Incest GHAR KI AAG (URDU) - Page 5 - SexBaba
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Incest GHAR KI AAG (URDU)

घर की आग

Episode 20: समझौते की रात और नया दस्तूर

हवेली में रात का सन्नाटा गहरा चूका था, मगर बिलाल के कमरे में हवस की गर्माहट दीवारों को पिघला रही थी. बिलाल नंगा बिस्तर पर लेता था, उसकी नज़रें दरवाज़े पर थीं. नसीम जैसे hi अंदर दाखिल हुई, बिलाल की आँखों में शैतानी चमक आ गयी.

सन 1: नसीम का डोमिनान्स और गहरी चुदाई

नसीम ने दरवाज़ा लॉक किया और बिलाल के क़रीब आयी. उसने आज रेशमी लॉन की बारीक क़मीज़ पहनी थी जिसके निचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसके भरे हुए मम्मी साफ़ नज़र आ रहे थे.

"तोह... दामाद जी को इतनी जल्दी थी?" नसीम ने मुस्कुराते हुए पूछा और अपनी क़मीज़ उतार दी.

बिलाल ने कुछ कहना चाहा मगर नसीम ने उसके होंठों पर ऊँगली रख दी. "आज निज़ाम बदल गया है बिलाल. कल तुमने मुझे फ़तेह किया था, आज मैं तुम्हे बताउंगी के तजुर्बा क्या होता है."





नसीम ने बिलाल को बिस्तर पर सीधा लिटाया और खुद उसके पैरों की तरफ बैठ गयी. उसने बिलाल की मर्दानगी को अपने नरम हाथों में थमा और उसे किसी लोल्लिपोप की तरह चाटना शुरू किया.





बिलाल की सिसकारी निकल गयी जब नसीम ने पूरा लुंड अपने हलक़ तक उतार लिया. नसीम आज पूरे डोमिनान्स में थी; वह बिलाल को हिलने तक का मौका नहीं दे रही थी.





कभी वह उसके होंठों को दांतो से काटती, तोह कभी उसके सीने के बालों से खेलते हुए उसके निप्पल्स को मसलती.





"आह... अम्मी... जान निकल देंगी क्या?" बिलाल ने तड़प कर पूछा.





नसीम ने बिलाल के ऊपर सवार होते हुए उसका लुंड पकड़ा और अपनी गीली छूट के लबों पर रगड़ा.





"अभी तोह सिर्फ शुरुआत है." नसीम ने एक hi झटके में लुंड पूरा अंदर ले लिया





और बिलाल के ऊपर तेज़ी से उछलने लगी. उसके भरे हुए मम्मी बिलाल के चेहरे पर थप्पड़ मार रहे थे.





बिलाल ने उन्हें पकड़ना चाहा मगर नसीम ने उसके हाथ पकड़ कर बिस्तर से चिपका दिए.





वह खुद अपने झटकों से बिलाल को बेहाल कर रही थी.





"मज़ा आ रहा है बिलाल? बोलो... कैसा लग रहा है मेरी ग़ुलामी में?" नसीम ने हप्ते हुए पूछा और तेज़ी बढ़ा दी.





बिलाल लज़्ज़त की इन्तहा पर था और नसीम के इस डोमिनेंट रूप ने उसे पागल कर दिया था. वो ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और दोनों ने एक साथ चीखते हुए एक दूसरे को निचोड़ लिया.





बिलाल ने अपना सारा पानी नसीम के अंदर भर दिया.

सन 2: दूसरा राउंड और घर का नया निज़ाम

पहले राउंड के बाद बिलाल be-jaan पड़ा था, मगर नसीम अभी फ़ारिग़ नहीं हुई थी. वह उठी, बिलाल के लिए पानी लायी और उसे पिलाया. फिर वह दोबारा उसके जिस्म से खेलने लगी.

"बिलाल... सुनो," नसीम ने बिलाल की गर्दन पर बोसे देते हुए दुसरे राउंड के लिए तैयार करना शुरू किया.









"अब घर में ये रोना धोना और गुस्सा ख़तम होना चाहिए. रशीद साहब मायूस हैं, सीमा निदामत में है. मैं चाहती हूँ के हम इस घर को एक नया मोड़ दें. हर कोई आज़ाद हो, कोई किसी से न छुपाये."

बिलाल ने नसीम की कमर पकड़ी. "आप क्या चाहती हैं?"

"मैं चाहती हूँ के तुम सीमा को माफ़ कर दो. वह बची है, भटक गयी थी. बदले में मैं तुम्हारे लिए हमेशा हाज़िर हूँ. और सिर्फ मैं hi नहीं... हिरा और आयेशा भी अब जवान हो रही हैं. अगर हम सब मिल कर एक दूसरे की ज़रुरत पूरी करें, तोह बहार मुंह मारने की ज़रुरत hi क्या है?" नसीम ने बिलाल के लुंड को दोबारा सहलाया जो अब फिर से अकड़ रहा था.

"आप सही कह रही हैं नसीम. अगर घर में hi इतना माल हो, तोह बहार क्यों जाना?"





बिलाल ने इस बार नसीम को अपने निचे दबाया. और छोड़ना शुरू किया.

अब दुसरे राउंड में बिलाल ने नसीम की हर ख्वाहिश का ख्याल रखा. नसीम ने उसे बताया के उसे 'डोगग्य स्टाइल' पसंद है. बिलाल ने नसीम को घुटनो के बल खरा किया और पीछे से be-rehami से धक्के लगाने शुरू किये.





नसीम की सिसकारियों से कमरा गूँज रहा था.





"आह... हाँ... ऐसे hi बिलाल! मुझे बताओ के तुम अब इस घर के मर्द हो!" नसीम ने अपनी गांड पीछे मारी.





बिलाल ने नसीम के नितम्ब (बटक्स) पर ज़ोर से थप्पड़ मरे और जूनून में चुदाई जारी राखी.





आखिर में बिलाल ने अपना लुंड बहार निकाला और नसीम के चेहरे और होंठों पर अपना गरम गारा बिखेर दिया.





सन 3: आयेशा और हमजा का तजस्सुस

कमरे के बहार, आयेशा अभी भी कॉरिडोर में खरी थी. उसने दरवाज़े की दराज़ से नसीम को बिलाल पर सवार होते और फिर ज़लील होते सब देख लिया था. उसके जिस्म में आग लगी हुई थी. उसने देखा के कैसे उसकी माँ ने उसके दामाद को अपने सेहर में ले लिया है.

तभी हमजा वहां आया. उसने आयेशा को वहां खरे देख कर मुस्कुरा दिया. "क्या देख रही हो आयेशा? अम्मी का 'कफ़्फ़ारा'?"

आयेशा ने शर्म से सर झुका लिया मगर वहां से हटी नहीं. हमजा उसके क़रीब गया और उसके कान में सरगोशी की. "डरो मत... अब इस घर में यही होना है. अम्मी ने रास्ता दिखा दिया है, अब हमारी बारी है."

हमजा ने आयेशा की कमर पर हाथ रखा और उसे अपने साथ टेरेस की तरफ ले जाने लगा. आयेशा ने इंकार नहीं किया. उसे लग रहा था के उसकी माँ ने जो दरवाज़ा खोला है, उस से अब सब गुज़रेंगे.

सन 4: रशीद साहब की ख़ामोशी

इधर रशीद साहब अपने कमरे में बैठे तस्बीह पढ़ रहे थे, मगर उनका ध्यान बिलाल के कमरे से आती सिसकारियों पर था. उन्हें पता था के नसीम वहां क्या कर रही है. मगर जो प्लान नसीम ने उन्हें बताया था, उसने उनके अंदर एक pur-asrar उम्मीद जगा दी थी.

"नसीम... तुम जो भी कर रही हो, बस मुझे मेरी मर्दानगी लौटा दो," उन्हों ने दिल में दुआ की. उन्हें इंतज़ार था उस 'खास तोहफे' का जिसका वादा नसीम ने किया था.

**Episode ख़तम.**

क्लिफहैंगर: नसीम ने बिलाल को पूरी तरह अपना घुलम बना लिया है. मगर क्या हमजा और आयेशा टेरेस पर कुछ ऐसा करेंगे जिस से घर का निज़ाम हमेशा के लिए बदल जाये? और रशीद साहब का 'सरप्राइज' कब सामने आएगा?
 
3 एपिसोड्स इन जस्ट 10 हॉर्स टाइम अस प्रॉमिस्ड.

होप यू गाइस लिकेड थिस.

नाउ ी ऍम वेटिंग फॉर योर फीडबैक.
 
घर की आग

Episode 21: टेरेस की तपिश और छुपे हुए राज़

टेरेस पर ठंडी हवा चल रही थी, मगर माहौल भोझल था. हमजा और आयेशा ने देखा के सीमा मुंडेर (पैरापेट वाल) से तक लगाए अकेले बैठी रो रही है. उसका दुपट्टा कंधे से ढलक रहा था और आँखें सूजी हुई थीं.

सन 1: सीमा का दुःख और Behan-Bhai का साथ

"एपीआई? आप यहाँ अकेली क्यों बैठी हैं?" हमजा ने क़रीब जा कर उसके कंधे पर हाथ रखा.

