Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 12 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 84

सुमित बस देखता hi रह gaya...Aur वो शख्स धीरे धीरे सुमित के करीब पहुँच gayi...Aur अपना इंट्रो दिया.

डॉ. Megha...1st ईयर Resident...Internal मेडिसिन

फिर मेघा सुमित की और अपना हाथ आगे बढ़ाती है.

डॉ. Sumit...Future न्यूरोसर्जन.

सुमित ने हाथ मिलाते हुए कहा.

मेघा:- कैसा लगा मेरा सरप्राइज?

सुमित:- Bouncer...Sir के ऊपर से निकल गया.

अभी भी सुमित हैरान hi था.

सुमित:- तुम्हे यहाँ देख बहुत अच्छा laga...Sach में बहुत खुश हूँ. :तूहैप्पी:

मेघा:- और तुम्हारे लिए भी खुश hun...Kya कहते थे tum...PG एंट्रेंस मतलब सब्जेक्ट ऑफ़ चॉइस और कॉलेज ऑफ़ Choice...Dono hi मिल गया.

सुमित:- वो तो है hi...Aur आने वाले कुछ दिन तक शायद पेअर भी जमीन में नहीं rahega...Itna अच्छा महसूस कर रहा hun...Dil करता है की उड़ता hi जाऊं.

दोनों बातें कर रहे थे और पास में hi कड़ी संजना दोनों की बातें समझने की कोशिश कर रही थी.

इतना तो वो जान hi गयी थी की सुमित और मेघा का पुराण जान पहचान hai...Isse आगे की वो समझने की कोशिश कर रही थी.

सुमित:- सच कहु तो मुझे लगा की शायद तुम्हारा मार्क्स फिर से काम आ गए है इस लिए अपना रिजल्ट नहीं बता रही हो.

सोच रहा था यूट्यूब में से एक मोटिवेशनल वीडियो देख कर तुम्हे अगले साल के लिए मोटीवेट करू. :lol1:

सुमित की इस बात पर मेघा के साथ संजना भी हसने लगती है.

मेघा:- भूलो mat...MBBS के पहले दिन से hi तुमसे अच्छे मार्क्स आये है हर baar...Iss बार भी चेक कर लेना.

सुमित:- वो तो hai...Theory में तुम काफी अच्छी हो.

मेघा:- क्या सिर्फ थ्योरी में? भूल गए 3रद ईयर में क्या हुआ tha...Jab मेडिसिन में तुम्हे सर से दांत पड़ी थी जब तुम्हे ठीक से रेस्पिरेटरी एग्जामिनेशन नहीं कर पा रहे थे.

मैंने hi सिखाया था.

सुमित:- क्यों की पहले hi सोच लिया था मैंने की मुझे सर्जन बनना hai...Medicine काम चलौ सब्जेक्ट था मेरे लिए.

मेघा:- लेकिन कोई भी सर्जन बिना मेडिसिन के नॉलेज के अच्छा सर्जन नहीं बन सकता.

सुमित इस बार कुछ नहीं बोलै.

मेघा:- अब्ब क्या हुआ?

सुमित:- और करो बेइज्जती. :( ...लोगो का मजाक मई उड़ाता हूँ और तुमने तो मेरा hi मजाक बना दिया.

मेघा:- सांगत का असर है.

सुमित:- वो तो है. :डी

सुमित:- एनीवे गई एग्जामिनेशन में एक्सपर्ट हूँ.

मेघा:- वो भी तुमसे अच्छा कर सकती हूँ.

सुमित:- अब्ब मुझसे नहीं hoga...Aur बेइज्जती नहीं करवा सकता.

अब्ब जा कर दोनों को एक दूसरे से फुर्सत मिलता hai....Aur जब मेघा का नजर संजना पर पड़ता है.

मेघा:- डॉ. Sanjana...Tumhe देख कर लगता है की कुछ खतरनाक hi प्रैंक किया होगा सुमित ने.

सुमित:- Prank...Wo भी बिना कैमरा के. :lol1:

मेघा:- वैसे लड़का बहुत अच्छा hai...Bas कभी कभी ऐसे हालात बना देता है की ना तो हंस सकते है और ना hi रू सकते है.

सुमित:- ये तुम नहीं तुम्हारा एक्सपीरियंस बोल रहा है.

मेघा:- 7-8 साल से झेल रही hun...Accha ख़ासा एक्सपीरियंस है.
 
फ्रेंड्स इस वीक में एक अपडेट dunga...Next वीक एग्जाम है जो पुरे वीक chalega...Socha था एग्जाम के बारे में कहने की जरुरत भी नहीं पड़ेगा लेकिन अभी लग रहा है की प्रिपरेशन एनफ नहीं हुआ है.

पिछले एग्जाम की तरह इम्पैक्टफुल तो जाहि है की 2 मोनथस का ब्रेक लेना पड़े इसी लिए 1 वीक का hi ले रहा hun...Terminal एग्जाम hi है इस बार लेकिन नई सब्जेक्ट्स hai...Picchle एग्जाम से काफी टफ है और प्रिपरेशन भी काम hai...Lekin एग्जाम का दर उतना नहीं hai...Issi लिए पिछले कुछ उपदटेस रेगुलर दिया था और एक अपडेट इस वीक में और देने का सोच रहा हूँ.

स्टोरी थोड़ा और बाकी है और सब कुछ ठीक रहा तो एग्जाम के बाद पहला प्रायोरिटी यही होगा की स्टोरी को अच्छे से लिख कर एन्ड कर दू फिर तो हमेशा के लिए रेस्ट है hi. :डी
 
अपडेट 85

सुबह सुमित राउंड ख़त्म होने के बाद वार्ड से निकल hi रहा था की संजना की आवाज उससे रोक लेता है.

संजना:- सुमित.

सुमित:- Hello.

संजना:- ठीक तो हो ना?

सुमित:- हाँ क्यों?

संजना:- मूड ऑफ लग रहा है tumhara...Aaj ना hi कोई hi hello...Aur राउंड के वक्त भी बिलकुल चुप थे.

सुमित:- एक बीमारी है मुझे.

संजना:- क्या?

सुमित:- नींद ज्यादा लगने ki...Yaa फिर नींद पूरा ना होने की...8, 9 घंटे सोता था लेकिन जब से रेजिडेंट बना हूँ 5 घंटे मुश्किल से सू पाटा हूँ.

संजना:- ये तो सभी के साथ होता है.

सुमित:- लेकिन मेरे लिए ये बर्दास्त के बाहर hai...Abhi के लिए चलता हूँ.

संजना:- कहा?

सुमित:- सोने.

संजना:- 2 हरष के बाद फिर से ड्यूटी है.

सुमित:- काफी hai...Aise hi बीच बीच में नींद पूरा करना होगा.

इतना कह कर सुमित चला जाता है.

2 हॉर्स लेटर

सुमित:- कुछ ज्यादा रौदे तो नहीं था मई?

संजना:- अरे nahi...Lekin थोड़ा अजीब जरूर लग रहे thhe...Kal का बिहेवियर और आज का.

सुमित:- सब मेहेरबानी नींद की hai...Mujhe खुद पता नहीं क्या कुछ बका था मैंने.

संजना:- तो फिर अब्ब?

सुमित:- अब्ब थोड़ा बेहतर hai...Pata नहीं आगे के 3 साल कैसे काटने वाले है.

संजना:- अच्छे से कटेगा.

सुमित:- हाँ अच्छे से hi katega...Aaj तक ऐसे hi तो कट्टा आया है.

संजना:- अरे मई वो वाला काटने की बात नहीं कर रही थी.

सुमित:- लेकिन मई वही काटने की बात कर रहा hun...Aur सच भी है ye...Khair तुम बताओ क्या काटने की बात कह रही थी.

संजना:- वो mai...Khair छोडो.

संजना आगे कुछ बोल नहीं पा रही thi...Sumit संजना की हालत पर अब्ब हसने लगता है.

संजना:- अब्ब क्या हुआ?

सुमित:- नहीं बस ऐसे hi हसने का मौका मिल जाता है जो मूड को हल्का कर देता hai...Warna तो लगी पड़ी है जिंदगी का.

संजना:- एक बात पूछनी थी तुमसे.

सुमित:- एक क्यों जितनी मर्जी पूछ lo...Jab तक प्रोफेसर नहीं आ जाते.

संजना:- मेघा तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?

सुमित:- 16

संजना:- क्या?

सुमित:- तुम 16तह इंसान ho...Jisne मुझे ये पूछा है.

संजना:- तो तुमने उन् 16 लोग को क्या जवाब दिया है?

सुमित:- सब को अलग अलग जवाब दिया hai...Lekin सभी जवाब का मतलब एक hi है.

तुम्हे भी जवाब दू इससे पहले एक सवाल तुमसे hi...Aisa तुम्हे क्यों लगा?

संजना:- बहुत फ्रैंकली बात कर रहे थे तुम दोनों.

सुमित:- तब तो कल तुम मुझे प्लेबॉय समझने लगोगी.

संजना:- क्यों?

सुमित:- एक तो मेरे पास वैसे भी दोस्तों की कमी hai...Lekin जितने है उतने hi काफी hai...Aur उन् सभी दोस्तों से चाहे लड़का हो या लड़की उतना hi फ्रैंक hun...Aur रही बात मेघा की तो वो बहुत hi ख़ास दोस्तों में से एक है.

संजना:- लेकिन मुझे तुम दोनों के बिच अलग hi अटैचमेंट महसूस हुआ.

सुमित:- कुछ दिनों में ये ग़लतफहमी दूर हो जायेगा.

सुमित ने बात को घूमने की कोशिश करते हुए कहा.

संजना कुछ कहती उससे पहले hi प्रोफेसर आ जाते है.

आफ्टर क्लास

फिर से सोने जा रहे हो?

सुमित के पीछे पीछे आते हुए संजना बोली.

सुमित:- नहीं... अब्ब नींद भगाने. :डी

संजना:- मतलब? कभी मौका मिलते hi सोने चले जाते ho...Aur कभी मौका मिलने के बाद नींद को भगाते हो. :कन्फ्यूज्ड:

सुमित:- अगर अभी नींद को नहीं भगाया तो कॉलेज वाले मुझे भगा देंगे.

संजना:- और भी ज्यादा कन्फ्यूज्ड कर रहे हो अब्ब?

सुमित:- आज नाईट ड्यूटी hai...Bunk मारना मब्ब्स तक hi पॉसिबल tha...Yaha बंक मार दिया तो कल होड़ अपने अंदर का सारा फ़्रस्ट्रेशन मुझ पर निकलेगा.

संजना:- सुना था बंकर लोग कही भी कभी भी बंक मार सकते है.

सुमित:- मार तो सकता hun...Itna दिमाग लगाने की जगह नाईट ड्यूटी कर hi लेता hun...Bahut कुछ सिखने को भी milega...Abb 3 साल hi तो है सिखने के लिए.

संजना:- बहुत कुछ सिख रहे हो.

सुमित:- क्या मतलब?

संजना:- अभी से बड़े सर्जन के लक्षण दिख रहा है तुम me...College के पहले hi दिन सुटुरे (सर्जिकल स्टिचिंग) वो भी पेशेंट में परफेक्शन के साथ.

सुमित इस बात पर हसने लगता है.

संजना:- हस्स क्यों रहे हो?

सुमित:- तुम्हे बाइक चलना आता है?

संजना:- बाइक तो नहीं लेकिन स्कूटर चला लेती हूँ.

सुमित:- एवरेज स्पीड?

संजना:- 45 km/hr

सुमित:- कितनी बार एक्सीडेंट हुआ है?

संजना:- 2 baar...Minor एक्सीडेंट.

सुमित:- मेरा बिका का एवरेज स्पीड है 70 km/hr...Aur एक्सीडेंट कितनी बार हुआ है याद nahi...Aakhiri बार याद था तो 19 बार...3 बार मेजर एक्सीडेंट होते होते बचा है.

संजना:- क्या कह रहे हो कुछ समझ में नहीं आ रहा.

सुमित:- सिर्फ इतना की जितनी बार गलती करते है उतना hi हम सीखते है.

संजना:- इसका मतलब जान बुझ कर गलती करना जरुरी है?

सुमित:- बिलकुल nahi...Agar जान बुझ कर गलती करते है तो वो गलती नहीं क्राइम hai...Dusro के लिए या खुद के liye...Ye कह रहा था की अगर गलती हो जाए तो उससे सीखना चाहिए.

संजना:- कहा मई तुम्हे सुटुरे के बारे में पूछ रही थी और कहा तुम गलती से सिखने की बात कर रहे हो?

सुमित:- अब्ब वही पर आ रहा hun...Tumhare सवाल par...Bas 2, 3 जगह की बात को जोड़ रहा hun...I मैं सुटुरे कर रहा हूँ. :डी

बात उन् दिनों की है जब मब्ब्स में सर्जरी रोटेशन में प्रोफेसर सुटुरे पद में सुटुरे करना सीखा रहे thhe...Maine भी तरय kiya...Bahut घटिया bana...Sabhi दोस्त हसने लगे और साथ में प्रोफेसर bhi...Bas क्या था फिर मेरा जिद्द.

