- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,859
तो हवेलीपे भी सबलोग जल्दीसे उठ गये.. लताने जब लखनको जगाया तब वो लताको पकडकर सरारत करने लगा.. लेकीन लताने उसे डोक्टरको पुछकर करनेको कहा.. तो लखन थोडा मायुस होगया.. क्युकी दो दीनसे चुदाइ नही करनेकी वजहसे वो पागल जैसा होने लगा था.. ओर उसने इस बारेमे पुनमसे बात करनेका फैसला करलीया.. तो वोभी तैयार होकर नीचे आगया.. तब चंदा फोनपे धिरेनसे बात करते उसे तैयार रहेनेको केह रही थी.. ओर सब लोग डायनींगपे बैठ गये.. तभी..
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. अब तुम लता ओर भावना मंजु सबको लेकर सामतभाइके घर सादीमे चले जाना.. अब दो दिन हमे सामतभाइ के घरपे ध्यान रखना होगा.. हम सामको तेरी भाभीको लेकर वापस आजायेगे.. ओर सृती कल तुजे भी सादीमे चलना हे.. तो तुम भी कलका अेडजेस्ट करलेना.. हमे होस्पीटलके लीये जमीन भी मील गइ हे.. तो कुछही दिनोमे हम इनका भी काम सुरु कर देगे.. तुम अपनी तैयारीया करने लगो.. अेक दो सालमे सबकुछ कंपलीट होजायेगा..
सृती : (हसते) अरे अेक दो सालमे तो बहुत कुछ तैयारीया हो जायेगी.. इसके लीये मे ओर लखन भैया अभीसे कामपे लग गये हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते) लखन भैया..? मतलब..?
लखन : (हसते) अरे भाइ.. वो हमारे फीरोजभाइकी लडकीकी बात कर रही हे.. कल हम सब उनके घरपे तो गये थे.. वोभी सृती भाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनने वाली हे.. हम कल उसीके लीये तो उनके घरपे गये थे.. वो साहीलके चाचाकी लडकी हे..
देवायत : (हसते) लखन तो फीर उनके चाचाको बोल अब वापस गांव आजाये.. हमने उनकी जमीनतो वापस देदी हे..
लखन : (हसते) भैया.. वो सब बाते मेने उनसे करली हे.. जैसेही उनकी लडकी बेंगलोर पढने चली जायेगी तब वोभी वापस इधर आजायेगे.. मे उसी बात तो उनको समजाने गयाथा.. हें..हें..हें..
भुमीका : (जोरोसे हसते) देवु.. मुजे लगता हे लखन अब काफी मेच्योर हो गया हे.. तो अब उनको ही यहाका सरपंच बना देना चाहीये.. हें..हें..हे..
लखन : (हसते सृतीकी ओर इसारा करते) हां बुआ.. ये आपकी बेटीतो सारा दिन टांग खीचाइ करती हे.. अब आप भी अपनी बेटीकी तराह टांग खीचलो..
सृती : (जोरोसे पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. मेने कब आपकी टांग खीची..?
लखन : (सृतीसे बचते) भैया.. आजकल आपकी सभी बीवीया मुजपे बहुत हाथ पांव चलाती हे.. ठीक हे.. अब आने दो सहेर.. रहोगी तो मेरे साथ ही.. तब देखता हु आपको मुजसे कौन बचाता हे.. हें..हें..हें..
सृती : (थोडा गभराते सख्तीसे) अरे नही नही.. ये क्या बात हुइ..? ठीक हे.. मे आपके घरपे रहुगी ही नही.. मे मेरे घरपे ठीक हु.. वही अकेली रहुगी.. ओर जरुरत पडी तो मे भावना दीदीको साथ लेजाउगी.. मुजे नही रहेना आपके साथ.. आप बहुत कमीने हो..
लखन : (सीरीयस होते) अरे यार मेतो मजाक कर रहा हु.. आपतो सीरीयस होगइ.. ठीक हे.. अब मे आपको कुछ नही कहुगा.. हम वहा आपको अकेले नही रहेने देगे.. आप हमारे साथही रहेगी.. मे अभीसे केह देता हु..
