Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 4 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८

कहातो नीलम अ‍ेक बरतन लेके चली गइ, इनके जातेही रमाने दरवाजा बंध करलीया ओर भानुका हाथ पकडके उसे अपने रुममे लेगइ ओर दोनोही आपसमे लीपट गये ओर अ‍ेक दुसरेको पागलोकी तराह चुमने लगे फीर रमा अपनी सारी कमर तक उची करके बेडपे लेट गइ क्युकी कपडे नीकालनेका टाइम नही था तब भानु भी पेन्टको नीचे करते चडी नीची करलेता हे ओर रमाके पैरके बीच बेठने लगता हे तो रमाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैला दीये.. ओर भानुके सामने कामुक नजरोसे सरमाते देखने लगी....अब आगे




दोनोही कामाग्नीमे जलते मदहोस होगये थे भानु उनके पेरके बीच बेठतेही उनके उपर जुक गया ओर रमाके ब्लाउसके बटन खोल दीया तब रमाके दोनो बुब्स उछलके बहार आगये तो भानुने उनके बुब्सको मुहमे लेलीया ओर हल्कासा होंठमे नीपलको दबाते चुसने लगा तब रमा नसीली आंख करते मदहोसीमे छागइ ओर भानुके बालको सहेलाने लगी तभी भानुने अपने होंठ रमाके होठपे रखदीया ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते मदहोसीके नसेमे जुमने लगे..




दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते रहे ओर अ‍ेक दुसरेकी जीभ नीकालते अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे रमा बीलकुल अपना होस खो चुकीथी अब नीलमभी आजाये तोभी वो भानुको छोडने वाली नही थी, बस उनकोतो सीर्फ सेक्स करनाथा वो अब भानुको पुर्ण समर्पीत हो चुकीथी ओर सीर्फ भानुको ही अपना पती मानती थी, उसने हाथ नीचे लेजाके लंडको हाथसे पकड लीया ओर अपनी चुतमे रखके लंडको अपनी गुफाका रास्ता दीखा दीया तब अ‍ेकही जटकेमे भानुने पुरा लंड रमाकी चुतमे उतार दीया..




भानु चुतमे लंड टालके रमाकी गरदनमे मुह रखते उनसे चीपक गया.. तो रमाभी अपनी चुतमे भानुके लंडको महेसुस करते मदहोस होने लगी ओर भानुके होंठ चुमते नसीली आंख करते चुदाइका आनंद लेने लगी भानु हाथके बल उचा होगया ओर धीरे धीरे लंडको बहार तक नीकालते जोरोसे धका मारके रमाकी चुतमे जडतक घुसाते रमाकी जोरोसे चुदाइ करने लगा तब लंड रमाकी बच्चेदानीसे टकराने लगा ओर रमाकी हर धकेके साथ आहे नीकलने लगी.. इतने तेज धकेकी वजहसे उनका बेडभी चरमारेते आवाज करने लगा..




थोडीही देरमे दोनो अ‍ेकदम उतेजीत होगये ओर रमा भानुको जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी.. ओर भानुने अपनी चोदनेकी स्पीड बढादी तभी रमाने जोरोसे भानुको खीचके अपने आपसे चीपका लीया ओर उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर अपना होंठ भानुके होंठोसे मीलाके लीपलोक करलीया ओर रमाकी आंख बडी करते भानुको देखती रही तभी भानुने अपने लंडपे रमाका गरम पानी महेसुस कीया..




तो भानुके लंडमेभी सुरसुराहट होने लगी ओर भानुने लंडको चुतमे जडतक घुसादीया ओर रमाके गर्भासयके उपर अपने वीर्यकी पीचकारीया मारते बोछार करने लगा.. दोनोही अ‍ेक साथ जडने लगे.. ओर भानु रमाके उपर ढेर हो गया.. ओर दोनो अपनी सांस दुरस्त करने लगे तब रमा भानुकी पीठ सहेलाती रही.. तभी भानुका लंड मुरजाके रमाकी चुतसे बहार नीकल गया ओर रमाकी चुतसे दोनोका कामरस बहेने लगा..

फीर भानु उतर गया तो रमा जटसे बेठ गइ ओर अपनी पेन्टीसे अपनी चुतको साफ करने लगी फीर भानुके लंडकोभी पोछके साफ करदीया फीर दोनोही खडे होके अपने कपडे सही करने लगे ओर रमाने कपडे सहीसे पहेन लीये ओर अपने बालोका जुडा बनाने लगी.. तबतक भानु उसे देखता रहा.. तो रमा उसे देखके खुब सरमाइ ओर आके भानुकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोके होंठ मीलगये.. तभी बहार आवाज आइ..

तो दोनोही जटसे बहार नीकल गये भानु बहार खटीयापे बेठ गया तब रमा दरवाजा खोलने गइ देखातो बहार नीलम सब्जी ओर दुध लेके आरही थी तब रमा जटसे कीचनमे चली गइ ओर नीलम आतेही सीधी कीचनमे सब्जी ओर दुध अपनी मांको देके बहार अपने भैयाके पास बेठ गइ ओर उनसे बाते करने लगी

नीलम : भैया मे खेतोपे गइथी वहा बापु दारु पीकर पडेथे लेकीन उनके पास जमीनपे कुछ खुनके धबे थे..

भानु : (चोंकते) कौन..? मामा..? क्या केह रही हो तुम..?

नीलम : हां बडेभैया.. मेने पुछा तो कहा उल्टी हुइ थी.. आपका बोला.. तोभी घर नही आये..

रमा : (चाइ लेके बहार आते) कहासे आते.. दारु पीली होगी.. तेरे भाइसे डरतेहे.. तो कहासे आते..

नीलम : लेकीन मम्मी बापुको खुनकी उल्टीया हुइ थी..

रमा : (गुसेसे) ये आज कलकी थोडीना होती हे.. कीतने दीनोसे हो रही हे.. अब दारु पीयेगे तो यही सब होगा.. पता नही इस आदमीसे कब छुटकारा मीलेगा.. मुजेतो ठीक हे मेरी बच्चीको भी मारने लगे हे..

भानु : मामी.. क्या इनको अस्पताल लेजाउ..?

रमा : कोइ जरुरत नही हे.. मे ले गइथी डोक्टरने मना करदीया कहा इनका लीवर खराब होगया हे बदलना पडेगा कहासे नीकाले.. खर्चाभीतो बहुत आता हे.. ओर बदलदीया तोभी क्या फायदा काम धंधातो करना नही.. बस दारु पीके पडे रहो.. अबतो इनसे छुटकारा मीलजाये तो हम मां बेटी वहा आजाये..

अ‍ेसेही बाते करते रमाने खाना बनालीया ओर तीनोने मीलके खा लीया फीर भानु रमाको कुछ पैसे देके वहासे नीकलने लगा.. नीकलनेसे पहेले नीलमको कुछ काम सोंपके दोनो अ‍ेक बार फीरसे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर होंठो मीलाके स्मुच करने लगे.. तो रमाने फीर अ‍ेक बार भानुके साथ सादी करके साथ रहेनेकी बात की ओर भानु उनको जल्द लेजानेका वादा करके नीकल गया..

तभी इधर देवायत गहेरी नींमे सोयाथा तभी उसे अपने होंठपे गीलापन महेसुस हुआ तो उसने आंख खोलके देखा तो ड्रेसके अंदर दो छोटे छोटे बुब्सके दर्शन होने लगे.. वो थोडी देर उसे देखता रहा.. ओर उनका लंड धीरे धीरे खडा होने लगा, फीर नजर उची करते देखातो पुनम उनपे जुकके इनके होंठ चुम रहीथी.. तो वो जटसे बेडपे बेठ गया..




देवायत : (थोडा गुसेसे) छुटकी ये क्या कर रही हे.. कोइ देख लेता तो..?

पुनम : (बेटपे बेठते) भाइ अ‍ेकदम फंटुस हो.. कोइ नही देखेगा.. भाभी वो रश्मीभाभीसे बात कर रही हे वो कीसी कामसे उनको मीलने आइ हे.. यहा सीर्फ हम दोनो अकेले ही हे..

देवायत : लेकीन बेबी कीसीने देखलीया तो गडबड होजायेगी.. अभीतो तेरी सगाइ हुइ हे..

पुनम : भाइ मुजे आपसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. मे यही होलमे आपका इन्तजार करुगी.. देर रात आजायेगा.. वरना हम पीछे सामको पार्कमे चले जायगे.. कहो कहा मीलोगे..?

देवायत : अ‍ैसी क्या बात हे जो पार्कमे बुला रही हे.. नही बेबी.. हम यही घरमेही बात करेगे..

पुनम : (गालपे कीस करते खडी होते) तो ठीक हे भाइ मे आपका यही होलमे इन्तजार करुगी भाभी सोजाये तब आजाना.. मुजे आपसे कुछ जरुरी बात करनी हे वोभी हम दोनोके बारेमे..

कहेते वो बहार चली गइ तो देवायत उसे देखतेही रेह गया ओर उनके दीलकी धडकन तेज चलने लगी.. पता नही क्यु अब उसने मानलीया था की मेरी बहेन अब बहेन नही रहेगी.. क्यु मेरे पीछे इतनी पागल हे.. जबकी लखन भीतो उनका भाइ हे.. ओर उनकीही उमरका हे.. फीरभी मेरे पीछे क्यु पडी हे..जरुर कोइ बात होगी.. ओर देवायत उसे नाराज भीतो नही करना चाहता क्युकी वो उसे बेहद प्यार करता था..

उसे बाबाकी सब बाते याद आने लगती हे, बाबानेही इन्डायरेक्टली अपनी बहेनसे सबंध होनेकी बात कही थी.. तो क्या मुजे मेरी बहेनसेही सब करना पडेगा.. यही सब सोचते उनका लंड खडा होने लगा अब वो अपनी बहेनको अलग नजरसे देखने लगा, वो जटसे बाथरुममे घुस जाता हे ओर फ्रेस होके बहार आता हे तब मंजु ओर रश्मी बाते कर रहीथी.. रश्मी देवायतके प्लानके मुताबीकही मंजुको मीलने आइ थी..तब देवायत मंजुके पास बेठ जाता हे तभी मंजु देवायतसे कहेती हे..

मंजुला : देवु.. ये रश्मीभाभी कुछ केह रही हे.. आप ठीकसे समजलो.. वो कोइ हमारे जमीनके कागजके बारेमे बात कर रही हे.. जो राधवजी ओर मुनीमजीने उनके घर रखे हे..

देवायत : (हसते) हां भाभी कहीये कीस कागजकी आप बात कर रही हे..?

रश्मी : (कातील स्माइल करती) देवरजी आपके भाइ ओर वो मुनीमजीने कुछ कागज रखे हे मेने देखा तो कुछ आपके नामके थे लगता हे आपकी कीसी जमीनके पेपर हे.. दोनोही मीलके कुछ खजानेकी बात कर रहेथे मेने कइ बार सुना हे.. ओर कुछ गांवके लोगोकेभी कागजात हे जो इन्होने ब्वाजके पैसे के बदले लेलीये हे.. सायद इनकीही सजा उनको मीली हे.. सब देखलो आप.. अबतो वो इनके कीसी कामके नही रहे..

देवायत : भाभी क्या गांवके लोगोकाभी हे..? कीतने कागजात हे..?

रश्मी : अरे बाबा बहोत हे पुरा बक्सा भरा हे सब कागजात देखनेमे पुरा दीन नीकल जायेगा.. आपकेभी बहोत सारे हे.. देखलो.. इनकी वजहसेही आपसे दुस्मनी मोडली.. ओर देखो.. आपही दोनोको होस्पीटल लेके गये.. देवरजी समय नीकालके देखलो ओर जीनके हे उसे देदो..

मंजुला : देवु कल कुछ खास काम ना होतो जाके देखलो.. हमारे गांवके गरीब लोगोके होगे.. देदो बेचारे खुस होजायेगे..बेचारे दो पैसे कमायेगे तो हमे दुआ मील जायेगी..

रश्मी : दीदी तबतो अच्छा हे कुछ लोगोकी दुआअ‍े मील जायेगी.. देवरजी आप देखलो.. ओर हां दीदी इनके खानेकी चीन्ता मत करना वहा देर होजायेगी तो मेही खीला दुगी ये वही खा लेगे मे बनादुगी..

मंजुला : (हसते) ठीक हे भाभी.. ये कल आजायेगे.. देखना इस बातका ओर कीसीसे जीक्र मत करना..

रश्मी : अरे नारे.. बाबा.. तभीतो सीधेही आपके पास चली आइ.. अब जोभी करना हे आप देखलो..मुजे इन कागजोसे कोइ लेना देना नही हे..

कहेते देवायतकी ओर कातील स्माइल करते देखती रही.. फीर कुछ बाते करके फटाफट चली गइ.. क्युकी कलके लीये उन्हे बहुत सारी तैयारीया करनी थी.. ये बात सीर्फ रश्मी ओर देवायतही जानते थे.. ओर इस बातके लीये रश्मी आज काफी अ‍ेक्साइटेड थी.. उधर चंदाके गांवमे चंदाने खाना बनालीया तो चंदा धीरे धीरे चलते सब खाना बहार लेके आगइ तो धिरेन उनको देखताही रेह गया..

क्युकी वोभी जवान ओर समजदार हो गयाथा उसे अपनी मम्मीके बेडकी हालत देखके कुछ संका होने लगीथी ओर अभी इनकी मम्मीको अ‍ैसे चलते देखके संका ओरभी मजबुत होगइ.. लेकीन वो अपनी मम्मीकी सीचुअ‍ेशनके बारेमे भी सोचता था तो मन ही मन खुसभी हो रहाथा तब दोनोही खानेके लीये बेठ गये तब चंदा धिरेनको सब जोबके बारेमे पुछने लगी.. तभी धिरेनने मौका देखतेही बात छेडदी..

धिरेन : (हीचकीचाते) मोम.. सुना आपने.. दीदीको क्या प्रोबलेम हुइ हे.. मुजे दीदीने सब बतादीया..

चंदा : (थोडा जेंपते) हां.. मुजे बताया उसने.. बहुत छुपाया..उसने.. ये सब करनेकी क्या जरुरतथी उसे..

धिरेन : (धीरेसे) मोम.., आपकी दीदीसे ओर कोइ बात हुइ.. मुजसे सब बाते बताइ हे..

चंदा : (सरमाते) हां.. हुइ बात लेकीन..(रुकते) मुजे पता हे.. तु क्या कहेना चाहता हे..

धिरेन : (हीचकीचाते धीरेसे) मोम.. वो आपके बारेमे..

चंदा : (अब खुलके बात करलेना चाती थी) हां.. में तभी तो इधर आगइ हु, वरना मंजुको कभीभी होस्पीटल लेजाना पडता हे.. धिरेन मुजे लगता हे इस बारेमे हमे अ‍ेक बार खुलके बात करलेनी चाहीये.. तुजे पता हे तेरी दीदी क्या चाहती हे..? बस मुजे सीर्फ तेरी राय जाननी हे.. तु क्या कहेना चाहता हे..

धिरेन : (मनमें खुस होते) मोम.. मेरे खयालसे दीदी सही केह रही हे..मोम..मुजे इस सादीसे कोइ प्रोबलेम नही हे.. आपको ये कदम पहेलेही उठालेना चाहीये था.. जब मे छोटा था.. खैर छोडीये उनको कबतक अ‍ेसे घुटघुटके जीयेगी.. मुजे पता हे अकेली ओरतको जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे..

चंदा : (हसते) अच्छा..? तुजे बडा ज्ञान हे इस बारेमे..?

धिरेन : मोम.. बुरा मत मानना.. मेने अ‍ेसे दोतीन केस देखे हे.. अ‍ेक मेरी टीचर ओर अ‍ेक मेरे दोस्तकी भाभी.. बस इनके आगे मे कुछ कहेना नही चाहता.. आप जोभी नीर्णय लेगी इसमे मुजे खुसी होगी..

चंदा : (धिरेनको परखते) अ‍ेक बार फीर सोचले.. मेरे इस कदमसे तुजे लोगोके तानेभी सुनने पडेगे..

धिरेन : मोम.. मुजे कीसीकी परवा नही.. बस मे आपकी खुसी चाहता हु.. मे चाहता हु आप अपनी बाकी की लाइफ खुलके जीये.. इनमे आपकीभी जींदगी सवर जायेगी ओर मंजुदीकी भी.. वरना उनका घरतो टुटही जायेगा.. वो आपको बहुत चाहती भी हे ओर मानती भी हे..

