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- Dec 5, 2013
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क्युकी लखनसे सेक्सके बारेमे बाते करते उनकी चुत काफी गीली होते अभी भी फडफडा रही थी.. ओर पानीका रीसाव करते गीली होगइ थी.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार होते मुस्कुराने लगी.. फीर पुनमने अपनी चुतको साफ करते करते धीरेसे आंख बंध करली.. ओर लखनके बडे लंडको इमेजींग करते चुतमे उंगली घुसादी.. तो आंखोके सामने लखनका चहेरा आगया..

ओर पुनम धीरे धीरे लखनको इमेजींग करते उंगलीको चुतमे अंदर बहार करने लगी.. आज पुनम को खुदकी चुत भठीकी माफीक गरम लग रही थी.. तभी कुछ देर हीलानेके बाद अचानक उनकी चुतसे अेक तेज धारसे फवारा नीकल गया.. तब वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर फ्रेस होकर बहार आगइ.. तो भावना पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखते हस रही थी.. तब पुनम भावनाकी ओर देखकर सरमा गइ.. ओर हसने लगी..

भावना : (हसते धीरेसे) पुनोदी.. क्या केह रहे हे हमारे देवरजी..? आपके साथ कोइ सरारत तो नही की..? क्युकी आपको बहार नीकलनेमे बहुत देर होगइ.. हें..हें..हें.. देखो आपकी सलवार गीली हो गइ हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) क्या भाभी.. आप भीनां.. अैसा कुछ भी नही हे.. वो क्या कहेगे..? जबसे हमने उसे जडी बुटी दिहे तबसे वो लताको नही मील सके इसीलीये सेक्सके बीना पागल होगये हे.. कहेते थे अब मे लताको मील सकता हु की नही.. हें..हें..हें..
भावना : (हसते धीरेसे) क्या..? वो आपसे यही पुछ रहे थे..? दीदी.. तो क्या उसने तबसे सेक्स नही कीया..? बापरे.. हें..हें..हें.. तब तो आज लता गइ कामसे.. आज उनको छोडेगे नही.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या उनका सचमे इतना बडा होगया होगा..?
पुनम : (सरमाते धीरेसे थोडी बात छुपाते) भाभी.. वो मुजे कहा पता होगा..? वो तो सुबह अब लता ही बता सकती हे.. हें..हें..हें.. सायद.. मे बी.. जो आप केह रही हे..
भावना : (हसते) दीदी.. आपको भी तो सब पता चल जाता हे.. लगता हे आप मुजे खुलकर सच बताना नही चाहती.. वैसे भी देवर भाभीके बीच काफी अन्डर स्टेन्डींग हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (थोडा गंभीर होते) भाभी.. हमारे बीच कहा कोइ पर्दा हे..? अब तो हम चारोको ही सबकुछ सम्हालना हे.. भाभी.. सच कहु..? हमारे बीच अन्डर स्टेन्डींग तो बहुत हे.. लेकीन वो अपना पहेला प्यार आज भी नही भुले.. वो आज भी मुजे इतना प्यार करते हे.. कास मे उनका प्यार कबुल करपाती.. भाभी.. वो अपना प्यार भाइसे भी बांटनेके लीये तैयार हे.. आज हमारे बीच बहुत सारी बाते हुइ.. भाभी.. उनकी बातोसे लगा.. की वो आज भी मुजे पानेकी चाहत रखते हे.. लेकीन प्यार ना मीलनेकी वजहसे वो अंदरसे बहुत दुखी हे..
भावना : (सामने देखकर धीरेसे) दीदी.. अेक बात कहु..? अब तो इस हवेली के साथ साथ हमारे गांवमे भी इतना सारा बदलाव हो रहा हे.. तो फीर आपको उनका प्यार कबुल करनेमे क्या दीकत हे..? मेरे खयालसे आपको लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेना चाहीये.. करलीजीये उनका प्यार कबुल.. आपको भी पता हे आगे क्या होने वाला हे.. तो इस बातसे क्यु भागना..? दीदी.. प्यार करके मीलन करनेका मजा ही अलग हे.. मे भी जीजुसे प्यार करती हु.. बस.. अब सीर्फ उस पलका इन्तजार कर रही हु.. जब हम दोनोका मीलन होगा..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. बात तो आपकी सही हे.. लेकीन फीर भी मे बहुत दुवीधामे हु.. मुजे इस बारेमे आपकी राइ जाननी थी.. आपने बता दीयाकी मुजे हमारे देवरका प्यार कबुल करलेना चाहीये.. भाभी.. उन्होने तो अपने प्यारका इजहार करते मुजे उलजनमे डाल दीया था.. मे कोइ नीर्णय नही लेपा रही थी.. की क्या करना हे.. ओर भाभीने भी मुजे बहुत सारी जीमेवारी दी हे.. तो उसे भी नीभाना हे..
भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. अब हम चारो साथ ही तो हे.. हम चारो मीलकर वो जीम्वेवारी भी नीभायेगे.. ओर चारो मीलकर मजे भी करेगे.. इतना हसीन मजा करना कौन नही चाहेगा.. हें..हें..हें.. आपकी जगाह मे होती.. तो मे लखन भैयाका प्यार कबसे कबुल कर चुकी होती.. कीतना प्यारा देवर मीला हे हमे..
पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. फीकर मत करो.. आपकी भी बारी आयेगी.. तब देखती हु.. आप हमारे देवरसे कीतना प्यार करती हो.. पहेले बडे भैयाको तो ठीकसे प्यार करलो.. लगता हे बहुत ही जल्द आप दोनोका मीलन होने वाला हे.. हें..हें..हें..
भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपके मुहमे घी सकर.. मुजे पता हे आपको ओर दीदीको सबकुछ पता हे.. फीर भी दोनो मुजे नही बताती.. ठीक हे.. मे उस पलका इन्तजार कर रही हु.. जब हम दोनो मीलेगे..
तो इधर लखन भी फोन कट होते ही मुस्कुराते नीचे अपने रुममे आगया.. तो नीलम लखनको देखते ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. ओर सरमके मारे खडी होकर अपने रुममे सोने चली गइ.. तब रमा बहुतही कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते हस रही थी.. ओर वोभी खडी होकर अपने रुममे सोने जाने लगी..
तब लखनने लताकी नजर बचाते रमाको आंख मारते उनका हाथ पकडलीया.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होते हाथ छुडाकर मुस्कुराते वहासे चली गइ.. तभी लताने जटसे रुमका दरवाजा बंध करदीया.. तो लखनने लताको अपनी गोद मे ही उठा लीया..
लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन छोडीये क्या कर रहे हे..? मे गीर जाउगी.. हें..हें..हें..
लखन : (गाल चुमते) डार्लींग मे आज तुजे छोडने वाला नही हु.. मुजे सब परमीशन मील गइ हे.. आज तो तु गइ कामसे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमसे पानी पानी होगइ) लखन.. प्लीज.. यार आपका बहुत बडा होगया हे.. मे नही जेल पाउगी.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..
लखन : (बेडपे सुलाते) लता.. कुछ नही होगा.. भाइका भी बडा हे.. तो क्या कीसी भी भाभीको कुछ हुआ हे..? तु खामखा डर रही हे.. मुजे मंजु भाभीने सब परमीसन देदी हे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते धीरेसे) क्या मंजु भाभीने..? लेकीन ये सब हुआ कैसे..? येतो बताइअे.. पहेले तो इतना बडा नही था..
लखन : (पासमे बैठते हसते धीरेसे) लता.. कीसीको कहेना नही.. भाभीने पुनम दीदीको कहेकर मुजे थोडीसी जडी बुटी देदी हे.. इसीलीये ये थोडासा बडा ओर मोटा होगया हे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) क्या थोडासा बडा होगया हे+.. हें..हें..हें.. ये थोडासा हे..? बापरे.. आपका तो कीसी गध्धे जैसा हो गया हे.. मुजे भाभीसे बात करनी पडेगी.. बाबा ये तो मेरी हालत बीगाड देगा.. भाभी भीनां.. क्या जरुरत थी आपको जडीबुटी देनेकी..? आपको मुना भाइने तो आयुर्वेदिक का कोर्षतो करवाया हे.. अरे बाबा उनकी दवाइसे भी आप मेरी हालत खराब कर देते हो.. मुजे कल इस बारेमे पुनो दीदीसे बात करनी पडगी..
