Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 6 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 35

आज का दिन स्पेशल tha...Aur स्पेशल दिन में कोई कमी ना हो उसके लिए सुमित पूरी तैयारी कर रहा tha...Aadha घंटा से मिरर के सामने बैठ कभी वो हैरस्टीले चेंज करता तो कभी सनग्लासेस.

थक हार कर.

सुमित:- जैसा hun...Waisa hi ठीक hun...Aur कीर्ति भी मुझे पसंद करती hai...Naa की मेरे लुक्स को.

फिर मिरर की तरफ देख.

सुमित:- हैंडसम तो हूँ hi फिर भी कोई मतलब nahi...Kirti मुझसे पसंद करती ha...Naa की मेरे लुक्स को.

वैसे भी इस लुक में गजब hi लग रहा हूँ.

इसी तरह सुमित ने खुद को कॉन्फिडेंस दिया.

सुमित:- एक हफ्ता हो गया सरप्राइज के बारे में सोचते hue...Finally अब्ब जा कर मिला.

इतना कह कर सुमित ने बीएड में रखे सरप्राइज को अपने पंत के पॉकेट में रख लिया.

सुमित:- बहुत नाराज हो ना tum...Ki मुझे तुम्हारे दिल की कोई परवाह nahi...Pichle कुछ दिनों से तुम्हारी नाराजगी और भी बढ़ गया hai...Meri तरफ देखती भी नहीं.

आज तुम्हारा और मेरा दोनों का इंतजार khatm...Aisa सरप्राइज दूंगा की तुम्हारा खोया हुआ मुस्कान वापस लौट आएगा.

ये सोचते हुए सुमित काफी एक्ससिटेड हो गया था.

सुमित जो अभी तैयार हो कर बाहर निकलने hi वाला था की पीछे से आ रही आवाज सुन कर रुक जाता है.

कहा जा रहे हो भैया ऐसे सज धज के?

सुमित पीछे अपनी बहिन रश्मि की तरफ ghuma...Aur मुस्कुराते हुए bola...Guess कर!!!

रश्मि:- शायद किसी पार्टी में जा रहे है आप.

सुमित अपना सर पर हाथ मार kar..."Sirf पार्टी में जाते वक्त सूट नहीं पहनता हूँ?"

रश्मि:- तो क्या आप अब्ब आवारा गर्दी करते वक्त भी सूट पेहेन्ने लगे.

सुमित:- अरे नहीं.

रश्मि:- तो फिर?

सुमित:- तेरी भाभी को प्रोपोज़ करने जा रहा हूँ.

सुमित दांत दिखा कर बोलै.

रश्मि:- पापा को बताती hun...Rukiye अभी.

सुमित:- डरता हूँ क्या?

सुमित ने पुरे शान से जवाब दिया.

रश्मि:- Papa...Papa.

रश्मि की आवाज और तेज होता देख...

सुमित:- रुक जा मेरी Maa...Marwayegi क्या?

सुमित का हालत एकदम से भीगी बिल्ली जैसा हो gaya...Rashmi भी अब्ब उससे देख हांसे जा रही थी.

रश्मि:- आल थे बेस्ट भैया!!! :तुम्बुप:

सुमित:- थैंक यू :)

फिर सुमित चला गया अपने मंजिल की taraf...Yani की अपने प्यार का इजहार करने.

Hi कीर्ति.

एक पार्क में पहुँचते hi सुमित ने मुस्कुरा कर कहा.

कीर्ति:- क्यों बुलाया यहाँ मुझे?

कीर्ति की जवाब में कोई भाव नहीं था.

सुमित:- कुछ बताना tha...Bahut ख़ास.

कीर्ति:- बोलिये जल्दी.

सुमित अब्ब बिना कोई देर किये पॉकेट से एक रोज निकल कर कीर्ति की तरफ बढ़ा देता है.

सुमित:- खुद से और झूठ बोल नहीं saka...Naa चाहते हुए भी तुमसे आखिर प्यार कर hi baitha...Tumhare प्यार का असर ऐसा है की सुबह शाम तुम hi दिखती ho...Har वक्त तुम्हे hi दिल में रखने का मन करता hai...Tumhari एक झलक पाने के लिए दिल तरस जाता hai...Tumhe देख लेने के बाद hi सुकून मिलता है इस दिल को.

दिल में तो तुम पहले से hi ho...Mera अब्ब एक hi ख्वाहिश है की तुम्हे अपने पलकों पर बिठा कर rakhu...Hamesha हमेशा के लिए.

क्या मुझे जिंदगी भर के लिए तुम्हारा साथ मिलेगा?

सुमित की आवाज में प्यार hi प्यार था अपने कीर्ति के liye...Saath hi एक घबराहट भी.

कीर्ति वो रोज लेती है और सुमित के उम्मीद के उल्टा उस रोज को अपने संदल से कुचल देती है.

सुमित:- :ीक: ये तुम...

कीर्ति:- श्रुति को जानते है आप?

सुमित:- हाँ.

सुमित के चेहरे में एकदम से दर दिखने laga...Dar इस बात का था की कही कीर्ति कुछ गलत ना समझ ले.

कीर्ति:- और प्रीती.

सुमित:- Haan...Lekin तुम.

कीर्ति:- और कीर्ति.

सुमित:- Haan...Tum.

कीर्ति:- अब्ब श्रुति और प्रीती के बाद मेरा टर्न है ना?

कीर्ति गुस्से में दर्द के साथ बोली.

सुमित:- Nahi...Tum गलत समझ रही हो.

सुमित को समझ में hi नहीं आ रहा था की कीर्ति को कैसे समझाए? वो खुद hi कन्फ्यूज्ड था की कीर्ति को ये सब कैसे पता चला.

कीर्ति:- आप जान 6 की रात श्रुति के साथ कहा थे?

सुमित कुछ बोल नहीं paaya...Abb उससे समझ में आने लगा की किसी ने उसके खिलाफ साजिश रचा hai...Lekin किसने?

कीर्ति:- जान 8 की रात प्रीती के साथ?

सुमित कुछ बोलता उससे पहले.

कीर्ति:- फिर भी मई गलत hi समझ रही हूँ ना? इतना बेवकूफ समझ रहे है आप मुझे?

सुमित कुछ बोल नहीं पा रहा tha...Usse समझ में hi नहीं आ रहा था की कैसे कीर्ति को समझाए.

कित्ती:- बहुत प्यार करती थी aapse!!!Lekin aap...Aapne तो मेरा दिल hi तोड़ दिया. :(

जब मैंने आपको प्रोपोज़ किया और आपने मन कर दिया फिर भी मई आपके पीछे पड़ी rahi...Ye सोच कर की कभी तो आपका दिल मेरे लिए dhadkega...Aapko भी मुझसे प्यार हो जाएगा.

आज धड़का तो भी एक हवस के रूप में!!!

आपके बारे में सब गलत बोलते thhe...Lekin मई नहीं मानती thi...Hamesha आप में अच्छाई hi दीखता tha...Pyar करती थी naa...Pyar अँधा होता hai...Shayad इसी वजह से अंधी हो गयी थी.

आप सच में बदल gaye...Itna बदल गए की आप अब्ब मुझे भी हवस की नजर से देखने लगे.

माफ़ kijiye...Mai आपकी टाइप की नहीं.

कीर्ति रट हुए boli...Dil का दर्द अब्ब आँखों से बाहर आ रहा था उसकी.

सुमित:- मई तुम्हे समझा सकता hun...Please मेरी बात ध्यान से सुन्ना.

कीर्ति:- नहीं सुन्ना मुझे आपकी कोई baat...Aap एक धोखेबाज़ है.

इतना कह कर कीर्ति वो रोज सुमित की मुंह पर मार कर चली जाती है.

सुमित:- प्लीज मेरी बात सुनो.

सुमित भी कीर्ति के पीछे चल pada...Ek बार कीर्ति की कंधे पर हाथ रख कर उससे बुलाने की कोशिश किया तो.

कीर्ति:- छूना मत मुझे.

कीर्ति की आवाज इतना तेज था की वो सुमित भी दर gaya...Abb कीर्ति के गुस्सा और नफरत के सामने वो टिक नहीं पाया.

बस कीर्ति को अपनी जिंदगी से दूर जाता देख रोने laga...Aaj बहुत मजबूर था Sumit...Aankh इतना भर आया की सामने कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था.

सिर्फ कानो में कुछ सुनाई दे रहा तह "आप धोखेबाज़ hai...Ek हवसी hai."...Bas यही बात उसको बार बार सुनाई दे रहा था.

जब दिल का दर्द संभल नहीं पाया तो वो उसी जगह पर गिर गया लाचार और मजबूर हो कर.

सारे अरमान सारे सपने एक hi पल में टूट gaye...Aaj फिर प्यार में वो हार gaya...Na जाने जिंदगी के और कितने इम्तेहान देना बाकी था उससे.

एक नजर अपने पॉकेट की तरफ dekha...Pocket को देखते hi दर्द भरे मुस्कान उसके चेहरे में फ़ैल gaye...Pocket में मौजूद सरप्राइज के साथ साथ उसका प्यार भी अधूरा रह गया.

यार एक तुम hi तो ho...Jo मुझ पर भरोषा करती thi...Pyar करती thi...Pyar करना तुमसे hi सीखा hai...Aur आज जब तुम से प्यार हो गया तो तुम मुझे छोड़ कर जा रही ho...Nahi मैंने तुम्हे कोई धोखा नहीं दिया hai...Aur हवस नहीं सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे.

तुम्हारे बिना जी नहीं paaunga...Wapas आ जाओ yaar...Hamesha तुम्हे अपने दिल में बिठा कर रखूँगा.

एक मौका तो दो मुझे अपनी बात कहने kaa...Mera प्यार का एहसास कराने ka...Please...Only ओने चांस.

Writer's नोट:- ये अपडेट अपडेट 1 का अपडेटेड वर्शन hai...Aur इसी वजह से शॉकिंग अपडेट कह रहा tha...Aur यही वजह था कल 2 अपडेट पोस्ट करने की सोच रहा tha...Iss अपडेट में ज्यादा टाइम नहीं लगा.

नेक्स्ट अपडेट शॉकिंग तो नहीं रिलीफ वाला अपडेट hoga...Plot के हिसाब से रिलीफ nahi...Shayad समझ गए honge...Agar नहीं तो नेक्स्ट अपडेट में समझ जाएंगे. :डी
 
थैंक्स बिंदास भाई फॉर योर सपोर्ट एंड comment...Kabhi कभी रीडर्स का शामे कमेंट आता है नीस अपडेट वाला तो सोचा एक बार मई भी शामे अपडेट पोस्ट कर देता हूँ. :डी. जोक्स अपार्ट, ये अपडेट स्टोरी का फ्लो में part है तो फिर से पोस्ट करना pada...Khair इस अपडेट की नाराजगी नेक्स्ट रिलीफ वाला अपडेट जरूर पूरा करेगा :approve:...Keep सपोर्टिंग.
 
अपडेट 36

सुमित बेसब्री से छत में घूम रहा tha...Aur बार बार दरवाजा की तरफ देख रहा tha...Intrjaar था तो उसकी जो उसके दिल की बहुत करीब आ चुकी थी.

और जब कीर्ति ने छत में अपना कदम रखा तब जा कर सुमित को थोड़ा छैन मिला.

वो कीर्ति को देखता hi रह gaya...Abb उसके आँखों में कीर्ति के लिए ढेर सारा प्यार था साथ hi दिल के एक कोने में दर.

कीर्ति भी सुमित को देखते हुए उसके तरफ बढ़ रही thi...Aankho में नफरत के साथ साथ दिल टूटने का दर्द भी था.

सुमित:- मुझे यकीं tha...Tum जरूर आओगी.

प्यार भरी आवाज में सुमित ने कहा.

कीर्ति:- ये बताने के लिए की हमारे बिच सब कुछ ख़त्म हो चूका है.

उतना hi नफरत में कीर्ति ने जवाब दिया.

सुमित:- हमारे बिच सुरु हुआ hi क्या है.

हमेशा की तरह मजाकिया अंदाज में सुमित ने kaha...Lekin कीर्ति ने जिस तरह गुस्से में देखा इससे वो समझ गया की इस बार मामला मजाक से सुलझने वाला नहीं है.

कीर्ति फिर मुद कर जाने लगी.

सुमित:- सुनो तो.

कीर्ति दुबारा सुमित की तरफ देखती hai...Pehle तो आँखों में नफरत था फिर धीरे धीरे आंसुओं ने नफरत की जगह ले ली.

ये देख सुमित का भी दिल छलनी होने laga...Ek हाथ आगे बढ़ाया आंसुओं को पोंछने के liye...Lekin कीर्ति ने झटक दिया.

कीर्ति:- छूने की कोशिश भी मत कीजिये.

सुमित अब्ब सिर्फ मज़बूरी में कीर्ति को रट देख रहा था.

कीर्ति:- कितना विश्वाश करती थी आप पर? विश्वाश नहीं andh-vishwash...Itna अंधी हो गयी थी की कुछ hi दिन में आप को अपना दिल दे baithi...Lekin आप? आप तो धोखेबाज़ निकले.

सुमित:- Nahi...Tum गलत समझ रही हो...

सुमित को बिच में hi रोक कर कीर्ति ने कहा.

कीर्ति:- दो दिन पहले श्रुति और प्रीती से मिली थी.

ये सुनते hi सुमित चौंक gaya...Dono को एक saath...Koi इत्तेफ़ाक़ नहीं tha...Wo तो अभी तक यही सोच रहा था की शायद कीर्ति ने मोबाइल चाट देख लिया होगा और ग़लतफहमी हो गया होगा.

कीर्ति:- बताया उन्होंने आप का करैक्टर.

सुमित कुछ बोल नहीं पा रहा था.

कीर्ति:- आपने जो उनके साथ किया वही मेरे साथ करने वाले थे.

खुद को एकदम अलग दिखा कर पहले लड़कियों को अत्त्रक्ट karo...Fir अपने प्यारे बातों और सेंस ऑफ़ ह्यूमर से उनको अपने जाल में fasaao...Fir उनके मुंह से hi प्यार का इजहार करवाते है.

