Hindi Sex kahani - Muskan - Page 3 - SexBaba
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Hindi Sex kahani - Muskan

Part 17

रघु के मोबाइल में मुस्कान को कुछ पिक्स दिखती है जो थी तो लौ क्वालिटी की लेकिन इमेज ठीक थक थी. उसमे ो देखती है रघु ने किसी ाव्रत की गांड की फोटोज ली हैं. उसे ो ड्रेस जाना पहचाना तो लग रहा था लेकिन यद् नहीं ारः था उसने कहाँ देखा है. ो देखती है उस ाव्रत की गांड उस ड्रेस में उभरी हुवी साफ़ साफ़ दिख रही है.

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Muskan...man men...tharki कहीं का देखो कैसे बेशर्म के जैसे फोटो लिया है...

मुस्कान फिर मोबाइल रघु को देती है...

Raghu..memsab ठीक है न मोबाइल??

Muskan...haa ठीक hi है...

Raghu...dhanywad मेमसाब मैं तो दर hi गया था के मेरा मोबाइल खराब न होगया हो...

Muskan...nahi ठीक hi है मोबाइल तुम्हारा...

Raghu...acha वैसे मेमसाब कल फिर आपको परेशानी तो नहीं हुवी मेरे जानेके बाद??

इस तरह अचानक रघु के पूछने से मुस्कान थोड़ा अचंबित होती है फिर ऐम्बर्रेस्सेड भी क्यों के कल जो भी हुवा ो बोहत ऐम्बर्रासिंग था उसके लिए. एक शादीशुदा हयादार ाव्रत होकर उसके रघु जैसे गैर मर्द का लुंड उसने हिलाया था भले hi दर्द काम करनेके लिए हो. रघु के सवाल पर मुस्कान बिना जवाब दिए चुप रहती है...

Raghu...kya हुवा मेमसाब...

Muskan...kuch नही..

Raghu...to बताइये न मेमसाब बादमें परेशानी तो नहीं हुवी...

Muskan...nahiii

Raghu...chalo ाचा ह मेमसाब लेकिन मुझे हुवी...

मुस्कान थोड़ा हैरानी से रघु की तरफ देखते हुवे..

Muskan...tumko क्या मतलब??

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Raghu...o क्या है न मेमसाब मेरे मोबाइल ों नहीं होरहा था तो मैं मेरी पत्नी को कॉल नहीं सका इसलिए ो पूछ रही थी मैं किदर था...

Muskan...hmm..

Raghu...memsab ो बोलती है कहीं तुम किसी ाव्रत के साथ तो नहीं थे हहै...

रघु अपने चेहरे पर बड़ी hi गन्दी सी स्माइल लेट हुवे मुस्कान को बोलता hai...muskan भी उसकी कही हुवी बात को समझती hai...raghu की पत्नी की बात टेक्निकली तो सही hi थी. कल रात रघु एक तरह से एक ाव्रत के साथ hi था....

Raghu...maine भी बोल दिया हां था मैं एक ाव्रत के साथ...

मुस्कान रघु की तरफ घूरती है उसकी इस बात पर क्या सचमे उसने अपनी पत्नी बताया कल जो कुछ भी हुवा...

Muskan...kya???

Raghu...maine बताया मेमसाब उसको के मैं ाव्रत के साथ तो था लेकिन ो आप hain...hum जहाँ काम कर रहे हैं उन साहब hi पताका बीवी...

Muskan...kya कहाँ तुमने??

Raghu...jo अपने सुना मेमसाब....

Muskan...dekho तुम मुझसे ऐसी बातें मत करो मैंने कितनी बार बोलै है...

Raghu...memsab अब आप हैं पताका इसलिए बोला hai...o क्या है न हमारे िद्र खूबसूरत को पताका और बोहत सरे शब्द से बोलते हैं...

Muskan...yaa...' ऐसा कोनसी जगा है जहाँ ऐसे वर्ड्स इस्तिमाल होते हैं...

Raghu...hehe इसलिए मेमसाब मैंने बताया मेरी पत्नी को के हमारी माल मेमसाब के घरकी लाइट चली गयी थी इसलिए मैं मदद करने चला गया था...

रघु के माल बोलने पर इसबार मुस्कान बस उसको एक बार गुस्से से देखती है और फिर कुछ नहीं बोलती...

Raghu...fir मेरी पत्नी ने पूछा तुम्हारी मेमसाब के कितने बचे हैं...?? तो मैंने बोलै अरे पगली हमारी आइटम मेमसाब की अभी उम्र hi क्या है बच्चों के liye....sahi बोलै न मेमसाब??

Muskan...mujhe ंन्न नही पता...

Raghu...aise कैसे मेमसाब आपके थोड़ी न बचे हैं और अभी तो आप जवान और माल hain...abhi तो आप और साहब के मज़े करने का टाइम है हहै....

Muskan...chupp!! तुम ज़्यादा बोल रहे हो..

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Raghu...isme गलत क्या बोलै मैंने memsab...dekhiye आप दोनों साफ़ साफ़ अभी मज़े कर रहे हैं इस वक़्त इसीलिए आपके बचे नहीं हैं या फिर कुछ और बात है memsab??....aur आपको तो पता है मेरे 7 बची हैं और मैं और मेरी पत्नी काफी मज़े कर चुके हैं हेहेहे...

Muskan...tumse मतलब? और तुम्हारे 7 बचे हैं इसमें मैं क्या करूँ??

Raghu...arey मेमसाब ाप्प तो खामखा गुस्सा होरही हैं मैं तो बस यूँ hi बता रहा था...

Muskan...hmm ठीक है तुम जाओ काम पर...

Raghu....waise मेमसाब मेरे यहाँ अनेकी एक और वजा थी...

Muskan...konsi वजा?

Raghu....memsab कल रात आपकी वजा से मुझे बोहत आराम mila...aapke हाथों में सचमे जादू है...

मुस्कान समझ जाती है रघु किस चीज़ की बात कर रहा था और ो ऐम्बर्रेस्सेड फील भी करती है लेकिन अपने चेहरे पर फील होने नहीं देती रघु को...

Muskan...thik है ठीक है उस बारे में फिर बात मत करना और मेहरबानी करके मेरे शोहर के सामने तो बिलकुल नहीं...

Raghu...kyun मंसबब???

Muskan...kyun मतलब? तुम पागल हो क्या ऐसी बातें किसी को बोलोगे तो मेरी क्या इज़्ज़त रहेगी.....

Raghu...haa मेंसबब्ब ये तो है आखिर अपने किसी गैर आदमी के लुंड की मालिश जो की है...

Muskan...bas बोहत हुवा मेरे साथ गन्दी बातें बिलकुल नहीं..

Raghu...arey मेमसाब अब लुंड को लुंड नहीं तो क्या बोलेंगे...

Muskan...mmm मुझी ो सब नहीं पता लेकिन आइंदा मेरे सामने वैसी बात करना...

Raghu...thik है मेमसाब वैसे ो सुबह मुझे वहां दर्द होरहा था क्या आप एक और बार उसकी मालिश क्र सकती हैं....

Muskan...chii कमीने मुझे समझ क्या रखा है तुमने??

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Raghu...memsabb मैंने आपको बस हमारे साहब की आइटम बीवी समझा हुवा है और कुछ nahi...aur आपको तो पता है मेरी बीवी नहीं है यहाँ वर्ण वही कर देती मालिश अपने कल बोहत ाचा किया था और मेरे दर्द भी काम हुवा था इसलिए बोल रहा hun...is गरीब की मदद कर दिज्ये मंसबब नहीं तो पता नहीं क्या होजायेगा...

Muskan...maine कहा न बिलकुल नाहीइ...

Raghu...kar दो मेमसाब आपने तो बस अपने हाथ hi इस्तिमाल करने hain...mere दर्द को समझिये...

Muskan...maine कहा न नाहीइ..

Raghu...mujse इतने दर्द में करना भी नहीं होगा मेमसाब दर्द अत जाता रहा और सुबह तो कुछ ज़्यादा hi था...

Muskan...to डॉक्टर के पास चले जाओ...

Raghu...chala जाता मेमसाब लेकिन मुझे दर है के डॉक्टर ससुरा कोई मोती रकम न ले ले मुझसे कुछ भी हुवा है बोलकर....

Muskan...aisa कुछ नहीं होता तुम जाओ डॉक्टर के पास...

Raghu...memsab मैंने सुना ही आपके धर्म में किसी दर्द में हो आदमी की मदद करने पर बोहत पुनिया मिलता है...

मुस्कान रघु को लाख बार मन करने के बावजूद भी नहीं मैंने पर फ़्रस्ट्राटे होरही थी लेकिन कहीं न कहीं उसे ये भी दर था के रघु कहीं किसी को कल वाला इंसिडेंट के बारे में न bolde...halanki ो इस बारे में बात भी नहीं कर रहा था के ो किसी को बताएगा ये बस मुस्कान का दर था....

मुस्कान अपने हाथ मसलते हुवे वहीँ कड़ी ऊपर एक बार देखती है के कोई देख तो नहीं रहा फिर संतुष्टि होने पर ो दूर के पास जाने लगती है और जाते हुवे धीरे से रघु ko.."andr ावो" बोलकर जाने लगती hai...raghu के मन में तो लड्डू फूटने लगते हैं आखिर उसने मुस्कान को फिरसे अपना लौड़ा मालिश करने पर मजबूर कर दिया था.

उसकी ख़ुशी छुपाये नहीं चुप रही thi.O मुस्कान को जाते हुवे देखता है. मुस्कान की गांड उसकी ड्रेस में ीदार उदार मटक रही थी जिसे देख रघु अपना लौड़ा मसलते हुवे मन men...."sasura ये गण्ड"

मुस्कान के दूर के अंदर जानेके बाद रघु भी थोड़ा ीदार उदर देखते हुवे अंदर चला जाता है लेकिन उन दोनों को इस तरह चोरी छुपे अंदर जाते हुवे ऊपर से कोई देख लेता है...

अंदर जाने के बाद रघु देखता है मुस्कान सोफे के पास कड़ी थी दूसरी तरफ घूमकर. रघु के सामने उसकी कातिलाना गांड.

Raghu..memsabb शुरू करें??

Muskan....yaad रखना ये बात किसी को भी पता चली तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा और ये मैं अब आखरी बार कर रही हूँ सिर्फ तुम्हें आराम देने के लिए..

Raghu...thik है मेमसाब आखरी बार hi सही लेकिन शिद्दत से करना...

मुस्कान कोई जवाब नहीं देती. रघु अब मुस्कान के पास अत है और...

Raghu..memsabb मैं िद्र ऊपर बैठ जॉन? आपको आसानी होगी...

Muskan...hmm

रघु अब अपने फैलाकर आराम से सोफे पर बैठ जाता है. मुस्कान कड़ी हुवी उसको एक बार देखती है और खुद धीरे से उसके पास आकर निचे बैठ जाती है.

Muskan...nikalo बहार

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Raghu...kya मेमसाब??

मुस्कान रघु को गुस्से से देखती है...

Raghu...hehe ो ये अभी लो मेमसाब...

इतना बोलकर ो अपनी पंत निचे करता है और अंडरवियर के ऊपर से अपना लौड़ा एक बार सहलाता है. अंडरवियर में बड़ा तम्बू बना हुवा था. मुस्कान अपनी नज़र दूसरी तरफ किये हुवे उसके सामने बैठी थी. रघु उसको देख कर शैतानी स्माइल कर रहा था. ो मुस्कान का रिएक्शन देखने के लिए चुप रहता है बिना कुछ किये...

थोड़ी देर में कुछ होता न देख मुस्कान िद्र देखती है तो उसके सामने बिलकुल रघु की अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू बना हुवा था जिसको देखती hi ो अपनी नज़र घुमा लेती hai...uski दिल की धड़कन तेज़ होजाती है.

Raghu...memsabb मेरी चड्डी आप खुद hi निकल लो न...

पता नहीं क्यों लेकिन मुस्कान धीरे से अपने हाथ आगे लेजाकर अंडरवियर के दोनों तरफ पकड़ते हुवे धीरे से चड्डी निचे कर देती है उसी के साथ रघु का कला लम्बा लौड़ा एकदम से फुदक कर बहार आजाता है...

मुस्कान को पेशाब और पसीने की गन्दी महक आने लगती hai...muskan दूसरी तरफ किये हुवी थी के रघु अचानक उसका हाथ पकड़ लेता है और अपने काळा लौड़े पर रख देता है...

Raghu...shuru होजावो मेंसबब्ब...

मुस्कान अपनी उखड़ी हुवी सांसों के साथ अब उसका कला लौड़ा अपने गोर हाथों में लेकर ऊपर निचे करने लगती है. मुस्कान को रघु का लौड़ा काफी बड़ा फील होरहा था अपने छोटे हाथों में. और हर स्ट्रोक के साथ ऐसे लगता था जैसे उसका लौड़ा और बड़ा होरहा है.

Raghu...aaaahhh बस ऐसी hi मेमसाब करती राहू आआह...

रघु सोफे पर बैठा हुवा अपना मन ऊपर करके मज़े में tha...uska कला लुंड मुस्कान के हाथों में मनो मरे ख़ुशी के फुदक रहा था. उसके बालों से घिरे टट्टे झूल रहे थे हिलाते हुवे. मुस्कान अपने हाथ में की चीज़ को साफ़ महसूस कर सकती थी के ो इस वक़्त एक दहकता हुवा गरम रोड जैसा है. ो लाख कोशिश करती है के उसके लौड़े की तरफ न देखे लेकिन फिर उससे रहा नहीं जाता और ो अपनी नज़र उदर कर hi लेती है...

एक बार के लिए ो अपने मन पर हाथ रखती है के रघु का कला लौड़ा कितना भयानक और बड़ा लग रहा था भला कैसे ये किसी ाव्रत के अंदर जासकता है और ो ाव्रत खुश भी होसकती है. ो देखती है उसके हर स्ट्रोक के साथ रघु के लुंड की काली स्किन उसके डार्क ब्राउन टोपे से उतर चढ़ रही थी.

Raghu....memsab क्या मस्त लौड़ा हिलती ो aap...apke पति के तो मज़े hain...kaash मेरी भी ऐसी किस्मत होती मैं तो रोज़ ऐसे अपने लौड़े की मालिश करवाता ससुरा ाःह...

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Muskan...kyun तुम्हारी पत्नी नहीं करती??

Raghu...arey ो कहाँ करेगी उसको तो मैं इतना मौका देता hi नहीं हूँ उसकी तो मैं बस ठुकाई करता हूँ हहै...

Muskan...mera हाथ दर्द करने लगा ही...

Raghu...thodi देर मेमसाब मेरा निकलने वाला है..

Muskan...niklne वाला है? क्या बकवास कर रहे हो मैं तुम्हारी मालिश सिर्फ दर्द काम करनेके लिए कर रही हूँ याद है न...

Raghu...haan हाँ मंसबब मुझे याद ही बस आप करती राहू...

मुस्कान अब फील करसकती थी के रघु के लौड़े की राजन फूलने लगी हैं मतलब ो अब छूटने की काफी नज़दीक लेकिन ये जानते हुवे भी ो उसका लौड़ा हिलना जारी रखती है. थोड़ी देर में हिलाते हिलाते अचानक रघु सीधा मुस्कान के खूबसूरत चेहरे पर झड़ने लगता है.

Muskan...heyy!!!

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गधा सफ़ेद मणि मुस्कान के गोर चेहरे पर हर तरफ फ़ैल जाता hai...raghu के लौड़े से उसके मणि पिचकारी मुस्कान के चेहरे पर गिर रही थी. यहाँ तक के ो मन अब मुस्कान के चेहरे से होते हुवे गले तक उतरने लगता है.

इस वक़्त घर के सोफे पर मज़दूर अधेड़ू उम्र का कला नाता आदमी रघु आराम से बैठा ह्वुआ उसका कला लम्बा लौड़ा बहार था और उसे पकड़ी हुवी इस घर की मालकिन और खूबसूरत जवान मुस्कान.

रघु अपने मज़े में था लेकिन एक्सपेक्ट कर रहा था उसकी इस हरकत से मुस्कान ज़रूर गुस्सा होगी शायद अपने पति को भी बता दे लेकिन आगे जो रघु देखता है उससे उसके होश उड़ जाते हैं. ो देखता है मुस्कान अपने होंठ पर लगे हुवे उसके गधे मणि को धीरे से अपनी ज़ुबान बहार निकलते हुवे बड़े hi सेक्सी अंदाज़ में लीक करती है...

इस सन को देख कर तो जैसे रघु के होश hi उड़ जाते हैं लेकिन तभी....

Muskan...ooh हेल्लो तुम मेरी बात सुन्न रही हूँ...!!!!

रघु अपने खुली आँखों वाले सपने से बहार अत है हड़बड़ा सा जाता है...

Muskan...tum होश में तो हो मैंने कहा अगर उस बात का किसी को भी पता चल न तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा...

