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अपडेट- 21
ये तीनो भाई एक ऐसी योजना बना रहे थे एक ऐसी योजना जो हर रिश्ते को तर तर करने वाली थी, असल में सूरज ने जो विचार रखे थे वो ये थे,
सूरज- मैं जो बोलने जा रहा हु उसे धयान से सुन्ना और आराम से सोचना, वो देव हमारी बहेनो को फ़साने में लगा हुआ ह, और जैसा मुझे लग रहा ह वो जल्दी hi उन्हें छोड़ देगा, क्योकि हमारी भेने भी उसकी तरफ आकर्षित दिख रही हैं, क्योकि उनकी उम्र हो चुकी ह और तुम देख hi रहे हो उन पैर जवानी कितनी उभर क्र आ रही ह, और ऐसी जवानी में लड़की को लुंड चाहिए hi छाइये, और उनकी शादी भी नहीं हो प् रही ह, दो बार शादी टूट चुकी ह, शायद अब उनसे कोई शादी भी न करे ऐसे में उनका मन भटक रहा होगा, और उस देव ने हमारी सहायता करके सबके दिल में जगह सी बना ली ह, तो हो सकता ह वो उसके निचे आ जाये, और अगर उस देव ने हमारी बहेनो को छोड़ दिया तो हम कही मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे, वो देव कुछ करे उससे पहले हम तीनो एक दूसरे की बहेनो को पता क्र छोड़ देते हैं, वो हमारी सगी भेने नहीं हैं तो ज्यादा फरक भी नहीं पड़ेगा, और उनके अंदर की वासना की आग भी बुझ जाएगी, और वो उस देव के पास नहीं जाएँगी, और घर की बात घर में hi रह जाएगी, और उस रीवा को तीनो छोड़ लेंगे,
सूरज की इस बात से पहले तो दोनों भाई चौंक गए लेकिन जल्दी hi तीनो ने सहमति क्र ली थी, कहने को तो ये सिर्फ देव की वजह से कर रहे थे लेकिन उनके अंदर पहले से hi चारो लड़कियों के लिए वासना भरी हुई थी, और ये बात चारो लड़किया भी जानती थी,
अभिजीत- मुझे सोमिया चाहिए,
सूरज- मुझे अक्षरा चाहिए, वो देव से बहुत लिपट रही थी, उसकी चीखे मेरा लुंड निकलेगा,
ज्वाला- तो अमिता मेरी हुई, और रीवा
सूरज- उसकी तो तीनो मिलकर फाड़ेंगे, रीवा और निहारिका को तो हम अपनी रखैल बनाएंगे, भविषा में हम तीनो में से राजा कोई भी बने लेकिन ये दोनों माँ बेटी हमारी रखैल होंगी,
अभिजीत- लेकिन हम उन्हें पटायेंगे कैसे,
सूरज- जैसे हमने आज तक राजय की इतनी लकडिया पाते हैं, लड़की को बस लुंड चाहिए, एक बार उसे बस छोड़ दो फिर वो किसी से कुछ नहीं खेती क्योकि कोई भी लड़की शर्म की वजह से किसी से नहीं बताती की उसे किसी ने छोड़ दिया ह, और बताएगी भी तो समाज उसे hi गालिया देगा, लड़को का क्या बिगड़ता ह, इसलिए एक बार छोड़ने के बाद हमारी भेने भी चुप रह जाएँगी, और फिर जब उन्हें चुदाई में मजा आने लगेगा तो हमारा साथ देंगी,
ज्वाला- वैसे जब दूसरे की बहन को छोड़ hi रहे हैं तो एक एक का hi मजा क्यों ले, जब हम सबके मजे ले सकते हैं,
अभिजीत- तुमने मेरे मुँह की बात चीन ली, हमारे सामने सगी बहेनो के अलावा 3 लड़किया हैं तो सबका मजा लेंगे न,
सूरज- फिर अपनी बहेनो को hi क्यों बक्शा जाये, अब तो चारो का मजा लेंगे,
ज्वाला- सगी बहन के साथ
सूरज- अरे वो किसी से तो छुड़ेगी hi और छूट और लुंड को क्या पता कोण सागा ह कोण पराया,
तीनो है पड़े, तीनो ने तय कर लिया की अब चारो लड़कियों को छोड़ा जायेगा,
सूरज- पहले अमिता सोमिया और अक्षरा को छोडनेगे फिर वो hi हमारे लिए रीवा को लेकर आएँगी, और तीनो मिकर रीवा को छोड़ेंगे,
अभिजीत- जल्दी से तैयारी करो अब रुका नहीं जा रहा देखो मेरा लुंड कैसे उछाले मर रहा ह,
सूरज- जल्दी hi उन्हें अपने ठिकाने पैर लेकर चलते हैं वही उन्हें काली से फूल बना क्र वापस लाएंगे,
ज्वाला- ठीक ह कोई अच्छा सा दिन तय क्र लेना और मुझे बता देना,
अभिजीत- मैं वह सब इंतजाम करवा देता हु,
तीनो भाई ख़ुशी से झूमने लगे और शराब पीकर नाचने लगे, और अपनी hi बहेनो के लिए अश्लील बाते करने lage,unki चूचियों और गांड के लिए खूब गन्दा बोल बोल क्र थके मरने लगे,
देव महल के बहार गया तो आज पूरी परजा उसके सामने सर झुका रही थी, देव को कुछ ऐसे खास लोग चाहिए तो जो उसकी मदद कर सके, क्योकि ऐसे बहुत कार्य थे जो उससे बहार भी करने थे, तभी एक औरत उसके सामने आ गई, और हाथ जोड़कर कड़ी हो गई,
देव- क्या बात ह
औरत- मैं आपसे माफ़ी मांगना चाहती हु,
देव- माफ़ी किस बात की,
औरत- एक दिन मैंने आपका अपमान किया था, मैंने कहा था पहले अपने लिए इज्जत बनाओ फिर हमारी मदद करना,
देव हँसा- कोई बात नहीं, उस समय तो सबने अपमान hi दिया था, और मुझे किसी सम्मान की जौरात नहीं ह और किसी अपमान का भय नहीं ह,
औरत- इसीलिए तो आप इस संसार के सबसे महँ इंसान ह, आपको सम्मान तो कभी छाइये hi नहीं था, और जो अपमान आपने झेला ह उसके बाद आपको अपमान का भय रहेगा hi नहीं, क्योकि उससे ज्यादा तो अपमान हो hi नहीं सकता,
तभी एक नौजवान लड़का वह आ गया और देव के सामने हाथ जोड़ लिए,
देव- माँ जी ये कोण ह?
