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- Dec 5, 2013
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तुम कौन?
गेट के सामने अनजान लड़की को देख सुमित के पापा ने पूछा.
लड़की:- अंकल मई Megha...Sumit की दोस्त.
स. डैड:- Megha...Naam कुछ सुना हुआ लग रहा है.
आओ अंदर.
मेघा अंदर आती hai...Kuch hi देर में रश्मि पानी का एक गिलास ले कर आती है मेघा के पास.
स. डैड:- कुछ काम था सुमित से?
मेघा:- 2 दिन से सुमित का कॉल लग नहीं रहा tha...To सोचा सब कुवह ठीक तो है ना?
स. डैड:- उससे क्या होगा? अब्ब डॉक्टर बन गया है तो मर्जी वो hi कर रहा hai...Abhi भी सू hi रहा होगा.
स. डैड:- Rashmi...Jaa कर सुमित को बुला कर laao...Bolna की उसकी दोस्त मेघा आयी है.
मेघा नाम सुनते hi रश्मि एक नजर मेघा को देखती है और मुस्कुराती हुई चली जाती है.
Bhaiya...Bhaiya...
सुमित को कंधे से हिला कर रश्मि उठाती है.
सुमित:- क्या हो गया सुबह सुबह?
रश्मि:- Subah...Ghadi dekhiye...Dopahar के 1 बज रहे है.
सुमित:- मेरे लिए सुबह hi hai...Chal अब्ब सोने दे.
इतना कह कर सुमित दूसरी तरफ मुंह कर के फिर से सोने लगता है.
रश्मि:- मेघा आयी है.
ये सुनते hi एकदम से सुमित उठ कर बैठ जाता है.
रश्मि:- वाह रे pyaar...Behen की कोई वैल्यू nahi...Lekin मेघा की नाम सुनते hi उठ कर बैठ गए.
मुंह फुलाते हुए रश्मि बोली.
सुमित:- तू और तेरा nonsense...Kisne कह दिया मई मेघा से प्यार करता हूँ?
रश्मि:- सब दिख रहा है.
सुमित:- हाँ तुझे तो सब कुछ दीखता है किताब के अलावा.
सुमित बढ़ से उतारते हुए बोलै.
रश्मि:- क्या भैया? भाभी से मिलने के जल्दबाज़ी में आज आपके सत्तीरे में भी दम नहीं है. :lol1:
सुमित बिना कुछ बोले रूम से निकल गया.
दूसरी तरफ
स. डैड:- तुम सुमित के साथ hi पढ़ती हो ना?
मेघा:- जी अंकल.
स. डैड:- सुना था सुमित से एक दो बार तुम्हारा नाम.
मेघा:- मेरे बारे में?
स. डैड:- वो कुछ छुपाता नहीं है mujhse...Uske कॉलेज के दोस्तों से ले कर जितने भी दोस्त है सभी के बारे में जानता हूँ.
ऐसे में एक दो बार तुम्हारा नाम भी सुना था.
"क्या सुना है आपने?" ये सवाल मेघा पूछना चाहती थी लेकिन ज्यादा जान पहचान ना होने से वो पूछ नहीं payi...Sumit के पापा बहुत से बात कर रहे थे लेकिन शायद कुछ hi देर की मुकाकात की वजह से मेघा उतना कम्फर्टेबले नहीं लग रही थी.
मेघा की आँखें फभी जे लिए सिर्फ सुमित को hi ढूंढ रही थी.
तब तक सुमित के साथ साथ सुमित की माँ भी चाय ले कर आ जाती है.
स. डैड:- तेरा hi इंतजार हो रहा था.
सुमित:- तकलीफ के लिए माफ़ी चाहता हूँ.
सुमित को अपने पापा से ऐसे बिंदास बात करता देख मेघा को थोड़ा हैरानी हुआ.
स. डैड:- तू और तेरा takleef...Aadat सी हो गयी है abb...Takleef तो तेरी माँ और मेघा को हुआ hai...Jo इतना इंतजार करवाया.
स. माँ:- अब्ब तो मुझे भी आदत हो गयी hai...Iski तकलीफ सहने ki...Ek तो इसका उठने का टाइम ऊपर से खाना खाने का time...Din भर इंतजार करना पड़ता है.
सुमित कुछ नहीं kehta...Wo मेघा के बारे में hi सोच रहा था जब से वो सू कर उठा tha...Aaj मेघा को पहली बार घर में देख वो काफी हैरान tha...Kuch जरुरी बात hi होगी जो मेघा आज यहाँ आयी hai..Kuch यही बात सुमित के दिमाग में चल रहा था.
