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समय बीतता गया और फिर त्रिकाल ने डलासुर जी को बंदी बना लिया. वो उसके मंसूबो को जान चुके थे. पैर फिर भी बिना किसी विरोद के उसके कैद में चले गए नहीं तो त्रिकाल जैसा डलासुर को बंदी बना ले और उनके 5 पुत्र और उनकी पत्नी हाथ पैर हाथ रख कर बैठे रहे ऐसा कैसे हो सकता है. नियति माँ के आदेश को न मन्ना डलासुर के वश में नहीं था. इसलिए ये दोनों अपने उप्पेर हो रही घटनाओ में भी बिना कुछ किये उनको अपनाते चले गए. न कोई विरोद और न कोई कोसिस कुछ भी बदलने की.
बैक इस एन्ड..
प्रेजेंट –
कुछ देर तक तो गुरु, कामिनी, सलोनी और पब चुप बेथ कर उस कहानी के बारे में सोचते hi रहे. और फिर पब बोलै
पब – गुरूजी कहानी तो समाज में आयी. ये भी पता चला की त्रिकाल डलासुर जी को कैद करने में क्यों सफल हुआ. और सम्भोग से क्यों डलासुर और दस माँ खुश होते है ये भी पता चला. पैर कुछ बाते है जो मेरी समाज में नहीं आयी.
दयासुर – और वो बाते क्या है??
पब – सबसे पहली बात तो ये की हम सब इस कहानी से कैसे जुड़े हुए है. हम भी दस माँ और दानवराज के और भक्तो के जैसे hi है. जो सम्भोग क्रिया से कुछ पावर प् रहे है.
गुरु – और अपने सुरु में कहा था की अब इस घटनाक्रम का अंत निश्चित है. तो आप ये कैसे कहा सकते है की ये सब ख़तम होने वाला है. क्या दस माँ ने आपको भविष्य बता दिया है??
सलोनी – जब आप 5 भाइयो ने ये ठान लिया था की आप सब को शादी hi नहीं करनी है तो फिर अपने अब माँ से शादी क्यों की???
कामिनी – और जब सबको नार्मल सम्भोग क्रिया से hi वर मिलते है तो इनके साथ hi इतनी पाबन्दी क्यों??
दयासुर – ारे बच्चो एक -2 करके. तुम्हारे हर सवाल का जवाब दुगा.
दयासुर – सबसे पहली बात तो ये की माता ने कभी भी किसी को उस भविष्य के बारे में नहीं बताया. हाँ पैर अंत निश्चित है ये इसलिए की पब hi वो लड़का है जो आहिल जी के कहे अनुशार माता और पिता जी को मुक्ति दिलवाएगा. और पब इस लिए hi तुम इस कहानी से जुड़े हुए हो. और तुम्हारे साथ तुम्हारी साडी पत्निया भी जुड़ गयी है. और तुम्हारा मैं टारगेट भी ये hi है – डलासुर और दक्षसूरी को इस दानव रूप से मुक्त करवाना है.
पब की तो ये सुन कर hi पहात गयी. उसको तो कोई आईडिया hi नहीं था ये सब कैसे करना है. और ये सब आज hi उसको पता चला और आज hi उसे अपने उस टारगेट का भी पता चला जिसके लिए उसका जनम हुआ है. वो सोच में दुब गया.
दयासुर – तुमको कुछ सोचने की जरुरत नहीं है. तुम तो बस वो करते रहो जो तुम्हारा धर्म है. जब एक तपश्वी का श्राप आज तक गलत नहीं हुआ तो उसका वर कैसे झूठा हो सकता है. नियति अपने आप तुमसे वो सब करवाएगी जिससे ये सब होना है. बस कभी भी नियति की आवाज को मत ठुकराना.
पब – जैसी आपकी आज्ञा गुरूजी. पैर आपको कैसे पता की में hi वो लड़का हु जो ये करेगा.
दयासुर – तुम खुद बताओ की माता का कोई और पुत्र भी है जो एक पतिव्रता नारी का बीटा हो. और वो दस माँ का भी बीटा हो. तुमने इस सब से भागना भी चाहा पैर नियति ने फिर तुमको वही ला कर खड़ा कर दिया जहा से तुम भागे थे. पैर इस वॉर नियति ने तुम्हारे भागने के सरे मार्ग भी बंद कर दिए. क्यों?? त्रिकाल जैसे सिद्ध तांत्रिक की भी हाल चल नियति ने फ़ैल कर दी पैर तुम ऐसे आम लड़के को कुछ नहीं होने दिया. क्यों??? इन सबका एक hi मतलब है नियति ने तुमको जिस काम के लिए चुना है. उस टारगेट तक पहुंचने में नियति भी तुम्हारी मदत कर रही है.