कहेते लखनकी आंख गीली होने लगी.. तो वो जटसे चाइ नास्ता छोडकर खडा होगया.. ओर चुपचाप उपर अपने रुमपे चला गया.. तो सब लोग उनको सीरीयस मुह बनाते देखते रहे.. आज मजाक मजाकमे बात थोडी सीरीयस होगइ.. तो लताभी उनके पीछे जानेके लीये खडी होने लगी.. तब मंजुने उसे वापस बीठा दीया.. ओर खुद खडी होकर उपर लखनके कमरेमे चली गइ..
अंदर जाकर देखातो लखन बेडपे बैठकर आंसु बहा रहा था.. तो मंजुने अंदर जातेही दरवाजा बंध करलीया.. तो लखन उनको देखतेही बेडसे खडा होकर अपने आंसु पोछने लगा.. तभी मंजु उसे हाथ पकडकर बेडपे बीठा देती हे.. ओर खुद भी उनसे पास बैठ जाती हे.. ओर अपनी सारीके पलुसे लखनके आंसु पोछने लगती हे.. तब लखनको मंजुमे अपनी मां नजर आती हे.. ओर लखन उनकी गोदमे सर रख देता हे.. तो मंजु मुस्कुराते उनके सरको सहेलाने लगती हे.. तभी..

लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. मेतो सीर्फ मजाक कर रहाथा.. तो फीर भाभी इतनी गभराइ हुइ क्यु थी..?
मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) बीटु.. जानती हु मे.. की तुम मजाक कर रहे थे.. ओर वोभी जानती थी.. की तुम मजाक कर रहे हो.. लेकीन वो आज तुमसे गभरा गइ थी.. वोभी सच हे.. लेकीन उनकी वजह मे अभी तुमको नही बता सकती.. कुछ दिनोमे आपको खुद पता चल जायेगा..
लखन : भाभीमां.. लेकीन वोतो मेरे बारेमे गलतही सोचेगीनां.. क्युकी मेने ही उनको कहा की तुम मेरे साथ रहोगी.. तो तुमको कौन बचायेगा.. भाभी.. मेरे कहेनेका मतलब वो कुछ ओर ही समज रही होगी.. मेरे कहेनेका मतलब गलत नही था.. मेरे मुहसे अैसेही अनायास नीकल गया था..
मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. मे जानती हु.. मेरा बेटा कभी गलत बोल ही नही सकता.. जा अपना मुह धोले.. ओर चल नीचे.. चाइ नास्ता करले.. वरना वोभी सारा दिन दुखी रहेगी.. उनका भी मुड बीगड गया हे..
लखन : (खडा होते) हां भाभी.. मे आता हु.. ओर सबके सामने भाभीसे माफी मांग लुगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) नही बीटु.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. तु चल.. मे उसे समजा दुगी..
लखन : (बाथरुममे जाते) नही भाभीमां आप जाओ.. अगर मेने माफी नही मागी तो मुजे सारा दीन चेइन नही मीलेगा.. मे अभी आता हु..
तब मंजु नीचे चली गइ.. ओर मुस्कुराती नीचे आगइ.. तो सबने राहतकी सांसली.. ओर सबलोग मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखते रहे.. खास करके सृती.. तो मंजुने सबको इसारोसे कुछ नही हुआ कहा.. तो सबके चहेरेपे स्माइल आगइ.. तो सृती भी मुस्कुराने लगी.. ओर सबलोग चाइ नास्ता करने लगे.. तब कुछ देरके बाद लखनभी नीचे आगया.. तो सबलोग उनके सामने देखने लगे.. तब..
लखन : (वापस चाइ नास्ता करने बैठते) अरे.. सबलोग मुजे अैसे घुरके क्या देख रहे हो.. मे कोइ भुत हु क्या..?
सृती : (हसते) देखा.. कीतना कमीना देवर हे हमारा.. ओर आप कोइ भुतसे कम भी थोडीना हो..? हें..हें..हें..
लखन : (सबलोग हसने लगे.. तभी) भाभी.. आइ अेम सोरी.. मेने कहेनेका मतलब गलत नही था.. मेतो अैसेही मजाकमे बोल गया था.. सोरी अगेइन.. आप गलत मत समजना..
