MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 44 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 284

पब ने गुरु को अपने पास बुलाया और अपनी गोद में बेथ कर बोलै – मेरी गुरुपित, मेरी पहली दरमपत्नी आज आपकी बरी है. आज हमारा मिलान होगा. न जाने कब से मैं इस दिन का इन्तजार कर रहा था. पैर आज मुझको मेरी गुरुपित मिल जाएगी.. मिलेगी न??

गुरु – हम्म

पब – ये क्या रुखा रुखा हम्म्म… क्या तुम ये नहीं चाहती??

गुरु – नहीं मेने भी इस दिन का सालो से इतंजार किया है तो आज जब वो दिन आ गया है तो दिल में एक बेचैनी सी है. पता नहीं क्यों पर कुछ चूब रहा है दिल में…

पब – गुरु क्या आज मैं तुमसे कुछ मांगू??

गुरु – आप कहा कर तो देखिये..

पब – गुरुपित आज तुम मुझको अपने सरे गम दे दो.. मुझको अपना वो घायल दिल दिखा दो जिस पैर आज तक किसी ने मलहम नहीं लगाया केवल वक्त ने उसको धक् दिया और अंदर hi अंदर वो घाव नासूर बन कर तुम्हारे दिल में चुभ रहे है..

पब की बात सुन कर गुरु रो पड़ी और पब से एक बच्ची की तरह चिपक गयी. आज पहली बार था जब गुरु इस तरह से रोई थी किसी के सामने. पब ने भी उसको चुप करवाने की कोई कोसिस न की. जब बहुत देर तक गुरु रोटी रही और पब उसके बालो पैर हाथ फेर कर उसे अपने से चुपकाये बैठा रहा.

जब गुरु का रोना बंद हुआ तब पब बोलै – जितना रोना है आज रो लो गुरुपित कियोकि मैं आज के बाद इन आखों में कभी आशु देखना नहीं चाहुगा….

बहुत देर तक गुरु और पब एक दूसरे से जुड़े बैठे रहे तब तक वो सब भी फ्रेश हो कर आ गए. एक बार एरिका ने गुरु की तरफ मुँह करके कुछ बोलना चाहा तो सविता ने इशारे से उसे मन कर दिया. और कामिनी डेरे से बोली – उनको कोई डिस्टर्बे मत करना आज पहली बार दीदी अपने दुःख को बहार लायी है. और ये hi दीदी के बर्षो के दर्द को ख़तम कर सकते है.. सच में ये बहुत अच्छे है एक hi रात में इन्होने इस कामिनी को पूरा बदल दिया. ये कामिनी इनके प्यार में दुब कर अपना आज तक का सभी गम भूल चुकी है और जो तुम्हारे सामने कामिनी है वो केवल पब की देवानी बैठी है जिसकी सोच पब ने सुरु और उन पैर hi ख़तम है…….

ीदार धिरे से पब – गुरु चल रूम में चलते है आज मुझको अपने गुरु का हर दर्द देखना है. जानती हो गुरु मैं जाने कब से ये करना चाहता था पैर तुम्हारे जखमो पैर प्यार का लेप लगाने के लिए मैं तैयार नहीं था इसलिए आज तक इस दिन का इन्तजार करता रहा पैर आज मैं अपनी गुरुपित के हर दर्द को देखना चाहता हु. उसके हर जखम पैर प्यार का मलहम लगाना चाहता हु…

गुरु – पहले ब्रेकफास्ट फिर सब…

पब – वादा…???

गुरु – पक्का वादा … मैं भी तो कब से इस इन्तजार में हु की कोई मेरा भी हो जो मेरे इन जख्मो पैर अपने प्यार का मलहम लगाए…..

फिर ये दोनों भी सभी के साथ बर्फ करने आते है और सभी बर्फ करके लग जाते है अपने अपने काम पर. और गुरु और पब चले जाते है पब के रूम में. पब गुरु को बीएड पर अपनी गोद में बैठा लेता है और फिर गुरु पब को एक किश करके बोलना सुरु करती है.

गुरु – आज मैं तुमको बताने जा रही हु ये मेरे अलावा कोई नहीं जनता. ये मेरी जिंदगी की वो कड़वी यादे है जिनको मेने अपने सीने में दफना किया हुआ है.

गुरु की कहानी गुरु की जुबानी –

मैं अपने माँ बाप के साथ दिल्ली से करीब 40 कम दूर एक छोटे से गाओं राजगंज में रहती थी. दिल्ली पास में था तो गाओं की तैराकी भी हो राखी थी. मेरे 2 छोटे भाई भी थे. मैं बचपन से hi संलि थी. पैर नयननक्श ठीक थे. पैर मेरी जिनगी की बर्बादी तो मेरे बचपन से hi सुरु हो गयी थी. जब मैं केवल 6 साल की थी तब मुझको फालिश का अटैक पड़ा और मेरा मुँह टेड़ा हो गया. माँ बाप में बहुत दवा करवाई तो बोलने की परेशानी तो दूर हो गयी पैर मुँह में थोड़ा टेढ़ापन आ चुक्का था. फिर जब मैं 8 साल के करीब थी तब मुझको माता हो गयी. और मेरे पुरे सरीर पैर डेन हो गए. फिर से माँ बाप ने दवा करवाई, मैं ठीक तो हो गयी पैर दानो के निशान मेरे पुरे सरीर पैर रहा गए. अब जो भी मुझको देखता नफरत की नजर से hi देखता. देखने में में बहुत बदसुररात हो चुकी थी. गाओं में सभी बच्चे मुझको डायन, भूतनी, चुड़ैल, और न जाने क्या क्या कहा कर चिढ़ाने लगे जो मेरी सहेलिया थी वो भी मुझसे नफरत करने लगी कोई मेरे पास बैठना पसंद नहीं करता था. हर दिन के साथ में लोगो के लिए मज़ाक का के जरिया बन गयी. उसका एक कारन ये भी था की मेरे उप्पेर इलाज में पिताजी ने इतने रस. लगा दिए थे की उनकी हालत अब खस्ता हो गयी थी. मैं अपनी माँ की लाड़ली थी तो माँ की वजह से hi पिताजी ने मेरा इलाज करवाया नहीं तो वो तो मुझको मर hi जाए देते. इतनी काम उम्र में सभी की नफरत झेलने से बचने के लिए मेने घर से निकलना hi बंद कर दिया सरे दिन माँ के साथ काम करती और अपने दोनों छोटे भाइयो का धयान रखती. मेरी दुनिया इन 3 लोगो के बिच hi रहा गयी थी. वक्त के साथ भाई बड़े हुए तो उन्होंने भी मुझसे कन्नी काटना सुरु कर दिया ये देख कर मेरा दिल बहुत रोटा. अक्सर रात के डेरे में मैं रोटी रहती.

शायद भगवन को भी मुज पैर दया आ गयी तो उन्होंने मेरे लिए सन्ति भाभी को भेज दिया. तब मैं 12 साल की थी जब शांति भाभी हमारे पडोसी पंडित जी के बड़े लड़के के साथ शादी करके यहाँ आयी थी. शादी किध हम में भी मैं न गयी पैर अपने भाई और माँ बाप से सुना की शांति भाभी बहुत खूबसूरत है तो उनको देखने की दिल में एक इच्छा सी हुयी और मैं अपने गेट से सालो बाद निकल कर पंडित जी के गेट पैर कड़ी हो गयी. तभी भाभी भी मेरे सामने से गुजरी तो उनको देख कर मैं देखती hi रहा गयी. कितनी सुन्दर थी वो 19 साल की एक जवानी से भरपूर 16 सिंगर में दूध जैसी गोली लड़की को देख कर में सूद बड hi भूल गयी. मैं उनके गेट पैर कड़ी ये सोचने लगी की क्या मैं भी उनके जैसी हो सकती हु. पैर तभी मुझको उनकी मदुर आवाज कानो में पड़ी – कोण हो तुम, किसी से मिलना है क्या??

ये पहली बार था की किसी ने मुझसे सीडी मुँह बात की हो जब से मेरा मु टेड़ा हुआ था तब से लोगो ने मेरे लिए मुँह टेड़े कर लिए थे. एक बार तो मैं दर गयी पैर फिर उनकी प्यार भरी बातो ने मुझको खुश कर दिया उस दिन मैं इतनी खुश थी की जैसे मेरे आज दुनिया जीत ली हो एक खूबसूरत लड़की ने बात करके मुझको बहुत ख़ुशी हो रही थी. फिर जब भी मौका मिलता मैं उनसे बात करती. उन्होंने मुझको बहुत संजय दुनिया के सामने खड़े होने की टक्कट दी. उनकी एक बात मेरे दिल में चाप गयी “ सरीर से खूबसूरत होने से क्या होता है खूबसूरत बनना है तो दिल से खूबसूरत बनो. सदा दुसरो के काम आओ”

उनसे मिलने के बाद तो मेरी दुनिया मैं केवल 2 लोग hi रह गे ीक शांति भाभी और एक मेरी माँ. वो एक दिन मुझको गुरु सत्यानंद जी के आश्रम भी ले गयी और फिर मैं वह से जुड़ती hi गयी. समय के साथ मेरा जुड़ाव आश्रम को भाभी से बढ़ता hi गया. अब मुजमे दुनिया से लड़ने की हिम्मत आ चुकी थी. कोई कुछ भी कहता अब मैं रोटी नहीं थी बस उसको अनसुना करके अपने में hi मस्त रहती. इस बिच भाभी को एक लड़का हुआ. और वो होने के कुछ दिन बाद hi मार गया. तो भाभी टूट गयी उस टाइम मेने भाभी को सहारा दिया. उसके 1 साल बाद hi भाभी को फिर एक लड़की हुयी वो भी उनके जैसी hi सुन्दर थी. धिरे धिरे वो बड़ी होने लगी और मैं जवान होने लगी. भाभी ने अपनी बेटी का नाम अल्पना रखा था. बीतते वक्त के साथ भाभी 2 बार और पेट से हुयी पैर उनका बच्चा पेट मैं hi ख़तम हो जाता. भैया के 2 छोटे भाई थे और 1 बहन सभी की सधी हो गयी थी. उन सभी को 2-3 बच्चे भी हो गए. जब भाभी को अल्पना के अलावा कोई बच्चा नहीं हुआ तो उनके घर वालो ने उनको भी अलग कर दिया. भैया भाभी से बहुत प्यार करते थे उन्होंने अपनी पत्नी को चढ़ने की जगह माँ बाप को छोड़ कर अपनी अलग दुनिया बसा ली. तो मेरा उनके यहाँ जाना भी बाद गया तो गाओं में ये हवा हो गयी की भाभी मुझसे मिलती है इन लिए उनको और कोई औलाद नहीं हो रही. जब मेने ये सुना तो मेने उनके यहाँ जाना बंद कर दिया. पैर भाभी ने फिर भी मेरा साथ नहीं छोड़ा और मुझसे मिलने खुद आने लगी.

अभी मैं 18 साल की हुयी थी की मेरे बाप में मुझको घर से विदा कर दिया. न तो मेरी पसंद पूछी गयी और न ये पूछा गया की मैं शादी करना चाहती हु या नहीं… बस कुछ रिश्तेदार बुला कर कर दिया विदा. मेरी सुसराल दिल्ली में ***** कॉलोनी में थी. पैर फिर भी मैं खुश थी की चलो अब मुझको एक प्यार करने वाला मिलेगा. वो समजेगा मुझको. जिंदगी को एक नए सिरे से सुरु करेंगे.. पैर सुहागरात की सेज पैर hi मेरा सपना टूट गया. एक 30 साल का कला आदमी फुल नशे में मेरे पास आया और मेरी पर बेथ कर मुझको हवस भरी नजरो से देखने लगा. मेने घुगट किया हुआ था. जैसे hi उसने मेरा घुगट हटाया पहले तो उसने अपनी आँखें फेर ली जैसे की अक्सर सभी करते थे मेरे साथ फिर बोलै – हैट साली पूरा नशा hi उतर दिया. साला पैसो के चक्कर में किस चुड़ैल को अपने घर ले आया मैं.. ाआट्ठ्हुउउउउ….

वो मेरे उप्पेर ठु कर चला गया मेरे सपने मेरे अरमान मेरी आने वाली जिंदगी के पालो में थूक कर वो चला गया और मैं केवल अपनी किस्मत पैर रोटी रही. रट रट कब सुबह हो गयी पता भी नहीं चला. मेरी बाद किस्मती हमेशा मेरे साथ रही मेरी बदसूरती बन कर. सुबह होते hi मेरे पति कमल की माँ ने मुज पैर होकुम चलने सुरु कर दिए. हर बीतते दिन के साथ मेरे पति और उनकी माँ का जुर्म बढ़ता गया. और मुझको लोगो के घरो में choka-bartan के काम पैर लगा दिया. पहले अपने घर का पूरा काम करती फिर दुसरो के घरो में काम करने जाती. फिर आते hi फिर से घर के कामो में लग जाती. और इसके बदले में मुझको मेरे पति के घुसे और लात hi मिलती थी. और जब उसकी माँ का मन करता वो भी बिना बात के बजा जाती थी. कामके बदले मिलने वाले सभी पैसे भी मेरे पास नहीं rehte.maar और काम ये hi मेरी जिंदगी बन गयी थी. मेरी शादी को 6 महीने hi हुए थे की मेरी माँ भी चल बसी. अब मेरा दुःख पूछने वाला भी कोई नहीं था. ऐसे hi जेए जा रही थी. पैर इस बिच मेने अपना एक नियम बना लिया गुरु सत्यानंद जी के आश्रम जाने का. एक वो hi ऐसी जगह थी जहा मुझको मेरे दुखो में मुक्ति मिलती थी. कुछ पालो के लिए hi सही पैर मैं भी जीवन में शांति महसूस करती. वह मैं पिछले 5-6 सालो से जा रही थी और गुरूजी की मुज पैर कृपा भी हुयी थी. तुमको पता है जब मैं 4 या 5वि बार भाभी के साथ आश्रम गयी थी तब गुरु सत्यानंद जी ने मुझको दुखी देख कर कहा था – तुझको एक बहुत बड़ा कार्य करना है मेरी बच्ची.. कठनाइयां सदा तेरे साथ रहेगी. पैर तू वो सब पायेगी जो तू चाहती है. बस तू कभी हिम्मत मत हारना कियोकि तुझको तो उसकी हिम्मत बनना है जिसकी हिम्मत दुनिया का भविष्य तय करेगी.”
 