पब – इसका मतलब तो ये हुआ की मुझको कुछ भी करने की जरुरत hi नहीं है. नियति खुद hi मुझसे वो सब करवा लेगी जो भविष्य में लिखा है.
दयासुर – नहीं ऐसा तो बिलकुल भी नहीं है. तुम भूल रहे हो कर्म से भविष्य को बदला जा सकता है. यदि तुम कर्म करना छोड़ डोज तो नियति इसकी सजा तुमको जरूर देगी. और जो तुम्हारा है तुम उसे भी खो डोज. पैर तुम्हारे कर्म तुमको hi करने होंगे. करम hi प्रदान है
पब – हम्म मैं अपने करम बिना किसी से डरे करुगा.
मणि – ये हुई न बात. अब तुम बस अपने कर्म करते जाओ ये मत सोचो की इसका क्या फल मिलेगा. जीतेंगे भी या नहीं. लड़ना तुम्हारा करम है और जीतना या हारना नियति….
पब – ये सब तो ठीक है पैर गुरूजी कुछ तो आईडिया होना चाहिए न की किस रहा पैर चल कर आपको मंजिल मिलेगी. क्या पता हम त्रिकाल के चाकर में hi लगे रहे और दस माँ और दानवराज की मुक्ति की रहा तक पहुंच hi न पाए. मुझको ये तो पता होना चाहिए न की ऐसा कोण सा काम है जिसको करने से में अपना टारगेट प् सकूगा. जैसे की अपने पहले त्रिकाल की कैद से दानवराज को मुक्त करवाने के लिए मुझसे कहा तो ये भी बताया की उसके लिए तुमको पावर्स हाशिल करनी है. और मैं उसी रहा पैर चलने लगा. मेरी रहा में आने वलिहार प्रॉब्लम को आप लोगो ने सोल्वे भी किया है. आप लोगो के मार्गदर्शन से में ये सब हाशिल कर पाया हु. तो बिना रहा के मंजिल कैसे मिलेगी??
अब दयासुर और मणि भी सोच में पद गए. कियोकि वो भी नहीं जानते थे की मुक्ति के लिए क्या करना है और क्या नहीं. आहिल जी का वर भी ये hi था की पब मुक्ति का कारन बनेगा. पैर जब तक उसे पता hi न हो की करना क्या है तो वो सफल कैसे हो रक्त है. पब की बात में दम था. जब दोनों को hi समाज नहीं आया तो दस माँ को याद करने लगे. और दस माँ भी वह आ गयी. सब उनको देख कर उनके पेअर छू कर आशीर्वाद लेने लगे. गुरु ने तो बहुत साल उनकी भक्ति की थी. पैर आज sa-sharir पहली बार देखा था. जब वो पब को बच्चन आयी थी तब वो दानव रूप में थी और वो उनका साया मात्रा था. गुरु तो आज खुद को दांय मन रही थी. सलोनी अपनी दादी से गले लग गयी थी. कियोकि अभी जो उसने अपनी दादी की कहानी सुनी थी तो उसको रोना आ गया था. दस माँ भी उसे शांत कर रही थी. दस माँ भी आज अपने 2 बेटो को एक साथ बैठा देख खुश थी.
दस माँ – इसका जवाब में दूगी बीटा. तुम अभी जिस रहा पैर होवो hi हमको मुक्ति दिलवाएगी. तुम खुद सोचो जब तक दानवराज कैद है उनकी मुक्ति कैसे संभव है. इसलिए hi तो तुमको 1सत टारगेट उनको वह से आज़ाद करवाना है. और उसके बाद तुमको क्या करना है ये भी तुम्हारे गुरु (मई और दयासुर की और इशारा कर के) बताते रहेंगे.
पब – जैसी आपकी आज्ञा माँ. क्या मैं कुछ और अपने पूछ सकता हु.
दस माँ – हाँ क्यों नहीं. हम आये hi तुम्हारी हर जिज्ञाषा को शांत करने के लिए.
