Part 04
दोनों मिया बीवी फिर थोड़ा सेक्स करके सजाते हैं. अगली सुबह रोज़ की तरह ब्रेकफास्ट करके आज़म ऑफिस के लिए निकल जाता है. बादमे वर्कर्स अनेके बाद मुस्कान जानकी को बुलाकर पानी दे देती है.
ऊपर काम चल रहा था तब आधे घंटे बाद रघु काम करते हुवे देखता है के मुस्कान घर के बहार टहल रही है. उसने एक सलवार कमीज़ पहनी हुवी थी पिंक कलर की. रघु की नज़र मुस्कान के आमों पर चली जाती है कल यद् करते हुवे जब उसने मुस्कान की ब्रा हाथ में ली थी. ब्रा के कप साइज का यद् करके hi रघु का मन होरहा था जेक जोरसे मसल दे मुस्कान के रसीले आम. मुस्कान टहलते हुवे उनके लगाए हुवे पौदों के पास जाती है और उदर कुछ फेंकने के लिए झुकती है तो उसकी गांड पीछे से उठ जाती है. रघु की तो हालत खराब होजाती है ये देख कर. ो अपना लौड़ा पंत में मसलता है सब से नज़र छुपकर.
झुकी होने की वजा से पीछे गांड पर कपडा टाइट होचुका था जिससे उसकी गांड के दोनों फैंको का शेप थोड़ा बोहत नज़र ारः था. जाने अनजाने में मुस्कान रघु को उकसा रही थी. वहां से उठने के बाद मुस्कान फूल के पौदों को पानी देने लगती है. तभी वहां जानकी आजाती है.
Janki...arey मेमसाब मुझे दिज्ये मैं कर देती हूँ..
Muskan..arey नहीं रहने दो जानकी तुम जाकर काम करो. पौदों को पानी hi तो देना है ो कर लुंगी मैं.
Janki...aap क्यों तकलीफ करती है मेमसाब मैं कर देती हूँ...
Muskan...janki इसमें तकलीफ कैसी मैं तो पहले भी करती रही हूँ ये..
Janki...thik है memsab...o रमेश बोल रहा था कैसे रत तक काम करना होगा क्यूंकि साहब कहीं जारहे हैं.
Muskan..haa ो बोल रहे थे कल मुझे...
Janki...aap फ़िक्र मत कीजिए मेमसाब मैं हूँ न इसी बहाने आपसे थोड़ी बोहत बात भी होजायेगी और काम भी.
Muskan..haa ो तो सही है...
ऐसे hi दोपहर होजाती है सब खाना खाकर वापस अभी जाते हैं. मुस्कान घरमे टीवी देख रही थी क्यूंकि उसको नींद नहीं आरही थी. टीवी देखते देखते उसको नींद यही रही थी के बेल्ल की आवाज़ से उठ जाती है. जानकी चाय लेने आयी थी. चाय बनाने में जानकी भी मुस्कान की हेल्प करती है. फिर कुछ खास नहीं होता. शाम में मज़दूर वापस चले जाते हैं. रत में आज़म घर आकर खाना खाने के बाद मुस्कान उसका बैग रेडी कर रही होती है तब आज़म पीछे से उसे बाँहों में लेता है.
Muskan...rehne दिज्ये जारहे हैं न कल मुझे छोड़कर..
Azam...bas 4 दिन की hi तो बात है आजाऊंगा वापस बोलो क्या लॉन वापसी पर..
Muskan...maska लगाना तो कोई आपसे sikhe..mujhe कुछ नहीं चाहिए बस ाजावो आप जल्दी...
Azam...ajaunga बाबा अब अपने शोहर को एक रोमांटिक सा किश तो दो..
Muskan...nahi शोहर मुझे आपका बैग पैक करना है...
Azam...thik है भाई कर लो बादमे करते हैं.
मुस्कान भी स्माइल के साथ उसका बैग पैक करने लगती है. आधे घंटे बाद जब काम होजाता है तो दोनों बीएड पैर आकर लेट जाते हैं. शोहर बीवी बिच रोमांस चलता है. दोनों की लाइफ अछि चल रही थी no डाउट. दोनों एकदूसरे से प्यार भी बोहत करते थे. बस कमी बस बचे की थी और ो बात दोनों को टाइम तो टाइम खलती भी थी. ऐसा नहीं था के दोनों तरय नहीं कर चुके हैं. तरय करनेके बाद भी लक अब तक नहीं था उनका बस इसी उम्मीद में हैं के कुछ कपल्स के लेट बचे होते हैं शायद उनमे से ो भी एक हों. रोमांस के बाद सेक्स करके फिर शोहर बीवी सजाते हैं.
