Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 13 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 93

Knock...Knock.

यस के इन.

सुमित को देखते hi डॉ. राहुल बोले.

सुमित:- सर आप ने बुलाया था? कॉफ़ी पिलाने के लिए.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

डॉ. राहुल:- कॉफ़ी के लिए nahi...Tere रिजल्ट के बारे में बात करना है.

डॉ. राहुल की आवाज में गुस्सा था जिसे देख सुमित की हंसी गायब हो गया.

डॉ. राहुल:- वैसे तो मई रिजल्ट डिस्कशन के लिए उन्ही को बुलाता हूँ जो बुरी तरह से फ़ैल होते hai...Lekin आज तुझे पास होते हुए भी बुलाना पद रहा है.

सुमित बस बातें सुन hi रहा tha...Thoda बहुत उससे अंदाजा हो गया था की सर ने उससे क्यों बुलाया है.

डॉ. राहुल:- 3 स्टूडेंट्स फ़ैल हुए है एग्जाम mein...Lekin उनसे भी ज्यादा तुझसे डिसअपोइंट हुआ hun...Topper ना सही लेकिन बहुत एक्सपेक्टेशंस था तुझसे.

सुमित कुछ बोलने hi वाला था की...

डॉ. राहुल:- इस बार का क्वेश्चन मैंने सेट किया tha...Simplest तो Toughest...Aur जब पेपर चेक करने बैठा तो सटिस्फीएड hi था स्टूडेंट्स का परफॉरमेंस देख कर.

तेरा पेपर आया तो सोचा थोड़ा स्ट्रिक्ट चेक karunga...Viva में भी तूने बहुत अच्छे से अंसवेरस दिया tha...Starting hi टोगेस्ट क्वेश्चन से सुरु किया tune...Aur अंसवेरस एक्सपेक्टेशन से भी upar...Very impressive...Lekin कुछ क़ुएस्तिओन्स क बाद पेपर hi ब्लेंक.

मतलब क्या था ये? क़ुएस्तिओन्स तुझे कुछ ज्यादा hi इजी लगा या एग्जाम का मजाक उड़ा रहा था तू?

सुमित:- सच कहु तो मुझे मार्क्स से अब्ब मतलब नहीं.

धीरे से लेकिन आत्मविश्वाश से भरा आवाज था ये सुमित का.

डॉ. राहुल:- मार्क्स से मतलब nahi...Kya क्या बोल रहा है तू?

सुमित:- सर, ी हद ा ब्रेकअप.

डॉ. राहुल:- ओह्ह तो इस लिए अब्ब तेरा पढाई और करियर में मन नहीं लग रहा hai...Ye आज कल के बच्चे भी.

राहुल सर का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

सुमित:- सर आपने सच kaha...Lekin ये बात 5 साल पहले की है.

ये सुन कर राहुल सर का गुस्सा और बेकाबू हो गया.

डॉ. राहुल:- मई गुस्सा बहुत काम होता hun...Aaj पहले hi दिमाग गरम है ऊपर से तू फ़ालतू की बातें कर रहा है...5 साल पहले की बात अब्ब सुना रहा है जिसका इस केस से कोई लेना देना नहीं.

अगर कुछ रीज़न है तो bata...Warna यहाँ से चला jaa...Exam में पास हुआ है कोई एक्शन लेने की बात hi नहीं बनता.

सुमित:- सर मतलब है उस बात ka...Aur भी कुछ बात hai...Yahi कुछ 2, 3 बातें है जो आपके सवाल का जवाब भी है.

डॉ. राहुल:- चल सूना.

सुमित:- बात तब की है जब मब्ब्स ख़त्म होने के बाद एक गांव में मेडिकल अफसर की पोस्ट में काम कर रहा था.

बाकी सब तो ठीक hi चल रहा था बस एक hi समस्या tha...Breakup...Breakup भी नहीं कह sakte...One साइडेड लव स्टोरी था जिसको उसकी मंजिल नहीं मिल सका.

बस इसी से उभरने की कोशिश में लगा हुआ tha...Papa, माँ कुक ह दोस्त और खुद मई सभी लगे हुए थे इस दर्द से खुद को उभारने के liye...Lekin कोई फायदा nahi...Suicide के अलावा हर नेगेटिव थॉट्स दिमाग में आ रहा tha...Papa की बातें मोटिवेशनल तो था hi और सुनने में भी अच्छा लग रहा tha...Lekin फिर भी अधूरा hi रह जाता था.

बस एक hi पॉजिटिव फीलिंग tha...Abb मई डॉक्टर बन गया हूँ और इसी फीलिंग के साथ लोगों की इलाज कर रहा tha...Log ठीक भी हो रहे thhe...Thoda सटिस्फैक्शन भी था अपने काम से.

ऐसे hi एक दिन एक पेशेंट आये पैन इन उप्पेर एब्डोमेन (पेट की ऊपर वाले हिस्से में दर्द) का केस लेकर. थोड़ा हिस्ट्री और एग्जामिनेशन के बाद केस दिएगनोसे किया पेप्टिक अलसर. लेकिन कुछ देर बाद दर्द और बढ़ने से वो फिर aaye...Iss बार फिर से डिटेल्ड हिस्ट्री ले कर जब एग्जामिनेशन किया तो पता चला केस एक्यूट पैंक्रिअटिटिस का था.

बहुत बड़ा ब्लंडर कर चूका tha...Fir किसी तरह पेशेंट को सुप्पोर्टीवे ट्रीटमेंट दे कर रेफेर कर दिया पास के बड़े हॉस्पिटल में जहा अच्छा फैसिलिटी tha...Unka जान जाते जाते bacha...Uss दिन खुद को बहुत गाली diya...Ekdum से ऐसा लगने लगा मुझे कुछ आता hi नहीं.

मब्ब्स के लगभग सभी एक्साम्स में आखिरी के 2 दिन पढता था और मार्क्स 80% से ज्यादा आ जाता tha...Base बहुत अच्छा tha...Issi वजह से मेरे खुद के hi दोस्त और कुछ जूनियर्स एग्जाम के टाइम मेरे साथ पढ़ते thhe...Aur नॉलेज भी बहुत अच्छा tha...Aap पेप्टिक अलसर और एक्यूट पैंक्रिअटिटिस रिलेटेड कुछ भी पूछिए शायद hi कुछ न आता हो.

लेकिन क्या फायदा? जब ग्राउंड लेवल में उस नॉलेज और मार्क्स कोई काम नहीं aaya...Chhota सा मिस्टेक से किसी का जान जा सकता tha...Uss टाइम उस पेशेंट को मेरे मार्क्स से ज्यादा जरुरी था मेरा डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट वो भी सही टाइम में जो दे नहीं सका.

मार्क्स से तो पहले भी मुझे खास लगाव नहीं tha...Exams के 2 दिन पहले पढता tha...Lekin इस इंसिडेंट के बाद तो सोच लिया मार्क्स से मुझे कोई मतलब nahi...Bas नॉलेज बढ़ाना hai...Har दिन कुछ नया सीखना hai...Apna डायग्नोसिस तक पहुँचने का और डिजीज का मैनेजमेंट अच्छे से करना है.

मार्क्स बुरा हो gaya...Dusra कोई अच्छा मार्क्स लाता है तो वो अच्छा है या बुरा है इससे मुझे कुछ खास मतलब nahi...Bas मुझे मार्क्स से चिढ हो गया hai...Ek जो थोड़ा घमंड था की मेरे पास अच्छा नॉलेज है वो टूट गया.

और दूसरी बात जब से डॉक्टर बना hun...Khas कर उस इंसिडेंट के बाद ये नोटिस किया की हमारा हेल्थ ूनप्रेडिक्टेबले hai...Kabhi भी कुछ भी हो सकता है achanak...Kabhi रोड के साइड अच्छे से चल रहे है तो भी एक उनकंट्रोलड ट्रक उड़ा सकता है और ब्लीडिंग से death...To कई बार डिजीज खुद उनकंट्रोलबले हो जाता है जिसे रोकने के लिए पेशेंट कुछ भी करने को तैयार होते है लेकिन कर नहीं पाते.

कई बार पैसे ना होने की मज़बूरी तो कई बार पैसे होने के बावजूद कुछ न कर पाने की majburi...Kai कैंसरस में तो ऑर्गन निकलने क बाद भी ठीक होगा या नहीं ये सोच कर घुट ते हुए पेशेंट्स देखा है.

लोगो की इतनी साती परेशानी है और मई अपना परेशानी में उलझा हुआ hun...Love failure...Jo मेरी कब hi थी hi नहीं.

इन् सभी बातों की वजह से अलग तरह से सोचने पर मजबूर हो gaya...Ye साड़ी परेशानी दिखती तो थी लेकिन महसूस पहली बार कर रहा tha...Shayad एहि मेरे सवाल के जवाब tha...Bas दुनिया को देखना पड़ता hai...Shayad दूसरों की दर्द को देख अपना दर्द छोटा लगने लगा.

सोच लिया मई पहले जितना मस्त हुआ करता था फिर वैसा hi banunga...Faaltu की परेशानी क्यों और झेलू और जो मेरी थी hi नहीं उसके लिए क्यों खुद को इतना तड़पउ?

तब से मेरा दो hi मकशद tha...Ek खुश rehna...Jindagi एक बार के लिए hi मिला है तो क्यों न अच्छे से jiyu...Aur दूसरा जब डॉक्टर बन hi गया हूँ तो अपना फ़र्ज़ अच्छे से nibhau...Aage और पढ़ना लिखना hai...Bahut कुछ सीखना है जिसे वो गलती फिर कभी न दोहराओ.

विश्वाश से भरा इस बात को सुन कर डॉ. राहुल भी मुस्कुरा रहे थे.

डॉ. राहुल:- नई perspective...Sun कर अच्छा लगा.

फिर वो सुमित की और देखते है.

डॉ. राहुल:- तुझे इस लिए बुलाया था क्युकी तेरा मार्क्स और एग्जाम पेपर देख लग रहा था तू केयरलेस हो रहा hai...Jo बिलकुल भी अच्छी बात नहीं hai...Tujh में एक पोटेंशियल देखा hai...Tera बेसिक नॉलेज, हाइपोथिसिस, लॉजिक, ट्रीटमेंट ओप्तिओंस में डिसिशन मेकिंग और correlations...Sabhi बहुत अच्छा hai...Bas इन्ही चीजों पर और ध्यान दे ये समझने के लिए बुलाया था.

लेकिन तेरी बात को सुन कर जरुरत hi नहीं pada...Ek नया पर्सपेक्टिव और पता chala...Chal सही है और तूने अपना जो मिशन की बात की है न उसी में लगा reh...Abhi ये realiz,e होना hi बहुत बड़ी बात है.

सुमित:- सर एक बात पुछु आप से?

डॉ. राहुल:- हाँ पूछ.

सुमित:- एग्जाम जितना हो सके उतना बढ़ाइए.

डॉ. राहुल:- लेकिन तुझे मार्क्स से मतलब hi नहीं?

सुमित:- वो तो नहीं hai...Lekin एग्जाम के वक्त ड्यूटी नहीं होता है तो सोने के लिए वक्त मिल जाता है. :डी

डॉ. राहुल:- भूल jaa...Duty में कोई भी डिस्काउंट नहीं milega...Karna hi पड़ेगा.

सुमित:- ड्यूटी करने में कोई प्रॉब्लम nahi...Acchaa hi लगता hai...Lekin थोड़ा ज्यादा लग रहा है.

डॉ. राहुल:- ये hi मिनिमम hai...Humare टाइम में तो 2 हरष एक्स्ट्रा hi होता tha...Duty चाहे वो ओट हो या ोपड उसमें एक सेकंड भी कोई गायब हो गया तो खैर nahi...Baaki चीज में थोड़ा बहुत चलता है.

सुमित:- अब्ब तो यही उम्मीद कर सकता हूँ किसी तरह काट जाए ये 2 साल.

डॉ. राहुल:- यही मौका है कुछ सिखने का या फिर कुछ गलती करने ka...Agar कुछ सीखते वक्त गलती हो भी गया है तो हम है यहाँ ब्लामे अपने ऊपर लेने के liye...Abb यहाँ से सर्जन बन कर निकलेगा और कुछ गलती हो भी गया तो खुद तू hi रेस्पोंसिबल होगा.

सुमित:- सर ये भी सही है.

डॉ. राहुल:- और भी बहुत सी बातें है जो बाद में समझ में आएगा.

अच्छा तो जा abb...Mujhe मेरे सवाल का जवाब मिल gaya...Haan लेकिन पढाई कभी मत छोड़ना.

इस उम्र तक भी मई कुछ न कुछ पढता रहता हूँ.

सुमित:- जरूर सर.

इतना कह कर सुमित निकल गया.

सुमित निकला तो बहार संजना वेट कर रही thi...Thodi दूर विकाश भी अपने दोस्तों से बात कर रहा था.

संजना:- क्या हक़ सुमित? क्या कहा सर ने?

तभी डॉ. राहुल भी बहार निकले.

डॉ. राहुल:- और सुमित ये प्यार के चक्कर में मत padna...Chup चाप उसी से शादी करना जिसे तुम्हारे माँ बाप चुने.

इतना कह कर वो वह से बाहर निकल गए.

संजना हैरानी में सुमित को देखती रह गयी.

विकाश:- मेघा ने सही hi कहा tha...Sumit सर को इन्फ्लुएंस कर hi देगा.

अब्ब तो संजना भी सोच में पद गयी.

सुमित: अरे Megha...Wo तो मुझे खुद मुझसे ज्यादा जानती है.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

संजना:- लेकिन कैसे?

सुमित:- टैलेंट है उसकी.

इतना कह कर सुमित वह से जाने लगा.

संजना:- लेकिन तुम कहा जा रहे हो?

सुमित:- Cafe...Megha इंतजार कर रही होगी.

संजना:- तुम्हे कैसे पता?

सुमित:- मेघा मेरे बारे में इतना जानती है तो मुझे भी थोड़ा पता होगा न मेघा के बारे में. :डी

इतना कह कर सुमित कैफ़े की और चला गया.


ात कैफ़े
 
अपडेट 94

ज्यादा इंतजार तो नहीं कराया?

हँसते हुए सुमित ने पूछा.

मेघा:- अब्ब तो आदत सी हो गयी hai...Khair chhodo...Kaisa रहा मीटिंग?

सुमित:- बताने की जरुरत है?

मेघा:- आउटकम पता hai...Kya हुआ hoga...Agar कुछ इंटरेस्टिंग है तो बता सकते ho...Sunne की बहुत फुर्सत है फ़िलहाल.

सुमित:- इंटरेस्टिंग तो कुछ खास नहीं tha...Jo भी वजह था खुल कर कह diya...Sir भी सटिस्फीएड थे आंसर से.

मेघा:- अच्छा कॉफ़ी आर्डर karo....Bore हो गयी इंतजार करते हुए.

