Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 71 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

पुनम : (हसते) हां तो भाभी.. अब आपको क्या कहु..? भाभी कहु या दीदी.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर हसते) नही.. अब दीदी ही ठीक हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. तुम दोनो ही बहुत कमीनी हो.. आप मुजे पहेले भी सब बता सकती थी.. आप भी तो मेरे बारेमे सबकुछ जानती थी..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. मे सब जानती जरुर हु.. लेकीन मंजुदीदीसे पुछे बगैर आपको कैसे बताती..? इन्होने मुजे मना कीया था.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) दीदी.. यहा तो अब सब अपनी बहेने ही हे.. तो मम्मी ओर हमारे बापुके बारेमे बता दीजीयेनां.. वैसे भी इन सबसे क्या छुपाना.. सब अपने ही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. रहेने दीजीये.. क्युकी कुछ बाते अ‍ैसी हे जो आपको अच्छी ना लगे.. अगर जानना हे तो दोनो हमारे पीछे जो गार्डन हे वहा चली जाओ.. ओर आरामसे बैठकर बात करो.. तबतक डीनर भी बन जायेगा.. क्युकी अभी बहुत टाइम हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती पुनो सही केह रही हे.. वैसे भी पुनो भी सब कुछ जानती हे.. तो तुम इनके साथ क्यु नही चली जाती..? तेरी पकी सहेली जो हे.. हें..हें..हें.. जा पुनो.. तुम दोनो आरामसे बात करो..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. आप ही जाओ हम तो हमारी नइ भाभीका बेड सजा रहे थे.. ये तो सृतीदीदी की रोनेकी आवाज सुनकर हम यहा चली आइ.. चलो भावनादीदी हम हमारा काम करते हे.. इन दोनोको बतीयाने दो.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते पीठमे मुका मारते) अरे..? दीदी तो गांवकी भासा भी बोलने लगी.. हें..हें..हें..

फीर पुनम भावना ओर दया वहासे हसते हुअ‍े खडी होगइ.. ओर वापस रुममे चली गइ.. ओर देवु ओर दयाके लीये बेडको सजाने लगी.. तब मंजु ओर सृती धीरे धीरे बात करते बहारकी ओर जाने लगी.. तो सृतीको अपने बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे चलते) हां दीदी.. अब बताइअ‍े.. मुजे मम्मी ओर हमारे ससुरकी पुरी कहानी जाननी हे..





मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. तेरे मम्मी पापा हमारे बापु मेरी मम्मी भानुभाइके पीता.. सबलोग आपसमे अच्छे दोस्त थे.. ओर अ‍ेक साथ कोलेनमे पढते थे.. तेरी मम्मी हमारे बापुको पसंद करती थी.. बापुका नाम किशन था.. लेकीन वो अपने दिलकी बात कहे इनसे पहेले ही मेरी मम्मी ओर हमारे बापु अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे थे.. ओर दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ता भी कायम होगया था..

सृती : (हसते) मंजु लगता हे हमारे बापु बहुत रंगीन मीजाजके ओर ठरकी थे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) नही सृती.. ये सब गलत हे.. बहुत अ‍ैसे रीस्ते थे.. जो उनको मजबुरीमे उनके साथ रीलेशन बनाना पडा.. इनमे सीर्फ हमारे बापुका दोस नही हे.. ओर जो भी रीलेशन था.. सब अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे था.. मम्मी ओर बापुके बीच सबकुछ अच्छा चल रहा था.. ओर अ‍ेक दिन हमारी दादी आश्रमसे अ‍ेक लडकीको लेकर आगइ.. विमला नाम था उनका.. बस.. फीर सबकुछ बीखर गया..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) लडकी..? विमला..? कौन थी वो..? कही हमारी सांस तो नही..?

मंजुला : हां सृती.. वो कोइ ओर नही.. हमारी सगी बुआ ओर हमारी सांस ही थी.. हमारे बापुकी छोटी बहेन.. जो कीसी श्रापकी वजहसे हमारे दादी दादाने उसे आश्रमपे छोडा था.. लेकीन जब गलत फहेमी दुर हुइ तो दादी उनको वापस हवेलीपे लेकर आइ.. ओर तबतक वो भी जवान हो चुकी थी.. ओर गांवके डरकी वजहसे कीसीको केह भी नही पाये की ये लडकी मेरी ओलाद हे.. सबको यही कहा.. की ये अनाथ थी तो हमने गोद लेली..

सृती : (आस्चर्यसे) क्या वो सचमे हमारी सगी बुआ थी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. लेकीन वो बहुत ही सातीर थी.. उनको पता थाकी बापु उनके सगे भाइ हे.. फीर भी उसने ये बात बापुसे छीपाइ.. क्युकी वो भी बापुसे प्यार करने लगी थी.. ओर बापुको अपने प्रेम जालमे फसाकर हर रात उनसे अपने तनकी आग बुजाने लगी.. ओर बापुको मेरी मम्मीसे अलग करदीया.. लेकीन तबतक तो मम्मी भी बापुसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर अपनी प्यास बुजाते बुजाते वो खुद भी प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..

फीर मंजुने सृतीको विमला किशन ओर नीर्मलाकी पुरी कहानी सुनाइ.. की कीस तराह विमलाने साजीस करके नीर्मलाको किशनसे दुर करदीया ओर किशनसे सादी करली.. फीर सृतीने खानदानके श्रापके बारेम भी बता दीया.. की कीस तराह श्रापका नीवारण हुआ.. ओर देवायतके बाद लखन ओर पुनमका जन्म हुआ.. सृतीने देवायतके खानदानके बारेमे सबकुछ सृतीको बता दीया..

सृती : (हसते गार्डनमे आते) मंजु.. ये तो बडी दिलचस्प कहानी हे.. अब समजी.. इस खानदानके सभी मर्द अपनी बहेनसे ही क्यु सादी करते हे.. इनमे मेरी मम्मी भी बाकात नही रही.. सृती.. मेरी मम्मीके बारेमे बताओनां.. चल यही बैठते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते बैठते) हां सुन.. जब भुमी आंटीको पता चलाकी बापु मेरी मम्मीको प्यार करते हे.. तब भुमी आंटीका दिल टुट गया.. ओर उपरसे तेरी मम्मीके साथ वो विरजी अंकलका हादसा हो गया.. फीर तेरे मम्मी पापाने आपसमे सादी करली.. ओर सादी करके सभी दोस्तोके साथ अपना रीस्ता खतम करलीया.. सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा.. क्युकी बापु उनको अपनी बहेन मानते थे ओर हर साल उनको सहेर जाकर राखी बंधवाते थे..

सृती : (हसते) मंजुदी.. अगर बापु मेरी मम्मीको सचमे बहेन मानते थे.. थो फीर बापुने उनके साथ रीलेशन क्यु बनाया..? क्या वो जवानीमे इतनी खुबसुरत थी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) खुबसुरत..? अरे कमीनी वो दोनो सहेलीतो कीसी हीरोइनसे कम नही थी.. ओर खुबसुरत तो वो दोनो अभी भी हे.. मेरी मम्मी भी कुछ कम नही हे.. देखा नही.. दोनो कैसे पटाका लग रही हे..? सुन.. रीलेशन बापुने नही.. भुमी आंटीने बनाया था.. तेरे पापा सेक्स ओर संतुस्ट करनेमे तो सक्षम थे..

दोनोकी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी थी.. मगर तेरे पापाके स्पम मे उतने काउन्ट नही थे.. की वो भुमी आंटीको प्रेगनेन्ट कर सके.. इस बारेमे तो अच्छी तराह जानती हेनां..? दोनोने कइ जगह अपना इलाज भी करवाया.. मगर फीर भी भुमी आंटी प्रेगनेन्ट नही हो पाइ..

सृती : (सामने देखते) अच्छा.. अब समजी.. इसीलीये दोनो रीलेशनमे आये..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. तेरे मम्मी पापा दोनो सहेरमे रहेते थे.. तब सीर्फ बापुही जानते थे की दोनो कहा रहेते हे.. उन्होने सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा था.. बापु दोनोकी तकलीफके बारेमे जानते थे.. इसीलीये दोनोको अ‍ेक दिन हमारे आश्रमपे लेकर गये.. ओर बापुने बाबाको दोनोकी तकलीफके बारेमे बात की..

