अपडेट 251
बहुत देर से पेड़ के निचे बैठे पब और अवनि को अब कुछ रहत लग रही थी. पैर अब रात होने लगी थी. और रात होने के साथ साथ ठण्ड भी बढ़ने लगी थी. जहा ये दिन में सूरज की गर्मी से परेशां थे तो अब इनको ठण्ड ने परेशां किया हुआ था. एक तो पेट खली फिर थकन और फिर ठण्ड का कहर.. हर बीतते पल के साथ इनकी परेशानी बाद रही थी.
रात पूरी तरह से हो चुकी थी. और ठण्ड ने भी अपने पुरे पेअर पशर लिए थे. दोनों वही पैर एक दूसरे से चिपक कर बैठे थे. पैर फिर भी गर्मी नहीं मिल प् रही थी. पैर दोनों की वाष्ण जरूर भड़कने लगी थी. जिस पैर काबू पाने के लिए दोनों को अलग होना था पैर वो भी नहीं कर सकते थे. तो दोनों में बहुत सोच केर फेशला लिया की किसी घर में चला जाये शायद वह कुछ रहत मिले.
दोनों एक छोटे से घर के बहार खड़े थे. पब ने ठण्ड से सुकड़ते हुए भी मजबूती से अपनी तलवार को पकडाहुआ था. और अवनि को अपने पीछे छुपा रखा था. पब ने धिरे से उन घर का गेट खोला. और अंदर झक कर देखा की कोई है या नहीं. पैर जब उसको कोई नहीं दिखा तो वो अवनि को साथ ले कर अंदर चला गया. फिर धिरे -2 पूरा घर देखा पैर वह कोई नहीं था. ये एक 1भक फ्लैट जैसा छोटा घर था. और 1 मंजिल का hi था. जब घर में कोई नहीं मिला तो दोनों ने रहत की सास ली. अंदर बहार के मुकाबले ठण्ड बहुत काम थी. भूखे और प्यासे दोनों घर क ीक कोने में लेट गए. उस कोने में हवा बिलकुल भी नहीं लग रही थी.
लेते लेते hi सुबह हो गयी नीड तो आयी नहीं ठण्ड, भूख और प्यास के कारन. सुबह जब सूरज निकला तब मौसम थोड़ा गरम हुआ तो दोनों को नीड आ गयी पैर कुछ गान्तो के बाद hi इनकी नीड भी खुल गयी. गर्मी जो बाद गयी थी. दोनों अभी पशीने में तर थे. अभी दोनों को बहुत कमजोरी फील हो रही थी. पैर आगे बढ़ना था. तो दोनों में काफी देर सोचने विचरने के बाद फेशला किया की पेड़ो से फलो को तलवार से काट कर खाया जाये हो सकता है की वो जहरीले न हो. देखने में तो वैसे भी जेहरीले नहीं लग रहे थे.
दोनों किसी तरह हिम्मत जूता कर बहार आये और एक अमरुद के पेड़ के पास खड़े हो कर अमरुद तोड़ कर तलवार से काट कर पहले सुंघा. सुघने में भी ठीक लगा तो पहले पब ने खाया और फिर अवनि में भी. पैर दोनों को कुछ नहीं हुआ तो दोनों बहुत खुश हुए. और फिर तो खाने में जुट गए. पेट भर खाने के बाद दोनों पानी की तलाश में चल दिए तो दोनों को एक तालाब मिल गया. शांत और साफ़ पानी का तालाब था. वह पैर नाहा दो कर फ्रेश हो कर दोनों को एक नयी शक्ति मिल गयी. अब उनको आगे का रास्ता खोजना था.
आज पुरे 3 दिन हो गए थे दोनों को उन नगर में, जहा जो मिलता खा लेते और जहा पानी मिलता अपनी बोत्तल भर लेते. पैर अभी तक उनको बहार जाने का रास्ता नहीं मिला था. रात में किसी भी घर में आग जला कर चुप कर सो जाते तो दिन में पेड़ो के निचे छाया में षाले हुए अपनी मंजिल की तलाश करते. न तो कोई पावर थी और न hi दोनों को अपनी मंजिल का पता मालूम था. तो बस ीदार से उदार भटकते फिर रहे थे.
अवनि – पब और कब तक ऐसे hi भटकते रहेंगे यार यहाँ से बहार जाने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है.
पब – अवनि भटकना तो पड़ेगा hi और कोई राष्ट भी नहीं है हमारे पास, बिना पावर्स के पाश गए है यहाँ पैर. वैसे एक बात है अवनि त्रिकाल है बहुत शातिर, क्या प्लानिंग से सब कुछ बनाया है. सच में इस चक्रवेव से निकलना बहुत कठिन है.
अवनि – तुम ऐसा क्यों बोल रहे हो??
