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अपडेट 18
दोनों माँ बेटी को कुछ समाज नहीं आता की हो क्या रहा है. पैर वो दर से कुछ नहीं बोलती. बस गुरु को देखती रहती है. और गुरु उसके इलाज में लगी हुई थी. वो कुछ जड़ीबूटी भले आयी थी बहार जा कर. और उनको पब को दे दिया था. कुछ देर की कड़ी म्हणत राग लायी और पब अब नार्मल हो गया था. और गुरु ने अवनि को इशारा किया तो दोनों मिल कर उसको ले कर बीएड पे लिटा देती है. सविता एक और कड़ी बस देख रही थी. गुरु दोनों को ले कर बहार आ जाती है. हाँ अब बोलो क्या बोलना है. और एक चेयर पे जा कर बेथ गई.
सविता अभी भी गुस्से ने थी वो उस बात को हजम hi नहीं कर प् रही थी जो पब ने बोली थी.
सविता – तुमने उस लड़के को मेरे रूम में क्यों सुलाया है. निकल जाओ मेरे घर से…
गुरु – अभी थोड़ी देर पहले तो उन दोनों गुंडों का लुंड बरी मज़े से चूस रही थी. उनको तो नहीं निकला तूने. क्या उन्होंने ज्यादा रस दिए थे. मेरे पति ने तो तुजसे पूछ hi है न तो क्यों हगामा कर रही है. रेट बोल अपना.
गुरु की बात सुन कर सविता तो मरे सरम की जमीं में गाड़ी जा रही थी वो अपना सर अपने पेरो में छुपा कर रोने लगती है. और अवनि तो पागलो की तरह कभी गुरु को तो कभी अपनी माँ को देख रही थी. की उसकी माँ इतनी गन्दी बात सुन के भी चुप कैसे है.
अवनि – ये क्या बत्तनीजी है (और अपना हाथ तप्पड़ मरने के लिए उड़ाती है)
पैर गुरु उसका हाथ बिच में hi पाकर लिटी है और बोली – ये ठाकुर की होने वाली रखेल अपनी ोकत में रहा नहीं तो अभी तेरी छूट ने डंडा घुसा दूगी. फिर ठाकुर को बस एक भोसड़ा मिलेगा बस….
अवनि – क्या बाक रही हो. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी गठिया बाते करने की…
गुरु – यदि में बक रही हु तो अपनी माँ से पूछ कितने में बेचा है तेरे को… ठाकुर ने अच्छा रस दिया होगा.
सविता –(रट हुए) भगवन के लिए चुप हो जाओ सब. प्लीज चुप हो जाओ…
गुरु – में जब से कहा रही थी तब तो तेरी जबान बहुत चल रही थी. अब क्या हो गया लुंड सुग लिया का मेरे पति का.
अभी गुरु पुरे गुस्से में थी. उसके पति को मर जाने को बोलै था उसने कैसे छोड़ देती. पैर अब वो दोनों एक दम संत थी. अवनि को तो इतना बारे जतका लगा था की वो कुछ सोच hi नहीं प् रही थी. उसनी माँ का जैसे संत होने को कहना इस बात का सबूत था की गुरु की बातो में सच्चाई है. अवनि ने इतनी गन्दी और कड़वी बाते आज तक नहीं सुनी थी. और सविता तो अवनि को सच का पता लगने से समाज hi नहीं प् रही थी की वो क्या करे. उसने सोचा भी नहीं था की अवनि के सामने ये बाते ऐसे आएगी.
30मं तक कोई कुछ नहीं बोलै. तब अवनि ने छुपी तोड़ी –
अवनि – आपको क्या मिला हमारी जिंदगी में ये तूफान ला कर. हम माँ बेटी को अपने अपनी बातो में hi मार दिया है. इससे अच्छा तो ये है की में अपनी जान दे दू. मुझसे ये बर्दास्त नहीं हो प् रहा है.
गुरु – हां तुम जान दे सकती हो. पैर सोच लेना फिर तुम्हारे भाई का क्या होगा. उस माँ का क्या होगा जिसने पूरी जिंदगी तुम दोनों के लिए क़ुरबार कर दी. उस माँ का क्या होगा जो पता नहीं कितने दिनों से ठाकुर की डंकिया को झेल रही है और तुमको पता भी नहीं है. वो पल -2 मर रही है. पर बस तुमको खुस देकना छाती है.
