Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 70 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२७

ओर फटाफट अपने सकपडे नीकालके नंगा हो गया.. ओर रमाके नीकलनेका इन्तजार करते बैडपे बैठ गया.. ओर रमाको याद करते अपना लंड हीलाकर खडा करने लगा.. तब कुछ ही देरमे लखनके लंडमे तनाव आगया.. ओर स्टीलके रोडके माफीक सख्त हो गया.. तभी बाथरुमके दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ.. तो लखन जटसे बाथरुमके दरवाजेके पीछे चला गया.... अब आगे

देखा तो रमा सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी पहेनकर अपने माथेपे टोलीया लपेटकर नीकलती हे.. जीसे देखते ही लखनका लंड जटके मारने लगा.. क्युकी इस रुपमे रमा बहुत ही कामुक ओर सेक्सी दीख रही थी.. वो बेडके पास जाकर माथेसे टोलीया नीकालती हे.. ओर अपने बालोको जटकने लगी.. तो लखनसे रहा नही गया.. ओर वो धीरेसे आकर रमाको पीछेसे अपनी बाहोमे भर लेता हे..

तो रमा गभराते जटसे पीछेकी ओर देखती हे.. तो पीछे लखनको पुरा नंगा देखा तो रमाने अ‍ेक पलतो लखनको देखते ही राहतकी सांसली.. लेकीन दुसरे ही पल लखनके इरादेको समजते ही वो जटसे पलट गइ.. ओर लखनको छोडनेकी मनते करने लगी.. लेकीन लखन कहा मानने वाला था.. ओर उपरसे लताका हुकुम भी था.. की वो रमाको आज आखरी बार मीलले.. तभी..

रमा : (धीरेसे दबी आवाजमे) लखनजी.. ये सुबह सुबह आप यहा क्या कर रहे हे..? छोडीये अगर कीसीने देखलीया तो मे बदनाम हो जाउगी..

लखन : (उतेजीत आवाजमे गलेको चुमते) भाभी.. आज तो आप चली जओगी.. फीर पता नही दुबारा कब हमे मीलनेका मोका मीलेगा.. तो अ‍ेक बार करलेने दीजीये.. मे आपके बीना नही रेह सकता..





रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे) ओह.. लखनजी.. आप समजते क्यु नही.. रातमे तो हमने कीया था.. ओर अबतो मे हमेसाके लीये आपकी होगइ हु.. हमे आगे मीलनेका बहुत मौका मीलेगा.. जब आपके भाइ खेतोपे होग.. तब आप मीलनेके लीये कभी भी मेरे घरपे आ सकते हो.. वरना फोन करना.. मे ही कुछ बहाना बनाकर आजाउगी..

लखन : (रमाके बुब्सको मसलते होठ चुमते) भाभी.. अब घर पेतो आता जाता रहुगा.. लेकीन आज आपपे बहुत प्यार आ रहा हे.. मत रोकीये मुजे.. मे आपके बीना नही रेह सकता.. सीर्फ अ‍ेक बार.. आपको इस रुपमे दखकर बहुत मन कर रहा हे..

रमा : (उतेजीत होते मदहोसीमे सरको सहेलाते) ओह.. लखनजी.. बीलकुल पागल हो.. इतना प्यार करते हो मुजसे..? करलो प्यार.. मे भी आपके बीना नही रेह सकती.. तो फीर बनालो मुजे अपनी बीवी.. मेने तो आपको पती मानलीया हे.. कर लीजीये प्यार.. लेकीन जटसे.. वरना कोइ जाग गया तो हमे देख लेगे..





कहेते रमा लखनकी बाहोमे समा गइ.. तो लखन बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. तो रमा भी लखनका साथ देने लगी.. दोनो पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तभी अचानक लखनने रमाको पलटाते पीछे करदीया.. ओर रमाकी पेन्टीको खीचकर नीचे करदी.. फीर अपना लंड रमाकी चुतपे सेट करने लगा.. तबतक रमाकी चुत भी काफी गीली हो चुकी थी..

तो वोभी आगेसे लखनके लंडको पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखाने लगी.. ओर लखनने अ‍ेक ही जटकेो अपना लंड रमाकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तो रमाकी हल्कीसी चीखके साथ आंसु नीकल गये.. तो लखनने फौरन अपना हाथ रमाके मुहपे रख दीया.. ओर रमाके बुब्सको थामते अपनी कमर हीलाते रमाको जटसे चोदने लगा.. तो रमा भी थोडी जुक गइ.. ओर लखनके हर धकेको जेलने लगी..





रमा : (मदहोसीमे धीरेसे) ल..ख..न.. आइइइ.. सीससस.. आह.. आह.. आह.. मर.. ग..इइइइइ.. प्लीज.. धीरे चोदीयेना दर्द होता हे.. मे कहा भागी जा रही हु.. आरामसे चोदीये.. आपने तो मुजे भी पागल करदीया हे..

लखन : (गलेको चुमते) भाभी.. हमे आश्रम भी जाना हे.. तो थोडा जल्दी कर रहा हु.. फीर आरामसे चोदनेके लीये मे वहा आउगा.. तब हम दोनो खुब मजे करेगे.. अब आपके बीना मजा नही आयेगा..

रमा : (चुदवाते हुअ‍े दर्दसे मुह बीगाडते) आपका मजा मेरी हालत खराब कर देता हे.. धीरे चोदीयेनां..

लखन रमाको पीछेसे जोरोसे अपनी कमर हीलाते चोदने लगा.. तब चोदते चोदते लखनने रमाकी ब्राका हुक भी खोल दीया.. तो रमाकी ब्रा नीचे गीर गइ.. तभी रमा बहुत उतेनीत होगइ.. ओर उनका तन अकडने लगा.. तो वो लखनसे चीपकनेके लीये अपनी कमर पीछे करते हीलाने लगी.. ओर कुछ ही देरमे लखनके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगी.. फीर जडकर सांत होगइ..

तब लखन समज गयाकी रमा जड गइ हे.. तो लखनने फोरन अपने लंडको बहार खीचलीया.. ओर रमाको पीठके बल बेडके कीनारे लीटा दीया.. फीर उनके दोनो पैरोके बीच आकर खडे खडे लंडको रमाकी चुतमे घुसाने लगा.. तब रमा मुह बीगाडते हाथसे लखनको रोकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन तबतक लखनने अ‍ेक धका मारते अपना लंड रमाकी चुतमे घुसा दीया था.. तो रमाकी फीरसे चीख नीकल गइ..





रमा : (मुह बीगाडते धीरेसे) आइइइइ... मर गइइइइ.. उइइइ मां... धीरे.. चो..दो.. दुखता.. हे..

रमा कुछ कहे इनसे पहेले ही लखन रमाकी धनाधन चुदाइ करने लगा.. तब रमाके दोनो बुब्स लखनके धकेसे तालमेलमे उछलने लगे.. ओर रमा दोनो हाथसे बेडसीटको पकडते मसलती रही.. ओर मछलीकी तराह छटपटाती रही.. लखन रमाकी अ‍ेक नही सुनता.. ओर रमाको लगातारा चोदता रहा.. तब रमाकी अ‍ेक बार फीर हालत खराब होने लगी.. ओर लखन उनके उपर छागया..

रमाको बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देते पुरा लंड जड तक घुसा दीया.. ओर रमाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब रमाको अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर जीनकी वजहसे वो भी उतेजनासे कांपते लखनको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लेती हे.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. तब लखन रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा अपनी सांसको कंट्रोल करते लखनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही..





लखन : (भारी सांसोसे) भाभी.. आजतो सुबह सुबह मस्त कसरत हो गइ.. बहुत मजा आया..

रमा : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) हंम.. लेकीन आपकी कसरतने मेरी हालत खराब करदी उनका क्या..? लखनजी.. बस.. अ‍ैसे ही मुजे प्यार करते रहेना.. आपने मुजपे क्या जादु करदीया.. मे तो आपकी दिवानी होगइ.. आजसे सही मायनेमे आपही मेरे भरथार हो.. अब ये रमा पुरी जींदगी आपकी होगइ.. बस.. आपसे सीर्फ अ‍ेक ही बीनंती हे..

लखन : (समने देखते गालको चुमते) क्या..?

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) लखनजी.. बस.. ओर कुछ नही.. लेकीन अब हम दोनो जब भी अकेले हो मुजे भाभी मत कहेना.. सीर्फ नामसे बुलाना.. मेने आजसे आपको अ‍ेक पतीका हक दीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) बस.. सीर्फ इतनीसी बात.. ठीक हे रमा डार्लींग.. लेकीन अब आप भी मुजे लखनजी नही.. सीर्फ लखन कहेकर बुलायेगी.. रमा.. तुम फीकर मत करना.. मे तेरा पती होनेका पुरा फर्ज नीभाउगा..

रमा : (सरमाते धीरेसे) जी.. अब उपरसे हटीये.. वरना आपका फीरसे मुड बन जायेगा.. देखो अभी भी अंदर बहुत सख्त लग रहा हे.. ओर हमे जाना भी हे.. आपने तो मुजे पुरी गंदी करदी.. अब दुबारा नहाना पडेगा.. जाइअ‍े अब.. अब हम घरपे मीलेगे.. तब जीतनी मर्जी हो उतना प्यार करलीजीयेगा..

