#93.
वृक्ष शक्ति
(9 जनवरी 2002, बुधवार, 15:15, मायावन, अराका द्वीप)
असलम के मरने के बाद अब सुयश की टीम में केवल 10 लोग बचे थे।
जहां एक तरफ सुयश सहित सभी थोड़ा उदास दिख रहे थे, वहीं उनका पीछा कर रहे युगाका की आँखों में खुशी के भाव थे।
“तौफीक!"
जेनिथ ने तौफीक का हाथ थामते हुए कहा- “यहां द्वीप पर हम साधारण जिंदगी तो जी नहीं रहे हैं। ना ही तुम्हारे कोई दुश्मन यहां पर हैं, फिर भी यहां पर तुम मुझसे दूर क्यों रहते हो?"
“देखो जेनिथ मैं वैसा इंसान नहीं हूं जैसा तुम्हे पसंद है।" तौफीक ने बहुत सीरियस अंदाज में कहा- “हर समय दिल की मत सुना करो, कभी-कभी दिमाग भी लगा लिया करो।"
“मैं तुम्हारी इस बात का मतलब नहीं समझी।" जेनिथ ने उलझे-उलझे भाव से कहा- “देखो तुम पहेलियां मत बुझाओ। तुम मुझे सीधे-सीधे बताओ कि तुम क्या कहना चाहते हो?"
“देखो जेनिथ मैं पहले तुमसे प्यार नहीं करता था, पर अब करने लगा हूं। पर पता नहीं क्यों मुझे महसूस होता है कि हम तुम इस जिंदगी में कभी मिल नहीं पायेंगे।" तौफीक ने निराशावादी व्यक्ति की तरह कहा।
यह सुनकर जेनिथ का दिल टूट सा गया।
“ऐसा कह के मेरा दिल क्यों दुखा रहे हो तौफीक?.... मैं जानती हूं कि तुम अपने प्यार का इजहार नहीं कर सकते। तुम दूसरोँ से थोड़ा अलग हो, पर इस तरह से मत बोलो।" इतना कहकर जेनिथ की आँखों से आँसू निकलने लगे।
तभी जेनिथ के गले में टंगे उस देवी के लॉकेट से कुछ चमक निकली और उसने जेनिथ के आँसुओ को सोख लिया। पर यह घटना कोई देख नहीं पाया।
उधर चलते-चलते एलेक्स के जूते के फीते खुल गये। एलेक्स जूते के फीते बांधने के लिये उस जगह पर बैठ गया और अपने जूते के फीते बांधने लगा।
किसी ने एलेक्स को रुकते नहीं देखा, वह सभी आपस में बात करते आगे बढ़ते जा रहे थे।
एलेक्स ने एक नजर आगे जाते हुए सभी लोगो पर मारी, पर उसने किसी को रोका नहीं। उसे लगा कि वह अभी जूते के फीते बांधकर दौड़कर उन लोगो के पास पहुंच जायेगा।
एलेक्स जूते के फीते बांधकर जैसे ही आगे बढ़ने चला, उसे पास के एक पेड़ के पीछे से कुछ खटके की आवाज आयी और एक इंसानी साया दिखाई दिया।
जंगल में इंसानी साया देखकर एलेक्स के मन मे उत्सुकता जागी, वह धीरे-धीरे उस पेड़ की ओर बढ़ा, जिधर से वह आवाज आयी थी।
पर एलेक्स ने एक गलती की, उसने किसी को भी रुकने के लिये आवाज नहीं लगाई।
एलेक्स ने पेड़ के पीछे झांक कर देखा, पर उसे कुछ दिखाई नहीं दिया।
“वह इंसानी साया कहां गया? अभी तो यहीं पर था।" एलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।
तभी एलेक्स को अपने पीछे एक सरसराहट का अहसास हुआ।
एलेक्स एक झटके से पलट गया। उसे अपने पीछे युगाका खड़ा दिखाई दिया, पर इससे पहले कि एलेक्स युगाका से कुछ पूछ पाता या फिर अपने साथियों को इस अंजाने खतरे से आगाह कर पाता, युगाका के हाथो से एक गाढ़े हरे रंग का धुंआ निकलने लगा।
एलेक्स हैरानी से धुंए को देखने लगा। तभी एलेक्स को अपना सिर नाचता हुआ सा महसूस हुआ और वह बेहोश होकर युगाका के हाथो में झूल गया।
युगाका ने एलेक्स को धीरे से वहीं पेड़ के नीचे लिटाया और स्वयं एलेक्स बनकर, भागकर सुयश की टीम में शामिल हो गया।
किसी को भी यह पता नहीं चल पाया कि एलेक्स बदल चुका है।
युगाका ने एलेक्स का रूप तो धारण कर लिया, पर परेशानी अब उसकी आवाज की थी क्यों कि युगाका में किसी का भी रूप बदलने का हुनर तो था, पर वह अपनी आवाज नहीं बदल सकता था।
और युगाका को पता था कि कोई ना कोई उससे कुछ ना कुछ तो पूछेगा ही? फ़िर वह कब तक नहीं बोलेगा?
