Romance Sex kahani - Ek Bhool 2 - Page 7 - SexBaba
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Romance Sex kahani - Ek Bhool 2

अपडेट 43

बहुत सही जा रहे ho...Jald hi कीर्ति इम्प्रेस हो जायेगी.

मेघा की इस आवाज में हंसी काम मजाक उड़ाना ज्यादा था.

सुमित जो अभी रात में छत के एक कोने में ऊपर आसमान में देख रहा था वो आवाज सुन उसका ध्यान मेघा की तरफ गया.

एक नजर मेघा को देख वापस सुमित ने अपना नजर हटा लिया.

मेघा:- ऐसा hi लग रहा होगा ना की तुम बहुत सही जा रहे ho...Aur जल्द hi कीर्ति इम्प्रेस हो जायेगी?

सुमित ने कुछ जवाब नहीं दिया.

मेघा:- अपने सपनो की दुनिया से बहार निकलो.

सुमित ने फिर कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- बहुत बड़ा प्लेबॉय कहते थे ना तुम खुद ko...Aur इतनी जल्दी हार भी मान लिया.

मेघा सुमित को देख हंसती है और फिर अपनी दबी हुई गुस्सा और निकलने लगती है.

मेघा:- तुम्हे देख यही याद आता hai...Garajne वाले बादल बरसते नहीं और भौंकने वाले कुत्ते काटते नहीं.

क्या कह रहे थे तुम? एक बार कीर्ति के करीब जाने का मौका मिल जाए? फिर तुम कीर्ति को मना लोगे और कीर्ति तुम्हारी हो जायेगी.

मौका मिल गया ना? क्या उखाड़ लिया तुमने अपने बेइज्जती के alawa...Abb तो अपना औकात पता चल गया होगा ना.

मेघा की ये बात सुमित के दिल पर जा laga...Ek बार फिर एहसास हुआ उससे इस हार kaa...Jaha से जीत की अब्ब कोई किरण तक दिखाई नहीं दे रहा था.

सुमित:- रात के 10 बज रहे hai...Kal तुम सब को निकलना hai...Jaake पैकिंग करो.

बेरुखी आवाज में सुमित ने जवाब दिया.

मेघा:- वास्ते फेलो.

गुस्से से मेघा ने सुमित को देखा और वह से जाने लगी.

अब्ब सुमित से और रहा नहीं gaya...Aankhein एकदम से भर aaya...Kaanpte हाथों के साथ उसने अपने पॉकेट से मोबाइल निकाला.

मेघा छत के गेट पर पहुंची hi थी की ना जाने क्या hua...Achanak से वो सुमित की तरफ मुद गयी.

सुमित:- Hello.

कांपते आवाज के साथ सुमित ने कहा.

हाँ सुमित बोल.

दूसरी तरफ से आशीष की आवाज आया.

सुमित:- यार आज तेरा जरुरत महसूस कर रहा हूँ.

इतना कहते hi सुमित रू पड़ा.

ये आवाज सुन मेघा भी हैरान रह गयी.

सुमित भी ऐसे hi मुदा hi था की वो भी मेघा की देख हैरान रह गया.

आशीष:- क्या हुआ सुमित? ठीक तो है ना तू?

दूसरी तरफ से आशीष डरते हुए बोलै.

लेकिन सुमित हैरानी से अभी भी मेघा को hi देखे जा रहा tha...Megha के सामने वो खुद को कमजोर दिखाना नहीं चाहता tha...Aur एक दर भी था जो गलत इमेज उसने खुद मेघा के मन में बनाया था कही वो झूठ कही मेघा के सामने खुल न जाए.

आशीष:- Hello...Hello...Sumit तू सुन तो रहा है?

सुमित को रिप्लाई ना करता देख आशीष का दर बढ़ता hi जा रहा था.

सुमित को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Wo अब्ब छत से निकल कर निचे चला gaya...Megha का और सामना करने की हिम्मत नहीं था अभी उस में.

मेघा वही हैरानी में कड़ी रह gayi...Sumit की वो बात और वो aawaj...Abhi भी उससे विश्वाश नहीं हो रहा था.

मेघा:- धोखेबाज़ है ye...Jarur किसी और लड़की को फ़साने की कोशिश में hoga...Emotional बनने की नाटक कर के.

लेकिन दूसरी तरफ से आशीष की वो आवाज आते hi ये शक भी ख़त्म हो गया.

Sumit...Aur emotional...Ye मेघा चाह कर भी नहीं मान पा रही थी.

लेकिन कही न कही उस आवाज में एक दर्द महसूस किया था usne...Dil और दिमाग की जुंग में बुरी तरह फंस चुकी थी Megha...Dil सुमित को गलत इंसान hi मानना चाह रहा tha...Aur Dimaag...Iss बात को झुठला रहा था.

तभी होटल से बाहर निकलते सुमित पर उसकी नजर pada...Ek पल के लिए मेघा को ख्याल आया की...

मेघा:- (इन हेर मंद) पीछा करके देखती हूँ.

लेकिन अगले hi पल.

मेघा:- मुझे क्या मतलब इस धोखेबाज़ से?

कुछ इन्ही सोच में गुम्म मेघा निचे अपनी रूम में चली गयी.

सुमित:- हार गया हूँ mai...Buri तरह हार गया hun...Mere लिए कुछ पल का वक्त तो है न तेरे पास?

सुमित की आवाज में भी उसकी हार साफ़ झलक रहा था.

सुमित की आवाज सुन आशीष ने पहले छैन की सांस लिया और फिर सुमित की इस हाल को देख और भी दर गया.

आशीष:- क्या हुआ?

सुमित:- Kirti...Wo जा रही hai...Mujhse dur...Hamesha हमेशा के लिए.

आशीष:- हुआ क्या है? साफ़ साफ़ बोल.

सुमित फिर आशीष को साड़ी बात बता देता है.

आशीष:- टूर के एक hi दिन में वो वापस जाना चाहती hai...Abhi भी बहुत नाराज है वो तुझसे.

सुमित:- हाँ yaar...Kuch समझ में नहीं आ रहा है कैसे उसकी नाराजगी दूर karu...Uski ये नाराजगी मुझे अंदर hi अंदर खाये जा रही है.

आशीष:- (सलौली तो हिमसेल्फ) पहले hi शक था इस टूर mein...Wo नहीं maanegi...Lekin तुझे कैसे समझाऊ?

सुमित:- मुझे भी पता tha...Ye काम नहीं करने वाला hai...Lekin दिल में कही ना कही एक उम्मीद tha...Bas इसी उम्मीद के सहारा चल पड़ा इस राश्ते par...Suna था डूबता को तिनके का सहारा hi काफी होता है.

वैसे भी प्यार के लिए एक पल hi काफी होता hai...Dukh इस बात का है की वो पल आने से पहले hi कीर्ति जा रही hai...Aur मई बस देख hi सकता हूँ.

इतना कह कर सुमित चुप हो gaya...Ek बार फिर आँखों से आंसू बहने लगे.

आशीष:- Bhai...Tu इतना प्यार करता है कीर्ति se...Lekin उससे dekh...Koi परवाह hi नहीं है tera...Kya भूक नहीं सकता तू उससे? और कितना बर्बाद करेगा खुद को?

आशीष को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कैसे वो सुमित का मदद kare...Bas एक ख्याल hi आया की समस्या को जड़ से उखाड़ फेने की.

सुमित:- वजह भी तो मई hi hun...Ek गलती को सुधारने के लिए दूसरा गलती कर बैठा.

कीर्ति को पाने की चक्कर में मेघा के साथ गलत kiya...Usse कीर्ति को यकीं हो गया की अब्ब में मेघा के पीछे भी लगा hun...Shak और भी बढ़ गया की मई प्लेबॉय hi हूँ.

नाराजगी तो जायज hi है ना? हर बार गलत मई hi hun...Jise ठीक करने की चक्कर में और भी गलत बनता जा रहा हूँ.

अभी भी भरोषा है yaar...Manaa लूंगा कीर्ति ko...Hai खुद के प्यार में इतना vishwash...Lekin मौका मिले तब ना? क्या मेरा गुनाह इतना बड़ा है की उसको कोई मौका hi नहीं?

आशीष कुछ बोल नहीं paaya...Usse भी कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Bas दर था सुमित की हालत देख कर.

कुछ देर की खामोशी को सुमित ने hi तोडा.

सुमित:- प्लेबॉय.

जब प्लेबॉय बनना चाहता था तब आशिक़ बन baitha...Aur जब आशिक़ बनना चाहता हूँ तो उसकी नजर में मेरा इमेज आज प्लेबॉय का है.

गजब किस्मत है यार.

दर्द में भी मुस्कुरा कर कहा सुमित ने.

सुमित:- Ashish...Sun रहा है ना तू?

आशीष:- हाँ सुन रहा हूँ.

सुमित:- याद है तुझे वो din...Jab तू मुझे प्यार के बारे में समझा रहा tha...Tab मैंने कहा था "सच में तुझे ऐसा लगता है की मुझे तेरा जरुरत padega."..Wo मजाक था यार.

लेकिन आज सच में तेरा जरुरत hai...Kuch टिप्स दे yaar...Kya करू? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है.

कुछ देर सोचने के बाद.

आशीष:- Vakt...Thoda वक्त दे यार खुद ko...Sab ठीक हो जाएगा.

सुमित:- वो hi तो नहीं है मेरे paas...Aur वैसे भी पिछले 3 साल से इंतजार hi तो कर रहा था एक मौका ka...Abb और इंतजार नहीं होता.

आशीष:- कुछ जख्म होते है जिससे वक्त hi भरता है.

सुमित ने कोई जवाब नहीं दिया.

आशीष:- कल कीर्ति को रोकने की कोई कोशिश मत करना?

सुमित:- क्या? क्या कह रहा है तू?

गुस्से में सुमित ने पूछा.

आशीष:- कीर्ति वैसे भी तुझसे छिड़ रही है abhi...Kal रोकने की कोशिश करेगा तो और छिड़ कर चली जायेगी.

वैसे कुछ चांस है उसके ना जाने kaa...Tour में आयी hai...Kuch चान्सेस है उसका रुकने ka...Agar उसका गुस्सा ख़त्म हो गया to...Bas उससे रोकने की ख्वाहिश कर के और मर छिड़ा देना.

सुमित को भी आशीष की ये बात सही laga...Wo भी बस यही दुआ करने लगा की काश आशीष की बात सही हो.

मेघा अपने रूम में पहुँचने से पहले hi सोच लेती है की आगे उससे क्या करना है.

कीर्ति:- सामान पैक करना नहीं है क्या तुझे? कल सुबह hi निकलना है.

मेघा:- मुझे कही नहीं जाना.

ये सुनते hi कीर्ति गुस्से से और हैरानी से मेघा को देखती है.

कीर्ति:- कही उससे प्यार तो नहीं करने लग गयी?

मेघा:- तेरी तरह नहीं hun...Jo 2 हफ्ते में hi किसी की बिना जाने पहचाने प्यार करने लग जाओ.

ये सुन कीर्ति गुस्सा के साथ हैरान भी होती है की अचानक मेघा को क्या हो गया?

कीर्ति:- गुस्सा है मुझसे?

मेघा:- तू hi बता क्या होना चाहिए तेरी इस बेवकूफी पर?

कीर्ति:- अब्ब मैंने क्या कर दिया?

मेघा:- Sumit...Subah जो कह रहा tha...Uss पर तेरा रिएक्शन बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा.

इंसान गलत hai...Lekin बात सही hai...Aur किसी की नफरत में इतना भी अंधी मत बन की तुझे सच्चाई और अच्छाई भी ना दिखे.

कीर्ति:- क्या तू भी उसकी बात पर इतना सीरियस हो रही hai...Wo और उसकी मूर्खों वाली बात.

मेघा:- मुर्ख नहीं है वो.

कीर्ति एक नजर मेघा को देखती है लेकिन कुछ नहीं बोल पाती.

मेघा:- मुझसे बेहतर तू hi जानती होगी जब 2 साल आगे बी. फार्मेसी में बढ़ जाने के बाद भी तुझे 1 मंथ में बायोलॉजी और केमिस्ट्री कम्पलीट करा दिया.

और मेडिकल में आने के बाद bhi...1st ईयर के स्टार्टिंग में hi 2ंद ईयर का भी बहुत अच्छा नॉलेज है.

इंसान गलत है wo...Dhokhebaaz hai...Dil से बहुत गलत इंसान है जो किसी दूसरे की दिल की क़द्र नहीं karta...Lekin दिमाग se...Dimaag से उतना hi तेज hai...Kab क्या सोचता है किसी को अंदाजा भी नहीं होता है.

कीर्ति:- कहना क्या चाहती है तू?

मेघा:- उसको इग्नोर करने के चक्कर में टूर को भी इग्नोर मत kar...Uska कांसेप्ट अच्छा tha...Agar तुझे भी ऐसा लगता है तो रुक जा.

कीर्ति:- लेकिन...

मेघा:- रुकेगी तब मौका भी है उससे सबक सिखाने ka...Tu hi कहती थी ना तू ऐसा सबक सिखाएगी की वो हमेशा याद रखेगा.

कीर्ति सिर्फ सोचती rahi...Koi जवाब नहीं दिया उसने.

मेघा भी अब्ब कुछ नहीं bolti...Usse उम्मीद था की कीर्ति जरूर रुकेगी.

और wo...Wo अब्ब जरूर पता लगा कर रहेगी सुमित की asliyat...Bas इसी वजह से वो इस टूर को कंटिन्यू रखना चाहती थी.