जब बापु ओर तेरे पापा वही इधर उधर धुम रहेथे तब भुमी आंटीने मोका देखकर बाबाको अपनी तकलीफके बारेमे पुछा.. तब बाबाने उसे तेरे पापासे संतान नही होनेकी बात कही.. ओर उसे ये भी कहा.. की तेरे नसीबमे संतान हे.. मगर तेरे पतीसे नही हमारे बापुसे..

सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? ये बात खुद बाबाने कही..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. पहेले तो तेरी मम्मीने मना कर दीया.. लेकीन बादमे उसने अपना मन बदल दिया.. क्युकी अ‍ेक जमानेमे प्यार जो करती थी उनसे.. ओर धीरे धीरे करते भुमी आंटीका पुराना प्यार जाग उठा.. ओर अ‍ेक दिन उसने राखीके तोहफेके बदले बापुसे संतान सुख मांग लीया.. तो बापु उनपे बहुत गुस्से हो गये.. ओर उन्होने भुमी आंटीको मना करदीया..

सृती : (हसते) कमीनी तुमतो बडा सस्पेन्स रखती हो.. बताना तो फीर मेरा जन्म कैसे हुआ..?

मंजुला : (हसते) सुन.. जीस तराह बापु आंटीको राखी बांधने आते थे उसी तराह तेरे पापा भी अपने गांव अपनी बहेनको राखी बांधने जाते थे.. उनका गांव दुसरे राज्यमे था.. तो उनको आने जानेमे ओर वहा रुकनेमे अ‍ेक हप्ता लग जाता था.. तो उनको राखीके तीन दिन पहेले ही नीकलना होता था.. तो अ‍ेक दिन तेरे पापा गांव चले गये.. तब उनके जाते ही भुमी आंटी बापुको लेकर आश्रमपे चली गइ..

सृती : (हसते) क्यु..?

मंजुला : (हसते) क्युकी बाबा हमारे बापुको समजा सके.. क्युकी बापु उनको बच्चा देनेके लीये मान नही रहे थे.. तब बाबाने बापुको समजाया.. तो बापुने कहा ये मेरी बहेन हे.. तब बाबा भी थोडा गुस्से होगये.. ओर बापुको कहा.. की तुमने तेरी सगी बहेनसे तो सादी करली.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. फीर भी तुजे बुरा लगता हे तो चल.. मे तुम दोनोकी सादी करवादु.. ओर बाबाने वहा दोनोकी गांधर्व सादी करवादी..
 
सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? मम्मीने बापुसे सादी करली थी.. तो फीर पापा..? मंजुदी आगे बताओनां..

मंजुला : (मुस्कुराते) सुन.. फीर तो बापुको भी भुमी आंटीकी बात माननी पडी.. देर साम आश्रमसे आते ही दोनो सुरु हो गये.. उसी रात दोनोने अपनी सुहागरात मनाइ.. सुहागरात क्या छोटसा हनीमुन ही मानलो.. पुरी रात दोनो जागे.. ओर प्यार करते रहे.. ओर जबतक तेरे पापा वापस नही आये तबतक दोनो मे से कोइ घरसे बहार ही नही नीकले.. दोनो अ‍ेक हप्ते तक लगातार मीलन करते रहे.. ओर नतीजेके फल स्वरुप भुमी आंटी बापुसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर तु उनके पेटमे ठहेर गइ..

सृती : (मुस्कुराते) क्या इस बातका पापाको पता नही चला..? तो फीर उनका क्या हुआ..?

मंजुला : (सामने देखते) सृती.. फीर तो भुमी आंटीका तेरे पापासे सीर्फ नामका ही रेह गया.. क्युकी अब भुमी आंटी बापुको ही अपना पती मानती थी.. तब भुमी आंटीने तेरे पापासे जुठ बोला था.. कहाकी हम आश्रम गये थे बाबाने उसे देसी दवाइ दी थी.. इसीलीये वो प्रेगनेन्ट हुइ हे.. ओर जब तेरा जन्म हुआ.. सृती.. अब जो मे तेरे पापाके बारेमे जो बात केह रही हु.. हो सकता हे तुजे बुरा लगे.. लेकीन ये सच हे..





सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? बता नही लगेगा बुरा.. इतना कुछ तो सुनलीया.. तो फीर क्या फर्क पडता हे.. कही तु केह रही थी दुसरी सचाइ.. कही ये वोही तो नही..? बता..

मंजुला : (सामने देखते) नही सृती.. वो सचाइ तो कुछ ओर ही हे.. जो तु सुन नही पायेगी.. खैर जानेदे.. कल तुजे सब पता चल जायेगा.. तब देखती हु.. तेरे मे सचाइ बरदास्त करनेकी कीतनी हिंमत हे..

सृती : (मुस्कुराते) कमीनी तुम तो मुजे डरा रही हो.. सुन.. तु मेरे पापाके बारेमे कुछ केह रही थी.. बता..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. तेरे पापाका भी उनकी भाभीके साथ अवैध रीस्ता था.. जब आंटीकी डीलीवरी हुइ ओर तेरा जन्म हुआ.. तब आंटीकी देखभालके लीये उनकी जेठानी गांवसे आइ थी.. ओर तेरे पापाका रीलेशन उनसे होगया.. वो अ‍ेक महीना यहा रुकी.. ओर जबतक यहा थी तबतक दोनो मौका मीलते ही अ‍ेक होजाते.. दोनो हर दिन रात सेक्स करते रहे..

सृती : (आंख गीली करते) मंजुदी.. मे मेरे मम्मी पापासे कीतना प्यार करती थी.. लेकीन मम्मी पापा दोनो अ‍ेक दुसरेको धोखा दे रहे थे.. तुमतो उनके बारेमे सबकुछ जानती हो.. क्या बापुका रीलेशन मेरे जन्म तक ही थानां..?

मंजुला : (भारी सांस लेते) नही सृती.. ये साली आग ही अ‍ैसी हे.. जब अ‍ेक बार चस्का लग जायेनां..? फीर तो ये पीछा ही नही छोडती.. मीलन करनेकी बार बार इच्छा होती हे.. ओर बापु ओर तेरे पापाका भी यही हुआ.. तेरे पापा सीर्फ राखीके दिन ही जाते थे.. लेकीन जबसे उनकी भाभीके साथ रीलेशन हो गया..

तबसे सालमे तीन चार बार अपने गांव जाने लगे.. ओर हमारे सास सुसरके बारेमे जानकर उनका भी मन हो गया.. ओर अपनी भाभीके साथ साथ अपनी बहेनको भी पटाकर सेट करलीया.. फीर तो वहा तीन चार दिन रुकते.. ओर अपनी भाभी ओर अपनी बहेनकी प्यास बुजाकर वापस आजाते..

सृती : (सामने देखते) ओह गोड..? पापा भी..? अपनी बहेनके साथ..? तो फीर मम्मी ओर बापु..?

मंजुला : सृती.. ये कीमीनी आग ही अ‍ैसी हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती.. ओर बापु भी जब सहेर जाते तब भुमी आंटीको मीलकर ही आते.. दोनो तब मीलते जब तेरे पापा अपनी जोबपे होते.. ओर तु अपनी स्कुलपे.. दुनीयाकी नजरमे दोनो भाइ बहेन थे.. लेकीन अकेले मे दोनो मीया बीवी बनकर पुरा दिन प्यार करते अपनी प्यास बुजाते.. ओर तबतक दोनो पती पत्नी रहे जबतक बापु गजर ना गये..





सृती : (आंख गीली करते) मंजुदी.. मे बापुको मामा कहेती थी.. तो समजती थी मामा अपनी बहेनको मीलने आते हे ओर उनका बहुत खयाल रखते हे.. मेरी पुरी पढाइका खर्चा भी देते थे.. लेकीन मुजे क्या पता थाकी वो अपनी बहेनका नही अपनी बीवी ओर बेटीका खयाल रखने आते हे.. मंजुदी.. ये दुनीया कीतनी अजीब हे.. कोइ रीस्ते नाते तक नही देखती.. मेरे पापा भी वोही नीकले.. बस.. लडकी या ओरत देखी नही के अपने नीचे लीटानेमे लग जाते हे.. फीर चाहे अपनी भाभी हो या सगी बहेन..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. तु उल्टा सोच रही हे.. इनमे सीर्फ मर्द नही हम ओरते भी यही चाहती हे.. ओर यही तो संसार हे.. सबको अपने अपने तनकी प्यास बुजानी हे.. जहा प्यार करते अ‍ेक दुसरेके वंसको आगे बढाते हे.. फीर चाहे कीसी भी तरीके से हो.. अपने अपने देखनेका नजरीया हे.. हमारे बापुका अ‍ैसी कइ ओरतोके साथ रीलेशन था.. जो सीर्फ बच्चेके लीये बनाया था.. फीर तो उनके सामने देखा तक नही.. जैसे हमारी रजीया ओर दयाकी मां.. उसने सीर्फ बच्चेके लीये बापुके साथ रीलेशन बनाया..

