Hindi Sex kahani - Muskan - Page 4 - SexBaba
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Hindi Sex kahani - Muskan

Hi गाइस, ी क्नोव इतस बीन 3 डेज सीन्स ी लास्ट पोस्टेड & we've रीछेड 500क व्यूज अलोंग सो वेट ा डे मोरे i'll पोस्ट ा बिग अपडेट फॉर रीचिंग थे माइलस्टोन अस वेल अस फॉर डिलेड अपडेट.

ओने मोरे थिंग गाइस, ी फील लिखे ी नीड ा ब्रेक बिकॉज़ ी haven't बीन अबले तो कंसन्ट्रेट ों स्टोरी राइटिंग लटल्य फॉर वेरियस पर्सनल रेअसोंस.

लेकिन फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है ये ब्रेक लॉन्ग नहीं होगा मैक्सिमम एक हफ्ता. उसके बाद मैं फ्रेश मंद के साथ स्टोरी लिख सकता हूँ ी फील. मैं होप करता हूँ रीडर्स इस चीज़ को अंडरस्टैंड करेंगे.

थैंक्स

थे ईविल
 
Part 23

मुस्कान की कोषसिंह के बावजूद भी ो रघु का बड़ा हाथ अपने चुचों पर से नहीं हटा पति लेकिन इसी बिच उसे एक अजीब से फीलिंग आने लगती है जो उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं की थी.

रघु के सख्त हाथों को अपने चुके को मसलता महसूस करना. कितने मरदाना तरीके से ो उसके चुके मसल रहा था जो खुद उसका शोहर भी नहीं कर पाया था.

न जाने क्यों मुस्कान की ऑंखें धीरे धीरे बंद होने लगती है हालाँकि थोड़ा रेजिस्टेंस ो अभी भी दिखा रही थी और उसे ख्याल भी था के ये जो कुछ भी होरहा है ो गलत है.

Muskan...aammmaahh चूरररू मुझी...

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रघु की हिम्मत पता नहीं कैसे बढ़ी हुवी इस वक़्त ो मुस्कान की बात को इग्नोर करते हुवे उसके चुके मसलना जारी रखता है...

मुस्कान रघु के इस प्रहार से उभरी भी नहीं थी के उसे अपनी गांड पर रघु का लौड़ा महसूस होने लगता है जो बोहत hi सख्त होचुका था.

मुस्कान विरोद करना तो दूर अब मदहोश के आलम में थी और रघु ये बात बखूबी सेंस करता जारहा था. उसके शोहर के अलावा किसी और गैर मर्द का ऐसा टच कहीं न कहीं मुस्कान को एक्साइट कर रहा था लेकिन ये शरीफ शादीशुदा जवान ाव्रत होनेकी वजा से ो इस बात को ताल रही थी.

थोड़ी देर बाद रघु मुस्कान के चुके चोर देता है और उसका हाथ पकड़ कर अपनी पंत के ऊपर से अपने लौड़े पर रख देता है. इतना बड़ा तम्बू अपने छोटे नरम हाथ पर लगते hi मुस्कान वहां से अपना हाथ हटा देती है.

तभी रघु नोटिस करता है के साइड वाले रूम से आवाज़ें आना बंद होचुका है. उसके दिमाग में एक आईडिया अत है और फ़ौरन मुस्कान का हाथ पकड़ लेता है और स्टोर रूम का दरवाज़ा हलके से खोलकर बहार देखता है. बहार कोई न देख ो जल्दी से मुस्कान का हाथ पकडे हुवे दूसरे रूम में आजाता है जहाँ काव्य और उसका ससुर रंग रैलियां मन रहे थे.

उस रूम में पूरी लाइट थी. रूम में एते hi रघु मुस्कान को फिरसे अपनी तरफ खींचता है. फिरसे मुस्कान उसकी छाती से टकराती है.

Muskan....tumm यी गलत्त कररर रही हूँ...

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Raghu....memsabb मैं औरर बरशट नही कर सकत्ता...

Muskan...kkk क्या मतलबबब??

Raghu...meraa लौड़ा जबसे आपको देखा है शांत hi नहीं होता..

दोनों एकदूसरे को देख रहे थे. रघु की बाँहों में मुस्कान थी.

Raghu...sahabb बड़ी नसीब वाले उनको आप जैसी आइटम मिली...

Muskan...ttt तू क्या तुम ज़बरदस्ती कररर ररोगी..

Raghu...wahii तो मैं बोल रहा हुन्न्न एक बार करने दू मंसबब उसके बाद मैं फिर कभी आपके पास नहीं आऊंगा...

Muskan...kaminee मुझे समझ के क्या रखा hai..main कोई ऐसी वैसी ाव्रत हूँ ??

Raghu...maine कब बोलै वैसे मंसबब आप तो पाठक हो एक शादीशुदा पाठक जिसका इस्तिमाल मेरा जैसा मर्द hi सही से कर सकता है...

Muskan...kk क्या मतलबबब है तुम्हारा मेरे शोहर को तुम जानते hoo...tum से लाख गुना बेहतर है ो...

Raghu...honge मंसबब लेकिन बस बहार se...mera जैसा मर्द hi आप जैसी कड़क शादीशुदा जवान आवर्तों के लिए सही होता है...

Muskan...bakwas बंद करूओ ोुर्ररर च चुर्र मुझी..

मुस्कान रघु की पकड़ से निकलने की कोशिश करते हुवे बोलती है...

Raghu...thik है मंसबब चूर देता हूँ बस एक शर्त पर...

Muskan...shart? मैं क्यों मनु तुम्हारी शर्त चुर्रू मुझे कामिनी...

Raghu...mujhe पता है साहब मेरे सामने टिक नहीं सकते है इसलिए आप दर रही हूँ...

Muskan...kya बकवास क्या मतलब है तुम्हारा??

Raghu...mere 7 बचे हैं मंसबब आप समझ जावू..

Muskan..haaiin तू..

Raghu...asal में मुझे तो लगता है साहब में दम hi नहीं है आप जैसी आइटम पत्नी को शांत करनेका...

Muskan...kamine बद्तमीज़ कहीं के!!!

रघु नोटिस करता है के मुस्कान बड़े गुस्से में आयी हुवी थी. उसे पता था ये बड़ी hi शरीफ और वफादार ाव्रत है और अपने शोहर के खिलाफ ऐसी बातें नहीं सुन सकती...

Raghu...sach hi तो बोलै है मेमसाब इसमें गुस्सा होनेवाली कोनसी बात ही..

Muskan...tumm हमारे यहाँ काम करते हो समझ और अपनी हद में राहू तुमसे थोड़ी बात क्या कर ली तुम तू ज़्यादा hi आगे जारहे हूँ...

Raghu...memsab बस 5 मिनट दो मुझे अगर आपको थका न दिया न तो मैं काम चोर दूंगा और फिर कभी दिखूंगा नहीं आपको...

Muskan...kya 5 मिनट?? तुम क्या मुझको पागल समझते हो जो तुम जैसे नीच आदमी को अपने पास भी आने दूंगी...??