चंदा : (हसते) चल ठीक हे.. मुजे खुसी हे मेरा बेटा मेरे बारेमे इतना कुछ सोचता हे ओर मेरी केर करता हे..

धिरेन : (हसते) थेन्कस मोम.., तो क्या आप.. सादी..

चंदा : (सरमाते हसते) नही.. अभी देर हे.. अब जोभी नीर्णय लेना हे तेरी सादीके बाद.. तेरी पुनमकोभी तो बताना पडेगा.. अब हमे उनकाभी सोचना पडेगा.. देखतेहे वो क्या कहेती हे..

धिरेन : (सरमाते) मोम.. इस बारेमे मेरी पुनमसे बात होगइ हे.. वो राजी हे.. उसे कोइ अ‍ेतराज नही..

चंदा : (सरारतसे) अच्छा.. मेरा बेटा अभीसे बीवी की राय लेने लगा.., हें..हें..हें..




धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मोम.. आपभीनां.. चलो ठीक हे जेसे आपकी मरजी.. मोम.. आप जोभी नीर्णय लेगी.. ओर जबभी जाना चाहेगी.. हमे मंजुर हे.. बस..?

चंदा : (हसते) हंमम.. चल ठीक हे तेरी सादीके बाद कुछ सोचेगे..

अ‍ेसीही बाते करते दोनोने लंच फीनीस कीया दोनोने खुलके बात करलीतो दोनोही अपने आपको हल्का महेसुस करने लगे.. धिरेन उपर अपने रुममे जाने लगा तो बीचमे चंदाका रुम आया तो उसे देखे बीना नही रहा गया ओर वो धीरेसे अंदर चला गया देखातो पुरा बेड अस्त व्यस्त था ओर अचानक उनकी नजर नीचे फर्सपे चली गइ तो वहा बेडसे बाथरुम तक चंदा ओर देवायतके कामरसकी बुंदे फर्सपे गीरी हुइथी..

तब धिरेनको जरासी भी संका नही रहीकी उनके जानेके बाद उनकी मम्मी चंदा ओर जीजु देवायतके बीच क्या क्या हुआ हे.. वो फोरन अपने रुममे जाके बेडपे लेट गया ओर चंदा देवायतके बारेमे सोचता रहा उनको कब नींद आगइ पताही नही चला.. तो दुसरी ओर चंदा कीचनका सब काम खतम करके उपर आइ ओर अपना बेड अ‍ेसे खुला देखके चोंक गइ..

उसे अपने बेडरुमका दरवाजा बंध ना करनेकी गलतीका अहेसास होगया.. वो सोचते बेडको सही करने लगीकी कही ये धिरेनने देख तो नही लीया..? वो यही सब सोचके बहुतही सरमीन्दा होने लगी.. की धिरेनको पता चल गया तो मे केसे उनसे आंख मीला पाउगी.. ओर दुसरी ओर देवायतके बीना वो रेह भीतो नही सकती थी.. यही सोचते उसने बेडकी चदर चेन्ज करली ओर फर्सपे पोछा लगाके सब साफ भी करलीया.. वो देवायतसे चुदाइ करवाके बहुत थक गइ थी तो आराम करते बेडपे सो भी गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९

उसे अपने बेडरुमका दरवाजा बंध ना करनेकी गलतीका अहेसास होगया.. वो सोचते बेडको सही करने लगीकी कही ये धिरेनने देख तो नही लीया..? वो यही सब सोचके बहुतही सरमीन्दा होने लगी.. की धिरेनको पता चल गया तो मे केसे उनसे आंख मीला पाउगी.. ओर दुसरी ओर देवायतके बीना वो रेह भीतो नही सकती थी.. यही सोचते उसने बेडकी चदर चेन्ज करली ओर फर्सपे पोछा लगाके सब साफ भी करलीया.. वो देवायतसे चुदाइ करवाके बहुत थक गइ थी तो आराम करते बेडपे सो भी गइ....अब आगे

इधर हवेलीपे साम ४ बजे मंजु देवायतको जगाती हे तब देवायत फ्रेस होके चाइनास्ता करलेता हे ओर अपने खेतोपे चला जाता हे.. वहा हरीया ओर मालती कुछ काम कर रहेथे ओर मजदुरभी दुसरी जगह काम कर रहेथे अभी तक भानु नही आयाथा तब देवायत उन मजदुरके घर चला गया जीसे सरपंचने माराथा उनका बच्चा बहार खेल रहाथा तब देवायत बीना आवाज कीये उनके रुममे दरवाजा खोलके चला गया..

देखा तो वो मजदुर अपनी खटीयापे लेटा था ओर उनकी पत्नी उनके पैरके पास बेठे जुकके उनका लंड मुहमे लेके अंदर बहार कर रहीथी.. जेसे दरवाजेकी आवाज आइ तो दोनो अ‍ेक दम गभरा गये.. ओर वो फटसे खटीयासे उतर गइ तब मजदुरभी सरमाते जटपट अपना लंड लुंगीमे छीपा लेता हे ओर उनकी बीवी सरमाते अंदर कीचनमे चली गइ तब देवायत कुछ ना बोलते उनको कुछ पैसे देके बहार आजाता हे

ओर अपने गोडाउनमे चला जाता हे.. ओर अपनी ओफीसकी चेरमे बेठते मनही मन मुस्कराता हे.. वो उन मजदुर ओर उनकी बीवीकी स्थीती भलीभांती जानता था.. ये अ‍ेक सारीरीक जरुरत थी जो दोनो मीलके पुरी कर रहेथे.. तभी भानुभी अपनी मामीको छोडके सीधाही खेतोपे चला आया ओर आके बेठता हे तो देवायत दोनोके लीये चाइका बोलता हे तभी..

देवायत : (हसते) छोड आया अपनी मामी को.., हें..हें..हें..

भानु : (सरमाते हसते) क्या यार तुभी.. मजाक करता हे.. मुजे ही जाना था.. छोडके आगया..

देवायत : (हसते) अच्छा..? अ‍ेसेही छोडके आगया? तु इतनाभी भोला नही हे.., बोल.. कीतनी बार ली मामीकी हें..हें..हें..

भानु : (हसते) तुभीना.., बस दो बार.. अ‍ेक बार घरपे ओर आज सुबह उनके घरपे जब उसे छोडने गयाथा तब.. हें..हें..हें.. (सीरीयस होते) देवु.. सुन.. वो मामाका लीवर खराब होगया हे.. लगता हे कुछही दीनोके महेमान हे.. उनको कबसे खुनकी उलटीया हो रही हे..लगताहे वो अब ज्यादा दीन नही नीकालेगे..

देवायत : (थोडा गुसा होते) तो कमीने इधर लाना चाहीयेनां.. हम कीसी होस्पीटल लेजाते..

भानु : नही यार मामी दीखाके आइ हे.. वो डोकटरने मना करदीया.. यार अबतो हमारी बेटीपे भी हाथ उठाता हे.. वो मरजाये वोही अच्छा हे.. सुन देवा.. मे मामी ओर हमारी बेटीको अपने घर लेआना चाहता हु..

देवायत : क्या भावुको या कीसीको तुम दोनोके रीस्तोके बारेमे पता हे..?

भानु : नही यार मुजे नही लगता कीसीको हमारे बारेमे पता हो.. यार क्या मे मामीसे सादी नही कर सकता? उनको मेरी दुसरी बीवी बनाके रखना चाहता हु.. ओर मुजे लगता हे तुम इसके लीये भावुको मना लोगे..मे मामीको छोडभीतो नही सकता अबतो वो मुजेही अपना पती मानती हे..

देवायत : (हसते) साले मे क्या भावुका बाप लगता हु जो उनको तेरे लीये मनाउगा.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) नही यार.. वो तुजे बहुत मानती हे ओर तेरी कीसीभी बातको नही टालती.. जबभी हम उसे कुछ कहेते हे तो कहेती हे जीजुसे पुछ लुगी वो कहेगे अ‍ेसा करना हे.. बस.. तभी तुजे केह रहा हु..ओर कमीना दोस्तके लीये तु इतना नही कर सकता..?

देवायत : (हसते) ठीक हे यार सही मौका मीलनेदे.. मे अकेलेमे बात करलुगा.. ठीक हे..?

भानु : देवु आज दो पहरको घर गया था.. लगताहे टाइम नजदीक आगया हे.. भावु कुछ पेटमे दर्दकी बात कर रहीथी.. सायद रातको होस्पीटल लेजाना पडे, तुभी ध्यान रखना भाभीकोभी लेजाना पडे..

देवायत : भानु अगर लेजाना पडेतो वही लेके जाना जहा हम उनका चेकअप कराने लेजाते हे..वो डो. सृती घरकी ही हे.. मंजुकी बेस्ट फ्रेन्ड हे..

भानु : हां भाइ वही लेजाउगा.. क्या तुम मौसीको छोड आये..?

देवायत : हां यार आज सुबह ही छोड आया ओर सुन.. वो धिरेनकी नोकरी बेंकमे लग गइ..

भानु : (हसते) क्या..? चलो अच्छा हुआ.. हमारी पुनम उनके लीये लकी हे, सगाइ होतेही नोकरी लग गइ.. हें..हें..हें..

देवायत : भानु तुमसे अ‍ेक ओर बात करनी हे.. मेटर बहुतही सीरीयस हे.. अभी कीसीको कुछ नही बताना.. बात सीर्फ तेरे तक ही सीमीत रखना हे.. तु मेरा दोस्त हे तो तुमसे कुछ छीपाना नही चाहता..

भानु : (सीरीयस होते) यार क्या बात हे जो तु इतना टेन्शनमे बोल रहा हे कुछ सीरीयस मेटरतो नही..?

मालती : (चाइ लेके अंदर आते) लीजीये आपकी चाइ.. पीलीजीये ठंडी होजायेगी मे बादमे कप लेजाउगी..

भानु : (चाइका कप उठाते) हां भाइ बोल क्या केह रहा था..?

तभी भानु चाइ पीते धीरे धीरे करते मंजुके बारेमे सारी बात बता देता हे.. ओर मंजु क्या चाहती हे वो भी बता देता हे फीर वो चंदाके साथ सादीकी धिरेनकी परमीशनकी भी बात बता देता हे तब भानु सुनके सोक्ट होजाता हे..

भानु : यार येतो बहुतही सीरीयस मेटर हे.. लेकीन भाभीने अ‍ैसा क्यु कीया..? उनकोतो सब पता था..

देवायत : भानु वो मुजे बहोत प्यार करती हे.. वो अपनी कोखसे मुजे हमारा वारीस देना चाहती थी.. तो अपनी जांन दावपे लगादी.. सायद पुनम लखनकी सादीके बाद मौसी मेरे घर आजायेगी..

भानु : क्या मौसी सादीके लीये इतनी आसानीसे मान गइ..? वोतो बहुतही खुदार हे.. ओर पढी लीखी भी..

देवायत : (हसते) सुन.. जब मंजु ओर भावु सादीके बाद पहेली बार मायके गइथी.. तुजे याद हे..?

भानु : हां.. याद हे.. लेकीन तभीतो वहा मौसी नही आइथी.. अ‍ैसा भावु केह रहीथी..

देवायत : (हसते) कहासे आती.. तब हम दोनो साथ थे.. बस तबसेही हम दोनो रीलेशनमे हे..

भानु : (जोरोसे हसते) कमीने.. तुतो बडा छुपा रुस्तम नीकला? हें..हें..हें.. अबतक मौसीकी कीतनी बार ली, साले सच बताना.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कमीने वो मेरी बीवी हे.. हमने मंदिरमे गांधर्व सादी करली हे तो लुंगातो सही ना.. पता नही अबतक हम दोनो कीतनी बार मील चुके हे.. जबतक हवेलीपे थी तब लगभग रोज मीलते थे..

भानु : (हसते) चल यार ये तुने अच्छा कीया अ‍ेक विधवाको सहारातो मील गया.. क्या तुजे भाभीने सामनेसे कहा..? कही उनको तुम दोनोपे सकतो नही होगया था..?

देवायत : नही यार कोइ सक नही हुआ.. वो खुद मेरी सादी मौसीेसे करवाना चाहती हे बस वो अपनी मौजुदगीमेही मौसीको लाना चाहती हे..

भानु : हां यार.. भाभी तेरा बहुत खयाल रखती हे.. चल अच्छा हुआ.. वो धिरेनभी मान गया.. लडका बहुतही समजदार हे.. अपनी मम्मीकी सब तकलीफ समजता हे.. हमारी पुनमभी भाग्यसाली हे..

देवायत : भानु वो सबतो ठीक हे.. मे चाहता हु बच्चोकी सादी जल्दी होजाये.. पता नही डीलेवरीके बाद मंजुका क्या होगा.. वेसे अभीतो कुछ होने वाला नही हे.. फीरभी अ‍ेक डरसा लगा रहेता हे..

अ‍ेसीही बाते करते साम ढल गइ तब देवायत ओर भानु अपने अपने घर चले गये जेसेही भानु घरपे आया तभी लता भावना ओर सरला तीनोही बाते करते खटीयापे बेठी थी तो लता उठके कीचनमे चली गइ ओर भावनाभी भानुकी ओर देखे बगैर अपने रुममे चली गइ तब भानु सरलाके पास बेठ गया तभी लता उनको पानी देके चली गइ भानुने पानी पीकर ग्लास वहीपे रख दीया तब सरलाने उनकी ओर देखा..

सरला : छोड आया अपनी मामी को..? क्या कर रहा था तेरा मामा..?

भानु : क्या मां पीकर पडेथे खेतो पे.. अबतो उसे खुनकी उलटीयाभी होने लगी हे.. पता नही क्या होगा मामीका.. बेचारी नीलमपे भी हाथ उठाता हे..

सरला : (गुसेसे) ओर क्या..? मरेगा साला.. मर जाये तो अच्छा हे तेरी मामीको तो छुटकारा मील जायेगा..

भानु : मां मामीने उसे होस्पीटलपे दीखाया लीवर खराब हे अब कुछ नही हो सकता..

सरला : तबतो तेरा मामा कुछही दीनोके महेमान हे.. पता नही दारुकी लत कहासे लग गइ जब सादी हुइथी तबतो अ‍ैसा नही था.. खैर अबतो रमा ओर नीलमको इधर लाना हे.. बेचारी कीतनी मजदुरी करती हे तभी जाके दो रीटीया नसीबमे होती हे, भानु तु उसे यहा लेआना ओर उनका खयाल रखना बेचारी बहुत अच्छी हे

भानु : ठीक हे मां.., वो देवु केह रहाथा सादी थोडी जल्दी करनेको.. बस इनकी डीलीवरी होजाये..

सरला : (हसते) हां कर देगे.. तु इनको बोलना, वेसे कहा हे वो.. पहेलेतो बहोत आता था.. जबसे उनके बापु गुजर गये तबसेतो आनाही बंध करदीया, क्या काममे इतना बीजी होगया..

भानु : मांइ अब उनके उपर कामकी काफी जीम्वेवारीभी तो आगइ हे.. बेचारा सारा दीन भाग दोडही करता हे

सरला : कामतो वो पहेलेभी करता था उनके बापु कहासे बीस्तरसे उठ पातेथे.. खैर छोड उसे कहेना माइ याद कर रही हे मीलने आये.. तब हम सादीकी बात करलेगे.. चल जा.. हाथ मुह धोले खाना नही खाना क्या..?

तब भानु फ्रेस होके अपने रुममे चला जाता हे तो भावना उनके सामने बीना देखेही बहार आके कीचन मे चली जाती हे.. ये बात भानुने नोटीस करली जबसे आया हे भावना अ‍ेक बारभी उनके सामने नही बोली.. ओर नाही सामने देखा.. भानुको ये बात थोडी अजीब लगी.. ओर वो हाथ पोछते बहार आगया ओर सब साथमे खाना खाने बेठ गये.. तबभी भावना भानुकी ओर नही देखती थी.. जेसे कोइ अन्जान हो..

इधर हवेलीपे देवायत आताहे तो मंजु उसे देखते स्माइल करने लगी ओर वो देवायतके लीये नेपकीन लेके बहार खडी रही तब देवायत फ्रेस होगया ओर मंजुसे नेपकीन लेके हाथ पोछने लगा ओर उनको लेके पुनमके पास सोफेपे बेठ गया तब मंजु भी इनसे चीपकके बेठ गइ तो देवायतने बेठते ही कहा..

