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सुमित सोने hi वाला था की उसके पापा रूम में आ गए.
स. डैड:- आज तुझे एक कहानी सुनाने आया हूँ.
सुमित:- कहानी?
स. डैड:- बचपन में तो बहुत परेशान करता था, पापा ये कहानी सुनाइए वो कहानी सुनाइए?
सुमित:- और आप को कोई कहानी याद नहीं रहता था.
बचपन की बातें याद आते hi एक बार फिर से सुमित के चेहरे में मुस्कान आ गया.
सुमित:- सुनाते वक्त बिच में hi भूल तो नहीं जाएंगे?
स. डैड:- Nahi...Ye कहानी तूने hi डिमांड किया tha...Abb बीटा का इच्छा हो और बाप पूरा ना कर sake...Ye हो सकता है?
सुमित:- मैंने डिमांड किया था कोई कहानी?
स. डैड:- अब्ब तेरा यादाश्त कमजोर हो रहा hai...Ye कहानी काम मेरा बायोग्राफी ज्यादा hai...Tune hi तो डिमांड किया था.
सुमित:- Haan...Lekin आज आपको कैसे याद आ gaya...Hamesha तो टालते आ रहे थे?
स. डैड:- बस इसी वजह से ताल रहा था क्यों की वो सही वक्त नहीं लग रहा tha...Koi ख़ास कहानी तो नहीं है लेकिन शायद तेरे लिए जरुरी हो सकता hai...Aur आज hi सही वक्त लग रहा है.
सुमित:- सुनाइए फिर.
सुमित भी अब्ब थोड़ा एक्ससिटेड लग रहा था.
स. डैड:- तुझे क्या लगता है ये जो तू बचपन में इतना शैतान था और जवानी के शुरुवात में आवारा, और बात करने की tarika...Relaxed और कारेफ़री आदत कहा से आया होगा तुझ में?
सुमित कुछ सोच hi रहा था की...
स. डैड:- कुछ ऐसा hi हुआ करता था मई bhi...Bilkul hi carefree...Kisia से कोई मतलब nahi...Apne hi तरीके से जीना जो मन करे वही karna...Doston के साथ मिल कर पुरे गांव वालों के नाक में दम कर के रखना.
जो दिल में आये वो बेझिझक कहना भले hi कोई गुस्से में नक् फुला le...Kisi का कोई परवाह नहीं था.
बस जिंदगी अपने तरीके से जीता tha...Koi रुकावट nahi...Koi टेंशन नहीं.
सुमित:- लेकिन अब्ब तो आप को देख कर ऐसा नहीं लगता?
स. डैड:- वक्त वक्त की बात hai...Aur वक्त के अनुसार खुद को बदलना भी पड़ता hai...Abb बुढ़ापे में बचपना करूँगा तो अच्छा लगेगा क्या?
सुमित:- आप hi तो कह रहे थे की आप पर किसी का कोई असर नहीं होता tha...To फिर ये बदलाव क्यों?
स. डैड:- थोड़ी ना किसी के कुछ कहने पर ये बदलाव आया है या फिर लोग क्या सोचेंगे इस वजह से कोई बदलाव आया hai...Abb वक्त के साथ ऐसे जीने का मन कर रहा है तो ऐसे hi जी रहा hun...Kabhi मजाक तो कभी सीरियस.
चल अब्ब तुझे अपनी कहानी की तरफ ले चलता हूँ.
जैसे की तू भी जानता है बचपन मेरा गांव में hi gujra...Uss वक्त के हिसाब से हमारा परिवार एक मिडिल क्लास tha...Naa hi कुछ ज्यादा ऐशो आराम और ना hi ज्यादा garibi...Kul मिला कर सब कुछ ठीक ठाक था.
हमारे माँ और पिताजी के हम दो hi बीटा thhe...Iss लिए परवरिश में भी कोई समस्या नहीं tha...Mai बड़े बीटा होने की वजह से पापा के थोड़ा करीब tha...Papa का भी अच्छा ख़ासा इज्जत और मान सम्मान था गांव mein...Papa का करीब था और पापा की गांव में pahunch...Issi वजह से गांव के बहुत लोग मुझे जानते थे.
बचपन में तो ये किसी सेलिब्रिटी वाली फीलिंग से काम नहीं tha...Mai किसी को नहीं जानता था लेकिन सब मुझे जानते थे.
...Wo अलग बात है की ये सब पापा की वजह से मुझे जानते hai...Lekin बचपन में इन् बातों से क्या फर्क पड़ता hai...Apni तारीफ़ suno...Papa की नाम से कोई भी काम किसी से भी करवा लो.
बचपन या फिर जवानी की सुरुवात तक ऐसे hi मौज मस्ती में बिता.
अब्ब पापा के बहुत करीब था ये जितना अच्छा था मेरे लिए उतना hi बुरा bhi...Jab भी पापा गुस्सा होते मेरा खैर नहीं tha...Kitna पिटाई हुई है ये गईं भी नहीं सकता.
पड़ोस की गांव में हॉस्पिटल tha...Hospital होना वैसे तो लोगो के लिए अच्छी बात hai...Lekin मेरे लिए buri...Papa को जब भी पिटाई करना होता बेफिक्र होकर मारते thhe...Agar एक दो हड्डी टूट भी गया तो हॉस्पिटल किस दिन काम आता?
इतना सुनते hi सुमित जोर जोर से हसने लगता है.
स. डैड:- अगर बचपन में मैंने भी तेरा ऐसे hi पिटाई करता तो हसने की हिम्मत नहीं करता तू?
सुमित की पापा की बात से तो सुमित को डरना चाहिए था लेकिन उन्होंने ये बात हँसते हुए कहा तो सुमित और भी हसने लगा.
सुमित:- हसने दीजिये Papa...Thoda बहुत मार तो आपसे भी खाया hai...Uss वक्त सोचता था काश आपको भी कोई पीट कर मेरा बदला ले le...Lekin दादाजी ने तो बहुत पहले hi बदला चूका दिया tha...Thanks दादाजी.
