Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 10 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 75

तो ये बात है? इतने दिनों से ये सब चल रहा था और मुझे आज पता चल रहा है.

थोड़ा गुस्से के साथ कीर्ति के पापा बोले.

क. डैड:- और Kirti...Tumne मुझे बताया भी नहीं?

कीर्ति:- इग्नोर कर रही थी isse...Picchle कुछ साल बिलकुल शांत हो गया tha...Pata नहीं आज इससे क्या हो गया?

सुमित की और देख गुस्से से बोली Kirti...Kirti की नफरत देख सुमित और भी टूट ता जा रहा था.

क. डैड:- ये सब जाने के बाद भी तू यहाँ इसके साथ आ gaya...Samjhaana चाहिए था isse...Lekin तू भी अपने बीटा के मोह में अँधा हो गया है.

नाराजगी भरी आवाज में कीर्ति के पापा ने सुमित के पापा से कहा.

स. डैड:- मई इसके साथ नहीं खुद मई इससे यहाँ ले कर आया हूँ.

इस बात से कीर्ति के सभी घर वाले हैरान हो गए.

क. डैड:- क्या? समझाने की जगह तू इससे और बढ़ावा दे रहा है?

स. डैड:- अगर गलती करता तो जरूर रोकता.

क. डैड:- तो क्या ये सही है?

स. डैड:- सही भी नहीं है.

क. डैड:- तो फिर?

स. डैड:- सच्चा प्यार करता hai...Teri बेटी के लिए अच्छा hi चाहता hai...Fir गलत कैसे हो गया?

लेकिन किस्से प्यार करना chahiye...Ye इससे समझ में नहीं aaya...Bas ये सही नहीं किया.

इस बात पर कीर्ति और उसके पापा दोनों hi उन्हें गुस्से से देखते है.

क. डैड:- Accha...Choice ख़राब hai...To इस ख़राब चॉइस को भूल जाने के लिए क्यों नहीं समझाया?

स. डैड:- मई कौन होता हूँ इसको चॉइस भूल जाने के लिए कहने वाला? बस इसके चॉइस पर सलाह दे सकता हूँ की क्या करना चाहिए और क्या नहीं.

इससे यही सलाह दिया था की सच्चा प्यार करता है तो करता reh...Aise डरपोक बन कर बिच में hi भूल जाने की झूठा दिलाशा मत दे खुद ko...Kyu की एक बार इंसान खुद को हारा हुआ मानने लगता है तो जिंदगी भर हारता hi रहता hai...Bahut वक्त लग जाता है खुद को संभालने में.

मई हमेशा अपने बेटे को एक फाइटर के रूप में देखना चाहता hun...Sirf जीतने वाला nahi...Agar सामने हार hi है फिर भी आखिरी पल तक लड़ता rahe...Aise में हार भी गया तो भी मुझे अपने बीटा पर गर्व होगा.

अपने पापा की इस बात सुनने पर सुमित को hi अपने पापा पर गर्व महसूस hua...Unke बीटा होने का.

स. डैड:- मौका दे रहा था इससे अपने प्यार साबित करने के liye...Agar इसका प्यार सफल हो जाता तो जिंदगी भर इससे खुद पर गर्व होता की एक असंभव सा दिखने वाली चीज संभव कर के दिखाया hai...Aur इससे अपने प्यार का कीमत पता चलता की प्यार कितना अनमोल होता है और इससे पाने के लिए न जाने कितने हालातों से गुजरना पड़ता है.

और इसका प्यार असफल हो जाता है तो इससे अपना गलती dikhega...Kaha कहा पर गलतियां किया है और क्या गलतियां किया hai...Issi सिख से ये आगे बढ़ेगा.

लोग कहते है किसी का भी सबसे बड़ा शिक्षक (टीचर) उसके माँ बाप और स्कूल कॉलेज की टीचर होते hai...Sahi भी hai...Lekin मैंने अपने जिंदगी के अनुभव से सीखा है की जिंदगी खुद सबसे बड़ा शिक्षक hai...Jindagi के ऐसे पहलु होते है जिससे हम बहुत कुछ सिख सकते है ख़ुशी के पल से भी और ग़म से भी.

इतना कह कर सुमित के पापा ने थोड़ा सांस लिया और फिर.

स. डैड:- तुम गलत चॉइस हो ये नहीं कह रहा hun...Tum खुद में बहुत अच्छी ho...Aur तुम्हारा पूरा अधिकार है अपने डिसिशन लेने ka...Tum सुमित के लिए गलत ho...Aur सुमित तुम्हारे लिए गलत hai...Shayad ये बात अब्ब सुमित भी समझ गया होगा.

क. डैड:- वाह क्या बात hai...Math का टीचर आज जिंदगी का ज्ञान देता फिर रहा है.

इस मजाक उड़ाने वाली हंसी पर सुमित से रहा नहीं gaya...Lekin वो कुछ बोलता उससे पहले उसके पापा उसका हाथ पकड़ लेता है.

स. डैड:- Jindagi...Iss विषय का शिक्षक तो अभी भी बन नहीं पाया hun...Ek विद्यार्थी हूँ और जो भी खुद सीखा है वो बता रहा हूँ.

और jindagi...Ye ऐसा शिक्षक है जो तेरा इस अहंकार वाली हंसी को आसानी से पाचताप वाली आंसू में बदल सकता hai...Bas वक्त की देरी है.

क. डैड:- सपना देखता reh...Waise भी सपना hi तो देखता आया है आज tak...Jo कभी पूरा नहीं हो सका.

स. डैड:- और तू भी वैसा का वैसा hi रह gaya...Bas दुसरो के बारे में अपना ओपिनियन बना लेता है और उससे में अदा रहता है भले hi वो सही है या गलत.

जरुरी तो नहीं है कहना लेकिन फिर भी तेरे जानकारी के लिए कह hi देता hun...Aaj वो सपना निकाल कर फेंक दिया hai...Vakt के साथ खुश हूँ और जिंदगी भी सही चल रहा hai...Abb बस अपना बीटा और बेटी की कुछ जिम्मेदारियां है.

कीर्ति के पापा इस बात पर कोई जवाब नहीं देते है.

ऐसे hi कुछ देर सुमित को देखने के बाद.

क. डैड:- तुम्हे तो मई बहुत शरीफ समझता था.

सुमित कोई जवाब नहीं देता.

क. डैड:- लेकिन आज कल तो शरीफ दिखने वाले लड़के hi छुपा ृष्टं निकलते है.

सुमित फिर भी कोई जवाब नहीं देता.

क. डैड:- वैसे एक बात bataao...Tumhe मई अपना दामाद बनाऊ क्यों?

कीर्ति:- पापा?

क. डैड:- मई सुमित से बात कर रहा हूँ.

क. डैड:- अच्छा तो सुमित bataao...Tum में ऐसा क्या ख़ास है की मई कीर्ति का हाथ तुम्हारे हाथ में दू.

इस बार कीर्ति की पापा की आवाज थोड़ा धीमा tha...Sumit को भी लगा इस बार कुछ जवाब देना chahiye...Lekin अगले hi पल.

क. डैड:- यही की तुम पढाई काम आवारापन ज्यादा कर रहे ho...College काम बार में ज्यादा समय रहते ho...Exam में पास होना भी किसी चमत्कार से काम नहीं.

अरे कोई पेशेंट तुम जैसे डॉक्टर से इलाज करने के लिए राजी नहीं होगा अगर असलियत जान ले तो फिर मई सब कुछ जानते हुए अपने बेटी का शादी तुम से करवौ.

अगर कीर्ति भी राजी होती फिर भी मई इस शादी का खिलाफ hi hoti...Garv है मुझे अपने बेटी पर जो कॉलेज जाती है तो सिर्फ पढ़ाई करने के liye...Naa की तुम जैसे आवारा के मीठी मीठी बातों में आयी जो पढाई के अलावा लड़की फ़साने में ज्यादा ध्यान देते है.

सुमित hi जानता था की कैसे उसने खुद को संभाला.

स. डैड:- सुमित की इतनी taarifein...Tujhe कहा से पता चला?

क. डैड:- सच कड़वा होता hai...Bhale hi कितना भी बुरा क्यों न lage...Mahesh याद hai...Party में एक दिन सभी के बारे में बातें चल रही thi...To इसका प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पता चल गया.

सुमित टैलेंटेड तो hai...Bas लड़की की चक्कर छोड़ दे.

स. डैड:- और तू बहुत मजे से सुन रहा था.

क. डैड:- मुझे क्या पड़ी है किसी के बारे में इतना सोचने ki...Bas जो भी पता था वो कह दिया.

स. डैड:- लेकिन बातों से तो ऐसा लग नहीं रहा था.

क. डैड:- फिर भी सच तो ये hi है.

स. डैड:- तूने सुमित से पूछा था ये सवाल की सुमित में तेरा दामाद बनने की क्या खासियत है? सवाल सुमित से पूछा है तो जवाब मई नहीं दूंगा.

बस 5 saal...Fir भी सुमित जवाब नहीं dega...Agar हमारी दोस्ती तब तक रहा तो देख लेना सुमित में क्या खासियत hai...Jawaab तेरा आँखें खुद तुझे देगा.

क. डैड:- कमाल hai...Apne बीटा का इस हरकत पर भी साथ दे रहा hai...Maar पीट कर समझाना चाहिए था ताकि अकाल ठिकाने आ जाये.

अगर मुझे पहले पता चलता की मेरी बेटी के पीछे पड़ा है तो हाथ पेअर तोड़ कर रख देता.

स. डैड:- नहीं कर पाटा.

क. डैड:- क्या?

स. डैड:- हाथ पेअर तोड़ने की बात कर रहा hai...Chhuu भी नहीं सकता है.

इस बार उनकी आवाज में थोड़ा गुस्सा भी था जिससे कीर्ति के पापा भी कुछ नहीं बोल पाए.

क. डैड:- सही hai...Tera घमंड उस वक्त तुझे ले डूबा tha...Abb तेरा बीटा को ले डूबेगा.

इसके बाद कुछ देर कोई बात नहीं होता.

कीर्ति:- Sumit...Tumse कुछ बात करनी है.

पहली बार ऐसा हुआ की कीर्ति ने बुलाया था और सुमित को कोई ख़ुशी नहीं हुआ.

सुमित:- कहो.

कीर्ति:- अकेले में.

कीर्ति अपनी पापा की और देखते hai...Wo परमिशन देते है.

दोनों फिर रूम से बाहर जाते है.

कीर्ति:- क्या बात है? इतना शांत क्यों हो?

सुमित:- बोलने के लिए अब्ब शब्द बाकी नहीं है.

कीर्ति अब्ब हसने लगती hai...Kirti की ये हंसी सीधा सुमित के दिल पर वार कर रहा था.

कीर्ति:- न जाने इतने साल में इतना बोल लिया तुमने की अब्ब तुम्हारे पास बोलने के लिए शब्द hi नहीं hai...Kamaal है.

ये कह कर कीर्ति और हसने लगती है.

कीर्ति:- इतना परेशान कर दिया था तुमने मुझे की आज तुम्हे परेशान देख बहुत ख़ुशी मिल रहा है.

सुमित की तरफ देख कर.

कीर्ति:- वैसे मुझे किसी को दुखी देखना अच्छा नहीं लगता पर पता नहीं क्यों तुम्हे दुखी देख कर बहुत अच्छा लग रहा है.

जैसे को taisa...Ye कहावत आज सही साबित हो gaya...Tumne मुझे जितना परेशान किया hai...Abb तुम भी उतना hi परेशान हो.

तुम तो कुछ बोल hi नहीं रहे हो.

सुमित:- आज तुम बोलो.

कीर्ति:- Haan...Aaj मई बोलूंगी और तुम sunoge...Kuch ऐसा बोलूंगी की आज के बाद कुछ सुन्ना भी नहीं चाहोगे तुम.

सुमित:- (इन हिज मंद) मंजूर है.

कीर्ति:- ऐसा नहीं है की मुझे तुम्हारे प्यार का एहसास नहीं tha...Jaanti हूँ तुम्हारा प्यार सच्चा hai...Lekin mai...Mujhe भी तो पसंद आना चाहिए तुम्हारा प्यार.

जब से एक बार तुम गलत लगने लगे तब से तुम से बिलकुल hi नफरत होने laga...Bhale hi तुम्हारा प्यार कितना भी सच्चा ho...Tumhara बातें, तुम्हारा चेहरा और tum...Sab से नफरत होने लगी.

जितना मई तुम्हे अवॉयड करती थी उतना hi तुम मेरे पास आते थे उससे मेरा नफरत और भी बढ़ gaya...Besharmi की भी हद्द होती है.

आज तुम्हारा जो हाल है वजह तुम खुद ho...Bahut पहले ठुकरा दिया था tumhe...Tum hi मेरे पीछे पड़े थे और आज ये हाल hai...Aur सच कहु तो तुम्हारा ये हाल मेरे लिए किसी सुकून से काम नहीं है.

इतना कहने के बाद कीर्ति एक नजर सुमित को देखती है और हँसते हुए कहती है.

कीर्ति:- क्या कहते थे तुम विवेक को? विचित्र praani...Khud देख लो तुमसे विचित्र कौन होगा?

तुम मेरे पीछे 8 साल से पड़े हो...8 साल यानी की 96 mahine...Aur मेरे पास तुम्हारे लिए 96 मिनट भी नहीं hai...Yahi है तुम्हारा औकात.

ये बात सुमित के दिल को चुभ gaya...Aur साथ hi उसके होंठो में दर्द भरी मुस्कान छा गया.

कीर्ति:- अभी भी बेशर्मी के साथ खड़े हो.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

सुमित:- अगर तुम्हारा इजाजत हो तो ये बेशर्मी दो बार और दिखाना चाहता हूँ.

कीर्ति:- क्यों और कब?

हैरानी से कीर्ति की मुंह से निकला.

सुमित:- तुम्हारा इंगेजमेंट और शादी के दिन.

कीर्ति को विश्वाश नहीं हो रहा था और खुद सुमित को भी.

कीर्ति:- अब्ब तुम खुद hi कुल्हाड़ी पर पेअर मारना चाहते हो तो मई क्या kahu...Accha hi hai...Tumhara शकल देखने लायक होगी.