सृती : (हसते) क्या..? रजु ओर दया दीदी..? वो दोनो भी बापुकी संतान हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. रामु काकातो बापुके दोस्त थे.. जो वो भी बच्चा देनेमे सक्षम नही थे.. तब उनकी बीवी बापुसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर रजुकी मां तो हमारे यहा काम करती थी.. वो बापुकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. ओर उनसे बच्चा चाहती थी.. ओर अ‍ेक दिन वो भी बापुसे प्रेगनेन्ट होगइ..

बापुने अपनी दोनो बेटीकी सादी भी करवाइ.. अ‍ेक कोतो उनके पतीने छोड दीया.. ओर अ‍ेक विधवा होगइ.. तबसे दोनो हमारे साथ हे.. दया बहेनकोतो पता हेकी वो हमारी बहेन हे.. लेकीन रजुदीदीको तो बेचारीको पता भी नही.. की वो भी हमारी बहेन हे..

सृती : (मुस्कुराते) लगता हे तब बापु बहुत ही हेन्डसम होगे.. तभी तो ओरते उनके पीछे इतनी पागल होगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. सीर्फ हेन्डसम ही नही.. उनमे आकर्सण ही इतना था.. जो आप हमारे देवु ओर लखन मे हे.. देख.. कीतनी खुबसुरत दुनीया हे ये.. जहा सीर्फ प्यार ही प्यार नजर आता हे.. तु कीसीसे प्यार करेगी तो तुजे भी प्यार मीलेगा.. ओर अगर पीछे हट गइ.. तो केवल दुख ही मीलेगा.. साथी होना जरुरी हे.. फीर चाहे वो पती हो या प्रेमी.. अगर दोनोमे से कोइ नही हेतो इस दुनीया उस ओरतको जीसका कोइ नही उसे नोचनेके लीये तैयार ही हे.. क्या सही कहाना मैने..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमाकर हसते) हां.. सही कहा.. ओर देख भी लीया.. अभी तक मुजसे रुठे हुअ‍े हे.. मंजुदी.. प्लीज.. आप उनसे बात करोनां.. आपके कहेनेपे मान जायेगे.. आपका बेटा जो हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) ना बाबा ना.. तुमने उसे नाराज कीया हे तो तुही मना.. मे तुम दोनोके बीच पडने वाली नही हु.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते पीठमे मारते) कीतनी कमीनी हे तु.. क्या मेरी इतनीसी बात नही मानेगी..? अब तो तेरी दीदी भी हु.. कमसे कम अपनी दीदीके लीये तो बनाले.. हें..हें..हें..

पुनम : (अंदर आते जोरोसे) अरे.. दोनो यहा बैठी हो..? देखो कीतने बज गये.. खाना भी बन गया हे.. चलो दोनो.. फीर बाते कर लेना..

मंजुला : (खडी होते धीरेसे) लोजी.. आगइ मेरी बहु.. हें..हें..हें.. (जोरोसे बोलते) अरे आ रही हे बाबा.. क्यु चीला रही हे.. बाते कर रही थी.. चलो सृती..

सृती : (खडी होते धीरेसे हसते) बहु..? दीदी इसे बहु क्यु कहा..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) अरे मेरे लखन बेटेकी बीवी हे ये.. तो बहु ही कहुगीनां.. हें..हें..हें.. चल..

पुनम : (दोनो पास आतेही हसते) क्यु भाभी.. अपने बारेमे जान लीया सब.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते पीठमे मुका मारते) भाभीकी बच्ची बहेन हु आपकी.. हां जान लीया सब.. हें..हें..हें.. दीदी.. आपको भी तो सब पता था.. तो बता देती मुजे..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. बडी दीदीकी परमीशनके बगैर कैसे बताती..? लेकीन अब कुछ पुछना होतो पुछ सकती हो.. अब बता दुगी.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते घरकी ओर चलते) हां पुछ लुगी.. देखो.. अमारी बहेन कीतनी खुस हे.. कोइ केह सकता हे.. इनका आज ही डीवोर्स हुआ हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां खुस तो होगीना कमीनी.. अ‍ेकसे छुटकारा मील गया तो दुसरेको सेट भी करलीया हे.. हें..हें..हें.. मेरी बहु जो होने वाली हे.. क्यु बहु.. बनोगीनां मेरे लखन बेटेकी रानी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते मुस्कुराते भागते) दीदी.. आप भीनां..

कहेते पुनम सर्मसार होते वहासे दोडकर चली गइ.. तो मंजु ओर सृती दोनो ही उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. फीर वो दोनो भी घरपे आगइ तो पुनम दोनोको देखते हसती रही.. तब लता रमा ओर नीलम नीचे होलमे बैठी थी.. तो मंजु ओर सृती भी वही जाकर बैठ गइ.. तभी देवायत भी आगया.. ओर वो भी सबके साथ बैठ गया.. तो पुनम उनसे सरमाकर मुस्कुराते अपने रुममे चली गइ....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२९

कहेते पुनम सर्मसार होते वहासे दोडकर चली गइ.. तो मंजु ओर सृती दोनो ही उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. फीर वो दोनो भी घरपे आगइ तो पुनम दोनोको देखते हसती रही.. लता रमा ओर नीलम नीचे होलमे बैठी थी.. तो मंजु ओर सृती भी वही जाकर बैठ गइ.. तभी देवायत भी आगया.. ओर वो भी सबके साथ बैठ गया.. तो पुनम उनसे सरमाकर मुस्कुराते अपने रुममे चली गइ....अब आगे

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु.. चंदाका फोन आया था.. वो सबलोग कल सुबह आ रहे हे.. तो उनको लेने जाना पडेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. तो फीर अगर लखनका काम ना होतो आप लखनको ही भेजदो.. सबको लेकर आजायेगा..

देवायत : (मुस्कुरात.) हां.. यही ठीक रहेगा.. लेकीन वो हे कीधर..? आते ही चला गया..

मंजुला : (हसते) अरे अपने दोस्तोसे मीलने गया होगा.. वैसे बंसी भैयाकी सादी जो हे.. वहा कुछ काम बाम कर रहा होगा.. लेकीन आप कीधर थे..?

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) मे बस.. पंचायतकी ओफीस गया था.. रमेशको मीलने.. वो सरपंचके पदसे इस्तीफा दे रहा हे.. ओर हमेसा हमेसाके लीये सहेर रहेने जा रहा हे.. ओर उपरसे यहा नइ स्कुल ओर होस्पीटलका काम भी सुरु हो गया हे..

सृती : (आस्चर्यसे) क्यु..? क्या हुआ..? तो फीर यहां..? आइ मीन.. वो चारुभाभी ओर वंदना..?

देवायत : (मुस्कुराते) सृती.. वो दोनो अलग होगये हे.. दोनोका डीवोर्स होगया हे.. यहा वो अपनी सब प्रोपर्टी चारु ओर वंदनाके नाम कर चुका हे.. तो कल सुबह पंचायत सदस्योकी मीटींग बुलाइ हे.. मुजे जाना होगा.. मंजु.. क्या सोच रही हो..? कुछ कहेना हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां जानु.. मे सोच रही हु.. क्युना हम इस गांवमे अ‍ेक मीसाल कायम करे..?

देवायत : (हसते) क्या..? कुछ नया सोचा हे क्या..?

