MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 36 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

थैंक यू फ्रेंड फॉर लवली कमेंट एंड सपोर्ट..

भाई पब ने दुनिया से पाप को ख़तम करने को HI ये प्लान बनाया है. अब ये कैसे पूरा होगा या नहीं हो पायेगा ये देखना है.

मास्टर को इसमें शामिल करने के बहुत से कारन है भाई. एक तो मास्टर का पड़ने का पेटन अलग है, उनके पुराने और करंट स्टूडेंट्स की हेल्प मिलेगी. उनको स्कूल चलने का अनुभव भी है. और पब इस प्लान पैर जयादा ध्यान नहीं दे सकता. उसको त्रिकाल पैर धयान देना है..
 
सबसे पहले तो भाई आपका कमेंट देख कर ख़ुशी हुई. बहुत दिन बाद आपका कमेंट आया है... अच्छा लगा देख कर...

भाई उस साये ने जो 4 दानव संभु को दिए है उनके बारे में पब को तो पता HI नहीं है भाई. और यदि मैं अस ा राइटर बात करू तो मेने सोच रखा है और वो आगे आपको देखने को मिलेगा भी. हिंट मेने उस साये के मुँह से HI निकल वाई थी....

और हाँ भाई मंटा हु इस गलती को की मेने त्रिकाल के वेयर में कुछ नहीं दिया. उसको कवर करना भूल गया. कियोकि वो अभी अपनी शदना में HI है इसलिए HI... पैर अब जल्दी HI उसके वेयर में आएगा...

थैंक यू अग्रवाल जी...
 
अपडेट 233

अविनाश के ऐसा कहने पैर सोनल शर्मा गयी वो कुछ बोलती या अविनाश कुछ और कहता उससे पहले दूर पैर दस्तक हुयी. तो ये दोनों अपनी अपनी चेयर पैर ठीक से बेथ गए और आने के लिए बोल दिया. तो रूम में अदिति आ गयी..

अदिति – गुड मॉर्निंग सर.. गुड मॉर्निंग मम…

सोनल – गुड मॉर्निंग अदिति बोलो कैसे आना हुआ??

अदिति – वो मम वो नई प्रोग्राम की डिटेल आपको दिखानी थी.

अविनाश – अच्छा सोनल जी मैं चलता हु. मुझको भी एक मीटिंग के लिए जाना है. Bye… शयाम को चलते है फिर…

सोनल – ok bye अविनाश जी… शयाम को मॉल में hi मिलते है…

और फिर अविनाश वह से चला जाता है. तो सोनल अदिति को बैठने को बोलती है. और उसको उस प्रोग्राम को देखने को बोलती है.

अदिति – मम ये देखिये (फाइल देखते हुए) मेने एक “स्टिंग ऑपरेशन – संतो का सच” के बारे में पूरी डिटेल बना ली है.

सोनल फाइल को देखते हुए – मतलब हम भी और न्यूज़ चैनल्स की तरह अपने संतो को hi टारगेट करेंगे… अदिति क्या तुमको भी लगता है की सभी संत ढोंगी hi होते है.

अदिति – नहीं मम मेरा संतो को टारगेट करने का कोई मकसद नहीं है. मैं तो खुद मानती हु की अपने समाज को संतो से बहुत कुछ मिला है बल्कि मिल रहा है. मेरा तो ये प्रोग्राम दूध का दूध और पानी का पानी करेगा. हम सभी संतो को टारगेट करेंगे. और जो सच्चे संत है उनके बारे मैं भी दिखाएंगे तो उन पाखंडियो को भी बेनकाब करेंगे जो अपने पाखंड से गरीबो को लूट रहे है. (फाइल का पेज पलट कर) देखिये मम मेने कुछ संतो को लिस्ट भी बनाई है. अभी तो हम इन सभी संतो का सच जनता के सामने रख सकते है.

सोनल – (बिना लिस्ट को देखे हुए) पैर अदिति मुझको नहीं लगता की इस प्रोग्राम के लिए हमको परमिशन मिलेगी. यार हम दोनों ने दानव पुत्र को ले कर hi देश में इतना बखेड़ा किया हुआ है. और अब यदि ये चालू कर दिया तो शायद अपने मद सर को भी ये सब संभालना भरी पद जाये.

सोनल की बात सुन कर अदिति का मुँह लटक जाता है. पैर तभी सोनल की नजर उस लिस्ट पैर पड़ती है तो और उस लिस्ट को देखने लगती है. उसमे मणि जी के आश्रम का नाम पद कर वो मुस्कुरा जाती है. की तभी उसकी नजर एक नाम पैर पड़ती है तो आखें बड़ी हो जाती है.

सोनल – ये .. ये संभु कोण है अदिति?? ये कोण सा आश्रम चलता है?? कोण है इसके गुरु??

आप सब समाज hi गए होंगे की सोनल क्यों चौकी है. और वो ये पूछ कर अपने सक को कन्फर्म कर रही है. और अदिति ने ये नाम क्यों लिखा है ये भी आप सब समाज hi गए होंगे. उसका बाप है संभु और वो उसकी नज़र में हीरो है. पैर सोनल ने संभु का जो सच देखा है शायद अदिति उस सच की किसी के लिए कल्पना भी नहीं कर सकती होगी.

अदिति – मम ये भी एक तांत्रिक है और ये घर से hi लोगो की सेवा करते है. इनके गुरु का नाम श्री त्रिकाल महाराजा है.

सोनल तो ये सुन कर बोखला जाती है. संभु और त्रिकाल के लिए इतनी रेस्पेक्ट वो भी अदिति के मुँह से. सोनल अदिति को अभी तक जितना जानी थी उसको अदिति सचाई पसंद एक नेक लड़की hi लग थी. वैसे भी किसी की खूबी या दोष छुपाये नहीं छुपता. तो सोनल भी अदिति की खूबियों से वाकिफ थी. इतने दिनों से दोनों साथ में जो दानवपुत्र के प्रोग्राम पैर साथ में काम कर रही थी. सोनल संभु और त्रिकाल के बारे में सुन कर अदिति के लिए भी चिंतित हो गयी. कियोकि सोनल को लगा की शायद वो इन दोनों को बिलकुल भी नहीं जानती है बस नाम सुन कर नाम लिस्ट में लिख लिया. सोनल को दर था की कही अदिति इन दोनों से उलझ गयी तो ये दोनों उसको और उसके परिवार को hi ख़तम कर देंगे. सोनल को क्या पता उसका परिवार hi संभु से सुरु होता है.

सोनल (एक दर भरी आवाज में) – अदिति तुम इन दोनों कमीनो को शायद जानती नहीं हो. तुम दूर hi रहना इन दोनों से. ये दोनों बहुत खतरनाक है. तुमको और तुम्हारे पुरे परिवार को ख़तम कर देंगे ये दोनों. भूल जाओ तुमने कभी ये 2 नाम सुने भी थे.

अदिति – मम आप ये क्या कहा रही है संभु तो बहुत भले मानव है. वो सदा जनकल्याण में hi लगे रहते है. उनसे और उनके गुरु से भला मुझको केसा भय मम..

सोनल – अदिति अभी तुम उस पाखंडी की हकीकत नहीं जानती. इस दूरिया का सबसे नीच, पापी, वहशी, दरिंदा यदि कोई है तो वो हरामी संभु hi है. वो तो इतना कमीना है की शायद उसकी मूट पैर उसके घर वाले भी खुशिया मनाये. पैर भगवन का खेल देखो अदिति वो मरता भी नहीं उसके जैसे को तो कुत्ते सिब hi बुरी मूट आणि चाहिए. तुम उसे मत उलझो अदिति वो तुम्हारा जीवन तभा कर देगा. किसी भी लड़की का जीवन तभा करना उसके लिए चिति मरने जितना बड़ा काम है.

अब अदिति को अपने हीरो अपने बाप के लिए इतनी गालिया सुन कर गुस्सा आने लगा – बस सोनल जी बस आप मेरी सर. है तो क्या आप उनके लिए कुछ भी बोलेगी और मैं चुप सुन लगी. अब आप अपनी मर्यादा तोड़ रही है. यदि एपनिया बी एक शब्द और कहा तो मैं भूल जोगी की आप मेरी सर, है जिनकी मैं दिल से रेस्पेक्ट करती हु.

सोनल – अदिति मैं तुमको उस कमीने संभु से बचने को कहा रही हु. तुम अभी उसके बारे में कुछ नहीं जानती. मेरी बहन वो तुझको भी उड़वा लेगा. और किसी बाजार की सोभा बना देगा. औरत उसके लिए खेलने का सदन है. प्लीज तुम उससे दूर hi रहना…

अदिति (फुल गुस्से में) – सोनल तू जानती क्या है उनके बारे में. तू होती कोण है जो में तेरी सुनु. आगे एक भी शब्द मेरे पाप के लिए और कहा तो मुँह तोड़ दूगी तेरा. तुझको जानना है न वो क्या करते है तो चल मेरे साथ दिखती हु वो कितनो का भला करते है.

सोनल ये सुन कर फुल चौक गयी – क्या कहा… पापा… कोण??? कोण पापा??

अदिति – संभु जी hi मेरे पापा है और पता नहीं तू मेरे पापा के बारे में क्या -2 बाके जा रही है. नहीं करनी ये नूआकृ. जहा तुम जैसी बॉस हो. जो एक भले इंसान को बदनाम करती हो…

अदिति की बात सोनल को हजम नहीं हो रही थी. और सोनल के कहे शब्द अदिति को गुस्सा दिलवा रहे थे. तो दोनों hi कुछ देर चुप बैठी रही. फिर कुछ देर में अदिति कड़ी हो कर गुस्से से रूम से जाने लगी. तो सोनल को भी जैसे होश आया और वो बोली – अदिति रुक जाओ. एक बार मेरी बात सुन लो…

अदिति – सोनल अब कहने और सुनने को कुछ नहीं बचा है. अब मैं यहाँ एक पल भी नहीं रुक सकती.

सोनल – ठीक है तुम जाना चाहती हो तो जाओ बस एक बात का जवाब दे दो…

अदिति – बोलो..

सोनल – ये तुम भी जानती हो की मुझको नहीं पता था की संभु तुम्हारा बाप है. फिर भी मेने उसके बारे में वो सब कहा. कुछ तो सच होगा न. और यदि मैं झूट बोल रही हु तो क्या तुम बता सकती हो की मैं तुमसे झूट क्यों बोलूगी. जबकि तुम जानती हो मेने तुमको हमेशा छोटी बहन hi समजा है.

सोनल की बात का अदिति पैर अक्षर हुआ. वो भी सोचने पैर मजबूर हो गयी कियोकि वो भी सोनल को इतना तो जानती hi थी की सोनल सच में उसको अपनी छोटी बहन की तरह hi मानती है. और एक नेक दिल और सच्ची लड़की है. फिर भी उसने उसके पापा के बारे में वो सब कहा जबकि वो ये भी नहीं जानती थी की वो उसके पापा है. और हर बार उसको भी संभु से बचने को कहा रही थी. यानि की उनके मन में मेरे लिए कोई गलत विचार नहीं है. पैर फिर मेरे देव तुल्य पापा के बारे में इतनी गलत बात क्यों कही. क्या कारन है इसके पीछे??

अदिति – सॉरी मुझको गुस्सा आ गया था. पैर फिर भी अपने मेरे पापा के बारे में इतना गलत क्यों कहा??

सोनल – अदिति प्लीज बुरा मत मन्ना और शांति से मेरी बात सुन्ना. अदिति तुम शायद अपने पापा की हकीकत को नहीं जानती हो. वो बहुत से ऐसे काम करते है जिन पैर तुम शायद hi कभी विश्वास कर पाओ..

अदिति – आपके पास क्या साबुत है. आपको किसने बताया?? हो सकता है वो झूट बोल रहा हो.

