Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 15 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 79

तुम कौन?

गेट के सामने अनजान लड़की को देख सुमित के पापा ने पूछा.

लड़की:- अंकल मई Megha...Sumit की दोस्त.

स. डैड:- Megha...Naam कुछ सुना हुआ लग रहा है.

आओ अंदर.

मेघा अंदर आती hai...Kuch hi देर में रश्मि पानी का एक गिलास ले कर आती है मेघा के पास.

स. डैड:- कुछ काम था सुमित से?

मेघा:- 2 दिन से सुमित का कॉल लग नहीं रहा tha...To सोचा सब कुवह ठीक तो है ना?

स. डैड:- उससे क्या होगा? अब्ब डॉक्टर बन गया है तो मर्जी वो hi कर रहा hai...Abhi भी सू hi रहा होगा.

स. डैड:- Rashmi...Jaa कर सुमित को बुला कर laao...Bolna की उसकी दोस्त मेघा आयी है.

मेघा नाम सुनते hi रश्मि एक नजर मेघा को देखती है और मुस्कुराती हुई चली जाती है.

Bhaiya...Bhaiya...

सुमित को कंधे से हिला कर रश्मि उठाती है.

सुमित:- क्या हो गया सुबह सुबह?

रश्मि:- Subah...Ghadi dekhiye...Dopahar के 1 बज रहे है.

सुमित:- मेरे लिए सुबह hi hai...Chal अब्ब सोने दे.

इतना कह कर सुमित दूसरी तरफ मुंह कर के फिर से सोने लगता है.

रश्मि:- मेघा आयी है.

ये सुनते hi एकदम से सुमित उठ कर बैठ जाता है.

रश्मि:- वाह रे pyaar...Behen की कोई वैल्यू nahi...Lekin मेघा की नाम सुनते hi उठ कर बैठ गए.

मुंह फुलाते हुए रश्मि बोली.

सुमित:- तू और तेरा nonsense...Kisne कह दिया मई मेघा से प्यार करता हूँ?

रश्मि:- सब दिख रहा है.

सुमित:- हाँ तुझे तो सब कुछ दीखता है किताब के अलावा.

सुमित बढ़ से उतारते हुए बोलै.

रश्मि:- क्या भैया? भाभी से मिलने के जल्दबाज़ी में आज आपके सत्तीरे में भी दम नहीं है. :lol1:

सुमित बिना कुछ बोले रूम से निकल गया.

दूसरी तरफ

स. डैड:- तुम सुमित के साथ hi पढ़ती हो ना?

मेघा:- जी अंकल.

स. डैड:- सुना था सुमित से एक दो बार तुम्हारा नाम.

मेघा:- मेरे बारे में?

स. डैड:- वो कुछ छुपाता नहीं है mujhse...Uske कॉलेज के दोस्तों से ले कर जितने भी दोस्त है सभी के बारे में जानता हूँ.

ऐसे में एक दो बार तुम्हारा नाम भी सुना था.

"क्या सुना है आपने?" ये सवाल मेघा पूछना चाहती थी लेकिन ज्यादा जान पहचान ना होने से वो पूछ नहीं payi...Sumit के पापा बहुत से बात कर रहे थे लेकिन शायद कुछ hi देर की मुकाकात की वजह से मेघा उतना कम्फर्टेबले नहीं लग रही थी.

मेघा की आँखें फभी जे लिए सिर्फ सुमित को hi ढूंढ रही थी.

तब तक सुमित के साथ साथ सुमित की माँ भी चाय ले कर आ जाती है.

स. डैड:- तेरा hi इंतजार हो रहा था.

सुमित:- तकलीफ के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

सुमित को अपने पापा से ऐसे बिंदास बात करता देख मेघा को थोड़ा हैरानी हुआ.

स. डैड:- तू और तेरा takleef...Aadat सी हो गयी है abb...Takleef तो तेरी माँ और मेघा को हुआ hai...Jo इतना इंतजार करवाया.

स. माँ:- अब्ब तो मुझे भी आदत हो गयी hai...Iski तकलीफ सहने ki...Ek तो इसका उठने का टाइम ऊपर से खाना खाने का time...Din भर इंतजार करना पड़ता है.

सुमित कुछ नहीं kehta...Wo मेघा के बारे में hi सोच रहा था जब से वो सू कर उठा tha...Aaj मेघा को पहली बार घर में देख वो काफी हैरान tha...Kuch जरुरी बात hi होगी जो मेघा आज यहाँ आयी hai..Kuch यही बात सुमित के दिमाग में चल रहा था.

मेघा:- और कॉलेज में प्रोफेसर pareshan...Sumit को एब्सेंट और लेट होता देख.

स. डैड:- लेकिन तू तो रोज कॉलेज जाता था न?

इस बार उनकी आवाज में भी हैरानी था.

मेघा:- सॉरी Uncle...Mai 1सत और 2ंद ईयर की बात कर रही थी.

स. माँ:- बात चाहे किसी वक्त की ho...Iss नालायक ने किसी को नहीं छोड़ा hai...Sabhi को परेशां करके रख दिया है.

रश्मि:- और सबसे ज्यादा मुझे. :(

सुमित:- सुमित SFS...Naam तो पता hi होगा.

स. डैड:- ये कैसा नाम है?

स. माँ:- ये नाम तो कभी नहीं सुना मैंने.

रश्मि:- इस नाम से तो आप बिलकुल जोकर लग रहे है.

तभी सुमित को एहसास हुआ ये नाम तो उसने सिर्फ मेघा को hi बताया tha...Ek नजर वो मेघा को देखता है जो सभी की बातें सुन हंस रही थी.

सुमित:- सुना नहीं है तो सुन lijiye...Sumit सफस यानी की स्ट्रैट फॉरवर्ड Sumit...Sirf मई hi फॉरवर्ड रहता hun...Baaki मेरे आस पास के सभी खुद बैकवर्ड हो जाते hai...Aise में किसी का hi परेशान होना आम बात है.

स. Dad:-Accha chalo...Inn दोनों को थोड़ा वक्त दो.

इतना कह कर वो उठ कर जाने लगते है.

मेघा:- अरे नहीं अंकल...

स. डैड:- इतना तो समझता hun...Agar पर्सनल बात नहीं होता तो तुम सबके सामने भी सुमित से बात कर सकती thi...Kuch पर्सनल और इम्पोर्टेन्ट hi होगा जो सब के सामने नहीं कह पा रही हो.

इतना कह कर वो वह से चले जाते है.

स. माँ:- अच्छा तुम दोनों बातें karo...Mein किचन में जाती हूँ.

सुमित:- (तो रश्मि) तुझे क्या अलग से रिक्वेस्ट करना पड़ेगा?

रश्मि भी नाक फुला कर वह से जाती है.

अब्ब सुमित फिर से सीरियस हो गया था ये जानने के लिए की मेघा क्यों आयी है.

सुमित:- हाँ bataao...Kya काम था?

मेघा:- ऐसे hi...Kya सिर्फ काम होगा तब hi आ सकती हूँ तुम्हारे घर?

सुमित:- नहीं nahi...Wo मतलब नहीं था mera...Aaj तक भले hi कितना भी जरुरी काम हो तुम घर नहीं आयी hi.

मेघा:- तो क्या अब्ब नहीं आ सकती? :हिंतहिंट:

सुमित को समझ में नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे.

मेघा:- समझ hi गए होंगे tum...Sirf तुम hi परेशां नहीं कर sakte...Mujhe भी आता है इर्रिटेट करना तुम्हारी तरह.

याद है हमारे मुलाक़ात के शुरुवाती din...Kitna परेशान करते थे तुम मुझे?

सुमित:- हाँ.

फींका सा जवाब दिया सुमित ने.

मेघा:- अगर सच कहु तो सच में तुम्हारी चिंता हो रहा tha...Issi लिए हाल चाल पूछने आ गयी.