कहा तो लखन अपने तनपे टोलीया लपेटकर जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर नहाकर बहार नीकल गया.. ओर दोडकर उपर अपने रुमकी ओर चला गया.. तो सृती कंपलीट होकर बहार नीकल ही रही थी.. ओर उसने लखनको इस हालतमे देख लीया.. तो सृती समज गइ की लखन रमाकी बजाकर आ रहा हे.. जब दोनोकी आंख मीली तो लखन सृतीको इग्नोर करते अपने रुममे चला गया.. ओर सीधा अपने रुममे घुस गया..
 
तो लखनने सृतीको इग्नोर कीया तो सृतीको अच्छा नही लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. ओर वो जटसे नीचे आगइ.. देखा तो लता कीचनमे चाइ नास्ता बना रही थी.. तबतक राधीका ओर रजीया भी जाग चुकी थी ओर कंपलीट हो रही थी.. राधीका कंपलीट होकर अपनी मम्मीको भी सभी कार्य करवाके कंपलीट कर रही थी.. ओर सृती धीरेसे कीचनमे लताके पास चली गइ.. ओर उनकी कदद करने लगी..

सृती : (मनमे) हे भगवान.. अब लतासे कैसे कहु..? की उनका पती मुजसे नाराज हे.. मेरे सामने भी नही देखते.. ओर अ‍ेक ये रमाभाभी हे.. कीतनी खुसनसीब हे.. उनको हर रात वो सब प्यार मील रहा हे.. जीनकी मुजे सख्त जरुरत हे.. क्या कसुर था मेरा..? सीर्फ अ‍ेक छोटीसी गलती ही हुइ हे.. जो मेने उनको खरी खोटी सुनाइ.. मेभी कीतनी कमीनी हु.. क्या जरुरत थी उनको सब सुनानेकी..?

करने देती उनको सब.. कीतना मजा आरहा था.. अ‍ेक दिन तो ये सब होने ही वाला हे.. तो फीर क्या जरुरत थी मुजे देवुके बारेमे सोचनेकी..? ज्यादा से ज्यादा उस दिन मुजे चोद लेते.. ओर क्या..? वैसे भी उस दिन वहा देखने वाला भी कौन था.. सीर्फ मंजु ओर पुनोदीको ही पता चलता.. लेकीन वो दोनोभी तो यही चाहती हे.. की मे लखनसे चुदवालु.. अबतो मौका हाथसे नीकल गया.. पता नही ये अब कब मुजसे बात करेगे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. सुबह सुबह क्या सोचमे पड गइ..? तबीयत ठीक नही हे क्या..?

सृती : (जेंपते) हंम..? हां.. हां लता.. तबीयत बीलकुल ठीक हे.. क्या मेरा देवर जाग गया..? हमे जाना हेनां..

लता : (मुस्कुराते) हां.. पहेले उनको ही जगाया.. हम चाइ नास्ता करके नीकल जायेगे..





सृती लखनके बारेमे लतासे बात करना चाहती थी.. लेकीन उनकी हिंमत नही हुइ.. ओर वो चुपचाप लताकी मदद करती रही.. तो दुसरी ओर लता भी सृतीकी मनोदसा समजते मनमे हस रही थी.. फीर सब साथमे बैठकर चाइ नास्ता करने लगे.. तो रजीया राधीकाकी मम्मीको चाइ नास्ता खीला रही थी.. तब भी सृती बार बार लखनकी ओर दया भावसे देखती रही.. लेकीन फीर भी लखनने सृतीकी ओर देखा तक नही.. तभी..

लखन : लता.. मे हमारी जीप ले लेता हु.. तुम सबका सामान उनमे रख देना.. फीर हमे जीपको वही छोडकर वापस आना हे.. यहाके लीये हम दुसरी कार ले लेगे..

सृती : (लखनसे बात करनेका मौका मीलते ही) अरे बाबा मेने कहा तो हे की हम यही कारसे अ‍ेडजेस्ट करलेगे.. तो दुसरी कार लेनेकी क्या जरुरत हे..?

लता : (बातको सम्हालते लखनकी ओर देखते) नही भाभी.. आप तो अपने घर जाना चाहती हेनां..? तो आपको भी तो कार चाहीये.. इसीलीये आपके देवरने कहा हे.. हम यहाके लीये दुसरी कार ले लेगे..

कहा तो सृती सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे लखनकी ओर देखती रही.. उसे जल्द बाजीमे कही हुइ बातोसे अपनी गलतीका अहेसास होगया.. उनके पास लताको देनेके लीये कोइ जवाब नही था.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. तो उसने फटाफट अपने आंसु पोछ लीये.. आज उसे लखनके साथ कीया हुआ व्यवहारसे बहुत पछतावा होने लगा.. ओर वो चाइ नास्ता करते खडी होगइ.. ओर लताके सामने देखकर कहा..

सृती : ठीक हे.. हम जा रहे हे.. तो फीर तुम लोग मेरी कारमे तो बैठोगीनां..?

लता : (सोक्ट होते आस्चर्यसे देखते) भाभी.. कैसी बाते कर रही हे..? आप हमे अ‍ैसा क्यु पुछ रही हे..? जरुर बैठेगी.. ओर ये कार लेनेका नीर्णय मेरा नही हे.. आपके देवरका हे..

सृती : (गलतीका अहेसास होते ही) ओह.. सोरी.. मेरे मुहसे अ‍ैसे ही नीकल गया.. चलो मे अपना बेग लेकर आती हु.. तुम भी अपना सब सामान लेलो.. हमे नीकलना हे.. मंजुदीका भी फोन आगया हे..

फीर सब लोग अपना अपना सामान लेकर लखनकी जीपमे रखने लगे.. ओर सृतीने अपनी कार लेली.. तो लता नीलम ओर रमा उसमे बैठ गइ.. ओर लखनने अपनी जीप लेली.. फीर सब लोग राधीका रजीयाको बाय करते आश्रमकी ओर नीकल गये.. सृती लखनके पीछे ही कार चलाने लगी.. तो दुसरी ओर मंजु देवायत पहेले ही आश्रम पहोंच चुके थे.. ओर सब लोग बाबाके पास बैठे थे..

तो आज पुनमका मन कही नही लग रहाथा.. वो बार बार दरवाजेकी ओर देखते परेसान हो रही थी.. क्युकी आज कइ दिनोके बाद वो लखनको मीलने वाली थी.. तब मंजु उनकी मनोदसा समज गइ.. ओर उसने धीरेसे पुनमका हाथ पकड लीया.. तो पुनम उनकी ओर देखके सरमा गइ.. तो मंजु मुस्कुराने लगी.. फीर धीरेसे उनके कानमे कहा..

मंजुला : फीकर मत कर मेरी बच्ची.. बस.. वो अभी आजायेगा.. तब मीललेना उनको..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. वो.. मेतो बस अ‍ैसे ही देख रही थी..

तो इधर पुरे रास्ते सृती खामोस रहेते सोचमे डुबी रही.. उसे लखनके साथ कीये बरतावपे पछतावा हो रहा था.. तब अ‍ेक घंटेके बाद लखन ओर सृती भी अपनी कारसे आश्रमपे पहोंच गये.. तो लखन अपनी जीप पार्क करते सीधा अंदर चला गया.. उसने सृतीकी कारकी ओर देखा तक नही.. ओर बाबाको प्रणाम करने लगा.. तो बाबा हसते हुअ‍े लखनकी पीठमे मुका मारते हे.. ओर उनको आशीर्वाद देते हे..

तब पुनम लखनको देखते ही खुसीके मारे आंसु बहाने लगी.. जी तो चाहता था की अभीके अभी लखन भैयाको गले मीलकर उनकी बाहोमे समा जाये.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे उन्होने अपनी भावनाओपे कंट्रोल रखा.. ओर लखनकी ओर आंसु नीकलनेके बावजुद हसते हुअ‍े देखने लगी.. तब पुनमको आंसु बहाते देखकर लखनकी आंख भी गीली होगइ.. ओर वो पुनमकी ओर देखते हसता रहा..

तो बहारकी ओर चारो कारसे उतरते ही होलकी ओर जाने लगी जहा बाबा बैठते हे.. तब रमाकी सुबह सुबह ही कुटाइ हो गइ थी.. तो वो थोडा लंगडाते धीरे धीरे चल रही थी.. तो लता सृती ओर नीलम भी उनके साथ चलने लगी.. लता रमाकी चाल देखते मन ही मनह हसते खुस हो रही थी.. तभी सृती लता ओर नीलम रमाके साथ धीरे धीरे चलते अंदर आगये.. ओर बाबाका आशीर्वाद लेते वही बैठ जाते हे..

तो पुनम ओर मंजुने चारोको आते हुअ‍े देख लीया.. तब रमाकी चाल देखते ही मंजु ओर पुनम खुस होते अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर मुस्कुराती रही.. जैसे उसने रमासे कोइ बडा बदला लेलीया हो.. सृती ओर लता पुनमके पास जाकर बैठ गइ.. तो लता पुनमके कानके पास मुह लेजाकर रमा ओर लखनके बारेमे हस हसके बाते करने लगी.. जीसे सुनकर पुनम भी हसने लगी.. तभी..

बाबा : (मुस्कुराते) मंजु बेटोे सब लोग आगये हे.. तो हम चले..? वहा सब रेडी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते खडी होते) जी बाबा चलीये.. बस.. इन्ही लोगोका इन्तजार था..

फीर सब लोग खडे होगये.. ओर मंदिरकी ओर जाने लगे.. तभी पुनमने लखनको आंखोके इसारोसे रुकनेके लीये कहा.. तो लखन जानबुजकर सबके पीछे होगया.. तो पुनम भी सबके पीछे रेह गइ.. ओर लखनके साथ पीछे चलने लगी.. जैसे ही सबलोग होलसे बहार नीकल गये.. तो पुनमने लखनको हाथ पकडकर रोक लीया.. ओर साइडमे चली गइ.. तब होलके ओर कोइ नही था..