तभी चलते हुए सभी को कुछ पौधे दिखाई दिये। यह पौधे देखने में छोटे थे। इन पर सूरजमुखी के समान कुछ फूल और रसभरी के समान कुछ फल लगे दिखाई दिये।
कुछ तितलीयां और भौंरे उस पौधे के पास मंडरा रहे थे, परंतु जैसे ही कोई भौंरा या तितली उस फूल के पास जाने की कोशिश कर रहा था, वैसे ही वह फूल अपनी पंखुडियों को बंद कर लेता था और जैसे तितली या भौंरा उस फूल से दूर हो जाता था, वह फूल पुनः खिल जाता था।
इस प्रकार फूल के खिलने और बंद होने पर एक अजीब सी ध्वनि उत्पन्न हो रही थी और इस ध्वनि को सुन उस पौधे पर लगा रसभरी के समान फल हर बार अलग-अलग रंगो में परिवर्त्तित हो जा रहा था।
उस पौधे को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह फूल नहीं चाहता कि कोई भौंरा या तितली उसमें उपस्थित मकरंद को ले सके।
सभी इस विचित्र पौधे को देख वही रुक गये।
“बड़ा ही विचित्र पौधा लग रहा है।" अल्बर्ट ने पौधे को देखते हुए कहा।
“ऐसा लगता है जैसे कि इस द्वीप के हर पौधे में जीवन है और ये खुद की अपनी समझ भी रखते हैं।" जेनिथ ने कहा।
अभी ये लोग इस प्रकार से पौधे को देख ही रहे थे कि तभी आसमान से एक उड़ती हुई चिड़िया आयी और उस पौधे से एक फल को तोड़कर आसमान में उड़ गयी।
“लगता है यह फल साधारण है, नहीं तो वह चिड़िया इस प्रकार फल को नहीं ले जाती।" सुयश ने कहा।
यह देख युगाका के मन में तुरंत एक ख़याल आया। वह धीरे से आगे बढ़ा और उसने पौधे से एक फल तोड़कर खा लिया।
फल को खाते ही युगाका जानबूझकर जमीन पर गिर गया और अपना गला पकड़कर खांसने की एक्टिंग करने लगा। यह देख सभी डर गये।
क्रिस्टी लपककर एलेक्स बने युगाका के पास आ गयी।
“क्या हुआ एलेक्स?" क्रिस्टी ने अपनी पानी की बोतल को युगाका के मुंह से लगाते हुए कहा- “लग रहा फल अटक गया।....लो पानी पी लो।"
युगाका ने क्रिस्टी के हाथ से पानी पीया। अब उसका खांसना बंद हो गया था। यह देख सभी ने राहत की साँस ली।
क्रिस्टी भी एलेक्स को खड़ा होते देख मुस्कुरा कर बोली- “जंगली बनने को कहा था। जंगली की तरह खाने को नहीं पगलू।" क्रिस्टी की बात सुन सभी मुस्कुरा दिये।
अब युगाका ने बोलने की एक्टिंग करते हुए फ़िर से अपना गला पकड़ लिया।
“कुछ तो परेशानी हुई है एलेक्स के गले के साथ।" सुयश ने सभी को आगाह करते हुए कहा- “कोई भी इस पौधे के फलो को नहीं खाएगा।"
युगाका ने इशारे से सभी को बताया कि उसके गले से आवाज नहीं निकल रही है।
अल्बर्ट ने टॉर्च की रोशनी से युगाका के मुंह में झांककर देखा। अल्बर्ट को कोई परेशानी समझ में नहीं आयी।
“मुझे लगता है कि यह भी कोई आवाज छीन लेने वाला विचित्र पौधा है?" अल्बर्ट ने कहा।
“अब मैं बात किससे करूंगी?" क्रिस्टी की आँखो से अब झर-झर आँसू बहने लगे- “सॉरी एलेक्स.... मैंने तुम्हारा मजाक उड़ाया।"
यह कहकर क्रिस्टी ने युगाका को कसकर झकझोरा।
युगाका एकटक क्रिस्टी को देख रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि अगर एलेक्स उसकी जगह होता तो कैसे व्यव्हार करता?