सुमित:- मेरा क्या hai...Thik तो नहीं hun...Lekin बहुत जल्द हो jaaunga...Bas कुछ वक्त aur...Kirti को भुला जार नयी शुरुवात कर लूंगा.

मग्गा:- भुला पाओगे?

सुमित:- अगर सच कहु तो ना. क्या करू मेमोरी hi इतना स्ट्रांग है. :डी

फिर सुमित सीरियस हो गया.

सुमित:- लेकिन कीर्ति से भी ज्यादा अपने करियर को इम्पोर्टेंस dunga...Sirf और सिर्फ अपने करियर में focus...Pin पॉइंट focus...Jaise अर्जुन का फोकस मछली की जगह मछली की आँखों में tha...Waisa फोकस.

और कीर्ति बाद में कभी मिल भी जाए तो ऐसा लगे की वो मेरी प्यार नहीं वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी.

मेघा:- सच में तुम्हे ऐसे डेटर्मीनेड देख बहुत अच्छा laga...Soch नहीं पा रही थी तुम्हारा क्या हाल हुआ hoga...Kirti की इंगेजमेंट देखने के baad...Phone भी नहीं लग रहा था और ना hi किसी तरह से कांटेक्ट कर पा रही thi...Bas यही दर तुम्हारे घर तक खिंचाई थी.

सुमित:- जितना रोना था पहके hi रू चूका hun...Engagement के बाद सिर्फ आधा घंटा hi रोया tha...Abb तो शायद आंसू भी सुख गए है.

खुद को थोड़ा तुम दे रहा था इसी लिए मोबाइल से खुद को दूर कर लिया कुछ दिनों के liye...Sabhi सोशल मीडिया डीएक्टिवेट करने के साथ मोबाइल भी स्वित्चेद ऑफ.

मेघा:- रह पाओगे मोबाइल के बिना? ये भी अलग hi एडिक्शन है.

सुमित:- (लाफिंग) प्यार का एडिक्शन, और सिगरेट दारु के एडिक्शन के सामने तो कुछ भी नहीं है.

मोबाइल का जरुरत अब्ब कुछ इम्पोर्टेन्ट कॉन्टेक्ट्स के लिए और इंटरनेट की जरुरत सिर्फ पढाई के लिए.

मेघा इस बात में कुछ नहीं kehti...Wo सिर्फ सुमित की कॉन्फिडेंस को देख रही थी.

सुमित:- मेघा अगर तुम गुस्सा नहीं होगी तो क्या एक बात पूछ सकता हूँ?

मेघा:- हाँ पूछो.

सुमित:- तुमने विकाश का प्यार रिजेक्ट कर दिया?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- लेकिन क्यों? वो तुमसे सच में प्यार करता है?

मेघा:- हाँ उसका प्यार सच्चा hai...Aur वो बहुत अच्छा भी hai...Lekin मुझे भी तो प्यार होना chahiye...Usse हमेशा से एक अच्छा दोस्त hi माना hai...Isse ज्यादा कुछ नहीं.

सुमित:- लेकिन.

मेघा:- लेकिन वेकिन कुछ नहीं.

थोड़ा गुस्सा में मेघा ने कहना जाती रखा.

मेघा:- तुमने hi तो कहा था कीर्ति के बाद अब्ब प्यार में कोई ध्यान नहीं डोज? एक सवाल hai...Kya कोई लड़की तुमसे सच में प्यार करे और वो बहुत अच्छी भी ho...Kya तुम उसका प्यार एक्सेप्ट करोगे?

सुमित:- अब्ब वो ताकत नहीं रहा और अपना करियर में भी फोकस करना है.

मेघा:- विकाश बहुत अच्छा है इसका ये मतलब तो नहीं की मुझे भी उससे प्यार हो hi जाएगा.

वैसे मुझे भी अपने करियर पर फोकस करना hai...Issi लिए मुझे भी प्यार में अब कोई शौख नहीं है.

आखिरी की बात मेघा ने बड़ी चलाखी से कहा.

सुमित:- अरे तुम तो गुस्सा हो गयी.

मेघा:- बात hi ऐसा किया है तुमने.

फिर दोनों के बिच इधर उधर की बातें होती है.

मेघा:- अच्छा तो मई चलती हूँ.

सुमित भी मेघा को ड्राप करने के लिए उसके साथ बाहर तक जाता है.

सुमित:- मेरा हालचाल पूछने के लिए यहाँ तक आयी tum...Bahut ैक्सः लगा.

मेघा मुस्कुराते हुए चाकी जाती है.

स. डैड:- काफी लम्बा बात चीत चला?

सुमित:- कुछ जरुरी बातें tha...Iss वजह से.

स. डैड:- समझ सकता हूँ क्या जरुरी बातें था.

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता है.

स. डैड:- वैसे कब जाओ मई मेघा के घर?

सुमित:- किस लिए?

स. डैड:- उसकी हाथ मांगने तेरे लिए?

सुमित:- क्या पापा आप bhi...Aap कुछ ज्यादा hi सोच रहे है. :डोह:

स. डैड:- मई ज्यादा सोच रहा हूँ?

सुमित:- हाँ इस मामले में.

इतना कह कर सुमित वह से सीधा अपने रूम में चला जाता hai...Sumit के पापा उससे जाते हुए बस देखते रहते hai...Unke चेहरे में एक अलग hi मुस्कान था.

2 इयर्स लेटर
 
अपडेट 80


2 इयर्स लेटर


Hello.

नंबर भले hi अनजाना था लेकिन आवाज पहचानने में सुमित को बिलकुल भी वक्त नहीं लगा.

सुमित:- हाँ Megha...Aaj बहुत दिन बाद तुम्हे मेरा याद आया?

मेघा:- और याद सिर्फ मई hi तुम्हे करती hun...Warna तुम्हे तो मुझसे कोई मतलब नहीं.

सुमित:- ऐसी बात नहीं है.

मेघा:- फिर कैसी बात है?

सुमित थोड़ा सोच में पद gaya...Lekin फिर भी क्या कहना है उससे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

मेघा:- अब्ब ये मत कहना की गांव में डॉक्टर्स काम थे औरतुम्हारा जिम्मेदारी बहुत बढ़ गया tha...Abb ये एक्सक्यूज़ पुराण हो चूका है.

सुमित:- सच कहु तो एंट्रेंस के प्रिपरेशन में बिजी हो गया था.

मेघा:- फिर झूठ.

सुमित:- क कैसे?

मेघा:- बहुत अच्छे से जानती हूँ tumhe...Har एक एग्जाम के लिए एग्जाम से पहले तुम मुझसे क्वेश्चन के बारे में डिसकस करते thhe...Bhale hi तुम एग्जाम के लिए फुल्ली प्रेपरेड़ हो या फिर बिलकुल भी नहीं.

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता.

मेघा:- इतना आसान झूठ तो मत बोलो.

जवाब तो सीधा सा होना चाहिए tha...Mai इम्पोर्टेन्ट थोड़ी ना हु जो तुम्हे याद आउंगी.

सुमित:- नहीं मेघा ऐसी बात नहीं है.

मेघा:- मेरी बात chhodo...Hairaani की बात तो ये है की तुमने अब्ब इम्पोर्टेन्ट चीज की बारे में बात भी नहीं किया.

सुमित:- बस बोर नहीं करना chaahta...Important चीज तो यही है की अच्छे मार्क्स के साथ सर्जरी में फुल स्कालरशिप के साथ मस करना है.

अब्ब इस बारे में बात करने लग गया तो घंटो तक बातें हो jaayega...Abb तुम्हारे पास भी तो इतना फ़ालतू टाइम नहीं होगा बोर होने के लिए.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- मई इस इम्पोर्टेन्ट चीज की बात नहीं कर राहु हूँ.

सुमित:- तो फिर?