खुद सुटुरे पद खरीद कर इतना तरय किया की इंटर्नशिप में आ कर उसी प्रोफेसर को जिद्द कर के मन लिया पेशेंट में सुटुरे करने देने के liye...Unhi दोस्तों के सामने सर के ऑब्जरवेशन में सर्जरी कर के dikhaya...Tab सर ने भी तारीफ़ किया था.

तुमने कहा था परफेक्शन बस इसी वजह से हस्सी आ गया.

Perfection...Abhi भी उस चीज को हासिल नहीं कर paaya...Lekin उसके करीब पहुँचने के लिए कितनी रात म्हणत किया hai...Kabhi कभी तो रात में उठ कर प्रैक्टिस करता tha...Jitne सिगरराते पॉकेट में होते थे 1सत ईयर में उतने सुटुरे होते थे इंटर्नशिप में.

संजना:- पढाई के मामले में तो बहुत सीरियस हो.

सुमित:- बिलकुल nahi...Padhai तो अभी तक मस्ती में बिता hai...Entrance एक्साम्स के अलावा बाकी सभी एक्साम्स में पासिंग मार्क सॉल्वर कर के छोड़ देता tha...Aur टीचर्स जिस टॉपिक को इम्पोर्टेन्ट बताते थे उसी को सबसे पहले इग्नोर कर देता था.

हाँ वो बात अलग है की जितना आना चाहिए उतना किसी भी हाल में कम्पलीट कर लेता हूँ एंडिंग तक.

संजना कुछ कहती उससे पहले hi.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ abb...Fir मिलेंगे.

संजना:- कहा?

सुमित:- पहले hi बताया था नींद bhagaane...Coffee शॉप.

संजना:- मई भी चलती हूँ.

सुमित:- Nahi...Abhi कॉलेज ख़त्म हुआ hai...Hostel जा कर मजे karo...Mera नाईट ड्यूटी hai...Issi लिए स्ट्रांग कॉफ़ी का प्रिस्क्रिप्शन खुद के लिए hi लिख सकता हूँ फिलहाल.

संजना:- ठीक है फिर.

सुमित:- और हाँ तुमसे बदला जरूर लूंगा.

संजना:- क्या?

सुमत:- सुबह से मेरा विवा ले रही ho...Mera भी हक़ बनता है.

संजना:- जरूर :)

फिर सुमित चला जाता hai...Sanjana भी जाने लगती hai...Ek दो बार पीछे मुद कर सुमित को देखती hai...Lekin सुमित तो खुद में hi मस्त हो कर चले जा रहा था.

संजना:- इंटरेस्टिंग.

कॉफ़ी शॉप में पहुंचने के बाद कॉफ़ी आर्डर कर के एक टेबल में बैठ जाता hai...Baahar अभी बारिश का शुरुवात हो hi रहा था.

वो अपने कुछ यादों में खोने hi लगा था की.

Hello सर्जन.

एक सेकंड भी नहीं लगा सुमित को आवाज पहचानने में.

सुमित:- Hi मेघा.

फिर वो मेघा की तरफ देखता है.

सुमित:- तुम यहाँ? देखा hi नहीं.

मेघा:- तुम्हारा पीछा कर रही थी.

सुमित:- अच्छा मजाक था.

मेघा:- सच है.

सुमित:- रियली?

अब्ब सुमित थोड़ा हैरान था.

मेघा:- कॉलेज के गेट से निकलते hi अपने hi धुन में चल रहे thhe...Socha की देखती हूँ ऐसे कहा जा रहे हो.

सुमित:- अकेले चलने में भी मजा अलग है.

मेघा:- इन ानोथेर word...Grapes अरे सावर.

सुमित:- क्या?

मेघा:- अंगूर खट्टा है.

सुमित:- क्या कहना चाहती हो?

मेघा:- अब्ब कीर्ति ने छोड़ दिया तो अकेले में मजा hai...Sahi एक्सक्यूज़ है.

इस बात पर सुमित हँसता है.

सुमित:- क्या तुम भी...3 साल हो गए है उस बात ko...Abb तो कभी कभी hi याद आती है Kirti...Kabhi अच्छी यादों में तो कभी बुरी.

मेघा:- अच्छा अब्ब बुरी भी हो गयी Kirti...Sach में अंगूर खट्टा hi है.

सुमित:- वो कभी बुरी नहीं थी मेरे मामले mein...Baaki पता nahi...Aur उसका जो भी फैसला था उसने liya...Koi गलत नहीं tha...Buri याद इस लिए की मैंने खुद के साथ बुरा kiya...Bas इतनी सी बात है.

मेघा:- खुद को जबरदस्ती विश्वाश दिलाना कोई तुमसे सीखे? अच्छा ये बताओ बाहर बारिश को देख कर क्या सोच रहे थे?

सुमित:- बचपन की yaadein...Maa हमेशा बारिश में बाहर निकलने से मन करती थी.

लेकिन तुम तो जानती hi हो mujhe...Maa से छुप कर बात बॉल ले कर निकल जाता था बारा होते hi...Aur तब तक खेलता था जब तक बाकी बच्चे बिजली गिरने के दर से भाग नहीं जाते थे.

वो अलग बात है की बाद में माँ मेरे hi बात से मुझे बॉल की तरह धो डालती थी.

वही याद आ गया.

मेघा:- मुझे तो लगा तुम्हे वो हुमति टूर की बारिश याद आ रहा है.

सुमित:- वो भी याद आता है कभी kabhi...Especially नदी में वो स्विमिंग.

मेघा:- वैसे कीर्ति ना sahi...Abb कोई और उसकी जगह ले रही है तुम्हारी लाइफ में.

सुमित:- हाँ सर्जरी.

मेघा:- मई संजना की बात कर रही थी.

सुमित:- क्या तुम भी टांग खींचती रहती ho...Ek टॉपिक ख़त्म हुआ नहीं की दोस्ती सुरु?

तब वेटर 2 कॉफ़ी ले कर आता है.

सुमित:- मैंने तो एक hi कॉफ़ी आर्डर किया था.

मेघा:- एक मैंने खुद se...Abb तुम मेरे लिए कॉफ़ी आर्डर करोगे नहीं.

सुमित:- क्युकी तुम्हे कॉफ़ी पसंद hi कहा है?

मेघा:- किसी मुर्ख से सुना था बहुत पहले की कॉफ़ी से नींद गायब हो जाता hai...Socha आज तरय कर लू.

सुमित:- और ये बात उसी मुर्ख के सामने कह रही हो.

मेघा:- अब्ब खुद hi मान रहे हो तो मई क्या कह सकती हु.

मेघा:- बात संजना के बारे में हो रहा tha...Divert मत करो.

सुमित:- अफवाह है ye...Jo तुम से सुरु हुआ है और तुम तक hi रहेगा.

मेघा:- इतनी जल्दी इतना frank...Ye तो अफवाह नहीं है.

सुमित:- तुम्हारे साथ तो और भी ज्यादा फ्रैंक tha...Iska मतलब ये नहीं की तुमसे प्यार करता था.

मेघा:- वो तो तुमने जान बुझ कर किया था.

सुमित:- ये भी जान बुझ कर कर रहा हूँ.

मेघा:- क्या?

सुमित:- अरे are...Itna भी हैरान मत ho...Ye साजिश नहीं है.

मेघा:- तो फिर?

सुमित:- अब्ब डॉक्टर बन चूका हु तो फ्रैंक भी तो होजा chahiye...Issi लिए हर किसी से फ्रैंकली बात करना पड़ता है.

मेघा इस जवाब पर कुछ नहीं कहती.

सुमित:- लेकिन कही से जलने की बदबू आ रहा है?

मेघा:- और ये अफवाह भी तुमसे सुरु हो कर तुम तक hi रहेगा.

सुमित:- अगर जल रही हो तो बता दो.

मेघा:- ऐसा क्यों लग रहा है तुम्हे?

सुमित:- अगर सच है तो जलाने में और भी मजा आएगा.

मेघा को बहुत गुस्सा आता है लेकिन वो कुछ नहीं बोलती.

मेघा:- अच्छा अब्ब मई चलती हूँ.

सुमित:- कहा?

मेघा:- मेरा भी नाईट ड्यूटी है.

इतना कह कर मेघा गुस्से में चली जाई hai...Naa hi सुमित उससे रोकना चाहता था और ना hi मेघा रुकना चाहती थी.

सुमित मेघा को जाते हुए देख पीछे से मुस्कुराता है.
 
अपडेट 86

अब्ब बहुत hua...Abb चलो यहाँ से.

संजना की आवाज में थोड़ा इर्रिटेशन था.

सुमित:- इतनी भी क्या जल्दी है?

संजना:- लंच टाइम हो चूका hai...Aur भूख भी बहुत लगी है.

सुमित:- भूख तो मुझे भी लगा है.

संजना:- चलो फिर कैंटीन.

सुमित:- वो वाला भूख nahi...Doctori की भूख. :डी

सज्नना गुस्से में सुमित को घूरती है और सुमित हंसने लगता है.

संजना:- तुम समझ के बाहर ho...Important क्लासेज बंक कर देते ho...Wo भी होड़ (हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट) ke...Jaante हो वो कितना लाल पीला हो कर गए थे...3 में से 3 क्लासेज बंक.

और अब्ब लंच टाइम में भी ोपड में ओवरटाइम कर रहे ho...Sab जा रहे hai...Bas हम दोनों hi बाकी है.

सुमित:- आज अगर ओट होता तो तुम्हे ओवरटाइम के जगह किसी दूसरा शब्द का इस्तेमाल करना पड़ता.

संजना:- 3 साल तक तो यही ओट और ोपड के चक्कर hi तो लगाने hai...Beemari भी वही honge...Signs एंड सिम्पटम्स भी wohi...Aur सर्जिकल प्रोसीजर भी wohi...Aaj hi सब कुछ सिख लोगे?

सुमित:- बीमारी भले hi वही ho...Lekin वही एक बीमारी को 10 मरीज अलग अलग तरह से एक्सप्लेन karenge...Thoda भी चूक हो गया तो अलग डिजीज दिअनोंसे हो जाएगा.

तुम्हे तो पता hi है...1 डिजीज का 10 सिम्पटम्स भी हो सकता hai...Aur 10 डिसीसेस में 1 कॉमन सिम्पटोमा भी होता है.

और इससे बचना है तो यही सही मौका hai...Real सेटिंग में पेशेंट को dekho...Kya सिम्पटम्स ले कर प्रेजेंट करते है? जितना ज्यादा केस देखेंगे उतना एक्सपीरियंस होगा और उतना hi confident...Wo क्या कहते है प्रैक्टिस मैक्स मन परफेक्ट.

संजना ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- अच्छा अच्छा नाराज मत ho...Sirf मन नहीं वीमेन bhi...Modify कर देता hun...Practice मैक्स ह्यूमन परफेक्ट. :D:D

संजना:- इर्रिटेट मत करो.

सुमित:- अच्छा चलो.

अब्ब जा कर संजना का इर्रिटेशन थोड़ा काम हुआ.

संजना:- 3 साल है रेजीडेंसी के liye...Itne वक्त में बहुत केसेस देखने को मिलेगा.

सुमित:- लेकिन इतना फ्रीडम नहीं मिलेगा.

संजना:- कैसा फ्रीडम?

सुमित:- अभी केसेस को ले कर कुछ समझ नहीं आया तो सीनियर्स है, स्पेशलिस्ट्स hai...Galti हो भी गया तो संभालने के लिए भी बहुत hai...Agar कुछ उल्टा सीधा भी हो गया तो जिम्मेदारी लेने के लिए भी सभी सीनियर्स है.

और आज सीनियर्स और डॉक्टर्स भी ज्यादा नहीं है तो पेशेंट काउंसलिंग का मौका मिल रहा hai...Iss लिए इस मौका को गवाना नहीं चाहता.

सुमित ने बस इतना hi कहा था ki...Saamne से आते सख्स को देख कर यकीं नहीं हुआ.

सुमित:- तुम अपना चस्मा दो?

संजना:- क्यों?

सुमित चस्मा पहन ने के बाद उतार देता है.

सुमित:- बस इसी का कमी था.

शख्स:- डॉक्टर साहब प्रणाम.

सुमित फिर चेयर पर बैठ जाता है.

सुमित:- (तो संजना) पक्का ये लास्ट वाला केस है. :डी

संजना कुछ नहीं कहती.

सुमित:- हाँ तो बताइये क्या कष्ट है आपको जो इतने दिन बाद आपका दर्शन हुआ.

सख्स:- मुझे एक्यूट अप्पेंदिसिटिस हुआ hai...Issi का रिपोर्ट बनवाने आया था.

सुमित:- अच्छा एक्यूट appendicitis...Aur तुझे ऐसा क्यों लगता है?

आप से साइड tu...Ye सुन कर संजना को थोड़ा हैरान हुई.

संजना:- तुम जांतव हो इन्हे.

सुमित:- बदकिस्मती से हाँ.

सख्स:- अच्छा बदकिस्मती.

