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- Dec 5, 2013
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सदवि – मैं हु मणि शंकर जी की शिष्य मंजिमा… प्यार से मेरे गुरु मुझको मंजू बुलाते थे.
पब और ये दोनों भी इस बात से चौक जाते है की ये मणि जी की शिष्य है. पब (चोकते हुए) – क्या आपस अच् में मणि शंकर जी की शिष्य है जिनके गुरु सत्यानंद जी है. और वो साधु के भी गुरु भाई है.
मंजू – जी हाँ बिलकुल. पैर आप मणि जी को कैसे जानते है??
सलोनी – जी वो हमारे भी गुरु है.
मंजू – ोूहः ये बात है.
पब – पैर यदि आप उनकी शिष्य है तो उनके आश्रम में अपनी सड़ना क्यों नहीं कर रही है. यहाँ क्यों??
मंजू – वो बात ये है की गुरूजी मेरी एक बात मन hi नहीं रहे थे. कितनी बार मेने उनसे कहा उस क्रिया को मुझको भी सीखा दो तो मैं भी वो करके कुछ सिद्धि प् लू. पैर उन्होंने मेरी बात को कभी मन hi नहीं.
पब – कैसे कोण सी क्रिया है जो वो नहीं जानते ये सीखा नहीं सकते??
मंजू – अरे वो तो उसे अच्छे से जानते है. पैर जब मेने कहा की मुझको भी सीखा दो तो बोले की ये समय सम्भोग क्रिया के लिए अनुकूल नहीं है. मैं भी एक बार उस क्रिका को करके कुछ सिद्दी प् लेती.
पब – अच्छा आप उस क्रिया को करना चाहती है. तो उस क्रिया के बारे मैं जानती भी होगी?? वैसे गुरु जी ने सच hi कहा था की ये उस क्रिया के लिए अनुकूल समय नहीं है.
मंजू – आप ये कैसे कहा सकते है??
पब – कियोकि मैं भी सम्भोग क्रिया कर रहा हु. और उसके लिए मुझको और भी कुछ करना पड़ता है.
मंजू – क्या आप ये कर रहे है?? सच में??
पब – हाँ और मैं आपसे भी कुछ पूछना चाहता हु??
मंजू – हाँ बोलिये..
पब – क्या आप मेरे से शादी करके मेरे साथ ये क्रिया करना चाहेगी??
मंजू पब की बात से सोच में पद जाती है और शादी करना?? फिर सम्भोग क्रिया करना?? जहा तक उसने सुना था सम्भोग क्रिया के बारे में शादी की जरुरत नहीं होती (मंजू ने केवल नार्मल क्रिया के बारे में hi सुना था. और उसमे शादी की जरुरत नहीं होती). पैर वो कुछ बोली नहीं. और फिर कुछ सोच कर बोली – 2 दिन तक तो ये नहीं हो सकता कियोकि मेने एक सिद्धि के लिए एक अनुषधन सुरु किया है और ये हवन उसी के लिए कर रही थी. अभी इसको पूरा होने में 2 दिन लग्गे. उसके बाद hi कुछ हो सकता है. और वैसे भी शादी करने के लिए मुझको सोचने का समय चाहिए. तो आप परसो (डे आफ्टर तोमररो) आ कर मिलिए मैं आपको तब hi हाँ या न कहा पाउगी.
पब – जी ठीक है जैसा आप कहे. मैं परसो आपसे मिलता हु.
फिर ये तीनो यहाँ से निकल जाते है और बहार जा कर टेलिपोर्ट हो कर हवेली पहुंच जाते है.
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ीदार सुबह हवेली में, जब नैना रूम से बहार आती है बराक फ़ास्ट करने के लिए. तब वह सब होते है. नैना ब्लेंड थी तो ज्यादा टाइम एक रूम में hi बैठी रहती थी. और उसके मंद में केवल साधु hi घूमता था. या फिर पब के वेयर में सोचती थी. और जितना वो पब के वेयर में सोचती उसे उतना hi लगता की पब और ये फॅमिली सच में बहुत अच्छी है. उसे हवेली में आये 2-3 दिन हो चुके थे पैर उसने एक बार भी किसी के बिच में झगड़ा या मन मुटाव नहीं देखा था. एक आदमी की इतनी पत्निया और वो भी बिना किसी झगडे के एक hi छत के निचे. ये अपने आप में एक बरी बात थी. फिर एक अजनबी लड़की के बदले के लिए साधु जैसे तांत्रिक से लड़ने जाने के लिए कहना भी उसकी अछाइयो को hi बताता था. जब वो टेबल पैर बैठी तो उसने फील किया की आज पब टेबल पैर नहीं है. और गुरु और अंकिता की बातो में एक गम्भीरता है. कियोकि ये दोनों hi जानती थी की पब, माहि और सलोनी इस टाइम कहा गए है. चले दोनों को पता था की साधु को हराना पब के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. पैर फिर भी एक चिंता तो होती hi है. और वही चिंता उनकी आवाज में जलक रही थी.
