Hindi Sex kahani - Muskan - Page 2 - SexBaba
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Hindi Sex kahani - Muskan

Part 09

बीड़ी लेकर ो आदमी वहीँ टंगा हुवा लाइटर जलाकर फूंकने लगता है. उस आदमी ने शर्ट और पंत पहन राखी थी. उसने थोड़ी देर पहले एक कपल को देखा था जो यहीं से गए थे. बीड़ी फूंकने के बाद ो एक तम्बाकू का पैकेट भी दाल लेता है मन में कुछ सोचते huwe...wahin साइड में उस आदमी का एक बैग भी पड़ा हुवा था.

िद्र आज़म और मुस्कान चलते हुवे घर पोहंच जाते हैं. थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर बैडरूम में दोनों कपडे निकल कर सोये हुवे थे. आज़म जहाँ मुस्कान के ऊपर आकर फोरप्ले कर रहा था वहीँ मुस्कान आहें भर रही थी. आज उसे कुछ अलग सा फील होरहा था. उसने आज ऐसा कुछ देखा था जो ो खुद शादीशुदा होकर अभी तक एक्सपीरियंस नहीं कर पायी थी ऐसा नहीं था ो के उससे ो कमी महसूस कर रही थी ो तो बस इससे बिलकुल बेखबर थी के ऐसा भी कुछ होता है.

रघु जिस तरह उसकी पत्नी से बात कर रहा था ऐसे कोण बात करता है अपने पत्नी से. ऐसा तो कोई आवारा hi बात कर सकता है. आज़म ने तो कभी मुस्कान से ऐसी बातें नहीं करि.

ो रघु तो तेहरा hi लफंगा आदमी न कोई शर्म न कोई तमीज अपनी खुद की पत्नी से भी कितना गन्दी भाषा में बात कर रहा था. मुस्कान का शोहर वैसा नहीं था ो तो बिलकुल सीधा साधा अपने काम से काम रखनेवाला, किसी के साथ अहतराम से बात करने वाला. मुस्कान को तो पलकों पर बिठा कर रखता है कभी उसको तकलीफ नहीं होने देता किसी भी बात की वजा से...

थोड़ी देर बाद आज़म और मुस्कान सेक्स करना शुरू करते हैं जैसे नोर्मल्ली ो करते हैं. मुस्कान आहें भर रही थी आज़म के हर धक्के के साथ वहीँ आज़म खूब मज़े में धक्के लगाए जारहा था. जब आज़म धक्का लगा रहा था तो आज़म को फील होता है के उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी में पहली बार मुस्कान अपनी गांड हल्का हल्का उठा रही थी धक्कों के साथ साथ. आज़म थोड़ा सरप्राइज भी था क्यूंकि मुस्कान ऐसे कभी नहीं करती थी.

ीदार हालाँकि िद्र थी लेकिन उसका दिमाग कहीं और hi था. मुस्कान आज उस वक़्त हुवे उस सन को यद् कर रही थी जहाँ रघु और उसकी पत्नी वीडियो कॉल पर बात करते हुवे जैसे सेक्स क्र रहे थे. उनका सेक्स कितना डिफरेंट था उनके कपरिसों में. ो रघु कितनी गन्दी गन्दी गलियां और अल्फ़ाज़ इस्तिमाल कर रहा था अपनी पत्नी से और तो और उसकी पत्नी को एक ककड़ी उसकी छूट में डालकर कितनी तेज़ी से अंदर बहार करने के लिए बोल रहा था और बोल रहा था उसका और ककड़ी का कोई कपरिसों नहीं है!!!!

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मुस्कान कमला का उस तरह जोरसे ककड़ी का उसकी छूट में अंदर बहार करना सोचकर अपनी गांड हलकी हलकी ऊपर कर रही थी. अनजाने में खुद को कमला की जगा इमेजिन कर रही थी के ो इस वक़्त एक ककड़ी अपनी शादीशुदा बुर में डालकर अंदर बहार कर रही हो. उसे उसमे मज़ा भी ारः था. उसकी आहें बढ़ रही थी टाइम के साथ. वहीँ आज़म भी धक्के लगाने में लगा तो हुवा था लेकिन मुस्कान के यूँ अचानक जोश को देख और उसका यूँ अपनी गांड धीरे धीरे ऊपर करने से ो भी नज़दीक था छूटने के...

आखिर कर आधे मिनट बाद आज़म कहते हुवे मुस्कान की छूट में झाड़ जाता है. मुस्कान भी अपने ख्याल से बहार अति है और देखती है के उसका शोहर झाड़ चूका है. मुस्कान की नज़र निचे अपनी शादीशुदा छूट पर जाती है. हलके सुनहरे बालों के निचे उसकी छूट के फुले हुवे लाइट पिंक लिप्स उसके शोहर के लुंड से लिपटे हुवे थे. झड़ने की वजा से आज़म का लुंड मुरझा चूका था और आज़म उसे निकल भी देता है और साइड में लेट जाता है.

Azam...jaan आज मज़ा आज्ञा..

Muskan..hmm

आज़म.. क्या सोच रही हो??

Muskan...kuch नहीं बस यूँ hi.

Azam..hmm वैसे आज क्या होगया था तुमको??

Muskan...kya मतलब क्या हुवा था??

Azam...kuch नहीं थोड़ा तुम एक्ससिटेड सी थी..

Muskan...waisi कोई बात नहीं बस आपके लिए...

Azam..hayyy...chalo मैं फ्रेश होकर अत हूँ..

Muskan...thik है...

आज़म के अंदर जाने के बाद मुस्कान उठकर शीशे के सामने अति है और खुद को उसमे देखने लगती है. शादी को 2 साल होचुके थे और इन 2 सालों में उसका फिगर काफी निखार चूका था जो उसुअल्ल्य नोटिस करती थी हालाँकि हेल्थ कॉन्ससियस थी ो फिर भी शोहर की सिवा करने में hi ज़्यादा ध्यान देती थी. ो इस वक़्त पूरी नंगी शीशे के सामने कड़ी खुद को निहारे जारही थी. उसकी नज़र अपने गोर गोल गोल चुचों पर जाती है जो एकदम परफेक्ट लगते थे और उनपर लाइट ब्राउन कलर के निप्पल्स तो चार चाँद लगते थे. फिर ो देखती है अपनी छूट को जहाँ उसके ऊपर हलके सुनहरे बाल थे और छूट के थोड़े नैचुरली फुले हुवे लाइट पिंक कलर के लिप्स. उसका पूरा गोरा बदन ऐसा था के जैसे उसपर एक भी दाग न हो. बिलकुल साफ़.

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मुस्कान खुद को निहरने में लगी थी के आज़म बाथरूम से बहार आजाता है और अपनी बीवी को शीशे के सामने तेहरा हुवा पता है.

Azam..kya हुवा मुस्कान??

मुस्कान थोड़ी हड़बड़ा सी जाती है क्यूंकि ो ऐसे कभी नहीं करती थी. उसुअल्ल्य सेक्स के. बाद दोनों फ्रेश होकर सो जाते थे लेकिन आज मुस्कान थोड़ा वेइरेड सा एक्ट क्र रही थी.

Muskan...oo ू कुछ नही मैं तो बस ऐसे hi..

Azam..kya हुवा मुस्कान कुछ बात है??

Muskan...kuch भी तो नहीं खंखार आप टेंशन ले रहे hain...main फ्रेश होकर अति हूँ..

Azam...thik है...

थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर जब मुस्कान वापस अति है तो आज़म सोचुका था जिसे देख मुस्कान स्माइल करती है और कपडे पहन कर सोजती है.

अगली सुबह नाश्ता करके आज़म ऑफिस के लिए निकल जाता है और मुस्कान थोड़े काम काम करके हॉल में बैठकर टीवी देखने में लग जाती है. कुछ देर बाद मज़दूर भी आजाते हैं काम के लिए. मुस्कान टीवी देखते हुवे बैठी hi थी के दूर बेल्ल बजती है. जब ो दूर जाकर खोलती है तो सामने रघु को पति है जो अपने दन्त दिखता हुवा खड़ा था. रघु को यूँ अचानक अपने सामने देखने से मुस्कान को कालका सन यद् अत है....

Raghu...aa मंसबब..

Muskan...haa बोलो क्या काम है???

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Raghu...o मेमसाब मुझे वाशरूम जाना था...

मुस्कान मन men...isko बस वाशरूम hi जाना होता है कहीं वही वीडियो कॉल करने तो नहीं??? नहीं नहीं मैं हूँ घरमे इस वक़्त और ो इतनी हिम्मत तो नहीं करेगा...

Muskan...thik है उदर...

मुस्कान उसको वाशरूम दिखते हुवे बोलती है और रघु उदर चला जाता है और मुस्कान फिर दूर हल्का सा बंद करके वापस जाकर सोफे पर बैठ जाती है टीवी देखते हुवे. रघु वाशरूम में जानेके बाद हल्का सा दूर खोलकर बाथरूम जानेकी तरय करता है लेकिन ये रिस्की था क्यूंकि मुस्कान थी वहां. ो बाथरूम की तरफ जाने hi लगता है के मुस्कान थोड़ी मूवमेंट करती है जिसे देख झट से रघु वापस वाशरूम चला जाता है. ो सोचता है इतनी डेरिंग करनेके के चक्कर में ो पिट hi न जाये...

बाथरूम में होते हुवे रघु पेशाब करने लगता है और उसकी आवाज़ बहार हॉल तक आने लगती है जिसे मुस्कान भी सुन लेती है उसे बड़ा अजीब लग रहा था ो मन hi man..."chiiii"

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फिर रघु वाशरूम से 5 मिनट बाद निकलता है. ो वाशरूम से निकल कर जाने hi वाला था के उसकी नज़र टीवी पर चली जाती है जो मुस्कान भी देख रही थी. ो इस वक़्त कोई मूवी देख रही थी जिसमे अचानक एक हॉट सन शुरू होजाता है जिसमे हीरो हेरिओं रोमांस कर रहे थे. रघु के कदम एकदम रुक जाते हैं. वहीँ मुस्कान जो टीवी देख रही थी उसे भी अहसास होता है के वाशरूम से रघु बहार आया है जस्ट. उसको बड़ा hi ऐम्बर्रासिंग फील होरहा था के ऐसे सन को इस वक़्त hi चलना था जब ो एक अधेड़ू उम्र का मज़दूर यहाँ पर था.

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ऐसी ावकार्ड सिचुएशन में मुस्कान को नहीं समझ ारः था के ो क्या करे. रघु थोड़ी देर उस सन को देखता रहता है और जब ो एन्ड होता है तोह...

Raghu..aa मंसबब मेरा होगया ही..

मुस्कान को समझ नहीं अत के ये आखिर कर उसे क्यों बता रहा है...

Muskan..th ठीक ही..

रघु फिर बहार चला जाता है और मुस्कान थोड़ा रहत की साँस लेती है. बड़ी ावकार्ड सिचुएशन जो बन गयी थी थोड़ी देर pehle...uske बाद मुस्कान टीवी ऑफ करके बैडरूम चली जाती है. दोपहर में खाने के बाद वर्कर्स दोबारा काम पर लग जाते हैं इसी बिच मुस्कान सोजती है. शाम में उसकी आंख खुलती है और टिया पीनेके बाद फ्रेश होकर ो बहार निकलती है घरसे....

स्कूटी निकल कर ो गेट से बहार थोड़ा घुमनेके लिए निकल पड़ती है. ो कुछ दूर गयी hi थी के कोई use...."muskannn"

मुस्कान स्कूटी स्टॉप करके उदर देखती है तो ो निर्मला आंटी थी जिनके घर ो अक्सर जाया करती थी. ो फिर स्कूटी वहां ले जाती है..

Muskan...arey आंटी कैसी हैं आप??

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Nirmala...main ठीक हूँ मुस्कान तुम कैसी हो? बोहत दिन होगये आयी नहीं घर...

Muskan..haha आंटी ो मेहमान ए थे इसलिए थोड़ा बिजी होगयी थी और आपको तो पता है न घर का रेनोवेशन का काम भी चल रहा है इसलिए आना जाना काम hi होता है...

Nirmala...ohh ाचा और कैसे चल रहा है घरका काम??

Muskan..bas चल रहा है आंटी...

Nirmala...hmm ावो न अंदर कहाँ जारही हो??

Muskan..o आंटी मैं तो बस निकली थी थोड़ा घूमने घरमे थोड़ा बोर होरही थी इसलिए...

Nirmala...haha ो तो है चलो एक एक चाय hi पि लेते हैं इसी बहाने बातें होजाएंगी और तुम्हारा बोरियत भी दूर होजायेगी और सच कहूं तो मेरी भी ः..

Muskan..hahaha चलिए आंटी चाय होजाये...

मुस्कान स्कूटी साइड में hi पार्क करने लगती है तभी वहां से एक रिक्शा गुज़रता है जिसमे बैठे लोगों को देख निर्मला आंटी अजीब सा मन बनती है जो मुस्कान भी नोटिस करती है.

Muskan...kya हुवा आंटी आप उस रिक्शा की तरफ देख kar...kon थे ो??

Nirmala...kya बताऊँ मुस्कान उस ाव्रत को देख कर hi मुझे घिन अति hai...besharm कहीं की...

मुस्कान को अजीब लगता है के निर्मला आंटी भला ऐसा क्यों बोल रही हैं.

Muskan...kyun आंटी क्या हुवा और कोण है ो ाव्रत??

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Nirmala...muskan तुम तो कुछ 2 महीने पहले hi यहाँ आयी हो न तुमको शायद नहीं पता होगा इस बारे में...

Muskan..haa मैं समझी नहीं आंटी क्या हुवा था 2 महीने पहले??

Nirmala...o एक लम्बी कहानी है तुम चलो अंदर मैं बताती हूँ...

दोनों अंदर जाने के बाद हॉल में बैठ जाते हैं चाय पिटे हुवे.

Muskan...aunty ो आप कुछ बोल रही थी...

Nirmala...haa ो जो रिक्शा गया था न बहार उसमे न एक पति पत्नी थे...

Muskan..kon आंटी? कोण थे ो??

Nirmala...o समरीन और अहमद कुरैशी थे यहीं कुछ दुरी पर रहते हैं. ो बंसी की दुकान है न उनके सामने वाला जो घर है न ो उनका hi है...

Muskan...o ाचा ाचा मैंने देखा है ो घर लेकिन कबि बात नहीं हुवी उनसे...

Nirmala...bat करना भी मत खास कर के उस समरीन कुरैशी से...

Muskan...kyun आंटी??

Nirmala...o जो...

तभी दूर बेल्ल बजती है और निर्मला जाकर दूर खोलती है उसका पति था. निर्मला मुस्कान को फिर कभी उस बात को बतानेका बोलती है फिर मुस्कान थोड़ी देर बाद वहां से चली जाती है उसे समझ नहीं रहा था आखिर निर्मला आंटी बताना क्या चाहती हैं उस कपल के बारे में. ो यहीं पास hi थोड़ी दूर रहते थे. मुस्कान स्कूटी लेकर फिर वापस घर चली जाती है. वहां पर सरे मज़दूर काम पर लगे हुवे थे. मुस्कान स्कूटी पार्क करने के बाद वहीँ गार्डन में थोड़ा घूमने लगती है. ऊपर फ्लोर से काम करते हुवे रघु निचे देखता है मुस्कान को.

मुस्कान ने उसुअल सूट पहना हुवा था जिसमे ो सिंपल लेकिन मस्त लग रही थी. चलने की वजा से उसके सूट पर से चुचों की थिरकन हलकी हलकी दिख रही थी जिसका मज़ा रघु ले रहा था और जब मुस्कान दूसरी तरफ जाती तो रघु को मुस्कान की गांड की थिरकन के व्यू मिल रहा था.

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ो मुस्कान को देखने में एकदम खो सा जाता है के तभी उसके साथ से कोई चीज़ निचे गिरती है उसके पास hi...

Ramesh..o रघु भाई संभल के क्या हुवा??

Raghu..kuch नहीं कुछ नहीं ो हाथ से गिर गया...

ीदार मुस्कान अब थोड़ी देर बाद अंदर चली जाती है. रात में मज़दूरों के जानेके बाद मुस्कान जो हॉल में बैठी हुवी थी ो ऊपर जानेका सोचती है देखने के क्या आज भी रघु ो सब कर रहा है. उसे खुद नहीं पता था के आखिर ो क्यों ो सब देखने बार बार जारही है. मुस्कान दूर ओपन hi कर रही थी के उसे आज़म की गाड़ी की आवाज़ अति है और ो रुक जाती है. आज़म आज जल्दी hi आज्ञा था मुस्कान फिर आज़म का बैग लेकर दोनों अंदर चले एते हैं.

Muskan...kya बात है आज जल्दी आगये आप..

Azam..bas भाई बीवी की यद् आगयी और दौड़े चले ए..

Muskan..haha ाचा जी 2 महीनों में पहली बार लगता है बीवी की इतनी जल्दी यद् आगयी काम पर जानेके बाद...

Azam...aisi बात नहीं है मैं तो अत रहा हूँ पहले भी है न?

Muskan..haha रहने दिज्ये..

Azam..haha बस आज काम जल्दी ख़तम होगया तो सोचा तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड क्र लेते हैं..

Muskan...hmm क्या बात है...

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Azam..haa चलो मैं फ्रेश होकर अत हूँ फिर खाना खा लेते हैं...

Muskan...thik है...

आधे घंटे बाद दोनों खाना खा लेते हैं और हॉल में टीवी देखने बैठ जाते हैं. बातें करते हुवे दोनों काफी देर होजाती है...

Azam...to चलें वाकिंग के लिए फिर..

Muskan...raat नहीं होगयी कल के मुकाबले...?

Azam...koi रात नहीं हुवी चलो चलते हैं...

फिर दोनों रेडी होकर वाकिंग के लिए निकल पड़ते हैं. थोड़ी देर चलने के बाद मुस्कान थोड़ा थकन सा फील करने लगती है.

Muskan...chalen वापस मेरे पेअर दर्द करने लगे हैं...

Azam...isi के लिए तो ये वाकिंग कर रहे हैं देखना रोज़ इस तरह चलने से एक्टिव भी रहोगी और ऐसे कभी दर्द भी नहीं hoga...bas ो चाय की दुकान थोड़ी दूर है ो पीकर चलते हैं वापस...

Muskan...aap और आपकी चाय चलिए...

दोनों कुछ देर और चलने के बाद उस चाय के ठेले के पास पोहंच जाते हैं और वहां चाय का बोलते हैं. इसी बिच दोनों िद्र उदर की बातें करते हैं. चाय पीनेके बाद दोनों वापस जाने लगते हैं तभी...

कल की तरह वही आदमी मुस्कान और आज़म को जाते हुवे देख रहा था बीड़ी फूंकते हुवे.

