Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 4 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 19

सुमित वापस राज और कीर्ति के पास आ gaya...Ek खामोशी था तीनो के bich...Koi कुछ नहीं बोल रहा tha...Aur ना hi किसी को समझ में आ रहा था की क्या बोले?

इस खामोशी को सुमित ने hi तोडा.

सुमित:- कीर्ति मुझे तुमसे कुछ बात करनी है?

कीर्ति:- हां कहो.

सुमित:- राज के बारे में.

कीर्ति:- (विथ सीरियस लुक) हाँ कहो.

सुमित की बात सुन कर राज के भी कान खड़े हो गए ये उत्शुकता के साथ की सुमित क्या कहने वाला है.

सुमित:- और राज साथ में तुझसे भी.

राज भी सर हिला कर सहमति देता है.

सुमित:- प्यार तो तुम दोनों hi एक दूसरे से करते हो या फिर thhe...Lekin तुम दोनों hi एक दूसरे को समझने में ना कामयाब रहे हो.

विश्वाश hi नहीं है तुम्हे अपने प्यार में.

राज:- नहीं bhai...Mujhe कीर्ति पर पूरा विश्वाश है.

सुमित:- कीर्ति के बारे में nahi...Tujhe अपने प्यार पर विश्वाश नहीं है.

अगर होता तो पहले hi बिना किसी दर के अपनी बात कीर्ति से kehta...Lekin तुझ में विश्वाश की कमी या फिर दर की कीर्ति तेरी बात नहीं मानेगी.

इसी वजह से पीछे हत्ता चला gaya...Aur सीधे से कीर्ति से बात करने में डरता raha...Aur अब्ब हालत ये है की तू चाह कर भी कीर्ति के सामने नहीं आ पाटा.

कीर्ति:- लेकिन मुझे राज पर बिलकुल भी भरोषा नहीं है.

सुमित:- तुम्हे यही लगता था ना की राज तुम्हारे साथ सीरियस नहीं है.

कीर्ति:- लगता था और hai...Aaj भी राज को देखता हु तो लगता है की वो बिलकुल भी नहीं बदला.

सुमित:- प्रॉब्लम यही hai...Ye तुम सोच रही हो और तुम्हे लगता है की जो तुम सोच रही हो वही सही hai...Aur कुछ बात हो hi नहीं सकता.

कीर्ति अब्ब गुस्से से सुमित को देखती है.

कीर्ति:- तो क्या अब्ब मई ये सोचु की जो राज कर रहा है वो सही hai...Ek तो वो मुझसे प्यार करने का दवा करता है और दूसरे hi पल किसी दूसरी लड़की के साथ flirting...Kya यही प्यार है?

सुमित:- लेकिन मुझे तो फ्लिर्टिंग जैसा कुछ नहीं लगा.

कीर्ति:- वो इस लिए क्यों की तुम राज का साथ देना चाहते ho...Aakhir उसका भाई जो हो.

सुमित:- और तुम्हारा दोस्त भी तो हूँ.

सुमित की इस बात पर कीर्ति कुछ नहीं बोलती.

सुमित:- मजाक और फ्लिर्टिंग में बहुत फर्क होता hai...Raj हर किसी के साथ हंसी मजाक करता hai...Haan अभी के हालात अलग है वर्ण असली राज को तो तुम भी जानती हो.

कीर्ति:- हर किसी के साथ हंसी majaak...Lekin मेरे saath...Naa hi कभी अच्छे से बात की और ना hi मुझे कभी ऐसा लगा की वो मुझसे प्यार करता है.

राज से भी ज्यादा प्यार मई उससे करती thi...Lekin वो कभी समझ hi नहीं paaya...Ulta दूसरी लड़कियों से फ्लिर्टिंग सॉरी तुम्हारे भाषा में मजाक करके मुझे जलाता tha...Aakhir कौन इतना बर्दास्त कर सकता है?

और जब अलग होने लगी राज से तो वो मेरे पीछे पद गया.

सुमित:- समझता hun...Tumhari feelings...Lekin तुम्हे उसी वक्त समझ जाना चाहिए था की राज भी तुमसे प्यार करता है जब वो तुमसे बाकी लड़कियों की तरह मजाक नहीं करता था.

बाकी लड़कियों का क्या? उनसे मजाक कर लिया और अगर उनको बुरा भी लग गया तो राज को क्या फर्क पड़ेगा? लेकिन tum...Tum कही हर्ट ना हो जाओ इस दर से तुमसे ज्यादा मजाक नहीं करता tha...Tumse अलग तरह का केयर करता होगा जो शायद तुम समझ नहीं पायी.

इस बार कीर्ति सोच में पद गयी.

सुमित:- यही प्रॉब्लम है तुम दोनों के bich...Raj समझा ना सका और कीर्ति तुम समझने hi नहीं चाहती थी.

सुमित:- और राज tu...Yaa तो तुझे कीर्ति को अपने प्यार का इजहार कर के उससे समझाना चाहिए था की तू कैसा है या फिर अपनी वो आदत बदलना चाहिए था.

कीर्ति के नाराज होने के बाद भी तू ऐसी कोशिश कर रहा था जैसे तेरा सामान यहाँ खोया है तो तू किसी और जगह ढूंढ रहा है ये सोच कर की वह ज्यादा रौशनी है और तुझे वो सामान वह मिल जाएगा.

राज ने कोई जवाब नहीं दिया.

कीर्ति:- लेकिन मुझे अभी भी राज पर भरोषा नहीं है.

सुमित:- राज का गारंटी मई लेता hun...Jitna मई जानता हूँ बहुत hi शरीफ और ईमानदार लड़का है.

कीर्ति:- और तुम्हारा गारंटी कौन लेगा?

सुमित:- मतलब?

कीर्ति:- तुम भी तो एक वक्त में दो लड़की को बेवकूफ बना रहे thhe...Yaha मेघा और वह तुम्हारी कीर्ति.

ये जवाब सुनते hi सुमित कुछ पल के लिए चुप हो गया और फिर.

सुमित:- वो मज़बूरी tha...Lekin मैंने खुद मेघा के सामने एडमिट किया hai...Khair तुम नहीं समझोगी.

मुझे समझने की जरुरत भी नहीं hai...Raj को समझ लो मई बस इतना hi चाहता हूँ.

कीर्ति कुछ नहीं कहती.

सुमित:- अभी भी मौका hai...Ego और जिद्द में गलत फैसला मत lo...Ye राज hi है जो तुम्हारे इतने मन करने के बाद भी हार नहीं माना.

अभी थोड़ा वक्त बिताओ एक दूसरे के saath...Samjho एक दूसरे ko...Aur फिर कोई फैसला लो.

कीर्ति:- मुझे समझने की कोई जरुरत नहीं hai...Mai अच्छे से जानती हूँ राज को.

सुमित:- शायद तुमसे और बात करके कोई फायदा नहीं hai...Tum पहले से hi अपना डिसिशन बना चुकी हो.

योर लाइफ योर decision...Mai ये भी नहीं कहूंगा की राज को छोड़ कर तुम बहुत pachhtaaogi...Ho सकता है की तुम्हे राज से भी ज्यादा प्यार करने वाला मिल jaaye...Lekin राज नहीं मिलेगा.

कीर्ति ने कुछ जवाब नहीं दिया.

सुमित:- जिंदगी में कब गलती हो जाए और वो गलती कितना भारी पद सकता है ये मुझसे बेहतर कोई नहीं jaanta...Tum बहुत लकी हो जो 2 साल के बाद भी सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है और सब कुछ तुम्हारे मर्जी के साथ हो रहा है.

एक मेरा जिंदगी...2 पल में बिखर gaya...Aur शायद hi फिर से जुड़ सके.

अगर तुम्हारे साथ भी ऐसा हो जाए तो पछताना mat...Haalath बदलने में देर नहीं lagta...Kahi ऐसा ना हो की जब तुम्हे प्यार का एहसास फिर हो और उस वक्त राज बदल जाए या फिर मजबूर हो जाए तो मेरे पास मत आना.

मई कोई हेल्प नहीं कर paaunga...Mujhe खुद अपने ग़म से बाहर निकलने का वक्त नहीं है तो दुसरो को क्या हेल्प करूँगा?

इतना कह कर सुमित वह से निकल गया और फैसला छोड़ दिया कीर्ति और राज पर.

सुमित की दो बात ने कीर्ति की दिमाग में गहरा छाप छोड़ gaya...Ek जो भी उससे प्यार करेगा वो राज नहीं hoga...Aur दूसरा हालत बदलने की बात.

वार्ड से निकलते hi.

सुमित:- Hello रमेश bhai...Party आज मेरी तरफ से.

इतना कह कर सुमित ने फ़ोन कट कर दिया और चल पड़ा हॉस्टल की और.

ात पार्टी

पार्टी में लगभग 5, 6 लोग thhe...Sumit और उसके seniors...Daaru की 10 बोतल, कुछ चखना और cigarette...Aur बैकग्राउंड में साद songs...Kuch ऐसा hi पार्टी था.

सुमित hi सुरुवात करते हुए आधा बोतल एक hi बार में पी लेता है.

रमेश:- अरे बस kar...Paagal हो गया है क्या?

सुमित:- हाँ अब्ब पागल होना hi बाकी रह गया है.

सुमित की होंठो में मुस्कान tha...Dard भरी मुस्कान.

राजीव:- भाई आज तू कुछ ज्यादा hi सेंटी लग रहा है.

रमेश:- मेघा को सब सच बता दिया आज इसने?

सुमित:- समझ में नहीं आ रहा है की मैंने सच बताया है या फिर अपने पेअर पर कुलहरि मारा है...2 साल का म्हणत 2 पल में ख़त्म कर दिया.

Megha...Pata नहीं ये लड़की इतनी अच्छी क्यों है की उसको और धोखा देने का मन hi नहीं हुआ.

