MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 37 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

थैंक यू भाई फॉर लवली कमेंट...

भाई त्रिकाल का माया जाल है. प्रोब्लेम्स तो होगी HI... सबसे बड़ी बात त्रिकाल के पास कितनी पावर्स होगी जो उसने इन सब माया जाल को बना दिया........

देखिये भाई लता क्या करती है.... पैर अभी तो ये दोनों एक दूसरे का इन्तजार HI कर रहे है. मिलेंगे तो क्या होगा और क्या नहीं ये देखने वाली बात होगी.......... और कब कहेगे अपने दिल की बात ये भी टाइम आने पैर HI पता चलेगा.......
 
अपडेट 240

अभी रात हो चुकी थी. और वो दोनों उस मैदान में hi सोने का इंतजाम कर चुके थे. दोनों ने ये तय किया था की नया चरण कल सुबह hi सुरु करेंगे. एक फल के आधे हिस्से ने hi इनकी भूख को मिटा दिया था. कियोकि वो एक मायावी फल था जिसमे से उसकी जहर की माया को महादेव की तलवार ने काट दिया था. ये फ्राइडे की नाईट थी.

फ्राइडे को और कही भी कुछ खाश नहीं हुआ न हवेली में, न संभु के घर और न hi लता के घर सोनल कल सुबह की सोचती हुयी सो चुक्का थी कियोकि कल सुबह अविनाश आने वाला था तो उससे मिलने का सोचते हुए सो गयी.

सैटरडे सुबह जब दोनों सो कर ुढे तब उनको अहसास हुआ की जो भूक उनको इतना तड़फा रही थी वो भी उस मायावी बाग़ के कारन hi था. भूक तो दोनों को अभी भी लगी थी पैर अब वो उसको कण्ट्रोल कर प् रहे थे. दोनों सुबह के सभी काम करके फ्री हुए. धयान लगा कर अपनी जीवन शक्ति को भी फुल किया. हवेली पैर सभी ये बात की ये अच्छा था की यहाँ से सभी से कांटेक्ट हो प् रहा था. सब ये सुन कर खुस हो गए की पहला चरण पार हो गया है. सभी से कुछ देर बात करके नए चरण में चले गए. तो फिर आवाज हुयी दूसरा चरण प्रारम्भ.

ये भी जंगल hi था पैर ये एक सुन्दर जंगल था. जहा हरे भरे पेड़ पौधे थे. सुबह सूरज को रौशनी में कुछ जंगली फूल भी खिले हुए दिख रहे थे, पेड़ो पैर जंगली फल भी लगे थे, तो चिडियो की चहचहाट भी आ रही थी. उस जंगल को देख कर दोनों को बड़ा सुकून मिल रहा था की चलो यहाँ पहले की जैसी प्रॉब्लम नहीं है. पब दिव्या दृष्टि से भी उस जंगल को स्कैन कर रहा था की कोई प्रॉब्लम न हो. पैर अभी तक उसको कुछ भी गलत नहीं मिला था. जो दिख रहा था वो हकीकत hi था. ये देख कर पब खुश हो गया और एक पेड़ से कुछ फलो को तोड़ कर लगा फिर दोनों ने पेट भर कर वो फल खाये. दोनों को वह बड़ा hi सुखों मिला. कुछ देर वही बिता कर दोनों आगे बाद गए.

दोनों अभी थोड़ा hi आगे आये थे की सामने का नजारा देख कर दोनों के मुँह खुले रहा गए. दोनों को यहाँ ऐसा कुछ देखने की आशा hi नहीं थी. सामने एक बड़ा सा मैदान था. और उस मैदान में 108 हवन खुद जल रहे थे. और बिच में 1 बड़ा कुंड था. मैदान के एक साइड में कुछ कच्चे माकन या आश्रम जैसा बना हुआ था. और उस आश्रम की सोभा वह लगे फूलो और फलो के सुन्दर पेटो से थी. सभी हवन कुंडो पैर साधु के जैसे दिखने वाले लोग बैठे हुए थे. और बड़े कुंड पैर तो 7 लोग बैठे थे. छोटे खुंडो पैर हवन करने वाले सभी साधु पिली धोती और पिली hi पटका लिए हुए थे जबकि वो 7 लोग भगवा वस्त्रो में उन सभी से ज्यादा बड़े और तपश्वी शादू लग रहे थे. पब ने सभी को गौर से देखा और फिर अपने दिव्या दृष्टि से भी तो उसको वो सब हक्कीकत hi लगा. वह इस जगह पैर ऐसे इतने बड़े हवन का आयोजन पब को बहुत ाजेब लगा. साला त्रिकाल के चक्रवेव में इतना पुण्य का काम.

पब और अवनि के जब कुछ समाज नहीं आया तो दोनों उस बड़े हवन कुंड के पास पहुंच गए. और पब जैसे hi बोलने को हुआ तो एक साधु ने पब को चुप रहने का इशारा किया. और इशारे से hi एक और बैठने को कहा. अब पब इतना तो जनता hi था की कोई भी मंत्र पड़ते हुए उससे बात तो नहीं कर सकता. और उन लोगो से बात करने के लिए पब एक साइड में बेथ गया. और उनके हवन के पुरे होने का इन्तजार करने लगा. हवन भी बहुत शांत तरीके से चल रहा था. सभी साधु मंत्रो को मन hi मन पद रहे थे. केवल हवन में जल रही सामग्री की hi खुस्भु और आवाज आ रही थी.

कुछ देर में पब को ऐसा लगता है की उसके मंद पैर कुछ आ कर चला जा रहा है. पैर वो सोचता है की शायद ये इस निर्मल वातावरण का प्रभाव है. सुबह से शयाम हो चुकी थी पैर वो दोनों उस हवन के पास hi बैठे रहे कई बार पब ने उड़ने की कोसिस भी की पैर अवनि ने हर बार उसको रोक लिया. फिर उसको भी हवन के बिच में से जाना गलत लग रहा था. तो वो भी बैठा रहा. और देखते hi देखते रात भी हो गयी. पैर वो दोनों वह से नहीं हिले. जब रात को हवन बंद हुआ तो पब ने अवनि को चलने को बोलै. और उन साधुओ को प्रदान करके जाने लगा. तब उनके हेड साधु ने बोलै – अब इतनी रात में कहा जाओगे. वैसे भी हवन अभी पूरा नहीं हुआ है. सुबह से फिर चालू होगा. अभी भोजन का समय है भोजन करके आज यहाँ आश्रम में hi विश्राम करो.

पब – नहीं महात्मा हमको बहुत दूर जाना है तो आप हमे आज्ञा दे. वैसे भी आज पूरा दिन यहाँ हो चुक्का है हमको आगे बढ़ना hi होगा.

अवनि – पब अब रात में हम कहा जायेगे. वैसे भी रात को सोना hi तो है चलो चल केर रट है. सुबह देखगे की क्या करना है.

पब को भी अवनि की बात सही लगती है तो वो भी भोजन करने पहुंच जाता है. भोजन को भी स्कैन करके देखता है पैर वो भी पुरे hi था कोई भी गलत बात उसको नहीं लग रही थी. पैर पता नहीं क्यों फिर भी उसके मंद में अलग -2 ख्याल आ रहे थे. और भोजन करके जब वो दोनों सोने लगे तो अवनि तो लेटते hi सो गयी पैर पब के ख्याल आने नहीं रुके. कभी दर लगने लगता तो कभी यही रहने का दिल करता. पैर वो हर विचार को झटक देता. कियोकि उसको अपना लक्ष्य पता था.