रघु मन men...saala ससुरा का नाती लगता है सपना देख रहा tha....sala तभी मैं सोचूं ये मेरा लौड़ा इतनी शिद्दत से क्यों हिलने लगी और अपने मन पर भी liyi...salaa...

Muskan...oye??

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Raghu...haa हां मंसबब किसी को नहीं बताऊंगा ये हम दोनों का राज़ है हहै...

रघु उतना बोलकर बड़े hi अजीब तरह से स्माइल करता है जिसे नोटिस करके मुस्कान उसके तरफ घूरती है और फिर घर के अंदर चली जाती है. रघु उसको जाते हुवे देख रहा था और ऑब्वियस्ली उसकी नज़र मुस्कान की मटकती हुवी गांड पर थी लेकिन इसब में कोई था जो इन दोनों को कबसे देख रहा था!!

मुस्कान अंदर जाकर सोफे पर बैठ जाती है और खुद को बड़ा कोसती है के कैसे ो इस सिचुएशन में फंस गयी. कहाँ ो इतनी हयादार शादीशुदा ाव्रत है और कहाँ उसने कल रात किसी गैर मर्द का लुंड हिलाया था मदद के लिए. एक तरह से तो ो अपने शोहर को धोका देना hi ho..kahan गयी उसकी वफाई? कहाँ गयी उसकी पवित्रता?

मुस्कान यही सब सोचते रहती है. ऐसे hi दोपहर में सब मज़दूर खाने चले जाते हैं और घंटे बाद वापस एते हैं. घर के अंदर मुस्कान सोई हुवी थी. तभी उनके घर के सामने से वही आदमी घर की तरफ देखते हुवे गुज़रता है जो रात में जॉगिंग के वक़्त चाय की टापरी पर आज़म से टकराया था.

शाम में सब मज़दूरों के जाने के बाद थोड़ी देर में आज़म ऑफिस से घर आजाता है और ो दोनों कल जानेके लिए पैकिंग करने लगते हैं. साडी पैकिंग करने के बाद दोनों खाना सब खाकर थोड़ा रेस्ट करने के बाद वाकिंग के लिए निकल पड़ते हैं.

Azam...acha कल सुबह निकल जायेंगे 9 बजे जल्दी निकलेंगे तो टाइम पर पोहंच जायेंगे...

Muskan...thik है मैंने अम्मी के घर कॉल कर दिया है...

Azam....hmm ठीक है और हां ो मैंने जो गिफ्ट लाया हुवा है ो रख लेना बैग में यद् से तुम्हारी अम्मी अब्बू के लिए...

Muskan...hmm रख दिया है मैंने...

Azam..chalo सही है..

दोनों बातें करते हुवे वाकिंग कर रहे हैं के तभी उनके साइड से वही आदमी गुज़रता है जो एक इसबार एक शाल ओढ़े हुवे था. आज़म और मुस्कान उसपर गौर नहीं करते ो बस अपनी बातों में लगे हुवे the...badmen चाय के टापरी पर पोहंच कर दोनों चाय पिटे हैं फिर वापस घर आजाते हैं और कल जल्दी निकलने के लिए सजाते हैं....

अगली सुबह दोनों नाहा धोकर फ्रेश होनेके बाद सब रेडी करके कार में सामान सब डालकर कार में बैठ जाते हैं घर का दूर लॉक करके.

आज़म ने शर्ट पंत पहनी हुवी थी वहीँ मुस्कान बुर्का पहने हुवी एकदम खूबसूरत और माल लग रही थी. आज़म से रमेश को पहले hi बता दिया था के ो 3 दिन के लिए आउट ऑफ़ सिटी जारहे हैं तो पानी सब का एडजस्ट कर ले...

आज़म और मुस्कान अपने ट्रिप पर निकल जाते हैं. घंटे बाद सरे मज़दूर आजाते हैं और रघु नोटिस करता है के घर के मैं दूर पर टाला लगा हुवा है. ो थोड़ा िद्र उदर देखता है लेकिन कुछ समझ नहीं अत उसे...

थोड़ी देर बाद काम ो काम शुरू करते हैं और रघु ऐसे hi काम करते हुवे जानकी के पास आकर...

Raghu...arey जानकी ये साहब मेमसाब कहीं गए हैं क्या?? घर को टाला लगा है...

जानकी रघु की तरफ बड़े hi अजीब तरह से देखती है और फिर...

Janki...kyun तुझे उनसे क्या काम है? ो पति पत्नी कहीं होंगे अपने काम से....

Raghu...arey जानकी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था...

Janki...puch रहे थे या पता कर रहे the..dono कहीं गए हैं 3 दिन के लिए...

Raghu...ohh achaaaa...thik...

"साला" जानकी धीमी सी आवाज़ सुनती है और रघु वापस अपने काम पर चला जाता है लेकिन जानकी उसको देख रही थी पता नहीं क्यों उसे कुछ अजीब लग रहा था.

िद्र मुस्कान और आज़म अब हाईवे पर पोहंच चुके थे रफ़्तार से जाने लगते हैं. मुस्कान भी कुछ थी के काफी देर बाद उसको और आज़म को हॉलिडे का मौका मिला था वर्ण आज़म काम में इतना बिजी होता है के उसके लिए टाइम hi नहीं निकल पता लेकिन आज ो दोनों एकदम बेफिक्र निकल पड़े थे.

3 घंटे ड्राइविंग करने के बाद दोनों को भूक लगने की वजा से आज़म कार एक छोटे और चीप से होटल पर रोकता है और दोनों खाना खाने चले जाते हैं. अंदर 1-2 आदमी बैठे हुवे थे.

मुस्कान को एक टेबल पर बिठा कर आज़म आर्डर करने के लिए कॅश काउंटर पर चला जाता है. जब आज़म वहां पोहचता है तो वहां से एक आंटी टाइप की भरे बदन की ाव्रत बैठी हुवी जिसको देखती है आज़म एक बार के लिए झटका खता है.

ो ाव्रत देखने में सांवली थी लेकिन जो चीज़ आज़म को झटका देती है उस ाव्रत ने एक डीप नैक ब्लाउज पहना हुवा था हालाँकि साडी से क्लीवेज थोड़ा चुप रहा था लेकिन ज़्यादातर उसके चुके अछि तरह से दिख रहे थे. आज़म अब थोड़ा नार्मल रियेक्ट करता है लेकिन न चाहते हुवे भी उसकी नज़र उस ाव्रत के क्लीवेज पर hi थी.

आज़म एक बार मुस्कान की तरफ देखता के कहीं ो देख तो नहीं रही फिर ो उस ाव्रत की तरफ घूमता है जो अब स्माइल कर रही thi...azam भी अब थोड़ा नार्मल होकर...

Azam...aa खाने में क्या है??

Awrat...kya khayenge....veg या non-veg? सब मिलेगा...

ो ाव्रत ये बात आज़म को बड़े hi अजीब तरीके से देखते हुवे बोलती है जो आज़म भी नहीं समझ पता है...

Azam..aa वेग में तरकारी खाना है??

Awrat...haa है न क्यों बैठिये लगवा देती हूँ....

Azam...thik ही..

आज़म फिर वहां से चला जाता है और ो ाव्रत भी खाना लगा देती hai...khane के बिच आज़म नोटिस करता है के ो ाव्रत वहीँ कॅश काउंटर के पास कोई चीज़ ठीक कर रही थी और टेबल से बहार आयी हुवी थी.

ो ाव्रत जब घूमती है तो साड़ी में उसकी बड़ी गांड आज़म देखता है जिससे मुश्किल से खाना उसके गले से उतरता है. उसकी नज़र बार बार अब वहां जारही थी.

ो ाव्रत अनजाने में या जानबूझकर कर रही थी ये उसे hi पता था लेकिन आज़म कहीं का कहीं बहक रहा था उस ाव्रत को देख कर. ऐसा नहीं था के ो वररेक्ट करते हुवे उसे देख रहा था लेकिन मुस्कान से छुपाते हुवे छुपी नज़रों से उसे ज़रूर देखे जारहा था. ो ाव्रत अब साइड में होती है और आज़म को उसकी नैवेल देखने मिलती है.

आज़म अब पानी का घुट अपने गले से उतारते हुवे वहां देख रहा था चोर नज़रों se....azam और मुस्कान इसी बिच आपस में बातें भी कर रहे the...thodi देर बाद जब दोनों का खाना होने लगता है तो आज़म एक लास्ट बार जैसे उस ाव्रत पर नज़र डालता है और इसबार उसकी नज़र वहीँ जैम जाती है....

ो ाव्रत एक बार फिरसे झुकी हुवी थी और डीप नैक ब्लाउज होनेकी वजा से उसके चुके जैसे लटके हुवे अंदर की लाइन साफ़ दिख रही थी. उस ाव्रत के चुके थोड़ा हिलने पर भी जिग्गले कर रहे थे.

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आज़म का लुंड उस आंटी को देख कर खड़ा होने लगता है. मर्द चाहे वर्जिन हो या मैरिड आंटी एक ऐसी चीज़ है जिसे देख अचे ाचों की निय्यत बिगड़ जाती है.

मुस्कान के देखने के दर से आज़म जल्दी अपनी नज़र वहां से हटाता है और ो दोनों हाथ धोकर कॅश काउंटर पर चले जाते हैं. आज़म डेन्ट होनेकी एक्टिंग करते हुवे क्यूंकि मुस्कान भी वहीँ कड़ी थी...

Azam...kitna हुवा??

Awrat...bas 200 रस.

आज़म पर्स से 250 रस निकल कर उसे देता है.

आज़म...50 रख लो....

ो ाव्रत 50 रस एक्स्ट्रा रख लेती है और आज़म को स्माइल करके दिखती है और फिर मुस्कान और आज़म जाने लगते हैं...

मुस्कान...50 रस?

Azam...arey ो एक तरह टिप दी है उसको...

Muskan...kis बात की टिप? खाना तो मुझे पसंद नहीं आया...

Azam...haha ाचा चलो अगली बार किसी बड़े होटल में जायेंगे ठीक है...

Muskan...hmm ठीक है...

फिर दोनों फिरसे अपना सर शुरू करते हैं. बातें और हंसी मज़ाक करते हुवे दोनों शोहर बीवी जारहे थे. उदार उनके घर पर मज़दूर अपना काम कर रहे थे. उनका काम हालाँकि अभी बचा हुवा था लेकिन नेअर्ल्य ख़तम होने आया था. आज़म ने रमेश से ये बात की थी के आनेवाली ईद से पहले अगर काम होजाये तो बेटर है और रमेश ने भी अपना पूरा तरय करनेका असुरे किया था आज़म को....

िद्र कार से दोनों शोहर बीवी अपने hi मूड में जारहे थे.

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आज़म को लेकिन वही होटल वाला सन याद ारः था जहाँ ो आंटी इंटेंशनली और ूनिंटेन्शनली अपने भरे जिस्म की नुमाइश कर रही थी.

ऐसा नहीं था के आज़म कोई ठरकी था या फिर आवर्तों को ताड़ना उसकी आदत थी लेकिन उस आंटी को रेसिस्ट नहीं कर पते हुवे उसको चोरी छुपे देखे बिना नहीं रह पाया था.

दोनों फिर 4 घंटे सफर करने के बाद दूसरी सिटी में पोहंच जाते हैं. आज़म ने होटल बुक किये हुवा था इसलिए स्टे की टेंशन उन्हें नहीं thi...city में पोहचने के बाद मुस्कान अपनी माँ के घर में इन्फॉर्म कर देती है के ो पोहंच चुके हैं. हालाँकि मुस्कान के माँ का घर अभी यहाँ से दूर था.

मुस्कान और आज़म काफी देर बाद आउट ऑफ़ सिटी काफी फ्रेश फील कर रहे थे. शादी के बाद उनका ज़्यादा घूमना फिरना नहीं हुवा था. आज़म खुश था के मुस्कान को ो थोड़ा टाइम दे पाया इस बहाने....

हाईवे से उतर कर आज़म एक कॉलोनी से कार ले जारहा था किसी मॉल को शॉर्टकट जानेके लिए. आज़म पहले यहाँ ऑब्वियस्ली चुका था इसलिए उसे रुट्स पता थे थोड़े बोहत. ो जा hi रहे थे के अचानक उनकी कार का टायर बरसत होजाता है और एक बड़ी आवाज़ वहां गूंजती है. एक बार के लिए तो मुस्कान बोहत दर जाती है...

Muskan..yaa khu*a क्या हुवा आज़म??

Azam...arey मुस्कान तुम ठीक तो ho...tension की बात नहीं है लगता है टायर फैट गया है मैं देखता हूँ तुम टेंशन मत लो....

मुस्कान भी खुद को शांत करते हुवे पानी पीती है और आज़म बहार जाकर टायर्स चेक करने लगता है तो उसे फ्रंट का राइट टायर फटा हुवा मिलता है....

Azam...yaar ये तो पूरा फैट गया है शेठ रेप्लस hi करना पड़ेगा....

आज़म आस पास देखता है के कहीं गेराज तो नहीं hai....lekin उसे नहीं दीखता कोई ो वापस कार के पास आकर..

Azam..muskan कार का टायर फैट गया है चेंज करना पड़ेगा उसे...

Muskan...kya कैसे? अब यहाँ तो कोई गेराज भी नहीं है शायद कोई पॉश कॉलोनी लग रही है ये तोह...

Azam...haa लेकिन टेंशन मत लो कुछ कर lenge....tum आराम से बैठो मैं किसी से पूछता हूँ...

आज़म फिर बहार किसी आदमी को ढूंढ़ने लगता है उसे थोड़ी देर बाद एक आदमी आता हुवा दीखता है और ो उसके पास जाकर...

Azam...aa भाईसाब ीदार कोई गेराज है क्या हमारी कार का टायर फैट गया है...

"ीदार तो नहीं है लेकिन 2-3 कम दूर एक टायर की शॉप है उदर आपको मिल जायेगा टायर और उसी के पास गेराज भी है.."

Azam...ohh ाचा उसका कोई नंबर है?

"हां एक मिनट शायद है मेरे मोबाइल में"

ो आदमी आज़म को मोबाइल नंबर देता है और उसको थैंक्स बोलनेके बाद ो चला जाता है...

Azam...muskan ीदार कोई स्टोर नहीं है लेकिन थोड़ी दूर एक शॉप है उसका नंबर मिला है मैं कॉल लगता हूँ उदर...

Muskan...hmm क्या मुसीबत hai...jaldi कीजिए शाम होगयी है ीदार hi..

Azam..haa जान...

आज़म शॉप और गेराज वाले को कॉल लगता है और यहाँ का अड्रेस देता hai...muskan भी कार से भर आकर कड़ी होगयी थी उसे िद्र उदर देखते हुवे एक आलीशान सा विला दिखा जो काफी बड़ा लग रहा था....

Muskan...azam वहां देखो क्या आलीशान विला है...

आज़म भी उदार देखता है और वाकई में ो विला काफी आलीशान था इसलिए ो भी इम्प्रेस होकर....

Azam...hmm वाओ आलीशान तो है, होंगे कोई रिच लोग. "वर्मा मेन्शन" लिखा हुवा है...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
ठोस हु अरे नई तो थिस थ्रेड, तो रीड आल उपदटेस सो फार, i've क्रिएटेड ान इंडेक्स कोन्टाइनिंग एव्री सिंगल अपडेट लिंक ों थे वैरी फर्स्ट पेज. दो चेक आईटी आउट.

थैंक्स
 
थैंक यू गाइस फॉर सो मच सपोर्ट ों एव्री अपडेट सो फार, it's मोरे थान एनफ मोटिवेशन फॉर अन्य वर्तितेर. ी होनेस्त्ली didn't थॉट ी वोउल्ड गेट थिस क्रेजी रिस्पांस व्हेन ी स्टार्टेड थिस स्टोरी.

ओने मोरे थिंग, ी क्नोव यू गाइस वांट बिग्गेर उपदटेस बूत तरय न अंडरस्टैंड, i've तो मैनेज माय वर्क, सोशल & पर्सनल लाइफ तू. तहत doesn't मैं ी won't बे गिविंग लॉन्गर उपदटेस एनीमोर. They'll के टाइम तो टाइम ेस्पेशलय ों मिलस्टोन्स & स्पेशल ोक्सासिओंस.

थैंक्स

थे ईविल
 
Part 18

Muskan...hmm काफी बड़े लोग होंगे...

Azam..haan सो तो है...

ऐसे hi ीदार उदर की बैठने करते हुवे दोनों थोड़ी देर टाइम पास करते हैं फिर आधे घंटे बाद गेराज से आदमी अत है और उनको टायर रेप्लस करके देता है. पेमेंट करने के बाद ो दोनों वहां से निकलते हैं...

