Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर - Page 19 - SexBaba
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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

#101. (नक्षत्रा द्वारा दिखाए दृश्य) मेगा अपडेट

दृश्य-1

“सर, मैंने देश के गद्दारों को अपने हथियार नहीं बेचे हैं। आप मेरी बात का यकीन करिये।" तौफीक ने कर्नल लुईस के सामने गिड़गिड़ाते हुये कहा।

“मैं जानता हूँ कि तुमने कुछ नहीं किया?" कर्नल लुईस ने हंसते हुए कहा- “क्यों कि दुश्मनों को हथियार मैंने बेचे हैं।"

“क्याऽऽऽऽ?" यह सुन तौफीक का चेहरा खुला का खुला रह गया-“इसका मतलब आप मुझे झूठे इल्जाम में फंसा रहे हैं।"

“अगर तुम पहले ही मेरे साथ मिल जाते तो यह नौबत नहीं आती, पर तुम्हें भी तो ईमानदारी के कीड़े ने काटा था। अब भुगतो ईमानदारी की सजा।" कर्नल लुईस ने हंसते हुए कहा- “फ्रांस की कोर्ट कम से कम आजीवन करावास की सजा तो तुम्हें जरूर देगी।"

यह कहकर कर्नल लुईस ने अपने बगल रखी घंटी पर अपनी उंगली मारी। तुरंत ही 4 सेना के जवान अंदर आये और तौफीक को ले जाने लगे।

“अगर मैं बच गया तो तुम्हें छोड़ूंगा नहीं कर्नल।" तौफीक ने जाते- जाते गुर्राकर कहा।

दृश्य-2

“चूंकि मेजर तौफीक पर जुर्म पूरी तरीके से साबित नहीं हो पाया, इसिलये ये कोर्ट जनरल ल्यूकस को इस केस में और छानबीन करने का आदेश देती है। तब तक के लिये मेजर तौफीक को उनके पद से हटाया जाता है और उनके सारे तमगे सेना में जमा करवाए जाते हैं।" इतना कहकर ‘ट्रिब्युनल आक्स आर्मिस द पेरीस’ के ‘जज’ अपने स्थान से खड़े हो गये।

दृश्य-3

“तुम दुखी मत हो तौफीक, देख लेना एक दिन ये फैसला तुम्हारे हक में ही आयेगा।" लॉरेन ने तौफीक की आँखों में झांकते हुए कहा।

“मेरी जिंदगी पूरी तरह बरबाद हो गयी लॉरेन। मेरा नाम, मेरा रुतबा, मेरे मेडल सब कुछ छीन लिये गये मुझसे। मैं कसम खाता हूँ कि उस कर्नल लुईस को बरबाद कर दूँगा। पर जब तक मैं ऐसा कर नहीं लेता मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता।" तौफीक की आँखों में ज्वालामुखी नजर आ रहा था।

“पर अब तुम ये सब करोगे कैसे? कर्नल तुमसे पहले से ही सतर्क हो चुका है। वह अब इतनी आसानी से तुम्हारे हाथ नहीं लगने वाला।" लॉरेन ने सोचते हुए कहा।

“वह सब तुम मुझ पर छोड़ दो। मुझे पता है कि उसकी लड़की जेनिथ फ्रांस की प्रसिद्ध डांसर है और वह अपना ड्रीम्स डांस ग्रुप चलाती है। कर्नल ने एक बार शराब के नशे में मुझसे ये राज की बात बता दी थी, जो कि मुझे याद थी। मैं जेनिथ के द्वारा ही कर्नल से बदला लूंगा।" तौफीक के शब्दों से आग निकल रहे थी- “तुम बस ये बताओ कि तुम मेरा साथ दोगी या नहीं?"

“तौफीक मैं कॉलेज के समय से तुम्हें जानती हूँ। तुम्हारे अलावा मेरा इस दुनियाँ में कोई है भी नहीं, फ़िर मैं तुम्हारा साथ क्यों नहीं दूंगी? तुम बस ये बताओ कि मुझे करना क्या है?" लॉरेन ने तौफीक की ओर प्यार से देखते हुए पूछा।

“मैंने सब पता कर लिया है। कुछ दिन बाद जेनिथ अपने डांस ग्रुप के साथ सुप्रीम नामक जहाज से सिडनी जाने वाली है। तुम्हें पहले उसके डांस ग्रुप में अपनी जगह बनाकर उसकी बेस्ट फ्रेंड बनना होगा। बाकी आगे का काम मैं समय आने पर तुम्हें बता दूंगा।" तौफीक ने लॉरेन को समझाते हुए कहा।

“पर अगर वो सुप्रीम पर जाने वाली है तो उसके ग्रुप में तो जगह ही खाली नहीं होगी, फ़िर भला मैं उसके ग्रुप में कैसे घुस पाऊंगी?" लॉरेन की बातों में दम था।

“मैंने आज ही उसकी एक मुख्य डांसर पर कार चढ़ाकर उसे मार दिया। अब उसके पास एक मुख्य डांसर की जगह खाली है, तुम आज ही अपना बायो-डाटा जेनिथ के पास भेज दो, इस समय वह तुम्हें तुरंत सलेक्ट कर लेगी।" तौफीक ने अपने शब्दों को चबाते हुए कहा।

“क्याऽऽऽऽऽ? तुमने अपना बदला लेने के लिये एक हत्या कर दी।" लॉरेन की आँखों में दुनियाँ भर का आश्चर्य दिख रहा था।

“मैं अपना बदला लेने के लिये किसी भी हद तक जा सकता हूँ और तुम्हें इतना सोचने की जरूरत नहीं है, आर्मी में आज तक मैंने हज़ारों लोगों को मारा होगा, उसमें भी कुछ ना कुछ लोग निर्दोष रहे ही होंगे।" इस समय तौफीक के चेहरे पर अजीब से भाव थे।

“आर्मी की बात अलग है तौफीक, पर वो डांसर तो ‘सिविलयन’ थी और उसका कोई दोष भी नहीं था।" लॉरेन ने तौफीक को समझाने की कोशिश की- “मेरी मानो तो अभी भी समय है, भूल जाओ बदला लेने के बारे में।"

“भूल जाऊं? अपनी सारी बेइज्जती को भूल जाऊं? अपनी पूरी जिंदगी भर जिस ईमानदारी को कमाया था, उस पर लगा दाग भूल जाऊं? अपने जूनीयरर्स के सामने, मैंने जो अपने मेडल वापस किये उसको भूल जाऊं? नहीं लॉरेन.... तुम मेरा साथ दो या ना दो.... मैं ये सब नहीं भूल सकता।" तौफीक का चेहरा पूरी तरह से धधकने लगा था।

“मैं तुमसे जी जान से प्यार करती हूँ तौफीक और मैं हर अच्छे-बुरे कदम पर तुम्हारे साथ हूँ।" लॉरेन ने भी अपने दाँत कसते हुए कहा।

दृश्य-4

“एक बार फ़िर से तुम्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत मुबारकबाद लॉरेन।" जेनिथ ने लॉरेन को देखते हुए कहा- “अब मैं घर चलती हूँ, काफ़ी देर हो गयी है इस समय।"

इतना कहकर जेनिथ लॉरेन के फ़्लैट से बाहर आ गयी। उसने अपनी कार पार्किंग से निकाली और उसमें बैठकर हाइवे की ओर चल दी।