सविता गुरु को मुँह फारे देखती है…
अवनि – आखिर तुम चाहती क्या हो. न तो जीने दे रही हो और न मरने… तुम बताओ क्या चाहती हो तुम
गुरु – सविता की तरफ – सविता जी पहले तो में माफ़ी चाहती हु. जो कुछ देर पहले मेने किया उस के लिए. पैर अपने मेरे पति को मरने का बोलै वो में बरदास नहीं कर पायी.
देखो हम तीनो के मान में बहुत सरे सवाल है. और उनके जवाब भी हम तीनो के पास hi है. तो सन्ति से एक एक कर के अपनी पूरी बात बोलै जिससे सब को सभी बातो का जवाब मिल सके. और ये भी सोच सके की अवनि को ठाकुर से कैसे बचाना है.
सविता – क्या सच में अवनि बच सकती है? क्या सच में?
गुरु – हाँ, पैर आपको छोड़ना पड़ेगा मेरे पति से. अब आप कोई सवाल नहीं करेगी यदि अवनि को बच्चन है तो सुरु करो अपनी बात
सविता (हर मन कर सब बताने का फैसला कर चुकी थी. कियुकी वैसे भी बस कल का दिन hi था, जब उसको ये सब बटाना था और उसको ठाकुर की रखेल बनने को मन्ना था.)– बात ये है की 15 दिन पहले ठाकुर रात को यहाँ आया था. और मुझसे बोलै की वो अवनि से शादी कर के उसको अपनी रखेल बनाना चाहता है. मुझको गुस्सा तो बहुत आया. पैर जैसे hi में ुचि आवाज में बोली उसके एक आदमी ने मेरे गाल पे तप्पड़ मर दिया. और मैं कुछ न कर सकीय. पैर फिर भी मेने हिम्मत कर के ठाकुर को मन कर दिया. तो ठाकुर ने कहा की - उसका अणि पे दिल आ गया है. नहीं तो अब तक तू और तेरी बेटी दोनों को एक साथ छोड़ चूका होता. चलो में तुमको सोचने का टाइम देता हु. 5 दिन है तुम्हारे पास सोचो और हां बोल दो. नहीं तो तुम मुझको जानती नहीं हो. और फिर वो चला गया.
फिर 6 दिन तक कुछ नहीं हुआ. मुझको लगा की ठाकुर भूल गया. मेने रहत की सास ली. पैर उस दिन देर रात तक तेरा भाई खेतो ने नहीं लोटा तो मुझको चिंता हुई. दोपहर में खाना देने गई थी तो वो खेत पे था. और जब रात को पहुंची तो वह कोई नहीं था. मैं दर गई. और मेरा दर सही निकला. अगले दिन ठाकुर के 2 आदमी ए. और बोले जड़ी तुम अपने बेटे की जान बहाना चाहती हो तो हमारे साथ चलो. मैं क्या करि चल दी उनके साथ और वो मुझको जंगल में ले गए. वह पे ठाकुर पहले से मौजूद था. उसने मुझको बहुत डराया. और मेरी बहुत बेज्जती की.
गुरु – क्या किया तुम्हारे साथ??
और पब को होश आ गया था. गुरु के रूम से निकलते hi. पैर वो बहार नहीं आया बस उन लोगो की बाते सुन रहा था. गुरु का वो रूप देख कर वो चौक भी गया था. और उसको गुरु पे प्यार भी आया था. की वो उससे कितना प्यार करती है.
सविता – ठाकुर के आदमियों ने पहले मेरे कपट उतर दिए. मैं 8 आदिमयो के सामने ब्रा और पेंटी ने कड़ी थी. फिर ठाकुर के आदमी मुझको कभी मरते तो खबि मेरे बूब्स दबा देते. और फिर एक ने मेरे बाल पाकर केर ठाकुर के पेअर पे मेरा सर रख दिया. और मुझको ठाकुर के जुटे चाटने परे. तब ठाकुर बोलै – सुन यदि तू अपने बेटे को बचाना चाहती है तो अपनी बेटी को बुला कर उससे हमारी सधी करा दे उसको अपनी रखेल बना कर रखेगी जिंदगी भर. उसको किसी चीज की कमी नहीं होगी. और यदि तूने मन किया तो तेरे बेटे को मर कर तुम दोनों माँ बेटी को उदा लगे. और फिर दोनों को एक साथ छोड़ कर अपने आदमियों के लिए छोड़ देंगे. वो लोग क्या करेगे तुम दोनों के साथ उसको तू अभी कुछ देर में महसूस करेगी. और यदि तूने किसी की हेल्प लेने की सोची भी तो तेरे बेटे के साथ वो भी मरेगा.
