानां.. उस दिन हमारी इतनी बात नही हुइ..

लता : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां भाभी.. अरे बापरे.. कीसी अजगरकी तराह होगया हे.. भाभी.. पहेले इनका इतना बडा नही था.. उस दिन अभी थोडासा फसाया ही था.. ओर मुजे इतनी जलन हुइ.. मे तो समजी मेरी मुनीया फट गइ हे.. भाभी.. कभी मौका मीले तो आप भी देख लेना.. क्युकी अब तो हमे सभी तराहकी छुट मील गइ हे.. अगर आप चाहो तो आप भी अजमा लेना.. हें..हें..हें..





सृती : (सर्मसार होकर अ‍ेक मुका मारते) अरे यार इतनी जल्दी..? अरे नही नही.. लता तु बहुत बीगड गइ हे.. भले ही मंजुने वो सब कहा हो.. वो मेरे देवर हे.. ओर हम अभी इसके लीये इतनी प्रिपेर भी नही हे..

लता : (धीरेसे हसते) ओ भाभी.. अब क्या सरमाना.. पुनो दीदीसे सुना नही..? की अब हमे चारोको ही सब कुछ सम्हालना हे.. तो फीर अब हमारे बीच कैसा पर्दा..? आज नही तो कल.. ये सब तो अब होने ही वाला हे.. भाभी.. अब आप भी मेरी तराह सब खुलकर बाते कीजीये.. अब हमे अ‍ेक दुसरेसे सरमानेकी कोइ जरुरत नही हे.. अब जब भी लखनको मीलनेका मन करे.. मील लीजीयेगा.. हमे अब कीसी तराहका कोइ अ‍ेतराज नही करना.. मे भी तो बडे भैयासे मीलुगी..

सृती : (सर्मसार होते हसते धीरेसे) कमीनी तो फीर बोलना तुजे हमारे पतीको मीलनेकी जल्दी हे.. अरे हां लता.. भैयासे याद आया.. मंजुने कहा हे.. की यहाका सब सेट होजाये.. तो तुजे वापस गांव जाना हे.. हम घरसे नीकले तब अ‍ैसा कुछ मंजु केह रही थी..

लता : (मनमे खुस होते) हां भाभी.. बस.. इस बारेमे अ‍ेक बार लखनसे बात करनी हे.. ओर मे चाहती हु.. इस बारेमे मंजु दीदी खुद लखनसे बात करले.. मेतो जानेके लीये तैयार हु.. बस.. फीर आप सम्हाल लेना मेरे लखनको.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) अरे यार.. तुमने तो पुरी तैयारीया करली हे.. लता.. थेन्क्स.. तुम कीतनी समजदार होगइ हो.. लेकीन अभी नही.. जब वक्त आयेगा तब मे उनसे मील लुगी.. फील हाल तो हम दोनोको वो भाइ बहेनके बीच सुलह करवानी हे..

लता : (आस्चर्यसे देखते धीरेस) भाइ बहेन के बीच सुलह..? भाभी.. आप क्या केह रही हो..? क्या हुआ दोनोके बीच..? कुछ जगडा बगडा तो नही हुआ..? मुजे तो कुछ पता ही नही हे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) लता.. प्लीज.. कीसीको कहेना नही.. तुम भी मेरी तराह खुली सोच वाली हो इसीलीये तुजे बता रही हु.. चल हम दोनो उपर मेरे रुममे जाकर बैठते हे ओर वही बात करते हे..? तबतक देवरजी ओर रमा भाभी भी आजायेगे.. फीर हम साथमे डीनर कर लेगे..

लता : (मुस्कुराते खडी होते धीरेसे) हां भाभी चलीये.. यहा बात करना थोडा खतरा भी हे.. तबतक रमा भाभी भी आजाअ‍ेगी..

सृती : (हसते साथ चलते धीरेसे) अरे हां.. रमा भाभीसे याद आया.. लता तुमने कुछ नोटीस कीया..? तुमने उनको देवरजीके साथ जानेको कहा तो कैसे खुस होगइ.. ओर तैयार होकर पटाका बनके चली गइ.. अब देवरजीको कहेकर इनका भी उधार करवादो.. मे कमीनीकी चीखे सुनना चाहती हु.. हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. चीखेतो मेभी सुनना चाहती हु.. लेकीन इस कमीनीकी.. क्युकी ये भी हमारी पुनोदीदीका घर उजाडनेके तुली हुइ हे.. क्या आपको सीर्फ चीखे ही सुननी हे..? मे तो इनका पुरा लाइव सो भी देखना चाहती हु.. हें..हें..हें.. देखु तो सही मेरा पती कैसे मेरी भाभी भतीजीकी चुतको फाडता हे.. कमीनीकी नजर हमारी जायदाद पे हे..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) लता.. लेकीन हम देखेगे कैसे..? क्या बहारकी ओर कुछ खीडकी बीडकी नही हे..? अभी वो अपने कमरेमे भी नही हे.. तो जरा देख तो ले..

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. चलीये.. हम देखकर आते हे.. वैसे भी यहा बात करनेमे थोडा खतरा हे.. वो नीलु भी यही हे.. चलीये..

कहेते दोनो रमाके रुममे चली गइ.. देखा तो बहारकी साइड खीडकी लगी हुइ थी.. तो दोनो देखकर खुस होगइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखते हसने लगी.. फीर लताने जाकर खीडकीकी कुंडी खोलदी.. ओर हल्कासा धका मारते खीडकीको थोडासा खोल दीया.. फीर आगे पर्दा लगालीया ताकी खुली खीडकी ना दीखे.. फीर बहार नीकलकर धीरे धीरे बाते करते उपरकी मंजीलपे चली गइ..
 
आम तोरपे उपर कोइ नही आता था.. तो जब भी लता नीचे होती तब दरवाजा खुला ही रखती.. तो आज भी रजीया दरवाजा खुला रखकर अपनी चुतपे पेड लगा रही थी.. दरसल रजीयाका पीरीयड सुरु हो गया था.. तभी तो वो जटसे उपरकी मंजीलपे चली गइ थी.. तब लता ओर सृतीने उसे देखलीया.. तो दोनो रजीयाके पास चली गइ.. तब रजीया दोनोको देखकर बहुत ही सर्मसार होने लगी.. तभी..

लता : (मुस्कुराते) दीदी क्या हुआ..? कुछ तकलीफ तो नही..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो अचानक पीरीयड सुरु होगया.. तो इधर आगइ..

सृती : (मुस्कुराते) रजीया दीदी तो फीर अब आप आराम करो.. आपका खाना मे यहा देजाउगी.. ओर अब खाना बनानेकी फीकर मत करना.. वो सब मे ओर लता देख लेगे.. ओके..?

