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- Dec 5, 2013
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बहुत सही जा रहे ho...Jald hi कीर्ति इम्प्रेस हो जायेगी.
मेघा की इस आवाज में हंसी काम मजाक उड़ाना ज्यादा था.
सुमित जो अभी रात में छत के एक कोने में ऊपर आसमान में देख रहा था वो आवाज सुन उसका ध्यान मेघा की तरफ गया.
एक नजर मेघा को देख वापस सुमित ने अपना नजर हटा लिया.
मेघा:- ऐसा hi लग रहा होगा ना की तुम बहुत सही जा रहे ho...Aur जल्द hi कीर्ति इम्प्रेस हो जायेगी?
सुमित ने कुछ जवाब नहीं दिया.
मेघा:- अपने सपनो की दुनिया से बहार निकलो.
सुमित ने फिर कोई जवाब नहीं दिया.
मेघा:- बहुत बड़ा प्लेबॉय कहते थे ना तुम खुद ko...Aur इतनी जल्दी हार भी मान लिया.
मेघा सुमित को देख हंसती है और फिर अपनी दबी हुई गुस्सा और निकलने लगती है.
मेघा:- तुम्हे देख यही याद आता hai...Garajne वाले बादल बरसते नहीं और भौंकने वाले कुत्ते काटते नहीं.
क्या कह रहे थे तुम? एक बार कीर्ति के करीब जाने का मौका मिल जाए? फिर तुम कीर्ति को मना लोगे और कीर्ति तुम्हारी हो जायेगी.
मौका मिल गया ना? क्या उखाड़ लिया तुमने अपने बेइज्जती के alawa...Abb तो अपना औकात पता चल गया होगा ना.
मेघा की ये बात सुमित के दिल पर जा laga...Ek बार फिर एहसास हुआ उससे इस हार kaa...Jaha से जीत की अब्ब कोई किरण तक दिखाई नहीं दे रहा था.
सुमित:- रात के 10 बज रहे hai...Kal तुम सब को निकलना hai...Jaake पैकिंग करो.
बेरुखी आवाज में सुमित ने जवाब दिया.
मेघा:- वास्ते फेलो.
गुस्से से मेघा ने सुमित को देखा और वह से जाने लगी.
अब्ब सुमित से और रहा नहीं gaya...Aankhein एकदम से भर aaya...Kaanpte हाथों के साथ उसने अपने पॉकेट से मोबाइल निकाला.
मेघा छत के गेट पर पहुंची hi थी की ना जाने क्या hua...Achanak से वो सुमित की तरफ मुद गयी.
सुमित:- Hello.
कांपते आवाज के साथ सुमित ने कहा.
हाँ सुमित बोल.
दूसरी तरफ से आशीष की आवाज आया.
सुमित:- यार आज तेरा जरुरत महसूस कर रहा हूँ.
इतना कहते hi सुमित रू पड़ा.
ये आवाज सुन मेघा भी हैरान रह गयी.
सुमित भी ऐसे hi मुदा hi था की वो भी मेघा की देख हैरान रह गया.
आशीष:- क्या हुआ सुमित? ठीक तो है ना तू?
दूसरी तरफ से आशीष डरते हुए बोलै.
लेकिन सुमित हैरानी से अभी भी मेघा को hi देखे जा रहा tha...Megha के सामने वो खुद को कमजोर दिखाना नहीं चाहता tha...Aur एक दर भी था जो गलत इमेज उसने खुद मेघा के मन में बनाया था कही वो झूठ कही मेघा के सामने खुल न जाए.
आशीष:- Hello...Hello...Sumit तू सुन तो रहा है?
सुमित को रिप्लाई ना करता देख आशीष का दर बढ़ता hi जा रहा था.
सुमित को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Wo अब्ब छत से निकल कर निचे चला gaya...Megha का और सामना करने की हिम्मत नहीं था अभी उस में.