मंजुला : (हसते) हां.. देवु मे चाहती हु.. अब इस गांवमे सभी वहीवटदार महीला हो.. क्या कहेते हो..? मेरी मानो तो आप चारु भाभीको सरपंच बनादो.. फीर धीरे धीरे करते सभी सदस्य बदलते जाइअ‍े.. ओर महीलाको जीम्वेवारी दीजीये.. वहा रश्मी भाभी ओर वंदना भी बहुत मस्त काम कर रही हे.. क्या कहेते हो..? ओर वेसे अब होस्पीटलमे भी महीला डोक्टर आ रही हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. आइडीया तो मस्त हे.. ठीक हे.. मे कल डी.अ‍ेम. से बात करलुगा.. फीर सभी सदस्यको भी बता दुगा.. वैसे सरपंचके लीये चारु ही ठीक हे.. ओर चंदाके गांवमे भी वो भीमाको सरपंच बनाना हे.. बेचारा कबसे हमारी आस लेकर बैठा हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) जानु.. वैसे होस्पीटलका काम सचमे सुरु होगया हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां हो गया हे.. सब टेन्डर दे दीये थे.. तो पास होगये.. साथमे स्कुलका काम भी सुरु होगया हे.. तो कंपलीट होनेमे अ‍ेकाद साल लग जायेगा.. फीर तुम आजाना इधर..

सृती : (मुस्कुराते) देखती हु बाबा.. लेकीन यहाके लीये मेने अ‍ेक डाक्टरनी ढुंढली हे.. हमारे गांवकी ही हे.. सरकारसे अ‍ेपोइन्ट होगी.. आप देखलेना..

देवायत : (हसते) अरे हां.. लखन ओर तुम बतातो रहे थे.. क्या हुआ इस लडकीकां..? बेंगलोर गइ की नही..?

सृती : (मुस्कुराते) नही.. काफी होसीयार हे.. बस.. अ‍ेकाद महीनेमे चली जायेगी..

सबलोग बाते करते बैठे थे.. तब लखन घरसे नीकलते ही रामुकाकाको खेतपे छोड दीया.. फीर वो गोडाउनकी ओफीसकी ओर जाने लगा.. तभी लखनको गोडाउससे छोटुकी बीवी रीटा अपनी सारीको सही करते बहार नीकलते नजर आइ.. जैसे ही लखनकी ओर नजर गइ.. वो थोडी गभराते डर गइ.. फीर लखनकी ओर देरकर सरमाते हसती हुइ वहासे नीकल गइ.. तब लखन गोडाउनमे चला गया..

ओफीसकी बगलकी रुममे जाकर देखा तो भानु अपनी पतलुन पहेन रहा था.. तो लखनकी ओर नजर जाते ही वो थोडा जेंप गया.. फीर सरमाकर हसने लगे.. तो लखन समज गया.. की अभी अभी अंदर क्या हुआ हे.. ओर वो ओफीसमे आकर बैठ गया.. तो कुछ देरमे भानु भी बहार आगया.. ओर लखनके पास बैठ गया.. फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे..

लखन : (जोरोसे हसते) क्या भैया.. भाभी घरपे नही हे तो बडा फायदा उठा रहे हो..

भानु : (हसते) क्या करु लखन.. पता नही कमीनी कब वापस आयेगी.. तबतक इन बहारकी बीरीयानीसे ही काम चलाता हु.. साली क्या कडक माल हे.. बहुत मजे देती हे.. तुम उनकी लेगा क्या..? तो अभी बुलाता हु..

लखन : (मुस्कुराते) नही भैया आपही लीजीये.. अब मेने बहारकी बीरीयानी खाना ओल मोस्ट बंध करदीया हे.. तीन तीन बीवीया हे.. तो इनमे ही खुस हु.. कहो.. कामकाज कैसा चल रहा हे यहा..?

भानु : (मुस्कुराते) बस.. कटाइ हो रही हे.. ओर अगली फसल उगानेकी तैयारीया चल रही हे.. आप सुनाओ.. वहा काम सुरु करदीया..? ओफीस बोफीसमे जाते होकी नही..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भैया ओफीसतो नही गया.. पर काम सुरु हो गया हे.. वहा हमारे पार्टनरके कोन्टेक्टमे रहेता हु.. सब फोन मे ही नीपट जाता हे.. भाइसे पुछकर तीन चार सोदा करलीया.. बहुत अच्छा रहा.. भाइ.. मे भाभीको साथमे लेकर आया हु.. नीलुभी साथमे आइ हे.. हम सब श्रीधरकी सादीमे आये हे.. तो भाभी अब चाचीके साथ ही घरपे आजायेगी.. सायद कल वोभी सब लोग आजायेगे..

भानु : भाइ.. मा आजाये तो आप ही घरपे छोड जाना.. कटाइ चल रही हे.. तो इधर भी ध्यान रखना पडेगा.. क्या भाइने दयासे सादी करली..? मुजे कहा था लेकीन मे नही आ सका..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. होगइ.. मे रामुकाकाको छोडने ही आया था.. चलो मे चलता हु.. अभी बंसीके घरपे जाना हे.. फीर वहीसे सब दोस्तो श्रीधरके घरपे जायेगे.. कल उनका मंडप मुहुर्त हे..

भानु : (थोडा हीचकीचाते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी.. पर कैसे कहु..? क्या वहा कोइ अच्छा डोक्टर बोक्टर हेकी नही..? बस.. थोडा दीखाना हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? क्या हुआ हे आपको..? कोइ तकलीफ हे क्या..?

भानु : (सरमाकर हसते) अरे इतनी भी नही हे.. सुनो.. वो.. आजकल नीचे थोडा दर्द हो रहा हे.. इसीलीये..

लखन : (हसते) अच्छा.. तो छोटुकी बीवीपे थोडी कम महेनत करो.. हें..हें..हें.. सुना हे आजकल वो आपके साथ ही रेहती हे..?

भानु : (सरमाकर हसते) तो क्या करु..? अ‍ेक आपकी भाभी यहा हे.. तो घरपे आनेका नाम ही नही ले रही.. तो क्या करता..? ओर वैसे भी आजकल कमीनी कुछ ज्यादा ही बच्चा बच्चा कर रही हे.. ओर मां भी नही समजती.. अब इस उमरमे आपकी भाभीको बच्चेके लीये केह रही हे..

लखन : (हसते) तो दिकत क्या हे..? देदोनां.. अ‍ेक ओर सही.. हें..हें..हें.. ओर भाभीकी उमर भी इतनी नही हे.. की वो बच्चा पैदा ना कर सके.. आप तो बच्चा पैदा करनेके मास्टर हो.. क्या दिकत हे..?

भानु : (हसते) तो क्या करु..? मुजे वो कोन्डम बोन्डम लगाना अच्छा नही लगता.. उनमे मजा ही नही आता.. तो बच्चा ठहेर जाता हे.. ठीक हे यार.. आप कहेते होतो ट्राइ करलेगे.. ओर क्या..? लेकीन कमीनी घरपे आये तबनां.. कीतने दिन होगये हम नही मीले..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. बस अ‍ेक ही दिनकी तो बात हे.. अगर चाची कल आजायेगी तो सामको ही दोनोको घरपे छोड दुगा.. फीर ट्राइ करते रहेना.. हें..हें..हें..

भानु : (मायुस होते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात ओर कहेनी हे.. क्या आपको पता हे..? मे ओर भावना अलग हो रहे हे..? वो मुजे डीवोर्स दे रही हे.. क्युकी उनको मेरे ओर रीटाके बारेमे सब पता चल गया हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. पता तो नही था.. लेकीन यहा आकर सब पता चला.. सीर्फ भावना भाभीको ही नही.. घरपे सबको पता चल गया हे.. की आप छोटुकी बीवीको घरपे लेजाते हो..

फीर लखन वहासे बंसीके घरपे चला जाता हे.. ओर बंसीके घरवालोको मीलता हे.. तब वहा जागृती उनसे मीलती हे.. ओर लखनको अपना वादा याद दीलाते बहुत ही सर्मसार होते अपनी भाभी सांतीके पास चली जाती हे.. फीर बंसी ओर लखन मुनाको मीलने उनके घरपे जाते हे.. तब बरखा ओर बसंती लखनकी बहुत टांग खीचाइ करती हे.. फीर दोनो मुनाको लेकर श्रीधरके घरपे चले जाते हे.. तो श्रीधर तीनोको देखकर बहुत खुस होता हे..
 
