Romance भंवर (पूर्ण) - Page 18 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Update:- 152

विपक्ष अध्यक्ष:- हां तो मामला संभाल लिया ना..

अनुप्रिया:- अध्यक्ष महोदय जी हम गुलाम बनाते है, ना कि सवाल जवाब करने वाले मुक्त व्यक्ति, जो हमारे ही अस्तित्व को चुनौती दे। पिछले कई दिनों से प्रवचन कम और युवाओं के सवाल ज्यादा होते है। हर कहे शब्द का अर्थ और भावार्थ के पीछे पड़ जाते है। और ये सब बस हुआ है आप लोगो के वजह से।

दोनो अध्यक्ष एक साथ… "हम समझे नहीं?"

रुद्रा:- जैसे आप लोग अपने प्रचार के लिए पहले दंगे फसाते हो और फिर खुद वहां पहुंचकर सुर्खियां बटोरते हो, वैसे ही स्टूडेंट पॉलिटिक्स कर रहे कुछ छात्र और छात्राओं ने मिलकर मीडिया आटेंशन पाने के लिए, एक प्रिंसिपल को घेरने का प्लान किया था, और वहां बीच में आ गया मंत्री जी का मुंह बोला बेटा, अपस्यु।

होम मिनिस्टर:- मै अपने बेटे को तो आज तक कहीं पहुंचने से रोक नहीं पाया, फिर वो तो सौरव से कहीं ऊंची चीज है। कहना ग़लत नहीं होगा कि कलिका अगर अपस्यु से शादी का प्रस्ताव रखती तो वो अकेला तुम सब के कैरियर ग्राफ को ऊंचाई पर पहुंचा देता, वो भी बिना एक भी क्राइम और गैर कानूनी गतिविधियों में हाथ डाले।

होम मिनिस्टर की बात सुनकर सभी हसने लगे। अनुप्रिया हंसती हुई कहने लगी… "शायद आपको पता नहीं मंत्री जी, कलिका उसकी सौतेली बहन है, और मै उसकी सौतेली मां। एक बात तो है, चन्द्रभान कि बुद्धि उसके बच्चो में कुट कूटकर भरी है, हां लेकिन उस लड़के का अभिभावक गुरु निशी था, इसलिए हमारे काम में बाधा बनने की सोच रहा है।

इस सच्चाई के बाद तो वहां मौजूद सारे अतिथि बिल्कुल दंग रह गए। अनुप्रिया सच्चाई से पर्दा उठती हुई सारी बातें बता दी, वो भी ऑडियो विजुअल प्रूफ के साथ जहां अनुप्रिया अपने सभी पुराने पार्टनर्स के ऊपर सर्विलेंस रखी हुई थी। इसी के साथ इस सच का भी उसने खुलासा कर दिया की क्यों वो केवल लोकेश राठौड़ को मारना चाह रही थी और बाकियों को नहीं, क्योंकि उनके पुराने साथी ने कभी अनुप्रिया और महिदीपि का रास्ता नहीं काटा।

अंत में महिडीपि…. "अब जब हमे उसकी योजना के बारे में पता है कि वो 2 लाख करोड़ के हवाले में हमसे डील करेगा, तो उसके ड्रीम प्रोजेक्ट को हम टेकओवर करते है। 4 लाख करोड़ रुपया लगभग 55000 मिलियन डॉलर, ये कुबेर का खजाना हमारे हाथ लगने वाला है। उसे सोचने दो की वो प्लान कर रहा है और यहां हम उसके प्लान को टेकओवर करेंगे। मंत्री जी आपकी पॉलिटिक्स क्या कहती है, आप तो उसके बहुत बड़े फैन है।

होम मिनिस्टर:- मै उसका फैन हूं और वो बहुत बड़ा ज्ञानी भी है। लेकिन राजनीति शास्त्र का थोड़ा कम ज्ञान है। मेरा फर्ज बनता है कि उसे इस ज्ञान में भी पारंगत करवा दू।

रुद्रा:- हम्मम ! फिलहाल तो वो अभी मियामी में है और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बचे हुए अमाउंट के लिए हाथ पाऊं मरेगा। देखते है कब तक वो रकम जमा करते है? उसे अपना प्लान करने देते है और हम बस आराम से उन पर नजर बनाए रखते है। आप सबका बहुत बहुत शुक्रिया, जीत की रकम का आधा हिस्सा हमारा होगा, और आधे हिस्से आप लोगों का।

सभा उसी के साथ समाप्त हो गई। जाते-जाते बावरा सौरव एक बार फिर कलिका के होंठ चूमते हुए पूछने लगा… "कल फ्री हो क्या?"

कलिका:- नीचे ज्यादा जोश मार रहा है तो यहां बहुत से व्यवस्था है, आओ और एन्जॉय कर लेना, शर्माना नहीं।

सौरव:- नाह तुम्हारे बिना दिल को चैन नहीं मिलेगा।

कलिका हंसती हुई… "दिल को या नीचे तुम्हारे.. खैर थोड़ा इंतजार करो इंगेजनेंट की डेट फिक्स करो, उस रात हम पुरा एन्जॉय करेंगे, वो भी विदेशियों को टक्कर देने वाले स्टाइल में।"..

सौरव उतावला होकर वहां से निकला और कलिका वापस आकर बैठ गई, अपनी फैमिली मीटिंग में। सबसे पहले तो सबने उसे शादी की बधाइयां दी फिर आगे की बात शुरू हो गई…

कलिका:- हमने जल्दबाजी तो नहीं कि ना इन लोगो को सामिल करके।

रुद्रा:- नहीं, इनकी मनसा जानने के लिए हमे वक़्त चाहिए था। सौरव से शादी का डिसीजन मास्टर स्ट्रोक है, होम मिनिस्टर शायद अपने रिश्तेदारी को ही मजबूत करे लेकिन पैसा का मतलब पॉवर होता है, इसलिए योजना के अंत में उसे यदि लेते और वो कहीं हम दोनों (अपस्यु और अनुप्रिया की टीम) को किनारे करके सारा माल हड़प कर जाता, तो हम उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकते थे। अभी तो 24 घाटे सर्विलेंस है उन सबके ऊपर।

युक्तेश्वर:- उसका भाई आरव जो मायलो ग्रुप देख रहा है, वो हमारे कंपनी को एक परसेंट भी टारगेट नहीं कर रहा, बल्कि अपना पूरा ध्यान नए नए टेंडर में दे रहा है जिसमें उसकी मदद उसका शसुर कर रहा है।

महिदीपु:- जल्दी से 2 लाख करोड़ जमा करने है ना इसलिए कंपीटेशन करने के बदले पुरा फोकस वहीं दिया है। एक तरह से ठीक भी है, हमारे लिए ही कर रहा है। हो सके तो उस ओर के सारे काम तुम लोग छोड़ दो और प्रोफिट के लिए सेंट्रल के टेंडर के बदले राज्यो के टेंडर उठाओ। रेगुलर मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करो।

रुद्रा:- सात्विक आश्रम की ब्रांच ना खोल ले पिताश्री। (हॉल में सभी लोगो के हसने की आवाज) .. बस बस.. बिजनेस का आईडिया नहीं है और ज्ञान देते है लंबा चौड़ा। हम बिजनेस देख लेंगे, आप पहले आश्रम का कहिए, वहां जो उस सौतेले ने हंगामा करवाया है उसपर क्या एक्शन लिया जाए।

कलिका:- "भईया वो प्रायोजित एक्शन नहीं है। मैं लगातर उसके आस पास नजर बनाए हूं। उल्टा अपस्यु ने उन लड़कियों के ग्रुप को अपने फ्लैट में ही रखा है ताकि मीडिया आटेंशन पाने के लिए, वो चिप हरकत ना कर सके। अपस्यु के कई सारे कॉन्टैक्ट्स, उसके यहां दिल्ली आने के पूर्व से आश्रम आते है, इसका मतलब ये तो नहीं कि हम सब पर शक करते रहे।"

"वैसे भी मां और मामा का दिमाग मेहनत पर नहीं लगता, इन्हे फ्री में पैसा चाहिए। दोनो को बोलो भक्तो के सवाल का पूर्ण निराकरण करे, ताकि लोगो की आस्था बनी रहे। और किसी भी कीमत पर स्टूडेंट को ना छेड़े, क्योंकि उन्हें भनक भी लगी कि सात्त्विक आश्रम के कारन उन्हें मीडिया आटेशन मिल रहा है, फिर यहां पहले नए स्टूडेंट्स आएंगे और बाद में नए नए बखेरे। और विश्वास मानो हम एक स्टूडेंट को गायब करेंगे, तो अगले दिन एक पुरा कॉलेज यहां घेराव कर देगा।"

"एक बात और हम ये मानकर चलेंगे की अब से जो भी स्टूडेंट आ रहे है, उसे अपस्यु भेज रहा है, एक छोटी सी भुल और हम लाइमलाइट में। इसलिए अपने ठरकी चलो को संभाल लेना आप लोग। आज कल बाबा और उनके चेलों के एमएमएस बहुत लीक हो रहे है।

अनुप्रिया:- इस बात से मै सहमत हूं, सब शांत दिखता है इसका ये मतलब की लोग शांत बैठे है। हर किसी पर हम नजर दिए है इसका ये मतलब नहीं कि वो हमसे नजर बचाकर अपनी योजना नहीं बना रहा होगा। जबतक अपस्यु के साथ डील नहीं हो जाता और डील के बाद उसे और उसके साथियों को मारकर हम एक बड़ा सबूत नहीं मिटा देते, तबतक कोई गलती नहीं करेगा। भले वो लड़का अपस्यु हमारे खिलाफ प्लान करे या ना करे।

हंस:- वैसे वो अभी कहां प्लान कर रहे है…

लगभग 10000 फिट की ऊंचाई, शयं श्यां हवा को चिड़ने की आवाज। गुरुत्वाकर्षण के वेग से नीचे गिरते अपस्यु और ऐमी। दोनो हाथ से हाथ पकड़े तेजी के साथ नीचे आ रहे थे।

हेलमेट में लगा मीटर ऊंचाई मानक बता रहा था। 4000, 2000, 1000, 800, 700, 600, 500, 400, 300.. और ये खुला पैराशूट और दोनो फिर भी काफी तेजी के साथ नीचे आए जो कंट्रोल होते होते जमीन तक को छू ही गया और दोनो धराम से मुंह के बल नीचे…

ऐमी कपड़ों से घुल झारते हुए खड़ी हुई… "मज़ा आ गया बेबी, लेकिन ये 300 फिट पैराशूट को कंट्रोल नहीं कर पाता, थोड़ा और ऊपर खोलना होगा।"…

अपस्यु:- हां सही कही.. वैसे मैं सोच रहा था 20000 फिट की ऊंचाई से कूदेंगे और पैराशूट ऊपर ही खोल लेंगे तो हम कहां पहुंचेंगे…

ऐमी:- पैराशूट में खाना अटकाने की भी व्यवस्था कर लेना, क्योंकि पता ना हम कितने दिन हवा में ही रह जाए।

अपस्यु:- हा हा हा हा हा… हां ये सही कहा तुमने। चलो चला जाए।

दोनो एक दूसरे के होंठ से होंठ मिलाते हुए चूमे और पैदल ही वहां से निकल गए।….. "आह मियामी बीच देख लो तो मन हरा भरा हो जाता है।".. अपस्यु साथ चलते हुए कहने लगा…

"अच्छा, और यहां का नज़ारा कैसा है फिर।"… ऐमी अपने शरीर के ऊपर बांधी पतली सी ड्रेस उतारती हुई कहने लगी, जो उसने ऊपर पहन रखा था।

"उफ्फ क्या फिगर है। मार डाला तुमने तो। अब जल्दी से ढक लो, वरना दूसरे भी देख लेंगे"… बीच पर बिकनी सेट में देखकर अपस्यु के होश उड़े।..

"नाह मै कितनी सेक्सी दिखती हूं, ये लोगो के नजरो और एक्सप्रेशन को काउंट करके तुम्हे बताउंगी।"…

"मै तो बस छेड़ रहा था तुम्हे, मेरी नजर फिसल सकती है क्या?"… अपस्यु वो ड्रेस उठाकर उसपर से धूल झारकर ऐमी के ओर बढ़ाते हुए कहने लगा।

"निकल गई होशियारी।"… ऐमी ड्रेस को वापस पहनती हुई कहने लगी।

"वैसे ये पतली सी सिफोन की ड्रेस जब तुम पहने रहती हो तब अंदर इतना हॉट फिगर छिपा होगा पता नहीं चलता।"..

"तुम भी तो अपने टी-शर्ट और जीन्स जब निकालते हो, फिर पता चलता है कि अंदर कैसी अथेलीट बॉडी छिपा रखी है।"

"मै क्या सोच रहा था चलकर क्यों ना एक दूसरे कि बॉडी को देखा जाए की कितना मेंटल करके रखा है हमने।"..

"बेबी अभी घर चलो, आज हमे कुछ और भी काम है।"…

दोनो मियामी बीच से अपने घर लौट आए, आते ही अपस्यु आराम से हॉल में बैठा और कंप्यूटर स्क्रीन को देखते… "ऐमी, इस जगह के सिक्योरिटी ब्रिज से किसी ने छेड़छाड़ की है, ऐसा लगता है।"..

ऐमी भागकर वाशरूम से बाहर आयी और लैपटॉप देखने लगी… "तुम्हारे ही रिश्तेदार लोग है, जो अंदर के सिक्योरिटी सिस्टम में घुसना चाह रहे है।"..

अपस्यु:- हम्मम ! जैसा सोचा था वैसा ही हो रहा है। चलो फिर इनको इनका काम करने दो, हम अपने काम पर फोकस करते है।

ऐमी:- उतावले कहीं के, अभी सुबह सुबह कौन सेक्स करता है। चलो ना वेगास चलते है, थोड़ा जुआ खेल कर आया जाए।

"जुआ खोलेगी.. पागल लड़की... कुछ और कहो"… अपस्यु पीछे से बाहों मै दबोचकर कहने लगा।

"अम्म्म्म ! तो हॉलीवुड चलें, मुझे एमा वाटसन से मिलना है।"..

"हां समझ गया काम पर फोकस करना है कामसूत्र पर नहीं।"..

"काफी समझदार हो गए हो बेबी"..

दोनो बैठ गए बहुत सारे खूबसूरत बिल्डिंग्स की तस्वीर को लेकर। इधर जबतक ऐमी का कंप्यूटर हैक हो चुका था और जबतक वो तस्वीर को टेबल पर फैलाते, उनके घर का बेल बजने लगा, ऐमी ने तुरंत सारी तस्वीरों के ऊपर एक कपड़ा फैला दिया। उधर कलिका खुद इस मामले को देख रही थी, इसलिए जैसे ही कंप्यूटर हैक हुआ कलिका खुद अपस्यु के घर की सीसी टीवी को बैठकर देखने लगी।

उसके साथ उसके दोनो भाई, हंस और युक्तेश्वर भी बैठे हुए थे।… "दोनो देख लो अपने छोटे भाई और बहू को। जोड़ी तो शानदार मिलाई है। मानना पड़ेगा बहू तो काफी हॉट और खूबसूरत ढूंढी है।"..