रजीया : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप खाना मत लाना.. मे वही आजाउगी..

लता : (मुस्कुराते) रजीया दीदी आप सरमाओ मत.. सृती भाभी सही केह रही हे.. आप आराम करलो.. दो दिनके बाद काम करना.. वरना कमजोरी आजायेगी..

रजीया : (सरमाते मुस्कुराते) जी दीदी.. तो फीर मे यही हु..

सृती : रजीया दीदी.. हम दोनो मेरे रुममे हे.. कुछ जरुरी बाते करनी हे.. अगर देवरजी आये तो आवाज लगाना हम डीनर कर लेगे..

रजीया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. आप जाइअ‍े वो आयेगे तो मे आपको बुला लुगी..

कहा तो सृती ओर लता सृतीके रुममे चली गइ.. तो दुसरी ओर लखन पहेले सीधा ही होस्पीटलपे चला गया.. ओर वहा राधीकाको खाना देदीया.. ओर रमाका परीचय करवाया तब राधीका सरमाकर नमस्ते कहेने लगी.. फीर लखनने वहा राधीकाकी मम्मीसे खुब बातेकी ओर उनको बहुत हसाया.. तो राधीका खाना खाते उन दोनोको देखकर बहुत खुस होगइ.. फीर जब राधीकाने खाना खालीया.. तो..

राधीका : (सरमाते धीरेसे) लखन.. वो.. आप होस्टेलपे गये थे..? वहा कोइ दिकत तो नही..?

लखन : (मुस्कुराते) नही राधु.. तुम वहाकी फीकर मत करो.. मे फुरसतमे वही रहुगा.. मुजे तो सीर्फ फोनसे ही बीजनेस देखना हे.. जब मम्मी ठीक होजाये ओर तुम हमारे घरपे आजाओ.. तब मे हमारी ओफीसपे जाउगा.. तुम मम्मीका खयाल रखो..

राधीका : (आंख गीली करते) लखन.. थेन्क्स.. वरना मे सब कुछ कैसे सम्हालती..?

लखन : (थोडा गुस्से होते) अ‍ेक जापट लगाउगानां.. अपने पतीको थेन्क्स कहेती हो..? सरम भी नही आती.. अ‍ेक बार मम्मीको घरपे आनेदो.. फीर हम दोनो मीलकर तुजे खुब पीटेगे.. क्यु मम्मी..? हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) अरे राधीका दीदी.. आप फीकर मत करो.. आप भी मेरी ननंद हो.. बस.. कल अ‍ेक दिनका काम हे.. तो घरपे सब सेट होजायेगा.. फीर मे भी यहा माजीकी देखभाल करने आजाउगी.. तो आप होस्टेलपे चली जाना..

राधीका : (सरमाकर हसते) जी भाभी.. लेकीन सायद अ‍ेक दो दिनमे तो मम्मीको भी यहासे छुटी मील जायेगी.. तो फीर कोइ दिकत नही हे..

लखन : नही.. अगर छुटी मील भी जाये तो भी मम्मीजीको कुछ दिन हमारे घरपे ले जायेगे.. वहा सृती भाभी लता रमा भाभी सबलोग होगे.. तो मम्मीजी की देख भाल होजायेगी.. जब मम्मीजी बीलकुल ठीक होजाये.. तब हम सोचेगे.. की क्या करना हे.. अभी तो तुजे बोला हे इतना ही करना हे..

राधीका : (सरमाते हसते) जी.. लखन.. ये लीजीये हमारी ओफीसकी अ‍ेक चाबी आपके पास रखीये.. ओर वो रसोयपे ध्यान रखीयेगा.. लडकीओको अच्छा खाना मील रहा हे की नही..

लखन : (मुस्कुराते चाबी लेते) ठीक हे.. तुम वहाकी फीकर मत करना वो सब मे देख लुगा.. चलो हम चलते हे..

रमा : (जानेके लीये खडी होते) राधु दीदी मे परसो आउगी.. ओर यही रहुगी.. आप फीकर मत करना..

राधीका : (सरमाकर धीरेसे) जी भाभी.. बाय..

कहातो लखन ओर रमा बाय बोलकर वहासे नीकल गये.. तब साम ढलनेको आइ थी.. दोनो कारमे आकर बैठ गये.. तब रमा बहुत ही सरमाने लगी.. कारके अंदर बैठते ही लखनने रमाकी जांगोपे हाथ रख दीया.. तो रमाके तनसे बीजलीकी तराह करंट दोडने लगा.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनसे नजरे चुराते मुस्कुराने लगी.. ओर उसने हिंमत करते लखनके हाथपे हाथ रख दीया..





लखन : भाभी.. चलोना मुजे आपसे प्यार करना हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. यहा नही प्लीज.. कोइ देख लेगा.. पहेले आप कही जाने दीजीये..

लखन : (हाथ हटाते मुस्कुराते) भाभी.. पहेले कहा जाना हे..? चलो.. पहेले कही घुमकर आते हे.. फीर हमारे पास अ‍ेक जगाह हे.. हम वही चले जायेगे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. तो पहेले वही ले लीजीयेनां.. अभी खानेका टाइम भी होगया हे.. तो घरपे सबलोग हमारा इन्तजार करते होगे.. हम कल परसो फुरसतमे कही घुमने जायेगे..

लखन : (मुस्कुराते कार चलाते) ठीक हे भाभी.. मे तो आपके साथ समय बीताना चाहता था.. तो आज हमे वही चले जाते हे.. ये राधुकी होस्टेल ही हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. देखनां.. वहा कोइ खतरा तो नही हेनां..

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही भाभी.. वहा उनकी ओफीसमे अ‍ेक पर्सनल कमरा हे.. मे ओर राधु वही मीलते थे..क्या भानु भाइका फोन बोन आता हेकी नही..?

रमा : (थोडी नीरास होते) नही.. लखनजी.. अब उनको तो हमारी कुछ फीकर ही नही हे.. जबसे आपके यहा आइ हु.. तबसे उन्होने मुजे अ‍ेक फोन भी नही कीया.. पता नही वो अकेले कैसे रहेते होगे.. अ‍ेक आप दोनो भाइ हो.. जो अपनी कीसी भी बीवीओको छोडते ही नही हो.. ओर अ‍ेक आपके भाइ.. जो हमारी खबर तक नही लेते..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. अब मे हुनां.. अब मे आपका खयाल रखुगा..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) लखनजी.. बस.. अब तो हम मां बेटीको आपहीसे उमीद हे.. कास हमारी जींदगीमे कोइ आप जैसा पती होते.. जो अपनी बीवीओको खुस रखते हे..