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Raghu...o तो है मेमसाब आप जैसी आइटम हम जैसों के नसीब में थोड़ी न होतीं hain...lekin बात ये भी है के आपको दर है कहीं आप हर न जाओ मुझसे क्यूंकि ये बात तो मैं आपको पक्का बता सकता हूँ के आप 5 मिनट में बेहाल होजावोगी जो साबुत होगा साहब मेरे सामने कुछ भी नही...

Muskan...tumari मेरे शोहर के सामने कोई अवकात नहीं hai...main कोई काव्य नहीं हूँ जो ऐसे मन कला करती fire...choroo मुझी...

Raghu...haa मेंसबब्ब आप उस आइटम जैसी नहीं हो ो तो एकदम रंडी है तो अपने ससुर से hi छुड़वा रही hai...lekin ये बात भी है के आप मुझसे नहीं जीत सकती जिसका मतलब ये भी है के साहब भी मेरे सामने फुसस्स हैं...

रघु के चेहरे एक अजीब सी स्माइल थी जो मुस्कान को ललकार रही थी अपने शोहर के बारे में ो ऐसी गंदे अल्फ़ाज़ नहीं सुन सकती थी लेकिन ो उसको रॉंग प्रूफ करने के लिए रघु को ये अल्लोव भी नहीं कर सकती थी.

Muskan...chorroo मुझे...

Raghu...bas 3 मिनट दो मंसबब अगर मैंने आपको बेहाल न कर दिया फिर मैं आपको चोर दूंगा...

Muskan..nahiii चोरोररू मुझी..

तभी मुस्कान के मोबाइल पर किसी की कॉल अति है. मोबाइल मुस्कान के हाथ में था जिसे रघु झट से खिंच लेता है. ो देखता है कॉल आज़म की थी.

Muskan...mujhe मेरा मोबाइल दू..

Raghu...sahab का कॉल ही मेमसाब...

Muskan..do मुझे...

Raghu...bas मुझे 3 मिनट दे दो मेमसाब मैं मोबाइल भी दे दूंगा और आपको चोरर भी दूंगा...

Muskan...blakcmail कर रही हूँ मुझी...

Raghu...nahii मंसबब बस 3 मिनट मांग रहा हुन्न...

दोनों पसीने हुवे एकदूसरे को देखते हुवे बातें कर रहे थे.

Muskan...mainee कहा न नही...

Raghu...kyunke आपको पता है साहब मेरे सामने कुछ भी नहीं हैं...

Muskan...tummm!!!

Raghu...chalo मंसबब 2 मिनती में अगर आप तस से मास नहीं हुवी तो मैं फिर कभी आपको दिखाई नहीं दूंगा...

इतना बोलकर रघु मुस्कान को बीएड पर धकेल देता है इसी बिच आज़म का कॉल भी कट जाता hai....muskan कुछ समझ पति इससे पहली hi ो उदर बीएड पर 2-3 बार उछलते हुवे वहां गिर जाती है. गिरने की वजा से रघु को मुस्कान के बाउंस हुवे चुचों का ाचा व्यू मिलता है.

मुस्कान गिरते हुवे सम्भलते हुवे रघु की तरफ देखती है जो उसकी तरफ ारः था. ो उठनेकी कोशिश करती उससे पहली hi रघु उसके ऊपर आकर उसके हाथ बीएड से सत्ता देता है...

Muskan...nnn नयी चोर्रो मुझी...

Raghu...bas 2 मिनट...

रघु अब मुस्कान पर झुक जाता है और उसके गले पर चूमने लगता है. इतनी देर उस स्टोर में रहने की वजा से मुस्कान के गले पर पसीना आया हुवा था जिससे ो और महक रही थी जो रघु के लिए नशे का काम रहा था.

रघु मुस्कान की गोरी स्किन चूमने लगता है उसके गले पर. रघु के इस तरह चूमने पर मुस्कान के अंदर एक अजीब सी फीलिंग आने लगती है. आखिर क्या था ये? क्यों वैसे होरहा था?

रघु मुस्कान के गले पर मौजूद उसका पसीना भी चाटने लगता है..

Muskan...mmmhhhppp नहहीइ...

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अपनी स्किन पर रघु की ज़ुबान का रफ़ टच मुस्कान को एक अजीब फीलिंग दे रहा था जो उसने इससे पहले कभी एक्सपीरियंस नहीं किया था.

उसके गोर नरम हाथ को रघु के मरदाना काळा बड़े हाथ होल्ड किये हुवे थे जैसे ो उसे अपनी अथॉरिटी दिखा रहा हो. ऐसी अथॉरिटी तो आज़म खुद उसके शोहर ने उसपर नहीं दिखाई थी.

Muskan...sssaahhh नयी चुर्रू...

मुस्कान की दिल की धड़कन बढ़ी हुवी थी. ो अपने हाथ पेअर हिला तो रही थी लेकिन उनमे उतना

ी डेस्पेरशन नहीं थी. जैसे ो कोई ट्रांस में चली गयी हुवी रघु के टच से.

रघु उसके गले पर चूमते हुवे अलग hi मज़े में था. अब ो उसका पसीना वहां पर चाटने लगता है..

Muskan...naiii छी चूरररू मुझे...

Raghu...memsab बस 2 मिनट चुप rahooo...fir चुररर दूंगा..

रघु फिर उसके गले पर चूमते चाटते हुवे उसके कान तक पोहंच जाता है और वहां चूमने लगता है. उस हरकत से मुस्कान अपना एक हाथ रघु के हाथ से चुराते हुवे उसकी पीठ पर रख देती है अनजाने में...

रघु जिसे देख अपने मन में मुस्कान का कान पकड़ लेता है और चूसने लगता है...

Muskan...hhhuhhhmmmssss...

मुस्कान अब सिसकियाँ लेने लगी थी लेकिन रघु को ये भी बात पता थी के ये तीखी मिर्ची कभी भी पलट सकती है इसलिए रघु अपना प्रहार उसपर जारी रखता है. कान को मन में लेनेके बाद अब रघु अपनी ज़ुबान उसके कान के अंदर डालकर वहां फेरने लगता है.

मुस्कान को तो जैसे अंदर से झटका लगता है उसकी रूह को अंदर से शांति मिलती है रघु की इस हरकत से. उसका जिस्म थोड़ा अकड़ जाता है और ो अपना हाथ जो उसने रघु की पीठ पर रखा था ो उसकी शर्ट पर और कस्ती है...

Muskan...sssssaaahhh छह..

मुस्कान की ऑंखें इस वक़्त बंद थी रघु की हमले से. उसने सोचा नहीं था ो किसी की जासूसी करने आएगी और ो खुद hi एक मज़दूर के साथ ये सब कर रही होगी...

रघु मुस्कान के कान में अपनी ज़ुबान डालते हुवे अब अपना एक हाथ से मुस्कान की चुनरी निकल देता है. अब उसके सामने मुस्कान के कुर्ती में कैद बड़े चुके थे जिनका उभर ठीक उसने सामने था.

रघु का लौड़ा पंत में दर्द करने लगा था. ऐसा व्यू उसने अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं देखा था.