मेघा:- कीर्ति...2 साल तक तुमने उसके बारे में एक बार भी बात नहीं kiya...Pehle तो मौका मिलते hi कीर्ति की बातें शुरू कर देते थे.

कुछ देर बाद.

सुमित:- वो इम्पोर्टेन्ट थी.

मेघा:- अब्ब.

सुमित:- बिलकुल भी nahi...Behtar यही है की वो अपनी लाइफ में खुश रहे और मई अपना सपना पूरा करने के पीछे लगा राहु.

मेघा:- वाह Sumit...Itna डेडिकेशन, फोकस्ड.

एक बार जरूर मिलना चाहूंगी इतने सीरियस सुमित से?

सुमित:- कभी नहीं मिल पाओगी मैडम.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- डेडिकेटेड और फोकस्ड तो हूँ लेकिन सीरियस टाइप तो बिलकुल भी नहीं.

जिंदगी वापस वही पटरी पर ला रहा hun...Apne में hi मस्त rahu...Jab मर्जी तब काम karu...Aur जब करू तब एक hi बार में सब कुछ खल्लास.

मेघा:- सही है ये bhi...Abb तो मिलने की और भी मन कर रहा hai...Wapas उसी सुमित सफस को देखने को मिलेगा.

सुमित:- सुमित SFS...Naam तो याद है तुम्हे.

मेघा:- और कारनामे भी.

वापस से माहौल खुशनुमा हो gaya...Dono में बातें शुरुवाती दिन की तरह होने लगा.

मेघा:- अच्छा चलो रखती hun...Kuch hi दिन में एंट्रेंस hai...Thoda प्रेपर भी करना पड़ेगा.

सुमित:- कितना पढ़ती हो yaar...Mujhe देखो 5 दिन से किताब को हाथ नहीं lagaya...Lekin जिस दिन लगाऊंगा 5 दिन का कंटेंट 5 हरष में ख़त्म कर दूंगा.

मेघा:- लेकिन मई सफ्म नहीं hu...Issi लिए रोज पढ़ना पड़ता है.

सुमित:- अब्ब ये सफ्म क्या बाला है?

मेघा:- स्ट्रैट फॉरवर्ड Megha...Jo की मई बिलकुल भी नहीं हूँ.

सुमित:- तो फिर तुम क्या हो?

मेघा:- Megha...Slow एंड स्टेडी विंस थे रेस.

सुमित:- ये तो कुछ ज्यादा hi ावक्वार्ड रहीमिन्ह है.

मेघा:- बिलकुल तुम्हारी जोक्स की तरह :lol1:

फिर कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद.

मेघा:- सुमित तुम्हे आज ऐसा खुश देख बहुत अच्छा laga...Sach में तुम अब्ब उस ग़म से उभर चुके हो.

सुमित:- 2 साल काफी होते hai...Waise तो सफस को 2 महीने काफी होते लेकिन आशिक़ सुमित सफस पर भरी पद गया.

मेघा:- क्या अब्ब आशिक़ सुमित फिर भरी नहीं पद सकता?

सुमित:- अब्ब तो बिलकुल भी nahi...Aashiq सुमित तो मर सा गया hai...SFS एक बार शुरू हो जाए किसी के भी छक्के छुड़ा सकता है.

मेघा:- अच्छा अच्छा अब्ब रखती hun...Agar ऐसे hi बात करती रही तो रिजल्ट्स हम दोनों के छक्के छुड़ा देगा.

फिर मेघा फ़ोन रख देती है.


फ्यू वीक्स लेटर


मेघा:- तुम्हारा रिजल्ट का क्या हुआ?

उत्शुक आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- बाकी तुम्हे ये बात रट हुए batayenge...Lekin सफस हँसते हुए.

मेघा:- क्या हुआ? वो तो बताओ? अब्ब रहा नहीं जा रहा है.

सुमित:- एक मार्क्स से स्कालरशिप छूट गया.

इस आवाज में उतना ग़म भी नहीं था जितना होना चाहिए था.

फिर मेघा सुमित से उसकी मार्क्स पूछती है और सुमत बता देता है.

मेघा:- किसी और कॉलेज में आसानी से स्कालरशिप मिल सकता है वो भी सर्जरी में hi.

सुमित:- कही सुना tha...Shayad किसी फिल्म mein...Hum एक बार जीते hai...Ek बार मरते hai...Aur प्यार भी एक hi बार करते है.

मेघा:- मई क्या पूछ रही हूँ और तुम क्या जवाब दे रहे हो?

सुमित:- जवाब तुम्हारे सवाल का hi दे रहा hun...Uss फुलमय डायलाग को मैंने बदल दिया.

हम एक बार जीते hai...Ek बार मरते hai...Aur पग (पोस्ट ग्रेजुएशन) भी एक hi बार करते है.

तो क्यों ना इस पग को अच्छे से किया jaaye...Full विथ कॉन्फिडेंस एंड पैशन.

मेघा:- तो उसके लिए क्या करोगे?

सुमित:- ईयर लोस्स.

मेघा:- व्हाट? दिमाग तो ठीक है तुम्हारा?

सुमित:- ठीक hi होगा जो इतना बोल्ड डिसिशन भी आसानी से ले रहा हूँ.

मेघा:- 1 ईयर लोस्स का मीनिंग समझते हो?

सुमत:- बिलकुल भी nahi...Bhake hi वो 1 ईयर लोस्स है लेकिन मेरे लिए तो 1 ईयर एडवांटेज होगा.

मब्ब्स के वक्त भी 2 साल बी फार्म पढ़ने के बाद किया tha...Tab भी अफसोश नहीं हुआ tha...Abb तो डॉक्टर हूँ लोस्स करने के बाद भी प्रैक्टिस तो कर hi सकता हूँ अस ा मेडिकल officer...Jitna प्रैक्टिस करूँगा उतना और सीखता रहूँगा.

मेघा:- ये कुछ ज्यादा hi रिस्की नहीं है?

सुमित:- रिस्क तो hai...Lekin रिस्क से डरता भी कौन है? और मेरा ये ईयर लोस्स का मतलब रिस्क से खेलने का नहीं है.

जब अपने चॉइस ऑफ़ कॉलेज में स्कालरशिप नहीं मिला तो सोचा कुछ तो कमी रह गया होगा प्रिपरेशन mein...Bas इसी कमी को मिटाने के लिए म्हणत करना है एक बार फिर से उसी कॉन्फिडेंस के साथ उसी पैशन के साथ.

जरुरी नहीं है की सर्जन कब बनूँगा जरुरी ये है की कैसा सर्जन बनूँगा.

मेघा:- बाकी कॉलेज में तो स्कालरशिप मिल रहा है ना? तो फिर बेस्ट कॉलेज hi क्यों? पढ़ने वाले स्टूडेंट तो कही से भी पढ़ लेते है?

सुमित:- मई कॉलेज को रैंक के हिसाब से सेलेक्ट नहीं कर रहा hun...MBBS तक तो मुझे भी कॉलेज से लेना देना नहीं था.

बस कीर्ति से प्यार करता था इसी वजह से उसी की कॉलेज में पढ़ना चाहता था जो की नहीं हुआ.

अब्ब मस जो कॉलेज से करना चाहता हूँ उस में एक hi चीज मुझे अच्छा लगा और वो hi काफी hai...Patients फ्लो.

जितने तरह के पेशेंट आएंगे उतने hi अलग तरह के सर्जरी भी प्रॅक्टिवे हो jaayega...Bas यही वजह है बेस्ट कॉलेज में पढ़ने की iccha...Surgeon जब भी बनूँगा तब यही लग्न चाहिए ी ऍम नाउ बोथ थेओरेटिकल्ल्य एंड स्किल वाइज क्वालिफाइड सर्जन.

बात को बहुत घूमने के बाद सुमित ने अपना वजह बता hi दिया.