ओर पुनम जोरोसे लखनकी बाहोमे लीपट गइ.. ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालकर सीनेपे सर रखके दबी आवाजमे रोने लगी.. तब लखनने बडी मुस्कीलसे उनको सम्हाला ओर सांत कीया तब पुनम लखनकी आंखोमे दया भावसे देखने लगी.. तब लखनको उनकी आंखोमे सीर्फ पस्च्याताप ही दीख रहा था.. तब पुनमकी आंख अ‍ेक बार फीर गीली होगइ.. ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..
 
पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मुजे माफ करदो.. वो मेरी आखरी गलती थी.. अब मे आपको सीकायतका मौका कभी नही दुगी.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार अपनी बहेनको माफ करदो.. मे वादा करती हु.. जींदगी भर आपका साथ नही छोडुगी..

लखन : (सरको सहेलाते) दी.. क्या कर रही हो..? यहा सबलोग हे.. हम आरामसे मीलकर बात करेगेनां.. मेने आपको माफ करदीया हे.. चलीये.. हम बादमे मीलते हे..

पुनम (मुस्कुराते आंसु पोछते) हां भाइ.. मे भावनाओमे बहेक गइ थी.. चलीये.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु.. चलो..

फीर पुनम ओर लखन जटसे चलकर सबके साथ होगये.. आश्रमपे आते ही पुनमने दयाको सादीके जोडेमे सजा दीया था.. तो दया देवायतके साथ चलते बहुत ही सरमा रही थी.. तब उनके साथ लता ओर सृती भी हस हसके बाते करने लगी.. तो आज नीलम लखनके साथ चलते उनसे हस हसके बाते करने लगी.. जीसे देखकर रमा भी बहुत खुस होगइ.. ओर उसे अपना सपना पुरा होते नजर आने लगा..

सब लोग मंदिरमे आगये.. तो ओर वही खडे होगये.. तो लखन भी आकर सबके साथ खडा होगया.. तो पुनम उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर लखनको आंखोके इसारोसे पास आकर खडे रहेनेको कहा.. तो लखन मुस्कुराते पुनमके पीछे आकर खडा होगया.. तो पुनम भी लता सृतीसे बाते करते धिरेसे सरकते लखनके पास आगइ.. ओर उसने हिंमत करते नीचेसे ही लखनका हाथ थाम लीया..





तब लखनकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर वो मुस्कुराते हुअ‍े पुनमकी ओर देखने लगा.. तो पुनम हां मे गरदन हीलाते हसने लगी.. ओर लखनने पुनमके होथोमे पंजा फसालीया.. ओर कसके पकड लीया.. जैसे दो प्रेमी दुनीयासे छुपर अपना प्यार जता रहे हो.. तभी मंजुने केरी बेगसे दो हार नीकालके देवायत ओर दयाको थमा दीया.. तो बाबाने हवनके सामने देवायत ओर दयाको साथ बीठा दीया..





ओर हवन जलाकर दोनोके हाथसे कुछ आहुती डलवाइ.. फीर दोनोको अ‍ेक दुसरेको हार पहेनाया.. ओर बाबाने दोनोको अग्नीके सामने सात फेरे लगवाये.. फीर देवायतसे दयाकी मांग भी भरवाइ ओर उसे मंगलसुत्र भी पहेनाया.. पुरी सादीके दौरान कीसीको ना दिखे अ‍ैसे पुनम ओर लखन अ‍ेक दुसरेके हाथ थामे खडे रहे.. तब ना लखनके मनमे कोइ वासना या गीला सीकवा था..तो ना पुनमके मनमे..

जैसे ही सादी संपन हुइ पुनमने लखनसे अपना हाथ छुडवा लीया.. ओर लखनसे थोडी दुर जाकर खडी होगइ.. तब देवायत ओर दया बाबाके पांव छुकर आशीर्वाद लेते ही फीर दोनो रामुकाकाके पास आकर उनके पैर छुते हे.. तब रामुकाकाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो मंजुने उसे हसते हुअ‍े सम्हाल लीया.. फीर सबलोग भोजन खंडकी ओर जाने लगे.. तब पुनम सृती लता ओर नीलम लखनके साथ चलने लगी..

तो पुनम लखनके साथ कोइ बात नही करपाइ.. फीर सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तो आज पहेली बार दया सादीके जोडेमे देवायतके पास बैठकर भोजन कर रही थी.. जीसे वो बहुत सरमा रही थी.. तो लखनके अ‍ेक तरफ लता बैठ गइ.. ओर उसने जान बुजकर लखनकी दुसरी ओर पुनमको बीठा दीया.. तो सृतीको अच्छी नही लगा.. उसे समजमे नही आ रहा था.. की लता उनके साथ अ‍ैसा क्यु कर रही हे..?

सृती बार बार लखनकी ओर देखती रही.. इस उमीदमे.. की लखन अ‍ेक बारतो उनके सामने देखेगा.. लेकीन लखन तो पुनमके साथ बातोमे लगा रहा.. दोनो धीरेसे बाते करते रहे.. तब भी पुनम बार बार लखनकी माफी मांगते साथ साथ अपने प्यारका इजहार भी कर रही थी.. फीर सबने भोजन करलीया तो सबलोग वापस होलमे आकर बाबाके पास बैठ गये..

तब देवायत ओर दया बाबाको प्रणाम करते उनको दक्षीणा देते हे.. तो बाबा भी मंजु सृती ओर पुनमसे वही अकेलेमे कुछ बात करते हे.. जीसे सुनकर पुनम ओर सृती बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. तो मंजु पुनमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर सब लोग बाबाकी इजाजत लेकर वहासे नीकलने लगे.. ओर कारकी ओर जाने लगे.. तबभी पुनम बार बार लखनकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. सब कारमे बैठने लगे..

तो लखनने इसारोसे पुनमको अपने साथ बैठनेको कहा.. तो पुनमने सरमाकर हसते नांमे गरदन हीलाते मना कर दीया.. ओर आंखोसे सृतीकी ओर इसारा कीया तो लखन समज गया.. फीर पुनम ओर लता सृतीकी कारमे बैठ गइ.. तो नीलम लखनके साथ ओर बाकीके सब देवायतके साथ बैठ गये.. तब मंजुने लखनको पुनमके घरपे रुकनेको कहा.. ओर सबलोग हवेलीकी ओर नीकल गये.. तो रास्तेमे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनोदी.. लखन भैयासे आपकी काफी बाते हुइ.. तो क्या मेरे बारेमे कोइ बात हुइ..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाभी.. सबलोग थे.. तो उनसे कैसे बात करती..? क्या अभी भी आपसे नाराज हे..?

सृती : (सेड मुह करते) हां.. क्या करु दीदी.. मुजसे गलती होगइ.. ओर ये लता भी उनका साथ दे रही हे..

लता : (थोडी नाराज होते धीरेसे) भाभी.. तो क्या जरुरत थी उनको खरी खोटी सुनानेकी..? पता हे आपको वो रुममे आकर आंसु बहा रहे थे.. वो केह रहेथे जब आप दोनो स्कुटर लेने गये तब ही उसने मना करदीया था.. ये तो आपकी जीद थी.. आपको कुछ टेस्ट जो करने थे.. ओर उपरसे अपने घर जानेकी बात कहेदी..

सृती : (धीरेसे गीडगीडाते) यार लता.. मुजे माफ करदे.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. अब क्या करु? जबसे मेने कहा तबसे मेरे सामने तक नही देखते.. तो मेरा तो दिमागही काम नही कर रहा.. तो मुहसे नीकल गया.. लता.. तेरे साथ तो बात करता हे.. अब तुही उनको मनानां.. कहोतो उनसे माफी मांगनेके लीये भी तैयार हु..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. फीकर मत करो.. मे उनसे बात करलुगी.. लगता हे वो मेरी बात मान जायेगे..

सृती : (खुस होकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको तो सब पता ही हे.. ठीक हे.. आप ही बात करलेना..

पुनम : (थोडी सीरीयस होते) भाभी.. आज मे आजाद होगइ हु.. मेने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे..

सृती : (सोक्ट होते) क्या..? क्या केह रही हे दीदी..? अ‍ैसे अचानक..? हमारे इस पतीको पता हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाभी.. सीर्फ आप दोनोको बताया.. ओर मंजुदीदी जानती हे.. ओर कोइ नही..

फीर पुनम सृती ओर लताको अपनी पुरी स्टोरी सुनाती हे.. जीसे सुनकर लता ओर सृती दोनो ही सोक्ट होजाती हे.. तो दुसरी ओर लखन ओर नीलमको आज बाते करनेका पुरा मोका मील गया था.. तो पीछली रातकी बाते करते दोनो अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते पुनमके गांव पहोंच गये.. तब नीलम ओर लखनके बीच काफी नजदीकीया बढ गइ थी.. तभी देवायतने अपनी कार रोकदी तो पीछे सबने अपनी कार रोकली.. तब मंजुने लखनको कहा..
 
मंजुला : लखन बेटा.. तुम पुनमके साथ जाकर उनका ओर दयाका सभी सामान लेआओ.. ओर अपनी जीपमे रखकर लेआओ.. हम नीकलते हे..

लखन : (जीपसे उतरते) जी भाभीमां.. भैया आप नीकलीये मे सामान लेकर आता हु..