अब्ब तो शायद कीर्ति हमेशा के लिए अलग हो जायेगी.

सुमित ने दर्द भरी आवाज के साथ कहा.

रमेश:- संभाल यार खुद ko...Jaruri तो नहीं की हर प्यार सफल ho...Hume hi देख le(Waha मौजूद सभी को इशारा kar)...Kiska प्यार कामयाब हो पाया है? किसी को धोखा मिला तो किसी ने मज़बूरी में हार मान लिया.

रमेश की बातों में भी सुमित की तरह hi दर्द था.

राजीव:- रमेश सही कह रहा है..

जिंदगी में हर वक्त हमे सिर्फ जीत hi नहीं milta...Kabhi हारना भी पड़ता है जो हमे गहरा सबक सिखाता है.

और तूने मेघा को सच बता कर सही kiya...Dil हल्का हो गया न?

सुमित:- दिल तो हल्का हो गया लेकिन दर्द?

इतना कह कर सुमित ने अपनी आँखें बंद कर लिया.

सॉरी फ्रेंड्स थोड़ा लेट अपडेट देने के liye...Abhi एक्साम्स है नेक्स्ट वीक से इसी वजह से स्टडी में ज्यादस फोकस कर रहा हूँ और ज्यादा वक्त नहीं मिल रहा hai...Exam नेक्स्ट वीक के मंडे से स्टार्ट होगा और फ्राइडे complete...Aur उस एग्जाम के 6 वीक्स के बाद 2ंद ईयर का फाइनल एग्जाम hai...Most रिस्की एंड tough...Risky इस लिए की गलती से फ़ैल हो गया तो ईयर लोस्स होगा और रे एग्जाम भी नहीं hai...Tough इस लिए क्यों की 1सत एंड 2ंद ईयर दोनों का कंटेंट होगा.

इसी लिए 6 वीक्स में भी सुरुवात के 3 या 4 हफ्ते hi अपडेट दे paaunga...Wo एक्साम्स कम्पलीट होने के बाद थोड़ा फ्री और रिलैक्स हो jaaunga...Aur नेक्स्ट अपडेट की बात करे तो सैटरडे तरय करूँगा बूत सूरे नहीं हूँ.
 
अपडेट 20

Hi ब्यूटी क्वीन :डी

दांत दिखाते हुए सुमित एक बार फिर मेघा की सीट के पास बैठ गया.

सुमित की आवाज सुन मेघा सुमित को गुस्से से देखती है और फिर इग्नोर कर पढ़ने लगती है.

तभी थोड़ी दूर से एक आवाज आता है.

"लोग प्यार होने के बाद कॉलेज आते hai...Apne गफ के साथ टाइम स्पेंड karne...Aur सुमित tu...Tu उलटी खोपड़ी ले कर पैदा हुआ hai...Break उप होने के बाद कॉलेज आने लगा hai...Hadd है."

सुमित:- और मुकेश tu...Tu साले ga**d मरवाने के लिए पैदा हुआ hai...Issi लिए सभी से पन्गा ले रहा है.

अगर मैंने अपने गुस्सा पर से कण्ट्रोल खो दिया तो कभी पास आने की हिम्मत भी नहीं करेगा.

सुमित की इस बात पर क्लास के आधा स्टूडेंट्स हसने लगे तो आधा हैरानी से घूरने lage...Shayad सुमित से ये लैंग्वेज किसी ने एक्सपेक्ट नहीं किया था.

सबका ऐसे हसना मुकेश को बिलकुल भी अच्छा नहीं laga...Wo सुमित की तरफ बढ़ते हुए कहता है.

मुकेश:- क्यों बे? ज्यादा हीरो बन रहा है?

जैसे hi मुकेश सुमित के पास pahuncha...Sumit ने बिना कुछ कहे एक हाथ से मुकेश का गाला पकड़ कर हवा में उठा दिया और कक्तव की तरफ मुकेश को करके दो थप्पड़ खिंच देता है.

सुमित:- प्रे कर की कक्तव में किसी ने नोटिस नहीं kiya...Warna दोनों ृस्तिकते हो सकते hai...Mujhe तो अपना परवाह नहीं तू अपना सोच.

इतना कह कर सुमित मुकेश को धक्का दे कर वापस भेज देता है.

सुमित अब्ब थोड़ा हल्का महसूस कर रहा tha...Itne दिनों का गुस्सा और फ़्रस्ट्रेशन उसने मुकेश पर निकाल दिया था.

फिर वो मेघा की तरफ देखता है जो अभी भी सुमित को गुस्से से घर रही थी.

सुमित:- करना पड़ता hai...Aise लोगो के साथ ऐसे hi बात और लात जरुरी hai...Warna मई वही सिंपल एंड स्ट्रैट फॉरवर्ड सुमित हूँ. :डी

मेघा कुछ जवाब नहीं देती.

और फिर क्लास में प्रोफेसर आ जाते है और पढ़ाने लगते hai...Ye वही प्रोफेसर है जिसका सुमित से पहले दिन मुलाक़ात हुआ था.

सुमित पेपर में कुछ लिख कर मेघा की तरफ बढ़ा देता है.

मेघा चेक करती है और उसमें लिखा था सॉरी :)

मेघा बिना कुछ कहे पेपर फाड़ कर फेंक देती है.

सुमित:- (धीरे से) नाराज हो मुझसे?

मेघा ने सुमित को साफ़ इग्नोर कर दिया था लेकिन सुमित अपने कोशिश पर लगा हुआ था.

सुमित:- होना भी chaahiye...Kaam hi ऐसा किया है मैंने.

सुमित:- कुछ तो बोलो.

सुमित:- Accha...Mat bolo...Aaj तुम सुनोगी और मई बोलूंगा.

इस बार मेघा गुस्से से सुमित को देखती hai...Shayad सुमित की बात सुन्ना भी उससे पसंद नहीं था.

सुमित:- Gussa...Gussa में तो तुम बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती.

अगर ऐसे hi गुस्से वाला चेहरा रहा तो तुम्हे अग्ली क्वीन bulaunga...Soch लो. :डी

मेघा वापस लेक्चर पर ध्यान देने लगती है.

सुमित:- हाँ तो कहा था mai...Maaf करने की बात पर.

एक hi रिक्वेस्ट है mera...Mujhe कभी माफ़ मत karna...Hamesha नफरत करते raho...Mere सॉरी बोलने पर भी माफ़ मत करना.

सुमित को बातें करते हुए प्रोफेसर देख लेते है.

प्रोफेसर:- Hey...Both ऑफ़ you...Stand up...Kya हुआ?

मेघा:- कुछ नहीं सर.

प्रोफेसर:- तो फिर क्या बात क्यों कर रहे थे?

सुमित:- सर कुछ कन्फूसिओं tha...Wohi क्लियर कर रहा था.

प्रोफेसर:- तुम्हे भी कोई कन्फूसिओं होता है?

प्रोफेसर ने हैरानी से पूछा.

सुमित:- मेघा को कुछ कन्फूसिओं था जो मई क्लियर कर रहा था.

प्रोफेसर:- हाँ तुम तो करोगे hi...Itna इंटेलीजेंट हो की तुम तो मेरा भी कन्फूसिओं क्लियर कर डोज.

(तो मेघा) लेकिन लेक्चर देने का और कन्फूसिओं क्लियर करने का ड्यूटी मेरा hai...Samajh गयी ना तुम?

मेघा:- यस sir...Aage से कोई कंप्लेंट नहीं आएगा.

फिर प्रोफेसर पढ़ाने लगते है और मेघा सुमित को गुस्से से देखती है.

सुमित:- Matlab...Matlab

इतना कह कर सुमित धीरे से हसने लगता है.

सुमित:- मतलब अभी भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए जगह है.

इतना कह कर फिर सुमित हसने लगता hai...Saath hi ये भी ध्यान दे रहा था की प्रोफेसर नोटिस ना करे.

मेघा:- Jagah...In माय फुट.

सुमित:- कही भी ho...Yahi काफी है की कोई जगह तो है.

अगर नहीं होता तो तुम मुझे प्रोफेसर से नहीं bachati...Ulta कंप्लेंट कर देती.

मेघा:- तुम्हारा प्रॉब्लम क्या है?

सुमित:- इतना भी ना समझ नहीं हो तुम की मेरे प्रॉब्लम से अनजान हो.

मेघा कुछ जवाब नहीं देती.

सुमित:- सही कह रहा हूँ naa...Abhi भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए जगह है.

मुस्कुराते हुए सुमित ने सवाल kiya...Jawaab मिला तो मेघा की गुस्से से भरी नजर.

सुमित:- गुस्सा क्यों हो रही हो? सच hi तो कहा मैंने.

अभी भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए जगह hai...Bhale hi वो नफरत का हो.

मेघा कुछ जवाब नहीं deti...Abb सुमित भी मेघा को और परेशान नहीं करना चाहता.

सुमित:- जो भूल हुआ है मुझसे उससे मई सुधार नहीं sakta...Aur अफसोश भी नहीं hai...Kyu की ये जरुरी था.

बस अब्ब कुछ कर सकता हूँ तो एक ummeed...Tumhari मदद ka...Mujhe कीर्ति से फिर से मिलाने मि उम्मीद.

मेघा:- और कितना स्वार्थी बनोगे तुम सुमित? तुम से ज्यादा बेशर्म इंसान आज तक नहीं देखा मैंने?

गुस्सा और दर्द से भरी आवाज में जवाब दिया मेघा ने.

सुमित:- स्वार्थी, घटिया, बेशर्म कुछ भी kaho...Mujhe कोई फर्क नहीं पड़ता.

अगर किसी चीज से फर्क पड़ता है तो वो है Kirti...Meri pyar...Meri duniya...Mera सब kuch...Ussi के लिए ये सब कर रहा hun...Aur आगे भी करूँगा.

