Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 3 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

# 15.

“आप फिलहाल अपने रूम में पहुंचिए मिस्टर अलबर्ट। क्यों कि अभी कुछ देर के लिए शिप की लाइट भी ऑफ हो गई थी। ऐसी स्थिति में शायद मिसेज अलबर्ट भी परेशान हों। मैं आपसे इस टॉपिक के बारे में बाद में बात करूंगा।“

यह कहकर सुयश, जेम्स हुक की तरफ बढ़ गया जो अब लगभग सभी कंट्रोल्स को चेक कर चुका था।

“कैप्टेन! शिप को चलाने वाले सभी मैकेनिकल यंत्र व व्हील तो सही काम कर रहे हैं।“ जेम्स हुक ने सुयश को अपनी तरफ आते देख बताना शुरु किया-

“पर शिप के सारे इलेक्ट्रानिक यंत्र, गेज, मीटर्स व ट्रांसमीटर सेट, पूरी तरह खराब हो चुके हैं। अब आप यह समझ लीजिए कि बाहरी दुनिया से फिलहाल हमारा संपर्क पूर्ण रुप से टूट चुका है। यहां तक कि हमारा दिशा सूचक यंत्र भी काम नहीं कर रहा है। इस समय तो हमें यह भी नहीं पता, कि हम किस दिशा में खड़े हैं।“

उधर रोजर व असलम को भी अब स्थिति की भयानकता का अंदाजा हो गया था। वह दोनों अभी तक, सिर झुकाए, चुपचाप खड़े हो कर बातें सुन रहे थे। सुयश ने ध्यान से जेम्स हुक की सारी बातें सुनी और फिर धीरे से एक हुंकारी भरते हुए, एक नजर रोजर व असलम पर मारी।

“सबसे पहले मैं आप लोगों को वास्तविक स्थिति से अवगत करा देना चाहता हूं।“ सुयश ने गंभीर स्वर में कहा-

“रोजर व असलम, तुम लोगों की एक छोटी सी गलती से, आज जहाज के सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में है। तुम्हें स्वयं नहीं मालूम कि तुम लो गोंने क्या किया है?“

“हम अपने किए की माफी मांगते हैं कैप्टन।“ सुयश की बातें सुनकर, रोजर ने धीरे से सिर उठाते हुए कहा-

“हम महसूस कर रहे हैं, कि हमसे वास्तव में बहुत बड़ी गलती हो गयी है, पर हम आपको यह विश्वास दिलाते हैं, कि भविष्य में फिर कभी ऐसी गलती नहीं करेंगे।“

असलम ने भी सिर उठाते हुए रोजर की हां में हां मिलायी। सुयश समझ गया कि उनको अब कुछ कहने की जरूरत नहीं है क्यों कि वह खुद ही समझ चुके हैं कि उनसे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है।

“फिलहाल मैं तुम लोगों से इस बारे में बाद में बात करूंगा।“ सुयश ने कहा- “पहले हमारा काम शिप को, अपने वास्तविक रुट पर वापस लाना है, क्यों कि बारामूडा त्रिकोण का यह क्षेत्र, विश्व के सबसे खतरनाक क्षेत्रों में गिना जाता है। और इस क्षेत्र के रिकार्ड ये कहते हैं कि आज तक जो भी जहाज इस क्षेत्र में आया है, वह वापस नहीं जा सका। इसका एक छोटा सा उदाहरण अभी आपने देखा भी है कि हमारे शिप के ऊपर से कोई उड़नतश्तरी नुमा, अजीब सा यान बहुत तेजी से निकला है। वह क्या था ? अभी इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है? पता है तो बस इतना, कि उस चीज के शिप के ऊपर से निकलते ही, हमारे सभी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र खराब हो गए।“

“विश्व के अनसुलझे रहस्यों की यदि कोई लिस्ट बनाई जाए तो यह स्थान सबसे ऊपर रहेगा । सैकड़ों बाम्बर यान से लेकर ना जाने कितने शिप, इस रहस्यमयी क्षेत्र का शिकार बन चुके हैं। जितना मैंने इस क्षेत्र के बारे में सुना है, उसके हिसाब से इस पूरे क्षेत्र में, तीव्रतम विद्युत चुंबकीय तरंगे फैली हुई हैं, जो हर इस क्षेत्र में आने जाने वाले, शिप और यानों का संपर्क, दुनिया से काटकर, उनके पूरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ध्वस्त कर देती हैं। यान के यात्रियों का अपने यान पर से, इसी कारण से कंट्रोल खत्म हो जाता है और वह क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसलिए दोस्तों इस मुसीबत की घड़ी में, हमें दूसरी अन्य समस्याओं से ध्यान हटाकर, सबसे पहले अपने शिप को इस रहस्यमई व खतरनाक क्षेत्र से निकालकर, अपने वास्तविक रूट पर लाना होगा।“

सुयश की बातें सुनकर हर आदमी तुरंत एक्शन में आ गया। उनके लिए यह विचार ही खतरनाक था, कि वह इस समय विश्व के सबसे खतरनाक क्षेत्र में हैं।

“कैप्टन यह कार्य पहले जितना आसान था, अब उतना ही मुश्किल है।“ रोजर ने अपनी प्रॉब्लम बताते हुए कहा-

“क्यों कि ना तो अब हमारे पास दिशा सूचक यंत्र है और ना ही ट्रांसमीटर सेट और बिना इन दोनों के, अब हम शिप को अपने वास्तविक रुट पर नहीं ला सकते।"

"इसलिए हमें सबसे पहले यह दिमाग लगाना होगा कि हमारा शिप है किस स्थिति में? क्यों कि इस समय बिना शिप की वास्तविक स्थिति जाने हुए, हम शिप को मोड़ेंगे कैसे?“

“और कैप्टेन हमारा दिशा सूचक यंत्र खराब हो जाने के कारण, हमें अपनी वास्तविक दिशा का भी ज्ञान नहीं हो पा रहा है।“ असलम ने अपने माथे पर छलक आए, हल्की पसीने की बूंदों को रुमाल से साफ करते हुए कहा-

“अगर दिन का समय होता तो सूर्य को देखकर, कुछ आइडिया लगाया भी जा सकता था। परंतु अंधेरी रात होने की वजह से तो आज चंद्रमा भी नहीं निकला है। फिर हम अपने जहाज की दिशा कैसे पता कर पायेंगे?“

“आप दिशा ज्ञान के लिए ज्यादा परेशान मत हो इए।“ सुयश ने कहा-

“क्यों कि अंधेरी रात में भी सितारों के द्वारा हमें दिशा ज्ञान हो सकता है। आकाश में जो 7 सितारों का समूह होता है। उसका आखिरी सितारा हमेशा उत्तर दिशा की ओर इशारा करता है और इस तारा मंडल की स्थिति पूरे वर्ष भर, एक ही रहती है। यानि कि इसमें कोई बदलाव नहीं होता। इसलिए आप दिशा ज्ञान को लेकर भ्रमित ना हों। अब रही शिप की इस समय की वास्तविक स्थिति के बारे में जानने की, तो आप लोगों को इसके लिए परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है। मेरी अभी फ्लोरिडा के ऑफिसर से, कुछ देर पहले बात हुई थी, जिसमें उसने जहाज की वास्तविक स्थिति मुझे बताई थी।............ लारा ! जरा टेबल पर रखा, कॉपी और पेन तो उठाना।“

लारा ने तुरंत ट्रांसमीटर सेट के बगल में रखा, कॉपी और पेन उठा कर सुयश को दे दिया। सुयश ने पहले एक नजर कॉपी पर लिखे उस को आर्डीनेट्स पर मारी जो उसने स्टीफेन से सुनकर कॉपी पर लिखा था और फिर उस पर एक रेखा चित्र बनाने में व्यस्त हो गया। सभी की निगाहें अब उस कॉपी के पन्ने पर थीं, जिसमे सुयश बहुत तेजी से एक डायग्राम बना रहा था। थोड़ी देर की मेहनत के बाद सुयश ने डायग्राम पूरा कर लिया। उस डायग्राम में सुप्रीम की वास्तविक स्थिति बनी थी। जिसके बीच-बीच में, वह दूरियां और दिशा लिखी थीं, जो स्टीफेन ने कुछ देर पहले सुयश को बतायी थीं।

इतना करके सुयश कुछ देर रुका और फिर कुछ सोचकर उसने दोबारा कलम चलानी शुरु कर दी। इस बार वह कुछ कैलकुलेशन कर रहा था। थोड़ी ही देर में सुयश ने अपना काम पूरा कर लिया। काम पूरा करने के बाद, सुयश ने वह पन्ना, बीच टेबल पर इस तरह रख दिया कि वह अब सभी को दिखायी दे रहा था। रोजर सहित अब सभी की निगाह सिर्फ और सिर्फ उस पन्ने पर थी। उस पन्ने पर सुयश ने ज्यामिती का प्रयोग करके, शिप का एक डायग्राम बनाया था और त्रिकोणमिती के फार्मूले लगा कर कुछ कैलकुलेशन भी की थी। सभी की नजरें, डायग्राम की तरफ देख, सुयश ने कहना शुरु किया-

“इस डायग्राम में मैंने ‘सुप्रीम’ की वास्तविक स्थिति दिखायी है। फ्लोरिडा के द्वारा बताए गए मैसेज के अनुसार, इस समय हमारा शिप 30 डिग्री नॉर्थ ईस्ट में, 80 नॉटिकल माइल, गलत दिशा में जा चुका है। और अब हमारा शिप, अपनी वास्तविक स्थिति से 56 डिग्री पश्चिमी देशांतर रेखाओं के मध्य इस जगह पर है।“ सुयश ने पेन से पेज पर एक जगह निशान लगाते हुए कहा-

“तो फिर मेरी कैलकुलेशन के हिसाब से, अगर हम ‘सुप्रीम’ को 120 डिग्री, दाहिने मोड़ते हैं और फिर 40 नॉटिकल माइल चलकर, 90 डिग्री बायें मोड़ते हैं तो हम अपने असली रास्ते पर आ जाएंगे। और फिर वह स्थिति हमारी पिछली स्थिति से 69 नॉटिकल माइल आगे होगी।“

सभी अब तारीफ वाली नजरों से सुयश को देख रहे थे। इतना स्ट्रांग कैलकुलेशन देखकर सभी समझ गये थे कि क्यूं इतनी छोटी उम्र में सुयश को इस शिप का कैप्टेन बनाया गया था। सुयश ने एक बार फिर सब पर नजर डाली और कह उठा-

“अगर आप लोगों को इस प्लान में किसी प्रकार की कोई दिक्कत हो रही हो, तो आप साफ-साफ शब्दों में मुझे बता सकते हैं। या फिर आपके पास कोई इससे भी अच्छा प्लान हो, तो आपका स्वागत है।“

सुयश की बात सुन रोजर ने वहां खड़े हर इन्सान पर एक नजर मारी और फिर सबको संतुष्ट देख, बोल उठा-

“आप का प्लान बिल्कुल पर्फेक्ट है कैप्टन। हमें इसमें कोई बदलाव नहीं करना है।“

“ओ.के. तो फिर आप लोग अब शिप को, फिलहाल प्लान के मुताबिक मोड़िये। और जब शिप अपने वास्तविक रुट पर आ जाये तो मुझे बता दीजिएगा। उसके आगे क्या करना है? ये मैं आपको बाद में बताता हूं।“

यह कहकर सुयश ने वह कॉपी रोजर को पकड़ा दी। अब सुयश, जेम्स हुक की ओर मुड़कर बोला-

“मिस्टर जेम्स हुक, आपने शिप की खराबियां पता की या नहीं ?“

“यस कैप्टेन!“ जेम्स हुक ने सुयश को जवाब दिया- “हमारे शिप के पूरे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र खराब हो चुके हैं। हमें तेजी से वह सारे यंत्र बदलने पड़ेंगे। परंतु पूरी लाइन में खराबी आ जाने के कारण, सारे यंत्र बदलने में बहुत समय लगेगा। जहां तक मेरा अंदाजा है, कि इस क्षेत्र में एका एक तीव्र विद्युत चुंबकीय तरंगे उत्पन्न हो गई थीं। जिसके कारण हमारे सारे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र फेल हो गए थे।“

“फेल हो गए थे से क्या मतलब है आपका ?“ असलम जो कि इतनी देर से सिर्फ बातें सुनकर माहौल का जायजा ले रहा था, बोल उठा-

“यह भी तो हो सकता है, कि इस क्षेत्र में अभी तक विद्युत चुंबकीय तरंगे फैली हों, जो कि हमारे द्वारा बदले गई यंत्रों को पुनः खराब कर दें।“

“आगे इस क्षेत्र में यदि पुनः चुंबकीय तरंगे फैल जाएं, तो वह बात अलग है। लेकिन इस बात का तो दावा है, कि इस समय हम लोग जिस क्षेत्र में हैं। वहां पर तो, विद्युत चुंबकीय तरंगे बिल्कुल नहीं हैं।“ जेम्स हुक ने अपना एक हाथ मुक्का बनाते हुए, अपने दूसरे हाथ के पंजे पर मारा-

“क्यों कि हमारी लाइट्स एक बार ऑफ हो जाने के बाद पुनः ऑन हो चुकी हैं। अगर विद्युत चुम्बकीय तरंगें अभी भी यहां होतीं तो यह सारी लाइटें फिर से खराब हो जातीं। जिससे यह पता चलता है कि यह क्षेत्र विद्युत चुंबकीय तरंगों वाला क्षेत्र नहीं है।“

“इसका सीधा सा मतलब निकलता है।“ सुयश ने गहरी सांस छोड़ते हुए कहा- “कि जो अंतरिक्ष यान, अभी-अभी हमारे सिर के ऊपर से निकला । विद्युत चुम्बकीय तरंगे जरुर उसी से निकल रही होंगी, और उसके जाते ही, पूरा क्षेत्र पुनः सामान्य हो गया।“

“मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है।“ जेम्स हुक ने कहा- “फिलहाल हमारे सारे इंजीनियर्स, तेजी से जहाज की खराबी को दूर करने में लगे हैं और हम आशा करते हैं कि जल्द से जल्द वह इसे दूर कर लेंगे।“

“ठीक है। जैसे ही शिप की सारी प्रॉब्लम सही हो जाए, आप मुझे खबर कर दीजिएगा।“ सुयश ने जेम्स हुक से कहा।

सभी को इंसट्रक्शन देने के बाद सुयश वहां पड़ी एक खाली कुर्सी पर बैठ गया।

जारी रहेगा …….....✍️
 
# 16

1 जनवरी 2002, मंगलवार, 05:30;

सुयश आँख बंदकर कुर्सी पर बैठा था। मगर वह अभी भी बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था।कुछ देर सोचते रहने के पश्चात, सुयश ने अपनी आँखें खोलीं। सुयश की नजर रोजर पर पड़ी। रोजर, असलम के साथ शिप के चालक दल को गाइड करने में लगा दिखायी दिया।

लेकिन इससे पहले कि शिप के चालक दल के सदस्य, शिप को स्टार्ट कर, सही रुट पर ला पाते। एक अजीब सी आवाज ने, फिर से सभी को आश्चर्य में डाल दिया।

“झर ....ऽऽ झर.....ऽऽ झर.....ऽऽ झर.....ऽऽ।“

“यह आवाज कैसी है?“ सुयश का व्याकुल स्वर कंट्रोल रूम में गूंज उठा।

सभी के कान अब सिर्फ और सिर्फ उस आवाज को सुनने में लगे थे। धीरे-धीरे वह आवाज तेज होती जा रही थी। एकाएक सुयश सहित सभी के दिमाग में एक स्वर गूंज उठा-“खतरा ऽऽऽऽ।“

“रोजर! तुरंत शिप के आसपास की लाइट्स को ऑन करो । क्विक.....।“ सुयश ने घबराकर कहा।

वह विचित्र आवाज धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी और अब उसने तेज होते- होते भयानक रूप ले लिया था। इससे पहले कि यह लोग कुछ और समझ पाते।

शिप को एक तेज झटका लगा और वह बिना स्टार्ट किए ही चल पड़ा। रोजर ने झपट कर तुरंत शिप के बाहर की सारी सर्च लाइट ऑन कर दी।

“कैप्टन! कोई अंजाना खतरा हमारे शिप की ओर तेजी से मंडरा रहा है।“ असलम ने अपनी जुबान को अपने सूख चुके होठों पर फिराते हुए, डरे स्वर में कहा -

“हमारा शिप बिना स्टार्ट किए ही किसी दिशा में जा रहा है।“

अब सभी की निगाहें किसी अंजानी आशंका से, शिप के विंड स्क्रीन पर चिपक गईं। शिप की सर्च लाइट का दायरा सीमित होने के कारण, वह सभी शिप के ज्यादा आगे देख पाने में असमर्थ थे। शिप मंथर गति से आगे बढ़ रहा था और वह आवाज लगातार अभी भी तेज हो रही थी। अचानक शिप की सर्च लाइट ने, इन सभी को जो नजारा दिखाया, उसको देखते ही सभी के हाथ-पैर एका एक फूलते से नजर आए।