मेघा वही हैरानी में कड़ी रह gayi...Sumit की वो बात और वो aawaj...Abhi भी उससे विश्वाश नहीं हो रहा था.
मेघा:- धोखेबाज़ है ye...Jarur किसी और लड़की को फ़साने की कोशिश में hoga...Emotional बनने की नाटक कर के.
लेकिन दूसरी तरफ से आशीष की वो आवाज आते hi ये शक भी ख़त्म हो गया.
Sumit...Aur emotional...Ye मेघा चाह कर भी नहीं मान पा रही थी.
लेकिन कही न कही उस आवाज में एक दर्द महसूस किया था usne...Dil और दिमाग की जुंग में बुरी तरह फंस चुकी थी Megha...Dil सुमित को गलत इंसान hi मानना चाह रहा tha...Aur Dimaag...Iss बात को झुठला रहा था.
तभी होटल से बाहर निकलते सुमित पर उसकी नजर pada...Ek पल के लिए मेघा को ख्याल आया की...
मेघा:- (इन हेर मंद) पीछा करके देखती हूँ.
लेकिन अगले hi पल.
मेघा:- मुझे क्या मतलब इस धोखेबाज़ से?
कुछ इन्ही सोच में गुम्म मेघा निचे अपनी रूम में चली गयी.
सुमित:- हार गया हूँ mai...Buri तरह हार गया hun...Mere लिए कुछ पल का वक्त तो है न तेरे पास?
सुमित की आवाज में भी उसकी हार साफ़ झलक रहा था.
सुमित की आवाज सुन आशीष ने पहले छैन की सांस लिया और फिर सुमित की इस हाल को देख और भी दर गया.
आशीष:- क्या हुआ?
सुमित:- Kirti...Wo जा रही hai...Mujhse dur...Hamesha हमेशा के लिए.
आशीष:- हुआ क्या है? साफ़ साफ़ बोल.
सुमित फिर आशीष को साड़ी बात बता देता है.
आशीष:- टूर के एक hi दिन में वो वापस जाना चाहती hai...Abhi भी बहुत नाराज है वो तुझसे.
सुमित:- हाँ yaar...Kuch समझ में नहीं आ रहा है कैसे उसकी नाराजगी दूर karu...Uski ये नाराजगी मुझे अंदर hi अंदर खाये जा रही है.
आशीष:- (सलौली तो हिमसेल्फ) पहले hi शक था इस टूर mein...Wo नहीं maanegi...Lekin तुझे कैसे समझाऊ?
सुमित:- मुझे भी पता tha...Ye काम नहीं करने वाला hai...Lekin दिल में कही ना कही एक उम्मीद tha...Bas इसी उम्मीद के सहारा चल पड़ा इस राश्ते par...Suna था डूबता को तिनके का सहारा hi काफी होता है.
वैसे भी प्यार के लिए एक पल hi काफी होता hai...Dukh इस बात का है की वो पल आने से पहले hi कीर्ति जा रही hai...Aur मई बस देख hi सकता हूँ.
इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Ek बार फिर आँखों से आंसू बहने लगे.
आशीष:- Bhai...Tu इतना प्यार करता है कीर्ति se...Lekin उससे dekh...Koi परवाह hi नहीं है tera...Kya भूक नहीं सकता तू उससे? और कितना बर्बाद करेगा खुद को?
आशीष को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कैसे वो सुमित का मदद kare...Bas एक ख्याल hi आया की समस्या को जड़ से उखाड़ फेने की.
सुमित:- वजह भी तो मई hi hun...Ek गलती को सुधारने के लिए दूसरा गलती कर बैठा.
कीर्ति को पाने की चक्कर में मेघा के साथ गलत kiya...Usse कीर्ति को यकीं हो गया की अब्ब में मेघा के पीछे भी लगा hun...Shak और भी बढ़ गया की मई प्लेबॉय hi हूँ.
नाराजगी तो जायज hi है ना? हर बार गलत मई hi hun...Jise ठीक करने की चक्कर में और भी गलत बनता जा रहा हूँ.