सोनल – अदिति मैं खुद एक साबुत हु तुम्हारे पापा के खिलाफ. मुझको किसी ने नहीं बताया अदिति बल्कि मेने सब अपनी आखों से देखा है (मन में – बल्कि मेने वो सब सहा है) फिर भी मैं जानती हु की तुम मेरी बात का कभी यकीं नहीं करोगी. तुम खुद एक जौर्नालिस्ट हो. और एक सच्चा जौर्नालिस्ट तो धुआँ देख कर hi पूरी आग की कहानी खोज लेता है. तुम्हारे सामने तो मैं जलती हुई बैठी हु तो तुम भी इस आग की कहानी का पता करो. सचाई तुम्हारे सामने होगी.

अदिति – ठीक है यदि आपको ये लगता है तो ये hi सही और मुझको विश्वास है की मेरे पापा निर्दोष hi साबित होंगे. और मैं आपकी गलतफमी को दूर जरूर करुँगी. मैं एक जौर्नालिस्ट का दरम जरूर पूरा करुँगी.

सोनल – बेस्ट ऑफ़ लक अदिति. भगवन करे तुम hi सच्ची निकलो ताकि तुम्हारे दिल को वो दर्द न सहना पड़े. पैर फिर भी इस काम को बहुत संभल कर करना. और हाँ यदि तुम मेरे सच को आजमाना चाहो तो अपने पापा के सामने अल्पना भट्ट का नाम लेना और फिर उनकी फेस रीडिंग करना. शायद तुमको कुछ मिल जाये.

अदिति – ok दोने.. अब मैं भी चीन से जभी बेठुंगी जब मैं अपने पापा को बेगुन्हा साबित कर दूगी.

फिर अदिति वह से निकल जाती है. और सोनल अपनी hi सोच में डूबी रहती है. धयान तो उसका उसके फ़ोन से टुटा.
 
अपडेट 234

यहाँ पब और अवनि चलते हुए फिर बहुत आगे आ गए थे. और इस वॉर वो कंपास देखते हुए hi आगे बाद रहे थे. शयाम का टाइम हो चुक्का था पैर अभी भी वो दोनों उसी जंगल में hi थे. और अब जब वो बढ़ते हुए जा रहे थे तो एक दम से पब हवा में hi किसी से टकरा गया. सामने देखा तो कुछ नहीं था. पैर जब भी आगे बढ़ने की कोसिस करता तो उसको ऐसा लगता की वो दीवार से टकरा रहा है. अवनि भी पब को देख कर रुक गयी थी. तो पब ने अपनी दिव्या दृष्टि को एक्टिव किया और सामने देखा तो वो देखता hi रहा गया. सामने एक मायावी देवर या कहो एक बहुत hi मजबूत सेफ्टी शील्ड थी. और इसका कोई अंत भी नज़र नहीं आ रहा था. जब पब ने डायन से देखा तो उसे पता चला की ये त्रिकाल की बनाई हुयी एक ऐसे शील्ड है जिसका उसके पास कोई थोड़ नहीं है.

पब को समाज नहीं आ रहा था की ए.बी.ए. आगे किसी बड़ा जाये. शील्ड तोड़ना उसके बस का नहीं और बिना शील्ड थोड़े अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं. पब को परेशां सोचता हुआ देख कर अवनि भी पब से उसके बारे में पूछती है तो पब भी उसे सब बताता है.

अवनि – एक बार गुरूजी से बात करके देखिये न. वो तो जानते होंगे इसके बारे में..

पब – अवनि गुरूजी से बात कैसे हो सकती है?? फ़ोन में सिंगल नहीं है. और मन hi मन बात होना यहाँ सम्भब नहीं है.

अवनि – नहीं अभी मन hi मन बात हो रही है. गुरु दीदी से अभी तो मेने की है..

पब चोकते हुए – क्या तुमने की?? तुम कबसे वो कला सिख गयी??

अवनि – तो क्या इतने दिनों तक दीदी ने मेरा जोट ेल निकल है वो यु hi क्या?? दीदी ने मुझको सिखाया है ये भी. पैर अभी सभी से कनेक्ट नहीं हो पति हु. केवल गुरु दीदी से hi हो पति हु तो उनसे hi घर का हाल चल ले रही थी.

पब अवनि की बात से चौक गया. इसलिए नहीं की अवनि वो सब कैसे सिख गयी बल्कि इसलिए की इस चक्रवेव में आ कर बाते कैसे हो रही है. तो वो भी दयासुर जी से कनेक्ट होता है. और उनसे दोनों सवाल करता है.

दयासुर जी – पुत्र मुझको लगता है की तुम अभी तक बहार के जंगल में hi भटक रहे हो. उस चक्र्विएव में घुसे hi नहीं हो. जो तुमको सामने शील्ड दिख रही है न ये hi है वो शील्ड जो इस चक्रवेव का बाहरी हिस्सा है. पूरा चक्रवेव इस शील्ड के अंदर hi है. और इस शील्ड के कारन hi ये दिव्या दृष्टि और भी बहुत सी बातो से सेफ है.

पब – ओह्ह तो हमको इस शील्ड के अंदर जाना है. पैर जाये कैसे?? ये तो टूटेगी भी नहीं..

दयासुर जी – तोड़ने की कोसिस भी मत करना नहीं तो अपनी साडी ताकत लगा कर भी उस शील्ड को नहीं तोड़ पाओगे. उस शील्ड का एक एंट्री पॉइंट है. और वो तुमको खुद से ढूढ़ना होगा को उसमे जाना होगा.

पब – गुरूजी कुछ तो बताइये की उस एंट्री पॉइंट को कैसे खोजू???

दयासुर जी – पुत्र तुमको एक बहुत बड़ी बात बताता हु. तुम्हारे पास जो चंद्र हंस तलवार है न वो hi तुमको इस यात्रा के हर मुश्किल टाइम में काम आएगी. वो तुम्हारी सबसे सहायक होगी.

और इतना कहा कर दयासुर जी कनेक्ट तोड़ देते है. शयाम का वक्त हो चला था. और वो दोनों इस जंगल में hi थे. फिर पब अवनि को सब बताता है. तो अवनि भी सोच में पद जाती है की उस एंट्री गेट को कैसे खोजै जाये. एक तो रात होने को थी. और ये अभी तक उस चक्रवेव के गेट पैर भी नहीं पहुंचे थे. काफी देर सोचने पैर पब को एक तरकीब सूजती है तो वो अपनी तलवार को याद करता है. और अपनी तलवार को लकड़ी की एक पतली पैर मजबूत डंडी के सिरे पैर टिकता है. एक हाथ से लकड़ी को पकड़ा था. और दूसरे हाथ से तलवार की दार को लकड़ी के सिरे पैर टिकता है. और फिर भोले नाथ का नाम ले कर उसको धिरे से घुमा देता है. तलवार भी 2-3 बार 360 घूम कर रुक जाती है. पैर इस बार तलवार का अगला सिरा किसी और दिशा की और रुका था. अवनि जो इस सब को अभी तक बड़े धयान से देख रही थी. वो एक दम बोल पड़ी – यानि की हमको उस दिशा की और जाना है.

पब – हाँ अवनि हमको अब उस दिशा की और hi बढ़ना होगा. कियोकि और कोई ऑप्शन नहीं है. पैर हमको इस वाल को भी नहीं छोड़ना है.

फिर ये दोनों चल देते है उस और पब ने अपनी दिव्या दृष्टि को एक्टिव hi रखता है ताकि वो उस शील्ड की वाल को देखता हुआ आगे बाद सके. दोनों को चलते हुए फिर 1 -1.5 हॉर्स हो चुक्का था. की तभी पब को उस वाल में एक छेड़ नजर आया. वो गेट के जैसा hi था. तो पब समाज गया. की ये hi है उसकी मंजिल की और जाने का रास्ता. पब अवनि को भी बताता है और दोनों जान वही रुक जाते है.

पब – अवनि गेट तो मिल गया. पैर मैं सोच रहा हु की सुबह फ्रेश हो कर hi अंदर चलेंगे. अभी तो रात हो चुकी है और मुझको लगता है तुम भी तक गयी होगी. तो अभी सो लेते है सुबह ध्यान में बेथ कर पहले अपनी जीवन शक्ति को पूरा करके फिर अंदर चलेंगे.

अवनि – हम्म ठीक है. पैर सोयेगे कहा. जमीन पैर तो हर तरफ कांटे hi है. और पानी भी फिनिश हो चुक्का है और खाना भी थोड़ा सा hi है.

पब – तुम चिंता क्यों करती हो मैं हु न.. चलो सोने चलते है.

और ये बोल कर पब अवनि का हाथ पकड़ कर टेलिपोर्ट हो जाता है. और जैसे hi अवनि सामने देखती है तो उसके मुँह से चीख निकल जाती है. और चीखते हुए पब के गले लग जाती है या कहो की उसके गले पैर लटक जाती है. कियोकि उसके पैरो के निचे जमीन नहीं थी. और यदि वो पब पैर न लटकती तो वो गिर जाती. कियोकि वो दोनों इस टाइम एक 25-30 फ़ीट उप्पेर एक पेड़ की दाल पैर थे. पब तो दाल पैर खड़ा था. पैर अवनि वो सब देख कर hi चीख उडी और दाल से गिरने को हो गयी. और पब के गले में झूल गयी पब ने भी अवनि को किसी बच्चे के जैसे गौड़ में ले कर उस पेड़ की दाल पैर hi लेट जाता है. अवनि पब के उप्पेर लेती थी. अवनि तो इस पल हवाओ में, पब के सीने से लगी, उसके उप्पेर लेती थी. अवनि का वो हाल था जो शब्दों में नहीं कहा जा सकता. आज उसको सरे जहा का सुकून मिल गया था. पुरे दिन पेडल चलने से जो थकन हुयी थी वो एक पल में hi ख़तम हो गयी. वो पब के दिल पैर अपना कान लगाए उसकी दध्कनो को सुन रही थी. उसके आलिंगन के सुखद अहसास का आनद ले रही थी. पब के सीने में अवनि के बड़े और ठोस चुके दबे हुए थे. पब को उनकी अपने सीने पैर रगड़ बहुत hi मीठा अहसास दे रही थी. बहुत देर तक दोनों एक दूसरे को महसूस करते रहे. एक दूसरे के सरीर पैर हाथ फेरते रहे. ये पहली बार था जब अवनि पब के साथ इस तरह लेती हुयी थी. पैर दोनों के इस प्रेम मिलान में वाष्ण अभी तक नहीं आयी थी. दोनों अपने प्रेमी को महसूस करके उसके साथ के इस पल को जी रहे थे. उसके सरीर के अहसास को अपने सरीर पैर महसूस कर आनंद ले रहे थे. जब बहुत देर बाद अवनि को होश आया तो वो बोली – ये क्या कर रहे है हम?? आप जनते है न हम से अभी नहीं कर सकते??

पब – क्या गलत कर रहे है हम?? मैं तो अपनी अवनि को प्यार कर रहा हु. सालो से तड़फते दिल को सुकून दे रहा हु. तुमको इसमें क्या गलत लगता है??

अवनि – मैं आपके उप्पेर लेती हु और आप कहा रहे है की क्या गलत है. चाहिए निचे बहुत देर हो गयी है. सुबह ुध कर अपने पहले पड़ाव की और बढ़ना भी है.

पब –निचे कहा सोयेगे. भूल गयी की जमीन पैर उन कटीली झाड़ियों के कांटे बिखरे पड़े है. अब तुम चुप चाप सो जाओ. सुबह उड़ना भी है न..

अवनि – सो जाऊ?? कहा आपके उप्पेर ऐसे hi?? आपको लगता है की हम सो पाएंगे?? आपको लगता है हम कण्ट्रोल कर पाएंगे??

पब – मैडम जी आपका तो नहीं पता पैर मैं खुद पैर कण्ट्रोल कर सकता हु. और आज तो तुमको ऐसे hi सोना पड़ेगा. चलो अब आखें बंद करो और सो जाओ.

पब की बात मान कर अवनि भी अपनी आखें बंद करके पब के सीने पैर hi अपना फेस रख कर सो जाती है. पब भी अपनी आखें बंद कर लेता है. और दोनों अपनी नीड की हसीं वादियों में खोये थे. दोनों प्रेमियों को एक दूसरे की बांहो में आखें बंद करते hi बहुत सुकून की नीड आ गयी थी.
 
