Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 8 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 58

मेघा:- सम्भालो खुद को.

सुमित को ऐसा टूटता देख मेघा से भी रहा नहीं गया.

सुमित:- अरे nahi...Bilkul ठीक hun...Bas कभी कभी कमजोर पद जाता hun...Lekin संभालना भी सिख गया हूँ.

सुमित ने मुस्कुराते हुए kaha...Lekin इस मुस्कान के पीछे की दर्द छुपा नहीं पाया.

सुमित:- (इन हिज मंद) सँभालने के अलावा और है भी क्या मेरे पास?

मेघा:- कीर्ति तुमसे बिलकुल भी प्यार नहीं karti...Wo अभी सिर्फ अपने hi बारे में सोच रही है? क्या तुम अपने बारे में सोच नहीं सकते?

सुमित:- (विथ स्माइल) अपने बारे में hi तो सोच रहा हूँ.

मेघा:- मेरा मतलब कीर्ति को भुला kar...Wo सिर्फ अपने बारे में सोच रही hai...Koi फ़िक्र नहीं है उससे tumhara...Mai कुछ दिनों से नोटिस कर रही हूँ कितना गलत हो सकती है वो.

सुमित:- सही गलत ये अपना अपना परसेप्शन है.

तुमने कीर्ति में कुछ बातें देखा होगा जिससे वो तुम्हे अब्ब पसंद नहीं है.

लेकिन mai...Uski कुछ अदाएं थी जिस में आज भी मई फ़िदा hun...Aisa लगता है जैसे उसका साथ मिल जाए तो पूरी जिंदगी ख़ुशी और सुख में beetega...Aisa लगता है जैसे मुझे उसकी जरुरत है और उसको मेरी.

कुछ सोचते हुए सुमित ने प्यार भरी आवाज में कहा.

मेघा:- कुछ भी kaho...Mujhe नहीं लगता वो कभी samjhegi...Bahut गलत कर रही है वो.

सुमित:- हो सकता है वो गलत hai...Lekin उसको गलत कहने का हक़ भी नहीं है मेरे पास.

मेघा:- ऐसा क्यों?

हैरानी भरी आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- खुद मुझे hi देख lo...Mujhse गलत कौन हो सकता है? क्या कुछ नहीं किया मैंने तुम्हारे साथ? इस भूल के लिए माफ़ी मांग hi सकता hun...Maafi मिलने की उम्मीद भी नहीं कर सकता.

मेरे इतना बड़ा भूल होने के बावजूद कैसे कीर्ति को गलत kahu...Jabki वो गलत है भी nahi...Pyar करना और ठुकराना दोनों का हक़ होना चाहिए.

मई उससे प्यार करता हूँ ये मेरा हक़ है और इस प्यार को अपनाना या ठुकराना उसका हक़ है.

मेघा:- लेकिन तुम्हे अपने गलती का एहसास तो है न?

सुमित:- हाँ.

मेघा:- उसको इस बात की एहसास भी नहीं hai...Aur तुम उससे गलत मानना भी नहीं छह रहे हो?

सुमित:- उससे मई पसंद नहीं hun...Ismein उसकी क्या गलती? ये मेरा जिम्मेदारी है की उसके दिल में अपने लिए प्यार जागो.

मेघा:- सुना था की प्यार अँधा होता hai...Aaj देख भी liya...Abb अंधकार में देखने की फैसला कर hi लिया है तुमने तो मई कुछ नहीं कह सकती.

इस बार मेघा की आवाज में गुस्सा tha...Sumit ने भी मुस्कुरा कर इस बात को ताल दिया.

अब्ब ना सुमित कुछ बोलना चाह रहा था और ना hi मेघा को कहने के लिए कुछ मिल रहा tha...Kuch देर सोचने के बाद.

मेघा:- अब्ब आगे क्या करोगे? कीर्ति के करीब जाने की? मेरा कुछ हेल्प चाहिए फिर से.

आखिरी बात मेघा ने व्यंग के साथ कहा.

सुमित:- अब्ब nahi...Thak गया हूँ abb...Abb कुछ करूँगा तो बस intejaar...Intejaar कीर्ति की और कुछ मौका का जो शायद आगे वक्त hi मुझे देगा.

और tum...Yakin नहीं करोगी tum...Sach में शर्मिंदा हूँ तुम्हारा जैसे उसे किया उस वजह se...Pehle भी कहा था उस ट्रिप के बाद पीछा छोड़ दूंगा तुम्हारा हमेशा हमेशा के लिए.

ना hi तुम मुझे देखना पसंद करती हो और ना hi मई तुम्हारे आँख में आँख मिला पाने के काबिल हूँ.

सुमित ने शर्मिंदगी भरी आवाज में कहा और अपनी नजर घुमा लिया.

मेघा:- अगर मई कहु की मैंने तुम्हे माफ़ कर दिया तो?

एकदम से सुमित के चेहरे का भाव बदल gaya...Yakin करना भी उससे मुश्किल हो रहा था.

सुमित:- क्या ये सच है?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- तब बता नहीं सकता कितना खुश हूँ mai...Bahut बड़ा बोझ दिल से उतर gaya...Kirti मुझसे प्यार नहीं करती इससे भी ज्यादा बुरा इस बात का लगता की मैंने किसी का दिल दुखाया hai...Uske साथ छल किया है.

हर बीतते दिन के साथ खुद से hi नजर नहीं मिला पा रहा tha...Khud से hi नफरत हो गया था.

कुछ पल के लिए सुमित चुप हो गया और फिर.

सुमित:- लेकिन इतने जल्दी माफ़ी नहीं मिलना चाहिए tha..Tumne माफ़ तो कर दिया लेकिन तुम्हारा क्या? माफ़ कर देने से तुम्हारा दिल का जख्म भर जायेगा?

सुमित इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले hi.

मेघा:- बहुत सोच रहे हो तुम... (लाफिंग) तुम इतना भी स्मार्ट नहीं हो की तुमसे प्यार हो जाए.

बस अच्छा दोस्त मानती thi...Lekin तुम्हारा उस धोखा के बाद नफरत हो गयी थी.

लेकिन सचाई जाने के बाद सोचा माफ़ कर देना hi सही है.

मेघा की इस बात पर सुमित को यकीं नहीं हो रहा था.

सुमित:- सच कह रही हो ना? प्यार जैसी कोई फीलिंग तो नहीं है न जो मेरा भूल का नतीजा था?

वर्ण एक तरफ़ा प्यार का दर्द मई hi समझता hun...Jo क्या से क्या हाल बना कर रख देता है.

मेघा:- तुम्हारा कॉमेडी से सिर्फ हंसी आता hai...Dil जीत नहीं सकता किसी का.

तुम शायद कुछ ज्यादा hi स्मार्ट सोच मान रहे हो खुद को.

सुमित मेघा की इस बात पर खुश था की उसकी भूल का असर मेघा पर उतना नहीं पड़ा जिस के लिए वो हमेशा खुद को कोष्टा था.

कुछ देर की ख़ामोशी के बाद सुमित ने कहा.

सुमित:- सच में महान हो यार tum...Bahut बड़ा दिल है तुम्हारा.

मेघा:- ये बात कितनी लड़की से कह चुके हो?

मेघा ने मजाकिया अंदाज़ में कहा ये सोच कर की सुमित भी इसी मजाकिया मूड में आ jaaye...Sumit को ऐसे सीरियस और दर्द में देख मेघा को भी अवचा नहीं लग रहा था.

सुमित:- तुम पहली हो.

मेघा कुछ कहती उससे पहले hi.

सुमित:- भले hi प्यार भरी बात बहुत लड़कियों से कहा है लेकिन झूठा तारीफ़ किसी का नहीं किया है.

और तुम्हारे लिए ये तारीफ़ तुम्हारा सम्मान में कहा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) कुछ नहीं हो सकता iska...Serious hi रहेगा हमेशा. :नू:

मेघा:- वैसे तुम्हे शायद पता nahi...Lekin ऐसे तुम बहुत खड़ूस लग रहे ho...Wo पुराने वाले सुमित सही thhe...Full ऑफ़ कॉन्फिडेंस और एवर हैप्पी सुमित.

सुमित:- (इन हिज मंद) वो सुमित कही खो सा गया है.

लेकिन मेघा से इस बारे में कुछ नहीं कहा सुमित ne...Ek hi बात बार बार बोलना शायद थक गया था वो.

वो अब्ब बस तालाब की तरफ hi देख रहा tha...Megha के पास भी अब्ब बात करने के लिए कुछ नहीं था.

जब जाने का वक्त आया तब अकेले में सुमित ने मेघा से कहा.

सुमित:- तुमने मेरा बहुत मदद किया hai...Jab कीर्ति तक पहुँचने का हर दरवाजा बंद था तब उम्मीद के रूप में तुम hi नजर aayi...Ye कर्ज मई कभी चूका नहीं पाऊंगा.

अगर जिंदगी में कभी भी कही तुम्हे मेरा जरुरत पड़े तो याद कर lena...Mai हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा एक दोस्त के रूप में.

ख़ुशी होगा मुझे तुम्हारा मदद कर के.

मेघा हां में सर हिलाती है.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ.

मेघा तो चाहती थी की सुमित कुछ दिन और ruke...Lekin उससे रोकने का कोई तरीका भी नहीं था उसके पास.

मेघा:- (सर हिला कर) अच्छे से जाना.

सुमित भी हाँ में सर हिला कर बाइक में बैठ जाता है.

मेघा:- और ज्यादा तेज मत चलाना.

शिकायत भरी आवाज में मेघा ने kaha...Jawaab में सुमित मुस्कुरा कर.

सुमित:- ठीक hai...Yaad रखूँगा.

फिर सुमित वह से चला gaya...Megha पीछे से सुमित को तब तक देखती रही जब तक सुमित उसकी आँखों से ओझल ना हो गया.

और सुमित के जाने के बाद चेहरे में रौनक एक डैम से गायब हो गया.


आफ्टर 1 ईयर


वक्त तो अपने गति से आगे बढ़ hi रहा tha...Lekin इसी वक्त में जी रहे कुछ जिंदगी है जिसका रफ़्तार वक्त के साथ तो बिलकुल भी नहीं था.

"सुमित को कब प्रोपोज़ करेगी?"

ये आवाज सुनते hi मेघा के भाव एकदम से बदल गए.
 
अपडेट 59

लेकिन मेघा ने कुछ जवाब नहीं दिया.

अब्ब चुप क्यों हो गयी? कुछ देर पहले तो बहुत बोल रही थी?

लेकिन मेघा अभी भी चुप थी.

सुमित से प्यार तो करती है ना?

मेघा:- बार बार एक hi जवाब देने का शौख नहीं है मुझे.

अपनी रूममेट नेहा की बात पर इस बार मेघा इर्रिटेट हो गयी.

नेहा:- प्यार तो बहुत करती है tu...Lekin प्रोपोज़ करने की बात सुनते hi ऐसे चुप क्यों हो जाती है.

मुस्कुराते हुए नेहा ने पूछा.

मेघा:- क्यों की अभी वो वक्त आया नहीं है.

नेहा:- तो फिर वो वक्त कब आएगा? मई भी देख रही हूँ...1 साल हो gaye...Abhi तक तो वो वक्त आया नहीं है.

मेघा:- Aayega...Jab सुमित को भी मुझसे प्यार होगा.

मेघा की इस जवाब से नेहा हैरान हो गयी.

नेहा:- क्या? सुमित तुझसे प्यार नहीं करता? सुमित का तुझे देखने का नजरिया बहुत अलग hai...Ye भी तुझे नहीं दिखाई दे रहा है?

मेघा:- हर अलग नजरिया प्यार नहीं होता.

मैंने भी देखा hai...Sumit जब भी मुझे देखता है उसकी आँखों में आत्मग्लानि होता hai...Abb भी वो कीर्ति से वो बहुत प्यार करता hai...Aur जब भी वो मुझे देखता है उसका वो भूल उससे याद आता है.

अब्ब तक वो मुझे आँख में आँख दाल कर नहीं dekhta...Najre चुराने की हर कोशिश करता है.

और तुझे ये प्यार दिख रहा है.

परशान आवाज में मेघा ने कहा.

नेहा:- तू इससे समझाती क्यों नहीं? तूने उससे माफ कर दिया.

मेघा:- बहुत पहले बता चुकी hun...Maine उससे माफ़ कर दिया hai...Lekin इस बात को वो बोझ के रूप में ले रहा है.

नेहा:- पता nahi...Kirti का प्यार का भूत कब उसके सर से हटेगा.

मेघा:- कई बार कोशिश कर चूका है प्यार से दूर भागने ki...Lekin बार बार घूम फिर कर वही आ जाता है.

नेहा:- बेवकूफ है ये Sumit...Jab जानता है की गलत राश्ते में जा रहा hai...Aur स्टडी में भी लोस्स होगा फिर भी?

मेघा:- दूसरों को ज्ञान देना आसान hai...Lekin कभी खुद को भी तो देख.

नेहा:- खुद पर? मई क्या बेवकूफी कर रही हूँ?

हैरानी में नेहा ने पूछा.

मेघा:- रोज कहती है तेरा ये मोबाइल का एडिक्शन तुझे पढ़ने नहीं deta...Har रात कसम खाती है की अगले दिन से मोबाइल नहीं chalayegi...Lekin? घूम फिर कर वही आ जाती hai...Aur कितना पढ़ती है? डेली 1 हर.

तुझे भी पता है मोबाइल का एडिक्शन तेरे लिए भी सही नहीं hai...Aur तेरा स्टडी लोस्स भी hoga...Fir क्यों?

इंसान सोचता तो बहुत कुछ hai...Lekin हर चीज कर नहीं paata...Kuch चीजें आदत बन जाती है.

मेघा की इस बात का कोई जवाब नहीं था नेहा के पास.

