MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 41 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 267

फिर दिव्यांश उन दोनों के शरीर में अपनी जीवन शक्ति के साथ उनकी नेगेटिव एनर्जी भी दाल देता है जिससे कुछ hi देर में दोनों भाई होश में आ जाते है. और होश में आते hi फिर से पब पैर हमला करने को तैयार होने लगते है. तो बिच में दिव्यांश hi उनको टोकता है

दिव्यांश – अब क्या करने वाले हो तुम दोनों???

नकसुर – इस लड़के से युद्ध और क्या??

दिव्यांश – पैर तुम दोनों वो युद्ध हार चुके हो और तुम दोनों मरने hi वाले थी पैर इस लड़के ने hi तुम दोनों को बचाया है. और अब तुम दोनों की पूरी जीवन शक्ति इस लड़के के पास है न तो तुम इसको हरा सकते हो और न hi अब वो वरदान बचा है जिसके चलते तुम दोनों यह पहरा दे रहे थे…

भलासुर – पैर वो कैसे दादाजी??? हम जब तक जीवित है तब तक उस तालाब की रक्षा करना हमारा धर्म है.

दिव्यांश – वो इसलिए कियोकि तुम दोनों मूट के मुँह से वापिस लोटे हो और तुमको जीवन देने वाला भी वही है जिसको तुम हराना चाहते थे. तो तुम्हारा ये जीवन अब सदा इस लड़के का कर्जदार है. तुम अपने पिता का वचन निभाते हुए मरे जा चुके हो तो तुम्हारे पिता का वचन भी उसके साथ hi मार गया है. अब तुम्हारे जीवन पैर केवल और केवल इस लड़के का हक़ है.

नकसुर – आप सच कहते है दादाजी. आज से हम इसके कर्जदार है. और इस कर्ज को उतरने के लिए हम सदा इसके साथ इसका साया बन कर रहेंगे.

पब – नहीं गुरूजी आप मेरे कर्जदार नहीं है. और न hi आपको मेरे साथ रहने की जरुरत है. अब आप लोग उस वचन से आज़ाद है तो जा कर अपना राज पढ़ सम्भालिये. बस मेरी आप दोनों से एक विनती है.

भलासुर – बोलो पुत्र यदि हम तुम्हारे लिए कुछ भी कर सके तो हमको बहुत ख़ुशी होगी.

पब अवनि को अपने पास बुलाता है और फिर कहता है – आपको हम दोनों की शादी यहाँ पैर hi करवानी है. ताकि मैं अपना अंतिम वरदान मांग कर त्रिकाल जैसे पापी का अंत कर सकू.

नकसुर – हम्म ये तो बहुत hi अच्छी बात है. हम इसके लिए तैयार है पैर तुम अंतिम वरदान में मांगने क्या वाले हो जो यहाँ पैर इससे शादी करना चाहते हो…

पब फिर नकसुर और भलासुर को दयासुर और मणि जी का पूरा प्लान बता देता है जिसको सुन कर दोनों बहुत खुश होते है. और दिल से अपने छोटे भाई और मणि शंकर जी की टैरिफ करते है. (अभी इस दोनों को नहीं पता की मणि शंकर इन दोनों का बड़ा भाई भी है)

पब – गुरूजी मेने सुना था की यहाँ पैर जो भी सीडी टेलिपोर्ट हो कर आता है उसका बचना नामुनकिन है. पैर हम तीनो पैर इतना बा संकट तो नहीं आया की हम उसको ताल न सके. और देवता तो हमसे बहुत शक्ति शैली है तो उन्होंने यहाँ आ कर अभी तक इस काम को क्यों नहीं किया…

नकसुर – पुत्र तुम पैर बड़ा संकट इसलिए नहीं आया कियोकि तुमने 5 चरण पार किये थे. यदि तुम या दादाजी भी टेलिपोर्ट हो कर यहाँ आते तो 2 मं में मारे जाते..

पब – इसका मतलब हमको 5 चरण पार करने का फायदा हुआ. वैसे गुरूजी यदि हम डायरेक्ट आते तो हमको और क्या भुगतना होता किस्सा हम 2 मं भी सामना नहीं कर सकते थे?? (पब को विश्वास नहीं हो रहा था की कुछ भी इतना खतरनाक हो सकता है की वो उसके सामने 2 मं भी न टिक सके)

नकसुर – पुत्र जो चुनोतिया तुमने 5 चरणों में पार की है न वो एक साथ तुम्हारे सामने कड़ी होती…

पब - ??????

नकसुर – देखो जब भी कोई यहाँ टेलिपोर्ट हो कर आता है तो वो होता तो तालाब के पास टेलिपोर्ट पैर पहुँचता है उस मैदान में. और उस टाइम उस मैदान में जहरीले तीर वाले और फल वाले पेड़ होते है (चरण 1). और उस जहरीले जांगले में तुम पैर एक साथ तांत्रिक (चरण 2), दानव (चरण 3), जानवर (चरण 4) और कृतिम दानव (चरण 6) हमला करते है. और आकाश से ड्रैगन्स (चरण 7) आग बर्शते है. इसके अलग तुम्हारा कोई प्रिये जान तुमको मदत के लिए पुकारता दिखाई देता है (चरण 5). और इन सभी का सामना आपको करना होता है बिना किसी शक्ति के करना होता है कियोकि आपकी सभी शक्तिया ब्लॉक हो चुकी होती है (चरण 2) और आपके दिमाग पैर करोड़, घ्रादा और न जाने किसी किसी भावनाये हावी होने लगती है (चरण 3). यदि सीडी सीडी कहु तो आपकी शक्ति छीन कर आपको दरिंदो से बारे जलिरिले जांगले में छोड़ दिया जाता है. और उससे भी बड़ी बात ये की उस जांगले को पार करने के लिए उस जहरीले फल को खाना जरुरी है. और ये बात कोई जनता भी नहीं था अभी तक…

पब ये सब सुन कर सुन्न पद जाता है उसके पुरे शरीर में दर की एक तीव्र लहार बहाने लगती है. आज उसको पता चला था की क्यों उसके गुरुओ ने उसको टेलिपोर्ट हो कर यहाँ आने से मन कर दिया. क्यों वो अभी भी दर रहे थे जब पब ने 5 चरण पुरे होने पैर यहाँ टेलिपोर्ट होने के लिए बोलै था. शायद वो ये जानते होंगे की यहाँ कितना खतना है पैर शायद वो भी ये नहीं जानते होंगे की 5 चरण पार करने का फायदा मिलेगा. यदि कहा जाये तो ये पब की किस्मत hi थी की उसको दिव्यांश जी का साथ मिला नहीं तो न तो वो ड्रैगन्स को हरा पता और न hi दोनों दानव भइओ से जीत पता. यदि दूसरे शवादो में कहे तो पब की जीत निकटि चाहती थी इसलिए hi हुयी थी नहीं तो वो इतना कबूल नहीं था की ये सब कर पता. नियति के खेल में सब मोहरे hi होते है और नियति की चाहत को अपने कर्मो से बदलना hi उन कर्मो का फल होता है जो की हर किसी के बस में नहीं होता.

फिर ये सब शादी की तैयारियों में लग जाते है. वह उस वीराने में कुछ भी तो नहीं था पैर जो जरुरी चीजे थी उनका तो इंतजाम किया hi जा सकता था और वो इंतजाम उन वाष्ण से भरे गाओं से किया था नकसुर और भलासुर ने. इस गाओं के सभी लोग उस तालाब के दूसरी साइड सम्भोग में लगे रहते थे गाओं में तो केवल खाने का इंतजाम करने hi जाते थे. इन सभी का काम था भी केवल सम्भोग और खाना…

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जब तक शादी की तैयारियां हो रही है तब टेक क बार त्रिकाल को भी देख लेते है. त्रिकाल की सड़ना पूरी हो चिकि थी उसका हवन आज सुबह hi पूरा हुआ था. और उसका शिरर 25 साल पहले जैसा हो गया था या कहो की उससे भी ज्यादा मजबूत हो चुक्का था. शरीर एक अलग hi चमक दे रहा था और अब त्रिकाल अपने अंतिम काम की तैयारियां कर रहा था इस काम के होते hi उसको उसकी सभी पुराणी शक्तिया मिलने वाली थी. और ये काम था नंगी लड़कियों की बलि दें अक. लड़कियों का इंतजाम तो संभु पहले hi करके गया था और ये सब त्रिकाल की गुलाम थी. वो सब खुद hi अपनी बलि की तैयारियां कर रही थी. जैसा त्रिकाल उनको कहता वैसा hi ये सब करती जा रही थी. ये तैयारियां भी जल्दी पूरी हो जनि थी. बस त्रिकाल को इन्तजार था तो शयाम के उस खाश पल का जब उसको बलि देनी थी. त्रिकाल ने बाईट हुए कुछ महीनो में अपनी शदना पैर बहुत म्हणत की थी. और उसका फल भी देखे दे रहा था. अब केवल कुछ घंटो की बात थी और वो टाइम होते hi त्रिकाल को फिर से सबसे जयते शक्तिशाली तांत्रिक हो जाना था. और त्रिकाल को पता था की उसकी शक्तियों के उसके पास आते hi वो अपने सपने को भी पूरा कर सकेगा. स्वर्ग का राजा बनने से कोई देवता भी उसको नहीं रोक सकेगा….

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मणि जी जहा पब पैर हर पर नजर रखे हुए थे वही दयासुर जी ने भी अपनी विद्या से गुरु को फिर से ठीक कर दिया था. वो बात अलग थी की इसके लिए उसको अपने कुछ महीनो का tap-bal गुरु को देना पड़ा था एक बार फिर दयासुर जी तप बल से विहीन हो चुके थे. पहले भी उन्होंने पब को अपनी सभी जीवन शक्ति और तप बल दिया था.

पब की सभी पत्नियों को भी अब एक बड़ी रहत मिली थी. युद्ध के दौरान तो इनकी हालत फिर से बिगड़ने लगी थी. पैर जैसे hi दिव्यांश जी ने उन दोनों भाइयो की जीवन शक्ति को पब में ट्रांसफर करना सुरु किया तो इसकी हालत में तेज़ी से सुंदर होने लगा था. अब ये सब भी स्वस्थ थी और अपने डायन में मग्न थी.

जहा इस टाइम सभी नार्मल थे. पब, अवनि और वो तीनो शादी की तैयारियों में थे. त्रिकाल भी खुश था की उसकी साधना आज पूरी हो जाएगी. पब की पत्निया भी स्वस्थ हो कर अपने डायन में थी पैर वही दस माँ के फेस के रंग बदले हुए थे उसके फेस को देख कर ऐसा लग रहा था की उनको कोई बहुत बड़ा झटका लगा हो और वो उस बात पैर विश्वास न कर प् रही हो. फिर भी होंटो पैर फैली मुस्कान बता रही थी की वो इस झटके के बाद भी बहुत खुश है. वो अभी भी पब पैर hi अपनी नज़रे जमाये हुए थी. और पब और अवनि की शादी की तैयारियों को देख रही थी. की एक दम बड़बड़ा ुधि – पब तुम वाकई सच्चे इन्शान हो जिसके प्यार, दया और इन्शानियत ने नियति को भी मजबूर कर दिया की वो अपना फैसला बदल दे. पैर पुत्र सवदान रहना नियति यदि कुछ बड़ा देती है तो कुछ छीन भी लेती है… पता नहीं अब नियति ये कोण सा खेल खेल रही है जिससे मेरे देखे हुए भविष्य में भी बदलाव आ रहा है. ये बदलाव एक सच्चा इन्शान hi कर सकता है और वो तुम हो पब जिसने नियति को बदल दिया है….

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यहाँ शादी की तैयारियां हो चुकी थी. मैदान पैर hi कुछ लकडिया जला कर नकसुर पब और अवनि उसके पास बैठे हुए थे. पब को उस गोअन में एक पुराण पजामा मिल गया था तो उसने अपने वो पत्ते कपडे निकल कर उस पजामा को पहन लिया था तो अवनि को एक पटिपोट और चुनरी मिल गयी थी पुराणी. उसने अपनी फटी T-shirt के उप्पेर hi वो चुनरी ोड ली थी और अपनी फटी जीन्स की जगह ये पटिपोट पहन लिया था. इनका बेग तो भ्रम की दुनिया (चरण 5) में hi कही रहा गया था. अवनि के अपनी शादी को ले कर पता नहीं कितने सपने होंगे. पैर आज जब शादी हो रही थी तो पहने को कपडे भी नहीं थे. मेक उप की एक्सपर्ट अवनि, अपनी शादी में मिटटी, खून और घावों का मेक उप किये बैठी थी. शादी का कोई भी अरमान पूरा नहीं हुआ था फिर भी वो बहुत खुस थी कियोकि वो आज अपने प्यार अपने पब की पत्नी बनने वाली थी. उसकी प्रेम कहानी में न जाने कितने मोड़ आये थे. पैर आज ये प्रेम कहानी पूरी होने जा रही थी. अवनि को पता था की शादी होते hi उसको एक बहुत बड़ी परीक्षा देनी है अपने प्रेम की और वो उसके लिए तैयार भी थी. अवनि की बात गुरु से हो गयी थी जब पब ने उन दानवो से लड़ती हुए अवनि को गोले में सुरक्षित किया था तब अवनि की गुरु से कुछ पालो की बात हुए थी पैर बात करते हुए hi अवनि बेहोश हो गयी थी. पैर अवनि को दयासुर जी की वो बात याद थी की इस युद्ध का अंतिम पड़ाव प्रेम से hi जीता जा सकेगा. अब शादी के बाद पब को वासना की आंधी को झेलना था जिसमे यदि वो बहक गया तो मूट hi मिलनी थी. पैर पब की वासना के अंत के लिए hi अवनि अपने प्रेम नमक हतियार के साथ मैदान में जाने वाली थी. और मणि जी और दयासुर जी का अवनि को यहाँ भेजने का अश्ली मकशद भी ये hi था की अवनि अपने प्रेम से पब की वासना को हारते हुए पब को अंतिम और सबसे जरुरी शक्ति – 5 दानव राजकुमारों की जीवन शक्ति दिलवा सके.

कुछ hi देर में विवहा भी पूरा हो चुक्का था और अभी दोपहर का 1 बज चुक्का था मतलब इनके पास केवल 6 हॉर्स hi बचे थे. तभी नकसुर जी बोले - पुत्र तुम दोनों का विवहा हो चुक्का है अब तुमको सम्भोग क्रिया करनी होगी. और उससे पहले उन वासना के भरे तालाब में जा कर पिता जी के उस बॉक्स को निकल कर लाना होगा..

पब – गुरूजी क्या आप बता सकते है की वो बॉक्स मुझको तालाब की किस दिखा में मिलेगा. और इसमें अब और भी कोई चुनौती है क्या??

नकसुर – पुत्र अब जो चुनौती है वो बहुत खतरनाक है पैर लगता है तुम्हारा खुद पैर अच्छा कण्ट्रोल है. उस तालाब के एरिया में जाते hi तुम दोनों वासना की आग से घिर जाओगे. और उस वासना को संभालना बहुत मुश्किल होगा तुम दोनों के लिए. और सबसे बड़ी बात तुमको तालाब में उतरना है और उस तालाब का पानी वह की हवा में पहेली वासना से भी 10 गुना खतरनाक है. यदि में तुमको मानवो की तरह बहु तो उस पानी की एक बून्द का तुहरे शरीर पैर गिरना भी 100 वियाग्रा टेबलेट से भी ज्यादा खतरनाक है. ये समाज लो यदि किसी आम मानव के सरीर पैर 1 बून्द पानी उसके मरने के लिए बहुत है. और तुमको उस पानी में उतर कर उस बॉक्स को खोजना है.

अवनि – गुरूजी पैर गुरूजी (दयासुर) ने तो कहा था की बॉक्स निकलने जाने से पहले वह जीतनेय भी गोअन के लोग है उनको मार देना. और फिर बॉक्स लेने जाना..

भलासुर – हाँ पुत्री उसने ठीक कहा था कियोकि उन सभी गोअन वालो के मरते hi हवा में पहेली वासना बहुत काम हो जाएगी. पब का सयम तो हम देख चुके है पैर मुझको नहीं लगता की तुम खुद को उस हवा में रोक पाओगी कुछ मं से ज्यादा..

पब – गुरूजी मेरा वासना पैर कण्ट्रोल दानवराज से पायी शक्तियों में से एक है. इसलिए आप दोनों से युद्ध करते हुए मुझको ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुयी. और अपने ठीक कहा अवनि उस वासना को नहीं झेल पायेगी. तो मैं सोच रहा हु की इसको यहाँ छोड़ कर ाकेगा hi उस तालाब में जा कर वो बॉक्स निकल लौ.

नकसुर – नहीं बिलकुल भी नहीं तुम दोनों की शादी का उद्देश्य hi ये है की तुम जब वासना से बहक जाओ तुमको अवनि संभाले. और तुम अपनी साडी वासना इसके प्रेम से ख़तम कर दो. अवनि की एक अग्नि परीक्षा होगी. कियोकि तुमको तालाब में उतरना है और अवनि को केवल बहार हवा में बैठना है इसलिए तुम पहले उन गोअन वालो को मार कर फिर तालाब में उतरना तो अवनि को खुद पैर काबू रखने में ज्यादा परेशनी नहीं होगी.

पब (कुछ संकोच के साथ) – गुरूजी क्या उन गोअन वालो को मरना जरुरी है कुछ ऐसा नहीं हो सकता की उनकी जान बचाई जा सके. वो सब भी तो त्रिकाल के जाल में फंसे बोले भले लोग है. किसी नितदोष की हत्या करना क्या ठीक होगा??

भलासुर – तुम्हारी सोच अच्छी है पुत्र पैर मरे हुए को मुक्ति देना पाप नहीं पुण्य होता है. ये जो गाओं वाले तुमको दिख है है न ये सब पिछले 26-27 साल से लगातार सम्भोग कर रहे है वो तो त्रिकाल के मायाजाल से न तो इनकी उम्र बढ़ती है और न hi ये मरते है. जिस दिन ये माया जाल टूटेगा तो तुमको इनकी सदी हुयी लाशे hi देखे देगी.

पब को भलासुर की बात ठीक लगी पैर कुछ सोच उसके मन में अभी भी थी – पैर गुरूजी मेरे समाज में ये नहीं आया की त्रिकाल ने इन सभी को यहाँ ये सम्भोग करने के लिए क्यों रखा है?? इससे उसको क्या फायदा हुआ??

भलासुर – बीटा जो भी दिव्या दृष्टि से यहाँ देखता है उनको पहला झटका वासना का तुरंत लग जाता है. जो इसके कारन hi है. और फिर तुम्हारे पास वरदान था नहीं तो हमसे युद्ध करने की जगह तुम वासना की इन हवाओ की चपेट में आ कर उन गोअन वालो में hi शामिल हो जाते. या फिर हमसे युद्ध करने में तुम धयान hi नहीं दे पता.

पब – हम्म ये तो है. पैर गुरूजी आप दोनों को ये हवाएं क्यों कोई अक्षर नहीं की?? क्या आपके पास भी वरदान है?? मेरे पास वरदान होने के बाद भी कुछ hi देर में अक्षर तो हुआ था चाहे को बहुत काम था. पैर आप दोनों तो 26-27 साल से hi यहाँ हो तो आप दोनों पैर इसका अक्षर क्यों नहीं हुआ??

नकसुर – वो इसलिए कियोकि त्रिकाल ने हमको एक शील्ड से सेफ कर दिया था. तुमसे युद्ध हारते hi टूट गयी. वो तो अच्छा हुआ की तुम हम दोनों को बेहोशी में hi यहाँ ले आये नहीं तो हम दोनों तो कुछ hi देर में पागल हो जाते हम 4 भाइयो का वासना पैर बिलकुल भी कण्ट्रोल नहीं है. इसलिए हम सब इससे दूर hi रहते है. और शायद ये हमारे माता पिता के कारन hi है. पैर दयासुर का अपने पैर पूरा कण्ट्रोल है. हम चारो ने वासना से दूर रहने के लिए hi शादी नहीं की थी. और जीवन बार केवल अपने फर्ज को hi निख़ते रहे..