मेरे साथ भी ऐसा hi hua...Aur प्यार में आपके पीछे पद gayi...Aap तो कभी मानते नहीं थे की आप मुझसे प्यार करते hai...Maante भी क्यों? आपके नजर में मेरे लिए प्यार की जगह हवस भी था.

फिर आपने कल मुझे प्रोपोज़ किया इतना तड़पाने के baad...Aur मई हां कह देती तो कुछ दिनों के बाद मुझे भी होटल में ले जाते.

और जब आपका काम हो जाता तो breakup...Aur इलज़ाम भी मुझ पर hi लगता की मई hi आपके पीछे पड़ी थी.

कीर्ति की हर एक बात में नफरत tha...Ye सुन कर सुमित का मुंह खुल गया.

सुमित:- Nahi...Tum गलत समझ...

कीर्ति:- मोबाइल दीजिये आपका.

सुमित:- लेकिन.

कीर्ति:- दीजिये?

गुस्से में कीर्ति चीखी.

सुमित डरते हुए मोबाइल आगे बढ़ा देता है.

फिर कीर्ति सुमित को खुद hi उसका श्रुति और प्रीती के साथ का चाट पढ़ा देता है.

अब्ब सुमित के माथे से पसीना बहने लगा था.

सुमित:- तुम्हे कैसे समझाऊ? समझ में नहीं आ रहा...

सुमित से और बोलै भी नहीं जा रहा था.

कीर्ति:- आपको समझाने की जरुरत भी नहीं hai...Samajh चुकी हूँ मई.

समझ तो उसी दिन जाना था जब मुझे ट्रक से बचाने के बाद इतना जोर से बाहो में भर लिया tha...Saaf हवस महसूस कर रही थी मई.

और आप का रूम का वो पोस्टर...मिशन प्लेबॉय का.

सुमित को ये सुन बहुत बुरा लगा की कीर्ति ने उसके प्यार का पहले एहसास को hi हवस का नाम दे दिया.

कीर्ति:- आज के बाद मुझसे बात करने की कोशिश भी मत कीजिये.

नफरत भरी आवाज में ये बात कह कर कीर्ति वह से जाने लगी.

सुमित:- सुनो तो.

हारा हुआ आवाज में सुमित ने मनाने की कोशिश ki...Lekin कीर्ति चली gayi...Bina एक बार भी पीछे मुड़े.

सुमित को पता hi नहीं चला कब उसका दिल का दर्द पसीना के रूप में आँखों से बह रहा tha...Sacche प्यार का एहसास हुआ भी तब जब उसका प्यार उससे दूर जा रही थी.

Hello?

दूसरी तरफ से श्रुति का आवाज आया.

सुमित:- सही खेल गयी tum...Ummeed से भी ज्यादा.

श्रुति:- मैंने कहा था tumhe...Tum सिर्फ मेरे हो? कोई कीर्ति बिच में नहीं आ सकती.

सुमित गुस्से में कुछ नहीं बोलै.

श्रुति:- परेशान लग रहे हो.

सुमित:- मैंने तुम्हे बता दिया था की हमारे बिच में प्यार जैसा कुछ नहीं hoga...Sirf गिव एंड टेक का रिलेशनशिप होगा.

श्रुति:- सुरु आप ने किया tha...Khatm मैंने? अगर इस दौरान मुझे सच में प्यार हो गया तो इसमें मेरी क्या गलती?

सुमित:- दिल में हाथ रख कर bol...Tujhe और सच्चा प्यार?

श्रुति:- अच्छा मुझे प्यार नहीं hai...Lekin मई चाहती हूँ की हमारा वो गिव एंड टेक का रिलेशनशिप और भी लम्बा chale...Koi प्रीती और कीर्ति का फखल मई पसंद नहीं कर सकती.

बहुत पहले से तुम दोनों पर नजर रख रही थी (मंदिर से लौटने के बाद घूरती aankhein)...Bas मौका का इंतजार कर रही थी जो आज मिल गया.

श्रुति की बातों से ख़ुशी साफ़ झलक रहा था.

सुमित:- और वो गिव एंड टेक वाला रिलेशनशिप सुरु होने से पहले hi मैंने ख़त्म कर दिया था.

श्रुति:- और यही बात मेरे ईगो पर लगा.

सुमित:- अब्ब मेरा ईगो का सामना करेगी तू?

श्रुति:- मतलब

श्रुति हल्का डरते हुए बोली.

सुमित:- जो तू सोच रही hai...Usse भी बुरा.

श्रुति:- रपे, मर्डर...

श्रुति इससे आगे कुछ बोलती.

सुमित:- इतना hi है तेरा soch...Physical torture...Ye बच्चों का काम hai...Mental टार्चर.

तूने मुझे कीर्ति से अलग करने की साजिश की hai...Aaj नहीं तो कल वो मान jaayegi...Lekin मई तुझे तुझसे hi अलग कर dungi...Itna कमजोर हो जायेगी तू मानसिक रूप से.

इतना कह कर सुमित ने फ़ोन रख दिया.

फ्लैशबैक एंड्स

सुमित ने राज की तरफ dekha...Jiske मन में कई सारे सवाल उठ रहे the...Wo कुछ बोलता उससे पहले hi सुमित ने कहा.

सुमित:- कीर्ति 2 दिन और रही हमारे घर mein...Socha था उन् 2 दिनों को मई अपने जिंदगी के सबसे यादगार दिन banaunga...Itna रोमांटिक होगा वो din...Yaadgaar तो bana...Lekin मेरा ना कामयाबी और लसाहृ के रूप में.

हर कोशिश किया कीर्ति को मनाने ko...Maanna तो दूर मेरी तरफ देखा तक nahi...Itni नाराज हो गयी थी वो.

2 दिन बाद वो अपने पेरेंट्स के साथ अपने घर चली gayi...Aur मई छत से उससे जाते हुए देखता रह गया दुखी मन से.

कोशिश जारी raha...Do तीन बार उसके घर भी gaya...Uncle आंटी से कोई बहाना बना deta...Lekin वो भी किसी काम का nahi...Kirti मुझसे मिलने भी नहीं आयी.

सोशल मीडिया और फ़ोन दोनों में ब्लॉक हो चूका था.

बस एक hi मौका tha...Mai थोड़ी दूर उसके घर की बाहर आशिक़ों की तरह उसका इंतजार karta...Kab वो घर से निकलेगी और मई उससे बात कर पाऊंगा.

इससे नाराज वो घर से निकलना भी बहुत काम कर चुकी thi...Mai hi थक हार कर उससे दूर हो gaya...Kahi न कही लग रहा था मई उसका फ्रीडम चीन उससे मेन्टल टार्चर कर रहा हूँ.

उसकी नजर से दूर तो हो gaya...Lekin उससे दूर कभी जा नहीं saka...Uske बारे में जानकारी हासिल करता रहता.

पुरे साल पढ़ाई बहुत बुरा gaya...Result भी ऐसा की पापा सच में नाराज हो gaye...Unhe सच बता भी नहीं सकता tha...Bas चुप चाप दांत सुन लेता था.

लगभग हार मान hi चूका था की ये बात दिमाग में aaya...Wo मेडिकल की तैयारी कर रही hai...Fir क्या था मैंने भी ठान लिया की मई भी मब्ब्स hi ज्वाइन करूँगा.

पापा बहुत नाराज हुए ऐसे अचानक से बी. फार्मेसी छोड़ने से 2 साल पढ़ने के baad...Lekin मई भी जिद्द में अदा raha...Aur मेरे जिद्द के सामने पापा भी मान गए.

फिर खुद को रूम में लॉक कर के दिन रात पढ़ने laga...Padhaai में ऐसे लग गया की कब दिन होता था और कब रात ये भी पता नहीं चलता.

वैसे तो मई इतना प्रेशर ले कर नहीं पढता hun...Lekin हालत hi ऐसा tha...Topic बहुत थे और टाइम बहुत काम.

रीलीज़ हुआ किसी को कांसेप्ट देना बहुत ाशन hai...Aur डेप्थ में पढ़ना उतना hi मुश्किल.

खुद को लॉक करने की एक और वजह tha...Gham में कब नशा करने लगा पता hi नहीं chala...Gharwalon से बचने के लिए रूम से बहुत काम बाहर निकलता था.

वो भी हैरान थे मेरे इस बदलाव se...Lekin कभी ज्यादा रियेक्ट भी नहीं किया.

कुछ मोनथस की म्हणत थोड़ा सा रंग ले कर आया.

एंट्रेंस में पास हो गया वो भी बहुत अच्छे मार्क्स se...Full स्कालरशिप भी मिला इस कॉलेज mein...Lekin एक एफओश.

कीर्ति के कॉलेज में हो नहीं पाया...1 मार्क्स से छूट gaya...Aisa लगा एक बार फिर हार गया हूँ.

इतना पैसा भी नहीं है की पैसे से उसी कॉलेज में एडमिशन करा पाटा.

डूबता को तिनके का sahaara...Thik ऐसे hi एक उम्मीद mila...Kirti की कोचिंग सेण्टर में पढ़ने वाले एक लड़के को दोएत banaya...Usse पता चला की कीर्ति की दोस्त मेघा इसी कॉलेज में पढ़ती है.

बहुत सोचा और फिर फैसला किया की यही एडमिशन कराऊंगा.

इतना कह कर सुमित चुप हो गया.

राज:- और आपको फिर से उम्मीद mila...Megha के जरिये कीर्ति तक पहुंचना का.

मुस्कुराते हुए,

सुमित:- सही सोचा.

राज:- लेकिन ये तो गलत है ना?

सुमित:- बहुत गलत hai...Abb मई खुद शर्मिन्दा हूँ.

सोचा था वैसे भी आज के जमाने में प्यार का कोई महत्वा नहीं hai...Megha से प्यार का नाटक करूँगा और इतना क्लोज हो जाऊँगा की कभी मौका मिले कीर्ति से बात करने ka...Mujhe सिर्फ एक अच्छा सा मौका चाहिए जहा मई कीर्ति से बात कर के सब सही कर दूंगा.

सोचा नहीं था मेघा इतना सीरियस हो जायेगी प्यार mein...Lekin वो हो गयी?

बहुत अच्छी लड़की है wo...Mujhse सच्चा प्यार करने लगी thi...Aur धोखा दिया नहीं गया mujhse...Ek बार फिर अपने पेअर में कुल्हाड़ी मार कर सच बता दिया.

हालात ऐसे हो गए है की जो भी कर रहा हूँ गलत hi हो रहा है.

राज:- अब्ब आप क्या करेंगे?

सुमित:- प्लान में कोई चेंज नहीं है.

राज:- मतलब?

सुमित:- मेघा के जरिये hi कीर्ति तक पहुँचूँगा.

राज:- लेकिन?

सुमित:- अब्ब मेघा की प्यार नहीं उसकी नफरत मुझे कीर्ति तक पहुचायेगा.

सुमित ने गहरी सोच के साथ kaha...Raj को कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

नोट:- रिलीफ वाला अपडेट इसा लिए कह रहा था क्यों की फ्लैशबैक ख़त्म हो चूका hai...Abb इससे रिलीफ मिल जाएगा आप सब को.

अब्ब स्टोरी अपने मैं प्लाट में chalega...Yaani की tragedy...Waise तो हर अँधेरा रात का एक उजाला सुबह होता hai...Lekin सुमित की इस रात का सुबह उजाला होगा या नहीं इसका गारंटी नहीं दे sakta...Abb स्टोरी में पैन और इमोशंस वाले अपडेट ज्यादा आएंगे.

उम्मीद है आप को आगे भी कहानी पसंद आये.
 
अपडेट 37

सुमित एक बड़ा सा पेपर, पेन और पेंसिल ले कर रूम से निकल hi रहा था की.

राज:- कहा जा रहे है आप?

सुमित:- छत mein...Room लॉक किये बिना hi सू jaa...Waapas आने में लेट हो जाएगा.

फिर सुमित वह से निकल गया और छत में पहुँच कर लाइट ों करता है.

तभी उसका नजर 350 मीटर दूर गर्ल्स हॉस्टल के छत में पड़ता hai...Jaha छत के एक कोने में मेघा अकेली thi...Light ों होते hi मेघा को भी सुमित दिख जाता है.

सुमित को देखते hi मेघा की चेहरे में नफरत के भाव आने लगता hai...Wo अपना मुंह घुमा लेती है.

सुमित ये देख मुस्कुराता है.

और फिर छत में पहले से hi रखा चेयर पर बैठ जाता hai...Table पर पेपर, पेन और पेंसिल रख कर वो अपना काम पर लग जाता है.

मेघा को हैरानी हो रहा था की सुमित ने अभी तक उससे इर्रिटेट नहीं किया.

जब वो सुमित की तरफ देखती है तो वो अपने काम में लगा हुआ tha...Paper में कुछ लिख रहा था.

इस सब में मेघा को कोई इंटरेस्ट नहीं tha...Sumit को देख कर उसका मूड और भी ऑफ हो गया tha...Fir वो लाइट ऑफ कर के निचे अपने रूम में चली जाती है.

आज नींद भी आँखों से गायब tha...Bahut से अंगड़ाई लेने के बाद और छत को घूरने के बाद जा कर नींद आती है.

रात के 2 बजे थे की अचानक से मेघा की नींद टूट जाती hai...Fir से सोने की कोशिश भी असफल hi raha...Aise में उससे अचानक से ख्याल आता है.

"सुमित अभी भी छत में होगा या फिर चला गया होगा?"

फिर खुद hi जवाब देती है.

"चला गया hoga...Waise भी मुझे क्या मतलब उससे."

फिर कुछ देर ऐसे hi खुद से सवाल जवाब करने के बाद उससे रहा नहीं जाता.

एक बार फिर वो छत की तरफ निकल पड़ती hai...Iss बार वो लाइट ों किये बिना hi छत में जाती है.

छत में जाते hi वो चौंक जाती hai...Sumit अभी भी मौजूद था.

चेयर में पीठ के बल लेता सुमित अपने उँगलियों से सिगरेट फंक रहा था...1 सिगरेट ख़त्म दूसरा suru...Dusra ख़त्म तीसरा suru...Aise करते करते वो 5 सिगरेट फूंकता है.

