MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 3 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 18

दोनों माँ बेटी को कुछ समाज नहीं आता की हो क्या रहा है. पैर वो दर से कुछ नहीं बोलती. बस गुरु को देखती रहती है. और गुरु उसके इलाज में लगी हुई थी. वो कुछ जड़ीबूटी भले आयी थी बहार जा कर. और उनको पब को दे दिया था. कुछ देर की कड़ी म्हणत राग लायी और पब अब नार्मल हो गया था. और गुरु ने अवनि को इशारा किया तो दोनों मिल कर उसको ले कर बीएड पे लिटा देती है. सविता एक और कड़ी बस देख रही थी. गुरु दोनों को ले कर बहार आ जाती है. हाँ अब बोलो क्या बोलना है. और एक चेयर पे जा कर बेथ गई.

सविता अभी भी गुस्से ने थी वो उस बात को हजम hi नहीं कर प् रही थी जो पब ने बोली थी.

सविता – तुमने उस लड़के को मेरे रूम में क्यों सुलाया है. निकल जाओ मेरे घर से…

गुरु – अभी थोड़ी देर पहले तो उन दोनों गुंडों का लुंड बरी मज़े से चूस रही थी. उनको तो नहीं निकला तूने. क्या उन्होंने ज्यादा रस दिए थे. मेरे पति ने तो तुजसे पूछ hi है न तो क्यों हगामा कर रही है. रेट बोल अपना.

गुरु की बात सुन कर सविता तो मरे सरम की जमीं में गाड़ी जा रही थी वो अपना सर अपने पेरो में छुपा कर रोने लगती है. और अवनि तो पागलो की तरह कभी गुरु को तो कभी अपनी माँ को देख रही थी. की उसकी माँ इतनी गन्दी बात सुन के भी चुप कैसे है.

अवनि – ये क्या बत्तनीजी है (और अपना हाथ तप्पड़ मरने के लिए उड़ाती है)

पैर गुरु उसका हाथ बिच में hi पाकर लिटी है और बोली – ये ठाकुर की होने वाली रखेल अपनी ोकत में रहा नहीं तो अभी तेरी छूट ने डंडा घुसा दूगी. फिर ठाकुर को बस एक भोसड़ा मिलेगा बस….

अवनि – क्या बाक रही हो. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी गठिया बाते करने की…

गुरु – यदि में बक रही हु तो अपनी माँ से पूछ कितने में बेचा है तेरे को… ठाकुर ने अच्छा रस दिया होगा.

सविता –(रट हुए) भगवन के लिए चुप हो जाओ सब. प्लीज चुप हो जाओ…

गुरु – में जब से कहा रही थी तब तो तेरी जबान बहुत चल रही थी. अब क्या हो गया लुंड सुग लिया का मेरे पति का.

अभी गुरु पुरे गुस्से में थी. उसके पति को मर जाने को बोलै था उसने कैसे छोड़ देती. पैर अब वो दोनों एक दम संत थी. अवनि को तो इतना बारे जतका लगा था की वो कुछ सोच hi नहीं प् रही थी. उसनी माँ का जैसे संत होने को कहना इस बात का सबूत था की गुरु की बातो में सच्चाई है. अवनि ने इतनी गन्दी और कड़वी बाते आज तक नहीं सुनी थी. और सविता तो अवनि को सच का पता लगने से समाज hi नहीं प् रही थी की वो क्या करे. उसने सोचा भी नहीं था की अवनि के सामने ये बाते ऐसे आएगी.

30मं तक कोई कुछ नहीं बोलै. तब अवनि ने छुपी तोड़ी –

अवनि – आपको क्या मिला हमारी जिंदगी में ये तूफान ला कर. हम माँ बेटी को अपने अपनी बातो में hi मार दिया है. इससे अच्छा तो ये है की में अपनी जान दे दू. मुझसे ये बर्दास्त नहीं हो प् रहा है.

गुरु – हां तुम जान दे सकती हो. पैर सोच लेना फिर तुम्हारे भाई का क्या होगा. उस माँ का क्या होगा जिसने पूरी जिंदगी तुम दोनों के लिए क़ुरबार कर दी. उस माँ का क्या होगा जो पता नहीं कितने दिनों से ठाकुर की डंकिया को झेल रही है और तुमको पता भी नहीं है. वो पल -2 मर रही है. पर बस तुमको खुस देकना छाती है.

सविता गुरु को मुँह फारे देखती है…

अवनि – आखिर तुम चाहती क्या हो. न तो जीने दे रही हो और न मरने… तुम बताओ क्या चाहती हो तुम

गुरु – सविता की तरफ – सविता जी पहले तो में माफ़ी चाहती हु. जो कुछ देर पहले मेने किया उस के लिए. पैर अपने मेरे पति को मरने का बोलै वो में बरदास नहीं कर पायी.

देखो हम तीनो के मान में बहुत सरे सवाल है. और उनके जवाब भी हम तीनो के पास hi है. तो सन्ति से एक एक कर के अपनी पूरी बात बोलै जिससे सब को सभी बातो का जवाब मिल सके. और ये भी सोच सके की अवनि को ठाकुर से कैसे बचाना है.

सविता – क्या सच में अवनि बच सकती है? क्या सच में?

गुरु – हाँ, पैर आपको छोड़ना पड़ेगा मेरे पति से. अब आप कोई सवाल नहीं करेगी यदि अवनि को बच्चन है तो सुरु करो अपनी बात

सविता (हर मन कर सब बताने का फैसला कर चुकी थी. कियुकी वैसे भी बस कल का दिन hi था, जब उसको ये सब बटाना था और उसको ठाकुर की रखेल बनने को मन्ना था.)– बात ये है की 15 दिन पहले ठाकुर रात को यहाँ आया था. और मुझसे बोलै की वो अवनि से शादी कर के उसको अपनी रखेल बनाना चाहता है. मुझको गुस्सा तो बहुत आया. पैर जैसे hi में ुचि आवाज में बोली उसके एक आदमी ने मेरे गाल पे तप्पड़ मर दिया. और मैं कुछ न कर सकीय. पैर फिर भी मेने हिम्मत कर के ठाकुर को मन कर दिया. तो ठाकुर ने कहा की - उसका अणि पे दिल आ गया है. नहीं तो अब तक तू और तेरी बेटी दोनों को एक साथ छोड़ चूका होता. चलो में तुमको सोचने का टाइम देता हु. 5 दिन है तुम्हारे पास सोचो और हां बोल दो. नहीं तो तुम मुझको जानती नहीं हो. और फिर वो चला गया.

फिर 6 दिन तक कुछ नहीं हुआ. मुझको लगा की ठाकुर भूल गया. मेने रहत की सास ली. पैर उस दिन देर रात तक तेरा भाई खेतो ने नहीं लोटा तो मुझको चिंता हुई. दोपहर में खाना देने गई थी तो वो खेत पे था. और जब रात को पहुंची तो वह कोई नहीं था. मैं दर गई. और मेरा दर सही निकला. अगले दिन ठाकुर के 2 आदमी ए. और बोले जड़ी तुम अपने बेटे की जान बहाना चाहती हो तो हमारे साथ चलो. मैं क्या करि चल दी उनके साथ और वो मुझको जंगल में ले गए. वह पे ठाकुर पहले से मौजूद था. उसने मुझको बहुत डराया. और मेरी बहुत बेज्जती की.

गुरु – क्या किया तुम्हारे साथ??

और पब को होश आ गया था. गुरु के रूम से निकलते hi. पैर वो बहार नहीं आया बस उन लोगो की बाते सुन रहा था. गुरु का वो रूप देख कर वो चौक भी गया था. और उसको गुरु पे प्यार भी आया था. की वो उससे कितना प्यार करती है.

सविता – ठाकुर के आदमियों ने पहले मेरे कपट उतर दिए. मैं 8 आदिमयो के सामने ब्रा और पेंटी ने कड़ी थी. फिर ठाकुर के आदमी मुझको कभी मरते तो खबि मेरे बूब्स दबा देते. और फिर एक ने मेरे बाल पाकर केर ठाकुर के पेअर पे मेरा सर रख दिया. और मुझको ठाकुर के जुटे चाटने परे. तब ठाकुर बोलै – सुन यदि तू अपने बेटे को बचाना चाहती है तो अपनी बेटी को बुला कर उससे हमारी सधी करा दे उसको अपनी रखेल बना कर रखेगी जिंदगी भर. उसको किसी चीज की कमी नहीं होगी. और यदि तूने मन किया तो तेरे बेटे को मर कर तुम दोनों माँ बेटी को उदा लगे. और फिर दोनों को एक साथ छोड़ कर अपने आदमियों के लिए छोड़ देंगे. वो लोग क्या करेगे तुम दोनों के साथ उसको तू अभी कुछ देर में महसूस करेगी. और यदि तूने किसी की हेल्प लेने की सोची भी तो तेरे बेटे के साथ वो भी मरेगा.

फिर ठाकुर ने अपने आदमियों को कहा की तुम इसके साथ कुछ भी कर सकते हो पैर याद रहे एक तो ये मारे न और इसको कोई अभी छोड़ेगा नहीं. (ठाकुर मन में – साली छोड़ गई तो इसका दर hi ख़तम हो जायेगा). चलो सुरु हो जाओ 10मं है तुम्हारे पास इसकी जवानी लूटने को.

बस फिर क्या था कुत्तो के जैसे टॉट परे मुज पैर पता नहीं क्या क्या हो रहा था. मुँह तो 1 सेक् को भी खली नहीं रहा. बिना चूड़े hi मेरी हालत बहुत ख़राब जो गई. ठाकुर बोलै सुन ये 10मं में तेरे साथ ऐसा कर सकते है तो सोच जब दिन रात ये तुज पैर और तेरी बेटी पैर चढ़े रहेंगे तो तुम दोनों की क्या हालत होगी. अब तू सोच ले और जब मन करे अपनी बेटी को ले आना हवेली पे. तब तक तेरा बीटा मेरे पास रहेगा. और फिर सब छाले जाते है. में रोटी रहती हु बड़ी मुश्किल से अपनी हालत ठीक की और घर पहुंच गई. मैं किस्से मदत मांगती कोण था मेरा अपना पूरा गाओं तो मेरे खिलाफ है. और ठाकुर गाओं का भगवन. गाओं वालो की नजर में वो देवता है. ठाकुर अपनी काली कमाई में से कुछ रस गाओं पैर खर्चता है. तो में क्या कर सकती थी. मैं बहुत दर गई जो मेरे साथ हुआ उन 10मं में. वो सहना मेरे बस का नहीं था. तो मेरी फूल सी बच्ची कैसे सहती. सोच -2 के मेरा दिमाग थक गया. तब मेने अवनि को ठाकुर की रखेल बनाने का फैसला किया. इससे वो रखेल तो होती पैर जिन्दा तो रहती न. और मेरा बीटा भी बच जाता. मेने एक लास्ट कोसिस करने के लिए ठाकुर के पास गई उससे मिलने. मेने उससे कहा की वो मुझको अपनी रखेल बना ले और मेरे बच्चो को छोड़ दे. पैर वो नहीं मन. वो बोलै तुझको भी बनना है तो तू भी आजा पैर मुझको तो तेरी बेटी चाहिए. और तू सोचे की तू उस को उसके ओफ्फिस से कही दूर भगा देगी तो सोचना भी मत मेरे आदमियों की निगरानी में है वो. वो **** ऑफिस में देहली में काम करती है न. में ये सब सुन कर और भी दर गई और मेने अवनि को यहाँ बुला लिया. पर समाज नहीं आ रहा था की इससे कैसे कहु ये बाते. बस ये सोचते हुए दिन निकल गए और आज सुबह ठाकुर के 2 आदमी आये थे घर.. और फिर उसने सुबह की साडी बात बता दी.

गुरु – जब वो दोनों आये थे तब हम दोनों भी तुमसे मिलने आये थे. अंदर से तुम्हारे रोने की आवाज सुन कर हम दोनों खिड़की पे पहुंचे. और हमने सब देख लिए. मेने पब को बड़ी मुश्किल से रोका था. नहीं तो वो उन दोनों से लड़ने जा रहा था.

अवनि (रट हुए ) माँ मुझको माफ़ कर दो. मेरी बवह से अपने इतना कुछ रहा है. और में इनकी बात सुन कर आपको गलत समाज बैठी. माफ़ कर दो माँ….. (और वो सविता के पेअर पकड़ लेती है. सविता उसको उदा कर सीने से लगा लेती है और चुप करवाने लगती है)

गुरु – अवनि और सविता तुम दोनों भी मुझको माफ़ केर दो मेने तुम दोनों के साथ ऐसा बर्ताव किया. पैर तुम दोनों संत नहीं हो रहे थे तो मुझको करना पारा. और सविता तुमने उस इंसान को मरने के लिए बोल दिया. जो मुझको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है.

अच्छा एक बात और बताओ की तुम अभी तक कुवारी क्यों हो??

ये क्यू. सुन कर सविता शर्मा गई तो अवनि चौक गई. उसकी माँ इस उम्र तक कुवारी है. यानि की उसकी माँ ने हम दोनों भाई बहन के लिए अपनी सब खुशिया का गाला खोट दिया.

सविता – ये तुम क्या…. तुमको कैसे पता ये.

गुरु ने सविता को उन गुंडों के जाने के बाद की साडी बात बताई. की कैसे उसने उसकी जान बचाई और क्या क्या किया.

गुरु – अवनि में तो भूल hi गई जा किचन से सब के लिए खाना ले आ. तेरी माँ अभी कमजोर है. उसको खाने की जरुरत है.

अवनि न चाहते हुए भी चली गई.

गुरु – अब बोलो

सविता – मरी शादी मेरे जीजा से हुई है. मेरी बहन के बच्चे है ये दोनों. जब मैं सधी कर के इस घर में आयी थी तब ये दोनों बच्चे थे. और इनके पिता बीमार थे. एक तरह से मुझको अपने जीजा और बच्चो की देख भल के लिए बेजा था. सधी के दिन भी उनकी तबियत ठीक नहीं थी. और फिर कभी हुई नहीं 15 दिन में hi वो मर गए. और मेने कभी इस बारे में सोचना बंद कर दिया. और बच्चो को hi अपनी जिंदगी मन लिया.

कुछ देर में अवनि सब के लिए खाना ले आये. तो गुरु उड़ कर मेरे पास आ गयी मुझको जगा हुआ देख कर और सही हालत में देख कर मुस्कुराई .

गुरु – कब उड़े

पब – मेरे सब सुना. तुम तो बरी खतरनाक हो यार. इतनी बुरी बुरी…. भगवन बच्ये..

गुरु – हाहाहा …. तुमको अब कोई नहीं बचा सकता में तो तुम्हारे गले पद गई अब तो. और कोई मेरे पति को मरने को बोले और में उसको छोड़ दू. ये में नहीं कर सकती.

पब – गले कहा पारी हो. तुम तो इतना दूर हो.

पब खड़ा हुआ और उसको भाहो में ले लिया. और उसकी आखों में देखने लगा. और फिर उसके गाल को चुम लिया. गुरु ने नजरे झुका ली – कहा- चलो बहार खाना खा लो.

फिर वो दोनों भी बहार आ गए.

खाना कटे हुए गुरु – पब तुम देहली से हो??