अपडेट 285

गुरु की स्टोरी छॉंट -:

जब मैं 4 या 5वि बार भाभी के साथ आश्रम गयी थी तब गुरु सत्यानंद जी ने मुझको दुखी देख कर कहा था – तुझको एक बहुत बड़ा कार्य करना है मेरी बच्ची.. कठनाइयां सदा तेरे साथ रहेगी. पैर तू वो सब पायेगी जो तू चाहती है. बस तू कभी हिम्मत मत हारना कियोकि तुझको तो उसकी हिम्मत बनना है जिसकी हिम्मत दुनिया का भविष्य तय करेगी.”

गुरु जी ने तबसे hi शिक्षा देना सुरु कर दिया था. और अब मेने मायाजाल बिछना सिख लिया था. मेरी मायाजाल की सिद्धि पूरी हो चुकी थी. तो बस मेने उसको अपने पति पैर एक बार आजमाया तब मुझको औरत होने का सुख मिला. वो सब मुझको इतना अच्छा लगा की मेने वो काम 2-3 बार जल्दी जल्दी किया. फिर पता नहीं क्यों मुझको इस काम से घृण्डा होने लगी. जब कोई आपसे प्यार करता hi नहीं तो इस तरह प्यार के कुछ पल पाने से क्या फायदा. कियोकि रात में तो मायाजाल में फस कर वो मेरे साथ बहुत प्यार से पेश आते और प्यार से सब करते भी पैर सुबह होते hi मुझको मरने लगते की मैं उनके पास क्यों सोई. रात में मिली खुशीओ पैर वो पिटाई भरी होने लगी तो फिर मेने वो सब भी करना छोड़ दिया.

पैर 3-4 महीने बाद मुझको पता चला की मैं पेट से हो गयी हु. मानशिक तो बहुत पहले रुक गया था पैर क्यों रुका ये पूछती तो किस्से?? जब एक दिन एक के घर में बर्तन साफ़ करते हुए मैं चक्कर खा कर गिर गयी तो उन्होंने hi डॉ. को बुला कर मेरा चकूप कावाया. तब पता चला की मैं माँ बनने वाली हु. और जब ये बात मेने कमल को बताई तो वो दुखी हो गया. उसको दर था की कही बच्चा मेरे जैसा बदसूरत न हो.

बीतते वक्त के साथ मैं माँ बन गयी. और मेने एक लड़के को जनम दिया वो पूरा अपने बाप पैर गया था. कार्बन कॉपी था वो अपने बाप की. उसको देख कर कमल खुश हो गया और पहली बार मुझको प्यार से गले लगा लिया. सोच की हयद मेरा बच्चा मेरी किस्मत बदल दे. पैर नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ. दिन बीतते गए और वो सब वैसे hi चलता रहा मेरा काम करना, हर हफ्ते आश्रम जाना, कमल से पीटना और अपने bête को अपने सीने से लगा कर रखना…

जब मेरा बीटा नवल 9-10 साल का हुआ तो उसने भी मुझसे कन्नी कटनी सुरु कर दी और बाप में hi गुसा रहने लगा. मेरे अंदर की ममता ये देख कर हमेशा रोटी पैर मैं कुछ नहीं कर सकती थी. वक्त के साथ उसकी भी आदत हो गयी. इस बिच hi मेरी सास ने भी दम तोड़ दिया तो घर की पूरी जिम्मेदारी मेरे उप्पेर आ gayi.Kabhi कभी शांति भाभी मिलने आ जाती तो वो बता देती गाओं के हाल, मेरे भाइयो की भी शादी हो चुकी थी उन दोनों के पास 1 बीटा और 1 बेटी थी. वो अपने परिवार मैं खुश थे वो भूल चुके थे की उनकी कोई बहन भी है.

जब मेरा बीटा 21 साल का था तक मेरे पति में उसकी शादी अपने एक दोस्त की बेटी प्रीति से तय कर दी. मैं भी खुश थी की चलो मेरे बीटा का घर बार रहा है. हम उसकी शादियों की तैयारी कर रहे थे की एक दिन शांति भाभी मिलने आयी और उन्होंने बताया की उनकी बेटी को एक बेटी हुयी है. ये सुन कर मुझको ख़ुशी हुयी. मेने भी उनको अपने bête की शादी में आने का न्योता दिया. तो वो बोली शादी में बुलाना है तो तुमको गाओं आ कर अपने भैया से कहना होगा. मैं जरूर ाउगि. तो मेने भी हाँ कर दी. मेने सोच जब न्योता देने गाओं जाना hi है तो क्यों न अपने भाइयो को भी न्योता दे औ. वैसे तो वो आएंगे नहीं पैर न्योता देना मेरा फर्ज था तो मैं गाओं जा कर अपने दोनों भाइयो को और भाभी के घर में न्योता दे आयी. शादी में भाभी और भैया दोनों आये और मुझको ख़ुशी तब हुयी जब मेरा छोटा भाई अपने bête के साथ वह आया उसको देख कर मुझको बहुत ख़ुशी हुयी.

शादी के बाद दिन अच्छे बीतने लगे. नवल के कहने पैर मेने घरो में काम करना बंद कर दिया था. अब हम दोनों सास बहु घर में रहते और मेरा पति कमल और बीटा नवल ड्यूटी पैर जाते. पैर मैं अभी भी अशरा जाती थी. मेरी बहु प्रीति का नेचर ठीक थक hi रहा मेरे साथ. एक दिन मुझको आश्रम जाना था तो मेरी बहु भी साथ चलने को बोलने लगी. तो मैं उसको भी साथ ले गयी. वह मेरी बहु ने गुरूजी (मणि जी) से दीक्षा देने को कहा तो उन्होंने उसे मन कर दिया. मेरी बहु दुखी हो गयी और घर आ कर मुझसे कहने लगी माजी आप hi मुझको कुछ सीखा दो मेरा बहुत मन है की मैं भी कुछ तांत्रिक विद्या सिखु.

मैं भी अपनी बहु प्रीति को मन नहीं कर पायी और उसको मायाजाल बनना सीखा दिया. दिन अब अच्छे काटने लगे थे. मेरे भाइयो और उनके लड़को का आना जाना भी होने लगा था. मैं बहुत खुश थी की मेरी जिंदगी में भी खुशियों के दिन आ गए है. पैर ये मेरा भ्रम hi था. bête की शादी को अभी 7-8 महीने हुए थे. और प्रीति 3 महीने के पेट से थी तभी मेरी जिंदगी में एक तूफान आया और मेरा घर परिवार सब मुझसे चीन गया.

दोपहर के टाइम प्रीति अपने रूम में आराम कर रही थी तभी दूर पैर एक साधु भीक मांगने को आया तो मेने उसको आता दिया. उसका पेअर घायल था और उसको बहुत तकलीफ हो रही थी ये देख कर मुझसे रहा नहीं गया तो मेने उसको घर में बुला कर बेठ्या और उसके घाव की पट्टी करने लगी. पट्टी करते हुए उसने मुझको अपनी और खींच लिया और मेरे होंटो को चूमने लगा पता नै क्यों मैं उसका विरोद न कर सकीय और कुछ hi देर में हम दोनों के कपडे जमीन पैर थे. वो मुज पैर चढ़ता उससे पहले hi पता नहीं कहा से मेरे पति आ गए और ये सब देख कर आग बबूला हो गए. कमल ने उस साधु को मरना सुरु किया तो वो अपने कपडे ले कर भाग गया. पैर मेरा सब कुछ लूट चुक्का था. मैं बर्बाद हो चुकी थी. पता नहीं मैं कैसे बहक गयी और मेरी एक पल के बहकने की सजा ये हुयी की मेरे पति में मुझको घर से बहार निकल दिया. मैं चाहा कर भी कुछ न कहा सकीय. मेरे तो होश hi ुढे हुए थे. घर ने निकल कर भी मैं बहुत देर तक रोड पैर बेसुदी की हालत में घूमती रही.

श्याम को मेरी भूक ने मुझको होश में लाया. तब मेने देखा की एक सधी में लिपटी में एक पार्क के गेट पैर बैठी हुयी थी. जब मंद में पूरी घटना गुमने लगी तो मैं रोने लगी बहुत देर ता क्रौन के बात रात के अंदर में भूक से बेहाल मेने चारो तरफ देख तो वह कुछ नहीं था पार्क के गेट पैर एक गार्ड को छोड़ कर कोई न था. मेने सुबह से कुछ नहीं खाया था मैं खाना कहती उससे पहले hi वो कमीना आ कर मेरी दुनिया उजाड़ कर चला गया था. अभी कोई रास्ता भी नहीं था. तब केवल आश्रम का hi ख्याल आया तो उस गार्ड से रास्ता पूछ कर में आश्रम की तरफ चल पड़ी.

उसके बाद तो बस गुरूजी का वो आश्रम hi मेरा ठिकाना हो गया. रात दिन सेवा और शिक्षा में निकलने लगे. जब मेरी शिक्षा पूरी हो गयी और मेने बहुत से मंत्रो को सिद्ध कर लिया तो गुरूजी ने मुझको दुनिया में जाने को कहा दिया. एक बार फिर मैं अपनी मंजिल की तलाश में निकल पड़ी. पैर अब मुझको दुनिया के बिच रहना अच्छा नहीं लगता था तो मेने शिवा नगर के जंगल को चुना अपने रहने के लिए. जो भी भटकता हुआ राहगीर मेरे पास जंगल में आता तोमैं उसकी मदतकर देती. वो लोग मुझको इज्जत देते. उनकी नजरो में जोमेरी सूरत को देख कर जो नफरत आती थी वो मेरी की गयी मदत से इज्जत और प्यार में बदल जाती. धिरे धिरे लोगो के बिच में मेरा नाम होने लगा लोग अपनी समस्याओ को ले कर मेरे पास आने लगे. गुरूजी ने जनकल्याड को hi सबसे उप्पेर बताया था तो मैं भी बिना किसी लालच लोगो का इलाज करने लगी. उनके दुखो को दूर करने के लिए मुज पैर जो बनता वो करने लगी. जीवन का ये hi वो समय था जब मेने लोगो के मन और आँखों में अपने लिए नफरत की जगह प्यार और सम्मान मिला. जीवन के एक बड़ा पड़ाव पार करने के बाद शांति भाभी की बात सच हुए थी. लोग अब मेरे बदसूरत चेहरे को नहीं बल्कि मेरे कर्मो को मेरे मन को देखते थे. जंगल में कुछ भी होने के बाद भी मैं एक खुश को प् चुकी थी. पैर दिल में एक तिस हमेशा थी की मैं अपने आप को कभी औरत होने का सुख नहीं दिला पायी. एक माँ होने के बाद भी माँ का सुख नहीं मिला. किसी की पत्नी होने के बाद भी पत्नी होने का सुख नहीं मिला. मैं कभी औरत नहीं बन पायी. औरत हो कर भी एक औरत होने को तर्षि हु मैं. आज आपको मुझको वो सुख देना है आप hi है जिसकी नजरो में मेने पहली बार अपने औरत होने का बहन किया था. आपकी नज़रो में वासना थी मेरे लिए. फिर आपके साथ रही आपके दिल में मेने अपने लिए वो प्रेम और वो इज्जत महसूस की जिसके लिए मैं तरस रही थी. एक तो दस माँ का आदेश और फिर आपकी नजरो में भाषा मेरे लिए प्यार, मैं अपने आप को रोक नहीं पायी और आपकी पत्नी बन gayi.uske बाद तो आप जानते hi हो…..

गुरु की कहानी सुनते हुए पब की आखों से आशु बहाने लगे. गुरु के दर्द ने पब को भी रोने पैर मजबूर कर दिया था. गुरु की आँखों से तो बहुत देर से आशु बहा रहे थे. तभी पता नहीं कहा से सविता निकल कर आयी और गुरु से लिपट कर रोने लगी.

पब – सविता तुमको क्या हुआ तुम क्यों रो रही हो..

सविता – दीदी अपने इतना कुछ झेला है. फिर भी आप जिन्दा है ये बहुत बड़ी बात है. शायद hi भगवन किसी को इतने दुःख देते हो. पूरी जिंदगी सभी की नफरत सहने के बाद भी अपने सबको केवल प्यार और प्यार hi दिया. कैसे दीदी कैसे… यदि कोई अपने आधी नफरत भी झेलता है न दीदी तो वो दुनिया को आग लगाने को उत्तारू हो जाता है आपके पास ताकत होने पैर भी अपने किसी का विरोद नहीं किया. कभी किसी को हानि नहीं पहुंचे केवल सभी से प्यार की ाश करती रही और आपको पुरे जीवन केवल नफरत और तिररिस्कार hi मिला. बेटी के रूप में, बहन के रूप ने, दोस्त के रूप में, पत्नी के रूप में, माँ के रूप में.. आपको हर रूप में मिला तो केवल तिरिस्कार और नफरत …

गुरु सविता को गले लगते हुए – नहीं मेरी बहन नहीं… मुझको भी बहुत प्यार मिल है. मेरे पंकज का प्यार, मेरी बहनो का प्यार, मेरी माँ का प्यार, मेरी भाभी का प्यार… मैं भी शायद कुछ गलत कर बैठती यदि शांति भाभी ने मुझको ये न कहा होता की दिल से सुन्दर बनो तो मैं भी कुछ और hi बन गयी होती एक खूबसूरत दिल पाने के लिए hi मैं ऐसी बन गयी..