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सैटरडे को हवेली में और लता के घर पैर कुछ खास नहीं होता. केवल लता के घर शयाम को hi अविनाश घर पहुँचता है. आ तो वो सुबह hi आ गया था पैर जिस मीटिंग के लिए वो गया था उससे रिलेटेड कुछ काम उसको आज hi करने थे कियोकि कल संडे था और वो अपने काम को पेंडिंग नहीं रखना चाहता था. तो आते hi सीदा ऑफिस पहुंच कर उसमे लग गया. न तो सोनल से मिला और न hi किसी और से कोई बात की. शयाम को जब घर पंहुचा तो सोनल को देख कर उसके फेस पैर एक चमक आ गयी जिसको लता ने भी नोट कर लिया.. फिर ये तीनो कल जाने की बातो को करते रहे और डिनर करके सो गए. रतन आज कही बहार था.

त्रिकाल की सड़ना को चलते हुए एक लम्बा टाइम हो गया था. त्रिकाल ने इतने दिनों में अपने आधे से बहार भी नहीं आया था. और न hi संभु उससे मिलने गया था. त्रिकाल का हर काम त्रिकाल के पास मौजूद वो लड़किया कर रही थी जिनके आगे जा कर त्रिकाल को बलि देनी थी. त्रिकाल के खाने से नहाने तक के सभी काम ये लड़किया hi कर रही थी. वो वैसे भी ये ट्रेनिंग के कारन त्रिकाल की गुलाम थी. त्रिकाल के एक बार कहने पैर ये त्रिकाल के लिए अपनी गार्डन काट देनी थी. तो ये सब काम तो बहुत छोटी बात थी. त्रिकाल एक बार 11 लड़कियों की बलि दे चुक्का था. पैर अभी भी 2 बार बलि दी जनि बाकि थी. और त्रिकाल हर बीतते दिनों के साथ अपनी सड़ना को अपने लिए और भी कठिन करता जा रहा था. और इस बार आज 7 दिनों के बाद त्रिकाल अपनी सड़ना के लिए किये जा रहे एक हवन से ुधा था. त्रिकाल ने इस 7 दिनों में एक मं के लिए भी अपना ाशन नहीं छोड़ा था. और इसके फलस्वरूप उसको अपने हवन ने सफलता भी मिली थी. और दिन प्रति दिन अपने लक्ष्य की और बाद रहा था. और आज जब वो हवन से ुधा तो उसको भी ये ज्ञात तो गया की पब उसके चक्रवेव में जा चुक्का है और उसने 1सत चरण पार भी कर लिया है. पैर कैसे ये जानने के लिए उसे टाइम लग्न था तो वो इस बात को दरकिनार कर संभु से मन hi मन कनेक्ट होता है और बताता है की पब हवेली से निकल चुक्का है. वो अपना हमला कर दे. त्रिकाल और संभु के बिच में अभी बहुत hi काम कांटेक्ट होता था. त्रिकाल अभी केवल अपनी शदना में ली लीं था. उसको न खाने का होश था और न पिने का. वो न सोता था और न hi कोई मनोरंजन करता था. अभी त्रिकाल केवल एक कठिन तपश्या कर रहा था और इससे वो बहुत खुश भी था कियोकि अब उसको फील होने लगा था की वो सही दिशा में है और उसके अंदर की कमजोरी उसकी ताकत में बदलने लगी थी. चाहे उसको अपनी सभी सकतिया नहीं मिली थी अभी पैर अभी उसका सरीर उस काबिल होने लगा था की वो फिर से अपनी शक्तियों को अपने सरीर में संभल सके.

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ीदार संभु को जैसे hi ये पता चला की वो अब हमला कर सकता है तो तुर्रंत अपने रूम में बैठे हुए hi उसने किसी को फ़ोन किया. और उसी एरिया में मिलने बुलाया जहा वो 2 बार पहले भी जा चुक्का था. संभु ने उसको पूरी टीम के साथ आने को बोलै था. ये संभु के खास चेले थे जो संभु के सभी गलत और सही कामो में उसके साथ हमेशा रहे थे. संभु उनसे बात करके तैयार होने लगा. और तैयार हो कर अपनी पत्नी के पास पहुंच कर बोलै – रेखा में किसी काम से बहार जा रहा हु. आने में देर भी हो सकती है और हो सकता है की कल शयाम तक hi औ.

रेखा – जी.. ok… मैं आपका इन्तजार करुँगी..

रेखा ने आज तक नहीं पूछा था की कहा जा रहे हो क्यों जा रहे हो तो आज hi क्यों पूछती. पैर आज उसकी बेटी को ये जानना था की वो क्यों जा रहा है. अपने बग्स से उसे ये तो पता था की वो कहा जा रहा है पैर क्यों ये उसके समाज के बहार था. अदिति इतना तो समाज गयी थी की आज कुछ होने वह है पैर अच्छा या बुरा ये उसको पता नहीं था. अदिति ने जब संभु को रेखा से जाने को कहते हुए सुना तो उसको पूरा यकीं भी हो गया. और अब उसके अंदर का पत्रकार बहार आने लगा. उसने अपने बाप के पीछे जाने का सोचा. पैर उसको एक दर भी लग रहा था. घवराहट भी थी. पैर वो अपने दिल को पक्का करके आज संभु के पीछे जाने की सोच को मजबूत किया और तैयार हो कर संभु के पीछे निकल गयी. संभु उसे बहुत आगे था अदिति को एड्रेस तो फ़ोन पैर hi पता चल गया था.

अदिति पूरी तैयारी के साथ अपनी कार से संभु के पीछे लगी हुयी थी. अदिति ने एक बॉडी कैमरा लगा लिया था. तो एक छोटा कैमरा उसके हाथ में था और दोनों फुल हद विथ दुब्बी साउंड कैमरा थे. उसका लेपटॉप दूसरी सीट पैर रखा था जिस पैर उसकी नजरे बार बार जा रही थी. संभु की कार के बग्स उसकी करंट लोकेशन को दिखा रहे थे. तभी अदिति को कार में लगे माइक्रो स्पिकेर्स से रिकॉर्ड आवाज लेपटॉप से आने लगी. आवाजे बहुत दिमि थी. तो अदिति ने संभु के फ़ोन को चक किया पैर उसे कोई कॉल नहीं हो रहा था. पैर आवाजों से लग रहा था की संभु किसी से बात कर रहा है. पैर किस्से और कैसे ये अदिति को समाज नहीं आया. फिर एक दम से अदिति को सभु की तेज़ आवाज सुनाई दी. – “अब तो तुम सबको मरना hi होगा. तुम हवेली छोड़ कर भी भाग नहीं सकोगी. लगता है भगवन भी उन सब क मूट चाहता है अब” ये सुन कर अदिति को कुछ समाज नहीं आया पैर इतना उसको लग गया की संभु किसी को मरने की सोच रहा है. और ये उसके लिए किसी झटके से काम नहीं था.

अदिति उस जगह पैर पहुंच गयी थी जहा संभु पहले hi अपने साथियो के साथ बैठा था. ये वो hi पुरातत्व विभाग की जमीन थी अदिति छुपती हुयी अंदर गयी तो संभु के दो तीन आदमी hi उसको गॉर्डस की तरह घूमते मिले. जिनको वो आसानी से चकमा दे कर अंदर चली गयी. ये एक खुला मैदान था. केवल कही -2 पैर कुछ खण्डार नजर आ रहे थे तो कही -2 पैर गहरी खुदाई हो रही थी. और मिटटी के टीले बने हुए थे. अदिति इन सबकी आड़ में छुपती हुयी संभु के पास पहुंच गयी. उसे अपनी जगह से संभु साफ़ देखे दे रहा था और उसकी बाते भी सुनाई दे रही थी. पैर उस पैर किसी की नज़र पड़ने की चांस बहुत काम थे.
 