सुमित:- थैंक यू.

फिर कीर्ति वह से चली गयी.

पहली बार ऐसा था की सुमित को कीर्ति के पीछे मुड़ने की और मुस्कुराने की उम्मीद नहीं tha...Wo बस मुश्कुराते हुए कीर्ति को जाते देखता रहा.

सुमित:- बस 2 मुलाक़ात aur...Fir तुम्हे भुला dunga...Bhulaana hi पड़ेगा.

आखिरी लाइन कहते हुए सुमित रोने hi वाला था की हालात और जगह देख रू भी नहीं पाया.

वो दुखी मन वापस आ गया.

स. डैड:- (तो कीर्ति) तुमने hi कहा था सुमित पिछले 3 साल से तुमसे नहीं मिला hai...Lekin सामने न आ कर भी तुम्हे अपने प्यार का एहसास दिलाने का हजार कोशिश कर चूका है.

अगर तुम राजी होती तो मई इसके (क. डैड) परवाह किये बिना तुम दोनों की शादी करा deta...Lekin तुम hi तैयार नहीं ho...Khair तुम्हारा डिसिशन hai...Sahi hi होगा तुम्हारे liye...Khush रहना तुम.

स. डैड:- (तो क. डैड) तू तो बचपन का दोस्त है और तुझसे वैसे भी ज्यादा नाराज नहीं रह sakta...Agar दोस्त का जरुरत पड़े तो आगे भी कुछ कहने के लिए मत हिचकना.

इतना कह कर वो सुमित को अपने साथ ले कर वह से निकल गए.

स. डैड:- यहाँ आने का मकशद यही था की तुझे जिंदगी के ऐसे पल भी हो सकते है ये समझाना चाहता tha...Agar कीर्ति मान जाती तो बहुत ख़ुशी होता मुझे bhi...Lekin ये एक ऐसा मुश्किल पल है जिसको अगर झेल लिया तो देखना आगे का जिंदगी और भी खुशनुमा हो जायेगा.

सुमित:- कीर्ति से अलग हो कर कैसी ख़ुशी?

स. डैड:- अभी नहीं samjhega...Vakt आने दे.

सुमित:- पापा अभी बहुत टूटा हुआ महसूस कर रहा hun...Ho सकता है कुछ दिन तक आप निराश हो जाए मुझे ऐसे देख kar...Lekin पापा विश्वाश कीजिये फिर से उठ कर खड़ा हो jaaunga...Bas थोड़ा वक्त dijiye...Aapne मेरे बारे में जो सोचा है उससे भी बड़ा बन कर दिखाऊंगा.

सुमित की आवाज में आत्मविश्वाश तो था लेकिन इस बात में भी दर्द hi हावी था.

स. डैड:- जितना चाहे उतना वक्त le...Mujhe विश्वाश है तुझ par...Mujhe हमेशा जीतने वाला बीटा नहीं chahiye...Haar के सामने भी ना झुकने वाला बीटा चाहिए भले hi वो हार उससे कितना भी तोड़ दे.

सुमित:- आज के लिए सॉरी Papa...Waha कुछ बोल नहीं paaya...Aisa लगता है मैंने खुद के साथ वह आप को भी हरा दिया.

स. डैड:- किसने कह दिया की तू वह हार गया था?

सुमित अपने पापा को हैरानी से देखता है.

ा. डैड:- अपने भावना से जीता है tune...Itna गुस्सा और दर्द के बावजूद अपने दिल पर काबू tha...Yeh देख मई सच में खुश हु.

उम्र और हालात ऐसे है की कीर्ति के पापा पर तेरा कभी भी हाथ उठ सकता था जैसे वो तुझे उक्षा रहा tha...Aur कीर्ति से प्यार की भीख में गिड़गिड़ाता तो वो भी कोई हैरानी की बात नहीं होती.

लेकिन तूने अपने भावना पर काबू रखा hai...Bahut बड़ी बात है ye...Bas बीटा कुछ वक्त aur...Dekhna जिंदगी में जो भी दर्द झेले है तूने ये सभी खुशियां बन कर सामने aayenge...Bas तू ऐसे hi मजबूती से आगे बढ़.

इतना समझ hi गया होगा दिल की बात हमेशा सुनने पर ठोकर hi लगता hai...Thoda दिमाग से भी सोच और ाही फैसले le....Ye नहीं कहूंगा की प्यार मत kar...Jindagi में प्यार का भी अलग hi जरुरत hai...Bas सही लड़की से प्यार कर.

सुमित:- अब्ब किसी और से प्यार? ऐसी हालात में?

स. डैड:- बिलकुल nahi...Aur प्यार करते नहीं प्यार हो जाता hai...Abb तो तेरा उम्र भी हो चूका है शादी के liye...Abb तो अपनी बीवी से hi प्यार करना :D...Fir galat...Pyaar किया नहीं जाता प्यार हो जाता है ये बात समझ लेना.

आखिरी की बात सुमित के पापा ने ऐसे कहा था की सुमित को भी हंसी आ गया.
 
अपडेट 76

सुमित सोने hi वाला था की उसके पापा रूम में आ गए.

स. डैड:- आज तुझे एक कहानी सुनाने आया हूँ.

सुमित:- कहानी?

स. डैड:- बचपन में तो बहुत परेशान करता था, पापा ये कहानी सुनाइए वो कहानी सुनाइए?

सुमित:- और आप को कोई कहानी याद नहीं रहता था.

बचपन की बातें याद आते hi एक बार फिर से सुमित के चेहरे में मुस्कान आ गया.

सुमित:- सुनाते वक्त बिच में hi भूल तो नहीं जाएंगे?

स. डैड:- Nahi...Ye कहानी तूने hi डिमांड किया tha...Abb बीटा का इच्छा हो और बाप पूरा ना कर sake...Ye हो सकता है?

सुमित:- मैंने डिमांड किया था कोई कहानी?

स. डैड:- अब्ब तेरा यादाश्त कमजोर हो रहा hai...Ye कहानी काम मेरा बायोग्राफी ज्यादा hai...Tune hi तो डिमांड किया था.

सुमित:- Haan...Lekin आज आपको कैसे याद आ gaya...Hamesha तो टालते आ रहे थे?

स. डैड:- बस इसी वजह से ताल रहा था क्यों की वो सही वक्त नहीं लग रहा tha...Koi ख़ास कहानी तो नहीं है लेकिन शायद तेरे लिए जरुरी हो सकता hai...Aur आज hi सही वक्त लग रहा है.

सुमित:- सुनाइए फिर.

सुमित भी अब्ब थोड़ा एक्ससिटेड लग रहा था.

स. डैड:- तुझे क्या लगता है ये जो तू बचपन में इतना शैतान था और जवानी के शुरुवात में आवारा, और बात करने की tarika...Relaxed और कारेफ़री आदत कहा से आया होगा तुझ में?

सुमित कुछ सोच hi रहा था की...

स. डैड:- कुछ ऐसा hi हुआ करता था मई bhi...Bilkul hi carefree...Kisia से कोई मतलब nahi...Apne hi तरीके से जीना जो मन करे वही karna...Doston के साथ मिल कर पुरे गांव वालों के नाक में दम कर के रखना.

जो दिल में आये वो बेझिझक कहना भले hi कोई गुस्से में नक् फुला le...Kisi का कोई परवाह नहीं था.

बस जिंदगी अपने तरीके से जीता tha...Koi रुकावट nahi...Koi टेंशन नहीं.

सुमित:- लेकिन अब्ब तो आप को देख कर ऐसा नहीं लगता?

स. डैड:- वक्त वक्त की बात hai...Aur वक्त के अनुसार खुद को बदलना भी पड़ता hai...Abb बुढ़ापे में बचपना करूँगा तो अच्छा लगेगा क्या?

सुमित:- आप hi तो कह रहे थे की आप पर किसी का कोई असर नहीं होता tha...To फिर ये बदलाव क्यों?

स. डैड:- थोड़ी ना किसी के कुछ कहने पर ये बदलाव आया है या फिर लोग क्या सोचेंगे इस वजह से कोई बदलाव आया hai...Abb वक्त के साथ ऐसे जीने का मन कर रहा है तो ऐसे hi जी रहा hun...Kabhi मजाक तो कभी सीरियस.

चल अब्ब तुझे अपनी कहानी की तरफ ले चलता हूँ.

जैसे की तू भी जानता है बचपन मेरा गांव में hi gujra...Uss वक्त के हिसाब से हमारा परिवार एक मिडिल क्लास tha...Naa hi कुछ ज्यादा ऐशो आराम और ना hi ज्यादा garibi...Kul मिला कर सब कुछ ठीक ठाक था.

हमारे माँ और पिताजी के हम दो hi बीटा thhe...Iss लिए परवरिश में भी कोई समस्या नहीं tha...Mai बड़े बीटा होने की वजह से पापा के थोड़ा करीब tha...Papa का भी अच्छा ख़ासा इज्जत और मान सम्मान था गांव mein...Papa का करीब था और पापा की गांव में pahunch...Issi वजह से गांव के बहुत लोग मुझे जानते थे.

बचपन में तो ये किसी सेलिब्रिटी वाली फीलिंग से काम नहीं tha...Mai किसी को नहीं जानता था लेकिन सब मुझे जानते थे. :D...Wo अलग बात है की ये सब पापा की वजह से मुझे जानते hai...Lekin बचपन में इन् बातों से क्या फर्क पड़ता hai...Apni तारीफ़ suno...Papa की नाम से कोई भी काम किसी से भी करवा लो.

बचपन या फिर जवानी की सुरुवात तक ऐसे hi मौज मस्ती में बिता.

अब्ब पापा के बहुत करीब था ये जितना अच्छा था मेरे लिए उतना hi बुरा bhi...Jab भी पापा गुस्सा होते मेरा खैर नहीं tha...Kitna पिटाई हुई है ये गईं भी नहीं सकता.

पड़ोस की गांव में हॉस्पिटल tha...Hospital होना वैसे तो लोगो के लिए अच्छी बात hai...Lekin मेरे लिए buri...Papa को जब भी पिटाई करना होता बेफिक्र होकर मारते thhe...Agar एक दो हड्डी टूट भी गया तो हॉस्पिटल किस दिन काम आता? :(

इतना सुनते hi सुमित जोर जोर से हसने लगता है.

स. डैड:- अगर बचपन में मैंने भी तेरा ऐसे hi पिटाई करता तो हसने की हिम्मत नहीं करता तू?

सुमित की पापा की बात से तो सुमित को डरना चाहिए था लेकिन उन्होंने ये बात हँसते हुए कहा तो सुमित और भी हसने लगा.

सुमित:- हसने दीजिये Papa...Thoda बहुत मार तो आपसे भी खाया hai...Uss वक्त सोचता था काश आपको भी कोई पीट कर मेरा बदला ले le...Lekin दादाजी ने तो बहुत पहले hi बदला चूका दिया tha...Thanks दादाजी.

स. डैड:- बहुत कमीना hai...Apne hi पापा को पिटवाना चाहता था?

सुमित इस बात पर सिर्फ हस्ता है.

स. डैड:- मई तो और भी कमीना tha...Uss वक्त पापा पर बहुत गुस्सा आता था.

सुमित:- अब्ब?

स. डैड:- अब्ब क्या बहुत पहले hi रीलीज़ हो गया hai...Wo जो भी करते थे सोच समझकर hi करते thhe...Pyaar भी बहुत करते thhe...Jab भी गुस्सा शांत होता था खुद hi मिठाई खिलाने ले चलते thhe...Apne hi हाथो से मलहम लगाते थे.

सुमित:- और चाचा? उनकी कितनी पिटाई होती थी?

स. डैड:- बहुत kam...Naa hi वो ज्यादा मार खाता tha...Aur ना hi पापा के उतना करीब tha...Bas माँ का लाडला था.

सुमित:- अच्छा hi hai...Bach गए.

स. डैड:- अच्छा तो बिलकुल भी नहीं hai...Hamesha उसके दिल में यही सवाल होता था की ऐसा मुझ में क्या था की पापा मेरे ज्यादा करीब thhe...Yaa फिर गांव वाले भी मुझे ज्यादा भाव देते थे.

कोशिश तो वो भी करता tha...Lekin बात नहीं बन पाटा tha...Ye भी अलग hi टैलेंट है की लोगो को इन्फ्लुएंस कैसे करना है? ये एक टैलेंट शायद बचपन से hi मुझ में था.

बस यही एक प्रॉब्लम है उस में की वो चाहता है ज्यादा से ज्यादा लोग उसके आस पास rahe...Uski तारीफ़ kare...Issi लिए आज भी थोड़ा बहुत शोऑफ करता रहता है.

और मुझे निचा दिखने का एक मौका भी नहीं chhodta...Jo आज तक कर नहीं पाया hai...Bachpan में जब भी वो मुझे निचा दिखाने का सोचता उल्टा उससे hi आईना दिखा देता tha...Iss बात का नाराजगी शायद अब्ब भी है उस में.

जब थोड़ा रीलीज़ हुआ उससे समझाने की कोशिश भी kiya...Lekin वो इस बात को दिल में ले चूका tha...Iss में मुझे मेरा भी गलती नहीं लग रहा था तो मैंने भी ये कोशिश छोड़ दिया.

आज जब सोचता हूँ तो हो सकता है अनजाने में कभी गलती हो भी सकता hai...Lekin दिल में हर बात को लेना ये भी सही नहीं है.

दिल का वो बुरा इंसान नहीं hai...Bas मुझसे हमेशा से नाराज hi रहा hai...Aur लोगो के अटेंशन को हमेशा सबसे ऊपर रखता hai...Waise भी मुझे इन् बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग मेरे बारे में गलत सोचते है या नहीं?

बस उससे शिकायत है तो एक बात ki...Wo अपने साथ साथ आरव को भी उसी तरफ ले जा रहा hai...Ek दो बार आरव से भी बात किया था लेकिन वो भी समझना नहीं चाहता तो छोड़ diya...Mujhe kya...Jaisa काम करेंगे वैसा hi फल मिलेगा.

ये क्या कुछ ज्यादा hi फॅमिली मटर में घुस गया.

हाँ कहा tha...Bachpan में.

