Hindi Sex kahani - Muskan - SexBaba
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Hindi Sex kahani - Muskan

hotaks

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Dec 5, 2013
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Hello एवरीवन. काफी लम्बे वक़्त के बाद मैं वापस आया हूँ इस साइट पर. मुझे पता है लास्ट टाइम जब मैंने अपडेट दिया था उसके बाद से काफी टाइम होचुका है. लेकिन मेरी अपनी पर्सनल रीज़न थी इतने लम्बे एब्सेंस के लिए. तो मैं इसबार एक स्टोरी लेकर आया हूँ जो न hi लॉन्ग होगी और न hi शार्ट, यूँ समजिये एक मध्यम लेंथ में होगी. आशा करता पहले जैसा सपोर्ट और रिस्पांस मुझे इस स्टोरी पर भी मिलेगा.

थैंक यू,

थे ईविल
 
Part 01

Azam...hello क्या कर रही हो???

Muskan...Bas काम करके बैठी हूँ और क्या करना है मैंने...

Azam...arey तो टीवी देख लो न बोर नहीं होगी..

Muskan...bas टीवी से hi मन लगाकर रखना पड़ता है मुझे...

Azam..ab क्या करूँ मुस्कान काम भी तो इम्पोर्टेन्ट है न...

Muskan...hmm..

Azam...acha मैं ये बोल रहा था क्यों न तुम अपनी माँ के घर हो ावो एक बार...

Muskan...pichle महीने hi तो गयी थी अब इतने जल्दी नहीं...

Azam..acha बाबा ठीक hai...chalo मैं रखता हूँ काम है थोड़ा...

Muskan..hmm ठीक है...

कॉल एंड्स....

मुस्कान और आज़म शैख़ जिनकी शादी को 2 साल होचुके हैं. फरीदाबाद में एक कॉलोनी में रहते हैं. जहाँ मुस्कान बाला की खूबसूरत एक हाउसवाइफ है वहीँ आज़म हैंडसम और वेल बिल्ट एक मंच में काम करता है. दोनों इस कॉलोनी में 2 महीने पहले hi मूव हुवे हैं. दोनों की फैमिलीज़ दूसरी सिटी में रहती हैं. उनका घर 2 फ्लोर्स का था लेकिन ो ग्राउंड फ्लोर पर hi रहते थे क्यूंकि फर्स्ट फ्लोर का रेनोवेशन होना बाकि था.

शाम के वक़्त आज़म घर आजाता है.

Muskan...agye आप..

Azam...haan भाई आज्ञा क्या बताऊँ थक गया हूँ आज काम काफी ज़्यादा था...

Muskan...kyun??

Azam...o बस एक मुझे बड़ा असाइनमेंट मिला है...

Muskan...hmm...aap मन हाथ धो लीजिए मैं खाना लगाती हूँ...

Azam..Ok

खाना खाने के बाद दोनों सोने चले जाते हैं बैडरूम...15 मिनट सेक्स करनेके बाद दोनों सजाते हैं...

अगली सुबह नाश्ता करके रेडी होनेके बाद आज़म काम के लिए निकलने लगता है...

Muskan...arey रुकिए आप कुछ भूल रहे हैं...

Azam...kya???

Muskan...sochiye सोचिये क्या भूले हो??

Azam...muskan लेट होरहा है बता दो न...

मुस्कान पीछे से पर्स निकल कर आज़म को देती है...

Azam...thank यू मेरी डारलू...

Muskan...bas बस रहने दिज्ये और जाईये अब काम पर...

Azam...acha तुम ो पास वाली निर्मला आंटी के यहाँ जाओगी न उनसे उनके पति का नंबर ले आना काम है....

Muskan...thik है ले आउंगी...

Azam...chalo ठीक है थैंक यू मैं चलता हूँ...

ो फिर काम के लिए निकल जाता है. मुस्कान भी अपने घर के काम फिनिश करके उनके घरसे 4 घर दूर निर्मला आंटी के घर चली जाती है. उनकी अछि बनती थी इसलिए मुस्कान अक्सर वहां जाती थी. उदर मुस्कान बातें सब करके घर वापस आजाती है और अपने शोहर आज़म को कॉल लगाती है...

Azam..haa मुस्कान बोलो...

Muskan..kya कर रहें आप...

Azam...kuch नहीं बस काम में लगा हुवा हूँ.. तुम हो आयी निर्मला आंटी के घर...

Muskan...haa मैं ो गयी थी और नंबर ले आयी हूँ बता दूँ...

Azam...haa एक minute....batawo...

Muskan...9xx क्सक्सक्स क्सक्सक्स6

Azam...chalo ठीक है मुस्कान बादमें बात करता हूँ काम है अब...

कॉल एंड्स...

इसी तरह शाम होजाती है और शाम में आज़म घर अत है.

Muskan...kaisa रहा दिन..

Azam..as उसुअल कैसा रहना tha...acha ो सब चोरो मैंने न तिवारी अंकल से बात की है ऊपर वाला जो फ्लोर हैं न उसके रेनोवेशन के बारे में इसलिए ो नंबर लिए था. उन्होंने पिछले महीने काम करवाया था अपने घर का उन्ही मज़दूरों को 2 दिन बाद बुलाया है काम के लिए. एक बार ो रेनोवेट होजाये न फिर ाचा खासा स्पेस हमें मिल जायेगा...

Muskan...hmm सही है..

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 02

फिर दोनों खाना खाकर सो सजाते हैं. अगले दिन डेली रूटीन की तरह आज़म ऑफिस चला जाता है और मुस्कान अपने काम में लग जाती है. आज़म अपने ऑफिस में बैठा हुवा था के उसे किसी का कॉल अत है..

Azam...hello कोण..

"साहब मैं रमेश बोल रहा हूँ ो काम के लिए तिवारी सेठ ने आपका नंबर दिया था"

Azam..arey हाँ हाँ बोलो...

Ramesh...sahab हम कल से आजायेंगे काम के लिए. आप होंगे न कल घरपर...

Azam...haan मैं रहूँगा वैसे भी संडे है कल...

Ramesh...thik है साहब...

ऐसे hi शाम होजाती है और आज़म घर चला जाता है और वहीँ रूटीन के साथ मुस्कान और आज़म सजाते हैं. अगले दिन ऑफिस न होनेकी वजा से दोनों सो रहे थे लेट लेकिन तभी घर की बेल्ल बजती है जिससे दोनों की आंख खुल जाती है. आज़म दूर पर चला जाता है जहाँ कोई आदमी खड़ा था...

Azam...haa भाई क्या काम है??

Ramesh...arey साहब हम ो घरका काम करने ए हैं...

Azam..arey हाँ थोड़ा रुको मैं फ्रेश होकर अत हूँ...

फ्रेश होकर नाश्ता करनेके बाद आज़म और रमेश ऊपर वाले फ्लोर पर जाकर बातें कर रहे थे...

Azam...to ये है सारा काम होजायेगा न...

Ramesh...sahab बेफिक्र रहिये hojayega...acha ो साहब खाना सब तो हम लोग होटल से खा लेंगे लेकिन पानी शनि अगर होसके तो िद्र hi मिल जाये तो ाचा था...

Azam...arey उसकी फ़िक्र मत करो मैं मेरी बीवी को बोल दूंगा ो पानी वगैरा दे जाया karegi...kuch भी चाहिए तो उसे बोल देना...

Ramesh..badhiya साहब तो हम शुरू करते हैं काम फिर...

Azam..thik hai...waise कितने हो तुम सब...

रमेश...5 sahab...main (30 यरस), जानकी(38 यरस), सत्य(24 यरस), हरीश(46 Yrs)aur रघु(49 यरस). सब ने बोहत काम किया हुवा है साहब काम आपको ऐसा करके देंगे के आप भी यद् रखोगे.

Azam..hmm ाचा है एक्सपेरिएंस्ड आदमी हो तो ाचा रहता है...

फिर काम शुरू होजाता है. आज़म और मुस्कान ने घर में hi मूवी का प्लान बनाया था इसलिए ो दोनों उसमे बिजी होजाते हैं. फर्स्ट फ्लोर पर ज़ोर शोर से काम शुरू होचुका tha...pehla दिन स्मूथली निकल जाता है. मज़दूर अचे से काम करके चले जाते हैं.

अगले दिन नाहा धोकर आज़म ऑफिस जानेके लिए रेडी होजाता है...

Azam..acha मुस्कान जब ो मज़दूर आएंगे न तो उनको पानी का इंतिज़ाम कर देना हाँ. बाकि ो खाना सहना बहार hi खाएंगे. और कुछ भी चाहिए तो ो बता देंगे..

Muskan...ji ठीक है आप जाईये आराम से....

आज़म के जानेके बाद मुस्कान कामों में लग जाती है. घंटे बाद ो काम वाले एते हैं और काम में लग जाते हैं. फर्स्ट फ्लोर पर जानेके लिए अलग से बहार से स्टैर्स थी इसलिए मज़दूर के लिए ऊपर निचे जाने में ज़्यादा मुश्किल नहीं होती थी. अंदर मुस्कान काम पर लगी हुवी थी के उसको बेल्ल की आवाज़ अति है. बहार उन मज़दूर में से एक जानकी मिलती है...

Janki...memsab ो पानी चाहिए था पीनेके लिए...

Muskan...arey हाँ सॉरी मैं भूल hi गयी अभी लती हूँ...

मुस्कान के जानेके बाद जानकी अंदर िद्र उदर देखती है क्यूंकि मुस्कान और आज़म ने घर बड़ा वेल मैनटैनेड और प्रॉपरलय फर्निश्ड रखा हुवा था. मुस्कान पानी लेकर उसे देती है....

Muskan...aur कुछ भी चाहिए तो बता देना मुझे...

Janki..ji मेमसाब...

जानकी फिर ऊपर चली जाती है सबको पानी देकर सब काम पर वापस लग जाते हैं. ीदार मुस्कान शोवे लेनेके लिए चली जाती है. उनका वाशरूम बहार हॉल से अटैच्ड था इसलिए दूर हॉल में से hi खुलता था. ीदार मज़दूर काम कर रहे the..unme से एक पेशाब करने निचे गेट के पास जाने लगता है...

रमेश.. अरे हरीश भाई किदर जारहा हो??

Harish...peshab करने...

Ramesh...arey हरीश भाई उदर मत करना साहब फिर गुस्सा krenge...ek काम करो उदर साहब के घर के अंदर hi चले जाओ वहां बाथरूम है. मैं साहब से बात कर लूंगा उस बारे में भी और हां बेल्ल बजा लेना एक बार..

हरीश फिर चला जाता है दूर तक और ो बेल्ल बजने hi वाला था के उसे दूर हल्का सा खुला हुवा मिलता है. जानकी जब वापस गयी थी ऊपर तो ो दूर बंद करना भूल गयी थी और मुस्कान को भी ख्याल नहीं रहा के दूर बंद है या खुला क्यूंकि ो हल्का सा hi खुला था. हरीश को हालाँकि नहीं पता था के इस घर कोण रहता है क्या है. ो अंदर हॉल में पोहंचा hi था के उदर hi वाशरूम का दूर खुलता है और अंदर से एक निघ्त्य में मुस्कान बहार अति है. मुस्कान को हालाँकि अंदाज़ा भी नहीं था के कोई उसके घर में है इस वक़्त. ो तो दूर बंद है समझकर बेफिक्र आयी थी बहार. ये सब इतने जल्दी होता है के दोनों को कुछ पता नहीं चलता. हरीश की नज़र जैसे hi वाशरूम की तरफ पड़ती है तो उसकी ऑंखें वहीँ जैम जतिन हैं क्यूंकि मुस्कान जो इतनी गोरी और खूबसूरत जवान एक निघ्त्य में कड़ी थी और नहाने की वजा से उसके गीले बाल टॉवल से लपेटे हुवे और उसके गीले बालों का पानी निचे ारः था जिससे उसकी निघ्त्य का ऊपरी हिस्सा भीग गया था थोड़ा जिसका नतीजा ये हुवा था के उसकी ब्रा के स्ट्रिप्स हलके हलके दिख रहे थे ऊपर से निघ्त्य में मुस्कान का कातिलाना गरदाय हुवा फिगर साफ़ उजागर होरहा था. मुस्कान को देखकर हरीश की हालत तो ख़राब होजाती है क्यूंकि ो तेहरा एक मज़दूर और ऐसा नज़ारा उसने ज़िन्दगी में अपनी आँखों के सामने नहीं देखा था.

ो मुस्कान को ताड hi रहा था के िद्र मुस्कान की नज़र अब हरीश पर पद जाती है और एकदम सतर्क होजाती है और अपने बालों से टॉवल निकल कर खुद पर दाल लेती है और गुस्से से...

Muskan...kon हो तुम??? और यहाँ क्या कर रहे हो???

हरीश भी थोड़ा दर जाता है के कहीं ये कम्प्लेन न कर दे...

Harish...oo ोू मेमसाब मैं ू वाशरूम जाने आया था ो मैं काम कर रहा हूँ आपके घर का ऊपर...

Muskan...lekin बिना बेल्ल बजाये यूँ दरवाज़ा कैसा खोल तुमने..

Harish...memsab माफ़ कीजिए लेकिन दरवाज़ा खुला था इसलिए बिना बेल्ल बजाये अंदर गया..

फिर मुस्कान को ख्याल अत है के हाँ उसने तो धयान hi नहीं दिया उस मज़दूर ाव्रत के जानेके बाद दूर उसने बंद किया या नहीं. अब ो सिचुएशन को समझते हुवे...

Muskan...thik है लेकिन आगे से धयान रखना बेल्ल बजाये बिना मत आईये...

Harish...thik है मेमसाब...

वाशरूम जाकर हरीश फिर वापस काम पर चला जाता है लेकिन उसे मुस्कान वाला सन अभी भी ख्याल ारः था, मुस्कान का ो गोरा कातिलाना जिस्म. ो अपने ख्यालों में डूबा हुवा था के...

"क्या सोच रहा है??"

Harish...kuch नहीं बस ऐसे hi रघु भाई...

Raghu...bata दे क्या करेगा मन में रखके...

हरीश िद्र उदर देखते हुवे रघु को अपने पास बुलाकर...

Harish...raghu भाई मैं अभी निचे गया था न पेशाब करने तब मैंने dekha...(Harish जो कुछ हुवा ो रघु को बता देता है..)

Raghu...sasura का नाती तू तो बड़ा भाग्यशाली nikla....kaisi है मेमसाब...

Harish...kya बताऊँ रघु भाई माखन है माखन हाथ लगावो तो पिघल jaye...lekin हैं मेमसाब किसी तलवार की तरह काट hi रख देंगी...

Raghu...hahaha चल काम करते हैं....

ऐसे hi ो दिन भी गुज़र जाता है. अगले दिन आज़म फिर ऑफिस के लिए निकल जाता है. घंटे बाद मज़दूर काम पर आकर और काम करने लगते हैं. ो सब काम करते हुवे कुछ आधा घंटा हुवा hi था के वहां मुस्कान आजाती है जिसके हाथ में एक ट्रे था जिसमे जूस था. जानकी वहां चली जाती है.

Janki...arey मेमसाब इसकी क्या ज़रूरत थी...

Muskan...koi बात नहीं आप ये सब पि लीजिए...

Janki...dhanywad मेमसाब...

ीदार रघु हरीश से धीमी आवाज़ में...

Raghu...harishhh यही है क्या मेमसाब??

Harish...haa रघु भाई यही है...

Raghu...sachme हरीश तू झूट नहीं बोल रहा था मेमसाब तो एकदम माखन है. देख यार क्या सफ़ेद रंग है मैंने तो ज़िन्दगी में इतनी गोरी नहीं देखि.

Harish...raghu भाई रहने दो मेमसाब ने सुन लिया न तो बवाल होजायेगा.

Raghu...jo भी है लेकिन मेमसाब हैं बड़ी माल...

Harish...raghu भाई चुप होजावो भावनाओं में बह मत जाओ...

Raghu..hahaha...

मुस्कान ट्रे लेकर फिर चली जाती है निचे. िद्र मज़दूर काम में लगे रहते हैं. करीब घंटे बाद...

"अरे जानकी"

उस आवाज़ को सुनकर उदर देखते हैं. मुस्कान एक बुर्के में कड़ी थी हेजाब किये हुवे. हालाँकि उसका चेहरा नहीं दिख रहा था लेकिन आवाज़ से सबको पता चल जाता है के ो मुस्कान hi है. हरीश और रघु की नज़र मुस्कान पर थी. बुर्के में मुस्कान का परफेक्ट फिगर कातिलाना लग रहा था.

