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Part 17
रघु के मोबाइल में मुस्कान को कुछ पिक्स दिखती है जो थी तो लौ क्वालिटी की लेकिन इमेज ठीक थक थी. उसमे ो देखती है रघु ने किसी ाव्रत की गांड की फोटोज ली हैं. उसे ो ड्रेस जाना पहचाना तो लग रहा था लेकिन यद् नहीं ारः था उसने कहाँ देखा है. ो देखती है उस ाव्रत की गांड उस ड्रेस में उभरी हुवी साफ़ साफ़ दिख रही है.
Muskan...man men...tharki कहीं का देखो कैसे बेशर्म के जैसे फोटो लिया है...
मुस्कान फिर मोबाइल रघु को देती है...
Raghu..memsab ठीक है न मोबाइल??
Muskan...haa ठीक hi है...
Raghu...dhanywad मेमसाब मैं तो दर hi गया था के मेरा मोबाइल खराब न होगया हो...
Muskan...nahi ठीक hi है मोबाइल तुम्हारा...
Raghu...acha वैसे मेमसाब कल फिर आपको परेशानी तो नहीं हुवी मेरे जानेके बाद??
इस तरह अचानक रघु के पूछने से मुस्कान थोड़ा अचंबित होती है फिर ऐम्बर्रेस्सेड भी क्यों के कल जो भी हुवा ो बोहत ऐम्बर्रासिंग था उसके लिए. एक शादीशुदा हयादार ाव्रत होकर उसके रघु जैसे गैर मर्द का लुंड उसने हिलाया था भले hi दर्द काम करनेके लिए हो. रघु के सवाल पर मुस्कान बिना जवाब दिए चुप रहती है...
Raghu...kya हुवा मेमसाब...
Muskan...kuch नही..
Raghu...to बताइये न मेमसाब बादमें परेशानी तो नहीं हुवी...
Muskan...nahiii
Raghu...chalo ाचा ह मेमसाब लेकिन मुझे हुवी...
मुस्कान थोड़ा हैरानी से रघु की तरफ देखते हुवे..
Muskan...tumko क्या मतलब??
Raghu...o क्या है न मेमसाब मेरे मोबाइल ों नहीं होरहा था तो मैं मेरी पत्नी को कॉल नहीं सका इसलिए ो पूछ रही थी मैं किदर था...
Muskan...hmm..
Raghu...memsab ो बोलती है कहीं तुम किसी ाव्रत के साथ तो नहीं थे हहै...
रघु अपने चेहरे पर बड़ी hi गन्दी सी स्माइल लेट हुवे मुस्कान को बोलता hai...muskan भी उसकी कही हुवी बात को समझती hai...raghu की पत्नी की बात टेक्निकली तो सही hi थी. कल रात रघु एक तरह से एक ाव्रत के साथ hi था....
Raghu...maine भी बोल दिया हां था मैं एक ाव्रत के साथ...
मुस्कान रघु की तरफ घूरती है उसकी इस बात पर क्या सचमे उसने अपनी पत्नी बताया कल जो कुछ भी हुवा...
Muskan...kya???
Raghu...maine बताया मेमसाब उसको के मैं ाव्रत के साथ तो था लेकिन ो आप hain...hum जहाँ काम कर रहे हैं उन साहब hi पताका बीवी...
Muskan...kya कहाँ तुमने??
Raghu...jo अपने सुना मेमसाब....
Muskan...dekho तुम मुझसे ऐसी बातें मत करो मैंने कितनी बार बोलै है...
Raghu...memsab अब आप हैं पताका इसलिए बोला hai...o क्या है न हमारे िद्र खूबसूरत को पताका और बोहत सरे शब्द से बोलते हैं...
Muskan...yaa...' ऐसा कोनसी जगा है जहाँ ऐसे वर्ड्स इस्तिमाल होते हैं...
Raghu...hehe इसलिए मेमसाब मैंने बताया मेरी पत्नी को के हमारी माल मेमसाब के घरकी लाइट चली गयी थी इसलिए मैं मदद करने चला गया था...
रघु के माल बोलने पर इसबार मुस्कान बस उसको एक बार गुस्से से देखती है और फिर कुछ नहीं बोलती...
Raghu...fir मेरी पत्नी ने पूछा तुम्हारी मेमसाब के कितने बचे हैं...?? तो मैंने बोलै अरे पगली हमारी आइटम मेमसाब की अभी उम्र hi क्या है बच्चों के liye....sahi बोलै न मेमसाब??
Muskan...mujhe ंन्न नही पता...
Raghu...aise कैसे मेमसाब आपके थोड़ी न बचे हैं और अभी तो आप जवान और माल hain...abhi तो आप और साहब के मज़े करने का टाइम है हहै....
Muskan...chupp!! तुम ज़्यादा बोल रहे हो..
Raghu...isme गलत क्या बोलै मैंने memsab...dekhiye आप दोनों साफ़ साफ़ अभी मज़े कर रहे हैं इस वक़्त इसीलिए आपके बचे नहीं हैं या फिर कुछ और बात है memsab??....aur आपको तो पता है मेरे 7 बची हैं और मैं और मेरी पत्नी काफी मज़े कर चुके हैं हेहेहे...
Muskan...tumse मतलब? और तुम्हारे 7 बचे हैं इसमें मैं क्या करूँ??
Raghu...arey मेमसाब ाप्प तो खामखा गुस्सा होरही हैं मैं तो बस यूँ hi बता रहा था...
Muskan...hmm ठीक है तुम जाओ काम पर...
Raghu....waise मेमसाब मेरे यहाँ अनेकी एक और वजा थी...
Muskan...konsi वजा?
Raghu....memsab कल रात आपकी वजा से मुझे बोहत आराम mila...aapke हाथों में सचमे जादू है...
मुस्कान समझ जाती है रघु किस चीज़ की बात कर रहा था और ो ऐम्बर्रेस्सेड फील भी करती है लेकिन अपने चेहरे पर फील होने नहीं देती रघु को...
Muskan...thik है ठीक है उस बारे में फिर बात मत करना और मेहरबानी करके मेरे शोहर के सामने तो बिलकुल नहीं...
Raghu...kyun मंसबब???
Muskan...kyun मतलब? तुम पागल हो क्या ऐसी बातें किसी को बोलोगे तो मेरी क्या इज़्ज़त रहेगी.....
Raghu...haa मेंसबब्ब ये तो है आखिर अपने किसी गैर आदमी के लुंड की मालिश जो की है...
Muskan...bas बोहत हुवा मेरे साथ गन्दी बातें बिलकुल नहीं..
Raghu...arey मेमसाब अब लुंड को लुंड नहीं तो क्या बोलेंगे...
Muskan...mmm मुझी ो सब नहीं पता लेकिन आइंदा मेरे सामने वैसी बात करना...
Raghu...thik है मेमसाब वैसे ो सुबह मुझे वहां दर्द होरहा था क्या आप एक और बार उसकी मालिश क्र सकती हैं....
Muskan...chii कमीने मुझे समझ क्या रखा है तुमने??
Raghu...memsabb मैंने आपको बस हमारे साहब की आइटम बीवी समझा हुवा है और कुछ nahi...aur आपको तो पता है मेरी बीवी नहीं है यहाँ वर्ण वही कर देती मालिश अपने कल बोहत ाचा किया था और मेरे दर्द भी काम हुवा था इसलिए बोल रहा hun...is गरीब की मदद कर दिज्ये मंसबब नहीं तो पता नहीं क्या होजायेगा...
Muskan...maine कहा न बिलकुल नाहीइ...
Raghu...kar दो मेमसाब आपने तो बस अपने हाथ hi इस्तिमाल करने hain...mere दर्द को समझिये...
Muskan...maine कहा न नाहीइ..
Raghu...mujse इतने दर्द में करना भी नहीं होगा मेमसाब दर्द अत जाता रहा और सुबह तो कुछ ज़्यादा hi था...
Muskan...to डॉक्टर के पास चले जाओ...
Raghu...chala जाता मेमसाब लेकिन मुझे दर है के डॉक्टर ससुरा कोई मोती रकम न ले ले मुझसे कुछ भी हुवा है बोलकर....