“भंवर...............।“ सुयश एका -एक चीख उठा। उन्हें कुछ दूरी पर, एक विशालकाय भंवर बनती नजर आयी। जो अपना दायरा लगातार बढ़ाती जा रही थी।

उसी भंवर के तीव्र बहाव के कारण, समुंदर का पानी भी तेजी से भंवर की ओर खिं च रहा था और उसी के साथ खिंच रहा था ‘सुप्रीम’ भी। इतनी विशालकाय भंवर को देख, एक पल के लिए सभी की सांसे रुक सी गईं। उधर शिप लगातार भंवर की ओर बढ़ रहा था। सभी लोगों के मौत के इस सम्मोहन को सुयश की आवाज ने तोड़ा-

“जल्दी करो........ शिप को स्टार्ट करो..... वरना यह अंजानी मौत हमें निगल जायेगी।“ सुयश के इतना कहते ही, संज्ञा शून्य हो चुके सभी व्यक्ति, अचानक हरकत में आ गए।

रोजर व असलम तेजी से शिप के कंट्रोल्स से छेड़-छाड़ करके उसे स्टार्ट करने की कोशिश करने लगे। अब सभी की निगाहें उस विशालकाय भंवर पर थीं, जो तेजी से शिप के बीच का दायरा कम करने में लगी हुई थी।

तभी ‘घर्र-घर्र‘ की तेज आवाज करते हुए, शिप का इंजन स्टार्ट हो गया। इंजन को स्टार्ट हो ते देख, सुयश चीख उठा-

“मोड़ो ऽऽऽऽऽ...जल्दी से शिप को मोड़ कर, भंवर से दूर जाने की कोशिश करो। ......वरना हम इसमें फंस जाएंगे.......और फंसने के बाद, इतनी बड़ी भंवर से हमारा बचकर निकल पाना असंभव होगा।“ भंवर की धाराएं, किसी शिकारी की तरह तेजी से शिप की ओर बढ़ रहीं थीं।

“कैप्टन!“ रोजर ने चिल्ला कर कहा-

“बिना स्पीड में लाए, इतने बड़े शिप को मोड़ना असंभव है और भंवर भी अब हमसे ज्यादा दूर नहीं है। जल्दी बताइए कैप्टेन अब हम क्या करें?“

लेकिन इससे पहले कि सुयश, रोजर को कोई जवाब दे पाता, जहाज को एक और तेज झटका लगा और वह भंवर की बाहरी कक्षा में प्रवेश कर गया। अब सुप्रीम, भंवर की धाराओं के हिसाब से धीरे-धीरे घूमना शुरू हो गया था। लहरों का शोर अब अपने चरमोत्कर्ष पर था। यह भयावह शोर सुनकर, शिप के अधिकांश यात्री भी जाग चुके थे और इस शोर का मतलब निकालने की चेष्टा कर रहे थे।

रोजर, असलम के साथ, बार-बार शिप को उस भयानक भंवर से निकालने की कोशिश कर रहा था। लेकिन शिप के स्पीड में ना होने के कारण, भंवर धाराएं उसे पुनः अंदर की ओर धकेल रही थीं। इस भयानक स्थिति में शिप, लहरों से अठखेलियां कर रहा था।

“रोजर! शिप को पहले भंवर से निकालने की कोशिश मत करो।“ सुयश इस भयानक परिस्थिति में भी तेजी से अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहा था-

“क्यों कि भंवर से निकलने के चक्कर में, शिप स्पीड नहीं पकड़ पा रहा है। और जब तक शिप स्पीड में नहीं आएगा , तब तक वह इस विशालकाय भंवर से निकल भी नहीं पाएगा। पहले धाराओं के मोड़ के हिसाब से, शिप को मोड़ते हुए, शिप की स्पीड बढ़ाने की कोशिश करो और जब शिप फुल स्पीड में आ जाए तो उसे एक झटके से भंवर से बाहर निकालने की कोशिश करो।“

“लेकिन सर, अगर हमने इस तरीके से शिप की स्पीड को बढ़ाने की कोशिश की तो हम भंवर के और अंदर चले जाएंगे और वहां पर भंवर का खिंचाव केंद्र की ओर, और ज्यादा होगा। फिर शायद यह भी हो जाए कि हम....... उससे निकल ही ना पाएं।“ असलम में मरी-मरी आवाज में कहा।

“मैं जैसा कहता हूं वैसा करो। समय बहुत कम है। इसलिए अपना दिमाग मत लगाओ“ सुयश ने बिल्कुल दहाड़ते हुए स्वर में कहा। तुरंत रोजर व असलम सुप्रीम को भंवर की धाराओं के मोड़ के हिसाब से मोड़ने में जुट गए।

कुछ भंवर के केंद्र की वजह से और कुछ धाराओं के अनुकूल चलते रहने के कारण, शिप की स्पीड लगातार बढ़ती जा रही थी। आखिरकार शिप फुल स्पीड में आ ही गया। लेकिन तब तक वह भंवर के केंद्र के काफी नजदी क पहुंच चुका था।

ए.सी . वाले कमरे में होने के बावजूद भी सभी के चेहरे पसीने से भीग गए थे।

ड्रेजलर जो कि शिप का ‘हेल्मसमैन‘ था और शिप को स्टेयरिंग व्हील के द्वारा चलाता था। उसकी नजरें सुयश के अगले आदेश का इंतजार कर रहीं थीं। सुयश की नजरें सिर्फ और सिर्फ शिप के स्पीडो मीटर पर थीं। जैसे ही स्पीडो मीटर ने फुल का इंडीकेशन दिया, सुयश ने चीख कर कहा-

“टर्न!“ सुयश के ऐसा कहते ही ड्रेजलर ने पूरी ताकत से स्टेयरिंग व्हील घुमाया। फुल स्पीड से चल रहे शिप को एक जोरदार झटका लगा और वह चौथी कक्षा की भंवर धाराओं पर एका एक ऐसे चढ़ गया, मानों वह लहरों पर से छलांग लगा कर उड़ जाना चाहता हो। शिप की स्पीड फुल होने की वजह से, एकदम से मोड़ते ही , वह लहरों से टकरा कर, हवा में उछल सा गया। एक क्षण के लिए सबकी सांसें रुक सी गईं। शिप पूरा का पूरा हवा में था और फिर एक छपाक की आवाज करते हुए दोबारा पानी में गिर गया।

पानी में गिरते ही शिप को इतना जोरदार झटका लगा कि कइयों के मुंह से चीख निकल गई। कई लोग अपने स्थान से गिर पड़े। यहां तक कि ड्रेजलर का हाथ भी स्टेयरिंग व्हील से छूट गया। लेकिन फिर तुरंत ही ड्रेजलर ने अपनी बॉडी को नियंत्रित कर, दोबारा से शिप का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया।

उधर पूरे शिप पर चीख-पुकार का बाजार गर्म हो गया था। किसी यात्री की समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है? इधर सुयश का चेहरा अब किसी चट्टान की तरीके से सख्त हो गया। उसकी निगाहें लगातार, विंडस्क्रीन पर उछल-उछल कर गिर रही लहरों पर पड़ रही थी।

शिप अब भंवर से थोड़ा सा निकलने में कामयाब हो गया था। मगर मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई थी। सभी की आंखें फिर से सुयश के चेहरे की ओर थीं। और सुयश की नजरें भंवर की धाराओं की ओर थीं।

एकाएक ही सुयश ने फिर टर्न का इशारा किया। ड्रेजलर ने दोबारा शिप के स्टेयरिंग व्हील को पूरी ताकत से मोड़ा। शिप एक बार फिर तेजी से भंवर धारा पर चढ़ा। लहरों ने सुप्रीम को पुनः ऊपर उछाल दिया। किस्मत ने एक बार फिर उनका साथ दिया और सुप्रीम की सागर की सतह पर सेफ लैडिंग हुई। इसी तरह 1 और कोशिश करने के बाद सुप्रीम, भंवर के तिलस् चक्रव्यूह से बचकर बाहर निकलने में सफल हो गया।

ड्रेजलर लगातार शिप को भंवर से दूर भगाए जा रहा था। मानो उसे डर हो कि शिप फिर से कहीं, भंवर में ना फंस जाए। तिलस्मी भंवर से काफी आगे निकलने के बाद, जब ड्रेजलर को यह महसूस हो गया कि अब वह मौत से दूर हैं, तो उसने ‘सुप्रीम’ को रोक दिया।

ड्रेजलर की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थी। वह अपनी सीट से उठा और कंट्रोलरुम के फर्श पर ही जमीन पर लेट गया। वह अपनी सांसें नियंत्रित करने की कोशिश करने लगा। सुयश ने भी अपने माथे पर बह आया पसीना पोंछा और तुरंत जेम्स हुक को शिप पर हुई टूट-फूट को चेक करने के लिए भेज दिया।

एक सहायता दल को छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर, शिप के यात्रियों की मरहम पट्टी करने के लिए भेज दिया गया। क्यों कि शिप के बार-बार उछलने के कारण, यात्रियों को काफी चोटें भी आ गई थीं। सुयश ने एक बार पुनः माइक पर एनाउंस करके, सभी यात्रियों को शिप की स्थिति से अवगत करा दिया और उन्हें यह भी बता दिया कि अब वह सभी खतरे से बाहर हैं।

कंट्रोल रूम में अब सभी के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी और होती भी क्यों ना ? आखिर उन्होंने मौत पर विजय जो पाई थी।

जारी रहेगा....…..✍️
 
# 17.

1 जनवरी 2002, मंगलवार, 07:30;

विशालकाय भंवर से बच जाने के बाद भी सुयश के चेहरे पर सोच के भाव विद्यमान थे। सुयश को सोच में पड़ा देख, आखिरकार असलम से ना रहा गया और वह बोल उठा-

“क्या बात है कैप्टन? अब तो सारे खतरे टल गए हैं, फिर अब आप इतना परेशान क्यों दिख रहे हैं?“

“एक खतरा टल जाने से इतना खुश होने की जरूरत नहीं है। माना कि फौरी तौर पर अभी खतरा टल गया है। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम लोग जिस स्थान पर खड़े हैं, वह दुनिया का सबसे खतरनाक क्षेत्र है। बारामूडा त्रिकोण.....यह नाम अपने आप में मौत का पर्याय है और जब तक हम लोग इस क्षेत्र से निकल नहीं जाते, तब तक खतरा हमारे सिर पर मंडराता रहेगा। वह किसी भी रूप में हम पर अटैक कर सकता है। इसलिए सबसे पहले खुशियां मनाना छोड़, हमें इस खतरनाक क्षेत्र से बाहर निकलने के बारे में सोचना चाहिए।“

“तो इसमें इतना सोचने की क्या जरूरत है?“ रोजर ने गंभीरता की चादर ओढ़ते हुए कहा-

“आपका प्लान तो फुलप्रूफ है। अब हमें शिप को आपके प्लान के मुताबिक मोड़कर अपने वास्तविक रास्ते पर ले आना चाहिए।“

“अब हम सुप्रीम को प्लान के मुताबिक नहीं मोड़ सकते।“ सुयश ने रोजर के चेहरे पर एक गहरी निगाह डालते हुए कहा।

“पर क्यों ? आपका प्लान तो फुलप्रूफ है।“ रोजर ने कहा।

“फुलप्रूफ था ।“ सुयश ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा-

“क्यों कि तब हमें अपने शिप की स्थिति का पूर्ण ज्ञान था, कि हम किस जगह पर हैं। लेकिन भंवर में घूमने और उससे बचकर निकलते समय, हम यह नहीं जान पाये कि अब हम अपनी वास्तविक स्थिति से कितना दूर हैं? हमें तो यह भी नहीं पता कि हमने भंवर में पहुंचकर कितने चक्कर लगाए? और जब हम उस भंवर से निकलें तो हमारा शिप किस दिशा में था ?“

यह सुनते ही जैसे सभी को सांप सूंघ गया । एकाएक मुस्कुराते हुए चेहरे डर के कारण सफेद हो गए।

“इसका तो यह भी मतलब हो सकता है, कि हम बारामूडा त्रिकोण के इस रहस्यमय क्षेत्र से निकलने के प्रयास में, इसके और अंदर आ गए हों।“ लारा ने चिंतित स्वर में कहा।

“यकीनन ऐसा हो सकता है।“ सुयश ने जवाब दिया-

“शिप पर बार-बार आने वाले, इन विचित्र खतरों से तो यही जान पड़ता है।“

“अब हमें क्या करना चाहिए?“

रोजर के शब्दों में छिपी व्याकुलता को सभी ने साफ महसूस किया। सुयश एक बार पुनः सोच में पड़ गया। सभी खामोश होकर उसके अगले निर्णय का इंतजार करने लगे।

“हेली कॉप्टर!“ सुयश के मुंह से खुशी भरे स्वर निकले-

“हमें हेलीकॉप्टर का उपयोग करना होगा । शायद हम लोग अपने वास्तविक मार्ग से ज्यादा दूरी पर ना हों और आसपास ही कोई और शिप आ-जा रहा हो, जिससे हमें असली रास्ते का पता चल जाए।“

सुयश के शब्दों को सुनकर, सभी के चेहरे पर हजार वाट का बल्ब जल गया। तब तक जेम्स हुक अपनी टीम को खराबी ढूंढने में लगाकर वापस आ गये थे। तुरंत सुयश, रोजर, असलम, लारा, ब्रैंडन व जेम्स हुक हेली पैड की ओर चल दिए। हेली पैड, शिप के पिछले हिस्से में डेक के पास था।

“कैप्टेन!“ रोजर ने सुयश से सवाल किया- “एक बात समझ में नहीं आई कि हमारे सारे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र कैसे ब्लास्ट हो गए?“

“इसको समझने के लिए किसी विज्ञान की जरुरत नहीं है“ जेम्स हुक ने रोजर को देखते हुए कहा-

“जितने भी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र होते हैं, वह सभी लो-फ्रीक्वेंसी पर चलते हैं, जबकि विद्युत चुम्बकीय तरंगें हाई-फ्रीक्वेंसी पर चलती हैं। इसलिए जब भी कभी कोई इलेक्ट्रानिक यंत्र, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के बीच आता है, वह तीव्र ऊष्मा छोड़ता है। और ऊष्मा अधिक बढ़ जाने के कारण इलेक्ट्रानिक यंत्र जल जाता है।“

“और हमारा दिशा सूचक यंत्र कैसे खराब हो गया ?“ ब्रैंडन ने अपना नॉलेज बढ़ाने के उद्देश्य से जेम्स हुक से पूछा- “वह तो इलेक्ट्रानिक यंत्र नहीं होता।“

“दिशा सूचक यंत्र की चुम्बकीय सुई, पृथ्वी के चुम्बकत्व द्वारा आकर्षित होती है, जिसके कारण वह लगातार उत्तरी ध्रुव दर्शाती है। पर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के अंदर, दिशा सूचक यंत्र की चुम्बकीय सुई अपना चुम्बकत्व का गुण खो देती है। इसलिए वह हमेशा गलत दिशा बताने लगती है।“ यह कहकर जेम्स हुक ने ब्रैंडन को देखा पर ब्रैंडन उनकी बातों से संतुष्ट था।

“कहीं ऐसा ना हो कि हमारा हेलीकॉप्टर भी खराब हो गया हो।“ रोजर ने शंका भरे स्वर में पूछा-

“क्यों कि वह भी इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों से कार्य करता है।“

“जिस समय इस क्षेत्र में तीव्र विद्युत चुम्बकीय तरंगें फैलीं, उस समय हेलीकॉप्टर बंद पड़ा था। इसलिए मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हेली कॉप्टर इस समय सही अवस्था में होगा।“

जेम्स हुक ने कहा- “और अब यह क्षेत्र पूर्ण रूप से विद्युत चुंबकीय तरंगों से मुक्त है, यह मैं अभी साबित कर देता हूं।“

कहते-कहते जेम्स हुक ने अपनी जेब से 1 जोड़ी , छोटा वॉकी-टॉकी सेट निकाला और उस सेट का एक पीस रोजर को पकड़ा दिया।

“यह एक वॉकी-टॉकी सेट है। यह भी एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक यंत्र होता है। यह बहुत ही पॉवरफुल है। खुले समुद्र में इसकी बात करने की क्षमता , लगभग 50 नॉटिकल माइल तक है। जिस समय शिप के ऊपर से वह रहस्यमयी यान निकला, यह मेरी जेब में था, पर ऑफ था। मेरा पूरा विश्वास है कि यह सही काम करेगा और अगर यह सही चल गया तो समझिए कि हेलीकॉप्टर भी सही स्थिति में होगा।“

यह कहकर जेम्स हुक ने वॉकी-टॉकी सेट को ऑन कर दिया। वॉकी-टॉकी सेट चेक करने पर बिल्कुल सही कार्य कर रहा था। तब तक बात करते-करते यह सारे लोग शिप के पिछले डेक पर पहुंच गये।

