Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 17 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

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#96.

चैपटर-12 : अटलांटिस वृक्ष

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:45, सामरा राज्य, अराका द्वीप)

व्योम लगातार किसी अंधे कुंए में गिरता हुआ सा प्रतीत हो रहा था।

कुछ देर तक ऐसे गिरते रहने के बाद व्योम को अपना शरीर किसी धरातल से छूता हुआ प्रतीत हुआ।

व्योम ने अपनी आँखो को खोला। वह इस समय एक घने जंगल में घास पर पड़ा हुआ था।

“ये मैं कहां आ गया?"

व्योम याद करते हुए बड़बड़ाया- “मैं तो द्वीप के नीचे के स्थान पर किसी विज्ञान की दुनियां में था। वहां पर मैने एक मशीन का बटन दबाया था, तभी मुझे अपना शरीर खंडों मे विभक्त होता हुआ महसूस हुआ। जिसके फल स्वरूप मैं यहां पहुंच गया। क्या....क्या वो मशीन ट्रांसमिट मशीन थी? पर उस मशीन ने मुझे कहां भेज दिया?"

व्योम ने एक नजर अपने आसपास के स्थान पर मारी। वह एक बहुत ही खूबसूरत परंतु छोटी सी घाटी में था।

चारो ओर हरियाली थी। खूबसूरत पहाड़ो के बीच सुंदर फल और फूलों वाली घाटी रंग- बिरंगे फूलों से बिलकुल स्वर्ग के समान महसूस हो रही थी।

वहां लगे सभी पेड़-पौधे व्योम के लिये नये थे। इससे पहले उसने ऐसे फल और फूलों के पौधे अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखे थे।

व्योम अभी जंगल की खूबसूरती का नजारा ले ही रहा था कि तभी उसे कुछ ‘धम-धम’ की आवाज सुनाई दी।

आवाज सुनते ही व्योम समझ गया कि कोई विशालकाय जीव उधर आ रहा है।

वह तुरंत एक पास के पेड़ पर चढ़ कर बैठ गया।

व्योम की नजर अब आवाज की दिशा की ओर थी, जो कि अब पास आती जा रही थी।

कुछ ही देर में व्योम को एक तरफ से एक मदममस्त हाथी आता हुआ दिखाई दिया।

उस हाथी की चाल से पता चल रहा था कि वह कुछ दिन पहले ही व्यस्क हुआ है। क्यों कि वह पूरी मस्ती में उछलता-कूदता दिखाई दे रहा था।

हाथी के दाँत लंबे और चमकीले थे। हाथी अपनी मस्तानी चाल से कुछ छोटे-छोटे पेडों को उखाड़ता चल रहा था।

हाथी को देख व्योम ने अपने आप को एक मोटी टहनी के पीछे छिपा लिया, जिससे हाथी की नजर उस पर ना पड़े।

झूमता हुआ हाथी अचानक एक पेड़ को उखाड़ते-उखाड़ते रुक गया। अब हाथी ध्यान से उस पेड़ पर लगे फलों को देखने लगा।

हाथी को ऐसा करते देख व्योम को थोड़ा आश्चर्य हुआ। वह भी ध्यान से उस पेड़ के फलों को देखने लगा।

उस पेड़ पर छोटे-छोटे आँवले के जैसे लाल और हरे फल लगे थे। कुछ देर तक देखते रहने के बाद हाथी ने एक लाल फल को खा लिया।

फल को खाते ही हाथी का आकार आश्चर्यजनक तरीके से एक चूहे के बराबर हो गया।

व्योम आँखे फाड़े उस दृश्य को देख रहा था।

चूहे के आकार में आकर हाथी काफ़ी खुश हो गया। अब वह चिंघाड़ते हुए वहां से चला गया।

“अरे बाप रे....यह तो बहुत ही विचित्र जगह है।" व्योम ने अपने मन मे सोचा- “ऐसे फलों के बारे में तो मैने कभी सुना भी नहीं....यह फल तो किसी भी जीव के जीनोम को बदलने की क्षमता रखता है।"

यह सोच व्योम अब पेड़ से उतरकर उस विचित्र वृक्ष के पास आ गया और उसके फलों को ध्यान से देखने लगा। व्योम को देखने में वो फल बिल्कुल साधारण से ही लगे।

“इन लाल फलों को खाकर वह हाथी छोटा हुआ था। पर यह हरे फलों से क्या होता है? कहीं ये हरे फल वापस जीव को सामान्य आकार में तो नहीं लाते। जरूर ऐसा ही होगा। पर इस हरे फल को चेक कैसे करू? मैं स्वयं पर तो इसका प्रयोग कर नहीं सकता। चलो कुछ फल जेब में रख लेता हूं, बाद में इसका प्रयोग करके देखूंगा कहीं पर?"

यह सोचकर व्योम ने कुछ लाल और कुछ हरे फल, पेड़ से तोड़कर अपनी जेब में डाल लिये।

“अब मुझे सबसे पहले पता करना चाहिए कि मैं हूं कहां पर?"