सुमित:- नहीं.

सवालिया नजरो से मेघा सुमित को देखती है.

सुमित:- तुम आर्डर karo...Aaj का दिन तुम्हारे naam...Aur पसंद भी tumhari....Jo चाहे आर्डर करो.

मेघा:- अचानक से.

सुमित:- आज तक खुद आर्डर करते करते बोर हो gaya....Socha तुम्हारा फ्लेवर भी चेक कर लेता हु.

फिर मेघा कॉफ़ी और नास्ता आर्डर कर लेती है.

मेघा:- अब्ब क्या सोच रहे हो?

बहुत देर से मेघा नोटिस कर रही थी की सुमित कुछ कहना चाहता है.

सुमित:- कुछ कहना था.

मेघा:- हाँ तो बिंदास bolo...Itna सोचने की क्या बात है?

सुमित:- पर समझ में नहीं आ रहा hai.....Pata नहीं तुम्हारा क्या जवाब होगा?

सुमित अपनी बात कहना तो चाहता था लेकिन एक झिझक था जो उसे बोलने नहीं दे रहा था.

मेघा:- मेरा क्या जवाब होगा ये मुझ पर छोड़ do....Tum क्या चाहते हो वो बोलो.

सुमित को अभी भी चुप देख कर.

मेघा:- या फिर शायद हो सकता है जो तुम बोलने जा रहे हो ये सुन कर मई ख़ुशी से झूम uthu...Shayad ये hi सुनने के लिए मेरे कान तरस रहे हो.

मेघा ने इस बार सुमित को छेड़ते हुए कहा तो अब्ब सुमित को भी हिम्मत mila...Apna जाना पहचाना अंदाज में वो बोलै.

सुमित:- Chalo...Kahi भाग chale...Iss दुनिया से dur...Sirf तुम और मई.

प्यार भरी आवाज में सुमित ने कहा तो ये बात मेघा के सर के ऊपर से चला gaya...Kaisa प्रोपोज़ था ये?

मेघा:- अरे यू सीरियस?

सुमित:- नहीं तो क्या तुम्हे मजाक लग रहा है.

सुमित की बातो से लग रहा था वो सच में सीरियस है.

मेघा:- तब तो ये पागलपन hai....Aur क्या मतलब है तुम्हारे बातों का?

सुमित:- जो तुमने सुना.

मेघा को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha....Jo बात वो सुमित की मुंह से सुन्ना चाहती थी वो सुमित ने बोल diya....Aur जो भी प्यार सुमित की आँखों में दिख रह था कुछ देर पहले वो अचानक से गायब हो गया.

सुमित:- चलो करते है ये पागलपन.

अब्ब तो मेघा को चक्कर आने लगा tha...Kuch समझ नहीं पा रही thi...Uski ये हालत देख सुमित अपने चेहरे का भाव बदल लेता है और मुस्कुराते हुए कहता है.

सुमित:- सच में ये 2 दिन का पागलपन जरुरी hai...Bahut अच्छा लगेगा तुम्हे.

2 din...Ye क्या ट्विस्ट है? एहि सवाल चल रहा था मेघा की दिमाग में.

सुमित:- एक प्लान बनाया है...2 दिन के लिए कही घूम कर फ्रेश होने ka....Bahut पढ़ लिया और बहुत ड्यूटी कर लिया.

सोचा तुम्हे भी साथ ले chalu...Maja आएगा.

सुमित की इस अंदाज पे मेघा को हंसी आ gaya...Kya सोच रही थी वो और क्या निकला सुमित की बात का matlab...Kahi न कही थोड़ा निराश भी thi...Jo सुन्ना चाहती थी उससे बिलकुल hi अलग था सुमित की बात.

सुमित:- बस यही झिझक था मन mein...Tum तैयार हो या नहीं? अगर तैयार हो भी गयी तो मेरे कारण से तुम्हारा 2 दिन लोस्स हो जाएगा.

मेघा:- तो ये था तुम्हारे बात का मतलब? मई तो कुछ और hi सोच रही थी?

सुमित:- क्या?

मेघा:- कही तुम्हे प्यार तो नहीं हो गया? जो ऐसे भागने की बात कर रहे हो?

सुमित:- प्यार और तुमसे?

छेड़ते हुए सुमित ने kaha....Lekin उसका हस्सी मेघा के घूरते hi बंद हो गया.

सुमित:- अब्ब इतनी हिम्मत kaha...Retirement ले लिया है आशिकी से.

मेघा:- ये खुद को सांत्वना दे रहे हो.

सुमित:- नहीं.

सुमित की इस बात पर उतना आत्मविश्वाश नहीं था.

मेघा:- खैर ये बात chhodo...Bas ये bataao....Tumhare साथ मई hi क्यों?

सुमित:- ये बात तुम भी जानती हो.

मेघा:- लेकिन तुम्हारी मुंह से सुन्ना चाहती हु.

सुमित:- बता दू?

मेघा:- शुभ मुहूर्त का इंतजार कर सकते हो.

मेघा की इस बात में छिड़ था.

सुमित:- चलो बता hi देता हु.

तुम वो हो जिसने टूटा हुआ सुमित को समेटा hai...Jindagi नाम की खेल से hi हार मान चूका सुमित को खेल का सही मतलब समझाया hai...Khushi में तो हर कोई साथ देता hai...Lekin तुम्हारा साथ सिर्फ दुःख में मिला है वो भी niswarth...Tum वो दोस्त हो मेरी जिसके साथ हर पल बिताना अपना खुश नसीब समझता hun...Aur भी बहुत कुछ है दिल में तुमसे कहने के liye...Jo शायद जुबान पर ला नहीं paaunga...Shayad भूल चूका हूँ.

कुछ लालसा है तुम्हारे साथ और वक्त बिताने ki...Kuch पल ख़ुशी में भी साथ बिताने की.

तुम मेरी वो हो जिसे शायद अंग्रेजी में "बेस्ट फ्रेंड" कहते है.

हर एक शब्द सुकून था मेघा के liye...Bahut देर से hi सही लेकिन आज सुमित की ये बातें, उसके दिल में अपना ये जगह मेघा को बहुत अच्छा मेषसुस करा रहा था.

सुमित:- हमेशा अपना ये जज़्बात जाहिर नहीं कर paaunga...Lekin एहि सच है.

मेघा:- वो तो तुम अभी भी जाहिर नहीं कर रहे ho...Lekin सब समझती हूँ. :डी

इस बा से सुमित को एकदम से झटका laga...Iss बात का कोई जवाब नहीं था सुमित के पास.

मेघा:- अच्छा तो कल सुबह मिलते है.

नेक्स्ट मॉर्निंग

आज भी आदत से मजबूर सुमित लेट हो पहुँचता hai...Lekin मेघा को शायद आज इंतजार करने में मजा आ रहा था.

सुमित के साथ 2 दिन तक घूमने की बात से hi वो काफी एक्ससिटेड हो गयी थी.

इस इंतजार का फल भी मीठा hi tha...Aaj सुमित का लुक देख मेघा का मुंह खुला का खुला रह गया.

होता भी क्यों nahi...Hamesha से उससे आकर्षक लगने वाला सुमित का लुक और पर्सनालिटी में चार चाँद लगा tha...Pehli बार उसने सुमित को क्लीन शवेद देखा tha...Jisse वो और भी आकर्षक लग रहा था.

मेघा:- तो इतना टाइम सजने सवारने में लगा था?

सुमित: बिलकुल.

मेघा:- काफी हैंडसम लग रहे हो!!

सुमित:- और तुम हमेशा की तरह ब्यूटीफुल.

मेघा सुमित की इस कॉम्प्लीमेंट पर सिर्फ मुस्कुराती है.

मेघा:- अचानक से इस बदलाव की वजह.

सुमित:- है कुछ.

मेघा:- बता सकते हो अगर इच्छा हो तो.

सुमित:- अगर सही वक्त आया तो जरूर बताऊंगा.

मेघा:- इस में भी suspense...Ummeed है वो वक्त जल्द हो आएगा.

सुमित इस बात पर कोई जवाब नहीं देता.

वो नोटिस कर रहा था की मेघा की नजर बार बार उससे hi देख रहा था.

सुमित:- कुछ कहना चाहती हो?

मेघा:- नहीं

मेघा:- (इन हेर मंद) मई तो कुछ नहीं kahungi....Lekin तुम से बुलवा कर रहूंगी तुम्हारी दिल की baat....Abb हो hi जाए आर या पार.

तभी सुमित उससे वो कह देता है जो उससे सच में हैरान कर देता है.

सुमित:- इस टूर में बाइक तुम चलाओगी.

इतना कह कर सुमित बाइक की चाभी मेघा को देता है.

मेघा:- लेकिन.

सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Jyadatar मैंने hi डिसिशन लिया है हर टूर में.

इस बार डिसिशन तुम्हारा hai...Jaha ले जाना चाहती हो ले chalo...Ye टूर तुम्हारा hai...Mai बस साथ हूँ इस पल को जीने के लिए.

मेघा:- इंटरेस्टिंग. :)

ये कह कर मेघा बाइक स्टार्ट करती है और दोनों चल पड़ते है अपने जिंदगी के ख़ुशी कुछ पल साथ बिताने के लिए.
 
अपडेट 95

बाइक थोड़ा आगे बढ़ा hi था की बाइक का बैलेंस बिगड़ने लगा.

सुमित भी बाइक से जम्प करने की कोशिश करने लगा लेकिन कर नहीं रहा था.

मेघा:- उतरो जल्दी.

डरते हुए आवाज में मेघा ने कहा.

सुमित:- नहीं nahi...Mujhe दर लग रहा है.

फिर थोड़ा और आगे जाके बाइक रुक जाता है.

बाइक से उतर कर.

मेघा:- बहुत डरपोक हो यार तुम.

इतना कह कर मेघा पीछे मुड़ती है और सुमित को हँसता देख चौंक जाती है.

मेघा:- पूरी म्हणत बर्बाद कर दिया.

सुमित:- ऐसे कैसे बर्बाद हो gaya...Darne की बहुत अच्छा एक्टिंग किया था. :lol1:

मेघा:- तुम्हे सच में दर नहीं लगा.

सुमित:- एक्टिंग करते वक्त :डी

मेघा:- लेकिन कोशिश तो बहुत अच्छा किया था बाइक के बैलेंस बिगाड़ने के लिए.

सुमित:- गलती तुम्हारी नहीं hai...Cricketke बाद बाइक hi ऐसा चीज है जिसे आज भी प्यार hai...Sirf इंसान का hi नहीं बाइक का भी एनाटोमी और फिजियोलॉजी पता है.

तुरंत पैट चल जाता है बाइक का बैलेंस बिगड़ा है या बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है :डी

सुमित की इस बात पर मेघा कुछ देर घूरती है फिर हसने लगती है.

मेघा:- तो फिर बाइक की पैथोलॉजी में फार्माकोलॉजी भी जानते honge...Ban जाओ बाइक के डॉक्टर. :हिंतहिंट:

सुमित:- बन चूका hun...Aur कई बार तो सर्जरी भी कर चूका hun...Bahut पैसे बचाये है :स्मार्त्य:

मेघा:- तुम से जीत नहीं सकती.

इतना कह कर मेघा हसने लगती है.

सुमित:- 2 दिन एन्जॉय करना hai...Pehle से hi फॉर्म में हूँ.

मेघा:- अच्छा ये बताओ सच में बाइक का बैलेंस बिगड़ जाता तो क्या करते?

सुमित:- जो कर सकता था वो karta...Pehle पीछे से hi बैलेंस बनाने की कोशिश और अगर नहीं कर पाया तो तुम्हारे साथ hi गिर जाता.

अब्ब साथ चल पड़े है तो साथ तो निभाना पड़ेगा न.

सुमित की इस बात पर मेघा सिर्फ उसको hi देखती है.

सुमित:- अब्ब इतना भी सेंटी होने की जरुरत नहीं hai...Bhale hi सर्जरी पढ़ रहा हूँ लेकिन ऑर्थोपेडिक्स आज भी अच्छे से आता hai...Aise लैंड करता जिससे फ्रैक्चर होता hi नहीं और हो भी जाता तो बिना ज्यादा कम्प्लीकेशन के अच्छे से ट्रीट हो जाता.

मेघा:- तुम से बातें करना hi बेकार है :डोह:

फिर दोनों निकल पड़ते है आगे की अनजान मंजिल की aur...Iss बार बैलेंस नहीं बिगड़ता.

और बाइक दूसरे सेहर में जा कर रुकता है.

सुमित:- यहाँ पर रुकने की वजह.

मेघा:- इस तोऊर के मास्टरमाइंड मई हूँ.

सुमित:- वो तो है.

मेघा:- फिर चलो जहा मई ले चलती हूँ बिना किसी सवाल जवाब के.

सुमित:- जो आज्ञा.

फिर दोनों एक सिनेमा हॉल की तरफ जाते है.

मूवी चल pada...Movie के दौरान मेघा की नजर कभी मूवी पर होता तो कभी सुमित par...Sumit का भी कुछ वैसा hi हाल था.

बिच बिच में सुमित की मुस्कान देख मेघा को लगा की सुमित को मूवी पसंद आ रहा है.

मूवी ख़त्म होने के बाद.

मेघा:- कैसा लगा?

सुमित:- अच्छा था.

मेघा:- बस अच्छा?

सुमित:- हाँ अच्छा hi था.

मेघा:- बस अच्छा hi?

सुमित:- अच्छा तुम क्या सुन्ना चाहती हो वो hi बोल देता हूँ.

मेघा:- तुम्हे जैसा लगा वैसा hi बताओ.

सुमित:- नहीं मूवी अच्छा hi था लेकिन एंडिंग ऐसा लगा जैसे कोई फैरयटाले टाइप मूवी है.

मेघा:- और ऐसा तुम्हे क्यों लगा?

सुमित:- ऐसा भी हैप्पी एंडिंग हो सकता hai...Real लाइफ में इम्पॉसिबल.

मेघा:- और तुम्हे क्यों लगा की ये रियल लाइफ में इम्पॉसिबल है?

सुमित:- क्युकी ऐसा मैंने होते कभी नहीं देखा.

मेघा:- लेकिन मैंने तो देखा है.

सुमित:- लेकिन मेरे साथ तो नहीं हुआ. :माध:

थोड़ा सा गुस्सा सुमित के चेहरे पर आ गया.

मेघा:- अब्ब ये मत कहना की अंगूर खट्टे होते है :lol1:

मेघा ने हँसते हुए kaha...Sumit बी कुछ देर बाद सातब देने के लिए मुस्कुराने लगा.

सुमित:- अभी भी विस्वाश नहीं hota...Agar रियल लाइफ में फिर कभी हुआ तो मुझे भी दिखाना.

मेघा:- दिखाना क्यों? खुद hi देख लो.

सुमित:- किसको?

मेघा:- खुद को hi.