सृती : (सामने देखते) अरे क्या सोरी..? अभी पता हे मेरी हालत कैसी होगइ थी..? जब आप चले गये.. मुजे तो रोना आ रहाथा.. ओर अब कहेते हो सोरी.. मेरा तो दिल गभरा रहा था..
लखन : (जोरोसे हसते) कीतना जुठ बोल रही हो.. हें..हें..हें.. आपका दिल आपके पास थोडीनां हे..? हें..हें..हें..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? मेरे पास दिल नही होगा तो कहा हे..? क्या मे कोइ भुत हु..? इन्सान नही हु..?
लखन : (जोरोसे हसते) भाभी.. आपका दिलतो भाइके पास हेनां..? ओर मेने कब कहा आप इनन्सान नही हो.. अच्छी खासी बकरी लग रही हो.. हें..हें..हें..
सृती : (मारनेके लीये खडी होते) कुते.. मुजे बकरी केह रहे हो.. अभी ठहेरो आपको दिखाती हु..
कहेते सृती लखनको मारनेके लीये दोडी.. तो लखनभी चैरसे खडा होकर कुदते सोफेके पास होलमे भाग गया.. ओर दोनो सोफेसे चकर लगाते रहे.. तब सबलोग दोनोके बीच सुलह होकर फीरसे जगडा देखते हस रहे थे.. ओर सृती थक कर खडी होगइ.. ओर लखनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तब लखन हसते हुअे सामनेसे सृतीके पास आगया.. ओर सृतीको जोरोसे हग करलीया.. तो आज पहेली बार सृतीको अपनी चुतपे लखनके बडे लंडकी चुभन महेसुस हुइ.. तब सृती बहुतही सरमाइ..

ओर हसते हुअे लखनकी पीठमे मुका मार दीया.. फीर दोनो हसते हुअे वापस आकर बैठ गये.. सबने नास्ता करलीया तब नीर्मला चंदा देवायत भुमीका ओर पुनम सृती सबलोग सहेर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो लखन भी मंजु लताको तैयार रहेनेका कहेकर बंसीके घरपे चला गया.. तो पुनम भी सृतीको लेकर अपने रुममे तैयार होने चली गइ.. तो मंजु भावना ओर लता भी सादीमे जानेके लीये अपने अपने रुममे चली गइ....
कन्टीन्यु
देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. अब तुम लता ओर भावना मंजु सबको लेकर सामतभाइके घर सादीमे चले जाना.. अब दो दिन हमे सामतभाइ के घरपे ध्यान रखना होगा.. हम सामको तेरी भाभीको लेकर वापस आजायेगे.. ओर सृती कल तुजे भी सादीमे चलना हे.. तो तुम भी कलका अेडजेस्ट करलेना.. हमे होस्पीटलके लीये जमीन भी मील गइ हे.. तो कुछही दिनोमे हम इनका भी काम सुरु कर देगे.. तुम अपनी तैयारीया करने लगो.. अेक दो सालमे सबकुछ कंपलीट होजायेगा..
सृती : (हसते) अरे अेक दो सालमे तो बहुत कुछ तैयारीया हो जायेगी.. इसके लीये मे ओर लखन भैया अभीसे कामपे लग गये हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते) लखन भैया..? मतलब..?
लखन : (हसते) अरे भाइ.. वो हमारे फीरोजभाइकी लडकीकी बात कर रही हे.. कल हम सब उनके घरपे तो गये थे.. वोभी सृती भाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनने वाली हे.. हम कल उसीके लीये तो उनके घरपे गये थे.. वो साहीलके चाचाकी लडकी हे..
देवायत : (हसते) लखन तो फीर उनके चाचाको बोल अब वापस गांव आजाये.. हमने उनकी जमीनतो वापस देदी हे..
लखन : (हसते) भैया.. वो सब बाते मेने उनसे करली हे.. जैसेही उनकी लडकी बेंगलोर पढने चली जायेगी तब वोभी वापस इधर आजायेगे.. मे उसी बात तो उनको समजाने गयाथा.. हें..हें..हें..