चेहरा काफी सीरियस tha...Pehli बार मेघा को लगा की ये लड़का सीरियस भी हो सकता है.

सिगरेट फूंकने के बाद सुमित वापस पेन उठाये पेपर वर्क में लग जाता है.

ये सब मेघा एकटक सुमित को देख रही थी.

मेघा:- (इन हेर मंद) इतना मासूम चेहरा और इतना बड़ा kaand...Logon का अब्ब कोई भरोषा nahi...Kabb किसका मुखौटा उतर जाए.

इतना कह कर मेघा वापस निचे अपने रूम में चली जाती है.

नेक्स्ट डे

मेघा आज लास्ट रौ में बैठी thi...Shayad वो अकेली रहना चाहती थी.

वो बस इंतजार कर रही थी की कब लेक्चर स्टार्ट hoga...Hairaani उससे तब होती है जब सुमित गेट से क्लास के अंदर आया.

जब सुमित मेघा की तरफ बढ़ा और उसके पास पहुँच गया तो मेघा सुमित की आँखों में देखती hai...Bahut लाल tha...Jo ये बता रहा था की सुमित रात भर सोया नहीं है.

फिर मेघा की उम्मीद के ठीक उल्टा सुमित उसके पास ना बैठ कर पास में hi बैठी दिव्या के पास चला जाता है.

सुमित:- मई ी सीट हेरे?

दिव्या:- ऑफ कोर्स.

सुमित:- अगर बुरा नहीं मानोगी तो मई तुम्हारा नाम पूछ सकता हूँ?

सुमित की इस सवाल पर दिव्या सुमित को घूरती है.

सुमित:- मई यहाँ स्टूडेंट काम गेस्ट ज्यादा हूँ :D...Iss वजह से पता नहीं.

दिव्या:- ी ऍम दिव्या.

फिर दिव्या और सुमित के बिच बातें सुरु हो जाता hai...Paas में hi बैठी मेघा इर्रिटेट हो रही थी दोनों के बात चीत se...Abb तो मेघा को सुमित की आवाज से भी नफरत हो गया था.

अचानक hi दिव्या पूछती है.

दिव्या:- क्या तुम दोनों का ब्रेक उप हो गया है?

सुमित:- (विथ स्माइल) क्या लगता है तुम्हे?

दिव्या:- कुछ दिनों से तुम दोनों को एक दूसरे से अलग देख कर और जो भी हल्ला फ़ैल रहा है उससे सुन कर तो सच में लग रहा है की ब्रेकअप हुआ है.

सुमित:- इस बार हल्ला सच है.

उधर मेघा सोच रही थी.

मेघा:- (इन हेर मंद) रिलेशनशिप सुरु hi कब हुआ था जो ब्रेकअप होगा?

दिव्या:- लेकिन क्यों?

सुमित:- बोर हो गया था.

लापरवाही के साथ सुमित ने जवाब दिया.

दोनों कुछ और बात करते उससे पहले प्रोफेसर क्लास में आ जाते है.

फिर सभी पढ़ाई पर ध्यान देते है सुमित के अलावा.

मेघा को भी अजीब लग रहा था सुमित का badlaaw...Kal तक कुछ ज्यादा hi इर्रिटेट करने वाला सुमित अब्ब उससे एकदम से इग्नोर करने लगा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) अच्छा hi hai...Isse पीछा तो छूटा.

एनाटोमी का क्लास tha...Udhar प्रोफेसर पढ़ा रहे thhe...Idhar स्टूडेंट्स पढ़ रहे thhe...Aur Sumit...Wo सोने की तयारी कर रहा था.

ये देख कर सुमित.

प्रोफेसर:- हे you...Boy ात लास्ट row...Kya नाम hai...Haan सुमित?

ये सुनते hi सुमित उठ कर खड़ा होता है.

सुमित:- जी सर.

प्रोफेसर:- तुम हमेशा लास्ट में hi क्यों बैठते हो? और अभी क्या कर रहे थे.

सुमित:- किसी महापुरुष ने कहा tha...Last रौ में बैठने से नींद अच्छा आता hai...Aur ऊपर से आपका लोरी जैसा सुरीला aawaj...Sone में सुहागा का काम कर रहा है. :यौन:

ये सुनते hi सभी हसने लगते है.

प्रोफेसर:- और ये महापुरुष है कौन?

सुमित:- छोड़िये ना Sir...Hai कोई सुमित नाम का.

प्रोफेसर:- तुम लेक्चर में ध्यान नहीं दे रहे ho...Matlab सब कुछ आता होगा.

सुमित:- शायद.

प्रोफेसर:- शायद का क्या matlab...Aaj तुझे अभी का लेक्चर रिलेटेड पूछता हूँ.

फिर प्रोफेसर क़ुएस्तिओन्स पूछते है और सुमित सही आंसर भी देता है.

प्रोफेसर:- अच्छा लास्ट question...What इस थे एपिथेलियल लाइनिंग ऑफ़ ब्रोन्चुस?

सुमित:- स्क्वैमस एपिथेलियम.

ये सुनते hi प्रोफेसर गुस्से में कहते है.

प्रोफेसर:- हमारे जमाने में तो हमने सिलिटेड कलुमनार एपिथेलियम पढ़ा था.

सुमित:- आपके जमाने में वो ट्रेंड उतना ज्यादा नहीं hoga...Lekin अब्ब ज़माना बदल रहा है.

प्रोफेसर:- ज़माना भले hi बदला ho...Lekin मेरे क्वेश्चन का आंसर बदला नहीं है.

सुमित:- लेकिन सर ये आंसर मुझ पर अप्लाई नहीं hota...Maine अपना बॉडी रिलेटेड आंसर दिया है.

प्रोफेसर:- ऐसा क्या है तुम्हारे बॉडी में.

प्रोफेसर के साथ सभी स्टूडेंट्स कन्फ्यूज्ड थे की सुमित कहना क्या चाहता है.

सुमित:- समझा कीजिये sir...Chronic smoking...Aur मेटाप्लॅसिए.

ये सुनते hi प्रोफेसर भी कुछ पल के लिए चुप हो जाते है.

प्रोफेसर:- ज्यादा स्मोकिंग मत karo...Warna ये मेटाप्लॅसिए नेओप्लासिए (कैंसर) में कही बदल न जाए.

(लम्बे टाइम तक स्मोकिंग करने से रेस्पिरेटरी तुबे में स्ट्रेस की वजह से सेल तोए बदल जाता है.)

सुमित:- ध्यान रखूँगा.

फिर प्रोफेसर पढ़ाने लगते है.

सुमित:- मई ी सीट सर?

प्रोफेसर:- हाँ बैठ जा abhi...Viva में छैन से बैठने नहीं दूंगा.

फिर सुमित बैठ जाता है.

तभी साइड में बैठी दिव्या कहती है.

दिव्या:- लगता नहीं तुम सर को परेशां करना बंद karoge...Collehe के फर्स्ट लेक्चर से ले कर हर लेक्चर में सर को परेशां करते hi रहते हो.

सुमित:- फवौरीते लेक्चरर hai...Majaa आता है सर का मजा lena...Aaj नींद नहीं लगता तो जरूर ध्यान देता.

दिव्या:- ी लिखे योर सेंस ऑफ़ ह्यूमर.

सुमित:- माय प्लेअसुरे.

उधर मेघा सब देख रही thi...Usse लग रहा था की सुमित की बातों में आ कर दिव्या कही दूसरी मेघा ना बन jaaye...Lunch टाइम में मेघा दिव्या से बात करने का सोचती है.

जब लेक्चर ख़त्म होता hai...Megha क्लास से बाहर जाती है.

मौका मिलते hi,

सुमित:- चाक़ू तरबूज पर गिरे या फिर तरबूज चाक़ू par...Katna तरबूज को hi है.

दिव्या:- मतलब?

सुमित:- तुम मुझ पर फिसलो या मई तुम par...Nukshaan तुम्हारा hi है.

दिव्या:- क्या मतलब?

सुमित:- मेघा की तरह इतना भी मत इम्प्रेस्सेड हो जाना मुझ ओर की कही बाद में तुम्हे भी पछताना ना पड़े.

दिव्या:- Chhee...Aise हो tum...Mai तो तुमसे दोस्ती करना चाहती thi...Bahut अच्छा समझती थी तुम्हे.

सुमित:- अच्छा और mai...Dur दूर तक कोई रिलेशन नहीं है.

इतना कह कर सुमित मुस्कुराने लगता hai...Divya अब्ब कोई जवाब नहीं देती.

मेघा जब वापस आती है तब,

दिव्या:- सही किया तुमने जो इससे ब्रेकअप कर लिया.

मेघा:- तुम भी दूर hi raho...Psycho है ये आदमी.

ये सुन सुमित मुस्कुरा कर इग्नोर कर देता है.

जब लंच टाइम होता है तब दिव्या पहले hi वह से चली जाती है.

सुमित:- क्या कह रही थी mujhe...Psycho...Psycho मतलब paagal...Haan पागल तो hun...Lekin कीर्ति के प्यार में.

मेघा कोई जवाब नहीं देती.

बाकी सभी लंच के लिए चले जाते है सुमित, मेघा और राज के alawa...Kuch रौ आगे बैठा राज दोनों की कुछ बातें सुन रहा था और समझ रहा था.

राज:- मेघा अगर कोई इंसान जान बुझ कर किसी के दिल में अपने लिए नफरत भर रहा हो तो समझ जाना कोई मकशद है इसके piche...Acche से sochna...Kuch मज़बूरी भी हो सकता है.

मेघा:- मकशद तो hai...Wo भी खतरनाक वाला.

मेघा की हर एक शब्द में नफरत था सुमित के लिए.

सुमित:- राज तू कहता था न तू एनाटोमी समझ नहीं पा रहा hai...Aaj रात बहुत अच्छे से samjhaunga...Aise समझाऊंगा की कभी भूल नहीं पायेगा....अभी तू जा.

सुमित ने तो बात इशारा में कहा tha...Lekin राज भी समझ गया और वह से चला गया.

सुमित भी बैग उठा कर जाने hi वाला था की.

मेघा:- कीर्ति बहुत अच्छी लड़की hai...Please उससे...

सुमित:- अच्छी है इसी लिए तो प्यार करता हूँ. :लव:

इतना कह कर सुमित आगे चल gaya...Saath hi वो ये भी सोच रहा था की आगे क्या करना है.
 
थैंक्स कीर्ति ji...Itna भी कपुलसीओं नहीं है की रिव्यु देना hi पड़ेगा. :D...Wo एक दम से रिव्यु ना आने पर सोचने के लिए मजबूर हो गया था की स्टोरी अच्छा चल तो रहा है? खैर, अब्ब कभी बी चांस रिव्यु ना भी आया तो भीबलखते rahunga...Xossip में किसी महान राइटर ने कहा था स्टोरी अपने साइलेंट रीडर्स के लिए लिखो.

टाइम मिले तो रिव्यु कर dijiye...Accha lagega...Lekin कंपल्सरी नहीं है. :डी
 
अपडेट 38

भाई ऐसे क्या देख रहे है आप?

कुछ देर से सुमित को अपनी तरफ घूरता देख राज ने हैरानी से पूछा.

सुमित:- एनाटोमी का कपरिसों कर रहा hun...Tujh में और कुत्ते की पूछ में.

[Anatomy:- Study of body structure]

राज:- मतलब?

सुमित:- तुझे समझाने की कोशिश और कुत्ते की पूंछ को सीधा करने की koshish...Dono बेकार है.

राज:- क्या आप मेघा वाली बात के बारे में कह रहे है.

सुमित:- Haan...Aisa कौन सा सच बताने का बुखार चढ़ गया था तुझे?

सुमित की आवाज में थोड़ा गुस्सा था.

राज:- अच्छा नहीं लग रहा था bhai...Megha को ग़लतफहमी में और भी ज्यादा नफरत हो रहा था आप से.

सुमित:- यही तो कोशिश कर रहा हु में.

राज:- अपना hi िमागे गिराना चाहते है?

सुमित:- Haan...Yeh तो सुरुवात hai...Abhi तो मेघा की दिल में और नफरत भरना है खुद के लिए.

राज:- लेकिन क्यों?

सुमित:- प्यार.

मुस्कुराते हुए सुमित ने जवाब दिया.

राज:- अब्ब आप को मेघा से प्यार हो गया?

चौंकते हुए राज ने पूछा.

सुमित:- नहीं re...Pyar तो हमेशा कीर्ति से hi करता था और करता रहूँगा.

Pyaar...Aisa दर्द है जिसका इलाज किसी एनाल्जेसिक (पैन रिलीवर) में nahi...Megha को भी यही बीमारी हो गया है.

इसका इलाज मेरे पास भी नहीं hai...Ek कोशिश है नफरत ki...Jo शायद काम कर जाए.

जितना वो मुझसे नफरत करने लगेगी सिमायड उतनी जल्दी भूल सके.

उम्मीद भरी आवाज में सुमित ने कहा.

राज:- बहुत अजीब लग रहा है मुझे यह sab...Khud को हर हाल में सही दिखाने की जमाने में आप खुद को hi गलत दिखा रहे है.

सुमित:- छोड़ ना ये सब baatein...Mujhe अपने फॅमिली और कीर्ति के अलावा किसी को प्रोवे करने की जरुरत नहीं.

हाँ मेघा के साथ गलत kiya...Iska अफसोश जिंदगी भर rahega...Aaj भी खुद को कोष्टा हूँ और आगे भी कोष्टा रहूँगा जब रक् मेघा की लाइफ फिर से पटरी पर नहीं आ jaata...Shayad यही सजा है मेरे इस पाप का.

गर्व था खुद par...Kabhi कुछ गलत नहीं kiya...Lekin abb...Ek बोझ सा बैठ गया है दिल par...Ek भूल को ठीक करने के लिए एक और भूल कर बैठा.

कहते कहते कुछ बूँद आंसू भी छलकने लगा सुमित की आँखों में.

राज:- लेकिन bhai...Aapne बात को इतना आगे बढ़ जाने कैसे दिया? वक्त रहते संभाल लेते.

राज ने सुमित की कन्धा पर हाथ रख कर कहा.