किसी ने कहा tha..."Everything इस फेयर इन लव एंड war."...Lekin इसको एडिट कर के कहता हूँ. "मोस्ट ऑफ़ थे थिंग इस फेयर इन लव एंड वॉर."

और ये मोस्ट ऑफ़ थे थिंग में मैंने जो भी किया मुझे सही laga...Tumhare लिए गलत हूँ लेकिन अपने प्यार के लिए सही.

मेघा कुछ जवाब नहीं deti...Aur सुमित भी इस बार चुप हो जाता है.

लेक्चर ख़त्म होता hai...Dusra सुरु होने से पहले hi.

सुमित:- अगर हो सके तो ये एक एहसान कर देना मुझ पर.

इतना कह कर सुमित बैग ले कर क्लास से निकल जाता hai...Usse और नाटक नहीं किया जा रहा tha...Gham में भी मुस्कुरा कर दुनिया को दिखाने की.

ात इवनिंग

शाम में जब राज अपने रूम में आता है तो रूम का हाल देख कर हैरान रह जाता है.

रूम में धुआँ hi धुआँ फैला हुआ था सिगरेट ka...Sumit पर नजर पड़ते hi देखा की सुमित अभी भी बीएड पर बैठ कर सिगरेट फंक रहा tha...Chehra में कोई भी भाव नहीं था.

राज:- भाई ये सब क्या है?

सुमित:- बस ऐसे hi...Aaj कण्ट्रोल नहीं कर पाया.

सुमित ने बिना किसी भाव के जवाब दिया.

राज:- एक बात कहना था आपसे.

सुमित का हालत देख राज चुप हो जाता है.

सुमित:- हाँ बोल.

राज:- नहीं bhai...Kuch भी नहीं.

सुमित:- पहले से hi दिमाग खराब hai...Aur गुस्सा मत dila...Jaldi बोल.

राज:- वो bhai...Aaj कीर्ति ने मुझे बुलाया था मिलने के liye...Abhi उसी के साथ टाइम स्पेंड करके आया hun...Bas यही खुशखबरी सुनाना चाहता था.

ये सुन सुमित के चेहरे पर मुस्कान आ जाता है.

सुमित:- वादा किया tha...Vakt से पहले तुम दोनों को मिला दूंगा.

राज की इस बात से सुमित भी खुश हो गया जैसे ये उसका भी जीत है.

फिर उसने सिगरेट बुझा कर ऐशट्रे पर फेंक दिया.

सुमित:- चल आ बैठ...

अपने बीएड की तरफ इशारा कर सुमित ने कहा.

सुमित:- तुझे देख मई भी खुश हो gaya...Bhale hi मेरा प्यार अधूरा रह gaya...Tujhe तेरा प्यार मिल gaya...Bas इसी में खुश हूँ.

हर बात के साथ सुमित की ख़ुशी भी बढ़ता जा रहा था..

सुमित की बात के साथ राज को भी कुछ याद आया.

राज:- Bhai...Bhul hi गया tha...Bataiye ना आपकी कहानी?

ये बात सुनते hi सुमित के चेहरा फिर से भाव हीं हो गया.

राज:- क्या हुआ भैया?

सुमित:- क्या करेगा सुन kar...Ek अधूरी कहानी hai...Ek भूल और प्यार के एहसास का.

ये कह कर सुमित खिड़की के पास चला गया और अपने पुराने खूबसूरत और मनहूस पल को याद करने लगा.

फ्लैशबैक

फ्रेंड्स थ्योरी एग्जाम कम्पलीट हो गया और एग्जाम भी अच्छा गया उसी ख़ुशी में आज अपडेट दे रहा hun...Abb प्रैक्टिकल बाकी है और वो भी फ्राइडे ख़त्म हो jaayega...Friday से 3 या 4 हफ्ते तक रेगुलर रहूँगा.

और स्टोरी अब्ब फ्लैशबैक में जाने वाली hai...Flashback में अराउंड 15 अपडेट honge...Aur उसके बाद स्टोरी अपने मैं प्लाट पर आएगा.

और रिलीज भी जल्द दूंगा.
 
अपडेट 21

अब्ब आया ये नालायक?

सुमित के घर आते hi उसके पापा उससे घूरते हुए bole...Sumit का रूप देख उन्हें और भी गुस्सा आया.

पुरे पसीना से भींगा हुआ sharir...Chehra में जीत की khushi...Ek हाथ में बात और दूसरे में ट्रॉफी.

सुमित:- आपने पहचानने में गलती कर diya...Mein नायक (हीरो) नहीं क्रिकेटर हूँ. :स्मार्त्य:

स. डैड:- नायक नहीं नालायक है तू.

सुमित:- लेकिन इस ट्रॉफी के लायक तो हूँ. :डी

स. डैड:- एग्जाम कब से है?

सुमित:- क्या पापा आप भी? बीटा ने आज सेंचुरी banaya...Ye आप नहीं पूछेंगे?

स. डैड:- एग्जाम आने वाला hai...Aur तू सिर्फ खेलता रह.

सुमित:- 42 बॉल्स में सेंचुरी.

स. डैड:- इस बार रिजल्ट अच्छा आना चाहिए.

सुमित:- 11 चक्का और 5 चौका

स. डैड:- तू सीरियस कब होगा?

सुमित:- मन ऑफ़ थे मैच.

स. डैड:- देख Sumit...Abb मुझे गुस्सा आ रहा है.

सुमित:- मन ऑफ़ थे टूर्नामेंट.

स. डैड:- सुमित्तत

इस बार सुमित के पापा इतने गुस्से में बोले की सुमित को भी एहसास हो गया की मजाक कुछ ज्यादा हो गया.

सुमित:- आप तो मेरे तारीफ़ कभी करेंगे nahi...Issi लिए मई खुद अपना तारीफ़ कर रहा हूँ.

स. डैड:- पहले पढ़ लिख कर बड़ा इंसान बन फिर तो तेरा तारीफ़ hi करता रहूँगा.

सुमित:- बड़ा इंसान banu...Matlab किस चीज में? उम्र mein...Height में या फिर किस चीज में?

स. डैड:- तेरा कुछ नहीं हो सकता?

इतना कह कर वो अपना सर पीटने लगते है.

सुमित:- क्या पापा आप भी? अभी तो मेरा बहुत कुछ होना बाकी hai...Pyar होना बाकी है, शादी होना बाकी है, बच्चे होना बाकी है.

सुमित के पापा का चेहरा देख ऐसा लग रहा था जैसे वो कभी भी रो देंगे.

स. डैड:- तेरे hi क्लास के दोस्त डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे है, इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे hai...Aur तू बी फार्मा पढ़ रहा hai...Padh क्या रहा है? टाइम पास कर रहा hai...Kam से काम यही तो पढ़ ले.

सुमित:- बिल गेट्स भी उतना नहीं पढ़ा है जितना उसके कंपनी में काम करने वाले ेंगिनीर्स?

स. डैड:- मतलब?

सुमित:- मतलब ये पिता जी की ये डॉक्टर लोग जितना भी पढ़ लिख le...Ye प्रेस्क्रिबे वही दवाई करेंगे जो हम लोग बनाएंगे.

डिग्री से जरुरी है akal...Jo मुझे आपसे hi मिला है.

स. डैड:- तू सिर्फ बातें hi करता reh...Aur लोग तेरे बारे में बातें बना रहे है.

सुमित:- और कौन है वो फ़ालतू बैठे महा purush...Jinke पास इतना वक्त है?

स. डैड:- यही पदोष के तेरे महेश अंकल.

फिर सुमित टेबल पर रखे पापा के मोबाइल उठा कर सीधा महेश अंकल को कॉल करता है.

Hello.

पहले hi रिंग टोन में कॉल कनेक्ट हो गया.

सुमित:- अंकल मई हु सुमित.

हाँ सुमित beta...Bolo...Kaise हो? तुम्हारा तो एडाम आने वाला है ना?

सुमित:- हाँ अंकल...2 दिन बाद hai...Ye पूछने के लिए कॉल किया था की आप ठीक तो है ना? मेरा मतलब? दुसरो की जिंदगी में झाँकने की बीमारी?

तमीज से बात करो?

सुमित:- जी uncle...Tameez तो मई सिख lunga...Jara आप अपने बेटों को सिखाइये कैसे पढ़ना chahiye...Jaise आप मेरे पापा को सलाह देते hai...Ek का इंजीनियरिंग क्लियर नहीं हो रहा है और दूसरे का 12 क्लियर नहीं हो रहा है.

सुमित का इतना hi कहना था की दूसरी तरफ से कॉल कट हो गया.

स. डैड:- ये क्या बदतमीज़ी है? आवारापन तो करता hi था अब्ब पुरे सोसाइटी में नाक भी कटवाएगा.

सुमित:- Izzat...Ye कुछ ज्यादा hi ओवररेटेड शब्द hai...Aap बस अपना काम अच्छे से करते rahiye...Jinko इज़्ज़त करना होगा karenge...Mahesh अंकल जैसे लोग तो जहा कही भी मिलेंगे टांक झाँक करने और शिकायत करने.

इस बार सुमित की पापा चुप hi रहे.

"भैया आप तो पापा को hi ज्ञान देने लगे."

मौका देख सुमित की बहिन रश्मि बोली.

सुमित:- तू तो चुप hi रह जंगली billi...Agar तेरा काण्ड बताने लगा तो पापा का गुस्सा तुझ पर शिफ्ट हो जाएगा.

रश्मि:- पापा देखिये ना भैया को...

स. डैड:- चुप रहो तुम dono...Pehle hi मई इससे परेशां hun...Aur अब्ब तुम दोनों.

सुमित के पापा सर पकड़ते हुए bole...Paas में hi कड़ी सुमित की माँ ये सब देख कर हंस रही थी.