कुछ इसी सोच के साथ मेघा सोने की कोशिश करते हुए कल का इंतजार करने लगी.
 
अपडेट 44

अगली सुबह जब सुमित उठा तो सर काफी भारी महसूस hua...Hamesha की तरह कल रात भी कुछ ज्यादा hi चढ़ा लिए था उसने.

कुछ देर बाद जब थोड़ा होश आया तोह एक बार फिर दिल में दर्द utha...Wohi दर्द जो अब्ब बर्दास्त के बाहर था.

कीर्ति चली gayi...Ye बात दिमाग में आते hi आँखें आंसू से भर aaya...Dil भी भारी भारी सा हो गया था सुमित का.

जब उससे रहा नहीं गया तो वो होटल से बाहर निकल gaya...Room में एक अजीब सा घुटन महसूस कर रहा था वो.

होटल से बाहर निकला hi था की उससे बहुत हैरानी hua...Pehle तो उसने कन्फर्म किया की ये कोई सपना तो नहीं?

ानकेहिं बंद कर के अपने सर के पीछे एक हाथ maara...Aur ानकेहिं खोल कर dekha...Saamne का नजारा सच hi tha...Kirti, मेघा और विवेक उससे hi घर रहे थे.

ये देखते hi वो ख़ुशी से उछाल pada...Dil के सारे ग़म और दर्द एक hi पल में गायब हो gaya...Hontho में मुस्कान के साथ वो कुछ पूछने hi वाला था की कीर्ति को देख वो रुक गहा.

कीर्ति अभी भी उसे घर रही थी.

अचानक से सुमित सोच में पद गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) कीर्ति तो अभी भी गुस्सा hai...Shayad अभी तक गयी नहीं लेकिन जाने की तैयारी hogi...Shayad कुछ ज्यादा hi ओवरएक्ससिटेड हो गया था.

सुमित का चेहरा वापस से लटक gaya...Dil में एक hi दुआ मांग रहा tha..."Kaash कीर्ति वापस ना जाए ना hi इस टूर से और ना hi मेरे जिंदगी से."

मेघा:- कही गिर गए थे क्या?

मेघा की इस आवाज से सुमित वापस होश में आया.

सुमित कुछ जवाब देता उससे पहले hi.

विवेक:- ये तो वैसे भी गिरा हुआ इंसान hai...Aur कितना गिरेगा?

सुमित ये सुनते hi गुस्सा हो gaya...Vivek को जवाब तो अच्छे से देना चाहता था लेकिन उससे इग्नोर कर के.

सुमित:- नहीं तो?

मेघा:- लगा शायद कही गिर गए honge...Issi लिए बच्चों की तरह रो रहे हो.

मेघा की जवाब सुनने के बाद महसूस हुआ की कुछ बूँद आंसू अभी भी उसके आँखों में hai...Jo कुछ देर पहले कीर्ति की याद में बहाया था.

कीर्ति:- दिमाग से तो अभी भी बच्चा hi है. :माध:

सुमित:- भूलो mat...Kabhi इसी दिमाग पर फ़िदा हुआ करती थी.

प्यार भरी आवाज में सुमित ने कहा.

कीर्ति ने इस बार कोई जवाब नहीं दिया.

सुमित:- वैसे ये आंसू प्याज (अनियन) की वजह से है.

सुमित की इस बात पर सभी हैरानी से उससे घूरते है.

सुमित:- थोड़ा अलग टास्ते है mera...Daaru के बाद हमेशा प्याज खाता hun...Aaj सुबह बिना दारु के hi प्याज काट कर खाने का तरय kiya...Aur नतीजा सामने है.

सुमित की इस लॉजिक पर सब हसने की जगह उल्टा इर्रिटेट हो गए.

विवेक:- (स्लो वौइस्) दुसरो का चुटिया काटने वाला प्याज काट रहा hai...Ajeeb है.

सुमित:- (स्लो वौइस्) सबसे पहले तो तेरा hi काटूंगा.

फिर सुमित कीर्ति को देख कहता है.

सुमित:- तैयारी तो कर hi लिया होगा वापस जाने की.

सुमित ने भारी दिल से ये सवाल पूछा.

कुछ देर चुप रहने के बाद कीर्ति बोली.

कीर्ति:- कल रात सोचने के बाद लगा की तुम्हारा आईडिया सही है.

ये सुनते hi सुमित के ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.

सुमित:- (इन हिज मंद) अबे कमीने Ashish...Tujhe तो महा हरामी सोचता था लेकिन तू तो सिर्फ हरामी nikla...Devmaanush बनने के लिए अभी बहुत सफर तय करना है तुझे. :डी

चल तू भी क्या याद rakhega...Thank यू.

सुमित का ख़ुशी उसके चेहरा में भी साफ़ झलक रहा था.

कीर्ति:- सिर्फ तुम्हारा आईडिया अच्छा laga...Tum नहीं.

सुमित:- (स्लो वौइस्) जल्द मई भी लगने लगूंगा.

सुमित का आवाज में एक बार फिर आत्मा विश्वाश लौट आया.

कीर्ति:- इम्पॉसिबल.

कीर्ति की इस बात पर भी सुमित मुस्कुराता रहा.

मेघा:- अब्ब चलना भी है या सिर्फ फ़ालतू की बकवाश करते रहोगे.

इर्रिटेट हो कर मेघा ने पूछा.

सुमित:- मेघा एक काम karo...Aaj तुम इस वप के साथ jaao...Mai कीर्ति के साथ जाऊँगा.

कीर्ति ने इस बात का एकदम से इंकार कर दिया.

कीर्ति:- मई और विवेक साथ जाएंगे.

कीर्ति की इस बात पर मेघा उससे गुस्से से देखती hai...Wo चाहती थी वो दोनों साथ jaaye...Lekin कीर्ति ने विवेक को चूसे किया.

सुमित:- (इन हिज मंद) खैर कोई बात nahi...Kirti इस टूर के लिए रुक gayi...Abhi के लिए इतना hi काफी है.

वैसे मई भी देखता हूँ कब तक तुम मुझसे बचोगी.

ये सोचने के साथ hi सुमित के होंठों में मुस्कान आ गया.

फिर सभी अपने अपने बप मासुरिंग डिवाइस ले कर निकल पड़े गांव की और.

मेघा नोटिस कर करि थी की सुमित कुछ ज्यादा hi खुश hai...Wo ख़ुशी में अपने hi धुन में चल रहा था अपने सपनो में खोये.

आज भी मेघा ने नोटिस किया की सुमित अब्ब उससे बेवजह इर्रिटेट करना बंद कर चूका tha...Aur ना hi किसी बात का शुरुवात करता था.

आखिर इस खामोशी को तोड़ कर मेघा ने पूछा.

मेघा:- ऐसे खुश हो रहे हो जैसे कीर्ति मिल hi गयी हो तुम्हे.

सुमित:- मिल jaayegi...Hai खुद पर विश्वाश.

कॉन्फिडेंस के साथ जवाब दिया सुमित ने.

मेघा:- खुद पर या अपने ऐसे बेकार प्लान्स पर?

सुमित:- जिसे कभी किसी से प्यार ना हुआ हो उससे क्या पता प्यार की ताकत?

कुछ सोचते हुए सुमित ने कहा.

मेघा:- क्या मतलब?

और सुमित का सोच सही nikla...Megha एकदम से गुस्सा हो गयी.

सुमित:- समझदार लगती ho...Aur समझदार को इशारा काफी होता है.

मेघा गुस्से में कुछ बोल नहीं पा रही थी.

सुमित:- शायद तुमने भी मुझसे प्यार किया tha...Jo मुझे महसूस नहीं hua...Itna स्वार्थ जो था तुम्हारे प्यार में.

मेघा:- क्या कहा तुमने.

मेघा का गुस्सा बढ़ते hi जा रहा था.

सुमित:- मैंने तुम्हे कितनी बार प्रोपोज़ kiya...Lekin तुमने एक बार भी रिस्पांस नहीं दिया.

हाथ धो कर पीछे लग gaya...Har तरह से एहसास दिलाया लेकिन तुमने एक्सेप्ट hi नहीं किया.

करती भी क्यों? पहले मेरा बैकग्राउंड जानना tha...Bank बैलेंस चेक करना tha...Aur उसके बाद जब कुछ ठीक लगा तब तुम मुझे भाव देने लगी.

सुमित का ये बात मेघा के बर्दाश्त के बाहर tha...Wo खिंच कर सुमित को एक थप्पड़ मारने hi वाली थी की.

सुमित:- इस गाल में सिर्फ कीर्ति का हक़ hai...Tumhara नहीं.

सुमित ने मेघा का हाथ झटक दिया.

सुमित:- अगर प्यार करती hi हो तो तुम्हे मेरे ख़ुशी में खुश होना chaahiye...Aur मेरा ख़ुशी तो जानती hi ho...Kirti.

मेघा कुछ पल सुमित को देखती rahi...Fir धीरे धीरे उसकी आँखों से आंसू बहने lagi...Aur एकदम से पूछे मुद कर वह से चली गयी.

मेघा के जाने के बाद.

सुमित:- काश ये गुस्सा और नफरत मेरे लिए तुम्हारे दिल में हमेशा rahe...Aur तुम मुझे भूल कर अपने जिंदगी में आगे बढ़ जाओ.

इस दुआ में उतना hi शिद्दत था जितना उसका हर वो दुआ में होता था जिस में वो कीर्ति के साथ होने का दुआ मांगता था.

मेघा वापस अपने रूम में आ जाती hai...Aur बीएड मई लेत कर रू कर अपना दिल हल्का करने की कोशिश करती है.

मेघा:- हर चीज का एक वजह होता hai...Uska भी एक वजह tha...Lekin अब्ब तुम उस लायक रहे hi नहीं की मई तुम्हे कोई जवाब दू.

न जाने कितनी देर रू कर मेघा खुद को शांत करने की कोशिश करती रही.

मेघा:- तुम बहुत गलत हो Sumit...Bahut गलत इंसान से प्यार कर लिया मैंने.

कीर्ति तुम्हे सबक सिखाएगी या नहीं ये तो मुझे पता नहीं लेकिन मई जरूर सबक sikhaaungi...You डेसेर्वे आईटी.

दूसरी तरफ सुमित का भी अब्ब कुछ मन नहीं लग रहा था...4 घर विजिट करने के बाद वो भी वापस लौट आया.

शाम में सभी छत में बैठे थे.

कीर्ति:- वैसे Sumit...Ye आईडिया बहुत अच्छा था.

कीर्ति ने मुश्कुराते हुए kaha...Bas इसी मुस्कान से सुमित का दिन बन gaya...Jise देखने के लिए कब से वो तड़प रहा था.

सुमित को समझ में hi नहीं आ रहा था जवाब कैसे दे.

सुमित का तारीफ़ कीर्ति की मुंह se...Ye विवेक को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा.

विवेक:- कीर्ति याद hai...Ek घर में हमे इसकी खूब तारीफ़ सुनने को मिला tha...Iska बिहेवियर, जेस्चर और न जाने क्या क्या.

सुमित विवेक की तरफ हैरानी से देख रहा tha...Vivek की मुंह से अपना तारीफ़ थोड़ा अजीब लग रहा था उससे.

कीर्ति:- Haan...Lekin तुम कहना क्या चाहते हो?

विवेक:- यही की जिसे अपने घर में इज्जत नहीं मिलता उसका तारीफ़ दूसरे लोग कर रहे है.

शो ऑफ का कोई मौका नहीं छोड़ते ऐसे लोग.

एक अजीब सा गुस्सा था विवेक की आवाज में.

सुमित:- ये तो सुना था की लोग हाथ के रेखा पढ़ सकते hai...Lekin तू तोह किसी का चेहरा इतने गहराई से पढ़ सकता hai...Kamaal का इंसान है तू वप.

विवेक:- मुझे क्या मतलब तुझ से? जो इतना फोकस करूँगा तुझ par...Ye तो कीर्ति से पता chala...Tera औकात.

सुमित:- (तो कीर्ति) मुझे तो पता hi नहीं था तुम मुझसे इतना प्यार करती हो.

इतना अच्छे से जान लिया तुमने मेरे बारे mein...Mere साथ साथ मेरे परिवार वालो के बारे में भी.

काश थोड़ा और पहले पता चला hota...Jaane hi नहीं देता तुम्हे.

सुमित ने फिर प्यार भरी आवाज में kaha...Ye सुन कीर्ति ने फिर चेहरा घुमा लिया.

सुमित:- और वप? ऐसे लोगो को क्या कहते है जो दूसरे के जिंदगी पर hi रिसर्च करते फिरते है?

विवेक ने कोई जवाब नहीं दिया.

वही सब के बिच कड़ी मेघा उन् लोगों के पास हो कर भी बहुत दूर thi...Apne ख्यालों में.

वो सोच रही थी की सुमित को कब इग्नोर करना है और कब सबक सिखाना है?

[Friends next update mein ek dhamaka hone wala hai...Taiyaar rahiye :D.]
 
अपडेट 45

4 दिन ऐसे hi बीत gaye...Sumit को कुछ ख़ास कामयाबी नहीं mila...Kirti का उसको इग्नोर करना जारी tha...Abb तो उससे खुद लग रहा था की अब्ब कुछ नहीं हो sakta...Uske प्यार में वो ताकत hi नहीं है की वो कीर्ति को मन सके.

