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Knock...Knock.
यस के इन.
सुमित को देखते hi डॉ. राहुल बोले.
सुमित:- सर आप ने बुलाया था? कॉफ़ी पिलाने के लिए.
हँसते हुए सुमित ने कहा.
डॉ. राहुल:- कॉफ़ी के लिए nahi...Tere रिजल्ट के बारे में बात करना है.
डॉ. राहुल की आवाज में गुस्सा था जिसे देख सुमित की हंसी गायब हो गया.
डॉ. राहुल:- वैसे तो मई रिजल्ट डिस्कशन के लिए उन्ही को बुलाता हूँ जो बुरी तरह से फ़ैल होते hai...Lekin आज तुझे पास होते हुए भी बुलाना पद रहा है.
सुमित बस बातें सुन hi रहा tha...Thoda बहुत उससे अंदाजा हो गया था की सर ने उससे क्यों बुलाया है.
डॉ. राहुल:- 3 स्टूडेंट्स फ़ैल हुए है एग्जाम mein...Lekin उनसे भी ज्यादा तुझसे डिसअपोइंट हुआ hun...Topper ना सही लेकिन बहुत एक्सपेक्टेशंस था तुझसे.
सुमित कुछ बोलने hi वाला था की...
डॉ. राहुल:- इस बार का क्वेश्चन मैंने सेट किया tha...Simplest तो Toughest...Aur जब पेपर चेक करने बैठा तो सटिस्फीएड hi था स्टूडेंट्स का परफॉरमेंस देख कर.
तेरा पेपर आया तो सोचा थोड़ा स्ट्रिक्ट चेक karunga...Viva में भी तूने बहुत अच्छे से अंसवेरस दिया tha...Starting hi टोगेस्ट क्वेश्चन से सुरु किया tune...Aur अंसवेरस एक्सपेक्टेशन से भी upar...Very impressive...Lekin कुछ क़ुएस्तिओन्स क बाद पेपर hi ब्लेंक.
मतलब क्या था ये? क़ुएस्तिओन्स तुझे कुछ ज्यादा hi इजी लगा या एग्जाम का मजाक उड़ा रहा था तू?
सुमित:- सच कहु तो मुझे मार्क्स से अब्ब मतलब नहीं.
धीरे से लेकिन आत्मविश्वाश से भरा आवाज था ये सुमित का.
डॉ. राहुल:- मार्क्स से मतलब nahi...Kya क्या बोल रहा है तू?
सुमित:- सर, ी हद ा ब्रेकअप.
डॉ. राहुल:- ओह्ह तो इस लिए अब्ब तेरा पढाई और करियर में मन नहीं लग रहा hai...Ye आज कल के बच्चे भी.
राहुल सर का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.
सुमित:- सर आपने सच kaha...Lekin ये बात 5 साल पहले की है.
ये सुन कर राहुल सर का गुस्सा और बेकाबू हो गया.
डॉ. राहुल:- मई गुस्सा बहुत काम होता hun...Aaj पहले hi दिमाग गरम है ऊपर से तू फ़ालतू की बातें कर रहा है...5 साल पहले की बात अब्ब सुना रहा है जिसका इस केस से कोई लेना देना नहीं.
अगर कुछ रीज़न है तो bata...Warna यहाँ से चला jaa...Exam में पास हुआ है कोई एक्शन लेने की बात hi नहीं बनता.
सुमित:- सर मतलब है उस बात ka...Aur भी कुछ बात hai...Yahi कुछ 2, 3 बातें है जो आपके सवाल का जवाब भी है.
डॉ. राहुल:- चल सूना.
सुमित:- बात तब की है जब मब्ब्स ख़त्म होने के बाद एक गांव में मेडिकल अफसर की पोस्ट में काम कर रहा था.
बाकी सब तो ठीक hi चल रहा था बस एक hi समस्या tha...Breakup...Breakup भी नहीं कह sakte...One साइडेड लव स्टोरी था जिसको उसकी मंजिल नहीं मिल सका.