कुछ देर बाद ो एक मॉल तक पोहचते हैं. दोनों वहां थोड़ी बोहत शॉपिंग करने के बाद वहां से निकलते हैं. रात तो होने आयी थी इसलिए दोनों अपने बुक किये हुवे होटल में चले जाते हैं. फ्रेश होकर फिर दोनों डिनर के लिए जाते हैं. दोनों क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे थे.

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शादी के बाद ररली hi हुवा था के दोनों इस तरह का टाइम स्पेंड किये थे तो ये दोनों के किये स्पेशल था.

डिनर करके दोनों एक वाक के लिए निकल जाते हैं. दोनों जा hi रहे थे के आज़म को किसी का कॉल अत है और ो मुस्कान से एक्सक्यूज़ करके थोड़ी दूर जाता है. मुस्कान ने हालाँकि आज़म पर कबि भी शक नहीं किया था लेकिन उसे थोड़ा ये अजीब लग रहा था फिर भी मुस्कान उस चीज़ को अवॉयड करती है क्यूंकि ो दोनों यहाँ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने ए थे और ो उसको रुइन नहीं करना चाहती थी किसी भी तरह से.

किसी से कॉल पर बात करके आज़म वापस मुस्कान के पास अत है. मुस्कान फिर भी आउट ऑफ़ क्यूरोसिटी आज़म से पूछ hi लेती है...

Muskan...kiska कॉल था??

Azam...aa ू ो ऑफिस से कॉल था...

Muskan...is वक़्त??

Azam...arey मतलब मेरे एक कलेग का कॉल था ो एक ज़रूर मीटिंग के बारे में बता रहा था वेकेशन के बाद...

Muskan...hmmm

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फिर दोनों वापस वाकिंग करके अपने होटल चले जाते हैं. दोनों फ्रेश होकर बीएड पर एते हैं और आज़म मुस्कान से थोड़ी बोहत छेड़खानी करते हुवे उसको गरम क्र देता है. थोड़े बोहत फोरप्ले के बाद आज़म उसके कपडे उतर देता है और खुद के भी...

दोनों नंगे होनेके के बाद उनका उसुअल स्टाइल में सेक्स करने लगते हैं. दोनों एन्जॉय कर hi रहे थे के मुस्कान को अचानक hi कल वाला सन यद् अत है जब ो अँधेरे में रघु के साथ आज़म से छुपी हुवी थी. उसने उस वक़्त रघु का दर्द काम करने के लिए उसका लुंड भी अपने हाथ से मालिश भी की थी. कितना बड़ा लग रहा था ो!!

आज़म से कितना उम्र में बड़ा है ो और तो और नाता भी. आज़म तो फिर भी फिट है और ो एक मज़दूर ज़रूर है लेकिन फिर किसी तरह से नहीं लगता. बापरे उसकी ो चीज़ इतनी बड़ी आज़म के मुकाबले शायद दुगना hi hoga....ya kh*da!!!

उसके हाथ में ो कितना तगड़ा लग रहा था. आज़म का उसने पकड़ना है लेकिन ो तो इतना बड़ा कभी नहीं लगता. रघु जब भी अपनी बीवी से वीडियो कॉल पर बात करता था ो अपना लुंड कैसे जोरसे हिलता था इतने स्टैमिना के साथ. इतनी उम्र में भी भला किसको इनसब चीज़ों में इंटरेस्ट रहता होगा.

पता नहीं क्यों रघु के बारे में सोचते हुवे hi मुस्कान जोरसे झाड़ जाती है और कहीं न कहीं आज़म को भी मज़ा आया था आज...

Azam...jaan आज मज़ा आज्ञा...

मुस्कान जो खुद hi कन्फ्यूज्ड थी के आखिर ो कैसे इस तरह झाड़ गयी बस उसके मन से "हम्म" निकलता है लेकिन ो ये सोच में पद जाती है के क्या ो रघु को यद् करके झड़ी है? अगर है तो क्यों? ऐसा क्या जादू किया है रघु ने उसपर? ो रघु है भी एक मज़दूर और एक नाता आदमी उससे सोचकर भला मुस्कान को कैसी फीलिंग आयी थी??

यही सब सवाल अब मुस्कान को परेशां करने लगे थे. दोनों शावर लेनेके बाद फिर सजाते हैं.

अगली सुबह ब्रेकफास्ट करके दोनों घूमने निकल जाते हैं. उदार उनके घर पर मज़दूर काम पर ए हुवे थे. रघु ेस्पेशलय बड़ा परेशां सा होचुका था के आज मुस्कान यहाँ नहीं थी. यूँ कहें काम करने में उसको मन उसी तरह से अत था.

मुस्कान को ताड़ना और मुस्कान के साथ छेड़खानी करना. उसके इतना कन्सेर्वटिवे हाउसवाइफ होनेके बावजूद भी मुस्कान ने अभी तक अपने शोहर को कुछ नहीं बताया था जो रघु को हिम्मत देने के लिए काफी था.

आज़म और मुस्कान अपनी मस्ती में लगे हुवे थे उन्हें पता था के अभी 2 दिन और हैं उनको एन्जॉय करने के लिए और फिर उनको मुस्कान के माँ के घर भी जाना था. दोनों अलग अलग जगा घूमते हैं. दोनों बोहत खुश थे इस वकेशंस से.

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ऐसे hi दोनों सारा दिन घुमनेके बाद शाम में अपने होटल जाकर फिर डिनर के वक़्त बहार चले जाते हैं. उदर रघु भी काम से होकर उन मज़दूरों की रिहाइश पर चला जाता है. रात में सोनेके के वक़्त ो चादर ओढ़े हुवे मुस्कान के बारे में सोचते हुवे अपना लौड़ा हिला रहा था.

मुस्कान को अलग अलग एंगल से अलग अलग जगा पर सोचते हुवे रघु अपना कला लौड़ा हिलाये जारहा था. उसे यद् अत है उस रात जब दोनों करीब थे और उसका लौड़ा मुस्कान की गांड की सिकाई कर रहा था और तो और मुस्कान ने अपने गोर छोटे हाथों से उसके लौड़े की मालिश भी की थी क्या मज़ा आया था. आखिर कैसे उसने इतनी शरीफ हयादार शादीशुदा ाव्रत को उसका लौड़ा पकड़ने पर मजबूर कर दिया.

उसे ये भी पता था के हो न हो मुस्कान ने उसकी ज़िन्दगी इतना बड़ा लौड़ा अपने हाथ में फील नहीं किया होगा. क्यूंकि जब उसने उसका लुंड पकड़ा था तो किस तरह उछली थी. ऐसा सब सोचते हुवे न जाने क्यों रघु के चेहरे पर घिनौनी शैतानी स्माइल आरही थी बार बार....

क्या सचमे ो इस घरेलु शादीशुदा हयादार ाव्रत को पता सकता है. उसे ये ज़रूर पता अगर ो किसी तरह बी चांस सफल होगया तोह उसके तो मज़े hi मज़े हैं. लेकिन ो सचमे ऐसा कर पायेगा? क्यूंकि मुस्कान चाहे जितनी भी वल्नरेबल हुवी हो उसके सामने लेकिन ो है के तीखी मिर्ची. हाथ लगाने पर जल hi जाये बाँदा.

मुस्कान की इन बातों को सोचते सोचते रघु का पानी निकल जाता है और ो भी सुजाता है और उदार आज़म और मुस्कान भी खाना खाकर अनेके बाद अपने होटल आकर सजाते हैं.

आधी रात में मुस्कान को कोई सपना आता है जिसमे ो फिरसे उसी रात में थी जिस वक़्त बारिश होरही थी और ो भीगी हुवी रघु के साथ आज़म अनेके बाद अँधेरे में खड़े थे एक कोने में लेकिन इस बार आज़म वहीँ सोफे पर बैठ हुवा था हॉल में.

और ो दोनों कोने में अँधेरे में खड़े. मुस्कान अपने सपने में अपने शोहर से कुछ बोलना छह रही थी लेकिन ो कुछ कह नहीं पढ़ी थी पता नहीं क्यों....

आज़म अपने मोबाइल पर लगा हुवा कुछ कर रहा था. मुस्कान अपने शोहर को देखते हुवे वहीँ कड़ी थी के रघु पीछे से उसे सात जाता है..

Raghu...muskan कबसे मैं तुम्हारे लिए तड़प रहा हूँ तुझे अंदाज़ा भी नहीं है...

Muskan...ye क्या कह रहे हो?? चोररू मुझे रघु...

Raghu...muskan अब बोहत होगया मेरा लौड़ा और इन्तिज़ार नहीं कर सकता....

Muskan...kya बकवास कर रहे हो चोरो मुझे...

Raghu...muskan!!!

Muskan..aahhh रघु नाहीइ...

इतना बोलकर रघु अचानक मुस्कान के चुके निघ्त्य के ऊपर से मसल देता है...

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मुस्कान कुछ समझ पति इससे पहले hi रघु दुबारा उसके चुके जोरसे दबा देता है और मुस्कान दर्द से अपना मन अपने शोहर को आवाज़ न जाये इसलिए पकड़ लेती है...

मुस्कान को यकीन नहीं होरहा था के रघु के अंदर अचानक इतनी हिम्मत कहाँ से आगयी लेकिन उसके लिए अब बड़ी मुश्किल होगयी थी ो न तो चिल्ला सकती थी और न hi ज़्यादा कुछ हटकट. कहाँ ो ऐसी सिचुएशन फंस गयी...

रघु जैसे मुस्कान के जिस्म के नशे में पागल सा हुवे जारहा था और उसके चुके अचे से मसले जारहा था जैसे ो आता गुंड रहा ho...muskan अब अपनी गांड पर कुछ सख्त चीज़ महसूस होने लगती है और एक शादीशुदा होने की वजा से उसे समझने में ज़्यादा देरी नहीं लगती के ो क्या चीज़ है...

मुस्कान अपनी बड़ी आँखों के साथ अब रघु को पीछे धकेलनेका तरय करने लगती है लेकिन रघु भी ऐडा हुवा था मुस्कान को मसलने men...muskana अपना स्ट्रगल जारी रखे hi हुवी थी के उसको अपने पीछे ज़िप ओपन होनेकी आवाज़ अति है उसी के साथ पंत ड्राप होनेकी मतलब रघु अब नंगा होचुक है.

मुस्कान कुछ सोच पति उससे पहले hi रघु उसकी निघ्त्य ऊपर लेने लगता है एक झटके में निकल भी देता है. नाईट निकलते hi मुस्कान के ब्रा में कैद गोर चुके तो जिग्गले कर जाते हैं. रघु तो पागल सा होजाता है मुस्कान का गोरा जवान जिस्म देख कर और एकदम से मुस्कान को अपनी तरफ घुमा देता है और उसका चेहरा पकड़ लेता है.

ो नाता होनेकी वजा से उसको थोड़ा ऊपर देखना पद रहा था लेकिन ो फिर भी अपनी डोमिनान्स दिखते हुवे उसका खूबसूरत चेहरा अपने हाथों में पकड़ कर अपना चेहरा उसके पास लेजाने लगता है.

मुस्कान तो बस पत्थर की तरह कड़ी थी और रघु का कला बदसूरत सा चेहरा उसके चेहरे की तरफ एते हुवे देख रही थी तभी रघु अचानक से अपने काळा होंठ उसके नरम होंठो पर रख hi देता है के...

Muskan..mmm नईईई....

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मुस्कान अपने सपने में hi बड़बड़ाते हुवे उठ जाती है. मुस्कान की आवाज़ सुनकर आज़म भी हड़बड़ा कर उठ जाता है. मुस्कान को पसीना आया हुवा था और ो उसकी निघ्त्य उसकी झांगों तक आयी हुवी थी लेकिन क्यों??

आज़म अपनी खूबसूरत बीवी की ये हालत देख कर थोड़ा परेशां होजाता है...

Azam..kya हुवा मुस्कान??

मुस्कान खुद को सँभालते हुवे उसे अब ख्याल अत है के ये तो एक सपना था और ो रहत की साँस लेती है....

Muskan...oo ोू अजांम मैंने एक बुरा सपना देखा इसलिये...

Azam...kaisa सपना??

Muskan...oo ऐसी कुछ नही डरवाना था...

Azam...yaar मैं तो दर hi गया तुम्हारे कपडे भी देखो...

मुस्कान फिर अपनी हालत पर गौर करती है. उसको पसीना आया हुवा था और उसकी निघ्त्य किसी वजा से उसकी झांगों तक ऊपर आयी हुवी थी. ो सोचती है क्या उसकी करवट लेने से निघ्त्य ऊपर हुवी या फिर वजा कुछ और hi है??

आज़म मुस्कान को पानी देता है. थोड़ी देर में शांत होनेके बाद दोनों फिर वापस सजाते हैं...

अगली सुबह ब्रेकफास्ट सब करके आज़म और मुस्कान दोनों मुस्कान की माँ के घर के लिए निकल जाते हैं. ो बड़ा खुश थी के आज काफी दिनों बाद ो अपने मायके जारही थी.

वहां जाकर दोनों सब से मिलते हैं. सब खुश भी थे के काफी दिनों बाद उनकी बेटी और दामाद घर ए थे. ो दोनों वहां एक रात रुकते हैं और अगले दिन उनसे अलविदा लेकर वहां से वापस एते है. कुछ जगह घूमने के बाद ो फाइनली वापस घर के लिए निकल पड़ते हैं.

काफी लम्बी ड्राइव थी इसलिए दोनों आराम से बातें करते हुवे अपने मोमेंट्स एन्जॉय करते हुवे आरहे थे. ओवरआल उन्होंने एक ाचा समय बिताया था. रात भर की ड्राइविंग के बाद दोनों सुबह के 4 बजे घर पोहचते हैं. कार पार्क करके दोनों सीधा सजाते हैं.

अगली सुबह हालाँकि आज़म को ऑफिस जाना था लेकिन रात में लेट वापस अनेकी वजा से आज़म डीडे करता है के ो आज घर पर hi rahega...dono काफी देर तक सोये रहते हैं अंतिल मुस्कान को दूर बेल्ल की आवाज़ सुनाई देती है. ो समझ जाती है के शायद जानकी आयी होगी पानी लेने.

ो बैडरूम से निकल कर सीधा मैं दूर पर जाती है एक तरह से नींद में hi चलते हुवे. उसकी ऑंखें प्रॉपरलय खुल भी नहीं रही थी नींद की वजा se...o दूर खोलती है और नींद में hi...

Muskan...haan जानकी...

सामने से कोई जवाब नहीं अत लेकिन ो वैसे hi कड़ी थी. ो आगे से जवाब एक्सपेक्ट कर रही थी लेकिन जवाब अभी तक नहीं आया था तभी...

"मंसबब"

मुस्कान नींद में hi उसको ये आवाज़ जनि पहचानी सी लग रही थी फिर अचानक ो अपनी ऑंखें खोलती है तो सामने रघु खड़ा था अपनी पीली बत्तीसी दिखते हुवे...

Muskan...tumm!!!

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Raghu....haa मेंसबब्ब मैं और कोण हेहेहे...

Muskan...kk ककया काम है??

Raghu...memsab आप दो दिन यहाँ नहीं थी न तो बड़ी प्रॉब्लम हुवी मुझे...

Muskan...kaisi प्रॉब्लम??

Raghu....o आपको पता है न मेमसाब पानी और पेशाब (इशारा करते हुवे) उसकी..

Muskan..hmm अभी क्या प्रॉब्लम है??

Raghu...sandas जाना है मेमसाब...

Muskan...thik है...

मुस्कान अब अंदर आजाती है दूर खुला रख कर hi और वापस बैडरूम जाने लगती है...

Raghu...waise मेमसाब आप माल लग रही हो इस वक़्त...

बैडरूम जाते हुवे मुस्कान पीछे मुड़कर एक बार रघु को देखती है उसको याद है उसने बोलै था उसके िद्र खूबसूरत को ऐसी वर्ड्स से बोलते हैं अब बात कितनी सच रघु को hi पता था.

मुस्कान बिना कुछ बोले बैडरूम चली जाती है ो दूर खुला रखती है ताकि जब रघु बहार आएगा तो ो जाकर मैं दूर बंद कर sake...andr आकर मुस्कान एक बार आज़म को देखती है के कहीं ो जाएगा हुवा तो नहीं लेकिन आज़म गहरी नींद में लग रहा था.

मुस्कान अब िद्र उदर टहलने लगती है तभी उसकी नज़र मिरर पर पड़ती है और ो मन पर हाथ रख लेती है. ो खुद की हालत देखकर थोड़ी हैरान होती है. उसकी निघ्त्य का एक साइड कंधे पर से निचे आया हुवा था जिसकी वजा से उसकी ब्रा हलकी हलकी नज़र भी आरही थी.

मतलब रघु को ये व्यू अचे से मिल चूका था और इसीलिए शायद उसने उसे माल भी बोलै था. मुस्कान को खुद पर गुस्सा अत है के गलती उसकी है के उसने बहार जाने से पहले खुद को चेक नहीं किया. इस मज़दूर को कैसे न कैसे उसके दीदार होरहे थे ो भी अचे वाले.

