Episode 34ज़रा को देख कर और फिर उसकी बातें सुनकर मेरा लुंड तो एक पल में hi तन गया. सचमे क्या दिन है आज. एक तरफ है रंजू जो अब मेरे कण्ट्रोल में आने वाली है तो दूसरी तरफ ये मासूम ज़रा. लगता है इसके नसीब में भी मेरा लुंड का स्वाद लिखा है.
वैसे ये एक तरह से बहुत अच्छी बात है. क्यूंकि इस ऑफिस में हम तीन लोग है और अगर रंजू और ज़रा दोनों मेरी हो जाये तो फिर हम इस छोटे से चिकित्सा अस्पताल को अपने मर्जी के हिसाब से चला पाएंगे. जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी इस गांव को ये हाकिम और वीरेन के जाल से मुक्त कर पाएंगे. मेरा प्रमोशन तो इस गांव में हो कर hi रहेगा.
मई अपने सोच में खोया था और ज़रा को लगा उसकी बीमारी के चक्कर में सोच में हूँ.
ज़रा डरते हुए बोली- डॉक्टर साब कोई ज्यादा दिक्कत है क्या.
मई bola-dekho ज़रा दिक्कत तो है अब कितना दिक्कत है ये तो check-up के बाद hi पता चलेगा.
फिर मई अपने कुरिस से उठा बहार का दरवाजा बंद कर दिया फिर ज़रा के पास आया.
मई bola-zara चलो यहाँ बीएड पे आ जाओ चेक करना पड़ेगा.
मई बड़े प्यार से ज़रा का हाथ थमा और उसे check-up वाले बीएड की तरफ ले गया.
मई bola-Zara, डरो मत. अगर दर्द मिटाना है तोह पहले बीमारी को जड़ से देखना होगा. चलो, इस बीएड पे धीरे से लेट जाओ.
ज़रा एक गहरा सांस ली और बीएड पर लेट गयी. उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था की उसका सूट के ऊपर से भी उसका सीना उछलता हुआ दिख रहा था.
मई bola-zara घबराना मत अभी निचे वहां चेक करेंगे.
ये सुनते hi ज़रा घबरा गयी.
मई bola-dekho ज़रा चेक किये बिना कैसे ठीक होगा.
ज़रा को लगा मई बात तो सही बोल रहा हूँ बिना चेक किये ठीक केस होगा लेकिन वो दर भी रही थी और उसे थोड़ा अजीब भी लग रहा था.
ज़रा boli-doctor साब कोई ऐसा दवा नहीं है जो आप दे दो और हम ठीक हो जाये.
मई bola-arey कैसी बात करती हो ज़रा तुम तो पढ़ी लिखी हो. बिना चेक किये कैसे दवा दे दे. कही गलत हो गया तो तुम्हारा तबियत और बिगड़ जायेगा.
मेरे बात पे ज़रा थोड़ा घबराई फिर बोली -ठीक है डॉक्टर साब.
अब मई धीरे से ज़रा के पेअर के पास गया और ज़रा का कुर्ती जो घुटने तक था उसे उठाना सुरु किया और कमर तक उठा दिया.
मई देखा ज़रा थार थार कांप रही थी. जैसे hi मई अपने हाथ से ज़रा के पायजामे का नाडा खोला ज़रा अपना आंख बंद कर ली और बिस्तर के एक कोने को कास के पकड़ ली.
मई फिर ज़रा के पायजामे को जांघ तक सरकाया और उसका मोटा मोटा जांघ मेरे सामने आ गया. फिर मई धीरे से दो उंगली ज़रा के पंतय में फसाया और उसको निचे सरका दिया.
ज़रा का ढकन तो बिलकुल तेज हो गया था वो बेचारी आंख बंद किये कुछ बोल भी नहीं पा रही थी.
मई ज़रा के दोनों टांगों को फैलाया ताकि उसकी तकलीफ की असली जगह देख पौन.
ज़रा के बुर पे और वहां से होते हुए गांड तक खूब सारा बाल जमा हुआ था. जब मई ज़रा के बुर के बाल को थोड़ा सा हाथ से हटाया तो दिखा ज़रा के बुर के साइड में हल्का हल्का लाल लाल धब्बा टाइप का छोटा छोटा दाना हो गया है. ये दाना अक्सर गर्मी और गलत तरीके से बाल खींचने से होता है. मलतला ज़रा को कोई बहुत बड़ा बीमारी नहीं था.
ये देख कर मई खुश हो गया फिर मेरे दिमाग में आया एक आईडिया.
मई bola-zara देखो यहाँ बहुत बाल है इसलिए ठीक से दिख नहीं रहा इसको साफ़ करना पड़ेगा तुम यही लेती रहो मई दो मिनट में आता हूँ.
ये बोलके मई उधर से निकला.