औरत- ये मेरे बेटी का बीटा ह, मेरी बेटी कहा गायब हो गई कोई नहीं जनता, वो महल में काम करने जाती थी , कुछ साल पहले वापस hi नहीं आई, हमारी कोई नहीं सुनता,
देव- क्या नाम ह तुम्हारा
लड़का- अभेंद्र
देव- अच्छा नाम ह, क्या करते हो
औरत- बस काम धुंध रहा ह राजकुमार, ये तो सेना में जाने को बोलता ह लेकिन मुझे दर लगता ह,
देव- हम्म्म सेना में जाना चाहते हो,
अभेंद्र- राजकुमार मैं देस की सेवा करना चाहता हु लेकिन नानी जाने नहीं देती बोलती हैं की ऐसे राजाओ के लिए अपनी जान को देव पैर क्यों लगाना जो प्रजा के दुःख नहीं देखता,
औरत- इसे माफ़ कर दो राजकुमार इसे नहीं पता क्या बोल रहा ह,
देव- कोई बात नहीं माँ जी सच hi बोल रहा ह, और सच बोलना कोई अपराध नहीं ह,
अभेंद्र ने एक उम्मीद की नजरो से देव को देखा, जैसे उसे लगा हो की शायद ये हमारा भला कर दे,
देव- देखो इस समय मैं ये तो नहीं जनता की तुम्हारी माँ कहा ह, वो ह भी या नहीं, मैं कोई झूटी उम्मीद नहीं दूंगा, लेकिन इतना विश्वास दिला सकता हु की अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ ह तो गलत करने वालो को सजा जरूर मिलेगी,
अभेंद्र- कोण देगा उन्हें सजा, मैं जनता हु वो राजपरिवार के hi लोग हैं,
देव- वो चाहे जो भी हो उन्हें सजा जरूर मिलेगी, लेकिन उसके लिए तुम क्या कर सकते हो, इस राजय को एक खुश हल राजय बनाने के लिए क्या कर सकते हो,
अभेंद्र- अपने राजय की सेवा करना मेरा धरम ह, उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हु,
देव- ठीक ह तो कल मुझे आकर मिलना राजय के बहार उत्तेर दिशा में जो खण्डार ह वह,
अभेंद्र- ठीक ह राजकुमार,
औरत- तू चला जायेगा तो हमारा घर कैसे चलेगा,
देव- ये इस राजय के लिए काम करेगा तो इसे वेतन भी मिलेगा, लेकिन आपको ख्याल रखना ह की ये बता किसी को पता न चले की ये किसके पास काम करता ह,
औरत- हमे आप पैर पूरा यकीन ह, आप hi हम सबका भला कर सकते हैं, मैं किसी से कोई जीकर नहीं करुँगी,
देव हाथ जोड़ क्र वह से निकल गया, वो आगे कई गाओं में घुमा, और शाम तक वापस आ गया,
इधर भवर सिंह ने दिन में कई बार कोशिश की निहारिका से मिलने की लेकिन हर बार वो चीता सामने खड़ा मिला, भवर सिंह को बहुत गुस्सा आ रहा था, वो उस चीता को मरवा देना चाहता था लेकिन फ़िलहाल कुछ भी गलत करना उसके लिए नुकसान दायक था,
इधर अमरावती और सौमित्र को पूरा दिन हो गया था सोचते सोचते की वो क्या करे, अमरावती को अच्छा लुंड मिल रहा था, उसकी वासना शांत हो रही थी लेकिन उसके अंदर का दर उसे परेशां कर रहा था क्योकि उसका राज काम्य को पता था, और काम्य से खतरनाक कोई नहीं था, इधर सौमित्र इस सोच में थी की उसे ये करना चाहिए या नहीं, अंत में दोनों ने आगे बढ़ने का फैसला क्र hi लिया था,
देव जब महल से बहार था तो अक्षरा और रीवा परेशां सी उसे ढूंढती फिर रही थी, उसके वापस आते hi दोनों उसके पास पहुंची,
रीवा- कहा चला गया था हम कब से धुंध रहे थे,
देव- क्यों क्या हुआ, कोई परेशानी ह क्या
अक्षरा- बस तू नहीं दीखता तो चिंता सी होने लगती ह, यहाँ बहुत दुश्मन ह न जाने कोण क्या करे,
देव- हाहाहाहा जब वो लोग मुझ पैर हावी थे तब तुम्हे डरना चाहिए था तब तुम नहीं डरे, अब वो मेरा कुछ नहीं कर सकते अब क्यों दर रही हो,
रीवा- तू इस समय अपने गुस्से और नाराजगी से भरा हुआ ह तुझे अभी समझ नहीं आएगा हम क्यों दर रहे हैं,
देव- क्या मुझे नाराज होने का भी अधिकार नहीं ह,
रीवा- पूरा हक़ ह, मैं नहीं चाहती की 18 साल की नाराजगी कुछ hi पालो में दूर हो जाये, और हमने तुझे इतनी तकलीफे दी हैं की इंसान पूरी जिंदगी उन्हें नहीं भूल सकता, फिर भी हम इंतजार करेंगी की तू हमे अपने दिल से माफ़ कर दे, क्योकि हमे माफ़ करना आसान नहीं होगा,
अक्षरा बस दोनों की बाते सुन रही थी,
अक्षरा- ोये तू चुप क्र, मैं इतना इंतजार नहीं कर सकती, अब जो गलती हो गई उसे बदल तो नहीं सकते तो क्या साडी उम्र ऐसे hi दुःख में जीवन बिताएंगे, और देव बाबू तुम, बहुत हो गई नाराजगी अब हमे माफ़ कर दो, जो सजा देनी ह दे दो हम है क्र उस सजा को पूरा करेंगी लेकिन हमसे अब नाराज मत रहना मैं जी नहीं पाऊँगी,
अक्षरा की आँखों में आंसू आ गए,
देव ने उसे गले लगा लिया,
देव- मैं कोई नाराज नहीं हु, तुम बस ये रोया मत करो समझी न,
रीवा की आँखे भी नाम थी और होतो पैर हलकी सी मुस्कान थी,
जब से देव महल में आया था राजगुरु न जाने किस गणित में लगे हुए थे, वो अपने कर्म में बैठे बहुत सी कुण्डलिया खोले बैठे थे, उनके अंदर का दर उनके चेरे पैर साफ़ दिख रहा था,
राजगुरु खुद से hi- कुछ समझ नहीं आ रहा, आज भी उसका भविष्य क्यों नहीं दिख रहा ह, जहा तक उसका भविष्य दीखता था वो समय पूरा हो चुक्का ह, उसे मर जाना चाहिए था, फिर वो जिन्दा कैसे ह, और तबाही आ रही ह, मुझे दिख रहा ह कुछ बहुत बुरा होने वाला ह, कैसे रोकू, अब तक सात्विक भी वापस नहीं आया ह, भौमिक को बुलवाता हु वो कुछ मदद कर सके, नहीं नहीं वो अपनी साधना में लगा ह,
अरे है ये तो मैंने सोचा hi नहीं भौमिक को जो शक्तिया मिली हैं शायद वो किसी काम आ जाये, और अगर भौमिक को मिली हैं तो सात्विक को भी मिली होगी, मेरे दोनों भाई हमारे राजय को बचा सकते हैं,
राजगुरु खुद से बात कर hi रहे थे की अचानक उनके दिमाग में कुछ हलचल हुई,
राजगुरु खुद से hi- शक्तिया मैंने इस तरफ क्यों नहीं सोचा, ये शक्तिया एक दम आई कहा से, और कही देव के साथ भी तो ऐसा कुछ तो नहीं हुआ जो भौमिक और सात्विक के साथ हुआ ह, क्योकि एक भौमिक कुछ hi समय में ताकतवर बन गया ह, कही एशिया hi कुछ देव और निहारिका के साथ तो नहीं हुआ, क्या कोई शकित जागृत हो रही हैं, इस संसार में कोई देविया शक्तिया जागृत हो रही हैं, लेकिन ये शक्तिया हैं क्या, कहा से आई, मुझे इस पैर धयान देना होगा, मुझे महाराज से बात करनी होगी,