अपडेट 241

अदिति उस जगह पैर पहुंच गयी थी जहा संभु पहले hi अपने साथियो के साथ बैठा था. ये वो hi पुरातत्व विभाग की जमीन थी अदिति छुपती हुयी अंदर गयी तो संभु के दो तीन आदमी hi उसको गॉर्डस की तरह घूमते मिले. जिनको वो आसानी से चकमा दे कर अंदर चली गयी. ये एक खुला मैदान था. केवल कही -2 पैर कुछ खण्डार नजर आ रहे थे तो कही -2 पैर गहरी खुदाई हो रही थी. और मिटटी के टीले बने हुए थे. अदिति इन सबकी आड़ में छुपती हुयी संभु के पास पहुंच गयी. उसे अपनी जगह से संभु साफ़ देखे दे रहा था और उसकी बाते भी सुनाई दे रही थी. पैर उस पैर किसी की नज़र पड़ने की चांस बहुत काम थे.

संभु के सामने 50 फैदर (रय) खड़े थे. तो 3 दानव खड़े थे डरावनी शकल के. लम्बे तगड़े देख कर hi कोई भी कहा दे मानव तो नहीं है. और यदि कोई मानव देखे तो दर से एक बार आखें hi बंद कर ले. और 1 बहुत hi सुन्दर दानव जितनी hi तगड़ी पैर कोमल काया, गोरा बदन, मोहक चेहरा वाली लड़की भी थी. और ये थी मोहिनी. अदिति उन सब को देख कर बहुत दर भी गयी और उसके अचम्भे की कोई सीमा hi न रही. उसने पहली बार दानव देखे थे. वो एक दीवार से लगी तेज़-2 सांसे लेती हुयी अपने कैमरा को उन लोगो की तरफ कर देती है. पैर उसके कान अभी भी संभु की बातो को hi सुन रहे थे.

संभु – मेरे साथियो वो टाइम आ गया है जिसके लिए मेने तुम सब को इख्ठा किया है. तुमको अभी कुछ देर में यहाँ से पानीपुर की लिए निकलना होगा. और तुम जानते हो तुमको वह जा कर पानीपुर के ठाकुर की हवेली में जाना है. और वह तुमको उस पंकज की पत्निया मिलेगी. सभी का मार दो. उसके लिए तुमको केवल उसकी किसी भी एक पत्नी को hi मरना होगा. बाकि तो अपने आप hi मार जाएगी. तुम्हारा वह जाने का कारन केवल एक hi है और वो है उस पंजक की किसी भी एक पत्नी को मरना.

संभु चेला (सक1) – आप चिंता मत करो हम सबको मार देंगे. उस हवेली को कोई भी जिन्दा नहीं बचेगा. पैर गुरूजी तैयारी के लिए कुछ तो टाइम दो.. क्यों न हमला 1 दिन बाद करे??

संभु – नहीं हमला तो कल hi करना होगा. कियोकि कल वो लोग हवेली छोड़ कर भाग नहीं सकेंगे. ये तुमको कल hi करना है. और यदि तुम सबने ये कर दिया तो मैं तुमको वो इनाम दुगा जो तुम सोच भी नहीं सकते. और तुम्हारे साथ ये सब है तुमको तो बस इनको गाइड करना है बाकि काम ये खुद कर लगे.

सक2 – पैर गुरूजी अपने तो बोलै था की अपने कुछ विदेशी निंजा के बारे में बताया था की वो आ रहे है पैर ये तो सदर्न से दिखने वाले गुंडे है. क्या ये वो सब कर पाएंगे??

संभु – हाहाहाहा ये उनके भी बाप है. इनको फाइटिंग में कोई मानव नहीं हरा सकता. ये सब दानव है और ये 4 महाशक्तिसाली दानव है. इनकी शक्तियों के बारे में तुम सब नहीं जानते. तुम इस बात की चिटा मत करो की वो विदेशी नहीं आये ये सब उनसे लाख गुना ज्यादा ताकतवर है.

सक1 – गुरूजी वो विदेशी आये क्यों नहीं??

संभु – वो सब मादरचोद डनवडरा से दर गए. साले छक्के कही के.

सक2 – तो गुरूजी पहले उस दानवपुत्र का पता करके उसको hi मरते है न. साले ने सभी की नाक में दम कर रखा है. अपने सभी भाई लोग डंडा करने से डरने लगे है.

संभु – तुम सब ये समाज लो की तुम उस अल्पना के पिल्लै, उस हरामी दानवपुत्र को hi मरने जा रहे हो. यदि उसकी पत्निया मार गयी तो वो भी मार जायेगा.

सक1 – क्या सच में गुरूजी?? वो उस दानवपुत्र का hi घर है?? तो क्या वो उसकी गैंग की लड़किया hi उसकी पत्निया है??

संभु – नहीं रे.. वो तो वो रंडिया है जिनको मेने ख़रीदा था अपने महागुरु त्रिकाल की शदना में बलि देने के लिए. कुछ तो साली उसमे मेरी रंडिया बनने के लिए भी भेजी थी.

सक2 – समजे नहीं गुरूजी अपने खरीद कर कहा भेज दी??

संभु – ारे वो थान ा अपना चेला भानु. उसके पास साला मस्त त्रिनेड करवाता था लड़कियों को. एक no. की रैंड बन कर निकलती थी. साला उसकी त्रिनेड रंडियो को छोड़ने में मज़ा बहुत आता था. देख साला सोच कर hi खड़ा होने लगा..

सभी चेले – हाहाहाःहाहा

संभु – चलो मज़ाक बहुत हो गया. अब सुनो पहले उस हवेली ने जा कर उस पंकज की या कहु उस दानवपुत्र की सभी पत्नियों को मरना और फिर वह हवेली के बैक में एक बेसमेंट है. उसमे तुमको वो सब रंडिया मिल जाएगी. जिनको मेने ख़रीदा था पैर अब काम उस हरामी के लिए करती है. उन सब रंडियो को तुम सब (रय की और देख कर) छोड़ सकते हो वो तुम लोगो के लिए मेरी तरफ से इनाम होगा.

वो सब खुश हो जाते है. वैसे भी रय केवल मानव छूट के दीवाने थे. इनको न तो पैसे का लालच था और न किसी को चीज की चाहा. वो सब तो केवल मानव नारी को छोड़ कर मार कर खुश होते थे.

संभु – पैर एक बाद का याद रहे पब की पत्नियों को छोड़ने के चक्कर में भूल से भी मत पद जाना. उनको तो जाते hi तुमको मरना है. और ये hi मेरा आदेश भी है पब की पत्नियों की मूट hi तुम सबका लक्ष्य है. उसके बाद तुम चाहे किसी को भी छोड़ो. या उस पुरे गाओं को आग लगा दो मुझको कोई फरक नहीं पड़ता…

सभी – ऐसा hi होगा..

संभु – तो ठीक है जाओ और काम करके hi लौटना. जय दानव राज… जय महा काल

सभी - जय दानव राज… जय महा काल

फिर सभी लोग वह से चले जाते है. संभु भी उनके पीछे hi निकल जाता है. वह केवल एक hi जीवित प्राणी था और वो थी अदिति. पैर वो किसी मरे हुए से काम नहीं लग रही थी. वही दीवार के सहारे अपने मुँह को घुटनो में छुपाये रो रही थी. संभु की सच्चाई देख कर अदिति की आतम मर चुकी थी. उसने जिको अपना हीरो, अपना भगवन, अपना आइडियल मन हो. उनकी सोच में वो आइडियल सच्चाई का पुजारी, जान कल्याण के लिए जेने वाला एक संत पुरुष था. पैर हकीकत में उसका बाप निकला कोण हावर का पुजारी, पापी, लोगो का खून चूसने वाला कीड़ा निकला. अदिति के दिल पैर क्या बीत रही थी ये तो केवल अदिति hi जानती थी.