कुछ आगे बढ़ने पर, लकड़ी का बना एक खूबसूरत सा कॉटेज दिखाई दिया। सभी उस विशालकाय कॉटेज में प्रवेश कर गए। लकड़ी का वह कॉटेज, अंदर से भी खूबसूरत था। कॉटेज के बीचो-बीच में एक हेली पैड बना था, जिस पर लाल रंग का एक छोटा सा, परंतु सुंदर हेलीकॉप्टर खड़ा दिखायी दिया। उस टू-सीटर हेलीकॉप्टर पर, इंग्लिश के बड़े व सुनहरे अक्षरों में “सुप्रीम” लिखा था।

कॉटेज में एक किनारे पर एक बड़ी सीइलेक्ट्रॉनिक मशीन लगी थी, जिसके सामने एक ऑपरेटर खड़ा, उन मशीनों से छेड़छाड़ कर, कुछ चेक करता दिखायी दिया। सुयश को देखते ही, वह तुरंत सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। लेकिन उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि वह भी कुछ परेशान सा है और निश्चय ही यह परेशानी भी, उस रहस्यमई यान से संबंधित थी। क्यों कि उस इलेक्ट्रॉनिक मशीन के आसपास, बिखरा कांच और टूटे हुए यंत्रों की स्थिति, इस बात का द्योतक थी कि यहां पर भी विद्युत चुंबकीय तरंगों का प्रकोप हुआ था।

“ऑपरेटर!“ रोजर ने ऑपरेटर को देखते हुए पूछा-

“क्या हेलीकॉप्टर उड़ने वाली पोजी शन में है?“

“यस सर!“ ऑपरेटर ने जवाब दिया-

“हेलीकॉप्टर तो रेडी है। पर कुछ यंत्रों में खराबी आ जाने के कारण, कॉटेज की छत व दीवारों को हटाने वाला, रिमोट कंट्रोल सही काम नहीं कर रहा है। इसलिए फिलहाल हेलीकॉप्टर सही होने के बाद भी, उड़ान नहीं भर सकता है।“

“डैम इट!“ सुयश ने सीधे हाथ का मुक्का बना कर, अपने बाएं हाथ के पंजे पर, गुस्से से मारते हुए कहा।

“अब क्या किया जाए सर?“ रोजर ने चिन्तित स्वर में सुयश की ओर देखते हुए कहा। सुयश कुछ देर सोचने के पश्चात, जेम्स हुक की ओर घूमकर बोला-

“मिस्टर जेम्स हुक, हमारे इस कॉटेज की दीवारें व छत फोल्ड होकर, कमल की पंखुड़ी की तरह खुलती हैं। इसकी छत में छोटे-छोटे फोल्डिंग ज्वाइंट्स हैं। आप तुरंत इन फोल्डिंग ज्वाइंट्स को खुलवाकर इसकी छत हटवा दीजिए।“

जेम्स हुक ने तुरंत कुछ लोगों को छत के फोल्डिंग ज्वाइंट्स को खोलने में लगा दिया। लगभग 45 मिनट के अथक परिश्रम के बाद, सभी हेलीपैड के ऊपर की छत खोलने में सफल हो गए।

“रोजर!“ सुयश ने रोजर को संबोधित करते हुए कहा-

“तुम तुरंत एक पायलट के साथ इस हेलीकॉप्टर से जाओ और देखो, शायद आप-पास से जाता हुआ, कोई और शिप दिखाई दे जाए या फिर कोई और सुराग मिल जाए। जिससे यह पता चल जाए कि हम इस समय किस जगह पर हैं? और हां यह वॉकी-टॉकी सेट भी लेते जाओ। इससे मेरे कांटेक्ट में रहना और मुझे सारी सूचना देते रहना ।“

यह कहते हुए सुयश ने जेम्स हुक से, वॉकी-टॉकी सेट लेकर, रोजर को दे दिया। रोजर, सुयश से वॉकी-टॉकी सेट लेकर, पायलट के साथ, हेलीकॉप्टर में प्रवेश कर गया।

हेलीकॉप्टर में बैठने के साथ, रोजर ने एक नजर वहां खड़े सभी लोगों पर मारी और फिर सुयश की तरफ देखते हुए, एक झटके से ‘थम्बस्-अप‘ की स्टाइल में अपना अंगूठा, जोश के साथ झटका देकर उठाया और फिर धीरे से पायलट की ओर देखकर, उसे हेलीकॉप्टर को उड़ाने का इशारा किया।

थोड़ी ही देर में, एक गड़गड़ाहट के साथ, हेलीकॉप्टर रोजर को लेकर आसमान में था।

जारी रहेगा........✍️
 
# 18 .

चैपटर-6 1 जनवरी 2002, मंगलवार, 08:30;

सुप्रीम एक विशालकाय शिप था। इसलिए इस पर कुल 18 डेक थे। 16 डेक यात्रियों के लिए थे। सिर्फ 2 डेक शिप के चालक दल के पास थे।

हेली पैड उनमें से ही एक डेक पर बना था। इसलिए इसकी ऊँचाई बाकी डेक के हिसाब से कुछ कम थी । इस डेक पर भी एक वर्गाकार आकृति में, लगभग 100 स्क्वायर फीट का स्विमिंग पूल बना था।

सुयश का केबिन भी इस डेक के नीचे की तरफ ही था। सुयश, असलम, लारा, ब्रैंडन और जेम्स हुक इसी डेक पर खड़े थे। चूंकि यात्रियों को इधर आने की मनाही थी। इसलिए सुबह हो जाने के बाद भी इस डेक पर काफी शांति थी।

रोजर को हेलीकॉप्टर लेकर निकले अभी बा-मुश्किल 5 मिनट ही हुए थे। अभी तक उसकी तरफ से कोई मैसेज नहीं मिला था। ब्रैंडन ने अपने हाथों में एक शक्तिशाली दूरबीन को पकड़ रखा था। वह बीच- बीच में दूरबीन को आँखों से लगा कर इधर-उधर देख रहा था। सभी लोग डेक की रेलिंग के पास खड़े थे।

“कैप्टेन!“ अचानक से ब्रैंडन ने सुयश को आवाज लगायी- “ब्लू व्हेल!“

ब्रैंडन की आवाज सुनकर सभी का ध्यान उस दिशा में गया, जिधर ब्रैंडन देख रहा था। उधर देखने पर, उन्हें पानी की सतह पर, लगभग 50 मीटर लम्बी ब्लू व्हेल दिखायी दी।

“ये ब्लू व्हेल तो, बाकियों से आकार में कुछ बड़ी लग रही है।“ असलम ने कहा।

“सही कह रहे हो असलम।“ सुयश ने भी असलम की बात का समर्थन किया-

“नार्मल ब्लू व्हेल का आकार 30 से 35 मीटर तक ही होता है। पर ये तो लगभग 50 मीटर के आस-पास दिख रही है।“

“ये तो इसी तरफ आ रही है।“ लारा ने घबरा ये स्वर में कहा- “हमें इससे किसी प्रकार का खतरा तो नहीं होगा कैप्टेन?“

“नहीं लारा।“ सुयश ने लारा के शक को दूर करते हुए कहा- “इससे घबराने की कोई जरुरत नहीं है। हमारे शिप का आकार 250 मीटर है। ये अकेली हमारे शिप का कुछ नहीं बिगाड़ सकती।“

तब तक ब्लू व्हेल थोड़ा और पास आ चुकी थी। वह बीच-बीच में पानी के बाहर आकर साँस भी ले रही थी जिसकी वजह से उसके सिर के ऊपर से गर्म हवा का फव्वारा भी निकल रहा था।

अब वह रुके हुए ‘सुप्रीम’ के बिल्कुल पास आ गयी थी। ब्लू व्हेल अब ध्यान से विशालकाय सुप्रीम को देख रही थी। शायद इससे पहले उसने अपने से बड़ी कोई चीज नहीं देखी थी।

थोड़ी देर तक शिप को देखते रहने के बाद, अब ब्लू व्हेल ने पानी में गुलाटियां मारनी शुरु कर दीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह शिप को कोई बड़ा जीव समझ कर खुश करने में लगी है।

शिप पर मौजूद सभी लोगों को उसकी यह हरकत बहुत अच्छी लग रही थी। थोड़ी देर तक गुलाटियां मारने के बाद, अब ब्लू व्हेल ने अपनी पूंछ से शिप पर पानी फेंकना शुरु कर दिया।

डेक का यह हिस्सा थोड़ा नीचा होने की वजह से पानी के कुछ छींटे, डेक पर खड़े लोगों पर भी पड़ रहे थे। ब्लू व्हेल के करतब देख कर, थोड़ी देर के लिए सभी शिप की परेशानियों को कुछ क्षण के लिए भूल गये। तभी ब्लू व्हेल ने बहुत ताकत लगा कर शिप पर पानी फेंका, जो कि तेजी से आकर डेक के किनारे पर खड़े सुयश को पूरा भिगा गया।

बाकी के लोग सुयश से थोड़ा दूर थे। इसलिए वह भीगने से बच गये सुयश का यह हाल देखकर एक बार सभी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी।

सभी को मुस्कुराते देख सुयश भी ना चाहते हुए मुस्कुरा दिया। ब्लू व्हेल अब वहां से जा रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे वह समझ गयी हो कि सुप्रीम एक निर्जीव वस्तु है और वह उसके साथ नहीं खेलेगी। सुयश ने एक नजर अपने भीगे हुए कपड़ों पर मारी और वहां डेक पर खड़े अपने एक कर्मचारी को दूसरे कपड़े लाने का इशारा किया।

वह कर्मचारी सुयश का खास था। उसे पता था कि सुयश के कपड़े केबिन में कहां पर हैं। वह बिना देर किए कपड़े लाने चला गया।

सभी की नजर फिर से वॉकी टॉकी सेट पर गयी। लगभग 15 मिनट बीत चुके थे, लेकिन अभी तक रोजर का कोई मैसेज नहीं आया था। मुश्किल से 3 से 4 मिनट में ही कर्मचारी सुयश के कपड़े लेकर आ गया। सुयश कपड़े लेकर, स्विमिंग पूल के बगल बने चेंजिंग रुम की तरफ चल दिया।

“बहुत देर हो चुकी है, पर अभी तक रोजर सर की तरफ से कोई मैसेज नहीं आया।“ ब्रैंडन ने असलम की ओर देखते हुए कहा- “क्या हमें अपनी तरफ से उन्हें कॉल करना चाहिए?“

“5 मिनट और इंतजार करते हैं।“ असलम ने जवाब दिया- “अगर फिर भी कोई कॉल नहीं आया तो हम अपनी तरफ से कॉल कर लेंगे।“

लेकिन इससे पहले कि कोई और कुछ कह पाता वॉकी टॉकी सेट से ‘खर्र-खर्र‘ की आवाज आयी। ब्रैंडन तुरंत यह सब सुयश को बताने के लिए चेंजिंग रुम की ओर भागा। ब्रैंडन ने चेंजिंग रुम के बाहर से ही आवाज लगा कर सुयश को मैसेज के बारे में बता दिया। उधर वॉकी टॉकी सेट पर रोजर की आवाज गूंजी-

“हैलो-हैलो कैप्टन! क्या आप मेरी आवाज सुन रहे हैं? ओवर।“

“यस रोजर सर!“ हमें आपकी आवाज सुनाई दे रही है। ओवर!“ असलम ने रोजर की बात का जवाब देते हुए कहा। तब तक सुयश सिर्फ पैंट पहने, उधर भाग कर आता दिखाई दिया। जल्दी-जल्दी में उसे शर्ट पहनने का टाइम ही नहीं मिला।

“यस रोजर! बताओ, क्या कहना चाहते हो तुम? ओवर!“ सुयश ने वॉकी टॉकी सेट को असलम से लेते हुए, रोजर को संबोधित करते हुए कहा। रोजर ने सुयश की आवाज पहचान ली। वह बोला-

“कैप्टन हम लोग इस समय शिप से काफी दूर आ चुके हैं। पर अभी दूर-दूर तक कुछ नजर नहीं आ रहा है। लगता है कि हम वास्तव में भटक गए हैं।“ सभी का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ वॉकी-टॉकी सेट पर था। रोजर का बोलना जारी रहा-

“अब हम लोग और आगे बढ़ रहे हैं सर। हर तरफ सिर्फ समुद्र की लहरें ही नजर आ रही हैं। नीला समुद्र ...... पानी ही पानी “

कुछ देर रुक कर आवाज फिर से आनी शुरू हुई- “सर हमें बहुत दूर एक काला धब्बा सा दिखाई दे रहा है। हम लोग अब उस दिशा में बढ़ रहे हैं। शायद वह कोई पानी का जहाज हो।“

थोड़ी देर बाद आवाज पुनः आयी -

“हम लोग गलत थे सर। वह कोई जहाज नहीं , बल्कि कोई द्वीप है। अब हम लोग धीरे-धीरे उसके और पास जा रहे हैं। यह कोई छोटा सा, परंतु हरा-भरा द्वीप है। इसके आसपास हल्की सी धुंध दिखाई दे रही है।.................अब हम द्वीप के और पास पहुंच गए हैं सर। अचानक कुछ गर्मी बढ़ सी गई है। शायद यह द्वीप कुछ ज्यादा ही गर्म है। क्यों कि इस द्वीप से, समुद्र की ठंडी लहरें टकरा कर, धुंध के रूप में आस पास फैल रही हैं, जो कोहरे के रूप में मुझे दूर से ही दिखाई दे रही हैं।................. यहां एक विचित्र सी पहाड़ी भी है।

दूर से देखने पर यह कोई क्राऊन पहने हुए मानव आकृति के समान प्रतीत हो रही है....... ऐसा लग रहा है जैसे कोई योद्वा इस द्वीप की रखवाली कर रहा हो............. अब हम इस द्वीप के ऊपर उड़ान भर रहे हैं सर। ....... यहां किसी भी प्रकार के जीवन का कोई निशान नहीं है। हर तरफ एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है। द्वीप के बीच में, एक साफ पानी की झील भी दिख रही है। देखने में यह द्वीप काफी सुंदर लग रहा है सर।.......... ऊंचाई से देखने पर यह द्वीप एक त्रिभुज की आकृति लिए हुए दिखाई दे रहा है। ..... पर यह क्या सर? ....ओऽऽऽ नो ऽऽऽ ...... यह कैसे संभव है?.......“

एका एक रोजर की आवाज अत्यंत विस्मय से भर गई। खौफ उसकी आवाज में साफ नजर आने लगा।

“क्या हुआ रोजर? क्या दिख रहा है तुम्हें?“ सुयश ने घबरा ये स्वर में पूछा।

“मैं समझ.....नहीं पा......रहा हूं सर! कि मैं......आपको कैसे बताऊं? ..........मैं इस समय ... ..बड़ा अजीब सा....महसूस कर रहा हूं। ऐसा लगता है जैसे धुंध....... बड़ी तेजी से बढ़ गई है....। आसमान का रंग........ समझ में .. ..नहीं आ ....रहा है। ......पानी भी ......जैसा दिखना चाहिए .......वैसा नहीं दिख रहा है.....और ये क्या ? ...... ये.... ये.....यहां ये.....मुझे क्या दिख रहा है.....सर ऐसा लग रहा है .....जैसे कि हम....... ..... ..........।“

“खट्....खट्.....खटाक।“ और इसी के साथ सुयश से रोजर का संपर्क टूट गया।

“रोजर ... रोजर....! क्या हुआ रोजर?....... तुम बोलते क्यों नहीं ? क्या दिखाई दे रहा है तुम्हें?“

सुयश लगातार वॉकी-टॉकी सेट पर पागलों की तरह चीख रहा था। जेम्स हुक ने धीरे से, सुयश के हाथों से वॉकी-टॉकी सेट ले लिया-

“आपका संपर्क रोजर से कट चुका है कैप्टन। शायद वह किसी खतरे का शिकार हो चुका है।“ सुयश अभी भी सकते की सी हालत में खड़ा शून्य में घूर रहा था। लारा ने धी र से सुयश को हिला कर शून्य से बाहर किया-

“अब हमें क्या करना चाहिए कैप्टन ? हेली कॉप्टर जाने के बाद, अब हमारी आखिरी उम्मीद भी टूट गई है।“ सुयश मानों सोते से जागा हो।

“रोजर ने मेरे साथ, आज तक के सफर में, ना जाने कितने खतरे देखे थे। पर आज तक मैंने उसे कभी, इतना घबराया हुआ नहीं देखा। ना जाने उसने ऐसा क्या देख लिया ? जो वह इतना घबरा गया ?“

सुयश ने धीमी आवाज में कहा। धीरे-धीरे जब सुयश सामान्य हुआ तो उसने अपने आस-पास खड़े लोगों पर नजरें डालीं । सभी के चेहरे पर दहशत और आँखों में खौफ के भाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे।

“अब हमारे पास कोई चारा नहीं है, शिप को अन्जानी दिशा में आगे बढ़ाने के सिवा।“

सुयश ने बारी -बारी सभी के चेहरों को देखते हुए कहा-

“इसलिए जिस दिशा में हेलीकॉप्टर गया था। शिप को उसकी विपरीत दिशा में मोड़कर तब तक आगे बढ़ने दिया जाये जब तक हमें वास्तविक रास्ते का पता ना चल जाए। किसी को कोई आपत्ति हो तो वो मुझे बता सकता है?“