बस इसी से उभरने की कोशिश में लगा हुआ tha...Papa, माँ कुक ह दोस्त और खुद मई सभी लगे हुए थे इस दर्द से खुद को उभारने के liye...Lekin कोई फायदा nahi...Suicide के अलावा हर नेगेटिव थॉट्स दिमाग में आ रहा tha...Papa की बातें मोटिवेशनल तो था hi और सुनने में भी अच्छा लग रहा tha...Lekin फिर भी अधूरा hi रह जाता था.
बस एक hi पॉजिटिव फीलिंग tha...Abb मई डॉक्टर बन गया हूँ और इसी फीलिंग के साथ लोगों की इलाज कर रहा tha...Log ठीक भी हो रहे thhe...Thoda सटिस्फैक्शन भी था अपने काम से.
ऐसे hi एक दिन एक पेशेंट आये पैन इन उप्पेर एब्डोमेन (पेट की ऊपर वाले हिस्से में दर्द) का केस लेकर. थोड़ा हिस्ट्री और एग्जामिनेशन के बाद केस दिएगनोसे किया पेप्टिक अलसर. लेकिन कुछ देर बाद दर्द और बढ़ने से वो फिर aaye...Iss बार फिर से डिटेल्ड हिस्ट्री ले कर जब एग्जामिनेशन किया तो पता चला केस एक्यूट पैंक्रिअटिटिस का था.
बहुत बड़ा ब्लंडर कर चूका tha...Fir किसी तरह पेशेंट को सुप्पोर्टीवे ट्रीटमेंट दे कर रेफेर कर दिया पास के बड़े हॉस्पिटल में जहा अच्छा फैसिलिटी tha...Unka जान जाते जाते bacha...Uss दिन खुद को बहुत गाली diya...Ekdum से ऐसा लगने लगा मुझे कुछ आता hi नहीं.
मब्ब्स के लगभग सभी एक्साम्स में आखिरी के 2 दिन पढता था और मार्क्स 80% से ज्यादा आ जाता tha...Base बहुत अच्छा tha...Issi वजह से मेरे खुद के hi दोस्त और कुछ जूनियर्स एग्जाम के टाइम मेरे साथ पढ़ते thhe...Aur नॉलेज भी बहुत अच्छा tha...Aap पेप्टिक अलसर और एक्यूट पैंक्रिअटिटिस रिलेटेड कुछ भी पूछिए शायद hi कुछ न आता हो.
लेकिन क्या फायदा? जब ग्राउंड लेवल में उस नॉलेज और मार्क्स कोई काम नहीं aaya...Chhota सा मिस्टेक से किसी का जान जा सकता tha...Uss टाइम उस पेशेंट को मेरे मार्क्स से ज्यादा जरुरी था मेरा डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट वो भी सही टाइम में जो दे नहीं सका.
मार्क्स से तो पहले भी मुझे खास लगाव नहीं tha...Exams के 2 दिन पहले पढता tha...Lekin इस इंसिडेंट के बाद तो सोच लिया मार्क्स से मुझे कोई मतलब nahi...Bas नॉलेज बढ़ाना hai...Har दिन कुछ नया सीखना hai...Apna डायग्नोसिस तक पहुँचने का और डिजीज का मैनेजमेंट अच्छे से करना है.
मार्क्स बुरा हो gaya...Dusra कोई अच्छा मार्क्स लाता है तो वो अच्छा है या बुरा है इससे मुझे कुछ खास मतलब nahi...Bas मुझे मार्क्स से चिढ हो गया hai...Ek जो थोड़ा घमंड था की मेरे पास अच्छा नॉलेज है वो टूट गया.
और दूसरी बात जब से डॉक्टर बना hun...Khas कर उस इंसिडेंट के बाद ये नोटिस किया की हमारा हेल्थ ूनप्रेडिक्टेबले hai...Kabhi भी कुछ भी हो सकता है achanak...Kabhi रोड के साइड अच्छे से चल रहे है तो भी एक उनकंट्रोलड ट्रक उड़ा सकता है और ब्लीडिंग से death...To कई बार डिजीज खुद उनकंट्रोलबले हो जाता है जिसे रोकने के लिए पेशेंट कुछ भी करने को तैयार होते है लेकिन कर नहीं पाते.
