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इतना चुप क्यों हो?
कुछ लम्बी खामोशी के बाद कीर्ति बोली.
सुमित और कीर्ति को नदी किनारे में आये 2 घंटे हो गए thhe...Lekin बात ना की बराबर हुआ tha...Nadi के किनारे एक पत्थर में दोनों बैठे थे एक दूसरे की बाहों में.
सुमित:- बस ऐसे hi.
कीर्ति:- इतना hi तो नहीं था न तुम्हारा प्यार? अभी से मन तो नहीं भर गया.
इस बात पर सुमित ने कीर्ति की तरफ dekha...Aur फिर मुस्कुरा कर.
सुमित:- कभी शेर को घांस खाते देखा है?
कीर्ति:- लेकिन तुम में अब्ब वो शेर वाली बात नहीं.
सुमित:- शेर अभी खुश hai...Bahut खुश hai...Dil की इच्छा जो पूरी हुई hai...Bas यही वजह है की वो शिकार नहीं कर रहा है.
बस कुछ पल aur...Warna तुम भी जानती हो इस शिकारी का शिकार करने का अंदाज़.
बोलना चालु कर दिया तो तुम्हारे दो कान भी काम पद जाएंगे सुनने के लिए.
मुश्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jawaab में कीर्ति भी मुस्कुरायी.
कुछ देर दोनों के बिच फिर खामोशी छा गया.
सुमित:- आज तुम्हारे इतने paas...Tumhare इतने करीब बैठा हूँ तो एहसास हो रहा hai...Jindagi में किस चीज की कमी है.
आज वही प्यार को महसूस कर रहा hun...Aisa लगता है तुम्हाता फिर से मिल जाने से मेरा जिंदगी पूरा हो गया है.
दिल में तो है बहुत कुछ बताने के liye...Lekin कहा से शुरू करू और कहा पर ख़त्म? बस इसी लिए खामोशी में इस प्यार का एहसास का मजा ले रहा हूँ.
कीर्ति:- मई भी.
कीर्ति की इस प्यार भरी बात पर सुमित एक बार फिर फ़िदा हो गया.
सुमित:- तुमने बताया nahi...Fir से कैसे मान गयी?
कीर्ति:- तो क्या फिर से रूत जाओ?
थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कीर्ति बोली.
सुमित:- नहीं nahi...Abb तो तुम्हारा झूठा नाराजगी भी बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा.
सुमित ने कीर्ति की होंठ पर अपना ऊँगली रखते हुए कहा जो ये साफ़ दिखा रहा था की इसका कल्पना भी करना कितना दर्दनाक है उसके लिए.
कीर्ति:- बहुत पहले hi इम्प्रेस हो गयी थी.
ये सुमित के लिए काफी हैरानी की बात था.
सुमित:- लेकिन कब और कैसे? मुझे तो कभी पता hi नहीं चला.
कीर्ति:- अगर इम्प्रेस ना होती तो इस वेकेशन पर क्यों रूकती?
सुमित:- तो फिर इतना गुस्सा क्यों थी मुझसे?
इस बार सुमित की आवाज में शिकायत था.
कीर्ति:- देखना चाहती थी तुम मेरे लिए क्या क्या कर सकते हो...2 साल की नाराजगी tha...Itna हक़ तो बनता है ना.
कीर्ति की इस मासूमियत भरी बात पर.
सुमित:- हमेशा सोचता tha...Tum मेरे टक्कर की ho...Lekin आज लग रहा है कोई मुकाबला hi नहीं है तुमसे.
कीर्ति:- कुछ बातों की समझ देर से hi होती है.
इस बात पर सुमित भी हांसे बिना नहीं रह पाया.
और इस हंसी के बाद फिर से एक खामोशी चा gaya...Sumit को बात करने से ज्यादा प्यार को महसूस करने में मजा आ रहा था.
कुछ देर तक कीर्ति भी सुमित के कन्धा पर सर टिकाये बैठी रहे.
सुमित कभी कीर्ति की तरफ प्यार से देखता तो कभी सामने नदी की तरफ.
कीर्ति:- Pyaar...Kuch अलग hi बात है इस शब्द है इस शब्द mein...Kya सही और क्या galat...Aasani से इसका अंदाजा लगा सकते है बस दिल की बात सुनो.