Janki...ji जी मेमसाब कहीं जारही हैं..

Muskan...haa ो मुझे कुछ काम है मैं तक़रीबन 2 घंटे में लौट आउंगी. तब तक प्लस एडजस्ट कर लेना अगर किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ी तोह.

Janki..ji जी मेमसाब कोई बात नहीं आप आराम से जाओ.

Muskan..ok

मुस्कान अब मुद कर जाने लगती है और उसका मुड़ना िद्र हरीश और रघु की नज़र सिदा टारगेट पर चली जाती है. बुर्का थोड़ा टाइट होनेकी वजा से मुस्कान की गांड का शेप अछि तरह से नुमाया था. सीढ़ियां उतारते हुवे मुस्कान की गांड की कातिलाना थिरकन. हरीश और रघु की नज़र हटाए नहीं हैट रही थी. दोनों पकडे जाने के दर से नज़रें चुरा चुरा कर देखते रहते हैं जब तक मुस्कान उनकी नज़रों से ओझल नहीं होजाती. मुस्कान स्कूटी चलना जानती थी इसलिए ो लेकर निकल जाती है...

Muskan..hello

Azam..haa मुस्कान बोलो..

Muskan...main ो फरीदा खला के यहाँ जारही हूँ आजाऊंगी 2 घंटे के अंदर और मैंने वर्कर्स को बता भी दिया है...

Azam...chalo ठीक है संभल कर जाना...

Muskan..ji रखती हूँ...

कॉल एंड्स....

2 घंटे अपनी खला के घर गुज़रनेके बाद मुस्कान वापस घर के लिए निकल जाती है स्कूटी लेकर. उदार आज़म ऑफिस में अपने काम पर लगा हुवा था. एक मंच में जॉब की वजा से ो दिन भर बिजी रहता था. उदर उसके घर पर रेनोवेशन का काम जारी था. मुस्कान घर पुहंचकर फ्रेश होकर टीवी देखने बैठ जाती है. ऊपर उसे काम करनेकी आवाज़ आरही थी तभी उसे ख्याल अत है के शाम का वक़्त है उन लोगों चाय hi बनाकर दी जाये. चाय बनाकर ो जानकी को पुकारती है सबको देनेके लिए बोलती है. मुस्कान के ऊपर न आने से हरीश और रघु निराश होजाते हैं. फिर ऐसे hi दिन गुज़र जाता है. शाम में आज़म घर कर काम कर मुज़ाहिरा करता है के कैसा चल रहा है काम. ो काम तो सही कर रहे थे क्यूंकि तिवारी ने बताया था के ो काम ाचा करते हैं. खाना खाकर फिर मुस्कान और आज़म थोड़े वक़्त का सेक्स करके सजाते हैं.

अगली सुबह फिरसे आज़म अपने काम के लिए रेडी होकर निकल जाता है और वहीँ मुस्कान अपने कामों में लग जाती है. काम करनेके बाद ो टीवी देखने बैठ जाती है. मुस्कान अक्सर काम पूरा करनेके बाद hi नहाती थी तो ो थोड़ा टीवी देखने के बाद शावर लेने चली जाती है. तभी मज़दूर भी आजाते हैं ऊपर. मुस्कान शावर ले रही थी के उसे बहार बेल्ल की आवाज़ अति है. ो अंदाज़ा लगाती है के शायद जानकी होगी. मुस्कान निघ्त्य पहन कर अपने बालों में टॉवल लपेट कर वाशरूम से बहार अति है और हलके से दूर खोलती है तो सामने जानकी hi थी.

Muskan..arey ावो जानकी कुछ चाहिए था??

Janki...haan मेमसाब ो मुझे नहीं असल में रघु को पानी चाहिए था.

मुस्कान ने जब दरवाज़ा खोला था तो उसने सिर्फ जानकी पर hi नज़र डाली थी रघु पर नहीं जो दूर से थोड़ा दूर साइड में था. एक मर्द मज़दूर की प्रजेंस का सुनकर मुस्कान जब तक रियेक्ट कर पति तब तक रघु जानकी के साथ खड़ा होजाता है और उसकी नज़र निघ्त्य में कड़ी मुस्कान पर चली जाती है. कल जो नज़ारा हरीश को देखने को मिला था वहीँ नज़ारा आज रघु को मिल रहा था बल्कि उससे भी बेहतर. मुस्कान जो अभी अभी निकली थी शावर लेकर उसके गीले बालों की वजा से पानी की बोंडे उसकी गर्दन और खूबसूरत चेहरे पर आरही थी. ऐसा नज़ारा देख भला कोण न उतावला हो.

पानी की बोंडे मुस्कान के गले से होते हुवे उसके कंधे से निचे उतर रही थी जो उसकी ब्रा स्ट्रैप्स को विज़िबल कर रही थी. मुस्कान को इतना करीब ऐसी हालत में देख रघु तो जैसे पत्थर बन गया था वहीँ मुस्कान जानकी की वजा से एकदम से रियेक्ट भी नहीं कर सकती थी क्यूंकि ो ावक्वार्ड लगता. फिर भी मुस्कान सिचुएशन को सँभालते हुवे...

Muskan...janki तुम थोड़ी देर में ाजावो मैं दे देती हूँ...

Janki...thik है मेमसाब हम चलते हैं...

रघु और जानकी फिर चले जाते हैं वहां से. उनके जानेके बाद मुस्कान दूर बंद करके सोचती है "ये सब क्या होरहा है, जानकी को भी समझना चाहिए अचानक उस आदमी को ले आयी. मुझे ध्यान रखना होगा आगे से. जानकी को बता देती हूँ के आवाज़ लगाकर आया करे जो भी हो और बेल्ल भी"

फिर मुस्कान रेडी होकर मज़दूरों के लिए पानी जानकी के हाथों भिजवाती है. उदर हरीश रघु से बातचीत कर रहा था.

Harish...kya रघु भाई जानकी के साथ निचे गए थे एते hi मेमसाब के घर...

Raghu...arey कुछ नहीं ो पानी गया था..

Harish...sambhal कर रघु भाई पानी के अलावा और कुछ मत मांग लेना उदर हाहाहा...

Raghu...hahahahaha...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 03

दोपहर के वक़्त सब खाना खाने के लिए जाते हैं. मुस्कान भी खाना खाकर आराम करने अपने बैडरूम चली जाती है लेकिन फिर उसे ख्याल अत है के सब मज़दूर तो खाने गए होंगे तो क्यों न एक बार काम देख आया ऊपर से इसलिए ो बहार आकर ऊपर चली जाती है. वहां कोई नहीं था लेकिन उसको कई जगा चीप बीड़ी तम्बाकू के पैकेट दीखते हैं. मुस्कान को ये सब बिलकुल पसंद नहीं था लेकिन उसे पता था ऐसे मज़दूर लोग ज़रूर इन चीज़ों का सेवन करते होंगे. मुस्कान को लेकिन एक बात की ख़ुशी थी के उनके घरका काम अचे से होरहा था जैसे आज़म ने कहा भी था के ये लोग करते हैं.

शाम के वक़्त मुस्कान मज़दूरों के लिए चाय जानकी के हाथ भिजवाती है. जानकी जानेके बाद मुस्कान दूर बंद करने hi वाली थी के वहां रघु आजाता है. रघु एक बिहारी शार्ट हिघ्त का गांजा और कला अधेड़ू उम्र का आदमी था जिसकी थोड़ी तोंद भी निकली हुवी थी. अब ो मुस्कान के सामने खड़ा था तो ो मुस्कान से हिघ्त में थोड़ा काम hi था. उसे देख मुस्कान पहले तो थोड़ा उनकंफर्टबले फील करती है लेकिन फिर ो जानती थी के ो एक मज़दूर है जो उनके hi घरका काम कर रहा था इसलिए नार्मल होजाती है.

Muskan...ji बोलिये कुछ चाहिए??

Raghu...memsab ो मुझे संडास जाना ही..

मुस्कान जिसको संडास का नहीं पता था ो थोड़ा कंफ्यूज होजाती है और रघु तेहरा एक बिहारी जो अपनी आवारा भाषा में ो बोल रहा था.

Muskan...san नं दास मतलब??

Raghu...oo मेमसाब वषह रूम..

मुस्कान वाशरूम की तरफ इशारा करते हुवे बता देती है और खुद टीवी देखने बैठ जाती है. रघु थोड़ा बोहत घरका जायज़ा लेते हुवे वाशरूम चला जाता है. उसके बाद रघु बहार अत है और देखता है के मुस्कान टीवी देखने में बिजी है. सोफे पर बैठे होनेकी वजा से उसको मुस्कान का सिर्फ सर नज़र ारः था. ो िद्र उदर देखता है के कुछ दिखा जाये लेकिन उसे ये भी पता था के एक गलती और उसकी छुट्टी थी. इसलिए ो वहां से चला जाता है. ऐसे hi ो दिन भी गुज़र जाता है.

अगले दिन आज़म के काम पर जानेके बाद मुस्कान आज मज़दूरों के लिए जूस प्रेपर करती है फिर काम फिनिश करने के बाद नहाने के लिए बाथरूम जाने hi वाली थी के उसे बेल्ल की आवाज़ अति है. ो सोचती है इस वक़्त कोण होगा मज़दूर नहीं होसकते क्यूंकि ो काम हैरोज़ 10 बजे शुरू करते हैं तो 9 बजे भला कोण होगा. कंधे पर टॉवल लिए हुवे hi मुस्कान दूर खोलती है तो सामने रघु को देखती है. सुबह इतने जल्दी आखिर ये यहाँ क्या कर रहा है. मुस्कान थोड़ा सुरप्रीसेड होती है.

Muskan..tum इस वक़्त?? आज जल्दी काम शुरू कर रहे हैं क्या??

Raghu..arey नहीं मेमसाब असल में मैं अकेला आया हु पहले. ो क्या है न मुझे शाम में जल्दी जाना है आज इसलिए एक घंटा पहला काम करके चला जाऊंगा..

Muskan...o अच्छा...

Raghu...memsab ू मुझे आपकी मदद चाहिए थी छोटी सी...

मुस्कान थोड़ा चौंकते हुवे...

Muskan..meri मदद!? कैसी??

Raghu...arey मेमसाब घबराईये मत बस ऊपर काम की जगा पर अपने बस थोड़ी देर के लिए स्टूल पकड़ना है. ो कोई है नहीं न इसलिए. अगर आप करना चाहें तो वर्ण रहने दिज्ये...

Muskan...thik है पकड़ना hi तो है..

Raghu...ji मेमसाब...

दोनों ऊपर चले जाते हैं. वहां एक स्टूल लेकर रघु उसे एक दीवार के किनारे रख देता है और मुस्कान को उसे पकड़ने बोलकर खुद उसपर चढ़कर कुछ काम करने लगता है. मुस्कान को रघु से बीड़ी की स्मेल आरही थी ो समझ जाती है उसने बीड़ी थोड़ी देर पहले पि होगी लेकिन मदद करने के लिए ो चुप रहती है. रघु काम करते हुवे चोरी छुपे निचे देखने की कोशिश कर रहा था मुस्कान की तरफ जिसने इस वक़्त निघ्त्य पहनी हुवी थी लेकिन साथ दुपट्टा भी था. दुपट्टा ओढ़ने के बावजूद भी मुस्कान की गर्दन दिख रही थी, उसने पोनी टेल में बंधे हुवे थे. ऊपर से रघु मुस्कान की छाती पर नज़र गड़ाए हुवे था क्यूंकि दुपट्टा पहनके बावजूद भी मुस्कान अपने आम के उभर नहीं छुपा प् रही थी और उसी पर रघु की नज़र थी जैसे ो स्कैन कर रहा हो. रघु को यूँ ताड़ना अभी तक मुस्कान की नज़र में आया था ो तो इस बात से बिलकुल बेखबर थी तभी अचानक से ो ऊपर देखती है तो दोनों की नज़र मिलती है जिससे रघु वापस काम करने लगता है.

तभी मुस्कान को निचे घरसे उसके मोबाइल की रिंग सुनाई देती है...

Muskan...mera फ़ोन बज रहा है मुझे जाना होगा...

रघु अब स्टूल पर से उतर...

Raghu....thik है मेमसाब मदद के लिए धन्यवाद...

मुस्कान फिर मुड़कर सीढ़ियां उतारकर जाने लगती है. उसके उतारते वक़्त उसकी निघ्त्य में गांड के दोनों फांकों का ीदार उदर मचलना रघु अपनी नज़र उदर hi गड़ाए हुवे रहता है. इस सन को देखकर निचे उसकी पंत में अछि खासी हलचल होरही थी.

Muskan..hello हां बोलिये..

Azam..kidr थी यार 2 बार कॉल क्र चूका हूँ..

Muskan...sorry ो मैं ऊपर गयी थी...

Azam..kyun वहां किस लिए?? इतनी सुबह..

Muskan..o क्या है न उनमे से एक मज़दूर आज सुबह जल्दी आज्ञा था क्यूंकि उसने शाम में जल्दी जाना था तो ो छोटी सी हेल्प मांग रहा था स्टूल पकडनेकी तो वही करने गयी थी...

Azam..acha ाचा और नाश्ता कर लिया..??

Muskan...haa कबका

Azam...acha ो मैंने कॉल किया था..

यूँ hi पति पत्नी थोड़ी देर बातें करते रहते हैं. कॉल रखने के बाद मुस्कान अपना मोबाइल लेकर वहीँ सोफे पर बैठ जाते है. आधे घंटे बाद उसे वर्कर्स के अनेकी आवाज़ अति है तो ो जानकी को बुलाती है...

Janki...memsab ो आपसे एक बात करनी थी...

Muskan...haa बोलो जानकी..

Janki..memsab ो आपको तो पता है इस मज़दूरी के काम से थोड़ी बोहत कमाई होजाती है लेकिन घरमें खर्चे इतने हैं के क्या बताऊँ इसलिए अगर मैं आपके घरके थोड़े बोहत काम कर लूँ तो आपको ऐतराज़ तो नहीं है न उसके बदले आप काम के ख़तम होते hi थोड़े पैसे मुझे दे देना. मैंने तिवारी साहब के यहाँ भी काम किया था...

मुस्कान को जानकी पर तरस ारः था. ो जानती थी के लोगों को क्या क्या करना पड़ता है पैसा कमाने के लिए...

Muskan..lekin तुम िद्र घरका काम करके ऊपर कैसे काम करोगी फिर??

Janki...memsab उसकी चिंता नहीं है रमेश से मैंने बात की है अगर आप चाहें तो ो मुझे आधा दिन उदर और आधा दिन िद्र काम करने दे देगा बस काम ख़तम होने तक...

Muskan...achaa..mujhe उनको पूछ लेने दो मैं तुमको बता दूंगी...

Janki..ji ठीक है मेमसाब बोहत बोहत धन्यवाद...

जानकी के जानेके बाद मुस्कान आज़म को कॉल लगाती है. और बात बताती है. थोड़ी बोहत कन्विंसिंग के बाद ो भी मन जाता है. जानकी को बतानेके बाद ो भी खुश होजाती है.

Janki...memsab फिर मैं आजसे hi काम शुरू कर देती हूँ...

Muskan...thik है..

दोपहर के वक़्त सब खाना खाने चले जाते हैं. वहीँ मुस्कान घरपर खाना खाकर बैडरूम चली जाती है रेस्ट करने और वहीँ उसकी नींद लग जाती है. 1.5 घंटे बाद उसकी बेल्ल की आवाज़ से नींद खुलती. जाकर देखती है तो जानकी थी.

Janki...memsab ो खाना खाकर कबका आगयी थी मैं बेल्ल भी बजायी लेकिन शायद आप सोढ़ी थी इसलिए आवाज़ नहीं आयी..

Muskan..haa ो मुझे नींद लग गयी थी...

Janki...to मेमसाब कोई काम है तो बता दिज्ये मैं कर देती हूँ..

Muskan..haa ो कुछ बर्तन है फिलहाल वही करलो..

Janki...thik है मेमसाब..

मुस्कान के कहे अनुसार जानकी घरके काम में लग जाती है. बर्तन धोकर ो झाड़ू कतका भी कर देती है. उसे पता था ये बड़े लोग काम से खुश होजाये तो अचे पैसे भी दे सकते हैं. जानकी का काम देखकर मुस्कान भी खुश होती है. इसी तरह दिन गुज़रने लगते हैं...