“नहीं !“ सभी ने समवेत स्वर में कहा। तभी ब्रैंडन की निगाह सुयश की पीठ पर बने एक टैटू पर गयी। सूर्य के निशान वाला काले रंग का बिल्कुल गोल वह टैटू लगभग 8 इंच डाया मीटर का था। टैटू में बनी सूर्य की आग उगलती आकृति, सूरज की रोशनी में बहुत तेज चमक रही थी।

“आपकी पीठ पर बना टैटू बहुत शानदार है कैप्टेन।“ ब्रैंडन ने टॉपिक चेंज करते हुए कहा- “आपकी शर्ट की वजह से आज तक, यह हम लोगों को दिखायी नहीं दिया।

जारी रहेगा..........✍️
 
# 19 .

“हम लोग सूर्यवंशी राजपूत हैं। इस लिए सूर्य हमारे आराध्य देव हैं। मेरे दादा जी भारत में रहते थे। यह निशान उनके हाथ पर बना था। जो मुझे बहुत अच्छा लगता था। एक बार जब दादा जी अमेरिका आये थे, तो मैंने उनका यह निशान कॉपी करके, एक टैटू वाले से अपनी पीठ पर बनवा लिया था।“

सुयश शायद अपने दादा जी को याद कर, कुछ देर के लिए वर्तमान परिस्थिति को एक क्षण के लिए भूल गया था। पर जैसे ही उसे रोजर की याद आयी वो फिर दुखों से भर गया। तभी सुयश की नजर सामने लगी घड़ी पर गयी। इस समय सुबह का 10:00 बज रहा था।

पूरी रात परेशानियों के बीच बीती थी। वैसे तो आज न्यू ईयर का पहला दिन था। फिर भी किसी के चेहरे पर खुशी नहीं थी। सुयश को बहुत थकान लग रही थी, मानसिक भी और शारीरिक भी। अब वह धीरे-धीरे अपने केबिन की ओर बढ़ गया।

उसके जाते ही बाकी लोग भी अपने केबिन की ओर बढ़ गये।

2 जनवरी 2002, बुधवार, 01:30;

शिप को चलते हुए पूरा दिन बीत चुका था, पर किसी भी तरह की अभी कोई मुसीबत नहीं आई थी। शिप में यात्रा कर रहे यात्रियों के बीच, अजीब सी अफवाहों का बाजार गर्म था।

सभी यात्री अलग-अलग तरह की अटकलें लगा रहे थे। किसी को भी शिप की वास्तविक स्थिति के बारे में नहीं पता था। पर शिप में यदि कोई सबसे ज्यादा परेशान था, तो वह था सुयश।

रात का लगभग 1:30 बज रहा था। परंतु उसकी आंखों में नींद का नामो निशान नहीं था। वह शिप पर लगातार हो रही, विचित्र घटनाओं में उलझा हुआ था- पहले शिप पर अपराधी के बारे में पता चलना, न्यू ईयर की रात लॉरेन का संदिग्ध परिस्थितियों में मर्डर हो जाना, शिप का बारामूडा त्रिकोण जैसे खतरनाक क्षेत्र में प्रवेश करना, शिप के ऊपर से नीली रोशनी बिखेरते रहस्यमय यान का निकलना, सभी इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों सहित कम्पास का खराब हो जाना, शिप का भंवर में फंस जाना और रोजर का हेलीकॉप्टर दुर्घटना ग्रस्त हो जाना।

यह सभी घटनाएं एक-एक करके सुयश के दिमाग में घूम रही थीं। लेकिन इन सब विचारों से बड़ा, एक विचार सुयश के दिमाग में और घूम रहा था और वह यह था कि क्या शिप सभी खतरों से बचकर, वापस अपनी सभ्यता में पहुंच पाएगा?

अभी वह इन सभी बातों में उलझा ही था, कि एकाएक फोन की घंटी, किसी हॉरर फिल्म के म्यूजिक की तरह से बज उठी।

“ट्रिंग.....ट्रिंग....ट्रिंग...“ सुयश की नजरें तुरंत सामने लगी घड़ी की ओर गईं। इस समय रात का 1:50 हुए थे।

“इतने समय किसका फोन हो सकता है?“ यह विचार दिमाग में आते ही, सुयश एक झटके से बेड से उतरकर, फोन उठा लिया।

“हैलो कैप्टन!“ उधर से ब्रैंडन की आवाज सुनाई दी- “क्या आप कुछ देर के लिए शैफाली के रूम में आ सकते हैं?“

“क्या हुआ?“ सुयश ने घबरा कर कहा- “कोई परेशानी है क्या ?“

“कुछ खास नहीं कैप्टेन!“ ब्रैंडन ने शान्त आवाज में कहा- “पर मिस्टर माइकल आपको कुछ दिखाना चाहते हैं। आप आ जाइये। आपके आने पर, सब पता चल जायेगा।“

यह कहकर ब्रैंडन ने फोन काट दिया। ब्रैंडन ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा था, जिससे कोई परेशानी होती पर ना जाने क्यों सुयश को ऐसा लग रहा था, कि कुछ गड़बड़ जरुर है। सुयश तुरंत स्लीपिंग सूट में ही, पैरों में स्लीपर डालकर तेजी से शैफाली के रूम की ओर भागा।

लेकिन उसका मन किसी अंजानी आशंका के कारण तेजी से धड़क रहा था। कई गैलरियों को पार करते हुए सुयश कुछ ही देर में शैफाली के रुम के पास पहुंच गया। शैफाली के रूम के दरवाजा खुला हुआ था। सुयश ने तेजी से अंदर प्रवेश किया। अंदर माइकल, मारथा, अलबर्ट, ब्रैंडन व लारा एक तरफ रखे सोफे पर बैठे दिखाई दिये। ब्रूनो उनके पास शांत भाव से जमीन पर बैठा था। सुयश को अंदर आते देख सभी उठकर खड़े होने लगे, पर सुयश ने सबको बैठे रहने का इशारा किया। सुयश भी एक खाली पड़े सोफे पर बैठ गया।

“क्या बात है ब्रैंडन?“ सुयश ने ब्रैंडन को देखते हुए कहा- “इतनी रात को आप सब यहां क्या कर रहे हैं?“

“कैप्टेन हमें भी मिस्टर माइकल ने 555 पर फोन करके बुलाया है।“ ब्रैंडन ने माइकल की तरफ इशारा करते हुए कहा-

“पर अभी हमें भी इन्होंने कुछ नहीं बताया है। हमारे आने पर इन्होंने आपको बुलाने के लिए कहा। शायद यह आपके सामने ही कुछ बताना चाहते हैं।“

यह सुन अब सुयश की निगाहें माइकल पर गयीं। माइकल जो अब तक खामोश बैठा था, सुयश को अपनी तरफ देखते हुए देख बोल उठा-

“कैप्टेन! थोड़ी देर पहले, मैं और मारथा इसी रुम में बैठकर आपस में बातें कर रहे थे। शैफाली दूसरे रुम में सो रही थी। तभी हमें शैफाली के रुम से किसी खटके की आवाज आयी। मैं और मारथा लगभग भागते हुए शैफाली के रुम में पहुंचे। वहां पहुंचकर हमने देखा, कि शैफाली के रुम के खिड़की, हवा के चलने की वजह से हिल रही थी। हमें लगा, कि शायद इसी की आवाज हमें आयी होगी। मैंने खिड़की को बंदकर एक नजर शैफाली पर डाली। तभी मुझे शैफाली के सिर के पास तकिये पर रखी, चमकती हुई कोई चीज दिखाई दी। मैंने आगे बढ़कर उस चीज को उठा लिया। वह चीज सोने का एक प्राचीन सिक्का थी।“

“सोने का प्राचीन सिक्का !“ सुयश के मुंह से आश्चर्य भरे स्वर निकले। ब्रैंडन व लारा भी आश्चर्य से माइकल को देख रहे थे।

“जी हाँ ! सोने का प्राचीन सिक्का।“ कहते हुए माइकल ने जेब से, एक सोने का सिक्का निकालकर टेबल पर रख दिया।

सुयश ने उस सिक्के को हाथ में उठा लिया। वह सिक्का शुद्ध सोने का बना था। उस सिक्के के एक साइड में 6 घोड़े, एक रथ को खींच रहे थे। रथ का पिछले हिस्से में एक योद्वा लड़की सवार थी। जिसके हाथ में त्रिशूल था। लड़की के बाल हवा में लहरा रहे थे। सिक्के के दूसरी साइड पर एक खूबसूरत सी डॉल्फिन मछली बनी थी और उस मछली के नीचे, किसी ना समझ में आने वाली भाषा में कुछ लिखा था। जब सुयश ने उस सिक्के को पूरी तरह से देख लिया, तो उसे लारा की तरफ बढ़ा दिया। अब लारा व ब्रैंडन उस सिक्के को देखने लगे।

“तकिये से सिक्का उठाने के बाद मैंने अलबर्ट सर को फोन किया।“ माइकल ने पुनः बोलते हुए कहा- “अलबर्ट सर ने सिक्का देखने के बाद आपको बुलाने के लिए कहा।“

इतना कहने के बाद माइकल ने अपनी बात समाप्त कर दी।

“क्या आपने किसी को भी शैफाली के कमरे में आते-जाते देखा ?“ सुयश ने माइकल को सम्बोधित करते हुए कहा- “या फिर आपकी अनुपस्थिति में कोई आया हो ?“

“नहीं !“ माइकल ने नकारात्मक अंदाज में सिर हिलाते हुए कहा- “कल की घटना के बाद से हम डरे हुए थे। इसलिए ना तो हम कहीं गये थे और ना ही कल से यहां कोई आया था। हमने तो खाना भी रुम में ही मंगा लिया था। वैसे भी कैप्टेन, ब्रूनो के रहते किसी का हमारे कमरे में चोरी-छिपे आना तो पॉसिबल भी नहीं है।“

सुयश की नजर ब्रूनो पर पड़ी। सुयश का चेहरा अपनी तरफ देख, ब्रूनो ने भी फॉर्मेलिटी के अंदाज में पूंछ को 2 बार दांये-बांये कर दिया। अब सुयश अलबर्ट की तरफ मुड़कर बोला-

“प्रोफेसर! आपका क्या कहना है, इस सिक्के के बारे में? क्या आप बता सकते हैं कि यह सिक्का किस देश का है?“

“कैप्टेन! जब मैंने सिक्का देखा तो मुझे भी समझ में नहीं आया, कि इस पर लिखा क्या है?“ अलबर्ट ने सुयश की ओर देखते हुए कहा-

“लेकिन मैं इतना जानता हूं कि ये किसी प्राचीन काल की सभ्यता का सिक्का है। और आज के समय में इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो सकती है। इसीलिए ये सिक्का देखने के बाद मैंने माइकल से आपको बुलाने के लिए कहा।“

“प्राचीन काल का सिक्का !“ ब्रैंडन के मुंह से आश्चर्य भरे स्वर में निकला-

“पर ये इतना पुराना सिक्का यहां पर आया कैसे?“

“इस अटलांटिक महासागर में हम लोगों के साथ, जो भी हो जाए वो कम ही है।“ सुयश ने कुछ सोचते हुए गम्भीर शब्दों में कहा।

“अटलांटिक महासागर!“ अचानक अलबर्ट आश्चर्य से भर उठा- “एक मिनट के लिए जरा मुझे वो सिक्का दोबारा दिखाइये।“

सुयश ने टेबल पर रखा सिक्का अलबर्ट की ओर बढ़ा दिया। सभी अब अलबर्ट की ओर देख रहे थे। अलबर्ट ध्यान से सिक्के के दोनों साइड देखता रहा और कुछ देर के बाद उसने अपनी चुप्पी तोड़ी-

“कैप्टेन मुझे यह सिक्का ‘अटलांटिस‘ सभ्यता का लग रहा है।“

“अटलांटिस!“ माइकल को छोड़कर सभी के मुंह से आश्चर्य भरे स्वर निकले। “आप यह बात कैसे कह सकते हैं?“ सुयश ने अलबर्ट की ओर देखते हुए पूछा- “कि ये सिक्का ‘अटलांटिस‘ का है।“

“कैप्टेन जब आपने अटलांटिक महासागर बोला तो अचानक से मुझे अपने ऑफिस की लाइब्रेरी में रखी एक किताब याद आ गयी। जिसका नाम ‘अटलांटिस- एक रहस्यमयी संसार‘ था। वह किताब सन् 1882 में ‘इग्नाटस डोनैली‘ ने लिखी थी, जिन्हें अमेरिकी सरकार ने ‘अटलांटिस‘ पर शोध करने के लिए रखा था। उन्हीं के द्वारा ‘अटलांटोलॉजी‘ नामक विषय की शुरुआत हुई। उसी किताब के कवर पेज पर, कुछ इसी तरह से समुद्र के देवता ‘पोसाइडन‘ की तस्वीर बनी थी।“

“एक मिनट रुकिये अलबर्ट सर।“ माइकल ने अलबर्ट को बीच में ही टोकते हुए कहा- “ये अटलांटिस क्या है? मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता। इसलिए मुझे आप लोगों की बातें समझ नहीं आ रहीं हैं।“

“अटलाटिस एक प्राचीन द्वीप की कहानी है।“ अलबर्ट ने माइकल को बताते हुए कहा- “जिसका जिक्र ग्रीक दार्शनिक ‘प्लेटो ‘ ने आज से लगभग 2600 वर्ष पूर्व किया था। कहते हैं कि अटलांटिस का विज्ञान आज से भी ज्यादा उन्नत था। उनकी धरती पर एलियंस का भी आना जाना था। पर वह द्वीप, एक दिन एक विशालकाय ज्वालामुखी के फटने की वजह से समुद्र में डूब गया। तबसे वैज्ञानिक आज भी उस दुनिया की खोज कर रहें हैं।“

“ओहऽऽऽ!“ माइकल ने एक लम्बी साँस भरी।

जारी रहेगा…....✍️
 
# 20 .

“पर इस सिक्के पर तो एक लड़की योद्धा का चित्र बना है।“ लारा ने अलबर्ट से सवाल किया- “आप तो किताब के कवर पेज पर देवता पोसाइडन की फोटो की बात कर रहे थे।“

“हां ! थोड़ी सी चीजें अलग जरुर हैं, पर उस किताब के कवर पेज से बहुत ज्यादा चीजें मैच हो रहीं हैं।“ अलबर्ट ने कहा-

“जैसे 6 घोड़े का रथ, त्रिशूल और डॉल्फिन की फोटो। पर मैं अब 100 प्रतिशत श्योर हूं कि यह सिक्का अटलांटिस का ही है।“

तभी सुयश ने इधर-उधर नजर मारते हुए माइकल से पूछा-

“शैफाली कहां है? कहीं दिखा ई नहीं दे रही है?“

“वह अभी भी सो रही है।“ माइकल ने जवाब दिया- “देर रात हो जाने के कारण, हमने उसे उठाया नहीं था।“

“क्या हम शैफाली के सोने की जगह देख सकते हैं? ब्रैंडन ने माइकल से पूछा- “शायद हमें वहां कोई सुराग मिल जाये? जिससे इस सिक्के के बारे में कुछ पता चल सके।“ सुयश को भी ब्रैंडन की बात सही लगी।

“हां -हां ! क्यों नहीं ?“ माइकल बोलते हुए खड़ा हो गया।

माइकल सहित सभी अब शैफाली के रुम में आ गये। ब्रूनो भी सबके पीछे-पीछे रुम में आ गया। शैफाली गहरी नींद में थी। माइकल ने धीरे से सभी को खाली पड़े, दूसरे तकिये की ओर इशारा किया। सुयश समझ गया कि इसी तकिये पर सिक्का मिला था। सभी की नजरें अब रुम में चारो तरफ, किसी सुराग की तलाश में घूम रही थीं। पर रुम में उन्हें कोई ऐसी चीज नजर नहीं आयी, जिसका सिक्के से कोई ताल्लुक हो। तभी सुयश की नजर शैफाली पर पड़ी जो कि अब बेचैनी से सोते हुए करवट बदल रही थी।

“लगता है ये फिर से सपने देख रही है।“ मारथा ने बेचैन स्वर में माइकल की ओर देखते हुए कहा।

“सपने!“ सुयश के स्वर में आश्चर्य के भाव थे- “पर शैफाली तो बचपन से अंधी है ना। फिर उसे सपने कैसे आ सकते हैं?“

“शैफाली को सपने आते हैं कैप्टेन।“ माइकल ने कहा- “जब ये छोटी थी, तब भी सोते-सोते घबरा जाती थी। फिर 4 साल की उम्र से इसने अपने सपनों के बारे में हमें बताना शुरु कर दिया था। अब सपने इसको कैसे आते हैं? इसके बारे में तो हममें से कोई भी नहीं जानता। एक बात है यह सपने में ऐसी चीजें देखती है, जिसके बारे में इसने पहले कभी ना सुना हो।“

तभी शैफाली ने जोर से अपनी मुठ्ठी बंद कर ली। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमचमाने लगीं । अब वह जोर से कसमसा रही थी। मारथा से यह देख रहा ना गया। उसने शैफाली को जोर-जोर से हिलाना शुरु कर दिया-