सुमित:- सब प्लानिंग के साथ किया tha...Kuch ऐसा प्लान था की मेघा को सिर्फ अट्रैक्शन हो और मेरा काम भी हो jaaye...Yaani की मेघा के थ्रू कीर्ति से फिर से मुलाक़ात हो जाए.

कॉलेज में 1 वीक लेट एंट्री इसी का सुरुवात था.

ौसे hi नोर्मल्ली मेघा के साथ फ्रेंडशिप करने से बात बन जाने पर डाउट tha...Bahut खूबसूरत है wo...Bahut से लड़को ने एप्रोच किया होगा usse...Mai भी उनमे से एक नहीं बनना चाहता tha...Thoda अलग थोड़ा स्टाइलिश.

इसी वजह से प्लान के हिसाब से 1सत क्लास एनाटोमी का अटेंड किया डॉ. महेश सर ka...Seniors से सुना था की वही एक लेक्चरर है जो हर बात को ईगो पर नहीं लेते.

और चल पड़ा अपने नई मिशन par...Mahesh सर से ऐसे बात किया की थोड़ा डिफरेंट dikhu...Aur इसका असर भी हुआ.

फिर धीरे धीरे मेघा के साथ करीबी बढ़ाना सुरु kiya...Thoda प्यार का झूठा एहसास दिलाता और थोड़ा इर्रिटेट karta...Socha ऐसे करूँगा तो मेघा का अट्रैक्शन बढ़ेगा.

और बढ़ा bhi...Lekin इतना बढ़ जाएगा की ये प्यार का रूप लेगा पता नहीं था.

अचानक से उस दिन पता चला जब गांव में मई उसको ढूंढते हुए मंदिर गया tha...Wo वह अकेली thi...Aur पीछे से जब उसका विश सुना तो बहुत बड़ा सा झटका लगा.

मेघा:- बहुत बहुत शुक्रिया भगवान् जी आप ka...Jo सुमित को मेरे जिंदगी में भेजा.

अपने प्यार अपना जीवन साथी के रूप में जिस लड़के के बारे में सोचती थी बचपन से वो साड़ी खूबियां है सुमित में.

बहुत alag...Dil का saccha...(Muskuraate हुए) थोड़ा हैंडसम bhi...Aur सबसे jaruri...Mujhse बहुत प्यार करता hai...Kabhi अकेलापन महसूस नहीं कराता hai...Apne अंदाज में मुझे हसाने की और खुश रखने की हर एक कोशिश करता है.

आप हम दोनों का साथ ऐसे hi बनाये rakhiye...Jindagi भर के लिए.

ये सुनते hi आश्चर्य के साथ मई वह से निकल गया.

और भी बहुत साड़ी बातें था जिससे मुझे पता चलने लगा था की मेघा अब्ब मुझसे प्यार करने लगी है.

ज्यादा से ज्यादा वक्त मेरे पास rehna...Mujh पर अपना अधिकार jataana...Indirectly अपना प्यार का एहसास कराना.

और कुछ दिनों बाद 5 स्टार में डेटिंग के vakt...Uski aankhein...Uski आँखें बहुत कुछ कह रही thi...Ye देख मुझे खुद से hi नफरत होने लग गया.

Pyaar...Maine इससे खेल के रूप में लिया था और जल्द hi इसने मुझे एहसास दिलाया की मई मेघा के साथ साथ अपने अंतर आत्मा के साथ भी कहल रहा हूँ.

और खेला नहीं गया ये khel...Mauka मिलते hi मेघा को अपना सच्चाई बता diya...Kirti के पा तो सकता था लेकिन ऐसे और भी गिर कर नहीं.

पश्चाताप भरी आवाज में सुमित ने कहा.

राज:- अब्ब तो कीर्ति आप पर और भी गुस्सा होगी?

सुमित:- होना भी चाहिए.

राज:- तो फिर आप?

सुमित:- तेरे सामने जो खड़ा है उसका नाम सुमित hai...Jo हारा तो बहुत बार है इस प्यार mein...Lekin हार अभी तक नहीं माना.

कोशिश करता रहूँगा आगे भी दिल se...Raasta कभी न कभी तो जरूर मिलेगा.

मुस्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jiski बातों में वापस पुरानी कॉन्फिडेंस आ गया था.

सुमित:- अच्छा sun...Anatomy बाद में padhaaunga...Abhi मूड नहीं hai...Aur हाँ ये ले papers...Kuch क़ुएस्तिओन्स लिखे hai...Jo इस एग्जाम में इम्पोर्टेन्ट है.

इतना कह कर सुमित छत में चला gaya...Aaj भी छत में मेघा थी.

वो मेघा की तरफ की छत में गया और

सुमित:- Hi ब्यूटी क्वीन.

मेघा जो अभी छत से निचे की तरफ देख रही thi...Gusse से सुमित की तरफ देखती है.

सुमित:- रात में तो और भी खूबसूरत लग रही हो.

सुमित ने दांत दिखाते हुए कहा.

मेघा फिर गुस्से में वह से चली गयी.

सुमित भी वह चेयर में बैठ गया.

आज भी देर रात में जब मेघा का नींद टुटा तो दिमाग में एक hi इंसान का चेहरा tha...Jise कभी वो बहुत प्यार करती थी.

आज भी उत्शुकता बस वो छत में गयी.

अभी भी सुमित छत पर hi tha...Kal की तरह आज उसके पास पेपर और पेन नहीं tha...Wo मुस्कान के साथ ऊपर आसमान में चाँद और तारा देख रहा था.

कुछ देर ऐसे hi सुमित को देखने के बाद मेघा वापस अपने रूम में लौट गयी.

नेक्स्ट डे

Hello ब्यूटी क्वीन.

एक बार फिर मेघा को अपने कान में किसी के गरम तेल डालने की एहसास hua...Jagah था लाइब्रेरी.

सामने देखा तो सुमित वही आगे की चेयर पर बैठ गया था.

सुमित:- आज कॉलेज क्यों नहीं आयी.

मेघा:- तुम्हे इससे कोई मतलब?

सुमित:- नहीं ऐसे hi उत्शुकता bas...Kaano में खुजली हो रहा है ये सुनने के लिए की रात भर मेरे यादों में नींद नहीं आया तुम्हे.

मेघा कुछ नहीं बोलती.

सुमित:- वैसे भी यह तो नार्मल hai...Dil जो टुटा है tumhaara...Aur मई हूँ भी charming...Itna चार्मिंग, इंटेलीजेंट और हैंडसम बॉयफ्रेंड मिस करने का ग़म में नींद थोड़ी ना आएगी.

मेघा बहुत hi नफरत के साथ सुमित को देखती hai...Itna सब हो जाने के बाद भी सुमित उसकी प्यार का मजाक बना रहा था.

आस पास देखते हुए.

सुमित:- हमेशा से यही मानता आया हूँ की कपल्स के लिए लाइब्रेरी डेटिंग स्पॉट hai...Exams के टाइम में तो और भी भरा है लाइब्रेरी.

सुमित ने सात आठ जगह ऊँगली दिखाते हुए कहा.

सुमित:- पता नहीं पढ़ाई भी करते है या फिर नैन माताका.

वैसे इन्हे देख कर ऐसा लग रहा है की काश मई और कीर्ति भी एक कॉलेज में hote...Padhaai काम प्यार ज्यादा करते.

मुस्कुराते हुए सुमित ने कहा तो उतना hi गुस्से से मेघा सुमित को घर रही थी.

फिर सुमित मेघा का बुक लेता है.

सुमित:- Pathology...Well nice...Sabhi को देखता हूँ तो सिर्फ एनाटोमी और Pathology...Samajh में कुछ आये नहीं आये पढ़ते रहते hai...Side में रखो.

बाकी के सब्जेक्ट्स पढ़ो मार्के के liye...Time मिले तो hi इन्हे पढ़ना.

फिर सुमित अपने पॉकेट से एक पेपर निकाल जार देता है.

ये है मोस्ट प्रॉबब्ले क़ुएस्तिओन्स एनाटोमी और पैथोलॉजी ka...Baaki के सब्जेक्ट्स देखो और ये paper...Topper तुम hi बनोगी.

मेघा:- यह सब मुझे क्यों बता रहे हो?

सुमित:- एहसान कर रहा था तुम par...Aur उम्मीद है इस एहसान का बदला तुम मुझे कीर्ति से मिलवा कर चुकाओगी.

इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.

वो लाइब्रेरी से निकल कर थोड़ा आगे hi पंहुचा था की उसके मोबाइल में कीर्ति का मसाज आया.

मेघा:- वेट फॉर 1 मिनट.

सुमित के पास पहुँचते hi मेघा ने कहा.

मेघा:- कीर्ति ने मुझे सब कुछ बता diya...Sab पता चल गया तुम्हारे बारे में.

सुमित:- कीर्ति ने जो भी कहा बिलकुल सच hai...Abb तो पता चल गया होगा कितना घटिया हूँ मई.

सुमित ने दांत दिखाते हुए कहा जैसे वो मेघा को और भी छिड़ा रहा hai...Fir वो वह से निकल गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) कीर्ति ने बताया है मतलब आधा काम कीर्ति ने hi कर दिया है मेघा के दिल में नफरत बढ़ाने के liye...Kirti भी अपनी जगह सही hai...Aakhir उसने बताया भी वही है जो मेरे बारे में सोचती है.

खैर जल्दी से इस सोच को बदल कर वापस कीर्ति की दिल में प्यार को जगाना है मेरे लिए.
 
अपडेट 39

एग्जाम के आखिरी दिन में भी मेघा का नजर कभी क्वेश्चन पेपर पर था तो कभी सुमित par...Aaj भी 60-70% क़ुएस्तिओन्स वही पूछा गया था जो सुमित ने रेकमेंड किया था.

मेघा:- (इन हेर मंद) इससे कैसे पता चला की यही क़ुएस्तिओन्स आने वाले है एक्साम्स में?

जरूर चोरी किया होगा क्वेश्चन पेपर्स इसने. :माध:

मेघा सुमित को एक नजर नफरत से देखती है और फिर आंसर लिखने लगती है.

लेकिन थोड़ी दूर पर बैठा सुमित का हरकत ना चाहते हुए भी मेघा का ध्यान अपनी तरफ खिंच रहा था.

वो लिख काम रहा था टाइम वास्ते ज्यादा कर रहा tha...Kabhi वही डेस्क पर सोने की कोशिश करता तो कभी पेंसिल से पेपर पर कोई आर्ट बनता और फिर इरेस कर देता.

सामने ऑब्सेर्वे कर रहे टीचर भी हैरानी से सुमित को hi देख रहे thhe...Lekin सुमित की तरफ से कोई चीटिंग जैसी हरकत नहीं था और ना hi किसी को उसकी वजह से डिस्टर्बेंस था तो उन्होंने कुछ नहीं बोलै.

और 50 मिनट बीत जाने के बाद.

सुमित:- सर कम्प्लेटेड.

आज भी सभी स्टूडेंट सुमित को हैरानी से देखने लगे फिर घडी की तरफ देख जल्दबाज़ी में अपने अंसवेरस लिखने लगे.

गार्ड:- इतना hi लिखा है और तुम्हारा कम्पलीट भी हो गया?

सुमित:- कॉलेज को भी तो हमसे इतना hi एक्सपेक्टेशन है.

गार्ड:- मतलब?

सुमित:- पास हो जाऊँगा इतना से hi...Aur कॉलेज को भी हम स्टूडेंट्स से इतना hi एक्सपेक्टेशन है की पास हो jaaye...Rules भी तो इतना सारा बनाया है की क्या कहु.

फ़ैल हो गए तो ये होगा वो hoga...Year लोस्स hoga...Year रिपीट का अलग चार्ज lagega...Parents मीटिंग hoga...Wagera वगेरा.

सभी सर दर्द से बचने के लिए सोचा पास hi हो जाता हूँ.

गार्ड:- और लिखोगे तो और भी अच्छा नंबर आएगा.

सुमित:- इससे क्या होगा? 50% भी पास hi है...90% भी पास.

गार्ड अब्ब कुछ बोल नहीं पा रहे थे.

सुमित:- अच्छा सर चलता hun...Warna मेरे बात से डिस्टर्ब हो कर टोपर टॉप नहीं कर पाएंगे और रात भर जागे हुए स्टूडेंट्स पास नहीं कर पाएंगे.

इतना कह कर सुमित वह से चला गया.


रिजल्ट डे


वैसे तो सभी स्टूडेंट्स बेसब्री से अपना रिजल्ट का इंतजार कर रहे thhe...Sumit को छोड़ kar...Wo भी बेसब्री से इंतजार कर रहा tha...Lekin मेघा का.

कुछ पल बाद उसका म्हणत रंग laaya...Dil जो खुश हो गया था मेघा की एक नजर से वो ख़ुशी अगले hi पल गायब हो गया मेघा का भाव हीं चेहरा देख कर.

खुद को दोषी मानते हुए अपने लिए hi नफरत भर गया सुमित के दिल में.

मेघा की तरफ देख कर उसने खुद से hi कहा.

सुमित:- बस कुछ दिन aur...Fir शायद सब ठीक हो जाए.

शायद शब्द कहते वक्त सुमित खुद को लाचार hi महसूस कर पा रहा था.

सुमित फिर चेहरे में झूठा मुस्कान ले कर मेघा के पास चला गया.

सुमित:- Hi ब्यूटी क्वीन. :डी

मेघा ने नफरत भरी निगाहो से सुमित को देखा और आगे चलने लगी.

सुमित:- अब्ब टोपर बनने वाली हो तो इस जस्ट पास वाले को भूल gayi...Galat बात.

मेघा अपनी जगह रुक फिर से सुमित को घूरती hai...Kuch कहना चाहती thi...Lekin फिर वो इग्नोर कर आगे बढ़ गयी.

सुमित:- एक जरुरी बात करना था.

इस बार सुमित सीरियस हो कर bola...Lekin मेघा ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.

सुमित:- सोच lo...Agar अब्ब बात कर लोगी तो हमेशा के लिए पीछा छोड़ दूंगा.

सुमित की इस बात पर मेघा भी रुक gayi...Sumit की तरफ मुड़ी hi थी की बिच में.

"Hi सुमित."

थोड़ी दुरी से एक लड़का की आवाज आया.