सीमा ने चौंक कर देखा और आंसू पोंछने लगी. "हमजा... आयेशा... तुम लोग यहाँ? बस, दिल घबरा रहा था. बिलाल ने आज सब के सामने अम्मी का हाथ पकड़ा, उन्हें be-izzat किया... ये सब मेरी वजह से हो रहा है. मैं कितनी bad-naseeb हूँ."

हमजा उसके बराबर बैठ गया और उसका हाथ पाकर कर दबाया. "एपीआई, आप खुद को क्यों क़सूरवार समझती हैं? जो हुआ, वह हो गया. और रही बात बिलाल भाई की, तोह उन्हें अम्मी संभल लेंगी. आप देखना, कल तक वह बिलकुल बदले हुए होंगे."

आयेशा ने सीमा की दूसरी तरफ बैठ कर उसके बाल सँवारे. "हाँ एपीआई, अम्मी ने तोह कफ़्फ़ारा देने का फैसला कर लिया है. अब आप क्यों रोटी हैं? बल्कि अब तोह घर में सब खुल कर जी रहे हैं. आप उस्मान भाई के बारे में सोच कर परेशां मत हों, वह भी अब सब समझ गए हैं."

माहौल को हल्का करने के लिए हमजा ने शरारत से सीमा की कमर में ऊँगली मारी. "ओहो एपीआई! अब ये रोना धोना छोड़ें. वैसे सुना है हैदराबाद में आपने उस्मान भाई के साथ काफी 'गहरी' रिसर्च की थी? हम से तोह इतनी बड़ी बात छुपाई!"

सीमा पहले तोह शर्मायी, फिर हल्का सा मुस्कुरा दी. "चुप कर बेशरम! तू कब से इतना बड़ा हो गया?"

आयेशा ने मौका देखा और हमजा की टांग खींची. "एपीआई, आप हमजा की बातें कर रही हैं? इसने तोह हिरा को भी नहीं छोड़ा! आप को पता है किचन में क्या हुआ था?"

सीमा ने हैरत से आँखें फैलायीं. "क्या? हमजा और हिरा? ये कब शुरू हुआ?"

आयेशा ने हँसते हुए बताया, "एपीआई, उस दिन उधर अम्मी, अब्बू हैदराबाद के लिए निकले hi थे के इधर यह लोगों का खेल शुरू होगया. हिरा ने किचन में ऐसी बारीक क़मीज़ पहनी थी के सब नज़र आ रहा था. इसे (हमजा को) हिरा ने वही घेर लिया. हिरा इसे खूब तड़पाया, कभी मसाला लगते हुए हाथ लगाती तोह कभी अपना बदन इस से रगरती. हमजा तोह पागल हो गया था, वही किचन के काउंटर पर इसने हिरा की 'खिदमत' शुरू कर दी थी!"

सीमा का मुंह खुला का खुला रह गया. "सच्ची? हिरा ने इतनी हिम्मत की?"

"हिम्मत क्या एपीआई, वह तोह अब अम्मी से भी दो हाथ आगे है," हमजा ने हस्ते हुए कहा. "अब इस घर में कोई 'बचा' नहीं रहा. सब प्लेयर बन चुके हैं."

सन 2: तपिश का एहसास और लबों का लम्स

इन बातों से माहौल में एक अजीब सी गर्माहट पैदा होने लगी. सीमा ने महसूस किया के आयेशा की सांसें तेज़ हो रही हैं और उसका चेहरा सुर्ख हो रहा है. सीमा, जो शादीशुदा है और पहले hi हैदराबाद में उस्मान के साथ चुदाई के मज़े चख चुकी थी, वह आयेशा की 'गर्मी' को फ़ौरन भांप गयी.

सीमा ने आयेशा का चेहरा अपने हाथों में लिया. "आयेशा... तू क्यों इतनी गरम हो रही है? क्या तुझे भी किसी 'रिसर्च' की ज़रुरत है?"

आयेशा ने नज़रें झुका लें मगर उसने इंकार नहीं किया. सीमा ने धेरै से आगे बढ़ कर आयेशा के लबों पर अपने होंठ रख दिए. हमजा वही बैठा ये मंज़र देख कर दांग रह गया. सीमा ने आयेशा के होंठ पूरी शिद्दत से चूसे, जैसे वह अपनी साड़ी जलन और दुःख उस नए लम्स में निकाल देना चाहती हो.

आयेशा ने भी सिसकारी भरते हुए सीमा का साथ दिया. सीमा का हाथ आयेशा के नरम और उभरे हुए मम्मों पर गया और उसने उन्हें क़मीज़ के ऊपर से hi ज़ोर से दबाना शुरू किया.

"अह्ह्ह... एपीआई... ये क्या कर रही हैं... हमजा देख रहा है," आयेशा ने हप्ते हुए कहा.

"देखने दे... ये मज़ा तोह अब हमारा हक़ है," सीमा ने आयेशा के सीने पर हाथ फेरते हुए कहा. हमजा ने भी मौका देखा और आयेशा की क़मीज़ पीछे से उठा कर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगा. टेरेस पर तीन behan-bhai एक दूसरे के जिस्मों से खेल रहे थे.

सन 3: नसीम की आमद और रशीद साहब से गुफ्तगू

तभी टेरेस के दरवाज़े पर साया लहराया. नसीम वहां खरी थी, उसके बाल बिखरे हुए थे और चेहरे पर बिलाल के साथ बितायी गयी रात का नशा साफ़ था. उसने इन तीनो को इस हाल में देखा तोह उसके लबों पर एक pur-asrar मुस्कराहट आयी.

"बस... बोहोत हो गया," नसीम ने सख्ती मगर प्यार से कहा. तीनो फ़ौरन अलग हुए और हड़बड़ा कर खरे हो गए.

"अम्मी... हम तोह बस..." हमजा ने सफाई देनी चाही.

"मुझे पता है तुम लोग क्या कर रहे थे. मगर अभी वक़्त नहीं है. रात बोहोत हो गयी है, सब अपने अपने कमरों में जाओ. जो खेल तुम खेलना चाहते हो, उसके लिए पूरी ज़िन्दगी पारी है," नसीम ने उन्हें रास्ता दिया. सीमा और आयेशा नज़रें झुकाये निचे चली गयीं, हमजा भी उनके पीछे निकल गया.

नसीम अब अकेली टेरेस पर खरी थी. फिर वह धेरै से रशीद साहब के कमरे की तरफ बरही. रशीद साहब अभी तक जाग रहे थे.

"रशीद... देखा आपने?" नसीम ने उनके पास बैठते हुए कहा. "बचे अब किसी परदे के मोहताज नहीं रहे. सीमा और आयेशा भी अब रस्ते पर आ रही हैं."

रशीद साहब ने नसीम का हाथ पकड़ा. "नसीम, ये सब कहाँ रुकेगा? मुझे डर लगता है."

नसीम ने उनके सीने पर सर रखा. "डरिये मत रशीद. जब आग लगती है तोह सब कुछ राख हो जाता है, मगर उस राख से एक नया निज़ाम बनता है. मैं बिलाल को संभल चुकी हूँ, अब बारी आपकी है. मैं आपके लिए एक ऐसा 'सरप्राइज' तैयार कर रही हूँ के आप अपनी साड़ी मायूसी भूल जायेंगे. बस मुझ पर भरोसा रखें."

रशीद साहब ने गहरी सांस ली. उन्हें महसूस हो रहा था के उनकी बीवी अब सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पुरे खंडन की 'रूह' बन चुकी hai—ek ऐसी रूह जो उन्हें गुनाह की तरफ ले जा रही थी, मगर वहां सुकून भी था.

**Episode ख़तम**

क्लिफहैंगर: नसीम ने बचो को तोह अलग कर दिया, मगर उसने हमजा और आयेशा के दिल में जो आग देखि, वह उसे कैसे इस्तेमाल करेगी? और रशीद साहब के लिए वह कौनसा 'सरप्राइज' है जो उनकी मर्दानगी को दोबारा जगायेगा?
 
**घर की आग**

Episode 22: रिश्तों की सियासत और नयी खिदमत

हवेली की फ़ज़ा में अब वह पहले जैसी घुटन नहीं थी. रात की तपिश ने सुबह के नाश्ते को एक नया रंग दे दिया था. धुप आँगन में फैली हुई थी और पराठों की खुशबु के साथ रिश्तों की नयी खिचड़ी पाक रही थी.

सन 1: नाश्ते की मेज़ और नसीम का इशारा

नाश्ते की मेज़ पर रशीद साहब खामोश बैठे चाय पी रहे थे, मगर उनका चेहरा पहले से ज़्यादा pur-sukoon था. नसीम ने सब के लिए नाश्ता परोसना शुरू किया और बिलकुल हलके अंदाज़ में बात छेरी.

