Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 49 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो हवेलीपे भी सबलोग जल्दीसे उठ गये.. लताने जब लखनको जगाया तब वो लताको पकडकर सरारत करने लगा.. लेकीन लताने उसे डोक्टरको पुछकर करनेको कहा.. तो लखन थोडा मायुस होगया.. क्युकी दो दीनसे चुदाइ नही करनेकी वजहसे वो पागल जैसा होने लगा था.. ओर उसने इस बारेमे पुनमसे बात करनेका फैसला करलीया.. तो वोभी तैयार होकर नीचे आगया.. तब चंदा फोनपे धिरेनसे बात करते उसे तैयार रहेनेको केह रही थी.. ओर सब लोग डायनींगपे बैठ गये.. तभी..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. अब तुम लता ओर भावना मंजु सबको लेकर सामतभाइके घर सादीमे चले जाना.. अब दो दिन हमे सामतभाइ के घरपे ध्यान रखना होगा.. हम सामको तेरी भाभीको लेकर वापस आजायेगे.. ओर सृती कल तुजे भी सादीमे चलना हे.. तो तुम भी कलका अ‍ेडजेस्ट करलेना.. हमे होस्पीटलके लीये जमीन भी मील गइ हे.. तो कुछही दिनोमे हम इनका भी काम सुरु कर देगे.. तुम अपनी तैयारीया करने लगो.. अ‍ेक दो सालमे सबकुछ कंपलीट होजायेगा..

सृती : (हसते) अरे अ‍ेक दो सालमे तो बहुत कुछ तैयारीया हो जायेगी.. इसके लीये मे ओर लखन भैया अभीसे कामपे लग गये हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (आस्चर्यसे हसते) लखन भैया..? मतलब..?

लखन : (हसते) अरे भाइ.. वो हमारे फीरोजभाइकी लडकीकी बात कर रही हे.. कल हम सब उनके घरपे तो गये थे.. वोभी सृती भाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनने वाली हे.. हम कल उसीके लीये तो उनके घरपे गये थे.. वो साहीलके चाचाकी लडकी हे..

देवायत : (हसते) लखन तो फीर उनके चाचाको बोल अब वापस गांव आजाये.. हमने उनकी जमीनतो वापस देदी हे..

लखन : (हसते) भैया.. वो सब बाते मेने उनसे करली हे.. जैसेही उनकी लडकी बेंगलोर पढने चली जायेगी तब वोभी वापस इधर आजायेगे.. मे उसी बात तो उनको समजाने गयाथा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते) देवु.. मुजे लगता हे लखन अब काफी मेच्योर हो गया हे.. तो अब उनको ही यहाका सरपंच बना देना चाहीये.. हें..हें..हे..

लखन : (हसते सृतीकी ओर इसारा करते) हां बुआ.. ये आपकी बेटीतो सारा दिन टांग खीचाइ करती हे.. अब आप भी अपनी बेटीकी तराह टांग खीचलो..

सृती : (जोरोसे पीठमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.. मेने कब आपकी टांग खीची..?

लखन : (सृतीसे बचते) भैया.. आजकल आपकी सभी बीवीया मुजपे बहुत हाथ पांव चलाती हे.. ठीक हे.. अब आने दो सहेर.. रहोगी तो मेरे साथ ही.. तब देखता हु आपको मुजसे कौन बचाता हे.. हें..हें..हें..

सृती : (थोडा गभराते सख्तीसे) अरे नही नही.. ये क्या बात हुइ..? ठीक हे.. मे आपके घरपे रहुगी ही नही.. मे मेरे घरपे ठीक हु.. वही अकेली रहुगी.. ओर जरुरत पडी तो मे भावना दीदीको साथ लेजाउगी.. मुजे नही रहेना आपके साथ.. आप बहुत कमीने हो..

लखन : (सीरीयस होते) अरे यार मेतो मजाक कर रहा हु.. आपतो सीरीयस होगइ.. ठीक हे.. अब मे आपको कुछ नही कहुगा.. हम वहा आपको अकेले नही रहेने देगे.. आप हमारे साथही रहेगी.. मे अभीसे केह देता हु..

कहेते लखनकी आंख गीली होने लगी.. तो वो जटसे चाइ नास्ता छोडकर खडा होगया.. ओर चुपचाप उपर अपने रुमपे चला गया.. तो सब लोग उनको सीरीयस मुह बनाते देखते रहे.. आज मजाक मजाकमे बात थोडी सीरीयस होगइ.. तो लताभी उनके पीछे जानेके लीये खडी होने लगी.. तब मंजुने उसे वापस बीठा दीया.. ओर खुद खडी होकर उपर लखनके कमरेमे चली गइ..

अंदर जाकर देखातो लखन बेडपे बैठकर आंसु बहा रहा था.. तो मंजुने अंदर जातेही दरवाजा बंध करलीया.. तो लखन उनको देखतेही बेडसे खडा होकर अपने आंसु पोछने लगा.. तभी मंजु उसे हाथ पकडकर बेडपे बीठा देती हे.. ओर खुद भी उनसे पास बैठ जाती हे.. ओर अपनी सारीके पलुसे लखनके आंसु पोछने लगती हे.. तब लखनको मंजुमे अपनी मां नजर आती हे.. ओर लखन उनकी गोदमे सर रख देता हे.. तो मंजु मुस्कुराते उनके सरको सहेलाने लगती हे.. तभी..





लखन : (धीरेसे) भाभीमां.. मेतो सीर्फ मजाक कर रहाथा.. तो फीर भाभी इतनी गभराइ हुइ क्यु थी..?

मंजुला : (मुस्कुराते सर सहेलाते) बीटु.. जानती हु मे.. की तुम मजाक कर रहे थे.. ओर वोभी जानती थी.. की तुम मजाक कर रहे हो.. लेकीन वो आज तुमसे गभरा गइ थी.. वोभी सच हे.. लेकीन उनकी वजह मे अभी तुमको नही बता सकती.. कुछ दिनोमे आपको खुद पता चल जायेगा..

लखन : भाभीमां.. लेकीन वोतो मेरे बारेमे गलतही सोचेगीनां.. क्युकी मेने ही उनको कहा की तुम मेरे साथ रहोगी.. तो तुमको कौन बचायेगा.. भाभी.. मेरे कहेनेका मतलब वो कुछ ओर ही समज रही होगी.. मेरे कहेनेका मतलब गलत नही था.. मेरे मुहसे अ‍ैसेही अनायास नीकल गया था..

मंजुला : (मुस्कुराते) बीटु.. मे जानती हु.. मेरा बेटा कभी गलत बोल ही नही सकता.. जा अपना मुह धोले.. ओर चल नीचे.. चाइ नास्ता करले.. वरना वोभी सारा दिन दुखी रहेगी.. उनका भी मुड बीगड गया हे..

लखन : (खडा होते) हां भाभी.. मे आता हु.. ओर सबके सामने भाभीसे माफी मांग लुगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही बीटु.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. तु चल.. मे उसे समजा दुगी..

लखन : (बाथरुममे जाते) नही भाभीमां आप जाओ.. अगर मेने माफी नही मागी तो मुजे सारा दीन चेइन नही मीलेगा.. मे अभी आता हु..

तब मंजु नीचे चली गइ.. ओर मुस्कुराती नीचे आगइ.. तो सबने राहतकी सांसली.. ओर सबलोग मंजुकी ओर सवालीया नजरोसे देखते रहे.. खास करके सृती.. तो मंजुने सबको इसारोसे कुछ नही हुआ कहा.. तो सबके चहेरेपे स्माइल आगइ.. तो सृती भी मुस्कुराने लगी.. ओर सबलोग चाइ नास्ता करने लगे.. तब कुछ देरके बाद लखनभी नीचे आगया.. तो सबलोग उनके सामने देखने लगे.. तब..