युक्तेश्वर:- दीदी वैसे भाई ने भी अपने आप को पूरा उसके लायक मैच बनाया है। काफी मजबूत और फुर्तीला शरीर लगता है इसका।

हंस:- पहली बार देख रहे है, जारा आवाज़ तो सुना दो इनकी।

तीनों के ठीक पीछे बैठी सर्विलेंस इंचार्ज श्रेया… "इन दोनों को ना ही सुनो तो हमारी सेहत के लिए अच्छा है।

कलिका:- वो क्यों श्रेया ?

श्रेया:- दोनों की रोमांटिक बातें सुनकर ऐसा मेहसूस होगा कि हमने तो जिंदगी में कुछ भी हासिल नहीं किया। ऐसा मेहसूस होगा जैसे कोई ऐसा चाहने वाला मिल जाता तो उसके लिए सबकुछ छोड़कर चले जाते।

तीनों एक साथ श्रेया को देखते हुए…. "तुम तो सर्वर छोड़कर नहीं भगोगी ना, वरना यहां विश्वास पात्र लोग ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है।"

कलिका:- लो इनका माईक भी पहुंच गया, अच्छा से ट्यून कर दो, इनकी आवाज साफ पता चलना चलिए।

अपस्यु और ऐमी तस्वीर को फैला रहे थे तभी हॉल की घंटी बजी। ऐमी ने सारी तस्वीरों को कवर किया और अपस्यु बाहर दरवाजा खोलने चला गया। जैसे ही दरवाजा खुला, कुछ लोग खड़े हुए थे।… "हां कहिए।"

एक व्यक्ति:- सर कुछ ऑर्डर्स आपने किया था। वहीं डिलीवरी के लिए आया हूं।

अपस्यु:- स्वीटी कुछ ऑर्डर किया था क्या तुमने..

ऐमी:- हां, हॉल में जिम्नास्टिक सेटअप लगाना है, और किचेन बगैरा के समान है। कुछ छोटे मोटे एक्सरसाइज के समान, ये सब सेटअप करवा लो जबतक मै नहाकर आती हूं।

"हुंह ! जबसे इजहार किया हूं इसके तो नखरे ही बढ़ गए है। आओ भाई जल्दी से सेटअप करो सामान।"

10 मिनट का काम था उन सबके लिए। फटाफट किया और चलते बने। जैसे ही वो लोग बाहर निकले अपस्यु भागकर बेडरूम में आया और तबतक ऐमी आइने के सामने अपने बाल सवार रही थी…. "क्या हुआ ऐसे भागकर क्यों आ रहे हो?".

ऐमी ने आइने में अपस्यु को आते देख पूछा।
 
Update:-153

अपस्यु ठीक उसके पीछे पहुंचकर उसके गर्दन पर किस्स करते… "मुझे भी नहाना था स्वीटी, तुम अकेले छोड़ आयी।"..

ऐमी:- बेबी चोटी बाना दो ना प्लीज़..

अपस्यु उसके बाल संवारते… "जानती हो हम लंबे अरसे से साथ है फिर भी लगता है कल ही मिले है।"..

ऐमी:- बेबी जब सब शांत हो जाएगा और हमारे पास कोई काम नहीं होगा तो क्या हम एक दूसरे से बोर हो जाएंगे। जैसे आम लवर्स एक दूसरे में कमियों को देखना शुरू कर देते है।

अपस्यु:- स्वीटी कह नहीं सकते, शायद उनकी जिंदगी में कोई जायका नहीं होता इसलिए आपस मै झगरकर एक दूसरे की कमिया निकालते होंगे। शायद हम भी ये कर सकते है, अभी साथ जिया ही कितना है।

ऐमी:- तो साथ में जीते है ना, इतना जिएंगे की एक बार बोर होकर भी देखते है। फिर जब बोर होंगे तो हम भी जमकर झगड़ा करेंगे, ना ना हम नहीं, केवल मै तुमसे झगड़ा करूंगी, तुमसे रूठ जया करूंगी, और तुम मुझे आकर मनाया करना।

अपस्यु:- वादा रहा, वैसे जब सब शांत होगा तब हमारे पास बच्चे होंगे, जानती हो ना 120 बच्चो के साथ रहना, उनके सवालों के जवाब, और उनकी अर्जियां। दूर से देखने में कितना क्यूट लगता है लेकिन पास से करने में लोग तो अपने सर के बाल नोचते है।

ऐमी:- हां बिल्कुल सही कहा, लेकिन वो प्यारे भी तो होते है। मै तो रोज उनसे 12 घंटे इरिटेट हुआ करूंगी, और 12 घंटे तुम मुझे प्यार करते रहना।

अपस्यु:- चोटी बन गई तुम्हारी। स्वीटी 24 घंटे का हिसाब लगा ली फिर झगड़ा कब करोगी।

ऐमी अपनी कुर्सी पर उल्टा बैठ गई और अपना चेहरा कुर्सी के टिकने वाले रेस्ट टॉप पर टिकाती… "तुम्हारे होंठ जब मेरे होंठ को एक पल के लिए भी छूते है, या लगातार स्पर्श किए रहते है, दिल की भावना और उमंग पहले दिन जैसा रहता है, जब हमने यही एक दूसरे को इस एहसास में किस्स किया था कि हमारे दिल एक दूसरे के लिए धड़कते है। आज भी वहीं धड़कने और वहीं एहसास है, तुमसे जितना प्यार करूं कम लगता है।

अपस्यु, ऐमी के होंठ पर अपनी उंगली फिरते… "तुम्हारे होंठ इतने सौम्य और आकर्षक है कि मै कभी भी खुद को रोक ही नहीं पता। ये तो मेरी लाइफ लाइन है।

ऐमी:- बस भी करो मेरी श्वांस चढ़ रही है, चलो चलकर पहले काम निपटाते है। फिर सुकून से हम अपनी बात जारी रखेंगे…

अपस्यु, ऐमी की आखों में देखकर मुस्कुराया और अपने होंठ से ऐमी के होंठ को स्पर्श मात्र करते… "चलो, चला जाए।"..

एक दूसरे के होंठों पर प्यारी सी हंसी फैली थी, इतनी प्यारी की एहसास करवा जाए दोनो एक दूसरे के होकर रह गए है। दोनो जैसे ही हॉल में पहुंचे… "देखे क्या कहीं थी, एक कमरे का सर्विलेंस कोई नहीं कर सकता, उस कमरे में एक भी ऐसा डिवाइस नहीं मिलेगा जिसे कोई हैक कार सके।".... श्रेया ने तीनों से कहा।

कलिका:- फिर हमे तो इनके पूरे प्लान का पता भी नहीं चलेगा।

श्रेया:- पता तो पुरा चलेगा। जिस रूम में कोई सर्विलेंस नहीं, वहां ये कभी काम कि बातें नहीं करते, बस रोमांस और प्यार की बातें करते है, जो सुनना सेहत के लिए काफी हानिकारक है और खासकर आप लोगो के लिए। कुछ भी हो लेकिन रहेगा तो भाई ही, और भाई के रोमांस को छिपकर सुनना और देखना अच्छी बात नहीं।

युक्तेश्वर:- हां ये भी सही है.. वैसे भी हमे इनके प्लान से मतलब है, शायद पर्सनल लाइफ को देखकर भाई के लिए प्यार जाग जाए।

कलिका:- हां सही कहा यूक्ते, वैसे ये अपनी ओर होता तो हमे कितनी मजबूती मिलती ना।

एक छोटे से इंतजार के बाद सर्विलेंस कर रहे लोग वापस से दोनो को देखने लगे। ऐमी टेबल पर पड़े चादर को हटाई, और दोनो मिलकर तस्वीर को देखने लगे… "इस बैंक की बिल्डिंग तो काफी शानदार बनाई है चाइना वालों ने।"…

"हां और इनकी 3-4 बैंक अभी वर्ल्ड की टॉप बैंक में चल रही है।".. अपस्यु ने जवाब दिया..

"तो क्यों ना चाइना वालो को चुना लगाया जाए बेबी, क्या कहते हो।"… ऐमी ने जवाब दिया..

अपस्यु:- बहुत शातिर है ये लोग, इन बैंक कि फौरन रिजर्व ये लोग वर्ल्ड बैंक के पास ही रखते है, इनके बैंक में केवल चाइनीज करेंसी मिलेगी। 2 लाख करोड़ रुपए का जुगाड वहां से करने गए तो हमे 8-10 कंटेनर कैश ढोकर एक बॉर्डर से कई इंटरनेशनल बॉर्डर तक लेकर जाना होगा।

ऐमी:- चाइना वाला बच गए.. 2.4 ट्रिलियन वाला अमेरिकन बैंक को देखे क्या?

अपस्यु:- पहला ख्याल तो मेरा यही था लेकिन थोड़ा ऊपर आ जाओ और फ्रांस की इस रिटेल बैंक पर ध्यान दो जहां कैश का फ्लो सबसे ज्यादा होता है।

ऐमी:- बीएनपी परिबास बैंक , 2.8 ट्रिलियन यूरो.. और पूर्णतः प्राइवेट बैंक।

ऐमी अपनी आखें बड़ी करती अपस्यु के गाल चूमती… "लगता है फ्रांस जाने का वक़्त आ गया है।"..

अपस्यु:- केवल बैंक को चेक करने के लिए फ्रांस जाएंगे बाकी 250 बिलियन यूरो की चोरी का प्लान तो यही बनेगा। तुमने टीम रेडी कर की है।

ऐमी:- बैल वाली टीम है, पहले से तैयार बैठी है। बस प्लान को एक्जीक्यूट कैसे करना है वो समझाना होगा और उनकी कीमत पहले देनी होगी।

अपस्यु;- क्या कीमत है उनकी..

ऐमी:- अगर कोई पैसा नहीं देते है तो वो हमारे प्लान पर काम करेंगे और काम होने के बाद हमे 10% देकर साइड कर देंगे। यदि उन्हें उनका अमाउंट 50 मिलियन यूएसडी दे देते है तो वो हमारे प्लान पर काम करेंगे और अपना काम खत्म करके निकल जाएंगे, फिर सारा रिस्क हम दोनों का।

अपस्यु:- उन्हें होल्ड पर डाल दो। पहले प्लान करते है। यदि सब ठीक रहा तो 10 टपोरी को ही काम पर लगाएंगे, और वो 10 टपोरी सभी इंडियन होंगे। पहले बैंक में देख तो ले कितना दम है।

कलिका जो स्क्रीन देख रही थी… "ये दोनो पागल है क्या? बैंक में डाका डालना इतना आसान है क्या?"..

हंस:- क्यों ना इनका टेस्ट ले लिया जाए? यदि बैंक वालो के हाथ पकड़े या मारे गए तो अपनी सर्विलेंस का टाइम बर्बाद हो जाएगा। यदि दोनो में दम खम निकला तो हम विश्वास करके आगे अपना काम जारी रखेंगे।

कलिका:- आइडिया अच्छा है… श्रेया संभालो अपना काम हम चले, कुछ भी नया दिखे तो हमे इनफॉर्म करना, खासकर हर उन लोगो से जिनसे ये मिलते है और बाते करते है, भले ही वो अनजान क्यों ना हो।

तीनों भाई बहन सर्विलेंस एरिया से निकलकर अपने अपने काम में गए और इधर ये दोनो अपना अपना काम में लगे हुए थे। 8 दिन तक ब्लूप्रिंट, बैंक का सिक्योरिटी एरिया, आस पास का एरिया और भागने के हर तरह के रास्ते पर गहरी चर्चा चलती रही।

शानदार सुबह की शुरवात हो रही थी। मीठी अंगड़ाई लेती हुई ऐमी जागी और आइने में खुद को देखने लगी… बिस्तर से उठकर अपने ऊपर टाईट कपड़े डाली और नीचे आकर अपस्यु के साथ-साथ रस्सी कूदने लगी।

दोनो 200 जंप का एक सेट पुरा करके बैठे ही थे कि अपस्यु ने ऐमी के होंठ से होंठ लगाकर चूमना शुरू कर दिया… "ओह, जान लोगे क्या। दम वैसे ही फूल रहा है ऊपर से लिप लॉक कर रहे हो।"..

अपस्यु:- 20 दिन हो गए है यहां आए हुए, एक भी दिन तुमने मेरे अरमानों को पूरा होने दिया। एक दिन भी साथ नहाने तक को नहीं मिला। अब तो मै भूलता जा रहा हूं कि इंटीमेसी होती कैसे है।

ऐमी:- हां तो रात को पोर्न देखकर प्रैक्टिस किया करो। उससे भी ना हो तो सेक्स टॉय ऑर्डर कर दू। क्या बेबी मै भी तो खुद को हैंडल की हुई हूं ना।

"लो अब इन्हे हैंडल करो।"… नदनी का फोन था, अपस्यु ऐमी के हाथ में फोन देते हुए कहने लगा… "कैसी है मां।"..

नंदनी:- अच्छी हूं, 28 को दीपावली है, वहीं याद दिलाने के लिए फोन की थी। जो भी काम हो 3-4 दिन में या तो खत्म करके वापस आओ या 2 नवंबर के बाद से कर लेने। तुम दोनो 24 से लेकर 31 तक घर पर ही रहोगे। और अपस्यु कहां है।

अपस्यु:- यहीं हूं मां, आप कैसी है?

नंदनी:- मुझे ऐमी से बात करनी होगी तो उसका नंबर है मेरे पास, तुम मुझसे बात नहीं करना चाहते थे क्या, जो फोन ऐमी को दे दिये..

अपस्यु:- इतना सोच कर आप खून मत जलाओ, हम आ जाएंगे 24 को। बाकी बातें आकर करते है।..

जैसे ही कॉल डिस्कनेक्ट हुआ, ऐमी अपने कंधे से अपनी सपोर्ट ब्रा को आधे कंधे तक नीचे करती… "चलो ना बेबी प्यास बुझाई जाए, वैसे भी कितने दिन हो गए।"..

अपस्यु उसे घूरकर देखते हुए… "पैकिंग करो, 2 दिन पेरिस और फिर वहीं से घर निकल जाएंगे। मै जबतक यहां के चीजों को साफ करता हूं।"

पूरा दिन ऐमी अपस्यु को देखकर हंसती रही और अपस्यु को चिढ़ाती रही। दोनो 7 बजे के करीब परिस एयरपोर्ट पर थे और अपना छोटा सा लगेज लेने के लिए इंतजार कर रहे थे…. "क्यों मुंह फुलाए बैठे हो, दुनिया के सबसे रोमांटिक प्लेस पर आए है, और 2 दिन है हमारे पास।"..