तब सृती ओर लता दोनो पुनम ओर लखनको अकेले मीलनेका मौका देते हे.. तो कारसे सीर्फ पुनम ही उतरती हे.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होने लगी.. ओर वो सरमाते वही सृतीके पास खडी रही.. तो लताने आवाज देकर नीलमको अपनी कारमे बुला लीया.. ताकी घर तक पुनम लखनके साथ टाइम स्पेन्ड कर सके.. तो नीलम मुस्कुराते जीपसे उतरके सृतीकी कारमे बैठ गइ..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी हम कारमे ही बैठी हे.. आप लखन भैयाको लेकर फटाफट अपना सामान ले आइअ‍े.. हम यहा ही रुके हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. थोडी देर लगेगी.. क्युकी घरकी चाबी वो भीमा भाइके वहा छोडनी हे..

लखन : (पास आते मुस्कुराते) दीदी.. वो आप फीकर मत करो.. मेने भीमा भाइका घर देखा हे.. मे देकर आउगा..

ओर लखन पुनमके साथ सामान लेने पुनमके पीछे चलने लगा.. तब सृती लताकी ओर देखकर कातील स्माइल करती हे.. जैसे वो लतासे कोइ बदला ले रही हो.. तो लता भी सृतीकी ओर जुठे गुस्सेसे घुरने लगती हे.. ओर उनकी पीठमे अ‍ेक मुका जडती हे.. तो सृती लताकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. तब पुनम घरका ताला खोलते अंदर चली गइ.. ओर उनके पीछे पीछे लखन भी अंदर चला गया..

जैसे ही दोनो अंदर चले गये.. तो अंदर जाते ही अचानक पुनम जोरोसे लखनसे लीपट गइ.. ओर लखनको बाहोमे भीचते उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. जैसे कोइ दो प्रेमी बरसोसे बीछडे हुअ‍े हो.. ओर पहेली बार मील रहे हो.. तो लखन भी आस्चर्यसे हसते पुनमको अपनी बाहोमे भीच लेता हे.. ओर पुनमकी ओर देखते हसता रहेता हे.. तभी..





पुनम : (लखनके चहेरेको चुमते) भाइ.. मुजे माफ करदो.. बस.. अ‍ेक बार मुजे माफ करो.. आइन्दा कभी आपको सीकायतका मौका नही दुगी.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (पुनमके चहेरेको हाथोमे थामते) दीदी.. आइ लव यु टु.. आपको माफ करदीया.. बस..? सोरी.. बहुत रुलाया आपको..

पुनम : (सीनेमे सर रखते) भाइ.. मे इतना रोइ तभी तो आपके प्यारकी अहेमीयतको समज पाइ.. भाइ.. आइ लव यु.. मे आपसे बहुत बहुत प्यार करती हु.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. बस.. मेरे प्यारको आप कबुल कर लीजीये..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) बस.. बस दीदी.. कर लीया.. क्या आपको सचमे मेरा प्यार कबुल हे..?

पुनम : (मुस्कुराते आंखोमे देखते) हां भाइ.. मे नादान आपके प्यारको समज नही पाइ.. ओर धिरेनके पले पड गइ.. बस.. जब हम पढते थे तब आपने थोडीसी हींमत करली होती.. तो आज मे धिरेनकी नही आपकी बीवी होती.. भाइ.. आज मे आजाद होगइ हु.. मेने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे.. ओर अब मे बढे भैयाके साथ भी कोइ रीलेशन नही रखुगी.. आइ प्रोमीस.. अब मे हमेसा हमेसाके लीये आपकी होना चाहती हु.. भाइ.. मुजे अपनालो.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. आइ लव यु टु.. आज मेरा सभी सपना पुरा होगया.. चलो हम घरपे आरामसे बात करेगे.. बहार वो सब खडे हे.. मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे.. कहा हे सामान..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या अ‍ैसे ही चले जाओगे..? अपनी दीदीका प्यार नही चाहीये आपको..?

कहेते पुनम प्यारसे लखनकी आंखोमे देखती रही.. ओर उसने हिंंमत करते अपने होठ लखनके होठोपे रख दीया.. ओर आंख बंध करते चुमने लगी.. तो लखनभी मदहोस होने लगा.. ओर वो भी पुनमके होठोको चुमते पुनमका साथ देने लगा.. दोनो सबकुछ भुलकर मदहोस होने लगे.. तभी लखनका हाथ पुनमके बुब्सपे चला गया.. ओर वो उनको मसलते पुनमके होठोका रसपान करने लगा..





तो पुनम सरसे पांव तक कांपने लगी.. वो जोरोसे लखनको बाहोमे भीचते आंखोकी पुतलीया पलटाने लगी.. ओर कीसी नसेकी हालतमे होने लगी.. आज उसने लखनको नही रोका.. उसने अपना बुब्स मसलवाते थोडासा मुह खोल दीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ डालते पेच लडाने लगे.. पुनम काफी गरम होगइ.. ओर वो कंट्रोल खोने लगी.. उसने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर लखनके लंडपे रख दीया..





ओर पेन्टके उपरसे ही पकडकर मसलने लगी.. पुनमकी इसी हकरतकी वजहसे लखन पुरी तराह पागल हो गया.. पुनमकी आंखे लाल होने लगी.. वो लखनकी आंखोमे देखने लगी.. तब लखनको उनकी आंखोमे वासना साफ दीखाइ दे रही थी.. तभी लखन अचानक पुनमसे दुर होगया.. तो पुनम होसमे आगइ.. ओर सर्मसार होते मुहको दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. फीर मुस्कुराते लखनको अपना सामान दिखाने लगी.. तो लखनने दोनोका सामान लेलीया.. तब..
 
पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) सोरी भाइ.. अभी सीर्फ इतना ही.. वरना मे फीरसे बहेक जाउगी.. आइ लव यु सो मच.. अब ये पुनम सीर्फ आपकी हे.. भाइ.. आजसे मुजे नाम लेकर बुलाना..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नही दी.. मेने अपनी दीदीको प्यार कीया हे.. भले ही हमारा रीस्ता कुछ भी हो.. मे आपको दीदी ही कहुगा.. क्युकी मेरी अपनी बहेनको प्यार करनेकी फेन्टासी हे.. आइ लव यु दी..





पुनम : (सर्मसार होते सीनेमे सर छुपाते) भाइ.. अपनी दीदीको इतना प्यार करते हो..? ओर मे नादान आपके प्यारको समज नही पाइ.. भाइ.. आजसे हम दोनो बोय फ्रेन्ड गर्ल फ्रेन्ड.. भाइ.. मे आपकी हर फेन्टासी पुरी करुगी.. आइ प्रोमीस.. हो सकता हे इन सबकी वजहसे हमे घरपे ज्यादा मीलनेका मौका ना मीले.. ओर हमारी बात ना होपाये.. तो आप मुजे व्होटसेप पे बात करते रहेना हम फोन पे ही बाते करेगे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. वेरी स्मार्ट.. लेकीन देखना मुजे रीप्लाय देना पडेगा.. केह देता हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाकर हसते) हां.. अब आप मेरे बोय फ्रेन्ड जो हो गये हे.. तो रीप्लाइतो देना ही पडेगा.. हें..हें..हें.. वरना मेरा यार मुजसे फीरसे नाराज होजायेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां होजाउगा.. अब चलीये.. सब हमारा इन्तजार करते होगे.. दीदी मुजे आपसे ढेर सारी बाते करनी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. बाते तो मुजे भी करनी हे.. लेकीन (फोन खीआते) ये हेना हमारे पास.. हम विडीवो कोलपे बाते करगे..

लखन : (मुस्कुराते सामान लेते) दीदी.. इनकी आदत तो नही हे.. लेकीन मे कोसीस करुगा.. अब चलीये.. आपमे कीतना बदलाव आ गया..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. ये बदलाव सीर्फ आपके लीये.. मे सबकुछ भुलकर सीर्फ आपकी होना चाहती हु.. भाइ.. मे आपके अंदर समा जानेके लीये बेकरार हु.. आजसे लखन ओर पुनम अ‍ेक ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आप तो अउसी बाते करते मुजे भी पागल करदोगी.. अब चलीये.. हें..हें..हें..

कहेते लखन बहार चला गया.. तो पुनम भी घरसे नीकलकर ताला लगाने लगी.. तब सृती ओर लता कारसे दोनोको देखने लगे.. ओर दोनोको इतनी जल्दीसे बहार नीकलते देखकर दोनो थोडी मायुस होगइ.. तब उनको नही पता थाकी पुनमने लखनका प्यार कबुल करलीया था.. तब लखनने सामान जीपमे रख दीया.. फीर वो लखनके साथ भीमा भाइके घरपे चली गइ.. तो पायल भाभीने दरवाजा खोला..

पायल : (मुस्कुराते) अरे देवरानीजी आप..? कुछ काम था क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) अरे नही भाभी.. बस.. आपको घरकी चाबी देने आइ थी.. आप इसे धिरेन लेने आये तो दे देना.. ओर हां.. अब मे आपकी देवरानी नही.. आपकी ननंद हु.. क्युकी मे ओर धिरेन अलग होगये हे..

पायल : (आस्चर्यसे) ये आप क्या केह रही हो..? अच्छा हुआ उस कमीनेको छोड दीया.. ठरकी कहीका.. होता तो कुछ हे नही.. ओर.. ओह.. सोरी.. दीदी कौन हे ये..? आप केह रही थी.. वो.. कही ये लखन भैयातो नही..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मेने आपसे कहाथानां.. यही लखन भैया हे.. आपके अ‍ेक लौते देवर.. मे इनको आपसे मीलवाने ही आइ हु.. ओर ये घरकी चाबी देनी थी.. बस..