लखन : (वापस चाइ नास्ता करने बैठते) अरे.. सबलोग मुजे अ‍ैसे घुरके क्या देख रहे हो.. मे कोइ भुत हु क्या..?

सृती : (हसते) देखा.. कीतना कमीना देवर हे हमारा.. ओर आप कोइ भुतसे कम भी थोडीना हो..? हें..हें..हें..

लखन : (सबलोग हसने लगे.. तभी) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने कहेनेका मतलब गलत नही था.. मेतो अ‍ैसेही मजाकमे बोल गया था.. सोरी अगेइन.. आप गलत मत समजना..

सृती : (सामने देखते) अरे क्या सोरी..? अभी पता हे मेरी हालत कैसी होगइ थी..? जब आप चले गये.. मुजे तो रोना आ रहाथा.. ओर अब कहेते हो सोरी.. मेरा तो दिल गभरा रहा था..

लखन : (जोरोसे हसते) कीतना जुठ बोल रही हो.. हें..हें..हें.. आपका दिल आपके पास थोडीनां हे..? हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) क्यु..? मेरे पास दिल नही होगा तो कहा हे..? क्या मे कोइ भुत हु..? इन्सान नही हु..?

लखन : (जोरोसे हसते) भाभी.. आपका दिलतो भाइके पास हेनां..? ओर मेने कब कहा आप इनन्सान नही हो.. अच्छी खासी बकरी लग रही हो.. हें..हें..हें..

सृती : (मारनेके लीये खडी होते) कुते.. मुजे बकरी केह रहे हो.. अभी ठहेरो आपको दिखाती हु..

कहेते सृती लखनको मारनेके लीये दोडी.. तो लखनभी चैरसे खडा होकर कुदते सोफेके पास होलमे भाग गया.. ओर दोनो सोफेसे चकर लगाते रहे.. तब सबलोग दोनोके बीच सुलह होकर फीरसे जगडा देखते हस रहे थे.. ओर सृती थक कर खडी होगइ.. ओर लखनकी ओर देखकर मुस्कुराने लगी.. तब लखन हसते हुअ‍े सामनेसे सृतीके पास आगया.. ओर सृतीको जोरोसे हग करलीया.. तो आज पहेली बार सृतीको अपनी चुतपे लखनके बडे लंडकी चुभन महेसुस हुइ.. तब सृती बहुतही सरमाइ..





ओर हसते हुअ‍े लखनकी पीठमे मुका मार दीया.. फीर दोनो हसते हुअ‍े वापस आकर बैठ गये.. सबने नास्ता करलीया तब नीर्मला चंदा देवायत भुमीका ओर पुनम सृती सबलोग सहेर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो लखन भी मंजु लताको तैयार रहेनेका कहेकर बंसीके घरपे चला गया.. तो पुनम भी सृतीको लेकर अपने रुममे तैयार होने चली गइ.. तो मंजु भावना ओर लता भी सादीमे जानेके लीये अपने अपने रुममे चली गइ....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९१

ओर हसते हुअ‍े लखनकी पीठमे मुका मार दीया.. फीर दोनो हसते हुअ‍े वापस आकर बैठ गये.. सबने नास्ता करलीया तब नीर्मला चंदा देवायत भुमीका ओर पुनम सृती सबलोग सहेर जानेकी तैयारीया करने लगे.. तो लखन भी मंजु लताको तैयार रहेनेका कहेकर बंसीके घरपे चला गया.. तो पुनम भी सृतीको लेकर अपने रुममे तैयार होने चली गइ.. तो मंजु भावना ओर लता भी सादीमे जानेके लीये अपने अपने रुममे चली गइ....अब आगे

इधर सब लोग जल्दी उठकर चाइनास्ता करते हसी मजाक कर रहे थे.. तब आज जयश्री ओर बरखा सुबह छे बजे सादीमे सांती जागृती ओर जयाको तैयार करने आइ थी.. तब उन दोनोके घरपे उनके जातेही पीछेसे क्या होगया.. दोनोको ही नही पता था..

ब्रीन्दा ओर श्रीधर भी सादीमे जानेके लीये सजधरके तैयार होगये जैसे दोनो मीया बीवी हो.. तो दुसरी ओर वीभु भी चाइ नास्ता करके सामतभाइके घरपे चला गया था.. तब घरपे सीर्फ बसंती ओर मुना ही रेह गये.. दोनो ही साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहेथे.. तब बसंती बहुत ही सरमा रही थी.. तभी..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. आप मुजसे कुछ बात कहेने वाली थी..

बसंती : (सरमाते मुस्कुराते) मुनाजी.. आजकल बरखा मेरे पीछेही पड गइ हे.. वोभी चाहती हेकी हम दोनो अ‍ेक दुसरेकी सौतन होजाये.. वो मुजे बहोत फोर्स कर रही हे.. लेकीन जबतक आपके बापु हे तबतक ये मुमकीन नही हे..

मुना : (मुस्कुराते धीरे) मोम.. कोइ बात नही.. लेकीन तबतक हम दोनो पती पत्त्नी वाला रीस्ता तो नीभा ही सकते हे.. मे आपसे भी बहुत प्यार करता हु.. मे आपको ओर बरखाको बहुत खुस रखुगा..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. पता हे मुजे.. आप हम दोनोको खुस रख सकते हे.. बापरे.. आपका कीतना बडा ओर मोटा हे.. जबसे आपने मुजे पहेली बार प्यार कीया.. तबसे मेतो आपकी दिवानी होगइ हु.. ओर बरखा भी वोही केह रही थी.. की जबतक आपके बापु हे तबतक हम दोनो अ‍ैसेही रीलेशन रखे.. तो अब आप मुजे कभी भी मील सकते हो.. बस.. हमे आपके बापु हे तबतक सावधानी रखनी हे.. देखना कुछ गडबड ना होजाये.. हमे आपके बापुका खयाल रखना हे.. उसे हमारी कीसी भी बातकी भनक नही लगनी चाहीये..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. आप मुजे अ‍ेक बात ओर बताने वाली थी.. हमारे नाना के घरके बारेमे.. आपने हमे बताया नही आप वहा क्यु नही जाती.. ओर हमे भी कभी जाने नही दीया.. तो आज अच्छा मौका हे बताइअ‍ेनां..

बसंती : (सर्मसार होते धीरेसे) मुनाजी.. आप क्या करोगे जानकर..? अब इनमे जाननेके लीये कुछ भी नही हे.. मे मेरे अतीतको भुल चुकी हु.. अब जो वहा हे.. वोही तो हमारे घरमे ओर हमारे गांवमे होने लगा हे.. लेकीन मुजे फीर भी उस घरसे कोइ रीस्ता नही रखना.. वो बहुत ही घटीया लोग हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. अ‍ेक बात पुछु..? आपकी ओर बापुकी उमरमे मुजे बहुत फर्क दीखता हे..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) मुनाजी.. क्या आप जानते हे आपके बापुकी उमरमे ओर मेरी उमरमे कीतना फर्क हे..? पुरे १४ साल.. ओर मेरी छोटी उमरमे ही आपके बापुके साथ सादी करदी गइ थी.. क्युकी अभी जो मेरी मां हेनां.. वो मेरी सौतेली मां हे.. दरसल वो मेरी सगी मौसी हे.. जब मे १६ सालकी थी.. ओर बडे भैया तब १८ सालके थे.. तब ही मेरी मां गुजर गइ थी..

मुना : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. क्या इसीलीये आपकी सादी करदी गइ थी..? क्युकी आप बापुसे बहुत छोटी लग रही हे.. लेकीन इस बारेमे हम आपको पुछ भी तो नही सकते.. ओर हमने ना तो नाना नानीको देखा हे.. ओर ना ही मामा मामी को.. आप मामाके घरके बारेमे बताना भी तो नही चाहती थी.. मोम.. मुजे सब बताइअ‍ेनां.. मुजे आज सबकुछ जानना हे..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) मुनाजी.. बात सुनकर आपको बुरा लगेगा.. क्युकी अब मे आपकी होने वाली बीवी हु.. आप ये बात बरदास्त नही कर पायेगे.. थो गुस्सेमे आकर बुछ उल्टा सीधा करोगे.. तो मे ओर बरखा कहा जायेगी..?