घर के रेनोवेशन का काम स्टार्ट हुवे हफ्ता होचुका था और काम ज़ोरों शूरों से चल रहा था. आज़म भी काम की फ़ास्ट प्रोग्रेस देखकर इम्प्रेस्सेड था.

वैसे hi एक दिन दोपहर के वक़्त खाना खाने के बाद सब वर्कर्स चुके थे काम पर और जानकी निचे मुस्कान से जिसकी अब अछि बनने लगी थी ो वहां चली जाती है. हर रोज़ की तरह ो थोड़े बोहत बर्तन साफ़ करने में लगी थी और मुस्कान अपने बैडरूम में आराम कर रही थी. जानकी को तभी दूर से कोई आवाज़ देता है तो ो वहां जाती है तो सामने रघु खड़ा था.

Janki...haa रघु कुछ काम था??

Raghu...janki ो मुझे संडास जाना है...

Janki...haa तो जा उदर है...

जानकी वाशरूम की तरफ इशारा करते हुवे बोलती है और खुद किचन चली जाती है. रघु दूर बंद करके वाशरूम जाने लगता है. जाते हुवे उसकी नज़र बैडरूम पर पड़ती है जिसका दूर बंद था जिसे देख ो निराश होजाता है. फिर ो िद्र उदर देखता है के कहीं कुछ हो लेकिन कुछ खास नहीं दीखता उसे. घरका वाशरूम और बाथरूम दोनों अटैच्ड hi थे हॉल से इसलिए दोनों डोर्स साइड बी साइड थे. रघु वाशरूम के बगल में hi बाथरूम के दूर से अंदर कुछ सोच कर चला जाता है...

अंदर ो िद्र उदर नज़र डालता है. उदर कोई शाम्पूस, सोप और कई शावर की चीज़ें राखी हुवी थी लेकिन फिर उसकी नज़र एक तरफ पड़ती है जिससे उसकी ऑंखें चमक जाती हैं. उसको जैसे कोई खज़ाना मिल गया हो. रघु उस चीज़ की तरफ बढाकर उसे अपने हाथ में लेता है. ो चीज़ थी ब्रा, विथाउट ा डाउट मुस्कान की ऐसे रघु सोचता है. एक मैरून कलर की सिल्क कपडे वाली ब्रा. रघु अपने काळा हाथ उस सिल्क ब्रा पर फेरना लगता है. उसके फैब्रिक को फील करते हुवे ो ब्रा कप्स को धीरे धीरे दबाने लगता है. जैसे ो मुस्कान के hi आम दबा रहा हो. फिर ो ब्रा के अंदरूनी साइड कुछ ढूंढ़ने लगता है और ो एक छोटे से कपडे के टैग पर गौर करने लगता है. "36 डी"

रघु...36! देखकर लगता तो नहीं आखिर छुपकर जो रखती है. जैसा गोरा रंग है इसके आम क्या hi लगते होंगे और निप्पल! सोचकर hi खड़ा होगया मेरा तो ससुरा का नाती.

Janki...raghuuu हुवा या नाहीइ कितनी देर लगा रहा ही...

जानकी की आवाज़ सुनकर रघु वापस मुस्कान की ब्रा वहीँ पर रखकर बहार अत है ऐसे प्रिटेंड करता है जैसे ो वाशरूम से आया हो...

Raghu...janki चाय मिलेगी क्या...

Janki..haa लेकिन बादमे अब जा काम पर...

शाम में काम ख़तम होनेके बाद सब वर्कर्स चले जाते हैं. आज़म ऑफिस से घर आकर डिनर करने के बाद बीवी मुस्कान के साथ फिल्म देखने बैठ जाता है.

Azam..acha मुस्कान मैं बताना भूल गए प्रसून मैं 3-4 दिन के लिए आउट ऑफ़ टाउन जारहा हूँ...

Muskan...kyun?? मैं कैसे अकेली रहूंगी??

Azam...o ऑफिस के काम से जारहा हूँ और अकेली नहीं रहोगी. मैं उस रमेश से बात की है के ो उन 3-4 दिनों में ो अपना काम रत तक कंटिन्यू करे और ो मन भी गया है बस ये है के रत में उनको एक बार चाय देने पड़ेगी वर्ण नींद आजाती है न. बाकि जानकी भी तो होगी न.

Muskan..hmm ठीक है जानकी होगी..

Azam..haa...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 04

दोनों मिया बीवी फिर थोड़ा सेक्स करके सजाते हैं. अगली सुबह रोज़ की तरह ब्रेकफास्ट करके आज़म ऑफिस के लिए निकल जाता है. बादमे वर्कर्स अनेके बाद मुस्कान जानकी को बुलाकर पानी दे देती है.

ऊपर काम चल रहा था तब आधे घंटे बाद रघु काम करते हुवे देखता है के मुस्कान घर के बहार टहल रही है. उसने एक सलवार कमीज़ पहनी हुवी थी पिंक कलर की. रघु की नज़र मुस्कान के आमों पर चली जाती है कल यद् करते हुवे जब उसने मुस्कान की ब्रा हाथ में ली थी. ब्रा के कप साइज का यद् करके hi रघु का मन होरहा था जेक जोरसे मसल दे मुस्कान के रसीले आम. मुस्कान टहलते हुवे उनके लगाए हुवे पौदों के पास जाती है और उदर कुछ फेंकने के लिए झुकती है तो उसकी गांड पीछे से उठ जाती है. रघु की तो हालत खराब होजाती है ये देख कर. ो अपना लौड़ा पंत में मसलता है सब से नज़र छुपकर.

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झुकी होने की वजा से पीछे गांड पर कपडा टाइट होचुका था जिससे उसकी गांड के दोनों फैंको का शेप थोड़ा बोहत नज़र ारः था. जाने अनजाने में मुस्कान रघु को उकसा रही थी. वहां से उठने के बाद मुस्कान फूल के पौदों को पानी देने लगती है. तभी वहां जानकी आजाती है.

Janki...arey मेमसाब मुझे दिज्ये मैं कर देती हूँ..

Muskan..arey नहीं रहने दो जानकी तुम जाकर काम करो. पौदों को पानी hi तो देना है ो कर लुंगी मैं.

Janki...aap क्यों तकलीफ करती है मेमसाब मैं कर देती हूँ...

Muskan...janki इसमें तकलीफ कैसी मैं तो पहले भी करती रही हूँ ये..

Janki...thik है memsab...o रमेश बोल रहा था कैसे रत तक काम करना होगा क्यूंकि साहब कहीं जारहे हैं.

Muskan..haa ो बोल रहे थे कल मुझे...

Janki...aap फ़िक्र मत कीजिए मेमसाब मैं हूँ न इसी बहाने आपसे थोड़ी बोहत बात भी होजायेगी और काम भी.

Muskan..haa ो तो सही है...

ऐसे hi दोपहर होजाती है सब खाना खाकर वापस अभी जाते हैं. मुस्कान घरमे टीवी देख रही थी क्यूंकि उसको नींद नहीं आरही थी. टीवी देखते देखते उसको नींद यही रही थी के बेल्ल की आवाज़ से उठ जाती है. जानकी चाय लेने आयी थी. चाय बनाने में जानकी भी मुस्कान की हेल्प करती है. फिर कुछ खास नहीं होता. शाम में मज़दूर वापस चले जाते हैं. रत में आज़म घर आकर खाना खाने के बाद मुस्कान उसका बैग रेडी कर रही होती है तब आज़म पीछे से उसे बाँहों में लेता है.

Muskan...rehne दिज्ये जारहे हैं न कल मुझे छोड़कर..

Azam...bas 4 दिन की hi तो बात है आजाऊंगा वापस बोलो क्या लॉन वापसी पर..

Muskan...maska लगाना तो कोई आपसे sikhe..mujhe कुछ नहीं चाहिए बस ाजावो आप जल्दी...

Azam...ajaunga बाबा अब अपने शोहर को एक रोमांटिक सा किश तो दो..

Muskan...nahi शोहर मुझे आपका बैग पैक करना है...

Azam...thik है भाई कर लो बादमे करते हैं.

मुस्कान भी स्माइल के साथ उसका बैग पैक करने लगती है. आधे घंटे बाद जब काम होजाता है तो दोनों बीएड पैर आकर लेट जाते हैं. शोहर बीवी बिच रोमांस चलता है. दोनों की लाइफ अछि चल रही थी no डाउट. दोनों एकदूसरे से प्यार भी बोहत करते थे. बस कमी बस बचे की थी और ो बात दोनों को टाइम तो टाइम खलती भी थी. ऐसा नहीं था के दोनों तरय नहीं कर चुके हैं. तरय करनेके बाद भी लक अब तक नहीं था उनका बस इसी उम्मीद में हैं के कुछ कपल्स के लेट बचे होते हैं शायद उनमे से ो भी एक हों. रोमांस के बाद सेक्स करके फिर शोहर बीवी सजाते हैं.

अगले सुबह आज़म ब्रेकफास्ट सब करके जाने के लिए रेडी होजाता है फिर अपनी बीवी से अलविदा लेकर चला जाता है. मुस्कान को पता था उसने 4 दिन बोर होजाना है बस जानकी होगी तो थोड़ा बोहत अकेलापन बातचीत से दूर होगा. मुस्कान आज जल्दी hi नहाकर रेडी होती है और नाश्ता करके घरके कामों में लग जाती है. घंटे बाद वर्कर्स भी आजाते हैं काम पर. अस उसुअल जानकी आकर पानी लेजाती है ऊपर. दोपहर से शाम तक उसुअल्ल्य सब कुछ होता. आज मज़दूरों ने रत तक भी काम करना था इसलिए सब शाम के वक़्त रेस्ट करने बैठ जाते हैं. जानकी मुस्कान के साथ घरमे थी सब के लिए जूस बना रही थी बातें करते हुवे. जूस बनानेके बाद जानकी सबको ो देती है. जूस पिटे हुवे रघु देखता है के मुस्कान अपनी स्कूटी निकल रही थी कहीं जानेके लिए उसने बुर्का पहना हुवा था. वहीँ मुस्कान शाम के वक़्त घरसे थोड़ी हवा खाने के लिए निकल रही थी. स्कूटी निकल कर मुस्कान निकल जाती है. रघु घर के दूर की तरफ देखता है तो ो बंद था.

Raghu..umm जानकी दरवाज़ा खुला है क्या??

Janki..kyun??

Raghu...o संडास रूम जाना है..

Janki..han हाँ खुला है..

रघु फिर अंदर चला जाता है असल में वाशरूम जाने आया hi नहीं था ो तो कल की तरह बाथरूम में कुछ मिलनेकी उम्मीद से आया था. ो सीधा बाथरूम चला जाता है. वहां जाकर उसे इसबार कुछ भी लटका हुवा नहीं मिलता. निराशा के साथ ो वापस जाने लगता hi है के उसे साइड में hi एक बकेट दिखती है जिसमे देखने पर उसे अंदर ब्लैक कलर की ब्रा और पंतय दोनों मिलते हैं जो मुस्कान ने सुबह निकले थे. रघु ये देखकर देविलिश स्माइल करता है. ो ब्रा पंतय उठाकर अपनी नाक के पास लेजाकर सूंघता है. मुस्कान के जिस्म की खुशबु उसे जैसे नशा दे रही थी. ो ब्रा कप्स के अंदर सूंघता ये सोचते हुवे के मुस्कान के गोर चुके इन्ही में समाते होंगे.

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कल जब मुस्कान स्टूल पकडे हुवी थी तो ो उसको ताड रहा था तो यही ब्रा मुस्कान के आमों का सम्भले हुवी थी. रघु ये सब ब्रा सुंघते हुवे सोच रहा था. उसका लौड़ा करवट ले चूका था मुस्कान के बारे में सोचते hi. ब्रा बकेट में डालकर अब ो मुस्कान की पंतय को देखता है. ो सोचता है सुबह जब मुस्कान सीढ़ी से उतरती रही थी तो उसकी गांड की फांकें इसी पंतय में िद्र उदर मचल रहे होंगे.

रघु अब पंतय का अगला हिस्सा सूंघता है और वहां की खुशबु सूंघते hi जैसे उसका लौड़ा अकड़ सा जाता है डंडे की तरह ये सोचकर की मुस्कान की सहादशुदा छूट यहीं टच होती होगी. रघु अपना लौड़ा पंत के ऊपर से अब रगड़ने लगता है. उसे बर्दाश्त नहीं होरहा था मुस्कान की ब्रा पंतय को देखकर hi. ो अपने ख्यालों में डूबा hi हुवा था के उसे बहार से स्कूटी की आवाज़ अति है मतलब मुस्कान वापस आगयी थी. रघु जल्दी से पंतय भी बकेट में दाल देता है और बहार आकर जल्दी से वाशरूम में चला जाता है.

थोड़ा नार्मल होनेके बाद ो वाशरूम से बहार निकलता है और एकदम से बहार जाने hi लगा था के सामने मुस्कान दूर खोलकर जस्ट आरही थी तो दोनों टकरा जाते हैं. दोनों कुछ समझ पते इससे पहले hi ो बैलेंस खोकर गिर जाते हैं.

मुस्कान पीठ के बल गिरी थी और रघु सामने से. गिरते hi अनजाने में रघु का सर मुस्कान के आमों पर टकरा जाता है जिससे उसे मुस्कान के चुके अपने सर पर बखूबी फील होते हैं. रघु गिरा हुवा hi मुस्कान को देखता है जो बुर्के में थी. इतना करीब ो मुस्कान को लिटेराल्ल्य स्कैन करने लगता है. मुस्कान का कातिलाना फिगर उसके बुर्के में अचे से दिख रहा था ो भी इतना करीब से.

Muskan..ouchh ोुछ आए...

ो खुद को सँभालते हुवे उठ जाती है और अपना बुर्का झटकते हुवे...

Muskan...andhe हो क्या?? किदर देख कर चल रहे हो??

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रघु मुस्कान को गुस्सा होता देख उठ जाता है और सिचुएशन को सम्भालनेकी कोशिश करते हुवे. उठनेके बाद अब जब दोनों खड़े थे तो रघु मुस्कान से हिघ्त में काम था इसलिए मुस्कान को थोड़ा सा निचे देखना पद रहा था बात करते वक़्त.

Raghu...arey माफ़ कीजिए मेमसाब मैंने आपको देखा नहीं एते हुवे. मैं ो संडास गया था जल्दबाज़ी में जारहा था तो टकरा गया.

Muskan...lekin देखकर चलना चाहिए न..

मुस्कान के चेहरे पर फ़्रस्ट्रेशन साफ़ था.

Raghu...maaf कर दिज्ये मेमसाब मैं देखा नहीं आपको..

Muskan...thik है ठीक है आइंदा से धयान रखना..

Raghu...ji मंसबब...

रघु फिर वहां से चला जाता है. बहार आकर ो अपने सर पर हाथ लगता जहाँ उसने मुस्कान के आम फील किये थे. बहार सब बैठे हुवे थे. रघु जाकर उदर hi बैठ जाता है.

Janki...raghu कितनी देर लगा दी अंदर मेमसाब ने कुछ बोलै नहीं...

रघु को hi पता था के थोड़ी देर पहले क्या हुवा लेकिन ो उस इंसिडेंट का ज़िकर नहीं करता...

Raghu...haa ो थोड़ा लम्बा टाइम लग गया. नहीं मेमसाब ने कुछ नहीं बोलै...

रेस्ट करनेके बाद सब वापस काम पर लग जाते हैं. आज उनको रत तक जो काम करना था. बादमे खाने के वक़्त सब चले जाते हैं. इसी बिच मुस्कान भी िद्र खाना खाकर बोर दूर करनेके लिए टीवी देखने बैठ जाती है. तब तक बहार खाना खाकर सब वापस अभी जाते हैं.

सब वापस काम पर लग जाते हैं. इसी बिच मुस्कान चाय बनाकर जानकी के हाथों भिजवाती है. उसके बाद कुछ खास नहीं होता. उसुअल काम चलता है और सब चले जाते हैं वापस.

अगली सुबह सबके काम पर अनेके बाद मुस्कान सबके लिए पानी जानकी के हाथों भिजवाती है.

Muskan..acha जानकी मुझे ो किचन में शेल्फ के ऊपर से कुछ निकलना था सीडी ले ौगी थोड़ा.

Janki..le अति मेमसाब लेकिन ो काम चल रहा है. एक काम करती हूँ किसी को ले अति हूँ मदद के लिए.