कई बार पैसे ना होने की मज़बूरी तो कई बार पैसे होने के बावजूद कुछ न कर पाने की majburi...Kai कैंसरस में तो ऑर्गन निकलने क बाद भी ठीक होगा या नहीं ये सोच कर घुट ते हुए पेशेंट्स देखा है.
लोगो की इतनी साती परेशानी है और मई अपना परेशानी में उलझा हुआ hun...Love failure...Jo मेरी कब hi थी hi नहीं.
इन् सभी बातों की वजह से अलग तरह से सोचने पर मजबूर हो gaya...Ye साड़ी परेशानी दिखती तो थी लेकिन महसूस पहली बार कर रहा tha...Shayad एहि मेरे सवाल के जवाब tha...Bas दुनिया को देखना पड़ता hai...Shayad दूसरों की दर्द को देख अपना दर्द छोटा लगने लगा.
सोच लिया मई पहले जितना मस्त हुआ करता था फिर वैसा hi banunga...Faaltu की परेशानी क्यों और झेलू और जो मेरी थी hi नहीं उसके लिए क्यों खुद को इतना तड़पउ?
तब से मेरा दो hi मकशद tha...Ek खुश rehna...Jindagi एक बार के लिए hi मिला है तो क्यों न अच्छे से jiyu...Aur दूसरा जब डॉक्टर बन hi गया हूँ तो अपना फ़र्ज़ अच्छे से nibhau...Aage और पढ़ना लिखना hai...Bahut कुछ सीखना है जिसे वो गलती फिर कभी न दोहराओ.
विश्वाश से भरा इस बात को सुन कर डॉ. राहुल भी मुस्कुरा रहे थे.
डॉ. राहुल:- नई perspective...Sun कर अच्छा लगा.
फिर वो सुमित की और देखते है.
डॉ. राहुल:- तुझे इस लिए बुलाया था क्युकी तेरा मार्क्स और एग्जाम पेपर देख लग रहा था तू केयरलेस हो रहा hai...Jo बिलकुल भी अच्छी बात नहीं hai...Tujh में एक पोटेंशियल देखा hai...Tera बेसिक नॉलेज, हाइपोथिसिस, लॉजिक, ट्रीटमेंट ओप्तिओंस में डिसिशन मेकिंग और correlations...Sabhi बहुत अच्छा hai...Bas इन्ही चीजों पर और ध्यान दे ये समझने के लिए बुलाया था.
लेकिन तेरी बात को सुन कर जरुरत hi नहीं pada...Ek नया पर्सपेक्टिव और पता chala...Chal सही है और तूने अपना जो मिशन की बात की है न उसी में लगा reh...Abhi ये realiz,e होना hi बहुत बड़ी बात है.
सुमित:- सर एक बात पुछु आप से?
डॉ. राहुल:- हाँ पूछ.
सुमित:- एग्जाम जितना हो सके उतना बढ़ाइए.
डॉ. राहुल:- लेकिन तुझे मार्क्स से मतलब hi नहीं?
सुमित:- वो तो नहीं hai...Lekin एग्जाम के वक्त ड्यूटी नहीं होता है तो सोने के लिए वक्त मिल जाता है. :डी
डॉ. राहुल:- भूल jaa...Duty में कोई भी डिस्काउंट नहीं milega...Karna hi पड़ेगा.
सुमित:- ड्यूटी करने में कोई प्रॉब्लम nahi...Acchaa hi लगता hai...Lekin थोड़ा ज्यादा लग रहा है.
डॉ. राहुल:- ये hi मिनिमम hai...Humare टाइम में तो 2 हरष एक्स्ट्रा hi होता tha...Duty चाहे वो ओट हो या ोपड उसमें एक सेकंड भी कोई गायब हो गया तो खैर nahi...Baaki चीज में थोड़ा बहुत चलता है.
सुमित:- अब्ब तो यही उम्मीद कर सकता हूँ किसी तरह काट जाए ये 2 साल.
डॉ. राहुल:- यही मौका है कुछ सिखने का या फिर कुछ गलती करने ka...Agar कुछ सीखते वक्त गलती हो भी गया है तो हम है यहाँ ब्लामे अपने ऊपर लेने के liye...Abb यहाँ से सर्जन बन कर निकलेगा और कुछ गलती हो भी गया तो खुद तू hi रेस्पोंसिबल होगा.