लखन : (सामने देखते) भाभी.. हम मां बेटीसे मतलब..? क्या वो नीलुका भी खयाल नही रखते..?

रमा : (गलतीका अहेसास होते ही) अरे नही नही.. खयाल तो हम दोनोका रखते हे.. हम मां बेटी. मतलब.. वो नीलुसे ज्यादा बात नही करते.. लखनजी.. बस अ‍ेक ही चीन्ता हे.. नीलुको भी आपके जैसा प्यार करने वाला पती मील जाये तो मेरी चीन्ता ही खतम होजायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. जरुर मील जायेगा.. मे ओर लता हेनां.. ओर वैसे भी आपने अभी मेरा प्यार देखा ही कहा..? देखना अ‍ेक बार हम दोनो मीलेगे तब आप मेरी दिवानी होजायेगी.. अ‍ेक बार चलीये तो सही..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) लखनजी.. प्लीज.. अभी ज्यादा कुछ नही.. सीर्फ उपर उपरसे.. क्युकी हमे जल्दी घरपे वापस भी जाना हे.. दो दिन होगये.. आप तो आते ही नही.. मे तो रातमे भी दरवाजा खुला रखती हु.. मत भुलो मे यहा सीर्फ आपके लीये आइ हु.. फीर मे रातमे आपका इन्तजार करते नीलुके साथ सो जाती हु..

लखन : (मुस्कुराते बुब्सको दबाते) भाभी.. आज आप अपने कमरेमे ही रहेना.. मे देर रात आजाउगा.. फीर हम दोनो पुरी रात प्यार करेगे.. आखीर आज हम दोनोका मीलन होही जायेगा.. फीकर मत करो..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. मैने सुना हे आपको कुछ जडी बुटी दी गइ हे.. जीनकी वजहसे आपका काफी बडा लग रहा हे.. तो मुजे कोइ तकलीफ तो नही होगीनां..? देखना बाबा मेरी ननंदको हमपे सक ना होजाये..

लखन : (हसते चुटकी लेते) भाभी.. मेरा क्या बडा हो गया हे..? मतलब..? क्या बडा होगया हे..?

रमा : (सर्मसार होते नजरे चुराते) चलो. हटो बदमास.. मुजे नही पता.. आप बहुत गंदे हो.. जैसे आपको पता ही नही हे..

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) अरे भाभी बताइअ‍ेना.. अब हम दोनोके बीच कैसा पर्दा..? हम आपसमे प्यारजो करते हे.. आप मेरी इतनीसी बात नही मानेगी..? बताइअ‍ेना..?

रमा : (बहुत ही सर्मसार होते कारकी बहारकी ओर देखते मुस्कुराते) नही..

लखन : (मुस्कुराते) क्या नही..? भाभी.. अ‍ैसे सरमाइअ‍े मत.. आपको मेरी कसम.. बताइअ‍े..

रमा : (थोडा नाराज होते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) लखनजी.. आप बहुत गंदे हो.. इतनीसी बातमे कोइ कसम देता हे क्या..? जाओ मे आपसे बात नही करती.. कटी..

लखन : (हसते) अरे.. आपतो नाराज होगइ.. ठीक हे मे कसम नही देता.. अब तो कहीये.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते हसते) मतलब आप नही मानोगे..? लतादीदी सही केह रही थी.. आप बहुत जीदी हो.. ठीक हे.. मे वो.. वो.. आपके सुसु करनेकी जगाहकी बात कर रही थी..

लखन : (चुटकी लेते हसते) भाभी.. इसका भी कोइ नाम तो होगा.. बताइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

रमा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) आप बहुत कमीने हो.. मुजसे नाम बुलवाकर ही मानोगे.. वो.. वो.. मे.. मे.. आपके लं..ड..की बात कर रही थी.. बस.. अबतो तसली मील गइ..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे भाभी.. फीकर मत करो.. हम प्यारसे करेगे.. भाभी.. अभी हम जा रहे हे.. तो वही देख लेना.. मुजे भी आपसे मीलनेका बहुत मन कर रहा हे.. आज आपको छोडने वाला नही हु..

रमा : (सरमाते कातील नजरोसे देखते) जोओजी.. मीलते तो हो नही.. लखनजी.. इसीलीये तो मे यहा आइ हु.. मे भी कही दिनोसे इसी दिनके इन्तेजारमे हु.. आपने तो मेरी रातोकी नींद ही हराम करके रखी हे.. मे भी आपसे मीलनेके लीये तरस रही हु.. लेकीन अभी नही.. हम रातमे फुरसतमे मीलन करेगे.. अभी सीर्फ उपर उपरसे.. चलीयेना हमे देर होजायेगी..

कहातो कारको लखनने सीधे ही राधीकाकी होस्टेलपे लेली.. तब सभी लडकीया खाना खाने डाइनींग रुममे थी.. तो लखन रमाको लेकर धीरेसे ओफीस खोलकर अंदर चला गया.. ओर दरवाजा लोक करके अंदरके कमरेमे चला गया.. ओर उनका दरवाजा बंध करके लाइट जलादी.. तो रमा दोनोका सीक्रेट रुम देखकर सर्मसार होगइ.. उनके दिलकी धडकन तेज होने लगी..
 
तभी लखनने पलटकार रमाको अपनी बाहोमे भर लीया.. तब रमा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने भी हिंमत करते लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनके सीनेमे सरको छुपा लीया.. तभी लखनने उनके चहेरेको पकडकर थोडा उंचा कीया ओर अपने चहेरेको रमाके होठोकी तरफ लेजाने लगा.. तब रमाने सरमाकर अपनी आंख बंध करली.. ओर लखनके होठोका इन्तजार करने लगी..





ओर लखनने धीरेसे रमाके होठो पे अपना होंठ रखदीया.. तो रमा सरसे पांव तक कांप गइ.. आज वो पहेली बार लखनके इतनी करीब थी.. ओर लखन उसे प्यार कर रहा था.. रमाने अपने कांपते होठोसे लखनके होठोको भीच लीया.. तो लखन अपनी जीभ नीकालकर रमाके मुहमे ठुसनेकी कोसीस करते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा छटपटाते बहुत ही उतेजीत होने लगी.. ओर उनकी चुत पानी बहाने लगी..

रमा : (कांपती आवाजमे धीरेसे) लखनजी.. प्लीज.. धीरेसे दबाइअ‍ेना.. दर्द होता हे..

कहातो लखन रमाके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. उनका लंड खडा होकर पेन्टके अंदर ही जटके मारने लगा.. वो भी अपने नये बीलमे घुसनेके लीये मचल रहा था.. तभी रमाको नीचे अपनी चुतपे लखनका लंड महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक कांपने लगी.. तभी लखनने रमाके चहेरेको चुमते बुब्ससे हाथ हटालीया ओर हाथको नीचे लेजाते रमाकी चुतको दबोच लीया.. तो रमा उछल पडी..