देवायत : मंजु अब तुम अ‍ेसे चलना फीरना बंध करदो मे खुद करलुगा बस अब तुजे सीर्फ आरामही करना हे

पुनम : (तीरछी नजररोसे हसते) भाइ मेनेतो कहा.. लेकीन मेरी कहा सुनती हे.. कीतनी बार कहा भाइका सब काम मे करदुगी..(डबल मीनींग) लेकीन इनकोतो पतीकी सेवाजो करनी हे, हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते) चल जुठी.. तेरी सादी होगी तब करना.. अपने पतीकी सेवा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते चीडते) क्या भाभी.., मुजे नही करनी सादी.. देखना आपके साथ ही रहुगी.. (मनमे- आपकी सौतन बनके..)

मंजुला : (उनका सर सहेलाते) अरे मेरी बच्ची लडकीया घरमे थोडीना बेठती हे.. अ‍ेक दीनतो उसे ससुराल जानाही पडता हे..

पुनम : (हसते) ठीक हे.. लेकीन अब आप कोइ काम नही करेगी.. आपको जोभी चाहीये मुजसे बोलना.. ओर भाइकी चीन्ता मत करो.. मे हुनां.. उनकाभी सब काम मे कर दुगी.. ओके..?

मंजुला : (हसते) चल ठीक हे मेरी मां.. सब समज गइ.. चल दयाको बोल खाना नीकाले..

तब पुनम हसती हुइ खडी होजाती हे ओर मंजुके गालपे अ‍ेक कीस करते कीचनमे चली जातीहे तो मंजु ओर देवायत दोनोही हसने लगते हे.. फीर दोनो डाइनींग टेबलपे चले जातेहे तब दया रजीया दोनोही खाना परोस देतीहे तो पुनम देवायतके पास बेठ जातीहे तभी खाना खाते मंजु धिरेनकी नोकरीके बारेमे बाते करती हे तो पुनम खुब सरमाती बाते सुनते अपने पेरसे देवायतके पेरको सहेलाती रहेती हे..

तब देवायतभी धीरे धीरे पुनमकी ओर ढलने लगा अब उससे पुनममे उनकी बहेन नही अपनी मासुका नजर आने लगी ओर वोभी उतेजीत होते धीरेसे पुनमके पैर सहेलाते उनकी जांगोपे हाथ रख देताथा..तब पुनम सरमसे पानीपानी होजाती थी ओर उनकी चुत फडफडाते पानी छोडने लगती थी..

देवायत : मंजु सोच रहा हु तेरी डीलेवरीके बाद पुनम लखनकी सादीकी तारीख नीकलवा लु..

पुनम : (सरमाते) भाइ इतनीभी क्या जल्दी हे.. कुछ दीनतो मुजे आपके साथ रहेने दो.. फीर वो अ‍ेडमीशन लेनेभी जाना हे..

मंजुला : (हसते) पुनो तेरे भाइके साथ चली जाना.. ओर सादीके बादभीतो पढाइ करनी हे.. तो फीर क्या हर्ज हे..?

पुनम : भाभी तब बच्चाभीतो बहुत छोटा होगा.. केसे सम्हालेगे..?

मंजुला : (हसते) तु इनकी चीन्ता मत कर वो चंपाभाभी आजयेगी ओर तेरी सासभीतो होगी.., हें..हें..हें.., फीर तुम दोनो मीया बीवी वहा अकेले मजे करना हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) क्या भाभी आपभीनां..मुजे कोइ मजे नही करना जोभी मजा करना हे मे यही करुगी क्यु भाइ..?

कहेते फटाफट पानी पीते अपने रुममे भाग गइ तब देवु ओर मंजु दोनो हसने लगे.. फीर दोनो खाना खाके अपने रुममे चले गये तब दया ओर रजीया खाना खाने बेठ गइ तब दोनोही बाते करने लगी..

रजीया : दया अब काफी दीन होगये मालीक हमे मीलने ही नही आते..

दया : आजायेगे.. अब वहा इतना काम बढ गया हे.. तो टाइम नही मीलता होगा.. वेसे वो मुजे दो बार करके तो गयेथे.. क्या तेरे पास नही आये..? अ‍ेक बारतो दोनोके पास आयेथे..

रजीया : (सरमाते) वोतो काफी टाइम होगया.. अबतो मे सोचतीहु मालीकसे अ‍ेक बच्चा करलु..

दया : मेनेतो कीतनी बार कहा हे.. हमारे जीनेका सहारातो होजायेगा.. मे उनसे बात करुगी..

रजीया : (सरारतसे) अगर हमेभी लडकीया हुइ तो..? हें..हें..हें..

दया : (हसते मजाकमे) तो क्या हुआ.. जीस तराह हम मालीककी सेवा करती हे तो हमारी लडकीया उनके बेटेकी सेवा करेगी हें..हें..हें..

रजीया : (हसते) कीतनी कमीनी हो.. वोभीतो इन्हीकी लडकीया होगी.. तो क्या अपने भाइसे चुदवायेगी..हें..हें..हें..

दया : (हसते) हां यार.. तो अच्छा हेना.. घरका माल घरमेही रहेगा.. हें..हें..हें..

रजीया : (हसते) वो छोड यार मेने सुना हे वो सरपंचकी बीवी पेटसे हे..?

दया : हां मेनेभी सुना हे.. मुआ खटीयापे जाते जाते उसे बच्चा देगया.. पता नही कीसका होगा..

रजीया : (धीरेसे) सुना हे हमारे मालीकसे उनकी बीवीके साथ संबध बहुतही अच्छे हे.. कही इनसेतो..

दया : (धीरेसे) चुप कर.. कमीनी कीसीने सुन लीयातो..? क्या पता.. फीरभी अच्छा हे.. वेसे क्या गदराया माल लगती हे.. कीसी हीरोइनसे कम नही लगती.. मालीकके तो मजे हे.. देखा नही वो मौसीभी केसी नजरोसे मालीकको देखती थी.. लगता हे उन दोनोकाभी टाका भीडा हुआ हे.. वोभीतो विधवा हे..

अ‍ेसी ही बाते करते दोनो खाना खाके सब काम नीपटाने लगी फीर अपने रुममे चली गइ ओर दोनोही कामुक बाते करते गरम होगइ थी तो दोनोने फटाफट अपने कपडे नीकाल दीये ओर अ‍ेकही बेडपे आके दोनो अ‍ेक दुसरेसे अपनी चुतको सहेलाते उंगली करवाने लगी जब दोनोही जड गइ तब अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गइ..




इधर रुममे देवायत ओर मंजु दोनोने चेन्ज करलीया ओर नाइट ड्रेसमे दोनो बेडपे आगये.. तब मंजु देवायतके सीनेपे सर रखते धीरेसे लेट गइ तो देवायतने उनको पीछेसे हाथ डालके अपनी बाहोमे लेलीया अब मंजुका पेट काफी नीकल चुकाथा तो देवायत बडीही सावधानी रखते उनके पेटका खयाल रखता..तब मंजुको देवायतपे बहुत प्यार आने लगा.. ओर उसने देवायतके होंठ चुमलीये.. फीर उनकी ओर देखते कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३०

इधर रुममे देवायत ओर मंजु दोनोने चेन्ज करलीया ओर नाइट ड्रेसमे दोनो बेडपे आगये.. तब मंजु देवायतके सीनेपे सर रखते धीरेसे लेट गइ तो देवायतने उनको पीछेसे हाथ डालके अपनी बाहोमे लेलीया अब मंजुका पेट काफी नीकल चुकाथा तो देवायत बडीही सावधानी रखते उनके पेटका खयाल रखता..तब मंजुको देवायतपे बहुत प्यार आने लगा.. ओर उसने देवायतके होंठ चुमलीये.. ओर उनकी ओर देखते कहा....अब आगे

मंजुला : जानु लगताहे अ‍ेक दो दीनमे हमे होस्पीटलपे भागना पडेगा.. आज सुबहसेही बहुत बेचेनी जेसा लग रहा हे..

देवायत : हां.. वो भानुभी वोही केह रहाथा की भावुको हल्कासा दर्द होने लगा हे..

देवायत : यार सुबह तक क्यु वेइट करना कहोतो अभी लेके आजाउ..?

मंजुला : नही इतनीभी तकलीफ नही हे आप उसे सुबह बुला लेना.. क्या मेरा बाबु प्यारके बीना रेह सकता हे..? हें..हें..हें.. जानु इस हालतमे मे कुछ नही कर सकती..

देवायत : (हसते) कोइ बात नही फीर अ‍ेक साथ वसुल करलुगा.. चल अब सोजा..

मंजुला : जानु वो पुनम कुछ उखडी उखडी रहेती हे.. आप अ‍ेक बार उनसे ठीकसे बात तो करलो.. उनको कोइ प्रोबलेमतो नही हेना..? वो इस सगाइ से खुसतो हेनां..?

देवायत : अरे हां.. तु क्यु गलत सोच रही हे.. वोतो धिरेनको देखतेही सरमाते पागल हो गइथी उसे धिरेन बहोत पसंद हे मेने पुछ लीया था.. तु फीकर मत कर..

मंजुला : तो फीर वो उदास क्यु लग रही हे.. आप उसे बात करलेना उसे कुछ चाहीयेतो नही..

देवायत : चल ठीक हे मे बात कर लुगा तु टेन्शन मत ले..




अ‍ैसीही बाते करते दोनोही सोने लगते हे तब थोडीही देरमे मंजुको नींद आने लगी.. ओर देवायतके हाथको तकीया बनाके सो गइ तब देवायत करवट लेके दुसरे हाथसे मंजुके सरको सहेलाने लगा ओर आंख बंध करते पुनमके बारेमे सोचता रहा.. उनको आज देर रात पुनमने मीलनेके लीये बुलाया था तबसेही उनके मनमे पुनमके बारेमे घमासान विचारोका युध्ध चल रहाथा उसे बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बात याद आने लगी.. ओर पुनमको अपनी बहेन ना मानके उसे अ‍ेक पत्नीके रुपमे इमेजींग करने लगा.. उनको काफी अंदाजा हो गयाथा की पुनम उनसे क्या बात करना चाहती होगी..

देवायत : (मनमे) पुनमने मुजे देर रात क्यु बुलाया होगा? वो क्या बात करना चाहती होगी? क्या मुजसे प्यारका इजहार करना चाहती हे.. नही नही प्यारका इजहारतो वो पहेलेही कर चुकी हे.. तो फीर क्या मुजसे.. सेक्स.. नही नही.. तो फीर इनती रात मुजे क्यु बुलाया.. चलोे जाके देखते हे वो क्या कहेती हे जोभी हो मुजे इनकी बात माननेके अलावा कोइ रास्ताभी तो नही दीखता बाबानेभी कहा हे वो तेरी बीवीही हे.. तो मुजे इनको स्वीकार करनाही पडेगा.. यही सोचते आंख बंध करते लेटा रहा..

तब पुनम अपने रुममे जातेही दरवाजा बंध करलेती हे ओर देवायतकी तस्वीर नीकालके बेडपे लेटे उनसे बाते करने लगती हे.. ओर अपने बुब्स ओर चुतको सहेलाने लगती हे.. आज वो देर रात अपने भाइको मीलनेके लीये बहुतही अ‍ेक्साइटेड हो रहीथी..आज वो खुलके देवायतसे सब बात करलेना चाहती थी.. क्युकी जीस तराह धिरेन उनके पीछे पागल था ओर फोनपे सबकुछ करवा रहा हे इनसे पुनमको डर लगने लगाथा..

कही पुनमकी वर्जीनीटी खतम ना होजाये.. यही सोचते चुतमे उगली डालके जोरोसे हीलाने लगी ओर अपने भाइ देवायतसे अपने पतीके रुपमे चुदवाती इमेजींग करती रही ओर जोरोसे उंगली अंदर बहार करती रही तब थोडीही देरमे उनकी चुतसे अ‍ेक पानीका फवारा नीकल गया तब वो खुब सरमाइ फीर अपनी चुतको साफ करके बाथरुममे चली गइ ओर नहाके बहार आगइ ओर नाइटके कपडे पहेन लीया.. तभी धिरेनका फोन आगया तो उनसे बात करने लगी..




धिरेन : हाइ बेबी क्या कर रही हे..

पुनम : हाइ.. कुछ नही बस आपके फोनका इन्तजार कर रहीथी.. कहो क्या कर रहे हो..

धिरेन : (हसते) बस तेरी यादमे बेडपे करवटे ले रहा हु.. बस अबतो तुम जल्दी आजाओ..

पुनम : (सरमाते) बस कुछ दीन इन्तजार करलो.. फीर हम मील जायेगे.. जानु मुजेभी जल्द आना हे..

धिरेन : आजाओ बेबी अब नही रहा जाता.. वेसे आज क्या पहेना हे..

पुनम : (सरमाते हसते) अभी क्या पहेनुगी..? वोही नालटड्रेस..

धिरेन : (हसते) अरे बाबा वो नही.. मे अंदरकी बात कर रहा हु.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) चल हट.. बेसरम.. तुम बहोत नोटी हो.. यार सरम आ रही हे..

धिरेन : (हसते) अरे बाबा बताओनां.. क्या तुम्हारा मन नही हे..?

पुनम : (सरमाते) नही पता मुजे.. क्या क्या पुछते हो.. क्या मम्मी सोगइ..?

धिरेन : (हसते) हां.. अभी अभी अपने रुममे गइ हे.. सुन पुनो.. तुजसे अ‍ेक बात कहेना चाहता हु..

पुनम : (हसते) क्या..? क्या मम्मीसे कुछ बात हुइ.. भाइके बारेमे..? बताओनां..

धिरेन : (हसते) हां.. आज हम दोनोने खुलके बात करली.. वो राजी हे.. बस सीर्फ मुजे पुछना था तो मेने हा केह दीया तब वो मनमे बहुत खुस लग रही थी.. ओर सुन.. मुजे लगता हे आज जब जीजु छोडने आये ओर मे नोकरीके लीये चला गया.. तब लगता हे पीछेसे दोनोके बीच कुछ हुआ हे.. मतलब.. सेक्स..

पुनम : (अ‍ेकदम सरमाते) छी.. तुम बहोत गंदे हो.. अपनी मम्मीके बारेमे अ‍ैसी बात करते हो..?

धिरेन : (हसते) तो क्या हुआ.. वेसेभी वो जीजसे सादीतो करही रही हे.. मे इसे गलत नही मानता..

पुनम : धिरेन लेकीन अभी दोनोकी सादी कहा हुइ हे.. तो फीर ये गलत नही हे..?

धिरेन : (हसते) अरे बेबी इनमे कुछ गलत नही हे.. बस अ‍ेक तुही हे जो नखरे कर रही हे.. वरना..

पुनम : (अ‍ेकदम सरमाते) वरना.. क्या..? तुम बहोत बीगड गये हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : हां तेरे प्यारमे बीगडा हु.. पुनो चल आजानां.. मे मम्मीसे बात करके तुजे यहा बुला लुगा..

पुनम : (हसते) नारे बाबा ना.. मे सादीसे पहेले वहा नही आउगी.. पता नही फीर तुम मेरे साथ क्या क्या करोगे.. मुजेतो डर लग रहा हे बाबा.. मे नही आउगी.. तुजे इधर आना हे तो आजा.. हें..हें..हें..

धिरेन : क्या पुनो.. सादीतो होही जायेगी लेकीन सादीसे पहेले कुछ मजे करते हेनां.. चलना सीर्फ अ‍ेक बार करेगे.. फीर सब सादीके बाद..

पुनम : (सरमाते) धिरेन मे फोन रखती हु.. कल बात करेगे.. गुड नाइट..

धिरेन : अरे सुन नाराज क्यु होती हो.. चल कोइ बात नही हम सादीके बाद करेगे लेकीन तुने बताया नही क्या पहेना हे.. प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार देखना हे..

पुनम : (सरमाते) क्या..? हें..हें..हें..

धिरेन : यार तु नखरे बहोत करती हे.. मे कहा कुछ कर रहा हु सीर्फ देखने को केह रहा हु..

पुनम : यार सरम आ रही हे.. समजोनां..

धिरेन : (थोडा नाराज होते) चल ठीक हे मत बता अब मे दुबारा फोन नही करुगा रखता हु..