करीब 1-2 हॉर्स तक अदिति रोटी रही. फिर किसी तरह से खुद को संभल कर अपनी कार के पास पहुंच कर घर पहुंच गयी. घर आ कर सिद्ध अपने रूम में घुस गयी और बीएड पैर लेट कर रोटी रही पता नहीं कब तक रोटी रही और फिर रट-2 hi सो गयी. उसको किसी भी चीज का होश नहीं था. ये उसकी जिंदगी का सबसे ख़राब दिन था. आज के दिन ने उसके पुरे बजूद को hi हिलाकर रख दिया था. उसके अश्तित्व को ख़तम कर दिया था. अब तक जिस नाम को अपने नाम के पीछे लगते हुए उसे गर्व होता था आज वो नाम उसे गली से भी बत्तर लग रहा था.

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संडे मॉर्निंग में सुबह उड़ कर पब और अवनि दोनों तैयार हो कर आश्रम के बहार आते है. अभी हवन सुरु नहीं हुआ था. और पब सोच रहा था की हवन सुरु होने से पहले hi वो वह से निकल जाये. ताकि कल जैसी इस्थिति आज भी न हो. वो आज का टाइम वास्ते नहीं करना चाहता था. पब और अवनि जैसे hi बहार की और चले तो बहार आ कर अवनि हवन वाली जगह पैर जाने लगी. पब ने उसे रोका और कहा – रुको अवनि वह कहा जा रही हो. भूल गयी हमारा लक्ष्य ये हवन नहीं है हमको यहाँ से जाना होगा हमारी मंजिल दूर है.

अवनि – पब ने भी अपनी मंजिल नहीं भूली हु. पैर तुम भूल रहे हो की किसी भी हवन को बिच में छोड़ कर नहीं जाया जाता. हमको हवन से कुछ तो पावर मिलेगी hi न. और वो पावर आगे हमारे काम आएगी.

पब – अवनि संजो हमको जाना जरुरी है. चलो साथ में ये बहस करने का टाइम नहीं है. कल का हवन देख लिया न और अभी हवन सुरु नहीं हुआ है हवन सुरु होने से पहले hi हमको यहाँ से निकल चलना चाहिए.

दोनों में ऐसे hi बहस चलती रही न तो अवनि वह से जाने को तैयार थी और न hi पब वह सकने को. जब कुछ देर तक समजने के बाद भी अवनि नहीं मानी तो पब को लगा कुछ तो बात है नहीं तो अवनि कभी मेरे से यहाँ सकने के लिए इतनी बहस नहीं करती. तो पब ने बातो को hi बदल दिया और अवनि से अपने प्यार की बाते करने लगा. ीदार वो सब शादू लोग हवन सुरु कर दिए. पैर अवनि पब की प्यार की बातो से हवन की और न जा कर वही कड़ी रही.

कुछ देर बाते करने के बाद पब ने अवनि की आखों में जानका और उसके मंद में घुस गया. और जब उसने देखा तो पता चला की अवनि पैर वशीकरण किया हुआ है. ये देख कर पब चौक गया कियोकि अवनि को गुरु, मंजू और माहि ने इतना तो तैयार किया hi था की उसके मंद पैर वशीकरण जैसी चीज का अक्षर नहीं होना चाहिए था. पैर जब पब ने अवनि के वशीकरण को छेड़ा तो वो समाज गया पूरी बात. ये कोई सदर्न वशीकरण नहीं था. और पब को भी याद आता है कल दिन में उसको भी ऐसा hi कुछ अपने मंद से टकराता हुआ लगा था. और रात में भी उसके मंद पैर अटैक हुआ था. जब तो वो समाज नहीं पाया पैर अवनि के मंद की कंडीशन से उसे सब समाज आ गया था. की ये सब इन साधुओ का hi किया हुआ है. पहले पब ने अवनि के उस वशीकरण को अपने मंत्रो से कटा. और फिर अवनि से बोलै – अवनि अब केसा फील कर रही हो. तुम ठीक तो हो न.

अवनि – हाँ मैं ठीक हु मुझको क्या हुआ?? बस थोड़ा सा सर में दर्द है.

पब – तो चले आगे बड़े. हमको अब आगे चलना चाहिए. हमारा लक्ष्य अभी बहुत दूर है.

अवनि – हाँ चलो चलते है बहुत देर हो गयी यहाँ. कल से हम यहाँ पैर hi है. तुमने पहले आगे चलने का क्यों नहीं सोचा कितना टाइम वास्ते कर दिया तुमने यहाँ पैर.

पब बस अवनि को देखता रहा गया. और मन hi मन हसने लगा की देखो खुद कुछ देर पहले चलने को तैयार नहीं थी और अब मुझसे क्या -2 कहा रही है. पैर वो भी जनता था की अवनि ऐसा क्यों कहा रही है इसलिए उससे कुछ नहीं बोलै. और अवनि का हाथ पकड़ कर उस मैदान से दूसरी दिशा में चल दिया. वो अभी 4 कदम hi चल पाया होगा की उसके सामने वो सब साधु आ गए.

हेड साधु – बीटा कहा जा रहे हो अभी हवन पूरा नहीं हुआ. तुम हवन को बिच में छोड़ कर नहीं जा सकते.

पब – हमको क्षमा करे भगवन हमारा जाना जरुरी है.

ह. साधु – पैर ये मेरे हवन का अपमान होगा. और मैं अपने हवन का अपमान नहीं होने दे सकता. इसलिए मैं तुमसे कहा रहा हु की तुम अभी यहाँ से नहीं जा सकते.

पब साधु की बात सुन कर सोच में पद गया. उसके लिए भी किसी साधु और उसके हवन का अपमान करना बहुत बड़ी बात थी. पैर उसको अब यहाँ रुकना ठीक नहीं लग रहा था. कारन अवनि का वशीकरण होना. और फिर उसके मंद पैर अटैक होना. इसका मतलब उसे ये लग रहा था कुछ तो गलत है यहाँ पैर. और ये साधु hi ये सब कर रहे है. पैर मुँह पैर hi किसी साधु का अपमान करना उसे ठीक नहीं लग रहा था.

कुछ देर तो वो सोचता रहा. और वो साधु भी उसे घेर कर खड़े रहे बाकि साधु अभी हवन कर रहे थे. पब को सोचते हुए याद आया की दयासुरजी ने कहा था जहा दानव प्रवति की जरुरत हो वह दानव बन जाना. तो हो सकता है ये hi वो टाइम है जब कुज्को दानवो की तरह हवन का अपमान करके hi आगे बढ़ना होगा.

पब (थोड़े गुस्से से) – सुनो बाबा अब मैं यहाँ नहीं सुख सकता, चले उसके लिए तुम्हारे हवन का अपमान हो या तुम्हारा मुझको इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता.

ये सुन कर ह. साधु भी गुस्से से बोलै – पापी मानव तू मेरे हवन का अपमान करके यहाँ से जिन्दा नहीं जा सकता. यदि तुझको जाना है तो उसके लिए तुझको हमको हराना होगा. आजा मैदान में देखे की कितना दम है.

ये सुन कर पब और ह. साधु आमने सामने हो गए लड़ने को तैयार. और ह. साधु के पीछे उसके चेले हवन कुंड में मंत्रो का जप करते हुए आहुति डालने लगे. उन मंत्रो को सुन कर पब बुरी तरह चौक गया. कियोकि वो मंत्र एक तांत्रिक किरिया के मंत्र थे. उस किरिया के जरिये ये सभी साधु अपने हवन कुंडो में डाली गयी आहुतियों से अपने ह. साधु को तायत दे रहे थे. ये एक बहुत hi शक्ति साली तांत्रिक किरिया थी. इस तरह से वो सभी साधु ने अपने हेड को बहुत सी तांत्रिक ताकते दे रहे थे.