बचपन या फिर जवानी की hi बात करू और दोस्त ना हो ऐसा कैसे हो सकता hai...Dosti भी गजब का था और hai...Jo दोस्त पहले हुआ करते थे वो आज भी hai...Bahut से दोस्त ऐसे है जो कुछ भी करने के लिए तैयार hai...Kuch दोस्त ऐसे भी है जो उतना पसंद नहीं karte...Dosto के बिच जब भी बात करता तो कुछ ज्यादा hi बोलने लग jaata...Ye बात कुछ दोस्तों को पसंद भी नहीं था.

एक वो भी है जो तेरा ससुर भी बन सकता tha...Lekin उसका बदकिस्मती.

सुमित भी इस बात पर हँसता है और फिर.

सुमित:- बचपन से जवानी तक आ गए लेकिन एक बात अभी भी नहीं बताया आपने?

स. डैड:- क्या?

सुमित:- आपकी लव स्टोरी?

स. डैड:- मेरा लव story...Impossible.

सुमित:- क्यों?

स. डैड:- वो क्या कहते हो तुम log...Haan सख्त launda...Kuch ऐसा hi हुआ करता था mai...Kisi लड़की के प्यार में इतना दम नहीं था की मेरा दिल चुरा sake...Aur मई किसी लड़की के पीछे जाओ ये मई किसी बुरे सपने में भी नहीं सोच सकता था.

वो अलग बात है की मई तेरी माँ का क्रश tha...Aur हमारी शादी एक अरेंज्ड मैरिज था.

सुमित:- शादी के बाद pyaar...Interesting कांसेप्ट.

स. डैड:- ये तो तेरे साथ भी होने वाला hai...Haan शादी के बाद थोड़ा बहुत प्यार तो हो hi gaya...Pyaar और responsibility...Shaadi के बाद hi अच्छे से सीखा है. :डी

स. डैड:- बचपन की बात हुए एक बहुत जरुरी चीज भूल गया बताने के लिए.

सुमित:- क्या?

स. डैड:- पढ़ाई.

सुमित:- आप पढ़ते भी थे?

स. डैड:- वो तो अभी भी तुझसे ज्यादा पढता हूँ.

सुमित:- उस टाइम की hi पढाई की कहानी सुनाइए?

स. डैड:- पढाई की शुरुवात तो हुआ था पापा की जिद्द की वजह se...Bachpan में हमेशा बंक करता था स्कूल और दोस्तों के साथ घूमने निकल जाता था.

लेकिन पापा को ये बात बिलकुल भी पसंद नहीं tha...Aur सबसे ज्यादा पिटाई इसी बात को ले कर होता tha...Papa के टाइम में बहुत काम लोग पढाई लिखे करते थे और जो भी पढ़े लिखे होते थे उनका इज़्ज़त भी होता था.

पापा किसी कारण से पढाई नहीं कर पाए थे और मुझे और तेरे चाचा को किसी भी हाल में पढ़ाना चाहते थे.

सुरुवात में तो पढाई शब्द से साफ़ नफरत tha...Bas पापा की दर से स्कूल चला जाता था.

लेकिन एक दिन अचानक से बदलाव आ गया.

मुझे टाइफाइड हो गया था और उसी पड़ोस की गांव की हॉस्पिटल में एडमिट किया gaya...Doctor ने बहुत अच्छे से इलाज kiya...Jab हॉस्पिटल में था तो बहुत से पेशेंट उस डॉक्टर को दिखाने aate...Unka बहुत इज़्ज़त tha...Har कोई उनका दिल से इज़्ज़त करते thhe...Aisa लगता था कोई सामान्य इंसान तो बिलकुल भी नहीं है.

लोगो को मौत से बचाना आसान काम तो बिलकुल भी नहीं hai...Aur उनका म्हणत, उनका ज्ञान देख कर मई काफी प्रभावित था उनसे.

बस ऐसे hi एक बार उनसे पूछ लिया.

स. डैड:- डॉक्टर sahab...Mujhe भी डॉक्टर बनना है.

वो मुस्कुराये और.

डॉक्टर:- इसके लिए तो तुम्हे बहुत पढ़ाई करनी पड़ेगी.

स. डैड:- क्या बिना पढ़ाइये किये डॉक्टर नहीं बन सकता?

डॉक्टर:- (विथ स्माइल) बन सकते ho...Jis दिन सूरज सुबह पश्चिम की और से उगना सुरु होगा.

ये काफी था मुझे समझने के liye...Thaan लिया अब्ब तो पढ़ना hi hai...Doctor बनना hi है किसी तरह.

मजाक मस्ती तो करता hi था लेकिन साथ में पढाई bhi...Doctor से बिच बिच में पूछता रहता था की कैसे पढ़ना chahiye...Doctori के लिए क्या पढ़ना chahiye...Vagera vagera...Wo भी अच्छे से समझाते थे.

10तह तक आने के बाद पढ़ाई में काफी अच्छा हो गया tha...Science और Maths...Jaha बाकी की विद्यार्थी इन् विषय से दूर भागते थे मुझे यही पढ़ने में मजा आता था.

10तह का एग्जाम अच्छा gaya...11th में पास की hi छोटी सेहर में जाने लगा.

11 और 12 भी अच्छे से पढ़ कर अच्छे मार्क्स के साथ पास हो गया.

लेकिन जब पहली बार मेडिकल कॉलेज में एंट्रेंस देने गया तो क़ुएस्तिओन्स देख कर सर चक्र gaya...Padha कुछ था और क़ुएस्तिओन्स कुछ और hi तरह का?

बहुत मुश्किल से पास हो paaya...Admission मिल सकता था लेकिन स्कालरशिप nahi...Middle क्लास होने की वजह से इतना पैसा दे पाना भी पॉसिबल नहीं था.

खैर, इसमें अपना आर्थिक हैसियत को दोष नहीं दे सकता tha...Agar सच में काबिल होता तो स्कालरशिप मिलना चाहिए था.

एक और कोशिश kiya...Marks थोड़ा अच्छा aaya...Lekin नतीजा wohi...Scholarship नहीं मिला.

एक और बार कोशिश kiya...Coaching भी liya...Lekin वही natija...Thoda और अच्छा मार्क्स लेकिन स्कालरशिप नहीं.

बहुत बुरा लग रहा tha...Mehnat इतना किया था लेकिन इस म्हणत का फल नहीं मिल रहा था.

घर में पापा और माँ दोनों hi सपोर्ट कर रहे थे अभी bhi...Kisi तरह मुझे इस जुंग को जीत ते हुए देखना चाहते थे.

एक और कोशिश kiya...Marks बहुत अच्छा aaya...Lekin स्कालरशिप फिर नहीं मिला.

अब्ब सच में टूट चूका tha...Pehli बार खुद को हारा हुआ महसूस kiya...Abb और दम नहीं था.

अब्ब तो जैसे साइंस से hi नफरत हो गया tha...Maths ले कर बैचलर में एडमिशन करवा liya...Papa भी नाराज thhe...Lekin बाद में मान गए.

इतना कह कर वो सुमित को देखने lage...Sumit भी चुप था.

स. डैड:- बस यही कहानी सुनना tha...Ek कहानी हार की.

सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.

स. डैड:- यही वो हार tha...Jisne मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था...2-4 दिन सिगरेट और दारु की नशा में खुद को डूबा दिया था.

यही वो कहानी है जो तू बार बार पूछ रहा था तेरे चाचा ने जब ये बात उठाया था.

हर नशा के कहानी के पीछे प्यार नहीं होता hai...Kuch टूटे सपने भी होते है.

सुमित:- सॉरी Papa...Mera उस जिद्द ने आपके भरे हुए जख्म को ताजा कर दिया.

स. डैड:- मैंने खुद ताजा किया hai...Aaj नहीं बहुत साल pehle...Aur अपने कमजोरी से डरना नहीं उससे लड़ना chahiye...Ye बात बहुत पहले hi समझ आ गया था भले hi देरी से आमाझ में aaya...Issi लिए तो तुझे डॉक्टर बनने पर जोर दे रहा था.

मेरे पापा पढ़े लिखे नहीं थे इसी लिए मुझे पढ़ना चाहते thhe...Mai डॉक्टर नहीं बन पाया इसी लिए तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता था.

सुमित बस ध्यान से उनकी बात सुन रहा था.

स. डैड:- लेकिन जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता tha...Issi लिए तुझे जो भी पढ़ने का मन था वही पढ़ने देना चाहता tha...Lekin तू था की कोई भी सब्जेक्ट अपने मन से पढ़ना नहीं चाहता tha...Bas यही बात मुझे पसंद नहीं था.

सुमित:- सच कहु तो उस वक्त तक मुझे मेरे जिंदगी का लक्ष्य नहीं मिल पाया था.

कीर्ति ने मेरे साथ अच्छा किया या गलत ये तो नहीं pata...Lekin उसकी पीछे पीछे मैंने भी मब्ब्स सेलेक्ट किया ये सही था.

आपका अधूरा सपना भी पूरा कर paaunga...Aur एक अच्छा सर्जन बनने का मेरा मकशद भी.

सुमित की पापा इस बात पर कुछ नहीं बोले.

सुमित:- और आपका वो नशा कैसे chhuta...Ek बार ये आदत लग जाती है तो आसानी से छूट टी नहीं है.

स. डैड:- Papa...Jab उन्हें पता चला तो वो काफी गुस्से में thhe...Unke सामने जाते hi हाथ पाउ फूल गौए थे mere...Lekin हैरानी की बात टॉट ये था की उन्होंने बहुत प्यार से समझाया mujhe...Shayad उनका प्यार hi था जो मुझे उस वक्त जरुरत था.

पापा और माँ के साथ कुछ दोस्त भी थे जिन्होंने उस वक्त मुझे sambhala...Warna सपना टूटने का dard...Har कोई संभल नहीं सकता.

जो मेरे साथ हुआ था वही तेरे साथ हुआ hai...Uss वक्त मेरे पापा थे मुझे संभालने के liye...Aaj मई हूँ.

ये कहानी इतने दिनों से इस लिए नहीं बता रहा था क्यों की आज मुझे सही वक्त लग रहा hai...Kal तक एक उम्मीद भी था की कीर्ति तुझे मिल सकती है और इस कहानी की जरुरत nahi...Lekin आज जो भी हुआ उस वाकः से ये बताना बहुत जरुरी है.

बीटा बस यही kahunga...Aise दर्द जो होते है अंदर से तोड़ के रख देते hai...Khud से hi हार जाना, दूर दूर तक कोई उम्मीद न dikhna...Ye मेरे साथ भी हुआ tha...Aaj तेरे साथ भी हो रहा hai...Bahut हिम्मत है तुझ में जो ये सेह रहा है.

अभी कुछ दिन और सेहन कर le...Dekhna राष्ट खुद मिल jaayega...Jaldbaazi में कोई गलत फैसला ना लेना जो मैंने लिया था.

सुमित:- क्या गलत फैसला?

स. डैड:- मैंने एक hi मेडिकल कॉलेज को सब कुछ मान लिया tha...Usmein स्कालरशिप न मिलने की वजह से मैंने जल्दबाज़ी में कोर्स चेंज कर लिया.

अगर थोड़ा और रिसर्च करता तो बहुत दूर दूसरा कॉलेज में उतने मार्क्स में स्कोलरहिप मिल jaata...Utna रेपुटेड कॉलेज नहीं था इस वजह से मेरे ध्यान में भी नहीं आया लेकिन मब्ब्स तो कर hi सकता था न.

बस यही कहूंगा कीर्ति hi सब कुछ नहीं hai...Thoda दिन और बर्दास्त कर le...Fir तुझे भी रीलीज़ होगा.

हर ग़म का कोई न कोई इलाज होता hai...Mere ग़म का इलाज वक्त tha...Tera भी वही है.

ग्रेजुएशन करने के बाद मेरा शादी भी हो gaya...Suru सुरु में तेरी माँ को ज्यादा वक्त नहीं देता tha...Lekin प्यार hi था शायद वो जो मुझे इस बात में उसका शिकायत भी नहीं दिखा.

धीरे धीरे उसकी प्यार भी अच्छा लगने laga...Aur उसके साथ अपना वो ग़म भी भूलने लगा और जिंदगी में वापस पहले की तरह लौटने लगा.

धीरे धीरे मैथ्स भी अच्छा hi लगने laga...Koi भी विषय हो ज्ञान तो देता hi hai...Kuch नया पढ़ने का लिखने का शौख तो हमेशा hi tha...Maths में भी अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर समझने लगा और अपना hi कॉन्सेप्ट्स बनाने laga...Dhire धीरे सब अच्छा लगने लगा.

और जब तू पैदा हुआ तो सोचा तेरा परवरिश और पढाई में कोई कमी नहीं आने dunga...Mera मेडिकल में सेलसेक्शन ना होने का एक वजह आज ये भी लगता है की मेरा इंग्लिश थोड़ा कमजोर था.

बस इसी वजह से तुझे जल्दी hi सेहर ले आया पढ़ाने के लिए ताकि तेरा पढाई में कोई रुकावट न आ paaye...Bas तुम दोनों की पढाई ख़त्म होने के बाद वापस से गांव में hi बस जाने का मन है.

आज सोचता हूँ मेडिकल तो गुजरा हुआ सपना है अगर आगे बढ़ा तो बहुत कुछ सिख पाऊंगा जिंदगी से और किताब से bhi...Bhale hi मैंने मेडिकल में एडमिशन नहीं लिया लेकिन आज भी कई साड़ी चीज मेडिकल रिलेटेड पढता रहता हूँ अच्छा भी लगता है.

बस कोई भी चीज हो किसी भी फील्ड ka...Interesting लगे तो सिखने की हर कोशिश करता हूँ.

इसी लिए हमेशा कहता आया हूँ सबसे बड़ा शिक्षक खुद जिंदगी hi है.

तू भी रीलीज़ करेगा कीर्ति के जाने के baad...Kya गलती हुआ है तुझसे और आगे की जिंदगी कैसे जीना hai...Ek कीर्ति गयी है कोई आएगी बाद में जो सच में तुझसे प्यार करेगी और जिंदगी भर साथ चलेगी.

सुमित:- समझ रहा हु Papa...Shayad आप सही कह रहे hai...Bas थोड़ा वक्त chahiye...Aap भी तो कह रहे है थोड़ा वक्त के बाद संभल जाऊँगा.
 