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 10

वाकिंग करके आज़म और मुस्कान घर पोहचने के बाद फ्रेश होकर इसबार सजाते हैं.

अगली सुबह संडे की वजा से आज़म घर पर hi था. थोड़ा लेट उठनेके बाद दोनों ब्रेकफास्ट करके हॉल में बैठ जाते हैं. पिछली बार की तरह दोनों ने मूवी का प्लान बनाया था.

दोनों फिल्म देखने बैठ जाते हैं स्नैक्स लेकर. दोनों क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे थे एकदूसरे के साथ. बहार वर्कर्स अपने टाइम पर आजाते हैं और काम शुरू करते हैं जो आज़म और मुस्कान को पता चल गया था. फिल्म तक़रीबन आधी होनेके बाद आज़म वाशरूम चला जाता है तभी दूर बेल्ल बजती है मुस्कान जाकर दूर खोलती है तो सामने जानकी थी..

Muskan..haa जानकी

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Janki..memsab ो पानी चाहिए था..

Muskan..arey हाँ मैं तो भूल hi गयी अभी देती हूँ...

Janki..ji और मेमसाब..

तभी वहां रमेश भी अत है..

Ramesh...aa मेमसाब ो साहब किदर हैं??

Muskan..o आरहे हैं क्यों कुछ काम था...??

Ramesh..haa ो उनको कुछ पूछना था ऊपर वाले फ्लोर के बारे में...

तभी आज़म भी आजाता है..

Azam...arey रमेश क्या हुवा??

Ramesh...sahab ो ऊपर वाले फ्लोर पर विंडो के डिज़ाइन का पूछना था...

Azam..haa चलो तुम मैं अत हूँ...

ो दोनों फिर चले जाते हैं. िद्र जानकी भी पानी लेकर चली जाती है उनके पीछे. मुस्कान वहीँ हॉल में टीवी देखते रहती है. ऊपर आज़म और रमेश विंडो के डिज़ाइन के बारे में डिसकस कर रहे थे तभी वहां रघु सोचता है के आज़म तो यहाँ है मतलब मुस्कान निचे अकेली होगी ो फिर किसी बहाने निचे जानेका सोचता है लेकिन तभी थोड़ी देर में आज़म का डिसकस करके होजाता है और ो निचे चला जाता है.

आज संडे था तो आज़म और मुस्कान कहीं बहार घूमकर अनेका सोचते हैं और रेडी होकर बहार आते हैं. ऊपरी फ्लोर से रघु उनको देख रहा था. मुस्कान ने बुर्का पहना हुवा था उसुअल्ल्य ो कहीं नेअर्बी जानेके लिए बुर्का नहीं पहनती थी लेकिन आज उसने घूमने जाना था इसलिए पहना हुवा था. आज़म की कार के पास दोनों जाने लगते हैं ऊपर से रघु मुस्कान को देखे जारहा था बुर्के में उसकी गांड को िद्र उदर मटकते हुवे. मुस्कान का शादीशुदा परफेक्ट फिगर उस बुर्के में कातिलाना लग रहा था. रघु चुप चुपके मुस्कान को अचे से ताड़े जारहा था जबतक के ो कार में बैठ नहीं जाती.

आज़म और मुस्कान कार लेकर निकल जाते हैं घुमनेके लिए. दोनों मॉल शॉल में घूमते हैं दोपहर तक फिर वहीँ लंच करके दोनों वापस घर आकर सजाते हैं. शाम में दोनों की आंख खुलती है और मुस्कान टिया बनाकर आज़म को देती है. टिया पीनेके बाद आज़म ऊपर चला जाता है काम देखने के लिए. िद्र मुस्कान नहानेके सोचती है और टॉवल लेकर चली जाती है बाथरूम.

तभी िद्र जानकी चाय के लिए घरमे अति है आज़म से पूछकर जो बताता है के मुस्कान अंदर hi है.

Janki...memsabb??

मुस्कान को शावर के अंदर से जानकी की आवाज़ अति है और ो थोड़ी देर में बहार आजाती है बिना आवाज़ दिए hi लेकिन तभी ो देखती है के जानकी के साथ हरीश खड़ा था. मुस्कान ने इस वक़्त ड्रेस तो पहना हुवा था लेकिन नहाने की वजा से ो थोड़ा गीला भी होगया था ऊपर से उसने टॉवल अपने बालों में लगाया हुवा था जिससे ो खुद को कवर कर सकती लेकिन उसने इस वक़्त दुपट्टा तक नहीं डाला हुवा था. अब सिचुएशन ये थी के मुस्कान के गोल गोल चुचों का शेप उस शावर के पानी से गीले हुवे मुस्कान के ड्रेस में अछि तरह से दिख रहा था. ो एकदम से आवाज़ लगाए बिना आयी थी जिसका जानकी और हरीश को आईडिया नहीं था.

हरीश के सामने अब मुस्कान ऐसी हालत में कड़ी थी उसका मन खुला का खुला रह जाता है. जानकी भी कुछ देर के लिए थोड़ा आश्चर्य करती है के मुस्कान के इस वक़्त ऐसी इसमें हरीश के सामने आगयी है. हरीश देखता है कैसे मुस्कान का फिगर उस हलके हलके गीले ड्रेस में उठकर दिख रहा hai..ye सब काफी अचानक हुवा था इसलिए किसी को भी सम्भलनेका उतना मौका नहीं milta...ab जानकी जल्दी से रियेक्ट करते हुवे...

Janki...harish भर jaa...maaf कीजिए मेमसाब..

हरीश भी वक़्त की नज़ाकत को समझते हुवे जल्दी से भर चला जाता है...

Janki...maaf कीजिए हमें नहीं पता था आप नहाने गयी हैं...

Muskan...janki थोड़ा धयान रखा करो na...pichli बार भी तुम उस आदमी को ले आयी थी...

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Janki..maaf कीजिए मंसबब..

Muskan...koi बात नहीं किसलिए आयी थी..

Janki...o चाय के लिए...

Muskan...haa ो बना लो...

फिर मुस्कान अपने बैडरूम चली जाती hai...wahan ो सोचती है जब से उनके घर का काम शुरू हुवा है तबसे अजीब अजीब सी चीज़ें होरही हैं उसके साथ. पहले तो ो बस अपने शोहर के सामने होती थी लेकिन उस तरह की प्राइवेसी से उसे कोम्प्रोमाईज़ करना पद रहा था.

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थोड़ी देर बाद आज़म भी आजाता है ऊपर से जानकी चाय लेकर जाचुकी थी. ऐसे hi ो दिन गुज़र जाता है रात में शोहर बीवी दोनों एन्जॉय करते हैं और सजाते हैं...

अगली सुबह रोज़ की तरह उठकर फ्रेश होकर नाश्ता करने के बाद आज़म अपने ऑफिस निकल जाता है. मुस्कान भी बहार हॉल में टीवी देखते हुवे बैठ जाती है अपना काम निपटा कर. वर्कर्स भी अपने टाइम पर आकर काम चालू करते हैं. ऐसे hi कुछ खास नहीं होता दोपहर में लंच के बाद मुस्कान सोकर उठती है शाम में और टिया पीकर फिर ो बहार निकलती है घूमने के लिए अपनी स्कूटी पर....

घूमते हुवे जब ो जारही थी तो उसे निर्मला आंटी का घर दीखता है और कल की बात यद् अति है जब निर्मला आंटी कुछ बतानेका बोलै रही थी. मुस्कान स्कूटी पार्क करके उतर जाती है और जाकर बेल्ल बजाते है. अंदर से थोड़ी देर तो रिस्पांस नहीं अत लेकिन फिर निर्मला आंटी बहार आजाती हैं...

Nirmala...arey मुस्कान ावो ावो..

Muskan..disturb तो नहीं किया आंटी..??

Nirmala...arey कैसा डिस्टर्ब मुस्कान और मैं कोनसा बिजी होती हूँ...

Muskan...haha मैं बस घूमने निकली थी टी सोच आपसे मिलती चलूँ...

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Nirmala...acha किया मैं भी बोर होरही थी ो भी वाक पर निकले हैं इस waqt...chalo अंदर...

दोनों अंदर जाते हैं और इसी बिच निर्मला दोनों के लिए टिया बनती है और ो िद्र उदर बातें कर रहे थे....

Muskan..hahaha ो बात तो बिलकुल सही hai...aunty ो आप कल कुछ बता रही थी...

Nirmala...haa ो तो मैं भूल gayi..suno मैं बताती हूँ....

आजसे 2 साल पहले ये जो समरीन और उसका पति अहमद कुरैशी ये नयी नयी शादी करके यहाँ ए थे. मेरी बात भी होती थी उससे पहले सब कुछ ाचा चलता था. दोनों पति पत्नी घूमना फिरना हम लोगों से बात चित करना सब होता था. अहमद कुरैशी किसी कंपनी में काम करता है. शादी के 1 महीना तोह ो घर में रहा शायद अपनी पत्नी को टाइम देनेके लिए. मेरे ख्याल से ो दोनों हनीमून भी गए थे...

Muskan...acha फिर..

Nirmala...fir एक महीने की छुट्टी के बाद अहमद काम पर जाने लगा और ो रात को देर तक घर अत था मेरे ख्याल से क्यूंकि मैंने खुद कई बार उसको लेट एते देखा tha...un दोनों की शादी नार्मल चल रही थी इस वक़्त तक.

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लेकिन अहमद का यूँ काम पर लेट आना काफी महीनों तक चलता रहा. उनके घर एक नौकरानी काम करती है विमला जो हमारे यहाँ भी काम करती है उसने मुझे ऐसी ऐसी चीज़ें बतायीं हैं के सुनोगी तो तुम्हारे होश उड़ जायेंगे...

Muskan....aisa क्या बताया उसने आंटी आपको??

Nirmala...suno, उन दोनों की शादी को तक़रीबन 8 महीने होचुके थे. अहमद अब भी घर लेट hi अत था. विमला हर रोज़ उनके घर जाती थी उस वक़्त काम पर. उसने मुझे बताया के कैसे उन दिनों समरीन को िद्र का hi एक गुंडा जिसका नाम बलराम भाई था ो उसको तंग करता था. आते जाते जब भी समरीन बुर्के में घूमती तो उसको गंदे गंदे कमेंट पास करता था. वैसे भी बलराम काफी बदनाम था उस वक़्त एरिया में पता नहीं कितनी आवर्तों के साथ छेड़खानी की थी और न जाने कितनो के साथ गलत काम भी कर चूका था. बड़ा बदनाम था ो.

Muskan...tha मतलब अब ो?

Nirmala...jail में है...

Muskan...kis वजा से??

Nirmala...usne किसी को मार मार के अध् मारा कर दिया था उसी केस में अंदर है..

Muskan...bapre ये तो बोहत खतरनाक लगता है...

Nirmala...haa उस वक़्त और भी zyada...vimla ने मुझे बताया के समरीन ने उस वक़्त अपने पति को भी बताया जिस वजा से ो दोनों कंप्लेंट भी करवाई लेकिन कुछ फायदा नहीं हुवा और ऊपर से अहमद अपने काम में बिजी था. रोज़ रोज़ का यूँ तंग करना एकदिन समरीन को गुस्सा आज्ञा और उसने कुछ लोगों के सामने बलराम को थप्पड़ मरना चाहा लेकिन बलराम ने उसका हाथ सबके सामने hi पकड़ लिया...

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और बदतमीज़ी करने लगा लेकिन किसी तरह से समरीन वहां से भाग गयी thi..fir ऐसे hi दिन बिताते गए समरीन को बलराम तंग करता hi रहा हर दूसरे din...jab भी समरीन घरसे निकलती तो बलराम उसके पीछा करता.

Muskan...lekin आंटी ये बलराम था कितने साल का मतलब इस तरह गुंडा गर्दी किसी ने उसे रोका नहीं...

Nirmala...nahi किसी की हिम्मत नहीं होती क्यूंकि उसकी वोट hi उस वक़्त उतनी थी. और बलराम एकदम गुंडे की तरह hi कला बदसूरत सा चेहरा और पेट बहार निकला हुवा लेकिन मज़बूत हमेशा अपने शर्ट के बटन खुले रखना रोदय की tarha...koi 55 साल का होगा बूढ़ा लेकिन लम्बा chauda...sar पर भी गांजा एकदम आवारा लगता था ो...

Muskan...fir क्या हुवा क्या किया समरीन ने आगे?

Nirmala...o क्या करती जो भी करना था बलराम ने करना था और वही हुवा जिसका दर समरीन को था. बलराम के अंदर बदले की आग इतनी बाधक चुकी थी के मैंने सुना है बलराम ने उसके साथ ज़बरदस्ती की जब उसका पति एकदिन किसी काम से बहार गया हुवा था. उसदिन विमला गयी थी काम पर उसने बताया के अंदर से दूर बंद था और अंदर बड़े hi अजीब अजीब सी आवाज़ें आरही थी ो ये समझ कर वापस आगयी के शायद समरीन और उसका पति अहमद लगे होंगे लेकिन फिर बादमे उसे पता चला के उसका साथ कुछ और hi हुवा था....

Muskan...kya सचमे??

Nirmala...haa ये बात तब साबित हुवी जब अगली सुबह विमला काम पर गयी तो उसने देखा घरसे बलराम निकल रहा था उसके जानेके बाद जब ो अंदर गयी तो देखा के कपडे िद्र उदर पड़े हुवे थे बीएड भीकृ हुवा था और समरीन एक कोने में बैठकर रो रही थी तो ो समझ गयी के क्या हुवा होगा...

Muskan...fir क्या हुवा???

अगले दिन जब उसका पति घर आया तोह विमला को लगा के शायद समरीन अहमद को सब कुछ बता देगी लेकिन उसने कुछ नहीं बताया उसे!!!

Muskan...kya!!!!

Nirmala...haa अब और सुनो...2-3 हफ़्तों बाद एक दिन जब विमला काम के लिए सुबह सुबह उनके घर गयी थी तो अहमद काम पर जाचुका था और समरीन अपने बैडरूम में थी. विमला जब वहां पोह्ची तो उसे बड़ी अजीब सी आवाज़ें बैडरूम से सुनाई दे रही थी जब ो नज़दीक गयी तो उसने दूर खुला पाया जो हल्का सा खुला था और जब उसने अंदर देखा तोह दांग रह gayi...andr समरीन अपनी निघ्त्य ऊपर करके पंतय साइड में करके अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी...

Samreen...ssssaaahhh आआ आआआआ आआह्ह ाःह aaaaaaaaaammp आआह्ह्ह...

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विमला देखती है के समरीन बड़ी इंटेंसिटी के साथ अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी जैसे ो डेस्पेरेट ho...ungli अंदर बहार करते हुवे ो अपने चुके भी बरी बरी अपनी निघ्त्य के ऊपर से मसले जारही थी अपनी ऑंखें बंद किये हुवे...

Samreen...aaaahh aaaaaaaaaaawww आअह्ह्ह ाःह मममममहह ाःह...

विमला साफ़ सुन पढ़ी थी के समरीन की सिसकारियां मज़े में निकल रही थी जैसे ो कुछ सोचकर ये सब कर रही हो और उसको उसमे बड़ा मज़ा ारः हो....

उसी तरह जब ो दूसरे दिन गयी तो उसदिन समरीन अपनी छूट में एक बड़ी सी मूली अंदर बहार करके खुद को शांत कर रही thi....uski निघ्त्य कमर तक छड़ी हुवी थी जिसकी वजा से उसकी गोरी मोती झंगें दिख रही थी और पंतय साइड में करके ो मूली अपनी छूट में अंदर बहार कर रही थी...

Samreen...aahhh सससससस मेर्री आअह्हह्ह्ह्ह प्लस आह्हः मममममहह आआह्ह्ह्ववव आह्ह्ह्हह...

ऐसे hi कई दिन विमला समरीन का ये खेल देखती रहती है कभी ो मूली तो कभी गाजर तो कभी ककड़ी तो कभी केला अपनी छूट में डालकर जैसे अपनी प्यास mitati....ye तो पक्का था के समरीन का पति अहमद उसे सटिस्फी नहीं कर पता था इसलिए तो ो ये सब कर रही थी...

ऐसे hi और थोड़े हफ्ते गुज़र जाते हैं और इस बिच बलराम समरीन को तंग तो करता था लेकिन समरीन उसपर ज़्यादा रियेक्ट नहीं करती थी जो के बड़ा अजीब था ो बस चली जाती वहां se...fir एक दिन जब विमला सुबह सुबह उनके घर पोहंची hi थे के ो देखती है के बलराम उनके घरसे सिगरेट फूंकते हुवे निकल रहा था उसके जानेके बाद जब विमला अंदर जाती है दबे पौन तो समरीन के कमरे में ो देखती है के कमरा तहस नहस तो है लेकिन समरीन बिलकुल नंगी बीएड पर पड़ी हुवी थी उसके गोर जिस्म पर गधा सफ़ेद रास जगा जगा लगा हुवा था जैसे बलराम उसके ऊपर झाड़ कर गया हो...

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ो देखती है के समरीन इसबार रो तो नहीं रही लेकिन ये सब देखकर तो ऐसा hi लग रहा है के फिरसे बलराम ने समरीन के साथ ज़बरदस्ती की है!!!! क्यूंकि समरीन की फटी हुवी निघ्त्य और ब्रा वहीँ पास hi में पड़े हुवे थे और पंतय उसके एक पौन में लटक रही thi...samreen का ऐसे hi बिना कुछ रियेक्ट किये पड़े रहना अजीब था और आखिर पहली बार जब बलराम ने उसके साथ ज़बरदस्ती की थी तो आखिर समरीन ने ये बात क्यों अपने पति को नहीं बताई?!

विमला उसके अगले दिन जाती है सुबह सुबह लेकिन उसदिन कुछ नहीं होता फिर उसके अगले दिन जाती है तो बलराम इसबार जाचुका घरसे और विमला अंदर जाकर देखती है बैडरूम के हलके खुले हुवे दूर se...andr समरीन पूरी नंगी पड़ी हुवी थी लेकिन उसके चेहरे पर चमक थी और उसके साथ गङ्गा सफ़ेद रास भी. बैडरूम की हालत देख कर तो ऐसे लग रहा था जैसे वहां कोई तूफ़ान आया ho..bedsheet, पिल्लोव्स, समरीन की ब्रा पंतय िद्र उदर पड़े हुवे थे...

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विमला को लेकिन समरीन का बदला हुवा रूप अजीब लगा रहा था इतना कुछ होरहा था उसके साथ फिर भी मुस्कुरा रही थी आजकल उसके चेहरे पर चमक रहती थी. विमला ने जैसे थान लिया था के ो सच का पता लगाकर रहेगी इसलिए ो उस इंसिडेंट के 1 हफ्ते बाद रात में उनके घर अति है और विंडो के पास चुप जाती है. ो टेहरी उनके घर की नौकरानी उसको घर के हर हिस्से का पता था.