शाम का समय था। हर तरफ कोहरा ही कोहरा फैला था। कोहरे के कारण कुछ दूर आगे की कार भी नजर नहीं आ रही थी।

जेनिथ की कार की रफ़्तार भी हाईवे पर होने की वजह से बहुत ज़्यादा थी।

यकायक जेनिथ की कार का 1 टायर ‘फिस्सऽऽऽऽऽऽ‘की आवाज के साथ पंचर हो गया।

जेनिथ ने किसी तरह रफ़्तार को नियंत्रित करके कार को एक साइड में लगाया और उतरकर धीरे से स्टेपनी निकाली।

मगर स्टेपनी भी पंचर निकली। गुस्से की अधिकता के कारण जेनिथ ने ’डैम इट’ कहते हुए कार को एक ठोकर जड़ दी।

अब वह सड़क के एक किनारे खड़े होकर, किसी से लिफ्ट लेने का इंतजार कर रही थी। हालांकि जेनिथ की कार रोड के काफ़ी किनारे खड़ी हुई थी। फ़िर भी जेनिथ ने बैक लाइट व इंडिकेटर को जलता हुआ छोड़ दिया था। जिससे पीछे से आने वाली कार को उसकी कार दिखाई दे जाए।

अब जेनिथ की नजर पीछे से आने वाली हर कार पर थी। उसने अपना रुमाल निकालकर अपने हाथ में ले लिया था, जिसे हिला-हिला कर वह पीछे से आ रही कारो को रुकने का इशारा कर रही थी।

पर इतने खराब मौसम में कोई रुकना नहीं चाह रहा था। पीछे से आती सारी कारे ‘सांय-सांय’ की आवाज करती हुई, उसके बगल से निकल रही थी।

तभी दूर से एक बड़ी सी लारी आती हुई दिखाई दी। लेकिन इससे पहले कि जेनिथ कुछ समझ पाती, वह लारी एकाएक रोड पर लहराई और ’धड़ाऽऽम’ की आवाज करते हुए, जेनिथ की कार को ठोकर मारते हुए, जेनिथ की तरफ झपटी। जेनिथ ने उससे बचने की बहुत कोशिश की। लेकिन बचते-बचते भी आखिरकार उससे टकरा ही गई।

जेनिथ की आँखों के सामने एकाएक अंधकार सा छा गया और वो बेहोश हो गयी।

तभी लारी का दरवाजा खोलकर तौफीक उतरा। उसने एक बार जेनिथ की नब्ज चेक की और फोन निकालकर लॉरेन को फोन किया।

थोड़ी ही देर में लॉरेन कार के साथ वहां आ गयी। उसने अपनी कार तौफीक के हवाले की और लारी को ड्राइव करते हुए वहां से चली गयी।

जेनिथ के सिर से खून निकल रहा था। तौफीक ने जेनिथ के माथे पर अपना रुमाल कसकर बांधा और जेनिथ को कार में डालकर अस्पताल की ओर चल दिया।

दृश्य-5

जेनिथ की आँख खुली तो उसने अपने आपको अस्पताल के एक बेड पर पाया। उसके सिर से पट्टी बंधी हुई थी। उसका शरीर भी जगह-जगह से जख्मी था।

तभी दरवाजा खोलकर एक नर्स अंदर आई। आते ही उसने जेनिथ से उसका हाल-चाल पूछा और बताया, कि उसे इस तरह से जख्मी हालत में वहां एक आदमी लेकर आया था। अगर वह समय पर उसे वहां नहीं लाता, तो उसका बचना नामुमकिन था।

जेनिथ के पूछने पर नर्स ने बताया कि वह आदमी अभी बाहर से उसकी दवा लेने गया है।

अभी जेनिथ नर्स से बात कर ही रही थी, कि तभी दरवाजे से तौफीक आता दिखाई दिया।

उसके चेहरे पर बहुत सख्त भाव थे। जेनिथ के पूछने पर उसने अपना नाम मेजर तौफीक बताया। फ़िर तौफीक ने जेनिथ से उसके घर का फोन नंबर मांगा।

जेनिथ ने तौफीक को लॉरेन का फोन नंबर दे दिया। कुछ ही देर में लॉरेन अस्पताल आ गयी।

तौफीक ने लॉरेन को जेनिथ की देखभाल करने को कहा और अस्पताल से चला गया।

दृश्य-6

“अरे यार! हम इतनी देर से आपस में बात कर रहीं हैं।" क्रिस्टी ने हल्के से अपने माथे पर चपत लगाते हुए कहा- “पर मैंने तुमसे अभी तक यह नहीं पूछा, कि तुम्हारे उस बॉयफ्रेंड का क्या हुआ? जो कॉलेज में तुमको चुपके-चुपके लेटर लिखा करता था।"

“छोड़ो यार!" लॉरेन ने थोड़ा दुखी स्वर में कहा- “तुमने भी क्या याद दिला दिया?"

“क्या हुआ? वो तुझे छोड़कर भाग गया क्या?" क्रिस्टी ने मजा किया अंदाज में बोला।

“भाग कर कहां जाएगा?" लॉरेन ने गहरी साँस भरते हुए जवाब दिया- “है तो अभी भी मेरे साथ, और वो भी इसी शिप पर।"

“इसी शिप पर!" क्रिस्टी ने हवा में हाथ नचाते हुए शायराना अंदाज में कहा- “अरे वाह! और ये तू सबसे बाद में बता रही है। अच्छा छोड़! ये बता, तू उससे मुझे कब मिलवा रही है।"

“क्या खाक मिलवा रही हूँ!" लॉरेन की आवाज में अभी भी दुख भरा था- “उसने इस शिप पर, मुझसे तक से तो मिलने से मना कर रखा है, फ़िर तुझे उससे कैसे मिलवाऊं?"

“ये क्या बात हुई?" क्रिस्टी ने चहककर कहा- “अरे वो तेरा बॉयफ्रेंड है, या कोई जासूस! जो वह तुझसे भी नहीं मिलना चाहता।"

“अच्छा मिलवाना छोड़ो। उसकी कोई फोटो तो मुझे दिखा सकती हो। आख़िर मैं भी तो देखूं, कौन है वह सूरमा जो मेरी सहेली के रातों की नींद उड़ाए है।" क्रिस्टी ने लॉरेन के चेहरे के पास, हवा में हाथ हिलाते हुए कुछ मजाकिया अंदाज में कहा।

“हां फोटो तो दिखा सकती हूँ।" लॉरेन ने स्वीकृति से सिर हिलाते हुए कहा- “मगर एक शर्त है, तुम और किसी से कुछ नहीं बताओगी?"

“अरे यार! मेरा इस शिप पर और कोई जानने वाला है ही नहीं । फ़िर भला मैं किसे बताऊंगी। लेकिन अगर तू नहीं मानती है, तो ले..... मैं वादा करती हूँ।" क्रिस्टी ने बाकायदा चुटकी से गला पकड़ते हुए वादा करने वाले अंदाज में कहा- “कि किसी से भी नहीं बताऊंगी।"

“फ़िर ठीक है। मैं तुम्हें कल उसकी फोटो जरूर दिखाऊंगी।" लॉरेन ने हामी भरते हुए कहा।

तौफीक जो कि उनकी टेबल के पास की टेबल पर बैठा था और बहुत देर से खूनी नज़रों से लगातार उन पर और उनकी बातों पर नजर रखे था। वह भी उठकर रेस्टोरेंट के बाहर निकल गया।

दृश्य-7

“क्या जरूरत थी क्रिस्टी को अपने बॉयफ्रेंड के बारे में बताने की?" तौफीक के शब्दो में नाराजगी साफ झलक रही थी।

“अरे यार, वो मेरी कॉलेज की मित्र थी। उसका तुम्हारे बदले से क्या लेना-देना?" लॉरेन ने भी इस बार नाराज होते हुए कहा- “और वो तो जेनिथ को जानती भी नहीं है, फ़िर तुम्हें उससे क्या खतरा है?"