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. मे अ‍ैसा कुछ भी करने वाला नही हु.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा.. मे सब सहेन करलुगा.. क्युकी इतना तो अंदाजा हो ही गया हे.. की वहा जरुर आपके साथ कुछ बुरा हुआ होगा.. मोम.. मेने आपको दिलसे अपनालीया हे.. तो बताइअ‍ेनां..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. तो सुनीये.. मेरे नानाकी पांच संतान थी.. सभी लडकीया थी.. मेरी मां का दुसरा नंबर था.. ओर अभी जो मेरी सौतेली मां यानीमी मेरी मौसी मांकी सबसे छोटी बहेन.. बात तबकी हे जब आपके मामा नये नये जवान हुअ‍े थे.. तब मेभी जवानीकी ओर कदम रख रही थी.. हम दोनो भाइ बहेन मांके साथ हमारे मामाके घरपे बहुत जाते थे.. तो हमारी मौसी भी जवान हो चुकी थी..

मुना : (हसते) क्या नानाने अपनी सालीको पटालीया था..? हें..हें..हें..

बसंती : (हसते) नही.. सुनीये तो.. आप तो जानते हो गांवमे लडकीओकी सादी छोटी उमरमे ही करदी जाती हे.. तब हमारी मौसी मांगलीक थी.. तो उनकी सादी नही हो रही थी.. ओर उनकी सादीकी उमर बीती जा रही थी.. तब वो पुरी अ‍ेकीस सालकी हो चुकी थी.. तब मेरे नाना नानीका स्वभाव बहुत ही सख्त था.. घरकी कीसीभी ओरतको घरसे अकेले नीकलनेकी पाबंधी थी.. ओर उपरसे मेरी मौसी जवानीकी आगमे जल रही थी..
 
मुना : (मुस्कुराते) मोम.. तो क्या इसीलीये नानीके गुजर जानेके बाद नानाने उनकी सालीके साथ सादी करली..?

बसंती : मुनाजी.. तब मुजे भी यही लग रहा था.. की मां गुजर गइ हे.. ओर मेरी मौसीकी सादी नही हो रही हे इसीलीये मेरे नाना नानीने मेरी मौसीकी सादी मेरे बापुसे करदी हे.. लेकीन बात कुछ ओर ही थी.. तब मौसीकी जवानी उफानपे थी.. जब वो अ‍ेकीसकी थी तब बापु भी पुरे चालीस पार कर चुके थे.. तो हमारी मौसी बापुके आधी उमरकी थी.. ओर उपरसे पुरी तराह जवान.. ओर वो अपने आपको कंट्रोल नही करपाइ..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. तो क्या मौसी ओर नानाके बीच.. मतलब.. दोनोके बीच भी फीजीकल रीलेशन..

बसंती : (मुस्कुराते) नही मुनाजी.. आपके नाना बहुतही सरल ओर सीधे थे.. हां मौसीकी सादी नही हो रही थी.. तो उनके कदम बहेक गये थे.. लेकीन हमारे बापुके साथ नही.. मेरे बडे भाइ विनोद यानीकी आपके मामाके साथ.. क्युकी तब वोभी नये नये जवान हुअ‍े थे.. जब भी हम दोनो भाइ बहेन हमारी मां के साथ नानाके घरपे जाते थे तब ही मौसी भांजे ने रीलेशन बनालीये थे..

दोनोके बीच जीस्मानी तालुकात हो गये थे.. ओर ये बातकी हमे कीसीको भनक भी नही लगने दी.. हमारे नानाका गांव भी पासमे ही था.. तो मौसी ओर मेरे भैया हप्तेमे दो तीन दिन मील ही जाते.. ओर अपनी प्यास बुजा लेते.. जैसे हम दोनो आज सुबह मीले..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. तो फीर कीसीको पता नही चला..?

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) मुनाजी.. ये बात भी कभी छुप सकती हे.. अ‍ेक दिन हमारी मौसीको उल्टीया होने लगी.. तब हमारी नानी उनको डोक्टरके पास लेगइ.. तो पता चला वो प्रेगनेन्ट होगइ हे.. फीर हमारी नानीने उनको घर आकर खुब मारा.. फीर भी उसने मेरे भाइका नाम तक नही लीया.. ओर हमारी नानीने उनका बच्चा गीरवा दिया.. ओर मेरी मौसीके लीये कही भी रीस्ते ढुंढने लगे.. तब उसी दिनोके बीच अ‍ेक दिन अचानक मेरी मां चल बसी..

मुना : (मुस्कुराते) हंम.. इसीलीये आपकी मौसीकी सादी हमारे नानासे करदी गइ.. यहीनां..?

बसंती : (मुस्कुराते) हां.. हमारे नाना नानीने सोचा.. की मेरी मौसीकी सादी इधर उधर करनेसे बहेतर हे.. उनके जमाइके साथ ही करदे.. ओर हमारी मौसीकी सादी मेरे बापुसे करदी गइ.. ओर मेरी मौसी मेरी नइ मां बनकर हमारे घरपे आगइ.. तब हमे क्या पता था..

की मेरे बडे भैया ओर मौसीका टाका पहेलेसे ही भीडा हुआ था.. फीर तो दोनोको खुली छुट मील गइ.. दोनो हर दिन मीलने लगे.. अ‍ैसे ही दो साल नीकल गये.. अब दोनो अपनी सेफ्टीका पुरा खयाल रखने लगे थे.. ओर अ‍ेक दिन मेने दोनोको मीलते हुअ‍े देख लीया.. बस.. यहीसे मेरे लीये बुरे दिन सुरु होगये..

मुना : (आस्चर्यसे) मोम.. बुरे दिन मतलब..? क्या आपकी मौसी आपके साथ जुल्म करने लगी थी..?

बसंती : (आंख गीली करते) नही मुनाजी.. तब मेभी जवान हो चुकी थी.. मुजे आज भी याद हे.. उस दिन मेरे बापु हमारे कीसी रीस्तेदारके गुजर जानेकी वजहसे तीन चार दिन कीसी गांव गय थे.. जीस रात मेने भाइ ओर मौसीको मीलन करते देख लीया.. उसी बातका उनको भी पता लग चुका था.. पुरा दिनतो अ‍ैसेही नीकल गया.. दोनोने मुजे कुछ भी नही कहा.. ओर उसी रात खाना खाते मौसीने मेरे खानेमे कुछ मीला दिया.. सायद नींदकी गोलीया थी.. ओर मे बेहोस होगइ..

मुना : (नास्ता करते रुक गया) मोम.. क्या आपकी मौसीने अ‍ैसा कीया..? फीर..?

बसंती : (आंसु नीकल गये) मुनाजी.. मुजे बतानेमे भी सरम आ रही हे.. मुजे पुरी रात कुछ भी पता नही था.. की मेरे साथ क्या हुआ.. जब मे सुबह होसमे आइ.. तब.. मेरा सब कुछ लुट चुका था.. मेरा कौमार्य भंग होचुका था.. पुरे बेडपे खुनके धब्बे थे.. ओर मे चल भी नही पा रही थी.. नीचे बहुत जलन हो रही थी..





मुना : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. क्या ये सब मामाने कीया..?

बसंती : (हां मे सर हीलाते) हां मुनाजी.. उस रात मेरे साथ बलात्कार कीया गया.. वो भी मेरे बडे भाइने.. ओर उसी दिन मौसी ओर भाइने मुजे कीसीको उनके बोरेमे ना बतानेकी बात कही.. वरना वोभी मेरे बारेमे मेरे होने वाले पतीको सब बता देने की धमकी देने लगे.. ओर मे मेरे बापुकी इजतके खातीर चुप रही..