जब मैंने भी दिल की बात सुनी तब एहसास हुआ तुम गलत नहीं ho...Fir क्या? तभी से माफ़ कर diya...Bas दिखाया nahi...Warna मेरे नखरे कौन झेलता.
सुमित बस कीर्ति की बात सुन रहा था और यही चाहता था की बस सुनते hi रहे.
कीर्ति:- और tum...Paagal हो बेवकूफ हो.
इतना कह कर कीर्ति सुमित को मारने लगती है.
सुमित:- अब्ब क्या हुआ?
हैरानी से सुमित ने पूछा.
कीर्ति:- उस दिन नदी में छलांग क्यों लगाया? अगर कुछ हो जाता तो.
इस बार कीर्ति की आवाज में शिकायत था.
सुमित:- कुछ नहीं hota...Swimming में एक्सपर्ट हूँ वो भी बचपन से. :स्मार्त्य:
कीर्ति:- फिर भी अगर कुछ हो जाता तो सोचा है मेरा क्या होता? कितना मुहकिल था मेरे लिए उस पल तुम्हे नदी में बेहटा देख.
कीर्ति की इस बात पर सुमित कोई जवाब नहीं दे पाया.
कीर्ति:- बस तभी से थोड़ा नरम होना pada...Warna तुम तो हो hi paagal...Na जाने इस पागलपन में क्या कर बैठोगे?
सुमित:- पागल तो हूँ लेकिन तुम्हारे प्यार में.
कीर्ति:- आगे से ऐसा किया ना तो हमेशा के लिए दूर चली जाउंगी.
सुमित:- अरे नहीं नहीं...
दर में सुमित आगे बोल भी नहीं पाया.
कीर्ति:- वादा karo...Aage से ऐसे परेशान नहीं करूँगा.
सुमित:- वादा hai...Aage सिर्फ प्यार करूँगा परेशान नहीं. :डी
कीर्ति फिर सुमित की कन्धा पर अपना सर टिका देती है.
कुछ पल यूँही खामोशी में बीतने के बाद.
सुमित:- सामने नदी देख रही हो.
कीर्ति:- हाँ.
सुमित:- अब्ब दिल की एक hi ख्वाहिश hai...Iss नदी की बहाव की उतार चढाव की तरह हम दोनों भी हमारे जिंदगी की उतार चढाव में एक दूसरे का साथ रहेंगे.
कीर्ति:- वादा है.
फिर दोनों यूँही एक दूसरे की बाहों में पूरा शाम गुजार देते है.
और जब अँधेरा छाने लगता है तब.
कीर्ति:- अब्ब हमें चलना चाहिए.
सुमित भी उठ जाता है.
कुछ पल hi हुआ था दोनों को चलते हुए तभी.
सुमित:- आज तो तुम कुछ ज्यादा hi खूबसूरत लग रही ho...Andhera में भी तुम्हारी खूबसूरती नहीं छिप रहा है.
कीर्ति:- क्यों? और दिन बदसूरत लगती थी?
सुमित:- Nahi...Aaj कुछ jyada...Aaj दिल की नजर से बोल रहा हूँ.
कीर्ति:- दिल की नजर? तुम्हारा एनाटोमी कुछ ज्यादा hi कमजोर hai...Thoda आशिकी काम और पढाई लिखे पर ज्यादा ध्यान दो.
इतना कह कर कीर्ति आगे बढ़ गयी.
सुमित:- एनाटोमी ऑफ़ heart....Issmein उतना एक्सपर्ट कभी नहीं रहा.
सुमित ने इतना तो कहा और आगे भी कुछ बोलै जो उसके मुंह से बाहर न निकल सका.
सुमित:- इस सब्जेक्ट में तो मेघा एक्सपर्ट है.
मेघा की याद आते hi वो भी दिल की बारे mein...Ek बार फिर सुमित कमजोर पद गया.
सुमित:- शायद ये जख्म हमेशा मुझे मेरे उस भूल का याद दिलाता rahega...Aakhir काम भी तो ऐसा hi किया है.
सुमित किसी तरह इस याद को भुलाना चाहता है कुछ पल के liye...Taaki कीर्ति के साथ कुछ पल बीती वो भी प्यार से.