राजगुरु तुरंत उठे और भवर सिंह की पास चल दिए फिर अचानक रुक गए,
राजगुरु- नहीं नहीं भवर सिंह को अगर इस बारे में पता चला तो वो पागल हो जायेगा, और पुरे राजय को युद्ध में झोक देगा, पहले मुझे hi सब पता करना होगा, उसी के बाद कुछ बोल सकता हु,
राजगुरु ने फिर से कुछ बहुत पुराणी किताबे निकल ली और पढ़ने लगे,
वही जंगलो में सात्विक अपने धयाम में बैठा था और उसका शरीर एक दम तप रहा था जैसे उसके शरीर में आग लगी हुई हो, उसके चेरे पैर तपन की लाली साफ़ दिख रही थी, तभी उसने एक दम अपनी आँखे खोल दी, उसकी आँखे लाल हो राखी थी, आँखे खुलते hi उसके चेरे पैर एक अजीब सी मुस्कान आ गई, सात्विक खड़ा हुआ और उसने अपने चारो तरफ देखा और जोर जोर से हसने लगा, वो बस हस्ता hi रहा, उसकी हसी बहुत भयानक थी, फिर अचानक वोट क दम चुप हो गया,
सात्विक खुद से hi- पूरा संसार इस शक्ति के लिए पागल ह, लेकिन ये शक्ति मेरे पास ह, मैं कुछ भी कर सकता हु, मैं सर्वशक्ति शैली हु, सबसे महँ तांत्रिक हु मैं, तंत्र गुरु अब मैं आपसे भी ज्यादा शक्ति शैली हु, इस संसार में मुझसे बड़ा तांत्रिक पैदा नहीं हो सकता, अब ये पूरी दुनिया मेरे सामने झुकेगी,
सात्विक के अंदर नकारात्मक ऊर्जा ने अपनी जगह बना ली थी, जिस वजह से उसकी तांत्रिक विद्या का ज्ञान और बढ़ गया था और वो उस पैर हावी भी हो गई थी, सात्विक के अंदर दबी हुई महत्वकांक्षाए अब उभर क्र बहार आ रही थी, वो हमेशा से सर्वशक्ति शैली बनना चाहता था लेकिन राजगुरु और भौमिक की सांगत में उसके ये विचार उसके अंदर hi दबे रहते थे लेकिन अब उसके अंदर की अच्छे कही खो चुकी थी, और उसकी बुराई ने जगह बना ली थी,
सात्विक वह से चल दिया उस पहाड़ की तरफ जहा भैरव सोया हुआ था, सात्विक ने अपनी रफ़्तार पैर धयान दिया और अपनी तेज रफतार को देख क्र वो और खुश हुआ,
कुछ hi देर में वो उस गुफा में पहुंच गया, राजा भैरव के रक्षक अभी भी उस ताबूत को घेरे बैठे हुए थे, सात्विक को वापस आया देख सब खड़े हो गए,
उनका बूढ़ा आदमी- महाराज आप आ गए,
सात्विक- है और इन्हे जगाने की विद्या भी सिख ली ह,
सात्विक ने भैरव सिंह को जैसे hi छुआ तो वो एक दम से किसी और दुनिया में पहुंच गया, चारो तरफ एक दम शांति थी, खुला आसमन था सात्विक ने अपने चारो तरफ देखा तो उसने पाया की वो अंतरिक्ष में ह, और वो हवा में उड़ रहा ह, एक पल के लिए वो घबरा गया, तभी उसे एक आवाज आई,
आवाज- तो तुम हो वो महँ तांत्रिक जो मुझे जगाने आया ह, अगर तुमने मुझे जगा दिया तो इस पुरे संसार को तेरे सामने झुका दूंगा,
सात्विक आवाज की तरफ जाना चाहता था लेकिन उसका खुद पैर कोई काबू नहीं था,
सात्विक- कोण हो तुम
आवाज- राजा भैरव
सात्विक- हम ह कहा
भैरव- मेरे मस्तिष्क में
सात्विक- आपको कैसे जागो,
भैरव- मुझे जगाने के लिए पहले तुम्हे तीनो शक्तियों को आजाद करना होगा, जिसमे से दो आजाद हो चुकी हैं, जब तक वो तीसरी आजाद नहीं होगी तब तक मेरे ये निंद्रा नहीं टूटेगी,
सात्विक- कहा हैं वो शक्तिया
भैरव- एक तो मैं तुम्हारे अंदर महसूस कर प् रहा हु, दूसरी आजाद हो गई ह लेकिन मैं नहीं जनता और तीसरी तुम्हे खुद ढूढ़नी होगी, और वो शक्ति किसी ऐसे के पास होनी चाहिए जो तुम्हारे और मेरे कहने पैर चल सके, हमारा साथी बनना चाहिए, जैसे hi वो शक्ति आजाद होगी तुम्हे महसूस हो जाएगी उसके बाद तुम मेरी नींद्र के मंत्रो को तोड़ सकते हो,
सात्विक- मैं अपना धयान लगा क्र उस शक्ति को ढूंढता हु,
भैरव- ये इतना आसान नहीं ह, वो ढूढ़ने से कभी नहीं मिल सकती, अगर ऐसे मिल जाती तो बहुत से ज्ञानी उन शक्तियों को ढूंढते हुए मृत्यु को प्राप्त हो गए, वो कब के धुंध लेते,
सात्विक- फिर मुझे क्या करना होगा,
भैरव- तुम्हे सब जगह जाना होगा, और खोजना होगा, जब तुम उस शक्ति के करीब होंगे या उस शक्ति के प्रभाव वाले इंसान से मिलोगे तो तुम्हे खुद अहसास हो जायेगा, अब जाओ और जल्दी से उसे धुंध क्र वापस आओ,
तभी सात्विक को एक झटका लगा और वो वापस उस गुफा में पहुंच गया और उसने अपना हाथ हटाया,
बूढ़ा आदमी- क्या हुआ महाराज आप कहा खो से गए थे, राजा कब उठेंगे,
सात्विक- उसके लिए मुझे कही जाना होगा, एक खोज पैर, तुम सब में से सबसे अच्छे योद्धा मेरे साथ चलो इस खोज के लिए, तुम्हरे राजा को जगाने के लिए ये खोज बहुत जरुरी ह,
बूढ़ा आदमी- महाराज आप जिसे चाहो ले जाओ, ये सभी बहुत शक्ति शैली योद्धा हैं, इस संसार में इन्हे कोई नहीं हरा सकता, बस इन्हे समय पैर मॉस और औरत मिलनी चाहिए, ये उसके बिना नहीं रह सकते,
सात्विक- सब मिलेगा,
सात्विक उस गुफा से निकल गया और उसके साथ 20 आदमी और चल दिए, जो देखने में hi बहुत खूंखार और ताकतवर थे,
ये सफर सात्विक को कहा लेजाने वाला था वो भी नहीं जनता था, वो पहले से बहुत बदल चुक्का था लेकिन ये सफर उसे और कितना बदलने वाला था इसका उसे अंदाजा नहीं था,
रात के भोजन के समय भवर सिंह अपने परिवार के साथ बैठा हुआ था लेकिन वह सिर्फ काम्य अमरावती सौमित्र और तीनो राजकुमार थे, क्योकि निहारिका का भोजन उसके कमरे में hi लगवाया गया था और चारो लड़किया भी निहारिका के साथ hi भोजन कर रही थी, और देव तो वही होता जहा उसकी माँ होती,
भवर सिंह- हमारी बेतिया कहा ह वो आज भोजन पैर साथ क्यों नहीं हैं,
सूरज- वो उन माँ बेटो के साथ भोजन कर रही हैं,
भवर सिंह गुस्से में आग बबूला हो गया,
भवर सिंह- उनकी हिम्मत कैसे हुई,
काम्य- करने दीजिये महाराज फ़िलहाल उन्हें छेड़ना ठीक नहीं ह,