सुमित:- और तुम्हारा क्या प्लान है.

मेघा:- मेरा तो मार्क्स बहुत काम hai...Kisi भी कॉलेज में मेडिसिन नहीं milega...Abb अगले साल का hi इंतजार है.

सुमित:- हर एक हार सिर्फ हार नहीं hota...Khud की कमजोरी पर गौर करने का और फिर दोबारा ना हारने की जिद्द का एक बहुत अच्छा मौका है.

ये भले hi देर से लेकिन वक्त में समझ आ hi गया.

कुछ सोचते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- सही है fir...Milte है अगली साल बेस्ट कॉलेज mein...Subject ऑफ़ चॉइस और कॉलेज ऑफ़ चॉइस के साथ.

सुमित:- इंतजार रहेगा.

आत्मविश्वाश के साथ सुमित ने कहा.


1 ईयर लेटर


तो बस इतनी सी कहानी tha...Jis प्यार को पाने के लिए न जाने क्या से क्या कर gaya...Khud को अपनी नजरो में गिरा diya...Nashe की लत में डुबो कर अपने hi जिंदगी को बड़बाद करने की राश्ते पर ले chala...Sabhi के सामने अपने प्यार के लिए गिड़गिड़ाता हुआ एक भिखारी बन gaya...Hamesha हर खेल में न हारने वाला सुमित जिंदगी की सबसे एहम खेल हार gaya...Loot गया और लूटा दिया खुद को.

कुछ ऐसा था मई.

बाकी की सर्जरी के 1सत ईयर रेसिडेंट्स के सामने सुमित ने कहा.

सुमित:- और आज dekho...Kaha से कहा पहुँच gaya...Bas एक विल पावर.

ा लॉस्ट मन तो मन विथ फुल ऑफ़ confidence...A परपोसेलेस पास्ट तो फ्यूचर ऑफ़ लॉट्स ऑफ़ hope...A साद लाइफ तो फीलिंग ऑफ़ इंटरनल हैप्पीनेस.

थिस वास् माय story...Bas इतना hi.

बस इतना hi? क्या अब्ब आगे तुझे कभी प्यार नहीं होगा?

सुमित:- इस जनम में तो कभी nahi...That वास् थे एन्ड ऑफ़ माय लव स्टोरी.

एक मुस्कान के साथ सुमित ने कहा.
 
अपडेट 81

3 इयर्स लेटर

लोकेशन:- Sumit's हाउस

एक लड़की दो घंटे से वेट कर रही thi...Najar सुमित के घर पर लगे बड़ा टला पर था.

इंतजार कर रही थी की कब कोई घर में आएगा और ताला खोलेगा.

जब धीरे धीरे उम्मीद काम होने लगी तो उठ कर आस पड़ोस के लोग से पूछने का सोचने लगी.

सुमित का घर सेहर के भीड़ भाड़ वाला इलाका से थोड़ा दूर एक सुनसान जगह में था तो आस पास ज्यादा घर भी नहीं था.

सुमित के पास का hi घर भी बंद tha...Abb दूसरे घर पहुँचने के लिए आगे 100 मीटर और चलना था उससे.

उस घर में पहुँचने पर पता चला की सुमित नाम का कोई शख्स वह रहता hi nahi...Aas पास के घर में पूछताछ करने के बाद भी सुमित का कोई पता नहीं chala...Jyada तर लोगो के जवाब था वो अभी यहाँ शिफ्ट हुए है. तो कुछ लोगो ने सुमित को पहचानने से hi मन कर दिया.

थक हार कर थोड़ी दूर चलने के बाद एक पेड़ (ट्री) के निचे रखे एक बेंच पर एक 35 साल के आस पास के आदमी को बैठे देखती है.

लड़की:- Bhaiya...Kya आप सुमित को जानती है?

सुमित के नाम सुनते hi वो आदमी उस लड़की को घूरने लगता है.

आँख से वो काफी नशे में लग रहा था.

आदमी:- तुम कौन हो?

लड़की:- जी मई कीर्ति.

आदमी:- क्या काम है तुम्हे उससे?

उस आदमी की मुंह से दारु की बदबू साफ़ आ रहा था और बातों से साफ़ नशे में दिख रहा था.

कीर्ति:- है कुछ जरुरी kaam...Bataiye न आप वो कहा है अभी?

आदमी:- कितना जानती हो तुम सुमित को?

कीर्ति:- अच्छा ख़ासा जान पहचान है.

आदमी:- गलत.

कीर्ति:- क्या मतलब?

आदमी:- अगर इतना hi अच्छा जान पहचान होता तो तुम्हे भी पता होना चाहिए था अब्ब वो इस दुनिया में नहीं है.

कीर्ति:- K...Kya?

कीर्ति से कुछ बोलै hi नहीं जा रहा था.

वो आदमी भी कुछ नहीं bola...Aisa लग रहा था वो भी उस हादशा को याद कर के दुखी था.

कीर्ति:- लेकिन कैसे?

दर्द भरी आवाज में बस इतना hi बोल पायी कीर्ति.

आदमी:- बहुत कर्ज में डूबा tha...Aur ऊपर से नशा का aadat...Har तरफ से ताने, लोगो का मजाक उड़ाना और हर कदम में haar...Usse बर्दास्त नहीं hua...Nashe में खुद को पूरी तरह से डूबा दिया.

इतना की एक दिन कुछ ज्यादा hi पी लिया और नशे की हालात में एक गाडी ने सामने से उड़ा दिया.

कीर्ति को अभी भी उसकी बातों में विश्वाश नहीं हो रहा था.

कीर्ति:- लेकिन वो तो दारु छोड़ चूका था.

आदमी:- सब कहने की बात hai...Aur जो लोग दारु छोड़ने की दवा करते है वो भी छुप छुप कर पीते hai...Nasha hi कुछ ख़ास है दारु ka....Jo काम होने की जगह बढ़ता hi जाता है.

अब्ब कीर्ति से और रहा नहीं gaya...Dil का दर्द आँखों से आंसू के रूप में बहने लगे.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) ी ऍम सॉरी Sumit...Kuch ज्यादा hi देर कर दी maine...Tumhare मौत का जिम्मेदार शायद मई hi हूँ.

न जाने आत्मग्लानि में कीर्ति कितने घंटो तक वही रोटी rahi...Baar बार उससे सुमित के साथ बिठाये कुछ यादगार पल की यादें आ रहा tha...Jisse याद करके वो और भी रोटी जा रही थी.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) मई खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाउंगी.

तभी एक और आदमी वह आता है.

अबे बेवड़े ज्यादा मत pee...Warna तू भी तेरे hi दोस्त की तरह टपक जाएगा.

ये सुनते hi कीर्ति का दर्द गुस्से में बदल गया.

आंसू पोंछते हुए.

कीर्ति:- आप मौत को कितने हलके में ले रहे hai...Aur बात ऐसे कर रहे है जैसे किसी का मरना भी मजाक है आपके लिए.

वो आदमी पहले कीर्ति को देखता hai...Aankho में आंसू और साथ में gussa...Wo समझ जाता है की जरूर कोई परेशानी में होगी.

आदमी:- मौत मजाक नहीं hai...Lekin ऐसे लोगो को देखता हूँ तो सच में गुस्सा आता है.

कुछ काम तो करते नहीं hai...Haath पेअर है लेकिन फिर भी अपाहिज hi बने rahenge...Jimmedaari सँभालने की जगह नशे में लगे रहते है.

साले घर के और दुनिया के बोझ.

एक था इसका दोस्त Sumit...Nashe करने के लिए कर्ज इतना ले लिया की आज भी उसका परिवार भुगत रहा hai...Aur अब्ब उनको और भी परेशां करने के लिए इस दुनिया से भी चला गया.

नफरत है ऐसी बेव्ड़ो से और इन् धरती की बोझ से.