पायल : (हसते) अरे तो बहार क्यु खडे हे दोनो..? अंदर आइअ‍ेनां.. चाइ पीकर जाइअ‍ेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. इसके लीये हम दोनो फीर कभी आयेगे.. अभी तो इजाजत दीजीये.. बहार मेरी भाभीया हमारा इन्तजार कर रही हे.. हम फीर कभी आयेगे.. चलो हम चलते हे..

पायल : (लखनकी ओर कातील नजरलसे हसते) देवरजी.. कभी कभी इधरसे नीकलो तो आते रहेना.. ये भी आपके भाइका ही घर हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) जी भाभी.. जरुर आउगा.. अब आपसे पहेचान होगइ.. तो कोइ दीकत नही.. भीमा भाइको यादी देनां.. कहेना लखन भैया आये थे.. फीर मीलता हु आपसे.. चलो बाय.. हम फीर मीलेगे..

पायल : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) जी.. जरुर.. ये आपहीका घर हे.. आते रहेना.. हें..हें..हें..

फीर दोनो सृतीकी कारके पास आते हे तब पुनम सृतीको लखन भैयाके साथ आनेकी बात करते लखनके साथ बैठ जाती हे.. आज खुले बालोके साथ पुनम बहुत ही कामुक दीख रही थी.. खुली जीपमे उनके बाल हवामे लहेराते जा रहे थी.. ओर वो बार बार अपने बालोको अपने कानके पीछे रखते लखनकी ओर देखकर हसने लगती थी.. आज पुनम लखनसे प्यारका इजहार करते बहुत खुस थी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आज आप बहुत खुबसुरत लग रही हे.. अ‍ैसा लगता हे मे आपको ब्याहकर अपने ससुराल लेजा रहा हु.. हें..हें..हें..





पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे कामुक मुस्कानसे) भाइ.. वो वक्त भी बहुत जल्द आयेगा.. अभी तो मेरे मायके जा रही हु.. मेरा ससुराल तो सहेरमे हे.. जब मेरा ये बोयफ्रेन्ड मुजे ब्याहकर लेजायेगा.. तब ससुराल भी आजाउगी.. हें..हें..हें.. भाइ.. सुना हे आजकल आपकी सृती भाभीके साथ कुछ अनबन हो गइ हे..? दोनो नही बोलते क्या..?

लखन : (सामने देखकर धीरेसे) दीदी.. आपको ओर भाभीमांको तो सब पता चल जाता हे.. तो फीर आप नही जानती क्या..? की हमारे बीच क्या हुआ हे.. अब आप ही बताइअ‍े इसमे मेरी गलती कहा थी..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. मुजे पता हे इस बार आपकी गलती नही थी.. ओर नाही भाभीकी गलती हे.. क्युकी जब दोनोका काम खतम होगया तब भाभीको भाइको लेकर गील्टी फील होने लगी.. उसे लगाकी उसने कोइ बडा अपराध कर दीया हे.. ओर वो गुस्सेमे आकर आपको खरी खोटी सुनाने लगी.. बाकी कुछ नही.. अब तो उसे भी अपनी गलतीका अ‍ेहसास होगया हे.. ओर आपकी माफी मांगना चाहती हे.. भाइ.. उसे माफ करदो..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या आपको नही लगता.. की दोनो नावमे अ‍ेक अ‍ेक पैर रखकर सफर करना आसान हे..? आप भी तो भाइसे प्यार करती हो.. तो आपको गील्टी नही होगी..?

पुनम : (आंख गीली करते धीरेसे) नही भाइ.. करती थी.. अब नही.. जीस तराह मे धिरेनसे आजाद होगइ हु उसी तराह मेने भाइके साथ भी रीलेशन खतम करलीया हे.. ओर ये बात मंजुदी ओर भाइ भी जानते हे.. सायद अब सृती दीदीका भी भाइके साथ रीलेशन खतम होजायेगा.. क्युकी कुछ बाते हे जो मे आपको अभी नही बता सकती..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हो आप..? लेकीन क्यु..? क्या कीसीने आपको कुछ कहा हे..? अरे आपको तो सबकुछ पता चलजाता हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाइ.. आपसे सीर्फ इतना बता सकती हु.. लास्ट मे आते वक्त हम बाबाको मीलने गयेथेनां.. तब बडी दीदीने मेरा मंगलसृत्र लेलीया ओर बाबाको देदीया हे.. जो मुजे भाइने पहेनाया था.. आप समज गयेनां..? बाबाने सृती भाभीको ओर मुजे आपको अपनानेके लीये केह दीया हे..

लखन : (सामने देखते) क्या सृती भाभी भी..? लेकीन वोतो भाइकी अमानत हेनां..?

पुनम : (सामने देखते) हां भाइ.. सीर्फ अ‍ेक दिन इन्तजार करलो.. कल आपको सबकुछ पता चल जायेगा.. भाइ.. अब मे सीर्फ आपकी हु.. ओर बडी दीदी ही हमारी सादी करवायेगी.. देख लेना..(कातील नजरसे सरमाकर मुस्कुराते) वैसे आपको जडी बुटी देकर मेने कोइ गलती नही की.. अभी देखा मेने.. हें..हें..हें..
 
लखन : (सरमाकर हसते) क्या दीदी.. वही तो..? उस दिन आपको कीस करदी तो चाटा जड दीया.. ओर आज सीधा डायरेक्ट अ‍ेटेक..? हें..हें..हें.. मे तो गभरा गया था.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. सोरी.. तब मे बडे भैयाकी अमानत थी.. तो मुजे भी सृती भाभीकी तराह गील्टी फील हुइ थी.. ओर आज मे आजाद पंछी हु.. जो सीर्फ मेरे नये बोय फ्रेन्डकी अमानत हो गइ हु.. तो इतनातो हक बनताहे मेरा.. हें..हें..हें.. भाइ.. अब फीकर मत करो.. वो सबकुछ होगा जो आप चाहते हो.. ओर ये पुनम सीर्फ आपकी हे.. आइ लव यु भाइ..

लखन : (मुस्कुराते) लव यु टु डार्लींग सीस्टर.. हें..हें..हें.. अब मेरी गर्ल फ्रेन्ड होगइ हो.. तो इस बोय फ्रेन्डका ध्यान रखना पडेगा.. क्युकी ये बोय फ्रेन्डकी बहुत सारी फेन्टासी भी हे.. देखना फीर मुकर मत जाना.. हें..हें..हें..





पुनम : (सरमसे पानी पानी होते मुस्कुराते) नही भाइ.. मुजे आपकी हर फेन्टासीके बारेमे सबकुछ पता हे.. आप फीकर मत करो.. आपकी हर फेन्टासी पुरी होगी.. अब आपकी ये गर्ल फ्रेन्ड मुकरने वाली नही हे.. आपकी वो बहेनको मेने मार दीया हे.. जो अपने भाइका प्यार ठुकराके दुसरेकी बीवी होगइ थी.. आजसे आपकी बहेनका नया जन्म हुआ हे.. जो सीर्फ अपने लखन भैयाकी अमानत हे.. बस.. सृती भाभीको माफ करदो..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मे उनसे नाराज ही कब था..? जो माफ करनेकी बात करती हो.. बस.. उसे तो अपनी गलतीका अहेसास करवाना चाहता हु.. अभी उसे थोडा तडपाने दीजीये.. ताकी दुबारा अ‍ैसी गलती कभीना करे..

पुनम : (हसते) भाइ.. अब तो मछलीकी तराह तडपने लगी हे.. उसे ज्यादा मत तडपाना.. वरना वो बीख जायेगी.. जब लोहा गरम होजाये तो सीधा हथोडा मारदेना.. आप समज गयेनां..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. क्या.. बीना सादी.. आइ.. मीन.. हथोडा मार देना.. क्या ये सही होगा..?

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) क्यु..? आपकी तो ये फेन्टासी हेनां..? की अ‍ेक बार सादीसे पहेले मीलन.. आइ मीन.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (सामने देखते मुस्कुराते) हंम.. लगता हे आप मेरे बारेमे काफी कुछ जान चुकी हे..? सादी तो मे आपके साथ भी करना चाहता हु.. तो फीर सोचलो.. हें..हें..हें..

पुनम : (बाजुमे मुका मारते) भाइ.. आप बहुत नोटी हो.. आपकी सब बात मे समज गइ.. अब आपकी गर्ल फ्रेन्ड होगइ हु.. तो मेरे बोय फ्रेन्डके लीये इतना तो कर ही सकती हु.. भाइ.. मे रेडी हु.. आप जब चाहो.. बस.. आप अपनी भाभीमांको सम्हाल लेना.. हें..हें..हें..

पुनम ओर लखन रोमेन्टीक बाते करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो इसी बीच पुनमने लखनको अपने ओर धिरेनके बीच जो भी कुछ हुआ.. वो सबकुछ बता दीया.. जीसे सुनकर लखनका गुस्सा सातवे आसमानपे चला गया.. लेकीन पुनमने उसे सयंमसे काम लेनेको कहा.. तो लखन सांत होगया.. सबलोग घरपे आगये.. तो मंजुने दयाके गृह प्रवेसकी बाकी रसम पुरी करली.. फीर लता ओर चंपाभाभीने सबको चाइ नास्ता करवाया..