स. डैड:- बहुत कमीना hai...Apne hi पापा को पिटवाना चाहता था?
सुमित इस बात पर सिर्फ हस्ता है.
स. डैड:- मई तो और भी कमीना tha...Uss वक्त पापा पर बहुत गुस्सा आता था.
सुमित:- अब्ब?
स. डैड:- अब्ब क्या बहुत पहले hi रीलीज़ हो गया hai...Wo जो भी करते थे सोच समझकर hi करते thhe...Pyaar भी बहुत करते thhe...Jab भी गुस्सा शांत होता था खुद hi मिठाई खिलाने ले चलते thhe...Apne hi हाथो से मलहम लगाते थे.
सुमित:- और चाचा? उनकी कितनी पिटाई होती थी?
स. डैड:- बहुत kam...Naa hi वो ज्यादा मार खाता tha...Aur ना hi पापा के उतना करीब tha...Bas माँ का लाडला था.
सुमित:- अच्छा hi hai...Bach गए.
स. डैड:- अच्छा तो बिलकुल भी नहीं hai...Hamesha उसके दिल में यही सवाल होता था की ऐसा मुझ में क्या था की पापा मेरे ज्यादा करीब thhe...Yaa फिर गांव वाले भी मुझे ज्यादा भाव देते थे.
कोशिश तो वो भी करता tha...Lekin बात नहीं बन पाटा tha...Ye भी अलग hi टैलेंट है की लोगो को इन्फ्लुएंस कैसे करना है? ये एक टैलेंट शायद बचपन से hi मुझ में था.
बस यही एक प्रॉब्लम है उस में की वो चाहता है ज्यादा से ज्यादा लोग उसके आस पास rahe...Uski तारीफ़ kare...Issi लिए आज भी थोड़ा बहुत शोऑफ करता रहता है.
और मुझे निचा दिखने का एक मौका भी नहीं chhodta...Jo आज तक कर नहीं पाया hai...Bachpan में जब भी वो मुझे निचा दिखाने का सोचता उल्टा उससे hi आईना दिखा देता tha...Iss बात का नाराजगी शायद अब्ब भी है उस में.
जब थोड़ा रीलीज़ हुआ उससे समझाने की कोशिश भी kiya...Lekin वो इस बात को दिल में ले चूका tha...Iss में मुझे मेरा भी गलती नहीं लग रहा था तो मैंने भी ये कोशिश छोड़ दिया.
आज जब सोचता हूँ तो हो सकता है अनजाने में कभी गलती हो भी सकता hai...Lekin दिल में हर बात को लेना ये भी सही नहीं है.
दिल का वो बुरा इंसान नहीं hai...Bas मुझसे हमेशा से नाराज hi रहा hai...Aur लोगो के अटेंशन को हमेशा सबसे ऊपर रखता hai...Waise भी मुझे इन् बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग मेरे बारे में गलत सोचते है या नहीं?
बस उससे शिकायत है तो एक बात ki...Wo अपने साथ साथ आरव को भी उसी तरफ ले जा रहा hai...Ek दो बार आरव से भी बात किया था लेकिन वो भी समझना नहीं चाहता तो छोड़ diya...Mujhe kya...Jaisa काम करेंगे वैसा hi फल मिलेगा.
ये क्या कुछ ज्यादा hi फॅमिली मटर में घुस गया.
हाँ कहा tha...Bachpan में.
बचपन या फिर जवानी की hi बात करू और दोस्त ना हो ऐसा कैसे हो सकता hai...Dosti भी गजब का था और hai...Jo दोस्त पहले हुआ करते थे वो आज भी hai...Bahut से दोस्त ऐसे है जो कुछ भी करने के लिए तैयार hai...Kuch दोस्त ऐसे भी है जो उतना पसंद नहीं karte...Dosto के बिच जब भी बात करता तो कुछ ज्यादा hi बोलने लग jaata...Ye बात कुछ दोस्तों को पसंद भी नहीं था.
एक वो भी है जो तेरा ससुर भी बन सकता tha...Lekin उसका बदकिस्मती.
सुमित भी इस बात पर हँसता है और फिर.
सुमित:- बचपन से जवानी तक आ गए लेकिन एक बात अभी भी नहीं बताया आपने?
स. डैड:- क्या?
सुमित:- आपकी लव स्टोरी?
स. डैड:- मेरा लव story...Impossible.
सुमित:- क्यों?
स. डैड:- वो क्या कहते हो तुम log...Haan सख्त launda...Kuch ऐसा hi हुआ करता था mai...Kisi लड़की के प्यार में इतना दम नहीं था की मेरा दिल चुरा sake...Aur मई किसी लड़की के पीछे जाओ ये मई किसी बुरे सपने में भी नहीं सोच सकता था.
वो अलग बात है की मई तेरी माँ का क्रश tha...Aur हमारी शादी एक अरेंज्ड मैरिज था.
सुमित:- शादी के बाद pyaar...Interesting कांसेप्ट.
स. डैड:- ये तो तेरे साथ भी होने वाला hai...Haan शादी के बाद थोड़ा बहुत प्यार तो हो hi gaya...Pyaar और responsibility...Shaadi के बाद hi अच्छे से सीखा है. :डी
स. डैड:- बचपन की बात हुए एक बहुत जरुरी चीज भूल गया बताने के लिए.
सुमित:- क्या?
स. डैड:- पढ़ाई.
सुमित:- आप पढ़ते भी थे?
स. डैड:- वो तो अभी भी तुझसे ज्यादा पढता हूँ.
सुमित:- उस टाइम की hi पढाई की कहानी सुनाइए?
स. डैड:- पढाई की शुरुवात तो हुआ था पापा की जिद्द की वजह se...Bachpan में हमेशा बंक करता था स्कूल और दोस्तों के साथ घूमने निकल जाता था.