सुमित:- क्या मतलब?

मेघा:- जिस लव स्टोरी को तुम फैरयटाले समझ रहे ho...Wo तुम्हारे साथ hi होने वाला है.

सुमित:- मई और फैरयटाले लव स्टोरी :lol1: Impossible...Mai तो अब्ब इन् चीजों से दूर भागता हूँ.

मेघा:- दुनिया गोल hai...Bhaagte हुए वही आ जाओगे.

सुमित भी इस जवाब पर चुप हो gaya...Megha की बात गलत तो नहीं लगा usse..Lekin क्या सच में ऐसा हो सकता hai...Bas यही सवाल उसके दिमाग में चलने लगा.

सुमित:- मई एक्सेप्शन हूँ.

बस इतना hi जवाब दे पाया सुमित.

मेघा:- हर इंसान को लगता है वो स्पेशल और एक्सेप्शनल है. :डी

मेघा की इस बात का भी जवाब नहीं था सुमित के पास.

सुमित:- बस मेरे लाइफ में फैरयटाले लवस्टोरी नहीं होगा.

मेघा:- (इन हेर मंद) लेकिन मेरी लाइफ में तो hoga...Aur बात एक hi है. :डी

मेघा:- (तो सुमित) जरूर hoga...Mein दावे के साथ कह सकती हूँ.

सुमित:- अच्छा मेरे लाइफ पर तुम इतना सूरे कैसे हो सकती हो?

मेघा:- क्यों की तुम से ज्यादा तुम्हे मई जानती hun...Ye बात तो तुम भी कहते हो.

मेघा की बात पर सुमित भी हँसता hai...Aaj मेघा की बातों का तोड़ सुमित के पास नहीं था.

सुमित:- हाँ लेकिन इस बार तुम गलत हो.

मेघा:- लगाओ शर्त.

मेघा की कॉन्फिडेंस पर अब्ब सुमित को हैरानी होने लगा.

सुमित:- Shart...Bataao क्या शर्त लगाओगी.

मेघा:- जिस दिन जीत जाउंगी उस दिन बताउंगी.

सुमित:- तुम्हारा कॉन्फिडेंस अच्छा लगा.

मेघा:- जिस दिन शर्त जीतूंगी उस दिन तुम्हे और अच्छा लगा.

सुमित भी चाहता था मेघा hi ये शर्त jeete...Apni ख़ुशी कौन नहीं chaahega...Lekin कही न कही विश्वास hi कमी था.

इस मामले में सुमित से और कुछ नहीं बोलै जाए रहा tha...Kuch देर ऐसे hi चलने के बाद.

सुमित:- तुम तो मेरव बारे में सब कुछ जानती ho....Mai hi कुछ नहीं जानता तुम्हारे बारे में.

मेघा:- कभी जान्ने की कोशिश भी की ?

ये बात मेघा की दिल से निकली जिसने सुमित को क्लीन बोल्ड कर दिया.

सुमित:- शायद मुलाकात hi ऐसे समय पर हुआ तब से अपने hi बारे में सोच रहा hun...Tumhe भी लग रहा होगा कितना खुदगर्ज़ हूँ मई.

मेघा:- अरे तुम तो सेंटी हो gaye...Mai तो बस ऐसे hi कह ताहि थी.

अगर सच में तुम्हे खुदगर्ज़ या गलत सोचती तो तुमसे बात करना तो दूर अपने आस भी आने नहीं देती.

इस जवाब से सुमित को थोड़ा राहत मिला.

सुमित:- अच्छा एक बात bataao...Jo बहुत दिनों से पूछना चाहता था.

पहली नजर में मई कैसा लगा था तुम्हे?

एनाटोमी का फर्स्ट क्लास जब सुमित ने प्रोफेसर के साथ सभी स्टूडेंट को हैरान कर दिया था और मेघा को ब्यूटी क्वीन कह कर परेशां किया था उसी दिन को याद कर के सुमित ने पूछा.

मेघा:- प्रिंस.

सुमित:- क्या?

मेघा:- प्रिंस मतलब राजकुमार.

सुमित:- सच में.

मेघा:- बिलकुल.

सुमित:- या तो सेंस ऑफ़ ह्यूमर वाला सोचना चाहिए या फ़ालतू के कॉमेडी करने वाला joker...Lekin प्रिंस कैसे.

मेघा:- लेकिन मैंने तो प्रिंस hi सोचा था.

मेघा ने सुमित के हालत के मजे लेते हुए कहा.

सुमित:- Prince...Kis एंगल से?

मेघा:- एंगल सही tha...Bilkul 360° सही.

सुमित:- अब्ब तो रेहम karo...Kuch समझ में नहीं आ रहा है.

मेघा:- चलो बता hi देती हूँ.

सुमित बहुत एक्ससिटेड लग रहा था.

मेघा:- क्या लगता है तुम्हे? वो कॉलेज के पहले दिन hi हमारी मुलाक़ात हुआ था?

अब्ब सुमित सच में चौंक गया.

सुमित:- मतलब तुमने भी मुझे नोटिस किया जब मई कीर्ति के साथ मंदिर आया था. [Update 31]

एक दो बार मेरा नजर तुम पर पड़ा था लेकिन तुम्हारा भी. :ीक:

हैरानी में सुमित ने कहा.

मेघा:- उससे भी पहले.

अब्ब तो सुमित का हाल बेहाल हो gaya...Usse पहले तो सुमित ने मेघा को कभी नहीं dekha...Lekin मेघा ने कैसे?

सुमित के एक्सप्रेशन देख.

मेघा:- क्यों हिला डाला न? (रजिनिकंठ स्टाइल)

सुमित:- कब से?

मेघा बस मुस्कुरा रही थी.

सुमित:- बताओ भी?

सुमित से रहा नहीं जा रहा था.

मेघा:- Bataungi...Lekin सही वक्त आने पर.

सुमित की मजा लेते हुए मेघा ने कहा.

सुमित:- नहीं अभी.

मेघा:- वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता.

हँसते हुए मेघा ने कहा लेकिन सुमित से बिलकुल भी सब्र नहीं हो रहा था.

सुमित:- अब्ब रहा नहीं जा रहा है.

मेघा:- ये क्या तुम्हारा फवौरीते मूवी गेंरे तो सस्पेंस थ्रिलर tha...Lekin लग तो नहीं रहा है.

सुमित का शक्ल देख कर लग रहा था अब्ब. वो कभी भी रू देगा.

सुमित:- कैसे मेरा मजा लेना है अच्छे से जानती हो तुम :(

चलो कोई बात nahi....Intejaar कर lunga...Dekhte है क्या थ्रिलक है इसमें.

मेघा:- बस मूवी को रियलिटी में बदल रही hun...Mera फवौरीते फैरयटाले स्टोरी तो सच होगा hi और देखना तुम्हारा फवौरीते गेंरे को भी रवैल लाइफ में फील करा दूंगी.

सुमित:- क्या सच में इतना थ्रिलिंग है?

मेघा:- तुम्हारे सोच से भी कही aage...Bas इंतजार karo...Intejaar का ये फल बहुत hi मीठा है.

सुमित:- इंतजार रहेगा.

एक्ससिटेमेंट से भरी आवाज में सुमित ने कहा.

कुछ दूर आगे चलने के बाद.

मेघा:- इस टूर का मास्टरमाइंड मई हूँ तो ऐसे थ्रिल तुम्हे टूर भर मिलते रहेंगे.

सुमित के उम्मीद से भी ज्यादा मजेदार टूर nikla...Abb उसका एक्ससिटेमेंट बढ़ता hi जा रहा था मेघा आगे क्या क्या बम फोड़ेगी.

सुमित:- और थोड़ा मुझ बेचारे पर रेहम भी करना. :प्रे:

मेघा:- बिलजुल नहीं. :ेविलौगह:
 
अपडेट 96

अब्ब कहा जा रहे है हम?

आवाज में थोड़ा घबराहट ला कर सुमित ने pucha...Thoda बहुत अंदाजा तो पहले hi हो चूका था.

मेघा:- चलो.

सुमित:- लेकिन क्यों?

मेघा:- टूर का आर्गेनाइजर मई hun...Mere हिसाब से चलो.

इतना कह कर मेघा आगे बढ़ जाती है.

सुमित:- लग गया :(

सुमित भी पीछे चल पड़ता है.

ये एक शॉपिंग मॉल tha...Sumit की होने वाली हालत सोच कर मेघा हांसे जा रही थी.

सुमित:- तुम शॉपिंग karo...Mai अभी आता हूँ.

मेघा:- कोई बहाना नहीं चलेगा बच्चू.

सुमित का हाथ पकड़ कर मेघा खींचती है.

सुमित:- आ रहा hun...Bas 2 मिनट में.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- अभी अभी बाहर फार्मेसी dikha...Benzodiazipines (स्लीपिंग पिल्स) की टेबलेट लेना hai...Fir भूल जाऊँगा.

मेघा:- अच्छा hai...Shoping के बाद थक जाओगे तो स्लीपिंग पिल की जरुरत तो पड़ेगी hi.

इतना कह कर मेघा सुमित का हाथ छोड़ देती है.

जब सुमित वापस आया.

मेघा:- 2 मिनट बोल कर गए thhe...Aur 1 मिनट 50 सेकंड में hi वापस आ gaye...Waah...Punctuality सिख गए आखिरकार.

सुमित:- जिंदगी के 2 महत्वपूर्ण दिन तुम्हे दे रहा hun...Iss में देरी की कोई गुंजाइश hi नहीं.

मेघा:- अच्छा तो ये 2 दिन के साथ ये 2 तबकेट भी do...Tab मानूंगी.

इतना कह कर मेघा सुमित के हाथ से टेबलेट छीन लेती है.

लेकिन इससे सुमित पर फर्क नहीं pada...Pocket की तरफ हाथ बढ़ाया hi था की...

मेघा:- ये तो चीटिंग है.

मेघा फिर से सुमित पर झपट पड़ती उससे पहले hi...Sumit जल्दी से पैकेट फाड़ के टेबलेट जैसा कुछ अपने मुंह में रख कर खली पैकेट मेघा को थमा देता है.

मेघा:- ये तो च्युइंग गम है. :ीक:

सुमित:- अब्ब यहाँ तुम्हारा शॉपिंग एन्जॉय करने के लिए पॉपकॉर्न तो मिलेगा nahi...Bas च्युइंग गम का hi सहारा है.

मेघा:- और ये दवाई?

सुमित:- संभालके rakhna...Tour ख़त्म होने के बाद लूंगा.

मेघा:- लेकिन ख़रीदा क्यों?

सुमित:- सुनील (रूममेट) का बर्थडे hai...Uski रातों के नींद उड़द गया hai...Birthday गिफ्ट देना है. :lol1:

मेघा:- अच्छा है मेरा बर्थडे याद nahi...Warna क्या पता क्या उटपटांग गिफ्ट मिलता.

सुमित:- तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की मई तुम्हे बर्थडे गिफ्ट दूना. :हम्म:

मेघा के घूरते hi.

सुमित:- ओह्ह sorry...Mujhe तुम्हारा बर्थडे भी याद है.

मेघा:- अच्छा गेस करो.

सुमित:- अप्रैल 1...दिन और पर्सनालिटी मैच करता है.

अब्ब मेघा सुमित की तरफ बढ़ती hi है की सुमित फुर्ती से एस्कलेटर पर छड़ जाता है.

सुमित:- 4तह फ्लोर.

मेघा:- मुझे एस्कलेटर से दर लगता है.

सुमित:- सिद्धि से आ जाओ.

फिर सुमित दूसरी तरफ मुद जाता है.

मेघा:- थक गयी.

सुमित:- जिंदगी की इस सफर में इतनी जल्दी थक गयी.

अब्ब मेघा छिड़ गयी.

मेघा:- एक तो इतना दौड़ा रहे हो ऊपर से मेरा hi मजाक बना रहे हो.

सुमित अभी हांसे जा रहा था.

मेघा:- तुम्हारा ये हंसी गायब नहीं कर दिया तो मेरा नाम बदल dena...Abb बताती हूँ थकान क्या होती है जब तुम्हे अपने पीछे पीछे दौड़ा कर तुम्हारी हालत ख़राब कर दूंगी.

सुमित:- जो आज्ञा हुजूर.

मेघा:- मजाक लग रहा है tumhe...Abb तो तुम्हारा हालत खराब काके hi rahungi...Warna सच में नाम बदल देना.

सुमित:- सोच लो.

मेघा:- सोच लिया.

फिर मेघा अपने शॉपिंग पर लग जाती hai...Wo कुछ सेलेक्ट करती और सुमित को dikhaati...Sumit भी अपना बिचार खुल कर मेघा को बताता.

1 घंटा....2 घंटा...3 घंटा.

इतनी देर में न जाने कितनी दुकानों की चक्कर लगा दी मेघा ne...Sumit को थकाने की चक्कर में खुद थक gayi...Lekin सुमित अभी भी जोश में खड़ा tha...Thakaan की लकीर उसके चेहरे में दूर दूर तक नहीं था.

मेघा:- अच्छा मई हार gayi...Itna कह कर मेघा अपना ड्रेस फाइनल कर लेती है.

सुमित:- तुम्हारी जिद्द से ज्यादा तो ये च्युइंग गम टिका.

च्युइंग गम को डस्टबिन में फेंकते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- तो फिर फेंका क्यों?

सुमित:- मुंह दुखने लग गया tha...Accha अब्ब अपना नामकरण के लिए तैयार रहो.

मेघा ने तभी जोश जोश में कह तो दिया था लेकिन अब्ब कुछ बोल नहीं पा रही थी.

मेघा:- हाँ तो क्या सोचा नाम?

थोड़ा डर्टी हुई मेघा ने पूछा.

सुमित:- वक्त आने पर बताऊंगा.

मेघा:- ये क्या बात हुई?

सुमित:- वक्त आने पर बताने की अधिकार सिर्फ तुम्हारे पास है क्या? मुझे पहली बार कब देखा था ये भी नहीं बता रही हो?

मेघा:- वो तो वक्त आने पर hi बताउंगी. :डी

सुमित:- मई भी वक्त आने पर बताऊंगा.

फिर सुमित अपना हाथ मेघा की और आगे बढ़ाता है.

मेघा:- ये क्या है?

सुमित:- तुम्हारा गिफ्ट.

ये देख मेघा बहुत खुश हो जाती hai...Thodi देर के लिए तो मेघा की नजर ड्रेस से हैट hi नहीं रहा tha...Fir प्यार भरी नजरो से सुमित को देखती hai...Aur जैसे hi परिसताग पर नजर जा रहा tha...Sumit उसको निकाल कर फेंक देता है.

मेघा:- बहुत मेहेंगी लग रही है.

सुमित:- तुम्हे इससे क्या मतलब?

मेघा:- Nahi...Lekin...

सुमित:- लेकिन वेकिन कुछ nahi...Mujhe पसंद आ gaya...To कीमत की कोई फ़िक्र नहीं है.