पब – हाँ

गुरु – तुमने कभी बताया नहीं.

पब – तुमने कभी पूछ नहीं.

हाहाहा दोनों हसने लगे और जब उन्होंने अवनि और सविता की तरफ देखा हो वो हैरानी से उन दोनों को देख रही थी.

सविता और अवनि एक साथ – तुमको नहीं पता तुम्हारा पति कहा रहता है??

गुरु – नहीं, चोको मत अभी बहुत कुछ है तुम दोनों को जानने के लिए. अभी तो तुमको ये भी नहीं पता की पब ने वो हरकत क्यों की थी.

पब को गुरु की बात से जो उसने किया था वो याद आ गया तो वो हिचकिचाने लगा और उसकी हिम्मत नहीं हुई उन दोनों को देखने की.

पब – मुझको माफ़ कर देना आप दोनों. सायद आप माफ़ भी न करे. काम hi ऐसा किया है. तो जो चाहे सजा दे सकती है. पर में अभी आपके घर को छोड़ कर नहीं जाउगा. एक बार अवनि को उस ठाकुर से बचा लू. फिर चला जाउगा आप लोगो की जिंदगी से कही दूर.

और पंकज आखो में आशु लिए कमरे की और जाने लगा. तो सविता ने उसका हाथ पाकर लिया.

सविता – अब यही बैठो और बताओ क्यों किया तुमने ऐसा.

पब – मैं नहीं बता पाउगा गुरु तुम hi बोलो सब…

गुरु –अपने बारे में बताने लगी कैसे पब को उसने पकड़ा और दस माँ ने क्या कहा. फिर वो कैसे 18 साल की हुई. और वो क्यों घूम रहे है. उसने बस सविता के लिए जो जरुरी था वो hi बताया.

सविता (गुरु के पेअर पाकर लेती है) – आप गुरुपित है. मैं **** गाओं की रहने वाली हु मेने बहुत सुना है आपके बारे में. यदि आप खुद आयी है तो अब मेरी बेटी को कुछ नहीं हो सकता.

फिर सविता उड़ कर पब की और देखते हुए – आप भी मुझको माफ़ कर देना. आप ने मेरे लिए इतना किया और में आपको गलत समाज बैठी. (और सरमने लगी)

पब – ये आप मुझको आप क्यों .. (बिच में)

गुरु – कियोकि कोई भी लड़की अपने होने बाले पति को आप hi कहती है. आप बुद्धू के बुद्धू hi रहेंगे.

….. हाहाहाहाहा

सविता ये सुन के भाग कर कमरे में चली जाती है. और अवनि की आखों में आशु आ जाते है. पैर वो मुस्कुरा भी रही थी.
 
अपडेट 19

पब – ये आप मुझको आप क्यों .. (बिच में)

गुरु – कियोकि कोई भी लड़की अपने होने बाले पति को आप hi कहती है. आप बुद्धू के बुद्धू hi रहेंगे.

….. हाहाहाहाहा

सविता ये सुन के भाग कर कमरे में चली जाती है. और अवनि की आखों में आशु आ जाते है. पैर वो मुस्कुरा भी रही थी.

गुरु – अवनि तुम दुखी मत हो तुम्हारी शादी भी पब से hi होगी.

पब और अवनि – क्या??

गुरु – हाहाहा हाँ तुम दोनों एक दूसरे से कितना प्यार करते हो ये दीखता है. और पब तुम्हारे साथ कुछ भी बिना मतलब नहीं हो सकता इस टाइम.

अवनि – पैर ये होगा कैसे?? माँ और मैं दोनों hi एक की ?? मैं ये बात माँ को कभी नहीं कहा सकती आज पहली बार उनके फेस पैर श्रम और ख़ुशी के भाव देखे है. आज से पहले तो केवल दुःख, दर्द और चिंताओं के भाव hi देखे थे. माँ के दर्द को अभी तक में ये सोच रही थी की रस की कमी के कारन वो दुखी है. इसलिए मेने जॉब स्टार्ट की. पैर आज पता चला की वो तो किवल दर्द सहने की मशीन थी अभी तक. आज अहसास हुआ है की उन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी हर ख़ुशी हम दोनों भाई बहिन पैर न्योछवर कर दी. और सरे गम खुद लेती रही. अब में उनसे ये ख़ुशी नहीं चीन सकती. चाहे मेरी शादी किसी से भी हो पैर मेरी माँ पब की hi वाइफ होगी.

गुरु –तू इन सब बातो को मत सोचो. वो में देख लगी. वैसे भी ये टाइम इन बातो का नहीं है अभी तुमको ठाकुर से भी बचाना है. चलो बहुत काम करना होगा.

पब – गुरु अभी तुम क्या करने को सोच रही हो.

गुरु – सम्भोग क्रिया सविता के साथ. क्यों तुम क्या सोच रहे हो?

पब – नहीं मैं तो तुमरे पूछ रहा हु. क्या करना है.

गुरु – हम्म तो चलो मेरे साथ स्याम होने को है और हमको कुछ चीजे लानी होगी बाजार से.

अवनि – मेरी सकती ले जाओ. जल्दी हो जायेगा.

गुरु – हम्म ठीक है. में अभी सविता से बात कर के आती हु. जब तक तुम चाभी दो इसे.

गुरु सविता के रूम में जा कर

गुरु – सविता तुम पूरी तरह तैयार हो न इस काम के लिए.

सविता – नज़ारे नीची कर के. – जी हाँ

गुरु – आखरी वक्त पैर देखा तो नहीं डौगी न. कियोकि इससे सब बर्बाद हो जायेगा. और हम लोग मर जायेगे.

सविता – नहीं में ऐसा नहीं करुँगी. गुरुमा पैर ये सही हो रहा है क्या??

गुरु – हां, ये नियति यही चाहती है.

सविता – जो आज्ञा गुरुमा.

गुरु – अरे यार माँ क्यों बोल रही हो, अभी कुछ ऑवर में मेरे पति की पत्नी और मेरी सुतं बनने वाली हो. गुरु कहो.

सविता – जैसी आपकी मर्जी. गुरु पर आपको बुरा नहीं लग रहा की मेरी शादी आपके पति से हो रही है.

गुरु – नहीं यार बतायतो था की सधी से पहले भी में ये जानती थी की इनकी 11 और शादी होगी. जो मुझको मंजूर थी. पर में पहली बीबी बनना चाहती थी. इन्होने मेरे दिल की बात समाज ली और मुझको 1सत वाइफ का सम्मान दिया. पैर तुम मुझसे भी जायद खुशकिस्मत हो की तुम उनकी पहली पूर्ण पत्नी बनोगी.

सविता –(समाज नहीं पाई की गुरु ने क्या कहा) – पूर्ण पत्नी से मतलब??

गुरु – (सर पे हाथ मरते हुए) – क्या बच्चो जैसी बात करती हो. मतलब की तुम पब से सबसे पहले चुड़ोगी. उसने आज तक किसी को नहीं छोड़ा है. वो पहली बार तुम्हारी छूट की hi ओपनिंग करेगा. अब सामजी..

सविता – (शर्मा जाती है. वो गुरु को देख नहीं प् रही थी) – हम्म (सरम के मरे मुँह से आवाज hi नहीं निकली)

गुरु – क्या हम्म. सोच लो उनका बहुत मोटा और लम्बा है..

सविता – क्या? (वो ये भी नहीं सामजी)

गुरु – लुंड…

सविता तो मरे सरम के पानी पानी हो कर बाथरूम में भाग गई और गुरु हस्ती हुई बहार आने लगी.

ीदार गुरु के अंदर जाते hi अवनि और पब के बिच में नयन मटक्का हुआ. और फिर कब दोनों एक दूसरे की बहो में आये कब किश सुरु किया पता hi नहीं चला. गुरु बहाल आयी तो दोनों किश कर रहे थे. दोनों दूसरी दुनिया में थे तो कैसे पता चलता की कोई उनको देख रहा है. वो तो बस अपने प्यार में दुबे थे. उनकी किश में कोई वासना नहीं थी था तो सिर्फ प्यार. ऐसा प्यार जिसमे ये जहा दुब जाये. आखे एक दूसरे से बात कर रही थी. हाथ एक दूसरे के कंडे पे थे. दोनों एक दूसरे के होतो को बारे आराम से चूस रहे थे. चूस क्या रहे थे बस अपना प्यार देखा रहे थे एक दूसरे को जो न जाने कब से इन दोनों के दिलो में था. पैर कभी बहार नहीं आया. आज मौका मिला था दोनों को. कभी कोई उप्पेर का होठ चुस्त तो कभी दूसरा उसके उप्पेर के होठ को चूसने लगता. तो खभी एक दूसरे के होठो को चाटने लगते जीब की नोक से. तो कभी दोनों की जीब मिल जाती और लड़ने लगती. क्या किश था. जब गुरु ने उनको देख तो उसके होतो पे मुस्कान आ गई. वो भी खड़े खड़े उनके प्यार को देख कर खुस होती रही. उसको ऐसा लगा की मनो वो है पब के साथ. तभी रूम में कुछ आवाज हुई. तो उसका डायन टुटा. और बोली – चल अब. या आज कुछ और करने का इरादा नहीं है.

पब गुरु की आवाज सुन कर जप गया. और गुरु के पीछे चल दिया. पब ने सकती की चाभी ले ली थी. और वो सकती चला रहा था. और गुरु पीछे बैठी थी. दोनों ने पास के कसबे से बहुत सा सामान ख़रीदा. और फिर बेफिस चल दिए. गुरु ने देख की पुरे रस्ते पब ने न तो उससे बात की है और न hi उससे नजरे मिला रहा है. तो गुरु ने एक सुनसान सी जगह पे सकती रोकने को कहा. पब ने सकती रोक दी पैर पीछे पलट के नहीं देखा. गुरु समाज गई की कोई बात है. तो गुरु उसके सामने आ गई. और उसकी आखो में देखते हुए बोली – क्या हुआ जान उदास क्यों हो.

पब – (कुछ देर कुछ नहीं बोलै और उदासी भरी आवाज में) – सॉरी गुरु….

गुरु – क्यों क्या हुआ. क्या किया है तुमने??

पब – वो वो तुमने देखा तो था, न और सायद तुमको बुरा भी लगा.

गुरु – ओह्ह्ह अब सामजी, (एक स्माइल के साथ, उसके गले में बहे डालते हुए) – अरे मेरे भोले बालम, मेरे साजन मुझको बुरा नहीं लगा था. पैर तुमको खुद पैर कण्ट्रोल रखना है. और फिर सविता भी अंदर hi थी यदि उसको अभी पता चल जायेगा तो आज की पूजा नहीं हो पायेगी न. मुझको बुरा क्यों लगेगा जब की वो तुम्हारी होने वाली वाइफ है तो तुम्हारा हक़ है उस पर…

पब – अच्छा तो तुम्हारा फेस लाल क्यों हो रहा था?

गुरु – आह्ह्ही मेरे पति देव को तो कुछ भी नहीं पता. …..

पब – क्या नहीं पता….

गुरु – (शर्मा जाती है, की कैसे कहे खुद hi अपने दिल की बात) – छोड़ो न इस बात को और चलो…

पब –(उसका हाथ पाकर कर अपनी बहो में ले लेता है) – बोलो न यदि नहीं बोलोगी तो कैसे पता चलेगा…

गुरु – अच्छा तुमको क्या लगता है की मेरा फेस लाल क्यों था

पब –तुम बुरा तो नहीं मानोगी…..

गुरु – बोलो तो सही… तुम्हारी बात का क्यों बुरा मानूगी. आप मेरे पति है. अपना पूरा हक़ है मुज पर भी. वो बात और है की मैं चाहा कर भी आपका हक़ आपको नहीं दे प् रही हु….

पब – अच्छा ये बात है तो में कर के बताता हु

और पब ने उसके फेस को पाकर कर उसके होतो पे होठ रख दिए. और चूसने लगा. वो उसकी आखो में देख रहा था. गुरु की आखें तो अपने आप बंद हो चुकी थी. और वो खो गई उसके प्यार में. उसको फील करने में. कितना प्यार था इस किश में. ये प्यार दोनों को भड़का रहा था. पब के हाथ कब गुरु के बूब्स पे पहुंचे उसको पता hi नहीं चला. और उसके हाथो को फील होते hi गुरु के मुँह से एक सिसकी निकल गयी जो पब के मुँह में hi रहा गई कियुकी किश लिपलॉक था. दोनों आपस में चिपकते जा रहे थे. और इतने पास हो गए की उनके बिच से हवा भी न निकल सके. तो पब का लुंड खड़ा हो कर गुरु के पेट पैर चुबने लगा. गुरु उस चुंबन को महसूस करते hi उसको और अपनी और खींचा. तो पब की कमर ने एक झटका मार दिया. इस झटके से लुंड सीधा गुरु की नाभि से टकराया. और गुरु का दिमाग में एक दम से कुछ आ गया और वो उससे अलग हो गई. पब को एक पल तो कुछ समाज hi नहीं आया क्या हुआ. पैर होश आते hi वो समाज गया गुरु क्यों अलग हुई है.

पब – इसलिए नहीं आता हु तुम्हारे ज्यादा नजदीक. देखो इस बिचरे की क्या हालत है इस टाइम…

गुरु – सूर्य जान, पैर हम आगे नहीं बाद सकते…

पब – सॉरी की कोई बात नहीं है में जनता हु सब कुछ. में तुमको ऐसी कंडीशन में नहीं डालना चाहता हु. इसलिए तो ये सब नहीं करता तुम्हारे साथ…..

तुमको पता है गुरु की तुम क्या हो मेरे लिए, तुमको देख कर हर दुःख से लड़ने की ताकत मिलती है. तुम विस्वास हो मेरे. तुम से मेने विस्वास करना सीखा है. पैर तुम्हारे नजदीक आते hi भूल जाता हु की इस दुनिया में कुछ और भी है. बस तुम hi तुम दिखाई देती हो. मुझको अपना मकसद, अपना बदला, अपना आस्तित्वव भी याद नहीं रहता में तुम्हारी बाँहों में रहना चाहता हु. में बस तुमको प्यार करना चाहता हु. और पूरी जिंदगी इस बाँहों में बिताने का मन होता है. पता नहीं कब तुम और मैं एक होंगे. में बस इस सब को जल्दी ख़तम कर के तुम्हारे साथ रहुगा.

गुरु पब की बातो से बहुत खुस थी की उसको एक इतना प्यार करने वाला पति मिला है. और में कितनी ाभागि हु की उसको प् भी नहीं सकती. वो सही सोचती हुई उसके सीने से लग जाती है. दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था बस एक दूसरे की बहो में एक दूसरे को फील कर रहे थे. दिल आपस में बाते कर रहे थे. जैसे कहा रहे हो की जब हम दोनों एक है तो इस सरीर की मिलने या न मिलने से क्या फर्क है. दोनों कुछ देर ऐसे hi खरे रहे.

गुरु – मैं आज बहुत खुस हु. पहले मान में आज एक दर था की कही तुम्हारा प्यार अब काम न होने लगे. पैर अब मुझको यकीं है की तुम्हारा प्यार मेरे लिए कभी भी काम नहीं होगा.