फिर ठाकुर ने अपने आदमियों को कहा की तुम इसके साथ कुछ भी कर सकते हो पैर याद रहे एक तो ये मारे न और इसको कोई अभी छोड़ेगा नहीं. (ठाकुर मन में – साली छोड़ गई तो इसका दर hi ख़तम हो जायेगा). चलो सुरु हो जाओ 10मं है तुम्हारे पास इसकी जवानी लूटने को.
बस फिर क्या था कुत्तो के जैसे टॉट परे मुज पैर पता नहीं क्या क्या हो रहा था. मुँह तो 1 सेक् को भी खली नहीं रहा. बिना चूड़े hi मेरी हालत बहुत ख़राब जो गई. ठाकुर बोलै सुन ये 10मं में तेरे साथ ऐसा कर सकते है तो सोच जब दिन रात ये तुज पैर और तेरी बेटी पैर चढ़े रहेंगे तो तुम दोनों की क्या हालत होगी. अब तू सोच ले और जब मन करे अपनी बेटी को ले आना हवेली पे. तब तक तेरा बीटा मेरे पास रहेगा. और फिर सब छाले जाते है. में रोटी रहती हु बड़ी मुश्किल से अपनी हालत ठीक की और घर पहुंच गई. मैं किस्से मदत मांगती कोण था मेरा अपना पूरा गाओं तो मेरे खिलाफ है. और ठाकुर गाओं का भगवन. गाओं वालो की नजर में वो देवता है. ठाकुर अपनी काली कमाई में से कुछ रस गाओं पैर खर्चता है. तो में क्या कर सकती थी. मैं बहुत दर गई जो मेरे साथ हुआ उन 10मं में. वो सहना मेरे बस का नहीं था. तो मेरी फूल सी बच्ची कैसे सहती. सोच -2 के मेरा दिमाग थक गया. तब मेने अवनि को ठाकुर की रखेल बनाने का फैसला किया. इससे वो रखेल तो होती पैर जिन्दा तो रहती न. और मेरा बीटा भी बच जाता. मेने एक लास्ट कोसिस करने के लिए ठाकुर के पास गई उससे मिलने. मेने उससे कहा की वो मुझको अपनी रखेल बना ले और मेरे बच्चो को छोड़ दे. पैर वो नहीं मन. वो बोलै तुझको भी बनना है तो तू भी आजा पैर मुझको तो तेरी बेटी चाहिए. और तू सोचे की तू उस को उसके ओफ्फिस से कही दूर भगा देगी तो सोचना भी मत मेरे आदमियों की निगरानी में है वो. वो **** ऑफिस में देहली में काम करती है न. में ये सब सुन कर और भी दर गई और मेने अवनि को यहाँ बुला लिया. पर समाज नहीं आ रहा था की इससे कैसे कहु ये बाते. बस ये सोचते हुए दिन निकल गए और आज सुबह ठाकुर के 2 आदमी आये थे घर.. और फिर उसने सुबह की साडी बात बता दी.
गुरु – जब वो दोनों आये थे तब हम दोनों भी तुमसे मिलने आये थे. अंदर से तुम्हारे रोने की आवाज सुन कर हम दोनों खिड़की पे पहुंचे. और हमने सब देख लिए. मेने पब को बड़ी मुश्किल से रोका था. नहीं तो वो उन दोनों से लड़ने जा रहा था.
अवनि (रट हुए ) माँ मुझको माफ़ कर दो. मेरी बवह से अपने इतना कुछ रहा है. और में इनकी बात सुन कर आपको गलत समाज बैठी. माफ़ कर दो माँ….. (और वो सविता के पेअर पकड़ लेती है. सविता उसको उदा कर सीने से लगा लेती है और चुप करवाने लगती है)
गुरु – अवनि और सविता तुम दोनों भी मुझको माफ़ केर दो मेने तुम दोनों के साथ ऐसा बर्ताव किया. पैर तुम दोनों संत नहीं हो रहे थे तो मुझको करना पारा. और सविता तुमने उस इंसान को मरने के लिए बोल दिया. जो मुझको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है.
अच्छा एक बात और बताओ की तुम अभी तक कुवारी क्यों हो??
ये क्यू. सुन कर सविता शर्मा गई तो अवनि चौक गई. उसकी माँ इस उम्र तक कुवारी है. यानि की उसकी माँ ने हम दोनों भाई बहन के लिए अपनी सब खुशिया का गाला खोट दिया.
सविता – ये तुम क्या…. तुमको कैसे पता ये.
गुरु ने सविता को उन गुंडों के जाने के बाद की साडी बात बताई. की कैसे उसने उसकी जान बचाई और क्या क्या किया.