पब – आप तो उल्टा बोल गए गुरूजी .. आप 4रो भाइयो का अपने आप पैर बहुत कण्ट्रोल है तभी तो ब्रह्मचर्य जीवन जेते हुए भी अपने कर्म पथ से नहीं हेट…

नकसुर – हाहाहाहाहा.. अच्छा चलो अब तुम जाओ और विजयी हो कर लोटो.. हम तीनो तुम्हारा यहाँ मैदान में hi इन्तजार करते मिलेंगे…

दिव्यांश – नहीं मैं भी इनके साथ hi जाउगा. जब तक मेरा बीटा आज़ाद नहीं हो जाता तब तक मैं इनका साथ नहीं छोड़ सकता.

पब – नहीं देव अब आप हरमे साथ आ कर क्या करेंगे?? अब उन गोअन वालो को मरना इतना भी कदिन नहीं की आपकी मदत की जरुरत पड़े. और फिर आप उन तालाब में उतर नहीं सकते कियोकि अब इतना कण्ट्रोल नहीं कर पाएंगे. और न hi आपके साथ कोई है. बॉक्स निकलना जब मुझको है तो फिर आपका क्या काम??

दिव्यांश – फिर भी यदि कोई और संकट आ गया तो मैं होगा तुम्हारी साक्षा के लिए..

नकसुर – दादाजी ये ठीक कहा रहा है. और हो सकता है की इनको अपने आप पैर कण्ट्रोल करने के लिए बिच में hi सम्भोग करना पड़े तो आपके सामने ये करना भी तो इनको ठीक नहीं लगेगा न..

पब – हाँ देव अब आप यहाँ रुकिए हम दोनों जल्दी hi काम ख़तम करके आपके पास आते है…

दिव्यांश को न चाहते हुए भी उनकी बात माननी पड़ी. फिर अवनि और पब उन तीनो से आशीर्वाद ले कर तालाब की और चल दिए.
 
थैंक यू भाई फॉर योर लवली कमेंट..

भाई आपकी बात एक दम ठीक है. और ये part 3-4 अपडेट में ख़तम भी जो रहा है...

और भाई नेक्स्ट part किस किस सवालो के साथ होगा वो भी अंत में आएंगे....

हाँ नेक्स्ट part में सेक्स बहुत है तो उसके लिए में आप सभी से जानना चाहता हु की सेक्स लिमिट ने राखु या बहुत ज्यादा या फिर सेक्स को शार्ट में hi ख़तम कर के स्टोरी को आगे बड़ौ....

भाई PDF कैसे बनेगी और कैसे अपलोड होगी ये मुझको नहीं पता.. बताना कैसे किया जा सकता है ये...
 
अपडेट 268

दिव्यांश को न चाहते हुए भी उनकी बात माननी पड़ी. फिर अवनि और पब उन तीनो से आशीर्वाद ले कर तालाब की और चल दिए. नकसुर ने उसको बॉक्स किस दिशा में है ये भी समजा दिया था. ये दोनों सबसे पहले उन गोअन वालो के पास पहुंचे. पैर वह पहुंचते hi अवनि की बेचैनी बढ़ने लगी उसको अपनी छूट में हलचल महसूस हो रही थी सरीर में खुमारी सी छाने लगी थी. और वो खुद hi पब से चुपकति जा रही थी. उसके कंडे पैर हाथ रख कर उसके जिस्म से अपना जिस्म घिस रही थी. एक तो पहले hi कपडे फाटे हुए थे. और अवनि की ये हरकते पब का धयान भी भटका रही थी. एक तो पब चाहते हुए भी उन गोअन वालो पैर वॉर नहीं कर प् रहा था जब सामने कोई मासूम हो और वो आप पैर हमला भी न कर रहा हो तो उसको मरने का दिल नहीं करता पैर मरना था तो पब अपना हाथ आगे करता है. पैर अवनि तो वासना में अंधी हो रही थी तो वो पब के ुढे हुए हाथ को पकड़ कर अपने चुचो पैर रख देती है. और पब से बोली – प्लीज इनको दबाओ न… आह्ह्ह्हह जान तुम कैसे पति हो मेरी जैसी पत्नी को तड़पता हुआ छोड़ कर मारने काटने में लगे हो…. देखो न तुम्हारी बीबी कैसे तड़फ रही है… देखो न वो सब कितने मज़े से प्यार कर रहे है चोलो हम भी एक – दूसरे से प्यार करते है. (पब को अपनी और खींचती हुयी) आओ न जान …

पब को भी अवनि की हालत का पता था इसलिए पब अवनि को अपने गले से लगा लेता है और बोलै – अवनि अब तुम मेरी पत्नी हो और मेरी पत्नी इतनी कमजोर नहीं हो सकती की वासना और प्यार में अंतर hi न समाज सके.. देखो मेरी आँखों में और अपने दिल से पूछो की क्या तुम्हारा दिल भी सच में वैसा hi चाहता है जैसा की तुमको दिख रहा है?? मेरी अवनि मुझसे प्यार करती है और वो वासना में बहक नहीं सकती. खुद को कुछ देर सम्भालो अवनि बस कुछ hi देर में मैं इस सबको मार दुगा…

पब की भाहो का सुकून और पब की बातो से दिल में ुढे प्यार ने अवनि को अपने उप्पेर काबू करने की ताकत दी. और अवनि पब के होंटो पैर एक छोटा सा किश करके अलग हो गयी. ये hi थी प्रेम की ताकत जो इस वासना पैर भरी थी. अवनि अपने अंदर हो रही उदल पुथल से परेशां थी पैर उसने अब पब को शो नहीं होने दिया. पब भी जनता था की अवनि पैर क्या बीत रही है. इसलिए उसमे जल्द से जल्द उन गोअन वालो को ख़तम करने का सोच कर अपने हाथ हवा में ुधा लिए और उन सभी पैर पत्तरों की बारिश कर दी. चुदाई करते हुए hi वो सभी उन पत्तरों से चोट लगने से मरने लगे पैर बारिश रुक नहीं रही थी. जब वो सभी पत्तरों से पूरी तरह डाक गए तो पब ने एक तेज़ हवा के झोके से उनके उप्पेर मिटटी भी दाल दी. उन सभी गोअन वालो की चुदाई करते हुए hi कब्र बन चुकी थी सभी मिटटी और पत्तरों से बाद चुके थे.

हवा में वासना की आग काम हो रही थी पैर फिर भी वो इतनी तो थी hi की अवनि जैसी नार्मल लड़की को सेक्स के लिए पागल करके रखे. पैर अवनि को भी अपने प्रेम पैर विश्वास था. पब अवनि को गले लगा कर और समजा कर उस तालाब के किनारे पहुंच गया जहा बॉक्स मिलने के चांस नकसुर ने बताये थे. और जैसे hi पब ने अपना एक पेअर तालाब में रखा पब के पुरे शरीर में तेज़ झनझनाहट होने लगी. लुंड पूरा खड़ा हो गया. पब का दिमाग पल भर में hi काम करना बंद कर दिया और उस पैर वासना का भूत सवार हो गया. पैर वो अपने आप पैर कण्ट्रोल करने के लिए आँखें बंद किये अपनी पत्नियों को याद करने लगा. और खुद को उनके प्रेम का वास्ता देने लगा.

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जैसे hi पब ने उन गाओं वालो को मरना सुरु किया दयासुर जी अपने धयान से उड़ कर गुरु से बोले – पुत्री अब वो वक्त आ गया है जब तुमको पारी और इन सभी को एक बार फिर संभालना होगा. मेरे पास अभी जीवन शक्ति नहीं है मैं कुछ नहीं कर पाउगा अब सब तुम्हारे हाथो में है.

गुरु – गुरूजी मैं कुछ भी करने को तैयार हु. पैर अब होने क्या वह है ये सब तो पहले से भी ज्यादा ठीक हो चुकी है. और इनको देख कर hi लगता है की ये अपनी जीवन शक्ति के मैक्स. लेवल को भी बड़ा रही है अभी तो खतरा क्या है?? अपने बताया था की सभी दानवो के साथ आपके दोनों बड़े भाई भी हार चुके है. अब तो केवल दानवराज को कैद मुक्त करना है.

दयासुर – पुत्री ये hi सबसे कदिन काम है. उस तालाब में उत्तर कर दानव राज को बहार निकलना. वो तालाब बहुत खतरनाक है. (फिर ये उस तालाब की डिटेल बताते है जैसा की इनके भाइयो ने पब को बताया था) और अब पब उस तालाब में उतरने वाला है तो जाहिर सी बात है उसका अक्षर सबसे पहले पारी पैर होगा और फिर उन सब पैर. और जैसे जैसे इनकी जीवन शक्ति कमजोर पड़ती जाएगी ये सब सम्भोग के लिए तडफने लगेगी. और ऐसे टाइम पैर तुमको उनको कण्ट्रोल करना होगा और ये तुम कर सकती हो. कियोकि तुम ये जानती हो इन्होने इस तड़फ में पारी का या एक दूसरे का हाथ छोड़ कर अपने शरीर के साथ कुछ भी किया तो पारी का और पब का क्या होगा. वह अवनि तो उन हवाओ से hi पागल हो रही है. वो खुद को बड़ी मुश्किल से संभाले हुए है.

गुरु ये सब सुन कर बहुत परेशां हो गयी. सच में ये बहुत खतरनाक था. वो तो पब इन सभी से जुड़ा हुआ था यदि कोई और होता तो वो इस वासना को कण्ट्रोल कर hi नहीं पता और वो इतनी वासना के प्रहार अपने शरीर पैर बर्दाश नहीं कर पता और उसके शरीर की नशो के फटने से उसकी मूट निश्चित हो जाती……. अब गुरु को इन सभी को कण्ट्रोल करना था पैर कैसे वो ये hi सोचने में लगी थी. वही दयासुर जी अपने धयान में फिर से बेथ गए थे.

गुरु वह पहुंच गयी जहा ये सभी बैठी थी. और कामिनी को सब बताने लगी कामिनी को भी टेंशन होने लगी ये दोनों सोच hi रही थी की क्या करना है की तभी पारी को एक जोर का झटका लगा उसका शरीर कम्पनी लगा. पारी का खुद पैर पहले से hi बहुत कण्ट्रोल था और फिर वरदान के बाद तो पारी अपने आप में बहुत कुछ हो गयी थी. पैर इस पारी को भी एक पल में hi कम्पनी पर मजबूर कर दिया था. पैर पारी जल्दी hi खुद को काबू कर गयी. जिससे वह पब भी अपने काबू में हो गया और तालाब में कूद गया.

पब के तालाब में कूदते hi पब के शरीर पैर जो वासना ने हालमा किया उसका अक्षर पारी और उन सभी पैर होने लगा. पब ने अपने आप पैर कबि हेट hi सबसे पहले अपने मंद को ब्लॉक किया ताकि उसके मंद पैर वासना का अक्षर न हो और वो अपना डायन बॉक्स को ढूढ़ने में लगा सके.

अंकिता, पारी और ऐडा इन तीनो की हालत सबसे पहले ख़राब होनी सुरु हुयी. कामिनी और गुरु बार बार इन सभी के कान में फुसफुसा रही थी की कैसे भी एक दूसरे का हाथ मत छोड़ना. ये तुम्हारी परीक्षा की अंतिम कड़ी है इसको यदि हम सबने पार कर लिया तो हम युद्ध में विजयी होंगे. तुम सबका काम केवल एक दूसरे के हाथ पकडे रखना है.

ये बार बार सुनने से सभी की कलाइयों पैर दूसरे के हाथ का कशाब बाद गया था. पैर हर बीतते हुए टाइम के साथ इन सभी की बेचैनी बढ़ती जा रही थी सभी की आँखें खुल चुकी थी. सभी अपनी टैंगो को आपस में रगड़ रही थी शरीर पशीने में नहाने लगा था.

पब बहुत देर से उस तालाब के अंदर उस बॉक्स को खोजने में लगा था. पैर उसको वो मिल hi नहीं रहा था एक तो तालाब में पेड़ पौधे इतने हो रखे थे की कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. पब को लगभग 15 मं बाद साँस लेने के लिए बहार निकलना पड़ा. पब के शरीर में उत्तेजना बहुत हो चुकी थी. शरीर लाल पड़ने लगा था. पैर कुछ तो खुद का कण्ट्रोल को सबसे ज्यादा उसकी पत्नियों ने उसको संभाला हुआ था.

पब की सभी पत्निया मरे उत्तेजना के अपना सर ीदार से उधर घुमा रही थी. पेअर तो रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे. तभी गुरु को याद आया की मणि जी ने वासना काम करने की दवा पहले hi बंबई थी. गुरु ने कामिनी को वो दवा और पानी लेन को बोलै. कामिनी के साथ जुली, सैंडी और 3-4 लड़किया वो दवा और पानी ले कर आ गयी. गुरु ने सभी को दवा खिलने को बोलै पैर दवा का अक्षर होता कहा से दवा से हजारो गुना ज्यादा तो उत्तेजना पब से इन सभी को मिल रही थी. गुरु दवा को फ़ैल होता देख डरने लगी. सभी को गर्मी लग रही थी पसीना आ रहा था तो गुरु ने जुली से बर्फ का टांडा पानी मगवा कर सभी को उससे वह बैठे हुए hi नहला दिया. पैर ये गर्मी इस पानी से तो संत किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती थी.

ये सब देख कर जुली ने गुरु से बोलै – दीदी यदि आपको ब्यूरेन ा लगे तो एक बात में बोलू??

गुरु – जुली बस इनको कैसे भी शांत करना है तुम कुछ भी करो मुझको बुरा नहीं लगेगा..

जुली – पैर उसके लिए मुझको वो करना पड़ेगा जो में पहले करती थी. और शायद आप सभी को इनके साथ हो सब होना अच्छा न लगे..

गुरु – जुली करो… कुछ भी करो… बस इनको शांत करने की कोसिस करती रहो..

जुली गुरु की बात सुन कर तुर्रंत सैंडी को ले कर वह से निकल गयी और बहुत से बड़सम के टूल्स ले कर आ गयी. उसके साथ में उसकी पूरी टीम थी. जुली की मार, उसका तरह तरह से टॉर्चर भी इनकी उत्तेजना को काम न कर सका बल्कि इसका उल्टा hi अक्षर हुआ . 20-25 मं में hi जुली ने अपनी हार मान कर पीछे हो गयी.

ये सब पिछले एक हॉर्स से ये सब झेल रही थी. सभी के शरीर एक दम लाल थे. हाथ एक दूसरे के पकडे हुए थे पैर अब पारी से बर्दाश नहीं हुआ तो वो सलोनी से अपना हाथ छुड़ाने लगी और रट हुए बोली – सलोनी प्लीज मेरा हाथ छोड़ दो अब मुझसे बर्ड्स नहीं हो रहा है मैं पागल हो जोगी.. सलोनी प्लस… दीदी (गुरु की तरफ देखते हुए) आप कहो न इससे ये मेरा हाथ नहीं छोड़ रही है. aaaahhhh…uuuummmmmm….ooohhhh दीदी आप hi मेरी छूट में कुछ घुसा दो न … कोई डंडा hi गुसा दो.. ोुह्ह्ह कुछ तो … करो …कोई… कुछ करो… दीदी मार दो मुझको या छूट में डंडा गुसाओ छोडो … chhodo..muje … मुज पैर एबीएस अमाह नहीं होता…

पता नहीं पारी क्या क्या बाके जा रही थी और कुछ hi देर में बाकि सभी में ऐसे hi बकना सुरु कर दिया. पैर अब इनके हाथ सकती से जुली की टीम की मेम्बर्स ने पकड़ा हुआ था. उनकी पकड़ से चाहा कर भी ये अपने हाथ नहीं छुड़वा प् रही थी. तेज़ चलती सांसे उसके सब्दो को तोड़ रही थी किसी की कोई भी बात गुरु को समाज नहीं आ रही थी. सभी तड़फ रही थी कामिनी और गुरु उनकी से दशा देख कर अंदर hi अंदर घुट रही थी. जब गुरु को कुछ भी समाज आना बंद हो गया तो उसने मणि जी से संपर्क किया.

गुरु – गुरूजी मेरी बहनो की हालत तो बहुत ख़राब है कुछ तो बताइये की ये सब रोका जा सके कैसे भी ये ठीक हो सके..

मणि – गुरु पहले तुम मुझको उनकी पूरी डिटेल बताओ की क्या हो रहा है वह..

फिर गुरु मणि जी को अब तक की पूरी बात बता देती है. तब मणि जी बोले – गुरु पब को वो बॉक्स मिल नहीं रहा है वो बहुत देर से उस तालाब में भटक रहा है और न hi उससे कोई संपर्क हो प् रहा है लगता है की पब ने अपने आप को ब्लॉक किया हुआ है. जब तक पब उस तालाब में है तब तक इनकी ये परेशानी बढ़ती hi जाएगी. और तुमको इस बात का ध्यान रखना है की इनमे से कोई भी बेहोश न हो और न hi मारे. गुरु सब तुम्हारे हाथो में है तुम hi यहाँ इन सभी को बचा सकती हो. ये इस युद्ध का अंतिम चरण है और न तो टाइम ज्यादा बचा है और न hi काम. बस कुछ देर किसी तरह सभी को सम्भालो…

गुरु (रट हुए) – गुरूजी क्या करू मैं … मेरी बहाने मेरे सामने तड़फ रही है मेरा पति इतनी मुश्किल में है और में बेबस कुछ नहीं कर प् रही…

मणि – गुरु होशला रखो और तुम कोई सदर्न नारी नहीं हो. आज वक्त है तुमको अपनी अश्ली शक्ति दिखने का. उन सभी को एक ऐसे भ्रम जाल में फशाओ की उनको लगे की उनका पति उनके साथ सम्भोग कर रहा है और उनकी वासना को शांत कर रहा है. इससे उनकी वासना काम तो नहीं होगी पैर उनका डायन भटकता रहेगा उनको लगेगा की बस कुछ hi पल में ये वासना उनका पति दूर कर देगा. और इस भ्रम जाल में फँसी वो सब सहती रहेगी बस अब ये hi एक उप्पय है.

गुरु को आज अपनी मैं पावर को उसे करने के लिए मणि जी में खुद hi बोल दिया था गुरु को भी पता था इससे होगा कुछ नहीं बस कुछ टाइम और वो इस दर्द को सहती रहा सकेगी और हो सकता है इतने में hi काम बन जाये….

गुरु ने कामिनी और जुली को कुछ समजा कर अपनी शक्ति का प्रोग सुरु कर दिया ये भ्रम जाल बहुत मजबूत और लम्बे टाइम तक रहने वाला था जिसमे एक साथ 10 लोगो को फाशय जा रहा था और ये काम गुरु hi कर सकती थी. गुरु के भ्रम जाल के बनते hi सभी को लगने लगा की पब उनके सामने है और उनके नाजुक अंगो से खेल रहा है और उनके साथ सम्भोग करना चाहता है ये देखते hi सभी खुश हो गयी की ा बुनको इस वासना से मुक्ति मिलेगी..

गुरु बहुत देर से सभी को भ्रम जाल में फसाये थी पैर अब अंकिता, पारी के शरीर में जगह जगह घाव होने लगे धड़कन तो पहले से बहुत तेज़ थी. नार्मल इंसान होती तो कब की मार चुकी होती. पैर अब इनके मजबूत शरीर में नशो ने फटना सुरु कर दिया था. अंकिता की एक साथ 4-5 जगह घाव हो गए और खून तेज़ी से बहाने लगा जब तक कामिनी खून का बहाव रोक पति अंकिता बेहोश हो गयी और बेहोशी में भी वासना में तड़फती रही. पारी का शरीर अंकिता से बहुत मजबूत था तो वो बेहोश हो नहीं हुयी पैर घाव उसको भी होने लगे. जुली किसी तरह उसको सम्भाने लगी.