ज़रा का तो हालत ख़राब हो गया. जिस जगह को आज तक ठीक से उसके सोहर ने भी नहीं देखा था वो जगह मई न सिर्फ देख रहा था अब उसको साफ़ भी करने वाला था. ज़रा मुझे मन करना छाती थी लेकिन बीमारी के नाम पे दर भी रही थी. उसे इलाज भी चाहिए था और अंत में बेचारी सोची जो होगा सो होगा पहले इलाज करा लेती हूँ.
मई थीधर कमरे से निकला और फिर अपने दराज़ से एक इलेक्ट्रिक त्रिम्मेर और एंटीसेप्टिक पाउडर निकला.
मई जैसे hi त्रिम्मेर ज़रा के बुर के पास लगाया उसके वाइब्रेशन से hi ज़रा चिहुँक उठी लेकिन वो खुद का मुँह खुद hi दबा ली. इधर मई ज़रा के बुर के बाल पे पाउडर छिड़क छिड़क कर अच्छे से त्रिम्मेर से पहले ज़रा के बुर का सारा बाल साफ़ किया फिर थोड़ा पेअर उठाकर ज़रा के गांड के पास भी जो बाल था वो भी साफ़ कर दिया.
ज़रा बेचारी शर्म के मारे गाड़ी जा रही थी. आज एक अजनबी लड़के ने उसका बुर आगाँद सब अच्छे से देख लिया था. इतना बेबस और इतना शर्म ज़रा को कभी नहीं आया था. जब पूरा बाल निकल गया तब जो छोटे छोटे धब्बे जैसे डेन थे वो मुझे अच्छे से दिखने लगा.
अब बारी था मेरे हाथों के कमल का. मई ड्रावर में से क्रीम निकला जो जरा के बुर के धब्बो को और दानो को आराम देता.
मई अपना ऊँगली पर थोड़ा सा सफ़ेद और नरम क्रीम लिया.
ज़रा तो अपना आँख कास के बंद कर ली थी, पर उसका जिस्म की thar-tharahat बता रहा था की वो मेरे हर अगले कदम का इंतज़ार कर रही है.
मई अपना क्रीम भरा ऊँगली धीरे से ज़रा के बुर के ऊपर रखा. जैसे hi वो ठंडा क्रीम ज़रा के बुर के कमसिन खाल से टकराया, ज़रा का पूरा बदन एक झटके में धनुष की तरह लचक गया.
Ufffffffffffffffffffffffffffffffffffff... डाक्टर साबबब... ये क्या है... बहुत ठंडा लग रहा haiiiiiiiiiiiii...wo शिशकते हुए बोली..

मई अपना ऊँगली को dhere-dheere गोल गोल में घूमना शुरू किया. क्रीम अब उसके बुर के होठों के बीच समां रहा था. मई देखा की कैसे वो दाना उस क्रीम को सोख रहा था. Dhere-dheere वो ठंडक ख़तम होने लगा और उसके जगह एक मीठा सा प्यारा सा जलन और गर्मी ले लिया.
ज़रा का जांघ अब khud-ba-khud और फैलने लगा था,
मेरे उंगली का सारा क्रीम जैसे hi ज़रा के बुर पे लग गया मई फिर से क्रीम लिया और इस बार अपना निशाना बदला. मई ज़रा की दोनों टांगों को पकड़ कर ुठोदा सा उठा दिया जिस से उसका गांड का छेद मुझे दिखने लगा जो बिलकुल छोटा सा था. उसका गांड देख कर hi लुंड में भूचाल आ गया लेकिन मई कण्ट्रोल किया.

मई अपना ऊँगली उसके गांड के हलके भूरे हलके गुलाबी छेद पर रखा और धीरे से वहां क्रीम मलने लगा. ज़रा तो बिस्तर का चादर को अपनी मुट्ठी में जकड ली और उसके मुंह से एक लम्बा AHNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNN निकल गया.
मेरा ऊँगली जब उसके उस नाज़ुक रस्ते के किनारों को छू रहा था, तोह ज़रा का शरीर झटके मार रहा था.
ज़रा बहुत हिम्मत करके boli-Dakter साबबब... वहां नहीं... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh...
मई देखा ज़रा के बुर से अब पानी आने लगा था इसलिए मई रुका नहीं. मई अपना हाथ से उसका पूरा गांड और बुर के बीच की जगह को dhere-dheere मसला. क्रीम की वजह से मेरा हाथ वहां माखन की तरह फिसल रहा था.
ज़रा को समझ hi नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है ज़रा को बुरा भी लग रहा और अच्छा भी लग रहा था.
मई जनता था ज़रा अब पूरी तरह मेरे कब्ज़े में है. ज़रा का पसीना और वो क्रीम मिलकर एक ऐसा महक पैदा कर रहा था जो केबिन का हवा को भरी बना रहा था.
ज़रा के बुर का चिकना खाल अब मेरे उँगलियों के नीचे किसी रेशम की तरह फिसल रहा था. मई देखा की क्रीम अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है.