पब – चलो तुमको यकीं हुआ यही बहुत है. नहीं तो पता नहीं क्या करना परता तुम्हारा यकीं पाने को… चलो अब चले…

गुरु – हाँ हाँ चलो अभी बहुत कुछ करना है. पैर मान नहीं हो रहा यार…. बारे hi सुकून मिल रहा है आज तुम्हारी बाँहों में.

पब – मुझको भी……

फिर दोनों देर कुछ देर और ऐसे hi रहे. पर जाना तो था hi. तो गुरु अलग हो कर चल दे सकती की तरफ और पीछे पीछे पब भी. पब के सकती चालू होते hi गुरु फिर से चिपग गई उससे. और दोनों एक दूसरे को फील करते हुए घर पहुंच गए.

घर पे जा कर गुरु ने देखा की सविता ने सब कुछ रेडी कर रखा है जो गुरु कह कर गई थी. उसके कमरे में सब कुछ ठीक था गुरु के हिसाब से.

गुरु सविता से – क्या बात है बड़ी जल्दी है मेरे पति से छोड़ने की. आग जदया हो रही है क्या?

सविता (सरमते हुए) – क्या दीदी आप भी …. मुझको परेशां मत करो नहीं तो आपको भी रोक लगी अपने साथ. फिर देखूँगी की वो आपको कैसे छोड़ते है.

गुरु – आअह्ह्ह खास ऐसा होता तो मजा आ जाता. में तो कब से तरस रही हु उनके निचे लेटने को.

सविता – क्या मतलब दीदी? आप अभी तक उनसे नहीं छू… मतलब अपने कुछ नहीं किया??

गुरु – हाहाहा हाँ नहीं चूड़ी अभी तक. बताया तो था की वो पहले तुम 11 के साथ hi कर सकते है. और तुम 1सत हो. चलो जाओ और पब को बुला के ले आओ. मुझको तुम दोनों को कुछ संजना है

और सविता चली जाती है पब को बुलाने. और गुरु लग जाती है अपनी तैयारियों में. पब और सविता साथ आते है. और उनके पीछे पीछे अवनि भी थी.

गुरु – अवनि तुम जाओ. तुम्हारा अभी कोई काम नहीं है. जब जरूर होगी बुलालूगी.

अवनि उलटे पेअर लोट जाती है.

गुरु – देखो डायन से सुन्ना जो बताने जा रही हु. वैसे पब तुमको तो मणि जी ने भी बताया था उस टाइम पैर फिर से सुनो

सबरी पहले तुम दोनों को नाहा दो कर तैयार हो कर आना है. और फिर मेरे साथ पूजा पैर बेतना है. पूजा पूरी होने के बाद तुम दोनों सम्भोग करोगे. पैर इसमें तुम दोनों को कुछ डायन रखना होगा. सविता तुम डायन रखना की तुमको इसको लुंड गुस्साने के बाद रोकना नहीं है चाहे तुमको कितना भी दर्द हो और पब तुमको रुकना नहीं है. चाहे ये कुछ भी कहे. सविता तुम कितना भी चिक चिल्ला सकती हो. पैर रोकने को नहीं बोल सकती. डेरे और प्यार से करने को बोल सकती हो. और पब तुम याद रखना एक बार लुंड को अंदर करने के बाद बहार मत निकलना नहीं तो ये सह नहीं पायेगी. तुम जानते हो ये बात. पैर हाँ सविता यदि तुम काम तकलीफ पाना चाहती हो तो तुमको इसके लुंड को अंदर लेने से पहले खुद को और इसको इतना गरम कर देना है की तुम दोनों उस गर्मी के कारन केवल मज़ा आये. और सबरे बरी बात लुंड को घुसने से पहले तुम दोनों को एक मंत्र बोलना है. और घुसने के बाद पब तुमको एक मन्त्र बोलना है. सविता तुम इसको डरने मंत्र को बोलने का याद दिलाओगी. कियोकि इसको याद नहीं रहेगा आज तो ये पक्का है.

पब (बिच में) – मतलब आज याद नहीं रहेगा से क्या है?? बाद में याद रहेगा मुझे??

गुरु – हाँ इसके बाद होने वाली किरिया में रहा सकता है. यदि तुमने अपने सयम को बनाये रखा तो.

गुरु फिर दोनों को तीनो मंत्र बताती है. और फिर पब से – पहले मंत्र के बाद तुम जो चाहते हो वो मग्न है. बातो तुम क्या मग्न चाहते हो

पब में तो मग्न चाहता हु की – मुझको इतनी सकती मिले की में उस ठाकुर को मर सकू.

गुरु – नहीं तुम ये नहीं मगोये. देखो भगवन से वर मग्न भी एक कला है यदि तुम ये मांगोगी तो कल तुम्हारा सामना ठाकुर से बहुत साकटिसशाली दानव से होना है तब तुम क्या करोगे. इसलिए जो में कहु वो hi मग्न –

‘हे डलासुर और दक्षसूरी माँ, मेरे सरीर में इतनी ताकत दो की कोई भी सुर, असुर, मानव किसी भी प्रकार के हतियार से या बाहुबल से मेरा बाल भी बांका न कर सके”

पब – गुरु यार तुम तो ग्रेट हो. तुम्हारा दिमाग तो बहुत चलता है.

गुरु – मुस्कुराते हुए –आखिर बीबी किसकी हु. … तुम जैसे घड़े की …. हहहहहहह

और सविता भी हंस रही थी.

गुरु – चलो तुम दोनों जाओ और तैयार हो जाओ. में जब तक यहाँ तैयारी करती हो.

फिर सविता तो अवनि के रूम में पहुंच जाती है और पंकज उसी रूम के बाथरूमम में घुस जाता है. अवनि ने पलहे से hi अपनी माँ को तैयार करने की पूरी तैयारी कर राखी थी. उसकी माँ के रूम में आते hi उसको सजाना सुरु कर दिया. और देखते hi देखते एक दुल्हन का रूप दे दिया. वो बहुत hi सुन्दर लग रही थी. उसके हलके सव्रे कलर पे अवनि ने आएसी मेकअप की थी की उसका फेस चमक गया था. उसके नयन नक्श तो बिना मेकअप के hi दुसरो के दिल पे चुरिया चलते थे. अब तो अवनि ने कमर hi कर दिया था. आखों का काजल उनको इतना गहरा बना रहा था की ासिक उस में दुब hi जाये. और माथे की बिंदी तो दिल के गोली का काम कर रही थी. पतले होठो की लाली किसी सराब की बोतल की तरह थी जिस को अपने होतो से लगते hi नशा हो जाये. चोली इतनी तंग थी की केदियो (बूब्स) का दम hi घुट रहा था. दोनों एक दूसरे से ऐसे मिल रहे थे की उससे बनने वाली घाटी में देखते hi उसमे अपना सब छोड़ दे. लाल राग की लेहगा चोली में वो एक दम 20-22 साल की दुल्हन लग रही थी.

पब ने तो बस सिंपल सा कुरता पैजना पहन रखा था. और उसको तैयार होने में भी बहुत काम टाइम लगा था. तो वो गुरु के साथ तैयारी करने में लगा था. जिससे सब जल्दी हो गया. गुरु ने पब से कहा की जा कर सविता को बुला लाये. वो दूरसे रूम के गेट पे पहुंच कर गेट खटखटाया तो अवनि की आवाज आयी बस 2 मं. और ये 2 मं 40 मं में पुरे हो hi गए…..

पर जब सविता बहार आयी तो पब का मुँह खुला का खुला रहा गया और वो उसको देखता रहा गया. तभी पीछे से आवाज आयी…

अवनि – ये मिस्टर मुँह बंद नहीं तो मक्खी गुर जाकेगी…. और जोर जोर से हसने lagi..hahahaha

सविता पब को इस तरह घूरता देख शर्मा भी रही थी और खुस भी हो रही थी की वो इस अरे में भी एक जवान लड़के के होश उदा सकती है. आज पहली बार वो इस तरह तैयार हुई थी वो भी अवनि के कहने पैर.

पब सविता को अपने साथ ले कर दूसने रूम में पंहुचा. तो गुरु भी उसको देख कर मुस्कुरा दी.

और गुरु लग गई अपने काम पे. सुरु हो गई वो क्रिया वो आज इस डर्टी पे पहली बार हो रही थी. बहुत देर तक पूजा होती रही भींच में गुरु ने दोनों को एक-2 कला देगा दिया जो उन दोनों ने एक दूसरे के गले में बाँदा दिया. पैर यहाँ पैर पब को मौका मिल गया को उसकी गर्दन को सहला दिया. सविता तो सिहर अंदर तक उडी. पैर ये बस कुछ पल का था. गुरु को पता नहीं चला. इस टाइम गुरु का फेस एक दम सपाट था. वो बस मंत्रो के उच्चारद में डायन दे रही थी. फिर गुरु ने एक चाकू लिया और दोनों को अपना अंगूठा आगे करेने को कहा. और गुरु ने दोनों के अगुठे पैर एक -2 कट लगा कर दोनों के कट को एक दूसरे के ऊपर रख कर ब्लड की कुछ ड्रॉप्स अग्नि में दाल दी. और फिर पब को मांग भरने को बोलै. पब ने अपने कटे अगुठे से सविता की मांग भर दी. और पूजा पूरी हो गई. गुरु ने दोनों को फिर से मंत्र दतिया. और याद दिलाया की लुंड एक बार घुसने के बाद न तो निकलना चाहिए और न hi सविता रुकने को बल सकती है. और फिर वो अवनि के पास चली गई. अब क्रिया का एक भाग पूरा हो चूका था और दूसरा बाकि था.
 
अपडेट 20

गुरु के जाने के बाद कुछ देर तक तो पब सविता को देखता रहा. फिर सविता का हाथ पाकर कर ले गया पलग तक. और उस पर बेथ गया.

पब – सवी आओ यहाँ बैठो न. आप खरी क्यों है. क्या मैं आप को सवी बोलै सकता हु.

सवी – हाँ आप हमको सवी कह सकते है. और ये मुझको अच्छा भी लगेगा. पैर प्लीज आप मुझको आप नहीं तुम बोलिये. आप पति है मेरे…

पब – हाँ आज से तुम मेरी सवी. ..... ... .... पैर तुम बैठो तो.

सवी ने बैठने की जगह उसके पेअर चुने लगी. तो पब ने उसको उदा कर अपने पास बिठा लिया. और उसको देखने लगता है और कुछ देर तक देखता hi रहता है. सवी तो उसके यु देखने से सरम आ रही थी. जब सरम बहुत बाद गई और पब ने पलके भी नहीं झपकी तो सवी ने कहा –क्या देख रहे है जी बहुत सरम आ रही है.

पब – तुम बहुत कूबरूरत हो सवी. तुमको देखने का hi मन करता है.

सवी उसकी बात से और शर्मा जाती है. पैर खुस भी थी अपनी तारीफ सुन कर.

पब – क्या मैं तुमको छू सकता हु. ?

सवी – हाँ में गर्दन हिला देती है.

पब उसके कंदो पे हाथ रख कर उसके फेस पैर झुकता जाता है और उसके होठो को अपने होठो ने ले कर चूसने लगता है. बारे मज़ा आ रहा था होतो को चूसने में कुछ देर में सवी भी उसका साथ देने लगती है. दोनों के हाथ एक दूसरे की पथ पर गम रहे थे. और एक दूसरे के होतो को चूस रहे थे. और एक डरने की जीब से भी खेलने लगे. सवी का तो पहला अनुभव था इसमें. वो तो पब की तरह की करने की कोसिस कर रही थी और मदहोश होती जा रही थी. पब का हाथ अब उसकी की के निचे नंगी पथ पे चल रहा था. उसके हाथ सवी की नंगी पथ पे चलने से उसके ससिर में हलचल मचा रहे थे. 6-7 मं में hi दोनों की साँसे उखाड़ने लगी तो दोनों ने किश थोड़ दिया. पैर पब रुका नहीं उसने कुछ hi पर में अपनी साँसों को सही किया और उसके गलो को चूमने लगा फिर उसकी गर्दन पे होठ रख दिए. सवी की साँसे तो पलहे से hi फूली हुई थे वो और तेज़ हो गई. पब ने आगे बढ़ने लगा तो उसकी चुनरी और ब्लाउज बिच ने आ गए. तो वो रुक कर सवी को देखने लगा . वो तो अपनी साँसों को ठीक करने में बिजी थी. जिससे उसकी बरी बरी चूचिया टैग चोली में उप्पेर निचे हो रही थी पब की नजर तो उन पैर अटक गई. और जब सवी को ये अहसास हुआ तो उसने तुर्रंत उसको बाहो में ले लिया और अपना सर उसकी काटी पे रख दिया. पब ने उसके फेस को उप्पेर उदय और फिर होतो से होठ मिल गए. और फिर एक दूसरे में खोने लगे पब में इस बार अपने हाथ उसके चुचो पे रख कर उनको कपड़े के ऊपर से hi बाबाने लगा. सवी की तो सिसकी निकल गयी होठ का बंदन टूट गया और वो अपनी गर्दन को ीदार उदार करने लगी. तो पब ने अपने हाथ रोक लिए और

पब – क्या हुआ जान अच्छा नहीं लगा क्या.

सवी – नहीं जी अच्छा तो बहुत लगा. पैर मेरी निप्पल बहुत hi सेंसिटिव है. मैं आज तक अपने आप को बस आपने निप्पल को दबा कर hi संत करती आयी हु. यदि आप नहीं रुकते तो मेरा हो जाता.

पब – ओह्ह ये बात है.

और फिर पब झुक कर उसकी चोली में से झक रहे चुचो पे किश कर देता है और उसकी और देखने लगता है. और फिर अपनी और खींच कर उसके गहने उतने लगता है. उसने गहने के नाम पे ज्यादा कुछ नहीं पहना था. बस कानो में बलि, नाथ और एक आर्टिफीसियल हार था. वो उनको उतर कर उसके गले में बस कला धागा रहने देता है. और उसको अपने को खींच केर उसके होतो पे एक किश करता है फिर नाक पे, फिर आखों पे और पुरे चेहरे पे किश करता जाता है फिर वो कानो पे पहुँचता है तो उसके कानो की लुओ को मुँह में ले कर चूसने लगता है. और सवी फिर मदहोश होने लगती है. तो पब उसकी चोली की दूरी को खोल देता है और उसकी चोली को निकलने लगता है सवी भी इसमें उसका साथ देती है. उसकी बरी बरी चुकी उसकी रेड ब्रा में बहुत कामुक लग रही थी. वो फिर ब्रा से बहार निकली चुकी को चाटने लगता है. और सवी सिसकिलिने लगती है. पैर आवाज बहुत डेमी थी. तभी सवी को कुछ याद अत है. तो वो बोली

सवी – सुनिए जी

पब रुक कर अपना फेस उसकी और करता है उसके फेस पे ऐसे भाव थे की क्यों रोका बिच में कितना मज़ा आ रहा था.

सवी – वो हमको जो दीदी ने कहा था वो कर लेना चाहिए.

पब के कुछ समाज नहीं आता पैर वो भी उसको अपने से दूर रही सह प् रहा था. तो उसने उसको खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया और उसकी पथ पब के सीने से लग गई. और उसका हाथ उसके पेट पे चल रहा था.

पब – क्या मतलब?? कोण दीदी ?? और क्या कहा??