“मैं कुछ नहीं जानता। जब तक मेरा काम पूरा नहीं हो जाता, तुम मेरी फोटो भी किसी को नहीं दिखाओगी।" तौफीक ने गुस्से से ऑर्डर दनदनाया।

“ठीक है मैं क्रिस्टी को संभाल लूंगी। तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।" लॉरेन ने कहा और उठकर वहां से चल दी।

दृश्य-8

“मैंने एक दूसरे इंसान एलेक्स को क्रिस्टी को अपना बॉयफ्रेंड कहकर मिला दिया। अब तो खुश हो।"

लॉरेन ने तौफीक को मनाते हुए कहा।

“हूँ!" तौफीक ने हामी भरी।

“सिर्फ हूँ...? कुछ तो बोलो तौफीक?" लॉरेन ने कहा- “वैसे मैंने भी आज तुम्हें जेनिथ के हाथ में हाथ डाले देखा। सच बोलूं तो पता नहीं क्यों बहुत गुस्सा आया मुझे। जी किया तुम्हारा मुंह नोच लूं।"

“मेरा मुंह नोचने का क्यों किया? जेनिथ का मुंह भी तो नोच सकती थी।" तौफीक ने लॉरेन पर कटाक्ष किया।

“उसका क्यों नोचूं, वह तो अब मेरी अच्छी दोस्त बन गयी है। कभी-कभी सोचती हूँ कि ये नाटक अब यहीं पर ख़तम कर दूं। और तुम्हारी मेरी जो फोटो मेरे पास है, उसको उसे दिखा दूं" लॉरेन ने भी तौफीक के कटाक्ष का जवाब देते हुए कहा।

“मेरी फोटो? मेरी तुम्हारी कौन सी फोटो है?" तौफीक ने अजीब सी नजर से लॉरेन को देखते हुए पूछा।

“एक है कॉलेज के टाइम की। जब तुम मुझसे पहली बार मिलने कॉलेज आये थे। काफ़ी पुरानी है, पर बिल्कुल साफ है। मैंने आज तक बचा कर रखी है वह फोटो।" लॉरेन ने कहा।

“पागल हो गयी हो क्या? वो फोटो आज तक बचा कर रखी है और उसे लेकर तुम ‘सुप्रीम’ पर भी आ गयी। मैं यहां इतनी मेहनत से अपने काम पर लगा हूँ और तुम मेरे काम पर पानी फेरने में लगी हो। अगर वह फोटो जेनिथ के हाथ लग गयी तो....मेरे साथ-साथ तुम भी जेल की चक्की पीसोगी। वैसे वो फोटो रखी कहां पर है?" तौफीक ने बिल्कुल हत्थे से उखड़ते हुए कहा

“इतना हाइपर क्यों हो गये तुम एकदम?... मैं पागल हूँ जो तुम्हारे साथ लगी हुई हूँ। तुम्हें तो मेरी कद्र ही नहीं है। इससे अच्छा तो मैं तुम्हारे योजना में शामिल होती ही नहीं और नहीं लगेगी फोटो जेनिथ के हाथ ...उसे मैंने अपनी अलमारी में रखा है और जेनिथ मेरी अलमारी खोलकर नहीं देखती है।" अब लॉरेन भी गुस्सा हो गयी।

यह देख तौफीक थोड़ा सामान्य दिखने लगा- “आई एम वेरी सॉरी...मुझे तुम पर हाइपर नहीं होना चाहिए था। तुम तो जानती हो कि इस समय मेरा दिमाग सही नहीं चल रहा।"

यह देख लॉरेन भी अब सामान्य हो गयी- “कोई बात नहीं मैंने भी गुस्से में तुम्हें जाने क्या कह दिया। मैं भी तुमसे माफ़ी मांगती हूँ। अच्छा अब ये बताओ कि तुम मुझे इस बार नये साल में क्या दे रहे हो?"

“मैंने अभी सोचा नहीं है। मैं देखता हूँ कि इस नये साल में तुम्हें क्या दे सकता हूँ?" तौफीक ने कहा और उठकर वहां से चला गया।

दृश्य-9

“आज 31 तारीख है तौफीक। आज तो सुप्रीम पर बड़ी पार्टी का आयोजन किया गया है। पर तुम्हारे बिना सारी पार्टी बेकार।" लॉरेन ने तौफीक से कहा।

“मेरे रहते मैं तुम्हारी पार्टी बेकार तो नहीं जाने दूंगा। तुम चिंता ना करो, कुछ सरप्राइज है तुम्हारे लिये?" तौफीक ने लॉरेन को देखते हुए कहा।

“कैसा सरप्राइज!" लॉरेन ने खुश होते हुए कहा।

“वास्तव में जॉनी ने अपने दोस्त से शर्त लगायी है नये साल की रात अंधेरे में जेनिथ को किस करने के लिये।" तौफीक ने मुस्कुराते हुए कहा।

“इतनी हिम्मत कैसे हुई उसकी?" लॉरेन ने गुस्से से कहा।

“अरे छोड़ो ना यार उनकी।" तौफीक ने झल्लाकर कहा- “मैं सोच रहा हूँ कि मैं भी यही काम तुम्हारे साथ करूँ।"

“हाऊ रोमांटिक तौफीक!....पर यह कैसे संभव है? वहां तो अंधेरा रहेगा। तुम इतने अंधेरे में मुझे देखोगे कैसे? कहीं गलती से तुमने जेनिथ को किस कर लिया तो? ना बाबा ना...ये तो मुझे बिल्कुल भी मंजूर नहीं है।"

“अरे कुछ नहीं होगा तुम टेंशन मत लो, मेरे पास इसका भी उपाय है।" यह कहकर तौफीक ने अपनी जेब से एक लॉकेट निकालते हुए कहा- “यह तुम्हारे लिये है। इसके पेंडेंट में रेडियम लगा हुआ है जो अंधेरे में भी चमकता है। तुम इसे डांस से पहले पहन लेना, इसके द्वारा अंधेरा होने पर भी मैं तुम्हें पहचान लूंगा।"

“वाह .... सो नाइस ऑफ यू।" इतना कहकर लॉरेन ने वह लॉकेट अपने पर्स में डाल लिया और पर्स से एक नीले रंग का चेकदार रुमाल निकालकर तौफीक को देते हुए कहा- “ये रुमाल तुम्हारे लिये... इस पर मैंने उर्दू से ‘लाम’ शब्द को काढ़ रखा है जो कि मेरे नाम का पहला शब्द है। यह हमेशा तुम्हें मेरी याद दिलाता रहेगा।"

तौफीक ने रुमाल को देखा और अपने जेब में रख लिया।

दृश्य -10

इस समय हॉल के हर कोने में लाउडस्पीकर लगे होने के कारण पूरे हॉल में मध्यम संगीत गूंज रहा था।