यह सोचकर व्योम ने अपने बैग से दूरबीन को निकाल कर अपनी आँखों पर चढ़ा लिया और घाटी पर एक नजर डाली, पर उसे दूर-दूर तक कुछ नजर नहीं आया।

“यहां से तो मनुष्य के जीवन के कोई अवशेष नजर नहीं आ रहे, फ़िर मुझे बतायेगा कौन? कि मैं इस समय कहां पर हूं? मुझे पहाड़ पर चढ़कर देखना चाहिए। शायद वहां से कुछ नजर आ जाये।"

यह सोचकर व्योम एक पास वाले पहाड़ पर चढ़ना शुरू हो गया। 1 घंटे के अथक परिश्रम के बाद व्योम उस पहाड़ की चोटी पर पाहुंच गया।

पहाड़ पर उसे एक विशालकाय वृक्ष दिखाई दिया। उस वृक्ष की ऊंचाई कम से कम 100 फिट से कम नहीं थी।

उस वृक्ष पर हजारो शाखाएं थी और हर शाखा पर बहुत ज़्यादा पत्तियाँ लगी थी। वह पेड़ इतना घना था कि पेड़ के नीचे सूर्य की रोशनी भी नहीं आ रही थी।

उस पेड़ का तना 12 फिट चौड़ा था। दूर से देखने पर वह पेड़ किसी विशालकाय दैत्य की भाँति प्रतीत हो रहा था।

उस पेड़ पर एक भी फल और फूल नहीं लगे थे।

व्योम ने उस पेड़ को हाथ लगाकर देखा। पेड़ को छूते ही अचानक उसे अपने मस्तिष्क में बहुत शांति महसूस हुई।

व्योम को एक अतिन्द्रिय शक्ति का अहसास हुआ, इसिलसे जाने क्यों श्रद्धावश व्योम ने पेड़ को हाथ जोड़कर प्रणाम कर लिया।

धीरे-धीरे शाम होने वाली थी और व्योम को भूख और प्यास भी लग रही थी, इसिलये व्योम ने एक बार फिर दूरबीन को आँखों से लगाकर घाटी की दूसरी ओर देखना शुरू कर दिया।

घाटी के दूसरी ओर बहुत दूरी पर उसे कोई चमकती हुई चीज दिखाई दी। व्योम ने दूरबीन को समायोजित करके देखा।

“अरे यह तो कोई धातु की विशाल मूर्ति लग रही है। मुझे उस दिशा में ही चलना चाहिए। शायद वहां पर कोई इंसान मिल जाये।"

यह सोच व्योम धीरे-धीरे पहाड़ से उतरने लगा। व्योम के पलटते ही उस वृक्ष से रोशनी की एक किरण निकली और व्योम के शरीर में समा गयी, पर व्योम इस दृश्य को देख नहीं पाया।

सागरिका

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 16:20, कलाट महल, अराका द्वीप)

इस समय युगाका कलाट महल में कलाट के सामने बैठा था।

“क्या हुआ बाबा? आपने आपातकाल बटन क्यों दबाया? ऐसी क्या तत्काल जरूरत पड़ गयी? सब ठीक तो है ना?" युगाका ने एक नजर कलाट पर डालते हुए पूछा।

“मुझे भी कुछ ज्यादा पता नहीं है बेटा। पर मुझे लग रहा है कि कोई बाहरी इंसान सामरा राज्य के अंदर दाख़िल हुआ है क्यों कि कुछ देर पहले अटलांटिस वृक्ष को, किसी के छूने के संकेत मुझे प्राप्त हुए हैं।" कलाट ने गंभीर होकर कहा।

“ऐसा कैसे हो सकता है? हमारी अदृश्य दीवार को कोई बाहरी शक्ति भेद नहीं सकती। फ़िर भला कोई अंदर कैसे आ सकता है? और बाहरी किसी इंसान को अटलांटिस वृक्ष के बारे में कैसे पता चलेगा?" युगाका के शब्दों में आश्चर्य के भाव नजर आने लगे।

“युगाका तुम तो जानते हो कि तुम्हारी वृक्ष शक्ति का आधार वही अटलांटिस वृक्ष है। हम गिने-चुने सामरा वासियो के अलावा उस वृक्ष की जानकारी तो सीनोर वासियो को भी नहीं है। फ़िर कोई भला उसके बारे में कैसे जान सकता है। बस यही तो मेरी चिंता का कारण है। लगता है हमें अटलांटिस वृक्ष तक चलना पड़ेगा।" कलाट ये कहकर खड़ा होने लगा।

“बाबा, मुझे भी आपसे कुछ बातें बतानी है?" युगाका ने कलाट को खड़ा होते देख कहा।

युगाका की बात सुन कलाट वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गया और युगाका की ओर देखने लगा।

“बाबा कुछ दिन पहले एक पानी का जहाज कुछ इंसानों को लेकर इस क्षेत्र में आया था, जिसे लुफासा ने अपनी शक्तियों से तोड़कर अधिकतर इंसानों को मार डाला, परंतु 12 इंसान किसी प्रकार बचकर मायावन में प्रविष्ट हो गये हैं। वह एक के बाद एक बाधाओं को पार करते जा रहे हैं। उनमें से कुछ मानव के पास तो असीमित शक्तियां भी हैं।" युगाका ने अपने भावनाओं को प्रदर्शित करते हुए कहा।