सवी – आअह्ह्ह्हह पहले हाथ तो रोकिये नहीं तो मैं बोल नहीं पाउगी….. आआह्ह्ह्ह (पब हाथ को उसके पेट पैर एक जगह रख देता है) अरे गुरु दीदी ने कहा था न की पहले हमको मंत्र पड़ना है फिर आपको अपनी विश मागणी है.

पब – ओह्ह तुम उसकी बात कर रही हो. पर तुम गुरु को दीदी क्यों बोली? वो तो देखने में तुमसे छोटी है

सवी – नहीं वो हर तरह से मुझसे बरी है अरे में भी और आपकी 1सत वाइफ भी है तो वो मेरी दीदी hi हुई. नहीं तो मेरे गाओं में तो सब उनको गुरु माँ कहते है. जानते हो उनके दर्शन को भी तरसते है लोग.

पब – हम्म मैं भी तरसता हु उसके दर्शन को. पैर वो करबाती hi नहीं है.

सवी – क्या कह रहे है आप. वो तो सरे दिन आप के साथ hi तो रहती है. दुनिया जिसकी पीछे पागल है. वो आपके लिए तो सब छोड़ कर आपके साथ है.

पब – अरे वो तो है hi मेरे साथ. तभी तो जिन्दा हु मैं. पैर में उसको अपनी पत्नी वाले रूप में देखना छटा हु. जैसे की तुम हो अभी मेरे साथ.

सवी – अच्छा जी, साथ मेरे हो और चाहा दीदी की…. पहले मुझको तो देख लो. जल्दी hi दीदी भी आपके साथ हूँगी.

पब – सॉरी सवी पैर मैं तुमको भी गुरु की hi तरह प्यार करता हु. पैर वो है की देती hi नहीं है. तुम तो डौगी न आज??

सवी – क्या??

पब – अपनी छूट… (और एक दम से अपना हाथ लहजे के ऊपर से hi चोट पे रख कर मसल देता है)

सवी – बहुत गंदे हो तुम. (और उसके सीने पे मरने लगती है)

पब – क्यों मेने क्या गलत कहा. तुम डौगी न.

सवी – हम्म (अपना चेहरा उसके सीने में छुपा देती है)

पब उसके बालो में हाथ फेरने लगता है… और फिर उसका एक हाथ उसके बूब्स पे आ जाता है. और वो उनको ब्रा के ऊपर से hi सहलाने लगता है. उसके हाथ उसके निप्पल पैर पहुंच जाते है और वो उसके निप्पल पे ऊगली फेरने लगता है. जिससे सवी उत्तेजित हो कर गर्दन ीदार उदार करने लगती है. पब उसकी गर्दन पे मुँह रख देता है और उसको चाटने लगता है. एक तो निप्पल पे उंगलियों का अनुभव और गर्दन पे जीब का. सवी तो आसमान की सेर पे निकल गयी थी. फ़ी पब एक हाथ को निप्पल से हटा केर उसकी बीआरओ को खोल देता है. एक hi पल में ब्रा उसके जिस्म का साथ छोड़ देती है और उसके 36 डी साइज के चुके आजाद हो जाते है पब उनको दांग से नहीं देख प् रहा था कियोकि वो उसके आगे अपनी पथ उसकी तरफ करके बैठी थी. तो वो उसके दोनों नंगे चुचो पे हाथ रख कर सहलाने लगता है. और सहलाते हुए फिर उसका हाथ उसके निप्पल पे पहुंच जाता है. तो वो अपने अगुते और एक ऊँगली के बिच में ले कर उसके चुके को धिरे धिरे दबाने लगता है. और एक बार उनको पाकर कर खींच देता है. और उसके खेचते hi सवी तरप उड़ती है. उसको सहन नहीं होता और और झड़ने लगती है. पब को जब ये अहसास होता है की वो जहर रही है तो वो उसके निप्पल को मसलने लगता है. तो उसकी सासे बे कबो हो जाती है और वो झड़ती hi जाती है. कुछ पालो के बाद उसको होश आता है तो वो पब के पाऊँ में ऊपर से नंगी हो कर लेती हुई थी. तो वो मरे सरम के अपना चेहरा उसकी और गुमा देती है. जो सीधा पब के लुंड से जा टकराता है और जब उसे उसे रूप का अहसास होता है. तो वो उसको एक बार उप्पेर से hi पाकर कर देखती है. बस 2 पल के लिए hi उसके हाथो ने उसको छुआ था. उसके विशाल साइज को महसूर करती है तो दर जाती है. और झट से पीछे हो जाती है. उसको इस तरह पीछे होने से पब बोलै- क्या हुआ जान तुम्हारे फेस पे ये दर क्यों आ गया. जो तुमने अभी पकड़ा था वो तुम्हारे लिए hi है. दर क्यों रही हो…

सवी – वो , वो बहुत बारे है. हमने इतना बारे कभी नहीं देखा.

पब – तो क्या हुआ तुमको तो मज़ा hi आएगा न.

सवी – वो दीदी ने कहा था की रोकना मत. पैर ये तो इतना बारे है हम कैसे सह पाएंगे. प्लीज आप आराम से करना. मैं आपको रोकूंगी नहीं पर प्लीज आराम से करियेगा.

पब – हां में बहुत आराम से करुगा. मैं तुमको कोई दर्द टठिना दुगा जान कर. मैं तो तुम्हारे सरे दर्द ख़तम करना चाहता हु…

सवी ये सुन के उसके होतो पे किश कर देती है. और कहती है – अब हमको वो काम कर लेना चाहिए नहीं तो कही ऐसा न हो. हम उसको hi भूल जाये मस्ती में.

पब को भी उसकी बात रही लगती है. पब – हम्म रही कह रही हो तुम. पैर उसके लिए पहले नंगा होना होता है. वैसे भी तुम आदि नंगी तो हो hi. चोलो पूरी नंगी हो कर अपना खजाना भी मुझको दिखा दो जो आज रात को में लूटने वाला हु…..

सवी ऐसी बाते सुन के सरमते हुए.. गंदे.. कोई अपनी बीबी से ऐसे बोलता है क्या ..

पब - अरे हर कोई अपनी बीबी से hi तो नंगी होने को कहा सख्त है. किसी और की बीबी से तोधिना बोलेगा.

सवी – तुम सच में गंदे हो…

पब – चलो तुमको भी गन्दा कर देता हु. (और फिर उसके होतो को चूसने लगता है और बूब्स को दबाने लगता है जिससे सवी की आग फिर बड़कने लगती है. कर फिर उसको गुरु की बात याद आ जाती है तो वो उसको अलग कर देती है)

सवी – अब पहले वो काम

पब – मेने कब मन किया यार तुम hi कपड़े नहीं उतर रही हो और तुम्हारे छोछू को देख कर मुझपे रुका नहीं जा रहा है.

सवी खरी हो जाती है पैर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी अपना लेहगा उतरने की सरम के मरे तो वो नजरे झुकाये खरी रहती है. पैर पब इतनी hi देर में पूरा नंगा हो चूका था. और उसका 9” का लुंड खरा हो कर हवा में लहरा रहा था. पब सवी को देख कर समाज जाता है और उसके पास जा कर उसके लेंगे को उतर देता है. अब दोनों पूरी तरह नंगे थे. सवी ने अभी तक नजर उदा कर उसकी और नहीं देखा था. पब उसके फेस को अपने हाथ में ले कर उसको देखने लगता है. सवी की सासे बहुत तेज़ चल रही थी जो अब पब के फेस पे गर्मी दे रही थी.

पब – चलो मन्त्र पदों.

फिर दोनों अपने अपने मंत्रो को पड़ते है जैसे की गुरु ने बताया था. ठीक वैसे hi. और पब अपनी विश भी गुरु के कहे अनुसार दोहराता है. मंत्र पड़ने के 1 मं में hi दोनों का खून तेज़ी से दौड़ने लगता है. और उनकी उत्तेजना का मीटर फुल हो जाता है. सवी की साडी सरम साडी हिचक एक पल में hi ख़तम हो जाती है. पैर पब को तो खुद पे कण्ट्रोल था तो वो बहकता नहीं है अभी.

सवी मरे उत्तेजना के पब से चिपक जाती है. और उसके फेस पे किश करने लगती है. और फिर पूरी सरीर पे किश करती चली जाती है. पब को तो बारे मज़ा आ रहा था. वो भी उसके नंगे जिस्म पे हाथ फेरने लगता है. कभी पथ को सहरता को कभी पेट को तो कभी उसके चत्तारो को पाकर के मसल देता अब उसके हाथो में नरमी नहीं थी. उसके हाथ पूरी सकती से उसके जिस्म पे चल रहे थे. और वो जहा भी मसलता वो हिस्सा लाल पद जाता. सवी ने उसको जैसे hi चूमना बंद किया वैसे hi बिना एक पल रुके उसने उसको चूमना और चेतना सुरु कर दिया. पहले उसे होतो को चूसा और एक बार चबा भी दिया. उसके होतो से खून निकल गया उसे वो चाट गया. पैर सवी को इसमें बहुत मज़ा आ रहा था. पब ने उसके गालो पे भी अपने दातो के निशान बना दिए थे. फ़ी वो उसकी गर्दन को चाटने लगा. और जगह -2 काट भी रहा था. और उसके हाथ लगातार उसकी गांड को मसलने में लगे थे. गांड पूरी लाल हो चुकी थी. पैर सवी को बस दर्द तो काम था पैर उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. पब का मुँह जैसे hi उसकी चूचियों पे पंहुचा उसकी सिसकिया तेज़ होने लगी. वो आअह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह कर रही थी. पब ने अपने हाथो को भी उसकी गांड से चूचियों पे रख दिया और मसलने लगा. ऐसे मसल रहा था की आता गूथ रहा हो. और उसकी एक चुकी को चारो और से चाट कर उसके निप्पल को मुँह में ले लिया और चूसने लगा दूसरी चुकी के निप्पल के साथ उसका हाथ खेल रहा था. सवी तो पागल हो गई. सवी – ोूहः क्या कर दिया tum…ne …… और …. जुऊर ……. सीईई …. चुसो…. In…koooo… खहहहा…. जावूओ…. अह्ह्ह्हह ….. क्या ….. हो …. रहा ….. है mere…sath….

मेरा निकल क्यों नहीं रहा ……. नहीं तो….. ऐसे ….चूसने ….. से…. तो …में …कब …. की फारिग हो ….गई hoti…….or … jor…se ..chuso…na…. मसलो….. मेरे निप्पल को masloooooo…..aaahhhhh दर्द ोुह्ह्ह रहा …. है… पैर मज़ा भी….. आ रहा…. है……

पब बदल बदल कर उसकी दोनों चूचियों को चूस रहा था मसल रहा था. सवी पागल हो चिकि थी… एक दम से उसने पब को दक्का दे के अलग कर दिया. और बोली – ायजू अब नहीं रुका जा रहा है.. चलो बीएड पे और मुझको अपना बना लो…

पब को भी उत्तेजना फील हो रही थी पैर वो काबू में था. पैर वो सवी की विनती को टुकड़ा न सका. चाहे वो काबू में था पैर चाहता वो भी था अपने लुंड को संत करना. तो वो सवी के पीछे बीएड पे पहुंच गया. सवी तो किसी रण्डिकी तरह अपनी दोनों टैंगो को फैला कर उसको बुला रही थी. वो भी उसके पैरो के बिच में बेथ गया. और अपने लुंड के टोपे को उसकी छूट से छेद से लगा दिया. और बस अब वो पागल हो उदा. उसकी आखों में खून उतर आया. उसका फेस एक दम चेंज हो गया. और आवाज में भरी पर आ गया. और इसी के साथ उसने एक जो का जतका मारा और उसका ऐडा लुंड उसकी झिल्ली को फरते हुए अंदर घुस गया. सवी को इतनी तेज़ दर्द हुआ की उसका चुदाई का भूत hi उतर गया. और उसके मुँह से एक जोर की चीख निकली……. आआआह्ह्ह्हह्ह माँ मर गई मैं. ोुह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है… रुक …. (इतना बोलते hi उसको गुरु की बात याद आ गई) रुकना मत गुसा दो पूरा. ये सुनके तो पब के फेस पे और रौनक आगयी. और उसने लुंड को थोड़ा सा पीछे लिया और दे दिया एक और कर्रारा दक्का. और लुंड सीधे जा कर बचे दानी से टकरा गया. और सवी की आखें बहार हो गई. दर्द इतना था की मुँह से चीख भी नहीं निकली. वो तो वो बेहोश नहीं हो सकती थी. इसलिए उसकी आखें खुली थी पैर सासे सीने में अटक गयी थी दिमाग दर्द के सुन्न हो चूका था. ससिर ने तो जान hi नहीं थी. वो एक लाश की जैसे हो गई. पर पब तो बिना रुके लगा हुआ था दे दाना दान दकको में. 8-10 दकको के बाद जब छूट थोड़ी खुल गई. तो पब ने अपने हाथ उसके निप्पल पे रख दिए. और उनको मसलने लगा. बस रही से सवी की जान में जान आयी. उसके निप्पल का ज्यादा सेंसिटिव होना आज वरदान बन गया. उसको फिर से उत्तेजना आने लगी. और छूट रास छोड़ने लगी. तब उसके मुँह से आवाज निकली एक चीख …. आआअह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो मरोगी क्या मुझको……. और उसका दिमाग चलने लगा दर्द तो बहुत था पैर अभी सेक्स की खुमारी में डाब रहा था. उसको गुरु की बात याद आयी की पब को एक मंत्र और बोलना है. उसने हिम्मत जूता कर फिर बोलै – पंकज सुनो.. तुमको वो मंत्र पड़ना है अब मंत्र बोलो. मंत्र बोलो. पब को भी उसकी इस बात से जैसे होश आया और वो कुछ दिम्मा हो कर मंत्र पर्ने लगा. मंत्र पूरा होते hi पब फिर से नार्मल हो गया पैर अभी भी वो बहुत उत्तेजित था. पैर अब वो मजे से दकके मर रहा था. सवी को भी मज़ा आने लगा था.

सवी – कोई अपनी बीबी को इसतरहा छोड़ता है क्या. थोड़ा धिरे करो न.. ..

पब – हाँ मेरी जान मेरी रानी आज तो तुझको जैम के छोड़ूगा. तुझको फुल मज़ा दुगा और खुद भी तेरे इस कामुक बदन से मज़ा लगा.

सवी – हाँ छोड़ो मुझे.. पैर प्यार से छोड़ो न.. जल्दी क्यों कर रहे हो… में तुम्हारी बीबी हु बीबी की तरह छोड़ो….

पब – चल में धिरे छोड़ता हु पैर मज़ा नहीं आया तो तेरी रेल बना दुगा फिर से…

सवी – जो चाहे बनाओ जी… में तो आपकी हु… जैसे चाहे भोगो… में कहा मन कर रही हु… में तो बस इतना चाहती हु की थोड़ा डेरे करो… (सवी समाज गई थी की इस टाइम पब का डायन आएसी बातो में लगा कर उसकी स्पीड को काम किया जा सकता है. और उसको भी मज़ा आ रहा था अब)

पब – हहहआए मेरी रानी तू मेरी हो गई… अब तो तुझको रोज छोड़ूगा….