लेकिन कभी कभी कीर्ति का उसके साथ मुस्कुरा कर बातें करना और उसकी कुछ अच्छाइयों का तारीफ़ करना डूबता हुए को तिनके का सहारा जैसा काम कर रहा था.

अपने हार सामने दिखने के बावजूद वो हार नहीं मान रहा tha...Ek उम्मीद की किरण शायद अभी भी था.

दूसरी तरफ मेघा ने भी सुमित के साथ बात चीत बंद कर दिया tha...Chaar दिन से दोनों साथ गांव में घूमने तो जाते लेकिन खामोशी के saath...Sumit जहा खुश था की उसका रूखापन असर कर रहा है मेघा पर वही मेघा अभी भी प्लान बना रही थी सुमित को सबक सिखाने की.

ऐसे hi चौथे दिन शाम का वक्त tha...Suryaaat होने के बाद अँधेरा चारों तरफ छाने लगा tha...Sumit होटल की छत एक कोने में खड़ा हो कर निचे जमीन पर देख रहा था.

सुमित

पीछे से विवेक की आवाज aaya...Sumit विवेक की तरफ देख मुदा.

सुमित:- हाँ वप बोल.

सुमित का जुबान लड़ खड़ा रहा था और आँखें एकदम लाल था.

विवेक:- ये क्या? तूने दारु पिया है.

सुमित:- इसी लिए तो तुझे मोटा पांडा के रूप में देख रहा hun...Agar चार पैरो में चलेगा तो मोटा गेंदा dikhega...Issi लिए तो तुझे विचित्र प्राणी बोलता hun...Kyu की तू है hi विचित्र सा.

गजब का नशा है इस लोकल में.

सुमित झूलते हुए बोलै.

विवेक को गुसा तो बहुत आ रहा tha...Lekin उसने सीधा काम की बात कहने का सोचा.

विवेक:- कीर्ति ने तुझे बुलाया hai...Lekin तू तो नशे में...

विवेक अपनी बात पूरा करता उससे पहले hi.

सुमित:- कीर्ति ने? कीर्ति ने मुझे bulaya...Sach कह रहा है तू?

कीर्ति ने उससे बुलाया है ये सुनते hi सारा नशा गायब हो गया सुमित का.

विवेक:- हाँ लेकिन तू नशे में...

विवेक फिर अपनी बात पूरा करता उससे पहले hi

सुमित:- नार्मल हूँ...10 पेग hi पिया hai...Itna कण्ट्रोल तो कर सकता हूँ.

कीर्ति ने कहा बुलाया है?

विवेक:- उसके रूम में.

सुमित एक्ससिटेड था की इतने दिनों में पहली बार कीर्ति ने उससे बात करने की पहल ki...Lekin मेघा का याद आते hi.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) लेकिन वह तो मेघा भी hogi...Khul कर बात नहीं कर पाऊंगा.

सुमित ने धीरे से कहा लेकिन विवेक ने सुन लिया.

विवेक:- मेघा वह नहीं hai...Kirti ने उससे बाहर भेज दिया है ताकि तुझसे कुछ पर्सनल बातें कर सके.

विवेक ने इतना hi कहा था की सुमित ने कीर्ति के रूम की तरफ दौड़ lagaya...Ek hi सांस में वो कीर्ति के रूम में पहुँच gaya...Sirf एक मुलाक़ात की hi तो जरुरत tha...Aur इस मुलाक़ात का बेचैनी hi इतना था की वो कुछ पल के सांस लेना भी भूल गया था.

कीर्ति की रूम में पहुँचते hi लम्बी लम्बी सांस लेने लगा.

Tum...Kaun हो तुम?

इस दरी हुई आवाज को सुन सुमित ने कहा.

Mai...Mai हूँ Sumit...Tumne hi तो बुलाया था.

Maine...Maine कब बुलाया? और क्यों बुलाउंगी?

ओह्ह ये gussa...Ye nakhre...Ye adaayein...Issi पर तो मरता आया hun...Aaj भी तुम नहीं बदली कीर्ति.

सुमित की आवाज में कीर्ति के लिए प्यार hi प्यार था.

दूसरी तरफ से आवाज न आता देख सुमित स्विच बोर्ड के पास जा कर सभी स्विच ों करता है.

लाइन चली गयी है.

खैर कोई बात nahi...Tumhara ये चाँद से खूबसूरत चेहरा तो बहुत बार देख चूका hun...Aur आगे भी देखता rahunga...Bas कोई कमी है तो तुम्हारी ये कोयल सी प्यारी आवाज की.

मुझे कोई बात नहीं करना है तुमसे.

लेकिन सुमित जा कर कीर्ति के पास बीएड में बैठ जाता है.

तुम्हारी नखरे सहने के लिए तो पूरा जिंदगी बाकी hai...Please बस इस बार मेरी बात suno...Abb मेरा सब्र का बाँध टूट रहा है.

सुमित ने बस इतना hi कहा था की.

दारु पिया है तुमने?

Haan...Aaj बस ऐसे hi.

याद है तुम्हे जब मैंने केमिस्ट्री में पढ़ाया था तुम्हे अल्कोहल फेरमेंटशन.

याद है तुमने कहा था तुम्हे बेवड़े लोग में सिर्फ एक बात पसंद है की वो पीने के बाद सच बोलते है.

वही समझ lo...Kuch सचाई बाटने hai...Kuch दिल की baatein...Aur कुछ गीले शिकवे.

दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आया.

ओह्ह sorry...Tumhe स्मेल पसंद नहीं आ रहा hoga...Dusre तरफ मुद जाता हूँ.

इतना कह कर सुमित अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लेता है.

क्या हुआ? कुछ तो बोलो? तुमने hi तो बुलाया tha...Baatein करने के लिए.

बातें करने के लिए रखा hi क्या है? मुझे कोई बातें नहीं करना तुम जैसे धोखेबाज़ से.

ओह्ह ये naaraajgi...Naarajgi कहु या nafrat...Mujhe तो नाराजगी hi लगता hai...Aur ये जायज भी hai...Misunderstanding जो है हमारे बिच.

सही hai...Pehle प्यार में धोखा do...Aur फिर एक्सक्यूज़ के लिए मिसुन्दरस्टण्डींग का नाम दो.

धोखा नहीं दिया है यार tumhe...Tumhaare साथ कैसे धोखा कर सकता हूँ जब की तुम तो मेरी जिंदगी ho...Abb तो मेरा सोच मेरे सपने मेरे khwahish...Sab तुम hi तो ho...Sirf तुम तक जिंदगी सिमट चुकी है.

ये कहते हुए सुमित काफी इमोशनल हो गया था.

एक भूल हुआ था मुझसे की मैंने तुम्हे नहीं बताया की मई प्लेबॉय बनने की कोशिश में लगा हुआ था तुमसे मिलने से pehle...Pyaar से हार गया था उस वक्त भी.

लेकिन तुम प्यार की वो नयी उम्मीद और जिंदगी में आगे का रास्ता दिखाने की किरण बन कर आयी की मुझे फिर से प्यार हो गया...सच्चा वाला प्यार.

जब से तुमसे प्यार की एहसास हुआ है तबसे तुम्हारा hi बन कर रह गया hun...Wo जो 2 डेट्स बताया था tumne...Uss दिन मई उन् दोनों से दूर होने की बात बताने गया था.

लेकिन उन्होंने तुम्हें कुछ और hi बता दिया और तुमने कुछ और hi समझ लिया.

कुछ भी kaho...Mujhe तुम पर कोई विश्वाश नहीं hai...Jaise तुम्हारे लिए श्रुति और प्रीती थी वैसे hi mai...Sirf एक खिलौना...

नहीं nahi...Aise मत बोलो यार.

एकदम से तड़प उठा सुमित.

तुम कौन हो मेरे लिए? ये बात तुम खुद hi नहीं jaanti...Taakat हो तुम meri...Dekh hi रही हो तुम खुद भी मेरा ये हाल तुम्हारे bin...Kitna लाचार और कितना कमजोर हो गया hun...Jab भी तुम मेरे पास thi...Aisa लगता था मेरे जिंदगी में सब कुछ hai...Jindagi की सही रास्ता दिखाने के लिए माँ और Papa...Khushi और दुःख के पल में साथ देने के लिए मेरे कुछ dost...Mera प्यार और जिंदाहि भर साथ निभाने के लिए तुम.

तुम तो मेरे लिए एक इंस्पिरेशन भी ho...Yaad है जब मैंने तुम्हारे प्यार को रिजेक्ट किया tha...Tab तुमने बिलकुल भी हार नहीं maana...Aur मुझे पता hi लिया :डी

तो फिर mai...Kaise हार मान सकता hun...Mai भी तब तक तुम्हारा पीछा नहीं छोडूंगा जब तक तुम फिर से मान नहीं jaati...Waise भी ये आशिक़ों वाली विश्वाश hai...Tumhe मन hi lunga...Chaahe कितना भी नखरे कर लो.

पहली बार हँसते हुए सुमित ने कुछ कहा.

तुम भी जानती हो की तुम मेरे लिए सब कुछ ho...Tumhare बिना मई बिलकुल अधूरा हूँ.

हाँ ये भी जानती हूँ की मेरे मना करने पर तुम मेघा के पीछे लग jaao...Aur जब मेघा ने कुछ ख़ास भाव नहीं दिया तो वापस मेरे पीछे आ gaye...Yahi हो है तुम्हारा प्यार.

Megha...Kya कहु उसके बारे mein...Mere लिए तो किसी भगवान् से काम नहीं hai...Jiske रूप में मुझे एक मौका मिला तुमसे वापस मिलने का.

आज जब तुम्हारे साथ 3 हफ्ते के लिए हूँ इसमें मेरा ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं hai...Lekin दिल मई कही न कही ये बात चुभ भी रहा है की मेघा के साथ बहुत गलत किया मैंने.

दर है की कही कोई बद्दुआ ना lage...Lage तो भी कोई दर नहीं hai...Bas वो बद्दुआ तुम्हे खोने के रूप में ना mile...Bas इसी से डरता हूँ.

अपना दर से भी ज्यादा उसके दिल के लिए भी दुःख hai...Kitni अच्छी है wo...Bilkul साफ़ दिल ki...Aur उस दिल को मैंने न जाने कितने टुकड़े कर diye...Pyaar शब्द से hi नफरत हो गया होगा उससे.

बहुत बड़ी भूल हो गयी है mujhse...Aur इसका बोझ शायद जिंदगी भर रहेगा.

लेकिन एक कोशिश कर रहा हूँ और करता rahunga...Megha के दिल में अपने लिए नफरत भर रहा hun...Tumne भी अच्छा किया की उससे मेरे बारे में भर भर के सभी नेगेटिव बातें hi bataya...Isse कुछ ख़ास फायदा तो होगा nahi...Lekin वो मुझे नफरत में भुला कर आगे बढ़ jaayegi...Aur vakt...Wo तो सभी का दर्द भर hi देता है.

इस बात में भी सुमित का दर्द साफ़ दिख रहा tha...Dusri तरफ से कुछ आवाज नहीं आया.

सुमित भी कीर्ति की जवाब का इंतजार करने लगा.

तुम्हारे इस बात पर भी विश्वाश नहीं हो रहा है.

यही तो बात hai...Trust इशू का प्रॉब्लम है हमारे bich...Pehle मुझे तुम्हारे प्यार पर विश्वाश नहीं हुआ और आज जब है तो तुम्हे मुझ पर विश्वाश नहीं है.

दूसरी तरफ से फिर कोई जवाब नहीं आया.

मजबूर tha...Jab तुम तक पहुंचने का सारा राष्ट बंद हो चूका था तो सिर्फ यही राष्ट नजर aaya...Itna कमजोर पद गया था की न चाहते हुए भी ये राष्ट चुनना pada...Ye भी डूबता को तिनके की सहारा tha...Iss राश्ते पर भी यकीं नहीं था की शायद तुम्हे फिर से देख सकू.

और जब आज ये राष्ट सफल हुआ तो फिर भी दिल में बोझ hai...Sahi कहते है log...Galat काम से कभी ख़ुशी नहीं मिलता.

लेकिन अब्ब कर भी क्या सकता हु? मेघा के लिए दुआ मांगने का अलावा और उसके दिल में अपने लिए नफरत भरने के अलावा.

दूसरी तरफ खामोशी hi छाया रहा.

शायद तुम्हे अब्ब भी यकीं nahi...Sharminda हूँ खुद की इस लाचारी पर जो तुम्हे यकीं दिला नहीं पा रहा हूँ.

अब्ब प्लीज पकाना बंद करोगे? जाओ यहाँ se...Aur इर्रिटेट मत करो.

इस घुटन से भरी आवाज ने सुमित को एक बार फिर तोड़ दिया.

शायद तुम सच में नफरत hi करने लगी हो.

खैर, इंतजार था तुम्हारा, है और rahega...Jab भी प्यार का एहसास और विश्वाश तुम्हे फिर से hoga...Aa jaana...Tumhare लिए दिल का दरवाजा हमेशा खुला रहेगा.

इतना कह कर सुमित वह से जाने laga...Tabhi कुछ सोचते हुए उसने कहा.

लेकिन कभी सिम्पथी या फिर मेरा लाचारी देख कर प्यार मत karna...Jab दिल से प्यार हो तब hi मुझे अपनाना.

इतना कह कर सुमित गेट तक पहुँच गया था.

तुमने मुझे हमेशा नफरत भरी नजरों से देखा hai...Kabhi प्यार भरी एक नजर देख lena...Shayad ख्याल बदल जाए.

इतना कह कर सुमित वह से चला गया.