मेघा:- और कॉलेज में प्रोफेसर pareshan...Sumit को एब्सेंट और लेट होता देख.
स. डैड:- लेकिन तू तो रोज कॉलेज जाता था न?
इस बार उनकी आवाज में भी हैरानी था.
मेघा:- सॉरी Uncle...Mai 1सत और 2ंद ईयर की बात कर रही थी.
स. माँ:- बात चाहे किसी वक्त की ho...Iss नालायक ने किसी को नहीं छोड़ा hai...Sabhi को परेशां करके रख दिया है.
रश्मि:- और सबसे ज्यादा मुझे.
सुमित:- सुमित SFS...Naam तो पता hi होगा.
स. डैड:- ये कैसा नाम है?
स. माँ:- ये नाम तो कभी नहीं सुना मैंने.
रश्मि:- इस नाम से तो आप बिलकुल जोकर लग रहे है.
तभी सुमित को एहसास हुआ ये नाम तो उसने सिर्फ मेघा को hi बताया tha...Ek नजर वो मेघा को देखता है जो सभी की बातें सुन हंस रही थी.
सुमित:- सुना नहीं है तो सुन lijiye...Sumit सफस यानी की स्ट्रैट फॉरवर्ड Sumit...Sirf मई hi फॉरवर्ड रहता hun...Baaki मेरे आस पास के सभी खुद बैकवर्ड हो जाते hai...Aise में किसी का hi परेशान होना आम बात है.
स. Dad:-Accha chalo...Inn दोनों को थोड़ा वक्त दो.
इतना कह कर वो उठ कर जाने लगते है.
मेघा:- अरे नहीं अंकल...
स. डैड:- इतना तो समझता hun...Agar पर्सनल बात नहीं होता तो तुम सबके सामने भी सुमित से बात कर सकती thi...Kuch पर्सनल और इम्पोर्टेन्ट hi होगा जो सब के सामने नहीं कह पा रही हो.
इतना कह कर वो वह से चले जाते है.
स. माँ:- अच्छा तुम दोनों बातें karo...Mein किचन में जाती हूँ.
सुमित:- (तो रश्मि) तुझे क्या अलग से रिक्वेस्ट करना पड़ेगा?
रश्मि भी नाक फुला कर वह से जाती है.
अब्ब सुमित फिर से सीरियस हो गया था ये जानने के लिए की मेघा क्यों आयी है.
सुमित:- हाँ bataao...Kya काम था?
मेघा:- ऐसे hi...Kya सिर्फ काम होगा तब hi आ सकती हूँ तुम्हारे घर?
सुमित:- नहीं nahi...Wo मतलब नहीं था mera...Aaj तक भले hi कितना भी जरुरी काम हो तुम घर नहीं आयी hi.
मेघा:- तो क्या अब्ब नहीं आ सकती? :हिंतहिंट:
सुमित को समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे.
मेघा:- समझ hi गए होंगे tum...Sirf तुम hi परेशां नहीं कर sakte...Mujhe भी आता है इर्रिटेट करना तुम्हारी तरह.
याद है हमारे मुलाक़ात के शुरुवाती din...Kitna परेशान करते थे तुम मुझे?
सुमित:- हाँ.
फींका सा जवाब दिया सुमित ने.
मेघा:- अगर सच कहु तो सच में तुम्हारी चिंता हो रहा tha...Issi लिए हाल चाल पूछने आ गयी.
सुमित:- मेरा क्या hai...Thik तो नहीं hun...Lekin बहुत जल्द हो jaaunga...Bas कुछ वक्त aur...Kirti को भुला जार नयी शुरुवात कर लूंगा.
मग्गा:- भुला पाओगे?
सुमित:- अगर सच कहु तो ना. क्या करू मेमोरी hi इतना स्ट्रांग है. :डी
फिर सुमित सीरियस हो गया.
सुमित:- लेकिन कीर्ति से भी ज्यादा अपने करियर को इम्पोर्टेंस dunga...Sirf और सिर्फ अपने करियर में focus...Pin पॉइंट focus...Jaise अर्जुन का फोकस मछली की जगह मछली की आँखों में tha...Waisa फोकस.
और कीर्ति बाद में कभी मिल भी जाए तो ऐसा लगे की वो मेरी प्यार नहीं वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी.