नेहा:- लेकिन तू इतना भड़क क्यों रही है? अच्छा अब्ब samjhi...Itna प्यार जो करती है सुमित se...Kuch भी बुराई नहीं सुन सकती.

नेहा ने हँसते हुए kaha...Megha ने भी हंस कर जवाब दिया.

नेहा:- अच्छा ये bata...Sumit से इतना प्यार क्यों करती है तू?

मेघा ने कुछ जवाब नहीं दिया.

नेहा:- उसका स्टाइल या फिर उसका akelapan...Aur सिम्पथी को तू प्यार सोच रही है.

मेघा:- अकेला तो है wo...Lekin उसका अकेलापन का इलाज सिम्पथी नहीं है.

बाकी तेरा sawaal...Kyu उससे मई इतना प्यार करती hun...Iss जवाब का पहला हकदार सुमित hi hai...Pehle ुई bataaungi...Fir किसी और को.

नेहा:- हाँ लेकिन वो तेरी ये बात सुने पहले उससे इस लायक तो bana...Kuch सोचा है?

मेघा:- बहुत pehle...Wo भी उसी टूर में जब सुमित ने कीर्ति को उसकी माँ की दवाई पर डांटा था. (मेघा की उस दिन की मुस्कान)

बस अब्ब एक्सेक्यूटे करना बाकी है.

Hello हीरो.

एक कोने में खड़ा सुमित ने जब ये सुना तो वो एक झूठी मुस्कान के साथ मुदा.

सुमित:- अरे मेघा तुम.

मेघा:- Haan...Lekin तुम यहाँ इस कोने में क्या कर रहे हो?

सुमित:- मन नहीं लग रहा tha...Sabhi रिजल्ट्स के बारे में बात कर रहे hai...Sabhi के अपने अपने अलग एक्सपेक्टेशंस है.

लेकिन mai...Mujhe पहली बार दर लग रहा है एग्जाम रिजल्ट्स से.

मेघा:- भला तुम्हे कब से मार्क्स की परवाह होने लगी?

सुमित:- मार्क्स की परवाह नहीं hai...Lekin पास फ़ैल की तो hai...Dar लग रहा है प्रैक्टिकल में कही फ़ैल न हो जाओ.

जिंदगी में तो फ़ैल hi hun...Abb यहाँ भी फ़ैल.

खुद से hi नफरत भरी आवाज में सुमित ने कहा.

सुमित:- बहुत लाचार महसूस कर रहा hun...Papa को भी क्या मुंह दिखाऊंगा.

इतना कह कर सुमित ने अपना मुंह घुमा लिया.

मेघा:- अच्छा आएगा result...Bharosha करो.

सुमित:- सिर्फ सुनने में अच्छा लगता है ये बात.

मेघा:- मुझे भरोषा है तुम पर.

सुमित:- गलत इंसान पर भरोषा कर रही ho...Aur मई पास होना डेसेर्वे भी नहीं करता.

थ्योरी नॉलेज अच्छा hai...Practical nahi...Waise भी न जाने कितने प्रैक्टिकल क्लासेज बंक किया hai...Fail hi डेसेर्वे करता हूँ.

उसके बाद सुमित का टर्न आता है रिजल्ट लेने के लिए.

और सुमित जब रिजल्ट ले कर आता है तो उसके चेहरे में हैरानी का भाव था.

मेघा उससे उसका रिजल्ट पेपर चीन लेती है.

मेघा:- कोंग्रटुलतिओन्स.

बेहद ख़ुशी में मेघा ने kaha...Jawaab में सुमित भी मुस्कुराया.

सुमित:- Ruko...Aata हूँ कुछ देर में.

मेघा:- लेकिन...

मेघा की बात ख़त्म होने से पहले hi सुमित वह से जल्दबाज़ी में कही चला gaya...Aur उसका कदम तभी रुका जब वो महेश सर (एनाटोमी वाले प्रोफेसर) के केबिन में पहुँच गया.

सुमित:- मई ी के इन सर?

डॉ. महेश:- यस के इन.

सुमित के अंदर आने के बाद.

डॉ. महेश:- हाँ Sumit...Kaho क्या बात है?

सुमित:- सर मई पास कैसे हो gaya...I मैं आपका विवा में भी पास hun...Mushkil से 1 या 2 आंसर दिया था मैंने.

सुमित की इस बात पर महेश सर मुश्कुराते है.

डॉ. महेश:- विवा का तो एक hi मीनिंग hai...Lekin अलग अलग लोग अलग इंटरप्रिटेशन निकालते है.

वैसे मेरे लिए बस ये स्टूडेंट्स का नॉलेज और कांसेप्ट चेक करने का एग्जाम hai...Aur उसी बेसिस पर मार्किंग करता hun...Lekin इस बार सोचा इससे मजे लेने का खेल बना लूँ.

सुमित:- सर थोड़ा और क्लियर बताइये.

डॉ. महेश:- पुरे 2 साल तुमने मेरा मजा liya...Kabhi आंसर को मजाक के रूप में तो कभी सीधा और आसान सवाल को घुमा फिर कर मुझे पूछ कर.

सोचा इस बार विवा में मई तुम्हारा मजा लेता hun...Yahi तो एक दिन है जब पूरा पावर एग्जामिनर के पास होता hai...Aur उस दिन तुम्हारा जो हाल किया उससे हिसाब बराबर.

अभी भी महेश सर के चेहरे में मुश्कान tha...Sumit अभी भी कुछ सोच रहा था.

सुमित:- सर क्या मई पास डेसेर्वे करता था?

डॉ. महेश:- ऑफ course...Jo तुमने 1-2 सवाल का आंसर दिया था सिर्फ वही सवाल तुम्हारे लेवल का tha...Baaki का क्वेश्चन मैंने अपने मजे लेने के लिए पूछ दिया.

सुमित ने अब्ब थोड़ा सुकून का सांस लिया.

डॉ. महेश:- देखो Sumit...Tum बहुत टैलेंटेड ho...Lekin बिलकुल केयरलेस और हार्डवर्क तो बिलकुल भी नहीं है.

पहली बार सुमित ने महेश सर के चेहरे में सीरियसनेस देखा.

डॉ. महेश:- कुछ टॉपिक्स है जिसमें बहुत अच्छा कॉन्सेप्ट है tumhara...Aur कुछ में बिलकुल भी नहीं.

सुमित:- सर वो पढ़ना बहुत hi बोरिंग लगता है.

डॉ. महेश:- ऐसा बिलकुल भी नहीं hota...Medical में तो बिलकुल भी nahi...Khair वो बात तुम धीरे धीरे समझ जाओगे.

क्या तुम बता सकते हो की तुम पढ़ाई में इतना इन्कन्सीस्टेन्ट क्यों हो?

इस सवाल में सुमित के चेहरे के भाव बहुत बार badla...Kabhi वो बताना चाहता था तो कभी नहीं.

डॉ. महेश:- थोड़ा बहुत समझ gaya...Especially तुम्हारा उम्र में ये सब कॉमन hai...Lekin ये भी मत bhulo...Jindagi आगे बढ़ता रहता hai...Buddhimaani इसी में है जितना जल्द इस सच को मान लो.

सुमित ध्यान से उनकी बात सुन रहा था.

डॉ. महेश:- अच्छा ये bataao...Tum बाद में क्या बनोगे?

सुमित:- न्यूरोसर्जन.

बहुत hi कॉंफिडेंट आवाज में सुमित ने कहा.

डॉ. महेश:- (विथ स्माइल) बहुत hi दूर का और बहुत hi टफ सब्जेक्ट का सोचा hai...Jaante हो कितना म्हणत करना पड़ेगा.

सुमित:- हाँ sir...Ye सपना है अब्ब mera...Aur मई अपने सपना पूरा करके hi rahunga...Kitna भी म्हणत क्यों ना करना पड़े.

सुमित ने इस बार भी आत्मा विश्वाश के साथ कहा.

डॉ. महेश:- अच्छा तो मई इससे hi अपना गुरु दक्षिणा मान लेता hun...Agar कभी मुझे ब्रेन का प्रॉब्लम हुआ बुढ़ापे में तो तुम्हारे पास hi आऊंगा.

सुमित:- अरे sir...Aap.

डॉ. महेश:- अगर हुआ to...Waise भी तुम जानते hi ho...Hamara body...Kab कहा क्या हो जाए कुछ पता नहीं चलता.

इतने सालो में पढ़ाने की एक संतुष्टि है की हर साल बहुत विद्यार्थी को अपने सब्जेक्ट में किसी लायक बनाया है.

तुम भी भरोशे पर खरा उतरना.

सुमित:- जी सर.

डॉ. महेश:- आल थे बेस्ट फॉर क्लीनिकल सब्जेक्ट्स.

सुमित:- थैंक यू सर.

फिर सुमित वह से निकल gaya...Raashte में चलते हुए बहुत से ख्याल आ रहे थे.

सुमित:- (इन हिज मंद) बस बहुत hua...Pyaar अपनी jagah...Padhaai अपनी जगह.

ये प्यार तो कभी भुला नहीं paaunga...Kirti की यादें तो आती रहेगी और तड़पाती rahegi...Lekin साथ hi मुझे अपने पढ़ाई पर भी ध्यान देना होगा.

भले hi दिल में कितना भी दर्द हो इसी दर्द से लड़ते हुए पढूंगा और आगे बढूंगा.

इस एग्जाम ने वैसे भी औकात दिखा diya...Confidence भी डाउन था की आगे कुछ होगा भी या nahi...Lekin सर से बात करने के बाद एक बार फिर लग रहा है कुछ कर सकता हूँ.

और करके hi रहूँगा.

यही सब सोचते हुए सुमित मेघा के पास पहुँच गया.

मेघा:- अच्छा तो ये बात है.

मेघा ने हँसते हुए कहा.

सुमित:- इस में हंसी की क्या बात है?

मेघा:- तुम और न्यूरोसर्जन?

सुमित:- हाँ तो.

मेघा:- कुछ ज्यादा hi सपना नहीं देख रहे हो?

मेघा जान बुझ कर सुमित को छिड़ा रही थी.

सुमित:- छोटा सपना है ये तो.

मेघा:- और बड़ा सपना? कीर्ति?

सुमित:- Nahi...Neurosurgeons का भी Scientist...Kuch ऐसे टेक्नोलॉजी डेवेलोप करू की न्यूरोलॉजी में बहुत से इम्प्रूवमेंट हो.

सुमित ने आत्मा विश्वाश के साथ कहा और इस बार मेघा और भी हैरान रह गयी.

मेघा:- कर पाओगे ये सब?

सुमित:- Koshish...Koshish तो karunga...Koshish से hi कुछ भी मुमकिन होता है.

सुमित का कॉंफिडेंट बढ़ता hi जा रहा था.

मेघा:- अचानक से ये सब?

सुमित:- अचानक से nahi...Kirti से दूर हुए 4 साल हो gaye...Hamesha आगे बढ़ना चाहता था लेकिन दिल का dard...Aage बढ़ने hi नहीं देता tha...Bas जिंदगी वही थम गया था.

अब्ब भी प्यार है कीर्ति se...Aaj भी दिल तड़पता है कीर्ति की याद mein...Lekin आगे भी तो बढ़ना padega...Iss टूटे हुए दिल के साथ hi आगे बढूंगा.

अगर आज आगे नहीं बढ़ा जब मौका है तो बाद में खुद को कोशने के अलावा कुछ बाकी नहीं rahega...Kirti से भी ज्याद ग़म मई खुद hi खुद को दे बैठूंगा.

प्यार अपनी जगह और फ्यूचर अपनी jagah...Agar किसी लायक बना तो शायद कीर्ति दोबारा मेरे पास आ जाए.

इस बार सुमित की आवाज में उम्मीद था.

मेघा भी ये सुन काफी खुश thi...Issi सुमित को तो वो देखना चाहती थी पिछले एक साल से.
 
अपडेट 60

ये मुस्कान की वजह?

कुछ देर से मेघा सुमित को hi नोटिस कर रही thi…Sumit अपने hi सोच में डूबा हुआ tha…Kabhi कभी वो मेघा की तरफ देख कर स्माइल कर रहा था.

सुमित:- तुम्हारे बारे में hi सोच रहा था.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- और क्या सोच रहे थे मेरे बारे में?

सुमित: यही की अगर तुम चाहो तो पेंगुइन को भी बर्फ बेच सकती हो. :lol1:

इस बार सुमित ने हँसते हुए कहा.

मेघा:- क्या मतलब?

सुमित:- एग्जाम में जस्ट पास होने वाले से पार्टी ले रही हो तो पेंगुइन को बर्फ बेचना कौन सी बड़ी बात है? :डी

मेघा इस बात पर सिर्फ मुस्कुराती है.

सुमित फिर अपने सोच में खो गया.

मेघा:- वैसे तुम्हे क्यों लगा अब्ब तुम्हे बदलना चाहिए?

सुमित एक नजर मेघा को देखता hai…Iss बार वो बहुत सीरियस था.

सुमित:- खुद से hi नफरत होने लगा tha…Jab भी आईना में खुद को देखता हूँ ऐसा लगता है दुनिया का सबसे बड़ा ह्य्पोक्रिटे मई hi हूँ.

हमेशा राज को यही बताता की प्यार में आर या पार का गेम khel…Yaa तो किसी तरह मनाने में कामयाब हो जा या फिर हमेशा के लिए प्यार को भूल jaa…Aise अपने वक्त और भविस्य बर्बाद मत kar…Aur जब बात मुझ पर आया तो मई तो एक लेवल और आगे निकल गया…3 साल बर्बाद कर दिया इस प्यार में.

जिंदगी में कभी सीरियस ना होने वाला सुमित आज दिन रात सीरियस रहता hai…Gham को अपने जिंदगी में मक्खी की तरह निकाल फेंकने वाला सुमित आज दर्द की समुन्दर में डूबता जा रहा है.