अभी भी भरोषा है yaar...Manaa लूंगा कीर्ति ko...Hai खुद के प्यार में इतना vishwash...Lekin मौका मिले तब ना? क्या मेरा गुनाह इतना बड़ा है की उसको कोई मौका hi नहीं?
आशीष कुछ बोल नहीं paaya...Usse भी कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Bas दर था सुमित की हालत देख कर.
कुछ देर की खामोशी को सुमित ने hi तोडा.
सुमित:- प्लेबॉय.
जब प्लेबॉय बनना चाहता था तब आशिक़ बन baitha...Aur जब आशिक़ बनना चाहता हूँ तो उसकी नजर में मेरा इमेज आज प्लेबॉय का है.
गजब किस्मत है यार.
दर्द में भी मुस्कुरा कर कहा सुमित ने.
सुमित:- Ashish...Sun रहा है ना तू?
आशीष:- हाँ सुन रहा हूँ.
सुमित:- याद है तुझे वो din...Jab तू मुझे प्यार के बारे में समझा रहा tha...Tab मैंने कहा था "सच में तुझे ऐसा लगता है की मुझे तेरा जरुरत padega."..Wo मजाक था यार.
लेकिन आज सच में तेरा जरुरत hai...Kuch टिप्स दे yaar...Kya करू? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
कुछ देर सोचने के बाद.
आशीष:- Vakt...Thoda वक्त दे यार खुद ko...Sab ठीक हो जाएगा.
सुमित:- वो hi तो नहीं है मेरे paas...Aur वैसे भी पिछले 3 साल से इंतजार hi तो कर रहा था एक मौका ka...Abb और इंतजार नहीं होता.
आशीष:- कुछ जख्म होते है जिससे वक्त hi भरता है.
सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.
आशीष:- कल कीर्ति को रोकने की कोई कोशिश मत करना?
सुमित:- क्या? क्या कह रहा है तू?
गुस्से में सुमित ने पूछा.
आशीष:- कीर्ति वैसे भी तुझसे छिड़ रही है abhi...Kal रोकने की कोशिश करेगा तो और छिड़ कर चली जायेगी.
वैसे कुछ चांस है उसके ना जाने kaa...Tour में आयी hai...Kuch चान्सेस है उसका रुकने ka...Agar उसका गुस्सा ख़त्म हो गया to...Bas उससे रोकने की ख्वाहिश कर के और मर छिड़ा देना.
सुमित को भी आशीष की ये बात सही laga...Wo भी बस यही दुआ करने लगा की काश आशीष की बात सही हो.
मेघा अपने रूम में पहुँचने से पहले hi सोच लेती है की आगे उससे क्या करना है.
कीर्ति:- सामान पैक करना नहीं है क्या तुझे? कल सुबह hi निकलना है.
मेघा:- मुझे कही नहीं जाना.
ये सुनते hi कीर्ति गुस्से से और हैरानी से मेघा को देखती है.
कीर्ति:- कही उससे प्यार तो नहीं करने लग गयी?
मेघा:- तेरी तरह नहीं hun...Jo 2 हफ्ते में hi किसी की बिना जाने पहचाने प्यार करने लग जाओ.
ये सुन कीर्ति गुस्सा के साथ हैरान भी होती है की अचानक मेघा को क्या हो गया?
कीर्ति:- गुस्सा है मुझसे?
मेघा:- तू hi बता क्या होना चाहिए तेरी इस बेवकूफी पर?
कीर्ति:- अब्ब मैंने क्या कर दिया?
मेघा:- Sumit...Subah जो कह रहा tha...Uss पर तेरा रिएक्शन बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा.
इंसान गलत hai...Lekin बात सही hai...Aur किसी की नफरत में इतना भी अंधी मत बन की तुझे सच्चाई और अच्छाई भी ना दिखे.
कीर्ति:- क्या तू भी उसकी बात पर इतना सीरियस हो रही hai...Wo और उसकी मूर्खों वाली बात.