ो अपना एक हाथ अब उसकी गर्दन में डालकर वहां फेरने लगता है जिससे मुस्कान थोड़ा और तड़पने लगती है और इसबार अपना पेअर रघु के पेअर पर रखती है.

Muskan...sssssaahh कछह....

रघु देख सकता था मुस्कान के चुके कैसे ऊपर निचे लगातार होरहे थे जो बड़े hi कामुक लग रहे थे.

Muskan....hhuhhhmmppp..

रघु अब मुस्कान का दूसरा हाथ भी चोर देता है लेकिन शॉकिंगली मुस्कान अपना हाथ विरोद के बजाय रघु की पीठ पर रख देती है.

रघु अब धीरे से मुस्कान को पलटा देता है.

Muskan..mmmh नही चुररर ररोरू मुझी..

अब पल्तानरकी वजा से मुस्कान की पीछे खुली बैक सामने थी. रघु के मन से लार टपकने लगती है मुस्कान की एकदम गोरी बिना दाग के पीठ देखकर. मुस्कान ने एक जमुनी कलर की ब्रा पहनी हुवी थी. रघु एक बार पीछे से मुस्कान के पुरे जिस्म को ताड़ता है उसके सर से लेकर निचे उसकी पीठ से होते हुवे उसकी उभरी हुवी गांड पर.

गांड पर नज़र जाते hi रघु का मन कर रहा था बस उसकी कुर्ती और पंतय फाड़कर सीधा अपना लौड़ा घुसा दे मुस्कान की गांड में लेकिन ो खुद पर काबू रखता है.

रघु अब झुक कर फिरसे मुस्कान की गर्दन पर चूमने लगता है...

Muskan..aaahhnnnsss नयी...

गर्दन पर चूमते हुवे रघु अपने दोनों हाथों में मुस्कान के दोनों हाथ बीएड से चिपका कर पकड़ लेता है...

हालाँकि अब तक 2 मिनट से ज़्यादा होचुके थे जिसका दोनों को ख्याल नहीं था मुस्कान ने तो फिर भी रज़ामंदी नहीं दी थी रघु को.

गर्दन पर चूमते हुवे रघु निचे अत है. मुस्कान के गले में उसका मंगलसूत्र था. उसपर से होते हुवे ो मुस्कान की गोरी बैक चूमने लगता है...

Muskan...aahhhssssss चोरर दू मुझीऐ...

Raghu...memsab शन्तत राहू बस 2 मिनट की बात है...

ो अब उसकी गोरी बैक चूमते हुवे मुस्कान की ब्रा तक पोहंच जाता है और अपने डेंटन से hi उसका हुक निकल देता है. अपनी ब्रा का हुक लूसे होते hi मुस्कान अपने हाथ चुराने लगती है रघु के हाथों में से लेकिन रघु उसको नहीं चोरता.

Muskan...mmmhh नयी ये तुमममम...

ब्रा के हुक अलग होजाते हैं और रघु वहीँ चूमते हुवे थोड़ा और निचे अत है. मुस्कान अब मदहोश होचुकी थी उसकी लगातार सिसकारियां निकल रही थी ो भूल चुकी थी के ो एक शादीशुदा ाव्रत है उसके साथ ये सब एक मज़दूर करे जारहा है.

वहीँ रघु मुस्कान को अपने काबू में करने की पूरी कोशिश कर रहा था क्यूंकि उसे पता मुस्कान जैसी शरीफ शादीशुदा जवान ाव्रत अगर उसके हाथ आगयी तो उसके सिर्फ मज़े hi मज़े हैं और होसकता है ो अपनी गरीबी को भी दूर कर सकता है मुस्कान के ज़रिये क्यूंकि उसका शोहर ाचा खासा कमा भी लेता है.

रघु अब पीछे से मुस्कान की ड्रेस ऊपर करके उसे पीठ तक ले लेता है. जिससे अब मुस्कान की गोरी कमर उसके सामने थी बिना देरी किये ो अपने मन वहां रखकर चूमने लगता है....

Muskan...mmmmm आहहहहहहह ननननहहह...

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रघु अपने हाथों में मुस्कान के छोटे गोर हाथों की हरकत महसूस कर सकता था उसके हर प्रहार से मुस्कान तड़पे जारही थी अपने हाथों को हिलाते हुवे...

कमर पर ए मुस्कान के पसीने को रघु चूमते हुवे कहते जारहा था. क्या गज़ब का नज़ारा था मुस्कान की गोरी कमर पर रघु जैसे नाता कला अधेड़ू उम्र का मज़दूर चूमे जारहा था.

थोड़ी देर में रघु मुस्कान को हाथों से उठाकर बिठा देता है. मुस्कान की ऑंखें अभी बंद थी शायद शर्म की वजा से जो रघु के लिए सुर्प्रिसिंग था क्यूंकि मुस्कान मन तोड़ जवाब देने वालों में से थी लेकिन शायद उसका ये फोरप्ले मुस्कान के लिए तू मच था जिससे ो शायद आजतक वंचित थी.

रघु देरी न करते हुवे मुस्कान की कुर्ती निकल देता है. कुर्ती निकलते hi मुस्कान के ब्रा में कैद बड़े गोल पॉइण्टी चुके एकदम से सेक्सी अंदाज़ में बाउंस होते हैं.

रघु पहली बार मुस्कान को सिर्फ ब्रा में देख रहा था. क्या मस्त माखन जैसा कातिलाना बदन एकदम बेदाग. जो चीज़ ो आजतक बस निघ्त्य या किसी ड्रेस के ऊपर से hi देखते ारः था ो खज़ाना आज बिलकुल उसके सामने था.

ब्रा में मुस्कान के चुके समां तो रहे थे लेकिन ब्रा के बहार कुछ कुछ नज़र आरहे थे. उसी ब्रा के बिच में मुस्कान का मंगलसूत्र तह

रघु मुस्कान का ड्रेस निचे फेंक देता है और उसकी नज़र अब मुस्कान के खूबसूरत चेहरे पर जाती है कितनी मासूम लग रही थी ो साथ में हॉट भी. रघु अब मुस्कान के चेहरे के तरफ देखते हुवे.

Raghu...memsabbb

मुस्कान अपनी ऑंखें खोलकर सामने देखती है.

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रघु उसके इतना करीब था ो स्ट्रैट उसकी आँखों में देख रहा था. मुस्कान के चेहरे लिटेराल्ल्य कोई एक्सप्रेशंस नहीं थे. ो इस चीज़ डाइजेस्ट नहीं कर पायी थी के ो इस चीज़ को रोक क्यों नहीं रही अभी तक. रघु इतना आगे बढ़ चूका है के ो उसकी कुर्ती तक उतर चूका है...

Raghu...memsab 2 मिनट्स होचुके हैं..

मुस्कान रघु की बात सुनती है और एकदम से रियेक्ट करते हुवे अपनी ब्रा के ऊपर अपने हाथ रखकर अपने चुचों को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगती है...

Raghu...memsabb देखा सिर्फ 2 मिनट्स में मैंने आपको बेहाल कर दिया फिर सोचो मैं घंटों में आपकी क्या हालत कर सकता हूँ...