पब – सच में गुरु तुम्हारा दिल, तुम्हारी रूह बहुत खूबसूरत है. आज तक तो केवल मैं इस गुरु की इज्जत hi करता था उसको अपना मार्गदर्शक और एक सच्चा साथी मंटा था पैर आज तुम्हारी पूजा करने का दिल होता है. यदि लोग तुम्हारी पूजा करते थे गुरु तो तुम सच में पूजा करने लायक भी हो… गुरु मुझको माफ़ कर देना शायद मैं तुमको वो खुशिया नहीं दे पाव जिनकी तुम हक़दार हो. पैर मैं अपनी पूरी कोसिस करुगा गुरु की मेरी गुरुपित के मन की हर मुराद पूरी हो…

गुरु पब से जा छुपी और बोली – ये आप किसी बात करते हो. आप मेरे पति हो और पति पत्नी की पूजा नहीं करता ये काम पत्नी का होता है. यदि आप ऐसा करेंगे तो लोग आपको जोरू का गुलाम कहेगे…

पब मुस्कुराते हुए – मैं तैयार हु जोरू का गुलाम बनने को….

इस बात पैर तीनो के फेस पैर स्माइल आ गयी.

पब – गुरु तुमने ये नहीं बताया की फिर तुम्हारी उन शांति भाभी का क्या हुआ??

गुरु – मुझको नहीं पता पब. अपने bête की शादी के बाद मैं कभी मिली hi नहीं. पैर तुम क्यों पूछ रहे हो..

पब – वो मेरी नानी है गुरु….

गुरु – क्या????? पर कैसे ??? तुम ये कैसे कहा सकते हो की वो hi तुम्हारी नानी है??

पब – कियोकि मेरी नानी का नाम भी शांति है और वो भी राजगंज में रहती है. ये बात मुझको माँ के डाक्यूमेंट्स से पता चली थी. सोचा था कभी जाउगा अपनी ननिहाल का पता करने पैर कभी जा नहीं पाया. और आज तुमने उसके बारे मैं सब कुछ बता दिया…

गुरु – ोुह्ह्ह मतलब तुम्हारी माँ अल्पना hi वो बच्ची है जिसको मेरे खिलाया था. हाँ और शायद मेरे bête की शादी पैर सोनल का जनम हुआ होगा…. तुम्हारी माँ भी तो तब दिल्ली में hi थी…

पब – दुनिया कितनी गोल है न गुरु…

गुरु – चलो फिर चले आज शांति भाभी, सॉरी शांति नानीजी के पास, देखे वो मुझको और अपने नाती को पहचान भी पति है या नहीं….

पब – हाहाहाहा तुम भी न गुरु तुमको तो अब तुम्हारी माँ भी न पहचान पाए मेरी नानी क्या चीज है. और मुझको तो उन्होंने आज तक देखा hi नहीं तो पहचानेगी कैसे….
 
अपडेट 286

गुरु – चलो फिर चले आज शांति भाभी, सॉरी शांति नानीजी के पास, देखे वो मुझको और अपने नाती को पहचान भी पति है या नहीं….

पब – हाहाहाहा तुम भी न गुरु तुमको तो अब तुम्हारी माँ भी न पहचान पाए मेरी नानी क्या चीज है. और मुझको तो उन्होंने आज तक देखा hi नहीं तो पहचानेगी कैसे….

गुरु – तो क्या ख्याल है चले फिर नानीजी से मिलने??

पब – चलो फिर…

ये बोल कर पब गुरु और सविता को ले कर टेलिपोर्ट हो कर पहुँचता है राजगंज. गुरु वह आ कर खिल उड़ती है. और ये लोग कहा की गलियों में घूमते हुए शांति नानी के घर के बाहर पचुच जाते है. जिन आँखों में गुरु ने आज तक अपने लिए नफरत hi देखि थी आज उसको उन आँखों में खुद के लिए वासना या प्यार नज़र आ रहा था. एक पारी जैसे लड़की को देख कर कोई भी खो जाये वो hi हाल हो रहा था गाओं में. और ये गुरु के लिए इतना सुखदायी था की गुरु का चेहरा गुलाब की तरह खिल ुधा था. गुरु को तो अपना बचपन याद आने लगा था. जैसे hi इन्होने घर की बेल्ल बजे तो घर से एक करीब 40 साल की औरत बहार आयी और बोली – जी किस्से मिलना है.

पब - जी हमको शांति देवी से मिलना था क्या वो अंदर है??

औरत – कोण शांति देवी??/ …….. ारे कही तुम उस पागल भुड़िया की बात तो नहीं कर रहे जिनको गाओं वालो ने पत्तर मार मार कर मार दिया था….

ये सुन कर पब का खून खोल गया और उसने उस औरत को गले से पकड़ कर ुधा लिया. और गुस्से से बोलै – जबान संभल कर बात कर …. नहीं तो तुझको यही गाड़ दुगा.. और किसने मारा है मेरी नानी को बताओ साले किसी को जिन्दा नहीं छोड़ूगा.

औरत झटपटाने लगी ये देख कर कुछ गाओं वाले आ गए. और गुरु ने पब से उस औरत को छुड़वा दिया. तभी गुरु की नजर एक औरत पैर पड़ी. कोई 55-60 साल की थी. तो उसको देख कर गुरु ने उसको पुकारा.

गुरु – ारी ोोू चंपा सुन तो ये सन्ति भाभी के बारे में क्या कहा रही है….

चंपा एक 18 साल की लड़की के मुँह से अपना नाम सुन कर हैरान रहा गयी. चंपा न तो इसको जानती थी और न उसने इसे कभी देखा था और कैसे सीडी नाम से hi बुला रही थी. और तो और अपनी नानी दादी की उम्र की शांति को भाभी बोल रही थी. चंपा कुछ देर उसको घूरती रही. फिर बोली – तू है कोण?? तेरी हिम्मत कैसे हुयी मुझको ऐसे बुलाने की?? (बात ये है की चंपा इस गाओं का रेडियो स्टेशन है. जैसे हर गाओं में होता है जो सभी की खबर रखता है ठीक वैसे है)

चंपा की बात सुन कर गुरु को अपनी गलती का अहसास हुआ. गुरु कुछ बोलती उससे पहले hi पब बोल पड़ा – साली ये तेवर किसी और के लिए रख. पहले जो पूछा है उसका जवाब दे नै तो तू जानती नहीं तेरा क्या होगा अभी…

पब अपनी नानी की बात सुन कर गुस्से में आ गया था. सविता यहाँ पैर बखेड खड़ा होता देख पब का हाथ पकड़ कर नजरो से उसे चुप रहने का इशारा किया. पैर जब तक चंपा बोली – ारे देखो तो जरा ये आज कल को छोरा मुझसे कैसे बात कर रहा है.. माँ बाप ने तमीज नहीं सिखाई क्या तेरे को…

सविता – देखिये इनकी बात का बुरा मात मानिये. शांति देवी इनकी नानी थी. वो इस औरत ने बताया की वो मार गयी तो ये गुस्से में उल्टा सीदा बोल गए है..

चंपा – क्या ये अल्पना बेटी का लड़का है??? अल्पना तो कितनी अच्छी लड़की थी और उसका बीटा इतना बत्तमीज़.. चल तू अल्पना का बीटा है इसलिए तुझको माफ़ कर रही हु नहीं तो तुझको बताती मुझसे उलझने से क्या होता है.

पब को फिर चंपा की बात पैर गुस्सा आया तो सविता ने फिर उसको रोक दिया और बोली – छोडिया न इस बात को ये बताइये इनके नाना और नानी कहा है..

चंपा – अब क्या बताऊ बेटी, बड़ा hi गलत हुआ उन दोनों के साथ. भगवन ने एक hi तो बेटी दी. फिर भी दोनों खुश थे. पैर एक दिन उनकी बेटी गायब हो गयी. उसके साथ में उनका दामाद और नातिन (सोनल) भी. भाई साहब ने बहुत खोजै उन सभी को पैर उनका कुछ पता नहीं चला. बेटी के गायब होने के करीब 1-1.5 साल बाद भाई साहब तो बेटी के गम में चल बेस. पैर शांति भाभी अकेली रहा गयी कोई नहीं था उनके साथ. बस किसी तरह अपनी बेटी के इन्तजार में दिन काट रही थी की 10-12 साल पहले वो भी पागल हो गयी. और एक दिन अपनी पड़ोसन गुरुपित जीजी की बहु को मरने को दोधी. वो आगे आगे और भाभी पीछे पीछे .. भाभी बस ये hi बोले जा रही थी की तूने hi मेरी बेटी को गायब किया है मैं तुझको जिन्दा नहीं छोडूगी.

गुरु – पैर वो तो प्रीति को जानती भी नहीं थी. केवल एक बार शादी में hi तो देखा था उन्होंने…

चंपा (गुरु को घूरते हुए) – हाँ ये hi तो बड़ी बात है. प्रीति न तो उनकी बेटी को जानती है और न उनको, तो वो क्यों करेगी ऐसा.. तभी तो लोगो को लगा की वो पागल हो गयी है. लोगो ने किसी तरह उनको पकड़ा और कमरे में बंद कर दिया. पैर वो चिलाती रही की उसने उनकी बेटी को गायब किया है वो उसे मार कर hi रहेगी.. फिर थोड़ी देर बाद में चिल्लाने लगी की तुम सब मिले हुए हो मैं किसी को नहीं छोडूगी पुरे गाओं में आग लगा दूगी..

ऐसे hi बहुत देर तक वो चिल्लाती रही और गाओं में आग लगाने की जगह खुद के रूम में hi आग लगा ली. और उस आग की चपेट में खुद hi आ कर मार गयी….

चंपा की बात सुन कर वो औरत बोली – पैर मेने तो सुना था काकी की लोगो ने उसको पत्तर मार मार के मारा था.

पब को भी डूबत हुआ तो उसने चंपा की आखों में देखा तो उसको सच पता चल गया की चंपा सच बोल रही है उसने खुद भी वो सन देखा था. पब ने गुरु को भी बता दिया की चंपा सच बोल रही है तो अब इन तीनो के यह रुपने का कोई मतलब नहीं था तो तीनो दुखी मन से वह से चल दिए. कहा तो वो सभी खुश थे की आज पब की नानी से मिलेंगे कहा उनको मिली तो उसकी नानी और नाना की मूट ी दर्दनाक खबर. ये सब सुन कर पब को बहुत दुःख हो रहा था. त्रिकाल के दर से जहा उसने और उसकी फॅमिली ने बहुत दुःख झेले थे. वही उसके नाना और नानी अपनी बेटी के गम में मार गए. कही न खाई इसका जिम्मेदार त्रिकाल hi था. और वो संभु भी जिसकी बुरी नियत उसकी माँ पैर पड़ी थी. जहा यहाँ आ कर गुरु का चेहरा खिल गया था वही यहाँ से जाते हुए उसके चहरे पैर अपनी सबसे प्यारी भाभी को खोने का दुःख था. जिंदगी भी क्या क्या करवाती है पल में ख़ुशी तो पल में गम.

ये तीनो अपनी अपनी सोच में वह से निकल hi रहे थे की पब के मन में मंजू की आवाज गुंजी – कहा हो आप जल्दी से यहाँ आओ. अपने गाओं में लड़ाई हो गयी है सलोनी और ेबेचा दोनों बेहोश हो चुकी है. मैं भी इनको ज्यादा देर रोक नहीं पाउगी……

पब मंजू की बात सुन कर चौक गया. उसने तुर्रंत एक खली जगह पैर पहुंच कर उन दोनों के साथ टेलिपोर्ट हो गया. और पहुंच साइड पानीपुर गाओं के बिच में. गाओं की चौपाल युद्ध का मैदान बानी हुयी थी. मंजू और माहि अपनी अपनी शक्ति से 2 दानवो से लड़ रही थी. पैर वो उन दोनों के आगे कमजोर पद रही थी. एक और सलोनी और ेबेचा बेहोश पड़ी थी. एरिका और कामिनी उनको होश में लेन की कोसिस कर रही थी. सबसे पहले पब उन दोनों के पास पंहुचा और गुरु को मंजू और माहि की मदत के लिए जाने का इशारा किया.

पब ने दोनों को 2-4 पालो में hi हील कर दिया. और फिर पहुंच गया उन दोनों दानवो के सामने.

डॉ14 – तो तुम है वो जिसको मरने के लिए हम यहाँ आये है. इतनी देर से कहा बिल में छुपा हुआ था चूहे.. बेकार में हराम टाइम पास करवा दिया. और बिना मतलब में हमको इन सबके साथ खेलना पड़ा.

डॉ15 – हाँ पैर मज़ा भी आया इनके साथ खेलने में. मानव कन्या दम वाली है. नहीं तो मानवो को कुचलने में हमको पल से ज्यादा टाइम नहीं lagta…hahahaha

पब – तुम दोनों ने इन पैर हाथ ुधा कर अपनी जिन्दी की आखिरी भूल कर ली है अब तुमको मुझसे कोई नहीं बचा सकता. याद कर लो अपने चाहने वालो को अब तुम्हारा काल आ चुक्का है…

डॉ15 – अबे बोल बचन बंद कर और दम है तो लड़ कर दिखा. हम भी तो देखे कितना दम है तुजमे…

ये सुन कर पब ने एक आग को गोला बना कर उनके उप्पेर फेका. तो वो दोनों हस्ते रहे. और गोला उनसे टकरा कर ठंडा पद गया.

डॉ14 – हाहाहा बच्चे ये क्या गुदगुदी कर रहा है. हमने तुझको लड़ने को बोलै था हँसाने के लिए नहीं… ये छोटी मोती चीजे हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकती. इनसे तो हम रोज खेलते है…

डॉ15 – दम है तो आ मैदान में और 2-2 हाथ कर …

पब भी अपनी पोजीशन लेने लगा. और वो दोनों भी पब ने एक गम कर पंच मारा डॉ14 पैर वो तो साइड हो गया. पैर इतने में एक किक डॉ15 ने पब के पेट पैर झाड़ दी. दोनों में गजब की फुर्ती थी पालक झपकने से पहले तो वो अपना एक्शन केर देते थे. और दोनों ने पब को बिच में ले कर दोना सुरु कर दिया. पब पैर इन वॉर का अक्षर तो ज्यादा नहीं हो रह था पैर उसकी जीवन शक्ति जरूर लग रही थी. तो पब ने भी निंजा फाइट की स्किल्स को याद किया और उनको जवाब देने लगा. अब लड़ाई में दोनों तरफ से बराबर हमले हो रहे थे. पैर पब एक करता तो वो 2 करते. पब एक से बचता तो उसरा उसको मर देता. पब उनके आगे कमजोर पड़ने लगा. तो पब ने दूसरी स्टाइल से फाइट सुरु की.