Muskan...aisa कुछ नहीं होता तुम जाओ डॉक्टर के पास...
Raghu...memsab मैंने सुना ही आपके धर्म में किसी दर्द में हो आदमी की मदद करने पर बोहत पुनिया मिलता है...
मुस्कान रघु को लाख बार मन करने के बावजूद भी नहीं मैंने पर फ़्रस्ट्राटे होरही थी लेकिन कहीं न कहीं उसे ये भी दर था के रघु कहीं किसी को कल वाला इंसिडेंट के बारे में न bolde...halanki ो इस बारे में बात भी नहीं कर रहा था के ो किसी को बताएगा ये बस मुस्कान का दर था....
मुस्कान अपने हाथ मसलते हुवे वहीँ कड़ी ऊपर एक बार देखती है के कोई देख तो नहीं रहा फिर संतुष्टि होने पर ो दूर के पास जाने लगती है और जाते हुवे धीरे से रघु ko.."andr ावो" बोलकर जाने लगती hai...raghu के मन में तो लड्डू फूटने लगते हैं आखिर उसने मुस्कान को फिरसे अपना लौड़ा मालिश करने पर मजबूर कर दिया था.
उसकी ख़ुशी छुपाये नहीं चुप रही thi.O मुस्कान को जाते हुवे देखता है. मुस्कान की गांड उसकी ड्रेस में ीदार उदार मटक रही थी जिसे देख रघु अपना लौड़ा मसलते हुवे मन men...."sasura ये गण्ड"
मुस्कान के दूर के अंदर जानेके बाद रघु भी थोड़ा ीदार उदर देखते हुवे अंदर चला जाता है लेकिन उन दोनों को इस तरह चोरी छुपे अंदर जाते हुवे ऊपर से कोई देख लेता है...
अंदर जाने के बाद रघु देखता है मुस्कान सोफे के पास कड़ी थी दूसरी तरफ घूमकर. रघु के सामने उसकी कातिलाना गांड.
Raghu..memsabb शुरू करें??
Muskan....yaad रखना ये बात किसी को भी पता चली तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा और ये मैं अब आखरी बार कर रही हूँ सिर्फ तुम्हें आराम देने के लिए..
Raghu...thik है मेमसाब आखरी बार hi सही लेकिन शिद्दत से करना...
मुस्कान कोई जवाब नहीं देती. रघु अब मुस्कान के पास अत है और...
Raghu..memsabb मैं िद्र ऊपर बैठ जॉन? आपको आसानी होगी...
Muskan...hmm
रघु अब अपने फैलाकर आराम से सोफे पर बैठ जाता है. मुस्कान कड़ी हुवी उसको एक बार देखती है और खुद धीरे से उसके पास आकर निचे बैठ जाती है.
Muskan...nikalo बहार
Raghu...kya मेमसाब??
मुस्कान रघु को गुस्से से देखती है...
Raghu...hehe ो ये अभी लो मेमसाब...
इतना बोलकर ो अपनी पंत निचे करता है और अंडरवियर के ऊपर से अपना लौड़ा एक बार सहलाता है. अंडरवियर में बड़ा तम्बू बना हुवा था. मुस्कान अपनी नज़र दूसरी तरफ किये हुवे उसके सामने बैठी थी. रघु उसको देख कर शैतानी स्माइल कर रहा था. ो मुस्कान का रिएक्शन देखने के लिए चुप रहता है बिना कुछ किये...
थोड़ी देर में कुछ होता न देख मुस्कान िद्र देखती है तो उसके सामने बिलकुल रघु की अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू बना हुवा था जिसको देखती hi ो अपनी नज़र घुमा लेती hai...uski दिल की धड़कन तेज़ होजाती है.
Raghu...memsabb मेरी चड्डी आप खुद hi निकल लो न...
पता नहीं क्यों लेकिन मुस्कान धीरे से अपने हाथ आगे लेजाकर अंडरवियर के दोनों तरफ पकड़ते हुवे धीरे से चड्डी निचे कर देती है उसी के साथ रघु का कला लम्बा लौड़ा एकदम से फुदक कर बहार आजाता है...
मुस्कान को पेशाब और पसीने की गन्दी महक आने लगती hai...muskan दूसरी तरफ किये हुवी थी के रघु अचानक उसका हाथ पकड़ लेता है और अपने काळा लौड़े पर रख देता है...
Raghu...shuru होजावो मेंसबब्ब...
मुस्कान अपनी उखड़ी हुवी सांसों के साथ अब उसका कला लौड़ा अपने गोर हाथों में लेकर ऊपर निचे करने लगती है. मुस्कान को रघु का लौड़ा काफी बड़ा फील होरहा था अपने छोटे हाथों में. और हर स्ट्रोक के साथ ऐसे लगता था जैसे उसका लौड़ा और बड़ा होरहा है.
Raghu...aaaahhh बस ऐसी hi मेमसाब करती राहू आआह...
रघु सोफे पर बैठा हुवा अपना मन ऊपर करके मज़े में tha...uska कला लुंड मुस्कान के हाथों में मनो मरे ख़ुशी के फुदक रहा था. उसके बालों से घिरे टट्टे झूल रहे थे हिलाते हुवे. मुस्कान अपने हाथ में की चीज़ को साफ़ महसूस कर सकती थी के ो इस वक़्त एक दहकता हुवा गरम रोड जैसा है. ो लाख कोशिश करती है के उसके लौड़े की तरफ न देखे लेकिन फिर उससे रहा नहीं जाता और ो अपनी नज़र उदर कर hi लेती है...
एक बार के लिए ो अपने मन पर हाथ रखती है के रघु का कला लौड़ा कितना भयानक और बड़ा लग रहा था भला कैसे ये किसी ाव्रत के अंदर जासकता है और ो ाव्रत खुश भी होसकती है. ो देखती है उसके हर स्ट्रोक के साथ रघु के लुंड की काली स्किन उसके डार्क ब्राउन टोपे से उतर चढ़ रही थी.
Raghu....memsab क्या मस्त लौड़ा हिलती ो aap...apke पति के तो मज़े hain...kaash मेरी भी ऐसी किस्मत होती मैं तो रोज़ ऐसे अपने लौड़े की मालिश करवाता ससुरा ाःह...
Muskan...kyun तुम्हारी पत्नी नहीं करती??
Raghu...arey ो कहाँ करेगी उसको तो मैं इतना मौका देता hi नहीं हूँ उसकी तो मैं बस ठुकाई करता हूँ हहै...
Muskan...mera हाथ दर्द करने लगा ही...
Raghu...thodi देर मेमसाब मेरा निकलने वाला है..
Muskan...niklne वाला है? क्या बकवास कर रहे हो मैं तुम्हारी मालिश सिर्फ दर्द काम करनेके लिए कर रही हूँ याद है न...
Raghu...haan हाँ मंसबब मुझे याद ही बस आप करती राहू...
मुस्कान अब फील करसकती थी के रघु के लौड़े की राजन फूलने लगी हैं मतलब ो अब छूटने की काफी नज़दीक लेकिन ये जानते हुवे भी ो उसका लौड़ा हिलना जारी रखती है. थोड़ी देर में हिलाते हिलाते अचानक रघु सीधा मुस्कान के खूबसूरत चेहरे पर झड़ने लगता है.
Muskan...heyy!!!
गधा सफ़ेद मणि मुस्कान के गोर चेहरे पर हर तरफ फ़ैल जाता hai...raghu के लौड़े से उसके मणि पिचकारी मुस्कान के चेहरे पर गिर रही थी. यहाँ तक के ो मन अब मुस्कान के चेहरे से होते हुवे गले तक उतरने लगता है.
इस वक़्त घर के सोफे पर मज़दूर अधेड़ू उम्र का कला नाता आदमी रघु आराम से बैठा ह्वुआ उसका कला लम्बा लौड़ा बहार था और उसे पकड़ी हुवी इस घर की मालकिन और खूबसूरत जवान मुस्कान.