बहुत कुछ सोच रखा था usne...Abb इस वेकेशन के कल का आखिरी दिन को कैसे एक यादगार लम्हा banaye...Fir कीर्ति से उसका पिछले 2 साल के बारे में जानना tha...Aur आगे की जिंदगी के बारे में प्लानिंग.
कुछ यही सोच के साथ सुमित कीर्ति के साथ आगे बढ़ रहा था.
ात नाईट 9 पं
अभी इस वक्त? तूने क्यों बुलाया हम सब को?
ये सवाल था मेघा का कीर्ति से.
सुमित भी अभी अभी पहुंचा tha...Kirti कुछ एक्ससिटेड लग रही thi...Megha कुछ कन्फ्यूज्ड thi...Aur Vivek...Uska अभी भी गाल फुला हुआ था.
कीर्ति:- कुछ बताना था.
मेघा:- क्या?
कीर्ति:- याद है tujhe...Jab इस वेकेशन में आये थे मैंने तुझसे कहा था की अब्ब मुझे कभी प्यार नहीं hoga...Lekin मई गलत थी.
मेघा कुछ नहीं बोलती.
कीर्ति:- ये एक यादगार पल है मेरे जिंदगी ka...Pyaar का एहसास दुबारा हो hi gaya...Issi लिए सोचा क्यों न इस पल को अपने दोस्तों के साथ सेलिब्रेट करू.
कीर्ति ने बोलना जारी रखा.
कीर्ति:- आज मई प्रोपोज़ करने वाली हूँ तुम सब के सामने जिसे मई अब्ब अपने जान से भी ज्यादा प्यार करने लगी हूँ.
इतना कह कर कीर्ति अपने पीछे से गुलाब का फूल निकालती है और धीरे धीरे सुमित की तरफ बढ़ती है.
सुमित का धड़कन काबू से बाहर हो रहा tha...Chaandni रात में कीर्ति की ये khubsurati...Aur अपने हाथो में गुलाब को लेकर चलने की वो aadaayein...Sumit से रहा नहीं जा रहा tha...Aur ऊपर से कीर्ति की ये muskaan...Uff
सुमित दिल थामे कीर्ति को देख रहा था और इंतजार कर रहा था उस पल का जिसका वो पिछले 2 साल से इंतजार कर रहा था.
कीर्ति भी धीरे से आगे बढ़ रही थी और सुमित के पास पहुँच कर मुस्कुराती है aur...Aur...
और वो सुमित के पास से निकलते हुए विवेक की तरफ बढ़ने लगी.
ये देख विबेक भी एकदम से हैरान हो gaya...Sumit को तो यकीं hi नहीं हुआ.
सुमित आँख बंद कर के फिर से देखता है लेकिन ये सच tha...Lekin यकीं शायद अभी भी नहीं हो रहा था.
कुछ hi पल में दिल में दर्द भर उठा.
सुमित:- (इन हिज मंद) Nahi...Nahi...Aisa नहीं हो सकता.
दर्द का असर चेहरे में भी साफ़ दिखने लगा.
जोर से खुद को पिंच करके देखता hai....Kaash ये सपना ho...Ek बुरा सपना.
लेकिन हकीकत कुछ और hi था.
कीर्ति:- ी लव यू विवेक.
कीर्ति की इस बात से सुमित के कान ने भी अपना काम करना बंद कर दिया.
एक नजर खुद के हाथ में dekha...Ye सपना तो नहीं निकला लेकिन हाथ के उस जगह पर एक जख्म हो गया tha...Jiska दर्द अभी उठ रहे दिल के जख्म के मुकाबले ना के बराबर था.
डरते हुए उसने कीर्ति की तरफ अपना नजर ghumaya...Vibek भी हैरानी में कोई जवाब नहीं दे पा रहा था.
कीर्ति मुद कर सुमित को देखती है.
कीर्ति:- बेवकूफ hi rahoge...Jo प्यार और दिखावा में फर्क करना नहीं जानते.
सुमित कुछ बोलने की हालात में नहीं था.
कीर्ति अब्ब मेघा की तरफ देखती है.
कीर्ति:- प्लान सक्सेसफुल.
कीर्ति की इस बात पर मेघा भी हैरान रह जाती hai...Wo कभी कीर्ति को घूरती तो कभी सुमित को.