वो लखनकी इस हरकतसे बहुत ही उतेजीत होगइ.. ओर उनकी कामवासना बहुत ही भडक गइ.. अ‍ेक पल तो लगाकी वो अभी के अभी लखनसे चुदवाले.. लेकीन रमाकी बजबुरी थी.. क्युकी दोनोको समयपे घर पहोंचना था.. रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर वो लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते.. उनके कंधेपे सर रख देती हे.. रमाकी उतेजनाकी वजहसे सांसे तेज चलने लगी..





रमा : (लडखडाती आवाज मे) ल..ख..न..जी.. प्लीज.. अभी कुछ नही.. हम रातमे आरामसे करेगेनां..

लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. मत रोकीये मुजे.. आज मे आपके अंदर समा जाना चाहता हु..

रमा : (सरमाते लखनका हाथ पकडते) लखनजी.. प्लीज.. घरपे सब लोग हमारा इन्तजार करते होगे.. मे ये सब जल्द बाजीमे करना नही चाहती.. आप उपर उपरसे प्यार कर लीजीयेनां.. हमारे पास पुरी रात पडी हे..

लखन : (होठोको चुमते) भाभी.. बस.. थोडासा प्यार करने दीजीये.. हम अभी चले जायेगे..

कहेते लखनने रमाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडकी ओर जाने लगा.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने लखनके सीनेमे मुह छुपा लीया.. तभी लखनने रमाको बेडपे लीटा दीया.. ओर उनकी सारी खीचकर नीकालने लगा.. तो रमा सरमसे पानी पानी होने लगी.. ओर लखनको रोकनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. रमा अब सीर्फ ब्लाउस ओर पेटीकोटमे रेह गइ..

रमा : (बहुत ही सरमाते अपना चहेरा छुपाते) लखनजी.. प्लीज.. यहा नही.. हम घरपे प्यार करेगेनां.. वहा आपको जीतनी मरजी हो प्यार करलीजीयेगा.. लेकीन यहा नही.. आप कंट्रोल नही करपायेगे..

लखन : (टीसर्ट नीकालते) भाभी.. करलुगा.. हम तो उपर उपरसे ही प्यार करेगे.. गभराइअ‍े नही..

ओर लखन अपना टीसर्ट नीकालके पेन्टको नीकालने लगा.. तब रमा लेटे ही टेडी नजरसे लखनकी चडीकी ओर देखने लगी.. जब पेन्ट उतर गया तो लखनकी चडीमे बहुत बडा तंबु हो गया.. जीसे देखकर रमा थोडी डर गइ.. उनको लखनके लंडको देखनेकी हिंमत नही हुइ.. ओर लखनने भी अपना नीकर नही नीकाला.. तभी लखन रमाके उपर चड गया.. ओर उनके बुब्सको थामते होठोको चुमने लगा..





तो रमाने लखनको अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर लखनका साथ देने लगी.. तभी लखनने रमाके पेटीकोटको उनके घुटने तक उचा करदीया.. ओर उनकी पेन्टीके उपरसे ही चुतपे हाथ रखते उनको सहेलाने लगा.. तो रमा मदहोस होते अपनी कमरको आडी टेडी करते सीसकारीया करने लगी.. तभी लखनने उनकी पेन्टीमे उंगली फसाकर खीचली.. तो रमाने जटसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया..

ओर वो कामुक नजरोसे गरदनको नांमे हीलाते लखनको मना करनेकी मनत करने लगी.. तो लखन धीरेसे रमाकी चुतकी ओर सरकते उनके दोनो पैरोके बीच आगया.. तो रमा समज गइकी लखन क्या करना चाहता हे.. तो उसने अपने दोनो पैर फैलादीये.. ओर होने वाले हमलेका इन्तजार करने लगी.. तभी लखनने उनकी चुतपे मुह लगा दीया.. ओर रमाकी चुतको चुमते उसे भीगोने लगा..





तो रमाकी चुत फडफडाते पनीयाने लगी.. तो लखन चुतको चाटते अपनी जीभ रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तो रमा कांपते अपनी कमर उछालते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. वो हाथ नीचे लेजाकर लखनके बालोको पकडकर खीचने लगती हे.. क्युकी रमाको अ‍ैसा प्यार कभी नही मीला था.. तो वो बहुत ही उजेजीत होते लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी..





रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) लखनजी.. ये आप क्या कर रहे हे.. वो बहुत गंदी जगाह हे.. हटीयेना मुजे कुछ हो रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते सामने देखते) भाभी.. यही तो असली मजा हे.. क्या भानुभाइ अ‍ैसा नही करते..?

रमा : (सरमाकर नां मे गरदन हीलाते) नही.. वो तो सीधा उपर ही चड जाते हे.. उसे ये सब पसंद नही..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. तब तो आज मे आपको जनत की सेर करवाउंगा.. रातमे तैयार रहेना..

रमा : (सरमाते) लखनजी.. हटीयेनां.. मुजे कुछ हो रहा हे.. चलोना हम चलते हे.. वरना कोइ हमपे सक करेगा..

लखन : (चुतमे उंगली खुसाते) बस भाभी.. हो गया.. यहा कोइ नही आता.. हम अभी चलते हे.. थोडा मजा तो लेनेदो.. क्या मस्त चुत हे आपकी.. रातमे यही चुतमे धमाके करने हे.. तैयार रहेना..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) पता हे मुजे.. मेतो रेडी ही हु.. आप नही आते..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. आज तो पका आउगा.. हम दोनो सुबह तक प्यार करेगे..

कहेते लखन रमाकी चुतमे उगलीको अंदर बहार करने लगता हे.. तो रमा जोरोसे सीसकारीया करते सातवे आसमानमे पहोंच जाती हे.. वो मदहोसीमे वासनामे अंधी होकर आंधी आंख चडाते उंगलीसे चुदाइका मजा लेने लगी.. तो लखन भी उगली करते रमाके उपर आकर उनके होठोको चुमने लगा.. ओर दुसरे हाथसे उनके ब्लाउसको उचा करदीया.. ओर ब्राको उचा करते उनके बुब्सको चुमने लगा..

