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पब की बात सुन कर जुली के आशु बहा गए – सच में आप बहुत अच्छे है आपका ये अपनापन hi तो है. जो मुझको कुछ भी कर गुजने की शक्ति देता है. ी लव यू फॉरएवर… अब आप जाइये एक मेरी जैसी लड़की के साथ इसका मत फरमाइए नहीं तो घर पैर आपकी साडी बिबिया आपकी पिटाई कर degi….hahaha
पब अब जुली से कुछ न बोल सका को घर की और चल दिया. हवेली पहुंच कर वो डिनर करके सो गया. वैसे भी आदि रात ख़तम हो चुकी थी. और कल इनको दयासुर के पास भी जाना था.
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चलिए एक बार त्रिकाल के अड्डे पैर भी नजर मार लेते है की वह क्या हो रहा है.
संभु – गुरूजी ये क्या हो रहा है कोई नया और बुराई के अंत करने के लिए आ गया है. कोई दानवपुत्र है. साला कहता खुद को दानवपुत्र है और कर देवता वाले काम रहा है. सेल पे पास लड़कियों की एक फौज भी है. पहले से hi इस पंकज ने दिमाग ख़राब कर रखा है अब ये और आ गया.
त्रिकाल – अरे मुर्ख ये कोई और नहीं वही पंकज है. आज की पूरी घटना मेने देखि है. और ये जो इसके पास फौज है न ये वो hi लड़किया है जो भानु हमारे लिए तैयार करता था. अब उन लड़कियों को hi त्रिनेड करके उनको किडनेप करने वालो को मरने के लिए उसे कर रहा है.
संभु – ये तो बहुत बुरी बात है.
त्रिकाल – नहीं हमको इससे ज्यादा फरक नहीं पड़ेगा. बस तू 3 महीने की बलि के लिए 21 लड़किया मगवा ले ****** से. यदि ये वह भी पहुंच गया तो ये सड़ना पूरी नहीं हो पायेगी. और एक बार ये सड़ना पूरी हो गयी फिर पंकज जैसे हमारा कुछ नहीं बिगड़ पाएंगे. एक बार मुझको मेरी खोई हुई पावर मिल जाये. फिर मैं डलासुर के इस रूप को अपना गुलाम बना कर देवताओ पैर अटैक करुगा. और फिर सवर्ग हमारा होगा संभु … मैं होगा स्वर्ग का राजा और तू वह का सेनापति…. और वो सरे देवता और इस दुनिया का हर मानव होगा हमारा गुलाम … हहह ाहः ः
संभु – हाँ गुरूजी ऐसा hi होगा. इस बार हमको कोई नहीं रोक सकता. हमारा वो सपना अब जरूर पूरा होगा.
त्रिकाल – हाँ संभु ऐसा होगा जरूर होगा. बस ये पंकज अपने रस्ते का कांटा बना हुआ है. सेल के उप्पेर इतनी बार अटैक कर चुक्का हु फिर भी बच जाता है पता नहीं कैसे हर बार किस्मत इसका साथ दे जाती है. और हम केवल देखने के कुछ नहीं कर पते.
संभु – गुरूजी तो फिर से कोई अच्छा सा प्लान बनाइये न. वैसे भी अब दिन hi कितने बचे है बस 80 दिन में आपकी सदमा पूरी हो जाएगी. फिर तो ये वैसे भी आपके सामने नहीं आ पायेगा. आपके सामने तो आने की हिम्मत तो आज भी नहीं होगी इसमें.
त्रिकाल – नहीं संभु बात ये नहीं है की उसमे कितनी शक्ति है. बात ये है की यदि मेरी सड़ना पूरी होने से पहले उसने डलासुर के देव रूप को उस कैद से मुक्त करवा दिया तो मेरा वो वरदान बेकार हो जायेगा जिसके कहते डलासुर ये bête hi हमको प्रोटेक्ट करते है. और यदि ऐसा हो गया तो ये चारो भाई मिल कर डलासुर के दानव रूप को यहाँ से आजाद करवा कर ले जायेगे. और हम उनको रोक भी नहीं सकते.