सभी की आँखें, जैसे इस यादगार लम्हे को कैमरे की मानिंद शूट कर रही थी।

सभी की निगाहें अपने-अपने लक्ष्य पर थी।

जैसे डांस करती हुई, जेनिथ की निगाहें रह-रह कर तौफीक की ओर जा रही थी। उसने सोच रखा था कि जैसे ही 12:00 बजे लाइट ऑफ होगी। उसे भागकर तौफीक के पास पहुंचना है। जेनिथ, तौफीक के साथ ही नववर्ष सेलिब्रेशन करना चाहती थी।

तौफीक की निगाहें स्टेज पर खड़ी लॉरेन की ओर थी और लॉरेन बार-बार तौफीक को देख रही थी।

लॉरेन के गले में तौफीक का दिया हुआ लॉकेट चमक रहा था।

उधर जॉनी ने जैक को पहले ही बता दिया था, कि लाइट ऑफ होते ही वह जेनिथ की ओर जाएगा और उसे किस करके दिखाएगा।

जॉनी का यह सोचना था कि 1 मिनट के अंधेरे में वह जेनिथ को किस करके वापस आ जाएगा। इसिलए वह स्टेज के पास खड़ा था और उसकी निगाहें लगातार जेनिथ की ओर थी।

जैक, जॉनी का यह कारनामा देखना चाहता था, इसलिए उसने अपनी जेब में अंधेरे में देख सकने वाला चश्मा डाल रखा था। उसकी निगाहें, जॉनी पर व एक हाथ अपनी जेब में था।

फिलहाल हर आदमी का लक्ष्य निश्चित था।

पार्टी जोरों से चल रही थी। घड़ी की सुईयां भी टिक-टिक करती हुई अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही थी।

और आख़िरकार वह समय भी आ गया। जब घड़ी की तीनो सुइयां एकाकार होने के लिये मचल उठि।

“15....14.... 13....12.....11....“ उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी-“5.....4.....3.....2............1“

जैसे ही तीनो सुइयो ने एक-दूसरे को अपने आलिंगन में लिया। तुरंत पूरे हॉल की लाइट ऑफ हो गयी।

हर तरफ शोर शराबे का माहौल था।

जॉनी लाइट के ऑफ होते ही स्टेज की ओर भागा। लेकिन उसे यह नहीं पता था, कि जेनिथ लाइट के ऑफ होते ही तौफीक की तरफ जा चुकी है।

अंधेरा होते देख, जैक ने तुरंत आँखों पर चश्मा लगा लिया। चश्मा लगाते ही उसे जेनिथ स्टेज से गायब दिखी। उधर जॉनी भाग कर, लॉरेन को जेनिथ समझ, उसके पास पहुंच गया।

यह देख के जैक के मुंह से एक ही शब्द निकला- “अब तू मरा जॉनी।"

नक्षत्रा की वजह से दूसरी जेनिथ भी सबकुछ साफ-साफ देख रही थी। उसका बदन पसीने से पूरी तरह भरा हुआ था और होंठ हल्के-हल्के कांप रहे थे। गुस्सा और नफरत की लहर उसके पूरे शरीर में बिजली बनकर दौड़ रही थी।

जारी रहेगा________✍️
 
टोटा आते ही, नार मैं फ़र्क आवै,

चोधर मिलते ही, यार मै फर्क आवै,

माॅ के मरते ही, घरबार मै फर्क आवै,

पिता के मरते ही, संस्कार मै फर्क आवै,

भरोसा ना हो तो, व्यापार मै फर्क आवै,

हमनें देखी है, जिंदगी की हर परिस्थित,

समय के साथ , प्यार में भी फर्क आवै।।

:writing:
 
#102.

इसी के साथ तौफीक और जैक ने अपनी जेब से रिवाल्वर निकाल ली। जैक के हाथों में इस समय रबर के दस्ताने दिखाई दे रहे थे, जबकि तौफीक ने रिवाल्वर को अपने रुमाल से पकड़ रखा था।

दोनो की ही नजर एक ही जगह पर थी, पर उनके निशाने अलग-अलग थे।

जहां तौफीक के निशाने पर अंधेरे में चमकता वह लॉकेट था, वहीं जैक के निशाने पर जॉनी था क्यों की वह बैंक से लूटा हुआ पूरा पैसा हड़पना चाहता था।

तभी पूरे हॉल में एक फॅायर की आवाज गूंजी- “धांयऽऽऽऽऽऽ।"

अजीब सी किस्मत थी कि दोनों गोलियां एक साथ चली। तौफीक के द्वारा चलायी गयी गोली तो निशाने पर लगी, पर जैक के द्वारा चलाई गयी गोली स्टेज पर पीछे जाकर लकड़ी में धंस गयी।

जैक ने गोली चलाने के बाद अपनी रिवाल्वर वहीं पर फेंक दी। जबकि तौफीक ने रिवाल्वर की नाल से निकलते धुंए को उड़ाया और फ़िर रिवाल्वर को अपनी जेब में डाल लिया।

दृश्य-11

जेनिथ डारथी के कमरे से बाहर निकलकर डेक की ओर चल दी।

जेनिथ ने गलती से डारथी के कमरे का दरवाजा खुला छोड़ दिया था। तौफीक छिपकर यह सब देख रहा था।

जेनिथ के जाते ही वह धीरे से डारथी के कमरे में घुस गया। किस्मत से डारथी इस समय स्नानघर में थी।

तौफीक को जेनिथ का पर्स वहीं बेड पर पड़ा हुआ दिखाई दिया। तौफीक को पता था कि जेनिथ के कमरे की चाबी जेनिथ के पर्स में है, उसने जेनिथ के पर्स से जेनिथ के रूम की चाबी निकाली और चुपचाप पर्स को बंद कर बाहर आ गया।

तौफीक ने एक नजर गैलरी में मारी और फ़िर धीरे से चाबी को जेनिथ के रूम के की-होल में लगाकर जेनिथ के रूम का दरवाजा खोल दिया।

तौफीक की नजर अब तेजी से हर अलमारी को उलझने में लग गयी।

“लॉरेन ने कहा था कि उसने मेरी और उसकी फोटो को अलमारी में ही रखा है।" तौफीक मन ही मन बुदबुदाया।

पर आधा घंटे के बाद भी जब तौफीक को फोटो नहीं मिली तो उसने अपनी जेब से ट्रेंच सिगरेट निकाली और वहीं सोफे पर बैठकर पीने लगा।

अभी उसने आधी सिगरेट ही पी थी कि तभी उसे लगा कि कहीं वह फोटो लॉरेन की जेब में ही तो नहीं थी। यह सोच तौफीक ने घबराकर अपनी सिगरेट बुझाई और अपने जेब से निकालकर एक स्प्रे अपने पूरे शरीर पर किया। इस स्प्रे के प्रभाव से तौफीक के शरीर की गंध छिप गयी।

अब वह तेजी से कमरे से निकलकर स्टोर रूम की ओर भागा। स्टोर रूम का दरवाजा खुला हुआ था।

तौफीक ने स्टोर रूम के दरवाजे को अंदर की ओर धक्का दिया। दरवाजा धीरे से आवाज करता हुआ खुल गया।