सुमित:- तू और तेरा timing...Tere जैसे पनौती सामने होगा तो बदकिस्मती भी साथ hi आएगा.

(तो संजना) बचपन से दोस्त काम दुश्मन jyada..Bhoot प्रेत की तरह हमेशा से पीछा करते रहने वाले इस महान सख्स के नाम है आशीष.

आशीष:- इतना घटिया intro...Yeh सुनने से पहले मुझे सच मच में अप्पेंदिसिटिस क्यों नहीं हो गया?

सुमित:- ओह्ह haan...Hum दोनों अप्पेंदिसिटिस की बात कर रहे thhe...Tujhe ऐसा क्यों लगा?

आशीष:- बहुत दिन से काम कर कर के पागल हो चूका hun...Sab के सब कामचोर है saale...Mujhe भी थोड़ा रेस्ट chaahiye...Ek छैन चाहिए जो न जाने कब से खो गया है.

ऐसे में अप्पेंदिसिटिस से अच्छा बीमारी क्या हो सकता hai...Naa hi ज्यादा डेंजरस और ना hi ज्यादा tension...Aur फेक रिपोर्ट बनाने के लिए डॉक्टर के रूप में दोस्त भी.

और हाँ कुछ ज्यादा दिन के लिए नेड रेस्ट लिख दवना रिपोर्ट में.

फिर सुमित कुछ सवाल पूछता है.

आशीष:- अबे इतना क्यों पूछताछ कर रहा hai..Sidha रिपोर्ट लिख के de...Acute Appendicitis...Aur कुछ नहीं.

सुमित:- सिम्पटम्स पूछना पड़ता है pehle...Aur थोड़ा एग्जामिनेशन भी करना पड़ेगा.

आशीष:- लिख दे कुछ भी.

सुमित:- सच में.

आशीष:- हाँ.

फिर कुछ लिखने के बाद.

सुमित:- यह ले.

आशीष:- ये क्या लिख diya...Grade 2 हेमोर्रोइड्स.

ये सुनते hi संजना हसने लगती hai...Aur साथ में सुमित भी.

आशीष:- ये क्या hai...Hemorrhoids...Kabhi सुना नहीं है इसके बारे में.

सुमित:- सुना तो बहुत बार hai...Bas नाम अलग है.

आशीष:- क्या?

सुमित:- पाइल्स.

आशीष:- क्या मतलब?

सुमित:- हिंदी में बोले तो बवासीर.

आशीष:- ये क्या कर दिया तूने?

सुमित:- परमानेंट ilaaj...Ye रिपोर्ट दिखा देना और जब चाहे तब रात मांग lena...Jindagi भर मौज करेगा बस इस एक रिपोर्ट से. :lol1:

आशीष:- जल्दी से रिपोर्ट बदल.

सुमित:- बहाना बनाने के लिए इससे अच्छा बीमारी और क्या हो सकता है?

आशीष:- नहीं yaar...Koi और बीमारी chalega...Ye नहीं बस.

सुमित:- क्यों? बीमारी तो बीमारी होती है.

आशीष:- अरे इस वाले बीमारी से इज़्ज़त का पूरा वाट लग jaayega...Log अजीब नजरो से देखेंगे.

सुमित:- देखने de...Kya फर्क पड़ता है?

आशीष:- तेरे लिए नहीं padega...Mere लिए तो पड़ता है.

सुमित:- संजना चलो.

संजना:- कहा?

सुमित:- लंच करने.

आशीष:- Abe...Mera रिपोर्ट तो चेंज करते जा.

सुमित:- बाद में aana...Abhi लंच टाइम है.

फिर सुमित और संजना ोपड रूम से निकलते hai...Piche पीछे आशीष भी.

आशीष:- सुधरेगा नहीं तू कमीने.

फिर सुमित अपना वाइट कोट उतार देता है.

आशीष:- इतने टाइम में तो मेरा रिपोर्ट बदल देता.

सुमित:- अब्ब तू आदत से majbur...Mera पीछा तो छोड़ेगा नहीं आसानी se...Abb वाइट कोट में पेशेंट्स के सामने तेरे साथ बकचोदी तो नहीं कर सकता.

फिर धीरे धीरे तीनो hi कैंटीन पहुँच जाते है.

आशीष:- अब्ब भी मौका hai...Badal दे report...Warna.

सुमित:- वर्ण क्या?

आशीष:- वर्ण तुझे श्राप दूंगा.

सुमित इस बात पर जोर जोर से हँसता है.

आशीष:- मई तुझे श्राप देता हूँ की आज से तेरे जिंदगी में कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनेगी.

ये सुन कर सुमित हैरानी से आशीष को देखता है और कहता है.

सुमित:- ये तो सजा नहीं मजा hai....Thanks भाई.

संजना:- क्या? ये मजा है?

सुमित:- Haan...Pak गया हु इन् चीजों से.

संजना:- बात तो ऐसे कर रहे हो की पहले बहुत सी गिर्ल्फ्रेंड्स थी.

आशीष:- ज्यादा nahi...Sirf 10-12.

संजना:- व्हाट?

सुमित:- बढ़ा चढ़ा कर कह रहा है...4 नाम के रिलेशनशिप्स और 1 ोनेसिडेड लव story...Bas इतना hi.

Hello सर्जन.

ये कहते हुए मेघा भी बिच में आ गयी.

आशीष:- भाई तू डॉक्टर जरूर बन गया hai...Lekin तुझे इलाज की सख्त जरुरत है.

सुमित:- और ऐसा क्यों?

आशीष:- मेमोरी कमजोर हो गया है तेरा.

4 नाम के रिलेशनशिप और कीर्ति के साथ ओने साइडेड लव स्टोरी तक तो सही tha...Lekin Megha...Usse कैसे भूल सकता है.

ये सुन कर साइड में hi कड़ी मेघा को अजीब लगता है और वो सुमित को देखती है.

आशीष आगे और बकवास ना करे इस दर से.

सुमित:- कुछ भी.

आशीष:- ये सब chhod...Pehle ये बता मेघा भाभी कैसी hai...Mai तुम दोनों की आगे की लव स्टोरी सुनने आया हु.

पहले hi आ जाता लेकिन जॉब ने मार रखा hai...Aaj और रहा नहीं gaya...Soch पहले मेरे लिए मेरा भाई सुमित hai...Fir कुछ aur...Yaa तो उसका बसा हुआ जिंदगी को देखूंगा या उसके जिंदगी को बसा कर आऊंगा.

मेघा के लिए तो ये बहुत अजीब था hi और साथ hi संजना के लिए bhi...Sumit को भी अब्ब दर था की कुछ उल्टा सीधा न बोल दे.

सुमित:- बस कर bhai...Kuch भी बोले जा रहा है.

सुमित का भावहीन चेहरा का दूसरा hi मतलब निकल लिया आशीष ने.

आशीष:- ऐसे उदास मत हो यार कीर्ति चली gayi...Koi बात nahi...Wo तुझे डेसेर्वे नहीं करती thi...Lekin Megha...Usse दूर मत जाने de...Dekha है मैंने उसके लिए तेरा प्यार.

सुमित:- कुछ भी बाके जा रहा hai...Hajaar बार कह चूका हु मेघा मेरी सिर्फ दोस्त hai...Isse आगे कुछ नहीं.

इस बार सुमित के आवाज में गुस्सा tha...Lekin इस गुस्से का भी अलग मतलब निकल लिया आशीष ने.

आशीष:- कोई भी गुस्सा सच्चाई कक बदल नहीं sakta...Tu गुस्सा हो कर खुद को झूठा दिलाशा तो दे सकता hai...Lekin मई जानता हूँ तू मेघा से कितना प्यार करता है.

सुमित:- Ashishhhhhhhhhh

अब्ब सुमित का गुस्सा कण्ट्रोल के बाहर जा रहा था.

आशीष:- सिर्फ तुझे hi गुस्सा आता hai...Mujhe नहीं आता.

और ये गुस्सा हो कर क्या साबित करना चाहता hai...Keh दे ये गलत है की तू मेघा से प्यार नहीं करता.

जब कीर्ति की जुदाई में रट हुए मुझसे फ़ोन करता था ना तो बात की शुरुवात कीर्ति से होता था और अंतत मेघा se...Kehte हुए थकता नहीं था tu...Megha बहुत अच्छी hai..Dost हो कर भी मेरा इतना ख्याल रखती hai...Maine मेघा के साथ बहुत गलत किया.

तू नहीं जानता लेकिन मैंने महसूस किया है तेरी आवाज में मेघा को ले कर pyaar...Uske बारे में न जाने कितनी hi देर तक बातें करता रहता tha...Uski acchaiyan...Teri bhool...Aur न जाने क्या kya...Agar कोई चीज मिसिंग था तो बस तू मानने के लिए तैयार नहीं था की तू मेघा से प्यार करता है.

और आज bhi...Aaj भी गुस्से से दिलाशा hi दे रहा है खुद को.

आशीष ने भी गुस्से में बहुत कुछ कह दिया.

सुमित:- मेघा समझाओ isse...Warna पता नहीं मई क्या कर बैठूंगा.

इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Abb आशीष को सब समझ में aaya...Hairaani में वो अब्ब मेघा को देखता है.

आशीष:- मुझे क्या पता अतः मेघा यही hai...Ek बार hi सही इशारा दे deta...Photo दिखने के लिए बोलता तो भी बात ताल देता था.

लेकिन सुमित ने अनसुना कर के वह से चला गया.

मेघा को समझ में नहीं आ रहा था की कैसे रियेक्ट kare...Aur संजना को तो ना के बराबर hi मामला समझ में आ रहा था.

सच्चाई तो है आशीष की बात mein...Warna तुझे इतना गुस्सा होने की जरुरत नहीं था.

ये सुनते hi सुमित पीछे मुड़ता hai...Saamne विकाश था.

सुमित:- तू?

विकाश:- Haan...Surgery 1सत ईयर Resident...Admission करने के बाद कामकी वजह से 3 हफ्ता घर जाना पड़ा tha...Aaj से hi ज्वाइन किया hai...I मैं अभी से.

सुमित:- चल सही है.

विकाश:- और आशीष की बात भी सही है.

सुमित कुछ जवाब नहीं देता.

विकाश:- मेघा ने मेरा प्यार ठुकराया क्यों की वो तुझसे प्यार करती hai...Lekin तू hi मैंने को तैयार नहीं है.

सुमित:- मई मेघा से प्यार नहीं करता.

इतना कह कर सुमित वह से भी चला गया.
 
अपडेट 87

यार उठा ले phone...Tab से बज रहा है.

इर्रिटेटेशन में सुनील ने कहा...2 बार फ़ोन की रिंग ने सुमित के साथ सुनील को भी उठा दिया.

सुमित उठ कर मोबाइल के पास पंहुचा जो उसने चार्ज होने के लिए छोड़ा था.

कुछ देर तक स्क्रीन को hi देखता रहा.

सुनील:- किसका फ़ोन है? या तो बात कर या स्विच ऑफ kar...Lekin मुझे सोने दे.

सुमित:- मेघा.

सुनील:- तो बात कर न!!!

सुमित:- Hello Megha...Wo आशीष ने आज...

मेघा:- मई आशीष के बारे में बात नहीं कर रही हूँ.

सुमित:- तो फिर?

मेघा:- कुछ जरुरी hai...Kya अभी मिल सकते हो?

सुमित:- लेकिन अभी? रात के 12 बजे!!

मेघा:- हाँ अभी इस vakt...Bahut जरुरी काम है.

सुमित:- लेकिन गार्ड्स...

सुमित सोच hi रहा था की.

मेघा:- अभी भी बुद्धू hi ho...MBBS के हॉस्टल में नहीं हो abhi...Resident ho...Thoda लिबर्टी तो मिलेगा hi.

सुमित अभी भी सोच hi रहा था की मेघा एक रेस्टोरेंट का एड्रेस दे कर फ़ोन कट कर देती है.

फ्यू मोमेंट्स लेटर

सुमित:- हाँ Megha...Kya जरुरी बात है?

जब उसने मेघा को देखा तो सुरप्रीसेड रह gaya...Megha एक टेबल में बैठी thi...Aur साथ में एक पैक्ड स्क्वायर शेप्ड बॉक्स था.

मेघा बिलकुल hi रिलैक्स्ड thi....Aur यही बात सुमित को हैरान कर रहा tha...Phone में तो कितनी सीरियस थी वो.

सुमित:- हाँ bataao...Kya जरुरी बात है?

मेघा:- पहले ये बॉक्स खोलो.

जब सुमित बॉक्स खोलता है तो उस बॉक्स के अंदर एक केक था.

और केक में लिखा tha..."Happy बर्थडे न्यूरोसर्जन."

ये देख सुमित और भी सुरप्रीसेड हो गया.

मेघा:- क्या सोच रहे हो?

सुमित:- अपना बर्थडे.

एक मुक्का सुमित को मारने के बाद.

मेघा:- अब्ब अपना बर्थडे भी भूल गए.

सुमित:- हाँ याद aaya...Aaj hi तो है मेरा बर्थडे.

थैंक यू मेघा.