सुमित:- सर ये भी सही है.
डॉ. राहुल:- और भी बहुत सी बातें है जो बाद में समझ में आएगा.
अच्छा तो जा abb...Mujhe मेरे सवाल का जवाब मिल gaya...Haan लेकिन पढाई कभी मत छोड़ना.
इस उम्र तक भी मई कुछ न कुछ पढता रहता हूँ.
सुमित:- जरूर सर.
इतना कह कर सुमित निकल गया.
सुमित निकला तो बहार संजना वेट कर रही thi...Thodi दूर विकाश भी अपने दोस्तों से बात कर रहा था.
संजना:- क्या हक़ सुमित? क्या कहा सर ने?
तभी डॉ. राहुल भी बहार निकले.
डॉ. राहुल:- और सुमित ये प्यार के चक्कर में मत padna...Chup चाप उसी से शादी करना जिसे तुम्हारे माँ बाप चुने.
इतना कह कर वो वह से बाहर निकल गए.
संजना हैरानी में सुमित को देखती रह गयी.
विकाश:- मेघा ने सही hi कहा tha...Sumit सर को इन्फ्लुएंस कर hi देगा.
अब्ब तो संजना भी सोच में पद गयी.
सुमित: अरे Megha...Wo तो मुझे खुद मुझसे ज्यादा जानती है.
हँसते हुए सुमित ने कहा.
संजना:- लेकिन कैसे?
सुमित:- टैलेंट है उसकी.
इतना कह कर सुमित वह से जाने लगा.
संजना:- लेकिन तुम कहा जा रहे हो?
सुमित:- Cafe...Megha इंतजार कर रही होगी.
संजना:- तुम्हे कैसे पता?
सुमित:- मेघा मेरे बारे में इतना जानती है तो मुझे भी थोड़ा पता होगा न मेघा के बारे में. :डी
इतना कह कर सुमित कैफ़े की और चला गया.
ात कैफ़े
Knock...Knock.
यस के इन.
सुमित को देखते hi डॉ. राहुल बोले.
सुमित:- सर आप ने बुलाया था? कॉफ़ी पिलाने के लिए.
हँसते हुए सुमित ने कहा.
डॉ. राहुल:- कॉफ़ी के लिए nahi...Tere रिजल्ट के बारे में बात करना है.
डॉ. राहुल की आवाज में गुस्सा था जिसे देख सुमित की हंसी गायब हो गया.
डॉ. राहुल:- वैसे तो मई रिजल्ट डिस्कशन के लिए उन्ही को बुलाता हूँ जो बुरी तरह से फ़ैल होते hai...Lekin आज तुझे पास होते हुए भी बुलाना पद रहा है.
सुमित बस बातें सुन hi रहा tha...Thoda बहुत उससे अंदाजा हो गया था की सर ने उससे क्यों बुलाया है.
डॉ. राहुल:- 3 स्टूडेंट्स फ़ैल हुए है एग्जाम mein...Lekin उनसे भी ज्यादा तुझसे डिसअपोइंट हुआ hun...Topper ना सही लेकिन बहुत एक्सपेक्टेशंस था तुझसे.
सुमित कुछ बोलने hi वाला था की...
डॉ. राहुल:- इस बार का क्वेश्चन मैंने सेट किया tha...Simplest तो Toughest...Aur जब पेपर चेक करने बैठा तो सटिस्फीएड hi था स्टूडेंट्स का परफॉरमेंस देख कर.
तेरा पेपर आया तो सोचा थोड़ा स्ट्रिक्ट चेक karunga...Viva में भी तूने बहुत अच्छे से अंसवेरस दिया tha...Starting hi टोगेस्ट क्वेश्चन से सुरु किया tune...Aur अंसवेरस एक्सपेक्टेशन से भी upar...Very impressive...Lekin कुछ क़ुएस्तिओन्स क बाद पेपर hi ब्लेंक.
मतलब क्या था ये? क़ुएस्तिओन्स तुझे कुछ ज्यादा hi इजी लगा या एग्जाम का मजाक उड़ा रहा था तू?