अंकिता के बेहोश होते hi पब के मंद पैर लगा ब्लॉक हैट गया और उसी हालत और ख़राब होने लगी पैर तभी उसको मणि जी की आवाज सुनाई दी – क्या कर रहे हो पुत्र अपनी दिव्या दृष्टि से देखो, क्यों इन पेड़ पोधो में ूँजे हुए हो.

मणि जी की आवाज सुनते hi पब ने अपनी दिव्या दृश्य से देखा सुरु किया तो 10 मं में hi वो बॉक्स तक पहुंच गया कियोकि इतनी देर की म्हणत से वो उसके बहुत नजदीक पहुंच चुक्का था. बॉक्स के मिलते hi वो उनको ले कर बहार आ गया. और तालाब से निकल कर खड़ा hi हुआ था की उनका खुद पैर से कण्ट्रोल एक दम ख़तम हो गया और वो इसलिए हुआ था की अंकिता के बेहोश होने से पब पैर वासना बहुत ज्यादा हावी होने लगी थी जिसे पारी सहा न पायी और पब के बाहर निकलते hi वो भी बेहोश हो गयी. और यहाँ पब सेक्स के लिए तडफता हुआ गिर गया और वो बॉक्स उसके हाथ से छूट कर एक और गिर गया. पब को गिरा देख कर अवनि उसके पास बैग कर आयी और उसको पुकारने लगी – पंजक क्या हुआ है तुमको उधो… उधो … हम जीत गए है .. अब तुमको केवल ये बॉक्स खोलना है और फिर हम अपने घर में सम्भोग क्रिया पूरी करेंगे…..
 
अपडेट 269

मणि जी की आवाज सुनते hi पब ने अपनी दिव्या दृश्य से देखा सुरु किया तो 10 मं में hi वो बॉक्स तक पहुंच गया कियोकि इतनी देर की म्हणत से वो उसके बहुत नजदीक पहुंच चुक्का था. बॉक्स के मिलते hi वो उनको ले कर बहार आ गया. और तालाब से निकल कर खड़ा hi हुआ था की उनका खुद पैर से कण्ट्रोल एक दम ख़तम हो गया और वो इसलिए हुआ था की अंकिता के बेहोश होने से पब पैर वासना बहुत ज्यादा हावी होने लगी थी जिसे पारी सहा न पायी और पब के बाहर निकलते hi वो भी बेहोश हो गयी. और यहाँ पब सेक्स के लिए तडफता हुआ गिर गया और वो बॉक्स उसके हाथ से छूट कर एक और गिर गया. पब को गिरा देख कर अवनि उसके पास बैग कर आयी और उसको पुकारने लगी – पंजक क्या हुआ है तुमको उधो… उधो … हम जीत गए है .. अब तुमको केवल ये बॉक्स खोलना है और फिर हम अपने घर में सम्भोग क्रिया पूरी करेंगे…..

सम्भोग शव्द सुनते hi पब के शरीर में हलचल होने लगी. बेहोशी में भी उसका लुंड पूरा तन कर खड़ा था जो फाटे हुए अंडरवियर से बहार hi आ गया था. पब को हिलने से पब ने अपनी आँखें खोल दी थी. अवनि के कोमल हाथो के स्पर्श ने उसकी वासना को एक दिशा दे दी थी. उस पैर छाए नशे को मंजिल कर पहुंचने का रास्ता उसे दिख गया था. पब आँखें खोलते hi अवनि के फाटे कपड़ो से झाकते जिस्म को घर रहा था. उसकी आखों में केवल वासना थी जो उसके पुरे शरीर पैर भरी थी. उसकी नशो में भी फुलाव आ यहाँ था. पुरे शरीर में नीली – हारी नशे दिखाई दे रही थी.

अवनि पब की नजरो को पहचान गयी थी वासना तो उस पैर भी अपना अक्षर कर रही थी पैर वो पब के मुकाबले कुछ भी नहीं थी. पब ने एक दम से अवनि को खिख कर लिटा दिया और उसके उप्पेर चढ़ने लगा तो अवनि एक दम हुयी इस घटना से घबरा गयी और छूटने की कोसिस करने लगी पैर पब की पकड़ से निकलना उसके बस की बात न थी. और पब वासना में आधा हो कर अपने लुंड को कपड़ो के उप्पेर से hi अवनि की छूट में घुसाने की कोसिस करने लगा. अभी अवनि को उसकी फटी हुयी जीन्स ने बचा लिया था नहीं तो पब ने तो इतना जोर का दक्का मारा था की लुंड पूरा hi घर जाना था.

पब बेचैनी से निचे देखा तो जीन्स को देखते hi उसे फाड़ने को हुआ तो अवनि ने पब के हाथो न रोकते हुए उसके फेस को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया और बोली – पब देखो मेरी आँखों में मैं आपकी पत्नी हु और आप मेरी पति.. आप जो करना चाहते है मैं आपको उसके लिए रोकूंगी नहीं. पैर बस एक बार मेरी बात सुन लो…

अवनि ने ये बात पब से आखें मिला कर दिल से बोली थी. और पब भी प्यार से भरी इस बात को सुन कर खामोश सा हो गया. अवनि का प्यार उसके दिल को बेचें करने लगा. तो बोलै – आअह्ह्ह्ह जब तुम मेरी पत्नी हो तो क्यों रोक रही हो मुझको… आअह्ह्ह्ह मैं मार जाउगा… मेरा लुंड फटने को है प्लीज मुझको एक बार छोड़ लेने दो उसके बात मैं तुम्हारी हर बात सुनुँगा..

पब वासना में इतना आधा हो गया था की उसको अवनि भी पहचान में नहीं आ रही थी उसको वासना के आलावा न कुछ दिखाई दे रहा था और न hi सुनाई दे रहा था. वो तो अवनि के शब्द उसके दिल से निकले थे जिनको दिल ने hi सुना था. पब की बात सुन कर अवनि फिर से बोली – पंकज होश में आओ मैं तुम्हारी अवनि हु तुम्हारा प्यार.. तुहारी प्रेमिका… तुम्हारी पत्नी… देखो इन आँखों में तुम मेरे लिए क्या हो.. क्या तुम अपने प्यार को हरा डोज इस वासना के तूफ़ान में?? पब आप कभी अपनी अवनि को दुखी भी नहीं कर सकते तो आज आपका प्यार क्यों काम हो रहा है… मैं सब करुँगी जो तुम चाहोगे. बस एक बार मेरी बात धयान से सुन लो न….

पब भी अवनि की बातो को सुन कर उसे धायण से देखने लगा. उसके दिल में प्यार उमड़ने लगा पैर इस प्यार पैर वासना हावी थी और होती भी क्यों न शरीर वासना के दवाब में फटने को था. पब ने एक दम अवनि को अपने गले आगा लिया और बोलै – ोुह्ह्ह मेरी जान.. मैं अभी अपने काबू में नहीं हु यदि तुम ये सब नहीं करना चाहती तो किसी और से कहो न की वो मुझको ठंडा कर दे…. मेरी जान कुछ करो नहीं तो तो मैं मार जाउगा….

पब बोलते हुए उसके गोल बहार को निकले दिलकश चूतड़ों को मशाल रहा था. तो कभी कमर के मक्कन मुलायम हिस्से को मशाने लगता. अवनि पैर भी खुमारी छड़ी हुई थी. पैर पहले उसको पब की वासना को काम करके अपने प्यार को बहार लाना था कियोकि सम्भोग किरिया के पूरा होने के लिए प्रेम मिलान बहुत जरुरी था.

अवनि – मैं कब मन कर रही हु आपसे आप जो चाहे वॉक अरे आपको हक़ है मेरे उप्पेर… पैर मेरी विनती है जॉब hi करे प्यार से करे न.. आअह्ह्ह धिरे दबाओ न… ोुह्ह्ह थोड़ा धिरे….

जीन्स होने के बाद भी पब के हाथो के दवाब से अवनि के चुत्तर लाल पड़ने लगे थे. कमर का हिस्सा भी कई जगह से लाल हो चुक्का था. पैर पब रुकने का नाम नहीं ले रहा था. पब – यार तुम बहुत अजीव बाते कर रही हो आज .. कभी कहती हो हक़ है कभी कहती हो किन ा करू.. कभी कहती हो प्यार से करू… प्यार hi तो कर रहा हु न मैं तुमको ….

अवनि – आह्ह्ह्ह नहीं आप प्यार नहीं कर रही आप अपनी हवस पूरी कर रहे है मेरे साथ… प्रेम में तो दोनों को मज़ा आता है पैर आप तो मुझको नोच रहे है… ाआईईई… ोुह्ह्ह तोड़ा तो धिरे करो जान… oooohhhh….mmmmaaaaa

अवनि ने नोचने वर्ड पैर जोर दिया था. जिससे आवेश में आ कर पब ने उसकी कमर को दोनों साइड से काश कर मशाल दिया. और अवनि की आखों में आशु आ गए… और अवनि ने अपना फारे पब से दूर कर लिया. तो पब को भी उसकी आँखों के आशु दिख गए. दिल में एक बेचैनी होने लगी थी पब के अवनि की बातो से… पैर वो खुद को रोक नहीं प् रहा था. जब अवनि ने देखा की पब को मन करने से या रोकने से भी वो नहीं रुक रहा है तो अवनि उसका साथ देने लगी… उसके मंद में अब कुछ और hi चल रहा था. उसको ऐडा वाला कांड याद आ गया था की कैसे पब को उसकी मनमानी करने देने के बाद भी उसको ऐडा के साथ hi सम्भोग करने को विवश किया था. इसलिए अवनि भी पब से लिपटने लगी. उसको चूमने लगी. अवनि का साथ प् कर तो पब और भी बड़कने लगा. उसके हाथ की शख्ती अवनि के जिस्म पैर बाद गयी अवनि को दर्द तो हो रहा था पैर वो उसको नजर अंदाज कर पब का साथ देने लगी. पब अब अवनि के फाटे होयुं कपड़ो को फाड् कर उसके जिस्म से अलग करने लगा तो अवनि ने खुद hi अपनी टी शर्ट –ब्रा उतर कर फेंक दी. अवनि के जानलेवा, गोल, सख्त चुके बेपर्दा हो कर पब के सामने आ गए. गुलाबी निप्पल जो छोटे hi थे. पैर अभी एक दम तन गए थे. पब उनको खा जाने वाली नजरो से देख रहा था. तो अवनि ने एक कामुक ऐडा से कहा – लो देखो तुम इनको hi पाना चाहते थे न. आओ और टूट पदों इन पैर नोच लो इनको लाल कर दो इनको आज. आज तुमको प्यार से तो कुछ करना नहीं है तो मिटा लो अपनी हवस इन कोमल ाँगो से…..

अवनि की बातो में जहा डिटकर था ावहि अदाए उसको पास बुला रही थी. अवनि उसको दावित भी दे रही थी तो लताड़ भी रही थी. अवनि के शब्द पब के दिल में बेचैनी पैदा कर रहे थे तो उसकी हवश को शांत करने का जरिया भी दिखा रही थे. अवनि जानती थी पब की हालत क्या है. इसलिए वो दोनों काम साथ hi कर रही थी. पब भी अपने आप को रोक नहीं पाया और अवनि के दोनों चुचो को अपने हाथो में ले कर मशलने लगा. अवनि दर्द और मज़े से तडफने लगी पैर उसके शब्द अभी भी संतुलित थे – आअह्ह्ह्हह और दबाओ इनको दिखाओ अपनी पत्नी के नाजुक जिस्म पैर अपनी दरिंदगी… अपनी अवनि के जिस्म को निचोड़ दो आज तुम … तुम पति हो और हक़ है तुम्हारा इन पैर पैर एक पत्नी को उसका प्यार न मिले कोई बात नहीं पैर तुम पति हो कर अपने हक़ से भी ज्यादा ले सकते हो… आअह्ह्ह ोू ाअम्माअम्मा…

अवनि ने बोलते हुए hi पब के लुंड पैर हाथ रख दिया तो एक बार तो वो अंदर तक दर गयी की ये है क्या??? 12 इंच मोटा और 4-4.5 इंच मोटा लुंड आज एक दैत्याकार लिए हुए था. उसकी नशो का उभर टोपे के ुढे हुए भाग से भी ुचा हो रहा था. नशे जैसे फटने की आखरी सीमा तक फूली हुयी थी. अवनि के कोमल नाजुक हाथो के स्पर्श से hi वो चमकने लगा था और पब की मदहोशी को बड़ा रहा था. मदहोशी के बढ़ने से पब की पकड़ कभी बाद जाती तो कभी काम होने लगती पैर मदहोशी की लम में वो अवनि के चुचो को चूषणे और काटने लगा था. अवनि पैर भी खुमारी बाद रही थी. अवनि के अंदर भी वासना का संचार अपनी उचाईयो पैर था. ये दर्द भी उसको अच्छा लगने लगा था. बस अब उसको पब के अंदर छुपे उसके प्रेम को थोड़ा सा बहार लाना था जिससे उसका काम हो सकता था. और इसलिए वो अपने हाथो की स्पीड बढ़ाते हुए उसके होंटो को चुने लगी थी. और ये चुम्बन इस सम्भोग का पहला खतरनाक चुम्बन होने लगा था. पब के दिल और दिमाग दोनों hi इस किश को महसूस करते हुए तृप्त हो रहे थे. लुंड पैर हाथो की हरकत उसको एक अलग hi सुच देने में लगा था. जब दोनों की सांसे उखड़ी तो दोनों अलग हो कर अपनी सांसे ठीक करने लगे पैर अवनि ने लुंड पैर से हाथ नहीं हटाया था. उसके लुंड को सहलाते हुए उसने पब की आँखों में देखते हुए बोलै – आप मेरे पति है और आज हम पहली बार ये सब करने जा रहे है तो क्या आप मेरे लिए कुछ नहीं करेंगे??

और ये कहा कर अवनि ने उसके होंटो को फिर से चुम लिया. अवनि के प्यार भरे इस निवेदन पैर पब भी बस इतना hi बोल पाया – बोलो क्या चाहती हो तुम??

अवनि – आपका प्यार…. अपने पति का प्यार…. हमेशा के लिए जो प्यार मेरे दिल में बस जाये ऐसा प्यारभरा साथ चाइये… आप मेरे साथ जो भी करे प्यार से करे.. मेरा ये जिस्म आपका है मैं चाहती हु की आपके प्यार से हमारे आत्माये भी एक दूसरे से जुड़ जाये… आगे आपकी इचछा है आप मुझको एक आसिम प्यार बारे सुच देते है या एक दर्द नाक याद….

अवनि बात करते हुए पब के लुंड पैर अपने हाथो का जादू दिखा रही थी और पब के हाथ अवनि के चुचो को उखाड़ने में लगे थे. पैर ये बात पब के दिल में जा कर hi बेथ गयी. और पब के हाथ अवनि के उप्पेर से खुद hi हैट गए और वो एक दम शांत हो कर जमीन पैर बेथ गया. पैर सब कुछ रुकते hi पब को वासना ने फिर से घेरना सुरु कर दिया था. और उसकी तड़फ को काम करने और अपने पैर काबू पाने के लिए पब ने अपना एक गुस्सा पूरी टक्कट से जमीन के एक पत्तर पर दे मारा पत्तर टूट कर बिखर गया पैर पब को टूटता देख अवनि ने उसको अपनी बांहो में समेत लिया और एक छोटा सा किश करके उसके लुंड को फिर से प्यार से सहलाने लगी…

पब – ोुह्ह्ह्ह अवनि पता नहीं क्यों मैं आज अपने आप को नहीं रोक प् रहा हु. मेरा पूरा शरीर तुमको रोडने को बेक़रार हो रहा है. मेरी आत्मा मुझको ये करने से रोक रही है पैर जिस्म मेरे काबू में नहीं है.. क्या करू अवनि मेरी जान.. तुमको पाना मेरा सपना था जो आज पूरा भी हुआ है तो मैं तुमको दर्द देने से खुद को hi नहीं रोक प् रहा हु….

अवनि – मत रूक खुद को … आ जाओ मेरे उप्पेर… तुमको शांत करने के लिए hi है ये जिस्म पैर बस इतना याद रखना जो तुम्हारे निचे है वो तुम्हारा प्यार तुम्हारी पत्नी अवनि है… अपने प्रेम को दिल से अपनी आत्मा से महसूस करो जान.. शरीर को उसका काम करने दो.. पैर हमारे दिलो को और आत्माओ को एक दूरसे में प्रेम से समां जाने दो बुल जाओ जिस्म क्या कर रहा है मेरी आँखों में देखो और अपने प्रेम को पूरा करो….

एक बार फिर दोनों के होंठ मिल चुके थे हाथो की हरकतों कर दोनों का hi धयान नहीं था. कुछ देर जब वासना पैर ये प्रेम हावी होने लगा तो अवनि ने खुद को पब से अलग किया और बोलै – जान हमको सम्भोग क्रिया भी पूरी करनी है. और समय भी बहुत काम है तो क्या पहले हम उस बॉक्स को खोल दे फिर आराम से अपना प्रेम मिलान करेंगे…

पब ने अवनि को अपनी बांहो में जकड लिया और बोलै – नहीं जान यदि तुम पल बार के लिए भी मुझसे दूर हुयी तो मैं फिर खुद पैर काबू नहीं प् सकूगा. पहले अब अपना मिलान होगा और फिर उसके बाद कोई और बात…

अवनि (होंठ पैर एक किश करके ) – जैसा तुम कहो जान, चलो फिर इन बचे हुए फाटे कपड़ो को भी उतर कर मंत्र पद लेते है और फिर अपनी विश मांग लेना. फिर ये अवनि तुम्हारे निचे होगी… फिर चाहे प्यार देना या फिर सजा…

पब तो अवनि के कहने के साथ hi नंगा हो गया पैर अवनि की जीन्स थोड़ी अटक रही थी उतरने में और पब फटी आँखों से उसकी गोरी और भरी हुयी झंगो को देख रहा था. लुंड की नशो में बहाव फिर एक बार चरम पैर था और फटने वाली ितिथि बानी हुयी थी. अवनि ने पब को अपने खजाने को यु घूरते हुए देखा तो शर्मा कर पलट गयी और ये अवनि की सबसे बड़ी गलती हुयी.