Muskan...mujheee कोइई आआआह्ह्ह..

रघु एकदम से मुस्कान को फिरसे बीएड पर धकेल देता है और उसके हाथों को झकड़ते हुवे खुद भी उसके ऊपर झुक जाता है. अचानक हुवे इस हमले से मुस्कान अचंबित होजाती है और रघु को देखने लगती है...

Raghu...memsabbbbbb..

Muskan...mmmhhmm नाई...

Raghu...memsab मुझे आपका शरीर पागल कर रहा ही..

Muskan..mmmm नयी चोरर दू मुझी 2 ममम ममम मिनट होगयीए ना...

Raghu...bas थोड़ी देर ऑर्डर memsabb...aapko तो पता है घर्र बीवी से दूर मैं यहाँ आपके hi घर का काम कर रहा हूँ बस मुझे थोड़ी मेरी थकन दूर करने दू...

Muskan...mmhhhmm नयी पागलल हूँ चुररर चोरू मुझी....

रघु मुस्कान के हाथ और मज़बूती से पकड़ता है जिससे मुस्कान को थोड़ा दर्द होता ही...

Muskan..aaahhh...

Raghu...memsabb बस थोड़ी देर...

मुस्कान को रघु में अब कुछ बदलाव नज़र आने लगे थे. पहले तो ो उसके साथ बड़े hi जेंटली पेश ारः था लेकिन यूँ उसके हाथ मज़बूती से पकड़ा कुछ तो इंडीकेट कर रहा था.

मुस्कान के रघु के तरफ देखती है जो उसके बड़े ब्रा में कैद चुचों को देख रहा था खा जानेवाली नज़रों से. तभी रघु की नज़र मुस्कान के आर्मपिट्स पर जाती हैं दोनों तरफ बिलकुल क्लीन बेदाग था जिसे देख रघु बिना वक़्त गवाए सीधा अपना मन मुस्कान के एक आर्मपिट पर रख देता है.

Muskan...yee की चोररर ये क्या कररर रहहीव हूँ...

रघु को आर्मपिट से अजीब सी महक आरही थी जो पसीने और उसके परफ्यूम की मिली जुली स्मेल थी. रघु वहां सूंघते हुवे अब अपनी ज़ुबान बहार निकल कर चाटने लगता है...

Muskan...mmmhhaahh नईईई क्या कररर रही हूँ...

मुस्कान उसे रोकना तो चाहती थी लेकिन रघु ने उसकी नाज़ुक कलाईयाँ बड़े hi मज़बूती से पकड़ राखी थी. झुके होनेकी वजा से रघु को अपनी छाती में मुस्कान के ब्रा में कैद चुके टच होरहे थे.

आर्मपिट चाटकर रघु वहां बिलकुल अपनी थूक लगा देता है हालाँकि मुस्कान फिरसे मदहोश होने लगी थी रघु की इस हरकत से ये उसके लिए बिलकुल नया था. कोई आर्मपिट्स भी चाटता है ये उसने सोचा नहीं था.

अब रघु दूसरे हाथ के आर्मपिट पर जाकर वहां चाटने और सूंघने लगता है...

Muskan...mmmhhhaa ंन्न नाआ अह्ह्ह...

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रघु उसके आर्मपिट्स बड़े hi पशनातेली कहते जारहा था जैसे उसे उसमे बड़ा मज़ा ारः हो और हो भी क्यों न मुस्कान एक शादीशुदा जवान ाव्रत थी और ऊपर से बेहद खूसबूरत.

दूसरा आर्मपिट चाटने के बाद रघु मुस्कान के खूसबूरत चेहरे की तरफ देखता है. उसकी ऑंखें बंद थी. रघु अब उसके हाथ छोड़कर अपना शर्ट के बटन निकलने लगता है. तभी मुस्कान को अपने हाथों पर रघु के हाथ न पाकर ो एकदम से अपनी ऑंखें खोलती है और रघु को शर्ट निकलते हुवे देखती है.

ो उसको इग्नोर करते हुवे एक झटके में उठ कड़ी होती है और किसी तरह अपनी ब्रा का हुक लगाकर दूर की तरफ भागने लगती है तभी रघु भी फ़ौरन फुर्ती दिखती हुवे उसका हाथ पकड़ लेता है जिससे मुस्कान एक झटके में रुक जाती है.

उसकी सांसें तेज़ से चलने लगती हैं जिसकी वजा से उसके ब्रा में कैद बड़े गोल चुके ऊपर निचे होने लगते हैं. इस वक़्त मुस्कान एक ब्रा और सलवार में कड़ी थी. उसका गोरी नैवेल और पीठ नंगे थे और उसका हाथ पकडे हुवे एक नाता अधेड़ू उम्र का मज़दूर जिसके शर्ट आखरी बटन ो अब निकल देता है.

अब उसकी छाती सामने थी जहाँ पर काळा सफ़ेद बल भरे हुवे थे. पूरी छाती पर तो नहीं लेकिन जितने थे बोहत थे. उनमे से कई तो सफ़ेद भी थे. उसकी छाती पर भी पसीना अभी भी दिख रहा था.

रघु मुस्कान का नाज़ुक गोरा हाथ पकड़े हुवे एकदम से उसे अपनी तरफ खींचता है जिसकी वजा से मुस्कान पलटते हुवे एकदम फाॅर्स में सीधा रघु की छाती से टकराती है. उसके बड़े गोर चुके ब्रा के ऊपर से रघु की छाती में प्रेस होते हैं.

Muskan...hhuhhh चोरो मुझीऐ तुम्हारी इतनी हिम्मतत्त...

Raghu...kahan जारही हो मेमसाब?? भूल रही हो आप ब्रा में हो इस तरह बहार जाओगी??

Muskan...mujhe जानी दू सिद्दी सिद्दी..

Raghu...chorrr दूंगा मंसबब बस एक बार आपके इन रसीले आमों को चुनी दे दो..

रघु ये बात मुस्कान के ब्रा में कैद चुचों की तरफ देखते हुवे बोलता है...

Muskan...mmhh बिलकुल नयी..

Raghu...memsab आपके इन रसीले आमों को मेरे जैसा मर्द hi अछि तरह से निचोड़ सकता है सोच लू....

Muskan...naii नाहीइ...

तभी मुस्कान की ऑंखें बड़ी होजाती है क्यूंकि रघु के बड़े हाथ उसकी गांड के दोनों फांकों पर थे और अगले hi पल रघु उसकी आँखों में देखते हुवे मुस्कान की गांड के दोनों फांकें बेदर्दी से मसलने लगता है.

Muskan...mmmaa अह्ह्ह अण्णन न्नन्नाःह्ह्ह्ह ाआँह्ह...

रघु को मुस्कान की गांड मसलने में बड़ा मज़ा ारः था. एक जवान शादीशुदा शरीफ की ाव्रत की गांड जो सिर्फ आजतक शायद उसके शोहर ने hi दबायी होगी या फिर नहीं..

लेकिन रघु का यूँ गांड मसलना मुस्कान के लिए तू मच था ो अब तड़पने लगी थी उसके अंदर एक अजीब सा करंट ट्रेवल करने लगा था. मज़े की लहर उसकी अंदर बह रही थी.