अभिजीत- लेकिन माँ इससे तो हमारा परिवार बिखर जायेगा, जब सब अपनी मर्जी से काम करने लगेंगे तो महाराज का दर ख़तम हो जायेगा,
काम्य- तुम अभी कुछ नहीं जानते यहाँ क्या चल रहा ह तो अपन ामुह बंद रखो,
भवर सिंह- उसे क्यों दन्त रही हो वो सही तो बोल रहा ह,
काम्य- वो दोनों अभी वापस आये हैं तो थोड़ा बहुत प्यार लुटाने दो, समय आने पैर सब बदल जायेगा,
भवर सिंह- तुमने कोई तरीका निकला क्या उसके बारे में जानने का,
काम्य ने अमरावती और सौमित्र की तरफ देख क्र कहा- तरीका निकला तो ह देखते हैं वो कितना जल्दी आपकी सहायता कर पते हैं,
भवर सिंह- जो भी उनकी जानकारी निकलेगा हम उन्हें बहुत बड़ा पुरुस्कार देंगे,
पुरुस्कार का नाम सुनते hi सौमित्र खुश हो गई,
भोजन करने के बाद जब सब अपने कमरे में चले गए तो काम्य ने सौमित्र से पूछा क्या वो तैयार ह तो सौमित्र ने हामी भर दी,
उसके बाद काम्य अमरावती के पास गई और उससे भी पूछा, अमरावती के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने भी है कर दी, काम्य खुश होती हुई अपने कमरे में आ गई, जहा उसने कुणाल को बिस्टेर पैर धकेला और उसके उप्पेर चढ़ क्र बैठ गई,
कुणाल- क्या कर रही हो,
काम्य- मुझे तुम्हरा लुंड छाइये मेरी छूट में, आज मुझे ऐसा छोड़ो की मेरी चीखे पूरा महल सुन ले,
कुणाल- ये क्या बोल रही हो, क्या हुआ ह तुम्हे
काम्य- मैंने वो साक्षात कामदेव को देख लिया ह, और मेरे अंदर की आग अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रही ह, जितना बोल रही हु उतना करो वर्ण मैं जाती हु बहार किसी और के पास,
कुणाल- करता हु करता हु,
कुणाल ने जालिद से अपने कपडे उतरे और काम्य के कपडे उतरे और सीधा अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, काम्य के मुँह से बस हलकी सी आह्हः निकली उसकी पूरी तरह भीगी हुई छूट में कुणाल के लुंड का ठीक से पता तक नहीं चला वो कब घुस गया, कुणाल ने जल्दी जल्दी धक्के लगाने शुरू क्र दिए, वो काम्य की चीख निकलना चाहता था लेकिन मर्द की सबसे बड़ी गलती hi यही होती ह वो जितनी जल्द बजी में छोड़ता ह उतनी hi जल्दी झाड़ता ह, और अगर ऐसे में औरत उसके शरीर पैर अपना हाथ फिर दे तो वो बर्दास्त hi नहीं कर पता, वही कुणाल के साथ हुआ और 10 मिनट्स में hi उसका शरीर अकडने लगा और उसने जल्दी से अपना लुंड बहार निकल लिया और काम्य की जांघो पैर अपना रास निकल दिया,
कुणाल के झड़ते hi काम्य गुस्से में पागल सी हो गई और उसने एक जोर दर थपड कुणाल के गलो पैर जड़ दिया, कुणाल की आँखों में आंसू आ गए,
काम्य- जब इस लुंड में दम hi नहीं था तो मेरे जैसी औरत से शादी hi क्यों की, नामरद इंसान तेरी वजह से मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई, तू जनता ह न मेरे अंदर कितनी आग ह अब कोण बुझायेगा मेरी इस आग को,
कुणाल के पास कोई शब्द नहीं थे, वो बेचारा उठा और चुप चाप अपने कपडे उठा कर वह से निकल क्र दूसरे बराबर के कर्म में आ गया जिसका रास्ता काम्य के कमरे के अंदर से hi था,
वही काम्य बिस्टेर पैर पद गई और अपनी छूट को अपने hi हाथो से रगड़ने लगी,
इधर अमरावती ने अपना मन पक्का किया और देव के कमरे की तरफ चल दी, और जैसे hi उसने कमरे में कदम रखा तो उसकी सांसे hi थम सी गई, सामने का नजारा इतना खूबसूरत था की दुनिया की कोई भी औरत एक बार देख ले तो नजर न हटा पाए, क्योकि सामने देव बिलकुल नंगा खड़ा था और बड़ा सा लुंड हवा में किसी मीनार की तरह खड़ा था और देव के हाथ में एक तलवार थी जिसे वो बड़े धयान से देख रहा था, उसका धयान hi नहीं था अमरावती कब उसके कमरे में आई या फिर उसे सब पता था और वो बस ये दिखा रहा था की उसे जानकरी नहीं ह,
अमरावती एक मूर्ति की तरह कड़ी रह गई, तभी देव पलटा और अमरावती को देख क्र चोकने का नाटक किया,
देव- आप आप यहाँ,
अमरावती भी एक दम होश में आई, और उसने तुरंत अपना मुँह फेर लिए,
देव – ओह्ह माफ़ करना महारानी, मैं कमरे में ऐसे hi रहता हु,
अमरावती- नहीं माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैं बिना बताये तुम्हारे कमरे में आ गई,
देव- कोई बात नहीं मैं कपडे पहन लेता हु,
अमरावती को लगा जैसे कोई कीमती खजाना छुपाया जार है ह और वो एक दम बोल पड़ी,
अमरावती- नहीं नहीं कोई जरुरत नहीं ह, मैं अपनी वजह से तुम्हे तकलीफ नहीं दे सकती, तुम जैसा रहना चाहो रह सकते हो,
देव- लेकिन आपको परेशानी होगी, आप मेरी तरफ देख भी नहीं प् रही हैं,
अमरावती ने तुरंत अपना मुँह देव की तरफ कर दिया और खुद को सम्हालने की कोशिश की,
अमरावती- हम राजपरिवार के लोग हैं, हमे ये सब सिखाया जाता ह, और ये शर्म उन लोगो के लिए होती ह जिन्होंने समाज को अच्छी तरह नहीं पहचाना ह, हम परिवार हैं और परिवार में एक दूसरे के सामने ऐसे आना कोई बड़ी बात नहीं ह,
देव- क्या सच में हम एक परिवार हैं,
अमरावती- जो पहले हो चुक्का ह उसे बदला तो नहीं जा सकता लेकिन एक नै शुरुआत तो की जा सकती ह, हमे अहसास ह की तुम्हारे साथ गलत हुआ ह, इस उम्र में हर किसी लड़के को एक साथी की जरुरत होती ह, तुम्हे भी थी तो तुमने उस लड़की के साथ रिश्ता बनाया इसमें क्या गलत ह,
देव- लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी,
अमरावती- तुमने गलत लड़की पैर भरोसा क्र लिया था, वो तुम्हारे लायक थी hi नहीं, और जैसा तुम्हारा रूप और तुम्हारा ये अंग ह उसके लिए तो कोई कामुक और अनुभवी औरत hi कुछ कर सकती ह,
देव ने अमरावती की आँखों में झाँका जिसकी नजर बार बार देव के खड़े लुंड पैर जा रही थी,
देव- मेरी किस्मत ऐसी कहा महारानी जहा कोई अनुभवी औरत मेरे नजदीक आ सके,