नैना – अंकिता जी, आज आप बहुत परेशां लग रही है क्या बात है??
अंकिता गुरु की और देखती है जैसे पूछ रही हो की बताऊ या नहीं??
गुरु – नैना बात ये है की ये सुबह माहि और सलोनी के साथ चले गए. तो थोड़ी सी फ़िक्र हो रही है और कोई बात नहीं है.
गुरु की बात सुन कर नैना का मुँह खुल गया. वो समाज गयी की पब माहि और सलोनी के साथ कहा गया होगा. कल hi बोलै और आज उससे लड़ने भी पहुंच गए. नैना सोचने लगी क्या आदमी है यार एक अजनबी के लिए अपनी पत्नियों की जान को खतरे में डालने के लिए चला गया. वो भी इतनी दूर. अब पता नहीं कितने दिन में लौटेंगे. लौटेंगे भी या नहीं. साधु से लड़ना कोई मज़ाक तो नहीं है. जो यु hi चले गए. मुझसे एक बार मिले भी नहीं. पता नहीं क्या होगा? यदि उनको कुछ हो गया तो इस सबका क्या होगा. कैसे जियेंगे ये सब उनके बिना. ये मेने क्या कर दिया अपने बदले की आग में मेने इस हस्ते खेलते परिवार को खतरे में दाल दिया. सच है मैं इनको अच्छे से समाज hi नहीं पायी. आज के ज़माने में ऐसा इंसान कहा मिलेगा. जो एक अजनबी की हेल्प के लिए अपने परिवार को खतरे में दाल कर चला गया हो.
और पता नहीं नैना क्या -2 सोचती रही. एक तरफ उसे पब और इस परिवार की चिंता थी तो दूसरी तरफ वो मन hi मन पब के इस अपनेपन की कायल हो चुकी थी. दिल बैठी वो अपना उस इंसान को जिसने न केवल उसकी जान और इज्जत बचाई. बल्कि उसका बदला लेने के लिए गुजरात जा चुक्का था. नैना टेबल पैर सबके साथ थी पैर वो तो अपनी hi सोचो में अकेली hi घूम रही थी. जैसे वो अकेली बैठी हो. पैर उसका डायन जब टुटा जब अंकिता ने उसे पुकारा
अंकिता – नैना चलोगी न हमारे साथ आज??
नैना (हाड़बते हुए) – कुछ कहा दीदी?? कहा जाना है???
अंकिता – नैना तेरा डायन कहा है?? काजल ने अभी कुछ कहा था तूने सुना या नहीं??
नैना – नहीं वो… वो.. मैं कुछ सोच रही थी.
अंकिता समाज जाती है की नैना को पब की टेंशन हो रही है. इसलिए वो सोच में है. अंकिता – नैना तू कुछ मत सोच वो आज hi सब ख़तम करके आ जायेगे. सब अच्छा hi होगा. फिक्र क्यों करती है. अब सुन ये काजल कहा रही थी की इसको और ऐडा को डॉ. के पास रेगुलर चकूप के लिए जाना है. और तुमको भी आज जाना था तो मैं कहा रही थी की सब चलते है.
नैना (हैरान होते हुए) – क्या कहा अपने आज hi सब ख़तम करके आ जायेगे??? इतनी दूर से?? ये कैसे हो सकता है??
अंकिता – वो सब तू छोड़ ये बता चलेगी न हमारे साथ ..
नैना – हाँ मैं भी फिर से दुनिया देखना चाहती हु.
अंकिता – हम्म गुड फिर रेडी हो जाओ फिर हम चारो चल पड़ते है.
सविता – अंकिता मैं भी चलुगी तुम्हारे साथ. तुम तीनो को अकेले कैसे संभालोगी.