“इंसानों के पास शक्तियां? कैसी शक्तियां हैं उनके पास?" कलाट ने आश्चर्य से भरते हुए युगाका से पूछा।

“एक इंसान की पीठ पर ‘पंचशूल’ पर छपी सूर्य की आकृति बनी है। उसने देवी शलाका की मूर्ति को भी छुआ, फिर भी वो जिंदा बच गया।" युगाका ने कहा।

“पंचशूल वाली सूर्य की आकृति? और....और....उसे देवी शलाका की मूर्ति को छूकर भी कुछ नहीं हुआ? ..... असंभव!....ये नहीं हो सकता।" कलाट भी यह बात सुनकर घबरा गया।

“ऐसा मेरी आँखों के सामने ही हुआ है बाबा। मैं आपसे झूठ नहीं बोल रहा।" युगाका ने कलाट को यकीन दिलाते हुए कहा- “और दूसरी लड़की तो अभी मात्र xx-xx वर्ष की ही लग रही है, पर वह मायावन के बारे में सबकुछ जानती है, उसने....उसने तो आज मेरी वृक्ष शक्ति भी मुझसे छीन ली थी।"

“क्याऽऽऽऽऽऽ?" युगाका के शब्द सुन कलाट के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा ।

“तुमने मुझे इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया? मुझे लगता है वह घड़ी आने वाली है जिसका अराका वासियों को हज़ारों सालो से इंतजार है। महाशक्ति ने अराका पर अपने कदम को रख दिया है। अब ‘सागरिका’ को फ़िर से खोलना पड़ेगा।"

“कौन महाशक्ति बाबा? और...और ये सागरिका क्या है?" युगाका के लिये कलाट का हर शब्द एक रहस्य के समान था।

“बताता हूं, सब बताता हूं...पर पहले सूर्य के अस्त होने के पहले हमें अटलांटिस वृक्ष तक पहुंचना होगा।" कलाट ने कहा।

“ठीक है बाबा तो पहले अटलांटिस वृक्ष तक पहुंचने की ही व्यवस्था करते हैं। आप मेरे साथ महल की छत पर चिलये।" इतना कहकर युगाका कलाट महल के छत की ओर भागा।

कलाट युगाका के पीछे था।

युगाका ने महल की छत पर पहुंचकर एक अजीब सी सीटी बजाई, कुछ देर बाद उसे हवा में उड़कर वही लकड़ी का ड्रोन आता दिखाई दिया।

ड्रोन महल की छत पर उतर गया। कलाट और युगाका दोनों ही ड्रोन में बैठ गये।

युगाका के इशारे पर अब वह ड्रोन अटलांटिस वृक्ष की ओर उड़ चला।

“क्या अब आप बतायेंगे बाबा कि महाशक्ति कौन है?" युगाका ने कलाट से पूछा।

जारी रहेगा_______✍️
 
kamdev99008 kitne update ho gaye lekin qapki samiksha ka intzaar hai :?:

:online: tab tak apun agley update ki taiyqqri karta hai:approve:
 
#97.

“आज से 20000 वर्ष पहले जब पोसाइडन ने क्लीटो को कैद करने के लिये अराका द्वीप के निर्माण के बारे में सोचा, तो उसके दिमाग में पहला प्रश्न यह आया कि द्वीप की संरचना किस प्रकार की बनाई जाये? इसिलये तिलिस्मा और मायावन के निर्माण के लिये पोसाइडन ने कैस्पर और महाशक्ति मैग्रा का चुनाव किया।

ये दोनो उस समय के सबसे सफल निर्माणकर्ता थे। पोसाइडन चाहता था कि मायावन में विचित्र जीवो और वृक्षो का संसार हो, इस मायावन को इतनी आसानी से कोई ना पार कर पाये और अगर कोई इसे पार करने की कोशिश करे तो कैस्पर उस इंसान की शक्तियों को देखकर तुरंत ऐसे तिलिस्म का निर्माण करे, जिसको तोड़ना उस इंसान की शक्तियों से परे हो। इस प्रकार मैग्रा ने ‘वृक्षा शक्ति’ और ‘जीव शक्ति’ को मिलाकर इस मायावन का निर्माण किया और कैस्पर ने तिलिस्मा का निर्माण किया।

इस निर्माण के कुछ समय बाद पता नहीं किन अंजान कारणो से महाशक्ति मैग्रा ने पोसाइडन के विरूद्ध ही कार्य करना प्रारम्भ कर दिया। जिसके बाद पोसाइडन और मैग्रा की शक्तियों के बीच टकराव शुरू हो गया और फ़िर 18000 वर्ष पहले महाशक्ति मैग्रा कहीं लुप्त हो गयी? उसके बाद से उसका आज तक कुछ पता नहीं चला?"