फीर सभी दोस्तो मीलकर वहाका कामकाज देखते हे.. तब श्रीधरकी बीवी जयश्री लखनकी बहुत मस्तीया करती हे.. तो श्रीधरकी मम्मी ब्रिन्दा भी चोर नजरसे लखनके पेन्टके उभारको देखती रहेती हे.. तब उनके मनमे अ‍ेक बार फीर वासनाका कीडा जाग जाता हे.. ओर वो कामके बहाने लखनके आस पास ही मंडराने लगती हे.. ओर बार बार चोर नजरसे लखनको देखते मस्तीया करते उनसे बाते करती रहेती हे..

अ‍ैसेही साम ढल गइ.. ओर रात होगइ.. ब्रिन्दाने लखनको वही खानेका बहुत आग्रह कीया लेकीन लखन नही माना.. ओर वो खानेके लीये घरपे आगया.. तब सबलोग डाइनींगपे बैठकर खानेकी तैयारीया कर रहे थे.. तो पुनमने आंखोके इसारोसे लखनको उनके पास बैठनेके लीये कहा.. तो लखन हाथ मुह धोकर पुनमके पास बैठ गया तो पुनम बहुत खुस होगइ.. तब सृतीको थोडी ज्वेलेसी फील हुइ.. तभी..

मंजुला : लखन बेटा.. कल मम्मी लोग आ रहे हे.. तो तुजे सुबह उनको लेने जाना पडेगा.. तेरे भाइको यहा कुछ काम हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभीमां.. मे चला जाउगा.. वहाका कुछ ओर काम होतो वो भी बोलीये..

देवायत : लखन.. हमारी बडी कार लेकर ही चले जाना.. साथमे सामान भी बहुत होगा.. ओर हां.. तुमने कोइ नइ कार बार लेली की नही..? क्युकी अब जीप तो तु यही छोड रहा हे..

लखन : (सृतीकी ओर देखते) नही भाइ.. यहासे जाते ही ले लुगा..

सृती : (मोकेका फायदा उठाते) जानु.. वहा दो दो कारकी क्या जरुरत हे.. मेरी कार तो हे.. ओर वहा हमने नया स्कुटर भी लेलीया हे..

लखन : (सृतीकी ओर देखते) नही भाइ.. भाभीको भी कारकी जरुरत पडती हे.. तो हम दुसरी कार ही लेलेगे..

मंजुला : लखन.. वो सब छोड.. सुनो सब.. खाना खानेके बाद सब लोग होलमे आजाना.. मुजे तुम सब लोगोसे अ‍ेक जरुरी बात करनी हे..

देवायत : (मुस्कुराते) मंजु सब लोग यही तो हे.. तो यही बतादोनां..

मंजुला : (पुनमकी ओर देखते) नही.. यहा नही.. अब सब लोग सांतीसे बीना कोइ बात करे खाना खालो..

तब पुनम समज जाती हे.. की मंजु उनके ओर धिरेनके बारेमे सबको बताने वाली हे.. तो वो थोडी मायुस होजाती हे.. तभी लखनने देख लीया.. तो डाइनींगके नीचेसे ही पुनमका हाथ थाम लीया.. ओर आंखोसे तसली देने लगा.. तो पुनमके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर उसने लखनके हाथोमे उंगलीया फसाकर जोरोसे दबादी.. जैसे केह रही हो.. की तुम होतो मुजे क्या गम..

तो दुसरी ओर बहुत दुर मुम्बइमे डो. सुधीर अपना जेन्डर चेन्ज करवाने गया था.. आज उनको १० दिन होगये थे.. तो सुधीरके तनपे अब काफी बदलाव आ चुका था.. उनके नीतंबसे लेकर उनके स्तन.. बाल.. चहेरे.. मतलब उनकी पुरी बोडीमे बदलाव आना सुरु होगया था.. अबतो अ‍ेकदम जवान ओरत बन गया था.. ओर अ‍ेक दो दिनमे ही उनको होस्पीटलसे छुटी मीलने वाली थी..

तो दुसरी ओर नीर्मला भुमीका चंदा ओर सरला भी बसमे बैठ गये थे.. ओर वापस आ रहे थे.. तब बीच रास्ते अ‍ेक होटेलपे फ्रेस होने रुके थे.. सरला बसमे सो रही थी तो नीर्मला भुमीका ओर चंदा बाथरुमकी ओर जाने लगी.. अचानक भुमीकी तबीयत बीगड गइ.. उनको उल्टीया होने लगी.. तो नीर्मला उनको थोडी दुर लेगइ.. ओर उनकी मदद करते चंदाकी ओर देखते उनसे कुछ बाते करने लगी..

भुमीका : नीमु.. ये उल्ज्ञीको भी अभी होनाथा.. देख हमे चंदा देख रही हे.. अब क्या होगा..?

नीकर्ला : अब देखलीया हे तो देखने दे.. अ‍ेक दिनतो उसेभी पता चल ही जायेगा.. ये बात हम कबतक छुपायेगे..? मुजे चीन्ता चंदाकी नही हे.. हमारी सृतीकी हे.. चल जो भी हो आगे देखा जायेगा..

भुमीका : (मुस्कुराते) हां.. अब उसे भी पता चले तो चलने दे.. तुम मेरे साथ होतो क्या दिकत..?

उल्टीया हुइ तो चंदा उन दोनोको देखती रही.. फीर तीनो फ्रेस होकर चाइ पीकर बसमे आकर अपनी अपनी जगहपे बैठ गइ.. तो भुमीका ओर चंदा पास पास ही बैठे थे.. तब भुमीकाने अपनी बेगसे अ‍ेक टेबलेटकी स्ट्रीप नीकालकर उनमेसे अ‍ेक गोली खाली.. तो चंदा स्ट्रीप देखते ही चौंक गइ.. क्युकी अ‍ैसी ही स्ट्रीप उनके पास थी.. जो उनको सृतीने दीथी.. तब चंदाको भुमीकाके उपर कुछ आसंकाये होने लगी..

चंदा : दीदी.. आप ये गोली क्यु खा रही हे..? ये तो प्रेगनेन्सीमे उल्टीया होती हे.. तब लेनी होती हे..

भुमीका : (थोडा जेंपते) अरे.. वो.. वो.. कुछ नही उल्टीयाकी सब अ‍ेकही टेबलेट आती हे.. मुजे सृतीने दीथी.. कहाथा कीसीको उल्टीया जैसा लगे तो इनमेसे खा लेना.. तु चीन्ता मत कर.. कुछ नही होता..

कहेते भुमीकाने बातको टाल दीया.. ओर उनके चहेरेपे थोडी चीन्ताके भाव आगये.. ओर वो साइडमे नीर्मलाकी ओर देखने लगी.. तब नीर्मलाने उसे आंओके इसारोसे तसली दी.. ओर सोनेकी कोसीस करने लगी.. कल सुबह उनको वापस ट्रावेल्सकी ओफीसमे पहोचना था.. ओर उनकी बस वापस आनेके लीये नीकल पडी.. तब नाही चंदाको पता था ओर नाही भुमीकाको.. की कल सुबह उनके साथ क्या होने वाला था..
 
तो दुसरी ओर सबने खाना खालीया.. तो मंजुने सबको होलमे अ‍ेकठा कीया.. तो सब लोग उनकी ओर सवालीया नजरोसे देख रहे थे.. मंजुने पुनम ओर धिरेनके बीच जोभी कुछ जगडा हुआ उनके बारेमे सबको बता दीया.. ओर ये भी केह दीया की अब दोनोके बीच डीवोर्स हो चुका हे.. तब नीलम धीरेसे वहासे सरक गइ.. ओर उपर अपने कमरेमे चली गइ.. क्युकी इन सबमे कहीना कही वो भी जीम्वेवार थी..

तो देवायतके अलावा ओर कुछ ओर लोग थे.. जीनको इस बारेमे नही पता था.. तो ये सब सुनतेही सोक्ट होगये.. पुनम मंजुके पास ही बैठी थी.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. लेकीन मंजुने कीसीको इस डीवोर्सकी वजह नही बताइ.. क्युकी कहीना कही इस डीवोर्सकी साजीस खुद पुनमने ही रची थी.. फीर सब लोगोने सुबह चंदाके आनेतक इन्तजार करनेका फैसला लीया..

कीसीको इस फैसलेसे दुख नही हुआ.. क्युकी ज्यादातर लोग इस बदलावको जानते थे.. ओर जो नही जानते थे उनमे सीर्फ रमा थी.. फीर कुछ देर बाते करके सब लोग सोनेके लीये जाने लगे.. पुनमके साथ सृती ओर लता चली गइ.. तो रमा नीलम उपर साथ सोने चली गइ.. आज मंजु ओर भावना दुसरे कमरेमे सोने चली गइ.. क्युकी आज देवायत ओर दयाकी सुहागरात थी.. तो मंजु दोनो अकेले सोने देना चाहती थी..