अमरावती- शायद तुमने कभी अपना खास हुनर किसी को दिखाया नहीं इसलिए कोई आई नहीं,
देव- अब हुनर दिखने के लिए किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं क्र सकता न,
अमरावती- सही कहा, लेकिन अब तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं ह, अब मैं तुम्हारे साथ हु, तुम्हे जॉब hi चाहिए मुझसे कह सकते हो, मैं तुम्हारी दोस्त जैसी हु, और दोस्तों को अपना हाल बताया जा सकता ह, वैसे भी तुम मेरे सेज बेटे नहीं हो, इसलिए दोस्त बन सकते हो,
देव- मुझे ख़ुशी होगी आपसे दोस्ती करके, आपको तो अनुभव भी बहुत होगा, क्या आप मेरी सहायता कर सकती हैं,
अमरावती- मैं मैं कैसे
देव- मेरा मतलब ह कोई अनुभवी औरत ढूंढने में,
अमरावती- है है जरूर, तुम्हे जो चाहिए मुझे बोलना मैं सब कर दूंगी, अब हम सब एक hi परिवार हैं, अपने दिल में कोई गलत भाव मत रखना, जो चाहिए खुल क्र बोलना, मैं सब दे दूंगी,
अमरावती की नजरे सिर्फ देव के खड़े लुंड पैर थी जो बिच बिच में हलके झटके खा रहा था,
ये तीनो भाई एक ऐसी योजना बना रहे थे एक ऐसी योजना जो हर रिश्ते को तर तर करने वाली थी, असल में सूरज ने जो विचार रखे थे वो ये थे,
सूरज- मैं जो बोलने जा रहा हु उसे धयान से सुन्ना और आराम से सोचना, वो देव हमारी बहेनो को फ़साने में लगा हुआ ह, और जैसा मुझे लग रहा ह वो जल्दी hi उन्हें छोड़ देगा, क्योकि हमारी भेने भी उसकी तरफ आकर्षित दिख रही हैं, क्योकि उनकी उम्र हो चुकी ह और तुम देख hi रहे हो उन पैर जवानी कितनी उभर क्र आ रही ह, और ऐसी जवानी में लड़की को लुंड चाहिए hi छाइये, और उनकी शादी भी नहीं हो प् रही ह, दो बार शादी टूट चुकी ह, शायद अब उनसे कोई शादी भी न करे ऐसे में उनका मन भटक रहा होगा, और उस देव ने हमारी सहायता करके सबके दिल में जगह सी बना ली ह, तो हो सकता ह वो उसके निचे आ जाये, और अगर उस देव ने हमारी बहेनो को छोड़ दिया तो हम कही मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे, वो देव कुछ करे उससे पहले हम तीनो एक दूसरे की बहेनो को पता क्र छोड़ देते हैं, वो हमारी सगी भेने नहीं हैं तो ज्यादा फरक भी नहीं पड़ेगा, और उनके अंदर की वासना की आग भी बुझ जाएगी, और वो उस देव के पास नहीं जाएँगी, और घर की बात घर में hi रह जाएगी, और उस रीवा को तीनो छोड़ लेंगे,
सूरज की इस बात से पहले तो दोनों भाई चौंक गए लेकिन जल्दी hi तीनो ने सहमति क्र ली थी, कहने को तो ये सिर्फ देव की वजह से कर रहे थे लेकिन उनके अंदर पहले से hi चारो लड़कियों के लिए वासना भरी हुई थी, और ये बात चारो लड़किया भी जानती थी,
अभिजीत- मुझे सोमिया चाहिए,
सूरज- मुझे अक्षरा चाहिए, वो देव से बहुत लिपट रही थी, उसकी चीखे मेरा लुंड निकलेगा,
ज्वाला- तो अमिता मेरी हुई, और रीवा
सूरज- उसकी तो तीनो मिलकर फाड़ेंगे, रीवा और निहारिका को तो हम अपनी रखैल बनाएंगे, भविषा में हम तीनो में से राजा कोई भी बने लेकिन ये दोनों माँ बेटी हमारी रखैल होंगी,
अभिजीत- लेकिन हम उन्हें पटायेंगे कैसे,
सूरज- जैसे हमने आज तक राजय की इतनी लकडिया पाते हैं, लड़की को बस लुंड चाहिए, एक बार उसे बस छोड़ दो फिर वो किसी से कुछ नहीं खेती क्योकि कोई भी लड़की शर्म की वजह से किसी से नहीं बताती की उसे किसी ने छोड़ दिया ह, और बताएगी भी तो समाज उसे hi गालिया देगा, लड़को का क्या बिगड़ता ह, इसलिए एक बार छोड़ने के बाद हमारी भेने भी चुप रह जाएँगी, और फिर जब उन्हें चुदाई में मजा आने लगेगा तो हमारा साथ देंगी,
ज्वाला- वैसे जब दूसरे की बहन को छोड़ hi रहे हैं तो एक एक का hi मजा क्यों ले, जब हम सबके मजे ले सकते हैं,
अभिजीत- तुमने मेरे मुँह की बात चीन ली, हमारे सामने सगी बहेनो के अलावा 3 लड़किया हैं तो सबका मजा लेंगे न,
सूरज- फिर अपनी बहेनो को hi क्यों बक्शा जाये, अब तो चारो का मजा लेंगे,
ज्वाला- सगी बहन के साथ
सूरज- अरे वो किसी से तो छुड़ेगी hi और छूट और लुंड को क्या पता कोण सागा ह कोण पराया,
तीनो है पड़े, तीनो ने तय कर लिया की अब चारो लड़कियों को छोड़ा जायेगा,
सूरज- पहले अमिता सोमिया और अक्षरा को छोडनेगे फिर वो hi हमारे लिए रीवा को लेकर आएँगी, और तीनो मिकर रीवा को छोड़ेंगे,
अभिजीत- जल्दी से तैयारी करो अब रुका नहीं जा रहा देखो मेरा लुंड कैसे उछाले मर रहा ह,
सूरज- जल्दी hi उन्हें अपने ठिकाने पैर लेकर चलते हैं वही उन्हें काली से फूल बना क्र वापस लाएंगे,
ज्वाला- ठीक ह कोई अच्छा सा दिन तय क्र लेना और मुझे बता देना,
अभिजीत- मैं वह सब इंतजाम करवा देता हु,
तीनो भाई ख़ुशी से झूमने लगे और शराब पीकर नाचने लगे, और अपनी hi बहेनो के लिए अश्लील बाते करने lage,unki चूचियों और गांड के लिए खूब गन्दा बोल बोल क्र थके मरने लगे,
देव महल के बहार गया तो आज पूरी परजा उसके सामने सर झुका रही थी, देव को कुछ ऐसे खास लोग चाहिए तो जो उसकी मदद कर सके, क्योकि ऐसे बहुत कार्य थे जो उससे बहार भी करने थे, तभी एक औरत उसके सामने आ गई, और हाथ जोड़कर कड़ी हो गई,
देव- क्या बात ह
औरत- मैं आपसे माफ़ी मांगना चाहती हु,
देव- माफ़ी किस बात की,
औरत- एक दिन मैंने आपका अपमान किया था, मैंने कहा था पहले अपने लिए इज्जत बनाओ फिर हमारी मदद करना,
देव हँसा- कोई बात नहीं, उस समय तो सबने अपमान hi दिया था, और मुझे किसी सम्मान की जौरात नहीं ह और किसी अपमान का भय नहीं ह,
औरत- इसीलिए तो आप इस संसार के सबसे महँ इंसान ह, आपको सम्मान तो कभी छाइये hi नहीं था, और जो अपमान आपने झेला ह उसके बाद आपको अपमान का भय रहेगा hi नहीं, क्योकि उससे ज्यादा तो अपमान हो hi नहीं सकता,
तभी एक नौजवान लड़का वह आ गया और देव के सामने हाथ जोड़ लिए,
देव- माँ जी ये कोण ह?