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ीदार हवेली में भी आज बहुत हलचल थी. ये सब सुबह जल्दी ुध कर अपने धयान में बेथ गए थे. और धयान करने के बाद ये सब सोनल और अविनाश के वेलकम की तैयारी में लग गए थे. अंकिता तो आज ख़ुशी से पहले नहीं समां रही थी. उसका भाई पहली बार उससे मिलने आ रहा था. वो उसकी तैयारी में लगी हुयी थी. गुरु ने जुली को भी बताया था की सोनल आ रही है. जुली भी सोनल से मिलना चाहती थी. पहले जब सोनल यहाँ आयी थी तब जुली की सोनल से बात नहीं हो पायी थी. वो अपने किये की माफ़ी मांगना चाहती थी सोनल से…

ये लोग ख़ुशी -2 सभी काम कर रहे थे. पैर इनको नहीं पता था की आज इनकी तरफ एक बहुत बड़ी आफत उनकी तरफ बाद रही है. और कुछ hi देर में उनके सामने होगी. ये लोग तैयारी कर hi रहे थे की जुली का फ़ोन गुरु के पास आया उसने गुरु को जल्दी से दानव बेस के कण्ट्रोल रूम में आने को कहा. जब गुरु का फ़ोन बजा था वो सलोनी, कामिनी के साथ hi कुछ बात कर रही थी. जुली की आवाज में एक घरी चिंता थी. गुरु को लग गया की कुछ तो बात है. तो वो तुर्रंत चल दी दानव बेस की और. सलोनी भी गुरु के फेस से भाप गयी तो वो भी उसके पीछे हो ली.
 
थैंक यू फॉर ग्रेट कमेंट एंड योर सपोर्ट... मज़ा आ गया भाई कमेंट पढ़ कर..

हाँ भाई पब इन साधुओ में फसने वाला है. अवनि अपने आप को बचा नहीं पायी थी और अवनि का मंद उनके काबू में हो गया.

अदिति का रिएक्शन क्या होगा ये आने में थोड़ा वक्त है....

पैर अब ये सब उन 4 दानवो को कैसे संभालेगी और पब इन साधुओ के साथ क्या करेगा ये सब HI होगा नेक्स्ट उपदटेस में....
 
अपडेट 242

ये लोग ख़ुशी -2 सभी काम कर रहे थे. पैर इनको नहीं पता था की आज इनकी तरफ एक बहुत बड़ी आफत उनकी तरफ बाद रही है. और कुछ hi देर में उनके सामने होगी. ये लोग तैयारी कर hi रहे थे की जुली का फ़ोन गुरु के पास आया उसने गुरु को जल्दी से दानव बेस के कण्ट्रोल रूम में आने को कहा. जब गुरु का फ़ोन बजा था वो सलोनी, कामिनी के साथ hi कुछ बात कर रही थी. जुली की आवाज में एक घरी चिंता थी. गुरु को लग गया की कुछ तो बात है. तो वो तुर्रंत चल दी दानव बेस की और. सलोनी भी गुरु के फेस से भाप गयी तो वो भी उसके पीछे हो ली.

जब ये दोनों दानव बेस में पहुंची तो जुली ने गुरु को बोलै – दीदी अभी खबर मिली है की 6 कार्स में कुछ गुंडे टाइप के आदमी अपने गाओं की तरफ आ रहे है. और वो अपनी हवेली का पता भी पूछ रहे थे.

गुरु – तुमको किसने बताया ये सब??

जुली – उन लड़कियों ने जो सिटी के बहार अपने गाओं के मोड पैर निगरानी रख रही है. ठाकुर साहिब ने hi बोलै था अहा 2-4 लड़कियों को निगरानी रखने के लिए.

तभी कण्ट्रोल रूम में एक स्क्रीन पैर उन कार्स की फोटो आने लगी. ये उस कैमरा की लाइव पिक्स थी जो हवेली के बहार लगा था काफी दूर तब की दुरी को रिकॉर्ड करने के लिए. सभी कार्स रुक गयी. और वो सब गुंडे उन कार्स से बहार आने लगे. और तभी वह पैर वो 4 दानव भी प्रकट हो गए. उन चारो को देख कर सलोनी के तो तोते hi ुध गए. वो उन 4रो को अच्छे से जानती थी. और इस तरह हवेली में आने का मतलब भी समाज रही थी.

सलोनी डरते हुए – दीदी दीदी जल्दी कुछ कीजिये. नहीं तो हमने से कोई जिन्दा नहीं बचेगा. ये चारो बहुत खतरनाक दानव है. इनको हरा पाना हममे से किसी के बस का नहीं है.

गुरु – तुम किन 4 दानवो की बात कर रही हो?? ये तो 3 hi दिख रहे है. और देखने से तो नहीं लगता की ये हम सबके सामने ठीक भी पाएंगे.

सलोनी चीखते हुए – दीदी ये मजाक का वक्त नहीं है कुछ hi देर में ये हवेली में आ जायेगे. और फिर कोई नहीं बचेगा. जल्दी से सभी को बचने का कोई इंतजाम करो.

गुरु को भी सलोनी की बात ठीक लगी. कियोकि एक तो वो उन 4रो के बारे में जानती है थी. और दूसरा जब सलोनी ये कहा रही है तो कोई तो बात होगी hi. फिर सभी को बचने के लिए वो सोचने लगी की क्या किया जाये.. एक दम गुरु के मंद में सब प्लान आ गया. तो वो अपने मन में कामिनी को याद करके बोली – कामिनी जल्दी से सभी को ले कर दानव बेस में आओ. तुम सबके पीछे मूट खड़ी है.

फिर सविता से, फिर अंकिता से, फिर एरिका से बोली इनसे बोलते hi वो जुली से बोली – जुली अभी अपनी सभी लड़कियों को बोलो कोई भी उन पैर अटैक नहीं करेगी. और चुप चाप छुपते हुए दानव बेस में पीछे वाले गेट से आये. और तुम उन सब को अंदर ले कर आओ. मैं किसी की भी जिंदगी के साथ रिस्क नहीं ले सकती.

जुली ने तुर्रंत फ़ोन घुमा दिया. और सभी को समजा भी दिया. और हवेली में ये सुनते hi सभी के हाथ पेअर फूल गए. कियोकि वो सब जानते थे गुरु ने कहा है तो बड़ी बात hi होगी. सविता, कामिनी, अंकिता ने सभी को चिल्ला चिल्ला कर बुलाया और दानव बेस की और भगा दिया. अंकिता ऐडा को खुद ले कर आयी. पेय, मूड, काजल भी दानव बेस में आ गए. जय तो पहले से hi दानव बेस में hi था. पैर उसको अभी कुछ पता नहीं था. पैर कैसे hi उसने घर के हर मेंबर को दानव बेस में आता देखा तो वो भी कण्ट्रोल रूम में पहुंच गया. अभी स्क्रीन पैर वो गुंडे हवेली का मैं गेट तोड़ते नजर आ रहे थे. एक गुंडे ने 4-5 वॉर में hi उस विशाल गेट को गिरा दिया. और ये देख कर ेबेचा बोली – सलोनी ये गुंडे कुछ -2 फारूक के गुंडों जैसे नहीं है?? साले देखने में कुछ भी नहीं और 4-5 बार में hi गेट hi थोड़ दिया.