सुमित के गए हुए 5 मिनट्स hi हुए थे की तेजी से कोई रूम में एंटर करता hai...Aur एंटर करते hi.

तू ठीक तो है ना मेघा?

इसी आवाज के साथ मेघा वापस होश में aayi...Sumit की बातों ने तो उससे बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया था.

मेघा:- हाँ ठीक hun...Mujhe क्या होगा?

कीर्ति:- सुमित आया था?

मेघा:- Haan...Lekin क्यों?

कीर्ति:- विवेक के साथ बाहर गयी thi...Ussi ने बताया की आते वक्त उसने सुमित को यहाँ रूम में आते देखा है.

बहुत कमीना है wo...Mauka मिला नहीं की सुरु हो जाता है अपना असली रंग दिखाना.

नफरत भरी आवाज में कीर्ति ने कहा.

मेघा में कोई जवाब नहीं diya...Wo अभी भी गहरी सोच में डूबी थी.

उससे इस बार सुमित की बातों में यकीं हो रहा tha...Nasha भी इतना छाया था सुमित पर की वो मेघा और कीर्ति की आवाज को पहचान तक नहीं पाया था.

मेघा जिस सुमित की असलियत को पता करने की कोशिश कर रही thhi...Aaj उसी सुमित ने सब कुछ नशे में बक दिया.

सुमित ने जब पहली बार उससे कीर्ति कह कर बुलाया था तब hi उससे वो मौका भी मिल गया जिससे वो सच्चाई सुमित से hi उगलवा सकती thi...Aur सुमित ने सब बता भी दिया.

मेघा को यकीं नहीं हो रहा था की सुमित तो एकदम से अलग nikla...Uske सोच और समझ के baahar...Sumit का वो dard...Abb मेघा को भी कही न कही परेशान करने लगा था.

एक बार फिर मेघा ने सुमित को याद किया शुरुवात से ले कर अब्ब tak...Sumit का कीर्ति से प्यार के बारे में जाने के बाद से ले कर अब्ब तक सुमित में उससे एक लाचार आशिक़ दिखने लगा एक धोखेबाज़ की जगह.

दूसरी तरफ विवेक.

विवेक:- (तो हिमसेल्फ) Shit...Ek गोल्डन चांस मिस हो gaya...Kirti को थोड़ी देर पहले hi भेजना चाहिए था.

सुमित को नशे की हालत में मेघा के साथ देख वो सुमित से और भी नफरत करने लगती.

फिर विवेक अपने प्लान के बारे में सोचने लगता hai...Kaise उसने प्लान कर के कीर्ति को पहले hi रूम से बाहर भेज दिया था और सुमित का नशे का फायदा उठा कर उसको मेघा के पास भेज दिया.

विवेक:- (तो हिमसेल्फ) साले Sumit...Kirti से बात करने के लिए तो पागल हो जाता hai...Megha के साथ थोड़ी देर और बात नहीं कर सकता था?

पूरा प्लान बिगाड़ diya...Ummeed है की कीर्ति को मेघा पर शक हो जाए.

कुछ देर गुस्से में इधर उधर भटकने के बाद.

विवेक:- कुछ भी हो jaaye...Kirti तो मेरी hi है.
 
अपडेट 46

बारिश का मौसम.

प्यार करने वालों पर तो अलग hi असर होता है बारिश ka...Baarish में साथ भींगने का मजा हो या फिर बारिश ख़त्म होने के बाद मिलान की intejaar...Bahut hi ख़ास मौसम होता है बारिश का.

और कुछ लोग जिन जे प्यार को मंजिल नहीं milta...Unke लिए भी बहुत ख़ास मौसम होता है ye...Aasman के तरफ बारिश के बूँद को गिरता देख अपने यादों में खो jaana...Pyaar का अलग hi अनुभव होता है.

कुछ यही हाल था सुमित ka...Hotel से बाहर एक पत्थर पर पिछले 1 घंटे से भंग रहा tha...Kabhi मुस्कुराता, कभी अपने ग़म में दुब जाता तो कभी कीर्ति की रूम के खिड़की के तरफ देख leta...Shayad एक झलक hi मिल जाए?

सुमित को इस हाल में देख मेघा को भी अच्छा नहीं लग रहा tha...Megha भी पिछले 1 घंटे से छत से निचे सुमित को देख रही thi...Aaj मेघा को सुमित का दर्द साफ़ दिख रहा था.

कुछ देर ऐसे hi पत्थर में बैठे रहने के बाद सुमित वह से उठ कर कही जाने लगा.

सुमित का ये हाल और मौसम का ये रूप देख मेघा को भी दर लग रहा tha...Tej बारिश, तेज हवाएं और आसमान में चमकते bijli...Mausam बहुत खतरनाक लग रहा था लेकिन Sumit...Wo बेपरवाह हो कर आगे बढ़ रहा था.

मेघा भी डरते हुए सुमित के पीछे जाने लगी.

कुछ दूर आगे जाने के बाद सुमित रुक gaya...Saamne एक नदी tha...Baarish का असर नदी पर भी साफ़ दिख रहा था जो अभी बारिश में विकराल रूप ले चूका था.

वही नदी के पास एक पत्थर में बैठ कर सुमित नदी को देखते हुए अपने ख्यालों में खो गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) 4 दिन हो गए कीर्ति को अपने दिल की बात बता चूका hun...Kabhi लगता है वो मुझे समझ रही है और कभी nahi...Kabhi मुश्कुरा कर बातें करती है तो कभी एकदम से गुस्सा हो जाती है.

कुछ समझ में नहीं आ रहा hai...Pata नहीं उसकी इस गुस्सा का क्या मतलब है? क्या वो चाहती है की मई उससे और मनाओ? अगर हाँ तो एक इशारा तो kare...Puri दुनिया छोड़ कर उसके पीछे आया hun...Usse मनाना कौन से बड़ी बात है.

लेकिन ना hi कुछ बोलती है और ना hi कुछ इशारा करती है.

कुछ ऐसे hi बातें सोच कर सुमित परेशान हुआ जा रहा tha...Aur जब कुछ समझ में नहीं आया तब उसी पत्थर में एक जोर का मुक्का मार diya...Dard तो बहुत हुआ लेकिन ये दर्द भी उसके दिल और दिमाग के दर्द के मुकाबले फिक्का पद रहा था.

सुमित को इस हाल में देख मेघा भी सुमित के पास पहुँच गयी.

सुमित:- तुम यहाँ...

हैरानी में बस इतना hi बोल पाया सुमित.

मेघा:- Haan...Lekin तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

सुमित:- बस ऐसे hi...Socha प्रकृति का हे दृश्य देखा jaaye...Baarish में यहाँ का नजारा काफी खूबसूरत लग रहा tha...To आ गया घूमने.

मेघा:- लेकिन बीमार पद गए तो?

सुमित:- इम्यून सिस्टम मजबूत hai...Kamjor हो रहा है तो बस ये लिम्बिक सिस्टम (रिलेटेड विथ इमोशन)

सुमित ने आखिरी के लाइन धीरे से कहा लेकिन मेघा ने फिर भी सुन liya...Sumit का ये दर्द देख मेघा भी कुछ बोल नहीं पायी.

सुमित:- लेकिन तुम यहाँ? इस बारिश में क्या कर रही हो?

मेघा:- बारिश में भींगना बहुत पसंद hai...Lekin सोचा माहि था तुम यहाँ मिलोगे.

सुमित:- सोचा तो तुमने तब भी नहीं होगा की मई ऐसे तुम्हारे लाइफ में मिलूंगा.

सुमित ने मजाक उड़ाते हुए kaha...Lekin आज मेघा को उतना गुस्सा नहीं आया.

मेघा:- जैसा कर्म करोगे वैसा hi फल milega...Ye बात आज नहीं तो कल तुम्हें पता चल जाएगा.

मेघा ने ये बात मुश्कुराते हुए कहा लेकिन ये बात सुमित के दिल में चुभ गया.

सुमित:- (इन हिज मंद) सच hi तो है.

मेघा:- कर लो अपना अच्छे और बुरे काम का hisaab...Jiska वजन ज्यादा है वैसे hi न्याय मिलेगा.

सुमित का दर्द का एहसास होते hi मेघा ने बात बदल लिया.

सुमित:- (इन हिज मंद) बिलकुल galat...Sirf कुछ hi गलतियां karo...Jindagi नर्क से भी बुरा बनने में वक्त नहीं lagta...Khair अच्छा hi hai...Aage गलती करने से पहले 10 बार सोचूंगा.

सुमित को चुप देख मेघा भी चुप हो जाती hai...Dono की नजर सामने बह रही नदी पर था.

मेघा:- ये नदी देख कर तुम्हारा hi याद आता है.

सुमित ने सिर्फ सवालियां नजरो से देखा.

मेघा:- अभी देखो ये नदी कितना तेज बह रहा hai...Apne मंजिल की तरह आगे बढ़ रहा hai...Bina किसी के रोके रुक रहा hai...Aur इतने सारे पत्थर भी इसके बहाव को रोक नहीं पा रहा hai...Thik 1 साल पहले के तुम jaise...Kitna कॉंफिडेंट थे tum...Aisa लगता था तुम उन् में से हो जो अपने जिंदगी अपने तौर पर जीते है बिना किसी के रुकावट के.

लेकिन ये वारिश ख़त्म होने के बाद इस नदी का हाल dekhna...Ekdum से शांत पद jaayega...Bilkul एक ज़िंदा लाश की tarah...Jo तुम्हारा अभी का हाल है.

ये कह कर मेघा सुमित को देखती है और सोचती है.

मेघा:- (इन हेर मंद) अब्ब तो कुछ bolo...Aise कब तक घुटते rahoge...Thoda तो गुस्सा और दर्द nikaalo...Aise तो और कमजोर पद जाओगे.

लेकिन सुमित अलग hi ख्याल में खोया हुआ था.

सुमित:- (इन हिज मंद) वो एक गलती उस चट्टान (रॉक) की तरह है जिसने मेरा पूरा बहाव hi बदल diya...Dhund रहा हूँ मंजिल फिर se...Majil एक बार मिल जाए बहाव वापस आने में वक्त नहीं लगेगा.

लेकिन मेघा को उसने जवाब दिया.

सुमित:- पहाड़ी नदी hai...Bahaav के बारे में ऐसे hi फैसला मत lo...Kab शांत पड़ना है और कब तबाही लाना है ये नदी को hi पता चलता है.

सुमित ने इतना कहा hi था की मेघा का नजर सुमित की दाया हाथ पर pada...Iss बार हाथ का वो घाव भी दिखा जो कुछ देर पहले पत्थर पर मारने की वजह से बना था.

मेघा:- तुम्हारे पास दूसरा शर्ट है?

ये सवाल सुमित के समझ के बाहर का था.

सुमित:- क्या मतलब?

मेघा:- जवाब दो.

सुमित:- हाँ hai...Lekin...

सुमित के बात करने से पहले hi मेघा सुमित के पास पहुँच कर उसका शर्ट फाड़ने लगती है.

सुमित:- Ye...Ye क्या कर रही हो?

सुमित पीछे हैट कर बोलै.

सुमित:- नया शर्ट hai...Aur तुम क्या कर रही हो ये सब?

सुमित अभी भी हैरानी से मेघा को देख रहा था.

मेघा:- अपना हाथ dekho...Abhi भी खून निकल रहा hai...Aur ऐसे मौसम में इन्फेक्शन का चांस बढ़ jaayega...Shirt के टुकड़े से बैंडेज बनाना है.

सुमित अपने हाथ की तरफ देखता hai...Abhi भी खून के कुछ बूँद गिर रहे थे.

सुमित:- थोड़ी देर मई ब्लीडिंग बंद हो jaayega...Coagulation सिस्टम भी अच्छा है मेरा.

मेघा:- अभी डॉक्टर नहीं पेशेंट हो tum...Aur इस वक्त तुम्हारा डॉक्टर मई हु.

थोड़ी तेज आवाज में बोली मेघा.

सुमित:- लेकिन पेशेंट की कंसेंट तुम्हें नहीं मिलेगा.

मेघा:- तुमने कंसेंट लिया था मेरे लाइफ के साथ ये मजाक करने के लिए?

इस बात पर सुमित एकदम चुप हो gaya...Megha को अपनी तरफ आता देख वो खुद hi शर्ट खोल कर मेघा को देता है.

सुमित:- फाड़ने की जरुरत नहीं hai...Kirti की बर्थडे के दिन ख़रीदा tha...Khud के लिए hi गिफ्ट.

फिर मेघा सुमित का घाव साफ़ कर के हाथ पर वो शर्ट कास कर बाँध देती है.

मेघा:- थोड़ा तो ख्याल करो अपना.

इस बार मेघा की आवाज में केयर था.

मेघा शर्ट बाँध कर फिर थोड़ी दूर पर जा कर बैठ जाती है.

सुमित जो अभी सिर्फ बनियान में था कुछ hi देर में उससे ठण्ड महसूस होने लगता है.

सुमित को कांपता देख.

मेघा:- क्या हुआ?

सुमित:- थोड़ा सा ठण्ड है.

मेघा:- अब्ब क्या हुआ? तुम्हारा स्किन अच्छा नहीं है क्या? वो क्या सिस्टम कहते है? हाँ इन्टेगुमेंटरी system...Ye अच्छा नहीं है?

सुमित इस बार कोई जवाब नहीं दे पाया.

जब कुछ देर बाद सुमित को और भी ठण्ड लगने लगती है.

मेघा:- चलो.