सुमित और मेघा का जब नजर मिला तो सुमित की होंठो में एक मुस्कान आ gaya...Haara हुआ मुश्कान.
कीर्ति:- बहुत इर्रिटेटिंग हो tum...Bahut बार मन किया था इर्रिटेट मत karo...Mat karo...Lekin सुनते कहा हो तुम.
बस इससे बचने के लिए परमानेंट इलाज ढूंढ liya...Future डॉक्टर जो हूँ.
सुमित अभी भी कुछ नहीं बोल पा रहा tha...Abb दर्द में दो बून्द आंसू आखों से टपक गए.
कीर्ति:- बस इसी लिए सोचा तुम्हारे करीब होने का नाटक करती hun...Expectation इतना हाई कर दूंगी की तुम आसमान में उड़ने lagoge...Aur reality...Ekdum से जमीं मई पटक दूंगी.
और वही किया.
उम्मीद है बहुत बड़ा झटका लगा है tumhe...Lagna भी chahiye...Aur अब्ब तुम मेरे पास आने से भी daroge...Irritate करना बहुत दूर की बात है.
कीर्ति की बातों में नफरत tha...Sirf नफरत.
ये सब सुन कर सुमित का सर फटने लगा था.
कीर्ति:- "ी लव यू" मेरे मुंह से ये सुन्ना तुम्हारे लिए एक ऐसा सपना है जो कभी पूरा नहीं हो sakta...Abb थोड़ा रियलिटी में aao...Aur रियलिटी.
"ी हेट यू."
इस बार कुछ ज्यादा hi तेज आवाज में कहा कीर्ति ne...Sumut अब्ब और झेल नहीं पाया.
वो वह से भागते हुए अपने तुम में पहुंचा और सीधे अपने बीएड पर गिर गया.
मेघा को भी सुमित का बहुत फ़िक्र होने लगा सुमित को इस हाल में देख kar...Kirti पर तो बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इससे ज्यादा सुमित का fikar...Wo भी सुमित के पीछे चली गयी.
और Kirti...Wo अभी भी कड़ी थी वही par...Ek विजयी मुश्कान के साथ.
इतना चुप क्यों हो?
कुछ लम्बी खामोशी के बाद कीर्ति बोली.
सुमित और कीर्ति को नदी किनारे में आये 2 घंटे हो गए thhe...Lekin बात ना की बराबर हुआ tha...Nadi के किनारे एक पत्थर में दोनों बैठे थे एक दूसरे की बाहों में.
सुमित:- बस ऐसे hi.
कीर्ति:- इतना hi तो नहीं था न तुम्हारा प्यार? अभी से मन तो नहीं भर गया.
इस बात पर सुमित ने कीर्ति की तरफ dekha...Aur फिर मुस्कुरा कर.
सुमित:- कभी शेर को घांस खाते देखा है?
कीर्ति:- लेकिन तुम में अब्ब वो शेर वाली बात नहीं.
सुमित:- शेर अभी खुश hai...Bahut खुश hai...Dil की इच्छा जो पूरी हुई hai...Bas यही वजह है की वो शिकार नहीं कर रहा है.
बस कुछ पल aur...Warna तुम भी जानती हो इस शिकारी का शिकार करने का अंदाज़.
बोलना चालु कर दिया तो तुम्हारे दो कान भी काम पद जाएंगे सुनने के लिए.
मुश्कुराते हुए सुमित ने kaha...Jawaab में कीर्ति भी मुस्कुरायी.
कुछ देर दोनों के बिच फिर खामोशी छा गया.
सुमित:- आज तुम्हारे इतने paas...Tumhare इतने करीब बैठा हूँ तो एहसास हो रहा hai...Jindagi में किस चीज की कमी है.
आज वही प्यार को महसूस कर रहा hun...Aisa लगता है तुम्हाता फिर से मिल जाने से मेरा जिंदगी पूरा हो गया है.
दिल में तो है बहुत कुछ बताने के liye...Lekin कहा से शुरू करू और कहा पर ख़त्म? बस इसी लिए खामोशी में इस प्यार का एहसास का मजा ले रहा हूँ.
कीर्ति:- मई भी.
कीर्ति की इस प्यार भरी बात पर सुमित एक बार फिर फ़िदा हो गया.
सुमित:- तुमने बताया nahi...Fir से कैसे मान गयी?