तक़रीबन आधे घंटे बाद विमला देखती है के घर की दूर बेल्ल बजती है, जिस जगा ो कड़ी थी वहां से हॉल का व्यू मिलता था. बेल्ल थोड़ी देर बजने के बाद समरीन के बैडरूम का दूर खुलता है और अंदर से समरीन एक निघ्त्य में बहार अति है उसकी चाल में अजीब सी ऐडा थी जैसे ो इंटेंशनली वैसे चल रही हो अपनी गांड िद्र उदर मटकते हुवे. ो जल्दी जल्दी जाकर दूर खोलती है और सामने बलराम को खड़ा पति है जो शर्ट पंत में खड़ा था. शर्ट के 2-3 बटन खुले हुवे.

समरीन उसके तरफ देख रही थी. बलराम की लाल ऑंखें देख कर लग रहा था उसने चढ़ाई हुवी थी. समरीन उसको देख hi रही थी के अचानक बलराम उसको अपनी तरफ जोरसे खींचता है जिससे समरीन आकर बलराम से टकराती है उसके बड़े चुके निघ्त्य के ऊपर से बलराम की छाती में टकराते हैं. विमला ये सब विंडो से देख रही थी और अचंबित थी कितना रोगलय बलराम समरीन से बर्ताव कर रहा था....

Balram...saali छिनाल दरवाज़ा खोलने में इतना टाइम क्यों लगायआ!!!

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 11

Samreen...mai मैंन ू सो रही थिई...

Balram...saali मैंने तुझे क्या बोलै था जब मैं आनेवाला हूँ तो तुझे बिलकुल तैयार रहना होगा...

Samreen...mainn तैयार होने होनेवाली थी..

विंडो से देख रही विमला हैरान थी के ये गुंडा समरीन से इतना ऑथॉरिटीवे टोन में कैसे बात कर रहा है. ऐसा क्या हुवा के समरीन ऐसे सुब्मिस्सिवे होचुकी थी एक गुंडे के सामने जो उसको छेड़ता था.

Balram...chinnaal कहींन की तैयार होनेवाली थी हहहह!!! फिर क्यों नहीं हुवी...

Samreen...mainn ू तैयार होनेवाली थिई तब्ब तक्क आप आगयीए....

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Balram...aap आगये की बची साली तुझे इसकी सजा मिलेगी...

इतना बोलकर ो समरीन को पकड़ कर दीवार से सत्ता देता है और उसे झुका देता hai...vimla अपने ऑंखें बड़ी करके देखने लगती है के आखिर ये गुंडा अब क्या करेगा समरीन के साथ. बलराम अब झुकी हुवी समरीन की निघ्त्य कमर तक ऊपर करता है जिससे उसकी गोरी बड़ी गांड उसके सामने आजाती है. विमला भी देखती है क्या गोरी और बड़ी है समरीन की और क्या लग रही थी ो ऐसी पोजीशन में. िद्र बलराम समरीन की गोरी गांड देखकर एक बार अपना लौड़ा मसलता है पंत के ऊपर...

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Balram...saali कुटिया...

इतना बोलकर ो एक जोर्का थप्पड़ समरीन की गांड पर लगता है...

"चट्टाअक्कक्क्क्क"

Samreen...aaaaaahhhhhhhmmmmppp...

समरीन अपने हाथ मन पर रख लेती है लेकिन थप्पड़ इतना जोरसे बलराम ने लगाया था के समरीन की गांड मरी हुवी जगा पर लाल होचुकी थी. बलराम का बड़े हाथ की पांच उंगलिया उठकर दिख रही थी. विमला भी अपने मन पर हाथ रख लेती है ये सब देख कर. समरीन उस थप्पड़ से उभरती तब तक फिरसे एक जोर्का थप्पड़ उसकी गांड पर पड़ता है...

"चायत्ततताआखक्क"

Samreen.....aaaaaaampppp..

फिरसे ो अपने मन पर हाथ रखकर अपनी चीख रोक लेती है. बलराम और विमला देख सकते थे के समरीन की गोरी गांड लाल होचुकी थी मार की वजा से. ऐसे hi बलराम 4-5 थप्पड़ और उसकी गांड पर मरकर एकदम लाल कर देता है.

अब बलराम अपनी पंत खोल देता है और निचे छोड़कर अपनी अंडरवियर भी निचे कर देता है जिससे उसका कला लौड़ा सामने झूलने लगता है जो खड़ा होचुका था. विमला बलराम के काळा लौड़े को देख कर हैरान रह जाती है जो गन्दा सा लग रहा था. बलराम अब समरीन के बाल पकड़ कर उसे उठाकर अपनी तरफ घुमाकर निचे बिठा देता है.

Balram...chal साली शुरू होजा तैयार कर इसे तेरी बुर के लिए...

समरीन अब अपने हाथ आगे बढाकर उसका लौड़ा पकड़ लेती है और धीरे से अपने मन में अंदर बहार करने लगती है. उसका लौड़ा प्रॉपरलय समरीन के मन में नहीं जारहा था लेकिन ो कोशिश पूरी कर रही थी के ज़्यादा से ज़्यादा अंदर ले सके...

विमला ये सब देख रही थी और उसे यकीन नहीं होरहा था के ये समरीन कर रही है. उसने काफी टाइम से यहाँ काम किया हुवा था और उसने देखा था समरीन कितनी नमज़ि और हयादार ाव्रत थी और अपने पति से कितना प्यार करती थी ो ाव्रत यहाँ एक गुंडे के सामने ऐसी हालत में थी.

Balram...saali और जोरसे चूस समझ नहीं अत तुझे कितने बार चूस चुकी है मेरा लौड़ा तू हहहह!!!

बलराम गुस्से के साथ उसे बोलता है. समरीन अब रफ़्तार बढ़ाते हुवे बलराम के लौड़े पर अपना मन आगे पीछे करने लगती है.

Balram...aahh इसी तरह मेरी चित्राल अपनी ज़ुबान का भी इस्तिमाल कार्र अचे से छत्त मेरे लौड़े को साली..

समरीन उसके कहे मुताबिक ज़ुबान से उसका लौड़ा चाटने लगती है. उस हॉल में ब्लोजॉब का आवाज़ साफ़ ारः था.

Balram..tatte कोण तेरी मा चाटेगी..

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समरीन अब लौड़े के साथ उसके टट्टे भी बरी बरी चाटने लगती है. हालाँकि उसका लौड़ा दिखने में बड़ा गन्दा लग रहा था लेकिन समरीन कोई मज़बूरी उसे सब कुछ सेहन करके ये करने पर मजबूर कर रही थी. समरीन का यूँ शिद्दत के साथ उसका लौड़ा चूसने और चाटने की वजा से बलराम अब मज़े में चुका था ो समरीन के बाल पकड़ कर उसका मन अपने लौड़े पर तेज़ी से आगे पीछे करने लगता है...

"गवाँकक ग्वाक ग्वाक ग्वाक" की आवाज़ें हॉल में गूंजने लगती है....

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समरीन को तकलीफ होने लगती है लेकिन बलराम मज़े में गले तक अपना लौड़ा समरीन के मन में पिस्टन की तरह अंदर बहार करे जारहा tha...takreeb 2 मिनट ऐसे hi करने के बाद बलराम समरीन के मन में hi कररहते हुवे झाड़ जाता है और उसके मन के अंदर ऐसे hi अपना लौड़ा डेल रखता है उसके गले तक उतरे हुवे...

समरीन को साँस लेने में तकलीफ होती है इसलिए ो बलराम के पेअर पर फाॅर्स डालने लगती है लेकिन बलराम की ताकत के सामने उसकी ताकत ऑब्वियस्ली काम पद रही थी. बलराम थोड़ी देर में अपना लौड़ा एकदम से बहार निकल लेता है और समरीन रहत की साँस लेती है. लौड़ा बहार एते hi समरीन के मन से थोड़ा बोहत मणि बहार अति है क्यूंकि ज़्यादातर तो ो निगल चुकी थी.

Balram..chinaal कहीं की...

समरीन थोड़ा खांसते हुवे उदर बैठी हुवी थी. उसके मन के आस पास बलराम के लौड़े का रास लगा हुवा था. विमला ये सब देखकर अचंबित तो थी hi लेकिन समरीन ये सब होने क्यों दे रही थी उसके साथ ये उसके मन में सवाल ज़रूर था.

थोड़ी देर बाद बलराम समरीन को ऊपर उठता है और उसकी निघ्त्य ऊपर से निकल देता है एकदम से. समरीन अब ब्रा पंतय में कड़ी थी उसका गोरा बदन केहर ध रहा था. उसके बड़े चुके उसकी ब्रा में ठीक से समां नहीं रहे थे और निचे उसकी पंतय उसकी बड़ी गांड के फांकों को थोड़ा भी कवर नहीं कर पढ़े थे. विमला भी बहार से समरीन का गोरा बदन देख रही थी.

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बलराम अब समरीन की ब्रा के स्ट्रैप्स पकड़ के एक झटके में उसकी ब्रा खिंच देता है जिससे ो टूट कर उसके हाथ में आजाती है जिसे ो एक तरफ फेंक देता है. ब्रा एकदम से टूटने की वजा से समरीन के गोर बड़े चुके बहार झूलने लगते हैं. एकदम बेदाग गोर चुके उसके बेहद रसीले लग रहे थे. बलराम अब अपना बड़ा हाथ दोनों चुचों पर रखकर थोड़ी देर उनको मसलता है...

Samreen...ssss आआअह्ह्ह्हह...

Balram...tere ये गुब्बारों हमेशा मुझे ुगस्ते हैं जैसे मुझे चुनौती दे रहे हों साले...

इतना बोलकर ो और जोरसे समरीन के आम मसलने लगता है. समरीन इसी बिच सिसकारियां भर रही थी हालाँकि उसे दर्द होरहा था फिर भी ो खुद को काबू किये हुवी थी. बलराम का लौड़ा भी फिरसे उठकर टाइट होचुका था इसलिए ो अब उसके चुके छोड़कर हॉल के सोफे पर बैठ जाता है पेअर फैला कर...

Balram...aajaa साली जो उसदिन बैडरूम में किया था ो करके दिखा फिरसे..

समरीन अब बलराम के सामने ाजति है बिलकुल नंगी सिर्फ पंतय के साथ उसके गोर बड़े चुके बहार खुले झूल रहे थे. बलराम बड़े तव के साथ एक शरीफ हयादार शादीशुदा जवान ाव्रत को खुदके सामने उसी के घर में रखे बैठा हुवा था. समरीन की नज़रें निचे थी.

Balram...saali चित्राल शुरू होजा मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं है...

समरीन अब अपना हाथ निचे लेजाकर पंतय को साइड में करके अपनी ऊँगली वहां धीरे से दाल देती है...

Samreen...aaahhmmppp...

पंतय साइड में होनेकी वजे से उसकी गुलाबी छूट नुमाया थी बिलकुल गुलाबी पेटल्स जो अचे से चूड़े थे बलराम के लौड़े की वजा से. समरीन की छूट को देख कर लग रहा था के बलराम ने उसकी सेवा बोहत अछि तरह से कर राखी है.

Samreen...aahhh आआआह्ह्ह्ह ससस...

ो अपनी शादीशुदा छूट में ऊँगली अंदर बहार कर रही थी जबकि उसके सामने एक आवारा गुंडा बलराम जो एक कला सा बूढ़ा बैठा हुवा था. बलराम को बड़ा मज़ा ारः था ये सब देख कर. आखिर उसने एक जवान शादीशुदा ाव्रत को इतना कुछ करने पर मजबूर जो किया था. लेकिन कैसे? इसका जवाब सिर्फ समरीन और बलराम के पास था...

थोड़ी देर ऐसे hi समरीन से फिंगरिंग करवाने के बाद बलराम का लौड़ा अब ज़्यादा hi अकड़ चूका था इसलिए ो सोफे से उठकर अपनी पंत अंडरवियर और शर्ट निकल कर पूरा नंगा होजाता है और समरीन के पास आकर उसको किसी डॉल की तरह कंधे पर उठा है और बैडरूम में चला जाता है.

विमला बैडरूम के अंदर उस जगा से नहीं देख सकती थी लेकिन उसने कुछ आवाज़ें ज़रूर सुनीं उधर जैसे उनके अंदर जानेके बाद बीएड की आवाज़ जैसे बलराम से समरीन को बीएड पर पटका हो फिर कोई कपडा फटने की आवाज़ जो ज़रूर समरीन की पंतय क्यूंकि उसका वही एक कपडे बचा था. थोड़ी देर बाद "aaaaaaaaaaahhhhhhh" की आवाज़. उसके साथ बलराम की मरदाना कररहने की आवाज़े जैसे ो पुरे जोश में हो.

विमला वहां काफी टाइम तक रुकी लेकिन ो आवाज़ें रुकी नहीं बल्कि समरीन की चीखें और बलराम की ग्रन्ट्स लगातार उसको सुनाई दे रहे थे जैसे ो जानवरों की तरह उसके साथ सम्भोग कर रहा था.

विमला फिर वहांस से लौट आयी. ो अगले दिन गयी थी उसके घर और उदर समरीन की तबियत ख़राब थी और ो लड़खड़ा कर चल रही थी. वैसा तो होना hi था इतना कुछ होनेके बाद.

विमला बता रही थी कैसे समरीन काफी बदल चुकी थी उसके बाद जैसे ो मार्किट सब बिना बुर्के के जाती और कपडे भी थोड़े ओपन टाइप के पहने लगी थी पता नहीं क्यों. उसका पति भी तो उससे ज़्यादा सवाल नहीं करता था प्यार जो करता है उससे.

फिर विमला ने एकदिन देखा के समरीन कहीं जारही थी जब अहमद काम पर गया हुवा था. ो िद्र उदर देखते हुवे छुपते छुपाते कहीं जारही थी.

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विमला उसका पीछा करती है किसी तरह तो देखती है के समरीन यहीं जो सुनसान बिल्डिंग है न उसमे चली जाती है और वहीँ बहार बलराम की बुलेट बाइक थी. विमला ज़्यादा रिस्क नहीं लेना चाहती थी इसलिए और अंदर नहीं गयी लेकिन उसने आवाज़ें बड़ी अजीब अजीब सुनी उदर ो समझ गयी थी के क्या चल रहा होगा...

ये तो पक्का था के समरीन अब पहली वाली हयादार ाव्रत तो नहीं रही जो उसके पति से वफाई और प्यार करती थी ो काफी चेंज होचुकी थी. उसे देख कर लग नहीं रहा था के ो किसी मज़बूरी में ये सब कर रही हो.

विमला ने फिर मुझे बताया के कैसे एकदिन अहमद किसी काम से हफ्ते भर के लिए बहार गया हुवा था और समरीन ने उसे हफ्ता भर न अनेका बोलै था ो समझ गयी थी के kyun...us हफ्ते के तीसरे दिन विमला शाम के वक़्त वहां गयी छुपते chupate...o बलराम के अनेका वेट कर रही थी और आधे घंटे बाद ो आया भी और अपनी बाइक पार्क करके सिदा घरमे चला गया.

विमला धीरे से वही विंडो के पास चली गयी और अंदर का नज़ारा देख कर हैरान रह गयी. बलराम सोफे पर बैठा हुवा था और उसके सामने समरीन कड़ी थी बुर्के में लेकिन सबसे हैरानी वाली बात उसने अंदर कुछ नहीं पहना था क्यूंकि समरीन के बड़े चुचों का शेप साफ़ साफ़ बिना ब्रा के पता चल रहा था और उसकी गांड पर भी साफ़ पता चला रहा था.

Balram...saali मेरी छिनाल ये हुवी न बात अब तू हुवी मेरी असली रैंड हाहाहा...

समरीन वहीँ कड़ी बलराम की बातें सुन रही thi...balram का भी लौड़ा अकड़ उसे परेशां कर रहा था इसलिए...

Balram...meri रद्द ीदार और मेरी पंत निकल मेरा लौड़ा तुझे ऐसे देख कर बौखला गया है...

समरीन अब चलकर वहां अति है और चलते हुवे उसके बिना ब्रा के बड़े चुके बुर्के के अंदर िद्र उदर झूम रहे थे. समरीन वहां आकर बैठ जाती है और बलराम की पंत निचे लेती है. उसकी अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू बना हुवा था. समरीन अपने गोर हाथों से उसकी अंडरवियर निचे लेती है और एकदम से उसका कला लौड़ा बहार आजाता है जो एकदम रोड की तरह खड़ा tha...samreen की सांसें उसे देख बढ़ जाती हैं...

Balram...dekh किस तरह से मेरा लौड़ा तेरी रंडी बुर के लिए तैयार hai...lekin उससे पहले मेरा लौड़ा चूसने शुरू कर.

बलराम के कहे मुताबिक समरीन वैसे hi बुर्के और हिजाब में बलराम का कला लौड़ा चूसने लग जाती है. अपनी ज़ुबान से चाटते हुवे बलराम को पूरा मज़ा देते हुवे.

Balram...chal अपने पति को कॉल लगा और उससे बात कर...

Samreen...slurrpp इस वक़्क़क्तत्त..

Balram...haa साली इसी वक़्त और हां बात करते हुवे मेरा लौड़ा तू चूसना बंद नहीं करेगी समझी...

समरीन थरथरते होठों के साथ अपना मोबाइल लेकर अपने शोहर अहमद को कॉल लगाती hai...kuch रिंग के बाद...

Ahmad..helloo जान...

Samreen..hha हेलल हील्लू..

Ahamd...haa बोलो जान कुछ काम था...

Samreen..hhh हां ू ो क्या कार्र रही होऊ...

Ahmad...kuch नहीं काम पर हु क्यों क्या हुवा??

Samreen..kk कक कुछ नाहीइ बॉस ऐसे hi पूछ रही थी...

"सलूरररप्प स्लुर्र्प्प ग्वाक सससस"

Ahmad...ye कैसी आवाज़ें हैं समरीन??

समरीन थोड़ा घबरा जाती है और बलराम की ततफ देखती है जो उसे चूसते रेहनेका बोलता है...

Samreen..oo ू मैं शेक पी सलूरररप्प रही थी...

Ahmad...acha कोनसा जूस??

Samreen...slluurrpp ू मैं ू चोच चॉकलेट शेक...

इसी बिच समरीन बलराम का कला लौड़ा कुछ ज़्यादा hi जोश के साथ चूसे जारही थी जैसे उसको शोहर के साथ बात करते हुवे ये करने में मज़ा ारः था...

Ahmad...achaa तुम्हें तो चॉकलेट पसंद नहीं था!!!

Samreen...oo हंप्प्प अब ही पसंदड़...

Ahmad...aur बताओ कैसे फील कर रही हो मेरे बगैर...