फिर मेघा वही ड्रेस चेंज कर के आती है.

सुमित तो बस देखता hi रह गया...2 मिनट बाद मेघा सुमित के पास आती है.

मेघा:- कैसी लग रही हूँ?

सुमित:- बहुत खूबसूरत :)

मेघा:- सिर्फ खूबसूरत :बीए:

सुमित:- खूबसूरत लग रही हो तो खूबसूरत hi कहूंगा na...Abb चिढ़ाने के लिए बदसूरत थोड़ी न कहूंगा.

मेघा:- मेरा मतलब सिर्फ इतना hi तारीफ़.

सुमित:- कभी कभी तारीफ़ के लिए शब्द काम पद जाते hai...Tum सिर्फ भावना को समझो.

मेघा:- वही तो समझ रही हूँ.

इतना कह कर मेघा मुस्कुराती है.

दोनों अब्ब मॉल से निकल जाते hai...Abb शाम का वक्त हो चूका था.

मेघा:- मुझे तो विश्वास hi नहीं हो रहा है 3 घंटे की शॉपिंग मई भी बोर नहीं हुए tum...Pehle तो 1 घंटे मई hi हालत खराब हो जाती थी.

सुमित:- अब्ब सिख लिया hai...Kisi चीज में फोकस कैसे करना hai...Mera ये 2 दिन का फोकस सिर्फ इस टूर और तुम पर hai...Issi लिए मोबाइल भी ये साथ में लाया हूँ.

सुमित ने फिर एक कीपैड मोबाइल दिखाया.

मेघा:- अच्छा कैसे सिख लिया ऐसे फोकस karna...Mujhe तो लगता था तुम अपने मर्जी के मालिक हो.

सुमित:- वो तो अभी भी hun...Lekin जिस चीज में जरुरी है उस चीज के लिए.

और ये फोकस सीखा सर्जरी रेजीडेंसी में आ kar...Ek बार व्हिप्पले प्रोसीजर (काम्प्लेक्स सर्जिकल प्रोसीजर फॉर पैंक्रियास कैंसर) में असिस्ट कर रहा tha...Surgery ख़त्म होने में 5 घंटा लग gaya...Focus बिलकुल भी हटा नहीं सकता tha...Aur उसके बाद तो जितने भी सर्जरी में असिस्ट किया है लगभग सभी 2-3 घंटे के होते है.

और अब्ब तो जब भी मौका मिले दिन में वक्त निकाल कर योग कर लेता hun...Concentration बहुत अच्छा रहता है.

मेघा:- ये तो बहुत अच्छी बात है.

सुमित:- हाँ और जरुरी भी.

मेघा:- में जब तुम्हे इंतजार करवा रही थी तो मजा तो बहुत आ रहा था लेकिन ये भी लग रहा था की तुम बदला जरूर लोगे :डी

सुमित:- वो तो लूंगा.

मेघा:- क्या?

सुमित:- डरो mat...Abhi तक दो hi चीज सोचा है...1) टेस्ट मैच खेलूंगा और तुम्हे दिन भर चीयर करने के लिए रखूँगा. 2) सर्जरी करते वक्त तुम्हे मुझे असिस्ट करने के लिए रखूँगा.

मेघा:- Surgery...Bilkul नहीं करुँगी.

सुमित:- करने के लिए कौन बोल रहा hai...Assist करना है तुम्हे.

मेघा:- नहीं मुझे दर लगता है ब्लीडिंग देख कर.

सुमित:- बहुत डरपोक हो.

मेघा:- मेरे लिए तो मेडिसिन hi ठीक hai...Acche से डायग्नोसिस कर के अच्छा सा ट्रीटमेंट दो.

सुमित:- तो फिर क्रिकेट के बारे में क्या ख्याल है.

मेघा:- उसके लिए तो मई भी एक्ससिटेड हूँ.

सुमित:- चल झूठी.

मेघा:- सच्ची.

सुमित:- 10 क्रिकेटर के नाम बताओ तो मानूंगा.

मेघा:- सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित, सुमित.

सुमित:- हंसी भी नहीं आया इस जोके par...Naa hi क्रिकेट कभी देखती हो और ना hi किसी प्लेयर का नाम पता hai....Aur कहती हो क्रिकेट के लिए एक्ससिटेड हो.

मेघा:- मैंने सिर्फ तुम्हे क्रिकेट खेलते देखा hai...Aur तुम्हारी बहुत बड़ी फैन hun...Bas ऑटोग्राफ नहीं लिया है. :डी

फिर मेघा सुमित की सभी इन्निंग्स, रन, बौंडरीएस गिनाने लगती hai...Kaise कैसे शॉट मारा था सुमित ने, उसका सेलिब्रेशन और हर एक पल को मेघा ने कैसे एन्जॉय किया ये सब बताने लगती है.

सुमित की हैरानी की कोई सीमा नहीं tha...Itna तो उससे खुद पता नहीं था.

मेघा:- क्यों उड़द गया होश? या फिर और गिनाऊ.

सुमित:- और ginaao...Apna तारीफ़ भले किसे पसंद नहीं.

फिर मेघा सुमित के आउट होने के तरीके को बिस्तर में बताने लगती hai...Kuch मिसफ़िएल्दिंग्स और भी बहुत कुछ.

सुमित:- बस bas...Abb रुलाओगी क्या? :(

मेघा फिर सुमित के क्रिकेट के कुछ ज्यादा hi ख़ास पल को याद करने लगती है जो सुमित को नहीं बताती.

सुमित:- अब्ब रात हो गयी hai...Koi अच्छा सा होटल ढूंढ़ना पड़ेगा.

मेघा:- नहीं होटल नहीं.

सुमित:- अच्छा अगर कोई रिश्तेदार है यहाँ तो bataao...Chale jaayenge...Mere तो नहीं है.

मेघा:- आज इस सेहर में hi नहीं रहेंगे.

सुमित:- फिर?

मेघा:- टूर का आर्गेनाइजर मई hun....Bas तुम खाना पैक कर के लाओ.

सुमित के वापस आने के बाद दोनों चल पड़ते है एक अनजान मंजिल को aur....Sumit के लिए तो और भी अनजान.

बाइक मेघा चलाती है इस बार भी...30 मिनट के बाद दोनों सेहर से कुछ दूर एक सुनसान जगह पर एक बड़ा सा ग्राउंड पर रुकते है.

मेघा:- आ गया मंजिल.

सुमित:- क्या? यहाँ पर?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- रात को सोना भी पड़ता है.

मेघा:- इतना बड़ा बीएड है तो.

मेघा पूरा ग्राउंड की और इशारा कर के कहती है.

मेघा:- हमेशा से एक ख्वाहिश thi...Khule आसमान के निचे सोने ki...Isse अच्छी जगह कहा milegi...Aur तुम साथ हो तो कोई दर भी नहीं.

सुमित:- इतना विश्वाश भी सही hai...Kabhi कभी रक्षक hi भक्षक बन जाते है.

मेघा:- रक्षक तो तुम ho...Koi भक्षक आये तो बचा लेना. :डी

सुमित:- अब्ब भक्षक यहाँ कहा मिलेगा?

मेघा:- जंगली कुत्ते, यहाँ तक तो भेड़िये से भी बचा loge...Agar शेर आया तो कह नहीं सकते.

सुमित:- तुम्हारे लिए तो शेर से भी लड़ jaaunga...Bahutmovies देखा है और जानता हूँ शेर को कैसे हवा में उड़ाना है.

मेघा सुमित की बात पर हसने लगती है.

मेघा:- मूवीज की लव स्टोरी फिक्शन और शेर के साथ एक्शन रियल.

सुमित:- सच कहु तो दोनों ऊंरेअलिस्टिक. :डी

कुछ देर के लिए दोनों के बिच खामोशी छा जाती hai...Filhaal तो रात बाकी है और बात बाकी है.
 
अपडेट 97

कुछ देर दोनों ग्राउंड पर बैठे hi थे की,

सुमित को लगता है मेघा बार बार उससे देख रही है.

सुमित:- इतना हैंडसम भी नहीं हूँ.

मेघा:- कोयल चाहे कैसा भी ho...Usse देखते रहने की भी अलग hi मजा है.

सुमित:- क्या? मई तुम्हे कोयल लग रहा हूँ?

मेघा:- अच्छा sorry...Kauwa को देखने की भी अलग hi मजा है.

सुमित:- धत्त :डोह: मई तो खुश हो रहा था की तुम्हे मेरी मधुर आवाज पसंद है. :(

मेघा:- आवाज तो कौवा जैसी hi hai...Lekin बातें बहुत प्यारी होती है तुम्हारी. :lol1:

सुमित:- प्यार से रिटायरमेंट के चूका हूँ.

मेघा:- शेर बुद्धा होने पर शिकार करना भूल जाता है क्या?

सुमित को इस बात का जवाब देते नहीं बन रहा tha...Lekin कुछ बोलने के लिए..

सुमित:- बुद्धा नहीं हुआ हूँ.

मेघा:- मतलब शिकार करना भी नहीं भूले.

कुछ देर के लिए सुमित चुप रहता है.

सुमित:- कोई अच्छा सा शिकार भी तो मिलना chahiye...Hai hi नहीं कोई मेरे लायक.

इस बार सुमित की आवाज में थोड़ा फ़्रस्ट्रेशन था.

मेघा:- 4, 5 असफल शिकार के बाद भी कह रहे हो शिकार तुम्हारे लायक की नहीं है.

इतना कह कर मेघा हसने लगती है लेकिन सुमित का उदास चेहरा देख एकदम से चुप हो जाती है.

जल्द hi वो सुमित के पास जा कर उसके कंधे में हाथ रख कर कहती है.

मेघा:- सॉरी.

मेघा का हाथ हटा कर.

सुमित:- कोई बात नहीं.

मेघा:- कीर्ति की याद आ रही है?

सुमित मेघा की आँखों में देखता hai...Sumit की आँखों में थोड़ा आंसू भर चूका था.

सुमित:- नहीं.

मेघा:- झूठ बोल रहे हो ना.

सुमित:- मेरी आँखों में देख कर kaho...Kya में झूठ बोल रहा हूँ.

जब मेघा सुमित की आँखों में देखती है तो एक बार फिर से दर जाती hai...Jis सुमित के बारे में सोच रही थी की वो अब्ब संभल चूका है वो आज भी पुरानी बातों को ले कर ाआंसु बहाये जा रहा था.

मेघा:- आँखें तो कह रही है तुम बहुत परेशान हो.

सुमित:- परेशान hi तो hun...Iss प्यार के चक्कर में 8-9 साल बर्बाद कर दिया.

जानता था कीर्ति मुझसे प्यार नहीं karti...Lekin विश्वाश था खुद पर की उससे मना lunga...Jarurat से ज्यादा विश्वाश.

प्यार करने की बहुत सा छड़ गया था सर mein...Umar भी ऐसा था की लगता था दुनिया मेरे कदम पर hai...Agar कीर्ति मेरी किस्मत में नहीं तो उस किस्मत को भी बदल देने की ताकत है मुझ में.

शुरुवात में तो ये प्यार था जूनून था लेकिन धीरे धीरे ये बस एक उम्मीद hi बन कर रह gaya...Kaash कीर्ति मुझे मिल जाए.

कीर्ति से मिलने से पहले किसी चीज में हारा नहीं tha...Bachpan से hi कुछ ऐसे तैयार किया था खुद को की अगर किसी चीज में पीछे रह जाओ जो मुझे पसंद है तो उस में अपनी म्हणत, लहन और जूनून से आगे आ hi jaata...Kirti से मिलने के बाद भी किसी चीज में नहीं हारा प्यार के अलावा.

जब आउट ऑफ़ ट्रैक था पढ़ाई mein...Apna सारा जोर लगा कर फुल स्कालरशिप ले कर hi छोड़ा मब्ब्स और मस में bhi...Padhai तो हमेशा से ताकत raha...Jo पढ़ने वाले अच्छे स्टूडेंट्स होते है वो जितना मार्क्स लाते थे 2 महीने पहले से पढ़ना सुरु कर ke...Wo मई सिर्फ 2 दिन में ज्यादा ले आता था.

पढ़ाई hi नहीं क्रिकेट और टेबल tennis...Bade मैचेस कभी हारा hi nahi...Bas उतना इंटरेस्ट नहीं था की इस में करियर banaau...Ye भी छोडो आर्ट्स को hi ले lo...Drawing और जाय में आज भी जान बस्ती है meri....Koi भी काम हो जो पसंद आ जाए उस में कभी पीछे नहीं rahunga...Ye मेरा विश्वाश है.

बस प्यार में हार gaya....Iss में अपना म्हणत और जूनून hi सब कुछ नहीं होता सामने वाले की हां की जरुरत होता hai...Ye बातें तो पता था लेकिन जरुरत से ज्यादा विश्वाश था की कीर्ति को मना hi लूंगा.

इतना कह कर सुमित मेघा को देखता hai...Saamne रखा पानी की बोतल से 2 घूंट पानी पीने के बाद.

सुमित:- कीर्ति मेरी यादों में अब्ब nahi...Usse तो कुछ महीनो के बाद hi भुला दिया tha...Kaha है, कैसी है वो भी पता करने की कोशिश नहीं kiya...Abb ये उसकी जिंदगी hai...Ummeed है वो जहा भी है खुश है.

बस पस्चाताप इस बात की है की इस प्यार के चक्कर में 8-9 साल बर्बाद कर diya...Tabhi इस चीज से दूर हो जाना चाहिए था जब ये बात समझ आ चूका tha...Aaj बहुत अच्छा कर रहा होता किसी भी फील्ड में जिस में लगा hota...Apne जवानी के 8-9 साल बर्बाद हो गए फ़ालतू mein...Lekin नहीं प्यार करने का अलग hi बहुत सवार था.

आज जिंदगी के उस मदद में हूँ जहा से पीछे देखता हूँ तो सिर्फ अपनी hi गलती और बेवकूफी दीखता है.

वो तो अच्छा हुआ की माँ, पापा, तुम और आशीष साथ थे की संभल गया वर्ण न जाने और कितनी गलतियां कर बैठता.

अब्ब सुमित चुप हो gaya...Kuch देर बाद मेघा बोली.

मेघा:- कोई बात nahi...Der आये दुरुस्त aaye...Abhi भी सुरुवात हो सकती है.

सुमित:- बुरा तो लगता hi hai...Sab कुछ आँखों के सामने था और मेरे बस में tha...Fir भी गलती करता hi गया.

मेघा:- तो फिर क्या ये बातें याद करते रहने से सब कुछ ठीक हो जाएगा?

सुमित:- बिलकुल nahi....Iss बात से आगे निकल चूका hun...Bas कभी कभी ये yaadein.....Yaadon पर किसका जोर चलता है.

मेघा:- बस अब्ब ये यादों से एक सीख lo...Baaki सब तो कवर उप कर hi सकते हो.