कीर्ति:- आप तो ऐसे बात कर रहे है जैसे कभी आपने दारु को हाथ तक लगाया नहीं है.

जो कीर्ति सुमित को कभी समझना hi नहीं चाहती thi...Aaj सुमित की गलती में भी उससे सही नजर आ रहा tha...Lekin अफ़सोस.

आदमी:- नहीं कभी नहीं लगाया haath...Daaru पीने वाले सभी को गलत नहीं कह raha...Lekin बेव्ड़ो को तो कभी सही नहीं कहूंगा.

मुर्ख hi होंगे ये लोग मानसिक रूप से जो मौत को खुद दावत देते है.

कीर्ति:- आप नहीं समझ paayenge...Ek डॉक्टर इतना भी मुर्ख नहीं होता की उससे दारु की नुकशान पता न ho....Sach में नशा करने की वजह था सुमित के पास.

कीर्ति:- (इन हेर मंद) और वो वजह मई हूँ.

दुखी मन से कीर्ति बोली.

अब्ब उससे और रहा नहीं जा रहा tha...Aur ना hi कुछ समझ में आ रहा रहा की क्या kare...Dil का दर्द अब्ब और सहा नहीं जा रहा था usse...Bas वो वह से बिना मंजिल की परवाह किये आगे बढ़ रही थी.

आदमी:- डॉक्टर? कौन?

कीर्ति:- सुमित.

आदमी:- वो बेवड़ा कब से डॉक्टर बन गया? माँ बाप के पैसो को नदी में उड़ाने के अलावा उससे आता hi क्या था?

जरूर आपको कोई ग़लतफहमी हुई होगी.

कीर्ति बस अपने जगह पर रुक जाती hai...Uss आदमी की बात से कई तरह के सवाल उसकी दिमाग में घूम रहे थे.

आदमी:- Doctor....Sumit.

वो आदमी खुद से ये बात बड़बड़ा रहा था की तभी उससे कुछ याद आता है.

आदमी:- आप किस की बारे में बात कर रही है?

कीर्ति:- सुमित

आदमी:- और वो डॉक्टर है.

कीर्ति:- हाँ.

आदमी:- तो फिर आप इस बेवड़े से क्यों बात कर रही hai...Iska दोस्त सुमित कोई और hai...Koi डॉक्टर वॉटर नहीं है वो.

अब्ब कन्फूसिओं में कीर्ति का सर फटने hi वाला tha...Kuch समझ में नहीं आ रहा था उससे.

आदमी:- एक डॉ. सुमित के बारे में मई जानता hun...Aap उस सुमित के बारे में बताइये जिसको ढूंढ रही है.

कीर्ति किसी तरह सुमित का डिटेल बता देती है.

आदमी:- मई भी वही डॉ. सुमित की बात कर रहा हूँ.

कीर्ति:- वो ठीक तो है न.

आदमी:- सिर्फ वो hi nahi...Unke पास आने वाले पेशेंट्स भी ठीक हो कर जाते है.

अब्ब कीर्ति की होंठो में मुस्कान aaya...Sumit का सही सलामत होने की बात सुन कर.

कीर्ति:- क्या आप बता सकते है? कहा रहते है वो?

कीर्ति से अब्ब और इंतजार नहीं हो रहा था.

आदमी:- एक्सएक्ट लोकेशन तो पता nahi....Par वो किस हॉस्पिटल में काम करते है वो बता सकता हूँ.

फिर वो आदमी कीर्ति को हॉस्पिटल का नाम बता देता है.

आदमी:- बहुत अच्छा डॉक्टर hai...Mera किडनी में स्टोन tha...Kuch जगह दिखने पर सर्जरी करने को कह रहे थे.

और डॉ. सुमित के पास गया तो उन्होंने कहा की स्टोन का साइज थोड़ा बड़ा hai...Dawai से भी निकला जा सकता hai...Agar नहीं हुआ तो सर्जरी hi करना पड़ेगा.

लेकिन दवाई काम कर गयी और दवाई से hi पत्थर निकल gaya...Aur अब्ब दर्द भी नहीं होता.

बहुत अच्छे डॉक्टर है wo...Bahut आसानी से इलाज कर diya...Kam पैसे में hi.

कोई प्रॉब्लम हो तो उनको hi dikhana...Acche से आपकी बात सुनेंगे और वैसे hi इलाज कर देंगे.

आज सुमित की तारीफ़ सुनने में कीर्ति को बहुत अच्छा लग रहा था.

फिर उस आदमी को शुक्रिया कह कर कीर्ति हॉस्पिटल के लिए निकल जाती है.

कीर्ति:- डॉ. सुमित अंदर है?

ओट रूम के बाहर एक डॉक्टर को कीर्ति ने पूछा.

डॉक्टर:- नहीं आज उसका ोपड डे है.

फिर देर किस बात ki...Teji से कीर्ति ोपड में पहुंच गयी वो भी बिना टिकट की.

और जैसे hi अंदर गयी सामने चेयर में बैठे शख्स को देख कर उसके लिए तो जैसे वक्त hi रुक गया.

थोड़ा लम्बे बाल, त्रिम्मेद बियर्ड में आज सुमित बहुत hi अच्छा दुःख रहा था.

कीर्ति की नजर सुमित से हैट hi नहीं रहा थी.

जब सुमित एक पेशेंट से फ्री हुआ तो सामने उसका भी नजर कीर्ति पर पड़ा.

एक पल के लिए तो उससे भी विश्वास नहीं हुआ.

और जब हुआ तो उसने दोनों hi आँखें बंद कर li...Hontho में मुस्कान के साथ हाथो का मुट्ठी बना कर खुद से hi kaha..."Yes" :यस2:

सुमित का चेहरा से hi पता चल रहा था उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था.

इसी पल के लिए hi तो उसने इतना इंतजार किया tha...Na जाने कितनी रातें ग़म में बिता था और कितनी उम्मीद भरी सपनो में.

खैर आज वो दिन आ hi gaya...Abb वो भी धीरे धीरे कीर्ति की और बढ़ने लगा.
 
स्टोरी के 1सत पोस्ट में hi लिखा है भाई की अपडेट वीकली hi पोस्ट कर सकता hun...Pehle थोड़ा टाइम था तो 3 दिन में देता tha...Abb बिलकुल भी टाइम नहीं मिल पाटा hai...Issi लिए वीकली hi अपडेट पोस्ट करना पद रहा hai...Kabhi तो मन करता है स्टोरी क्लोज कर के फोरम में hi आना छोड़ दू इतना फ़्रस्ट्रेशन होता hai...Lekin वादा किया है स्टोरी कम्पलीट करूँगा तो करूँगा किसी हाल mein...Bas कुछ उपदटेस और hai...Update कब आएगा इस बात का मई अभी कुछ नहीं कह सकता और ना hi 1 वीक से पहले पोस्ट करने की वादा कर सकता हूँ.
 
सबसे पहले तो भाई आपका स्वागत है स्टोरी में :हुग: और आपका मेरे बाकी कहानी के लिए कमैंट्स का भी shukriya...Aapka सवाल समझ सकता hun...Jawaab भी है जो शायद स्टोरी से hi दूँ तो बेहतर hoga...Abhi इतना hi कहूंगा की कोई जल्दबाज़ी नहीं है स्टोरी कम्पलीट करने ki...Bas फ्लो ऐसा है जिससे लग रहा है की स्टोरी कम्पलीट होने वाली hai...Abhi स्टोरी का मैं part तो बाकी hi hai...Thoda मजेदाद बनाने के लिए सस्पेंस के साथ लिख रहा हूँ जैसे शुरुवात में किया tha...Ummeed है आपको पसंद आएगा.
 
अपडेट 82

सुमित अब्ब धीरे धीरे कीर्ति के पास पहुँच गया.