स. डैड:- और हंसो...

इतना कह कर वो चले gaye...Fir सुमित भी अपने रूम में चला गया.

कुछ hi देर में उसके रूम में नॉक hua...Gate खोलने के बाद.

सुमित:- हाँ बोल जंगली बिल्ली.

रश्मि:- आपको कोंग्रटुलतिओन्स कहने आयी थी.

ये सुनते hi सुमित के चेहरे पर स्माइल आ गया.

सुमित:- बहुत जल्द बोल दी तूने.

रश्मि:- ठीक है अगली बार से नहीं बोलूंगी.

इतना कह कर रश्मि मुंह फुला कर वह से जाने लगी.

सुमित:- अरे are...Tu तो नाराज हो gayi...Accha ये ले.

इतना कह कर सुमित ने पर्स से 500 का नोट निकाल कर दिया.

रश्मि:- इतना पैसा?

सुमित:- Jaa...Party kar...Tournament जितने का पैसा hai...Warna तो तुझे 5 रुपैया भी ना दू.

फिर रश्मि पैसा रख लेती है.

रश्मि:- Bhaiya...Aap क्रिकेट में hi फोकस क्यों नहीं करते? इतना अच्छा तो खेलते है.

सुमित:- फवौरीते गेम hai...Lekin इतना भी इंटरेस्ट नहीं की इससे hi करियर बना लू.

रश्मि:- तो किस चीज में है?

सुमित:- पता nahi...Bachpan से आज तक बस इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहा hu...Ummeed है कभी तो मिलेगा.

रश्मि:- जल्दी dhundiye...Kahi पापा इस इंतजार में पागल ना हो जाए.

सुमित:- अरे पापा.

इतना कह कर सुमित हसने लगता है.

सुमित:- पापा सिर्फ पापा नहीं बेस्ट फ्रेंड है mere...Jaan बुझ कर इर्रिटेट करता हूँ unhe...Majaa आता है.

रश्मि:- लेकिन वो तो...

सुमित:- वो भी समझते hai...Thodi ना कहेंगे की "जा बीटा जा कर मस्ती kar...Duniyadari कुछ नहीं होता." बस वो मुझे थोड़ा सीरियस दलहन चाहते है.

रश्मि:- तो फिर कब होंगे आप?

सुमित:- अभी किस चीज की जल्दी hai...Masti का टाइम hai...Jab वक्त आएगा हो जाऊँगा.

रश्मि:- आपसे पापा जीत नहीं सकते तो मई क्या चीज hun...Aap अपना मस्ती करते rahiye...Mai चली पार्टी karne...Aur हाँ पापा को थोड़ा काम परेशां कीजिये.

सुमित:- अच्छा ठीक है.

फिर सुमित ऐसे hi मुस्कुराते बीएड पर गिर जाता hai...Tabhi उसके मोबाइल में मैसेज का नोटिफिकेशन आया.

मसाज पढ़ते hi सुमित का सारा ख़ुशी और मस्ती एक पल में गायब हो gaya...Dhire धीरे चेहरे में गुस्से का भाव आने लगा.

सुमित:- (इन हिज मंद) हर बार मेरा hi चुटिया काट ता hai...Abb बहुत हुआ.

तभी उससे फ़ोन आता है.

सुमित:- ये कमीना Ashish...Saala इसका फ़ोन का टाइमिंग भी इसके क्रिकेट शॉट जितना घटिया hai...Jab मूड ऑफ होता है सिर्फ उसी वक्त फ़ोन करता hai...Kamina.
 
अपडेट 22

ऐसे चुप क्यों बैठा है सुमित? पहले इतना बोलता था की कान पाक जाते थे.

पास में बैठा सुमित के एक दोस्त ने pucha...Lekin सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

आशीष:- थोड़ा मूड ऑफ है iska...Break उप हुआ है.

अच्छा ये बात hai...Hota रहता है ये सब.

ये सुनते hi सुमित उससे हैरानी से देखता है.

सुमित:- ये क्या बक रहा है कारन तू?

कारन:- लव, रिलेशनशिप और ब्रेक उप तो फैशन है आज kal...Chalta है.

टेंशन मत le...Kisi और को पता ले.

सुमित ने इस बार कोई जवाब नहीं दिया.

कारन:- (हँसते हुए) शायद तू सच्चा प्यार कर बैठा. :lol1:

सुमित बस उससे देखता रहा.

कारन:- किस जमाने में जी रहा है तू Sumit...Vakt के साथ साथ हर चीज का मतलब बदलता hai...Pyar का भी?

अगर दुनिया में खुस रहना है तो अपना ये पुराने ख़यालात बदल या फिर जो तू परफेक्शनिस्ट बनने की कोशिश कर रहा hai...Usse भूल जा.

सुमित इस बार उससे देख कर हसने लगा.

कारन:- कही पागल तो नहीं हो गया?

सुमित:- Nahi...Dekh रहा हूँ की इंसान अपने आप को कुछ ज्यादा hi मॉडर्न दिखाने के लिए क्या कुछ नहीं karte...Abe इतना भी मत बदल की कुछ दिन बाद आईना देखने पर खुद को hi ना पहचान सके.

जितना भी आसमान की सैर करना है कर लेकिन पेअर जमीन पर रहना चाहिए.

कारन:- सच में अभी भी पुराने जमाने में जी रहा hai...Dialogue भी वही घीसा पीटा purana...Kuch नया तरय कर?

और आसमान में उड़ना है तो पेअर जमीन से उठाना hi पड़ता है.

सुमित:- मुंह के बल गिरेगा.

कारन:- वो तो बाद में dikhenge...Kahi ऐसा ना हो की तू जिंदगी की दौड़ में पीछे ना रह जाए.

सुमित:- जिंदगी की दौड़ से किस्से मतलब है? मुझे किसी से कम्पटीशन करना hi नहीं hai...I ऍम बियॉन्ड competition...Tere हिसाब से जिंदगी एक रेस hai...Mere हिसाब से जीने की cheej...Aur इसी में मई खुश हूँ.

कारन:- तुझे समझाना मतलब भैंस की आगे बीन बजाना.

अगर यकीं ना हो तो आशीष से hi पूछ le...Bol Ashish...Kitne गर्लफ्रेंड है तेरे? और प्यार का मतलब क्या है?

आशीष:- गर्लफ्रेंड तो 5 hai...Ek भी सीरियस रिलेशनशिप nahi...Aur रही प्यार का मतलब तो इस बात पर चर्चा करने की कोई मतलब नहीं. सुमित का अपना डेफिनिशन है और मेरा apna...Aur दोनों hi अपनी जगह सही है.

सुमित:- 5 गफ? कभी बताया नहीं तूने?

आशीष:- बता कर भी क्या करता? तुझे बताता तो उल्टा तू फ़ालतू का लेक्चर देता सच्चा प्यार के ऊपर.

सुमित:- फिर भी.

आशीष:- देख bhai...Jo तू आज महसूस कर रहा है वो मई बहुत पहले कर चूका hun...Saccha pyar...Shayad hi ऐसी कोई चीज होता hai...Pyar karo...Faaide में रहो और वक्त आने पर धोखा दे कर आगे बढ़ jaao...Bas यही रह गया है प्यार का मतलब.

इसी लिए जिंदगी में ज्यादा सर दर्द नहीं लेने ka...Bas मौज मस्ती करो जब तक साथ हो और फिर आगे बढ़ जाओ.

बस ये मेरा पॉइंट ऑफ़ व्यू था.

कारन:- देखा तूने? सुमित का भी यही सोच है.

सुमित:- तो मई क्या करू?

कारन:- तो मान ले की हम दोनों सही है?

सुमित:- सच में बेवकूफ hi रहेगा तू.

इतना कह कर सुमित हल्का सा muskuraya...Kuch कहने के लिए मुंह खोला hi था की फिर कुछ सोचते हुए चुप हो गया.

सुमित:- रहने दे.

अबे बस करो ये बकवास? जल्दी आर्डर करो kuch...Bhukh लगा है.

पास से hi कुछ दोस्तों की आवाज aaya...Jo कुछ देर से बस तीनो की बातें सुन रहे थे.

सुमित:- Haan...Baaton में भूल hi gaya...Kaha पार्टी देने आया था क्रिकेट मैच का? और कहा बेकार की टॉपिक ले कर बैठ गया.

फिर सभी आर्डर के बारे में आपस में बात करते है.

सुमित:- Nahi...Koi अल्कोहल और सिगरेट नहीं?

आशीष:- क्यों?

सुमित:- मई ना hi पीटा हु और ना hi प्रमोट करता हूँ ये सब चीज.

आशीष:- आज तो तरय कर?

सुमित:- कभी नहीं.

आशीष:- लेकिन आज?

सुमित:- आज ऐसा क्या है?

आशीष:- तेरा ब्रेक up...Thoda पी le...Dil के दर्द काम हो जाएगा.

सुमित:- इतना भी दर्द नहीं हो रहा है की नशे का सहारा lun...Dard से ज्यादा गुस्सा आ रहा hai...Uski बेवफाई ka...Aur धोखा उसने दिया hai...Mai अपना जिंदगी उसके लिए क्यों बर्बाद करू?

आशीष:- मतलब कभी नहीं पियेगा?

सुमित:- Nahi...Aur लड़कियों के चक्कर में तो बिलकुल भी नहीं.

कारन:- दोस्त की कहने पर.

सुमित:- ऐसी दोस्तों से दोस्ती तोड़ lunga...Lekin दसरू को हाथ नहीं lagaunga...Aur किसी का इतना औकात नहीं की मुझसे मेरे मर्जी के खिलाफ कुछ करवाए.

सुमित ने इस बार कारन की आँखों में घूरते हुए kaha...Pehle hi कारन से वो गुस्सा tha...Aur इस बार गुस्सा फुट पड़ा.