सुमित इस बात पर सिर्फ मुस्कुराता है.

मेघा:- याद है तुम्हे तुम्हारा hi एक क्रिकेट match...Pehle 20 बॉल्स में 2 runs...Aur फाइनल रिजल्ट 61 बॉल्स 107 रन्स नॉट out...Waha एक फुल टॉस टर्निंग पॉइंट था और यहाँ पर तुम्हे अपना रेअलिज़तिओन टर्निंग पॉइंट नहीं लगता?

सुमित:- वो क्रिकेट था यहाँ पर लाइफ.

मेघा:- कितना नेगेटिव सोचते हो? इतना पेसिमिस्टिक तो कभी नहीं थे तुम.

सुमित:- अभी भी नहीं hun...Bas कॉन्फिडेंस नहीं raha...Abb तो दर लगता है की किसी से प्यार हो जाए या फिर शादी करूँगा तो क्या उससे वो खुशियां दे पाऊंगा.

मेघा:- बहुत ज्यादा सोच रहे ho...Jaise कीर्ति की यादों से वक्त के साथ निकल gaye...Yaha भी वक्त के साथ सब ठीक हो jaaye...Dekhna मंजिल की तरफ कोई राष्ट मिल hi जाएगा.

सुमित:- होप सो.

कुछ देर की खामोशी के बाद.

सुमित:- Sorry...Ye टूर मूड फ्रेश करने के लिए आये thhe....Lekin मैंने अपनी बातों से मूड ऑफ hi कर दिया.

मेघा:- नहीं जरुरी tha...Apne अंदर तूफ़ान के बावजूद ख़ुशी का दिखावा करके एन्जॉय कर सकते हो?

सुमित:- नहीं इतना भी बड़ा तूफ़ान nahi...Kuch गलतियां है जो कभी कभी याद आ जाते है.

अब्ब दोनों कुछ नहीं bolte...Sumit वही जमीन पर लेत जाता है और थोड़ी दूर में मेघा.

फिर मेघा सुमित के पास आती है.

मेघा:- वैसे तुम सच में हैंडसम लग रहे हो.

सुमित:- पता है. :डी

मेघा:- फेयर एंड लवली या फेयर एंड हैंडसम किसका कमाल है? :हम्म:

सुमित:- दूर hi रहता हूँ ऐसे मेकअप se...Bahut पहले जेल भी लगाना छोड़ diya...Khair अब्ब तो बाल भी छोटे hi है.

मेघा:- झूठे.

सुमित:- सच mein...Natural लुक की बात hi कुछ और है.

मेघा:- ये तुम कह रहे हो?

सुमित:- और नहीं तो क्या? कभी कभी जल्दबाज़ी में सुबह बिना मुंह धोये hi आ जाता tha....Tumhe कभी पता चला?

मेघा:- छी :युक:

सुमित:- :lol1:

कुछ देर मेघा सुमित को देखती है.

सुमित:- आज धोया hai...Infact नहा कर आया हूँ. :डी

कुछ देर बाद मेघा सुमित की क्लीन शवेद दाढ़ी पर हाथ फिराती है और फिर उसके बाल पर.

मेघा:- क्लीन शवेद लुक hi बेस्ट है तुम्हारे लिए.

सुमित:- पता है.

मेघा:- फिर पिछले 8-9 साल से ये जंगल क्यों उगा के रखा था?

सुमित:- कभी काटने की जरुरत hi नहीं पड़ी.

मेघा:- और बाल थोड़ा बड़ा रखा karo...Suit करेगा तुम पर.

सुमित:- ये नहीं कर सकता.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- अगर कर दिया तो सभी लड़कियां मुझ पर फ़िदा हो जाएंगी.

मेघा:- अब्ब कुछ ज्यादा hi बोल रहे हो.

सुमित:- तुम नहीं jaanti...Ek वक्त था जब बड़े बालों के साथ आशिक़ों जैसे स्टाइल में घुमा करता tha....Ladkiyan hi मुझसे दोस्ती करने के लिए आगे पीछे घूमती thi...Lekin 2,4 के अलावा किसी को भी भाव नहीं देता था.

कीर्ति से hi पूछ लेना अगर कभी मिल जाए तो.

मेघा:- पता है.

सुमित:- क्या पता है?

मेघा:- वही तुम्हारा लम्बे बालो वाला लुक.

सुमित:- :ीक: ये भी पता है? आखिर तुम मुझे कब से जानती हो?

मेघा:- शायद पिछले 7 जन्मो से. :डी

इस बात पर भी सुमित कोई जवाब नहीं दे पाया.

मेघा:- मुंह बंद कर lo...Raat की वक्त hai...Koi मच्चर आ गया तो फ्री का प्रोटीन मिल जायेगा.

इतना कह कर मेघा सुमित को अपनी मोबाइल देती है.

मोबाइल देख कर तो सुमित और भी हैरान रह जाता है.

करीब 10 साल वाला photo...Lambe बालो पर हाथ फिराता सुमित सच में हैंडसम लग रहा था.

सुमित:- ये कब और कहा की फोटो है? कुछ याद नहीं आ रहा. :हम्म:

मेघा:- अच्छे से dekho...Shayad याद आ जाएगा.

सुमित फिर गौर से फोटो को देखता hai...Background में भगवान् शिव की मंदिर देख सुमित को याद आ जाता है.

सुमित:- ये तो कीर्ति के साथ मंदिर गया था उस वक्त की फोटो है.

मेघा:- हाँ और उसी वक्त मैंने फोटो खिंच लिया.

सुमित:- क्यों?

मेघा:- जासूसी करने आये थी.

सुमित:- बताओ न.

मेघा:- पहले भी कह चुकी हूँ वक्त आने पर सब कुछ बताउंगी.

सुमित:- लेकिन वो वक्त कब आएगा?

मेघा:- तुम पर देपेंद करता है.

सुमित:- क्या मतलब?

मेघा:- ये भी वक्त आने पर पता चलेगा. :lol1:

सुमित की इस हालत पर मेघा को बहुत हंसी आ रही थी.

कुछ देर दोनों ऐसे hi बातें करते hai...Fir.

मेघा:- (इन हेर मंद) सोचा था इस टूर में सुमित से उसकी दिल की बात बुलवा कर rahungi...Lekin जैसे वो टूटा है और जैसी बातें कर रहा है थोड़ा टाइम और lagega...Koi बात नहीं.

सुमित:- (इन हिज मंद) मेघा को बता तो दिया अपनी दिल की बात लेकिन खुल कर कह नहीं paaya...Shayad hi और खुल कर बता पाउ.

सच में उस घटना ने इतना तोड़ कर रख दिया की अब्ब खुद पर भरोगः नहीं की मई किसी के लायक हूँ. :(...अब्ब तो प्यार की हर एक कदम पर दर लगता है. :(

रात थोड़ा गहरा हो चूका tha...Sumit की नजर जब मेघा पर पड़ा तो उसने देखा मेघा को थोड़ा ठण्ड लग रहा hai...Apna जैकेट उतार कर.

सुमित:- ये लो?

मेघा:- लेकिन तुम?

सुमित:- आदत हो गयी hai...Kirti की वक्त से hi रातों की तन्हाई और ठण्ड से दोस्ती कर लिया है.

न जाने कितनी रात उसकी यादों में ठण्ड की रातें छत में उसकी यादों में गुजार दिया था. :डी
 
अपडेट 98

अब्ब कहा जा रहे है हम?

एक बार फिर सुमित का वही सवाल और मेघा की भी वही जवाब.

मेघा:- टूर की आर्गेनाइजर मई हूँ.

सुमित भी अब्ब बिन कुछ बोले साथ चलने लगा.

कुछ देर और चलने के बाद,

मेघा:- सामने dekho...Manjil का एक झलक.

सुमित:- सामने का नजारा देखने के लिए टेलिस्कोप चाहिए.

करीब 750 मीटर्स दूर शहर के कुछ घर hi दिख रहे थे.

मेघा:- झलक बोलै hai...Wo भी नहीं दिख रहा है तो चस्मा की जरुरत है तुम्हे.

सुमित:- बाइक से hi चले आते...2 कम से चलते आ रहे है.

मेघा:- क्यों इतनी जल्दी थक गए? क्या एथलिट बनोगे तुम? :हिंतहिंट:

सुमित:- हाँ अगर दिन भर चलते रहे तो जरूर थक जाऊँगा.

मेघा:- इसकी जरुरत नहीं पड़ेगी. 2 घंटे में हम वापस जा रहे है.

सुमित:- क्या? :ीक:

हैरानी में सुमित से आगे बोल hi नहीं पाया.

मेघा:- सच कह रही हूँ.

सुमित:- Nahi...Abhi तो मजा आने लगा है.

मेघा:- लेकिन टूर की आर्गेनाइजर मई हूँ. :डी

सुमित अब्ब कुछ बोल नहीं paaya...Lekin उसका चेहरा लटक जरूर गया.

मेघा:- ऐसे खड़ूस मुंह मत banaao...Hum जहा जा रहे है वह के लिए ये भाव सही नहीं है.

सुमित:- एक तो तुम बता नहीं रही ho...Kaha जा रहे है और जा भी रहे है तो कुछ hi देर के liye...Socha था आज रात तक मजे करेंगे.

क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा है?

जो पल वो मेघा के साथ बिता रहा था एकदम से वो ख़त्म जो जाएगा ये सोचते hi वो थोड़ा बिचलित हो उठा.

मेघा:- बहुत अच्छा लग रहा hai...Shayad तुम से भी ज्यादा.

सुमित:- तो फिर क्यों?

मेघा:- चीनी का स्वाद बहुत अच्छा होता hai...Lekin काम खाओगे तब hi...Agar ज्यादा खा लिया तो कड़वा हो जाता है.

सुमित:- बकवास बातें है.

सुमित की आवाज में फ़्रस्ट्रेशन साफ़ दिख रहा tha...Megha भी उसकी मजा लेने के लिए.

मेघा:- सेहर आने hi वाला है....1 किलो चीनी खरीद कर तुम्हे देती hun...Saabit karo...Jyada चीनी खाने से चीनी कड़वा नहीं होता.

सुमित:- कड़वा तो बिलकुल नहीं hoga...Haan मेरी डायबिटीज जैसी कंडीशन जरूर हो जाएगा.

मेघा:- अपने इन्सुलिन पर थोड़ा तो विस्वाश रखो. :lol1:

सुमित:- आज कल जिस पर विश्वाश करता हूँ वही विश्वाश तोड़ देता है.

मेघा:- अरे arre...Itna gussa...Kuch दूर के लिए गुस्सा थूक दो.

लो आ गया मंजिल.

सुमित ने सामने देखा तो भगवान् शिव का मंदिर tha...Ye देख सुमित का नाराजगी थोड़ा काम तो जरूर हुआ लेकिन अभी भी ख्वाहिश था मेघा की कुछ और देर की साथ की.

अंदर जाने के बाद सुमित मंदिर के आस पास घूमने laga...Kabhi वो मूर्ति के पास जाता तो कभी किसी और चीज की दर्शन करने.

मेघा भी पूजा ख़त्म करके प्रसाद ले कर आती है.

सुमित एक मिनट में hi मिठाई ख़त्म कर देता है.

मेघा:- किए लगा?

सुमित:- अधभूत.

अभी भी सुमित मिठाई की स्वाद में hi खोया हुआ था.

मेघा:- वो इस लिए क्यों की मिठाई काम hi tha..Warna जरूर कड़वा होता.

अब्ब ये सुन कर सुमित भी हसने लगता है.

सुमित:- यहाँ तो तुम पूरी तरह गलत हो?

मेघा:- क्यों?

सुमित:- भोलेनाथ की प्रसाद hai...Kadhwa हो hi नहीं sakta...Yaha तक की भांग का स्वाद भी गजब का होता है. :lol1:

मेघा:- बकवास है ye...Ganjedion को बहाना चाहिए भोलेनाथ की नाम पर नशा करने ki...Bhagwaan शिव ने तो जेहेर भी पिया tha...Himmat है तो बोलो पीने को उन्हें.

सुमित:- अरे अरे तुम तो गुस्सा हो गयी.

मेघा:- बात hi ऐसी की तुमने.

सुमित:- थोड़ा मजाक tha...Haan गंजेड़ियों को ये जरूर समझने की जरुरत है.

मेघा:- क्यों तुम नहीं हो?

सुमित:- मई तो एक्स गंजेड़ी hun...Abb ये मोह माया से काफी आगे निकल चूका हु.

फिर दोनों मंदिर के एक कोने में जा कर बैठ जाते है.

मेघा:- क्या सोच रहे हो?

सुमित:- यही की हमारी पहली मुलाक़ात भी भोलेनाथ की मंदिर मई hi हुआ था.

मेघा:- तुम्हारा हुआ tha...Mera नहीं.

सुमित:- भूल hi गया tha...Lekin तुम तो अभी भी बताने को तैयार नहीं हो.

मेघा:- Vakt...Aane दो उस शुभमुहूर्त को.

मेघा:- वैसे तुमने कुछ माँगा.

सुमित:- नहीं.

मेघा:- अभी कुछ मांगने के लिए है hi nahi...Jab जरुरत पड़ेगा तब maangunga...Filhaal भगवान् को किसी जरुरत मंद की मनोकामना पूरा करने do...Mai क्यों बे वजह परेशां करू.

मुस्कुराते हुए सुमित ने जवाब दिया.

सुमित:- वैसे तुमने क्या माँगा?

मेघा:- कुछ जरुरी चीज.

सुमित:- क्या मई जान सकता हूँ?

मेघा:- तुम्हारे बारे में.

सुमित:- ऐसा क्या?

मेघा:- यही की तुम्हे थोड़ा अकाल दे.

सुमित:- अकाल तो मेरे कण (पार्टिकल) कण में है.

मेघा:- ग़लतफहमी है तुम्हारा.

सुमित:- और ऐसा तुम्हे क्यों लगता है?

मेघा:- अगर तुम्हारे पास अकाल होता तो....

सुमित:- तो?

मेघा:- मई नहीं बताउंगी.

सुमित:- बहुत बातें छुपाने लगी हो.

मेघा:- (इन हेर मंद) तो बात आज बहुत आगे पहुँच चूका होता. :)

कुछ देर बात करके दोनों वह से निकल जाते है.

सुमित:- काश कुछ देर और.

मेघा:- चीनी उतना hi खाना चाहिए जितना जरुरी हो.

सुमित:- लेकिन अभी तो बहुत कुछ बाकी है.

मेघा:- इसी लिए तो दूसरी बार आ कर पूरा karenge...Thoda भूख बाकी रहना चाहिए.

और सर्जन को सर्जरी से फुर्सत kaha...Dusri बार मौका मिलाने की यही एक तरीका है.

सुमित अब्ब कुछ नहीं बोलै.