रमाके उपर नीचे दोनो ओरसे हमले होने लगे.. तो रमा पागल जैसी होगइ.. आखीर आज अ‍ेक जवान लडकेने उसे छेड ही दीया.. रमाकी जींदगीमे लखन दुसरा मर्द था.. जो उसे इस तराह प्यार कर रहा था.. रमा कइ दिनोसे भानुसे दुर थी.. तो उनके उपर भी चुदाइका बुखार चडा हुआ था.. तो वो लखनके हमलेको ज्यादा देर बरदास्त नही करपाइ.. ओर वो अकडने लगी.. ओर अपनी कमरको जटके देते चुतसे फवारा छोडते जडने लगी..

फीर कुछही देरमे जडकर सांत हो गइ.. तो लखनका पुरा हाथ भीगो दीया.. फीर लखनने उंगली नीकालली.. ओर वही हाथ पोछते रमाके होठोपे कीस करने लगा.. तो रमाके चहेरेपे भी संतुस्टीके भाव थे.. ओर वो लखनको कीस करते मुस्कुराने लगी.. फीर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. फीर दोनो खडे होगये ओर अपने अपने कपडे पहेनने लगे.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१८

फीर कुछही देरमे जडकर सांत हो गइ.. तो लखनका पुरा हाथ भीगो दीया.. फीर लखनने उंगली नीकालली.. ओर वही हाथ पोछते रमाके होठोपे कीस करने लगा.. तो रमाके चहेरेपे भी संतुस्टीके भाव थे.. ओर वो लखनको कीस करते मुस्कुराने लगी.. फीर उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. फीर दोनो खडे होगये ओर अपने अपने कपडे पहेनने लगे.. तभी.... अब आगे





रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. थेन्क्स.. मुजे तो लगा में आज गइ कामसे.. आज आप पका चोद लोगे मुजे.. लेकीन आपने तो मुजे बीना चोदे ही जनतकी सेर करवादी.. क्या आप मेरी ननंदके साथ भी अ‍ैसा करते हो..?

लखन : (सर्ट पहेनते) अरे भाभी.. आपकी ननंदतो ये सब चीजोकी बहुत सौकीन हे.. वो तो मुजे ब्लुजोब भी देती हे.. मेरी सांसने मेरे लीये क्या मस्त माल नीकाला हे.. वो मुजे कभी मना ही नही करती..

रमा : (समाकर मुस्कुराते) क्या वो माल हे..? हें..हें..हें.. आप बहुत गंदे हो.. वैसे आपकी सांस भी कुछ कम नही हे.. ओर ये ब्लुजोब क्या होता हे..? मुजे बता सकते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अभी तो टाइम नही हे.. मे रातमे आपको सब कुछ सीखा दुगा.. आप तैयार रहीयो.. आज हम दोनोका मीलन हो ही जायेगा.. आपने बहुत इन्तजार करवाया हे मुजे..

रमा : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) अच्छा..? क्या मैने इन्तजार करवाया हे..? जनाबके पास हमसे मीलनेका टाइम ही नही हे.. मे तो कबसे आपके इन्तजारमे बैठी हुइ हु.. इसीलीये तो इतने दिन आपके यहा रुकी हुइ हु.. ओर यहा भी सीर्फ आपके लीये ही आइ हु.. समजे..? बात करते हे..





लखन : (बाहोमे भरते होठ चुमते) भाभी.. सोरी.. क्या हेनां.. वहा कोइना कोइ होता था.. फीर बंसीकी सादी ओर अंकलका क्रिया कर्म.. तो मे आपसे अकेलेमे कैसे मीलता..? लेकीन अब फीकर मत कीजीये.. आज आपकी सारी कसर पुरी करदुगा.. ओर आपके पतीका सारा प्यार अब मेही आपको दुगा.. आजसे यही समजलो आपका पती मे ही हु..

रमा : (सीनेमे सर छुपाते धीरेसे) लखनजी.. वो तो मैने आपका प्यार कबुल कीया तबसे ही आपको मेने अपना पती मानलीया हे.. मेरा यकीन कीजीये.. तबसे मैने आपके भाइको इस तनको छुने भी नही दीया.. अब चलीये.. देर हो रही हे हमे..

लखन : (सरमाते लंडकी ओर इसारा करते) भाभी.. क्या इसे देखना नही हे क्या..?

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी.. देखना हे.. लेकीन अभी नही.. आप रातमे तो मेरे पास आही रहे हो.. तो मे रातमे आरामसे देख लुगी.. लगता हे बहुत ही बडा हे.. मेरी तो हालत खराब कर देगा.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) अरे भाभी.. डरीये मत.. अ‍ैसा कुछ भी नही जैसा आप सोच रही हो.. चलीये..

फीर दोनो ही ओफीसमे लोक करके वहासे नीकलने लगे.. तो सब लडकीया खाना खाकर उपर अपने रुमकी ओर जा रही थी.. तो वहा लखनको दिया मील गइ.. तो लखनको देखते ही कातील मुस्कान करते लखनके पेन्टके उभारको देखने लगी.. तो लखनने उनकी नजरको पकडलीया.. ओर दियाकी ओर नैन नचाने लगा.. तब दिया बहुत ही सरमाइ.. तभी लखनने उनकी ओर देखकर छुपकेसे आंख मारदी..

तो दिया सरमाकर मुहको दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. ओर जटसे लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते उपरकी मंजीलपे अपने रुममे चली गइ.. तो दुसरी ओर घरपे लखन ओर रमाके घरसे जाते ही लता ओर सृती दोनो रजीयाको बताकर अपने कमरेमे चली गइ थी.. तब सृतीने धिरेसे रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तो लता समज गइकी बात थोडी सीरीयस हे.. तब सृती लताके पास सटकर बैठ गइ.. तो लता उनके सामने प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखने लगी.. ओर पुछ लीया..

लता : हां भाभी.. कहीये.. दोनो भाइ बहेनके बीच क्या प्रोबलेम हे..? कोइ सीरीयस मेटरतो नही..?

सृती : (धीरेसे) अरे नही नही.. लता.. बात इतनी भी सीरीयस नही हे.. तुजे तो पता हे.. लखन पुनोदीदी पढते थे.. तब ही हमारे लखन भैया उनको प्यार करते थे.. ओर उपरसे मंजुने दोनो भाइके साथ रीलेशन रखनेका सब नीर्णय लीया.. तब इस नीर्णयके बारेमे सीर्फ मुजे ओर पुनोदीदी को ही पता था.. ओर उपरसे लखन भी पुनोदीदीको भाभी भाभी कहेकर छेड रहा था.. ओर हम दोनोकी मस्तीया करते हमारे साथ फ्लर्ट भी करने लगे थे..

लता : (हसते) भाभी.. इस मामलेमे वो बहुत ही कमीने हे.. हें..हें..हें.. फीर क्या हुआ..?