“कहीं वह छोटी लड़की ही तो मैग्रा नहीं?" युगाका ने हैरानी से पूछा।

“कुछ कह नहीं सकते। हो भी सकता है। इसीलिये तो ‘सागरिका’ खोलने चल रहे हैं।" कलाट ने कहा।

“ये सागरिका क्या है बाबा?" युगाका ने फ़िर कलाट से पूछा।

“जब देवताओं ने पृथ्वी का निर्माण कार्य शुरू किया, तो 7 तत्वों की रचना की और उन 7 तत्वों की रचनाओ का इतिहास सुरक्षित रखने के लिये 7 चमत्कारी किताबों का निर्माण किया। इस प्रकार धरती, आकाश, वायु, अग्नि, जल, प्रकाश और ध्वनि के इतिहास के लिये क्रमश: भूमिका, निहारिका, वेगिका, अग्निका, सागरिका, प्रकाशिका और ध्वनिका नामक किताबों की रचना की और यह सभी किताबें पृथ्वी के अलग-अलग भागो में छिपा दी गयी।

इनमें से मुझे सागरिका किताब की जानकारी है। वह एक चमत्कारी पुस्तक है और भूतकाल के अलावा कुछ भविष्य भी दिखाती है। उस पुस्तक के, भविष्य के पन्नो को, पुस्तक की इच्छा के बगैर कोई नहीं खोल सकता। पिछली बार जब मैं उस पुस्तक के पास गया था, तो उसके आखरी पन्ने पर लिखा था कि जब मायावन में महाशक्ति के अस्तित्व का अहसास हो जाये तो उस पुस्तक का अगला पन्ना खुलेगा।"

अब इससे पहले कि युगाका कोई और प्रश्न पूछ पाता, ड्रोन अटलांटिस वृक्ष के पास पहुंच गया।

ड्रोन से उतरकर कलाट और युगाका अटलांटिस वृक्ष के पास पहुंच गये। दोनों ने ही पहले वृक्ष को प्रणाम किया।

“हे महावृक्ष क्या आज आपके पास कोई अंजान व्यक्ती आया था?" कलाट ने वृक्ष से पूछा।

“एक ऐसा व्यक्ती आया था, जो सामरा का नहीं था, पर फ़िर भी मुझे वो अपना सा लगा।" वृक्ष से आवाज आयी।

“मैं कुछ समझा नहीं महावृक्ष? वो सामरा का नहीं था फ़िर भी अपना लगा, ऐसा कैसे हो सकता है?" कलाट ने ना समझने वाले अंदाज मेंकहा।

“ठीक उसी प्रकार जैसे त्रिकाली.... ....।" कुछ कहते-कहते वृक्ष शांत हो गया।

“मैं आपके कथन को समझ गया महावृक्ष। अगर आपको ऐसा महसूस हुआ है तो फ़िर मुझे कोई आपत्ती नहीं है।" कलाट ने कहा।

पर युगाका को महावृक्ष की ये बात समझ नहीं आयी। उसे समझ नहीं आया कि महावृक्ष ने त्रिकाली का नाम क्यों लिया?

“परेशान मत हो कलाट, खुशियाँ अराका पर कदम रख चुकी हैं, मैंने उसे महसूस किया है। तुम तो बस अब ‘दूसरे देव युद्ध’ की तैयारी करो।" वृक्ष ने कहा।

“क्या देव युद्ध निकट आ चुका है महावृक्ष?" कलाट ने पूछा।

“परिस्थितीयां बननी शुरू हो चुकी हैं, ये देव युद्ध पिछले से भी बड़ा होगा। पर देवताओं की शक्ति तुम्हारे साथ है। इसलिये तुम बिल्कुल भी परेशान मत हो। तुम तो अभी बस खुशियों की तैयारी करो।" वृक्ष ने कहा।

“जी महावृक्ष... जैसी आपकी आज्ञा।" कलाट ने कहा- “हे महावृक्ष मैं सागरिका का अगला पन्ना पलटना चाहता हूं।"

“ठीक है ... यह उचित समय भी है, तुम सागरिका का अगला पन्ना पलट सकते हो।" वृक्ष के इतना कहते ही उस वृक्ष पर 2 सोने के सेब दिखाई देने लगे।

कलाट और युगाका ने एक-एक फल को खा लिया।

फल को खाते ही दोनों का शरीर एक ऊर्जा के प्रकाशपुंज के रूप में परिवर्त्तित हो गया और रोशनी की तेजी से उड़कर समुद्र में समा गया।

समुद्र में तेजी से यात्रा करता वह प्रकाशपुंज कुछ ही सेकंड में समुद्र के अंदर डूबे अटलांटिस तक पहुंच गया। अटलांटिस द्वीप के अवशेष चारो ओर बिखरे दिखाई दे रहे थे।

दोनों प्रकाशपुंज वहां मौजूद पोसाइडन के मंदिर में प्रवेश कर गये।

पोसाइडन के मंदिर में प्रवेश करते ही युगाका और कलाट दोनो अपने वास्ताविक रूप में आ गये।