पब – यदि अपने सालो पहले भविषय देखा था. और उसमे घटित होने वाले घटना क्रम से आप दुखी थी. तो क्या में ये जान सकता हु की कोई ऐसी बात अपने जब देखि हो और वो अब घटित हो चुकी हो. मतलब जब का फ्यूचर आज का पास्ट हो. और यदि ऐसा है तो क्या वो वैसे hi घटा है जैसा की अपने देखा था??
दस माँ – हाँ बीटा बुल्कुल वो hi हो रहा है जो हमने देखा था. सबसे पहले त्रिकाल का दानवराज को कैद करना. फिर तुम्हारा जनम. ये दोनों घटनाये ठीक वैसे hi देखि थी ऐसे की हुयी है. हमने उस टाइम जो देखा था यदि उसे तुम्हारी भाषा में बोलू तो वो एक नाटक की हेडलाइंस की तरह थी. कुछ -2 पालो के बहुत से स्कीन हमने देखे थे. 2 वैसे hi घाट चुके है. जैसे की देखे थे. हम दोनों hi जानते थे की त्रिकाल दानवराज को कैद कर लेगा. पैर फिर भी में रहे कियोकि नियति का ये hi आदेश था. (दस माँ मन ने सोचती है बीटा 3रद स्कीन भी कल रात को घटित हो चुक्का है. हमारे बेटो का संभु को वचन देना. और ये सोच कर उनकी आखों में पानी आ गया)
पब – माँ मैने तो भविष्य नहीं देखा तो क्या में अपने कर्मो से भविष्य बदल सकता हु. और यदि ऐसा है तो मुझको बताइये की मुझको क्या करना होगा??
दस माँ – हाँ तुम कर सकते हो. तुम कोसिस जरूर कर सकते हो पैर हम तुमको नहीं बता सकते की तुमको क्या करना होगा. बस इतना जान लो सच्चाई, जान कल्याण, न्याय, प्रेम और धरम की रहा hi नियति के फेशलो को भी बदल देती है.
पब – जी मैं ये जरूर याद रखुगा. और जान कल्याण के लिए मेने एक आर्मी भी तैयार की है. दानव सेना के मान से. आप तो ये जानती hi होगी. अब मैं हम क्राइम को ख़तम करने की कोसिस करुगा उस आर्मी से.
दस माँ – हाँ मैं जानती हु. और ये बहुत अच्छा काम किया है तुमने. पैर केवल हिंसा से hi जान कल्याण नहीं होता पुत्र तुमको उन लोगो की मदत भी करनी चाहिए जो आशय है. जो सच में किसी की मदद के लिए विवश है. जैसे की तुमने उन लड़कियों को रखा के पास से तो छुड़वा लिया पैर ये समाज अब उनको वो सम्मान नहीं देगा जो उनके लिए जरुरी है. अब उन लड़कियों की मददद तुमको करनी होगी.
पब – हाँ माँ मेरे भी ये hi सोच कर उनको जंगल के कैंप में रोका है. हवेली में रखना भी उचित न लगा. अभी में ये सोच नहीं पाया हु की क्या करना चाहिए. उन सब के लिए.
दस माँ – तुम्हारी एक समस्या में ख़तम कर देती हु. (ये बोल कर दस माँ ने अपनी आखें बंद की और कुछ देर तक अपनी हाथ को हवा में गुमटी रही और फिर आखें खोल कर बोली) अब तुम्हारी हवेली के पीछे के पहाड़ के निचे एक ऐसा निवेश िस्थान बन गया है जहा 3000-4000 लोग आराम से रहा सकते है. और उसका एक गेट तुम्हारी हवेली के बेसमेंट से है तो दुशरा पहाड़ी के पीछे के जंगल में खुलता है. और इन दोनों गेट को केवल वो hi खोल सकेगा जिसका परिचय तुम खुद उन गेट को डोज.
पब – ये तो अपने मेरी बहुत बड़ी प्रॉब्लम दूर कर दी. थैंक यू माँ…. और पब उनके गले लग गया.
दस माँ – माँ भी बोलता है और थैंक यू भी. तुम ये जो काम कर रहे हो ये काम पहले पतासुर और भीमासुर का था. उन्होंने बहुत लोगो की मदद की है. अब तुम इस काम को कर रहे हो तो मेरा भी फर्ज है की तुम्हारी मदद करू. अब मैं चलती हु. यदि फिर मेरी जरुरत हो तो मुझको याद कर लेना.