मेघा:- मुर्ख नहीं है वो.
कीर्ति एक नजर मेघा को देखती है लेकिन कुछ नहीं बोल पाती.
मेघा:- मुझसे बेहतर तू hi जानती होगी जब 2 साल आगे बी. फार्मेसी में बढ़ जाने के बाद भी तुझे 1 मंथ में बायोलॉजी और केमिस्ट्री कम्पलीट करा दिया.
और मेडिकल में आने के बाद bhi...1st ईयर के स्टार्टिंग में hi 2ंद ईयर का भी बहुत अच्छा नॉलेज है.
इंसान गलत है wo...Dhokhebaaz hai...Dil से बहुत गलत इंसान है जो किसी दूसरे की दिल की क़द्र नहीं karta...Lekin दिमाग se...Dimaag से उतना hi तेज hai...Kab क्या सोचता है किसी को अंदाजा भी नहीं होता है.
कीर्ति:- कहना क्या चाहती है तू?
मेघा:- उसको इग्नोर करने के चक्कर में टूर को भी इग्नोर मत kar...Uska कांसेप्ट अच्छा tha...Agar तुझे भी ऐसा लगता है तो रुक जा.
कीर्ति:- लेकिन...
मेघा:- रुकेगी तब मौका भी है उससे सबक सिखाने ka...Tu hi कहती थी ना तू ऐसा सबक सिखाएगी की वो हमेशा याद रखेगा.
कीर्ति सिर्फ सोचती rahi...Koi जवाब नहीं दिया उसने.
मेघा भी अब्ब कुछ नहीं bolti...Usse उम्मीद था की कीर्ति जरूर रुकेगी.
और wo...Wo अब्ब जरूर पता लगा कर रहेगी सुमित की asliyat...Bas इसी वजह से वो इस टूर को कंटिन्यू रखना चाहती थी.
कुछ इसी सोच के साथ मेघा सोने की कोशिश करते हुए कल का इंतजार करने लगी.
बहुत सही जा रहे ho...Jald hi कीर्ति इम्प्रेस हो जायेगी.
मेघा की इस आवाज में हंसी काम मजाक उड़ाना ज्यादा था.
सुमित जो अभी रात में छत के एक कोने में ऊपर आसमान में देख रहा था वो आवाज सुन उसका ध्यान मेघा की तरफ गया.
एक नजर मेघा को देख वापस सुमित ने अपना नजर हटा लिया.
मेघा:- ऐसा hi लग रहा होगा ना की तुम बहुत सही जा रहे ho...Aur जल्द hi कीर्ति इम्प्रेस हो जायेगी?
सुमित ने कुछ जवाब नहीं दिया.
मेघा:- अपने सपनो की दुनिया से बहार निकलो.
सुमित ने फिर कोई जवाब नहीं दिया.
मेघा:- बहुत बड़ा प्लेबॉय कहते थे ना तुम खुद ko...Aur इतनी जल्दी हार भी मान लिया.
मेघा सुमित को देख हंसती है और फिर अपनी दबी हुई गुस्सा और निकलने लगती है.
मेघा:- तुम्हे देख यही याद आता hai...Garajne वाले बादल बरसते नहीं और भौंकने वाले कुत्ते काटते नहीं.
क्या कह रहे थे तुम? एक बार कीर्ति के करीब जाने का मौका मिल जाए? फिर तुम कीर्ति को मना लोगे और कीर्ति तुम्हारी हो जायेगी.
मौका मिल गया ना? क्या उखाड़ लिया तुमने अपने बेइज्जती के alawa...Abb तो अपना औकात पता चल गया होगा ना.
मेघा की ये बात सुमित के दिल पर जा laga...Ek बार फिर एहसास हुआ उससे इस हार kaa...Jaha से जीत की अब्ब कोई किरण तक दिखाई नहीं दे रहा था.
सुमित:- रात के 10 बज रहे hai...Kal तुम सब को निकलना hai...Jaake पैकिंग करो.