मई क्रीम वाले डब्बे से थोड़ा ज़्यादा क्रीम लिया और अपना दो उंगली जो क्रीम से पूरा भरा हुआ था ज़रा के बुर के छेद पे टिका दिया. जैसे hi मेरा ऊँगली उसके बुर के नरम होठों को अलग करके अंदर के चमड़े को छुआ, ज़रा एक लम्बी और dard-bhara सिसकी ली-
अह्ह्ह... डाक्टर साबबब... ये क्या... इतना गहरा क्यों...
ज़रा का आंख ऊपर उठने लगा था वो जोर जोर से हाफ रही थी.
मई रुका नहीं. मई अपना ऊँगली को dhere-dheere, milimetre-dar-milimetre उसके गरम और गिला बुर के अंदर उतरना शुरू किया. क्रीम के वजह से मेरा ऊँगली माखन की तरह अंदर सरक रहा था. ज़रा का बदन कमान की तरह लचक गया और उसने अपने दोनों पेअर अनजाने में मेरा कन्धा पर कास गया.

मई अपना ऊँगली को पूरा अंदर तक उतार दिया. ज़रा की बुर के अंदर की दीवार इतना गर्म था की मुझे अपना ऊँगली पर उसका धड़कन महसूस हो रहा था. मई बुर के अंदर hi अपना ऊँगली को गोलाई में घूमना शुरू किया, ताकि वो दवा उसके गर्भ की देहलीज़ तक पहुँच जाये.
ज़रा अब पूरी तरह होश खो रही थी. उसके मुंह से अब शब्द नहीं, सिर्फ अजीब सा ahhnnnnnnnnnnnn ohhhhhhhhhhhhh वाला आवाज़ निकल रहा था. मई महसूस किया की उसका बुर से निकलने वाला रास क्रीम के साथ मिलकर बाह रहा है जो ज़रा के बुर से निकल कर उसके गांड के तरफ जा रहा है
मई मौके का फायदा उठा कर अपना ऊँगली को थोड़ा बहार खिंचा और फिर झटके से अंदर डाला. ज़रा जोर से अपना दोनों पेअर जो मेरे कंधे पे था उसको दबा दी और सिसकने लगी.
अब तो ऐसा हो रहा था की जब जब मेरा ऊँगली उसके अंदर जाता, ज़रा का गांड बिस्तर से दो इंच ऊपर उछाल जाता. मई अपनी दूसरा हथेल भी आगे बढाकर सीधा ज़रा के कुर्ती में घुसा दिया और उसका एक चुकी को कास के दबाया, जिससे उसका तड़प और बढ़ गया.
ज़रा मदहोशी में chillayi-Dakter साबबब... मार डालो मुझे... बहुत आग लग रहा है... अंदर तक... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh...
मई देखा की ज़रा का चेहरा पसीने से lath-path हो चूका है और उसका आँख नशे में ऊपर हो चूका है. मई अपना ऊँगली को तेज़्ज़ी से andar-bahar करना शुरू किया.
ज़रा का सीना upar-neeche हो रहा था, और उसका नरम हाथ बिस्तर को मुट्ठी में भींचते जा रहा था. उसका गांड बिस्तर से दो इंच ऊपर उछाल रहा था. हर झटके के साथ वो आगे की तरफ सरकने की कोशिश कर रही थी. वो बार बार कमर उचका रही थी जिस से उसका प्यारा गांड का छेद मुझे दिख रहा था. मई भी मौके का फायदा उठाया. मई बिना कोई मौका गंवाए अपना क्रीम से भरा दूसरा ऊँगली को उसका गांड का छेद पर टिका दिया. इधर ज़रा झड़ना सुरु की उधर मई एक झटके में अपना ऊँगली उसके पीछे वाले रस्ते में घुसा दिया.
ज़रा का पूरा बदन एक पल के लिए पत्थर जैसा अकड़ गया. उसका बुर से झड़ने का सुख और गांड में क्रीम वाला ऊँगली का तीस... दोनों मिलकर उसे एक ऐसा तड़प में धकेल दिया जो वो आज तक महसूस नहीं की आईटी.
ज़रा जोर से सिस्का का chikcki-Uiyiiiii अम्म्मीईईईई... डाक्टर साबबब... ये... ये क्या किया... अह्ह्ह... वहां... बहुत दर्द... और मज़्ज़ा भी... उसने शिशकते हुए बोली. बेचारी अपने मुँह पर भी कण्ट्रोल खो चुकी थी.
इस मजे के कारन उसके आंख से आंसू बहने लगा.

मई अभी भी नहीं रुका. मई अपना दोनों ऊँगली ko—ek आगे और एक piche—dhere-dheere अंदर गोल गोल घूमना शुरू कर दिया. क्रीम का गर्मी पीछे वाले रस्ते में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था. ज़रा अब मेरे हाथों में माँ की पुतले की तरह पिघल रही आईटी. उसका दोनों जांघ खुद बा खुद उछाल रहा था उसका पेअर मेरे कंधे पे था वो झटका खा खा के झाड़ रही थी. मई एक बार और अपना दोनों ऊँगली को पूरा अंदर दबा दिया और वही थामे रखा जब तक की ज़रा का बदन पूरी तरह ठंडा होकर बिस्तर पर गिर नहीं गया.