संभु – ओह्ह ये तो बड़ी दुविद्या है. पैर क्या कोई इतने काम दिन में ये कर सकता है?? और क्या हम अभी कुछ नहीं कर सकते??
त्रिकाल – वैसे तो मेरे बनाये उस चक्रवेव को तोडना हर किसी के वश में नहीं है. पैर अभी तक पब ने जो पावर पायी है. वो उसे इसमें बहुत काम आएगी. और फिर इस सब में दस माँ उस लड़के की हेल्प कर रही है तो कुछ भी हो सकता है.
संभु – हम्म गुरूजी तो आप उसमे कुछ फेर बदल कर दीजिये. ताकि पब की पावर वह कुछ कर न पाए.
त्रिकाल – नहीं संभु मैं अभी उसमे कुछ भी चेंज नहीं कर सकता. हाँ यदि मेरी पावर मेरे पास होती तो बात अलग थी. वैसे भी पब उसको तोड़ सकता है इसके भी 10% के चांस है वो भी इसलिए की दस माँ खुद उसकी हेल्प कर रही है.
संभु – वो तो ठीक है गुरूजी पैर कुछ ऐसा नहीं हो सकता की यदि वो देव रूप को मुक्त भी करवा दे तब भी वो यहाँ अटैक न कर पाए??
त्रिकाल – ये कैसे हो सकता है संभु?? यदि दलारूर का देव रूप आज़ाद होगा तो उसके 4रो bête यहाँ से अशनि से डलासुर के दानव रूप को ले कर जा सकते है.
संभु – और यदि कुछ ऐसा हो की भीमासुर और पतासुर (दस माँ के bête) जो की हमको आज प्रोटेक्ट कर रहे है वो आगे भी हमको प्रोटेक्ट करते रहे. ये कभी यहाँ से जा hi न पाए??
त्रिकाल – संभु सोच तो तेरी बहुत अच्छी है यदि ये हो गया तो फिर पंकज हमारा कुछ नहीं बिगड़ पायेगा. और न hi मेरी इस सदमा में कोई परेशानी कड़ी हो सकेगी.
संभु – हाँ गुरूजी यदि ऐसा हो गया तो फिर आपकी बनायीं शील्ड और इन दोनों भाइयो के होते कोई भी कुछ नहीं कर पायेगा. और यदि कोसिस भी करेगा तो फिर हम दोनों यहाँ मौजूद है. हर वॉर के लिए. आपको हरा कर आपके सामने से डलासुर के दानव रूप को ले जाना केवल इन भाइयो के बस की hi बात है. पंकज आपके सामने से ये नहीं कर सकता. चाहे वो आपके उस चक्रवेव को तोड़ दे पैर आपके होते हुए वो यहाँ कभी नहीं आ सकता.
त्रिकाल – हाँ संभु ये तो है. हमको खतरा केवल इस बात का है की यदि इन चारो भाइयो की शक्ति एक जगह हो कर हम पैर वॉर केरे तो हम उस वॉर का सामना नहीं कर सकते. नहीं तो हमारा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता.
संभु – तो क्यों न इन दोनों भाइयो को hi पैसा लिया जाये. यदि ये हमारी सुरक्षा का वचन दे दे तो फिर हमको किसी का दर नहीं.
त्रिकाल – हाँ और ये काम तुमको करना होगा. इन दोनों को बातो में पैसा कर इनसे वचन लेना होगा.
संभु – ठीक है आज hi मैं ये तरय करता हु.
फिर ये अपने इस प्लान को और सोचते है की क्या करना चाहिए. और क्या नहीं और फिर संभु त्रिकाल की चल रही सड़ना के लिए इन्तजार करके बहार की और आता है. ये उसका रोज का काम था. डेली वो त्रिकाल के लिए सरे ाररेंग्मेंट खुद करता था. और फिर चला जाता था. और जब ये भोर में वह से निकला तो अपने प्लान को अंजाम देने के लिए गेट पर रुक गया जहा पैर भीमासुर और पतासुर खड़े थे. और आज उनसे बात करने लगा. ये वो पहले भी करता था जब त्रिकाल कोमा में था.