सुमित:- तुम jaao...Mai बाद में आऊंगा.

मेघा:- मैंने कहा चलो.

मेघा की इस तेज आवाज को सुमित मन नहीं कर paaya...Dono अब्ब वापस होटल की तरफ चल पड़ते है.

सुमित:- (इन हिज मंद) मई जिसके करीब जाना चाहता हूँ वह मुझसे दूर भागती है और जिससे दूर जाना चाहता हूँ वो और करीब आ रही है.

मेघा भी तब hi मेरे पास होती है जब मई खुद को कमजोर महसूस कर रहा होता हूँ और जब अकेला रहना चाहता हूँ.

पता नहीं जिंदगी आगे और क्या क्या दिन दिखायेगा?

कीर्ति:- कहा थी अब्ब तक?

मेघा का रूम में एंटर करते hi कीर्ति ने पूछा.

मेघा:- बारिश में भींगने गयी थी.

कीर्ति:- बच्ची है क्या? जो ऐसे बारिश में भींगने गयी thi...Beemar पद गयी तो?

मेघा:- समझदार हो गयी hun...Aur ये अच्छे से समझती हूँ की पानी में भींगने से कोई प्रलय नहीं आ जाएगा.

थोड़ा बहुत सर्दी और bukhaar...Isse ज्यादा? और इस दर में अपनी अपनी दिल की बात सुन्ना छोड़ दूँ?

कीर्ति ने इस बार कुछ नहीं कहा.

मेघा:- तुझसे कुछ बात करनी है?

कीर्ति:- हाँ बोल.

मेघा:- सुमित ऐसा नहीं है जैसा तू सोच रही है.

कीर्ति हैरानी से मेघा को घूरती है.

कीर्ति:- अब्ब तुझ पर क्या जादू कर दिया उसने?

मेघा:- इस बार इग्नोर मत कर प्लीज.

कीर्ति:- मुझे उसके बारे में कुछ बात नहीं करना है.

मेघा:- पहले बात तो सुन.

कीर्ति:- नहीं उसके बारे में कोई बात नहीं.

मेघा इस बार चुप हो जाती hai...Aur कीर्ति को सिर्फ गुस्से से देखती है.

कीर्ति:- अच्छा तू बता? तू उसको ज्यादा जानती है या मई?

मेघा:- मई...1 साल से जानती हूँ usko...Aur तू सिर्फ 1 महीना.

कीर्ति:- लेकिन तुझसे अच्छे से मई उससे समझती हूँ.

मेघा:- Galat...Usse बेहतर भी मई hi समझती hun...Har बात को ध्यान से सुना है समझा hai...Har हरकत को जाना hai...Aaj भी वो तुझसे बहुत प्यार करता hai...Aise इग्नोर मत कर यार उसको.

कीर्ति:- तेरी बात सुन कर तो ऐसा लग रहा है जैसे तू hi उससे प्यार करने लगी है.

मेघा:- मेरी बात chhod...Agar दिल में अभी भी थोड़ा प्यार बाकी है तो दूर जाने मत दे यार usko...Saccha प्यार करने वाले लोग बहुत काम को मिलते है.

अभी ईगो में आ कर उसका दिल मत तोड़ की कही उसका प्यार शब्द से hi विश्वाश न उठ जाए?

दूसरी तरफ Sumit...Wo भी अपने रूम की तरफ जा hi रहा था की विवेक की रूम से आ रही कुछ आवाज ने उसका ध्यान आकर्षित किया.

वैसे तो सुमित को किसी के बात से कोई मतलब नहीं tha...Lekin ये बातें अलग tha...Sumit जैसे hi बातें सुन रहा था हैरानी में उसकी आँखें और भी बड़ा हो रहा था.
 
अपडेट 47

विवेक:- समझ में नहीं आ रहा है कैसे बताओ कीर्ति को अपने दिल की बात?

यही वो बात था जिसने सुमित को विवेक की बात सुनने के लिए मजबूर किया.

दूसरी तरफ से:- अबे बता de...Itna क्या सोच रहा है?

विवेक:- अगर मना कर दिया तो...

विवेक की आवाज में दर था.

दूसरी तरफ से:- अच्छा एक बात bata...Tera कीर्ति के साथ कैसा रिलेशन है?

विवेक:- Friendly...Sirf फ्रेंडली.

मायूस आवाज में बोलै विवेक.

दूसरी तरफ से:- अबे चूतिये...1 साल से कीर्ति के साथ hai..Aur सिर्फ फ्रेंडली hi hai...Kya गाली दू समझ में नहीं आ रहा है.

दूसरी तरफ से अपने दोस्त को गुस्सा होता देख विवेक और भी परेशान हो गया.

विवेक:- तुझे सुग्गेस्टिव के लिए पूछ रहा hun...Ulta तू hi मुझे डिमोटिवेट कर रहा है.

दूसरी तरफ से:- तो क्या karu...Itna टाइम काफी होता है फ्रेंडली से भी आगे बढ़ने ki...Lekin तू...

विवेक:- ये सब उस सुमित की वजह से हुआ है.

इस बार विवेक की आवाज में गुस्सा था.

दूसरी तरफ से:- ये सुमित है कौन? और क्या कर दिया इस ने.

विवेक:- कीर्ति पहले उससे प्यार करती thi...Aur उस सुमित ने जब से कीर्ति का दिल तोडा है कीर्ति का प्यार से विश्वाश उठ चूका है.

और वो साला इस टूर में भी कीर्ति का पीछा पड़ा hai...Dil तो कर रहा है की....

सुमित का नाम जुबान में आते hi आवाज में भी गुस्सा भर जाता विवेक का.

फिर दोनों के बिच ऐसे hi बातें होता hai...Kabhi सुमित के बारे में तो कभी फ़ालतू की बातें.

कुछ देर बाद.

दूसरी तरफ से:- एक काम kar...Tu हमेशा hi सीरियस टाइप लगता hai...Aur शायद यही वजह है कीर्ति का तू सिर्फ दोस्त hi रह गया है.

थोड़ा इमोशनल बनने की तरय kar...Shayad तेरा काम बन जाए.

विवेक:- हाँ तरय करता हूँ.

दूसरी तरफ से:- Abey...Kabhi तो कॉंफिडेंट हो jaa...Aise लूज़र की जैसे बात करके कीर्ति को पतयेगा.

विवेक:- Chal...Pata कर hi दिखाऊंगा.

जबरदस्ती का कॉन्फिडेंस अपने आवाज में भर कर विवेक ने कहा.

दूसरी तरफ से:- हाँ ये हुई न baat...Apne साथ मेरा नाक भी मत कटवा dena...Chal...All थे बेस्ट.

ये कह कर दूसरी तरफ से कॉल कट हो जाता है.

विवेक:- (तो हिमसेल्फ) पता nahi...Kirti फिर भी मानेगी या नहीं.

सुमित को सिर्फ विवेक की hi आवाज सुनाई दे रहा tha..Lekin इतना काफी था सारे मामला समझने के लिए.

वो अब्ब अपने रूम में चला gaya...Dil एकदम से खुश हो gaya...Aakhir होता क्यों नहीं? उसकी Kirti...Wo भी तो प्यार के सफर में सुमित से आगे नहीं बढ़ी hai...Jo भी फीलिंग्स tha...Pyar का या नफरत ka...Wo सिर्फ सुमित के liye...Filhaal यही काफी था सुमित के लिए.

सुमित:- एक दर tha...Wo भी ख़त्म हो gaya...Vivek से जो भी इन्सेक्युरित्य था वो बस कीर्ति की वजह से tha...Dar था की कही कीर्ति भी उससे प्यार तो नहीं karti...Lekin अब्ब कोई दर नहीं.

चाहे कितना भी चालबाज़ी कर ले विवेक tu...Kirti तो मेरी hi hai...Hai इतना विश्वाश खुद पर.

ख़ुशी के मारे सुमित रूम की चारो तरफ चक्कर लगा रहा था.

सुमित:- ऐसा लग रहा है पहले वाला सुमित बन रहा हूँ फिर se...Wohi vishwash...Wohi jidd...Abb तो कीर्ति मेरी hi है.

बस नफरत को hi तो प्यार में बदलना hai...Badal dunga...Pyaar का वो एहसास दिलाऊंगा अपनी कीर्ति को की वो खुद दौड़ कर मेरे पा आएगी.

ऐसे hi ख़ुशी के साथ सुमित इधर उधर चक्कर लगा रहा था रूम ke...Uska अपने किस्मत से एक hi तो ख्वाहिश tha...Wo भी पूरा हो गया.

एक सही राष्ट hi तो माँगा था उसने कीर्ति तक पहुँचने ki...Aur वो आज उससे मिल gaya...Apne विश्वाश और हौसला के रूप में.

कुछ देर ऐसे hi खुद से बात करने के बाद सुमित को एक ख्याल आया.

सुमित:- (इन हिज मंद) वैसे मेहः मेरे लिए लकी hai...Jab भी वो मिलती है किस्मत भी एकदम से साथ देने लगता है.

सुमित:- (तो हिमसेल्फ) ये क्या फ़ालतू की बातें सोचने laga...Come ों Sumit...Just फोकस ों Kirti...Nothing ेल्स.

इन इवनिंग

सुबह से शाम तक बोर होने के बाद कीर्ति ने सोचा की शाम में नदी की तरफ घूमने के liye...Sabhi तैयार हो गए.

सुमित तो पहले से hi उत्शहित tha...Usse अब्ब और रहा नहीं गया.

सुमित:- वैसे मौसम कितना सुहाना हो गया है naa...Safed बादल और ठंडी hawaayein...Aur प्यार के ये ehsaas...Aisa महसूस हो रहा है की चारों तरफ हर एक कण (पार्टिकल) में प्यार hi प्यार hai...Aur इसका ये अध्भुत अनुभव.

कीर्ति की तरफ देख अपना ख़ुशी जाहिर करते हुए सुमित ने कहा.

सुमित की इस बात पर कीर्ति को तो कोई फर्क नहीं pada...Lekin मेघा सुमित को देख हैरान हो गयी थी.

कहा कुछ देर पहले टूटा हुआ और परेशान सा लगने वाला सुमित अभी एकदम से खुश दिख रहा है.

मेघा:- (इन हेर मंद) इसको आज तक समझ नहीं पायी हूँ तो अब्ब क्या समझूंगी.

लेकिन सुमित को खुश देख मेघा को भी अच्छा लग रहा था.

सुमित:- प्रकृति का ये नजारा तो dekho...Kitna सुन्दर hai...Chaaron तरफ बड़े बड़े पहाड़ hai...Jiska सर बादलों को भी चीयर कर शान से खड़ा hai...Saamne से ये बहती नदी जिसका बेग (स्पीड) ये दिखाता है की ये अपने मंजिल से मिल जाने के लिए कितना आतुर है.

और इसी प्रक्रिया में इस नदी से उत्पन्न होता मधुर sangit...Jo कान के रास्ते हो कर दिल और दिमाग दोनों को उमंग से भर देता hai...Aur ये तेज और ठंडी hawaayein...Jiska कण कण में सिर्फ प्यार hi प्यार है.

प्रकृति का ये नजारा किसी मूवी के वो हीरो और हीरोइन के डांसिंग लोकेशन से काम नहीं hai...Mai तो तैयार hun...Intejaar है तो बस अपनी हीरोइन की.

सुमित ने कीर्ति को देख प्यार से कहा.

मेघा:- वैसे तुम बात किस्से कर रहे ho...Yaha कोई भी तुमसे बात नहीं कर रहा है और ना hi करने के मूड में लग रहा है.

सुमित:- ये दिल की बात hai...Isse दूसरा दिल hi समझ सकता hai...Waise दो दिल की बातें कोई और समझ भी नहीं सकता.

एक बार फिर सुमित की नजर कीर्ति पर tha...Lekin कीर्ति इग्नोर कर आगे बढ़ जाती है.

सुमित अपने hi जगह खड़ा रह जाता hai...Teeno को आगे बढ़ते देख मुस्कुराने लगता hai...Jab कीर्ति थोड़ी दूर चली गयी तब.

Kirti...I लव यू.

सुमित ने ये एक बार kaha...Lekin ये आवाज कीर्ति को बार बार सुनाई दे रहा था.

काम hi ऐसा किया था सुमित ne...Karib 20 मीटर की दुरी से एक पहाड़ की तरफ मुंह कर के जोर से अपने प्यार का इजहार किया tha...Aur वही आवाज पहाड़ों में प्रतिबिम्ब (रिफ्लेक्शन) के रूप में कीर्ति को सुनाई दे रहा था.

लेकिन इसका भी कुछ फायदा नहीं हुआ सुमित ko...Kirti का चेहरा गुस्से से और लाल हो गया.

कीर्ति.

एक तेज आवाज के साथ कीर्ति पीछे मुड़ी.

पीछे मुड़ती hi देखा सुमित नदी के बिलकुल करीब था.

सुमित:- सोच रहा हूँ शोले के अंदाज़ में तुम्हे प्रोपोज़ करू.

कीर्ति कुछ नहीं kehti...Bas गुस्से से सुमित को देखती है.

सुमित:- अब्ब यहाँ पानी का टावर तो है नहीं तो सोचने पर सामने दिखा पानी का नदी.

सुमित की इस बात पर सभी हैरान हो जाते है कीर्ति के alawa...Abhi भी कीर्ति को कुछ ख़ास फर्क नहीं पड़ा था.

सुमित:- अगर तुमने मेरे प्यार को नहीं अपनाया तो मई इस नदी में कूद जाऊँगा.