लेकिन पापा को ये बात बिलकुल भी पसंद नहीं tha...Aur सबसे ज्यादा पिटाई इसी बात को ले कर होता tha...Papa के टाइम में बहुत काम लोग पढाई लिखे करते थे और जो भी पढ़े लिखे होते थे उनका इज़्ज़त भी होता था.
पापा किसी कारण से पढाई नहीं कर पाए थे और मुझे और तेरे चाचा को किसी भी हाल में पढ़ाना चाहते थे.
सुरुवात में तो पढाई शब्द से साफ़ नफरत tha...Bas पापा की दर से स्कूल चला जाता था.
लेकिन एक दिन अचानक से बदलाव आ गया.
मुझे टाइफाइड हो गया था और उसी पड़ोस की गांव की हॉस्पिटल में एडमिट किया gaya...Doctor ने बहुत अच्छे से इलाज kiya...Jab हॉस्पिटल में था तो बहुत से पेशेंट उस डॉक्टर को दिखाने aate...Unka बहुत इज़्ज़त tha...Har कोई उनका दिल से इज़्ज़त करते thhe...Aisa लगता था कोई सामान्य इंसान तो बिलकुल भी नहीं है.
लोगो को मौत से बचाना आसान काम तो बिलकुल भी नहीं hai...Aur उनका म्हणत, उनका ज्ञान देख कर मई काफी प्रभावित था उनसे.
बस ऐसे hi एक बार उनसे पूछ लिया.
स. डैड:- डॉक्टर sahab...Mujhe भी डॉक्टर बनना है.
वो मुस्कुराये और.
डॉक्टर:- इसके लिए तो तुम्हे बहुत पढ़ाई करनी पड़ेगी.
स. डैड:- क्या बिना पढ़ाइये किये डॉक्टर नहीं बन सकता?
डॉक्टर:- (विथ स्माइल) बन सकते ho...Jis दिन सूरज सुबह पश्चिम की और से उगना सुरु होगा.
ये काफी था मुझे समझने के liye...Thaan लिया अब्ब तो पढ़ना hi hai...Doctor बनना hi है किसी तरह.
मजाक मस्ती तो करता hi था लेकिन साथ में पढाई bhi...Doctor से बिच बिच में पूछता रहता था की कैसे पढ़ना chahiye...Doctori के लिए क्या पढ़ना chahiye...Vagera vagera...Wo भी अच्छे से समझाते थे.
10तह तक आने के बाद पढ़ाई में काफी अच्छा हो गया tha...Science और Maths...Jaha बाकी की विद्यार्थी इन् विषय से दूर भागते थे मुझे यही पढ़ने में मजा आता था.
10तह का एग्जाम अच्छा gaya...11th में पास की hi छोटी सेहर में जाने लगा.
11 और 12 भी अच्छे से पढ़ कर अच्छे मार्क्स के साथ पास हो गया.
लेकिन जब पहली बार मेडिकल कॉलेज में एंट्रेंस देने गया तो क़ुएस्तिओन्स देख कर सर चक्र gaya...Padha कुछ था और क़ुएस्तिओन्स कुछ और hi तरह का?
बहुत मुश्किल से पास हो paaya...Admission मिल सकता था लेकिन स्कालरशिप nahi...Middle क्लास होने की वजह से इतना पैसा दे पाना भी पॉसिबल नहीं था.
खैर, इसमें अपना आर्थिक हैसियत को दोष नहीं दे सकता tha...Agar सच में काबिल होता तो स्कालरशिप मिलना चाहिए था.
एक और कोशिश kiya...Marks थोड़ा अच्छा aaya...Lekin नतीजा wohi...Scholarship नहीं मिला.
एक और बार कोशिश kiya...Coaching भी liya...Lekin वही natija...Thoda और अच्छा मार्क्स लेकिन स्कालरशिप नहीं.
बहुत बुरा लग रहा tha...Mehnat इतना किया था लेकिन इस म्हणत का फल नहीं मिल रहा था.
घर में पापा और माँ दोनों hi सपोर्ट कर रहे थे अभी bhi...Kisi तरह मुझे इस जुंग को जीत ते हुए देखना चाहते थे.
एक और कोशिश kiya...Marks बहुत अच्छा aaya...Lekin स्कालरशिप फिर नहीं मिला.
अब्ब सच में टूट चूका tha...Pehli बार खुद को हारा हुआ महसूस kiya...Abb और दम नहीं था.
अब्ब तो जैसे साइंस से hi नफरत हो गया tha...Maths ले कर बैचलर में एडमिशन करवा liya...Papa भी नाराज thhe...Lekin बाद में मान गए.
इतना कह कर वो सुमित को देखने lage...Sumit भी चुप था.
स. डैड:- बस यही कहानी सुनना tha...Ek कहानी हार की.
सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.
स. डैड:- यही वो हार tha...Jisne मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था...2-4 दिन सिगरेट और दारु की नशा में खुद को डूबा दिया था.
यही वो कहानी है जो तू बार बार पूछ रहा था तेरे चाचा ने जब ये बात उठाया था.
हर नशा के कहानी के पीछे प्यार नहीं होता hai...Kuch टूटे सपने भी होते है.
सुमित:- सॉरी Papa...Mera उस जिद्द ने आपके भरे हुए जख्म को ताजा कर दिया.
स. डैड:- मैंने खुद ताजा किया hai...Aaj नहीं बहुत साल pehle...Aur अपने कमजोरी से डरना नहीं उससे लड़ना chahiye...Ye बात बहुत पहले hi समझ आ गया था भले hi देरी से आमाझ में aaya...Issi लिए तो तुझे डॉक्टर बनने पर जोर दे रहा था.
मेरे पापा पढ़े लिखे नहीं थे इसी लिए मुझे पढ़ना चाहते thhe...Mai डॉक्टर नहीं बन पाया इसी लिए तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता था.
सुमित बस ध्यान से उनकी बात सुन रहा था.
स. डैड:- लेकिन जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता tha...Issi लिए तुझे जो भी पढ़ने का मन था वही पढ़ने देना चाहता tha...Lekin तू था की कोई भी सब्जेक्ट अपने मन से पढ़ना नहीं चाहता tha...Bas यही बात मुझे पसंद नहीं था.