पब – देखो सबसे पहले वो जेह्रीला जंगल मिला. उस जंगल को पार करने के लिए हवा में उड़ कर hi जाना था. और ये काम कोई भी मानव नहीं कर सकता. हाँ दानव और देवताओ के पास ये पावर होती है. तो फिर वो जहरीला बैग, कोई भी ये hi सोचेगा जैसे की पहले हवामे उड़ कर जांगले पार किया है वैसे hi ये भी पार होगा. और कोई भी खुद जहर खाने की भूल नहीं कर सकता.
अवनि – हाँ ये तो है, कोई भी खुद से जहर नहीं खता. वो तो तुम्हारी चाँद हंस तलवार ने जहर ख़तम कर दिया नै तो हम दोनों मरे जाते.
पब – हाँ अवनि और यदि तुमने खाने की जींद न की होती तो मैं उस फल को काट कर खता भी नहीं. तुम्हारे प्यार ने hi उस टाइम मुझको बचा लिया.
अवनि – मेरे नहीं हमारे प्यार ने हम दोनों को बचाया है. और ये प्यार hi हमको इस लड़ाई में जिताएगा भी.
पब – हाँ ठीक कहा, पैर सोचो फिर वो तांत्रिक जो साधु के भेष में लोगो के मंद को अपने कण्ट्रोल में कर लेते है. कोई भी देवता या मानव उनसे इतनी आसानी से नहीं बच सकता. फिर साले सब एक साथ मिल कर मरने की कोसिस करते है.
अवनि – पैर उस टाइम तुमको क्या हो गया था, वैसे तो तुमको सभी मन्त्र और तंत्र आते है. पैर मंत्रो का जवाब देने की जगह तुम बचते फिर रहे थे.
पब – बताया तो था तुमको तुम्हारी सभी सोटानो की एनर्जी बहुत डाउन हो गयी थी. तब मुझको अपनी hi एनर्जी से उन सभी से लड़ना पड़ा और एक दानव बनना पड़ा.
अवनि (झूठे गुस्से से) – पंकज??? उनमे एक मेरी माँ है सौतन नहीं है वो मेरी बहाने है. समजे..
पब – तो क्या हुआ अब कुछ hi दिनों में सौतन hi हो jayegi..hahahaha.. फिर तुम भी अपनी माँ के साथ मेरी हो जाओगी..
अवनि – तुमको तो यहाँ भी मस्ती सूज रही है. गंदे कही के..
पब – यहाँ कहा मस्ती तो बीएड रूम में होगी जब तुम और सविता दोनों एक साथ नंगी मेरी बांहो में होगी…
अवनि को ये सुन कर बहुत शर्म आती है. तो वो झूठे गुस्से से चीची – पंकज.. गंदे .. जाओ मैं तुमसे बात नै करती.
पब – सॉरी सॉरी.. यार प्लीज गुस्सा मत हो में तो मजाक कर रहा था. (बात को बदलते हुए) देखो न हम यहाँ इस मानव नगरी में फास गए है और कोई रास्ता भी नहीं मिल रहा.
अवनि – मेने कुछ सोच है यहाँ से निकलने के लिए..
पब – तो ाताओ न 3 दिन से तो बोली नहीं और अभी भी नहीं बोल रही..
अवनि – देखो यहाँ पैर ीदार उदार भटकते रहने से कुछ नहीं होगा. हमको एक hi दिशा में आगे बढ़ते रहना होगा. तो जाहिर सी बात है एक टाइम हम इस नगर की बाउंड्री तक पहुंच जायेगे. और फिर बाउंड्री को छोड़ेगे hi नहीं, बाउंड्री के सहारे सहारे षाले हुए हमको बहार जाने का मार्ग मिल जायेगा, ठीक वैसे hi जैसे हमने इस छवरविएव में गुस्ते टाइम किया था.
पब – बहुत बढ़िया… ये बात मेरे मंद में पहले क्यों नहीं आयी?? अब हमको ये hi करना है.
अवनि – आती कहा से तुम्हारा मंद डर्टी हो गया है. उसमे केवल गन्दी गन्दी बाते hi आती है. तो ये सब कहा से आएगा..
पब - क्या कहा मेरा मंद डर्टी है, रुक आज तुझको डर्टी कर देता हु.
ये बोल कर पब अवनि की और भागता है तो अवनि भी आगे भागने लगती है. दोनों ऐसे hi मस्ती मजाक करते हुए आगे बढ़ने लगते है. पैर अब दोनों को एक दिशा मिल चुकी थी. तो जोश भी नया पैदा हो गया था. दोनों तेज़ी से एक hi दिशा में षाले जा रहे थे. 3 दिनों में दोनों को गर्मी सहने की आदत हो गयी थी.