रघु अपने मज़े में था लेकिन एक्सपेक्ट कर रहा था उसकी इस हरकत से मुस्कान ज़रूर गुस्सा होगी शायद अपने पति को भी बता दे लेकिन आगे जो रघु देखता है उससे उसके होश उड़ जाते हैं. ो देखता है मुस्कान अपने होंठ पर लगे हुवे उसके गधे मणि को धीरे से अपनी ज़ुबान बहार निकलते हुवे बड़े hi सेक्सी अंदाज़ में लीक करती है...
इस सन को देख कर तो जैसे रघु के होश hi उड़ जाते हैं लेकिन तभी....
Muskan...ooh हेल्लो तुम मेरी बात सुन्न रही हूँ...!!!!
रघु अपने खुली आँखों वाले सपने से बहार अत है हड़बड़ा सा जाता है...
Muskan...tum होश में तो हो मैंने कहा अगर उस बात का किसी को भी पता चल न तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा...
रघु मन men...saala ससुरा का नाती लगता है सपना देख रहा tha....sala तभी मैं सोचूं ये मेरा लौड़ा इतनी शिद्दत से क्यों हिलने लगी और अपने मन पर भी liyi...salaa...
Muskan...oye??
Raghu...haa हां मंसबब किसी को नहीं बताऊंगा ये हम दोनों का राज़ है हहै...
रघु उतना बोलकर बड़े hi अजीब तरह से स्माइल करता है जिसे नोटिस करके मुस्कान उसके तरफ घूरती है और फिर घर के अंदर चली जाती है. रघु उसको जाते हुवे देख रहा था और ऑब्वियस्ली उसकी नज़र मुस्कान की मटकती हुवी गांड पर थी लेकिन इसब में कोई था जो इन दोनों को कबसे देख रहा था!!
मुस्कान अंदर जाकर सोफे पर बैठ जाती है और खुद को बड़ा कोसती है के कैसे ो इस सिचुएशन में फंस गयी. कहाँ ो इतनी हयादार शादीशुदा ाव्रत है और कहाँ उसने कल रात किसी गैर मर्द का लुंड हिलाया था मदद के लिए. एक तरह से तो ो अपने शोहर को धोका देना hi ho..kahan गयी उसकी वफाई? कहाँ गयी उसकी पवित्रता?
मुस्कान यही सब सोचते रहती है. ऐसे hi दोपहर में सब मज़दूर खाने चले जाते हैं और घंटे बाद वापस एते हैं. घर के अंदर मुस्कान सोई हुवी थी. तभी उनके घर के सामने से वही आदमी घर की तरफ देखते हुवे गुज़रता है जो रात में जॉगिंग के वक़्त चाय की टापरी पर आज़म से टकराया था.
शाम में सब मज़दूरों के जाने के बाद थोड़ी देर में आज़म ऑफिस से घर आजाता है और ो दोनों कल जानेके लिए पैकिंग करने लगते हैं. साडी पैकिंग करने के बाद दोनों खाना सब खाकर थोड़ा रेस्ट करने के बाद वाकिंग के लिए निकल पड़ते हैं.
Azam...acha कल सुबह निकल जायेंगे 9 बजे जल्दी निकलेंगे तो टाइम पर पोहंच जायेंगे...
Muskan...thik है मैंने अम्मी के घर कॉल कर दिया है...
Azam....hmm ठीक है और हां ो मैंने जो गिफ्ट लाया हुवा है ो रख लेना बैग में यद् से तुम्हारी अम्मी अब्बू के लिए...
Muskan...hmm रख दिया है मैंने...
Azam..chalo सही है..
दोनों बातें करते हुवे वाकिंग कर रहे हैं के तभी उनके साइड से वही आदमी गुज़रता है जो एक इसबार एक शाल ओढ़े हुवे था. आज़म और मुस्कान उसपर गौर नहीं करते ो बस अपनी बातों में लगे हुवे the...badmen चाय के टापरी पर पोहंच कर दोनों चाय पिटे हैं फिर वापस घर आजाते हैं और कल जल्दी निकलने के लिए सजाते हैं....
अगली सुबह दोनों नाहा धोकर फ्रेश होनेके बाद सब रेडी करके कार में सामान सब डालकर कार में बैठ जाते हैं घर का दूर लॉक करके.
आज़म ने शर्ट पंत पहनी हुवी थी वहीँ मुस्कान बुर्का पहने हुवी एकदम खूबसूरत और माल लग रही थी. आज़म से रमेश को पहले hi बता दिया था के ो 3 दिन के लिए आउट ऑफ़ सिटी जारहे हैं तो पानी सब का एडजस्ट कर ले...
आज़म और मुस्कान अपने ट्रिप पर निकल जाते हैं. घंटे बाद सरे मज़दूर आजाते हैं और रघु नोटिस करता है के घर के मैं दूर पर टाला लगा हुवा है. ो थोड़ा िद्र उदर देखता है लेकिन कुछ समझ नहीं अत उसे...
थोड़ी देर बाद काम ो काम शुरू करते हैं और रघु ऐसे hi काम करते हुवे जानकी के पास आकर...
Raghu...arey जानकी ये साहब मेमसाब कहीं गए हैं क्या?? घर को टाला लगा है...
जानकी रघु की तरफ बड़े hi अजीब तरह से देखती है और फिर...
Janki...kyun तुझे उनसे क्या काम है? ो पति पत्नी कहीं होंगे अपने काम से....
Raghu...arey जानकी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था...
Janki...puch रहे थे या पता कर रहे the..dono कहीं गए हैं 3 दिन के लिए...
Raghu...ohh achaaaa...thik...
"साला" जानकी धीमी सी आवाज़ सुनती है और रघु वापस अपने काम पर चला जाता है लेकिन जानकी उसको देख रही थी पता नहीं क्यों उसे कुछ अजीब लग रहा था.
िद्र मुस्कान और आज़म अब हाईवे पर पोहंच चुके थे रफ़्तार से जाने लगते हैं. मुस्कान भी कुछ थी के काफी देर बाद उसको और आज़म को हॉलिडे का मौका मिला था वर्ण आज़म काम में इतना बिजी होता है के उसके लिए टाइम hi नहीं निकल पता लेकिन आज ो दोनों एकदम बेफिक्र निकल पड़े थे.
3 घंटे ड्राइविंग करने के बाद दोनों को भूक लगने की वजा से आज़म कार एक छोटे और चीप से होटल पर रोकता है और दोनों खाना खाने चले जाते हैं. अंदर 1-2 आदमी बैठे हुवे थे.
मुस्कान को एक टेबल पर बिठा कर आज़म आर्डर करने के लिए कॅश काउंटर पर चला जाता है. जब आज़म वहां पोहचता है तो वहां से एक आंटी टाइप की भरे बदन की ाव्रत बैठी हुवी जिसको देखती है आज़म एक बार के लिए झटका खता है.
ो ाव्रत देखने में सांवली थी लेकिन जो चीज़ आज़म को झटका देती है उस ाव्रत ने एक डीप नैक ब्लाउज पहना हुवा था हालाँकि साडी से क्लीवेज थोड़ा चुप रहा था लेकिन ज़्यादातर उसके चुके अछि तरह से दिख रहे थे. आज़म अब थोड़ा नार्मल रियेक्ट करता है लेकिन न चाहते हुवे भी उसकी नज़र उस ाव्रत के क्लीवेज पर hi थी.
आज़म एक बार मुस्कान की तरफ देखता के कहीं ो देख तो नहीं रही फिर ो उस ाव्रत की तरफ घूमता है जो अब स्माइल कर रही thi...azam भी अब थोड़ा नार्मल होकर...
Azam...aa खाने में क्या है??
Awrat...kya khayenge....veg या non-veg? सब मिलेगा...
ो ाव्रत ये बात आज़म को बड़े hi अजीब तरीके से देखते हुवे बोलती है जो आज़म भी नहीं समझ पता है...
Azam..aa वेग में तरकारी खाना है??
Awrat...haa है न क्यों बैठिये लगवा देती हूँ....
Azam...thik ही..