गांड दबाते हुवे रघु को सलवार के अंदर की पंतय भी हाथ में महसूस होरही थी इसी बिच मुस्कान सिसकारियां ले रही थी. वहां फैन या एक नहीं था दोनों फिरसे गर्मी की वजा से पसीना पसीना होने लगे थे.

सामने से मुस्कान के ब्रा में कैद गोर चुके रघु की बालों और पसीने वाली छाती में दबे हुवे थे. रघु को मुस्कान से आरही है महक और ुगसा रही थी. गांड को बेदर्दी से मसलते हुवे मुस्कान की सिसकारियां कोई काम घी में आग नहीं दाल रही थी.

Muskan...huhhh हहह हहहहह रर ररुक्क जावू हहह...

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मुस्कान तेज़ सांसें लेते हुवे अब फील करती है के उसकी पंतय गीली होचुकी है लेकिन कैसे? उसके खुद पर बड़ी शर्म आरही थी के ो कैसे एक गैर मर्द के टच से गीली होगयी.

रघु अब उसकी गांड छोड़कर अपने हाथ ऊपर लेजाकर उसकी ब्रा के हुक फिरसे निकलने लगता है. मुस्कान को जैसे hi उसका अहसास होता है ो झट से पूरी ताकत लगाकर रघु को धकेलती है और अपनी ब्रा पर अपने दोनों रखती है.

रघु संबलते हुवे मुस्कान की तरफ देखता है जो अपनी ब्रा को कवर किये हुवे सिर्फ सलवार में कड़ी थी ऊपर से से उसका गोरा बदन माखन जैसा बिलकुल सेक्सी लग रही थी ो इस वक़्त.

Muskan...boht हुवा तुम तुम्मारा...

Raghu...memsabb मुझे पता है आप भी मैं जो कर रहा था उसको एन्जॉय कर रही थी..

Muskan..kyaaa बक कक रहे हूँ...

Raghu...memsabb अगर आप एन्जॉय नहीं कर रही होती तो अबतक आप चिल्लाकर किसी को बुला चुकी होती और आगे से अपनी झगें मेरे लौड़े पर रगड़ नहीं रही होतीं...

मुस्कान रघु की बात सुनकर शॉक होजाते है और सोचने लगती है कब उसने ऐसा किया और उसको पता भी नहीं चला ो अपनी सोच में डूबी hi थी के रघु फिरसे उसके पास अत है और उसको पीछे लेते हुवे दीवार से सटाकर फिरसे उसके हाथ जकड लेता है..

Muskan..mmmhh चुर्रू मुझी..

Raghu...memsabb एक बार करके देखो मेरे साथ ऐसे मज़े दूंगा आप अपने पति को भूल जाओगी...

Muskan...chiii अवकात में राहू अपनीइ चुर्रु..

रघु अब ो करता है जो मुस्कान इमेजिन भी नहीं कर रही थी. रघु मुस्कान को कमर से पकड़ एक hi झटके में दीवार से सटायर हुवे उठा देता है और उसकी दोनों झंगें अपनी कमर में दाल लेता है. मुस्कान उसकी पकड़ की कोशिश तो करती है मगर नाकाम रहती है.

रघु अभी भी मुस्कान की कमर में एक हाथ दाल लेता है और दूसरे हाथ से उसके दोनों हाथ दीवार से सटाकर पकड़ लेता है...

रघु अब फिरसे उसकी आर्मपिट्स एक एक करके चाटने लगता hai...thoda बोहत पसीना जो अब आया हुवा तो ो भी चाटने लगता है..

Muskan...aaahmmm नईईई..

रघु का लौड़ा जो अकड़ा हुवा था उसकी पंत में ो अब मुस्कान को अपनी गांड की दरार में महसूस होने लगता है सलवार के ऊपर से. मुस्कान अपनी थूक निगलती है जब रघु उसका लौड़ा मुस्कान की गांड की दरार में ऊपर निचे करने लगता है...

कितना सख्त फील होरहा था उसे जैसे कोई लोहे की रोड हो. उसकी शादीशुदा छूट तो वैसे hi गीली थी पंतय में. रघु की बड़े लौड़े का उसकी छूट से इतना करीब होना उसको एक अलग hi फीलिंग दे रहा था.

रघु उसके आर्मपिट्स चाटते हुवे अब निचे आजाता है सीधा अपना मन मुस्कान की ब्रा में कैद चुचों पर रख देता है...

Muskan..aaaa चूरररू मुझी आआह्ह्ह...

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रघु अपना मन खोलते हुवे मुस्कान की राइट साइड के पॉइण्टी निप्पल्स को मन में लेता है ब्रा के ऊपर से जिससे मुस्कान एक बड़ी सिसकारी लेती है और साथ में रघु निचे से एक जोर्का झटका लगता है जिससे मुस्कान एक बार ऊपर उछलती है.

रघु फिर दूसरे चुके पर शिफ्ट होते हर उदर निप्पल मन में लेता है ऑलमोस्ट जैसे खा रहा हो. मुस्कान के लिए ये सब बिलकुल नया था उसने ये सब कभी एक्सपीरियंस नहीं किया था.

ो अपनी तेज़ सांसों को काबू करने लगी हुवी थी के रघु रुक जाता है और उसके तरफ देखने लगता है. मुस्कान अब दर जाती है के आगे रघु क्या करेगा उसके साथ.

तभी रघु उसके दोनों हाथ अपने दोनों में लेकर दीवार से सततता है उसकी झंगें अब खुद hi रघु की कमर में झूल रही थी. रघु अब मुस्कान के खूबसूरत गोर चेहरे की तरफ अपना कला चेहरा बढ़ता है. मुस्कान की दिल की धड़कन बढ़ी हुवी थी ो अब रघु को रोक भी नहीं पढ़ी थी किसी वजा से.

रघु उसके बेहद करीब पोहंच जाता है.

Raghu..memsabb मुझे आपको छोड़ना ही..

इतना बोलते hi मुस्कान के होश से उड़ जाते हैं ो ये रघु बोलेगा एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी. एक गैर मज़हबी मज़दूर अधेड़ू उम्र का आदमी उस जैसी जवान शादीशुदा ाव्रत को छोड़ने की बात कर रहा था लेकिन ो कुछ कर भी नहीं पढ़ी थी.

तभी रघु एक रयथेम में अपना लौड़ा मुस्कान की गांड की दरार में ऊपर निचे करने लग रहा था मुस्कान जिसकी वजा से अपनी ऑंखें बंद खोल रही थी.

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Raghu...memsabb मुझे आपकी शादीशुदा बुर में अपना लौड़ा फिट करना ही...

रघु ये सब बड़े hi आहिस्ता से बोल रहा था. उसने ो बात बोली hi थी न जाने क्या होता है मुस्कान को ये ो अपनी गांड रघु के लौड़े पर खुद hi एक बार ऊपर से निचे करती है...