तो घरमे आते ही रमाने भावेसको अपनी गोदमे लेलीया ओर उनके साथ खेलने लगी.. सबलोग होलमे बैठे बाते करते रहे.. लेकीन आज सृती ओर पुनमका मन पहेली बार देवायतसे नही लग रहा था.. तभी लखन खेतोकी ओर अपने दोस्तोके पास मीलनेके लीये जानेकी बात करता हे.. तो रामुकाका उनके साथ जानेके लीये खडे होगये.. फीर दोनो अपने खेतोकी ओर नीकल गये..

तो देवायत भी पंचायचतकी ओफीसकी ओर चला गया.. तो मंजुने उसे रातको घरपे जल्दीसे आनेके लीये कहा.. तो लता रमाके साथ भावेसको लेकर उपर अपने कमरेमे चली गइ.. तो पीछे नीलम भी चली गइ.. तब मोका देखते ही पुनम भावना ओर सृतीको लेकर अपने रुममे घुस गइ.. ओर अपने ओर धिरेनके बीच हुअ‍े जगडेकी पुरी कहानी दोनोको सुनादी..

तब सृती ओर भावना पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. क्युकी पुनम अपने डीवोर्सकी बात खुस होते केह रही थी.. तब सृती ओर भावनाको पुनमकी खुस होनेकी वजह मालुम नही थी.. की पुनमने लखनसे अपना प्यारका इजहार करलीया हे.. तो दुसरी ओर मंजु ओर दया अपने रुममे बैठी थी.. ओर मंजु दयाको अपने सबके बारेमे सब कुछ बताकर समजा रही थी.. तभी..

दया : (मुस्कुराते) दीदी.. आप फीकर मत कीजीये.. मुजे पुनमदीदीने सबकुछ बता दीया हे.. ओर ये भी बता दीया हेकी हम सब आपसमे बहेने हे.. दीदी.. मुजे खुसी हेकी आप लोगोमे मुजे बहेनके रुपमे स्वीकार करलीया हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया.. येतो स्वीकार करना ही था.. इसीलीये तो आपकी सादी देवुसे करवादी हे.. दया.. तुमने सादी भले देवुसे करली.. लेकीन आजसे यही समजलो.. दोनो भाइ तुम सबके पती हे.. तुम अपनी मरजीसे चीसे चाहो मीलन कर सकती हो.. अब हमारे घरपे कोइ पाबंधी नही हे.. आगे यहा तुजे लता ओर भावुको ही सम्हालना हे..

दया : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. पुनमदीदी..? क्युकी आज उसने अपने डीवोर्स पेपरपे साइन करदी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया.. वो सब मुजे पता हे.. सुन.. पुनो अभी तो कुछ दिन यहा रहेगी.. फीर वो भी सहेर चली जायेगी.. अपने ससुराल.. मे पुनोकी सादी लखनसे करजाना चाहती हु.. वहा रजीया पुनम ओर सृती.. हमारे लखनके साथ रहेते उनको सम्हाल लेगी.. जबतक मेरा विजय बडा नही हो जाता.. फीर तो पुनम ओर सृती भी यहा आजायेगी.. ओर हां.. अभी इस बारेमे हमारे पतीको कुछ मत बताना..

दया : (मुस्कुराते) जी दीदी.. नही बताउगी.. दीदी.. मुजे तो अभी भी यकीन नही हो रहाकी मेने बडेभाइसे सादी करली.. बापु कीतना खुस हो रहे थे.. मुजे तो सब सपना लग रहा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) दया ये कोइ सपना नही हे.. हकीकत हे.. आज हमारे भाइके साथ तेरी सुहागरात हे.. तुजे जीतना प्यार बटोरना हे.. बटोरले.. ओर तेरा वक्त भी सही चल रहा हे.. मां बननेकी तेरी बरसोकी तम्मना थीनां..? आज अच्छा मोका मीला हे तुजे.. करले अपना सपना पुरा..

दया : (सर्मसार होते नजरे जुकाते) जी दीदी..

मंजुला : (हसते) सुन.. तुजे अ‍ेक ओर बात बताती हु.. पता नही इसे सुनकर खुस होना चाहीयेकी नही.. सृती प्रेगनेन्ट हे.. लेकीन कोइ फायदा नही.. वो क्यु..? वो तुजे मे अभी नही बता सकती.. ओर बहुत जल्द तेरी सहेली जो रजु हेनां..? वो भी प्रेगनेन्ट होजायेगी.. क्युकी आजकल मेरा लखन बेटा बहुत महेनत कर रहा हे.. हें..हें..हें..

कहा तो दया सर्मसार होते हसने लगी.. फीर मंजुने पुनम भावनाको कहेकर देवायत ओर दयाके लीये सेज सजानेको कहा.. तो पुनम ओर भावना खुस होते दोनोके लीये बेड सजाने लगी.. तो उपर नीलम भावेसके साथ खेल रही थी.. तब लता अपना सब सामान वापस रुममे सेट करने लगी.. तो रमा उनकी मदद करते.. अपने ओर भानुके बीचके रीलेशनेकी बात करती हे.. की दोनोके बीच कुछ अच्छा नही हे....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२८

कहा तो दया सर्मसार होते हसने लगी.. फीर मंजुने पुनम भावनाको कहेकर देवायत ओर दयाके लीये सेज सजानेको कहा.. तो पुनम ओर भावना खुस होते दोनोके लीये बेड सजाने लगी.. तो उपर नीलम भावेसके साथ खेल रही थी.. तब लता अपना सब सामान वापस रुममे सेट करने लगी.. तो रमा उनकी मदद करते.. अपने ओर भानुके बीचके रीलेशनेकी बात करती हे.. की दोनोके बीच कुछ अच्छा नही हे.... अब आगे

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. अब आपके पैरकी चोट कैसी हे..? ठीक हुआ की नही..?

रमा : (नजरे जुकाते धीरेसे) हां दीदी.. ठीक होगइ.. दीदी.. अब आपसे क्या छीपाना.. जो प्यार पतीसे मीलना चाहीये आजकल वो प्यार मुजे नही मीलता.. ओर आपको तो पता हे हम ओरतोकी कीतनी जरुरत होती हे..

लता : (अनजान बनकर मुस्कुराते) भाभी.. आपतो मेरी सहेली जैसी हे.. जरा खुलकर बताइअ‍ेनां..

रमा : (सर्मसार होते नजरे चुराते) दीदी.. अब आपसे क्या कहु.. आजकल आपके भाइ बहुत कमजोर हो गये हे.. जो प्यार उनसे मुजे मीलना चाहीये वो मुजे नही मील रहा.. अब तो हम दोनोके बीच जगडे भी होने लगे हे.. ओर अ‍ेक माजी हे.. जो रट लगाये बैठी हे.. की उनको मुजसे अ‍ेक बच्चा चाहीये.. अब आपही बताओ मे क्या करु..? कहासे बच्चा लाउ..? मेने तो भावेसको ही अपना बच्चा मानलीया हे.. उसे ही पालुगी..

लता : (अ‍ेक नजरसे देखते) दीदी.. क्या केह रही हे आप..? तो फीर मांको केह दीजीये मे बच्चा नही दे सकती.. ओर भावेस सीर्फ आपका नही मेरा भी बेटा हे.. देखो.. कीतना बडा होगया हे.. क्या वो अभी भी आपका दुध पीता हे..?

रमा : (सरमाकर मुस्कुराते) हां दीदी.. अब नीलु कीतनी बडी होगइ हे.. तो दुध कहासे आयेगा.. बस.. मुहमे लेकर चुसते रहेता हे.. ओर सो जाता हे.. पता नही आपने इसे कैसी लत लगाइ हे.. क्या आपभी वही करती थी..?

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. वो भावना दीदीके बजाये मुजे मां मानता था.. ज्यादातर मेरे पास ही रहेता था.. बहुत सरारती हे.. मे भी उसे अ‍ैसे ही सुलाती थी.. ओर तब कहा मेरी सादी हुइ थी.. बस.. चुसता रहेता था..

रमा : (हसते धीरेसे) दीदी.. अब तो होगइनां..? तो लखनजीसे कहेकर आप भी अ‍ेक बच्चा कर लीजीयेनां.. देखो.. आपकी सादीको कीतना टाइम हो गया.. दोनो भाइ बहेनकी साथमे ही तो सादी हुइ थी.. ओर आज पुनम दीदी प्रेगनेन्ट हे.. तो आप इतनी देरी क्यु कर रही हे..?

लता : (थोडी मायुस होते) भाभी.. हमारे घरकी कुछ बात हे.. जो मे आपको नही बता सकती.. बस.. कुछ दिन इन्तजार कीजीये.. मे भी बच्चा पैदा करलुगी..

रमा : (थोडी संकासे धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? कही लखनजीमे तो.. कुछ..

लता : (थोडा जुठ बोलते जटसे) अरे नही नही.. लखनजी बीलकुल फीट हे.. बस.. कमी सीर्फ मुजमे हे.. अभी दवाइ चल रही हे.. तो कुछना कुछ तो होगा.. भाभी.. अ‍ेक बात पुछु..? अगर अब भानुभाइ इतना सक्षम नही हे.. तो फीर अब आप क्या करोगी..?

रमा : (आंसु बहाते धीरेसे) दीदी.. अब आपसे क्या कहु..? आपको भी पता हे हम ओरतोकी कीतनी जरुरत होती हे.. इनसे तो आपका खानदान कीतना अच्छा हे.. सब आपसी रीस्तोमे ही अ‍ेडजेस्ट कर लेते हे.. कीसीको कोइ पाबंदी नही.. कास मे भी आपके खानदानमे होती.. तो कोइ जंजट हस नहस होती..