बेरुखी आवाज में सुमित ने जवाब दिया.
मेघा:- वास्ते फेलो.
गुस्से से मेघा ने सुमित को देखा और वह से जाने लगी.
अब्ब सुमित से और रहा नहीं gaya...Aankhein एकदम से भर aaya...Kaanpte हाथों के साथ उसने अपने पॉकेट से मोबाइल निकाला.
मेघा छत के गेट पर पहुंची hi थी की ना जाने क्या hua...Achanak से वो सुमित की तरफ मुद गयी.
सुमित:- Hello.
कांपते आवाज के साथ सुमित ने कहा.
हाँ सुमित बोल.
दूसरी तरफ से आशीष की आवाज आया.
सुमित:- यार आज तेरा जरुरत महसूस कर रहा हूँ.
इतना कहते hi सुमित रू पड़ा.
ये आवाज सुन मेघा भी हैरान रह गयी.
सुमित भी ऐसे hi मुदा hi था की वो भी मेघा की देख हैरान रह गया.
आशीष:- क्या हुआ सुमित? ठीक तो है ना तू?
दूसरी तरफ से आशीष डरते हुए बोलै.
लेकिन सुमित हैरानी से अभी भी मेघा को hi देखे जा रहा tha...Megha के सामने वो खुद को कमजोर दिखाना नहीं चाहता tha...Aur एक दर भी था जो गलत इमेज उसने खुद मेघा के मन में बनाया था कही वो झूठ कही मेघा के सामने खुल न जाए.
आशीष:- Hello...Hello...Sumit तू सुन तो रहा है?
सुमित को रिप्लाई ना करता देख आशीष का दर बढ़ता hi जा रहा था.
सुमित को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Wo अब्ब छत से निकल कर निचे चला gaya...Megha का और सामना करने की हिम्मत नहीं था अभी उस में.
मेघा वही हैरानी में कड़ी रह gayi...Sumit की वो बात और वो aawaj...Abhi भी उससे विश्वाश नहीं हो रहा था.
मेघा:- धोखेबाज़ है ye...Jarur किसी और लड़की को फ़साने की कोशिश में hoga...Emotional बनने की नाटक कर के.
लेकिन दूसरी तरफ से आशीष की वो आवाज आते hi ये शक भी ख़त्म हो गया.
Sumit...Aur emotional...Ye मेघा चाह कर भी नहीं मान पा रही थी.
लेकिन कही न कही उस आवाज में एक दर्द महसूस किया था usne...Dil और दिमाग की जुंग में बुरी तरह फंस चुकी थी Megha...Dil सुमित को गलत इंसान hi मानना चाह रहा tha...Aur Dimaag...Iss बात को झुठला रहा था.
तभी होटल से बाहर निकलते सुमित पर उसकी नजर pada...Ek पल के लिए मेघा को ख्याल आया की...
मेघा:- (इन हेर मंद) पीछा करके देखती हूँ.
लेकिन अगले hi पल.
मेघा:- मुझे क्या मतलब इस धोखेबाज़ से?
कुछ इन्ही सोच में गुम्म मेघा निचे अपनी रूम में चली गयी.
सुमित:- हार गया हूँ mai...Buri तरह हार गया hun...Mere लिए कुछ पल का वक्त तो है न तेरे पास?
सुमित की आवाज में भी उसकी हार साफ़ झलक रहा था.
सुमित की आवाज सुन आशीष ने पहले छैन की सांस लिया और फिर सुमित की इस हाल को देख और भी दर गया.
आशीष:- क्या हुआ?
सुमित:- Kirti...Wo जा रही hai...Mujhse dur...Hamesha हमेशा के लिए.
आशीष:- हुआ क्या है? साफ़ साफ़ बोल.
सुमित फिर आशीष को साड़ी बात बता देता है.
आशीष:- टूर के एक hi दिन में वो वापस जाना चाहती hai...Abhi भी बहुत नाराज है वो तुझसे.