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ो खुद को ठीक करती है के वाशरूम के दूर खुलने का आवाज़ आता है. ो अंदर hi रूकती है के रघु मैं दूर से बहार चला जाये लेकिन जाता नहीं बल्कि उसे पुकारता है. मुस्कान न चाहते हुवी भी बहार जाती है...

Raghu...memsab साहब घर पर hi हैं क्या??

Muskan...haa तो तुमको उससे क्या??

Raghu...arey मेमसाब मैं तो बस यूँ hi पूछ रहा था साहब की गाड़ी बहार कड़ी है न इसलिए...

Muskan...hmm किसलिए बुलाया ??

Raghu...oo

मुस्कान नोटिस करती है के रघु उसके जिस्म को जैसे स्कैन किये जारहा था...

Muskan...kya ू जल्दी बतावू...

Raghu...pani मेमसाब पनीइ

Muskan...deti हूँ...

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मुस्कान उसको पानी दे देती है और अब रघु को न चाहते हुवे भी वहां से जाना पड़ता है. मुस्कान भी दूर बंद करके सीधा बैडरूम आकर वापस सोजती है....

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 19

रघु उनके घर से निकल कर ऊपर चला जाता है पानी लेकर. ऊपर जानेके बाद जानकी रघु को देखती है. ो काफी देर से अंदर था भला पानी लानेके लिए इतना टाइम ये आखिर करता क्या है अंदर जाकर??

जानकी को पता नहीं क्यों रघु पर थोड़ा डाउट सा होरहा था के कहीं ो कुछ कर तो नहीं रहा andr..janki का शक चोरी से था. मुस्कान पर तो उसको धयान नहीं गया था क्यूंकि उसे पता था रघु की इतनी हिम्मत कहाँ आज़म साहब के होते हुवे और तो और मुस्कान जैसी खूबसूरत हैदर ाव्रत इस नाते को भौ तक न दे.

ऐसे hi घंटे बाद मुस्कान और आज़म उठकर फ्रेश होजाते हैं. ब्रेकफास्ट करने के बाद दोनों बहार हॉल में बैठते हैं.

Muskan...azam वाशरूम में पता नहीं पानी नहीं ारः...

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Azam..kaise? अभी तो थोड़ी देर पहले ारः था...

Muskan...haa ऑटो रहा था लेकिन अभी नहीं ारः मैं अभी चेक करके आरही हूँ...

Azam..ohh यार ab...arey हाँ बहार मज़दूरों में कोई न कोई प्लंबिंग का काम जनता होगा न...

Muskan...shayad...

Azam..tum रुकू.

आज़म ऊपर जाकर थोड़ी देर में वापस अत है मुस्कान के शॉक के लिए रघु को साथ में ले अत है...

Muskan...ya kh*da आज़म को भी यही mila...ye आदमी पता नहीं कैसे हर बार यही जाता है..

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Azam..muskan ये रघु प्लंबिंग का काम ाचा कर लेता है ये कर dega...tum दिखा दो...

Muskan...aap दिखा दो न...

Azam...jaan मैं दिखा देता मुझे एक अर्जेंट कॉल करना है मैं अभी aya...tum ज़रा..

मुस्कान रेलुक्टेंटली मान जाती है और रघु को आगे जाने बोलकर खुद उसके पीछे चली जाती है. अंदर जाने के बाद रघु िद्र उदर देखता है. ो तो कई बार चुका था यहाँ उसे काफी चीज़ों का पता था इस वाशरूम में....

Raghu...haa मंसबब क्या प्रॉब्लम है बतातिये अभी ठीक कर देता हूँ...

रघु ये बात मुस्कान को ताड़ते हुवे अपने पीले दन्त दिखते हुवे बोलता है जिसे देख मुस्कान उसे घूरती है...

Muskan...ye नल से पानी नहीं ारः है...

Raghu...chalo मंसबब मैं निकल देता है पानी हहै...

मुस्कान फिरसे उसे घूरती है उसे पता था कहीं न कहीं रघु उसे डबल मीनिंग बात कर रहा होगा....

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रघु अब नल के पास बैठकर वहां काम करने लगता है. रूम में लाइट ज़रूर थी लेकिन गर्मी भी उतनी होरही थी वहां थोड़ी देर में hi दोनों पसीना होने लगते हैं. रघु जो ऊपर काम कर रहा था पहले से hi पसीने में लत पैट था. उसके शरीर से पसीने की स्मेल भी आरही थी. वहीँ मुस्कान को हल्का हल्का पसीना ारः था अभी उसकी खूबसूरती को और निखार रहा था.

रघु काम करते हुवे चुप चुपके मुस्कान को देख भी रहा था. काम करते हुवे रघु की नज़र वहीँ पास में रखे हुवे वाशिंग मशीन के साइड में बकेट पर जाती है तो उसकी नज़र वहीँ जैम जाती है बकेट में से ब्रा के स्ट्राप लटक रही थी.

रघु सोचता है के ज़रूर ये ब्रा मुस्कान ने कल पहनी होगी जिसके बारे में सोचकर hi उसका लौड़ा अकड़ने लगता है पंत के अंदर. वहीँ मुस्कान जो िद्र उदर देख रही थी उसकी भी नज़र अचानक रघु पर जाती है और ो देखती है के ो कहाँ देख रहा है.

रघु के इस तरह उसकी ब्रा स्ट्राप को देखने से ो बड़ा hi ऐम्बर्रेस्सेड फील करती है. ऐसा कभी नहीं हुवा था के आज़म के अलावा शादी के बाद किसी ने उसकी ब्रा देखि हो. उसको समझ नहीं ारः था के ो क्या करे.

एक तरफ गुस्सा भी ारः था के रघु इस तरह उदर देख रहा था उसके यहाँ होते हुवे भी उसको ज़रा भी दर नहीं के ो यहाँ कड़ी है? देखते हुवी नज़र रघु पर जाती है और ो देखती है उसके पंत में तम्बू बन गया था.

मुस्कान तो फ़ौरन अपना चेहरे दूसरी तरफ घुमा लेती hai...uski सांसें बढ़ जाती हैं ो सोचती है क्या उसकी ब्रा को देख कर इस आदमी का ो!!!!

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मुस्कान अपनी सोच में थी के रघु की नज़र उससे मिलती है. मुस्कान हड़बड़ा सी जाती है यूँ अचानक दोनों की नज़र मिलने से लेकिन तभी वहां आज़म आजाता है और ो देखता है मुस्कान और रघु एकदूसरे को देख रहे थे...

Azam..kya हुवा?

आज़म की आवाज़ सुनकर मुस्कान एकदम से उसकी तरफ देखती है...

Muskan..kk क्क कुछ नही...

Azam...hmm हां रघु निकल आया पानी??

रघु अब फिरसे मुस्कान की तरफ देखते हुवे जिसने निघ्त्य पहनी हुवी thi..m

Raghu...arey नहीं साहब अभी पानी निकलना बाकि hai...thodi म्हणत करनी पड़ेगी मुझे...

Azam...to करो किसका इन्तिज़ार है??

Raghu...memsab का...

रघु के जवाब से आज़म और मुस्कान दोनों चौंक जाते हैं और उसके तरफ देखते हैं जो अपने पीले दन्त उनको दिखा रहा था...

Azam...kya मतलब??

Raghu...mera मतलब मुझे मेमसाब से मदद chahiye...mujhe एक बाल्टी चाहिए...

Azam...ohh तो ऐसे बोलो na...muskan इसको एक बाल्टी दे दो...

Raghu...arey बाल्टी है िद्र साहब....

रघु वहां राखी हुवी बकेट की तरफ इशारा करके बोलता है लेकिन मुस्कान को शर्म आरही थी के रघु उसके शोहर के सामने hi उस बकेट का ज़िक्र कर रहा था...

Azam...haan तो ले लो...

Raghu...sahab उसमे कुछ कपडे हैं...

Azam...kaise कपडे मुस्कान ो कपडे निकल कर रघु को दे दो...

Raghu...haa मंसबब जल्दी से कपडे निकल दो...

रघु मुस्कान की तरफ देखता है जिसे ो गुस्से से देखते हुवे रिस्पांस करती है क्यूंकि उसे पता था रघु उसके शोहर के सामने hi उससे डबल मीनिंग बात कर रहा था...

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Muskan...haa ू मैं दूसरी बकेट लेकर आती हूँ...

इतना बोलकर ो जाने लगती है रघु उसके जाते हुवे घूरने लगता है. निघ्त्य में उसकी गांड के फांकें िद्र उदर मटकते हुवे देख रहा था. मुस्कान के शोहर के सामने hi उसको ताड़ते हुवे रघु को अलग hi किक मिल रही थी...

मुस्कान थोड़ी देर में बकेट लेकर अति है आज़म को हॉल में देख थोड़ी रहत की साँस लेती है. ो बकेट लेकर रघु के पास जाती है जो अब अंदर वाली बकेट के पास खड़ा था और मुस्कान देखती है के उसके हाथ में उसकी वही ब्रा थी जिसकी स्ट्राप तबसे लटकी हुवी थी. मुस्कान अजीब सा फील करती है के उसकी ुसेड ब्रा एक नाते मज़दूर के हाथ में है इस वक़्त...

Raghu..ye लो मेमसाब कपडे...

रह बाल्टी मुस्कान की तरफ करते हुवे बोलता hai....muskan भी बिना कुछ बोले उससे बकेट लेती है लेकिन उसकी नज़र रघु के हाथ पर जाती है जिसमे उसने उसकी ब्रा पकड़ी हुवी थी.

Raghu...kya हुवा मंसबब कुछ चाहिए??

मुस्कान अब क्या बोलती के उसको उसकी ब्रा वापस चाहिए ऊपर से उसका शोहर बहार hi खड़ा था. मुस्कान बस रघु के हाथ पर देखे जारही थी जिसका रघु को पता था लेकिन ो मुस्कान को सत्ता रहा था...

Raghu...memsabb क्या चाहिए??

मुस्कान अब उसकी तरफ घूरते हुवे उसके हाथ के तरफ देखती है...

Raghu..ohhh ये क्या मंसबब्ब?

रघु ब्रा को ऊपर बिलकुल सामने करते हुवे बोलता है. ब्रा अब रघु के साथ लटकी हुवी थी. ब्रा के कप्स झूल रहे थे. मुस्कान ये देख कर अपनी नज़र घुमा लेती है और बकेट आगे कर के...

Muskan...isme दाल दो...

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Raghu...kya मेमसाब??

Muskan...dekho तुम

Raghu...apki ब्रा??

मुस्कान एकदम से रघु की तरफ देखते हुवे उसके हाथ अपनी ब्रा खिंच कर बकेट में डालती है और पलट कर चली जाती है. जाते हुवे रघु फिरसे निघ्त्य के में जिग्गले कर रहे उसकी गांड के फांकें ताड़ते हुवे अपना लौड़ा मसलने लगता है....

रघु मन men...ye तरबूज़ तो ससुरा लुंड में दम करके रखे हैं...

20 मिनट बाद रघु नल ठीक करके बहार अत है जहाँ आज़म टीवी देख रहा था. ो एक बार बैडरूम की तरफ नज़र डालता है लेकिन दूर बंद था...

Raghu...sahab होगया काम...

Azam...oh ाचा ठीक hai..ek मिनट...

आज़म रघु के साथ बहार जाता है और कार पार्क एरिया में जाकर अपनी जेब से 1000 निकल कर उसे देता है रघु भी बिना झिजक के पैसे रख लेता hai..m

Raghu...sahab आगे भी ऐसा कोई काम है तो बता देना..

Azam..haa क्यों नहीं...

रघु आज़म की तरफ एक बार देखता है और अपनी पंत की जेब से एक बीड़ी निकल लेता है....

Raghu...sahab फूंको गए..??

Azam...arey नहीं नहीं मैं नहीं पिता..

Raghu..sachme साहब? मुझे तो लगा आप फूंकते होंगे...

आज़म ीदार उदार देखते हुवे...

Azam...kabhi कबर...

Raghu...aarey साहब तो दर क्यों रहे हो फंक लो मेरे साथ...

Azam...arey नहीं मुस्कान देख लेगी तो मेरी खैर नहीं...

Raghu...arey मेमसाब की फ़िक्र मत करो मैं उनको अछि तरह से संभल लूंगा...

Azam...kya मतलब??

Raghu..arey साहब मेरा मतलब मैं संभल लूंगा अगर मेमसाब देख लेंगी तो...

Azam...fir भी..

Raghu...sahab आप डरते बोहत हैं..

आज़म रघु की बात पर उसकी तरफ देख कर एक बार मैं दूर की तरफ जाकर देखता है फिर अपना हाथ आगे बढाकर...

Azam..do एक सिगरेट...

Raghu...sahab सिगरेट तो नहीं है बीड़ी है..

Azam...do...

आज़म भी रघु के साथ बीड़ी के काश लगाने लगता है. रघु आज़म की तरफ देखता है. आज़म था वैसे डेन्ट लुकिंग. मुस्कान के लिए ऑलमोस्ट परफेक्ट पार्टनर था ो. रघु को ये बात अछि तरह से पता थी. बीड़ी के काश लगते हुवे रघु को कुछ सूझता है...

Raghu...aa साहबब वैसी एक बात पुछु

Azam..haa पुछू

Raghu...kitna टाइम होगया शादी को आप दोनों के??

आज़म को हालाँकि एक मज़दूर के मन से ये सवाल थोड़ा अजीब लगता है लेकिन ो एक लाइटर नोट पर उसको लेते हुवे...

Azam..yahin कुछ 7 महीने...

Raghu...ohh मतलब ज़्यादा टाइम नहीं हुवा...

Azam...haan

Raghu...acha है साहब मेरी तो शादी को 30 साल से ऊपर होचुके hain...jawani में hi शादी होगयी थी मेरी...

Azam...ohh 30 साल!!!

Raghu...haan साहब 7 बचे हैं मेरे...

आज़म...7!!!! एक बात बताओ कैसे मैनेज कर लेते हो सरे परिवार का खरचा...

Raghu...bas होजाता है साहब क्या करें..

Azam...fir भी इतनी महंगाई में....

Raghu...ab महंगाई का ये तो मतलब नहीं न साहब के बचे पैदा न करें हहै...

आज़म बीड़ी का काश लगा रहा था जल्दी जल्दी क्यूंकि उसे पता था ज़्यादा देर अत न देख मुस्कान कभी भी बहार आसक्ति है....

Azam...haa ठीक है तुम जाओ काम पर मैं भी जारहा हूँ वर्ण अगर मुस्कान आजायेगी तो प्रॉब्लम होजायेगी...

Raghu...haha आप डरते बोहत हैं साहब मेमसाब से...

Azam..kya करें भाई बीवी है खफा होगयी तो मुश्किल होजायेगी...

Raghu...hehe मैं समझ सकता हूँ साहब....

आज़म फिर चला जाता है और रघु भी. रघु ने बीड़ी के काश के बहाने आज़म के नज़दीक अनेकी ज़रूर कोशिश की थी लेकिन क्या ये उसके लिए वर्क करेगा क्यूंकि ऐसा तो था नहीं के आज़म ओपनली उसके साथ बीड़ी फंक सकता है. आज तो उसने फिर भी चुप चुपके किसी तरह बीड़ी फंक ली थी.

ऐसे दोपहर का टाइम होजाता है और सरे मज़दूर खाना खाने के लिए चले जाते हैं. ीदार मुस्कान और आज़म भी खाना खा लेते हैं. खाने के बाद दोनों टाइम पास के लिए टीवी देखने बैठ जाते हैं थोड़ी देर बाद मुस्कान थोड़ी हवा खाने के लिए मैं दूर से बहार अति है.

थोड़ी देर रुकने के बाद उसे कुछ ख्याल अत है और उसकी नज़र सीढ़ियों पर जाती है. पता नहीं क्यों उसके कदम अपने आप hi ऊपर चले जाते हैं. सीढ़ियों से चढ़कर ो ऊपर जाती है ो पोहंचती hi है के उसे निचे से कोई अनेका अहसास होता है उसके पास कोई और ऑप्शन न होकर ो जल्दी से एक रूम में जाकर चुप जाती है.

ो वहां रखे हुवे कुछ बोरियों के पीछे चुप जाती है. बोरियों के पीछे से ो देखती है के और कोई नहीं रघु hi वहां आया था और ो एक बार िद्र उदर देखते हुवे जल्दी से अपनी पंत निचे लेने लगता है जिसे देख मुस्कान जल्दी से अपना चेहरा घुमा लेती है हालाँकि उसने ये पहले देखा था लेकिन ो एक हयादार शादीशुदा ाव्रत थी और उसके लिए ये शोभा नहीं देता था एटलीस्ट उसकी मुताबिक.