लखन : (थोडा नाराज होते) लता.. अैसा दीदीको पुछते हे क्या..? तुम होनां.. ओरत तो इतना बडा लंड देखकर पागल होजाती हे.. ओर चुदवानेके लीये तैयार होजाती हे.. ओर अेक तुम हो.. जो बातका बतंगंड बना रही हो.. हां.. जा कल उसे बात करलेना.. फीर मेरे पास आना.. बहुत नखरे कर रही हो.. कुछ नही करना मुजे.. जा सोजा..
लता : (सरमाते हसते) अरे.. आपतो नाराज हो गये..? मे पुनम दीदीसे थोडीना पुछुगी.. अब वो कहा आपकी दीदी हे.. (हसते धीरेसे) मेतो हमारी पुनम भाभीसे पुछुगी.. हें..हें..हें.. अब वो भी तो मेरी जेठानी हे.. ओर मत भुलो.. हम दोनो पकी सहेलीया भी हे.. हमारा पहेला मीलन उसीने तो करवाया था.. हें..हें..हें.. तो मे उनसे कुछ भी पुछ सकती हु..
लखन : (जुठ मुठ नाराज होते दुसरी ओर करवट लेते) ठीक हे.. जा यार.. मुजे तुमसे बात ही नही करनी.. मेरा सारा मुड खराब करदीया..
लता : (लखनसे चीपकते हसते) अले..ले..ले.. मेरा बच्चा नाराज हो गया.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. चोदलो मुजे.. मे रेडी हु.. पर याद रखना अगर मुजे कुछ हो गया तो सब जीम्वेवारी आपकी होगी..
कहातो लखन दुसरी ओर करवट लेकर सोने लगा.. तो लता लखनकी नाराजगीसे हसने लगी.. तभी लताने लखनसे चुदवानेकी हिंमत करली.. यही सोचकर की वो कब तक लखनसे दुर रहेगी.. अेक दिन तो उसे इस लंडसे चुदना ही पडेगा.. ओर यही सोचते लता लखनके उपर जुकते उनके गालपे कीस करने लगी.. ओर लखनको मनानेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन लखन थोडी देर जुठ मुठ नाराज होनेका नाटक करता रहा..

ओर पुनम धीरे धीरे लखनको इमेजींग करते उंगलीको चुतमे अंदर बहार करने लगी.. आज पुनम को खुदकी चुत भठीकी माफीक गरम लग रही थी.. तभी कुछ देर हीलानेके बाद अचानक उनकी चुतसे अेक तेज धारसे फवारा नीकल गया.. तब वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर फ्रेस होकर बहार आगइ.. तो भावना पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखते हस रही थी.. तब पुनम भावनाकी ओर देखकर सरमा गइ.. ओर हसने लगी..

भावना : (हसते धीरेसे) पुनोदी.. क्या केह रहे हे हमारे देवरजी..? आपके साथ कोइ सरारत तो नही की..? क्युकी आपको बहार नीकलनेमे बहुत देर होगइ.. हें..हें..हें.. देखो आपकी सलवार गीली हो गइ हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) क्या भाभी.. आप भीनां.. अैसा कुछ भी नही हे.. वो क्या कहेगे..? जबसे हमने उसे जडी बुटी दिहे तबसे वो लताको नही मील सके इसीलीये सेक्सके बीना पागल होगये हे.. कहेते थे अब मे लताको मील सकता हु की नही.. हें..हें..हें..
भावना : (हसते धीरेसे) क्या..? वो आपसे यही पुछ रहे थे..? दीदी.. तो क्या उसने तबसे सेक्स नही कीया..? बापरे.. हें..हें..हें.. तब तो आज लता गइ कामसे.. आज उनको छोडेगे नही.. हें..हें..हें.. दीदी.. क्या उनका सचमे इतना बडा होगया होगा..?
पुनम : (सरमाते धीरेसे थोडी बात छुपाते) भाभी.. वो मुजे कहा पता होगा..? वो तो सुबह अब लता ही बता सकती हे.. हें..हें..हें.. सायद.. मे बी.. जो आप केह रही हे..