सुमित:- हाँ yaar...Kuch समझ में नहीं आ रहा है कैसे उसकी नाराजगी दूर karu...Uski ये नाराजगी मुझे अंदर hi अंदर खाये जा रही है.
आशीष:- (सलौली तो हिमसेल्फ) पहले hi शक था इस टूर mein...Wo नहीं maanegi...Lekin तुझे कैसे समझाऊ?
सुमित:- मुझे भी पता tha...Ye काम नहीं करने वाला hai...Lekin दिल में कही ना कही एक उम्मीद tha...Bas इसी उम्मीद के सहारा चल पड़ा इस राश्ते par...Suna था डूबता को तिनके का सहारा hi काफी होता है.
वैसे भी प्यार के लिए एक पल hi काफी होता hai...Dukh इस बात का है की वो पल आने से पहले hi कीर्ति जा रही hai...Aur मई बस देख hi सकता हूँ.
इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Ek बार फिर आँखों से आंसू बहने लगे.
आशीष:- Bhai...Tu इतना प्यार करता है कीर्ति se...Lekin उससे dekh...Koi परवाह hi नहीं है tera...Kya भूक नहीं सकता तू उससे? और कितना बर्बाद करेगा खुद को?
आशीष को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कैसे वो सुमित का मदद kare...Bas एक ख्याल hi आया की समस्या को जड़ से उखाड़ फेने की.
सुमित:- वजह भी तो मई hi hun...Ek गलती को सुधारने के लिए दूसरा गलती कर बैठा.
कीर्ति को पाने की चक्कर में मेघा के साथ गलत kiya...Usse कीर्ति को यकीं हो गया की अब्ब में मेघा के पीछे भी लगा hun...Shak और भी बढ़ गया की मई प्लेबॉय hi हूँ.
नाराजगी तो जायज hi है ना? हर बार गलत मई hi hun...Jise ठीक करने की चक्कर में और भी गलत बनता जा रहा हूँ.
अभी भी भरोषा है yaar...Manaa लूंगा कीर्ति ko...Hai खुद के प्यार में इतना vishwash...Lekin मौका मिले तब ना? क्या मेरा गुनाह इतना बड़ा है की उसको कोई मौका hi नहीं?
आशीष कुछ बोल नहीं paaya...Usse भी कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Bas दर था सुमित की हालत देख कर.
कुछ देर की खामोशी को सुमित ने hi तोडा.
सुमित:- प्लेबॉय.
जब प्लेबॉय बनना चाहता था तब आशिक़ बन baitha...Aur जब आशिक़ बनना चाहता हूँ तो उसकी नजर में मेरा इमेज आज प्लेबॉय का है.
गजब किस्मत है यार.
दर्द में भी मुस्कुरा कर कहा सुमित ने.
सुमित:- Ashish...Sun रहा है ना तू?
आशीष:- हाँ सुन रहा हूँ.
सुमित:- याद है तुझे वो din...Jab तू मुझे प्यार के बारे में समझा रहा tha...Tab मैंने कहा था "सच में तुझे ऐसा लगता है की मुझे तेरा जरुरत padega."..Wo मजाक था यार.
लेकिन आज सच में तेरा जरुरत hai...Kuch टिप्स दे yaar...Kya करू? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है.
कुछ देर सोचने के बाद.
आशीष:- Vakt...Thoda वक्त दे यार खुद ko...Sab ठीक हो जाएगा.
सुमित:- वो hi तो नहीं है मेरे paas...Aur वैसे भी पिछले 3 साल से इंतजार hi तो कर रहा था एक मौका ka...Abb और इंतजार नहीं होता.
आशीष:- कुछ जख्म होते है जिससे वक्त hi भरता है.
सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.
आशीष:- कल कीर्ति को रोकने की कोई कोशिश मत करना?
सुमित:- क्या? क्या कह रहा है तू?
गुस्से में सुमित ने पूछा.