"सीमा, आयेशा, हिरा... सुनो बचो," नसीम ने सब की तरफ देखते हुए कहा. "घर के हालात अब थोड़े बेहतर हो रहे हैं, बिलाल भी अब pur-sukoon है. मगर इस सारे हंगामे में तुम्हारे अब्बू का स्ट्रेस बोहोत बढ़ गया है. डॉ. ने कहा है के उन्हें ज़ेहनी सुकून की सख्त ज़रुरत है."

नसीम ने रशीद साहब का हाथ थमा और बेटियों की तरफ देखा. "इस लिए अबसे तुम तीनो को अपने अब्बू का ख़ास ख्याल रखना होगा. उनकी हर ज़रुरत, उनकी हर फरमाईश को पूरा करना तुम्हारा फ़र्ज़ है ताके उनका स्ट्रेस लेवल काम हो सके."

सीमा और आयेशा ने सर हिला दिया, उन्हें लगा शायद अम्मी दवाई या खाने पिने की बात कर रही हैं. मगर हिरा, जिसने हमजा के साथ किचन में और रशीद साहब की आँखों में बदलती चमक को भांप लिया था, वह मुस्कुरा दी. वह समझ गयी के अम्मी किस 'खिदमत' की बात कर रही हैं. हिरा ने दबे पाऊँ मेज़ के निचे से अपने बाप के पाऊँ को अपने नरम पाऊँ से सेहला दिया. रशीद साहब चौंक गए मगर उन्हों ने पाऊँ हटाया नहीं.

सन 2: सिद्दीकी साहब की आमद और नया सौदा

अभी नाश्ता ख़तम hi हुआ था के बहार से दुर्बल बजी. सिद्दीकी साहब (Episode 15 वाले) अपने बेटे अबरार के साथ हवेली में दाखिल हुए. उनके चेहरे पर पुराणी दोस्ती के sath-sath एक अजीब सी बेचैनी थी.

रशीद साहब ने उनका इस्तक़बाल किया. कुछ देर इधर उधर की बातून के बाद सिद्दीकी साहब असल मुद्दे पर आये. "रशीद भाई, मैं अपने अबरार के लिए आयेशा का हाथ मांगने आया हूँ. हम पुराने दोस्त हैं, रिश्ता हो जाये तोह दोस्ती रिश्तेदारी में बदल जाएगी."

रशीद साहब ने नसीम की तरफ देखा. नसीम ने मुस्कुराते हुए कहा, "सिद्दीकी साहब, हमें क्या एतेराज़ हो सकता है? अबरार जवान भी है और समझदार भी. मगर... हमारे उस्मान के लिए भी तोह सोचिये. आपकी बेटी अथिया अब बरी हो गयी है. क्यों न हम ये रिश्ता do-tarfa कर लें?"

सिद्दीकी साहब का रंग एक पल के लिए फैक हो गया. उन्हों ने अबरार की तरफ देखा और फिर नज़रें झुका लें. "नसीम भाभी... वह... मैं इस बारे में सोच कर बताऊंगा," सिद्दीकी साहब ने इतनी जल्दी में इजाज़त ली के अपना चश्मा भी मेज़ पर छोर गए.

सन 3: दाल में कला या पूरी दाल काली?

उनके जाने के बाद रशीद साहब हैरान रह गए. "नसीम, तुम ने ये क्या किया? सिद्दीकी साहब उस्मान के क़िस्से जानते हैं, वह अपनी बेटी हमारे बिगड़े हुए बेटे को क्यों देंगे?"

नसीम ने ठंडी आह भरी और रशीद साहब के क़रीब आ कर उनके कान में सरगोशी की. "रशीद, आप बोहोत भोले हैं. वह हमारे घर रिश्ता लेकर hi इस लिए आये हैं क्यूंकि उनके घर में भी 'दाल में कुछ कला' नहीं, बल्कि पूरी दाल hi काली हो चुकी है."

"क्या मतलब?" रशीद ने पूछा.

"अथिया और उसके बाप के दरमियान वही हो रहा है जो अब इस घर में शुरू होने वाला है. सिद्दीकी साहब dar-asal एक ऐसा घर ढून्ढ रहे हैं जहाँ उनकी बेटी के 'नए मिज़ाज' को क़ुबूल किया जाये और कोई ऊँगली न उठाये. वह जानते हैं के हमारी हवेली में अब कोई पर्दा नहीं रहा, इस लिए वह अथिया को यहाँ 'सेफ' समझते हैं." नसीम की बात सुन कर रशीद साहब सुन्न रह गए.

सन 4: बहनो का डिस्कशन और पहली वालंटियर

दोपहर को तीनो बहनें कमरे में बैठीं थी और अम्मी की उस 'अपील' पर बात कर रही थीं.

"यार... अम्मी ने कहा अब्बू का स्ट्रेस दूर करना है. इसका मतलब क्या है?" आयेशा ने मासूमियत से पूछा.

सीमा ने जो हैदराबाद देख कर आयी थी, हल्का सा मुस्कुरा कर कहा, "आयेशा, अम्मी चाहती हैं के हम अब्बू को वही सुकून दें जो अम्मी देती हैं. ताकि उन्हें लगे के उनकी बेटियां उनसे कितनी मोहब्बत करती हैं."

"क्या मतलब? हम अब्बू के साथ...?" आयेशा की सांस रुक गयी.

हिरा जो अपनी निघ्त्य के स्ट्राप से खेल रही थी, बोली, "देखो, मैं तोह तैयार हूँ. अब्बू बेचारे कितने तनहा हैं. उन्हें थोड़ा 'स्पेशल' फील करवाने में क्या बुराई है? वैसे भी, अगर हम उन्हें खुश रखेंगे, तोह वह हमें आज़ादी देंगे. तुम लोगो को पता है न, अम्मी ने मुझे हमजा के लिए 'ग्रीन सिग्नल' दे दिया है अगर मैं अब्बू को हैंडल कर लून."

सीमा खामोश रही, मगर आयेशा के दिमाग में कुछ पुराणी संजीदा बातें घूमने लगीं. उसने सोंचा, "आज़ादी... अगर अब्बू को खुश करके मिलती है, तोह शायद ये ग़लत नहीं."

हिरा उठी और आईने के सामने खरी हो गयी. "तोह फिर आज रात पहली बारी मेरी. मैं देखना चाहती हूँ के अब्बू कितने स्ट्रेस में हैं!"

**Episode ख़तम**

क्लिफहैंगर: हिरा ने तोह ज़िम्मेदारी उठा ली है, मगर क्या रशीद साहब अपनी कमसिन बेटी का ये नया रूप बर्दाश्त कर पाएंगे? और सिद्दीकी साहब की बेटी अथिया का क्या राज़ है जो नसीम ने भांप लिया है?
 
**घर की आग**

Episode 23: शराफत का नक़ाब और गहरे राज़
हवेली की फ़ज़ाओं में आज दोपहर से hi एक अजीब सी संजीदगी थी. नसीम ने सबको डाइनिंग टेबल पर जमा किया था. रशीद साहब ऊपर अपने कमरे में कैलुला (दोपहर की नींद) कर रहे थे. नसीम के चेहरे पर वो मख़सूस शातिराना मुस्कराहट थी जो तब आती थी जब वो कोई बड़ा खेल खेलने वाली होती थी.

"सिद्दीकी ने आयेशा का हाथ मांग कर समझा है के उसने हमें ज़लील करने की कोशिश में है," नसीम ने धीमी मगर kaat-dar आवाज़ में कहा. "उसे लगता है के सीमा और उस्मान के बारे में जो वो जानता है, वो उसका हथ्यार है. लेकिन वो ये भूल गया है के कांच के घर में रहने वाले दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते."

उस्मान ने कुर्सी पर पीछे होते हुए पूछा, "अम्मी, आपका क्या मतलब है?"

"मेरा मतलब वाज़ेह है," नसीम ने उस्मान की आँखों में देखते हुए कहा. "सिद्दीकी की बेटी, अथिया... वो बोहोत भोली बनती है, लेकिन मुझे (जमीला, जो पहले इस हवेली की खादिम थी अब सिद्दीकी के काम कर रही है से) खबर मिली है के उनके घर के पीछे वाले पोरशन में कुछ ऐसा होता है जो सिद्दीकी दुनिया से छुपता है. उस्मान, तुमने अथिया से दोस्ती करनी है. उसे बहलाना है, फुसलाना है... लेकिन उसके जिस्म से खेलने के लिए नहीं, बल्कि उसके घर के राज़ निकलने के लिए."

"हमजा तुम्हे भी कुछ जासूसी करनी होगी, होपायेगा?" नसीम ने हमजा की तरफ देखते हुए कहा.

"कोशिश तोह कर hi सकता हूँ" हमजा ने इधर उधर देखते हुए कहा.

हमें सिद्दीकी की ऐसी कमज़ोरी चाहिए के वो हमारा नाम लेते हुए भी थरथराये."

सन 1: सीमा और उस्मान — कमरे की तन्हाई और फ़िक्र

मीटिंग ख़तम होते hi उस्मान ऊपर अपने कमरे में चला गया. वो थोड़ा सोच में था. तभी दरवाज़ा धेरै से खुला और सीमा दाखिल हुई. उसने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया और उस्मान के पास आ कर कड़ी हो गयी. सीमा ने आज एक हलकी नीली सारी पहनी थी, पसीने की वजह से ब्लाउज उसकी कमर से चिपक रहा था.