संभु – प्रदम भीमासुर जी …. प्रदम पतासुर जी….
भीमासुर – क्या बात बहुत दिन बाद आज हमरे प्रदम किया जा रहा है.
संभु – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. आप जानते है जब से गुरूजी होश में आये है तब से मैं कुछ जयादा hi बिजी हो गया हु. और वो अभी अपनी सड़ना भी कर रहे है तो उसका सारा ाररेंग्मेंट भी करना होता है. पहले तो मैं फिर था ताका प लोगो से बात हो जाती थी. पैर अब थोड़ा सा बिजी हु. इसलिए आपसे माफ़ी मांगता हु.
पतासुर – कोई बात नहीं संभु.. वैसे भी हमारा तो काम है यहाँ की सुरखा करना. पैर आज तक कोई आया hi नहीं जिससे लड़ना पड़े.
संभु – हाँ ये तो है गुरूजी के दर से आ भी कोण सकता है. पैर फिर भी आप दोनों धन्य है जो इतने सालो से हमको सेफ किया हुआ है.
पतासुर – नहीं इसमें धन्य होने वाली कोण सी बात है. तुम्हारे गुरूजी के वरदान का फल है ये तो…
संभु – अच्छा क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हु??
पतासुर – हाँ बोलो
संभु – क्या कभी ऐसा हो सकता है की कोई वरदान निष्फल हो जाये??
भीमासुर – ऐसा कैसे हो सकता है. यदि वरदान देने वाले के पास में वो होगा नहीं तो वो वरदान देने से पहले hi मन कर देगा. वरदान देने के बाद निष्फल होने का क्या मतलब..
संभु – क्यों ऐसा क्यों नहीं हो सकता ???? आप इस वरदान को hi ले लो. जिसकी वजह से आप दोनों यहाँ है. डलासुर जी को तो ये बता था की उनके पुत्र उनके वरदान का मन रखेंगे. पैर यदि आप लोग ऐसा न करते तो??
पतासुर – संभु अपने शव्दो को सोच कर बोलो. हम अपने पिताजी के वर को कभी निष्फल नहीं होने देते..
संभु – तो क्या आप हमेशा यहाँ हमको प्रोटेक्ट करते रहेंगे??
भीमासुर – जब तक तुम्हारे गुरूजी के पास ये वर है तब तक हम यही है.
संभु (मन में – सेल बातो में पेशे hi नहीं. फिर से तरय करना होगा) – अच्छा और यदि कभी फ्यूचर में कोई आ कर आपको बहका दे. तो फिर तो आप अपने पिताजी के वर को निष्फल करके चले जायेगे क्या??
पतासुर – हमको बच्चा समजा है क्या जो कोई भी हमको बहका देगा.
संभु – हाँ हर माँ के लिए उनके पुत्र हमेशा बच्चे hi होते है. क्या पता कल को आपकी माँ hi आपको आ कर बहका दे.
भीमासुर – संभु अपनी जवान को लगाम दो. तुम दानव रानी के वेयर में बात कर रहे हो.
संभु – आपको बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहता हु. पैर ये क्यों नहीं हो सकता?? कल को वो आ कर आप दोनों से कहे की तुम दोनों डलासुर जी के पुत्र नहीं हो. तो फिर क्यों उनके वर का मन रख रहे हो. तब क्या होगा???
पतासुर – (तेज़ आवाज में) संभु अपनी जेवा को रोक ले… तूने बहुत गलत बात बोल दी है. तू अभी तक जिन्दा है कियोकि हम यहाँ तेरी और त्रिकाल की सुरक्षा कर रहे है.