सुमित:- सच कहु तो उस वक्त तक मुझे मेरे जिंदगी का लक्ष्य नहीं मिल पाया था.
कीर्ति ने मेरे साथ अच्छा किया या गलत ये तो नहीं pata...Lekin उसकी पीछे पीछे मैंने भी मब्ब्स सेलेक्ट किया ये सही था.
आपका अधूरा सपना भी पूरा कर paaunga...Aur एक अच्छा सर्जन बनने का मेरा मकशद भी.
सुमित की पापा इस बात पर कुछ नहीं बोले.
सुमित:- और आपका वो नशा कैसे chhuta...Ek बार ये आदत लग जाती है तो आसानी से छूट टी नहीं है.
स. डैड:- Papa...Jab उन्हें पता चला तो वो काफी गुस्से में thhe...Unke सामने जाते hi हाथ पाउ फूल गौए थे mere...Lekin हैरानी की बात टॉट ये था की उन्होंने बहुत प्यार से समझाया mujhe...Shayad उनका प्यार hi था जो मुझे उस वक्त जरुरत था.
पापा और माँ के साथ कुछ दोस्त भी थे जिन्होंने उस वक्त मुझे sambhala...Warna सपना टूटने का dard...Har कोई संभल नहीं सकता.
जो मेरे साथ हुआ था वही तेरे साथ हुआ hai...Uss वक्त मेरे पापा थे मुझे संभालने के liye...Aaj मई हूँ.
ये कहानी इतने दिनों से इस लिए नहीं बता रहा था क्यों की आज मुझे सही वक्त लग रहा hai...Kal तक एक उम्मीद भी था की कीर्ति तुझे मिल सकती है और इस कहानी की जरुरत nahi...Lekin आज जो भी हुआ उस वाकः से ये बताना बहुत जरुरी है.
बीटा बस यही kahunga...Aise दर्द जो होते है अंदर से तोड़ के रख देते hai...Khud से hi हार जाना, दूर दूर तक कोई उम्मीद न dikhna...Ye मेरे साथ भी हुआ tha...Aaj तेरे साथ भी हो रहा hai...Bahut हिम्मत है तुझ में जो ये सेह रहा है.
अभी कुछ दिन और सेहन कर le...Dekhna राष्ट खुद मिल jaayega...Jaldbaazi में कोई गलत फैसला ना लेना जो मैंने लिया था.
सुमित:- क्या गलत फैसला?
स. डैड:- मैंने एक hi मेडिकल कॉलेज को सब कुछ मान लिया tha...Usmein स्कालरशिप न मिलने की वजह से मैंने जल्दबाज़ी में कोर्स चेंज कर लिया.
अगर थोड़ा और रिसर्च करता तो बहुत दूर दूसरा कॉलेज में उतने मार्क्स में स्कोलरहिप मिल jaata...Utna रेपुटेड कॉलेज नहीं था इस वजह से मेरे ध्यान में भी नहीं आया लेकिन मब्ब्स तो कर hi सकता था न.
बस यही कहूंगा कीर्ति hi सब कुछ नहीं hai...Thoda दिन और बर्दास्त कर le...Fir तुझे भी रीलीज़ होगा.
हर ग़म का कोई न कोई इलाज होता hai...Mere ग़म का इलाज वक्त tha...Tera भी वही है.
ग्रेजुएशन करने के बाद मेरा शादी भी हो gaya...Suru सुरु में तेरी माँ को ज्यादा वक्त नहीं देता tha...Lekin प्यार hi था शायद वो जो मुझे इस बात में उसका शिकायत भी नहीं दिखा.
धीरे धीरे उसकी प्यार भी अच्छा लगने laga...Aur उसके साथ अपना वो ग़म भी भूलने लगा और जिंदगी में वापस पहले की तरह लौटने लगा.
धीरे धीरे मैथ्स भी अच्छा hi लगने laga...Koi भी विषय हो ज्ञान तो देता hi hai...Kuch नया पढ़ने का लिखने का शौख तो हमेशा hi tha...Maths में भी अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर समझने लगा और अपना hi कॉन्सेप्ट्स बनाने laga...Dhire धीरे सब अच्छा लगने लगा.
और जब तू पैदा हुआ तो सोचा तेरा परवरिश और पढाई में कोई कमी नहीं आने dunga...Mera मेडिकल में सेलसेक्शन ना होने का एक वजह आज ये भी लगता है की मेरा इंग्लिश थोड़ा कमजोर था.
बस इसी वजह से तुझे जल्दी hi सेहर ले आया पढ़ाने के लिए ताकि तेरा पढाई में कोई रुकावट न आ paaye...Bas तुम दोनों की पढाई ख़त्म होने के बाद वापस से गांव में hi बस जाने का मन है.
आज सोचता हूँ मेडिकल तो गुजरा हुआ सपना है अगर आगे बढ़ा तो बहुत कुछ सिख पाऊंगा जिंदगी से और किताब से bhi...Bhale hi मैंने मेडिकल में एडमिशन नहीं लिया लेकिन आज भी कई साड़ी चीज मेडिकल रिलेटेड पढता रहता हूँ अच्छा भी लगता है.
बस कोई भी चीज हो किसी भी फील्ड ka...Interesting लगे तो सिखने की हर कोशिश करता हूँ.
इसी लिए हमेशा कहता आया हूँ सबसे बड़ा शिक्षक खुद जिंदगी hi है.
तू भी रीलीज़ करेगा कीर्ति के जाने के baad...Kya गलती हुआ है तुझसे और आगे की जिंदगी कैसे जीना hai...Ek कीर्ति गयी है कोई आएगी बाद में जो सच में तुझसे प्यार करेगी और जिंदगी भर साथ चलेगी.
सुमित:- समझ रहा हु Papa...Shayad आप सही कह रहे hai...Bas थोड़ा वक्त chahiye...Aap भी तो कह रहे है थोड़ा वक्त के बाद संभल जाऊँगा.