"उस्मान... क्या तुम वाक़ई उस अथिया के पास जाओगे?" सीमा की आवाज़ में जलन और डर साफ़ था.

उस्मान ने सीमा को कमर से पकड़ कर अपने क़रीब खिंचा. "आपि, आप जल रही हैं? आपको पता है के मेरे लिए आपके इस हुस्न से बढ़कर कुछ नहीं है, आपक के हुस्न के आगे सब फीका है. ये सब सिर्फ एक ड्रामा है ताके हम हमेशा के लिए सुकून से रह सकें."

उस्मान ने सीमा का चेहरा ऊपर उठाया. सीमा की आँखों में गर्मी थी. "मुझे डर लगता है उस्मान... वो जवान है, नए ज़माने की है. कहीं तुम मुझे भूल न जाओ."

"आपको भूलना इतना आसान नहीं बल्कि मेरे लिए नामुमकिन है," उस्मान ने सरगोशी की और सीमा के होंठों को अपनी गिरफ्त में ले लिया. यह किश गहरी और रोमांटिक थी.





उस्मान ने सीमा की सारी का पल्लू गिरा दिया. सीमा के भरे हुए मम्मी, जो ब्लाउज में क़ैद थे, तेज़ी से ऊपर निचे हो रहे थे.

उस्मान ने ब्लाउज के हुक्स एक एक करके खोले. सीमा ने कोई rok-tok नहीं की, बल्कि अपने जिस्म को उस्मान के हवाले कर दिया. ब्लाउज खुलते hi सीमा की गोरी और भरी हुई छातियाँ बहार निकल आयीं. उस्मान ने उन्हें अपने हाथों में भरा और ज़ोर से दबाया.





"अह्ह्ह... उस्मान... उफ़... धेरै... दर्द होता है," सीमा ने सिसकारी ली, मगर उसके हाथ उस्मान की पंत की बेल्ट खोल रहे थे.

"आज दर्द और मज़े का नया सबक़ पढ़ाऊंगा आपि," उस्मान ने गन्दी आवाज़ में कहा. "आज आपने इस घर की हिफाज़त का वादा लेना है मुझसे... अपने इस रसीले बदन की क़सम दे कर."

उस्मान ने सीमा को बीएड पर पटका और उसकी सारी और पेटीकोट को एक झटके में पैरों से निकल दिया. सीमा अब पूरी नंगी बीएड पर पड़ी थी, उसका गुंधा हुआ बदन कमरे की हलकी रौशनी में चमक रहा था. उस्मान ने अपने कपडे उतरे और उसका 8 इंच का सख्त लुंड किसी तलवार की तरह खड़ा हो गया.





सीमा ने जब उसे देखा, तोह उसकी आँखों में हवस की चमक आ गयी. "उफ़... ये कितना पागल हो रहा है. आओ... मेरे अंदर आओ और मुझे बताओ के तुम सिर्फ मेरे हो."

उस्मान ने अपना 8 इंच का सख्त लुंड, जो किसी सुर्ख गर्म रोड की तरह तन चूका था, सीमा की रनो (तइस) के दरमियान रगड़ना शुरू किया.





"अह्ह्ह... उस्मान... उफ़... ये कितना गर्म है," सीमा ने सिसकारी ली और अपनी नीली पंतय उतारकर टांगें और फैला दिन. "देखो... तुम्हारी आपि का क्या हाल कर दिया है तुमने... मैं कब से इसकी प्यासी हूँ."

उस्मान ने देखा के सीमा की छूट गर्मी और ख्वाहिश से बिलकुल गीली हो चुकी थी और उससे निकलने वाला पानी उसकी रनो पर चमक रहा था. उस्मान ने लुंड की टोपी को सीमा के दांय (क्लाइटोरिस) पर रख कर धेरै से रगड़ा.





"आपि... आज मैं आपको दिखाऊंगा के एक असली मर्द कैसे अपनी रांड को तड़पता है," उस्मान ने एक गन्दी गाली देते हुए कहा. "बिलाल तोह साला नामर्द होगा जो इतने रसीले बदन को छोड़ कर चला गया... मैं आज इसका कोना कोना भर दूंगा."

सीमा ने "रांड" लफ्ज़ सुना तोह उसके जिस्म में एक झटका सा लगा, मगर ये झटका शर्म का नहीं बल्कि हवस का था.

"हाँ... मैं हूँ रांड! तेरी रांड! थोक मुझे उस्मान... अब बर्दाश्त नहीं होता!"

उस्मान ने सीमा की दोनों टांगें उठा कर अपने कन्धों पर रखीं और एक zor-dar धक्का मारा. "फपायक!"





"अम्मीय...." सीमा की एक लम्बी चीख निकल गयी. उसका बदन कमान की तरह ऊपर उठा और उसने बीएड की चादर को अपनी मुट्ठियों में जाकर लिया. "ओह्ह्ह खुदा! मर्डर गयी! उस्मान... निकाल इससे... पहात रही हूँ मैं!"

उस्मान ने रुकने के बजाये सीमा के होंटो को अपने होंटो से जोड़ दिया ताके उसकी चीखें डाब जाएं. उसने महसूस किया के सीमा की छूट इतनी तंग (टाइट) थी के उसका लुंड उसमे मुश्किल से जगह बना रहा था. उसने थोड़ा ृक्क कर सीमा की आँखों में देखा, जो दर्द और मज़े से उलट चुकी थीं.





"अभी तोह सिर्फ टोपी गयी है बजी... अभी पूरा बाकी है," उस्मान ने सरगोशी की और एक और गहरा धक्का मारा.

पाछाक!





अब उस्मान का लुंड जड़ तक सीमा के अंदर धस चूका था. सीमा को महसूस हुआ जैसे उसका पेट अंदर से पहात जायेगा, मगर उस दर्द के पीछे एक ऐसी लज़्ज़त थी जो उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी.

"अह्ह्ह... उफ़... कितना मोटा है... ओह्ह्ह... पूरा मेरे पेट तक लग रहा है... अह्ह्ह... मेरी छूट... मेरी छूट गरम करदी तूने!" सीमा अब रोने जैसी सिसकारियां भर रही थी.

उस्मान ने अपनी रफ़्तार बढ़ाना शुरू की. Thap-Thap-Thap-Thap.





हर धक्के के साथ उस्मान की तइस सीमा की गांड से टकराती और एक मख़सूस आवाज़ पैदा होती.

"उस्मान मुझे पीछे से छोड़ो" समय ने इल्तेजा की..

उस्मान ने सीमा को बीएड पर पलट कर डोगग्य स्टाइल में झुका दिया. सीमा की मोती और गोरी गांड अब हवा में थी. उस्मान ने पीछे से अपना लुंड दोबारा उसकी गहराई में उतरा और उसके बाल पीछे से मुट्ठी में जाकर लिए.





"अह्ह्ह... उस्मान... उफ़... ये पोजीशन... अह्ह्ह... ये तोह और गहरा जा रहा है!" सीमा ने अपने सर को तकिये में धस दिया.

उस्मान ने be-rehami से धक्के मरने शुरू किये. हर धक्का सीमा के जिस्म को आगे झटका देता. सीमा की छूट से निकलने वाला पानी अब उस्मान की रनो पर लग रहा था.

उस्मान ने पीछे से हाथ बढ़ा कर सीमा के दोनों भरे हुए मम्मों को ज़ोर से दबाया. "तेरी ये छातियाँ... उफ़... कितनी भरी हैं सीमा! इन्हें निचोड़ते हुए तुझे ठोकने का मज़ा hi कुछ और है."





"अह्ह्ह... गंदे... हाँ... और ज़ोर से दबाओ... तोड़ दो इन्हें!"









सीमा अब पूरी तरह हवस में ढल चुकी थी. "उस्मान... और गन्दी गालियां दो... बोलो के मैं तुम्हारे लुंड के लिए कितनी तड़पती हूँ!"

उस्मान ने उसके कान के पास अपना मुँह लाया और गरज कर बोलै, "तू मेरी रखैल है! तू मेरे लुंड की भूकी कुत्तों की तरह तड़पने वाली मेरी बड़ी बेहेन है जिसे मैं आज पूरी रात ठोकूंगा





"मैं... मैं होने वाली हूँ उस्मान... उफ़... मैं निकल रही हूँ... अह्ह्ह!" सीमा का जिस्म झटके खाने लगा, उसकी छूट की दीवारें उस्मान के लुंड को कसने लगीं.

उस्मान ने देखा के सीमा अपने अंजाम के क़रीब है, उसने अपनी रफ़्तार और बढ़ा दी. "मैं भी... मैं भी अपना सारा गरम लावा तेरी इस गहराई में भरने वाला हूँ सीमा... तैयार हो जा!"

उस्मान ने एक आखरी, zor-dar धक्का मारा और अपना सारा गारा और गरम वीर्य सीमा की छूट की गहराई में पिचकारियों की तरह छोड़ दिया.