कारन:- अच्छा तू मत peena...Lekin हमें तो पीने दे.

सुमित:- बाद में पी लेना अपने पैसे se...Lekin मेरे पार्टी में ये सब नहीं चलेगा.

कारन:- बहुत ऐटिटूड है सुमित तुझ में.

इस बार कारन ने भी गुस्से में कहा.

सुमित:- हाँ hai...Aur जरुरी भी hai...Attitude बिना इंसान का हाल वैसा भी होता है जैसा बिना जेहेर के सांप ka...Koi भी उससे उठा कर इधर से उधर फेंक देगा.

ठीक ऐसा hi इंसान hai...Thoda सीधा साधा इंसान क्या मिल जाते है दुनिया वाले उससे निचोड़ लेने की हर एक कोशिश करता है.

कारन:- अच्छा ठीक hai...Tu अपना ऐटिटूड अपने पास rakh...Mai chala...Bina दारु के मई पार्टी नहीं कर सकता.

इतना कह कर कारन वह से जाने लगा.

सुमित:- फ़ालतू में रूत रहा है तो मई कुछ नहीं karunga...Dusri ब्रेकअप हुआ है aaj...Dono में से किसी को नहीं मनाया तो तुझे घंटा मनाऊंगा?

सुमित ने भी ऐटिटूड में जवाब दिया.

फिर बाकी के दोस्त पार्टी करने lage...Sabhi सुमित और उसका मूड से वाकिफ थे तो किसी ने कुछ नहीं kaha...Bas वो सभी सुमित को टाइम देने लगे उसका मूड ठीक होने का.

सुमित:- Ashish...Raat में तुझसे मिलने आऊंगा?

इतना कह कर सुमित वह से घर चला gaya...Baaki सभी अपने अपने घर की और चले गए.

अभी भी सुमित का मूड ऑफ hi tha...Aur अब्ब उसका दिमाग में दो तरह का ख्याल चल रहा tha...Ek सच्चा प्यार ka...Aur दूसरी तरफ कारन और आशीष का pyar...Kaun सही है?

अभी भी उससे लग रहा था की वही सही hai...Lekin दिल ये बात मानने को घबरा रहा tha...Do बार गलत हो चूका था wo...Bas इसी सोच में जकड़ा हुआ वो घर पहुँच गया.

ात होम

सुमित ने घर जाते hi देखा की कुछ मेहमान आये हुए hai...Teen लोग thhe...Do को तो सुमित जानता tha...Wo थे सुमित के पापा के दोस्त और उनकी पत्नी.

साथ में एक लड़की भी थी जिसे सुमित नहीं जानता था और शायद जानना भी नहीं चाहता था.

वो उनके पेअर छू कर और बिना मन थोड़ी बातें कर अपने रूम की और चला गया.

जाते जाते रश्मि की एक hi बात कान में पड़ा.

रश्मि:- चल कीर्ति...तुझे में अपनी ड्राइंग दिखाती हूँ.

सुमित को इस बात से कोई मतलब नहीं था और वो अपने रूम में चला गया.

कीर्ति भी रश्मि के साथ उसके रूम की और जाने lagi...Lekin नजर चुरा कर वो अपने रूम की तरफ जाते सुमित को भी देख रही थी.

शायद सुमित का ये बर्ताव उससे अजीब laga...Ekdum से सुमित ने उससे इग्नोर कर दिया tha...Naa hi कोई Hi Hello और ना hi एक पल से ज्यादा की नजर.

शायद पहली बार किसी ने कीर्ति को ऐसे इग्नोर किया था.

और यही से सुरु होता है सुमित और कीर्ति की कहानी.
 
अपडेट 23

क्या बात है?

सुमित को सीरियस देख आशीष ने भी सीरियस हो कर पूछा.

सुमित:- कुछ सोचा है.

अभी भी सुमित अपने सोच में hi था.

आशीष:- क्या?

सुमित:- सोच रहा hun...Abb मई भी इस प्यार के चक्कर से दूर hi राहु.

आशीष कुछ देर तक सुमित को हैरानी से देखता है.

आशीष:- अचानक तुझे हो क्या गया?

सुमित:- एहसास hua...Taali एक हाथ से नहीं बजता.

आशीष:- मतलब?

सुमित:- कब तक मई अकेला hi सच्चा प्यार निभाता rahu...Abb तो लगने लगा है की सच्चा प्यार का कोई अस्तित्वा है hi नहीं?

गुस्से में सुमित ने कहा.

आशीष कुछ नहीं बोलै.

सुमित:- कब तक ऐसे hi अपना दिल तुड़वाता रहूँगा यार? अब्ब और नहीं सहा jaata...Thak गया हूँ यार abb...Jo भी आती है धोखा दे कर जाती है.

पहली बार सुमित की आवाज में दर्द dikha...Aankhein थोड़ा सा भींग चूका tha...Lekin अभी भी वो खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहा था.

आशीष:- ये क्या यार? तू तो सेंटी हो रहा hai...Bhul mat...Tu कितना स्ट्रांग है.

सुमित के कंधे पर हाथ रख आशीष ने सहारा diya...Lekin सुमित ने उसका हाथ झटक दिया.

सुमित:- अभी भी स्ट्रांग hi hun...Do ब्रेकअप हुआ hai...Lekin एक बूँद आंसू तक नहीं गिराया उनकी यादों में.

ना hi प्यार का रोना रोऊँगा उनके saamne...Itna भी कमजोर नहीं हूँ की अपने दिल को सँभालने के लिए किसो बेवफा की चरण पर गिर जाओ.

आशीष:- सही है bhai...Lekin ऐसे कैसे छोड़ दिया तूने unhe...Kuch तो बोलना चाहिए था? मनाना ना सही लेकिन अपना फ़्रस्ट्रेशन तो निकालता.

सुमित:- Chhod...Jaane दे abhi...Mai क्यों बदला लू? Vakt...Sabse निर्दयी चीज यही वक्त होता है.

आने दे सही samay...Aaj तक उनके पास मई tha...Har जरुरत मई साथ diya...Unki मुशीबत से मई लड़ा hun...Mere रहते शायद hi उन्हें कभी कमजोर पल का महसूस हुआ हो.

लेकिन abb...Abb मई नहीं hun...Agar वो खुद hi लड़ पाए तो ठीक hai...Warna.

इतना कह कर सुमित हसने लगता है.

सुमित:- Warna...Vakt...Bahut बुरा हाल करता है.

और उस वक्त वो रोयेंगी और मई hasunga...Unhe dekh...Unke आंसू dekh...Ye एक टूटा हुआ आशिक़ की हंसी होगी.

इतना कह कर सुमित और भी हसने लगा.

आशीष:- भाई संभाल खुद को.

सुमित:- हाँ अब्ब खुद को संभालना सुरु hi किया hai...Warna इस ग़म में आज दिन भर उदास raha...Gusse में कारन से बहस भी हो गया.

लेकिन अब्ब nahi...Abb खिड़ को sambhalunga...Raashta भी ढूंढ लिया.

आशीष:- प्लेबॉय वाला राष्ट?

सुमित:- हाँ.

आशीष:- मतलब तू भी मुझसे और कारन से अब्ब सहमत है?

सुमित:- बिलकुल nahi...Tumhara कांसेप्ट से प्यार का मतलब ऐयाशी hai...Lekin मई तब भी कहता था और अब्ब bhi...Pyar और ऐयाशी अलग चीज है.

कुछ बदलाव आया है तो मुझ mein...Abb मैंने प्यार का राष्ट छोड़ ऐयाशी को अपनाने का सोचा है.

एक नफरत सी थी सुमित की बातों में? पता नहीं किसके लिए? खुद के या फिर अपने एक्स के लिए?

आशीष:- अच्छा ये chhod...Aur अब्ब तू भी ऐयाशी के hi रास्ता में चल पड़ा है तो मुझसे कुछ टिप्स le...Iss खेल का पुराना खिलाडी हूँ.

सुमित:- तुझे सच में लगता है की मुझे तेरे टिप्स की जरुरत है?

सुमित ने आशीष को घूरते हुए कहा.

आशीष ने भी बोलने से पहले अपना सर पीट लिया.

आशीष:- पता नहीं किस्से बोल दिया ये बात.

लड़की पटाने में तू एक्सपर्ट hai...Koi भी लड़की तेरी बात और स्टाइल से आसानी से अत्त्रक्ट हो जाती है.

बस यही वजह था आसानी से पैट भी गयी wo...Aur जब बोर हो गयी तो किसी और के साथ सेट.

सुमित:- लेकिन जो भी हो मैंने प्यार सच्चे दिल से किया tha...Jab भी उनके साथ रिलेशनशिप में था किसी भी लड़की को आँख उठा कर नहीं देखा था.

खैर, अब्ब तो ऐयाशी और मजे hi मजे.

इस बार सुमित की आवाज में एक्ससिटेमेंट था.

आशीष:- लड़की भी तो dhund...Warna क्या खुद से hi करेगा ऐयाशी?

सुमित:- ढूंढ़ने की क्या जरुरत? आस पास hi तो है.

हमारी hi क्लास की Shruti...Bahut आगे पीछे करती रहती है mera...Kabhi भाव नहीं diya...Ussi से सुरुवात hi करता हूँ.

आशीष:- क्या श्रुति?

आशीष ने चिल्ला कर कहा और फिर धीरे से.

आशीष:- हाँ वो तुझे hi तो लाइन देती है.

सुमित:- नहीं तो तुझे देगी? थोड़ा कॉंफिडेंट ban...Aise hi चुटिया बना रहा तो अभी जो भी गफ है तेरे वो भी लात मार कर भगा देगी.

इतनी रात को कहा से आ रहा है?

सुमित के आते hi उसके पापा ने पूछा.

सुमित:- आशीष को पढ़ाने गया tha...Do दिन बाद एग्जाम है.