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
सो गाइस part 23 इस पोस्टेड & अस ी साइड यस्टरडे i'll बे टेकिंग ा वीक लॉन्ग ब्रेक तो फ्रेशन उप माइसेल्फ, इन थे मेंअंतिमे यू गाइस दो शेयर योर thoughts/suggestions ों हाउ थिस स्टोरी कैन बे इम्प्रोवेद फुरदर. I'll डेफिनिटेली कंसीडर गुड ओनेस.

थैंक यू सो मच गाइस, सी y'all आफ्टर ा वीक.

थे ईविल
 
दोस्तों part 23 पोस्ट कर दिया है और जैसे मैंने कल बताया था मैं एक हफ्ते का ब्रेक ले रहा हूँ और जबतक मैं ब्रेक पर हु आप लोग अपने सुझाव मेरे साथ शेयर कर सकते हैं के कैसे स्टोरी बेटर होसकती है.

थैंक्स

थे ईविल
 
Part 24

रघु को एक तरह का झटका लगता है जब मुस्कान खुद उसके लौड़े पर एक बार अपनी गांड ऊपर निचे करती है उसने ये इतने जल्दी बिलकुल भी एक्सपेक्ट नहीं किया था.

रघु का लौड़े वैसे hi काफी टाइट होचुका था इस तरह मुस्कान की गांड पर अपना लौड़ा रगड़ने की वजा से ऊपर से ये मुस्कान की हरकत उसके तू मच होरहा था.

मुस्कान जिसकी ऑंखें इस वक़्त बंद थी रघु उसके तरफ अब बड़े hi हवसी अंदाज़ में देख रहा था उसकी हरकत के बाद ो जनता था कहीं न कहीं मुस्कान के अंदर भी आग है बस उसको बढ़कने की ज़रूरत है.

रघु अब खड़े खड़े hi एक हाथ से अपनी पंत का हुक खोलकर पंत निचे चोर देता है अब ो बस अंडरवियर में था जिसमे उसके लौड़े का तम्बू काफी बड़ा लग रहा था.

रघु अब खड़े खड़े मुस्कान की गांड फिरसे मसलने लगता है और अपना मन उसकी गर्दन पर रख फिरसे वहां चूमते हुवे मुस्कान को मदहोश करने लगता है. मुस्कान भी सिसकारियां लेते हुवे बेजान कोषसिंह कर रही थी रघु को पीछे धकेलने की.

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रघु अछि तरह भांप चूका था मुस्कान के ये लौ रेजिस्टेंस और उसका कॉन्फिडेंस और बढ़ भी रहा था. ो गर्दन पर चूमते हुवे उसके कान के पास जाकर...

Raghu..memsabbbbb आपकी गंड़द तो आपसी ज़्यादा सच बोल रही haii..khud hi मेरे लौड़े की गर्मी महसूस कर रही थी.

रघु की बात सुन मुस्कान की धड़कन और तेज़ होजाती है पता नहीं कैसे लेकिन उसकी खुदकी बॉडी पर ो कण्ट्रोल लगातार खोटी जारही थी. वहीँ मुस्कान को अब अपनी गांड की दरार में रघु का लौड़े कुछ ज़्यादा hi अछि तरह से फील होने लगा था क्यूंकि उसे अहसास नहीं था के रघु अपनी पंत भी उतर चूका है.

रघु मुस्कान की गर्दन पर लगातार चुम्मा छाती कर रहा था और अपना लौड़ा निचे ग्राइंड किये जारहा था और खुद मुस्कान भी इस एक्ट सोमेहो इन्वॉल्व थी तभी दोनों की डिस्टर्बेंस के लिए फिरसे मुस्कान का कॉल बज उठता है.

जिसकी आवाज़ सुन जैसे मुस्कान का मदहोशी का आलम टूट जाता है और ो एकदम से ट्रांस स्टेट से बहार अति है और रघु को अपनी गर्दन पर चूमता हुवा पति है और निचे उसकी गांड पर बड़ी hi सख्त चीज़ बार बार ऊपर निचे होरही थी हालाँकि ो अभी भी गरम थी लेकिन कॉल की वजा से ो जाग सी जाती है.

मुस्कान अपना पूरा फाॅर्स लगाकर झटपटाते हुवे रघु से निचे उतरने लगती है.

Muskan..chhh चुर्रोरो मुझेईई आए निच्छेइ उतारु...

हालाँकि रघु ने उसे मज़बूती से जकड रखा था लेकिन मुस्कान भी कोई काम नहीं था ो भी सोमेहो निचे उतरने में कामयाब होजाती है इसी बिच उसके चुके रघु की छाती में खूब पिस्टे हैं.

उतरते hi मुस्कान अपना मोबाइल देखती जो उसकी सलवार की जेब में था कॉल आज़म की थी जिसे देख ो परेशां होजाती है क्यूंकि आज़म ने उस वक़्त भी कॉल की थी और उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया था ज़रूर ो टेंशन में होगा.

मुस्कान फिर अपनी हालत पर गौर करती है कहाँ इतनी पाकीज़ा शरीफ जवान शादीशुदा ाव्रत है और ो इस वक़्त एक अधेड़ू उम्र के मज़दूर के साथ इस तरह सिर्फ ब्रा और सलवार में कड़ी है.

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मुस्कान फिरसे अपने गोर हाथों से अपनी ब्रा कवर करती है इसी बिच उसकी नैवेल रघु को एक्सपोज़ होजाती है जिसके ो जमकर मज़े लेता है. एक जवान ाव्रत की गोरी क्लीन और फ्लैट नैवेल.

मुस्कान को ब्रा कवर किये हुवे अब कॉल का ख्याल अत है और एक कोने में जाकर कॉल उठती है हालाँकि उसे दर था के कहीं रघु कॉल के बिच कुछ कर न दे लेकिन कॉल उठाना भी ज़रूरी था.

Muskan...hhh हह ठिल्लूओं अजांम...

Azam...muskan मुस्कानंन जान किदार हो तुम कबसे कॉल कर रहा हुन्न्न..??

ू मैं ू अज़ाम मैं...

Azam..kya हुवा तुम इतना परेशां क्यों लग रही होऊ...??

Muskan...parrr परेशाननं नही तू मम मैं बिल्कुल ठिक्क हुन्न्न...

Azam...fir कॉल क्यों नहीं उठा रही थी???

Muskan...oo मैं अजांम मैं निर्मला ौन्तीय के यहाँन फंक्शन के लिए आयी हुन्न न तो बातों बातून में टाइम नाहीइ मिला...

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Azam...hmm फिर भी यार मुझे टेंशन होगयी थी के पता नहीं मेरी प्यारी बीवी कहाँ चली गयी...

Muskan...fikkk फिकर करनेकीई...

मुस्कान बात कर hi रही थी के उसे अपने पीछे आहत सुनाई देती है और ो समझ जाती है के रघु उसके पीछे ारः है उसे दर लग रहा था अब के कहीं ो कुछ गलत सलत न कर दे आज़म इस वक़्त दूसरी और कॉल पर जो था.

Muskan....aahhhssssss...

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मुस्कान समझ पति उससे पहले hi रघु मुसकन की कमर में हाथ डालकर उससे चिपक जाता है. फिरसे मुस्कान को अपनी गांड उसका बड़ा लौड़ा महसूस होने लगता है.