(भाइयो यहाँ मैं आप सभी को बता दू की दस माँ, मणि जी और दयासुर जी इस चुदाई का लाइव टेलीकास्ट देख रहे है. और दयासुर जी पब की पत्नियों को मैं – 2 बाते बता भी रहे है बिना किसी अश्लील शब्द का उसे किये. गुरु और कामिनी ने सभी को होश में ला दिया है सभी अभी भी वासना में तड़फ रही है पैर पब के साथ इनका भी टेम्पर गिरने लगा है)

अवनि ने पलट कर फाशी जीन्स और पेंटी को पेअर से निकलने के लिए झुकी तो पब के सामने वो हाहाकारी गांड आ गयी. दिल की शेप में गोर लाल पद चुके वो चूतड़ किसी को भी बहकाने के लिए काफी थे. और यहाँ तो पब पहले hi बड़ी मुश्किल से अपने पैर काबू किया था और उप्पेर से ऐसा najara…uuuffff… पब न चाहते हुए भी दरिंदा बन रहा था. हद जब हुयी जब अवनि के झुके होने पैर पेअर थोड़े फेल गए और पब को वो झांटो से भरी कुवारी छूट दिखाई दे गयी. झांटे भी बहुत बड़ी तो न थी. पैर छोटी भी न थी. इस यात्रा के दुराण hi ये अपने साइज को प् सकीय थी. और पब इस खजाने को देख कर लाख कोसिसो के बाद भी खुद कर काबू न रख रखा और एक हाथ से उसकी छूट के होंटो को मशाल दिया. अवनि एक दम हड़बड़ा गयी और गिरने को हुयी तो पब ने कमर को पकड़ कर 2-3 तप्पड़ उसके लाल चूतड़ों पैर मर दिए. अवनि चीख उडी – एआईईईई मायआ…. मार क्यों रहे हो जी…. हटो मंत्र भी पांडा है.. (अवनि को क्या पता था की पब पैर क्या बिट रही है)

अवनि पीछे हटने को हुई तो पब ने एक हाथ से कमर पकड़ कर अपनी कमर से चिपका दिया. और पब का लुंड दोनों चूतड़ों के बिच से छूट को रगड़ता हुआ अवनि को आगे से दिखाई देने लगा. अवनि तो ऐसा करने से दर और दर्द से सिहर गयी. वो तो अच्छा हुआ की लुंड की भी छेद में नहीं गुशा नहीं तो कांड अभी हो जाना था. अवनि डार्क इ मरे निचे बेथ गयी और पब ने उसको उड़ाना चाहा तो अवनि ने घूम कर एक किश उसके लुंड पैर कर दिया पब की सांसे hi अटक गयी – आह्हः की आवाज के साथ. अवनि लुंड का हाल देख कर मंजर समझने की कोसिस न करते हुए उसको संतुस्ट करने की चाहा में होंटो को पूरा खोल कर उस लाल सुपडे को अपने होंटो में दबाने लगी. तो पब आतुर हो कर अपनी कमर चलने लगा. अवनि केन ा चाहने पैर भी ऐडा लुंड उसके मुँह में भर चुका था और अवनि की आँखें बहार को हो गयी थी. पब अपने होश में न था और लगातार कमर चलाये जा रहा था अवनि ने भी 2 मं में hi खुद को इसके लिए मजबूत करके उसके लुंड को चूसना सुरु कर दिया पैर ये अवनि का पहला अवसर था और न वो इस वेयर में ज्यादा जानती थी पैर अवनि के मुँह की गर्माहट hi बहुत थी पब को मज़े की बडियो में खोने के लिए पब के दकके तेज़ होने से अवनि के मुँह का दर्द बढ़ने लगा तो सांसो में कमी आने लगी पैर अवनि पब के मजबूत सिकंजे में फाशी मुर्गी की तरह फड़फड़ाने से ज्यादा कुछ कर नहीं प् रही थी.

करीब 15 मं तक मुँह छोडन के बाद पब ने अवनि को छोड़ तो खासते हुए अवनि लम्बी – 2 सांसे लेने लगी. और पब झुक कर उसके चुचो से खेलने लगा. तो अवनि फिर से बोली – तो अपने सोच लिया है की ये मिलान मेरे लिए दर्द भरा hi होगा. आप मुझको वो प्यार नहीं देंगे जो आपसे आपकी पत्नी चाहती है. तो कोई बात नहीं आपके हर फेशल पैर आपकी पत्नी आपके साथ है मंत्र पढ़िए को दर्द देना सुरु करिये अपनी इस दासी और पत्नी को… आपके लिए मैं बस आपकी दासी आपका खिलौना हु न तो सुरु करिये अपना खेल फिर चाहे उसमे आपकी इस दासी और पत्नी को कितना भी दर्द मिले….

ये कहते हुए अवनि के फेस पैर दर्द और दुःख की वो लकीरे थी जो अभी तक नहीं आयी थी शायद अवनि अपनी हार मैंने लगी थी. उसकी आँखों से आशु भी बहाने लगी थे. और वो पब की आखों में hi झांक रही थी जो उसके उप्पेर झुका उसके चुके बेदर्दी से दवा रहा था. अवनि के आशु और उसकी बाते फिर से पब को झंझोरने लगी थी. तो उसके हाथ रुक गए.

अवनि ने भी टाइम न ख़राब करते हुए उसको मंत्र पड़ने को बोलै और फिर खुद भी मंत्र पड़ने लगी. मंत्र पड़ते hi जो वासना पब और अवनि पैर हावी होने लगी तो पब आज अपनी विश मांगना भी भूल गया. पैर अवनि जैसे अभी भी होश में थी. पब एक बार फिर अवनि को नोचने लगा तो अवनि ने अपनी वासना को रोकते हुए पब से बोलने लगी पैर पब तब तक उसको लेता कर खुद उस पैर चढ़ने लगा था और उसके जिस्म पैर अपने दांतो के निशान बना रहा था.

अवनि – आह्ह्ह्हह एआईईईई उउउउउ पब आपको अपनी विश भी मागणी है आप अपनी दासी अपनी पत्नी की प्यार देने की विश तो पूरी नहीं करेंगे पैर अपनी वो विश मांगिये जिसके लिए गुरूजी ने कहा था… ोुह्ह्ह माँ …. बस आज जिन्दा बचा ले… इनके उप्पेर छै इस वासना से बचा ले भगवन… ओह्ह्ह मांगिये अपनी विश… एआईईईई…

अवनि के शरीर परकै जगह खून निकने लगा था वो एक ऐसे दरिंदे के चंगुल में थी जिसको खुद नहीं पता था की वो क्या कर रहा है. पैर पब के अंतर्मन में अवनि की हर बात का अक्षर हो रहा था तभी उसने वो मंत्र पड़ा था और अब विश मांगने के लिए सिद्ध बैठा तो उसके मुँह से निकला – “हे दस माँ और दानवराज आज अपने इस पुत्र को प्रेम की शक्ति दो उसकी सभी पत्निया और दासिया उसके साथ अटूट प्रेम के बंदन में बंद जाये जो कभी भी समाप्त न हो और न HI कभी कमजोर हो. मुझको पति और भगवन मैंने वाली हर लड़की से मैं बहिनथा प्रेम करू”

विश सुनते hi अवनि उड़ कर बेथ गयी जो अभी तक दर्द में तड़फ रही थी. और एक दम बोली – ये क्या मांग रहे है आप??? होश में तो है??? गुरूजी ने क्या कहा था और आप क्या बोल रहे है. जल्दी से विश चेंज करिये….

पब – नहीं अवनि मैं सिर्फ तुमको प्यार देना चाहता हु मुझको और कुछ नहीं चाहिए पैर शायद आज मेरा ये शरीर मेरे बस में नहीं है तो शायद आज तुमको मैं वो प्यार न दे पाव जिसकी तुम हक़दार हो पैर आज के बाद तुम सभी को मेरा सिर्फ प्यार hi मिलेगा… प्लीज आज मुझको संभल लो फिर हम सबके बिच केवल और केवल प्रेम होगा….

(यहाँ दस माँ, दयासुर और मणि जी तीनो के मंद में hi ब्लास्ट होने सुरु हो चुके थे पब की ये बेहूदा विश सुन कर. त्रिकाल को अब को रोकेगा?? अब क्या होगा??? उनको ऐसा लग रहा था की आज तक की साडी म्हणत पैर एक मं में hi पानी फेर दिया हो. सब कुछ ख़तम हो चुक्का हो.)

अब अवनि को लग रहा था की शायद उसमे गलती कर दी है वो अपने पति की इस दशा को समाज hi नहीं पायी. पैर वो करती भी तो क्या करती उसको गुरु और मणि जी ने कहा था की जब पब वासना में आउट ऑफ़ कण्ट्रोल हो जाये तो तुमको उसको उसका प्यार याद दिलवाना है. उसके दिल में छुपा प्यार hi उसकी वासना को हरा सकता है. और यदि उसने केवल वासना के साथ तुम्हारे साथ सम्भोग किया तो क्रिया पूरी न होने का खतरा है तो तुमको हर हाल में अपने प्यार को उसकी वासना पैर हावी करना होगा.

पैर यहाँ तो कुछ और hi हो गया था वासना पुरे शरीर पैर हावी थी जो उसको दरिन्दा बनाये हुए थी पैर अंतर्मन से अवनि के लिए अभी इस कदर था की अपने प्यार के लिए उसने उस शक्ति को भी ठुकरा दिया जिसके जरिये वो त्रिकाल से टक्कर ले सकता था या बच सकता था. उसने अपने प्यार के लिए अपनी जान डाव पैर लगा दी थी. वो भी बिना कुछ सोचे समजे… अब इसका क्या परिदम होगा ये तो आने वाला वक्त hi बता सकता है. अभी तो अवनि अपने आप से लड़ रही थी अब उसको पब की कोई भी हरकत दर्द नहीं दे रही थी कियोकि जो दिल और दिमाग में तूफ़ान मचा था वो किसी भी दर्द का अहसास नहीं होने दे रहा था और फिर उसके शरीर पैर मंत्र पड़ने की वजह से बढ़ती हुयी वासना ने भी दर्द के अहसासों को ख़तम कर दिया था.

पब लगातार अवनि के उप्पेर लेता उसके जिस्म से खेल रहा था और जब उसको बर्दाश करना भरी हो गया तो उसने अपना लुंड अवनि की कुवारी छूट पैर टिका दिया और अवनि तो अपने विचारो में थी उसको पता hi न चला की पब क्या कर रहा है. और पब ने अब देखा न ताव एक जोर का झटका मार दिया लुंड तो पहले hi रोड बना पड़ा था अवनि की छूट को किसी ककड़ी की तरह फाड़ता हुआ अदा घुस कर रुक गया. और अवनि की छूट ने खून की लकीर बहार निकल दी. अवनि के सरे विचार छूट में घुसे लुंड ने कुचल कर रख दिए और दर्द की एक तेज़ चीख के साथ पब को देखने लगी. और आशु बहाने लगी.

लुंड के अंदर जाते hi पब तो जैसे पागल hi हो गया था एक तो पहले से hi बेकाबू था और अब वो पागलपन के दौर में पहुंच गया. उसको न तो अवनि दिखानी पद रही थी और न hi उसकी चीखे सुनाई पद रही थी वो बेलगान घोड़े जैसा अवनि की छूट में पूरा लुंड घुसाने के बाद बिना रुके फुल स्पीड में दकके लगाने लगा. अवनि दर्द के मरे छटपटा रही थी. फेस पूरा आशुओ से भर गया था. न तो बेहोश हो रही थी और न hi होश में थी दर्द इतना था की मूट से भी बतर लग रहा था. एक तो 12 इंच लम्बा और 4-4.5 इंच मोटा लुंड उप्पेर से लुंड की नशो का उभर गन्धो जैसा काम कर रहा था. हर दकके की रगड़ पुरे जिस्म को कपकपा देती. पैर पब पुरे जोर से चुचो को मशलता हुआ उसकी छूट को फाड़ने में लगा था.

जब कुछ देर में छूट में उस भयानक लुंड को एक्सेप्ट कर लिया तो थोड़ा दर्द काम हुआ और अवनि को हलके दर्द के साथ मज़ा ाले लगा तो फिर से वो गरम होने लगी और दिमाग काम करने लगा. तब उसको याद आया की पब को अभी एक बार और मंत्र पांडा है.

अवनि – ोुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह जांणण सुउउऊँणुओ ताऊ तुमको mantra…ooohhh थोड़ा धिरे… आअह्ह्ह्ह ाअम्मम्मा मंत्र पांडा हाआईईईई

पब अवनि की बात पैर जरा भी ध्यान दिए बिना लगा रहा तो अवनि ने उसके छोटे निप्पल को मरोड़ते हुए फिर से बोलै तो पब ने भी उसकी बात सुनी और मंत्र पड़ने लगा. मंत्र पड़ने के बाद दोनों चुप चाप लगे रहे कुछ hi देर मैं अवनि बड़बड़ाने लगी.. – ोुह्ह्ह्ह मेरी जाननं मेरे पाटीई देववव मेरे पंकज ाब्ब्ब बहुत मज़ा आ रहा है ऐसे hi छोड़ो अपनी अवनि को और तेज़ करो ..आअह्ह्ह क्या बात है जान… इतना मज़ा जीवन में पहली बार आ रहा है फाड़ दो मेरी आज .. क्या जादू है… वाह्ह्ह

पब – ह्ह्ह्हहम्म्म्म आअह्ह्ह्ह मुझको भी बहुत मज़ा आ रहा है.. मेरी दिलरुबा…. तुमको पेलने में तो बहुत hi मज़ा है सच में अवनि तू कमल की चीज़ है तेरी छूट कितनी कासी हुयी है और कितनी गरम भी है… आह्ह्ह्ह मज़ा आ गया जाननं (उसके होंटो को चूस लेता है)

अवनि – हहहहहाआनं ऐसे hi और tez…or तेज़ आह्हः ऐडा सच कहती थी जीवन का अश्ली सुच तुम्हारी बहो में hi है.. आअह्ह्ह जान अब तुम मुझको हमेशा ऐसे hi प्यार करना जांणण ोुह्ह्ह काटो मत न…

पब – आह्हः ऐडा hi क्यों सविता ने कुछ नहीं बताया उसको भी तो ये मज़ा मिल चुक्का है… तुम दोनों माँ बेटी एक दम मस्त हो अब तो तुम दोनों को साथ में hi छोड़ा करुगा.. आह्हः

अवनि (शरमाते हुए ) – ननणायआ जी … ना मैं नहीं करवाने वाली माँ के सामने…..

पब – जान आज के बाद तो सबसे पहले तुम सबको एक साथ hi छोड़ना है तो तेरी ये शर्म उस दिन hi ख़तम हो जाएगी फिर तुम दोनों माँ बेटी को घोड़ी बना कर एक hi बिस्तर पैर पेलूगा… हहहयययय क्या क़यामत गाड़ है तुम दोनों की …

फिर ये दोनों ऐसे hi नंगी बाते करते हुए चुदाई में लगे रहे और जैसे जैसे ये संतुस्ती की तरफ बाद रहे थे वैसे वैसे पब की बाकि पत्निया भी ठीक होती जा रही थी.

अवनि – ोुह्ह्ह थोड़ा तेज़ करो .. ोुह्ह्ह मुझको कुछ हो रहा है जान …आअह्ह्ह्ह … तेज़ … के फ़ास्ट… फ़ास्ट… ऊऊह्ह्ह आआह्ह्ह्ह पकड़ो मुझको मैं उड़ने लगी हु आअह्हह्ह्ह्हह गयी गयी गयी…. मैं गयी…

और इसके साथ hi अवनि झड़ने लगती है. पब पैर से भी वासना का भूत उत्तर चुक्का था तो वो भी अवनि के साथ hi तुम को भी डिस्चार्ज करवा दिया. अब दोनों एक दूसरे से लिपटे अपनी सांसो को ठीक करने में लगे थे. और एक रौशनी इनको घेरने में लगी थी.
 
अपडेट 270 लास्ट अपडेट part 1



पब के विश मांगते hi मणि जी ने गुस्से में अपना धयान उस पैर से हटा लिया था और अपने गुस्से को शांत करते हुए फ्यूचर की सोचो में खो गए. आज फिर उसको ऐसा लग रहा था जैसा की तब लगा था जब पब ने उनको मन कर दिया था उनके साथ जाने के लिए. वो बहुत देर तक अपने hi विचारो में खोये रहे.

दयासुर जी ने जैसे hi पब की विश सुनी तो उनके मुँह से निकला – “ हो गया सब ख़तम”

उनकी ये बात सुन कर उनके पास बैठी गुरु बोली – क्या हुआ गुरूजी कैसे ख़तम हो गया सब?? पब ठीक तो है न??

दयासुर फिर गुरु को पब की विश बताता है जिसको सुन कर एक तरफ गुरु के दिल में अपने पति के लिए बेहिसाब प्यार उमड़ता है तो दिमाग में तूफ़ान चलने लगता है की अब त्रिकाल का सामना कैसे करेंगे. अब त्रिकाल के हाथो खुद को अपने परिवार को और इस संसार को पब कैसे बचाएगा… कामिनी की हालत शामे थी…

वही दस माँ की तो आँखें मरे हेरात के hi बहार आने को हो गयी थी. जो पब के किसी युद्ध से न चिंतित हुयी थी और न उसके भाव बदले थे वो अब बहुत जल्दी -2 बदल रहे थे. कैसे?? क्यों??? बस ये hi उनके मंद में गूंज रहा था पैर उन्होंने फिर से अपनी दृष्टि पब पैर hi लगा दी थी जैसे उनको किसी और बात की भी प्रतीक्षा थी. पैर दयासुर जी और मणि जी अपने विचारो में गम हो चुके थे.

पब के अवनि की छूट में झड़ने के साथ hi उसकी सभी पत्नियों पैर से वासना की खुमारी उतर चुकी थी. पैर वो सभी बहुत कमजोर और घायल थी.

ीदार त्रिकाल अपनी बलि देने में लगा था हर लड़की को एक एक करके इशारे से बुलाता और वो लड़की खुद hi अपना सर कटती. त्रिकाल अपने मन्त्र पड़ने में लगा था. जब पब का सेक्स पूरा हुआ तभी त्रिकाल की बलिया भी पूरी हो गयी. वो अपने मंत्रो को पड़ता गया और यहाँ पब उस बॉक्स तक पहुंच गया.

पब ने सांसे ठीक करने में केवल 4-5मं hi लगाए थे. सम्भोग क्रिया पूरी हो चुकी थी. और पब वो उसका मन चाहा वरदान भी मिल गया था पैर इसका असर कहा कहा और किस किस पैर हुआ ये तो वक्त hi बता सकता है. पैर पब अभी इस बात से अनजान था और उसके मंद में अब यहाँ से निकले की बात चल रही थी. और काम भी कोई खास बचा नहीं था केवल उस बॉक्स को ओपन करना था और यहाँ का सारा चक्रवेव ख़तम. ये सब सोच केर पब उस बॉक्स की तरफ बाद गया. अवनि अभी भी बेहोश पड़ी थी. और बेहोश तो होना hi था कितनी बुरी तरह वो चूड़ी थी ऐडा को छोड़ कर पब की किसी भी पत्नी की ऐसी हालत नहीं हुयी थी.

जैसे hi पब उस बॉक्स के पास पंहुचा त्रिकाल के मन्त्र पुरे हो गए. और वह डलासुर का दानव विकराल रूप प्रकट हो गया. ये वो रूप था जिसको देख कर आम आदमी तो दर से hi मर जाये. पैर त्रिकाल का तो ख़ुशी का कोई ठिकाना hi न था. उसके इतने दिन की साधना जो पूरी हो गयी थी. त्रिकाल तुर्रंत उनको प्रदम करके बोलै – हे दानवराज !!! मेरी आज से 26 साल पहले हुयी गलती को माफ़ करे और मुझको मेरी सभी शक्तिया पुनः प्रदान करे.

डलासुर – त्रिकाल तुमने मुझको अपनी कैद में रख कर भी मेरे प्रति अपनी निष्ठां काम नहीं होने दी. और फिर इस साधना को पूरा करके तुम अपनी शक्ति को पाने के हकदार हो गए हो तो मैं तुमको तुम्हारी सभी शक्तिया बावीस करता हु.

ये बोल कर डलासुर जी ने अपना हाथ आगे किया (आशीर्वाद देने की मुद्रा में) तो उनके हाथ से रौशनी निकल कर त्रिकाल के शरीर में सामने लगी. (रोशनी एक लाइन की तरह डलासुर जी से त्रिकाल तक जा रही थी)

ीदार पब के थोड़ा दम लगा कर उस बॉक्स को खोलने की कोसिस कर रहा था पैर बॉक्स थोड़ा ज्यादा hi तीते था जब पब ने पूरा जोर लगा कर खोला तो बॉक्स खुल गया. और बॉक्स के खुलते hi दो काम एक साथ हुए. पहला हुआ ये की बॉक्स से नील रंग का धुआँ (एयर) और पानी जैसा निकला जो सिद्ध पब के उप्पेर गिरा. और देखते hi देखते पब का शरीर नीला पड़ने लगा. कुछ hi पालो में पब बेहोश हो कर गिर गया. और उसका शरीर डार्क ब्लू हो गया.