सुमित:- डॉ. सुमित here...General सर्जन.

इतना कह कर सुमित अपना हाथ आगे बढ़ता है लेकिन अगले hi पल दूसरा हाथ भी आगे बढ़ा कर दोनों हाथ कीर्ति के सामने जोड़ देता है.

सुमित:- एंड फ्यूचर न्यूरोसर्जन.

अब्ब सभी डॉक्टर्स और स्टूडेंट्स का नजर सुमित पर hi था.

कीर्ति:- ये क्या कर रहे हो तुम?

सभी को अपनी तरफ देखता हुआ देख कीर्ति को थोड़ा ावक्वार्ड लग रहा था.

सुमित:- एक डॉक्टर की हैसियत से अपने पेशेंट को ग्रीट कर रहा hun...Wo क्या है न मब्ब्स के 1सत ईयर से hi पढता आया हूँ की सबसे पहले पेशेंट को ग्रीट करना चाहिए.

और आप पहली बार डॉ. सुमित के पास आयी hai...Greeting तो बनता hi है.

कीर्ति:- नहीं मई पेशेंट नहीं hun...Aur ना hi मुझे कुछ हुआ है.

सुमित:- तो फिर?

कीर्ति:- तुमसे जरुरी काम था.

सुमित:- तो फिर अपॉइंटमेंट लेना चाहिए था.

थोड़ा सीरियस आवाज में सुमित ने kaha...Kirti भी कुछ बोल नहीं पायी.

सुमित:- अरे मजाक कर रहा tha...Tumhe अपॉइंटमेंट की क्या jarurat...Chalo.

कीर्ति:- कहा?

सुमित:- तुमने hi तो कहा है डॉ. सुमित से तुम्हे कोई काम nahi...Sirf सुमित से है.

मुझे डॉक्टर से सिर्फ सुमित बनने के लिए इस रूम से बाहर निकलना होगा.

Sunil...Sambhal लेना आज का OPD...Kuch ज्यादा hi इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है.

सुनील:- दिख रहा है. :डी

फिर सुमित ोपड रूम से निकल जाता है और कीर्ति भी सुमित के साथ चलती रहती है.

कीर्ति:- आज भी तुम बिलकुल नहीं बदले.

सुमित:- बदलाव तो बहुत आया hai...Lekin शायद तुम्हे कुछ दिखा नहीं.

कीर्ति:- अब्ब धीरे धीरे dekhungi...Jaldbaazi क्या है?

कीर्ति ने बहुत प्यार से kaha...Jawaab में सुमित सिर्फ मुस्कुराया.

कीर्ति:- हम कहा जा रहे है?

सुमित:- Canteen...Baat करने का सबसे मस्त जगह.

कैंटीन में पहुँचने के बाद.

सुमित:- बहुत दिन बाद तुम से मुलाकात हुआ hai...Socha नहीं था तुम फिर कभी मिलोगी.

कीर्ति:- सोचा तो मैंने भी नहीं tha...Lekin किस्मत को कुछ और hi मंजूर था.

सुमित:- Kismat...Yahi तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त hai...Der से hi सही हर मुशीबत से मुझे बहार निकाल hai...Aaj hi देख lo...Kitna खुश हु मई.

कीर्ति भी खुश थी की सुमित उससे नाराज नहीं है और बहुत अच्छे से बातें भी कर रहा hai...Abb उससे लग रहा था की जल्द hi उससे अपनी दिल की बातें बता देनी चाहिए.

कीर्ति:- तुम मुझसे नाराज तो नहीं हो न?

सुमित:- हाँ पहले tha...Lekin अब्ब इन् बातों से ऊपर उठ चूका hun...Kabhi कभी माफ़ कर देने में hi भलाई hai...Sab कुछ भुला कर आगे बढ़ना hi समझदारी है.

कीर्ति:- सही कह रहे ho...Mai hi बेवकूफ थी जो तुम्हे समझ नहीं पायी थी.

सुमित:- वो तो तुम अभी भी समझ नहीं पायी हो.

कीर्ति:- क्या?

सुमित:- क्या तुम सच में मुझे समझती हो? कभी हम दोनों ने इतना वक्त साथ में भी तो नहीं गुजरा.

कीर्ति:- बस इतना समझती हूँ की तुम समझ से बाहर हो.

ये सुनते hi सुमित भी हसने लगा.

कीर्ति:- वो क्या कहते थे तुम खुद ko...Unimaginable एंड Unpredictable...Sahi hi hai....Aur हाँ याद आया सुमित सफस.

सुमित:- ये तुम्हे कहा से पता चला?

कीर्ति:- मेघा se...Bahut पहले उसने बताया था.

सुमित:- ओह्ह god...Tum लड़कियां भी समझ से बाहर ho...Kab किस्से क्या बात करती हो कुछ पता hi नहीं चलता.

कीर्ति:- मेघा से याद aaya...Kaisi है वो? बहुत सालो से कोई बात भी नहीं हुई उससे.

मेघा की बात सुनते hi सुमित थोड़ा सोच में पद गया.

सुमित:- बहुत खुश है वो.

कीर्ति:- चलो सही hai...Bahut अच्छी है wo...Deserve भी करती है खुश रहना.

सुमित:- सबसे ज्यादा.

सुमित:- अच्छा ये bataao...Uncle आंटी कैसे है अभी?

कीर्ति:- बहुत अच्छे है dono...Mummy का डायबिटीज और ब्लड प्रेशर दोनों hi मैनटैनेड है.

कीर्ति को सुमित का ये सवाल बहुत पसंद आया.

कीर्ति:- दोनों तुम्हारे बारे में पूछते रहते है.

ये सुनते hi सुमित ने बहुत मुश्किल से अपना हंसी रोका.

कीर्ति:- पहले की बात और thi...Abb और है.

सुमित ने इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया.

कीर्ति:- बातों hi बातों में पूछना hi भूल gayi...Rashmi कैसी है?

सुमित:- वो तो हमेशा की तरह अच्छी है.

कीर्ति:- Sumit...Sach में इतने दिन बाद मिले है हम लेकिन फिर भी बातें ऐसी कर रहे है जैसे कभी अलग हुए hi नहीं है.

सुमित:- बातें karna...Ye जो मेरा फवौरीते होब्बीएस मई से एक hai...Kab सुबह से शाम हो जाता है और रात से subah...Kuch पता hi नहीं चलता.

कीर्ति:- Chalo...Kahi बाहर चलते hai...Puraani यादें भी ताजा हो जाएगा.

सुमित:- घर में मुझे कुछ काम hai...Tum भी chalo...Sabse मिलना भी हो जाएगा.

कीर्ति:- नहीं अभी नहीं.

सुमित:- क्यों? क्या परेशानु है?

कीर्ति:- अभी कम्फर्टेबले फील नहीं कर रही hun...Sab नाराज होंगे.

सुमित:- नहीं कोई नाराज नहीं hai...Waise भी कई साल बीत गए है उस बात को ले kar...Waise भी मई तो साथ hi हूँ.

कीर्ति कुछ देर सोचती है फिर जैसे hi उससे लगता है की आज नहीं तो कल जाना hi है.

कीर्ति:- अच्छा ठीक hai...Chalo

तभी मब्ब्स के कुछ स्टूडेंट्स आते है और.

स्टूडेंट:- सर, ये क्या? अगर मम ने देख लिया तो बुरा मान जाएंगी.

सुमित:- दो दिन टाइम दे चूका hun...Abhi भी एक्यूट अप्पेंदिसिटिस अच्छे से पढ़ा नहीं है tune...Agli बार भी नहीं ओढ़ा तो मई बुरा मान जाऊँगा.

इतना सुनते hi वो स्टूडेंट चुप हो जाता है.

सुमित:- और किसी को भी कोई होमवर्क चाहिए?