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और उसने इस सिचुएशन में कभी रघु को नहीं देखा था और न hi उसने ये एक्सपेक्ट किया था के रघु यूँ अचानक ajayega...pant निकलने के बाद रघु अपनी अंडरवियर निचे करके अपना लौड़ा बहार निकल लेता है और ऐसे hi लुंड ऊपर निचे करने लगता है.

मुस्कान समझ जाती है रघु क्या करने लगा है लेकिन ऐसी ावकार्ड सिचुएशन में ो निचे जा भी नहीं सकती थी और फिर आज़म यहाँ आज्ञा तो???

"ससुरा क्या तरबूज़ हैंण्ण्न साअल्लाअ उन आम के तो क्या केहनी मन करता है पूरा रास पि जौंन..." रघु बड़बड़ाते हुवे अपना लौड़ा हिलाये जारहा था. मुस्कान रघु की बातें सुन रही थी लेकिन ो सूरे नहीं थी ो किसके बारे में बात कर रहा है....

मुस्कान लाख कोशिश करती है के ो रघु की तरफ न देखे लेकिन ो जैसे खुद से hi हर जाती है और चोर नज़र से ो रघु की तरफ देख लेती है. रघु का कला लम्बा लौड़ा तना हुवा लग रहा था. रघु नाता होनेकी वजा से उसको ऐसी हरकत करते हुवे देखने में और भी अजीब लगता था.

उसके बड़े टट्टे लौड़ा हिलाते हुवे जो ीदार उदार झूल रहे थे ो देख कर मुस्कान अपनी थूक निगल रही थी. उसके शोहर से कितना अलग और बड़ा था ये लुंड.

थोड़ी देर में hi रघु लौड़ा हिलाते हुवे एकदम से झड़ने लगता है और झड़ते hi उसका गधा मणि बोरियों से होते थोड़े चीते मुस्कान के चेहरे पर भी गिरते हैं. मुस्कान तो जैसे हड़बड़ा जाती है उसको अंदाज़ा नहीं था ऐसा कुछ होगा. मुस्कान लेकिन बिना आवाज़ किये वहीँ बैठी रहती थी.

लौड़ा शांत करने के बाद रघु पंत चढ़ाकर बहार चला जाता है शायद बीड़ी की काश lagane..muskan अब बहार आकर दरवाज़े से हलके से बहार देखती तो रघु दूसरी तरफ घूमकर बीड़ी फंक रहा था. मुस्कान हलके पौन धीरे धीरे वहां से लिटेराल्ल्य भागते हुवे निचे चली जाती है.

अब उसे नहीं पता था के रघु ने देखा या नहीं देखा. दूर खोलकर मुस्कान लगभग फिरसे दौड़ कर बैडरूम चली जाती है जबकि आज़म वहीँ हॉल में बैठा हुवा था. आज़म टीवी में बिजी था इसलिए ो नोटिस नहीं करता. मुस्कान अंदर जाकर जैसे रहत की साँस लेती है और खुद को मिरर में देखती है.

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उसके खूबसूरत गोर चेहरे पर रघु का गधा मणि लगा हुवा था!!!

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Hello गाइस, लिखे i've मेंशनएड बिफोर अपॉन रीचिंग सर्टेन मिलेस्तोनेस i'll पोस्ट ा बिग अपडेट. सीन्स we're अबाउट तो रीच 400क व्यूज! i'll बे प्रेपरिंग ा वैरी स्पेशल & बिग अपडेट! आप सब लोगों का ऐसा क्रेजी रिस्पांस hi जो मुझे मोटिवेटेड रख रहा है.

थैंक यू सो मच एवरीवन,

थे ईविल
 
Part 20

अपने चेहरे पर रघु के गधे रास के चीते देख मुस्कान को घिन सी आती है लेकिन ो देखती कितना गधा लग रहा था. इतना गधा तो उसके शोहर का भी नहीं है!!!

मुस्कान एक टॉवल लेकर अपना चेहरा पोछने का सोचती है के न जाने क्यों ो रुक जाती है और अपनी एक ऊँगली अपने चेहरे पर लेजाते हुवे लगा हुवा मणि अपनी ऊँगली पर लेती है और उसको देखने लगती है.

कितना अजीब था ये. मुस्कान को अंदाज़ा नहीं था के ो कहाँ से कहाँ आगयी है. कल तक ो एक हयादार शरीफ शादीशुदा ाव्रत किसी मर्द को शायद दिखती भी नहीं थी उसके शोहर के अलावा लेकिन ो आज एक गैर मर्द के लुंड की मणि अपनी ऊँगली पर लिए कड़ी थी. ो अपनी ऊँगली नाक के करीब लेजाती है और सूंघती है.

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बड़ी hi अजीब स्ट्रांग स्मेल उसकी नाक में चली जाती है जो उसने खुद अपने शोहर के मणि में भी नहीं फील की थी..

मुस्कान को पता नहीं क्या होगया था उसने जैसे कोई भूत hi देख लिया हो ो खुद को मिरर में देखते हुवे बस कड़ी थी. उसकी ऊँगली पर लगे हुवे मणि को ो फिरसे देखती है. इस पॉइंट तक उसको ये भी ख्याल नहीं था के उसका शोहर बहार हॉल में hi है और कभी भी अंदर आसक्त है.

मुस्कान लेकिन कड़ी हुवी फिरसे पता नहीं उसे क्या सूझता है ो एक जैसे कोई ट्रांस में हो ो मणि लगी हुवी ऊँगली को अपने मन के करीब लेजाती है और धीरे से अपने मन में अंदर डालती है. उसको नमकीन सा सवाद अत है जिसके बाद जैसे उसे होश सा अत है और ओह सीधा बाथरूम जाकर अपना चेहरा साफ़ करती है.

Azam...muskan?? कहाँ हो यार?

मुस्कान बाथरूम से बहार आकर सीधा हॉल में वापस आजाती है और आज़म के साथ बैठती है.

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दोनों टीवी देखने में बिजी होजाते हैं लेकिन मुस्कान के मन में अब कहीं न कहीं खुद की हरकत पर पछतावा होरहा था के कैसे उसने किसी गैर मर्द की मणि न सिर्फ सूंघी बल्कि टास्ते भी की!!! क्या ो इतनी गिर चुकी है? क्या उसके जैसी हयादार शादीशुदा शरीफ जवान ाव्रत को ये शोभा देता है?

शाम के वक़्त दोनों वाक के लिए निकलते हैं बोर होनेकी वजा से. क्यूंकि कैसे तो वापस आज़म ने काम पर जाना था. दोनों वाक करते हुवे थोड़ी देर चले hi थे के रेणुका आंटी के घरसे रेणुका उनको आवाज़ लगाती है जिसे सुनकर आज़म और मुस्कान स्माइल करते हुवे वहां चले जाते हैं.

Azam...arey कैसी हैं आंटी??

Renuka...main ठीक हूँ आज़म तुम सुनावो और मुस्कान तुम? आज छुट्टी मिल hi गयी हाँ पत्नी के लिए निकल hi लिया तुमने...

सब हँसते उस बात पर...

Muskan..main ठीक हूँ आंटी

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Azam...aapko तो पता है न आंटी काम में इतना बिजी होता हूँ के मुस्कान के लिए टाइम hi नै निकल पता.

Renuka..haa हां पता लेकिन आज़म टाइम निकला करो ऐसे hi कभी कभी ाचा लगता है उसका भी बोर दूर होजाता है...

Azam..baat तो आपकी सही है आंटी मैं तरय करूँगा....

Muskan..bas बस पता है आपका टाइम निकलना...

Renuka...hahaha सुन रहे हो आज़म तुम्हारी पत्नी के तने...

Azam...hahaha है आंटी...

Renuka...acha मैंने तुम दोनों को बुलाया था कल न मेरा बीटा और उसकी पत्नी वापस आरहे हैं दुबई से तो उनके अनेकी ख़ुशी में उन्होंने एक छोटी सी पार्टी राखी है आना ज़रूर हाँ.

Azam...aunty मैं तो नहीं ापाउँगा मुस्कान ज़रूर ajayegi...kyun मुस्कान??

Muskan...haan आंटी मैं आजाऊंगी...

Renuka...chalo ठीक होगया और हाँ ो जो तुम्हारे घर वर्कर्स काम कर रहे हैं न उनको भी थोड़ी देर बाद आने बोल देना कुछ गरीबों के लिए भी न खाना बनवाया है.

Azam...ok आंटी बोल डेजगे उनको, हम चलते हैं...

Renuka...thik है...

दोनों फिर वापस थोड़ी वाकिंग के बाद वापस घर चले जाते हैं. आज़म ऊपर काम देखने जाने लगता है तो मुस्कान को बुलाता है तो पहले ो मन कर देती फिर थोड़ा कहने पर अनेके लिए तैयार होजाती है.

ऊपर जानेके बाद आज़म और रमेश आपस में बातें कर रहे थे और वहीँ मुस्कान ीदार उदर टहल रही थी उदर hi. ो चल hi रही थी के उसकी नज़र किसी चीज़ पर पड़ती है और उसकी ऑंखें बड़ी होजाती हैं. ो पता नहीं क्यों एकदम से दर जाती है. ो आज़म और बाकि लोगों के तरफ देख रही थी के कहीं कोई देख तो नहीं रहा.

अब ो धीरे से उस चीज़ की तरफ टहलते हुवे जाने लगती है. उसे दर था के कहीं कोई उसे देख न ले उदर जाते hi मुस्कान थोड़ी देर तो वहीँ कड़ी रहती है फिर एकदम से झुक कर अपनी एअर रिंग का एक पीेछे उठा लेती है जो मोस्ट लिकेल्य कल गिर गया था जब ो यहाँ आयी थी.

उठाकर मुस्कान जैसे रहत की साँस लेती है.

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Azam..muskan? चलें?

Muskan..hh हाँ चालू

दोनों फिर वापस चले जाते हैं. ऐसे hi फिर रात होजाती है और दोनों डिनर करने के बाद बहार हॉल में रेस्ट करने बैठ जाते हैं. आज आज़म वाकिंग के लिए मन कर देता है क्यूंकि उसे कुछ काम करना था अपने लैपटॉप पर.

थोड़ी देर बाद आज़म के काम शुरू करनेके बाद मुस्कान वहीँ बीएड पर बैठी हुवी मोबाइल उसे करते रहती है हालाँकि थोड़ी देर में नींद अनेके बाद मुस्कान सो जाती है. आधी रात में आज़म की अचानक से नींद खुलती है जब ो कुछ अजीब आवाज़ें सुनता है.

आज़म उठनेके बाद ीदार देखता है. उसे कुछ समझ नहीं ारः था के आवाज़ कैसी आरही थी लेकिन फिर उसकी नज़र उनके hi ब्लैंकेट पर जाती है जिसमे मुस्कान सोढ़ी थी. ो देखता है ब्लैंकेट हलकी हलकी हिल रही थी. सन्नाटे की वजा से आज़म को ऐसी आवाज़ आरही थी साफ़ साफ़.

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आज़म देखता है ब्लैंकेट थोड़ा निचे हल्का हल्का हिल रही थी. आज़म बिना कुछ सोचे मुस्कान को जगाने लगता है....

Azam...muskan??!!!

2-3 बार पुकारने के बाद मुस्कान की नींद खुल जाती है. इस तरह आधी रात में जगाने से मुस्कान भी थोड़ी परेशां होजाती है और अपने शोहर को देखती है...

Muskan...kya हुवा आज़म??

Azam...tumko क्या हुवा तबियत ठीक है न??

Muskan...kyun मुझे क्या हुवा?

Azam...tumari ब्लैंकेट हिल रही थी बार बार धीरे धीरे.

Muskan...kya क्यों....

ो उतना बोली hi थी के उसे कुछ फील होता है और ो एकदम से चुप होजाती है. उसके जैसे होश hi उड़ जाते हैं आखिर कैसे ये पॉसिबल होसकता है. मुस्कान की हवाईयां उड़े हुवे थे.

Azam...kya हुवा मुस्कान??

Muskan..kk कक्क कुछ नही अजांम शायद कोई सपना आया होगा...

Azam...kya सचमे? अगर तबियत नहीं है तो गोली दूँ??

Muskan...nahi नहीं आज़म मैं बिलकुल ठीक hun...aap सोजावो आराम से...

Azam..main तो सजाऊंगा तुम आराम से सोजावो पहले...

मुस्कान फिर अपने शोहर के तरफ मुस्कुराते हुवे लेट जाती है.

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आज़म भी फिर सुजाता है. लेकिन मुस्कान की नींद उडी हुवी थी क्यूंकि आज़म ने जो हिलता हुवा देखा था और जिसे फील करके उसके होश उड़े हुवे थे उसकी शादीशुदा छूट गीली हुवी थी उसकी पंतय में निघ्त्य के अंदर और शायद कुछ सोचते हुवे मुस्कान अपनी छूट सपने में बेखयाली में hi रगड़ रही थी.

मुस्कान अपने सर पर हाथ पकड़ लेती है के उससे क्या होरहा है फिर ो अपने सपने के बारे में सोचती है के उसे कैसा सपना ारः था थोड़ी देर पहले. मुस्कान फिर उठकर बाथरूम चली जाती है जहाँ खुद को आईने में देखती है उसके चेहरा का जैसे रंग hi उदा हुवा था.

आखिर कैसे ो इस तरह शादीशुदा एक हदयार शरीफ ाव्रत होनेके बावजूद भी ऐसे सपने देख सकती है. यही सब ख़यालात के साथ मुस्कान अपना चेहरा वाश करके वापस बैडरूम जाकर सोजती है.

अगली सुबह हरदिन की तरह आज़म नाहा धोकर ब्रेकफास्ट करनेके बाद ऑफिस चला जाता है और वहीँ मुस्कान भी शावर लेनेके बाद बहार हॉल में टीवी देखते हुवे बैठ जाती है.

घंटे भर बाद मज़दूर सब आगये थे काम के लिए और मुस्कान भी बोर होचुकी थी घर में बैठे बैठे इसलिए ो बहार निकलती है ो िद्र उदर टहल रही थी के उसे रेणुका आंटी का इनविटेशन याद अत है और वहीँ जानेका सोचती है जिससे उसका वहां टाइम भी गुज़र जायेगा.

मुस्कान वापस घर के अंदर जाकर एक ाचा सा सलवार कमीज पहन लेती है.

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उसके फेयर कलर की वजा से ड्रेस अछि तरह से मैच कर रहा था. मुस्कान मेकअप नहीं करती है और न hi उसको ज़रूरत थी नैचुरली खूबसूरत होनेकी वजा से. खुद को ठीक करके मुस्कान वापस बहार आजाती है और जानकी को आवाज़ देकर उसे बादमे अनेका बोलती है रेणुका के घर.

उसके बाद मुस्कान स्कूटी लेकर चली जाती है रेणुका के घर. वहां जानेके बाद ो रेणुका, उसके बेटे बहु और बाकि लोगों से मिलती है.

Renuka...muskan उन मज़दूरों को बता दिया है न...

Muskan...haa आंटी मैंने बोल दिया है आजायेंगे ो...

Renuka...chalo ाचा hogya...acha तुम िद्र रुको काव्य (रेणुका की बहु) के पास मैं अति हूँ थोड़ी देर में...

Muskan...thik है आंटी...

रेणुका के जानेके बाद मुस्कान काव्य के पास थोड़ी बोहत बातें करती है हालाँकि काव्य बार बार कहीं देखे जारही थी जो मुस्कान को समझ नहीं ारः था. काव्य का पति तो किसी और से बात कर रहा था लेकिन फिर ऐसे काव्य किसे देखे जारही थी.

एनीवे मुस्कान सोचती है उसको क्या करना है इसलिए ो उसके बारे में ज़्यादा न सोचकर चुप रहती है. ऐसे दोपहर होजाती है और सब खाना सब खाने लगते हैं. तकरीबन सब का खाना होनेके बाद आज़म मुस्कान के घर पर काम कर रहे मज़दूर भी आजाते हैं वहां.

मुस्कान उस वक़्त रेणुका आंटी से बात कर रही थी...

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लेकिन उसकी नज़र ठहर ठहर के काव्य पर जारही थी जो कुछ ठीक नहीं लग रही थी उसे पता नहीं क्यों ो अपने पति से नज़रें छुपकर किसी को कुछ इशारे कर रही थी जो अभी भी मुस्कान की नज़र से छुपा हुवा था.

थोड़ी देर में खाने के बाद लगभग सब लोग जाचुके थे सिवाय कुछ के. मुस्कान भी बैठी हुवी थी रेणुका के साथ तभी ो कुछ देखती है और रेणुका से एक्सक्यूज़ लेकर ो छुपकर वहां जाने लगती है.

असल में मुस्कान ने काव्य को वाशरूम की तरफ चोरी छुपे जाते हुवे देखा था. थोड़ा आगे जाकर ो देखती है के काव्य वाशरूम के नज़दीक पोहचते hi ऑलमोस्ट दौड़ते हुवे अंदर चली जाती है.