पुनम : अरे सुनो.. नाराज होगये क्या..? चलो ठीक हे.. बताती हु लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार..

कहेते वो अपना मोबाइल अ‍ेक जगह सेट करती हे ओर अपना गाउन नीकालके सीर्फ ट्रान्सरन्ट ब्रा पीन्टीमे रहेती हे जो उनके भाइ देवायतने उसे दीलवाइथी, वो सीर्फ वोही ब्रा पेन्टी पहेनती थी जीनको देवायतने दीलाइथी वो मोबाइलके सामने खडी होगइ ओर अ‍ेक मोडेलकी तराह पोज देने लगी जीसे देखके धिरेन बहुत खुस होगया.. वो काफी देर खडी रही फीर अपना गाउन पहेनलीया ओर बेटपे मोबाइल लेके लेट गइ..




पुनम : अबतो मेरे सोना खुस..? कहो मे कैसी लग रही थी..?

धिरेन : (हसते) अ‍ेक दम होट.. अ‍ेन्ड सेक्सी..

फीर दोनो वापस बाते करने लगे बाते करते दोनोही उतेजीत होने लगे ओर अपने अपने लंड चुतको सहेलाने लगे.. जब धिरेन जड गया पुनम अभी दुसरी बार जडने वाली थी जब वोभी जड गइ तब दोनोने बाते करके फोन काट दीया, फीर पुनम बाथरुममे जाके सब साफ करके आगइ ओर थोडा बाल सही करते ढीली चोटी बनाली ओर सवरने लगी फीर अपना नाइटड्रेस पहेनके बहार आगइ तबतक सब लोग सो चुकेथे..

वो जाके सीधी देवायतके रुमके पास चली गइ ओर खीडकीसे जांकनेकी कोसीस करने लगी तब मंजु सो चुकीथी तब वो होलमे आगइ ओर सोफेपे बेठते देवायतका इन्तजार करने लगी.. तभी २० मीनीटके बाद दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ तो पुनमने पीछे मुह घुमाके देखा तो देवायत बहार आके दरवाजा बंध कर रहा था.. तब पुनमके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर देवायतके सामने देखती रही.. तभी देवायत उनके पास आ गया ओर उनसे चीपकके बेठ गया.. आज पुनममे उसे अपनी बहेन नही अपनी बीवी नजर आ रहीथी..

देवायत : हां छुटकी बोल क्या कहेना चाहती थी..

पुनम : (नजर जुकाते) भाइ मुजे आपसे कुछ कहेना हे.. आप इतनी जल्दी सादी क्यु कर देना चाहते हे..?

देवायत : बेबी इतनी जल्दी कहा.. अब तु सादीके लायक होगइ हे.. ओर अ‍ेक दोढ महीनेके बादही करेगे.. क्यु कुछ प्रोबलेम हे..?

पुनम : भाइ अभी राखी हे आप मुजे क्या तोहफा दे सकते हे..?

देवायत : बेबी वोतो तुने कहा हे मे वक्तपे मांग लुगी.. बोल क्या चाहीये तुजो कहेगी मे तुजे दुगा..

पुनम : भाइ अ‍ेसे नही आपको मुजे वादा करना पडेगा

देवायत : (हसते पुनमके सरको सहेलाते) अरे मेने तुजे आज तक कीसी बातके लीये मना कीया हे क्या..? तो फीर मुजसे क्यु वादा मांग रही हे.. फीर भी चल दीया.. आइ प्रोमीस.. बोल क्या चाहीये..?

पुनम : (सर जुकाते) भाइ बताती हु.. लेकीन पहेले मेरी बात सुनले.. मे ये सादी सीर्फ नामकीही कर रही हु ताकी हमारे रीस्तेको समाजसे छुपा सकु.. मुजे सीर्फ आपसे मतलब हे ओर मे आपसेही पहेली सादी करना चाहती हु.. मेरे पहेले पती आपही रहोगे अब आप देखलो सब केसे मेनेज करना हे..

देवायत : छुटकी क्या सादी करना जरुरी हे..? क्या हम अ‍ेसेही प्यार नही कर सकते..?

पुनम : भाइ मुजसे सीर्फ सादीही नही करनी हे बल्की सादीके बादभी मुजे ओर चीज चाहीये सादीके बाद रहुगी तो मे धिरेनके साथही..

देवायत : तो फीर मुजसे सादी क्यु करनी हे.. मेतो अ‍ेसेही वहा आता जाता रहुगा..

पुनम : (सरमाते नजर जुकाते) भाइ यही समजलो ये मेरी राखीका तोहफा हे.. मेरा पहेला पती आपही होगे.. ओर मेरा कोमार्य सीर्फ आपकोही सोंपना चाहती हु.. वोभी मेरी धिरेनसे सादीके पहेले.. ओर वादा करो.. मेरे जीतनेभी बच्चे होगे.. सीर्फ हम दोनोके होगे.. बस यही मेरा तोहफा हे..

देवायत : (सोक्ट होते) बेबी तु ये क्या बोल रही हे.. अ‍ैसा नही हो सकता.. तु कुछ ओर मांगले..

पुनम : भाइ मुजे कुछ ओर नही चाहीये.. मे सारी जींदगी आपकी बीवी बनके रेहना चाहती हु.. भलेही आप मेरी साससे सादी करले.. लेकीन हमारा रीस्ता वोही पत्ती पत्नीका रहेगा.. समाजके लीये मे धिरेनकी बीवी रहुगी.. ओर मनसे तनसे ओर बीस्तरमे सीर्फ आपकी बीवी रहुगी.. आइ प्रोमीस.. वरना मेरे लीये इस जीवन का कोइ मतलब नही..

देवायत : (पुनमको हग करते) बेबी तु ये क्या बोल रही हे.. मेरी तो कुछ समजमेही नही आता.. तु जीवनकी बात मत कर.. अ‍ेकतो हाथसे छुटती जा रही हे.. ओर तुमभी..

कहेते देवायतके आंसु नीकलने लगे तब पुनमने देखलीया तो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे ओर उनके सीनेमे सर छुपाके आंसु बहाने लगती हे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके आंसु पोछने लगतेहे फीर पुुनम देवायतका चहेरा अपने दोनो हाथमे थामते उनकी आंखोमे देखती रहेती हे..

पुनम : भाइ प्लीज.. मान जाओ.. मे आपके बीना जीन्दा नही रेह सकती.. यही समजलो मेरी जान आपमे बसती हे.. जबसे होंस सम्हाला हे तबसे मेने आपको अपना पती माना हे.. मे सीर्फ आपके लीयेही जी रही हु.. मुजे नीरास मत करो.. मे आपको जींदगी भर पत्नीका प्यार देना चाहती हु.. ओर दुगी भी..

देवायत : लेकीन बेबी अगर धिरेन या चंदाको पता चल गया तो..?

पुनम : भाइ नही चलेगा.. सबके सामनेतो आप मेरे भाइही रहोगे.. बस हम अकेले होगे ओर बीस्तमे होगे तबही हम पती पत्नी होगे.. आइ प्रोमीस.. प्लीज.. मान जाओ..

देवायतके पास इनकी बात माननेके अलावा कोइ रास्ता नही था उन्होने ये रीस्ता रोकनेकी हर कोसीस की लेकीन अपनी बहेनके प्यारके आगे वो वीवस होगया इनको बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बात याद आने लगी.. बाबाने उसे स्पस्ट केह दीयाथाकी तुम दोनोका रीस्ता पती पत्नीका होगा ओर आज ये बात सच हो रहीथी.. तब देवायतने धीरेसे अपना हाथ पुनमके हाथमे रख दीया ओर दोनोने अपनी उंगलीया आपसमे फसाली..




देवायत : (हसते) ठीक हे बेबी.. आजसे तेरी हर बात मे स्वीकार करता हु.. ओर तेरी हर इच्छा मे पुरी करुगा.. बस ये तेरी भाभीकी डीलीवरी होजाने दे.. फीर हम कुछ सोचते हे आगे क्या करना हे..

पुनम : (खुस होते हग करते) ओह.. थेन्कयु भाइ.. थेन्कयु सो मच.. आज आपने मेरी हर तम्मना पुरी करदी.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (हसते) लव यु टु बेबी.. क्या अबभी मुजे भाइ कहेगी..?

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. आप मेरे भाइही रहोगे.. क्युकी भाइसे सादीकी मेरी फेन्टासी हे.. ओर मे आपको भाइ ही कहुगी ओर भाइकी पत्नीही बनुगी.. बीस्तरमे भी भाइ कहुगी.. क्या तुम अपनी बहेनो को..चो..

देवायत : (आंख बडी करते हसते) क्या..? क्या बोला तुमने..?

पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) धत् कुछ नही भाइ.. मुजे सरम आ रही हे..आप बहुत नोटी हो..




कहेते पुनमने सर जुका लीया ओर सरमसे मुस्कराती रही.. तब देवायतने उनका चहेरा दाढीसे पकडते थोडा उचा कीया तो अ‍ेक नजर देवायतकी ओर देखते अपनी नजर जुकाली ओर सरमाती रही तब देवायतने दोनो हाथ उनके गालपे रखके चहेरेको थाम लीया ओर अपनी ओर कीया तब पुनम नजर जुकाते चोर नजरसे देवायतको देखती रही ओर देवायतने उनका चहेरा पकडते धीरे धीरे अपनी ओर करने लगा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३१

कहेते पुनमने सर जुकालीया ओर सरमसे मुस्कराती रही.. तब देवायतने उनका चहेरा दाढीसे पकडते थोडा उचा कीया तो अ‍ेक नजर देवायतकी ओर देखते अपनी नजर जुकाली ओर सरमाती रही तब देवायतने दोनो हाथ उनके गालपे रखके चहेरेको थाम लीया ओर अपनी ओर कीया तब पुनम नजर जुकाते चोर नजरसे देवायतको देखती रही ओर देवायतने उनका चहेरा पकडते धीरे धीरे अपनी ओर करने लगा....अब आगे

तब पुनम समज गइ उनका दील जोरोसे धडकने लगा ओर उनकी सांस तेज होने लगी तब देवायत उनकी गरम सांसोको महेसुस करते साफ सुन रहाथा ओर दोनोके चहेरे अ‍ेकदम नजदीक आगये तब देवायतने दोनो हाथसे उसे बाहोमे भरते नजदीक खीचलीया तभी पुनम आनेवाले पलके बारेमे सोचते बहुतही अ‍ेक्साइटेड होगइ ओर कांपने लगी अपने भाइसे प्यारका इजहार करते अपने यारसे पहेला ओफीसीयल चुंबन करने जा रहीथी ओर उसने अपनी आंख बंध करली ओर आखीर दोनोके होंठ मील गये..

तब पुनमनेभी अपने दोनो हाथ देवायतकी गरदनमे डालके जुडा बना लीया ओर आंख बंध करते दोनो स्मुच करते मदहोसीकी ओर ढलने लगे.. तभी पुनमने अपना मुह थोडा खोल दीया ओर अपनी जीभ थोडी बहार नीकाल ली तब देवायत उसे मदहोस होके चुसने लगा तब पुनम कामातुर होने लगी ओर अपनी आधी आंख चडाली.. जेसे उनपे कोइ नसा छागया हो.. उनकी चुतके दोनो होंठ फडफडाने लगे..




तब देवायतभी अपनी जीभ नीकालके पुनमकी जीभसे पेच लडाने लगा ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहमे अपनी जीभ घुसानेकी कोसीस करने लगे दोनोके मुहसे लगातार रस नीकल रहाथा दोनोही अ‍ेक दुसरेके रसको पीने लगे.. तभी देवायतका अ‍ेक हाथ चुबन लेते पुनमके बुब्सपे चला गया ओर उसने हल्कासा दबा दीया तब पुनमके सरीरमे अ‍ेक कंपनकी लहेर दोडने लगी ओर पुनम पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी..




उसने फोरन अपना हाथ देवायतके बुब्सवाले हाथपे रखदीया ओर खुद देवायतके हाथपे दबाव बनाने लगी.. जेसे केह रही हो जोरोसे मसल डालो.. उनकी चुत लगातार फडफडाते पानी बहाने लगी.. ओर देवायतभी आज अपनी बहेनको प्यार करते पागल हो रहाथा वो आज अ‍ेसे रीस्तोसे पहेली बार बंध रहाथा जो उनकी मासुका खुदकी बहेन थी..जो अभी उनकी बाहोमे होके अपने होठोके रसको पीला रही थी वो आज सबसे ज्यादा अ‍ेक्साइटेड था ओर लगातार बुब्स मसलते पुनमको कीस कर रहाथा..

तो दुसरी ओर पुनमभी आज अ‍ेक साथ अपने भाइका सब प्यार बटोर लेना चाहती थी.. वो मनही मन चाहतीथी की उनका भाइ आजही उनका कौमार्य भंग करके उसे जमकर चोदले.. वो देवायतसे आजही चुदवानेके लीये मन बना चुकीथी.. ओर उसने चुंबज करतेही अपना हाथ देवायतके पेन्टके उभारपे रख दीया ओर पेन्टके उपरसेही देवायतके बडे लंडको महेसुस करते मसलने लगी.. वो अलग होते वासनाभरी नजरोसे देवायतको देखते उनकी पेन्ट खोलने लगी..




देवायत : (उसे रोकते) नही बेबी.. आज नही.. मंजु कभीभी उठ सकती हे.. हम इसे स्पेसयल दीनमे करेगे.. हमारी सादीके बाद.. क्युकी तेरा पहेली बार हे तो थोडा दर्द होगा.. तुजे आराम करना पडेगा..

पुनम : (सरमाते कामुक आवाजमे) प्लीज..भाइ.. कुछ नही होगा, मे दर्द सहेन करलुगी, प्लीज..मान जाओ..मुजे आजही आपका प्यार चाहीये मे आपके बगैर नही रेह सकती प्लीज..चलो मेरे रुममे..

देवायत : पुनो मान जा अबतो मे तेरा होचुका हु.. तु जो कहेगी सब करुगा.. लेकीन आज नही.. पहेले हमारी सादी होजानेदे.. आजसे तु मेरी बहेन नही.. मेरी मासुका मेरी हमसफर.. मेरी बीवी हे..

पुनम : (जोरोसे बाहोमे भरते) ओह.. भाइ थेन्कयु वेरी मच.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : लव यु टु डार्लींग.. सीस्टर.. बस कुछ दीन इन्तजार करले मेरी अ‍ेक स्पेसीयल जगाह हे.. हम वही जाके सादी करलेगे.. सबसे छुपके.. ओर सबकुछ होगा जो तु चाहती हे.. अब खुस..?

पुनम : हां भाइ.. बहुत खुस हु.. बस सादी होजाने दो फीर दुसरा सारा इन्तजाम मे करलुगी.. अब मुजे धिरेनसे सादी करनेमे कोइ अ‍ेतराज नही.. वरना नही करने वालीथी..

देवायत : चल अब सोजा.. मुजेभी बाथरुममे जाना पडेगा, हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) आप बहुत नोटी हो.., मुजेभी.. हें..हें..हें.. चलोना मेरे रुममे कही जानेकी जरुरत नही हे.. वही साथमे करेगे..

देवायत : नही बेबी आज नही.. वरना आजही हमारी सुहागरात होजायेगी..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हो जानेदो भाइ मे रेडी हु.. चलोना.. प्लीज.. कुछ नही होगा.. बहुत मन हो रहा हे..

देवायत : नही बेबी तु समज.. इसे हम स्पसेसीयल बनायेगे सीर्फ हम दोनो होगे तब.. फीर वो यहा हो या सहेरकी कोइ होटेलमे.. बस कुछ दीन इन्तजार करले..फीर तेरी सारी तम्मना पुरी कर दुगा..

पुनम : ओके जानु.. जेसे आपकी मरजी.. लव यु..(कीस करते) मुंउउहाआआ..

देवायत : हं.. चल ठीक हे अब सोजा आइ लव यु अ‍ेन्ड गुडनाइट..

पुनम : (कीस करते) गुडनाइट भाइ.. लव यु टु..

कहेते देवायत जटसे अपने रुमकी ओर चला गया क्युकी खुदको बडी मुस्कीलसे कंट्रोल कीया था अगर पुनमने थोडीसी ओर जीद की होतीतो वो अपने आपको रोकनेमे असमर्थ होजाता ओर अपनी बहेनकी आजही चुदाइ कर डालता.. तब पुनमभी खुस होते अपने रुममे जाके दरवावजा बंध करलेती हे ओर अंदर जातेही खुसीके मारे नाचने लगती हे ओर वो फटाफट अपने सब कपडे नीकालके बेडपे लेट जाती हे ओर देवायतको अपने पतीके रुपमे इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालके धीरे धीरे सहेलाने लगती हे..