तो सृती लताको पुरा वाक्या सुनाने लगी.. तो लता बीच बीचमे हसती रही.. सृतीने लताको ये भी बता दियाकी मस्तीया करते लखन बहेक गया था.. तो हम दोनो भी बहेक गइ थी.. हम दोनो लखनकी मस्तीका पुरा मजा ले रही थी.. ओर ये भी बताया.. की मस्तीया करते लखनने उन दोनोके होठोको चुम लीया ओर दोनोके बुब्सको भी दबाया.. इसीलीये पुनम दीदीने गुस्सेमे आकर लखनको चाटा मार दीया..

लता : (चोंकते धीरेसे) भाभी.. ये आप क्या बोल रही हे..? क्या वाकइ पुनो दीदीने लखनको चाटा मारा..? लेकीन उसने अ‍ैसा क्यो कीया..? उनकोतो सब पता था.. की आगे क्या होने वाला हे.. अब तो हम सभीको इन दोनो भाइके साथ रीलेशन रखना पडेगा..

सृती : (सरमाते धीरेसे) हां लता.. सीर्फ उनको नही.. मुजे भी सब पता था.. इसीलीये तो मेने दोनो भाइके साथ रीलेशनको स्वीकार भी करलीया था.. फीर भी पुनम दीदी अपने आपपे कंट्रोल नही करपाइ.. सायद उनको देवुको खोनेका डर था.. क्युकी वो भी जानती थी.. की लखन भैया उनको अभी भी प्यार करते हे..
 
लता : (मुस्कुराते) भाभी.. आपको नही लगता.. की पुनोदीदीने थोडी जल्दबाजीमे गलत कदम उठालीया..

सृती : हां लता.. सही कहा तुमने.. लेकीन पुनो दीदीने देवुके साथ सादी करली हे.. फीर भी उनको फौरन अपनी गलतीका अहेसास होगया था.. तबतक बहुत देर हो चुकी थी.. लखन भैया नाराज होकर वहासे चले गये.. ओर तबसे हम दोनोके साथ नही बोल रहे थे.. आज हम दोनोके बीच बात हुइ.. वो मुजसे तो नाराज नही थे.. लेकीन पुनो दीदीसे बहुत नाराज हे.. आज मेने उनको बडी मुस्कीलसे पुनो दीदीसे बात करनेके लीये मना लीया हे..

लता : भाभी.. पुनो दीदी मेरी सहेली भी हे.. वो उनकी हर बात मेरे साथ सेर करती हे.. मेरी सादीसे पहेले जब मंजु भाभी ओर भावना भाभी डीलीवरीके लीये आपकी होस्पीटलमे थी.. ओर मे हमारे घरपे अकेली थी.. तब मेरे ओर लखनके बीच पहेला मीलनमे पुनोदीदी ने हमारी मदद की थी.. उसी टाइम पुरे दो दिन ओर अ‍ेक रात लखन वही हमारे घरपे थे.. उसी दिन लखनने मेरा कौमार्य भंग कीया.. अगर आप कहोतो मे लखनसे बात करु..? हंम..? सायद मेरी बात मानले..

सृती : (मुस्कुराते) हां लता.. मेने तो बात करली हे.. तो तुम भी कोसीस करलो.. बस.. भगवान करे दोनो भाइ बहेनके बीच सुलह होजाये.. पुनोदीदी कीसी भी तराह अ‍ेक बार उनसे बात करना चाहती हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. लेकीन मे इनको जानती हु.. वो बहुत जीदी हे.. आपकी बात इतनी आसानीसे मान गये वो ही बहुत हे.. भाभी.. अब तो मंजुदीदीने भी सब लखनको बता दीया हे.. तो वो पुनोदीदीसे कोइ डीमांन्ड तो नही करेगेंनां..?

सृती : (सरमाकर हसते धीरेसे) लता.. अब डीमांन्ड करे भी तो क्या फर्क पडता हे..? अब तो पुनम दीदीने भी सबकुछ स्वीकार करलीया हे.. वो भी लखन भैयासे मीलनेके लीये तडप रही हे.. हम सबको सभी तराहकी छुट मील गइ हे.. तो क्यु गभराना.. ओर मे तो चाहती हु.. की पुनोदीदी लखन भैयाका प्यार कबुल करले.. ओर दोनो आपसमे मील जाये.. क्या कहेती हो..? हें..हें..हें..





लता : (सरमाकर मुह खुला रखते) भाभी.. क्या केह रही हो..? पुनम दीदी लखनको मीलनेके लीये मान गइ हे..? जहा तम मे उनको जानती हु पुनम दीदी इतनी आसानीसे लखनके साथ रीलेशन नही रखेगी.. हां मुजे लगता हे.. इसके लीये आप अभी तैयार हो.. हें..हें..हें.. भाभी.. देखना.. इनको जेलना इतना आसान नही हे.. अ‍ेक बार सोचलो.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमते अ‍ेक मुका मारते हसते) कमीनी.. क्यु मुजे डरा रही हो..? हम उनको इतनी आसानीसे थोडीना मीलेगी..? देखना.. इसमे पहेल तो मेरे देवरको ही करनी पडेगी.. मे सामनेसे आगे थोडीना बढुगी.. इसके लीये मे उनका मन जानुगी.. फीर इनको खुब तडपाउगी.. फीर इनके बारेमे सोचुगी.. की अब क्या करना हे.. बस.. अभी तो हमे इन दोनो भाइ बहेनका मीलन करवाना हे.. तु इसके बारेमे कुछ सोचके रख.. ओर कमीनी तुम भी तो देवुसे मीलन करोगी.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) हां भाभी.. इस बातके लीये तो मे भी बहुत अ‍ेक्साइटेड हु.. देखते हे कब हम दोनोका मीलन होता हे.. भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? अब लखनसे पहेले मे भाइको मीलना चाहती हु.. क्युकी मैने दोनोका देखा हे.. बडै भैयाका इतना बडा नही हे.. तो बादमे लखनको जेलनेमे मुजे आसानी रहेगी..

सृती : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? तुमने देवुका भी देखा हे..? मगर कैसे..? कब..?

लता : (सरमाकर मुस्कुरते) भाभी.. अब आपसे क्या छुपाना.. आज मेरे घरका राज भी बता देती हु.. भाभी.. तब मेरी सादी भी नही हुइ थी.. जीस तराह हमारे ससुरका मेरी मांके साथ रीलेशन था.. उसी तराह बडे भैयाका भी मेरी मां के साथ रीलेशन हे.. कमीनी बहुत ही कामुक ओर चुदकड ओरत हे.. मे कइ बार दोनोको मीलते हुअ‍े देख चुकी हु.. इसीलीये मुजे पता हे.. की बडे भैयाका कीतना बडा हे..