मेघा:- आज तुम्हारा बर्थडे hai...Fir भी वो ख़ुशी नहीं दिख रहा है तुम्हारे चेहरे में.

सुमित:- वजह सिर्फ इतना है की मैंने बर्थडे को कभी सीरियसली लिया hi नहीं.

मेघा:- अजीब नमूना हो तुम भी.

सुमित:- सिर्फ बचपन में hi एक्ससिटेमेंट होता था बर्थडे ka...Maa, पापा और कुछ रिलेटिव्स से गिफ्ट मिलता tha...Dhire धीरे वो एक्ससिटेमेंट काम होने लगा.

ऊपर से कुछ दोस्तों का meherbaani...Raat के 12 बजते hi wish...Aur सरप्राइज के नाम में एक केक जो बिलकुल भी सुरप्रीसेड नहीं होता tha...Aur पार्टी टाइप तो कभी भी नहीं था की 10, 12 दोस्तों के साथ पार्टी में एन्जॉय karu...Jab ये भी बोरिंग लगने लगा तो सभी के बर्थडे पार्टी में जाना छोड़ दिया और अपने में किसी को बुलाना भी.

फिर होती है कीर्ति की entry....Uske बाद तो खुद से hi pareshaan...Koi भी दिन अच्छा नहीं लगता tha...Naa hi बर्थडे ना hi कुछ और.

सोशल मीडिया से दूर होने के बाद विशेष भी देखना बंद हो गया.

अब्ब कोई रिलेटिव जिसको भी याद होगा वो सुबह से ले कर दोपहर तक फ़ोन karenge...Aur haan...Rashmi...Wo तो सुबह 6 बजे से पहले hi फ़ोन karegi...Neend की दुश्मन :वेरिसद:

मेरे लिए बर्थडे का सिर्फ एक hi काम hai...Koi फॉर्म में डेट ऑफ़ बिरथ का कॉलम फइलल karna...Aur कोई याद दिला दे तो hi याद आता है आज तो मेरा बर्थडे है.

मेघा:- कितने बोरिंग हो तुम?

सुमित:- किसने कह दिया? सिर्फ बर्थडे एक्साइट नहीं करता और पार्टी टाइप लड़का नहीं hun...Warna 2, 4 दोस्तों के साथ हमेशा मस्ती तो चलता रहता है.

सुमित केक काटने hi वाला था की.

मेघा:- रुको.

सुमित:- अब्ब क्या हुआ?

मेघा कैंडल निकलती है और उसमे 2 नुम्बेर tha...Arrange करने पर 35.

सुमित:- इतना भी बुद्धा नहीं hun...Jo 5 साल बढ़ा रही हो.

पाप लगेगा अगर मेरे जवानी के जन्म फिन में मेरे बुढ़ापे की सैर कराओगी तो.

मेघा:- बुद्धा तो हो hi गए हो tum...Aur साबुत तुम्हारे ये सफ़ेद बाल और दाढ़ी है.

मेघा 2, 4 सफ़ेद बाल और दाढ़ी खिंच कर कहती है.

सुमित:- Ouch...Ye भी अजीब नमूना hi hai...Tumhare भाषा में.

फिर सुमित केक काट ता hai...Aur वो केक कट का डिज़ाइन देख.

मेघा:- ओह्ह hello surgeon...Ye तुम कोई सर्जरी नहीं कर रहे ho...Jara ढंग से काटो.

सुमित:- ढंग से hi काट रहा हूँ..

मेघा:- फिर ऐसे क्यों काट रहे ho...Aadha मेरा तरफ आधा अपने तरफ.

सुमित:- जैसे की तुम जानती हो की कई जूठा नहीं खाता hun...Iss लिए तुम्हारे हिस्से को पहले hi अलग कर रहा हूँ.

मेघा:- इसी लिए तो अजीब नमूना हो.

सुमित:- और 3 घंटे ओट रूम में स्पेंड करने के बाद दबा के खाया था इसी लिए ज्यादा भूख भी नहीं hai...Issi लिए आधा केक तुम्हारे तरफ.

मेघा:- लेकिन मई इतना खा नहीं पाउंगी.

सुमित:- आर्डर करने के लिए किसने कहा था फिर ये लार्ज साइज केक?

मेघा:- तुम्हे तो पता hi hai...Birthday में केक खाया काम चेहरे पर लगाया ज्यादा जाता है.

सुमित:- खबरदार jo...Thoda सा भी केक लगाया to...Itni रात को मई बिलकुल नहीं नहाऊंगा.

वैसे भी 4 दिन बाद बड़ी मुश्किल से नहाया है.

मेघा:- की... :युक:

सुमित:- ये तो नार्मल hai...Kabhi कभी तो हफ्ता तक काम चल जाता है नहाने से.

मेघा:- थिस इस तू मच.

सुमित:- तुम्ही तो कहती ho..."Honesty इस थे बेस्ट पालिसी."

मेघा:- ये मैंने कब कहा?

सुमित:- मुझे तो लगा तुमने hi कागा hai...Tumhi इन् कहावत से मुझे मोटीवेट करती थी.

मेघा:- अब्ब तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो.

सुमित:- इतनी हिम्मत कहा.

कुछ देर बाद.

मेघा:- आधा केक बाकी रह गया.

सुमित:- पैक करो.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- करो न.

फिर मेघा पैक करती है बाकी बचे हुए केक को.

सुमित:- अब्ब चलो.

फिर दोनों रेस्टोरेंट से बाहर आ जाते hai...Aur रोड के साइड में कुछ खेल रहे बच्चा को दमित केक देता है.

मेघा:- ये तो अच्छा किया.

सुमित:- हाँ नहाने से बच गया.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

रास्ते में चलते हुए.

सुमित:- थैंक यू मेघा.

मेघा:- दोस्ती में no थैंक यू no सॉरी.

सुमित:- ये डायलाग पुराण हो गया आउट किसी काम का नहीं.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- एक दोस्त tha...Kuch साल पहले दो थप्पड़ लगाया tha...Baad में लगा गलती मेरा hi tha...Aur यही ख्याल aaya...Dosti में no थैंक यू no sorry...Sorry नहीं बोलै और ना hi वो दुबारा आया माफ़ी मांगने.

ये सुन कर मेघा हंसती है और फिर.

मेघा:- मतलब कुछ भी बकवास कहानी बना कर सुना दो.

सुमित:- अब्ब मुंह से निकल गया तो जस्टिफाई तो करना hi पड़ेगा न.

मेघा:- वैसे वो थैंक यू क्यों बोलै था तुमने?

सुमित:- तुम्हे hi शौख चढ़ा है थैंक यू ना सुनने ki...To फिर मई क्यों बताओ?

मेघा:- अब्ब बताओ भी.

सुमित:- सच में बहुत दिन बाद आज बर्थडे सेलिब्रेट करके अच्छा laga...Aur इस बार का सरप्राइज सरप्राइज hi tha...Aur और aur...Tumhara मुझ बेचारे के गाल पर केक न लगा कर एहसान करना.

मेघा:- आगे भी कुछ बाकी हो तो वो भी बोल दो.

सुमित:- जोक्स apart...Aaj का ये बर्थडे सेलिब्रेशन सच में अच्छा लगा.

इस बार सुमित ने दिल से कहा.

मेघा:- सिर्फ थैंक्स से काम नहीं चलेगा.

सुमित:- फिर?

मेघा:- रेतुर्न गिफ्ट भी चाहिए.

सुमित:- तुम कहो तो मई...

मेघा:- बस बस अब्ब फिल्मी डायलाग नहीं.

सुमित:- हाँ kaho...Kya चाहिए.

मेघा:- कल का तुम्हारा दिन?

सुमित:- यू मैं डेटिंग? लेकिन कल तो बिजी हूँ मई.

मेघा:- कुछ ज्यादा hi उम्मीद लगाए बैठे ho...Mujhe कोई शौख नहीं है.

तुमने hi तो कहा था की ज्यादा लोगो के बिच तुम एन्जॉय नहीं करते...2, 4 दोस्तों के साथ hi मस्ती करते हो.

देखती हूँ सच में तुम्हे मस्ती आती भी है या फिर बोरिंग hi हो.

सुमित:- किसी और din...Kal सच में बिजी हूँ.

मेघा:- पहले तो बहुत बंक करते thhe...Khud को क्या टाइटल दिया tha...Haan "प्राउड बुनकार्ड"... अब्ब क्या हुआ?

सुमित:- अच्छा ठीक है.

(इन हिज मंद) होड़ तो पक्का पागल हो जाएगा.

मेघा:- और haan...Tumne और आशीष ने क्या रायता फैलाया है उसका एक्सप्लनेशन भी चाहिए.

सुमित:- वो मेघा.

सुमित एक दम से सीरियस हो गया.

मेघा:- अभी nahi....Birthday के कुछ पल को एन्जॉय karo...Baaki सवाल के जवाब तो देने hi पड़ेंगे.

ये सुन कर सुमित भी muskuraya...Aur कुछ देर बाद दोनों अपने अपने हॉस्टल की और चले गए.
 
अपडेट 88

यकीं नहीं tha...Itni सुबह hi रेडी हो जाओगे.

सुबह के 6 बजे सुमित को देख मेघा हैरान थी.

सुमित:- रेडी होने में कितना टाइम lagega...Bas एक अलार्म और 10 मिनट.

अलार्म सुनते hi मेघा सुमित की आँखों में देखती है.

मेघा:- लगता नहीं है तुम अच्छे ऐ सोये हो.

सुमित:- पूरा 120 मिनट सो कर उठा हूँ.

मेघा:- मतलब 2 घंटा.

मेघा थोड़ा गुस्सा में बोली.

सुमित:- मैथ्स अच्छा है.

मेघा:- और अब्ब बाइक में चलना hai...Ek तो नींद में लग रहे हो और ऊपर से तुम्हारे तेज बाइक चलने की आदत.

सुमित:- बाइक चलना तो बाए हाथ का खेल है.

मेघा:- अच्छा? :हँ:

सुमित:- कुछ ज्यादा hi बोल diya...Dono हाथ की जरुरत hai..Btw अच्छा कण्ट्रोल है.

मेघा:- देखा है तुम्हारा कण्ट्रोल बहुत बार.

सुमित:- तब तो तुमने कुछ नहीं dekha...Ek ज़माना था चाहे जितना भी नासा में रहता था बाइक की स्पीड 60 से काम कभी नहीं होता था.

मेघा:- और 2 बार मेजर एक्सीडेंट से बचे थे.

सुमित:- वो तो तब की बात tha...Abb मेरा कण्ट्रोल उतना है जितना एक एक्सपेरिएंस्ड सर्जन का फोरसेप्स पर कण्ट्रोल होता है.

मेघा:- और भी कुछ रह गया है बोलने के लिए?

सुमित:- नहीं.

मेघा:- तो फिर चले.

सुमित:- मई तो कब से तैयार hun...Bas तुम hi हो की लड़ाई से फुर्सत नहीं मिलता.

मेघा आँख दिखाती है तो सुमित भी चुप हो जाता है.

फिर दोनों बाइक में बैठ कर अपने सफर की और बढ़ते है.

मेघा:- हाँ ऐसे hi...Thoda ठण्ड hai...Isse तेज मत चलाना.

सुमित:- वो तो तुम रिक्वेस्ट करोगी तो भी नहीं चलाऊंगा.

मेघा:- अच्छा.

सुमित:- ये बाइक मेरा फर्स्ट हैंड बाइक hai...Wo भी अपने खून पसीने की म्हणत से ख़रीदा hai...Abb तुम्हारे कहने पर बाइक के साथ थोड़ी न केयरलेस करूंगा.

मौका मिकते hi मेघा सुमित के बाए हाथ में जोर से पिंच कर देती है.

सुमित उसी वक्त डिस्क ब्रेक मार कर जोर से कराहता hai...Aur गुस्से के साथ.

सुमित:- पागल हो गयी हो क्या?

सुमित को गुस्से में देख मेघा थोड़ा दर जाती है.

मेघा:- वो मई नई पिंच...

इतना कह कर मेघा चुप हो जाती है.

कुछ देर चुप रहने के बाद सुमित हसने लगता है.

सुमित:- तुम्हारे सरप्राइज किसी शॉक से काम नहीं होता है.

इतना कह कर सुमित फिर बाइक स्टार्ट कर देता है.

मेघा:- और हाँ आगे से जान बुझ कर ब्रेक नहीं लगाओगे.

बातों को जारी रखने के लिए मेघा ने कहा.

सुमित:- चूतियों वाले हरकत का कोई शौख नहीं hai...Wo एकदम से तुमने पिंच कर दिया तो ब्रेक लगाना पड़ा.

मेघा:- वैसे हम जा कहा रहे है?

सुमित:- पता नहीं.

मेघा:- बताओ न.

सुमित:- सच में कुछ डीडे नहीं किया है कहा जाना hai...Bas ऐसे hi जा रहे है.

मेघा:- बाइक रोको.

काफी तेज और गुस्से में मेघा बोली.

सुमित भी बाइक रोक देता है और मेघा उतर जाती है.