थैंक यू फ्रेंड्स फॉर सपोर्टिंग में...

फ्रेंड्स मेरा ऑफिस में कुछ प्रोब्लेम्स चल रही है. बड़ी मुश्किल से जॉब बची है. 2 मंथ की सैलरी तो पहले HI ुधा दी. अब जॉब जाने के भी चांस है. तो अभी ऑफिस पैर धयान दे रहा हु. इस लिए उपदटेस नहीं आ रहे. एक बार सब सेट उप ठीक हो जाये फिर रेगुलर अपडेट देना सुरु कर दुगा....................

ी थिंक यू आल ऑफ़ ओने अंडर स्टैंड माय प्रॉब्लम... जॉब के बिना कुछ नहीं है दोस्तों...
 
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अपडेट 235

सोनल और अविनाश मॉल में बहुत साडी शॉपिंग करके घर आ चुके थे. सोनल अविनाश के साथ बिताये उन लम्हो को याद कर बार-2 मुस्कुरा रही थी. और यहाँ अविनाश का भी ये hi हाल था. वो भी सोनल के साथ बिताये टाइम में खोया था. उसको भी सोनल के प्यार का अहसास हो चुक्का था और सोनल को भी पता लग गया था की अविनाश उसको पसंद करने लगा है. पैर दोनों में से कोई भी ये दूसरे से कहने की हिम्मत नहीं कर रहा था. और अभी तो केबल ये एक अहसास मात्रा hi था. दोनों इस बात को पूरी तरह कन्फर्म करना चाहते थे. हो सकता है जो लग रहा है वो बस बहम हो. या केवल दूसरे के प्रति रेस्पेक्ट हो. दोनों के लिए पहले प्यार का पहला अहसास था. दोनों hi जैसे इस नशे में खोये थे. और जब सर्वेंट ने डिनर के लिए आ कर बोलै तो दोनों अपने नशे में hi मुस्कुराते हुए टेबल की और चल दिए. पता था यार का दीदार फिर होगा. तो होंटो पे मुस्करात और आखों में सररत तो आणि hi थी.

अभी दिंनिंग टेबल पैर अविनाश, लता, रतन और सोनल bête हुए थे. अखिल भाई का पता नहीं कहा थे. वैसे भी वो मस्त मोला इंसान था. किसी को पता नहीं होता था की वो क्या और कब करता है. सबसे छोटा था तो लता और रतन ने छूट भी बहुत दे राखी थी. और कभी सख्त होते भी तो अविनाश उसको बचा लेता. उसके सरे इल्जाम अपने उप्पेर hi ले लेता. लता और रतन भी ये सब जानते थे पैर अपने बेटो का आपस का प्यार देख कर वो भी चुप हो जाते थे. अविनाश एक जिम्मेदार इंसान था. उसने अपने पापा के बिज़नेस को बहुत अच्छे से संभल रहा था. पैर कुछ दिनों से उसका धयान भी केवल R-news पैर था.

रतन – बीटा आज की मीटिंग का क्या रहा??

लता – आपको कितनी बार कहा है की bête से जो भी बिज़नेस की बात करनी हो वो खाने के बाद या पहले किया करो. अभी केवल फॅमिली टॉक…

अविनाश – हाहाहाहाहा.. वैसे काम हो गया डैड…

लता (आखें दिखते हुए) – अविनाश… कहा न ….

अविनाश – सॉरी माय स्वीट माँ.. अब नहीं करता ok.. बूत माँ मुझको आपसे काम था. ैतुल्य आपसे एक परमिशन लेनी है.

लता – बोलो बीटा क्या बात है. तुमको कबसे परमिशन की जरुरत पद गयी?? कही कोई लड़की तो पसंद नहीं कर ली तूने??

ये सुन कर अविनाश जप जाता है एक बार सोनल की तरफ देखता है तो वो भी शर्मा केर नज़रे जुका लेती है. और लता ये सब देख रही थी. और मुस्कुरा भी रही थी.

अविनाश – नहीं माँ.. ऐसी बात नहीं है. वो तो मैं कुछ और कहना चाहता था. वो डैड आपसे भी वो सब कहना था.

रतन – बीटा तुम तो मेरी शान तो माय डिअर सोन.. जो बोलना है बेझिजक बोलो..

अविनाश – वो माँ मेने और सोनल जी ने इन संडे को अंकिता दीदी के पास जाने का सोचा है. मेने आज तक अपनी बहन को नहीं देखा माँ मैं भी अपनी बहन से मिलना चाहता हु. अपनी सुनी कलाई पैर राखी बढ़वाना चाहता हु…

अविनाश की बात पैर पहले तो रतन और लता चौक गए फिर बहुत खुश हुए. वो भी चाहते थे की उनके bête भी अंकिता को अपनी बहन मने. पैर उन्होंने इस बात के लिए उनको कहा hi नहीं कियोकि फरकेफुल्ली बनाया रिश्ता बंदन बन जाता है.

लता ख़ुशी से – ये तो बहुत hi अच्छी बात है. मैं आज बहुत खुश हु की तुमने अपनी बहन की तरफ अपना हाथ बढ़ाया तो…

अविनाश – माँ दीदी मुझसे मिलेगी तो रही न?? वो नाराज तो नहीं है न अपने भाई से??

लता – ारे पागल लड़के वो ख़ुशी से पागल हो जाएगी. एक बार तू जा तो सही उसके पास…

फिर कुछ देर तक ऐसे hi बात करते हुए डिनर हो जाता है और सभी अपने -2 रूम में चले जाते है. लता और रतन अपने रूम में पहुंचे तो रतन बोलै – ये अवनीश ने बहुत अच्छा किया लता. अपनी बेटी को भी उसके भाई का प्यार मिलेगा. लता तुम अविनाश के जाने की तैयारियां करवा देना. आखिर बहन की सुसराल पहली बार जा रहा है. ऐसे hi न चल दे पागल..

लता – हम्म मैं देख लगी सब आप चिंता न करे. वो बहुत समझदार है.

रतन – हाँ समझदार तो बहुत है सारा बिज़नेस सँभालने लगा है अकेला. पैर पता नहीं आज कल इसका डायन केवल R-news पैर hi है.

लता – आप भी न कुछ नहीं समझते. अपने जवानी के दिनों को भूल गए. कैसे मेरे पीछे घूमते रहते थे. वो तो अल्पना और प्रतिक थे तो उन्होंने सब संभल लिया था. नहीं तो आपको तो काम से मतलब hi नहीं रहा था.

रतन – कहना क्या चाहती हो तुम?? क्या सच में अपने bête ने बहु धुन hi है?? तुम जानती हो उसे?? यार मैं तो कबसे चाहता हु की इसकी शादी हो जाये. पैर ये मेरी सनटैन hi नहीं..

लता – पक्का तो नहीं पैर मुझको अंदाजा तो है. वो यदि वो hi लड़की है तो मेरी तो हाँ है..

रतन – लता पहेलियाँ न बजाओ जो भी कहना है साफ़ -2 कहो न… कोण है वो लड़की??

लता – मुझको तो लगता है वो और कोई नहीं सोनल hi है. अपनी बेटी hi अपनी बहु बनने वाली है.

रतन खुश होते हुए – क्या सच में?? तो मुझको भी मंजूर है तुम कल hi पंडित जी को बुलवा लो. कल hi सगाई की डेट फिक्स कर देते है.

लता – सबर करिये जी.. ये केवल मेरा अंदाजा है. और मैं चाहती हु अविनाश खुद हमसे कहे की वो सोनल को पसंद करता है. और फिर अभी तो पंकज भी नहीं आ पायेगा. कुछ दिन तो बच्चो को एन्जॉय करने दो. और हाँ अब आप थोड़ा ज्यादा बिज़नेस पैर डायन देना ये तो R-news के अलावा कुछ देखने से रहा.

रतन – हहहहहहह.. तुम भी न लता…

ये दोनों पति – पत्नी तो अपने bête की शादी के सपने सजाने में लगे हुए है. इनको अब हम डिस्टर्ब नहीं करते…

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वह अवनि और पब पेड़ पैर सो रहे थे. यहाँ lata-ratan सपनो में खोये थे. पैर एक अनजानी जगह पैर एक बहुत खास मीटिंग चल रही थी. ये एक बड़ा हॉल था. जहा चेयर पैर 16 लोग बैठे हुए थे. सभी बहुत hi तगड़े, पहलवान टाइप थे. और उनके फेस से hi पता चल रहा था की वो सब दानव है. पैर एक दानव बूढ़ा साडू टाइप था. और ये था दानवो का गुरु. और वो सब दानव थे दानव रक्षक (डॉ1, डॉ2, DR3…etc) जिनके वेयर में दयासुर जी ने पब को बताया था.

डॉ1 – गुरूजी अब क्या करना है. मानवो ने तो दर से आतंक फैलाना hi बंद कर दिया है. न केवल भारत में बल्कि दूसरे देशो में भी उसका दर बनने लगा है. लोग सचाई का रास्ता अपनाने लगे है.

डी. गुरु – इस पंकज से सच में बहुत विकत इस्थिति पैदा कर दी है. मणि, दयासुर और न जाने कितने आदराम को रोकने में लगे हुए थे पैर कोई भी ऐसा नहीं कर सका. मानव के मन में उसका इतना भय हो गया है की छोटे – मोठे अपराधों को छोड़ दो तो कोई भी अपराध करने से hi डरने लगा है. यदि ऐसा hi चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हम दानवो को फिर एक बार शक्ति विहीन होना होगा. मानवो के ये दुष्कर्म हमको और सात करम देवो को बल देते है. और यदि मानव दुष्कर्म hi नहीं करेगा. तो फिर एक बार ये देव विजयी हो जायेगे. जहा कलयुग में हम दानवो का अदिकार होता है. फिर भी देवताओ ने डलासुर को धरम के मार्ग पैर ला कर कलयुग में भी चुप कर रहना पद रहा है.

डॉ2 – हाँ गुरूजी इतने शक्ति साली हो कर भी कायरो की तरह चुप कर बैठे है. मेने तो पहले hi कहा था डलासुर कैद में है दक्षसूरी और दयासुर को हरा कर हम लोग दानव राज बन जाते है पैर अपने hi हमारा साथ नहीं दिया.

डी. गुरु – मूर्खो जैसी बात मत करो, तुम नहीं जानते की दक्षसूरी के पास भी माता गोरी की शक्ति है. वो तुम सबको पल भर में बिखेर सकती है. और डलासुर कोई कैद में नहीं है. तुम जानते हो वो केवल प्रतिज्ञा से बाँदा है इसलिए वह कैद में पड़ा है. यदि को करोड़ में आ गया तो फिर तुम जानते हो क्या हो सकता है. मेने सालो से इन दिनों का इन्तजार किया है. अब तुम कोई भी गलत कदम ुधा कर मेरे सालो के प्लान को फ़ैल मत कर देना…

डॉ1 – नहीं गुरूजी हम बिना आपकी आज्ञा के कुछ भी नहीं करेंगे. बताइये क्या करना है हमको??

डी. गुरु – अपने सभी योद्धाओ (दानव रक्षक दवरा त्रिनेड दानव – RY)(ye hi स्कूल में मिले थे फारूक के पास) को वापिस बुला लो. कियोकि जब मानव hi पाप नहीं करेगा तो वो तो वैसे hi बेकार हो जायेगे. हम हमको उनके दिमाग को दूसरी तरह से तैयार करना होगा. जिससे वो उस पंकज से बिना डरे मानवो को कुचल दे. और फिर एक बार अधर्म hi अधर्म हो.

डॉ3 – वाह गुरूजी क्या सोचा है अपने.. अपने रय के सामने उन लड़कियों की एक नहीं चलेगी. फिर अपने रय उन लड़कियों को hi रगड़ देंगे. और एक बार फिर वासना का नंगा नाच होगा.

डी. गुरु – हाँ एक दम ठीक सोच. रय के मन में दर कोई नहीं बैठा सकता. रय खुद डार्क ा दूसरा नाम है. पंकज कोसिस भी करेगा तो भी केवल वो उन रय को hi मार पायेगा जो उसके सामने होंगे. और युद्ध में सिपाही तो मरते hi है.

