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घर की आग
Episode 20: समझौते की रात और नया दस्तूर
हवेली में रात का सन्नाटा गहरा चूका था, मगर बिलाल के कमरे में हवस की गर्माहट दीवारों को पिघला रही थी. बिलाल नंगा बिस्तर पर लेता था, उसकी नज़रें दरवाज़े पर थीं. नसीम जैसे hi अंदर दाखिल हुई, बिलाल की आँखों में शैतानी चमक आ गयी.
सन 1: नसीम का डोमिनान्स और गहरी चुदाई
नसीम ने दरवाज़ा लॉक किया और बिलाल के क़रीब आयी. उसने आज रेशमी लॉन की बारीक क़मीज़ पहनी थी जिसके निचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसके भरे हुए मम्मी साफ़ नज़र आ रहे थे.
"तोह... दामाद जी को इतनी जल्दी थी?" नसीम ने मुस्कुराते हुए पूछा और अपनी क़मीज़ उतार दी.
बिलाल ने कुछ कहना चाहा मगर नसीम ने उसके होंठों पर ऊँगली रख दी. "आज निज़ाम बदल गया है बिलाल. कल तुमने मुझे फ़तेह किया था, आज मैं तुम्हे बताउंगी के तजुर्बा क्या होता है."

नसीम ने बिलाल को बिस्तर पर सीधा लिटाया और खुद उसके पैरों की तरफ बैठ गयी. उसने बिलाल की मर्दानगी को अपने नरम हाथों में थमा और उसे किसी लोल्लिपोप की तरह चाटना शुरू किया.

बिलाल की सिसकारी निकल गयी जब नसीम ने पूरा लुंड अपने हलक़ तक उतार लिया. नसीम आज पूरे डोमिनान्स में थी; वह बिलाल को हिलने तक का मौका नहीं दे रही थी.

कभी वह उसके होंठों को दांतो से काटती, तोह कभी उसके सीने के बालों से खेलते हुए उसके निप्पल्स को मसलती.

"आह... अम्मी... जान निकल देंगी क्या?" बिलाल ने तड़प कर पूछा.

नसीम ने बिलाल के ऊपर सवार होते हुए उसका लुंड पकड़ा और अपनी गीली छूट के लबों पर रगड़ा.

"अभी तोह सिर्फ शुरुआत है." नसीम ने एक hi झटके में लुंड पूरा अंदर ले लिया

और बिलाल के ऊपर तेज़ी से उछलने लगी. उसके भरे हुए मम्मी बिलाल के चेहरे पर थप्पड़ मार रहे थे.

बिलाल ने उन्हें पकड़ना चाहा मगर नसीम ने उसके हाथ पकड़ कर बिस्तर से चिपका दिए.

वह खुद अपने झटकों से बिलाल को बेहाल कर रही थी.

"मज़ा आ रहा है बिलाल? बोलो... कैसा लग रहा है मेरी ग़ुलामी में?" नसीम ने हप्ते हुए पूछा और तेज़ी बढ़ा दी.

बिलाल लज़्ज़त की इन्तहा पर था और नसीम के इस डोमिनेंट रूप ने उसे पागल कर दिया था. वो ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और दोनों ने एक साथ चीखते हुए एक दूसरे को निचोड़ लिया.

बिलाल ने अपना सारा पानी नसीम के अंदर भर दिया.
सन 2: दूसरा राउंड और घर का नया निज़ाम
पहले राउंड के बाद बिलाल be-jaan पड़ा था, मगर नसीम अभी फ़ारिग़ नहीं हुई थी. वह उठी, बिलाल के लिए पानी लायी और उसे पिलाया. फिर वह दोबारा उसके जिस्म से खेलने लगी.
"बिलाल... सुनो," नसीम ने बिलाल की गर्दन पर बोसे देते हुए दुसरे राउंड के लिए तैयार करना शुरू किया.