तभी जोसमे थोडीही देरमे चुतसे फवारा नीकल गया ओर वो उठके बातरुममे चली गइ फीर नहाके बेडपे आके सोगइ.. उधर देवायतभी अपने रुममे चला गया तो मंजु गहेरी नींदमे सो रहीथी.. तब देवायत उनसे पीछेसे चीपकके अ‍ेक हाथ मंजुके बुब्सको थामते सो गया तब मंजुने उनका हाथ पकडके कसके अपने बुब्सपे दबा दीया ओर वो पीछे कमर खीसकाते देवायतसे चीपकके सो गइ..

सुबह मंजु जल्दी उठ गइ ओर बाथरुममे घुसके नहाने लगी तब दया ओर रजीयाभी नहाके काममे लग गइथी हवेलीकी सब सफाइ जाडु पोछा चाइ नास्ता बनाना दोनोही सुबह लग जाती थी तब जाके मंजु उठतीथी.. मंजु नहाके बहार आगइ ओर तैयार होने लगी देवायत अभीभी सो रहा था तब मंजु तैयार होके पुनमके रुममे उनको जगाने चली गइ ओर दरवाजा खटखटाया तब जाके थोडी देरके बाद पुनम आइ..

मंजुला : (हसते) गुड मोर्नींग.. महारानी थोडा जल्दी उठलीया करो अब तुम्हारी सादी होने जा रही हे..

पुनम : मोर्नींग भाभी.. क्या सुबह सुबह सादीकी बात लेके बैठ गइ.. मेतो कबसे उठ गइ हु.. बस योगा कर रहीथी.. अभी नहाके आतीहु.. आप भाइको उठादो.. ओर हां मेरी साससे बात करलेना..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां मेरी मां.. पहेले आतो सही फीर बात करलेगे.. वो लखनभीतो सोया पडा होगा..

कहेते नीचेसेही लखनको जोरोसे आवाज लगाती हे.. उपरतो जा नही सकती.. तब लखनभी तैयार होके सीधे नीचेही आता हे ओर मंजुके पेर छुके उसे गुडमोर्नींग वीस करता हे तब मंजु हसने लगती हे..

मंजुला : अरे वाह.. मेरा प्यारा देवरतो उठभी गया.. ओर कंपलीटभी हो गया.. क्या रातमे लतासे बात नही हुइ.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते) क्या भाभी.. सुबह सुबह कोइ नही मीला क्या जो मेरी टांग खीच रही हो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) चल बेठ मे तेरे भाइको जगाके आती हु..अ‍ेकदम अ‍ेदी हे अभीभी सोये पडे हे.. हें..हें..हें..

कहेते वो वापस रुममे चलीगइ ओर देवायतके पास बेठ गइ ओर प्यारसे उनके चहेरेको देखती रही.. तब देवायत बडा ही मासुम लग रहा था तो अपने आपको रोक नही पाइ ओर जुकके देवायतके होंठ चुमने लगी तभी देवायतकी आंख खुल गइ देखातो मंजुथी तो उनके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर सोतेही मंजुकी कमरमे हाथ रखके गोदमे सर रखदीया ओर वापस सोने लगा तब मंजु प्यारसे उनके सरको ससहेलाने लगी..

मंजुला : जानु उठो मेरे बेबीको जागना नही हे क्या..? देखो कीतने बज गये..

देवायत : (नींदमे) सोने दोनां.. यहा कीतना मजा आता हे.. बस तुम बैठी रहो..

मंजुला : (हसते) अरे.., उठ जाओ बाबा सब जाग गये हे.., वो मौसीको फोन करना हे.. सायद उनको लेने जाना पडे वरना धिरेनको बोलदुगी मौसीको लेके आजाये.. ओर हां आज आपको रश्मीभाभीके घर जाना हे..

देवायत : वहा..? लेकीन क्यु..?

मंजुला : अरे.. भुल गये..? जानु वो हमारी जमीन ओर गांवके लोगोके जमीनके कागजात लेने जाना हे जाके देखलो बाबा पता नही कीतने कागज होगे.. सबको देखके देदो.. बेचारे खुस होजायेगे..

देवायत : (हसते) तुम गांव वालोकी कीतनी चींता करती हो.. लगता हे गांवका सरपंच तुम्हे होना चाहीये..

मंजुला : (सरको हटाते) ना बाबा नां मुजे नही बनना सरपंच.. अब उठो सब आपका वेइट कर रहेहे फीर जाना भी हे.. चलो..चलो..

कहेते देवायतको जगाके बाथरुममे धकेल देती हे ओर हसने लगती हे.. कुछ देरके बाद देवायत नहाके बहार आता हे तब वहा पुनम देवायतके कपडे रख रहीथी जेसेही देवायत बहार आया तो रुममे कोइ नही था वहा पुनम देवायतको देखके सरमा गइ जेसे देवायतकी नइ नइ दुल्हन हो.. आज देवायतको उनके चहेरेपे काफी नीखार दीख रहाथा तो वो पुनमके पास आगया तब पुनमका दील जोरोसे धडकने लगा ओर वो सरमसे पानी पानी होने लगी..ओर अपनी नजरे जुकाते देवायतकी हरकतोका इन्तजार करने लगी..

तभी देवायतने वहा कीसीको ना देखके पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठोपे अपने होंठ रख दीये तब पुनमने अपनी आंख बंध करली ओर वो देवायतसे छुटनेकी कोसीस करने लगी जेसेही देवायतने उसे छोडा वो सरमसे पानीपानी होते मुस्कराती रुमसे बहार भाग गइ दरवाजा खुलाथा तो वो कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी.. वो ये रीस्ता सबसे छुपाके रखना चाहती थी, क्युकी उसे लंबी मंजील पार करनी थी..

तब देवायतभी कंपलीट होके बहार आगया तो होलमे मंजु लखन ओर पुनम बैठे थे ओर टीवी देख रहेथे जेसेही देवायत आया तब पुनम सरमाते मुस्कराते कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता नीकालने लगी..

मंजुला : (पुनमकी ओर देखते हसते) देवु.. क्या बात हे.. लगताहे हमारी पुनम अभीसे मेच्योर होगइ हे.. देखो केसे सब जीम्वेवारी उठाली हे.. खुद चाइनास्ता नीकाल रही हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) लगता हे सगाइके बाद बंदरीया सुधर गइ हे, हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते लखनका कान खीचते) अ‍ेय.. क्या बोला..? मेरी बच्चीको कुछ मत कहेना.. बंदरीया होगी वो लता.. जो तेरे जेसे बंदरके साथ सगाइ करली.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे कान छोड.. (लखनकी ओर देखते) लखन सुन.. आज मे खेतोपे सामको आउगा अ‍ेक कामसे बहार जा रहा हु.. भानुसे कहेना वो प्याज भरवाले.. ओर मार्केटमे जाने दे.. तुभी ध्यान रखना..

लखन : जी भैया.., भाइ अ‍ेक बात कहु.. आप अ‍ेक ट्रेकटर ओर लेलो.. मे खेतोमे चलाउगा..

देवायत : (हसते) ठीक हे भानुसे कहेना कोइ अच्छासा ट्रेक्टर देखले.. ले लेगे..

लखन : (हसते) भाइ मेने सीलेक्ट करलीया हे वोही लेना हे.. हें..हें..हें..

देवायत : अच्छा..? तुजे मालुम पडता हे कोनसा लेना हे..? चल ठीक हे वोही लेना..

लखन : (खुस होते) थेन्कयु भाइ..

मंजुला : लखन वो काम बामतो ठीक हे थोडा ट्रेडींगकाभी देखले.. उनमेभी ध्यान दे.. हमे कहा मजदुरी करनी हे.., अबतो तुजे ओर भानुभाइकोही सब सम्हालना हे..

लखन : (हसते) भाभी फीकर मत करो भानुभाइ मुजे सब सीखा रहे हे..

मंजुला : हां भाइ अब तुम उनके जीजा हो गयेहो तो सीखायेगेही.., हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) क्या भाभी आपभी..जब देखो मेरी ही टांग खीचती हो.. उस बंदरीयाकोतो कुछभी नही कहेती.. हें..हें..हें..

पुनम : भाइ चलो सब आजाओ चाइ नास्ता रेडी हे.. बादमे सब बाते करना..

तब सब टीवी बंध करके डाइनींग टेबलपे आजाते हे तब मंजु खडी होते लखनकी पीठमे हसके मुका मारती हे ओर डाइनींगकी ओर जाते सेन्टर चेयरपे बेठ जातीहे तो उनकी अ‍ेक बाजु देवायत बेठता हे तब मोका देखके फटसे पुनम आके देवायतके साथ बेठ जाती हे ओर लखन देवायतके सामने बेठ जाना हे.. तभी पुनम बेठे बेठेही सबको सर्व करती हे ओर सब चाइ नास्ता करने लगते हे.. तभी देवायतके जांगपे पुनम हाथ रखके सहेलाने लगती हे ओर दुसरे हाथसे वो खाना खा रही हे..

तब पुनमका हाथ लगतेही देवायतका लंड जटके मारते खडे होने लगा ओर देवायतके पेन्टमे उभार होने लगा.. तब दुसरा हाथ नीचे लेजाते पुनमका हाथ हटानेकी कोसीस करता हे तबतक पुनमका हाथ देवायतके लंडको सहेला रहा था तब मंजु ओर लखन चाइनास्ता करनेमे बीजी थे तभी पुनम लंड सहेलाते मंजुसे बाते करने लगती हे..ओर सबके सामने नोर्मल होनेका दीखावा करती हे..

पुनम : भाभी आपको वो मौसीको फोन करना हे याद रखना..चाइनास्ता करके उसनको फोन कर देनां..

मंजुला : (खाना खाते हसते) हां मेरी मां याद हे तु कीतनी चीन्ता करती हे.. अभी चाइनास्ता तो करनेदे फीर फोन करलुगी..

पुनम : भाभी अब आपको कैसा लग रहा हे.. कुछ बैचेनीतो नही.. कल केह रही थी..

मंजुला : थोडी लगती हे.. तभीतो मौसीको बुलाना हे.. वो साथमे आयेगी..

पुनम : भाभी क्या मे साथमे आजाउ..?

मंजुला : अरे नही नही मौसी हेना.. तु यहा ध्यान रखना.. धरमेभीतो कोइ होना चाहीये..

अ‍ेसीही बाते करते रहे तब पुनम लगातार देवायतका लंड पेन्टके उपरसे सहेलाती रही तो देवायतके पेन्टमे आगे गीला धबा होगया.. तो पुनमके हाथमे लग गयातो कुछ चीपचीपासा लग रहाथा तब पुनमने हाथ हटालीया ओर देवायतकी ओर तीरछी नजर करते कातील स्माइल करते हसने लगी ओर सबकी नजर बचाते वो हाथकी उंगलीया चाटते देवायतकी ओर हसती रही.. तब देवायत पानी पीके उठ गया..

ओर फटाफट अपने रुममे चला गया सीधा बाथरुममे घुस गया पेन्ट हटाके देखातो उनके लंडसे पानी नीकलते चडी ओर पेन्ट काफी गीला होगया था.. तो उसने वापस जेन्ज करलीया.. फीर कुछ याद आया तो उसने अ‍ेक गोली अपनी जेबमे रखली जो वायग्राकी थी फीर वो बहार आगया तब मंजुने पुछही लीया.. तो पुनमकी गांड फटने लगी.. ओर उसे अपनी गलतीका अहेसास हो गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३२

ओर फटाफट अपने रुममे चला गया सीधा बाथरुममे घुस गया पेन्ट हटाके देखातो उनके लंडसे पानी नीकलते चडी ओर पेन्ट काफी गीला होगया था.. तो उसने वापस जेन्ज करलीया.. फीर कुछ याद आया तो उसने अ‍ेक गोली अपनी जेबमे रखली जो वायग्राकी थी फीर वो बहार आगया तब मंजुने पुछही लीया.. तो पुनमकी गांड फटने लगी.. ओर उसे अपनी गलतीका अहेसास हो गया....अब आगे

मंजुला : देवु पेन्ट क्यु बदल दीया क्या कुछ प्रोबलेम हे..?

देवायत : हां मंजु.. बेठता हु तब वो बहुत टाइट लग रहा हे.. तु जरा देखलेना.. बाथरुममे छोडा हे..

मंजुला : चलो ठीक हे.. अभी देख लुगी..

पुनम : (मोकेका फायदा उठाते) क्या भाभी अब तुम बाथरुममे जाओगी.. वहा कीतना गीला होता हे.. कही पैर बैर फीसल गया तो.. कोइ जरुरत नही मे सब देख लुगी.. कीतनी बार कहा हे अब कोइ काम नही करना.. मे सब करदुगी.. आप बैठी रहो चुपचाप..

मंजुला : (जोरोसे हसते) हां मेरी मां तु ही करदेना लेकीन मुजे डांट तो मत.., हें..हें..हें.. (देवायतकी ओर देखते) देवु.. ये मेरी भाभी तो मुजे बहुत डांटती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमसे पानीपानी होगइ) भाभी.. अ‍ेक दुंगी नां.. प्लीज.. मुजे भाभी मत कहीये..

मंजुला : (हसते) क्यु.. मेरे अ‍ेक लौते भाइकी मंगेतर हो तो तुजे भाभी ना कहुतो क्या कहु.., हें..हें..हें..

पुनम : (जुठमुठ नाराज होते) ठीक हे मुजसे बात मत करीयो.. अब सब काम आपही करलेना..

मंजुला : (पुनमको हग करते) अरे मेरी ननंद नाराज होगइ.. चल ठीक हे नही कहुगी.. भा..भी.., हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते पीठमे मुका मारते) भाभी.. फीर.. (देवायतसे) भाइ आप भाभीको कुछ कहोनां वरना सारा दीन तंग करती रहेगी..

देवायत : (हसते) मे तुम दोनोके बीच कुछ बोलने वाला नही हु.. तुम दोनोही मेरे लीये बराबर हो.., हें..हें..हें..

कहातो पुनम सरमा गइ.. ओर हसने लगी क्युकी देवायतकी डबल मीनींग बातको वो भली भांती जान चुकीथी दोनो बराबरका मतलब देवायत दोनोकोही बीवी मानता था.. तभी सबने चाइनास्ता करलीया ओर सब होलमे सोफेपे बेठ गये तभी मंजुने चंदाको फोन करदीया तो चंदाने फोन उठालीया..

चंदा : (फोनपे) हां मंजु बोल.. केसी हे तेरी तबीयत..?

मंजुला : मौसी कलस कुछ बैचेनी जैसा लग रहा हे.. आप आजाओनां.. कहोतो मे देवुको लेने भेजती हु.. वरना आप धिरेन फ्रि हेतो उनके साथ आजाओ..

चंदा : लगता हे डीलेवरीका टाइम होगया हे.. मुजेभी अ‍ैसाही हुआथा.. खैर मे धिरेनके साथ आ रही हु..

मंजुला : मौसी उनको नोकरी बोकरी जाना होतो मे देवुको भेजती हु..

चंदा : (हसते) अरे नही उनकोतो कलसे जोइन करना हे मुजे छोडके सामको घर आजायेगा.. तु फीकर मत कर उनके पास बाइक हेनां.. हम अभी नीकलते हे.. देवुको मत भेजना.. चल रखती हु..

मंजुला : (फोन काटते) देवु अब आप आरामसे जाओ ओर सब काम नीपटालो.. वो धिरेन मौसीको छोडने आ रहा हे.. फीर सामको चला जायेगा उनको कल नोकरी जोइन करना हे..

लखन : (हसते) हां अबतो धिरेन आयेगा ही.., हें..हें..हें..

पुनम : (गुसेसे) भाइ अ‍ेक लगाउगीनां.. आनेदो लताभाभीको फीर देखना केसे तेरी टांग खीचती हु..

मंजुला : (हसते) अरे.. दोनो जगडो मत.. पुनो येतो मजाक कर रहा हे..

पुनम : (बडबडाते) अब मेभी मजाकही करुगी.. बंदर कहीका..