सीमा को महसूस हुआ के जैसे उसके अंदर कोई झाश्मा पहात गया हो. दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए हांप रहे थे, उनका पसीना एक दूसरे में जज़्ब हो रहा था.

"मज़ा आया... आपि?" उस्मान ने भांपते हुए पूछा.

सीमा ने पलट कर उस्मान के गले में बाहें दाल दी. "तुमने मुझे पागल कर दिया है उस्मान... अब मैं तुम्हारे बगैर एक पल नहीं रह सकती."

सन 2: हमजा की जासूसी और सिद्दीकी का सच

वही दूसरी तरफ, हमजा अपना काम कर रहा था. उसने सिद्दीकी साहब के घर के बहार एक पुराणी बाइक पर बैठ कर निगरानी शुरू की थी.

उसने देखा के सिद्दीकी साहब की गाड़ी निकलते hi, उनका बीटा अबरार (जो आयेशा का मंगेतर बनने वाला था) घर के पीछे वाले पोरशन में गया जहाँ उनकी भतीजी रहती थी.

हमजा ने अपना मोबाइल निकाला और ज़ूम करके देखने लगा. खिरकी के परदे हल्के से हतय हुए थे. जो मंज़र हमजा ने देखा, उसने उसके होश उदा दिए.









अबरार और उसकी अपनी चचाज़ात बेहेन वहां उस हालत में थे जो सिद्दीकी साहब की "शराफत" का जनाज़ा निकलने के लिए काफी थी.

हमजा ने धेरै से मुस्कुराते हुए रिकॉर्डिंग ों कर ली. "तोह ये बात है... सिद्दीकी साहब दूसरों को दरस देते हैं और अपना बीटा घर में hi मुँह कला कर रहा है."

सन 3: नसीम की स्ट्रेटेजी और अगला क़दम

रात के वक़्त जब हमजा वापस आया, उसने नसीम को वो वीडियो दिखाई.





नसीम की आँखों में फतह (विक्ट्री) की चमक थी.

"शाबाश मेरे शेर!" नसीम ने हमजा की पीठ thap-thapai. "अब खेल हमारे हाथ में है. कल उस्मान अथिया से मिलेगा, लेकिन अब वो उसे बहलाएगा नहीं, बल्कि धेरै से उसे एहसास दिलाएगा के हमें उनके घर के 'रंगीन' राज़ मालूम हैं. हम उन्हें ब्लैकमेल नहीं करेंगे, हम उन्हें 'समझायेंगे' के ख़ामोशी में hi दोनों घरों की भलाई है."

सन 4: रशीद साहब और हिरा — सुकून की एक रात

इसी बीच, रशीद साहब अपने कमरे में बैठे थे. हिरा उनके पास आयी, उसने आज एक निहायत बारीक और ट्रांसपेरेंट निघ्त्य पहनी थी.

"अब्बू... आप परेशां मत हों. अम्मी ने सब संभल लिया है," हिरा ने उनके पीछे खरे हो कर उनके कन्धों को दबाना शुरू किया.

रशीद साहब ने सुकून की सांस ली. हिरा के नरम हाथों का लम्स उन्हें एक नयी दुनिया में ले जा रहा था. "बेटी, तुम लोग इतने समझदार कब से हो गए?"

हिरा ने झुक कर उनके कान में सरगोशी की, उसके मम्मी रशीद साहब की पीठ से मास (टच) हो रहे थे. "जब से हमने देखा के हमारे अब्बू इतने बोझ में हैं. आप बस हम पर भरोसा रखें."

हिरा ने धेरै से उनका हाथ पकड़ा और अपने नरम पेट पर रख दिया. रशीद साहब ने पहले थोड़ा झिझक महसूस की, लेकिन हिरा की जवान जिल्द का नशा उन पर हावी होने लगा. उसने उनका हाथ धीरे से ऊपर सरका कर अपने एक नरम उभार पर रख दिया.

"हिरा... ये... ये क्या..." रशीद साहब की आवाज़ थरथरा रही थी.

"कुछ नहीं अब्बू... बस थोड़ा सुकून... क्या आप अपनी बेटी को मन करेंगे?" हिरा ने निहायत मासूमियत मगर हवस भरी नज़रों से उन्हें देखा.

रशीद साहब ने अपनी आँखें बंद कर लीन. उन्हें महसूस हो रहा था के उनकी फॅमिली अब उनकी मुट्ठी में नहीं रही, बल्कि वो खुद अपनी बेटियों और बीवी के बिछाये हुए इस नरम जाल में फंसते जा रहे हैं... मगर इस जाल में मज़ा बोहोत था.

**Episode अभी ख़तम नहीं हुआ है**

क्लिफहैंगर: अगली सुबह उस्मान और अथिया की मुलाक़ात होनी है. क्या उस्मान सिद्दीकी की बेटी को उसके घर का सच बता कर खामोश कर पायेगा? और सीमा, जो उस्मान की मोहब्बत में पागल हो रही है, क्या वो इस 'जासूसी' के खेल को बर्दाश्त कर पायेगी?
 
*घर की आग**

Episode 23: Part 2 — जासूसी का जाल और अथिया का ऐतमाद


सीमा और उस्मान की उस जुनूनी रात के बाद, अगली सुबह हवेली में एक अजीब सी ख़ामोशी थी. सीमा के बदन में अभी भी उस्मान के लम्स (टच) की गर्मी बाकी थी, मगर दिमाग में अथिया का ख्याल उसे बेचैन कर रहा था.

नसीम ने नाश्ते की टेबल पर उस्मान को एक pur-israr (मिस्टीरियस) इशारा किया. उसने उस्मान के हाथ में एक छोटी सी pen-drive थमा दी. "इसमें वो पुराने दस्तावीज़ हैं जो सिद्दीकी के बिज़नेस के हैं, लेकिन तुम्हारा असल हथ्यार तुम्हारी बातें होंगी. अथिया से मिलो, उसे एहसास दिलाओ के तुम उसमे दिलचस्पी रखते हो, और फिर धीरे से उसके घर के हालात कुरेदना."

सन 5: उस्मान और अथिया — पहली मुलाक़ात

दोपहर के वक़्त उस्मान मॉडल टाउन के एक पॉश कैफ़े में बैठा था. अथिया दाखिल हुई, उसने एक मॉडर्न स्लीवलेस कुर्ती और जीन्स पहनी थी. वह वाक़ई खूबसूरत थी, मगर उसकी आँखों में एक अजीब सी 'अकड़' थी.

"Hi उस्मान! सॉरी थोड़ा लेट हो गयी," अथिया ने बैठते हुए कहा.

उस्मान ने एक दिलकश मुस्कराहट दी. "इतनी खूबसूरत लड़की का इंतज़ार तोह सदियों तक किया जा सकता है."

बातों का सिलसिला शुरू हुआ. उस्मान ने अपनी बातों के जाल में अथिया को फंसना शुरू किया. उसने महसूस किया के अथिया अपने बाप (सिद्दीकी साहब) से काफी दरर्ति है मगर अपने भाई अबरार के काफी क़रीब है.

"वैसे अथिया, तुम्हारे घर में सब इतने 'parda-dar' हैं, क्या तुम्हें कभी घुटन नहीं होती?" उस्मान ने धेरै से उसका हाथ पकड़ा.

अथिया थोड़ा हिचकिचाई मगर हाथ पीछे नहीं खिंचा. "होती तोह है उस्मान... लेकिन घर के अंदर जो होता है वो बहार नहीं आना चाहिए. मेरे भाई अबरार कहते हैं के हमें अपनी खुशियां घर की char-deewari में hi ढूंढ़नी चाहिए."





उस्मान के कान खड़े हो गए. 'घर की char-deewari में khushiyan'—ye वही इशारा था जिसे हमजा ने वीडियो में देखा था.

सन 4: हमजा का सबूत और नसीम का अगला वॉर

वही दूसरी तरफ, हमजा ने उस पुराने ड्राइवर से मज़ीद बातें उगलवा ली थीं. सिद्दीकी का बीटा अबरार dar-asal अपनी hi चचाज़ात बेहेन के साथ एक गहरे रिश्ते में था, और सिद्दीकी को ये सब मालूम था मगर वो अपनी 'शराफत' का पर्दा बचने के लिए खामोश था.

रात को नसीम ने उस्मान और हमजा को अपने कमरे में बुलाया.

"तोह... सिद्दीकी हमारी फॅमिली को 'गन्दा' कह रहा था जबकि उसका अपना बीटा घर में hi मुँह कला कर रहा है," नसीम ने एक ठंडी हंसी हंसी. "अब सुनो मेरा प्लान. हम ये वीडियो लीक नहीं करेंगे. हम सिद्दीकी को एक 'फॅमिली डिनर' पर बुलाएँगे. वहां हम उसे ये बताएँगे के हमें सब पता है. हम शराफत से ये रिश्ता कैंसिल करने को कहेंगे. अगर वो मन गया तोह ठीक, वर्ण..."

"हम्म, वर्ण क्या अम्मी?" हिरा ने तजस्सुस में बोली..