Muskan..haa प्लस..

जानकी जाकर देखती है वहां रघु hi थोड़ा वेला बैठा हुवा था इसलिए ो उसके पास जाती है.

Janki...arey रघु ो एक काम था.

Raghu...kaisa काम?

Janki...o मेमसाब हैं न उनको किचन में माले से कोई चीज़ निकालनी थी तू मदद कर देना...

ये सुनते hi रघु के मन में लड्डू फूटने लगते हैं. ो तुरंत hi माँ जाता है..

Janki...lekin ो माला थोड़ा ऊपर तू कैसे चढ़ेगा उदर...

Raghu...arey सीढ़ी है न

Janki...seedhi पर तो काम चल रहा है...

Raghu...haa लेकिन कोई स्टूल होगा न घर में..

Janki..haa होगा तू जा जाकर देख मेमसाब उदर hi हैं...

रघु की तो चंडी जैसा निकल आयी थी. ो तो मौके की तलाश में रहता है के कैसे भी मुस्कान देखने मिल जाये. ो फिर चला जाता है udr...muskan पहले तो कल के इंसिडेंट की वजा से थोड़ा वेइरेड फील करती है लेकिन कुछ नहीं बोलती...

Raghu...memsab कोई स्टूल तो होगा न घरमे..

Muskan...haa है ो मैं लती हूँ...

Raghu...arey मैं ले अत हूँ मेमसाब बताइये किदर है

Muskan...o रूम में है..

मुस्कान फिर उसके बैडरूम का दूर ओपन करके देती है. पहली बार रघु ो बैडरूम देख रहा था. क्या मस्त महक आरही थी. बैडरूम वेल मैनटैनेड रखा हुवा था. रूम की हर चीज़ जगा पर राखी हुवी थी. रघु बीएड की तरफ घूरे जारहा था....

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Raghu...kya मस्त खटिया है साला...

Muskan..kya ः??

Raghu..ohh आ कुछ नहीं मेमसाब..

Muskan..kya हुवा? ो रहा स्टूल..

Raghu...han ो स्टूल..

रघु फिर स्टूल लेकर किचन में चला जाता hai...wahan मुस्कान उसे ो शेल्फ का बताती है.

रघु की हिघ्त हालाँकि मुस्कान से थोड़ी काम थी जो मुस्कान को hi अजीब लग रहा था के ये उससे शार्ट आदमी कैसे कर लेगा. लेकिन रघु अब स्टूल पर चढ़ जाता है और शेल्फ के ऊपर हाथ डालने लगता है लेकिन उसका हाथ नहीं पोहच रहा था. जिसे देख मुस्कान को हलकी सी हंसी अति है जिसे रघु सुन लेता है..

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Raghu...kya हुवा मेमसाब??

Muskan...kuch नहीं ऐसे कैसे निकलोगे ो तुम्हारा तो हाथ भी नहीं पोहच रहा है..

Raghu...arey मेमसाब हिघ्त काम है मेरी लेकिन मैं ऐसी ऐसी चीज़ें कर लेता हूँ जो अचे अचे मुस्टंडे लोग नहीं कर सकते.

मुस्कान को उसकी बात समझ नहीं अति..

Muskan...kya मतलब..??

Raghu...mere पास ऐसे हतियार हैं के मैं अचे ाचों का पानी निकल सकता हूँ..

Muskan...kya मतलब है तुम्हारा...??

मुस्कान जो टोटली कन्फ्यूज्ड थी रघु की बातों पर. उसे कुछ समझ नहीं ारः था के रघु क्या बोल रहा है इसलिए ो रघु की बातें हंसी मज़ाक में ले रही थी.

Raghu...memsab मैं न अचे ाचों को बेहाल कर देता हूँ अपने हथियार से...

रघु ये बात मुस्कान को ऊपर से निचे तक देखते हुवे बोलता है...

Muskan..hahahah ऐसा कोनसा हतियार है तुम्हारे पास...??

Raghu...o ऐसा हतियार है उस जैसा आपके पति के पास होना असंभव है...

अपने शोहर ज़िकर होता देख मुस्कान थोड़ा सीरियस होती है..

Muskan...kya मतलब है तुम्हारा? तुमको पता है मेरे शोहर ऐसे हैं के किसी को भी धूल छठा दें...

Raghu...hahaha धूल छठा कर क्या करना है memsab...uske अलावा ऐसी बोहत साडी चीज़ें हैं जो आपके पति मैं दावे के साथ बोल सकता हूँ नहीं करसकते मेरी तरह...

Muskan...ye क्या बकवास कर रहे हो? मेरे पति को देखा है तुमने ो तुमको 1 मिनट में चित कर देंगे...

Raghu...arey मेमसाब मैंने लड़ाई झगडे की बात hi कब की है..

रघु की बातों को मुस्कान समझ hi नहीं पढ़ी थी ो उसके डबल मीनिंग बातिओं से अनजान थी. मुस्कान को अबतक रीलीज़ नहीं हुवा था के एक मामूली सा मज़दूर उससे कैसी बातें कर रहा है...

Raghu...rehne दिज्ये मेमसाब आप नहीं सम्झिन्गी....

मुस्कान थोड़ा कन्फ्यूज्ड कड़ी थी वहां...

Raghu...memsab पकड़िए...

रघु ये बात जान बूझकर अपना एक हाथ निचे पंत पर रखते हुवे बोलता है. जिसे मुस्कान अनजाने में hi देखती है लेकिन अनजाने में hi पूछ भी बैठती है..

Muskan..kya??

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Raghu..kya पकड़ा दूँ मेमसाब आपको...

मुस्कान रघु को देखती है जिसके काळा चेहरे पर एक गन्दी सी स्माइल थी.

Muskan...kya कहाँ तुमने??

Raghu...memsab ो स्टूल पकड़िए थोड़ा ऊपर है न कहीं गिर न जॉन...

Muskan..thik है..

मुस्कान स्टूल पकड़ती hai...raghu अपनी एड़ियों पर रहकर ऊपर से ो चीज़ निकल देता है.

Raghu...ye रही मेमसाब आपकी चीज़...

Muskan...shukriyaa..

Raghu...arey इसमें कैसा शुक्रिया मेमसाब्ब्ब्ब...

रघु फिरसे मुस्कान को ऊपर से निचे एक बार देखता है मुस्कान से थोड़ी नज़रें churakar...utrne के बाद रघु किचन के दूर से जा hi रहा था के..

Muskan...ye स्टूल तो रख दो...

Raghu...arey हाँ मेमसाब रखता hun...ek गिलास पानी मिलेगा??

Muskan..haan क्यों नहीं..

रघु स्टूल रूम में रख अत है और किचन के दूर पर जाकर खड़ा होजाता है. मुस्कान उसे पानी देती है और अपने रूम जाने लगती है. दूर पर खड़े होनेकी वजा से जगा थोड़ी काम थी इसलिए जब मुस्कान जाने लगती है तो रघु थोड़ा पीछे एक पल के लिए होता है लेकिन पता नहीं कहाँ से हिम्मत जोड़कर मुस्कान के दूर से जाते हुवे hi थोड़ा आगे होजाता है. मुस्कान जो थोड़ा रघु की तरफ पीठ किये हुवे जाती थी उसको रघु पीछे से जाते हुवे hi टच होता है. लेकिन टच के साथ मुस्कान कुछ ऐसा फील करती है जिससे उसकी जैसा रोह hi हिल जाती है.

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मुस्कान ने आज एक सूट पहना हुवा था ग्रीन कलर का और उसको जाते हुवे अपनी गांड पर कुछ फील होता है. ो एक शादीशुदा ाव्रत थी और उसे पता था ो क्या चीज़ थी. ओह एक बार रुकने का सोचती है लेकिन सिचुएशन कितनी ावकार्ड होसकती है और ये अनजाने में हुवा सोचकर जाने लगती है लेकिन..

Raghu...arey मेमसाब आपके घरमे कोई बचे नज़र नहीं एते...

Muskan...nahi हैं..

Raghu..kyun मेमसाब कितने साल होगये आपकी शादी को??

रघु ये सब बातें मुस्कान की गांड की तरफ घूरते हुवे बोल रहा था...

मुस्कान थोड़ा फ़्रस्ट्राटे होते हुवे..

Muskan...tumko उससे मतलब तुम अपने काम से काम रखो..

Raghu...arey मेमसाब आप तो बुरा मन gayi...maaf कीजिएगा...

मुस्कान बिना कुछ बोले hi जाने लगती है अपने रूम में...

Raghu...waise मेमसाब मेरे 7 बचे हैं गौण में...

मुस्कान रघु की बात सुनकर हैरान होजाती है और मन में hi सोचती है.." 7 बचे!!! बैरी"

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मुस्कान जो उदर घूमी हुवी थी उसे नहीं पता था के रघु की नज़र इस वक़्त उसकी गांड पर है और साथ में ो अपना लौड़ा भी पंत के ऊपर से रगड़ रहा था...

Muskan...acha ठीक है..

उतना बोलकर मुस्कान रूम में चली जाती है. जाते हुवे रघु मुस्कान की िद्र उदर मटकती हुवी गांड की फैंको को देखना नहीं भूलता...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 05

वहां से निकलने के बाद रघु अपने लौड़े पर महसूस हुवे मुस्कान की गांड के अहसास का सोच रहा था. जिस घर का काम करने ो आया था ो वहीँ के मालिक की जवान बीवी के साथ फ़्लर्ट करने में लगा हुवा था. लेकिन उसे ये भी पता था भले hi ो थोड़ी देर पहले मुस्कान के पास डबल मीनिंग बातें करके आया था लेकिन मुस्कान है बड़ी तीखी मिर्ची अगर उसे ज़रा सी भी भनक पड़ी तो अंजाम बुरा होगा.

रघु अब वापस काम करने चला जाता है. उदर मुस्कान अपने बैडरूम में बीएड पर लेती हुवी कुछ सोच रही थी.

Muskan...anjane में हुवा होगा ज़रूर नहीं तो उसकी इतनी हिम्मत कहाँ. और ो है भी गवर पता नहीं कैसी कैसी बातें कर रहा था. बोलता है अचे ाचों का पानी निकल देता हूँ? उसके पास कोई हतियार है ऐसा! और क्या बोल रहा था? हाँ, बोलता है जो ो कर सकता है ो मेरे शोहर नहीं कर सकते! कहाँ मेरे शोहर और कहाँ ो! हाहाहा ज़रूर पगला गया होगा ो.

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उसके 7 बचे हैं!!! बैरी इतने साड़ी!!! पता नहीं उसकी बीवी ने कैसे ये sab...sochkar hi अजीब लग रहा है...

मुस्कान बीएड पर बैठे बैठे hi थोड़ी देर में वहीँ सोजती है. दोपहर में उसकी नींद खुलती है फिर ो खाना खाकर बहार हॉल में बैठ जाती है. लेकिन उसे वहां बोर होरहा था इसलिए ो बहार अति है तो देखते hi सब वर्कर्स खाना खाने गए हुवे हैं. फिर ो काम का प्रोग्रेस देखने के लिए ऊपर जाती है. मुस्कान उदर hi टहल रही थी काम को देकते हुवे. उसे तक़रीबन वहां 10 मिंट होचुके थे के. ो टहलते हुवे एक कमरे में जाती है...

तभी वहां कोई मज़दूर अत है जो खाने के बाद थोड़ा रेस्ट करनेके लिए अपना शर्ट निकलता है. मुस्कान इस बात से अनजान थी के वहां कोई आया हुवा है. ो मज़दूर वहीँ खड़ा होकर बीड़ी फूंकने लगता है. मुस्कान तभी उस रूम से निकलती है तो बहार उसे ो शख्स दीखता है. और कोई नहीं रघु था. रघु की पीठ मुस्कान के और थी और ऊपर शर्ट निकलने की वजा से उसके काळा शरीर पर पीछे मुस्कान को उसकी पीठ पर बाल hi बाल नज़र एते हैं. और उसकी पीठ पर धुप में चलकर अनेकी वजा से पसीना आया हुवा था.

मुस्कान को थोड़ी घिन सी अति है उसे देखकर. बाल और पीठ पर पसीना. मुस्कान वहां से जाने लगती hi है के रघु िद्र घूम जाता है और ो खुद बी सरप्राइज होता है मुस्कान को देखकर.

Raghu...arey मंसबब आप!!

मुस्कान भी एकदम रुक जाती है. सिचुएशन ावक्वार्ड थी क्यूंकि ो एक मज़दूर के सामने कड़ी थी जो बिना शर्ट के था. मुस्कान की नज़र रघु पर जाती है. जैसे उसकी पीठ पर बाल थे वैसे hi उसकी छाती पर भी बालों का गुच्छ था पसीने में लटपट ो पूरा मज़दूर लग रहा था. मुस्कान को ऐसा सब देखने की आदत नहीं थी. उसका शोहर तेहरा डेन्ट सा ऑफिस जानेवाला आदमी ो रहता था साफ़ सूत्र.

Muskan..haa ो मैं ऐसे hi टहल रही थी..

Raghu...oohhh अच्छा...

मुस्कान जाने के लिए कदम बढ़ा hi रही थी के...

Raghu..memsabb ो अपनी मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया tabb...matlab मैंने बस यूँ hi पूछा था मंसबब्ब...

मुस्कान...2 साल...

Raghu...oohh..waise मेमसाब पता है मैं तो और 4-5 बचे पैदा कर लेता लेकिन मेरी पत्नी ने मन कर दिया...

मुस्कान थोड़ी हैरानी से सोचती hai..."ye आदमी पागल है क्या 7 बचे होनेके बाद भी बोल रहा है और 5 बच्चों के लिए रेडी था. इसकी पत्नी को पता नहीं क्या क्या झेलना पड़ता होगा..

Muskan...kyun 7 बचे काफी नहीं थे...

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Raghu...kafi तो हैं मेमसाब लेकिन बचे जब होसकते हैं तो क्यों नहीं...

Muskan...aur उनको कैसे पालते??

Raghu...kar लेता गुज़ारा मेमसाब...

Muskan...hmm सही है...

Raghu...waise मेमसाब आप mujheee...choro जाने दू...

Muskan...main तुमको क्या???

Raghu...choriye मंसबब रहने डिजयी...

Muskan...batate हो या...

Raghu...choriye मेमसाब आप बुरा मन जयिंगी...

Muskan...nahi बोलोगे तो ज़रूर मानूंगी...

मुस्कान क्यूरियस थी के आखिर ये नाता सा मज़दूर क्या बोलना छह रहा है. रघु भी मुस्कान को थोड़ा फ़्रस्ट्राटे कर रहा था. लेकिन अब ो दूर से hi मुस्कान के इर्द गिर्द घूम कर..

Raghu...memsab मुझे आप 'आइटम' लगती हो...

Muskan...kya बक रहे हो!! तुम्हारा दिमाग खराब है मैं तुम्हारी कंप्लेंट करुँगी आज़म को...

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Raghu..maine बोलै था मेमसाब आप बुरा मन जाओगी...

Muskan...haa तुमने बात hi ऐसी की है..

Raghu...choriye मेमसाब मैंने तो बोलै भी था मैं नहीं बताना चाहता लेकिन फिर भी अपने मुझसे बुलवाया...

Muskan...to तू मुझे इस नज़र से देखते हुवे शर्म नहीं अति tumko...maine अगर अपने शोहर को बता दिया न तो तुम्हारी खैर नहीं...

Raghu...memsab मैं एक बिहारी हूँ और मेरी ज़ुबान ऐसी hi hai...humare में ो क्या बोलते ह खु खूबबब खूबसूरत को ऐसे बोलते हैं...

Muskan...haa तो आइटम क्या होता है सिदा bolo...sida भी क्यों बोलो तुम यहाँ काम करने ए हो न के तारीफ या शेर ो शायरी करने...

Raghu...haan मेमसाब काम करने hi आया hun...mujhe शायरी तो नहीं लेकिन ऐसी बोहत सी चीज़ें अति है जिससे कोई भी बेहाल होजाये...

ये बात ो मुस्कान को ऊपर से निचे तक देखते हुवे बोलता है...

Muskan...dekho तुमन जो भी तुम्हारा नाम है दुआबारा ो लफ्ज़ मेरे सामने नहीं बोलोगे...

Raghu...jaise आपकी मर्ज़ी मेमसाब वैसे मेरा नाम रघु है...

Muskan..haa हाँ ठीक है...