सुमित:- आ गया प्यार का एक और दुश्मन.

मेघा इस बात पर सुमित को घूरती है.

सुमित:- मेरा मतलब कीर्ति से था.

फिर वो लड़का सुमित के पास आ गया.

सुमित:- देखा तो बहुत बार hai...Lekin नाम पता नहीं है.

लड़का:- अरे पता भी कैसे chalega...Megha के पीछे hi लगे रहते ho...Kabhi किसी और से भी बात चीत कर लिया karo...Dosti करो.

सुमित:- सुझाव के लिए धन्यबाद.

लड़का:- बी थे वे ी ऍम Vikash...Topper ऑफ़ थे batch...Iss एक्साम्स के रिजल्ट में भी.

सुमित:- तो मर. Vikash...Kya काम था तुम्हे मुझसे?

विकाश:- कुछ ख़ास nahi...Ek रिक्वेस्ट tha...Thoda पढाई लिखे कर लो.

सुमित:- और वो क्यों?

लड़का:- बोर हो गया हु हर एक्साम्स में टॉप करते hue...One साइडेड कम्पटीशन hai...Tum में hi आखिरी उम्मीद hai...Sabhi टीचर्स से तारीफ़ भी सुना है tumhara...Especially विवा [interview exam] में.

लेकिन उतना hi careless...Har एग्जाम में जस्ट पास.

कुछ देर के लिए सुमित चुप रहा और फींका मुस्कान के साथ कहा.

सुमित:- जब एक लड़ाई खुद से hi चल रहा hai...Khud की hi अस्तित्वा se...To दोस्त बाकी की कोई भी लड़ाई और कम्पटीशन मायने नहीं रखता.

सुमित की ये बात विकाश तो नहीं समझा और सर खुजाते हुए चला gaya...Lekin मेघा समझ gayi...Jise अब्ब इस बात से कोई मतलब नहीं था.

तभी मेघा के मोबाइल में एक मैसेज आता है.

मेघा मोबाइल चेक करती है तभी.

सुमित:- होटल का एड्रेस सेंड किया hai...Dhyan से सोचना मेरे बातों ko...Agar सही लगे तो आ जाना वर्ण तुम्हारा मर्जी.

इतना कह कर सुमित वह से चला गया.

फ्यू मिनट्स लेटर.

सुमित:- पता था मुझे तुम जरूर aaogi...Coffee भी आर्डर कर दिया hai...Aao बैठो.

कॉलेज के पास की hi होटल में दोनों बैठे थे.

सुमित:- प्यार का ताकत hi ऐसा है की तुम्हे खिंच लाया.

मेघा का गुस्सा देख

सुमित:- सॉरी sorry...I मैं नफरत का ताकत.

मेघा:- काम की बात कहो.

सुमित:- अकेले में कुछ बातें करना था.

मेघा:- हाँ बोलो.

सुमित:- जैसा की मैंने bataya...Agar तुम मेरी एक बात maanogi...To हमेशा के लिए पीछा छोड़ दूंगा.

मेघा:- बोर मत karo...Aur बताओ क्या करना है?

मेघा को इर्रिटेट देख सुमित के चेहरे में मुस्कान आ gaya...Shayad यही देखना चाहता था Sumit...Ye देख मेघा और भी इर्रिटेट हो गयी.

सुमित:- अभी 4 वीक्स टाइम बाकी है 2ंद ईयर के liye...Iss वेकेशन में तुम अपना घर जाने का प्लान कैंसिल कर दो?

सुमित अब्ब सीरियस हो कर बोलै.

मेघा:- क्या? क्या कहा तुमने?

सुमित:- वही जो तुमने सुना.

मेघा:- सोच भी कैसे लिया तुमने ऐसा की मई तुम्हारी यह बात मानूंगी.

सुमित:- भरोषा hai...Tumhara मेरे लिए नफरत par...Mujhse छुटकारा पाने के लिए इतना तो कर hi सकती हो.

मेघा:- मई ऐसा कुछ नहीं करुँगी.

सुमित ने मेघा की बात का परवाह न करते हुए अपनी बात जारी रखा.

सुमित:- कीर्ति का कॉलेज भी ऑफ hai...Usko भी मना लो किसी तरह 4 वीक्स के टूर के लिए.

मेघा:- सोच भी कैसे लिया तुमने...

मेघा की बात को बिच में hi काट कर सुमित ने कहा.

सुमित:- तुम्हारा मर्जी hai...Agar मान जाओगी तो हमेशा के लिए पीछा छोड़ दूंगा वर्ण तुम hi तो कहती थी साइको हूँ mai...Tab तक पीछा नहीं छोडूंगा जब तक तुम्हे भी साइको न बना दू.

एक कुटिल मुश्कान के साथ सुमित ने कहा.

मेघा:- इतना निचे गिर जाओगे तुम की अब्ब सीधे ब्लैकमेलिंग पर उतर आओगे.

दर्द भरी आवाज में मेघा ने कहा.

सुमित:- Emotion...Ye बहुत जरुरी चीज hai...Aur इसका इस्तेमाल सही जगह पर karo...Aur वो सही जगह मई बिलकुल भी नहीं हूँ.

तुम्हारे इमोशंस से मुझे कोई मतलब नहीं hai...Mujhe मतलब है तो सिर्फ तुम्हारे जवाब से.

मेघा अब्ब कुछ नहीं बोलती है और सोचने लगती है.

मेघा:- (इन हेर मंद) मई hi बेवकूफ thi...Jo ये सोचती थी की कुछ मजबूरियां होंगे tumhare...Itna गलत भी नहीं हो सकते हो tum...Jarur कुछ मिसुन्दरस्टण्डींग होगा.

लेकिन तुम तो बहुत घटिया nikle...Kirti ने बिलकुल सही किया तुमसे अलग हो कर.

मेघा ने अपने चचरे में छलक रहे दर्द पर काबू कर liya...Abb उस दर्द का कोई मान नहीं tha...Jis पर उससे उम्मीद था की वो उसका दर्द समझेगा, उससे कभी दर्द का एहसास होने नहीं देगा आज वो hi शख्स सामने बैठे उसके दर्द का तमाशा बना रहा था.

सुमित ने भी मेघा को सोचने का पूरा वक्त दिया.

कुछ hi पल बाद मेघा ने अपना फैसला बताया.

मेघा:- मंजूर है.

नफरत भरी आवाज में मेघा ने जवाब दिया.

सुमित:- बहुत बहुत शुक्रिया tumhara...Kaise तुम्हारा शुक्रिया अदा करू समझ में नहीं आ रहा है.

सुमित एक्ससिटेमेंट में बोले जा रहा tha...Usse बिच में hi रोक कर.

मेघा:- ज्यादा ओवरएक्टिंग करने की जरुरत नहीं है.

सुमित:- ठीक है fir...Iss टूर के बाद तुम अपने raaste...Mai और कीर्ति अपने रास्ते.

मेघा फिर वह से जाने लगी.

सुमित से दूर जाने के बाद उसकी आँखों से आंसू बहने लगी.

मेघा:- मई अपने रास्ते लेकिन तुम और कीर्ति भी अलग अलग raaste...Manjuri इस वजह से दिया है क्यों की मई तुम्हे कीर्ति से हमेशा के लिए अलग कर dungi...Aur खेलने नहीं दूंगी तुम्हे कीर्ति की लाइफ से या किसी और लड़की से.

यू जस्ट don't डेसेर्वे ट्रू लव.

फिर रट हुए मेघा वह से चली गयी.

सुमित भी मेघा के जाने के बाद सुमित भी पेमेंट कर के वह से निकल जाता है.

काफी समय पैदल hi चलने के बाद वो एक मंदिर पहुंचा.

सुमित:- याद है आप ko...Picchli बार कीर्ति के साथ आया tha...Aur उस वक्त मैंने कीर्ति से कहा था की अभी मुझे किसी चीज की जरुरत nahi...Agar जरुरत पड़े तो यही मागूंगा की मुझे इतनी ताकत देना की हर मुशीबत से लड़ सकू.

लेकिन आज कुछ और hi मांगने आया हूँ.

कीर्ति और मेरा saath...Ye nahi...Kyu की मुझे यकीं है अगर मेरा प्यार सच्चा है या फिर कीर्ति को मुझ पर भरोषा होगा तो वो जरूर मेरी hogi...Koi नहीं रोक सकता.

कुछ aur...Jo मेरे बस में नहीं है.

सब कहते है आप के कई रूप होते hai...Ek रूप आज मैंने देख liya...Megha के रूप mein...Kitna गलत किया मैंने उसके saath...Lekin usne...Usne एक बार फिर मेरा साथ diya...Mere लिए तो वो किसी भगवान् से काम नहीं जो मुझे एक और मौका दे रही है कीर्ति से मिलने ki...Kirti का प्यार और भरोषा फिर से जितने की.

बस आप उसके साथ कुछ गलत होने मत dijiye...Jis दलदल में खुद के साथ उसको भी घसीट लाया हूँ उसको आप बाहर nikaliye...Shuruaat तो मैंने किया लेकिन अंत करना मेरे बस में नहीं है.

इस टूर के बाद उसके लाइफ में वो साड़ी खुशियां फिर से मेघा को dijiye...Jiska वो हक़दार है.

इतना कह कर सुमित वह से चला gaya...Aankho में aansu...Aur इस आंसू में किसी के लिए सम्मान.
 
अपडेट 40

बहुत खुश दिख रहे है आप?

राज कुछ देर से सुमित को ख़ुशी में इधर उधर टहलते देख रहा tha...Jab उससे रहा नहीं गया तो उसने पूछ hi लिया.

सुमित:- ख़ुशी की hi तो बात hai...Bas मेघा का कॉल का इंतजार hai...Fir उसके बाद निकल जाऊँगा एक हसीं सफर के liye...Apni कीर्ति के साथ.

सुमित की ख़ुशी आज उसकी बातों से भी झलक रहा था.

राज:- तो बताइये आगे क्या प्लान किया है.

सुमित:- नाउ इतस टाइम फॉर ब्रेन तो स्टॉप इतस फंक्शन एंड हार्ट तो स्टार्ट.

राज:- मतलब?

सुमित:- कुछ ख़ास nahi...Dimaag को छुट्टी दे दिया है कुछ दिनों के liye...Aur dil...Abb उसको ढंग का काम मिला hai...Ishq लड़ने का.

राज:- कुछ समझा नहीं. :हम्म:

सुमित:- अब्ब कोई प्लान नहीं karunga...Agar अब्ब भी प्लान करने लगूंगा तो ऐसा लगेगा जैसे कीर्ति को पाने के लिए कोई साजिश कर रहा हूँ.

इसी लिए अब्ब जो भी करूँगा दिल से karunga...Ek बार फिर से एहसास करना है प्यार के वो हसीं पल कीर्ति के साथ जो इतने दिनों से सिर्फ एक खाव्हिश बन कर रह गया tha...Ek बार फिर से.

सुमित कही खो सा गया था ये बातें कहते hue...Ek बार फिर से अपने अतीत के हसीं यादों में.

आँखें खोल कर उसने राज को देखा.

सुमित:- और तेरा लव स्टोरी? वो कहा तक पहुंचा?

राज:- Wo...Hum दोनों...

सुमित:- लड़का शर्मा रहा hai...Matlab सब कुछ ठीक चल रहा है.

राज:- हाँ भाई धीरे धीरे सब ठीक हो रहा hai...Kal भी 2 घंटे साथ में वक्त बिताया हमने.

सुमित:- इसी लिए अभी तेरा मुंह उतरा हुआ है...1 मोनथस की दूरियां.

हँसते हुए सुमित ने कहा.

राज:- क्या भाई आप भी? पहले hi मई परेशान हूँ इस जुदाई से और आप है की हंस रहे है.

सुमित:- थोड़ा जुदाई भी सहना सिख le...Mujhe hi देख ले...2 साल की जुदाई hai...Aur देख प्यार कितना मजबूत हो गया है.

यही छोटी छोटी दर्द hi तो है जो प्यार और जिंदगी का मतलब समझाता है.

सुमित और अपना प्रवचन देता इससे पहले hi मेघा का कॉल आ जाता है.

सुमित:- अच्छा मई चलता हूँ.

राज:- बेस्ट ऑफ़ लक भाई.

सुमित:- और हां sun...Abb कोई उटपटांग हरकत मत कर dena...Agli बार मई भी कुछ नहीं कर पाऊंगा.

इतना कह कर सुमित रूम से निकल गया.

आज कुछ ज्यादा hi शान्ति था सुमित और मेघा के bich...Dono साथ चल रहे थे और एक दूसरे से कोई बात चीत भी nahi...Naa hi कोई Hi Hello और ना hi कोई हाल चाल puchna...Abb शायद ये वेकेशन अपने मतलब का बन गया था इस वजह से.

सुमित ने एक नजर भी मेघा की और नहीं dekha...Megha कभी कभी सुमित की तरफ देखती और अगले पल hi नजरें बदल लेती.

सुमित की चेहरे की ख़ुशी देख उससे और भी गुस्सा आ रहा था.

मेघा:- (इन हेर मंद) दूसरों के दिल के साथ खेलने के बाद देखो कितना खुश है. :माध:

सुमित:- अब्ब तो बता do...Tour के लिए क्या प्लान किया hai...Kaise जाएंगे? मेघा के साथ तुमने क्या बात किया? और वो कैसे मान गयी?

लेकिन मेघा ने कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- देखो मैंने इस वेकेशन को एक रोमांटिक प्लाट की तरह तैयार किया hai...Please तुम इससे सस्पेंस थ्रिलर मत बनाओ. :प्रे:

फिर भी मेघा ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.

सुमित:- अरे yaar...Itna कुछ किया है maine...Vacation के लिए लोकेशन सेलेक्ट kiya...Hotel सेलेक्ट kiya...Visiting स्पॉट्स भी सेलेक्ट किया और साथ hi सचेडूले bhi...Itna सब कुछ फिनॉइज़ करने के बाद भी तुमसे कुछ पूछ रहा हूँ तो कोई रिस्पांस नहीं दे रही हो?