सृती : (आस्चर्यसे) लता क्या केह रही हो तुम..? देवुका सरला चाचीके साथ भी रीलेशन हे..? अगर मामाका रीलेशन सरला चाचीके साथ था.. तो वोतो देवुकी मां के बराबर हे.. फीर भी उसने देवुके साथ भी रीलेशन बनालीया..? कोइ ओरत इतनी कामुक कैसे हो सकती हे..?

लता : (फीकी मुस्कानसे) भाभी.. क्यु नही हो सकती..? वो मांके बराबर हे.. मां तो नही.. मेरी घरकी सब ओरते बहुत ही कामुक हे.. वैसे भी हमारे खानदानकी तराह मेरे घरपे भी रीस्तोके कुछ मायने नही हे.. मेरी मां तो इतनी कामुक ओरत हे.. मेने सुना हे उनकी सादीसे पहेले उनका अपने भाइके साथ भी रीलेशन था.. ओर उसीसे प्रेगनेन्ट भी होगइ थी.. इसीलीये मेरी नानीने उनका बच्चा गीराकर उनकी सादी मेरे बापुसे करवादी..

सृती : (आस्चर्यसे हसते) लता क्या केह रही हो तुम..? सरला चाची..?

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सुनोतो सही.. सीर्फ इतना ही नही.. जब मेरे बापु इनको सुख देनेमे सक्षम नही थे.. तो उसने हमारे ससुरके साथ ही रीलेशन रखलीया.. मे ओर भानुभाइ हमारे ससुरकी ही संतान हे.. अब वो भी चले गये.. तो मेरी मांने बडे भैयाको ही फसा लीया.. भाभी.. मेरी मांका बस चलता तो वो भानु भाइके साथ भी रीलेशन रख लेती.. लेकीन उनको बडेभाइका हथीयार बहुत पसंद आगया.. ओर वो अभी भी उसीसे अपनी प्यास बुजाती हे..

सृती : (आंखोमे चमकके साथ) क्या..? इस उमरमे भी..? लता.. सरला चाचीतो बहुत ही रंगीन मीजाजकी नीकली.. हमारे ससुर भीनां.. उन्होने कीसीको नही छोडा.. नीर्मला आंटी.. सरला चाची.. यहा तक की उनकी बहेनको भी नही छोडा.. ओर उनके साथ तो सादी भी करली.. पता नही इस खानदानमे सब बहेनोके पीछे ही क्यु पागल हे..? यहा तक की हमारे देवुने भी पुनो दीदीसे सादी करली हे.. ओर लखन भैया भी इनको प्यार करते हे..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. ये बात आप नही समजेगी.. ये साली आग बहुत बुरी चीज हे.. की वो कोइ रीस्ते नाते नही देखती.. सीर्फ अ‍ेक ही रीस्ता देखती हे.. वो हे अ‍ेक मर्द ओर अ‍ेक ओरतका.. फीर चाहे वो बहेन हो या भाभी मामी.. कोइ भी हो.. यहा तक मांको भी नही छोडते.. ओर ज्यादातर सबको अपनी बहेन ही अच्छी लगती हे.. ओर हमारे इस खानदान मेतो सभी मर्द बहेनको प्यार करनेके माहीर हे.. यहा तक की बहेनभी भाइके पीछे पागल हे.. ओर उनको बडी उमरकी ओरते भी पसंद हे..

सृती : (सरमाते हसते) लता.. अगर तुम हमारे ससुरकी सुतान हो तो तुमभी तो इनकी बहेन हुइ.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भाभी.. मेने भी बडे भैयाको प्यार कीया हे.. ओर अभी छोटे भाइके साथ सादी करके इनका बीस्तर गरम कर रही हु.. भाभी.. भाइ बहेनके बीच ये जो रीस्ता हेनां.. वो आप कभी भी नही समज पाओगी.. जब हम दोनो फीजीकल होते ये सोचते हेनां.. की ये मेरा भाइ हे.. तब प्यार करनेका जोस कइ गुना बढ जाता हे.. मे आज भी बडे भैया ओर लखनके पीछे पागल हु..
 
सृती : (सरमाकर हसते) लता.. तुमने तो प्यारके मायने ही बदल दीये.. मे भी अ‍ैसे रीस्तोके बारेमे सुनती हुना.. तो बहुत गरम होजाती हु.. यहा तक की मे अपने आपपे कंट्रोल भी नही कर सकती.. कास.. मेरा भी कोइ भाइ होता..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मामाका लडका भी भाइ ही होता हे.. हें..हें..हें..

लताकी बात सुनकर सृतीका दिमाग तेज चलने लगा.. क्युकी उनकी नजरमे भुमीका भी कीशनकी बहेन थी.. ओर अभी लताने कहा.. की हमारे ससुरने उनकी बहेनको भी नही छोडा.. तब सृतीके मनमे विचारोका धमासान युध्ध होने लगा.. क्युकी वो भी अपने ससुरको पहेले मामा मामा कहेती थी.. उनके मनमे आसंकाये होने लगी.. की क्या उनकी मम्मीका भी उनके किशन मामाके साथ रीलेशन होगा..?

सृती : (मनमे सोचते) हे भगवान.. मेरी मम्मी भी तो मेरे मेरे ससुरको भाइ मानती थी.. ओर मे भी इनको मामा ही कहेती थी.. तो क्या मेरी मम्मीका भी मेरे ससुरके साथ रीलेशन होगा..? कही मे भी तो मेरे ससुरकी संतान नही हुनां..? नही नही.. मे ये क्या सोच रही हु.. अ‍ैसा कभी नही हो सकता.. मे ये कभी स्वीकार नही करुगी.. लेकीन मंजुतो केह रही थी.. की देवुने उनकी सभी बहेनोके साथ सादी करली हे.. तो सादी तो मेने भी देवुसे की हे.. तो क्या मे भी देवुकी बहेन हु..? हे भगवान.. ये तुमने मुजे कैसी उलजनमे डाल दीया..?

लता : (कंधेसे पकडकर हीलाते) भाभी.. कहां सोच मे डुब गइ..? कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

सृती : (तंद्नासे बहार आते) अरे नही नही.. लता.. तुम क्या केह रही थी..? (बात बदलते) लता.. आज अच्छा मौका हे.. तुजे भी पीरीयडका प्रोबलेम हे.. ओर अभी अभी रजीयाको भी होगया.. तो आज मेरा देवर बीलकुल फ्रि हे.. भेजदे उनको रमा भाभीके पास.. अब देखते हे मेरा देवर रमा भाभीका क्या हसर करते हे.. कमीनी कहीकी.. मे तो इन मां बेटीकी चीखे सुनना चाहती हु.. हें..हें..हें..