सविता, गुरु, सलोनी, एरिका, माहि, मंजू और कामिनी इस लाइव फाइट का मज़ा ले सही थी. पैर कुछ hi देर मैं उनके फेस पैर चिंता के भाव आने लगे. कियोकि पब फिर से कमजोर पड़ने लगा था. तो पब ने एक दम में हवा में छलांग लगा कर उड़ने लगा. तो वो दोनों भी हवा में आ गए. अब लड़ाई हवा में होने लगी. पब फिर कमजोर पड़ने लगा तो पब ने अपनी तलवार को याद किया. जैसे hi पब की तलवार पब के हाथ में आयी वो दोनों रुक गए. और एक बार झुक कर उस तलवार को प्रदम किया और अपनी तलवारो को याद करके उन्होंने अपनी तलवारो को भी संभल – तुमको क्या लगा की हम इससे दर जायेगे. नहीं बच्चे ये हमारे लिए पूजनीय है और आज तुमको मार कर इसको इसके उचित िस्थान पैर पंहुचा देंगे. ये हमारा फर्ज है…

फिर क्या था फिर एक बार भयाना युद्ध सुरु हो gaya.talwaro की टकराव से गगन भेदी आवाजे आ रही थी. लोग अपने कानो को बंद किये हुए थे. तलवारे इतनी फुर्ती से चल रही थी की देखने वालो को पता hi नहीं चल रहा था की कब और कैसे तलवारे चल रही है. केवल तंत्र तंत्र की एक के बाद एक आवाज पुरे वातवरद में गूंज रही थी. इतने भयानक युद्ध को देख कर लोग दर के मरे कपङे लगे थे. सभी ये hi दुआ कर रहे थे कैसे भी उनका रक्षक उनका ठाकुर जीत जाये. वो 2 थे और दोनों hi अपनी पूरी कोसिस कर रहे थे पब को हारने की. पैर पब की तलवार के आगे उनकी चल नहीं प् रही थी. और मौका मिलते hi पब ने डॉ14 के पेट में तलवार घुसा दी. डॉ14 तुर्रंत जमीन पैर जा गिरा और तड़फते हुए दम तोड़ गया. डॉ15 तो उसको मरते हुए देखता hi रहा गया. तभी पब के पीछे से किसी ने अपनी तलवार घूरने की कोसिस की पैर वो कामियाब न हुआ. पब ने पलट कर देखा तो एक और दानव वह खड़ा उसे आश्चर्य से देख रहा था. पैर इस वॉर से सविता को चक्कर आ गया था वो बेहोश होने लगी थी. (इस एक बार ने सविता की जीवन शक्ति को बहुत ख़तम कर दिया था) अब तक डॉ15 भी संभल चुक्का था और अब वो भी पुरे गुस्से में आ गया था. फिर एक बार तलवारो के टकराने की आवाजे फ़िज़ा में गुजने लगी. और फिर डॉ15 की तलवार पब के कंडे को एक घाव दे कर चली गयी. और पब धाम से निचे गिर पड़ा. पब के निचे गिरते hi ेबेचा और सलोनी पब के पास पहुंची तब तक वो दोनों भी निचे आ गए और पब पैर हमला करने लगे. पैर इस बार बचाव किया सलोनी और ेबेचा ने… तब तक पब भी ुधा खड़ा हुआ अब मैदान में वो 2 थे और ये तीन…

फिर भयानक युधः सुरु हो गया. अब पब के सरीर पैर घाव भी हो रहे थे और उन दानवो के भी. वो दोनों पुरे गुस्से में इन तीनो से लाडे जा रहे थे. वो 2 भी इन 3नोपर भरी पड़ने लगे थे. पब, ेबेचा और सलोनी तीनो के बदन पैर कई घाव हो चुके थे. उनसे खून भी निकल रहा था. और वोकमजोर भी पड़ने लगे थे. और वो दोनों दानव और भी तेज़ी से पुरे गुस्से के साथ हमले पैर हमले किये जा रहे थे. कमजोर होने पैर भी ये तीनो पूरी हिम्मत से इन महाबलशाली दानवो के सामने ठीके हुए थे. पैर वह खड़े लोगो के मन में अब दर पैदा होने लगा था. गुरु, मंजू, माहि और एरिका के फेस पैर दर्द और दर के पुरे भाव आ चुके थे. युद्ध में पब की हार लगने लगी थी. पैर तभी पब में मन में मंजू की आवाज आयी और फिर एक तेज़ हवा का तूफान आया. तूफान के साथ मिटटी भी ुधि और वो उन दानवो की आखों में घुस गयी. वो दोनों दानव पल भर के लिए चूक गए और इस पल में hi पब ने अपनी तलवार डॉ13 के पेट के पार कर दी. पैर दुरसी तरफ डॉ15 की आखें खुल गयी थी पैर ेबेचा पता होने के बाद भी खुद को संभल नहीं पायी थी. और डॉ15 ने अपनी तलवार और ेबेचा के पेट की तरफ बड़ा दिया था. पैर तब तक पब ये देख चुक्का था और डॉ15 का धयान पब की तरफ नहीं था तो पब ने उसके हाथ पैर hi अपनी तलवार चला दी. और उसका हाथ तलवार के साथ hi काट दिया पैर तब तक उसकी तलवार ेबेचा को एक घाव दे गयी थी. डॉ15 दर्द से चीख रहा था. और डॉ13 और डॉ14 जमीन पड़े थे. सलोनी ने ेबेचा को संभाला और वह से दूर हो गयी.

पब ने वक्त ख़राब न करते हुए डॉ15 की गर्दन पैर तलवार से वॉर करके उसके सर को धड़ से अलग कर दिया. और इसके साथ hi वो तीनो दानव मरे जा चुके थे. अभी ये तीनो जमीन पैर पड़े hi थे की पब के मन में एक नयी आवाज आयी…
 
थैंक यू भाई फॉर ा ग्रेट कमेंट .... :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:

दसमा ने गुरुपित को उसकी ख़ुशी दी है. और गुरु के साथ सेक्स भी जल्द HI आएगा..

भाई एक राज की बात है पब लिखने के पीछे... और वो ये है की मेरे नामका शार्ट भी पब है. और पंकज एक काल्पनिक नाम.. तो यदि में पंकज लिखता हु तो मुज्कोवो फील नहीं आता... फिर भी कोसिस करुगा...

:thanks::thanks::thanks::thanks:
 
अपडेट 287

पब ने वक्त ख़राब न करते हुए डॉ15 की गर्दन पैर तलवार से वॉर करके उसके सर को धड़ से अलग कर दिया. और इसके साथ hi वो तीनो दानव मरे जा चुके थे. अभी ये तीनो जमीन पैर पड़े hi थे की पब के मन में एक नयी आवाज आयी…

मयति (पब के मन में) – मालिक मैं मयति हु. आप सबसे पहले इन दोनों दानवो के सर भी काट दो. और फिर जितना जल्दी हो सके यहाँ से निकल जाओ और अपने साथियो को भी जाने को कहा दो… जल्दी करो मेरे मालिक…

पब पहले तो चौक गया. पैर फिर वो मयति की आवाज को पहचान गया. और उसको लग रहा था की जरूर कोई तो बात है जो मयति ऐसा कहा रही है इसलिए उसने मयति की बात मानते हुए सबसे पहले उन दोनों के सर काटे और फिर बोलै – जो भी यहाँ खड़ा है यहाँ से भाग जाओ नहीं तो सब जानते हो की मैं क्या कर सकता हु…

पब ने ये बात इतने कड़े लहजे में कही थी की सरपंच और पंडित भी चुप चाप वह से चल दिए. वैसे भी वो DR’s का हाल देख hi चुके थे तो ये तो वो भी समाज गए थे की वो इससे नहीं जीत पाएंगे. एक मानव के हाथ में दानवो की पूजनीय तलवार को देख कर hi वो दुविद्या में आ चुके थे. और फिर DR’s का हाल.. ा बुनको अपनी भी मूट साफ़ नजर आ रही थी. तो वो भी मौका जान कर जांदी hi वह से निकलने लगे की तभी कामिनी बोली –आप रुकिए जी, पहले इन दोनों पापियों को तो सजा दे दो जिसके लिए हम सब यहाँ आयी थी…

पब ने गुस्से से कामिनी को गुरते हुए कहा – कामिनी घर की तरफ चलो….

कामिनी का तो पूरा सरीर hi कैंप ुधा. और वो अपनी कार में जा बैठी. अब एक कार में ये सब तो आने थे नहीं. पब, गुरु, कामिनी, सविता, एरिका, ेबेचा, सलोनी, मंजू और माहि ये 9 लोग एक कार में कैसे आते इसलिए पब ने ेबेचा, मंजू और सलोनी को ले कर थोड़ा आगे जा कर टेलिपोर्ट हो गया. कियोकि ये तीनो hi घायल थी. सविता को गुरु ने पहले hi कार में लिटा दिया था. तो ये सब कार से हवेली पहुंच गए.

अभी सभी लोग पब के रूम में आचुके थे. केवल अवनि, अंकिता और जय दानव बेस में थे. बाकि सभी एक hi रूम में पहुंच चुके थे और अंकिता और अवनि को भी बुला लिया था. सविता को अभी तक होश नहीं आया था. और ेबेचा भी अभी दर्द में थी. पब, सलोनी और मंजू के सरीर पैर कई जख्म थे, उसको भी अपनी जीवन शक्ति बहुत काम लग रही थी. पैर उसके मन में अभी बहुत से सवाल गम रहे थे इसलिए उसने सबसे पहले मन hi मन मयति को पुकारा – मयति कहा हो तुम?? मैं तुमसे मिलना छटा हु..

पब के पुकारते hi वह मयति प्रकट हो गयी और उसको देख कर सभी की आखें खुली की खुली रहा गयी. कोई भी मयति को नहीं पहचानता था. उसकी सही ड्रेस और उसके चेहरे का तेज़ बता रहा था की वो कोई रानी है. पैर वो यहाँ कैसे?? सभी के मन में ये सवाल था पब को छोड़ कर..

मयति – मेरे मालिक आपकी गुलाम हाजिर है क्या हुकम है मेरे लिए???

मयति का ये कहना था की सभी के मुँह खुले के खुले रहा गए. एक गजब की सूंदर रानी खुद को पब का गुलाम बता रही थी. और वो सब उसको जानते भी नहीं…

पब – मयति ये सब क्या था??? क्यों तुमने मुझको वह से जाने को बोलै??? क्यों उन मरे हुए दानवो का सर कतबया?? तुम मेरी मदत के लिए कूद क्यों नहीं आयी?? इतने दिनों से कहा थी वैसे तो कहा रही थी की मैं आपकी गुलाम हु. हमेशा आपकी सेवा करुँगी पैर तुम तो एक बार भी नहीं आयी मिलने भी.. और आज भी केवल मुजो आदेश दे कर वह से जाने को बोलै….

मयति – शांत मालिक शांत…. एक एक करके आपके सभी सवालो के जवाब दूगी में.. पैर सबसे पहले मैं आपसे माफ़ी मांगती हु आपको आदेश दे कर वह से जाने के लिए बोलने पैर. प्लीज मुझको माफ़ कोर दो….

पब – उसकी जरुरत नहीं है मयति ये तो मैं भी समाज गया था की कुछ तो बात है जो तुमने पहली बार मुझसे बात की और ये सब कहा है.. मैं बस वो बात जानना चाहता हु….

मयति – हाँ अपने ठीक समजा. उसका कारन ये था की यदि आपमें से कोई भी वह रुकता तो उसकी मित्यु निश्चित थी.

सभी – क्या????

मयति – हाँ कियोकि जिनको अभी आप मार कर आ रहे है वो कोई सदर्न दानव नै है वो दानव रक्षक थे. वो दानव रक्षक जिनसे देवता भी भय कहते है. इनको हराना hi बड़ी बात होती है अपने तो उन तीन दानव रक्षक को मार hi दिया है. आप सभी सच में बहुत साहसी है.

सलोनी तो ये सुन कर कपङे लगी. कियोकि वो डॉ के बारे में जानती थी. वो ये सोच कर hi दर रही थी की उसने खुद डॉ से युद्ध किया है. डार्क इ मरे जब सलोनी कपङे लगी तो पब उसके पास गया और उसको खुद से चिपका कर उसको शांत करने लगा.

पब – यानि की डॉ ने खुद आ कर मुज पैर हमला किया?? पैर क्यों???

मयति – ये तो मैं भी नहीं जानती. हाँ पैर उन लोगो ने मेरे bête अमरसर को भी आपके खिलाफ कर दिय है मेने उसको बहुत संजय पैर वो भी आपको मरना चाहता है. कहता है की एक बार यदि उसने आपको मार दिया तो वो चंद्र हंस तलवार प् लेगा और फिर सदा के लिए अमर हो जायेगा. मेने संजय उसको की तुम अपने करम पथ से भटक रहे हो. हमारा करम तलवार और उसके मालिक की रक्षा करना है न की मरना…

पब – अमरसर क्या बाला है ये कहा से आ गया?? और ये कैसे अमर हो जायेगा इस तलवार को प् कर???

मयति – अमरसर मेरा बड़ा बीटा है. उनसे कई सालो तक भ्रम देव की तपश्या की. तब उसे वरदान मिला की उसको कोई नहीं मार सकता. उसकी मित्यु चाँद हंस तलवार से hi होगी.. वैसे भी ये तलवार सदा से दानवो के पास सुरक्षित थी और इसकी सुरक्षा भी हमारे पास hi थी. तो उसको मरने का कोई भय नहीं था. पैर जब तुमने इस तलवार को प् लिया तो उसको भय लगने लगा और वो DR’s से जा मिला. DR’s ने उसको आपके खिलाफ भड़का कर आप पैर नजर रखने को भेज दिया. पैर वो आपको मार कर आपकी तलवार पाना चाहता है.