संभु – हाँ हाँ यही तो कहा रहा हु. कल को आवेश में आ कर या किसी के बहकावे में आ कर आप दोनों अपने पिता के वर को भूल जाये. तो क्या ये निष्फल नहीं हो जायेगा. और वैसे भी इतिहास गव्हा है देवताओ में भी पिता और पुत्र के भी लड़ाईया हो चुकी है. तो तुम हो फिर भी दानव हो…
भीमासुर – नहीं हम उन लोगो में से नहीं है जो अपने दिए हुए वर और वचनो को भूल जाये.
संभु – हाँ मंटा हु आप उनमे से नहीं है पैर ये वर आपके पिताजी ने दिया है. यदि आपका दिया होता तो मैं ये सवाल hi नहीं करता.
भीमासुर – ठीक है यदि ऐसी बात है तो “हम दोनों वचन देते है जब तक हम जीवित है हम इस जगह की सुरक्षा करते रहेंगे”
संभु – आप दोनों सच में धन्य हो. जो पिता के वर को अपने वचन से और मजबूत कर दिया है. आप जैसा पिता भक्त पुत्र शायद hi कोई और हो. आप दोनों की शदा hi जय हो…..
ये कहा कर संभु एक ख़ुशी मन में लिए वह से निकल गया. इन दोनों भाइयो को पता भी नहीं चला की ये ठगे जा चुके है. पैर इसका आभाष दयासुर को हो गया था. किकोकि अभी जो टाइम था इस टाइम दयासुर अपनी आराध्ना केर होता था. तो उसे अपने डायन में hi अपने भाई का वचन सुनाई दे गया. और ये सुनते hi वो हड़बड़ा कर उदा और एक गहरी सोच में दुब गया. जब उसके नहीं समाज आया तो चल दिया अपनी माता जी यानि की दस माँ के पास. वह जब दस माँ ने दयासुर का फेस देखा तो वो समाज गयी की इसको भी उस वचन का आभाष हो चुक्का है. दुखी तो दस माँ भी थी. पैर कुछ किया तो नहीं जा सकता न. कियोकि वचन दिने वाले ने वचन दे दिया. और मुँह से निकले शब्द कभी वापिस नहीं आते.
दयासुर – माँ क्या ये सच है की भीमा भैया ने संभु को वचन दिया है.
दस माँ – हाँ बीटा ये सच है.
दयासुर – ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी. अब क्या होगा माँ?? अब त्रिकाल को ऐसे रोका जायेगा???
दस माँ – आदिक आदिर न हो पुत्र. ये सब नियति का खेल है. और नियति की आगे किसी की नहीं चलती. और यदि नियति चाहेगी तो सब कुछ ठीक हो जायेगा पुत्र. और यदि मेरे उन पुत्रो की वीरगति hi इस सब का अंत है तो भी हम कुछ नहीं कर सकते. (और ये कहते हुए दस माँ की आखों में भी आशु तेर गए)
दयासुर – ये क्या कहा रही है माँ??? अपने मुझको इसलिए पिताजी को मुक्त करवाने को नहीं जाने दिया की मुझको अपने भाइयो से युद्ध करना होगा. और आज आप खुद hi उसकी वीरगति की बात कर रही है. नहीं माँ मेरे भाइयो को कुछ नहीं होगा.
दस माँ – बीटा तुम जानते हो की मैं और तुम्हारे पिताजी क्यों शांत है. और अब तुम कुछ ऐसा मत करना की फिर से कोई नया संकट आ खड़ा हो. नियति ने इस काम के लिए जिसे चुनना होगा. उसका चयन खुद नियति hi करेगी. अब वक्त का इन्तजार करो. यदि तुमको युद्ध में भाग लेना होगा तो तुम भाग नहीं पाओगे. हमारे प्रभु भोले बाबा ने जैसा रच रखा है होगा तो वैसा hi.
फिर दस माँ दयासुर को और भी बहुत कुछ समजा कर बापिस भेज देती है. आज दस माँ ने दयासुर को एक राज से भी अवगत करा दिया था की – मणि शंकर तुम्हारे सबसे बड़े भाई का पुनःजन्म है.