सवी – रोका किसने है आपको … में तो छाती हु की आप हर टाइम ऐसे hi छोड़ते रहो मुझको .. ये मेरा ससिर अपना hi तो है.. आप इसके मालिक है. पैर यदि इतनी जोर से करोगे तो में कल कैसे छोड़वाउगि आपसे…

पब – हाँ अब में इस ससिर का मालिक हु तो में इसको दर्द नहीं दुगा.. आराम से करोगे अब…

पब ने अपनी स्पीड नार्मल कर ली. अब तो सवी को बहुत मज़ा आ रहा था वो भी करम उदा उदा के चुद रही थी. और आह्ह्ही बार रही थी

पब – क्यों जान मज़ा आ रहा है न अब, (उसके चुचो को पाकर लेता है ) कितने सुन्दर है तेरे चुके.

सवी – आपके लिए hi है ये भी.. खाइये इनको.. चूसिये… चूसिये न … देखो आपको कैसे बुला रहे है….

पब का डायन उसके चुचो प इलाज गया और वो उनको चूसने लगा. सवी की तो जन्नत हो गई निचे छूट में लुंड था उप्पेर उसके चुके पब का खिलौना बन गए थे. अब तो दोनों को फुल मज़ा आ रहा था. सवी को देख कर लग hi नहीं रहा था की इसकी हालत करब थी. अब तो दोनों एक दूसरे को उकसाने में लगे थे. पब भी कभी तेज़ दकके मरता तो कभी धिरे. पैर रुक नहीं रहा था. बस छोड़ता जा रहा था. और सवी छुड़वाने में बिजी थी और पता नहीं क्या क्या बाके जा रही थी. उन दोनों की आवाज भी बहुत तेज़ थी…

चलो जब तक ये अपनी मस्ती में बिजी है तब तक दूसरे रूम का हाल भी देख लेते है की क्या हुआ वह…

गुरु उस रूम से निकल कर सीधा अवनि के पास पहुंची.

अवनि – क्या हुआ गुरु. हो गयी क्रिया पूरी…

गुरु – हाँ मेरा काम तो हो गया . अब तो वो दोनों hi करेंगे जो करना है अब तुम भी सो जाओ..

फिर अवनि और गुरु लेट जाते है. पैर नीड कहा आणि थी जबकि पता हो की पास के कमरे में क्या हो रहा है. और कोण कर रहा है. एक का पति था. तो एक का होने वाला पति और उसकी माँ थी. बहुत देर तक सोने की कोसिस से जैसे hi दोनों नीड आयी. तभी उनके कानो में सविता की चीख सुनाई दी. अवनि तो एक दम से रूम की और भागी. पैर गुरु ने उसका हाथ पाकर लिया. तब अवनि को अपनी गलती का अहसास हुआ. और वो बेथ गई. फिर बस कुछ देर की सन्ति के बाद तो कखि चीकने की आवाज तो कभी उनकी गन्दी गन्दी बातेहि सुणाई दे रही थी. दोनों उन बातो से गरम हो रही थी. पैर चुप चाप सोने के लिए लेती रही. वो कर भी कुछ नहीं सकती थी. गुरु ने अवनि को दिन में hi समजा दिया था की यदि तुमको पब की बीबी बनना है तो अपनी छूट को मूतने के अलावा और किसी काम में नाहिलेना है. वो अब पब की अमानत है. जिसको तुम छू भी नहीं सकती.

अभी चुदाई चलते हुए 1 ऑवर से उप्पेर हो चूका था. और ये अब अपने अंतिम पर्व पे थी. अभी दोनों की कमर बहुत तेज़ तेज़ चल रही थी और मुँह से सिसकियों के आलावा कुछ नहीं निकल रहा था. बस दोनों कैसे भी अपनी मंजिल को पाना चाहते थे दोनों के ससिर पसीने से भरे हुए थे. और दोनों कुछ -2 देर में एक दूसरे को चोम लेते या काट लेते. दोनों के हाथ तो रुक hi नहीं रहे थे……

एक दम से सवी चिल्लाती है – ोुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह मेरा होने वाला है और तेज़ करो …… आअह्ह्ह्ह

और ीदार पब भी चिल्लाया – जान में भी आने वाला हु …. और इस टाइम पब के झटके सुरु के झटको से भी तेज़ थे. पैर अभी छूट इन झटको के लिए तैयार थी वो आग उगलने को तैयार थी दोनों एक दूरसे की बभो में समिति जा रहे थे. पैर कमर रुकने का नाम नहीं ले रहे थी. और वो पल भी आ गया जब दोनों झड़ने लगे और दोनों की आखें खुद hi बंद होने लगी. और एक दिव्या चमक उस रूम में फेल गई. और दोनों पूरी तरह से संतुष्ट हो कर सुस्ता रहे थे. पब तो झड़ते हुए hi बेहोश सा हो गया था. उसका लुंड अभी भी सवी की छूट में था. और वो सवी के उप्पेर सोया हुआ था. सवी को जब होश आया तो उसके पुरे ससिर में एक दर्द जग उदा और उसको कमजोरी होने लगी पैर वो सो नहीं प् रही थी लुंड जो फसा था छूट में.

सवी ने आवाज लगाई. उसने तो अपनी पूरी ताकत आगा दी थी आवाज लगाने में पैर आवाज फिर भी बहुत डेमी थी. – “ दीदी यहाँ आओ”
 
अपडेट 21

सवी ने आवाज लगाई. उसने तो अपनी पूरी ताकत लगा दी थी आवाज लगाने में पैर आवाज फिर भी बहुत डेमी थी. – “ दीदी यहाँ आओ”

गुरु तो जैसे इस आवाज का hi वेट कर रही थी तुर्रंत चल दी उस तरफ. अवनि ने भी इससरए से पूछा आने को पैर गुरु ने मन कर दिया. गुरु ने वह जा कर देखा तो दोनों नंगे पड़े थे. सवी के ऊपर था पब.

सवी – दीदी इनको उतरिये न मेरे ऊपर से. पूरा सरीर दुःख रहा है. और इनका वो अभी भी मेरे अंदर hi है. और मुजमे इतनी ताकत नहीं है की में इनको हटा सकू.

गुरु – हम्म तो खूब मज़े किये है. आवाजे तो घर के बहार तक जा रही थी. मैं और अवनि तो सो नहीं पाए तुम दोनों के चक्कर में. चलो पहले ये पिलो फिर इसको हटती हु. (गुरु अपने साथ एक दवा ले थी जो उसने पहले hi बना ली थी)

सवी उसको पी लेती है. अभी सवी में इतनी भी ताकत नहीं थी की और कुछ बोल सके. उसको अंदर से सरम आ रही थी की वो गुरु के सामने नाँगिपरी है और उसकी बेटी ने उसकी चुदाई की आवाजे सुनी है ये सोच कर वो शर्मा रही थी अंदर hi अंदर पैर बोली नहीं कुछ.

गुरु ने बेहोश पब को सवी के ऊपर से निचे उतरा तो तुरंत सवी भी बेहोश हो गई. ये देख कर गुरु ने दोनों के नंगे बदनो पे चादर दाल दी. और वो भी जा केर सो गई. आदि से जयादा रात बिट चुकी थी. तो उसको भी लेटते hi नीड आ गई.

सुबह सबसे पहले भी गुरु hi जगी थी. उसने अवनि को उदय. और दोनों घर के कामो में लग गए. कुछ देर बाद सवी को होश आ गया. और जब वो उडी तो उसको कोई भी दर्द नहीं था. ओरअपने अंदर एक नयी एनर्जी का अहसास हो रहा था. उसको कल रात की चुदाई याद आ गई पब पे नजर पार्टी hi. तो उसको यकीं नहीं हुआ की इतनी घमासान चुदाई के बाद भी उसको अब जरा भी दर्द नहीं है. तो उसने चादर हटा के देखा तो उसका सरीर पहले से ज्यादा चमक रहा था. और जब उसने अपनी चोट को देख तो वो दर गई. उसकी छूट तो ऐसी लग रही थी की उसमे कोई लैंड गया hi नहीं है. पैर वो उस चुदाई को कैसे भूल पति जो उसने कल रात को की थी. वो सोच -2 के परेशां थी की ये क्या हो रहा है. तो उसने गुरु को आवाज दी. वो भूल गई की वो अभी भी नंगी बैठी है. गुरु जैसे hi अंदर आयी तो उसको नंगा देख के मुस्कुरा दी

गुरु – क्या हुआ अब? दर्द केसा है. और क्या फील हो रहा है.?

सविता – दीदी दर्द तो बिलकुल भी नहीं है. और ससिस के अंदर एक नया अहसास है. पूरा सरीर हल्का -2 लग रहा है. और ऐसा लग रहा की की मुजमे ताकत बहुत बाद गई है. पैर मैं बात ये है की ये देखो मेरी छूट किसी दिख रही है लगता hi नहीं की इसमें कोई लुंड भी गया है. ऐसा लग रहा है की मैं अभी भी कुवारी हु.

गुरु – तू एक रात में hi कितनी बेसरम हो गई सविता. देख कैसे पूरी नंगी हो कर अपनी छूट मुझको दिखा रही है और कैसे छूट लैंड की बाते कर रही है. बे शर्म कही की… हाहाहाहा

सविता ने जैसे hi गुरु की बात सुनी वो तो सरम से पानी पानी हो गई और तुरंत कदर उदा के अपने ऊपर दाल hi. और भागी बाथ रूम में. और बोली – दीदी में 2 मं में आयी कही जाना मत..

गुरु हस्ती रहा गई उसकी स्पीड देख कर. 2 मं में hi सविता बहार आ गई.

गुरु – आ मेरी बे सरम सुतं आ अब बोल क्या पूछ रही थी. की तेरी छूट इतनी दमदार चुदाई के बाद भी कुवारी जैसी कैसे दिखती है….

सविता – सरमते हुए… क्या दीदी अब आप ऐसी बाटे न कोरो न..

गुरु – लो खुद करे तो कोई बात नहीं हम बोले तो सरमाती है.

सविता – दीद प्लीज … बताओ न क्या बात है.

गुरु – सुन बात ये है की जो क्रिया तुम दोनों ने की है उसने लड़की का कुंवारा पैन भांग नहीं होता वो किरिया पूरी हेट hi फिर से लोट अत है. और कोई भी ऐसा निशान नहीं रहता जो की ये बता सके की तुमने चुदाई की है. और रही तेरी ताकत की बात तो सुन जो भी ये किरिया करता है उसके पटनेर को उससे मिलने वाले फल का कुछ हिस्सा उसको भी मिलता है. तो पब में को ताकत मागि थी वो कुछ तुम्हारी पास भी है.

सविता – मतलब की हमारी सुहागरात होने के बाद भी में कुवारी हु. अब समाज में नहीं आ रहा की में खुस हु. या दुखी. कुंवारा पैन हर लड़की चाहती है. और मुझको तो दो बार मिल रहा है. पैर पति ऐसा है की फली बार hi बरी मुश्किल से झेला है इसे फिर से उस दर्द को कैसे साहूजी…

हहहहहह की आवाज आती है तो दोनों की नजर पब के पार्टी है. वो भी जाग गया था. पैर वो अभी तक चादर से कवर था.

सविता – बरी हसी आ रही है न मुझको परेशां करके. टुन्ने पता है कितना दर्द दिया है कल रात को मुझको. मेरी तो जान हलक में आ गयी थी.

पब – अच्छा सिर्फ दर्द दिया. और मज़ा नहीं आया तुमको.

सविता – (सरमते हुए) हम्म आया. पैर दर्द बहुत था.

पब – गुरु यार वाकई मैं इसको बहुत दर्द हुआ कल रात को वैसे तो नहीं होना चाहिए था. कियोकि जो इसकी हालत मेने देखि थी. मुझको नहीं लगता की सब लड़की को इतना दर्द होता होगा. कियोकि वो तो दस माँ की कृपा थी की मेरा लुंड अंदर होने से इसको कुछ नहीं हुआ. पैर इसका फेस बता रहा था की ये मर भी सकती थी. यदि दस माँ की कृपा नहीं होती तो..

गुरु – हम्म, अच्छा मुझको बताओ तुम लोगो ने क्या-2 किया कल ??

पब उसको सब बताने लगता है. गुरु जैसे hi लुंड घुसने के बारे में सुनती है. और फिर सवी को कैसे होश आया ये पता चलता है तो गुस्सा हो जाती है.

गुरु – तुम दोनों मुर्ख हो. गलती खुद करते हो और फिर कहते हो की दर्द हुआ. दर्द तो होगा hi न यदि गलती करोगी. वो तो अच्छा हुआ की सविता के बूब्स सेंसिटिव है नहीं तो कल रात को हम तीनो मर जाते.

पब – मतलब ?? हमने क्या गलती की, तुमने जैसे कहा था वैसे hi तो किया न.
 
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गुरु – तुम दोनों मुर्ख हो. गलती खुद करते हो और फिर कहते हो की दर्द हुआ. दर्द तो होगा hi न यदि गलती करोगी. वो तो अच्छा हुआ की सविता के बूब्स सेंसिटिव है नहीं तो कल रात को हम तीनो मर जाते.

पब – मतलब ?? हमने क्या गलती की, तुमने जैसे कहा था वैसे hi तो किया न.

गुरु – मेने तुमसे कहा था की सुरु करने से पहले इसको गरम कर लीना अच्छे से. पैर तुम तो इसके एक बार कहने पे hi छड़ गए इसके उप्पेर.

तुमको इसको इतना गरम करना था की ये तुमसे छोड़ने की भिक मांगे. तो इसकी छूट में छूट रास बहुत हो जाता और ये आसानी से तुमको झेल लेती. तुमको पता है की किरिया में क्या होता है. जब की कोई ये किरिया करता है तो डलासुर और दक्षसूरी माँ का एक अंश उसके सरीर में समां जाता है और इससे वो दोनों संतुस्ट होते है. और वरदान देते है. मंत्र पड़ने से उनके अंश सरीर में आते है. और उनकी उत्तेजना भी आती है साथ में. इसलिए तुम दोनों केवल उन ांसो की उत्तेजना से hi सेक्स सुरु कर दिए.

पब – मतलब की जब तक छूट से रास न बहाने लगे मुझको सेक्स नहीं करना है.

गुरु – हाँ

पब – अच्छा तुमने न रुकने को क्यों बोलै था. यदि में रुक जाता तो सयद इसको दर्द काम होता.

गुरु – और यदि तुम रुकते तो तुम्हारी उत्तेजना तुम्हारे सर को पाद देती. देखो ये तो तुम भी जानते हो की सेक्स केवल छूट लुंड का खेल नहीं है. इसमें दिमाग का भी पूरा योगदान होता है. हमको उत्तेजना दिमाग से आती है. सोच की तुमने एक सेक्स पावर का हैवी दोसे लिया है और तुम सेक्स नहीं करते, बल्कि सेक्स के भींच में रुक जाते हो हो क्या होगा. तुम मरोगे hi न. और डलासुर का अंश सेक्स पावर के हैवी दोसे से भी ज्यादा खतरनाक होता है.

फिर कुछ देर को सन्ति छ जाती है..
 