गुरु – अवनि में तो भूल hi गई जा किचन से सब के लिए खाना ले आ. तेरी माँ अभी कमजोर है. उसको खाने की जरुरत है.
अवनि न चाहते हुए भी चली गई.
गुरु – अब बोलो
सविता – मरी शादी मेरे जीजा से हुई है. मेरी बहन के बच्चे है ये दोनों. जब मैं सधी कर के इस घर में आयी थी तब ये दोनों बच्चे थे. और इनके पिता बीमार थे. एक तरह से मुझको अपने जीजा और बच्चो की देख भल के लिए बेजा था. सधी के दिन भी उनकी तबियत ठीक नहीं थी. और फिर कभी हुई नहीं 15 दिन में hi वो मर गए. और मेने कभी इस बारे में सोचना बंद कर दिया. और बच्चो को hi अपनी जिंदगी मन लिया.
कुछ देर में अवनि सब के लिए खाना ले आये. तो गुरु उड़ कर मेरे पास आ गयी मुझको जगा हुआ देख कर और सही हालत में देख कर मुस्कुराई .
गुरु – कब उड़े
पब – मेरे सब सुना. तुम तो बरी खतरनाक हो यार. इतनी बुरी बुरी…. भगवन बच्ये..
गुरु – हाहाहा …. तुमको अब कोई नहीं बचा सकता में तो तुम्हारे गले पद गई अब तो. और कोई मेरे पति को मरने को बोले और में उसको छोड़ दू. ये में नहीं कर सकती.
पब – गले कहा पारी हो. तुम तो इतना दूर हो.
पब खड़ा हुआ और उसको भाहो में ले लिया. और उसकी आखों में देखने लगा. और फिर उसके गाल को चुम लिया. गुरु ने नजरे झुका ली – कहा- चलो बहार खाना खा लो.
फिर वो दोनों भी बहार आ गए.
खाना कटे हुए गुरु – पब तुम देहली से हो??
पब – हाँ
गुरु – तुमने कभी बताया नहीं.
पब – तुमने कभी पूछ नहीं.
हाहाहा दोनों हसने लगे और जब उन्होंने अवनि और सविता की तरफ देखा हो वो हैरानी से उन दोनों को देख रही थी.
सविता और अवनि एक साथ – तुमको नहीं पता तुम्हारा पति कहा रहता है??
गुरु – नहीं, चोको मत अभी बहुत कुछ है तुम दोनों को जानने के लिए. अभी तो तुमको ये भी नहीं पता की पब ने वो हरकत क्यों की थी.
पब को गुरु की बात से जो उसने किया था वो याद आ गया तो वो हिचकिचाने लगा और उसकी हिम्मत नहीं हुई उन दोनों को देखने की.
पब – मुझको माफ़ कर देना आप दोनों. सायद आप माफ़ भी न करे. काम hi ऐसा किया है. तो जो चाहे सजा दे सकती है. पर में अभी आपके घर को छोड़ कर नहीं जाउगा. एक बार अवनि को उस ठाकुर से बचा लू. फिर चला जाउगा आप लोगो की जिंदगी से कही दूर.
और पंकज आखो में आशु लिए कमरे की और जाने लगा. तो सविता ने उसका हाथ पाकर लिया.
सविता – अब यही बैठो और बताओ क्यों किया तुमने ऐसा.
पब – मैं नहीं बता पाउगा गुरु तुम hi बोलो सब…
गुरु –अपने बारे में बताने लगी कैसे पब को उसने पकड़ा और दस माँ ने क्या कहा. फिर वो कैसे 18 साल की हुई. और वो क्यों घूम रहे है. उसने बस सविता के लिए जो जरुरी था वो hi बताया.
सविता (गुरु के पेअर पाकर लेती है) – आप गुरुपित है. मैं **** गाओं की रहने वाली हु मेने बहुत सुना है आपके बारे में. यदि आप खुद आयी है तो अब मेरी बेटी को कुछ नहीं हो सकता.
फिर सविता उड़ कर पब की और देखते हुए – आप भी मुझको माफ़ कर देना. आप ने मेरे लिए इतना किया और में आपको गलत समाज बैठी. (और सरमने लगी)
पब – ये आप मुझको आप क्यों .. (बिच में)
गुरु – कियोकि कोई भी लड़की अपने होने बाले पति को आप hi कहती है. आप बुद्धू के बुद्धू hi रहेंगे.
….. हाहाहाहाहा
सविता ये सुन के भाग कर कमरे में चली जाती है. और अवनि की आखों में आशु आ जाते है. पैर वो मुस्कुरा भी रही थी.