पब – ोुह्ह्ह्ह ये तो बहुत hi खतरनाक बात है. मेरे तो बैठे बिठाये इतने खतरनाक खतरनाक दुसमन बन गए है और मुझको पता भी नहीं.. पैर डॉ मुझको क्यों मरना चाहते है?? और यदि मरना चाहते है तो अभी क्यों मरने को आये पहले क्यों नहीं??

मयति – ये तो मैं भी नहीं जानती. कुछ तो ऐसा हो रहा है जो सब से छुपा है. और वो क्या है ये समझना बहुत जरुरी है कियोकि एक साथ दानवो का रय बन कर पूरी दुनिया में तभी मचाना. डॉ का अमरसर को आपके खिलाफ करना. फिर DR’s का खुद आप पैर हमला. मुझको तो लगता है DR’s के पीछे कोई तो है और वो कोई बड़ी योजना बना रहा है. और शायद आप उसके बिच में आने लगे हो इसलिए hi उसने आपको मरने के लिए DR’s जैसे महाबलियों को भेजा है…

मयति की बात ने सभी को सोचने पैर मजबूर कर दिया. सभी के मंद ब्लॉक होने लगे. तो सलोनी बोली – आप प्लीज बाबा को बुला लो. मुझको बहुत दर लग रहा है. आज तो हम सब बच गए यदि DR’s ने फिर से हमला किया तो हम नहीं बच पाएंगे. पैर वो हमारे पीछे क्यों पड़े है??

पब – तुम ठीक कहती हो सलोनी गुरूजी को बुलाना hi होगा. मेने भी नहीं सोचा था की DR’s जब अभी तक किसी के सामने नहीं आये है तो अब भी क्यों आएंगे. पैर इन्होका सामने आना किसी बड़े खतरे का संकेत है गुरूजी hi उस खतरे को समाज सकते है.

गुरु – नहीं अभी गुरूजी को कोई नहीं बुलाएगा. सबसे पहले तुम सबका इलाज जरुरी है. पहले फर्स्ट अड़ तब गुरूजी को बुलाना या खुद गुरूजी के साथ चले जाना…

पब को गुरु के सब्दो में दर्द का अहसास हो चुक्का था. आज का दिन उसका था पैर पहले शांति नानी से मिलने जाने पैर वह से निराशा मिलना और फिर ये सब गुरु का दिल टूट रहा था और उसके टूटते दिल का अहसास पब को भी था. पैर इतने बड़े खतरे को अनदेखा करना भी सही नहीं था. पैर पब अभी चुप hi रहा और गुरु फर्स्ट अड़ बॉक्स लेन लगी तो मयति ने उसको रोका – रुकिए आप मैं अभी इन सभी को हील कर देती हु..

पब की कंडीशन वो नहीं थी की वो हील पावर उसे कर सकता. पैर मयति ने सभी को हील कर दिया. केवल सभी की जीवन शक्ति का ईस्टर डाउन रहा गया था. और वो ध्यान में बैठने से hi पूरा होने वाला था. फिर पब ने दयासुर को याद किया तो दयासुर भी वह आ गए. और जैसे hi उन्होकी नज़र मयति पैर पड़ी तो वो उनसे किसी बच्चे की तरह जा लिपटे.

दयासुर – मति अम्मा आप यहाँ?? पैर अम्मा तुमको देख कर दिल खुश हो गया…

मयति (दयासुर के सर पैर हाथ फेरते हुए) – मेरा बाबा केसा है… मुझको भी अपने बाबा के देख कर बहुत ख़ुशी हो रही है.

एक बार फिर सभी चौक गए और इस बार चोकने वालो में पब भी था. अपने गुरु को मयति से किसी बच्चे की तरह मिलता देख कर वो बहुत आश्चर्य में था.

पब – मयति तुम गुरूजी को कैसे?? …… ऊऊऊ … सुररररययय सॉरी तुमने hi इनको पला था सॉरी मैं ये बात भूल गया था….

दयासुर – बीटा तुम अम्मा का नाम ले कर क्यों बात कर रहे हो…

मयति – नहीं बाबा वो मेरे मालिक है तुम भूल गए चंद्र हंस तलवार का मालिक hi हरेश वंश का भी मालिक होता है. और मैं उनकी गुलाम हु तो वो मेरा नाम ले कर hi बुलाएंगे न..

पब – देखिये न गुरूजी मैं भी इनको बहुत बार समजा चुक्का हु पैर ये मानती hi नहीं हमेशा खुद को मेरा गुलाम hi कहती है और यदि मन करो तो कहती है की वो पाप की भागी बन जाएगी…

दयासुर – हाँ बीटा ये तो है. अब जब शक्ति आती है तो जिम्मेदारी भी साथ लती है. और साथ में बहुत से दोस्त और दुसमन भी अपने आप बन जाते है… (मयति की तरफ देख कर) वैसे अम्मा आप इतने सालो से कहा थी…

मयति – बीटा मुझको दानवराज ने त्रिकाल को एक वरदान के रूप में दे दिया था. और त्रिकाल के उस चक्रवेव के टूटते hi मैं त्रिकाल के बंदन से मुक्त हो गयी…

फिर पब दयासुर को आज की पूरी घटना बताने लगता है. तब दयासुर – सलोनी बीटा तुम सब वह कैसे पहुंची थी??

दयासुर की बात सुन कर सलोनी दयासुर के गले लग गयी उसके मन में अभी भी दर था. दयासुर के गले लग कर बोली – वो बाबा कुछ गोअन वाले आये थे कामिनी दीदी के पास, कहने लगे ठकुराइन हमे बचा लो सरपंच और पंडित से उसने हम सभी पैर बहुत जुर्म कर रखे है. और आज तो हद hi हो गयी है चोपला में बहुत सरे गाओं वालो को कुत्ते की तरह मार रहा है और कहा रहा है की बुलाओ अपने ठाकुर को, मैं भी देखु की वो कितना बड़ा मर्द है. साला मेरे गाओं का भवगान बनने चला है, बुलाओ उसको यहाँ यही उसकी समादि न बना दी तो कहना….

सलोनी की बात सुन कर बहुत के फेस पैर गुस्सा आ गया. पैर बहुत तो ये पहले hi जानते थे. तो वो शांत थे तब कामिनी बोली – हाँ बाबा ये सुन कर मुझको बहुत गुस्सा आया मेने सलोनी और ेबेचा को साथ चलने को बोलै तो मंजू, माहि और एरिका भी साथ आ गयी. जब हम वह पहुंचे तो सच में सरपंच और पंडित के आदमी गाओं वालो को पिट रहे थे.

फ़्लैश बैक –

कामिनी – सरपंच रोक ले अपने आदमियों को नहीं तो आज तू जिन्दा नहीं बचेगा…

सरपंच – हाहाहाहा अरे ठकुराइन तुम कहा आ गयी लड़ने. तू तो बिस्तर में लड़ने लायक सामान है. यदि तेरे पति में दम है तो उसको बुला. नहीं तो इनको पीटने दे और तू चल मेरे साथ बिस्तर में लड़ेंगे हम दोनों….

सरपंच की बात सुन कर सलोनी ने गुस्से में उसके पास पहुंची और एक थप्पड़ दिया तो सेल के गाल पैर 5 उंगलियों के निशान बन गए. सलोनी – कुत्ते अपनी औकात भूल गया है क्या??? आज तूने अपनी मूट को खुद दावत दी है.

सलोनी अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi सरपंच ने उसकी गर्दन पकड़ कर उसे हवा ने ुधा दिया और गुस्से से बोलै – साली तू 2 टेक की रंडी मुज पैर हाथ ुढती है देख में आज तेरा क्या हाल करता हु.. आअह्हह्ह्ह्ह

सरपंच की बात पूरी होने से पहले hi सलोनी ने अपने घुटने को हवा में लटके हुए hi मोड़ा और एक भरपूर प्रहार उसके मैं पॉइंट पैर कर दिया. सरपंच अपनी गोलिया पकड़ कर बेट्टा चला गया. और सलोनी उसके सामने कड़ी हो कर उसके मुँह पैर मुक्के मरने सुरु कर दी.

अभी सलोनी 2-3 मुक्के hi मार पायी थी की पीछे से आवाज आयी – उस बच्चे से कहा लड़ रही है दम है तो मुझसे लड़ मैं भी देखु तुजमे कितना दम है जो तेरी पति ने खुद आने की जगह तुम सब को भेज दिया. पैर यार हो तुम सब एक no का माल तुम्हारे साथ मज़ा बहुत आने वाला है….

सलोनी उस तक बढ़ती उससे पहले ेबेचा ने उस पैर हमला बोल दिया. पैर िभेचा का एक भी वॉर उसको नै लगा वो अपनी फुर्ती से ेबेचा के हर वॉर से बचता रहा. ये देख कर सलोनी भी वह पहुंच गयी तो दूसरा दानव भी आ गया अब ये दोनों उन दोनों से लड़ने लगी. अब ेबेचा ने अपनी तलवार से लड़ना सुरु कर दिया तो सलोनी उसके साथ अपने डाव पेच आजमा रही थी.

पहले तो दोनों hi उन दोनों का कुछ भी नहीं बिगड़ पायी फिर उन्होंने एक पल रुक कर फिर से अटैक किया तो डॉ पैर कुछ देर के लिए भरी पड़ने लगी. और दोनों ने अपने अपने प्रतिध्वंदी को मिटटी चटवा दी. पैर इस बार जैसे hi वो दोनों ुढे तो उनके अटैक घातक हो गए. और इन दोनों ने hi दोनों लड़कियों को एक –एक किक मरी उनके सीने पैर दोनों उड़ती हुयी जा गिरी कुछ दुरी पैर. गिरते hi दोनों बेहोश हो गयी उन दोनों को बेहोश देख कर मंजू और माहि ने मूर्छा संभाला और पब को बता दिया.

फ़्लैश बैक एन्ड

फिर पूरी बात बताने की बाद सलोनी दयासुर से बोली – बाबा अब न मुझको बहुत दर लग रहा है मैं DR’s से जा कर बिड गयी थी. वो तो अच्छा हुआ ये टाइम पैर आ गए नहीं तो वो तो हम सबको मार hi देता… बाबा वो फिर से हम पैर हमला तो नहीं करेंगे न….
 
अपडेट 288

डॉ के अटैक की पूरी घटना बताने की बाद सलोनी दयासुर से बोली – बाबा अब न मुझको बहुत दर लग रहा है मैं DR’s से जा कर बिड गयी थी. वो तो अच्छा हुआ ये टाइम पैर आ गए नहीं तो वो तो हम सबको मार hi देता… बाबा वो फिर से हम पैर हमला तो नहीं करेंगे न….

दयासुर – तू मेरी बहुत बेटी है और फिर भी ये कायरो जैसी बाते कर रही है. वो DR’s है तो क्या हुआ मेरी बेटी किसी से भी लड़ सकती है जब वो अपनी भक्ति से भोलेनाथ को खुश कर सकती है तो क्या वो उन पापियों से नहीं लड़ सकती?? बीटा तुम सच्ची के साथ हो तो हमेशा बिना किसी से डरे अपने फर्ज का पालन करो. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा वो तुमको मार भी देगा न पैर बीटा सच्चाई की रहा पैर चलते हुए मूट कभी खली नहीं जाती. तुमको कभी किसी से डरने की जरुरत नहीं है. सच्ची की रहा पैर चलने वालो का नियति भी साथ देती है तभी तो तुम्हारा पति आज तुम्हारे साथ है.

सलोनी – हाँ बाबा आप ठीक कहते हो. पैर पता नहीं क्यों उनसे मुझको बहुत दर लगता है…

दयासुर – तो याद रखना यदि तू उनसे दर गयी तो वो तेरे पति को मार देंगे और फिर रोटी रहना साडी उम्र…

सलोनी गुस्से से – बाबा……. कोई इनको हाथ तो लगा के दिखाए इनको चुने से पहले उसको हम सभी से टकराना होगा…

पब – शांत मेरी झषि की रानी शांत… तो गुरूजी अब आप hi बताइये की यदि DR’s सामने आ गए है तो अब उनसे कैसे निपटा जाये कियोकि ये कोई छोटे मोठे दानव तो है नहीं आज तो बच गए कियोकि हम सभी साथ थे. पैर आगे कोई हमला हुआ तो कुछ भी हो सकता है..

दयासुर – देखो बीटा ये तो मुझको भी बहुत दिन से लग रहा था की डॉ के पीछे कोई है. और मेरा शक 2 जानो पैर था एक थी मति अम्मा और एक दानव गुरु. मति अम्मा जब तुम्हारे साथ है तो केवल दानव गुरु hi बचते है. और यदि दानव गुरु इनके पीछे है तो ये तो तय है की कोई बड़ी योजना पैर काम कर रहे है कियोकि वो अभी छोटा गेम नहीं खेलते और उसका एक मात्रा उद्देश्य है देवताओ को हरा कर स्वर्ग पैर दानव राज को बैठना. और वो सदा ये hi करते आये है. पैर अब सवाल ये है की दानव राज तो इसके लिए कभी तैयार होंगे नहीं. तो फिर कैसे??

मयति – दया बाबा आप भूल रहे है की दानव राज की घोषणा सदा दानव गुरु hi करते आये है.

दयासुर – हाँ अम्मा पैर पिताजी के रहते ये सम्भब भी तो नहीं. की कोई उनको हरये बिना दानव राज बन जाये और मेरे हिसाब से अभी किसी में इतना डम्ब hi नहीं है की वो दानव राज को हरा सके..