नसीम ने कोई जवाब नहीं दिया...

सन 5: सीमा की जलन और रात का जूनून

उस्मान जब थका हारा कमरे में आया, तोह सीमा पहले से वहां मौजूद थी. उसने आज एक सियाह (ब्लैक) रंग की बारीक निघ्त्य पहनी थी जो उसके गोर जिस्म पर क़यामत ध रही थी.

"तोह... मिल आये अपनी नयी मेहबूबा से?" सीमा ने गुस्से और जलन में पूछा.

उस्मान ने उसे कमर से पकड़ कर बीएड पर गिरा दिया. "बजी, आपका ये गुस्सा मुझे और गरम कर रहा है. मैंने कहा था न, वो सिर्फ एक मोहरा (पवन) है. मेरे लुंड की मलिका सिर्फ आप हैं."

उस्मान ने सीमा की निघ्त्य के स्ट्राप निचे सरका दिए. सीमा के भरे हुए मम्मी बहार निकल आये, जो गुस्से की वजह से तेज़ी से ऊपर निचे हो रहे थे. उस्मान ने उन्हें अपने मुँह में भर लिया और बुरी तरह चूसा.





"अह्ह्ह... उस्मान... उफ़... गंदे... धेरै!" सीमा की जलन अब हवस में बदल रही थी. "क्या तुमने उसे छुआ? सच बताओ!"

"नहीं आपि... मैंने सिर्फ आपके इस बदन की क़सम खाई है," उस्मान ने अपना सख्त लुंड सीमा की रनो के दरमियान फंसा दिया.





"आज मैं आपको ऐसी चुदाई दूंगा के आप उस अथिया का नाम भूल जाएँगी."

उस्मान ने सीमा को घुटनो के बल किया (डोगग्य स्टाइल). सीमा की गोरी और भारी गांड उस्मान के सामने एक खुले dastar-khwan की तरह थी. उस्मान ने लुंड की टोपी को सीमा की गीली छूट पर रखा और एक hi झटके में जड़ तक अंदर घुसा दिया.

पाछाछक!





"ऊह्ह्ह्ह माआ! मर्डर गयी!" सीमा ने चीख मारी. "कितनी... कितनी बुरी तरह डाला है... अह्ह्ह... पूरा फॉर दिया तूने!"

उस्मान ने पीछे से उसके बाल पकडे और तेज़ी से धक्के मारने लगा. Thap-Thap-Thap-Thap. हर धक्का सीमा के जिस्म को हिला कर रख रहा था.





"बोल... मज़ा आ रहा है? बोल न रंडी के तेरा भाई तुझे कैसे ठोकता है!" उस्मान ने गन्दी गाली देते हुए पूछा.

"अह्ह्ह... हाँ... उफ़... बोहोत मज़ा... और ज़ोर से... तोड़ दो मुझे... अह्ह्ह... मैं तेरी रांड हूँ उस्मान... सिर्फ तेरी!" सीमा पागल हो कर सिसकारियां भर रही थी.

उस्मान ने सीमा को बीएड पर लिटा कर उसकी दोनों टांगों को अपने कन्धों पर रखा और पूरे ज़ोर से मिशनरी पोजीशन में धक्के मारे.









सीमा की छूट से निकलने वाला पानी और उस्मान का पसीना मिल कर एक मख़सूस महक पैदा कर रहे थे.

जब दोनों अपने अंजाम पर पहुंचे, तोह उस्मान ने अपना सारा गरम लावा सीमा की गहराई में छोड़ दिया. दोनों एक दूसरे से लिपट कर निढाल हो गए.

*Episode ख़तम*

क्लिफहैंगर: सिद्दीकी साहब को फॅमिली डिनर का बुलावा भेज दिया गया है. क्या सिद्दीकी अपनी बर्बादी का सबूत देख कर खामोश हो जायेंगे? या वो कोई नया वॉर करेंगे? और आयेशा, जो इस सब से be-khabar है, उसका क्या होगा?
 
घर की आग

Episode 24: शराफत का जनाज़ा और हवेली में हवस का खेल

सिद्दीकी साहब ने हवेली आने के बजाये उल्टा रशीद साहब को अपने घर डिनर पर बुलाया था. ये उनकी तरफ से एक "पावर मूव" था, जैसे वो जाता रहे हों के खेल उनके मैदान में खेला जायेगा. नसीम ने तय कर लिया था के सिर्फ वो, रशीद साहब और उस्मान hi जायेंगे.

सिद्दीकी साहब के घर जाने से पहले हवेली में एक अजीब सा तनाव था, मगर नसीम का चेहरा pur-israr फतह से चमक रहा था.

नसीम ने आज निहायत hi गहरी सुर्ख (डार्क रेड) सारी पहनी थी, उसके भरे हुए जिस्म पर सारी का पल्लू baar-baar सरक रहा था. रशीद साहब ने कोशिश की के वो नार्मल लगें, मगर उन्हें पता था के आज वो किसी की "शराफत के ढोंग" का पर्दा फाश करने जा रहे हैं. लेकिन इसकी शुरुवात उस्मान ने कल hi करदी थी.

सन 1: अथिया की कोशिश और उस्मान का झटका

डिनर से एक दिन पहले, अथिया ने उस्मान को एक प्राइवेट गार्डन कैफ़े में मिलने बुलाया. वो आज काफी तैयार होकर आयी thi—Usne एक निहायत hi छोटी और टाइट कुर्ती पहनी थी जिसका गाला इतना गहरा था के उसके गोर मम्मों का आधा उबार (उप्पेर चउरवे) साफ़ नज़र आ रहा था और होठों पर सुर्ख लिपस्टिक. उसका इरादा उस्मान को पूरी तरह अपने जाल में फंसना था ताके रिश्ता पक्का हो जाये. उसने सोचा था के उस्मान को सडके करके वो अपने अब्बू का काम आसान कर देगी.

"उस्मान... हमारी शादी की बातें चल रही हैं और तुम मुझसे khinche-khinche रहते हो?" अथिया ने उस्मान के क़रीब आकर अपने हाथ उसकी छाती पर रखे और उन्हें dhire-dhire निचे सरकने दिया. "क्या मैं तुम्हे पसंद नहीं? देखो... मैं सिर्फ तुम्हारे लिए इतनी तैयार हुई हूँ."

उस्मान ने उसका हाथ कलाई से पकड़ा और निहायत hi be-rukhi से झटक दिया. उसने अथिया की आँखों में देखा जहाँ सिर्फ झूट था.

"अथिया, अपनी ये सस्ती एक्टिंग बंद करो," उस्मान की आवाज़ किसी ठन्डे हथ्यार जैसी थी. "तुम्हे लगता है मैं तुम्हारे इस गोर बदन को देख कर पिघल जाऊंगा? तुम्हे लगता है तुम्हारे अब्बू बोहोत शरीफ हैं? अथिया, तुम्हारी फॅमिली हमारे घर पर नज़र रखती है न? तोह सुनो... हमने तुम्हारे घर के अंदर की वह गन्दगी देख ली है जो तुम्हारे अब्बू ने पर्दो में छुपा राखी है."

अथिया का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा. "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई! मेरे अब्बू मॉडल टाउन के सब से pur-waqar मर्द हैं."

"Pur-waqar?" उस्मान ने तंज़ से कहा और उसके क़रीब झुका. "तोह फिर अपने भाई अबरार से पूछो के वो पीछे वाले पोरशन में चचाज़ात बेहेन के साथ क्या 'इबादत' करता है? अथिया, मुझे तुमसे या तुम्हारे इस खंडन से कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं ये रिश्ता सिर्फ इसलिए बचा रहा हूँ ताके मेरे घर की इज़्ज़त पर आंच न आये, वर्ण तुम जैसी लड़कियां मेरे जूते की नोक पर रहती हैं."

उस्मान ने अथिया को उसकी औक़ात दिखा दी थी. अथिया की आँखों में आंसू थे मगर वो गुस्से और शर्म से भरी हुई थी. वो कुछ कहना चाहती थी मगर उस्मान उसे वही छोड़ कर निकल गया.





सन 2: सिद्दीकी का घर — Naqaab-Poshi का खत्म

डिनर का वक़्त था. सिद्दीकी साहब का बांग्ला रोशनियों से चमक रहा था मगर अंदर का माहौल काफी भरी था. रशीद, नसीम और उस्मान डाइनिंग टेबल पर बैठे थे.

"रशीद साहब!, हम चाहते हैं के अगले महीने hi बचो का निकाह हो जाये. नाक काम में देरी कैसी?" सिद्दीकी ने हुकूमत से कहा. (अथिया ने अपने बाप को उसकी और उस्मान की मुलाक़ात का खुलासा बता दिया था जिस से सिद्दीकी और तैश में था.)

रशीद साहब ने कुर्सी पर बैठते हुए ठन्डे अंदाज़ में पूछा, "सिद्दीकी साहब, इतनी जल्दी क्यों? और मॉडल टाउन में इतने बड़े खानदान हैं, आप हमारी hi देहलीज़ पर क्यों बार बार आ रहे हैं? क्या कोई ख़ास वजह है?"





