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तो ये बात है? इतने दिनों से ये सब चल रहा था और मुझे आज पता चल रहा है.
थोड़ा गुस्से के साथ कीर्ति के पापा बोले.
क. डैड:- और Kirti...Tumne मुझे बताया भी नहीं?
कीर्ति:- इग्नोर कर रही थी isse...Picchle कुछ साल बिलकुल शांत हो गया tha...Pata नहीं आज इससे क्या हो गया?
सुमित की और देख गुस्से से बोली Kirti...Kirti की नफरत देख सुमित और भी टूट ता जा रहा था.
क. डैड:- ये सब जाने के बाद भी तू यहाँ इसके साथ आ gaya...Samjhaana चाहिए था isse...Lekin तू भी अपने बीटा के मोह में अँधा हो गया है.
नाराजगी भरी आवाज में कीर्ति के पापा ने सुमित के पापा से कहा.
स. डैड:- मई इसके साथ नहीं खुद मई इससे यहाँ ले कर आया हूँ.
इस बात से कीर्ति के सभी घर वाले हैरान हो गए.
क. डैड:- क्या? समझाने की जगह तू इससे और बढ़ावा दे रहा है?
स. डैड:- अगर गलती करता तो जरूर रोकता.
क. डैड:- तो क्या ये सही है?
स. डैड:- सही भी नहीं है.
क. डैड:- तो फिर?
स. डैड:- सच्चा प्यार करता hai...Teri बेटी के लिए अच्छा hi चाहता hai...Fir गलत कैसे हो गया?
लेकिन किस्से प्यार करना chahiye...Ye इससे समझ में नहीं aaya...Bas ये सही नहीं किया.
इस बात पर कीर्ति और उसके पापा दोनों hi उन्हें गुस्से से देखते है.
क. डैड:- Accha...Choice ख़राब hai...To इस ख़राब चॉइस को भूल जाने के लिए क्यों नहीं समझाया?
स. डैड:- मई कौन होता हूँ इसको चॉइस भूल जाने के लिए कहने वाला? बस इसके चॉइस पर सलाह दे सकता हूँ की क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
इससे यही सलाह दिया था की सच्चा प्यार करता है तो करता reh...Aise डरपोक बन कर बिच में hi भूल जाने की झूठा दिलाशा मत दे खुद ko...Kyu की एक बार इंसान खुद को हारा हुआ मानने लगता है तो जिंदगी भर हारता hi रहता hai...Bahut वक्त लग जाता है खुद को संभालने में.
मई हमेशा अपने बेटे को एक फाइटर के रूप में देखना चाहता hun...Sirf जीतने वाला nahi...Agar सामने हार hi है फिर भी आखिरी पल तक लड़ता rahe...Aise में हार भी गया तो भी मुझे अपने बीटा पर गर्व होगा.
अपने पापा की इस बात सुनने पर सुमित को hi अपने पापा पर गर्व महसूस hua...Unke बीटा होने का.
स. डैड:- मौका दे रहा था इससे अपने प्यार साबित करने के liye...Agar इसका प्यार सफल हो जाता तो जिंदगी भर इससे खुद पर गर्व होता की एक असंभव सा दिखने वाली चीज संभव कर के दिखाया hai...Aur इससे अपने प्यार का कीमत पता चलता की प्यार कितना अनमोल होता है और इससे पाने के लिए न जाने कितने हालातों से गुजरना पड़ता है.
और इसका प्यार असफल हो जाता है तो इससे अपना गलती dikhega...Kaha कहा पर गलतियां किया है और क्या गलतियां किया hai...Issi सिख से ये आगे बढ़ेगा.
लोग कहते है किसी का भी सबसे बड़ा शिक्षक (टीचर) उसके माँ बाप और स्कूल कॉलेज की टीचर होते hai...Sahi भी hai...Lekin मैंने अपने जिंदगी के अनुभव से सीखा है की जिंदगी खुद सबसे बड़ा शिक्षक hai...Jindagi के ऐसे पहलु होते है जिससे हम बहुत कुछ सिख सकते है ख़ुशी के पल से भी और ग़म से भी.
इतना कह कर सुमित के पापा ने थोड़ा सांस लिया और फिर.
स. डैड:- तुम गलत चॉइस हो ये नहीं कह रहा hun...Tum खुद में बहुत अच्छी ho...Aur तुम्हारा पूरा अधिकार है अपने डिसिशन लेने ka...Tum सुमित के लिए गलत ho...Aur सुमित तुम्हारे लिए गलत hai...Shayad ये बात अब्ब सुमित भी समझ गया होगा.
क. डैड:- वाह क्या बात hai...Math का टीचर आज जिंदगी का ज्ञान देता फिर रहा है.
इस मजाक उड़ाने वाली हंसी पर सुमित से रहा नहीं gaya...Lekin वो कुछ बोलता उससे पहले उसके पापा उसका हाथ पकड़ लेता है.