"अब घर में ये रोना धोना और गुस्सा ख़तम होना चाहिए. रशीद साहब मायूस हैं, सीमा निदामत में है. मैं चाहती हूँ के हम इस घर को एक नया मोड़ दें. हर कोई आज़ाद हो, कोई किसी से न छुपाये."
बिलाल ने नसीम की कमर पकड़ी. "आप क्या चाहती हैं?"
"मैं चाहती हूँ के तुम सीमा को माफ़ कर दो. वह बची है, भटक गयी थी. बदले में मैं तुम्हारे लिए हमेशा हाज़िर हूँ. और सिर्फ मैं hi नहीं... हिरा और आयेशा भी अब जवान हो रही हैं. अगर हम सब मिल कर एक दूसरे की ज़रुरत पूरी करें, तोह बहार मुंह मारने की ज़रुरत hi क्या है?" नसीम ने बिलाल के लुंड को दोबारा सहलाया जो अब फिर से अकड़ रहा था.
"आप सही कह रही हैं नसीम. अगर घर में hi इतना माल हो, तोह बहार क्यों जाना?"

बिलाल ने इस बार नसीम को अपने निचे दबाया. और छोड़ना शुरू किया.
अब दुसरे राउंड में बिलाल ने नसीम की हर ख्वाहिश का ख्याल रखा. नसीम ने उसे बताया के उसे 'डोगग्य स्टाइल' पसंद है. बिलाल ने नसीम को घुटनो के बल खरा किया और पीछे से be-rehami से धक्के लगाने शुरू किये.

नसीम की सिसकारियों से कमरा गूँज रहा था.

"आह... हाँ... ऐसे hi बिलाल! मुझे बताओ के तुम अब इस घर के मर्द हो!" नसीम ने अपनी गांड पीछे मारी.

बिलाल ने नसीम के नितम्ब (बटक्स) पर ज़ोर से थप्पड़ मरे और जूनून में चुदाई जारी राखी.

आखिर में बिलाल ने अपना लुंड बहार निकाला और नसीम के चेहरे और होंठों पर अपना गरम गारा बिखेर दिया.

सन 3: आयेशा और हमजा का तजस्सुस
कमरे के बहार, आयेशा अभी भी कॉरिडोर में खरी थी. उसने दरवाज़े की दराज़ से नसीम को बिलाल पर सवार होते और फिर ज़लील होते सब देख लिया था. उसके जिस्म में आग लगी हुई थी. उसने देखा के कैसे उसकी माँ ने उसके दामाद को अपने सेहर में ले लिया है.
तभी हमजा वहां आया. उसने आयेशा को वहां खरे देख कर मुस्कुरा दिया. "क्या देख रही हो आयेशा? अम्मी का 'कफ़्फ़ारा'?"
आयेशा ने शर्म से सर झुका लिया मगर वहां से हटी नहीं. हमजा उसके क़रीब गया और उसके कान में सरगोशी की. "डरो मत... अब इस घर में यही होना है. अम्मी ने रास्ता दिखा दिया है, अब हमारी बारी है."
हमजा ने आयेशा की कमर पर हाथ रखा और उसे अपने साथ टेरेस की तरफ ले जाने लगा. आयेशा ने इंकार नहीं किया. उसे लग रहा था के उसकी माँ ने जो दरवाज़ा खोला है, उस से अब सब गुज़रेंगे.
सन 4: रशीद साहब की ख़ामोशी
इधर रशीद साहब अपने कमरे में बैठे तस्बीह पढ़ रहे थे, मगर उनका ध्यान बिलाल के कमरे से आती सिसकारियों पर था. उन्हें पता था के नसीम वहां क्या कर रही है. मगर जो प्लान नसीम ने उन्हें बताया था, उसने उनके अंदर एक pur-asrar उम्मीद जगा दी थी.
"नसीम... तुम जो भी कर रही हो, बस मुझे मेरी मर्दानगी लौटा दो," उन्हों ने दिल में दुआ की. उन्हें इंतज़ार था उस 'खास तोहफे' का जिसका वादा नसीम ने किया था.
**Episode ख़तम.**
क्लिफहैंगर: नसीम ने बिलाल को पूरी तरह अपना घुलम बना लिया है. मगर क्या हमजा और आयेशा टेरेस पर कुछ ऐसा करेंगे जिस से घर का निज़ाम हमेशा के लिए बदल जाये? और रशीद साहब का 'सरप्राइज' कब सामने आएगा?
Episode 20: समझौते की रात और नया दस्तूर
हवेली में रात का सन्नाटा गहरा चूका था, मगर बिलाल के कमरे में हवस की गर्माहट दीवारों को पिघला रही थी. बिलाल नंगा बिस्तर पर लेता था, उसकी नज़रें दरवाज़े पर थीं. नसीम जैसे hi अंदर दाखिल हुई, बिलाल की आँखों में शैतानी चमक आ गयी.
सन 1: नसीम का डोमिनान्स और गहरी चुदाई
नसीम ने दरवाज़ा लॉक किया और बिलाल के क़रीब आयी. उसने आज रेशमी लॉन की बारीक क़मीज़ पहनी थी जिसके निचे उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसके भरे हुए मम्मी साफ़ नज़र आ रहे थे.
"तोह... दामाद जी को इतनी जल्दी थी?" नसीम ने मुस्कुराते हुए पूछा और अपनी क़मीज़ उतार दी.
बिलाल ने कुछ कहना चाहा मगर नसीम ने उसके होंठों पर ऊँगली रख दी. "आज निज़ाम बदल गया है बिलाल. कल तुमने मुझे फ़तेह किया था, आज मैं तुम्हे बताउंगी के तजुर्बा क्या होता है."