गुरु एक दम से पब की चादर खींच लेती है. और उसका नंगा बदन उन दोनों के सामने आ जाता है. जिसको देख कर उनको यकीं नहीं हो रहा था. और उनकी छूटो ने पानी छोड़ना सुरु कर दिया था. एक hi रात में वो पूरा बदल गया था. चेहरे पे तो कोई खास बदलाब नहीं था बस वो थोड़ा सा भर गया था और एक अलग hi चमक आ गई थी. वो स्मार्ट तो पहले से hi दिकता था. पैर अब तो बॉडी भी पहलवानो की जैसी हो गई थी. सिक्स पैक बॉडी, उसकी बॉडी गजनी के सलमान की जैसी देख रही थी. एक दम सॉलिड.

तभी एक दम से गुरु ने कल के सामान में रखा चाकू उदा लिया और उसके हाथ में गुसा दिया. सविता की तो चीख hi निकल गई. और उसकी आखें बंद हो गई. तभी रूम का गेट कनक होने लगा. अवनि की आवाज आये क्या हुआ मम्मी. गुरु ने कहा कुछ नहीं तुम जाओ..

गुरु की नार्मल आवाज सुन कर सवी ने आखें खोली और पब के हाथ की और देखा तो वह पे कुछ भी नहीं था. फिर गुरु के हाथ में चाकू देख तो वो मुद गया था ु शेप में. ये देख कर सवी बोली – ये क्या है दीदी, अपने अपने पति पे hi चाकू से बार कर दिया.

गुरु – में इसकी पत्नी बाद में हु उससे पहले में दस माँ की भक्त हु. और मुझको उनकी सकती पे पूरा विस्वास है. मैं ये भी देख रही थी की इसने क्या पाया है.

पब – गुरु मुझको अंदर से बहुत सकती फील हो रही है.

गुरु – हाँ इसका मतलब क्रिया सफल रही है. अब ये सोचो की ठाकुर का क्या करना है.

पब – करना क्या है. मैं जाउगा और उसको मार के जय को ले के आ जाउगा.

गुरु – हाँ जैसे की ठाकुर तुमको देख कर खुद कहेगा की आओ और मुझे मार दो. और को जय को अपनी दाल नहीं बलायेगा.

पब – तब क्या करे??

गुरु – कुछ सोचती हु जब तक तुम हवेली का एक चक्कर लगा कर आओ. देखो की वह कितने लोग है. और क्या ाररेंग्मेंट है सुरक्षा के.

पब – ok अभी जाता हु..

पब पूरी हवेली का चाकर काट की आया. उसको कोई ज्यादा आदमी नहीं देखे. बस 2 आदमी थे गेट पर. पर कक्तव कमरा चारो और लाये थे. और जब वो लोटा तो उसको कुछ आदमी उस टिया वाले की शॉप पे भी थे. उसमे से एक वो भी था जिसने सविता को लुंड चुस्य था. उसको देख कर पब का खून खोल गया. वो उसको मरने जाने लगा. पर फिर वो कुछ सोच के वापस लोट गया. और गुरु को सब बता दिया.

पब – मुझको लगता है की ठाकुर के पास जितने भी आदमी है. वो सब हवेली के अंदर hi है. तो मुझको हवेली के अंदर hi जाना होगा. पैर कैसे?? कियोकि जय भी अंदर है और मुझको लगता है की ठाकुर को पता होगा की हम दोनों सविता के घर पैर है कल से. उसके आदमियों ने उसको जरूर बताया होगा.

गुरु – हाँ ये तो है hi. और हमको जल्दी hi कुछ करना होगा. कियोकि केवल कल सुबह तक का टाइम है. कल ठाकुर के आदमी फिर आएंगे

सब सोच में थे की जय को पहले कैसे बचाया जाये. कियोकि पब का तो अब कोई दर नहीं tha.par बात तोजाय की hi थी. किसी को भी कुछ नहीं सूज रहा था. कियोकि ठाकुर की हवेली किसी है. उसके अंदर कोण -2 है. जय को किस हालत में रखा गया है. और उनके पास कोण से हतियार है. कुछ भी नहीं पता था किसी को. कुछ देर बाद पब बोलै – एक आईडिया है मेरे पास पैर उसमे सविकि जान को खतरा है.

गुरु – नहीं सुन्ना मुझको तेरा आईडिया. तो इस बिक्री को क्यों फसा रहा है. ये तेरे को करना है.

सविता – दीदी सुन तो लो इनका आईडिया. में जय के लिए किसी भी खतरा के लिए तैयार हु. बस उसको कुछ नहीं होना चाहिए.

गुरु – चलो बोलो.

पब – देखो मुझको कोई नहीं जनता की मैं यहाँ क्यों आया हु. यदि में कहु की जय के पास मेरा एक बहुत जरुरी सामान है . और मैं वो सामान लेने आया हु तो किसी को भी सक नहीं होगा. कियोकि जय भी सहर जाता रहता है.

गुरु – और वो सामान क्या है?

पब – गुरु पहले पूरी बात सुनो.

मैं सोच रहा हु की मैं और सवी आज स्याम को हवेली जाये. और हवेली जा कर सवी ठाकुर से मिलने को कहे तो ठाकुर सोचेगा तो की सवी किसी लड़के के साथ क्यों मिलने आयी है. पैर वो एक लड़के से डरेगा नहीं और सवी से मिलने आएगा. तो मैं उससे कहुगा की वो मुझको जय से मिलवा दे. कियोकि मुझको उससे कुछ लेना है…………………………………………… और पब अपनी पूरी प्लानिंग बताता गया. और जो कुछ कमी थी वो गुरु ने सही कर दी…

अभी एक्शन में टाइम था. तो मैं बहार ड्राइंग रूम में बैठा था. और अवनि अपने रूम में थी. गुरु और सविता किचन में जा चुकी थी. तो मेने सोच चलो अवनि से बात की जाये. कियोकि मेने देखा था की अवनि आज सुबह से hi मुझको इग्नोर कर रही है. तो मेने उसके रूम के गेट पे गया तो वो अपने मोबाइल में लगी हुई थी. मेने आवाज दी

पब – क्या में अंदर आ सकता हु..

अवनि – अरे आइये न सर. पूछ क्यों रहे है (और उसने मोबाइल एक साइड रख दिया)

पब – देखो मेने भी ले लिया है एक नया मोबाइल कल. (और में उसको कल जो गुरु के साथ आया था वो मोबाइल दिखया. हमने 2 मोबाइल लिए थे 1 गुरु के लिए और मेरे लिए)

अवनि – हम्म अच्छा है आपका पूर्ण no. तो में तरय कर कर के तक गई थी. मैं तो आपके दिल्ली वाले कमरे पे भी गई थी. पैर उन्होंने कहा की आप घर छोड़ कर जा चुके है.

पब – हाँ माँ और बहन की डेड के बाद मेने क्या किया तुम को बताया था न.

अवनि – हम्म, आज बारे स्मार्ट लग रहे हो. गुरु दी ने बताया तुम्हारी सकती के बारे में.

पब – एक बात पुछु

अवनि – हाँ बोलो

पब – तुमको केसा लग रहा है की मेने तुम्हारी माँ से सधी कर ली है

अवनि – थोड़ा अजीव है, पर में समझती हो की ये क्यों हुआ है. और में अपनी माँ के लिए खुस हु की वो आज खुस है. बस अब आप उनका ख्याल रखना.

पब – हाँ वो तो रखुगा hi, और तुम्हारा क्या??

अवनि – मैं अपना ख्याल खुद रख रक्ति हु.

पब – ोुह्ह्ह मेरी जान खुद hi अपना ख्याल रख सकती है. वैसे तुम आज सुन्दर लग रही हो.

अवनि – सरमते हुए – हम्म फ़्लर्ट मत करो..

पब – ी लव यू..
 
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पब – ी लव यू..

अवनि – (वो भी उससे बहुत प्यार करती थी पैर उसको उम्मीद नहीं थी की पंकज एक डैम से बोल दे गए तो वो चुप hi रही.)

पब – तुमने रिप्लाई नहीं किया.

अवनि – सोचेंगे इस वेयर में… अप्लीकेशन लगा दी है यदि मंजूर हुई तो bataugi…(thode मजाकिया स्टाइल में)

पब – यार मजाक मत करो, मैं सच में तुमसे प्यार करता हु. वो भी तब से जब तुमने ऑफिस ज्वाइन किया था. हम एक टीम में थे. और उसमे और भी बहुत थे. पैर मुझको सिर्फ तुम अच्छी लगी. तुमसे बात कर के दिल को सुकून मिलता था. और ये कब प्यार में बदल गया पता hi नहीं चला. अब जब तुमको यहाँ देखा तो में हिल गया पूरा. मेरा वो प्यार जिसको में दिल्ली छोड़ आया था. एक दम से मेरे सामने था. और फिर एक पल में hi पता चला की तुम बहुत ज्यादा फांसी हुई कंडीशन में हो और तुमको पता भी नहीं है. तो में पागल हो गया और केवल एक hi बात याद रहा गई की तुमको बचने के लिए तुम्हारी माँ के साथ क.. सॉरी सेक्स करना होगा. तो में वो हरकत कर बेथ. और जब होश में आ कर बहार आया तो तुम्हारी आखों में खो गया और पता hi नहीं चला की कब हमारे होठ एक हो गए. पैर में उस किश को कभी नहीं भूल पाउगा. जिसमे सिर्फ तुम्हारा और मेरा प्यार था. वासना तो थी hi नहीं… फिर तुम खुश हो गयी जब गुरु ने कहा की हमारी सधी होगी. तब मुझको लगा की मुझको मेरा प्यार मिल गया. पैर आज सुबह से देख रहा हु की तुम मुझसे नजरे चुरा रही हो. क्या बात है??

अवनि – पंकज बात ये है की मैं भी तुमसे प्यार करती हु. वो भी बहुत, पर में इस पंकज से प्यार नहीं करती में तो उस पंकज से प्यार करती थी जो एक दम सीधा था. और भोला इतना की लड़कियों से बात भी नहीं करनी आती थी. वो बस मुझसे hi बात करता था. मैं जानती हु की तुम क्यों और कैसे बदले हो. और अब तुम उसके पति हो किसको में बचपन से माँ मानती आयी हु. मेरे दिल में तुम्हारे लिए आज भी उतना hi प्यार है. मैं भी तुमसे उस टाइम नहीं कहा पायी थी. तो कल तुमको देख कर मैं भी उन पुराणी बातो में खो गयी. पैर रात को मेने बहुत सोच तो मेरे कुछ समाज नहीं आया की में क्या चाहती हु. प्लस मुझको गलत मत समझना. मुझको थोड़ा टाइम दे दो………

पब – थोड़ा नहीं चाहे जितना ले लो. पैर मुझको तुम्हारा हमेशा इंतजार रहेगा.

अवनि – पैर एक रिक्वेस्ट है. की इस वजह से तुम मेरी माँ को कोई ताफलीफ नहीं डोज. और ना hi उनको हमारे बारे में बटगे…

पब – तुमने ऐसा सोचा भी कैसे की में ऐसा कर भी सकता हु. तुम अभी मुझको समाज hi नहीं पाई हो. वाकई तुमको अभी वक्त की जरुरत है. तुम चिंता मत करना सवी अब मेरी जिम्मेदारी है.

और ये कहा कर पब वह से निकल जाता है. और बहार आ कर बेथ जाता है और अवनि के बारे में सोचने लगता है तो उसको भी फील होता है . की बस 2 दिन में hi अवनि की जिंदगी में कितनी चेंज हुए है. पहले उसको अपनी माँ को गलत समझना. अपना प्यार को दुबारा देखना, और उस प्यार को अपनी माँ और भाई की ख़ुशी के लिए कुर्बान करने की सोचना, किसी की रखेल बनने का दर, अपने प्यार को दुबारा खोने का दुःख, जैसे 2 hi दिन में पूरी जिंदगी के दुःख और सुख मिल गए हो. वो शौच में hi था की सवी और गुरु बहार एते है खाना ले कर. और अवनि को भी बुला लेते है. सब सन्ति से खाना कहते है. और अब पब अपने प्लान को फिर से सोचने लगता है कियोकि बस कुछ सयम बाद उसे जाना था और अब सब उस पे hi निर्भर था. उसने पहले कभी कोई लड़ाई नहीं लड़ी थी. वैसे तो गुरु ने उसका हौसला बहुत बारे दिया था. और उसको अपनी ताकत के भी बरोश था. पैर फिर भी एक दर तो था hi की कुछ भी गलत हुआ तो सवी और जय की जिंदगी डाव के लग जाएगी.

नोट – डिअर फ्रेंड्स यहाँ मैं आप लोगो को बता दू की पब का निशाना बचपन से hi अच्छा है. और फिर नक्स ज्वाइन करके तो और भी अच्छा हो गया था. उसने नक्स में कई तरह की गन भी उसे कर राखी थी कैंप में. जो भाई नक्स के बारे में जानते है उनको पता होगा की नक्स में जिसका निशाना अच्छा होता है. उसके कैंप भी अलग होते है. इसके निशाने का एक नमूना टाइगर बाले part में आप देख चुके है. और वाकई किसी भी तरह की कोई भी फाइटिंग स्किल उसके पास नहीं थी. वो तो कभी बचपन में अपने दोस्तों के साथ भी हाथ पाई नहीं किया था.

सयम के समय में और सवी दोनों ठाकुर की हवेली की तरफ चल दिए. सवी के फेस पे भी दर के भाव थे. दर तो मुझको भी लग रहा था. पैर फेस पे नहीं दिख रहा था. मुझे लगा की यदि सवी का फेस ऐसे hi रहा तो ठाकुर को सक हो सकता है.

पब – सवी दर कियो रही हो.

सवी (हड़बड़ा गई) – नहीं में तो ठीक हु. (जबकि उसकी आवाज में कम्पन था)

पब – सवी तुमको मुझपे बिस्वास है न. मेरी आखो में देखो.

सवी ने पब की आखो में देखा. तो उसको कुछ रहत सी मिली. वो दर को भूल कर मेरे प्यार में खोने लगी… देखते hi देखते हम दोनों चिपक गए और रस्ते में hi एक दूसरे की बहो में खोने लगे. वो तो जंगल था. नहीं तो कोई गाओं वाला देखता तो सवी की बदनामी होती. थोड़ी देर में सवी को अच्छा फील होने लगा तो हम फिर चल दिए. रस्ते में में उसके साथ यहाँ वह की बाते करता रहा जिससे दर उसपे फ़ी से हावी न हो जाये.

हम दोनों हवेली के गेट पे पहुंचे तो सविता ने बोलै की ठाकुर से मिलना है. तो उसने कहा की ठाकुर साहब बहार गए है आते hi होंगे. तो हम ठाकुर का इंतजार करने लगे. पर अब एक एक पल किसी युग के बारे बार लग रहा था. दर हावी हो रहा था. सविता की तो हालत करब होने लगी तो में उसको साइड में ले जा कर हिम्मत देने लगा. करीब 30मं के बाद ठाकुर आ गया. तो उसने सविता को देख कर अंदर बुलाया. हम ठाकुर के साथ अंदर चले गए. ठाकुर हमको एक रूम में ले गया जो हवेली से कुछ हैट के था.