सुमित:- सच कहु तो मुझे मार्क्स से अब्ब मतलब नहीं.
धीरे से लेकिन आत्मविश्वाश से भरा आवाज था ये सुमित का.
डॉ. राहुल:- मार्क्स से मतलब nahi...Kya क्या बोल रहा है तू?
सुमित:- सर, ी हद ा ब्रेकअप.
डॉ. राहुल:- ओह्ह तो इस लिए अब्ब तेरा पढाई और करियर में मन नहीं लग रहा hai...Ye आज कल के बच्चे भी.
राहुल सर का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.
सुमित:- सर आपने सच kaha...Lekin ये बात 5 साल पहले की है.
ये सुन कर राहुल सर का गुस्सा और बेकाबू हो गया.
डॉ. राहुल:- मई गुस्सा बहुत काम होता hun...Aaj पहले hi दिमाग गरम है ऊपर से तू फ़ालतू की बातें कर रहा है...5 साल पहले की बात अब्ब सुना रहा है जिसका इस केस से कोई लेना देना नहीं.
अगर कुछ रीज़न है तो bata...Warna यहाँ से चला jaa...Exam में पास हुआ है कोई एक्शन लेने की बात hi नहीं बनता.
सुमित:- सर मतलब है उस बात ka...Aur भी कुछ बात hai...Yahi कुछ 2, 3 बातें है जो आपके सवाल का जवाब भी है.
डॉ. राहुल:- चल सूना.
सुमित:- बात तब की है जब मब्ब्स ख़त्म होने के बाद एक गांव में मेडिकल अफसर की पोस्ट में काम कर रहा था.
बाकी सब तो ठीक hi चल रहा था बस एक hi समस्या tha...Breakup...Breakup भी नहीं कह sakte...One साइडेड लव स्टोरी था जिसको उसकी मंजिल नहीं मिल सका.
बस इसी से उभरने की कोशिश में लगा हुआ tha...Papa, माँ कुक ह दोस्त और खुद मई सभी लगे हुए थे इस दर्द से खुद को उभारने के liye...Lekin कोई फायदा nahi...Suicide के अलावा हर नेगेटिव थॉट्स दिमाग में आ रहा tha...Papa की बातें मोटिवेशनल तो था hi और सुनने में भी अच्छा लग रहा tha...Lekin फिर भी अधूरा hi रह जाता था.
बस एक hi पॉजिटिव फीलिंग tha...Abb मई डॉक्टर बन गया हूँ और इसी फीलिंग के साथ लोगों की इलाज कर रहा tha...Log ठीक भी हो रहे thhe...Thoda सटिस्फैक्शन भी था अपने काम से.
ऐसे hi एक दिन एक पेशेंट आये पैन इन उप्पेर एब्डोमेन (पेट की ऊपर वाले हिस्से में दर्द) का केस लेकर. थोड़ा हिस्ट्री और एग्जामिनेशन के बाद केस दिएगनोसे किया पेप्टिक अलसर. लेकिन कुछ देर बाद दर्द और बढ़ने से वो फिर aaye...Iss बार फिर से डिटेल्ड हिस्ट्री ले कर जब एग्जामिनेशन किया तो पता चला केस एक्यूट पैंक्रिअटिटिस का था.
बहुत बड़ा ब्लंडर कर चूका tha...Fir किसी तरह पेशेंट को सुप्पोर्टीवे ट्रीटमेंट दे कर रेफेर कर दिया पास के बड़े हॉस्पिटल में जहा अच्छा फैसिलिटी tha...Unka जान जाते जाते bacha...Uss दिन खुद को बहुत गाली diya...Ekdum से ऐसा लगने लगा मुझे कुछ आता hi नहीं.
मब्ब्स के लगभग सभी एक्साम्स में आखिरी के 2 दिन पढता था और मार्क्स 80% से ज्यादा आ जाता tha...Base बहुत अच्छा tha...Issi वजह से मेरे खुद के hi दोस्त और कुछ जूनियर्स एग्जाम के टाइम मेरे साथ पढ़ते thhe...Aur नॉलेज भी बहुत अच्छा tha...Aap पेप्टिक अलसर और एक्यूट पैंक्रिअटिटिस रिलेटेड कुछ भी पूछिए शायद hi कुछ न आता हो.