देवायत : (हसते खडा होते) चलो ठीक हे मे चलता हु.. मंजु अ‍ैसा कुछ लगेतो मुजे फोन करना..

मंजुला : हां करुगी.. ओर देवु खाना इधर खाना.. हम बनालेगे.. उनको क्यु तकलीफ देना..

देवायत : (हसते) वोभी तेरी तराह जीदी हे देखा नही उस दीन क्या कहेके गइ.. वो खाना खाने बीना नही आने देगी.. ओर कागजात भी तो बहुत होगे.. साम होजायेगी..

मंजुला : ठीक हे.. लेकीन मुजे जाना पडेतो सब छोडके आजाना..

देवायत : चल ठीक हे.. वेसेभी वो काम इम्पोटन्ट नही हे.. मुजे फोन करना..ओके बाय..

जेसे ही देवायत खडा हुआ पुनम भी साथमे खडी होगइ ओर देवायतके रुममे जटसे जाने लगी अंदर जातेही धीरेसे रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर सीधी बाथरुममे चली गइ अंदर जाके देखातो देवायतकी पेन्ट ओर चडी अ‍ेसेही नीचे पडीथी पुनमजे उसे जटसे उठालीया ओर चडीमे चेक करते देखने लगी तो चडीमे देवायतका विर्य लगा हुआथा तब उसे देखके पुनमके चहेरेपे कातील स्माइल आगइ..

ओर अ‍ेक बार नाक के पास लेजाते उनकी खुस्बु लेने लगी तब वो सुंघतेही आंख बंध करते मदहोस होगइ फीर धीरेसे मुहके पास लेजाते जीभ नीकालके उसे चाटने लगी.. ओर चाटते आंख बंध करते अ‍ैसा फील करने लगीकी जेसे वो देवायतका लंड चाट रही हो..




देवायतका विर्य उसे नमकीनसा स्वादीस्ट लगने लगा वो धीरे धीरे करते सारा विर्य चाट गइ फीर पेन्ट ओर चडी पानीकी बाल्टीमे डालके अपना मुह साफ करलीया ओर वापस बहार आके मंजुके पास बेठ गइ..

इधर देवायत अपना बुलेट लेके चला जाता हे ताकी वो सरपंच राघवके घरमे छुपा सके ताकी कीसीको पता ना चलेकी अंदर देवायत आया हे.. ओर कार इधर होगीतो धिरेनभी इमरजन्सीमे मंजुको लेजा सकता हे.. ओर वो राघवके घर पीछेके रास्तेसे आगया.. तो रश्मी उनकाही वेइट करते आंगनमे बेठीथी जेसेही देवायत आया उसने फटाफट गेइट खोला ओर बुलेट अंदर आतेही गेइट बंध करलीया ओर उसने देवायतके बुलेटको घरके पीछे छुपाके रखवा दीया फीर देवायतको लेके अपने रुममे अंदर चली गइ..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे) देवरजी पहेले ये बक्सा देखो मेने पहेलेसेही आपके ओर गांवके लोगोके कागजात अलग करदीये हे ताकी हमारा समय खराब नाहो आप इनमे नजर डालो तबतक मे सब तैयारीया करती हु थोडा टाइम लगेगा फीर जब कहु तब आप चले आना..

देवायत : ये कागजातभी..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे) सब सम्हालके बक्सेमे रखे हे पुरा बक्साही लेजाना.. ओर हम उनके सामने ही सबकुछ करेगे.. उनको(सरपंच)को दीखा देगेकी मे बांज नही हु.. आज पुरी जींदगी जीलेना चाहती हु ओर आज आपको पुर्ण समर्पीत होजाउगी.. अब आपही मेरे पती होगे.. ओर आपहीके नामका सींदुर लगाउगी..

कहेते रश्मी चली गइ ओर देवायत सब कागजात देखने लगा तब उनमे बहुत सारे कागजात गांवके लोगोके थे.. ओर उनके कागजात रश्मीने अलगसे बांघके रखाथा जब देवायतने अपने कागजात देखा तब वो चोंक गया.. क्युकी इनमे उन जमीनका जीक्रथा जो देवायतकोभी नही मालुम था.. तभी अ‍ेक कागजपे देवायतकी नजर पडी ओर खोलके देखने लगा तो उनमे कुछ नक्सा जेसे दीखता था जो अ‍ेक पहेली जेसे लगता था उनमे अ‍ेक शीव मंदिर अ‍ेक नंदी का चीत्र था जो देवायतने सम्हालके वापस रख दीया..

तभी रश्मी अंदर पानी लेके आइ तो देवायत उसे देखताही रेह गया ओर उनका लंड ठुमकी लगाते खडा होने लगा.. क्युकी रश्मी सादीके जोडेमे थी जो सब शींगार करके आइथी वो आज दुल्हनके लीबासमे कीसी कामदेवकी रतीकी मुरत लग रहीथी जो कीसीको भी पागल करदे उसने देवायतको पानी दीया तो देवायतने छुपकेसे वायग्राकी गोली खाली ओर पानी पीकर ग्लास वापस देते उनको देखताही रहा तब रश्मी देवायतके पेन्टमे तंबु देखके बुरी तराह सरमा गइ ओर धीरेसे कहा..

रश्मी : देवरजी.. ये सब आपहीके लीये सजी हु.. बस आप थोडी देरके बाद रुममे आजाइअ‍े सब रेडी हे..

कहेके वो ग्लास लेके चली गइ ओर कीचनसे सीधीही अपने घरके सब दरवाजा अच्छेसे बंध करके लोक करलीया फीर अपने पतीवाले रुममे जाके बेडपे अपने सब बाल खुले करके बेठ गइ क्युकी वो देवायतको अच्छी तरहसे जानतीथीकी उसे कीस तराह अपनी ओर आकर्सीत करते पागल करना हे तभी थोडीही देरमे देवायत उनके रुममे चला गया ओर धीरेसे दरवाजेको धका मारा तब दरवाजा खुल गया अंदर देखातो रश्मी फुलोसे सजा हुआ बेडपे खुले बालोके साथ बैठीथी ओर उनके दुसरी ओर अ‍ेक पलंगपे उनका पती राघव लेटे सब तमासा देख रहा था..तब देवायत दरवाजा बंध करके बेडकी ओर चला गया..




जब देवायत जाके बेडपे बेठ गया तब रश्मी बेडसे उतरके अ‍ेक दुधका ग्लास लेके देवायतको देती हे.. तब देवायत उनके सामने देखतेही दुध पीने लगता हे तब पंलगपे लेटे राघव सब कुछ टेडी नजर करते देख रहाथा जबसे रश्मी सब तैयारीया कर रहीथी तबसेही राघवका बीपी हाइ हो रहाथा ओर मनही मन अपनी कीस्मतको कोस रहाथा उसे अपने सब पापोके हीसाब किताब अपनी नजरके सामने ही होते दीख रहाथा..

रश्मी : (राघवकी ओर देखते) देख रहे हेनां आप.. अब आपको दीखा दुगी की मे बांज नही हु.. सब आपकी नजरके सामनेही होगा.. मुजे बहुत मारा हेनां..? अब देखते रहो सब, मे केसे आपका हीसाब करती हु..

देवायत : भाभी अब चलीये जबसे आपको देखा हे मुजसे रहा नही जा रहा.. देखीये लंड फटा जा रहा हे..

रश्मी : (बुरी तराह सरमाते) बस कुछ पल इन्तजार कीजीये फीर ये भाभी आपकी बीवी होजायेगी..

कहेते रश्मी देवायतका हाथ पकडके घरके मंरिके सामने चली गइ ओर वहा उसने अपने सरपे पलु डालके सरको ढक लीया ओर अ‍ेक दीया जलाया फीर अपने गलेमे जो मंगलसुत्रथा उसे खीचके नीकाल दीया ओर अपने पती राघवकी ओर फेंक दीया फीर अ‍ेक बेगसे दो हार नीकाले अ‍ेक देवायतके हाथमे थमा दीया ओर दुसरा खुदके हाथमे रखके अ‍ेक दुसरेके सामने खडे होगये..

रश्मी : देवरजी आज हम हमारी कुलदेवीके सामने गांधर्व विवाह कर रहेहे फीर इसे दियेको हम चार फेरा लगाके सादी करेगे.. आज मे आपकी सुहागन होजाउगी.. ओर इस मांगमे आपके नामकाही सींदुर लगेगा..

कहा तो देवायतने रश्मीके गलेमे माला पहेनादी तब रश्मीनेभी देवायतके गलेमे फुलोकी माला डालदी ओर दोनोही हाथ जोडके मंदिरके सामने दर्शन करने लगे ओर अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वीकार करने लगे.. तभी रश्मीने मंदिरसे दिया अपने हाथमे लेलीया ओर नीचे जमीनपे रख दीया.. फीर उसने देवायतका हाथ पकड लीया दोनोही दियेके आस पास घुमने लगे.. ओर लास्ट फेरेमे रश्मी आगे चलने लगी..

ओर आखीरमे रश्मीने देवायतको अ‍ेक डीबी हाथमे थमा दी तब देवायतने उसे देखतेही स्माइलकी ओर डीबीसे अ‍ेक चुटकी सींदुर लेके रश्मीकी मांग भरदी तब रश्मीने आंख बंध करली ओर आंखसे आंसु टपक गये.. तब देवायतने उनके आंसु अपने हाथसे पोछे ओर अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर अ‍ेसेही सादी सम्पन हुइ तब रश्मीने दियेको वापस मंदिरमे रख दीया फीर देवायतके चरणोमे जुक गइ तभी देवायतने उसे कंधेसे पकडके खडा करदीया ओर उनका सर चुमलीया ओर दोनो बेडपे आगये तब रश्मी अपने फुलोसे सजाया हुआ बेडपे अपने खुले बालोके साथ बैठ गइ..




देवायतभी उनके पास आके बेठ गया तो रश्मीने नजर जुकाली ओर सरमाती रही तभी देवायतने उसे बाहोमे भरलीया तो रश्मी बेठेही देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर उनके गलेमे मुह डाल दीया तभी देवायतने धीरेसे उनकी सारीका पलु गीरा दीया तब रश्मी खुब सरमाइ ओर उनकी सांस तेज चलने लगी दोनोकोही राघवकी हाजरीसे कुछ फर्क नही पडता था रश्मी देवायतकी बाहो से अलग होगइ..

ओर देवायतहे सर्टके बटन खोलने लगी.. तब देवायतभी उनके ब्लाउसके हुक खोलने लगता हे तो रश्मी बुरी तराह सरमा रहीथी दुसरी ओर देवायतपेभी अब वायग्राका असर होने लगाथा वो आज मन बना चुकाथाकी आज रश्मीको बुरी तराह साम तक चोदना हे ओर उसे प्रेगनेन्ट करके ही आना हे.. इस बातसे रश्मी पुरी तराह अन्जानथी की आज इनकी हालत अ‍ैसे बीगडने वाली हेकी वो दो दीन बीसतरसे उठभी नही पायेगी..

देवायत बेडसे उतर गया ओर रश्मीकोभी उतार दीया ओर अपनी पेन्ट नीकालके रश्मीके पेटीकोटका नाडा खीच लीया तब पेटीकोट सरकके नीचे गीर गया ओर रश्मी सीर्फ टु पीसमेही रेह गइ तब वो सरमाते देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर देवायतको कसके पकड लीया.. तभी देवायतने उसे गोदमे उठालीया ओर अ‍ेसेही राघवके पास चला गया तब रश्मी अ‍ेक बार राघवके सामने देखके खुब सरमाइ ओर देवायतके सीनेमे सर छुपालीया.. वो बुरी तराह सरमा रहीथी तब देवायतने राघवकी ओर देखते कहा..

देवायत : देख राघव.. आज तेरी बीवी अब तेरी नही रही.. आजसे ये मेरी बीवी होगइ हे ओर मेरी बाहोमे हे आज हमारा सुहागदीन हे तेरे सामनेही रश्मीको चोद चोदके प्रेगनेन्ट कर दुगा.. अब वो हमेसाके लीये मेरी बीवी बनहे इधरही रहेगी ओर मे यहा आके तेरे सामनेही इसे चोदता रहुगा.. ओर हां.. अ‍ेक बात ओर इसे मे पीछले छे सालसे चोद रहा हु..

तेरे सारे कागजात अब मेरे पास आगये हे जो तुने ओर मुनीमने इकठे कीयेथे.. तुजे आज अ‍ेक बात ओर बताता हु वो मुनीमकी बीवी चंपाकोभी मे चोदता हु.. उसे अब सीर्फ मेरा लंड ही चाहीये जेसे इस रश्मीको चाहीये.. अबसे तुम दोनोकी बीवीको मेने अपना लीया हे.. ओर इन दोनोको अब मे जींदगीभर अपनी बीवी बनाके चोदता रहुगा.. ओर रश्मीको मे अपना बच्चाभी दुंगा..

कहातो राघवका दीमाग सुन होगया.. वो कुछ बोलना चाहता था लेकीन बोल नही सकता था वो अ‍ेक दम गुसेमे आगबबुला होगया अगर वो चल फीर सकता तो आज पका देवायतका खुन कर देता.. राधवको अपनी सारी जींदगी बेकार चली गइ अ‍ैसा फील होने लगा.. उनकी आंखोमे आंसु गालोसे होते बहेने लगा.. जीसे देखके रश्मीको बडा सुकुन मीला.. उसने देवायतको आंखोके इसारोसे बेडकी ओर चलनेको कहा तब देवायत बेडकी ओर चला गया ओर रश्मीको पीठके बल सुलाके खुदभी इनके पास लेट गया..




तब रश्मीने उनकी ओर करवट लेके देवायतके सीनेमे सर छुपालीया तो देवायतने उनकी कमरमे हाथ डालके अपनी ओर खीचके खुदसे चीपकालीया तभी रश्मीको अपनी चुतपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ तब वो खुब सरमाइ ओर उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा अ‍ैसा नहीथा की रश्मी आज देवायतसे पहेली बार चुद रहीथी लेकीन आजकी बात ही कुछ ओरथी देवायतका लंड आज वायग्राकी वजहसे तनके फुल गयाथा ओर हमेसाकी तराहसे थोडा बडा होगया था इस बातसे रश्मी बीलकुल अन्जान थी..

तभी देवायतने रश्मीको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर अपने होंठ रश्मीके होंठपे रख दीया.. तब दोनो ही मदहोस होने लगे रश्मीपे भी प्यारका नशा छाने लगा वो आधी आंख बंध करते प्यारके नसेमे देवायतका होंठ चुमनेमे साथ देने लगी उनको अ‍ैसा लगने लगा मानो आज उनकी पहेली सुहागरात हे.. वो बहुतही सरमा रहीथी उनकी चुत लगातार फडफडाते पानी बहा रहीथी.. उनके दोनो बुब्स कामोतेजनाकी वजहसे कच्चे आमकी तराह कठोर होके उपर नीचे होने लगे जेसे कीसी कुआरी लडकीके हो रहेहो....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३३

तभी देवायतने रश्मीको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर अपने होंठ रश्मीके होंठपे रख दीया.. तब दोनो ही मदहोस होने लगे रश्मीपे भी प्यारका नशा छाने लगा वो आधी आंख बंध करते प्यारके नसेमे देवायतका होंठ चुमनेमे साथ देने लगी उनको अ‍ैसा लगने लगा मानो आज उनकी पहेली सुहागरात हे.. वो बहुतही सरमा रहीथी उनकी चुत लगातार फडफडाते पानी बहा रहीथी.. उनके दोनो बुब्स कामोतेजनाकी वजहसे कच्चे आमकी तराह कठोर होके उपर नीचे होने लगे जेसे कीसी कुआरी लडकीके हो रहेहो....अब आगे

देवायतने रश्मीके होंठोके रसपान करते अपना अ‍ेक हाथ रश्मीके बुब्सपे ब्राके उपरही रखदीया तब रश्मीके मुहसे सीसकारीया नीकल गइ.. जेसे आज कीसीने उनके बुब्स पहेली बार छुआ हो.. रश्मी कसके देवायतको बाहोमे भीच लेती हे ओर अपना मुह खोलके अपनी जीभ देवायतके मुहमे ठुसनेकी कोसीस करने लगती हे.. ओर देवायतभी अपना मुह खोलके रश्मीकी जीभको चुसते उनके मुहके रसको पीने लगता हे.. आज दोनोही बुरी तराह कामातुर हो चुके थे तभी देवायतने रश्मीकी ब्राको उपर करदीया..