डॉ1 – पैर गुरूजी सभी को वापस बुलाना और फिर सभी के दिमागों में परिवर्तन करना बहुत समय ले लेगा.

डी. गुरु – कोई बात नहीं वैसे भी हमने बहुत इन्तजार किया है. तुम इस काम को सुरु कर दो. हाँ उससे पहले एक काम करना. वो संभु को जानते हो न?? उनको 50 रय की जरुरत है. वो कुछ बड़ा करने की सोच रहा है शायद..

डॉ3 – गुरूजी संभु और त्रिकाल hi तो वो मानव है जो हमको प्रिये है और हम उनको hi नहीं पहचानेगे ये कैसे हो सकता है. मैं आज hi उसके पास 50 रय भेज देता हु. पैर ये सब संभु के कहने पैर hi काम करेंगे…

डी. गुरु – कोई बात नहीं तुम भेज दो संभु वो चीज है जो किसी से नहीं दर सकता.

पैर डी. गुरु की ये बात डॉ1 को कुछ समाज नहीं आयी थी. पैर वो सभी के सामने नहीं बोलै. वो गुरु से कुछ पूछना चाहता था. पैर कुछ सोच कर चुप रहा गया.

ये लोग बहुत hi खतरनाक प्लान कर रहे है. पता नहीं पब इनको कैसे रोकेगा. और अभी तो पब है भी नहीं तो अभी क्या होगा?? संभु ने इतने रय लिए है तो ये इनको भी पब के खिलाफ hi उसे करेगा न..
 
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अपडेट 236

सुबह सूरज की पहली किरण के साथ hi पब की आखें खुल गयी. हलकी सी रौशनी में अवनि का मासूम चेहरा देख कर पब का दिल भगवन हो गया. पब अवनि के चेहरे में खोया रहा. और उसके हाथ अवनि की पीठ पैर और खास गए. अवनि के मुलायम और नुकीले निप्पल पब क्व सीने पैर चुभ रहे थे. एक तो मॉर्निंग में उनका लुंड पहले hi खड़ा था. और फिर चूचियों के अहसास से hi जटके लेने लगा. अवनि को भी अपनी जनहो के बिच में हिलता हुआ डंडा महसूस करके जग गयी. उसे लगा कोई साप या कुछ और तो नहीं. उसने दर से पब के लौंद को पकड़ कर दूर छिटका. जैसे को उसको वह से ुधा कर फेक रही हो. पैर पब का लुंड तो अवनि के हाथ में आते hi जोर का झटका लेने लगा. और इस बार सीधा अवनि की छूट से जा कर लगा. तो अवनि की भी आह्हः निकल गयी. और अवनि को भी अहसास हो गया की वो क्या है. तो एक दम हड़बड़ा कर उड़ने लगी. पैर पब ने उसे उड़ने नहीं दिया.

पब – अवनि क्या कर रही हो गिरना है क्या??

पब की बात से अवनि को याद आया की वो जमीन से 25-30 फ़ीट उप्पेर एक पेड़ की दाल पैर पब के उप्पेर सोई हुयी है. यदि ुधि तो हमेशा के लिए hi ुध जाएगी. तो दर से पब से जोर से चिपक गयी. तो एक बार फिर अवनि को अपनी छूट पैर लुंड की चुभन फील हुयी. अवनि – आआह्ह्ह्ह….. पंकज उधो न. चलो निचे चलना है अब. फिर हमको आगे भी तो बढ़ना है.

पब का मन तो नहीं कर रहा था. लुंड पैर कोमल छूट का अहसास, सीने पैर चुभते निप्पल और अवनि की गरम सासे गले पैर फील करके उसे बड़ा मज़ा आ रहा था. पैर अवनि ने कहा रही था. आज से उनकी यात्रा का पहला पड़ाव सुरु होना था. तो पब ने टेलिपोर्ट हो कर पेड़ से निचे आ गया अवनि अभी भी उसकी गौड़ में hi थी.

पब ने अपनी जलतत्व की शक्ति से पानी की व्यवस्था की. दोनों जान नित्यकरम से फ्री हो कर धयान में बेथ गए. पहले पब ने अपनी जीवन शक्ति को बढ़ाया और फिर एक बार हवेली में सभी से बात की. सब पब से बात कर खुश हो गए. एक बार फिर पब को बेस्ट ऑफ़ लक बोल उनका पब से कनेक्शन टूट गया.

पब और अवनि तैयार हो कर जा पहुंचे उस गेट पैर और जैसे hi पब ने गेट के अंदर कदम रखा तो एक आवाज गुजी. – सवदान यहाँ किसी भी प्राणी का आना वर्जित है. यदि कोई अंदर आता है तो वो अपनी दुखद मृत्यु का स्वयं जिम्मेदार होगा.

पब और अवनि इस आवाज को सुन कर चौक गए. और चारो और देखने लगे पैर उनको कोई नहीं दिखा. वैसे भी वो जानते थे की वॉक इस रहा पैर है तो उनको इस चेतावनी से फरक नहीं पांडा था. पैर बात इतने कड़क लहजे में कही थी की अवनि के जिस्म में दर की एक लहार दौड़ गयी.

पब ने देखा की कुछ दुरी तक तो खली जगह है पैर उसके आगे फिर एक जंगल है. पैर ये जंगल बहार के जंगल से अलग लग रहा था. यहाँ पेड़ जायद ुचे नहीं थे. केवल 12-15 फ़ीट की हिघ्त के hi थे. और जैसे hi वो उस जंगल के पास पहुंचे. और उन्होंने जंगल की तरफ अपना कदम रखा. तो फिर आवाज हुयी. “प्रथम चरण आरम्भ”. वो दोनों समाज गए की 7 चरणों में से 1सत चरण में वो पहुंच चुके है. और इन 7 चरणों के बाद मिलेगा को तालाब जिसमे डलासुर का देव रूप कैद है. वो दोनों अपनी सोच में आगे बाद रहे थे. अभी जंगल में पेड़ बहुत दूर दूर थे. तो दोनों उनके बिच में से hi जा रहे थे. पब ने देखा की ये पेड़ कुछ अजीव है. पेड़ में 8-10 फ़ीट की हाइट तक कोई भी दाल या पट्टी नहीं थी. उप्पेर के 5-7 फ़ीट हाइट में hi दाल और पट्टी थी. निचे के हिस्से में कांटे निकले थे. पैर ये कांटे छोटे नहीं थे. हर कांटा काम से काम 1 फ़ीट लम्बा तो था hi, और बहुत नुकीला भी था. और सबसे बड़ी बात ये थी की कांटे केवल उप्पेर की और सर उढ़ाये नहीं थे. बल्कि हर दिशा में थे. उनका नुकीला सिरा डार्क ग्रीन था. जबकि पिछले सिरा लाइट ग्रीन था. पेड़ो की ये बनावट बहुत अजीब थी पब ने ऐसे पेड़ कभी नहीं देखे थे. पब उनको डायन से देखता हुआ चल रहा था. और सोच रहा था की ये ऐसे क्यों है. तभी अवनि अपनी बेखयाली में एक पेड़ की नजदीक पहुंच जाती है और पब जैसे hi अवनि की और देखता है एक दम उसको अपनी और खींच लेता है. अवनि क अपेद की तरफ जाना और पब का उसे अपनी और खींचना ये कुछ hi पालो में हो गया पैर इसके साथ एक और काम हुआ और वो ये था की उस पेड़ के सभी कांटे सभी दिशाओ में तीर की तरह चल गए. 2 कांटे अवनि के सूट पैर भी लगे. और पब के सूट पैर भी 1 कांटा लगा. पब ने उनको तुरंत निकल फेका. और जब पेड़ की और देखा तो उस पेड़ पैर फिर से वैसे hi कांटे आ चुके थे. पब एक दम अवनि पैर चिल्ला पड़ा – अवनि होश में हो या नहीं?? क्या तुम पार्क में घूम रही हो जो इतना बेखौफ हो. यदि मेने एक पल की भी देर की होती तो तुम अभी मर चुकी होती.

पब की दांत सुन कर अवनि के आशु आ गए एक तो वो उन काँटों से hi दर गयी थी. फिर पब ने उसे दांत दिया. अवनि के आशु देख कर पब को लगा की और शायद ज्यादा hi रियेक्ट कर गया. तो बोलै – सॉरी यार, पैर थोड़ा डायन से देख कर चलो यहाँ कर कदम पैर मूट है.

अवनि – it’s ok, पैर तुम बहुत तेज़ दांत रहे थे. ऐसा भी कोई करता है क्या…

दोनों ऐसे hi बाते करते हुए आगे बाद रहे थे. पब समाज गया था की यदि उन पेड़ो के पास जायेगे तो वो उन पैर कांटे बर्षा देंगे. और यदि एक भी कांटा लग गया सरीर से डायरेक्ट तो मूट पक्की है कियोकि कांटे जेहरीले थे. तभी तो पब दर गया था की कही अवनि को कुछ हो न जाये. वो अभी थोड़ा hi आगे आये थे की जंगल घाना होने लगा. अब दो पेड़ो के बिच में बहुत काम जगह थी. आगे बढ़ने के लिए उन पेड़ो के बिच से hi जाना था. ये वो तलवार से देख चुक्का था (जस्ट लिखे प्रीवियस) पब और अवनि एक जगह खड़े हो गए. दोनों के समाज नहीं आ रहा था की आगे कैसे बड़े. अवनि को भूक भी लगी थी. और घर का खाना फिनिश हो चुक्का था. पैर अवनि बोली नहीं कियोकि उसको दिख रहा था की यहाँ कुछ नहीं है. पब कुछ देर तक सोचता रहा की इन पेड़ो को कैसे पार किया जाये. पब ने सोच की यदि इन पेड़ो को hi हटा दिया जाये तो आगे बाद सकते है. तो पब ने हाव् अक के बड़ा बवंडर तैयार किया और पेड़ो की तरफ छोड़ दिया. हवा अपने साथ कुछ पेड़ो को उखड कर ले गयी. और कुछ पेड़ो को गिरा गयी. पैर ये क्या बवंडर के आगे बढ़ते hi पेड़ फिर अपनी जगह पैर थे. कोई भी पेड़ काम नहीं था. फिर पब ने आग के कुछ गोले फेके. पेड़ो में आग लग गयी. और हवा में जहरीला धुआँ होने लगा. ये देख कर तो पब की हवा hi खराब हो गयी तो उसने जल्दी से पपनी की बर्षा कर आग को बुझा दिया. पैर तब तक जहरीली हवा अवनि की सांसो में चली गयी और वो बेहोश हो कर गिर गयी. पब को भी नशा सा हो गया था. पैर पब अपने आप को संभाले हुए अवनि को ुधा कर थोड़ा पीछे को चला गया जहा उस धुएं का इफ़ेक्ट नहीं था. वह पब ने अवनि को लिटाया और अपना बेग खोल कर उसमे से कुछ जड़ी बूटी निकल कर अवनि को सुंगई और खुद भी उसे सुगने लगा. वो ये जड़ी बूटी कुछ तो घर से hi ले कर चला था. और कुछ उसने पिछले जंगल ने भी ली थी. (पब को जड़ी बूटीओ का गायन भी माहि से प्राप्त वर से हुआ है) कुछ hi देर में अवनि को होश आ गया था. फिर दोनों वह बेथ कर सोचने लगे की कैसे आगे बड़ा जाये. अभी दोपहर का टाइम हो गया था लगभग 2 बाज चुके थे. और इतनी तेज़ धुप में भी वो पेड़ के निचे नहीं बेथ सकते थे.