दूसरा काम हुआ ये की बॉक्स के खुलते hi त्रिकाल का बनाया ये पूरा तलिशम ख़तम होने लगा. और वह आकाश में एक बड़ी मात्रा में रौशनी एकत्रित होने लगी. उस चक्रवेव को बनाना में त्रिकाल ने अपनी जितनी ऊर्जा (जीवन शक्ति) को लगाया था वो सभी एक जगह एक बड़े गोले के रूप में आ गयी और फिर एक लाइन के रूप में वह से बिजली (कर्रूँट) की स्पीड से चलती हुयी त्रिकाल के पास पहुंच गयी. कियोकि ये त्रिकाल की hi शक्ति थी तो त्रिकाल ने hi ऐसी व्यवश्था की थी की यदि कभी उसका चक्र्विएव टूट भी जाये तो उसकी साडी शक्ति उसके पास दुवारा पहुंच जाये. और हुआ भी वैसा hi. पैर जब ये शक्ति त्रिकाल के पास पहुंची तब डलासुर जी त्रिकाल को उसकी शक्ति वापस दे रहे थे. और ये शक्ति भी उस शक्ति की लाइन से hi जा टकराई. जैसे की बिजली के तारो के साथ होता है की जब 2 तार किसी प्रतिरोधक (लिखे – बल्ब/ अन्य टाइप ऑफ़ इलेक्ट्रिकल आइटम व्हिच वर्क विथ करंट) के साथ जुड़ते है तो वो उस प्रतिरोधक को वर्क करने की एनर्जी देते है और यदि उन दोनों तारो को डायरेक्ट जोड़ दिया जाये तो दमका हो जाता है तो वैसा hi यहाँ हुआ 2 अलग अलग एनर्जी लाइन्स के डायरेक्ट मिलने से धमाका हो गया. यदि वो किसी प्रतिरोधक (शरीर) के साथ मिलती तो वो शरीर बहुत शक्तिशाली हो जाता पैर हवा में उनका ये मिलान एक बड़ा धमाका कर गया और उस धमाके से इतनी एनर्जी पैदा हुयी की उसने उस पुरे घर को hi अपनी चपेट में ले लिया वो तो त्रिकाल ने घर पैर एक शील्ड बना राखी थी जिससे वो शक्ति बहार न जा पायी और उस शेड में hi बंद हो कर रहा गयी. अब घर के बहार से घर दिखाई नहीं दे रहा था अहा केवल एक गोल बहुत बड़ा रौशनी का गोला hi नज़र आ रहा था.

उस गोले के अंदर त्रिकाल, डलासुर के साथ साथ पतासुर और भीमासुर भी फस गयी थे. कियोकि वो दोनों बहार गेट पैर पहरा दे रहे थे. अंदर क्या हो रहा था ये कोई नहीं जनता था उन चारो के क्या हाल थे ये भी किसी को पता नहीं थे. और ये सब कितने समय तक ऐसे hi रहने वाला था ये तो केवल परमेशवर hi जनता था. नियति का ये कोण सा खेल था ये तो केवल नियति hi जानती थी. एक तरफ पब नीला हो कर बेहोश पड़ा था तो एक तरफ त्रिकाल पीला (रौशनी) हो कर पड़ा था.

इस सभी बातो के बिच एक और बात हुयी और वो ये थी की नीले धुएं (ब्लू एयर) के बाद में उस बॉक्स से डलासुर का देव रूप निकल आया था. वो अब आज़ाद था डलासुर का देव रूप आज़ाद हो गया था पब ने अपना पहला टारगेट प् लिया था पैर वो इस बात को नहीं जनता था कियोकि वो तो बेहोश हो गया था. पब ने एक बहुत बड़ा मिशन पूरा कर दिया था. पैर वो इस जीत की ख़ुशी मानाने के लिए होश में नहीं था. एक और अवनि नंगी बेहोश पड़ी थी. बस पब ने उसके उप्पेर वो चुनरी दाल दी थी जो शादी के टाइम उसके सर पैर थी.

दूसरी तरफ पब बेहोश पड़ा था जिसका पूरा शरीर डार्क ब्लू हो चुक्का था. और पब के बेहोश होते hi ऐडा भी बेहोश हो गयी ये देख कर सभी गहरा गए. गुरु भाग कर फिर से दयासुर जी के रूम में पहुंची और बोली – गुरूजी देखिये क्या हुआ है?? देखिये गुरूजी पब ठीक तो है न. ऐडा एक दम से बेहोश हो कर गिर गयी है. और मेरा मन भी एक दम बहुत घराने लगा है जैसे एकदम से कुछ बहुत बुरा हो गया हो… प्लीज देखिये न गुरूजी वो कैसे है…

दयासुर अपने धयान में थे पैर उनको भी इस बात का आभाष हो रहा था की की कुछ बहुत बड़ा हो चुक्का है तो वो भी पब को देखने के लिए उस तालाब पैर धयान लगाने लगे. पैर उनको कुछ दिखाई नहीं दिया. तो उन्होंने फिर से पब का सोचते हुए दिव्या दृष्टि से देखा तो पब और अवनि एक गाओं के बाहरी हिस्से पैर बेहोश पड़े दिखाई दिए. दयासुर जी को एक पल में तो कुछ भी समाज नहीं आया पैर जब उन्होंने धयान से देखा तो वो उस गाओं के घरो को पहचान गए और फिर उनको पब के सामने खुला पड़ा बॉक्स दिखाई दिया. तो वो सारा माजरा समाज गए. पैर एक बात उनको भी समाज न आयी और वो ये थी की पब का शरीर नीला कैसे हो गया??

दयासुर जी में अभी इतनी शक्ति नहीं थी की वो टेलिपोर्ट हो कर पहुंच सके. तो उनको अपने बड़े भाई नकसुर की याद आयी और उनसे संपर्क करके पब के हाल के बारे में बताया. नकसुर जो अभी तक खुश था की पब और अवनि ने अपना काम कर दिया है और वो जल्द hi आते होंगे उनके फेस पैर भी चिंता की लकीरे आने लगी. दयासुर के बोलते hi वो भलासुर और दिव्यांश को ले कर पब की तरफ भाग लिए.

दयासुर जी ने भी गुरु को पब का सच बता दिया तो गुरु की हालत ख़राब हो गयी और उसकी आँखों से आशु बहने लगे.

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दस माँ के फेस पैर डलासुर के देव रूप को आज़ाद देख कर न तो ख़ुशी थी और न पब को बेहोश देख कर गम.. उनके फेस पैर था तो केवल और केवल – आश्चर्य… घोर आश्चर्य…

आज जो भी अभी कुछ घंटो में हुआ था उसने दस माँ को चकित कर दिया था इनको लग hi नहीं रहा था की ये जो हो रहा है ये सच है. सब एक सपने के जैसा था उनके लिए पैर ये सच था. उस इस सच को वो मैंने को तैयार नहीं थी. और उसका कारन था कई 100 साल पहले देखा गया भवियश… और इतने सालो से वो उन शर्त क्लिप्स को हर घडी हर पल जीती आयी थी. हमेशा मन से दुआ करती थी की जो भविष्य उन्होंने देखा है वो न हो पैर वो ये जानती थी की होगा तो वैसा hi जैसा की उन्होंने देखा है. और वो बात उनके जहाँ में इतनी बेथ चुकी थी की आज जब भविष्य वर्तमान बन कर आया और उनकी दुआ काबुल होते हुए सब कुछ बदल गया तो वो इनको मैंने को तैयार नहीं थी. कियोकि ये उनके देखे हुए भविष्य का अंत नहीं था. अभी तो और भी बहुत कुछ होना वाकई था उनके जीवन में. और वो ये hi नहीं समाज प् रही थी की यदि आज सब बदल गया है तो क्या आगे का देखा वैसा hi होगा??? या वो भी बदल जायेगा??? और यदि बदलेगा तो क्या उनको इस दानव जीवन से मुक्ति मिलेगी??? या अभी और एक बार और इन्तजार में hi जीवन काटना होगा… कब होगा इस श्राप का अंत… क्या एक ऋषि का वचन झूठा हो जायेगा?? और यदि हाँ तो तब क्यों नहीं हुआ जब बिना किसी गलती के उनको श्राप मिला था??? न जाने ऐसी कितनी hi बाटे थी जो दस माँ सोचने में लगी थी. पैर फिर अपने मन को इन बातो से झटक कर बोली कही मेरी याद्दाश तो कमजोर तो नहीं हो गयी??? मेरे जो देखा था मुझको ठीक से याद hi न हो… नहीं ऐसा नहीं हो सकता मैं शदा उनके बारे में सोचते हुए जीती आयी हु. उन यादो को कैसे भूल सकती हु… पैर हो सकता है की मैं अपनी कल्पनाओ के कारन सच और कल्पना को मिक्स कर दी हु???

एक काम हो सकता है यदि में एक बार फिर उनको देखु तो मेरा संदेह दूर हो सकता है इसके लिए मुझको अपनी दिव्या दृष्टि को कई 100 साल पीछे जा कर वो सब फिर से देखना होगा… हाँ ये ठीक रहेगा.. पैर यदि नियति माँ को ये पसंद न आया तो?? पैर मैं आज में बेथ कर भूतकाल hi देख रही हु जो बीत गया उसको याद कर रही हु.. पैर उस भूत काल में आगे के भविष्य की जहलक भी है. दस माँ अपने इन विचारो में थी की डलासुर का देव रूप उनके रूम में आ गया. वो वह से टेलिपोर्ट हो कर सिद्ध यहाँ hi आये थे. वो बहुत hi कमजोर से लग रहे थे कियोकि डलासुर की अधिकतम शक्ति इस टाइम दानवरूप में थी तो देव रूप को कमजोर होना hi था.

डलासुर – मेरी दक्षणा किन खयालो में खोई है?? इतनी परेशां होने की क्या वजह है?? आज तो मैं भी वापस आ गया हु..

दक्षसूरी – ये आप पूछ रहे है जी?? क्या आप परेशां नहीं है?? क्या सच में मेरी याद्दाश कमजोर हो गयी है??

डलासुर – नहीं प्रिये मुझको तो नहीं लगता की ऐसा कभी भी हो सकता है. तुम खुद वो शक्ति हो जिसको देवराज भी नहीं हरा सकते. तो तुमको इतनी तुक्ष बीमारी कैसे हो सकती है.

दक्षसूरी - तो फिर आप परेशां क्यों नहीं है?? क्या आप नहीं जानते आज क्या हुआ है?? क्या इस दिन के लिए hi हम इतने सालो से शांत बैठे थे??? देखिये मैं आज कहा देती हु यदि इतने सालो से शांत रहा कर भी इस दानव रूप से मुक्ति नहीं मिलेगी तो फिर मुझको मुक्त करवाने के लिए सयम महादेव को hi आना होगा. नहीं तो न तो सृष्टि रहेगी और न hi कोई जीवित प्राणी… फिर उसका जो भी परिडाम हो जब बिना किसी गलती के इतने सालो से सजा काट रहे है तो अब ाप्रद भी कर hi लिया जाये…

डलासुर – शांत देवी शांत… इतना करोड़??? इतनी तड़प??? ये किस लिए है देवी???

दक्षसूरी – देव आप जानते है उस श्राप के मिलने से लेकर आज तक कई 100 सालो में हमने क्या नहीं झेला है. और जब 25-30 साल से लगने लगा है की वो वक्त निकट है जब इस सबका अंत होगा तो आज लगता है की वैसा होगा hi नहीं तो फिर पता है कितने साल और हम दोनों को ये सब देखना होगा. हमने अपनी मुक्ति के लिए वो सब भी स्वीकार कर लिया जो स्वीकारने लायक नहीं था पैर फिर भी ये परिवर्तन क्यों????

डलासुर – ऐसा क्या हुआ है देवी अभी मुझको कुछ भी ज्ञात नहीं है. मैं तो उस कैद से मुक्त हो कर सिदा ीदार hi आ गया था. और वह भी केवल तुम्हारे दस्तक पुत्र को नीला पड़ा हुआ देखा था. मुझको अभी पूरा सच नै पता तुम बताओगी…

दक्षसूरी – जी देव बिलकुल पैर उससे पहले आपको मुझको ये बताना होगा की हमने क्या भविष्य देखा था. इससे आपको परिवर्तन भी समाज में आ जायेगा…

डलासुर – हम्म ठीक है मैं एक – एक करके स्कीन बताता हु तुम बताना उनमे क्या परिवर्तन हुआ है.

दक्षसूरी – हम्म ok

डलासुर – त्रिकाल को मेरे दोनों रूपों को कैद करते हुए देखा था. छल से …

दक्षसूरी – हम्म हुआ भी वही..

डलासुर – फिर त्रिकाल ने अल्पना के साथ छल से सम्भोग करने की कोसिस में खुद की hi शक्तियों को गवाना. और फिर अल्पना की कोख में तुम्हारी मौजूदगी में तुम्हारे दस्तक पुत्र की नीव रखवाना…

दक्षसूरी – हम्म हुआ भी वही..

डलासुर – त्रिकाल के छेले (संभु) को अपने पुत्रो का वचन देना. की वो मरते दम तक उस जगह की सुरक्षा करेंगे.

दक्षसूरी – हम्म हुआ भी वही..

डलासुर – पब का उस तालाब के पास अपने पुत्र नकसुर और भलासुर से युद्ध. और फिर पिताजी (दिव्यांश) की मदत से अपने दोनों पुत्रो की मूट…

दक्षसूरी – युद्ध हुआ देव, पैर अपने दोनों पुत्र नहीं मरे. पब ने उनकी जान निकलने से पहले hi पिताजी को दक्का मार दिया जिससे हमारे दोनों पुत्र युद्ध तो हार गए पैर अभी तक जीवित है.

डलासुर – ये तो अच्छी बात है न देवी. अपने दोनों पुत्र जीवित है जैसा तुमने चाहा था ठीक वैसा hi तो हुआ न…

दक्षसूरी – पैर देव इससे भविष्य की और भी घटनाये बदल गयी न.. आप अभी निष्कर्ष मत निकालिये. पहले आज की पूरी घटना जान लीजिये….

डलासुर – हम्म ok, पब का तालाब से वासना में लिप्त हो कर बॉक्स के साथ बहार आना और अवनि को देखते hi उस पैर टूटना. फिर पिताजी का वो बॉक्स खोलना और हलाहल जहर से उनकी मूट होना…

दक्षसूरी – देव ये भी नहीं हुआ. पब तालाब से बहार आ कर अवनि पैर टूट तो पड़ा पैर न तो पिताजी वह थे और अवनि ने भी पब को प्रेम का पथ दिखा कर उसको उसकी जरुरी शक्ति से वंचित कर दिया. फिर बॉक्स भी खोल पब ने तो अब वो उस हलचल जहर से लड़ रहा है. वो तो उसके पास महादेव की एक शक्ति (ाष्टिका देवी की दी हुयी शक्ति) है इसलिए अभी तक मारा नहीं है पैर पता नहीं कितनी देर को शक्ति इसकी रक्षा कर पायेगी…

डलासुर – ोुह्ह्ह ये तो सच में बहुत बड़ा बदलाव हुआ है. कियोकि इसके बाद हमने देखा था की पब और त्रिकाल दोनों hi अपनी शक्तियों को प् लेते है. और दोनों hi एक दूसरे से टकराव के लिए तैयार भी होते है…

दक्षसूरी – हाँ देव ये hi तो सबसे बड़ा बदलाव है एक और पब हलाहल जहर से लड़ रहा है तो दूसरी और त्रिकाल भी अपने hi घर में शक्ति विश्पोट से आपके दानव रूप के साथ कैद हो गया है और इस शक्ति पहुंज के अंदर झाकना मेरे वश में भी नहीं है.. पता नहीं वो भी जिन्दा बचेगा या नहीं???

डलासुर – हम्म सच में देवी आपका चिंतित होना गलत नहीं था यदि हमने त्रिकाल की कैद को स्वीकार किया तो इसलिए की भविष्य में उसको एक बहुत बड़ा काम करना था. मेरे भी कुछ समाज नहीं आया की नियति में इतने बड़े परिवर्तन क्यों और कैसे आये…. ये नियति की इच्छा से हुआ या उसके विरोध??? और इन परिवर्तन की कीमत कोण चुकाएगा??? क्या एक बार फिर हम दोनों hi???

दक्षसूरी – अब आप समजे मैं क्यों व्याकुल थी. पैर अब मेरा सब्र जवाब दे चुक्का है देव या तो इस पार या उस पार…

डलासुर – नहीं देवी पहले हमको एक बार नियति देवी को याद करना चाहिए उनके वचन में बन्दे है हम दोनों तो उनको hi इसका जवाब देना होगा. नहीं तो फिर दुनिया देखेगी अश्ली दानव राज डलासुर…….

फिर ये दोनों नियति माँ को याद करते है और नियति माँ आ कर इनको समजा कर वह से चली भी जाती है.

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यहाँ दानव बेस में पब का नीला पड़ा शरीर एक बीएड पैर रखा है और उसके चारो तरफ गुरु, कामिनी, नकसुर, भलासुर, दयासुर, दिव्यांश, मणिशंकर खड़े है और सब पब को इस संकट से निकलने का रास्ता खोज रहे है. पैर मिल किसी को नहीं रहा. पब की सभी पत्निया बहुत hi कमजोर अवशता में दूसरे रूम में है. और उनकी देख भल जुली और उसकी टीम कर रही है. अभी उनमे से किसी के फेस पैर चमक नहीं है जो सदा होती थी.

ऐडा और पब का हाल एक जैसा hi है. बस अड़ अक शरीर नील नहीं पड़ा है. और अवनि नार्मल है पैर उसको अभी होश नहीं आया है और ये सम्भोग की तकन से हुयी बेहोशी है न की किसी और बड़ी वजह की.

इतने ज्ञानी और प्रकरणी लोगो को भी नहीं समाज आया की इस जहर से कैसे बचाया जाये कियोकि इन सभी के हिसाब से इस जहर से बचना मुंकिन hi नहीं यदि पब अभी भी साँस ले रहा है तो ये भी इन सभी के लिए एक बड़ा चमत्कार hi है. कियोकि इस जहर से बाबा भोले नाथ hi बचा सकते है. पैर इनको पब को बचाना भी जरुरी था. जब सब आशा छोड़ देते है तब वह प्रकट होती है – दस MAA..(dakshasuri)

दस माँ – मैं बताती हु तुम सभी को की ए.बी.ए. आगे क्या करना है……………….

थे एन्ड ऑफ़ PART 1

फ्रेंड्स ये part यहाँ पैर hi हातम हो गया. कियोकि पब का 1सत टारगेट था अपनी शक्तियों को हासिल करके डलासुर के देव रूप को आज़ाद करवाना. और वो हो चुक्का है. पब को अपनी सभी शक्तिया मिल चुकी है. पैर ये त्रिकाल से लड़ने के लिए पूरी नहीं है. तो अब क्या होगा??

पब को दस माँ कैसे बचाएगी???

दस माँ और डलासुर जी को नियति ने क्या कहा??

दस माँ और डलासुर को इस दानव जीवन से मुक्ति कैसे मिलेगी??

क्या पहले से देखा भविष्य पूरी तरह से बदल जायेगा?? और यदि हां तो क्यों?? और यदि नहीं बदला तो ऐसा क्या है जिसको स्वीकार करना दस माँ और डलासुर जी के लिए बहुत कदिन था…..

त्रिकाल उस कैद से बहार आएगा या नहीं और यदि आएगा तो कैसे?? कियोकि इसके अंदर देखना जब दस माँ के बस में भी नहीं है तो कैसे???

संभु का क्या होगा?? बिना त्रिकाल के वो क्या करेगा??

डनवगुरु और उनके साथ दानव रक्षक (डॉ) ने जो आतंक पेलने की योजना बनायीं थी उनका क्या हुआ??

दानव गुरु ने ये क्यों कहा था की हिंसा, पाप, अत्याचार फेलिन से त्रिकाल को फायदा होगा???

अदिति का क्या हुआ??

सोनल और अविनाश की लव स्टोरी का क्या हुआ?? क्या ये फिर मिल पाएंगे?? केसा क्या हुआ था की सोनल ने अविनाश से सभी रिश्ते ख़तम कर लिए??

दानव बेस में रहने वाली उन लड़किय का क्या हुआ?? बेबी ने कुछ किया या नहीं???

गुरु का क्या हुआ?? गुरु से दस माँ ने क्यों कहा था की जो मरने को तैयार हो वो hi पब की 1सत वाइफ बने???

उस लड़की का क्या हुआ जिसने पब को धोखा दिया था जब वो दिल्ली में जॉब करता था. पब ने उसको भुला दिया या उसका भी कोई रोले आएगा.????