उसके बाद दस माँ वह से चली गयी. और सब कुछ देर में hi रहे
समय बीतता गया और फिर त्रिकाल ने डलासुर जी को बंदी बना लिया. वो उसके मंसूबो को जान चुके थे. पैर फिर भी बिना किसी विरोद के उसके कैद में चले गए नहीं तो त्रिकाल जैसा डलासुर को बंदी बना ले और उनके 5 पुत्र और उनकी पत्नी हाथ पैर हाथ रख कर बैठे रहे ऐसा कैसे हो सकता है. नियति माँ के आदेश को न मन्ना डलासुर के वश में नहीं था. इसलिए ये दोनों अपने उप्पेर हो रही घटनाओ में भी बिना कुछ किये उनको अपनाते चले गए. न कोई विरोद और न कोई कोसिस कुछ भी बदलने की.
बैक इस एन्ड..
प्रेजेंट –
कुछ देर तक तो गुरु, कामिनी, सलोनी और पब चुप बेथ कर उस कहानी के बारे में सोचते hi रहे. और फिर पब बोलै
पब – गुरूजी कहानी तो समाज में आयी. ये भी पता चला की त्रिकाल डलासुर जी को कैद करने में क्यों सफल हुआ. और सम्भोग से क्यों डलासुर और दस माँ खुश होते है ये भी पता चला. पैर कुछ बाते है जो मेरी समाज में नहीं आयी.
दयासुर – और वो बाते क्या है??
पब – सबसे पहली बात तो ये की हम सब इस कहानी से कैसे जुड़े हुए है. हम भी दस माँ और दानवराज के और भक्तो के जैसे hi है. जो सम्भोग क्रिया से कुछ पावर प् रहे है.
गुरु – और अपने सुरु में कहा था की अब इस घटनाक्रम का अंत निश्चित है. तो आप ये कैसे कहा सकते है की ये सब ख़तम होने वाला है. क्या दस माँ ने आपको भविष्य बता दिया है??
सलोनी – जब आप 5 भाइयो ने ये ठान लिया था की आप सब को शादी hi नहीं करनी है तो फिर अपने अब माँ से शादी क्यों की???
कामिनी – और जब सबको नार्मल सम्भोग क्रिया से hi वर मिलते है तो इनके साथ hi इतनी पाबन्दी क्यों??
दयासुर – ारे बच्चो एक -2 करके. तुम्हारे हर सवाल का जवाब दुगा.
दयासुर – सबसे पहली बात तो ये की माता ने कभी भी किसी को उस भविष्य के बारे में नहीं बताया. हाँ पैर अंत निश्चित है ये इसलिए की पब hi वो लड़का है जो आहिल जी के कहे अनुशार माता और पिता जी को मुक्ति दिलवाएगा. और पब इस लिए hi तुम इस कहानी से जुड़े हुए हो. और तुम्हारे साथ तुम्हारी साडी पत्निया भी जुड़ गयी है. और तुम्हारा मैं टारगेट भी ये hi है – डलासुर और दक्षसूरी को इस दानव रूप से मुक्त करवाना है.
पब की तो ये सुन कर hi पहात गयी. उसको तो कोई आईडिया hi नहीं था ये सब कैसे करना है. और ये सब आज hi उसको पता चला और आज hi उसे अपने उस टारगेट का भी पता चला जिसके लिए उसका जनम हुआ है. वो सोच में दुब गया.
दयासुर – तुमको कुछ सोचने की जरुरत नहीं है. तुम तो बस वो करते रहो जो तुम्हारा धर्म है. जब एक तपश्वी का श्राप आज तक गलत नहीं हुआ तो उसका वर कैसे झूठा हो सकता है. नियति अपने आप तुमसे वो सब करवाएगी जिससे ये सब होना है. बस कभी भी नियति की आवाज को मत ठुकराना.
पब – जैसी आपकी आज्ञा गुरूजी. पैर आपको कैसे पता की में hi वो लड़का हु जो ये करेगा.
दयासुर – तुम खुद बताओ की माता का कोई और पुत्र भी है जो एक पतिव्रता नारी का बीटा हो. और वो दस माँ का भी बीटा हो. तुमने इस सब से भागना भी चाहा पैर नियति ने फिर तुमको वही ला कर खड़ा कर दिया जहा से तुम भागे थे. पैर इस वॉर नियति ने तुम्हारे भागने के सरे मार्ग भी बंद कर दिए. क्यों?? त्रिकाल जैसे सिद्ध तांत्रिक की भी हाल चल नियति ने फ़ैल कर दी पैर तुम ऐसे आम लड़के को कुछ नहीं होने दिया. क्यों??? इन सबका एक hi मतलब है नियति ने तुमको जिस काम के लिए चुना है. उस टारगेट तक पहुंचने में नियति भी तुम्हारी मदत कर रही है.