अगले सुबह आज़म ब्रेकफास्ट सब करके जाने के लिए रेडी होजाता है फिर अपनी बीवी से अलविदा लेकर चला जाता है. मुस्कान को पता था उसने 4 दिन बोर होजाना है बस जानकी होगी तो थोड़ा बोहत अकेलापन बातचीत से दूर होगा. मुस्कान आज जल्दी hi नहाकर रेडी होती है और नाश्ता करके घरके कामों में लग जाती है. घंटे बाद वर्कर्स भी आजाते हैं काम पर. अस उसुअल जानकी आकर पानी लेजाती है ऊपर. दोपहर से शाम तक उसुअल्ल्य सब कुछ होता. आज मज़दूरों ने रत तक भी काम करना था इसलिए सब शाम के वक़्त रेस्ट करने बैठ जाते हैं. जानकी मुस्कान के साथ घरमे थी सब के लिए जूस बना रही थी बातें करते हुवे. जूस बनानेके बाद जानकी सबको ो देती है. जूस पिटे हुवे रघु देखता है के मुस्कान अपनी स्कूटी निकल रही थी कहीं जानेके लिए उसने बुर्का पहना हुवा था. वहीँ मुस्कान शाम के वक़्त घरसे थोड़ी हवा खाने के लिए निकल रही थी. स्कूटी निकल कर मुस्कान निकल जाती है. रघु घर के दूर की तरफ देखता है तो ो बंद था.
Raghu..umm जानकी दरवाज़ा खुला है क्या??
Janki..kyun??
Raghu...o संडास रूम जाना है..
Janki..han हाँ खुला है..
रघु फिर अंदर चला जाता है असल में वाशरूम जाने आया hi नहीं था ो तो कल की तरह बाथरूम में कुछ मिलनेकी उम्मीद से आया था. ो सीधा बाथरूम चला जाता है. वहां जाकर उसे इसबार कुछ भी लटका हुवा नहीं मिलता. निराशा के साथ ो वापस जाने लगता hi है के उसे साइड में hi एक बकेट दिखती है जिसमे देखने पर उसे अंदर ब्लैक कलर की ब्रा और पंतय दोनों मिलते हैं जो मुस्कान ने सुबह निकले थे. रघु ये देखकर देविलिश स्माइल करता है. ो ब्रा पंतय उठाकर अपनी नाक के पास लेजाकर सूंघता है. मुस्कान के जिस्म की खुशबु उसे जैसे नशा दे रही थी. ो ब्रा कप्स के अंदर सूंघता ये सोचते हुवे के मुस्कान के गोर चुके इन्ही में समाते होंगे.
कल जब मुस्कान स्टूल पकडे हुवी थी तो ो उसको ताड रहा था तो यही ब्रा मुस्कान के आमों का सम्भले हुवी थी. रघु ये सब ब्रा सुंघते हुवे सोच रहा था. उसका लौड़ा करवट ले चूका था मुस्कान के बारे में सोचते hi. ब्रा बकेट में डालकर अब ो मुस्कान की पंतय को देखता है. ो सोचता है सुबह जब मुस्कान सीढ़ी से उतरती रही थी तो उसकी गांड की फांकें इसी पंतय में िद्र उदर मचल रहे होंगे.
रघु अब पंतय का अगला हिस्सा सूंघता है और वहां की खुशबु सूंघते hi जैसे उसका लौड़ा अकड़ सा जाता है डंडे की तरह ये सोचकर की मुस्कान की सहादशुदा छूट यहीं टच होती होगी. रघु अपना लौड़ा पंत के ऊपर से अब रगड़ने लगता है. उसे बर्दाश्त नहीं होरहा था मुस्कान की ब्रा पंतय को देखकर hi. ो अपने ख्यालों में डूबा hi हुवा था के उसे बहार से स्कूटी की आवाज़ अति है मतलब मुस्कान वापस आगयी थी. रघु जल्दी से पंतय भी बकेट में दाल देता है और बहार आकर जल्दी से वाशरूम में चला जाता है.