तौफीक स्टोर रूम में दाख़िल हो गया। तौफीक ने पहले उसे जगह को देखा, जहां लॉरेन की लाश रखी गयी थी, पर वहां लाश को ना पाकर तौफीक घबरा गया और वह स्टोर रूम का पिछला दरवाजा खोलकर उधर से बाहर निकल गया।

तभी तौफीक को दूसरे डेक पर खड़ा एक सुरक्षा गार्ड दिखाई दिया।

सुरक्षा गार्ड को देख तौफीक वहीं रखे ड्रम के पीछे छिप गया। छिपते वक्त तौफीक की जेब में रखा लॉरेन का दिया हुआ नीला चेकदार रूमाल वहीं गिरगया, जिसे तौफीक देख नहीं पाया।

सुरक्षा गार्ड के जाते ही तौफीक ने 2 खम्भों के पास गिणत के 8 का निशान बनाया और वहां से निकल गया।

तौफीक ने ब्रेंडन के मुंह से ब्रूनो की बात सुन ली थी। उसे लगा कि कहीं कैप्टन उसका पीछा ब्रूनो से ना करवाये।

अब तौफीक एक गैलरी से निकलकर जा रहा था कि तभी क्रिस्टी के रूम से आती आवाज ने उसके कदमों को उधर मोड़ दिया।

क्रिस्टी के कमरे से एक हरा कीड़ा उछलता हुआ बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, जिसे तौफीक ने एक गार्ड के हाथ से रिवाल्वर छीनकर मार दिया।

दृश्य-12

तौफीक बिना आवाज किये लैब में प्रविष्ट हो गया।

थॉमस अपनी लैब में बैठा हुआ था। उसके बगल में रूमाल का एक ढेर लगा था।

वह बार-बार अलग-अलग रूमाल उठाता और उस पर कोई केमिकल डालकर रूमाल को चेक कर रहा था।

अचानक एक रूमाल पर केमिकल डालते ही उसकी आँखे चमक उठी। रूमाल पर कुछ छोटे-छोटे कण अब चमकने लगे थे।

“निश्चित ही यह बारूद के कण हैं।" थॉमस मन ही मन बड़बड़ाया-“इसका मतलब है कि जिसने भी हॉल में लॉरेन को गोली मारी, यह रूमाल उसी का है और उसने रिवाल्वर को रूमाल से पकड़ रखा था।"

रूमाल का एक हिस्सा रिवाल्वर की नाल की वजह से थोड़ा जल भी गया था, जो अब थॉमस को साफ दिख रहा था। रूमाल से अभी भी संदल की खुशबू आ रही थी।

थॉमस ने तुरंत रूमाल को उठाकर उसे पीछे पलटा। रूमाल के पीछे की ओर तौफीक का नाम और उसका रूम नंबर पड़ा था।

“खाना खाने नहीं चलना है क्या सर?" पीछे से उसके सहायक पीटर ने आवाज लगाई- “सभी लोग लंच के लिए जा चुके हैं, बस हम ही लोग बाकी बचे हैं।"

“2 मिनट रुक जाओ पीटर। ........ या फिर ऐसा करो कि तुम खाने के लिए चलो, मैं बस थोड़ी ही देर में आ रहा हूँ।" थॉमस ने पीटर से कहा।

“ओ.के. सर।" कहकर पीटर रूम से बाहर निकल गया, शायद उसे तेज भूख लगी थी।

“मुझे तुरंत कैप्टन को कातिल का नाम बता देना चाहिए।" थॉमस मन ही मन बड़बड़ाया।

यह सोचकर वह फोन की ओर बढ़ गया।

थॉमस को फोन की ओर बढ़ते देख तौफीक ने वहां रखे दूसरे फोन का रिसीवर उठा लिया।

थॉमस ने जैसे ही फोन को उठाकर अपने कान से लगाया, उसे फोन पर तौफीक खरखराती आवाज सुनाई दी- “तुझे अपनी जिंदगी प्यारी नहीं है क्या? जो मेरे बारे में कैप्टन को बताने जा रहा है।"

एकदम से फोन पर आयी आवाज ने थॉमस को चोंका दिया। वह एक पल में समझ गया कि इस फोन के पैरलल में लगे किसी फोन पर तौफीक मौजूद है और वह उसे भली भाँति देख रहा है। यह अहसास ही उसे एक पल के लिये कंपा गया।

थॉमस ने तुरंत आसपास के सभी फोन पर नजर मारी। उसकी निगाहें एक दिशा में जाकर ठहर गई। एक खंभे के पास अंधेरे में खड़ा, उसे तौफीक नजर आया। जो उसी की तरफ देख रहा था।

“कौन हो तुम?" थॉमस ने हिम्मत करते हुए जोर से पूछा और फिर रिसीवर को धीरे से क्रैडल पर रख दिया।

“अभी-अभी तुमने मेरा नाम रूमाल पर से पढ़ा तो है, फिर भी भूल गए।" तौफीक की गुर्राती हुई आवाज वातावरण में गूंजी।

“तो क्या तुम ......?"

“मेरा नाम लेने की कोशिश मत करो।" तौफीक ने थॉमस के शब्दो को बीच में ही काटते हुए, उसे चुप करा दिया- “क्योंकी मेरे हिसाब से हवा के भी कान होते हैं और मैं नहीं चाहता कि मेरी आवाज, मेरा नाम अभी किसी तक पहुंचे।"

“क्या चाहते हो तुम?" थॉमस के शब्दो में भय साफ नजर आ रहा था।

“अजीब पागल हो तुम ......।" तौफीक के स्वर में खतरनाक भाव आ गये- “अब जब तुमने मेरा नाम ‘जान’ लिया है, तो अब मैं भी तुम्हारी ‘जान’ ही लूंगा।"

“तुम ..... तुम मुझे नहीं मार सकते।" थॉमस ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

थॉमस की आँखे अब अंधेरे में भी तौफीक के हाथ में थमे रिवाल्वर को स्पस्ट देख रही थी।

और इससे पहले कि थॉमस अपने बचाव में कुछ कर पाता, एक ‘पिट्’ की आवाज हुई और एक गोली उसके गले में सुराख कर गई।

थॉमस किसी कटे पेड़ की तरह धड़ाम से फ़र्श पर गिर गया। उसकी आँखों में आश्चर्य के भाव थे। शायद मरते दम तक उसे अपनी मौत पर विश्वास नहीं था।

तौफीक ने रिवाल्वर की नाल से निकलते हुए धुंए को फूंक मारकर हवा में उड़ाया और फिर रिवाल्वर की नाल पर लगा साइलेंसर हटाकर, दोनों ही चीज अपनी जेब के हवाले कर ली।

अब तौफीक रूमाल के ढेर के पास पहुंच गया।

उसने अपनी जेब में हाथ डालकर एक लाईटर निकाल लिया। ‘खटाक’ की आवाज के साथ लाइटर ऑन हुई और उससे निकलती हुई लौ ने तुरंत ही रूमाल के गट्ठरों को अपने घेरे में ले लिया।

तौफीक ने एक-दो जलते हुए रूमाल थॉमस के ऊपर व कुछ रूमाल कमरे में इधर-उधर फेंक दिये।

धीरे-धीरे पूरे कमरे ने आग पकड़ ली।

कुछ ज्वलनशील रसायन को भी आग ने अपने घेरे में ले लिया। तौफीक अब सधे कदमों से रूम के बाहर निकला और एक दिशा में चल दिया।