अंकिता – ok तुम भी चलो…
फिर ये 5 देविया चल देती है हॉस्पिटल. पहले अंकिता ऐडा और काजल को ले कर लेडी डॉ. से मिलती है. और सविता को उनके पास छोड़ कर नैना को ले कर ऑय स्पेशलिस्ट के पास पहुंच जाती है. तो डॉ. नैना को देख कर उसकी रिपोर्ट्स निकल कर अंकिता के सामने रख देता है. और फिर अंकिता को वो देखने को बोलता है.
डॉ. – अंकिता ये केस कुछ अलग है. आईज हर तरह से ठीक है. कही भी कोई प्रॉब्लम नहीं है. बस एक बात है जो आज तक मेने न देखि है और न सुनी है.
अंकिता डॉ. की बात सुन कर रिपोर्ट्स को पड़ने लगती है. वो भी एक डॉ. है तो वो भी बहुत कुछ जानती है और समझती भी है. जब रिपोर्ट पड़ती है तो वो भी हैरान हो जाती है. और सोचने लगती है की ये हो कैसे सकता है. सोचते हुए उसके मंद में नैना की स्टोरी आ जाती है की उसकी आईज साधु ने की है. ये सोचते hi उसके सब समाज आ जाता है. अंकिता को इतनी देर से चुप देख कर डॉ. बोलै
डॉ. – है न अजीब, मेरा तो ये 1सत केस है ऐसा. की किसी के ऑय लेंस पैर कुछ कला लिक्वीड जमा हो गया हो. मुझको तो ये केस समाज के बहार है. यदि ऑपरेशन करके इस लिक्वीड को साफ़ भी कर दे तो क्या पता ये फिर आएगा या नहीं??
अंकिता – थैंक यू डॉ. मैं समाज गयी की प्रॉब्लम क्या है. और इसका क्या इलाज है.
डॉ. – व्हाट?? यार यदि तुम समाज गयी हो तो मुझको भी बताओ ये है क्या?? मैं भी कुछ जान जाउगा.
अंकिता – अभी नहीं डॉ. जब ये ठीक हो जाएगी तब कभी फुर्सत में आ कर बात करती हु. अभी हमको चलना चाहिए.
डॉ – ok अस योर विश. पैर बताना जरूर…
सदवि – मैं हु मणि शंकर जी की शिष्य मंजिमा… प्यार से मेरे गुरु मुझको मंजू बुलाते थे.
पब और ये दोनों भी इस बात से चौक जाते है की ये मणि जी की शिष्य है. पब (चोकते हुए) – क्या आपस अच् में मणि शंकर जी की शिष्य है जिनके गुरु सत्यानंद जी है. और वो साधु के भी गुरु भाई है.
मंजू – जी हाँ बिलकुल. पैर आप मणि जी को कैसे जानते है??
सलोनी – जी वो हमारे भी गुरु है.
मंजू – ोूहः ये बात है.
पब – पैर यदि आप उनकी शिष्य है तो उनके आश्रम में अपनी सड़ना क्यों नहीं कर रही है. यहाँ क्यों??
मंजू – वो बात ये है की गुरूजी मेरी एक बात मन hi नहीं रहे थे. कितनी बार मेने उनसे कहा उस क्रिया को मुझको भी सीखा दो तो मैं भी वो करके कुछ सिद्धि प् लू. पैर उन्होंने मेरी बात को कभी मन hi नहीं.
पब – कैसे कोण सी क्रिया है जो वो नहीं जानते ये सीखा नहीं सकते??
मंजू – अरे वो तो उसे अच्छे से जानते है. पैर जब मेने कहा की मुझको भी सीखा दो तो बोले की ये समय सम्भोग क्रिया के लिए अनुकूल नहीं है. मैं भी एक बार उस क्रिका को करके कुछ सिद्दी प् लेती.
पब – अच्छा आप उस क्रिया को करना चाहती है. तो उस क्रिया के बारे मैं जानती भी होगी?? वैसे गुरु जी ने सच hi कहा था की ये उस क्रिया के लिए अनुकूल समय नहीं है.
मंजू – आप ये कैसे कहा सकते है??
पब – कियोकि मैं भी सम्भोग क्रिया कर रहा हु. और उसके लिए मुझको और भी कुछ करना पड़ता है.
मंजू – क्या आप ये कर रहे है?? सच में??
पब – हाँ और मैं आपसे भी कुछ पूछना चाहता हु??