आज़म फिर वहां से चला जाता है और ो ाव्रत भी खाना लगा देती hai...khane के बिच आज़म नोटिस करता है के ो ाव्रत वहीँ कॅश काउंटर के पास कोई चीज़ ठीक कर रही थी और टेबल से बहार आयी हुवी थी.
ो ाव्रत जब घूमती है तो साड़ी में उसकी बड़ी गांड आज़म देखता है जिससे मुश्किल से खाना उसके गले से उतरता है. उसकी नज़र बार बार अब वहां जारही थी.
ो ाव्रत अनजाने में या जानबूझकर कर रही थी ये उसे hi पता था लेकिन आज़म कहीं का कहीं बहक रहा था उस ाव्रत को देख कर. ऐसा नहीं था के ो वररेक्ट करते हुवे उसे देख रहा था लेकिन मुस्कान से छुपाते हुवे छुपी नज़रों से उसे ज़रूर देखे जारहा था. ो ाव्रत अब साइड में होती है और आज़म को उसकी नैवेल देखने मिलती है.
आज़म अब पानी का घुट अपने गले से उतारते हुवे वहां देख रहा था चोर नज़रों se....azam और मुस्कान इसी बिच आपस में बातें भी कर रहे the...thodi देर बाद जब दोनों का खाना होने लगता है तो आज़म एक लास्ट बार जैसे उस ाव्रत पर नज़र डालता है और इसबार उसकी नज़र वहीँ जैम जाती है....
ो ाव्रत एक बार फिरसे झुकी हुवी थी और डीप नैक ब्लाउज होनेकी वजा से उसके चुके जैसे लटके हुवे अंदर की लाइन साफ़ दिख रही थी. उस ाव्रत के चुके थोड़ा हिलने पर भी जिग्गले कर रहे थे.
आज़म का लुंड उस आंटी को देख कर खड़ा होने लगता है. मर्द चाहे वर्जिन हो या मैरिड आंटी एक ऐसी चीज़ है जिसे देख अचे ाचों की निय्यत बिगड़ जाती है.
मुस्कान के देखने के दर से आज़म जल्दी अपनी नज़र वहां से हटाता है और ो दोनों हाथ धोकर कॅश काउंटर पर चले जाते हैं. आज़म डेन्ट होनेकी एक्टिंग करते हुवे क्यूंकि मुस्कान भी वहीँ कड़ी थी...
Azam...kitna हुवा??
Awrat...bas 200 रस.
आज़म पर्स से 250 रस निकल कर उसे देता है.
आज़म...50 रख लो....
ो ाव्रत 50 रस एक्स्ट्रा रख लेती है और आज़म को स्माइल करके दिखती है और फिर मुस्कान और आज़म जाने लगते हैं...
मुस्कान...50 रस?
Azam...arey ो एक तरह टिप दी है उसको...
Muskan...kis बात की टिप? खाना तो मुझे पसंद नहीं आया...
Azam...haha ाचा चलो अगली बार किसी बड़े होटल में जायेंगे ठीक है...
Muskan...hmm ठीक है...
फिर दोनों फिरसे अपना सर शुरू करते हैं. बातें और हंसी मज़ाक करते हुवे दोनों शोहर बीवी जारहे थे. उदार उनके घर पर मज़दूर अपना काम कर रहे थे. उनका काम हालाँकि अभी बचा हुवा था लेकिन नेअर्ल्य ख़तम होने आया था. आज़म ने रमेश से ये बात की थी के आनेवाली ईद से पहले अगर काम होजाये तो बेटर है और रमेश ने भी अपना पूरा तरय करनेका असुरे किया था आज़म को....
िद्र कार से दोनों शोहर बीवी अपने hi मूड में जारहे थे.
आज़म को लेकिन वही होटल वाला सन याद ारः था जहाँ ो आंटी इंटेंशनली और ूनिंटेन्शनली अपने भरे जिस्म की नुमाइश कर रही थी.
ऐसा नहीं था के आज़म कोई ठरकी था या फिर आवर्तों को ताड़ना उसकी आदत थी लेकिन उस आंटी को रेसिस्ट नहीं कर पते हुवे उसको चोरी छुपे देखे बिना नहीं रह पाया था.
दोनों फिर 4 घंटे सफर करने के बाद दूसरी सिटी में पोहंच जाते हैं. आज़म ने होटल बुक किये हुवा था इसलिए स्टे की टेंशन उन्हें नहीं thi...city में पोहचने के बाद मुस्कान अपनी माँ के घर में इन्फॉर्म कर देती है के ो पोहंच चुके हैं. हालाँकि मुस्कान के माँ का घर अभी यहाँ से दूर था.
मुस्कान और आज़म काफी देर बाद आउट ऑफ़ सिटी काफी फ्रेश फील कर रहे थे. शादी के बाद उनका ज़्यादा घूमना फिरना नहीं हुवा था. आज़म खुश था के मुस्कान को ो थोड़ा टाइम दे पाया इस बहाने....
हाईवे से उतर कर आज़म एक कॉलोनी से कार ले जारहा था किसी मॉल को शॉर्टकट जानेके लिए. आज़म पहले यहाँ ऑब्वियस्ली चुका था इसलिए उसे रुट्स पता थे थोड़े बोहत. ो जा hi रहे थे के अचानक उनकी कार का टायर बरसत होजाता है और एक बड़ी आवाज़ वहां गूंजती है. एक बार के लिए तो मुस्कान बोहत दर जाती है...
Muskan..yaa khu*a क्या हुवा आज़म??
Azam...arey मुस्कान तुम ठीक तो ho...tension की बात नहीं है लगता है टायर फैट गया है मैं देखता हूँ तुम टेंशन मत लो....
मुस्कान भी खुद को शांत करते हुवे पानी पीती है और आज़म बहार जाकर टायर्स चेक करने लगता है तो उसे फ्रंट का राइट टायर फटा हुवा मिलता है....
Azam...yaar ये तो पूरा फैट गया है शेठ रेप्लस hi करना पड़ेगा....
आज़म आस पास देखता है के कहीं गेराज तो नहीं hai....lekin उसे नहीं दीखता कोई ो वापस कार के पास आकर..
Azam..muskan कार का टायर फैट गया है चेंज करना पड़ेगा उसे...
Muskan...kya कैसे? अब यहाँ तो कोई गेराज भी नहीं है शायद कोई पॉश कॉलोनी लग रही है ये तोह...
Azam...haa लेकिन टेंशन मत लो कुछ कर lenge....tum आराम से बैठो मैं किसी से पूछता हूँ...
आज़म फिर बहार किसी आदमी को ढूंढ़ने लगता है उसे थोड़ी देर बाद एक आदमी आता हुवा दीखता है और ो उसके पास जाकर...
Azam...aa भाईसाब ीदार कोई गेराज है क्या हमारी कार का टायर फैट गया है...
"ीदार तो नहीं है लेकिन 2-3 कम दूर एक टायर की शॉप है उदर आपको मिल जायेगा टायर और उसी के पास गेराज भी है.."
Azam...ohh ाचा उसका कोई नंबर है?
"हां एक मिनट शायद है मेरे मोबाइल में"
ो आदमी आज़म को मोबाइल नंबर देता है और उसको थैंक्स बोलनेके बाद ो चला जाता है...
Azam...muskan ीदार कोई स्टोर नहीं है लेकिन थोड़ी दूर एक शॉप है उसका नंबर मिला है मैं कॉल लगता हूँ उदर...
Muskan...hmm क्या मुसीबत hai...jaldi कीजिए शाम होगयी है ीदार hi..
Azam..haa जान...
आज़म शॉप और गेराज वाले को कॉल लगता है और यहाँ का अड्रेस देता hai...muskan भी कार से भर आकर कड़ी होगयी थी उसे िद्र उदर देखते हुवे एक आलीशान सा विला दिखा जो काफी बड़ा लग रहा था....
Muskan...azam वहां देखो क्या आलीशान विला है...
आज़म भी उदार देखता है और वाकई में ो विला काफी आलीशान था इसलिए ो भी इम्प्रेस होकर....
Azam...hmm वाओ आलीशान तो है, होंगे कोई रिच लोग. "वर्मा मेन्शन" लिखा हुवा है...
तो बे कॉन्टिनोएड...