कुछ आगे जाने पर उसकी रफ़्तार एकाएक तेज हो गई। अब वह तेजी से चिल्ला रहा था- “आग.....आग .....लैब में आग लग गई......गार्ड.....गार्ड..जल्दी सीजफायर लाओ।"

उसके चिल्लाते ही बहुत से लोगों का का ध्यान उस ओर आकर्षित हो गया।

तब तक लैब से काला धुआं निकलने लगा था। बहुत से लोग लैब से धुंआ निकलते देख वहां पर एकत्रित हो गए। कुछ लोगों ने शीशे तोड़कर आग बुझाने के यन्त्र निकाल लिये। वह सिलेंडर हाथ में लेकर लैब में घुस गए।

आग अभी इतनी ज्यादा नहीं फैली थी कि उसे बुझाया न जा सके। धीरे-धीरे गार्ड्स ने आग पर काबू पा लिया।

तौफीक भी अब भीड़ में शामिल हो गया था। आग पर नियंत्रण होते देख उसके चेहरे पर एक दबी-दबी सी मुस्कान आ गयी।

इसी के साथ नक्षत्रा ने रुका हुआ समय फिर से चालू कर दिया और जेनिथ के सामने दिखने वाले दृश्य हवा में विलोप हो गये।

इसी के साथ जेनिथ वहां पर लहराकर गिर गयी। उसके गिरने की आवाज काफ़ी तेज थी, जिसे सुनकर अल्बर्ट की खुल गयी। उसने दूर जेनिथ को पड़ा देखा तो सबको उठा दिया।

सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

“क्या हुआ जेनिथ?" तौफीक ने जेनिथ का हाथ पकड़ते हुए पूछा।

तौफीक के हाथ पकड़ते जेनिथ को बहुत तेज़ गुस्सा आया, तभी उसे अपने मस्तिष्क में नक्षत्रा की आवाज सुनाई दी- “अपनी भावनाओं पे नियंत्रण करो दोस्त...तुमने मुझसे वादा किया था।"

यह सुन जेनिथ ने अपने गुस्से को अंदर दबाया, पर तौफीक का हाथ अपने हाथ से धीरे से छुड़ाते हुए कहा- “कुछ नहीं हुआ मुझे ... बस थोड़ी सी बेचैनी हो रही थी इसिलये टहलने आ गयी थी। टहलते-टहलते चक्कर आ गया था बस।"

यह सुनकर सबने राहत की साँस ली।

“बहुत अच्छे दोस्त... अच्छा नियंत्रण किया तुमने।" नक्षत्रा ने कहा- “थोड़ा सा ठहर जाओ, वक्त आने पर इस तौफीक से भी निपट लेंगे, बस तुम अपने होश को संभाले रखो।"

“मैं अब ठीक हूँ।" जेनिथ ने अपने मन में नक्षत्रा से कहा- “और बहुत-बहुत धन्यवाद मुझे आइना दिखाने के लिये।"

इतना कहकर जेनिथ उठी और क्रिस्टी के साथ वापस सोने वाले स्थान की ओर चल दी।

जारी रहेगा______✍️
 
To bhai log bas 3 aur update, and ye chapter khatam ho jayega, aur fir maayavan me pravesh kar jayenge:approve: Aur uske baad, agla padaav Tilishma :declare:
 
#103.

चैपटर-14

हिमलोक: (10 जनवरी 2002, गुरुवार, 10:25, ट्रांस अंटार्कटिक पर्वत अंटार्कटिका)

विल्मर इस समय बहुत परेशान था। कल से जेम्स कुछ पता नहीं चल रहा था। इस वजह से वह काफ़ी घबराया हुआ था।

“इस कमरे में कहीं भी कोई दरवाजा नहीं है, फिर जेम्स अचानक से कमरे से कहां चला गया? कहीं सच में ही तो देवी शलाका उसे नहीं पकड़ ले गयी?" विल्मर के दिमाग में अजीब-अजीब से ख्याल आ रहे थे।

अभी विल्मर यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसे हवा में एक द्वार बनता दिखाई दिया जो कि इस बात का घोतक था कि शलाका आ रही है।

हवा के द्वार से शलाका ने कमरे में प्रवेश किया। इस समय उसने बहुत ही मॉर्डन सी काले रंग की त्वचा से सटी (skin-tight) पोशाक पहन रखी थी। इस पोशाक में अगर कोई उसे देखता तो मान ही नहीं सकता था कि यह कोई देवी है। हर समय की तरह त्रिशूल अब भी शलाका के हाथ में था।

शलाका ने एक नजर कमरे में बैठे विल्मर पर मारी और बोल उठी- “जेम्स कहां है?“

“म ...मुझे नहीं पता ....।" विल्मर ने डरते हुए कहा- “जेम्स कल से कहीं गायब है। मुझे लगा उसे आप कहीं ले गयी है?"

शलाका की आँखें सोचने वाली मुद्रा में सिकुड गयी। उसने एक नजर पूरे कमरे पर मारी।

अब उसकी नजरें दरवाजे वाले स्टीकर पर जाकर चिपक गयी।

“इसका मतलब जेम्स ने गुप्त द्वार का प्रयोग किया है।" शलाका मन ही मन बड़बड़ायी।

“आपने कुछ कहा क्या?" विल्मर ने शलाका को बड़बड़ाते देखकर पूछा।

“नहीं... मैंने कुछ नहीं कहा और मैं जेम्स को लेकर कहीं नहीं गयी?, वो स्वयं ही गुप्त द्वार का प्रयोग करके यहां से बाहर गया है।" शलाका ने विल्मर की ओर देखते हुए कहा- “मैं उसको लाने जा रही हूँ, तब तक तुम इसी कमरे में रहो और ध्यान रहे, यहां के किसी सामान से छेड़-छाड़ करने की कोशिश मत करना, वरना तुम भी गायब हो जाओगे।" विल्मर ने हां में सिर हिलाया।

शलाका अब चलकर उस स्टीकर वाले दरवाजे के पास पहुंची और स्टीकर पर मौजूद लाल बटन को दबा दिया। बटन हरे रंग का हो गया। विल्मर आँखें फाड़े उस दृश्य को देख रहा था।

शलाका उस गुप्त द्वार में प्रवेश कर गयी। कुछ आगे चलने पर उसे चारो ओर दरवाजे ही दरवाजे नजर आये। यह देख शलाका की नजर सभी दरवाज़ों पर फिरने लगी।

कुछ देर देखने के बाद उसकी नजर एक दरवाजे पर टिक गयी। शलाका धीरे से आगे बढ़ी और उस द्वार में प्रवेश कर गयी।

वह रास्ता एक बर्फ़ की गुफा में निकला था। शलाका उस गुफा से बाहर निकली। उसे अपने अगल-बगल चारो तरफ बर्फ़ के पहाड़ दिखाई दे रहे थे।

यह स्थान देखकर शलाका की पुरानी याद ताजा हो गयी। जब वो 5000 वर्ष पहले यहां वेदालय में पढ़ती थी।

शलाका के चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान बिखर गयी। शलाका ने अपने आसपास देखा, पर उसे जीवन के कोई भी लक्षण वहां दिखाई नहीं दिये।

“यहां इतना सन्नाटा क्यों है, 5000 वर्ष पहले तो यह जगह पूरी तरह से जीवन से परिपूर्ण थी। इतने वर्ष में तो इस जगह को और विकसित हो जाना चाहिये था, पर यह तो बिल्कुल वीरान दिखाई दे रही है। ऐसी वीरान जगह पर तो जेम्स को ढूंढ पाना मुश्किल होगा।.....मुझे रुद्राक्ष और शिवन्या की मदद लेनी होगी, वह हिमलोक के बारे में सबकुछ जानते हैं। उन्हें अवश्य पता होगा कि जेम्स कहां है?"