दोनों माँ बेटी को कुछ समाज नहीं आता की हो क्या रहा है. पैर वो दर से कुछ नहीं बोलती. बस गुरु को देखती रहती है. और गुरु उसके इलाज में लगी हुई थी. वो कुछ जड़ीबूटी भले आयी थी बहार जा कर. और उनको पब को दे दिया था. कुछ देर की कड़ी म्हणत राग लायी और पब अब नार्मल हो गया था. और गुरु ने अवनि को इशारा किया तो दोनों मिल कर उसको ले कर बीएड पे लिटा देती है. सविता एक और कड़ी बस देख रही थी. गुरु दोनों को ले कर बहार आ जाती है. हाँ अब बोलो क्या बोलना है. और एक चेयर पे जा कर बेथ गई.
सविता अभी भी गुस्से ने थी वो उस बात को हजम hi नहीं कर प् रही थी जो पब ने बोली थी.
सविता – तुमने उस लड़के को मेरे रूम में क्यों सुलाया है. निकल जाओ मेरे घर से…
गुरु – अभी थोड़ी देर पहले तो उन दोनों गुंडों का लुंड बरी मज़े से चूस रही थी. उनको तो नहीं निकला तूने. क्या उन्होंने ज्यादा रस दिए थे. मेरे पति ने तो तुजसे पूछ hi है न तो क्यों हगामा कर रही है. रेट बोल अपना.
गुरु की बात सुन कर सविता तो मरे सरम की जमीं में गाड़ी जा रही थी वो अपना सर अपने पेरो में छुपा कर रोने लगती है. और अवनि तो पागलो की तरह कभी गुरु को तो कभी अपनी माँ को देख रही थी. की उसकी माँ इतनी गन्दी बात सुन के भी चुप कैसे है.
अवनि – ये क्या बत्तनीजी है (और अपना हाथ तप्पड़ मरने के लिए उड़ाती है)
पैर गुरु उसका हाथ बिच में hi पाकर लिटी है और बोली – ये ठाकुर की होने वाली रखेल अपनी ोकत में रहा नहीं तो अभी तेरी छूट ने डंडा घुसा दूगी. फिर ठाकुर को बस एक भोसड़ा मिलेगा बस….
अवनि – क्या बाक रही हो. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी गठिया बाते करने की…
गुरु – यदि में बक रही हु तो अपनी माँ से पूछ कितने में बेचा है तेरे को… ठाकुर ने अच्छा रस दिया होगा.
सविता –(रट हुए) भगवन के लिए चुप हो जाओ सब. प्लीज चुप हो जाओ…
गुरु – में जब से कहा रही थी तब तो तेरी जबान बहुत चल रही थी. अब क्या हो गया लुंड सुग लिया का मेरे पति का.
अभी गुरु पुरे गुस्से में थी. उसके पति को मर जाने को बोलै था उसने कैसे छोड़ देती. पैर अब वो दोनों एक दम संत थी. अवनि को तो इतना बारे जतका लगा था की वो कुछ सोच hi नहीं प् रही थी. उसनी माँ का जैसे संत होने को कहना इस बात का सबूत था की गुरु की बातो में सच्चाई है. अवनि ने इतनी गन्दी और कड़वी बाते आज तक नहीं सुनी थी. और सविता तो अवनि को सच का पता लगने से समाज hi नहीं प् रही थी की वो क्या करे. उसने सोचा भी नहीं था की अवनि के सामने ये बाते ऐसे आएगी.
30मं तक कोई कुछ नहीं बोलै. तब अवनि ने छुपी तोड़ी –
अवनि – आपको क्या मिला हमारी जिंदगी में ये तूफान ला कर. हम माँ बेटी को अपने अपनी बातो में hi मार दिया है. इससे अच्छा तो ये है की में अपनी जान दे दू. मुझसे ये बर्दास्त नहीं हो प् रहा है.
गुरु – हां तुम जान दे सकती हो. पैर सोच लेना फिर तुम्हारे भाई का क्या होगा. उस माँ का क्या होगा जिसने पूरी जिंदगी तुम दोनों के लिए क़ुरबार कर दी. उस माँ का क्या होगा जो पता नहीं कितने दिनों से ठाकुर की डंकिया को झेल रही है और तुमको पता भी नहीं है. वो पल -2 मर रही है. पर बस तुमको खुस देकना छाती है.