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संभु विला

जब अदिति सुबह उडी तो उसके चेहरे पैर एक दृढ़ता थी. एक आत्मविश्वास था. बात ये थी की वो रात को hi सोच चुकी थी की उसे आगे क्या करना है. वो किसी भी हाल में अपने पापा को बेकसूर साबित करना चाहती थी. और उसके लिए उसने रात में hi बहुत कुछ तैयारी कर ली थी. और वाकई तैयारी के लिए सुबह hi घर से निकल गयी. करीब 9 बजे जब वापिस आयी तो अपने साथ लाया सामान अपने रूम में रख कर संभु के रूम में पहुंची. तो उसने देखा की संभु अभी नाहा रहा है. तो फिर भाग कर अपने रूम में गयी और अपने सामान में से कुछ हिडन कैमरा ले कर सभु के बनाये मंदिर में चली गयी. और वह पैर उनको छुपा दिया. ये वो मंदिर था जहा बेथ कर संभु अपने घर वालो और समाज को देखने के लिए कुछ लोगो की समसयाओ को अपनी तांत्रिक शक्ति से सुलझाता था. इस कारन hi इसकी समाज में बहुत इज्जत थी. और ये उन लोगो से कोई पैसे भी नहीं लेता था. अदिति वह सरे कैमरा फिट करके अपने रूम में आ गयी. उसने सोच लिया था की वो मंदिर में होने वाली घटनाओ को रिकॉर्ड करके अपने पापा को बेगुन्हा साबित करेगी. पैर वो संभु पैर पूरी तरह नज़र रखना चाहती थी. इसलिए उसने अपनी कुछ दिन की छुट्टियों की एप्लीकेशन R-news में मेल कर दी थी. और जब संभु अपने मंदिर में जा कर जान कलिआण के काम करने लगा. तब अदिति ने संभु के रूम में घुस कर उसके मोबाइल और रूम में बग्स और कैमरा लगा दिए. उसके पर्स में एक चिप रख दी. उसके बाद अदिति ने संभु की कार में भी अपना जाल बिच दिया. अपना सारा काम निपटा कर अदिति अपने रूम में आ गयी और अपने लेपटॉप को ों करके अपने सरे सिस्टम को एक्टिव कर दिया. और संभु पैर नजर रखनी सुरु कर दी.

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ीदार लता ने आज बर्फ करते हुए सोनल से बोलै – सोनल आज तुम ऑफिस से छुट्टी कर लो. मुझको तुम्हारे साथ शॉपपिंग पैर जाना है.

सोनल – ठीक है माँ. पैर ये शॉपिंग किस लिए??

लता – वो बीटा तुम दोनों अंकिता से मिलने जाओगे तो क्या खली हाथ जाओगे क्या??

सोनल – पैर माँ मैं और अविनाश जी ने कल इवनिंग में hi कर ली थी.

लता – अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है. चलो दिखायो क्या -2 ख़रीदा है तुम दोनों ने??

सोनल – ok माँ बर्फ करते hi मैं आपको दिखती हु.

फिर सोनल और लता बर्फ करके रूम में पहुंच जाते है. और सोनल लता को कल की हुयी शॉपिंग दिखती है. लता को उसमे कुछ कमी लगती है. तो वो और सोनल शॉपिंग पैर चले जाते है. रस्ते में hi अविनाश का फ़ोन आता है की सोनल तुम कहा हो. और जब सोनल बोलती है की वो आज ऑफिस नहीं आ रही है. तो अविनाश सदा सा मुँह बना कर फ़ोन काट कर देता है. सोनल का दिल भी शॉपिंग में नहीं था और वह अविनाश भी सोनल के लिए बेचीं था. और लता इन दोनों की बैचेनी को समाज कर मन hi मन हंस रही थी.

शॉपिंग पूरी होते होते दोपहर हो जाती है. तो लता ड्राइवर को कार R-news के ऑफिस ले चलने को बोलती है ये सुन कर सोनल को बड़ी ख़ुशी हुयी उसका उतरा हुआ चेहरा फिर खिल गया. ये लता भी देख रही थी. कुछ hi देर में दोनों R-news के ऑफिस में होते है. लता की सिक्योरिटी ऑफिस के बहार hi रहा जाती है. ऑफिस में लता को देख कर सारा स्टाफ खड़े हो कर उनको विश करता है. तो लता वह सब देखने लग जाती है. और सोनल पहुंच जाती है अपने केबिन में. पैर वह पैर अविनाश सोनल की चेयर पैर लेता हुआ सा होता है. जैसे hi अविनाश सोनल को देखता है एक दम खुश हो जाता है पैर झूठा गुस्सा दिखते हुए बोलै – कहा थी तुम?? मैं कब से तुम्हारा वेट कर रहा था. और तुम अब आ रही हो. ये भी कई टाइम है ऑफिस में आने का??

सोनल – सॉरी सॉरी अविनाश जी वो माँ मुझको अपने साथ शॉपिंग पैर ले गयी थी. तो मैं क्या करती.

अविनाश – कल hi तो किट hi न हमने शॉपिंग फिर आज क्यों?? और यदि जाना hi था तो शयाम को भी जा सकती थी न.

अभी अविनाश सोनल को बिलकुल पति की तरह hi दांत रहा था. और सोनल भी एक पत्नी की तरह hi उसकी सुन भी रही थी. और उसी तरह उसे जवाब भी दे रही थी. और गेट पैर कड़ी लता दोनों की इस नोक जोक का मज़ा ले रही थी. अब उसको पूरा विश्वर हो गया था की ये दोनों सच में एक दूसरे से प्यार करते है. तो लता अविनाश से मज़े लेने के लिए अंदर आती हुयी बोली – अविनाश क्या कहा रहा है तू?? क्यों दांत रहा है तू इसको इस तरह??

अविनाश की तो लता की आवाज सुन कर hi बोलती बंद हो गयी पता नहीं अब माँ क्या सोच रही होगी?? क्या कहेगी. अब क्या करू. यार मैं ये कैसे भूल गया की ये माँ के साथ गयी थी तो माँ भी इसके साथ हो सकती है. कहा फंस गया में??

अविनाश – वो.. माँ आप यहाँ?? माँ ऐसी कोई बात नहीं है. वो मुझको कुछ काम था सोनल जी से तो इसलिए hi पूछ रहा था. और कोई बात नहीं है.

लता – क्यों ये एक दिन की छूती भी नहीं कर सकती क्या?? क्या मैं अपनी बेटी के साथ शॉपिंग पैर भी नहीं जा सकती क्या?? अब मुझको तुमसे पूछ कर जाना होगा?? ऐसा क्या काम था जोट ु खुद नहीं कर सकता..

अविनाश – नहीं नहीं माँ ऐसी कोई बात नहीं है. आप जब चाहे जहा चाहे जा सकती है मैं आपको कैसे रोक सकता हु. आपको डैड नहीं रोक पते तो मैं कोण होता हु…

लता – रुक माँ को छिड़ता है अभी बताती हु तुझको. और सुन तू मेरी बेटी को बहुत डांटने लगा है. अब वो ऑफिस नहीं आएगी. (सोनल को देख कर) जा बेटी इसको सभी फाइल आगरा समजा दे मैं बहार तेरा वेट कर रही हु. हम साथ में hi घर चलेंगे. इसको hi करने दे ऑफिस का काम. हम दोनों माँ बेटी तो घर पैर मज़े से रहेंगे..

ये बोल कर लता तो चली गयी पैर सोनल और अविनाश पैर बम फोड़ गयी दोनों hi ठगे से खड़े रहा गए पैर लता के सामने बोलता कोण?? लता के जाने के कुछ देर बाद अविनाश बोलै – ये माँ क्या कहा गयी सोनल. अब हम साथ काम नहीं करेंगे??

सोनल (गुस्से से) – ये सब न आपकी वजह से hi हुआ है. न तो कुछ देखते हो न सुनते हो बस सुरु हो जाते हो. मैं अंदर आयी नहीं की डांटना सुरु कर दिया. और अब देखो उसका परिदम. अब संभालना R-news को अकेले hi..

अविनाश – नहीं सोनल ये मैं अकेले कैसे करुगा. मुझको तुम्हारा साथ चाइये. प्लीज एक बार माँ से बात करके देखो न. शायद वो मान जाये..

इस बार सोनल गुस्सा थी और अविनाश मन रहा था पहले अविनाश गुस्सा था और सोनल उसको शांत कर रहा था. और लता भी कही नहीं गयी थी रूम के बहार hi खड़ी दोनों की बाते सुन रही थी. ये सब सुनने के लिए hi तो उसने वो बम फोड़ा था. आखिर उसने भी तो अपने टाइम में रतन के साथ ऑफिस में फुल रोमांस किया था. वो पुराणी खिलाडी थी. और ये दोनों अभी इस खेल को सीखे भी नहीं थे. लता उन दोनों को देख कर अपने दिन याद कर रही थी. वो बहुत खुश थी आज.
 
अपडेट 237

पब और अवनि दोनों इस जंगल को पार करने का तरीका सोच रहे थे. पैर दोनों को कुछ भी समाज नहीं आ रहा था. पब ने अपनी दिव्या दृष्टि से भी देखा की उस जंगल के पार क्या है पैर वो देख नहीं प् रहा था. उसको केवल वो जंगल hi नज़र आ रहा था. और जब तक उसके पास क्या है ये पब को न पता हो वो टेलिपोर्ट हो कर भी नहीं जा सकता था. जंगल को ख़तम भी नहीं किया जा सकता था. और न hi उसके बिच से निकल कर जाया जा सकता था. तो काफी देर से चुप अवनि बोली – पंकज हम उड़ कर भी तो ये जंगल पार कर सकते है न??

पब – पैर यार उड़ने की शक्ति कहा है मेरे पास.

पैर अवनि की इस बात ने पब के दिमाग की बत्ती जला दी और उसको इस जंगल को पार करने का रास्ता मिल गया. रास्ता बहुत कदिन था पैर उसके इलावा और कोई चारा भी नहीं था. तो पब ने अवनि को बोलै – अवनि एक तरीका तो है. पैर थोड़ा जोखिम भी है.

अवनि – पब हम यहाँ दर कर तो बैठे नहीं रहा सकते न कुछ तो करना hi होगा.

पब – चलो फिर तैयार हो जाओ हवाई सफर के लिए. अपना मास्क और ग्लप्स पहन लो. ये ड्रेस तुमको उन काँटों से बच कर रखेगी..

पब की बात सुन कर अवनि चौक गयी की अभी तो कहा रहा था की उड़ने की शक्ति नहीं है और अभी कहा रहा है की तैयार हो जाओ हवाई सफर के लिए. चक्कर क्या है पैर उसे पब पैर अब पूरा विश्वास था. और अब उसको मूट का भय भी नहीं था. और शायद इस अटल विश्वास को पैदा करने के लिए hi नियति ने पब से दूर होने का दर्द दिया था. और पब को भी अपनी पत्नियों से मिली उन शक्तियों पैर विश्वास था जिनके दम पैर वो इस खतरनाक सफर के लिए निकल पड़ा था.

अवनि के तैयार होने तक पब ने भी अपने ग्लप्स और मास्क पहन लिया था. उसको इन तीरो से खतरा तो नहीं था फिर भी वो रिस्क नहीं लेना चाहता था. दोनों जान तैयार हुए तो पब ने अवनि को गौड़ में ुधा लिए अवनि ने भी अपनी बांहे पब के गले में दाल दी. और अवनि ने अपनी आखों से इशारा किया की वो रेडी है.

पब पहले थोड़ा पीछे हुआ और एक ुचे पेड़ की सबसे उप्पेर की डाली को देख कर उस पैर स्फोरम पोर्ट हो गया. जैसे hi पब ने उस डाली पैर पेअर रखा पब तुर्रंत डाली पैर से हवा ने उप्पेर को उछाल गया. और दूर पेड़ की एक डाली को देख कर उस पैर टेलिपोर्ट हो गया. जब तक उस पेड़ के कांटे उन तक पहुंचते वो दानो दूसरे पेड़ के टॉप पैर उछाल रहे थे. और जब उस पेड़ के कांटे उन तक पहुंचे तब तक वो अगले पेड़ के उप्पेर उछाल रहे थे. पब पूरा बन्दर बना हुआ था. और अवनि और बन्दर का बच्चा जो बन्दर से चुपके रहता है. एक पेड़ से दूसरे पेड़ पैर तो दूसरे से तीसरे पेड़ पैर उछलते हुए पब आगे बाद रहा था ो न तो रुक सकता था और न hi पीछे लूट सकता था. वो लगातार आगे बाद रहा था. और अवनि हवा में उलटिया कहते हुए दर से पब को काश कर पकडे हुयी थी. अवनि का सर चक्र गया था. तो उसने अपनी आखें बंद कर ली. पब अभी अवनि की तरफ डायन नहीं दे रहा था वो तो हर पल केवल आगे बाद रहा था. एक पल की चूक भी उनकी मूट साबित हो सकती थी. इतनी सतर्कता के बाद भी पब की ड्रेस में कई कांटे घुस चुके थे. और कुछ अवनि की ड्रेस पैर भी लगे हुए थे. पैर ड्रेस की वजह से उनको कोई भी नुकशान नहीं हुआ था. इस सब के बिच पब ने इस बात का पूरा डायन रखा था की वो दिशा से न भटके.