कीर्ति ने इतनी जल्दी कैसे हाँ कर ैया टूर के लिए ये सोच सोच कर दिमाग के न्यूरॉन में शार्ट सर्किट हो रहा है? और ये भी समझ में नहीं आ रहा है की कौनसा गाडी में jaayenge...Thela, ऑटो, बस, जीप कुछ पता नहीं.

तुमसे पहले पूछा था तो कहा तुम मैनेज कर लोगी लेकिन अब्ब कोई जवाब hi नहीं दे रही हो?

अब्ब तो शक होने लगा है कीर्ति इस टूर में आ रही है या नहीं...

मेघा:- तुम्हे वेकेशन से मतलब है ना.

सुमित:- हाँ.

मेघा:- तो फिर चुप चाप चलते रहो.

सुमित कन्फूसिओं में चलता raha...Kabhi उसके चेहरे में कीर्ति से होने वाली मुकाकत का सोच कर एक्ससिटेमेंट था तो कभी कन्फूसिओं की सच में कीर्ति इस टूर में आएगी?

कुछ देर और चलने के बाद सुमित को अपना सपना सच होता दिल्ही दिया.

गली से मैं रोड पर आते hi बायीं तरफ 50 मीटर की दुरी में कीर्ति एक कार के बाहर कड़ी थी.

आँखों के अलावा सुमित के शरीर के हर हिस्सा जैसे बेजान हो gaya...Aankhein था जो कीर्ति की खूबसूरती को निहार रहा था.

आँखों में ढेर सारा प्यार के साथ सुमित ने खुद से कहा.

सुमित:- (इन हिज मंद) अब्ब से तुम्हे इन्ही पलकों में बिठा कर रखूँगा.

पिछली बार शायद मेरा hi प्यार में कोई कमी रह गया tha...Iss बार प्यार का एहसास कुछ ऐसे कराऊंगा की तुम कभी मुझसे दूत नहीं जाओगी.

मेघा भी सुमित को रुका देख वही पर रुक गयी.

जब कीर्ति का नजर सुमित पर पड़ा तो उससे विश्वाश hi नहीं hua...Aur जब हुआ तब उसने नफरत से अपनी नजरें बदल दिया.

सुमित तो पहले से hi इस बात के लिए तैयार tha...Jab उसने अपना नजर इधर उधर घुमाया तो कीर्ति से थोड़ी दूर में एक लड़का खड़ा tha...Laghbhag उसी की उम्र का.

फिर सुमित ने अपने याददास्त पर जोर दिया और याद करने लगा की कही वो कीर्ति का कोई भाई तो नहीं? कीर्ति तो अपनी माँ बाप की एक लौटी बेटी thi...Fir वो याद करने लगा की कही वो लड़का कीर्ति की कोई कजिन तो नहीं? लेकिन उससे ऐसा कुछ याद नहीं आया.

अगले पल उसके दिमाग़ में सवाल आया, "कही बॉयफ्रेंड तो नहीं?" नहीं nahi...Aisa नहीं हो सकता.

दर के साथ सुमित आगे सोच भी नहीं पा रहा था.

फिर उसने खुद को संभालते हुए.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) Sumit...Be कॉंफिडेंट.

फिर अपना मुठ्ठी कस्ते हुए वो आगे कीर्ति और उस लड़का के पास चला गया.

सुमित:- Hi Kirti...Aaj तो बहुत खूबसूरत लग रही हो.

प्यार भरी आवाज में सुमित ने तारीफ़ kiya...Aur कीर्ति गुस्से में मुंह फेर लेती hai...Ye देख वो लड़का भी सुमित की तरफ गुस्से से देखता है की सुमित ने कीर्ति को उनकंफर्टबले फील करवाया.

फिर सुमित उस लड़का की आँखों में देख कहता है.

सुमित:- कौन है ये विचित्र प्राणी?

सुमित ने उस लड़के का गेटउप देख कर bola...Sir में छाता जैसे बाल वो भी पीला रंग से colored...Sumit को उसके लुक से कोई ख़ास मतलब तो नहीं tha...Par अपना गुस्सा निकालने का मौका मिल गया.

ये सुन कीर्ति गुस्से में सुमित को देखती है.

लड़का:- Vivek...Vivek नाम है मेरा.

सुमित:- व् फॉर विचित्र, व् फॉर Vivek...Sahi है. :lol1:

सुमित ने जैसे मजाक उड़ाते हुए kaha...Ye सुन विवेक और कीर्ति दोनों गुस्से में सुमित को देखते है.

कीर्ति:- Megha...Isse क्यों ले कर आयी है तू? और तेरी दोस्त कहा है? जल्दी bula...Pehle hi हम लेट हो चुके है.

मेघा:- (डरते हुए) सुमित hi है वो दोस्त.

कीर्ति:- क्याआ?

मेघा की बातों से कीर्ति हैरान रह gayi...Hairaani से भी jyaada...Itna बड़ा झूठ का.

मेघा:- कुछ बातें करनी hai...Yaha साइड में आ.

कीर्ति गुस्से में मेघा की तरफ जाती है.

फिर वो दोनों कुछ देर बातें करती hai...Kirti का गुस्सा भी धीरे धीरे काम होता जा रहा था.

वापस आ कर.

कीर्ति:- ये भी चलेगा इस टूर में.

कीर्ति की बातों में अभी भी असंतुष्टि दिखाई दे रहा था.

मेघा ने भी राहत की सांस लिया और एक नफरत भरी नजर से सुमित को देखने लगी.

सुमित:- कीर्ति बहुत hi स्टाइलिश ड्राइवर है ये तुम्हारा.

कीर्ति:- विवेक दोस्त है मेरा.

सुमित:- हाँ तो कोई गलत बात थोड़ी ना hai...Driver दोस्त नहीं हो सकते क्या?

कीर्ति:- बात hi करना बेकार है.

कीर्ति की हर एक बात में सुमित के लिए नफरत था.

विवेक:- तुम्हे ये इतना परेशान कर रहा है और तुम हो की कुछ बोल hi नहीं रही हो.

इससे तो मई.

इतना कह कर विवेक सुमित के पास आता है और मुट्ठी कास कर सुमित की तरफ हाथ बढ़ाया hi था की सुमित उसका हाथ बिच में पकड़ कर.

सुमित:- पूरा मूड बना कर आया हूँ यार इस टूर के लिए.

(कीर्ति की तरफ देख) रोमांटिक हीरो hi बने रहने दे.

(विवेक की तरफ देख) फ़ालतू में ऊँगली कर एक्शन हीरो बनने में मजबूर मत कर.

इतना कह कर सुमित विवेक का हाथ झटक देता है.

कीर्ति:- Vivek...Chhodo isse...Kicchad में पत्थर फेंकने का काम मत karo...Mai जानती hun...Isse कैसे डील करना है.

विवेक गुस्से से सुमित को देख वह से जाता है और मेघा का लगेज कार में रख देता hai...Sumit भी अपना लगेज रखता है.

कीर्ति जा कर बैक सीट में बैठ जाती hai...Sumit भी बैक सीट की तरफ जाने वाला था की मेघा उसका राष्ट रोक खुद कीर्ति के साथ बैठ जाती है.

सुमित अब्ब मज़बूरी में विवेक के साथ फ्रंट सीट में बैठ जाता है.

कार जैसे hi आगे बढ़ा सभी अपने अपने ख्यालों में खोये हुए thhe...Isa टूर का मकशद सभी के लिए अलग अलग tha...Kisi को अपना प्यार हासिल करना था तो किसी को अपना नफरत जड़ से मिटाना था.

सुमित के दिमाग़ में भी कई सवाल tha...Vivek कौन है? अगर विवेक और कीर्ति दोस्त है तो ये दोस्ती किस हद्द तक? विवेक का इस टूर में क्या काम? मेघा और कीर्ति की बिच की बात चीत?

लेकिन ये सवालों को कुछ देर साइड रख सुमित सिर्फ कीर्ति के बारे में hi सोच रहा था.

फिर वो अपना पॉकेट से एक छोटा सा मिरर निकाल कर कुछ ऐसे रखता है जिससे कीर्ति का पूरा चेहरा उससे प्रतिबिम्ब के रूप में दिखाई दे.

कीर्ति को निहारते हुए,

सुमित:- (इन हिज मंद) तुम्हारा खूबसूरती के साथ साथ तुम्हारा मेरे लिए नफरत और भी बढ़ गया है.

वादा है खुद se...Tumhara ये नफरत को जल्द hi प्यार में बदल दूंगा.
 
अपडेट 41

Utro...Naashta का टाइम हो गया.

कार एक होटल के सामने रुका tha...Sumit के अलावा सभी उतर चुके thhe...Lekin सुमित जो अपने hi दुनिया में खोया हुआ था उसको इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.

सुना नहीं तुमने?

एक बार फिर गुस्से से कीर्ति ने पूछा.

आवाज थोड़ा तेज था तो सुमित का ध्यान भी टूट गया.

सुमित:- हाँ बोलो.

मुश्कुराते हुए सुमित ने पूछा.

कीर्ति:- नाश्ता करना है या नहीं?

छिड़ते हुए कीर्ति ने एक बार फिर पूछा.

सुमित:- तुम्हारे साथ hun...Issi एहसास से पेट भर गया.

कीर्ति:- बकवास बंद karo...Aage गाडी नहीं rukegi...Fir बाद में मत कहना की भूख लगा है.

सुमित:- गाडी में तुम भी तो ho...Jab जब भूख लगेगा तब तब तुम्हे देख lunga...Bhookh मिट जाएगा.

सुमित की आवाज में प्यार hi प्यार tha...Ye सुन कीर्ति और भी छिड़ गयी.

कीर्ति:- तुमसे बातें करना hi बेकार है.

कीर्ति वह से चली gayi...Megha और विवेक के साथ.

सुमित कार के विंडो से प्यार से कीर्ति को जाते हुए देखने लगा.

सुमित:- न जाने कितनी रातें तुम्हारी यादों में भूखा बिताया hai...Aaj क्यों ना तुम्हारे साथ होने की ख़ुशी में भूखा राहु. :डी

कुछ ऐसे hi ख्यालों के साथ सुमित अपने प्यार की दुनिया में फिर से खो गया.

अचानक hi एक ख्याल के साथ सुमित का ध्यान टुटा.

वो जल्द अपने जगह से उठ कर कार के बैक सीट पर बैठ gaya...Aur इंतजार करने लगा कीर्ति की वापस आने ka...Aur एक रोमांटिक ट्रिप का.

होटल से वापस आने के बाद जैसे hi कीर्ति ने कार का गेट खोला सुमित को देख फिर से आग बबूला हो गयी. :माध:

गुस्से में कुछ बोल भी नहीं पा रही thi...Megha को कुछ इशारा कर वो फ्रंट सीट में बैठ गयी.

मेघा फिर सुमित के पास बैठ gayi...Baithte वक्त वो भी सुमित को एक नजर गुस्से से देखती है.

सुमित:- अरे yaar...Tumhare साथ तो क्लास में कई बार बैठ चूका हूँ? अब्ब तो कीर्ति को मौका दो?

लेकिन मेघा कुछ जवाब नहीं देती.

सुमित:- कोई बात nahi...Kirti तो मेरे पास जिंदगी भर rahegi...Mere हमसफ़र बन kar...Kuch पल hi सही तुम भी बैठ jaao...Shayad कोई यादगार लम्हा बन जाए.

सुमित ने हँसते हुए kaha...Lekin ये बात काफी था दोनों का गुस्सा और भड़काने ka...Lekin दोनों hi चुप rahi...Shayad इस वेकेशन का मूड अभी से खराब नहीं करना चाहती थी.

कार कुछ दूर आगे गया hi था की.

सुमित:- ऐ विचित्र Praani...Ye विचित्र प्राणी थोड़ा लम्बा शब्द हो gaya...VP शार्ट form...Haan ये ठीक रहेगा.

हाँ तो मर. VP...Ye क्या बैल गाडी चला रहा है? साइकिल वाला फीलिंग आ रहा है :सिघ:

विवेक:- एक तो सुबह से ड्राइव कर रहा hun...Upar से इतनी दूर का डेस्टिनेशन रखा hai...Wo तो शुक्र मन की अभी भी चला पा रहा हूँ इतने थकान के बावजूद.

सुमित:- थोड़ा ग्लूकोस वगेरा पीया kar...Taakat milega...Wo भी इंस्टेंट वाला.

विवेक:- ये जो तू इतना भौंक रहा hai...Khud hi क्यों ड्राइव नहीं करता?

सुमित:- मई तो कर लूंगा drive...Lekin फार्मूला रेस की स्पीड रेसर और बाहर बैठे दर्शक को hi मजा आता है.

मेघा:- Nahi...Koi जरुरत नहीं है इसका.

सुमित के बात ख़त्म होते hi मेघा बोल उठी.

सुमित भी मेघा के साथ उस रात का बाइक वाला सफर याद करके मुस्कुराया.

सुमित:- अरे yaar...Kitna बोरिंग ट्रिप चल रहा hai...Thoda म्यूजिक हो जाए.

चलो Kirti...Tumse शुरुवात करते है.

लेकिन कीर्ति ने कोई रिस्पांस नहीं दिया.

सुमित:- अच्छा ठीक hai...Mai hi शुरुवात करता हूँ.

मैं तनु समझावण की

न तेरे बिना लगदा जी

मैं तनु समझावण की

न तेरे बिना लगदा जी

तू की जाने प्यार मेरा

मैं करून इंतज़ार तेरा

तू दिल, तुण्हीऊँ जान मेरी

सुमित ने पुरे फील के साथ सुर मिला कर गाना सुरु hi किया था की कीर्ति की हरकत ने मानो उसका दिल एक बार फिर से तोड़ दिया.

जहा सुमित कीर्ति को अपने दिल की बात गांव के जरिये से बताना चाहता था वही कीर्ति उसकी गाना को अवॉयड करने के लिए ईरफ़ोन मोबाइल में कनेक्ट कर के अपने कानो में लगा लेती है.

सुमित:- (इन हिज मंद) क्या इतना hi इज़्ज़त रह गया है मेरा?

सुमित ने अपना गाना बंद कर दिया और खिड़की से बाहर देखने लगा.