सविता गुरु को मुँह फारे देखती है…
अवनि – आखिर तुम चाहती क्या हो. न तो जीने दे रही हो और न मरने… तुम बताओ क्या चाहती हो तुम
गुरु – सविता की तरफ – सविता जी पहले तो में माफ़ी चाहती हु. जो कुछ देर पहले मेने किया उस के लिए. पैर अपने मेरे पति को मरने का बोलै वो में बरदास नहीं कर पायी.
देखो हम तीनो के मान में बहुत सरे सवाल है. और उनके जवाब भी हम तीनो के पास hi है. तो सन्ति से एक एक कर के अपनी पूरी बात बोलै जिससे सब को सभी बातो का जवाब मिल सके. और ये भी सोच सके की अवनि को ठाकुर से कैसे बचाना है.
सविता – क्या सच में अवनि बच सकती है? क्या सच में?
गुरु – हाँ, पैर आपको छोड़ना पड़ेगा मेरे पति से. अब आप कोई सवाल नहीं करेगी यदि अवनि को बच्चन है तो सुरु करो अपनी बात
सविता (हर मन कर सब बताने का फैसला कर चुकी थी. कियुकी वैसे भी बस कल का दिन hi था, जब उसको ये सब बटाना था और उसको ठाकुर की रखेल बनने को मन्ना था.)– बात ये है की 15 दिन पहले ठाकुर रात को यहाँ आया था. और मुझसे बोलै की वो अवनि से शादी कर के उसको अपनी रखेल बनाना चाहता है. मुझको गुस्सा तो बहुत आया. पैर जैसे hi में ुचि आवाज में बोली उसके एक आदमी ने मेरे गाल पे तप्पड़ मर दिया. और मैं कुछ न कर सकीय. पैर फिर भी मेने हिम्मत कर के ठाकुर को मन कर दिया. तो ठाकुर ने कहा की - उसका अणि पे दिल आ गया है. नहीं तो अब तक तू और तेरी बेटी दोनों को एक साथ छोड़ चूका होता. चलो में तुमको सोचने का टाइम देता हु. 5 दिन है तुम्हारे पास सोचो और हां बोल दो. नहीं तो तुम मुझको जानती नहीं हो. और फिर वो चला गया.
फिर 6 दिन तक कुछ नहीं हुआ. मुझको लगा की ठाकुर भूल गया. मेने रहत की सास ली. पैर उस दिन देर रात तक तेरा भाई खेतो ने नहीं लोटा तो मुझको चिंता हुई. दोपहर में खाना देने गई थी तो वो खेत पे था. और जब रात को पहुंची तो वह कोई नहीं था. मैं दर गई. और मेरा दर सही निकला. अगले दिन ठाकुर के 2 आदमी ए. और बोले जड़ी तुम अपने बेटे की जान बहाना चाहती हो तो हमारे साथ चलो. मैं क्या करि चल दी उनके साथ और वो मुझको जंगल में ले गए. वह पे ठाकुर पहले से मौजूद था. उसने मुझको बहुत डराया. और मेरी बहुत बेज्जती की.
गुरु – क्या किया तुम्हारे साथ??
और पब को होश आ गया था. गुरु के रूम से निकलते hi. पैर वो बहार नहीं आया बस उन लोगो की बाते सुन रहा था. गुरु का वो रूप देख कर वो चौक भी गया था. और उसको गुरु पे प्यार भी आया था. की वो उससे कितना प्यार करती है.
सविता – ठाकुर के आदमियों ने पहले मेरे कपट उतर दिए. मैं 8 आदिमयो के सामने ब्रा और पेंटी ने कड़ी थी. फिर ठाकुर के आदमी मुझको कभी मरते तो खबि मेरे बूब्स दबा देते. और फिर एक ने मेरे बाल पाकर केर ठाकुर के पेअर पे मेरा सर रख दिया. और मुझको ठाकुर के जुटे चाटने परे. तब ठाकुर बोलै – सुन यदि तू अपने बेटे को बचाना चाहती है तो अपनी बेटी को बुला कर उससे हमारी सधी करा दे उसको अपनी रखेल बना कर रखेगी जिंदगी भर. उसको किसी चीज की कमी नहीं होगी. और यदि तूने मन किया तो तेरे बेटे को मर कर तुम दोनों माँ बेटी को उदा लगे. और फिर दोनों को एक साथ छोड़ कर अपने आदमियों के लिए छोड़ देंगे. वो लोग क्या करेगे तुम दोनों के साथ उसको तू अभी कुछ देर में महसूस करेगी. और यदि तूने किसी की हेल्प लेने की सोची भी तो तेरे बेटे के साथ वो भी मरेगा.