लता पुनम ओर सृती अ‍ेक ही बेडपे लेटी हुइ थी.. लता ओर पुनम आपसमे बाते कर रही थी.. तो सृती आज मंजुसे हुइ बाते याद करते सोचमे डुबी हइ थी.. आज उसने अपनी मम्मीका ओर अपने ससुरका राज जान लीया.. तबसे सृती अपने आपको रोमांचीत फील कर रही थी.. लेकीन जबसे उनकी डोक्टर फ्रेन्डसे बात हुइ तबसे उसे अपनी मम्मीकी चीन्ता होने लगी थी.. ओर अपना फोन देखते मनमे सोच रही थी..

सृती : (फोन देखते मनमे) इस कमीनीने अभी तक फोटो भी नही भेजा.. कही भुलतो नही गइ..? अब रातमे उनसे कैसे बात करु..? सुबह ही बात करते मंगवा लुगी.. क्या वो सचमे मेरी मम्मी ही होगी..? नही नही.. मम्मी नही कोइ ओर होगी.. क्युकी अब तो हमारे ससुरभी नही हे.. तो फीर वो कीनसे प्रेगनेन्ट होगी..? ओह.. गोड.. क्या मुसीबत हे ये..

अगर सचमे वो मम्मीकी तसवीर होगी तो..? तो फीर मे क्या करुगी..? क्या मम्मीका कीसी ओरके साथ अफैर होगा..? लेकीन कीसके साथ..? अ‍ैसा तो कोइ हेभी नही.. जीसे मे जानती हु.. तो फीर कौन होगा..? दे..वु.. नही नही.. ये नही हो सकता.. वो तो उनका दामाद हे.. कल वो आयेगी तो देखुगी.. अगर सचमे मेरी मम्मी होगी तो उनके सरीरमे कुछ तो बदलाव होगा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. कबसे क्या सोच रही हे.. हमसे बाते कीजीयेनां..

लता : (मुस्कुराते) दीदी.. पुनोदीदीने मुजे सब बताया.. अब तो आप भी हमारी बहेन हो.. सुनो.. येलो.. आप ये सुनो.. पुनोदीदीने उनका ओर धिरेनके बीच जो जगडा हुआ हे.. उसे रेकोर्ड कीया हे.. आप भी सुनालो..

सृती : (मुस्कुराते) अरे यार सुनलीया हे मेने.. लखन भैयाने ही क्लीप भेजीथी मुजे..

तीनो बाते कर रही थी तब लखन अपने दोस्तोके पास चला गया था.. वहा उनको साहील मीला तो उसने उनके चाचा फीरोज.. चाची जरीना.. ओर खास करके उनकी बहेन सबानाका हाल जान लीया.. तो बातो ही बातोमे साहीलने बता दियाकी उनके चाचा चाची यहा आनेके लीये राजी होगये हे.. ओर उन्होने अपने बडे बेटे कादीर ओर बडी बहेन सायराके नीकाहको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. उनका मकान भी उनको देने राजी हो गये हे.. बस.. अब सबाना दीदीकी बेंगलोर जानेकी देरी हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. ये तो तुमने अच्छी खबर सुनाइ.. भाभी केह रही थी सबाना बहुत होसीयार हे.. तो वो बहुत जल्द बेंगलोर जाने वाली हे.. वो सृती भाभीके संपर्कमे ही हे.. तु फीकर मत कर..

साहील : (सरमाते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? उनका तीन चार बार फोन भी आगया हे.. कहेती हे.. जब मे बेंगलोर जाउ तब उनको ट्रेनमे छोडनेके लीये मे भी वहा जाउ.. वरना वो नही जायेगी.. ओर जानेसे पहेले वो अ‍ेक बार मुजे अकेलेमे मीलना चाहती हे..

लखन : (खुस होकर हसते) कमीने.. तो फीर जाकर मीलले उसे.. ओर इनका मतलब भी जानता हे..? साहील.. मुजे लगता हे वो तुजे प्यार करने लगी हे.. मेरी मान तु चलेजा.. ओर मे भी तो वहा हु.. हम दोनो जायेगे.. बस..?

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. प्यारतो मे भी करता हु.. लेकीन अपने दिलकी बात कहेनेकी हिंमत नही होती.. वो अ‍ेक डोक्टर ओर मे कहा अ‍ेक अनपढ गांवका कीशान.. वो मेरे प्यारको कभी अ‍ेक्सेप्ट नही करेगी.. ओर मेरी बहेन भी हे.. अ‍ेक तो कादीर भाइ ओर सायरा दीदीने चाचाको धोखा दीया हे.. तो ना उनकी हींमत होगी ओर नाही मेरी..

लखन : (हसते) अरे मे साथ हुनां.. तु क्यु गभराता हे..? सुन.. अभी जो घरपे भाभी हे उनका क्या हुआ..? तु सृती भाभीको दीखाने जाता हेकी नही..? कोइ दिकत तो नही..?

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाइ अ‍ेक बार दिखने गया था.. सब नोर्मल हे.. भाइ.. जब चाचा ओर चाची इधर आयेगे तब इनकी भी टेन्शन हे.. क्युकी ये बात हम कब तक छीपाके रखेगे..

लखन : (मुस्कुराते) यार तु उनकी टेन्शन मतले.. मे बडे भैयासे बात करलुगा.. वो तेरे चाचा चाचीको समजा देगे.. साहील.. मे तुजे भी अ‍ेक बात कहेना चाहता हु..

साहील : (मुस्कुराते) हां भाइ बोल..

लखन : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. पुनोदीदीका डीवोर्स हो गया हे.. उनका धिरेनके साथ जगडा हुआ था..

साहील : (आस्चर्यसे) कीस बातका जगडा..? भाइ.. सीर्फ जगडेकी वजहसे कोइ डीवोर्स देता हे क्या..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) यार.. तुजे कैसे समजाउ..? सुन.. धिरेनमे कुछ गडबड हे.. दोनोकी सेक्स लाइफ अच्छी नही थी.. तो पुनोदीको ये डीसीजन लेना पडा..

साहील : (कातील मुस्कानसे धीरेसे) भाइ.. तो अब..? आपकी लाइन तो क्लीलीयर होगइ.. क्या सोचा हे आपने..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) सुन यार.. पुनोदीने मेरा प्यार अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. सायद मे उनसे सादी भी करलु..

साहील : (खुस होते ताली बजाते) ग्रेट यार.. क्या मस्त खबर सुनाइ हे तुमने..

दोनो बात करते थे तब बंसी ओर मुना भी आगया.. फीर सब लोग श्रीधरके घरपे चले गये.. ओर कलकी तैयारीया देखने लगे.. अ‍ैसेही देर रात होगइ तो सबलोग अपने अपने घरकी ओर सोनेके लीये चले गये.. लखन भी हवेलीपे आगया.. तो पुरी हवेलीपे अंधेरा था.. लखन उपर चला गया तो वहा उनको लता नही मीली.. तो बाजुके रुममे खीडकीसे देखने गया..
 
तो वहा नीलम ओर रमा.. नंगी होकर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट करनेके लगी हुइ थी.. लखन लताको ढुंढने नीचे आया.. ओर पुनमके रुममे हल्कासा धका मारा.. तो दरवाजा खुल गया.. तो वहा पुनम लता ओर सृती लेटे बाते कर रही थी.. जैसे ही दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ तो पुनम सृती देखने लगी.. तो लखन वहा अंदर देख रहा था.. तो पुनमने उसे धीरेसे आवाज देकर अंदर बुला लीया..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया.. अंदर आजाये.. बैठीये इधर.. आज लता दीदी इधर ही सोयेगी..