स्टूडेंट:- सर सीधा hi बोल देते यहाँ से जाने के लिए.

सुमित:- समझदार लोगो को इशारा hi काफी होता hai...Waise भी तुम लोग मेरे hi स्टूडेंट ho...Samjhadaari तो नस नस में है.

ये सुनते hi वो स्टूडेंट्स हँसते हुए वह से चले जाते hai...Unke जाने के बाद.

कीर्ति:- किस मम की बारे में बात कर रहे थे ये?

सुमित:- मेरी वाइफ.

ये जवाब कीर्ति के लिए किसी सदमे से काम नहीं था.

कीर्ति:- तुम्हारी शादी??????

हैरानी में कीर्ति से बोलै hi नहीं जा रहा था.

सुमित:- पुरे 33 साल का हो चूका hun...Abb नहीं करूँगा तो कब? वैसे भी पिछले महीने hi हुआ था shaadi...Dhumdhaam से.

एक्ससिटेमेंट में सुमित bola...Lekin कीर्ति का चेहरा देखते hi.

सुमत:- क्या हुआ?

कीर्ति:- कुछ नहीं.

बहुत मुश्किल से वो boli...Sumit भी अब्ब समझ गया.

कीर्ति:- मेघा?

सुमित:- तुम्हारे जाने के बाद मेरी लाइफ में संजना आयी.

सुमित इससे आगे बोलता तभी उसके मोबाइल में फ़ोन आया.

सुमित:- हाँ darling...Aa रहा हूँ.

सुमित:- और suno...Apne हाथ का अच्छा सा लंच banaao...Ek स्पेशल गेस्ट है साथ में.

लव यू ा लोट.

सुमित की आवाज में प्यार hi प्यार tha...Bilkul वैसा जैसे कुछ साल पहले सुमित का कीर्ति के लिए था.

लेकिन आज वक्त बदल चूका था और साथ hi haalaath...Jo सुमित उसके लिए पागल हुआ फिरता था आज वही सुमित उसका दिल तोड़ चूका था.

अब्ब और दर्द उससे बर्दास्त नहीं हो रहा tha....Ek बार फिर दिल का दर्द आँखों से आंसू के रूप में बह रहा था.

कीर्ति:- Sumit...You अरे रियली ुणिमागिनाब्ले एंड ूनप्रेडिक्टेबले.

इतना कह कर कीर्ति ने आँखें झुका ली.

सुमित को भी कीर्ति का रोना अच्छा नहीं लग रहा tha...Bhale hi वो कीर्ति से नाराज था लेकिन अपनी ख़ुशी में वो कीर्ति से नाराजगी और शिकायत भी भूल गया था.

लेकिन आज कीर्ति मिली भी तो इस हालात mein...Naa hi वो पीछे मुद सकता था और ना hi मुड़ना चाहता था.

कीर्ति के लिए ागत कुछ कर सकता था तो सिर्फ dua...Dua उसकी ख़ुशी की बिना खुद ke...Isse ज्यादा कुछ नहीं.
 
अपडेट 83

3 इयर्स बैक

सर्जरी रेजीडेंसी 1सत डे


तो जनाब कहा जा रहे है आप?

सुमित के रूम पार्टनर सुनील ने पूछा.

सुमित:- सोचा थोड़ा हॉस्पिटल का चक्कर लगा कर aau...Abb यही तो है अपना कर्मस्थल वो भी 3 साल के लिए.

सुनील:- ऐसे?

सुमित:- हाँ तो कैसे?

सुनील:- मेरा मतलब वाइट कोट लगा le...Doctor वाली फीलिंग भी aayegi...Aur तू है की शर्ट पंत में hi जा रहा है.

सुमित:- अंडरकवर होने में भी अलग hi मजा है.

सुनील:- अंडरकवर कप तो सुना था.

सुमित:- तो मुझे अंडरकवर डॉक्टर समझ ले.

सुनील:- तू तो समझ के बाहर है?

सुमित:- और ऐसा क्यों?

सुनील:- कल ओरिएंटेशन क्लास बंक कर दिया और आज तेरा ये अंडरकवर होने का shaukh...Pata नहीं कल क्या गुल खिलायेगा.

सुमित:- अब्ब घंटो तक कौन बोर hoga...Seniors ने कहा था किसी काम का नहीं ये ओरिएंटेशन क्लास.

सुनील:- तुझे सर्जरी डिपार्टमेंट के होड़ बुला रहे है मिलने के लिए.

सुमित:- इतना बड़ा सर्जन भी नहीं हूँ.

सुनील:- बहुत खड़ूस दिख रहा था wo...Agar उसने सोच लिया तो बड़ा सर्जन तो क्या तुझे सर्जन बनने hi नहीं देगा. :lol1:

सुमित:- ऐसे कैसे?

सुनील:- वो तो वो hi बता सकते है.

सुमित:- देख लेंगे उन्हें भी.

इतना कह कर सुमित निकलने hi वाला था की उसके मोबाइल में फ़ोन आता है.

सुमित:- हाँ चुड़ैल बोल.

दोस्ती तरफ रश्मि थी.

रश्मि:- आपने हॉस्टल ज्वाइन कर लिया और बताया भी नहीं.

सुमित:- अरे वोऊ...

रश्मि:- कोई एक्सक्यूज़ नहीं. :बात:

सुमित:- सच hi सुन्ना चाहती है तो तेरा बकबक से बच्चन के लिए हॉस्टल चूसे kiya...Abb तेरी बकवास सुनु या पढाई पर ध्यान दू.

दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आता.

सुमित:- अरे मजाक कर रहा tha...Abhi रेजीडेंसी (पग ग्रेजुएशन) में इंटर्न से भी ज्यादा ड्यूटी देते है तो घर और कॉलेज दोनों मैनेज करना मुश्किल होता है.

हर वीकेंड घर जरूर आऊंगा.

रश्मि:- सच्ची!!!

सुमित:- मुछि.

हँसते हुए सुमित ने कहा और फ़ोन रख दिया.

हॉस्टल से निकलने के बाद वो सर्जरी के वार्ड में गया.

कुछ देर वह के कंडीशन देखने के बाद वो एक खाली बीएड के पास जा कर खड़ा हो जाता है.

और वह से निकलने hi वाला था की एक लड़की गुस्से से उससे कहती है.

लड़की:- आप चुप चाप अपने बीएड पर baithiye...Tabhi से देख रही हूँ बिना किसी काम के इधर उधर घूम रहे है.

सुमित ने गौर से उस लड़की को dekha...White कोट में एक खूबसूरत सी ladki...Gusse में थोड़ी लाल आँखें.

लड़की:- आप हंस क्यों रहे है?

वाइट कोट में hi कैपिटल लेटर में नाम लिखा था डॉ. संजना.

सुमित:- नहीं कुछ nahi...Bas एक जोके याद आ गया था.

संजना:- क्या परेशानी है आपकी?

सुमित:- रात में नींद अच्छे से नहीं आती.

संजना:- तो आपको साइकाइट्री वार्ड में जाना चाहिए था.

सुमित:- नहीं नहीं मई साइको नहीं हूँ.

एक्टिंग करते हुए सुमित ने kaha...Sanjana से मस्ती मजाक करना उससे अच्छा लग रहा था.

संजना:- साइकाइट्री का मतलब साइको नहीं hai...Chaliye मई आपको रेफेर कर देती हूँ.

सुमित:- लेकिन मुझे तो पहले hi सर्जरी में रेफेर कर दिया था एक डॉक्टर ne...Aur डॉ. सुमित ने यहाँ वार्ड में एडमिट कर दिया.

संजना:- ये डॉ. सुमित कौन है?

सुमित:- बहुत बड़े सर्जन hai...Shayad आप नहीं जानती उन्हें.

संजना:- लेकिन एडमिट किस वजह से? रात में नींद न आने की वजह से सर्जरी वार्ड में एडमिट.