रघु के मोबाइल में मुस्कान को कुछ पिक्स दिखती है जो थी तो लौ क्वालिटी की लेकिन इमेज ठीक थक थी. उसमे ो देखती है रघु ने किसी ाव्रत की गांड की फोटोज ली हैं. उसे ो ड्रेस जाना पहचाना तो लग रहा था लेकिन यद् नहीं ारः था उसने कहाँ देखा है. ो देखती है उस ाव्रत की गांड उस ड्रेस में उभरी हुवी साफ़ साफ़ दिख रही है.
Muskan...man men...tharki कहीं का देखो कैसे बेशर्म के जैसे फोटो लिया है...
मुस्कान फिर मोबाइल रघु को देती है...
Raghu..memsab ठीक है न मोबाइल??
Muskan...haa ठीक hi है...
Raghu...dhanywad मेमसाब मैं तो दर hi गया था के मेरा मोबाइल खराब न होगया हो...
Muskan...nahi ठीक hi है मोबाइल तुम्हारा...
Raghu...acha वैसे मेमसाब कल फिर आपको परेशानी तो नहीं हुवी मेरे जानेके बाद??
इस तरह अचानक रघु के पूछने से मुस्कान थोड़ा अचंबित होती है फिर ऐम्बर्रेस्सेड भी क्यों के कल जो भी हुवा ो बोहत ऐम्बर्रासिंग था उसके लिए. एक शादीशुदा हयादार ाव्रत होकर उसके रघु जैसे गैर मर्द का लुंड उसने हिलाया था भले hi दर्द काम करनेके लिए हो. रघु के सवाल पर मुस्कान बिना जवाब दिए चुप रहती है...
Raghu...kya हुवा मेमसाब...
Muskan...kuch नही..
Raghu...to बताइये न मेमसाब बादमें परेशानी तो नहीं हुवी...
Muskan...nahiii
Raghu...chalo ाचा ह मेमसाब लेकिन मुझे हुवी...
मुस्कान थोड़ा हैरानी से रघु की तरफ देखते हुवे..
Muskan...tumko क्या मतलब??
Raghu...o क्या है न मेमसाब मेरे मोबाइल ों नहीं होरहा था तो मैं मेरी पत्नी को कॉल नहीं सका इसलिए ो पूछ रही थी मैं किदर था...
Muskan...hmm..
Raghu...memsab ो बोलती है कहीं तुम किसी ाव्रत के साथ तो नहीं थे हहै...
रघु अपने चेहरे पर बड़ी hi गन्दी सी स्माइल लेट हुवे मुस्कान को बोलता hai...muskan भी उसकी कही हुवी बात को समझती hai...raghu की पत्नी की बात टेक्निकली तो सही hi थी. कल रात रघु एक तरह से एक ाव्रत के साथ hi था....
Raghu...maine भी बोल दिया हां था मैं एक ाव्रत के साथ...
मुस्कान रघु की तरफ घूरती है उसकी इस बात पर क्या सचमे उसने अपनी पत्नी बताया कल जो कुछ भी हुवा...
Muskan...kya???
Raghu...maine बताया मेमसाब उसको के मैं ाव्रत के साथ तो था लेकिन ो आप hain...hum जहाँ काम कर रहे हैं उन साहब hi पताका बीवी...
Muskan...kya कहाँ तुमने??
Raghu...jo अपने सुना मेमसाब....
Muskan...dekho तुम मुझसे ऐसी बातें मत करो मैंने कितनी बार बोलै है...
Raghu...memsab अब आप हैं पताका इसलिए बोला hai...o क्या है न हमारे िद्र खूबसूरत को पताका और बोहत सरे शब्द से बोलते हैं...
Muskan...yaa...' ऐसा कोनसी जगा है जहाँ ऐसे वर्ड्स इस्तिमाल होते हैं...
Raghu...hehe इसलिए मेमसाब मैंने बताया मेरी पत्नी को के हमारी माल मेमसाब के घरकी लाइट चली गयी थी इसलिए मैं मदद करने चला गया था...
रघु के माल बोलने पर इसबार मुस्कान बस उसको एक बार गुस्से से देखती है और फिर कुछ नहीं बोलती...
Raghu...fir मेरी पत्नी ने पूछा तुम्हारी मेमसाब के कितने बचे हैं...?? तो मैंने बोलै अरे पगली हमारी आइटम मेमसाब की अभी उम्र hi क्या है बच्चों के liye....sahi बोलै न मेमसाब??
Muskan...mujhe ंन्न नही पता...
Raghu...aise कैसे मेमसाब आपके थोड़ी न बचे हैं और अभी तो आप जवान और माल hain...abhi तो आप और साहब के मज़े करने का टाइम है हहै....
Muskan...chupp!! तुम ज़्यादा बोल रहे हो..
Raghu...isme गलत क्या बोलै मैंने memsab...dekhiye आप दोनों साफ़ साफ़ अभी मज़े कर रहे हैं इस वक़्त इसीलिए आपके बचे नहीं हैं या फिर कुछ और बात है memsab??....aur आपको तो पता है मेरे 7 बची हैं और मैं और मेरी पत्नी काफी मज़े कर चुके हैं हेहेहे...
Muskan...tumse मतलब? और तुम्हारे 7 बचे हैं इसमें मैं क्या करूँ??
Raghu...arey मेमसाब ाप्प तो खामखा गुस्सा होरही हैं मैं तो बस यूँ hi बता रहा था...
Muskan...hmm ठीक है तुम जाओ काम पर...
Raghu....waise मेमसाब मेरे यहाँ अनेकी एक और वजा थी...
Muskan...konsi वजा?
Raghu....memsab कल रात आपकी वजा से मुझे बोहत आराम mila...aapke हाथों में सचमे जादू है...
मुस्कान समझ जाती है रघु किस चीज़ की बात कर रहा था और ो ऐम्बर्रेस्सेड फील भी करती है लेकिन अपने चेहरे पर फील होने नहीं देती रघु को...
Muskan...thik है ठीक है उस बारे में फिर बात मत करना और मेहरबानी करके मेरे शोहर के सामने तो बिलकुल नहीं...
Raghu...kyun मंसबब???
Muskan...kyun मतलब? तुम पागल हो क्या ऐसी बातें किसी को बोलोगे तो मेरी क्या इज़्ज़त रहेगी.....
Raghu...haa मेंसबब्ब ये तो है आखिर अपने किसी गैर आदमी के लुंड की मालिश जो की है...
Muskan...bas बोहत हुवा मेरे साथ गन्दी बातें बिलकुल नहीं..
Raghu...arey मेमसाब अब लुंड को लुंड नहीं तो क्या बोलेंगे...
Muskan...mmm मुझी ो सब नहीं पता लेकिन आइंदा मेरे सामने वैसी बात करना...
Raghu...thik है मेमसाब वैसे ो सुबह मुझे वहां दर्द होरहा था क्या आप एक और बार उसकी मालिश क्र सकती हैं....
Muskan...chii कमीने मुझे समझ क्या रखा है तुमने??
Raghu...memsabb मैंने आपको बस हमारे साहब की आइटम बीवी समझा हुवा है और कुछ nahi...aur आपको तो पता है मेरी बीवी नहीं है यहाँ वर्ण वही कर देती मालिश अपने कल बोहत ाचा किया था और मेरे दर्द भी काम हुवा था इसलिए बोल रहा hun...is गरीब की मदद कर दिज्ये मंसबब नहीं तो पता नहीं क्या होजायेगा...
Muskan...maine कहा न बिलकुल नाहीइ...
Raghu...kar दो मेमसाब आपने तो बस अपने हाथ hi इस्तिमाल करने hain...mere दर्द को समझिये...
Muskan...maine कहा न नाहीइ..
Raghu...mujse इतने दर्द में करना भी नहीं होगा मेमसाब दर्द अत जाता रहा और सुबह तो कुछ ज़्यादा hi था...
Muskan...to डॉक्टर के पास चले जाओ...
Raghu...chala जाता मेमसाब लेकिन मुझे दर है के डॉक्टर ससुरा कोई मोती रकम न ले ले मुझसे कुछ भी हुवा है बोलकर....