लखन : (अंदर आते) ओह.. सोरी.. मे बस यही देखने आया था.. आप लोग सोजाइअ‍े.. मे उपर रुममे जाके सोजाता हु..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) सोरी जानु.. आज पुनोदीदी ओर सृती भाभी हे तो इन्होने मुजे यही बुला लीया.. (लखनकी मस्तीया करते जोरोसे हसते) हां फीर भी आपको अकेला लगे.. तो उपर रमा भाभी हे आपको कंपनी देनेके लीये.. हें..हें..हें.. (तीनो जोरोसे हसने लगी तब)

लखन : (जुठा गुस्सा करते) कोइ जरुरत नही मुजे.. तुम अपना काम करो चुपचाप.. चलो मे चलता हु..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. आओना.. थोडी देर इधर हमारे पास बैठोना.. मुजे आपसे कुछ बात कहेनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. पता हे मुजे आपको क्या बात करनी हे.. हम सुबह बात करेगे.. मुजे नींद आ रही हे.. ओर सुबह आंटी ओर भाभीको लेने भी जाना हे.. तो आप लोग बात करे.. चलो गुड नाइट..

पुनम : (लखन जातेही लताको धीरेसे) कमीनी क्यु मेरे भाइको तडपा रही हे..? अ‍ेक बार सीधा सीधा बोलदेना.. की अब बडे भैयासे ठुकवाकर ही तुमसे मीलुगी..

सृती : (हसते धीरेसे) कमीनी सब हमारे पतीके पीछे ही क्यु पडी हे..? अब तो लखन भैयाको भी जडी बुटी दीहे.. देखती नही इनका कीतना बडा हो गया हे..

लता : (थोठी परेसान होते धीरेसे) अरे यार प्यार करतीहु उनसे.. तबसे जब मे इन सब चीजोको समजने लगी थी.. लेकीन भाइकी इतनी सादीया होगइ.. ओर उपरसे हम दोनोकी उमरम. भी काफी फर्क हे.. तो अपने दिलकी बात कहेनेकी हिंमत ही नही हु.. वरना आपसे पहेले ही मेरी सादी भाइके साथ होजाती..

सृती : (मुस्कुराते) सोरी यार.. मे तो सीर्फ मजाक कर रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) नही दीदी.. लताका बडे भैयासे मीलना जरुरी हे.. अभी इनका सही समय भी चल रहा हे.. तो वो आसानीसे प्रेगनेन्ट हो सकती हे.. बाकी आपकोतो मंजुदी लता ओर मेरे बारेमे पता ही हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां यार.. मेरा तो ये सब प्रोफेशन हे.. मुजे भी आपलोगोसे नया सीखनेको मीला.. की अ‍ैसी योनी वाली लडकी मां नही बन सकती..

लखन दरवाजा बंध करके चला गया तो सृती बहुत नीरास होगइ थी.. जब लखन आया तो उनको अ‍ेक आसा जगी.. की चलो बातो बातोमे वो लखनसे बात करते उसे मना लेगी.. पुनमने भी पहेल की फीर भी लखन चला गया.. तो सृतीको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. लेकीन हल्की रोसनीमे कसीको दीखाइ नही दीया.. ओर लखन उपरकी ओर जा ही रहा था.. तभी मनमे..

लखन : (मनमे) साला के.अ‍ेल.पी.डी. हो गया.. वैसे भी लताका पीरीयड चल रहा हे.. तो वो थीडीना करने देगी.. ओर रजीयाका भी यही हाल हे.. वो यहा हेभी नही.. ओर उपर वो मां बेटी भी साथ हे.. अब क्या करु..? भाइके तो कीतने मजे हे.. आज वो भी दया बहेनके साथ अपनी सुहागरात मनाते होगे..

ओर अभी चोदनेकी इच्छा भी हो रही हे.. (अचानक मनमे खुस होते) अरे हां.. आज चंपाभाभी अकेली होगी.. क्युना उनके रुममे चला जाउ..? वैसे भी वो चुदवानेकी सौकीन हे.. देखा नही उस दिन उनको पता था.. फीर भी मुजसे चुदवा लीया.. चलो कोइ नही तो आज चंपा भाभी ही सही..

सोचते ही सलखन खुस होते धीरेसे दबे पांव चंपा भाभीकी रुमकी ओर चला गया.. ओर दरवाजेको हल्कासा धका मारते अंदर घुस गया तो वहा चंपा भाभी कामकी थकानकी वजहसे खरराटा मारते सो रही थी.. ओर लखन दरवाजा लोकर करते उनके पास चला गया.. ओर अपने कपडे नीकालकर नंगा ही आहीस्तासे चंपा भाभीकी बगलमे जाकर कंबल उठाकर घुसके लेट गया.. तभी..
 
चंपा : (हडबडाते जटसे करवट लेते) कौन..? कौन हे..?

लखन : (मुहपे हाथ रखते धीरेसे) भाभी.. मे हु.. लखन.. जोरोसे मत बोलो..

चंपा : (हाथ हटाते धीरेसे) अरे देवरजी आप..? इस वक्त..? लेकीन यहा तो आपकी बीवी नही हे..

लखन : (धीरेसे बुब्सपे हाथ रखते) भाभी.. जानता हु.. उस वक्त मे गलतीसे आगया था.. लेकीन आज जान बुजकर आया हु.. आपसे मीलने.. उस दिन आप बहुत अच्छी लगी.. आपने क्या खुब मजा दीया.. मे तो आपका दिवाना होगया हु.. तो आगया..

चंपा : (धीरेसे मुस्कुराते) आप बहुत बदमास हो.. अगर कीसीने देखलीया नां.. मे तो बदनाम होजाउगी.. ना बाबा ना.. उस दिन आपने मेरी हालत खराब करदी थी..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाभी.. कुछ नही होगा.. आप तो जानती हे.. अब हमे सबके साथ सेक्स करनेकी छुट मील गइ हे.. बस.. जो होगा अ‍ेक दुसरेकी सहमतीसे होगा.. तो काहेकी बदनामी..?

चंपा : (मुस्कुराते) हां.. बात तो आपकी सही हे.. मेने भी सुना हे.. दया बता रही थी.. लेकीन उस दिन आपका देखा.. बाबा कीतना बडा हे.. दो दिन लगे.. तब जाके ठीक हुइ हु.. आज कुछ नही..

लखन : (पैर डालकर उपर चडते) भाभी.. उस दिन पहेली बार थाना.. तो तकलीफ हुइ.. लेकीन इस बार देखना आपको कोइ तकलीफ नही होगी.. रजुको भी तकलीफ नही होती.. मुजसे कैसे मजेसे चुदवाती हे.. अब तो मेरे बगैर रेह भी नही सकती..

चंपा : (बाहोमे कसते) अगर मुजे भी आपका चस्का लग गया तो..? तो फीर मे कहा जाउगी..?

लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) अरे मेरी भोली भाभी.. बडे भैयातो हे यहा.. या फीर मेरे पास चली आना.. कहेना रजुको मीलने जा रही हु.. या फीर मे इधर आजाउगा.. दोनो खुब मजे करेगे.. ओर वैसे भी आप अकेली हो.. तो आपका खयाल रखनेके लीये हम दोनो भाइ हेना..

चंपा : (सरमाकर हसते धीरेसे) ठीक हे.. लेकीन देखना.. अब जब भी यहा आओ.. कमसे कम अ‍ेक बार मीलने आओगे.. केह देती हु.. अब जो भी करना हे करलो.. देखना मुजे सुबह जल्दी उठना भी हे.. कल तो बहुत काम हे.. तो बाबा मुने काम करनेके लायक छोडना.. चलो.. सुरु होजाओ.. कीतने दिनोसे प्यासी हु.. अब तो बडे देवरके पास भी मुजे मीलनेका टाइम नही हे..

तो चुमा चाटी ओर बुब्सके साथ खेलते लखनने चंपाभाभीको गरम करदीया.. ओर वो मादक सीसकारीया करते लखनको चोदनेके लीये मनत करने लगी.. तब जाके धीरे धीरे करते लखनने पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे घुसा दीया.. तब चंपा भाभी हवामे उडने लगी.. तब कुछ ही देरके बाद दोनो घमासान चुदाइ करते हवामे गोते लगाने लगे.. लखन चंपाभाभीकी जमकर चुदाइ करने लगा..





तो दुसरी ओर आज देवायत ओर दयाकी भी सुहागरात थी.. आज दया घुंघटमे बेडके बीच बैठी थी.. मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र दयाके चहेरेपे चार चांद लगा रहे थे.. जीसे देवायत आते ही दयाको देखकर पागल जैसा होने लगा.. उनके मनमे पुनम धिरेनको लेकर जो दुख था.. वो दयाको देखते ही अ‍ेक पलमे दुर हो गया.. ओर वो सबकुछ भुलकर दयाको बेडपे लीटाते प्यार करने लगा..