नशा और एडिक्शन से नफरत करने वाला सुमित आज खुद एडिक्ट hai…Ek दिन बिना सिगरेट के रह नहीं paata…Jab भी दारु सामने होता है खुद को रोक नहीं paata…Agar छोड़ने की सोचता भी हूँ तो विथड्रावल सिम्पटम्स कुछ पल भी चैन से जीने नहीं deta…Na जाने कितनो का नशा छुड़वाया hai…Lekin खुद पर?

क्या हुआ करता था मई और क्या हूँ आज? एक हारा हुआ, लाचार और निकम्मा nashedi…Khud को hi गाली देने का मन करता है.

पापा का सपना है की मई बाद में इतना काबिल डॉक्टर बनूँगा जो लोग का हर एक बीमारी का इलाज karunga…Lekin उन्हें क्या pata…Unka hi बीटा कैंसर, सिरोसिस और कपड़ जैसे बीमारी का शिकार बन जाएगा.

माँ रोज फ़ोन में पूछती है की रात और दिन के खाने में क्या खाता hun…Padhai से वक्त निकाल कर अपना ख्याल रखता हूँ या nahi…Har बार झूठ बोलना पड़ता hai…Kya जवाब दूँ मई? खाना काम नशा में ज्यादा व्यस्त रहता hun…Aur जिस पढाई से वक्त निकालने की बात करती है वो उन्हें क्या पता पिछले एक साल में एक बार भी किताब को नहीं छुआ.

और Rashmi…Jo हमेशा मुझे कॉंफिडेंट और विनर के रूप में जानती hai…Ashliyat जानेगी तो पता चलेगा मई कितना बड़ा लूज़र हूँ.

और मेरा दोस्त Ashish…Jo हर वक्त मेरे साथ खड़ा रहता hai…Mujhe पहले की तरह देखने के लिए क्या कुछ नहीं karta…Usse भी पता नहीं उसका ये लड़ाई मेरे लिए कब तक चलने वाला है.

साथ देने वाले लोग तो बहुत hai…Lekin मई hi हूँ जो सभी को निराश करता जा रहा हूँ.

ऐसा मई बिलकुल नहीं tha…Megha तुम मुझे जानती थीं ा कॉलेज की शुरूआती दिनों में?

मेघा:- हाँ.

सुमित:- हाँ वैसा hi हुआ करता था mai…Nahi नहीं उससे भी accha…Pehle जैसा था वैसा hi tha…Naa hi कोई एक्टिंग और ना hi किसी को धोखा देने की प्लानिंग.

लेकिन अब्ब? अब्ब जो सुमित को मई देख रहा हूँ उससे तो मई खुद भी नफरत करता hun…Bas छुटकारा नहीं पा रहा हूँ.

कब तक खुद को और अपनों को धोखा देता रहूँगा? प्यार बहुत जरुरी hai…Shayad hi कभी अपने प्यार को भुला paau…Lekin अपने जिम्मेदारी? उससे कैसे भूल सकता हूँ.

बहुत मुश्किल hai…Lekin आगे बढ़ना hi है मुझे.

सुमित की आवाज में कभी दर्द, नफरत और लाचारी था लेकिन आखिरी बात में आत्मविश्वाश.

मेघा:- क्या ये आसान होगा तुम्हारे लिए?

सुमित:- इस कोशिश को जिद्द का रूप दूंगा.

मेघा:- अब्ब उसी सुमित को देख रही हूँ जिससे मई जानती हूँ.

सुमित इस बात पर मुस्कुराता hai…Aur फिर सीरियस हो कर.

सुमित:- तुम ये मत समझना की मई तुम्हारा सिम्पथी लेना चाहता hun…Bas कभी कमजोर महसूस करता हूँ तो ऐसे hi कुछ भी बोल देता हूँ.

मेघा:- नहीं nahi…Aise हालात में hi तो दोस्त काम आते hai…Kuch मिले ना मिले मोटिवेशन जरूर मिलता है. :डी

अभी तक सुमित और मेघा दोनों hi नाश्ता ख़त्म कर चुके था या यूँ कहे की सुमित का ये मेघा के लिए पार्टी ख़त्म हो चूका था.

कैंटीन से बाहर निकलते hi.

मेघा:- दोस्त के रूप में हमेशा साथ rahungi…Kabhi जरुरत पड़े तो याद कर लेना.

सुमित:- जरूर. :)

फिर दोनों अपने अपने हॉस्टल की तरफ जाते है.

सुमित:- (इन हिज मंद) तुम तो हमेशा साथ रहती ho…Bas मई hi हूँ की कभी कभी तुम्हे फेस करने की हिम्मत नहीं कर पाटा.

और सुमित जब अपने रूम में पहुँचता है.

राज:- Bhaiya…Kuch बात करनी है आपसे?

राज कुछ ज्यादा hi सीरियस था इस बार.

सुमित:- Haan…Bol.

राज:- इस बार आपके पापा से झूठ नहीं बोल पाया.

थोड़ा बहुत सुमित समझ गया.

राज:- आपका हालत मुझसे देखा नहीं जा रहा hai…Maine hi उन्हें बता दिया आपका नशे के बारे में.

कुछ देर के लिए तो सुमित को बहुत गुस्सा aaya…Lekin कुछ देर मई खुद hi शांत हो गया.

सुमित:- गलत नहीं किया tune…Mai खुद बताना चाहता tha…Lekin हिम्मत नहीं कर पा रहा tha…Aaj नहीं तो कल उन्हें पता चल hi जाता.

राज:- भैया आप को ऐसे देख नहीं पा रहा tha…Har बीतते दिन के साथ आपका नशा भी बढ़ता जा रहा tha…Naa hi आप पढ़ाई पर ध्यान दे रहे thhe…Uncle को बताना hi सही लगा.

थोड़ा डरते हुए राज ने कहा.

सुमित:- कोई बात नहीं.

कुछ सोचते हुए सुमित ने kaha…Ek दर भी लग रहा था की उसके पापा कैसे रियेक्ट करेंगे और वो कैसे पापा का सामना कर पायेगा.

राज:- कल से आपको घर में शिफ्ट होने का कहा है उन्होंने.

ये सुनते hi सुमित का दर और भी बढ़ gaya...Wo hi जानता था उसके पापा नशा से कितना नफरत करते है.
 
अपडेट 61

तेरा रूम सेट करवा दिया है? अभी jaa...Jaa कर आराम kar...Dinner के वक्त निचे आना.

थोड़ा सख्त आवाज में सुमित के पापा ने kaha...Paas hi मई उसकी माँ और बेहेन भी thhe...Dono सुमित से बातें करना चाहते thhe...Lekin सुमित की पापा की इस बात के बाद दोनों चुप रहे.

सुमित भी अपने पापा की तरफ देखता hai...Unka गुस्सा देख नजरे झुका कर अपने रूम में चला जाता है.

डिनर टाइम

आ गए डॉक्टर साहब?

व्यंग भरी आवाज में सुमित के पापा ने कहा.

स. डैड:- बैठिये.

सुमित भी कुछ बोले बिना बैठ गया.

स. डैड:- खाना यही खाएंगे या फिर कुछ स्पेशल अरेंजमेंट karwaau...Daaru और सिगरेट की?

सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.

स. डैड:- कुछ ड्रग्स भी लेता है? अगर हाँ तो वो भी बता दे.

इस बार गुस्से में उन्होंने पूछा.

सुमित:- नशेड़ी बनने का शौख नहीं hai...Kabhi कभी दारु, सिगरेट पी लेता हूँ ग़म भुलाने के लिए.

दर्द भरी आवाज में सुमित ने कहा.

स. डैड:- ग़म भुलाने के liye...Aisa क्या ग़म हो गया तुझे इतने से उम्र में?

घर का खर्च मई उठाता hun...Din भर काम में मई जाता hun...Ghar में सभी का मांग और इच्छा पूरा करने के लिए जरुरत से ज्यादा काम मई करता hun...Duniya वालों का सामना भी मई करता हूँ.

और तेरा काम क्या hai...Padhna और सिर्फ padhna...Abb ये भी तुझे ग़म लगने लगा.

सुमित:- वो ग़म नहीं है.

अपने पापा के गुस्सा के सामने इतना hi बोल पाया सुमित.

स. डैड:- तो फिर क्या ग़म है?

सुमित बोलना तो चाहता था लेकिन बोल नहीं पा रहा था.

स. डैड:- लव फेलियर?

सुमित हाँ में सर हिला देता hai...Aur इसी के साथ सभी की नजरे सुमित पर hi रुक जाता hai...Sabhi को सवाल थे सुमित से.

सुमित की पापा भी चुप hi रहे कुछ पल के लिए.

स. डैड:- जिस चीज का दर था वही hua...Aaj कल के बच्चों को देखता hun...Jabardasti के प्यार के चक्कर में पड़ना चाहते है.

जिस उम्र में जिंदगी का शुरुवात भी ढंग से नहीं होता उसी उम्र में ये बच्चे सोचने लगते है जिंदगी बीत रहा है और अभी तक इन्हे इनका प्यार नहीं milaa...Jindagi अधूरा है इनका.

जिस उम्र में पढ़ लिख कर कुछ बनना chahiye...Uss उम्र में इनका अलग hi कम्पटीशन होता hai...Kisko पहले रिलेशनशिप नसीब hoga...Kaun ज्यादा गिर्ल्फ्रेंड्स बनाएगा?

आज कल देख रहा हूँ प्यार नहीं मिला तो कोई अपना जान दे देता hai...Koi नशेड़ी बन जाता hai...To कोई रिजेक्ट होने के गुस्से में लड़की के साथ hi गलत कर देते है.

क्या ज़माना आ गया है ये?

पहले तुझे देख कर लगता था तू इन् सब चीजों से दूर hai...Lekin तू भी उनमे से hi एक निकला.

निराश आवाज में उन्होंने कहा.

सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.

सुमित के पापा भी अब्ब चुप हो गए.

स. माँ:- कौन है वो लड़की?

सुमित:- कीर्ति.

ये सुनते hi फिर से सब हैरान रह gaye...Sabse ज्यादा रश्मि.

रश्मि:- लेकिन कीर्ति ने तो मुझे कभी बताया नहीं.

सुमित:- उससे मुझसे प्यार है hi नहीं तो क्या बताएगी?

स. डैड:- सुरु से ले कर अब्ब तक जो भी हुआ सब बता.

फिर सुमित सब कुछ बता देता है.

स. माँ:- इतना सब कुछ हो गया और तूने हमे कुछ भी बताना सही नहीं समझा.

सुमित:- बता कर आप लोगों को परेशान नहीं करना चाहता tha...Ye ग़म खुद तक hi रखना चाहता था.

सुमित फिर अपने पापा की तरफ देखते hai...Unke होंठो में मुस्कान था लेकिन चेहरे में दर्द.

स. डैड:- ये bacche...Sochte है की ये बहुत समझदार hai...Hume दर्द होने नहीं denge...Inhe लगता है इनका दर्द बहुत बड़ा दर्द hai...Hum लोग सुनेंगे तो सेह नहीं paayenge...Itna बड़ा दर्द है इनका.

इतना कह कर वो चुप हो गए.

स. माँ:- कभी अपने पापा की उम्र की जगह और उनके उम्र के बराबर होगा तो समझेगा.

जो तू अपना अकेला का दर्द नहीं सेह पा रहा hai...Wo अपने साथ साथ 4 लोगों की जिंदगी के लिए लड़ रहे है.

कभी सोचा है परिवार होने के बाद अपने कितने इच्छा ख्वाहिश कुर्बान करना पड़ता hai...Apni ख्वाहिश को कुचल कर वो हमारे डिमांड पूरी करते है और उसी में खुश हो जाते है.

काम से वापस आने के बाद भी रोज यही सोच में आधा रात बीत जाता है की अपने बच्चों की अच्छे पढ़ाई के लिए आगे क्या kare...Abhi पढाई फिर बाद में shaadi...Hajaar तरह के सोच आते रहते hai...Utna hi टेंशन और उतना hi परेशानी.

लेकिन तुम दोनों की पढाई में कोई प्रॉब्लम ना हो इस लिए ये बात बताते भी nahi...Tujhe पता है तेरा मब्ब्स ज्वाइन करने के बाद तेरे पापा ने कितना लोन लिया है?

ये बात सुमित के लिए शॉकिंग था.

सुमित:- Loan...Lekin किस बात की? मई तो फुल स्कालरशिप में पढ़ रहा हूँ.

स. माँ:- कॉलेज स्कालरशिप देते है सिर्फ पढाई के liye...Baaki की खर्च? हॉस्टल की, खाने ki...Personal लाइफ ki...Books, कपीस और स्टडी मैटेरियल्स की?

और जो कोर्स पढ़ रहा है वह के अधिकतर स्टूडेंट्स की लाइफस्टाइल बहुत अच्छा होता hai...Unke सामने ज्यादा पीछे ना रह जाए उसके लिए इतना कर रहे है.

सुमित ये बात सोचता रह gaya...Kuch देर के बाद वो बोलै.

सुमित:- आगे से जरुरत से खर्च करूँगा.

स. डैड:- खर्च करने से किसने मन किया है? मेरा कमाया जो भी है वो तुम दोनों के लिए hi hai...Jitna खर्च करने का मन हो पढाई में उतना kar...Lekin नॉलेज में असर दिखना चाहिए.

बात ये नहीं है की मई तुम दोनों की पढाई या फिर परवरिश से परेशान hun...Ye फ़र्ज़ है मेरा.

और तेरा फ़र्ज़ है बिना किसी परेशानी के अच्छे से पढ़ लिख कर किसी लायक बन jaa...Aur जब तू उसी फ़र्ज़ से भटक रहा है तब बुरा लग रहा है.

सुमित को अब्ब और भी एहसास हो रहा था पिछले दो साल से वो क्या करता जा रहा था.

स. माँ:- और पता है चखे 2 महीना पहले से तेरे पापा हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर) का दवाई ले रहे है.

ये बात सुमित को एक झटका सा लगा.