स. डैड:- Jindagi...Iss विषय का शिक्षक तो अभी भी बन नहीं पाया hun...Ek विद्यार्थी हूँ और जो भी खुद सीखा है वो बता रहा हूँ.
और jindagi...Ye ऐसा शिक्षक है जो तेरा इस अहंकार वाली हंसी को आसानी से पाचताप वाली आंसू में बदल सकता hai...Bas वक्त की देरी है.
क. डैड:- सपना देखता reh...Waise भी सपना hi तो देखता आया है आज tak...Jo कभी पूरा नहीं हो सका.
स. डैड:- और तू भी वैसा का वैसा hi रह gaya...Bas दुसरो के बारे में अपना ओपिनियन बना लेता है और उससे में अदा रहता है भले hi वो सही है या गलत.
जरुरी तो नहीं है कहना लेकिन फिर भी तेरे जानकारी के लिए कह hi देता hun...Aaj वो सपना निकाल कर फेंक दिया hai...Vakt के साथ खुश हूँ और जिंदगी भी सही चल रहा hai...Abb बस अपना बीटा और बेटी की कुछ जिम्मेदारियां है.
कीर्ति के पापा इस बात पर कोई जवाब नहीं देते है.
ऐसे hi कुछ देर सुमित को देखने के बाद.
क. डैड:- तुम्हे तो मई बहुत शरीफ समझता था.
सुमित कोई जवाब नहीं देता.
क. डैड:- लेकिन आज कल तो शरीफ दिखने वाले लड़के hi छुपा ृष्टं निकलते है.
सुमित फिर भी कोई जवाब नहीं देता.
क. डैड:- वैसे एक बात bataao...Tumhe मई अपना दामाद बनाऊ क्यों?
कीर्ति:- पापा?
क. डैड:- मई सुमित से बात कर रहा हूँ.
क. डैड:- अच्छा तो सुमित bataao...Tum में ऐसा क्या ख़ास है की मई कीर्ति का हाथ तुम्हारे हाथ में दू.
इस बार कीर्ति की पापा की आवाज थोड़ा धीमा tha...Sumit को भी लगा इस बार कुछ जवाब देना chahiye...Lekin अगले hi पल.
क. डैड:- यही की तुम पढाई काम आवारापन ज्यादा कर रहे ho...College काम बार में ज्यादा समय रहते ho...Exam में पास होना भी किसी चमत्कार से काम नहीं.
अरे कोई पेशेंट तुम जैसे डॉक्टर से इलाज करने के लिए राजी नहीं होगा अगर असलियत जान ले तो फिर मई सब कुछ जानते हुए अपने बेटी का शादी तुम से करवौ.
अगर कीर्ति भी राजी होती फिर भी मई इस शादी का खिलाफ hi hoti...Garv है मुझे अपने बेटी पर जो कॉलेज जाती है तो सिर्फ पढ़ाई करने के liye...Naa की तुम जैसे आवारा के मीठी मीठी बातों में आयी जो पढाई के अलावा लड़की फ़साने में ज्यादा ध्यान देते है.
सुमित hi जानता था की कैसे उसने खुद को संभाला.
स. डैड:- सुमित की इतनी taarifein...Tujhe कहा से पता चला?
क. डैड:- सच कड़वा होता hai...Bhale hi कितना भी बुरा क्यों न lage...Mahesh याद hai...Party में एक दिन सभी के बारे में बातें चल रही thi...To इसका प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पता चल गया.
सुमित टैलेंटेड तो hai...Bas लड़की की चक्कर छोड़ दे.
स. डैड:- और तू बहुत मजे से सुन रहा था.
क. डैड:- मुझे क्या पड़ी है किसी के बारे में इतना सोचने ki...Bas जो भी पता था वो कह दिया.
स. डैड:- लेकिन बातों से तो ऐसा लग नहीं रहा था.
क. डैड:- फिर भी सच तो ये hi है.
स. डैड:- तूने सुमित से पूछा था ये सवाल की सुमित में तेरा दामाद बनने की क्या खासियत है? सवाल सुमित से पूछा है तो जवाब मई नहीं दूंगा.
बस 5 saal...Fir भी सुमित जवाब नहीं dega...Agar हमारी दोस्ती तब तक रहा तो देख लेना सुमित में क्या खासियत hai...Jawaab तेरा आँखें खुद तुझे देगा.
क. डैड:- कमाल hai...Apne बीटा का इस हरकत पर भी साथ दे रहा hai...Maar पीट कर समझाना चाहिए था ताकि अकाल ठिकाने आ जाये.
अगर मुझे पहले पता चलता की मेरी बेटी के पीछे पड़ा है तो हाथ पेअर तोड़ कर रख देता.
स. डैड:- नहीं कर पाटा.