औरत- ये मेरे बेटी का बीटा ह, मेरी बेटी कहा गायब हो गई कोई नहीं जनता, वो महल में काम करने जाती थी , कुछ साल पहले वापस hi नहीं आई, हमारी कोई नहीं सुनता,
देव- क्या नाम ह तुम्हारा
लड़का- अभेंद्र
देव- अच्छा नाम ह, क्या करते हो
औरत- बस काम धुंध रहा ह राजकुमार, ये तो सेना में जाने को बोलता ह लेकिन मुझे दर लगता ह,
देव- हम्म्म सेना में जाना चाहते हो,
अभेंद्र- राजकुमार मैं देस की सेवा करना चाहता हु लेकिन नानी जाने नहीं देती बोलती हैं की ऐसे राजाओ के लिए अपनी जान को देव पैर क्यों लगाना जो प्रजा के दुःख नहीं देखता,
औरत- इसे माफ़ कर दो राजकुमार इसे नहीं पता क्या बोल रहा ह,
देव- कोई बात नहीं माँ जी सच hi बोल रहा ह, और सच बोलना कोई अपराध नहीं ह,
अभेंद्र ने एक उम्मीद की नजरो से देव को देखा, जैसे उसे लगा हो की शायद ये हमारा भला कर दे,
देव- देखो इस समय मैं ये तो नहीं जनता की तुम्हारी माँ कहा ह, वो ह भी या नहीं, मैं कोई झूटी उम्मीद नहीं दूंगा, लेकिन इतना विश्वास दिला सकता हु की अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ ह तो गलत करने वालो को सजा जरूर मिलेगी,
अभेंद्र- कोण देगा उन्हें सजा, मैं जनता हु वो राजपरिवार के hi लोग हैं,
देव- वो चाहे जो भी हो उन्हें सजा जरूर मिलेगी, लेकिन उसके लिए तुम क्या कर सकते हो, इस राजय को एक खुश हल राजय बनाने के लिए क्या कर सकते हो,
अभेंद्र- अपने राजय की सेवा करना मेरा धरम ह, उसके लिए मैं कुछ भी कर सकता हु,
देव- ठीक ह तो कल मुझे आकर मिलना राजय के बहार उत्तेर दिशा में जो खण्डार ह वह,
अभेंद्र- ठीक ह राजकुमार,
औरत- तू चला जायेगा तो हमारा घर कैसे चलेगा,
देव- ये इस राजय के लिए काम करेगा तो इसे वेतन भी मिलेगा, लेकिन आपको ख्याल रखना ह की ये बता किसी को पता न चले की ये किसके पास काम करता ह,
औरत- हमे आप पैर पूरा यकीन ह, आप hi हम सबका भला कर सकते हैं, मैं किसी से कोई जीकर नहीं करुँगी,
देव हाथ जोड़ क्र वह से निकल गया, वो आगे कई गाओं में घुमा, और शाम तक वापस आ गया,
इधर भवर सिंह ने दिन में कई बार कोशिश की निहारिका से मिलने की लेकिन हर बार वो चीता सामने खड़ा मिला, भवर सिंह को बहुत गुस्सा आ रहा था, वो उस चीता को मरवा देना चाहता था लेकिन फ़िलहाल कुछ भी गलत करना उसके लिए नुकसान दायक था,
इधर अमरावती और सौमित्र को पूरा दिन हो गया था सोचते सोचते की वो क्या करे, अमरावती को अच्छा लुंड मिल रहा था, उसकी वासना शांत हो रही थी लेकिन उसके अंदर का दर उसे परेशां कर रहा था क्योकि उसका राज काम्य को पता था, और काम्य से खतरनाक कोई नहीं था, इधर सौमित्र इस सोच में थी की उसे ये करना चाहिए या नहीं, अंत में दोनों ने आगे बढ़ने का फैसला क्र hi लिया था,
देव जब महल से बहार था तो अक्षरा और रीवा परेशां सी उसे ढूंढती फिर रही थी, उसके वापस आते hi दोनों उसके पास पहुंची,
रीवा- कहा चला गया था हम कब से धुंध रहे थे,
देव- क्यों क्या हुआ, कोई परेशानी ह क्या
अक्षरा- बस तू नहीं दीखता तो चिंता सी होने लगती ह, यहाँ बहुत दुश्मन ह न जाने कोण क्या करे,
देव- हाहाहाहा जब वो लोग मुझ पैर हावी थे तब तुम्हे डरना चाहिए था तब तुम नहीं डरे, अब वो मेरा कुछ नहीं कर सकते अब क्यों दर रही हो,
रीवा- तू इस समय अपने गुस्से और नाराजगी से भरा हुआ ह तुझे अभी समझ नहीं आएगा हम क्यों दर रहे हैं,
देव- क्या मुझे नाराज होने का भी अधिकार नहीं ह,
रीवा- पूरा हक़ ह, मैं नहीं चाहती की 18 साल की नाराजगी कुछ hi पालो में दूर हो जाये, और हमने तुझे इतनी तकलीफे दी हैं की इंसान पूरी जिंदगी उन्हें नहीं भूल सकता, फिर भी हम इंतजार करेंगी की तू हमे अपने दिल से माफ़ कर दे, क्योकि हमे माफ़ करना आसान नहीं होगा,
अक्षरा बस दोनों की बाते सुन रही थी,
अक्षरा- ोये तू चुप क्र, मैं इतना इंतजार नहीं कर सकती, अब जो गलती हो गई उसे बदल तो नहीं सकते तो क्या साडी उम्र ऐसे hi दुःख में जीवन बिताएंगे, और देव बाबू तुम, बहुत हो गई नाराजगी अब हमे माफ़ कर दो, जो सजा देनी ह दे दो हम है क्र उस सजा को पूरा करेंगी लेकिन हमसे अब नाराज मत रहना मैं जी नहीं पाऊँगी,
अक्षरा की आँखों में आंसू आ गए,
देव ने उसे गले लगा लिया,
देव- मैं कोई नाराज नहीं हु, तुम बस ये रोया मत करो समझी न,
रीवा की आँखे भी नाम थी और होतो पैर हलकी सी मुस्कान थी,
जब से देव महल में आया था राजगुरु न जाने किस गणित में लगे हुए थे, वो अपने कर्म में बैठे बहुत सी कुण्डलिया खोले बैठे थे, उनके अंदर का दर उनके चेरे पैर साफ़ दिख रहा था,
राजगुरु खुद से hi- कुछ समझ नहीं आ रहा, आज भी उसका भविष्य क्यों नहीं दिख रहा ह, जहा तक उसका भविष्य दीखता था वो समय पूरा हो चुक्का ह, उसे मर जाना चाहिए था, फिर वो जिन्दा कैसे ह, और तबाही आ रही ह, मुझे दिख रहा ह कुछ बहुत बुरा होने वाला ह, कैसे रोकू, अब तक सात्विक भी वापस नहीं आया ह, भौमिक को बुलवाता हु वो कुछ मदद कर सके, नहीं नहीं वो अपनी साधना में लगा ह,
अरे है ये तो मैंने सोचा hi नहीं भौमिक को जो शक्तिया मिली हैं शायद वो किसी काम आ जाये, और अगर भौमिक को मिली हैं तो सात्विक को भी मिली होगी, मेरे दोनों भाई हमारे राजय को बचा सकते हैं,
राजगुरु खुद से बात कर hi रहे थे की अचानक उनके दिमाग में कुछ हलचल हुई,
राजगुरु खुद से hi- शक्तिया मैंने इस तरफ क्यों नहीं सोचा, ये शक्तिया एक दम आई कहा से, और कही देव के साथ भी तो ऐसा कुछ तो नहीं हुआ जो भौमिक और सात्विक के साथ हुआ ह, क्योकि एक भौमिक कुछ hi समय में ताकतवर बन गया ह, कही एशिया hi कुछ देव और निहारिका के साथ तो नहीं हुआ, क्या कोई शकित जागृत हो रही हैं, इस संसार में कोई देविया शक्तिया जागृत हो रही हैं, लेकिन ये शक्तिया हैं क्या, कहा से आई, मुझे इस पैर धयान देना होगा, मुझे महाराज से बात करनी होगी,
राजगुरु तुरंत उठे और भवर सिंह की पास चल दिए फिर अचानक रुक गए,