इतना बोलकर ो जाने लगती है सीडिया उतर कर. रघु मुस्कान की गांड उतरने की वजा से िद्र उदर स्विंग होते हुवे देख अपना लौड़ा पंत के ऊपर से मसलते हुवे धीरे से "आइटम तो तू है, तेरे जिस्म की हर चीज़ लूटने लायक है. चेहरे से लेकर पौन तक."

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आँखों सो ओझल होनेके बाद रघु रेस्ट करने बैठ जाता है उदर मुस्कान अपने घर अति है और सिदा बैडरूम चली जाती है.

Muskan...pagal कहीं का आवारा hi है ो जो मुझे आइटम बोल रहा था.

मुस्कान जो इस वक़्त मिरर के सामने कड़ी थी ऐसे बोलते हुवे खुद को hi निहारे जारही थी अनजाने में. उसको आजतक किसी ने ऐसे आइटम वर्ड से नहीं पुकारा था. ो एक शरीफ खंडन से बिलोंग करती थी और जब पढ़ाई भी कर रही थी तब भी ऐसा कोई इंसिडेंट नहीं हुवा था.

मुस्कान फिर जाकर बीएड पर रेस्ट करती है. उसके बाद पूरा दिन उसुअल काम चलता है. मज़दूर रत में काम करके चले जाते हैं. मुस्कान रत में अपने शोहर से बात करती है लेकिन रघु वाली बात नहीं बताती फॉर सम रीज़न. या फिर होसकता है ज़ेहन से निकल गया हो. अगला दिन भी यूँ hi गुज़र जाता है. उसके अगले दिन आज़म आनेवाला था.

सुबह मज़दूर काम करने आजाते हैं. मुस्कान नाश्ता सब करके शावर सब लेकर हॉल में बैठी टीवी देख रही थी तभी बेल्ल बजती है. जाकर दूर खोलने पर सामने जानकी कड़ी थी.

Muskan..arey ावो जानकी कुछ चाहिए था..

Janki...ha ो मेमसाब मैं कल तो पता है आपको छुट्टी है काम की तो आज सोचा थोड़ा पहले hi काम कर लूँ...

Muskan...areg कोई बात नहीं जानकी बाद में ाजावो कल के दिन के भी पैसे मिल जायेंगे तुमको...

Janki...dhanyawad मेमसाब apka..main बादमे अति हूँ...

Muskan...thik है...

शाम में मुस्कान अपनी स्कूटी निकल कर जानेका सोचती है कहीं बोर दूर करने के लिए ो स्कूटी निकल hi रही थी के उसे गेट के बहार कार के हॉर्न की आवाज़ अति है. मुस्कान वहां जाती है तो कार से उसका शोहर आज़म निकलता है जिसे देख ो खुश होजाती है.

Muskan..aagye आप...

Azam...haa मेरी जान आज्ञा & गेस व्हाट मेरे साथ कोई है...

Muskan...kon???

तभी ो देखती है के कार के पिछली सीट से एक आदमी उतरता है जिसे देख..

Muskan....asif जीजू!!!

आसिफ कार से स्माइल करता हुवा निकलता है. और तभी दूसरे दूर से कोई निकलता है जिसे देख मुस्कान की ख़ुशी दुगनी होजाती है.

Muskan..shama!!!

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मुस्कान और शमा गले लगते हैं तिघ्टलय. दोनों बोहत खुश लग रहे थे एकदूसरे को देख कर. आसिफ और आज़म एक साथ खड़े थे.

Muskan..shama कैसी है तू?? शादी के बाद आज देख रही हूँ tujhe...na कोई कॉल न कोई msg...tujhe पता है मैंने कितना तरय किया तुमसे राब्ता करनेकी...

Shama....bilkuk ठीक हूँ तू बता और मुझे पता है yaar...main असल में सिटी में थी भी नहीं na...wahan से हम लोग गौण में मूव होचुके हैं उसके बाद तो टाइम hi नहीं मिला...

Muskan...main भी ठीक हूँ और गौण में!! क्या बट hai...shama जैसी सिटी गर्ल वहां कैसे एडजस्ट होगयी हाहाहा??

Shama...hahaha होना पड़ा लेकिन सचमे जो मज़ा गौण की ज़िन्दगी में है न सिटी में नहीं है...

Muskan...hmm चल अंदर चलते hain...jiju ठीक हो ना..

Asif...haa मैं भी ठीक हूँ...

सब अंदर जाने लगते हैं. तब कार के अंदर बैठे हुवे ड्राइवर के पास आसिफ जाता है...

Asif...ganesh चाचा कार उदर पार्क करदो रोड के साइड और अंदर ाजावो..

Ganesh...thik है साहब...

आसिफ फिर अंदर चला जाता है. अंदर सब सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे. जानकी को मुस्कान ने बुला लिया था और ो चाय बना रही थी.

Muskan...shama लेकिन तुम जीजू इन्हे कहाँ मिले...

Shama...o क्या है न हम लोग कुछ काम से सिटी में ए थे तो एक जगा आज़म जीजू खड़े थे टैक्सी के लिए तो हम साथ चले ए...

Muskan..hmm और बता कैसी चल रही है लाइफ...

Shama...life तो अछि चल रही है तू बता...

Muskan...mast...acha अब आयी है तो 1-2 हफ्ते यहीं रुक जा...

शमा...2-3 हफ्ते हहहह....

Muskan...haa क्यों नहीं...

Shama...nahi बाबा हम ए भी थे अर्जेंट हम आज hi निकल जायेंगे...

Muskan...kya आज hi!!! जीजू समजावो न शमा को...

Asif...muskan सही बोल रही है शमा हम लोग ए थे किसी ज़रूरी काम se...humen जाना होगा...

Muskan...arey आप दोनों इतने जल्दबाज़ी में क्यों ho...aap बोलिये न कुछ...

Azam...arey बाबा मैं यही दोनों को बताते ारः हूँ लेकिन दोनों मन hi नहीं रहे...

Muskan...shama ये क्या बात हुवी काम से काम एक दिन तो रुक...

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Shama...hahaha चल ठीक है लेकिन बस आज रात ok..

Muskan...thik है...

ऐसे hi सब बातें करते रहते हैं. बहार काम जारी था. रत में सब खाना कहते हैं. मज़दूर काम करके निकल जाते हैं. और कल वैसे छुट्टी थी उनको. रात में खाने के बाद शमा और मुस्कान बातें कर रही थी और आज़म, आसिफ बहार टहलने गए हुवे थे.

थोड़ी देर बाद मुस्कान अपने बैडरूम थोड़ी देर के लिए जाती है. और तक़रीबन 10 मिनट बाद जब ो बहार अति है तो शमा उसे हॉल में नहीं milti...tabhi उसे बाथरूम की लाइट ों मिलती है...

Muskan..shamaaa तू अंदर है क्या...

Shama...ummm हां हहह हैं मैं सलूरररप्प मममहह अहह अंडररर हुन्न....

मुस्कान को शमा का जवाब थोड़ा अजीब लगता है. क्यूंकि उसकी साँस उखड़ी उखड़ी सी लग रही थी और कुछ अजीब सी आवाज़ आरही थी.

Muskan...shama तू ठीक तो है ना??

Shama...slluurrpp हहहहह हां मुस्कान मैं स्लुर्र्प्प स्लुर्र्प ठीक हूँ...

मुस्कान को अजीब तो लगता है लेकिन फिर ो उसपर ज़्यादा न सोचते हुवे जाकर सोफे पर बैठ जाती है. 5 मिनट बाद शमा वाशरूम से निकलती है. मुस्कान देखती है के शमा की लिपस्टिक थोड़ी भीकृ हुवी है और थोड़ा पसीना भी आया था उसे.

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Muskan..kya हुवा शमा तबियत खराब तो नहीं हुवी तेरी??

Shama...arey यार ऐसी कोई बात नहीं है...

मुस्कान भी उस बात को इग्नोर कर देती है. उदर आज़म और आसिफ टहलने जाकर वापस आने लगे थे. इसी बिच मुस्कान और शमा सोफे पर बैठी बातें कर रही थी तभी वाशरूम का दूर खुलता है उसमे से गणेश निकलता है. मुस्कान की नज़र वहां जाती है. ो देखती है गणेश के शर्ट का एक बटन खुला हुवा था और उसे भी थोड़ा पसीना आया हुवा था. लेकिन उससे भी बड़ी बात मुस्कान ने तो इस आदमी को वाशरूम जाते हुवे नहीं देखा. शमा के बहार अनेके बाद आखिर कब ो अंदर गया था??!

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 06

मुस्कान सोच में पड़ी hi हुवी थी के दूर बेल्ल बजती है. आज़म और आसिफ वापस चुके थे. मुस्कान को हालाँकि ये बात अभी भी हज़म नहीं हुवी थी के कैसे गणेश बाथरूम से अचानक निकला!! फिर रत होजाती है और सब सजाते हैं.

आधी रात में प्यास लगने से मुस्कान की आंख खुलती है और ो किचन में पानी पिने चली जाती है. जाते हुवे उसे वाशरूम की लाइट ों मिलती है और अंदर से हलकी हलकी आवाज़ें आरही थीं. मुस्कान एक बार को पुकारनेका सोचती है लेकिन फिर न बोलकर पानी पिने चली जाती है. ो पानी पि hi रही थी ke...usko "ाहहममपपपपप" की सिसकारी जैसी आवाज़ अति है. मुस्कान थोड़ी चौकन्ना होजाती है. पानी का गिलास रखकर ो वाशरूम के दूर के पास जाती है और वहां कान लगाकर सुनने लगती hai...andr से हलकी हलकी आवाज़ें तो आरही थी लेकिन क्लियर नहीं.

थोड़ी देर बाद उसे ज़मीन पर कुछ गिरनेकी हलकी आवाज़ अति है जैसे कोई कपडा गिरा हो. मुस्कान सोचती है इस वक़्त कोण होगा ो भी बाथरूम में!! तभी फिरसे कोई आवाज़ अति है उसे सुनकर मुस्कान समझ जाती है के कोई अंदर किश कर रहा है!!!

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Muskan...zarur शमा और आसिफ जीजू honge...itni रात में ः...

मुस्का सोचती है इतनी रात में इनको डिस्टर्ब करना ाचा नहीं इसलिए ो वहां से चली जाती है.

अगली सुबह ब्रेकफास्ट करने के बाद सब थोड़ी देर बातें करने सोफे पर बैठे हुवे ते और गणेश एक तरफ बैठा हुवा था टीवी देखते हुवे. मुस्कान बात करते हुवे नोटिस करती है के गणेश तिरछी नज़र से शमा की तरफ देख रहा था. मुस्कान को कुछ समझ नहीं ारः था. बड़ा hi अजीब उसे ये लग रहा था.

तकरीबन आधे घंटे बाद शमा और आसिफ वापस जाने के लिए तैयार होजाते हैं. और सब भर आजाते हैं घरके. कार के पास जानेके बाद मुस्कान शमा को धीरे से...

Muskan...shama क्या बात है इतनी रोमांटिक तू कबसे होगयी रात में बाथरूम में hi...jiju और तू तो बड़े छुपे रुस्तम निकले ः.

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मुस्कान की बात सुनकर शमा थोड़ा कन्फ्यूज्ड सा एक्सप्रेशन देती है जैसे ो खुद कन्फ्यूज्ड हो. फिर भी हल्का सा मुस्कुरा कर..

Shama..haha...

Muskan...shama जीजू और 1-2 दिन रुक जाते न...

Shama...yaar कबि और आएंगे रहने के liye...waise तुम और जीजू ावो न हमारे घर रहने क्यों जीजू??

Azam..han हाँ आएंगे एक दिन...

Muskan....haa ajayenge...apna ख्याल rakhna...Whtsapp नंबर तो लिया हुवा है मश्ग ज़रूर करना...

Shama...sure सूरे जब भी टाइम मिलेगा...

मुस्कान फिरसे नोटिस करती है गणेश जो कार में बैठा हुवा था शमा की तरफ देख रहा था. इस वक़्त शमा की पीठ उसके तरफ थी तो समझ जाती है ो कहाँ देख रहा hoga...muskan गुस्सा होजाती है लेकिन बात का पक्का कन्फर्मेशन न होनेकी वजा से जाने देती है लेकिन फिर भी शमा को थोड़ा दूर लेजाकर धीरे से...

Muskan..shama ये तुम्हारा ड्राइवर जो है ये बार बार तुमको देखे जारहा है ये मुझे सही नहीं लग रहा hai...kabse काम कर रहा है ये...??

मुस्कान की बात सुनकर शमा थोड़ा सा बौखला जाती है लेकिन थोड़ा नार्मल होनेकी कोशिश करते हुवे...

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Shama...arey मुस्कान तू गलत समझ रही है ऐसा कुछ नहीं hai...aur हमारी सालों से एक नौकरानी है उनके पति हैं...

Muskan...fir भी शमा थोड़ा ध्यान रखना...

Shama...haha जाने दे उस चीज़ चल हम लोग चलते हैं लेट होरहा है...

Muskan...thik है मश्ग करना मुझे जब घर पोहचोगी तो..

Shama..zarur...

फिर शमा और आसिफ कार में बैठकर चले जाते हैं वहां से. आज़म और मुस्कान भी वापस घरके अंदर चले जाते हैं. थोड़ी देर बाद आज़म रेडी होकर ऑफिस के लिए निकल जाता है. मुस्कान फिर टीवी देखने बैठ जाती है. आज मज़दूरों की छुट्टी थी इसलिए ऊपर आवाज़ भी नहीं आरही थी. लेकिन मुस्कान टीवी देखते हुवे भी बोर होजाती है और आज जानकी भी नहीं आनेवाली थी जिससे ो बात करसके...

फिर ो कुछ सोचकर रेडी होकर मैं दूर लॉक करके अपनी स्कूटी निकलती है और घूमने निकल पड़ती है. ो 3 कंत गयी hi थी के एक एरिया में एक बोर वेल के पास जानकी दिखती है जिस देख ो स्कूटी रोकती है..

Muskan...arey जानकी तुम यहाँ??

Janki..arey मेमसाब आप मैं ो पानी लेने आयी thi...aap घूमने निकली हो??

Muskan...haa थोड़ा बोर होरही थी isliye...waise तुम यहाँ रहती हो..??

Janki..haan मेमसाब मैं भी और बाकि सरे भी ो सामने पुराणी बिल्डिंग है न वहीँ रहते हैं. जब भी आस पास कोई काम होता है यही हमारा बसेरा होता है...

Muskan..oh ाचा acha...thik है मैं चलती हूँ...

Janki...arey मेमसाब रुकिए न चाय बना देती हूँ पीकर जाईये...

Muskan...arey नहीं नहीं क्यों तकलीफ लेती हो मैं चलती हूँ...

Janki..memsab इसमें तकलीफ कैसी प्लस आईये न बस एक कप चाय...

मुस्कान आना तो नहीं चाहती थी लेकिन जानकी के इतना बोलने पर ो मन जाती है और स्कूटी एक तरफ रुका कर जानकी के पीछे चली जाती है. ो एक पुराणी अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग थी जो सालों से बंद पड़ी होगी. हालाँकि आस पास घर थे. जगा जगा कचरा पड़ा हुवा थोड़ी बोहत स्मेल भी आरही थी. मुस्कान का मन कर रहा था के बस ो चली hi जाये लेकिन जानकी के बोलने पर रुकी जो थी.

जानकी मुस्कान को एक रूम में लेजाती है जहाँ शायद ो पकाया करते थे. जानकी मुस्कान को एक वहीँ एक पुराणी चेयर पर बिठा देती hai..muskan को ऐसी जगा की आदत नहीं थी. ो आस पास देखती है सामान जगा जगा रखा हुवा था. थोड़ी देर में जानकी चाय बनाकर मुस्कान को देती है.

Janki..memsab मुझे बस 5 मिनट दिज्ये मैं निचे जाकर पानी ले अति हूँ बोर वेल से तबतक आप चाय पीजिए...

मुस्कान कुछ बोलती उससे पहले hi जानकी निकल जाती है निचे. मुस्कान चाय चुस्की लेते हुवे िद्र उदर जायज़ा लेने लगती है. उस रूम से निकल कर ो दूसरे रूम की तरफ जाती है तो वहां कुछ सामान रखा हुवा था. उस रूम के बाद तीसरे रूम में जाती है तो वहां एक बिस्तर था और टंगे हुवे कुछ कपडे जिसे देख कर लग रहा था यहाँ ज़रूर जानकी सोती होगी.