हवेली के अंदर जाते hi मेने देखा की बाउंड्री के चारो तरफ आदमी है. और हवेली बाउंड्री के बीचो बिच बानी है. पीछे की और एक पहाड़ था. गेट के एक साइड में 2 रूम थे. एक गार्ड के लिए था. और एक वेटिंग रूम लग रहा था. हम उसमे hi गए थे. और गेट की दूसरी साइड में गेट से थोड़ी दुरी पे 3 रूम थे उसके बहार कुछ आदमी और थे. जब हम वेटिंग रूम में पहुंचे तो

ठाकुर – सविता कोण है ये और क्यों ले हो इसको यहाँ. तुमको तो तुम्हारी बेटी लेन को बोलै था.

सविता (दर रही थी) – जी ठाकुर साहब, ये जय का दोस्त है कल से हमारे घर पे है. ये उससे मिलना छटा है.
 
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ठाकुर – क्या इसने कहा और तुम इसको यहाँ ले आई. तुम जानती हो न की तुम किसके सामने और कहा कड़ी हो.

सविता – (इसरा करती है, और पब से कुछ दुरी पे ठाकुर को ले जाती है, ये सब हमारे प्लान के हिसाब से hi चल रहा था.) – में जानती हु की में अपने होने वाले दामाद के सामने हु. पैर मुझको माफ़ करे ठाकुर साहब जब इसने अवनि की गर्दन पे चाकू रख दिया और ुजसे कहा की यदि मेने इसको जय से नहीं मिलवाया तो ये अवनि को और मुझको मार देगा. तो में इसको अपने पास ले आयी. सोच अब आप हमारे अपने है तो इतनी तो मदत कर hi सकते है

ठाकुर (उसकी बातो से खुस था फिर भी बोलै) – मतलब तुम्हारी बेटी मन गई क्या और तुमको कोई ऐतराज तो नहीं है न..

सविता – हाँ वो भी मन गई, वो तो एक hi बार में मन गई, मेरा दिल hi नहीं मान रहा था. पैर उस दिन जंगल से जाने के बाद सोचा तो लगा की आपसे मैं जीत तो नहीं सकती इसलिए अवनि को बुला लिया. पैर मैं उससे कहने में दर रही थी. पैर आपके गुंडों के दबाब में मेने अवनि को कहा तो वो एक बार में hi हाँ कहा दी. और बोली माँ ठाकुर साहब तो गाओं के भगवन है और यदि उन्होंने मुझको पसंद किया है तो ये तो ख़ुशी के बात है. में उनकी रखेल बानगी तो क्या हुआ तुम्हारी तरह पूरी जिंदगी दुःख में तो नहीं कटनी पड़ेगी. बस अब आप एक कृपा कर दीजिये की जय को कहा बुला दो तो ये मिल कर यहाँ से चला जाये. और फिर आप जब कहेगे हम अवनि को ले कर आ जायेगे.

ठाकुर पब की और जाता है

ठाकुर – तुम जय से क्यों मिलना चाहते हो. तुम्हारी हिम्मत कैसे हई हमारी अवनि पे चाकू सकने की.

पब – ठाकुर के पेअर को पाकर लिटा है – हमको माफ़ कर दीजिये ठाकुर साहब हमको नहीं पता था की वो आपकी अमानत है. हम तो बस जय से 2 मं के लिए मिलना चाहते है. मेरे एक चीज है उसके पास वो कहा है ये जान कर हम लोट जायेगे. प्लीज माफ़ कर दो मुझको. मेरी बहन की जान खतरे में है यदि हमको को नहीं मिली हो मेरी बहन मर जाएगी.

ठाकुर – क्या है जय के पास और वो जय के पास कैसे आई.

पब – हमारे पुरखो की एक मूर्ति है छोटी सी. वो मेने hi दी थी जय को छुपाने के लिए. जब जय सहर में मिला था 1 महीने पहले. पर मेरे चाचा को पता चल गया की वो मूर्ति मेरे पास है तो उसने मेरी बहन को उदा लिया. अब मुझको वो मूर्ति चाचा को देनी hi पड़ेगी नहीं तो वो मेरी बहन को मर देगा.

ठाकुर – चलो ठीक है मैं उसको यहाँ बुला देता हु. वो भी केवल सविता के कहने पर. (ठाकुर के मन में कुछ और चल रहा था)

ठाकुर अपने एक आदमी को अंदर बुलाता है और उसको जय को लेन को कहता है. कुछ देर में जय बिलकुल बुरी सी हालत में अंदर आता है. ऐसा लग रहा था की इसको खाना नहीं मिलता हो. जय को देख कर सविता के आशु आ जाते है. और वो जा कर उसके गले लग जाती है

सविता – मेरे बच्चे तेरी ये क्या हालत हो गई है…..

ठाकुर (तेज़ आवाज में) – ये लड़के पूछ इससे तू किस मूर्ति के बारे में कह रहा था. अब वो मूर्ति मुझको चाहिए. (पुराणी मूर्ति ठाकुर की कमजोरी थी जो की पब को हवेली के चारो और घूमते हुए एक आदमी से पता चली थी)

इस समय रूम में सवी, ठाकुर, जय, पब और ठाकुर का एक आदमी था. तो पब सविता को इसरा करता है और सविता जय को सहारा देते हुए पब के पीछे ले आती है. और पब भी जय को देख रहा था.

पब – जय भाई वो मूर्ति कहा है.

पब बोल तो जय से रहा था पैर उसकी नजर ठाकुर और उसकी आदमी पे hi थी. ठाकुर ने तो सपने में भी नहीं सोचा था की ये एक लड़का उसका कुछ बिगड़ भी सकता है. एक तो ठाकुर अपने घर में था. दूसरा ठाकुर के पास पूरी सेना थी. जबकि पब अकेला था.

जय के पीछे आते hi पब एक दम से ठाकुर को पकड़ा. और अपने दोनों हाथो से उसके सर को पाकर लिया.

पब – भानु तूने ये अच्छा नहीं किया मेरी अवनि के बारे में गलत सोच कर.

ठाकुर कुछ कहता उससे पहले तो पब ने उसके सर को घुमा दिया. अभी ठाकुर का मुँह उसकी पथ की तरफ था. और ठाकुर मर चूका था. ठाकुर की ये हाल देख के उसका आदमी दर गया और बहार को भागा चिल्लाते हुए – ठाकुर साहब को मर दिया, ठाकुर साहब को मर दिया

ये देख कर पब सविता से बोलै – सवी तुम जय का डायन रकना और गेट अंदर से बंद कर लो, मैं अभी आता हु डोरी देर मैं.

सवी- जी, अपना भी डायन रखना.

और पब चला जाता है और गेट को बहार से भी बंद कर देता है. पब को देखते hi सभी उसको घेर लेते है. 100 से भी जयादा आदमी थे. सरे के सरे पब को hi देख रहे थे आधे से जयादा के पास गन्स थी. और कुछ डंडा, तलवार और दूसरे हतियारो के साथ थे. जो आदमी भागा था उसने चिल्ला कर कहा इसी ने मारा है. और जैसे hi सबने सुना की इसने hi मारा है तो सब पब को मरने के लिए आगे बढ़ने लगते है. पब सब को देख कर भागने लगता है. और रूम से धोरा दूर हो जाता है. उसने भागना hi सुरु किया था की गोलिया चलने लगी. और वो उसके कपड़ो में छेद कर के जमीं पे गिरने लगी. तभी एक पूछे से तलवार वॉर करता है. तो उसकी शर्ट कट कर उसके कद्दू पे झूल जाती है. पैर उसको कुछ नहीं होता. गोली और तलवार से कुछ भी न होता डेक सभी गुंडों की पहात जाती है. पे पब तभी भाग कर एक आदमी के हाथ से गन ले लेता है. और फायरिंग सुरु कर देता है कुछ hi पल में 20 से जयादा गुंडों की लाश पति थी फिर वो उस खली गन को फेक देता है. एक आदमी उसको गुस्सा मरने अत है तो वो उसके दोनों कानो पे जोर से हाथ मरता है और वो वही मर जाता है. अब एक खोनी खेल सुरु हो चूका था. जिसमे खून सिर्फ गुंडों का hi बहा रहा था. वो जहा पे होता वह से केवल चीकने की कब्जे अति तो कभी गन की. बहुत से तो हवेली छोड़ के भाग गए. और बचे हुए मरते जा रहे थे. कुछ hi देर में लाशो का देर था. अभी कोई भी जिन्दा नहीं देख रहा था. तो पब ने चारो और घूम कर देखा. कोई भी नहीं था जिन्दा. फिर वो हवेली में गया. और हवेली में देखने लगा. हवेली अंदर से बहुत सुन्दर थी. असा लग रहा था की सवर्ग हो. जब पब हवेली में गया तो इस टाइम वो खून से पूरा नाहा चूका था. बदन पे केवल अंडरवेअर था. उसमे भी बहुत से छेड़ थे. और वो भी लाल हो चूका था. पब के सरीर का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था जहा खून न लगा हो. हवेली के अंदर आ कर हवेली को देखने लगा. पैर वह उसे कुछ नौकर के अलावा केवल ठकुराइन (कामिनी) और उसकी 2 बेतिया मिली. सब बहुत डरे हुए थे. और पब को देख कर तो और भी दर रहे थे. पब जब हवेली में घूम रहा था तो उसकी नजर एक मिरर पे गई जिसमे खुद को देख कर वो भी एक बार दर गया. फिर उसने एक नौकर से बाथरूम पूछा और उसमे जा कर नहाया और साफ़ हो गया. पर उसके पास कपडे नहीं थे तो उसने उसी नौकर से कपडे मगे. वो डरता हुआ कपड़े ले आया. उनको पहन कर वो बहार आया और वेटिंग रूम में गया. और सवी से बोलै अभी कोई खतरा नहीं है पैर जय की हालत ठीक नहीं है. तो हवेली के अंदर चलो और वह पे चल कर बैठो. और गुरु को फ़ोन कर के बुला लो.

चलो कुछ देर पहले चलते है जब पब वेटिंग रूम से निकला. तो जय सविता और पब की बातो से चक्र गया था. तो उसने सविता से पूछा की ये कोण है. तब सविता ने उसको साडी बाते शार्ट में बता दी. और ये भी बताया की उसने जय को बचने के लिए hi उससे सधी की है. पर अब वो खुस है उससे सधी कर के.

जय को भी दुःख हुआ की उसकी माँ ने इतना सहा है उन दोनों के लिए. पैर वो भी खुस था सविता की सधी से.
 
अपडेट 25

सविता जय को ले कर अंदर आ गई और गुरु को भी फ़ोन कर दिया. पब ने सविता का फ़ोन ले कर अपना no. दिल किया और अपना फ़ोन डुडाने लगा कियोकि लड़ाई में वो कही गिर गया था. कुछ देर में वो अपना फ़ोन ले कर अंदर गया तो देख सविता और जय अभी तक खरे है. जय ने ये देखा तो सविता से पूछ की कड़ी क्यों हो जा कर सोफे पे क्यों नहीं बढ़ती. जय को इस हालत में खड़ा ह्यु कर रखा है.

सविता – वो थॉराइन ने मन कर दिया.

पब – क्या? इसकी तो …… चलो तुम बैठो में देखता हु की कोण रोकता है तुमको.

सविता जा कर कामिनी के पास के सोफे पैर बेथ गई तो ठकुराइन गुस्से से पब को देखने लगी. कामिनी कुछ कर तो सकती नहीं थी. पैर उसको पसंद नहीं आया की सविता उसके बारे बार बैठे.

कामिनी – ये लड़के क्या नाम है तुम्हारा और इस रंडी को हमारे घर क्यों लाये हो?? और क्यों मारा मेरे पति को??

पब – क्या बोली तू?? बस इस बार माफ़ कर रहा हु. कियोकि मेने तुमको दुःख दिया है. दुबारा मेरी सवी के लिए कुछ भी कहने से पहले सोच लेना मैं क्या कर सकता हु. (ये बात पब ने गुस्से से बोली थी. और इसका असर भी हुआ)

कामिनी – अच्छा यदि ये सटी सावित्री है तो इसने ठाकुर साहब को क्यों पसाया??

पब – ोूहः मुझको लगता है भानु तुमको भी चुटिया बना रहा था. इसने ठाकुर को नहीं ठाकुर ने इसको पसाया. और जबरजस्ती मेरी अवनि से सधी करना चाहता था.

कामिनी – क्या मतलब? इसने ठाकुर को नहीं पसाया ये कह कर की हम गरीब है. मेरी बेटी को अपने नहीं अपनाया तो में आपको बदनाम कर दूगी??

पब – नहीं ठाकुर ने इसको दमकाया था की यदि इसने अपनी बेटी की सधी उससे नहीं की तो वो इसके बेटे (जय की और इसरा करता है) को मर देगा. और जय पिछले 15-16 दिनों से भानु की कैद में था. भानु के इसी किये की सजा उसे मार के दी है.

कामिनी – क्या ये लड़का ठाकुर साहब की कैद में था? हमने तो इसको कभी नहीं देखा यहाँ.

ऐडा (कामिनी की 1सत बेटी) बिच में बोली – नहीं माँ ये सच है. इसको पापा ने कैद किया हुआ था. हमने के वॉर देखा है इसको बहार के रूम. जो पहिचे की और बने है.

अब कामिनी को सब समाज में आ गया की ठाकुर ने क्या किया है. तो कामिनी रोने लगती है. और फिर सविता से पूरी बात बताने को कहती है तो सविता उसको बता देती है की उसको ठाकुर ने कैसे -2 परेशां किया. और फिर पब की मदत ली अपने बेटे को छुड़वाने में.

कामिनी (रट हुए) – मुझको माफ़ कर दो सविता. मेरे पति ने तुमको बहुत परेशां किया. अभी तक तो मुझको लग रहा था की मेरे पति अपने अच्छे कामो के लिए लड़ते हुए मरे गए है. तो मेने अपने आप को संत किया हुआ था. पर ऐसे पति से अच्छा तो ये hi हुआ की वो मर गए. तुम सब लोग हमको माफ़ कर दो. माफ़ कर दो….. (वो तेज़ रोने लगती है. जो दुःख अभी तक उसने छुपा के रखा था. वो इस बात से बहार आ गया की उसका पति be-wafa है. उसको रोटा देख उसकी दोनों बेतिया भी रोने लगती है)

भानु की छोटी बेटी पेय बहुत छोटी थी. वो अभी 7तह क्लास में थी. उसको तो कुछ भी समाज नहीं आया.

तो वो रट हुए अपनी माँ से – माँ इन्होने पापा को मारा है न. तो आप इनसे माफ़ी क्यों मैग रही है.

कामिनी – नहीं बीटा ये तो बहुत अच्छे है इन्होने नहीं मारा आपके पापा को वो तो आपके पापा से एक बड़ीई वाली गलती हो गई, तो भगवन ने उनको अपने पास बुला लिया.

पेय – तो क्या यदि मैं गलती करुँगी तो भगवन मुझको भी अपने पास बुला लगे.

कामिनी – (रट हुए) – नहीं बीटा ऐसा नहीं कहते मेरी बेटी तो समझदार है वो कोई गलती करती hi नहीं है.