लता : (रमाके पास सटकर बैठते धीरेसे) भाभी.. अ‍ेक बात कहु..? हमारे खानदानके बारेमे आपको इतना कुछ कैसे पता..? क्या आपकी कीसीके साथ कोइ बात हुइ हे..?

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. मे इतने दिन यहा रही.. फीर आपके साथ भी अ‍ेक हप्ता रही.. तो इतना तो पता चल ही जाता हे.. अ‍ेक दुसरेकी जरुरतको कीतनी आसानीसे पुरी कर लेते हे.. ओर मे इसे गलत भी नही मानती.. मुजे भी ये सब पसंद हे..

लता : (अ‍ेक नजरसे सामने देखते धीरेसे) नीलु.. तुम जरा भावेशको लेकर बहार जा.. मुजे भाभीसे कुछ प्राइवेट बाते करनी हे..

नीलम : (भावेशको लेकर बहार जाते) जी दीदी..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. आपको ये सब पसंद हेना..? इसीलीये मेरे लखनके साथ रीलेशन बनाया हेनां..? हमे पता हे आपको पैरमे कैसी मोच आइ हे.. ये दर्द मेरे लखनने दीया हेनां..?

रमा : (सोक्ट होते लताकी ओर देखते) दीदी.. वो.. मे.. वो..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. डरीये मत.. मुजे आपके ओर लखनके रीलेशनके बारेमे सबकुछ पता हे.. इनसे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. कमसे कम घरकी बात घरमे तो रहेगी.. ओर फीकर मत कीजीये.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. हमारे घरके सभी मर्दो ओर ओरतोको पुरी छुट हे.. की वो घरमे जीसके साथ संधन बनाना चाहे बना सकते हे.. बस.. इनमे दोनोकी रजामंदी होनी चाहीये.. अगर भानु भाइ आपको वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. तो ये सुख आप लखनसे पा सकती हे..? हमे कोइ अ‍ेतराज नही..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) दीदी.. ये आप क्या बोल रही हे..? क्या आपको हमारे बारेमे सबकुछ पता था.. तो फीर आपको मेरे बारेमे जानकर बुरा नही लगा..?

लता : (मुस्कुराते) नही भाभी.. क्युकी मे आपकी तकलीफ समजती हु.. कही आप बहार दुसरे मर्दके साथ मुह मारे इनसे तो लखन ही अच्छा हे.. कमसे कम घरकी बात घरमे तो रहेगी.. ओर ओरतोके दिलकी बात समजने वाला कोइ हेही नही.. कमसे कम हमारा खानदानतो अच्छा हे.. यहा हम सब अ‍ेक दुसरेकी दिलकी बात समज जाते हे.. ओर अ‍ेक दुसरोकी जरुरत पुरी करते हे.. आपको पता हे मे यहा क्यु आइ हु..?

रमा : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? बताइअ‍ेनां.. यहा क्यु आइ हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. हमारे घरमे कीसीने मेरे दिलकी फीलीग्सको जाननेकी कोसीस ही नही की.. ओर मेरी सादी लखनसे करवादी.. हालाकी अब मे भी उनसे प्यार करने लगी हु.. लेकीन पता हे मे कीसको प्यार करती थी..? मेने उनके साथ ना जाने क्या क्या सपने सजाये थे.. वो मेरे सपनोके राजकुमार थे.. मेरी सादीसे पहेोे मे उनके साथ सबकुछ करनेको तैयार थी.. जो मेरे दिलकी बात मंजुदी जान गइ..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? आप उनको इतना प्यार करती थी..? तो क्या आपकी सादी लखनजीसे अपनी मरजीसे नही हुइ थी..? आपके दिलमे कौन था जो आप इसे प्यार करती थी..? बताइअ‍ेना मुजे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. मेने लखनसे सादी मेरी मरजीसे कीथी.. ताकी मे अपने पहेले प्यारके साथ रेह सकु.. मेरा पहेला प्यार मेरे जेठजी थे.. जीनके साथ मे सादी करना चाहती थी.. लेकीन हमारे बीच उमरके फासलेकी वजहसे मुमकीन नही था.. तो मेने अपने दिलसे ही समजोता करलीया.. ओर लखनके साथ सादी करली.. ताकी मे भाइके साथ रेह तो सकु.. कमसे कम हर दिन उनका चहेरातो देख सकती हु..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. तो क्या इसीलीये आपका सभी सामान लेकर इधर आगइ हो..?

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. क्युकी यहा सीर्फ मंजुदी.. ओर पुनोदी हे जो मेरे दिलकी बात जानती हे.. इसीलीये मंजुदीने मुजे हमेसाके लीये इधर बुलालीया.. ताकी वो मेरी सादी बडे भैयाके साथ करवादे.. भाभी.. मेने लखनको भले ही छोड दिया हो.. लेकीन वो आज भी मेरे दिलमे बसे हे.. मे बडे भैयासे सादी कर रही हु.. हमारे घरमे तो मेरा सपना पुरा नही हुआ.. लेकीन यहा आकर हो गया..





रमा : (लताको गले लगाते) दीदी.. यहा आप सबलोग कीतने अच्छे हे.. जो अ‍ेक दुसरेकी फीलींग्सके बारेमे जानते हे.. ओर उनकी कद्र भी करते हे.. ओर अ‍ेक आपके भाइ हे.. जो उनको मेरी कोइ परवा ही नही.. दीदी.. आपके भाइ बहुत ही अयास आदमी हे.. बहार कीतनी ओरतोके साथ उनका चकर हे.. सुना हे अबतो खेतीकछ मजदुरनको घरपे भी लाते हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. हमे सब पता हे.. सायद इसीलीये तो भावना दीदीने उनको डीवोर्स देनेका फैसला करलीया हे.. अब वो वहा कभी नही आयेगी.. अगर मां आपको बच्चेके लीये फोर्स करते तो आप लखनको केह सकती हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. फीर आप भावेशका क्या करोगी..? अ‍ेक बार भावना दीदीसे बात करलीजीयेगा..

रमा : (आंग गीली करते) दीदी.. मुजे भावेशसे बहुत लगाव हो गया हे.. आप भावना दीदीको कहे मे इसे अच्छेसे पालुगी.. भले ही मेरा बच्चा होजाये.. मे भावेशको कभी नही छोडुगी.. अब यहीतो अ‍ेक सहारा होगा मेरा.. नीलु भी ससुराल चली जायेगी.. दीदी मुजे हर रात प्यार चाहीये.. तभी तो मे लखनजीकी ओर ढल गइ.. मुजे माफ कर दीजीये..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. इसीलीये तो हमने लखनको जडी बुटी दी हे.. ताकी वो अ‍ेक साथ दस दस ओरतोको संतुस्ट कर सके.. आप लखनके साथ रीलेशन रखीये.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस.. आपके अंदर अ‍ेक बुरी ओरत हे.. उसे मार दीजीये.. वरना आपकी जींदगी बरबाद होजायेगी.. मुजे कुछ ओर नही कहेना..

कहा तो रमा खामोस होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते आंसु बहाने लगी.. तब लताको रमाके उपर दया आगइ.. ओर उसे गले लगालीया.. तभी नीलम मुस्कुराते भावेशको लेकर अंदर आगइ.. जो रोने लगा था.. ओर उन दोनोको देखती रही.. तभी नीचेकी ओर सृतीको मंजुसे अकेले मीलनेका मोका मील गया.. ओर दोनो बाते करते होलमे जाकर बैठ गइ.. तब मंजु सब कुछ समज गइ.. की अब सृती उनको क्या पुछना चाहती हे..
 
मंजुको भी पता थाकी अब सृतीको सब सचाइ बतानेका वक्त नजदीक आगया हे.. ओर इसके लीये उसे सृतीकी नाराजगी भी जेलनी पडेगी.. इसीलीये मंजुने अभी इस बातको टाइनेकी कोसीस करनेका फैसला करलीया.. लेकीन फीर भी वो इस बातको ज्यादा वक्त नही छीपा पायेगी.. तब मंजुने बातको लखनकी ओर घुमानेका फैसला करलीया.. अब देखते हे मंजु इसमे कामयाब होती हेकी नही..

मंजुला : (हसते) हां बोल कुती.. क्या कहेना चाहती हे तु..? देख रही हु.. जबसे आइ हे कुछ परेसान दीख रही हे.. बता.. क्या बात हे..? मेरे लखन बेटेने तो कुछ परेसान नही कीया..? हें..हें..हें..

सृती : (मंजुकी ओर देखते) दीदी.. जैसे आपको तो कुछ पता ही नही.. की मे क्यु परेसान हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे बाबा अ‍ैसे परेसान मत हो.. तेरे बच्चेपे बुरा असर पड सकता हे.. अब तो खुसीओका दिन हे.. खुस रहा करो.. बता.. क्या कहा तेरी उस डोक्टरनीने..?

सृती : (आंख गीली करते) मंजुदी.. मेरी प्रेगनन्सी तो ठीक हे.. सच तो अ‍ेक महीनेके बाद ही पता चलेगा.. तब अ‍ेक रीपोर्ट ओर होगी.. लेकीन उसने मुजे जो बात कही.. तबसे मेरा दिमाग काम नही कर रहा..

मंजुला : (मुस्कुराते) अच्छा..? अ‍ैसा क्या कहा तेरी उस डोक्टरनीने..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) मंजुदी.. कुछ दिन पहेले उनकी क्लीनीकपे दो ओरते आइ थी.. उनमेसे अ‍ेक प्रेगनेन्ट थी जो इनकी सकल हुबहु मेरी मम्मीसे मीलती थी.. उसने दोनोसे पुछा तो दोनोने हमारे गांवका नाम लीया.. तो क्या यहा गांवमे कीसीकी सकल मेरी मम्मीसे मीलती हे..? उसने दोनोका फोटो भी अपने मोबाइलमे खीच लीया हे..