मुस्कान अपनी चाय ख़तम कर चुकी थी और ो वहीँ हॉलवे में घूम कर जानकी का वेट कर रही थी तभी उसे बिल्डिंग के पिछली साइड से किसी के चलने की आवाज़ अति है. अंडर कंस्ट्रक्शन होनेकी वजा से निचे देखा जासकता था. मुस्कान वहां चली जाती है और धीरे से निचे देखती है तो उस आदमी का चेहरा देख लेती है ो रघु था. ो देखती है के रघु एक बनयान में था और निचे एक साइड से खुलने वाली पुराणी सी रंग बिरंगी लुंगी में था.

मुस्कान सोचती है ये वहां निचे क्या कर रहा है? रघु सामने से मुस्कान को दिखा रहा था और सिर्फ फर्स्ट फ्लोर पर होनेकी वजा से मुस्कान क्लेअर्ल्य उसको देख सकती थी. इससे पहले के मुस्कान और सोचती के रघु वहां क्या कर रहा है रघु अचानक सी अपनी लुंगी साइड में करता है और उसकी पुराणी बड़ी सी अंडरवियर निचे करके अपना लौड़ा बहार निकल लेता है. ये सब इतना फ़ास्ट हुवा था के मुस्कान को रियेक्ट करनेका मौका hi नहीं मिला और जब तक ो रियेक्ट करती तब तक रघु के लौड़े से पेशाब की एक मोती धार निकलने लगती है.

मुस्कान का तो जैसे मन खुला का खुला रह जाता है उसके सामने होरहे सन को देख कर. मुस्कान की नज़र रघु के लौड़े पर जाती है जो बिलकुल कला था और मुरझाया हुवा भी काफी लम्बा लग रहा था. आस पास घनी झांटें साफ़ दिख रही थी. इतना सब देखकर मुस्कान एकदम उदर से नज़र हटा लेती है और पीछे हैट जाती है. उसकी धड़कने तेज़ थी. ये आखिर उसने क्या देख लिया. मुस्कान अपनी फूली हुवी सांसों के साथ...

Muskan...chiiii

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मुस्कान अब जल्दी से निचे चली जाती है और जाते हुवे hi उसे जानकी मिल जाती है...

Janki...arey मेमसाब क्या हुवा आप जारही हो? चाय पि ली अपने??

Muskan...haa जा रही हूँ जानकी मुझे लेट होरहा है और मैंने पि ली है चाय..

Janki...thik है मेमसाब

उसके बाद मुस्कान जल्दी से अपनी स्कूटी स्टार्ट करके वहां से वापस घर चली जाती है और सिदा वाशरूम जाकर फ्रेश होकर बैडरूम में चली जाती है. उसके मन अभी भी वही सन ारः था के उसने ये क्या देख लिया. न चाहते भी बार बार उसके ज़ेहन वही सन याद ारः था.

रात में डिनर के बाद मुस्कान और आज़म सेक्स करते हैं लेकिन इसबार सेक्स करते हुवे मुस्कान आज़म के लुंड को नोटिस करती है. कितना गोरा क्लीन हालाँकि ज़्यादा बड़ा नहीं फिर भी उसकी नीड्स पूरा करता है. मुस्कान का नोटिस करना वहीँ नहीं रुकता फिर उसे आज सुबह का सन यद् आता है जब उसने रघु को पेशाब करते हुवे देखा था और उसका ो कला लुंड और आस पास झांटें!! आदमी हिघ्त में छोटा है लेकिन उसके पास उतना लम्बा!! और उसदिन किचन में वही चीज़ मेरे पीछे टच हुवी थी!!

मुस्कान अपनी सोच से भर एते हुवे अपने थॉट्स पर उसे घिन अति है. सेक्स के बाद शावर लेकर दोनों सो जाते हैं. अगली सुबह संडे था इसलिए दोनों आराम से सोये रहते हैं लेकिन फिर भर मज़दूरों के आने और काम करनेकी आवाज़ से जाग जाते हैं. ब्रेकफास्ट करके दोनों हॉल में बातें करते बैठते हैं. थोड़ी देर बाद आज़म मुस्कान को अपने साथ काम का प्रोग्रेस देखने के लिए चलने बोलता है.

ो दोनों चले जाते हैं वहां. मुस्कान रघु की तरफ देखती है तो उसे कल का सन फिरसे यद् अत है हालाँकि रघु इससे बिलकुल बेखबर था. मुस्कान ने कभी नहीं सोचा था के उसको ऐसी सिचुएशन भी फेस करने पड़ेगी. ो यहाँ ज़्यादा रुकना नहीं चाहती थी. आज़म िद्र उदर काम देख रहा था रमेश से बात करते हुवे. रघु वही मुस्कान को ताड़ने में लगा हुवा था सबसे नज़र छुपकर.

जब आज़म रमेश से बात क्र रहा था तो मुस्कान पहली बार चुप छुपकर रघु की तरफ देखती है. उसकी नज़र रघु की पंत के तरफ जाती है तब ो नोटिस करती है के उसकी पंत में उभर कुछ ज़्यादा hi दीखता है जो उसने पहले कभी नोटिस नहीं किया था. मुस्कान की तो ऑंखें बड़ी होजाती हैं हालाँकि उसका कोई गलत इंटेंशन नहीं था वहां देखनेका.

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ो तो बस क्यूरोसिटी कहें या कल के इंसिडेंट का इफ़ेक्ट. मुस्कान उसकी तरफ देख hi रही थी के अचानक उसकी नज़र रघु से मिलती है तो मुस्कान एकदम अपनी नज़र फेर लेती है. ो सोचती है के ो पागलों जैसी हरकतें क्यों क्र रही है.

थोड़ी देर बाद मुस्कान और आज़म निचे चले जाते हैं. अंदर पोछते hi मुस्कान को अपने मोबाइल रिंग बजते हुवे सुनाई देती है. ो कॉल उठाने चली जाती है और आज़म यही टीवी देखने बैठ जाता है. बैडरूम में जाकर मुस्कान अपना मोबाइल देखती है तो उसमे 'शमा' नाम लिखा tha..o कॉल उठती है...

Muskan...hello शमा...

Shama...haa hello मुस्कान हम कल hi पोहंच गए थे रत में. ो क्या है न वैसे खाना खाकर सोगये तो बताना भूल गयी..

Muskan...haha कोई बात नहीं पोहच गए न...

Shama...haa पोहहहहह्णणछहः गई...

Muskan..kya हुवा शमा!???

Shama...oo ो कुछ नाहीइ मुस्कान बस ो पैररर लग गया चेयर से...

Muskan..haha किदर धयान है tera...waise किदर हैं जीजू...

Shama...oo ू अहह ओफ्फिकी गय्ये हैं...

Muskan...ye कैसी आवाज़ें है शमा और तू हम्प क्यों रही है??

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Shama...ah..o मैं थोड़ी देरर पहले सीढियानं छड़ककर आयी हुन्न ना इसलियी...

मुस्कान को बड़ी अजीब सी आवाज़ें आरही थी जैसे कोई दो चीज़ें आपस में टकरा रही हों. जब शमा िद्र भी आयी थी तो उसे बड़ा अजीब बेहवे क्र रही थी. थोड़ी सेहमी सेहमी सी रहना किसी से जो उसके नेचर के बिलकुल अगेंस्ट था. मुस्कान शमा को अचे से जानते थी के ो ऐसी नहीं है लेकिन फिर भी मुस्कान उस चीज़ इग्नोर करती है.

Shama...musskann उनका कॉल आरहा हीी (इतना कहते hi मुस्कान सुनती है के ो आवाज़ें काफी तेज़ होजाती हैं अचानक) ाहहममंपपप मैंन फिर कभी कॉल करती......

उसके पूरा बोलने से पहली hi कॉल कट जाता है. मुस्कान को समझ नहीं ारः था के आखिर शमा को हुवा क्या है...

Muskan..ye शमा को क्या होगया है?? ो अजीब सी awazen...jiju तो ऑफिस गए हैं ो तो नहीं होसकता लेकिन शमा बड़ा अजीब बेहवे क्र रही है और यूँ अचानक कॉल कट होना!!!

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 07

मुस्कान कन्फ्यूज्ड थी लेकिन फिरसे उस चीज़ को इग्नोर करते हुवे हॉल में जाकर अपने शोहर के साथ टीवी देखने बैठ जाती है. दोनों मिया बीवी टीवी देखने में बिजी थे के दूर बेल्ल की आवाज़ अति है. मुस्कान जाकर दूर खोलती है तो सामने जानकी और रघु खड़े थे. रघु को देखकर मुस्कान को थोड़ा अजीब लगता है और सोचती है ये हर बार जानकी को ये आदमी hi मिलता है क्या किसी भी काम के लिए. अपनी सोच से बहार एते हुवे मुस्कान थोड़ा नार्मल होते हुवे...

Muskan..haa जानकी कुछ काम था..??

Janki...haan ो मेमसाब मैं सोच रही थी के आपके किचन की सफाई एक बार करवा लूँ और मैं रघु को उसी लिए लायी hun...ye मेरी मदद कर देगा...

मुस्कान मन men...ye नाता सा आदमी कैसे इतना ऊपर के शेल्फ तक पोहंच कर सफाई करेगा! ये जानकी भी न...

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मुस्कान फिर भी जानकी पर थोड़ा बोहत ट्रस्ट करती थी इसलिए ो अल्लोव कर देती है और वापस जाकर आज़म के साथ टीवी देखने बैठ जाती hai..idr जानकी और रघु किचन में चुके थे और सफाई शुरू क्र देते हैं...

Raghu...arey जानकी ऊपर माले की सफाई के लिए स्टूल चाहिए hoga..o तो मांग ले मेमसाब से...

Janki..arey haan..memsabb ो स्टूल चाहिए था...

Muskan..haa ो दूर खुला है ले लो..

Raghu...tu रुक मैं ले अत हूँ...

रघु फिर स्टूल लेने बैडरूम चला जाता है. फिरसे ो आलीशान से बैडरूम में आया था. हालाँकि ये बैडरूम कोई बड़े से महल में नहीं था लेकिन फिर भी आज़म और मुस्कान ने अपने बैडरूम को कोई आलीशान महल वाले बेडरूम्स से काम नहीं रखा था. वहां हर चीज़ मैनटैनेड और साफ़ सूत्री राखी हुवी थी.

रघु वहां जानेके बाद िद्र उदर देखता है ो पहले भी चुका था लेकिन वहां की फ्रेग्रेन्स और बाकि साडी चीज़ें उसे अलग सी फीलिंग दे रही थी. उसके अलावा रघु जनता था के ये वही कमरा है जहाँ मुस्कान रहती है. जहाँ पर ो और उसका शोहर सेक्स करते होंगे. यहीं पर ो अपने कपडे चेंज करती होगी.

रघु फिर नज़र दौड़ता है के कहीं कुछ मिल जाये लेकिन रूम इतना क्लीन था के देखकर लग नहीं रहा था के कुछ मिलेगा लेकिन तब उसकी नज़र उनके क्लोसेट पर जाती है जिसका दूर फोर्टनेटेली उसके लिए हल्का सा खुला था. रघु की ऑंखें चमक जाती है वहां देख कर. ो दबे पौन क्लोसेट तक जाता है और धीरे से ो दूर खोलता है. अंदर आज़म के शर्ट और बाकि कपडे रखे हुवे थे. ज़्यादातर मर्द के hi कपडे दिख रहे थे जिसे देख ो थोड़ा ऋरष सा होजाता है लेकिन तभी ो दूसरा दूर भी धीरे से खुलता है वहां पर मुस्कान के ड्रेसेस और बाकि साडी चीज़ें थी लेकिन जिसे उसकी ऑंखें ढूंढ रही थी उसे ो नहीं मिलती.

ो मुस्कान का एक ड्रेस जिसे उसने थोड़े दिन पहले पहना था उसे अपने हाथ में लेकर सूंघता है जिसकी महक जैसे उसे पागल कर देती है. रघु हालाँकि ये सब करने में लगा हुवा था जबकि मुस्कान और आज़म बहार hi हॉल में बैठे हुवे टीवी देख रहे थे. ड्रेस को थोड़ी देर सूंघने के बाद रघु अब क्लोसेट में िद्र उदर देखने लगता है तभी ो एक ड्रावर ओपन करता है और उसकी आँखों के सामने जैसे खज़ाना था.

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उस ड्रावर में मुस्कान की फ्रेश धोयी हुवी बरस और पैंतीस थी. रघु तो उनको देखकर जैसे हिप्नोतिसे hi होजाता है. ो अपना लौड़ा पंत के ऊपर से एक बार मसलता है और फिर अपना हाथ आगे बढाकर मुस्कान की एक ब्रा और पंतय उठा लेता है और उनको अपने नाक के पास लेजाने hi वाला था के किचन में से जानकी रघु को पुकारती है...

रघु एकदम से जैसे होश में एते हुवे जल्दी से ो ब्रा पंतय अपनी जेब में दाल लेता है और क्लोसेट को पहले जैसा बंद करके स्टूल लेता है और बहार आजाता है. रघु देखता है के मुस्कान और आज़म अभी भी टीवी देखने में बिजी हैं इसलिए ो रहत की साँस लेता है लेकिन जब ो किचन में जानकी के पास जाता है..

Janki..hey रघु इतनी देर तू अंदर क्या कर रहा था?? कितनी देर होगयी...

रघु झूट मूत का बहाना बनाते हुवे...

Raghu...arrr अरे जानकी ो स्टूल नहीं मिल रहा था. ो असल में उसककी ऊपर कपडे थे इसलिए मुझे नहीं मिला..

Janki...hmm ठीक है ठीक है आप चढ़कर ऊपर सफाई करो जल्दी से...

रघु फिर काम पर लग जाता है. ो ऊपर सफाई करते हुवे बार बार मुस्कान की तरफ भी देख रहा था. इतने दिन के ावा जाहि के बाद रघु थोड़ा कॉंफिडेंट सा होगया था अब.

Janki..aa मंसबब्ब..

Muskan..haa जानकी??

Janki...memsab िद्र आईये तू.

मुस्कान उठकर वहां चली जाती है लेकिन उदर रघु के प्रजेंस से थोड़ा अजीब फील करती है.

Janki...memsab ो ये चूले के ऊपर का कप्बोर्ड जो है उसमे के चीज़ें निकल कर साफ़ कर दें वहां भी थोड़ी धूल जमी हुवी है...

Muskan...haa ो काफी दिन होगये हैं वहां भी kardo...ek मिनट मैं मदद क्र देती हूँ संभल कर क्यूंकि ो गिलास की चीज़ें भी हैं उदर...

इतना बोलकर ो मुस्कान की मदद करने लगती है. िद्र रघु जो शेल्फ्स के ऊपर सफाई करने में लगा हुवा था मुस्कान को बेझिजक ताड़ने लगता है क्यूंकि इस वक़्त कोई उसकी और नहीं देख रहा था. मुस्कान थोड़ा ऊपर से उस शेल्फ से चीज़ें निकल रही थी अपने हाथ ऊपर करके जिससे साइड से उसके चुके थोड़ा बोहत जिग्गले कर रहे थे. ये नज़ारा देख कर रघु अपना लौड़ा पंत में एडजस्ट करता है.

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उसका हलक सुख जाता है ऐसा सन देख कर. मुस्कान जैसी खूबसूरत शादीशुदा जवान ाव्रत को इतना करीब से ऐसे पोजीशन में उसने शायद hi कभी देखा हो. ो तेहरा एक मज़दूर उसकी नसीब में ये सब कहाँ. रघु अपनी नज़र मुस्कान पर निचे लेजाता है जहाँ मुस्कान की गांड का व्यू उसे मिल रहा था. ये सब देख कर उसका लौड़ा अकड़ने लगा था.

थोड़ी देर में जब साडी चीज़ें निकल जाती है तो...

Raghu...memsab ू िद्र माले में भी 1-2 चीज़ें हैं ो भी निकल देतीं तो मैं िद्र भी साफ़ कर देता..

मुस्कान पलट कर रघु की तरफ देखती है जहाँ ो अजीब सी स्माइल के साथ स्टूल पर खड़ा था.