सुमित:- अब्ब क्या हुआ?

मेघा:- मई तुम्हारा टाइम वास्ते कर रही हु न?

सुमित:- क्या....

सुमित आगे बोलता उससे पहले hi.

मेघा:- तुम्हारा आने का मन hi नहीं tha...Issi लिए मेरे कहने पर बिना मन hi 2 घंटे सू कर aaye...Koi कूद hi नहीं है tumhara...Aur बस फॉर्मेलिटी के लिए कही जा रहे है बिना प्लानिंग के.

अगर सच में टाइम वास्ते कर रही हूँ तो रियली सॉरी.

इतना कह कर मेघा चुप हो जाती है.

सुमित:- हो गया tumhara...Abb कुछ सुनोगी भी?

मेघा चुप रहती है.

सुमित:- कुछ भी सोच lo...Usko अपने तरीके से कहानी बना लो और खुद hi विस्वाश भी कर लो.

इस बार सुमित की आवाज में नाराजगी था.

सुमित:- अब्ब बैचलर (मब्ब्स) के दिन गए की रात में जब भी मन हो सू जाओ और जब उठ jaau...Aaj की नींद कल पूरा कर लू.

अब्ब नींद की बहुत जरुरत hai...Bahut काम सोने का टाइम मिलता है और ना सोउ तो पता नहीं अगले दिन कोई इम्पोर्टेन्ट केस मिस हो सकता hai...Bachpana तो अभी भी थोड़ी सी है लेकिन रिस्पांसिबिलिटी की भी जरुरत है.

हर रोज 7-8 घंटे सोता हूँ फिर भी ताकि अगले दिन मन बना रहे पढाई लिखे में और कुछ सिखने के liye...Aaj 2 घंटे सू भी रहा हूँ तो वजह है.

मेघा:- क्या?

ऐसे hi मेघा के मुंह से निकला.

सुमित:- Nasha...Waise भी बर्थडे मेरे लिए कोई खास दिन नहीं hai...Iss बर्थडे को तुमने स्पेशल बनाया hai...Aur आज सेलिब्रेट करना चाहता हूँ तो स्पेशल तरीके se...Kuch अलग.

2 घंटे की नींद में भी अलग hi नशा होता hai...Abb दारु और सिगरेट की तरफ देख तो नहीं sakta...Bas ऐसे में यही नशा सही लगा.

मेघा:- और ये नशा चाहिए hi क्यों?

सुमित:- बहुत दिन से तुमसे बात नहीं hua...Aur आज दिल से बात करना चाहता hun...Sirf दिल se...Dimag से बात करने लगा तो काफी कुछ दिल में डाब jaayega...Soch समझ कर बात करने lagunga...Issi लिए सोया hi नहीं ताकि दिमाग अच्छे से काम न कर पाए.

लेकिन दिल से की हुई बात कुछ अलग hi hai...Bina किसी सोच जो दिल में है वही बात karunga...Bahut सी बातें है दिल mein...Jo शायद तुमसे कहना जरुरी है.

सुमित को भी पता नहीं था वो क्या बोले जा रहा hai...Bas जो दिल में था वही बोले जा रहा था.

मेघा:- और बिना मंजिल का सफर?

सुमित:- मुझे भी तो पता नहीं था मेरा बर्थडे कोई सेलिब्रेट karega...Lekin सेलिब्रेट हुआ न.

अब्ब रेतुर्न गिफ्ट की बारी मेरा hai...To तुम्हे भी तो पता नहीं होना चाहिए हमारा मंजिल क्या है?

अब्ब मेघा को ाचा लगता है.

मेघा:- इतना कुछ सोचा है तुमने?

सुमित:- और तुम हो की मुझ पर शक कर रही हो.

मेघा:- सॉरी.

कान पकड़ कर मेघा बोलती है तो सुमित भी मुस्कुरा देता है.

सुमित:- अब्ब बैठो.

मेघा बैठ जाती यही और सफर फिर सुरु हो जाता है.

मेघा:- लेकिन तुम्हे तो पता है न हम कहा जा रहे है?

सुमित:- Nahi...Abb ये फैसला बाइक पर है की हमे कहा ले जाएगा.

इतना कह कर सुमित बाइक की स्पीड बहुत तेज कर देता है.

मेघा:- Dhire...Slow डाउन.

दर में मेघा चिल्लाने लगी.

सुमित:- अब्ब विस्वाश नहीं रहा क्या मुझ ओर?

बाइक को स्लो कर के सुमित ने कहा.

मेघा:- नहीं वो बात nahi...Tum तो जानते hi हो मुझे तेज गाडी और उचाई से दर लगता है.

सुमित:- दर का भी दर तुम्हारे सामने hai...To फिर दर किस बात का?

मेघा:- अब्ब सच में चढ़ गया है तुम्हे.

सुमित:- क्या?

मेघा:- Nasha...Raat भर जागने का.

सुमित इस बार कुछ नहीं बोलता.

मेघा:- सुमित तुम जानते हो मुझे तुम में क्या पसंद है?

सुमित:- 3, 4 बोतल खरं करने के बाद भी कण्ट्रोल में रहना?

मेघा:- क्या बकवास कर रहे हो?

सुमित:- अच्छा बता hi do...Aisa क्या दिख गया मुझ में जो खुद मुझे नहीं दीखता.

मेघा:- Nayapan...Bahut साल हो गए तुमसे mile...Tumhare बारे में सब कुछ जान कर भी अनजान hun...Aaj ऐसे ho...Kal कैसा बन जाओगे वो भी पता nahi...Hameaha एक नया रूप देखने को मिलता hai...Aaj का hi ये सफर देख लो.

और उसके साथ hi केयरिंग नेचर.

सुमित:- Nayapan...Ye hi दूर होता जा रहा है मुझसे.

सुमित की आवाज में दर्द था इस बार जो मेघा ने भी महसूस किया.

मेघा कुछ बोलती उससे पहले hi सुमित कुछ ऐसा कर देता है की मेघा चौंक जाती है.

मेघा:- ये कहा जा रहे हो?

सुमित:- मुझे नहीं पता.

मेघा:- तो ये जंगल में क्यों जा रहे है?

सुमित:- आज तक कभी नहीं गया इसी लिए.

इतना कह कर सुमित थोड़ा अंदर जाने के बाद बाइक रोक देता है.

मेघा:- वापस chalo...Koi जानवर आ गया तो?

सुमित:- कम्युनिटी फारेस्ट hai...Aur कोई जान लेवा जंगली जानवर होने का रिपोर्ट इस जिल्ला में hi कभी नहीं मिला.

हाँ लेकिन भूत, प्रेत, पिसाच और चुड़ैल की गारंटी नहीं के सकता.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- लेकिन जुन्ग्के hi क्यों?

सुमित:- तुमने hi तो कहा tha...Nayapan...Mai कभी जंगल नहीं घुमा hun...Shayad तुम भी नहीं.

मेघा:- लेकिन यहाँ करेंगे क्या?

सुमित:- घूमेंगे, फिरेंगे मस्ती करेंगे और क्या?

बेपरवाह हो कर वुमित ने कहा और आगे बढ़ गया.

मेघा भी सुमित के साथ साथ चलने लगी.

सुमित बार बाद मेघा की तरफ देखता और खुश हो जाता.

मेघा:- ऐसे क्यों देख रहे हो?

सुमित:- बहुत समय बाद कोई कदम से कदम मिला कर चलने वाली मिली है.

मेघा:- क्या?

सुमित:- मेरा मतलब है चलते वक्त साथ में कोई है.

मेघा:- फिर दिमाग की baat...Dil को क्या हो गया अब्ब?

सुमित:- मेरा matlab...Bahut दिनों बाद किसी अच्छी दोस्त के साथ घूमने का मौका मिला है.

मेघा:- और kaho...Kaisa लग रहा है आज का दिन?

सुमित:- बहुत दिन बाद बाहर घूमने निकला hu...Khaas दोस्त और ख़ास वजह के saath...Bahut अच्छा लग रहा है.

मेघा:- ख़ास दोस्त?

सुमित:- मई तो मानता हूँ tumhe...Bas तुम hi नहीं मानती. :डी

मेघा:- अच्छा.

मेघा सुमित को मारने के लिए उसके पास जाती है तो सुमित भाग जाता है.

कुछ देर तक मेघा के पीछे लगे रहने के बाद.

सुमित:- डेली जॉगिंग करता hun...Pakad नहीं पाओगी.

फिर थक जाने के बाद दोनों साथ साथ चलने लगते है.

मेघा:- और ख़ास वजह?

सुमित:- बताऊंगा.

मेघा:- वैसे आज बहुत खुश लग रहे हो तुम.

सुमित:- Khush...Wo तो बिलकुल भी नहीं hu...Aur वही बताना चाहता हु tumhe...Kuch सालों से बहुत कमजोर पद चूका hun...Kehne के लिए तो सब कुछ है मेरे paas...Lekin फिर भी कुछ नहीं है.

मेघा:- कीर्ति?

सुमित की बात मेघा के लिए किसी झटके से काम नहीं tha...Upar से सुमित की बातों से झलकता हुआ उसका दर्द.

सुमित:- Nahi...Abb कीर्ति से कोई लेना देना nahi...Bahut पहले hi भुला चूका हूँ.

मेघा:- तो फिर?

सुमित:- बताता hun...Abhi पूरी तरह से होश में नहीं hun...Shayad मौका भी अच्छा है.
 
अपडेट 89

सुमित:- सच कहु तो जीने का तरीका hi भूल चूका हूँ.

इतना कह कर सुमित कीर्ति की और देखता hai...Kirti कुछ नहीं kehti...Usko देख सुमित को यही लगा की वो आगे की बात सुन्ना चाहती है.

सुमित:- कीर्ति की आने से पहले कितना खुश था.

एक अलग hi jindagi...Hamesha खुश रहता tha...Shayad hi कोई दुःख या परेशानी महसूस किया tha...Agar कभी कोई परेशानी आ भी जाता तो उसमें भी खुशियां निकाल hi लेता था.

बस अपने हिसाब से जीता tha...Kisi को कोई प्रॉब्लम भी नहीं tha...Agar कोई किसी वजह से जलता था तो उससे और जलाने की मजा hi कुछ और होता था.

ना किसी को फ़ालतू की ज्ञान देना और ना hi किसी से फ़ालतू का ज्ञान लेना.

कुल मिला kar...Apni मर्जी की मालिक था.

मेघा:- अब्ब तो जैसे दुसरो की गुलामी करते हो?

सुमित:- नहीं बस कोई ख़ुशी महसूस hi नहीं होता hai...Chahe कितना भी झूठी तसल्ली दे दू खुद को.

मेघा:- और ये झूठी तसल्ली कब से दे रहे हो?

सुमित:- कीर्ति के जाने के बाद से.

मेघा:- कुछ दिन पहले hi तो कह रहे थे की बहुत खुश हो tum...Abb सब कुछ सेट है.

सुमित:- झूठ था wo...Aaj तक तुम से सब कुछ झूठ hi तो बोलता आ रहा hun...Pehle झूठा pehchaan...Jhutha pyaar...Aur अब्ब ये झूठा दिखावा.

साला ये प्यार के चक्कर में कितना झूठा बन गया हूँ और कितना galat...Abb तो खुद से hi नफरत होने लगा है.

सुमित की बातों में गुस्सा था और आँखों में aansu...Jo सुमित की दूसरी तरफ होने की वजह से मेघा की नजर से दूर था.

मेघा:- और ये भी झूठ बोल रहे हो की तुम अब्ब कीर्ति से प्यार नहीं करते.

मेघा ने तो मजाक में कहा था लेकिन जब सुमित उसकी तरफ मुदा तो पता चल गया उसकी अनुमान कितनी गलत है.

सुमित:- प्यार का तो पता nahi...Lekin अब्ब कीर्ति की मेरी जिंदगी में कोई जगह नहीं है.

मेघा की आँखों में देख कर सुमित ने कहा.

अब्ब मेघा को पता चला की सुमित किस हाल से गुजाह रहा hai...Kisi तरह सुमित को शांत कराने के बाद.

सुमित:- ये दर्द कीर्ति की जाने की नहीं hai...Wo दर्द तो कब का झेल चूका हूँ.

दुःख सिर्फ इतनी सी है की 3 साल हो गए लेकिन मई अभी तक जीना सीखा hi नहीं hai...Itna बर्बाद कर दिया खुद को प्यार में की अब्ब कीर्ति के बिना कोई अस्तित्वा नजर hi नहीं आता.

जिंदगी तो वक्त के साथ चल hi रहा hai...Professional और सोशल लाइफ भी अच्छा hi hai...Lekin प्राइवेट लाइफ की लगी पड़ी hai...Hamesha एक अधूरापन महसूस होता है जिसका शायद hi कोई अंत हो.

मेघा को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था सुमित को क्या जवाब दे.

मेघा:- हालात hi ऐसे thhe...Kuch वक्त तो लगेगा न सब ठीक होने में.

सुमित:- कितना वक्त? अब्ब तो सब्र का बाँध भी टूट रहा hai...Dur दूर तक कुछ सही होता नहीं दिख रहा है.