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Samreen..."tumare बगैररररर आआह्ह गवक गवक गवाँकक गवक गवाँकक गवाँकक गवाँकक गवाँकक"

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 12

अहमद को कॉल पर अचानक अजीब सी आवाज़ें आने लगती हैं. ो अपनी बीवी पर बोहत ज़्यादा भरोसा करता था इसलिए उसके मन में कोई भी गलत ख्याल नहीं अत उल्टा ो परेशां होजाता है अपनी बीवी के लिए....

ीदार बलराम समरीन को बालों से पकड़ कर उसका सर अपने लौड़े पर तेज़ी से आगे पीछे करने लगता है और उसी का आवाज़ अहमद को कॉल पर सुनाई दे रहा था. समरीन कुछ नहीं कर सकती थी बलराम जितने फाॅर्स के साथ उसका मन छोड़ रहा था उसके शोहर के कॉल पर होते हुवे भी.

Ahmad....samreen क्या हुवा ये कैसी आवाज़ ही समरीन??

"गवाँकक गवाँकक गवाँकक गवाँकक" फिर भी अहमद को लगातार ो आवाज़ आरही थी. थोड़ी देर यूँ hi तेज़ी से लौड़ा अंदर बहार करने के बाद बलराम समरीन का मन चोर देता है...

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समरीन के मन से बलराम के लौड़े का रास बह गिर रहा था. समरीन एक हयादार के अलावा बाकि सब लग रही थी इस वक़्त. एक लोकल गुंडा उसके साथ अपना मन मर्ज़ी कर रहा था और समरीन उसका विरोद भी नहीं कर प् रही थी. समरीन वहीँ थोड़ी देर बैठती है...

Ahmad...helloo..samreen...samreen??

समरीन अपने शोहर की आवाज़ सुनकर अपने हाथ में मोबाइल की तरफ देखती है और उसके बिलकुल सामने बलराम का कला फनफनाता लौड़ा देखती है जिसपर उसका गधा रास और उसकी थूक लगी हुवी थी. उसके शोहर को क्या hi पता था के उसकी हयादार बीवी के साथ इस वक़्त क्या होरहा है.

Ahmad...samreennnn किदारर हो क्या हुवा??

Samreen...hffff हहह हां अह्मद्द ू जूस पिटे वक़्त ठसका गया था इसलिए ो आवाज़...

Ahamd...kya करती हो जान संभल कर पीना चाहिए ना...

Samreen...haa आगे से ख्याल रखूंगी...

बलराम अब जाकर वैसे hi सोफे पर बैठ जाता है और समरीन को उसी तरह चलते हुवे अपने पास अनेका इशारा करता है. मोबाइल की तरफ एक बार देखते हुवे ो अब धीरे धीरे बलराम के पास घुटनो के बल जाने लगती है. बिना ब्रा पंतय के बुर्के में उसके चुके हिल रहे थे िद्र उदर और पीछे उसकी बड़ी गांड के दोनों फांकों का शेप सा बना हुवा था. बलराम जो पेअर फैला कर आराम से बैठा था सोफे पर समरीन को इस तरह एते हुवे देख अपने लौड़े को सहलाये बिना नहीं रह पता.

समरीन जैसी शरीफ और हयादार शादीशुदा ाव्रत को इस तरह कुटिया की तरह चलते उसके पास एते हुवे देख तो किसी का भी पानी निकल जाये. समरीन के वहां पोहचते hi बलराम उठ खड़ा होता है और समरीन को उठाकर खड़े खड़े hi 69 पोसितों में ले अत है. उठाने की वजा से उसने पहना हुवा बुर्का ऊपर से निचे गिर जाता है और बलराम के सामने समरीन की गोरी बड़ी गांड और गोरी मोती झंगें सामने आजाती है जिसे ो एक बार सूंघता है जैसे कोई नशा कर रहा हो.

समरीन भी कहीं न कहीं बलराम के यूँ उसके शरीर के लिए पागलपन अलग hi मज़ा देता था. अब इस पोजीशन में समरीन के सामने बलराम का कला लौड़ा फिरसे खड़ा था और अब बलराम समरीन की शादीशुदा छूट पर अपना मन रखकर जानवरों जैसे चाटने लगता है.

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इस अचानक प्रहार से समरीन को अलग hi मज़ा आने लगता है उसकी सिसकारियां फिरसे गूंजने लगती हैं. बलराम बिलकुल जैसे उसकी छूट खाये जारहा था आखिर कर समरीन एक जवान ाव्रत थी और बलराम के ठरकी आदमी. समरीन अपने बिलकुल सामने बलराम का कला लौड़ा देखती है जो बड़ा hi खुंखार लग रहा था. उस काळा लौड़े पर टोपे तक स्किन छड़ी हुवी थी. ो अब अपने गोर हाथ लेजाकर उसका लौड़ा पकड़ लेती है लेकिन जिस इंटेंसिटी के साथ बलराम उसकी छूट चाट रहा था उसको स्टेबल रह पाना मुश्किल होरहा था. ो अपने मन पर हाथ रखे हुवी क्यूंकि अभी तक उसका शोहर कॉल पर hi था...

Ahmad...samreen यार क्या कर रही इतना इतनी देर तक्क जवाब नहीं दे रही ho..hellloo..

अहमद बोल hi रहा था के बलराम अब अपना एक हाथ आगे लेजाकर समरीन का मन पर अपने लौड़े पर दे देता है जैसे आर्डर कर रहा हो उसे के ो लौड़े चूसे उसका लेकिन इसी बिच समरीन के हाथ से मोबाइल भी निचे गिरकर टूट जाता है और ऑफ होजाता है जो समरीन देखती है तभी बलराम अपने दोनों हाथ उसकी गांड पर रखकर जोरसे मसलता है. समरीन जहाँ अपनी छूट बलराम के यूँ चाटने की वजा से मज़े से ऑंखें बंद किये हुवी थी वहीँ बलराम समरीन की शादीशुदा छूट खाने में लगा हुवा था.

"ससससस अह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhhh ससस हममपपपप अह्ह्ह्ह"

समरीन मज़े में कुछ ज़्यादा hi सिसकारियां भरने लगती है जिससे साफ़ पता चल रहा था के ो अब ये एन्जॉय कर रही थी. ो बलराम का लौड़ा भी अपने मन में लेकर अछि तरह चूस रही थी. दोनों एकदूसरे को भोगने में लगे हुवे थे जहाँ बलराम एक राक्षस और एक गुंडा था और वहीँ समरीन एक घरेलू शादीशुदा ाव्रत.

ऐसे hi थोड़ी देर बाद समरीन खुद पर कण्ट्रोल खो देती है और बलराम के मन पर hi झड़ने लगती है और इतने इंटेंस ओर्गास्म के बाद समरीन का शरीर कमज़ोर सा पद जाता है. बलराम अब समरीन को निचे उतर देता है. समरीन बलराम के सामने कड़ी थी तभी अचानक बलराम उसका बुर्का फाड़ कर निकल फेंकता है. ो अब बलराम के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी और उसका गोरा बदन देख बलराम का लौड़ा फिरसे अकड़ने लगता है...

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अब बलराम समरीन को एकदम से गॉड में उठा लेता है और बैडरूम की तरफ जाने लगता है. उसने समरीन को ऐसा उठाया था जैसे ो कुछ भी न हो. बलराम उसको लेकर बैडरूम की और जारहा था उसका अकड़ा हुवा कला लौड़ा िद्र उदर बल खा रहा था. फिर रूम का दूर बंद होता है. विमला यहाँ कड़ी बस सोच hi सकती थी के अंदर क्या होरहा होगा लेकिन थोड़ी देर बाद उसने आवाज़ें ज़रूर सुनी...

ऐसी आवाज़ें जैसे अंदर बैडरूम में पूरा बीएड हिल रहा हो. चुदाई का आवाज़ इतना तेज़!!! दोनों की स्किन्स जब मिल रही थी तो अजीब सी मधुर आवाज़ आरही थी और साथ में बलराम के तेज़ धक्कों की आवाज़ बस उस रूम में हवस का तूफ़ान सा आया हुवा था. ो बैडरूम जो बस समरीन और उसके शोहर का था लेकिन इस वक़्त समरीन और एक गैर मज़हबी गुंडा उस रूम में चुदाई किये जारहे थे.

"आआआअह्ह्ह्ह मममम ahhhhhhhhhh प्लसस आआह्ह्ह्हह"

"चित्राल सललीई ले"

"आआह्ह आआअह्ह्ह स्सह्ह्ह्ह आआआअह्ह्ह"

(रूम के अंदर का नज़ारा)

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विमला उसदिन को कभी नहीं भूल सकती थी कैसे जानवरों जैसे बलराम इतनी हयादार शरीफ शादीशुदा ाव्रत को छोड़ रहा था जो उसकी बेटी की उम्र की है...

इतना कुछ सुनकर मुस्कान का तो सर hi चक्र चूका था. उसे यकीन नहीं होरहा था के ऐसा भी कुछ होसकता है और समरीन को देख कर लगता नहीं था के ो ऐसा कुछ कर सकती थी. मुस्कान बस अपने मन पर हाथ रख कर सुने जारही थी निर्मला की बात.

Muskan...fir क्या हुवा आंटी उसके शोहर को पता नहीं चला क्या??

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Nirmala...yakeen karogi...nahi पता चला!!

Muskan...sachme!!!

Nirmala....haan!! और एक बात है जो तुम सुनोगी तो तुम्हारे होश उड़ जायेंगे...

Muskan...kya आंटी??

Nirmala...pata है कल जब ो रिक्शा पर जारहे थे तुमने नोटिस नहीं किया होगा शायद ो समरीन पेट से है और तुमको तो पता चल गया होगा किसका बचा होगा उसके पेट में...

मुस्कान बड़ी ऑंखें करते हुवे बस निर्मला को देखे जारही थी ो समझ जाती है के निर्मला क्या कहना छह रही है...

Muskan..mm मतलबबब उस गुंडई का!!??

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Nirmala...haan...

मुस्कान बस अपने मन पर हाथ रख लेती है ये सोचकर hi के नयी नयी शादी हुवी एक हयादार शरीफ शादीशुदा ाव्रत ने अपने hi शोहर के साथ धोका कर दिया और उस गुंडे गैर मज़हबी का बचा लिए घूम रही है!!!

दोनों थोड़ी देर और बातें करते हैं और फिर मुस्कान वहां से चली जाती है अपने घर. अंदर जाकर ो फ्रेश होकर हॉल में बैठ जाती है टीवी देखने. लेकिन उसका ख्याल निर्मला आंटी के बोले हुवे बातों पर hi था आखिर कैसे समरीन ने उतना बड़ा कदम उठा लिया थी तो ो एक हेडेड ाव्रत अपने शोहर से प्यार करने वाली जैसे उनकी नौकरानी ने निर्मला को बताया. लेकिन फिर भी मुस्कान उन सब बातों को इग्नोर करते टीवी देखने लगती है.

रात में सब वर्कर्स अपने काम करके चले जाते हैं और थोड़ी देर बाद आज़म भी अपने काम से वापस आजाता है. डिनर सब करके दोनों कल की तरह hi वाकिंग पर निकल जाते हैं.

Azam...muskan अगले वीक कहीं घूमने चलते हैं...

Muskan..ghumne यूँ अचानक??

Azam..haha हां एक्चुअली कंपनी से फॅमिली वेकेशन मिला है 3 डेज अस ा बोनस क्यूंकि कंपनी ने प्रॉफिट किया hai...so चलते हैं...

Muskan...lekin कहाँ??

Azam...tumhen कहाँ जाना है batao....vacation हम कहीं भी जासकते हैं लेकिन 3 दिन के लिए...

Muskan...acha माँ के घर चलें...

Azam...hahaha मुझे पता hi था चलो ठीक है दिल्ली चलते हैं....

Muskan...yayyy!!

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Azam....chalo हम स्लो होगये हैं...

Muskan...hmm

दोनों वाकिंग करते हुवे थोड़ी दूर आजाते हैं और थोड़ा टायर्ड फील करने लगते हैं लेकिन दोनों पानी नहीं लेकर ए थे.

Muskan...azam मुझे प्यास लगी है...

Azam...thodi देर और चाय की दुकान पर hi पि लेते हैं...

Muskan...hmm ठीक है...

दोनों फिर वापस से थोड़ी देर वाकिंग करते हैं तो छायी की दुकान आजाती है दोनों वहां पानी पिटे हैं और आज़म अपनी चाय. कुछ देर बातें करने के बाद फिर दोनों वापस चल पड़ते हैं दोनों निकलते hi हैं के आज़म से कोई आदमी टकराता है...

Azam..arey भैसबब देख कर चलो!!

Admi...haa हां मैंने देखा नही ो पेअर टकरा गया...

Azam...haa देख कर....

फिर आज़म और मुस्कान चले जाते हैं वहां se...jo आदमी आज़म से टकराया था ो वही था जो पिछली दो बार मुस्कान और आज़म को देखे जारहा था.

घर पोहनचक्र दोनों फ्रेश होकर अपने बैडरूम चले जाते हैं. दोनों सोने hi वाले थे के आज़म को उसके मोबाइल पर किसी का कॉल अत है और ो उस कॉल को देख कर मुस्कान की तरफ देखता है जो अपना मोबाइल देख रही थी.

Azam...aa मुस्कान मैं अत हूँ..

Muskan...kahan जारहे हो??

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Azam...bas िद्र hi अभी अत हूँ...

Muskan..hmm...

आज़म बहार जाकर उस कॉल को अटेंड करता है. ो किसी से काफी देर बात करता है. अंदर मुस्कान अपने मोबाइल में लगी हुवी थी उसके दिमाग निर्मला की कही हुवी बातों का भी ख्याल अत है के आखिर कैसे उतनी हयादार ाव्रत एक गुंडे के साथ अफेयर कर बैठी और अपने शोहर के साथ बेवफाई की. ऐसा क्या हुवा होगा उनके बिच बल्कि उस गुंडे ने तो उसके साथ ज़बरदस्ती की थी उसके बावजूद भी समरीन ने उसके साथ hi अपना बिस्तर गरम किया.

सोचकर hi इतना अजीब लगता है ो तो फिर भी उस गुंडे का बचा अपने पेट में लेकर घूम रही है और फिर जब ो बचा पैदा होगा और उसके शोहर की तरह न दिख कर किसी और की तरह दिखेगा तब ो क्या जवाब देगी??!!!

अगर ो संभल भी लेगी तो क्या ो खुद को फेस कर पायेगी अपनी ज़िन्दगी में? के उसने अपने शोहर को धोका देकर किसी और के सामान्य बनाकर इतना बड़ा गुनाह कर लिया...

यही सब सोचे जारही थी मुस्कान इस वक़्त बीएड पर लेती हुवी. थोड़ी देर में आज़म कॉल एन्ड करके वापस रूम में आजाता है..

Azam...arey मुस्कान सोई नहीं??

Muskan...nahii ो बस नींद नहीं आरही थी...

Azam...kyun क्या हुवा??

Muskan...kuch नहीं बस ऐसे hi..

Azam....hmm चलो सोते हैं रात होगयी है...

Muskan...hmm

दोनों फिर थोड़ी देर बाद सजाते हैं. रात में मुस्कान को प्यास लगती है और ो उठकर बहार किचन में चली जाती है पानी pine...pineke बाद मुस्कान रूम में जा hi रही थी के उसको मैं दूर पर कुछ आहत सुनाई देती है ो सोचती है इतनी रात को कोण होगा हालाँकि उसे दर तो लग रहा था लेकिन फिर भी हिम्मत करके ो बहार अति है लेकिन वहां कोई नहीं था...

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तभी उसकी नज़र सीढ़ियों पर जाती है फिर ो कुछ सोचकर सीढ़ियां चढ़कर ऊपर वाले फ्लोर पर जारही थी उसे उस रूम से कुछ आवाज़ें आरही थी. ो दबे पौन पास जाने लगती है और उदर जाकर हलके से अंदर देखती है तो अंदर सिर्फ एक मोबाइल था.

और उसपर कुछ वीडियो चल रही थी मुस्कान को कुछ समझ नहीं अत लेकिन तभी अचानक से कोई उसके पीछे ाजता है और उसको कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचता है जिससे ो उसकी बाँहों में गिर जाती है...

Raghu....memsab ऐसे चुप चुपके क्या देख रही हो...

मुस्कान अपनी उखड़ी हुवी सांसों के साथ..

Muskan...kuch नही मैं ू चोरोऊ मुझी"

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Raghu...aise कैसे मेमसाब? शादीशुदा होक किसी गैर मर्द का लौड़ा ताड़ रही हो शर्म नहीं अति?

Muskan...mai मैंन मैं ो नही देख रही थी...

Raghu...hahaha मेमसाब ज़रा अपना हाथ तो देखो कहाँ है??

मुस्कान देखती है के उसका साथ ड्रेस के ऊपर से छूट पर hai...o बोहत hi ज़्यादा ऐम्बर्रेस्सेड फील करती है उससे...

Raghu...memsab मुझे पता है मेरी पत्नी की जगा तुम खुदको कल्पना करती हो..

Muskan..nnn नं नाहीइ ऐसा कुछ नही ही..

Raghu....mujhe पता है तुझे तेरी शादीशुदा बुर में मेरा लौड़ा चाहिए मेमसबबबबबबब हाहाहाहा..

तभी रघु एक जोर्का धक्का मुस्कान की गांड में लगता है....

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 13

झटका लगते hi एकदम से मुस्कान अपनी नींद से उठतकर बैठ जाती है. ो आस पास देखती है तो अपना सर पकड़ लेती है. उसके साइड में उसका शोहर आज़म लेता हुवा था दूसरी साइड ghumkar.....matlab ो एक सपना देख रही थी...

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उसे यकीन नहीं होरहा था के उसे इतना गन्दा सपना आया. एक मामूली से ो भी गैर मज़हबी मज़दूर ने उसको पकड़ा हुवा था!! मुस्कान अपने बुरे सपने से बहार आने के बाद पानी पीकर फिर सोजती है.

अगली सुबह रोज़ की तरह आज़म नाश्ता सब करके अपने काम पर चला जाता है और मुस्कान शावर लेने चली जाती है. मुस्कान को शावर लेते हुवे कल के बुरे सपने का ख्याल अत है कितना गन्दा सपना उसने देखा था. आजतक उसको ऐसी कोई चीज़ का सामना नहीं करना पड़ा था. ो और आज़म अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में बोहत ख़ुशी थी. इसकी एक वजा और भी होसकती थी के उसने निर्मला की बताई हुवी समरीन की स्टोरी सुनी.

मुस्कान शावर लेते हुवे खुद के गोर जिस्म को निरहने लगते है. शावर का पानी उसके गोर शरीर पर लगातार गिर रहा था. उसके बाल से होते हुवे उसकी गर्दन से फिर उसके चुचों से होते हुवे उसकी कमर पर फिर निचे पैरों तक. मुस्कान अपने ख्यालों में शावर लिए जारही थी.