लेकिन क्या फायदा? जब ग्राउंड लेवल में उस नॉलेज और मार्क्स कोई काम नहीं aaya...Chhota सा मिस्टेक से किसी का जान जा सकता tha...Uss टाइम उस पेशेंट को मेरे मार्क्स से ज्यादा जरुरी था मेरा डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट वो भी सही टाइम में जो दे नहीं सका.
मार्क्स से तो पहले भी मुझे खास लगाव नहीं tha...Exams के 2 दिन पहले पढता tha...Lekin इस इंसिडेंट के बाद तो सोच लिया मार्क्स से मुझे कोई मतलब nahi...Bas नॉलेज बढ़ाना hai...Har दिन कुछ नया सीखना hai...Apna डायग्नोसिस तक पहुँचने का और डिजीज का मैनेजमेंट अच्छे से करना है.
मार्क्स बुरा हो gaya...Dusra कोई अच्छा मार्क्स लाता है तो वो अच्छा है या बुरा है इससे मुझे कुछ खास मतलब nahi...Bas मुझे मार्क्स से चिढ हो गया hai...Ek जो थोड़ा घमंड था की मेरे पास अच्छा नॉलेज है वो टूट गया.
और दूसरी बात जब से डॉक्टर बना hun...Khas कर उस इंसिडेंट के बाद ये नोटिस किया की हमारा हेल्थ ूनप्रेडिक्टेबले hai...Kabhi भी कुछ भी हो सकता है achanak...Kabhi रोड के साइड अच्छे से चल रहे है तो भी एक उनकंट्रोलड ट्रक उड़ा सकता है और ब्लीडिंग से death...To कई बार डिजीज खुद उनकंट्रोलबले हो जाता है जिसे रोकने के लिए पेशेंट कुछ भी करने को तैयार होते है लेकिन कर नहीं पाते.
कई बार पैसे ना होने की मज़बूरी तो कई बार पैसे होने के बावजूद कुछ न कर पाने की majburi...Kai कैंसरस में तो ऑर्गन निकलने क बाद भी ठीक होगा या नहीं ये सोच कर घुट ते हुए पेशेंट्स देखा है.
लोगो की इतनी साती परेशानी है और मई अपना परेशानी में उलझा हुआ hun...Love failure...Jo मेरी कब hi थी hi नहीं.
इन् सभी बातों की वजह से अलग तरह से सोचने पर मजबूर हो gaya...Ye साड़ी परेशानी दिखती तो थी लेकिन महसूस पहली बार कर रहा tha...Shayad एहि मेरे सवाल के जवाब tha...Bas दुनिया को देखना पड़ता hai...Shayad दूसरों की दर्द को देख अपना दर्द छोटा लगने लगा.
सोच लिया मई पहले जितना मस्त हुआ करता था फिर वैसा hi banunga...Faaltu की परेशानी क्यों और झेलू और जो मेरी थी hi नहीं उसके लिए क्यों खुद को इतना तड़पउ?
तब से मेरा दो hi मकशद tha...Ek खुश rehna...Jindagi एक बार के लिए hi मिला है तो क्यों न अच्छे से jiyu...Aur दूसरा जब डॉक्टर बन hi गया हूँ तो अपना फ़र्ज़ अच्छे से nibhau...Aage और पढ़ना लिखना hai...Bahut कुछ सीखना है जिसे वो गलती फिर कभी न दोहराओ.
विश्वाश से भरा इस बात को सुन कर डॉ. राहुल भी मुस्कुरा रहे थे.
डॉ. राहुल:- नई perspective...Sun कर अच्छा लगा.
फिर वो सुमित की और देखते है.
डॉ. राहुल:- तुझे इस लिए बुलाया था क्युकी तेरा मार्क्स और एग्जाम पेपर देख लग रहा था तू केयरलेस हो रहा hai...Jo बिलकुल भी अच्छी बात नहीं hai...Tujh में एक पोटेंशियल देखा hai...Tera बेसिक नॉलेज, हाइपोथिसिस, लॉजिक, ट्रीटमेंट ओप्तिओंस में डिसिशन मेकिंग और correlations...Sabhi बहुत अच्छा hai...Bas इन्ही चीजों पर और ध्यान दे ये समझने के लिए बुलाया था.