पब – पैर गुरूजी अभी दानव राज तो कैद है न. केवल उनका देव रूप hi बहार है और अपने hi बताया था की वो दिन प्रति दिन कमजोर होता जा रहा है. इस कंडीशन में उनको तो कोई भी हरा देगा…

दयासुर – नहीं माँ के रहते ये सम्भब नहीं है. पिताजी के देव रूप तो केवल खड़ा भी रहे वो hi बहुत है माँ अकेले सब पैर भरी है.

मयति – फिर कोण हो सकता है जो दानव राज बनने के सपने देख रहा हो..

पब – क्यों अमरसर नहीं हो सकता वो?? केवल मेरी तलवार को छोड़ कर उसको कोई नहीं मार सकता अमरता का वरदान है उसके पास वो भी तो दानव राज बन सकता है..

दयासुर – नहीं वो नहीं बन सकता चाहे वो अमर है पैर वो कुछ डरपोक किस्म का है. यदि वो डरपोक नहीं होता तो डॉ के साथ में मिल कर केवल तुम पैर निघा रखने के लिए किम जोम बन कर न बैठा होता.

पब – क्या ***** देख का हेड किम जोम hi अमरसर है???

मयति – हाँ वो hi है. पैर आपको उससे घबराने की जरुरत नहीं है. वो अपने सामने आएगा भी नहीं जब तक ये तलवार आपके साथ है. (दयासुर की और देख कर) दया बाबा ये दानव राज का देव रूप कमजोर कैसे हो गया है?? पहले भी तो दानव राज ने अपने देव रूप को 90% पावर फुल कर लिया था. दानव रूप तो केवल श्राप के कारन hi बचा था.

दयासुर – अम्मा वो पिताजी का दानव रूप त्रिकाल की कैद में था न तो वो भी उस गोले में कैद है और पता नहीं उस गोले मैं ऐसा क्या हो रहा है की दानव राज कड़ी तपश्या के बाद भी दानव रूप को कमजोर नहीं कर प् रहे है बल्कि देव रूप की पावर भी दिन प्रति दिन काम होती जा रही है.

पब (चोकते हुए) – कही त्रिकाल को तो दानवराज बनाना की योजना नहीं है???

दयासुर भी शोकेड हो गए – क्या ये क्या पागलो वाली बात है….

फिर कुछ देर सोच कर बोले – बीटा मुझको लगता है की तुम सही हो, त्रिकाल को hi दानव राज बनाना की योजना है दानव गुरु की. और ये योजना बहुत hi पुराणी है हम लोग hi नहीं समाज पाए. कियोकि दानव राज को कैद में करना इसका एक बड़ा प्रमाद है. त्रिकाल के वो वरदान (पाप करने से जीवन शक्ति बढ़ने वाला और जिसको मरे उसकी जीवन शक्ति पाने वाला) भी त्रिकाल की सोच के बहार थे पैर त्रिकाल ने मगे. त्रिकाल के पीछे सुरु से hi दानव गुरु का हाथ था. फिर त्रिकाल का दानव राज को कैद करना… सच में बीटा यदि अल्पना की वजह से त्रिकाल का वो हाल नहीं हुआ होता तो अभी तक त्रिकाल दानव राज बन कर स्वर्ग पैर विजय भी प् लेता. मेरे समाज में अब सब आ रहा है. दानव गुरु की योजना सच में बहुत गहरी है. हम तो कभी सोच भी नहीं सकते की दानव गुरु एक मानव को दानव राज बनाना की योजना पैर काम कर सकते है…

पब – यानि त्रिकाल के इरादे सच में बहुत खतरनाक है और उससे भी खतरनाक है दानव गुरु के इरादे… पैर अब करना क्या है कियोकि त्रिकाल तो अभी उस गोले में कैद है जब तक वो कैद है कोई कुछ नहीं कर सकता..

दयासुर – नहीं बीटा ऐसा नहीं है, अब मेरे सब समाज में आ राह है दानव गुरु ने ये आतंक इसलिए hi फैलाया है ताकि देव कमजोर हो. और त्रिकाल को इस आतंक से जीवन शक्ति मिलती रहे. और शायद पाप की इतनी आदिकता के कारन hi दानव राज का दानव रूप मजबूत हो रहा है. सबसे पहले इस आतंक को रोकना होगा… देखो मुझको लगता है की पिताजी और माँ ये सब पहले से hi जानते है और इसलिए उन्होंने तुमको इस काम के लिए चुना है. एक मानव शैतान के विरुद एक मानव को hi खड़ा किया है नियति ने. नियति सदा hi संतुलन बनाये सख्ती है और जब भी संतुलन बिगड़ने लगता है उसके लिए कुछ ऐसी घटनाये होते है जो किसी की सोच के परे हो.

पब – गुरूजी हम भी वो hi सोच रहे थे मानवता के लिए पैर अब तो इसको रोकना और भी जरुरी हो गया है पैर DR’s के रहते ये कैसे होगा…

मयति – जहा तक मैं दानव गुरु को जानती हु वो कुछ भी करने से पहले बहुत सोचते है, पैर मैं अभी तक ये नहीं समाज प् रही हु की उन्होंने आज तुम पैर हमला क्यों किया??

पब – पैर मैं शायद इसका कारन जनता हु मयति. बात ये है की मेने hi अपने दुश्मनो को सामने लेन के लिए एक चल चली थी. मेने तुम्हारी दी हुयी उस विद्या से अपनी और अपनी सभी पत्नियों की शक्ति को हाईड कर रखा था. और शायद DR’s इस चल में फस गए. उनको लगा होगा की मेरे पास कोई शक्ति नहीं है. और मैं अपनी शक्तिया फिर से पाने की कोसिस कर रहा हु तो उन्होंने इसलिए hi मुज पैर हमला किया…

दयासुर – बहुत अच्छे पुत्र… और सच कहु तो ये तुम्हारी एक बहुत बड़ी कामियाबी है जो तुमने DR’s के 3 साथियो को मार दिया है. न जाने कितने देव दानव युद्ध हुए पैर बहुतो में दानव हरे भी पैर आज तक ये 15 डॉ कभी मारे नहीं गए. हमेशा hi ये बच कर आ जाते थे. आज पहली बार इनके 3 साथियो को मृत्यु का स्वाद मिला है. अब दानव गुरु तुम पैर जल्दी हमला नहीं करेंगे. पैर जब भी करेंगे वो बहुत hi खतरनाक होगा. याद रखना अगले हमले में तुम चारो तरफ से घिरे हुए होंगे और तुमको खुद को बचाना बहुत hi मुश्किल. पैर ये सभी 6-7 महीने तो नहीं होगा उसके बाद पता नहीं कब वो अपना गेम खेले..

पब – और यदि इतने दिनों में हम hi उसको खोज कर उन पैर हमला कर दे तो…

दयासुर – दानव गुरु है वो, जो विद्या वो जानते है कोई नहीं जनता… अब तो तुम भूल hi जाओ की तुम उसके ठिकाने तक कभी पहुंच भी पाओगे. हाँ उनको बहार निकलने पैर विवश कर सकते हो..

पब – वो कैसे..???

दयासुर – उनके सभी रय को मार कर, तुम जतनी जल्दी दुनिया से आतंक ख़तम कर डोज उतनी hi जल्दी वो बहार आने पैर मजबूर हो जायेगे.

पब – हम्म ये hi करना होगा अब… (मयति की और देख कर) मयति के बताओ की तुमने मुझसे उन मरे हुए दानवो की गर्दन काटने को क्यों बोलै था???

मयति – कियोकि वो DR’s थे. और उनको मारना बच्चो का खेल नहीं. तुमको पता है ये काम केवल कुछ महँ शास्त्रों से hi किया जा सकता है. जैसे – देवराज इंद्रा का व्रज, त्रिदेव और त्रिदेवी के शास्त्र.. वाकई देवो के शास्त्र तो फ़ैल है उनके सामने.. और उनको मरने की लिए उनके सर को धड़ से अलग करना जरुरी होता है. और यदि कोई उनकी गर्दन से निकले खून की गांध को अपने अंदर ले ले तो वो वही मार जाये.

दयासुर – हाँ पुत्र मति अम्मा ठीक कहती है, अच्छा अब मैं चलता हु. तुमको फिर कोई सहायता की जरुरत हो तो मुझको याद करना…

पब – हाँ गुरूजी….

फिर दयासुर जी चले जाते है तो मयति बोलती है – तो मैं भी चलती हु मालिक..

पब – जैसी आपकी मर्जी, पैर एक बात बताओ की इतने दिनों से तुम कहा थी. वैसे तो खुद को बड़ा गुलाम गुलाम कहती हो पैर तुमको मेरी याद कितने दिनों के बाद आयी..

मयति – नहीं ऐसी बात नहीं है, जैसे hi वो चक्रवेव टुटा था वैसे hi मैं आपके पास आयी पैर तब तक आप वह से जा चुके थे. और फिर मेने आपको बहुत खोजै पैर आप मिले hi नहीं. पैर आज जैसे hi अपने अपनी तलवार को निकला मुझको आपका पता मिल गया और मैं तुर्रंत आ गयी. (मन में) याद तो पता नहीं क्यों आपकी बहुत आती है. पता नहीं आपमें ऐसा क्या है की मुझको आपसे प्यार हो गया है. ये न दानव राज से हुआ और न hi इतना प्रेम मुझको अपने पति से हुआ. पैर आपके लिए दिल में अलग hi भाव आते है और मैं आपसे कहा भी नहीं सकती)

मयति भी वह से चली जाती है और फिर पब गुरु और सविता को ले कर सो जाता है पब के पुरे बदन में दर्द था. गुरु को दुःख तो था पैर वो भी मुद्दे की गहराई को समाज रही थी. 2 हॉर्स के बाद जब पब उड़ता है तो वह से सविता जा चुकी थी. वो और गुरु रूम में अकेले थे सही हुयी गुरु का चेहरा एक मासूम सी बच्ची के जैसा लग रहा था. गुरु इस टाइम इतनी पीरी लग रही थी की पब उसको किश करने से खुद को रोक नहीं पाया. और फिर उसको देखता hi रहा. अभी अंदर गिर चुक्का था. गुरु की भी आखें खुल गयी उसकी नजर सबसे पहले पब पैर hi गयी जो उसको एक तक देख रहा था. ये देख कर गुरु थोड़ा सा शर्मा गयी. फिर बोली – ऐसे क्या देख रहे हो??

पब – देख रहा हु मेरी गुरु कितनी सुन्दर है. जितना सूंदर उप्पेर से है उतनी hi सूंदर दिल से भी है. सच मैं जान मैं तुमको अपनी 1सत वाइफ बना कर बहुत खुश हु. और आज तुम में समां कर खुद को पूरा करना चाहता हु… बोलो गुरु इज्जाजत है???

गुरु – ऊऊह्ह्म्म्म ऐसे नहीं… मेने कुछ सोच है…

पब – तो बोलो न जान अब मुझसे साबरा नहीं हो रहा पता नहीं कितने दिनों में तो आज वो दिन आया है जब हम मिल सकते है.

गुरु – बेकार तो मैं भी हु.. और शायद तुमसे ज्यादा… पैर मेरे दिल में एक खुऐश है.. क्या आप उसे पूरा नहीं करेंगे…

पब – मैं अपनी गुरु की हर खुऐश को जरूर पूरा करुगा.. बोलो गुरु… गुरु एक बात कहु??

गुरु – हम्म्म

पब – गुरु देखो ये तो अब मैं जनता हु की तुमने ख़ुशी केवल खुअबो में hi देखि होगी.. तो तुम्हारे इतने साल में बहुत से सपने होंगे… तुमने बहुत बार सोचा होगा की यदि मैं ऐसा करती तो कितना मज़ा आता वैसा करती तो कितना मज़ा आता… गुरु मैं चाहता हु की अब तुम अपनी हर चाहत पूरी करो मेरे साथ… तुमने जब भी जो भी सपने सजाये हो मैं उनको पूरा करना चाहुगा….

पब की बात सुन कर गुरु की आखें ख़ुशी से झलक गयी और वो पब से जा चिपकी.. और दोनों में एक वाइल्ड किश सुरु हो गया. दोनों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था. केवल एक दूसरे के होंटो को चूसे जा रहे थे. गुरु के होंटो पैर पब ने 2-3 जगह काट कर खून भी निकल दिया था दन्त तो गुरु ने भी छूबए थे पैर पब का खून निकलना मुश्किल था..

पता नहीं कितनी देर तक ये एक दूसरे के होंठ और जीभ से खेलते रहे. इनका धयान तब टुटा जब अंकिता ने दोनों को आवाज दी – अब क्या होंटो को खा कर hi पेट बरना है?? पेट बर्न के लिए डिनर रेडी है दीदी…

अंकिता की आवाज से दोनों हड़बड़ा गए और अलग हो कर तेज़ तेज़ सांसे लेने लगे… जब दोनों नार्मल हुए तो दोनों के हैंतो पैर मुस्कान थी अंकिता तो बोल कर hi निकल गयी थी. फिर पब बोलै –तुमने बताया नहीं तुम क्या चाहती हो??

गुरु (नजसे झुका कर) – मैं अपनी सुहागरात शिवा नगर के जंगल में बनाना चाहती हु जहा मेने जीवन का एक बहुत बड़ा टाइम बिताया है…

पब – तो इसमें को सी बाड़ी बात है चलो चलते है फिर…

गुरु – जी नहीं अभी पहले डिनर फिर चलेंगे जैसे मैं कहुगी समजे…

पब – जो आज्ञा देवीजी…

फिर ये दोनों डिनर करने को पहुंच जाते है. दोनों सभी के साथ डिनर केर रहे थे और वो सब आज गुरु को छेद रही थी. गुरु को भी इसमें बहुत ख़ुशी मिल रही थी. गुरु आज अंदर से खुश थी.
 
अपडेट 289 (मेगा अपडेट - पंकज और गुरुपित)

गुरु और पब डिनर करके रूम में आ गए पब ने सभी को बता दिया की वो आज हवेली में नहीं रहेगा तो सब अपना ध्यान रखे. वैसे भी दयासुर ने बोलै hi था की दूसरा हमला इतनी जल्दी नहीं हो सकता तो पब ने अपना सारा ध्यान गुरु पैर hi लगा रखा था. पब ने गुरु को देख कर पूछा – हाँ तो डार्लिंग अब क्या आज्ञा आपके सेवक के लिए???