क. डैड:- क्या?
स. डैड:- हाथ पेअर तोड़ने की बात कर रहा hai...Chhuu भी नहीं सकता है.
इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था जिससे कीर्ति के पापा भी कुछ नहीं बोल पाए.
क. डैड:- सही hai...Tera घमंड उस वक्त तुझे ले डूबा tha...Abb तेरा बीटा को ले डूबेगा.
इसके बाद कुछ देर कोई बात नहीं होता.
कीर्ति:- Sumit...Tumse कुछ बात करनी है.
पहली बार ऐसा हुआ की कीर्ति ने बुलाया था और सुमित को कोई ख़ुशी नहीं हुआ.
सुमित:- कहो.
कीर्ति:- अकेले में.
कीर्ति अपनी पापा की और देखते hai...Wo परमिशन देते है.
दोनों फिर रूम से बाहर जाते है.
कीर्ति:- क्या बात है? इतना शांत क्यों हो?
सुमित:- बोलने के लिए अब्ब शब्द बाकी नहीं है.
कीर्ति अब्ब हसने लगती hai...Kirti की ये हंसी सीधा सुमित के दिल पर वार कर रहा था.
कीर्ति:- न जाने इतने साल में इतना बोल लिया तुमने की अब्ब तुम्हारे पास बोलने के लिए शब्द hi नहीं hai...Kamaal है.
ये कह कर कीर्ति और हसने लगती है.
कीर्ति:- इतना परेशान कर दिया था तुमने मुझे की आज तुम्हे परेशान देख बहुत ख़ुशी मिल रहा है.
सुमित की तरफ देख कर.
कीर्ति:- वैसे मुझे किसी को दुखी देखना अच्छा नहीं लगता पर पता नहीं क्यों तुम्हे दुखी देख कर बहुत अच्छा लग रहा है.
जैसे को taisa...Ye कहावत आज सही साबित हो gaya...Tumne मुझे जितना परेशान किया hai...Abb तुम भी उतना hi परेशान हो.
तुम तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो.
सुमित:- आज तुम बोलो.
कीर्ति:- Haan...Aaj मई बोलूंगी और तुम sunoge...Kuch ऐसा बोलूंगी की आज के बाद कुछ सुन्ना भी नहीं चाहोगे तुम.
सुमित:- (इन हिज मंद) मंजूर है.
कीर्ति:- ऐसा नहीं है की मुझे तुम्हारे प्यार का एहसास नहीं tha...Jaanti हूँ तुम्हारा प्यार सच्चा hai...Lekin mai...Mujhe भी तो पसंद आना चाहिए तुम्हारा प्यार.
जब से एक बार तुम गलत लगने लगे तब से तुम से बिलकुल hi नफरत होने laga...Bhale hi तुम्हारा प्यार कितना भी सच्चा ho...Tumhara बातें, तुम्हारा चेहरा और tum...Sab से नफरत होने लगी.
जितना मई तुम्हे अवॉयड करती थी उतना hi तुम मेरे पास आते थे उससे मेरा नफरत और भी बढ़ gaya...Besharmi की भी हद्द होती है.
आज तुम्हारा जो हाल है वजह तुम खुद ho...Bahut पहले ठुकरा दिया था tumhe...Tum hi मेरे पीछे पड़े थे और आज ये हाल hai...Aur सच कहु तो तुम्हारा ये हाल मेरे लिए किसी सुकून से काम नहीं है.
इतना कहने के बाद कीर्ति एक नजर सुमित को देखती है और हँसते हुए कहती है.
कीर्ति:- क्या कहते थे तुम विवेक को? विचित्र praani...Khud देख लो तुमसे विचित्र कौन होगा?
तुम मेरे पीछे 8 साल से पड़े हो...8 साल यानी की 96 mahine...Aur मेरे पास तुम्हारे लिए 96 मिनट भी नहीं hai...Yahi है तुम्हारा औकात.
ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Aur साथ hi उसके होंठो में दर्द भरी मुस्कान छा गया.
कीर्ति:- अभी भी बेशर्मी के साथ खड़े हो.
नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.
सुमित:- अगर तुम्हारा इजाजत हो तो ये बेशर्मी दो बार और दिखाना चाहता हूँ.
कीर्ति:- क्यों और कब?
हैरानी से कीर्ति की मुंह से निकला.
सुमित:- तुम्हारा इंगेजमेंट और शादी के दिन.
कीर्ति को विश्वाश नहीं हो रहा था और खुद सुमित को भी.
कीर्ति:- अब्ब तुम खुद hi कुल्हाड़ी पर पेअर मारना चाहते हो तो मई क्या kahu...Accha hi hai...Tumhara शकल देखने लायक होगी.
सुमित:- थैंक यू.
फिर कीर्ति वह से चली गयी.