लेकिन तेरी बात को सुन कर जरुरत hi नहीं pada...Ek नया पर्सपेक्टिव और पता chala...Chal सही है और तूने अपना जो मिशन की बात की है न उसी में लगा reh...Abhi ये realiz,e होना hi बहुत बड़ी बात है.
सुमित:- सर एक बात पुछु आप से?
डॉ. राहुल:- हाँ पूछ.
सुमित:- एग्जाम जितना हो सके उतना बढ़ाइए.
डॉ. राहुल:- लेकिन तुझे मार्क्स से मतलब hi नहीं?
सुमित:- वो तो नहीं hai...Lekin एग्जाम के वक्त ड्यूटी नहीं होता है तो सोने के लिए वक्त मिल जाता है. :डी
डॉ. राहुल:- भूल jaa...Duty में कोई भी डिस्काउंट नहीं milega...Karna hi पड़ेगा.
सुमित:- ड्यूटी करने में कोई प्रॉब्लम nahi...Acchaa hi लगता hai...Lekin थोड़ा ज्यादा लग रहा है.
डॉ. राहुल:- ये hi मिनिमम hai...Humare टाइम में तो 2 हरष एक्स्ट्रा hi होता tha...Duty चाहे वो ओट हो या ोपड उसमें एक सेकंड भी कोई गायब हो गया तो खैर nahi...Baaki चीज में थोड़ा बहुत चलता है.
सुमित:- अब्ब तो यही उम्मीद कर सकता हूँ किसी तरह काट जाए ये 2 साल.
डॉ. राहुल:- यही मौका है कुछ सिखने का या फिर कुछ गलती करने ka...Agar कुछ सीखते वक्त गलती हो भी गया है तो हम है यहाँ ब्लामे अपने ऊपर लेने के liye...Abb यहाँ से सर्जन बन कर निकलेगा और कुछ गलती हो भी गया तो खुद तू hi रेस्पोंसिबल होगा.
सुमित:- सर ये भी सही है.
डॉ. राहुल:- और भी बहुत सी बातें है जो बाद में समझ में आएगा.
अच्छा तो जा abb...Mujhe मेरे सवाल का जवाब मिल gaya...Haan लेकिन पढाई कभी मत छोड़ना.
इस उम्र तक भी मई कुछ न कुछ पढता रहता हूँ.
सुमित:- जरूर सर.
इतना कह कर सुमित निकल गया.
सुमित निकला तो बहार संजना वेट कर रही thi...Thodi दूर विकाश भी अपने दोस्तों से बात कर रहा था.
संजना:- क्या हक़ सुमित? क्या कहा सर ने?
तभी डॉ. राहुल भी बहार निकले.
डॉ. राहुल:- और सुमित ये प्यार के चक्कर में मत padna...Chup चाप उसी से शादी करना जिसे तुम्हारे माँ बाप चुने.
इतना कह कर वो वह से बाहर निकल गए.
संजना हैरानी में सुमित को देखती रह गयी.
विकाश:- मेघा ने सही hi कहा tha...Sumit सर को इन्फ्लुएंस कर hi देगा.
अब्ब तो संजना भी सोच में पद गयी.
सुमित: अरे Megha...Wo तो मुझे खुद मुझसे ज्यादा जानती है.
हँसते हुए सुमित ने कहा.
संजना:- लेकिन कैसे?
सुमित:- टैलेंट है उसकी.
इतना कह कर सुमित वह से जाने लगा.
संजना:- लेकिन तुम कहा जा रहे हो?
सुमित:- Cafe...Megha इंतजार कर रही होगी.
संजना:- तुम्हे कैसे पता?
सुमित:- मेघा मेरे बारे में इतना जानती है तो मुझे भी थोड़ा पता होगा न मेघा के बारे में. :डी
इतना कह कर सुमित कैफ़े की और चला गया.
ात कैफ़े