भुमीका : (जोरोसे हसते) देवु.. मुजे लगता हे लखन अब काफी मेच्योर हो गया हे.. तो अब उनको ही यहाका सरपंच बना देना चाहीये.. हें..हें..हे..
लखन : (हसते सृतीकी ओर इसारा करते) हां बुआ.. ये आपकी बेटीतो सारा दिन टांग खीचाइ करती हे.. अब आप भी अपनी बेटीकी तराह टांग खीचलो..
सृती : (जोरोसे पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. मेने कब आपकी टांग खीची..?
लखन : (सृतीसे बचते) भैया.. आजकल आपकी सभी बीवीया मुजपे बहुत हाथ पांव चलाती हे.. ठीक हे.. अब आने दो सहेर.. रहोगी तो मेरे साथ ही.. तब देखता हु आपको मुजसे कौन बचाता हे.. हें..हें..हें..
सृती : (थोडा गभराते सख्तीसे) अरे नही नही.. ये क्या बात हुइ..? ठीक हे.. मे आपके घरपे रहुगी ही नही.. मे मेरे घरपे ठीक हु.. वही अकेली रहुगी.. ओर जरुरत पडी तो मे भावना दीदीको साथ लेजाउगी.. मुजे नही रहेना आपके साथ.. आप बहुत कमीने हो..
लखन : (सीरीयस होते) अरे यार मेतो मजाक कर रहा हु.. आपतो सीरीयस होगइ.. ठीक हे.. अब मे आपको कुछ नही कहुगा.. हम वहा आपको अकेले नही रहेने देगे.. आप हमारे साथही रहेगी.. मे अभीसे केह देता हु..
कहेते लखनकी आंख गीली होने लगी.. तो वो जटसे चाइ नास्ता छोडकर खडा होगया.. ओर चुपचाप उपर अपने रुमपे चला गया.. तो सब लोग उनको सीरीयस मुह बनाते देखते रहे.. आज मजाक मजाकमे बात थोडी सीरीयस होगइ.. तो लताभी उनके पीछे जानेके लीये खडी होने लगी.. तब मंजुने उसे वापस बीठा दीया.. ओर खुद खडी होकर उपर लखनके कमरेमे चली गइ..
अंदर जाकर देखातो लखन बेडपे बैठकर आंसु बहा रहा था.. तो मंजुने अंदर जातेही दरवाजा बंध करलीया.. तो लखन उनको देखतेही बेडसे खडा होकर अपने आंसु पोछने लगा.. तभी मंजु उसे हाथ पकडकर बेडपे बीठा देती हे.. ओर खुद भी उनसे पास बैठ जाती हे.. ओर अपनी सारीके पलुसे लखनके आंसु पोछने लगती हे.. तब लखनको मंजुमे अपनी मां नजर आती हे.. ओर लखन उनकी गोदमे सर रख देता हे.. तो मंजु मुस्कुराते उनके सरको सहेलाने लगती हे.. तभी..

लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. मेतो सीर्फ मजाक कर रहाथा.. तो फीर भाभी इतनी गभराइ हुइ क्यु थी..?
मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) बीटु.. जानती हु मे.. की तुम मजाक कर रहे थे.. ओर वोभी जानती थी.. की तुम मजाक कर रहे हो.. लेकीन वो आज तुमसे गभरा गइ थी.. वोभी सच हे.. लेकीन उनकी वजह मे अभी तुमको नही बता सकती.. कुछ दिनोमे आपको खुद पता चल जायेगा..
लखन : भाभीमां.. लेकीन वोतो मेरे बारेमे गलतही सोचेगीनां.. क्युकी मेने ही उनको कहा की तुम मेरे साथ रहोगी.. तो तुमको कौन बचायेगा.. भाभी.. मेरे कहेनेका मतलब वो कुछ ओर ही समज रही होगी.. मेरे कहेनेका मतलब गलत नही था.. मेरे मुहसे अैसेही अनायास नीकल गया था..
मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. मे जानती हु.. मेरा बेटा कभी गलत बोल ही नही सकता.. जा अपना मुह धोले.. ओर चल नीचे.. चाइ नास्ता करले.. वरना वोभी सारा दिन दुखी रहेगी.. उनका भी मुड बीगड गया हे..