पहली बार ऐसा था की सुमित को कीर्ति के पीछे मुड़ने की और मुस्कुराने की उम्मीद नहीं tha...Wo बस मुश्कुराते हुए कीर्ति को जाते देखता रहा.
सुमित:- बस 2 मुलाक़ात aur...Fir तुम्हे भुला dunga...Bhulaana hi पड़ेगा.
आखिरी लाइन कहते हुए सुमित रोने hi वाला था की हालात और जगह देख रू भी नहीं पाया.
वो दुखी मन वापस आ गया.
स. डैड:- (तो कीर्ति) तुमने hi कहा था सुमित पिछले 3 साल से तुमसे नहीं मिला hai...Lekin सामने न आ कर भी तुम्हे अपने प्यार का एहसास दिलाने का हजार कोशिश कर चूका है.
अगर तुम राजी होती तो मई इसके (क. डैड) परवाह किये बिना तुम दोनों की शादी करा deta...Lekin तुम hi तैयार नहीं ho...Khair तुम्हारा डिसिशन hai...Sahi hi होगा तुम्हारे liye...Khush रहना तुम.
स. डैड:- (तो क. डैड) तू तो बचपन का दोस्त है और तुझसे वैसे भी ज्यादा नाराज नहीं रह sakta...Agar दोस्त का जरुरत पड़े तो आगे भी कुछ कहने के लिए मत हिचकना.
इतना कह कर वो सुमित को अपने साथ ले कर वह से निकल गए.
स. डैड:- यहाँ आने का मकशद यही था की तुझे जिंदगी के ऐसे पल भी हो सकते है ये समझाना चाहता tha...Agar कीर्ति मान जाती तो बहुत ख़ुशी होता मुझे bhi...Lekin ये एक ऐसा मुश्किल पल है जिसको अगर झेल लिया तो देखना आगे का जिंदगी और भी खुशनुमा हो जायेगा.
सुमित:- कीर्ति से अलग हो कर कैसी ख़ुशी?
स. डैड:- अभी नहीं samjhega...Vakt आने दे.
सुमित:- पापा अभी बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहा hun...Ho सकता है कुछ दिन तक आप निराश हो जाए मुझे ऐसे देख kar...Lekin पापा विश्वाश कीजिये फिर से उठ कर खड़ा हो jaaunga...Bas थोड़ा वक्त dijiye...Aapne मेरे बारे में जो सोचा है उससे भी बड़ा बन कर दिखाऊंगा.
सुमित की आवाज में आत्मविश्वाश तो था लेकिन इस बात में भी दर्द hi हावी था.
स. डैड:- जितना चाहे उतना वक्त le...Mujhe विश्वाश है तुझ par...Mujhe हमेशा जीतने वाला बीटा नहीं chahiye...Haar के सामने भी ना झुकने वाला बीटा चाहिए भले hi वो हार उससे कितना भी तोड़ दे.
सुमित:- आज के लिए सॉरी Papa...Waha कुछ बोल नहीं paaya...Aisa लगता है मैंने खुद के साथ वह आप को भी हरा दिया.
स. डैड:- किसने कह दिया की तू वह हार गया था?
सुमित अपने पापा को हैरानी से देखता है.
ा. डैड:- अपने भावना से जीता है tune...Itna गुस्सा और दर्द के बावजूद अपने दिल पर काबू tha...Yeh देख मई सच में खुश हु.
उम्र और हालात ऐसे है की कीर्ति के पापा पर तेरा कभी भी हाथ उठ सकता था जैसे वो तुझे उक्षा रहा tha...Aur कीर्ति से प्यार की भीख में गिड़गिड़ाता तो वो भी कोई हैरानी की बात नहीं होती.
लेकिन तूने अपने भावना पर काबू रखा hai...Bahut बड़ी बात है ye...Bas बीटा कुछ वक्त aur...Dekhna जिंदगी में जो भी दर्द झेले है तूने ये सभी खुशियां बन कर सामने aayenge...Bas तू ऐसे hi मजबूती से आगे बढ़.
इतना समझ hi गया होगा दिल की बात हमेशा सुनने पर ठोकर hi लगता hai...Thoda दिमाग से भी सोच और ाही फैसले le....Ye नहीं कहूंगा की प्यार मत kar...Jindagi में प्यार का भी अलग hi जरुरत hai...Bas सही लड़की से प्यार कर.
सुमित:- अब्ब किसी और से प्यार? ऐसी हालात में?
स. डैड:- बिलकुल nahi...Aur प्यार करते नहीं प्यार हो जाता hai...Abb तो तेरा उम्र भी हो चूका है शादी के liye...Abb तो अपनी बीवी से hi प्यार करना
...Fir galat...Pyaar किया नहीं जाता प्यार हो जाता है ये बात समझ लेना.