मुस्कान रघु को सिलेंटली पीछे धकेलने की कोशिश करती है लेकिन रघु नहीं हटाता उल्टा ो मुस्कान की गर्दन में चूमने लगता है.

Muskan...mmmm हतोऊ कमिणी

Azam...kya हुवा मुस्कान कुछ प्रॉब्लम है क्या??

तभी रघु पीछे एक जोर्का झटका लगता है...

Muskan...nn ननणायआईई अजांम कक कककक कोई प्रॉब्लम नहीं है..

Azam...waise तुम अभी तक गयी क्यों नही टाइम तो काफी होचुका है..

Muskan...haa मैं जाने hi वाली थिई...

तभी रघु उसकी ब्रा का हुक फिरसे निकल देता है और मुस्कान को जैसे hi अपनी ब्रा ढीली लगती है ो अपनी आबूर बचने के लिए दोनों हाथ से ब्रा पकड़ लेती है लेकिन इसी चक्कर में उसके हाथ से मोबाइल छूट जाता है.

मोबाइल गिरने की आवाज़ आज़म को भी कॉल के दूसरे एन्ड सी आती है...

Azam..muskan मुस्कान क्या हुवा???

मुस्कान अपनी ब्रा पकड़ कर अब रघु की तरफ घूमती है और उसके गुस्से भरी नज़रों से देखने लगती है तब उसको अहसास भी होता है के रघु निचे सिर्फ अंडरवियर में था और तम्बू वहां बना हुवा था ो बड़ा था जिसे देख मुस्कान अपनी नज़र दूसरी तरफ घुमा लेती है.

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निचे गिरे हुवे मोबाइल में मुस्कान का शोहर hello hello कर रहा था लेकिन ो इस बात से बेखबर था के उसकी जवान हसीं बीवी इसकी अपनी ब्रा पकड़े हुवे अपने गोर बड़े उरोजों को एक अधेड़ू उम्र के गैर मज़हबी मज़दूर से बचा रही थी.

रघु मुस्कान की हालत देखता है के ो इस वक़्त मोबाइल उठानेकी कंडीशन में तो नहीं थी इसलिए ो खुद झुक कर उसका मोबाइल उठाकर मुस्कान को देता है लेकिन उसके दोनों हाथ ब्रा को होल्ड किये हुवे थे इसलिए ो मोबाइल नहीं पकड़ सकती थी इसलिए रघु खुद hi मोबाइल उसके कान से लगा देता है.

मुस्कान एक बार तो रघु को बड़े hi ग़ुस्सेवाली नज़र से देख रही थी लेकिन मौके की नज़ाकत को देखते हुवे बात करने लगती है.

Muskan...haaa हआ ाज़मंम सॉरी मोबिली निचे गिर्र गया था...

Azam..yaar मुझे लगा कुछ हो तो नहीं गया तुम्हें...

Muskan...nnn नही मुझे क्या होना है..

रघु अब फ़ोन पकडे हुवे अपना मन मुस्कान के मन के करीब लेजाने लगता है जिसे देख मुस्कान अपनी ब्रा और तिघ्टलय पकड़ती है लेकिन रघु मुस्कान के गर्दन पर आरहे पसीने की बून्द को अपनी जुबां से चाटता है. रघु की खुरदुरी ज़ुबान के फील से hi मुस्कान का पूरा शरीर हिल सा जाता है एक बार के लिए...

Azam...thik है मुस्कान अब तुम जाओ घर्र मैं भी कॉल राखत हूँ एक काम ही..

Muskan...thhh ठीक हैई..

आज़म के कॉल रखते hi मुस्कान फ़ौरन अपने हरह पीछे लेजाकर हुक लगा देती है हालाँकि उसके गोर चुके उस ब्रा में कैद तड़प रहे थे बहार आने के लिए.

मुस्कान आस पास देखती है अपनी कुर्ती के लिए जो उसे नहीं दिख रही थी. रघु अब बीएड के दूसरे तरफ जाकर मुस्कान की कुर्ती उठता है और मुस्कान की तरफ देखता है उसे एक बार सूंघता है जिसे देख मुस्कान उसको घूरती है.

Raghu...kya खुशबु है मेमसाब आपके बदंन की...

Muskan...chup राहू बेशर्म कहींन kee...tumne मेरे साथ ज़बरदस्ती की है तुम्हें तो मैं छोड़ूंगी नाहीइ...

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Raghu...maine तो ज़बरदस्ती की थी मेमसाब लेकिन आप तो खुद अपनी मर्ज़ी से मेरे लौड़े पर अपनी गांड रगड़ रही थी.

रघु की बात सुनकर मुस्कान ऐम्बर्रेस्सेड होती है उसकी बात सच थी अनजाने में या जान बूझकर उसने किया तो था ो.

रघु की बात सुनकर मुस्कान आगे बढ़कर उसके हाथ से अपनी कुर्ती लेती है और फ़ौरन पहन लेती है. रघु उसको नहीं रोकता क्यूंकि ो एक तरह से अब होश में चुकी थी. मुस्कान िद्र उदर अपनी चुनरी ढूंढ़ने लगती है लेकिन उसे नहीं मिल रही थी.

इसलिए ो जल्दी से वहां से जाने लगती है...

Raghu..memsabbbbb...

मुस्कान एक सेकंड के लिए रूकती है लेकिन अगले hi पल वहां से चली जाती है. ो जल्दी से सीढ़ियों से उतर कर गेट तक जाने लगती है के तभी...

Nirmala....arey मुस्कान???

मुस्कान निर्मला आंटी की आवाज़ सुनकर रुक जाती है और उसकी हालत ख़राब सी होने लगती है क्यूंकि ो इतनी देर ऊपर थी.

Nirmala...muskan??

मुस्कान अब धीरे से उसके तरफ हलकी सी स्माइल करती है...

Muskan...jj जज जी आंटी..

Nirmala...kidar से आरही हो??

Muskan..oo ू मैंन उपर सी..

Nirmala...wahan क्या कर रही थी??

मुस्कान को अब समझ नहीं ारः था के ो क्या बोले क्या बोलती ो के आंटी की बहु और पति का कांड देखने गयी थी लेकिन वहां उसके साथ hi एक तरह से कांड होगया. मुस्कान अपनी क्विक थिंकिंग के साथ सिचुएशन को सम्भालनेकी कोशिश करती है.

Muskan..mm मम्मीण ू बात कर रही थी आज़म से...

Nirmala...achaa मैं तुमको यहाँ निचे ढूंढ रही थी मुझे लगा तुम चली गयी होगी घर...

Muskan..nnahii मैं उपपरर hi थी...

Nirmala...acha...

Muskan...thik ही ौन्तीय मैं चलती हुन्न..

Nirmala...thik ही ध्यान रखना..

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मुस्कान वहां से चली जाती है लेकिन निर्मला मुस्कान के गले में चुनरी की गैर मौजूदगी देखती है उसके मन में सवाल तो अत है क्यों?

ीदार रघु रूम में से बहार अत है और ीदार उदर देख कर ो भी वहां से निकल जाता है.