सुमित:- (इन हिज मंद) नहीं आज वो नाराज hai...Aaj मई मनाऊंगा तो hi कल वो भी मुझे मनाएगी जब मई नाराज hounga...Pyar में रूठना मनाना तो चलता रहता है. :)

ये सोचते hi सुमित के होंठो पर फिर से मुस्कान छा गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) जानता हूँ तुम्हारी naraajgi...Abhi तो तुम्हे और इर्रिटेट करना hai...Tumhare अंदर का गुस्सा और नाराजगी को जड़ से मिटाना hai...Waapas से तुम्हे अपना बनाना है.

ये सोचते हुए सुमित का आत्मा विश्वाश फिर से बढ़ gaya...Aur फिर वो फिर से कीर्ति को प्यार भरी नजरो से निहारने लगा.

यह सब मेघा के सामने hi हो रहा tha...Chaah कर भी वो सुमित को अवॉयड नहीं कर पा रही थी.

फिर ऐसे hi ये ट्रिप भी ख़त्म हो gaya...Shaam में वो सभी अपने डेस्टिनेशन पहुँच गए.

यह एक पहाड़ी इलाका tha...Kuch बड़े बड़े पहाड़, कुछ बड़े और हरे पेड़ से बहती ठंडी hawaayein...Aur आसमान में नीला baadal...Dhalte शाम में वो इतना hi जान पाए इस इलाका के बारे में.

सभी को इंतजार था तो कल ka...Wo भी बेसब्री से.

फिर सभी होटल के अंदर गए और सुमित काउंटर से 2 चाभी ले कर आता hai...Ek कीर्ति को दे कर.

सुमित:- सोचा था हम 3 hi होंगे टूर mein...Issi लिए 2 रूम बुक करवाया tha...Ek में मई और कीर्ति और दूसरे में मेघा.

सुमित ने मुस्कुराते हुए kaha...Kirti तो चुप thi...Lekin उसकी आँखें बहुत कुछ कह रही थी.

सुमित:- ओह्ह sorry...Ek में मई अकेला और दूसरे में तुम दोनों.

फिर सभी अपने अपने रूम की तरफ जाने lage...Vivek को सुमित के साथ रूम शेयर करना अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन वो फिर भी चुप चाप चलता रहा.

रूम में पहुँच कर अपना लगेज रखने के बाद सुमित रूम से निकल कर बहार चला गया.

आशीष:- व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज? फ़ोन वो भी तूने किया आज?

सुमित:- Haan...Aaj बहुत hi ज्यादा खुश hun...To सोचा तुझे फ़ोन कर lun...Waise भी तू सिर्फ ख़ुशी के वक्त के hi तो दोस्त है.

आशीष:- कुछ ज्यादा नहीं बोल रहा है?

सुमित:- अभी बोलै hi कहा hun...Bolne तो दे.

आशीष:- हाँ haan...Tera ख़ुशी तेरी बातों से hi जलक रहा है? लगता है मेघा पैट गयी है.

सुमित का रिएक्शन पहले hi सोच आशीष हसने लगता है.

सुमित:- फिर चुतियापा? :माध:

आशीष:- अच्छा अच्छा bataa...Kirti के साथ कितना आगे बढ़ा बात?

सुमित:- आज उसको इतने वक्त के बाद देखा यार वो भी इतने देर के liye...Bahut प्यार आ रहा है यार उस par...Aatma विश्वाश भी बढ़ गया है की इस बार उससे अपना बना कर hi रहूँगा.

एक्ससिटेमेंट में सुमित ने कहा.

आशीष:- सिर्फ dekha...Aur इतना खुश हो रहा है.

सुमित:- अबे पेसिमिस्टिक जनताओं के सरदार :माध: यह तो शुरुआत hai...Bahut अच्छा suruwaat...Dekhte जा इस शुरुवात को मई कितना आगे तक ले कर जाता हूँ.

आशीष:- भरोषा है यार तुझ par...Bhulna mat...Free की पार्टी पेंडिंग है.

सुमित:- अब्ब किया तूने समझदारी वाली बात.

आशीष:- वैसे Sumit...Ek कन्फूसिओं hai...Tere घर वालों को भी पता होगा इस 4 वीक के वेकेशन के बारे mein...Fir तू कैसे इस वेकेशन पर जा पाया?

सुमित:- स्टडी.

आशीष:- मालाब?

स्टडी:- ये पेरेंट्स के लिए एक्सपेक्टेशन है तो बच्चों के लिए हथियार.

आशीष:- अबे साफ़ साफ़ बता.

सुमित:- पापा को फोर में कहा की बायोकेमिस्ट्री की लाइव क्लास लेने जा रहा hun...Pehle तो उन्हें शक हुआ की मई इतना पढ़ाकू कैसे बन गया hun...Lekin फिर वो मान gaye...Bahut खुश thhe...Maa को भी समझा दिया.

और साथ hi 20,000 रस भी दाल दिया उन्होंने मेरे अकाउंट mein...Aur बाकी के कुछ पैसे सीनियर्स और दोस्तों se...Vacation का खर्चा पानी निकल जाएगा.

आशीष:- गलत नहीं कर रहा है तू?

सुमित:- (सीरियस हो कर) गलत तो कर रहा हूँ लेकिन मज़बूरी hai...Ek आखिरी कोशिश hi तो hai...Uske बाद खुद के साथ साथ कीर्ति और घर वालों के लिए भी जिम्मेदार बन जाऊँगा.

आशीष:- कोई बात nahi...Tu टूर को एन्जॉय kar...Aur हाँ भूलना मत फ्री की पार्टी खाये बहुत दिन हो गए मुझे?

आशीष ने सुमित को सीरियस होता देख बात को संभाल लिया.

सुमित:- टूर से आते hi मिल जाएगा तुझे पार्टी.

दूसरी तरफ

कीर्ति:- मुझे भी अब्ब लगता है तूने सही kiya...Kuch ज्यादा hi उड़द रहा है? ऐसे पंख काटूंगी उस सुमित का इस टूर में की वो फिर से कभी उड़द नहीं पायेगा.

मेघा कुछ नहीं boli...Wo अभी भी अपने सोच में गुम्म थी.

कीर्ति:- क्या सोच रही है?

मेघा:- यही की कितना गलत है Sumit...Nafrat हो गया है उससे अब्ब तो.

कीर्ति:- 2 सालो से जानती hun...Kitna बड़ा धोखेबाज़ है वो ये मुझसे अच्छा कोई नहीं jaanta...Tu दूर hi रह उससे.

उससे ऐसे सबक सिखाऊंगी की वो तुझे भी कभी परेशान नहीं करेगा.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.
 
अपडेट 42

मेघा:- ये विवेक कौन है?

कीर्ति:- मेरा दोस्त hai...Best फ्रेंड.

मेघा:- वो Cartoon...Aur तेरा बेस्ट फ्रेंड. :lol1::lol1:

हँसते हुए मेघा ने kaha...Aur इस टूर में आने के बाद ये शायद पहली बार था जब मेघा के चेहरे में हंसी था.

कीर्ति बस मेघा को घूरती है.

मेघा:- उससे कही तो देखा है. :हम्म:

कीर्ति:- कहा?

मेघा:- याद नहीं आ रहा hai...Cartoon नेटवर्क में देखा है या फिर पोगो mein...Soch रही हूँ. :लोटपोट:

कीर्ति:- मार खायेगी अब्ब!!

मेघा:- Ohho...Itna छिड़ रही है? सिर्फ दोस्त है या फिर दोस्ती से भी aage...Mera मतलब कही तू भी उसके रंग में रंग कर कोई कार्टून करैक्टर तो बनने की नहीं सोच रही है?

कीर्ति कुछ जवाब नहीं देती hai...Bas अपना मुंह घुमा लेती है.

मेघा:- क्या हुआ? नाराज हो गयी क्या?

कीर्ति:- Nahi...Sab उससे ऐसे hi चिढ़ाते hai...Bas यही सोच कर बुरा लग रहा है.

थोड़ा अलग है Vivek...Jyada लोगों से बातें नहीं karta...Apne में hi लगा रहता hai...Sirf पढ़ाई पर hi ध्यान है uska...Bas इसी वजह से लोग इससे चिढ़ाते hai...Jo मुझे अच्छा नहीं लगता.

और वो Sumit...Kya कह रहा tha...Vichitra प्राणी हँ :माध: दिल तो कर रहा है उसका गाला hi दबा दूँ.

मेघा:- और उसका इस अकेलापन पर तरस खा कर उससे तूने अपना बेस्ट फ्रेंड बना लिया?

कीर्ति:- Nahi...Uski तरह मुझे भी पढ़ना बहुत अच्छा लगता hai...Bas इसी से दोस्ती की शुरुवात हो gayi...Jo वक्त के साथ और भी गहरी होते चली गयी.

मेघा:- कितना पढ़ती है? अभी टूर में आयी hai...Aur खबरदार जो अब्ब पढ़ाई की बात अब्ब किया तो !!

कीर्ति:- पढ़ाई जरुरी hai...Warna देख रही है उस सुमित की हालात? ऐसे hi निकम्मा बन कर घूमना पड़ेगा.

मेघा:- ये बात किस पर ले कर आ gayi...Jis बारे में बात करना चाहती थी वो hi भूल गयी.

उस कार्टून को इस टूर पर क्यों ले कर आयी? बहुत बोरिंग टाइप है वो.

कीर्ति को अपनी तरफ घूरती देख...

मेघा:- ी मैं वो विचित्र praani...Ohh sorry...Teri बेस्ट फ्रेंड विवेक.

कीर्ति:- जब तूने टूर के बारे में पूछा तब में लाइब्रेरी में thi...Vivek भी वही tha...Usko भी बता diya...Usne hi सुग्गेस्ट किया की हमे चलना chahiye...Itne दिनों का वेकेशन hai...Thoda रिफ्रेश हो जायेंगे.

उस वक्त सुमित के बारे में पता नहीं था तब मैंने भी टूर के लिए हाँ कर दिया.

मेघा:- एक तो वो सुमित और ऊपर से ये Vivek...Tour स्टार्ट होने से पहले hi सत्यानाश हो गया.

कीर्ति:- सुमित से कपड़े कर hi mat...Vivek दिल का साफ़ hai...Dhire धीरे समझ जायेगी.

मेघा:- ऐसा लगता तो नहीं.

कुछ सोचते हुए मेघा ने जवाब दिया.

कीर्ति:- क्या मतलब?

मेघा:- बहुत अजीब है wo...Ek दो बार नोटिस किया hai...Sumit को अलग नजर से घर रहा tha...Bahut hi गुस्से mein...Shayad सुमित का कुछ नुकशान करना चाहता है.

जब तू सुमित को लंच के लिए कार में पूछ रही thi...Uss वक्त भी.

ऐसे लोग बहुत खतरनाक होते hai...Andar से kuch...Baahar से कुछ.

कीर्ति:- कुछ भी बोल रही है tu...Aur उस सुमित को डिफेंड करने के लिए तू विवेक पर इलज़ाम लगा रही है.

मेघा:- सुमित तो है hi कमीना धोखेबाज़ और बहुत कुछ..

लेकिन इसका ये मतलब नहीं की विवेक गलत नहीं हो सकता.

कीर्ति:- कुछ ज्यादा hi सोच रही है.

इतना कह कर कीर्ति वह से चली गयी.

कीर्ति बात सुनने के लिए तैयार नहीं thi...Megha अब्ब और भी सोच में पद गयी.

आफ्टर डिनर

ये तू? ये क्या कर रहा है?

वाशरूम से आने के बाद रूम का नजारा देख हैरानी से विवेक ने पूछा.

सुमित:- पेग बना रहा हूँ? पियेगा?

कप आगे बढ़ाते हुए सुमित ने पूछा.

विवेक:- मई ड्रिंक नहीं करता.

सुमित:- मुझे क्या!!

इतना कह कर सुमित पूरा कप खाली कर देता है.

सुमित:- मजा आ गया.

फिर वो दूसरा पेग बनाने लगा.

विवेक:- मेरे रूम में ये ड्रिंकिंग नहीं चलेगा.

सुमित:- खानदानी रूम है क्या ये तेरा?

विवेक:- मुझे रूम चेंज करना है? तुझ जैसे बेवड़े के साथ मई नहीं रह सकता.

सुमित:- एक काम kar...Room से बाहर निकलने के बाद 20 मीटर आगे jaa...Waha सिद्धि (लैडर) hai...Fir निचे jaa...Counter दिख jaayega...Waha जा कर बात kar...Dusra रूम मिल जाएगा तुझे.

सुमित ने अब्ब सिगरेट जलाते हुए कहा.

विवेक:- अभी जाता हूँ.

सुमित:- तो जा न. :डेड:

फिर विवेक चला gaya...Aur कुछ देर में लौट आया.

विवेक:- होटल भी तेरी तरह hi घटिया hai...Koi नहीं है काउंटर में अभी?

सुमित:- तो फिर छत में जा कर सू jaa...Chaandni रात में ठंडी ठंडी हवाओं के लहार में.

विवेक अपने बीएड पर चला जाता है.

सुमित:- अब्ब तेरे पास दो ऑप्शन hai...Pehla चुप चाप सू jaa...Dusra मुझे आ कर कंपनी दे.

विवेक:- इर्रिटेट मत कर.

इतना कह कर विवेक सोने के लिए बीएड में लेत जाता है और कुछ hi देर में नींद के आग़ोश में चला जाता है.

दूसरी तरफ Sumit...Kuch देर ऐसे hi नशा में झूलने के बाद वो अपना कैमरा निकालता hai...Aur उसमे से कीर्ति का फोटो निकलता hai...Jo उसने छुप कर खींचा था.

सुमित:- (विथ स्माइल) ये कैमरा भी फींका पद gaya...Tumhare खूबसूरती के saamne...Ismein भी इतनी औकात नहीं की तुम्हारी साड़ी खूबसूरती को कैद कर सके.

(कैमरा को साइड रख कर) तुम तो ऐसे hi मेरे दिल में छाप गयी ho...Camera की क्या जरुरत.

(खिड़की से बाहर देखते हुए) कुछ अलग प्लान किया है इस टूर के liye...Ummeed है तुम्हे पसंद आएगा और ये टूर तुम्हारे जिंदगी के खूबसूरत पल में से एक होगा.