सुमित ने पापा को देखते हुए kaha...Jo अभी डाइनिंग टेबल में बैठे हुए thhe...Saath में सभी लोग thhe...Kirti और उसके पेरेंट्स भी.

सुमित भी हाथ धो कर वह एक चेयर पर बैठ gaya...Uski माँ उससे भी डिनर सर्वे कर देती है.

स. डैड:- तू खुद पढता लिखता नहीं है kuch...Aur चला अपने दोस्त को पढ़ाने.

सुमित:- दिमाग नाम की भी कोई चीज होता है पिता shri...Aur उसी दिमाग का इस्तेमाल करते हुए 1 मंथ पहले 1 वीक में hi पूरा सेमेस्टर कवर कर लिया है.

इस बात पर आप क्या कहेंगे?

स. डैड:- यही की पहले तू आवारा था और अब्ब झूठ बोलना भी सिख गया है.

क. डैड:- अगर ये बात है तो मई ये कहूंगा सुमित की तुम बहुत जीनियस ho...Keep आईटी उप?

स. डैड:- जीनियस वेणीउस कुछ नहीं है? बस टाइम पास करता रहता है.

सुमित:- मेरे आँखों में देखते हुए कहिये ये बात फिर से?

स. डैड:- चल मान लिया की तुझ में टैलेंट hai...Hardwork भी कोई चीज होता है? इसके बिना किसी को सक्सेस नहीं मिलता.

सुमित:- हार्डवर्क का मतलब ये नहीं की मई बाहर जा कर हैमर से पत्थर फोड़ता फिरू बिना मतलब ke...Wo भी तो हार्डवर्क hai...Aur उस हार्ड वर्क से कोई सक्सेस नहीं मिलेगा.

हार्डवर्क का भी अपना hi वक्त और टाइमिंग होता hai...Aur उसी वक्त में हार्डवर्क करने से सक्सेस मिलता है.

सक्सेसफुल बनना किसे है? मुझे तो जिंदगी जीना है.

स. डैड:- और वो वक्त आएगा कब?

सुमित:- मुझे क्या पता?

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा.

क. डैड:- बहुत समझदार है तेरा बीटा?

स. डैड:- काहे की समझदार? फ़ालतू की बातें hai...Bina सर पेअर के.

इससे तो तेरे बेटी से सीखना चाहिए की कैसे म्हणत करना चाहिए पढ़ाई में?

अपने पापा की बात सुन कर सुमित कीर्ति को देखता है जो उससे hi देख रही thi...Shayad सुमित की बात को काफी गौर से सुन रही थी वो.

क. डैड:- सुमित? तुम आज तक हमारे घर कभी नहीं आये इस सेहर में होने के बावजूद? तुम से बातें करना बहुत अच्छा लगता है? मई तो बिजी रहता हु लेकिन तुम?

क. माँ:- हाँ मई भी थक चुकी हूँ तुम्हे बुलाते bulaate...Rashmi तो आती है लेकिन तुम तो कभी भी नहीं?

सुमित:- अंकल Aunty...Busy तो में भी रहता हूँ.

क. डैड:- तुम बिजी? किस चीज में?

स. डैड:- आवारा गर्दी में.

सुमित:- ना चाहते हुए भी घर वालों को दिखाने के लिए 8 घंटा की college...Uske बाद 2 घंटा की cricket...Uske बाद 3 घंटे दोस्तों के saath...Uske बाद 2 घंटे mobile...Aur बाकी के 9 घंटा में सोना.

24 घंटा में 1 मिनट का भी फुर्शत नहीं.

क. डैड:- और गर्लफ्रेंड? आज कल तो ये फैशन है.

उनकी इस बात पर सभी सुमित को घूरने लगे.

सुमित:- गफ? ऐसी किस्मत कहा अंकल? सब पापा की गलती है.

सुमित पापा की तरफ शिकायत भरी नजरो से देखता है.

स. डैड:- मतलब?

सुमित:- आप hi का दें है ये बदसूरत चेहरा? कोई देखती तक नहीं.

क. डैड:- ये क्या बोल रहे हो तुम? इतना हैंडसम तो हो tum...Aur तुम्हारा पापा? इसकी तो बात hi छोड़ दो.

कॉलेज के टाइम अपने लुक के लिए इतना फेमस था की ना जाने कितनी लड़किया इस पर मरती थी.

इस बात पर सुमित पापा को ऐसे घूरता है जैसे उससे विस्वाश hi नहीं हुआ हो.

सुमित की माँ भी अपने पति को घूरने लगती है.

क. डैड:- गुस्सा मत कीजिये भाभी ji...Ye भी सुमित की तरह hi शरीफ hai...Kisi को भी भाव नहीं देता था.

ये बात सुन,

सुमित:- (इन हिज मंद) मई और शरीफ. :D...Kuch पल aur...Fir आप भी kahenge...Mujhse बड़ा कमीना कोई हो hi नहीं सकता. :ेविलौगह:

इधर सुमित अपने हंसी मजाक में लगा हुआ tha...Udhar कीर्ति सुमित को गौर से समझने की कोशिश कर रही thi...Aakhir ये लड़का है क्या चीज?
 
सॉरी फ्रेंड्स अपडेट लिख तो लिया लेकिन लास्ट के कुछ पोरशन मुझे खुद बोरिंग लग रहा hai...Ye अपडेट सुमित और कीर्ति की बात चीत का पहला अपडेट hai...Aur बोरिंग अपडेट के रूप में नहीं देना chaahta...Kal दोपहर में एडिट कर के पोस्ट करूँगा.

कल शाम में घर के लिए निकल रहा हूँ तो दोपहर तक अपडेट पोस्ट कर दूंगा.

सॉरी अपडेट पोस्ट करते करते कैंसिल कर दिया. :(
 
थैंक्स अक्की भाई फॉर योर सपोर्ट एंड review...Sumit की इसी नेचर की वजह से उसका ज्यादा दोस्त नहीं hai...Lekin जितने भी है हमेशा साथ निभाने वाले hai...Aur आपने सुमित की तरफ से देखा है आशीष की तरफ से भी जल्द पता चल jaayega...Dono में चलता रहता hai...Haan लेकिन सुमित hi थोड़ा ज्यादा डोमिनेंट रहता hai...Keep सपोर्टिंग भाई.
 
अपडेट 24

ये आप क्या?

हैरानी में कीर्ति इससे आगे बोल नहीं पायी.

काम भी सुमित ने ऐसा hi किया tha...Ek बहुत hi ठीक गिलास का चस्मा पेहेन कर आया था.

सुमित:- लग रहा हूँ ना बुद्धा प्रोफेसर?

कीर्ति:- हाँ लेकिन...

कीर्ति को अभी भी समझ में नहीं आ रहा था की क्या बोले.

सुमित:- पापा ने ये ड्यूटी दिया है तुम्हे पढ़ने का तो मन भी नहीं कर सकता.

कीर्ति:- हाँ तो ये चस्मा और प्रोफेसर की लुक क्यों?

सुमित:- मेरा मन्ना ये है की टीचर दो टाइप के होते hai...Ek प्रोफेसर type...Jo लगातार घंटो तक अपना लेक्चर पेलते है और दूसरा फ्रेंडली टाइप teacher...Jo स्टूडेंट की प्रॉब्लम समझते हुए उसी हिसाब से पढ़ते है.

मुझे लगा की 1सत वाला ऑप्शन hi सही है.

कीर्ति:- क्यों?

सुमित:- क्यों की मुझे नहीं लगता की तुम्हे फ्रेंडली तरीके से पढ़ा paaunga...Hum दोनों की बिच दोस्ती नहीं जमेगा.

कीर्ति:- मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है आपकी बातों का मतलब. :हम्म:

सुमित:- वैसे मेरी बात समझने की जरुरत नहीं hai...Jo मई पढ़ाऊंगा बस वही समझो. :डी

कीर्ति:- हाँ वो तो samjhungi...Pehle आप बताइये की हम दोनों में दोस्ती क्यों नहीं हो सकती?

सुमित:- नेचर अलग है madam...Kaha मई बोलता hi रहता हूँ और हर चीज को मजाक में उड़ा देता hu...Aur कहा तुम एकदम सीरियस और ज्यादातर चुप hi रहने वाली.

कीर्ति:- हाँ तो नेचर में डिफरेंस होने से दोस्ती नहीं हो सकती?

सुमित:- हो सकता hai...Lekin ज्यादा देर टिक नहीं sakta...Jald hi तुम मुझसे इर्रिटेट हो jaaogi...Itna पकाता हूँ मई.

वैसे भी मेरा दोस्ती ज्यादातर लोगो से ज्यादा टिकता nahi...Maa, पापा और बेहेन के अलावा कुछ hi दोस्त है जो मुझे झेल पा रहे है.

सुमित ने दांत दिखाते हुए कहा.

सुमित:- वैसे भी लड़कियों से दोस्ती के लिए पूछना भी काफी हिम्मत जुटाना पड़ता है मेरे लिए.

कीर्ति:- जैसे की अभी.

कीर्ति ने हँसते हुए कहा और सुमित ने भी अपना मुंह ऐसा बना लिया जैसे उसका चोरी पकड़ा गया हो.

कीर्ति:- अच्छा मई hi पूछती hun...Kya आप मेरे दोस्त बनेंगे?

सुमित:- सोच lo...Bahut pachtaaogi...Aisa दोस्त नहीं हूँ मई जो तुम्हे कोई फायदा हो सके.

कीर्ति:- दोस्ती भी फायदा और घाटा देख कर करते है?

सुमित:- अच्छा morality...Morality आज कल सिर्फ किताबों में पाया जाता है और मई किताब पढता hi नहीं. :डी

कीर्ति:- तो क्या सोचा आपने?

सुमित:- इतना hi kahunga...Try ात योर ओन रिस्क.