गुरु ने नजरे झुका कर अपने दोनों हाथ आगे कर दिए और उनकी मुठ्ठी खोल दी. उसके एक हाथ में सिंदूर की डिब्बी थी तो दूसरे हाथ में मंगलसूत्र था. पब ने भी गुरु की इच्छा को समाज लिया. और उसने आगे बाद कर पहले उसकी मांग में सिंदूर भर दिया और फिर मंगलसूत्र गले में बांध दिया. मगलसूत्र बंडवा कर गुरु ने झुक कर पब के पेअर छुए तो पब ने उसको गले से लगा लिया और बोलै – गुरु तुम सदा मेरे दिल में रहती हो और मैं तुम्हारी बहुत इज्जत करता हु. मैं तुमको वचन देता हु की हर इस्थिति में मैं तुम्हारे साथ रहुगा. सदा ऐसे hi तुमसे प्यार करता रहुगा.. तुम भी मेरा साथ डौगी न गुरु…

गुरु – मारते दम तक.. हमको कोई जुड़ा नहीं कर सकता… पैर मैं आज अपने एक और वादा चाहती हु…

पब – बोलो गुरु??

गुरु – आपको वादा करना होगा की इस घर में अब आप किसी और को नहीं लाएंगे… मैं ये तो जानती हु की जिस युद्ध को हमने सुरु किया है उसमे आपको कुछ भी करना पद सकता है. पैर अब इस घर में किसी और के आने से रिश्तो में तकरार हो सकती है. बहार आप चाहे किसी के भी साथ कुछ भी करे पैर शादी करके किसी को भी लाये तो ये गुरुपित आपको फिर इस घर में नहीं मिलेगी… और एक बात कोई भी बात हो किसी भी बात हो आप सब मुझको जरूर बतायेगे.. चाहे किसी को चुद कर आने की बात को या किसी को मार कर आने की बात आपको सब मुझको बताना होगा….

पब – मतलब की आप हमारी रिपोर्टिंग अफसर बनना चाहती है…

गुरु –आपको जो भी समझना है आप समजिये. मैं इस घर में अब किसी भी दुःख का साया नहीं देख सकती और इसके लिए जरुरी है हम सभी में एक दूसरे के प्रति विश्वास, और उसके लिए जरुरी है की आप से जुडी हर बात हमको पता हो. जो प्रेम और विश्वास हम सब में आज है वो ऐसे hi बना रहे उसके लिए मुझको आपकी रिपोर्टिंग अफसर बनना पड़े चाहे फिर बॉस मैं सब बनने को तैयार हु….

पब – और मैं भी तैयार हु अपनी गुरु को अपनी बॉस बनाना की लिए, आज से जो भी होगा गुरु तुमको मैं जरूर बताउगा और बिना तुम सभी की सलहा के कोई भी ऐसा कदम नहीं उधोगा जिससे हम सभी के रिश्ते पैर ाच आये…

गुरु – मम्मूउउउठहहह (पब को किश करती है) अब मैं बहुत खुश हु…

पब – तो फिर मुझको भी खुश करो न जान कबसे तुम्हारा इन्तजार कर रहा हु. बोलो चले अब…

गुरु – ऐसे नहीं चलना है…

ये बोलते हुए गुरु ने पहना हुआ सूट उतरा सुरु कर दिया. गुरु को कपडे उतरता देख कर पब तो बस उसको hi देखता रहा. उसका लुंड पेण्ट में अंगड़ाई लेना सुरु कर चुक्का था. गुरु के नंगे जिस्म को देखने भर से पब का लुंड रोड में बदलने लगा था. और जब गुरु का नंगा बदन दिखने लगा तो पब चौक पड़ा कियोकि उसके पुरे बदन पैर मेहदी की डिज़ाइन बानी हुयी थी जो उसको अद्भुत सुंदरता की मिशाल बना सही थी. एक तो वरदान में पायी अपशराओ की सुंदरता उप्पेर से मेहदी पब तो गुरु की सुंदरता में खो सा गया था…







गुरु ने जब अपने सभी कपडे उतर दिए तो उसने पब की और देखा तो वो उसको खा जाने वाली नजरो से देख रहा था ये देख कर तो गुरु बहुत ज्यादा खुश हो गयी. पैर उसको शर्म भी आने लगी तो वो पलट गयी और बोली – ऐसे क्या देख रहे है आप…

गुरु ने ये एक गलती कर दी उसके पलटते hi पब को उसकी छोड़ी गांड नजर आ गयी जो मेहदी से सजी हुयी थी. पब ने इतनी कामुक गांड आज तक नहीं देखि थी. पब को गुरु की कोई आवाज नहीं सुनाई दी वो तो बस उस गांड को hi घूरे जा रहा था. गर्दन से ले कर पेअर के पंजे तक बानी मेहदी की डिज़ाइन को देख कर पब का लुंड उछलने लगा था. पब से जब न रहा गया तो वो आगे बढ़ने लगा. और जब गुरु ने पब का कोई जवाब न सुना तो वो मुद कर देखने लगी. पब गुरु के पास पहुंच कर उसको अपने में भींच लिया पब ने गुरु को इतनी जोर से अपनी भंहो में भीचा था की गुरु की हड्डिया भी चटक गयी.

गुरु – आह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो जी… मारना है क्या???

पब तो गुरु के आवाज से जैसे नीड से जगा. और उसने अपनी पकड़ दिली कर दी – गुरु ये सब क्या है?? कब करवाया तुमने???

गुरु – क्यों आपको अच्छा नहीं लगा???

पब – ऊऊह्ह्ह जान अच्छा नहीं बहुत अच्छा लगा… तुम्हारा ये बदन की जान लेवा है उस पैर तुम यदि ऐसे कारीगरी करोगी तब तो हम पागल hi हो जायेगे न.. सच में आज तुम्हारा ये बदन इस महदी की सुंदरता में इतना खूबसूरत लग रहा है की मेरे पास शब्द नहीं है आज तुम्हारी तारीफ करने के लिए.. बस मन कर रहा है की तुम में समां जाऊ और उस सुन्दर बदन पैर अपना नाम लिख दू…

गुरु पब की तारीफ से बहुत खुश हुयी उसने भी अपने हाथो की पकड़ टाइट का दी…. पैर शर्म के कारन कुछ बोल नहीं पायी पब के सीने में अपना मुँह छुपा ली.

पब – गुरु तुम बताओ न अब क्या करना है मुझसे अब और नहीं रुका जा रहा जांणण…..

गुरु पब के सीने में सर घुसाए हुए धिरे से बोली – पहले आप अपने कपडे निकालिये और फिर ऐसे hi हम जंगल में चलेंगे…

गुरु की बात सुनने से hi पब के लुंड ने एक झटका मारा. खुले जंगल में नंगे बदन टेलिपोर्ट हो कर जाना और फिर वह घूमते हुए सेक्स करना ये सोच कर hi पब के लुंड ने झटका मार दिया था. पब तुर्रंत गुरु से अलग हुआ और 2-3 सेक् में hi नंगा हो गया. पब की बेकरारी देख कर गुरु के चेहरे पैर मुस्कान आ गयी. पब ने गुरु को भाहो में खींच और उसके होंटो को चूसने लगा. और टेलिपोर्ट हो कर जा पंहुचा शिवा नगर के जंगल में. पब ने भी इन जंगल की बहुत खाक छनि थी. आज यहाँ दुवारा आ कर पब के दिल में एक अलग hi ख़ुशी हो रही थी. ये hi वो जंगल थे जिनमे साथ चलते हुए गुरु के प्यार हो गया था.

जब ये जंगल में पहुंचे तो वह जौली जानवरो की आवाजे आ रही थी हवा की साये साये और जानवरो की आवाजे एक अलग hi रोमांच दोनों के दिलो में पैदा कर रही थी. दोनों यहाँ आ तो गए थे पैर होंठ अभी भी एक दूसरे में hi उलझे थे. पब का लुंड गुरु की नाभि में घुसा जा रहा था. गुरु के खड़े हो चुके निप्पल पब के सीने पैर चुभ रहे थे. गुरु भी उसने पब की छाती पैर घिस रही थी. पब के हाथ मेहदी लगी गांड को मशाल कर लाल करने पैर आमादा थे.

जब दोनों की सांसे फूलने लगी तो दोनों अलग हुए पैर पब रुकने को तैयार नहीं था वो पहले hi बहुत उत्तेजित हो चुक्का था. गुरु गहरी सांसे ले रही थी और पब ने उसकी गर्दन को चूमना सुरु कर दिया. पब ने गुरु की गर्दन पैर लगी मेहदी की लाइन्स पैर जीभ से चाटने लगा जैसे मेहदी को छुड़ाना चाहता हो. गुरु तो सिसकियों पैर सिसकिया लिए जा रही थी. गुरु ने खुद की सिसकियों को रोकने की कोई कोसिस नहीं की थी. आज वो खुल कर मज़ा लेना चाहती थी. पब के हाथ उसके चुचो पैर चल रहे थे. पहले तो पब ने बहुत धिरे धिरे चुचो को सहलाया जिससे गुरु का रोम रोम खड़ा होने लगा और फिर मशलना सुरु कर दिया. कभी गुरु को दर्द होता तो कभी मज़े से सिसक पड़ती… गुरु की आह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह ीिस्ससीई कक्कक्क्स hi हवा में गूंज रही थी.

पब ने गुरु को एक साफ़ पत्थर पैर लेता दिया और उसके पेट को चुचो के चारो और चाटने लगा. उप्पेर से निचे तो कभी निचे से उप्पेर. जैसे hi वो चुचो के पास पहुँचता गुरु को लगता की वो उनको अब मुँह में भरेगा. पैर वो चारो तरफ चाट कर फिर निचे चला जाता और नाभि में जीभ घुसा देता. इस बार जब पब गुरु के चुचो पैर पंहुचा तो गुरु ने खुद पब के चेहरे को पकड़ कर अपने चुचो पैर दबा दिया तो पब ने भी उसके एक निप्पल को चूसना सुरु कर दिया. निप्पल को चूसते हुए उसने एक हाथ से गुरु के दूसरे चुके को मसलना सुरु कर दिया. फिर पब के चूसने की स्पीड बढ़ती गयी और उसने निप्पल पैर दन्त hi गदा दिए और दूसरे निप्पल को उप्पेर की तरफ खींच दिया…

गुरु – आअह्ह्ह्हह ईईईई कक्कक्कक्स ऊऊह्ह्हह्ह ममममआ पागल कर डोज ाआज्जज्जज्ज टटटूउउउमम्मम खा जाओ िंकूओ आअज्ज्ज टककक किसी ने इनको हाथ तक नहीं लगाया है…. आअह्ह्ह्हह

गुरु की छूट से पानी बहाने लगा था वो तड़फ रही थी मज़े से. जिंदगी में पहली बार कोई उसके जिस्म से खेल रहा था. अभी गुरु चुचो के दर्द में खोई थी की पब ने उसकी छूट के दाने को मशाल दिया. और गुरु तेज़ चीखती हुयी झाड़ गयी. और फिर हाफने लगी. पब अब उसके एक निप्पल को बड़े प्यार से चूस रहा था. पैर तभी गुरु एक दम से पब को पत्तर पैर लेता कर उसके लुंड को पकड़ कर हिलने लगी. और फिर अपनी जीभ निकल कर टोपे पैर फिरने लगी. पब की एक आठ निकल गयी. फिर गुरु ने एक बार पूरा लुंड छठा और उसके बॉल्स को चाटने लगी. गुरु किसी कुत्तिया की तरह टैटू से ले कर लुंड के टॉप तक चाटने लगी. 3-4 बार उप्पेर से निचे तक चाट कर उसने पब के बॉल्स को मुँह में भर लिया और उनको चूसने लगी. और लुंड को हाथ से हिलने लगी. पब अब सिसक रहा था. जो चाहा रहा था गुरु उसके लुंड को चूसे पैर गुरु भी जैसे बदला ले रही थी. पैर कुछ देर में गुरु को पब पैर दया आ गयी और उसके मुसल जैसे लुंड को मुँह में बर्न की कोसिस करने लगी. थोड़ी देर की कोसिस में आधे से ज्यादा लुंड गुरु के मुँह में था और वो उसको चूस रही थी. पब ने गुरु के सर को पकड़ कर लुंड पैर दबाया हुआ था. और धिरे धिरे कमर हिला रहा था.

कुछ देर मुँह की चुदाई करके पब ने गुरु को एक पेड़ के सहारे खड़ा किया और निचे बेथ कर उसकी छूट पैर मुँह लगा दिया मुँह से लगते hi गुरु को एक तेज़ झटका लगा. उसकी पकड़ पेड़ की दाल पैर बाद गयी और पब की जीभ गुरु की छूट में घुस गयी..

गुरु – कक्कक्क्स ऊऊओह्ह्ह्हह ाआजजजजजज हीईई ससायबबबबबब ाआज्जम्म्मालललुगगगगीयी क्या….. आअह्ह्ह्हह ीित्तत्णना माज़जज़ाअ ननननाआह्ह्ह्हीईई कक्कक्स ईईईई ड्डड्डाआंणत्तत्त नननननाआह्ह्ह्हहीीी आआ

पब – चपड़ चपड़…. क्यों केसा लग रहा है जान… बड़ी hi मिधि है तू.. चपड़….