अपडेट 77

कुछ जल्दी hi नहीं आ गए आप डॉ. सुमित?

विकाश ने सुमित को देखते hi पूछ liya...Baaki सब ने राहत के सांस लिया.

मेघा:- इतने बड़े सर्जन जो hai...Lunch के लिए भी अलग से वक्त निकलना पड़ता है इन्हे.

कीर्ति:- तुम्हारे इंतजार में सुबह से भूखी हूँ.

सभी का जवाब सुनने के बाद सुमित ने थोड़ा सांस लिया और कीर्ति की और देख हँसते हुए कहा.

सुमित:- रोका किसने hai...Raj सामने hai...Isse hi खा जाओ.

राज:- भाई sahab...Uksaiye mat...Waise भी दिमाग बहुत खाती है ye...Aur आप है की पूरा का पूरा hi खा लेने की सलाह दे रहे है.

कीर्ति:- क्या मई तुम्हारे दिमाग खाती हूँ?

राज:- ओह्ह sorry...Tum तो खून चुस्ती हो :lol1:

कीर्ति:- रुको बाद में बताती हूँ तुम्हे.

ऐसे hi दोनों की नोक झोक पर सभी हसने लगते है.

राज:- देखा भैया aapne...Pyaar के साइड effect...Aap की hi जिंदगी सही चल रहा hai...Single लाइफ बेस्ट लाइफ.

राज ने मजाक को आगे बढ़ाया लेकिन ये सुनते hi सुमित का चेहरा भाव हीं हो गया.

राज ने भी जल्द hi समझते हुए.

राज:- सॉरी भैया.

सुमित:- कोई बात nahi...Aise hi सॉरी कहने लगा तो हमेशा सॉरी hi कहता रह जाएगा.

आदत दाल रहा हूँ अब्ब.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

सुमित:- अब्ब तुम्हे क्या हो गया?

कीर्ति को थोड़ा सीरियस देख सुमित ने पूछा.

कीर्ति:- वो तुम्हारी वाली कीर्ति से मिलना है.

सुमित:- क्यों?

कीर्ति:- मुंह नोचना है uski...Mera नाम बदनाम करके रख दिया है.

सुमित:- अब्ब उसने क्या कर दिया?

कीर्ति:- मुझे dekho...Kitna मस्त रहती hun...Jindagi के हर पल को एन्जॉय करती hun...Aur एक वो hai...Khadoos...Pata नहीं कैसे किसी का दिल तोड़ सकती है.

सुमित:- अब्ब इसमें उसकी क्या गलती? उससे मई पसंद नहीं हूँ तो वो क्या कर सकती hai...Khair अब्ब मई भी उससे आगे का सोच जिंदगी में आगे बढ़ रहा hun...Wo भी खुश मई भी खुश.

कीर्ति:- मतलब मेघा के चांस है.

अचानक से कीर्ति की इस बात पर 3 लोग हैरान रह जाते hai...Sumit, मेघा और विकाश भी.

सिचुएशन भी ऐसा ावक्वार्ड हो गया था की कोई कुछ नहीं बोल रहा था.

कीर्ति:- जोक्स apart...Tumhe ऐसे आगे बढ़ते देख बहुत अच्छा लग रहा hai...Tourist से स्टूडेंट तक का ये सफर सच में तारीफ़ के लायक है.

राज:- टूरिस्ट?

कीर्ति:- पहले 1सत ईयर में इनका दर्शन महीने में एक बार होता tha...Bilkul टूरिस्ट के jaise...Abb dekho...Internship में 1 मिनट का भी बंक नहीं.

सुमित:- पहले स्टूडेंट tha...Bunk मारना, मस्ती करना ये आम बात tha...Abb डॉक्टर हूँ, रेस्पोंसिबल होना तो पड़ेगा hi...Aur इंटर्नशिप hi है जिसमे जितना सिख पाऊंगा उतना अच्छा hoga...Baad में अकेले काम करना पड़ेगा और कुछ बेसिक नहीं आएगा तो शर्म से दुब मरने की हालात हो जाएगा.

विकाश:- और कितना रेस्पोंसिबल हो गया है ये तेरा कॉपी hi बता रहा है.

विकाश सुमित के हाथ से कॉपी उठा कर पेज पलटने लगता hai...Har एक टॉपिक का नोट.

तब तक सभी का लंच आ जाता है.

विकाश के हाथ से कॉपी मेघा लेती है.

और रैंडम्ली एक पेज पर लिखा कुछ पढ़ती है.

मेघा:- जनाब का अभी से पग (पोस्ट ग्रेजुएशन) का प्रिपरेशन चल रहा है.

टका.

राज:- अब्ब ये टका क्या है?

कीर्ति:- त्रिकार्बोक्सीलिक एसिड Cycle...1st ईयर Biochemistry....Itna भी नहीं pata...Padhaai के मामला में अभी भी नहीं sudhre...Bataati हूँ बाद में.

मेघा:- अभी से 1सत ईयर का रेविसिओं भी स्टार्ट.

सुमित:- नेक्स्ट पेज में जाओ.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

और जब मेघा नेक्स्ट पेज में पहुँचती है तो हैरानी में उसकी आँखें बड़ी हो जाती है और वो सुमित को सवालिया नजरो से देखती है.

सुमित:- तरीकीक्लिक एंटी डेप्रेस्सेंट (टका) 2ंद ईयर फार्माकोलॉजी.

ये सुनते hi सभी के मुंह से लगभग एक hi वक्त एक hi शब्द निकलता है, "क्या?"

विकाश:- अबे तुझे ये डिप्रेशन कब से हो गया? जो एंटी डेप्रेस्सेंट लेने लगा है?

सुमित:- पता nahi...Jo भी सिम्पटम्स देखता हूँ खुद में सभी डिप्रेशन के hi लग रहे है.

राज:- लेकिन डिप्रेशन की दवाई?

सुमित:- ले नहीं रहा hun...Lene का सोच रहा हूँ.

मेघा:- लेकिन साइड इफेक्ट्स?

सुमित:- दवाई है तो थोड़ा बहुत साइड इफेक्ट्स तो होगा hi...Waise भी मेरा कंडीशन जो है उसमें दवाई साइड इफ़ेक्ट से ज्यादा काम hi करेगा.

और जो भी साइड इफेक्ट्स है वो उतना भी नहीं होगा जो ग़म अभी सेह रहा हूँ.

कोशिश तो पूरा है की बिना दवाई के hi डिप्रेशन से बहार आ जाओ.

कोशिश भी कर रहा हूँ बहुत non-pharmacological मेझस के saath...Lekin आखिर में कुछ काम नहीं आया तो दवाई के सहारे hi काम चलना पड़ेगा.

किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या बोलना चाहिए.

सुमित:- कुछ महीने पहले जब साइकाइट्री वार्ड में था तब एक पेशेंट का काउंसलिंग किया था की अगर डिप्रेशन कण्ट्रोल से बाहर जा रहा है तो दवाई लेना chahiye...Abb बात खुद पर आ रहा है तो इंकार भी कैसे कर सकता हूँ?

इस बात पर भी कोई कुछ नहीं बोलता.

सुमित ने महसूस किया की अब्ब सब सीरियस हो गए hai...Maahaul को फिर से हंसी मजाक में बदल दिया usne...Hans तो सभी रहे थे लेकिन अंदर से सब अलग हो सोच में पड़े thhe...Jab उनसे रहा नहीं गया तो धीरे धीरे सबजाने लगे.

आखिर में सुमित और मेघा hi बाकी थे.

मेघा:- जान सकती हूँ इस मुस्कान की वजह?

सुमित:- तुम्हारे बारे में hi सोच रहा हूँ.

मेघा:- मेरे बारे mein...Kirti से फुर्सत मिल गया?

सुमित:- क्या तुम भी टांग खिंच रही हो?

मेघा:- अच्छा bataao...Kya सोच रहे थे मेरे बारे में?

सुमित:- अब्ब 2 दिन hi बाकी है हमारे इंटर्नशिप के लिए.

मेघा:- हाँ तोह?

सुमित:- खुश तो बहुत होगी तुम?

मेघा:- किस बात की ख़ुशी.

सुमित:- 2 दिन के बाद मुझे कभी देखना नहीं पड़ेगा और न hi कभी कोई irritation...Bahut परेशान किया है ना मैंने tumhe...College के पहले दिन से ले कर आखिरी दिन तक.

सुमित ने हँसते हुए hi कहा.

मेघा:- हाँ पहले थोड़ा बहुत परेशान थी tumse...Bilkul भी पसंद नहीं थे तुम.

सुमित:- अब्ब?

मेघा:- अब्ब तो और भी पसंद नहीं हो.

मेघा ने भारी दिल से kaha...Sumit की बात से उससे एकदम से याद आ गया की 2 दिन बाद यूँ तेज मुलाक़ात नहीं हो पायेगा.

सुमित को पाने की ख्वाहिश तो बहुत पहले hi भूल चुकी थी wo...Lekin अब्ब नजर से भी dur...Shayad ये उसने कभी सोचा भी नहीं था.

सुमित भी मेघा की दिल की बार से अनजान नहीं था.

मेघा:- सच कह रहे हो na...Kabhi दिखोगे तो नहीं?

मेघा अपने मजाक में भी दर्द छुपा नहीं पायी.

सुमित:- बिलकुल नहीं.

मेघा:- सच में बहुत खुदगर्ज़ हो चुके ho...Kya हम दोस्त सिर्फ कॉलेज तक hi थे?

सुमित:- मेरा दोस्ती जिंदगी भर के लिए होता hai...Lekin हालात ऐसे hi की कल क्या होगा इसका गारंटी नहीं दे सकता hun...Badalne की सोच रहा hun...Kitna बदल जाऊँगा ये भी नहीं पता.

अभी सब से दूर खुद में hi जीना चाहता हूँ कुछ वक्त के liye...Haan अगर कभी जरुरत पड़े तो एक आवाज dena...Tumhare लिए हमेशा तैयार हूँ.

मेघा:- अच्छा ये सब chhodo...Ye बताओ पग किस सब्जेक्ट में करोगे अब्ब तो मब्ब्स भी ख़त्म हो गया है.

सुमित:- सर्जरी.

मेघा:- कुछ और?

सुमित:- नहीं सिर्फ और सिर्फ सर्जरी.

मेघा:- नीस choice...Lekin रैंक भी बहुत अच्छा चाहिए सर्जरी के liye...Agar पहले बार में ना हो पाया तो?

सुमित:- कैसे नहीं होगा? पूरी जान दाल दूंगा म्हणत में और जिद्द bhi...Bahut हो गया compromise...Abb फिर से जिद्दी सुमित बनना hai...Surgery से कुछ भी काम नहीं.

अब्ब इश्क़, मोहब्बत की फ़ालतू की चक्कर में पड़ना hi नहीं hai...Kaam से मतलब है abb...MBBS का पढाई तो मजाक बना के रख दिया tha...Acche से padhunga...Surgeon banunga...Best Surgeon...Uske बाद जिंदगी के आगे के faisla...Shaadi सेटल वगेरा.

सुमित की इस बात में मेघा को अपने जवाब मिल gaya...Abb सुमित प्यार करना hi नहीं चाहता भले hi वो कितनी भी कोशिश कर ले.

अब्ब उससे भी लगा रहा था उससे भी आगे का सोचना chahiye...Apne ख़ुशी के लिए और सुमित की ख़ुशी के लिए.

सुमित:- तुम बताओ? किस सब्जेक्ट में पग करोगी?

मेघा:- मेडिसिन.

सुमित:- और डीएम (सुपरस्पेशलिटी)?

मेघा:- कार्डियोलॉजी.

सुमित:- गलत वक्त में पैदा हो गया.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- 10 साल छोटा होता तो मेरा दिल का इलाज तुम hi karti...Aur मुझे भी मौका मिलता इतनी अच्छी कार्डियोलॉजिस्ट से इलाज करवाने की.

मेघा ने इस बात पर कुछ जवाब नहीं दिया.

मेघा:- तभी कह रहे थे tum...Kisi से प्यार नहीं करोगे? क्या अभी भी वजह कीर्ति hi है?

सुमित:- Nahi...Sach कहु तो अब्ब हिम्मत hi nahi...Ek बाद हुआ गलती tha...Dusri बार वो भी galti...Baar बार हो रहा है तो ये बेवकूफी है.

प्यार शादी ये तो बाद की बात hai...Agar होना होगा तो हो jaayega...Lekin पढाई? जिंदगी एक मौका और दे रहा है एक अच्छा सर्जन बनने का, अपने सपने पूरा करने ka...Ye वक्त अब्ब निकल गया तो हमेशा के लिए निकल जाएगा.

मेघा को भी अब्ब अपने सवाल का हर एक जवाब मिल गया.
 
अपडेट 78

Tum...Kyu आये यहाँ? प्लीज जाओ यहाँ से.

सुमित का हाथ पकड़ कर मेघा ने kaha...Sumit अपना हाथ छुड़ाते हुए अंदर आ गया.

अंदर आते hi बहुत लोगों के भीड़ dikha...Sabhi खुश thhe...Koi खाने में व्यस्त था तो कोई अपने hi धुन में.

कुछ लोग थे जो आगे स्टेज में विवेक और कीर्ति को बधाई दे रहे थे और उनसे बातें कर रहे थे.

कीर्ति को देखते hi सुमित के चेहरे में एक मुस्कान आ गया.

चारो तरफ नजर दौड़ाते हुए.

सुमित:- सजावट काफी अच्छा है.

मेघा:- सुमित क्यों आये ho...Seh नहीं पाओगे तुम ये सब.

मेघा की आवाज में फ़िक्र था.

सुमित:- वादा किया tha...Nibhana तो पड़ेगा hi.

मुस्कुराते हुए सुमित न कहा.

मेघा की ध्यान सुमित की बातो से ज्यादा उसकी आँखों में था.

मेघा:- तुमने आज फिर पिया है?

सुमित:- (हँसते हुए) पिया तो नहीं है फिर भी पुरे नशे में हूँ.

मेघा:- कैसा नशा?