सुमित:- आपने बताया क्यों नहीं?

स. डैड:- अभी उतना सीरियस नहीं hai...Socha इतनी सी बात के लिए तुझे क्यों परेशान करू.

वैसे भी दवाई के साथ साथ खाना पीना का भी ख्याल रख रहा हूँ और साथ hi एक्ससरसीसे भी.

इतना व्यस्त रहने के बाद भी इन् बातों का ख्याल रलह रहा hun...Aur तू?

हमेशा गर्व होता था तुझे देख kar...Ye नहीं पता था की मई अपना बीमारी दूर करने के लिए खाना पीना मई इतना सीरियस हूँ और तू जान बुझ कर बीमार होने के लिए जहर का सेवन कर रहा है.

सुमित आत्मग्लानि में कुछ बोल भी नहीं पा रहा tha...Bolne के लिए भी उसके पास कुछ नहीं था.

स. डैड:- अब्ब तो मुझे hi लगने लगा है की मेरा hi गलती है की तू आज इस हाल में hai...Pehle hi इतना छूट नहीं देना चाहिए tha...Lekin 2 साल पहले का सुमित देख खुद धोखा खा गया tha...Sochta था समझदार है tu...Rabhi से इतना छूट नहीं देना चाहिए था.

हॉस्टल जाने की बात किया तब सोचा दोस्तों के बिच रह कर अच्छे से padhega...Lekin क्या पता था ये काण्ड करता है तू हॉस्टल में.

जब 3 हफ्ते के लिए टूर गया पढाई का बहाना बना कर तो सोचा पढाई से ब्रेक ले कर घूमना चाहता hai...Acchi बात है.

सच में सुमित बहुत निराश हु मई.

सुमित:- पापा हालात hi ऐसा था की मई....

स. डैड:- हालत की वजह से प्यार हो गया चल सही hai...Umar hi ऐसा hai...Nayi चीज और नयी एहसास हमेशा hi आकर्षित होता hai...Upar से होर्मोनेस का asar...Dil टूटने का दर्द भी नार्मल hi है.

लेकिन दिल टूटने के बाद नशा करने लग जाना? अपने hi जिंदगी बर्बाद कर dena...Ye कैसे सही हो सकता है?

इस बार उनकी आवाज में गुस्सा tha...Sumit भी अब्ब कुछ नहीं बोल पाया.

कुछ देर में सब डिनर ख़त्म कर चुके थे.

स. डैड:- थका होगा aaj...Jaa जा कर सू जा.

सुमित उठ कर जाने hi वाला था की.

स. डैड:- टेबल में उस प्लास्टिक में तेरे लिए कुछ रखा है वो भी लेते जा.

सुमित ने जब प्लास्टिक में चेक किया तो अंदर का सामान देख उसका हैरानी का कोई सीमा नहीं था.

एक बोतल बियर और कुछ सिगरेट्स के पैकेट्स थे.

सुमित:- ये...

स. डैड:- हाँ तेरे लिए hi hai...Addict बन चूका hai...Mai भी जानता हूँ एक दम से छूटेगा नहीं ये आदत.

हम से छुप कर और भी पीना चालु कर dega...Isse अच्छा हमारे जानकती में hi थोड़ा पी ले.

और वादा कर धीरे धीरे ये आदत छोड़ देगा.

ये सुन सुमित ने दारु को छोड़ अपने पापा के पेअर में गिर गया.

सुमित:- पापा मुझे पीना hi नहीं hai...Mai भी तंग आ चूका हूँ नशा se...Bas छूट नहीं रहा hai...Kisi तरह ये आदत छुड़वा dijiye...Chahe किता भी मारिये, पीटीए लेकिन इस आदत से छुटकारा dilaiye...Mai भी नहीं जीना चाहता हूँ इस दलदल में.

इस बार सुमित के आवाज में दर्द के साथ आँखों में आंसू भी था.

सुमित की इस पश्चाताप देख वह मौजूद सभी के आँखों में कुछ बून्द आंसू छलक गए.
 
अपडेट 62

अब्ब तू बच्चा भी तो नहीं है की मार पीट कर सही गलत सिखौ.

अब्ब तो खुद समझदार है की सही और गलत समझ सके.

सुमित के पापा ने सुमित को उठा कर कहा.

सुमित:- वादा करता हूँ पापा जल्द hi ये आदत छोड़ दूंगा.

अजीब सा एक्सप्रेशन था सुमित के चेहरे mein...Yaa फिर कह सकते है बहुत से मिला जुला expressions...Sharmindagi ki...Khud से hi गुस्से की और एक जुंग जितने की जज़्बात की.

स. डैड:- यही सुन्ना चाहता tha...Chal सही है खुद तुझे अपने गलती का एहसास हुआ.

वर्ण जब कोई गलत राश्ते की और जाने लगता है उससे वही सही लगने लगता hai...Khud hi सही बाकी सब गलत... और मई तुझे रोकने की कोशिश करता तो मुझे hi अपने दुश्मन की रूप में देखने लगता.

बात समझना तो दूर चुप चुप कर उसी राश्ते की और बढ़ता तू.

खैर तुझे एहसास हुआ यही बड़ी बात है.

सुमित:- आपके बातों का कभी बुरा माना है मैंने?

स. डैड:- अगर मेरा इतना hi फ़िक्र होता तो ये सब नशा करता hi क्यों?

सुमित इस बात पर फिर चुप हो गया.

स. डैड:- ये kya...Kabhi कहता है पहले जैसा बनेगा और फिर ये लटका हुआ chehra...Mera सुमित इतना सीरियस कभी नहीं होता था.

सुमित के पापा हँसते हुए बोले.

सुमित:- सोच लीजिये.

स. डैड:- क्या सोचु?

सुमित:- अगर पहले जैसा बन गया तो बात बात पर परेशान हो जाएंगे आप.

इस बात पर सुमित के पापा को थोड़ा सा पुराना सुमित का झलक dikha...Filhaal यही बहुत था उनके लिए.

स. डैड:- Accha...Aisa लगता है तुझे? भूल मत बाप हूँ tera...Abb पता चलेगा मई क्या चीज हूँ? वो तो तुझे बच्चा समझ कर छोड़ देता था.

सुमित:- टिपिकल एक्सक्यूज़. :लाफिंग:

इस बात पर सुमित के पापा भी सिर्फ मुस्कुराते है.

ात नाईट

बहुत दिनों बाद सुमित को 10 बजे hi नींद लग रहा tha...Warna रात के 2 , 3 बजे तक तो उसका नींद उड़ा hi रहता था.

कल की सुबह से नयी शुरुवात करने का सपना देख वो गहरा नींद में डूब गया.

आज भी गजब की स्टैमिना है आप में?

सुबह जॉगिंग में दौड़ रहे सुमित ने पापा से कहा.

स. डैड:- उम्र भले hi बुढ़ापे की और ले जा रहा hai...Lekin शरीर से तो अभी भी जवान हूँ.

सुमित:- ग़लतफहमी नाम के शिकारी से आप भी बच नहीं पाए.

स. डैड:- Galatfehmi...Chal अभी तुझे हकीकत की दरहन करवाता हूँ.

सुमित:- वो कैसे?

स. डैड:- इस जॉगिंग में मुझसे ज्यादा टिक कर बता.

फिर सुरु होता है दोनों में race...Jo कुछ देर तक तो बराबरी में चल रहा था लेकिन फिर सुमित की ताकत ने जवाब दे दिया.

स. डैड:- अब्ब बोल ग़लतफहमी का शिकार कौन है?

सुमित:- वो तो बहुत दिनों के बाद जॉगिंग के लिए निकला हूँ इस वजह से.

हाँफते हुए सुमित ने जवाब दिया.

स. डैड:- और इससे कहते है अटीपिकल एक्सक्यूज़.

सुमित:- मौका मिलते hi मेरा डायलाग मुझ पर.

स. डैड:- डायलाग बाज़ी में भी तेरा बाप हूँ.

सुमित:- वो तो दिख रहा है.

स. डैड:- लेकिन मुझे कुछ और दिख रहा है.

सुमित:- क्या?

स. डैड:- तेरा ये motaapa...Daaru पी पी कर और सुस्त जीवन से कैसा बॉडी बना लिया है.

सुमित:- अब्ब क्या कर सकते है.

स. डैड:- क्या कर सकते है? म्हणत करना पड़ेगा.

सुमित:- वो बहुत बोरिंग लगता hai...Iss में कोई शॉर्टकट नहीं है क्या?

स. डैड:- म्हणत में कोई कोम्प्रोमाईज़ nahi...Chaahe वो पढाई हो या अपने शरीर में.

सुमित:- आपका ये उपदेश याद rakhunga...Lekin आज के लिए बस इतना hi...Bahut थक गया हूँ.

स. डैड:- अच्छा jaa...Sirf आज के लिए थोड़ा कोम्प्रोमाईज़ hai...Kal से नहीं.

फिर सुमित धीरे धीरे चलते हुआ अपने घर की और बढ़ गया.

Hi ब्यूटी क्वीन :डी

सामने मेघा को देख कर यही बात सुमित के ख्याल में aaya...Aur ये दिल की बात जुबान में लाने से किसी तरह रोक लिया उसने.

"नहीं अब्ब और ये वाला मजाक नहीं." ये बात सोच कर सुमित ने कहा.

सुमित:- Hello.

मेघा हैरानी से सुमित को घूर रही थी.

सुमित:- क्या हुआ?

मेघा:- तुम और कॉलेज?

सुमित:- हाँ to...Admission लिया hai...College आने का हक़ है.

मेघा:- वो तो hai...Lekin तुम्हारे गिनती कॉलेज में अस ा टूरिस्ट स्टूडेंट रूप में होता है.

सुमित:- टूरिस्ट स्टूडेंट? अब्ब डिक्शनरी में कौन से नए शब्द जोड़ दिया किसी ने?

मेघा:- तुम्हारा अटेंडेंस ऐसा है की तुम स्टूडेंट काम टूरिस्ट ज्यादा लगते ho...Aur कॉलेज तुम्हारे लिए कॉलेज काम टूरिस्ट स्पॉट ज्यादा है.

सुमित:- हाँ वो तो hai...Aur किसी महान व्यक्ति ने कहा था अटेंडेंस में क्या रखा है?

मेघा:- और वो महान व्यक्ति तुम hi हो.

सुमित:- समझदार हो गयी ho...Aakhir सांगत का असर है.

मेघा:- आज कुछ अलग दिख रहे ho...Kal तक तुम्हारा जो सदा हुआ चेहरा रहता था उसमें कुछ जान आ गयी है.

सुमित फिर कक रात से आज सुबह तक घर की बातें मेघा को बता देता hai...Megha की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं tha...Jis सुमित को बदलने की सपना वो एक साल से देख रही थी वो आज जा कर पूरा हुआ.

मेघा:- वो सुमित क्या सुमित जो नशे में ना रहे?

हँसते हुए मेघा ने पूछा.

जवाब में सुमित सिर्फ मुस्कुराया.

मेघा:- लेकिन तुम्हे आज कॉलेज में देख वो भी 3रद ईयर के 1सत डे में सच में हैरानी हो रहा है.

सुमित:- हैरानी तो होती रहती hai...Agar मई कल कॉलेज छोड़ दूँ तो वो भी एक हैरानी भी होगा.

सुमित की यही बात मेघा को हैरान करने के लिए काफी था.

सुमित:- हो गयी न hairaan...Abb ऐसा कोई प्लान नहीं hai...Surgery का 1सत क्लास hai...Miss नहीं करना चाहता.

मेघा:- सर्जरी से याद aaya...Mera भी 1सत क्लीनिकल रोटेशन सर्जरी का hi है.

सुमित:- कोंग्रटुलतिओन्स.

मेघा:- किस बात की.

सुमित:- बाद में कोई डॉ. सुमित थे मोस्ट फेमस न्यूरोसर्जन की बात करे तो तुम गर्व के साथ कह सकती हो की तुमने भी सर्जरी मेरे साथ hi पढ़ा है. :स्मार्त्य:

मेघा:- कुछ ज्यादा hi नहीं सोच रहे हो?

सुमित:- अब्ब तो सोच बड़ा hi rakhunga...Wo कहते है न "सिंपल लिविंग हाई थिंकिंग"

मेघा:- तुम और सिंपल लिविंग?

सुमित:- बस कुछ दिन aur...Jab से दारु सिगरेट छोड़ दूंगा तब से दाल रोटी और चावल hi खाऊंगा.

मेघा:- कुछ भी?

सुमित:- कुछ भी नहीं khaunga...Sirf दाल, रोटी और चावल. :डेड:

मेघा:- अच्छा चलो क्लास का टाइम हो गया hai...1st डे hi लेट होना अच्छी बात नहीं है.

सुमित:- अपशगुन होता है क्या?

मेघा इस बात पर सिर्फ सुमित को घूरती है.

दोनों फिर सर्जरी के क्लास में चले जाते है.

आफ्टर कॉलेज

सुमित:- तुम्हारा चेहरा लटका क्यों है?

मेघा:- आसमान से गिरे खजूर पर latke...Yahi फील हो रहा है?

सुमित:- और वो क्यों?

मेघा:- 1सत और 2ंद ईयर में एनाटोमी और पैथोलॉजी ने हालत खराब कर दिया tha...Abb बाकी के काम सर्जरी और मेडिसिन पूरा कर देंगे.

मेघा की उस बात पर सुमित को भी हंसी आया.

सुमित:- असली खेल तो अब्ब सुरु हुआ hai...MBBS का मीनिंग hi है बैचलर ऑफ़ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ़ सर्जरी.

मेघा:- और फिर भी तुम चिल हो?

सुमित:- और नहीं तो kya...Ek हाथ से सर्जरी करूँगा दूसरे से मेडिसिन.

मग्गा को सुमित की इस कॉन्फिडेंस पर हैरानी बहुत हो रहा था लेकिन वो कुछ नहीं बोली.