मेघा:- सच में तुम्हे ऐसे डेटर्मीनेड देख बहुत अच्छा laga...Soch नहीं पा रही थी तुम्हारा क्या हाल हुआ hoga...Kirti की इंगेजमेंट देखने के baad...Phone भी नहीं लग रहा था और ना hi किसी तरह से कांटेक्ट कर पा रही thi...Bas यही दर तुम्हारे घर तक खिंचाई थी.
सुमित:- जितना रोना था पहके hi रू चूका hun...Engagement के बाद सिर्फ आधा घंटा hi रोया tha...Abb तो शायद आंसू भी सुख गए है.
खुद को थोड़ा तुम दे रहा था इसी लिए मोबाइल से खुद को दूर कर लिया कुछ दिनों के liye...Sabhi सोशल मीडिया डीएक्टिवेट करने के साथ मोबाइल भी स्वित्चेद ऑफ.
मेघा:- रह पाओगे मोबाइल के बिना? ये भी अलग hi एडिक्शन है.
सुमित:- (लाफिंग) प्यार का एडिक्शन, और सिगरेट दारु के एडिक्शन के सामने तो कुछ भी नहीं है.
मोबाइल का जरुरत अब्ब कुछ इम्पोर्टेन्ट कॉन्टेक्ट्स के लिए और इंटरनेट की जरुरत सिर्फ पढाई के लिए.
मेघा इस बात में कुछ नहीं kehti...Wo सिर्फ सुमित की कॉन्फिडेंस को देख रही थी.
सुमित:- मेघा अगर तुम गुस्सा नहीं होगी तो क्या एक बात पूछ सकता हूँ?
मेघा:- हाँ पूछो.
सुमित:- तुमने विकाश का प्यार रिजेक्ट कर दिया?
मेघा:- हाँ.
सुमित:- लेकिन क्यों? वो तुमसे सच में प्यार करता है?
मेघा:- हाँ उसका प्यार सच्चा hai...Aur वो बहुत अच्छा भी hai...Lekin मुझे भी तो प्यार होना chahiye...Usse हमेशा से एक अच्छा दोस्त hi माना hai...Isse ज्यादा कुछ नहीं.
सुमित:- लेकिन.
मेघा:- लेकिन वेकिन कुछ नहीं.
थोड़ा गुस्सा में मेघा ने कहना जाती रखा.
मेघा:- तुमने hi तो कहा था कीर्ति के बाद अब्ब प्यार में कोई ध्यान नहीं डोज? एक सवाल hai...Kya कोई लड़की तुमसे सच में प्यार करे और वो बहुत अच्छी भी ho...Kya तुम उसका प्यार एक्सेप्ट करोगे?
सुमित:- अब्ब वो ताकत नहीं रहा और अपना करियर में भी फोकस करना है.
मेघा:- विकाश बहुत अच्छा है इसका ये मतलब तो नहीं की मुझे भी उससे प्यार हो hi जाएगा.
वैसे मुझे भी अपने करियर पर फोकस करना hai...Issi लिए मुझे भी प्यार में अब कोई शौख नहीं है.
आखिरी की बात मेघा ने बड़ी चलाखी से कहा.
सुमित:- अरे तुम तो गुस्सा हो गयी.
मेघा:- बात hi ऐसा किया है तुमने.
फिर दोनों के बिच इधर उधर की बातें होती है.
मेघा:- अच्छा तो मई चलती हूँ.
सुमित भी मेघा को ड्राप करने के लिए उसके साथ बाहर तक जाता है.
सुमित:- मेरा हालचाल पूछने के लिए यहाँ तक आयी tum...Bahut ैक्सः लगा.
मेघा मुस्कुराते हुए चाकी जाती है.
स. डैड:- काफी लम्बा बात चीत चला?
सुमित:- कुछ जरुरी बातें tha...Iss वजह से.
स. डैड:- समझ सकता हूँ क्या जरुरी बातें था.
सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता है.
स. डैड:- वैसे कब जाओ मई मेघा के घर?
सुमित:- किस लिए?
स. डैड:- उसकी हाथ मांगने तेरे लिए?
सुमित:- क्या पापा आप bhi...Aap कुछ ज्यादा hi सोच रहे है. :डोह:
स. डैड:- मई ज्यादा सोच रहा हूँ?
सुमित:- हाँ इस मामले में.
इतना कह कर सुमित वह से सीधा अपने रूम में चला जाता hai...Sumit के पापा उससे जाते हुए बस देखते रहते hai...Unke चेहरे में एक अलग hi मुस्कान था.