थोड़ा नार्मल होनेके बाद ो वाशरूम से बहार निकलता है और एकदम से बहार जाने hi लगा था के सामने मुस्कान दूर खोलकर जस्ट आरही थी तो दोनों टकरा जाते हैं. दोनों कुछ समझ पते इससे पहले hi ो बैलेंस खोकर गिर जाते हैं.
मुस्कान पीठ के बल गिरी थी और रघु सामने से. गिरते hi अनजाने में रघु का सर मुस्कान के आमों पर टकरा जाता है जिससे उसे मुस्कान के चुके अपने सर पर बखूबी फील होते हैं. रघु गिरा हुवा hi मुस्कान को देखता है जो बुर्के में थी. इतना करीब ो मुस्कान को लिटेराल्ल्य स्कैन करने लगता है. मुस्कान का कातिलाना फिगर उसके बुर्के में अचे से दिख रहा था ो भी इतना करीब से.
Muskan..ouchh ोुछ आए...
ो खुद को सँभालते हुवे उठ जाती है और अपना बुर्का झटकते हुवे...
Muskan...andhe हो क्या?? किदर देख कर चल रहे हो??
रघु मुस्कान को गुस्सा होता देख उठ जाता है और सिचुएशन को सम्भालनेकी कोशिश करते हुवे. उठनेके बाद अब जब दोनों खड़े थे तो रघु मुस्कान से हिघ्त में काम था इसलिए मुस्कान को थोड़ा सा निचे देखना पद रहा था बात करते वक़्त.
Raghu...arey माफ़ कीजिए मेमसाब मैंने आपको देखा नहीं एते हुवे. मैं ो संडास गया था जल्दबाज़ी में जारहा था तो टकरा गया.
Muskan...lekin देखकर चलना चाहिए न..
मुस्कान के चेहरे पर फ़्रस्ट्रेशन साफ़ था.
Raghu...maaf कर दिज्ये मेमसाब मैं देखा नहीं आपको..
Muskan...thik है ठीक है आइंदा से धयान रखना..
Raghu...ji मंसबब...
रघु फिर वहां से चला जाता है. बहार आकर ो अपने सर पर हाथ लगता जहाँ उसने मुस्कान के आम फील किये थे. बहार सब बैठे हुवे थे. रघु जाकर उदर hi बैठ जाता है.
Janki...raghu कितनी देर लगा दी अंदर मेमसाब ने कुछ बोलै नहीं...
रघु को hi पता था के थोड़ी देर पहले क्या हुवा लेकिन ो उस इंसिडेंट का ज़िकर नहीं करता...
Raghu...haa ो थोड़ा लम्बा टाइम लग गया. नहीं मेमसाब ने कुछ नहीं बोलै...
रेस्ट करनेके बाद सब वापस काम पर लग जाते हैं. आज उनको रत तक जो काम करना था. बादमे खाने के वक़्त सब चले जाते हैं. इसी बिच मुस्कान भी िद्र खाना खाकर बोर दूर करनेके लिए टीवी देखने बैठ जाती है. तब तक बहार खाना खाकर सब वापस अभी जाते हैं.
सब वापस काम पर लग जाते हैं. इसी बिच मुस्कान चाय बनाकर जानकी के हाथों भिजवाती है. उसके बाद कुछ खास नहीं होता. उसुअल काम चलता है और सब चले जाते हैं वापस.
अगली सुबह सबके काम पर अनेके बाद मुस्कान सबके लिए पानी जानकी के हाथों भिजवाती है.
Muskan..acha जानकी मुझे ो किचन में शेल्फ के ऊपर से कुछ निकलना था सीडी ले ौगी थोड़ा.
Janki..le अति मेमसाब लेकिन ो काम चल रहा है. एक काम करती हूँ किसी को ले अति हूँ मदद के लिए.
Muskan..haa प्लस..
जानकी जाकर देखती है वहां रघु hi थोड़ा वेला बैठा हुवा था इसलिए ो उसके पास जाती है.
Janki...arey रघु ो एक काम था.
Raghu...kaisa काम?
Janki...o मेमसाब हैं न उनको किचन में माले से कोई चीज़ निकालनी थी तू मदद कर देना...
ये सुनते hi रघु के मन में लड्डू फूटने लगते हैं. ो तुरंत hi माँ जाता है..
Janki...lekin ो माला थोड़ा ऊपर तू कैसे चढ़ेगा उदर...