मुना : मोम.. आपको नही लगता आपने गलती की.. आपको नानाको सब बता देना चाहीये था..

बसंती : (अपनी आंखे पोछते) मुनाजी.. मुजे भी यही लगा था.. की मे बापुको सब बतादु.. लेकीन बापु इतने सरल ओर सीधे थे.. की वो ये बात बरदास्त नही कर सकते.. ओर इसीका फायदा आपके मामा उठाने लगे.. अ‍ेक दिन जब मौसी ओर आपके नाना घरपे नही थे..

तब भाइने दुसरी बार मुजे जबरदस्तीसे चोद लीया.. ओर जब बापु वापस आये उस रात मेने हिंमत करके बापुको सब कुछ बता दिया.. ओर ये भी बता दियाकी भाइ ओर मौसीके बीच सादीसे पहेले ही अवैध रीस्ता हे.. बस.. उसी दिनसे मेरे बुराइके दिन सुरु हो गये..





मुना : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. तो फीर नाना ने उन दोनोको कुछ नही कहा..?

बसंती : (आंख गीली करते) मुनाजी.. सायद मेने आपके नानाको नही बताया होता तो अच्छा था.. जीस रात मेने बापुको सब बताया.. उसी रात बापुने आपके मामा ओर मौसीके साथ खुब जगडा कीया.. ओर रातको पता नही क्या हुआ.. सुबह आपके नानाकी मोत हो चुकी थी..

पता नही बापु कैसे मरे.. मेने जब उनकी लास देखी तब उनके गलेके कीसी रसीके नीशान थे.. सायद आपके नानाको मार दिया गया था.. ओर आपके मामाकी पुलीसमे भी बहुत जान पहेचान थी.. तो मामलेको आनन फाननमे नीपटा लीया.. वो बहुत ही खतरनाक हे..

मुना : (अ‍ेक नजरसे देखते) मोम.. ये तो बहुत बुरा हुआ.. तो फीर मामाने आपको कुछ नही कहा..?

बसंती : (आंसु पोछते फीकी मुस्कुरानसे) नही मुनाजी.. फीर तो आपके मामाको कीसीका डर ही नही था.. उनको तो खुली छुट मील गइ थी.. फीर तो आये दिन मेरी चुदाइ करने लगे.. फीरतो वो मुजे मौसीकी हाजरी मे भी चोदने लग थे.. मे तब पुरी तराह भाइकी चुंगालमे फस चुकी थी..
 
मुना : मोम.. तो फीर आपकी सादी बापुसे कैसे हुइ..?

बसंती : मुनाजी.. फीर तो आपके मामा मेरी मौसीके बजाये मेरी ओर ढलने लगे थे.. सायद वो मुजे सचमे प्यार करने लगे थे.. ओर ये बात मेरी नइ मां यानीकी मौसीको राच नही आइ.. ओर उसने आनन फाननमे मेरी सादी आपके बापुसे करवादी.. ओर मेरी सादीके बाद मौसीने भी आपके मामासे सादी करली.. बस.. इसीलीये मेरी ओर आपके बापुकी उमरमे इतना फर्क हे.. मुनाजी.. उस दिनके बाद मेने उस घरकी चोखटपे कभी कदम नही रखा.. ओर इसीलीये मे आप दोनोको अपने मामाके घरपे नही जाने देती थी..

मुना : मोम.. आइ अ‍ेम सोरी.. हमे नही पता थाकी आपके साथ मामा ओर नानीने आइ मीन मामीने इतना बुरा कीया हे.. लेकीन मे आपसे वादा करता हु.. अ‍ेक दिन मे इसका बदला जरुर लुगा.. क्या वो हमारे पास वाले गांवमे ही रहेते हेनां..?

बसंती : (जटसे) नही नही मुना.. अब आप ही हमारा सहारा हो.. अगर आपको कुछ होगया तो मे ओर बरखा जीन्दा नही रहेगी.. हमे उनसे कोइ बदला नही लेना.. भुलजाइअ‍े सब.. इसीलीये मे आपको ये सब नही बता रही थी.. बीटु.. मेरी खातीर.. बरखा की खातीर.. आप अ‍ैसा वैसा कोइ कदम मत उठाना.. आपको मेरी कसम हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. मे अ‍ैसा कोइ बदला नही लुगा जो आप सोच रही हे.. बस.. मुजे सीर्फ हमारे मामाके बारेमे जानकारीया दे दीजीये.. ओर देखीये.. उनके साथ क्या होता हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बात बता दीजीये.. क्या मामा ओर नानी मुजे ओर बरखाको पहेचानते हे..? बस.. सीर्फ इतना बता दीजीये..

बसंती : (मुस्कुराते) नही मुनाजी.. मेने उनका साया भी आप दोनोपे नही पडने दिया.. अबतो आपके नानाभी नही रहे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना पता हे.. मेरी सादीके बाद मौसीने आपके मामाके साथ सादी करली थी.. ओर असलमे वो उनकी सादीसे पहेले ही आपके मामाकी पत्नी बनकर ही घरपे रहेने लगी थी..

जब उसने अपनी सादीसे पहेले अपना बच्चा गीरा दिया.. तबसे उनकोभी अब कोइ संतान नही हुइ हे.. अब मेरे मायकेमे सीर्फ आपके मामा ओर नानी जो अब आपकी मामी होगइ हे वोही रहेते हे.. बस.. मुजे सीर्फ इतना ही पता हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. क्या नाम हे मामाका.. ओर मेरी नइ नानीका.. हें..हें..हें.. ओर क्या काम करते हे मामा..

बसंती : (सरमाकर हसते) क्या करेगे जानकर..? देखना आप कुछ उल्टा सीधा मत करना.. क्युकी अब कुछ दिनोके बाद मेभी आपकी बीवी होजाउगी.. जब मेरी सादी आपके बापुसे हुइ तब हमारी स्थीती इतनी अच्छी नही थी.. जो भी थोडी बहुत जमीन थी वोही जमीन आपके मामा सम्हालते थे.. लेकीन जैसेही वो गांवके सरपंच होगये..

तो आज उनके पास पुरे पचीस अ‍ेकर जमीन हे.. आपके मामाका नाम विनोद हे.. जो उसी गांवमे सरपंच भी हे.. सायद आज या कल सामतभाइके घरपे सादीमे भी आयेगे.. मे आपको दिखा दुगी.. ओर आपकी नइ नानी वही गांवमे बच्चोको पढाती हे.. वो वहा घरपे ही पढाती हे.. गीता नाम हे उनका.. बहुत ही खुबसुरत.. बरखा ओर मेरी तराह कामी ओरत हे.. हें..हें..हें..

मुना : (कातील मुस्कानसे) मोम.. आप दोनो सचमे बहुत ही सेक्सी हो.. तुम दोनोको देखते ही मन होने लगता हे.. लेकीन मोम.. बुरा मत मानना.. अब मामी गइ कामसे.. हें..हें..हें..

बसंती : (सरमाकर हसते अ‍ेक चपत लगाते) आप बहुत कमीने हे.. आपकी बहेन ओर मांकोतो पटालीया अब मामीको भी नही छोडेगे.. हें.. हें..हें.. देखना सब ध्यान रखकर करना.. आपके मामाको पता ना चल जाये.. कमीना बहुत खतरनाक हे.. गांवमे सरपंच जो हे..

मुना : (मुस्कुराते) मोम.. आप मेरी चीन्ता मत करना.. मे नही.. उनको तो कोइ ओरही सम्हाल लेगा.. मे कही पीक्चरमे आने वाला ही नही.. बस.. अब तुम सीर्फ देखती जाओ.. हें..हें..हें..