मंदिर अंदर से बहुत विशालकाय था। चारो ओर पानी ही पानी भरा था। बहुत से जलीय जंतु वहां तैर रहे थे।

मंदिर में पोसाइडन की एक विशालकाय प्रतिमा लगी थी, जिसके नीचे एक शेर की मूर्ति भी थी।

कलाट ने शेर की मूर्ति को पकड़कर घुमा दिया। अब शेर का मुंह पोसाइडन की ओर हो गया था। तभी एक गड़गड़ाहट के साथ पोसाइडन की मूर्ति के पीछे, एक द्वार सा खुल गया।

कलाट और युगाका उस द्वार में प्रविष्ट हो गये।

वह एक 20 फुट लंबा- चौड़ा कमरा था, जिसकी दीवार पर अजीब-अजीब से जलीय जन्तुओं की उभरी हुई आकृतियाँ बनी थी। उस कमरे में पानी का नामो- निशान भी नहीं था।

कमरे के बीचोबीच में एक खंभे पर एक मोटी सी प्राचीन किताब रखी थी। उस किताब के कवर पर उभरा हुआ, एक सुनहरी धातु का ‘सी-हार्स’ बना था।

वह किताब काफ़ी मोटी दिख रही थी।

कलाट ने युगाका को उस किताब को ना छूने का इशारा किया और अपने वस्त्रो में छिपे एक मछली की खाल जैसे दस्तानों को अपने दोनों हाथों में पहन लिया।

अब कलाट ने किताब को प्रणाम कर उसके पन्नो को खोल दिया।

किताब के खोलते ही उस किताब से पानी की कुछ बूंदे निकलकर कलाट के सामने हवा में फैल गयी। इसी के साथ वह पानी, हवा में कुछ शब्दों को लिखने लगा। जो कि इस प्रकार थे-

“सप्तलोक से आयी शक्ति, ब्रह्मकण से बना त्रिकाल,

देवयुद्ध कण-कण में होगा, जब टूटेगा मायाजाल"

यह पंक्तियाँ देखकर कलाट मुस्कुरा दिया, पर युगाका की कुछ भी समझ में नहीं आया।

उसने कलाट की ओर देखा, पर कलाट ने इशारे से उसे सबकुछ बाद में बताने को कहा।

पंक्तियो को देख कलाट ने फ़िर से सागरिका को देख हाथ जोड़ा।

उसके हाथ जोड़ते ही सागरिका से निकलने वाला वह जल, फ़िर से सागरिका में समा गया और इसी के साथ वह किताब स्वतः बंद हो गयी।

अब कलाट, युगाका को लेकर वापस पोसाइडन के मंदिर में आ गया।

कलाट के गुप्त स्थान से निकलते ही गुप्त स्थान वापस से बंद हो गया और शेर की मूर्ति अपने यथास्थान

आ गयी।

कलाट और युगाका जैसे ही पोसाइडन के मंदिर से बाहर आये, वह फ़िर से प्रकाशपुंज में बदल गये और सामरा राज्य की ओर चल दिये।

जलपरी की मूर्ति

(9 जनवरी 2002, बुधवार, 17:30, मायावन, अराका द्वीप)

“कैप्टन...शाम होने वाली है। हमें रात गुजारने के लिये फ़िर से कोई सुरक्षित स्थान देखना होगा।" अल्बर्ट ने सुयश को देखते हुए कहा।

“कुछ दूरी पर मुझे पेड़ ख़तम होते दिख रहे हैं। शायद वहां पर कोई सुरक्षित जगह हो?" सुयश ने अल्बर्ट को एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“कैप्टन, ऐमू फ़िर गायब हो गया।" ब्रेंडन ने कहा- “जब युगाका ने हम पर हमला किया था, तब तक वह हमारे साथ था। उसके बाद से उसका कुछ पता नहीं है?"

“मुझे ऐसा लगा जैसे ऐमू युगाका से बहुत ज़्यादा घबरा गया था।" जेनिथ ने कहा।

तभी ऊंचे पेडों का सिलसिला ख़तम हो गया। अब सामने दूर-दूर तक मैदानी क्षेत्र था, जहां पर एक भी पेड़ नजर नहीं आ रहे थे।

तभी तौफीक ने कहा- “कैप्टन.... वहां कुछ दूरी पर जमीन पर कोई इमारत जैसी नजर आ रही है। हमें उस तरफ ही चलना चाहिये।"

सभी की नजर तौफीक की बताई दिशा की ओर घूम गयी। सभी उस दिशा की ओर चल दिये।

“यह तो संगमरमर पत्थरों से बनी कोई जगह दिखाई दे रही है।" शैफाली ने कहा

लगभग 5 मिनट में ही सभी उस स्थान पर पहुंच गये।

वह एक सफेद संगमरमर पत्थरों से बनी, एक पार्क जैसी जगह थी। इस जगह पर किसी भी प्रकार की कोई छत नहीं थी।