नसीम ने बिलाल को बिस्तर पर सीधा लिटाया और खुद उसके पैरों की तरफ बैठ गयी. उसने बिलाल की मर्दानगी को अपने नरम हाथों में थमा और उसे किसी लोल्लिपोप की तरह चाटना शुरू किया.

बिलाल की सिसकारी निकल गयी जब नसीम ने पूरा लुंड अपने हलक़ तक उतार लिया. नसीम आज पूरे डोमिनान्स में थी; वह बिलाल को हिलने तक का मौका नहीं दे रही थी.

कभी वह उसके होंठों को दांतो से काटती, तोह कभी उसके सीने के बालों से खेलते हुए उसके निप्पल्स को मसलती.

"आह... अम्मी... जान निकल देंगी क्या?" बिलाल ने तड़प कर पूछा.

नसीम ने बिलाल के ऊपर सवार होते हुए उसका लुंड पकड़ा और अपनी गीली छूट के लबों पर रगड़ा.

"अभी तोह सिर्फ शुरुआत है." नसीम ने एक hi झटके में लुंड पूरा अंदर ले लिया

और बिलाल के ऊपर तेज़ी से उछलने लगी. उसके भरे हुए मम्मी बिलाल के चेहरे पर थप्पड़ मार रहे थे.

बिलाल ने उन्हें पकड़ना चाहा मगर नसीम ने उसके हाथ पकड़ कर बिस्तर से चिपका दिए.

वह खुद अपने झटकों से बिलाल को बेहाल कर रही थी.

"मज़ा आ रहा है बिलाल? बोलो... कैसा लग रहा है मेरी ग़ुलामी में?" नसीम ने हप्ते हुए पूछा और तेज़ी बढ़ा दी.

बिलाल लज़्ज़त की इन्तहा पर था और नसीम के इस डोमिनेंट रूप ने उसे पागल कर दिया था. वो ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाया और दोनों ने एक साथ चीखते हुए एक दूसरे को निचोड़ लिया.

बिलाल ने अपना सारा पानी नसीम के अंदर भर दिया.
सन 2: दूसरा राउंड और घर का नया निज़ाम
पहले राउंड के बाद बिलाल be-jaan पड़ा था, मगर नसीम अभी फ़ारिग़ नहीं हुई थी. वह उठी, बिलाल के लिए पानी लायी और उसे पिलाया. फिर वह दोबारा उसके जिस्म से खेलने लगी.
"बिलाल... सुनो," नसीम ने बिलाल की गर्दन पर बोसे देते हुए दुसरे राउंड के लिए तैयार करना शुरू किया.