Muskan..hmm

मुस्कान फिर वहां चली जाती है और शेल्फ खोलकर ो चीज़ें निकलने लगती है. रघु तिरछी नज़र से निचे मुस्कान की तरफ देखने की कोशिश करता है लेकिन मुस्कान ने दुपट्टा ओढ़ रखा था इसलिए उसे ज़्यादा कुछ देखने नहीं मिलता लेकिन िद्र मुस्कान जब ो चीज़ निकल रही थी तो अनजाने में hi उसकी नज़र रघु की पंत पर जाती है. थोड़ी देर पहले रघु जो मुस्कान की तरफ देखकर ऑंखें सीख रहा था उसकी वजा से उसका लौड़ा का उभर उसकी पंत पर साफ़ नज़र ारः था और जैसे hi मुस्कान की नज़र वहां पड़ती है तो ो अचंबित होजाती है और उसकी ऑंखें बड़ी होजाती है.

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मुस्कान जैसी शरीफ घर की एक शादीशुदा खूसबूरत लड़की उसने ऐसा कभी एक्सपीरियंस नहीं किया था. मुस्कान अचानक से अपनी नज़र हटा भी लेती है. पता नहीं क्यों लेकिन उसकी दिल की धड़कन तेज़ सी होजाती है. उसको उसदिन वाला सन यद् अत है जब उसने रघु को पेशाब करते हुवे देखा था.

मुस्कान फिर जल्दी से ो चीज़ें निकल लेती है और किचन से बहार चली जाती है. रघु और जानकी अपना काम कंटिन्यू रखते हैं. ऐसे hi दिन गुज़र जाता है. अगले 5 दिन ऐसे hi काम चलता रहता है नोर्मल्ली.

उसके अगले दिन सुबह नाश्ता सब करनेके बाद आज़म अपने काम पर चला जाता है और मुस्कान शावर सब लेकर रेस्ट करते हुवे टीवी देखने बैठ जाती है. सब वर्कर्स भी आकर काम करने लग जाते हैं. दोपहर के वक़्त सब मज़दूर खाना खाने के लिए जाते हैं. मुस्कान जो खाना खचुकि थी घर के बहार टहलनेके लिए अति है. िद्र उदर देखते हुवे उसे ऊपर जानेका सूझता है के काम का प्रोग्रेस hi देख ए. उसने आज एक सलवार कमीज पहन रखा था.

ो घर का दूर बहार से बंद करके सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाने लगती है. उअप्र पोहंच कर ो िद्र उदर देखती है. वाक़ई में ये मज़दूर काफी ाचा काम कर रहे थे. तभी मुस्कान के कानों में धीमी अजीब सी आवाज़ आने लगती है जैसे कोई किसी के पास बात कर रहा हो. उसे नहीं पता था के ो कैसी आवाज़ है इसलिए ो उसी आवाज़ की तरफ चल देती है जो एक रूम से आरही थी. ो वहां पोहंचती है तो ो आवाज़ थोड़ी तेज़ सुनाई देने लगती है. हालाँकि निचे घर के पास से ो आवाज़ नहीं सुनाई दे रही थी. मुस्कान जब वहां पोहंचती है और ो आवाज़ थोड़ी क्लियर अति है.

"ससुरी तेरई बुर्र के बिना मेरा लौड़ा पागल होगया है"

"अरे सरम किजयी आस पास कोई सुन लेगा"

मुस्कान के पेअर एकदम से रुक जाते हैं लेकिन ो पीछे नहीं हटती के ो इस तरह पकड़ी न जाये लेकिन मुस्कान को जानना तो था आखिर कोण है जो ऐसी गन्दी बातें कर रहा है िद्र उसके अपने घर में ऊपर से अंदर उसको बड़ी घिन भी आरही थी. काम करने वालों में ाव्रत तो एक hi है कहीं जानकी और कोई मर्द!!! हालाँकि मुस्कान सूरे नहीं थी इसलिए अपने दिल की तेज़ धड़कनो के साथ ो दूर से अंदर झांकती है. अंदर थोड़ा अँधेरा सा अंदर और थोड़ी बोहत चीज़ें भी राखी हुवीं थी उदर लेकिन अंदर का सन देख मुस्कान के रोंगटे खड़े होजाते हैं.

अंदर और कोई नहीं रघु अपना चीन वाला मोबाइल सामने पकड़ कर किसी ाव्रत से वीडियो कॉल में बात कर रहा था अपनी पंत निचे करके और उसकी घिसी पीती बड़ी सी अंडरवियर भी थोड़ी निचे करके. मुस्कान की नज़र रघु के रोड जैसे खड़े काळा लम्बे लौड़े पर जाती है. हालाँकि अंडरवियर की वजा से पूरा तो नहीं लेकिन लगभग पूरा hi उसका लौड़ा बहार था. मुस्कान को जैसे सांप hi सूंघ जाता है आखिर ये बार बार उसको इस अधेड़ू उम्र के नीच मज़दूर के लौड़े के दर्शन जो होरहे थे.

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रघु का कला लम्बा लौड़ा देख कर मुस्कान अपने मन पर हाथ रख लेती है और उसकी ऑंखें बड़ी होजाती है. ो देखती है उसके काळा लौड़े पर डार्क ब्राउन कलर के टोपे तक चमड़ी चढ़ी हुवी थी. ो धीरे धीरे अपने लौड़े को ऊपर निचे कर रहा था बात करते हुवे.

Raghu....arey पत्नी से ऐसी बात करने में कैसी शर्म्म और कोई नहीं सुनेगा सब खाना खाने गए हैंन...

कमला (रघु की पत्नी) कोई जहाँ काम कर रहे हैं उदर वाले घरसी सुन लेगा तो??

Raghu...nahii कमला उदर भी...

ो इतना बोलता hi है के अचानक ो अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ा देता है. अंदर थोड़ा अँधेरा था इसलिए मुस्कान को पूरा क्लियर तो नहीं लेकिन दिख रहा था ठीक थक. रघु के थोड़ा तेज़ अपना लौड़ा हिलने से मुस्कान देखती है के कैसे उसका कला लम्बा लौड़ा ऊपर निचे होता हुवा भयानक लग रहा था. ये आदमी शार्ट हिघ्त का ज़रूर था लेकिन उसका लौड़ा उफ्फ्फ तौबा!!!

Raghu..kamla मुझे तेरी बुर्र चाहिए अभी...

Kamla...aap पगला गए हैं क्या...

Raghu..haa कमला पगला गया हूँ तेरी बुर्र को पेले कितना टाइम होगया ही...

ये सब ो अपना कला लौड़ा हिलाते हुवे बोल रहा था. िद्र मुस्कान को अब बड़ी घिन आने लगती है. इतनी गन्दी बातें सुन्ना उसके बस की बात नहीं थी. ो टेहरी इतनी शरीफ मसलम शादीशुदा जवान ाव्रत उसने अपनी पूरी ज़िन्दगी में ऐसी बातें नहीं सुनी थी. ो अपने शोहर के साथ भी जब सेक्स करती थी तो ऐसी गन्दी बातें नहीं होती थी बल्कि बड़ी अहतराम और नज़ाकत के साथ सरे काम को ो और उसके शोहर अंजाम देते थे.

Kamla...pichle महीने hi तो आकर गए थे आप..

Raghu...haa कमला उसके बाद कितना टाइम होगया है मेरा लौड़ा सुना सुना होगया है और तो और तेरी बुर भी तो तरस रही होगी न...

मुस्कान मन men...chii ये आदमी कितनी गन्दी बातें कर रहा haii...mujhe यहाँ से जाना चाहिए...

Kamla...haan ो तोह हैई...

Raghu....kamla काम ख़तम होते hi मैं आजाऊंगी तेरी बुर्र पैनी....

मुस्कान जिसकी दिल की धड़कन तेज़ी से धड़क रही थी ो जल्दी से दबे पौन वहां से जाने लगती है. ो मेक सूरे कर रही थी के रघु को कोई आहत न सुनाई दे. सीढ़ियां उतारकर ो ऑलमोस्ट दौड़ते हुवे घर का दूर खोलकर अंदर चली जाती है और सीधा बैडरूम में जाकर दूर बंद कर लेती है और उसके पीछे रुक कर सांसें लेने लगती है....

थोड़ा नार्मल होनेके बाद..

Muskan...chiii ो गन्दा आदमी कितनी गन्दी गन्दी बातें कर रहा था अपनी बीवी के साथ. थोड़ी भी शर्म नहीं अति उसको शायद. छी ये मुझे क्या बार बार ऐसी गन्दी चीज़ें देखने मिल रही हैं. मैं भी हमेशा गलत वक़्त पर गलत जगा पोहंच जाती हूँ.

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मुस्कान जाकर बीएड पर लेट जाती है. उसके दिमाग में अब फ्रेश थोड़ी देर पहले वाला सन घूमने लगता है. उसे यकीन नहीं होरहा था के ो थोड़ी देर पहले क्या देख कर आरही है. पहली बार उसने अपने शोहर के अलावा किसी और का लुंड देखा था और देखा भी ऐसा के....

ऐसे hi रात होजाती है. डिनर करनेके बाद आज़म और मुस्कान थोड़ी देर टीवी देख कर अपने बैडरूम चले जाते हैं. मुस्कान एक निघ्त्य पहनकर बीएड पर लेट जाती है और आज़म अपने कपडे निकलने लगता है. जब आज़म पुरे कपडे निकल लेता है तो आज पहली बार मुस्कान अपने शोहर के लुंड पर गौर करती है वर्ण तो आजतक बस सेक्स होता था रोमांटिक सा सॉफ्ट सा जैसे शादीशुदा जोड़े के बिच ये होना एक फॉर्मेलिटी हो.

मुस्कान गौर करती है के कैसे उसके शोहर का लुंड साफ़ सूत्र रंग में गोरा टोपे पर बिना चमड़ी के कितना प्यारा लगता है और तो और आज़म कितने प्यार और नज़ाकत से उससे बात करता है सेक्स के बिच भी. लेकिन मुस्कान को साथ hi साथ उसको आज दोपहर वाला सन यद् अत है जहाँ रघु अपनी पत्नी से कितनी गन्दी बातें करते हुवे अपना ो कला गन्दा सा लम्बा लौड़ा हिला रहा था.

मुस्कान मन men...azam का कितना गोरा और साफ़ है और मुझसे कितना प्यार से बात करते हैं लेकिन ो रघु अपनी बीवी सी कितनी गन्दी बातें कर रहा था और उसका ू!!!!

Azam..muskan!!!???

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 08

सोच में डूबी हुवी मुस्कान अनजाने और बेखेलि में बोल पड़ती है...

Muskan..chiii हँ!!

मुस्कान जो अपनी सोच में कुछ ज़्यादा hi खो गयी थी अपने शोहर की पुकारने से होश में अति है. ो देखती है उसका शोहर उसके साथ फोरप्ले शुरू कर चूका था और अपना लुंड पकडे डालने के लिए रेडी था. मुस्कान अपने शोहर को देखती है जो उसे प्यार से देख रहा था न कोई गन्दा वर्ड उसे किये और न कोई उसे ज़बरदस्ती करते हुवे बस पूरी तरह एक प्यारे शोहर की तरह नाज़ुकता से उसे ट्रीट क्र रहा था. दोनों के बिच आगे एक रोमांटिक सेक्स होता है और फिर दोनों गहरी नींद में सजाते हैं.

अगली सुबह आज़म तैयार होकर ब्रेकफास्ट करनेके बाद ऑफिस चला जाता है और मुस्कान अपने उसुअल रूटीन के साथ फ्रेश होकर बहार हॉल में टीवी देखने बैठती है. दोपहर तक कुछ खास नहीं होता. सब वर्कर्स खाना खाने चले जाते हैं. वहीँ मुस्कान जो अपना लंच करके अपने बैडरूम में बैठी हुवी थी उसे कल का सन यद् अत है जब ो ऊपर गयी थी तो उसने क्या देखा था.

मुस्कान के लिए उतना आसान नहीं था के ो ऐसे इंसिडेंट को यूँ hi भूल जाये आखिर कर ो एक सिंपल सी शरीफ हयादार हाउसवाइफ थी. मुस्कान लाख कोशिश कर रही थी के उसके ज़ेहन ो चीज़ दुबारा न ए लेकिन फिलहाल उसकी कोशिश नाकाम होरही थी.

ो झट से उठती है और हॉल से होते हुवे ो मैं दूर से बहार अति है और सीढ़ियों की तरफ देखते हुवे सोचती है क्या आज भी ो ऐसे hi बातें कर रहा होगा. उतनी गन्दी बातें अपनी बीवी से भला कोण करता है. पता नहीं क्यों लेकिन मुस्कान के पेअर सीढ़ियों से होते हुवे ऊपर चल पड़ते हैं. ऊपर पोहचने के बाद उसे आज कल जैसी आवाज़ें नहीं आरही थी फिर भी ो उसी रूम तक चली जाती है और धीरे से अंदर देखती है लेकिन आज वहां कोई नहीं था.

Muskan..chalo ाचा है कल की तरह गन्दी बातें तो नहीं सुन्नी पद रही आज...

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मुस्कान फिर निचे चली जाती है और अपने बैडरूम में जाकर आराम करती है. दोपहर से फिर शाम होजाती है. रात में खाने के बाद बैडरूम में मुस्कान कल के इंसिडेंट के बाद से अपने शोहर के साथ सेक्स रोमांटिकल्ल्य एन्जॉय कर रही थी. जैसे उसके अंदर उसके शोहर के लिए और प्यार उमड़ आया हो. 2-3 दिन यूँ hi गुज़र जाते हैं. इसी बिच घर का काम अचे से चल रहा था.

उसके गले दिन दोपहर के वक़्त सरे मज़दूर खाने जाचुके थे और घरमे मुस्कान खाने के बाद बहार hi हॉल में बैठी हुवी टीवी देख रही थी तभी उसे कुछ ख्याल अत है और ो टीवी बंद करके मैं दूर ओपन करके बहार अति है और सीढ़ियां चढ़ने लगती है. उसकी धड़कने तेज़ होजाती हैं जब ो ऊपर पोहचने के बाद उसदिन की तरह आवाज़ें सुनाई देती हैं. ो अपने कदम बढाकर उसी रूम की तरफ चली जाती है बिलकुल बिना आवाज़ के. नज़दीक पोहचते hi...

Raghu...kamla तू जो मेरा लौड़ा तेरे मन लेकर चुस्ती ही naa...maza आजाता है...

Kamla...dhatt ो तो आप ज़बरदस्ती करवाते हैं...

Raghu...lekin ससुरी तेरी बुर्र तो मैं ज़बरदस्ती नहीं पेलता न...

ऐसी सब बातें मुस्कान को रूम के अंदर से सुनाई दे रही थी. मुस्कान जो इतनी हयादार शरीफ खूबसूरत जवान हाउसवाइफ है उसको क्या सुझा है के ो यहाँ ऐसी बातें सुनने आयी थी. हालाँकि ो इसबार अंदर नहीं झांक रही थी बस बातें सुन रही थी.

Raghu...kamla मेरा मन कर रहा है मैं अभी उदर ऑन और तेरी बुर्र पेल dun...dekh तो सही कैसे मेरा लौड़ा फुदक रहा है...

मुस्कान मन men...chiii गन्दा आदमी कहीं का...

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मुस्कान जो सिर्फ सुन रही थी लेकिन नहीं देख रही थी के रघु उसकी पत्नी को जो दिखा रहा है.

Raghu...dekh कमला मेरा लौड़ा सूझ सा गया है तेरी बुर की यद् में...

Kamla...aji तो उसे शांत कर लीजिए न..

Raghu...nahi कमला उसको बर्बाद नहीं करना उसे तो तेरी बुर में डालकर एक और बचा पैदा करना है...

मुस्कान ये सुनकर अपने मन पर हाथ रखती है...

Kamla..dhatt 7 बच्चों से मन नहीं भरा आपका...

Raghu...arey कमला मेरा बस चले तो तेरी बुर से 50 बचे पैदा करवा लूँ...

मुस्कान सुनकर हैरान होजाती है रघु की बात..

Muskan...bapre ये इंसान है या हैवान कैसी बातें कर रहा है ये जैसे बीवी नहीं बचे पैदा करनेकी मशीन हो...

Kamla...hahahah आप बिलकुल पागल हैं...

Raghu...chal कमला मैं रखता हूँ सबके अनेका टाइम होगया. 2 दिन बाद फ़ोन करूंगा...

मुस्कान जल्दी सी दबे पौन वहां से निकल लेती है और फटाफट सीढ़ियां उतरते हुवे घरमे जाकर सिदा बैडरूम चली जाती है और बीएड पर लेट जाती है.