लता : (हसते धीरेसे) भाभी.. बात तो आपकी सही हे.. मे भी यही सोच रही हु.. जबसे दोनो यहा आइ हे.. दोनो मां बेटी लखनकी ओर कुछ अजीब नीगाहोसे देख रही हे.. लगता हे भाभी ओर लखनका कुछ तो चकर हे.. जो भाभी खुद लखनसे चुदवाना चाहती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हाथ पकडकर हसते धीरेसे) लता.. तो मेरे देवरको कहेदे.. आज इनकी फाडके रखदे.. हम दोनो नीचे जाकर उनकी चीखे सुनेगी.. अब तो तुमने खीडकी भी खोलदी हे.. हम इनका लाइव सो भी देखेगी.. हो सकेतो रेकोर्ड भी करलेगे.. ओर पुनो दीदीको भेज देगे.. क्या कहेती हो..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाकर हसते) ठीक हे भाभी.. मे लखनसे बात करती हु.. अब चलीये नीचे चलते हे.. खाना तो बन गया हे.. अभी वो दोनो भी आते होगे.. देखा नही.. कमीनी कैसे जटसे उनके साथ पटाका बनकर चली गइ.. भाभी.. लगता हे दोनोके बीच जरुर कुछ तो चकर हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते धीरेसे) लता.. रमा भाभीका तो ठीक हे.. लेकीन हमे नीलुका खयाल रखना पडेगा.. देखना वो कीसी भी हालमे लखनसे प्रेगनेन्ट नही होनी चाहीये.. वरना हम सब फस जायेगे.. हमे सीर्फ धिरेन नीलुके लीये इनको सीर्फ सबक सीखानी हे.. कमीनी धिरेनसे सादी करना चाहती हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. आप इनकी फीकर मत करो.. मे इनका पुरा खयाल रखुगी.. रमा भाभी चली जायेगी.. तब हम इनका भी इलाज करवा लेगे.. आपका देवर बहुत रंगीन मीजाजके हे.. नीलु उनकी साली हे तो वो कबसे नीलुके उपर डोरे जमाये हुअ‍े हे.. हें..हें..हें.. बस.. अ‍ेक बार उनके नीचे आजाये तो वो धिरेनको भी भुल जायेगी..

सृती : (खडी होते धीरेसे हसते) लता.. लखन तो पहेलेसे ही रंगीन मीजाजके हे.. सीर्फ वो ही नही.. इनके सभी दोस्तो रंगीन मीजाजके हे.. इसीलीये तो कमीने सभी दोस्तोने वो जडी बुटीका कोर्ष कीया हे.. ओर आज सभी दोस्तो अपनी बहेनसे सादी करके उनको ठोकते हे.. इसीलीये तो लखन भी अपनी बहेनके पीछे पडा हे.. तुम भी तो इनकी बहेन हो.. लगता हे अब तो पुनो दीदी भी इनकी चपेटमे आजायेगी.. हें..हें..हें..

लता : (खडी होकर बहारकी ओर जाते) भाभी.. जो भी हो.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. आने वाली जींदगी हम सबके लीये बहुत ही रंगीन होगी.. अ‍ैसा पुनम दीदी केह रही थी.. लगता हे वो भी इस बातके लीये तैयार हे.. चलीये.. मे रजीया दीदीका खाना यही लेकर आती हु.. बीचारी सारा दिन काममे ही लगी रहेती हे.. मेरे सामने तो कुछ बोलती ही नही..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) लता.. वो बहुत ही अच्छी हे.. अब तुजे नही लगता.. की रजीया दीदीको अ‍ेक बच्चा होना चाहीये.. हंम..? मेरी मान तुम भी अ‍ेक बच्चा करले.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. उनको बच्चेकी बहुत आस हे.. मे लखनको कहुगी.. इनको बच्चा देदे.. ओर जहा तक मेरी बात हे.. वो तो सब आप भी जानती हे.. मुजे लखनसे बच्चा कभी नही होगा.. इसके लीये आपके पती हेनां.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते अ‍ेक मुका मारते) तु बहुत ही कमीनी हो.. मेरे पतीपे डोरे डाल रही हो.. हें..हें..हें..

दोनो ही कामुक बाते करते नीचे आगइ.. तब दोनोने अपनी चुतको गीली करली थी.. तो सृतीको अभी चुदवानेकी बहुत इच्छा होने लगी थी.. अबतो वो देवायतसे ज्यादा लखनके बारेमे सोचने लगी थी.. तभी सृतीको वापस उल्टी जैसा होने लगा.. तो वो मुहपे हाथ रखकर जटसे कोमन बाथरुममे चली गइ.. तो लता भी जटसे उनके पीछे चली गइ.. देखा तो सृती उल्टीया कर रही थी.. तो लता उनकी पीठ सहेलाने लगी..

लता : (मनमे खुस होते) भाभी.. अचानक क्या हुआ..? हंम..? क्या होस्पीटल चालना हे..? तो मे लखनको बुला लेती हु..

सृती : (सरको नामे हीलाते मुह साफ करते) अरे नही लता.. रुकजा.. आज दुसरी बार उल्टीया हुइ हे.. जब हम स्कुटर लेने गये तब भी हुइ थी.. लता.. मुजे लगता हे.. मे प्रेगनेन्ट होगइ हु.. मेरे पास टेस्ट कीट भी खतम होगइ हे.. कल मे मेरी फ्रेन्डके पास जाकर टेस्ट करवा लुगी.. तु चीन्ता मत कर..

लता : (खुस होते मुस्कुराते) भाभी.. क्या केह रही हे..? मेरे पास अभी दो कीट पडी हे.. क्या मे आपको देदु..? हंम..? आप सुबह टेस्ट करवा लेना.. अगर पोजीटीव आया तो मेभी आपके साथ चलुगी..

सृती : (मुह पोछते मुस्कुराते) लता.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. मे वहीसे सीधी क्लीनीकपे चली जाउगी.. अभी उल्टीकी टेबलेट ले लेती हु.. सब ठीक होजायेगा.. तु चीन्ता मत कर.. ओर सुन.. जबतक कंन्फर्म नही होजाता तु इसके बारेमे कीसीको बताना नही..कल रीपोर्ट आनेके बाद मे खुद देवु ओर मंजुको सरप्राइज देना चाहती हु..

लता : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. मंजु दीदीको सरप्राइज दोगी..? आपको तो पता हेना उनको ओर पुनोदीदीको सब पता चल जाता हे.. तो उनको तो सब पता होगा.. आप पुनो दीदीसे क्यु नही पुछ लेती..? पता नही मेरे नसीबमे अ‍ैसा मौका कब आयेगा..
 
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