अपस्यु:- नहीं अभी मुंह नहीं फुलाए हूं बल्कि हमे 9 बजे तक बीएनपी परिबास के सीईओ से मिलना है और कल सुबह इनके हेड ऑफिस जाना है।

ऐमी:- हम्मम ! आराम से करने वाला काम जल्दी में करना पड़ गया।

अपस्यु:- चलो कोई बात नहीं, होटल चलकर सीधा वहीं निकलेंगे।

ऐमी:- ठीक है बेबी..

दोनो जैसे ही होटल पहुंचे फटाफट मीटिंग के लिए तैयार हो गए। मीटिंग के लिए खास ख्याल रखा था, जिसके लिए इन्होंने कपड़ों और गहनों पर खास खर्च किया था। अपस्यु ने जहां अरमानी के ब्लैक टैक्सीडो के सूट में ब्लिकुल प्रोफेशनल लुक दे रहा था। वहीं ऐमी गहरे लाल रंग की एक स्लीव लेस परिधान पहने हुई थी, जो ऊपर से लेकर उसके कमर से तक बिल्कुल चिपकी, नीचे उसके पूरे हाई हिल तक को कवर करती एक बड़ा सा घेरा बाना रही थी। उसके ऊपर उसके हल्के खुले सीने और जारा सी झांकती क्लीवेज लाइन पर वो अलग ही दिखती, उसके गले का हीरो के हार का सेट। एक हाथ ने मंहगी घड़ी और दूसरे हाथ में 4 कांच की लाल चूड़ियां और इन सब के अंत में उसकी छनकती पायल। कुल मिलाकर पुरा आदा से तैयार हुई थी।

रात के ठीक 9 बजे दोनो अपने भाड़े के लीमो से एक बड़े ही आलीशान घर के मुख्य द्वार पर उतरे, और उसका स्वागत करने के लिए बैंक का सीईओ अपनी पत्नी के साथ खड़ा था। रेड वाइन के 1 पेग से मीटिंग की शुरवात हुई और दूसरे पेग के बाद मीटिंग खत्म। कल सुबह बैंक आकर एक छोटी सी फॉर्मेलिटी पूरी करनी थी और 87 हजार करोड़ रुपया यानी के पूरे 100 बिलियन यूरो उस बैंक में जमा करना था। उनके अकाउंट ओपन करने कि खुशी इतनी ज्यादा हुई की बैंक वालों ने बिजनेस क्लास में रिटर्न टिकट करवा दिया।

मीटिंग खत्म होने के बाद दोनो सीधा होटल पहुंचे। बैंक घूमने और कल दिन के फ्लैट को पकड़ने के लिए दोनो के पास वक़्त कम था और काम ज्यादा, इसलिए अरमान होने के बावजूद दोनो सो गए और सुबह उठते ही बैंक के अंदर क्या करना है उस बात की चर्चा होने लगी।

सुबह 11 बजे दोनो बैंक में थे और प्लान के मुताबिक अपस्यु बैंक के फार्म को देखने लगा। इतने बड़े कस्टमर से मिलने, अपना 5 मिनट का वक़्त निकालकर बैंक का एमडी भी मिलने के लिए पहुंचा हुए था और अपस्यु की बात सुनकर वो अपना 10 मिनट देता गया।

इसी बीच ऐमी बैंक के बिल्डिंग की तारीफ करने लगी। सीईओ के सेक्रेटरी ने ऐमी को बैंक दर्शन करवाने ले गई, जहां सीईओ कि सेक्रेटरी हंस हंस कर तब पागल हो गई जब ऐमी ने पूछा लिया कि, बैंक सिक्योरिटी के लिहाज से थोड़ा कमजोर दिख रही है। सेक्रेटरी पैसे सुरक्षित है ऐसा आश्वाशन देती हुई बैंक कि रिजर्व करेंसी को पूरे डिटेल में समझा दिया।

लगभग 1 बजे के करीब दोनो पेरिस से एयरपोर्ट के लिए निकल गए, जहां उनका लगेज पहले से पहुंचा हुआ था और 3 बजे की एयर इंडिया के फ्लाइट से घर की वापसी।

कलिका:- ये दोनो तो वापस आ रहे है श्रुति, तुम बताओ कितने खतरनाक लोगो को भेजना चाहिए।

श्रुति:- मैम आप इसके पीछे अपना सबसे बेस्ट टीम भेजिए, वो टीम जो इसे मार सके। क्योंकि ये दोनो बहुत बड़े खिलाड़ी है।

कलिका:- हम्मम ! ठीक है आज इनका भी टेस्ट हो ही जाए। 250 बिलियन यूरो की चोरी की प्लांनिंग करके आ रहे है, इनका स्वागत तो करना बनता है ना बॉस।

कलिका वहां से निकलकर सीधा अपने ममेरे भाई रुद्रा के पास पहुंची।… "क्या सीस क्या किया जाए।"

कलिका:- रुद्रा उसे मारकर कहानी खत्म करने या फिर उसने हमारे लोगों को हरा दिया तो प्रोफिट कमाने का वक़्त आ गया है।

रुद्रा:- हम्मम। ठीक है उन विदेशी भक्तो को भेज देता हूं जो खा खाकर सांढ हुए जा रहे है, और डॉलर में हमसे सेलरी लेते है। कितने लोगो को भेज दू..

कलिका:- कितने ऐसे ट्रेंड फाइटर है..

रुद्रा:- 40 तो होंगे ही..

कलिका:- हां तो सबको भेज दो और कहना यदि मारने में सफल हो गए तो सबको 20 हजार डॉलर बोनस में दिया जाएगा।
 
Update:-154

रुद्रा:- जैसे तुम चाहो.. वैसे कल टीवी का इंटरव्यू मस्त था तुम्हारा… बौद्धिक विकास से ही एक उन्नत समाज का निर्माण होगा।

कलिका:- हमे नहीं पता था कि ये पढ़ने लिखने वाले जो हमसे इतना सवाल जवाब करते है, यदि इनका उत्तर पूरे विस्तार से और तथ्यपूर्ण ढंग से से दिया जाए, तो वो हमारा इतना प्रचार कर देंगे। आज कल तो मां और मामा टीवी पर छाए हुए है। भक्तो की संख्या में 2 गुना ज्यादा इजाफा मिल रहा है। अब तो रोज का कलेक्शन टीडीएस काटकर 5 करोड़ का बन रहा है। लोगों के आने में 2 गुना और जबसे उन्हें विश्वास हुआ की हम समाज कल्याण करते है उनके दान करने में 8 गुना का इजाफा आया है।

रुद्रा:- ये सब पापा और बुआ के ज्ञान का नतीजा है। वैसे ज्ञानी तो वो लड़का भी होगा, लेकिन क्या करें तुमने पहली बार किसी को मारने के लिए कहा है, अब परिवार की बात तो नहीं ही टाला जा सकता है।

कलिका:- थैंक्स रुद्रा…

इंद्रा गांधी इंटरनेशनल हवाई अड्डा.. प्लेन लैंड हुई और दोनो अपने हेरोइक लुक के साथ बाहर निकले। बाहर कुंजल खुद दोनो को लेने आयी थी।… जैसे ही कुंजल की नजर दोनो पर गई, वो हाथ हिलाती हुई दोनो को इशारे करने लगी।…

"कुछ परेशान सी दिख रही है ना कुंजल। हम इतने दिन बाद मिल रहे है लेकिन इसकी उमंग कहीं गायब है।"… ऐमी ने अपस्यु को कुंजल के ओर दिखती हुई कहने लगी।

वाकई अपस्यु को भी ऐसा लगा.. अपस्यु कुंजल के कंधे पर किसी दोस्त की तरह हाथ रखकर उसे खुद में थोड़ा सा समेटते… "क्या हुआ छोटी को, हमारा आना पसंद नहीं आया क्या?"

कुंजल:- नहीं वो बात नहीं है। दृश्य भईया अभी हॉस्पिटल में एडमिट है बस वहीं से आ रही हूं।

अपस्यु:- हम्मम ! हालात काफी गंभीर है क्या?..

कुंजल:- शायद जिंदगी और मौत के बीच है, कल ही एडमिट हुए है, आप दोनो आने ही वाले थे इसलिए हमने बताया नहीं।

अपस्यु:- चलो चलते है फिर हॉस्पिटल..

तीनों जैसे ही एयरपोर्ट से कुछ दूर आगे बढ़े, आगे एक डायवर्जन था। अपस्यु कार को दूसरे रूट पर मोड़ा और ठीक आगे एक खुला कंटेनर ट्रक जा रहा था। जैसे ही कार थोड़ी आगे बढ़ी, पीछे से 3 बड़ी बड़ी जेसीबी कार के पीछे थी।.. हम ट्रैप किए जा चुके है… कोई चाहता है हम उस कंटेनर में जाए।"..

ऐमी:- कुंजल दृश्य भईया के पास डॉक्टर की टीम तो अच्छी है ना।

कुंजल:- हां वो उनके जीजा जी है ना आकाश, उन्होंने मुंबई से डॉक्टर की टीम बुलाई है। वहीं लोग इलाज कर रहे है, लेकिन कुछ फायदा नहीं हो रहा।

अपस्यु:- इनकी तो, ये जो भी है, जितना मेरे सब्र का इम्तिहान लेंगे मै उतना ही इनको मारने में वक़्त नहीं लगाऊंगा। ऐमी देखो इस कार में क्या क्या है।

अपस्यु ने गाड़ी तेज करके कंटेनर में डाल दिया और इंजन बंद कर दिया। जैसे ही कार कंटेनर के अंदर गई बड़ा सा स्टील का दरवाजा लग गया और चारो ओर अंधेरा ही अंधेरा। कार की लाइट जली। सीट को नीचे करके ऐमी ने डिक्की खोला। डिक्की के नीचे से छोटा बोर्ड खोलकर वहां से 2 हैंड पिस्तौल और 4 एक्स्ट्रा मैग्जीन निकली। एक हेड कवर बुलेट प्रूफ जैकेट रखा था उस अपस्यु को दे दी।

ऐमी:- अपस्यु यहां रॉड और वो छोटी कुल्हाड़ी दोनो हो क्या निकाला लूं।

अपस्यु:- तुम दोनो अंदर ही रहना मुझे तीनों चीज चाहिए पिस्तौल, रॉड और कुल्हाड़ी। स्मोक बॉम्ब है।

ऐमी:- हां वो निकाल ली…

अपस्यु पुरा तैयार था, जैसे ही वो दरवाजा खुला सामने के ओर बिल्कुल अंधेरा।… "अपनी लगने वाली है ऐमी, लगता है भागना पड़ेगा।"..

कार में बैठे अपस्यु इतना कह ही रहा था कि तभी वहां विदेशी आवाज़ गूंजी… "नीचे उतर जाओ और अपनी मौत का सामना करो।"…

अपस्यु, कार से नीचे आते… "देखो भाई लोग ये सम्राट तिलविश क्यों बने हो, ये ऐसे अंधेरा कायम करके क्यों रखे हुए हो।"

आदमी:- तुम्हारे यहां इंडिया में वो नागिन का इंसाफ बहुत फेमस है। इधर नाग को मारा और वो अपने आखों में तस्वीर कैद कर लेता है। उसके बाद नागिन उस तस्वीर को देखकर अपना बदला लेती है। वो क्या कहते है..

अपस्यु:- नागिन का इंसाफ.. सुनो मेरे भाई, लेकिन तुम मुझे मारना क्यों चाहते हो?

आदमी:- क्या करूं ब्रो, तुमसे कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है, बस पापी पेट का सवाल है।

अपस्यु:- और इस पापी पेट को मै भर दूं तो?

आदमी:- तुम समझे नहीं दोस्त, पापी पेट के साथ साथ जॉब सेटिस्फेक्शन भी चाहिए ना, इसलिए तुम्हे मारना पड़ेगा ब्रो।

अपस्यु:- मार ही रहे हो तो बस 2 मिनट सुन लो, उसके बाद पता ना मै अपने मारने वाले का चेहरा भी देख पाऊं या नहीं।

आदमी:- 120 सेकंड.. शुरू हो जाओ।

अपस्यु मुसकुराते हुए 1 से लेकर 120 तक गीन दिया।.. "हां भाई अब मार दे।"

वो आदमी अटैक का नारा लगाते हुए जैसे ही हमला करने को हुआ, एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसे पड़ी। उस आदमी के होश ठिकाने आ गए।.… "दोस्त आज एक्शन के मूड से जारा भी नहीं हूं, दिमाग कहीं और है। थैंक्स टीम, वैसे उजाला तो कर दो।"..

वहां चारो ओर रौशनी हुई, बीच में गिनकर 39 घायल लोग पड़े थे और एक को घायल किया जा रहा था। साथ ही साथ उनके पास जो हथियार थे वो आम आर्म्स और वैपन जैसे बिल्कुल नहीं दिख रहे थे।

अपस्यु:- जान बचा ली मेरी तुम लोगो ने.. जल्दबाजी में किसी को टपका तो नहीं दिया।

नीलू:- नहीं बॉस सब जिंदा है, आप जाओ हम इसे देख लेते है। इन हथियारों का क्या करना है।

अपस्यु:- इसे भी साथ लेती चली जाए मैडम जी। किस तरह के हथियार है समझ कर मुझे बता दीजिएगा, ताकि पता कर सके की कौन सा हथियार है ये।

नील ने बाहर का दरवाजा खोल दिया। एक ओर से अपस्यु निकल गया और दूसरे ओर से नीलू की टीम सभी घायलों को एम्बुलेंस में लोड करके राजस्थान के लिए निकल गई। कुछ ही देर में अपस्यु हॉस्पिटल पहुंचा। अपस्यु की मासी और दृश्य की मां कंचन की नजर जैसे ही अपस्यु पर गई वो रोना शुरू कर दी।

कंचन के पति प्रताप सिंह उसे चुप कराते हुए हौसला देने लगे। वहीं पास में ही अश्क बैठी हुई थी, वो दृश्य की बहन पायल के कंधे पर अपना सर रखकर रो रही थी। अपस्यु का चेहरा देख ऐमी उसका हाथ थामती हुई कहने लगी…. "संभालो अपने आपको अपस्यु, चलो पहले स्वास्तिका से मिलते है।"…

अपस्यु केवल हां में अपना सर हिलाया और स्वास्तिका के पास पहुंचा। स्वास्तिका अपने चेंबर में बैठी मेडिकल की कोई बुक पढ़ रही थी… "कैसी हो स्वास्तिका।"..