कीर्ति:- तो क्या फिर से रूत जाओ?
थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कीर्ति बोली.
सुमित:- नहीं nahi...Abb तो तुम्हारा झूठा नाराजगी भी बर्दास्त नहीं कर पाऊंगा.
सुमित ने कीर्ति की होंठ पर अपना ऊँगली रखते हुए कहा जो ये साफ़ दिखा रहा था की इसका कल्पना भी करना कितना दर्दनाक है उसके लिए.
कीर्ति:- बहुत पहले hi इम्प्रेस हो गयी थी.
ये सुमित के लिए काफी हैरानी की बात था.
सुमित:- लेकिन कब और कैसे? मुझे तो कभी पता hi नहीं चला.
कीर्ति:- अगर इम्प्रेस ना होती तो इस वेकेशन पर क्यों रूकती?
सुमित:- तो फिर इतना गुस्सा क्यों थी मुझसे?
इस बार सुमित की आवाज में शिकायत था.
कीर्ति:- देखना चाहती थी तुम मेरे लिए क्या क्या कर सकते हो...2 साल की नाराजगी tha...Itna हक़ तो बनता है ना.
कीर्ति की इस मासूमियत भरी बात पर.
सुमित:- हमेशा सोचता tha...Tum मेरे टक्कर की ho...Lekin आज लग रहा है कोई मुकाबला hi नहीं है तुमसे.
कीर्ति:- कुछ बातों की समझ देर से hi होती है.
इस बात पर सुमित भी हांसे बिना नहीं रह पाया.
और इस हंसी के बाद फिर से एक खामोशी चा gaya...Sumit को बात करने से ज्यादा प्यार को महसूस करने में मजा आ रहा था.
कुछ देर तक कीर्ति भी सुमित के कन्धा पर सर टिकाये बैठी रहे.
सुमित कभी कीर्ति की तरफ प्यार से देखता तो कभी सामने नदी की तरफ.
कीर्ति:- Pyaar...Kuch अलग hi बात है इस शब्द है इस शब्द mein...Kya सही और क्या galat...Aasani से इसका अंदाजा लगा सकते है बस दिल की बात सुनो.
जब मैंने भी दिल की बात सुनी तब एहसास हुआ तुम गलत नहीं ho...Fir क्या? तभी से माफ़ कर diya...Bas दिखाया nahi...Warna मेरे नखरे कौन झेलता.
सुमित बस कीर्ति की बात सुन रहा था और यही चाहता था की बस सुनते hi रहे.
कीर्ति:- और tum...Paagal हो बेवकूफ हो.
इतना कह कर कीर्ति सुमित को मारने लगती है.
सुमित:- अब्ब क्या हुआ?
हैरानी से सुमित ने पूछा.
कीर्ति:- उस दिन नदी में छलांग क्यों लगाया? अगर कुछ हो जाता तो.
इस बार कीर्ति की आवाज में शिकायत था.
सुमित:- कुछ नहीं hota...Swimming में एक्सपर्ट हूँ वो भी बचपन से. :स्मार्त्य:
कीर्ति:- फिर भी अगर कुछ हो जाता तो सोचा है मेरा क्या होता? कितना मुहकिल था मेरे लिए उस पल तुम्हे नदी में बेहटा देख.
कीर्ति की इस बात पर सुमित कोई जवाब नहीं दे पाया.
कीर्ति:- बस तभी से थोड़ा नरम होना pada...Warna तुम तो हो hi paagal...Na जाने इस पागलपन में क्या कर बैठोगे?
सुमित:- पागल तो हूँ लेकिन तुम्हारे प्यार में.
कीर्ति:- आगे से ऐसा किया ना तो हमेशा के लिए दूर चली जाउंगी.
सुमित:- अरे नहीं नहीं...
दर में सुमित आगे बोल भी नहीं पाया.
कीर्ति:- वादा karo...Aage से ऐसे परेशान नहीं करूँगा.
सुमित:- वादा hai...Aage सिर्फ प्यार करूँगा परेशान नहीं. :डी
कीर्ति फिर सुमित की कन्धा पर अपना सर टिका देती है.
कुछ पल यूँही खामोशी में बीतने के बाद.
सुमित:- सामने नदी देख रही हो.
कीर्ति:- हाँ.