जब उसने सुमित की तरफ देखा तो सुमित का चेहरा उतरा हुआ tha...Bilkul ना खुश नजर आ रहा था वो.

मेघा:- अब्ब तुम्हे क्या हुआ?
 
अपडेट 63

मेघा:- अब्ब तुम्हे क्या हुआ?

सुमित:- बस आज के क्लास se...Jaisa सोचा था वैसा नहीं था.

मेघा:- तुम तो कहते थे आसानी से पढ़ लोगे.

सुमित:- कुछ ज्यादा hi आसान है.

मेघा:- मतलब? :हम्म:

सुमित:- सोचा था सर्जरी का क्लास hai...Kuch सर्जरी वेर्गेरी करने को milega...Lekin सर्जरी तो दूर की बात है सिर्फ प्रोसेदूरेस का नाम hi पढ़ने को mila...Aur कुछ अजीबो गरीब दिखने वाले इंस्ट्रूमेंट्स. :वेरिसद:

सुमित को ऐसे देख मेघा को हंसी आ गया.

मेघा:- तो क्या सोचा था पहले दिन hi नेउरसुरजों बन जाओगे :lol1:

सुमित:- वक्त लगेगा जानता hun...Lekin इतना ज्यादा वक्त लगेगा ये पता नहीं था.

मेघा:- तुम hi तो कहते थे इंतजार का फल मीठा होता है.

मेघा अभी भी सुमित की मजे ले रही थी.

सुमित:- ऐसा कब कहा मैंने?

मेघा:- कभी तो कहा hai...Lekin याद नहीं आ रहा है.

सुमित:- नहीं ऐसा डायलाग कभी नहीं कह सकता हूँ मई.

मेघा:- इतना यकीं?

सुमित:- हाँ अब्ब ये डायलाग कुछ ख़ास नहीं raha...Bacche बच्चे बोलते hai...Mera डायलाग है तो कुछ यूनिक होना चाहिए.

मेघा:- Unique...Hmm...Yaad आया सुमित सफस.

ये सुनते hi सुमित कुछ पल के लिए चुप हो गया.

सुमित:- काहे की SFS...Abb एसबीएस bolo...Straight बैकवर्ड सुमित...4 साल से एक hi जगह अटका हुआ hun...Yaa फिर कहो कागि पीछे छूट गया हूँ.

एक अलग hi इर्रिटेशन था सुमित की आवाज mein...Abb मेघा भी मजाक के मूड से बाहर आ गयी.

मेघा:- पीछे रह गए हो? ये किसने कह दिया.

सुमित:- खुद ne...Mujhe सबसे अच्छे से मई hi जानता हूँ.

मेघा:- अभी भी अच्छे से खुद को नहीं जान पाए हो.

सुमित:- और वो कैसे?

मेघा:- अभी तुम आगे बढ़ने की सोच तो रहे हो naa...Aur आगे बढ़ भी रहे ho...Abhi के लिए ये भी बहुत है.

सुमित:- बढ़ तो रहा hun...Lekin कछुआ की रफ़्तार से.

मेघा:- भूलो mat...Agar अपना मंजिल की और दृढ निश्चय के साथ आगे बढ़ोगे तो इसी रफ़्तार से अपने उस मंजिल को हासिल कर लोगे जो बहुत से केयरलेस खरगोश अपने घमंड में हासिल नहीं कर सकते.

सुमित:- ये कछुआ और खरगोश की कहानी और सच्चा pyaar...Abb तो कहानी में hi अच्छा लगता है.

मेघा:- हर बात को इतना नेगटिवेली क्यों लेते हो?

सुमित:- सच है ye...Bhale hi कड़वा hai...Lekin सच से दूर भागने की जगह अब्ब इसको स्वीकार कर रहा हूँ.

सुमित:- (इन हिज मंद) तुम्हारे सामने और लूज़र बनना नहीं चाहता hun...Lekin अभी positivity...Wo दूर दूर तक दिख नहीं रहा hai...Bas किसी तरह ये वक्त निकल जाए और काश पहले की तरह कॉंफिडेंट और स्ट्राइटफॉरवर्ड बन saku...Kabhi कभी तो खुद से नफरत होता है की इतना नेगेटिव क्यों बन गया हूँ?

मेघा:- और भूलो mat...Jitne भी गलतियां करोगे वो भी यही सिखाएगा की आगे से ये गलती नहीं करना hai...Jab जागो तब sabera...Khone के लिए कुछ नहीं है अब्ब और पाने के लिए बहुत कुछ.

आखिर के वो line...Sidha सुमित के दिमाग़ में असर कर गया.

फिर कुछ देर बात करने के बाद.

सुमित:- अच्छा चलता हूँ.

फिर मेघा हॉस्टल चली जाती है और सुमित अपना घर.

ात डिनर टाइम

स. डैड:- चल बता आज की अपडेट?

सुमित:- अपडेट किस बात की?

स. डैड:- सिगरेट और दारु की काउंट.

सुमित:- 8 सिगरेट्स और दारु आज पिया नहीं है.

8 सिगरेट्स की बात सुन्न कर सभी को बहुत हैरानी हुआ.

स. डैड:- और कल तक कितना पीटा था?

सुमित:- 30 के आस पास सिगरेट्स और दारु 1 पेग से 1 बोतल तक.

स. माँ:- इतना ज्यादा?

वो सुमित को डरते हुए देखती hai...Sumit इस बार कुछ नहीं बोलता.

स. डैड:- ये भी काम hi hai...Aise हालात को मैंने भी देखा है.

इस बार सुमित की पापा भी काफी सीरियस हो कर बोले.

स. माँ:- ऐसे हालात? मतलब आप भी पीते थे? मुझे तो कभी पता नहीं चला.

स. डैड:- अरे नहीं nahi...Mera एक दोस्त था ऐसा hi...Din भर नशे में hi रहता था.

सुमित की माँ तो चुप हो गयी लेकिन सुमित को पापा की बात पर कही न कही शक हो गया.

वो अपने पापा से भले hi कितना भी क्लोज tha...Lekin उनके अतीत से बिलकुल hi अनजान था.

जल्द hi पापा से इस बारे में बात करने का उसने मन बना लिया.

रश्मि:- 30 hi क्यों? हाफ सेंचुरी पूरा कर लेते.

सुमित:- उस में तो तेरा कॉपीराइट hai...Daily 50 चुगली करने की कॉपीराइट. :लाफिंग:

सुमित की इस बात पर रश्मि अपना मुंह घुमा लेती hai...Uske माँ और पापा दोनों अभी भी सीरियस दिख रहे थे.

स. माँ:- अपना सेहत का तो सोच.

सुमित:- उसी लिए तो छोड़ रहा हूँ ये सब.

सुमित ने किसी सोच में डूब कर ये जवाब दिया.

सुमित:- (इन हिज मंद) सिगरेट में कपड़ का दर तो नहीं है फिलहाल लेकिन लंग कैंसर. और अल्कोहल से लिवर सिरोसिस.

इस सोच ने सुमित को अंदर तक हिला दिया.

सुमित:- (इन हिज मंद) पहले hi इतना लेट हो चूका hun...Abb और nahi...Dhire धीरे सभी नशे से दूर होने के बाद अपना हेल्थ चेकउप करवाऊंगा.

काश ज्यादा देर ना हुआ हो. :प्रे:
 
अपडेट 64

आज सुमित ऐसे hi फ्रेश होने छत पर गया tha...Waha पर बैठे अपने पापा को देख थोड़ा हैरानी भी हुआ.

सुमित:- आप वह?

स. डैड:- हाँ ऐसे hi.

सुमित:- ऐसे hi? ऐसा तो नहीं lagta...Kuch सोच में दिख रहे है?

इस बात पर सुमित के पापा थोड़ा मुश्कुराते हैं.

स. डैड:- उम्र hi अब्ब ऐसा hai...Thoda बहुत सोचना पड़ता है.

सुमित:- और वैसे भी आप तो सोचते hi रहते है?

स. डैड:- बिलकुल galat...Jarurat से ज्यादा कभी कुछ नहीं सोचता हूँ.

सुमित:- तो फिर बता hi दीजिये आज का soch...Mujhe भी तो पता चले आप के सोच में क्या क्या बातें आते है? आपके और आपके जनरेशन के सोच से बिलकुल hi अपरिचित हूँ.

स. डैड:- उसके लिए कभी अपने बाप के लिए भी वक्त निकालना पड़ता hai...Abb लड़कियों के चक्कर में रहेगा दिन रात तो कैसे पता चलेगा.

इस बात पर सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

स. डैड:- अब्ब तू कबसे इतना सीरियस होने लगा? वो क्या कहते hai...Haan चिल रह.

इस बात पर सुमित फिर से मुस्कुराया.

स. डैड:- हाँ ऐसे hi...Aise hi अच्छा लगता है तू.

एक बात याद rakh...Jaisa है तू वैसा hi reh...Kabhi किसी के लिए किसी वजह से खुद को जबरदस्ती बदलने की कोशिश मत kar...Warna खुद को hi खो बैठेगा.

सुमित:- सही कह रहे है आप.

कुछ सोचते हुए बोलै सुमित.

स. डैड:- बाप hun...Sahi सलाह hi दूंगा.

सुमित:- वैसे पापा एक बात पूछ सकता हूँ?

स. डैड:- परमिशन की जरुरत कब से पड़ने लगा तुझे?

सुमित:- नहीं बात कुछ और है?

स. डैड:- चल bata...Wo बात और है की अगर कुछ उल्टा सीधा पूछा तो दोनों hi गाल को लाल कर दूंगा.

सुमित की पापा की हंसी से सुमित के मन का संकोच काम हो गया.

सुमित:- आप भी अपने टाइम पर मेरे तरह hi नशा करते थे?

इस बात से सुमित के पापा के चेहरे के भाव थोड़ा बदल गया.

स. डैड:- बिलकुल भी नहीं.

सुमित:- लेकिन डिनर के टाइम मुझे कुछ और hi laga...Kuch तो बात छुपा रहे है आप.

स. डैड:- अभी भी वही कहूंगा तेरी तरह तो बिलकुल भी nahi...Aur वैसे भी तुझसे क्या छुपाना.

सुमित:- बताइये फिर?

स. डैड:- कोई ख़ास बात नहीं hai...Agar तू जानना hi चाहता है तो ये तेरे लिए सरप्राइज रहेगा. :डी

सुमित:- सरप्राइज क्यों?

स. डैड:- क्यों तुम लोग hi सिर्फ सरप्राइज दे सकते हो वो भी predictable...Jaise की माँ और पापा की बिर्थडेज़ और एनिवर्सरी में सुरप्रीसेड केक जो बिलकुल भी सरप्राइज नहीं होता.

जिस दिन तू पूरी तरह से नशा मुक्त हो जाएगा उसी दिन बताऊंगा ये kahani...Abb तुझ पर hai...Jitna जल्द नशा मुक्त होगा उतना जल्द ये कहानी सुनेगा.

सुमित:- बहुत नाइंसाफी है ये?

स. डैड:- इस में मई कोई हेल्प नहीं कर सकता.

कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद.

सुमित:- अभी तक आपने मेरे पढ़ाई के बारे में नहीं पूछा.

स. डैड:- जितना मई तुझे जानता हूँ पढाई में तुन बहुत अच्छा hai...Padh hi लेगा अच्छे से.

लेकिन जो मई नहीं जानता था वो बहुत हैरानी की बात tha...Pehle ये सही कर लू बाकी सब तो चलता hi रहेगा.

फिर कुछ देर और बात करके सुमित अपने रूम में चला जाता है सोने.

रात के 11 बज रहे थे.

तभी सुमित के मोबाइल में मेघा का फ़ोन aaya...Thoda आश्चर्य की बात था सुमित के liye...Bahut काम hi दोनों के बिच फ़ोन में बात होता tha...Warna तो अब्ब सिर्फ कॉलेज में hi थोड़ा बहुत बात होता था.

सुमित:- हाँ Megha...Kaho क्या बात है?

मेघा:- कुछ काम था.

सुमित:- इतनी रात को?

मेघा:- हाँ और इस काम का वक्त से कोई लेना देना नहीं.

कुछ कन्फूसिओं था सर्जरी mein...Wohi क्वेश्चन पूछना था?

सुमित:- जैसे में तो बहुत बड़ा सर्जन हूँ?

मेघा:- तुम hi तो खुद को न्यूरोसर्जन कहते थे?

सुमित:- वो तो बाद की बात है.

मेघा:- और न्यूरोसर्जन बनने की और ये एक छोटा सा कदम है.

सुमित:- अच्छा ठीक hai...Pucch lo...Agar मेरे बस का है तो जरूर बताऊंगा.

फिर मेघा सवाल पूछती है और लउकीली वो सवाल का जवाब सुमित के पास tha..Fir इसी टॉपिक में दोनों के बिच कुछ देर बात होती है.

आफ्टर थे टॉपिक.

मेघा:- वैसे तुम्हारे बातों से लग रहा है बहुत खुश हो तुम?

सुमित:- हाँ पापा से बात किया tha...Alag hi ख़ुशी मिल रहा है आज.

मेघा:- यही तो समझा रही थी तुम्हे हॉस्टल छोड़ कर घर में शिफ्ट हो jaao...Lekin तुम समझ hi नहीं रहे थे.

सुमित:- पापा का सामना करने की हिम्मत नहीं था उस वक्त.

मेघा:- कोई भी पेरेंट्स अपने बच्चों का बुरा नहीं चाहते है और ना hi करते है.

सुमित:- तो फिर जा कर बता दो अपने पेरेंट्स को तुम्हे यहाँ कोई लड़का पसंद आ गया है तुम उसी से शादी करोगी?

मेघा:- पागल हो क्या :माध: घर से निकाल देंगे.

सुमित:- यही to...Yahi सोच मेरा भी था.

मेघा:- चलो chhodo...Ant भला तो सब भला.