पब – इसका मतलब तो ये हुआ की मुझको कुछ भी करने की जरुरत hi नहीं है. नियति खुद hi मुझसे वो सब करवा लेगी जो भविष्य में लिखा है.
दयासुर – नहीं ऐसा तो बिलकुल भी नहीं है. तुम भूल रहे हो कर्म से भविष्य को बदला जा सकता है. यदि तुम कर्म करना छोड़ डोज तो नियति इसकी सजा तुमको जरूर देगी. और जो तुम्हारा है तुम उसे भी खो डोज. पैर तुम्हारे कर्म तुमको hi करने होंगे. करम hi प्रदान है
पब – हम्म मैं अपने करम बिना किसी से डरे करुगा.
मणि – ये हुई न बात. अब तुम बस अपने कर्म करते जाओ ये मत सोचो की इसका क्या फल मिलेगा. जीतेंगे भी या नहीं. लड़ना तुम्हारा करम है और जीतना या हारना नियति….
पब – ये सब तो ठीक है पैर गुरूजी कुछ तो आईडिया होना चाहिए न की किस रहा पैर चल कर आपको मंजिल मिलेगी. क्या पता हम त्रिकाल के चाकर में hi लगे रहे और दस माँ और दानवराज की मुक्ति की रहा तक पहुंच hi न पाए. मुझको ये तो पता होना चाहिए न की ऐसा कोण सा काम है जिसको करने से में अपना टारगेट प् सकूगा. जैसे की अपने पहले त्रिकाल की कैद से दानवराज को मुक्त करवाने के लिए मुझसे कहा तो ये भी बताया की उसके लिए तुमको पावर्स हाशिल करनी है. और मैं उसी रहा पैर चलने लगा. मेरी रहा में आने वलिहार प्रॉब्लम को आप लोगो ने सोल्वे भी किया है. आप लोगो के मार्गदर्शन से में ये सब हाशिल कर पाया हु. तो बिना रहा के मंजिल कैसे मिलेगी??
अब दयासुर और मणि भी सोच में पद गए. कियोकि वो भी नहीं जानते थे की मुक्ति के लिए क्या करना है और क्या नहीं. आहिल जी का वर भी ये hi था की पब मुक्ति का कारन बनेगा. पैर जब तक उसे पता hi न हो की करना क्या है तो वो सफल कैसे हो रक्त है. पब की बात में दम था. जब दोनों को hi समाज नहीं आया तो दस माँ को याद करने लगे. और दस माँ भी वह आ गयी. सब उनको देख कर उनके पेअर छू कर आशीर्वाद लेने लगे. गुरु ने तो बहुत साल उनकी भक्ति की थी. पैर आज sa-sharir पहली बार देखा था. जब वो पब को बच्चन आयी थी तब वो दानव रूप में थी और वो उनका साया मात्रा था. गुरु तो आज खुद को दांय मन रही थी. सलोनी अपनी दादी से गले लग गयी थी. कियोकि अभी जो उसने अपनी दादी की कहानी सुनी थी तो उसको रोना आ गया था. दस माँ भी उसे शांत कर रही थी. दस माँ भी आज अपने 2 बेटो को एक साथ बैठा देख खुश थी.
दस माँ – इसका जवाब में दूगी बीटा. तुम अभी जिस रहा पैर होवो hi हमको मुक्ति दिलवाएगी. तुम खुद सोचो जब तक दानवराज कैद है उनकी मुक्ति कैसे संभव है. इसलिए hi तो तुमको 1सत टारगेट उनको वह से आज़ाद करवाना है. और उसके बाद तुमको क्या करना है ये भी तुम्हारे गुरु (मई और दयासुर की और इशारा कर के) बताते रहेंगे.
पब – जैसी आपकी आज्ञा माँ. क्या मैं कुछ और अपने पूछ सकता हु.
दस माँ – हाँ क्यों नहीं. हम आये hi तुम्हारी हर जिज्ञाषा को शांत करने के लिए.