मेघा:- अब्ब तुम पर hai...Agar बाकी जगह घूमना है तो फुर्सत मिलाओ.

सुमित:- मतलब बलि मेरा hi chadhega...Koi बात nahi...Fir राहिल सर को मानना पड़ेगा.

मिला lunga...Jald hi.

सुमित की आवाज में उत्शुकता tha...Jald hi वो फिर मेघा के साथ घूमने वाला था.

1.5 इयर्स लेटर
 
अपडेट 99

तेरा ध्यान किधर है?

राहुल सर ने बहुत तेज आवाज में kaha...Sumit की ये लापरवाही उन्हें बिलकुल पसंद नहीं आया.

सुमित:- सॉरी sir...Kuch देर के लिए कंसन्ट्रेट नहीं कर पा रहा था.

1 घंटे के सर्जरी के बाद चाहते हुए भी सुमित सर्जरी में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा था.

फिर सुमित सर्जरी में ध्यान देने लगा.

डॉ. राहुल:- बहुत बार कह चूका हूँ जितना ड्यूटी टाइम तुम लोगो का hai...Utna hi काफी hai...Lekin तुझे तो ओवरटाइम करना hai...Aur इतना सर्जरी कर चूका है पिछले एक हफ्ते में की इस सर्जरी में कंसन्ट्रेट नहीं कर पाए रहा है.

ये तुरप (प्रोस्टेट सर्जरी) है...90 मं से ज्यादा टाइम लग गया तो सर्जरी को यही रोकना padega...Aur तू है की हर चीज में देरी कर रहा है.

राहुल सर का हाथ (सर्जरी के लिए) और मुंह दोनों एक साथ चल रह था.

सुमित:- सर ओवरटाइम का प्रॉब्लम नहीं hai...Ussi से कॉन्फिडेंस बढ़ रहा hai...Aaj किसी सोच में अटका हुआ hun...Usse बाहर निकल hi नहीं पा रहा हूँ.

डॉ. राहुल:- गेट आउट.

पहली बार राहुल सर ने सुमित के चेहरा को देखते हुए कहा.

सुमित:- सॉरी सर?

हैरानी के साथ सुमित ने पूछा.

डॉ. राहुल:- अब्ब क्या हिंदी में बताना पड़ेगा.

सर का गुस्सा देख सुमित भी अब्ब बिना कुछ बोले वह से निकल गया.

उससे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा था.

बाहर आ कर ओट ड्रेस चेंज कर के वो हॉस्पिटल प्रेमिसे से बाहर निकल जाता है.

तभी वो आशीष को फ़ोन लगाता है.

आशीष:- हाँ bol...Jarur कोई काम होगा? वर्ण तू क्यों याद करेगा मुझे!!

सुमित:- अब्ब और नहीं होगा मुझसे.

आशीष:- क्या मतलब?

सुमित:- अब्ब तो समझ जा topic...Explain करने की मूड में नहीं हूँ.

आशीष:- इस बार भी जल्दबाज़ी!!!

सुमित:- नहीं इस बार देर कर चूका hun...Abb मुझसे नहीं हो paayega...Thak चूका हूँ खुद को बदलने की हर एक कोशिश करके.

आशीष:- मुझे अभी भी जल्दबाज़ी hi लग रहा है.

सुमित:- इस बार फैसला कर चूका hun...Bas तुझे ये बता रहा हूँ की इस टॉपिक में कोई बायत मत करना और सुग्गेस्टिव तो देना hi mat..Abb छिड़ होने लगा है mujhe...Abb तो ये मेरा पर्सनल लाइफ के साथ साथ प्रोफेशनल लाइफ पर भी असर दाल रहा है.

इतना कह कर सुमित फ़ोन कट कर देता है.

कॉफ़ी के दो घूँट hi पीया था की संजना भी वह आ गयी.

संजना:- पागल हो क्या तुम? सर्जरी करते वक्त ऐसा केयरलेस कैसे कर सकते हो तुम?

सुमित:- प्लीज Sanjana....Jaao यहाँ se...Abhi मूड ठीक नहीं है.

संजना:- ऐसे कैसे?

सुमित:- प्लीज जाओ.

इस बहार सुमित के आवाज में गुस्सा भी था.

सुमित की इस रूप से हैरान हो कर संजना वह से निकल जाती है.

आधा घंटा के बाद सुमित के मोबाइल में फ़ोन आता hai...Phone राहुल सर का था.

डॉ. राहुल:- ध्यान कहा था आज तेरा?

सुमित:- सॉरी sir...Kuch पर्सनल प्रॉब्लम था इस वजह से.

डॉ. राहुल:- शायद ये परेशानी अभी भी hoga...Abhi ज्यादा कुछ कहूंगा नहीं.

देख एक बात कहता हूँ अच्छे से sunn...Chahe कितना भी बड़ा सर्जन बन जा लेकिन सर्जरी करते वक्त दिमाग एकदम स्थिर rakh...Aise हजार तरह के सोच के साथ करेगा तो पेशेंट के साथ साथ अपने लिए भी परेशानी खड़ा करेगा.

आज तू हर के स्टेप में गलती कर रहा tha...Painting से ले कर इरीगेशन तक और देर इतना कर रहा था की पेशेंट को कभी भी वाटर इंटोक्सिकेशन सिंड्रोम (कम्प्लीकेशन) हो सकता tha...Tera स्किल और नॉलेज बहुत अच्छा है लेकिन कुछ ऐसी गलती से हमेशा बच.

परवल प्रॉब्लम सब का होता hai...Usse suljha...Agar नहीं सुलझ रहा है तो और टाइम ले लेकिन ऐसे आधा मन के साथ सर्जरी कभी मत करना.

आज गुस्सा तो आ रहा था लेकिन इतना भी नहीं की तुझे निकाल diya...Aisa हर रेजिडेंट (MD/MS स्टूडेंट) के साथ देखा है maine...Tujhe ओट रूम से निकलने का वजह ये समझाना था की कितना बड़ा गलती कर रहा है तू.

सुमित:- समझ गया sir....Aaj मई खुद शर्मिन्दा हूँ इस गलती से.

डॉ. राहुल:- अब्ब मत dohrana...Aur हाँ बार बार एक hi गलती मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं.

इतना कह कर राहुल सर फ़ोन कट कर देते है.

सुमित अभी भी साफé में बैठा था और इतने में उसके मोबाइल में एक मैसेज आता है.

मेघा:- कहा बिजी हो सर्जन?

और फिर मेघा का फ़ोन आता hai...Lekin सुमित मोबाइल स्विच ऑफ करके वह से निकल जाता है.


प्रेजेंट


एक लड़की ने दूर khola...Usse देखते hi.

सुमित:- इस बार लेट नहीं किया डार्लिंग तुमने.

कीर्ति:- तुम हो संजना!!!!

जाना पहचाना चेहरा देख कीर्ति कुछ ज्यादा hi हैरान रह गयी.


सुमित ने तो बिना देखे hi कह दिया tha...Lekin जब सुमित की नजर उस लड़की पर पड़ा तो.

सुमित:- ओह्ह सॉरी!!

लड़की:- बहुत जल्दबाज़ी में लग रहे है जीजू आप.

कीर्ति:- जीजू?

कीर्ति की दिमाग चकराने लगा था अब्ब.

कीर्ति:- तुम तो मेघा की दोस्त हो ना? एक दो बार देखा है.

लड़की:- हाँ कीर्ति.

कीर्ति को इस में भी हैरानी हुआ.

लड़की:- अरे कंफ्यूज मत ho...Memory अच्छा है mera...Kisi से मिल लू तो उसकी चेहरा और नाम बहुत मुश्किल से भूलती हूँ.

सुमित:- बातों में इंट्रोडस करना भूल hi गया.

ये है मेरी साली साहिबा मिस Anita...Jo अपने दोस्त मेघा से मिलने यहाँ आयी है.

सुमित:- (तो अनीता) लेकिन मेघा कहा गयी?

अनीता:- Hospital...Abhi गयी hai...Kuch जरुरी काम था शायद.

कीर्ति:- लेकिन मेघा से मिलने यहाँ क्यों आयी हो? कोई कुछ जवाब देता उससे पहले सुमित के मोबाइल में फ़ोन आता है.

सुमित:- हाँ संजना बोलो.

कीर्ति के भी कान खड़े हो गए abb...Lekin दूसरी तरफ की कोई आवाज कीर्ति को सुनाई नहीं दिया.

सुमित:- Ok मई आ रहा हूँ.

फ़ोन कट करने के बाद.

सुमित:- एक इमरजेंसी केस hai...Intestinal ऑब्स्ट्रक्शन का...3-4 घंटे बाद आऊंगा.

कीर्ति:- ये सर्जरी तो फाइनल ईयर रेजिडेंट भी कर सकते hai...Tum hi क्यों?

सुमित:- Sorry...Intestinal ऑब्स्ट्रक्शन ट्यूबरक्लोसिस की वजह से hai...Agar थोड़ा भी गलती हुआ तो एडहेसिव की वजह से बार बार ऑब्स्ट्रक्शन होता रहेगा.

कीर्ति:- और तुम ये सर्जरी कर पाओगे?

सुमित:- क्यों नहीं? प्रैक्टिस बहुत किया hai....Ovetime कर कर ke...Final ईयर तो प्यार और मोह माया से उठ कर ोवेटीमे सर्जरी में बिता hai...Issi का फायदा है. :डी

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा और यही बात कीर्ति की दिल में चुभ गया.

सुमित:- अच्छा चलता hun...Aate वक्त मेघा से भी मिलवा dunga...Puraani दोस्ती नाम के लिए hi सही लेकिन है.

कीर्ति का दिमाग अब्ब फटने hi वाला था कन्फूसिओं की वजह se...Sumit की शादी की बात से पहले hi उसकी दिल टूट गया था और ऊपर से ये कन्फूसिओं.

सुमित की शादी संजना से हुआ है तो मेघा यहाँ क्या कर रही है? सुमित की आवाज में अभी संजना के लिए वो प्यार नहीं था जो हॉस्पिटल से आते वक्त था और गेट खुलने के बाद?

और उससे भी बड़ा sawaal...Kaun है संजना?

यही सवाल कीर्ति को बार बार परेशान कर रहा था.
 
अपडेट 100

फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे हो तुम?

हॉस्पिटल कैंटीन में सुमित को देखते hi गुस्से में मेघा ने पूछा.

पिछले 2 हफ्ते से सुमित या तो मेघा की फ़ोन कट कर रहा था या फिर सुमित की मोबाइल स्वित्चेद ऑफ hi मिलता.

सुमित:- ओह्ह मेघा तुम.

फीका सा जवाब दिया सुमित ने.

मेघा:- कुछ पूछा है मैंने तुमसे?

सुमित:- थोड़ा बिजी हूँ मई फिलहाल.

मेघा:- अच्छा किस चीज में बिजी हो?

सुमित पर अब्ब मेघा का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

चाय की आखिरी घूंट पी कर.

सुमित:- अभी एक सर्जरी में जा रहा hun...Baad में मिलता हूँ.

मेघा कुछ बोलती उससे पहले सुमित वह से निकल गया.

कुछ दूर बैठी संजना भी पिछले कुछ दिनों की हरकत देख हैरान थी.

मेघा को भी सुमित की इस बदलाव कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Aaj नहीं तो कल सुमित को जवाब देना hi होगा इसी सोच के साथ वो भी वह से चली गयी.

ात इवनिंग.

अभी भी कह रहा hun...Galat कर रहा है tu...Bahut गलत.

एक बार फिर आशीष ने सुमित को समझाने के लिए फ़ोन किया.

सुमित:- अच्छा क्या गलत है?

आशीष:- तुझे दिखाई नहीं देता मेघा का प्यार? और क्या तू मेघा से प्यार नहीं करता.

सुमित ने एक लम्बी सांस ले कर कहना सुरु किया.

सुमित:- करता hun...Bahut प्यार करता hun...Aur इसी प्यार की वजह से उससे अलग होने जा रहा हूँ.

आशीष:- क्या kya...Kya मतलब?

सुमित:- अगर एक शब्द में कहु तो मई मेघा को डेसेर्वे नहीं करता.

आशीष:- अबे एक शब्द को गोली maar...Aur पूरी वजह bataa...Kyu तू मेघा को डेसेर्वे नहीं करता.

सुमित:- अब्ब मई वो सुमित नहीं रहा जो आशिक़ हुआ करता tha...Pyaar के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता tha...Aaj वो सुमित हूँ जो प्यार मई टूट चूका hai...Usse खुद अपने प्यार मई विश्वास नहीं रहा.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

आशीष को भी लगने लगा की कुछ तो गलत हुआ है.

आशीष:- अब्ब क्यों हुआ तुझे?

सुमित:- कीर्ति से अलग होने के बाद मई कुछ इस तरह से टूट गया की अभी तक जुड़ नहीं पाया हूँ.

उस जुदाई ने मुझे अंदर तक मेरे वजूद को हिला के रख दिया था.

सच कहते है लोग प्यार में टूट जाने के बाद इंसान पहले जैसा नहीं रहता.

नार्मल तो हो चूका hun....Lekin कुछ और hi normal...Jo पहले से काफी अलग है.

आशीष:- क्या बात कर रहा है? कीर्ति को तो भुला चूका है ना तू? फिर ये सब?

सुमित:- उसकी प्यार को तो कब का भुला चूका hun...Abb तो कीर्ति खुद मेरे पास आ गयी और कहती है की वो भी मुझ से प्यार करती hai...Uski तरफ मुद कर भी नहीं देखूंगा.

आशीष:- फिर परेशानी क्या है?

सुमित:- यही की उस इंसिडेंट ने मुझे पूरी तरह से बदल गया.

हमेशा खुद पर विश्वाश tha...Ussi विश्वाश के साथ सब कुछ हासिल kiya...Har एक इच्छा पूरा kiya...Apna hi नहीं हर एक दोस्त की मुशीबत दूर करता था.

कीर्ति नाराज हो गयी तो विश्वाश था आज नहीं तो कल मना hi लूंगा उससे.

लेकिन वक्त का कड़वा sach...Haar गया इस मामले mein...Kirti की प्यार तो चला hi gaya...Saath में खुद पर जो विश्वाश था जो अभिमान था वो सब भी. :(

पल भर में सब कुछ टूट ता हुआ महसूस hua...Jo हर किसी का परेशानी दूर करता था वो खुद का परेशानी दूर नहीं कर saka...Aur परेशानी भी क्या? प्यार.

कुछ भी keh...Ek सच्चा आशिक़ था यार mai...Dil टूट gaya...Jaha मेरे सभी दोस्त में प्यार काम हवस ज्यादा भरा tha...Unn में मई hi एक था सच्चा प्यार करने वाला.

कीर्ति की भी गलती नहीं tha...Usse मई पसंद नहीं था तो नहीं tha...Kya कर सकता था? लेकिन मेरा प्यार तो हार गया न?