मंजुला : (बातको टालते) अरे होगी कोइ.. जो उनकी सकल तेरी मम्मीसे मीलती होगी.. अब मे पुरे गांवकी ओरतोको तो जानती नही.. क्या अभी वो फोटो हे तेरे पास..?

सृती : नही.. क्युकी उसी वक्त उनका फोन रीपेरींगमे दीया हुआ था.. जब आजायेगा तब वो मुजे सेन्ड करदेगी.. लेकीन अभी तक तो आजाना चाहीये था.. अभी आया क्यु नही..? लगता हे वो भुल गइ होगी.. मे अभी मंगवा लेथी हु.. (फोन लगाती हे)

सृ. फ्रेन्ड : (फोन उठाते ही) हां सृती.. अभी मे डीलीवरीमे बीजी हु.. कुछ काम था क्या..?

सृती : (जटसे) अरे नही बस.. तु वो फोटो सेन्ड करने वाली थी.. नही मीला.. आगया फोन..?

सृ. फ्रेन्ड : हां आगया हे.. मे फ्रि होते ही तुजे सेन्ड कर देती हु.. आज तो दो तीन डीलीवरी हे.. बहुत बीजी हु.. ओके.. चलो बाय..

सृती : (थोडी मायुस होते) बाय.. (फोन रखते ही) दीदी.. हमारे देवरके साथ वहा जाते वक्त मे कीतनी खुस थी.. बस.. वहासे आनेके बाद कुछ भी अच्छा नही लग रहा.. मुजसे गलती पे गलती हो रही हे.. कुछ समजमे ही नही आता की मे क्या करु..?

मंजुला : (सामने देखते थोडा सख्त लहेजेमे) क्यु..? सब कुछ अच्छा तो चल रहा था.. क्या जरुरत थी लखनको खरा खोटा सुनानेकी.. तु सही तो जा रही थी.. ओर सुन.. ताली सीर्फ अ‍ेक हाथसे नही बजती.. उनका देखनेकी तेरी ही जीद थीनां..? उसने तो मना भी कीया था.. तुही नही मानी.. तो इसमे बेचारे मेरे बेटेकी क्या गलती थी..? तुम दोनो तो पहेलेसे ही सबकुछ तैय करके बैठी हो..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) तेरा बेटा..? क्या तुम उसे अपना बेटा मानती हो..? वो देवर हे हमारा..

मंजुला : (अ‍ेक नजरसे देखते) नही.. पहेले था.. जब मे कुछ नही जानती थी.. अब वो सीर्फ तुम सबका देवर हे.. लेकीन मेरा बेटा हे.. मेरा बबलु.. क्या भुल गइ उस कीताबको..? (ये कैसी अनुभुती)

सृती : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? तो फीर क्या तुम.. दे..व..या..नी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सही पहेचाना तुमने.. मे ही उस देवयानी हु.. ओर लखन ही मेरा बबलु हे.. ओर जो तेरी सहेली हेनां.. आज कल तेरे बहुत करीब हे.. तेरी पुनो दीदी.. यही तो वो पीयु हे.. जो मेरे बबलुकी बीवी थी.. लेकीन इनकी अ‍ेक इच्छाकी वजहसे इस जन्ममे उसे देवुकी बीवी बनना पडा.. जो स्वयंम कामका अंस हे.. ओर मेरा लखन भी वोही हे.. जो तुम उसे दुख पहोचांके आइ हो..

सृती : (अपने हाथोमे मुह छीपाते आंसु बहाते) दीदी.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. पता नही मे उसे कैसे मनाउगी.. ओर अब तो हमारे पतीके पास भी हमारे लीये समय नही हे.. मे इस उमीदसे यहा आइ थी.. की चलो.. वहा जाकर मील लुगी उसे.. लेकीन ये तो सादीपे सादी कीये ही जा रहे हे.. जबसे यहा आइ हु मेरे सामने तक नही देखा..

मंजुला : (मुस्कुराते) सृती.. उस राजाने जीतनी भी ओरतोको रानी बनाया था.. उसे तो यहा अपनी काम इच्छा पुर्ती करनेके लीये आना ही था.. मेने ये फैसला युही नही लीया था.. सबकुछ सोच समजकर ही लीया था.. अभी भी वक्त हे.. सम्हलजा.. जैसे मेरी पुनो सम्हल गइ.. सुन.. पुनोने धिरेनको डीवोर्स देदीया हे.. तो मे बहुत जल्द पुनोकी सादी लखनसे करवा रही हु.. अब तुजे सोचना हे.. की तुजे क्या करना हे..





सृती : (आंसु बहाते हां मे गरदन हीलाते) हां.. ठीक केह रही हे आप.. अब मे भी हमारे देवरको अपना लुगी.. पुनो दीदी कीतनी सहेजतासे अपनी दिलकी बात केह देती हे.. जो मे नही केहपाइ.. मुजे बहुत गील्टी फील होती हे.. मे अ‍ैसे रीस्तोको जल्दीसे अ‍ेक्सेप्ट नही कर पा रही.. तो क्या करु..? तुही बता..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्यु..? अभीसे हार मानली..? अभी तो तुमने देखा ही कहा हे..? तुजे अ‍ैसे बहुत रीस्ते देखने हे.. क्या यही जाननेके लीये इधर आइ हेनां..? अ‍ेक तो मेरे लखनके साथ रीलेशनको तुम अ‍ेक्सेप्ट नही करपाइ.. तो दुसरे रीलेशनको तुम कैसे अ‍ेक्सेप्ट करपाओगी..? सृती.. तुजे सभी रीलेशन अ‍ेक्सेप्ट करना ही पडेगा.. क्युकी तेरी मंजील मेरा देवु नही हे.. मेरा बेटा हे.. अपनाले उसे..

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) हां.. बस.. अब यही करुगी.. लेकीन मंजुदी.. मे अभी थोडा उलजनमे मे फसी हु.. मुजे मेरे बारेमे ओर मम्मीके बारेमे सबकुछ जानना हे.. अ‍ेक बार तुमने ही कहा थानां.. की देवुकी जीतनी बहेने हे सब उनकी बीवीया होगइ हे.. तो क्या मे भी.. मतलब मुजे मेरे बारेमे जानना हे.. बता..

मंजुला : (मुस्कुराते) क्या करोगी जानकर..? तुम अ‍ेक रीलेशनको भी अ‍ेक्सेप्ट नही कर पा रही हो.. तो दुसरे रीलेशनके बारेमे जानकर तुजपे क्या बीतेगी..? मत जानो.. तुजे केवल दुख ही होगा.. तुम दयाकी तराह इतनी स्ट्रंोग नही हो.. अभी बता दुगी तो तुम यहासे भाग जाओगी..

सृती : (आंख गीली करते) नही भागुगी.. मंजुदी.. मुजे इतनी कमजोर भी मत समजो.. मे सीर्फ तेरी सौतन ही नही तेरी दोस्त भी हु.. तुम मेरे बारेमे अच्छी तराह जानती हो.. तुजे तो पता हे मेने कीतने दुख जेले हे.. तो अ‍ेक ओर सही.. वैसे भी मुजे सक तो कबसे हे.. बस.. तेरे मुहसे सुनकर सीर्फ कंन्फोर्म करना चाहती हु.. क्या मे भी तेरी ओर पुनो दीदीकी बहेन हुंना..?

मंजुला : (आंख गीली करते सृतीका हाथ थामते) हां.. हां सृती.. तुम भी हमारी बहेन हो.. हमारे ससुर कहो या हमारे बापु.. हम सब इनकी संतान हे.. हम सब अपने भाइओकी बीवीया हे.. तो कभी भुमी आंटी भी हमारे बापुको अपना भाइ मानती थी..





इतना सुनते ही सृती अपने हाथोमे अपना चहेरा छुपाते थोडी जोरोसे रोने लगी.. तब मंजुने उसे बैठे बैठेही अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर सृतीकी पीठ ओर सरको सहेलाने लगी.. तब सृतीने मंजुके कंधेपे सर रख दीया ओर आंसु बहाती रही.. मंजुने उसे थोडी देर अ‍ैसे ही रोने दिया.. जब रो रोके सृतीका दिल थोडा हल्का हुआ.. तब उसने देखा.. तो उनके आस पास पुनम भावना दया.. सब खडे थे.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) रो लीया..? अभी तो कहेती थी मे इतनी कमजोर नही हु.. तो फीर दुसरी सचाइ जानकर तेरा क्या होगा..? अब जा थोडा अपना हुलीया धोकर ठीक करले.. फीर हम आरामसे अकेलेमे बात करेगे.. मुजे पता हे तुजे क्या जानना हे..

सृती : (मुस्कुराते खडी होते) दीदी.. तुम बहुत ही कमीनी हो.. सब कुछ जानलेती हो.. हें..हें..हें..

कहेते वो नीचे पुनमके रुममे घुस गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपना हुलीया ठीक कर लीया.. ओर बहार आगइ.. तब मंजुके कंधेपे पुनम अपना सर रखके बैठी थी.. ओर मंजु प्यारसे पुनमके सरको सहेला रही थी.. तो दया ओर भावना भी वही बैठकर दोनोका प्यार देखते हस रही थी.. तभी सृती भी वहा आकर बैठ गइ तो पुनम उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर कहा..
 
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