सिद्दीकी ने पानी का सिप लिया. "वजह शराफत है रशीद साहब. लेकिन... अगर आप नखरे करेंगे, तोह मुझे वो सब कुछ कहना पड़ेगा जो मैंने आपकी बेटी और बेटे के बारे में सुना है. सीमा और उस्मान... सुना है इनके दरमियान bhai-behen वाला रिश्ता कुछ ज़्यादा hi 'गहरा' है?"

रशीद साहब का चेहरा सुर्ख हो गया. "सिद्दीकी! अपनी जुबां को लगाम दो! ये सिर्फ गन्दी अफवाएं हैं, क्या तुम्हारे पास इन तोहमतों का कोई सबूत है?"

"रशीद साहब, मैं काफी वक़्त से खामोश हूँ," सिद्दीकी ने रोटी तोड़ते हुए कहा. "लेकिन अब बात हद्द से बढ़ रही है. सीमा और उस्मान... मॉडल टाउन में बातें हो रही हैं. लोग कहते हैं के आपके घर में bhai-behen का रिश्ता कुछ 'अजीब' है. अगर आपने आयेशा का हाथ अबरार को नहीं दिया, तोह मैं ये बातें इतनी फेलॉग के कोई आपकी देहलीज़ पर पेअर नहीं रखेगा."

रशीद साहब का हाथ थरथराया, मगर नसीम ने उनका हाथ पकड़ लिया. नसीम ने निहायत सुकून से अपना लैपटॉप निकाला.





"इसका मतलब आपके पास कही सुनी बातों के अलावा कोई सबूत नहीं हैं" नसीम ने शातिराना मुस्कान के साथ कहा.

"सिद्दीकी साहब, बदनामी का डर उन्हें होता है जिन्हे अपनी चादर साफ़ रखनी न आती हो," नसीम ने कहा और वीडियो प्ले कर दी.

सिद्दीकी की नज़रें लैपटॉप पर जमीं और उसका रंग पहले पीला और फिर सफ़ेद पद गया. वीडियो में अबरार अपनी hi बेहेन के साथ उन तमाम हड्डों को पार कर रहा था जो कोई तसव्वुर भी नहीं कर सकता. अबरार वही बैठा था, उसने अपना सर झुका लिया.





"ये है आपकी शराफत?" नसीम ने गरज कर कहा. "आपका बीटा घर में hi मुँह कला कर रहा है! अगर ये वीडियो बहार गयी, तोह आपकी सियासत और आपकी इज़्ज़त मिटटी में मिल जाएगी. हम शरीफ लोग हैं, सिद्दीकी साहब. हमने आज तक किसी का बुरा नहीं चाहा, मगर अगर आपने हमारे बचो का नाम लिया, तोह मैं खुद ये वीडियो हर न्यूज़ चैनल को दूंगी."

सिद्दीकी साहब की साडी अकड़ ख़तम हो गयी. खुद को मुश्किल में आता देख मजबूरन सिद्दीकी रशीद साहब के सामने हाथ जोड़ दिए. "माफ़ कर दें... ये रिश्ता ख़तम समझिये. बस ये वीडियो डिलीट कर दें."

रशीद साहब ने लैपटॉप बंद किया. "हम शरीफ लोग हैं, सिद्दीकी साहब. हमें किसी को नंगा करने का शौक नहीं जब तक वो हमें मजबूर न करे. हमारा नाम भी मत लेना अब."

"चलिए रशीद साहब" उस्मान के हाथ में लैपटॉप पकड़ते हुए नसीम ने तेज़ लहजे में कहा और बहार की तरफ अपना रुक करलिया. रशीद साहब और उस्मान भी सिद्दीकी और उनके बेटे अबरार को अलविदा करते हुए नसीम के पीछे पीछे होलिये.





सन 3: हवेली का खेल — ट्रुथ एंड डरे

वही हवेली में, रशीद और बाक़ी लोगो के आने में वक़्त था. सीमा, आयेशा, हिरा और हमजा खाना खा कर हॉल में बैठे थे. माहौल थोड़ा बोरिंग हो रहा था.

"यार, ये कितनी ख़ामोशी है," हिरा ने अंगराई लेते हुए कहा, उसकी निघ्त्य के निचे से उसके उभार नुमाया हो रहे थे. "क्यों न हम कोई गेम खेलें जब तक वो लोग नहीं आते?"





"कैसा गेम?" हमजा ने तजस्सुस से पूछा.

"ट्रुथ एंड डरे!" हिरा ने शरारत से कहा. "मैंने सुना है इसमें बोहोत मज़ा आता है."

आयेशा पहले तोह हिचकिचाई. "नहीं यार, ये सब बचपना है. और अगर किसी ने कुछ ग़लत मांग लिया तोह?"





"अरे आयेशा, हम घर के लोग hi तोह हैं. डरो मत!" सीमा ने आयेशा का हाथ पकड़ कर राज़ी कर लिया.





"चलो, बोतल घूमते हैं," हिरा ने एक pur-israr मुस्कराहट के साथ कहा. "लेकिन रूल ये है के कोई झूट नहीं बोलेगा और कोई डरे से पीछे नहीं हटेगा."

सीमा ने मुस्कुरा कर आयेशा की तरफ देखा जो थोड़ा सहमी हुई थी. आयेशा ने आज सिर्फ एक हलकी लॉन की क़मीज़ पहनी थी और दुपट्टा सिर्फ कंधे पर रखा था.





बोतल घूमी और पहला निशाना सीमा पर रुका.

"ट्रुथ या डरे?" हमजा ने अपनी बड़ी बेहेन की आँखों में देख कर पूछा.

"ट्रुथ," सीमा ने काफी इत्मीनान से कहा.

हिरा ने सवाल किया, "आपि, ये बताएं के बिलाल भाई के अलावा भी क्या आपने कभी किसी और मर्द के बारे में सोचा? क्या कोई ऐसा है जिसे देख कर आपका बदन गरम होने लगता है?"

आयेशा ने हिरा को हैरत से देखा, मगर सीमा बिलकुल नहीं हिचकिचाई. उसने धेरै से हमजा की तरफ देखा और फिर मुस्कुरा दी. "हाँ... एक नहीं बल्कि कई मर्द हैं इस घर में, कभी किसी ग़ैर मर्द का तोह नहीं सोंच मगर अपने घर के मर्दो में hi मेरी दिलचस्पी रही है, जिनमें कुछ बिलाल से कहीं ज़्यादा जवान और ताक़तवर है. जब वो मेरे पास से गुज़रते हैं, तोह मुझे अपने जिस्म में एक अजीब सी थरथराहट महसूस होती है."

हमजा का दिल dhak-dhak करने लगा. सब समझ गए थे के इशारा किस तरफ है.

हॉल में फैन की गरम हवा चल रही थी, मगर चारो के दरमियान जो खिचाव था वह मौसम से कहीं ज़्यादा गर्म था. सीमा के "ट्रुथ" ने माहौल में एक अजीब be-chaini भर दी थी. हमजा की नज़रें अब bar-bar सीमा के भरे हुए जिस्म और आयेशा की मासूमियत पर टिक रही थीं.

बोतल दोबारा घूमी और इस बार निशाना आयेशा पर रुका. आयेशा ने घबरा कर सीमा की तरफ देखा.

"ट्रुथ या डरे, आयेशा?" हिरा ने आंख दबाते हुए पूछा.

"टी... ट्रुथ," आयेशा ने धीरे से कहा, उसे लगा के सच बोलना डरे से ज़्यादा आसान होगा.

सीमा ने आगे झुक कर आयेशा की आँखों में देखा, "आयेशा, ये बता के जब तू रात को अपने कमरे में अकेली होती है और गर्मी ज़्यादा होती है... तोह क्या कभी तूने अपने जिस्म को खुद छुआ है? क्या कभी हमजा या अब्बू का ख्याल दिमाग में आने पर तुझे निचे अजीब सी गिलहत या तरी महसूस हुई?"

आयेशा का चेहरा एक दम सुर्ख टमाटर हो गया. उसने दुपट्टा इतनी ज़ोर से मुट्ठी में जकड़ा के उसके नाख़ून हथेली में धस गए. "आपि... ये कैसा सवाल है?"

"सच बोलना है आयेशा आपि, रूल याद है न?" हमजा ने भरी आवाज़ में कहा.

आयेशा ने नज़रें झुका कर सरगोशी की, "हाँ... कई बार. जब से हमारे इस घर में माहौल बदला है... मुझे नींद नहीं आती. मैं अक्सर अपने मम्मों को मसलती हूँ और सोंचती हूँ के काश कोई मरदाना हाथ इन्हें इतनी ज़ोर से दबाये के मेरा सारा दर्द निकल जाये. और... और हाँ, हमजा को देख कर मुझे अक्सर एक अजीब सी be-chaini होती है."

हमजा ने महसूस किया के उसका लुंड अब बनयान के निचे अंगड़ाई ले रहा है. आयेशा का ये इक़रार उन सब के लिए एक "ग्रीन सिग्नल" था.