मंजू – हाँ बोलिये..
पब – क्या आप मेरे से शादी करके मेरे साथ ये क्रिया करना चाहेगी??
मंजू पब की बात से सोच में पद जाती है और शादी करना?? फिर सम्भोग क्रिया करना?? जहा तक उसने सुना था सम्भोग क्रिया के बारे में शादी की जरुरत नहीं होती (मंजू ने केवल नार्मल क्रिया के बारे में hi सुना था. और उसमे शादी की जरुरत नहीं होती). पैर वो कुछ बोली नहीं. और फिर कुछ सोच कर बोली – 2 दिन तक तो ये नहीं हो सकता कियोकि मेने एक सिद्धि के लिए एक अनुषधन सुरु किया है और ये हवन उसी के लिए कर रही थी. अभी इसको पूरा होने में 2 दिन लग्गे. उसके बाद hi कुछ हो सकता है. और वैसे भी शादी करने के लिए मुझको सोचने का समय चाहिए. तो आप परसो (डे आफ्टर तोमररो) आ कर मिलिए मैं आपको तब hi हाँ या न कहा पाउगी.
पब – जी ठीक है जैसा आप कहे. मैं परसो आपसे मिलता हु.
फिर ये तीनो यहाँ से निकल जाते है और बहार जा कर टेलिपोर्ट हो कर हवेली पहुंच जाते है.
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ीदार सुबह हवेली में, जब नैना रूम से बहार आती है बराक फ़ास्ट करने के लिए. तब वह सब होते है. नैना ब्लेंड थी तो ज्यादा टाइम एक रूम में hi बैठी रहती थी. और उसके मंद में केवल साधु hi घूमता था. या फिर पब के वेयर में सोचती थी. और जितना वो पब के वेयर में सोचती उसे उतना hi लगता की पब और ये फॅमिली सच में बहुत अच्छी है. उसे हवेली में आये 2-3 दिन हो चुके थे पैर उसने एक बार भी किसी के बिच में झगड़ा या मन मुटाव नहीं देखा था. एक आदमी की इतनी पत्निया और वो भी बिना किसी झगडे के एक hi छत के निचे. ये अपने आप में एक बरी बात थी. फिर एक अजनबी लड़की के बदले के लिए साधु जैसे तांत्रिक से लड़ने जाने के लिए कहना भी उसकी अछाइयो को hi बताता था. जब वो टेबल पैर बैठी तो उसने फील किया की आज पब टेबल पैर नहीं है. और गुरु और अंकिता की बातो में एक गम्भीरता है. कियोकि ये दोनों hi जानती थी की पब, माहि और सलोनी इस टाइम कहा गए है. चले दोनों को पता था की साधु को हराना पब के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. पैर फिर भी एक चिंता तो होती hi है. और वही चिंता उनकी आवाज में जलक रही थी.
नैना – अंकिता जी, आज आप बहुत परेशां लग रही है क्या बात है??
अंकिता गुरु की और देखती है जैसे पूछ रही हो की बताऊ या नहीं??
गुरु – नैना बात ये है की ये सुबह माहि और सलोनी के साथ चले गए. तो थोड़ी सी फ़िक्र हो रही है और कोई बात नहीं है.
गुरु की बात सुन कर नैना का मुँह खुल गया. वो समाज गयी की पब माहि और सलोनी के साथ कहा गया होगा. कल hi बोलै और आज उससे लड़ने भी पहुंच गए. नैना सोचने लगी क्या आदमी है यार एक अजनबी के लिए अपनी पत्नियों की जान को खतरे में डालने के लिए चला गया. वो भी इतनी दूर. अब पता नहीं कितने दिन में लौटेंगे. लौटेंगे भी या नहीं. साधु से लड़ना कोई मज़ाक तो नहीं है. जो यु hi चले गए. मुझसे एक बार मिले भी नहीं. पता नहीं क्या होगा? यदि उनको कुछ हो गया तो इस सबका क्या होगा. कैसे जियेंगे ये सब उनके बिना. ये मेने क्या कर दिया अपने बदले की आग में मेने इस हस्ते खेलते परिवार को खतरे में दाल दिया. सच है मैं इनको अच्छे से समाज hi नहीं पायी. आज के ज़माने में ऐसा इंसान कहा मिलेगा. जो एक अजनबी की हेल्प के लिए अपने परिवार को खतरे में दाल कर चला गया हो.