सुमित:- वैसे तुम इतनी रात तक?

मेघा:- आज थोड़ा पढाई करने के लिए जाग रही हूँ.

सुमित:- कुछ दिनों के लिए तो ठीक hai...Lekin आदत मत बना लेना.

मेघा:- यह बात तुम कह रहे हो?

सुमित:- Haan...Kyu की भुगत चूका hun...Pehle तो रात भर जागने में मजा आता था अब्ब ये आदत सा बन गया है या फिर मज़बूरी.

वैसे भी बहुत कुछ सिख लिया है अब्ब तो :डी

मेघा:- और क्या क्या सीखा है?

सुमित:- बहुत kuch...Aur सबसे बड़ी sikh...Nature के खिलाफ कभी नहीं जाना chahiye...Pura हेल्थ का वाट लग चूका है.

फिजिकल हेल्थ में तो प्रॉब्लम आया भी hai...Mental हेल्थ बुरी तरह से प्रभावित हुआ tha...Aisa लग रहा था साइको बन रहा hun...Psychosis, डिप्रेशन और बहुत से साइकियाट्रिक कंडीशंस है जो पढ़ा भी नहीं था ऐसा सिम्पटम्स दिखने लगा था.

अब्ब थोड़ा बहुत सही लग रहा है.

कुछ दे मेघा चुप hi रही.

मेघा:- चलो इस सब से उभरने के लिए एक खुश खबरि है तुम्हारे लिए.

सुमित:- वो क्या? :?:

मेघा:- बहुत बड़ी खुशखबरी है.

सुमित:- (बड़बड़ाते हुए) कीर्ति से रिलेटेड कुछ है क्या?

लेकिन मेघा ने सुमित की ये बात सुन लिया.

मेघा:- उससे भी बड़ा.

सुमित:- उससे भी bada...Jaldi बताओ.

सुमित की बातों में एक्ससिटेमेंट आ गया.

मेघा:- Surprise...Kal बताउंगी.

ये कह कर मेघा ने फ़ोन कट कर दिया.

सुमित के चेहरे में अब्ब मुस्कान था.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) आज जब खुश हूँ तो बहुत सुरपरिसेस मिल रहा hai...Waise तो जिंदगी खुद एक सरप्राइज hai...Kahi भी कभी भी कोई न कोई सरप्राइज मिल जाता hai...Yaji तो मजा है जिंदगी जीने का.

शायद 2-3 साल में यही मिस कर रहा था. :)
 
अपडेट 65

हाँ बताओ? क्या सरप्राइज है?

कॉलेज पहुँचते hi सुमित ने मेघा से पूछा.

मेघा:- बाद में.

सुमित का बेसब्री देख मेघा हँसते हुए बोली.

सुमित:- रात भर तो इंतजार किया hi hai...Abb और इंतजार नहीं होता.

मेघा:- थोड़ा और इंतजार कर lo...Intejaar का फल मीठा होता है.

सुमित:- लेकिन इंतजार कड़वा होता है. :युक:

मेघा:- हाँ वो तो तुम्हारे चेहरे से hi पता चल रहा है.

सुमित:- तो फिर प्लीज तरस khaao...Abb तो बता दो. :प्रे:

मेघा:- लेकिन तुम इतना क्यों बेसब्र हो रहे हो? एक नार्मल सी सरप्राइज hi तो है.

सुमित:- तुमने कहा था ना ये सरप्राइज कीर्ति से रिलेटेड से भी ज्यादा सुर्प्रिसिंग hai...Bas तभी से इसी बारे में सोच रहा hun...Raat में भी छैन की नींद नहीं आया.

बस ये जानना चाहता hun...Kya सरप्राइज है.

मेघा:- वो कहते है न वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता. :lol1:

सुमित:- ये कहावत फिर कभी बाद mein...Abhi तो बस वो सरप्राइज बता दो.

मेघा:- नहीं ये तो सही वक्त आने पर hi बताउंगी.

इतना कह कर मेघा क्लास की तरफ चली gayi...Sumit भी पीछे लग गया लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ.

सुमित का बेचैनी बढ़ता hi जा रहा tha...Aur हद्द तो तब हुआ जब.

प्रोफेसर:- Sumit...Tumhara ध्यान किधर है?

सुमित:- सरप्राइज में.

ये कहने के बाद सुमित को माहौल का अंदाजा hua...Professors और कुछ स्टूडेंट्स उससे घर रहे थे और कुछ हंस रहे थे.

सुमित:- सॉरी sir...I मैं.

प्रोफेसर:- आज तो तू मुझे सरप्राइज दे रहा hai...Kal तक तो काफी अटेंटिव था लेकिन आज?

सुमित इस बार कोई जवाब नहीं दे paaya...Side में hi बैठी मेघा मुंह छुपा कर हंस रही थी.

प्रोफेसर:- अगली बार से ऐसा नहीं होना chahiye...Jaanta हूँ अच्छा स्टूडेंट है लेकिन इसका मतलब ये नहीं की केयरलेस बन jaayega...Surgery में नॉलेज के साथ साथ स्किल्स भी चाहिए और कॉमन मिस्टेक्स बहुत kam...Baar बार समझाना मुझे भी अच्छा नहीं लगता.

इस बार प्रोफेसर की आवाज में काफी गुस्सा tha...Sumit ने कुछ जवाब नहीं दिया.

बाकी की क्लास सुमित ने ध्यान देने की पूरी दिखावा किया.

सुमित:- अब्ब तो दया karo...Sir से दांत भी खिला दिया सबके saamne...Abb क्या पिटवाना चाहती हो?

मेघा:- जो जैसा करता है वो वैसा hi भरता है. :डी

सुमित:- फिर से कहावत :डोह:

सुमित कुछ देर इंतजार करता hai...Fir भी मेघा कुछ नहीं बताती.

सुमित:- जब मन करे बता देना.

सुमित के आवाज में इस बार इर्रिटेशन tha...Aur वो वह से जाने लगा.

मेघा:- अगर मई इर्रिटेट हो गयी तो बताउंगी भी नहीं.

सुमित:- मज़बूरी का सही फायदा उठा रही हो.

मेघा:- अच्छा chalo...College ख़त्म होने के बाद बताउंगी.

इस बात से भी सुमित को राहत नहीं मिला.

बाकी की दिन भी सुमित के लिए बोरिंग साबित hua...Ghadi का धीरे चलने की एहसास से सुमित ने अपने hi घडी में दो पंच भी मार diya...Lekin वक्त की चाल में कोई बदलाव नहीं आया.

सुमित का ये बेचैनी देख मेघा को हंसी भी आ रहा था.

और आखिर वो वक्त आ hi गया.

सुमित:- अब्ब तो बता दो.

मेघा:- इतना भी क्या जल्दी है?

सुमित:- Please...Abb मेरा धैर्य जवाब दे रहा hai...Bataao वर्ण मई...

मेघा:- वर्ण क्या?

सुमित:- वर्ण मई रू दूंगा. :क्राई:

मेघा:- अच्छा बताती हूँ...2 हफ्ते बाद इंटरकॉलेज फार्माकोलॉजी क्विज कम्पटीशन है.

ये सुन कर सुमित ठगा हुआ महसूस करने laga...Yahi बात सुनने के लिए इतना इंतजार और बेसब्री?

सुमित:- इस में सुर्प्रिसिंग क्या है?

मेघा:- तुमने ध्यान से सुना nahi...Ek बार फिर रिपीट करती हूँ...इंटरकॉलेज.

सुमित अब्ब सोचने लगा और जब थोड़ा हिंट मिलने लगा तब मेघा ने एक कॉलेज का नाम बताया.

अब्ब सुमित के चेहरे का भाव बदलने लगा.

मेघा:- सही सोच रहे ho...Kirti भी पार्टिसिपेंट है इस क्विज में.

अब्ब तो सुमित का चेहरे का रंग एक दम से बदल gaya...Murjhaya चेहरे में एक नयी जान आ गया.

मेघा:- थोड़ा पढाई लिखे भी कर लेना?

सुमित:- वो क्यों?

मेघा:- तुम्हारा मार्क्स और रिजल्ट...3 बेस्ट स्टूडेंट्स को चूसे कर रहे hai...Abhi तक तो पोजीशन के हिसाब से सेलेक्ट कर रहे hai...Iss क्राइटेरिया में तुम दूर दूर तक नहीं हो.

सुमित:- कोई टेंशन नहीं hai...Wo 3रद कौन है? Arun...Usse मन लूंगा.

मेघा:- अगर वो न माना तो?

सुमित:- सिलेक्टर को जा कर bolunga...Mai बेस्ट हूँ कंटेस्टेंट के रूप में. ज्यादा से ज्यादा नॉलेज टेस्ट करेगा हम दोनों ka...Aashaani से जीत जाऊँगा.

मेघा:- उसको ुँडेरेस्तिमाते नहीं कर रहे हो?

सुमित:- नहीं कॉंफिडेंट हु अपने mein...Aur जब बात प्यार की हो तो कॉन्फिडेंस के साथ म्हणत भी करूँगा पढ़ाई में.

इतना कह कर सुमित अपने hi दुनिया में खो gaya...Uske चेहरे की ख़ुशी और बदलते भाव को देख कर मेघा भी मुस्कुराने लगी लेकिन जल्द hi ये मुस्कान बिलकुल hi गायब हो गया. :(

खुद के लिए दुखी है या सुमित के लिए ख़ुशी? इस बात का फैसला नहीं कर पा रही थी वो.

सुमित:- सच mein...Intejaar का फल मीठा होता है.

इतना कह कर सुमित वह से अपने घर की तरफ निकल गया.

क्या बात है? इतना बदलाव?

सुमित का नया रूप देख उसके पापा ने कहा.

सुमित:- Badlaaw...Soch रहा हूँ जब बदल hi रहा हूँ तो अंदर का बदलाव hi क्यों? बाहर से भी बदल जाओ.

सुमित ने अपने गाल पर हाथ चला कर कहा जहा कुछ देर पहले दाढ़ी (बियर्ड) हुआ करता था.

रश्मि:- अब्ब जा कर सही अकाल आया hai...Warna उस जंगल के साथ तो बिलकुल hi बन्दर दीखते थे.

सुमित:- बन्दर कब से दाढ़ी रखने लगे?

रश्मि:- बात का मतलब samjhiye...Mera मतलब था बहुत बुरे दीखते थे आप और अब्ब भी.

सुमित:- वो तो दिखूंगा hi...2 किलो मेक उप रोज थोड़ी न लगाता हूँ.

रश्मि:- कुछ ज्यादा नहीं बोल रहे है आप? :माध:

सुमित:- अच्छा ज्यादा हो गया? चल 1.5 किलो. :lol1:

इतना कह कर सुमित अपने रूम में चला गया और रश्मि पीछे से घूरती रही.

रूम में पहुँचने के बाद सुमित का अंदाज़ अलग hi tha...Wo कुछ गाना गन गुनाते हुए आईना के सामने बहुत सी बातें सोच रहा tha...Wo इस वक्त को भुला कर 2 हफ्ता बाद की जिंदगी जी रहा था.

कीर्ति से कब मिलेगा? कैसे मिलेगा? वो एहसास कैसा रहेगा? कीर्ति का गुस्सा उसके लिए काम हुआ या नहीं? यही कुछ सोच था जिस में सवाल सुमित खुद से करता और जवाब भी खुद hi देता था.

नाश्ता करने के लिए जब वो निचे आया तब सामने मौजूद 2 शख्स को देख थोड़ा हैरानी तो हुआ लेकिन अगले hi पल नार्मल हो गया.

सामने आरव और उसके पापा थे.

आरव को देख.

सुमित:- (इन हिज मंद) इसका टाइमिंग तो आशीष से भी बेकार है.

फ्रेंड्स अब्ब स्टोरी का स्पीड थोड़ा तेज बढ़ेगा.
 
अपडेट 66

क्या बात है छोटे? बहुत दिनों के बाद दिख रहा है? सब कुछ ठीक तो है न?

सुमित के पापा के इस बात पर उसके चाचा मुस्कुराते हुए बोले.

Aarav's डैड:- हाल चाल तो आपका पूछने आया था भैया?

ये मुस्कान मुस्कान काम व्यंग ज्यादा लग रहा था.

स. डैड:- पूछने की क्या जरुरत hai...Dekh hi रहा है कितना तंदुरुस्त hun...Wo बोलते है ना फिट एंड fine...Lekin तू थोड़ा मोटापा का शिकार हो गया hai...Thoda बहुत योग कर लिया कर.

ा. डैड:- Motaapa...Haan थोड़ा saa...Wo क्या है ना आरव का फ्यूचर सिक्योर्ड है तो इसी ख़ुशी में कोई टेंशन नहीं hai...Bas अच्छे से खाओ पियो और चैन से सू jaao...Baaki के वक्त अपने बेटे की सफलता देखो.

ये बात सुनते hi सुमित का अपने हंसी पर से कण्ट्रोल छूट gaya...Lekin जल्द hi वो संभल गया.

आरव:- इस हंसी का वजह जान सकता हूँ?

सुमित:- जान कर क्या करेगा? कुछ सोच रहा tha...Waise भी मेरा सोच में से कुछ तुझे समझ में नहीं आता और कुछ से मिर्च लग जाता hai...Ye दूसरा केटेगरी hai...Jaane दे वर्ण मुंह फुला लेगा.

आरव:- चल बता hi दे? क्या सोच रहा था?

सुमित:- अब्ब चाचा जी को सुकून मिल रहा है तेरे सिक्योर्ड फ्यूचर से तो सोचा कोई ऐसा काम मिल गया होगा जिसमें तू बहुत hi अच्छा hai...Movies पायरेट कर के बेचने की.

और हुआ भी wohi...Aakhiri लाइन सुनने के बाद आरव का चेहरा एकदम से लाल हो गया.

आरव:- वो बचपन था.

सुमित:- बचपन की बहुत सी आदतें बुढ़ापे तक साथ नहीं छोड़ता.