सुमित:- अब्ब दिल की एक hi ख्वाहिश hai...Iss नदी की बहाव की उतार चढाव की तरह हम दोनों भी हमारे जिंदगी की उतार चढाव में एक दूसरे का साथ रहेंगे.
कीर्ति:- वादा है.
फिर दोनों यूँही एक दूसरे की बाहों में पूरा शाम गुजार देते है.
और जब अँधेरा छाने लगता है तब.
कीर्ति:- अब्ब हमें चलना चाहिए.
सुमित भी उठ जाता है.
कुछ पल hi हुआ था दोनों को चलते हुए तभी.
सुमित:- आज तो तुम कुछ ज्यादा hi खूबसूरत लग रही ho...Andhera में भी तुम्हारी खूबसूरती नहीं छिप रहा है.
कीर्ति:- क्यों? और दिन बदसूरत लगती थी?
सुमित:- Nahi...Aaj कुछ jyada...Aaj दिल की नजर से बोल रहा हूँ.
कीर्ति:- दिल की नजर? तुम्हारा एनाटोमी कुछ ज्यादा hi कमजोर hai...Thoda आशिकी काम और पढाई लिखे पर ज्यादा ध्यान दो.
इतना कह कर कीर्ति आगे बढ़ गयी.
सुमित:- एनाटोमी ऑफ़ heart....Issmein उतना एक्सपर्ट कभी नहीं रहा.
सुमित ने इतना तो कहा और आगे भी कुछ बोलै जो उसके मुंह से बाहर न निकल सका.
सुमित:- इस सब्जेक्ट में तो मेघा एक्सपर्ट है.
मेघा की याद आते hi वो भी दिल की बारे mein...Ek बार फिर सुमित कमजोर पद गया.
सुमित:- शायद ये जख्म हमेशा मुझे मेरे उस भूल का याद दिलाता rahega...Aakhir काम भी तो ऐसा hi किया है.
सुमित किसी तरह इस याद को भुलाना चाहता है कुछ पल के liye...Taaki कीर्ति के साथ कुछ पल बीती वो भी प्यार से.
बहुत कुछ सोच रखा था usne...Abb इस वेकेशन के कल का आखिरी दिन को कैसे एक यादगार लम्हा banaye...Fir कीर्ति से उसका पिछले 2 साल के बारे में जानना tha...Aur आगे की जिंदगी के बारे में प्लानिंग.
कुछ यही सोच के साथ सुमित कीर्ति के साथ आगे बढ़ रहा था.
ात नाईट 9 पं
अभी इस वक्त? तूने क्यों बुलाया हम सब को?
ये सवाल था मेघा का कीर्ति से.
सुमित भी अभी अभी पहुंचा tha...Kirti कुछ एक्ससिटेड लग रही thi...Megha कुछ कन्फ्यूज्ड thi...Aur Vivek...Uska अभी भी गाल फुला हुआ था.
कीर्ति:- कुछ बताना था.
मेघा:- क्या?
कीर्ति:- याद है tujhe...Jab इस वेकेशन में आये थे मैंने तुझसे कहा था की अब्ब मुझे कभी प्यार नहीं hoga...Lekin मई गलत थी.
मेघा कुछ नहीं बोलती.
कीर्ति:- ये एक यादगार पल है मेरे जिंदगी ka...Pyaar का एहसास दुबारा हो hi gaya...Issi लिए सोचा क्यों न इस पल को अपने दोस्तों के साथ सेलिब्रेट करू.
कीर्ति ने बोलना जारी रखा.
कीर्ति:- आज मई प्रोपोज़ करने वाली हूँ तुम सब के सामने जिसे मई अब्ब अपने जान से भी ज्यादा प्यार करने लगी हूँ.
इतना कह कर कीर्ति अपने पीछे से गुलाब का फूल निकालती है और धीरे धीरे सुमित की तरफ बढ़ती है.
सुमित का धड़कन काबू से बाहर हो रहा tha...Chaandni रात में कीर्ति की ये khubsurati...Aur अपने हाथो में गुलाब को लेकर चलने की वो aadaayein...Sumit से रहा नहीं जा रहा tha...Aur ऊपर से कीर्ति की ये muskaan...Uff
सुमित दिल थामे कीर्ति को देख रहा था और इंतजार कर रहा था उस पल का जिसका वो पिछले 2 साल से इंतजार कर रहा था.