“शैफाली..... शैफाली....।“ पर शैफाली अभी भी गहरी नींद में थी। सभी ध्यान से शैफाली की ओर देख रहे थे। मारथा के जोर-जोर से हिलाने के कारण अब शैफाली जाग गयी। “

मॉम....मॉम....!“ शैफाली ने जागते ही जोर से मारथा को पकड़ लिया।

“शांत हो जाओ!..... शांत हो जाओ शैफाली। मम्मा यहीं पर है।“ मारथा ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा- “तुम सिर्फ सपना देख रही थी।“ शैफाली अब धीरे-धीरे नार्मल हो रही थी। तभी उसने वातावरण में कुछ सूंघने की कोशिश की।

“कैप्टेन अंकल आप!“ शैफाली के शब्दों में आश्चर्य नजर आया- “आप इस समय हमारे रुम में क्या कर रहे हैं? और आपके साथ 2 लोग और भी हैं। कोई परेशानी हुई है क्या ?“

“नहीं बेटा ! कुछ खास बात नहीं है।“ सुयश ने शैफाली को तारीफ भरी नजरों से देखते हुए कहा- “हम लोग वैसे ही बस आपके पापा से मिलने आये थे।“

“और आप ग्रैण्ड अंकल?“ शैफाली ने सूंघते हुए अलबर्ट की ओर चेहरा घुमाया- “आप भी शायद पापा से मिलने ही आये होंगे।“

“हां बेटा !“ अलबर्ट ने भी झूठ बोलते हुए कहा- “रात में नींद नहीं आ रही थी। इसलिए मैं भी घूमता हुआ इधर आ गया। हमारी छोड़ो ! तुम बताओ, क्या तुम्हें फिर से सपने आये थे?“ अलबर्ट ने टॉपिक चेंज करते हुए कहा।

“सपने!“ शैफाली ने अचानक दिमाग पर जोर डालते हुए कहा- “हां ग्रैंड अंकल। मैं फिर से सपना देख रही थी। मैने सपने में एक खूबसूरत हरा-भरा त्रिभुज की आकृति वाला द्वीप देखा, जिसके चारो तरफ धुंध फैली हुई थी। क्राऊन पहने एक अजीब सी मानव आकृति लिए हुए पहाड़ी, पत्थरों पर बनी विचित्र सी आकृतियां, एक सुंदर झील, .........।“

कहते-कहते शैफाली एक क्षण के लिए रुकी, मानों वह सपने को पूरी तरह से याद कर रही हो।

उधर सुयश, ब्रैंडन और लारा के चेहरे पर शैफाली की बातें सुनकर पसीना छलक आया था, क्यों कि शैफाली ठीक उसी द्वीप के बारे में बता रही थी। जिसको आज सुबह ही रोजर ने देखा था। तभी अचानक उसके पास बैठा ब्रूनो, अपने कान खड़े करके उठ कर बैठ गया। उसकी नजरें अब अपने सपनों के बारे में बता रही शैफाली पर थी। एका एक वह धीरे से उठा और कूं-कूं करते हुए शैफाली से दूर हट गया। पर उसकी सहमी-सहमी सी निगाहें अभी भी शैफाली पर थीं।

चूंकि शैफाली का ध्यान अपने सपनों पर और बाकी सभी का ध्यान शैफाली पर था। इसलिए किसी ने ब्रूनो की हरकतों पर ध्यान नहीं दिया। मगर ब्रैडन की निगाह से यह घटना बच नहीं सकी । ब्रैंडन को ब्रूनो की यह हरकत बड़ी अजीब सी लगी। अब वह कभी शैफाली की ओर देखता तो कभी डरे सहमे ब्रूनो की ओर। उधर शैफाली लगातार बोले जा रही थी-

“मैंने देखा एक सुनहरा मानव, जो हमें किसी दिशा में जाने के लिए इशारा कर रहा था और एक बड़ी पूंछ वाला पहाड़ी तोता .......और एक आवाज......।“ कहते-कहते शैफाली एका एक रुक सी गई।

“कैसी आवाज?“ सुयश ने शैफाली से पूछा।

“ऐसा लग रहा था, जैसे कोई कह रहा हो ‘वेलकम टू अटलांटिस‘।“ शैफाली ने कहा। अटलांटिस शब्द सुनते ही अब सभी का दिमाग सांय-सांय करने लगा।

“और.... और.... क्या देखा तुमने?“ सुयश ने जोर देते हुए कहा।

“और......।“ कहते-कहते एका एक शैफाली ने अपना सिर पकड़ लिया।

“क्या बात है बेटा ? क्या हुआ?“ मारथा ने शैफाली को झकझोरते हुए कहा।

“पता नहीं क्यों ? अचानक मेरा सिर बहुत तेजी से दर्द हो ने लगा है। और बहुत भारी-भारी सा महसूस होने लगा है।“

“कोई बात नहीं बेटा। अब तुम सोचना बंद करो और वापस बेड पर आराम कर लो। मम्मा अब आपके पास हैं इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।“

माइकल ने अपनी उंगलियों से शैफाली के बालों में कंघी करते हुए कहा। उधर जैसे ही शैफाली ने सपनों के बारे में सोचना बंद किया, ब्रूनो जो कि दूर बैठा हुआ था, धीरे धीरे चलता हुआ शैफाली के पास आ गया। शैफाली वापस बेड पर लेट गयी।

माइकल यह देखकर धीरे से बेड से उठा और रुम से निकलते हुए सबको बाहर आने का इशारा किया। मारथा को शैफाली के पास छोड़, सभी लोग बाहर के रुम में आ गये। सभी सोफे पर बैठ गये, पर किसी के मुंह से कोई बोल नहीं फूट रहा था। अजीब सा सस्पेंस भरा सन्नाटा छाया था। लंबे खिंच रहे सन्नाटे को तोड़ा ब्रैंडन की आवाज ने-

“कैप्टेन! मुझे लग रहा है, कि शैफाली एक नॉर्मल बच्ची नहीं है। इसके पास कुछ ना कुछ पॉवर जरुर है। शायद भविष्य देखने की पॉवर या फिर कुछ अलग.... जो हम समझ नहीं पा रहे हैं।“

“कह तो तुम ठीक रहे हो ब्रैंडन।“ सुयश ने भी ब्रैंडन की हां में हां मिलायी- “पर सवाल अभी शैफाली की पावर्स के बारे में बात करने का नहीं है। सवाल यह है कि वह रहस्यमयी द्वीप क्या है? जिसने रोजर की जान ले ली और यह अटलांटिस का सिक्का यहां कहां से आया ?“

“क्या मिस्टर रोजर अब नहीं रहे?“ अलबर्ट ने आश्चर्य से पूछा।

“जी हां प्रोफेसर! कल रोजर का हेलीकॉप्टर एक ऐसे ही रहस्यमयी द्वीप के पास दुर्घटना ग्रस्त हो गया जिसमें रोजर की मौत हो गयी।“ सुयश ने अलबर्ट से कहा।

“ओह! भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।“ अलबर्ट ने दुख प्रकट किया।

“जरुर उस द्वीप पर कुछ ना कुछ खतरनाक है।“ लारा ने कहा- “तभी वह शैफाली को भी सपने में नजर आ रहा है।“

“पर यह अटलांटिस का सिक्का यहां पर कैसे आया और कौन है वह जो शैफाली को सपने के माध्यम से बुला रहा है?“ सुयश ने कहा।

“कैप्टेन! मेरे पास एक थ्योरी है।“ अलबर्ट ने गहरी सांस लेते हुए कहा- “मैं ये तो नहीं कह सकता कि ये थ्योरी बिल्कुल सही है पर सभी घटनाओं को एक क्रम देने के बाद मुझे ये थ्योरी काफी हद तक सही दिशा में जाती लग रही है। अगर आप इजाजत दें तो मैं बोलूं।“

“जी प्रोफेसर बताइये!“ सुयश ने इजाजत देते हुए कहा।

“अटलांटिस एक प्राचीन द्वीप था। कहते हैं कि वह यहीं कहीं अटलांटिक महासागर में ही था। किताबों में लिखा है कि अटलांटिस द्वीप का विज्ञान बहुत उन्नत था। अटलांटिस द्वीप पर दूसरे ग्रहों के लोगों का भी आना जाना था। फिर अचानक एक विशालकाय ज्वालामुखी के फटने की वजह से, वह पूरी सभ्यता, अटलांटिक महासागर में कहीं खो गयी। अब ये एक अजीब इत्तफाक है कि जिस जगह का वर्णन किताबों में किया गया है, उसी जगह पर बारामूडा त्रिकोण का यह क्षेत्र आता है। अब आप लोग अपने दिमाग से यह बताइये कि क्या वजह हो सकती है, इस क्षेत्र में जहाजों के गायब होने की ?“

“आपकी थ्योरी मुझे भी काफी स्ट्रांग लग रही है प्रोफेसर।“ सुयश को अलबर्ट की बातों में दम दिखाई दिया- “इसका मतलब कि वह द्वीप अटलांटिस का अवशेष हो सकता है और वहां बचे हुए लोग नहीं चाहते कि कोई उनकी सभ्यता के बारे में जाने।“

“बिल्कुल ठीक कैप्टेन। अब हम सही लाइन पर बढ़ रहे हैं।“ अलबर्ट के शब्दों में अब खुशी के भाव थे।

“ओह! तभी हमें इस क्षेत्र में उड़नतश्तरी दिखायी दी थी।“ लारा ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

“पर यह सिक्का और शैफाली के सपने?“ माइकल जो कि इतनी देर से सभी की बात सुन रहा था, बोल उठा।

“इस बारे में अभी कुछ ज्यादा कह नहीं सकते मिस्टर माइकल।“ सुयश ने गहरी साँस लेते हुए कहा- “लेकिन जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि जल्द ही हमें शैफाली के माध्यम से कुछ और रहस्यों का पता चलेगा। तब तक के लिए सभी लोग अपने आँख और कान खुले रखें और जैसे ही किसी को कुछ और नयी चीजें पता चलें, तुरंत मुझे बताएं।“ यह कहकर सुयश सोफे से खड़ा हो गया।

“कैप्टेन, इस सिक्के का क्या करना है?“ माइकल ने कैप्टेन को खड़े होते देख पूछ लिया। “फिलहाल ये सिक्का प्रोफेसर के पास रहेगा। हो सकता है कि इन्हें इसमें कुछ और खास बात नजर आ जाये। जब हम अपनी सभ्यता में पहुंचेंगे तो यह सिक्का अमेरिकन सरकार को दे देंगे।“ यह कहकर सुयश ने सिक्का माइकल के हाथ से ले अलबर्ट के हवाले कर दिया।

उधर सुयश को खड़े होते देख, ब्रैंडन और लारा भी अपने स्थान से खड़े हो गये थे। कुछ ही देर में तीनों कमरे से बाहर निकल गये।

जारी रहेगा.....…...✍️
 
# 21 .

2 जनवरी 2002, बुधवार, 14:30; ‘सुप्रीम’

अगले दिन दोपहर तक कोई ऐसी विशेष घटना नहीं घटी, जिसका कि जिक्र किया जा सके।

शिप के सारे यात्री अपने आप में मशगूल थे। कुछ चिंतित दिख रहे थे, तो कुछ अपनी इस नई जिंदगी में आशाओं और उल्लास की नई किरण ढूंढ रहे थे। सभी को अब शिप की वास्तविक स्थिति की जानकारी हो गई थी। उनको पता चल गया था, कि सुप्रीम इस विशाल सागर में रास्ता भटक गया है।

सभी यात्रियों की तरह, असलम भी डेक पर इधर-उधर चहल कदमी कर रहा था। उसके हाथों में एक शक्तिशाली दूरबीन भी थी। जिसे वह बीच-बीच में आंखों से लगा कर, दूर-दूर तक अपनी नजरें दौड़ा रहा था। अचानक उसकी नजरें बहुत दूर एक काले से धब्बे पर पड़ीं। उसे देखते ही असलम खुशी से मन ही मन बुदबुदाया-

“द्वी प!“ असलम तुरंत दूरबीन को और एडजस्ट करके ध्यान से देखने लगा- “द्वीप ही है।“

द्वीप को ध्यान से देखने के बाद, उसके चेहरे पर मुस्कुराहट के भाव आ गये। उसने तुरंत वॉकी टॉकी से, कंट्रोल रुम में मौजूद ड्रेजलर को, शिप को द्वीप की तरफ मोड़ने के लिए बोल दिया। अब वह कैप्टेन सुयश को यह खुशखबरी देने के लिए उसके रुम की ओर चल दिया।

असलम की चाल में तेजी थी और उसके चेहरे पर ना समझ में आने वाले कुछ भाव थे। थोड़ी ही देर में वह सुयश के रुम तक पहुंच गया।

“कैप्टेन-कैप्टेन!“ असलम खुशी के मारे तेजी से, बिना दरवाजे पर नॉक कि ये ही सुयश के रुम में घुस गया। उसकी तेज आवाज सुन, सुयश जो कि बहुत गहरी नींद में सो रहा था, हड़बड़ा कर उठकर बैठ गया।

“क्या हुआ? क्या फिर कोई मुसीबत आ गई?“ सुयश ने डरते हुए कहा।

“नहीं कैप्टेन! इस बार एक अच्छी खबर है।“ असलम ने खुशी भरे लहजे में कहा- “हमें कुछ दूरी पर एक द्वीप दिखाई दे रहा है।“

“द्वीप!“ सुयश ने आश्चर्य से कहा।

“यस कैप्टेन द्वीप!“ असलम ने कहा- “आप जल्दी चलिए। वैसे मैंने सुप्रीम के चालक दल को शिप को उधर मोड़ने के लिए बोल दिया है।“

सुयश ने पैरों में स्लीपर डाला और असलम के साथ, लगभग भागते हुए, शिप के डेक पर पहुंच गया। यह वही डेक था, जहां पर हेलीपैड था। इसलिए यहां पर कोई यात्री नहीं था। तब तक शिप को द्वीप की ओर मोड़ा जा चुका था। अब वह द्वीप, बहुत ज्यादा दूरी पर नहीं था।

असलम ने धीरे से दूरबीन, सुयश के हाथों में दे दी। सुयश ने दूरबीन को अपनी आँखों पर चढ़ा लिया। अब वह बहुत ध्यान से उस द्वीप को देख रहा था।

तभी ब्रैंडन भी सुयश को ढूंढता हुआ वहां आ पहुंचा। अब ब्रैडन की भी निगाह द्वीप की ओर थी। काफी हरा -भरा द्वीप था। मौसम कुछ ज्यादा ठंडा होने की वजह से, दिन के समय में भी, हल्की-हल्की सी धुंध द्वीप के चारो ओर फैली हुई थी। कुछ अजीब सी पहाड़ियां भी दिखाई दे रहीं थीं। जिसके कारण द्वीप का ये हिस्सा, एक अजीब सा नजारा प्रस्तुत कर रहा था।

अब तक ब्रैंडन भी दूसरी दूरबीन प्राप्त कर चुका था। और वह भी बड़े ध्यान से द्वीप की ओर देख रहा था।

“कैप्टन!“ ब्रैंडन ने द्वीप की ओर देखते हुए सुयश से पूछा- “आपको इस द्वीप को देखकर क्या महसूस हो रहा है?“

“मुझे ये वही द्वीप लग रहा है ब्रैंडन।“ सुयश के आवाज में बर्फ की सी ठण्डक थी- “जिसका जिक्र रोजर व शैफाली ने किया था।“

“इक्जैक्टली ! यही बात तो मैं भी आपसे कहना चाहता था कैप्टेन।“ ब्रैंडन ने अपनी सहमति जताई-

“और आप जरा इस द्वीप के आस-पास का क्षेत्र तो देखिए। एक अजीब सी निस्तब्धता छाई है। एक विचित्र से डरावनेपन का अहसास हो रहा है।“

“तुम बिल्कुल सही कह रहे हो ब्रैंडन।“ सुयश ने अपनी आँखों के आगे से दूरबीन हटाते हुए कहा-

“मैंने भी जब से ये द्वीप देखा है, तब से बार-बार मुझे रोजर व शैफाली की कही बातें याद आ रहीं हैं।“ असलम को शैफाली के सपनों के बारे में कुछ नहीं पता था। पर उसने सुयश को बीच में टोकना सही नहीं समझा।

“कैप्टेन!“ ब्रैंडन ने कहा- “अगर शैफाली की यह बात सही निकली है तो क्या बाकी बातें भी सही होंगी।“

“कुछ कह नहीं सकता ब्रैंडन?“ सुयश का दिमाग इस समय बहुत तेजी से चल रहा था-

“पर ये बात तो श्योर है कि इस द्वीप पर कुछ ना कुछ खतरा जरुर है।“

तब तक शिप, द्वीप के काफी पास आ गया था। शिप को पास आया देख अब असलम से ना रहा गया। वह बोल उठा-

“कैप्टेन! अब हमें क्या करना है? क्या इस द्वीप पर जाना है या...............?“

असलम ने जान बूझकर अपनी बात अधूरी छोड़ दी। असलम की बात सुनकर, सुयश जैसे सपनों से बाहर आया। उसने एक नजर ब्रैंडन और असलम पर डाली और फिर बोल उठा-