पब – यदि अपने सालो पहले भविषय देखा था. और उसमे घटित होने वाले घटना क्रम से आप दुखी थी. तो क्या में ये जान सकता हु की कोई ऐसी बात अपने जब देखि हो और वो अब घटित हो चुकी हो. मतलब जब का फ्यूचर आज का पास्ट हो. और यदि ऐसा है तो क्या वो वैसे hi घटा है जैसा की अपने देखा था??
दस माँ – हाँ बीटा बुल्कुल वो hi हो रहा है जो हमने देखा था. सबसे पहले त्रिकाल का दानवराज को कैद करना. फिर तुम्हारा जनम. ये दोनों घटनाये ठीक वैसे hi देखि थी ऐसे की हुयी है. हमने उस टाइम जो देखा था यदि उसे तुम्हारी भाषा में बोलू तो वो एक नाटक की हेडलाइंस की तरह थी. कुछ -2 पालो के बहुत से स्कीन हमने देखे थे. 2 वैसे hi घाट चुके है. जैसे की देखे थे. हम दोनों hi जानते थे की त्रिकाल दानवराज को कैद कर लेगा. पैर फिर भी में रहे कियोकि नियति का ये hi आदेश था. (दस माँ मन ने सोचती है बीटा 3रद स्कीन भी कल रात को घटित हो चुक्का है. हमारे बेटो का संभु को वचन देना. और ये सोच कर उनकी आखों में पानी आ गया)
पब – माँ मैने तो भविष्य नहीं देखा तो क्या में अपने कर्मो से भविष्य बदल सकता हु. और यदि ऐसा है तो मुझको बताइये की मुझको क्या करना होगा??
दस माँ – हाँ तुम कर सकते हो. तुम कोसिस जरूर कर सकते हो पैर हम तुमको नहीं बता सकते की तुमको क्या करना होगा. बस इतना जान लो सच्चाई, जान कल्याण, न्याय, प्रेम और धरम की रहा hi नियति के फेशलो को भी बदल देती है.
पब – जी मैं ये जरूर याद रखुगा. और जान कल्याण के लिए मेने एक आर्मी भी तैयार की है. दानव सेना के मान से. आप तो ये जानती hi होगी. अब मैं हम क्राइम को ख़तम करने की कोसिस करुगा उस आर्मी से.
दस माँ – हाँ मैं जानती हु. और ये बहुत अच्छा काम किया है तुमने. पैर केवल हिंसा से hi जान कल्याण नहीं होता पुत्र तुमको उन लोगो की मदत भी करनी चाहिए जो आशय है. जो सच में किसी की मदद के लिए विवश है. जैसे की तुमने उन लड़कियों को रखा के पास से तो छुड़वा लिया पैर ये समाज अब उनको वो सम्मान नहीं देगा जो उनके लिए जरुरी है. अब उन लड़कियों की मददद तुमको करनी होगी.
पब – हाँ माँ मेरे भी ये hi सोच कर उनको जंगल के कैंप में रोका है. हवेली में रखना भी उचित न लगा. अभी में ये सोच नहीं पाया हु की क्या करना चाहिए. उन सब के लिए.
दस माँ – तुम्हारी एक समस्या में ख़तम कर देती हु. (ये बोल कर दस माँ ने अपनी आखें बंद की और कुछ देर तक अपनी हाथ को हवा में गुमटी रही और फिर आखें खोल कर बोली) अब तुम्हारी हवेली के पीछे के पहाड़ के निचे एक ऐसा निवेश िस्थान बन गया है जहा 3000-4000 लोग आराम से रहा सकते है. और उसका एक गेट तुम्हारी हवेली के बेसमेंट से है तो दुशरा पहाड़ी के पीछे के जंगल में खुलता है. और इन दोनों गेट को केवल वो hi खोल सकेगा जिसका परिचय तुम खुद उन गेट को डोज.
पब – ये तो अपने मेरी बहुत बड़ी प्रॉब्लम दूर कर दी. थैंक यू माँ…. और पब उनके गले लग गया.
दस माँ – माँ भी बोलता है और थैंक यू भी. तुम ये जो काम कर रहे हो ये काम पहले पतासुर और भीमासुर का था. उन्होंने बहुत लोगो की मदद की है. अब तुम इस काम को कर रहे हो तो मेरा भी फर्ज है की तुम्हारी मदद करू. अब मैं चलती हु. यदि फिर मेरी जरुरत हो तो मुझको याद कर लेना.
उसके बाद दस माँ वह से चली गयी. और सब कुछ देर में hi रहे