स्वास्तिका:- लौट आया हमारा हीरो। दोनो एडवेंचर टूर पर गए थे या हनीमून ट्रिप पर।

अपस्यु:- हम्मम ! तुम्हारे ऐसे सवालों का मतलब मै समझ गया। सच सच बताओ तुम्हे क्या लगता है।

स्वास्तिका:- जिस हिसाब से इसका ब्लड सेल डैमेज हो रहा है, मेरे ख्याल से 8 घंटे से ज्यादा नहीं जिंदा रहने वाला है।

अपस्यु:- नहीं किसी कीमत पर नहीं मारना चाहिए, मै दीवाली में उसे सबके साथ दिए जलाते हुए देखना चाहता हूं। यहां किसकी हिम्मत हो गई जो तुम्हे इलाज करने से रोक दिया।

स्वास्तिका:- उनके यहां के लोगों का कहना है कि उसके पास डॉक्टर है जो इलाज कर लेंगे, मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं है।

अपस्यु:- स्वास्तिका, ऐमी का वो माइक्रो स्कैनर यहां रखा हुए है ना, और मेरा वो सेल ट्रानफ्यूजन वाला लिक्वड।

स्वास्तिका:- हां हमारा खुद का सारा तकनीक यहां मैनें अच्छे से सेटअप किया हुआ है, पहले हाथ तो लगाने दे। यहां तो घर के लोग खड़े है, ओटी के बाहर तो 20-25 लोग खड़े है जो किसी को आगे नहीं जाने देते।

अपस्यु:- हम्मम ! स्वास्तिका तुम ओटी के लिए तैयार रहो, मै और ऐमी बाहर से आए है, हम रोगाणुरहित (स्टरलाइज्ड) होकर आते है।

कुछ ही समय बाद तीनों तैयार थे। वो आउटडोर पैसेज से होते हुए गुजरे और अपस्यु ने कंचन को अपने साथ लिया।….. "एक बार सुनी थी मेरा बेटा 2 साल तक जिंदगी और मौत से जूझ रहा था, लेकिन मेरे सामने स्वास्थ्य खड़ा था तो बस मै भगवान को नमन कर रही थी। जानती हूं मेरा बेटा एक बड़ा फाइटर है और वो ये बजी भी जीत जाएगा, पर क्या करूं मां हूं ना, उसकी हालत में सुधार की कोई खबर ना सुनकर मेरे प्राण बाहर आ रहे है।"..

कंचन, अपस्यु के कंधे के सहारे से किसी तरह चल रही थी और अपने आशु बहती हुई अपनी दिल की भावना बयान कर रही थी।… "मै आ गया हूं ना, आप चिंता मत करो, बस अब यहां से हमे संभालने दो और ओटी को घेरे लोग को कहो किनारे हो जाने।"

"हमारे डॉक्टर्स इलाज कर रहे है। तुम्हे ज्यादा भाईचारा दिखाने की जरूरत नहीं है। वहां जितने भी डॉक्टर्स है तुम्हारी बहन से कहीं ज्यादा पढ़े लिखे है और जानकर है।"… अपस्यु की बात सुनकर पायल गुस्से में कहने लगी।

अपस्यु:- हम दृश्य भाई को ऑपरेशन थियेटर के अंदर देखने जा रहे है, आपको भी साथ चलना है तो आप भी चल दो।

पायल, अपस्यु को खींचकर एक थप्पड़ मारती हुई… "तुम खुद को समझते क्या हो? रिश्तेदार हो तो किनारे खड़े रहो चुप चाप और उनको इलाज करने दो।"

"वो अभी होश में नहीं है अपस्यु, तुम तीनों आओ मेरे साथ।"… ओटी के बाहर खड़ी होकर बायोटेक्नोलॉजी एक्सपर्ट वैली कहने लगी, जो स्वास्तिका के हॉस्पिटल में अपना एक्सपेरिमेंट आगे बढ़ाना चाहती थी, लेकिन छोटे से विवाद के वजह से यह हो ना सका।

वैली की बात सुनकर पायल फिर कुछ बोलना चाह रही थी, तभी कंचन उसे शांत करवाती हुई कहने लगी…. "पायल शांत हो जाओ बेटा। यहां हर कोई दृश्य को स्वास्थ्य होते ही देखना चाहता है। मानती हूं वक़्त ने तुम्हें अपने के हाथो घाव दिए है इसका ये मतलब नहीं कि हर किसी पर विश्वास करना छोड़ दे। यहां सिर्फ मै, तुम या इस छोटे से लड़के अपस्यु की ही कहानी नहीं है कि उसने दर्द और धोका झेला है, हर कोई इस दौर से कभी ना कभी गुजर रहा होता है।"

ऐमी:- हम सब की कहानी बिल्कुल उस बैंक की तरह है जो लोन देती है। कई लोग बैंक को चुना लगाकर भाग जाते है, लेकिन बैंक अपना घाटा कवर करने के लिए 2 गुना ज्यादा लोन देती है ना कि अपना बैंक बंद करके भाग जाती है। मैंने तो जिंदगी से यही सीखा है, विश्वास करना सीखो और विश्वास से आगे बढ़ो। जिनकी फितरत में है धोका देना वो देंगे ही, इसका मतलब ये तो नहीं कि विश्वास का दामन ही छूट जाए।

अपस्यु:- स्वीटी मेरे संगत का पूरा असर परा है। लगता है पायल दीदी समझ गई है, चलो हम भी चले।

कंचन को भी थोड़ा हौसला आया। वो पूरे भिड़ को किनारे करते सबको ऑपरेशन थियेटर के अंदर जाने के लिए बोली। स्वास्तिका अंदर घुसते ही एक डॉक्टर को पकड़ कर पूछने लगी …. "कुछ पता चला हुआ क्या है।" डॉक्टर भी ना में जवाब देते हुए कहने लगा, "उतनी देर से वहीं ट्राय कर रहे है लेकिन कुछ समझ में ही नहीं आ रहा, बॉडी का हर फंक्शन और हर ऑर्गन पुरा अच्छे से काम कर रहा है लेकिन हम सारे टेस्ट केर चुके, कुछ मिल ही नहीं रहा है ऐसा जो का सके की इस वजह से ब्लड सेल लगातार टूट रहा है।"..

स्वास्तिका ने उन डॉक्टर्स को कुछ देर रेस्ट करने के लिए कहा और वैली पर विश्वास दिखाते हुए उसने पहले दृश्य के शरीर की जानकारी ली। उसकी दी गई जानकारी के अनुसार जब स्वास्तिका ने कुछ टेस्ट किए तो जेनेटिक इंजिनियरिंग का ऐसा शानदार उदहारण देखकर वो काफी हैरान थी।
 
Update:- 155

स्वास्तिका ने उन डॉक्टर्स को कुछ देर रेस्ट करने के लिए कहा और वैली पर विश्वास दिखाते हुए उसने पहले दृश्य के शरीर की जानकारी ली। उसकी दी गई जानकारी के अनुसार जब स्वास्तिका ने कुछ टेस्ट किए तो जेनेटिक इंजिनियरिंग का ऐसा शानदार उदहारण देखकर वो काफी हैरान थी।

ब्लड के कई टेस्ट तथा ओटी के अंदर ही ब्लड कल्चर की सारी शुवधाएं थी। वैली वहां बैठकर बड़ी ही तेजी के साथ अपना काम करने लगी… "मुझे एक डाउट है अपस्यु, जिस तरह का शरीर है दृश्य का, उस हिसाब से कोई ऐसा बहरी चीज शरीर के अंदर डाला गया है जिसे बॉडी का एंटीबॉडी मैकेनिज्म एक्सेप्ट कर चुका है और उसकी उपस्तिथि के कारन ही ये सब हो रहा है।"

स्वास्तिका ने जों अपने हिसाब से एक स्कैनर डिवाइस तैयार करवाया था ऐमी से उसे तुरंत ही इंसर्ट किया गया इसी बीच वैली भी अपना टेस्ट करके आ चुकी थी… "बोन मैरो के पास डेवलप नए ब्लड सेल परफेक्ट है, जो भी हो रहा है वो हार्ट से ब्लड फिल्टर होने के बाद ही हो रहा है।"..

जैसे ही वैली ने यह बात बताई, स्वास्तिका ने उस छोटे से माइक्रो डिवाइस को सीने तक पहुंचाया। वो बड़े गौर से देखकर बारीकी से एग्जामिन कर रही थी, तभी वैली कहने लगी… "हर्ट के अंदर अंदर इंसर्ट करके चेक करो।"

वो छोटी सी नैनो डिवाइस हार्ट के अंदर पहुंची तब सबको साफ दिखा, हर्ट के अंदर एक काले रंग का लेयर चढ़ा हुआ है, स्वास्तिका बड़े ही ऐतिहातन उसे हटाने लगी। लगभग 3 घंटे लग गए उस लेयर को हटाने में। लेकिन इतना होने के बाद भी काम अभी पुरा नहीं हुआ था।

लगभग ब्लड सेल टूट चुके थे और वो बॉडी के अंदर एक्स्ट्रा फ्लूइड के जैसे काम कर रहे थे, स्वास्तिका का दिमाग ही काम करना बंद कर दिया कि ब्लड शरीर के अंदर चढ़ाए कैसे और जो ब्लड अब किसी काम के नहीं रह गए है उन्हें हटाए कैसे।

स्वास्तिका ने यह बात साथ आए डॉक्टर्स से डिस्कस की। सभी डॉक्टर्स मुस्तैदी दिखाते हुए काम करना शुरू किया। तुंरत ही 12 यूनिट ब्लड की वयवस्था हुई। फिर 6 पार्ट करके थोड़ा थोड़ा ब्लड चढ़ाया जाने लगा, और दूसरी ओर से दृश्य के शरीर से खराब हो चुके ब्लड को निकाला भी जाने लगा। लगभग 8 घंटे की मेहनत के बाद पुरा काम खत्म हो चुका था।

दृश्य चैन कि श्वांस ले रहा था और सभी डॉक्टर्स के साथ वैली और स्वास्तिका भी बाहर निकले। डॉक्टर्स ने दृश्य की जान बचाने के लिए वैली और स्वास्तिका को पूरा क्रेडिट दिया और कहते गए, "दोनो ही अपने फील्ड के जेनियस है, हमे तो इनसे सीखने कि जरूरत है।"…

कंचन:- दृश्य को कब तक होश आएगा।

स्वास्तिका:- उसे 8 घंटे में होश आ जाना चाहिए लेकिन आप ऐसे हालात में मिलिएगा तो पक्का वो वापस से 10-20 घंटे सदमे में बेहोश रहेगा। आप सब भी चले जाइए और आराम के कल 10 बजे के बाद दृश्य से मिल लीजिएगा।

सभी लोग वहां से चले गए। वहां सिर्फ 3 लोग ही रह गए थे, अपस्यु, ऐमी और वैली। रात के तकरीबन 3 बज रहे थे। अपस्यु और ऐमी दोनो ओटी में ही बैठे बस दृश्य के जागने का इंतजार कर रहे थे, ना ही दोनो ने नींद की झपकी ली और ना ही दोनो ने दृश्य को देखना बंद किया। हां वैली उनके पास ही सो इंतजार करते करते सो गई।

दृश्य की आंख जब खुली वो खुद में पूरी तरह कमजोर मेहसूस कर रहा था। लेकिन आखों में उसके खून और चेहरे पर गुस्सा साफ देखा जा सकता था। इससे पहले कि वो अपने हाथ मै लगे आईवी सेट और बाकी चीजों को निकालकर फेंक देता…. "काफी गुस्से में दिख रहे हो भाई, मै आपको रोक तो नहीं सकता बस किसी ने आपको कुछ दिया होगा, वो मुझे दे दो फिर जहां जाना चाहो वहां जा सकते हो।"..

अपस्यु की बात सुनकर दृश्य पागलों की तरह चिल्लाते हुए रोने लगा। वैली भी अपनी आखें खोलकर जागी और वो तेजी से उठकर दृश्य के पास पहुंची…. "शांत हो जाओ दृश्य, तुम अभी बहुत कमजोर हो।"…

दृश्य वहीं बैठा बेबस सा मेहसूस करने लगा और अपनी हालत पर रोते हुए कहने लगा…. "पता नहीं वहां अचानक से क्या हुआ, एक बस कुछ ही देर में तूफान आया और हम सबको अपनी चपेट में लेकर शांत हो गया। तुम्हारे गॉडफादर जेके और पल्लवी ने तो उनका कुछ देर सामना भी किया लेकिन वो भी…."

वैली:- आदिल और अप्पू कहां है दृश्य।

दृश्य, उनका नाम सुनकर कुछ देर ख़ामोश रहा, फिर… "वो दोनो भी हमारे बीच नहीं रहे।"…

वैली अपने पति आदिल की खबर के लिए इतनी देर से दृश्य के जागने का इंतजार कर रही थी, और जब उसने सच्चाई बताई तो वो वापस अपनी जगह बैठकर बेसुध आंसू बहाती रही।

अपस्यु:- पार्थ और निम्मी भी थे क्या?

दृश्य:- मेरे आंख बंद होने तक कुछ धुंधली सी तस्वीर दिखी थी। वहां कई लोग पहुंचे थे, और फिर क्या हुआ याद नहीं। घटना के 2 दिन पहले जेके ने पार्थ और निम्मी को कहीं दूर भेजा था। घटना के एक दिन पहले मुझे भी जेके कहीं और भेज रहा था लेकिन वो पुरा ग्रुप जब मेरे सामने था तब मै कैसे चला जाता। शायद कुछ बात जेके जानता था इसलिए मुझे वहां से निकलने के लिए कह रहा था।…

ऐमी:- हम्मम ! उन्होंने एक कोड और एक चाभी दी होगी।

दृश्य:- घटना के 1 घंटा पहले उसने मुझसे कहा था, शायद यहां का कोई बंदा यदि हॉस्पिटल पहुंचेगा, तो अपस्यु और ऐमी उसके सामने होगा। "दृश्य एक काम करो ये बैग रख लो, इसके ऊपर लिख देना केवल अपस्यु या ऐमी के लिए यह मेरा बैग है। तुम तो भाई हो उसके, तुम मर भी गए तो ये बैग उसके पास पहुंच ही जाएगा।"… दोनो ही बिल्कुल पागल थे। वो बैग मै कल तुम दोनो को ढूंढकर देता हूं।

अपस्यु और ऐमी दोनो एक दूसरे के आखों में देख रहे थे। दोनो ने एक दूसरे के सर को आपस में मिलाया और कुछ देर तक आशु बहाने के बाद कहने लगे… "नए सफर की शुरवात अच्छे से करना गॉडफादर।"..