ये सुन कर सलोनी का धयान भी उन गुंडों की तरफ गया. और जब उसने डायन से देखा तो उसको ेबेचा की बात में दम लगा. पैर वो सूरे नहीं थी. गुरु की टेंशन काम हो चुकी थी कियोकि वो सब यहाँ पैर सेफ थे. इस बेस में किसी का भी आना पॉसिबल नहीं था. इसलिए अब गुरु ने भी अपना मंद चलना सुरु किया. (गुरु अभी तक फारूक और उसके गुंडों के बारे में पब से जान चुकी थी. उसको सब पता चल चुक्का था. और मांईजी के मिशन के बारे में तो वो पहले से hi जानती थी बस उसको ये नहीं पता था की मणि जइब hi दानवो के वध करने के लिए मिशन पैर जाते है पब के बताने से वो सब समाज गयी थी)

गुरु कुछ सोच केर नैना से – नैना देखो इन गुंडों को धयान से देखो और अपनी आखें बंद करके इन पैर धयान दो और पता लगाओ की कोण है ये सब…

नैना ने भी गुरु की बात मान कर वैसा hi किया. और अभी तक धयान में बैठने से इन सभी की शक्तिया बहुत बाद गयी थी. या ये कहा सकते है वो शक्तिया थी तो पहले भी पैर अब ये सब अपनी शक्तियों को पहचान गयी थी. नैना ने जैसे hi धयान उन गुंडों पैर लगाया तो कुछ hi देर में उसके सामने उनका आश्ली चेहरा आ गया. और उन 4रो दानवो का भयानक रूप देख कर तो उसकी रूह hi कैंप गयी.

नैना – दीदी ये सब दानव है और वो 4 तो बहुत hi भयानक है. ये लड़की जो इतनी सुन्दर दिख रही है वास्तव में ये इतनी डरावनी है की यदि कोई देख ले तो सुसु hi निकल जाये.

पेय (मजाक में) – दीदी पैर आपका तो नहीं निकला…

पेय की बात पैर सब मुस्कुरा दिए तो ऐडा और पारी ने उसे घुरा तो वो भी चुप हो गयी. कियोकि ये मस्ती का टाइम नहीं था.

पारी – चलो बच गए यदि हम लोग टाइम से यहाँ नहीं आते तो अभी उन दानवो के सामने होते. फिर पता नहीं हमारा क्या होता.

तभी बेसमेंट ने लगे कैमरा की लाइव स्क्रीन पैर कुछ दानव आने लगे. हवेली में कोई भी कैमरा नहीं था. तो उनको नहीं पता था की हवेली में अभी क्या हो रहा है. तो ये जानने के लिए नैना एक बार फिर अपनी आखें बंद करके देखती है तो दानवो ने हवेली ने तोड़ पोड मचा दी थी. पुरे घर को hi उलट पलट दिया था. संभु के चेले संभु से फ़ोन पैर बात कर रहे थे.

S.C. – गुरूजी यहाँ तो कोई भी नहीं है. और उस बेसमेंट में भी कोई नहीं है पूरा घर खली है. किचन में खाना आधा पका हुआ रखा है. लगता है की इनको पता चल गया तो ये सब भाग गए है.

संभु कुछ सोच कर – हम्म हो सकता है की भाग गए हो. पैर ये लोग जल्दी hi वापिस आ जायेगे. और यही कही छुपे होंगे. तुम एक काम करो अपने साथ आये कुछ लोगो को जंगल की तरफ भेजो. और कुछ को झरने की तरफ शायद ुधा hi हो.

S.C. – ठीक है गुरूजी.

संभु – तुम सब वही उनका वेट करो कब तक भागेंगे लौट केर आना तो पड़ेगा hi न. गाओं की साइड से तो तुम लोग आये हो तो वह तो हो नहीं सकते. तुम लोग आज वही रुको. और चारो और फेल जाओ, जल्दी hi वो सब लौट आएंगे. तुम लोग बस सतर्क रहना… बाकि मैं अभी पता करता हु की वो सब है कहा.

कॉल एन्ड

फिर वो संभु के कहे अनुशार 20 रय को जंगल में और 20 रय को झरने की तरफ और 4 रय को गाओं में भी भेजता है पता लगन ेके लिए की वो लोग कहा जा सकते है. और इनके साथ 2-2 अपने साथियो को भी भेजता है. अब हवेली में केवल वो 4 दानव और 6 रय और 3 S.C. भचे थे. ये सभी लोग भी हवेली में अलग अलग जगहों पैर जा कर एक बार फिर हवेली को देखने लगे थे. की शायद कोई मिल जाये.

ये सब नैना अपने धयान में बेथ केर देख और सुन रही थी. फिर नैना अपनी आखें खोल कर ये सब कुछ सभी को बता देती है. तो सब चिंता में पद जाते है. फिर गुरु बोली – इसका मतलब अब हमको यहाँ hi रहना होगा.

तभी अंकिता को कुछ याद आता है तो वो गहरा केर बोली – दीदी पैर दीदी… आज तो सोनल दीदी और अविनाश भी आ रहे है.

ये सुन कर सभी को उस बात का याद आ गया और सभी घराने लगे. गुरु एक दम बोली – अंकिता जल्दी से सोनल को फ़ोन करो और बोलो की वो आज यहाँ न आये. यदि वो यहाँ आ गयी तो अनर्थ हो जायेगा..

अंकिता तुर्रंत अपना फ़ोन निकलती है और सोनल को कॉल करती है. पैर सोनल का no. स्विच ऑफ था. ये सुनकर सभी गहरा गए. अंकिता बोली – दीदी में माँ को फ़ोन करके भाई का no. लेती हु.

गुरु – हां ये ठीक रहेगा. पैर बात इस तरह से करना की लता जी को पता न चले की तुम क्यों अविनाश का no. मांग रही हो. नहीं तो वो तुम्हारे लिए भी परेशां हो जाएगी.

अंकिता – हाँ दीदी ठीक है.

फिर अंकिता लता को फ़ोन करके उससे अविनाश का no. ले लिया ये बोल कर की वो भाई से पहुंचना चाहती है की वो कितनी देर में पहुंच रहा है. लता ने भी बिना कुछ सोचे no. दे दिया. अंकिता ने तुर्रंत अविनाश को फ़ोन किया. पैर ये क्या अविनाश का फ़ोन भी स्विच ऑफ था. और लता ये बता चुकी थी की वो लोग 30 मं पहले निकल चुके है. मतलब की 5-6 हॉर्स में वो दोनों हवेली पहुंच जायेगे.

अब जरा ये भी देख ले की दोनों के फ़ोन ऑफ क्यों है. बात ये थी की जैसे hi ये दोनों घर ने निकले अविनाश का फ़ोन बजने लगा. कल हुयी मीटिंग से रिलेटेड फ़ोन थे तो अविनाश उनसे बात करता रहा 5 मं तक. ये दोनों एक बहुत hi आलिशान मिनी बस में थे. ड्राइवर का बॉक्स अलग था. और इनके बैठने का बॉक्स अलग. एक दम मस्त मिनी बस थी.



सोनल इतने दिन से अविनाश से बात करने के लिए मरी जा रही थी और आते hi अविनाश ने फ़ोन पैर बात सुरु कर दी. तो सोनल को गुस्सा आने लगा. जब अविनाश ने सोनल को गुस्से में देखा तो उसने उसको मनाया. और फिर दोनों बात करने लगे. पैर तभी फिर से अविनाश का फ़ोन बाज गया. तो अविनाश ने एक मं बात करके hi कॉल कट की और फिर सोनल के गुस्से से बचने के लिए उसे ऑफ कर दिया. दोनों ने फिर से बात सुरु hi की थी की फिर फ़ोन बज गया. पैर इस बार सोनल का बजा था. सोनल का तो गुस्से से दिमाग hi ख़राब हो गया. उसने बिना बात किये hi ऑफ करके एक साइड में फेक दिया जैसे ये उसका दुसमन हो. और अविनाश उसकी हरकतों को देख कर अंदर hi अंदर हंस रहा था. पैर सामने से हँसता तो सोनल उनको कच्चा hi खा जाती. दोनों फ़ोन ऑफ करके अपनी प्यार भरी बातो में लग गए. आज पहली बार दोनों अकेले थे तनहा थे. फ़ोन ऑफ होने के बाद तो दोनों को डिस्टर्ब करने वाला भी कोई नहीं था. और टाइम भी बहुत था काम से काम 5-6 हॉर्स तो थे hi दोनों के पास. पैर दोनों को ये नहीं पता था की वो जहा जा रहे है वह अभी मूट तांडव कर रही है.
 