पब की बात सुन कर जुली के आशु बहा गए – सच में आप बहुत अच्छे है आपका ये अपनापन hi तो है. जो मुझको कुछ भी कर गुजने की शक्ति देता है. ी लव यू फॉरएवर… अब आप जाइये एक मेरी जैसी लड़की के साथ इसका मत फरमाइए नहीं तो घर पैर आपकी साडी बिबिया आपकी पिटाई कर degi….hahaha
पब अब जुली से कुछ न बोल सका को घर की और चल दिया. हवेली पहुंच कर वो डिनर करके सो गया. वैसे भी आदि रात ख़तम हो चुकी थी. और कल इनको दयासुर के पास भी जाना था.
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चलिए एक बार त्रिकाल के अड्डे पैर भी नजर मार लेते है की वह क्या हो रहा है.
संभु – गुरूजी ये क्या हो रहा है कोई नया और बुराई के अंत करने के लिए आ गया है. कोई दानवपुत्र है. साला कहता खुद को दानवपुत्र है और कर देवता वाले काम रहा है. सेल पे पास लड़कियों की एक फौज भी है. पहले से hi इस पंकज ने दिमाग ख़राब कर रखा है अब ये और आ गया.
त्रिकाल – अरे मुर्ख ये कोई और नहीं वही पंकज है. आज की पूरी घटना मेने देखि है. और ये जो इसके पास फौज है न ये वो hi लड़किया है जो भानु हमारे लिए तैयार करता था. अब उन लड़कियों को hi त्रिनेड करके उनको किडनेप करने वालो को मरने के लिए उसे कर रहा है.
संभु – ये तो बहुत बुरी बात है.
त्रिकाल – नहीं हमको इससे ज्यादा फरक नहीं पड़ेगा. बस तू 3 महीने की बलि के लिए 21 लड़किया मगवा ले ****** से. यदि ये वह भी पहुंच गया तो ये सड़ना पूरी नहीं हो पायेगी. और एक बार ये सड़ना पूरी हो गयी फिर पंकज जैसे हमारा कुछ नहीं बिगड़ पाएंगे. एक बार मुझको मेरी खोई हुई पावर मिल जाये. फिर मैं डलासुर के इस रूप को अपना गुलाम बना कर देवताओ पैर अटैक करुगा. और फिर सवर्ग हमारा होगा संभु … मैं होगा स्वर्ग का राजा और तू वह का सेनापति…. और वो सरे देवता और इस दुनिया का हर मानव होगा हमारा गुलाम … हहह ाहः ः
संभु – हाँ गुरूजी ऐसा hi होगा. इस बार हमको कोई नहीं रोक सकता. हमारा वो सपना अब जरूर पूरा होगा.
त्रिकाल – हाँ संभु ऐसा होगा जरूर होगा. बस ये पंकज अपने रस्ते का कांटा बना हुआ है. सेल के उप्पेर इतनी बार अटैक कर चुक्का हु फिर भी बच जाता है पता नहीं कैसे हर बार किस्मत इसका साथ दे जाती है. और हम केवल देखने के कुछ नहीं कर पते.
संभु – गुरूजी तो फिर से कोई अच्छा सा प्लान बनाइये न. वैसे भी अब दिन hi कितने बचे है बस 80 दिन में आपकी सदमा पूरी हो जाएगी. फिर तो ये वैसे भी आपके सामने नहीं आ पायेगा. आपके सामने तो आने की हिम्मत तो आज भी नहीं होगी इसमें.
त्रिकाल – नहीं संभु बात ये नहीं है की उसमे कितनी शक्ति है. बात ये है की यदि मेरी सड़ना पूरी होने से पहले उसने डलासुर के देव रूप को उस कैद से मुक्त करवा दिया तो मेरा वो वरदान बेकार हो जायेगा जिसके कहते डलासुर ये bête hi हमको प्रोटेक्ट करते है. और यदि ऐसा हो गया तो ये चारो भाई मिल कर डलासुर के दानव रूप को यहाँ से आजाद करवा कर ले जायेगे. और हम उनको रोक भी नहीं सकते.