कुछ देर बाद शावर लेकर मुस्कान बहार आजाती है एक ड्रेस पहन कर और हॉल में टीवी देखने बैठती है.

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बहार मज़दूर अपने काम पर आजाते हैं आधे घंटे बाद. टीवी देखकर मुस्कान को बोर होने लगता है इसलिए ो बहार आजाते है गार्डन में. वहां ो ऊपर देखती है सरे मज़दूर काम कर रहे थे फिर मुस्कान भी पौदों को पानी देने लगती है.

आज आसमान में बदल दिखाई दे रहे थे और ऐसा लग रहा था के बारिश होने वाली है. इतने सुहाने मौसम में मुस्कान सोचती है काश आज़म यहाँ होता और ो दोनों इस पल को एन्जॉय कर पते. खैर मुस्कान पौदों को पानी देकर उदर hi टहलने लगती है. ऊपर सब मज़दूर अपने काम पर लगे हुवे थे.

ऐसे hi दोपहर होजाती है और सब वर्कर्स खाना खाने चले जाते हैं और मुस्कान अंदर लंच करके अपने बैडरूम में जाचुकी थी. शाम के वक़्त उसकी आंख खुलती है और टिया पीकर बहार हॉल में बैठती है. तभी दूर बेल्ल बजती है और जाकर देखने पर बहार जानकी कड़ी थी...

Janki...memsabb ो लगता है बारिश होगी आज आपके पास कोई डालने के लिए शीट है ो क्या है न ऊपर एक जगा पर कच्चा सीमेंट डाला हुवा है इसलिए...

Muskan...nahi जानकी शीट तो कोई नहीं है...

Janki...ohh कोई नहीं मंसबब कोई ले आएगा रिहाइश पर jakar...udr पड़ी हुवी है..

Muskan...oh अच्छा...

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फिर शाम में हलकी फुलकी बारिश शुरू होजाती है और आज थोड़ा जल्दी hi वर्कर्स चले जाते हैं जो उन्होंने पहले hi बता दिया था. अब मुस्कान अंदर हॉल में बैठी हुवी थी के अचानक घर की लाइट भी चली जाती है और घरमे पूरा अँधेरा च जाता है...

Muskan...ya kh*da अब इस लाइट को क्या हुवा...

मुस्कान अपनी मोबाइल की लाइट ों करने जाती है और देखती है के उसके मोबाइल की बैटरी 3% पर है...

Muskan...mobile तो मैं चार्ज करना hi भूल गयी!!! अब क्या karunn...dekhti हूँ कोई मोमबत्ती मिलती है kya...bas तब तक चार्ज न ख़तम होजाये....

मुस्कान फ़्लैश लाइट ों करके मोमबत्ती ढूंढ़ने लगती है किचन में. िद्र उदर देखने पर उसे नहीं मिल रहा था फिर ो अपने बैडरूम जाकर ढूंढ़ती है लेकिन वहां भी नहीं मिलती. बहार अब बारिश तेज़ होचुकी थी साथ में बदल गरज भी रहे थे. मुस्कान अकेली थी तो उसे थोड़ा दर सा लगने लगा था. मुस्कान सोचती है के अब आज़म को कॉल करना hi होगा. ो कॉल लगा देती है लेकिन तभी उसका मोबाइल ऑफ होजाता है.

Muskan...yaa kh*da ये तो ऑफ होगया!!! अब क्या करुण...

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घर में बहार से थोड़ी बोहत लाइट आरही थी लेकिन न के brabar...muskan कुछ नहीं कर सकती थी इस वक़्त ो सोफे पर बैठ जाती है इस उम्मीद में के आज़म जल्दी आजायेगा काम se...o बैठी hi हुवी थी के बहार से कोई दरवाज़ा खटखटा hai...awaz सुनकर मुस्कान दर जाती है के इतनी रात को ो भी लाइट नहीं है उस वक़्त कोण आया hoga...muskan पहली बार कोई जवाब नहीं देती बस चुप रहती hai...lekin फिरसे दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ अति है और इसबार मुस्कान थोड़ा दर जाती hai....aur सोफे से उठकर धीरे धीरे चलते हुवे दूर के पास जाने लगती है. एक तो ये था ऊपर बारिश इतनी जोरकी होरही थी और बदल गर्जना मुस्कान के लिए तो जैसे कोई बुरे सपने से काम नहीं था. धीरे धीरे चलते हुवे ो किसी तरह अँधेरे में hi दूर के पास पोहंच जाती है.

मुस्कान.. कोण हैई???

दूर के दूसरी तरफ से कोई आवाज़ नहीं आता. तभी मुस्कान कंपते हाथों के साथ दूर खोलती है तो सामने कोई खड़ा था. एक बार के लिए मुस्कान की हालत खराब होजाती है लेकिन तभी....

"मंसबब"

Muskan...kon है??

"मंसबब मैं रघु"

मुस्कान की तो जैसे जान में जान आती है भले hi सामने वाला मज़दूर hi क्यों न हो लेकिन ो उसे जानती तो thi..m

Muskan...tum यहाँ क्या कर रहे हो इतनी रात को...??

Raghu...memsabb मेरा मोबाइल यहाँ रह गया था ऊपर मैं वापस ारः था लेने तो ज़्यादा बारिश होगयी और मैं पूरा भीग गया ऊपर से लाइट भी नहीं है...

तभी मुस्कान गौर करती है के रघु खड़ा है लेकिन भीगा हुवा है. बहार बदल भी गरज रहे थे.

Muskan...arey कल ले लेते मोबाइल इतना क्या अर्जेंट था...

Raghu...urgent है मेमसाब आप नहीं समझेंगी...

मुस्कान मन men...haa पता है क्या अर्जेंट है....

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Raghu....o क्या है न मेमसाब मुझे मेरी पत्नी से बात करना होता है उसके बगैर मेरा मन नहीं लगता...

Muskan...hmm ठीक ही..

Raghu...ghar से दूर हूँ न मेमसाब कुछ मज़बूरी है मेरी..

Muskan...bas बस समझ गयी..

Raghu...kya समझ गयी मंसबब्ब...??

Muskan...kuch नाहीइ...

Raghu....bata दिज्ये मंसबब वैसे भी आपकी थोड़ी न कोई मज़बूरी होगी आपके तो पति आपके साथ हैं...

मुस्कान समझ जाती है के रघु कैसी बात उसके साथ कर रहा है और गुस्से में...

Muskan...kya मतलब है तुम्हारा देखो तुम अपनी हद में राहू..

Raghu...arey मेमसाब आप तो गुस्सा होगयी मैंने तो बस अपनी मज़बूरी आपको बता रहा था...

Muskan...dekho तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हारी बातें नहीं समझ रही??

Raghu...arey मेमसाब मैंने वैसे कब कहा मैं तो चाहता हूँ आप मेरी बात सुनिए...

Muskan...haa हाँ ठीक है जाओ जाकर ले लो फिर मोबाइल....

Raghu...arey मेमसाब उसी लिए तो आया हूँ आप देखिये तो सही कितना अँधेरा है बहार और फिर मैं पूरा भीग गया हूँ...

Muskan...to तुम्हें क्या चाहिए अब?? लाइट तो अंदर भी नहीं ही...

Raghu...memsabb कोई टोर्च hi दे दिज्ये थोड़ी देर के लिये ताकि मैं मेरा मोबाइल ले सकूँ...

Muskan...torch...pata नहीं कहाँ है ो ढूंढ़ना पड़ेगा..

Raghu...dhund दिज्ये मंसबब आप समझ रही हैं न मेरे लिए फ़ोन कितना ज़रूरी है...

मुस्कान रघु की बात पर उसके तरफ थोड़ा गुस्से से देखती है और फिर अंदर जाने लगती है. मुस्कान ने इस वक़्त निघ्त्य पहनी हुवी थी. रघु बखूबी बातें करते हुवे भी उसको ताड रहा था नज़रें चुरा कर.

Raghu...aa मंसबब क्या मैं अंदर ajaun..bahar बारिश होरही है और ठण्ड भी लग रही है...

मुस्कान मुड़कर रघु को देखती है उसको थोड़ा तरस तो आजाता है उसपर....

Muskan...thik है ाजावो...

मुस्कान फिर टोर्च ढूंढ़ने बैडरूम चली जाती है और रघु दूर से अंदर आकर खड़ा होजाता है. वहां अँधेरा था बस बहार से थोड़ी बोहत लाइट आरही थी जो एनफ नहीं थी. रघु को ठण्ड लग रही थी जो उसने शर्ट पंत पहना था ो गीला होचुका था.

अंदर अभी भी मुस्कान टोर्च ढूंढ रही थी िद्र रघु को िद्र रुके हुवे काफी देर होचुकी थी तो उसे वाशरूम जाना होता इसलिए ो किसी तरह वाशरूम के दूर तक पोहंच कर अंदर चला जाता है लेकिन दूर बंद नहीं करता क्यूंकि अंदर बिलकुल hi लाइट नहीं थी. मुस्कान बैडरूम में काफी देर ढूंढ़ने के बाद उसे टोर्च मिलती है जो प्रॉपरलय चल भी नहीं रही थी, मुस्कान उसे 4-5 बार अपने हाथ पर मरकर स्टार्ट क्र लेती है और बहार अति है लेकिन वहां उसे रघु नहीं दीखता....

टोर्च की लाइट भी कोई खास नहीं पद रही थी बार बार डिम हुवे जारही थी. ये सिचुएशन hi बड़ी ावक्वार्ड थी के ऐसे वक़्त पर जब घरमे बिजली नहीं थी ऊपर से उसका मोबाइल भी डेड होचुका था और तो और उसके पास कोई प्रॉपर लाइट सोर्स भी नहीं था.

डिम टोर्च लाइट के साथ मुस्कान िद्र उदर देखती है लेकिन उसे कहीं रघु नहीं दीखता तभी ो लाइट वाशरूम की तरफ घूमती है दूर हल्का सा ओपन होनेकी वजा से अनजाने में मुस्कान कुछ ऐसा देख लेती है जिससे ो फ़ौरन अपनी फ़्लैश लाइट दूसरी तरफ घुमा लेती है...

Muskan...ya kh*da!!!

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असल में जब मुस्कान फ़्लैश लाइट वाशरूम की और करती है तो अंदर जहाँ रघु पेशाब करने में लगा हुवा था और दूर ओपन होनेकी वजा से मुस्कान की नज़र सिदा सिदा रघु के लौड़े पर जाती है टोर्च लाइट की वजा से. कुछ सेकंड के लिए सही लेकिन मुस्कान के दर्शन फिरसे रघु के लौड़े से होचुके थे. अंदर रघु को भी अहसास होजाता है के अभी अभी क्या हुवा है ो भी जल्दी से अपनी पंत चढ़ा कर बहार आने लगता है लेकिन मन hi मन जैसे खुश होरहा था आखिर उसे लग रहा था चलो काम से काम मुस्कान की नज़र उसके लौड़े पर तो पड़ी.

लेकिन उसे भी क्या पता था के मुस्कान तो कई बार उसके लौड़े का दर्शन कर चुकी है. रघु वाशरूम से बहार अत है मुस्कान को दूसरी और घूमे हुवे पता है.

Raghu..memsabb

मुस्कान जो उदर घूमकर कड़ी थी अब िद्र घूम जाती है और टोर्च उसकी तरफ करते हुवे...

Muskan....ye लो टोर्च और जाओ जल्दी से...

Raghu...kyun क्या हुवा मंसबब??

Muskan...kuch नहीं हुवा मेरे शोहर आनेवाले होंगे तुम अपना मोबाइल लो और जाओ...

Raghu...arey मेमसाब आपके शोहर आएंगे तो क्या होजायेगा साहब से मैं बात क्र लूंगा और फिर आपको पता है कितनी बारिश होरही है बहार...

Muskan...dekho तुम्हे जितना बोलै है उतना करो समझे...

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Raghu...thik है मेमसाब आप इस गरीब की मज़बूरी नहीं सकती तो मैं चला जाता हूँ..

Muskan....kya मतलब है तुम्हारा मैं इतना कुछ कर रही हूँ तुमको ये टोर्च आधे घंटे से ढूंढ कर दे रही हूँ उतना काफी नहीं है??

Raghu...memsab आपका बोहत धन्यवाद उसके लिए मैं तो बस बारिश ख़तम होते hi जाने वाला था लेकिन आप इस तरह बोल रही हैं तो मैं चला जाता हूँ...

Muskan...thik है तुम ऊपर रुक जाओ बारिश ख़तम होते hi चले जाना....

Raghu...thik है मेमसाब dhanywad...kya आप थोड़ी देर टोर्च मर देंगी ताकि मैं ऊपर जसको...

Muskan..haa

रघु और ो बहार एते हैं और रघु ऊपर जाने लगता है और मुस्कान उसके लिए टोर्च मरती है ो जाने hi लगा था के टोर्च अचानक बंद होजाती है और अँधेरे की वजा से रघु का पेअर किसी चीज़ से टकराता है और ो गिरने को होता है. उसका बैलेंस बिगड़ता देख ो किसी चीज़ को पकड़ने की कोशिश करता है लेकिन इसी बिच उसका पेअर स्लिप होकर ो पीछे मुस्कान की और गिरने लगता है...

Muskan...ye संभाल करररर

मुस्कान के मन से बस ये लफ्ज़ निकले थे के अगले hi पल दोनों वही ज़मीन पर गिर जाते हैं. रघु अपना बैलेंस बिगड़ कर मुस्कान पर आजाता है और मुस्कान ये सब इतना अचानक होजाता है के उसे सम्भलनेका मौका hi नहीं मिलता....

Muskan...aaaaa मर्डर गयी..

दोनों गिरने के बाद खुद को सँभालने में लगे थे. बारिश कुछ ज़्यादा hi तेज़ लग रही थी इसलिए दोनों गीले होने लगते हैं. रघु जो पहले से hi गीला था और मुस्कान जिसने एक निघ्त्य पहनी हुवी थी ो गिरनेकी वजा से कररहा रही थी...

Raghu...arey मंसबब आप ठीक तोह हैंन्न...??

Muskan...marr गयी आआह्ह्ह...

Raghu..arey मेमसाब उठ जाईये आपको चोट तो नहीं आयी...

Muskan...pata नाहीइ आआह...

रघु मुस्कान की उठने में मदद करने जाता है. मुस्कान जो एक निघ्त्य पहने हुवी थी ो अब काफी गीली होचुकी थी रघु उसके कंधे पर सहारा देने लगता है मुस्कान भी उठने लगती है इसी बिच रघु को हाथ हल्का सा मुस्कान एक चुके के साइड टच होता है जिसपर मुस्कान का धयान नहीं जाता. ो उठती है और रघु उसको कंधे से सहारा देता है. मुस्कान से शार्ट होनेकी वजा से उसका हाथ कंधे पर नहीं बल्कि मुस्कान की पीठ पर था और उसी बिच रघु को गीली निघ्त्य के ऊपर से मुस्कान की ब्रा भी फील होती है.

रघु बखूबी मुस्कान की ब्रा फील कर रहा था. मुस्कान का धयान इस मेस की वजा से उसपर नहीं जाता. दोनों अंदर पोहंच जाते हैं. अंदर पोहचते hi...

Raghu...memsab मुझे टोर्च दो मैं अभी आया...

Muskan...torch बहार पड़ी है...

रघु फिर बहार जाकर टोर्च ले अत है और थोड़ा अपने हाथ पर उसे मरकर लाइट ों करता है फिर ो सिदा बैडरूम चला जाता है जहाँ से ो टॉवल ले अत है बहार और जब ो बहार अत है तो टोर्च की लाइट सीधा मुस्कान पर पड़ती है तो उसे जो नज़ारा मिलता है उससे उसकी ऑंखें वहीँ जैम जाती हैं.

सामने मुस्कान कड़ी थी जो बिलकुल गीली थी एक निघ्त्य में. मुस्कान की निघ्त्य उसके गोर जिस्म से चिपक चुकी थी और उसका कातिलाना फिगर रघु के सामने था. उसकी ब्रा स्ट्रैप्स टोर्च की लाइट की वजा से अछि तरह दिख रही थी. उसके चुचों का शेप उस गीली निघ्त्य में देख रघु थूक निगलता है और निचे भी मुस्कान की पंतय के स्ट्रैप्स उठकर दिख रहे थे.

मुस्कान को अपनी हालत का अंदाज़ा अब होता है जब टोर्च लाइट उसके ऊपर पड़ती है और ो फ़ौरन अपने हाथों से खुदको कवर करनेकी नाकाम कोशिश करते हुवे अपना एक हाथ अपने चुचों पर दूसरा निचे क्र देती है लेकिन रघु मुस्कान की ये हालत देख अपना लौड़ा पंत के ऊपर से मसले बिना नहीं रह पता.

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तो बे कॉन्टिनोएड...
 
हे गाइस, अपोलोजिज़ ी won't बे अबले तो अपडेट टुडे देय तो पर्सनल रेअसोंस सो आईटी विल बे फॉर टुमारो.

गाइस अपडेट कल आएगा क्यूंकि आज मुझे कुछ पर्सनल काम है.

थैंक्स

थे ईविल
 
Part 14

रघु साफ़ देख सकता था के मुस्कान के गोर हाथ उसके भीगी हुवी निघ्त्य को छुपा नहीं पढ़े थे. उसकी भीगी हुवी निघ्त्य में से उसका शरीर बड़ा hi कामुक लग रहा था. मुस्कान ऐम्बर्रेस्सेड फील करती है के एक मज़दूर के सामने ऐसे मौसम में इतने अँधेरे में कड़ी है.

Muskan....torch बंद करो पागल हो तुम!!!

मुस्कान गुस्सा होते हुवे बोलती है जिसे सुनकर रघु जल्दी से टोर्च ऑफ क्र देता है लेकिन मुस्कान को पता था आजतक उसके साथ कभी नहीं हुवा ो इतनी हयादार ाव्रत और ऐसी हालत में तो खुद अपने शोहर के सामने नहीं गयी थी. टोर्च बंद होनेकी वजा से उदर अँधेरा होचुका था.

रघु अब मुस्कान को टॉवल देने के लिए आगे बढ़ता है अँधेरे में hi. उसके पास पोहंच कर रघु रुक जाता है...

Raghu...memsabb ये लीजिए टॉवेल...

मुस्कान अँधेरे की वजा से नहीं देख पायी थी के रघु उसके इतना करीब आया हुवा है तो थोड़ा सरप्राइज सा होती है. आखिर का ो गीले कपड़ों में कड़ी थी इस वक़्त. मुस्कान फिर भी मौके की नज़ाकत को समझते हुवे उसके हाथ से टॉवल लेती है और खुद पर दाल लेती है. अब उसे जाना था बैडरूम लेकिन रघु से टोर्च मरनेका भी नहीं बोल सकती थी.