बहुत HI मस्त.... मज़ा आ गया रिव्यु पद कर ..... रियली ग्रेट..... थैंक यू सो मच फॉर थिस कमेंट.....

भाई अपने वो सब लिखा है जो मैं चाहता था की आप लोग ये सब बिना लिखे HI समजे... ग्रेट ...

अदिति का दुःख ठीक वैसा HI है जैसा अपने कहा.. उसको होश भी नहीं है की वो कहा है...

पब की लड़ाई को बिच में इसलिए रोका है कियोकि उसकी पत्नियों को भी उस टाइम तक पंहुचा दू जब पब लड़ाई सुरु करेगा.

भाई जैसा अपने कहा ठीक वैसे HI ये सब बेस में चले भी गए है. और इनको भी लगता है की वो जीत नहीं सकते. पैर अभी कंडीशन में एक और मोड़ है और वो ये है की सोनल और अविनाश भी कुछ HI हॉर्स में पहुंचने वाले है. यदि ये सब उन दानवो को नहीं मरते या भागते है तो सोनल और अविनाश को भी खतरा है....

भाई शायद आप लोगो ने एक बात पैर धयान नहीं दिया की संभु ने जान कर HI अभी अटैक के लिए बोलै है. क्यों??? कार में से संभु ने किसी को फ़ोन भी किया. पैर खुद के फ़ोन से नहीं.. अदिति थोड़ा बहुत HI सुन पायी. कोण था वो????
 
:thanks::thanks::thanks:

थैंक यू भाई फॉर ग्रेट कमेंट....

भाई पब की तरफ से इतना बड़ा नहीं है कियोकि वो तो गया HI है लड़ने. और उसको तैयार HI किया है इसके लिए... पैर पब की पत्निया तो लड़ना नहीं जानती. और सामने है वो 4 दानव जिनसे देवता भी डरते है.

मेरी पूरी कोसिस होगी की ऐसा लिखू इस फाइट को की आप सभी को ये पसंद आये....
 
:thankyou::thankyou::thankyou:

थैंक यू बीआरओ फॉर लवली कमेंट एंड योर सपोर्ट..

भाई अभी अदिति तो दुःख के उस सागर में है जहा उसे खुद का होश नहीं है. सोचिये यदि किसी का भगवन HI शैतान निकले तो उस पैर क्या बीतेगी. अदिति के लिए संभु सब कुछ था पैर संभु HI अब उसकी नजरो में सबसे कमीना हो गया तो अदिति का क्या हाल होगा...

पब की पत्निया कैसे बचेगी ये बस कुछ HI अपडेट में आएगा... हिंट तो मेने उन 4 दानवो के इंट्रो के साथ भी दी थी. अब देखिएगा नेक्स्ट अपडेट में HI इस सभी का प्लान....

ये टाइम पब पैर काम और उसकी पत्नियों पैर ज्यादा भरी है.....
 
थैंक यू बीआरओ फॉर लवली कमेंट...

यस बीआरओ दानव बेस में जा कर ये सब सेफ है पैर अब क्या करे... सोनल और अविनाश आने वाले है.

भाई अदिति को तो अभी अपना भी होश नहीं है आज उससे उसका भगवन, उसका पिता, उसका हीरो चीन गया है. गम में है बेचारी अभी...

इन सभी की सेफ्टी के लिए कुछ इंतजाम पब ने भी किये थे. उसके चलते HI जुली को पता चल गया. पैर सोनल का आज HI आना और आज HI अटैक होना .............................................

अपडेट पोस्टेड...
 
अपडेट 243

आज पहली बार दोनों अकेले थे तनहा थे. फ़ोन ऑफ होने के बाद तो दोनों को डिस्टर्ब करने वाला भी कोई नहीं था. और टाइम भी बहुत था काम से काम 5-6 हॉर्स तो थे hi दोनों के पास. पैर दोनों को ये नहीं पता था की वो जहा जा रहे है वह अभी मूट तांडव कर रही है.

चलिए एक बार फिर दानव बेस में चलते है.

जब उन दोनों का hi फ़ोन नहीं लगा तो ये सब बहुत परेशां हो गए. वो सब तो दानव बेस में चुप कर बच सकते थे. पैर जब सोनल और अवनिनाश घर आएंगे तो ये दानव उन दोनों को मार देंगे. और वो दोनों hi इन सब के लिए इतने इम्पोटेंट तो थे hi की वो उन दोनों में से किसी को भी खरोच नहीं आने दे सकते थे. अब क्या किया जाये ये सोच कर सभी के दिमाग ख़राब थे. किसी के पास कोई रास्ता नहीं था. जब कोई कुछ नहीं बोलै तो अंकिता ने अपने मंद को ठंडा किया और सोचने लगी की इन दानवो से उन दोनों को कैसे बचाया जाये तो उसके मंद में केवल एक hi बात आयी – हम लोगो को लड़ना होगा. हमको ये दिखाना होगा की हम इस दानवो पैर भी भरी है. अब इनको मरने के अलावा और कोई मार्ग नहीं है हमारे पास.

एक दम शांति में अंकिता की कही बात ने सबको हिला दिया. सबसे ज्यादा सलोनी दरी हुयी थी कारन था की वो इनके बारे में जानती थी की ये क्या वाला है. तो सलोनी बोली – अंकिता तुम्हारा दिमाग तो ख़राब नहीं है ये कोई सदर्न गुंडे नहीं है जिनसे हम लाडे और जीत जाये. ये सब वो दानव है जिनसे लड़ना हम लोगो के बस का रोग नहीं है. हाँ यदि वो होते तो शायद उनका मुकाबला कर सकते थे.

अंकिता – सलोनी यदि तुमको ये विश्वास है की हमारे पति इनको हरा सकते है तो फिर मुझको भी विश्वास है की हम इन सबको हरा सकते है. कियोकि जो सकतिया उनके पास है वो सब शक्तिया हम सबके पास भी है. बस अंतर है तो इतना की उनके पास एक hi सरीर में ये सभी शक्तिया है. जबकि हमारे पास 10 सरीर में है. यदि हम सब एक हो कर उन दानवो से लड़ेंगे तो मुझको पूरा विश्वास है की जीत हमारी होगी.

पारी – और यदि हम हार गए तो??

अंकिता – पारी कायरो जैसी बात मत करो. सोचो हराम पति केवल 20% जीतने के चांस पैर भी वह गए है जहा हर कदम पैर मूट है. तो क्या हम 50% के चांस पैर भी नहीं लड़ सकते?? और यदि नहीं लाडे तो सोचो सोनल दीदी को कुछ भी हो गया तो क्या होगा?? सोनल दीदी के बिना उनका क्या होगा?? क्या वो हमको माफ़ कर पाएंगे की हम लोगो की कायरता की वजह से उनके जान से प्यारी बहन नहीं रही. और लता माँ को क्या जवाब देंगे जब उनको पता चलेगा की उनकी वजह से माँ की गौड़ सुनी हो गयी??