ऐसे hi ख़ुशी में सुमित ने ना जाने कितने देर तक खुद से hi बात kiya...Aaj उसके होंठो में हर पल मुश्कान hi tha...Shayad कीर्ति को अपने इतना करीब महसूस कर के.

एक बार नजर घडी पर देखा तो रात के 12:00 ऍम बज रहे थे.

सुमित:- अब्ब सू जाता hun...Kal जल्दी भी तो उठना hai...Aur सुबह सुबह अपनी जान कीर्ति के दरहन भी तो करना है.

नेक्स्ट मॉर्निंग

सुमित:- सोनी दो ना jaan...Din भर तो हमे साथ hi रहना है.

आधा नींद में सुमित बोलै.

अबे utth...Kaun तेरा जान? और क्या बकवाश कर रहा है.

फिर सुमित धीरे से सामने देखता hai...Saamne विवेक tha...Usse देख वो उठ कर बैठ जाता है.

सुमित:- सोचा tha...Kirti आएगी मुझे uthaane...Lekin पता नहीं सुबह सुबह किस विचित्र प्राणी को देख liya...Saara दिन बेकार जाएगा अब्ब. :सिघ:

विवेक तैयार होने लगता है.

विवेक:- तुझे रेडी नहीं होना है?

सुमित:- तू चुप hi reh...Saara मूड ऑफ कर diya...Kitna खूबसूरत सपना देख रहा था कीर्ति के saath...Aur तूने बिच में hi सत्यानाश कर दिया.

विवेक:- तू कीर्ति के पीछे क्यों पड़ा है?

थोड़ा गुस्से के साथ विवेक ने पूछा.

सुमित:- तुझे क्या मतलब? ये हम दो प्रेम की पंछियों के बिच की बात है.

विवेक:- तू और Kirti...Wo भी lover...Subah सुबह नशा कर लिया क्या?

सुमित ने कुछ जवाब नहीं दिया.

विवेक:- अच्छा ये bataa...Kirti ने तुझे कभी पसंद भी किया है?

सुमित:- हाँ पास्ट में.

विवेक कुछ बोलने hi वाला था की...

सुमित:- और फ्यूचर में भी.

कॉन्फिडेंस के साथ सुमित ने जवाब दिया.

विवेक:- लेकिन प्रेजेंट में nahi...Present hi असली वक्त होता hai...Past सिर्फ एक मेमोरी है और फ्यूचर सिर्फ इमेजिनेशन. :lol1:

विवेक ने हँसते हुए कहा जैसे वो सुमित का मजाक उड़ाना रहा ho...Aur ये बात जा कर सुमित के दिल पर लगा.

सुमित:- (इन हिज मंद) सच hi तो hai...Kirti मेरे वर्त्तमान में नहीं hai...Jaha उसकी जरुरत है.

लेकिन इससे पॉसिबल मई banaunga...Aur बना कर hi रहूँगा.

विवेक:- कीर्ति तेरा इंतजार कर रही hai...Jaa जल्दी से.

सुमित:- सच mein...Pehle बताया क्यों नहीं?

विवेक:- ज्यादा खुश मत ho...Tour के बारे में पूछना है उससे तुझसे.

सुमित:- कुछ तो पूछना चाहती hai...Kaafi है.

इतना कह कर सुमित वह से निकल गया.

कीर्ति:- ये कौनसी जगह hai...Map में चेक किया maine...Ghumne लायक कोई जगह है hi nahi...Pahaadi में बसा एक गांव hai...Niche एक नदी और थोड़ा बहुत jungle...Isse ज्यादा कुछ नहीं है.

कीर्ति बहुत गुस्से में thi...Aur साथ में मेघा भी.

सुमित:- इतना कुछ तो है? तुम्हे क्या कमी लगा?

कीर्ति:- सिर्फ ये नदी और जंगल...3 हफ्ते सिर्फ यही देख कर गुजारेंगे?

कीर्ति की बात से hi उसका गुस्सा झलक रहा था.

सुमित:- तुमने कुछ देर पहले hi तो कहा hai...Yeh एक गांव है.

कीर्ति:- तोह?

सुमित:- गांव hai...Yahi तो काफी है.

कीर्ति:- मतलब तुम हमे गांव घुमाने लाये ho...Bullshit.

सुमित:- Haan...Lekin कुछ अलग तरह से.

कीर्ति:- मई बहुत से गांव घूम चुकी hun...Aur 3 हफ्ते का vacation...Sirf एक गांव में रह कर बिता नहीं सकती.

मेघा:- हाँ और मई तो खुद गांव की hun...Ye कोई नया एक्सपीरियंस नहीं है?

कीर्ति:- तेरी hi गलती hai...Vacation प्लानिंग का काम इससे नहीं देना चाहिए tha...Aur दे भी दिया तो पहले hi पता कर लेना चाहिए था.

कीर्ति का गुस्सा बढ़ता hi जा रहा था.

मेघा:- मई इसके मुंह लग्न नहीं चाहती thi...Aur ये उम्मीद से भी ज्यादा बेवकूफ निकला.

अभी अभी वह आ पंहुचा विवेक ने भी मौका पर चौका मारने का सोचा.

विवेक:- मई तो कहता हूँ इसको यही छोड़ कर हम लोग कही और वेकेशन के लिए चलते है.

सभी सुमित को गुस्से से देख रहे थे.

सुमित:- मेरा भी कुछ सुनोगे.

किसी ने कुछ जवाब नहीं दिया.

सुमित:- सोच समझ कर मैंने वेकेशन को इस तरह से प्लान किया hai...Aur ये बहुत जरुरी है हमे पर्सनली भी और प्रोफ़ेस्सिओनल्ल्य भी.

अभी तक के टूर में हम लोग न जाने कहा कहा गए hai...Hill Station...Historical प्लेस, रिलीजियस प्लेस, और ब्यूटीफुल जियोग्राफिक locations...Jo की बहुत लोग ऐसे hi सोचते है.

इसी लिए कुछ नया socha...Hum लोग 3 हफ्ते इस गांव में रहेंगे.

हम सब अपने लाइफ में ऐसे बिजी हो चुके है की हमे अपने पैशन, होब्बीएस के लिए भी टाइम नहीं hai...Ye पूरा दुनिया hi मटेरिअलिस्टिक बन गया hai...Sirf और सिर्फ कर्रिएर और पैसे के बारे में सोचते hai...Iske अलावा और कुछ nahi...Khushi के नाम पर कुछ पार्टीज, एक दूसरे के साथ मजाक, कभी मूवीज और कॉमेडी videos...Sirf इतना hi.

पैसा और करियर बहुत जरुरी hai...Lekin सिर्फ एहि दुनिया नहीं है.

इसी लिए 3 हफ्ते इस गांव में rahenge...Gaanw वालो से घुल मिल कर rahenge...Unse जान पहचान banayenge...Jo बहुत जरुरी है.

कही का कही इस फ़ास्ट फॉरवर्ड दुनिया में हम कुछ ऐसे हो गए है की जिसे हम जानते नहीं उससे हम इंसान hi नहीं mante...Uski अलग duniya...Humara अलग दुनिया.

इसी लिए सोचा हम यहाँ गांव में रह कर कम्युनिकेशन स्किल डेवेलोप करेंगे और साथ hi कम्युनिकेशन participation...Agar आता है तब और मजबूत बनाएंगे इन् स्किल्स ko...Khud को ऐसे बनाएंगे की दुसरो की जरुरत में हम मदद करेंगे और हमारी मुशीबत में वो हमे हेल्प कर सके.

ह्यूमन बीइंग इस ा सोशल animal...Society और कम्युनिटी के अलावा हमारा क्या औकात है ये सिर्फ तभी पता चलता है जब हम अकेले पद जाते है.

इसी लिए कम्युनिटी पार्टिसिपेशन स्किल डेवेलोप करते है वो भी नेचर के साथ.

और अस ा फ्यूचर डॉक्टर्स अगर कभी किसी गांव में काम करना पड़ा तो हमारे लिए आसानी होगा?

क्या कहते हो?

सभी एक दूसरे को देखने लगे.

सुमित अपने रूम में जा कर 4 ब्लड प्रेशर मासुरिंग डिवाइस ले कर आ गया.

सुमित:- इसी से शुरुवात karenge...Free का हेल्थ सर्विस किसे पसंद नहीं. :D...Aaj कुछ घर में ब्लड प्रेशर मैसूर करेंगे और अगर किसी का बहुत ज्यादा और काम मैसूर आया तो उन्हें हेल्थ पोस्ट या हॉस्पिटल जाने के लिए मोटीवेट करेंगे.

कोई मेडिसिन रेकमेंड नहीं करेगा? अभी हम सिर्फ मेडिकल स्टूडेंट्स है डॉक्टर नहीं.

के on...Lets एक्स्प्लोर ौरसेल्फ़.

सुमित एक्ससिटेमेंट में बोले जा रहा था.

मेघा:- (कीर्ति को देख कर) नीस आईडिया.

कीर्ति:- तुम तो खुद hi डिसिशन लिए जा रहे ho...Humse जाने की कोशिश भी नहीं कर रहे हो की हम इंटरेस्टेड है भी या नहीं.

ये क्या बच्चों जैसा ज्ञान दे रहे हो? भला किसे दूसरे लोगों से बात काटना नहीं आता जो हमे इस गांव में ये बेवकूफी करके सीखना की जरुरत पद गया.

कीर्ति की ये जवाब सुमित के उम्मीद से बिलकुल बाहर tha...Kirti की नफरत से तो वो परिचित था लेकिन ये जवाब? सुमित को कितना बुरा लगा है वो उसके चेहरा में मायूसी का भाव साफ़ दिखा रहा था.

विवेक:- और तेरे जैसे डॉक्टर hi होंगे जो गांव में काम karenge...Hume कोई जरुरत nahi...Talented hai...Accha ख़ासा नौकरी मिल जायेगा शहर में hi.

इतना कह कर दोनों अपने अपने रूम चले gaye...Baahar सिर्फ सुमित और मेघा रह गए थे.

मेघा:- आईडिया अच्छा है तुम्हारा.

सुमित हैरानी से मेघा को देखता hai...Dono के रिजेक्ट करने के बाद मेघा से ये अप्प्रेसिअशन किसी हैरानी से काम नहीं था.

मेघा:- नफरत अभी भी है तुमसे और हमेशा rahega...Bas ये आईडिया सही लगा.

सुमित:- थैंक यू.

फिर मेघा एक डिवाइस उठा कर आगे जाने लगी.

सुमित:- रुको.

सुमित:- साथ chalenge...Akele जाने में प्रॉब्लम भी आ सकता है.

मेघा:- क्या मतलब? मुझे अकेले में प्रॉब्लम होगा और तुम्हारे साथ होते hi प्रॉब्लम साल्व्ड? समझते क्या हो खुद को?

सुमित:- तुम मेरे साथ rahogi...To मेरा भी प्रॉब्लम साल्व्ड हो jaayega...Anjaan है इस जगह से और यहाँ के लोग se...Agar किसी घर में हमारी बातों से मिसुन्दरस्टण्डींग हो गया और वो गुस्सा हो गए तो दूसरा संभाल सकता hai...Aur किसी और प्रॉब्लम में भी हेल्प मिल सकता है.

मेघा सुमित की बात को सोचती रही.

सुमित:- तुम्हारी मर्जी.

मेघा:- ठीक है.

फिर दोनों आगे साथ चलने lage...Raasta में डीडे किया की आज 10 घर वो विजिट करेंगे.

मेघा नोटिस कर रही थी की सुमित बेवजह उससे अब्ब इर्रिटेट नहीं कर रहा hai...Sirf काम की बातें hi कर रहा hai...Aur इसके अलावा सुमित का वो ब्लेंक face...Jo दिखा रहा था सुमित को अभी भी कीर्ति की बातों ने निराश कर दिया है.

सुमित भी निराश हो कर आगे बढ़ रहा tha...Kitna कुछ सोचा था उसने इस टूर के बारे mein...Lekin कीर्ति का वो बेरुखी वाला jawaab...Uske सारे ख्वाब एक पल में hi टूट गया.

मेघा:- ब्लैकमेलिंग के लिए आगे क्या सोचा है?

गुस्सा भरी आवाज में मेघा ने पूछा.

सुमित:- कुछ nahi...Abb कोई ब्लैकमेलिंग नहीं.

मेघा:- इतनी जल्दी पीछा छूट gaya...Yakin नहीं हो रहा.

सुमित:- तुम्हारा काम था कीर्ति को इस टूर में laana...Wo तुमने कर diya...Abb कीर्ति को मनाना मेरा जिम्मेदारी.

तुम आजाद हो अब्ब se...Aur तुमने जो भी किया मेरे लिए उसके लिए थैंक्स.

सुमित ने भी बेरुखी से जवाब दिया जिससे मेघा और गुस्सा हो gayi...Abb वो भी चुप हो गयी.

धीरे धीरे दोनों सभी घर विजिट करने lage...Megha नोटिस कर रही थी की गांव वालो से बात करते वक्त सुमित अचानक से अच्छे मूड में आ जाता और घर से निकलने के बाद वही मूड ऑफ वाला चेहरा.

लगभग सभी घर के लोग दोनों से बात कर के बहुत खुश thhe...Kayi घर में अच्छा ख़ासा स्वागत भी हुआ उनका.

दोनों के लिए ये बहुत अच्छा अनुभव था.

फिर 10 घर कम्पलीट कर के दोनों वापस होटल में आ जाते है.

इस बिच सुमित और मेघा के बिच कोई बात नहीं हुआ.

कीर्ति:- तुमने हमारा पूरा टूर बर्बाद कर दिया सुमित.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

कीर्ति:- कल hi हम सब वापस जानरहे hai...Tour कैंसिल.

ये सुन बहुत बड़ा सा झटका लगा सुमित ko...Wo कुछ अलग करने का सोच रहा था जिसे कीर्ति को एक अच्छा एक्सपीरियंस मिले इस वेकेशन में लेकिन हुआ कुछ और.

सुमित:- तुम्हारी मर्जी.

हारा हुआ आवाज में सुमित ने जवाब diya...Aur अपने रूम में चला गया.
 
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