Raghu...arey सीढ़ी है न
Janki...seedhi पर तो काम चल रहा है...
Raghu...haa लेकिन कोई स्टूल होगा न घर में..
Janki..haa होगा तू जा जाकर देख मेमसाब उदर hi हैं...
रघु की तो चंडी जैसा निकल आयी थी. ो तो मौके की तलाश में रहता है के कैसे भी मुस्कान देखने मिल जाये. ो फिर चला जाता है udr...muskan पहले तो कल के इंसिडेंट की वजा से थोड़ा वेइरेड फील करती है लेकिन कुछ नहीं बोलती...
Raghu...memsab कोई स्टूल तो होगा न घरमे..
Muskan...haa है ो मैं लती हूँ...
Raghu...arey मैं ले अत हूँ मेमसाब बताइये किदर है
Muskan...o रूम में है..
मुस्कान फिर उसके बैडरूम का दूर ओपन करके देती है. पहली बार रघु ो बैडरूम देख रहा था. क्या मस्त महक आरही थी. बैडरूम वेल मैनटैनेड रखा हुवा था. रूम की हर चीज़ जगा पर राखी हुवी थी. रघु बीएड की तरफ घूरे जारहा था....
Raghu...kya मस्त खटिया है साला...
Muskan..kya ः??
Raghu..ohh आ कुछ नहीं मेमसाब..
Muskan..kya हुवा? ो रहा स्टूल..
Raghu...han ो स्टूल..
रघु फिर स्टूल लेकर किचन में चला जाता hai...wahan मुस्कान उसे ो शेल्फ का बताती है.
रघु की हिघ्त हालाँकि मुस्कान से थोड़ी काम थी जो मुस्कान को hi अजीब लग रहा था के ये उससे शार्ट आदमी कैसे कर लेगा. लेकिन रघु अब स्टूल पर चढ़ जाता है और शेल्फ के ऊपर हाथ डालने लगता है लेकिन उसका हाथ नहीं पोहच रहा था. जिसे देख मुस्कान को हलकी सी हंसी अति है जिसे रघु सुन लेता है..
Raghu...kya हुवा मेमसाब??
Muskan...kuch नहीं ऐसे कैसे निकलोगे ो तुम्हारा तो हाथ भी नहीं पोहच रहा है..
Raghu...arey मेमसाब हिघ्त काम है मेरी लेकिन मैं ऐसी ऐसी चीज़ें कर लेता हूँ जो अचे अचे मुस्टंडे लोग नहीं कर सकते.
मुस्कान को उसकी बात समझ नहीं अति..
Muskan...kya मतलब..??
Raghu...mere पास ऐसे हतियार हैं के मैं अचे ाचों का पानी निकल सकता हूँ..
Muskan...kya मतलब है तुम्हारा...??
मुस्कान जो टोटली कन्फ्यूज्ड थी रघु की बातों पर. उसे कुछ समझ नहीं ारः था के रघु क्या बोल रहा है इसलिए ो रघु की बातें हंसी मज़ाक में ले रही थी.
Raghu...memsab मैं न अचे ाचों को बेहाल कर देता हूँ अपने हथियार से...
रघु ये बात मुस्कान को ऊपर से निचे तक देखते हुवे बोलता है...
Muskan..hahahah ऐसा कोनसा हतियार है तुम्हारे पास...??
Raghu...o ऐसा हतियार है उस जैसा आपके पति के पास होना असंभव है...
अपने शोहर ज़िकर होता देख मुस्कान थोड़ा सीरियस होती है..
Muskan...kya मतलब है तुम्हारा? तुमको पता है मेरे शोहर ऐसे हैं के किसी को भी धूल छठा दें...
Raghu...hahaha धूल छठा कर क्या करना है memsab...uske अलावा ऐसी बोहत साडी चीज़ें हैं जो आपके पति मैं दावे के साथ बोल सकता हूँ नहीं करसकते मेरी तरह...
Muskan...ye क्या बकवास कर रहे हो? मेरे पति को देखा है तुमने ो तुमको 1 मिनट में चित कर देंगे...
Raghu...arey मेमसाब मैंने लड़ाई झगडे की बात hi कब की है..
रघु की बातों को मुस्कान समझ hi नहीं पढ़ी थी ो उसके डबल मीनिंग बातिओं से अनजान थी. मुस्कान को अबतक रीलीज़ नहीं हुवा था के एक मामूली सा मज़दूर उससे कैसी बातें कर रहा है...
