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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २२७
ओर फटाफट अपने सकपडे नीकालके नंगा हो गया.. ओर रमाके नीकलनेका इन्तजार करते बैडपे बैठ गया.. ओर रमाको याद करते अपना लंड हीलाकर खडा करने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडमे तनाव आगया.. ओर स्टीलके रोडके माफीक सख्त हो गया.. तभी बाथरुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो लखन जटसे बाथरुमके दरवाजेके पीछे चला गया.... अब आगे
देखा तो रमा सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी पहेनकर अपने माथेपे टोलीया लपेटकर नीकलती हे.. जीसे देखते ही लखनका लंड जटके मारने लगा.. क्युकी इस रुपमे रमा बहुत ही कामुक ओर सेक्सी दीख रही थी.. वो बेडके पास जाकर माथेसे टोलीया नीकालती हे.. ओर अपने बालोको जटकने लगी.. तो लखनसे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे आकर रमाको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लेता हे..
तो रमा गभराते जटसे पीछेकी ओर देखती हे.. तो पीछे लखनको पुरा नंगा देखा तो रमाने अेक पलतो लखनको देखते ही राहतकी सांसली.. लेकीन दुसरे ही पल लखनके इरादेको समजते ही वो जटसे पलट गइ.. ओर लखनको छोडनेकी मनते करने लगी.. लेकीन लखन कहा मानने वाला था.. ओर उपरसे लताका हुकुम भी था.. की वो रमाको आज आखरी बार मीलले.. तभी..
रमा : (धीरेसे दबी आवाजमे) लखनजी.. ये सुबह सुबह आप यहा क्या कर रहे हे..? छोडीये अगर कीसीने देखलीया तो मे बदनाम हो जाउगी..
लखन : (उतेजीत आवाजमे गलेको चुमते) भाभी.. आज तो आप चली जओगी.. फीर पता नही दुबारा कब हमे मीलनेका मोका मीलेगा.. तो अेक बार करलेने दीजीये.. मे आपके बीना नही रेह सकता..

रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे) ओह.. लखनजी.. आप समजते क्यु नही.. रातमे तो हमने कीया था.. ओर अबतो मे हमेसाके लीये आपकी होगइ हु.. हमे आगे मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. जब आपके भाइ खेतोपे होग.. तब आप मीलनेके लीये कभी भी मेरे घरपे आ सकते हो.. वरना फोन करना.. मे ही कुछ बहाना बनाकर आजाउगी..
लखन : (रमाके बुब्सको मसलते होठ चुमते) भाभी.. अब घर पेतो आता जाता रहुगा.. लेकीन आज आपपे बहुत प्यार आ रहा हे.. मत रोकीये मुजे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. सीर्फ अेक बार.. आपको इस रुपमे दखकर बहुत मन कर रहा हे..
रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे सरको सहेलाते) ओह.. लखनजी.. बीलकुल पागल हो.. इतना प्यार करते हो मुजसे..? करलो प्यार.. मे भी आपके बीना नही रेह सकती.. तो फीर बनालो मुजे अपनी बीवी.. मेने तो आपको पती मानलीया हे.. कर लीजीये प्यार.. लेकीन जटसे.. वरना कोइ जाग गया तो हमे देख लेगे..

कहेते रमा लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखन बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा भी लखनका साथ देने लगी.. दोनो पागलोकी तराह अेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तभी अचानक लखनने रमाको पलटाते पीछे करदीया.. ओर रमाकी पेन्टीको खीचकर नीचे करदी.. फीर अपना लंड रमाकी चुतपे सेट करने लगा.. तबतक रमाकी चुत भी काफी गीली हो चुकी थी..
तो वोभी आगेसे लखनके लंडको पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखाने लगी.. ओर लखनने अेक ही जटकेो अपना लंड रमाकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तो रमाकी हल्कीसी चीखके साथ आंसु नीकल गये.. तो लखनने फौरन अपना हाथ रमाके मुहपे रख दीया.. ओर रमाके बुब्सको थामते अपनी कमर हीलाते रमाको जटसे चोदने लगा.. तो रमा भी थोडी जुक गइ.. ओर लखनके हर धकेको जेलने लगी..

रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) ल..ख..न.. आइइइ.. सीससस.. आह.. आह.. आह.. मर.. ग..इइइइइ.. प्लीज.. धीरे चोदीयेना दर्द होता हे.. मे कहा भागी जा रही हु.. आरामसे चोदीये.. आपने तो मुजे भी पागल करदीया हे..
लखन : (गलेको चुमते) भाभी.. हमे आश्रम भी जाना हे.. तो थोडा जल्दी कर रहा हु.. फीर आरामसे चोदनेके लीये मे वहा आउगा.. तब हम दोनो खुब मजे करेगे.. अब आपके बीना मजा नही आयेगा..
रमा : (चुदवाते हुअे दर्दसे मुह बीगाडते) आपका मजा मेरी हालत खराब कर देता हे.. धीरे चोदीयेनां..
लखन रमाको पीछेसे जोरोसे अपनी कमर हीलाते चोदने लगा.. तब चोदते चोदते लखनने रमाकी ब्राका हुक भी खोल दीया.. तो रमाकी ब्रा नीचे गीर गइ.. तभी रमा बहुत उतेनीत होगइ.. ओर उनका तन अकडने लगा.. तो वो लखनसे चीपकनेके लीये अपनी कमर पीछे करते हीलाने लगी.. ओर कुछ ही देरमे लखनके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. फीर जडकर सांत होगइ..
तब लखन समज गयाकी रमा जड गइ हे.. तो लखनने फोरन अपने लंडको बहार खीचलीया.. ओर रमाको पीठके बल बेडके कीनारे लीटा दीया.. फीर उनके दोनो पैरोके बीच आकर खडे खडे लंडको रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तब रमा मुह बीगाडते हाथसे लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन तबतक लखनने अेक धका मारते अपना लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया था.. तो रमाकी फीरसे चीख नीकल गइ..

रमा : (मुह बीगाडते धीरेसे) आइइइइ... मर गइइइइ.. उइइइ मां... धीरे.. चो..दो.. दुखता.. हे..
रमा कुछ कहे इनसे पहेले ही लखन रमाकी धनाधन चुदाइ करने लगा.. तब रमाके दोनो बुब्स लखनके धकेसे तालमेलमे उछलने लगे.. ओर रमा दोनो हाथसे बेडसीटको पकडते मसलती रही.. ओर मछलीकी तराह छटपटाती रही.. लखन रमाकी अेक नही सुनता.. ओर रमाको लगातारा चोदता रहा.. तब रमाकी अेक बार फीर हालत खराब होने लगी.. ओर लखन उनके उपर छागया..
रमाको बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देते पुरा लंड जड तक घुसा दीया.. ओर रमाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब रमाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर जीनकी वजहसे वो भी उतेजनासे कांपते लखनको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लेती हे.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. तब लखन रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा अपनी सांसको कंट्रोल करते लखनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही..

लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. आजतो सुबह सुबह मस्त कसरत हो गइ.. बहुत मजा आया..
रमा : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हंम.. लेकीन आपकी कसरतने मेरी हालत खराब करदी उनका क्या..? लखनजी.. बस.. अैसे ही मुजे प्यार करते रहेना.. आपने मुजपे क्या जादु करदीया.. मे तो आपकी दिवानी होगइ.. आजसे सही मायनेमे आपही मेरे भरथार हो.. अब ये रमा पुरी जींदगी आपकी होगइ.. बस.. आपसे सीर्फ अेक ही बीनंती हे..
लखन : (समने देखते गालको चुमते) क्या..?
रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) लखनजी.. बस.. ओर कुछ नही.. लेकीन अब हम दोनो जब भी अकेले हो मुजे भाभी मत कहेना.. सीर्फ नामसे बुलाना.. मेने आजसे आपको अेक पतीका हक दीया हे..
लखन : (मुस्कुराते) बस.. सीर्फ इतनीसी बात.. ठीक हे रमा डार्लींग.. लेकीन अब आप भी मुजे लखनजी नही.. सीर्फ लखन कहेकर बुलायेगी.. रमा.. तुम फीकर मत करना.. मे तेरा पती होनेका पुरा फर्ज नीभाउगा..
रमा : (सरमाते धीरेसे) जी.. अब उपरसे हटीये.. वरना आपका फीरसे मुड बन जायेगा.. देखो अभी भी अंदर बहुत सख्त लग रहा हे.. ओर हमे जाना भी हे.. आपने तो मुजे पुरी गंदी करदी.. अब दुबारा नहाना पडेगा.. जाइअे अब.. अब हम घरपे मीलेगे.. तब जीतनी मर्जी हो उतना प्यार करलीजीयेगा..
कहा तो लखन अपने तनपे टोलीया लपेटकर जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर नहाकर बहार नीकल गया.. ओर दोडकर उपर अपने रुमकी ओर चला गया.. तो सृती कंपलीट होकर बहार नीकल ही रही थी.. ओर उसने लखनको इस हालतमे देख लीया.. तो सृती समज गइ की लखन रमाकी बजाकर आ रहा हे.. जब दोनोकी आंख मीली तो लखन सृतीको इग्नोर करते अपने रुममे चला गया.. ओर सीधा अपने रुममे घुस गया..
अध्याय - २२७
ओर फटाफट अपने सकपडे नीकालके नंगा हो गया.. ओर रमाके नीकलनेका इन्तजार करते बैडपे बैठ गया.. ओर रमाको याद करते अपना लंड हीलाकर खडा करने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडमे तनाव आगया.. ओर स्टीलके रोडके माफीक सख्त हो गया.. तभी बाथरुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो लखन जटसे बाथरुमके दरवाजेके पीछे चला गया.... अब आगे
देखा तो रमा सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी पहेनकर अपने माथेपे टोलीया लपेटकर नीकलती हे.. जीसे देखते ही लखनका लंड जटके मारने लगा.. क्युकी इस रुपमे रमा बहुत ही कामुक ओर सेक्सी दीख रही थी.. वो बेडके पास जाकर माथेसे टोलीया नीकालती हे.. ओर अपने बालोको जटकने लगी.. तो लखनसे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे आकर रमाको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लेता हे..
तो रमा गभराते जटसे पीछेकी ओर देखती हे.. तो पीछे लखनको पुरा नंगा देखा तो रमाने अेक पलतो लखनको देखते ही राहतकी सांसली.. लेकीन दुसरे ही पल लखनके इरादेको समजते ही वो जटसे पलट गइ.. ओर लखनको छोडनेकी मनते करने लगी.. लेकीन लखन कहा मानने वाला था.. ओर उपरसे लताका हुकुम भी था.. की वो रमाको आज आखरी बार मीलले.. तभी..
रमा : (धीरेसे दबी आवाजमे) लखनजी.. ये सुबह सुबह आप यहा क्या कर रहे हे..? छोडीये अगर कीसीने देखलीया तो मे बदनाम हो जाउगी..
लखन : (उतेजीत आवाजमे गलेको चुमते) भाभी.. आज तो आप चली जओगी.. फीर पता नही दुबारा कब हमे मीलनेका मोका मीलेगा.. तो अेक बार करलेने दीजीये.. मे आपके बीना नही रेह सकता..

रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे) ओह.. लखनजी.. आप समजते क्यु नही.. रातमे तो हमने कीया था.. ओर अबतो मे हमेसाके लीये आपकी होगइ हु.. हमे आगे मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. जब आपके भाइ खेतोपे होग.. तब आप मीलनेके लीये कभी भी मेरे घरपे आ सकते हो.. वरना फोन करना.. मे ही कुछ बहाना बनाकर आजाउगी..
लखन : (रमाके बुब्सको मसलते होठ चुमते) भाभी.. अब घर पेतो आता जाता रहुगा.. लेकीन आज आपपे बहुत प्यार आ रहा हे.. मत रोकीये मुजे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. सीर्फ अेक बार.. आपको इस रुपमे दखकर बहुत मन कर रहा हे..
रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे सरको सहेलाते) ओह.. लखनजी.. बीलकुल पागल हो.. इतना प्यार करते हो मुजसे..? करलो प्यार.. मे भी आपके बीना नही रेह सकती.. तो फीर बनालो मुजे अपनी बीवी.. मेने तो आपको पती मानलीया हे.. कर लीजीये प्यार.. लेकीन जटसे.. वरना कोइ जाग गया तो हमे देख लेगे..

कहेते रमा लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखन बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा भी लखनका साथ देने लगी.. दोनो पागलोकी तराह अेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तभी अचानक लखनने रमाको पलटाते पीछे करदीया.. ओर रमाकी पेन्टीको खीचकर नीचे करदी.. फीर अपना लंड रमाकी चुतपे सेट करने लगा.. तबतक रमाकी चुत भी काफी गीली हो चुकी थी..
तो वोभी आगेसे लखनके लंडको पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखाने लगी.. ओर लखनने अेक ही जटकेो अपना लंड रमाकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तो रमाकी हल्कीसी चीखके साथ आंसु नीकल गये.. तो लखनने फौरन अपना हाथ रमाके मुहपे रख दीया.. ओर रमाके बुब्सको थामते अपनी कमर हीलाते रमाको जटसे चोदने लगा.. तो रमा भी थोडी जुक गइ.. ओर लखनके हर धकेको जेलने लगी..

रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) ल..ख..न.. आइइइ.. सीससस.. आह.. आह.. आह.. मर.. ग..इइइइइ.. प्लीज.. धीरे चोदीयेना दर्द होता हे.. मे कहा भागी जा रही हु.. आरामसे चोदीये.. आपने तो मुजे भी पागल करदीया हे..
लखन : (गलेको चुमते) भाभी.. हमे आश्रम भी जाना हे.. तो थोडा जल्दी कर रहा हु.. फीर आरामसे चोदनेके लीये मे वहा आउगा.. तब हम दोनो खुब मजे करेगे.. अब आपके बीना मजा नही आयेगा..
रमा : (चुदवाते हुअे दर्दसे मुह बीगाडते) आपका मजा मेरी हालत खराब कर देता हे.. धीरे चोदीयेनां..
लखन रमाको पीछेसे जोरोसे अपनी कमर हीलाते चोदने लगा.. तब चोदते चोदते लखनने रमाकी ब्राका हुक भी खोल दीया.. तो रमाकी ब्रा नीचे गीर गइ.. तभी रमा बहुत उतेनीत होगइ.. ओर उनका तन अकडने लगा.. तो वो लखनसे चीपकनेके लीये अपनी कमर पीछे करते हीलाने लगी.. ओर कुछ ही देरमे लखनके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. फीर जडकर सांत होगइ..
तब लखन समज गयाकी रमा जड गइ हे.. तो लखनने फोरन अपने लंडको बहार खीचलीया.. ओर रमाको पीठके बल बेडके कीनारे लीटा दीया.. फीर उनके दोनो पैरोके बीच आकर खडे खडे लंडको रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तब रमा मुह बीगाडते हाथसे लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन तबतक लखनने अेक धका मारते अपना लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया था.. तो रमाकी फीरसे चीख नीकल गइ..

रमा : (मुह बीगाडते धीरेसे) आइइइइ... मर गइइइइ.. उइइइ मां... धीरे.. चो..दो.. दुखता.. हे..
रमा कुछ कहे इनसे पहेले ही लखन रमाकी धनाधन चुदाइ करने लगा.. तब रमाके दोनो बुब्स लखनके धकेसे तालमेलमे उछलने लगे.. ओर रमा दोनो हाथसे बेडसीटको पकडते मसलती रही.. ओर मछलीकी तराह छटपटाती रही.. लखन रमाकी अेक नही सुनता.. ओर रमाको लगातारा चोदता रहा.. तब रमाकी अेक बार फीर हालत खराब होने लगी.. ओर लखन उनके उपर छागया..
रमाको बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देते पुरा लंड जड तक घुसा दीया.. ओर रमाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब रमाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर जीनकी वजहसे वो भी उतेजनासे कांपते लखनको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लेती हे.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. तब लखन रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा अपनी सांसको कंट्रोल करते लखनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही..

लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. आजतो सुबह सुबह मस्त कसरत हो गइ.. बहुत मजा आया..
रमा : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हंम.. लेकीन आपकी कसरतने मेरी हालत खराब करदी उनका क्या..? लखनजी.. बस.. अैसे ही मुजे प्यार करते रहेना.. आपने मुजपे क्या जादु करदीया.. मे तो आपकी दिवानी होगइ.. आजसे सही मायनेमे आपही मेरे भरथार हो.. अब ये रमा पुरी जींदगी आपकी होगइ.. बस.. आपसे सीर्फ अेक ही बीनंती हे..
लखन : (समने देखते गालको चुमते) क्या..?
रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) लखनजी.. बस.. ओर कुछ नही.. लेकीन अब हम दोनो जब भी अकेले हो मुजे भाभी मत कहेना.. सीर्फ नामसे बुलाना.. मेने आजसे आपको अेक पतीका हक दीया हे..
लखन : (मुस्कुराते) बस.. सीर्फ इतनीसी बात.. ठीक हे रमा डार्लींग.. लेकीन अब आप भी मुजे लखनजी नही.. सीर्फ लखन कहेकर बुलायेगी.. रमा.. तुम फीकर मत करना.. मे तेरा पती होनेका पुरा फर्ज नीभाउगा..
रमा : (सरमाते धीरेसे) जी.. अब उपरसे हटीये.. वरना आपका फीरसे मुड बन जायेगा.. देखो अभी भी अंदर बहुत सख्त लग रहा हे.. ओर हमे जाना भी हे.. आपने तो मुजे पुरी गंदी करदी.. अब दुबारा नहाना पडेगा.. जाइअे अब.. अब हम घरपे मीलेगे.. तब जीतनी मर्जी हो उतना प्यार करलीजीयेगा..
कहा तो लखन अपने तनपे टोलीया लपेटकर जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर नहाकर बहार नीकल गया.. ओर दोडकर उपर अपने रुमकी ओर चला गया.. तो सृती कंपलीट होकर बहार नीकल ही रही थी.. ओर उसने लखनको इस हालतमे देख लीया.. तो सृती समज गइ की लखन रमाकी बजाकर आ रहा हे.. जब दोनोकी आंख मीली तो लखन सृतीको इग्नोर करते अपने रुममे चला गया.. ओर सीधा अपने रुममे घुस गया..