सुमित सोने hi वाला था की उसके पापा रूम में आ गए.
स. डैड:- आज तुझे एक कहानी सुनाने आया हूँ.
सुमित:- कहानी?
स. डैड:- बचपन में तो बहुत परेशान करता था, पापा ये कहानी सुनाइए वो कहानी सुनाइए?
सुमित:- और आप को कोई कहानी याद नहीं रहता था.
बचपन की बातें याद आते hi एक बार फिर से सुमित के चेहरे में मुस्कान आ गया.
सुमित:- सुनाते वक्त बिच में hi भूल तो नहीं जाएंगे?
स. डैड:- Nahi...Ye कहानी तूने hi डिमांड किया tha...Abb बीटा का इच्छा हो और बाप पूरा ना कर sake...Ye हो सकता है?
सुमित:- मैंने डिमांड किया था कोई कहानी?
स. डैड:- अब्ब तेरा यादाश्त कमजोर हो रहा hai...Ye कहानी काम मेरा बायोग्राफी ज्यादा hai...Tune hi तो डिमांड किया था.
सुमित:- Haan...Lekin आज आपको कैसे याद आ gaya...Hamesha तो टालते आ रहे थे?
स. डैड:- बस इसी वजह से ताल रहा था क्यों की वो सही वक्त नहीं लग रहा tha...Koi ख़ास कहानी तो नहीं है लेकिन शायद तेरे लिए जरुरी हो सकता hai...Aur आज hi सही वक्त लग रहा है.
सुमित:- सुनाइए फिर.
सुमित भी अब्ब थोड़ा एक्ससिटेड लग रहा था.
स. डैड:- तुझे क्या लगता है ये जो तू बचपन में इतना शैतान था और जवानी के शुरुवात में आवारा, और बात करने की tarika...Relaxed और कारेफ़री आदत कहा से आया होगा तुझ में?
सुमित कुछ सोच hi रहा था की...
स. डैड:- कुछ ऐसा hi हुआ करता था मई bhi...Bilkul hi carefree...Kisia से कोई मतलब nahi...Apne hi तरीके से जीना जो मन करे वही karna...Doston के साथ मिल कर पुरे गांव वालों के नाक में दम कर के रखना.
जो दिल में आये वो बेझिझक कहना भले hi कोई गुस्से में नक् फुला le...Kisi का कोई परवाह नहीं था.
बस जिंदगी अपने तरीके से जीता tha...Koi रुकावट nahi...Koi टेंशन नहीं.
सुमित:- लेकिन अब्ब तो आप को देख कर ऐसा नहीं लगता?
स. डैड:- वक्त वक्त की बात hai...Aur वक्त के अनुसार खुद को बदलना भी पड़ता hai...Abb बुढ़ापे में बचपना करूँगा तो अच्छा लगेगा क्या?
सुमित:- आप hi तो कह रहे थे की आप पर किसी का कोई असर नहीं होता tha...To फिर ये बदलाव क्यों?
स. डैड:- थोड़ी ना किसी के कुछ कहने पर ये बदलाव आया है या फिर लोग क्या सोचेंगे इस वजह से कोई बदलाव आया hai...Abb वक्त के साथ ऐसे जीने का मन कर रहा है तो ऐसे hi जी रहा hun...Kabhi मजाक तो कभी सीरियस.
चल अब्ब तुझे अपनी कहानी की तरफ ले चलता हूँ.
जैसे की तू भी जानता है बचपन मेरा गांव में hi gujra...Uss वक्त के हिसाब से हमारा परिवार एक मिडिल क्लास tha...Naa hi कुछ ज्यादा ऐशो आराम और ना hi ज्यादा garibi...Kul मिला कर सब कुछ ठीक ठाक था.
हमारे माँ और पिताजी के हम दो hi बीटा thhe...Iss लिए परवरिश में भी कोई समस्या नहीं tha...Mai बड़े बीटा होने की वजह से पापा के थोड़ा करीब tha...Papa का भी अच्छा ख़ासा इज्जत और मान सम्मान था गांव mein...Papa का करीब था और पापा की गांव में pahunch...Issi वजह से गांव के बहुत लोग मुझे जानते थे.
बचपन में तो ये किसी सेलिब्रिटी वाली फीलिंग से काम नहीं tha...Mai किसी को नहीं जानता था लेकिन सब मुझे जानते थे.
बचपन या फिर जवानी की सुरुवात तक ऐसे hi मौज मस्ती में बिता.
अब्ब पापा के बहुत करीब था ये जितना अच्छा था मेरे लिए उतना hi बुरा bhi...Jab भी पापा गुस्सा होते मेरा खैर नहीं tha...Kitna पिटाई हुई है ये गईं भी नहीं सकता.
पड़ोस की गांव में हॉस्पिटल tha...Hospital होना वैसे तो लोगो के लिए अच्छी बात hai...Lekin मेरे लिए buri...Papa को जब भी पिटाई करना होता बेफिक्र होकर मारते thhe...Agar एक दो हड्डी टूट भी गया तो हॉस्पिटल किस दिन काम आता?
इतना सुनते hi सुमित जोर जोर से हसने लगता है.
स. डैड:- अगर बचपन में मैंने भी तेरा ऐसे hi पिटाई करता तो हसने की हिम्मत नहीं करता तू?
सुमित की पापा की बात से तो सुमित को डरना चाहिए था लेकिन उन्होंने ये बात हँसते हुए कहा तो सुमित और भी हसने लगा.
सुमित:- हसने दीजिये Papa...Thoda बहुत मार तो आपसे भी खाया hai...Uss वक्त सोचता था काश आपको भी कोई पीट कर मेरा बदला ले le...Lekin दादाजी ने तो बहुत पहले hi बदला चूका दिया tha...Thanks दादाजी.
स. डैड:- बहुत कमीना hai...Apne hi पापा को पिटवाना चाहता था?
सुमित इस बात पर सिर्फ हस्ता है.