“नहीं असलम। पिछली सारी बातें गौर करने के बाद, मैंने यह सोच लिया है कि हमें इस द्वीप पर नहीं जाना है। क्यों तुम्हारा क्या ख्याल है ब्रैंडन?“

“मैं भी आपसे सहमत हूं कैप्टेन।“ ब्रैंडन ने सुयश की बात का सर्मथन देते हुए कहा।

“तो फिर ठीक है।“ सुयश ने असलम की ओर घूमते हुए कहा- “शिप को दूसरी दिशा में मोड़कर, आगे बढ़ाने का आदेश दे दो।“

“पर कैप्टन!“ असलम ने थोड़ा अनमने भाव से कहा- “इस द्वीप की बात पूरे शिप पर फैल गयी होगी। बहुत से लोगों ने तो इस द्वीप को देख भी लिया होगा और वह खुश होकर इसकी जमीन को छूने के लिए बेकरार भी होंगे। ऐसे में हम उन्हें क्या समझाएंगे?“

“कुछ भी कहो ? पर उन्हें समझाओ।“ सुयश ने थोड़ा बेचैन हो कर कहा- “पर ..... पर ..... शिप को इस मनहूस द्वीप से दूर ले चलो।“

यह कहकर सुयश ने, एक बार फिर गहरी निगाहों से उस रहस्यमई द्वीप को देखा और फिर डेक से हटकर, नीचे अपने केबिन की ओर चल दिया। ब्रैंडन भी सुयश को जाता देख वहां से चला गया।

असलम अब डेक पर अकेला खड़ा था। पर उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव नहीं थे। शायद वह सुयश के इस फैसले से नाराज था।

चैपटर-7 3 जनवरी 2002, गुरुवार, 00:30; रात के लगभग 12:30 हो रहे थे।

जहां एक ओर सारे यात्री, अपने-अपने कमरों में सो रहे थे। वहीं सुयश, लारा के साथ पूरे शिप का चक्कर लगा रहा था। दिन में सोने की वजह से, सुयश कुछ फ्रेश नजर आ रहा था। इसलिए आज उसने लारा के साथ, कुछ देर गश्त लगाने का निर्णय लिया था।

“तुम्हें क्या लगता है लारा ?“ सुयश ने लारा की ओर देखते हुए कहा- “इन अजीब सी घटनाओं के पीछे क्या कारण हो सकता है?“

“सिंपल सी बात है कैप्टन।“ लारा ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “हम लोग इस समय बारामूडा त्रिकोण के रहस्यमई व खतरनाक क्षेत्र से गुजर रहे हैं। यह क्षेत्र विश्व के अनसुलझे रहस्यों में से एक है, तो फिर यहां इस तरह की घटनाएं होना लाजिमी है। बल्कि अगर यह कहा जाए, कि यदि हम लोग इस खतरनाक क्षेत्र से निकलने में कामयाब हो जाएं, तो हम इस क्षेत्र में इतना अंदर जा कर निकलने वाले, विश्व के पहले व्यक्ति होंगे।“

“नहीं...... नहीं....! पहले नहीं।“ सुयश ने लारा की बात काटते हुए कहा- “दूसरे व्यक्ति होंगे। क्यों कि इसके पहले भी एक व्यक्ति, इस खतरनाक क्षेत्र से जीवित बच निकलने में सफल रहा था।“

“पहला व्यक्ति कौन था ?“ लारा ने उत्सुक स्वर में सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“आज से लगभग 16 साल पहले, ‘ब्लैक थंडर‘ नाम का, एक पुर्तगाली पानी का जहाज हम लोगों की तरह भटक कर, इस रहस्यमई क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। बाहरी दुनिया से उसका संपर्क कट जाने के बाद, उस जहाज का क्या हुआ? यह कोई ना जान पाया। उसके खोने के लगभग 3 महीने के बाद, एक दूसरे जहाज के यात्रियों को लकड़ी के तख्ते पर तैरता हुआ, एक व्यक्ति मिला। उसे जहाज पर खींच लिया गया। iलेकिन वह व्यक्ति मानसिक रूप से पूर्ण विक्षिप्त था।

बाद में उसके बारे में पता चला, कि उस व्यक्ति का नाम विलियम डिकोस्टा था। और वह उसी जहाज का यात्री था, जो बारामूडा त्रिकोण के इन रहस्यमय अंधेरों में खो गया था।

लेकिन कोई भी उससे यह नहीं पता लगवा सका कि वह बीते हुए 3 महीने तक कहां था ? और उसने क्या-क्या देखा ? कुछ साल बाद उसके मरने का न्यूज भी आया था। लेकिन मरने से पहले तक उसकी यादाश्त नहीं लौटी थी।

इसलिए इस क्षेत्र का राज कभी खुल नहीं पाया।“ कहते-कहते सुयश शांत हो गया।

“आपको तो इस क्षेत्र की काफी जानकारी लगती है कैप्टन।“ लारा ने सुयश की प्रशंसा करते हुए कहा।

“नहीं ! ऐसी कोई बात नहीं है। मैं भी इस क्षेत्र में बहुत अधिक समय से नहीं चल रहा हूं।“ सुयश ने कहा-

“लेकिन मुझे ऐसे रहस्यमय क्षेत्रों के बारे में जानना बहुत अच्छा लगता है। मैं जब छोटा था, तभी से मुझे यह सुपर नेचुरल रहस्य बहुत अच्छे लगते थे। मैं हमेशा ही ऐसी किताबें पढ़ा करता था, जो मानव मस्तिष्क से परे, रहस्य की दुनिया की जानकारी देते हों।

जैसे इस बारामूडा त्रिकोण की जानकारी, मुझे सन 1964 में प्रकाशित ‘आरगोशी ‘ नामक पत्रिका से प्राप्त हुई। जिसे मैंने बाद में पढ़ा था ।

उसके लेखक ‘विंसेंट एच गेडिड्स‘ थे। उन्होंने उस पुस्तक में विस्तार से, बारामूडा त्रिकोण के बारे में जानकारी दी है।

उसके बाद इस रहस्यमय त्रिकोण के बारे में लेखक ‘इवान टीसेण्डरसन‘ ने भी काफी कुछ लिखा। उन्होंने इस प्रकार के क्षेत्रों को ‘वाइल वोर्टइसिज‘ का नाम दिया।

फिर सन् 1973 में इनसाइक्लो पीडिया ‘ब्रिटानिका ‘ ने भी बारामूडा त्रिकोण के बारे में काफी कुछ लिखा।

उसके बाद 1973 में ही ‘जॉन वेलेस स्पेंसर’ की पुस्तक ‘लिंबो ऑफ द लास्ट‘, 1974 में ‘चाल्र्स बर्लिट्ज‘ की पुस्तक ‘द बारामूडा ट्रांइगिल‘ और 1975 में ‘लॉरेंश डीकुस्शे‘ की पुस्तक ‘द बारामूडा ट्रांइगिल मिस्ट्री साल्वड‘ नामक पुस्तक, प्रकाश में आई।“

“इन सभी पुस्तकों ने दुनिया भर के लोगों में, बारामूडा त्रिकोण के बारे में उत्सुकता जगा दी। लेकिन कोई भी किताब इस रहस्य को सुलझाने में असमर्थ रही। सभी लेखकों के अपने-अपने तथ्य थे, जो उनके हिसाब से तो सही थे। पर दूसरों से थोड़ा अलग थे।“ सुयश ने थोड़ा रुक कर फिर बोलना शुरू किया-

“मुझे स्वयं इस क्षेत्र के बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता रहती थी। पर मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि मुझे जिंदगी में कभी इस क्षेत्र में भटकना पड़ेगा।“

“अब तो यह स्थिति आ गई है सर।“ लारा ने सुयश की ओर देखते हुए कहा- “कि मारे डर के, कोई भी यात्री ढंग से सो भी नहीं पा रहा है। सभी के दिमाग में, एक ही सवाल कौंध रहा है, कि क्या वह बच कर अपनी सभ्यता तक वापस जा सकेंगे?

वैसे हम यात्रियों के बारे में क्या कहें, हमारे तो चालक दल व कर्मचारी भी ऐसा ही सोच.. ..... .............।“

कहते कहते लारा एकाएक चुप सा हो गया और एक तरफ देखने लगा। सुयश भी उसकी आंखों का पीछा करते हुए, उस तरफ देखने लगा, जिस तरफ लारा देख रहा था। पर उसे सामने कुछ दिखाई नहीं दिया।

“क्या बात है लारा ? तुम बोलते-बोलते एका एक चुप क्यों हो गये?“ सुयश ने धीरे से लारा से पूछा।

“श्ऽऽऽऽऽ......।“ लारा ने अपने होठों पर उंगली रखते हुए, सुयश को चुप रहने को कहा। और धीरे-धीरे एक दिशा की ओर, दबे पांव चल पड़ा। सुयश की समझ में तो कुछ नहीं आया, पर वह भी धीरे-धीरे लारा के पीछे चल पड़ा। तभी गैलरी के दूसरे किनारे पर, एक मानवाकृति जैसी परछाई दिखाई दी।

“कौ न है वहां ? रुक जाओ!“ लारा ने चिल्लाते हुए तेजी से रिवाल्वर निकाल ली-

“रुक जाओ, वरना गोली मार दूंगा।“

उसकी आवाज सुनते ही वह परछाई, जो कंधे पर कोई चीज उठाए थी, तेजी से एक दिशा की ओर भागी। उसको भागते देख लारा व सुयश तेजी से उस साये के पीछे भागे।

“मैं कहता हूं रुक जा ओ।“ लारा के दहाड़ते हुए शब्दों से पूरी गैलरी थर्रा सी गयी -

“वरना मैं गोली चला दूंगा।“

लारा की दूसरी धमकी से भी साये की गति में कोई अंतर नहीं आया। वह आकृति अभी भी निरंतर भागती जा रही थी। गैलरी के हर मोड़ पर उन्हें सिर्फ एहसास हो रहा था कि कोई अभी तेजी से यहां से निकला है। उस आकृति की स्पीड इतनी तेज थी कि उन्हें गोली चलाने का भी समय नहीं मिल पा रहा था।

जारी… रहेगा....……✍️
 
# 22 .

एक गैलरी में मुड़ते ही, उन्हें सामने कोई नहीं दिखाई दिया।

लेकिन सीढ़ियों के ऊपर का दरवाजा अभी भी हिल रहा था। जिसका साफ मतलब था, कि जो भी अभी आगे भाग रहा था, वह डेक की ओर गया है।

सुयश व लारा भी तेजी से डेक की तरफ खुलने वाले दरवाजे की ओर भागे। लेकिन जैसे ही वह दरवाजे के पास पहुंचे, इन्हें एक ‘छपाक‘ की तेज सी ध्वनि सुनाई दी। ऐसा लगा जैसे कोई चीज पानी में गिरी हो।

दोनों भागकर डेक पर पहुंचे, तो इन्हें डेक की रेलिंग के पास कोई खड़ा हुआ नजर आया । जो समुद्र में कुछ देख रहा था। लारा ने भागकर उसे पकड़ लिया। वह कोई और नहीं, प्रोफेसर अलबर्ट डिसूजा थे।

“क्या फेंका आपने पानी में?“ सुयश ने अलबर्ट से थोड़ी तेज आवाज में पूछा।

“मैं......मैंने क्या फेंका ? मैं तो उसे रोकने की कोशिश कर रहा था।“ अलबर्ट ने घबराये से स्वर में कहा।

“किसे?......किसे रोकने की कोशिश कर रहे थे?“ लारा ने हांफते हुए, थोडे़ नाराजगी भरे अंदाज में कहा।

“मुझे नहीं पता, कि वह कौन था? मैं तो यहां सिगरेट पीने के लिए आया था। तभी मुझे ‘रुक जाओ‘ की तेज आवाज सुनाई दी। मेरी निगाहें आवाज की दिशा में घूम गयी। तभी मुझे दरवाजे से निकलकर, रेलिंग की तरफ भागता हुआ, एक साया दिखाई दिया। मैं उसे पकड़ने के लिए उसकी तरफ लपका। इसके कारण मेरी सिगरेट भी मेरे हाथ से गिर गई। उसकी रफ्तार बहुत तेज थी। उसने अपने कंधों पर कुछ उठा रखा था। इससे पहले कि मैं उस साये के पास पहुंच पाता, वह साया पानी में कूद गया। मैं अभी उसे देख ही रहा था कि तभी आप लोग आ पहुंचे।“

“वाह-वाह! क्या कहानी बनाई है?“ लारा ने रिवाल्वर को जेब में रखते हुए, अपने दोनों हाथों से ताली बजाई-

“मान गए आपके दिमाग को मिस्टर अलबर्ट। कितने कम समय में कितनी अच्छी कहानी आपने बना डाली।“

“कहानी !...............आपको क्या लगता है कि मैंने आपको मनगढ़ंत कहानी सुनाई है?“ अलबर्ट ने थोड़ा रोष में आते हुए कहा।

“और नहीं तो क्या........?“ लारा ने थोड़ा मुस्कान बिखेरते हुए कहा-

“ये भी तो हो सकता है कि आप ही कुछ लेकर भाग रहे हों और डेक पर पहुंचकर आपने वह चीज पानी में फेंक दी हो, और फिर हम लोगों के देख लेने के बाद अपनी जान बचाने के लिए चुपचाप खड़े हो गए हों और एक शानदार कहानी भी बना कर हमें सुनादी हो।“

“हो सकता था, बिल्कुल हो सकता था । लेकिन मैं आपको साबित कर दूंगा कि आपके आगे भागने वाला मैं नहीं था।“ अलबर्ट ने विश्वास भरे शब्दों में कहा।

“अच्छा ! तो साबित करके दिखाइए ।“ लारा ने बिल्कुल परीक्षक जैसी पैनी निगाहों से अलबर्ट को देखते हुए कहा। सुयश भी तीखी निगाहों से एकटक अलबर्ट को घूरे जा रहा था।

“अच्छा तो यह बताइए भागने वाले ने अपने कंधे पर क्या उठा रखा था ?“ अलबर्ट ने लारा की तरफ देखते हुए कहा।

“अब भला यह हम कैसे बता सकते हैं?“ लारा का जवाब बिलकुल साधारण था- “कि भागने वाले ने अपने कंधे पर क्या उठा रखा था?“

“फिर भी कुछ तो अंदाजा होगा। चलिए अच्छा छोड़िए, अब यह बताइए कि जो चीज उसने अपने कंधे पर उठा रखी थी, वह कितनी भारी रही होगी ? आप उसके पीछे पीछे भाग रहे थे, शायद उससे आपको कुछ अंदाजा हुआ हो या फिर उस चीज का पानी में गिरने पर उसकी आवाज से कुछ अंदाजा हुआ हो।“ इतना कहकर अलबर्ट लारा की ओर देखने लगा।

“मेरे ख्याल से जो चीज भागने वाले ने अपने कंधे पर उठा रखी थी वह जरूर भारी थी। क्यों कि एक तो उसकी चाल देखकर ऐसा एहसास हो रहा था और दूसरा शिप के चलने से समुद्र की लहरें कटती हैं, जिससे आवाज उत्पन्न होती है और उस आवाज के बावजूद भी, उस चीज के पानी में गिरने की आवाज सुनाई दी, जिससे यह साबित होता है कि वह चीज काफी भारी थी।“

“अच्छा अब ये बताइये कि आपने उस साये का कितनी दूर तक पीछा किया ?“ अलबर्ट ने तुरंत अगले सवाल का गोला दाग दिया।

“यही कोई लगभग 500 से 600 मीटर तक तो पीछा किया ही था।“ लारा ने पुनः ना समझने वाले अंदाज में जवाब दिया।

“अब ये बताइए कि आपको मेरी उम्र कितनी दिख रही है?“ अलबर्ट ने मुस्कुराते हुए लारा से पुनः सवाल किया। इस बार सुयश के चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान आ चुकी थी । शायद अब वह अलबर्ट के प्रश्नों का उत्तर समझने लगा था।

“क्या बकवास है?“ लारा ने एका एक झुंझलाते हुए शब्दों में कहा- “भागने वाले का आपकी उम्र से क्या संबंध हो सकता है?“

“संबंध है।“ इस बार काफी देर से चुप सुयश बोल उठा- “इसलिए तुम अलबर्ट के सवालों का जवाब दो लारा“ लारा ने आश्चर्य से सुयश की ओर देखा और फिर धीरे से बोल उठा-

“लगभग 60 वर्ष।“

अलबर्ट ने अब आगे बढ़कर लारा के सीने पर हाथ रख कर कहा-

“क्या बात है मिस्टर लारा ! आपके दिल की धड़कन तो बहुत तेज चल रही है?“

“अजीब मूर्ख आदमी हैं आप! अरे मैं इतनी दूर से उस साये के पीछे दौड़ रहा था, तो धड़कन तो तेज चलेगी ही।“ लारा ने एक बार फिर गुस्से में आते हुए कहा।