बसंती : (खडी होते) ठीक हे.. चलो अब सादीमे नही जाना क्या.. जाइअ‍े तैयार होजाइअ‍े.. आज सुबह कीतना जोसमे कीया हे.. नीचे अभी भी जलन हो रही हे.. आपको जेलना इतना आसान नही हे.. आप हेक ही बारमे मुजे थका देते हे..

मुना : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) मोम.. चलोनां.. अ‍ेक बार फीर करते हे.. आज आपको चोदनेका बहुत मन हो रहा हे.. प्लीज.. अभी फटाफट होजायेगा..

बसंती : (सर्मसार होते कामुक नजरोसे देखते धीरेसे) नही नही.. अभी मे तैयार हो गइ हु.. हम बादमे करेगे.. दो पहोरको खाना खानेके बाद हमारे पास बहुत टाइम होगा.. बरखा तो अब वही रुकेगी.. तब आपको जीतना प्यार करना हे करलेना.. चलीये अब जाना हे.. आपके बापुभी उधर गये हे.. बस.. उनका खयाल रखना.. बाकी बरखाका अब कोइ डर नही हे.. कमीनी खुद भी वही चाहती हे..

मुना : (बुब्स मसलते होठोको चुमते) येस मोम.. आइ लव यु.. चलो..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. आइ लव यु टु.. मेरा छोटा पती.. हें..हें..हें.. चलीये.. घरको ताला लगा दीजीये..





कहातो मुनाने अ‍ेक बार फीर बसंतीको अपनी बाहोमे जकड लीया.. ओर उनके दोनो उरोजोको मसलते होठोको चुमने लगा.. तब बसंती भी मदहोस होने लगी.. ओर मुनाका साथ देते उतेजीत होने लगी.. तब अ‍ेक बार फीर उनकी चुतमे हलचल होने लगी.. तब बसंती जटसे मुनासे अलग होगइ.. ओर सर्मसार होगइ.. उसने मुनाको कामुक नजरोसे हसते गालपे अ‍ेक हल्कीसी चपत लगादी..
 
बसंती : (सरमाकर हसते) चलीये पतीदेव.. दो पहोरको आरामके वक्त अपनी सारी तम्मना पुरी करलेना..

मुना : (हसते) येस डार्लीग.. हें..हें..हें..

फीर दोनो घरको ताला लगाकर साथमे चलने लगे.. जैसे कोइ पती पत्नी जा रहे हो.. तभी उसी वक्त दोनोको श्रीधर ओर ब्रीन्दा भी उनकी तराह सजधजके साथ चलते नजर आये.. तो दोनोकी हसी नीकल गइ.. जैसेही दोनो पास आये तो ब्रीन्दा ओर बसंती भी सरमाकर हसते आपसमे गले लग गइ.. जैसे दोनो अ‍ेक दुसरेका राज जानती हो.. तो श्रीधर ओर मुनाभी हसकर अ‍ेक दुसरेके गले लग गये.. ओर हस हसके बाते करते चारो साथ चलने लगे.. तो चलते चलते दोनो हस हसके बाते करते श्रीधर ओर मुनाके पीछे चल रही थी..

ब्रीन्दा : (हसते धीरेसे) कहीये बसंती बहेन कैसी चल रही हे जींदगी..? बहुत मजा आ रहा हेनां..?

बसंती : (हसते धीरेसे) ब्रीन्दा बहेन.. जैसे आपकी जींदगी चल रही हे.. अ‍ैसे ही मेरी चल रही हे.. क्युकी आपको तो सबकुछ पता होगा.. हमारे बैटे जो आपसमे अच्छे दोस्त हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेसे कोइ बात नही छुपाते.. क्या ये सच हेनां..?

ब्रीन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) हां.. कमीने सभी दोस्त अ‍ैक जैसे ही हे.. बसंती बहेन प्लीज.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रखना..

बसंती : (मुस्कुराते) अरे ब्रीन्दा बहेन फीकर मत करो.. हम दोनो अ‍ेक ही कस्तीमे सवार हे.. तो अब हम दोनोके बीच कैसा पर्दा..? हमारी भी कुछ जरुरते हे.. तो हम कहा पुरी करेगे..? बहार तो हमारी बदनामी होगी.. तो इनसे अच्छा हे घरकी बात घरमे ही रहे.. क्या भाइ साहेबने आपको डिवोर्स देदीया..?

ब्रीन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) नही.. बस मे उन्हीका इन्तजार कर रही हु.. कमीना अपनी भाभीके साथ सादी करना चाहता हे..

बसंती : (मुस्कुराते) क्या वो वृन्दा बहेन आपके ताउकी लडकी हेनां..? अब आपके जेठ भीतो बुढे हो गये हे.. तो बेचारी कहा जायेगी.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) नही बसंती बहेन.. कमीनी वो कोइ बेचारी नही हे.. उन दोनोके बीच मेरी सादीसे पहेले ही चकर था.. पता नही मे यहा कहा फस गइ.. ये तो अच्छा हुआ मेरे बेटेने सब सम्हाल लीया.. वरना मे तो टुट जाती..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) ब्रीन्दा बहेन.. क्या आप श्रीधर भाइको अबभी अपना बेटा कहेती हो..? क्या आपने श्रीधर भाइसे सादी करली हेनां..? मुनाजी केह रहे थे आप दोनोने सहेर जाकर सादी करली हे.. ओर हमारे ठाकुरके बंगलेपे ही थे.. जहा आप दोनोने अपनी सुहागरात भी मनाली हे..

ब्रीन्दा : (बहुत ही सर्मसार होते धीरेसे) हां.. प्लीज अभी ये बात कीसीको कहेयेगा नही.. खास करके मेरी बहु जयश्रीको.. वरना उनको बुरा लगेगा.. क्या आपने मुना भाइसे सादी करली..?

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) अरे नही.. अभी उनके बापु जीन्दा हे.. तो नही कर सकती..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) अच्छा.. ये तो आप उनको मुनाजी केह रही हे.. इसीलीये पुछ रही थी.. तो फीर दोनोने कुछ कीया बीया की नही..? अ‍ैसे ही तो मजे कर सकती हो.. हमे भी सादीकी वजहसे बडी मुस्कीलसे मीलनेका मौका मीला हे.. तो आज मील गये.. हें..हें..हें..

बसंती : (सरमाकर हसते) सभी दोस्तो कमीने हे.. क्या अ‍ैसा मौका कोइ जाने देते हे.. हमारी बहुअ‍े इधर सादीमे आइ हे.. तो आज दोनोको मौका मील गया.. आज हम दुसरी बार मीले.. मेरी तो अ‍ेक ही बारमे हालत खराब करदी.. ओर अभी भी उनको करना था.. लेकीन सादीमे भी तो आना था.. तो मैने मना करदीया.. अब तो यही मेरे पती हे.. मैने दिलसे इनको पती मानलीया हे.. इसीलीये मुनाजी केह रही हु..

ब्रीन्दा : (सरमाकर हसते) बसंती बहेन.. मेरा भी यही हाल हे.. पता नही मुना भाइने सबको कौनसी जडी बुटी दी हे.. मेरी भी अ‍ेक ही बारमे हालत खराब कर देते हे.. लेकीन मजा भी तो बहुत आता हे.. क्या आजसे हम दोनो पक्की सहेली..? हंम..

बसंती : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) हंम.. लेकीन अ‍ेक सर्त पे.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ कोइ राज नही छुपायेगे.. सबकु बाते सेर करेगे.. बोलो सर्त मंजुर हे.. तो हम आजसे पकी सहेली हे.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सरमाते हसते) ठीक हे.. आपकी सर्त मंजुर हे.. आजसे हम दोनो पकी सहेली.. क्या इस बारेमे बरखाको सब पता हे..?