2 इयर्स लेटर
तुम कौन?
गेट के सामने अनजान लड़की को देख सुमित के पापा ने पूछा.
लड़की:- अंकल मई Megha...Sumit की दोस्त.
स. डैड:- Megha...Naam कुछ सुना हुआ लग रहा है.
आओ अंदर.
मेघा अंदर आती hai...Kuch hi देर में रश्मि पानी का एक गिलास ले कर आती है मेघा के पास.
स. डैड:- कुछ काम था सुमित से?
मेघा:- 2 दिन से सुमित का कॉल लग नहीं रहा tha...To सोचा सब कुवह ठीक तो है ना?
स. डैड:- उससे क्या होगा? अब्ब डॉक्टर बन गया है तो मर्जी वो hi कर रहा hai...Abhi भी सू hi रहा होगा.
स. डैड:- Rashmi...Jaa कर सुमित को बुला कर laao...Bolna की उसकी दोस्त मेघा आयी है.
मेघा नाम सुनते hi रश्मि एक नजर मेघा को देखती है और मुस्कुराती हुई चली जाती है.
Bhaiya...Bhaiya...
सुमित को कंधे से हिला कर रश्मि उठाती है.
सुमित:- क्या हो गया सुबह सुबह?
रश्मि:- Subah...Ghadi dekhiye...Dopahar के 1 बज रहे है.
सुमित:- मेरे लिए सुबह hi hai...Chal अब्ब सोने दे.
इतना कह कर सुमित दूसरी तरफ मुंह कर के फिर से सोने लगता है.
रश्मि:- मेघा आयी है.
ये सुनते hi एकदम से सुमित उठ कर बैठ जाता है.
रश्मि:- वाह रे pyaar...Behen की कोई वैल्यू nahi...Lekin मेघा की नाम सुनते hi उठ कर बैठ गए.
मुंह फुलाते हुए रश्मि बोली.
सुमित:- तू और तेरा nonsense...Kisne कह दिया मई मेघा से प्यार करता हूँ?
रश्मि:- सब दिख रहा है.
सुमित:- हाँ तुझे तो सब कुछ दीखता है किताब के अलावा.
सुमित बढ़ से उतारते हुए बोलै.
रश्मि:- क्या भैया? भाभी से मिलने के जल्दबाज़ी में आज आपके सत्तीरे में भी दम नहीं है. :lol1:
सुमित बिना कुछ बोले रूम से निकल गया.
दूसरी तरफ
स. डैड:- तुम सुमित के साथ hi पढ़ती हो ना?
मेघा:- जी अंकल.
स. डैड:- सुना था सुमित से एक दो बार तुम्हारा नाम.
मेघा:- मेरे बारे में?
स. डैड:- वो कुछ छुपाता नहीं है mujhse...Uske कॉलेज के दोस्तों से ले कर जितने भी दोस्त है सभी के बारे में जानता हूँ.
ऐसे में एक दो बार तुम्हारा नाम भी सुना था.
"क्या सुना है आपने?" ये सवाल मेघा पूछना चाहती थी लेकिन ज्यादा जान पहचान ना होने से वो पूछ नहीं payi...Sumit के पापा बहुत से बात कर रहे थे लेकिन शायद कुछ hi देर की मुकाकात की वजह से मेघा उतना कम्फर्टेबले नहीं लग रही थी.
मेघा की आँखें फभी जे लिए सिर्फ सुमित को hi ढूंढ रही थी.
तब तक सुमित के साथ साथ सुमित की माँ भी चाय ले कर आ जाती है.
स. डैड:- तेरा hi इंतजार हो रहा था.
सुमित:- तकलीफ के लिए माफ़ी चाहता हूँ.
सुमित को अपने पापा से ऐसे बिंदास बात करता देख मेघा को थोड़ा हैरानी हुआ.
स. डैड:- तू और तेरा takleef...Aadat सी हो गयी है abb...Takleef तो तेरी माँ और मेघा को हुआ hai...Jo इतना इंतजार करवाया.
स. माँ:- अब्ब तो मुझे भी आदत हो गयी hai...Iski तकलीफ सहने ki...Ek तो इसका उठने का टाइम ऊपर से खाना खाने का time...Din भर इंतजार करना पड़ता है.
सुमित कुछ नहीं kehta...Wo मेघा के बारे में hi सोच रहा था जब से वो सू कर उठा tha...Aaj मेघा को पहली बार घर में देख वो काफी हैरान tha...Kuch जरुरी बात hi होगी जो मेघा आज यहाँ आयी hai..Kuch यही बात सुमित के दिमाग में चल रहा था.