5-6 हॉर्स षाले रहने के बाद उन दोनों को नगर की बाउंड्री नजर आ hi गयी. दोनों ख़ुशी से उछाल पड़े. अब दोनों को मंजिल का रास्ता दिखने लगा था. तो दोनों अपनी मांजी की और चल दिए. बाउंड्री के सहारे चलते हुए जब रात होने लगी तो दोनों ने पास के घर में hi अपना डेरा जमा लिया. और नेक्स्ट डे सूरज के निकलने के साथ hi दोनों फिर से सफर पैर निकल पड़े. ये टाइम दोनों को पेडल चलने के लिए सबसे अच्छा लगता था. इस टाइम न गर्मी होती थी और न hi ठण्ड. तो दोनों तेज़ी से आगे बढ़ने लगे. रस्ते में एक जगह पानी मिला तो डेली के कामो से भी निपट लिए थे.
4-5 हॉर्स चलने के बाद दोनों को एक गेट दिखाई देने लगा दोनों ख़ुशी से डांस करने लगे. पैर ऐसे hi गेट पैर पहुंचे दोनों की ख़ुशी कटा हो गयी. उस गेट को बंद किया हुआ था. और वह पैर एक nakabposh(NP) बैठा हुआ था. दोनों जैसे hi गेट की तरफ बाद उसने दोनों को रोक दिया.
नप – रुको कहा जा रहे हो…
पब – हमको यहाँ से बहार जाना है. तो इस गेट से बहार जा रहे है.
नप – नहीं इस गेट से तुम लोग बहार नहीं जा सकते. यदि तुम्को इस मानव नगरी से बहार जाना है तो तुमको सिद्ध करना होगा की तुम सच में मानव हो. या मानवो के बारे में बहुत कुछ जानते हो.
पब – हम सच में मानव hi है. तुमको देखने से लगता है क्या की हम लोग मानव नहीं है.
नप – हाहाहाहा ये तो है hi मानव नगरी यहाँ आ कर देवता भी मानव बन जाते है और दानव भी और सब तुम्हारे जैसे मानव hi दिखाई देते है.
पब – तो फिर बताओ हमको क्या करना होगा की तुम हमको यहाँ से बहार जाने का राष्ट दे सको..
नप – देखो लड़के मानव के पास hi गयां का बन्दर है तो तुमको मेरे कुछ सवालों का जवाब देना होगा..
पब – कैसे सवाल??
नप – वो सवाल इनके जवाब मानव hi जानते है या मानवो को जानने वाले जानते है. और मानव नगरी से मानवो को जानने वाला hi बहार जा सकता है.
पब – ठीक है आप पूछिए मैं जवाब देने को तैयार हु.
नप – एक बार और सोच लो, कियोकि यदि कल का सूरज निकलने से पहले तुम जवाब नहीं दे पाए या गलत जवाब दिए तो फिर तुम कभी यहाँ से बहार नहीं जा पाओगे.
पब कुछ देर सोच कर बोलै – ठीक है मुझको मंजूर है वैसे भी तो यहाँ पैर फास hi गए है हो सकता है की जवाब दे कर बहार जा सके.
नप – तो सुनो तुमको 5 सवालो के जबाव देने है –
- देवी तारा और रानी तारा में क्या अंतर है??
- तुमने विज्ञानं पड़ा होगा, रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) की सबसे छोटी यूनिट है – परमाडु (एटम), और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की सबसे छोटी यूनिट है – कोशिका (थे सेल), बताओ दोनों में में कोण छोटा है??
- तुम मैथ भी जानते hi होंगे – मैथ में 2+2 = 4 और 2क्ष2 = 4 होता है, “+” की जगह “क्ष” होने पैर भी जवाब शामे है. जबकि और किसी भी अंक (नंबर) के साथ ऐसा नहीं होता, 3+3=6, 3क्ष3=9… बताओ क्यों??
- तुम दोनों भारत से हो न?? तो तुम जानते होंगे की भारत में एक विद्वान थे – चाणक्य, चाणक्य ने तक्षशिला से अपनी शिक्षा ले थी. और यदि तुमको वह जाना हो तो तुमको क्या करना होगा.
- अंतिम सवाल तुम्हारे जीवन से जुड़ा है मैं जनता हु तुम्हारी 12 पत्निया है और अब इस लड़की से भी शादी करना चाहते हो, तो मैं ये जानना चाहता हु की तुम अपनी किस पत्नी को सबसे जयादा प्रेम करते हो? और क्यों??
इस आदमी के सवालो ने दोनों को हिला कर रख दिया था दोनों को लग रहा था की ये सभी सवालो को जानते है. पैर सटीक ाँस फिर भी मंद में नहीं आ रहा था. अभी तो दिन के करीब 12 hi बजे थे. तो दोनों के पास करीब 16 हॉर्स थे. तो दोनों एक साइड में बेथ कर उन क्यू. की नस. सोचने लगे.