पार्क के बीचोबीच एक सुंदर और साफ पानी का तालाब था, जिसके चारो ओर उसमें उतरने के लिये सीढ़ियाँ बनी थी। उस तालाब के बीच में पानी का एक विचित्र फव्वारा लगा था।

उसे विचित्र इसलिये कहा क्यों की उस फव्वारे में एक ‘सर्प लड़की’ की मूर्ति लगी थी।

उस लड़की के शरीर के नीचे का भाग एक सर्प का था और कमर से ऊपर का भाग एक लड़की का था।

लड़की के बाल की जगह सैकडो सर्प निकले थे और हर सर्प के मुंह से पानी की एक धार फव्वारे की शकल में निकल रही थी।

“मेडूसा!" अल्बर्ट ने उस मूर्ति को देखते ही कहा- “ये ग्रीक कहानियों का पात्र ‘मेडूसा’ है। यह 3 ‘गारगन’ बहनो में से एक थी।"

“क्या इसकी कहानी हमें सुनाएंगे प्रोफेसर?" जेनिथ ने अल्बर्ट से अनुरोध करते हुए कहा।

“जरूर सुनाऊंगा, पर पहले एक बार इस पूरी जगह को ठीक से देख लिया जाये कि यह जगह रात गुजारने लायक है भी कि नहीं?" अल्बर्ट ने जेनिथ से कहा।

जेनिथ ने धीरे से सिर हिलाकर अपनी हामी भर दी। अब सभी बाकी की जगह को देखने लगे।

उस पार्क के एक दूसरे क्षेत्र में खूबसूरत जलपरी की मूर्ति बनी थी, जिसका कमर से नीचे का हिस्सा एक मछली जैसा था और कमर के ऊपर का हिस्सा एक लड़की का था।

जारी रहेगा______✍️
 
SANJU ( V. R. )

avsji mitra and bhabhi ji

Humaar 2 estory usc me hain per koi padhta hi nahi :girlcry:
 
SANJU ( V. R. )

avsji

2-3 Updates se koi hi hello nahi hui ju ki? Kidhar busy:sadwavey:
 
#98.

उस जलपरी ने अपने हाथ में एक मटकी पकड़ी हुई थी।

मटकी का मुंह नीचे की ओर था। नीचे की ओर पत्थर से बनी एक नाली के जैसी संरचना बनी थी, जो वहां से घुमावदार रास्ते की शकल में, कुछ दूर बने एक ड्रैगन की मूर्ति के मुंह तक जा रही थी।

कुल मिलाकर बहुत ही रहस्यमयी वातावरण था।

तभी सूर्य की आखरी किरण ने भी आसमान से अलविदा कहा और शाम हो गयी।

सूर्य की आखरी किरण के जाते ही अचानक उस क्षेत्र में किसी वाद्य यंत्र का एक मीठा संगीत सा बजने लगा।

संगीत को सुन सभी आश्चर्य से इधर-उधर देखने लगे, पर उन्हें यह समझ नहीं आया कि यह संगीत कहां से सुनाई दे रहा है।

वह आवाज चारो ओर गूंज रही थी और सभी के कानों को बहुत भली लग रही थी।

तभी जलपरी के मटके से एक गुलाबी रंग का द्रव निकलना शुरू हो गया।

“यह सब क्या हो रहा है?" क्रिस्टी ने कहा- “लगता है यह कोई तिलिस्मी जगह है?"

“कोई भी यहां कि किसी भी चीज को छुएगा नहीं।" सुयश ने सभी को चेतावनी दे दी।

उधर जलपरी के मटके से निकला गुलाबी द्रव, अब नालियों से होता हुआ, ड्रैगन के मुंह में जाने लगा।

एक बार देखने पर यह महसूस हो रहा था कि वह जलपरी ड्रैगन को शरबत पिला रही है।

पर यह नहीं पता चल रहा था कि जलपरी की मटकी में वह द्रव आ कहां से रहा है? और ड्रैगन के मुंह के बाद जा कहां रहा है?

तभी उस पूरे क्षेत्र में एक खुशबू सी फैल गयी। उस खुशबू में अजीब सा नशा महसूस हो रहा था।

“यह अजीब सी खुशबू किस चीज की है?" जेनिथ ने कहा।

“यह तो शराब जैसी खुशबू है।" जॉनी ने वातावरण में बसी गंध को सूंघते हुए कहा- “पर यह खुशबू आ कहां से रही है?"