फिर भी ो धीरे धीरे करते हुवे बैडरूम की तरफ जाने लगती है बहार से आरही थोड़ी थोड़ी लाइट के sahare..o जा hi रही थी के उसका पेअर टकराता है किसी चीज़ से "आआह" और ो फोर्टनेटेली सोफे पर हाथ पकड़ लेती है लेकिन इसी बिच टॉवल निचे गिर जाता है और झुक कर कड़ी थी इस वक़्त....

Raghu....arey मेमसाब क्या हुवा???

रघु फ़ौरन टोर्च ों करता है और मुस्कान की तरफ करता है. ो देखता है के मुस्कान सोफे पर हाथ रखकर झुकी हुवी है और टॉवल निचे गिरा हुवा है. उसके सामने का नज़ारा देख फिरसे ो थूक निगलता है. ऐसा लग रहा था के मुस्कान का बदलूक चल रहा था और रघु का लक. इतने करीब से उसे मुस्कान जैसी जवान और शरीफ हयादार शादीशुदा ाव्रत को ऐसी हालत में देखने मिल रहा था.

इस वक़्त टोर्च मरते hi उसके सामने मुस्कान सोफे के सहारे झुकी हुवी मिलती है और उसकी निघ्त्य गीली होनेकी वजा से उसमे से पंतय लाइन साफ़ दिख रही थी और उससे भी ज़्यादा मुस्कान झुकी होनेकी वजा से मुस्कान की गांड उभर का गीली निघ्त्य में दिख रही थी. रघु फिरसे अपना लौड़ा पंत के ऊपर से एडजस्ट करता है जो बार बार मुस्कान को ऐसी हालत में देख करवट ले रहा था....

रघु के लिए कण्ट्रोल करना बोहत मुश्किल होरहा था अनजाने में hi सही मुस्कान रघु को ुगसा रही थी. मुस्कान अब फिरसे बैडरूम में जानेके लिए उठती है तभी बहार आज़म की कार का हॉर्न होता है. आवाज़ सुनकर मुस्कान को अहसास होता है के इस वक़्त ो भीगी हुवी हालत में है और घरकी लाइट भी गयी हुवी है और बहार उनके घर का काम करने वाला मज़दूर भी भीगे हुवे कपड़ों में था. हालाँकि ो गलत नहीं थी और न hi उसको झुक बोलने की ज़रूरत है लेकिन आखिर ो कैसे ये एक्सप्लेन करेगी के ो और रघु इस वक़्त भीगे हुवे घरके अंदर क्या कर रहे हैं??

बहार कार इंजन ऑफ होनेकी आवाज़ अति है तो मुस्कान हड़बड़ा जाती है ऐसी सिचुएशन उसको कभी फेस नहीं करनी पड़ी थी लेकिन अब फ़ौरन कुछ सोचते हुवे...

Muskan...plss कहीं चुप्प जावू मैं तुमको बादमे बहार भेज दूंगी ो आगये हैं....

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Raghu...memsab आप दर क्यों रही हैं और इसमें छुपने वाली क्या बात ही??

Muskan...tum नहीं समझोगी कहीं चुप जाओ मौका देखती है मैं तुमको बहार अनेका इशारा करूंगी...

Raghu...dekho मेमसाब आप खामखा दर रही हैं बस बहार हम गिरे hi तो हैं ो बता देंगे साहब को...

मुस्कान अब थोड़ा फ़्रस्ट्राटे होते हुवे रघु से गुस्से में बोलती है...

Muskan...maine कहा न कहीं चुप जावू समझ नहीं अति तुमको!!!

Raghu...thik है ठीक है मंसबब चुप जाता हूँ जैसे आपकी मर्ज़ी...

"मुस्कानंन" बहार से आज़म अपनी बीवी को पुकारता है और तभी दूर भी खुलता है जो रघु भी बंद करना भूल गया था उस वक़्त. आज़म अंदर देखता है के अँधेरे चाय हुवा है और थोड़ी बोहत लाइट आरही थी.

Azam....muskan???

Muskan...azam मैं यहाँ हुन्न...

Azam...kahan?? और लाइट को क्या हुवा??

Muskan...idr hi और लाइट जबसे बारिश शुरू हुवी है तबसे गयी हुवी ही...

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आज़म अपने मोबाइल की फ़्लैश मरते हुवे अंदर अत है और मुस्कान की तरफ जाता है तो ो देखता है मुस्कान के कपडे गीले है...

Azam...muskan!!! क्या हुवा तुम्हारे कपडे गीले क्यों हैं??

Muskan...azam ो मैं बहार गयी थी थोड़ी देर के लिए तो मेरा पेअर फिसल गया और फिर बारिश से भीग गयी..

Azam...kahan ध्यान रहता है मुस्कान मोबाइल फ़्लैश मर लेती न या फिर टोर्च भी है न...

Muskan...o मोबाइल के बैटरी डेड होगयी थी मेरे और टोर्च मिली थी लेकिन ो भी सही से काम नहीं कर रही है...

Azam...ohh यार चलो कोई नहीं तुम जाकर शावर लेलो मैं तब तक पता करता हूँ कब तक लाइट आएगी...

मुस्कान को फिर ख्याल अत है के रघु यहाँ छुपा हुवा है और किसी तरह उसको यहाँ से निकलना भी है लेकिन उसको नहीं समझ ारः था के आखिर ो ये कैसे करे...

Muskan..aa आज़म आप शावर ले लीजिये न मैं बादमे ले लुंगी....

Azam..arey कैसी बात कर रही हो तुम इतनी भीगी हुवी हो तुम्हारी तबियत ख़राब होसकती है इसलिए तुम जाओ अभी...

मुस्कान अपना दिमाग जल्दी जल्दी दौड़ती है के आखिर ो क्या करे...

Muskan...azam ो अंदर लाइट तोह है नहीं मैं कैसे शावर लुंगी....

Azam...arey हां ये भी ही लेकिन अपने कपडे तो बदल लो....

Muskan....haa मैं ू बदलती हुन्न्न...

आज़म और मुस्कान अब बैडरूम चले जाते हैं मोबाइल फ़्लैश लगा kar....idr रघु जो एक कोने में छुपा हुवा था उन दोनों को जाता हुवा देखता है उन्होंने बैडरूम का दूर बंद नहीं किया था.

रघु मन men...isne मुझे यूँ छुपाया क्यों है ो भी खुद के पति से!!! ऐसे बरतौ कर रही है जैसे हम दोनों का चक्कर चल रहा है ससुरा हाहाहा....

रघु की नज़र बैडरूम की तरफ थी जिसका दूर हल्का सा खुला था उसे पता था के मुस्कान अंदर अपने कपडे चेंज कर रही होगी उसकी नज़र वहीँ थी के उसको बैडरूम के हलके खुले हुवे दूर से मुस्कान की निघ्त्य गिरती हुवी दिखती जो अभी मुस्कान ने निकली थी. फ़्लैश लाइट की वजा से मुस्कान का साया थोड़ा थोड़ा रघु को दिख रहा था. निघ्त्य निकलते hi रघु मुस्कान का साया दीखता है. मुस्कान इस वक़्त ब्रा और पंतय में थी जिसके बारे में सोचकर hi रघु की ऑंखें वहीँ गड जाती हैं और हाथ अपने लौड़े पर....

तभी रघु देखता है के वहां मुस्कान अपनी पंतय भी निकल फेंकती है. रघु की नज़र मुस्कान के साये और उसने निचे फेंके हुवे कपड़ों पर थी. और फिर मुस्कान अपनी ब्रा भी निकल देती है और वहीँ पंतय और निघ्त्य पर फेंकती है. तीनो कपडे वहीँ पड़े हुवे थे और अब रघु की नज़र उसके साये पर जाती है जिसे देख उसका लौड़ा अकड़ने लगता है.

साये से hi पता चल रहा था के क्या कातिलाना मुस्कान का फिगर होगा. उसकी गांड के फांकों का परफेक्ट शेप, पतली सी कमर और उसके गोल चुचों का शेप मनो साया नहीं हु बा हु रघु मुस्कान को नंगा देख रहा हो.

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और सोने पर सुहागा मुस्कान अपने बाल भी खुले कर देती है जिसे देख रघु का लौड़ा झटका मरता है. उसे पता था इस वक़्त मुस्कान उस दूर के पीछे पूरी नंगी कड़ी है इसके बारे में सोचकर hi ो पागल हुवे जारहा था.

रघु मन men...kya किस्मत पायी है इसके पति ने क्या मज़े करता होगा ये उसके sath...kya जिस्म है sasura....saye में hi इतनी आइटम लग रही है तो असल में कैसी होगयीईइ सलाह...

फिर रघु देखता है के मुस्कान का एक पेअर उन कपड़ों के तरफ अत है उन कपड़ों को अपनी तरफ खींचती है. इसी बिच रघु को मुस्कान की एक गोरी तंग का भी व्यू मिलता है बिलकुल बेदाग सफ़ेद रंग की tang...raghu अपना लौड़ा फिरसे मसलते हुवे...

रघु मन men...aaaahh मंसबब्ब टंगड़ी कबाब है ये तोहह....

फिर अंदर अब मुस्कान दूसरी ब्रा पंतय और निघ्त्य पहन लेती है. आज़म उससे कुछ बात कर रहा था और फिर ो थोड़ी देर में उसे कुछ बोल कर बहार अति है. ो पीछे बैडरूम की तरफ एक बार देखते हुवे हॉल में िद्र उदर देखती है और धीमी आवाज़ में...

Muskan....kidr हूँ तुम????

रघु को आवाज़ तो अति है मुस्कान की लेकिन उसको मस्ती सूझते हुवे ो उसको तंग करने लगता है और चुप बैठता है...

Muskan...heyyy कहैं हो तुममम जल्दी से बहार ावू..

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रघु अब भी चुप बैठता है वहीँ मुसकन अब टेंशन होने लगी थी के उसने झूट तो बोल hi दिया है पहले hi अब तो पक्का सच नहीं बोल सकती थी क्यूंकि अब तो ो उससे ज़्यादा डेंजरस सिचुएशन में थी...

Muskan....ye किदर चला गया हेय किदर हूँ तुम??

Raghu...memsabb मैं िद्र्र हुन्न...

Muskan...kidr प्लस जल्दी से बहार ावो मैं दूर खोलती हूँ तुम चले जाओ यहाँ से...

Raghu...memsab मैं जहाँ छुपा हूँ वहां कुछ नहीं दिख रहा है मुझे मैं कैसे बहार एवं...

Muskan...yaa khu*a क्या मुसीबत हैई...

मुस्कान अब जिध्र से आवाज़ आरही थी उदर hi टिप्टोए करते हुवे चली जाती है. रघु चुप बैठा हुवा था एक कोने में उसे मुस्कान थोड़ी बोहत नज़र आरही थी...

Muskan...ajawooo जल्दी बहार

Raghu...memsab हाथ तो दिज्ये कहीं कोई चीज़ गिर न जाई...

Muskan...ye khu*a ये मैं कहाँ फंस गयी....

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मुस्कान की मजबूरी थी ो अपना हाथ आवाज़ की तरफ करती है रघु बिना झिजक के आगे हाथ बढाकर मुस्कान का हाथ पकड़ लेता है हाथ पकड़ते hi रघु फील करता है क्या माखन जैसा नरम हाथ है मुस्कान का ऐसा फील होरहा था उसे जैसे ो कोई बेहद hi नरम चीज़ पकड़ ली ho....wahin मुस्कान रघु का सख्त हाथ अपने हाथ पर फील करती है ऐसा तो उसके शोहर का बिलकुल नहीं था शायद क्यूंकि उसका शोहर एक ऑफिस एम्प्लोयी है जो सारा दिन कंप्यूटर के सामने बैठा रहता है और वहीँ रघु एक मज़दूर उसके हाथ सख्त होना ऑब्वियस था.

ो दोनों खुसपुस कर बार क्र रहे थे ताकि आज़म को आवाज़ न जाये. मुस्कान खुद नहीं जानती थी के आखिर ो ये सब क्यों किये जारही थी. इस तरह से एक गैर मज़हबी मज़दूर के सामने डिफेंसिव होना क्या उसके लिए सही रहेगा? बस वक़्त hi बताएगा. मुस्कान का हाथ पकड़ कर रघु आगे आने लगता है लेकिन तभी...

Azam...hello हाँ बोलो

आज़म किसी से फ़ोन पर बात करते हुवे बहार अत है और ो जैसे hi बहार अत है अब इसे चांस कहें या मुस्कान की बदकिस्मती रघु चांस मरते हुवे मुस्कान को अपनी तरफ हाथ से hi खिंच लेता है.

Muskan...heeyy

इस अचानक हरकत से मुस्कान जैसे ऑलमोस्ट वहां गिरते हुवे रघु पर आ पड़ती है. मुस्कान रघु पर सामने के बल गिरी थी इसलिए रघु अपनी छाती पर भरपूर मुस्कान के चुचों को फील करता है. गिरने के इमपैक्ट से उसके गोल चुके जैसे रघु की छाती में गुब्बारे की तरह टकराते हैं. मुस्कान भी गिरते हुवे बचने के लिए रघु को पकड़ती है उसकी बाँहों पर और उसे अपने आगे कोई सख्त सी चीज़ महसूस भी होती है लेकिन इस वक़्त ो उसे इग्नोर कर देती है. मुस्कान की हिघ्त रघु से थोड़ी ज़्यादा थी इसलिए उसके चुके तकरीबन तकरीबन उसके मन तक टच होरहे थे. इसी बिच मुस्कान के बाल भी आगे की तरफ एते हैं जिसे ो ठीक करती है. रघु को मुस्कान के जिस्म से हलकी हलकी पसीने की स्मेल आरही थी जो उसे मदहोश सा कर रही थी.

Raghu...memsabb साहब ए इसलियी...

अब मुस्कान भी क्या उसको डांटती ो खुद इस सिचुएशन के लिए ज़िम्मेदार थी. न hi ो रघु को यूँ छुपाती अपने शोहर से और न hi उसको इस तरह ये सब झेलना पड़ता. रघु की बात का न जवाब देते हुवे मुस्कान अपने बाल ठीक करके चुपचाप आगे घूम जाती है जो सिचुएशन को और मुश्किल बना देता है रघु के लिए. आलरेडी ो मुस्कान के इतना करीब होना उसके लिए बेहद मुश्किल खुद पर काबू करना होरहा था और ऊपर से अब मुस्कान आगे की और घूम गयी थी...

आज़म किसी से बात करते हुवे हॉल में hi था लेकिन उसे अँधेरे में कुछ नहीं दिख रहा था िद्र मुस्कान आगे घूमकर आज़म को देख रही थी ो अब तो बिलकुल नहीं छह रही थी के आज़म उसे इस वक़्त इस हालत में देखे लेकिन यूँ मुस्कान के आगे घूमने की वजा से रघु के सामने अब मुस्कान की बैक थी हालाँकि अँधेरे की वजा से उसे कुछ भी नहीं दिख रहा लेकिन उसे फील ज़रूर कर सकता था. होता भी यही है रघु जितनी तंग जगा में खड़ा था वहां जगा काम होनेकी वजा से ऑलमोस्ट दोनों चिपके हुवे थे.

रघु जितना मर्ज़ी तरय कर लेता लेकिन ो अपने लुंड को टाइट होने से नहीं रोक पता. पंत में होनेकी वजा से उसे तकलीफ होरही थी ो छह तो रहा के यहीं इसी वक़्त बस अपनी पंत खोल दे लेकिन उसे ये भी पता था के मुस्कान किस किस्म की थीकि मिर्ची है. मुस्कान वहीँ अपने शोहर को िद्र उदर टहलते हुवे किसी से बात करते हुवे देख रही थी और होप कर रही थी के आज़म अंदर चला जाये और ो रघु को यहाँ से भगा सके....

लेकिन उसे पता था अब जो होगया सो होगया अब उसे बोहत hi ध्यान से रघु को यहाँ से भागना होगा इसलिए ो बिना कोई आवाज़ किये इस वक़्त रघु से लगभग चिपकी हुवी कड़ी थी लेकिन इस तरह खड़े होने की थोड़ी देर बाद hi उसे अपनी गांड पर कोई सख्त सी चीज़ महसूस होती है ो चीज़ मनो एकदम टाइट हो. रघु पीछे खड़ा अपनी हालत से वाकिफ था लेकिन ो ऐसी सुनहरे चांस को कैसे मिस करने वाला था. उसे पीछे कड़ी हुवे मुस्कान के शरीर से पसीने की स्मेल आरही थी और इतनी देर खड़े होनेकी वजा से ो और स्ट्रांग होचुकी थी तभी रघु धीरे से मुस्कान के कान में...

Raghu..memsab आवाज़ मत करना वर्ण गड़बड़ होजायेगी...

Muskan...tumm पिचई हेतु..

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Raghu...memsab यहाँ जगा इतनी काम है मैं क्या कृण्ण...

Muskan...tum हटो पीछे और ये तुम्हारी कोहनी मुझे लग रही है उसे दूर करो..

Raghu...memsabb ो मेरी कोहनी नहीं हैई ो मेरा...

Muskan...kyaa मेरा??

Raghu...choriye मंसबब आप गुस्सा होंगी...

Muskan...nahi बताओगे तो ज़रूर होंगी समझे...

Raghu...memsabb मैं पहली hi बता रहा हूँ आप गुस्सा होंगी इसलिए रहने दिज्ये...

Muskan...batate हो या नहीं...

Raghu...memsabb ो मेरा लौड़ा है...

मुस्कान की ऑंखें जैसे एकदम बड़ी होजाती है और ो एकदम से आगे होनेकी कोशिश करती है लेकिन रघु उसकी कमर में हाथ दाल देता है...

Raghu...memsabbb ज़्यादा हरकत मत करो वर्ण साहब को भनक पद जाएगी...

मुस्कान को अब अहसास होता है तबसे जो चीज़ उसको अपनी गांड पर महसूस होरही है और जब ो टकराई थी उससे तब भी फील हुवा ो रघु का लुंड hai...muskan खुद को कोस रही थी आखिर क्यों उसने आज़म को नहीं बताया जो एक्चुअल सिचुएशन हुवी थी.

Raghu...memsabb मैंने बताया था आप गुस्सा होंगी देखिये कैसे आप चुप hogyi....ab मैं क्या करूँ मंसबब मैं इतना भीगा हुवा हूँ के खुद बा खुद होगया आप समझ रहीं हैं न....

Muskan...dekho तुम पीछे रहो बोहत होगया...

Raghu...memsab मैंने बताया न िद्र इतनी जगा नहीं है के मैं पीछे हैट सकू...

थोड़ी देर दोनों चुप रहते हैं इसी बिच आज़म फ़ोन पर अभी भी बात कर रहा था. कॉल में ो भूल गया था के आखिर उसकी बीवी है किदर?

Raghu...waise मंसबब आपको पता है मेरा लौड़ा इस तरह खड़ा होनेकी और एक भी वजा है...