और पता नहीं नैना क्या -2 सोचती रही. एक तरफ उसे पब और इस परिवार की चिंता थी तो दूसरी तरफ वो मन hi मन पब के इस अपनेपन की कायल हो चुकी थी. दिल बैठी वो अपना उस इंसान को जिसने न केवल उसकी जान और इज्जत बचाई. बल्कि उसका बदला लेने के लिए गुजरात जा चुक्का था. नैना टेबल पैर सबके साथ थी पैर वो तो अपनी hi सोचो में अकेली hi घूम रही थी. जैसे वो अकेली बैठी हो. पैर उसका डायन जब टुटा जब अंकिता ने उसे पुकारा
अंकिता – नैना चलोगी न हमारे साथ आज??
नैना (हाड़बते हुए) – कुछ कहा दीदी?? कहा जाना है???
अंकिता – नैना तेरा डायन कहा है?? काजल ने अभी कुछ कहा था तूने सुना या नहीं??
नैना – नहीं वो… वो.. मैं कुछ सोच रही थी.
अंकिता समाज जाती है की नैना को पब की टेंशन हो रही है. इसलिए वो सोच में है. अंकिता – नैना तू कुछ मत सोच वो आज hi सब ख़तम करके आ जायेगे. सब अच्छा hi होगा. फिक्र क्यों करती है. अब सुन ये काजल कहा रही थी की इसको और ऐडा को डॉ. के पास रेगुलर चकूप के लिए जाना है. और तुमको भी आज जाना था तो मैं कहा रही थी की सब चलते है.
नैना (हैरान होते हुए) – क्या कहा अपने आज hi सब ख़तम करके आ जायेगे??? इतनी दूर से?? ये कैसे हो सकता है??
अंकिता – वो सब तू छोड़ ये बता चलेगी न हमारे साथ ..
नैना – हाँ मैं भी फिर से दुनिया देखना चाहती हु.
अंकिता – हम्म गुड फिर रेडी हो जाओ फिर हम चारो चल पड़ते है.
सविता – अंकिता मैं भी चलुगी तुम्हारे साथ. तुम तीनो को अकेले कैसे संभालोगी.
अंकिता – ok तुम भी चलो…
फिर ये 5 देविया चल देती है हॉस्पिटल. पहले अंकिता ऐडा और काजल को ले कर लेडी डॉ. से मिलती है. और सविता को उनके पास छोड़ कर नैना को ले कर ऑय स्पेशलिस्ट के पास पहुंच जाती है. तो डॉ. नैना को देख कर उसकी रिपोर्ट्स निकल कर अंकिता के सामने रख देता है. और फिर अंकिता को वो देखने को बोलता है.
डॉ. – अंकिता ये केस कुछ अलग है. आईज हर तरह से ठीक है. कही भी कोई प्रॉब्लम नहीं है. बस एक बात है जो आज तक मेने न देखि है और न सुनी है.
अंकिता डॉ. की बात सुन कर रिपोर्ट्स को पड़ने लगती है. वो भी एक डॉ. है तो वो भी बहुत कुछ जानती है और समझती भी है. जब रिपोर्ट पड़ती है तो वो भी हैरान हो जाती है. और सोचने लगती है की ये हो कैसे सकता है. सोचते हुए उसके मंद में नैना की स्टोरी आ जाती है की उसकी आईज साधु ने की है. ये सोचते hi उसके सब समाज आ जाता है. अंकिता को इतनी देर से चुप देख कर डॉ. बोलै
डॉ. – है न अजीब, मेरा तो ये 1सत केस है ऐसा. की किसी के ऑय लेंस पैर कुछ कला लिक्वीड जमा हो गया हो. मुझको तो ये केस समाज के बहार है. यदि ऑपरेशन करके इस लिक्वीड को साफ़ भी कर दे तो क्या पता ये फिर आएगा या नहीं??
अंकिता – थैंक यू डॉ. मैं समाज गयी की प्रॉब्लम क्या है. और इसका क्या इलाज है.
डॉ. – व्हाट?? यार यदि तुम समाज गयी हो तो मुझको भी बताओ ये है क्या?? मैं भी कुछ जान जाउगा.
अंकिता – अभी नहीं डॉ. जब ये ठीक हो जाएगी तब कभी फुर्सत में आ कर बात करती हु. अभी हमको चलना चाहिए.
डॉ – ok अस योर विश. पैर बताना जरूर…