जानती हो तुम न जाने कितनी गाली दे रहा हूँ अभी खुद को जो ऐसा हाल हो गया है की अपना दुःख तुम्हे सुना रहा हूँ.

अपना रोना किसी को सुनाना बिलकुल भी पसंद नहीं है mujhe...Naa hi किसी का रोना सुनता हूँ और ना hi सुनाता hun...Hamesha फाइट बैक में विश्वाश करता tha...Lekin किस चीज से फाइट बैक karu...Wo भी समझ में नहीं आ रहा है.

मेघा:- अरे तो मुझे अपने परेशानी शेयर करने में कैसी दिक्कत है?

सुमित:- आदत नहीं hai...Aur आज कल तो हर एक आदत भूलता जा रहा हूँ.

मेघा फिर सुमित को समझने की कोशिश करती hai...Kuch खाद तो फर्क नहीं पद रहा था लेकिन सुमित को सुनने में अच्छा जरूर लग रहा था.

मेघा:- अब्ब कहा जा रहे हो?

सुमित:- थोड़ी dur...Kuch पल अकेला रहना चाहता हूँ.

मेघा:- लेकिन मुझे दर लग रहा है यहाँ अकेले.

सुमित:- Bachpan...Jab बहुत छोटा था तो मुझे भी भूत से दर लगता था.

मेघा:- मतलब?

सुमित:- दोनों फ़ालतू का दर hai...Vaastavikta से कोशो दूर.

मेघा:- मेरा दर फ़ालतू का लग रहा है तुम्हे?

सुमित:- Haan...I मैं नहीं.

सुमित को जवाब देते नहीं बन रहा था.

मेघा:- लेकिन कपरिसों बकवास था.

सुमित:- नींद की नशे में hun...Jo दिल में आये वही बोले जा रहा हूँ.

मेघा:- अच्छा ठीक hai...Jaldi आ जाना.

सुमित:- फ़िक्र मत karo...Dur से hi सही नजर तुम पर hi rahega...Koi मुशीबत आने नहीं दूंगा.

इतना कह कर सुमित जुन्ग्के के थोड़ा और दूर घुस gaya...Fir एक पेड़ (ट्री) के पीछे चुप कर मेघा को देखता hai...Iss वक्त उसके होंठो में मुस्कान था.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) क्या तुम कभी समझ पाओगी मेरे बात की मतलब? खैर, मई खुद नहीं चाहता की तुम समझ sako...Issi लिए बातो को इतना घुमाना pada...Lekin दिल को हल्का करने के लिए आज कहना hi पड़ा जो न जाने कितने सालों तक दिल में hi कैद था.

सुकून है इस बात ka...Aaj तुमसे दिल की बात कह दिया.

और जो दिल का बात hai...Sabse jaruri..."I लव यू" ये तुमसे कभी नहीं kahunga...Chaahe कितना भी नशा में राहु.

ये कहते hi सुमित की चेहरे में दर्द भरी मुस्कान आ गया.

अब्ब तो तंग आ चूका हूँ इस अकेलापन se....Aut इससे भी बुरा इस बात का लग रहा है की ये अकेलापन हमेशा मेरे साथ hi rahega...Kabhi कोशिश नहीं करूँगा इस अकेलापन से निकलने की.

कितना प्यार करता हूँ तुमसे ये कभी बता नहीं paaunga...Hai कुछ vajah...Mere लाख चाहने के बावजूद हम दोनों एक नहीं हो पाएंगे.

2 साल और हो तुम मेरे paas...Yahi मेरे जिंदगी के सबसे ख़ास पल होंगे जिसमें भी ख़ुशी से दर्द hi ज्यादा होगा.

उसके baad....Uske बाद तो.

इससे आगे सुमित कुछ नहीं bola...Abb बातो की जगह मुस्कान ने ले लिए और साथ hi आंसुओ की धार ने भी.
 
अपडेट 90

कल क्यों नहीं आये तुम कॉलेज?

संजना की आवाज में थोड़ा गुस्सा था.

सुमित:- बंक.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

संजना:- खुद अपने पेअर में कुलहरि मार लिया तुमने.

सुमित:- और कुलहरि hi टूट गया. :lol1:

संजना:- मजाक लग रहा है तुम्हे.

संजना का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

सर्जरी के सभी रेसिडेंट्स (MD/MS स्टूडेंट्स) दोनों को hi देख रहे thhe...Sabhi को हालात पता था.

सुमित:- ऐसा क्या जुर्म कर दिया मैंने की तुम इतना गुस्सा हो?

संजना:- बंक.

सुमित:- वो तो बचपन से hi करता आया हूँ. यू क्नोव what...I ऍम ा क्रोनिक (सीन्स लॉन्ग टाइम) bunker...Bhale hi गर्व की बात नहीं है लेकिन कोई अफ़सोस भी नहीं.

संजना:- अफ़सोस तो अब्ब hoga...Waise वजह जान सकती हूँ?

सुमित कुछ कहता इससे पहले hi.

विकाश:- बर्थडे था कल इसका.

संजना:- व्हाटटटटट? तुम्हे कैसे पता? और सुमित तुमने मुझे बताया क्यों नहीं?

विकाश:- मुझे भी पता नहीं tha...Raat में मेघा ने कहा.

सुमित:- और कमीने विश भी नहीं किया मुझे.

विकाश:- कभी व्हाट्सप्प चेक करता है?

सुमित:- वो तो सालो से बंद पड़ा hai...Kisi को बात करना होगा तो फ़ोन hi एक मात्रा रास्ता है.

विकाश:- मज़बूरी था yaar...Phone में बैलेंस नहीं tha...Aur तू कल हॉस्टल भी नहीं आया.

सुमित:- अब्ब तो शर्म kar...Acha ख़ासा कमाता है फिर भी फ़ोन में बैलेंस नहीं.

विकाश:- मेरा तो सारा काम व्हाट्सप्प से hi हो जाता hai...Recharge करने की जरुरत hi नहीं पड़ता.

संजना:- अगर तुम दोनों का हो गया हो तो मुझसे भी बात करलो.

सुमित:- और अब्ब मुझे दोष मत देना की मैंने तुम्हे नहीं बताया.

मुझे खुद याद नहीं था मेरा birthday...Wo तो मेघा ने याद dilaaya...Aur उसके बाद मेघा के साथ वक्त बिताने के बाद बाकी कुछ चीज का याद hi नहीं था.

और यही वजह था बंक ka...Pehli बार मेघा ने कुछ माँगा tha...Mana कैसे कर देता.

अब्ब सुमित के जुबान में मेघा की नाम आते hi उसके चेहरे की भाव भी एकदम से बदल जाता tha...Jo शायद संजना को सोच में दाल रहा था.

संजना:- तुम तो कहते थे की मेघा से प्यार नहीं करते.

सुमित:- तब भी कहता था और आज भी कहता hun...Megha बहुत स्पेशल दोस्त है meri...Aur ये दोस्ती है की बढ़ता hi जा रहा है.

इस बार संजना ने कुछ नहीं कहा.

सुमित:- तुम कह रही थी की क्लास बंक करने की अफ़सोस होगा.

संजना:- कुछ hi देर में पता चल जाएगा.

विकाश:- ट्रस्ट me...Kuch नहीं होगा isse...Expert है इस मामले में ये.

बाकी की स्टूडेंट्स भी सुमित को हैरानी से देखते है.

संजना:- मुझे नहीं लगता...

विकाश:- तब तुम सुमित को जानती hi नहीं.

सुमित:- अबे किस चीज की तारीफ़ कर रहा है.

विकाश:- थोड़ी देर में पता चल जाएगा. :डी

सुमित:- चलो ये भी सही hai...Bahut दिन से लाइफ में कोई थ्रिल नहीं mila...Dekhte है तुम्हारे सस्पेंस.

संजना:- सामने है सस्पेंस.

होड़ (हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट) के क्लास में आते hi संजना धीरे से बोली.

वलास में आते hi.

होड़:- सुमित कौन है.

बाकी सब स्टूडेंट बैठ जाते है.

होड़:- तो तुम हो सुमित. सही कहता था राकेश (ओने ऑफ़ थे सर्जरी Favulty)...Hero टाइप लुक.

सुमित कुछ जवाब नहीं देता.

होड़:- और शायद इसीलिए सोचा होगा थोड़ा हीरोगिरी करोगे.

थोड़ा सख्त आवाज में उन्होंने कहा.

होड़:- और ये है तुम्हारे हीरोगिरी के इनाम.

इतना कह कर कुछ पेपर वो सुमित के हाथ में थमा देते है.

सुमित जैसे hi पेपर की और नजर डालता है वो एकदम से हैरान हो जाता hai...Suspension लेटर.

वो कुछ कहता उससे पहले hi.

होड़:- अच्छे से padho...Kahi ग्रामेटिकल मिस्टेक्स तो nahi...Dean को सबमिट करना है ये लेटर.

कुछ देर पढ़ने के बाद.

सुमित:- सर आप को तो सर्जरी के साथ इंग्लिश का भी प्रोफेसर होना चाहिए था.

होड़:- वो बाद में dekhunga...Pehle अस ा हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट hi काम कर लेने दो.

सुमित बस उन्हें hi देखता रहता है.

होड़:- तुम्हारे चेहरे में कोई दर या अफ़सोस नहीं दिख रहा है.

सुमित:- अफसोश की क्या बात है सर?

होड़:- ससपेंड होने पर भी अफसोश नहीं?

सुमित:- मई ससपेंड हुआ भी तो नहीं हूँ.

होड़:- शायद तुमने ये लेटेंट पढ़ा नहीं है.

सुमित:- अच्छे से पढ़ा है sir...Aur अगर ससपेंड होता तो ये लेटर मुझे डीन की तरफ से milta.Aur ये लेटर अभी मेरी जगह डीन के हाथ में होता.

होड़:- एक मौका दिया है तुम्हे.

सुमित:- अगली बार एब्सेंट न होने के लिए?

होड़:- Nahi...Pichle 3 क्लासेज बंक करने के liye...Safaai में कुछ अच्छा सा और सच्चा रेडों chahiye...Warna अगली बार ये लेटर तुम्हे डीन की तरफ से मिलेगा.

चलो batao...Mai पहले hi मन बना चूका हूँ तुम्हे ससपेंड करने ka...Abb तुम पर देपेंद करता है आगे.

सुमित:- सर ऐसे hi मूड नहीं था तो क्लास बंक कर दिया.

इस जवाब ने सब को हैरान कर diya...Sabhi को लगा था सुमित एक अच्छा सा झूठ बोल dega...HOD भी इंतजार कर रहे थे कोई अच्छा सा झूठ सुनने को मिलेगा वर्ण बहुत से बोरिंग रेअसोंस तो वो पहले भी सुन चुके थे.

होड़:- (ताली बजा कर) आनेस्टी इस थे बेस्ट पालिसी.

ये भी सभी को हैरान कर दिया.

सुमित:- थैंक यू सर.

होड़:- लेकिन क्लास बंक करना मेरी नजर में डिसरेस्पेक्ट hai...Wo भी मेरे hi 3 क्लासेज. और इस डिसरेस्पेक्ट का सजा तुम्हारा ससपेंड होना hi है.

सुमित ने इस बार कुछ नहीं kaha...Wo अच्छा मौका का इंतजार में था.

होड़:- तुम अपने सीनियर्स से बात नहीं करते?

सुमित:- सिर्फ काम की baat...OT और ोपड में.

होड़:- अगर काम की बात करते तो ये पता होता की बुंकिंग के कितना खिलाफ हूँ mai...Aur एक बार जो स्टूडेंट मेरे नजर में पद gaya...Pure 3 साल मेरे नजर से दूर नहीं होता.

सुमित:- ये तो अच्छी बात hai...Aapke सुपेटविसिओं में बहुत कुछ सिखने को मिलेगा.

इस जवाब से होड़ थोड़ा गुस्सा हो जाते है.

होड़:- और पनिशमेंट? अभी तो ससपेंड कर रहा hun...Kahi ऐसा ना हो की ृस्तिकते hi कर du...Ek दो एक्साम्प्लेस है.

सुमित:- लेकिन sir...Seniors ने ये भी कहा था की आप थ्योरी से प्रैक्टिकल को ज्यादा महत्वा देते hai...Aap hi तो कहते है थ्योरी जरुरी hai...Aur उससे भी जरुरी है थ्योरी को प्रक्टिकली अप्लाई karna...Khaas कर के सर्जरी mein...Aur ये बात कोई किताब नहीं सिखाता.

ये सिखाता है तो स्टूडेंट का डेडिकेशन, मेहनत और experience...Saath hi सीनियर्स का एक्सपीरियंस जो गलती करने से रोकते है.

ये सुनते hi होड़ का भाव एकदम से बदल जाता है.

होड़:- थ्योरी का क्लास में 3 दिन एब्सेंट हो तो प्रैक्टिकल में कितना होगा?

सुमित:- रजिस्टर सामने है सर.

होड़ फिर रजिस्टर टर्न करते है और हैरानी से.