पेय एक दम से पब का हाथ पाकर लेती है, और बोली – यदि आप अच्छे है तो आप मम्मी को माफ़ को माफ़ क्यों नहीं कर देते. देखो मम्मी रो रही है…

पब – आपकी मम्मी ने कोई गलती नहीं की है तो हम क्यों माफ़ करे? (हड़बड़ा जाता है. और उसके मुँह से बस एहि निकलता है)

पेय – आपको पता है मम्मी कहती है की यदि कोई माफ़ी मगे तो तुरंत उसको माफ़ कर देना चाहिए. पता है माया आंटी ने सुबह क्या किया, तब भी हमने उनको माफ़ कर दिया.

पब – क्या किया था आपकी माया आंटी ने सुबह??

पेय – मेरे लिए बिना बोन्बिता का दूध ले आयी वो भी पूरा गिलास, जब हमने कहा की बोन्बिता क्यों नहीं डाला तो बोली की मैं भूल गई मुझको माफ़ कर दो. तो हमने कर दिया माफ़…. और हमको फिर बिना बोन्बिता का hi दूध पीना para…(or मुँह बना लेती है…. सब उसकी इस हरकत पे हसने लगते है)

तभी पीछे से आवाज आयी – हाँ बीटा माफ़ कर देना चाहिए. आपके ये जो भैया है न वो एक दम बुद्दू है इनको कुछ नहीं आता. (ये आवाज गुरु की थी जो अभी अभी आयी थी अवनि के साथ)

सब पीछे देखते है गुरु को. तब तक गुरु और अवनि भी बेथ जाते है.

कामिनी – नौकरो से – जाओ सब के लिए कुछ ले आओ.

ऐडा भी नौकरो के साथ चली जाती है

पेय कुछ सोच रही थी. तभी बोली – मम्मी क्या ये हमारे भैया है???

पब – हाँ हम आपके भैया है. (और उसको बहो में बार लेता है तो उसकी आखों से एक ासु निकल जाता है)

कामिनी – थैंक ु. मुझको माफ़ करने के लिए. और मेरी बेटी को एक भाई देने के लिए.

पब – नहीं इसके लिए तो में आपका और इस नन्ही पारी का थैंक्स कहुगा. की मुझको एक बहन मिल गई.

पब गुरु को इसरा कर के एक और ले जाता है.

पब – गुरु मुझको तो अब कुछ समाज नहीं आ रहा है की हो क्या रहा है. मैं बहुत कन्फुज हु

गुरु – क्या हुआ

पब – देखो एक तो तुमने बहार लाशो का देर देखा hi होगा. इतनी लाशो का क्या करो समाज नहीं आ रहा.

गुरु – उसकी टेंशन मत लो वो तो पीछे पद्धड़ के जंगल में जला दी जाएगी.

कामिनी भी उनके पीछे आ गई थी – हां में अभी नौकरो से बोल देती हु वो सब लाशो को जंगल में छोड़ पंहुचा देंगे.

पब – चलो एक प्रॉब्लम तो ख़तम, अब दूसरी पुलिस.?

कामिनी – उसकी तुम चिनता मत करो हवेली में कभी पुलिस नहीं आ सकती बस भानु मर गया ये बहार न जाये. और हम किसी को नहीं बढ़ाएंगे ऐसे गंदे आदमी के लिए हम तुम जैसे लोगो को पुलिस के हवाले नहीं कर सकते.

पब – थैंक ु कामिनी जी.

कामिनी कुछ नहीं बोली बस उसकी आखो से एक आशु निकल गया. कुछ देर बाद बोली – आपको एक बात पता है. की हमारी सधी भानु से कैसे हुई थी.

पब – नहीं..

कामिनी – हमारे खंडन में एक परंपरा है. “जिसकी लड़ी उसकी भेस”.

पब – मतलब??

कामिनी – हमारी शादी यहाँ से 40 कम दूर एक ठाकुर से हुई थी. उसने हमसे शादी करने के लिए हमारे पापा को हराया था. हम उनके साथ खुस थे. पैर एक दिन एक पार्टी में भानु ने हमको देख लिया और हम को पाने के लिए उसने उनको ललकारा. और फिर सुरु हो गयी दोनों में लड़ाई. बहुत से आदमी मरे गए. और अंत में भानु ने धोखे से मेरे पति को मर दिया. और हमसे शादी कर ली. ऐडा मेरे पहले पति की बेटी है.

पब – हम्म समाज की ऐडा और पेय की आगे में ज्यादा डिफ्रेंस क्यों है.

कामिनी – नहीं आप नहीं समजे. हमको hi पूरा बोलना होगा. अब अपने हमारे पति को मारा है तो अब आप पैर है की आप ऐडा को अपनायेगे का मुझको. आप चाहे तो हम दोनों से भी शादी कर सकते है. पेय को तो अपने बहन बना लिया है नहीं तो….

पब (बिच में hi) – नहीं ऐसा बोलना भी मत. वो बहन है मेरी. और कामिनी जी क्या हम इस बारे में थोड़ी देर में बात करे. कियोकि मेरे लिए ये शॉकिंग है. प्लीज गलत मत समझना. मेरा दिमाग अभी किसी और बातो में है. क्या आप मेरी हेल्प कर सकती है उन सब में??

कामिनी – हाँ बिलकुल जैसा आप कहे..

पब – गुरु जो बात मुझको सब से ज्यादा खटक रही है वो ये है की बहार काम से काम 40-50 कमरे है. पर कोई भी रिकॉर्ड रूम नहीं है. और नहीं कोई स्क्रीन है. मेने ठाकुर का रूम भी देख वह भी कुछ नहीं था. और पुरे घर में मुझको कोई ऐसी चीज नहीं दिखी जिसकी सुरक्षा के लिए इतना सब किया जाये. कुछ तो है जो मिल नहीं रहा है.

गुरु – हाँ सोचने वाली बात तो है. कामिनी तुमको कुछ पता है इस वेयर में.

कामिनी – हाँ हमको तो भानु बोले थे की तुम्हारी सुरक्षा की लिए कर रहे है हम ये सब.

पब समाज जाता है ये टिपिकल इंडियन वाइफ है जिको ये भी नहीं पता होता की उसका पति क्या करता है और क्यों नहीं. जो पति ने कहा दिया वो सच. अपनी अकाल तो लगनी hi नहीं है.

पब – नहीं गुरु कुछ और तो है hi यहाँ नहीं तो वो रिकॉर्ड रूम और स्क्रीन हवेली में कही होनी चाहिए थी.

गुरु – हाँ तुम सही कह रहे हो. चलो एक बार में भी तुम्हारे साथ अच्छे से देख लेती हु. क्या पता मुझको कुछ मिले.

पब – ok चलो, कामिनी जी क्या आप हम सब के लिए कुछ खाने का ाररेंग्मेंट कर सकती है सब भूके है. (हकीकत में पब कामिनी को नहीं ले जाना चाहता था)

कामिनी – ok आप हवेली देखो में कर देती हु सब

और फिर चल देते है सब.

हवेली घूमते हुए गुरु को भानु के रूम में कुछ आभास होता है. पैर तो उसको इग्नोर कर देती है. फिर जब वो लोग रियर एरिया के गार्डन में पहुंचते है तो गुरु को फिर कुछ लगा. इस बार वो इग्नोर नहीं कर पायी. और जब उसने उसको समजा की क्या है तो वो घबरा गई. और बोली

गुरु – चलो यहाँ से यहाँ कुछ भी नहीं है.

फिर दोनों अंदर आ गए. और गुरु टॉयलेट का बोल कर एक रूम में घुस गई और वह जमीं पे बेथ कर डायन लगाने लगी. उसने फिर जो महसूस किया था वो मणि जी को बताया. तो मणि जी ने उससे कुछ कहा और बोले की मैं भी वह पहुंचने की कोसिस करता हु. पैर मैं अभी बिजी हु एक पूजा में. तो उसको पूरा करके कल सयम तक या परसो सुबह तक पहुँचूगा.

कुछ देर में गुरु रूम से बहार आ गई. जब तक खाने की तैयारी हो चुकी थी. अभी खाना खाने बेथ गए. जब सब खाना खा रहे थे तो गुरु बोली

गुरु – कामिनी क्या हम आज रात को यहाँ रुक सकते है. कल सुबह हम लोग चले जायेगे.

पब – क्यों गुरु यहाँ क्यों रुकना चाहती हो. अब तो हमको चलना चाहिए.

गुरु – नहीं पंकज अभी कुछ काम है मुझको. कल बताऊगी तुम्हे.

कामिनी तो इस बातो से सकते में आ गई. उसकी आखों से आशु निकलने लगे. उसको रोटा देख पब को लगा की ये हम लोगो के यहाँ रुकने से परेशां हो कर रो रही है. तो

पब – कामिनी जी क्या हुआ. यदि आप नहीं चाहती तो हम लोग अभी चले जायेगे.

ये सुन के तो कामिनी और तेज़ रोने लगी और पेय भी रोने लगी.

कामिनी (रट हुए) – नहीं आप ये क्या कहा रहे है. अब आप किस हवेली से नहीं जा सकते है. अपने अभी तक मेरी बात का जबाब भी नहीं दिया है जो मेने आपसे उस टाइम पूछी थी. और आप यदि यहाँ से जाना चाहते है तो हम तीनो को जहर दे देना. अब आप इस घर के मालिक है. आपको में नहीं जाने दूगी….

पेय – हाँ में अपने भैया को कही नहीं जाने दूगी. (और पेय पब से चिपक गयी)

पब – तुम ऐसी बात क्यों कर रही ho.me तुमको समाज नहीं प् रहा हु की तुम्हारे दिल में क्या है.

कामिनी – अपने उस टाइम भी मेरी नहीं सुनी थी. अब आपको मेरी पूरी बात सुन्नी होगी.

गुरु – अच्छा ठीक है तुम बोलो क्या बोलना चाहती हो?

कामिनी गुरु की तरफ देखती है जैसे पूछ रही हो की तू इतनी छोटी हो कर इस तरह से बात कैसे कर सकती हो… पब कामिनी के फेस को देख कर समाज जाता है की वो क्या सोच रही है.
 
अपडेट 26

कामिनी – अपने उस टाइम भी मेरी नहीं सुनी थी. अब आपको मेरी पूरी बात सुन्नी होगी.

गुरु – अच्छा ठीक है तुम बोलो क्या बोलना चाहती हो?

कामिनी गुरु की तरफ देखती है जैसे पूछ रही हो की तू इतनी छोटी हो कर इस तरह से बात कैसे कर सकती हो… पब कामिनी के फेस को देख कर समाज जाता है की वो क्या सोच रही है.

पब – कामिनी तुम इसकी बात का कभी बुरा मत मन्ना कियोकि बहुत कुछ ऐसा है जिसको तुम नहीं जानती हो. ये मेरी 1सत वाइफ है. और सवी मेरी 2ंद वाइफ है. और सवी भी गुरु को दीदी hi कहती है. और मेर लिए भी ये बहुत कुछ है.

कामिनी – हम्म ok, पर मेरी बात तो सुनिए.

पब – हां बोलो क्या कहना है तुमको…..

कामिनी – मेने पलहे भी बताया था की आप को मुझसे और ऐडा में से किसी एक से या दोनों से सधी करनी होगी. तो आप बताइये क्या चाहते है.

पब – मैं तुम दोनों में से किसी से सधी नहीं कर सकता अभी. पैर क्या मैं किसी और से ऐडा की सधी करा सकता हु?

ऐडा तो ये सुन कर सकते मैं आ गई थी. उसको उसकी माँ में पलहे hi बता रखा था ठाकुरो का रिवाज. पैर अब को किसी और की दुल्हन बनेगी. पैर किसे?

कामिनी – आप मुज को अपना लो. फिर आप इसकी शादी किसी से भी करवा सकते है..

पब गुरु की और देखता है. गुरु हां में इसरा कर देती है. फिर वो सवी की और देखता है तो सवी भी हाँ कर देती है. इन दोनों को तो पहले hi पता था की पंकज की बहुत सधी होगी तो एक और से क्या जाता है. पैर अवनि को अच्छा नहीं लगता की पब एक 38 साल की लेडी से शादी करे. कियोकि से उसके टारगेट के लिए भी जरुरी नहीं थी. पैर वो कुछ बोल नहीं पति सवी के सामने.

पब – कामिनी पैर में तुमसे अकेले में एक बात कहना चाहता हु.

कामिनी उड़ कर रूम की और जाने लगती है. वैसे भी सब को खाना हो गया था. तो सब उड़ जाते है. पब रूम की और चल देता है. रात बहुत हो चुकी थी तो सब सोने जाने लगते है. गुरु सविता को अपने पास बुलाती है. और कुछ सामान लेन को कहती है. सविता किचन की और जाने लगती है. गुरु फिर पब को आवाज देती है पब अभी कामिनी के रूम में घुसा hi था. की गुरु की आवाज सुन कर वापस आ जाता है.

गुरु – तुम आज रात कामिनी के साथ hi रहना. न तुम रूम से आना और न hi कामिनी को आने देना.

पब – क्यों? तुम क्या करने वाली हो?

गुरु – मेने पहिचे गर्दन में कुछ सकती महसूस की थी तो मेने मणि जी से बात की उन्होंने बताया की वो भी आ रहे है. पैर जब तक में उन सक्तियो को वह से हटा दू. उन सक्तियो को हटाने के लिए मुझको एक सेफ्टी शैलद बनानी होगी. जो किसी के भी आने से टूट जाएगी. तो कोई भी उस और न ए ये डायन रखना है.

पब – ok मैं जय और अवनि को भी बोल देता हु की वो अपने रूम से न निकले. और न hi और किसी को निकलने दे. वैसे भी नौकर तो सरे बहार की सफाई में बिजी है तो वो तो आ नहीं सकते. फिर भी में कामिनी को सुला कर बहार आ जाउगा और डायन रखुगा की कोई उदार न ए.

तभी सवी भी सब सामान ले कर गुरु और पब के पास पहुंच जाती है.

पब – तुम ये सब ले कर कहा घूम रही हो?

गुरु – मेने hi मगाया था. ये मेरे साथ रहेगी पूजा में.

पब – मैं क्यों नहीं आ सकता ??

गुरु – कियोकि तुमको कुछ देर कामिनी के साथ भी रहना है. और मैं इतने टाइम नहीं रुक रक्ति. ये सब मुझको सूरज निकलने से पहले करना है.

पब – ok, तो फिर मैं कामिनी के पास जाता हु. पैर तुम दोनों अपना ख्याल रखना.

दोनों – हाँ , और गार्डन की और चल डेट है.

पब भी अंदर जाता है. कामिनी अपनी ड्रेस चेंज कर रही थी. वो इस टाइम ब्लाउज और पेटीकोट में थी. और अलमारी से कपड़े निकल रही थी. उसको ऐसे देख कर पब का लुंड पूरा खरा हो गया था. कामिनी उसकी और पलटी. पैर उसने अपने आप को छुपाने की जरा भी कोसिस नहीं की. और बोली – बस 2 मं में नाहा कर आती हु. जब तक तुम भी कपड़े चेंज केर लो. ये पता नहीं किसके कपड़े पहने है तुमने.

पब –ok तुम जाओ, पैर मैं क्या पह्नु, ये तो मुझको तुम्हारे नौकर ने दिए थे.

कामिनी – सामने की अलमारी में से जो चाहो पहन सकते हो. वह पे कुछ कपड़े है भानु के.

और कामिनी अंदर घुस जाती है. पब अपने कपड़े बदल लेता है. तो उसको भी कुछ फ्री सा फील होता है.
 
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