तो रश्मीके बुब्स उछलते बहार आगये तभी रश्मीने हाथ पीछे लेजाके ब्राका हुक खोलदीया ओर ब्राको नीकालके जमीनपे फेंकदी.. तब देवायत रश्मीको पीठके बल लीटाते अ‍ेक टांग उनकी कमरपे डाल देता हे ओर रश्मीपे जुकके उनके बुब्सको अपने मुहमे लेलता हे ओर नीपलको अपने होंठोसे दबाते हल्का हल्का खीचते चुसने लगता हे तब रश्मीकी आहे नीकल जाती हे ओर देवायतके सरमे बाल पकडते खीचने लगती हे मानो वो पागल जेसी होगइ हो.. उनके मुहसे लगातार सीसकारीयोकी आवाज नीकलने लगी..




मानो वो सारी दुनीयादारी भुलके देवायतको अपने मे समा लेनेकी कोसीस करने लगी.. तभी देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा जेसेही रश्मीकी नाभीमे जीभ डाली, रश्मी पागलोकी तराह सीसकारीया करते इधर उधर कमर करने लगी.. ओर देवायतने उनकी पेनटीमे हाथ घुसा दीया ओर उनकी चुतपे रखके धीरे धीरे सहेलाने लगा.. तब रश्मीने हाथ नीचे लेजाके पेन्टीके उपरसेही देवायतका हाथ दबाके पकड लीया..

मानो वो उसे रोकनेकी कोसीस कर रही हो.. तभी देवायतने कामुक नजरसे रश्मीकी ओर देखातो रश्मीने धीरेसे अपना हाथ हटालीया तो देवायतने अपने हाथकी मीडल उंगली रश्मीकी चुतमे सहेलाते धीरेसे घुसादी ओर उनके मटरके दानेको टटोलने लगा तब रश्मी पागल जेसे होगइ ओर दोनो हाथ पीछे लेजाते अपने बेडकी चदर जोरोसे पकडली ओर आंख बंध करते मुहको इधर उधर करते छटपटाने लगी..

तभी देवायत उनके पैरके बीच बेठ गया ओर पेन्टीमे उंगली फसाके खीचने लगा तब रश्मीने अपने दोनो पैर मोडके अपनी कमरको थोडी उची करली ओर देवायतने उनकी पेन्टी नीकालके साइडमे रखदी ओर अपना मुह रश्मीकी चुतपे लगा दीया तब रश्मीसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया ओर वो पागलोकी तराह छटपटाते अपने होंठ दांतोसे दबाके कमर ओर सीनेको उछालने लगी..




रश्मी : (मदहोसीमे) बस..बस..बस..नही..देवरजी.. छोडो.. मर जाउगी.. हंमममममअअअअअ ससससइइइइ

देवायत : (रश्मीकी ओर देखते) रश्मी अब देवर नही नामसे बुला.. अब तु मेरी पत्नी हे..

रश्मी : दे..वु.. बस..अब आभी जाओ.. मत तडपाओ..

तभी देवायत वापस रश्मीकी चुतमे मुह लगा देता हे ओर चुतके अंदर अपनी जीभ डालमे मटर जेसे दानेको टोटलने लगता हे तब रश्मी अपना हाथ चुतके पास रखके चुतको चोडी करनेकी कोसीस करती हे वो बीलकुलही पागल जेसे होगइ थी ओर छटपटाते देवायतको बार बार अपने उपर चडनेकी मनते करती रही..




तभी अचानक रश्मीका सरीर अकडने लगा ओर हजारो चीटीया रेंदती उनकी चुतकी ओर दोड रही हो अ‍ैसा महेसुस करने लगी.. जेसे सातवे आसमानपे चली गइ हो अ‍ेसे अपनी कमर उछालने लगी तब चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया ओर देवायतके पुरे चहेरेपे छा गया तब देवायत उनका पानी जीभसे चांटते चुतको साफ करने लगा ओर रश्मीने अपनी कमर धडामसे बेडपे पटकदी.. तब उनको होंस आयाकी देवायत उनकी चुत चाट रहा हे तब वो बुरी तराह सरमसे पानीपानी होने लगी ओर मुहको इधर उधर करते सीसकारीया करती देवायतसे नजरे चुराने लगी..

तभी देवायत बेडसे उतर गया ओर रुमके बाथरुममे चला गया ओर अपना मुह साफ करके वापस बेडपे आगया तब रश्मी उनसे नजर नही मीला पा रहीथी वो बहुतही सरमा रहीथी क्युकी वो पहेले देवायतको देवर मानके उनके साथ जानायज रीलेशन रखते दुचवाती थी ओर आज वही देवायत उनका पती बनके उनके साथ प्यारका खेल खेल रहाथा ओर थोडीही देरमे उनकी जबरदस्त चुदाइ करने वालाथा यही सोचते वो खुब सरमा रही थी..ओर उनकी चुत फडफडाते लगातार पानी छोड रही थी..

देवायत उनके पेरके बीच बेठ गया ओर धीरेसे लंडको रश्मीकी चुतपे घीसने लगा तब रश्मी कामुक सीसकारीया करते अपने दोनो हाथसे चुतके आसपास सहेलाने लगी.. जब लंड गीला होगया तब देवायत चुतके लव होलमे लंड फसाके रश्मीके उपर जुक गया ओर रश्मीके दोनो हाथ पंजेसे पकडते होंठ दबाके लीपलोक करलीया फीर कमर उची करते अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंबा ओर तगडा लंड रश्मीकी चुतमे घुसा दीया..




तब रश्मीकी चीख नीकलके देवायतके मुहमे ही दब गइ ओर आंखसे आंसु नीकलने लगे वो बडी आंख करते देवातके सामने देखते उनसे छुटनेकी कोसीस करती अपना दोनो पैर बेडपे पटकने लगी ओर देवायत धीरे धीरे सोट मारते लंडको अंदर बहार करने लगा.. तब रश्मीकी हालत पतली होगइ थी ओर वो देवायतसे अपने होंठ छुडानेकी कोसीस मुहको इधर उधर करते करने लगी.. ओर मुह छुडा लीया..

रश्मी : (रोते हुअ‍े) सीइइइइ मरररर गइइइइ नीकालो.. बससस बससस बसस.. ओर.. नहीहीही.. देवु.. आज.. बहुत.. दर्द हो रहा हेहेहे.. उउउउइइइइइइ मांआआअ मर जाउगी.. यार.. बस.. बसस बसससइइइइ

देवायत : (चोदते) कुछ नही होगा.. तु पहेली बार थोडीनां चुदवा रही हे..

रश्मी : नही..देदेदेवुवुवुवु..आज बहुत.. मोटा.. लग रहा हे.. फाडदी.. मेमेरीरीरी चुउउउततततसससइइइइइ

तभी देवायत लंड अंदर घुसाके वापस पैरके बीच बेठ जाता हे ओर रश्मीकी कमरको दोनो हाथसे पकडके अपने लंडकी ओर खीचता हे तब रश्मीकी अ‍ेक बार हल्कीसी चीख नीकल जाती हे.. देवायत अ‍ेसेही थोडी देर बेठते उनके दोनो बुब्स धीरे धीरे मसलने लगता हे तब थोडीही देरमे रश्मीका दर्द कम होगया ओर रश्मीकी दर्द भरी आवाज कामुक सीसकारीयोमे तबदील होजाती हे.. ओर देवायत धीरे धीरे पुरा लंड बहार खीचते अंदर धकेलते रश्मीको चोदने लगता हे.. तब रश्मीकी हर धकेके साथ आहे नीकलने लगती हे..




रश्मी : (कामुक आवाजमे) दे..वुवुवु..आहहह..आहह..आहह..मुउउउजेजेजे..बबच्चाआआ देदेदोदो..इइइइ

देवायत : (मदहोसीमे) हं..हाहाहा.. देदेदे..दुदुदुगागागाममममअअअअअअ पुरा..घुसासास दुदुउउउ हंहह

रश्मी : ननहीहीही दर्द होहोगागाग..सीसीसससइइइइइइममममममहहहहउउउउउउससस ममरररर जाउउउगीगी..

देवायत : कुछछछ नननहीहीही होहोगागागा लडकीइइइ चाहीये? हां.. बोलानां.. देदेदुदुदु लडकीइइइ..

रश्मी : (मदहोसीमे देवायतकी ओर देखते) हां.. कुकुछछभीभीइइइ देदेदोदो.. करदोदो.. प्रेगनेन्टटटससस

देवायत : उनको.. मेमेरेरे बेबेटेटेसेसे चुदवायेगीगीइइइइइ हां..अअअअसससस बोल.. हां.. बोलनां..मममअअ

रश्मी : (कामुक नजरोसे) हं..ससीइइइहहहहमममममउउउ हांहाहा.. चुचुददवावाउउउउगीगीगीइइइइ सससइइइइ

देवायत : (जोरोसे सोट मारते चोदते) अअअमममममहहहहह रश्मीइइइइ मुमुमुजजजसेसेसेसे चुचुदेदेगी..हां..

रश्मी : (आधी आंख चडाके) हहहहससससइइइइइइमममममममम आह..इइइइइइउउउउअअअअअअ

देवायत : हहहहअअअअममम बोबोललललनां..? रंरंडीडी.. बबबबनेनेनेगीगी मेमेमेरीरीरी.. हमहमहम..

रश्मी : ससससहांहां.. बबबनुनुनुगीगीगी चोचोचोदददद लेलेलेनानानाना..

अ‍ेसीही कामुक आवाजमे बडबडाते दोनो नाजाने क्या क्या बोल रहेथे अ‍ेक बारतो रश्मीभी सरमसे पानीपानी होगइ ओर चुदवाते देवायतसे नजर चुराने लगी.. तभी रश्मीने देवायतको खीचके अपने तनसे चीपकालीया ओर जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर लीपलोक करलीया तब देवायतभी उसे बाहोमे भीचता हे..

तब रश्मी अपनी कमरको जटके देने लगी तभी देवायतको अपने लंडपे रश्मीका गरम पानी बोछार करते महेसुस हुआ.. ओर पुरे लंडपे गरमी छाने लगी तब देवायत ओर कामुक होगया ओर हाथके बल उचा होके पीछे खीसक गया ओर बेडसे उतरके रश्मीकी कमरको पकडके अपनी ओर खीचलीया तब रश्मी सरकके बेडके कीनारे आगइ ओर उसने अपने दोनो पैर घुटनोसे मीड लीये तब देवायत उसे जुकके गरदनसे पकडलेता हे ओर नीचे खडे खडे रश्मीको जोरोसे सोट मारते चोदने लगता हे तब पुरे रुममे सनाटेके साथ सीर्फ अ‍ेकही आवाज गुंजने लगी..

फचच..फचच..फचच.फचच.फचच..फचच..फचच..फचच..थपप..थप..थप..थपप..थपप..थपप..थपप..




दोनोके बीच घमासान चुदाइ हो रहीथी अब तक रश्मी दो बार जड चुकीथी तबभी देवायत आज जडनेका नाम नही ले रहाथा इनकी वजहथी वो कामुक गोली.. इधर रश्मीकी जबरदस्त चुदाइ हो रहीथी तो रुमके दुसरे कोनेमे राघव दोनोकी चुदाइका नंगा नाच कभी कभी टेडी नजर करते देखता रहेता था ओर उनको अपनी सारी इजत रश्मीकी चुदाइकी वजहसे मीटीमे मीलती नजर आ रहीथी.. वो मनही मन अपनी मोत मांगने लगा.. ओर बाजुमे इनकी बीवी बडीही बेहरमीसे देवायतसे चुद रहीथी.. देवायत ओर रश्मी उनसे सामनेही चुदाइ करते बरोबरका बदला ले रहे थे..

तभी देवायत जोरोसे चोदते हुअ‍े रश्मीपे जुकके उनसे चीपक जाता हे.. ओर रश्मीके पंजेको कसके पकड लेता हे तो रश्मीथी उनके पीठपे हाथ रखके देवायतके कंधेको दांत गडाके कांटने लगती हे ओर देवायत लंडको जडतक घुसाके होलेसे सोट मारते रश्मीकी बच्चेदानीसे लंडको टकराता हे तब बच्चेदानीका मुख खुलजाता हे जीनकी वजहसे रश्मीकी हल्की चीखे नीकलने लगती हे..तभी रश्मीको अपने बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस होने लगा ओर उसने देवायतको कसके बाहोमे भीचलीया ओर अ‍ेक बार फीर देवायतके साथही जडने लगी.. ओर अपने दोनो पैर मोडके उचा करलीया..




फीर दोनोही सांत होगये ओर देवायत रश्मीके उपर अ‍ेसेही ढेर होके पडा रहा तबतक रश्मी देवायतकी पीठ दोनो हाथसे सहेलाती रही.. उसे अबभी अपने पेटके अंदर देवायतका गरम विर्य महेसुस हो रहाथा तब वो बुरी तराह सरमसे पानीपानी होते देवायतसे नजर चुराते अपने मुहको इधर उधर करती रही.. दोनोही काफी देर अ‍ेसे रहे आज रश्मीकी चुतकी धमाकेदार चुदाइ हुइथी वो अ‍ेकही चुदाइमे पहेली बार तीन बार जड चुकीथी..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे) देवु.. अब उठना नही हे क्या? आजतो थका दीया आपने.. चलो बाथरुममे..

देवायत : (सर उचा करते सामने देखते) नही बेबी.. आजतो हमारी सादी हुइ हे.. अभी अ‍ेक बार ओर करना हे.. क्या मस्त चुतहे तेरी मेतो आज पागल होगया हु..

रश्मी : (सरमाते हसते) बीलकुल पागल हो.. तबतो मेरी चुतकी धजीया उड जायेगी.. आज आपका हथीयार कुछ ज्यादाही बडा लग रहा हे..आज आपको क्या होगया था? जो जडतेही नही थे.. मेरातो तीन बार नीकल गया.. कीतना जोसमे चोदते थे.. ओर ना जाने क्या क्या बोल रहेथे.. अ‍ेसेही कोइ बोलता हे..

देवायत : (अन्जान बनते) क्या..? क्या बोला मेने..? बोलनां..

रश्मी : (अ‍ेक दम सरमाते धीरेसे) हमारी बच्चीको अपने बेटेसे चुदवानेकी बात कर रहेथे.. धत्

देवायत : (हसते) तो क्या हुआ.. अपनीही बहेनको चोदेगा.. इसमे बुराइ क्या हे..

रश्मी : (सरमसे सीना सहेलाते) सरम करो.. कोइ बहेनको चोदता हे..? हां कोइ कोइ होता हे.. जेसे ये.. पडे हे.. सादी से पहेले ओर सादीके बाद खुब चोदतेथे इनकी बहेनको.. अब पडे सब भुगत रहे हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) क्या.. इनकी बहेन.. कभी देखातो नही यहा.. कहा रहेते थे..

रश्मी : हमारे गांवमे.. इनके चाचाकी लडकी ओर मेरी सहेली थी इनके चाचाने ही हमारा रीस्ता करवाया था.. वो वहा बहुत आते थे.. मेतो समजतीथी इनके चाचा हे तभी आते होगे मुजे क्या मालुमकी इनके चाचाकी लडकीको चोदने आते थे.. दोनोका टाका नाजाने कबसे भीडाथा तभीतो उनहोने सादी नहीकी..इनके पीछे बीलकुल पागल थी.. इनके चाचाकी अ‍ेकही लडकीथी.. जोब करतीथी सरकारी स्कुलमे टीचरथी..

देवायत : तो तुजे केसे मालुम हुआ..?

रश्मी : (सरमाते) अ‍ैसी बातेभी कही छुपती हे..? हमारी सादीसे पहेलेभी अ‍ेक बार प्रेगनेन्ट हलचुकी थी..तब सबसे छुपके दोनो बच्चा गीराके आयेथे.. तब नाम नही बताया ओर हमारी सादीके बाद फीरसे उनको पेटसे करदीया.. तब चाचीको पता चला तो हमसे सब रीस्ताही तोड दीया.. ओर बच्चा गीरा दीया.. तबसे मुजे बच्चेकी जीद कर रहे थे.. लेकीन अबतो उमर होगइ हे ओर सराबभी बहुत पीते हेतो कहासे बच्चा पैदा करते.. अब दीखा दुगी इनको.. की बच्चा केसे पैदा होता हे आप मुजे आजही प्रेगनेन्ट करदो..