राजगुरु- नहीं नहीं भवर सिंह को अगर इस बारे में पता चला तो वो पागल हो जायेगा, और पुरे राजय को युद्ध में झोक देगा, पहले मुझे hi सब पता करना होगा, उसी के बाद कुछ बोल सकता हु,
राजगुरु ने फिर से कुछ बहुत पुराणी किताबे निकल ली और पढ़ने लगे,
वही जंगलो में सात्विक अपने धयाम में बैठा था और उसका शरीर एक दम तप रहा था जैसे उसके शरीर में आग लगी हुई हो, उसके चेरे पैर तपन की लाली साफ़ दिख रही थी, तभी उसने एक दम अपनी आँखे खोल दी, उसकी आँखे लाल हो राखी थी, आँखे खुलते hi उसके चेरे पैर एक अजीब सी मुस्कान आ गई, सात्विक खड़ा हुआ और उसने अपने चारो तरफ देखा और जोर जोर से हसने लगा, वो बस हस्ता hi रहा, उसकी हसी बहुत भयानक थी, फिर अचानक वोट क दम चुप हो गया,
सात्विक खुद से hi- पूरा संसार इस शक्ति के लिए पागल ह, लेकिन ये शक्ति मेरे पास ह, मैं कुछ भी कर सकता हु, मैं सर्वशक्ति शैली हु, सबसे महँ तांत्रिक हु मैं, तंत्र गुरु अब मैं आपसे भी ज्यादा शक्ति शैली हु, इस संसार में मुझसे बड़ा तांत्रिक पैदा नहीं हो सकता, अब ये पूरी दुनिया मेरे सामने झुकेगी,
सात्विक के अंदर नकारात्मक ऊर्जा ने अपनी जगह बना ली थी, जिस वजह से उसकी तांत्रिक विद्या का ज्ञान और बढ़ गया था और वो उस पैर हावी भी हो गई थी, सात्विक के अंदर दबी हुई महत्वकांक्षाए अब उभर क्र बहार आ रही थी, वो हमेशा से सर्वशक्ति शैली बनना चाहता था लेकिन राजगुरु और भौमिक की सांगत में उसके ये विचार उसके अंदर hi दबे रहते थे लेकिन अब उसके अंदर की अच्छे कही खो चुकी थी, और उसकी बुराई ने जगह बना ली थी,
सात्विक वह से चल दिया उस पहाड़ की तरफ जहा भैरव सोया हुआ था, सात्विक ने अपनी रफ़्तार पैर धयान दिया और अपनी तेज रफतार को देख क्र वो और खुश हुआ,
कुछ hi देर में वो उस गुफा में पहुंच गया, राजा भैरव के रक्षक अभी भी उस ताबूत को घेरे बैठे हुए थे, सात्विक को वापस आया देख सब खड़े हो गए,
उनका बूढ़ा आदमी- महाराज आप आ गए,
सात्विक- है और इन्हे जगाने की विद्या भी सिख ली ह,
सात्विक ने भैरव सिंह को जैसे hi छुआ तो वो एक दम से किसी और दुनिया में पहुंच गया, चारो तरफ एक दम शांति थी, खुला आसमन था सात्विक ने अपने चारो तरफ देखा तो उसने पाया की वो अंतरिक्ष में ह, और वो हवा में उड़ रहा ह, एक पल के लिए वो घबरा गया, तभी उसे एक आवाज आई,
आवाज- तो तुम हो वो महँ तांत्रिक जो मुझे जगाने आया ह, अगर तुमने मुझे जगा दिया तो इस पुरे संसार को तेरे सामने झुका दूंगा,
सात्विक आवाज की तरफ जाना चाहता था लेकिन उसका खुद पैर कोई काबू नहीं था,
सात्विक- कोण हो तुम
आवाज- राजा भैरव
सात्विक- हम ह कहा
भैरव- मेरे मस्तिष्क में
सात्विक- आपको कैसे जागो,
भैरव- मुझे जगाने के लिए पहले तुम्हे तीनो शक्तियों को आजाद करना होगा, जिसमे से दो आजाद हो चुकी हैं, जब तक वो तीसरी आजाद नहीं होगी तब तक मेरे ये निंद्रा नहीं टूटेगी,
सात्विक- कहा हैं वो शक्तिया
भैरव- एक तो मैं तुम्हारे अंदर महसूस कर प् रहा हु, दूसरी आजाद हो गई ह लेकिन मैं नहीं जनता और तीसरी तुम्हे खुद ढूढ़नी होगी, और वो शक्ति किसी ऐसे के पास होनी चाहिए जो तुम्हारे और मेरे कहने पैर चल सके, हमारा साथी बनना चाहिए, जैसे hi वो शक्ति आजाद होगी तुम्हे महसूस हो जाएगी उसके बाद तुम मेरी नींद्र के मंत्रो को तोड़ सकते हो,
सात्विक- मैं अपना धयान लगा क्र उस शक्ति को ढूंढता हु,
भैरव- ये इतना आसान नहीं ह, वो ढूढ़ने से कभी नहीं मिल सकती, अगर ऐसे मिल जाती तो बहुत से ज्ञानी उन शक्तियों को ढूंढते हुए मृत्यु को प्राप्त हो गए, वो कब के धुंध लेते,
सात्विक- फिर मुझे क्या करना होगा,
भैरव- तुम्हे सब जगह जाना होगा, और खोजना होगा, जब तुम उस शक्ति के करीब होंगे या उस शक्ति के प्रभाव वाले इंसान से मिलोगे तो तुम्हे खुद अहसास हो जायेगा, अब जाओ और जल्दी से उसे धुंध क्र वापस आओ,
तभी सात्विक को एक झटका लगा और वो वापस उस गुफा में पहुंच गया और उसने अपना हाथ हटाया,
बूढ़ा आदमी- क्या हुआ महाराज आप कहा खो से गए थे, राजा कब उठेंगे,
सात्विक- उसके लिए मुझे कही जाना होगा, एक खोज पैर, तुम सब में से सबसे अच्छे योद्धा मेरे साथ चलो इस खोज के लिए, तुम्हरे राजा को जगाने के लिए ये खोज बहुत जरुरी ह,
बूढ़ा आदमी- महाराज आप जिसे चाहो ले जाओ, ये सभी बहुत शक्ति शैली योद्धा हैं, इस संसार में इन्हे कोई नहीं हरा सकता, बस इन्हे समय पैर मॉस और औरत मिलनी चाहिए, ये उसके बिना नहीं रह सकते,
सात्विक- सब मिलेगा,
सात्विक उस गुफा से निकल गया और उसके साथ 20 आदमी और चल दिए, जो देखने में hi बहुत खूंखार और ताकतवर थे,
ये सफर सात्विक को कहा लेजाने वाला था वो भी नहीं जनता था, वो पहले से बहुत बदल चुक्का था लेकिन ये सफर उसे और कितना बदलने वाला था इसका उसे अंदाजा नहीं था,
रात के भोजन के समय भवर सिंह अपने परिवार के साथ बैठा हुआ था लेकिन वह सिर्फ काम्य अमरावती सौमित्र और तीनो राजकुमार थे, क्योकि निहारिका का भोजन उसके कमरे में hi लगवाया गया था और चारो लड़किया भी निहारिका के साथ hi भोजन कर रही थी, और देव तो वही होता जहा उसकी माँ होती,
भवर सिंह- हमारी बेतिया कहा ह वो आज भोजन पैर साथ क्यों नहीं हैं,
सूरज- वो उन माँ बेटो के साथ भोजन कर रही हैं,
भवर सिंह गुस्से में आग बबूला हो गया,
भवर सिंह- उनकी हिम्मत कैसे हुई,
काम्य- करने दीजिये महाराज फ़िलहाल उन्हें छेड़ना ठीक नहीं ह,
अभिजीत- लेकिन माँ इससे तो हमारा परिवार बिखर जायेगा, जब सब अपनी मर्जी से काम करने लगेंगे तो महाराज का दर ख़तम हो जायेगा,
काम्य- तुम अभी कुछ नहीं जानते यहाँ क्या चल रहा ह तो अपन ामुह बंद रखो,
भवर सिंह- उसे क्यों दन्त रही हो वो सही तो बोल रहा ह,
काम्य- वो दोनों अभी वापस आये हैं तो थोड़ा बहुत प्यार लुटाने दो, समय आने पैर सब बदल जायेगा,
भवर सिंह- तुमने कोई तरीका निकला क्या उसके बारे में जानने का,
काम्य ने अमरावती और सौमित्र की तरफ देख क्र कहा- तरीका निकला तो ह देखते हैं वो कितना जल्दी आपकी सहायता कर पते हैं,
भवर सिंह- जो भी उनकी जानकारी निकलेगा हम उन्हें बहुत बड़ा पुरुस्कार देंगे,