एक नहीं 5 ब्रेक ups...Bhale hi पहले के 4 प्यार ऐसे hi नाम का tha...Lekin 5 ब्रेअकूपस लड़की की तरफ से hi hua...Khud में hi कमजोरी दिखने लगा.

एक बार इंसान के अंदर का अभिमान पूरी तरह से टूट जाता है तो इंसान वैसा बिलकुल नहीं रहता.

कॉन्फिडेंस डाउन तो था hi...Upar से मेन्टल और इमोशनल trauma...Puri तरह से हार गया यार.

वो तो माँ, पापा, मेघा और तूने sambhala...Pata नहीं कैसे एक जीरो में हीरो देख लिया सभी ने.

तुम सभी की वजह से जिंदगी का मकशद तो मिल gaya...Lekin इंसान वैसा नहीं raha...Puri तरीके से बदल गया हूँ.

अब्ब आशीष को समझ में आया सुमित कितना टूट चूका है.

आशीष:- तूने कहा na...Megha ने तुझे संभाला hai...Bahut प्यार करती है यार वो tujhse...Bas तुझे दिखाई नहीं देता.

इस बात पर सुमित हँसता है.

आशीष:- क्या हुआ? क्यों हंस रहा है?

सुमित:- तू कहता है मुझे नहीं पता की मेघा मुझे पसंद नहीं karti...Megha से भी पहले से जानता हु मई की वो मुझसे प्यार करती है.

पहली मुलाक़ात में वो मुझसे अत्त्रक्टेड thi...Uss वक्त मेरा भूल था की मैंने उसके साथ गलत किया.

जब मई उससे खुदसे नफरत करने पर मजबूर कर रहा था तो कहा से उससे मेरी अच्छाई दिख गयी की वो मुझसे प्यार करने लगी.

तब से ले कर वो मुझसे प्यार करती hai...Aur प्यार भी ऐसा की हर दिन के साथ बढ़ता hi जा रहा hai...Wo इसी इंतजार मई है की मई कब उससे अपने दिल की बात बोलूंगा.

आशीष:- तू भी उससे प्यार करता है और वो भी तुझसे प्यार करती hai...Ye बात तू भी जानता है फिर परेशानी क्या है? कह दे अपनी दिल की बात और जिंदगी की सफर में साथ आगे बढ़ जा.

सुमित:- अगर ये कर दिया तो मेघा के साथ धोखा होगा.

आशीष:- अब्ब ये क्या कह रहा है?

सुमित:- वो तो मुझसे प्यार करती hai...Wo मेरे लिए सबसे सही hai...Lekin मई उसके लिए नहीं.

आशीष:- तू भी तो उससे प्यार करता है?

सुमित:- करता hun...Lekin अब्ब वो विश्वाश नहीं रहा की आगे भी प्यार निभा पाऊंगा या nahi...Wo जो प्यार डेसेर्वे करती hai...Wo मई नहीं दे पाया तो उसके साथ अन्याय होगा.

आशीष:- भाई मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है?

सुमित:- बहुत कोशिश किया मैंने अपने दिल की प्यार जगाने ki...Megha से प्यार भी hai...Lekin वो विश्वाश नहीं है की कितना साथ निभा paaunga...Abhi भी खुद को कही न कही लाचार hi महसूस करता हूँ.

आशीष:- ऐसा तो नहीं था यार तू?

सुमित:- बस दिखने के liye...Mein जितना मस्त हुआ करता था अब्ब वो कही खो सा गया hai...Kuch अलग hi सीरियसनेस आ गया है.

वो तो दोस्तों के साथ और मेघा के साथ नार्मल दिखने के लिए ऐसा मस्ती और बेवकूफी करता hun...Lekin मेरे अंदर अभी भी तूफ़ान चल रहा है.

सच कहु तो एक साल पहले तक anti-depressant में tha...Mental ट्रामा भी बहुत दर्दनाक hai...Bahut मुश्किल से उभरा हुआ हूँ.

आशीष:- अब्ब तो मुझे भी दर लग रहा है यार.

सुमित:- दर mat...Pyaar के अलावा सभी चीज में रिकवरी कर रहा hun...Ek ऐसा धक्का लगा है जिसने मुझे अंदर से तोड़ दिया tha...Abhi तक उससे उठ hi रहा hun...Haan बहुत हद्द तक ठीक है अब्ब.

आशीष:- बस यार मेघा को जाने मत dena...Baaki सब ठीक हो जाएगा.

सुमित:- क्या लगता है तुझे? अबे ये मेरी भी ख्वाहिश hai...Megha मेरे साथ रहे हमेशा hamesha...Mujhe प्यार kare...Har एक पल हर एक मोड़ में मेरा साथ दे :क्राई:

उसी वजह से उसके पास रहता tha...Uske साथ घूमता tha...Shayad उसकी प्यार में सब कुछ भुला कर उसका हो jaau...Lekin अभी तक अपना उस कमजोरी hi भारी पड़ा रहा.

इस वजह से इतने वक्त तक उसके दिल में एक आशा को जिन्दा rakha...Lekin और धोखा नहीं कर सकता उसके saath...Aur कहु भी तो क्या? कुछ साल मेरे लिए और रुक जाओ...

आशीष:- अभी भी लगता है यार की तू गलत कर रहा है?

सुमित:- जानता hun...Lekin मजबूर हूँ.

आशीष:- क्या वो तेरे बिना खुश रहेगी?

सुमित:- इतनी जल्दी तो nahi...Lekin बाद में जरूर रहेगी.

और अगर मेरे साथ rahi...Aur मेरा वो घाव नहीं भरा तो हमेशा के लिए दुखी रहेगी.

आशीष:- तो क्या करेगा अब्ब तू?

अब्ब तो आशीष भी हार मान चूका था.

सुमित:- कुछ nahi...Pichhli बार नफरत पैदा करने की कोशिश की तो प्यार कर baithi...Iss बार कुछ नहीं करूँगा.

अगर उससे लगेगा की अब्ब मुझे उसकी कोई परवाह नहीं तो वो खुद मुझसे नफरत करेगी.

इतना कह कर सुमित ने फ़ोन कट कर दिया और मेघा की फोटो पॉकेट से निकाल कर.

सुमित:- तुमने मुझे सँभालने की हर एक कोशिश किया लेकिन मई संभल नहीं paaya...Dil का ये घाव पता नहीं कब bharega...Saath रहने की इच्छा के बावजूद साथ नहीं रह सकता. :क्राई:

ी डोंट डेसेर्वे यू.
 
अपडेट 101


आफ्टर 4 मोनथस


सुमित और मेघा का रेजीडेंसी ख़त्म होने में बस 2 महीना बाकी रह गया था.

सुमित का ऐसे मुंह फेर लेना मेघा को बहुत चुभ रहा था.

न जाने कितने रातें इस उम्मीद में बिता की कल एक नया सवेरा होगा और उसका सुमित फिरसे उसके पास आ jaayega...Pehle की तरह उसको कुछ नया सा सरप्राइज देगा और जो प्यार दीखता था उससे सुमित की आँखों में उससे सुमित अपने जुबान के रास्ते चासनी की मिठास भरी आवाज में कहेगा.

लेकिन ये इंतजार इंतजार hi रह gaya...Sumit की व्यबहार में ना hi प्यार आया और ना hi rukhapan...Bas वो मेघा को और ज्यादा नजरअंदाज करने लगा.

मेघा जब भी सुमित से बात करती सुमित बात को hi घुमा deta...Kayi बार तो मेघा गुस्से में चली जाती.

लेकिन जब गुस्सा का भी फायदा नहीं दिखा तो मेघा प्यार से सुमित से बातें करने lagti...Lekin इसका भी कोई फायदा नहीं हुआ.

थक हार कर आखिर मेघा ने सोच लिया की वो खुद सुमित को अपने दिल की बात batayegi...Ye बात तो पता चल hi जायेगी की सुमित का क्या ख्याल है उसके बारे mein...Roj रोज की परेशानी से अच्छा है की एक बार में hi सच पता चल jaaye...Chahe वो मीठा हो या कड़वा.

सुमित को पार्किंग में देख मेघा भी पार्किंग में चली जाती hai...Sumit बाइक निकाल hi रहा था की संजना भी वह आ जाती है.

संजना:- Hello सुमित.

सुमित:- हाँ कहो.

संजना:- एक बात पूछनी थी तुमसे.

सुमित:- यहाँ? कही बाहर चलते है?

संजना:- नहीं nahi...Bahut मुश्किल से कही मिलते हो tum...Iss बार मिस कर दिया तो पता नहीं कब मौका मिलेगा.

तब तक मेघा भी वह पहुँच जाती hai...Sumit बस हाथ हिला कर उससे Hi कहता है.

सुमित:- कुछ जरुरी बात है क्या?

संजना:- बहुत जरुरी.

सुमित:- हाँ कहो.

संजना:- तुम किसी से प्यार करते हो?

उम्मीद भरी आवाज में संजना ने pucha...Aur उसी नजर से मेघा ने.

सुमित अपने दिल को मजबूत करने की हर एक कोशिश कर रहा tha...Shayad वो जानता था ये hi वो वक्त है जब उससे सबसे मुश्किल फैसला लेना है.

सुमित:- तुम ये क्यों पूछ रही हो?

संजना:- पहले मेरी सवाल का जवाब दो?

सुमित:- नहीं पहले मेरे सवाल का जवाब दो?

संजना:- ठीक hai...Agar तुम सिंगल हो तो मई तुमसे शादी के लिए ऑफर करने वाली हूँ?

ये सुन कर तो मेघा का गुस्सा सातवे आसमान में पहुँच gaya...Bas वो सुमित की जवाब का इंतजार कर रही थी.

सुमित:- शादी.

संजना:- Haan...Abb तुम bataao...Single हो या कमिटेड?

सुमित ने अब्ब अपना दिल को पत्थर का बना liya...Aankh बंद किया तो मेघा की चेहरा दिखने laga...Aur मुंह से जवाब निकला...

सुमित:- सिंगल.

बस इतना hi काफी था मेघा की दिल तोड़ने के liye...Ek बार फिर सुमित ने उसका दिल तोड़ diya...Abb उसका धैर्य ने जवाब दे diya....Aankho से आंसू के कुछ बून्द गिरने के साथ hi वो वह से निकल gayi...Uska सब कुछ ख़त्म हो चूका tha...Uska pyaar...Sumit के ऊपर vishwash...Sab कुछ.

मेघा को जाते देख सुमित भी काफी लाचार महसूस कर रहा tha...Usse लग रह था की उसने खुद अपने जिंदगी को खुद से दूर कर दिया.

वो अपने ख्याल में खोया hi था की.

संजना:- तो तुम तैयार हो शादी के लिए?

सुमित:- तुम्हे मुझसे प्यार है?

संजना:- प्यार का तो पता nahi...Lekin तुम बहुत अच्छे लगते हो mujhe...Attractive, बोल्ड, एनर्जेटिक, केयरिंग एंड ात लास्ट हस्बैंड मटेरियल.

सुमित:- ऐसा हुआ करता था mai...Lekin अब्ब नहीं हूँ.

संजना:- क्या मतलब?

सुमित:- वही जो तुमने suna...Aisa फिरसे बनने की नाकाम कोशिश कर रहा tha...Lekin बन नहीं पाया.

संजना:- फिर भी मई तुमसे शादी करना चाहती हूँ.

कुछ देर सुमित ने सोचा और फिर कहा.

सुमित:- कीर्ति को जानती हो तुम?

संजना:- Haan...Tumhari एक्स.

सुमित:- उसी की बहुत गुण तुम में देखा है मैंने.

वो भी मुझसे ऐसे hi अत्त्रक्टेड thi...Lekin जब बात प्यार की आई तो एक कदम भी साथ आगे नहीं बढ़ पाए हम.

वैसा hi तुम्हे अब्ब लग रहा hai...Thoda यूनिक सोच कर तुम मुझ पर अत्त्रक्टेड ho...Lekin जान जाओगी मुझे तो खुद नफरत करोगी.

प्यार करने लायक नहीं हु mai...Abhi जिंदगी की उस दौर से गुजर रहा हूँ जहा मई न चाहते हुए भी उसके साथ गलत कर बैठा हूँ जिसे मुझ पर सबसे ज्यादा भरोषा था.

तुम्हारे साथ तो एक दोस्ती से आगे कुछ भी नहीं है.

संजना को कुछ समझ में नहीं आ रहा था...

सुमित:- पहले तो बहुत अच्छी दोस्त थी तुम मेरी.

लेकिन जब तुम में कीर्ति की झलक दिखने लगा तो खुद को रोक liya...Tumhare अट्रैक्शन को और बढ़ावा नहीं देना चाहता था और ना hi मई खुद इस चक्कर में पड़ना चाहता था.

जब भी ये बात तुम मुझसे कहना चाहती thi...Bahut अच्छे से बात को घुमा देता tha...Lekin आज जरुरी था तुम्हे सब कुछ बताना.

हम दोस्त से ज्यादा कुछ नहीं बन सकते.

संजना:- तुम किसी से तो शादी karoge...To फिर मई क्यों नहीं?

सुमित:- अभी शादी के लिए तैयार नहीं hun...Na जाने कितने साल लग jaayenge...Karunga या नहीं वो भी नहीं pata...Abb किसी के दिल में और झूठा उम्मीद नहीं जगा सकता.

इतना कह कर सुमित ने बाइक वह से आगे बढ़ा दिया.

संजना:- मई इंतजार करुँगी.

संजना की आवाज में जिद्द tha...Bike रोक कर सुमित ने कहा.

सुमित:- जिद्द अच्छी बात नहीं है Sanjana...Ek बार यही जीडस मुझे ले डूबा था.

फिर सुमित वह से निकल गया.

फ्यू हॉर्स लेटर

सुमित:- मई ी के इन सर?

डॉ. राहुल:- यस के इन.

आज राहुल सर बहुत hi अच्छे मूड में थे.

सुमित:- कुछ काम था सर?

डॉ. राहुल:- बात करना था.

फिर राहुल सर बोलना सुरु करते है.

डॉ. राहुल:- अब्ब 2 मोनथस बाद तेरा पग कम्पलीट हो जाएगा. तेरा 3 साल का रेजीडेंसी बहुत शानदार रहा. मेरा करियर अस ा प्रोफेसर में मैंने 5, 6 hi ऐसे स्टूडेंट्स को इतना अच्छा सर्जन बनते देखा hai...Basics से ले कर एडवांस्ड स्किल में बहुत hi अच्छा hai...Ummeed है तेरा ये नॉलेज और स्किल बहुत लोगों के काम आये.

बहुत एक्सपेक्टेशंस है tujhse....Lekin दर है की कही सब उल्टा न हो jaaye...Jo भी मई देख रहा हूँ तू बहुत डिस्टर्बेद hai...Koi लारेषणी है क्या?

सुमित:- हाँ sir...Ek पर्सनल प्रॉब्लम है.