गुरु – अंकिता सही कहा रही है. ये टाइम तुमसबको एक जुट हो कर लड़ने का है. यदि तुम सब एक हो तो तुम पब से भी ज्यादा शक्तिशाली होगी (वैसे ये सच नहीं है. कियोकि इनके पास पब की पावर का एक हिस्सा hi है. गुरु इनका मनोबल बढ़ाने को बोल रही है) और अब लड़ना भी जरुरी है और शायद इस दिन के लिए hi तुमको भी तुम्हारी पावर्स का ज्ञान हुआ है.

गुरु और अंकिता की बातो ने सबके अंदर एक जोश पैदा कर दिया. सब साथ में बोली – यदि ये hi करना है तो हम सब तैयार है अब तो इन दानवो की खेर नहीं.

अंकिता – सलोनी अब तुम ये बताओ की तुम इनके बारे में क्या जानती हो.

सलोनी – ये जो मानव जैसे है ये सब रय है इनसे ेबेचा लड़ चुकी है. (फिर इनके वेयर में डिटेल में सब बताती है)

और ये जो 4 दानव है ये 4रो मायावी और खतरनाक दानव है. यदि ये चारो मार जाये तो फिर हम 50% लड़ाई जीत जायेगे.

  • अगनासुर – ये अग्नि से पल भर में कुछ भी जला सकता है.
  • परसुर – ये किसी भी मानव की परछाई को अपने वश में करके उसे मार भी सकता है और उससे कुछ भी करवा सकता है.
  • अंधकासुर – ये कभी भी डेरा पेला सकता है. रौशनी को निगल जाता है. और उस रौशनी के साथ hi सामने वाले की साडी शक्ति को भी खींच लेता है. ये जिसको चाहे उसको कुछ hi मं. में शक्तिहीन कर देता है और फिर वो मर जाता है. बड़े से बड़े देवता भी इसके सामने आने से डरते है.
  • मोहिनी – ये वो दानव कन्या है जो किसी को भी अपनी और आकर्षित कर सकती है. और अपना गुलाम बना लेती है. एक बार इसकी मोहिनी शक्ति में आया व्यक्ति सदा के लिए इसका हो जाता है.
सलोनी की ेके क बात को अंकिता और गुरु धयान से सुन रही थी. और फिर दोनों सोचती रही की कैसे इन सभी से निपटा जाये. कुछ देर में गुरु बोली – मंजू मेरे हिसाब से इस अगनासुर के लिए तुम बहुत हो. उसके पास केवल अग्नि की पावर है जबकि तुम हरे पास पुरे 5 तत्वों की पावर है.

मंजू – हाँ इसको मैं संभल सकती हु.

गुरु – ये पयासुर की ताकत है परछाई. और यदि किसी की परछाई hi न हो तो?? फिर ये कुछ नहीं कर पायेगा. और इसके लिए हमको इसको अंदर में ले कर जाना होगा. और इस हवेली में सबसे ज्यादा अंदर है बेसमेंट में. यदि वह लाइट बंद कर दो तो कुछ भी नहीं देखता.

ऐडा – पैर दीदी अंदर में तो हम भी नहीं लड़ सकते न.

गुरु – हम्म पैर नैना अंदर मैं भी देख सकती है. देखो इसको पहले बेसमेंट तक एरिका पहुचायेगी. एरिका तुमको इसके सामने जाना होगा. जैसे hi ये तुम्हारी परछाई छूने की भी कोसिस करे तुमको वह से टेलिपोर्ट हो जाना है चाहे थोड़ी hi दूर सही. और इनको अपने पीछे लगा कर बेसमेंट तक लाना है. और बेसमेंट में नैना और सलोनी इसके इन्तजार में बैठी होगी. जैसे hi ये बेसमेंट में आये नैना तुमको सबसे पहले लाइट का मैं स्विच ऑफ करना है फिर इसकी पीठ पैर एक रेडियां चिपका देना है. उसके बाद का काम सलोनी तुमको करना है. साले की गार्डन काट देना.

एरिका, नैना, सलोनी – ठीक है दीदी, हम ये कर सकते है.

ेबेचा – दीदी इसकी गार्डन मैं काट दू तो??

अंकिता – ेबेचा तुमको अंधकासुर से लड़ना होगा. और उसमे तुम्हारी मदत पारी कर सकती है.

पारी – मैं ?? और वो कैसे??

अंकिता – पारी तुमको एक अट्रेक्टिव ड्रेस पहन कर उस दानव के सामने जाना होगा. उसको अपने रूप जाल में फैशन होगा. और यदि मान लो की वो तुम्हारी पावर खींचने की कोसिस करेगा तो भी उसको सेक्स पावर hi मिलेगी. और वो सेक्स के लिए तुम्हारे पीछे आएगा. तुमको खुद को बचते हुए उसको अपने मैं उलझा कर रखना है. और ेबेचा इस बिच में hi तुमको धोखे से उसे मार देना है. अपनी तलवार से. और याद रहे वो एक बार में hi मरना चाहिए यदि उसने तुम्हारी तरफ पलट कर तुम्हारी शक्ति को चूसना सुरु कर दिया तो फिर उससे बचना मुश्किल हो जायेगा.

पारी और ेबेचा – बहुत भेड़िया…

अंकिता – लास्ट में रहा गयी मोहिनी उसका शिकार करुँगी मैं. ये किसी को भी वश में करने के लिए उसके मंद को अपने वश में करती है. माहि तुमको मेरी हेल्प करनी होगी.

माहि – बोलो अंकिता मुझको क्या करना होगा.

अंकिता – मैं उसके सामने कड़ी होगी. आखें खोल कर वो मेने मंद को कण्ट्रोल करने की या मेरे मन को कण्ट्रोल करने की कोसिस करेगी. तो मैं अपने मंद को खुद hi कण्ट्रोल में रखूगी. वो मेरे मंद को नहीं छू पायेगी. और जब वो ये नहीं कर पायेगी तो फिर कोसिस करेगी. तुमको इस बिच में hi इसको मूट कैग हैट उतरना होगा. और यदि तुम चाहो तो सविता भी हरारे साथ हो सकती है.

माहि – नहीं यदि उसको तुम अपने में उलझा कर रखोगी तो फिर मैं इनविजिबल हो कर एक डैगर उसके गले में उतर दूगी.

सविता – तो क्या मैं यहाँ बेथ कर तमाशा देखूँगी??

गुरु – नहीं मैं, तुम, जुली और कामिनी उन सभी बचे हुए गुंडों को संभालेंगे.

सलोनी – तो अब सभी अपने लिए हथियार ले लो. और चलो दिखा दो इनको भी हम सब क्या चीज है….

जुली – आप सभी अपने हथियार मुझको दो पहले. मैं आप सभी की तलवार, डैगर पैर एक खाश पाइजन का लैप कर देती हु. यदि कोई तलवार की दार से बचा भी तो ये पाइजन उनकी जान ले लेगा.

फिर सब तैयार हो गयी कुछ hi देर में लड़ाई के लिए और महादेव को याद कर निकल गयी दानव्बासे से बहार. जय और सैंडी को ऐडा के पास छोड़ कर आ गए थे. जय भी साथ आना चाहता था पैर ये सब जानते थे की जय लड़ाई में परफेक्ट नहीं है इसलिए उसे वही ऐडा के पास छोड़ दिया. नैना ने सभी दानवो की लोकेशन देख कर सभी को बता दी थी. तो सभी अपने अपने टारगेट की और चल दिए.

(भाइयो ये टाइम और पब के ह. साधु से युद्ध सुरु करने का टाइम लगभग शामे hi है. इसलिए पब वाले सन को बिछने रोक कर ये पहले लिखा है. अब यहाँ एक साथ एक hi टाइम में 6 जगह लड़ाई होगी. पैर मैं उनको 1-1 करके hi लिखुगा. पैर ये सब फाइट्स एक hi टाइम में हुयी है.)
 
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