Muskan...aisa कुछ नहीं होता तुम जाओ डॉक्टर के पास...
Raghu...memsab मैंने सुना ही आपके धर्म में किसी दर्द में हो आदमी की मदद करने पर बोहत पुनिया मिलता है...
मुस्कान रघु को लाख बार मन करने के बावजूद भी नहीं मैंने पर फ़्रस्ट्राटे होरही थी लेकिन कहीं न कहीं उसे ये भी दर था के रघु कहीं किसी को कल वाला इंसिडेंट के बारे में न bolde...halanki ो इस बारे में बात भी नहीं कर रहा था के ो किसी को बताएगा ये बस मुस्कान का दर था....
मुस्कान अपने हाथ मसलते हुवे वहीँ कड़ी ऊपर एक बार देखती है के कोई देख तो नहीं रहा फिर संतुष्टि होने पर ो दूर के पास जाने लगती है और जाते हुवे धीरे से रघु ko.."andr ावो" बोलकर जाने लगती hai...raghu के मन में तो लड्डू फूटने लगते हैं आखिर उसने मुस्कान को फिरसे अपना लौड़ा मालिश करने पर मजबूर कर दिया था.
उसकी ख़ुशी छुपाये नहीं चुप रही thi.O मुस्कान को जाते हुवे देखता है. मुस्कान की गांड उसकी ड्रेस में ीदार उदार मटक रही थी जिसे देख रघु अपना लौड़ा मसलते हुवे मन men...."sasura ये गण्ड"
मुस्कान के दूर के अंदर जानेके बाद रघु भी थोड़ा ीदार उदर देखते हुवे अंदर चला जाता है लेकिन उन दोनों को इस तरह चोरी छुपे अंदर जाते हुवे ऊपर से कोई देख लेता है...
अंदर जाने के बाद रघु देखता है मुस्कान सोफे के पास कड़ी थी दूसरी तरफ घूमकर. रघु के सामने उसकी कातिलाना गांड.
Raghu..memsabb शुरू करें??
Muskan....yaad रखना ये बात किसी को भी पता चली तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा और ये मैं अब आखरी बार कर रही हूँ सिर्फ तुम्हें आराम देने के लिए..
Raghu...thik है मेमसाब आखरी बार hi सही लेकिन शिद्दत से करना...
मुस्कान कोई जवाब नहीं देती. रघु अब मुस्कान के पास अत है और...
Raghu..memsabb मैं िद्र ऊपर बैठ जॉन? आपको आसानी होगी...
Muskan...hmm
रघु अब अपने फैलाकर आराम से सोफे पर बैठ जाता है. मुस्कान कड़ी हुवी उसको एक बार देखती है और खुद धीरे से उसके पास आकर निचे बैठ जाती है.
Muskan...nikalo बहार
Raghu...kya मेमसाब??
मुस्कान रघु को गुस्से से देखती है...
Raghu...hehe ो ये अभी लो मेमसाब...
इतना बोलकर ो अपनी पंत निचे करता है और अंडरवियर के ऊपर से अपना लौड़ा एक बार सहलाता है. अंडरवियर में बड़ा तम्बू बना हुवा था. मुस्कान अपनी नज़र दूसरी तरफ किये हुवे उसके सामने बैठी थी. रघु उसको देख कर शैतानी स्माइल कर रहा था. ो मुस्कान का रिएक्शन देखने के लिए चुप रहता है बिना कुछ किये...
थोड़ी देर में कुछ होता न देख मुस्कान िद्र देखती है तो उसके सामने बिलकुल रघु की अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू बना हुवा था जिसको देखती hi ो अपनी नज़र घुमा लेती hai...uski दिल की धड़कन तेज़ होजाती है.
Raghu...memsabb मेरी चड्डी आप खुद hi निकल लो न...
पता नहीं क्यों लेकिन मुस्कान धीरे से अपने हाथ आगे लेजाकर अंडरवियर के दोनों तरफ पकड़ते हुवे धीरे से चड्डी निचे कर देती है उसी के साथ रघु का कला लम्बा लौड़ा एकदम से फुदक कर बहार आजाता है...
मुस्कान को पेशाब और पसीने की गन्दी महक आने लगती hai...muskan दूसरी तरफ किये हुवी थी के रघु अचानक उसका हाथ पकड़ लेता है और अपने काळा लौड़े पर रख देता है...
Raghu...shuru होजावो मेंसबब्ब...
मुस्कान अपनी उखड़ी हुवी सांसों के साथ अब उसका कला लौड़ा अपने गोर हाथों में लेकर ऊपर निचे करने लगती है. मुस्कान को रघु का लौड़ा काफी बड़ा फील होरहा था अपने छोटे हाथों में. और हर स्ट्रोक के साथ ऐसे लगता था जैसे उसका लौड़ा और बड़ा होरहा है.
Raghu...aaaahhh बस ऐसी hi मेमसाब करती राहू आआह...
रघु सोफे पर बैठा हुवा अपना मन ऊपर करके मज़े में tha...uska कला लुंड मुस्कान के हाथों में मनो मरे ख़ुशी के फुदक रहा था. उसके बालों से घिरे टट्टे झूल रहे थे हिलाते हुवे. मुस्कान अपने हाथ में की चीज़ को साफ़ महसूस कर सकती थी के ो इस वक़्त एक दहकता हुवा गरम रोड जैसा है. ो लाख कोशिश करती है के उसके लौड़े की तरफ न देखे लेकिन फिर उससे रहा नहीं जाता और ो अपनी नज़र उदर कर hi लेती है...
एक बार के लिए ो अपने मन पर हाथ रखती है के रघु का कला लौड़ा कितना भयानक और बड़ा लग रहा था भला कैसे ये किसी ाव्रत के अंदर जासकता है और ो ाव्रत खुश भी होसकती है. ो देखती है उसके हर स्ट्रोक के साथ रघु के लुंड की काली स्किन उसके डार्क ब्राउन टोपे से उतर चढ़ रही थी.
Raghu....memsab क्या मस्त लौड़ा हिलती ो aap...apke पति के तो मज़े hain...kaash मेरी भी ऐसी किस्मत होती मैं तो रोज़ ऐसे अपने लौड़े की मालिश करवाता ससुरा ाःह...
Muskan...kyun तुम्हारी पत्नी नहीं करती??
Raghu...arey ो कहाँ करेगी उसको तो मैं इतना मौका देता hi नहीं हूँ उसकी तो मैं बस ठुकाई करता हूँ हहै...
Muskan...mera हाथ दर्द करने लगा ही...
Raghu...thodi देर मेमसाब मेरा निकलने वाला है..
Muskan...niklne वाला है? क्या बकवास कर रहे हो मैं तुम्हारी मालिश सिर्फ दर्द काम करनेके लिए कर रही हूँ याद है न...
Raghu...haan हाँ मंसबब मुझे याद ही बस आप करती राहू...
मुस्कान अब फील करसकती थी के रघु के लौड़े की राजन फूलने लगी हैं मतलब ो अब छूटने की काफी नज़दीक लेकिन ये जानते हुवे भी ो उसका लौड़ा हिलना जारी रखती है. थोड़ी देर में हिलाते हिलाते अचानक रघु सीधा मुस्कान के खूबसूरत चेहरे पर झड़ने लगता है.
Muskan...heyy!!!
गधा सफ़ेद मणि मुस्कान के गोर चेहरे पर हर तरफ फ़ैल जाता hai...raghu के लौड़े से उसके मणि पिचकारी मुस्कान के चेहरे पर गिर रही थी. यहाँ तक के ो मन अब मुस्कान के चेहरे से होते हुवे गले तक उतरने लगता है.
इस वक़्त घर के सोफे पर मज़दूर अधेड़ू उम्र का कला नाता आदमी रघु आराम से बैठा ह्वुआ उसका कला लम्बा लौड़ा बहार था और उसे पकड़ी हुवी इस घर की मालकिन और खूबसूरत जवान मुस्कान.