भावना : (हसते) दीदी.. आपको भी तो सब पता चल जाता हे.. लगता हे आप मुजे खुलकर सच बताना नही चाहती.. वैसे भी देवर भाभीके बीच काफी अन्डर स्टेन्डींग हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (थोडा गंभीर होते) भाभी.. हमारे बीच कहा कोइ पर्दा हे..? अब तो हम चारोको ही सबकुछ सम्हालना हे.. भाभी.. सच कहु..? हमारे बीच अन्डर स्टेन्डींग तो बहुत हे.. लेकीन वो अपना पहेला प्यार आज भी नही भुले.. वो आज भी मुजे इतना प्यार करते हे.. कास मे उनका प्यार कबुल करपाती.. भाभी.. वो अपना प्यार भाइसे भी बांटनेके लीये तैयार हे.. आज हमारे बीच बहुत सारी बाते हुइ.. भाभी.. उनकी बातोसे लगा.. की वो आज भी मुजे पानेकी चाहत रखते हे.. लेकीन प्यार ना मीलनेकी वजहसे वो अंदरसे बहुत दुखी हे..
भावना : (सामने देखकर धीरेसे) दीदी.. अेक बात कहु..? अब तो इस हवेली के साथ साथ हमारे गांवमे भी इतना सारा बदलाव हो रहा हे.. तो फीर आपको उनका प्यार कबुल करनेमे क्या दीकत हे..? मेरे खयालसे आपको लखन भैयाका प्यार कबुल कर लेना चाहीये.. करलीजीये उनका प्यार कबुल.. आपको भी पता हे आगे क्या होने वाला हे.. तो इस बातसे क्यु भागना..? दीदी.. प्यार करके मीलन करनेका मजा ही अलग हे.. मे भी जीजुसे प्यार करती हु.. बस.. अब सीर्फ उस पलका इन्तजार कर रही हु.. जब हम दोनोका मीलन होगा..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. बात तो आपकी सही हे.. लेकीन फीर भी मे बहुत दुवीधामे हु.. मुजे इस बारेमे आपकी राइ जाननी थी.. आपने बता दीयाकी मुजे हमारे देवरका प्यार कबुल करलेना चाहीये.. भाभी.. उन्होने तो अपने प्यारका इजहार करते मुजे उलजनमे डाल दीया था.. मे कोइ नीर्णय नही लेपा रही थी.. की क्या करना हे.. ओर भाभीने भी मुजे बहुत सारी जीमेवारी दी हे.. तो उसे भी नीभाना हे..
भावना : (मुस्कुराते) दीदी.. अब हम चारो साथ ही तो हे.. हम चारो मीलकर वो जीम्वेवारी भी नीभायेगे.. ओर चारो मीलकर मजे भी करेगे.. इतना हसीन मजा करना कौन नही चाहेगा.. हें..हें..हें.. आपकी जगाह मे होती.. तो मे लखन भैयाका प्यार कबसे कबुल कर चुकी होती.. कीतना प्यारा देवर मीला हे हमे..
पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाभी.. फीकर मत करो.. आपकी भी बारी आयेगी.. तब देखती हु.. आप हमारे देवरसे कीतना प्यार करती हो.. पहेले बडे भैयाको तो ठीकसे प्यार करलो.. लगता हे बहुत ही जल्द आप दोनोका मीलन होने वाला हे.. हें..हें..हें..
भावना : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपके मुहमे घी सकर.. मुजे पता हे आपको ओर दीदीको सबकुछ पता हे.. फीर भी दोनो मुजे नही बताती.. ठीक हे.. मे उस पलका इन्तजार कर रही हु.. जब हम दोनो मीलेगे..
तो इधर लखन भी फोन कट होते ही मुस्कुराते नीचे अपने रुममे आगया.. तो नीलम लखनको देखते ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. ओर सरमके मारे खडी होकर अपने रुममे सोने चली गइ.. तब रमा बहुतही कामुक नजरोसे लखनकी ओर देखते हस रही थी.. ओर वोभी खडी होकर अपने रुममे सोने जाने लगी..
तब लखनने लताकी नजर बचाते रमाको आंख मारते उनका हाथ पकडलीया.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होते हाथ छुडाकर मुस्कुराते वहासे चली गइ.. तभी लताने जटसे रुमका दरवाजा बंध करदीया.. तो लखनने लताको अपनी गोद मे ही उठा लीया..
लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन छोडीये क्या कर रहे हे..? मे गीर जाउगी.. हें..हें..हें..
लखन : (गाल चुमते) डार्लींग मे आज तुजे छोडने वाला नही हु.. मुजे सब परमीशन मील गइ हे.. आज तो तु गइ कामसे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमसे पानी पानी होगइ) लखन.. प्लीज.. यार आपका बहुत बडा होगया हे.. मे नही जेल पाउगी.. मुजे बहुत डर लग रहा हे..
लखन : (बेडपे सुलाते) लता.. कुछ नही होगा.. भाइका भी बडा हे.. तो क्या कीसी भी भाभीको कुछ हुआ हे..? तु खामखा डर रही हे.. मुजे मंजु भाभीने सब परमीसन देदी हे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते धीरेसे) क्या मंजु भाभीने..? लेकीन ये सब हुआ कैसे..? येतो बताइअे.. पहेले तो इतना बडा नही था..
लखन : (पासमे बैठते हसते धीरेसे) लता.. कीसीको कहेना नही.. भाभीने पुनम दीदीको कहेकर मुजे थोडीसी जडी बुटी देदी हे.. इसीलीये ये थोडासा बडा ओर मोटा होगया हे.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते) क्या थोडासा बडा होगया हे+.. हें..हें..हें.. ये थोडासा हे..? बापरे.. आपका तो कीसी गध्धे जैसा हो गया हे.. मुजे भाभीसे बात करनी पडेगी.. बाबा ये तो मेरी हालत बीगाड देगा.. भाभी भीनां.. क्या जरुरत थी आपको जडीबुटी देनेकी..? आपको मुना भाइने तो आयुर्वेदिक का कोर्षतो करवाया हे.. अरे बाबा उनकी दवाइसे भी आप मेरी हालत खराब कर देते हो.. मुजे कल इस बारेमे पुनो दीदीसे बात करनी पडगी..
लखन : (थोडा नाराज होते) लता.. अैसा दीदीको पुछते हे क्या..? तुम होनां.. ओरत तो इतना बडा लंड देखकर पागल होजाती हे.. ओर चुदवानेके लीये तैयार होजाती हे.. ओर अेक तुम हो.. जो बातका बतंगंड बना रही हो.. हां.. जा कल उसे बात करलेना.. फीर मेरे पास आना.. बहुत नखरे कर रही हो.. कुछ नही करना मुजे.. जा सोजा..
लता : (सरमाते हसते) अरे.. आपतो नाराज हो गये..? मे पुनम दीदीसे थोडीना पुछुगी.. अब वो कहा आपकी दीदी हे.. (हसते धीरेसे) मेतो हमारी पुनम भाभीसे पुछुगी.. हें..हें..हें.. अब वो भी तो मेरी जेठानी हे.. ओर मत भुलो.. हम दोनो पकी सहेलीया भी हे.. हमारा पहेला मीलन उसीने तो करवाया था.. हें..हें..हें.. तो मे उनसे कुछ भी पुछ सकती हु..
लखन : (जुठ मुठ नाराज होते दुसरी ओर करवट लेते) ठीक हे.. जा यार.. मुजे तुमसे बात ही नही करनी.. मेरा सारा मुड खराब करदीया..
लता : (लखनसे चीपकते हसते) अले..ले..ले.. मेरा बच्चा नाराज हो गया.. हें..हें..हें.. ठीक हे.. चोदलो मुजे.. मे रेडी हु.. पर याद रखना अगर मुजे कुछ हो गया तो सब जीम्वेवारी आपकी होगी..
कहातो लखन दुसरी ओर करवट लेकर सोने लगा.. तो लता लखनकी नाराजगीसे हसने लगी.. तभी लताने लखनसे चुदवानेकी हिंमत करली.. यही सोचकर की वो कब तक लखनसे दुर रहेगी.. अेक दिन तो उसे इस लंडसे चुदना ही पडेगा.. ओर यही सोचते लता लखनके उपर जुकते उनके गालपे कीस करने लगी.. ओर लखनको मनानेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन लखन थोडी देर जुठ मुठ नाराज होनेका नाटक करता रहा..