Muskan...mujhe नहीं जानना...

Raghu...main फिर भी बताता देता हूँ memsabb...asal में मुझे थोड़ी देर के लिए आप में मेरी पत्नी दिखी....

Muskan...dekho तुम अपनी बकवास बंद करो...

Raghu..memsabb बकवास नहीं ही मैं जब भी अपनी पत्नी के दोनों कद्दू के बिच अपना लौड़ा लेजाता हूँ तो इसी तरह ये खड़ा होजाता है...

Muskan....dekho तुम हद से ज़्यादा बढ़ रहे हो मुझसे इतनी गन्दी बात नहीं करो...

रघु... मेमसाब इसमें गन्दी बात क्या है...

Muskan...mujhe नहीं पता...

Raghu...memsab लेकिन मुझे पता हैई...

Muskan...to पूछ क्यों रहे हो?

Raghu...bas आपके मन से सुन्ना चाहता था...

Muskan....maine पहले hi बोलै है तुमको मेरे से गन्दी बात मत कारु...

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Raghu...maine कब की है मंसब मैंने तो बस जो चीज़ है वही आपको बोलै hai...main बिहारी हूँ मंसबब मुझे यही भाषा अति है...

Muskan...thik है ठीक है लेकिन मुझसे दुबारा ऐसी बात मत करना समझे...

रघु अब मुस्कान के कान के करीब जाकर धीरे से बोलता है...

Raghu...bas एक और बात मंसबब मेरी पत्नी के कद्दू से बड़े तो आपके हैं....

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Azam...."Muskannn!!"

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 15

मुस्कान एकदम से गुस्सा होने hi वाली hi थी के आज़म का कॉल एन्ड होजाता है और उसको पुकारने लगता hai....ab सिचुएशन मुस्कान के लिए डिफिकल्ट थी ो इस वक़्त जवाब भी नहीं दे सकती थी और जवाब नहीं देगी तो आज़म परेशां होने लगे गए और उसको घर की हर कोने में ढूंढेगा....

आज़म फिर बैडरूम के अंदर चला जाता है और उसके जाते hi मुस्कान जानेका सोचती है और जैसे hi अपने कदम आगे बढाती है रघु फिर उसे अपनी तरफ खिंच लेता है...

Raghu..memsabbb..

Muskan...choroo मुझे ये क्या क्र रहे हो??

Raghu...memsab रुक जाईये अब जयिंगी तोह साहब कभी भी बहार आसक्ति हैं...

Muskan...maine कहाँ मुझे चोरोऊ...

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रघु मुस्कान को चोर देता है उसे पता था ो हद से ज़्यादा कर रहा है लेकिन कहीं न कहीं से उसे हिम्मत मिली थी मुस्कान जैसी शादीशुदा जवान खूबसूरत ाव्रत के साथ इतनी डबल मीनिंग बातें और हरकतें करनेकी...

Raghu...jaisi आपकी मर्ज़ी मंसबब...

रघु के चोरते hi मुस्कान जाने hi वाली थी के आज़म फिरसे बहार आजाता है और इसबार मुस्कान को लगता है के आज़म का उसकी देख hi लेगा इसलिए ो तुरंत निचे बैठ जाती hai...raghu ये एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था के मुस्कान यूँ अचानक निचे बैठेगी लेकिन अब उसको मुस्कान का चेहरे अपने लौड़े के इतना करीब पाकर जोश ारः था.

आज़म बहार अत है लेकिन मोबाइल में कुछ देखने लगता है हालाँकि उसको पता था मुस्कान यही कहीं hogi...idr मुस्कान निचे बैठी हुवी अपने शोहर आज़म को देख रही थी तभी उसे अपने चेहरे पर कोई शख्त चीज़ महसूस होती है और उसे समझने में देरी नहीं लगती के ो क्या चीज़ है. मुस्कान को गुस्सा ारः था रघु और खुद पर भी के कहीं न कहीं उसका इस सिचुएशन में होना उसकी hi गलती है...

रघु का लौड़ा अपने मन के इतना करीब पाकर मुस्कान थोड़ा दूर होनेकी कोशिश करती है लेकिन संभल कर क्यूंकि थोड़ी भी आवाज़ आज़म वहीँ खड़ा tha...raghu जनता था के मुस्कान क्या करनेकी कोशिश कर रही थी लेकिन उसे भी मस्ती सूझ रही थी इस वक़्त ो और आगे होने लगता है जिससे फ़्रस्ट्राटे होकर...

Muskan...pagal कहीं के पीछे राहु वर्ण मेरा से बुरा कोई नहीं होगा...

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Raghu...memsabb मैंने क्या किया??

रघु अनजान बनने की कोशिश क्र रहा था जैसे उसे कुछ पता नहीं था. मुस्कान भी अब सोचने लगती है क्या सचमे रघु नहीं पता इसके बारे में...

Raghu...batayiye मंसबब....

मुस्कान अब क्या बताती रघु तो उसे डायरेक्ट पूछ रहा था और ो पहले hi उससे डबल मीनिंग बातें करने में लगा हुवा था....

Muskan...kuch नही..

रघु के चेहरे पर देविलिश स्माइल अति है उसे पता था मुस्कान अंदर से ज़रूर फ़्रस्ट्राटे हुवी होगी और गुस्सा भी. इसलिए ो फिरसे अपना लौड़ा मुस्कान के चेहरे पर टकराता है जिससे फिरसे मुस्कान पीछे होनेकी कोशिश करती है...

Muskan...arey तुम फिरसे आगे आगये मैंने बोलै न पीछे रहो तुमको मेरी बात समझ नहीं आरही....

Raghu...memsabb मैं क्या करूँ मेरे पेअर दुखने लगे हैं इसलिए मैं सीधे खड़ा नहीं रह पढ़ा हूँ...

Muskan...ya kh*da क्या मुसीबत है तो बैठ जाओ...

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Raghu...memsab मेरा सिर्फ पेअर hi नहीं दुःख रहा है और भी कुछ दुःख रहा है...

Muskan...kya??

Raghu...memsab जाने दिज्ये आप फिर गुसा होंगी...

Muskan...rehne दो फिर मुझे जानना भी नहीं है...

Azam...muskan कहाँ हो तुम??

आज़म अब जो बैडरूम जाचुका था वापस वही से मुस्कान को फिरसे पुकारता है...

अब मुस्कान को पता था अगर ो अब जवाब नहीं देगी तो बड़ी गड़बड़ होजायेगी आज़म बोहत परेशां होजायेगा इसलिए ो थोड़ी धीमी आवाज़ में...

Muskan...azam मैं वाशरूम में हुन्न...

Azam..arey यार कबसे पुकार रहा हूँ तुमको...

Muskan...sorry मैंने सुना नही..

Azam...thik है मैं दूर पर hi खड़ा हूँ लाइट नहीं आयी है अभी भी....

मुस्कान कुछ जवाब नहीं देती ो बस वहीँ बैठी हुवी आज़म को अंदर थोड़े लम्बे समय के लिए जानेका वेट क्र रही थी क्यूंकि आज़म तभी से बार बार अंदर बहार कर रहा था.

Raghu...memsabbb अब मुझसे रहा नहीं जारहा मुझे वहां दर्द होरहा है...

Muskan...to थोड़ी देर इन्तिज़ार करो फिर चले जाना...

Raghu...memsab मुझसे और बर्दाश्त नहीं होरहा...

Muskan....to थोड़ा रगड़ लो न उदर जहाँ पर दर्द होरहा है...

Raghu...memsabb मेरे रगड़ने से कुछ नहीं होगा शायद आप कुछ मदद कर सकें...

Muskan...main!!! लेकिन कैसी मदद तुम खुद कर लो...

Raghu...memsabb समझा कीजिए मुझसे नहीं होगा आप अछि तरह से कर सकती हैं मेरी मदद और आपको तो पता है दर्द के मरे अगर मैं चीख बैठा तोह साहब सीधा िद्र hi आएंगे....

Muskan....yaa kh*da क्या मुसीबत है किदर दर्द होरहा है???

Raghu...memsabb अपना हाथ दो आपको बोलने से बुरा लगेगा...

Muskan...nahi तुम बता दो...

Raghu...memsabb अपना हाथ दिज्ये मेरे बोलने से पक्का आपको बुरा लगेगा...

मुस्कान थोड़ी देर सोचकर लेकिन झिजक कर अपना हाथ थोड़ा ऊपर करती है. रघु उसका कोमल और नाज़ुक हाथ अपने सख्त हाथ में पकड़ लेता है और सीधा अपनी पंत के ऊपर से अपने लुंड पर लेजाता है. मुस्कान रघु के लौड़े के अहसास से एक झटके में अपना हाथ पीछे कर लेती है...

Muskan...kamine कहीं के तुम्हारी हिम्मत कैसे हुवी ये krneki...boht होगया तुम्हारा...

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Raghu...memsabb इसलिए मैंने नहीं बोलै था और इसलिए बिना बोले आपका हाथ वहां legaya...mujhe वहीँ दर्द होरहा है मेमसाब शायद उस वक़्त जब हम गिरे थे तब की वजा se...pls मंसबब थोड़ा सेहला दिज्ये वर्ण मेरी चीख निकल जाएगी...

Muskan...nahi कभी नहीं मदद करना एक बात है लेकिन तुम हद से ज़्यादा बढ़ रहे हो क्या समझ रखा है mujhe...main इस सिचुएशन में हूँ तो तुम मेरा गलत फायदा उठाओगे??

Raghu....dekhiye मेमसाब पहली बात इनसब की वजा आप hi हैं आप hi ने मुझे छुपने के लिए बोलै मुझे कोई शौक नहीं था और बहार मैं गिरा इसमें मेरी क्या गलती...

Muskan...jo भी है तुम चुप चाप खड़े रहो थोड़ी देर में चले जाना और काम पर मत आना कैसे...

Raghu..memsab क्यों गरीब के पेट पर लत मरने पर तुली हुवी हो...

Muskan...to चुप खड़े रहो...

Raghu...memsab सोच लीजिए फिर मुझे नहीं कहना अगर मेरी चीख निकल गयी तोह..

मुस्कान को पता था ये डेंजरस होसकता है अगर गलती से भी इसकी आवाज़ आज़म ने सुन ली तो बवाल होजायेगा लेकिन उसका मतलब ये नहीं था के ो किसी ैरे गैर एक गैर मज़हबी मज़दूर उसकी दुगनी उम्र के आदमी का लुंड सहलाया जस्ट बिकॉज़ ो इस वक़्त अपने शोहर से उसको छुपाये हुवे है आखिर ो एक हैदर शरीफ शादीशुदा ाव्रत है.

उसका मन और दिल दोनों कह रहे थे के ो ये बिलकुल न करे ऐसा तो उसने खुद उसके शोहर को भी नहीं किया फिर आखिर कैसे इस आदमी के साथ करे लेकिन उसका दिमाग ये बोल रहा था के ो जल्दी से उसको सेहला दे वर्ण ये दर्द के मरे चिल्ला न बैठे...

Raghu...memsabbb ाःह...

रघु धीरे लेकिन मुस्कान को टेंशन में डालने जितना बोलता है. मुस्कान अब अपने हाथ मसल रही थी उसकी दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी...

Muskan..tt टुम्म अपना मन उदार कारु ोुर्र मैं ये थोड़ी देर ही करूंगी..

रघु के मन में लड्डू फूटने लगते हैं आखिर उसने मुस्कान को मजबूर कर hi दिया था उसने कभी नहीं सोचा था के मुस्कान को यहाँ तक भी ला सकता था. वहीँ मुस्कान थोड़ी हिम्मत करते हुवे धीरे से अपने हाथ रघु की पंत पर ले जाती hai...raghu का सख्त लौड़ा महसूस करते hi उसके दिल की धड़कन और तेज़ होजाती है...

Raghu...aah एक मिनट मंसबब बहार तो निकलने दो या फिर आप खुद निकलिंगी??

मुस्कान खुद hi जो उसने मूव की है उसका अहसास करके और रघु की बात से ऐम्बर्रेस्सेड फील करती है. ो खुद को कोसती है के क्यों उसने पहले मूव किया.

Raghu...memsab आप निकलेंगी??

Muskan...nnn नन्ही...

Raghu...to फिरर??

Muskan...ttt टुम्म निकलू...

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Raghu...nikal देता हूँ मंसबब आपके हाथ लगने की देरी उसको ठंडक मिलेगी...

मुस्कान चुप रहती है इसी बिच उसकी नज़र बैडरूम के दूर पर थी के आज़म बहार न ajaye....raghu अपनी पंत की ज़िप निचे करता है जिसे मुस्कान सुन लेती है ो अपना मन दूसरी तरफ कर लेती है. रघु अब पंत का हुक भी निकल देता है और निचे कर देता है. अंदर उसने एक पुराणी सी बड़ी अंडरवियर पहनी हुवी थी जिसमे उसके लौड़े का उभर साफ़ पता चल रहा था.

रघु को हालाँकि अभी भी यकीन नहीं होरहा था के ो मुस्कान के सामने अपनी पंत उतर रहा था और ो उसका लौड़ा भी सहलाने जारही है. हालाँकि उदर अँधेरा था लेकिन कुछ न होने से कुछ होना behtar...raghu अब अपनी अंडरवियर भी निचे कर देता है और निचे करते हुवे एकदम से उसका लौड़ा उछाल कर बहार अत है और मुस्कान के खूबसूरत चेरे से टकराता है...

Muskan...aaahh..

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Raghu...memsab निकल दिया है शुरू होजाये....

रघु धीरे hi सही लेकिन एक ऑथॉरिटीवे टोन में मुस्कान से बोलता hai...muskan भी रीलीज़ करती है के रघु का लौड़ा उससे जस्ट अबाउट टकराया है. उसकी दिल की धड़कन फिरसे तेज़ होजाती है उसे नहीं ख्याल था के ो तो बस छुपने के लिए बैठी थी लेकिन उसे यहाँ क्या क्या करना पद रहा था...

मुस्कान वहीँ बैठी हुवी उसके सामने अब रघु का कला लौड़ा था. मुस्कान को उसके लौड़े से पसीने और पेशाब की बदबू भी हलकी हलकी आरही थी लेकिन अब उसे करना तो था वर्ण गड़बड़ होसकती थी जैसे के रघु ने बताया था...

Raghu...memsab जल्दी कारु...

मुस्कान दूसरी तरफ मन करके अब धीरे से अपना गोरा कोमल हाथ रघु के लौड़े पर लेजाती है. मुस्कान का हाथ उसके लौड़े से टच होता है तो ो एक बार के लिए अपना हाथ पीछे करती है फिर वापस से हाथ आगे करती है और धीरे से उसके लौड़े पर अपना हाथ रखती है. उसकी दिल की धड़कन बढ़ गयी थी रघु के लौड़े के अहसास से. ऐसा उसकी ज़िन्दगी में पहली बार हुवा था के उसने अपने शोहर के अलावा किसी और का लुंड चुवा था.

रघु मन men...sssassss साअल्लाअ क्या नरम हाथ हैं iskeee...sasuraa पानी है न निकल जाईए इतना मुश्किल से मनाया ही िस्कु...

Raghu...memsabbb अब आगे पिचई कारु दर्द्द होरहा ही...

मुस्कान जो मन दूसरी तरफ किये हुवे थी अपने हाथ में रघु का लौड़ा पकडे हुवे धीरे धीरे हाथ आगे पीछे करने लगती है. उसे बड़ा hi अजीब लग रहा था उसे नहीं समझ नहीं ारः था के आखिर ो इस सिचुएशन कैसे फंस गयी...

Raghu...aaaahh ऐसी ही मंसबब...

मुस्कान रघु की आवाज़ सुनती है जिसको आराम मिल रहा था उसके हिलने से लेकिन मुस्कान ये जल्दी से ख़तम करके अपने शोहर के पास जाना छह रही थी अब हो पता है या नहीं रघु hi बेहतर जनता था. मुस्कान रघु का लौड़ा हिलाते हुवे फील कर सकती थी के ो चीज़ अब पत्थर जैसी सख्त होरही थी क्या उसके टच से? उसने पहले भी रघु का लौड़ा देखा है जब ो अपनी पत्नी के साथ वीडियो कॉल पर बात कर रहा था. उस वक़्त भी कितना सख्त और लम्बा सा लग रहा था.

और आज वहीँ लुंड उसके हाथ में था. मुस्कान दूसरे तरफ मन किये हुवे तो थी लेकिन उसका धयान अब बैडरूम के दूर पर काम और रघु का लौड़ा सहलाने में ज़्यादा था.

Raghu...aaaahh मंसबब्ब ऐसे hi करते राहु मेरा दर्द काम होरहा है...

Muskan...kam होगया न दर्द??

Raghu...memsab करते रहो होरहा है काम....

मुस्कान अपने नरम हाथों से रघु का कला लौड़ा पकडे हुवे धीरे धीरे ऊपर निचे कर रही थी...

Raghu...memsabb आपके हाथों में तो जादू है मेरा लौड़ा इस तरह मेरी पत्नी भी नहीं हिलती...

Muskan...chup रहो मैं ये सिर्फ तुम्हारा दर्द काम करनेके लिए कर रही हूँ...

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Raghu...main कोनसा मंसबब आपको बोल रहा हूँ के आप अपनी हवस मिटने मेरा लौड़ा हिला रही हो...??

Muskan...maine कहा न चुप रहो...

Raghu..memsab मेरा दर्द काम तो होरहा है लेकिन अगर आपको जल्दी ये दर्द काम करना है तो एक और तरीका है...

Muskan...konsa तरीका??

Raghu...hath की जगा आप मम मन इस्तिमार करेगी तो मेरा दर्द यूँ गायब होजायेगा...

मुस्कान एकदम से उसका लौड़ा चोर कर कड़ी होजाती है और गुस्से में...

Muskan...bas बोहत हुवा तुम समझते क्या हो मुझे तुम्हारी मदद क्या कर रही हूँ तुम मुझे ऐसी वैसी समझ रहे हो...

रघु.. अरे मंसबब आप मुझे गलत समझ रही हैंन...

Muskan...kya गलत हाँ तुम क्या चाहते मैं इसे अपने मन में छी...

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Raghu...arey मंसबब वही तो मैं बता रहा हूँ आप गलत समझ रही हैं मैं बोल रहा था आप थूक का इस्तिमाल करेगी तो जल्दी आराम milega...mun से मेरा ो मतलब था....

रघु की बात सुनकर मुस्कान ऐम्बर्रेस्सेड होजाती है के ो खुद ऐसे कैसे सोच सकती है जबकि रघु थूक की बात कर रहा था...

Muskan...bas बस अब बोहत हुवा मैं और नहीं कर सकती...

Raghu..kar दो मेमसाब आप के हाथ में सच में जादू ही...