रघु अपने मज़े में था लेकिन एक्सपेक्ट कर रहा था उसकी इस हरकत से मुस्कान ज़रूर गुस्सा होगी शायद अपने पति को भी बता दे लेकिन आगे जो रघु देखता है उससे उसके होश उड़ जाते हैं. ो देखता है मुस्कान अपने होंठ पर लगे हुवे उसके गधे मणि को धीरे से अपनी ज़ुबान बहार निकलते हुवे बड़े hi सेक्सी अंदाज़ में लीक करती है...
इस सन को देख कर तो जैसे रघु के होश hi उड़ जाते हैं लेकिन तभी....
Muskan...ooh हेल्लो तुम मेरी बात सुन्न रही हूँ...!!!!
रघु अपने खुली आँखों वाले सपने से बहार अत है हड़बड़ा सा जाता है...
Muskan...tum होश में तो हो मैंने कहा अगर उस बात का किसी को भी पता चल न तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा...
रघु मन men...saala ससुरा का नाती लगता है सपना देख रहा tha....sala तभी मैं सोचूं ये मेरा लौड़ा इतनी शिद्दत से क्यों हिलने लगी और अपने मन पर भी liyi...salaa...
Muskan...oye??
Raghu...haa हां मंसबब किसी को नहीं बताऊंगा ये हम दोनों का राज़ है हहै...
रघु उतना बोलकर बड़े hi अजीब तरह से स्माइल करता है जिसे नोटिस करके मुस्कान उसके तरफ घूरती है और फिर घर के अंदर चली जाती है. रघु उसको जाते हुवे देख रहा था और ऑब्वियस्ली उसकी नज़र मुस्कान की मटकती हुवी गांड पर थी लेकिन इसब में कोई था जो इन दोनों को कबसे देख रहा था!!
मुस्कान अंदर जाकर सोफे पर बैठ जाती है और खुद को बड़ा कोसती है के कैसे ो इस सिचुएशन में फंस गयी. कहाँ ो इतनी हयादार शादीशुदा ाव्रत है और कहाँ उसने कल रात किसी गैर मर्द का लुंड हिलाया था मदद के लिए. एक तरह से तो ो अपने शोहर को धोका देना hi ho..kahan गयी उसकी वफाई? कहाँ गयी उसकी पवित्रता?
मुस्कान यही सब सोचते रहती है. ऐसे hi दोपहर में सब मज़दूर खाने चले जाते हैं और घंटे बाद वापस एते हैं. घर के अंदर मुस्कान सोई हुवी थी. तभी उनके घर के सामने से वही आदमी घर की तरफ देखते हुवे गुज़रता है जो रात में जॉगिंग के वक़्त चाय की टापरी पर आज़म से टकराया था.
शाम में सब मज़दूरों के जाने के बाद थोड़ी देर में आज़म ऑफिस से घर आजाता है और ो दोनों कल जानेके लिए पैकिंग करने लगते हैं. साडी पैकिंग करने के बाद दोनों खाना सब खाकर थोड़ा रेस्ट करने के बाद वाकिंग के लिए निकल पड़ते हैं.
Azam...acha कल सुबह निकल जायेंगे 9 बजे जल्दी निकलेंगे तो टाइम पर पोहंच जायेंगे...
Muskan...thik है मैंने अम्मी के घर कॉल कर दिया है...
Azam....hmm ठीक है और हां ो मैंने जो गिफ्ट लाया हुवा है ो रख लेना बैग में यद् से तुम्हारी अम्मी अब्बू के लिए...
Muskan...hmm रख दिया है मैंने...
Azam..chalo सही है..
दोनों बातें करते हुवे वाकिंग कर रहे हैं के तभी उनके साइड से वही आदमी गुज़रता है जो एक इसबार एक शाल ओढ़े हुवे था. आज़म और मुस्कान उसपर गौर नहीं करते ो बस अपनी बातों में लगे हुवे the...badmen चाय के टापरी पर पोहंच कर दोनों चाय पिटे हैं फिर वापस घर आजाते हैं और कल जल्दी निकलने के लिए सजाते हैं....
अगली सुबह दोनों नाहा धोकर फ्रेश होनेके बाद सब रेडी करके कार में सामान सब डालकर कार में बैठ जाते हैं घर का दूर लॉक करके.
आज़म ने शर्ट पंत पहनी हुवी थी वहीँ मुस्कान बुर्का पहने हुवी एकदम खूबसूरत और माल लग रही थी. आज़म से रमेश को पहले hi बता दिया था के ो 3 दिन के लिए आउट ऑफ़ सिटी जारहे हैं तो पानी सब का एडजस्ट कर ले...
आज़म और मुस्कान अपने ट्रिप पर निकल जाते हैं. घंटे बाद सरे मज़दूर आजाते हैं और रघु नोटिस करता है के घर के मैं दूर पर टाला लगा हुवा है. ो थोड़ा िद्र उदर देखता है लेकिन कुछ समझ नहीं अत उसे...
थोड़ी देर बाद काम ो काम शुरू करते हैं और रघु ऐसे hi काम करते हुवे जानकी के पास आकर...
Raghu...arey जानकी ये साहब मेमसाब कहीं गए हैं क्या?? घर को टाला लगा है...
जानकी रघु की तरफ बड़े hi अजीब तरह से देखती है और फिर...
Janki...kyun तुझे उनसे क्या काम है? ो पति पत्नी कहीं होंगे अपने काम से....
Raghu...arey जानकी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था...
Janki...puch रहे थे या पता कर रहे the..dono कहीं गए हैं 3 दिन के लिए...
Raghu...ohh achaaaa...thik...
"साला" जानकी धीमी सी आवाज़ सुनती है और रघु वापस अपने काम पर चला जाता है लेकिन जानकी उसको देख रही थी पता नहीं क्यों उसे कुछ अजीब लग रहा था.
िद्र मुस्कान और आज़म अब हाईवे पर पोहंच चुके थे रफ़्तार से जाने लगते हैं. मुस्कान भी कुछ थी के काफी देर बाद उसको और आज़म को हॉलिडे का मौका मिला था वर्ण आज़म काम में इतना बिजी होता है के उसके लिए टाइम hi नहीं निकल पता लेकिन आज ो दोनों एकदम बेफिक्र निकल पड़े थे.
3 घंटे ड्राइविंग करने के बाद दोनों को भूक लगने की वजा से आज़म कार एक छोटे और चीप से होटल पर रोकता है और दोनों खाना खाने चले जाते हैं. अंदर 1-2 आदमी बैठे हुवे थे.
मुस्कान को एक टेबल पर बिठा कर आज़म आर्डर करने के लिए कॅश काउंटर पर चला जाता है. जब आज़म वहां पोहचता है तो वहां से एक आंटी टाइप की भरे बदन की ाव्रत बैठी हुवी जिसको देखती है आज़म एक बार के लिए झटका खता है.
ो ाव्रत देखने में सांवली थी लेकिन जो चीज़ आज़म को झटका देती है उस ाव्रत ने एक डीप नैक ब्लाउज पहना हुवा था हालाँकि साडी से क्लीवेज थोड़ा चुप रहा था लेकिन ज़्यादातर उसके चुके अछि तरह से दिख रहे थे. आज़म अब थोड़ा नार्मल रियेक्ट करता है लेकिन न चाहते हुवे भी उसकी नज़र उस ाव्रत के क्लीवेज पर hi थी.
आज़म एक बार मुस्कान की तरफ देखता के कहीं ो देख तो नहीं रही फिर ो उस ाव्रत की तरफ घूमता है जो अब स्माइल कर रही thi...azam भी अब थोड़ा नार्मल होकर...
Azam...aa खाने में क्या है??
Awrat...kya khayenge....veg या non-veg? सब मिलेगा...
ो ाव्रत ये बात आज़म को बड़े hi अजीब तरीके से देखते हुवे बोलती है जो आज़म भी नहीं समझ पता है...
Azam..aa वेग में तरकारी खाना है??
Awrat...haa है न क्यों बैठिये लगवा देती हूँ....
Azam...thik ही..
आज़म फिर वहां से चला जाता है और ो ाव्रत भी खाना लगा देती hai...khane के बिच आज़म नोटिस करता है के ो ाव्रत वहीँ कॅश काउंटर के पास कोई चीज़ ठीक कर रही थी और टेबल से बहार आयी हुवी थी.