यह सोचकर शलाका ने अपने त्रिशूल को हवा में उछाला। हवा में उछालते ही त्रिशूल कहीं गायब हो गया। अब शलाका ने अपने दोनों हाथ की मुट्ठियां बंद कर, दोनो हाथ के अंगूठे को अपने मस्तिष्क के दोनो तरफ लगाया और अपने मन में ‘रुद्राक्ष और शिवन्या’ दोहराना शुरू कर दिया।

हवा में मानिसक तरंगे फैलना शुरू हो गयी।

कुछ ही देर में शलाका को 4 रेंडियर एक स्लेज गाड़ी को खींचते उधर आते दिखाई दिये।

स्लेज आकर शलाका के पास रूक गयी। शलाका के स्लेज में बैठते ही रेंडियर उसे लेकर एक अंजान दिशा की ओर चल दिये। रास्ते भर शलाका हिमालय में हुए अनेकों बदलाव को देखती जा रही थी।

लगभग 15 मिनट के बाद रेंडियर बर्फ़ से ढकी एक गुफा के पास पाहुंच गये। रेंडियर एक क्षण को रुके और फ़िर गुफा में प्रवेश कर गये। अब रेंडियर गुफा में दौड़ रहे थे।

गुफा में बीच-बीच में ऊपर की ओर सुराख बने थे, जहां से थोड़ी-थोड़ी बर्फ़ गिर कर गुफा में आ रही थी।

कुछ देर के बाद शलाका को गुफा के आगे एक विशालकाय गड्ढ़ा दिखाई दिया, जिसके चारो ओर, नीचे की तरफ जाता हुआ एक 10 फिट चौड़ा रास्ता बना था। गड्डे की गहराई का अंत नहीं दिख रहा था।

रेंडियर उसी रास्ते पर दौड़ते हुए नीचे की ओर जाने लगे।

वह रास्ता इतना खतरनाक था कि शायद कोई मानव उसे देखकर उसमें जाने की सोचता भी नहीं, पर शलाका तो कई बार इस रास्ते से आ-जा चुकी थी। इसिलये वह आराम से स्लेज में बैठी हुई थी।

गड्डे में थोड़ा नीचे जाने के बाद अब उजाला नजर आने लगा था, पर यह उजाला कहां से आ रहा था, यह नहीं पता चल रहा था।

लगभग 500 मीटर का सफर उस गड्डे में तय करने के बाद अब रेंडियर रुक गये।

शलाका को वहां दीवार में एक द्वार दिखाई दिया। शलाका ने उस द्वार को खोला और अब उसके सामने था- “हिमलोक”।

वही हिमलोक जिसकी रचना वेदालय के समय में महागुरु नीलाभ ने की थी। वही हिमलोक जिस पर रुद्राक्ष और शिवन्या को शासन करने के लिये चुना गया था।

शलाका के सामने एक बर्फ़ से ढकी हुई दुनियां थी, जहां पर चारो ओर बर्फ़ की विशालकाय देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित थी।

तभी शलाका को सामने खड़े रुद्राक्ष और शिवन्या दिखाई दिये। शलाका खुश होकर बारी-बारी दोनों के गले लग गयी।

“पूरे 5000 वर्ष बीत गये हैं तुमसे मिले।" शिवन्या ने शलाका को निहारते हुए कहा- “मुझे तो लगा था कि शायद अब तुम जीवित भी नहीं हो।"

“शायद अब तक जीवित नहीं बचती, पर किसी के इंतजार ने इतने वर्ष तक मुझे जीवित रखा।....अरे हां मैं दरअसल किसी दूसरे काम से यहां आयी हूँ.... मुझे एक जेम्स नाम के मनुष्य की तलाश है, जो गलती से हिमालय पर आ पहुंचा है।" शलाका ने बात को बदलते हुए कहा।

“एक विदेशी मनुष्य हमने पकड़ा तो है, जो कि हमारी सीमा में घूम रहा था। हो सकता है कि वही जेम्स हो?" रुद्राक्ष ने कहा।

“उसने नीले रंग की टी शर्ट और काली जींस पहनी हुई है।" शलाका ने जेम्स का हुलिया दोनों को बताया।

“हां फ़िर तो वही है ... जेम्स हमारे ही पास है .... हमें लगा कि वह गुरुत्व शक्ति चुराने आया है, इसिलये हमने उसे कैदखाने में डाल दिया।" शिवन्या ने कहा।

“गुरुत्व शक्ति!" शलाका ने आश्चर्य से कहा- “क्या कल गुरुत्व शक्ति प्रकट होने वाली है?"

“हां...तुम तो जानती हो कि गुरुत्व शक्ति हर साल एक विशेष नक्षत्र में सूर्योदय की पहली किरण के साथ बर्फ़ से निकलती है, जिसकी हम पूजा भी करते हैं और सूर्यास्त की आखरी किरण के साथ वापस बर्फ़ में समा जाती है।" शिवन्या ने शलाका को याद दिलाते हुए कहा।

“हां-हां .... मुझे सब याद है ... मैं कुछ भी नहीं भूली....ना गुरुत्व शक्ति और ना ही आर्यन को ................।" शलाका ने एक गहरी साँस भरते हुए कहा।

“चलो फ़िर हमारे महल चलो ... इतने दिन बाद आयी हो तो एक दिन तो रहना ही पड़ेगा हमारे साथ .... और वैसे भी कल तुम पूजा में भी भाग ले सकती हो।" रुद्राक्ष ने शलाका पर जोर डालते हुए कहा।

यह सुन शलाका थोड़ा सोच में पड़ गयी।

उसे सोच में पड़े देख शिवन्या भी बोल उठी- “अरे चलो ना यार... तुम्हारा जेम्स तो वैसे भी मिल गया है, अब तुम्हें परेशानी ही क्या है?"

“ठीक है चलती हूँ....।" कुछ सोचकर शलाका ने मस्कुराते हुए कहा- “अच्छा ये बता कि बाकी के लोग कैसे हैं?"