मुस्कान जिसकी पीठ रघु के तरफ थी उसे देख रघु अपना आप खो रहा था अभी थोड़ी देर पहले मुस्कान उसका लौड़ा पकडे हुवी थी बस उसने ये गलती कर दी के उसने मन की बात कर di...lekin रघु छूटने hi वाला था मुस्कान के हाथों के कमल se...ab मुस्कान उसके सामने कड़ी थी पीठ किये रघु अपना लौड़ा खुद hi पकड़ लेता है और हिलने लगता है. दर्द वार्ड जैसी कोई चीज़ असल में थी hi नहीं ये तो बस रघु का आईडिया था मुस्कान के हाथ किसी तरह अपना लौड़ा देनेका...

रघु मुस्कान के थोड़ा करीब होकर उसकी महक को अपने नाक में लेते हुवे जैसे नशे के साथ अपना कला लौड़ा हिलाये जारहा था. थोड़ी देर बाद उससे कण्ट्रोल नहीं होता और ो सीधा मुस्कान की निघ्त्य पर पीछे झाड़ देता है. गधा सफ़ेद रास मुस्कान की निघ्त्य पर गिरने लगता है. मुस्कान जिसका धयान अब दूर पर था जहाँ आज़म अंदर जाने लगा था ो वाशरूम की तरफ देखते हुवे...

Azam...muskan मैं बैडरूम में हूँ जल्दी ाजावो...

मुस्कान रहत की साँस लेती है और आज़म के जाते hi रघु की तरफ देखते हुवे...

Muskan...jaldi करो और जाओ यहाँ से आज़म बैडरूम गए हैं...

Raghu...thik है मंसबब धन्यवाद आपके हाथ की मालिश की वजा से मेरा दर्द कुछ तो काम हुवा...

मुस्कान थोड़ा ऐम्बर्रेस्सेड फील करते हुवे...

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Muskan...thik है ठीक है जाओ तुम अब...

रघु अपनी अंडरवियर और पंत ऊपर कर लेता है और दूर की तरफ धीरे धीरे पेअर रखते हुवे जाने लगता है ो दूर के पास पोहचा hi था के लाइट आजाती है और एकदम फ्रीज होजाता है वहीँ जैसे ो पकड़ा गया हो. मुस्कान भी दर जाती है के कहीं आज़म रघु को न देख ले लेकिन बैडरूम से दूर तक देखना पॉसिबल नहीं था इसलिए मुस्कान रहत की साँस लेती है और रघु की तरफ देख कर उसे जानेका इशारा करती है इसी बिच उसकी नज़र रघु की पंत पर जाती है जहाँ अभी भी उभर बना हुवा था जिसे देख ो थूक निगलती है. फिर रघु दूर खोलकर बहार चला जाता है.

मुस्कान अब बैडरूम के अंदर चली जाती है जहाँ आज़म खड़ा था...

Azam...hash लाइट आगयी इतनी बारिश में मिरेकल hi है लाइट का ana...ek काम करो तुम नाहा लो जल्दी से फिर मैं भी नाहा लेता हूँ...

Muskan...thik है...

मुस्कान फिर कप्बोर्ड से अपने कपडे निकल कर वाशरूम जाने लगती है के तभी...

Azam...muskan रुको!!! ये तुम्हारी निघ्त्य पर गीला सफ़ेद सफ़ेद क्या लगा हुवा है!!!???

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तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Part 16

आज़म की इस बात से जैसे मुस्कान को सांप hi सूंघ जाता है उसको तो कोई आईडिया नहीं था के थोड़ी देर पहले रघु ने उसके ऊपर अपने लुंड का पानी भी छोरा हुवा है. मुस्कान की पूरी हवा निकल जाती है और समझ जाती है के ो पकड़ी गयी है फॉर no रीज़न न hi ो रघु को छुपाती उसके शोहर से चुप चाप सब कुछ बता देती जो कुछ भी हुवा लेकिन अब कर चुकी है तो भुगतना तो पड़ेगा hi.

आज़म धीरे धीरे मुस्कान की तरफ बढ़ने लगता है जिसे मुस्कान महसूस कर सकती थी. उसकी हार्टबीट काफी बढ़ चुकी थी क्यूंकि आज़म तुरंत पहचान लेगा के ये गीला सफ़ेद रास क्या फिर ो अपने शोहर को क्या जवाब देगी. क्या कहेगी ो अपने शोहर से.

Azam...muskan??

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मुस्कान को कुछ समझ नहीं ारः था ो क्या करे लेकिन ो अपना दिमाग किसी तरह जल्दी से दौड़ती है और फ़ौरन पलट जाती है अपने शोहर की तरफ जो उसके पास पोहंच चूका था...

Azam...kya लगा है मुस्कान तुम्हारे पीछे??

Muskan...azam ो शायद अँधेरे में कुछ लग गया होगा मैं अभी नहाकर अति हूँ....

Azam...lekin...

Muskan...azam रात भी होगयी मैं जल्दी से नहाकर अति हूँ....

मुस्कान जल्दी से अपने कपडे लेकर बाथरूम चली जाती है. आज़म हालाँकि अभी भी कन्फ्यूज्ड था लेकिन उस बारे में ज़्यादा न सोचते हुवे वहीँ मोबाइल उसे करते हुवे बैठ जाता है...

मुस्कान बाथरूम में जाकर जैसे रहत की साँस लेती है उसे पता था उसने नरौली एस्केप एक बड़ी hi डेंजरस सिचुएशन से. कुछ भी होसकता था अगर आज़म को पता चल जाता है उसकी बीवी की निघ्त्य किसी गैर मर्द का छुम लगा हुवा है तो ो पता नहीं कैसे रियेक्ट करता.

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मुस्कान वाशरूम में मिरर के सामने कड़ी खुद को देख रही थी. उसने आज अपने शोहर से झूट बोलै जो उसने अपनी शादीशुदा ज़िन्दगी में कभी नहीं किया था न hi उसको कभी ज़रूरत पड़ी थी. और झूट उसने बोलै भी किस के लिए उनके घर का काम कर रहे थे एक अधेड़ू उम्र के गैर मज़हबी नाते मज़दूर के लिए. क्या ये उसको शोभा देता है? ो एक शादीशुदा और हैदर ाव्रत है जो सिर्फ अपने शोहर से प्यार करती है उसी को सब कुछ मानती है.

खैर मुस्कान अब अपनी निघ्त्य निकल देती है और अब सिर्फ ब्रा पंतय में मौजूद थी ो खुदको मिरर में देखती है गोरा बदन कातिलाना फिगर ब्रा में कैद उसके गोल चुके सपाट पेट मोती झंगें. एक टिपिकल शादीशुदा जवान ाव्रत लेकिन मुस्कान का खूबसूरत चेहरा उसपर चार चाँद लगता था. ो ये जानती थी के ो बोहत खूबसूरत है और जवान भी और उसको उसपर घमंड नहीं था ो तोह अपने शोहर की तरफ पुरेली डिवोटेड थी.

मुस्कान अब अपनी ब्रा भी निकल देती है और ब्रा निकलते hi उसके गोर गोल चुके एकदम से उछाल कर बहार आजाते हैं. गोर चुचों लाइट पिंक कलर के निप्पल्स उफ्फ्फ जानलेवा थे बिलकुल. मुस्कान एक बार उन्हें देखती है और फिर अपनी पंतय भी निकल देती है.

पंतय निकलते hi मुस्कान का सबसे अनोखा खज़ाना सामने था. मुस्कान फिर शावर ों करके नहाने लगती है पानी की बुँदे उसके जिस्म पर गिरने लगती हैं जो सर से होते हुवे उसकी गर्दन से होकर निचे उसके चुचों को छूटे हुवे निचे बह रही थी.

शावर लेते हुवे मुस्कान को उस वक़्त का सन याद अत है जब ो और रघु अँधेरे में छुपे हुवे थे. बिना वजा उसने वैसा किया ो बोल hi देती अपने शोहर को के रघु बस ो अपना मोबाइल लेने आया था तो भीग गया गिर कर और गीला होगया लेकिन फॉर सम रीज़न मुस्कान ने वैसा नहीं किया और उसको ो सब सहना पड़ा.

उसको याद अत है जब रघु ने उसको और उसकी पत्नी को कपड़े करते हुवे बोलै था के मुस्कान के कद्दू उसकी पत्नी से बड़े हैं!!! मुस्कान को अछि तरह से पता था के उसका क्या मतलब था और ो गुस्सा भी हुवी थी लेकिन ऐन वक़्त पर आज़म ने पुकारा फिर उसकी ो सख्त चीज़ बापरे मुस्कान की गांड में कितनी बड़ी फील होरही थी मुस्कान को उसका भी अहसास था के ो क्या चीज़ है.

और ो याद करती है उसको दर्द होनेकी वजा से उसने रघु का लुंड भी सहलाया था और ो उसके छोटे हाथों में कितना बड़ा फील होरहा था. उसने खुद कभी अपने शोहर का इस तरह से लुंड नहीं हिलाया था और अब हिलाया भी तो किसका एक अधेड़ू उम्र के नाते मज़दूर का!!! और उसी मज़दूर ने उसकी निघ्त्य पर पीछे से अपना पानी भी chora...chii और तो और पीछे उसकी निघ्त्य पर लगा हुवा उसका रास मुस्कान के शोहर ने भी देख लिया...

बापरे अगर आज़म नज़दीक आकर उस सफ़ेद गधे रास को देख लेता या फिर पहचान जाता तो मुस्कान क्या जवाब देती आखिर अपने शोहर को क्यूंकि जो भी हो मुस्कान कोई ऐसी वैसी ाव्रत नहीं थी उसका शोहर उसपर पूरा भरोसा और प्यार करता था उसे पता था उसकी बीवी कितनी हयादार और शरीफ ाव्रत है.

शावर लेनेके बाद मुस्कान टॉवल लेकर पूछने लगती है.

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अपने गोर शफर बदन पर टॉवल फेरने लगती है. पोछते हुवे उसकी नज़र अपनी निघ्त्य पर जाती है और उसे ख्याल अत है के कैसे रघु ने उसकी निघ्त्य पर अपना पानी छोरा होगा और उसे पता भी नहीं चला...

मुस्कान फिर आगे बढ़कर अपनी निघ्त्य अपने हाथ में लेती है और उसको पीछे घुमा कर निघ्त्य पर लगे रघु के गधे सफ़ेद रास को देखने लगती है. बाप्रेस कितना गधा था ये रास उसका शोहर भी अपने लुंड से पानी निकलता था लेकिन ो इतना गधा नहीं होता था बल्कि ो तो ऑलमोस्ट पानी जैसा होता है लेकिन क्यों? इतना डिफ्रेंस क्यों? क्या उससे फरक पड़ता है? ये सब सवाल मुस्कान के दिमाग में चल रहे थे.

मुस्कान अनजाने में सही लेकिन रघु के बारे में बार बार सोच जारही थी ो किसी और चीज़ पर फिलहाल कंसन्ट्रेट नहीं कर पढ़ी थी. यहाँ तक के ो खुद के शोहर के बारे में उतना नहीं सोच पढ़ी थी. रघु की वल्गर हरकतें बातें उसे तंग तो कर hi रही थी लेकिन बार बार सोचने पर मजबूर भी कर रही थी. ऐसा भी नहीं था के रघु उसके साथ ज़बरदस्ती कर रहा था लेकिन उसे जब भी मौका मिल रहा था ो उसे गावता नहीं था.

मुस्कान अपनी निघ्त्य पर लगे रघु के गधे रास को देखे जारही थी फिर अचानक ो कुछ ऐसा करती है जिसका शायद खुद मुस्कान को भी ख्याल नहीं था. मुस्कान निघ्त्य पर जहाँ ो गधा रास लगा था उस हिस्से को अब अपनी नाक के पास लेजाती है और एक बार के लिए सूंघती है.

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आज़म और ो जब सेक्स करते थे तो उसने इंटेंशनली तो नहीं लेकिन कभी कबर आज़म के छुम की स्मेल सूंघी है पर ो रघु के मुकाबले काफी लाइट स्मेल थी जहाँ रघु का ये गधा रास कुछ ज़्यादा hi स्ट्रांग स्मेल कर रहा था. इनसब के बिच मुस्कान के मन में बस एक hi सवाल था आखिर ऐसा क्यों?

आज़म रघु से काफी जवान है. कहाँ आज़म एक हैंडसम जवान आदमी और कहाँ रघु एक अधेड़ू उम्र का नाता आदमी दोनों के बिच ज़मीन आसमान का फर्क है फिर भी क्यों?! मुस्कान के नाक के करीब उसकी निघ्त्य पर लगे रघु के गधे रास की महक मुस्कान ले रही थी. देखते देखते मुस्कान अपनी निघ्त्य अपनी नाक के और करीब लेती इतना के ऑलमोस्ट ो गधा मणि मुस्कान के नाक को लग hi जाता.

इतना करीब से सूंघने से मुस्कान को बेहद स्ट्रांग स्मेल मिलती है उस गधे मणि की. जैसे उसको नशे वाली फीलिंग आरही थी. फिरसे उसे उस वक़्त का धयान अत है जब रघु उसके उतना करीब था तो उसके शरीर से पसीने की स्मेल आरही थी हालाँकि ो पाक साफ़ रहना पसंद करती थी यहाँ तक की ो अपने शोहर को भी थोड़ा पसीना आने पर भी उसे नहाने बोलती थी लेकिन यहाँ रघु जैसे अधेड़ू उम्र के मज़दूर के जिस्म से आरही पसीने की स्मेल पर मुस्कान से ज़्यादा कुछ रियेक्ट नहीं किया था.

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रघु जैसे नाते अधेड़ू उम्र के आदमी के जिस्म से पसीने की मरदाना स्मेल से मुस्कान परेशां नहीं हुवी जैसे उसे ऐतराज़ नहीं हुवा हो. जबकि उसको इसकी बिलकुल आदत नहीं थी और ो जो चीज़ उसने अपनी गांड पर महसूस की थी उफ्फ्फफ्फ्फ़ क्या फौलादी लुंड है रघु का. मुस्कान के लिए ये सब कुछ नया था. ो गुस्सा ज़रूर होती थी रघु पर लेकिन कहीं न कहीं ो उसके सामने कमज़ोर लगती थी.

फिर ो निघ्त्य वहीँ बकेट में डालकर अपने कपडे पहन कर बहार आजाती है. आज़म भी शावर लेकर फिर दोनों सजाते हैं क्यूंकि रात होचुकी थी.

िद्र जब रघु घर से बहार आया था तो थोड़ी देर में लाइट आगयी थी इसलिए ो ऊपर जाकर अपना मोबाइल लेकर चला जाता है वापस. रिहाइश पर जाकर लेते हुवे ो मुस्कान की साथ किए हुवी अपनी हरकतों के बारे में सोचते हुवे अपना लौड़े सहलाता है....

रघु मन men...saala क्या माल है ससुरा लुंड की सिकाई करके मज़ा आज्ञा hahaha....socha नहीं था ऐसी माल पर अपना पानी छोड़ूंगा sasura...kya चांस मिला था साला किस्मत भी अपने sath...kaash ऐसा बार बार चांस मिले और मैं उस आइटम को अचे से मसल सकू....

सुबह मुस्कान और आज़म की नींद खुलती है फिर दोनों फ्रेश होकर नाश्ता करते हैं. आधे घंटे बाद आज़म ऑफिस जानेके लिए रेडी होता है..

Azam...muskan पता है न कल हमें निकलना है तुम 2 रात के कपडे पैक करलो सुबह hi निकलेंगे कल...

Muskan...thik है...

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आज़म फिर ऑफिस के लिए निकल जाता है मुस्कान वहीँ सोफे पर अपना मोबाइल उसे करते हुवे बैठ जाती है. सारे मज़दूर अपने काम पर आजाते हैं अपने टाइम पर. मोबाइल उसे करके जब मुस्कान बोर होती है तो घर के बहार अति है और गार्डन में पानी देने लगती है. पौदों को पानी देते हुवे उसकी नज़र रघु पर पड़ती है जो ऊपर कुछ काम कर रहा था. उसे कल याद अत है जब ो दोनों अँधेरे में एकदूसरे से चिपक कर खड़े थे.

ो सोच hi रही थी के रघु और उसकी नज़रें आपस में मिलती है रघु उसे अपने पीले दन्त दिखते हुवे स्माइल करके दिखता है जिसे देख मुस्कान ऐम्बर्रेस्सेड फील करती है. आखिर उन दोनों को hi पता था के कल क्या हुवा था. मुस्कान अब अपनी नज़रें हटते हुवे रघु से ऑय कांटेक्ट अवॉयड करनेकी कोशिश करते हुवे पानी देने लगती है...

ो लगी hi हुवी थी के उसको पता hi नहीं चलता कब रघु निचे आज्ञा था.

Raghu...memsbbb...

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रघु की आवाज़ सुनकर मुस्कान एक बार को उछाल पड़ती है यूँ अचानक ो आएगा उसको अंदाज़ा नहीं था. मुस्कान उसकी तरफ घूम जाती है जो फिरसे उसकी तरफ देख कर स्माइल किये जारहा था...

Muskan...haa क्या हुवा???

Raghu....memsab हुवा तो कुछ नहीं बस कल ो मेरा मोबाइल जो है न शायद पानी लगने की वजा से ख़राब होगया ों नहीं होरहा...

Muskan...acha तो मैं क्या करूँ??

Raghu...memsabb ये आप देखो शायद आपको कुछ पता चल जाये मोबाइल ठीक होसकता है या नहीं...

Muskan...nahi नहीं मुझे नहीं पता इस बारे में कुछ भी...

Raghu...pls मंसबब....

मुस्कान उसके हाथ से मोबाइल लेकर देखने लगती है हालाँकि उसको भी आईडिया नहीं था ऊपर से उसका मोबाइल कोई सस्ता चिनीसे कंपनी का था. मुस्कान देखती है के पीछे बैक कवर भी है मतलब रिमूवेबल बैटरी भी होगी. ो सोचती है ये आदमी कितना पुराण मोबाइल लिए घूम रहा है. ो बैक कवर खोलकर बैटरी एक बार निकल कर दोबारा डालती है और पावर बटन प्रेस करती है तो मोबाइल ों होजाता है...

मुस्कान सूरे होने के लिए ों होते hi टच रिस्पांस सब चेक करने लगती है तभी ो बी मिस्टेक गैलरी पर क्लिक करती है और स्क्रीन पर कुछ फोटोज ओपन होजाते हैं और उनको देख उसको कुछ जाना पहचाना सा दीखता है...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
सो गाइस, सीन्स we've रीछेड 300क व्यूज इन सुच शार्ट अमूत ऑफ़ टाइम इतस टाइम तो सेलिब्रेट! थिस one's ैसिलय थे लांगेस्ट अपडेट ऑफ़ थिस स्टोरी सो फार. एन्जॉय!

थैंक्स,

थे ईविल
 
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