आखिरी की बात सुमित के पापा ने ऐसे कहा था की सुमित को भी हंसी आ गया.
तो ये बात है? इतने दिनों से ये सब चल रहा था और मुझे आज पता चल रहा है.
थोड़ा गुस्से के साथ कीर्ति के पापा बोले.
क. डैड:- और Kirti...Tumne मुझे बताया भी नहीं?
कीर्ति:- इग्नोर कर रही थी isse...Picchle कुछ साल बिलकुल शांत हो गया tha...Pata नहीं आज इससे क्या हो गया?
सुमित की और देख गुस्से से बोली Kirti...Kirti की नफरत देख सुमित और भी टूट ता जा रहा था.
क. डैड:- ये सब जाने के बाद भी तू यहाँ इसके साथ आ gaya...Samjhaana चाहिए था isse...Lekin तू भी अपने बीटा के मोह में अँधा हो गया है.
नाराजगी भरी आवाज में कीर्ति के पापा ने सुमित के पापा से कहा.
स. डैड:- मई इसके साथ नहीं खुद मई इससे यहाँ ले कर आया हूँ.
इस बात से कीर्ति के सभी घर वाले हैरान हो गए.
क. डैड:- क्या? समझाने की जगह तू इससे और बढ़ावा दे रहा है?
स. डैड:- अगर गलती करता तो जरूर रोकता.
क. डैड:- तो क्या ये सही है?
स. डैड:- सही भी नहीं है.
क. डैड:- तो फिर?
स. डैड:- सच्चा प्यार करता hai...Teri बेटी के लिए अच्छा hi चाहता hai...Fir गलत कैसे हो गया?
लेकिन किस्से प्यार करना chahiye...Ye इससे समझ में नहीं aaya...Bas ये सही नहीं किया.
इस बात पर कीर्ति और उसके पापा दोनों hi उन्हें गुस्से से देखते है.
क. डैड:- Accha...Choice ख़राब hai...To इस ख़राब चॉइस को भूल जाने के लिए क्यों नहीं समझाया?
स. डैड:- मई कौन होता हूँ इसको चॉइस भूल जाने के लिए कहने वाला? बस इसके चॉइस पर सलाह दे सकता हूँ की क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
इससे यही सलाह दिया था की सच्चा प्यार करता है तो करता reh...Aise डरपोक बन कर बिच में hi भूल जाने की झूठा दिलाशा मत दे खुद ko...Kyu की एक बार इंसान खुद को हारा हुआ मानने लगता है तो जिंदगी भर हारता hi रहता hai...Bahut वक्त लग जाता है खुद को संभालने में.
मई हमेशा अपने बेटे को एक फाइटर के रूप में देखना चाहता hun...Sirf जीतने वाला nahi...Agar सामने हार hi है फिर भी आखिरी पल तक लड़ता rahe...Aise में हार भी गया तो भी मुझे अपने बीटा पर गर्व होगा.
अपने पापा की इस बात सुनने पर सुमित को hi अपने पापा पर गर्व महसूस hua...Unke बीटा होने का.
स. डैड:- मौका दे रहा था इससे अपने प्यार साबित करने के liye...Agar इसका प्यार सफल हो जाता तो जिंदगी भर इससे खुद पर गर्व होता की एक असंभव सा दिखने वाली चीज संभव कर के दिखाया hai...Aur इससे अपने प्यार का कीमत पता चलता की प्यार कितना अनमोल होता है और इससे पाने के लिए न जाने कितने हालातों से गुजरना पड़ता है.
और इसका प्यार असफल हो जाता है तो इससे अपना गलती dikhega...Kaha कहा पर गलतियां किया है और क्या गलतियां किया hai...Issi सिख से ये आगे बढ़ेगा.
लोग कहते है किसी का भी सबसे बड़ा शिक्षक (टीचर) उसके माँ बाप और स्कूल कॉलेज की टीचर होते hai...Sahi भी hai...Lekin मैंने अपने जिंदगी के अनुभव से सीखा है की जिंदगी खुद सबसे बड़ा शिक्षक hai...Jindagi के ऐसे पहलु होते है जिससे हम बहुत कुछ सिख सकते है ख़ुशी के पल से भी और ग़म से भी.
इतना कह कर सुमित के पापा ने थोड़ा सांस लिया और फिर.
स. डैड:- तुम गलत चॉइस हो ये नहीं कह रहा hun...Tum खुद में बहुत अच्छी ho...Aur तुम्हारा पूरा अधिकार है अपने डिसिशन लेने ka...Tum सुमित के लिए गलत ho...Aur सुमित तुम्हारे लिए गलत hai...Shayad ये बात अब्ब सुमित भी समझ गया होगा.
क. डैड:- वाह क्या बात hai...Math का टीचर आज जिंदगी का ज्ञान देता फिर रहा है.