दृश्य:- मै उन्हें छोडूंगा नहीं पाताल से भी ढूंढ निकलूंगा।

अपस्यु:- एक बार ढूंढ तो लिए थे, क्या नतीजा निकला। 1999 में जेके और पल्लवी ने ज्वाइन किया। 2014 तक एक एजेंट रहे। अपने कैरियर में शुरू से दोनो ने साथ किया और अंत तक साथ रहे। 15 साल में कुल 8 बार उन्हें डीएक्टिव किया गया। कुल 42 केस सॉल्व किए, 22 कैसे में सहायक रहे। इस केस में भी वो नहीं मारते क्योंकि दोनो के दिमाग को कोई मात नहीं दे सकता था। इतना ही कहूंगा उन दोनों को मारने वाला कोई जीनियस है, और इतिहास उलट लो, बल पर हमेशा छल भारी रहा है। आप आराम करो।

अपस्यु और ऐमी दोनो ही वहां से बाहर आ गए… "बेबी मेरा सिना जल रहा है, मै एक बार उन दोनों के लिए अपने पूरे इमोशंस बाहर निकालना चाहती हूं।".. बिल्कुल शांत स्वर में ऐमी ने अपस्यु से कहा।

अपस्यु:- हां मै जानता हूं, इसलिए तो फ्लैट चल रहे है।

दृश्य के जागने की खबर जैसे जैसे लगी हर कोई उससे मिलने आता गया। अपस्यु फ्लैट जाने से पहले स्वास्तिका को वैली के पति के डेथ के बारे में संदेश दे चुका था। उसे पता था हर कहानी में हीरो के लिए ही सारे इमोशंस होते है और उसके सहायकों के लिए 2 आंह भाड़े बोल बोलकर सांत्वना दे दिया जाता है, इसलिए स्वास्तिका लगातार उसके साथ थी और बस उसे हौसला दिए जा रही थी।

दिन के 2 बज रहे थे, आरव, लावणी के साथ फ्लैट के अंदर दाखिल हुआ। कुछ देर चारो ओर देखने के बाद वो अपस्यु के बेडरूम के ओर जाने लगा…. "कहां जा रहे हो।".. लावणी ने धीमे से पूछा..

आरव, अपनी ललाट ऊपर करके चेहरे पर शरारती भावना लाए हुए…. "दोनो बेडरूम में कैसे पड़े हुए होंगे वो देखने।"..

लावणी:- छी, पागल कहीं के। उनके मोबाइल पर कॉल करके जगाओ ना।

आरव:- मेरा मूड अब बदल गया है, चलो हम अपने बेडरूम में चलते है।

लावणी, बड़ी सी आखें किए… "पागल तो नहीं हो गए, जिस काम से आए हो वो काम करो चुपचाप।"

आरव:- तुम करने कहां दे रही हो, कहती हो अपस्यु के बेडरूम में मत जाओ। अपने बेडरूम में मत चलो। एक काम करते है यहीं हॉल में बैठकर टीवी देखते है जबतक उनके गीडफैदर का क्रियाकर्म हो जाए।

लावणी:- दिमाग कम चलाओ, तुम्हे नहीं लगता बहुत ज्यादा बोलने लगे हो।

आरव:- दोनो बेवड़े और बेवड़ी कल रात गले तक पीकर टल्ली होंगे। आ भी जाओ।

आरव ने उनका बेडरूम खोला और जैसा कहा था ठीक वैसा ही था। आरव ने लावणी को आराम से बेड पर बैठने के लिए कहा और खुद बाथरूम जाकर एक बाल्टी पानी उठा कर ले आया। छपाक.. पहले अपस्यु उसके बाद ऐमी…

"दोनो उठ जाओ, मुझे लगा कोई हॉट सीन देखने को मिलेगा, यहां तो दोनो कपड़ों में ही हो।"

"बदतमीज लड़का, तुझे तो मै आकर बताती हूं।"…कहती हुई ऐमी अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई। आरव पास की कुर्सी पर बैठकर अपस्यु के कंधे पर हाथ रखते… "तू ठीक तो है ना।"

अपस्यु:- हां ठीक हूं, कुछ आशु बाहर आने थे सो हम दोनों यहां चले आए।

आरव:- अच्छा किया। चल अब तैयार हो जा, चलकर उन्हें अंतिम विदाई देते है। पुलिस घर आयी थी और वो..

अपस्यु:- हां समझ गया 2 मिनट रुक हम चलते है। मां को सॉरी कहना, दीवाली का समय है ऐसे में मै उन्हें मुख अग्नि दूंगा तो 13 दिन यही फ्लैट में रहूंगा।

आरव:- मां जानती है और उन्होंने कहा है तू वहीं रहेगा, क्रियाकर्म की सारी विधि उसी घर से होगी..

अपस्यु:- नहीं यार घर की पहली दीवाली है…

आरव:- हमने तो कई दीवाली दिल जलते हुए निकाल दिए, एक और सही। परिवार में इतनी बड़ी बात हुई है, कोई खुशियां माना भी पाएगा क्या? हां हम सब में से कोई नहीं जानता था उन्हें, लेकिन क्या जब तू ही नहीं खुशियां माना पाएगा तो हम कैसे मना सकते है यार। और दीवाली गया तो क्या हुआ हम होली साथ ने मनाएंगे। खुशियां बांटने और साथ रहने के लिए कई मौके मिल जाएंगे। चल अब थोड़ा अपने लूज बॉडी को ठीक कर और उन्हें चलकर अंतिम विदाई देते है।

बड़ा सा मैडम 4 कंधे पर ताबूत में बंद जेके और पल्लवी की लिपटी हुए लाश आयी। अपस्यु और ऐमी ठीक चीता के सामने खड़े थे। ऐमी ने अपस्यु हाथ थामा और मुस्कुराती हुई कहने लगी… "अपनी पसंद की जिंदगी जिए, अपनी पसंद की मौत मरे और आखरी इक्छा भी पूर्ण हो गई"..

अपस्यु:- हां दोनो गुमनाम मौत नहीं मेरे। कहते थे मेरा पंचतत्व बस इसी माटी में मिले।

वहीं पास में एक और चीता सजी थी जो दृश्य के साथी अप्पू की थी और उसके सामने उसकी बीवी और बच्चे साथ ने उसका ससुर इंटेलिजेंस हेड बक्शी भी खड़ा था, जो रो रही अपनी बेटी को हौसला दे रहा था। और उसके ठीक पास आदिल की कब्र खुदी हुई थी जिसके सामने वैली अपने बेटे साथ खड़ी थी और स्वास्तिका उस सांत्वना से रही थी।

2 और लाश का बोझ अपस्यु उठा रहा था, और 2 लाश का गम दृश्य को भी था। अपस्यु ने विधिवत अंतिम संस्कार किया। अप्पू के बेटे को भी पूर्ण विधि से अपने पिता की उसने मुझ अग्नि दिलवाई। वैली का इस जहां में कोई नहीं था, और ना ही आदिल का। दोनो के लिए तो दृश्य का परिवार ही पुरा परिवार था। मिट्टी देने के वक़्त वैली भी अपने आशु नहीं छलकाई और जाने वाले को खुशी खुशी अंतिम विदाई दी।

13 दिन बाद…

दृश्य:- मै उनके पीछे जा रहा हूं, तुम्हारा काम खत्म हो गया है तो तुम भी चलो।

अपस्यु:- हर किसी को अपनी गलती की कीमत खुद ही चुकानी परती है भाई। आपने उन रेसिलिएंट को खत्म कर दिया तो मुझे आने की जरूरत नहीं, वरना मै जब आराम से निकलूंगा तो आपका भी हिसाब ले लूंगा।

दृश्य:- ऐसा क्यों बोल रहा है, क्या मेरी गलती थी जो वो लोग मरे?

अपस्यु:- नहीं वो तुम्हारी गलती भले ही ना हो, लेकिन अब उसके पीछे जाना शायद तुम्हारी गलती हो सकती है। तुम्हारी क्षमता आम इंसानों से 200 गुना ज्यादा है, शायद इस बार भी बच जाओ, लेकिन हर कोई तुम्हारे तरह किस्मतवाला नहीं होता है।

दृश्य:- हम्मम ! तो फिर मै क्या करूं?

अपस्यु:- इस सवाल का जवाब मै कैसे दे सकता हूं, खुद से पूछो ना। क्या अब तक एक बार भी इस बात की समीक्षा नहीं किए की वहां गलती कैसे हुई? इतने मजबूत होने के बाद भी कहां चूक कर गए? 2 इंटेलिजेंस के मास्टर ब्रेन, 2 आईटी प्रोफेशनल, 6 ट्रेंड ऑफिसर की टीम और पूरी एक बटालियन के बराबर तुम थे भाई, लेकिन नतीजा उनके पक्ष में गया? आपको क्या करना है वो मै कैसे बता दूं।
 
Update:-156

दृश्य:- हम्मम ! भाई होने के नाते एक मदद और कर दो अपने भाई की?

अपस्यु:- के एन शर्मा, उत्तर प्रदेश के जौनपुर क्षेत्र में मिल जाएंगे। मेरे गॉडफादर अक्सर कहते थे, जिंदगी में जब भी खाली रहो उनके पास वक़्त बिताओ। शायद ये आपका भी खाली समय है और आपको भी वहां वक़्त बिताना चाहिए। आगे आपकी मर्जी है।

दृश्य, अपस्यु के गले लगकर उसे जेके का बैग थमाते हुए… "थैंक्स भाई, मै उनके पास वक़्त बीतता हूं, वहां जाने से पहले मै तुझसे मिलकर जाऊंगा।

अपस्यु:- उम्मीद है आप अपने नए सफ़र कि मंजिल को जरूर तय करे।

दृश्य अपने परिवार के साथ वहां से निकल गया। पिछले 13 दिन में पायल 26 बार अपस्यु से माफी मांग चुकी थी। उसे अपने कहे शब्दो पर गिल्ट मेहसूस हो रहा था। वैली की हालत देखते हुए उसे वहीं एक दोस्त के पास छोड़ दिया गया, यानी कि स्वास्तिका के साथ। जिसके साथ मिलकर वैली 2 दिनों से हॉस्पिटल के काम में पुरा ध्यान दे रही थी।

"क्या खडूस क्या सोच रहा है।"… एक शाम अपस्यु घर की लॉन में अकेला बैठा हुआ था, तभी वहां आरव, लावणी के साथ पहुंचते..

लावणी:- भईया आपको ना आचार्य महिदिपी और उनकी बहन अनुप्रिया को सुनना चाहिए, दोनो आपके ज्ञान के भंडार को बढ़ा देंगे।

अपस्यु:- ऐसा क्या खास है उन दोनों में?

लावणी:- आप टीवी नहीं देखते क्या, आज कल टीवी पर उनके भक्त क्या डिस्कशन करते है। वो आपके फ्लोर पर रहती है एक लड़की मालविका और उसका बॉयफ्रेंड विकास, दोनो तो पुरा हिलाए हुए है।

अपस्यु:- ओह हो हमारी लावणी तो उनकी फैन हो गई।

लावणी:- फैन तो मै आपकी भी होती लेकिन आपने बहुत परेशान किया है मुझे।

"अच्छा जी, मेरे भईया को छोटी आंख वाला कहा था किसी ने, मुझे याद आ रहा है। क्यों भाई ऐसे ही कोई शब्द कहे थे ना राखी पर।"…. कुंजल उनके बीच पहुंचती हुई बोली।

आरव:- हां तो ठीक ही बोली थी क्या गलत कहा था लावणी ने।

कुंजल:- देख लो भाई अभी से, होने वाली बीवी की पक्ष ले रहा है।

अपस्यु:- होने वाली बीवी जब इतनी प्यारी हो तो इतना तो पक्ष लेना बनता ही है ना। क्यों लावणी?

लावणी बेचारी शर्मा गई और वहां से निकलने में ही अपनी भलाई समझी, लेकिन आरव ने उसका हाथ छोड़ा ही नहीं। …. "हां तो इकलौती बीवी है ऊपर से इतनी प्यारी भी। बड़े पापड़ बेले है मैंने इसके लिए।"

अपस्यु:- हां वो तो हम सबको याद है, पापड़ तूने बेले थे या दारू पिला कर तस्वीरें ले कर ब्लैकमेल किया था?

कुंजल:- क्या ? क्या ? क्या ?

लावणी अपनी हाथ छुड़ाकर दौड़कर गई अपस्यु के पास और उसके मुंह पर कसके अपने दोनो हाथ रखकर, उसका मुंह बंद करती…. "नहीं भईया प्लीज, आपको मेरी कसम जो किसी को कुछ बताया तो।".… इतना कहकर सामने आरव को घूरते… "ये सब तुम्हारा किया धारा है आरव, क्या कहा था तुमने हम दोनों के बीच की बात है, कोई तीसरा जान ही नहीं सकता। अभी घूमने निकलेंगे फिर मै दिखाती हूं।"

कुंजल :- नहीं मुझे जानना है, प्लीज कोई बताओ वरना मै दोनो में से किसी से बात नहीं करूंगी, मै भी कसम लेती हूं..

आरव:- यहां क्या तुम दोनो प्रतिज्ञा-प्रतिज्ञा खेल रही हो। कॉलेज के एक लफड़े से निकालने के लिए, और साची दीदी के वो डर भागने वाले कुत्ते के कॉन्सेप्ट को काटने के लिए, मैंने लावणी के डरपोक कैरेक्टर में दारू का मोटीवेशन डाला था और इसका नतीजा ये हुआ कि लावणी ने जो ही उस लड़के का हाल किया। उसके बाद ये बहुत खुश थी और मुझे लावणी से प्यार। ये खुश होकर नशे मै मुझे चूमती रही और मेरे मोबाइल से सेल्फी लेती रही। बस इसी बात फायदा बाद में मिलने के लिए उठाया था। और बेबी तुम जब अपस्यु को बताने के लिए डांट ही रही हो तो उसमे कुंजल वाला भी एड कर लेना। सब हिसाब किताब आज बराबर कर लेना।

लावणी गुस्से में उसके पास पहुंची और उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले गई। उसे बाहर जाते हुए देख कुंजल और अपस्यु जोर जोर से हंस रहे थे।…. "तुम दोनो को शर्म नहीं आती, जब देखो तब लावणी को छेड़ते रहते हो।"… नंदनी दोनो के सर पर हाथ मारती हुई कहने लगी।

कुंजल:- मां वो मीना कुमारी वाली आज डांस हो जाए क्या.. इन्हीं लोगों ने ले ली ना दुपट्टा मेरा।

नंदनी:- ए पागल ये क्या कह रही है?

अपस्यु:- डांस ही करने तो कह रही है, और क्या कह रही। जब देखो तब आप ना बिल्कुल एंग्री लुक दिए रहते हो।

नंदनी:- मेरी ही गलती है, वीरे से उस दिन इसका रिश्ता पक्का कर देती तब ये इसकी हंसी खी खी नहीं निकलती और तू जो इसे बढ़ावा दिए रहता है वो इसको टाईट करके रखता।

अपस्यु:- वैसे जोड़ी तो अच्छी ही है मां, ऊपर से इनकी जुगलबंदी… वीरे जी.. हां कुंजल जी..

नंदनी तेज हंसती… "वैसे भी इसे तो अरेंज मैरेज ही करनी है ना, तो पूछ ले वीरे में क्या खराबी है।"..

कुंजल:- भईया आप ना लोटा हो, किधर भी लुढ़क जाते हो। अभी मेरी डिग्री कंप्लीट होने दो फिर ढूंढ लेना लड़का। और कोई ना मिले तो कोई नहीं मै उसी वीरे जी से ही कर लुंगी। दोनो मां बेटा खुश। मै चली अब..