फिर ठाकुर ने अपने आदमियों को कहा की तुम इसके साथ कुछ भी कर सकते हो पैर याद रहे एक तो ये मारे न और इसको कोई अभी छोड़ेगा नहीं. (ठाकुर मन में – साली छोड़ गई तो इसका दर hi ख़तम हो जायेगा). चलो सुरु हो जाओ 10मं है तुम्हारे पास इसकी जवानी लूटने को.
बस फिर क्या था कुत्तो के जैसे टॉट परे मुज पैर पता नहीं क्या क्या हो रहा था. मुँह तो 1 सेक् को भी खली नहीं रहा. बिना चूड़े hi मेरी हालत बहुत ख़राब जो गई. ठाकुर बोलै सुन ये 10मं में तेरे साथ ऐसा कर सकते है तो सोच जब दिन रात ये तुज पैर और तेरी बेटी पैर चढ़े रहेंगे तो तुम दोनों की क्या हालत होगी. अब तू सोच ले और जब मन करे अपनी बेटी को ले आना हवेली पे. तब तक तेरा बीटा मेरे पास रहेगा. और फिर सब छाले जाते है. में रोटी रहती हु बड़ी मुश्किल से अपनी हालत ठीक की और घर पहुंच गई. मैं किस्से मदत मांगती कोण था मेरा अपना पूरा गाओं तो मेरे खिलाफ है. और ठाकुर गाओं का भगवन. गाओं वालो की नजर में वो देवता है. ठाकुर अपनी काली कमाई में से कुछ रस गाओं पैर खर्चता है. तो में क्या कर सकती थी. मैं बहुत दर गई जो मेरे साथ हुआ उन 10मं में. वो सहना मेरे बस का नहीं था. तो मेरी फूल सी बच्ची कैसे सहती. सोच -2 के मेरा दिमाग थक गया. तब मेने अवनि को ठाकुर की रखेल बनाने का फैसला किया. इससे वो रखेल तो होती पैर जिन्दा तो रहती न. और मेरा बीटा भी बच जाता. मेने एक लास्ट कोसिस करने के लिए ठाकुर के पास गई उससे मिलने. मेने उससे कहा की वो मुझको अपनी रखेल बना ले और मेरे बच्चो को छोड़ दे. पैर वो नहीं मन. वो बोलै तुझको भी बनना है तो तू भी आजा पैर मुझको तो तेरी बेटी चाहिए. और तू सोचे की तू उस को उसके ओफ्फिस से कही दूर भगा देगी तो सोचना भी मत मेरे आदमियों की निगरानी में है वो. वो **** ऑफिस में देहली में काम करती है न. में ये सब सुन कर और भी दर गई और मेने अवनि को यहाँ बुला लिया. पर समाज नहीं आ रहा था की इससे कैसे कहु ये बाते. बस ये सोचते हुए दिन निकल गए और आज सुबह ठाकुर के 2 आदमी आये थे घर.. और फिर उसने सुबह की साडी बात बता दी.
गुरु – जब वो दोनों आये थे तब हम दोनों भी तुमसे मिलने आये थे. अंदर से तुम्हारे रोने की आवाज सुन कर हम दोनों खिड़की पे पहुंचे. और हमने सब देख लिए. मेने पब को बड़ी मुश्किल से रोका था. नहीं तो वो उन दोनों से लड़ने जा रहा था.
अवनि (रट हुए ) माँ मुझको माफ़ कर दो. मेरी बवह से अपने इतना कुछ रहा है. और में इनकी बात सुन कर आपको गलत समाज बैठी. माफ़ कर दो माँ….. (और वो सविता के पेअर पकड़ लेती है. सविता उसको उदा कर सीने से लगा लेती है और चुप करवाने लगती है)
गुरु – अवनि और सविता तुम दोनों भी मुझको माफ़ केर दो मेने तुम दोनों के साथ ऐसा बर्ताव किया. पैर तुम दोनों संत नहीं हो रहे थे तो मुझको करना पारा. और सविता तुमने उस इंसान को मरने के लिए बोल दिया. जो मुझको अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा है.
अच्छा एक बात और बताओ की तुम अभी तक कुवारी क्यों हो??
ये क्यू. सुन कर सविता शर्मा गई तो अवनि चौक गई. उसकी माँ इस उम्र तक कुवारी है. यानि की उसकी माँ ने हम दोनों भाई बहन के लिए अपनी सब खुशिया का गाला खोट दिया.
सविता – ये तुम क्या…. तुमको कैसे पता ये.
गुरु ने सविता को उन गुंडों के जाने के बाद की साडी बात बताई. की कैसे उसने उसकी जान बचाई और क्या क्या किया.