मेघा:- और कॉलेज में प्रोफेसर pareshan...Sumit को एब्सेंट और लेट होता देख.
स. डैड:- लेकिन तू तो रोज कॉलेज जाता था न?
इस बार उनकी आवाज में भी हैरानी था.
मेघा:- सॉरी Uncle...Mai 1सत और 2ंद ईयर की बात कर रही थी.
स. माँ:- बात चाहे किसी वक्त की ho...Iss नालायक ने किसी को नहीं छोड़ा hai...Sabhi को परेशां करके रख दिया है.
रश्मि:- और सबसे ज्यादा मुझे.
सुमित:- सुमित SFS...Naam तो पता hi होगा.
स. डैड:- ये कैसा नाम है?
स. माँ:- ये नाम तो कभी नहीं सुना मैंने.
रश्मि:- इस नाम से तो आप बिलकुल जोकर लग रहे है.
तभी सुमित को एहसास हुआ ये नाम तो उसने सिर्फ मेघा को hi बताया tha...Ek नजर वो मेघा को देखता है जो सभी की बातें सुन हंस रही थी.
सुमित:- सुना नहीं है तो सुन lijiye...Sumit सफस यानी की स्ट्रैट फॉरवर्ड Sumit...Sirf मई hi फॉरवर्ड रहता hun...Baaki मेरे आस पास के सभी खुद बैकवर्ड हो जाते hai...Aise में किसी का hi परेशान होना आम बात है.
स. Dad:-Accha chalo...Inn दोनों को थोड़ा वक्त दो.
इतना कह कर वो उठ कर जाने लगते है.
मेघा:- अरे नहीं अंकल...
स. डैड:- इतना तो समझता hun...Agar पर्सनल बात नहीं होता तो तुम सबके सामने भी सुमित से बात कर सकती thi...Kuch पर्सनल और इम्पोर्टेन्ट hi होगा जो सब के सामने नहीं कह पा रही हो.
इतना कह कर वो वह से चले जाते है.
स. माँ:- अच्छा तुम दोनों बातें karo...Mein किचन में जाती हूँ.
सुमित:- (तो रश्मि) तुझे क्या अलग से रिक्वेस्ट करना पड़ेगा?
रश्मि भी नाक फुला कर वह से जाती है.
अब्ब सुमित फिर से सीरियस हो गया था ये जानने के लिए की मेघा क्यों आयी है.
सुमित:- हाँ bataao...Kya काम था?
मेघा:- ऐसे hi...Kya सिर्फ काम होगा तब hi आ सकती हूँ तुम्हारे घर?
सुमित:- नहीं nahi...Wo मतलब नहीं था mera...Aaj तक भले hi कितना भी जरुरी काम हो तुम घर नहीं आयी hi.
मेघा:- तो क्या अब्ब नहीं आ सकती? :हिंतहिंट:
सुमित को समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे.
मेघा:- समझ hi गए होंगे tum...Sirf तुम hi परेशां नहीं कर sakte...Mujhe भी आता है इर्रिटेट करना तुम्हारी तरह.
याद है हमारे मुलाक़ात के शुरुवाती din...Kitna परेशान करते थे तुम मुझे?
सुमित:- हाँ.
फींका सा जवाब दिया सुमित ने.
मेघा:- अगर सच कहु तो सच में तुम्हारी चिंता हो रहा tha...Issi लिए हाल चाल पूछने आ गयी.
सुमित:- मेरा क्या hai...Thik तो नहीं hun...Lekin बहुत जल्द हो jaaunga...Bas कुछ वक्त aur...Kirti को भुला जार नयी शुरुवात कर लूंगा.
मग्गा:- भुला पाओगे?
सुमित:- अगर सच कहु तो ना. क्या करू मेमोरी hi इतना स्ट्रांग है. :डी
फिर सुमित सीरियस हो गया.
सुमित:- लेकिन कीर्ति से भी ज्यादा अपने करियर को इम्पोर्टेंस dunga...Sirf और सिर्फ अपने करियर में focus...Pin पॉइंट focus...Jaise अर्जुन का फोकस मछली की जगह मछली की आँखों में tha...Waisa फोकस.
और कीर्ति बाद में कभी मिल भी जाए तो ऐसा लगे की वो मेरी प्यार नहीं वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी.