संभु – ओह्ह ये तो बड़ी दुविद्या है. पैर क्या कोई इतने काम दिन में ये कर सकता है?? और क्या हम अभी कुछ नहीं कर सकते??
त्रिकाल – वैसे तो मेरे बनाये उस चक्रवेव को तोडना हर किसी के वश में नहीं है. पैर अभी तक पब ने जो पावर पायी है. वो उसे इसमें बहुत काम आएगी. और फिर इस सब में दस माँ उस लड़के की हेल्प कर रही है तो कुछ भी हो सकता है.
संभु – हम्म गुरूजी तो आप उसमे कुछ फेर बदल कर दीजिये. ताकि पब की पावर वह कुछ कर न पाए.
त्रिकाल – नहीं संभु मैं अभी उसमे कुछ भी चेंज नहीं कर सकता. हाँ यदि मेरी पावर मेरे पास होती तो बात अलग थी. वैसे भी पब उसको तोड़ सकता है इसके भी 10% के चांस है वो भी इसलिए की दस माँ खुद उसकी हेल्प कर रही है.
संभु – वो तो ठीक है गुरूजी पैर कुछ ऐसा नहीं हो सकता की यदि वो देव रूप को मुक्त भी करवा दे तब भी वो यहाँ अटैक न कर पाए??
त्रिकाल – ये कैसे हो सकता है संभु?? यदि दलारूर का देव रूप आज़ाद होगा तो उसके 4रो bête यहाँ से अशनि से डलासुर के दानव रूप को ले कर जा सकते है.
संभु – और यदि कुछ ऐसा हो की भीमासुर और पतासुर (दस माँ के bête) जो की हमको आज प्रोटेक्ट कर रहे है वो आगे भी हमको प्रोटेक्ट करते रहे. ये कभी यहाँ से जा hi न पाए??
त्रिकाल – संभु सोच तो तेरी बहुत अच्छी है यदि ये हो गया तो फिर पंकज हमारा कुछ नहीं बिगड़ पायेगा. और न hi मेरी इस सदमा में कोई परेशानी कड़ी हो सकेगी.
संभु – हाँ गुरूजी यदि ऐसा हो गया तो फिर आपकी बनायीं शील्ड और इन दोनों भाइयो के होते कोई भी कुछ नहीं कर पायेगा. और यदि कोसिस भी करेगा तो फिर हम दोनों यहाँ मौजूद है. हर वॉर के लिए. आपको हरा कर आपके सामने से डलासुर के दानव रूप को ले जाना केवल इन भाइयो के बस की hi बात है. पंकज आपके सामने से ये नहीं कर सकता. चाहे वो आपके उस चक्रवेव को तोड़ दे पैर आपके होते हुए वो यहाँ कभी नहीं आ सकता.
त्रिकाल – हाँ संभु ये तो है. हमको खतरा केवल इस बात का है की यदि इन चारो भाइयो की शक्ति एक जगह हो कर हम पैर वॉर केरे तो हम उस वॉर का सामना नहीं कर सकते. नहीं तो हमारा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता.
संभु – तो क्यों न इन दोनों भाइयो को hi पैसा लिया जाये. यदि ये हमारी सुरक्षा का वचन दे दे तो फिर हमको किसी का दर नहीं.
त्रिकाल – हाँ और ये काम तुमको करना होगा. इन दोनों को बातो में पैसा कर इनसे वचन लेना होगा.
संभु – ठीक है आज hi मैं ये तरय करता हु.
फिर ये अपने इस प्लान को और सोचते है की क्या करना चाहिए. और क्या नहीं और फिर संभु त्रिकाल की चल रही सड़ना के लिए इन्तजार करके बहार की और आता है. ये उसका रोज का काम था. डेली वो त्रिकाल के लिए सरे ाररेंग्मेंट खुद करता था. और फिर चला जाता था. और जब ये भोर में वह से निकला तो अपने प्लान को अंजाम देने के लिए गेट पर रुक गया जहा पैर भीमासुर और पतासुर खड़े थे. और आज उनसे बात करने लगा. ये वो पहले भी करता था जब त्रिकाल कोमा में था.