होड़:- 100℅ अटेंडेंस

सुमित:- ये तो रजिस्टर कहता है sir...Warna 110℅ से काम नहीं होगा मेरा प्रैक्टिकल में अटेंडेंस.

होड़:- 110% क्या होता है?

सुमित:- Overtime...Jab ओट में सर्जरी के केस ख़त्म हो जाते है तो बाकी चीज की ऑब्जरवेशन में कुछ डेट और रुकता hun...OPD में लंच टाइम के वक्त भी कुछ केसेस क्र बारे में स्टडी करता हूँ.

सर आपका एक भी क्लास अटेंड नहीं किया hai...Lekin आपको ओट में सर्जरी करते देखा hai...OPD में पेशेंट का हिस्ट्री और एग्जामिनेशन करते देखा hai...Kuch ऐसा hi जोश चाहिए मुझर bhi...Bas एबी सिखने की कोशिश है.

वर्ण थ्योरी तो बुक पढंर से आ hi jaayega...Aur 4 स्टैण्डर्ड बुक्स हमेशा साथ में hi होते है मेरे.

ये सुनते hi होड़ का भाव अब्ब एकदम hi बदल जाता है.

होड़:- एक बात bataao...Itne hi अटेंटिव और फोकस्ड हो तो मेरा hi क्लास क्यों बंक किया तुमने? बाकी तो 100℅ अटेंडेंस है.

सुमित:- आप होड़ है तो आपके टॉपिक भी सबसे इम्पोर्टेन्ट hai...Aur सभी इम्पोर्टेन्ट टॉपिक अब्ब तक कवर कर चूका हूँ इस ईयर ka...Iss लिए क्लास की जरुरत hi नहीं pada...Isse अच्छा ये लेक्चर ऑवर में रात करके आगे की तैयारी करू.

होड़:- चेक करता hun...Kitna कवर किया है?

फिर वो कुछ आसान और मुश्किल सवाल पूछते है हर टॉपिक से.

सुमित जिस अंदाज से जवाब दे रहा था उससे बाकी स्टूडेंट्स के साथ होड़ भी हैरान रह जाते है.

होड़:- बहुत खूब.

सुमित:- थैंक यू सर.

होड़:- खड़ा क्यों hai...Baith जा.

सुमित के बैठने के बाद.

होड़:- पहले hi सजा देने की मन बना कर आया tha...Pehle की साड़ी गलती maaf...Lekin अभी जो गलती हुआ है उसकी सजा तो जरूर मिलेगा.

सुमित:- अब्ब क्या गलती हो गया सर?

होड़:- सभी का टाइम लोस्स? तुम hi बताओ कितना लोस्स हुआ है.

सुमित:- 20 मिनट्स.

होड़:- शायद मैथ्स में कमजोर रह गए हो.

सुमित:- 21 मिनट?

होड़:- 10 स्टूडेंट्स हो तुम sab...Aur मुझे भी साथ जोड़ लो तो 11. 11×20= 220 मिनट्स लोस्स.

भूलो मत टाइम का लोस्स hi सबसे बड़ा लोस्स है जो कभी वापस नहीं aata...Aur सर्जरी में भी टाइम बहुत जरुरी चीज है.

इसकी सजा क्या होनी चाहिए?

सुमित:- आप hi फैसला कीजिये?

होड़:- मूड अच्छा है अभी mera...Issi लिए मुश्किल सजा नहीं dunga...Sabhi को आज तुम चाय पिलाओगे लंच टाइम में.

सुमित:- Ok sir...Aap भी?

होड़:- नहीं मई बिजी हूँ उस vakt...Waise भी मई चाय नहीं पीटा.

उसके बाद क्लास सुरु हो जाता hai...Aur ख़त्म होने तक सुमित का आंसर होड़ को और भी इम्प्रेस कर देता है.

आफ्टर क्लास

संजना:- तुम सही कह रहे थे.

विकाश:- पुरे मब्ब्स ऐसे hi काण्ड कर के बिताया है सुमित ne...Acche से जानता हूँ isse...Kise कैसे इन्फ्लुएंस करना है अच्छे से जानता है.

कोई भी डिपार्टमेंट के टीचर्स ऐसे नहीं होंगे जिसके साथ सुमित का पन्गा ना हुआ ho...Wo तो अब्ब जाके थोड़ा हम्बल तरीके से जवाब देता है.

तुम्हारा बात hi कुछ और है सुमित!!

कीर्ति की आवाज कुछ ऐसा था जैसे उसको सुमित पर बहुत गर्व है.

सुमित:- सभी ऐसा hi कहते है.

कीर्ति:- मुझे भी कहना चाहिए था.

सुमित:- सही कहते थे राहुल sir...Beeta हुआ वक्त वापस नहीं आता है.

कीर्ति:- कौन राहुल सर?

सुमित:- वही हमारे होड़.

इस बात का कीर्ति कोई जवाब नहीं deti...Dusra सवाल पूछती है.

कीर्ति:- अगर मेघा से इतना प्यार करते थे तो संजना से शादी क्यों किया?

सुमित:- कहानी अभी बाकी है.

कीर्ति:- मेघा के साथ भी गलत हुआ.

सुमित:- मेघा से बात करोगी तो पता chalega...Iss वक्त दुनिया में सबसे ज्यादा कोई खुश है तो वो मेघा hi है.

कीर्ति:- विकाश के साथ?

सुमित:- Nahi...Vikash भी अब्ब खुश है किसी और के साथ अरेंज्ड मैरिज कर के.

कीर्ति:- तो फिर मेघा कहा है?

सुमित:- ये तो आगे कहानी hi बताएगा.

लो आ गया घर.

इतना कह कर सुमित दूर बेल्ल रिंग करता है.

कीर्ति:- मई संजना से मिलना चाहती हूँ.

एक लड़की ने दूर khola...Usse देखते hi.

सुमित:- इस बार लेट नहीं किया डार्लिंग तुमने.

कीर्ति:- तुम हो संजना!!!!

जाना पहचाना चेहरा देख कीर्ति कुछ ज्यादा hi हैरान रह गयी.
 
अपडेट 91

आफ्टर 8 मोनथस

और एक आखिरी shot...Saamne वाले खिलाडी के पास इसका भी कोई जवाब नहीं.

और इसी के साथ सुमित से भी ज्यादा एक्ससिटेड हो कर मेघा उछलने लगी.

सुमित अपना टेबल टेनिस के बात बोर्ड में रख कर बस मेघा को hi देखे जा रहा tha...Megha को खुश देख वो भी मुस्कुराने लगा.

मेघा:- कॉंग्रट्स गोल्ड मेडलिस्ट.

सुमित:- थैंक you...Ye सब तुम्हारी hi मेहरबानी है.

मेघा:- मेरी meharbaani...Aur वो कैसे?

सुमित:- जब भी तुम पास में होती हो तो एकदम से जोश बढ़ जाता hai...Aur दूसरी बात तुम मेरे लिए बहुत लकी ho...Jab भी कभी हालात बिगड़ने लगते है तुम्हारे पास आ जाने से सब कुछ एकदम से hi संभल जाता है.

कीर्ति के जाने के बाद कितना टूट गया tha...Wo पापा और तुम hi थी जिस वजह से मई संभल पाया था.

मेघा:- फिर से कीर्ति?

सुमित:- अब्ब याद तो आ hi जाती hai...Kya करू मेमोरी है hi इतना शार्प!! :डी :डी

मेघा:- कर लो अपनी तारीफ़.

सुमित:- वैसे अब्ब सिर्फ वो याद hi hai...Isse ज्यादा कुछ नहीं.

मेघा:- सच में?

सुमित:- Haan...Uske जाने के बाद एक बार भी कांटेक्ट नहीं किया और ना hi कोशिश kiya...Kuch महीने के बाद तो उसके बारे में सोचना भी बंद कर दिया.

मेघा:- क्या बात है? प्यार से सीधा नफरत. :डी

सुमित:- नहीं नफरत नहीं है और अब्ब ना hi कोई pyaar...Nafrat होगा भी तो कैसे? उसकी कोई गलती नहीं thi...Mai hi हाथ धो कर पीछे पड़ा tha...Aur उसने रिजेक्ट कर दिया.

अब्ब उसके लिए कोई फीलिंग्स नहीं है दिल mein...Agar वो मेरी अब्ब कुछ लगती है तो teacher...Jo जाते जाते बहुत कुछ सीखा कर गयी.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- और मई सोच रही थी की तुमने मुझे कीर्ति के बारे में एक बार भी क्यों नहीं पूछा?

सुमित:- अब्ब कोई मतलब hi नहीं है तो क्या पूछना या फिर क्या पता करना? उसकी जिंदगी अलग है और मेरा alag...Wo जहा भी रहे खुश रहे और मई भी अपनी जिंदगी में खुशियां ढूंढ़ना चाहता हूँ.

मेघा:- थैंक god...Bach gayi...Warna फिर से कीर्ति को पानी तुम्हारा जूनून का शिकार बन jaati...Yaad है तुम्हारा वो प्लान.

सुमित:- और मार लो taana...Gaali भी दे सकती ho...Waise जब भी वो दिन याद करता हु तो मई खुद hi अपने आप को गाली देता हु.

मेघा:- छोडो ये baatein...Waise भी कीर्ति से मेरा भी उसी दिन आखिरी बार बात हुआ था.

सुमित:- क्यों? कीर्ति तो तुम्हारी बहुत अच्छी दोस्त थी.

मेघा:- ताली एक हाथ से नहीं bajta...Suna hi होगा.

सुमित:- समझ गया.

मेघा:- आज तो तुम्हारा कोई जवाब nahi...Har एक बॉल में shot...Majaa आ गया.

मेघा ने बात को कीर्ति से डाइवर्ट करते हुए कहा.

सुमित:- सामने वाला मुझसे भी स्ट्रांग tha...Defensive गेम में शायद hi उससे हरा paata...Fir क्या था थोड़ा hi मौका मिलते hi चांस ले कर शॉट पे शॉट मारे जा रहा था और उसके बाद तुम्हारा entry...Josh और किस्मत का अध्भुत combination...Aur रिजल्ट तुम्हारे सामने.

मेघा:- उम्मीद है बाकी के खेल में भी तुम्हारा जोश देखने को मिलेगा.

सुमित:- बाकी का तो पता nahi...Kal क्रिकेट hai...Bas तुम आ jaana...Chauka और चक्का की बारिश कर दूंगा.

मेघा:- कभी कभी लगता है तुम्हे डॉक्टर की जगह स्पोर्ट्समैन बनना चाहिए था.

सुमित:- वैसे तो बहुत कुछ बन सकता hun...Pyaar के अलावा जिस चीज को भी हाथ लगाया है निराशा नहीं mila...Aur रही स्पोर्ट्स की बात तो ये तो जिंदगी भर साथ rahega...Physical और मेन्टल हेल्थ के लिए काफी जरुरी है.

मेघा:- वैसे आज मेरा बहुत तारीफ़ कर रहे ho...Luck फैक्टर और जोश वगेरा.

बात को फिर से डाइवर्ट करते हुए मेघा ने पूछा.

सुमित:- सच hi तो कहा है.

मेघा:- एकदम से क्या हो gaya...Kisi का taarif...Wo भी तुम्हारे मुंह se...Aur वो भी मेरे लिए :eek:...Kamaal हो गया.

सुमित:- मेरा तारीफ़ करना किसी अवार्ड से काम nahi...Bahut म्हणत और लगन के बाद मिलता hai...Mehnat करती जाओ और तारीफ़ सुनती रहो.

मेघा:- लेकिन अभी तो मैंने कोई म्हणत भी नहीं kiya...Tum hi तारीफ़ कर रहे ho...Wo भी लक के लिए.

सुमित इस बात पर कुछ नहीं बोल पाया.

मेघा:- अपने मीठे बोल से किसी और को चुना lagaana...Samjhe मर.

इतना कह कर मेघा सुमित के गाल पिंच कर के आगे बढ़ जाती है.

सुमित भी मेघा के पास पहुँच कर.

सुमित:- तुमसे जीत नहीं सकता.

सुमित:- (समवेयर इन हिज हार्ट) और तुमसे हारने का अफसोश भी नहीं.

मेघा:- मेरे सवाल का जवाब ये नहीं है?

सुमित:- सवाल क्या था फिर?

मेघा:- मई तुम्हारे लियर क्यों लक फैक्टर हूँ?

सुमित:- अब्ब मुंह से निकली हर बात का एक्सप्लनेशन थोड़ी न होता hai...Tumhe खुश करने के लिए कह दिया होगा.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) दिल से निकली हर बात को कैसे बयान करू.

मेघा:- अच्छा मुझे खुश करने के लिए झूठी तारीफें हो रही थी.

सुमित इस बार भी जवाब नहीं दे पाया.

मेघा:- क्या बात है? बहुत कन्फ्यूज्ड लग रहे हो?

सुमित ने फिर जवाब नहीं दिया.

मेघा:- अब्ब बताओ bhi...Kya कन्फूसिओं है?

सुमित सोच hi रहा था की.

मेघा:- कोई सीरियस बात है?