अगली बरी हमजा की थी. उसने भी "ट्रुथ" चुना ताके बातों का सिलसिला और गहरा हो.

हिरा ने पूछा, "हमजा, तू ये बता के इस कमरे में बैठी हुई तीनो बहनो में से, सब से ज़्यादा किस्से 'ठोकने' का ख्याल तुझे sota-jagta सताता है? किसका जिस्म तुझे सब से ज़्यादा पागल करता है?"

हमजा ने तीनो को स्कैन किया. सीमा का tajurba-kar जिस्म, हिरा की be-baaki और आयेशा की nayi-nayi जवान होती गर्मी.

"सीमा आपि का जिस्म एक नशा है," हमजा ने खुल कर कहा, "लेकिन आयेशा आपि की ये शर्म और इनके naye-naye उभरते हुए ये मम्मी... मेरा दिल चाहता है के मैं इन्हें अपने मुँह में भर लून और तब तक न छोड़ू जब तक ये दर्द से रोने न लगें."

आयेशा ने ये सुन कर अपनी क़मीज़ का पल्लू थोड़ा और खींचा, मगर उसकी सांसें अब तेज़ हो चुकी थीं.

फिर से गेम शुरू हुआ. बोतल घुमाई गयी और इस बार निशाना सीमा पर आया.

"ट्रुथ या डरे?" आयेशा हिम्मत करते हुए पूछा लिया.

"डरे..." सीमा ने बड़ी hi बेबाकी से कहा.

आयेशा ने मुस्कुरा कर कहा, "तोह डरे ये है के आपको अपने ऊपर वाले दो कपडे (क़मीज़ और ब्रा) उतार कर सिर्फ दुपट्टा ओढ़ना होगा, और दुपट्टा भी ऐसे के तुम्हारे मम्मी थोड़े नज़र आएं."

"तुम इससे ज़्यादा बड़ा डरे दे भी नहीं सकती थी" सीमा ने मुस्कुराकर कहा और अपना कुरता ऊपर किया और ब्रा उतार दी. जब उसने दुपट्टा ओढ़ा, तोह उसके ठोस और गोर मम्मों की घाटी (क्लीवेज) सब की आँखों के सामने चमक रही थी.

अगली बरी हमजा की थी. डरे सीमा ने दिया. "हमजा, तू अपना लुंड बहार निकाल और हिरा के हसीं गालो पर हलके से 'थप्पड़' (स्लप्स) मार."

हमजा ने बिना किसी झिझक के अपनी पंत निचे की. उसका सख्त और बड़ा लुंड बहार निकल आया. हिरा ने मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर लीन मगर जब हमजा ने अपना गरम लुंड उसके गाल पर मारा,

"thap..thap...thap...." की वो आवाज़ निकल तोह रही थी हिरा के गालों से लेकिन आयेशा के जिस्म में एक बिजली दौड़ गयी.

इस मंज़र ने सबकी बेचैनी बढ़ा कर रख दी थी.

गेम फिर शुरू हुआ तोह अगली बार बोतल हिरा पर रुकी. "अब मेरी बरी!" हिरा ने ख़ुशी से कहा. अगला डरे हिरा के लिए था.

सीमा ने कहा, "हिरा, तू हमारे सामने अपनी निघ्त्य उठा और अपनी छूट में ऊँगली कर के दिखा के तू कितनी गरम है."

हिरा ने मज़ाक़ मस्ती में hi अपनी निघ्त्य ऊपर कर ली. उसके नंगे जिस्म और नंगी छूट को देख कर हमजा का बुरा हाल था. हिरा ने अपनी दरमियानी ऊँगली अपनी छूट की गहराई में डाली और सिसकारी ली. "अह्ह्ह... देखो... मैं कितनी गीली हो चुकी हूँ."

अब माहौल इतना गरम हो चूका था के कपडे बोझ लगने लगे थे. हिरा ने बोतल घुमाई और निशाना आयेशा पर आया.

"अब ट्रुथ नहीं... अब 'डरे' होगा!" हिरा ने एलान किया. "आयेशा बजी, आपका डरे ये है के आप हमजा के बिलकुल सामने कड़ी हो जाएं, और अपने कुर्ते के ऊपर से hi अपने दोनों मम्मों को हमजा के मुँह के पास ले जाएं... उसे महसूस करने दें आपकी गर्मी." हिरा ने आयेशा को कोई ऑप्शन hi नहीं दिया डरे के अलावा...

आयेशा कांपते हुए उठी. वो हमजा के सामने घुटनो के बल बैठ गयी. हमजा ने उसकी कमर पकड़ कर उसे अपने क़रीब खिंचा. आयेशा ने अपनी छाती हमजा के चेहरे के सामने कर दी. हमजा ने कुर्ते के ऊपर से hi आयेशा के सख्त होते हुए निप्पल्स को अपने होठों में भरा.

"अह्ह्ह... हमजा... उफ़!" आयेशा ने पहली बार किसी मर्द का लम्स (टच) इस तरह महसूस किया.

हमजा अपनी आपि के उन सख्त मम्मों को दबा भी रहा था और निप्पल्स को कुर्ती के ऊपर से चूसने की पूरी नाकाम कोशिश भी कर रहा था...

"ुमंम्हह... अह्ह्ह... हमजा अब बस करना मुझे बहोत दर्द होरहा है" आयेशा की कमज़ोर से आवाज़ आयी.

"बस करो हमजा, होगया अब" ये सीमा की आवाज़ थी, जिसपर हमजा को न चाहते हुए भी हटना पड़ा.

सीमा ने अब कमान संभाली. बोतल घूमी और निशाना हिरा पर रुका.

"हिरा, तेरा डरे ये है के तू हमजा की पंत उतारेगी और उसके 'औज़ार' को तब तक चटोगी जब तक वो पूरा गीला न हो जाये. और आयेशा... तू पीछे से हमजा को पकड़ेगी और उसके कान में अपनी सिसकारियां भरेगी ताके हमजा तेरी भी गर्मी महसूस करे."

हिरा ने बिना किसी देर के हमजा की पंत और अंडरवियर निचे सरका दी. हमजा का 8 इंच का सख्त और सुर्ख लुंड किसी गरम रोड की तरह बहार निकल आया. आयेशा ने इतना बड़ा लुंड इतने क़रीब से पहली बार देखा था, उसकी आंखें फटी की फटी रह गयीं.

हिरा ने लुंड की टोपी पर अपनी ज़बान फेरी. "ममम... हमजा, ये तोह पत्थर हो रहा है." उसने पूरा लुंड अपने मुँह में भर लिया. सीमा ने आगे बढ़ कर आयेशा की क़मीज़ ऊपर की और उसके नंगे मम्मों को अपने हाथों में भर कर दबाने लगी.

हॉल में अब सिर्फ सिसकारियां, चाटने की "slurp-slurp" आवाज़ें और जिस्मों की गर्मी थी. आयेशा अब पूरी तरह बहक चुकी थी, उसने अपना हाथ हमजा के लुंड पर रखा और उसे सहलाने लगी.

माहौल इतना इरोटिक हो चूका था के किसी को बहार की गाड़ी की आवाज़ सुनाई नहीं दी. हमजा का सर पीछे की तरफ था, हिरा उसके लुंड के साथ खेल रही थी, सीमा आयेशा के निप्पल्स को अपने डेंटन से काट रही थी...

तभी हवेली का मैं दरवाज़ा खुला....

"नसीम, तुमने देखा सिद्दीकी का चेहरा..." रशीद साहब की आवाज़ हॉल में गूंजी.

रशीद, नसीम और उस्मान हॉल में दाखिल हुए और उनके सामने जो मंज़र था, उसने उनके पाऊँ टेल ज़मीन निकल दी. उनका बीटा नंगा था, उसकी बहनें उसके जिस्म से लिपटी हुई थीं, और घर की सब से शर्मीली बेटी आयेशा... अपने भाई के लुंड को सेहला रही थी.

सन्नाटा छ गया. रशीद साहब का मुँह खुला का खुला रह गया, नसीम की आँखों में ताजुब था मगर एक शातिराना चमक भी थी, और उस्मान... वो तोह जैसे जैम hi गया.

**Episode 24 ख़तम**

क्लिफहैंगर: सिद्दीकी का क़िस्सा तोह तमाम हुआ लेकिन हवेली में अब रिश्तों के बीच का पर्दा रोज़ बा रोज़ गिरता जारहा है. रशीद साहब क्या वो गुस्सा करेंगे या वो भी इस be-parda हवस का हिस्सा बन जायेंगे? बिलाल का क्या हाल है कराची में?
 
ख़ुशी हुई की आप को मेरी आज की म्हणत पसंद आयी.... मैं हमेशा कोशिश करूँगा के मेरे रीडर डिसअप्पोइंट न हो.
 
ी ऍम ट्राइंग तो क्रिएट तहत इंडेक्स ों फर्स्ट पेज बूत ी ऍम नॉट अबले तो दो सो....... आईटी लुक्स वैरी कॉम्प्लिकेटेड. प्लीज िफ़ एनीवन कैन हेल्प में विथ थिस "डीएम" में
 
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