स. डैड:- मई तो और भी कमीना tha...Uss वक्त पापा पर बहुत गुस्सा आता था.
सुमित:- अब्ब?
स. डैड:- अब्ब क्या बहुत पहले hi रीलीज़ हो गया hai...Wo जो भी करते थे सोच समझकर hi करते thhe...Pyaar भी बहुत करते thhe...Jab भी गुस्सा शांत होता था खुद hi मिठाई खिलाने ले चलते thhe...Apne hi हाथो से मलहम लगाते थे.
सुमित:- और चाचा? उनकी कितनी पिटाई होती थी?
स. डैड:- बहुत kam...Naa hi वो ज्यादा मार खाता tha...Aur ना hi पापा के उतना करीब tha...Bas माँ का लाडला था.
सुमित:- अच्छा hi hai...Bach गए.
स. डैड:- अच्छा तो बिलकुल भी नहीं hai...Hamesha उसके दिल में यही सवाल होता था की ऐसा मुझ में क्या था की पापा मेरे ज्यादा करीब thhe...Yaa फिर गांव वाले भी मुझे ज्यादा भाव देते थे.
कोशिश तो वो भी करता tha...Lekin बात नहीं बन पाटा tha...Ye भी अलग hi टैलेंट है की लोगो को इन्फ्लुएंस कैसे करना है? ये एक टैलेंट शायद बचपन से hi मुझ में था.
बस यही एक प्रॉब्लम है उस में की वो चाहता है ज्यादा से ज्यादा लोग उसके आस पास rahe...Uski तारीफ़ kare...Issi लिए आज भी थोड़ा बहुत शोऑफ करता रहता है.
और मुझे निचा दिखने का एक मौका भी नहीं chhodta...Jo आज तक कर नहीं पाया hai...Bachpan में जब भी वो मुझे निचा दिखाने का सोचता उल्टा उससे hi आईना दिखा देता tha...Iss बात का नाराजगी शायद अब्ब भी है उस में.
जब थोड़ा रीलीज़ हुआ उससे समझाने की कोशिश भी kiya...Lekin वो इस बात को दिल में ले चूका tha...Iss में मुझे मेरा भी गलती नहीं लग रहा था तो मैंने भी ये कोशिश छोड़ दिया.
आज जब सोचता हूँ तो हो सकता है अनजाने में कभी गलती हो भी सकता hai...Lekin दिल में हर बात को लेना ये भी सही नहीं है.
दिल का वो बुरा इंसान नहीं hai...Bas मुझसे हमेशा से नाराज hi रहा hai...Aur लोगो के अटेंशन को हमेशा सबसे ऊपर रखता hai...Waise भी मुझे इन् बातो से कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग मेरे बारे में गलत सोचते है या नहीं?
बस उससे शिकायत है तो एक बात ki...Wo अपने साथ साथ आरव को भी उसी तरफ ले जा रहा hai...Ek दो बार आरव से भी बात किया था लेकिन वो भी समझना नहीं चाहता तो छोड़ diya...Mujhe kya...Jaisa काम करेंगे वैसा hi फल मिलेगा.
ये क्या कुछ ज्यादा hi फॅमिली मटर में घुस गया.
हाँ कहा tha...Bachpan में.
बचपन या फिर जवानी की hi बात करू और दोस्त ना हो ऐसा कैसे हो सकता hai...Dosti भी गजब का था और hai...Jo दोस्त पहले हुआ करते थे वो आज भी hai...Bahut से दोस्त ऐसे है जो कुछ भी करने के लिए तैयार hai...Kuch दोस्त ऐसे भी है जो उतना पसंद नहीं karte...Dosto के बिच जब भी बात करता तो कुछ ज्यादा hi बोलने लग jaata...Ye बात कुछ दोस्तों को पसंद भी नहीं था.
एक वो भी है जो तेरा ससुर भी बन सकता tha...Lekin उसका बदकिस्मती.
सुमित भी इस बात पर हँसता है और फिर.
सुमित:- बचपन से जवानी तक आ गए लेकिन एक बात अभी भी नहीं बताया आपने?
स. डैड:- क्या?
सुमित:- आपकी लव स्टोरी?
स. डैड:- मेरा लव story...Impossible.
सुमित:- क्यों?
स. डैड:- वो क्या कहते हो तुम log...Haan सख्त launda...Kuch ऐसा hi हुआ करता था mai...Kisi लड़की के प्यार में इतना दम नहीं था की मेरा दिल चुरा sake...Aur मई किसी लड़की के पीछे जाओ ये मई किसी बुरे सपने में भी नहीं सोच सकता था.
वो अलग बात है की मई तेरी माँ का क्रश tha...Aur हमारी शादी एक अरेंज्ड मैरिज था.
सुमित:- शादी के बाद pyaar...Interesting कांसेप्ट.
स. डैड:- ये तो तेरे साथ भी होने वाला hai...Haan शादी के बाद थोड़ा बहुत प्यार तो हो hi gaya...Pyaar और responsibility...Shaadi के बाद hi अच्छे से सीखा है. :डी
स. डैड:- बचपन की बात हुए एक बहुत जरुरी चीज भूल गया बताने के लिए.
सुमित:- क्या?
स. डैड:- पढ़ाई.
सुमित:- आप पढ़ते भी थे?
स. डैड:- वो तो अभी भी तुझसे ज्यादा पढता हूँ.
सुमित:- उस टाइम की hi पढाई की कहानी सुनाइए?
स. डैड:- पढाई की शुरुवात तो हुआ था पापा की जिद्द की वजह se...Bachpan में हमेशा बंक करता था स्कूल और दोस्तों के साथ घूमने निकल जाता था.
लेकिन पापा को ये बात बिलकुल भी पसंद नहीं tha...Aur सबसे ज्यादा पिटाई इसी बात को ले कर होता tha...Papa के टाइम में बहुत काम लोग पढाई लिखे करते थे और जो भी पढ़े लिखे होते थे उनका इज़्ज़त भी होता था.