इस मजाक उड़ाने वाली हंसी पर सुमित से रहा नहीं gaya...Lekin वो कुछ बोलता उससे पहले उसके पापा उसका हाथ पकड़ लेता है.
स. डैड:- Jindagi...Iss विषय का शिक्षक तो अभी भी बन नहीं पाया hun...Ek विद्यार्थी हूँ और जो भी खुद सीखा है वो बता रहा हूँ.
और jindagi...Ye ऐसा शिक्षक है जो तेरा इस अहंकार वाली हंसी को आसानी से पाचताप वाली आंसू में बदल सकता hai...Bas वक्त की देरी है.
क. डैड:- सपना देखता reh...Waise भी सपना hi तो देखता आया है आज tak...Jo कभी पूरा नहीं हो सका.
स. डैड:- और तू भी वैसा का वैसा hi रह gaya...Bas दुसरो के बारे में अपना ओपिनियन बना लेता है और उससे में अदा रहता है भले hi वो सही है या गलत.
जरुरी तो नहीं है कहना लेकिन फिर भी तेरे जानकारी के लिए कह hi देता hun...Aaj वो सपना निकाल कर फेंक दिया hai...Vakt के साथ खुश हूँ और जिंदगी भी सही चल रहा hai...Abb बस अपना बीटा और बेटी की कुछ जिम्मेदारियां है.
कीर्ति के पापा इस बात पर कोई जवाब नहीं देते है.
ऐसे hi कुछ देर सुमित को देखने के बाद.
क. डैड:- तुम्हे तो मई बहुत शरीफ समझता था.
सुमित कोई जवाब नहीं देता.
क. डैड:- लेकिन आज कल तो शरीफ दिखने वाले लड़के hi छुपा ृष्टं निकलते है.
सुमित फिर भी कोई जवाब नहीं देता.
क. डैड:- वैसे एक बात bataao...Tumhe मई अपना दामाद बनाऊ क्यों?
कीर्ति:- पापा?
क. डैड:- मई सुमित से बात कर रहा हूँ.
क. डैड:- अच्छा तो सुमित bataao...Tum में ऐसा क्या ख़ास है की मई कीर्ति का हाथ तुम्हारे हाथ में दू.
इस बार कीर्ति की पापा की आवाज थोड़ा धीमा tha...Sumit को भी लगा इस बार कुछ जवाब देना chahiye...Lekin अगले hi पल.
क. डैड:- यही की तुम पढाई काम आवारापन ज्यादा कर रहे ho...College काम बार में ज्यादा समय रहते ho...Exam में पास होना भी किसी चमत्कार से काम नहीं.
अरे कोई पेशेंट तुम जैसे डॉक्टर से इलाज करने के लिए राजी नहीं होगा अगर असलियत जान ले तो फिर मई सब कुछ जानते हुए अपने बेटी का शादी तुम से करवौ.
अगर कीर्ति भी राजी होती फिर भी मई इस शादी का खिलाफ hi hoti...Garv है मुझे अपने बेटी पर जो कॉलेज जाती है तो सिर्फ पढ़ाई करने के liye...Naa की तुम जैसे आवारा के मीठी मीठी बातों में आयी जो पढाई के अलावा लड़की फ़साने में ज्यादा ध्यान देते है.
सुमित hi जानता था की कैसे उसने खुद को संभाला.
स. डैड:- सुमित की इतनी taarifein...Tujhe कहा से पता चला?
क. डैड:- सच कड़वा होता hai...Bhale hi कितना भी बुरा क्यों न lage...Mahesh याद hai...Party में एक दिन सभी के बारे में बातें चल रही thi...To इसका प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पता चल गया.
सुमित टैलेंटेड तो hai...Bas लड़की की चक्कर छोड़ दे.
स. डैड:- और तू बहुत मजे से सुन रहा था.
क. डैड:- मुझे क्या पड़ी है किसी के बारे में इतना सोचने ki...Bas जो भी पता था वो कह दिया.
स. डैड:- लेकिन बातों से तो ऐसा लग नहीं रहा था.
क. डैड:- फिर भी सच तो ये hi है.
स. डैड:- तूने सुमित से पूछा था ये सवाल की सुमित में तेरा दामाद बनने की क्या खासियत है? सवाल सुमित से पूछा है तो जवाब मई नहीं दूंगा.
बस 5 saal...Fir भी सुमित जवाब नहीं dega...Agar हमारी दोस्ती तब तक रहा तो देख लेना सुमित में क्या खासियत hai...Jawaab तेरा आँखें खुद तुझे देगा.
क. डैड:- कमाल hai...Apne बीटा का इस हरकत पर भी साथ दे रहा hai...Maar पीट कर समझाना चाहिए था ताकि अकाल ठिकाने आ जाये.
अगर मुझे पहले पता चलता की मेरी बेटी के पीछे पड़ा है तो हाथ पेअर तोड़ कर रख देता.