सुमित:- एक और बीमारी भी है.

संजना:- वही तो पूछ रही हूँ?

सुमित:- लंग्स में किडनी अटैक.

संजना:- क्या?

सुमित:- ओह्ह sorry...Kidney में हार्ट अटैक.

संजना:- व्हाट नॉनसेंस?

अब्ब संजना सच में गुस्सा हो गयी थी.

सुमित:- डॉ. सुमित ने कट स्कैन किया tha...Report में वही लिखा tha...Kidney में हार्ट अटैक.

संजना:- पक्का साइकियाट्रिक पेशेंट है.

फिर संजना गुस्से में निकल गयी और हँसते हुए सुमित भी अपना रूम वापस चला गया.

नेक्स्ट डे.

तुम!!!

हैरानी में संजना चीख पड़ी जब उसने अपने सामने सुमित को dekha...Wo भी वाइट कोट में.

डॉ. Sumit...1st ईयर रेजिडेंट.

हाथ आगे बढ़ाते हुए सुमित बोलै.

सुमित की इस बात ने संजना को और भी हैरान कर diya...Fir भी वो सुमित से हाथ मिलाती है.

संजना:- संजना हेरे.

अभी भी उसको विश्वाश नहीं हो रहा था की ये सच hai...Kaha कल का वो साइकियाट्रिक पेशेंट और कहा आज का ये 1सत ईयर रेजिडेंट वो भी सर्जरी का.

जहा संजना खुद को विश्वाश दिलाने की कोशिश कर रही थी वही दूर एक शख्स को देख सुमित को भी हैरानी का एक तेज झटका लगा.

सुमित:- Woww...Whattt ा सुरप्रीसीई!!!

सुमित को भी भरोषा नहीं हो रहा था.
 
थैंक्स माहि जी फॉर योर सपोर्ट एंड review...Sumit छत में पेपर पर कुछ लिख रहा था तो अच्छा ख़ासा लाइट की जरुरत तो पड़ेगा hi...Haan ये 350 थोड़ा ज्यादा हो गया 200-250 ठीक रहता.

सिर्फ आप hi नहीं सुमित और प्रोफेसर की बिच जो बातें होती है कब्जी कभी वैसी बातें मेरे भी सर के ऊपर से निकल जाता hai...Keep सपोर्टिंग.
 
अपडेट 84

सुमित बस देखता hi रह gaya...Aur वो शख्स धीरे धीरे सुमित के करीब पहुँच gayi...Aur अपना इंट्रो दिया.

डॉ. Megha...1st ईयर Resident...Internal मेडिसिन

फिर मेघा सुमित की और अपना हाथ आगे बढ़ाती है.

डॉ. Sumit...Future न्यूरोसर्जन.

सुमित ने हाथ मिलाते हुए कहा.

मेघा:- कैसा लगा मेरा सरप्राइज?

सुमित:- Bouncer...Sir के ऊपर से निकल गया.

अभी भी सुमित हैरान hi था.

सुमित:- तुम्हे यहाँ देख बहुत अच्छा laga...Sach में बहुत खुश हूँ. :तूहैप्पी:

मेघा:- और तुम्हारे लिए भी खुश hun...Kya कहते थे tum...PG एंट्रेंस मतलब सब्जेक्ट ऑफ़ चॉइस और कॉलेज ऑफ़ Choice...Dono hi मिल गया.

सुमित:- वो तो है hi...Aur आने वाले कुछ दिन तक शायद पेअर भी जमीन में नहीं rahega...Itna अच्छा महसूस कर रहा hun...Dil करता है की उड़ता hi जाऊं.

दोनों बातें कर रहे थे और पास में hi कड़ी संजना दोनों की बातें समझने की कोशिश कर रही थी.

इतना तो वो जान hi गयी थी की सुमित और मेघा का पुराण जान पहचान hai...Isse आगे की वो समझने की कोशिश कर रही थी.

सुमित:- सच कहु तो मुझे लगा की शायद तुम्हारा मार्क्स फिर से काम आ गए है इस लिए अपना रिजल्ट नहीं बता रही हो.

सोच रहा था यूट्यूब में से एक मोटिवेशनल वीडियो देख कर तुम्हे अगले साल के लिए मोटीवेट करू. :lol1:

सुमित की इस बात पर मेघा के साथ संजना भी हसने लगती है.

मेघा:- भूलो mat...MBBS के पहले दिन से hi तुमसे अच्छे मार्क्स आये है हर baar...Iss बार भी चेक कर लेना.

सुमित:- वो तो hai...Theory में तुम काफी अच्छी हो.

मेघा:- क्या सिर्फ थ्योरी में? भूल गए 3रद ईयर में क्या हुआ tha...Jab मेडिसिन में तुम्हे सर से दांत पड़ी थी जब तुम्हे ठीक से रेस्पिरेटरी एग्जामिनेशन नहीं कर पा रहे थे.

मैंने hi सिखाया था.

सुमित:- क्यों की पहले hi सोच लिया था मैंने की मुझे सर्जन बनना hai...Medicine काम चलौ सब्जेक्ट था मेरे लिए.

मेघा:- लेकिन कोई भी सर्जन बिना मेडिसिन के नॉलेज के अच्छा सर्जन नहीं बन सकता.

सुमित इस बार कुछ नहीं बोलै.

मेघा:- अब्ब क्या हुआ?

सुमित:- और करो बेइज्जती. :( ...लोगो का मजाक मई उड़ाता हूँ और तुमने तो मेरा hi मजाक बना दिया.

मेघा:- सांगत का असर है.

सुमित:- वो तो है. :डी

सुमित:- एनीवे गई एग्जामिनेशन में एक्सपर्ट हूँ.

मेघा:- वो भी तुमसे अच्छा कर सकती हूँ.

सुमित:- अब्ब मुझसे नहीं hoga...Aur बेइज्जती नहीं करवा सकता.

अब्ब जा कर दोनों को एक दूसरे से फुर्सत मिलता hai....Aur जब मेघा का नजर संजना पर पड़ता है.

मेघा:- डॉ. Sanjana...Tumhe देख कर लगता है की कुछ खतरनाक hi प्रैंक किया होगा सुमित ने.

सुमित:- Prank...Wo भी बिना कैमरा के. :lol1:

मेघा:- वैसे लड़का बहुत अच्छा hai...Bas कभी कभी ऐसे हालात बना देता है की ना तो हंस सकते है और ना hi रू सकते है.

सुमित:- ये तुम नहीं तुम्हारा एक्सपीरियंस बोल रहा है.

मेघा:- 7-8 साल से झेल रही hun...Accha ख़ासा एक्सपीरियंस है.
 
फ्रेंड्स इस वीक में एक अपडेट dunga...Next वीक एग्जाम है जो पुरे वीक chalega...Socha था एग्जाम के बारे में कहने की जरुरत भी नहीं पड़ेगा लेकिन अभी लग रहा है की प्रिपरेशन एनफ नहीं हुआ है.

पिछले एग्जाम की तरह इम्पैक्टफुल तो जाहि है की 2 मोनथस का ब्रेक लेना पड़े इसी लिए 1 वीक का hi ले रहा hun...Terminal एग्जाम hi है इस बार लेकिन नई सब्जेक्ट्स hai...Picchle एग्जाम से काफी टफ है और प्रिपरेशन भी काम hai...Lekin एग्जाम का दर उतना नहीं hai...Issi लिए पिछले कुछ उपदटेस रेगुलर दिया था और एक अपडेट इस वीक में और देने का सोच रहा हूँ.

स्टोरी थोड़ा और बाकी है और सब कुछ ठीक रहा तो एग्जाम के बाद पहला प्रायोरिटी यही होगा की स्टोरी को अच्छे से लिख कर एन्ड कर दू फिर तो हमेशा के लिए रेस्ट है hi. :डी
 
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