पापा किसी कारण से पढाई नहीं कर पाए थे और मुझे और तेरे चाचा को किसी भी हाल में पढ़ाना चाहते थे.
सुरुवात में तो पढाई शब्द से साफ़ नफरत tha...Bas पापा की दर से स्कूल चला जाता था.
लेकिन एक दिन अचानक से बदलाव आ गया.
मुझे टाइफाइड हो गया था और उसी पड़ोस की गांव की हॉस्पिटल में एडमिट किया gaya...Doctor ने बहुत अच्छे से इलाज kiya...Jab हॉस्पिटल में था तो बहुत से पेशेंट उस डॉक्टर को दिखाने aate...Unka बहुत इज़्ज़त tha...Har कोई उनका दिल से इज़्ज़त करते thhe...Aisa लगता था कोई सामान्य इंसान तो बिलकुल भी नहीं है.
लोगो को मौत से बचाना आसान काम तो बिलकुल भी नहीं hai...Aur उनका म्हणत, उनका ज्ञान देख कर मई काफी प्रभावित था उनसे.
बस ऐसे hi एक बार उनसे पूछ लिया.
स. डैड:- डॉक्टर sahab...Mujhe भी डॉक्टर बनना है.
वो मुस्कुराये और.
डॉक्टर:- इसके लिए तो तुम्हे बहुत पढ़ाई करनी पड़ेगी.
स. डैड:- क्या बिना पढ़ाइये किये डॉक्टर नहीं बन सकता?
डॉक्टर:- (विथ स्माइल) बन सकते ho...Jis दिन सूरज सुबह पश्चिम की और से उगना सुरु होगा.
ये काफी था मुझे समझने के liye...Thaan लिया अब्ब तो पढ़ना hi hai...Doctor बनना hi है किसी तरह.
मजाक मस्ती तो करता hi था लेकिन साथ में पढाई bhi...Doctor से बिच बिच में पूछता रहता था की कैसे पढ़ना chahiye...Doctori के लिए क्या पढ़ना chahiye...Vagera vagera...Wo भी अच्छे से समझाते थे.
10तह तक आने के बाद पढ़ाई में काफी अच्छा हो गया tha...Science और Maths...Jaha बाकी की विद्यार्थी इन् विषय से दूर भागते थे मुझे यही पढ़ने में मजा आता था.
10तह का एग्जाम अच्छा gaya...11th में पास की hi छोटी सेहर में जाने लगा.
11 और 12 भी अच्छे से पढ़ कर अच्छे मार्क्स के साथ पास हो गया.
लेकिन जब पहली बार मेडिकल कॉलेज में एंट्रेंस देने गया तो क़ुएस्तिओन्स देख कर सर चक्र gaya...Padha कुछ था और क़ुएस्तिओन्स कुछ और hi तरह का?
बहुत मुश्किल से पास हो paaya...Admission मिल सकता था लेकिन स्कालरशिप nahi...Middle क्लास होने की वजह से इतना पैसा दे पाना भी पॉसिबल नहीं था.
खैर, इसमें अपना आर्थिक हैसियत को दोष नहीं दे सकता tha...Agar सच में काबिल होता तो स्कालरशिप मिलना चाहिए था.
एक और कोशिश kiya...Marks थोड़ा अच्छा aaya...Lekin नतीजा wohi...Scholarship नहीं मिला.
एक और बार कोशिश kiya...Coaching भी liya...Lekin वही natija...Thoda और अच्छा मार्क्स लेकिन स्कालरशिप नहीं.
बहुत बुरा लग रहा tha...Mehnat इतना किया था लेकिन इस म्हणत का फल नहीं मिल रहा था.
घर में पापा और माँ दोनों hi सपोर्ट कर रहे थे अभी bhi...Kisi तरह मुझे इस जुंग को जीत ते हुए देखना चाहते थे.
एक और कोशिश kiya...Marks बहुत अच्छा aaya...Lekin स्कालरशिप फिर नहीं मिला.
अब्ब सच में टूट चूका tha...Pehli बार खुद को हारा हुआ महसूस kiya...Abb और दम नहीं था.
अब्ब तो जैसे साइंस से hi नफरत हो गया tha...Maths ले कर बैचलर में एडमिशन करवा liya...Papa भी नाराज thhe...Lekin बाद में मान गए.
इतना कह कर वो सुमित को देखने lage...Sumit भी चुप था.
स. डैड:- बस यही कहानी सुनना tha...Ek कहानी हार की.
सुमित अभी भी कुछ बोल नहीं पा रहा था.
स. डैड:- यही वो हार tha...Jisne मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था...2-4 दिन सिगरेट और दारु की नशा में खुद को डूबा दिया था.
यही वो कहानी है जो तू बार बार पूछ रहा था तेरे चाचा ने जब ये बात उठाया था.
हर नशा के कहानी के पीछे प्यार नहीं होता hai...Kuch टूटे सपने भी होते है.
सुमित:- सॉरी Papa...Mera उस जिद्द ने आपके भरे हुए जख्म को ताजा कर दिया.
स. डैड:- मैंने खुद ताजा किया hai...Aaj नहीं बहुत साल pehle...Aur अपने कमजोरी से डरना नहीं उससे लड़ना chahiye...Ye बात बहुत पहले hi समझ आ गया था भले hi देरी से आमाझ में aaya...Issi लिए तो तुझे डॉक्टर बनने पर जोर दे रहा था.
मेरे पापा पढ़े लिखे नहीं थे इसी लिए मुझे पढ़ना चाहते thhe...Mai डॉक्टर नहीं बन पाया इसी लिए तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता था.
सुमित बस ध्यान से उनकी बात सुन रहा था.
स. डैड:- लेकिन जोर जबरदस्ती भी नहीं कर सकता tha...Issi लिए तुझे जो भी पढ़ने का मन था वही पढ़ने देना चाहता tha...Lekin तू था की कोई भी सब्जेक्ट अपने मन से पढ़ना नहीं चाहता tha...Bas यही बात मुझे पसंद नहीं था.