अपस्यु;- जा कहां रही है, बैठ ना गप्पे लड़ाते है।

कुंजल:- लड़को की सेल लगी है बाजार में। मै बड़ी भाभी और साची जा रहे है उसी की शॉपिंग करने।

अपस्यु:- अच्छा सुन एक ढंग के पापा मिले तो उसे भी खरीद लेना।

चटाक की एक झन्नाटेदार आवाज़ जो बाहर जा रही कुंजल के कानो तक भी पड़ी, और वो हंसती हुई… "सब के साथ ज्यादा मज़ा लोगे तो यही हाल होगा।"…

उसकी बात सुनकर नंदनी और अपस्यु दोनो हंसने लगे।… "तू ना बहुत शरारती है। तुझमें बहुत कुछ सुनंदा दीदी जैसा है, ऐसा लगता है वो अपना रूप छोड़ गई है। मै आज तक उनके इतना सरल हंसमुख और दयालु नहीं बन पाई। वो जब तुम्हारे पास हो ना तो आस पास एक अलग ही तरह की फीलिंग होती है। तेरी मासी और मौसा जब भी उसके पास आते, वो ऐसी खिंचाई करती की दोनो हाथ जोड़ लिया करते थे, बख्श दो।"....

अपस्यु:- बस अब आप भावुक मत हो जाना। कभी कभी सोचता हूं कश कोई रिवर्स बटन होता, कश उस रात की घटना की भनक कुछ समय पहले लग गई होती, कश मै मां को.. खैर छोड़ो.. ये काश शब्द ना मां बहुत चुभता है, मुझे एहसास करवाता है कि कितना बेबस और लाचार है हम। अब तो मेरे जिंदगी में एक और काश जुड़ गया। छोड़ो भी मां, वैसे अब आपको देर नहीं हो रही वो ऑफिस में कौन है क्लर्क जिनके बेटी की शादी में आपको जाना था।।

नंदनी:- देख मै भी ना यहां बैठ गई। अच्छा सुन बेटा स्वास्तिका और वैली को फोन करके घर बुला ले, उनको बोलना रेडी होने मै बाहर जबतक एक छोटा सा काम निपटाकर आती हूं।

नंदनी चली गई, अपस्यु भी स्वास्तिका को कॉल करके नंदनी का संदेश द देने के बाद, कुछ सोचते हुए सिन्हा जी को कॉल लगाने के लिए मोबाइल निकाला ही था कि ठीक उसी वक़्त सिन्हा जी का कॉल आ गया।

अपस्यु:- बापू बहुत शक्त जान हो, 100+ तो क्रॉस करोगे ही।

सिन्हा जी:- आजा छोटे, मेरे सीने में ना हल्की हल्की चुभन हो रही है।

अपस्यु:- हम्मम ! यहां भी वही हाल है बापू, आप महफिल लगाओ मै अभी आया।

थोड़ी ही देर में अपस्यु सिन्हा जी के ऑफिस में था और दोनो बैठकर आराम से दारू के मज़े लेने लगे। आज अपस्यु अपनी नहीं बल्कि ऐमी की फेवरेट वेसपर मार्टिनी की डिमांड कर बैठा।

सिन्हा जी:- छोटे तू ये टेस्ट कबसे चेंज कर दिया, तेरे लिए कितनी मेहनत से मैंने वो तेरे कॉकटेल का इंतजाम किया था अब आखरी मोमेंट पर प्लान चेंज ना कर।

अपस्यु:- कोई नहीं बापू अभी जो है वो पिला दो।

दोनो बैठ गए बड़े आराम से पीने। सिन्हा जी के 2 पेग और अपस्यु अपने तरीके से बेहिसाब… तभी एक सिक्योरिटी वाला… "सर वो होम मिनिस्टर साहब आए है।"…. "आए नहीं है ने घोंचू, आ चुके है। शुक्ला जी आप ऑफिसर्स से कहिए यहां के सीसी टीवी को बंद करने, और उन ऑफिसर्स को भी यहां लेते आएगा, कहिएगा आज शाम मेरे साथ 1,2 जाम हो जाए।"..

सिन्हा जी:- बड़ा खुश लग रहा है, बात क्या है?

होम मिनिस्टर:- 3 दिन बाद मेरे बेटे का एंगेजमेंट है, सोचा कुछ लोगों मै निजी तौर पर इन्वाइट कर दू। अपस्यु के घर गया तो पता चला कोई था ही नहीं।

सिन्हा जी:- और फिर तूने आईबी वालो से हमारा पता लगवाया..

होम मिनिस्टर:- अब एक पेग देगा कंजूस या इसका भी बिल भेजेगा।

अपस्यु:- बधाई हो सर, वैसे कहां रिश्ता तय किया है?

होम मिनिस्टर:- आज कल मां बाप रिश्ता तय करते है क्या? लड़के ने पसंद कर ली, और मैंने हां, बाकी की डिटेल उस दिन खुद आकर देख लेना, और मेरी बहू को भी लेकर आना। ये जो तेरा ससुर है ना, साला बहुत बड़ा कंजूस है, बेटी की शादी तय हुई, एक बार पार्टी के लिए पूछा तक नहीं।

सिन्हा जी:- कश्यप, भाई तू बहुत ऊंची चीज है। रहने दे वरना मै तेरी होवार्ड यूनिवर्सिटी वाली पार्टी का पोल खोल दूंगा जो तुमने दिल्ली यूनिवर्सिटी में मनाई थी, और फिर वो माला मिश्रा, की कहानी भी।

होम मिनिस्टर:- अबे कौन माला मिश्रा की बात कर रहा है?

सिन्हा जी:- चुतिया सब बात इसी के सामने पूछ ले। अबे वो फ्रेंच कंपनी ट्रित्रेंट के इंडिया की सीईओ।

होम मिनिस्टर:- चुतिया कहीं का, मला मिश्रा का केस वो होवार्ड वाली पार्टी में नहीं हुआ था, बल्कि वो अखिल के शादी तय होने की जब हमने रूमर उड़ाई थी तब हुआ था। उस पार्टी में तो तुझे भाभी (सिन्हा जी की पत्नी) दिखी थी और कांड उसी के साथ पढ़ने वाली वो फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट थीं ना.. क्या नाम तो था रे..

सिन्हा जी:- अंकिता शर्मा..

होम मिनिस्टर:- अंकिता शर्मा की बात रहा हूं पागल। सुनीता भाभी की फ्रेंड का क्या नाम था, जिसे तू मूवी दिखाने ले गया था?

सिन्हा जी:- नूतन छवरिया ..

होम मिनिस्टर:- हां कांड उसके साथ हुआ था..

अपस्यु:- आप दोनो को नहीं लगता कि यहां कोई तीसरा भी बैठा हुआ है?

होम मिनिस्टर:- ओह सॉरी अपस्यु, वो हम बहुत दिन के बाद मिल रहे थे तो..

अपस्यु:- दोनो रहने भी दीजिए... आप अपने गर्लफ्रेंड की याद ताजा कीजिए मै जा रहा हूं?

होम मिनिस्टर:- नाह तुम दोनो बैठो, मै जा रहा हूं। ज्यादा देर रहा तो मीडिया वाले शुंघते हुए पहुंच जाएंगे।

होम मिनिस्टर के जाते ही… "बापू ऑफिस में पीने का मज़ा नहीं आएगा अब, वैसे भी मंत्री जी यहां का पूरा माहौल बोर कर दिया।"

सिन्हा जी:- हां सही कहा.. चल किट्टू सु में चलते है। चलकर 2-4 पेग भी मरेंगे और मूड बाना तो 2-4 ठुमके भी।

थोड़ी ही देर में दोनो पब के सामने खड़े थे। लंबी सी कतार लगी थी और सिन्हा जी उन सबको दरकिनार करते हुए सीधा गेट पर पहुंच गए। वहां के गेट का बाउंसर… "तुम दोनो यहां ऐसे कैसे चले आ रहे हो। जाकर पहले अपनी ड्रेस बदल कर आओ और फिर उधर से लाइन में आना।"..

सिन्हा जी:- साले यहां क्या तूने स्कूल खोला है जो हम ड्रेस कोड में आए। इंडियन लॉ के कोड अनुसार हम सब यहां चलते है और रास्ता छोड़।

बाउंसर अपना हाथ आगे ही बढ़ाया था कि…. "तू मेरे बापू को टच कर लिया तो मेरा वादा है मै तुझे इतनी जोड़ लात मारूंगा की तू अपने उस दरवाजे से टकराते हुए इतना शानदार आवाज़ करेगा की अंदर की पब्लिक कहेगी.. वांस मोर (once more)

दूसरा बाउंसर तुरंत वहां पहुंचते… "क्यों बहस कर रहे हो, आप दोनो की क्या समस्या है।"

सिन्हा जी:- इसकी तो, साला जो आता है यही पूछता है। हमे अंदर जाना है बस।

बाउंसर:- सर अंदर फुल है, आप ड्रेस कॉड फॉलो करके लाइन में अाए।

सिन्हा जी:- छोटे मुझे अब इनसे कोई बात नहीं करनी, बस 1 मिनट है तेरे पास वरना मै घर चला जाऊंगा।

अपस्यु, बाउंसर से… "अंदर मैनेजर से बोलो बाहर सुप्रीम कोर्ट के मशहूर वकील बिना ड्रेस कोड के अंदर आना चाहते है, क्या करना है? जो जवाब हो बता देना फिर हम यहां के ऑनर से ही बात कर लेंगे।

बाउंसर ने संपर्क किया और डिस्को का दरवाजा तुरंत खुल गया। वहां का मनाजिंग डारेक्टर खुद सिन्हा जी को लेने आया था। दोनो जैसे ही अंदर आए सिन्हा जी मैनेजर को वापस भेजते… "छोटे यहां तो घर की पार्टी लगती है। देख तो मेरा बेटा और बहू कितने प्यारे लग रहे है।".. (आरव और लावणी)
 
Update:- 157

बाउंसर ने संपर्क किया और डिस्को का दरवाजा तुरंत खुल गया। वहां का मनाजिंग डारेक्टर खुद सिन्हा जी को लेने आया था। दोनो जैसे ही अंदर आए सिन्हा जी मैनेजर को वापस भेजते… "छोटे यहां तो घर की पार्टी लगती है। देख तो मेरा बेटा और बहू कितने प्यारे लग रहे है।".. (आरव और लावणी)

एक बड़े से सोफे के चारो ओर... आरव, ऐमी, कुंजल, लावणी, साची, ध्रुव, और कुंजल के कॉलेज के 1,2 फ्रेंड बैठे थे। किसी के हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक तो किसी के हाथ में हार्ड ड्रिंक पड़ी हुई थी।"… उन्हें देखकर अपस्यु कहने लगा.. "यहां हम दोनों आए है ना, फिर जो जिसके साथ आया है उसे एन्जॉय करने दो। चलो चलकर हम अपना एन्जॉय करते है।"..

दोनो बार काउंटर पर पहुंच चुके थे और बार टेंडर दोनो को ड्रिंक सर्व कर रहा था। इसी बीच आरव की नजर दोनो पर गई… "चलो कहीं और चलते है।"..

कुंजल:- क्या हुआ, यूं अचानक..

आरव:- बार काउंटर पर देखो, रहूं और केतु साथ में पहुंचे है। कुछ ही देर में यहां सॉलिड कचरा होने वाला है।

साची:- यार एक तो हमने दोनो में से किसी को पूछा नहीं, अब दोनो अपना एन्जॉय कर रहे हैं तो करने दो। तुम लोग ये नहीं हुआ कि यहां बुला ले, उल्टा उन्हें देखकर भागने का सोच रहे।

ऐमी:- तुमलोग रहो मै जा रही हूं। तंग आ गई हूं मै दोनो की नौटंकी से।

आरव:- पती को कंट्रोल में करने के बदले उल्टा भाग रही हो। बैठो चुपचाप।

ऐमी:- आरव मुझे रोकने की कोशिश मत कर, वरना अच्छा नहीं होगा।

अपस्यु उनकी ओर देखकर… "बापू बाकी समय तो ठीक है लेकिन आपकी ये बेटी जो है ना हमे साथ देखकर अपना मुंह काहे चढ़ा लेती है।"

सिन्हा जी एक जाम हवा में लहराते… "मुझे क्या पता आज उससे पूछकर ये मैटर सलट ही लेते है। चल..

"हां बापू चलो।"… कहते हुए अपस्यु खड़ा हुआ और ऐमी के ओर फ्लाइंग किस्स भेजते हुए वापस कहने लगा… "बापू, थोड़ी देर के लिए कान बंद कर लो, ऐमी को देखकर मेरा मूड रोमांटिक हो गया।"..

सिन्हा जी:- तू जा छोटे अपने प्यार का इजहार कर, तेरे बापू का आशीर्वाद है।

अपस्यु माईक का जुगाड करके, उसपर चिल्लाते हुए… "अरे ओ ऐमी, मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है, आज का वादा है देख मैं आ गया, तू भी जळी आ मुझे मत और तड़पा।

ऐमी अभी अपनी बात खत्म कर ही रही थी कि इतने में अपस्यु की फटी आवाज़ बजने लगी… ऐमी अपने हाथ से अपना चेहरे ढक्ती… "ये नहीं सुधरने वाले।"

कुंजल:- भाभी कुछ तो रेस्पॉन्स करो..

लावणी:- कितना चाहते है ऐमी दीदी तुम्हे। अब जाओ भी, देखो कैसे बुला रहे है।

ऐमी:- क्यों मेरे सब्र का इम्तिहान ले रहे हो। आरव चल तू डैड को लेकर जा और मै अपस्यु को। आरव..

आरव:- हां चल रहा हूं, चिल्ला क्यों रही हो भाभी।

ध्रुव:- किसी को अभी जाने की जरूरत नहीं है। जबतक कुछ ऐसा नहीं होता कि इन्हे ले जाने की जरूरत हो, तबतक रहने देते है फिर जब ऐसा लगेगा कि ओवर हो रहा है तो ले जाना, क्यों इतना रिएक्ट करके अपनी और उनकी दोनो की शाम बर्बाद कार रहे हो।

इधर अपस्यु का गाना जैसे ही खत्म हुआ मैनेजर भागता हुआ आया… "सर मुझे लगा आप कुछ अनाउंस करेंगे इसलिए माईक दिया था, लेकिन आप तो गाने लगे। सर ऐसी आवाज में गाएंगे तो हमारे पब की इज्जत चली जाएगी।

अपस्यु:- ले भाई, ले जा इस माईक को और अपनी इज्जत बचा ले। बापू कोई रेस्पॉन्स ही नहीं है।

सिन्हा जी:- आखिर बेटी किसकी है? मुझे तुम तीनो पर ना प्राउड टाइप फील होता है। जनता है मेरी दिल से इक्छा थी तू ही मेरा दामाद बने। उमाहहहह..