कुछ ही देरमे दोनो फोर प्लेय खेलते नंगे होगये.. दया भी बहुत उतेजीत होगइ थी.. ओर आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोसीमे देवायतके बाल खीचते अपने उपर खीचने लगी.. देवायत उनके उपर चडकर छा गया.. ओर दयाके बुबस्को मुहमे लेकर चुसने लगा.. तभी दयाने हाथ नीचे लेजाते देवायतका लंड मुठीमे पकड लीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी..

जब लंड गीला होगया.. तो दयाने लंडके टोपेको अपनी चुतमे फसा लीया ओर देवायतके होठोको चुमते उनको कसके बाहोमे भीच लीया.. तो देवायतने भी देर ना करते अपनी कमरको अ‍ेक जटका दीया तो देवायतका आधा लंड दयाकी चुतमे घुस गया.. ओर दया हल्कासा चीखते देवायतको जोरोसे बाहोमे कस लेती हे.. तभी देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारा ओर पुरा लंड दयाकी चुतमे उतार दीया..





तो दयाकी आंखसे आंसु नीकल गये.. वो फीर भी कामुक्तासे देवायतकी ओर देखती रही.. ओर अपनी कमरको जटके मारते देवायतको चोदनेके लीये उक्साने लगी.. फीर क्या..? देवायत हाथके बल उचा हो गया.. तो दयाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर देवायतके हाथोमे फसा लीया.. देवायत लंबे लंबे सोट मारते दयाको चोदने लगा.. तो दयाका मुह खुला ही रेह गया.. ओर वो मजेसे चुदवाने लगी..





अबतक दया दो बार जड चुकी थी.. ओर तीसरी बार जडनेके लीये रेडी थी.. तभी देवायत कांपने लगा.. जैसे वो सातवे आसमानको छुने लगा.. दयासे चीपकते पुरा लंड दयाकी चुतमे घुसा दीया.. ओर कमरको जटके देते दयाकी बच्चेदानीपे विर्यकी बौछार करते भीगोने लगा.. तो दया आंखोकी पुतलीया पलटते जैसे स्वर्गमे पहोंच गइ.. ओर देवायतसे चीपकते कांपते हुअ‍े जडने लगी..





देवायतका पुरा लंड भीगो दीया.. तब दोनो ही परम आनंदकी अनुभुती करने लगे.. फीर देवायत दयाके सीनेपे सर रखते उनके बुब्सको चुमने लगा.. दया देवायतके सरको सहेला रही थी.. दयाकी पुरी चुत देवायतके पानीसे लबालब भरी हुइ थी.. दयाको पता नही था.. की उनको गर्भवती करनेके लीये बच्चेदानीमे जानेके लीये देवायतके स्पमकी होड लगी हुइ हे.. दोनो आनंद मय होते इस पलको अ‍ेन्जोय कर रहे थे..





तो इधर लखनने अब तक चंपा भाभीको चोद चोदके दो बार जडा दीया था.. चंपा भाभी बहुत थक गइ थी.. क्युकी लखन उनको काफी देरसे चोद रहा था ओर अभीभी उनका चोदना जारी था.. जब चंपा भाभी जड जाती तो उनका जोस ठंडा होजाता.. लेकीन लखनके लगातार चोदनेसे कुछ देरके बाद वो फीरसे उतेजीत होजाती ओर लखनका साथ देने लगती.. अ‍ेक बार फीर वो जोसके साथ लखनसे चुदवा रही थी..
 
चंपा : (कामुक नजरोसे) देवरजी.. ओर कीतनी देर चोदते रहोगे.. मे तो दो दो बार जड चुकी हु.. फीर भी आप जडनेका नाम ही नही ले रहे.. आज तो थका दीया मुजे.. थोडा जल्दी करोनां..

लखन : (जोरोसे चोदते) बस.. बस भाभी होगया.. अभी थोडी देर ओर.. आपको चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. आह.. आह.. आह.. आइ... भा..भीइइइइइ.. मे गया.. आइइइइ...





कहेते लखन जटके मारते अपना पुरा लंड चंपाभाभीकी चुतमे घुसा देता हे.. तो लंड चंपाभाभीकी बच्चेदानीसे टकरा गया.. तो चंपा भाभीकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. ओर उसे बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. तो वो उतेजनासे कांपने लगी.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते अपनी कमरको जटके देते लखनके साथ ही जडने लगी.. फीर कुछ ही देरमे लखन चंपाभाभीके सीनेपे सर रखते ढेर होगया..

तो चंपाभाभी अपनी सांस दुरस्त करते लखनकी पीठको सहेलाने लगी.. फीर भी लखन चुतमे लंड डालके पडा रहा.. चंपाभाभीने उसे अपने उपरसे हटानेकी कोसीसकी लेकीन लखन नही माना.. तो चंपाभाभी हसने लगी.. ओर चुदवानेके लीये फीरसे तैयार होगइ.. इस बार लखनने चंपा भाभीको अपनी गोदमे बीठाकर चोद लीया.. ओर चंपाभाभीकी चुतको अ‍ेक बार फीर अपने पानीसे सीचते हरी भरी करदी..





फीर लखन अपने रुममे जाकर सो गया.. तो दुसरी ओर देवायत दयाको फीरसे चोदने लगा.. दया फीरसे उतेजीत होने लगी.. उनको देवायतकी स्टेमीनाका पता था.. आज दया अपनी सुहागरातको यादगार बनाना चाहती थी.. उसने देवायतसे पुरी रात चुदवानेका मन बनालीया था.. तो इस बार भी दो दो बार जडके दोनो साथमे जड गये.. दयाने अपने दोनो पैर देवायतके कंधेपे रख दीया..





ताकी वो देवायतसे गर्भवती होजाये.. इस रात देवायत दयाको अलग अलग पोजीसनमे चोदता रहा.. कभी घोडी बनाकर पीछेसे चोदता तो कभी दयाको अपने उपर चडाके सवारी करवाता.. दोनो सुबह चार बजे तब अलग अलग पोजीसनमे चुदाइ करते रहे.. दयाका अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहा था.. पुरी रातमे देवायतने दयाकी चुतको अपने पानीसे पांच बार सीच दीया था.. फीर दोनो बाथरुममे जाकर नहाते हे.. ओर बहार आकर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकते सो जाते हे..









आज सुबह श्रीधरके घरपे सबलोग जल्दीसे उठ गये.. क्युकी पंडीतने सुबहका मुहुर्त थोडी जल्दीमे नीकाला था.. तो आज जीतुलाल ओर वुन्दा बहुत खुस थे.. आखीर वो दिन आही गया.. जो दोनो आजाद पंछी बनकर उडने वाले थे.. तब उनको पता नही थाकी ब्रीन्दाने क्या तैयारीया करली थी.. अ‍ेक तो वो जीतुलालके साथ पुजामे बैठना नही चाहती थी.. ओर उपरसे वो अपने बेटे श्रीधरकी बीवी थी..

तो वो कैसे पुजामे बैठ सकती हे..? वही सब सोचकर उसने अगले ही दिन अपनी खास सहेली बसंती ओर उनके पती वीभुको पुजामे बैठनेके लीये तैयार करलीया था.. तो सुबह सुबह ही उनके घरपे मुना बरखाके साथ ब्रीन्दाकी खास सहेली बसंती ओर विभु भी तैयार होकर आगये.. श्रीधर ओर जयश्रीका अलग अलग मंडप लगा हुआ था.. तभी जयश्रीके साथ जवेरीलाल ओर वृन्दा बैठ गये..

श्रीधरके लीये पुजामे बैठनेके लीये ब्रीन्दाने जीतुलालके साथ बैठनेके लीये मना करदीया.. तो जीतुलाल तीलमीलाते गुस्सा करने लगा.. तभी ब्रीन्दाने जीतुलालकी ओर कातील स्माइल करते श्रीधरके पास बसंती ओर उनके पती विभुको बीठा दीया.. तो जीतुलाल उन दोनोको देखकर सन्न रेह गया.. ओर वहासे उठकर जवेरीलाल ओर वृन्दाके पास जाकर बैठ गया.. तो वृन्दा उनको अपने पास बैठे देखकर बहुत खुस होगइ....

कन्टीन्यु
 
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