सुमित की ये आवाज से वो कितना सीरियस है कोई अंदाज नहीं लगा पा रहा था.

मेघा भी डरते हुए नदी को देखती hai...Dopahar से तो नदी की बेग और गहराई में थोड़ा कमी तो आया tha...Lekin अभी भी नदी किसी भी इंसान को बहा ले जा सकता tha...Aur एक बार नदी में गिर जाने के बाद इतना आसान नहीं था जिन्दा बाहर निकलना.

सुमित:- सच कह रहा हूँ Kirti...Apne प्यार की kasam...Tumne मेरा प्यार को नहीं अपनाया तो सच में कूद जाऊँगा.

इस बार सुमित की आवाज और भी सीरियस था.

सभी हैरान थे की सुमित को अचानक क्या हो गया है? कुछ देर पहले तो बहुत खुश tha...Lekin अब्ब?

मेघा:- कुछ तो बोल.

मेघा की आवाज में भी दर साफ़ दिख रहा था.

कीर्ति फिर भी चुप थी.

सुमित:- सिर्फ 10 तक गिनूंगा कीर्ति.

मेघा:- रोक ले उसको.

कीर्ति:- अच्छे से जानती हूँ isko...Bahut बड़ा ड्रामेबाज़ hai...Nahi kudega...Isko सिर्फ अटेंशन चाहिए.

सुमित:- अटेंशन नहीं तुम्हारा प्यार चाहिए.

इसके बाद सुमित अपना गिनती सुरु कर देता है.

मेघा बार बार कीर्ति को मना रही थी.

कीर्ति:- कह दिया naa...Ye नहीं kudega...Sab कुछ जानती हूँ इसके बारे में.

कीर्ति ने भी जिद्द पकड़ लिया की वो सुमित को नहीं रोकेगी.

सुमित:- 3...2...1

और देखते hi देखते सुमित ने नदी पर छलांग लगा दिया.

इस बार कीर्ति की भी आँखें हैरानी में बड़ी हो गयी और दर के मारे उसके हाथ पेअर एकदम से काम करना बंद कर चूका था.

नदी अपने बेग से सुमित को अपने साथ ले जा रहा था.

जहा पहले कीर्ति और सुमित के बिच की दुरी 50 मीटर था छलांग लगाने से पहले और अब्ब वही नदी सुमित को कीर्ति के आँखों के सामने से ले जा रहा था.

कीर्ति अपना हाथ आगे बढ़ा कर सुमित को रोक लेना चाहती थी लेकिन रोक नहीं पायी.

सुमित मुस्कुराता हुआ कीर्ति की नजर से दूर जाने लगा.

मेघा का हाल भी कुछ ठीक नहीं tha...Usse भी अपने आँखों पर विश्वाश नहीं हो रहा tha...Aur दिल का दर्द अलग.

Vivek...Wo भी सुमित ऐ चाहे कितना नफरत करे लेकिन सुमित का ऐसा कर जाना उससे भी अच्छा नहीं लग रहा था.

करीब 20 मीटर और दूर जाने के बाद सुमित के हाथ और पेअर काम करना चालू कर देता hai...Aur थोड़ा म्हणत करने के बाद सभी को फिर से चौंकातु हुए वो नदी से बाहर सुरक्षित निकल आता है.

होंठो में वही मुस्कान के साथ कीर्ति की तरफ बढ़ने लगता है.

कीर्ति भी दौड़ कर सुमित की तरफ जाती है.

सुमित:- कैसा लगा मेरा स्विमिंग?

चटाक.

एक जोर का थप्पड़ सुमित के गाल पर लगता है.

सुमित:- ारी मई.

चटाक.

दूसरे गाल में भी कीर्ति के पांचो ऊँगली के चाप बन जाते है.

कीर्ति:- ऐसे बेवकूफी कर के तुम्हे लगता है मुझे मना लोगे?

सुमित:- Chill...Suicide नहीं स्विमिंग करना चाहता था.

सुमित ने मुस्कुराते हुए कहा लेकिन कीर्ति अभी भी गुस्से में थी.

सुमित:- Megha...Kya कह रही थी कीर्ति तुमसे? मेरे बारे में सब कुछ जानती है.

कुछ नहीं जानती है ये pagli...Isse तो ये भी नहीं पता की मेरा फवौरीते एडवेंचर hai...Rafting...Aur स्विमिंग तो जैसे मेरे खून में दौड़ता है.

(कीर्ति को देख कर) ना तुम्हे मेरा होब्बीएस का पता है और ना hi मेरे प्यार का ehsaas...Kabhi जान्ने की तो कोशिश करो सच कहता hun...Pyaar हो जाएगा तुम्हे भी.

सुमित ने कीर्ति की आँखों में देखते हुए कहा.

और फिर विवेक की तरफ जाते हुए.

सुमित:- Kirti...Tumhaare लिए मेरा प्यार और भी बढ़ gaya...Bahut सही डिसिशन था tumhara...Kisi के इमोशनल हो जाने का मतलब ये नहीं की वो प्यार hai...Aur कोई इमोशनल है ये सोच कर उस पर तरस खा कर प्यार नहीं करते.

प्यार तो दिल से होता hai...Jab दिल से प्यार का सच्चा एहसास हो तभी किसी के प्यार को अपनाना चाहिए.

वर्ण सुसाइड के धमकी से प्यार को काबुल करवाने वाले तो बहुत milenge...Aur याकि मानो जो सुसाइड का सोचता है हर फ़ालतू के चीज में उससे कमजोर इंसान कोई नहीं.

और ना hi उन् पर कभी विश्वाश करना जो कुछ ज्यादा hi इमोशनल बनने की कोशिश करे.

ये कहने के बाद सुमित विवेक को देखता है.

सुमित:- वैसे Kirti...Mujhe प्यार करना तुमने hi सिखाया hai...Aage भी पागलपन karunga...Bas इस टाइप के nahi...Yaad है मैंने जब तुम्हे मन किया था तब तुमने जिद्द पकड़ लिया था और मुझसे हाँ बुलवा कर hi maana...Abb मई भी तुम्हारे पीछे पड़ jaaunga...Aut हाँ बुलवा कर hi मानूंगा.

कीर्ति:- तो तुम अब्ब टार्चर करोगे?

सुमित:- नहीं प्यार का एहसास दिलवाऊंगा.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं boli...Bas उस सदमा से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी.

दूसरी तरफ सुमित को सही सलामत देख मेघा के सांस में सांस आया.

सुमित:- Hello वप :डी

विवेक:- क्या मतलब है तेरा? इमोशनल क्या कह रहा था.

विवेक ने धीरे से कहा कही कीर्ति और मेघा सुन न ले.

सुमित:- सही सोच रहा है.

विवेक:- मतलब...

सुमित:- हाँ वही.

फिर विवेक हैरानी से सुमित को देखता hi रह जाता है.

सुमित:- तेरा ये इमोशन का ढोंग बेकार बनाने के लिए ये कर सकता हूँ तो सोच कीर्ति को प्यार का एहसास दिलाने के लिए क्या कुछ नहीं कर सकता?
 
अपडेट 48

आज सुमित के साथ मई चलूंगी.

अगले दिन सुबह कीर्ति की इस बात ने बाकी तीनो को हैरानी में दाल दिया.

सुमित को तो एक पल के लिए विश्वाश hi नहीं hua...Aur जब विश्वाश हुआ तब मानो ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं raha...Kisi तरह खुद के भावना पर नियंत्रण किया.

तभी उसको एक शरारत सुझा.

पास में hi खड़े मुंह लटका हुआ विवेक के हाथ में जोर से पिंच कर दिया.

विवेक:- Ouch...Ye क्या कर रहा है?

बेहद गुस्से में विवेक ने pucha...Pehle कीर्ति का वो निर्णय और अब्ब सुमित का ये हरकत.

सुमित:- सच है या सपना? जाने की कोशिश कर रहा था.

विवेक:- तो मुझे क्यों पिंच किया? खुद पर करता.

विवेक गुस्से से सुमित को घुरा जा रहा था.

सुमित:- पता था तू ऐसे hi bhaunkega...Issi लिए तुझ पर hi तरय kiya...Khair, अब्ब कन्फर्म हो गया की ये सच है.

विवेक:- कीर्ति तुम्हारी वजह से चुप hun...Warna इसका क्या हाल करूँगा वो मई खुद नहीं जानता.

कीर्ति:- गलत बात है ये सुमित.

इस बार कीर्ति की बातों में वो गुस्सा नहीं था.

विवेक:- ोुछःह

सुमित:- डोंट mind...Ek और बार कन्फर्म कर रहा था.

उसके बाद विवेक ने सुमित पर गालियों के वरसात कर diya...Shakahaari (वेग) वाले :D...Kirti के सामने अपना इमेज खराब भी तो नहीं कर सकता था. :नू:

लेकिन सुमित को इस बात से क्या मतलब tha...Wo तो बस कीर्ति में hi खोये जा रहा था.

कीर्ति:- चलना नहीं है क्या.

सुमित:- हाँ चलो.

उत्शाहीत हो कर सुमित ने kaha...Aur कीर्ति की तरफ बढ़ गया.

वही विवेक अपने मन में.

विवेक:- (इन हिज मंद) बस कीर्ति की वजह से कुछ नहीं कर रहा hun...Sharaafat का ये जो मुखौटा है कीर्ति के saamne...Bas इसी ने मेरा हाथ बाँध रखा hai...Warna क्या हाल करता मई खुद नहीं जानता.

और ये कीर्ति को भी क्या हो गया hai...Abb तो वो भी सुमित के साइड ले रही है.

विवेक के गुस्सा का कोई ठिकाना नहीं tha...Lekin मजबूर tha...Vajah wohi...Kirti की मौजूदगी.

मेघा का भी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं था.

मेघा:- (इन हेर मंद) अचानक से ये कीर्ति को क्या हो gaya...Kal रात तक तो सुमित से बहुत गुस्सा thi...Aur कल तक का ये नफरत आज अचानक से कैसे बदल गया?

इस सवाल के जवाब तो फिलहाल मेघा के पास भी नहीं था.

फिर सुमित और कीर्ति अपना बप सेट्स ले कर अपने रास्ते चले जाते hai...Megha को भी न चाहते हुए विवेक के साथ जाना पड़ता है.

रास्ते में ख़ुशी से गन गुनाते हुए सुमित चल रहा tha...Kirti भी पास में hi thi...Lekin वो बिलकुल hi चुप थी.

सुमित:- कुछ तो bolo...Tumhari एक आवाज सुनने के लिए बेकरार हु.

कीर्ति:- क्या बोलू?

सुमित:- कुछ bhi...Tumhari हर एक बोल कोयल की मधुर आवाज से काम नहीं लगता.

कीर्ति:- अभी तक वैसे hi फ्लिर्टिंग जार रहे हो?

थोड़ा शिकायत के साथ कीर्ति ने पूछा.

सुमित:- नहीं अभी भी वैसा hi प्यार करता हूँ.

इस बार कीर्ति कुछ नहीं बोलती.

कुछ देर दोनों ऐसे hi चुप चाप चलते hai...Sumit ख़ुशी में कभी कीर्ति को देखता तो कभी अपने सपनो की दुनिया में खो jaata...Ek नयी शुरुवात के सपने.

कीर्ति:- बहुत बदल गए हो tum...Lekin एक चीज आज भी वैसा hi है.

सुमित:- (इन हिज मंद) मई बदल गया हूँ? इस प्यार के दीवानापन में खो कर आज भी वही हूँ जहा 3 साल पहले था.

कीर्ति:- तुम्हारा कॉन्फिडेंस और स्ट्रांग personality...Aaj भी किसी के सामने नहीं झुकते हो.

सुमित:- झुकता hun...Jo मेरे लिए बहुत hi ख़ास है.

कीर्ति की आँखों में देख सुमित ने जवाब दिया.

कीर्ति ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया.

सुमित:- और मेरा प्यार? वो भी तो बदला नहीं है?

कीर्ति:- लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता.

अभी भी विश्वाश की कमी देख सुमित थोड़ा निराश हो जाता hai...Lekin जल्द hi संभल कर.

सुमित:- बस कुछ दिन aur...Fir तुम्हारा ये शिकायत भी दूर कर दूंगा.

कीर्ति ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया.

ऐसे hi फिर कुछ देर चुप चाप चलने के बाद कीर्ति hi बोली.

कीर्ति:- अगर तुम सच मान कर माफ़ी मांग लेते पहले hi तो बात शायद कुछ और hota...Lekin तुम हमेअह जस्टिफाई hi करते रह gaye...Tum और तुम्हारा ईगो.

गहरी सोच से निकलते हुए कीर्ति ने pucha...Baaton में अभी भी शिकायत था.

सुमित:- अगर सच में गलती करता तो जरूर उस बात के लिए माफ़ी maangta...Lekin झूठ बोल कर मना नहीं sakta...Humaare राते का शुरुवात hi झूठ से हो ये मई नहीं चाहता.

आगे ना चाहते हुए भी बहुत से गलती हो सकता है हम दोनों से hi...Unn गलतियों का माफ़ी मांगेंगे.

कीर्ति सुमित की इस बात से संतुष्ट नहीं दिख रही थी.

सुमित:- और bataao...Aaj इतने दिनों baad...Achanak कैसे बदलाव आ गया तुम में? कही तरस तो नहीं खा रही हो? :हिंतहिंट2:

कीर्ति:- Nahi...Aisa लग रहा है जैसे तुम शायद उतना गलत भी नहीं ho...Socha बात कर के देखती हूँ.