संभु – प्रदम भीमासुर जी …. प्रदम पतासुर जी….
भीमासुर – क्या बात बहुत दिन बाद आज हमरे प्रदम किया जा रहा है.
संभु – नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. आप जानते है जब से गुरूजी होश में आये है तब से मैं कुछ जयादा hi बिजी हो गया हु. और वो अभी अपनी सड़ना भी कर रहे है तो उसका सारा ाररेंग्मेंट भी करना होता है. पहले तो मैं फिर था ताका प लोगो से बात हो जाती थी. पैर अब थोड़ा सा बिजी हु. इसलिए आपसे माफ़ी मांगता हु.
पतासुर – कोई बात नहीं संभु.. वैसे भी हमारा तो काम है यहाँ की सुरखा करना. पैर आज तक कोई आया hi नहीं जिससे लड़ना पड़े.
संभु – हाँ ये तो है गुरूजी के दर से आ भी कोण सकता है. पैर फिर भी आप दोनों धन्य है जो इतने सालो से हमको सेफ किया हुआ है.
पतासुर – नहीं इसमें धन्य होने वाली कोण सी बात है. तुम्हारे गुरूजी के वरदान का फल है ये तो…
संभु – अच्छा क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हु??
पतासुर – हाँ बोलो
संभु – क्या कभी ऐसा हो सकता है की कोई वरदान निष्फल हो जाये??
भीमासुर – ऐसा कैसे हो सकता है. यदि वरदान देने वाले के पास में वो होगा नहीं तो वो वरदान देने से पहले hi मन कर देगा. वरदान देने के बाद निष्फल होने का क्या मतलब..
संभु – क्यों ऐसा क्यों नहीं हो सकता ???? आप इस वरदान को hi ले लो. जिसकी वजह से आप दोनों यहाँ है. डलासुर जी को तो ये बता था की उनके पुत्र उनके वरदान का मन रखेंगे. पैर यदि आप लोग ऐसा न करते तो??
पतासुर – संभु अपने शव्दो को सोच कर बोलो. हम अपने पिताजी के वर को कभी निष्फल नहीं होने देते..
संभु – तो क्या आप हमेशा यहाँ हमको प्रोटेक्ट करते रहेंगे??
भीमासुर – जब तक तुम्हारे गुरूजी के पास ये वर है तब तक हम यही है.
संभु (मन में – सेल बातो में पेशे hi नहीं. फिर से तरय करना होगा) – अच्छा और यदि कभी फ्यूचर में कोई आ कर आपको बहका दे. तो फिर तो आप अपने पिताजी के वर को निष्फल करके चले जायेगे क्या??
पतासुर – हमको बच्चा समजा है क्या जो कोई भी हमको बहका देगा.
संभु – हाँ हर माँ के लिए उनके पुत्र हमेशा बच्चे hi होते है. क्या पता कल को आपकी माँ hi आपको आ कर बहका दे.
भीमासुर – संभु अपनी जवान को लगाम दो. तुम दानव रानी के वेयर में बात कर रहे हो.
संभु – आपको बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहता हु. पैर ये क्यों नहीं हो सकता?? कल को वो आ कर आप दोनों से कहे की तुम दोनों डलासुर जी के पुत्र नहीं हो. तो फिर क्यों उनके वर का मन रख रहे हो. तब क्या होगा???
पतासुर – (तेज़ आवाज में) संभु अपनी जेवा को रोक ले… तूने बहुत गलत बात बोल दी है. तू अभी तक जिन्दा है कियोकि हम यहाँ तेरी और त्रिकाल की सुरक्षा कर रहे है.