“वैसे आपकी उम्र क्या होगी ?“ अलबर्ट ने बदस्तूर मुस्कुराते हुए एक बार फिर लारा से पूछा।

एक क्षण के लिए तो लारा के मन में आया कि इस बुड्ढे की दाढ़ी पकड़कर उसे पानी में फेंक दे। पर सुयश पर नजर पड़ते ही उसने अपने गुस्से पर काबू किया।

“तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया। तुम्हारी उम्र कितनी है?“ अलबर्ट अब ‘आप‘ से ‘तुम‘ पर आते हुए बोला।

“30 वर्ष!“ लारा ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया।

“अच्छा अब एक आखिरी सवाल और मिस्टर लारा।“ कहते हुए अलबर्ट ने लारा का हाथ अपने सीने पर रखा- “क्या तुम्हें मेरे दिल की धड़कन भी तेज लग रही है?“

“नहीं ।“ लारा ने जवाब दिया।

“तो अब यह बताइए जनाब कि आपके कहे अनुसार आपके आगे-आगे कोई चीज कंधे पर लेकर मैं भाग रहा था। जबकि मेरी उम्र आपके कहे अनुसार 60 वर्ष है, जो कि आपकी उम्र से दुगनी है। तो फिर यदि मैं कोई भारी वस्तु लेकर आपके आगे-आगे भागूंगा, तो फिर मेरी सांस नहीं फूलेगी क्या ? जबकि आप खाली हाथ थे और मेरे कंधे पर भारी वजन था।

कहने का मतलब यह है कि जब आप भागकर मेरे पास पहुंचे तो आपको मेरी धड़कन सामान्य दिखी या नहीं ? यदि सामान्य दिखी तो यह साबित होता है कि आपके आगे-आगे मैं नहीं भाग रहा था।"

लारा अलबर्ट के तर्कों को सुनकर शांत हो गया। अब उसे यह विश्वास हो गया कि आगे भागने वाला शख्स अलबर्ट नहीं कोई और था।

“और हाँ ! एक बात और है, यहीं कहीं मेरी सिगरेट भी गिरी थी, जब मैं उसे पकड़ने भागा था।“

कहकर अलबर्ट इधर-उधर नजरें दौड़ाने लगा। कुछ दूरी पर उसे जलती हुई सिगरेट मिल गई जो कि अब लगभग खत्म होने वाली थी। अलबर्ट ने आगे बढ़कर उस जलती हुई सिगरेट को उठा लिया।

“यह सिगरेट आप देख रहे हैं। यदि यह सिगरेट मैंने आपके आने के कुछ देर पहले जलाई होती, तो अभी तक यह आधी ही पहुंची होती, ना कि खत्म हो जाती। और यदि मैंने अपने कंधे पर भारी वस्तु रखी होती तो जाहिर सी बात है कि मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ा होता तो फिर बीच में सिगरेट जलाने का प्रश्न ही नहीं उठता। बस.... इतना ही काफी है या और कुछ बताऊं अपने बारे में?“ अलबर्ट ने लारा की तरफ देखते हुए थोड़े तल्ख स्वर में कहा।

पर इससे पहले कि लारा कुछ और बोल पाता, सुयश आगे बढ़ कर बोल उठा-

“नहीं-नहीं प्रोफेसर अलबर्ट! अब आगे आपको और कोई सबूत देने की जरूरत नहीं है। हम यह मान चुके हैं कि आगे भागने वाला व्यक्ति कोई और था। वैसे अब आप गुस्सा छोड़कर, आगे भागने वाले के बारे में कुछ और बताइए। आई मीन वह कैसा था ? क्या आपने उसका चेहरा देखा ? उसकी लंबाई कितनी थी ? उसने क्या पहन रखा था ? उसके कंधे पर क्या चीज हो सकती है? वगैरह-वगैरह।“

“मैंने उसे ज्यादा तो नहीं देखा। पर उसकी लंबाई सामान्य थी। उसने अपने कपड़ों के ऊपर, कुछ कंबल जैसा ओढ़ रखा था। जिसके कारण उसकी नीचे की ड्रेस के बारे में ज्यादा आईडिया नहीं मिल पाया। उसने कंधे पर कोई लंबी सी चीज रोल करके रखी थी। और कुछ भी हो पर उसके अंदर गजब की फुर्ती थी। क्यों कि वह भागता हुआ आया और एक छलांग में ही उस भारी सी चीज के साथ, उधर की रेलिंग पर चढ़ गया और बिना पीछे मुड़े इतनी ऊंचाई से, चलते शिप से कूद गया। मेरी समझ से तो वह कोई पागल ही रहा होगा जो सुसाइड करना चाह रहा होगा। क्यों कि इतनी ऊंचाई से चलते शिप से बीच समुद्र में कूदने पर, उसके बचने की तो 1 परसेंट भी संभावना व्यक्त नहीं की जा सकती ।“

सुयश धीरे-धीरे चलता हुआ उस स्थान पर पहुंच गया, जिधर कि अलबर्ट ने अभी इशारा किया था। सुयश कुछ देर तक वहां खड़ा नीचे अंधेरे समुद्र को घूरता रहा, फिर कुछ ना समझ में आने पर वहां से पलटने लगा। तभी उसकी नजर पास की रेलिंग में फंसे एक कपड़े के टुकड़े पर पड़ी जो हवा के चलने के कारण ‘फट्-फट्‘ की आवाज करता हुआ लहरा कर रेलिंग से टकरा रहा था। सुयश ने धीरे से उस कपड़े के टुकड़े को रेलिंग से निकाल लिया।

“यह कपड़ा शायद पानी में कूदने वाले का है। जो जल्दबाजी में यहां की रेलिंग में फंसकर फट गया होगा।“ सुयश ने अलबर्ट व लारा के चेहरे के आगे, वह कपड़ा लहराते हुए कहा। उस कपड़े को देख लारा आश्चर्य से भर उठा।

“क्या बात है लारा ? तुम इस कपड़े को देखकर आश्चर्य में क्यों पड़ गए?“ सुयश ने लारा के चेहरे के बदलते हुए भाव को देख पूछ लिया।

“जाने क्यों ऐसा लगता है, जैसे ये कपड़ा मैंने किसी को पहने हुए देखा है? पर याद नहीं आ रहा कि आखिर इसे पहने हुए देखा किसे है।“ लारा ने जवाब दिया।

“इसी बात का तो एहसास मुझे भी हो रहा है।“ सुयश ने ध्यान से उस कपड़े को देखते हुए कहा-

“वैसे मिस्टर अलबर्ट, क्या आपको भी ऐसा ही महसूस हो रहा है?“

“जी हां ! मुझे भी यह कपड़ा पहचाना हुआ लग रहा है। पर याद नहीं आ रहा कि इसे देखा कहां है?“

अलबर्ट ने भी कपड़े पर निगाह डालते हुए, दिमाग पर जोर डाला। काफी देर याद करने के बाद भी किसी को कुछ याद नहीं आया।

“आइए अब मैं आपको आपके कमरे तक छोड़ दूं मिस्टर अलबर्ट।“ सुयश ने वह कपड़ा जेब के हवाले करते हुए कहा- “

और हां अब आप यह सिगरेट का खाली टोटा भी फेंक दीजिए, जिसे आप काफी देर से पकड़े हुए हैं।“

सुयश के शब्दों को सुनकर अलबर्ट में मुस्कुराते हुए उस सिगरेट के टोटे को हवा में उछाल दिया। हवा में उछला हुआ सिगरेट का टुकड़ा, हवा में तैरता हुआ धीरे-धीरे सागर की लहरों की ओर बढ़ रहा था और उस पर लिखा हुआ “ट्रेंच“ नाम का ‘लोगो ‘ रात के अंधेरे में भी तेजी से चमक रहा था। तीनों ही तेजी से अलबर्ट के रूम की ओर बढ़ गए।

जारी रहेगा……….✍️
 
# 23 .

3 जनवरी 2002, गुरुवार, 03:00;

“वैसे कैप्टन!“ अलबर्ट ने एक दूसरी सिगरेट जलाते हुए कहा- “आपका इन दोनों तरीकों की घटनाओं के बारे में क्या सोचना है?“

“दोनों तरीके की घटनाएं?“ सुयश ने अलबर्ट के हाथ में पकड़ी सिगरेट को ध्यान से देखते हुए कहा।

“जी हां ! मेरा मतलब है कि पहली तरह की घटनाएं वो जो शिप पर लॉरेन के मर्डर के बाद घट रही हैं और दूसरी घटनाएं जो शिप का बारामूडा त्रिकोण के इस रहस्यमय क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद घट रही हैं। क्या आपको इन दोनों घटनाओं के बीच कोई समानता दिख रही है?“ कहने के बाद अलबर्ट ने सिगरेट का एक जोरदार कश लिया और धुंए को मुंह से गोल-गोल छल्ले बनाते हुए हवा में उड़ाया।

“समानता...... ! भला इन दोनों बातों में कौन सी समानता हो सकती है?“ सुयश ने संक्षिप्त सा जवाब दिया। पर उसकी निगाहें अभी भी अलबर्ट के हाथ में थमी सिगरेट पर थी।

“नहीं ! मेरा कहने का यह मतलब था कि कहीं ऐसा तो नहीं, किसी ने जानबूझकर इस शिप को इस क्षेत्र में लाने की कोशिश की हो।“ अलबर्ट के स्वर में शंका के भाव थे।

“क्या बेवकूफी भरा सवाल है?“ लारा ने खीझते हुए अलबर्ट से कहा- “भला हम लोग क्यों अपनी जान के दुश्मन बन कर, इस क्षेत्र में शिप को लाना चाहेंगे। और वैसे भी किसी व्यक्ति को शिप को इस क्षेत्र में लाने से क्या फायदा हो सकता है?“

“मैं आपको अपने बारे में एक बात बताता हूं मिस्टर लारा। मैं एक बार पेड़ पौधों पर एक शोध कर रहा था। शोध का विषय था कि क्या पेड़ पौधे भी बात कर सकते हैं।

मैंने इस शोध में काफी वर्ष लगा दिये। पर मैं पूर्ण रूप से इस बात को साबित नहीं कर पाया। लिहाजा सरकार ने मुझे अपने इस शोध के लिए डॉलर देने बंद कर दिए। पर चूंकि इसमें मेरी पूरी जिंदगी लग चुकी थी और यह मेरा जुनून था इसलिए मैंने इस शोध को बंद नहीं किया। मैं आज भी अपने खर्चे पर सरकार से छिपा कर इस शोध पर काम कर रहा हूं।“

“तो इन सब चीजों का मेरे शिप से क्या ताल्लुक?“ सुयश ने अलबर्ट की ओर अजीब सी नजरों से देखते हुए कहा।

“ताल्लुक है कैप्टन! यह भी तो हो सकता है कि कोई इस बारामूडा त्रिकोण के बारे में शोध कर रहा हो और अब जबकि अंतर्राष्ट्रीय संघ ने इस क्षेत्र को खतरनाक घोषित कर, यहां आने पर रोक लगादी है तो कोई अपने शोध को पूरा करने के लिए, शिप को ही इधर मोड़ पर ले आया हो।“ अलबर्ट ने कहा।

“आप साफ-साफ शब्दों में मुझ पर और मेरे पूरे चालक दल पर आरोप लगा रहे हैं मिस्टर अलबर्ट।“ सुयश ने गुस्से से दाँत पीसते हुए अलबर्ट को जवाब दिया।

“नहीं आप गलत सोच रहे हैं कैप्टन। मैं आप पर और पूरे चालक दल पर आरोप नहीं लगा रहा हूं। मैं तो सिर्फ संभावना व्यक्त कर रहा हूं।“ अलबर्ट ने सुयश के गुस्से भरे चेहरे को देख मुस्कुराते हुए कहा।

“अच्छा अगर आप संभावना व्यक्त कर रहे हैं तो मैं भी आपसे एक बात पूछना चाहता हूं।“ सुयश ने अपने आप को सामान्य करते हुए अलबर्ट से पूछ लिया-

“आप यह बताइए कि आप सिगरेट किस ब्रांड की पीते हैं?“

“क्लासिक......! मैं हमेशा क्लासिक सिगरेट पीता हूं।“ अलबर्ट ने जवाब दिया।

“पर आपने अभी डेक पर हम लोगों के सामने जो सिगरेट का टुकड़ा जमीन से उठाया, वह तो ट्रेंच नामक सिगरेट का था।“ अब सुयश के चेहरे पर मुस्कुराहट के भाव थे।

“जी हां ! दरअसल वह सिगरेट मुझे लोथार ने ऑफर की थी, और मैंने उससे ले ली थी।“ अलबर्ट ने शांत भाव से जवाब दिया।

“इसका मतलब डेक पर कुछ देर पहले आपके साथ मिस्टर लोथार भी थे।“ सुयश के शब्दों में किसी डिटेक्टिव से भाव थे।

“जी हां ! पर उन्हें कुछ देर पहले कोई काम याद आ गया था, जिसके कारण वह वहां से चले गए थे।“ अलबर्ट ने अजीब से नजरों से सुयश को देखते हुए कहा।

अब यह लोग एक गलियारे से निकल रहे थे और चूंकि अलबर्ट का रूम अब ज्यादा दूर नहीं बचा था। इसलिए सुयश ठिठक कर एक जगह रुक गया। रुकता भी क्यों ना आखिर उसे अपने सवालों का जवाब जो अलबर्ट से चाहिए था। सुयश को रुकते देख अलबर्ट और लारा भी वहीं रुक गए।

“अब हमें यह बताइए मिस्टर अलबर्ट, कि कोई आदमी किसी दूसरे को सिगरेट कब ऑफर करता है?“ सुयश ने पुनः नये सवाल का गोला दाग दिया।

“जाहिर सी बात है, जब वह खुद पीने को निकालता है, तभी वह दूसरे को ऑफर करता है।“ इस बार लारा ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा।

“इसका मतलब लोथार ने भी आपके साथ सिगरेट पीनी शुरू की होगी ? तो फिर उनकी सिगरेट का टुकड़ा कहां गया ?“ सुयश के चेहरे की मुस्कुराहट बदस्तूर जारी थी।

“वो.... वो....उसने अपनी सिगरेट का टुकड़ा समुद्र में फेंक दिया था।“ अलबर्ट ने गड़बड़ाते हुए स्वर में कहा।

“अच्छा तो उसने अपनी सिगरेट का टुकड़ा समुद्र में फेंक दिया। वरना इस ...........तो अब आप ये बताइए कि आपने कहा था कि आप सिगरेट पी रहे थे, तभी आपने आवाज सुनी और आपकी सिगरेट गिर गई और जब हम लोगों ने सिगरेट का टुकड़ा उठाया तो वह खत्म होने वाली थी। तो यह कैसे संभव हो सकता है कि एक ही समय में जलाई गई दोनों सिगरेट में से एक तो लोथार ने पीकर तभी पानी में फेंक दी थी और दूसरी उसके जाने के बाद भी काफी देर तक चलती रही।“ सुयश ने कहा।

“लोथार ने अभी आधी सिगरेट ही पी थी कि तभी उसे काम याद आ गया और वह बीच में ही सिगरेट फेंक कर चला गया। और रही बात मेरी सिगरेट का तो मैं सिर्फ क्लासिक ब्रांड ही पीता हूं, इसलिए मैं पहले लोथार से सिगरेट नहीं ले रहा था, फिर जब उसने ज्यादा जोर दिया, तो मैंने उसका दिल रखने के लिए सिगरेट उस से ले ली। सिगरेट मेरे हाथ में थी, पर मेरे मन मुताबिक ब्रांड की नहीं थी, इसलिए मैं सिर्फ उसे जला कर पकड़े हुए थे, कश नहीं ले रहा था और आपको तो पता ही है कि अगर सिगरेट का कश ना लिया जाए, तो वह बहुत देर तक चलती रहती है। लेकिन आप ये बताइए कि आपके ये सब पूछने का क्या मतलब हुआ?“ अलबर्ट ने सुयश को घूरते हुए कहा।

“मतलब तो कुछ नहीं हुआ बस मैं भी आप ही की तरह से संभावना व्यक्त कर रहा था।“ सुयश ने अजीब से लहजे में कहा।

तभी सिक्योरिटी के दो आदमी गश्त लगाते हुए उधर आ पहुंचे और सुयश व लारा को देख उनके पास आकर खड़े हो गए। लारा ने उन्हें रुकता देख धीरे से आगे बढ़ जाने का इशारा किया। वह दोनों इशारा समझ तुरंत आगे की गश्त पर चल दिये।

“यहां पर एक बात समझ में नहीं आई।“ लारा ने अलबर्ट को देखते हुए कहा-

“कि जो साया पानी में कूदा, क्या वह आत्महत्या करने जा रहा था और अगर वह आत्महत्या करने जा रहा था, तो उसने अपने कंधे पर क्या लाद रखा था ?“

“वैसे इसका पता लगाना बहुत आसान है।“ सुयश ने इस बार, बारी-बारी से लारा व अलबर्ट की ओर देखते हुए कहा-