कीर्ति:- मुझे रिस्क पसंद है.

सुमित:- Ok फ्रेंड्स.

इतना कह कर सुमित अपना हाथ आगे बढ़ा देता है और कीर्ति भी हाथ मिलाती है.

सुमित:- अच्छा ये bataao...Life में ऐसा क्या रिस्क लिया है तुमने जो तुम्हे रिस्क पसंद है.

कीर्ति:- पापा से वादा किया hai...Padhungi तो मब्ब्स और वो भी फुल स्कालरशिप mein...Warna कुछ पढूंगी hi nahi...Abb इससे बड़ा रिस्क क्या हो सकता है?

इस बात पर सुमित की भी आँखें हैरानी से फ़ैल गया.

सुमित:- उसमे बड़ी बात क्या है? वादा किया hi जाता है तोड़ने के लिए.

कीर्ति:- लेकिन मेरे लिए nahi...Mai जो सोचती हूँ और कहती हूँ वो करके hi दिखाती हूँ.

सुमित:- ग्रेट डेडिकेशन. :applause::applause:

सुमित बस इतना hi जवाब दे पाया.

कीर्ति:- पापा और माँ को भी अभी बाहर घूमने जाना था क्या?

कीर्ति ने गुस्से में खुद से hi कहा.

सुमित:- क्यों क्या हुआ?

कीर्ति:- मई कोचिंग ज्वाइन करने वाली थी एंट्रेंस के liye...Lekin उनको भी अभी जाना tha...Mujhe भी चलने को कह रहे thhe...Lekin पढाई बिगड़ने की दर से मैंने साफ़ मन कर diya...Ghar में मई अकेली हो जाउंगी ये सोच 1 मंथ के लिए यहाँ ले कर आ गए.

सुमित:- कोई परेशानी है यहाँ?

कीर्ति:- नहीं परेशानी तो nahi...Dost के रूप में रश्मि hai...Aapke माँ और पापा भी बहुत अच्छे hai...Lekin अभी पढ़ने का बहुत मन hai...Yahi 2 साल तो है जो डेटर्मिने करेगा एंट्रेंस एग्जाम कैसे जाएगा?

ये बात सुनते hi सुमित सोचने लगा.

सुमित:- (इन हिज मंद) ये 11तह से hi एंट्रेंस और आगे की पढ़ाई की इतना सोच रही hai...Aur एक मई tha...12th के एग्जाम के बाद भी कोई मतलब नहीं.

सुमित:- मेरे हिसाब से सही डिसिशन है unka...Hamesha घर और जॉब को hi तो देखते hai...Thoda टाइम तो उन्हें भी दो घूमने फिरने ka...Jindagi जीने का.

और टेंशन मत lo...Tumhara पढाई मई भी कोई लोस्स नहीं होगा.

कीर्ति:- कैसे?

सुमित:- बायोलॉजी और केमिस्ट्री मई अपनी तरह hi एक्सपर्ट बना dunga...Knowledge के लिए या फिर एंट्रेंस की पॉइंट ऑफ़ view...Sab कुछ आसानी से समझा दूंगा.

कीर्ति:- और फिजिक्स?

सुमित:- ये मेरे बस की बात nahi...Boring लगने लगा है abb...Physics तुम किसी चस्मा वाले प्रोफेसर से hi पढ़ लेना.

कीर्ति:- चस्मा वाले प्रोफेसर.

इतना कह कर कीर्ति हसने लगती है.

कीर्ति:- लगता है आपको उन् से काफी चिढ़ है.

सुमित:- चिढ़ nahi...Fun के लिए कहता hun...Funny है ना ये चस्मा वाले प्रोफेसर शब्द?

कीर्ति:- हाँ.

सुमित:- अच्छा तो मिस Kirti...Thoda पढाई लिखे हो jaaye...Baatein करते रहेंगे तो आपकी मार्क्स थोड़ा काम आ सकते hai...Aur 1 मार्क्स भी काम आये तो आपकी फुल स्कालरशिप छूट सकती है.

कीर्ति:- हाँ सही कहा aapne...Kaha मई बातों में उलझ गयी.

सुमित:- (इन हिज मंद) इतना पढ़ाकू तो हमारे क्लास के टोपर भी नहीं होते थे. :डोह:

कीर्ति फिर बुक नीलालटी है और.

कीर्ति:- अगर सच कहु तो मुझे ढंग से एक chapter भी नहीं aata...Concepts hi समझ में नहीं aata...Humaare कॉलेज में सिर्फ चस्मा वाले प्रोफेसर है जो पढ़ाते तो है लेकिन समझा नहीं paate...Issi लिए कोचिंग ज्वाइन करना चाहती हूँ.

कीर्ति की बातों में दर और घबराहट साफ़ झलक रहा था.

सुमित:- पहले बुक बंद करो.

हैरानी से कीर्ति बुक बंद कर देती है.

कीर्ति:- लेकिन क्यों?

सुमित:- आँखें बंद करो.

हैरानी के साथ कीर्ति सुमित की बात मान लेती है.

सुमित:- एक लम्बी सांस लो और उसी तरह से हवा फेंको.

कीर्ति वैसा hi करती है.

सुमित:- करते रहो जब तक रिलैक्स फील नहीं हो जाता.

कुछ देर बाद जब कीर्ति आँखें खोलती है.

सुमित:- आज कल के स्टूडेंट्स का यही प्रॉब्लम hai...Jarurat से ज्यादा प्रेशर लेते hai...Padhai में भी कांसेप्ट काम रट्टा ज्यादा मारते hai...Aur मार्क्स ज्यादा आया तो और मोटीवेट होते है रट्टा मारने के लिए और मार्क्स काम तो डिप्रेशन.

और एजुकेशन सिस्टम भी ऐसा है जिसमे नॉलेज काम मेमोरी ज्यादा चेक करते है.

कीर्ति इस बार कुछ नहीं बोली.

सुमित:- खैर chhodo...Mai कुछ भी बोले जा रहा hun...Abb आते है पढाई पर.

स्टार्ट करते है बायोलॉजी se...Biology के बारे में आज के लिए इतना hi.

बायोलॉजी इस थे साइंस ऑफ़ exception...And मोस्ट ऑफ़ थे एंट्रेंस क़ुएस्तिओन्स अरे अबाउट एक्सेप्शन.

इतना कह कर सुमित उठ जाता है वह से.

कीर्ति:- और आगे?

सुमित:- आज के लिए इतना hi काफी है. :डी

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा.

कीर्ति:- बस इतना hi.

सुमित:- इतना hi काफी hai...Aur इससे ज्यादा कुछ मत पढ़ो आज के liye...Bahut बदलाव पाओगी खुद में?

कीर्ति:- ना पढ़ने से कैसा बदलाव? उल्टा मई पीछे रह जाउंगी?

अब्ब कीर्ति को गुस्सा आ रहा tha...Ye भी ख्याल आ रहा था की सुमित को कुछ आता nahi...Bas टाइम पास कर रहा है.

सुमित:- इतने दिन से तो पढ़ hi रही हो न? कितना आगे पहुंची हो?

कीर्ति कोई जवाब नहीं दे पायी.

सुमित:- पढ़ना जरुरी hai...Usse भी जरुरी है कैसे पढ़ना hai...Mai तो यही सुग्गेस्ट करूँगा की स्टडी स्मार्ट राथेर थान स्टुडियंग मोरे.

कीर्ति अभी भी चुप थी.

सुमित:- बस मेरा एक बात maano...Aaj कुछ भी मत padho...Itna hi सोचो की पढ़ाई के साथ कैसे स्ट्रेस मैनेज कर sakogi...Bas आज बिना कोई पढाई बिना किसी फ्यूचर का सोच आज के दिन एन्जॉय karo...Dekhna कल से hi बदलाव महसूस करोगी.

इतना कह कर सुमित वह से जाने laga...Apna मोबाइल चेक किया तो देखा श्रुति का मैसेज tha...Apne मन में उसने कहा.

सुमित:- मिशन श्रुति स्टार्टेड.

दूसरी तरफ Kirti...Wo सुमित को जाते हुए देख रही thi...Dimaag में भी सुमित की hi बातें घूम रही thi...Naa जाने 1 hi घंटा की मुलाक़ात ने कितना कुछ बदल दिया था.
 
सॉरी friends...Aaj भी अपडेट पोस्ट नहीं कर paaya...Kal कोशिश karunga...Sirf koshish...Sure नहीं hun...Likhne का हालत और मन दोनों नहीं hai...Ek तो कोरोना वायरस ने दिमाग ख़राब कर रखा hai...Upar से एग्जाम का टेंशन...3 हफ्ते बाद एग्जाम है...2 साल का कंटेंट और थोड़ा भी इधर उधर हुआ तो 1 साल loss...Re एग्जाम भी नहीं hai...Waise तो एग्जाम के पोस्टपोन होने के चान्सेस बहुत ज्यादा है (99%)...लेकिन एकदम से सूरे हो भी नहीं सकता और पोस्टपोन हो भी गया तो इस टाइम का फायदा उठा सकता हूँ.

कुछ यही वजह hai...Sabse ज्यादा तो Corona...Mujhe तो ज्यादा दर नहीं hai...Safety प्रसौतिओं फॉलो कर रहा hun...Lekin आस पास के हालत और वायरस का इतना तेजी से फैलना देख बुरा लग रहा है.

कल कोशिश karunga...Aur haan...Be सेफ एंड फॉलो आल थे सेफ्टी प्रीकॉशन्स. :प्रे:
 
अपडेट 25

नेक्स्ट डे

कीर्ति टेबल के एक तरफ पढ़ रही थी और सुमित दूसरी तरफ अपना मोबाइल में बिजी tha...Chatting में.