और भी बहुत से ऐसे hi सवालो के जवाब आप सभी को नेक्स्ट part – 2 में मिलेंगे. इस part के साथ ये स्टोरी ख़तम हो जाएगी….
 
PART 2

अपडेट 271

रिकैप :-

अभी तक अपने पड़ा की कैसे पब गुरुपित से मिला और वह दानव रानी दक्षसूरी ने पब को उसके जीवन का उद्देश्य बताया. फिर गुरुपित और पब का गाओं गाओं भटकना और गुरुपित का पब की 1सत वाइफ बनना. फिर सफर सुरु हुआ पब की 11 पावर गर्ल्स को खोजने का और एक –एक करके पब को उसकी पावर गर्ल्स मिलती गयी और वो अपने जीवन के part को जनता गया. जो उसके साथ हुआ उसकी माँ और बहन के साथ हुआ. पब और त्रिकाल का टकराव, त्रिकाल का पब का हमला और उसका उनसे बचना… फिर अंत में पब का त्रिकाल के उस चक्रवेव को तोडना जिसको कोई भी देव या दानव नहीं तोड़ पाया था. पैर इस चक्कर में पब आ गया एक जहर की चपेट में… और त्रिकाल चला गया उसकी शक्तियों के ब्लास्ट के गोले में….

आगे :-

दानव बेस में मंत्रो की आवाज गूंज रही थी. रात के अँधेरे में हवन की अग्नि किसी सूरज की भाटी लग रही थी. और हवन कुंड के चारो और बैठी पब की 13 पत्निया मंत्रो के साथ आहुतिया दाल रही थी. सभी की सभी हड्डियों का ढांचा बानी हुयी थी. न वो तेज़ था और न की फेस पैर कोई चमक थी. चेहरे पैर थी तो एक उदासी और आसिम दुःख. दुःख था अपने पति पब को इस हाल में होने का. पिछले 1 साल ने लगातार भगवन शिव की आराधना के बाद भी पब की बॉडी पैर कोई फरक तक नहीं पड़ा था. आज भी उसका शरीर वैसे hi नीला था जैसे आज से 1 साल पहले उस बॉक्स को खोलने से हुआ था. हलाकि दानव बेस की सभी लड़कियों ने भी पब की बहुत सेवा की थी और वो सब भी निरंतर मन hi मन भोले बाबा की आराधना कर रही थी. दस माँ ने hi पब की पत्नियों को बताया था की किस लेप के लगाने से इस जहर का अक्षर शरीर के उप्पेर hi रुका रहेगा और पब को मरने नहीं देगा. और दस माँ ने ये भी बताया था की इस जहर ने मुक्ति का केवल एक मार्ग है और वो है भोले बाबा को प्रश्न करके उनहोसे इस जहर के अक्षर को ख़तम करने का वर मांगा जाये… पैर भोले बाबा को खुस करके उनसे वर लेना कोई बच्चो का खेल तो है नहीं…. उनको प्रश्न करने में तो सादिया बिट जाती है यहाँ तो अभी केवल 1 hi साल पूरा हुआ है.

ये जहर वो जहर था जिसके अक्षर को केवल भोले बाबा hi ख़तम कर सकते थे. इसलिए hi दस माँ ने कहा था की इस जहर से दिव्यांश जी की तुर्रंत मूट होनी तय थी. पैर नियति ने अपने बदलाव किये और इस जहर के अक्षर से पब प्रभावित हुआ. अब ये बदलाव क्यों हुए ये तो वो hi जाने… न न भाइयो ये बदलाव क्यों हुए इसका कारन दानव रानी दक्षसूरी और दानव राज डलासुर जी को भी पता है. कियोकि इस बदलाव का कारन उन्होंने नियति से जान लिया था. और तब hi उन्होंने पब की पत्नियों को ये सब करने का बोलै था.

दस माँ के कहे अनुशार पब की सभी पत्निया पब की सलामती के लिए ये सब करने को पल भर में hi तैयार हो गयी थी. और उनकी मदत के लिए दानव बेस की हर लड़की आतुर थी. और ये सब पिछले 1 साल से लगातार चल रहा था. न तो पब में कोई बदलाव आया और न hi उनकी सेवा में. आज भी वो सब उतनी hi निष्ठां से वो सब कर रही थी जितनी की पहले दिन की थी. अभी पब की कोई भी शक्ति एक्टिव नहीं थी और न hi उसकी किसी पत्नी के पास कोई शक्ति थी पैर फिर भी वो पीछे नहीं हैट रही थी. पब की सभी पत्नियों ने खाना पीना छोड़ रहा था पुरे दिन में केवल एक फल (फ्रूट लिखे – बनाना, एप्पल, मानगो अन्य टाइप 1 पिछ ऑफ़ फ्रूट) खा कर hi जी रही थी. इसलिए सभी सुख कर कांटा हो गयी थी. पैर उनकी सेवा में कोई भी कमी न थी.

पब की पत्नियों के साथ दानव बेस की हर लड़की को भी हाल कुछ उनके जैसा hi था. वो हवन में चाहे न बैठी हो पैर वो सब की पब की सलामती के लिए अपने अपने तरीके से दुआए मांग रही थी. कुछ पब के बेहोश शरीर की देख भल कर रही थी. उसके शरीर पैर दिन में 3 बार लेप लगाना उस लेप को बनाना ये सब इनका hi काम था. और जुली की टीम इन सभी के लिए फुल मैनेज कर रही थी. सभी दुखी थी. सभी की आँखों में आज भी पानी था. पैर हिम्मत काम किसी में न थी.

इस 1 साल के दुराण जो इससे अलग हुआ वो केवल 2 hi घटनाये थी. 1 अच्छी और 1 बुरी… अच्छी घटना ये थी की ऐडा माँ बन चुकी थी और उसने एक सुन्दर सी बेटी को जनम दिया था जिसको पलने की जिम्मेदारी भी जुली के hi पास थी. और अब वो 6 महीने की भी हो चुकी थी. ऐडा ने अपनी माँ की ममता को भी दफ़न कर दिया था अपने पति की सलामती के लिए. वही माहि ने भी उस लड़की से मुँह मोड़ रहा था जबकि वो जानती थी की ये उसकी सबसे प्यारी छोटी बहन शशि hi है. इसका नाम भी सभी ने शशि hi रखा था.

बुरी घटना ये हुयी थी की बेबी अपना रंग दिखा कर वह से भाग गयी थी. एक दिन जुली के साथ बाजार से सामान का बोल कर निकली थी. पैर जुली को चकमा दे कर भाग गयी. पैर जाने से पहले वो एक गन्दी हरकत कर गयी थी. और वो ये थी की बेबी ने जिन 8 लड़कियों को स्पेशल ट्रेनिंग दी थी उन सभी को सेक्स मूवीज की लत लगा गयी थी और ये किसी को पता भी नहीं चला. बेबी के भागने के 1 महीने बाद जब वो लड़किया सेक्स की आग में तडफने लगी. उनकी बॉडी सेक्स के लिए पागल होने लगी तब जा कर जुली की टीम को पता चला पैर तब तक देर हो चुकी थी. तो जुली ने उन लड़कियों को और लड़कियों से अलग रखा और अंकिता की सलहा से उनकी भी देख भल करने लगी. पैर उनकी कंडीशन ठीक नहीं थी. उनके अंदर सोई वो सेक्स स्लेव जग चुकी थी. और हमेशा सेक्स की चाहत में रहती थी. जुली ने बहुत कोसिस की थी उनको शांत करने की पैर जुली की कोसिसो से वो और बेकाबू होने लगी. उनको अब केवल एक तगड़ा लुंड hi शांत कर सकता था. और कर भी पता या नहीं ये भी कोई नहीं जनता…

यहाँ ये सब पब को बचने में लगी थी तो दूसरी तरफ दानव गुरु और डॉ ने मिल कर पूरी दुनिया में पाप hi पाप फैला दिया था. डॉ ने पूरी दुनिया में रय को फैला दिया था जो खुल कर आतंक मचा रहे थे. न सर्कार, न आर्मी, न पुलिस कोई भी उनके आगे कुछ नहीं कर प् रहा था दुनिया में जांगले राज था. ड्रग्स, हथियार खुले आम ख़रीदे और बेचे जा रहे थे. जिसकी नजर जिस लड़की पैर पड़ी वो नोच ली जाती थी. आज दुनिया में केवल एक कानून था और वो था – जिसकी लाठी उसकी भैंस. हर देश की सर्कार इस जांगले राज को ख़तम करने की कोसिस कर रही थी पैर ये उनके बस का नहीं था. हाँ मणि जी, दयासुर जी, भलासुर जी और नकसुर जी अपनी पूरी कोसिसो में लगे थे. और इन्होने इंडिया में कुछ हद तक रय को कण्ट्रोल भी किया था. पैर इसका अंत नहीं कर पाए थे. दीनदयाल ने hi आश्रम की पूरी जिम्मेदारी संभल राखी थी. मणि जी तो इन आशूर युवराजों के साथ hi वयश्त थे. पैर ये सभी भी टाइम टाइम पैर पब की खबर लेते रहते थे. दस माँ पहले की तरह अपने निजी निवास पैर डलासुर जी के देव रूप के साथ अपनी तपश्या में थी. पैर डलासुर का देव रूप बहुत कमजोर था और दिन प्रति दिन कमजोर hi हो रहा था. डलासुर की लाख कोसिसो के बाद भी वो अपने देव रूप को कमजोर होने से नहीं बचा प् रहे थे. और इसका सीदा अर्थ था की डलासुर का दानव रूप दिन प्रति दिन शक्ति शैली होता जा रहा है पैर उसके बारे में किसी को ठीक से जानकारी नहीं थी कियोकि त्रिकाल के आड़े पैर न तो दिव्या दृष्टि से देखा जा सकता था और न hi उसके आस पास भी जाया जा सकता था. वह केवल एक बड़ा गोला hi दिखाई देता था जिसके रात ने भी दिन के जैसी रौशनी निकलती थी. और जो भी उसके आस पास जाता वो मारा जाता. संभु ने भी कोसिस की थी एक बार अपने गुरु त्रिकाल के पास जाने के लिए पैर उस गोले को छूटे hi वो 10 फ़ीट दूर जा गिरा वो तो उसके पास भूचरत्व सेफ्टी शील्ड थी नहीं तो उसका वही कल्याण हो जाना था.

संभु जब वह कुछ नहीं कर पाया तो पब और उनकी पत्नियों को खोजने की कोसिस करने लगा. हवेली को तो संभु के आदमियों ने खण्डार बना दिया था. हवेली में सब बर्बाद हो चुक्का था. काजल के माँ बाप और बाकि गोअन वालो पैर भी बहुत जुर्म हुए पैर जब कोई जनता hi नहीं तो बताता कैसे…. संभु और दानव गुरु को पब की कोई खबर तक नहीं मिल पायी थी. पैर इस 1 साल में अदिति ने संभु की कुंडली पूरी तैयार कर ली थी. उनके ड्रग्स, लड़कियों की सप्लाई, हथियारों की सप्लाई, तांत्रिक क्रिया करके आदमियों के पैसे लूटना, उनकी बहिन बेटियों की इज्जत लूटना, किसी को भी पल भर में जान से मर देना ये सभी गलत कामो के साबुत अदिति के पास थे पैर अभी न तो कोई सुनने वाला था और न hi अदिति को सपोर्ट करने वाला.. अदिति को पता चल चुक्का था कानून संभु का कुछ नहीं बिगड़ सकता. उसको अपने बाप से इतनी नफरत हो गयी थी की कोई उसका नाम भी लेता तो अदिति का मान करता की उसको मार दे. और पब के नाम से इतना प्यार हो गया था की यदि उसका ख्याल भी आता तो उसकी छूट गीली होने लगती थी. इसलिए अदिति को अपने प्यार और नफरत दोनों को पूरा करने के लिए पब के लौटने का इंतजार था.

इन सभी से अलग दीपक, हमक और मास्टर ये हंबा ने अपने सोल्लगे की बिल्डिंग का काम पूरा कर लिया था और उसके लिए टीचर्स को भी अप्पोइंट कर लिया था. पैर कुछ गरीबो के बच्चो को छोड़ कर कोई भी यहाँ एडमिशन के लिए नहीं आया था. कुछ अपरादि लोग मास्टर से लड़ने की कला सिखने जरूर आये थे पैर मास्टर ने सभी को भगा दिया था. पाप और आतंक के माहौल में इन कलागेस को बनवाना भी बहुत मुश्किल भरा रहा था. पैर किसी भी तरह ये बन तो गए थे पैर इनको चलने के लिए सरीफ घर के बच्चे बहार निकलने से भी डरने लगे थे तो पड़ने कहा से आते. अभी केवल बिल्डिंग्स hi थी पैर उनको चलने की लिए स्टूडेंट्स नहीं थे. ये हाल लगभग सभी जगहों का था आम आदमी ने खुद को दर और आतंक से घर में hi कैद कर रखा था केवल जरुरत के लिए hi बहार जा रहे थे कियोकि बिच सड़क पैर कतल और रपे होना आम बात हो गयी थी.

दानव युवराज जहा भी जा कर रय को मार कर वह शांति कायम करते. तो कुछ दिन बाद hi डॉ फिर से नए रय को वह भेज देते. जो कुछ hi दिनों में फिर से वह आतंक मचाना सुरु कर देता. सरीफ लोगो ने भी जिन्दा रहने के लिए हतियार ुधा लिए थे अपनी आत्म रक्षा के लिए. और जो नहीं ुधा पाए थे वो मरे जा रहे थे. रय अपने एरिया में सबसे पहले सर्कार और पुलिस की गतिविड़ी को ख़तम करते और आम जनता में से अप्रदिक प्रवति के लोगो के सरपरस्त बन कर उनको आतंक मचने के लिए खुला छोड़ देते. पुरे देश में लोगो के मन में यदि कोई डार्ट है तो वो उन 4 लोगो का hi था जो कही भी कैसे भी आते है और पापीओ को उनके कर्मो की सजा दे कर चले जाते. इस खौफ ने hi थोड़ा आतंक को काम किया था नहीं तो जंगलर राज तो था hi देश में. दानवपुत्र को तो लोग भूल hi चुके थे. और देशो के हाल और भी ख़राब थे. कुछ देशो के मंत्री मंडल और officer’s रैंक पैर रय पहुंच गए थे वह तो इन्शानो की हालत जानवरो के जैसी हो चुकी थी.

पैर देश और दुनिया से बेखबर पब की पत्निया अपने पति और दानव सेना अपने मालिक को बचने ने लगे हुए थे. और दानव राजकुमारों को भी ये hi आशा थी की पब के ठीक होने पैर दुनिया में फिर से शांति बनायीं जा सकेगी. कियोकि भलासुर जी, नकसुर जी और दयासुर जी की जीवन शक्ति 1 साल पहले ख़तम हो गयी थी. और अभी तक वो फिर से इतने शक्ति शैली नहीं हुए थे की एक साथ सभी कुछ संभल sake.per यहाँ पब में कोई इम्प्रूवमेंट नहीं था. पब की सभी पत्निया इस बात से hi परेशां थी पैर उनको विश्वास था की वो भोले नाथ को मन कर hi रहेगी चाहे उसमे उनको कितना भी टाइम क्यों न लग जाये.
 
अपडेट 272

आज वो hi डेट थी जिस डेट को पब इस हाल में पंहुचा था. और ये याद आते hi पब की पत्निया आज कुछ ज्यादा hi दुखी हो गयी थी. सभी अपनी साधना में लगी थी पैर दिल में आज कुछ ज्यादा hi दर्द था. सभी को एक साल पहले की वो सभी बाते याद आ रही थी जो की उन्होके साथ हुयी थी. पब के साथ उन सभी ने आशिम दर्द और तकलीफ झेली थी पब की यात्रा के इस अंतिम दिन में. और अंत में पब को जीत भी मिली पैर वो सब हार गयी. कियोकि जिससे उन सभी का बजूद था वो hi उस कंडीशन में पहुंच गया था जिसमे से उससे निकलने के लिए उनको एक नयी जंग लड़नी थी. और वो सब 1 साल से उस जुंग को लड़ भी रही थी. कहा उनके शरीर में वरदानो की शक्ति होती थी पैर आज वो सदर्न नारी की तरह होते हुए भी अपने पथ से बातकी नहीं थी. शारारिक दुर्बलता ने उसके मन की आष्टा को जरा भी काम नहीं होने दिया था. और न hi उनके रूटीन में कोई परिवर्तन आया था.

आज भी वो रोज की तरह हवन कर रही थी पैर आज सभी की आँखों में कुछ ज्यादा hi आशु जलक रहे the.man की पीड़ा आँखों के रस्ते बहार आ रही थी. पैर मंत्रो की ध्वनि में कोई कमी न थी. मंत्रो की गूंज में आज एक दर्द की लहार कुछ ज्यादा hi तीव्र थी.

दर्द से भरे मंत्रो की इस गूंज में एक प्यारी सी मदुर आवाज गुंजी जिसने सभी का दयँ अपनी और कर लिया. और जब सभी लड़कियों ने उस दिशा में देखा तो पाया की वह दस माँ और डलासुर जी खड़े है. दस माँ के फेस पैर दुःख और दर्द के बदल छाए हुए है. दस माँ और डलासुर जी को देखते hi उन सभी ने उनको प्रदम किया और फिर गुरु ने दस माँ से बोलै – दानव रानी और दानव राज को मेरा प्रदम.. माँ आप दोनों के आने से हमको बहुत ख़ुशी हो रही है. आपके आने से लगता है की हम अब जरूर सफल होंगे… पैर माँ आपके चेहरे पैर ये केसा दुःख है?? एक सन्यासी जीवन बिताने वाली और भूत और भविष्य सब जानने वाली देवी के मच पैर दर्द के भाव????

दस माँ ने पहले एक बार सलोनी की तरफ देखा और फिर बोलै – गुरुपित तुम एक दम सही हो पैर मेरे दिल में भी किसी के लिए प्यार है. मैं अपनी पोती को इस हाल में और नहीं देख सकती. मेरी बेटी सलोनी के दर्द ने मुज सन्याशी के मन को झंझोर दिया है. तुम इसको मोह भी कहा सकती हो पैर यदि मेने अपने बच्चो में किसी से सबसे ज्यादा प्यार किया है तो वो सलोनी hi है और आज उसको इस हालातो में देख कर मेरा दिल बैठा जा रहा है. और आज जब मुज पैर मेरी बेटी का दर्द देखा न गया तो मैं यहाँ चली आयी उसको इस दर्द से मुक्त करवाने के लिए….

सनोली दस माँ की बाते सुन कर भावुक हो गयी और रोने लगी फिर दस माँ की ानतीं बात सुन कर चहकते हुए बोली –क्या सच में दादी आप इनको (पब) ठीक कर देगी… दादी प्लीज ठीक करिये न… पैर अपने एक साल पहले तो कहा था की इस जहर को बाबा भोले नाथ के इलावा कोई भी नहीं काट सकता. और उनके वर से hi इनको ठीक किया जा सकता है…

सलोनी की बात का जवाब डलासुर जी ने दिया – हाँ बेटी तुम्हारी दादी ने ठीक hi कहा था हम इसको ठीक नहीं कर सकते. और न hi इसको ठीक करने के लिए यहाँ आये है…

सलोनी (बिच में hi) – यदि दादी आप इनको ठीक नहीं कर सकती तो मेरे दर्द को कैसे ख़तम कर सकती है. मेरी तो हर ख़ुशी, मेरा हर दर्द इनसे hi जुड़ा है यदि ये hi ठीक नहीं होंगे तो मुझको दर्द से मुक्ति कैसे मिलेगी….

दस माँ (बहुत प्यार से) – मेरी बेटी मैं तुम्हारे पति को तो ठीक नहीं कर सकती पैर तुम सभी को इसके बंदन से मुक्त कर सकती हु. तुम लोगो पैर इसके मरने के साथ जो मरने का दर है उसको ख़तम कर सकती हु. फिर तुम इसके बंदन से आज़ाद होगी और अपनी एक नयी….