बसंती : (मुस्कुराते) हां.. कमीनी वो खुद चाहती हे.. की मे मुनाजीसे सादी करलु.. हें..हें..हें.. क्या आपकी बहु जयश्रीको सब पता हे..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते थोडा मायुस होते) नही.. अभी उनको कुछ भी पता नही हे.. बस उनका ही डर लग रहा हे.. आप बरखाको कहीयेनां.. बातो ही बातोमे वो जयश्रीको समजाये..

बसंती : (मुस्कुराते) ठीक हे.. अब वो आप मुजपे छोड दीजीये.. मेरी बरखा सबकुछ सम्हाल लेगी..

दोनो ही बाते करते अ‍ेक दुसरेके साथ अपने राज सेर कर रही थी.. ओर धीरे धीरे मुना श्रीधरके पीछे चल रही थी.. जैसे दोनो उनकी बीवीया हो.. ओर बातोही बातोमे ब्रिन्दाने बातोका दौर सम्हाल लीया.. ओर धीरे धीरे करते बंसतीसे मुना ओर उनके बीच रीलेशनकी सब बाते उगलवाने लगी.. तो बसंती भी उनके ओर श्रीधरके बारेमे सब जानती हे कहेते वो भी ब्रिन्दा ओर श्रीधरके रीलेशनके बारेमे सभी बात जानने लगी..

ओर दोनो सामत भाइके घरपे जाकर भी पास पास बैठकर बाते करती रही.. आज बाते करते ब्रिन्दा ओर बसंती अ‍ेक दुसरेकी राजदार हो गइ थी.. ओर पकी सहेलीया बन चुकी थी.. फीर ब्रिन्दाने उनके परीवारके बारेमे सबकुछ बता दीया की वो ओर उनके पती डीजोर्स ले रहे हे.. तो बसंतीने भी मुनाके साथ सादी करनेकी अपनी इच्छा जाहीर करदी.. दोनो सहेलीया धीरे धीरे हस हसके बाते कर रही थी..
 
तो दुसरी ओर हवेलीपे भी सभी लेडीस तैयार हो गइ थी.. तब देवायतने अपनी बडी कार लेली.. तो मंजुने चंदाके हाथोमे कुछ पैसोकी बेग थमादी.. तो चंदा मुस्कुराते बेग लेकर देवायतकी बगलमे बैठ गइ.. तब नीर्मला भुमीका सृती ओर पुनमभी कारमे बैठने लगे.. तो मंजुने सबको हाथ हीलाकर बाय कहा.. ओर देवायत कार मे सबको लेकर सहेरकी ओर नीकल गया.. तब चंदा धिरेनको फोन करने लगी..

तो घरपे मंजु भावना लता सब लोग सादीमे जानेकी तैयारीया करने लगी.. साथमे दया ओर रजीयाभी जा रही थी.. तब घरपे सीर्फ सरलाचाची ओर चंपा भाभी ही रेहने वाली थी.. तभी भानुभी रमा ओर नीलमको लेकर आगया.. उसेभी सादीमे जाना था.. रमा ओर नीलम सहेरमे जानेके लीये अपना सब सामान साथ मे लेकर आये थे.. आज दोनो ही पटाखा बनके आइ थी.. क्युकी रमाने नीलमको हमेसा सजधजके रहेनेकी सब बाते समजा दीथी.. की वहा कैसे रहेना हे..

रमा आतेही मंजु लता भावना सबको हस हसके गले मीली.. जैसे उनके मनमे कोइ गलत भाव ही ना हो.. तब नीलम रमाकी सभी हरकते नोटीस कर रही थी.. ओर हस रही थी.. तभी लखन भी सबको लेने वापस आगया.. तो रमाको देखते ही खुस होगया.. तब रमा ओर नीलम दोनो ही लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर दोनो ही उनके सामने देखकर मुस्कुराने लगी.. तब नीलम बडी ही कातीलाना नजरोसे देखकर हस रही थी.. लेकीन लखनने नीलमक ओर ध्यान ही नही दीया..

फीर भानु ओर लखन सभी लेडीसको लेकर सादीमे चले गये.. तो वहा सांती ओर बंसीका मंडप मुहुर्त चल रहा था.. जैसेही मंजु कारसे उतरी तब वहा बैठी सभी लेडीस खडी होगइ.. ओर रानी साहीबा यहा बैठीये कहेकर मंजुको अपने पास बुलाने लगी.. तब मंजु हसकर सबको हाथ जोडकर अभीवादन करते रश्मी वंदनाके पास जाकर बैठ गइ.. ओर सबलोग सादीका आनंद लेने लगे.. तब रमा ओर लखनकी बार बार आंखे मीलने लगी..

तो आंख मीलते ही रमा सरमाकर मुस्कुराने लगती.. तो आज नीलमभी लखनको देखकर सरमा रही थी.. ओर तभी भावना दोनोके उपर नजर जमाये टेडी नजरोसे देखती रही.. ओर लखनकी तरफ देखते सरारत भरी नजरोसे देखने लगी.. जबसे उनकी पुनम ओर मंजुके साथ बात हुइ तबसे उनको रमाके उपर बहुत गुस्सा आ रहाथा.. तो लखनके बारेमे भी उनको सब पता था.. लखन श्रीधर मुना साहील सभी दोस्तो अ‍ेक जगहपे बैठकर अपनी मासुकाको देखके आपसमे मस्तीया कर रहे थे..

तब जागृती जयश्री ओर बरखा भी सभी लडकोकी ओर देखकर हस रही थी.. ओर उनके सामने मुह बनाते लडकेको छेड रही थी.. तो आज सामतभाइ ओर जया खुद बंसी ओर सांतीके साथ मुहुर्तपे बैठ गये थे.. अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते मुहुर्त खतम हुआ.. तब सभी लेडीस दुसरी वीधीया करती रही.. तब रमेश ओर लखनकी पुरी टीम भोजनकी तैयारीया करने लगे.. सामतभाइके घरपे बहुत महेमान आचुके थे..

तो दुसरी ओर देवायत सभी लेडीसको लेकर धिरेनके घरपे पहोंच गया.. तब धिरेनने भी अपनी बाइक लेली.. ओर सब लोग सहेरकी ओर नीकल गये.. जब चंदाका फोन आयाथा तब ही धिरेनने अपने मेनेजरसे बात करली थी.. की उनकी सालीकी जगह उनकी बीवी मकान देखने आ रही हे.. तो कुछ गडबडना होजाये.. तब पोने घंटेके बाद सभी लोग बेन्क मेनेजरके घरपे थे.. तो वहा उनकी बीवीओने सबका स्वागत कीया..

फीर कुछ औपचारीक बातोके बाद मेनेजर ओर उनकी दोनो बीवीओने सबको पुरा मकान दीखाया.. तो चंदा मकान देखकर बहुत खुस होगइ.. पुनमको भी पसंद था.. लेकीन अब वो धिरेनके साथ रहेना नही चाहती थी.. तो उसने अपने चहेरे कोइ नाखुसीका भाव आने नही दीया.. तो दुसरी ओर नीर्मला ओर भुमीका भी मकान देखकर बहुत खुस हो रही थी.. तो सृती भी मकान देखकर खुस होगइ..

क्युकी ये मकान अ‍ेक छोटे बंगले जैसा दिख रहा था अंदर तीन रुमके अलावा होल कीचन ओर स्टोर रुमके साथ सब तराहकी सुवीधाये ओर बहुत अच्छा इन्टीरीयर ओर फर्नीचर था.. तो सबको पसंद आगया.. फीर देवायत धिरेन ओर मेनेजरने आपसमे बैठकर मकानकी कीमत तैय करली.. ओर देवायतने वही चंदाके पाससे पैसे लेकर मेनेजरको टोकन थमा दिया.. तब मेनेजरकी दोनो बीवीया बहुतही खुस होगइ.. सबके लीये ठंडा ओर आइसक्रिम आगया.. फीर कुछ देरके बाद देवायत सबको लेकर वहासे नीकल गया..