तभी ऐमू चीखता हुआ युगाका के सिर पर जाकर उड़ने लगा-“दोस्त नहीं... दोस्त नहीं.... ये ऐमू का दोस्त नहीं।"
चूंकि ऐमू कुछ समय पहले शैफाली और ब्रूनो के लिये भी ‘गंदी लड़की’ और ‘गंदा कुत्ता’ जैसे शब्दो का प्रयोग कर रहा था इसिलये ऐमू की बात पर शैफाली को छोड़ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
शैफाली की तेज निगाहें अब एलेक्स बने युगाका पर गई, अचानक शैफाली की आँखों के भाव बदले।
अब उसके चेहरे पर गुस्सा था, पर उसने किसी को कुछ महसूस नहीं होने दिया।
“चुप हो जाओ क्रिस्टी... इस जंगल में सभी को कुछ ना कुछ परेशानी हो ही रही है। कम से कम एलेक्स तुम्हारे साथ तो है। उनके बारे में सोचो जो अब हमारे साथ नहीं हैं।" अल्बर्ट ने क्रिस्टी को दिलासा देते हुए कहा।
सुयश ने भी क्रिस्टी के कंधे पर हाथ रखकर उसे शांत रहने का इशारा किया।
अब क्रिस्टी का रोना कम हो गया था, पर उसने युगाका के हाथ को अभी भी नहीं छोड़ा था।
उधर युगाका का हाथ पहली बार किसी इंसान ने पकड़ा था, इसिलये उसे बहुत ही अजीब सा महसूस हो रहा था।
तभी शैफाली ने धीरे से पास पड़ा, लकड़ी का मोटा डंडा उठाया और युगाका के सिर के पीछे पहुंच गयी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, शैफाली ने वह डंडा जोर से युगाका के सिर पर मार दिया।
एक तेज सी आवाज हुई और युगाका वहीं गिरकर बेहोश हो गया।
“यह तुमने क्या किया?" क्रिस्टी ने ना समझने वाले भाव से शैफाली को घूरा।
“यह एलेक्स भैया नहीं है क्रिस्टी दीदी।" शैफाली ने कहा- “यह कोई बहुरूपिया है, जो एलेक्स भैया बनकर हमारे साथ चल रहा था। कैप्टन अंकल .... इससे पहले कि यह होश में आये, आप इसे तुरंत किसी चीज से बाँध दीजिए।"
शैफाली की बात सुन सभी नीचे पड़े एलेक्स को देखने लगे।
“यह तुम क्या कह रही हो शैफाली?" जैक ने कहा- “इसका चेहरा तो बिल्कुल एलेक्स से मिल रहा है। कहीं तुम गलत तो नहीं हो?"
“अगर आपको लगता है कि मैं गलत बोल रही हूं, तो जरा देर रुक जाइये। अभी इसके होश में आते ही आपको सब पता चल जायेगा।" शैफाली ने नाराज होते हुए कहा।
“नहीं-नहीं.... मेरा यह कहने का मतलब नहीं था। मैं तो बस वैसे ही पुष्टि कर रहा था।" जैक ने घबराकर कहा।
तभी ब्रेंडन पास लगे एक पेड़ की जड़ को चाकू से काटकर ले आया। देखने में वह जड़ काफ़ी मजबूत लग रही थी। ब्रेंडन ने उसी जड़ से युगाका के हाथ उसके शरीर के पीछे करके बांध दिये।
जारी रहेगा________