स. डैड:- नहीं कर पाटा.
क. डैड:- क्या?
स. डैड:- हाथ पेअर तोड़ने की बात कर रहा hai...Chhuu भी नहीं सकता है.
इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था जिससे कीर्ति के पापा भी कुछ नहीं बोल पाए.
क. डैड:- सही hai...Tera घमंड उस वक्त तुझे ले डूबा tha...Abb तेरा बीटा को ले डूबेगा.
इसके बाद कुछ देर कोई बात नहीं होता.
कीर्ति:- Sumit...Tumse कुछ बात करनी है.
पहली बार ऐसा हुआ की कीर्ति ने बुलाया था और सुमित को कोई ख़ुशी नहीं हुआ.
सुमित:- कहो.
कीर्ति:- अकेले में.
कीर्ति अपनी पापा की और देखते hai...Wo परमिशन देते है.
दोनों फिर रूम से बाहर जाते है.
कीर्ति:- क्या बात है? इतना शांत क्यों हो?
सुमित:- बोलने के लिए अब्ब शब्द बाकी नहीं है.
कीर्ति अब्ब हसने लगती hai...Kirti की ये हंसी सीधा सुमित के दिल पर वार कर रहा था.
कीर्ति:- न जाने इतने साल में इतना बोल लिया तुमने की अब्ब तुम्हारे पास बोलने के लिए शब्द hi नहीं hai...Kamaal है.
ये कह कर कीर्ति और हसने लगती है.
कीर्ति:- इतना परेशान कर दिया था तुमने मुझे की आज तुम्हे परेशान देख बहुत ख़ुशी मिल रहा है.
सुमित की तरफ देख कर.
कीर्ति:- वैसे मुझे किसी को दुखी देखना अच्छा नहीं लगता पर पता नहीं क्यों तुम्हे दुखी देख कर बहुत अच्छा लग रहा है.
जैसे को taisa...Ye कहावत आज सही साबित हो gaya...Tumne मुझे जितना परेशान किया hai...Abb तुम भी उतना hi परेशान हो.
तुम तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो.
सुमित:- आज तुम बोलो.
कीर्ति:- Haan...Aaj मई बोलूंगी और तुम sunoge...Kuch ऐसा बोलूंगी की आज के बाद कुछ सुन्ना भी नहीं चाहोगे तुम.
सुमित:- (इन हिज मंद) मंजूर है.
कीर्ति:- ऐसा नहीं है की मुझे तुम्हारे प्यार का एहसास नहीं tha...Jaanti हूँ तुम्हारा प्यार सच्चा hai...Lekin mai...Mujhe भी तो पसंद आना चाहिए तुम्हारा प्यार.
जब से एक बार तुम गलत लगने लगे तब से तुम से बिलकुल hi नफरत होने laga...Bhale hi तुम्हारा प्यार कितना भी सच्चा ho...Tumhara बातें, तुम्हारा चेहरा और tum...Sab से नफरत होने लगी.
जितना मई तुम्हे अवॉयड करती थी उतना hi तुम मेरे पास आते थे उससे मेरा नफरत और भी बढ़ gaya...Besharmi की भी हद्द होती है.
आज तुम्हारा जो हाल है वजह तुम खुद ho...Bahut पहले ठुकरा दिया था tumhe...Tum hi मेरे पीछे पड़े थे और आज ये हाल hai...Aur सच कहु तो तुम्हारा ये हाल मेरे लिए किसी सुकून से काम नहीं है.
इतना कहने के बाद कीर्ति एक नजर सुमित को देखती है और हँसते हुए कहती है.
कीर्ति:- क्या कहते थे तुम विवेक को? विचित्र praani...Khud देख लो तुमसे विचित्र कौन होगा?
तुम मेरे पीछे 8 साल से पड़े हो...8 साल यानी की 96 mahine...Aur मेरे पास तुम्हारे लिए 96 मिनट भी नहीं hai...Yahi है तुम्हारा औकात.
ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Aur साथ hi उसके होंठो में दर्द भरी मुस्कान छा गया.
कीर्ति:- अभी भी बेशर्मी के साथ खड़े हो.
नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.
सुमित:- अगर तुम्हारा इजाजत हो तो ये बेशर्मी दो बार और दिखाना चाहता हूँ.
कीर्ति:- क्यों और कब?
हैरानी से कीर्ति की मुंह से निकला.
सुमित:- तुम्हारा इंगेजमेंट और शादी के दिन.
कीर्ति को विश्वाश नहीं हो रहा था और खुद सुमित को भी.
कीर्ति:- अब्ब तुम खुद hi कुल्हाड़ी पर पेअर मारना चाहते हो तो मई क्या kahu...Accha hi hai...Tumhara शकल देखने लायक होगी.
सुमित:- थैंक यू.