सुमित:- नींद ki...Saala इंटर्नशिप की आखिरी दिन भी मिगहत ड्यूटी रख दिया उन् लोगो ne...Pichle 30 घंटा से सोया नहीं hun...Shayad इस लिए आँखों में कीर्ति की प्यार से ज्यादा नींद की कमी दिख रहा है.

मेघा कुछ नहीं boli...Usse अभी भी दर था की सुमित कही कुछ हंगामा न कर दे.

सुमित:- खैर अब्ब तो आदत हो चुकी है.

मेघा:- किस चीज की?

सुमित:- दोनों hi चीज ki...Kirti की नफरत और नींद की कमी की भी.

अब्ब तो ऑफिशियली डॉक्टर hun...Neend की कमी और बिजी लाइफ schedule...Iski आदत तो हो hi jaayega...Acchi बात hai...Ye जिंदगी की बिच रास्ते में साथ तो नहीं छोड़ेगा.

फीका मुस्कान के साथ सुमित ने कहा.

सुमित:- पूछना hi भूल gaya...Tum कब आयी?

मेघा:- कुछ देर पहले.

सुमित:- चाओ aage...Kirti को कोंग्रटुलते भी तो करना है...

चेहरे में मुस्कान लिए सुमित इससे आगे कुछ नहीं बोलै.

मेघा सुमित को रोकने की कोशिश करती है लेकिन सुमित ने तो ठान hi लिया था की जो भी होगा वो देख लेगा.

वो सीधा कीर्ति की नजर के सामे फर्स्ट रौ की चेयर में बैठ gaya...Wo बैठा भी उस जगह था जहा उससे कीर्ति, उसकी पापा और विवेक तीनो ने देख liya...Lekin किसी ने कुछ कहा नहीं.

हैरानी में कीर्ति सोच में पद गयी की ये सुमित का प्यार है या जिद्द?

विवेक को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन फिर भी वो चुप hi रहा.

कीर्ति की पापा भी खुद को तैयार कर रहे thhe...Dil में ूँजे भी दर था की कही सुमित कुछ गड़बड़ ना कर de...Rishtedaar और दोस्तों के बिच शर्मिंदा होने का अलग hi दर सत्ता रहा था.

धीरे धीरे इंगेजमेंट का फंक्शन सुरु hua...Sumit अपने hi चेयर पर बैठे सब कुछ मुस्कुराते हुए hi देखने लगा.

कीर्ति को अजीब भी लग रहा था की सुमित ने अब्ब तक कुछ गड़बड़ नहीं किया.

मेघा को भी एक अनजाना सा दर लग रहा tha...Kabhi वो सुमित के पास आ कर उससे समझाती तो कभी कीर्ति के पास जा कर उससे कुछ बातें करती रही.

और जब वक्त रिंग सेरेमनी की आया तो जो भी सुमित को जानते थे उन्हें यकीं था की सुमित जरूर कुछ करेगा.

लेकिन उनके उम्मीद के ठीक विपरीत सुमित मुस्कुराते हुए hi सब कुछ देखता रहा.

और सभी रिश्तेदार और दोस्तों के बधाई देने के बाद सुमित के शरीर में हलचल सुरु हुआ.

वो अब्ब उठ कर स्टेज में गया और कीर्ति के पास जा कर धीरे ऐ बस इतना hi कहा.

सुमित:- कोंग्रटुलतिओन्स!!!

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया लेकिन अगले hi पल पीछे खिंच liya...Aur मुद कर वह से जाने लगा.

लेकिन थोड़ी देर आगे जाने के बाद वापस पलट कर कीर्ति के पास आ गया.

सुमित:- अगर दिल और दिमाग में कोई सवाल है तो पूछ सकती ho...Pata नहीं कही ये hi आखिरी मुलाक़ात साबित ना हो जाए.

मेरा तो कोई सवाल और गिला शिकवा बाकी नहीं है.

कीर्ति:- कुछ देर पहले तक तो नहीं tha...Aur तुमसे कोई मतलब भी तो nahi...Abb बस एक hi सवाल hai...Tumne कोई हंगामा नहीं किया इस इंगेजमेंट में?

सुमित:- प्यार किया है tumse...Tumhara ख़ुशी चाहता हूँ ना की तुम्हारी dukh...Agar इसी विचित्र प्राणी के साथ खुश हो तो यही सही.

अभी भी सुमित की आवाज में भरपूर प्यार था.

कीर्ति:- तुम्हे आज यहाँ एक्सपेक्ट नहीं किया था.

सुमित:- वादा किया था उस दिन की इंगेजमेंट के दिन aaunga...Fir क्या tha...Aa गया अपना वादा पूरा करने और हो सकता है आखिरी बार देखने के लिए भी.

कीर्ति:- आखिरी बार? कुछ hi दिन में शादी भी तो hai...Uss दिन भी आ सकते हो.

सुमित की हालात पर हँसते हुए कीर्ति ने कहा.

सुमित:- उस दिन के लिए वादा नहीं कर सकता.

कीर्ति:- क्यों? इतना hi हिम्मत रह गया है तुम में?

सुमित:- Himmat...Himmat की तो बात hi मत karo...Khud को बर्बाद कर देने तक का हिम्मत था मुझ mein...Khair अब्ब हिम्मत किसी और चीज के लिए बचा के रखा है.

कीर्ति:- क्या?

उत्शुकता बस कीर्ति की मुंह से निकल गया.

सुमित:- तुम्हारी बदकिस्मती जो ये तुम जान नहीं paaogi...Himmat बताने से ज्यादा कर के दिखाने में विश्वाश रखता हूँ जो की तुम कभी देख नहीं paaogi...Abb एक या दो पल aur...Bas उतने वक्त के लिए hi हम साथ है.

कीर्ति ने इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- मैंने अपना पोस्टिंग अस ा मेडिकल अफसर एक गांव में लेने का फैसला किया hai...Dates का पता nahi...Kabhi भी जाना पद सकता hai...Jyadatar चांस ये है की तुम्हारे शादी से पहले hi मुझे यहाँ से निकलना पद सकता है.

इसी लिए कोई वादा नहीं कर सकता की तुम्हारी शादी में आ पाऊंगा या nahi...Agar यही रहा तो जरूर aaunga...Vaada रहा.

कीर्ति:- नौकरी की बात आते hi प्यार gaayab...Jaanti थी तुम्हारा प्यार की गहराई को पहले से hi.

सुमित:- (मुस्कुराते हुए) प्यार अपनी jagah...Jimmedaari अपनी jagah...Ye बात भले hi देर से समझ में aaya...Lekin समझ में आ hi गया.

अगर दूसरी तरफ से भी कोई सच्चा प्यार करे तो सिर्फ प्यार का गहराई hi नहीं खुशियों की ऊंचाई भी दुनिया यार karega...Lekin अफसोश.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Kirti भी कुछ नहीं बोली.

सुमित:- अब्ब शायद तुम्हारा कोई सवाल नहीं hai...Accha चलता hun...Hameaha खुश रहना.

इतना कह कर सुमित वह से जाने laga...Bhaari दिल के साथ चेहरे में एक झूठा मुस्कान लिए वो अपने आखिरी नजर तक कीर्ति को देखते हुए वह से निकल गया.

मेघा:- (तो कीर्ति) अभी भी वक्त hai...Gusse में और नाराजगी में जाने वाले इंसान लौट कर वापस आ सकते है लेकिन मुस्कुराते हुए जाने वाले इंसान कभी वापस नहीं लौट ते है.

कीर्ति:- हु केयर्स?

वह से निकलने के बाद सुमित के आँखों में आंसू थे लेकिन दिल में एक santushti...Aisi संतुष्टि की अब्ब कुछ हो नहीं sakta...Sab कुछ ख़त्म हो चूका है हमेअह हमेशा के लिए.

अब्ब किसी तरह वो खुद को तैयार कर रहा था अपने जिंदगी के एक नए शुरुवात के लिए.
 
अपडेट 79

तुम कौन?

गेट के सामने अनजान लड़की को देख सुमित के पापा ने पूछा.

लड़की:- अंकल मई Megha...Sumit की दोस्त.

स. डैड:- Megha...Naam कुछ सुना हुआ लग रहा है.

आओ अंदर.

मेघा अंदर आती hai...Kuch hi देर में रश्मि पानी का एक गिलास ले कर आती है मेघा के पास.

स. डैड:- कुछ काम था सुमित से?

मेघा:- 2 दिन से सुमित का कॉल लग नहीं रहा tha...To सोचा सब कुवह ठीक तो है ना?

स. डैड:- उससे क्या होगा? अब्ब डॉक्टर बन गया है तो मर्जी वो hi कर रहा hai...Abhi भी सू hi रहा होगा.

स. डैड:- Rashmi...Jaa कर सुमित को बुला कर laao...Bolna की उसकी दोस्त मेघा आयी है.

मेघा नाम सुनते hi रश्मि एक नजर मेघा को देखती है और मुस्कुराती हुई चली जाती है.

Bhaiya...Bhaiya...

सुमित को कंधे से हिला कर रश्मि उठाती है.

सुमित:- क्या हो गया सुबह सुबह?

रश्मि:- Subah...Ghadi dekhiye...Dopahar के 1 बज रहे है.

सुमित:- मेरे लिए सुबह hi hai...Chal अब्ब सोने दे.

इतना कह कर सुमित दूसरी तरफ मुंह कर के फिर से सोने लगता है.

रश्मि:- मेघा आयी है.

ये सुनते hi एकदम से सुमित उठ कर बैठ जाता है.

रश्मि:- वाह रे pyaar...Behen की कोई वैल्यू nahi...Lekin मेघा की नाम सुनते hi उठ कर बैठ गए.

मुंह फुलाते हुए रश्मि बोली.

सुमित:- तू और तेरा nonsense...Kisne कह दिया मई मेघा से प्यार करता हूँ?

रश्मि:- सब दिख रहा है.

सुमित:- हाँ तुझे तो सब कुछ दीखता है किताब के अलावा.

सुमित बढ़ से उतारते हुए बोलै.

रश्मि:- क्या भैया? भाभी से मिलने के जल्दबाज़ी में आज आपके सत्तीरे में भी दम नहीं है. :lol1:

सुमित बिना कुछ बोले रूम से निकल गया.

दूसरी तरफ

स. डैड:- तुम सुमित के साथ hi पढ़ती हो ना?

मेघा:- जी अंकल.

स. डैड:- सुना था सुमित से एक दो बार तुम्हारा नाम.

मेघा:- मेरे बारे में?

स. डैड:- वो कुछ छुपाता नहीं है mujhse...Uske कॉलेज के दोस्तों से ले कर जितने भी दोस्त है सभी के बारे में जानता हूँ.

ऐसे में एक दो बार तुम्हारा नाम भी सुना था.

"क्या सुना है आपने?" ये सवाल मेघा पूछना चाहती थी लेकिन ज्यादा जान पहचान ना होने से वो पूछ नहीं payi...Sumit के पापा बहुत से बात कर रहे थे लेकिन शायद कुछ hi देर की मुकाकात की वजह से मेघा उतना कम्फर्टेबले नहीं लग रही थी.

मेघा की आँखें फभी जे लिए सिर्फ सुमित को hi ढूंढ रही थी.

तब तक सुमित के साथ साथ सुमित की माँ भी चाय ले कर आ जाती है.

स. डैड:- तेरा hi इंतजार हो रहा था.

सुमित:- तकलीफ के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

सुमित को अपने पापा से ऐसे बिंदास बात करता देख मेघा को थोड़ा हैरानी हुआ.

स. डैड:- तू और तेरा takleef...Aadat सी हो गयी है abb...Takleef तो तेरी माँ और मेघा को हुआ hai...Jo इतना इंतजार करवाया.

स. माँ:- अब्ब तो मुझे भी आदत हो गयी hai...Iski तकलीफ सहने ki...Ek तो इसका उठने का टाइम ऊपर से खाना खाने का time...Din भर इंतजार करना पड़ता है.

सुमित कुछ नहीं kehta...Wo मेघा के बारे में hi सोच रहा था जब से वो सू कर उठा tha...Aaj मेघा को पहली बार घर में देख वो काफी हैरान tha...Kuch जरुरी बात hi होगी जो मेघा आज यहाँ आयी hai..Kuch यही बात सुमित के दिमाग में चल रहा था.

मेघा:- और कॉलेज में प्रोफेसर pareshan...Sumit को एब्सेंट और लेट होता देख.

स. डैड:- लेकिन तू तो रोज कॉलेज जाता था न?

इस बार उनकी आवाज में भी हैरानी था.

मेघा:- सॉरी Uncle...Mai 1सत और 2ंद ईयर की बात कर रही थी.

स. माँ:- बात चाहे किसी वक्त की ho...Iss नालायक ने किसी को नहीं छोड़ा hai...Sabhi को परेशां करके रख दिया है.

रश्मि:- और सबसे ज्यादा मुझे. :(

सुमित:- सुमित SFS...Naam तो पता hi होगा.

स. डैड:- ये कैसा नाम है?

स. माँ:- ये नाम तो कभी नहीं सुना मैंने.

रश्मि:- इस नाम से तो आप बिलकुल जोकर लग रहे है.

तभी सुमित को एहसास हुआ ये नाम तो उसने सिर्फ मेघा को hi बताया tha...Ek नजर वो मेघा को देखता है जो सभी की बातें सुन हंस रही थी.

सुमित:- सुना नहीं है तो सुन lijiye...Sumit सफस यानी की स्ट्रैट फॉरवर्ड Sumit...Sirf मई hi फॉरवर्ड रहता hun...Baaki मेरे आस पास के सभी खुद बैकवर्ड हो जाते hai...Aise में किसी का hi परेशान होना आम बात है.

स. Dad:-Accha chalo...Inn दोनों को थोड़ा वक्त दो.

इतना कह कर वो उठ कर जाने लगते है.

मेघा:- अरे नहीं अंकल...

स. डैड:- इतना तो समझता hun...Agar पर्सनल बात नहीं होता तो तुम सबके सामने भी सुमित से बात कर सकती thi...Kuch पर्सनल और इम्पोर्टेन्ट hi होगा जो सब के सामने नहीं कह पा रही हो.

इतना कह कर वो वह से चले जाते है.

स. माँ:- अच्छा तुम दोनों बातें karo...Mein किचन में जाती हूँ.