संभु – हाँ हाँ यही तो कहा रहा हु. कल को आवेश में आ कर या किसी के बहकावे में आ कर आप दोनों अपने पिता के वर को भूल जाये. तो क्या ये निष्फल नहीं हो जायेगा. और वैसे भी इतिहास गव्हा है देवताओ में भी पिता और पुत्र के भी लड़ाईया हो चुकी है. तो तुम हो फिर भी दानव हो…
भीमासुर – नहीं हम उन लोगो में से नहीं है जो अपने दिए हुए वर और वचनो को भूल जाये.
संभु – हाँ मंटा हु आप उनमे से नहीं है पैर ये वर आपके पिताजी ने दिया है. यदि आपका दिया होता तो मैं ये सवाल hi नहीं करता.
भीमासुर – ठीक है यदि ऐसी बात है तो “हम दोनों वचन देते है जब तक हम जीवित है हम इस जगह की सुरक्षा करते रहेंगे”
संभु – आप दोनों सच में धन्य हो. जो पिता के वर को अपने वचन से और मजबूत कर दिया है. आप जैसा पिता भक्त पुत्र शायद hi कोई और हो. आप दोनों की शदा hi जय हो…..
ये कहा कर संभु एक ख़ुशी मन में लिए वह से निकल गया. इन दोनों भाइयो को पता भी नहीं चला की ये ठगे जा चुके है. पैर इसका आभाष दयासुर को हो गया था. किकोकि अभी जो टाइम था इस टाइम दयासुर अपनी आराध्ना केर होता था. तो उसे अपने डायन में hi अपने भाई का वचन सुनाई दे गया. और ये सुनते hi वो हड़बड़ा कर उदा और एक गहरी सोच में दुब गया. जब उसके नहीं समाज आया तो चल दिया अपनी माता जी यानि की दस माँ के पास. वह जब दस माँ ने दयासुर का फेस देखा तो वो समाज गयी की इसको भी उस वचन का आभाष हो चुक्का है. दुखी तो दस माँ भी थी. पैर कुछ किया तो नहीं जा सकता न. कियोकि वचन दिने वाले ने वचन दे दिया. और मुँह से निकले शब्द कभी वापिस नहीं आते.
दयासुर – माँ क्या ये सच है की भीमा भैया ने संभु को वचन दिया है.
दस माँ – हाँ बीटा ये सच है.
दयासुर – ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी. अब क्या होगा माँ?? अब त्रिकाल को ऐसे रोका जायेगा???
दस माँ – आदिक आदिर न हो पुत्र. ये सब नियति का खेल है. और नियति की आगे किसी की नहीं चलती. और यदि नियति चाहेगी तो सब कुछ ठीक हो जायेगा पुत्र. और यदि मेरे उन पुत्रो की वीरगति hi इस सब का अंत है तो भी हम कुछ नहीं कर सकते. (और ये कहते हुए दस माँ की आखों में भी आशु तेर गए)
दयासुर – ये क्या कहा रही है माँ??? अपने मुझको इसलिए पिताजी को मुक्त करवाने को नहीं जाने दिया की मुझको अपने भाइयो से युद्ध करना होगा. और आज आप खुद hi उसकी वीरगति की बात कर रही है. नहीं माँ मेरे भाइयो को कुछ नहीं होगा.
दस माँ – बीटा तुम जानते हो की मैं और तुम्हारे पिताजी क्यों शांत है. और अब तुम कुछ ऐसा मत करना की फिर से कोई नया संकट आ खड़ा हो. नियति ने इस काम के लिए जिसे चुनना होगा. उसका चयन खुद नियति hi करेगी. अब वक्त का इन्तजार करो. यदि तुमको युद्ध में भाग लेना होगा तो तुम भाग नहीं पाओगे. हमारे प्रभु भोले बाबा ने जैसा रच रखा है होगा तो वैसा hi.
फिर दस माँ दयासुर को और भी बहुत कुछ समजा कर बापिस भेज देती है. आज दस माँ ने दयासुर को एक राज से भी अवगत करा दिया था की – मणि शंकर तुम्हारे सबसे बड़े भाई का पुनःजन्म है.