"अब घर में ये रोना धोना और गुस्सा ख़तम होना चाहिए. रशीद साहब मायूस हैं, सीमा निदामत में है. मैं चाहती हूँ के हम इस घर को एक नया मोड़ दें. हर कोई आज़ाद हो, कोई किसी से न छुपाये."
बिलाल ने नसीम की कमर पकड़ी. "आप क्या चाहती हैं?"
"मैं चाहती हूँ के तुम सीमा को माफ़ कर दो. वह बची है, भटक गयी थी. बदले में मैं तुम्हारे लिए हमेशा हाज़िर हूँ. और सिर्फ मैं hi नहीं... हिरा और आयेशा भी अब जवान हो रही हैं. अगर हम सब मिल कर एक दूसरे की ज़रुरत पूरी करें, तोह बहार मुंह मारने की ज़रुरत hi क्या है?" नसीम ने बिलाल के लुंड को दोबारा सहलाया जो अब फिर से अकड़ रहा था.
"आप सही कह रही हैं नसीम. अगर घर में hi इतना माल हो, तोह बहार क्यों जाना?"

बिलाल ने इस बार नसीम को अपने निचे दबाया. और छोड़ना शुरू किया.
अब दुसरे राउंड में बिलाल ने नसीम की हर ख्वाहिश का ख्याल रखा. नसीम ने उसे बताया के उसे 'डोगग्य स्टाइल' पसंद है. बिलाल ने नसीम को घुटनो के बल खरा किया और पीछे से be-rehami से धक्के लगाने शुरू किये.

नसीम की सिसकारियों से कमरा गूँज रहा था.

"आह... हाँ... ऐसे hi बिलाल! मुझे बताओ के तुम अब इस घर के मर्द हो!" नसीम ने अपनी गांड पीछे मारी.

बिलाल ने नसीम के नितम्ब (बटक्स) पर ज़ोर से थप्पड़ मरे और जूनून में चुदाई जारी राखी.

आखिर में बिलाल ने अपना लुंड बहार निकाला और नसीम के चेहरे और होंठों पर अपना गरम गारा बिखेर दिया.

सन 3: आयेशा और हमजा का तजस्सुस
कमरे के बहार, आयेशा अभी भी कॉरिडोर में खरी थी. उसने दरवाज़े की दराज़ से नसीम को बिलाल पर सवार होते और फिर ज़लील होते सब देख लिया था. उसके जिस्म में आग लगी हुई थी. उसने देखा के कैसे उसकी माँ ने उसके दामाद को अपने सेहर में ले लिया है.
तभी हमजा वहां आया. उसने आयेशा को वहां खरे देख कर मुस्कुरा दिया. "क्या देख रही हो आयेशा? अम्मी का 'कफ़्फ़ारा'?"
आयेशा ने शर्म से सर झुका लिया मगर वहां से हटी नहीं. हमजा उसके क़रीब गया और उसके कान में सरगोशी की. "डरो मत... अब इस घर में यही होना है. अम्मी ने रास्ता दिखा दिया है, अब हमारी बारी है."
हमजा ने आयेशा की कमर पर हाथ रखा और उसे अपने साथ टेरेस की तरफ ले जाने लगा. आयेशा ने इंकार नहीं किया. उसे लग रहा था के उसकी माँ ने जो दरवाज़ा खोला है, उस से अब सब गुज़रेंगे.
सन 4: रशीद साहब की ख़ामोशी
इधर रशीद साहब अपने कमरे में बैठे तस्बीह पढ़ रहे थे, मगर उनका ध्यान बिलाल के कमरे से आती सिसकारियों पर था. उन्हें पता था के नसीम वहां क्या कर रही है. मगर जो प्लान नसीम ने उन्हें बताया था, उसने उनके अंदर एक pur-asrar उम्मीद जगा दी थी.
"नसीम... तुम जो भी कर रही हो, बस मुझे मेरी मर्दानगी लौटा दो," उन्हों ने दिल में दुआ की. उन्हें इंतज़ार था उस 'खास तोहफे' का जिसका वादा नसीम ने किया था.
**Episode ख़तम.**
क्लिफहैंगर: नसीम ने बिलाल को पूरी तरह अपना घुलम बना लिया है. मगर क्या हमजा और आयेशा टेरेस पर कुछ ऐसा करेंगे जिस से घर का निज़ाम हमेशा के लिए बदल जाये? और रशीद साहब का 'सरप्राइज' कब सामने आएगा?




