“कल हम पूरे शिप में सफर कर रहे सभी यात्रियों और अपने स्टाफ को चेक करेंगे। अगर शिप का कोई आदमी कम हुआ, तो इसका मतलब हुआ कि आप सही कह रहे थे, और अगर शिप में सारे यात्री हैं, तो इसका मतलब कि आप किसी कारण से झूठ बोल रहे थे। क्यों कि शिप बीच समुद्र में है और दूर-दूर तक कहीं जमीन नहीं दिख रही है। जिसका साफ मतलब है कि बाहर से कोई भी आदमी इस चलते हुए शिप पर नहीं आ सकता।“

“आपकी जो मर्जी आए करिए। मैंने जो कुछ भी देखा था वह सब आपको सच-सच बता दिया। अब प्लीज........ गॉड के लिए मुझे अकेला छोड़ दीजिए। क्यों कि मेरे कमरे में मेरी बीवी मारिया मेरा इंतजार कर रही है।“ अलबर्ट ने एक तरीके से पीछा छुड़ाने वाले अंदाज में कहा।

“बस एक आखिरी सवाल और!“ कहकर सुयश अलबर्ट के रुम की ओर चल दिया-

“इस समय रात के लगभग 03:30 बज रहे हैं। आप इतनी देर रात अपने कमरे से निकलकर डेक पर क्या कर रहे थे? ठीक उसी तरह, जिस दिन वह रहस्यमय यान शिप पर से निकला था। उस दिन मैरिज एनिवर्सरी होने के बावजूद भी आप रात के 3:30 बजे तक डेक पर थे। इसका मतलब क्या है?“

“देखिए कैप्टन अगर नार्मल बात होती तो मैं आपको जरूर बता देता। लेकिन अब जब कि आप मुझ पर शक कर रहे हैं, तो मैं इस बात को बताना जरूरी नहीं ...............।“

लेकिन इससे पहले की अलबर्ट अपनी बात पूरी कर पाते और सुयश उससे दोबारा कुछ पूछता, वातावरण में लड़की की एक तेज चीख सुनाई दी।

“बचाओ......... बचाओ!“

“यह तो किसी लड़की की आवाज है?“ अलबर्ट घबरा कर बोला- “लगता है कोई किसी खतरे में है?“

तीनों लोग बहुत तेजी से चीख की दिशा में भागे। सुयश के दिमाग में एक ही शब्द गूंज रहा था-

खतरा... खतरा... खतरा !“

जारी रहेगा....….✍️
 
# 24 . 3 जनवरी 2002, गुरुवार, 04:00;

आवाज क्रिस्टी के रूम से आई थी। आवाज को सुन तीनों भाग कर क्रिस्टी के रुम के पास पहुंच गये। रूम का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। तब तक चीख की आवाज सुनकर कुछ सिक्योरिटी गार्ड व आस-पास के रूम के लोग भी एकत्र हो गए थे।

लारा ने 2 सिक्योरिटी गार्ड को लेकर, दबे पाँव क्रिस्टी के रूम के दरवाजे को अंदर की ओर धकेल दिया । रूम का दरवाजा पूरा खुल गया। अब रुम के अंदर का दृश्य बिल्कुल साफ नजर आने लगा। क्रिस्टी एक तरफ डरी-डरी सी खड़ी हुई थी।

“क्या बात है? तुम अभी-अभी चीखी क्यों थी ?“ लारा ने क्रिस्टी की ओर देखते हुए पूछा।

“वो.....वो....... वो...... बेड के पीछे...........!“ क्रिस्टी ने डरे-डरे शब्दों में बेड की ओर इशारा करते हुए कहा।

तुरंत एक गार्ड बिना आवाज किए, रिवाल्वर हाथ में लेकर, सतर्कता से बेड की ओर खिसकने लगा। चूँकि किसी को भी नहीं पता था कि बेड के पीछे किस तरह का खतरा है, इसलिए बाकी के गार्ड्स और लारा ने भी रिवाल्वर निकालकर बेड की ओर सतर्कता वश तान दी।

धीरे-धीरे वह गार्ड बेड के पास पहुंच गया। सभी की सतर्क निगाहें बेड के पीछे वाली साइड पर थीं। उधर जैसे ही उस गार्ड ने बेड के पीछे झांका।

एक गहरे हरे रंग का लगभग 8 इंच लंबा एक कीड़ा, बेड के पीछे से उछल कर, उस गार्ड के चेहरे पर बैठ गया और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उस कीड़े ने तेजी से उस गार्ड के गाल पर अपने बिच्छूनुमा डंक गड़ा दिए।

“ओ माई गॉड!..........“ सभी के मुंह से समवेत स्वर निकला।

कुछ लोगों के मुंह से तो उस खतरनाक कीड़े को देखकर चीख निकल गई। उधर जैसे ही उस कीड़े ने गार्ड के चेहरे पर डंक मारा, गार्ड बिना आवाज किए, उसी समय

‘धड़ा ऽऽऽम‘ की आवाज करते हुए वहीं गिर पड़ा।

हरे रंग के उस कीड़े ने अब अपनी लाल-लाल आँखों से कमरे के बाहर नजर मारी और मेढक की तरह से जंप मार कर कमरे के बाहर की ओर भागा। लेकिन इससे पहले कि वह बाहर आ पाता या फिर किसी और को कोई और नुकसान पहुंचा पाता, वहां पर कुछ देर पहले आ चुके तौफीक ने बिजली की फूर्ति दिखाते हुए, एक गार्ड से रिवाल्वर छीनकर, उस कीड़े को हवा में ही गोली मार दी।

“धाँ य ऽऽऽऽऽऽऽ!“ शानदार निशाना। दूसरी गोली की कोई जरूरत नहीं थी। निशाना बिल्कुल परफेक्ट था।

कीड़ा वहीं जमीन पर गिर पड़ा। उसके शरीर का एक हिस्सा गोली लगने के कारण फट सा गया था। उधर गोली चलाने के बाद तौफीक ने फूंक मारकर रिवाल्वर से निकलते धुंए को हवा में उड़ाया।

उसकी यह हरकत देख सुयश के चेहरे पर आश्चर्य के भाव आ गए। उसे तुरंत शैफाली के कहे शब्द याद आ गए-

“उस अपराधी की आदत, गोली चलाने के बाद रिवाल्वर की नाल से निकलते धुंए को फूंक मारने की है और ऐसा वही आदमी करता है, जो बहुत बड़ा निशानेबाज हो और रिवाल्वर हमेशा अपने साथ रखता हो।“

उधर अब फायर की आवाज सुनकर बहुत से लोग वहां एकत्रित हो चुके थे। सभी एक दूसरे से हालात के बारे में जानने के लिए पूछताछ कर रहे थे।

“यह कीड़ा यहां पर कैसे आया मिस क्रिस्टी ?“ सुयश ने आगे बढ़कर क्रिस्टी से पूछा।

“मुझे नहीं पता !“ क्रिस्टी ने अब अपनी सांसों पर नियंत्रण करते हुए कहा- “मैं उस समय बाथरूम में थी, तभी मुझे बाथरूम की ऊपर वाली खिड़की से दो पंजेनुमा हाथ दिखाई दिए। जो इसी कीड़े के थे। मैंने आज तक ऐसा खतरनाक कीड़ा नहीं देखा था। इसलिए मेरे मुंह से तेज चीख निकल गई। मैं उस कीड़े से बचने के लिए भागकर रूम में आ गई। कीड़ा अब भी मेरे पीछे था। मैं काफी देर तक उससे बचती रही, फिर जब वो एक बार मेरी तरफ उछला तो मैंने उसे हवा में ही लात मार दी। जिससे वह बेड के पीछे गिर पड़ा। तब तक आप लोग मेरी चीख सुनकर यहां आ ही गए।“

उधर लारा ने आगे बढ़कर गिरे पड़े गार्ड की नब्ज चेक की। “नो मोर सर! अब यह जीवित नहीं है।“

अब सबकी निगाह सिर्फ और सिर्फ कीड़े पर थी।

“ऐसा कीड़ा तो मैंने आज तक कहीं नहीं देखा।“ सुयश ने कीड़े को ध्यान से देखते हुए कहा।

“आप ठीक कह रहे हैं सर!“ लारा ने भी आगे बढ़कर कीड़े को देखते हुए कहा- “मैंने भी आज तक ऐसा कीड़ा कभी नहीं देखा। और इसके पंजे तो देखिए, इसके शरीर के हिसाब से इसके पैर काफी बड़े व पंजे काफी नुकीले हैं। यह देखने में छिपकली व मेंढक की मिली जुली प्रजाति का लग रहा है। इसकी सुर्ख लाल आंखें व इसकी पूंछ में लगा, बिच्छू जैसा डंक कितना खतरनाक है और वैसे ही इतने जहरीले प्राणी के बारे में तो मैंने कभी सुना ही नहीं। जिसके शरीर में इतना जहर हो कि डंक मारते ही आदमी मर जाए।“

“एक मिनट कैप्टन!“ तौफीक ने आगे आते हुए कहा- “यह कीड़ा निश्चित रूप से समुद्र से हमारे शिप पर आया था, क्यों कि इसके पंजे के बीच की बनावट ठीक वैसे है, जैसे पानी में तैरने वाले बत्तख या मेंढक की होती है।“

“मैं आप लोगों से इस कीड़े के बारे में कुछ बताना चाहता हूं।“ अलबर्ट ने आगे बढ़कर ध्यान से उस कीड़े को देखते हुए कहा।

अब सभी का ध्यान की ड़े से हटकर अलबर्ट की ओर हो गया। अलबर्ट ने सबका ध्यान अपनी तरफ देख बोलना शुरू कर दिया-

“यह घटना 30 जून सन 1908 की है। मध्य साइबेरिया के ‘टुंगुस‘ क्षेत्र के आस-पास के स्थानों में सभी व्यक्ति जब गहरी नींद से सो कर उठे, तो प्रातः लगभग 7 बजकर 17 मिनट पर उन्हें आकाश में एक भयानक गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी। फिर देखते ही देखते, आकाश से एक आग का गोला तेजी से जमीन की ओर आता दिखाई दिया और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता। तीन-चार तालियों जैसी गड़गड़ाहट के साथ, कोई चीज बहुत तेजी से आवाज करती हुई साइबेरिया के जंगलों में गिरी। विस्फोट की आवाज इतनी तेज थी कि उससे 250 मील दूर ‘किर्नस्क‘ में रहने वाले लोगों के कानों में तीव्र दर्द शुरू हो गया। उस विस्फोट के पास के एक स्थान ‘कंस्क‘ में तो घोड़े जैसे विशालकाय जानवर कई मील दूर जा गिरे। उस से 40 मील दूर रहने वाले एक किसान सेमीनोव की कमीज उसके शरीर पर जल गयी और विस्फोट के कारण वह सीढ़ियों से जा गिरा। इस विस्फोट से डेढ़ हजार रेंडियर पशु मारे गये और ना जाने कितने डॉलर की धन-संपदा का नुकसान हुआ। सभी का यही अनुमान था कि आकाश से शायद कोई उल्का पिंड वहां पर आकर गिरा था, परंतु जब वहां की आग बुझाई गई तो उस स्थान पर किसी भी प्रकार की किसी चीज के गिरने का कोई प्रमाण नहीं मिला। यहां तक कि कोई गड्ढा भी नहीं मिला। हाँ इतना जरूर था कि 20 मील की त्रिज्या में मौजूद सभी वृक्ष जल गए।“

“आप यह सब क्यों सुना रहे हैं?“ लारा ने आगे बढ़कर अलबर्ट को टोकते हुए कहा- “उस घटना का इस विचित्र कीड़े से क्या संबंध?“

“बाद में इस घटना के कुछ दिनों बाद......।“ अलबर्ट ने इशारे से लारा को चुप रहने को बोल, स्वयं बदस्तूर जारी रहे-

“जब ‘किर्नस्क‘ व ‘कंस्क‘ के निवासी ‘क्रिसोन‘ नामक एक छोटे से गांव में गए तो उन्हें एक अजीब सी घटना देखने को मिली। उस गांव में रहने वाले लगभग 1500 व्यक्ति अपने जानवरों सहित गायब हो गए थे। मतलब कि उस गांव में एक भी व्यक्ति या जानवर, जीवित या मृत किसी भी अवस्था में नहीं मिला। जबकि सभी के घरों व दुकानों में जो भी वस्तुएं थीं, वह सब ज्यों की त्यों रखीं थीं। किसी भी स्थान पर किसी प्रकार के संघर्ष का भी कोई निशान नहीं था। फिर रातों-रात वहां के 1500 इंसान अपने मवेशी सहित अचानक कहां गायब हो गए, यह आज तक कोई भी नहीं जान पाया। हाँ ! एक तालाब के पास, इसी तरह का एक हरा कीड़ा मृत पाया गया था। जब वैज्ञानिकों ने इसे देखा तो वह इसे उठा कर अपनी प्रयोगशाला में ले आये। पूर्ण रूप से इस पर शोध करने के बाद उन्होंने यह बताया कि ऐसा कीड़ा पृथ्वी पर कहीं नहीं पाया जाता। अब यह कहां से आया और वहां के निवासी कहां चले गए। यह आज तक नहीं पता चला। बाद में इस कीड़े की तस्वीर ‘क्रीचर वर्ल्ड‘ नामक पुस्तक में छपी। जहां से मैंने इसको देखा था।“

इतना कहकर अलबर्ट बिल्कुल शांत हो गया और बारी-बारी से उन सब को देखने लगा जो साँस रोके लगातार उनकी कहानी सुने जा रहे थे।

“यह कैसे हो सकता है?“ असलम जो काफी देर से वहां आकर खड़ा था और उनकी बातें सुन रहा था, बोल उठा-

“साइबेरिया के जंगलों का कीड़ा यहां अटलांटिक महासागर में क्या कर रहा है?“ परंतु इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं था, इसलिए सब चुप रहे। लेकिन कुछ लोगों के चेहरों पर दहशत के भाव अब साफ नजर आने लगे थे।

“प्रोफेसर अलबर्ट, बस आपसे एक सवाल और?“ सुयश ने अलबर्ट की ओर देखते हुए कहा -

“क्या यह कीड़ा इतना जहरीला होता है कि किसी को यदि यह डंक मार दे तो वह एक सेकेंड में मर जाएगा।“

“माफी चाहता हूं कैप्टेन, पर मैं इस बारे में नहीं जानता क्यों कि उस किताब में इसके जहरीले होने के बारे में नहीं लिखा था। हाँ, इस घटना को देखने के बाद इतना जरूर कहूंगा कि इसके बिच्छू जैसे डंक में अवश्य ही इतना खतरनाक जहर होगा जो एक सेकंड में किसी की जान लेने में सक्षम है।“ इतने जहरीले जानवर के बारे में सुनकर एक सेकेंड के लिए मानो सबको सांप सूंघ गया हो।

“अब तुम एक काम करो लारा।“ सुयश ने लारा को आर्डर देते हुए कहा-

“इस गार्ड की लाश को भी वहीं रखवा दो, जहां लॉरेन की लाश रखी है।“

आर्डर मिलते ही लारा ने दो गार्डों को इशारे से बुलाया और उस गार्ड की लाश को ले जाने के लिए कहा। दोनों गार्ड उस लाश को उठा कर वहां से चले गए।

सुयश ने शिप के एक लैब टेक्निशीयन को बुलाकर उस कीड़े की बॉडी को भी हटवा कर टेस्टिंग के लिए लैब भिजवा दिया।

“थैंक यू मिस्टर तौफीक!“ सुयश ने तौफीक का आभार प्रकट करते हुए कहा-

“अगर आपने ठीक वक्त पर कीड़े को निशाना ना बनाया होता तो शायद वह अभी एक-दो लोगों को और काट सकता था। आपके निशाने की एक बार फिर से तारीफ करनी होगी। वैसे आपके रिवाल्वर चलाने की स्टाइल काफी अच्छी है और गोली चलाने के बाद फूंक मारकर, रिवाल्वर से निकलते धुंए को उड़ाना, यह भी काफी अच्छा है।“

तौफीक ने अपने हाथ में पकड़ी रिवाल्वर अब गार्ड को सौंप दी। पर इससे पहले कि अभी और कोई कुछ बोल पाता, तभी वह दोनों गार्ड, जो अभी-अभी मृत गार्ड की लाश को ले गए थे, भागकर उधर आते दिखाई दिए। सभी आश्चर्य से उधर देखने लगे।

“सर.....सर....वो.... वो....!“ एक गार्ड ने घबराए स्वर में कहा।

“क्या वो...वो... लगा रखा है। बोलते क्यों नहीं ? बात क्या है?“ सुयश ने बिल्कुल डांटने वाली स्टाइल में कहा।

“वो....वो..कैप्टन! लॉरेन की लाश अपनी जगह पर नहीं है। लॉरेन की लाश गायब हो गई।“ दूसरे गार्ड ने हकलाये स्वर में कहा।

“व्हाट!“ लारा के मुंह से आश्चर्य भरे भाव निकले। “ओ गॉड! ये सब क्या हो रहा है?“ सुयश ने चिन्तित स्वर में कहा।

तुरंत सारे लोग उस दिशा में भाग लिए जिधर कोल्ड स्टोर रूम था।

जारी रहेगा....…..✍️
 
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