सुमित:- सच कहु तो उस वक्त तक मुझे मेरे जिंदगी का लक्ष्य नहीं मिल पाया था.
कीर्ति ने मेरे साथ अच्छा किया या गलत ये तो नहीं pata...Lekin उसकी पीछे पीछे मैंने भी मब्ब्स सेलेक्ट किया ये सही था.
आपका अधूरा सपना भी पूरा कर paaunga...Aur एक अच्छा सर्जन बनने का मेरा मकशद भी.
सुमित की पापा इस बात पर कुछ नहीं बोले.
सुमित:- और आपका वो नशा कैसे chhuta...Ek बार ये आदत लग जाती है तो आसानी से छूट टी नहीं है.
स. डैड:- Papa...Jab उन्हें पता चला तो वो काफी गुस्से में thhe...Unke सामने जाते hi हाथ पाउ फूल गौए थे mere...Lekin हैरानी की बात टॉट ये था की उन्होंने बहुत प्यार से समझाया mujhe...Shayad उनका प्यार hi था जो मुझे उस वक्त जरुरत था.
पापा और माँ के साथ कुछ दोस्त भी थे जिन्होंने उस वक्त मुझे sambhala...Warna सपना टूटने का dard...Har कोई संभल नहीं सकता.
जो मेरे साथ हुआ था वही तेरे साथ हुआ hai...Uss वक्त मेरे पापा थे मुझे संभालने के liye...Aaj मई हूँ.
ये कहानी इतने दिनों से इस लिए नहीं बता रहा था क्यों की आज मुझे सही वक्त लग रहा hai...Kal तक एक उम्मीद भी था की कीर्ति तुझे मिल सकती है और इस कहानी की जरुरत nahi...Lekin आज जो भी हुआ उस वाकः से ये बताना बहुत जरुरी है.
बीटा बस यही kahunga...Aise दर्द जो होते है अंदर से तोड़ के रख देते hai...Khud से hi हार जाना, दूर दूर तक कोई उम्मीद न dikhna...Ye मेरे साथ भी हुआ tha...Aaj तेरे साथ भी हो रहा hai...Bahut हिम्मत है तुझ में जो ये सेह रहा है.
अभी कुछ दिन और सेहन कर le...Dekhna राष्ट खुद मिल jaayega...Jaldbaazi में कोई गलत फैसला ना लेना जो मैंने लिया था.
सुमित:- क्या गलत फैसला?
स. डैड:- मैंने एक hi मेडिकल कॉलेज को सब कुछ मान लिया tha...Usmein स्कालरशिप न मिलने की वजह से मैंने जल्दबाज़ी में कोर्स चेंज कर लिया.
अगर थोड़ा और रिसर्च करता तो बहुत दूर दूसरा कॉलेज में उतने मार्क्स में स्कोलरहिप मिल jaata...Utna रेपुटेड कॉलेज नहीं था इस वजह से मेरे ध्यान में भी नहीं आया लेकिन मब्ब्स तो कर hi सकता था न.
बस यही कहूंगा कीर्ति hi सब कुछ नहीं hai...Thoda दिन और बर्दास्त कर le...Fir तुझे भी रीलीज़ होगा.
हर ग़म का कोई न कोई इलाज होता hai...Mere ग़म का इलाज वक्त tha...Tera भी वही है.
ग्रेजुएशन करने के बाद मेरा शादी भी हो gaya...Suru सुरु में तेरी माँ को ज्यादा वक्त नहीं देता tha...Lekin प्यार hi था शायद वो जो मुझे इस बात में उसका शिकायत भी नहीं दिखा.
धीरे धीरे उसकी प्यार भी अच्छा लगने laga...Aur उसके साथ अपना वो ग़म भी भूलने लगा और जिंदगी में वापस पहले की तरह लौटने लगा.
धीरे धीरे मैथ्स भी अच्छा hi लगने laga...Koi भी विषय हो ज्ञान तो देता hi hai...Kuch नया पढ़ने का लिखने का शौख तो हमेशा hi tha...Maths में भी अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर समझने लगा और अपना hi कॉन्सेप्ट्स बनाने laga...Dhire धीरे सब अच्छा लगने लगा.
और जब तू पैदा हुआ तो सोचा तेरा परवरिश और पढाई में कोई कमी नहीं आने dunga...Mera मेडिकल में सेलसेक्शन ना होने का एक वजह आज ये भी लगता है की मेरा इंग्लिश थोड़ा कमजोर था.
बस इसी वजह से तुझे जल्दी hi सेहर ले आया पढ़ाने के लिए ताकि तेरा पढाई में कोई रुकावट न आ paaye...Bas तुम दोनों की पढाई ख़त्म होने के बाद वापस से गांव में hi बस जाने का मन है.
आज सोचता हूँ मेडिकल तो गुजरा हुआ सपना है अगर आगे बढ़ा तो बहुत कुछ सिख पाऊंगा जिंदगी से और किताब से bhi...Bhale hi मैंने मेडिकल में एडमिशन नहीं लिया लेकिन आज भी कई साड़ी चीज मेडिकल रिलेटेड पढता रहता हूँ अच्छा भी लगता है.
बस कोई भी चीज हो किसी भी फील्ड ka...Interesting लगे तो सिखने की हर कोशिश करता हूँ.
इसी लिए हमेशा कहता आया हूँ सबसे बड़ा शिक्षक खुद जिंदगी hi है.
तू भी रीलीज़ करेगा कीर्ति के जाने के baad...Kya गलती हुआ है तुझसे और आगे की जिंदगी कैसे जीना hai...Ek कीर्ति गयी है कोई आएगी बाद में जो सच में तुझसे प्यार करेगी और जिंदगी भर साथ चलेगी.
सुमित:- समझ रहा हु Papa...Shayad आप सही कह रहे hai...Bas थोड़ा वक्त chahiye...Aap भी तो कह रहे है थोड़ा वक्त के बाद संभल जाऊँगा.