डॉ. राहुल:- प्यार का?

सुमित:- हाँ सर.

डॉ. राहुल:- ये वही लड़की है naa...Medicine की रेजिडेंट.

सुमित:- हाँ मेघा.

डॉ. राहुल:- तुझसे मिलने सर्जरी की वार्ड में आती थी तो कभी नजर पद जाता tha...Waise भी मुझे प्यार से उतना मतलब नहीं है.

सुमित ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया.

डॉ. राहुल:- अगर साथ रहना है तो बात कर, मामला सुलझा le...Aur अगर साथ नहीं रहना है तो सब कुछ ख़त्म kar...Agar दोनों नाव में प्यार रखेगा तो ज्यादा वक्त नहीं लगेगा डूबने के लिए.

सुमित बस उनकी बात सुन्न hi रहा था कोई जवाब नहीं दे रहा था.

डॉ. राहुल:- अभी तुझे बुलाने का मकशद प्यार पर ज्ञान देना नहीं hai...Bas ये समझाना है की सही फैसला सही वक्त में लेना चाहिए.

देख Sumit...Bahut से लोग है इस दुनिया mein...Har एक फील्ड में अच्छी पकड़ वाले लोग मिल jaayenge...Uss फील्ड में उनका नॉलेज अच्छा होता है उस फील्ड के लिए वो काबिल होते है.

लेकिन कभी सोचा है सिर्फ कुछ hi लोग होते है जो सफल रहते है और बाकी लोग भी सहमत होते है की इस में कुछ अलग hai...Warna हज़ारो, लाखो की भीड़ में क्या फर्क होता है.

वही एक जैसा ज्ञान, काबिलियत, सोच, makshad...Lekin उन् लाखों में भी कोई ऐसा एक जरूर होता है जो सब कुछ वैसा hi होने के बाद भी कुछ अलग होता है.

कभी सोचा है इस बारे में?

सुमित:- सर आपके सवाल का कुछ विचार तो hai...Lekin फिलहाल आपका सुन्ना चाहूंगा.

डॉ. राहुल:- अगर मई अपना विचार कहु तो faisla...Ek सही faisla...Wo भी सही वक्त mein...Jo उसका विवेक दिखता है.

सूना तो होगा hi हज़ारो एम्प्लाइज के बिच एक दो तंग आ कर स्टार्टअप सुरु करते है और कुछ hi वक्त में अपने म्हणत से करोड़पति बन जाते है.

अपना hi एक्साम्प्ले le...Medical एंट्रेंस में लाखों बच्चे परीक्षा देते है लेकिन हज़ार सफल होते hai...Bahut में एक बात कॉमन देखने को मिलता hai...Knowledge, हार्डवर्क और एआईएम. लेकिन उन् में भी कुछ hi सक्सेसफुल होते है.

थोड़ा बहुत लक फैक्टर हटाने पर दिखेगा की जो भी सफल हुए है उन्होंने कुछ अलग तरह का डिसिशन लिया है वो भी सही वक्त में.

प्रोफेशन से ले कर बिज़नेस और बिज़नेस से ले कर leadership...Sabhi जगह काम आता है wisdom...Aur विजडम के लिए चाहिए सही डिसिशन.

फिर वो सुमित को देखते है.

डॉ. राहुल:- पढ़ाई और म्हणत में हमेशा अच्छा hi देखा hai...Lekin विजडम यहाँ पर तुझे पीछे देखा है.

3 साल में. जब भी तुझे अकेला में देखा है तू हमेशा कन्फ्यूज्ड hi रहा hai....Aur यही कन्फूसिओं सबसे बड़ा दुश्मन है विजडम ka...Sahi फैसला लेने hi नहीं देता.

कन्फूसिओं कुछ पल से ज्यादा का नहीं होना chahiye...Yaa तो इस पार या उस paar...Apna विचार और फैसला भी वैसा hi होना chahiye...Agar वही पर अटका रहा तो कभी आगे बढ़ नहीं पायेगा.

और सबसे इम्पोर्टेन्ट है present...Past को ज्यादा सोचेगा तो रिग्रेट होगा और फ्यूचर को ज्यादा सोचेगा तो tension...Present hi है जहा पे म्हणत करेगा तो फुरुरे सिक्योर होगा hi और आने वाले वक्त में पास्ट का रिग्रेट नहीं hoga...Bas इस पल को कन्फूसिओं में बर्बाद मत करना.

सोचा था तू खुद समझ जायेगा लेकिन मुझे hi समझाना पड़ा.

बस ये विजडम की कमी है तुझ mein...Lekin पोटेंशियल है तुझ mein....Bas इस कन्फूसिओं के चक्कर में आगे नहीं बढ़ पा रहा hai...As ा सर्जन बहुत आगे जाएगा ये अभी से दिख रहा है लेकिन किस दिशा में वो तुझे भी पता नहीं hoga...Bas ये दिशा पता करना है और जिंदगी में कुछ नया करना है तो ये कन्फूसिओं को गोली मार, अपने विचार को साग रख और आगे बढ़.

फिर वो सुमित के पास आते है और उसके कंधे में हाथ रख कर कहते है.

डॉ. राहुल:- मेरा तो आगे हो रहा है...5-10 साल बाद रिटायर हो jaaunga...Abb करियर के आखिरी के कुछ सालों में नई जनरेशन को अच्छे से ट्रैन करना है.

नॉलेज और स्किल सीखने के साथ कुछ गलतियां जो नहीं करना है वो भी समझाना जरुरी है.

अगर परेशानी प्यार का है तो या तो अपना ले या फिर दूर हो jaa....Yaa तो खुशियां मिलेगा या फिर dard...Tere लिए भी अच्छा रहेगा और उस लड़की के लिए bhi...Lekin आगे का राष्ट जरूर मिलेगा.

मई नहीं चाहता की मेरा बेस्ट रेजिडेंट ये कन्फूसिओं और टेंशन में अपने पोटेंशियल के हिसाब से काम न कर सके.

फिर राहुल सर वह से जाने लगते hai...Gate में पहुँच कर.

डॉ. राहुल:- उम्मीद है की खबर में तेरे कामयाबी के कहानी सुनने और पढ़ने को milega...Apne विवेक से सही फैसला लेने की कोशिश करना जिंदगी के हर एक मोड़ पर.

यही है इस गुरु का उपदेश.
 
अपडेट 102

राहुल सर की बात सुमित की दिमाग में छाप चूका tha...Sahi तो थे वो, 3 साल से वो एक फैसला नहीं ला पा रहा tha...Aur जी दागी के पिछले 8-9 साल में भी वो काफी पीछे रह गया tha...Sahi फैसला ना ले पाने की कारण.

ऐसे hi 2 महीने और बीत gaye...Kal कॉलेज का आखिरी दिन था.

इस बिच मेघा का दिल तो टूट hi गया tha...Jab कही सुमित और उसकी नजर टकरा जाता तो वो भी सुमित से मुंह फेर लेती थी.

ये सब देख सुमित को और भी दर्द हो रहा tha...Sumit ने फैसला तो ले hi लिया था की वो मेघा से दूर हो jaayega...Lekin मेघा की यादों से वो दूर नहीं हो पा रहा था.

मेघा की यादें उससे और तड़पाने लगा tha...Thik वैसा hi हाल था जैसा कीर्ति के समय हो गया था.

मेघा से मिलने की, बातें करने की मन तो बहुत था लेकिन अब्ब ये सब संभव नहीं था.

सुमित:- मेघा से इस सोच से दूर हुआ की मई उससे वो प्यार नहीं दे पाऊंगा जो वो डेसेर्वे करती hai...Mai खुद संभल जाऊँगा.

लेकिन संभल नहीं पा रहा hun...Ulta दर्द बढ़ता hi जा रहा hai...Abb तो ये दर्द असहनीय होता जा रहा है.

जब कीर्ति से अलग हुआ संभालने के लिए तुम thi...Tumne मेरा दर्द को बांटा tha...Lekin जब तुमसे अलग हो रहा हूँ तो अब्ब संभालने के लिए कोई नहीं है.

मुझे तुम्हारी आदत पद चूका है Megha...Pata नहीं ये कैसा फैसला था तुम भी दुखी हो मई भी dukhi...Lekin खुश कौन है?

बाद की ख़ुशी बाद mein...Filhaal जो दर्द है वही तो संभाला नहीं जा रहा है.

इतना कह कर सुमित सर्जरी के वार्ड से निकल कर अपने रूम की तरफ जा hi रहा था की कॉलेज के गेट में मेघा मिल गयी.

सुमित:- मेघा.

सुमित से और रहा नहीं गया...6 महीने बाद उसने आखिर मेघा को बुला hi लिया.

लेकिन मेघा का जवाब.

मेघा:- एवरीथिंग इस ओवर Sumit...Tumhari शकल तक देखना पसंद नहीं करती हूँ मई.

नफरत भरी मेघा की ये आवाज सुमित की कान में मानो उबले हुए तेल की काम कर गया.

सुमित:- सुनो तो....

लेकिन मेघा वह से निकल gayi....Lekin सुमित के दिमाग में बहुत कुछ छोड़ गयी सोचने के लिए.

रूम में आने के 1 घंटा तक भी सुमित का मन अशांत tha...Baar बार वो अपने फैसले पर सोच रहा था.

दिमाग में चल रहे हलचल को शांत करने का कोई तरीका न मिलता देख सुमित शावर लेने चला गया.

एक तो ठण्ड का मौसम ऊपर से बर्फ की तरह ठंडा paani...Sumit का दिमाग ने अब्ब काम करना hi बंद कर दिया.

कुछ देर बाद जब होश में आया तब ठन्डे दिमाग से सोचना सुरु kiya...Aise hi एक ख्याल उसके दिमाग में आया.

सुमित:- 2 दिन मई मेघा यहाँ से चली jayegi...Hamesha हमेशा के liye...Jab मैंने मेघा से अलग होने का फैसला लिया तो मेघा मेरे पास thi...Mere साथ thi...Vishwash था एक आवाज लगाऊंगा वो दौड़ कर मेरे पास आ jaayegi...Lekin abb...Abb तो वो जा रही hai...Mujhse नफरत करने लगी hai...Ek बहार चली गयी तो हमेशा के लिए चली जायेगी.

फिर मेरा क्या होगा?

यही काफी था सुमित को अंदर से हिलाने के लिए.

सुमित:- पता नहीं क्या फैसला ले लिया? मई खुश नहीं hun...Wo खुश नहीं है.

मई तो बिलकुल भी खुश नहीं हूँ और शायद hi कभी ख़ुशी मिलेगा इस फैसला se...Megha भी कैसे खुश होगी बाद में? अगर उससे प्यार करने वाला नहीं मिला तो?

मई तो करता हूँ न उससे प्यार.

ये सोचते hi सुमित को रेअलिज़तिओन हुआ की वो कितना प्यार करता है मेघा से.

सुमित:- सहित yaar...Ye क्या ब्लंडर कर diya...Mujhe मेघा से प्यार hai...Aur प्यार करने या दिखने की चीज थोड़ी न है महसूस करने की hai...Megha महसूस करती थी मेरा pyaar...Issi लिए तो साथ थी.

यही प्यार तो चाहती थी wo...Kirti से ब्रेकअप क्या हुआ मई तो प्यार का मतलब hi भूल गया tha...Pyaar के नाम में सोचता था मेघा को कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी टाइप का प्यार dunga...Jo की होता hi नहीं है.

लेकिन ये बात पहले क्यों समझ में नहीं आया?

अगले hi पल सुमित को अपने सवाल का जवाब मिल गया.

सुमित:- शायद उस वक्त मेघा साथ thi...Wo तो हमेशा से साथ thi...Issi लिए समझ नहीं paaya...Lekin वो जा रही है अब्ब मुझे छोड़ kar...Aur शायद यही दर उसकी एहमियत और मेरा प्यार मुझे समझ में आ रहा है.

कुछ देर रूम में टहलने के बाद.

सुमित:- अब्ब बहुत hua...Kal hi मई जा कर मेघा से बात karunga...Usse वक्त मांगूंगा की थोड़ा वक्त लग सकता है उससे पुराना सुमित मिलने के liye...Lekin मिलेगा जरूर.

प्यार करती है वो mujhse...Jarur हाँ कहेगी.

बेवकूफ था mai...Shaadi के कुछ hi टाइम बाद अपना पुराना रूप में आ hi jaata...Megha की प्यार hi तो है जो मुझे बदल रहा था और पूरी तरह से बदल सकता hai...Kuch टाइम बाद मई भी उससे वो प्यार देता जो वो डेसेर्वे करती hai...Lekin उस वक्त ये समझ क्यों नहीं आया?

प्यार की बातें दिमाग में आते hi सुमित मुस्कुरा उठा.

बस ऐसे hi हसीं ख्याल के साथ सुमित सू गया.

अगले दिन अपना ड्यूटी ख़त्म करने के बाद सुमित सीधा मेघा से मिलने gaya...Bahut कोशिश के बाद भी वो नहीं mili...Phone भी नहीं लगा.

बहुत मुश्किल के बाद आशा (मेघा की रूममेट) मिली.

सुमित:- मेघा कहा है?

आशा सुमित को गुस्से से देखती है.

आशा:- अब्ब क्या चाहिए तुम्हे?

सुमित:- उस वक्त गलती हो gaya...Samajh नहीं पाया अपने प्यार को?

आशा:- अब्ब समझ में आया?

सुमित:- हाँ.

आशा इस बात पर थोड़ा हंसती है.

आशा:- लेकिन देर कर दिया tumne...Megha आज सुबह hi यहाँ से चली गयी.

सुमित:- क्या?

सुमित को तो विश्वाश hi नहीं हुआ.

आशा:- बहुत देर और बेवकूफी कर दिया तुमने.

सुमित:- मई उसका घर का पता जानता hun...Abhi जाता हूँ उससे मिलने.

आशा:- लेकिन तुम उसकी दिल की बात नहीं जान पाए और ना hi अब्ब क्या है वो जानते हो.

सुमित:- जानता हूँ वो भी मुझसे प्यार करती थी और करती है.

आशा:- करती है?

सुमित:- Haan...Naaraj है wo...Manaa लूंगा.

आशा:- अगर मई कहु की वो नफरत करती है तो?

सुमित:- वो मुझसे नफरत नहीं कर sakti....Agar करनेकागि है तो फिरसे प्यार में बदल दूंगा उसकी नफरत.

सुमित की आवाज में इस बार आत्मविश्वाश था.

आशा:- 1 मं.

फिर आशा अपने रूम में जा कर 1 डेरी के कर आती है.

आशा:- ये lo...Megha का आखिरी सामन इस हॉस्टल में.

सुमि ने जब डेरी का 1सत पेज पलटाया उसके होंठो में एक मुस्कान आ गया.

मेघा की खूबसूरत अक्सर में लिखा था "माय लव स्टोरी"
 
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