कीर्ति की इस बात ने सुमित का फिर मूड ों कर diya...Kirti उससे एक मौका दे रही hai...Filhaal यही उसके लिए काफी था.

दूसरी तरफ.

विवेक:- तुमसे कुछ पूछना है?

मेघा:- पूछो.

विवेक:- तुम सुमित से प्यार करती हो ना?

शाख भरी आवाज में विवेक ने pucha...Aur विवेक का पूछने के तरीका और पूछा हुआ सवाल पर मेघा को बहुत गुस्सा आ रहा था.
 
अपडेट 49

बहुत खुश दिख रहे हो तुम?

रास्ते में मेघा ने सुमित से pucha...Sumit आज सच में बहुत खुश दिख रहा था.

सुमित ने एक नजर मेघा को देख कर मुस्कुराया लेकिन कुछ बोलै नहीं.

मेघा भी अब्ब खामोशी के साथ आगे बढ़ने लगी.

सुमित अपने hi धुन में चल रहा था.

मेघा:- क्या आज फिर से रिवरसाइड चले?

सुमित:- क्यों?

मेघा:- बस ऐसे hi...Aaj किसी से बात चीत करने का मूड नहीं है.

सुमित:- बात चीत का उतना मूड तो मेरा भी नहीं hai...Chalo आज रिवरसाइड hi चलते है.

फिर दोनों नदी के किनारे की और चलते hai...Dono में से कोई किसी से बात नहीं कर रहा था.

नदी के किनारे पहुँच कर सुमित नदी के बहुत करीब एक पत्थर पर बैठ जाता है.

मेघा:- संभल kar...Kahi...

फ़िक्र के साथ मेघा ने कहा.

सुमित:- उस दिन के इंसिडेंट के बाद भी तुम ये कह रही हो?

मेघा:- इतना हल्का मत लो नदी ko...Apne विकराल रूप में ना जाने कितना विनाश किया है और ना जाने कितने hi सभ्यता का अंतत किया है.

मेघा इस बार काफी सीरियस थी.

सुमित:- लेकिन आज तो नदी उस दिन से काफी छोटी है.

मेघा:- अगले पल? अगले पल भी इतना hi छोटी rahegi...Iss बात का गारंटी ले सकते हो?

सुमित इस बार कुछ नहीं बोलै.

मेघा:- पहाड़ी नदी hai...Bahaav में कब बदलाव आ जाए कुछ पता नहीं चलता.

कुछ ऐसा hi है जिंदगी bhi...Kab किस मोड़ में पहुंचेंगे और किस्मत में क्या लिखा है कोई नहीं जानता.

मेघा की बात में उसके दिमाग में चल रही गहरी सोच साफ़ दिखा रहा था.

सुमित ने इस बार भी कोई जवाब नहीं दिया.

मेघा:- अभी खुद को hi dekho...Kal तक सदा हुआ चेहरा के साथ घूम रहे थे और aaj...Aaj बहुत खुश दिख रहे हो.

कल फिर इस चेहरे में ये ख़ुशी रहेगा या nahi...Iski भी कोई गारंटी नहीं.

सुमित:- फ़िक्र मत karo...Abb तो खुश होने का वजह मिल गया है.

सुमित की बातों में उसका ख़ुशी साफ़ दिख रहा था.

मेघा:- Acchaa...Aisa क्यों लगता है?

सुमित:- Kirti...Uska नफरत ख़त्म हो गया hai...Jald hi वो मान जायेगी.

पिछले 3,4 दिनों से आये कीर्ति में बदलाव से सुमित बहुत खुश tha...Abb कीर्ति सुमित से अच्छे से बात कर रही thi...Kabhi मुश्कुरा कर तो कभी खुद hi सुमित को बुलाती टाइम स्पेंड करने के लिए.

मेघा:- किसी पर भी इतना अंध विश्वाश कर लेते हो?

इस बार मेघा की आवाज में व्यंग था.

सुमित:- किसी पर भी नहीं karta...Lekin Kirti...Pyaar है वो meri...Aur प्यार में विश्वाश की जरुरत होता है ना की बैकग्राउंड को देखते है.

मेघा:- लगे रहो अपने इस विश्वाश के साथ.

इस बार मेघा ने गुस्से में कहा.

और गुस्सा का वजह था सुमित के आँखों में बंधा patti...Tab से मेघा उससे हिंट दे रही थी लेकिन सुमित समझने को तैयार hi नहीं था.

अभी भी मेघा कीर्ति के बारे में hi सोच रही thi...Samajhne की कोशिश कर रही थी लेकिन समझ पाने में असफल हो रही थी.

कीर्ति का ये बदलाव मेघा के सोच और उम्मीद से भी बाहर tha...Kuch पूछने पर घुमा फिरा कर ताल देती थी.

उससे भी देखने पर यही लग रहा था की कीर्ति सुमित ऐ प्यार करने लगी hai...Lekin दिल ये बात मानने को तैयार नहीं था.

और साथ hi Vivek...Abhi भी उससे विवेक के साथ वो बातें याद आ रहा था.

विवेक:- तुम सुमित से प्यार करती हो ना?

इस सवाल और सवाल पूछने की तरीका पर मेघा को बहुत गुस्सा आया.

मेघा:- तुम्हे क्या मतलब?

विवेक:- मतलब hai...Pehle ये बताओ तुम सुमित से प्यार करती हो या नहीं?

मेघा:- कहा na...Iss बात से तुम्हे कोई मतलब नहीं होना चाहिए.

विवेक:- अगर करती हो तो bataao...Kuch प्लान करूँगा तुम्हे और सुमित को मिलाने की?

अब्ब मेघा को कुछ गड़बड़ लग रहा था.

मेघा:- साफ़ साफ़ कहो.

विवेक:- मई कीर्ति से प्यार करता hun...Aur उस सुमित को कीर्ति के पास देख कर खून जल रहा है.

तुम चाहो तो सुमित तुम्हारा और कीर्ति मेरी.

शाख तो मेघा को पहले hi tha...Jo अब्ब यकीं में बदल गया.

मेघा:- कीर्ति को बताया तुमने ये बात?

विवेक:- हमेशा से फ्रेंड जोन hi रहा hun...Abb तो बताने में भी दर लग रहा है.

ये सुन कर मेघा की गुस्सा कण्ट्रोल से बाहर चला गया.

मेघा:- आज कल हर कोई प्यार को पाने के लिए प्लानिंग या फिर साजिश hi करता फिर रहा hai...Jaise ये फैशन बना गया है.

कुछ देर तक तो विवेक मेघा का गुस्सा देख कुछ नहीं bola...Kuch देर बाद.

विवेक:- क्या सोचा तुमने फिर?

मेघा:- यही की अभी तक मुंह से समझा रही थी तुम्हे इस बात से कोई मतलब नहीं होना chahiye...Agli बार थप्पड़ से सम्झाउनही.

मेघा की ये गुस्सा देख विवेक ने आगे बोलने की हिम्मत नहीं किया.

मेघा ने कीर्ति को भी ये बात बताने की कोशिश ki...Lekin विवेक का दोस्ती का ऐसा पर्दा चढ़ गया था कीर्ति की आँखों में की वो विवेक के बारे में कुछ सुन्ना नहीं चाहती थी.

कुछ यही बातें थी जो मेघा को सोचने पर मजबूर कर रहा tha...Kirti का बदला रूप, विवेक की साजिश और सुमित की आँखों में बंधी patti...Na जाने आगे इस वेकेशन में क्या होने वाला है.

ात नाईट...11:50 पं

"कहा हो?"

कीर्ति ने ये मैसेज पढ़ते hi हैरानी में रिप्लाई दिया.

कीर्ति:- अभी तक जगे हुए हो?

सुमित:- तुम्हारी यादों में न जाने कितने hi रात जाग कर बिताया hai...Ye तो कुछ भी नहीं.

कीर्ति:- सो यू थिंक थिस इस रोमांटिक?

सुमित:- नॉट ात all...Romantic hi होना है तो छत में आ जाओ.

कीर्ति:- इतनी रात को?

सुमित:- Haan...Abb ये मत कहना की भूतों से दर लगता है.

कीर्ति:- बिलकुल नहीं.

सुमित:- थें प्रोवे आईटी.

कीर्ति मुस्कुराती हुई छत में चली जाती है.

और जैसे hi छत में अपना कदम रखती है हैरानी से उसकी आँखें फ़ैल जाती है.

सुमित:- हैप्पी बर्थडे तो यू.

सामने एक प्लेट में ब्रेड का एक बड़ा पीेछे रखा tha...Aas पास जल रहे 4 candles...Aur एक चाक़ू.

कीर्ति को ऐसे सुरप्रीसेड और खुश देख सुमित के ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.

कीर्ति:- ये सब क्या है?

सुमित:- बर्थडे स्पेशल फॉर स्पेशल गर्ल.

कीर्ति:- तुम्हें याद hai...Lekin मैंने कभी बताया भी नहीं.

सुमित:- आशिक़ hun...Itna तो पता hi होगा.

अब्ब कीर्ति सुमित के पास पहुँच जाती है.

कीर्ति:- फ़ोन पर भी तो विश कर सकते थे.

सुमित:- वो मेरा स्टाइल nahi...Formality के रूप में फ़ोन या मैसेज करो.

मुझे तो तुम्हे सरप्राइज देना tha...Aur तुम्हारा ये ख़ुशी देखना था.

कीर्ति:- सो स्वीट ऑफ़ यू.

इतना कह कर कीर्ति सुमित की गालों पर पिंच कर देती है.

सुमित:- केक नहीं mila...Aur इंटरनेट वाला मोबाइल भी नहीं लाया जो यूट्यूब से वीडियो देख कर बना लेता.

इस बार इसी ब्रेड से काम चला लो.

कीर्ति:- ये भी बहुत अच्छा hai...Aur इससे भी अच्छा है तुम्हारा सरप्राइज.

फिर कीर्ति ब्रेड को काट कर सुमित को खिलाती hai..Sumit भी ब्रेड का एक टुकड़ा कीर्ति को खिलाता है.

सुमित एक नजर कीर्ति को प्यार से देखता hai...Lekin इस बार कीर्ति का एक्सप्रेशन बदला हुआ था.

सुमित:- तुम ठीक तो हो?

कीर्ति अब्ब और भी इमोशनल हो जाती है.

कीर्ति:- सच में प्यार करते हो ना मुझसे?

सुमित:- अब्ब कैसे यकीं दिलाओ.

बाल खुजाते हुए सुमित ने कहा.

कीर्ति:- यकीं दिलाने की जरुरत नहीं hai...Bas इस बार भरोषा मत तोडना.

सुमित:- वादा है.

सुमित का ख़ुशी का अब्ब कोई ठिकाना नहीं tha...Kirti ने उसके प्यार को फिर से अपना लिया tha...Na जाने कितने दिन और कितने रात गुजारे थे कीर्ति की यादो में सुमित ने अपने टूटे दिल के saath...Jis को आज फिर से जोड़ा भी कीर्ति ने hi.

एक नजर फिर सुमित ने देखा कीर्ति को प्यार और सम्मान के साथ.
 
शायद आप दोनों ने ये लाइन मिस कर diya...Kirti की बदलाव एक दिन की नहीं है...3,4 दिन की hai...Jab कीर्ति ने पिछली बार सुमित से अच्छे से बात किया था उस दिन के बाद 3,4 दिन की घटना है ये.

और सुमित का नदी में छलांग लगाने के बाद के 3,4 दिन के बाद hi कीर्ति ने सुमित से बात किया tha...Jo पिछले अपडेट में मेंशन किया hai...Kul मिला कर 7,8 दिन है.

और कीर्ति को अब्ब सच में सुमित से प्यार है या कीर्ति का कोई गेम है ये यो आगे hi पता चलेगा.
 
फ्रेंड्स लिखने बैठा हूँ लेकिन लिखा नहीं जा रहा hai...Shayad लिखने के लिए सही शब्द नहीं मिल रहे है aaj...Ye अपडेट बहुत इम्पोर्टेन्ट है स्टोरी के लिए इस वजह से जल्दबाज़ी में लिखना भी नहीं चाहता.

अपडेट का टाइम मेंशन करने के बाद पीछे हटना मुझे खुद अच्छा नहीं लग रहा है :(

उम्मीद है कल दोपहर से शाम तक अपडेट लिख कर पोस्ट कर दूंगा.

रियली सॉरी.
 
अपडेट 50

इतना चुप क्यों हो?

कुछ लम्बी खामोशी के बाद कीर्ति बोली.

सुमित और कीर्ति को नदी किनारे में आये 2 घंटे हो गए thhe...Lekin बात ना की बराबर हुआ tha...Nadi के किनारे एक पत्थर में दोनों बैठे थे एक दूसरे की बाहों में.

सुमित:- बस ऐसे hi.

कीर्ति:- इतना hi तो नहीं था न तुम्हारा प्यार? अभी से मन तो नहीं भर गया.

इस बात पर सुमित ने कीर्ति की तरफ dekha...Aur फिर मुस्कुरा कर.

सुमित:- कभी शेर को घांस खाते देखा है?

कीर्ति:- लेकिन तुम में अब्ब वो शेर वाली बात नहीं.

सुमित:- शेर अभी खुश hai...Bahut खुश hai...Dil की इच्छा जो पूरी हुई hai...Bas यही वजह है की वो शिकार नहीं कर रहा है.

बस कुछ पल aur...Warna तुम भी जानती हो इस शिकारी का शिकार करने का अंदाज़.