कीर्ति कभी अपने पढ़ाई की तरफ ध्यान देती तो कभी ना चाहते हुए भी सुमित की taraf...Ek दो बार बुलाना भी चाहा लेकिन फिर खुद hi रुक गयी.

जब बर्दास्त के बाहर हुआ तब.

कीर्ति:- आपका पढ़ाने का तरीका भी अलग है? दूसरा कोई साथ बैठ कर पढ़ाता है और aap...Aap कुछ बताने के बाद अपने में hi लगे हुए है.

सुमित:- एक छोटा बच्चा का hi एक्साम्प्ले ले lo...Jab वो छोटा होता है तब hi उसकी माँ उससे अपने हाथो से खिलाती hai...Fir बाद में उससे खुद hi सीखना पड़ता hai...Khud से तरय कर के.

ठीक ऐसे hi...Mere ख्याल से तुम इतनी भी छोटी नहीं हो की तुम्हे दूसरे पर hi देपेंद रहना padega...Agar कुछ सीखना चाहती हो कुछ पढ़ना चाहती हो तो खुद hi म्हणत करना पड़ेगा.

कीर्ति:- मतलब आप माँ वाला केयर कर रहे है.

सुमित:- Nahi...Tumhe लायक बना रहा hun...Agar तुम्हे कुछ करना है तो खुद से hi करना होगा वर्ण कोई भी टीचर, कॉलेज या इंस्टीटूशन तुम्हे एंट्रेंस में स्कालरशिप नहीं दिलवा सकता जब तक तुम खुद hi म्हणत नहीं करोगी.

कीर्ति:- तो फिर आपका या फिर किसी टीचर का क्या काम?

सुमित:- तुम्हारे म्हणत को एक दिशा (डायरेक्शन) dena...Facilitate karna...Thoda कांसेप्ट या फिर ओवरव्यू dena...Lekin म्हणत तुम्हे hi करना पड़ेगा.

थोड़ा कांसेप्ट दे चूका हूँ उस टॉपिक par...Mehnat की बारी tumhari...Aur जब पूरा पढ़ लेने के बाद उसी हिसाब से एंट्रेंस के लिए टिप्स दूंगा.

कीर्ति:- ये भी सही है.

इतना कह कर कीर्ति फिर से पढाई में लग जाती है और सुमित चैटिंग में.

दोनों में कुछ बात होता सुमित के पापा वह पहुँच जाते है.

स. डैड:- ये काम अच्छे से करना!!! इसके अलावा तुझसे और कोई उम्मीद है भी नहीं.

सुमित जवाब में सिर्फ मुस्कुराता है.

कीर्ति:- नहीं Uncle...Bahut अच्छे से पढ़ा रहे hai...Kaafi इंटेलीजेंट है ये.

सुमित की तरफ देख मुस्कुराती हुई बोली कीर्ति.

स. डैड:- मुझे यकीं तो नहीं हो रहा hai...Fir भी अगर तुम कहती हो तो मान लेता हूँ.

सुमित की तरफ घूरते हुए वो बोले तो सुमित इस बार अपना हंसी रोक नहीं पाया.

सुमित:- लीजिये एक और gawah...Abb बताइये आप कब मानेंगे मेरा इंटिलेगेन्स को?

सुमित की पापा कुछ नहीं बोलते.

सुमित:- 49 गवाह तो हो चूका hai...Jald हाफ सेंचुरी पूरा हो जाएगा.

स. डैड:- अच्छे से padhana...Mai एक पार्टी से हो कर आता हूँ.

इतना कह कर सुमित के पापा चले गए.

सुमित पापा को तब तक देखता रहा जब तक वो मैं गेट से बाहर नहीं निकल gaya...Saath hi उसका मुस्कान बढ़ते हुए हंसी का तोप लेने लगा.

कीर्ति:- आप हंस क्यों रहे है?

सुमित:- फ्यूचर का सोच कर?

कीर्ति:- कैसा फ्यूचर?

कन्फूसिओं में कीर्ति ने पूछा.

सुमित:- पापा का फ्यूचर...4 घंटे के बाद का.

अब्ब कीर्ति और भी ज्यादा कंफ्यूज हो गयी.

सुमित:- 4 घंटे के बाद पापा का गुस्सा अभी से देख रहा हु और वही सोच कर हंसी आ रहा है.

कीर्ति:- ऐसा क्या होने वाला है?

सुमित:- क्रिकेट मैच कह्लैने जा रहा हूँ और कल एग्जाम hai...Papa को जब पता चलेगा यो उनका गुस्सा देखने लायक होगा और उसी गुस्सा का सोच हंस रहा हूँ.

अब्ब कीर्ति को सुमित की बात समझ में आया लेकिन एक बात अभी भी उसके समझ के बाहर था.

कीर्ति:- आप खेलने जा रहे है एग्जाम के बावजूद लेकिन बाकी के dost...Kya उनका एग्जाम नहीं है?

सुमित:- है और वो नहीं aayenge...Bahut डरपोक है.

गल्ली के बच्चों के साथ है आज का मैच.

कीर्ति:- बच्चोने के साथ?

सुमित:- हाँ वही फ़ालतू बैठे रहते है मेरी tarah...Aur वैसे भी जब मई बात पकड़ता हूँ तो क्या बच्चे, क्या जवान और क्या buddhe...Sabhi को धोता हूँ बिना भेदभाव के.

कीर्ति कुछ बोलने hi वाली थी की.

सुमित:- अब्ब तुम ऍबे पढ़ाई में ध्यान दो.

फिर कीर्ति पढ़ने लगती है और सुमित चतरिंग में लग जाता है.

कीर्ति आज पढ़ नहीं पा रही thi...Sumit को सामने देख हजार तरह की सवाल उसके दिमाग में आ रहा tha...Bahut अजीब सा लग रहा था उससे सुमित का करैक्टर.

कीर्ति:- वैसे आप बहुत इंटेलीजेंट hai...Concepts बहुत अच्छा है और आज तक पहले की तरह याद है.

सुमित सिर्फ कीर्ति को देखता है कुछ बोलता नहीं.

कीर्ति:- एक सवाल है?

सुमित:- Pucho...Sawaal का जवाब देने hi तो बैठा हूँ.

कीर्ति:- आपने मब्ब्स क्यों तरय नहीं किया? इतना टैलेंटेड है aap...Thoda तरय करते तो हो जाता आपका भी.

सुमित इस सवाल पर मुस्कुराता है.

सुमित:- कोई ख़ास लगाव नहीं था मब्ब्स में.

कीर्ति:- तो फिर बी फार्मेसी?

सुमित:- एक गलती को दूसरे गलती से सुधारा तो नहीं जा सकता है ना?

कीर्ति:- क्या मतलब? मई कुछ समझी नहीं.

सुमित:- एक बहुत बड़ा गलती हो गया था 11 में बायोलॉजी सेलेक्ट कर ke...Aur हमेशा से मई स्ट्रैट फॉरवर्ड रहा हूँ तो सोचा अब्ब बायोलॉजी के फील्ड में hi आगे बढ़ना है.

अब्ब इस गलती को सुधारने के लिए बायोलॉजी को छोड़ कोई दूसरा सब्जेक्ट सेलेक्ट करने की दूसरा गलती करना नहीं चाहता था.

अब्ब ऑप्शन था तो बायोलॉजी फील्ड के कुछ गिने चुने स्कोपस.

मुझे अपना नींद बहुत प्यारा है इस लिए मब्ब्स को साइड कर diya...Kaun सुबह जल्दी उठ कर और देर रात तक पढ़ कर मेडिकल की तयारी करेगा?

और कुछ ऐसे दोस्त थे हो बोलते थे की मेडिकल में नहीं हुआ तो फॉरेस्ट्री या फिर एग्रीकल्चर padhenge...Tabhi से ये दो स्कोप भी साइड कर दिया.

और रहा Pharmacy..Wahi कर रहा hun...Agar इससे भी बोर हुआ तो ये भी छोड़ दूंगा.

सुमित का जवाब सुन कीर्ति का दिमाग hi चक्र gaya...Bilkul इल्लॉजिकल जवाब लगा उससे ये.

सुमित:- (लाफिंग) स्ट्रैट फॉरवर्ड और ूनप्रेडिक्टेबले hun...Aur तुम्हारे समझ से baahar...Issi लिए मेरे बारे में छोड़ पढाई में ध्यान लगाओ.

इतना कह कर सुमित फिर मोबाइल में लग गया.

कीर्ति:- लेकिन...

कीर्ति इससे आगे कुछ कहती उससे पहले hi.

सुमित:- एंट्रेंस में इस टाइप का क्वेश्चन आएगा.

व्हिच बैक्टीरिया लक्स सेल वाल?

ना की सुमित के कितने दांत है, आँख है, नाक है? पेअर पर चलता है या फिर हाथ पर? बाल इंसान जैसा है या फिर छिड़ियों की घोसला जैसा?

इसी लिए मेरे बारे में छोड़ किताब पढ़ो.

सुमित की इस बात पर कीर्ति को बहुत हंसी आता hai...Hasne के बाद.

सुमित:- अच्छा अब्ब पढ़ो.

सुमित ने भी हँसते हुए kaha...Aur मोबाइल में देखने लगा.

मोबाइल में आया हुआ मैसेज देख उसके होंठ मुस्कान से फ़ैल गए.

श्रुति:- ी लव यू.

सुमित ने जवाब टाइप किया.

सुमित:- ी लिखे you...I लिखे यू ा lot...Can वे बे फ्रेंड विथ बेनिफिट?

ये मैसेज टाइप कर सुमित रिप्लाई का वेट करने laga...Mission श्रुति का फर्स्ट स्टेप जो था सुमित का.

दूसरी तरफ Kirti...Abb वो पढ़ाई के साथ साथ चोरी से सुमित को एक नजर जरूर देख leti...Sumit का करैक्टर अब्ब उससे इंटरेस्टिंग लगने लगा.
 
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