उसने एक सिल्क साड़ी पहनी हुवी थी. काव्य कोई काम नहीं थी 36-30-37 कातिलाना फिगर साड़ी में हर दूसरे मर्द की नज़र उसपर जाना लाज़मी था. काव्य का बॉब्ब फिगर hi काफी था किसी को भी अत्ताक्ट करने के लिए.

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उस सिल्क साड़ी में दौड़ने से मुस्कान नोटिस करती है के कैसे काव्य की गांड मटक रही है. लेकिन उसकी आगे के हिसाब से काव्य की गांड कुछ ज़्यादा hi बड़ी लगती है ो सोचती है होसकता है नेचुरल हो.

मुस्कान वहीँ छुपी रहती है उसको आगे जानेकी हिम्मत नहीं होरही थी. अंदर जानेके बाद दूर तो बंद होगया था लेकिन अंदर से अब चुरियों की आवाज़ लगातार आरही थी. वाशरूम बहार साइड था इसलिए सनलाइट की वजा से अंदर देखना भी मुशील था हालाँकि मुस्कान दूर hi कड़ी थी.

ो कड़ी उदर का जायज़ा ले hi थी के उसके कंधे पर कोई हाथ रखता है. मुस्कान एकदम से दर जाती है के इस वक़्त कोण आज्ञा. डार्क हुवी मुस्कान पीछे घूमती है तो वहां रघु खड़ा था..

Muskan...tum!!!

Raghu...haa मैं मंसबब...

Muskan....tum गए नहीं...

Raghu...nahi मेमसाब मैंने सोचा आपसे बात करके जॉन...

Muskan...mujse कैसी बात??

Raghu...bas ऐसे ही

Muskan...kya ऐसे hi तुम जाओ काम पर...

Raghu...memsab आप जो अभी देख रही हैं मैंने भी ो देखा है...

Muskan...kk ककया तुमने देखा??

Raghu...ye जो आइटम अभी गयी अंदर ये बहु है न इस घर की...

Muskan...haa तू...

Raghu...memsab मैंने उस आइटम के पहले ये संडास में किसी आदमी को जाते देखा है...

Muskan...kon आदमी??

Raghu..mujhe नहीं पता मंसबब ो कोण है...

Muskan....o आदमी यहाँ था?

Raghu..bilkul था और ो उस आइटम के पति से थोड़ी देर पहले बात भी कर रहा था...

मुस्कान मन men...kon होसकता hai...ho न हो काव्य का चक्कर चल रहा है उस आदमी के साथ....

तभी वाशरूम का दूर खुलने की आवाज़ अति है और रघु एकदम से मुस्कान को कमर से पकड़ कर पीछे छुपा लेता है...

Raghu..memsabb चुप जाओ ो आरहे हैं...

मुस्कान देखती है के रघु का हाथ उसकी कमर पर था. कितना सख्त हाथ है रघु आखिर है एक मज़दूर का और कितना बड़ा. उसके शोहर का बिलकुल ऐसा नहीं था. ो धीमी आवाज़ में hi रघु से...

Muskan...heyy क्या कर रहे हो हाथ हटाओ..

Raghu...memsab ो देख लेंगे तो प्रॉब्लम होजायेगी...

मुस्कान चुप रहती है ो दोनों वाशरूम की तरफ देखने लगते हैं. पहले तो काव्य निकलती है जिसकी हालत कुछ खास नहीं लग रही थी. बाल उसके भीकरें हुवे, पसीना आया हुवा, उसकी लिपस्टिक होंठ पर फैली हुवी, उसके कपडे भी सही जगा पर नहीं थे. उसके ब्लाउज का एक बटन भी खुला हुवा था.

मुस्कान और रघु काव्य की हालत देख कर समझ जाते हैं के अंदर क्या हुवा होगा. मुस्कान को बड़ा अजीब लग रहा था यूँ रघु के साथ खड़े होकर ये सब देखने में ऊपर से ो दोनों इतना करीब खड़े थे. ो आवाज़ भी नहीं कर सकते थे.

उदार काव्य िद्र उदर देख कर घर के पिछले दूर से अंदर चली जाती है. मुस्कान और रघु उस आदमी के बहार निकलने का इन्तिज़ार करने लगते हैं. रघु अब मुस्कान के और उसके कान के करीब आकर...

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Raghu...memsab मैंने बोलै था न ये आइटम के साथ कोई अंदर है...

Muskan..huhh हां...

Raghu...memsab लगता है इस आइटम की प्यास इसका पति नहीं बुझाता हेहेहे...

Muskan..mmm मुझी क्या पता तुम मुझसे ऐसी बाटत मैट कारु...

Raghu...arey मेमसाब मैं तो बस बता रहा हूँ ऐसा होसकता है न...

Muskan..hha हैं...

तभी वाशरूम से कोई निकलने लगता है और इन दोनों की नज़र वहीँ जैम जाती है. ो आदमी बहार निकलता है तो ये दोनों देखते हैं कैसे ो आदमी एक सांवला सा है और काव्य से काफी बड़ा लगा रहा था. गांजा सा था ो आदमी लेकिन लम्बा चौड़ा पेट बहार निकला हुवा. उसके शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुवे थे उसकी छाती पसीने से लटपट.

तम्बाकू कहते हुवे ो आदमी बहार निकल रहा था. रघु उसको पहचान कर मुस्कान के और करीब जाकर. ो अब ऑलमोस्ट मुस्कान से चिपक रहा था....

Raghu...yahi ो आदमी है मेमसाब...

Muskan...ye एई आदमी तू......

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 21

Raghu...isko पहचानती हो आप?? कोण है ये??

Muskan...yee एई तो रामलाल जी हैं काव्य के सससस ससूरर!!!!

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Raghu...kya!!! अरे ये तो सच मच का ससुरा का नाती होगया मेमसाब हाहाहा...

मुस्कान को यकीन नहीं होरहा था के निर्मला आंटी का पति उनको धोका देकर उसकी खुद की बहु के साथ चक्कर चला रहा है और ऐसा भी नहीं था के काव्य का ससुर उससे कोई ज़ोर ज़बरदस्ती कर रहा हो ो तो खुद गयी थी वाशरूम उसके ससुर के पीछे.

इसका मतलब पक्का था दोनों का अफेयर काफी टाइम से चल रहा था और निर्मला आंटी को इसका भनक तक नहीं थी और बेचारी मुस्कान को समरीन के बेवफाई के किस्से सुना रही थी.

मुस्कान को निर्मला आंटी के लिए बोहत बुरा लग रहा था के उनका खुदका पति और बहु एकदूसरे से चक्का चला रहे हैं. न hi उसको इसकी भनक है और न hi उसके बेटे को के ये दोनों क्या गुल खिला रहे हैं.

मुस्कान अपनी सोच में डूबी हुवी थी तो उसे रघु कंधे पर हाथ रख कर जैसे जगाता है...

Raghu...memsab ो देखो उस आइटम का ससुर तो सीढ़ियों से उसके पीछे hi गया है मतलब उदर कुछ होने वाला है...

Muskan...haan शायद...

Raghu...chalo मंसबब देखते हैं ये दोनों क्या कर रहे हैं...

Muskan...nnn नही नही मुझे नही देखना...

Raghu...memsabb आप बात को समझो अभी तो हमने बस उनको बहार एते हुवे देखा है हमें क्या पता उनका चक्कर चल भी रहा है या नहीं. मैंने देखा है आप उस आइटम की सास के साथ अचे से बात कर रही थी उसका मतलब आप उनको अछि तरह जानती हैं. उनको धोका दे रहे हैं दोनों तो हमारा फ़र्ज़ बनता है मेंसबब्ब के हम उनकी मदद karen...kyun सही कहा न??

मुस्कान भी रघु की बात पर सोचते hi. जैसा भी है बात तो सही बोल रहा था. उन्होंने ने तो सिर्फ उन दोनों बारी बारी बहार एते देखा था न की आँखों सामने उनकी करतूतें इसलिए बेटर यही रहेगा के ो ऊपर जाकर देखें के ये दोनों क्या कर रहे हैं और पोस्सिब्ल्य कुछ साबुत भी इखट्टा कर लें??

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मुस्कान रघु की बात से सहमत होती है और ो दोनों किसी तरह चोरी छुपी सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाने लगते हैं. मुस्कान आगे थी और रघु पीछे. सलवार कमीज में मुस्कान की गांड की थिरकन पर ऑब्वियस्ली रघु की नज़र थी ऊपर से मुस्कान के इतना करीब से चलने से उसके जिस्म की परफ्यूम की खुशबु भी उसके नाक में जा रही थी.

रघु मुस्कान को सीढ़ियां चढ़ने तक ताड़ते रहता है. दोनों ऊपर पोहंच जाते हैं. ऊपर कोई नहीं था हालाँकि रूम्स थे ऊपर लेकिन बिलकुल सन्नाटा था वहां बस आवाज़ आरही थी तो चूड़ियों की जिसको फॉलो करते हुवे अब ये दोनों उदर जाने लगते हैं.

उस फ्लोर पर 2 रूम्स थे जिसमे एक से आवाज़ आरही थी चूड़ियों की अब इन दोनों को पता था नहीं था आखिर किस रूम से. दरवाज़े बंद थे खिड़कियां भी. इन रूम्स के अलावा वहां एक स्टोर रूम भी था जिसका दूर हल्का खुला हुवा लग रहा था.

लेकिन दोनों को अब समझ नहीं ारः था के ो क्या करे जिससे ो अंदर देख सके. रघु कुछ जल्दी जल्दी सोचने लगता है. ो मुस्कान के करीब रहने का एक पल भी गवाना नहीं चाहता था तभी उसे रूम विंडो के ऊपर एक स्पेस दीखता जो था तो ओपन लेकिन थोड़ा ऊपर था.

मुश्किल ये थी के उन दोनों में से कोई भी उस हिघ्त तक ऐसे hi नहीं देख सकता था और रघु तो वैसे भी मुस्कान के काम हिघ्त का था.

Raghu...ab क्या करें मेमसाब??

Muskan...mujhe नाहीइ पता मुझे ये सही भी नहीं लग रहा इस तरह चोरी चुप्पी...

Raghu...memsabb आप फ़िक्र मत करो मैं कुछ करता हूँ....

रघु िद्र उदर देखते हुवे स्टोर रूम जाता है और थोड़ी देर में वहां से एक स्टूल ले एते हुवे देखता है के मुस्कान निचे जाने लगी थी इसलिए ो जल्दी से स्टूल रखकर धीरे से...

Raghu...memsab?? कहाँ जारही हैं अप्प? मैं स्टूल ले आया हूँ अब अंदर देख सकते हैं...

मुस्कान स्टूल देखती है और थोड़ी हैरान भी थी के इस रघु को कुछ ज़्यादा hi एक्ससिटेमेंट में है अंदर देखने के लिए....

Raghu...memsab लेकिन प्रॉब्लम ये है इसपर कोई एक hi खड़े होकर देख सकता है...

Muskan...ttt तू फिरर??

Raghu...memsabb आप चढ़ जाओ ऊपर और अंदर देखू..

Muskan...nnn नही नही मुझे दर लगता ही मैं गिर गयी तू...

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Raghu...arey मंसबब आप फ़िक्र क्यों करती हो मैं किस लिए hun...girne नहीं दूंगा..

रघु ये बात बड़े hi अजीब अंदाज़ में बोलता है. मुस्कान उसको देखती तो है लेकिन उसकी बात पर ज़्यादा धयान न देकर 2-3 दफा इंकार करने के बाद मान जाती है...

Raghu...thik है मंसबब तू पेअर रखकर चढ़ जावू...

मुस्कान अब उस स्टूल पर धीरे से पौन रखकर वहीँ दीवार के सहारे चढ़ जाती है और अंदर झाँकने लगती है. अंदर का नज़ारा देख मुस्कान की ऑंखें बड़ी होजाती हैं. उसने अपनी ज़िन्दगी में ऐसा कुछ नहीं देखा था.

अंदर काव्य की साड़ी दरवाज़े के पास पड़ी हुवी थी और ो सिर्फ एक टाइट ब्लाउज और पेटीकोट में. काव्य का ससुर रामलाल सिर्फ के अंडरवियर में. मुस्कान देखती है रामलाल पेट के बल लेता हुवा था एक बीएड पर और काव्य के हाथ में तेल की बोतल थी.

मुस्कान की नज़र काव्य के टाइट ब्लाउज में कैद चुचों पर जाती है जो बड़े लग रहे थे. ो पेटीकोट भी उसकी गांड पर उभरा हुवा था.

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Ramlal...bahu अचे से मालिश करना...

Kavya...haan बापूजी अचे से hi मालिश करुँगी आपकी...

काव्य ो बात बड़े hi सेक्सी अंदाज़ में बोलती है जैसे उसके इरादे ठीक नहीं हों. अब काव्य रामलाल की पीठ पर तेल डालकर उदार मालिश करने लगती hai...ramlal की चौड़ी पीठ पर काव्य के कोमल हाथ बड़े hi सेक्सी लग रहे थे.

झुक कर मालिश करने की वजा से अब काव्य के उस टाइट ब्लाउज में उसकी चुचों की बिच की बारीक लाइन दिख रही थी ऊपर से काव्य का मंगलसूत्र उसके क्लीवेज के सामने झूल रहा था.

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उफ्फ्फ काव्य केहर ध रही थी इस वक़्त. एक शादीशुदा जवान ाव्रत अपने ससुर को ऐसे ब्लाउज पेटीकोट में मालिश दे रही थी.

पीठ की मालिश करते हुवे काव्य रामलाल के हाथ भी दबाने लगती है. मालिश करते हुवे काव्य के चुके उस टाइट ब्लाउज में िद्र उदर झूले जारहे थे. मुस्कान जिसे साफ़ देख सकती थी. उसका तो गाला सुख गया था ये सब देख कर. उसे तो यकीन भी नहीं होरहा था के कोई बहु अपने ससुर से अफेयर भी कर सकती है.

Ramlal...bahu ऐसे मज़ा नहीं ारः पीठ की मालिश कोई और नरम चीज़ से कारु...

काव्य अपने ससुर को बड़े hi सेक्सी अंदाज़ में देखती है और जो आगे करती है उसे देख मुस्कान फिरसे हैरान होजाती है. काव्य अब अपने ससुर की पीठ पर झुक कर अपने चुचों को उसकी पीठ पर रगड़ने लगती है. सारा तेल काव्य के टाइट ब्लाउज पर लग जाता है.

Kavya...bapujii अब इनसे नरम चीज़ मालिश के लिए नहीं है मेरे पास...

Ramlal...hehe ये भी चल जायेंगे बहु...

काव्य अपने बड़े चुचों को रामलाल की पीठ पर ीदार से उदार रगड़ रही थी. उसके ससुर को तो मज़ा यही रहा था इसमें काव्य भी इसे एन्जॉय कर रही थी.

थोड़ी देर बाद...

Kavya...bapujii घूम जाईये...

बिना देरी किये रामलाल पीठ के बल लेट जाता है और घूमते hi मुस्कान देखती है उसकी अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू बना हुवा था. काव्य उस उभर को देख कर जैसे अपने होंठ कटती है और फिरसे बोतल से आयल लेकर अब रामलाल की छाती पर मालिश करने लगती है.

बाल hi बाल थे रामलाल की छाती पर लेकिन काव्य को जैसा रामलाल का यही मरदाना पैन पसंद था और बड़े hi शौक से उसकी मालिश कर रही थी.

छाती पर अछि तरह से मालिश करने के बाद काव्य अब हाथ में आयल लेकर रामलाल के पैरों पर मालिश करने लगती है.

Ramlal...wahhh बहु मज़ा आज्ञा क्या मालिश करती है तो तुझे तो इसका इनाम मिलना चाहिए...

रामलाल की बात सुनकर बस एक सेक्सी स्माइल ो अपने ससुर को पास करके अपना काम जारी रखती है. मालिश करते हुवे काव्य टाइट ब्लाउज में से झांक रहे उसके बड़े चुचों की लम्बी लाइन पर रामलाल की नज़र थी. ो तो जैसा चरगेद उप हुवा था इनसब से.

काव्य अब फिरसे बोतल लेने टेबल के पास जाने लगती है के मुस्कान देखती है रामलाल अब बीएड पर से निचे उतर चूका था और जैसे hi काव्य उसके तरफ घूमती है तो रामलाल एकदम से उसे कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचता है...

काव्य एकदम से खींचती हुवी रामलाल की बालों वाली छाती से ातकृति है. उसके टाइट ब्लाउज में कैद उसके बड़े चुके उसके ससुर की छाती में डाब जाते हैं...

Kavya...aaahh सससस बापूजी ये आ ाप्प क्या कर रहे हैं ??

Ramlal...bahuuuu तुझे तेरी अछि मालिश का इनाम दे रहा हुन्न्न...