Muskan...ganda आदमी कहीं का. कितने गंदे लफ्ज़ इस्तिमाल कर रहा था. की. और उसकी बीवी भी लगता है वैसी hi है उसे भी उसके शोहर के गन्दी बातों का बुरा नहीं लगता है शायद. मुझे वहां नहीं जाना चाहिए इतनी गन्दी बातें की मैं नहीं जाउंगी फिर उदर...

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मुस्कान फिर सो जाती है. अगले एक हफ्ता मुस्कान उस चीज़ को अवॉयड करती है. आखिर ो एक हयादार हाउसवाइफ थी उसको ये सब शोभा नहीं देता था यही सब सोचकर ो पूरा हफ्ता वहां ऊपर नहीं जाती. फिर एक हफ्ते बाद जब सब कुछ नार्मल सा होगया था उसके अगले दिन रात में जब सब वर्कर्स आधा घंटे पहले निकल रहे थे तो रघु वहीँ काम करनेका बोलता है जिसे जानकी ने मुस्कान को बताया था जाते हुवे. मुस्कान को शक होता है रघु काम के बहाने कहीं अपनी बीवी को कॉल करके वही साडी चीज़ें तो नहीं करनेका सोच रहा.

सब वर्कर्स के जानेके बाद मुस्कान दबे पौन ऊपर चली जाती है और उसका शक सही निकलता है. रघु जिसको आईडिया नहीं था के उसका कार्यकर्म मुस्कान कितने दिन से देख रही है. ो तो यही सोचकर बैठा था के ये साहब मेमसाब यहाँ थोड़ी न दोपहर या रात में आएंगे.

मुस्कान जब वहां पोहंचती है तो रघु की वहीँ गन्दी बातें उसकी पत्नी के साथ चल रही थी जिससे मुस्कान को ज़्यादा सरप्राइज नहीं होरहा था क्यूंकि ो काफी दिन से ो सुन रही थी....

Raghu...kamla मुझे तेरी बुर्र देखनी ही..

Kamla...pagal हैं ये तो ईरफ़ोन डालकर बात क्र रही हूँ ये नहीं होगा पता है कहाँ आकर बार क्र रही हूँ...

Raghu...sasuri दिखा दे मेरा लौड़ा फुदक रहा है...

कमला अब अपनी साड़ी और पेटीकोट उठाकर बैठ जाती है और कैमरा अपनी छूट की तरफ करती है. दोनों के मोबाइल hi चिनवाले थे कैमरा की क्वालिटी से hi पता चल रहा था.

Raghu...ye हुवी न बात ससुरा का nati...kamla तेरी बुर्र्र्र....

मुस्कान जो तबसे दीवार के पीछे कड़ी सुन रही थी पता नहीं उसे क्या सूझता है और ो अंदर धीरे से झांकती है तो ो देखती है रघु ने जो मोबाइल पकड़ा था उसमे उसकी बीवी बिलकुल कैमरा के सामने अपनी छूट दिखा रही थी. ो देखती है के रघु की तरह hi ो भी काली थी छूट तो उसकी बिलकुल किसी गुफा की तरह लग रही थी. रघु के लम्बे काळा लौड़े ने ड्रिलिंग ऐसी की थी उसकी पत्नी की के पूरी की पूरी गुफा बानी हुवी थी वहां.

मुस्कान की नज़र सूखे गले के साथ रघु के लौड़े पर जाती है जो ो भी उसकी पत्नी को दिखेंर के लिए मोबाइल के सामने किये हुवे था. अँधेरे की वजा से और मोबाइल की लाइट की वजा से मुस्कान को रघु का लौड़ा और कला दिख रहा था जो इस वक़्त किसी स्ट्रैट डंडे की तरह खड़ा था.

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Raghu...kamlaaa अब एक ककड़ी ले और मुझे दिखा मैं तेरी बुर्र कैसे पेलता हूँ मेरे लौड़े से..

Kamla...nahi नहीं ये कैसी बातें कर रहे हैं aap...bachon को आवाज़ चली जाएगी...

Raghu...dikha दे कमला ो नहीं सुनेंगे...

मुस्कान का ये सब देख और सुनकर गाला सुख गया था. उसने कभी नहीं सोचा था के उसको ये सब भी अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में देखना पड़ेगा. फिर ो देखती है के कमला एक ककड़ी लेती है और अपनी गुफा जैसी छूट में घुसती है जो आसानी से चली भी जाती है...

Raghu...kamlaa देख तेरी बुर माखन जैसे उस ककड़ी को कैसे खा गयी हाहाहा...

कमला अब उस ककड़ी को अपनी छूट में अंदर बहार करने लगती है और मुस्कान की नज़र वहीँ थी. उसके सामने ऐसा सन चल रहा था जो उसने अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं देखा था. कमला उस ककड़ी को अंदर बहार करने में लगी हुवी थी.

Raghu...kya मैं तुझे ऐसे पेलता हूँ ससुरी...

Kamla..nahiii..

Raghu...to फिर?? कमला मुझे पता है मेरे हतियार और उस ककड़ी का कोई मुअकबले नहीं लेकिन तू ये समझ के मैं तुझे इस वक़्त पेल रहा हूँ फिर देख हाहाहा...

हथियार शब्द सुनकर मुस्कान जैसे फ्लैशबैक में चली जाती है जब रघु ने उसी हथियार की बात उसके साथ की थी..

"मेमसाब मैं न अचे ाचों को बेहाल कर देता हूँ अपने हथियार से..."

मुस्कान सोचने लगती है के मज़दूर अपने कोनसे हथियार की बात उसदिन कर रहा था!!!

"ो ऐसा हतियार है उस जैसा आपके पति के पास होना नामुमकिन है..."

रघु ने कैसे उसके इतनी गन्दी डबल मीनिंग बात क्र लीन और उसको पता भी नहीं चला था. रघु ने उसे अपने काळा लम्बे लौड़े जैसा मुस्कान के शोहर के पास न होनेकी की भी बात की थी जो मुस्कान को अब समझ आरही थी. उसको यकीन नहीं होरहा था के गन्दा सा अधेड़ू उम्र का मज़दूर उसके साथ इतनी गन्दी डबल मीनिंग बात क्र चूका है और उसे पता भी नहीं चला...

"अह्ह्ह्ह ाजी बास अब"

मुस्कान अपने ख्यालों से बहार एते हुवे अंदर देखती है जहाँ रघु की पत्नी मोबाइल अपनी छूट में तेज़ी से ककड़ी अंदर बहार कर रही थी वहीँ रघु भी अपना कला लौड़ा हिलाये जारहा था.

Raghu...kar कर कमला मत रुक अब और तेज़ी से छोड़ उस ककड़ी से अपनी बुर्र को...

कमला अपनी रफ़्तार बढाती है जिसे देख मुस्कान का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता है और उसके पसीने छूटने लगते हैं. कैमरा क्वालिटी हालाँकि बेकार थी फिर भी मुस्कान साफ़ देख सकती थी के ो ाव्रत किस रफ़्तार से ो ककड़ी अपनी छूट में अंदर बहार कर रही थी. मुस्कान के हाथ अनजाने में कंपते हुवे अब निचे चले जाते हैं ऐसी चीज़ करने जो मुस्कान ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में नहीं किया था.

इतना इंटेंसिटी के साथ अगर ये कॉल पर बात करते हुवे कर रहे हैं तो असल में कैसे करते होंगे!!! अंदाज़ा भी लगाना मुश्किल है. मुस्कान के गोर हाथ अब निचे चले जाते हैं अंदर का हॉट सन देखते हुवे हालाँकि उसको इस बात का अंदाज़ा नहीं था ो तो बस अंदर देखे जारही थी बिना खुद पर धयान दिए.

मुस्कान अपना एक गोरा हाथ उसने पहने हुवे ड्रेस के ऊपर से hi उसकी शादीशुदा छूट पर ले जाती है.

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उसके लिए ये पहली बार था के ो ऐसा कुछ कर रही थी. अंदर रघु अपनी पत्नी कमला के इस रफ़्तार से ककड़ी अपनी छूट में अंदर बहार करने से ो भी अपना कला लौड़ा थोड़ा तेज़ी से हिलने लगता है. उसका यूँ हिलना और उसका लौड़ा बड़े hi खुंखार लग रहे थे.

अब सिचुएशन यहाँ ये थी के रघु जो मुस्कान के नज़दीक जाने के एक बहाना नहीं चोरता था उसे खुद अहसास नहीं था के इस वक़्त जब अपना लौड़ा बहार निकल कर बैठकर हिलाये जारहा है उसे लाइव खुद मुस्कान देख रही है और मुस्कान जिसे रघु से घिन सी अति थी उसे hi ो इस वक़्त अपना लौड़ा हिलाते हुवे देखकर अनजाने में hi सही अपनी छूट सेहला रही थी. दोनों hi एकदूसरे के करतूतों से अनजान थे इस वक़्त.

तभी फ़ोन में रघु की पत्नी कमला इतनी देर ककड़ी से चुड़ते हुवे झाड़ जाती है जिसे देख रघु भी एकदम से झड़ने लगते है. उसके काळा लम्बे लौड़े से गधा सफ़ेद मणि अँधा धुन निकलने लगता है जिसे देख मुस्कान को घिन सी अति है लेकिन ो नोटिस करती है के कितना सारा मणि निकल कर रहा था अब तक. झड़ने के बाद रघु वहीँ मोबाइल साइड में रखकर लेट सा जाता है. मुस्कान थोड़ा होश में एते हुवे खुद के हाथ को निचे पति है जिसे देख उसको खुद यकीन नहीं होरहा था के क्या ो सोचमे ये देख कर टर्न ों हुवी थी!!! क्या ये शोभा देता है एक शरीफ खंडन के शादीशुदा जवान ाव्रत को??

मुस्कान फिर दबे पौन जल्दी से निचे भाग जाती है. ो घरका दूर ओपन कर रही थी के तभी आज़म अपनी गाड़ी लेकर घर अत है मुस्कान को भर पाकर...

Azam...arey मुस्कान क्या हुवा बहार क्या कर रही हो??

अब मुस्कान क्या बताती के ो इस वक़्त क्या देखकर आरही है. उसने क्या क्या देख लिया है. मुस्कान को ऊपर से पसीना भी आया हुवा था ऊपर उतनी देर रुकने की वजा से.

Muskan...umm ू आए मैं ना िद्र hi टहल रही थी...

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मुस्कान किसी न किसी तरह झूट बोल देती है लेकिन क्यों? आखिर क्यों ो झूट बोल रही थी अपने hi शोहर से!? क्यों ो बता नहीं देती आज़म को के ो पिछले 2-3 हफ़्तों से क्या देख रही है. क्या इतनी गंभीर बात अपने शोहर से छुपाना सही रहेगा? ये सब सवाल फिलहाल मुस्कान के दिमाग में नहीं ए थे ो तो सिचुएशन को टैकल करते हुवे झूट बोल चुके थी आज़म से...

Azam..haha क्या मुस्कान ये कोनसा वक़्त है टहलने के लिए और िद्र अँधेरा भी तो देखो कितना है. अगर टहलना hi है तो खाना खाकर चलते हैं कुछ देर टहलने के लिए. मैं तो बोलता हूँ हम दोनों ये रोज़ का रख लेता हैं, क्या बोलती हो?

Muskan...haa जी जी ये भी ठीक है...

Azam...hmm ठीक है अब चलो अंदर भूक भी लग रही है...

Muskan...ha चलिए...

जब दोनों मिया बीवी घर के अंदर चले जाते हैं तो सीढ़ियों के बिलकुल ऊपर रघु खड़ा था जो दीवार के सहारे छुपा हुवा तह.

Raghu...ye टहल रही थी?? कहीं इसने मुझे देख तो नहीं लिया ो सब करते हुवे!!! नहीं नहीं अगर देखा होता तो अब तक मैं जेल में होता. वैसी तीखी मिर्ची है ो...

रघु फिर चला जाता है वहां से. िद्र मुस्कान और रघु थोड़ी देर बाद डिनर करके हॉल में टीवी देखने बैठ जाते हैं साथ में िद्र उदर की बातें करते huwe....kuch आधे घंटे बाद...

Azam...hmm तो चलें टहलने??

Muskan...aap इतना उत्साह में क्यों हैं टहलने जानेके लिए??

Azam...kyunke मेरी बीवी को टहलनेका नया नया शौक चढ़ा है इसलिए हाहाहाहा...

Muskan...aisa कुछ नहीं है मैं तो बस ऐसे hi...

Azam..arey मैं तो मज़ाक कर रहा था. असल में उसदिन मैं और आसिफ जब गए थे न जॉगिंग के लिए क्या फ्रेश फील हुवा था. खानेके बाद रत में टहलनेका मज़ा hi अलग है.

Muskan...lekin इतनी रात में जाना सही रहेगा.??

Azam..arey तो तुम कोनसा अकेली जारही ho..main भी तो हूँ न साथ और तो और िद्र की लोकैलिटी का पता है न तुम्हें लाइट्स सब तरफ हैं उसका भी प्रॉब्लम नहीं. बाकि स्टोर्स सब चालू hi रहती हैं. बस तक़रीबन आधा घंटा वाकिंग करेंगे फिर वापस अजय करेंगे. देखना तुम कितना फ्रेश फील करोगी और नींद भी कितनी अछि आएगी तुम्हें..

Muskan..thik है अब आप बोल रहे हैं तो...

Azam..chalo फिर चलते हैं आज से hi शुरवात करते हैं..

Muskan...aaj से???

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Azam..haan है क्यों नहीं?

Muskan...hmm ठीक है...

फिर दोनों शोहर बीवी दूर लॉक करके निकल पड़ते हैं टहलनेके लिए. बातें करते हुवे टहलने में मुस्कान भी अब ाचा लग रहा था क्यूंकि ो उसुअल्ल्य ज़्यादातर घरमें रहती है तो उसके लिए ये थोड़ा रिफ्रेशिंग था. दोनों बातें करते हुवे हंसी मज़ाक करते हुवे चले जारहे थे. कुछ 1 कम चलनेके बाद...

Muskan...ab चलें वापस काफी दूर आगये हैं हम..

Azam..dur हाहाहा? उसदिन पता है मैं और आसिफ इससे दुगना आगे निकल गए थे...

Muskan...nahi नहीं मैं उतना नहीं चल सकती...

Azam..haha चलो कोई बात नहीं बस थोड़ी दूर hi एक चाय का ठेला है वहां से चाय पीकर फिर वापस चलते हैं..

Muskan...chai इस वक़्त?? न बाबा न..

Azam...chalo भी मुझे पता है तुम ज़्यादा चाय नहीं पीती बस एक बार तरय करने में क्या हर्ज़ है. अगर पसंद आयी तो पि लेना वर्ण मत पीना..

Muskan...hmm ठीक है...

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फिर ो दोनों थोड़ी देर चलते हुवे उसी चाय वाले ठेले के पास पोहचते huwe...wahan एक छोटा सा होटल टाइप बना हुवा था नारयल के पेड़ के सूखे ब्रांचेज से बना हुवा. आस पास अँधेरा था सिर्फ उस चाय की ठेले की लाइट थी वहां और 1-2 घर आस पास थे. आज़म और मुस्कान वहां पोहचते हैं. उस ठेले पर एक दो आदमी थे. आज़म जाकर ठेले वाले से दो चाय का बोल देता है.

थोड़ी देर बाद ो उनको चाय बनाकर दे देता है. आज़म मुस्कान के हाथ चाय थमा देता है पहले तो मुस्कान मन करती है लेकिन आज़म के कहने पर फिर ो थोड़ी पि लेती है और सुर्प्रिसिंगलय उसको टास्ते ाचा लगता है.

Azam...maine बोलै था न muskan...usdin भी हमने पि थी चाय िद्र की. बड़ी अछि चाय बनता है ये...

Muskan...thik है बाबा आप जीते बस ः...

Azam..hahaha...

चाय ख़तम करके दोनों फिर वापस जाने लगते हैं. ो दोनों जा hi रहे थे कोई उनको चाय के ठेले से जाते हुवे देख लेता है और फिर ो ठेले वाले से....

"एक बीड़ी देना"

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तो बे कॉन्टिनोएड...
 
थैंक्स एवरीवन ों 100क व्यूज! 1 लाख व्यूज काफी बड़ा नंबर होता है और इतने काम समय में तक़रीबन 3 वीक्स में, सुर्रियल! थैंक यू सो मच एच & एवरीवन. रियली अप्प्रेसियते आईटी.
 
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