Raghu...rehne दिज्ये मेमसाब आप नहीं सम्झिन्गी....
मुस्कान थोड़ा कन्फ्यूज्ड कड़ी थी वहां...
Raghu...memsab पकड़िए...
रघु ये बात जान बूझकर अपना एक हाथ निचे पंत पर रखते हुवे बोलता है. जिसे मुस्कान अनजाने में hi देखती है लेकिन अनजाने में hi पूछ भी बैठती है..
Muskan..kya??
Raghu..kya पकड़ा दूँ मेमसाब आपको...
मुस्कान रघु को देखती है जिसके काळा चेहरे पर एक गन्दी सी स्माइल थी.
Muskan...kya कहाँ तुमने??
Raghu...memsab ो स्टूल पकड़िए थोड़ा ऊपर है न कहीं गिर न जॉन...
Muskan..thik है..
मुस्कान स्टूल पकड़ती hai...raghu अपनी एड़ियों पर रहकर ऊपर से ो चीज़ निकल देता है.
Raghu...ye रही मेमसाब आपकी चीज़...
Muskan...shukriyaa..
Raghu...arey इसमें कैसा शुक्रिया मेमसाब्ब्ब्ब...
रघु फिरसे मुस्कान को ऊपर से निचे एक बार देखता है मुस्कान से थोड़ी नज़रें churakar...utrne के बाद रघु किचन के दूर से जा hi रहा था के..
Muskan...ye स्टूल तो रख दो...
Raghu...arey हाँ मेमसाब रखता hun...ek गिलास पानी मिलेगा??
Muskan..haan क्यों नहीं..
रघु स्टूल रूम में रख अत है और किचन के दूर पर जाकर खड़ा होजाता है. मुस्कान उसे पानी देती है और अपने रूम जाने लगती है. दूर पर खड़े होनेकी वजा से जगा थोड़ी काम थी इसलिए जब मुस्कान जाने लगती है तो रघु थोड़ा पीछे एक पल के लिए होता है लेकिन पता नहीं कहाँ से हिम्मत जोड़कर मुस्कान के दूर से जाते हुवे hi थोड़ा आगे होजाता है. मुस्कान जो थोड़ा रघु की तरफ पीठ किये हुवे जाती थी उसको रघु पीछे से जाते हुवे hi टच होता है. लेकिन टच के साथ मुस्कान कुछ ऐसा फील करती है जिससे उसकी जैसा रोह hi हिल जाती है.
मुस्कान ने आज एक सूट पहना हुवा था ग्रीन कलर का और उसको जाते हुवे अपनी गांड पर कुछ फील होता है. ो एक शादीशुदा ाव्रत थी और उसे पता था ो क्या चीज़ थी. ओह एक बार रुकने का सोचती है लेकिन सिचुएशन कितनी ावकार्ड होसकती है और ये अनजाने में हुवा सोचकर जाने लगती है लेकिन..
Raghu...arey मेमसाब आपके घरमे कोई बचे नज़र नहीं एते...
Muskan...nahi हैं..
Raghu..kyun मेमसाब कितने साल होगये आपकी शादी को??
रघु ये सब बातें मुस्कान की गांड की तरफ घूरते हुवे बोल रहा था...
मुस्कान थोड़ा फ़्रस्ट्राटे होते हुवे..
Muskan...tumko उससे मतलब तुम अपने काम से काम रखो..
Raghu...arey मेमसाब आप तो बुरा मन gayi...maaf कीजिएगा...
मुस्कान बिना कुछ बोले hi जाने लगती है अपने रूम में...
Raghu...waise मेमसाब मेरे 7 बचे हैं गौण में...
मुस्कान रघु की बात सुनकर हैरान होजाती है और मन में hi सोचती है.." 7 बचे!!! बैरी"
मुस्कान जो उदर घूमी हुवी थी उसे नहीं पता था के रघु की नज़र इस वक़्त उसकी गांड पर है और साथ में ो अपना लौड़ा भी पंत के ऊपर से रगड़ रहा था...
Muskan...acha ठीक है..
उतना बोलकर मुस्कान रूम में चली जाती है. जाते हुवे रघु मुस्कान की िद्र उदर मटकती हुवी गांड की फैंको को देखना नहीं भूलता...
तो बे कॉन्टिनोएड...