आशीष:- कीर्ति वैसे भी तुझसे छिड़ रही है abhi...Kal रोकने की कोशिश करेगा तो और छिड़ कर चली जायेगी.
वैसे कुछ चांस है उसके ना जाने kaa...Tour में आयी hai...Kuch चान्सेस है उसका रुकने ka...Agar उसका गुस्सा ख़त्म हो गया to...Bas उससे रोकने की ख्वाहिश कर के और मर छिड़ा देना.
सुमित को भी आशीष की ये बात सही laga...Wo भी बस यही दुआ करने लगा की काश आशीष की बात सही हो.
मेघा अपने रूम में पहुँचने से पहले hi सोच लेती है की आगे उससे क्या करना है.
कीर्ति:- सामान पैक करना नहीं है क्या तुझे? कल सुबह hi निकलना है.
मेघा:- मुझे कही नहीं जाना.
ये सुनते hi कीर्ति गुस्से से और हैरानी से मेघा को देखती है.
कीर्ति:- कही उससे प्यार तो नहीं करने लग गयी?
मेघा:- तेरी तरह नहीं hun...Jo 2 हफ्ते में hi किसी की बिना जाने पहचाने प्यार करने लग जाओ.
ये सुन कीर्ति गुस्सा के साथ हैरान भी होती है की अचानक मेघा को क्या हो गया?
कीर्ति:- गुस्सा है मुझसे?
मेघा:- तू hi बता क्या होना चाहिए तेरी इस बेवकूफी पर?
कीर्ति:- अब्ब मैंने क्या कर दिया?
मेघा:- Sumit...Subah जो कह रहा tha...Uss पर तेरा रिएक्शन बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा.
इंसान गलत hai...Lekin बात सही hai...Aur किसी की नफरत में इतना भी अंधी मत बन की तुझे सच्चाई और अच्छाई भी ना दिखे.
कीर्ति:- क्या तू भी उसकी बात पर इतना सीरियस हो रही hai...Wo और उसकी मूर्खों वाली बात.
मेघा:- मुर्ख नहीं है वो.
कीर्ति एक नजर मेघा को देखती है लेकिन कुछ नहीं बोल पाती.
मेघा:- मुझसे बेहतर तू hi जानती होगी जब 2 साल आगे बी. फार्मेसी में बढ़ जाने के बाद भी तुझे 1 मंथ में बायोलॉजी और केमिस्ट्री कम्पलीट करा दिया.
और मेडिकल में आने के बाद bhi...1st ईयर के स्टार्टिंग में hi 2ंद ईयर का भी बहुत अच्छा नॉलेज है.
इंसान गलत है wo...Dhokhebaaz hai...Dil से बहुत गलत इंसान है जो किसी दूसरे की दिल की क़द्र नहीं karta...Lekin दिमाग se...Dimaag से उतना hi तेज hai...Kab क्या सोचता है किसी को अंदाजा भी नहीं होता है.
कीर्ति:- कहना क्या चाहती है तू?
मेघा:- उसको इग्नोर करने के चक्कर में टूर को भी इग्नोर मत kar...Uska कांसेप्ट अच्छा tha...Agar तुझे भी ऐसा लगता है तो रुक जा.
कीर्ति:- लेकिन...
मेघा:- रुकेगी तब मौका भी है उससे सबक सिखाने ka...Tu hi कहती थी ना तू ऐसा सबक सिखाएगी की वो हमेशा याद रखेगा.
कीर्ति सिर्फ सोचती rahi...Koi जवाब नहीं दिया उसने.
मेघा भी अब्ब कुछ नहीं bolti...Usse उम्मीद था की कीर्ति जरूर रुकेगी.
और wo...Wo अब्ब जरूर पता लगा कर रहेगी सुमित की asliyat...Bas इसी वजह से वो इस टूर को कंटिन्यू रखना चाहती थी.
कुछ इसी सोच के साथ मेघा सोने की कोशिश करते हुए कल का इंतजार करने लगी.