पुरे 2 हॉर्स तक गुलाटी मरने के बाद वो दोनों उस खतरनाक जंगल को पार करने में कामियाब हुए. और जब आगे देखा तो एक बहुत hi सुन्दर बाग़ था. पहले तो पब बैग की जमीन कर पहुंचते hi जमीन पैर hi लेट गया. उसकी हालत खस्ता हो गयी थी. अवनि को गौड़ में ले कर 2 हॉर्स तक हवा में उछलते रहना कोई सरल काम तो नहीं था. पहले वो कुछ देर तक सुस्ताता रहा. जब उसने अवनि को देखा तो वो उल्टिया कर रही थी. हवा में उछलने से उसको उलटी हो गयी थी. अवनि की हालत पब से भी ख़राब थी. उसका सर अभी भी चक्र रहा था. और उसको उलटी पैर उलटी हो रही थी.

पब ने अपनी शक्ति से पानी का इंतजाम करके अवनि को पानी पीने को दिया और फिर उसको अपनी गौड़ में लेता कर उसके सर की हलके -2 मालिश करने लगा. पब उस बाग़ के एक पेड़ के निचे बैठा था. शयाम हो चुकी थी. और दोनों थक कर चूर थे. अवनि अपने सर की मालिश करवाते हुए सो गयी और पब मालिश करते -2 कब सो गया उसको भी पता नहीं चला.

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यहाँ हवेली में सभी अपने कामो में बिजी थे. पब को याद करते हुए भगवन से उसकी जीत की दुआ करती हुयी सभी अपने कामो में लगी थी. वो 10 पावर वाइफ अपनी शक्तियों को बढ़ाने के लिए लगातार धयान भी करती थी. अब अभी शयाम के टाइम से एरिका को अच्छा फील नहीं हो रहा था. तो वो गुरु के पास किचन में पहुंची. गुरु के पास सविता, कामिनी और अंकिता कड़ी थी

एरिका – दीदी मुझको कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा. बहुत कमजोरी हो रही है. लग रहा है की सरीर की ताकत एपनिया प ख़तम हो रही है.

अंकिता – क्या हुआ एरिका?? कोई दवा ववा ली या नहीं??

गुरु – एरिका तुमने धयान लगया या नहीं?? मुझको लगता है वो टेलिपोर्ट की शक्ति का उसे कर रहे है. और शायद कुछ ज्यादा hi उसे किया है उन्होंने.

एरिका – दीदी आज दोपहर से hi ठीक नहीं लगा तो मेने धयान भी नहीं लगाया था.

गुरु – एरिका ये क्या बचपना है गुरूजी ने तुम सबको कितना संजय था फिर भी अभी धयान में बैठो और अपने अंदर देखो की तुम्हारी जीवन शक्ति कितनी है. तुमको पहले hi बताया था की तुम्हारी जीवन शक्ति काम है. तुमको ज्यादा धयान लगाने की जरुरत है.

सविता – दीदी ठीक तो मुझको भी नहीं लग रहा था. थोड़ी कमजोरी मुझको भी थी.

गुरु अपने सर पैर हाथ मरते हुए – तुम सबको अब में कैसे संजो तुम लोग यदि ऐसा hi करती रहोगी तो पक्का हम सब मरे जायेगे.

गुरु कामिनी से – कामिनी जाओ और सभी को बुलाओ.

कामिनी सभी को बुला कर लती है. अभी सब हॉल में बैठे थे.

गुरु – देखो तुम सब धयान से मेरी बात सुनो. अभी तुम सब एक ऐसे युद्ध का हिस्सा हो जिसमे यदि तुमको या उनको कुछ भी हुआ तो हम तो सब मरेंगे hi साथ से न जाने कितने लोगो की उमीदे तहत जाएगी. इस धरती पैर त्रिकाल जैसे डस्ट और पापी का राज हो जायेगा. देखो तुम सबको अपना बहुत डायन रखना है तुमको यदि कोई भी प्रॉब्लम फील हो तो उसको इग्नोर मत करो वो प्रॉब्लम हमारे पति से जुडी हो सकती है. तुम सब यहाँ हो कर भी उस युद्ध के मैदान में उनके साथ हो. यदि तुम से कोई भी कमजोर हो गयी तो वो युद्ध को हार जायेगे.

गुरु की बातो में गंभीरता थी. और वो सब भी उसको समाज रही थी. गुरु ने एरिका और सविता को धयान में बैठने को कहा तो कुछ देर बाद जब को ुधि तो

एरिका बोली – दीदी अपने सच कहा था. मेरी जीवन शक्ति आधी hi बची है. मुझको धयान में बेथ कर उसे बढ़ाना होगा.

सविता – दीदी मेरी भी जीवन शक्ति काफी उसे हो चुकी है. मुझको भी धयान लगाना होगा.

उन दोनों की और गुरु की बात सुन कर ऐडा डरते हुए बोली – दीदी मुझको भी दोपहर से कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा. दिल बहुत गहरा रहा है. अभी दिल की घबराहट तो काम है पैर कमजोरी से नशा सा हो रहा है.

गुरु समाज गयी की ऐडा किसी बात से दर रही है तो गुरु ने ऐडा को अपने गले से लग कर बोलै – बीटा यदि तुमको कुछ प्रॉब्लम थी तो तुमने पहले क्यों नहीं बोलै.

ऐडा धिरे से – दीदी वाओ ो क्या है न की मुझको लगा की मैं आप सबको बहुत परेशां करती हु. हमेशा कोई न कोई प्रॉब्लम बोलती रहती हु. मुझको अच्छा नहीं लगता की आप सब मेरी वजह से परेशां रहते है.

गुरु बहुत प्यार से – ऐडा तुमको पता है तुम्हारी इस युद्ध में क्या भूमिका है??

ऐडा नादानी से गार्डन न में हिला देती है.

गुरु – ऐडा तुम भूल गयी गुरु जी ने आपसे क्या कहा था की आपके जिम्मेदारी सबसे बड़ी है. फिर भी तुम नहीं सामजी की तुम्हारी भूमिका इस युद्ध में कितनी बड़ी है. ऐडा तुम पैर सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और वो है हमारे पति की. उनकी जावन शक्ति तुमसे जुडी है. यदि तुम्हारी जीवन शक्ति पूरी होगी तो hi वो अपनी किसी भी पावर को उसे कर पाएंगे. वो चाहे किसी की जीवन शक्ति का उसे करे न करे पैर खुद को जिन्दा रखने के लिए खुद की जीवन शक्ति को तो उसे करना hi होगा न. और उनको उनकी जीवन शक्ति केवल तुमसे hi मिल सकती है. इसलिए यदि तुमको इतनी सिब hi तकलीफ होगी तो उसका मतलब है की वो किसी परेशानी में है या आने वाले है. ऐडा यदि तुमको रत्तीभर भी कोई भी प्रॉब्लम हो तो तुमको हमसे कहना hi है. ये तुम्हारे लिए नहीं हम सबके पति के लिए है. ऐडा तुम पैर इस उम्र में 2 बहुत बड़ी जिम्मेदारी है एक हम्सब्के पति की और दूसरी हम सभके बच्चे की. और इन दोनों जिम्मेदारी को केवल तुम hi निभा सकती हो नियति से तुमको hi चुना इन सबके लिए. और ऐडा जब तुम सबसे छोटी हो कर सबसे बड़ी जिम्मेदारी ुद्धा सकती हो तो क्या हम सब उसमे तुम्हारी हेल्प भी नहीं कर सकते?? क्या वो हमारे कुछ नहीं है?? क्या उनके प्रति साडी जिम्मेदारी तुम्ही लोगी..

कामिनी गुरु की सभी बातो को सुन कर खुद को रोक नहीं पायी और जा कर ऐडा को अपने गले लगा लिया और बोली – आह्ह्ह्ह मेरी बच्ची तू कितनी बहादुर है. देख खुद नियति ने तुझको सबसे बड़े काम के लिए चुना है. मेरी बहादुर बेटी… अब यदि तुझको कोई भी तकलीफ हो अपनी माँ से कहना. बीटा तुम पैर बहुत कुछ निर्भर करता है. अब कभी ऐसा मत सोचना की तेरे किसी भी काम को करने से हमको कोई भी प्रॉब्लम होगी या हमको अच्छा नहीं लगेगा..

ऐडा भी हाँ में सर हिला देती है. कुछ देर तक सभी ऐसे hi बाते करते रहते है और फिर सभी धयान में बेथ जाते है. इनके धयान में बैठने से पब के अंदर नयी शक्ति का संचार होना सुरु हो जाता है.
 
अपडेट 238

रात को डिनर के बाद सोनल लता के रूम में पहुंची और पहले तो उससे अपने जाने के वेयर में बात करती रही और फिर उसने लता से ऑफिस जाने की परमिशन मागि तो लता ने ये बोल दिया की ठीक है तुम ऑफिस जा सकती हो पैर मंडे से. आज वेडनेसडे था तो उनको इतने दिन अविनाश से दूर hi रहना था ये जुदाई की आग उसे जला रही थी पैर वो लता से कुछ बोल भी नहीं सकती थी. हलाकि घर में वो अविनाश को देख सकती थी. पैर प्यार ने अभी -2 तो रंग भरा था उसके जीवन में, और तुरंत hi जुदाई, अभी तो उसने या अविनाश ने एक दूसरे को बोलै भी नहीं था की वो प्यार करते है. बस अहसास हुआ था अभी और इस अहसास से hi वो रोमांचित थी. पैर वो भी कुछ दिन के लिए बंद हो गया था. उसे अविनाश के साथ रहना था. पैर लता ने उसके सपनो पैर पानी फेर दिया. पैर एक बात की उसे तशाली थी की संडे को तो वो दोनों साथ जा hi रहे है.

सोनल लता के पास से उदास हो कर अपने रूम में आ गयी. और उसने उदास मन को शांत करने के लिए अविनाश को फ़ोन कर दिया. फ़ोन पैर अविनाश को उसने लता का फेशला बताया तो अविनाश भी उदास हो गया. पैर फिर अविनाश ने सोनल को जो कहा वो सुन कर सोनल के आशु आ गए. पैर को बोली कुछ नहीं. अविनाश ने उसको कहा की वॉक अल मॉर्निंग में hi किसी जरुरी मीटिंग के लिए बहार जा रहा है और सैटरडे की मॉर्निंग में hi वापिस आएगा. ये उसे अभी थोड़ी देर पहले hi उसके डैड ने उसे बोलै था. अब सैटरडे तक सोनल को उसकी शकल भी देखने को नहीं मिलनी थी.

ये सब लता का hi प्लान था. ऐसा नहीं था की लता दोनों को अलग करना चाहती थी. बल्कि ये उसका प्लान था दोनों को जल्दी एक करने के लिए. लता इस खेल की पुराणी खिलाडी थी. उसको पता था की यदि सोनल और अविनाश में सच में प्यार है तो वो इस जुदाई से जल्दी hi बहार झलक जायेगा. कियोकि जुदाई की तड़फ उनको एक दूरसे के प्यार को एक्सेप्ट करने पैर मजबूर कर देगी. और यदि ये केवल एक अट्रैक्शन है तो इस जुदाई से अपने आप काम होने लगेगा. वो उनके रिश्ते को जल्दी -2 नाम देना चाहती थी. कियोकि वो भी अपनी सोनल बेटी को अपनी बहु बना कर हमेशा के लिए अपने घर में रखना चाहती थी. नहीं तो अभी तक तो उसे ये hi लगता था की सोनल उसे छोड़ कर चली hi जाएगी. और एक बार फिर वो अपनी बेटियों की याद में तड़फती रहेगी. पैर सोनल ने उसे वो रास्ता दिखा दिया था जो उसकी ममता को उसकी बेटी पैर हमेशा लुटाने के लिए खुल गया था. सोनल के जाने के बाद लता ने अंकिता को फ़ोन किया. अंकिता अभी ध्यान में थी तो फ़ोन गुरु ने उड़ाया, पहले नॉर्मली बाते करके गुरु ने लता को बोलै की वो बोल देगी अंकिता से आपसे बात करने के लिए.