पुरुस्कार का नाम सुनते hi सौमित्र खुश हो गई,
भोजन करने के बाद जब सब अपने कमरे में चले गए तो काम्य ने सौमित्र से पूछा क्या वो तैयार ह तो सौमित्र ने हामी भर दी,
उसके बाद काम्य अमरावती के पास गई और उससे भी पूछा, अमरावती के पास कोई और रास्ता नहीं था उसने भी है कर दी, काम्य खुश होती हुई अपने कमरे में आ गई, जहा उसने कुणाल को बिस्टेर पैर धकेला और उसके उप्पेर चढ़ क्र बैठ गई,
कुणाल- क्या कर रही हो,
काम्य- मुझे तुम्हरा लुंड छाइये मेरी छूट में, आज मुझे ऐसा छोड़ो की मेरी चीखे पूरा महल सुन ले,
कुणाल- ये क्या बोल रही हो, क्या हुआ ह तुम्हे
काम्य- मैंने वो साक्षात कामदेव को देख लिया ह, और मेरे अंदर की आग अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रही ह, जितना बोल रही हु उतना करो वर्ण मैं जाती हु बहार किसी और के पास,
कुणाल- करता हु करता हु,
कुणाल ने जालिद से अपने कपडे उतरे और काम्य के कपडे उतरे और सीधा अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, काम्य के मुँह से बस हलकी सी आह्हः निकली उसकी पूरी तरह भीगी हुई छूट में कुणाल के लुंड का ठीक से पता तक नहीं चला वो कब घुस गया, कुणाल ने जल्दी जल्दी धक्के लगाने शुरू क्र दिए, वो काम्य की चीख निकलना चाहता था लेकिन मर्द की सबसे बड़ी गलती hi यही होती ह वो जितनी जल्द बजी में छोड़ता ह उतनी hi जल्दी झाड़ता ह, और अगर ऐसे में औरत उसके शरीर पैर अपना हाथ फिर दे तो वो बर्दास्त hi नहीं कर पता, वही कुणाल के साथ हुआ और 10 मिनट्स में hi उसका शरीर अकडने लगा और उसने जल्दी से अपना लुंड बहार निकल लिया और काम्य की जांघो पैर अपना रास निकल दिया,
कुणाल के झड़ते hi काम्य गुस्से में पागल सी हो गई और उसने एक जोर दर थपड कुणाल के गलो पैर जड़ दिया, कुणाल की आँखों में आंसू आ गए,
काम्य- जब इस लुंड में दम hi नहीं था तो मेरे जैसी औरत से शादी hi क्यों की, नामरद इंसान तेरी वजह से मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई, तू जनता ह न मेरे अंदर कितनी आग ह अब कोण बुझायेगा मेरी इस आग को,
कुणाल के पास कोई शब्द नहीं थे, वो बेचारा उठा और चुप चाप अपने कपडे उठा कर वह से निकल क्र दूसरे बराबर के कर्म में आ गया जिसका रास्ता काम्य के कमरे के अंदर से hi था,
वही काम्य बिस्टेर पैर पद गई और अपनी छूट को अपने hi हाथो से रगड़ने लगी,
इधर अमरावती ने अपना मन पक्का किया और देव के कमरे की तरफ चल दी, और जैसे hi उसने कमरे में कदम रखा तो उसकी सांसे hi थम सी गई, सामने का नजारा इतना खूबसूरत था की दुनिया की कोई भी औरत एक बार देख ले तो नजर न हटा पाए, क्योकि सामने देव बिलकुल नंगा खड़ा था और बड़ा सा लुंड हवा में किसी मीनार की तरह खड़ा था और देव के हाथ में एक तलवार थी जिसे वो बड़े धयान से देख रहा था, उसका धयान hi नहीं था अमरावती कब उसके कमरे में आई या फिर उसे सब पता था और वो बस ये दिखा रहा था की उसे जानकरी नहीं ह,
अमरावती एक मूर्ति की तरह कड़ी रह गई, तभी देव पलटा और अमरावती को देख क्र चोकने का नाटक किया,
देव- आप आप यहाँ,
अमरावती भी एक दम होश में आई, और उसने तुरंत अपना मुँह फेर लिए,
देव – ओह्ह माफ़ करना महारानी, मैं कमरे में ऐसे hi रहता हु,
अमरावती- नहीं माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए, मैं बिना बताये तुम्हारे कमरे में आ गई,
देव- कोई बात नहीं मैं कपडे पहन लेता हु,
अमरावती को लगा जैसे कोई कीमती खजाना छुपाया जार है ह और वो एक दम बोल पड़ी,
अमरावती- नहीं नहीं कोई जरुरत नहीं ह, मैं अपनी वजह से तुम्हे तकलीफ नहीं दे सकती, तुम जैसा रहना चाहो रह सकते हो,
देव- लेकिन आपको परेशानी होगी, आप मेरी तरफ देख भी नहीं प् रही हैं,
अमरावती ने तुरंत अपना मुँह देव की तरफ कर दिया और खुद को सम्हालने की कोशिश की,
अमरावती- हम राजपरिवार के लोग हैं, हमे ये सब सिखाया जाता ह, और ये शर्म उन लोगो के लिए होती ह जिन्होंने समाज को अच्छी तरह नहीं पहचाना ह, हम परिवार हैं और परिवार में एक दूसरे के सामने ऐसे आना कोई बड़ी बात नहीं ह,
देव- क्या सच में हम एक परिवार हैं,
अमरावती- जो पहले हो चुक्का ह उसे बदला तो नहीं जा सकता लेकिन एक नै शुरुआत तो की जा सकती ह, हमे अहसास ह की तुम्हारे साथ गलत हुआ ह, इस उम्र में हर किसी लड़के को एक साथी की जरुरत होती ह, तुम्हे भी थी तो तुमने उस लड़की के साथ रिश्ता बनाया इसमें क्या गलत ह,
देव- लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी,
अमरावती- तुमने गलत लड़की पैर भरोसा क्र लिया था, वो तुम्हारे लायक थी hi नहीं, और जैसा तुम्हारा रूप और तुम्हारा ये अंग ह उसके लिए तो कोई कामुक और अनुभवी औरत hi कुछ कर सकती ह,
देव ने अमरावती की आँखों में झाँका जिसकी नजर बार बार देव के खड़े लुंड पैर जा रही थी,
देव- मेरी किस्मत ऐसी कहा महारानी जहा कोई अनुभवी औरत मेरे नजदीक आ सके,
अमरावती- शायद तुमने कभी अपना खास हुनर किसी को दिखाया नहीं इसलिए कोई आई नहीं,
देव- अब हुनर दिखने के लिए किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं क्र सकता न,
अमरावती- सही कहा, लेकिन अब तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं ह, अब मैं तुम्हारे साथ हु, तुम्हे जॉब hi चाहिए मुझसे कह सकते हो, मैं तुम्हारी दोस्त जैसी हु, और दोस्तों को अपना हाल बताया जा सकता ह, वैसे भी तुम मेरे सेज बेटे नहीं हो, इसलिए दोस्त बन सकते हो,
देव- मुझे ख़ुशी होगी आपसे दोस्ती करके, आपको तो अनुभव भी बहुत होगा, क्या आप मेरी सहायता कर सकती हैं,
अमरावती- मैं मैं कैसे
देव- मेरा मतलब ह कोई अनुभवी औरत ढूंढने में,
अमरावती- है है जरूर, तुम्हे जो चाहिए मुझे बोलना मैं सब कर दूंगी, अब हम सब एक hi परिवार हैं, अपने दिल में कोई गलत भाव मत रखना, जो चाहिए खुल क्र बोलना, मैं सब दे दूंगी,
अमरावती की नजरे सिर्फ देव के खड़े लुंड पैर थी जो बिच बिच में हलके झटके खा रहा था,
