मेघा:- सच में तुम्हे ऐसे डेटर्मीनेड देख बहुत अच्छा laga...Soch नहीं पा रही थी तुम्हारा क्या हाल हुआ hoga...Kirti की इंगेजमेंट देखने के baad...Phone भी नहीं लग रहा था और ना hi किसी तरह से कांटेक्ट कर पा रही thi...Bas यही दर तुम्हारे घर तक खिंचाई थी.
सुमित:- जितना रोना था पहके hi रू चूका hun...Engagement के बाद सिर्फ आधा घंटा hi रोया tha...Abb तो शायद आंसू भी सुख गए है.
खुद को थोड़ा तुम दे रहा था इसी लिए मोबाइल से खुद को दूर कर लिया कुछ दिनों के liye...Sabhi सोशल मीडिया डीएक्टिवेट करने के साथ मोबाइल भी स्वित्चेद ऑफ.
मेघा:- रह पाओगे मोबाइल के बिना? ये भी अलग hi एडिक्शन है.
सुमित:- (लाफिंग) प्यार का एडिक्शन, और सिगरेट दारु के एडिक्शन के सामने तो कुछ भी नहीं है.
मोबाइल का जरुरत अब्ब कुछ इम्पोर्टेन्ट कॉन्टेक्ट्स के लिए और इंटरनेट की जरुरत सिर्फ पढाई के लिए.
मेघा इस बात में कुछ नहीं kehti...Wo सिर्फ सुमित की कॉन्फिडेंस को देख रही थी.
सुमित:- मेघा अगर तुम गुस्सा नहीं होगी तो क्या एक बात पूछ सकता हूँ?
मेघा:- हाँ पूछो.
सुमित:- तुमने विकाश का प्यार रिजेक्ट कर दिया?
मेघा:- हाँ.
सुमित:- लेकिन क्यों? वो तुमसे सच में प्यार करता है?
मेघा:- हाँ उसका प्यार सच्चा hai...Aur वो बहुत अच्छा भी hai...Lekin मुझे भी तो प्यार होना chahiye...Usse हमेशा से एक अच्छा दोस्त hi माना hai...Isse ज्यादा कुछ नहीं.
सुमित:- लेकिन.
मेघा:- लेकिन वेकिन कुछ नहीं.
थोड़ा गुस्सा में मेघा ने कहना जाती रखा.
मेघा:- तुमने hi तो कहा था कीर्ति के बाद अब्ब प्यार में कोई ध्यान नहीं डोज? एक सवाल hai...Kya कोई लड़की तुमसे सच में प्यार करे और वो बहुत अच्छी भी ho...Kya तुम उसका प्यार एक्सेप्ट करोगे?
सुमित:- अब्ब वो ताकत नहीं रहा और अपना करियर में भी फोकस करना है.
मेघा:- विकाश बहुत अच्छा है इसका ये मतलब तो नहीं की मुझे भी उससे प्यार हो hi जाएगा.
वैसे मुझे भी अपने करियर पर फोकस करना hai...Issi लिए मुझे भी प्यार में अब कोई शौख नहीं है.
आखिरी की बात मेघा ने बड़ी चलाखी से कहा.
सुमित:- अरे तुम तो गुस्सा हो गयी.
मेघा:- बात hi ऐसा किया है तुमने.
फिर दोनों के बिच इधर उधर की बातें होती है.
मेघा:- अच्छा तो मई चलती हूँ.
सुमित भी मेघा को ड्राप करने के लिए उसके साथ बाहर तक जाता है.
सुमित:- मेरा हालचाल पूछने के लिए यहाँ तक आयी tum...Bahut ैक्सः लगा.
मेघा मुस्कुराते हुए चाकी जाती है.
स. डैड:- काफी लम्बा बात चीत चला?
सुमित:- कुछ जरुरी बातें tha...Iss वजह से.
स. डैड:- समझ सकता हूँ क्या जरुरी बातें था.
सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता है.
स. डैड:- वैसे कब जाओ मई मेघा के घर?
सुमित:- किस लिए?
स. डैड:- उसकी हाथ मांगने तेरे लिए?
सुमित:- क्या पापा आप bhi...Aap कुछ ज्यादा hi सोच रहे है. :डोह:
स. डैड:- मई ज्यादा सोच रहा हूँ?
सुमित:- हाँ इस मामले में.
इतना कह कर सुमित वह से सीधा अपने रूम में चला जाता hai...Sumit के पापा उससे जाते हुए बस देखते रहते hai...Unke चेहरे में एक अलग hi मुस्कान था.
2 इयर्स लेटर