धिरेन अपनी बेन्कपे चला गया.. तो देवायत सृती ओर पुनमको क्लीनीकपे छोड देता हे.. ओर नीर्मला भुमीका ओर चंदाको लेकर भुमीकाके घरपे आगया.. तो वहा भी घरमे बहुत मीटी आगइ थी.. तब देवायत सबके लीये खाना ओर दुध लेने बाजार चला गया.. तब तक भुमीका नीर्मला ओर चंदा.. तीनोने मीलकर घरकी सफाइ करली.. जब सफाइ होगइ तब देवायत सबका खाना लेकरभी आगया..

फीर चारोने मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तो नीर्मला ओर भुमीका दोनो खाना खाते देवायतके पेरोको सहेलाने लगी.. ओर देवायतको छेडने लगी.. जब देवायतने नजर घुमाकर देखा तब चंदा चुपचाप खाना खा रही थी.. जैसेही भुमी नीर्मलाकी ओर देखा तो भुमीकाने देवायतको अपने रुममे आनेका इसारा कीया.. तब नीर्मला देवायतकी ओर सरमाकर हस रही थी.. तभी देवायतने इसारोमे नां कहेते चंदाकी ओर इसारा कीया..

तो क्लीनीकपे सृतीने खुदका ओर पुनमका खाना होटेलसे मंगवा लीया था.. जैसेही सब पेसन्टको देख लीया.. तब दोनो ही खाना खाने बैठ गइ.. ओर खाना खाते हस हसके लखनके बारेमे बाते करने लगी.. ओर बातोही बातोमे दोनो अ‍ेक बार फीर लखनमे आये बदलावकी बाते करने लगी.. अब सृती ओर पुनम दोनोने हवेलीकी पुरी कमान सम्हालने की ठानली थी.. दोनोही सभी चर्चा खुलकर करने लगी थी..
 
खाना खानेके बाद दोनोही सृतीके पर्सनल रुममे आराम करने चली गइ.. तो घरपे भुमीका ओर नीर्मला देवायतको रुममे आनेका इसारा करते नीचे भुमीके रुममे आराम करने चली गइ.. तब चंदा ओर देवायत दोनोही उपरकी मंजीलपे सृतीके रुममे चले गये.. तब चंदा बहुतही सरमा रही थी.. क्युकी अ‍ेक तो वो अ‍ैसेही बहुत चुदकड थी.. ओर देवायतसे हर वक्त चुदाइ करवाने तैयार ही रहेती.. उपरसे आज वो अकेली थी.. उनको येभी पता थाकी अभी उपर जाते ही उनकी कुटाइ होजायेगी..

ओर हुआ भी यही.. उपर जातेही देवायतने चंदाको दबोच लीया.. तो चंदा जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब कुछही देरके बाद दोनोही पुरी तराह नंगे थे.. दोनोके कपडे अ‍ेक कोनेमे साथ पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे.. देवायत ओर चंदा दोनोही सीक्ष नाइन पोजीसमे थे.. देवायत चंदाकी चुतमे जीभ डालकर उनके भगन्साको खरोद रहाथा.. तो चंदाभी उतेजीत होते जोरोसे देवायतके लंडको मुहमे भरके अंदर बहार कर रही थी..





आज कितने दिनोके बाद दोनोको अकेलेमे प्यार करनेका मौका मीला था.. तो चंदा अ‍ेक अ‍ेक लह्मा जी लेना चाहती थी.. वो देवायतसे उनकी सादीसे पहेले मीलती थी.. उसी तराह मीलना चाहती थी.. पीछले कुछ दिनोसे उनकी मां बननेकी इच्छा भी बहुत बढ गइ थी.. लेकीन उनके बेटे धिरेनकी सादी भी हो चुकी थी.. तो देवायतसे कहे भी कैसे की मुजे तुम्हारे बच्चेको जन्म देना हे.. वो इस बातको कहेनेके लीये बहुत सरमा रही थी.. लेकीन मंजु उनके दिलकी सभी बाते जान चुकी थी..

ओर आज चंदाको देवायतसे प्यार करनेका बहुत अच्छा मौका मील गया था.. चंदा मदहोस होकर पुरी तराह देवायतका साथ दे रही थी.. ओर देवायतकी छेडखानीको ज्यादा देर तक बरदास्त नही कर पाइ.. ओर देवायतके मुहमे फवारा छोड दीया.. तब देवायत बाथरुममे चला गया.. ओर अपना मुह साफ करके वापस चंदाके पास आगया.. तब चंदाने भी अपनी चुतको कपडेसे साफ करली..

तभी चंदाने उसे पकडकर अपने उपर खीचलीया ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. ओर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाकर देवायतके लंडको पकडने लगी.. तब कुछही पलमे देवायतके लंडको मुठीमे पकडलीया.. ओर होले होले सहेलाते अपनी चुतपे घीसने लगी.. जब लंड गीला हो गया तब चंदाने लंडको चुतमे थोडा फसालीया ओर देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनको अपने तनसे जोरोसे चीपका लेती हे..

तब देवायतने चंदाके होठोको लीपलोक करते अ‍ेक जोरोका जटका दीया.. तब नीचेकी ओर नीर्मला ओर भुमीका अ‍ेक दुसरेको लीपटकर बाते कर रही थी.. तब उनको चंदाकी चीखनेकी आवाज जोरोसे सुनाइ दी.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. तो अचानक भुमीने नीर्मलाका हाथ थाम लीया ओर उसे बेडसे खडा करते खुद भी बेडसे उतर गइ..





भुमीका अपने नाकपे उंगली रखते नीर्मलाको चुप रहेनेका इसारा करते उसे धीरेसे सीडीयोकी ओर लेजाने लगी.. दोनो उपरकी मंजीलकी ओर दबे पांव जाने लगी.. जैसेही दोनो उपरकी मंजीलपे गइ.. तो सृतीके रुमका दरवाजा खुला था.. देवायत ओर चंदाको कोइ उमीद नही थी की नीर्मला ओर भुमीका उपरकी मंजीलपे आ सकती हे.. दोनो ही बीन्दास दरवाजा खुला रखकर चुदाइमे मसगुल थे..

नीर्मला ओर भुमीका धीरेसे दरवाजेके बहार खडी रहेकर अंदरकी ओर जाकने लगी.. तो अंदरका नजारा देखकर दोनोही उतेजीत होने लगी.. ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेका हाथ थाम लीया.. दोनो ही धीरेसे देवायत चंदाकी चुदाइ देखने लगी.. तब चंदाके दोनो पैर मुडकर देवायतकी कमरपे थे.. ओर देवायत हाथोके बल जोरोसे चंदाकी चुदाइ कर रहा था.. तब नीर्मला ओर भुमीका दोनो सरमाके अ‍ेक दुसरेके सामने देखते मुस्कुराने लगी..

नीर्मला आज पहेली बार अपनी बहेनको अ‍ैसे चुदवाते देख रही थी.. तब उनकी ओर भुमीकाकी चुतभी गीली होने लगी.. अभीतक सीर्फ सृती लता ओर चंदा ही थी.. जीनको भुमीकाके देवायतके साथ रीलेशनके बारेमे नही पता था.. तो दुसरी ओर पुनम ओर सृती रुममे अ‍ेक दुसरेकी कमरपे पेर डालकर बाते कर रही थी.. दोनोही लखनकी बाते करते उतेजीत हो गइ थी.. ओर बीच बीचमे अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम लेती थी..
 
तो इधर गांवमे भी भोजन हो रहा था.. सभी जेन्ट्सने खाना खालीया था.. ओर अभी सब लेडीस खाना खा रही थी.. तब नीलम सबसे छुपकर बार बार लखनकी ओर देखकर सरमाके मुस्कुरा देती थी.. तो रमा भी नीलम ओर लखनकी आंख मीचोली देखकर खुस हो रही थी.. ओर वोभी लखनसे बात करनेके लीये उनके आस पास ही मंडरा रही थी.. लेकीन आज इतने लोगोके बीच लखनने खुदको बहुत ही सयंम मे रखा..