कहते हुए सिन्हा जी ने उसे किस्स कर लिया। अपस्यु सिन्हा जी को गले लगाते… "क्या यार बापू इमोशनल कर देते हो।"..

"अरे मेरा छोटा इमोशनल हो गया। ले तू इसे पी फिर पीकर इस ऐमी की खबर लेते है, इतने प्यार से तू गाना गाया और उसने रेस्पॉन्स ही नहीं किया।"..

इधर जबतक दोनो आपस में लगे थे और उधर ऐमी ध्रुव की बात मानते जैसे ही नॉर्मल होकर हसने लगी, और दोनो के किस्से शुरू से सुनने लगे इतने में ही… "हाई, क्या मै तुम लोगो को ज्वाइन कार सकता हूं।"..

आरव:- आप कहीं और जाइए सर, यहां फैमिली पार्टी चल रही है।

एक लड़का:- ओह कम ऑन यार, हम जारा भी परेशान नहीं करेंगे 2 को। 2 लड़की जो एक्स्ट्रा लाए हो, उन्हें हम दोनों बस कंपनी देंगे।

दूसरा लड़का:- फैमिली पार्टी होटल में की जाती है ना कि पब में। हम भी अपने दोस्तो के रूम में उसके कजिन बनकर रुकते है और खूब मज़े करते है।

ध्रुव खड़ा होकर जैसे ही कॉलर पकड़ा, ऐमी अपस्यु को देखने लगी। अपस्यु सिन्हा जी को गले से लगा रहा था, और उसे देखकर वो अंदर से खुश हो गई। .. ",सॉरी बेबी"… गिल्ट फील करती वो दिल में खुद से कहने लगी और अगले ही पल अपने टेबल पर ध्यान देती… "ध्रुव छोड़ो इन्हे, हां बताओ मुझे कौन कंपनी देने आ रहा है।"

एक लड़का आगे बढ़कर अपने दिल पर हाथ रखा और अपने हाथ उसके ओर बढ़ा दिया। ऐमी उसकी उंगली पकड़कर थोड़ा फोर्स लगाई और खींचकर एक थप्पड़ मारते… "मुझे तो मज़ा आ रहा है कंपनी का। आई लव इट।"..

इतने में दूसरा कड़का कुछ बोलने को हुआ, आरव उसके पाऊं में एक लात मारकर नीचे गिराया.. "आराम से लेटा रह भाई, अभी उसे तो कंपनी एन्जॉय करने दे। और इधर ऐमी जबतक उसका उंगली लगभग तोड़ने जितना दवाब बनती 5-6 झन्नाटेदार थप्पड़ खींच चुकी थी।.. "मज़ा आ रहा है मेरी कंपनी का।".. "सॉरी सिस्टर भुल हुई को जबरदस्ती घुसने चला आया, प्लीज मुझे छोड़ दो।"

ऐमी उसे छोड़कर पूछने लगी… "और किसे कंपनी चाहिए।"..

"मुझे"… अपस्यु पीछे से उसके कंधे पर लादकर कहने लगा.. तेज म्यूज़िक की वजह से ऐमी आवाज़ पर नहीं ध्यान दे पाई, लेकिन पीछे से कोई कंधे पर लटक रहा था… तेजी के साथ मुड़ी और एक झन्नाटेदार थप्पड़ खींचकर।

हर किसी का मुंह खुला का खुला ही रह गया। अपस्यु ऐमी को टुकुर टुकुर देखते… "सारे पैसे बर्बाद, एक ही तप्पड़ में पुरा नशा उतार दी। वैसे थप्पड़ मारने के लिए तो मैंने मना किया था न स्वीटी।"

ऐमी:- सॉरी बेबी मुझे लगा कोई अनजान लड़का मेरे कंधे पर हाथ दिए है।

अपस्यु:- एक झलक देख ही लेती कम से कम, खैर कोई नहीं, वो दोनो लड़के यहां परेशान तो नहीं कर रहे थे।

कुंजल:- भाई आप बैठो तो पहले..

अपस्यु:- नहीं हम तो बस बाय कहने आए थे। वो लगा ऐसा की हम कोई यहां ड्रामा ना करे ये सोचकर तुमलोग कहीं परेशान ना हो, इसलिए हम घर जा रहे है यही कहने आया था। चलो बापू…

अपस्यु आगे चला, उसके पीछे उठकर ऐमी भागी, उसके पीछे लड़खड़ाते सिन्हा जी।…. "ओ बूढ़उ, कहां चले।"

सिन्हा जी:- अपने साकी के पास जा रहा, वो अकेला बाहर गया है।

आरव:- वो अकेला बाहर नहीं गया है, पीछे से उसकी होने वाली पत्नी भी गई है। अब मियां बीवी के बीच में जाकर क्या करोगे।

सिन्हा जी:- फिर मै क्या करूं?

आरव:- जब वो वापस आकर चलने के लिए कहे, आराम से यहीं बैठे रहना और बोल देना आरव मुझे छोड़ देगा।

अपस्यु अपने कार तक पहुंचा, पीछे पीछे ऐमी भी… "बेबी सुनो तो।"..

अपस्यु:- क्या हुआ ऐमी?

ऐमी, अपनी कान पकड़ती… "सॉरी बेबी, तुम्हारे आने के ठीक पहले 2 लड़कों ने बहुत ही ज्यादा बदतमीजी की थी। एक को वार्निग दे दिया था, तभी तुमने अचानक से मेरे कंधे पर हाथ रखा और…"

अपस्यु:- हां मैं समझ गया, कोई बात नहीं। ये बापू किधर रह गए।

ऐमी:- बापू की बेटी को ले चलो कहां ले जा रहे, उन्हें शायद किसी और कि कंपनी पसंद आ रही हो।

बिना कोई जावाब दिए पब में गया। वहां जब पहुंचा तो सिन्हा जी सबके बीच बैठे आराम से दारू का मज़ा ले रहे थे। अपस्यु वापस आकर कार में बैठा जहां पहले से ऐमी बैठी हुई थी। अपस्यु बिना कुछ बोले ड्राइव करने लगा..

ऐमी:- अब कुछ बोलो भी, ऐसे चुप तो ना रहो।

अपस्यु:- आई लव यू

ऐमी:- लव यू टू बेबी। कुछ और बोलो ना।

अपस्यु:- लेकिन बोलना क्या है, तुम ही कुछ शुरवात क्यों नहीं करती?

"अकडू कहीं का, गुस्सा होना भी है, और गुस्सा दिखाना भी नहीं।"…. ऐमी अपने मन में सोचती हुई, अपस्यु का चेहरा देखने लगी। अपस्यु बिना कोई प्रतिक्रिया दिए ड्राइव करता रहा और कार अपार्टमेंट के पार्किंग में खड़ी करके, फ्लैट के ओर बढ़ने लगा।

"हद है मै साथ में हूं, और तुम आगे आगे भाग रहे।"… ऐमी पीछे से टोकती हुई कहने लगी। अपस्यु 4 कदम पीछे आकर ऐमी को देखकर मुस्कुराया और हाथ पकड़ कर.. "चले मिस।"..

दोनो साथ साथ चलने लगे, अपस्यु ख़ामोश "हां, हूं" में जवाब देते और ऐमी उससे तरह तरह के सवाल पूछती। थर्ड फ्लोर पर पहुंचते ही अपस्यु सीधा अपने फ्लैट ना जाकर उन लड़कियों के फ्लैट के दरवाजे पर था। बेल बजाकर अपस्यु वहीं बाहर खरा रहा… "तुम रात के 11.30 बजे इनके कमरे की बेल क्यों बजा रहे हो।"…

ऐमी जबतक ये सवाल पूछ रही थी, अंदर से दरवाजा खुला और साथ ही साथ पीछे से आवाज भी आयी… "कामिनी कहीं थी ना ये केवल गर्ल्स पार्टी है, फिर कौन अपने बॉयफ्रेंड को यहां बुला कर लाई।"..

इधर जबतक दरवाजे का छोटा सा हिस्सा खोलकर वहां रहने वाली 4 लड़कियों में से एक लड़की खुशी चिल्लाते हुए कहने लगी… "अरे शांत हो जाओ बाहर रूम ऑनर खड़े है।"

"हां तो उससे बोलो कल सुबह आएगा, अभी हम पार्टी कर रहे है।".. वापस से किसी दूसरी लड़की की आवाज आयी।… "क्या बात है मिस, सैटरडे नाईट का पुरा फायदा उठाया जा रहा है, 2 महीने बीते 1 महीना हो गया, फ्लैट का किराया अब तक नहीं आया।"..

ऐमी:- किराया काया वसूल लेगी, चलो भी बेबी अब यहां से, इनको पार्टी करने दो।

तभी खुशी पुरा दरवाजा खोलते… "अंदर अाए सर, मै पूरी बात बताती हूं।".. अंदर का नजारा देखकर तो ऐमी का मुंह खुला ही रह गया। 8-9 लड़कियां थी सभी लिंगरी में, और लगभग बहुत कुछ के बहुत कुछ दिख रहे थे। अपस्यु एक झलक सबको देखा… "पहले ऊपर ढंग के कपड़े डालो, फिर मै अंदर आता हूं।"..

"ये हैंडसम लड़का तेरा ऑनर है, मेरा ऐसा ऑनर होगा तो मै इसी के फ्लैट में शिफ्ट हो जाती।"… एक लड़की अपनी बात कही और खी खी खी करके हंसने लगी।

ऐमी:- इन्हे पार्टी करने दो अपस्यु, बाद में किराया ले लेना। (कमीना जान बुझ कर यहां बस टाइम पास कर रहा है। यहां के बाद पक्का ये काया के पास जाएगा।)

खुशी ने जबतक 2 मिनट के लिए रूम बंद किया और वापस से खोलकर अपस्यु और ऐमी को अंदर बुलाने लगी। दोनो आकर बैठ गई, तभी खुशी पूछने लगी… "सर कॉफी लेंगे या टी।"..

अपस्यु:- चाय ही पिला दो।..

एक लड़की मजाकिया अंदाज़ में… "लगता है गर्लफ्रेंड साथ में है इसलिए सारीफ बन रहे है तुम्हारे सर वरना अभी तो कुछ और ही पीने की डिमांड हो जाती।"..

ऐमी, कुछ नहीं बोली वो बस अपस्यु की प्रतिक्रिया को देख रही थी। अपस्यु इन सब बातो को दरकिनार करते… "खुशी, किराया टाइम पर नहीं आया, तुम्हे 2 महीने का एडवांस कहा गया था देने।"..

एक और रेंटर मालविका:- सर वो हम सबकी आर्थिक स्तिथि थोड़ी डाउन चल रही है।..

समय रात के 12… "ये भी ना यहां इसकी कहानी सुनकर आज 1 बजा देगा।"… ऐमी अपने मन में सोचती उनसे पूछने लगी… "कितना एडवांस देना था।"..

खुशी:- जी वो 60 हजार देना था।

ऐमी अपना मोबाइल निकालर जल्दी जल्दी हाथ चलाते… "बेबी तुम्हारे अकाउंट में 1 लाख 20 हजार पहुंच गया है। इनका 4 महीने का एडवांस मिल गया अब चलो।"

अपस्यु कुछ नहीं बोला सिर्फ एक बार उसने ऐमी को देखा और वहां से उठकर चल दिया। ऐमी भी उठकर जाने लगी तभी खुशी उसका हाथ पकड़कर… "1 लाख 20 हजार हमारा पे कर दिया।"..

ऐमी:- अभी 1 करोड़ 20 लाख भी पे कर सकती थी। तुमलोग एंजॉय करो पार्टी।

एक और रेंटेर निशा… "क्या हुआ सर कुछ ज्यादा ही रूठ गए क्या? लेकिन शक्ल देखकर लगता तो नहीं था। शायद हमे देखकर उनका मन हरा भरा हो गया हो इसलिए गुस्से वाले एक्सप्रेशन दिखे नहीं।"

ऐमी:- अच्छा भ्रम है कंटिन्यू रखो, मुझे अभी बहुत से काम है।

ऐमी वहां से निकल गई, उसके जाते ही खुशी कहने लगी… "एक तो उसने 4 मंथ का किराया भर दिया, उपर से उसे है उंगली कर रही हो निशा।"..

निशा:- कामिनी तो तू ही आ जा जल्दी से, तुझे उंगली करती हुं।

ऐमी वहां से निकलकर पता था कहां पहुंचना है। दरवाजा नॉक की और काया ने आवाज़ दिया खुला ही हुआ है। ऐमी को कोई लेना देना नहीं था कि वहां क्या चल रहा है, वो अपस्यु का हाथ पकड़ी और उसे चलने के लिए कहने लगी।

काया दोनो को देखकर हंसती हुई कहने लगी… "अच्छा अब समझ में आया कि ये महाशय अचानक से रात में दर्शन देने कैसे चले आए।".

ऐमी:- आज कुछ ज्यादा ही रूठे है काया, जारा मै मना लू इन्हे वरना पता ना कब तक इन डायरेक्टली मुझ पर गुस्सा उतारते रहे।

अपस्यु:- जबरदस्ती कुछ भी समीक्षा कर रही हो। मुझे काया से अभी बात करनी है।

काया:- वो इतनी जरूरी बात भी नहीं है। मुझे नींद लग रही है और सुबह लिसा आएगी, कल दिन में बात करना जो भी करना हो, अब जाओ।

अपस्यु बाहर आते… "क्या बचपना है स्वीटी।"..

ऐमी:- अंदर चलो फिर मै बचपन से जवानी तक के सब दर्शन करवाऊंगी।

अपस्यु, ऐमी की बात पर हंस दिया, हंसते हुए दोनो फ्लैट में घुसे, और फ्लैट में घुसते ही ऐमी अपस्यु को दीवार से चिपकाते हुई कहने लगी…. "तुझ जैसे भौंरे को मैनें यहां मसल दिया ना, तो बाहर किसी को मुंह दिखने के लायक नहीं रहेगा। तेरा फटा हुए इज्जत फिर कवड़ियों के भाव नीलाम होगा।"…
 
Update:- 158

"पागल".. अपस्यु इतना कहकर ऐमी की आखों में देखने लगा और ऐमी मुस्कुराती हुई… "क्या देख रहे हो।"..

अपस्यु ऐमी के होंठ को एक बार चूमकर अलग होते.. "तुम्हारा बचपना।"..

अपस्यु की बात सुनकर ऐमी हंस दी, फिर आंख मारती हुई पूछने लगी… "और क्या देखना चाहते हो।"

अपस्यु:- बचपन से शुरू हो गया, अब जवानी तक के दर्शन करवा दो।

ऐमी मुस्कुराती हुई होंठ से होंठ लगाकर चूमने लगे। अपस्यु जल्दी में उसके टॉप निकालने लगा… "बेबी रुको तो, कितने उतावले हो रहे हो.. आहह ! नाखून से छिल दिए ना पीठ।"..