इस पर आरव गुस्से में घूरता hi रहा.

ा. डैड:- वैसे Sumit...Haalaath से तो लग रहा है ये काम अब्ब तुम्हे करना पद सकता है?

सुमित:- इस हालात से तो मई भी अनजान hun...Jara समझाइये.

ा. डैड:- सूना है पढ़ाई में मन नहीं लगता tumhara...Kuch साल पहले से hi आवारा बन गए ho...Ladkiyon के चक्कर mein...Cigarette, दारु की chakkar...Bahut गलत hai...Lekin आज कल के generation...Kuch समझते कहा है.

इस बात पर सुमित को गुस्सा तो आया लेकिन कुछ सोच कर मुस्कुराने लगा.

ा. डैड:- वैसे भैया इसी वजह से आया tha...Aap तो जानते hi है सुमित कितना जिद्दी hai...Kisi की नहीं सुनता? आपका तो कोई मान hi नहीं रखा isne...Kuch वैल्यू नहीं? कुछ इज़्ज़त नहीं?

सोचा हाल चाल जानते हुए कुछ ज्ञान भी देता चालू सुमित को?

इस बात पर सुमित के पापा कुछ देर मुस्कुराने के बाद कहते है.

स. डैड:- बहुत देर कर दी वजह बताने में?

ा. डैड:- हाँ वजह था भी aisa...Thoda इंतजार कर रहा tha...Aap तो जानते hi है इंतजार का फल मीठा होता है.

स. डैड:- नहीं कड़वा होता है.

ा. डैड:- ये तो मैंने कभी सुना नहीं.

स. डैड:- आँखों से देखा और कानो से सूना हर बात सही नहीं होता hai...Mehsus कर lena...Tujhe भी पता चल जाएगा इंतजार का फल कड़वा hi होता है.

इस पर आरव के पापा कुछ नहीं बोलते.

स. डैड:- Sumit...Tera चाचा कुछ ज्ञान देना चाहते hai...Aur ज्ञान को कभी ना मत kehna...Marte वक्त रावण भी लक्ष्मण को सही ज्ञान दे कर गए thhe...Ye तो तेरा जीता जागता ज्ञान का भंडार चाचा hai...Kuch सीख ले.

इस बात पर दोनों hi आरव और उसके पापा हैरानी से सुमित के पापा को देखते hai...Taarif था या vyang...Dono को hi समझ में नहीं आया.

ा. डैड:- Sumit...Kuch बातें hai...Jo तुम्हे बुरा लग सकता hai...Lekin जितना जल्द तुम इन् बातों को रीलीज़ करोगे उतना hi अच्छा होगा तुम्हारे लिए.

आरव तुम से उम्र में 1 साल छोटा है लेकिन पढ़ाई में 1 साल आगे hai...Ye बात को शायद तुम अभी हलके में ले रहे हो लेकिन बाद में.....

फिर ऐसे hi उन्होंने कुछ देर अपनी बातें कहना जारी रखा जिसमें हर शब्द सुमित को निचा दिखा रहा tha...Sumit भी मुस्कुराते हुए सुनता गया.

ा. डैड:- उम्मीद है तुम्हे समझ में आ गया है.

सुमित:- जी चाचा ji...Aapka हर एक बात दिमाग़ में घर कर गया है और हर एक बात में सच्चाई था.

ा. डैड:- और bhaiya...Aapka बीटा तो आपसे भी 2 कदम आगे निकल चूका है.

स. डैड:- वो कैसे?

ा. डैड:- आप भी नशा करते thhe...Lekin आपका बीटा तो नशेड़ी hi बन गया.

आप जो इतना महान दिखाते है खुद को लेकिन अपने hi बेटे को गलत रास्ते में जाने से रोक नहीं paaye...Aur मुझे आना पड़ा सही गलत का राष्ट दिखाने.

स. डैड:- तेरा बहुत बहुत shukriya...Warna मुझे तो लगा था मेरा बीटा हाथ से निकल गया hai...Abb उससे कोई सुधर नहीं sakta...Jo तूने आज किया है वो कोई फरिश्ता hi कर सकता है.

सुमित के पापा ने मुश्कुराते हुए ऐसे तारीफ़ किया जो आरव के पापा को पचाना बहुत मुश्किल हो रहा था.

आरव:- वैसे Sumit...Tera सिगरेट और अल्कोहल का तो काफी किस्सा सुना hai...Kitna पीटा है?

लंग कैंसर और लिवर किररहोशिस तो हो hi गया hoga...Aisa चीज पी रहा है जो सिर्फ और सिर्फ नुकशान hi करता है.

नफरत भरी आवाज में आरव ने कहा.

कुछ देर से खामोशी से सुन रही सुमित की माँ को इस बात पर बहुत गुस्सा आया.

स. माँ:- आरव...

वो कुछ बोलती उससे पहले.

सुमित:- बच्चा है ये Maa...Daantiye mat...Agar रोने लगा तो चॉकलेट भी नहीं है मेरे पास चुप कराने के लिए.

आरव:- वैसे आईडिया अच्छा है टॉपिक डाइवर्ट कराने के लिए.

सुमित:- तू कहता है तो कनवेर्स कर देता हूँ.

लंग कैंसर तो होता रहता hai...Mai सोच रहा हूँ अब्ब तक ुरोथेलिअल कार्सिनोमा (यूरिनरी ब्लैडर कैंसर) क्यों नहीं हुआ? और जहा तक बात है दारु और लिवर सिरोसिस की तो उस में क्या है लिवर ट्रांसप्लांट करा लूंगा और फिर से लग जाऊँगा.

आरव:- कुछ ज्यादा hi कॉंफिडेंट नहीं है तू?

सुमित:- बात सुमित से कर रहा है मेरे भाई.

आरव:- ये सब chhod....Cigarette से ब्लैडर का कैंसर कब से होने लगा?

सुमित:- उम्र से तो छोटा है hi...Gyaan में भी है ये बात तो प्रोवे मत kar...Log हसेंगे तुझ पर अगर ऐसे hi कुछ भी बकता रहा तो.

आरव:- मैंने क्या गलत कह दिया?

सुमित:- हर बात में galat...Pehle तो सिगर्रेट और दारु सिर्फ नुकशान करता है.

4तह ईयर में hai...Ye तो पढ़ hi लेना चाहिए था अब्ब तक सिगरेत्ते इस प्रोटेक्टिव अगेंस्ट अल्सरेटिव Colitis...Aur जहा तक बात दारु की है तो एक बार पढ़ लेना काम दोसे में अल्कोहल का ब्रेन में इफ़ेक्ट और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम में इफ़ेक्ट?

आरव:- तब तो हर किसी को पीना सुरु कर देना चाहिए?

सुमित:- जेहेर hai...Lekin 100% बुरा भी नहीं hai...Teri तरह. :डी

आरव:- क्या मतलब?

सुमित:- इतना ना समझ भी नहीं है तू.

इस बार आरव चुप रहा.

ा. डैड:- अच्छा भैया चलते hai...Jo काम करने आये थे वो कर दिया hai...Ummeed है सुमित सुधर जाएगा.

स. डैड:- बहुत बहुत शुक्रिया तेरा एक बार फिर se...Ummeed है तुझे समझ में आ गया होगा इंतजार का फल कड़वा होता है.

आरव के पापा ने कुछ जवाब नहीं diya...Lekin उन्हें अच्छे से समझ में आ गया था इंतजार का फल कड़वा होता है.

कितने उम्मीद से आये थे की सुमित या उसके पापा को आज निचा dikhayenge...Unka गुस्सा का उनके खिलाफ hi इस्तेमाल करेंगे लेकिन सुमित की पापा की हर एक बात पर मुस्कुराना उन्हें उनके हर एक उम्मीद को कुचलते जा रहा tha...Aakhir में उनका मन hi कड़वा हो गया.

स. डैड:- गेट को अच्छे से लगते हुए जाना.

गेट से निकलते hi जब आरव के पापा ने सूना तो ना चाहते हुए भी गेट को सत्ता कर वो और आरव निकल गए.

स. डैड:- ये वाला मातुरित्य तो बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया tha...Samajhdaar हो गया है.

सुमित:- कैसा मातुरित्य?

स. डैड:- जैसे आरव की क्लास ले रहा था सोच रहा था अपने चाचा को भी नहीं bakshega...Mujhe hi बात संभालना पड़ेगा.

सुमित:- अभी उनसे उनका हर बात पर बड़ी आवाज में जवाब देना और खुद को डिफेंड करना तो बचपना है.

वैसे भी क्या कहता मई कोई बेवड़ा और नशेड़ी नहीं hun...Aur इस बात पर उनसे लड़ना ये अपने कमी को नजर अंदाज करना होगा सामना नहीं.

उनको जवाब dunga...Lekin बातों से nahi...Apne काम se...Wo मुझे निकम्मा समझते hai...Mera कामयाबी hi मेरा जवाब hoga...Aaj उनका हर एक बात मेरे दिल और दिमाग में घर कर गया hai...Unka इसी ज्ञान यानी की मेरे कमजोरी को अपना ताकत बनाऊंगा एक दिन.

सुमित की पापा बस सुन hi रहे थे सुमित की बात.

सुमित:- लेकिन Papa...Unka ये बर्ताव समझ से hi बाहर hai...Wo भी बचपन से है.

स. डैड:- जितना भी फ़्रस्ट्रेशन है सब मेरे वजह से tha...Mera गुस्सा तुझ पर निकाल रहा tha...Aur आज वो मौका मिला था जो आज तक इंतजार कर रहा tha...Lekin इंतजार का फल मिला भी तो कड़वा :lol1:

सुमित:- आपसे क्या प्रॉब्लम है उनका?

स. डैड:- है एक छोटी सी kahaani...Kisi दिन लम्बा कर के सुनाऊंगा.

सुमित:- ये तो मेरा जैसा डायलाग है.

स. डैड:- सही कहता था तेरा Chacha...Mera कुछ वैल्यू hi नहीं hai...Izzat hi नहीं hai...Apne बाप पर hi चोरी का इलज़ाम लगा रहा hai...Wo भी डायलाग चोरी का.

सुमित:- बस बस Papa...Aap मुझसे भी बुरा एक्टर है.

स. डैड:- जानता हूँ बचत अच्छा एक्टर है...2-3 साल तक सही एक्टिंग करता रहा tu...Pata hi नहीं चला.

इस बात पर सुमित थोड़ा सीरियस होने लगा.

स. डैड:- अब्ब किस ख़ुशी में ऐसा सदा हुआ चेहरा बना रहा है?

सुमित:- नहीं कुछ याद आ गया था.

स. डैड:- जानता hun...Lekin ये yaadein...Ye तो जिंदगी भर साथ चलता hai...To क्या जिंदगी भर सदा हुआ चेहरा ले कर ghumega...Abb muskura...Warna सच में कड़वा फल खिला dunga...Karela.

सुमित भी इस बात पर मुस्कुरा देता है.

सुमित:- पापा मई सोच रहा था की आप चाचा को समझाते क्यों नहीं? ऐसे झगड़ा अच्छी बात भी तो नहीं है.

स. डैड:- तूने देखा नहीं है उसका फ़्रस्ट्रेशन अच्छे se...Hamesha मुझसे पीछा होम का दुःख है usse...Aur अभी तक है.

समझाया भी बहुत hai...Baatein भी बहुत किया hai...Lekin वो सुने तब न.

जो अब्ब तक ये बातें अपने दिल में दबा कर रखा है अब्ब क्या sunega...Aur बार बार भैंस के सामने बीन बजाने की बेवकूफी मई भी नहीं कर सकता.

अपने तक तो ठीक hai...Lekin उसका बीटा भी उसके जैसा hi बन रहा है इस बात पर भी आँख में पट्टी बाँध रखा है usne...Aarav का तेरे प्रति व्यव्हार इसी लिए है क्यों की बचपन से वो यही सब देखता और सीखता आया है.

उसको जवाब वक्त hi dega...Jab मुंह के बल गिरेगा तभी अकाल ठिकाने आएगा.

सुमित इस मामले में ज्यादा नहीं जानता था तो इतना में hi चुप हो गया.

आफ्टर फ्यू डेज

मेघा:- बहुत खुश दिख रहे हो?

सुमित:- हाँ क्विज में सेलेक्ट हो गया hun...Arun मान गया.

मेघा:- तैयारी कैसा है फिर?

सुमित:- Perfect....Sab दवाई को पानी बना कर पी लिया hai...Bas यही बाकी है.

फिर सुमित एक टेबलेट मेघा को देता है.

मेघा:- ये तो सेदटयवेस (स्लीप िन्दुसिंग) है.

सुमित:- हाँ इंतजार नहीं hota...Kal कीर्ति से जो मुलाक़ात hogi...Raat का इंतजार मुझसे सहा नहीं jaayega...Bas इसी लिए.

मेघा वो दवाई फेंक देती है.

सुमित:- अरे मरवाओगी tum...Saamne वाले महेश अंकल के हाथो से?

मेघा:- क्या मतलब?

सुमित:- उनके लिए दवाई ले जा रहा tha...Aur तुमने फेंक दिया.

मेघा:- तब तो कुछ और hi कह रहे थे.

सुमित:- मजाक था. :लोटपोट:

इतना कह कर दवाई उठा कर सुमित वह से निकल गया.

मेघा बस सुमित को ख़ुशी में देखते hi रह गयी.
 
अपडेट 67

कितना टाइम लग रहा है? पता नहीं कब सुरु होगा?

ये बेचैनी भरी आवाज विकाश का था.

सुमित:- हो जाएगा suru...Jaldbaazi किस चीज की है.

सुमित ने जवाब तो विकाश का था लेकिन नजर कीर्ति की और.

कीर्ति सुमित को आज इस क्विज में देख हैरान भी थी और गुस्सा bhi...Wo सुमित को इग्नोर करने की हर एक प्रयास कर रही थी.