तो दुसरी ओर ब्रीन्दा भी जयश्रीको बात करते दो पहोरको आराम करने घरपे चले जानेकी बात करते श्रीधरको मीलनेकी प्लानींग कर रही थी.. तो यही हाल मुना ओर बसंतीका भी था.. जब बसंती खाना लेने काउन्टरपे लडकोके पास आइ.. तब मुनाने इसारोसे बसंतीको घरपे जानेकी बात करली.. जीसे सुनकर बसंती भी खुब सरमाइ.. ओर हांमे गरदन हीलाते दुसरा खाना लेने आगे नीकल गइ..

तो बाकीके लडके अपनी मासुकाओके साथ सेटींग करनेमे लगे हुअ‍े थे.. जब सभी लेडीसका खाना खतम हो गया.. तब मंजु रश्मी वंदना भावना लता रमा नीलम सभी लेडीस हवेलीपे आराम करने आगइ.. दो पहोरके बाद बंसी ओर सांतीकी हल्दीकी रसम होने वाली थी.. ओर साथमे सादीके गानेके साथ नाच गानका प्रोग्राम भी होने वाला था.. तो अभी जयश्री जागृती बरखा तीनो सांतीके रुममे बेठकर सांतीकी टांग खीचाय करते आपसमे मस्तीया कर रही थी..

तो सहेरमे भुमीके घरपे अब भी देवायत चंदाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा था.. वो चंदाको दो बार जडाके खुद भी जडनेको आया तब चंदाने देवायतकी कमरपे अपने दोनो पैरकी आंटी लगादी.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते अपने तनसे चीपका लीया.. ओर देवायतने अपनी कमरको जटके देते अ‍ेक बार चंदाकी चुतको लबा लब भर दीया.. तब चंदाभी उनके साथ जड गइ.. आज चंदाकी हालत पतली होगइ थी.. तब..





चंदा : (पीठ सहेलाते सर्मसार होते धीरेसे) जानु.. आज इसे बहार मत नीकालना.. आप आज मेरी सारी तम्मना पुरी करदो.. आज भरदो मेरी कोखको.. मे हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमत) चंदा.. आज अ‍ैसा ही होगा.. जबतक मे तेरी कोख नही भरुगा तबतक मे तेरे उपरसे उतरने वाला नही हु.. क्युकी मुजे मंजुने कहा हे.. की आज तेरा काम करना हे..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. कभी कभ मुजे मंजु बहुत ही रहस्यमय लगती हे.. पता नही उनको मेरे दिलकी बात पता कैसे लग जाती हे.. देखा नही.. बडे भैया उनके आखरी वक्तमे मंजुको कैसे हाथ जोडते थे.. ओर भैयाने भी बडी दीदीका हाथ आपको सोप दीया.. ओर कहा लो सम्हालो अपनी सोनुको.. जानु.. कौन हो आप..? ओर कौन हे बडी दीदी.. उसने दीदीको सोनु क्यु कहा..?

देवायत : (मुस्कुराते) चंदा.. उन सभी बातोका जवाब तो तुजे मंजुही दे सकती हे.. कभी फुरसतमे उनसे पुछ लेना.. वो हम सबके बारेमे बहुत कुछ जानती हे..

चंदा : (मुस्कुराते) जानु.. अबतो पुछनाही पडेगा.. क्युकी अबतो दीदीको आपको ही सम्हालना पडेगा.. चलीये.. अब दुसरा राउन्ड नही करना क्या..? देखना आज तो साम तक आपको मेरे उपरसे उतरने ही नही दुगी.. जबतक आप मेरे अंदर अपना बीज नही डालते.. फीर भलेही मेरी हालत खराब होजाये..





ओर देवायत बीना लंड बहार नीकाले चंदाकी दुसरी बार चुदाइ करने लगा.. तब नीर्मला ओर भुमीका भी अपनी अपनी चुतमे उंगली करके जड गइ थी.. दोनो ही चंदा ओर देवायतकी बाते सुन रही थी.. तब नीर्मलाका जीर्क होते ही नीर्मला सरमाने लगी.. ओर भुमीका हाथ पकडकर उसे नीचे लेजाने लगी.. दोनो वापस नीचे अपने रुममे आकर बेडपे लेटी हुइ थी.. ओर अ‍ेक दुसरेसे चीपकते बाते कर रही थी..

तभी अचानक भुमीका अपने मुहपे हाथ रखके बाथरुममे चली गइ.. ओर उल्टीया करने लगी.. तब नीर्मला समज गइ.. ओर फटाफट रुमका दरवाजा बंध करके भुमीकाके पास बाथरुममे चली गइ.. ओर उनकी पीठ सहेलाती रही.. जब भुमीकाको उलटीया होगइ तब उसने अपना मुह साफ करलीया.. ओर दोनो वापस बेडपे आके लेट गइ.. तब नीर्मलाने भुमीकाको अपनी बाहोमे भरलीया..

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. क्या तुम उल्टीकी गोली नही लेती..? हंम..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नीमु.. ये अचानक राजीवका हादसा हो गया.. तो मेने तीन दिनसे नही ली थी.. मे गोली खाना भुल गइ थी.. अभी ले लेती हु.. वरना सृतीको पता चलेगा तो गडबड होजायेगी..

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी.. अ‍ेक दिनतो उसे पता चल ही जायेगा.. मेरी बात मान तुम अ‍ेक बार उनसे खुलकर बात करले.. क्या पता सायद वो तुम दोनोके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करले..

भुमीका : (जटसे धीरेसे) अरे नही नही.. मे उनको जानती हु.. वो हमारा रीस्ता कभी अ‍ेक्सेप्ट नही करेगी.. नीमु.. वो मंजुकी तराह नही हे.. जो अपनी मांका रीलेशन अपने पतीके साथ स्वीकार करले.. तुम बहोत नसीब वाली हो.. सृती कभी नही चाहेगी.. की उनकी मां का रीलेशन अपने दामाद के साथ हो..

नीर्मला : भुमी.. तो फीर क्या करोगी..? मुजे लगता हे अब तुजे जल्द ही कीसी लेडी डोक्टरको दिखाना चाहीये.. वरना दुसरी प्रोबलेम होगी तो क्या करोगी..?

भुमीका : (अचानक खडी होते) नीमु.. चल मेरे साथ.. मे अ‍ेक टोक्टरको जानती हु.. उसे नही पता की मे सृतीकी मां हु.. हम दोनो अभी उनको दिखाकर वापस आजायेगी.. ये दोनो भलेही अपना मजा लुटे..

नीर्मला : (जटसे खडी होते) भुमी.. क्या हम अभी दिखाकर वापस आजायेगी..? चल..

भुमीका : (हाथ पकडकर बहार नीकलते) अरी चल तो सही.. मे यहीसे उनको आवाज लगाकर केह देती हु.. की हम अभी आते हे.. चल फटाफट..

भुमीका नीचेसेही जोरोसे आवाज लगाकर चंदाको कहेती हेकी हम अभी पडोसमे मीलकर आते हे.. ओर दोनो बहार नीकलकर फटाफट ओटो रीक्षा पकडकर दुर अ‍ेक लेडी डोक्टरके पास चली गइ.. तब उनको नही पता थाकी यही लेडी डोक्टर उनकी जींदगीमे भुचाल लायेगी.. क्युकी सृती जब मेडीकल कोलजमे थी तब इसी डोक्टरके पास वाले रुममे रहेती थी.. ओर तब भुमीका अक्सर सृतीको मीलने जाया करती थी....

कन्टीन्यु
 
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