अपस्यु अपने होंठ ऐमी के गले से लगाते… "तुम जवानी दर्शन बोलकर मुझसे मेहनत करवाओगी तो यही होगा।"…

ऐमी कूदकर उसके गोद में चढ़ती, होंठ से होंठ लगाकर चूमती हुई… "डायनिंग टेबल पर चलो।"

अपस्यु उसे गोद में उठाए डाइनिंग टेबल पर गया। चादर खींच सामान नीचे गिराते, ऐमी को डायनिंग टेबल पर लिटाया और और उसके जीन्स के बटन खोलना लगा। ऐमी अपना हाथ बटन के ऊपर डालती उसे खोंलने से रोकी और खुद नीचे उतारकर अपस्यु जो धक्के देती डाइनिंग टेबल पर लिटाई। तेजी से उसके पैंट और अंडरवियर को खोलकर नीचे फेक दी।

ऐमी के सामने अपस्यु का अर्द्ध विकसित लिंग था, जिसे वो अपने हाथो में लेकर मूठियाने लगी। अपस्यु पर मस्ती का पूरा सुरूर चढ़ने लगा। देखते ही देखते ऐमी ने लिंग को मुंह में के लिया और अपस्यु मजे में तेज तेज श्वांस लेने लगा।

इतने में ही ऐमी ने लिंग को मुंह से निकाल दीया। ऐमी के अलग होते ही अपस्यु अपनी श्वांस सामान्य करने लगा, इधर जबतक ऐमी डाइनिंग टेबल पर चढ़ी और अपस्यु के कमर के दोनों ओर पाऊं करती, हाथ पीछे ले जाकर अपने ब्रा के हुक को खोल दी।

अपने कमाल के स्तन को, ब्रा की कैद से आजाद करके, ब्रा को अपस्यु के मुंह पर फेकी। फिर अपने जीन्स के बटन खोलकर अपनी जिसने निकालकर उसके मुंह पर फेंक दी। उफ्फ क्या आदा से कमर को पीछे करके ऐमी ने अपने पैंटी को निकालकार अपस्यु के मुंह पर फेका.… अपस्यु उसे अपने हाथ में लेकर तेज श्वांस खींचा, और खो गया। ऐमी यह देख हर "ही ही".. करी और आराम से अपस्यु के कमर पर बैठ गई। लिंग योनि के ऊपर घिस रहा रहा था, ऐमी के स्तन अपस्यु के सीने में दबे हुए थे और ऐमी, अपने हाथ से अपस्यु के बाल को ऊपर करती, उसके आखों मै आखें डालकर देखती हुई अपने होंठ आगे बढ़ा दी।

अपस्यु उसके होंठ के रसपान में पुरा डूब गया और अपने हाथ नीचे ले जाकर, लिंग को उसके योनि में डाला और एक जोरदार झटका मारा। ऐमी होंठ को अलग कर लंबी सिसकारी भारी और ठंडी ठंडी श्वांस लेने लगी। अपस्यु अपने दोनो हाथ मजबूती से नितम्बों को दबोचे थे और उसकी दसों उंगलियां दरार में अंदर घुसी थी।

अपस्यु उत्तेजना में आकर अपनी उंगली गुदा मार्ग के इर्द गिर्द चलाने लगा। उंगलियों का ये स्पर्श ऐमी को गुदगुदी और उत्तेजना दे रही थी और इसी उत्तेजना में ऐमी ने अपस्यु के होंठ को अपने दांतों के भींचकर उसका रसपान करने लगी और अपने कमर पूरे उत्तेजना के साथ हिलाने लगी।

दोनो मस्ती में चूर एक दूसरे के साथ पुरा एन्जॉय करते रहे। और अंत में खाली होकर एक दूसरे से लिपटकर सो गए।ए

8 नवंबर 2014..

राजस्थान का जोधपुर महल को दुल्हन की तरह सजाया गया था। होम मिनिस्टर ने कुछ खास लोगों की मौजूदगी में अपने बेटे के सगाई का कार्यक्रम रखा था, जहां ज्यादातर मेहमान दोनो ही पक्षों के ओर से सामान्य थे। दिग्गज राजनेता, प्रमुख उद्योगपति और बड़े बड़े सरकारी अधिकारी।

महल के रास्ते से लेकर उस इलाके के चप्पे चप्पे में जैसे पुरा छावनी बना हुआ था। कलिका पूरी तरह से सज धज कर अपनी मां अनुप्रिया के साथ में बैठी हुई थी और उसके भाई बाहर लोगो से मिल रहे थे और पार्टी का लुफ्त उठा रहे थे।

शाम के 7.30 बजे सौरव और कलिका ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई और उसके बाद पार्टी का माहौल शुरू हो गया। आमुमन लगभग सभी कॉमन गेस्ट थे, और बचे हुए लोगो के साथ जान पहचान जारी थी। तभी सौरव और कलिका अपस्यु और ऐमी के सामने हुए। कुछ लम्हे के लिए कलिका और अपस्यु की नजर एक दूसरे पर ठहर गई, और उसके बाद अपस्यु उन पर ध्यान ना देकर ऐमी से बात करने लगा…

कलिका:- ये क्यूट सा बच्चा कौन है सौरव हमारी पार्टी में, इससे जान पहचान नहीं करवाओगे।…

सौरव:- मेरे पिताजी के कारन जिंदा बचा हुए लड़का है ये कलिका, इनसे पहचान कि जरूरत नहीं।

कलिका:- हमारे गेस्ट है ये सौरव, इतना रूड ना बनो।

सौरव:- तुम जान पहचान करो, मै 2 मिनट में आया।

कलिका अपना हाथ आगे बढ़ती हुई… "हेल्लो लिटिल ब्रदर, आई एम् कलिका।"..

अपस्यु हाथ मिलाते… "सिस्टर मुझसे रिश्ता जोड़कर लगता है होने वाले जीजाजी को तुमने नाराज कर दिया।"…

कलिका अपस्यु को हैरान करती उसे गले से लगा ली और धीमे से हंसती हुई कहने लगी…. "तुम्हारे जीजाजी को तो मै संभाल लुंगी, लेकिन जिस जगह तुम खड़े हो लिटल ब्रदर वहां पहुंचने के लिए लोग सालो मेहनत करते है और खुद को बनाए रखने के लिए तो उससे भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।"

अपस्यु:- सिस्टर डोंट वरी, मै सेल्फ मेड हूं और ये नामचिहन लोगो की महफिल में खुद को बनाए रखने के लिए मैंने भी अपना एक मुकाम हासिल किया है।

कलिका, अपस्यु से अलग होती उसकी आंखो में घुरकार देखती… "मुकाम पर बने रहो ऐसी मै प्राथना करूंगी। वैसे ये दिखता केवल सहर है, लेकिन है पुरा जंगल, अपना ख्याल रखना लिटल ब्रदर।

अपस्यु:- ये यदि जंगल है तो मै इस जंगल का शेर हूं सिस्टर। सियार कितना भी झुंड बनाकर मेरे शिकार की योजना क्यों ना बना ले, जंगल का तो एक ही बाप रहेगा। शायद अभी आपको जीजाजी के पास जाना चाहिए, बेचारे मेरा गुस्सा शराब पीकर निकाल रहे।

कलिका वहां से तुरंत सौरव के पास पहुंची, उसके जाते ही ऐमी… "भाई को पहचान गई बहना लेकिन वर्षों के बिछड़े भाई से मिलने का तरीका भी बिल्कुल निराला था।

अपस्यु:- जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

ऐमी:- जी गुरुजी समझ गई।

इधर कलिका सौरव के पास पहुंचकर… "तुम मेरे साथ आओ।"

सौरव:- नहीं जाओ तुम भी मेरे बाप की तरह मेरे दुश्मन की फैन हो जाओ। पहली ही मुलाकात में भाई बहन का प्यार जाग गया।

कलिका:- सभी गेस्ट को आपस में बात करने दो, तुम मेरे साथ आओ तुम्हे कुछ दिखाना है।

सौरव छोटा सा मुंह बनाए उसके साथ कमरे में पहुंचा… कलिका जबतक दरवाजा लॉक कर रही थी, सौरव शराब का एक पेग खिंचते… "दिखाओ क्या दिखाना है।"

कलिका मुस्कुराती हुई अपने लहंगे की डोर को खींचकर उसे जमीन में गिरने दी… "तुम्हे भी तो इन्हे रात भर मस्ती में देखना है ना।"

सौरव अपनी बड़ी आखों से उसके सुडौल टांगो के पुरा दर्शन करते तेजी के साथ उसके पास पहुंचा और बैठकर पैंटी के ऊपर अपना मुंह डालते… "क़यामत हो तुम कलिका, बस ऐसे ही गुस्सा शांत कर दिया करो।"..

कुछ ही देर में गद्देदार बिस्तर हुच हूच के आवाज़ के साथ ऊपर नीचे होने लगी। सौरव तेज तेज झटके मारते उसके बड़े बड़े स्तन को अपने दोनो हाथ में दबोचे हुए था और जैसे ही छुटने वाला हुआ कलिका बैठकर उसके लिंग को आगे पीछे करती अपना चेहरा सामने ले आयी।

सौरव की आखें पूरी बंद हो गई और पुरा कम कलिका के चेहरे पर फ़ैल गया।.. कलिका हंसती हुई कहने कहीं… "पुरा विदेशी वाली फीलिंग थी ना।"…

सौरव कलिका के दोनो निप्पल को अंगूठे में फसाकर पुरा खींचा… "आह सौरव, दर्द हो रहा है।"..

सौरव:- आज तो पूरी रात इन विदेशियों को फेल करने वाले आसान होंगे।

कलिका अपना चेहरा साफ करती हुई बिस्तर मै नंगी लेट गई… "सौरव कुछ ड्राई फ्रूट्स लेकर बिस्तर में आराम करो और वो सेक्स पॉवर वाली गोली कुछ देर बाद खा लेना। अभी पूरी रात बाकी है।"..

सौरव कलिका की बात मानते हुए बिस्तर से टिक कर बैठ गया और अपने हाथ से उसके स्तन को सहलाते हुए कहने लगा… "कितना अच्छा तो तुम उसे मारने कि योजना बना रही थी, फिर ऐसे उसके साथ प्यार जताने की क्या जरूरत थी। मै तो सुलग गया, मुझे ऐसा लगा जैसे कहीं तुम भी उसकी फैन हो गई तो वो कमीना अपस्यु फिर ना कहीं बच जाए।"

कलिका:- हा हा हा हा.. तुम अंदर की बहुत सी कहानी नहीं जानते सौरव.. इसलिए इतना पैनिक हो गए।

सौरव:- पैनिक ना हो जाऊं तो और क्या रहूं। एक तो उसके ऊपर की चिढ़, ऊपर से मुझे क्या पता तुम सबके दिमाग में क्या चल रहा है। मेरा बस चले तो इसे मारने के लिए तबतक लोगो को भेजता रहता जबतक कि ये मर ना जाए।

कलिका:- वो हमने भी कोशिश की थी लेकिन ये है बहुत दिमाग का तेज। लेकिन क्या करे कभी-कभी हम हारकर भी जीत जाते है और जितने की आदत रखने वाला खिलाड़ी अपनी जीत में यह भुल जाता है कि आज के जंग में मिली जीत मात्र एक दिखावा था, ये परखने के लिए की वो कितना सक्षम है।

सौरव नीचे झुककर स्तन के निप्पल के ऊपर वाले गुदाज मांस पर जोड़ से डांट काटते हुए… "सीधा सीधा बताओ जो दिल को सुकून दे, वरना बताओ ही नहीं। मुझे अपने मज़े करने दो।"

कलिका उसका बल पकड़कर उसका चेहरे अपने चेहरे के पास लाई और उसके होंठ को चूमती हुई, उसका सर अपने दोनो पाऊं के बीच रखती उसके मुंह को योनि के ऊपर दबाकर अपनी कमर हिलाने लगी… "हमने 40 लोग मारने भेजे थे, जो इसे खत्म कर दे, ताकि ये हवाला वाला प्लान के पहले ही इसकी कहानी खत्म। क्योंकि कौन फालतू में इंतजार करे की ये कब 2 लाख करोड़ जमा करेगा या कर भी पाएगा की नहीं।"..

सौरव उसके क्लीट के साथ खेलते… "वो तो जिंदा है ना, फिर क्या बच्चो को मारने भेजी थी।"..

कलिका:- हां वो जिंदा बच गया क्योंकि सोच से भी पड़े उसका मैनेजमेंट है। वो हमारे 40 लोगों को तो क्या, बल्कि आधे लोग को भी ना संभाल पाए। हमारे 40 लोगो को गायब करने वाला और कोई नहीं बल्कि हमारे पुराने एक दुश्मन (लोकेश) की टीम थी। खैर ये भी अच्छा हुआ। इस से 2 बात पता चली..

सौरव:- क्या ?

कलिका:- पहली ये की वो हमेशा स्ट्रॉन्ग बैकअप अपने पास रखता है और दूसरा ये की लड़ाई में घायल मेरे सभी आदमी को वो बंदी बनाया, जिसके हथियार पर सर्विलेंस कैमरा था। इसी वजह से मुझे अपस्यु के स्ट्रॉन्ग बैकअप का पता भी चला और उम्मीद है कल से वो हमारे लिए काम करे।

सौरव योनि के ऊपर से उठा और टेबल ओर पड़ी टैबलेट खाते हुए उसके सीने के इर्द गिर्द, अपना पाऊं दोनो ओर रखकर अपने सोए लिंग को उसके गाल से लेकर चेहरे कर घिसने लगा… "मै तो कहता हूं अपस्यु के साथ मेरे बाप को भी खत्म कर दो। साला बहुत दिमाग खाता है, मुझे आगे बढ़ने नहीं देता और उस कुत्ते अपस्यु के लिए पुरा मरता है। ये बाप मेरा कभी नहीं होगा।

दोनो के बीच सेक्स और बातचीत का दौर काफी लंबा चलता रहा और जब फाइनली दोनो सोने के लिए अपनी आखें मूंद रहे थे, दोनो ही एक दूसरे के विचार और पूर्व में किए काम से लेकर भविष्य कि योजनाओं तक हर काम में संतुष्ट होकर सोए।
 
Bechara Parth mehnat kar raha hai ... Don't distrub him ... Aur abhi to matr 10k carore ki baat hui hai .. aage ambani ji ko lagega .. main garib hun :D
 
Yeahhhh .... Abhi to saza ki surwat hui hai .. aagaj ho chuka hai ... Anjaam tak pahunchne baki hai ... By the way ... Ye kahaniyo ke paise hai .. aate jate rahenge ... Vichlit na hon aap
 
Hahaha .. isme manaki jaisa kya hai indrjeet bhai :D .. she is damn gorgious... Haan to rahi baat bhaiyon ki .. to unke liye main mehnat kar raha hun .. bus bhai dhoka na de aur apne vichar dete rahe
 
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