करीब 1 ऑवर के बाद अंकिता ने लता को फ़ोन किया तो वो सोने की तैयारी में थी. लता ने अंकिता का फ़ोन तुर्रंत रेसिवे कर लिया. अंकिता ने लता को पहले hi बता दिया था की पब को मणि जी ने एक बहुत बड़े काम से बहार भेजा है. लता से नॉर्मली बात होने के बात लता ने अंकिता को बताया की सोनल संडे को तुम्हारे घर आ रही है. ये बात सुन कर वो सब बहुत खुश हो गए. कियोकि सभी अंकिता के पास hi बैठे थे. फिर लता ने जो कहा उसको सुन कर अंकिता की ख़ुशी की कोई सीमा hi न रही. लता ने अंकिता को बताया की अविनाश भी आ रहा है सोनल के साथ तुमसे राखी बढ़वाने के लिए. अंकिता ने अविनाश को केवल फोटो में hi देखा था उसका अपना सागा भाई उससे जीवन में पहली बार राखी बढ़वाने आ रहा था. अंकिता ने बचपन में कई बार अपने पापा को बोलै था की वो अभी अविनाश या अखिल को साथ लाये ताकि वो उनको राखी बंद सके. पैर न तो उसके पापा ने कभी उनको कहा और न hi उन दोनों ने कभी अपनी बहन न होने के दुःख को अपने पापा से कहा.

लता से बात करने के बाद अंकिता ख़ुशी से बावली हुयी रोने लगी. फ़ोन कर अंकिता की बाते सुन कर सभी समाज चुके थे की उसका भाई अविनाश उससे राखी बढ़वाने आ रहा है. अंकिता गुरु से लिपटे रो रही थी.

गुरु – अंकिता रो क्यों रही हो ये तो बहुत बड़ी खुश खरी है. तुमको तो इसकी तैयारी करनी चाहिए…

अंकिता – नहीं दीदी आज में बहुत खुश हु. पहले मुझको मेरे माँ बाप मिल गए वो भी इनकी वजह से. और आज सोनल दीदी की वजह से मुझको मेरा भाई मिल रहा है. अब मैं पूरी हो गयी दीदी. मेने एक औरत होने के सभी रिश्ते जी लिए.

पारी – न न अंकिता अभी तो एक और रिश्ता बचा है और वो ये (पब) hi पूरा कर सकते है. देखना जब वो बापिस आ कर तेरी फाड़ेंगे न तो 9 महीने में hi तेरा वो रिश्ता भी पूरा हो जायगा…

पारी की बात पैर सब हंस दिए और अंकिता उसे मरने को दूधी. और माहौल बहुत hi खुशनुमा हो गया. अंकिता के तो पर निकल आये थे वो ख़ुशी से उड़ रही थी.

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सुबह सूरज की पहली किरण के साथ पब और अवनि की आखें खुल गयी दोनों की थकन ख़तम हो चुकी थी. पैर अवनि को अब बहुत भूक लग रही थी कल भी उसने कुछ नहीं खाया था. फिर रात को उलटी हो गयी अब उसका पेट एक दम खली था. भूक तो पब को भी लगी थी. पैर उनको देव का वरदान था तो उसको फरक नहीं पद रहा था पैर इससे उसकी जीवन शक्ति का लोस्स जरूर हो रहा था. जब अवनि ने पेड़ की और देखा तो उस पैर फल (जस्ट लिखे एप्पल था बूत डार्क ब्लू कलर का) लगे हुए थे. भूक के कारन अवनि पेड़ की तरफ बड़ी तो पब ने उसे रोक दिया.

पब – अवनि रुको, मत भूलो की हम कहा पैर है. कुछ भी हो सकता है.

और ये बोल कर पब उस फल को दिव्यादृस्ति से देखने लगा. तो उसका शक सही निकला वो फल जेह्रीला था. और वो भी ऐसा जहर था की किसी को पल भर में hi मार दे. ये देख कर पब बोलै – अवनि उन फल की तरफ देखना भी मत उसको कहते hi मर जाना है.

अवनि – फिर मैं क्या खो?? बहुत जोरो की भूक लगी है. भूक के मरे जान निकल रही है.

पब – अवनि मेरी जान अपनी भूक को कण्ट्रोल करो. अब बताओ यहाँ कुछ भी नहीं है खाने को. थोड़ी hi देर में हम ये बाग़ पार कर जायेगे. तो शायद कुछ मिले खाने को.

अवनि भी कुछ नहीं बोल पति पैर पता नहीं क्यों उस पैर आज भूक कण्ट्रोल नहीं हो रही थी. और अवनि के पास तो वरदान भी नहीं था. फिर दोनों उसी बाग़ में अपने डेली के काम करके फ्री होते है. अवनि बैग में से एक कपडा निकल कर पेट पैर बांध लेती है. और पेट भर कर पानी पीती है. पब दिव्या दृष्टि से आगे का मार्ग खोजता है पैर कोई सफलता नहीं मिलती केवल वो जेह्रीला फल और उसके पेड़ hi दिखाई देते है. निराश हो कर पब अपनी तलवार को याद करता है और उससे आगे की दिशा जानने की कोसिस करता है. तलवार थोड़ा उप्पेर हो कर अलग अलग पेड़ो की और इशारा कर रही थी. पब को आज उसकी तलवार का ये संकेत समाज hi नहीं आ रहा था. फिर भी पब कुछ सोच कर एक दिशा में चलने का फेशला करके उस और बढ़ने लगता है. अभी डायरेक्शन बताने ने दिव्या दृष्टि और उनकी चाँद हुंश तलवार दोनों hi फ़ैल हो चुके थे. तो पब अपनी सोच से अपने हिसाब से एक दिशा में आगे जाने लगता है. अब बैठे रहने से तो ये बाग़ पार नहीं होना था तो वो चल दिए.

उनको चलते हुए दोपहर का टाइम हो गया पैर ये भाग पार न हुआ. दोनों का भूक से बुरा हाल था. पुरे बाग़ में एक जैसे hi फल के पेड़ थे. और सभी पेड़ो पैर फल भी थे. पैर सब डार्क ब्लू hi थे. मतलब सब जेहरीले hi थे. दोनों ीदार से उदार भटक रहे थे की शायद कोई रास्ता मिल जाये पैर कुछ भी नहीं मिला. भटकते -2 शयाम भी हो गयी. पैर कोई राष्ट न मिला. अब थक हर कर दोनों एक जगह बेथ गए. अवनि के पेट में दर्द सुरु हो गया भूक के कारन पैर वो दोनों कुछ कर भी नहीं प् रहे थे.

बहुत देर तक बैठे रहने के बाद फिर से दोनों चलने को तैयार हो गए पैर इस बार पब ने अवनि को गुड में ुधा लिया अवनि का दर्द बाद रहा था. हीलिंग पावर भी इस दर्द को काम कर नहीं प् रही थी. जब तक पेट में कुछ न जाये भूक कैसे मिट सकती है. भूखा तो पब भी था पैर वो वर के कारन बर्दाश कर रहा था.

अवनि को गौड़ में ले कर पब ने टेलिपोर्ट होना सुरु किया. जहा खड़ा होता वह से जहा तक नजर जाती वह टेलिपोर्ट हो जाता. शयम से रात हो गयी पैर वो दोनों बाग़ से बहार न निकले. दोनों hi बहुत परेशां थे. मंद काम नहीं कर रहा था. थक कर दोनों सो गए.

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आज दिन में अंकिता, नैना, पारी, ेबेचा, काजल शॉपिंग पैर गए थे. अंकिता ने अविनाश के लिए राखी ली थी. और एक hi भाई के लिए 5 राखी ले आयी राखी का टाइम तो था नहीं इस लिए मिली भी बड़ी मुश्किल से. फिर सभी ने दिल खोल कर शॉपिंग की. ेबेचा शॉपिंग के साथ चारो और नजर भी रख रही थी. शॉपिंग से जब ये लोग लोटे तो एरिका, ऐडा और सविता फिर से धयान में बैठी हुयी hi मिली. उनकी जीवन शक्ति काम होने लगी थी. फिर ये सब भी धयान में बेथ कर सोने चले गए.
 
अपडेट 239

अदिति को अभी तक कुछ भी नहीं मिला था. मंदिर में लोगो का इलाज करते हुए की वीडियो के इलावा. और उसको अभी तक कोई भी ऐसी बात नहीं दिखी थी जिससे उसे अपने पापा पैर संदेह हो. केवल 2 बार संभु घर से बहार गया था और वो भी जल्दी hi लोट आया था. पैर अदिति को ये समाज नहीं आ रहा था की उसके पापा दोनों बार वह क्यों गए थे. कार में लगे बग्स को ट्रेस कर के अदिति ने ये तो पता कर लिया था की वो कहा गया था. वो एरिया दिल्ली से नार्थ साइड पैर जाने वाले रस्ते पैर पुरातत्व विभाग के आदिन था. और उसमे किसी भी आम आदमी को जाने की अनुमति नहीं थी. पैर इससे ज्यादा अदिति को न तो उस जगह के बारे में पता था और न ये की संभु ने वह जा कर किया क्या है.

आज उस अंजनी जगह के हॉल में केवल 2 लोग बैठे थे. एक डॉ1 और एक दानव गुरु. दोनों आपस में कुछ बाते कर रहे थे.

डी. गुरु – क्या तुमने 50 RY(Danav रक्षक दवरा त्रिनेड दानव – रय) संभु के पास पंहुचा दिए??

डॉ1 – हाँ गुरु आज शयाम को hi पहुंच गए थे.

डी. गुरु – हम्म ये अच्छी बात है. अब हमको कुछ दिन इन्तजार करना होगा..

डॉ1 – पैर गुरु जी अपने आज तक किसी को भी 10-12 रय से ज्यादा नहीं दिए है तो संभु को एक साथ 50 रय देने का क्या मतलब??

डी. गुरु – कियोकि यदि संभु अपने मकशद में कामियाब हो गया तो हमको अपने सभी रय को बापिस बुला कर उनके मंद को दुबारा सेट करने की जरुरत hi नहीं पड़ेगी.

डॉ1 – और वो क्यों गुरूजी?? संभु ऐसा क्या करने वाला है??

डी. गुरु – संभु दानवपुत्र को ख़तम करने के लिए, दानव सेना को ख़तम करने के लिए हमसे 50 रय मांगे है. हमने खुद उसके पास जा कर उसे अपने वो 4 शक्ति शैली दानव भी दिए है जिनको हराना देवताओ के बस की भी बात नहीं. तुम तो उनको अच्छे से जानते hi हो पुत्र..

डॉ1 – क्या गुरूजी अपने उन महावीरों को एक मानव के आदेश के पालन के लिए लगा दिया?? मन की गुरूजी त्रिकाल और संभु दोनों hi करम से दानव है. पैर फिर भी उन महा वीरो को उनके पास भेजना??

D.guru – शायद तुम नहीं जानते की त्रिकाल कोण है. त्रिकाल हमारा वो अश्त्र है जिससे हम देवताओ को भी हरा सकते है. हम जनम से आज तक त्रिकाल की हर तरह की सहायता करते आये है. उसको वो मार्ग दिखते आये है जो स्वर्ग को जाता है. बस एक बार त्रिकाल स्वर्ग जीत ले. फिर हम दानवो का राज होगा. दानवराज भी हमको रोक नहीं पाएंगे..