गुरु – अवनि में तो भूल hi गई जा किचन से सब के लिए खाना ले आ. तेरी माँ अभी कमजोर है. उसको खाने की जरुरत है.
अवनि न चाहते हुए भी चली गई.
गुरु – अब बोलो
सविता – मरी शादी मेरे जीजा से हुई है. मेरी बहन के बच्चे है ये दोनों. जब मैं सधी कर के इस घर में आयी थी तब ये दोनों बच्चे थे. और इनके पिता बीमार थे. एक तरह से मुझको अपने जीजा और बच्चो की देख भल के लिए बेजा था. सधी के दिन भी उनकी तबियत ठीक नहीं थी. और फिर कभी हुई नहीं 15 दिन में hi वो मर गए. और मेने कभी इस बारे में सोचना बंद कर दिया. और बच्चो को hi अपनी जिंदगी मन लिया.
कुछ देर में अवनि सब के लिए खाना ले आये. तो गुरु उड़ कर मेरे पास आ गयी मुझको जगा हुआ देख कर और सही हालत में देख कर मुस्कुराई .
गुरु – कब उड़े
पब – मेरे सब सुना. तुम तो बरी खतरनाक हो यार. इतनी बुरी बुरी…. भगवन बच्ये..
गुरु – हाहाहा …. तुमको अब कोई नहीं बचा सकता में तो तुम्हारे गले पद गई अब तो. और कोई मेरे पति को मरने को बोले और में उसको छोड़ दू. ये में नहीं कर सकती.
पब – गले कहा पारी हो. तुम तो इतना दूर हो.
पब खड़ा हुआ और उसको भाहो में ले लिया. और उसकी आखों में देखने लगा. और फिर उसके गाल को चुम लिया. गुरु ने नजरे झुका ली – कहा- चलो बहार खाना खा लो.
फिर वो दोनों भी बहार आ गए.
खाना कटे हुए गुरु – पब तुम देहली से हो??
पब – हाँ
गुरु – तुमने कभी बताया नहीं.
पब – तुमने कभी पूछ नहीं.
हाहाहा दोनों हसने लगे और जब उन्होंने अवनि और सविता की तरफ देखा हो वो हैरानी से उन दोनों को देख रही थी.
सविता और अवनि एक साथ – तुमको नहीं पता तुम्हारा पति कहा रहता है??
गुरु – नहीं, चोको मत अभी बहुत कुछ है तुम दोनों को जानने के लिए. अभी तो तुमको ये भी नहीं पता की पब ने वो हरकत क्यों की थी.
पब को गुरु की बात से जो उसने किया था वो याद आ गया तो वो हिचकिचाने लगा और उसकी हिम्मत नहीं हुई उन दोनों को देखने की.
पब – मुझको माफ़ कर देना आप दोनों. सायद आप माफ़ भी न करे. काम hi ऐसा किया है. तो जो चाहे सजा दे सकती है. पर में अभी आपके घर को छोड़ कर नहीं जाउगा. एक बार अवनि को उस ठाकुर से बचा लू. फिर चला जाउगा आप लोगो की जिंदगी से कही दूर.
और पंकज आखो में आशु लिए कमरे की और जाने लगा. तो सविता ने उसका हाथ पाकर लिया.
सविता – अब यही बैठो और बताओ क्यों किया तुमने ऐसा.
पब – मैं नहीं बता पाउगा गुरु तुम hi बोलो सब…
गुरु –अपने बारे में बताने लगी कैसे पब को उसने पकड़ा और दस माँ ने क्या कहा. फिर वो कैसे 18 साल की हुई. और वो क्यों घूम रहे है. उसने बस सविता के लिए जो जरुरी था वो hi बताया.
सविता (गुरु के पेअर पाकर लेती है) – आप गुरुपित है. मैं **** गाओं की रहने वाली हु मेने बहुत सुना है आपके बारे में. यदि आप खुद आयी है तो अब मेरी बेटी को कुछ नहीं हो सकता.
फिर सविता उड़ कर पब की और देखते हुए – आप भी मुझको माफ़ कर देना. आप ने मेरे लिए इतना किया और में आपको गलत समाज बैठी. (और सरमने लगी)
पब – ये आप मुझको आप क्यों .. (बिच में)
गुरु – कियोकि कोई भी लड़की अपने होने बाले पति को आप hi कहती है. आप बुद्धू के बुद्धू hi रहेंगे.
….. हाहाहाहाहा
सविता ये सुन के भाग कर कमरे में चली जाती है. और अवनि की आखों में आशु आ जाते है. पैर वो मुस्कुरा भी रही थी.