सुमित:- (तो रश्मि) तुझे क्या अलग से रिक्वेस्ट करना पड़ेगा?

रश्मि भी नाक फुला कर वह से जाती है.

अब्ब सुमित फिर से सीरियस हो गया था ये जानने के लिए की मेघा क्यों आयी है.

सुमित:- हाँ bataao...Kya काम था?

मेघा:- ऐसे hi...Kya सिर्फ काम होगा तब hi आ सकती हूँ तुम्हारे घर?

सुमित:- नहीं nahi...Wo मतलब नहीं था mera...Aaj तक भले hi कितना भी जरुरी काम हो तुम घर नहीं आयी hi.

मेघा:- तो क्या अब्ब नहीं आ सकती? :हिंतहिंट:

सुमित को समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे.

मेघा:- समझ hi गए होंगे tum...Sirf तुम hi परेशां नहीं कर sakte...Mujhe भी आता है इर्रिटेट करना तुम्हारी तरह.

याद है हमारे मुलाक़ात के शुरुवाती din...Kitna परेशान करते थे तुम मुझे?

सुमित:- हाँ.

फींका सा जवाब दिया सुमित ने.

मेघा:- अगर सच कहु तो सच में तुम्हारी चिंता हो रहा tha...Issi लिए हाल चाल पूछने आ गयी.

सुमित:- मेरा क्या hai...Thik तो नहीं hun...Lekin बहुत जल्द हो jaaunga...Bas कुछ वक्त aur...Kirti को भुला जार नयी शुरुवात कर लूंगा.

मग्गा:- भुला पाओगे?

सुमित:- अगर सच कहु तो ना. क्या करू मेमोरी hi इतना स्ट्रांग है. :डी

फिर सुमित सीरियस हो गया.

सुमित:- लेकिन कीर्ति से भी ज्यादा अपने करियर को इम्पोर्टेंस dunga...Sirf और सिर्फ अपने करियर में focus...Pin पॉइंट focus...Jaise अर्जुन का फोकस मछली की जगह मछली की आँखों में tha...Waisa फोकस.

और कीर्ति बाद में कभी मिल भी जाए तो ऐसा लगे की वो मेरी प्यार नहीं वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी.

मेघा:- सच में तुम्हे ऐसे डेटर्मीनेड देख बहुत अच्छा laga...Soch नहीं पा रही थी तुम्हारा क्या हाल हुआ hoga...Kirti की इंगेजमेंट देखने के baad...Phone भी नहीं लग रहा था और ना hi किसी तरह से कांटेक्ट कर पा रही thi...Bas यही दर तुम्हारे घर तक खिंचाई थी.

सुमित:- जितना रोना था पहके hi रू चूका hun...Engagement के बाद सिर्फ आधा घंटा hi रोया tha...Abb तो शायद आंसू भी सुख गए है.

खुद को थोड़ा तुम दे रहा था इसी लिए मोबाइल से खुद को दूर कर लिया कुछ दिनों के liye...Sabhi सोशल मीडिया डीएक्टिवेट करने के साथ मोबाइल भी स्वित्चेद ऑफ.

मेघा:- रह पाओगे मोबाइल के बिना? ये भी अलग hi एडिक्शन है.

सुमित:- (लाफिंग) प्यार का एडिक्शन, और सिगरेट दारु के एडिक्शन के सामने तो कुछ भी नहीं है.

मोबाइल का जरुरत अब्ब कुछ इम्पोर्टेन्ट कॉन्टेक्ट्स के लिए और इंटरनेट की जरुरत सिर्फ पढाई के लिए.

मेघा इस बात में कुछ नहीं kehti...Wo सिर्फ सुमित की कॉन्फिडेंस को देख रही थी.

सुमित:- मेघा अगर तुम गुस्सा नहीं होगी तो क्या एक बात पूछ सकता हूँ?

मेघा:- हाँ पूछो.

सुमित:- तुमने विकाश का प्यार रिजेक्ट कर दिया?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- लेकिन क्यों? वो तुमसे सच में प्यार करता है?

मेघा:- हाँ उसका प्यार सच्चा hai...Aur वो बहुत अच्छा भी hai...Lekin मुझे भी तो प्यार होना chahiye...Usse हमेशा से एक अच्छा दोस्त hi माना hai...Isse ज्यादा कुछ नहीं.

सुमित:- लेकिन.

मेघा:- लेकिन वेकिन कुछ नहीं.

थोड़ा गुस्सा में मेघा ने कहना जाती रखा.

मेघा:- तुमने hi तो कहा था कीर्ति के बाद अब्ब प्यार में कोई ध्यान नहीं डोज? एक सवाल hai...Kya कोई लड़की तुमसे सच में प्यार करे और वो बहुत अच्छी भी ho...Kya तुम उसका प्यार एक्सेप्ट करोगे?

सुमित:- अब्ब वो ताकत नहीं रहा और अपना करियर में भी फोकस करना है.

मेघा:- विकाश बहुत अच्छा है इसका ये मतलब तो नहीं की मुझे भी उससे प्यार हो hi जाएगा.

वैसे मुझे भी अपने करियर पर फोकस करना hai...Issi लिए मुझे भी प्यार में अब कोई शौख नहीं है.

आखिरी की बात मेघा ने बड़ी चलाखी से कहा.

सुमित:- अरे तुम तो गुस्सा हो गयी.

मेघा:- बात hi ऐसा किया है तुमने.

फिर दोनों के बिच इधर उधर की बातें होती है.

मेघा:- अच्छा तो मई चलती हूँ.

सुमित भी मेघा को ड्राप करने के लिए उसके साथ बाहर तक जाता है.

सुमित:- मेरा हालचाल पूछने के लिए यहाँ तक आयी tum...Bahut ैक्सः लगा.

मेघा मुस्कुराते हुए चाकी जाती है.

स. डैड:- काफी लम्बा बात चीत चला?

सुमित:- कुछ जरुरी बातें tha...Iss वजह से.

स. डैड:- समझ सकता हूँ क्या जरुरी बातें था.

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता है.

स. डैड:- वैसे कब जाओ मई मेघा के घर?

सुमित:- किस लिए?

स. डैड:- उसकी हाथ मांगने तेरे लिए?

सुमित:- क्या पापा आप bhi...Aap कुछ ज्यादा hi सोच रहे है. :डोह:

स. डैड:- मई ज्यादा सोच रहा हूँ?

सुमित:- हाँ इस मामले में.

इतना कह कर सुमित वह से सीधा अपने रूम में चला जाता hai...Sumit के पापा उससे जाते हुए बस देखते रहते hai...Unke चेहरे में एक अलग hi मुस्कान था.

2 इयर्स लेटर
 
अपडेट 80


2 इयर्स लेटर


Hello.

नंबर भले hi अनजाना था लेकिन आवाज पहचानने में सुमित को बिलकुल भी वक्त नहीं लगा.

सुमित:- हाँ Megha...Aaj बहुत दिन बाद तुम्हे मेरा याद आया?

मेघा:- और याद सिर्फ मई hi तुम्हे करती hun...Warna तुम्हे तो मुझसे कोई मतलब नहीं.

सुमित:- ऐसी बात नहीं है.

मेघा:- फिर कैसी बात है?

सुमित थोड़ा सोच में पद gaya...Lekin फिर भी क्या कहना है उससे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

मेघा:- अब्ब ये मत कहना की गांव में डॉक्टर्स काम थे औरतुम्हारा जिम्मेदारी बहुत बढ़ गया tha...Abb ये एक्सक्यूज़ पुराण हो चूका है.

सुमित:- सच कहु तो एंट्रेंस के प्रिपरेशन में बिजी हो गया था.

मेघा:- फिर झूठ.

सुमित:- क कैसे?

मेघा:- बहुत अच्छे से जानती हूँ tumhe...Har एक एग्जाम के लिए एग्जाम से पहले तुम मुझसे क्वेश्चन के बारे में डिसकस करते thhe...Bhale hi तुम एग्जाम के लिए फुल्ली प्रेपरेड़ हो या फिर बिलकुल भी नहीं.

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता.

मेघा:- इतना आसान झूठ तो मत बोलो.

जवाब तो सीधा सा होना चाहिए tha...Mai इम्पोर्टेन्ट थोड़ी ना हु जो तुम्हे याद आउंगी.

सुमित:- नहीं मेघा ऐसी बात नहीं है.

मेघा:- मेरी बात chhodo...Hairaani की बात तो ये है की तुमने अब्ब इम्पोर्टेन्ट चीज की बारे में बात भी नहीं किया.

सुमित:- बस बोर नहीं करना chaahta...Important चीज तो यही है की अच्छे मार्क्स के साथ सर्जरी में फुल स्कालरशिप के साथ मस करना है.

अब्ब इस बारे में बात करने लग गया तो घंटो तक बातें हो jaayega...Abb तुम्हारे पास भी तो इतना फ़ालतू टाइम नहीं होगा बोर होने के लिए.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- मई इस इम्पोर्टेन्ट चीज की बात नहीं कर राहु हूँ.

सुमित:- तो फिर?

मेघा:- कीर्ति...2 साल तक तुमने उसके बारे में एक बार भी बात नहीं kiya...Pehle तो मौका मिलते hi कीर्ति की बातें शुरू कर देते थे.

कुछ देर बाद.

सुमित:- वो इम्पोर्टेन्ट थी.

मेघा:- अब्ब.

सुमित:- बिलकुल भी nahi...Behtar यही है की वो अपनी लाइफ में खुश रहे और मई अपना सपना पूरा करने के पीछे लगा राहु.

मेघा:- वाह Sumit...Itna डेडिकेशन, फोकस्ड.

एक बार जरूर मिलना चाहूंगी इतने सीरियस सुमित से?

सुमित:- कभी नहीं मिल पाओगी मैडम.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- डेडिकेटेड और फोकस्ड तो हूँ लेकिन सीरियस टाइप तो बिलकुल भी नहीं.

जिंदगी वापस वही पटरी पर ला रहा hun...Apne में hi मस्त rahu...Jab मर्जी तब काम karu...Aur जब करू तब एक hi बार में सब कुछ खल्लास.

मेघा:- सही है ये bhi...Abb तो मिलने की और भी मन कर रहा hai...Wapas उसी सुमित सफस को देखने को मिलेगा.

सुमित:- सुमित SFS...Naam तो याद है तुम्हे.

मेघा:- और कारनामे भी.

वापस से माहौल खुशनुमा हो gaya...Dono में बातें शुरुवाती दिन की तरह होने लगा.

मेघा:- अच्छा चलो रखती hun...Kuch hi दिन में एंट्रेंस hai...Thoda प्रेपर भी करना पड़ेगा.

सुमित:- कितना पढ़ती हो yaar...Mujhe देखो 5 दिन से किताब को हाथ नहीं lagaya...Lekin जिस दिन लगाऊंगा 5 दिन का कंटेंट 5 हरष में ख़त्म कर दूंगा.

मेघा:- लेकिन मई सफ्म नहीं hu...Issi लिए रोज पढ़ना पड़ता है.

सुमित:- अब्ब ये सफ्म क्या बाला है?

मेघा:- स्ट्रैट फॉरवर्ड Megha...Jo की मई बिलकुल भी नहीं हूँ.

सुमित:- तो फिर तुम क्या हो?

मेघा:- Megha...Slow एंड स्टेडी विंस थे रेस.

सुमित:- ये तो कुछ ज्यादा hi ावक्वार्ड रहीमिन्ह है.

मेघा:- बिलकुल तुम्हारी जोक्स की तरह :lol1:

फिर कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद.

मेघा:- सुमित तुम्हे आज ऐसा खुश देख बहुत अच्छा laga...Sach में तुम अब्ब उस ग़म से उभर चुके हो.

सुमित:- 2 साल काफी होते hai...Waise तो सफस को 2 महीने काफी होते लेकिन आशिक़ सुमित सफस पर भरी पद गया.

मेघा:- क्या अब्ब आशिक़ सुमित फिर भरी नहीं पद सकता?

सुमित:- अब्ब तो बिलकुल भी nahi...Aashiq सुमित तो मर सा गया hai...SFS एक बार शुरू हो जाए किसी के भी छक्के छुड़ा सकता है.

मेघा:- अच्छा अच्छा अब्ब रखती hun...Agar ऐसे hi बात करती रही तो रिजल्ट्स हम दोनों के छक्के छुड़ा देगा.

फिर मेघा फ़ोन रख देती है.


फ्यू वीक्स लेटर


मेघा:- तुम्हारा रिजल्ट का क्या हुआ?

उत्शुक आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- बाकी तुम्हे ये बात रट हुए batayenge...Lekin सफस हँसते हुए.

मेघा:- क्या हुआ? वो तो बताओ? अब्ब रहा नहीं जा रहा है.

सुमित:- एक मार्क्स से स्कालरशिप छूट गया.

इस आवाज में उतना ग़म भी नहीं था जितना होना चाहिए था.

फिर मेघा सुमित से उसकी मार्क्स पूछती है और सुमत बता देता है.

मेघा:- किसी और कॉलेज में आसानी से स्कालरशिप मिल सकता है वो भी सर्जरी में hi.

सुमित:- कही सुना tha...Shayad किसी फिल्म mein...Hum एक बार जीते hai...Ek बार मरते hai...Aur प्यार भी एक hi बार करते है.

मेघा:- मई क्या पूछ रही हूँ और तुम क्या जवाब दे रहे हो?

सुमित:- जवाब तुम्हारे सवाल का hi दे रहा hun...Uss फुलमय डायलाग को मैंने बदल दिया.

हम एक बार जीते hai...Ek बार मरते hai...Aur पग (पोस्ट ग्रेजुएशन) भी एक hi बार करते है.

तो क्यों ना इस पग को अच्छे से किया jaaye...Full विथ कॉन्फिडेंस एंड पैशन.

मेघा:- तो उसके लिए क्या करोगे?

सुमित:- ईयर लोस्स.

मेघा:- व्हाट? दिमाग तो ठीक है तुम्हारा?

सुमित:- ठीक hi होगा जो इतना बोल्ड डिसिशन भी आसानी से ले रहा हूँ.

मेघा:- 1 ईयर लोस्स का मीनिंग समझते हो?