डॉ1 – क्या गुरूजी एक मानव देवताओ को हरा सकता है?? क्या ये संभव है?? क्या वो हम दानवो का साथ देगा??

डी. गुरु – तुम भूल रहे हो पुत्र. ये मानव hi देवताओ की सबसे बड़ी सकती है. मानवो को बचने के लिए हर बार देवताओ ने हम दानवो के साथ छल किया है. इसलिए इस बार मेने उन देवताओ के खिलाफ एक मानव को hi खड़ा किया है. वो जनम से तो मानव है पैर करम उसके दानवो जैसे है. तुम अभी त्रिकाल की पायी उन 2 शक्तियों को नहीं जानते जिसकी वजह से त्रिकाल के पास यथा शक्ति है. उसके पास एक कपटी दिमाग है. वो देवताओ के छल का जवाब भी दे सकता है. और देवताओ के वॉर को भी रोक सकता है. बस पुत्र तुम उसका साथ दो तो हम सबकी कामना पूरी जरूर होगी..

डॉ1 – पैर गुरूजी यदि दानव राज या दानव रानी बिच में आ गए तो??

डी. गुरु – नहीं आ सकते.. ये hi तो सबसे बड़ी बात है. देखो उस कपटी इंद्रा ने अपनी चल से दानव राज को फिर ये देवताओ के पक्ष में पर लिया. और उन्होंने सन्यासी जीवन का चुनाव किया. फिर भी वो दानव राज थे. और यदि कोई दानव उनके विरुद्ध जाता तो दानवराज का फर्ज था उसको रोकना. पैर यदि कोई मानव वो करे तो दानव राज उसको नहीं रोकेंगे. बस इणलिए hi मेने मानव पैर डाव लगाया है. अब तक तो हम सफल भी हो गए होते. पैर पहले उस मानव कन्या (अल्पना) ने अंतिम पालो में सब बिगड़ दिया. मेने संभु को समजा कर फिर से सब ठीक किया तो दानव रानी के प्रिये शिष्य मणि ने उन मानव कन्या के पुत्र को hi त्रिकाल के खिलाफ खड़ा कर दिया. अब बस हमको उस एक मानव पब को त्रिकाल के रस्ते से हटाना है. और बेथ कर तमाशा देखना है त्रिकाल के स्वर्ग जीतने के बाद हम सब दानव आज़ाद होंगे. ये पूरी सृष्टि हमारी होगी. बस अंतर इतना होगा की दानव राज डलासुर की जगह त्रिकाल होगा.

डॉ1 – सच में गुरूजी अपने तो बहुत hi गहरी और लम्बी योजना बनाई है मैं कभी सोच भी नहीं सकता था की अपने इतनी लम्बी योजना बना राखी है. बल्कि उस योजना में आप बहुत हैट तक कामियाब भी हो चुके है. अब केवल एक छोटा का काम है और वो है पब का अंत. उसके लिए मैं आपके हर आदेश को मैंने के लिए तैयार हु.

डी. गुरु – अभी तो तुम केवल पाप और बुराई को फेलाओ. अभी तो पब के लिए संभु है. संभु भी काम नहीं है. वो त्रिकाल का hi चेला है. संभु पब को ख़तम कर देगा. हम खुद उसकी मदद कर रहे है. और यदि जरुरत हुयी तो तुमको भी पब के पीछे लगा देंगे. त्रिकाल और स्वर्ग के बिच की हर रुकावट हम दूर करेंगे.

डॉ1 – ऐसा hi होगा गुरूजी एक मानव आपकी इतने दिनों की योजना को बेकार नहीं कर सकता. आप जब भी आज्ञा देंगे हम सब उसे मार कर आपके कदमो में रख देंगे.

डी. गुरु – नहीं पुत्र वो भी काम नहीं है. उसने भी बहुत साडी शक्तिया हासिल कर ली है. अब तो वक्त hi बताएगा की पब के साथ हमको युद्ध करना होगा की भी नहीं…..

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अगली सुबह पब और अवनि के लिए ज्यादा अच्छी नहीं थी. भूक उनकी जान लेने को आतुर थी तो रस्ते की खोज अभी वाकई hi थी. एक बार फिर दैनिक किरियो से फ्री हो कर पब और अवनि अपनी रहा की खोज के लिए सोच में दुब चुके थे. अवनि की हालत अभी और चलने वाली नहीं थी. तो पब ने उसको गुड में ले कर यात्रा सुरु कर दी. करीब 2 हॉर्स तक चलने के बाद पब की हिम्मत जवाब देने लगी लक्ष्य का पता नहीं था. और बिना लक्ष्य के चले जाना उनके लिए अब बहुत कदिन हो रहा था. तभी पब को लगने लगा की वो जिस जगह से निकल रहा है वो वह पहले भी आ चुक्का है. कियोकि वह पैर पानी से बहुत सी धरती गीली थी जैसे की उन्होंने सुबह गीली की थी. पानी काफी सुच चुक्का था पैर फिर भी वह का गीलापन दिख रहा था.

पब के मन में कुछ विचरो ने जनम ले लिया था. तो पब ने एक निर्दय लिया. और अपनी तलवार और एक हाथ में और दूसरे हाथ से अवनि को अपने कंडे पैर ले कर आगे बढ़ने लगा. और तलवार से पेड़ो पैर मार्क बनाना लगा. चलते हुए पब ने ये धयान रखा की वोट क दम सिद्ध hi चले एक hi दिशा में.

करीब 2 हॉर्स के बाद पब को अपना बनाया मार्क दिखा एक पेड़ पैर. उस मार्क को देख कर पब थोड़ा और चला तो उसे अपने बनाये कुछ और मार्क दिख गए. अब पब समाज गया की ये बाग़ मायावी है. वो कितना भी सिद्ध चल ले. किसी भी दिशा में आगे भाड़े और इस बाग़ में hi भटकता रहेगा. और जब पब ने ये बात अवनि को बताई तो अवनि तो रोने को हो गयी. भूक ने उसके पेट में तहलका मचाया हुआ था. अब क्या करे कैसे इस बाग़ से निकले ये उनकी सोच के बहार हो चुक्का था.

कुछ देर बाद अवनि बोली – पब एक बार फिर तलवार से hi डिश अक पता काने की कोसिस करो.

पब को भी ये सोच रही लगी अब एक वो hi सहारा थी जो कोई मार्ग बता सकती थी. तो पब ने अपनी तलवार को अपने दोनों हाथ में पकड़ kar(talwar के लेती हुयी दशा में. जैसे किसी को समर्पण के टाइम तलवार के दार वाली हिस्से से दोनों हाथो में ले कर किसी के पैरो में रखा जाता है) अपने सर से लगया और मन hi मन बोलै – हे महादेव की दिव्या चाँद हुंश तलवार मुझको आगे बढ़ने का मार्ग बताये. हे महादेव आपकी कृपा और आशीर्वाद के बिना में आगे नहीं बाद सकता. महादेव मुज नादाँ बालक पैर कृपा करे…

पब के ऐसा बोलते hi तलवार अपने आप हवा में लहराने लगी और एक पेड़ पैर लगे एक फल को थोड़ दिया. फल जमीन पैर गिरा और तलवार फिर से पब के हाथो में आ गयी. अब पब फिर से एक अजीब पहेली में उलझ गया. की ये फल उनको इस बाग़ से बहार कैसे निकल सकता है.

पब और अवनि दोनों उस फल को देख देख कर सोचते रहे की अब क्या किया जाये. पैर कोई भी मार्ग समाज नहीं आया. और कुछ टाइम सोचने में यु hi निकल गया. तभी अवनि बोली – पब मुझको इस फल को देख कर भूक और तेज़ लग रही है. क्यों न मैं इसको खा कर hi पेट भर लू.

पब – मरना है क्या. कहते hi मार जाओगी. इसमें जहर है.

अवनि – बिना खाये भी मरना भी है और खा कर भी तो क्यों न खा कर hi मारा जाये….

अवनि के ये कहते hi तलवार चमक ुधि. और ये देख कर पब और अवनि चौक गए. इसका मतलब ये था की इस मायावी बाग़ से बहार जाने के लिए जहर से भरा फल खाना पड़ेगा. पैर उस फल को कहते hi मूट तय है. अब दोनों बहुत कश्मकश में पद gaye.khane पैर भी मरना था और न खाने पैर भी भूख से मूट पक्की थी. बहुत देर तक दोनों सोचते रहे श्याम ढलने को हो गयी थी. लगभब 2 दिन से वो इस बाग़ में भूखे घूम रहे थे. तो पब कुछ फेशला करते हुए बोलै

पब – अवनि में इस फल को खा रहा हु. यदि मुझको कुछ हो जाये तो तुम कोई और मार्ग दुन्ना बहार जाने का.

अवनि – पंकज तुम पागल हो गए हो क्या?? यदि इस फल को कोई खायेगा तो मैं खाऊगी. कियोकि मेरे मरने के बाद तुम दूसरा मार्ग खोज सकते हो पैर मैं नहीं. मेरे मरने से ये यात्रा नहीं रुकेगी पैर तुम्हारे न रहने पैर सब ख़तम हो जायेगा. इसलिए इस फल को मैं hi खाऊगी..

पब – नहीं अवनि ये मेरी यात्रा है. इस यात्रा को अपने जीवन का लक्ष्य मेने चुना है तुम तो केवल मेरा साथ देने मेरी मदत करने को hi यहाँ आयी हो. मैं अपने हिस्से की मूट तुमको नहीं दे सकता.

दोनों में कुछ देर तक ऐसे hi बहस होती रही और लास्ट में ये तय हुआ की वो दोनों hi इस फल को आधा -2 खायेगे. तो पब ने फल को 2 टुकड़ो में करने के लिए तलवार hi ुद्धा ली चाकू तो था नहीं दोनों के पास. इतनी बड़ी तलवार से फल काटते हुए देख कर अवनि हंस पड़ी. – ये क्या कर रहे हो?? दानवो की इस महँ तलवार से ये काम?? हाहाहाहा..

पब (फल काटते हुए) – अब जब मरना hi है तो कोण सा ये तलवार और वो सब काम आने वाला है. तो क्यों न इस तलवार का कोई तो उसे कर hi लिया jaye….hahaha

पैर जब पब की नजर कटे हुए फल पैर गयी तो वो चूक गया. अब वो फल हरा हो गया था. पब ने उसको दिव्यदृष्टि से स्कैन किया तो उसका जहर ख़तम हो चुक्का था. मतलब उसके जहर को तलवार ने काट दिया था. ये देख कर पब बहुत खुश हो गया. और अवनि भी.. खेल खेल में hi उन्होंने अपने उस लक्ष्य को प् लिया जो 2 दिन की मेहनत के बाद भी नहीं मिला था. दोनों ने जल्दी से उस फल को खा लिया और फल को कहते hi उसको चारो और से एक ग्रीन रौशनी ने घेर लिया. और जब वो रौशनी काम हुयी तो उन्होंने देखा की वो उस बाग़ के बहार खड़े है. और सामने कुछ दुरी पैर hi खली मैदान दिख रहा है. जो बिलकुल चारद के प्रारंभ होने पैर मिला था, वैसा hi था. दोनों की ख़ुशी की कोई सीमा नहीं रहती.

दोनों बाग़ से बहार आ चुके थे. और दोनों को अब भूख का भी अहसास नहीं था. चरण समाप्ति की और देख कर 2 दिन की थकन भी ख़तम हो गयी थी. दोनों में एक नया जोश पैदा हो गया. तो दोनों एक दूसरे के गले लग गए. और पब ने अवनि को गौड़ में ले कर उन मैदान की और भाग लिया. मैदान पर कदम रखते hi आवाज हुयी थी. “ प्रथम चरम समाप्त”

अभी रात हो चुकी थी. और वो दोनों उस मैदान में hi सोने का इंतजाम कर चुके थे. दोनों ने ये तय किया था की नया चरण कल सुबह hi सुरु करेंगे. एक फल के आधे हिस्से ने hi इनकी भूख को मिटा दिया था. कियोकि वो एक मायावी फल था जिसमे से उसकी जहर की माया को महादेव की तलवार ने काट दिया था. ये फ्राइडे की नाईट थी.
 
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