ो ाव्रत जब घूमती है तो साड़ी में उसकी बड़ी गांड आज़म देखता है जिससे मुश्किल से खाना उसके गले से उतरता है. उसकी नज़र बार बार अब वहां जारही थी.
ो ाव्रत अनजाने में या जानबूझकर कर रही थी ये उसे hi पता था लेकिन आज़म कहीं का कहीं बहक रहा था उस ाव्रत को देख कर. ऐसा नहीं था के ो वररेक्ट करते हुवे उसे देख रहा था लेकिन मुस्कान से छुपाते हुवे छुपी नज़रों से उसे ज़रूर देखे जारहा था. ो ाव्रत अब साइड में होती है और आज़म को उसकी नैवेल देखने मिलती है.
आज़म अब पानी का घुट अपने गले से उतारते हुवे वहां देख रहा था चोर नज़रों se....azam और मुस्कान इसी बिच आपस में बातें भी कर रहे the...thodi देर बाद जब दोनों का खाना होने लगता है तो आज़म एक लास्ट बार जैसे उस ाव्रत पर नज़र डालता है और इसबार उसकी नज़र वहीँ जैम जाती है....
ो ाव्रत एक बार फिरसे झुकी हुवी थी और डीप नैक ब्लाउज होनेकी वजा से उसके चुके जैसे लटके हुवे अंदर की लाइन साफ़ दिख रही थी. उस ाव्रत के चुके थोड़ा हिलने पर भी जिग्गले कर रहे थे.
आज़म का लुंड उस आंटी को देख कर खड़ा होने लगता है. मर्द चाहे वर्जिन हो या मैरिड आंटी एक ऐसी चीज़ है जिसे देख अचे ाचों की निय्यत बिगड़ जाती है.
मुस्कान के देखने के दर से आज़म जल्दी अपनी नज़र वहां से हटाता है और ो दोनों हाथ धोकर कॅश काउंटर पर चले जाते हैं. आज़म डेन्ट होनेकी एक्टिंग करते हुवे क्यूंकि मुस्कान भी वहीँ कड़ी थी...
Azam...kitna हुवा??
Awrat...bas 200 रस.
आज़म पर्स से 250 रस निकल कर उसे देता है.
आज़म...50 रख लो....
ो ाव्रत 50 रस एक्स्ट्रा रख लेती है और आज़म को स्माइल करके दिखती है और फिर मुस्कान और आज़म जाने लगते हैं...
मुस्कान...50 रस?
Azam...arey ो एक तरह टिप दी है उसको...
Muskan...kis बात की टिप? खाना तो मुझे पसंद नहीं आया...
Azam...haha ाचा चलो अगली बार किसी बड़े होटल में जायेंगे ठीक है...
Muskan...hmm ठीक है...
फिर दोनों फिरसे अपना सर शुरू करते हैं. बातें और हंसी मज़ाक करते हुवे दोनों शोहर बीवी जारहे थे. उदार उनके घर पर मज़दूर अपना काम कर रहे थे. उनका काम हालाँकि अभी बचा हुवा था लेकिन नेअर्ल्य ख़तम होने आया था. आज़म ने रमेश से ये बात की थी के आनेवाली ईद से पहले अगर काम होजाये तो बेटर है और रमेश ने भी अपना पूरा तरय करनेका असुरे किया था आज़म को....
िद्र कार से दोनों शोहर बीवी अपने hi मूड में जारहे थे.
आज़म को लेकिन वही होटल वाला सन याद ारः था जहाँ ो आंटी इंटेंशनली और ूनिंटेन्शनली अपने भरे जिस्म की नुमाइश कर रही थी.
ऐसा नहीं था के आज़म कोई ठरकी था या फिर आवर्तों को ताड़ना उसकी आदत थी लेकिन उस आंटी को रेसिस्ट नहीं कर पते हुवे उसको चोरी छुपे देखे बिना नहीं रह पाया था.
दोनों फिर 4 घंटे सफर करने के बाद दूसरी सिटी में पोहंच जाते हैं. आज़म ने होटल बुक किये हुवा था इसलिए स्टे की टेंशन उन्हें नहीं thi...city में पोहचने के बाद मुस्कान अपनी माँ के घर में इन्फॉर्म कर देती है के ो पोहंच चुके हैं. हालाँकि मुस्कान के माँ का घर अभी यहाँ से दूर था.
मुस्कान और आज़म काफी देर बाद आउट ऑफ़ सिटी काफी फ्रेश फील कर रहे थे. शादी के बाद उनका ज़्यादा घूमना फिरना नहीं हुवा था. आज़म खुश था के मुस्कान को ो थोड़ा टाइम दे पाया इस बहाने....
हाईवे से उतर कर आज़म एक कॉलोनी से कार ले जारहा था किसी मॉल को शॉर्टकट जानेके लिए. आज़म पहले यहाँ ऑब्वियस्ली चुका था इसलिए उसे रुट्स पता थे थोड़े बोहत. ो जा hi रहे थे के अचानक उनकी कार का टायर बरसत होजाता है और एक बड़ी आवाज़ वहां गूंजती है. एक बार के लिए तो मुस्कान बोहत दर जाती है...
Muskan..yaa khu*a क्या हुवा आज़म??
Azam...arey मुस्कान तुम ठीक तो ho...tension की बात नहीं है लगता है टायर फैट गया है मैं देखता हूँ तुम टेंशन मत लो....
मुस्कान भी खुद को शांत करते हुवे पानी पीती है और आज़म बहार जाकर टायर्स चेक करने लगता है तो उसे फ्रंट का राइट टायर फटा हुवा मिलता है....
Azam...yaar ये तो पूरा फैट गया है शेठ रेप्लस hi करना पड़ेगा....
आज़म आस पास देखता है के कहीं गेराज तो नहीं hai....lekin उसे नहीं दीखता कोई ो वापस कार के पास आकर..
Azam..muskan कार का टायर फैट गया है चेंज करना पड़ेगा उसे...
Muskan...kya कैसे? अब यहाँ तो कोई गेराज भी नहीं है शायद कोई पॉश कॉलोनी लग रही है ये तोह...
Azam...haa लेकिन टेंशन मत लो कुछ कर lenge....tum आराम से बैठो मैं किसी से पूछता हूँ...
आज़म फिर बहार किसी आदमी को ढूंढ़ने लगता है उसे थोड़ी देर बाद एक आदमी आता हुवा दीखता है और ो उसके पास जाकर...
Azam...aa भाईसाब ीदार कोई गेराज है क्या हमारी कार का टायर फैट गया है...
"ीदार तो नहीं है लेकिन 2-3 कम दूर एक टायर की शॉप है उदर आपको मिल जायेगा टायर और उसी के पास गेराज भी है.."
Azam...ohh ाचा उसका कोई नंबर है?
"हां एक मिनट शायद है मेरे मोबाइल में"
ो आदमी आज़म को मोबाइल नंबर देता है और उसको थैंक्स बोलनेके बाद ो चला जाता है...
Azam...muskan ीदार कोई स्टोर नहीं है लेकिन थोड़ी दूर एक शॉप है उसका नंबर मिला है मैं कॉल लगता हूँ उदर...
Muskan...hmm क्या मुसीबत hai...jaldi कीजिए शाम होगयी है ीदार hi..
Azam..haa जान...
आज़म शॉप और गेराज वाले को कॉल लगता है और यहाँ का अड्रेस देता hai...muskan भी कार से भर आकर कड़ी होगयी थी उसे िद्र उदर देखते हुवे एक आलीशान सा विला दिखा जो काफी बड़ा लग रहा था....
Muskan...azam वहां देखो क्या आलीशान विला है...
आज़म भी उदार देखता है और वाकई में ो विला काफी आलीशान था इसलिए ो भी इम्प्रेस होकर....
Azam...hmm वाओ आलीशान तो है, होंगे कोई रिच लोग. "वर्मा मेन्शन" लिखा हुवा है...
तो बे कॉन्टिनोएड...