मुस्कान घर पोहंच कर दूर लॉक करके सीधा बैडरूम चली जाती है और बीएड पर लेट जाती है उसके सांसें छड़ी हुवी थी जो थोड़ी देर पहले हुवे इंसिडेंट को सोचकर. पता नहीं क्यों उसे अजीब लग रहा था.

Muskan...kaminaa कहींन का उसकी हिम्मत कैसी huwi...main आज़म को सब कुछ बता दूंगी....

मुस्कान उस बारे में सोचते हुवे अपने बदन पर हाथ फेरने लगती hai..raghu का ो मरदाना टच उसे अभी भी महसूस होरहा था. मुस्कान का एक हाथ उसके चुचों पर और दूसरा हाथ निचे उसके पेट से होती हुवी उसकी छूट पर चला जाता है.

मुस्कान की ऑंखें अब बंद होचुकी थी ो किसी और hi दुनिया में पोहंच चुकी थी. ो एक शादीशुदा ाव्रत थी और उसको सिर्फ उसके शोहर का ख्याल आना चाहिए था लेकिन इस वक़्त मुस्कान को थोड़ी देर पहले हुवे रघु की ज़बरदस्ती का ख्याल ारः था और उसको सोचते हुवे ो खुद को सेहला रही थी.

उसकी चुनरी उसने कब निकल फेंकी उसको hi नहीं पता था तेज़ सांसें लेनेकी वजा से उसके चुके कुर्ती में ऊपर निचे होते हुवे बड़े सेक्सी लग रहे थे.

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मुस्कान का एक हाथ निचे उसकी छूट को सेहला रहे था ो अपने कार्यकर्म में बिजी थी के तभी बेल्ल बजती है और ो एकदम उठ कड़ी होती है. बिना दुपट्टे के मुस्कान बेहद सेक्सी लग रही थी लेकिन ो अपनी चुनरी पहन कर खुदको ठीक कर लेती है और बहार दूर पर आयी हुवी जानकी से मिलकर फिर वापस आकर बाथरूम चली जाती है.

अपने सरे कपडे निकलने के बाद मुस्कान जब अपनी पंतय निकलती है तो हैरान रह जाती है जब ो देखती है के उसकी पंतय गीली होचुकी थी.

Muskan..nnnnaiii ये कैसी...

मुस्कान भले hi इस चीज़ को देंय कर रही थी लेकिन कहीं न कहीं उसे भी ये पता था के ये रघु की हरकत का नतीजा था. रघु ने उसके साथ ज़बरदस्ती की बावजूद इसके के ो उसकी कम्प्लेन करती या फिर उसको खुद hi थप्पड़ मर देती या फिर एटलीस्ट चिल्लाती लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया.

मुस्कान अपनी पंतय निकल कर खुदको सामने के मिरर में देखती है उसका गोरा बदन बोहत सेक्सी लग रहा था. उसकी इसी शादीशुदा गोर बदन को रघु थोड़ी देर पहले मसल रहा था. उसकी नज़र अपने गोर चुचों पर जाती है जिसपर रघु के मरदाना हाथ थे और उन्हें बेदर्दी से मसल रहे थे ससससस...

उसके ये मासूम गोर शादीशुदा चुके रघु के मरदाना हाथों का केहर सेह रहे थे जिनको आजतक उसके शोहर ने बड़े hi प्यार से सहलाया था.

मुस्कान फिर अपनी नज़र अपनी नैवेल पर डालती है जहाँ रघु चुम और चाट रहा था. उसकी खुरदुरी ज़ुबान उसके पेट पर बड़े hi डोमिनेंट तरीके से घूम रही थी.

लेकिन इतना सब होनेके बावजूद भी मुस्कान रघु को ज़्यादा ओपपोसे नहीं कर पायी थी.

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मुस्कान फिर धीरे से नजाने क्यों घूम जाती है फिर अपनी तिरछी नज़र से मिरर की तरफ देखती है उसकी गोरी के दोनों फांकें बड़े hi हॉट लग रहे थे. उसके इन्हें फांकों को रघु के मरदाना काळा हाथों ने आते की तरह गोंडा था और उसकी वजा से उसकी सिसकारियां भी निकल रही थी.

उसकी इतनी बेदाग़ गांड को इतना बेरहमी से रघु का मसलना कहीं न कहीं मुस्कान को काफी एक्साइट कर गया था.

मुस्कान फिर खुद से बोलती है के ो पक्का अपने शोहर को रघु की इस हरकत के बारे में बताएगी आखिर उसने उसकी इज़्ज़त पर हाथ डाला था उसकी आबरू पर.

मुस्कान फिर शावर लेने लगती है. रात में सरे वर्कर्स के जानेके बाद आज़म भी वापस घर चुका था. मुस्कान और ो डिनर करनेके बाद बहार हॉल में टीवी देखते हुवे बैठे हुवे थे.

Azam....kaisa रहा फंक्शन मुस्कान??

Muskan...aaa अच्छा था...

Azam...nirmala आंटी की बहु बेटे से मिली..?

Muskan..haan mili...(aur उनकी बहु की रासलीला भी देख ली)

मुस्कान को अब फंक्शन से याद अत है के ो रघु की हरकत के बारे में आज़म को बताना था ो अपने शोहर की तरफ देखती है जो टीवी देख रहा था अब. ो हिम्मत तो बना रही थी बतानेकी लेकिन कहीं न कहीं उसे रघु की बात भी ध्यान में थी के कैसे उसने ज़बरदस्ती ज़रूर की थी लेकिन मुस्कान ने भी ज़्यादा कुछ विरोद नहीं दिखाया था.

उसकी दिल की धड़कन फिरसे तेज़ होजाती है उसका शोहर साथ बैठा हुवा था और ो एक गैर मर्द की उसपर बेहूदा हरकत को ो बता भी नहीं पढ़ी थी.

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ो छह कर भी आज़म को ये बात नहीं बता सकती थी ऑब्वियस्ली फिर दर ये था के आज़म को पता चलने के बाद ो हंगामा कर देगा फिर रघु फिर अनाप शनाप न बोल दे जिससे उनकी शादीशुदा ज़िन्दगी में फुट भी आसक्ति थी.

मुस्कान इतना गहरा सोचकर आज़म को बतानेकी अगेंस्ट फैसला करती है.

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
Hi गाइस, मुझे पता है सब अपडेट का इन्तिज़ार कर रहे हैं और मोस्ट लिकेल्य कंसर्नड भी होंगे के कहीं फिरसे मैंने स्टोरी बिच में तो नहीं चोर दी.

रीज़न बड़ा hi सिंपल है मैं काफी बिजी हूँ इन दोनों इसलिए मैं इन्फॉर्म तक नहीं कर पाया. रही बात अपडेट की ो जल्दी hi आएगा और ो बड़ा भी होगा. 600क व्यूज भी कब के रीच होचुके हैं तो उसके लिए भी कंबाइंड बड़ा अपडेट मैं तरय करूँगा जल्द से जल्द दूँ.

थैंक यू एवरीवन

थे ईविल
 
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