अब जॉनी की नजर जलपरी की मटकी से निकलते गुलाबी रंग के द्रव पर पड़ी।

जॉनी धीरे-धीरे चलता हुआ, जलपरी की मूर्ति के पास पहुंच गया और खड़ा होकर उस द्रव को सूंघने लगा।

वह विचित्र सी खुशबू उस गुलाबी द्रव से ही आ रही थी।

“ओए नशेड़ी।" जैक ने जॉनी को चिढ़ाते हुए कहा- “वहां क्या सूंघ रहा है? वह कोई शराब नहीं है।“

जॉनी ने तो जैक की बात का कोई जवाब नहीं दिया और ना ही बुरा माना। उसे तो बस अब वह गुलाबी द्रव ही आकर्षित कर रहा था।

जॉनी ने उस द्रव को अपने चुल्लू में उठाकर देखा और फ़िर धीरे से उसे पी लिया।

“अरे वाह! लॉटरी लग गयी.....ये तो शराब ही है।" जॉनी खुशी से चीखकर नाचने लगा।

उसका नाच देखकर सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। जॉनी अब जल्दी-जल्दी एक बोतल से पानी फेंक कर उसमें शराब भरने लगा।

“कोई और उस शराब को हाथ भी नहीं लगायेगा।" तौफीक ने चेतावनी देते हुए कहा- “यह किसी प्रकार का मायाजाल भी हो सकता है? नहीं तो इस जंगल में इतना सुंदर संगमरमर का पार्क कहां से आ गया?"

उधर जॉनी लगातार शराब पीता जा रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह जन्म-जन्म का प्यासा हो।

तभी क्रिस्टी जॉनी को देखकर चीख उठी- “ईऽऽऽऽऽऽऽऽऽ"

क्रिस्टी की चीख सुनकर सभी का ध्यान जॉनी की ओर गया। उसे देखकर सभी आश्चर्य से भर गये क्यों की जॉनी के शरीर पर बहुत तेजी से बाल निकल रहे थे।

क्रिस्टी की चीख सुन और सभी को अपनी ओर देखता पाकर, जॉनी की नजर स्वयं पर गयी।

उसके हाथ और पैर पर तेजी से बाल निकल रहे थे। अपने में हो रहे इस बदलाव को देख अब जॉनी भी चीखने लगा।

एक क्षण में ही उसका पूरा नशा काफूर हो गया।

“कैप्टन....बचाओऽऽऽऽ.... मुझे ये क्या हो रहा है?" जॉनी सुयश की ओर भागा।

सुयश को भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे? असहाय सी अवस्था में वह जॉनी को देख रहा था।

“मुझे बचा लो।" अब जॉनी शैफाली के पास जाकर गिड़गिड़ाने लगा- “तुम कुछ भी कर सकती हो....मुझे बचा लो।"

शैफाली भी सिर्फ जॉनी को देख रही थी, उसके पास भी जॉनी के लिये कोई उपाय नहीं था।

अब जॉनी के चेहरे पर भी बाल निकलने लगे और उसकी आवाज भी धीरे-धीरे बदलने लगी।

कोई अंजान खतरा देख ब्रेंडन और तौफीक ने अपने हाथ में चाकू निकाल लिया।

ब्रेंडन और तौफीक के हाथ में चाकू देख जॉनी डर कर एक तरफ खड़ा हो गया।

उसका बदलना अब भी जारी था।

कुछ ही देर में जॉनी एक पूर्ण विकसित गोरिल्ला में परीवर्तित हो गया।

यह देख जैक भी अब जॉनी से दूर हो गया। सभी डरी-डरी नज़रों से उस गोरिल्ले को देख रहे थे।

तभी गोरिल्ला ने अपने मुंह से बहुत तेज ‘खो-खो’ की आवाज निकाली और उछलकर उस पार्क से बाहर आ गया।

जब तक सभी उसे देखने के लिये बाहर निकले, तब तक वह गोरिल्ला अजीब सी आवाज निकालता और उछलता हुआ जंगल की ओर भाग गया।

जैक को जॉनी के गोरिल्ला बनने पर बिल्कुल भी अफसोस नहीं हुआ, वह तो मन ही मन खुश था क्यूकी अब इस जंगल से निकलने के बाद सारी दौलत जैक की हो जानी थी।

मगर जैक के चेहरे के भाव क्रिस्टी ने साफ पहचान लिये। क्रिस्टी के चेहरे पर अब जैक के लिये नफरत के भाव नजर आये।

एलेक्स और जॉनी के गायब होने के बाद अब वह लोग कुल 8 बचे थे।

सच पूछो तो जॉनी के गायब होने का अफसोस सुयश के अलावा किसी को नहीं हुआ था।

“कैप्टन.... इस घटना के बाद क्या हमें अब भी इस जगह पर रात गुजारनी चाहिये?" ब्रेंडन ने सुयश से पूछा।

“आसपास कोई और जगह इतनी साफ सुथरी नहीं है और वैसे भी अगर हम इस जगह की किसी वस्तु का इस्तेमाल ना करे तो मुझे नहीं लगता कि इस जगह पर रुकने में कोई परेशानी है?"

सुयश ने कहा- “वैसे आपका इस बारे में क्या कहना है प्रोफेसर?"

“मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूँ कैप्टन।" अल्बर्ट ने कहा-

“अगर जॉनी भी जल्दबाजी नहीं करता तो वह भी अब तक हमारे पास होता। इस जगह पर सफाई और पानी दोनो उपलब्ध हैं, हम यहां रुक सकते हैं।"

फिर क्या था, उसी जगह पर एक किनारे बैठकर सभी खाना खाने लगे।

“प्रोफेसर आप हमें ‘मेडूसा’ की कहानी सुनाने वाले थे।" जेनिथ ने अल्बर्ट को याद दिलाते हुए कहा।

अल्बर्ट ने धीरे से सिर हिलाया और कहानी सुनाना शुरू कर दी-

“मेडूसा के पिता का नाम ‘फोर्किस’ और माँ का नाम ‘सीटो’ था। फोर्किस को जल का देवता कहा जाता था। उसके हाथ केकड़े की तरह थे और शरीर का निचला हिस्सा किसी विशाल सर्प की तरह था। शायद वह जलीय दैत्य की प्रजाति का था।

मेडूसा की माँ सीटो ड्रैगन परिवार से थी। बाद में फोर्किस और सीटो ने बहुत से वंश की स्थापना की। जैसे ‘गार्गन वंश’, जिन्हे हम नागवंश कह सकते हैं। गार्गन वंश में सीटो की 3 पुत्रियां हुई। ‘स्थेनो, यूरेल और मेडूसा’। इसमें मेडूसा सबसे छोटी थी। मेडूसा की दोनों बहन अमर थी। मेडूसा पहले बहुत खूबसूरत थी। मेडूसा ने आजीवन कुंआरे रहने का व्रत लिया और कोमार्य की देवी एथेना की पुजारिन बन गयी।

एक दिन समुद्र के देवता पोसाइडन की नजर मेडूसा पर पड़ी और मेडूसा के सौन्दर्य से आसक्त होकर पोसाइडन ने देवी एथेना के मंदिर में ही मेडूसा के साथ बलात्कार किया।

जिससे क्रुद्ध होकर देवी एथेना ने मेडूसा को श्राप देकर सर्प में परिवर्त्तित कर दिया। एथेना के इस श्राप का प्रभाव मेडूसा की दोनों बहनो पर भी हुआ। वह भी मेडूसा की ही तरह सर्प में परिवर्त्तित हो गयी। इस श्राप के प्रभाव से मेडूसा और उन तीन बहनो की आँखों में ऐसी शक्ति आ गयी कि अब जो भी उनकी आँखों में देखता वह पत्थर का बन जाता।

बाद में ‘जीयूष’ के पुत्र ‘पर्सियस’ ने एथेना की दी हुई ‘शील्ड’ से मेडूसा के अक्स को देखकर उसका सिर काट दिया।उस समय मेडूसा, पोसाइडन के बच्चे की माँ बनने वाली थी। मेडूसा का सिर कटने के बाद उसका खून समुद्र में जाकर मिल गया, जिससे पंखों वाले घोड़े ‘पेगासस’ का जन्म हुआ और सुनहरी तलवार के साथ एक योद्धा ‘क्राइसोर’ का जन्म हुआ। उधर फोर्किस और सीटो ने कुछ और वंश को जन्म दिया, जिनमें ‘हेस्पराइडस’ जो कि एक अप्सरा थी और ‘लैडन’ जो कि एक 100 सिर वाला हाइड्रा ड्रैगन था।

लैडन एक खतरनाक योद्धा था, जो कि हेस्पराइडस के ‘सोने के सेब’ के बाग में उस वृक्ष की रक्षा करता था। बाद में जीयूष के दूसरे पुत्र ‘हेराक्लस’ ने लैडन को सोने के सेब की खातिर मार दिया था। इस तरह फोर्किस और सीटो को मूलतः ‘नागवंश’ और ‘ड्रैगनवंश’ का जनक माना गया है। पृथ्वी पर पाया जाने वाला हर ‘राक्षस’ इसी वंश से उत्पन्न हुआ है।" इतना कहकर अल्बर्ट चुप हो गया।

“बाप रे .... बड़ा खतरनाक था मेडूसा का परिवार।" क्रिस्टी ने एक गहरी साँस छोड़ते हुए कहा-

“पर एक बात समझ में नहीं आयी कि एथेना के मंदिर में मेडूसा की तो गलती ही नहीं थी, फ़िर एथेना ने पोसाइडन के बजाय मेडूसा को क्यों श्राप दिया?"

“यह हमेशा से ग्रीक माइथालोजी में विवाद का विषय रहा है। ज़्यादातर लोगो का यही मानना है कि एथेना ने उस समय गलत किया था।" अल्बर्ट ने कहा।

“तो क्या मेडूसा के माँ, बाप, भाई, बहनो ने कभी पोसाइडन से बदला लेने के बारे में नहीं सोचा?" जेनिथ ने अल्बर्ट ने पूछा।

“इस बारे में कुछ कह नहीं सकता क्यों कि किसी भी किताब में ऐसा कोई जिक्र किया नहीं गया है।" अल्बर्ट ने कहा- “पर जो भी हो, मुझे भी लगता है कि मेडूसा कभी गलत नहीं थी, पर माइथोलॉजी में उसे हमेशा एक शैतान की तरह प्रदर्शित किया गया है जो मेरे हिसाब से पूर्णतया गलत है।"

सभी ने एक नजर मेडूसा की मूर्ति पर डाली और देर रात हो जाने के कारण सोने के लिये चल दिये।

जारी रहेगा________✍️
 
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