दस माँ की बात सुन कर वह मौजूद पब की सभी पत्नियों को गुस्सा आ जाता है पैर और कोई दस माँ के सामने बोलने की हिम्मत नहीं कर सकता था तो सलोनी, जो की बचपन से hi उनकी लाड़ली थी वो hi गुस्से से बोली – बस दादी बस आगे मत बोलना. अपने ये सोच भी कैसे लिया की मैं अपने मरने के दर से इनको बचने के लिए ये सब कर रही हु. दादी आप अपनी hi दी शिक्षा को भूल गयी…

गुरु – नहीं सलोनी तुम माँ पैर गुस्सा नहीं कर सकती उन्होंने अपनी बात राखी है और पहले हमको उनकी पूरी बात सुन्नी चाहिए और तब भी गुस्सा नहीं वो दानव रानी भी है. तम प्यार से भी मन कर सकती हो. तुम अपने बड़ो से बात करने का तरीका नहीं भूल सकती..

कामिनी – दीदी आप ये किसी बात कर रही है. मन की ये बड़ी है पैर इन्होने हमारे प्यार और विश्वास का अपमान किया है और ये अदिकार किसी के पास भी नहीं की वो हमारे प्यार का इस तरह अपमान करे…

गुरु (तेज़ आवाज में) – कामिनी चुप एक दम चुप… अभी तुम न दस माँ को जानती हो और न hi इनके बारे में तुमको कुछ पता है यदि ये कुछ भी करती या कहती है तो उसके पीछे या तो कोई बड़ा उद्देश्य होता है या फिर नियति का आदेश होता है. इसलिए पहले चुप रहा कर माँ की बातो को सुनो फिर क्या करना है वो हमारा फैसला होगा. तो अब बिच में कोई नहीं बोलेगा…

गुरु की बातो को सुन कर दस माँ के फेस पैर एक स्माइल आ जाती है. जैसे मन hi मन गुरु की तारीफ कर रही हो. और फिर बोलती है – देखो मेरी बच्चियों में तुम सभी को पब के साथ जुड़े उस सम्भोग क्रिया के बंदन से मुक्त करने आयी हु. जिसके कारन पब की जान के साथ तुम सभी की मूट भी निश्चित है. पैर अब ऐसा नहीं होगा तुम सब आज़ाद हो जाओगी और अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी कर सकोगी. तुम सब बंधन मुक्त हो जाओगी. फिर तुम चाहे तो पब को ठीक करने के लिए महादेव को मनाओ या फिर अपनी इच्छा से कही और जा कर अपने जीवन को नए सिरे से सुरुवात करो…

गुरु – आपका बहुत बहुत धन्यवाद् माँ जो अपने हमारे बारे में इतना सोच. पैर माँ मैं और कामिनी तो पहले भी उस बंधन से मुक्त है पैर हमारे लिए हमारा पति hi सब कुछ है और अपने hi मुझको आदेश दिया था की मुझको इसके साथ रहना है. तो मैं तो इसको इस हाल में छोड़ कर कही जा नहीं सकती. पैर यदि इनमे से कोई बंधन मुक्त हो कर कही जाना चाहती है तो आप उसको बंधन मुक्त कर दे माँ.

सविता – दीदी ये किसी बात कर रही है आप मैं तो सब कुछ इनसे hi जुड़ा है मैं अपने पति को छोड़ कर कही नहीं जा सकती.

अवनि – मैं अपने प्यार को छोड़ कर कही नहीं जा सकती मुझको भी सबसे पहले इनको ठीक करने के लिए भोले नाथ को मानना है..

ऐडा – दीदी मैं अपनी बेटी का मुँह भी नहीं देखा है ठीक से केवल इस लिए की इनके लिए बाबा को मन सकू और आप ऐसी बात कर रही है..

सब एक एक करके मन कर देती है तो फिर दस माँ बोलती है – पैर तुम ये सब भी तो सोचो की इसका दुनिया को पाप मुक्त बनाना का सपना भी तो तुम सब को hi पूरा करना है. तुम सब जानती हो अभी दुनिया की क्या हालत है. और उसको ठीक करने में तुम बहुत कुछ कर सकती हो..

सलोनी – दादी दुनिया की हालत से लड़ने के लिए बाबा (दयासुर) है मेरे 2 ताऊ है और फिर गुरूजी (मणि जी) भी उनके साथ है यदि दुनिया के हालत hi ठीक करने के लिए कुछ करना है तो आपको हमारी जगह उन सभी को और शक्तिया दे कर भी वो सब करवा सकती है हमको हमारे पति के साथ छोड़ दो जब तक वो ठीक नहीं होते हम और कुछ भी नहीं करेंगे.

मंजू – माँ हमारी दुनिया तो ये hi है और जब ये hi ठीक नहीं तो हम दुसरो की दुनिया को कैसे ठीक कर सकते है..

दस माँ के समजने के बाद भी जब कोई भी पब को छोड़ने को तैयार नहीं हुयी तो ये देख कर दस माँ ने एक बार फिर कोसिस की पैर वो सब अपने प्यार और पति को छोड़ कर कही भी जाने को या कुछ भी करने को राजी न हुयी. पैर इन सभी बातो ने पब की पत्नियों के दिलो में एक दर्द और दर पैदा कर दिया. जो उनकी आँखों से बहार आने लगा. गुरु ने पहले hi कहा था की दस माँ बिना किसी मकशद के कुछ नहीं करती तो उनकी ये बाते सुन कर सभी के मन में एक दर ने जमन ले लिया था की कही पब को कुछ होने तो नहीं वाला है जो दस माँ उनको पब से दूर होने की बात कहा रही है. सभी में मन विचलित हो चुके थे और सभी आशु बहा रही थी सभी के दिल में हजारो तरह के ख्याल थे और खुद hi उन खयालो से लड़ रही थी. दस माँ शांति से सभी को रट हुए देख रही थी.

कुछ hi देर में डलासुर जी ने एक आवाज लगायी –दाल्भ्य और दक्षणा…..
 
थैंक यू भाई फॉर लवली कमेंट ....

भाई एक और अपडेट दिया है मेने इसको भी पड़े.. और एक देने वाला हु...

सॉरी भाई मैं जनता हु की आपसभी इंतजार करते है और आप सभी को गुस्सा भी आता होगा बूत अपनी कुछ मजबूरियों के चलते रुकना पड़ता है नहीं तो मैं भी चाहता हु की ये स्टोरी जल्दी hi अपने मुकाम पैर पहुंचे.. 1.5 साल्हो गया अभी तक ख़तम hi नहीं हुयी जब लिखना सुरु किया था सोचा नहीं था की ये इतनी लम्बी हो जाएगी.. स्टोरी की रूप रेखा तो पहले दिन में hi पूरी थी बस उसको उचित रूप दे कर आप सभी के सामने रक्त रहता हु और स्टोरी बढ़ती रहती है....
 
अपडेट 273

कुछ hi देर में डलासुर जी ने एक आवाज लगायी – दाल्भ्य और दक्षणा…..

डलासुर जी के मुँह से खुद उनके लिए आवाज लगता सुन कर सभी उनकी तरफ देखने लगी. और देखते hi देखते दस माँ और डलासुर जी जो वह पहले से मौजूद थे वो इतने तेज़ चमकने लगे की कोई उनकी तरफ देख भी नहीं प् रहा था और वह पैर एक और डलासुर और दस माँ प्रकट हो गए. ये सब देख कर तो पब की सभी पत्निया चक्र गयी. किसी के समाज न आया की हो क्या रहा है पैर मंजू और गुरु शायद कुछ कुछ समाज गयी थी और जैसे hi उन्होंने आँखें बंद करके उस चमक में झाकने की कोसिस की तो उनको अपने आप पैर यकीं नहीं हुआ की उनके सामने साक्षात् भगवन भोले नाथ और माता पारवती कड़ी है. ये देखते hi उनकी आँखों से ख़ुशी के आशु बहाने लगे और वो दोनों hi जमीन पैर दंडवत लेत कर प्रदम करने लगी. गुरु और मंजू की ये हाल देख कर और सभी भी कोसिस करने लग की हो क्या रहा है.

जी हाँ दोस्तों जो अभी तक दक्षसूरी (दस माँ) और डलासुर बन कर इन सभी से बात कर रहे थे उनको पब का साथ छोड़ने की सलहा दे रहे थे वो और कोई नहीं भगवन भोले नाथ और माता पारवती hi थे. और वो दोनों इनके प्रेम की परीक्षा ले रहे थे. और जब वह असली डलासुर और दक्षसूरी आ गए. तब भोले नाथ बोले -

भोले नाथ – दाल्भ्य और दक्षणा ये सभी बच्चिया अपनी परीक्षा में सफल हुए है. नियति में अपने कर्मो से परिवर्तन करने के कारन पब को कीमत चुकानी पड़ी थी उसकी भरपाई आज उसकी पत्नियों ने अपने प्रेम और विश्वास से कर दी है. आज इन सभी ने सिद्ध कर दिया की प्रेम से बड़ा इस संसार में कुछ नहीं है. पहले पंकज ने ये सिद्ध किया और आज इन्होने ये सिद्ध कर दिया. मैं इन सभी कन्याओ की बक्ति से प्रश्न हु और इनके पति पंकज को जीवन दान देता हु. और साथ मैं वो शक्ति भी देता हु जो उसने अपने प्रेम को श्रेष्ठ सिद्ध करने के कारन छोड़ दी thi.(Danav राजकुमारों की सभी शक्तियों जितनी जीवन शक्ति जो पब ने अवनि के साथ सेक्स करके मिलनी थी पैर उसने मांगा केवल प्रेम) परन्तु एक बात का डायन रहे जरुरी नहीं की इस शक्ति से वो किसी से भी जीत सकता है. यदि नियति ने बदलाव किये है तो जरुरी नहीं की सभी कुछ बदल जाये या सब कुछ वैसा hi रहे…

ये सुन कर की भोले नाथ ने पब को जीवन दान मिल गया है पब की पत्नियों का ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा वो तो अपनी ख़ुशी को संभल hi नहीं प् रही थी. भोले नाथ के चुप होने hi माता पारवती बोली – दाल्भ्य ये परिवर्तन नियति यानि मेने इसलिए भी किये है कियोकि तुमने भविष्य देखने के बाद भी नियति के कामो में कोई ह्क्तक्षेप नहीं किया था. और आगे का तुमने जो भी देखा है जरुरी नहीं है की सब वैसा hi हो.

दक्षणा (दस माँ) - माँ इसका मतलब जरुरी नहीं की हमको मुक्ति मिले??

पारवती – बेटी तुम भूल रही हो नियति ने कभी किसी ऋषि के वरदान को निष्फल नहीं किया है तो तुम्हारा भी नहीं होगा. तुम दोनों को मुक्ति जरूर मिलेगी पैर कैसे और कब इसके लिए तुम दोनों को अपने कर्म करते हुए प्रतीक्षा करनी होगी.

दक्षणा – जो आज्ञा माँ

फिर भोले नाथ के हाथ से एक रौशनी निकलती है जो पब के शरीर में समां जाती है और देखते hi देखते पब के शरीर से नीला रंग गायब हो जाता है. पैर अभी भी पब होश में नहीं आया था जब तक कोई कुछ कहता या पूछता उससे पहले hi भोले नाथ और माँ पारवती अंतर्ध्यान हो गए. पब को उसकी सभी पत्निया घेर कर कड़ी थी और पब बेहोश पता था जब 2 मं तक पब नहीं उदा तो सलोनी बोली – दादी देखो न ये तो अभी भी नहीं उड़ रहे है,

दस माँ – बेटी इतनी अधीर न हो अभी जहर का ाशर ख़तम हुआ है इतने दिनों से शरीर में जो कमजोरी आयी है उसमे कुछ तो समय लगेगा hi. और फिर अब इसके शरीर में इसकी शक्तिया भी एक्टिव होने लगी है देखना कुछ hi देर में तुम सब भी पहले जैसी हो जाओगी.

दस माँ की बात से उनको थोड़ा सबर होता है नहीं तो उनको तो अब एक एक पल काटना भरी हो रहा था. तभी मंजू बोली – हे माँ भोले नाथ ने ये क्या कहा की पब ने नियति को बदल दिया. उसने एक निश्चित घटना को बदल दिया?? क्या ये सच है??

दस माँ – हाँ बेटी ये सच है. और कोई भी व्यक्ति अपने सात कर्मो से विदी के विधान को बदल सकता है पैर ये तभी संभव है जब आपकी नियत और कर्म दोनों सच्चे हो और आप पुरे दिल से उस काम को कर रहे हो.

गुरु – पैर माँ इन्होने ऐसा किया क्या जो विदी का विद्वान hi बदल गया..

दस माँ – बेटी इसने युद्ध के दुराण अपने दुसमन के लड़ने के कारन और उसकी भावनाओ को देखते हुए, मरते हुए दुसमन के भी प्राण बचा लिए (भलासुर और नकसुर को दिव्यांश को दक्का दे कर बचाना). प्रेम के आगे उसने शक्ति को ठुकरा दिया तो सम्भोग क्रिया भी समय से कुछ पहले hi ख़तम हो गयी. प्रेम के लिए नियति ने भी पब का साथ दिया और समय से पहले सम्भोग किरिया होने के कारन hi त्रिकाल आज उस शक्ति पुंज में कैद है. और इस वजह से hi पिताजी (दिव्यांश) भी वह नहीं पहुंच पाए और वो बॉक्स पब ने समय से पहले hi खोल दिया. उसके 2 अक्षर हुए एक त्रिकाल का कैद होना और दूसरा पिताजी के उप्पेर गिरने वह जहर पब के उप्पेर गिरना. नियति का तो नियम hi है की कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. और पब ने विदी के विद्वान में जो बदलाव किये उसके कारन hi पब को इस जहर की चपेट में आना पड़ा. पैर तुम सभी ने एक बार फिर प्रेम और भक्ति को जीता दिया. पब ने तुम्हारा प्रेम अपने साथ बनाये रखने के लिए शक्ति को ठुकरा दिया तो तुम सभी ने पब के प्रेम के लिए अपना सब कुछ भुला कर पब को अपने प्रेम के बल पैर बचा लिया. बस अब इस बात का हमेशा ख्याल रखना की कभी भी ये प्रेम काम न हो कियोकि तुम सभी की सभसे बड़ी ताकत प्रेम hi है. जिसने आज देवा दी देव महादेव को भी यहाँ आने केर विवश कर दिया.

दस माँ की बातो ने सभी के दिल को एक शांति प्रदान की उनके दिल में एक ख़ुशी पैदा हो गयी. एक साल में उन्होंने जीतनेय भी कष्ट सही थे उनका दर्द इस पल की ख़ुशी के साथ hi ख़तम हो गया.

दस माँ – अच्छा मेरी बच्चियों अब मैं भी चलती हु. कुछ hi देर में मणि और दयासुर दोनों यहाँ पहुंच जायेगे. जो तुम सभी का सही मार्ग दर्शन करेंगे.

दस माँ ने जाते जाते अपने हाथ से कुछ किरणे निकल कर उन सभी पैर दाल दी जिससे कुछ hi पालो में वो सभी फिर से पहले जैसी खूबसूरत और हेअल्थी हो गयी. अभी ये सभी पब के पास बेथ कर बाटे hi कर रही थी की जुली और उनके साथ कुछ लड़किया यहाँ आ गयी कियोकि ये उनका रोज का काम था पब के लेप करने का पैर जब उन्होंने पब और उन सभी को एक दम ठीक देखा तो सभी ख़ुशी से चीख ुधि और उनकी आँखों में भी ख़ुशी के आशु आ गयी. वही hi पब होश में न था पैर अब वो पहले जैसा हो गया था उसकी बॉडी बहुत तेज़ी से रिकवर हो रही थी और उसके साथ hi पब की पत्नियों को भी अपने अंदर उनकी शक्ति का आभाष फिर से होने लगा था. इस लड़कियों ने पुरे दानव बेस में ये बात फैला दी तो उस रूम के बहार hi सभी इखट्टा हो गयी. जुली तो मरे ख़ुशी के सुबक सुबक के रो रही थी जो आज तक इस सभी की ढल बानी हुयी थी जिसने पिछले एक साल में किसी के सामने 1 आशु नहीं बहाया था जिसने सभी को होशला दिया था सभी का पूरा डायन रखा था आज वो जुली फोट फोट कर रो रही थी पिछले एक साल के आशुओ को वो आज नहीं रोक प् रही थी. गुरु ने भी उनको सहारा दिया और जुली गुरु से किसी छोटी बच्ची की तरह चिपक कर रोये जा रही थी. गुरु ने भी उसको रोने दिया और वो भी उसके साथ रोने लगी. आज फिर सभी की आँखों में आशु थे पैर ये आशु ख़ुशी के थे.

कुछ देर बाद पब ने धिरे धिरे अपनी आँखें खोली और बोलै – अवनि अवनि अवनि कहा हो तुम?? अब किसी हो?? तुमको अब दर्द तो नहीं हो रहा न….

पब की आवाज सुनते hi सभी के चेहरे खिल गए. अवनि तो अपना नाम सुन कर खुद को रोक न पायी और पब के सीने से जा लगी. और रोने लगी. पब अभी बेथ hi पाया था की अवनि उससे चिपक गयी अवनि के बालो पैर हाथ पेरते हुए उसने चारो तरफ देखा तो उसको समाज आया की वो अब अपने दानव बेस में है तो गुरु की तरफ देख कर बोलै – गुरु मैं यहाँ कैसे आया?? वह क्या हुआ?? डलासुर जी आज़ाद हुए या नहीं?? मुझको यहाँ कोण लाया?? मैं बेहोश कैसे हो गया था बॉक्स खोलते खोलते?? मैं कब से बेहोश हु?? त्रिकाल की साधन पूरी हुयी या अभी कुछ टाइम बचा है?? नहीं नहीं अब तक तो हो hi गयी होगी कियोकि जब मेने बॉक्स खोला था तब hi टाइम पूरा हो चुक्का था.. तो त्रिकाल से बचने के लिए कुछ सोच है?? दानव बेस से बहार निकलते hi वो हम पैर हमला कर देगा…

पब तो एक दूँ में बोले hi चला जा रहा था न तो किसी को बोलने दे रहा था और न hi चुप हो रहा था और ये सब भी पब की आवाज सुनने और उसको देखने में hi खोयी थी आखिर इतने इन्तजार के बाद उनका चौथ का चाँद जो देखने को मिल रहा था. जब पब चुप hi नहीं हुआ तो गुरु ने उसके होंटो पैर हाथ रख कर उसको चुप होने का इशारा किया. और उसकी आँखों में देखने लगी. अवनि तो पब के सीने में घुशी हुयी थी उसको दिन दुनिया से मतलब hi ख़तम हो चुक्का था. वाकई भी पब के चारो और बेथ गयी जिसको जहा जैसे जगह मिली बेथ गयी पब ने लग कर बस……

ये सब ऐसे कितनी देर बैठे रहे इनको होश hi नहीं रहा.. ये तो अपने प्यार को महसूस कर रहे थे बस.. इन सभी की तरंग टूटी एक छोटी बच्ची के रोने की आवाज सुन कर… और जब पलट कर देखा तो जुली एक छोटी सी बच्ची को गॉड में ले कर कड़ी है जो की रोये जा रही है. जुली के हाथ में बच्ची देख कर ऐडा ने भाग कर रोटी हुयी बच्ची को अपनी गॉड में ले लिया और उसको पागलो की तरह चूमने लगी. ऐडा की गॉड में आते hi बच्ची चुप हो गयी शायद उसने अपनी माँ की गॉड को पहचान लिया था. मन भर के चूमने के बा दादा ने उसे अपनी छाती से चिपका लिया. और आँखें बंद कर ली ये सब देख कर पब बोलै – जुली ये किसकी बच्ची है??? और यहाँ कैसे आ गयी??