“बाकी सब तो ठीक हैं, परंतु धरा और मयूर थोड़े से परेशान हैं।" शिवन्या ने कहा- “दरअसल कुछ समय पहले उसकी धरा शक्ति का एक कण चोरी हो गया है, जिसे वो ढूंढ नहीं पा रहे हैं।"

ऐसा कैसे हो सकता है?“ शलाका ने आश्चर्य से पूछा- “पृथ्वी पर अगर कहीं भी वह धरा शक्ति का कण प्रयोग में लाया जाये तो वह धरा और मयूर को पता चल जायेगा, फ़िर वो उसे प्राप्त कर सकते हैं।"

“धरा शक्ति का प्रयोग अभी अमेरिका के एक शहर वाशिंगटन में कल ही 2 बार किया गया, जिससे उन्हें यह तो पता चल गया कि वह शक्ति इस समय अमेरिका में है, धरा और मयूर अमेरिका पहुंच भी चुके हैं। अब बस उन्हें इंतजार है उस शक्ति के अगली बार प्रयोग होने का। जैसे ही इस बार किसी ने उसका प्रयोग किया, वह पकड़ा जायेगा। .... पर छोड़ ना यार उनकी बातों को....वो दोनों आसानी से उस शक्ति को प्राप्त कर लेंगे। चल हम लोग चलते हैं, कल के उत्सव की तैयारियां करते हैं।"

शिवन्या यह कहकर शलाका को खींचकर महल की ओर चल दी।

चक्रवात

(10 जनवरी 2002, गुरुवार, 14:00, मायावन, अराका द्वीप)

रात में शैफाली और जेनिथ की वजह से सभी देर से सोये थे, इसिलये सभी के उठने में काफ़ी देर हो गया था।

चूंकि उस पार्क वाली जगह पर एक खूबसूरत सा तालाब भी था, जिसमें साफ पानी भरा था। इसिलये सभी ने उस जगह पर आधा दिन ज़्यादा रहने का विचार किया।

बारी-बारी सभी लेडीज और जेंट्स ने वहां पर खूब नहाया और अपने कपडों को साफ किया।

इतने दिनो बाद नहा कर सभी को बहुत ताज़ा महसूस हो रहा था।

अब सभी फ़िर से आगे की ओर बढ़ गये।

जेनिथ का दिमाग बुरी तरह से तौफीक पर खराब था। इसिलये वह तौफीक से ज़्यादा बात नहीं कर रही थी। तौफीक ने जेनिथ के इस बदलाव को महसूस कर लिया था, पर उसे इसका कारण नहीं पता चला।

अब केवल 8 लोग ही बचे थे, पर जोड़े पूरी तरह से टूट गये थे। क्रिस्टी से एलेक्स अलग हो गया था और जैक से जॉनी। जेनिथ और तौफीक का रिस्ता भी अब नहीं बचा था, इसिलये सभी अब थोड़ा कम बात कर रहे थे।

“अरे दोस्त दूसरों से बातें मत करो, पर मुझे तो इस तरह से बोर ना करो।" नक्षत्रा ने जेनिथ के मन में कहा- “कुछ तो बोलो?"

“हम तो सुबह से ढलकर, शाम हो गये,

इस कमबख्त इश्क से बदनाम हो गये।"

जेनिथ ने शायराना अंदाज में, नक्षत्रा को किवता सुनाई।

“वाह-वाह दोस्त क्या बात कही है?” नक्षत्रा ने कहा- “आप बहुत तेजी से उबर रहे हो अपने दुख से। ... बहुत खूब.... शानदार।"

“बहुत-बहुत धन्यवाद!" जेनिथ ने मन में कहा- “अब तुम भी कुछ सुनाओ नक्षत्रा?"

“पृथ्वी पर आकर हम भी इंसान हो गये,

तुझमें सिमटकर 2 रूह एक जान हो गये।"

जेनिथ ने भी जेनिथ के लिये एक किवता मार दी।

“बहुत ही खूबसूरत नक्षत्रा... मान गये तुम्हें.... तुम भी बहुत तेजी से सीख रहे हो पृथ्वी की भाषा।" जेनिथ ने खुश होते हुए नक्षत्रा से कहा।

भले ही तौफीक का राज जेनिथ को पता चल गया था, मगर नक्षत्रा की बातो ने जेनिथ को अब बिल्कुल संभाल लिया था। जेनिथ को जिंदगी का यह नया अंदाज बहुत पसंद आ रहा था।

तभी चलते हुए उनके रास्ते में एक फूलों की घाटी आ गई। बहुत ही खूबसूरत फूलों के पौधे चारो ओर लगे थे। चारो ओर खुशबू बिखरी हुई थी।

सभी को ये घाटी बहुत अच्छी लग रही थी। ब्रेंडन ने आगे चलते हुए एक गुलाबी रंग के फूल को तोड़कर अपने हाथो में ले लिया। उस फूल की खुशबू भी बहुत अच्छी थी।

तभी कहीं से एक भौंरा उड़ता हुआ आया और ब्रेंडन के आसपास मंडराने लगा। उसके पंखों की तेज़ ‘भन्न-भन्न’ की आवाज बहुत अजीब सी लग रही थी।

यह देख ब्रेंडन ने अपनी जगह बदल कर उस भौंरे से बचने की कोशिश की, पर भौंरा भी ब्रेंडन के पीछे-पीछे दूसरी जगह पर पहुंच गया।

ब्रेंडन ने फ़िर जगह बदल ली, पर शायद वह भौंरा भी जिद्दी था, वह ब्रेंडन के पीछे ही पड़ गया। ब्रेंडन जिधर जा रहा था, भौंरा उधर आ जा रहा था।

“ब्रेंडन अंकल शायद वह भौंरा आपके नहीं बल्कि आपके हाथ में मौजूद फूल के पीछे पड़ा है।" शैफाली ने ब्रेंडन से कहा- “आप उस फूल को फेंक दिजिये।"

ब्रेंडन को शैफाली का लॉजिक सही लगा, इसिलये उसने अपने हाथ में पकड़े गुलाबी फूल को वहीं जमीन पर फेंक दिया।

पर फूल का गुलाबी रंग और महक अभी भी ब्रेंडन के हाथों पर लगी थी। इसिलये भौंरा फूल को फेंकने के बाद भी ब्रेंडन के पीछे लगा रहा।

अब ब्रेंडन को उस भौंरे की आवाज थोड़ा इरिटेटिग लगने लगी। वह बार-बार भौंरे को अपने हाथ से भगाने की कोशिश कर रहा था।

पर उस भौंरे ने भी शायद ब्रेंडन को परेशान करने की कसम खा रखी थी, वह अभी भी ब्रेंडन के पीछे लगा था।

इस बार ब्रेंडन ने भौंरे को भगाने की कोशिश नहीं की और उसे थोड़ा और अपने पास आने दिया। जैसे ही वह भौंरा इस बार ब्रेंडन के पास आया, ब्रेंडन ने निशाना साधकर अपने हाथ का वार उस भौंरे के ऊपर कर दिया।

इस बार निशाना बिल्कुल ठीक था। ब्रेंडन का हाथ तेजी से भौंरे को लगा और वह वहीं एक धूल वाली जगह पर घायल होकर गिर गया।

भौंरे के भनभनाने की आवाज अब और तेज हो गयी थी। अब वह जमीन पर गिरकर जोर से तड़पते हुए धूल में लोट रहा था।

भौंरे के जमीन में तड़पने की वजह से जमीन पर कुछ गोल-गोल सी लकीरें बनने लगी।

अब थोड़ी-थोड़ी सी धूल भी जमीन से उठने लगी। कुछ ही देर में भौंरे वाली जगह पर छोटा सा धूल का गुबार बन गया। सभी की नजर उस भौंरे की ओर थी। सभी को भौंरे को देखकर किसी नये खतरे का अहसास हो गया था।

धीरे-धीरे भौंरे का छटपटाना बंद हो गया, पर आश्चर्यजनक तरीके से धूल का गुबार अभी भी कम नहीं हुआ था।

“ये धूल का गुबार क्यों कम नहीं हो रहा?" क्रिस्टी ने कहा- “क्या यह भौंरा भी किसी प्रकार के चमत्कार का हिस्सा है?"

जारी रहेगा_______✍️
 
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