सुमत:- बिलकुल भी nahi...Bhake hi वो 1 ईयर लोस्स है लेकिन मेरे लिए तो 1 ईयर एडवांटेज होगा.

मब्ब्स के वक्त भी 2 साल बी फार्म पढ़ने के बाद किया tha...Tab भी अफसोश नहीं हुआ tha...Abb तो डॉक्टर हूँ लोस्स करने के बाद भी प्रैक्टिस तो कर hi सकता हूँ अस ा मेडिकल officer...Jitna प्रैक्टिस करूँगा उतना और सीखता रहूँगा.

मेघा:- ये कुछ ज्यादा hi रिस्की नहीं है?

सुमित:- रिस्क तो hai...Lekin रिस्क से डरता भी कौन है? और मेरा ये ईयर लोस्स का मतलब रिस्क से खेलने का नहीं है.

जब अपने चॉइस ऑफ़ कॉलेज में स्कालरशिप नहीं मिला तो सोचा कुछ तो कमी रह गया होगा प्रिपरेशन mein...Bas इसी कमी को मिटाने के लिए म्हणत करना है एक बार फिर से उसी कॉन्फिडेंस के साथ उसी पैशन के साथ.

जरुरी नहीं है की सर्जन कब बनूँगा जरुरी ये है की कैसा सर्जन बनूँगा.

मेघा:- बाकी कॉलेज में तो स्कालरशिप मिल रहा है ना? तो फिर बेस्ट कॉलेज hi क्यों? पढ़ने वाले स्टूडेंट तो कही से भी पढ़ लेते है?

सुमित:- मई कॉलेज को रैंक के हिसाब से सेलेक्ट नहीं कर रहा hun...MBBS तक तो मुझे भी कॉलेज से लेना देना नहीं था.

बस कीर्ति से प्यार करता था इसी वजह से उसी की कॉलेज में पढ़ना चाहता था जो की नहीं हुआ.

अब्ब मस जो कॉलेज से करना चाहता हूँ उस में एक hi चीज मुझे अच्छा लगा और वो hi काफी hai...Patients फ्लो.

जितने तरह के पेशेंट आएंगे उतने hi अलग तरह के सर्जरी भी प्रॅक्टिवे हो jaayega...Bas यही वजह है बेस्ट कॉलेज में पढ़ने की iccha...Surgeon जब भी बनूँगा तब यही लग्न चाहिए ी ऍम नाउ बोथ थेओरेटिकल्ल्य एंड स्किल वाइज क्वालिफाइड सर्जन.

बात को बहुत घूमने के बाद सुमित ने अपना वजह बता hi दिया.

सुमित:- और तुम्हारा क्या प्लान है.

मेघा:- मेरा तो मार्क्स बहुत काम hai...Kisi भी कॉलेज में मेडिसिन नहीं milega...Abb अगले साल का hi इंतजार है.

सुमित:- हर एक हार सिर्फ हार नहीं hota...Khud की कमजोरी पर गौर करने का और फिर दोबारा ना हारने की जिद्द का एक बहुत अच्छा मौका है.

ये भले hi देर से लेकिन वक्त में समझ आ hi गया.

कुछ सोचते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- सही है fir...Milte है अगली साल बेस्ट कॉलेज mein...Subject ऑफ़ चॉइस और कॉलेज ऑफ़ चॉइस के साथ.

सुमित:- इंतजार रहेगा.

आत्मविश्वाश के साथ सुमित ने कहा.


1 ईयर लेटर


तो बस इतनी सी कहानी tha...Jis प्यार को पाने के लिए न जाने क्या से क्या कर gaya...Khud को अपनी नजरो में गिरा diya...Nashe की लत में डुबो कर अपने hi जिंदगी को बड़बाद करने की राश्ते पर ले chala...Sabhi के सामने अपने प्यार के लिए गिड़गिड़ाता हुआ एक भिखारी बन gaya...Hamesha हर खेल में न हारने वाला सुमित जिंदगी की सबसे एहम खेल हार gaya...Loot गया और लूटा दिया खुद को.

कुछ ऐसा था मई.

बाकी की सर्जरी के 1सत ईयर रेसिडेंट्स के सामने सुमित ने कहा.

सुमित:- और आज dekho...Kaha से कहा पहुँच gaya...Bas एक विल पावर.

ा लॉस्ट मन तो मन विथ फुल ऑफ़ confidence...A परपोसेलेस पास्ट तो फ्यूचर ऑफ़ लॉट्स ऑफ़ hope...A साद लाइफ तो फीलिंग ऑफ़ इंटरनल हैप्पीनेस.

थिस वास् माय story...Bas इतना hi.

बस इतना hi? क्या अब्ब आगे तुझे कभी प्यार नहीं होगा?

सुमित:- इस जनम में तो कभी nahi...That वास् थे एन्ड ऑफ़ माय लव स्टोरी.

एक मुस्कान के साथ सुमित ने कहा.
 
अपडेट 81

3 इयर्स लेटर

लोकेशन:- Sumit's हाउस

एक लड़की दो घंटे से वेट कर रही thi...Najar सुमित के घर पर लगे बड़ा टला पर था.

इंतजार कर रही थी की कब कोई घर में आएगा और ताला खोलेगा.

जब धीरे धीरे उम्मीद काम होने लगी तो उठ कर आस पड़ोस के लोग से पूछने का सोचने लगी.

सुमित का घर सेहर के भीड़ भाड़ वाला इलाका से थोड़ा दूर एक सुनसान जगह में था तो आस पास ज्यादा घर भी नहीं था.

सुमित के पास का hi घर भी बंद tha...Abb दूसरे घर पहुँचने के लिए आगे 100 मीटर और चलना था उससे.

उस घर में पहुँचने पर पता चला की सुमित नाम का कोई शख्स वह रहता hi nahi...Aas पास के घर में पूछताछ करने के बाद भी सुमित का कोई पता नहीं chala...Jyada तर लोगो के जवाब था वो अभी यहाँ शिफ्ट हुए है. तो कुछ लोगो ने सुमित को पहचानने से hi मन कर दिया.

थक हार कर थोड़ी दूर चलने के बाद एक पेड़ (ट्री) के निचे रखे एक बेंच पर एक 35 साल के आस पास के आदमी को बैठे देखती है.

लड़की:- Bhaiya...Kya आप सुमित को जानती है?

सुमित के नाम सुनते hi वो आदमी उस लड़की को घूरने लगता है.

आँख से वो काफी नशे में लग रहा था.

आदमी:- तुम कौन हो?

लड़की:- जी मई कीर्ति.

आदमी:- क्या काम है तुम्हे उससे?

उस आदमी की मुंह से दारु की बदबू साफ़ आ रहा था और बातों से साफ़ नशे में दिख रहा था.

कीर्ति:- है कुछ जरुरी kaam...Bataiye न आप वो कहा है अभी?

आदमी:- कितना जानती हो तुम सुमित को?

कीर्ति:- अच्छा ख़ासा जान पहचान है.

आदमी:- गलत.

कीर्ति:- क्या मतलब?

आदमी:- अगर इतना hi अच्छा जान पहचान होता तो तुम्हे भी पता होना चाहिए था अब्ब वो इस दुनिया में नहीं है.

कीर्ति:- K...Kya?

कीर्ति से कुछ बोलै hi नहीं जा रहा था.

वो आदमी भी कुछ नहीं bola...Aisa लग रहा था वो भी उस हादशा को याद कर के दुखी था.

कीर्ति:- लेकिन कैसे?

दर्द भरी आवाज में बस इतना hi बोल पायी कीर्ति.

आदमी:- बहुत कर्ज में डूबा tha...Aur ऊपर से नशा का aadat...Har तरफ से ताने, लोगो का मजाक उड़ाना और हर कदम में haar...Usse बर्दास्त नहीं hua...Nashe में खुद को पूरी तरह से डूबा दिया.

इतना की एक दिन कुछ ज्यादा hi पी लिया और नशे की हालात में एक गाडी ने सामने से उड़ा दिया.

कीर्ति को अभी भी उसकी बातों में विश्वाश नहीं हो रहा था.

कीर्ति:- लेकिन वो तो दारु छोड़ चूका था.

आदमी:- सब कहने की बात hai...Aur जो लोग दारु छोड़ने की दवा करते है वो भी छुप छुप कर पीते hai...Nasha hi कुछ ख़ास है दारु ka....Jo काम होने की जगह बढ़ता hi जाता है.

अब्ब कीर्ति से और रहा नहीं gaya...Dil का दर्द आँखों से आंसू के रूप में बहने लगे.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) ी ऍम सॉरी Sumit...Kuch ज्यादा hi देर कर दी maine...Tumhare मौत का जिम्मेदार शायद मई hi हूँ.

न जाने आत्मग्लानि में कीर्ति कितने घंटो तक वही रोटी rahi...Baar बार उससे सुमित के साथ बिठाये कुछ यादगार पल की यादें आ रहा tha...Jisse याद करके वो और भी रोटी जा रही थी.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) मई खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाउंगी.

तभी एक और आदमी वह आता है.

अबे बेवड़े ज्यादा मत pee...Warna तू भी तेरे hi दोस्त की तरह टपक जाएगा.

ये सुनते hi कीर्ति का दर्द गुस्से में बदल गया.

आंसू पोंछते हुए.

कीर्ति:- आप मौत को कितने हलके में ले रहे hai...Aur बात ऐसे कर रहे है जैसे किसी का मरना भी मजाक है आपके लिए.

वो आदमी पहले कीर्ति को देखता hai...Aankho में आंसू और साथ में gussa...Wo समझ जाता है की जरूर कोई परेशानी में होगी.

आदमी:- मौत मजाक नहीं hai...Lekin ऐसे लोगो को देखता हूँ तो सच में गुस्सा आता है.

कुछ काम तो करते नहीं hai...Haath पेअर है लेकिन फिर भी अपाहिज hi बने rahenge...Jimmedaari सँभालने की जगह नशे में लगे रहते है.

साले घर के और दुनिया के बोझ.

एक था इसका दोस्त Sumit...Nashe करने के लिए कर्ज इतना ले लिया की आज भी उसका परिवार भुगत रहा hai...Aur अब्ब उनको और भी परेशां करने के लिए इस दुनिया से भी चला गया.

नफरत है ऐसी बेव्ड़ो से और इन् धरती की बोझ से.

कीर्ति:- आप तो ऐसे बात कर रहे है जैसे कभी आपने दारु को हाथ तक लगाया नहीं है.

जो कीर्ति सुमित को कभी समझना hi नहीं चाहती thi...Aaj सुमित की गलती में भी उससे सही नजर आ रहा tha...Lekin अफ़सोस.

आदमी:- नहीं कभी नहीं लगाया haath...Daaru पीने वाले सभी को गलत नहीं कह raha...Lekin बेव्ड़ो को तो कभी सही नहीं कहूंगा.

मुर्ख hi होंगे ये लोग मानसिक रूप से जो मौत को खुद दावत देते है.

कीर्ति:- आप नहीं समझ paayenge...Ek डॉक्टर इतना भी मुर्ख नहीं होता की उससे दारु की नुकशान पता न ho....Sach में नशा करने की वजह था सुमित के पास.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) और वो वजह मई हूँ.

दुखी मन से कीर्ति बोली.

अब्ब उससे और रहा नहीं जा रहा tha...Aur ना hi कुछ समझ में आ रहा रहा की क्या kare...Dil का दर्द अब्ब और सहा नहीं जा रहा था usse...Bas वो वह से बिना मंजिल की परवाह किये आगे बढ़ रही थी.

आदमी:- डॉक्टर? कौन?

कीर्ति:- सुमित.

आदमी:- वो बेवड़ा कब से डॉक्टर बन गया? माँ बाप के पैसो को नदी में उड़ाने के अलावा उससे आता hi क्या था?

जरूर आपको कोई ग़लतफहमी हुई होगी.

कीर्ति बस अपने जगह पर रुक जाती hai...Uss आदमी की बात से कई तरह के सवाल उसकी दिमाग में घूम रहे थे.

आदमी:- Doctor....Sumit.

वो आदमी खुद से ये बात बड़बड़ा रहा था की तभी उससे कुछ याद आता है.

आदमी:- आप किस की बारे में बात कर रही है?

कीर्ति:- सुमित

आदमी:- और वो डॉक्टर है.

कीर्ति:- हाँ.

आदमी:- तो फिर आप इस बेवड़े से क्यों बात कर रही hai...Iska दोस्त सुमित कोई और hai...Koi डॉक्टर वॉटर नहीं है वो.

अब्ब कन्फूसिओं में कीर्ति का सर फटने hi वाला tha...Kuch समझ में नहीं आ रहा था उससे.

आदमी:- एक डॉ. सुमित के बारे में मई जानता hun...Aap उस सुमित के बारे में बताइये जिसको ढूंढ रही है.

कीर्ति किसी तरह सुमित का डिटेल बता देती है.

आदमी:- मई भी वही डॉ. सुमित की बात कर रहा हूँ.

कीर्ति:- वो ठीक तो है न.

आदमी:- सिर्फ वो hi nahi...Unke पास आने वाले पेशेंट्स भी ठीक हो कर जाते है.

अब्ब कीर्ति की होंठो में मुस्कान aaya...Sumit का सही सलामत होने की बात सुन कर.

कीर्ति:- क्या आप बता सकते है? कहा रहते है वो?

कीर्ति से अब्ब और इंतजार नहीं हो रहा था.

आदमी:- एक्सएक्ट लोकेशन तो पता nahi....Par वो किस हॉस्पिटल में काम करते है वो बता सकता हूँ.

फिर वो आदमी कीर्ति को हॉस्पिटल का नाम बता देता है.

आदमी:- बहुत अच्छा डॉक्टर hai...Mera किडनी में स्टोन tha...Kuch जगह दिखने पर सर्जरी करने को कह रहे थे.

और डॉ. सुमित के पास गया तो उन्होंने कहा की स्टोन का साइज थोड़ा बड़ा hai...Dawai से भी निकला जा सकता hai...Agar नहीं हुआ तो सर्जरी hi करना पड़ेगा.

लेकिन दवाई काम कर गयी और दवाई से hi पत्थर निकल gaya...Aur अब्ब दर्द भी नहीं होता.