उसी की साइड में बैठा विवेक सुमित को नफरत भरी नजर से घूर रहा tha...Lekin सुमित को इस बात से कोई फ़िक्र नहीं tha...Uska नजर, ध्यान और सब कुछ तो बस कीर्ति पर hi tha...Chehre में एक अलग hi रौनक और तेज गति से धड़कता दिल की धड़कन ये बात भी साफ़ कर रहा था.

मेघा कभी सुमित की और देखती तो कभी कीर्ति ko...Kabhi उससे सुमित के लिए ख़ुशी हो रहा था तो कभी खुद के hi दिल में दर्द महसूस हो रहा था.

विकाश:- (सुमित की कान mein)Kya कर रहा है yaar...Megha तुझे hi देख रही है.

सुमित:- आँखें हैं तो देखेगी hi. :डेड:

विकाश:- वो क्या सोचेगी?

सुमित:- गलत सवाल... वो क्या सोचेगी नहीं वो क्या सोच रही है? सोचना भी सही नहीं hai...Wo क्या देख रही है?

और जवाब है आशिकी.

विकाश:- Aaaashiquiiii...Ye क्या बोल रहा है?

इस बार हैरानी में विकाश का आवाज थोड़ा तेज हो गया.

सुमित:- दिख नहीं रहा hai...Tab से hi नैन माताका चल रहा hai...Abb तू बोर मत kar...Bahut मजा आ रहा है अभी.

विकाश:- तू मेघा से प्यार नहीं करता?

इस बार सुमित थोड़ा सीरियस हो कर विकाश की और mudaa...Aur शख्त आवाज में.

सुमित:- बहुत पिटेगा tu...Mujhse नहीं मेघा se...Agar ये बात मेघा को पता चला तो.

विकाश:- मतलब तुम दोनों एक दूसरे से प्यार नहीं करते?

थोड़ा हैरानी भी था विकाश की इस बात में और थोड़ा ख़ुशी भी.

सुमित:- अबे nahi...Wo दोस्त है meri...Best फ्रेंड.

इस बात से विकाश की ख़ुशी कई गुना बढ़ गया.

विकाश:- और वो सामने वाली लड़की?

सुमित:- मेरी एक्स गफ.

विकाश:- सच बोल रहा है तू?

सुमित:- वैसे किसी का कसम तो नहीं खाता हूँ जल्दी लेकिन चल आज तेरा hi सर का कसम खा लेता हूँ.

अब्ब विकाश कुछ नहीं bola...Khushi में बोलै भी नहीं जा रहा था.

सुमित का भी पूरा ध्यान अब्ब कीर्ति पर tha...Kuch दिन पहले तक मुरझाया चेहरा में एक नयी जान वापस आ गया tha...Hansta मुस्कुराता इस चेहरे में एक अलग hi रौनक था.

हर बार की तरह इस बार भी सुमित का आत्मविश्वाश बढ़ रहा था की जल्द hi कीर्ति उसकी हो जायेगी.

फिर सुरु हुआ क्विज का दौर.

सभी पार्टिसिपेंट्स अपने टीम और पॉइंट्स के लिए दिमाग़ घुमा रहे थे सुमित को छोड़ kar...Wo तो अपना दिल और दिमाग़ दोनों hi कीर्ति के पास रख कर बैठा था.

विकाश:- अबे सुमित कुछ तो आंसर bol...Kuch समझ में नहीं आ रहा है इसका आंसर?

सुमित:- दिमाग़ का बत्ती jala...Aakhir टोपर है तू क्लास का?

विकाश:- लेकिन ये क्वेश्चन कभी पढ़ा नहीं है.

सुमित:- तो 2ंद टोपर से पूछ? मुझ जैसा बैकबेंचर और जस्ट पास वाले से क्या पूछ रहा है?

विकाश मेघा को पूछता है लेकिन वो भी नहीं बता पाती है.

सुमित:- अब्ब तो एक hi राष्ट है.

विकाश:- क्या?

सुमित:- आँखें बंद कर.

विकाश:- इससे क्या होगा?

सुमित:- अबे कर न.

विकाश:- हाँ कर लिया?

सुमित:- दिमाग़ में जो दवाई का नाम पहले aaye...Wo बता दे.

विकाश आंसर देने hi वाला था की.

सुमित:- रुक ruk...Aaram se...Confident हो कर जवाब दे.

विकाश कॉन्फिडेंटली अपना जवाब देता hai...Aur जवाब था गलत.

विकाश का चेहरा लटक जाता है.

सुमित:- इसी लिए कहता हूँ लक वुक कुछ नहीं होता hai...Mehnat kar...Kaamyaabi मिलेगा.

फिर सुमित हँसते हुए फिर कीर्ति की दर्शन में लग जाता है.

विकाश सुमित को घूरे जा रहा था और मेघा को सुमित की इस हरकत पर हंसी आ रहा था.

फिर वो क्वेश्चन कीर्ति की टीम की पास गया.

और कीर्ति सही जवाब देती है.

सुमित:- मेरी कीर्ति का कोई जवाब नहीं.

कीर्ति से भी ज्यादा खुश सुमित दिख रहा था.

विकाश:- ये तूने जान बुझ कर किया न?

सुमित:- बिलकुल nahi...Mujhe भी पता नहीं tha...Kirti की ख़ुशी में शामिल हो रहा था bas...Kirti की जीत hi तो मेरा जीत है.

विकाश अपने सर पर हाथ रख कर अगले क्वेश्चन के लिए तैयार हो गया.

मेघा बस सुमित की हरकत को देख रही thi...Sumit को इतना खुश और एक्ससिटेड देखने की उम्मीद आज पूरा जो हुआ था.

ऐसे hi क्विज चलता रहता है.

विकाश:- अबे yaar...Tu यहाँ क्या करने आया है?

सुमित:- आशिकी.

शार्ट एंड स्वीट आंसर.

ऐसे hi कुछ देर और क्विज चलने के बाद.

विकाश:- ऐसे तो हार hi jaayenge...Aas पास भी नहीं है हम बाकी के टीम्स के सामने.

सुमित:- हीरो का खेल हमेशा लास्ट में आता है.

इतना कह कर सुमित फिर अपने काम में व्यस्त हो गया.

फिर से क्विज का दौर chala...Iss बार विकाश और मेघा अपने टीम को काफी ऊपर तक ले कर गए.

और आखिर में.

विकाश:- (तो सुमित) जीतने का आखिरी मौका है.

सुमित:- विजयी भाव.

विकाश:- आशीर्वाद नहीं आंसर मांग रहा hun...Mujhe इसका आंसर नहीं पता.

सुमित:- मेघा से पूछ फिर.

मेघा:-- मुझे भी नहीं पता.

विकाश:- आखिरी मौका hai...Tu सोच कर dekh...Agar सही हो गया तो जीत जाएंगे.

उम्मीद भरी आवाज में विकाश ने कहा.

सोचने का नाटक कर सुमित ने एक आंसर कहा.

विकाश:- सूरे

सुमित:- हाँ.

विकाश:- मुझे सही जवाब तो पता नहीं है लेकिन इस्स्में शक हो रहा है.

तू कहता है तो यही जवाब देता हूँ.

इतना कह कर विकाश जवाब देने hi वाला था की.

सुमित:- अबे रुक.

फिर सुमित कीर्ति की और देखता hai...Kaafi खुश दिख रही thi...Sumit जानता था की ये जवाब गलत हो गया तो ये सवाल कीर्ति की पास जाएगा और कीर्ति का एक्ससिटेमेंट देख उससे पता चल गया था की कीर्ति सही जवाब जरूर देगी.

फिर सुमित थोड़ा सख्त हो कर आंसर चेंज कर देता है.

विवेक भी कन्फ्यूज्ड हो कर दूसरा जवाब देता hai...Aur वो बिलकुल सही था.

जीत की एक्ससिटेमेंट काम होने के बाद.

विकाश:- हरवाने की पूरा प्लान बना लिया था तूने.

सुमित:- अंत भला तो सब भला.

इतना कह कर सुमित कीर्ति की तरफ gaya...Jo जीत के इतना पास आने के बाद हार कर बहुत मायूस थी.

सुमित:- प्यार में हमेशा हारने की ठेका मई hi क्यों लू? एक दो बार तुम भी तो महसूस करो ये दर्द.

मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jawaab में कीर्ति गुस्से से देखती है.

सुमित:- वैसे एक बात तो कहना भूल hi gaya...Khubsurat तो तुम पहले भी thi...Aaj कुछ नया पता चला तुम्हारे बारे में.

"ब्यूटी विथ ब्रेन."

बहुत प्यार से सुमित ने कहा और उतना hi गुस्से से कीर्ति ने सुमित को देखा.

सुमित:- वैसे तो ये पुराना डायलाग hai...Lekin आज कहना जरुरी है.

गुस्से में भी तुम बहुत खूबसूरत लगती हो.

कीर्ति कुछ कहती उससे पहले विकाश और मेघा वह आ गए.

कीर्ति:- कोंग्रटुलतिओन्स.

सुमित:- थैंक यू.

कीर्ति:- तुम्हे नहीं कहा है?

सुमित:- विनिंग टीम में hun...Issi लिए सोचा मुझे भी कहा है तुमने.

कीर्ति:- विनिंग टीम में तो ho...Lekin एक बोझ jaise...Jaanti हूँ कितना कंट्रीब्यूशन है तुम्हारा.

सुमित:- इसी लिए तो प्यार करता हूँ tumse...Itna कुछ जानती हो मेरे बारे mein...Accha बता hi दो कितना है मेरा कंट्रीब्यूशन?

कीर्ति:- "विन" शब्द में "स" अल्फाबेट का जितना रोले है उतना hi.

सुमित:- "स" फॉर Sumit...Sahi अल्फाबेट सिलेक्शन है तुम्हारा.

कीर्ति इस बात पर कुछ नहीं कहती.

सुमित:- वैसे भी मेरा जीत तुम्हारा hi तो जीत है pagli...Pata नहीं कब समझोगी तुम ये बात.

बहुत देर से खुद पर कण्ट्रोल कर रहा विवेक से अब्ब कण्ट्रोल नहीं हुआ.

विवेक:- बहुत हुआ...

सुमित:- सार्वजनिक Beizzati...Ye शब्द सुना है कभी?

विवेक चुप हो gaya...Gusse में उससे बोलने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे.

फिर कुछ देर बाद सभी अपने अपने घर की और जाने lage...Iss बिच कीर्ति ने सुमित को पूरी तरीके से इग्नोर कर दिया था.

जाते वक्त सुमित कीर्ति को पीछे से तब तक देखता रहा जब तक कीर्ति उसकी नजरों से ओझल ना हो gayi...Aur उसके बाद फिर से वही हारा हुआ मुस्कान.

लेकिन दिल में ये सुकून जरूर था की बहुत दिनों बाद कीर्ति से मिला और उससे बातें किया.

विकाश:- थैंक यू.

सुमित:- किस बात की?

विकाश:- तू नहीं होता तो हम जीत नहीं पाते.

सुमित:- इस में मैंने क्या किया? टीम को सिर्फ तूने और मेघा ने संभाला था.

विकाश:- सुमित एक बात बता?

सुमित:- हाँ पूछ.

विकाश:- तू इतना रिलैक्स्ड कैसे था? हारने की कोई दर नहीं था क्या?

सुमित:- ओने साइडेड जीतने की क्या majaa...Thoda कॉम्पिटिटिव होना chahiye...Thrill का मजा hi कुछ और है.

विकाश:- अगर इस थ्रिल के चक्कर में हार जाते तो?

सुमित:- हार और जीत तो होता रहता hai...Jaruri है तो इस का experience...Jeet से कॉन्फिडेंस मिलता है तो हार से नया पाठ.

विकाश:- ये भी सही hai...Lekin एक बात बता तू बहुत hi कॉंफिडेंट नजर आ रहा tha...Kab आंसर देना है और कब इग्नोर करना है तुझे ये बात अच्छे से पता था.

इस बात पर सुमित थोड़ा मुस्कुराता है.

सुमित:- सीनियर्स सिर्फ रैगिंग और दारु साथ पीने के लिए नहीं होते है.

विकाश:- मतलब?

सुमित:- ये क्विज कम्पटीशन 5 साल से चल रहा hai...Seniors से बात करने पर पता चला की मार्क्स का पैटर्न लगभग शामे hi hai...Iss साल कुछ नया होता भी नहीं दिख रहा था.

पता था कब आंसर देना है और कब nahi...Thrill बनाने के liye...Jab आंसर देने का वक्त आता तुम लोग सही सही आंसर दे रहे थे और मुझे आशिकी करने का मौका भी. :डी

फिर कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद विकाश भी चला जाता hai...Aur बचे मेघा और सुमित.

मेघा:- खुश तो बहुत होंगे तुम.

सुमित:- हाँ बहुत.

मेघा:- और ये ख़ुशी का वजह ये क्विज में 1सत आना तो बिलकुल भी नहीं है.

सुमित:- बिलकुल nahi...Agar हार भी जाता तो टेंशन नहीं होता.

बस अपने टीम की इज़्ज़त का ख्याल आ गया लास्ट में और एक mauka...Kirti को भी तड़पाने की. मई hi कब तक तड़पुं :डी

मेघा:- ऐसे खुश चेहरा में बहुत अच्छा दिख रहे हो.

सुमित:- अब्ब ये तुम्हारा हाथ में है. :अप्प्रोवे:

मेघा:- कैसे?

सुमित:- ऐसे hi कीर्ति से मिलने की सुरपरिसेस देती raho...Mai खुश हो जाऊँगा.

इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Sach में बहुत खुश था wo...Abhi भी उसके दिमाग में कीर्ति के साथ जुडी ये यादें hi घूम रहा था.

मेघा भी सुमित की ख़ुशी में खुश होने की कोशिश करते हुए अपने हॉस्टल की और जाने लगी.
 
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