Kavya...sasurji आप इस तरह खुद की बहु को ऐसे अपनी बाँहों में लिए खड़े हो क्या ये सही है??

Ramlal...sahi तो नहीं ही लेकिन क्या करें अब बहु की इतनी मालिश का इनाम तो बनता है...

Kavya...kaisa इनाम बापूजी ??

Ramlal...abhi देता हूँ...

इतना बोलकर रामलाल एकदम से काव्य की गांड पीछे से पेटीकोट के ऊपर से पकड़ लेता है और जोरसे जोरसे मसलते हुवे काव्य की गर्दन में चूमने लगता hai...bas फिर क्या था काव्य की सिसकारियां उस रूम में गूंजने लगती हैं...

Kavya...aaahhh सससससस बापुजीईईई एईई कोनसाए इनआम हाइइइइ...

Ramlal...ye एक ससुर का अपनी बहु के लिए स्पेशल इनाम है...

रामलाल काव्य की गांड पेटीकोट के ऊपर से आते की तरह गुंडे जा रहा था. काव्य सिसकाये जारही थी. ीा तरह पागलों जैसे उसका ससुर उसकी गांड जो मसल रहा था. गर्दन चूमते हुवे रामलाल पीछे से हाथ लेजाकर अपनी बहु के ब्लाउज के हुक निकल देता है..

इसी बिच रामलाल अपनी बहु को मसलना जारी रखता है. उसकी बहु की ऐसी सेक्सी सिसकारियां उसे और उत्तेजित कर रही थी इसलिए ो अब एकदम से काव्य का ब्लाउज निकल देता है. अब ो सिर्फ एक ब्रा में कड़ी थी जिसमे उसके बड़े चुके समाये नहीं समां रहे थे. मुश्किल से अंदर ठीके हुवे थे.

रामलाल अपनी बहु को बेहद hi ज़्यादा हवसी नज़रों से देखते हुवे अब एकदम से पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर फिरसे उसकी गांड लेकिन इसबार पंतय के ऊपर से जोरसे गांड मसलते हुवे उसके किश करने लगता है...

आग जो दोनों तरफ hi लगी थी दोनों की पागलों जैसे एकदूसरे को चूमने लगते हैं जैसे बरसों से बिछड़े आशिक आज मिले hon..kiss की गीली आवाज़ रूम में गूंज रही थी इस वक़्त जिसे मुस्कान साफ़ सुन रही थी...

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ो हैरान ो परेशां बस अंदर के नज़ारे को किसी पोर्न मूवी की तरह देख जारही थी. चूमते हुवे रामलाल काव्य पर खड़े खड़े झुक भी रहा था. बड़े hi शिद्दत से दोनों किश किये जारहे थे.

ऐसे hi 2 मिनट किसिंग चलने के बाद रामलाल किश तोड़कर सीधा काव्य का पेटीकोट निकल देता है. काव्य अब सिर्फ ब्रा पंतय में कड़ी थी.

मुस्कान उसको देखते हुवे सोचती है ये वही काव्य है जो उस वक़्त कितना अहतराम और शर्म ो हाय के साथ सबके साथ पेश आरही थी और यहाँ देख इस वक़्त अपने hi ससुर के सामने ब्रा पंतय में कड़ी है.

रामलाल अब काव्य के पीछे जाकर उसकी ब्रा निकल देता है जिससे एकदम उसके बड़े चुके ुचा कर बहार आजाते हैं. रामलाल एकबार हवस भरी नज़र से काव्य को देख कर चुके एकदम से दबा देता है फिर उसको बीएड से पकडे हुवे झुका देता है.

काव्य की बड़ी गांड अब और उभरी हुवी दिख रही थी ऐसी पोजीशन में. उसके चुके बिलकुल नंगे झूल रहे थे. रामलाल उसके पीछे आकर एकदम से उसकी गांड पर एक जोर्का थप्पड़ मरता है.

Kavya...aaahhhh बापूजिई क्या कर रही हूँ..

रामलाल अब झुक कर जैसे काव्य की गांड के फांकों पर सूंघता है जैसे नशा कर रहा हो...

Ramlal...mmhhhhh बहू तेरी ये गण्ड का कोई जवाब नाहीइ...

Kavya...aaiisaa क्या ही मेरी गाँण्ड में बापूजिई??

Ramlal...jab तू मेरे बेटे से शादी करके पहली बार आयी थी इस घर में उस शादी के जोड़े में यही तेरी बड़ी गांड ने मेरे लुंड को टाइट कर दिया था....

काव्य अपने ससुर की बात सुनकर और थोड़ा झुक जाती है जिससे उसकी बड़ी गांड और बहार को निकलती है...

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Kavya...to ये लीजिये बापूजी मेरी गांड को सजा दीजिये आपके लुंड तो तंग करने की...

रामलाल अपनी बहु की बात सुनकर जैसे पागल hi होजाता है और एकदम से काव्य की पंतय खिंच कर निचे ले लेता है. ो अब पूरी नंगी थी रामलाल बिना रुके अब एकदम से अपनी अंडरवियर भी निकल देता है. अंडरवियर निकलते hi उसका लुंड उछाल कर बहार आजाता है.

मुस्कान की वहां नज़र पड़ी hi थी के ो एकदम से अपने चेहरा घुमा लेती है और पीछे घूम जाती है जहाँ रघु खड़ा था बीड़ी के काश लगते हुवे....

मुस्कान को ीदार घूमे देख रघु अपनी बीड़ी बुझाकर...

Raghu...kya हुवा मंसबब देख लिया सबब??

Muskan...nn ंन्न नहहीइ...

Raghu...kyun क्या हुवा??

Muskan...kuchh नही लेकिंन मुझे नही देखना आगे..

Raghu...lekin क्यों मंसबब? आप हेतु मैं देखता हूँ अब मैं भी तो देखूं अंदर क्या चल रहा है...

मुस्कान अब स्टूल पर से उतर जाती है और वहीँ खड़े होजाती हैं साइड में और रघु अंदर झाँकने लगता है हालाँकि उसे तकलीफ होरही थी थोड़ी बोहत क्यूंकि उसकी हिघ्त थोड़ी बोहत काम थी.

अंदर झाकते hi रघु "साला मडर्र जाट"

रघु अंदर देखता है के रामलाल और उसकी बहु दोनों नंगे हैं और काव्य झुकी हुवी है उसका ससुर नंगा बिलकुल उसके पीछे खड़ा है. उसका लुंड फनफना रहा था.

Ramlal...bahuu इनाम का वक़्त आज्ञा है..

Kavya...de दिज्ये बापूजिई मुझे इनाम...

Raghu...sasura का नथी कैसा इनाम....

रामलाल अब काव्य की छूट पर अपना लौड़ा सेट करता है और बिना देरी किये एक जोर्का धक्का लगता है. उसका लुंड सनसनाता हुवा काव्य की शादीशुदा छूट को चीरते हुवे अंदर तक घुस जाता है...

Kavya....sssssss आहहहहहह बापुजीई....

काव्य का तो जैसा सारा जिस्म हिलने लगता है उसके ससुर के धक्के की वजा से. रघु के दिमाग पता नहीं क्या अचानक से एक आईडिया अत है और ो अपना मोबाइल निकल कर उनकी रिकॉर्डिंग करने लगता है.

रूम के अंदर की गरमा गर्मी उफान पर थी. रामलाल अब काव्य की कमर पकड़ कर धक्के ज़ोरों शोरों से लगाने लगता है.

काव्य की गांड और रामलाल के झांगों के मिलने की आवाज़ पुरे रूम में गूंजने लगती है जो बहार खड़े दोनों रघु और मुस्कान सुन सकते थे. मुस्कान ऐम्बर्रेस्सेड होरही थी इस तरह एक मज़दूर के साथ इस तरह जासूसी करने और ये सब देखने सुनने के लिए.

Kavya....bapujiii ाःह ाःह आठ कितना मिस्स्स किया आपके लुंड कोऊ अह्ह्ह....

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Ramlal...kyun बहू रवि नहीं छोड़ता था क्या सस्सहः..

Kavya...aahhh बापुज्जीए आपका बेत्ता छोड़ता तू ही लेकिन उसके पास आपके जैसा लुंदड़ नहीं हैई नाआआ अह्ह्ह्ह....

काव्य की बात सुनकर को जैसा रामलाल को और जोश ाजता है और ो अब काव्य के बाल पकड़ लेता है और दमदार धक्के लगाने लगता है...

Kavya...aaahh आअह्ह्ह्ह आठ आठ बापूजिई आठ आअह्ह्ह....

रघु मन men...saaala बहु छोड़ रहा है या रंडी हहै...

रघु अब अपनी नज़र अपने निचे डालता है जहाँ मुस्कान िद्र उदर देखते हुवे कड़ी थी. अंदर का सन देख कर रघु का लौड़ा अकड़ा हुवा था. मुस्कान इतनी खूबसूरत थी के जो किसी को भी अपने और अत्त्रक्ट कर दे लेकिन ो एक शादीशुदा ाव्रत थी तो उसके पाने के चान्सेस सबके पास नहीं थे फॉर ऑब्वियस रीज़न.

रघु फिरसे अंदर देखने लगता है अंदर का नज़र काफी गरम होचुका था अब. रामलाल अपनी बहु को बड़े hi बेदर्दी से छोड़ने में लगा हुवा था.

Ramlal..bataa बहुउउ तेरी छूट का मल्लिक कोण ही??

Kavya....aaahhhh बापूजिई मेरी छुटत आआह्ह्ह आपकीय आआह्ह हैई...

Ramlal...tujhe तेरी छूट में किसका लुंड चाहिये??

Kavya...aaahhhh बापूजिई मेरी अहह छूट में मुझी सससआहह आपका लुंड चाहियेए...

रामलाल अपने धक्के जारी रखता है. रूम में ाहों और धक्कों की आवाज़ें गूंज रही थी लगातार. रघु अंदर देखने में बिजी था तभी...

Muskan...yee कोई ारहहआ हैई..

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रघु मुस्कान की आवाज़ से चौकन्ना होजाता है और एकदम से स्टूल से निचे उतरता है. सीढ़ियों से किसी के अनेकी आवाज़ आरही थी मुस्कान भी दर गयी थी के अब क्या होगा क्यूंकि ो दोनों इस वक़्त यहाँ थे एक तो अंदर एक ससुर बहु अपनी मस्ती में लगे हुवे थे ये खुद उनको देख्नने में लगे हुवे थे.

मुस्कान मरे टेंशन के रघु को देख रही थी. रघु भी फ़ौरन कुछ सोचता है और पता नहीं उसके अंदर कहाँ से हिम्मत अति है और मुस्कान का हाथ पकड़ कर कहीं जाने लगता है. यूँ अचानक अपना हाथ पकड़ने से मुस्कान भी हैरान थी.

Muskan..yee क्या कर रही हूँ??

Raghu...memsab चुप राहू..

रघु मुस्कान का हाथ पकड़ कर वहीँ पास वाले स्टोर रूम में जाकर दरवाज़ा बंद कर देता hai...ye सबब इतना अचानक हुवा था के मुस्कान को जैसे कुछ पता hi नहीं चला. लेकिन ो जानती थी थी रघु की क्विक थिंकिंग की वजा से ो दोनों बाल बाल बचे हैं इन ससुर बहु के कांड से. क्या ो बचे हैं?

उस स्टोर रूम में अँधेरा था जो थोड़ी बोहत लाइट आरही थी दरवाज़े बंद होनेकी वजा से अब ो भी नहीं आरही थी. अँधेरे की वजा से दोनों एकदूसर्स को नहीं देख पढ़े थे लेकिन अभी भी रघु मुस्कान का कोमल गोरा हाथ पकडे हुवे था.

दोनों हालाँकि बहार की आहत सुनने में लगे हुवे थे के क्या होरहा है. उनको साइड वाले रूम से अभी भी काव्य की ाहों और धक्कों की आवाज़ आरही थी...

"काव्य यहाँ हो क्या तुम??"

कोई काव्य को पुकारते हुवे बहार आया हुवा था. उस रूम से कोई आवाज़ नहीं अति.

"काव्य"

Kavya..."Haan हां आ रवीए एक मिनत्ती"

Ravi..."Kya कर रही हूँ तुम अंदर निचे सब तुम्हें पूछ रहे हैं और पापा पता नहीं कहाँ गए हुवे hain..tumne देखा है क्या पापा को??"

Kavya..bapuujii को आ ंन्न ननहीइ देख्ठा....

Ravi...pata नही कहाँ चले गए हैं..

Kavya...ghrme hi कहीं होंगे रावी..

Ravi..gharme?? सब तरफ ढूंढ चूका हूँ कहीं नहीं देख रही...

Kavya..aahhh..

Ravi...kya हुवा??

Kavya...kuch नही...

Ravi...awo बहार कितना लेट कर रही हूँ...

Kavya...bassss ईई...

मुस्कान का हाथ अभी भी रघु के हाथ में था जिसका अहसास उसे अभी होता है. मुस्कान का हाथ उसके शोहर ने पता नहीं कितनी बार पकड़ा था लेकिन ऐसे रघु का उसका हाथ पकड़ा कुछ अलग था. जिस सख्ती से उसने हाथ पकड़ा था ो अलग था. मज़दूर होनेकी वजा से रघु का हाथ पत्थर जैसा महसूस होरहा था मुस्कान को.

मुस्कान अब अपना हाथ रघु के हाथ से चुराती है. उसको अजीब लग रहा था के ो इस सिचुएशन में इस वक़्त कड़ी है. पता नहीं कैसे ो रघु के साथ hi ऐसी परिस्तिति में ागिरीति है.

स्टोर के बहार कुछ अलग सन चल रहा था. काव्य का पति रूम के बहार खड़ा उसकी पत्नी का इन्तिज़ार कर रहा था और रूम के अंदर काव्य और उसका ससुर रामलाल चुदाई करने में लगे हुवे थे.

Muskan...mujhe बहार जाना ही...

Raghu...memsabb अभी नही जासकते सुन्न नही रही हो कोई आया हुवा ही बहार...

Muskan...kya मुसीबत ही...

Raghu...memsab लेकिन देख लिया न ो आइटम कितनी बड़ी चुड़क्कड़ ही खुद के ससुर से चुद रही ही हेहेहे...

Muskan...chii मैनी क्या बोलै था मुझसे ऐसी बातें मत कारु..

Raghu...arey मेमसाब मैं तो सच बात बता रहा hunn...dekha न कितनी सटी सावित्री बनकर घूम रही थी बहार और यहाँ देखो कैसे छम्मक चलो बानी हुवी ही...

मुस्कान कुछ न बोलकर चुप रहती है बात तो उसकी सही थी आखिर काव्य कितनी शरीफ लग रही थी बहार से और यहाँ ो खुदके ससुर के साथ गुलछर्रे उदा रही थी.

मुस्कान हैरान थी के खुद निर्मला आंटी की बहु इस तरह उनके hi पति और उसके ससुर के साथ अफेयर कर रही थी. वही निर्मला आंटी जो उसदिन समरीन को क्या कुछ नहीं बोल रही थी.

मुस्कान अपनी सोच में डूबी हुवी थी के उसको अपने पेअर पर कुछ रेंगता हुवा महसूस होता है जिससे दर कर ो अपना पेअर झिड़कती है उसे दर तो लगता है के पता नहीं क्या होगा...

Raghu...kya हुवा मेमसाब आवाज़ मैट कारु..

Muskan...kuch है मेरे पेअर के पास..

Raghu...kya है???

Muskan...mujhe नही पता...

Raghu..kuch कीड़ा मकुड़ा होगा चुप कड़ी रहो मंसबब...

मुस्कान बड़ी फ़्रस्ट्राटे होरही थी इस तरह एक काळा कमरे में रघु के साथ बंद होने से और ऊपर से बहार जो कुछ भी चल रहा था.

मुस्कान थोड़ी नार्मल हुवी hi थी के तभी उसके पेअर पर कुछ चढ़ने लगता है जिसके अहसास से ो एकदम से उछलने लगती है..

Muskan...aaaaaaa...

Raghu...memsabbb...

रघु जल्दी से मुस्कान का मन पकडे जाता है और गलती से उसका हाथ उसके एक चुके से टकराता है. रघु को तो जैसा करंट सा लगता है उस अहसास से. रघु को लेकिन पकड़ने जानेका भी दर था इसलिए ो किसी तरह मुस्कान का मन पकड़ लेता है.

Raghu....memsabbb चुप राहू कोई सुन लेगा...

Muskan..mmmm ममम...

मुस्कान के पेअर ो जो कुछ भी था ो और ऊपर जाने लगता है जिसे मुस्कान दर जाती है और कुछ न सूझते हुवे रघु इतना करीब होनेकी वजा से बिना कुछ सोचे उसके गले लग जाती है...

Muskan....kuchhh हैई कुछः है...