बहुत अच्छे डॉक्टर है wo...Bahut आसानी से इलाज कर diya...Kam पैसे में hi.

कोई प्रॉब्लम हो तो उनको hi dikhana...Acche से आपकी बात सुनेंगे और वैसे hi इलाज कर देंगे.

आज सुमित की तारीफ़ सुनने में कीर्ति को बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उस आदमी को शुक्रिया कह कर कीर्ति हॉस्पिटल के लिए निकल जाती है.

कीर्ति:- डॉ. सुमित अंदर है?

ओट रूम के बाहर एक डॉक्टर को कीर्ति ने पूछा.

डॉक्टर:- नहीं आज उसका ोपड डे है.

फिर देर किस बात ki...Teji से कीर्ति ोपड में पहुंच गयी वो भी बिना टिकट की.

और जैसे hi अंदर गयी सामने चेयर में बैठे शख्स को देख कर उसके लिए तो जैसे वक्त hi रुक गया.

थोड़ा लम्बे बाल, त्रिम्मेद बियर्ड में आज सुमित बहुत hi अच्छा दुःख रहा था.

कीर्ति की नजर सुमित से हैट hi नहीं रहा थी.

जब सुमित एक पेशेंट से फ्री हुआ तो सामने उसका भी नजर कीर्ति पर पड़ा.

एक पल के लिए तो उससे भी विश्वास नहीं हुआ.

और जब हुआ तो उसने दोनों hi आँखें बंद कर li...Hontho में मुस्कान के साथ हाथो का मुट्ठी बना कर खुद से hi kaha..."Yes" :यस2:

सुमित का चेहरा से hi पता चल रहा था उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

इसी पल के लिए hi तो उसने इतना इंतजार किया tha...Na जाने कितनी रातें ग़म में बिता था और कितनी उम्मीद भरी सपनो में.

खैर आज वो दिन आ hi gaya...Abb वो भी धीरे धीरे कीर्ति की और बढ़ने लगा.
 
स्टोरी के 1सत पोस्ट में hi लिखा है भाई की अपडेट वीकली hi पोस्ट कर सकता hun...Pehle थोड़ा टाइम था तो 3 दिन में देता tha...Abb बिलकुल भी टाइम नहीं मिल पाटा hai...Issi लिए वीकली hi अपडेट पोस्ट करना पद रहा hai...Kabhi तो मन करता है स्टोरी क्लोज कर के फोरम में hi आना छोड़ दू इतना फ़्रस्ट्रेशन होता hai...Lekin वादा किया है स्टोरी कम्पलीट करूँगा तो करूँगा किसी हाल mein...Bas कुछ उपदटेस और hai...Update कब आएगा इस बात का मई अभी कुछ नहीं कह सकता और ना hi 1 वीक से पहले पोस्ट करने की वादा कर सकता हूँ.
 
सबसे पहले तो भाई आपका स्वागत है स्टोरी में :हुग: और आपका मेरे बाकी कहानी के लिए कमैंट्स का भी shukriya...Aapka सवाल समझ सकता hun...Jawaab भी है जो शायद स्टोरी से hi दूँ तो बेहतर hoga...Abhi इतना hi कहूंगा की कोई जल्दबाज़ी नहीं है स्टोरी कम्पलीट करने ki...Bas फ्लो ऐसा है जिससे लग रहा है की स्टोरी कम्पलीट होने वाली hai...Abhi स्टोरी का मैं part तो बाकी hi hai...Thoda मजेदाद बनाने के लिए सस्पेंस के साथ लिख रहा हूँ जैसे शुरुवात में किया tha...Ummeed है आपको पसंद आएगा.
 
अपडेट 82

सुमित अब्ब धीरे धीरे कीर्ति के पास पहुँच गया.

सुमित:- डॉ. सुमित here...General सर्जन.

इतना कह कर सुमित अपना हाथ आगे बढ़ता है लेकिन अगले hi पल दूसरा हाथ भी आगे बढ़ा कर दोनों हाथ कीर्ति के सामने जोड़ देता है.

सुमित:- एंड फ्यूचर न्यूरोसर्जन.

अब्ब सभी डॉक्टर्स और स्टूडेंट्स का नजर सुमित पर hi था.

कीर्ति:- ये क्या कर रहे हो तुम?

सभी को अपनी तरफ देखता हुआ देख कीर्ति को थोड़ा ावक्वार्ड लग रहा था.

सुमित:- एक डॉक्टर की हैसियत से अपने पेशेंट को ग्रीट कर रहा hun...Wo क्या है न मब्ब्स के 1सत ईयर से hi पढता आया हूँ की सबसे पहले पेशेंट को ग्रीट करना चाहिए.

और आप पहली बार डॉ. सुमित के पास आयी hai...Greeting तो बनता hi है.

कीर्ति:- नहीं मई पेशेंट नहीं hun...Aur ना hi मुझे कुछ हुआ है.

सुमित:- तो फिर?

कीर्ति:- तुमसे जरुरी काम था.

सुमित:- तो फिर अपॉइंटमेंट लेना चाहिए था.

थोड़ा सीरियस आवाज में सुमित ने kaha...Kirti भी कुछ बोल नहीं पायी.

सुमित:- अरे मजाक कर रहा tha...Tumhe अपॉइंटमेंट की क्या jarurat...Chalo.

कीर्ति:- कहा?

सुमित:- तुमने hi तो कहा है डॉ. सुमित से तुम्हे कोई काम nahi...Sirf सुमित से है.

मुझे डॉक्टर से सिर्फ सुमित बनने के लिए इस रूम से बाहर निकलना होगा.

Sunil...Sambhal लेना आज का OPD...Kuch ज्यादा hi इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है.

सुनील:- दिख रहा है. :डी

फिर सुमित ोपड रूम से निकल जाता है और कीर्ति भी सुमित के साथ चलती रहती है.

कीर्ति:- आज भी तुम बिलकुल नहीं बदले.

सुमित:- बदलाव तो बहुत आया hai...Lekin शायद तुम्हे कुछ दिखा नहीं.

कीर्ति:- अब्ब धीरे धीरे dekhungi...Jaldbaazi क्या है?

कीर्ति ने बहुत प्यार से kaha...Jawaab में सुमित सिर्फ मुस्कुराया.

कीर्ति:- हम कहा जा रहे है?

सुमित:- Canteen...Baat करने का सबसे मस्त जगह.

कैंटीन में पहुँचने के बाद.

सुमित:- बहुत दिन बाद तुम से मुलाकात हुआ hai...Socha नहीं था तुम फिर कभी मिलोगी.

कीर्ति:- सोचा तो मैंने भी नहीं tha...Lekin किस्मत को कुछ और hi मंजूर था.

सुमित:- Kismat...Yahi तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त hai...Der से hi सही हर मुशीबत से मुझे बहार निकाल hai...Aaj hi देख lo...Kitna खुश हु मई.

कीर्ति भी खुश थी की सुमित उससे नाराज नहीं है और बहुत अच्छे से बातें भी कर रहा hai...Abb उससे लग रहा था की जल्द hi उससे अपनी दिल की बातें बता देनी चाहिए.

कीर्ति:- तुम मुझसे नाराज तो नहीं हो न?

सुमित:- हाँ पहले tha...Lekin अब्ब इन् बातों से ऊपर उठ चूका hun...Kabhi कभी माफ़ कर देने में hi भलाई hai...Sab कुछ भुला कर आगे बढ़ना hi समझदारी है.

कीर्ति:- सही कह रहे ho...Mai hi बेवकूफ थी जो तुम्हे समझ नहीं पायी थी.

सुमित:- वो तो तुम अभी भी समझ नहीं पायी हो.

कीर्ति:- क्या?

सुमित:- क्या तुम सच में मुझे समझती हो? कभी हम दोनों ने इतना वक्त साथ में भी तो नहीं गुजरा.

कीर्ति:- बस इतना समझती हूँ की तुम समझ से बाहर हो.

ये सुनते hi सुमित भी हसने लगा.

कीर्ति:- वो क्या कहते थे तुम खुद ko...Unimaginable एंड Unpredictable...Sahi hi hai....Aur हाँ याद आया सुमित सफस.

सुमित:- ये तुम्हे कहा से पता चला?

कीर्ति:- मेघा se...Bahut पहले उसने बताया था.

सुमित:- ओह्ह god...Tum लड़कियां भी समझ से बाहर ho...Kab किस्से क्या बात करती हो कुछ पता hi नहीं चलता.

कीर्ति:- मेघा से याद aaya...Kaisi है वो? बहुत सालो से कोई बात भी नहीं हुई उससे.

मेघा की बात सुनते hi सुमित थोड़ा सोच में पद गया.

सुमित:- बहुत खुश है वो.

कीर्ति:- चलो सही hai...Bahut अच्छी है wo...Deserve भी करती है खुश रहना.

सुमित:- सबसे ज्यादा.

सुमित:- अच्छा ये bataao...Uncle आंटी कैसे है अभी?

कीर्ति:- बहुत अच्छे है dono...Mummy का डायबिटीज और ब्लड प्रेशर दोनों hi मैनटैनेड है.

कीर्ति को सुमित का ये सवाल बहुत पसंद आया.

कीर्ति:- दोनों तुम्हारे बारे में पूछते रहते है.

ये सुनते hi सुमित ने बहुत मुश्किल से अपना हंसी रोका.

कीर्ति:- पहले की बात और thi...Abb और है.

सुमित ने इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया.

कीर्ति:- बातों hi बातों में पूछना hi भूल gayi...Rashmi कैसी है?

सुमित:- वो तो हमेशा की तरह अच्छी है.

कीर्ति:- Sumit...Sach में इतने दिन बाद मिले है हम लेकिन फिर भी बातें ऐसी कर रहे है जैसे कभी अलग हुए hi नहीं है.

सुमित:- बातें karna...Ye जो मेरा फवौरीते होब्बीएस मई से एक hai...Kab सुबह से शाम हो जाता है और रात से subah...Kuch पता hi नहीं चलता.

कीर्ति:- Chalo...Kahi बाहर चलते hai...Puraani यादें भी ताजा हो जाएगा.

सुमित:- घर में मुझे कुछ काम hai...Tum भी chalo...Sabse मिलना भी हो जाएगा.

कीर्ति:- नहीं अभी नहीं.

सुमित:- क्यों? क्या परेशानु है?

कीर्ति:- अभी कम्फर्टेबले फील नहीं कर रही hun...Sab नाराज होंगे.

सुमित:- नहीं कोई नाराज नहीं hai...Waise भी कई साल बीत गए है उस बात को ले kar...Waise भी मई तो साथ hi हूँ.

कीर्ति कुछ देर सोचती है फिर जैसे hi उससे लगता है की आज नहीं तो कल जाना hi है.

कीर्ति:- अच्छा ठीक hai...Chalo

तभी मब्ब्स के कुछ स्टूडेंट्स आते है और.

स्टूडेंट:- सर, ये क्या? अगर मम ने देख लिया तो बुरा मान जाएंगी.

सुमित:- दो दिन टाइम दे चूका hun...Abhi भी एक्यूट अप्पेंदिसिटिस अच्छे से पढ़ा नहीं है tune...Agli बार भी नहीं ओढ़ा तो मई बुरा मान जाऊँगा.

इतना सुनते hi वो स्टूडेंट चुप हो जाता है.

सुमित:- और किसी को भी कोई होमवर्क चाहिए?

स्टूडेंट:- सर सीधा hi बोल देते यहाँ से जाने के लिए.

सुमित:- समझदार लोगो को इशारा hi काफी होता hai...Waise भी तुम लोग मेरे hi स्टूडेंट ho...Samjhadaari तो नस नस में है.

ये सुनते hi वो स्टूडेंट्स हँसते हुए वह से चले जाते hai...Unke जाने के बाद.

कीर्ति:- किस मम की बारे में बात कर रहे थे ये?

सुमित:- मेरी वाइफ.

ये जवाब कीर्ति के लिए किसी सदमे से काम नहीं था.

कीर्ति:- तुम्हारी शादी??????

हैरानी में कीर्ति से बोलै hi नहीं जा रहा था.

सुमित:- पुरे 33 साल का हो चूका hun...Abb नहीं करूँगा तो कब? वैसे भी पिछले महीने hi हुआ था shaadi...Dhumdhaam से.

एक्ससिटेमेंट में सुमित bola...Lekin कीर्ति का चेहरा देखते hi.

सुमत:- क्या हुआ?

कीर्ति:- कुछ नहीं.

बहुत मुश्किल से वो boli...Sumit भी अब्ब समझ गया.

कीर्ति:- मेघा?

सुमित:- तुम्हारे जाने के बाद मेरी लाइफ में संजना आयी.

सुमित इससे आगे बोलता तभी उसके मोबाइल में फ़ोन आया.

सुमित:- हाँ darling...Aa रहा हूँ.

सुमित:- और suno...Apne हाथ का अच्छा सा लंच banaao...Ek स्पेशल गेस्ट है साथ में.

लव यू ा लोट.

सुमित की आवाज में प्यार hi प्यार tha...Bilkul वैसा जैसे कुछ साल पहले सुमित का कीर्ति के लिए था.

लेकिन आज वक्त बदल चूका था और साथ hi haalaath...Jo सुमित उसके लिए पागल हुआ फिरता था आज वही सुमित उसका दिल तोड़ चूका था.

अब्ब और दर्द उससे बर्दास्त नहीं हो रहा tha....Ek बार फिर दिल का दर्द आँखों से आंसू के रूप में बह रहा था.

कीर्ति:- Sumit...You अरे रियली ुणिमागिनाब्ले एंड ूनप्रेडिक्टेबले.

इतना कह कर कीर्ति ने आँखें झुका ली.

सुमित को भी कीर्ति का रोना अच्छा नहीं लग रहा tha...Bhale hi वो कीर्ति से नाराज था लेकिन अपनी ख़ुशी में वो कीर्ति से नाराजगी और शिकायत भी भूल गया था.

लेकिन आज कीर्ति मिली भी तो इस हालात mein...Naa hi वो पीछे मुद सकता था और ना hi मुड़ना चाहता था.

कीर्ति के लिए ागत कुछ कर सकता था तो सिर्फ dua...Dua उसकी ख़ुशी की बिना खुद ke...Isse ज्यादा कुछ नहीं.
 
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