बोलना चालु कर दिया तो तुम्हारे दो कान भी काम पद जाएंगे सुनने के लिए.

मुश्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jawaab में कीर्ति भी मुस्कुरायी.

कुछ देर दोनों के बिच फिर खामोशी छा गया.

सुमित:- आज तुम्हारे इतने paas...Tumhare इतने करीब बैठा हूँ तो एहसास हो रहा hai...Jindagi में किस चीज की कमी है.

आज वही प्यार को महसूस कर रहा hun...Aisa लगता है तुम्हाता फिर से मिल जाने से मेरा जिंदगी पूरा हो गया है.

दिल में तो है बहुत कुछ बताने के liye...Lekin कहा से शुरू करू और कहा पर ख़त्म? बस इसी लिए खामोशी में इस प्यार का एहसास का मजा ले रहा हूँ.

कीर्ति:- मई भी.

कीर्ति की इस प्यार भरी बात पर सुमित एक बार फिर फ़िदा हो गया.

सुमित:- तुमने बताया nahi...Fir से कैसे मान गयी?

कीर्ति:- तो क्या फिर से रूत जाओ?

थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कीर्ति बोली.

सुमित:- नहीं nahi...Abb तो तुम्हारा झूठा नाराजगी भी बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा.

सुमित ने कीर्ति की होंठ पर अपना ऊँगली रखते हुए कहा जो ये साफ़ दिखा रहा था की इसका कल्पना भी करना कितना दर्दनाक है उसके लिए.

कीर्ति:- बहुत पहले hi इम्प्रेस हो गयी थी.

ये सुमित के लिए काफी हैरानी की बात था.

सुमित:- लेकिन कब और कैसे? मुझे तो कभी पता hi नहीं चला.

कीर्ति:- अगर इम्प्रेस ना होती तो इस वेकेशन पर क्यों रूकती?

सुमित:- तो फिर इतना गुस्सा क्यों थी मुझसे?

इस बार सुमित की आवाज में शिकायत था.

कीर्ति:- देखना चाहती थी तुम मेरे लिए क्या क्या कर सकते हो...2 साल की नाराजगी tha...Itna हक़ तो बनता है ना.

कीर्ति की इस मासूमियत भरी बात पर.

सुमित:- हमेशा सोचता tha...Tum मेरे टक्कर की ho...Lekin आज लग रहा है कोई मुकाबला hi नहीं है तुमसे.

कीर्ति:- कुछ बातों की समझ देर से hi होती है.

इस बात पर सुमित भी हांसे बिना नहीं रह पाया.

और इस हंसी के बाद फिर से एक खामोशी चा gaya...Sumit को बात करने से ज्यादा प्यार को महसूस करने में मजा आ रहा था.

कुछ देर तक कीर्ति भी सुमित के कन्धा पर सर टिकाये बैठी रहे.

सुमित कभी कीर्ति की तरफ प्यार से देखता तो कभी सामने नदी की तरफ.

कीर्ति:- Pyaar...Kuch अलग hi बात है इस शब्द है इस शब्द mein...Kya सही और क्या galat...Aasani से इसका अंदाजा लगा सकते है बस दिल की बात सुनो.

जब मैंने भी दिल की बात सुनी तब एहसास हुआ तुम गलत नहीं ho...Fir क्या? तभी से माफ़ कर diya...Bas दिखाया nahi...Warna मेरे नखरे कौन झेलता.

सुमित बस कीर्ति की बात सुन रहा था और यही चाहता था की बस सुनते hi रहे.

कीर्ति:- और tum...Paagal हो बेवकूफ हो.

इतना कह कर कीर्ति सुमित को मारने लगती है.

सुमित:- अब्ब क्या हुआ?

हैरानी से सुमित ने पूछा.

कीर्ति:- उस दिन नदी में छलांग क्यों लगाया? अगर कुछ हो जाता तो.

इस बार कीर्ति की आवाज में शिकायत था.

सुमित:- कुछ नहीं hota...Swimming में एक्सपर्ट हूँ वो भी बचपन से. :स्मार्त्य:

कीर्ति:- फिर भी अगर कुछ हो जाता तो सोचा है मेरा क्या होता? कितना मुहकिल था मेरे लिए उस पल तुम्हे नदी में बेहटा देख.

कीर्ति की इस बात पर सुमित कोई जवाब नहीं दे पाया.

कीर्ति:- बस तभी से थोड़ा नरम होना pada...Warna तुम तो हो hi paagal...Na जाने इस पागलपन में क्या कर बैठोगे?

सुमित:- पागल तो हूँ लेकिन तुम्हारे प्यार में.

कीर्ति:- आगे से ऐसा किया ना तो हमेशा के लिए दूर चली जाउंगी.

सुमित:- अरे नहीं नहीं...

दर में सुमित आगे बोल भी नहीं पाया.

कीर्ति:- वादा karo...Aage से ऐसे परेशान नहीं करूँगा.

सुमित:- वादा hai...Aage सिर्फ प्यार करूँगा परेशान नहीं. :डी

कीर्ति फिर सुमित की कन्धा पर अपना सर टिका देती है.

कुछ पल यूँही खामोशी में बीतने के बाद.

सुमित:- सामने नदी देख रही हो.

कीर्ति:- हाँ.

सुमित:- अब्ब दिल की एक hi ख्वाहिश hai...Iss नदी की बहाव की उतार चढाव की तरह हम दोनों भी हमारे जिंदगी की उतार चढाव में एक दूसरे का साथ रहेंगे.

कीर्ति:- वादा है.

फिर दोनों यूँही एक दूसरे की बाहों में पूरा शाम गुजार देते है.

और जब अँधेरा छाने लगता है तब.

कीर्ति:- अब्ब हमें चलना चाहिए.

सुमित भी उठ जाता है.

कुछ पल hi हुआ था दोनों को चलते हुए तभी.

सुमित:- आज तो तुम कुछ ज्यादा hi खूबसूरत लग रही ho...Andhera में भी तुम्हारी खूबसूरती नहीं छिप रहा है.

कीर्ति:- क्यों? और दिन बदसूरत लगती थी?

सुमित:- Nahi...Aaj कुछ jyada...Aaj दिल की नजर से बोल रहा हूँ.

कीर्ति:- दिल की नजर? तुम्हारा एनाटोमी कुछ ज्यादा hi कमजोर hai...Thoda आशिकी काम और पढाई लिखे पर ज्यादा ध्यान दो.

इतना कह कर कीर्ति आगे बढ़ गयी.

सुमित:- एनाटोमी ऑफ़ heart....Issmein उतना एक्सपर्ट कभी नहीं रहा.

सुमित ने इतना तो कहा और आगे भी कुछ बोलै जो उसके मुंह से बाहर न निकल सका.

सुमित:- इस सब्जेक्ट में तो मेघा एक्सपर्ट है.

मेघा की याद आते hi वो भी दिल की बारे mein...Ek बार फिर सुमित कमजोर पद गया.

सुमित:- शायद ये जख्म हमेशा मुझे मेरे उस भूल का याद दिलाता rahega...Aakhir काम भी तो ऐसा hi किया है.

सुमित किसी तरह इस याद को भुलाना चाहता है कुछ पल के liye...Taaki कीर्ति के साथ कुछ पल बीती वो भी प्यार से.

बहुत कुछ सोच रखा था usne...Abb इस वेकेशन के कल का आखिरी दिन को कैसे एक यादगार लम्हा banaye...Fir कीर्ति से उसका पिछले 2 साल के बारे में जानना tha...Aur आगे की जिंदगी के बारे में प्लानिंग.

कुछ यही सोच के साथ सुमित कीर्ति के साथ आगे बढ़ रहा था.

ात नाईट 9 पं

अभी इस वक्त? तूने क्यों बुलाया हम सब को?

ये सवाल था मेघा का कीर्ति से.

सुमित भी अभी अभी पहुंचा tha...Kirti कुछ एक्ससिटेड लग रही thi...Megha कुछ कन्फ्यूज्ड thi...Aur Vivek...Uska अभी भी गाल फुला हुआ था.

कीर्ति:- कुछ बताना था.

मेघा:- क्या?

कीर्ति:- याद है tujhe...Jab इस वेकेशन में आये थे मैंने तुझसे कहा था की अब्ब मुझे कभी प्यार नहीं hoga...Lekin मई गलत थी.

मेघा कुछ नहीं बोलती.

कीर्ति:- ये एक यादगार पल है मेरे जिंदगी ka...Pyaar का एहसास दुबारा हो hi gaya...Issi लिए सोचा क्यों न इस पल को अपने दोस्तों के साथ सेलिब्रेट करू.

कीर्ति ने बोलना जारी रखा.

कीर्ति:- आज मई प्रोपोज़ करने वाली हूँ तुम सब के सामने जिसे मई अब्ब अपने जान से भी ज्यादा प्यार करने लगी हूँ.

इतना कह कर कीर्ति अपने पीछे से गुलाब का फूल निकालती है और धीरे धीरे सुमित की तरफ बढ़ती है.

सुमित का धड़कन काबू से बाहर हो रहा tha...Chaandni रात में कीर्ति की ये khubsurati...Aur अपने हाथो में गुलाब को लेकर चलने की वो aadaayein...Sumit से रहा नहीं जा रहा tha...Aur ऊपर से कीर्ति की ये muskaan...Uff

सुमित दिल थामे कीर्ति को देख रहा था और इंतजार कर रहा था उस पल का जिसका वो पिछले 2 साल से इंतजार कर रहा था.

कीर्ति भी धीरे से आगे बढ़ रही थी और सुमित के पास पहुँच कर मुस्कुराती है aur...Aur...

और वो सुमित के पास से निकलते हुए विवेक की तरफ बढ़ने लगी.

ये देख विबेक भी एकदम से हैरान हो gaya...Sumit को तो यकीं hi नहीं हुआ.

सुमित आँख बंद कर के फिर से देखता है लेकिन ये सच tha...Lekin यकीं शायद अभी भी नहीं हो रहा था.

कुछ hi पल में दिल में दर्द भर उठा.

सुमित:- (इन हिज मंद) Nahi...Nahi...Aisa नहीं हो सकता.

दर्द का असर चेहरे में भी साफ़ दिखने लगा.

जोर से खुद को पिंच करके देखता hai....Kaash ये सपना ho...Ek बुरा सपना.

लेकिन हकीकत कुछ और hi था.

कीर्ति:- ी लव यू विवेक.

कीर्ति की इस बात से सुमित के कान ने भी अपना काम करना बंद कर दिया.

एक नजर खुद के हाथ में dekha...Ye सपना तो नहीं निकला लेकिन हाथ के उस जगह पर एक जख्म हो गया tha...Jiska दर्द अभी उठ रहे दिल के जख्म के मुकाबले ना के बराबर था.

डरते हुए उसने कीर्ति की तरफ अपना नजर ghumaya...Vibek भी हैरानी में कोई जवाब नहीं दे पा रहा था.

कीर्ति मुद कर सुमित को देखती है.

कीर्ति:- बेवकूफ hi rahoge...Jo प्यार और दिखावा में फर्क करना नहीं जानते.

सुमित कुछ बोलने की हालात में नहीं था.

कीर्ति अब्ब मेघा की तरफ देखती है.

कीर्ति:- प्लान सक्सेसफुल.

कीर्ति की इस बात पर मेघा भी हैरान रह जाती hai...Wo कभी कीर्ति को घूरती तो कभी सुमित को.

सुमित और मेघा का जब नजर मिला तो सुमित की होंठो में एक मुस्कान आ gaya...Haara हुआ मुश्कान.

कीर्ति:- बहुत इर्रिटेटिंग हो tum...Bahut बार मन किया था इर्रिटेट मत karo...Mat karo...Lekin सुनते कहा हो तुम.

बस इससे बचने के लिए परमानेंट इलाज ढूंढ liya...Future डॉक्टर जो हूँ.

सुमित अभी भी कुछ नहीं बोल पा रहा tha...Abb दर्द में दो बून्द आंसू आखों से टपक गए.

कीर्ति:- बस इसी लिए सोचा तुम्हारे करीब होने का नाटक करती hun...Expectation इतना हाई कर दूंगी की तुम आसमान में उड़ने lagoge...Aur reality...Ekdum से जमीं मई पटक दूंगी.

और वही किया.

उम्मीद है बहुत बड़ा झटका लगा है tumhe...Lagna भी chahiye...Aur अब्ब तुम मेरे पास आने से भी daroge...Irritate करना बहुत दूर की बात है.

कीर्ति की बातों में नफरत tha...Sirf नफरत.

ये सब सुन कर सुमित का सर फटने लगा था.

कीर्ति:- "ी लव यू" मेरे मुंह से ये सुन्ना तुम्हारे लिए एक ऐसा सपना है जो कभी पूरा नहीं हो sakta...Abb थोड़ा रियलिटी में aao...Aur रियलिटी.

"ी हेट यू."

इस बार कुछ ज्यादा hi तेज आवाज में कहा कीर्ति ne...Sumut अब्ब और झेल नहीं पाया.

वो वह से भागते हुए अपने तुम में पहुंचा और सीधे अपने बीएड पर गिर गया.

मेघा को भी सुमित का बहुत फ़िक्र होने लगा सुमित को इस हाल में देख kar...Kirti पर तो बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इससे ज्यादा सुमित का fikar...Wo भी सुमित के पीछे चली गयी.

और Kirti...Wo अभी भी कड़ी थी वही par...Ek विजयी मुश्कान के साथ.
 
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