रघु की तो बोलती बंद हो जाती है मुस्कान के इस तरह उसके गले लगने से. उसका लौड़ा उफान पर आजाता है मुस्कान की इस हरकत से. मुस्कान गोल गोल चुके रघु की छाती में धंस जाते हैं. जवान शादीशुदा चुचों का अहसास से hi रघु की हवा टाइट होजाती है.

मुस्कान ने लगायी हुवी परफ्यूम की खुशबु रघु के नाक में जाकर नशे का काम कर रही थी. सामने उसका लौड़ा जो पहले hi अकड़ा हुवा था काव्य और उसके ससुर के कांड को देख कर अब ो मुस्कान की झांगों में चुबने लगता है.

मुस्कान को भी रीलीज़ होता है उसने क्या किया है. इस वक़्त उसके दोनों हाथ रघु के गले में िद्र उदर थे और ो लिटेराल्ल्य उससे चिपकी हुवी थी.

मुस्कान रियेक्ट करने hi वाली थी के उसको अहसास होता है रघु के हाथ अब उसकी कमर को जकड़े हुवे हैं और उसको अपनी झागों पर सामने कुछ सख्त चीज़ भी महसूस होरही है. मुस्कान की धड़कने तेज़ होजाती हैं इस अहसास से तभी उसके कान में रघु कुछ कहता है..

"फ़िक्र मैट कर मुस्कान मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगा"

तभी रघु मुस्कान को और अपनी तरफ खिंच लेता है. मुस्कान को अपनी गले का अहसास होता है लेकिन प्रॉब्लम ये थी के क्या उसने लेट तो नहीं कर दिया अपनी गलती रीलीज़ करने में.

मुस्कान को रघु के से पसीने की स्ट्रांग स्मेल आरही थी जो पता नहीं क्यों उसको मदहोश कर रही थी. मुस्कान हालाँकि अब अपने हाथ उसके गले में से निकल कर उससे दूर होनेकी कोशिश करने लगती है लेकिन रघु की पकड़ इतनी मज़बूत थी के ो ऐसा नहीं कर पढ़ी थी..

Muskan...mujhee चोरररू..

रघु अब मुस्कान की गर्दन पर अपना मन रख देता है. "आआह्ह" की आवाज़ से फिरसे मुस्कान उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश करती है.

मुस्कान को रघु से आरही मरदाना पसीने की स्मेल मदहोश कर रही थी जिससे ो छह कर भी ज़्याद ज़ोर नहीं लगा पढ़ी थी. ऊपर से दोनों एक गरम सन देख कर ए थे.

रघु के हाथ में पूरी की पूरी मुस्कान hi थी इस वक़्त लेकिन उसे पता था ये मछली को अगर सही से नहीं पकड़ा तो हाथ से निकल भी सकती और अगर पकड़ने में कामियाब होगया तो उसके मज़े hi मज़े हैं.

रघु अब अपने दोनों हाथ सीधा मुस्कान की गांड के दोनों फांकों पर लेजाता है और उन्हें धीरे धीरे बड़े hi इरोटिक अंदाज़ में मसलने लगता है..

"आआह्ह्ह प्लसस रुकक्क जावू"

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रघु बिना कुछ जवाब दिए मुस्कान की गांड की मालिश जारही रखता है और ऊपर से ो उसकी गर्दन पर चूमे जारही थी. मुस्कान के पास इस वक़्त रघु के वार का कोई जवाब नहीं थी उल्टा ो मदहोश हुवे जारही थी.

ज़िन्दगी में पहली बार मुस्कान की गांड कोई इस तरह गुंड रहा था. खुद उसके शोहर ने कभी ऐसे उसकी गांड नहीं दबायी थी. यहाँ तक के उसकी हलकी हलकी सिसकियाँ भी निकलने लगती हैं...

"चुर्रू ममम मुज्झी ससस"

मुस्कान के विरोद में कोई जान नहीं थी उसके बोलने अंदाज़ से रघु को अंदाज़ा होगया था और उसकी वजा से उसे और हिम्मत भी मिल रही थी...

रघु अब आगे बढनेका सोचकर उसकी गांड पर से हाथ हटाकर मुस्कान का खूबसूरत चेहरा अपने दोनों हाथों में पकड़ लेता है अपना चेहरा उसके तरफ करने लगता hai...muskan को इसका अहसास होजाता है और ो अपना चेहरा हटाने की कोशिश करती है लेकिन जितनी ताकत रघु लगा रहा था ो कुछ कर नहीं पढ़ी थी.

कोई रास्ता न देख मुस्कान मजबूरन अपनी ऑंखें बंद करके अपने होंठ जोरसे बंद करती है. रघु अपने काळा सूखे होंठ मुस्कान के नरम लाल होंठ से मिलाने hi वाला था के...

बहार दूर से कोई उसका लॉक हिलने लगता है जैसे कोई दूर खोलने की कोशिश कर रहा हो...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
थैंक यू सो मच एवरीवन, ुंफोरटूनटेली i'm स्टिल हैविंग फीवर राइट नाउ बूत i've ट्राइड माय बेस्ट तो व्रिठे ान अपडेट. मय्बे थोड़ा छोटा है बूत i'll मेक ुप्तो आईटी सून.

थैंक्स

थे ईविल
 
Part 22

दरवाज़ा के लॉक हिलने की आवाज़ से रघु का भी धयान उदार जाता है और ो रुक जाता है...

Raghu...memsab आवाज़ मत करना...

मुस्कान अब क्या बोलती उसकी तो खुद बोलती बंद हुवी पड़ी थी रघु की हरकतों से. बहार तो ो बड़ी सख्त पेश अति थी लेकिन यहाँ रघु की हरकतें और मरदाना पैन उसे पता नहीं अभी तक शांत रखे हुवे था वर्ण मुस्कान जैसी ाव्रत रघु की ऐसी हरकतों पर चुप रहने वालों में से नहीं थी.

लॉक की आवाज़ थोड़ी देर बाद बंद होजाती है लेकिन रघु और मुस्कान दोनों की हवा टाइट होचुकी थी क्यों ो दोनों यहाँ बड़े hi अजीब सिचुएशन में खड़े थे और यही बाज़ू वाले रूम में इसी घर के ससुर बहु की रासलीला चल रही थी.

आवाज़ बंद होते hi रघु फिरसे मुस्कान के चेहरे के पास अपना चेहरा लेजाने लगता है तभी मुस्कान को पता नहीं कहाँ से ताकत इखट्टा करके एकदम से उसको धक्का देती है हालाँकि रघु ज़्यादा दूर नहीं होता फिर भी...

Muskan...kameene कहीं के तुम्हारी हिम्मत कैसी हुवी मुझे चुने की...

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Raghu...o मेमसाब मैं कहाँ आपसे चिपका था आप तो खुद hi मेरे से चिपकी थी भूल गयी...

मुस्कान को पता था उसके पेअर पर कुछ रेंग्नर से ो खुद hi रघु के गले लगी थी लेकिन उसे ये भी पता था के रघु की हरकत गलत है आखिर ो कैसे उसके साथ ये कर सकता है ो कोई ऐसी वैसी ाव्रत थोड़ी न है...

Muskan...oo ोोू मुझसे गलती होगयी थी लेकिन तुम तो मुझपर छाडे जारहे हो समझ क्या रखा है मुझे...

Raghu...memsab तो आपने मुझे क्या समझ रखा hai...main भी एक शादीशुदा आदमी हूँ आप मुझसे गले लगे जारही हो...

मुस्कान को रघु की बात से हैरानी होती है ो उसपर गुस्सा हुवे जारही है और ो खुद उसको उसपर चढ़ने का इलज़ाम लगा रहा है...

मुस्कान इससे पहले कुछ और बोलती फिरसे लेकिन उसको अपने सलवार पर कुछ रेंगता हुवा महसूस होता है और फिरसे चिल्लाते हुवे वहीँ उछलने लगती है...

रघु कुछ सोचकर चुप रहता है ये देखने के लिए मुस्कान क्या रिस्पांस करती है. मुस्कान नहीं चाहती थी के रघु फिरसे उसके साथ कोई हरकत करे इसलिए ो रघु से मदद नहीं मांग रही थी लेकिन इस सिचुएशन में ो कुछ कर भी नहीं सकती थी और देख कर लग रहा था के ये वही कीड़ा मकुड़ा जो उस वक़्त मुस्कान के पेअर पर चढ़ा था.

Muskan...plsss मेरी मददद कारु कुछ चढ़ा ही मेरे उपर...

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Raghu...rehne दो मेमसाब आप फिर बोलोगी मैं आपके ऊपर चांस मर रहा हुन्न्न...

Muskan..aa नही बोलूंगी प्लस मददद कारु हटाओ इसको...

Raghu...baat से मुकर गयी तू??

Muskan...nahii मुकरूंगी प्लसस प्लस मददद कर दू..

रघु अब बिना वक़्त गवाए किसी तरह अँधेरे से मुस्कान के पीछे आजाता है और उसके कान में आकर बोलता है...

Raghu...memsabb सीढ़ी खडी राहू मैं उसको निकाल देता हुन्न...

रघु को इतना करीब और कान में इस तरह बोलने से मुस्कान फिरसे मदहोश सी होने लगती है फिरसे उसे रघु की पसीने की स्मेल आने लगती है...

रघु अब उस कीड़े को निकलने के लिए मुस्कान की पीठ पर हाथ फेरने लगता है ताकि ो मिल जाये लेकिन ऐसा करने से मुस्कान के जिस्म में हलचल सी होने लगती है. रघु के सख्त हाथ का अहसास मुस्कान को अंदर से हिला रहा था.

ऐसा टच उसने अपने शोहर के साथ में कभी नहीं किया था आखिर क्यों ऐसे होरहा था उसके साथ? आज़म तो उससे बोहत प्यार करता है और ो भी फिर भी क्यों??

रघु अपने सख्त हाथ मुस्कान के गर्दन तक भी लेजाने लगता है. मुस्कान की ऑंखें अब मदहोशी में बंद होने लगती है ो भूलने लगती है के रघु उसके पीछे उसके ऊपर चार रहे किसी कीड़े मकोड़े निकलने के लिए खड़ा है...

रघु मुस्कान की तेज़ सांसों को पीछे खड़े फील कर रहा था उसे पता था मुस्कान इस वक़्त बड़े hi वल्नरेबल सिचुएशन में है.

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रघु अब मुस्कान की कमर में अपना एक हाथ डालता है और उसको अपने से सत्ता लेता है. मुस्कान एकदम से रघु की छाती से चिपक जाती है. ो मुस्कान के जिस्म से आरही थी महक को सूंघ रहा था जैसे नशा कर रहा हो.

Raghu...waise मेमसाब कुछ भी बोलो मैं आप जैसी आइटम मेरी पूरी ज़िन्दगी में नहीं देखा...

Muskan...kkk क्या बकवास कर रही हो मैनी तुमको उसको निकलने बोलै है और तुम..

Raghu...memsab मैं तरय कर रहा हूँ मिला नहीं है अभी तक्क...

Muskan...jaldi कारु ोुरर्र....

Raghu...aur क्या मेमसाब??

Muskan...aurr औरर तुम थोड़ा रहो...

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Raghu...memsab दूर रहूँगा तो उसको निकलना बड़ा मुश्किल hojayega...aap थोड़ा शांत होजावो मैं निकल देता हूँ...

रघु हाथ ीदार फेर रहा था उसे अचानक से मुस्कान की ब्रा की स्ट्राप फील होती है. मुस्कान को भी इसका अहसास होता है के रघु के हाथ से जस्ट अभी अभी उसकी ब्रा स्ट्राप टच हुवी है. मुस्कान को अब शर्म आरही थी.

रघु की भी हिम्मत अब बढ़ रही थी ऊपर से उसका लौड़ा उसे पंत के अंदर तंग किये जारहा था. मुस्कान जैसी जवान खूबसूरत शादीशुदा ाव्रत के इतना करीब होकर उसका लौड़ा पंत में दर्द करने लगा था.

साइड वाले रूम से आवाज़ें तो आरही थी लेकिन हलकी हलकी शायद ससुर बहु को अहसास होगया था के कोई बहार खड़ा है लेकिन फिर भी ो रुके नहीं थे.

तभी मुस्कान एकदम से रघु से दूर होजाती है और अपनी पीठ पर अपना हाथ लेजानेकी कोशिश करने लगती है...

Muskan..aaa यी..

Raghu...kya हुवा मेमसाब??

Muskan..aa ू आ ोोूहः..

अब मुस्कान क्या बोलती उसको के ो जो भी कीड़ा मकुड़ा है उसकी सलवार के अंदर चला गया है. मुस्कान को लेकिन अब उससे बड़ा दर लग रहा था इसलिए ो थोड़ा दूर जाकर देरी न करते हुवे अपनी सलवार की ज़िप खोल देती है.

ज़िप खुलने की आवाज़ रघु को भी अति है और उसके मन में लड्डू फूटने लगते हैं. अगर ज़िप खुली है तो ज़रूर मुस्कान की बैक इस वक़्त नंगी होगी और उसकी ब्रा भी नज़र आरही होगी लेकिन उस रूम में इतना अँधेरा था के कुछ देख पाना मुश्किल था.

मुस्कान ज़िप निचे लेनेके बाद अपना हाथ रीच करने लगती है और ऑब्वियस्ली उसे मुश्किल होरही थी लेकिन तभी उसे अपने पीछे रघु फील होता है...

Muskan...tt टूम तुममम दूररर राहू प्लसस...

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Raghu...memsab क्या हुवा आप बिना बोले आगे आगयी ो कीड़ा नहीं निकलना क्या...

मुस्कान अब रघु को बोल भी नहीं सकती थी के ो अंदर आया हुवा है और उसने अपनी सलवार की ज़िप खोली हुवी है. ीदार जानबूझकर hi अब मुस्कान से फिरसे चिपक जाता है और उसे पहली बार अब मुस्कान की बिना कपडे की ब्रा स्ट्राप अपने छाती पर महसूस होती है.

रघु अपना हाथ मुस्कान की कमर में दाल देता है और उसको मुस्कान की ज़िप खोलने की वजा से ड्रेस लूसे साफ़ पता चल रहा था. रघु अब मुस्कान के कंधे के पास आकर वहां अपना मन रखता है. मुस्कान की सॉफ्ट स्किन उसे फील होरही थी.

तभी अचानक ो वहां चूमता है जिसके अहसास से hi मुस्कान के शरीर में जैसे थरथाहत होती है.

Muskan...yee यी क्या कररर रही हो??

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Raghu....aapki मदद मंसबब...

Muskan...dekho तू तुम्को मैनी पहली भी बोला है मुझसे बदतमीज़ी नही कारु

इतना बोलकर मुस्कान थोड़ा और आगे होती है लेकिन अब आगे दीवार थी इसलिए ो रुक जाती है. रघु अब आगे होता है और मुस्कान को अचानक दीवार से सत्ता देता है. अचानक हुवे इस हमले से मुस्कान दर जाती है.

Muskan..yee तुम

तभी मुस्कान को अपनी गांड पर फिरसे रघु का लौड़ा महसूस होता है क्यूंकि ो अब उससे चिपक गया था.

Muskan...choroo मुझे ये क्या बतमीज़ी ही..

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रघु बिना जवाब दिए मुस्कान के जिस्म से खेलने लगता है. दोनों इतनी देर उस रूम में बंद होनेकी वजा से पसीना पसीना होगये थे. रघु मुस्कान की गर्दन पर चूमने लगता है.

Muskan..mmm चुर्रो मुझे...

Raghu...memsabbbb आप मीन मुझे मेरी पत्नी दिखती ही..

Muskan...kkkk क्या बकवास कर रही हूँ चोर्रो मुझी..

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रघु मुस्कान को चिपके हुवे उसकी गर्दन पर लगातार चूमे जारहा था. मुस्कान को भी रघु से आरही है पसीने की स्ट्रांग स्मेल आरही थी जो पता नहीं क्यों उसे फिरसे मदहोश सा कर रही थी.

मुस्कान रघु को पीछे हटाने की भी कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी ो कोशिश नाकाम होरही थी अबतक.

मुस्कान को ढीली पड़ता देख रघु अब अपने हाथ आगे बड़ाहट है और मुस्कान के बिलकुल चुचों के ऊपर अपने हाथ लेजाता है और बिना कुछ सोचे सीधा दबा देता है..

Muskan...aaaasssss नाईई..

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मुस्कान के गोल चुके दबाते hi रघु को जैसे स्वर्ग का अहसास होता है. एक शादीशुदा जवान ाव्रत के चुके दबाना कोई आम बात नहीं थी...

मुस्कान अपने हाथ रघु के हाथ पर रखती है ताकि ो उसके हाथ हटा सके. रघु के साख हाथों पर अपने नरम हाथ मुस्कान को बड़ा अजीब फील होरहा था. रघु तो जैसे पागल सा होगया था मुस्कान के जिस्म को इस तरह छू कर या फिर बड़ी गलती कर रहा था?

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
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