लखन : (खडा होते) हां भाभी.. मे आता हु.. ओर सबके सामने भाभीसे माफी मांग लुगा..
मंजुला : (मुस्कुराते) नही बीटु.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. तु चल.. मे उसे समजा दुगी..
लखन : (बाथरुममे जाते) नही भाभीमां आप जाओ.. अगर मेने माफी नही मागी तो मुजे सारा दीन चेइन नही मीलेगा.. मे अभी आता हु..
तब मंजु नीचे चली गइ.. ओर मुस्कुराती नीचे आगइ.. तो सबने राहतकी सांसली.. ओर सबलोग मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखते रहे.. खास करके सृती.. तो मंजुने सबको इसारोसे कुछ नही हुआ कहा.. तो सबके चहेरेपे स्माइल आगइ.. तो सृती भी मुस्कुराने लगी.. ओर सबलोग चाइ नास्ता करने लगे.. तब कुछ देरके बाद लखनभी नीचे आगया.. तो सबलोग उनके सामने देखने लगे.. तब..
लखन : (वापस चाइ नास्ता करने बैठते) अरे.. सबलोग मुजे अैसे घुरके क्या देख रहे हो.. मे कोइ भुत हु क्या..?
सृती : (हसते) देखा.. कीतना कमीना देवर हे हमारा.. ओर आप कोइ भुतसे कम भी थोडीना हो..? हें..हें..हें..
लखन : (सबलोग हसने लगे.. तभी) भाभी.. आइ अेम सोरी.. मेने कहेनेका मतलब गलत नही था.. मेतो अैसेही मजाकमे बोल गया था.. सोरी अगेइन.. आप गलत मत समजना..
सृती : (सामने देखते) अरे क्या सोरी..? अभी पता हे मेरी हालत कैसी होगइ थी..? जब आप चले गये.. मुजे तो रोना आ रहाथा.. ओर अब कहेते हो सोरी.. मेरा तो दिल गभरा रहा था..
लखन : (जोरोसे हसते) कीतना जुठ बोल रही हो.. हें..हें..हें.. आपका दिल आपके पास थोडीनां हे..? हें..हें..हें..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? मेरे पास दिल नही होगा तो कहा हे..? क्या मे कोइ भुत हु..? इन्सान नही हु..?
लखन : (जोरोसे हसते) भाभी.. आपका दिलतो भाइके पास हेनां..? ओर मेने कब कहा आप इनन्सान नही हो.. अच्छी खासी बकरी लग रही हो.. हें..हें..हें..
सृती : (मारनेके लीये खडी होते) कुते.. मुजे बकरी केह रहे हो.. अभी ठहेरो आपको दिखाती हु..
कहेते सृती लखनको मारनेके लीये दोडी.. तो लखनभी चैरसे खडा होकर कुदते सोफेके पास होलमे भाग गया.. ओर दोनो सोफेसे चकर लगाते रहे.. तब सबलोग दोनोके बीच सुलह होकर फीरसे जगडा देखते हस रहे थे.. ओर सृती थक कर खडी होगइ.. ओर लखनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तब लखन हसते हुअे सामनेसे सृतीके पास आगया.. ओर सृतीको जोरोसे हग करलीया.. तो आज पहेली बार सृतीको अपनी चुतपे लखनके बडे लंडकी चुभन महेसुस हुइ.. तब सृती बहुतही सरमाइ..

ओर हसते हुअे लखनकी पीठमे मुका मार दीया.. फीर दोनो हसते हुअे वापस आकर बैठ गये.. सबने नास्ता करलीया तब नीर्मला चंदा देवायत भुमीका ओर पुनम सृती सबलोग सहेर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो लखन भी मंजु लताको तैयार रहेनेका कहेकर बंसीके घरपे चला गया.. तो पुनम भी सृतीको लेकर अपने रुममे तैयार होने चली गइ.. तो मंजु भावना ओर लता भी सादीमे जानेके लीये अपने अपने रुममे चली गइ....
कन्टीन्यु