फिर कीर्ति वह से चली गयी.
पहली बार ऐसा था की सुमित को कीर्ति के पीछे मुड़ने की और मुस्कुराने की उम्मीद नहीं tha...Wo बस मुश्कुराते हुए कीर्ति को जाते देखता रहा.
सुमित:- बस 2 मुलाक़ात aur...Fir तुम्हे भुला dunga...Bhulaana hi पड़ेगा.
आखिरी लाइन कहते हुए सुमित रोने hi वाला था की हालात और जगह देख रू भी नहीं पाया.
वो दुखी मन वापस आ गया.
स. डैड:- (तो कीर्ति) तुमने hi कहा था सुमित पिछले 3 साल से तुमसे नहीं मिला hai...Lekin सामने न आ कर भी तुम्हे अपने प्यार का एहसास दिलाने का हजार कोशिश कर चूका है.
अगर तुम राजी होती तो मई इसके (क. डैड) परवाह किये बिना तुम दोनों की शादी करा deta...Lekin तुम hi तैयार नहीं ho...Khair तुम्हारा डिसिशन hai...Sahi hi होगा तुम्हारे liye...Khush रहना तुम.
स. डैड:- (तो क. डैड) तू तो बचपन का दोस्त है और तुझसे वैसे भी ज्यादा नाराज नहीं रह sakta...Agar दोस्त का जरुरत पड़े तो आगे भी कुछ कहने के लिए मत हिचकना.
इतना कह कर वो सुमित को अपने साथ ले कर वह से निकल गए.
स. डैड:- यहाँ आने का मकशद यही था की तुझे जिंदगी के ऐसे पल भी हो सकते है ये समझाना चाहता tha...Agar कीर्ति मान जाती तो बहुत ख़ुशी होता मुझे bhi...Lekin ये एक ऐसा मुश्किल पल है जिसको अगर झेल लिया तो देखना आगे का जिंदगी और भी खुशनुमा हो जायेगा.
सुमित:- कीर्ति से अलग हो कर कैसी ख़ुशी?
स. डैड:- अभी नहीं samjhega...Vakt आने दे.
सुमित:- पापा अभी बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहा hun...Ho सकता है कुछ दिन तक आप निराश हो जाए मुझे ऐसे देख kar...Lekin पापा विश्वाश कीजिये फिर से उठ कर खड़ा हो jaaunga...Bas थोड़ा वक्त dijiye...Aapne मेरे बारे में जो सोचा है उससे भी बड़ा बन कर दिखाऊंगा.
सुमित की आवाज में आत्मविश्वाश तो था लेकिन इस बात में भी दर्द hi हावी था.
स. डैड:- जितना चाहे उतना वक्त le...Mujhe विश्वाश है तुझ par...Mujhe हमेशा जीतने वाला बीटा नहीं chahiye...Haar के सामने भी ना झुकने वाला बीटा चाहिए भले hi वो हार उससे कितना भी तोड़ दे.
सुमित:- आज के लिए सॉरी Papa...Waha कुछ बोल नहीं paaya...Aisa लगता है मैंने खुद के साथ वह आप को भी हरा दिया.
स. डैड:- किसने कह दिया की तू वह हार गया था?
सुमित अपने पापा को हैरानी से देखता है.
ा. डैड:- अपने भावना से जीता है tune...Itna गुस्सा और दर्द के बावजूद अपने दिल पर काबू tha...Yeh देख मई सच में खुश हु.
उम्र और हालात ऐसे है की कीर्ति के पापा पर तेरा कभी भी हाथ उठ सकता था जैसे वो तुझे उक्षा रहा tha...Aur कीर्ति से प्यार की भीख में गिड़गिड़ाता तो वो भी कोई हैरानी की बात नहीं होती.
लेकिन तूने अपने भावना पर काबू रखा hai...Bahut बड़ी बात है ye...Bas बीटा कुछ वक्त aur...Dekhna जिंदगी में जो भी दर्द झेले है तूने ये सभी खुशियां बन कर सामने aayenge...Bas तू ऐसे hi मजबूती से आगे बढ़.
इतना समझ hi गया होगा दिल की बात हमेशा सुनने पर ठोकर hi लगता hai...Thoda दिमाग से भी सोच और ाही फैसले le....Ye नहीं कहूंगा की प्यार मत kar...Jindagi में प्यार का भी अलग hi जरुरत hai...Bas सही लड़की से प्यार कर.
सुमित:- अब्ब किसी और से प्यार? ऐसी हालात में?
स. डैड:- बिलकुल nahi...Aur प्यार करते नहीं प्यार हो जाता hai...Abb तो तेरा उम्र भी हो चूका है शादी के liye...Abb तो अपनी बीवी से hi प्यार करना
आखिरी की बात सुमित के पापा ने ऐसे कहा था की सुमित को भी हंसी आ गया.