सुमित:- Nahi...Bas थोड़ी सी कन्फूसिओं है.

मेघा:- किस बात की?

सुमित:- अब्ब 2 साल में सर्जन बन hi jaaunga...Bas कन्फूसिओं है की न्यूरोसर्जन या फिर गई सर्जन?

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) बात को टालने के लिए क्या क्या बकवास बोले जा रहा हु.

मेघा:- उसके लिए बहुत टाइम है.

सुमित:- अरे टाइम hi तो नहीं है.

एकदम से सुमित बोलै.

मेघा:- तुम सच में कन्फ्यूज्ड लग रहे ho...Thoda ठन्डे दिमाग से socho...Jawaab मिल जाएगा.

सुमित:- दिमाग को ठंडा करने के लिए एक कप कोल्ड कॉफ़ी हो जाए?

इस बार मेघा हंसती है.

मेघा:- अब्ब जा कर तुमने कोई ढंग की बातें ki...Chalo.

मेघा का बस इतना hi कहना था की सुमित को ढूंढते हुए संजना आ गयी.

संजना:- सुमित चलो?

सुमित:- कहा?

संजना:- Library...Exam आ रहा hai...Padhne के लिए.

सुमित:- बाद में.

संजना:- नहीं अभी chalo...Suna है इस बार क़ुएस्तिओन्स टफ आने वाले है.

सुमित:- आने do...Dekh लूंगा.

संजना:- Sumit...Majaak अपनी jagah...Aur सीरियसनेस अपनी jagah...Abhi सीरियस होने का वक्त है.

सुमित कुछ कहने hi वाला था की.

संजना:- मई कुछ नहीं jaanti...Tum चल रहे हो अभी.

मेघा:- चिंता मत karo...Sumit को एक्साम्स हैंडल करने की आदत hai...Kar लेगा वो.

संजना:- तुम नहीं जानती अभी सुमित ko...Practical में hi अच्छा hai...Theory में बहुत इम्प्रूवमेंट की जरुरत है.

मेघा:- मई नहीं जानती सुमत को?

संजना:- तुम जिस सुमित को जानती थी वो सुमित कुछ और tha...Abhi...

संजना इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

सुमित:- मई आज भी वही सुमित हूँ.

संजना:- और इस सुमित में बहुत बदलाव की जरुरत hai...Thoda सीरियस बनने की जरुरत hai...Padhai में भी और आदत में भी.

सुमित को अब्ब संजना पर गुस्सा आ रहा tha...Megha भी सोच रहा था संजना की खैर नहीं.

सुमित ने एक नजर मेघा को देखा जो बिलकुल भी खुश नहीं लग रही थी.

कुछ सोच कर.

सुमित:- चलो.

ये बहुत सुर्प्रिसिंग था मेघा के लिए.

आगे बढ़ने के बाद एक दो नजर सुमित ने पीछे मुद कर मेघा को dekha...Jo हैरान और गुस्सा में नजर आ रही थी.
 
अपडेट 92

इन लाइब्रेरी

तब से देख रही हूँ तुमने किताब की तरफ देखा भी नहीं है.

हैरानी में संजना बोली.

सुमित:- प्रिपरेशन कम्पलीट हो चूका है.

संजना:- वो तो मेरा भी हो चूका hai...Wo भी 2 baar...Lekin रेविसिओं भी तो जरुरी hai...Acche मार्क्स के लिए.

सुमित:- Marks...Yeh मोह माया से बहुत पहले उठ चूका hun...Papa की दांत और दोस्तों की taane...Iss से भी कोई फर्क नहीं पड़ता tha...Abb तो और खैर बहुत आगे निकल चूका हूँ.

सुमित की जवाब से संजना और भी हैरान रह gayi...Pehli बार कोई ऐसा देख रही गहि जिसे मार्क्स से कोई मतलब नहीं था.

संजना:- अगर मार्क्स चाहिए hi nahi....To फिर इतनी पढ़ाई का क्या फायदा?

सुमित:- बस नॉलेज के लिए.

संजना:- अब्ब ये मत कह देना की अच्छे मार्क्स लाना बुरी बात hai...Ye सिर्फ रट्टा मरने वाले स्टूडेंट्स लाते है.

सुमित:- नहीं अच्छी बात hai...Thoda बहुत स्टूडेंट्स की म्हणत भी दिखता hai...Bas मुझे मार्क्स से उतना फर्क नहीं पड़ता.

संजना:- कहने की बात hai...Exam आने do...Aur फिर देखती हूँ तुम्हारी मार्क्स.

सुमित:- देख लेना.

फिर सुमित अपने मोबाइल में लग जाता hai...Sanjana भी हैरानी में अपने पढाई में लग जाती है.

दूरिंग एग्जाम

जितना हैरानी सभी स्टूडेंट्स को हो रहा था उससे ज्यादा संजना ko...Sumit अपने वादा के मुताबिक सिर्फ 30 मिनट्स में अपना पेपर सबमिट करके क्लास से निकल गया.

रिजल्ट डे

सुमित अपना रिजल्ट ले कर सबसे पहले संजना के पास गया.

संजना:- पागल हो तुम.

इस आवाज में हैरानी के साथ गुस्सा भी था.

सुमित:- अब्ब ये गुस्सा किस बात की?

संजना:- इतना केयरलेस कैसे हो सकते हो तुम Sumit...Pehli बार कोई ऐसा देख रही हूँ जो अपने पोटेंशियल से काफी काम का परफॉरमेंस दे रहा hai...Talented ho...Lekin इस टैलेंट का मजाक मत बनाओ.

सुमित:- मजाक नहीं है ये....

सुमित आगे कुछ बोलता उससे पहले hi...

संजना:- तुम्हारा हर एक मजाक तुम्हारे मार्कशीट पर धब्बा hai...Lekin तुम्हे तो कोई अफसोश hi नहीं.

तभी सुमित का नजर विकाश पर पड़ा.

सुमित:- अबे तू अपना मुंह लटकाये क्यों बैठा है? टोपर hai...Thoda तो मुस्कान ला अपने चेहरे में.

विकाश:- तूने इस बार भी डिसअप्पोइंट कर दिया.

सुमित:- अब्ब क्या कर दिया मैंने?

विकाश:- मब्ब्स में कम्पटीशन नहीं mila...Socha यहाँ मस में milega...Lekin यहाँ भी तेरा वही attitude...Pass मार्क्स के अराउंड सोल्वे कर और निकल जा एग्जाम हॉल से.

सुमित इस बात पर सिर्फ मुस्कुराया.

विकाश:- उस वक्त का समझ में आता hai...Breakup हुआ tha...Padhaai में मन नहीं tha...Lekin इस बार?

सुमित:- इस बार भी वजह है.

विकाश:- क्या?

सुमित:- Bataaunga...Kabhi फुर्सत में.

सुमित की ब्रेकअप की बात संजना ने सुन ली.

संजना:- क्या कह रहे थे तुम विकाश? सुमित की ब्रेकअप.

विकाश कुछ कहने से पहले सुमित की तरफ देखता है.

सुमित:- ऐसे क्या देख रहा hai...Koi गलती थोड़े किया था जो मुंह छुपाता firunga...Bol दे.

फिर विकाश संजना को वो साड़ी बात बताता है जितना उससे पता tha...Aur सुमित भी मजे ले कर सुन रहा था.

बात ख़त्म होने के बाद संजना सुमित की और देखती hai...Tabhi सुमित की कान में एक आवाज गूंजता है.

Hello सर्जन.

बिना उस आवाज की तरफ मुड़े सुमित जवाब देता है.

सुमित:- आओ Cardiologist...Tumhara hi इंतजार था.

फिर सुमित मेघा की और मुड़ता है.

सुमित:- अब्ब बताओ अपनी रिजल्ट?

मेघा:- गेस करो.

सुमित:- ये कौन मुश्किल काम hai...Obviously टॉप hi किया होगा.

मेघा:- इस बार भी तुम्हारा गेस सही है.

सुमित:- Wow...Congratulations!!!

सुमित की ख़ुशी उसकी बातों से झलक रहा था.

मेघा:- थैंक you...Aur रिजल्ट तो तुम्हारा भी आज है.

सुमित:- हाँ.

मेघा:- और तुम्हारा मार्क्स भी वही 55-60℅ के बिच में होगा.

इतना सही प्रेडिक्शन देख संजना और भी हैरान हो गयी.

सुमित:- 55℅...तो बे मोरे प्रेसीसे.

मेघा:- कोंग्रटुलतिओन्स!!!

सुमित:- और ये बधाई किस बात की?

मेघा:- इतना मार्क्स hi तो तुम चाहते हो.

सुमित:- अगर कभी मुझे इंजेक्शन की जरुरत पड़ेगा तो तुम्हे hi बुलाऊंगा.

मेघा:- क्यों?

सुमित:- मेरे नस नस से वाकिफ हो तुम.

मेघा:- :डी बहुत झेला है tumhe...Itna तो पता होगा hi.

दोनों की बातें सुन रही संजना की हैरानी शायद hi ख़त्म ho...Dono की इतना जान पहचान देख हैरानी के साथ अब्ब वो थोड़ा उनकंफर्टबले फील कर रही थी.

सुमित:- तो पार्टी कब दे रही हो?

मेघा:- जब भी तुम चाहो.

सुमित:- Chalo...Ek मस्त कॉफ़ी हो jaaye...Saari थकान ख़त्म हो जायेगी.

पहले मेरे साथ कॉफ़ी पी ले.

ये आवाज होड़ राहुल सर का था.

सुमित:- सर, आप?

डॉ. राहुल:- कुछ बात करना है tujhse...Result के बारे mein...Department रूम में chal...Wohi कॉफ़ी का इंतजाम हो जाएगा.

इतना कह कर थोड़ा गुस्सा में वो निकल गए.

सुमित:- हमारा कॉफ़ी का प्लान आज शाम में.

जाते वक्त सुमित ने मेघा से कहा.

मेघा:- Ok.

संजना:- जानती थी ऐसा hi hoga...Kuch ज्यादा hi मजाक में ले रहा था एग्जाम को.

मेघा:- अरे फ़िक्र मत karo...Kuch नहीं होगा.

संजना:- तुम नहीं जानती राहुल सर का gussa...Surgery डिपार्टमेंट की नहीं ho....Warna फैकल्टी डरते है जब सर गुस्सा में होते hai...Sumit तो फिर भी स्टूडेंट hi है.

संजना की इस बात से मेघा को गुस्सा तो aaya...Fir भी.

मेघा:- किसी को नहीं jaanti...Lekin सुमित को जानती hun...Handle कर लेगा wo...Dekhna सर जब रूम से निकलेंगे तो उनका गुस्सा मुस्कान में बदल जायेगी.

संजना:- इतना जानती हो सुमित के बारे में?

संजना की ये जवाब थोड़ा सरकास्टिक था.

मेघा:- इससे भी ज्यादा.

थोड़ा गुस्सा में संजना की आँखों में देख मेघा ने जवाब दिया.

संजना:- Vikash...Iss बारे में क्या कहना चाहते हो?

विकाश:- अब्ब मई क्या कहु? जो भी मेघा कह रही है उस में कोई दो राय नहीं nahi...Megha से ज्यादा सुमित को कोई नहीं समझ सकता.

इस जवाब ने संजना को और भी इर्रिटेट कर दिया.

संजना:- जब तुम्हे पता है वो एग्जाम को मजाक में ले रहा है तो तुम समझाती क्यों नहीं? अपने करियर के साथ खेल रहा है वो !!!

मेघा:- पहली बात तो वो अपना करियर के साथ खेल नहीं रहा hai...Wo कितना सीरियस और स्ट्राइटफॉरवर्ड है अभी करियर के liye...Wo वक्त आने पर पता चलेगा.

और रही बात मार्क्स की to...Usne इस बात को सोच लिया तो वो पठार की lakeer...Naa hi मई समझा सकती हूँ और ना hi वो दोबारा sochega...Ayr मई समझौ भी क्यों जब उसके पास जेन्युइन रीज़न है?

संजना:- एग्जाम में मार्क्स न लाने की जेन्युइन रीज़न? पहली बार सुन रही हूँ.

इस बार भी संजना की आवाज में व्यंग था.

मेघा:- हर चीज स्तरइटफॉरवर्ड और प्रेडिक्टेबल नहीं होता है.

संजना:- बताओ आखिर क्या वजह है वो?

मेघा:- सुमित से hi पूछ lena...Aur अच्छा एक्सप्लेन कर dega...Free टाइम भी है उसके paas...Abhi अभी एग्जाम ख़त्म हुआ है.

इस बात पर संजना ने कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- सुमित वापस आये तो कह देना आज शाम को यही पास वाले कैफ़े में इंतजार करुँगी.

इतना कह कर मेघा वह से चली gayi...Sanjana वही सुमित का इंतजार करने lagi...Megha की वजह से आज उसकी मूड पूरी तरह ऑफ हो गया था.

सुमित और मेघा की दोस्ती और एक दूसरे पर इतना समझदारी देख वो थोड़ा उनकंफर्टबले फील कर रही थी.
 
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