गुरु – आअह्ह्ह्हह कक्कक्स ोुर्ररर छहहाआटट्टुओ हहहहाआनं एआईएससीईए हीई छहहाआटट्टुओ ंणआह्ह्हियी ड्डआँन्नततत्तत्त ंन्नाःह्ह्यी प्प्ललललिएआससेई बब्बाःहूंउत्तत गग्गूदडग्गूदडीई ोुह्ह्ह ंन्नाःह्ह्यी मममआइईईईन्न्न ंन्नाःहीई सससआहहहा ससायककक्तीी ऊऊह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ममममआ ममारर्र गग्गाय्यीइइइइइ.. म्मारर गगाईयीईईई…

गुरु चीखती हुयी झड़ने लगी. उसके हाथ पेअर कपङे लगे तो गुरु ने पेड़ की दाल को छोड़ कर पब ने कंधो को पकड़ लिया और उसके उप्पेर झुकते हुए तेज़ तेज़ सांसे लेने लगी. पैर पब अभी भी उसकी छूट से निकले पानी को चाटने में लगा था. जब पबने वो पूरा पानी चाट लिया तो उसने गुरु को सहारा दे कर खड़ा किया और अपना लुंड उसकी छूट से भिड़ा दिया. पैर ऐसे सही एंगल नहीं बन प् रहा था तो पब ने गुरु को पेड़ पैर झुका दिया और उसके पीछे से अपना लुंड गुरु की छूट पैर रख दिया गुरु तो पब की कटपुतली बानी हुयी थी. वो अभी भी झड़ने के सुरूर में थी पब ने जैसे hi गुरु से आगे बढ़ने को पूछा तो गुरु ने भी हाँ में सर हिल्ला दिया पब बहुत देर से उत्तेजित हो रखा था तो उसका पहला दक्का hi तेज़ लगा और गुरु की 2-3 बार चूड़ी छूट को फाड़ते हुए उसका मुसल 1/3 गुरु की छूट में जा घुसा मोठे टोपे ने छूट की दीवारों को पूरा फैला दिया था. गुरु के सर से सभी सुरूर उतर गए और गुरु की एक तेज़ चीख हवा में गूंज उड़ती.

गुरु – aaaiiiiiiiiii ऊऊऊह्ह्ह्ह माआआआ ये क्या घुसा दिया…. ोुह्ह्ह मेरी फैट गयी…. ररूक्क्कुओ

पब गुरु की चीख सुन कर रुक गया नहीं तो वो दूसरा दक्का मरने hi वाला था. पब ने एक हाथ गुरु के निचे को झूलते चुचो पैर रखा तो दूसरे को डेन पैर. छूट को मसलते हुए उसकी चूचियों को भी मसलना सुरु कर दिया गुरु को कुछ hi देर में अच्छा लगने लगा तो पब ने फिर से एक जोर का दक्का मारा और फिर बिना रुक्के 2-3 दकको में पूरा लुंड जड़ तक घुसा दिया. गुरु के आशु निकल गए. छूट से खून बेहटा हुआ उसकी जहांहो पर आने लगा. पब ने एक हाथ से गुरु को सम्भला और दूसरे से गुरु की चूचियों को मसलने लगा. पब ने झुक कर गुरु किप ेथ को चेतना सुरु का दिया..

गुरु (रट हुए) – आह्ह्ह्ह मार दिया तुमने…. इतनी भी क्या जल्दी थी आपको मा बहुत दर्द हो रहा है … ोुह्ह्ह कुछ करूओ न… माआ ोुह्ह्ह्ह कक्किएस्साआ जालललीमम खशम दिला दिया तुमने….

पब – सॉरी गुरु वो मेने सोच की बार बार दर्द देने से अच्छा है एक बार में hi दे दो… और अब जैसा भी हु तेरा hi हु मेरी लुगाई…

गुरु – लुगाई हु तुम्हारी पैर तुमने तो रंडियो की जैसी मेरी छूट फाड् दी.. मा…

पब – अब मर्द तेरा हु तो तेरी hi फाडूगा न.. या तेरी अम्मा की फाडू.. बोल…

गुरु – हाँ तुमको मौका मिले तो मेरी अम्मा की भी फाड् देते… हहहययययय मेरी छोटी सीई छूवोत्तत्त का सत्यानाश कर दिया तुमने….

पब – अभी कहा अभी तो सत्यानाश होना बाकि है मेरी जान कहे तो सुरु करे…

गुरु – फाड़ते टाइम पूछा था क्या बस फाड् दी अब क्यों पूछ रहे हो जो करना है करो मैं कैसे रोक सकती हु तुमको खशम जो हो मेरे….

गुरु की गरम गरम बातो ने पब को बहुत जोस दिला दिया और गुरु भी इन गरम बातो से बहुत संभल चुकी थी. पब ने धिरे धिरे दकके लगाने सुरु किये तो कुछ hi दकको में गुरु भी फुल मूड में आ गयी…

गुरु – हैं ऐसे.. होई… फाड़ूऊ… अपनी लुग्ग्गैयी… कक्कीी बुस्स्सस बब्बूउर्ड्र्र का भोसड़ा बना दो….. आज बायणनना दो इस बुर का भोसड़ा… साल्ल्लूओ से रोत्त्तीय एआयईईई हहहाआईई ईई… आआह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह… ाआज्जज्जज्ज सससाललल्लीई ककूवो कक्कक्क्स कखहुब्ब्ब कक्कूउत्त्त्ततुओ…. आअह्ह्ह्हह ….

पब – हहहहाआनंनं आजजज मैं अपनी लुगाई की बुर्र खूब कुटुगा… अब तो रोज्ज्ज्ज hi कुटुंगग्गाआँ तेरई बुरर्र… ब्बूउल्ल कूऊत्तुवाय्यएईजीई नन्ना…

गुरु – ह्ह्ह्हआआआ ह्ह्हह्ह्हम्मम्मम कक्कक्क्स तुमममहहरररीई लआईई हूँ ब्बीिन्नं पुछही भी कककुत्त्त सायकककोऊ तूऊमममम … बब्बूउससस आअह्ह्ह्हह

पब – हहहाआनं ररोूजज कुटुंगग्गा, ऑर्डर अब तो सब के संग भी कुतुगग्गा टेरिइइइ… त्तीरररीी जजीएससीई गरम बुर्र किसी की नहीं हीी ….

गुरु – सायछहहीइ मीरररीी ज्यादा गरम है क्या….

पब – हॉँण्णन जान तीररीई तो मिरररी लल्लूऊणण्ड को hi जला रही है.. ऐसा लग राह है की गरम लावे मम्मी लुंड दुप्की मर रहा है बार बार…. सच में तू बहुत गरम है…

गुरु – गरम तो होगी hi नाआ स्स्सस्साआललल्लूऊओ से कुटिइइइइ ज्जुऊ नाहहीईई ठहियइ… आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह टट्ट्टीीज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ ोोूररररर टट्ट्टीेईज़्ज़्ज़्ज़ कक्कक्कक्कक्स aaaaaaaaaa गेयीईई गगगआयीईई मंमांननीये फफ्फीीिर्रर्र सस्सी गगगगयीईईई….

गुरु एक बार फिर झड़ने लगी थी. गरम बातो ने गुरु को फिर से झड़ने पैर मजबूर कर दिया था. गुरु के कहने पैर पब ने कुछ जोर के दकके गुरु की छूट में मार दिए थी और फिर उसको झड़ने दिया… झड़ते हुए गुरु खुद को संभल न पायी और पब के हाथ में झूल गयी… कुछ देर बाद पब ने गुरु के पेट और चुचो को सहलाना सुरु कर दिया. लुंड तो अभी भी उसकी छूट में hi था गुरु धिरे धिरे फिर गरम होने लगी. जब गुरु थोड़ा गरम हुयी तो उसने पब के लुंड को छूट से बहार निकला और पेटो की तरफ देखते हुए आगे बढ़ने लगी. पब खड़े लुंड को ले कर नंगी गुरु के पीछे पीछे जा रहा था.

गुरु एक मोठे तने वाले पेड़ पैर चढ़ गयी और पब भी गुरु के पीछे पीछे चढ़ गया. एक मोठे से तने पैर पहुंच कर गुरु ने पब को उस पैर लेता दिया और उसके लुंड को छूट पैर सेट करके पब के उप्पेर छा गयी. पब उस तने पैर अपने आप को संभाते हुए गुरु को भी संभल रह था. गुरु का न निचे गिरने का दर था और न चोट लगने का दर.. बस गुरु पब के लुंड को छूट में ले कर कूड़े जा रही थी. गुरु पागलो की तरह खुद रही थी. अपनी चूचियों को पब की छाती पैर रगड़ रही थी. गुरु का पागलपन पब के कण्ट्रोल से बहार लग रहा था. पैर पब भी गुरु को उसके मन की करने से रोक नहीं रहा था उसका पूरा साथ दे रहा था. गुरु खुद को ज्यादा देर संभल न पायी और फिर से झड़ने लगी. झड़ते हुए वो पब की भंहो में झूल रही थी. लुंड अभी भी छूट का रूस पि रहा था. कुछ देर में सांसे ठीक करने के बाद दोनों पेट से निचे आ गए.

वही पास में एक पेड़ की डाली बहुत निचे को थी तो पब गुरु को उसके पास ले गया और गुरु को उस पैर लटका दिया. गुरु अपने दोनों हाथ और पैरो की कैंची बना कर पेड़ की डाली पैर झूल रही थी और पब ने जमीन पैर खड़े हो कर उसकी छूट में लुंड पेल दिया.





गुरु पैर आज चुदाई का भूत सबर हो चुक्का था. वो बस छूटे रहना चाहती थी. पब पेड़ की डाली पैर लटकी गुरु की छूट में लुंड फशाये उसे चूड़े जा रहा था और गुरु फुल मस्ती में सिसकिया पुरे जंगल को सुना रही थी. कुछ देर में hi गुरु को लटकना मुश्किल होने लगा तो पब ने गुरु को गोद में ले लिया और खड़ा खड़ा उसे छोड़ने लगा.

गुरु – आह्ह्ह्ह ीीी कक्ककक्कक्स मेरी मम्मारररड़ड़ड़ड़ मम्मूउज्ज्जक्क्कूओ जहहहाआररर्णननी मई ली चल .. सच में आज मेने अपनी जन्नत देख ली. देख ली मेने अपनी जन्नत… आअह्ह्ह ब्बूउसस झाररणनई के न्नीिछ्छी और छोड़ दे mujko…aaahhhh कक्कक्स… अअअअअ कछहहाललल ननननाआ… नंनाह्ह्हियी टट्टीेललल्लीप्पोर्ट… नहीं होना.. ऐसे hi छोड़ते हुए ले चल मुझको झरने तक पास में hi है..

पब – ओह्ह्ह गुरु तू सच में पागल है. पता नहीं क्या क्या करवाएगी… पुरे जंगल में घूम घूम कर चुद रही है और अब झरने के नीच छोड़ना है तुझको… देख तो साली तेरे छूट चुड़ते चुड़ते सूजने लगी है.. देख अब बस कर नहीं तो बाद में तुझको बहुत दर्द होगा…

गुरु (गुस्से से) – सेल क्या हुआ दम निकल गया क्या तेरा.. जो कहा सही हु कर न, या मन बार गया मुझसे?? सूजती है तो सूजने दे.. फैट जाने दे इसको आज.. साली सालो से रो रही है ये.. आज इसको भी तो पता चले की कोई है जो इसको कुचल सकता है.. तू कुछ मत सोच बस मज़े ले.. ये दर्द hi मेरे उन जख्मो की दवा है जो सालो से मेरे दिल पैर लगे हुए है.

गुरु सच में आज पागल हो गयी थी. क्या और कैसे बोल रही थी उसको कोई होश नहीं था वो बस चुड़ते रहना चाहती थी. पब भी उसका पूरा साथ दे रहा था. पब को गुरु की चिटा भी हो रही थी उसकी छूट पैर सूजन आ चुकी थी पैर वो रुकना नहीं चाहती थी और पब उसको बिच में छोड़ना नहीं चाहता था. तो पब भी उसको गोद में लिए चल दिया झरने की तरफ. गुरु तो चलते हुए भी लुंड पैर कूद रही थी. पब के लिए गुरु किसी गुड़िया के जैसी hi थी. उसको ुधा कर चलना उसके लिए नार्मल चलने जैसा hi था. झरने तक पहुंचते हुए गुरु एक और बार झाड़ चुक्की थी. और अब वो एग्रेसिव हो गयी थी. वो पब के जिस्म पैर कभी कही कटती तो कभी चाटने लगती, बड़बड़ाना तो बंद hi नहीं हो रहा था. पब भी उसकी इच्छा को पूरी करते हुए उसके जिस्म से खेल कर मज़े ले रहा था. उसको अपने मज़े से ज्यादा गुरु की चिंता थी.

जरने के निचे आते hi ठन्डे पानी ने दोनों की आग को फिर से भड़का दिया. और फिर दोनों फुल मस्ती में सुरु हो गए. पोज़ बदल बदल कर झरने के निचे गुरु चुदती रही और पब छोड़ता रहा.









जब झरने के निचे गुरु दूसरी बार झड़ी तो पब ने भी अपने वीर्य की फुहार उसकी बच्चेदानी में छोड़ दी. कियोकि अब गुरु की छूट से थोड़ा थोड़ा खून आने लगा था. पब के गरम वीर्य को अपने अंदर महसूस करके गुरु की आत्मा तृप्त हो गयी और वो बेहोश सी पब के उप्पेर लुढ़क गयी. पब ने जैसे hi अपना लुंड गुरु की छूट से निकला गुरु पूरी तरह बेहोशी के हाल में चली गयी. पब ने वही पैर गुरु को और खुद को साफ़ किया. झरने के ठन्डे पानी के निचे भी गुरु की बेहोशी नहीं टूट रही थी. पुरे सरीर पैर निशान hi निशान थे. कुछ जगह तो नीला पद चुक्का था. पब को गुरु की चिंता हुयी तो उसने गुरु को उद्या और अपने रूम में टेलिपोर्ट हो गया. रूम में आते hi गुरु को बीएड पैर लिटा कर पहले साफ़ तोलिये से उसका गीला बदन सुखाया और फिर उसको चक किया तो उसे फीवर आने लगा था.

पब ने सबसे पहले गुरु को कुछ हद तक हील कर दिया. जिससे उसको कोई बड़ा खतरा न हो. पैर उसको पूरी तरह हील नहीं किया था ताकि गुरु को अपने दर्द का अहसास हो और वो ऐसा पागलपन फिर न करे
 
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