कीर्ति भी धीरे से आगे बढ़ रही थी और सुमित के पास पहुँच कर मुस्कुराती है aur...Aur...
और वो सुमित के पास से निकलते हुए विवेक की तरफ बढ़ने लगी.
ये देख विबेक भी एकदम से हैरान हो gaya...Sumit को तो यकीं hi नहीं हुआ.
सुमित आँख बंद कर के फिर से देखता है लेकिन ये सच tha...Lekin यकीं शायद अभी भी नहीं हो रहा था.
कुछ hi पल में दिल में दर्द भर उठा.
सुमित:- (इन हिज मंद) Nahi...Nahi...Aisa नहीं हो सकता.
दर्द का असर चेहरे में भी साफ़ दिखने लगा.
जोर से खुद को पिंच करके देखता hai....Kaash ये सपना ho...Ek बुरा सपना.
लेकिन हकीकत कुछ और hi था.
कीर्ति:- ी लव यू विवेक.
कीर्ति की इस बात से सुमित के कान ने भी अपना काम करना बंद कर दिया.
एक नजर खुद के हाथ में dekha...Ye सपना तो नहीं निकला लेकिन हाथ के उस जगह पर एक जख्म हो गया tha...Jiska दर्द अभी उठ रहे दिल के जख्म के मुकाबले ना के बराबर था.
डरते हुए उसने कीर्ति की तरफ अपना नजर ghumaya...Vibek भी हैरानी में कोई जवाब नहीं दे पा रहा था.
कीर्ति मुद कर सुमित को देखती है.
कीर्ति:- बेवकूफ hi rahoge...Jo प्यार और दिखावा में फर्क करना नहीं जानते.
सुमित कुछ बोलने की हालात में नहीं था.
कीर्ति अब्ब मेघा की तरफ देखती है.
कीर्ति:- प्लान सक्सेसफुल.
कीर्ति की इस बात पर मेघा भी हैरान रह जाती hai...Wo कभी कीर्ति को घूरती तो कभी सुमित को.
सुमित और मेघा का जब नजर मिला तो सुमित की होंठो में एक मुस्कान आ gaya...Haara हुआ मुश्कान.
कीर्ति:- बहुत इर्रिटेटिंग हो tum...Bahut बार मन किया था इर्रिटेट मत karo...Mat karo...Lekin सुनते कहा हो तुम.
बस इससे बचने के लिए परमानेंट इलाज ढूंढ liya...Future डॉक्टर जो हूँ.
सुमित अभी भी कुछ नहीं बोल पा रहा tha...Abb दर्द में दो बून्द आंसू आखों से टपक गए.
कीर्ति:- बस इसी लिए सोचा तुम्हारे करीब होने का नाटक करती hun...Expectation इतना हाई कर दूंगी की तुम आसमान में उड़ने lagoge...Aur reality...Ekdum से जमीं मई पटक दूंगी.
और वही किया.
उम्मीद है बहुत बड़ा झटका लगा है tumhe...Lagna भी chahiye...Aur अब्ब तुम मेरे पास आने से भी daroge...Irritate करना बहुत दूर की बात है.
कीर्ति की बातों में नफरत tha...Sirf नफरत.
ये सब सुन कर सुमित का सर फटने लगा था.
कीर्ति:- "ी लव यू" मेरे मुंह से ये सुन्ना तुम्हारे लिए एक ऐसा सपना है जो कभी पूरा नहीं हो sakta...Abb थोड़ा रियलिटी में aao...Aur रियलिटी.
"ी हेट यू."
इस बार कुछ ज्यादा hi तेज आवाज में कहा कीर्ति ne...Sumut अब्ब और झेल नहीं पाया.
वो वह से भागते हुए अपने तुम में पहुंचा और सीधे अपने बीएड पर गिर गया.
मेघा को भी सुमित का बहुत फ़िक्र होने लगा सुमित को इस हाल में देख kar...Kirti पर तो बहुत गुस्सा आ रहा था लेकिन इससे ज्यादा सुमित का fikar...Wo भी सुमित के पीछे चली गयी.
और Kirti...Wo अभी भी कड़ी थी वही par...Ek विजयी मुश्कान के साथ.