जुली – आपकी है…

पब जुली की बात सुन कर चौक गया और फिर ऐडा और बच्ची की तरफ धयान से देखने लगा कुछ देर तक सब समझने की कोसिस करते रहने के बाद बोलै – मैं कितने दिनों से बेहोश हु???

गुरु – दिनों से नहीं आप पुरे 1 साल से बेहोश है. आज आपको बेहोश हुए पूरा साल हो गया है.

पब – क्या कहा 1 साल बीत गया??? ऐसा क्या हो गया था मुझे और फिर मैं ठीक कैसे हुआ ??? हुआ क्या था???

फिर गुरु और अवनि पब को सब कुछ बताते है. सब कुछ सुनते हुए पब की आँखें भी भर जाती है जब उसको पता चलता है की उसको बचने के लिए दानव सेना की लड़कियों ने और खाश कर उसकी पत्नियों ने क्या क्या किया है. तो एक बार फिर भावुक हो कर सभी को गले लगा लेता है. कुछ देर तक ऐसे hi मेल मिलाप चलता रहता है फिर पब धयान में बेथ कर पिछले एक साल में देश और दुनिया में जो भी हो रहा है उसको देखता है और ये भी देखता है की उसकी पत्निया ने क्या क्या किया है. धयान से उड़ कर फ्रेश हो कर जब बहार आता है तो उनकी पत्नियों ने खाने की तैयारी कर राखी थी. पब की आँखों में खाना देख कर आशु आ जाते है की उसकी किसी पत्नी ने पिछले एक साल से खाना नहीं खाया है और ये सोचते हुए एक प्लेट खाने की ुधा कर सभी को अपने हाथो से खिलने लगता है तो वो भी सभी उसको खिलने लगती है.

खाना होने के बाद पब जब रूम से बहार आता है तो देखता है की दानव बेस की सभी लड़किया उसको देखने के लिए बहार hi कड़ी है. उस सभी को देख कर पब हाथ जोड़ता है और बोलै – मैं आप सभी का आभारी हु जो आप सभी में मेरी इतनी सेवा की है. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद्…

पब इसके आगे कुछ बोलता उससे पहले hi एक लड़की बोली – नहीं मालिक आप हमको ये बोल कर पराया मत करिये. हम सब तो आपकी दशिया है और आप हमारे भगवन. और भगवन की सेवा करना तो हर दासी का फर्ज होता है. बल्कि हम तो खुश है की हमको आपकी सेवा करने का कोई तो मौका मिला. आप हमारे लिए क्या है ये हम आपको बता नहीं सकते… प्लीज मालिक आप हाथ मत जोड़िये ये हाथ हम जैसे बे सहारा लड़कियों को सहारा देने के लिए है. उनको हमारे आगे जोड़ कर हमको सर्मिन्दा मत कीजिये…..

पब जब उस लड़की को देखा तो पब को उससे बाते करते हुए उसकी आँखों में एक अलग hi कसीस दिखाई देती है. ये देख कर एक बार तो पब चौक जाता है तो पब उस लड़की की आँखों में झाकने लगता है और जब वो उसके मंद को रीड करता है तो पब की बेचैनी बढ़ने लगती है. पब किसी तरह खुद को शांत करके उन सभी को समजा भुजा कर बापिस उनके रूम्स में भेज देता है और खुद जुली के साथ अंदर रूम में आ जाता है. जहा उसकी सभी पत्निया बैठी हुयी शशि के साथ खेल रही थी.

पब अंदर आ कर जुली की तरफ देख कर बोलै – गुरु एक बड़बड़ हो गयी है.

गुरु – क्या हुआ??

पब – गुरु मेने जो वरदान अवनि के साथ मांगा था उसका अक्षर शायद दानव बेस की हर लड़की पैर हो गया है. एक तो वो पहले से hi मुझको अपना भगवन मानती थी अब तो दिल की गहराइयो से वो सब मुझको चाहने लगी है. और जो मेने देखा है उससे तो लगता है की उस पावर का अक्षर अभी बहुत काम हुआ है पैर जल्द hi जब मेरी power’s पूरी एक्टिव हो जाएगी तो मैं चाहा कर भी उन सभी को खुद को चाहने से नहीं रोक पाउगा….

जुली – तो इसमें गलत क्या है ठाकुर साहब?? वो तो पहले भी आपको चाहती थी और अब भी चाहती है तो इसमें गलत क्या है?? प्यार करना कोई गुन्हा तो नहीं… काम से काम आपको उनका प्यार दिखा तो नहीं तो…………
 
अपडेट 274

जुली – तो इसमें गलत क्या है ठाकुर साहब?? वो तो पहले भी आपको चाहती थी और अब भी चाहती है तो इसमें गलत क्या है?? प्यार करना कोई गुन्हा तो नहीं… काम से काम आपको उनका प्यार दिख तो नहीं तो…………

जुली बोलती बोलती रुक गयी और बहार को चली गयी. ये देख कर एरिका बोली – लगता है इसका दिल भी आ गया है आप पैर….

पब – हम्म लगता तो ये hi है…

अवनि – और मांगो प्रेम का वरदान.. मन कर रही थी मैं पैर मेरी तो सुनते hi नहीं हो न आप…

पब – अच्छा मैं तुम्हारी नहीं सुनता?? ये वरदान मांगने के लिए मुझको मजबूर किसने किया tha…bolo…

गुरु – अरे आप भी न इससे बच्चो के जैसे लड़ने लगे… जो हो गया वो भूल जाओ और अब ये सोचो की यदि ये सब इतनी शिद्दत से आपको चाहने लगी तो उसका क्या अक्षर होगा??

अवनि – दीदी इनका बाद में सोचना पहले ये सोचो की उन 8 लड़कियों को कैसे ठीक करना है… उनकी कंडीशन भी तो ठीक नहीं है. और वो सब hi बेबी के बनाये सभी प्रोग्राम और सॉफ्टवर्स को जानती है. उनके बिना तो हम उनको उसे भी नहीं कर पाएंगे.

पब (बेबी के बारे में भी उसने दिव्या दृष्टि से देख लिया था. और पब को ये भी पता था की उन लड़कियों के हाल क्या है) दांत भीचते हुए बोलै – उन बेबी को तो मैं छोड़ूगा नहीं, साली की छूट में बहुत आग है न देखना क्या हाल करता हु उसका…….

गुरु – पब उसको बाद में देखेंगे. अभी बहुत कुछ ऐसा है जो तुमको संभालना है. दुनिया के हाल तुमको पता hi है. और फिर ये सब लड़किया भी है…

पब – गुरु ये सब छोड़ो ये बताओ दीदी किसी है?? मैं उनको देख नहीं पाया जल्दी -2 में…

गुरु चुप हो जाती है और गर्दन झुका लेती है. ये देख कर पब का दिल बेचें होने लगता है. तो वो आँखें बंद करके सोनल को देखने लगता है तो पता है की सोनल इस टाइम मणि जी के आशाराम में है और उसने भगवा रंग की साडी पहने हुयी है. फेस पैर उदासी और आँखों में निराशा लिए वो आश्रम की किचन में खाना बना रही थी. सोनल को इस हाल में देख कर पब का दिल तड़फ गया. तो उसने अपनी ऑंखें खोली और बोलै – गुरु दीदी गुरूजी के आश्रम में क्या कर रही है तुमने तो बताया था की अविनाश और दीदी के बिच में कुछ है और मैं भी खुश था की दीदी अपने जीवन में आगे बढ़ने लगी है. फिर ये सब??? क्या हुआ है?? क्या अविनाश ने देखा दिया?? क्या अंकल नहीं मने दीदी के लिए???

गुरु चुप hi रहती है तो अंकिता बोली – हम सब भी बहुत खुश थे दीदी और अविनाश के लिए पैर पता नहीं किस बात पैर दीदी अविनाश से नाराज हो गयी और उससे बात करना hi बंद कर दिया. और फिर जब दीदी को पता चला की आप इन हालातो में हो तो उन्होंने चेंनल और घर सब कुछ छोड़ कर आश्रम में चली गयी हमने और गुरूजी ने उनसे पूछने की बहुत कोसिस की पैर वो कुछ भी बताने को तैयार hi नहीं है की आखिर बात क्या है. माँ और पापा तो दोनों की शादी करवाने के सपने देख रहे थे. भैया ने खुद hi प्रोपोज़ किया था दीदी को… पता नहीं क्या हुआ है जो दीदी सब छोड़ कर आश्रम चली गयी…

ये सुन कर पब सोनल को फ़ोन लगानेके लिए अंकिता से बोलै तो अंकिता ने फ़ोन लगा कर दिया. कियोकि अभी पब के पास फ़ोन नहीं था. सोनल अंकिता का फ़ोन देख कर कॉल रेसिवेद नहीं करती. तो पब फिर से मिलता है इस बार मन न होते हुए भी सोनल अंकिता का फ़ोन उदा लेती है.

पब - hello दीदी…

पब की आवाज सुनते hi सोनल की आँखें ख़ुशी से चालक जाती है. – hello भाई… तू ठीक हो गया… तू ठीक हो गया मेरे भाई…

पब – आपके होते हुए मुझको कुछ हो भी सकता है क्या?? जिसकी इतना प्यार करने वाली बहन हो वो भाई ज्यादा देर बीमार भी नहीं रहा सकता….

सोनल – नहीं भाई मेने तो कुछ भी नहीं किया है तेरे ठीक होने में मेरी भाभियो में बहुत म्हणत की है. वो hi है जो तुजको मूट से मुँह से बापिस ले आयी. मैं आज बहुत खुस हु मेरा भाई ठीक हो गया.

पब – दीदी पैर आपका भाई बहुत दुखी है…

सोनल – क्यों क्या हुआ?? तू दुखी क्यों है किसी ने तुजसे कुछ कहा क्या???

पब – जिस भाई की बहन उस हाल में हो वो दुखी तो होगा hi न. आप दुनिया से नाते रिश्ते तोड़ कर आश्रम में रहोगी तो आपका भाई क्या ख़ुशी से रहा पायेगा…

सोनल – नहीं भाई तू मेरे लिए दुखी मत हो मैं एक दम ठीक हु. तू मेरी चिंता मत कर… जब मेरी जिंदगी में मेरे भाग्य में, ये hi लिखा है तो तू क्या कर सकता है. तू मेरी चिंता छोड़ और अपनी बता, मेरी शशि किसी है??? (सोनल बात बदलने के लिए hi शशि का नाम ली थी.)

पब – शशि अच्छी है और अपनी माओ के साथ खेल रही है. पैर पहले आप मुझको बताइये की अपने वो सब क्यों छोड़ा?? किसी ने कुछ कहा क्या?? अंकल ने, अविनाश जी ne..ya…

सोनल (बिच में) – नहीं नहीं भाई किसी ने कुछ नहीं कहा मैं hi अपनी मर्जी से वो सब छोड़ कर यहाँ चली आयी. पापा जी और वो तो बहुत दुखी थे मेरे जाने से ….

पब - “वो” मतलब जो अंकिता ने कहा वो सच था??

सोनल (श्रम और दुःख के साथ) – हाँ भाई… बूत मेरी hi किस्मत ख़राब है तो कोई क्या कर सकता है….

पब – नहीं दीदी अब तो आपको बताना hi होगा. ऐसा क्या हुआ की आप इतना आगे जाने के बाद भी सब कुछ छोड़ कर आश्रम में आ गयी .. बोलो दीदी… मुझको बताओ क्या हुआ है.. आपका भाई आपके लिए कुछ भी करेगा. पैर आपके हिस्से की ख़ुशी आपको दिलवा कर hi रहेगा….

सोनल – बताऊगी भाई वो बात भी तुझको hi बताऊगी. और है hi कोण मेरा जिसको वो कला दर्द बता सकू.. पैर भाई अब कुछ नहीं हो सकता, मुझको अपना प्यार पाने के लिए दूसरा जनम hi लेना होगा. अब तो ये आश्रम hi मेरी जिंदगी है…

पब (भीगी आँखों से) – बताओ न दीदी किसी क्या बात है जो अपने मान लिया है की आपको आपका प्यार नहीं मिल सकता. क्या अविनाश जी आपको नहीं चाहते?? या अंकल ने कुछ कहा है. बोलिये दीदी… मैं अपनी बहन की ख़ुशी के लिए अंकल के पेअर पकड़ लगा.. कैसे भी करके अविनाश जी को भी मन लगा.. बस अपेक बार बोलिये तो बात क्या है…..

सोनल – नहीं भाई वो सब तैयार है बूत मैं hi ये शादी नहीं करना चाहती और इसकी वजह में तुमको मिल कर बताऊगी.. भाई एक बात बोलू यदि तू उसको मने तो……

पब – दीदी ये क्या कहा रही है आप, आप अपने भाई को हुकुम करो… मैं हर हल में आपकी हर इच्छा पूरी करुगा…

सोनल – तो भाई उस हरामी संभु को मार दे न… भाई मार दे उस कमीने को… अब मुझसे और दूर नहीं रहा जाता तुजसे… प्लीज उसको मार दे… तड़पा तड़पा के मार de….bhai, तेरी बहन के हर दर्द का कारन संभु hi है.

सोनल ने ये बात रट हुए बोली थी. उसकी आवाज में एक कम्पन था. जैसे पता नहीं कितना दर्द कितना गुस्सा वो अपने अंदर समेटे बैठी हो. और उसको केवल अब इस बात का hi इन्तजार हो की उसका भाई संभु को मरेगा तब hi वो दुःख और गुस्सा ख़तम होगा. सोनल अपने आप को संभल न पायी तो उनसे फ़ोन कट कर दिया. और बहुत देर तक रोटी रही…..

सोनल का फ़ोन कट होते hi पब के नथूड़े भी फूलने लगे गुस्से से… उसने महसूस किया था की उसकी बहन बहुत दर्द में है. वो इस टाइम पब की मंद में केवल ये hi चल रहा था की कैसे वो संभु को मार के अपना वचन पूरा करे. पैर पब को अब गुस्सा और दर्द पलना आ गया था तो वो आउट ऑफ़ कण्ट्रोल नहीं हुआ.

गुरु – क्या कहा दीदी ने??? कुछ बताया की वो क्यों आश्रम में रहा रही है??

पब – नहीं बस उन्होंने अपने भाई से एक hi चीज मागि है और वो है संभु की मूट… और अब संभु को मेरे हाथो कोई नहीं बचा सकता…..

पब ने ये बात इतनी गंभीर और सार्ड लहजे में बोली थी की कोई कुछ बोल hi नहीं पाया. कुछ देर सोचने के बाद पब बोलै – माहि मेने तुमको संभु के कवच के बारे में पता करने को बोलै था क्या हुआ उसका???

माहि – हाँ वो सोनल दीदी ने hi किसी अदिति नाम की लड़की से पता करवाया था की उस कवच की पावर संभु अपने गले में पहने हुए लॉकेट में मौजूद है.

पब अदिति का नाम सुन कर याद करने लगता है कियोकि उसको लगा था की वो इससे मिला है. फिर उसको याद आता है की अदिति तो वो hi लड़की है जिसने उसका (यानि दानवपुत्र) का इंटरव्यू लिया था. तभी माहि फिर बोली – आपको एक बार अदिति से मिलना चाहिए इस बारे में. वो आपकी हेल्प कर सकती है…

पब अभी कुछ और बोलता उससे पहले hi वह दयासुर जी, नकसुर जी, भलासुर जी और मणिशंकर जी आ जाते है. इन चारो को देख कर सभी उनके पेअर छू कर आशीर्वाद लेते है और फिर मणिसंकर जी बोलते है – आज तुमको ठीक देख कर मुझको कितनी ख़ुशी हो रही है ये में बता नहीं सकता पुत्र. और तुम्हारा पुनः मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी दस माँ ने मुझको hi दी है. और इससे मैं बहुत खुश हु. अब तुमको hi इस संसार को इस भयानक संकट से आजाद करवाना है. और उसमे हम चारो भाई तुम्हारे साथ है…

नकसुर जी – बड़े भैया ने एक दम ठीक कहा है पुत्र… अब तुमको hi उन दोस्तो का अंत करना है जिन्होंने संसार में आतंक फैला रखा है…

पब चोकते हुए – बड़े भैया??? यानि की आप जानते है???

भलासुर जी – हाँ पुत्र हमको माँ ने मणि जी का सच बता दिया है. और उसका कारन भी संसार पैर फैला ये संकट hi था. हम चारो को एक साथ एक जुट हो कर काम करने के लिए hi माँ ने ये सच हमको बताया है. तुम तो हमारी जीवन शक्ति ले कर यहाँ सो गए. और बिना शक्ति के इन पापीओ को हमने कैसे रोका है ये हम hi जानते है.

पब - इसने मेरी कोई गलती नहीं है गुरूजी.. फिर भी इसके लिए मैं आपसे…

नकसुर जी – नहीं पुत्र तुमको माफ़ी मांगने की जरुरत नहीं है माफ़ी तो हमको तुमसे मागणी चाहिए. तुमने तो हमको जीवन दान दिया और हम तुमसे फिर से युद्ध करने को तैयार हो रहे थे. वो तो दादाजी ने रोका नहीं तो हम सीक पाप हो जाता…

पब – हाँ गुरूजी देव (दिव्यांश) कैसे है?? कहा है वो??

दयासुर जी – बीटा वो देव है तो उन्होंने हमारे साथ रहने को मन कर दिया. और अपने देव लोक को चले गए. माँ ने बताया था की वो अभी तपश्या में लीं है.

पब – अब मेरे लिए क्या आदेश है गुरूजी???

मणि जी – पब सबसे पहले तो तुमको सम्भोग किरिया पूरी करनी होगी उससे तुम्हारी शक्तिया बाद जाएगी. और तुम्हारी पत्नियों की भी… उसके बाद हम सभी का एक hi उद्देश्य होगा. और वो है पृत्वी को पाप मुक्त करना….

पब – जैसा आप कहे… इस क्रिया को पूरा करने के लिए कोई विशेष आदेश??

मणि जी – नहीं बस तुमको 2 बात का धयान रखना है एक सुरु तुमको सविता से करना होगा और अंत ऐडा से. कियोकि सविता तुम्हारी पहली शक्ति है और ादका पता नै वो इस सम्भोग क्रिया का हिस्सा है या नहीं… हाँ एक बात का और धयान रखना की सभी का चरम पूरा होने से पहले तुम एक बार भी चरम सुख नहीं प् सकते. और अंत में तुमको अपना प्रशाद सभी पत्नियों को देना है…

मणि जी के मुँह से ये सब सुन कर पब की सभी पत्निया शर्मा कर भाग गयी. और पब भी मरे शर्म के सर झुका कर बैठा रहा. वो चारो भी जानते थे की गुरु से इतनी शर्म होनी hi चाहिए इसलिए मणि जी ने बोलै – और कुछ जानना है??

पब ने न में सर हिला दिया. फिर कुछ देर की ख़ामोशी के बात पब बोलै – गुरूजी में आपसे कुछ पूछना चाहता हु…

मणि जी – हाँ पूछो??

पब – गुरूजी मेरे ये समाज नहीं आया की त्रिकाल के पास इतनी पावर्स कहा से आ गयी की उसने इतना बड़ा चक्रवेव बना दिया. जब मुझको उसको तोड़ने के लिए hi इतनी ज्यादा जीवन शक्ति की जरुरत पड़ी तो उसको बनाना में तो न जाने कितनी लगी होगी?? इतनी जीवन शक्ति और वो भी इतने काम टाइम में??? 25 साल वो कोमा में रहा. फिर भी उसकी शक्ति के आगे दिव्यांश जैसे देव भी फ़ैल हो गए?? आप 5 भाइयो कई 100 सालो से तापयशा करके अपनी जीवन शक्ति बड़ा रहे है फिर भी उसकी जीवन शक्ति आपसे ज्यादा??/ कैसे???

दयासुर – ये सब उन 2 वरदानो का कमल है पुत्र जो उसने पिताजी से लिए थे. और इन 2 वरदानो ने hi बहुत कुछ बदल दिया इस संसार में…

पब – कोण से वरदान गुरूजी?? ऐसे कोण से वरदान है जिसके आगे आप सभी फ़ैल हो गए???
 
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