अ‍ेसीही बाते करते देवायतकी दीमागकी बती जल उठी ओर इनको अ‍ेक आइडीया आया क्युकी जीस तराह पुनम ओर उनके रीस्ते बदल रहेथे तो देवायत पुनमको बडी आसानीसे यहा मील सकता था ओर आगेके लीये रश्मीका घर बहुत काम आने वाला था देवायतका जीतनीभी ओरतोके साथ रीलेशन था सबको यहा बुलाके इनकी चुदाइ कर सकताथा..

इनके लीये रश्मीको विस्वासमे लेना जरुरीथा ओर वो देवायत अच्छी तराह जानता था.. वो इनके लीये अब रश्मीको अपनी पत्नी माननेका मन बना चुकाथा ओर उसे खुब प्यार करते पत्नीका हर सुख देना चाहता था ताकी रश्मीका दील जीत सके वो मनही मन सब योजनना बनाने लगा जीनके लीये रश्मीको कुछ बाते बताना जरुरी लगा ओर उसने चुदाइके बाद रश्मीसे सब बाते करना तैय करलीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३४

इनके लीये रश्मीको विस्वासमे लेना जरुरीथा ओर वो देवायत अच्छी तराह जानता था.. वो इनके लीये अब रश्मीको अपनी पत्नी माननेका मन बना चुकाथा ओर उसे खुब प्यार करते पत्नीका हर सुख देना चाहता था ताकी रश्मीका दील जीत सके वो मनही मन सब योजनना बनाने लगा जीनके लीये रश्मीको कुछ बाते बताना जरुरी लगा ओर उसने चुदाइके बाद रश्मीसे सब बाते करना तैय करलीया....अब आगे

रश्मी : जानु क्या सोच रहे हे उतरोना मुजे नीचे बहुत चीपचीपासा लग रहा हे.. चलोना खाना खाके फीर करते हे हम.. खानाभी बनाना हे.. फीर खाना खाके आराम यही करना.. मेने मंजुदीदीको बोल दीया हे..

देवायत : (रश्मीके होंठ चुमते) नही डार्लींग तुम आज सादीके जोडेमे बहुतही सुंदर लग रहीथी तबसे मेरा काबुमे नही होरहा था अ‍ेसा लगता हे में तेरे उपर अ‍ेसेही अंदर डालके पडा रहु ओर तुजे चोदता रहु..क्या मस्त लग रही हे तु..

रश्मी : (सरमसे पानीपानी होते) धत् अगर इस बीवीसे इतनाही प्यार आ रहाहे तो आजाते.. कीतने दीनोके बाद आये हो.. बस अ‍ेक बार करके गये फीर दीखे ही नही.. आज मौका मीला..

कहातो देवायत रश्मीसे होंठ चुमते लीपलोक करलेता हे ओर धीरे धीरे कमर हीलाते वापस रश्मीको चोदने लगता हे तो रश्मीभी होंठ चुमते देवायतका साथ कमर हीलाते देने लगी..आज रश्मी बडी कामुक लग रही थी वोभी देवायतको दीलोजानसे चाहतीथी देवायतको देखतेही उसे लगताकी देवायत उसे दीन रात चोदता ही रहे.. क्युकी वो आजही देवायतसे चुदके प्रेगनेन्ट होना चाहती थी..





तब देवायत अपने चोदनेकी स्पीडको थोडा बढा देता हे तब रश्मी उनकी गरदनमे हाथ डालके अपने तनसे चीपकानेकी कोसीस करने लगी..तो देवायतभी चोदते चोदते रश्मीके गलेमे मुह लगाते चोदने लगा तो रश्मी फीरसे कामातुर होने लगी धीरे धीरे वो मदहोसीमे छाने लयी ओर आधी आंख बंध करते नसे जेसी हालत मे चली गइ बीच बीचमे देवायत उनके बुब्को मुहमे लेके चुसता रहा.. ओर बुब्सकी नीपलको अपने होंठोसे खीचता रहा

देवायत अपने लंडको खीच खीचके रश्मीकी चुतमे जड तब घुसाता रहा तब लंड रश्मीकी बच्चेदानीके मुहसे टकराता ओर गर्भासयका मुह खुल जाता जीनकी वजहसे रश्मी अ‍ेकदम कामातुर होगइ ओर उनकी आहे नीकल जाती.. ओर वो देवायतको जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी..





अ‍ेक बार फीर प्यारका भवंडर कामुक्ताभरी चुदाइमे तबदील होगया ओर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. रश्मीको अपनी चुतके अंदर देवायतका बडा लंड अपने चुतके दानेको छुते महेसुस हो रहाथा जो लगातार दानेसे छुते देवायतका लंड पुरा अंदर बहार हो रहाथा जीनकी वजहसे रश्मी बहुतही गरम हो गइथी वो लगातार चुतसे पानी बहाते सीसकारीया करने लगी मानो वो सब भुलके स्वर्गमे चली गइ हो..

अभी तक वापस दो बार जड चुकीथी ओर जबभी जडती देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेती ओर अपने तनसे चीपका लेती.. ओर होंंठ चुमते जडने लगती.. अ‍ेसेही ओर २० मीनीट तक देवायत बीना थकेही रश्मीको चोदता रहा तभी देवायत अचानक हाथके बल उचा होगया ओर अ‍ेक हाथसे रश्मीका पंजा पकडके दुसरे हाथसे रश्मीके गलेको पकड लीया ओर जोरोसे कमर हीलाते रश्मीको चोदने लगा तो रश्मीका मुह खुलाही रेह गयह ओर वो लगातार देवायतकी आंखोमे देखते उनसे चुदवाती रही..





तभी देवायतका सरीर अकडने लगा ओर उनके सरीरमे सुरसुहाट होने लगी ओर वो सातवे आसमानपे जाने लगा तो रश्मीपे जुकके उनके सरीरसे चीपक गया तो रश्मीने उसे जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर दोनोने होंठ मीलाके लीपलोक करलीया तब रश्मी लगातार बडी आंख करते देवायतकी आंखोमे देखती रही.. ओर देवायत लंडको रश्मीकी चुतमे जडतक घुसा देता हे ओर रुक रुक के कमरको जटके देने लगता हे..

तभी लंड रश्मीकी बच्चेदानीके मुखसे टकराते उनपे गरम विर्यकी पीचकारीया मारते बोछार करने लगता हे.. ओर रश्मीकी मदहोस होते आधी आंख चडाके अ‍ेक चीख नीकल जाती हे ओर वोभी अपनी चुतसे पानीका बोछार करते देवायतके लंको भीगोते जडने लगती हे.. दोनोही पसीनेसे लथबथ होगये.. तब देवायत रश्मीके गलेमे मुह डालके उसे हल्कासा चुमने लगता हे तो रश्मीभी आंख बंध करते देवायतके कंधेपे मदहोसी मे चुमती रहेती हे..तब देवायत रश्मीके सीनेपे सर रखके ढेर होगया तो रश्मी इनके सरको सहेलाती रही..





दोनोही सांत होगये तब रश्मी अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके उचा करते देवायतकी पीठमे आटी लगाके रखती हे.. ताकी दोनोका काम रस बहार ना नीकले दोनोही अ‍ेसे पडे रहे तब रश्मीको नही पताथाकी देवायतका बीज उनके गर्भमे प्रवेस करते उनके बीजके अंडेको मीलनेके लीये दोड रहेथे.. ओर आखीर देवायतका बीज अंदर चला गया ओर रश्मीके बीजसे मील गया.. इस बातसे दोनोही अन्जान थे..

काफी देर दोनो अ‍ेसेही पडे रहे तब रश्मी देवायतकी पीठ सहेलाती रही ओर बीच बीचमे दोनो अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते रहे आज दोनोकी आंखोमे बेसुमार प्यार नजर आ रहाथा.. तभी देवायत रश्मीके उपरसे उतर गया तो लंड फच.. आवाजके साथ चुतसे बहार आगया तो वो अभीभी अ‍ेसेही खडाथा.. जीसे देखके रश्मीको बडाही आस्चर्य हुआ ओर वो सरमसे पानीपानी होके नजर चुराने लगी..

रश्मी : (धीरेसे थकी आवाजमे) देवु.. मुजमे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. आजतो आपने मुजे चोद चोदके पुरी नीचोडली.. प्लीज.. मुजे बाथरुममे ले चलो.. मुजसे चला नही जायेगा..

देवायत : (उसे गोदमे उठाते) हां चल मेरी रानी.. दोनो साथमे नहातेहे बहोत भुख लगी हे..

रश्मी : (गोदमे) भुखतो लगेगी नां.. जनाबको दो दो बार करना था.. चोद चोदके थका दीया मुजे.. पुरा सरीर दर्द कर रह हे.. चलो.. फीर खानाभी बनाना हे.. सीर्फ सब्जी गरम करनी हे ओर रोटी बनानी हे..

तब दोनोही नंगे बाथरुममे चले गये दोनोही अ‍ेक दुसरको साबुन लगाते सावर चालु करके नहाने लगे ओर तब देवजायत रश्मीके बुब्स ओर चुतपे साबुन लगाते फीरसे उतेजीत होगया तब रश्मी पलटके देवायतके सामने होगइ ओर उनके गलेमे हाथ डालके उनके होंठ चुमने लगी.. तभी देवायतने भी होंठ चुमते उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो फीरसे कामाग्नीमे जलते अ‍ेक दुसरेको चुमते प्यार करने लगे..





तभी देवायतने रश्मीको पलट दीया ओर उनके पीछेसे रश्मीकी अ‍ेक टांग अपने हाथमे फसाके उची करली ओर पीछेसेही अपना तगडा लंड रश्मीकी चुतमे उतार दीया.. तब रश्मीकी आह.. नीकल गइ ओर कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते उनके होंठ चुमने लगी तो देवायत खडे खडेही पीछेसे रश्मीको चोदने लगा तो रश्मी लगातार सीसकारीया करती रही.. ओर चुपचाप देवायतसे चुदवाती रही काफी धका पैनी चुदाइके बाद दोनोही अ‍ेक साथ जड गये..





तब रश्मी अपनी चुतपे पानी डालके बाथरुमसे बहार चली गइ तब वो लंगडाते चल रहीथी जीसे देखके देवायतकी हसी नीकल गइ फीर वोभी बहार आगया तब रस्मी अपने रुममे जाके गाउन पहेनके कीचनमे चली गइ ओर देवायतने भी कपडे पहेन लीये ओर बहार रश्मीके पास जाने लगा.. तब रश्मी कीचनमे सब्जी गरम करनेके लीये स्टवपे रख रहीथी फीर वो आंटेको गुंदने लगी तबतक देवायत उसे बहारसे ही देखता रहा..

रश्मी : (सरमाते हसते) अ‍ेसे क्या देख रहे हे.. मे खाना बनालु..? मेरे जानुको भुख लगी हे.. हें..हें..हें..

देवायत : हंममम.. बेबी आप बहुत खुबसुरत लग रही हो.. आइ लव यु सो मच..

रश्मी : (सरमाते हसते) लव यु टु जानु.. जानती हु.. तभी तो मेरी तीन तीन बार कुटाइ करदी.., हें..हें..हें..

देवायत : रश्मी.. अब मे तुजे हमेसा अ‍ेसेही अपनी बीवी बानाके रखुगा.. ओर तुजे खुब प्यार करुगा.. अब तुम सीर्फ मेरी हो.. ओर यही रहोगी.. मेरी सीक्रेट वाइफ बनके.. देखना कीसीको मालुम ना हो..

रश्मी : (खुसीसे हसते) थेन्कयु जानु.. मुजे बीवी बनानेके लीये.. आप फीकर मत करो.. मेरी जानभी चली जाये तोभी ये बात कीसीको पता नही चलेगी.. अपनी इस बीवीपे इतना विस्वास रखो..

देवायत : बेबी बात विस्वासकी नही हे.. बस मे मेरी मंजुको बहोत प्यार करता हु.. ओर आज तुमसे अ‍ेक बातभी बतानी हे.. जो सीर्फ मे जानता हु.. पता नही अब तु मेरी पत्नी होगइ हे तो जी चाहता हे तुजे सब सचाइ बचादु..

रश्मी : (हसते) जानती हु.. यहीना..की मेरे अलावा कइ ओर ओरतोसे भी आपके रीलेशन हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस मुजेतो मेरे हीसेका प्यार मीलना चाहीये..

देवायत : नही रश्मी बात वो नही हे.. तुजे पता हे अब हमारे घरमे ओर इस गांवमे बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. बस इसीके बारेमे बात करनी थी..

रश्मी : (अ‍ेक नजरसे देखते) जानु.. अ‍ैसी क्या बात हे जो मेरा जानु बातको मनमे दबाके परेसान हो रहे हे..

तभी देवायत बडीही सीफततासे अपने घरमे आने वाले बदलावके बारेमे बात करने लगता हे जीन बातोमे बुछ बाबाकी बातभी करता हे तब रश्मी बडेही गोरसे सुनते खाना बना रहीथी ओर आस्चर्य हो रहीथी.. तब देवायत उसे आने वाले सब रीस्तोके बारेमे बात करता हे ओर वो अ‍ेक खास मक्सदकी वजहसे इस बातको रश्मीको बता रहाथा तब बीच बीचमे कुछ बाते सुनते रश्मी सरमसे पानीपानी भी हो रहीथी..

रश्मी : इसका मतलब अब आपके यहा कोइ रीस्तेकी अ‍ेहमीयतही नही रहेगी.. केसा लगता हे आपको..?

देवायत : रश्मी तुजे याद हे हीमाचलके उस राजाके बारेमे.. वहा उसने अ‍ेक परंपरा स्थापीत करदी हे..

रश्मी : हां.. मेने उनके बारेमे कइ बार सुना हे वहा कोइभी विधवा या त्यक्ता नही हे सब सुहागन हे या कवारी.. बडी अजीब परंपरा हे ओर अच्छी परंपरा भी हे..

देवायत : बस यही समजले बाबाके कहेनेके मुताबीक अब वोही राजा मेरे पोतेके रुममे फीरसे मेरे यहा जन्म लेने वाला हे.. ओर उनकी सुरुआत मानलोना मुजसेही सुरु होगइ हे..

रश्मी : (सरमाते हसते) तो क्या आपभी अ‍ेसे रीलेशनको मानोगे..? क्या अ‍ैसा कोइ रीलेशन हुआ हे..?

देवायत : हां.. मेरी मौसीजी.. तुम अभी मील चुकी हो उनसे.. उनसेही सादी कर रहा हु.. वोभी इनके लडकेकी मंजुरीसे जो अ‍ेक विधवा हे.. बेचारी छोटी उमरमे धिधवा होगइ थी..

रश्मी : (हसते) क्या इसके लीये मंजुदीदी मान गइ..?

देवायत : हां.. इस सादीके लीये मुजे मंजुनेही कहा हे.. बस इनका रीजन मे तुजे अभी नही बता सकता.. अ‍ैसे कइ ओर रीस्ते मुजे भी नीभाना पडेगा.. ओर ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रखना..

रश्मी : (अ‍ेक नजरसे प्यारसे देखते) जानु मेरा यकीन करो मे मर जाउगी.. लेकीन हमारी बात कीसीसे मालुम नही होगी.. जो सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. क्या इस बीवीपे इतना विस्वास नही हे..?

देवायत : नही जानु विस्वासतो बहुत हे.. तभीतो ये बात तुमसे केह रहा हु.. क्युकी आने वाले वक्तमे सायद मुजे तेरी जरुरत पडे..

रश्मी : (हसते) ठीक हे जानु जबभी इस बीवीकी जरुरत पडे बेजीजक कहेना.. जानभी देदुगी..

देवायत : (हसते) थेन्कस बेबी.. बस जान नही चाहीये तेरी मदद चाहीये..

रश्मी : (सरारतसे) अच्छा तभी तुम करते समय हमारी बच्चीके बारेमे अ‍ेसी बात कर रहेथे.., हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बेबी हमतो सायद अभीभी कुछ मर्यादामे रहेगे.. लेकीन मेरा बेटा.. हो सकता हे वो ये सब रीस्ते नाते नही माने..ओर हमने जो बाते कही सायद सचभी होजाये.. मेरा पोतातो मानने वालाही नही हे.. वो सब मुजे मालुम हे वो सब प्रकृतीको मानने वाले होगे..

रश्मी : (हसते) हां.. हो सकता हे.. सब पोसीबल हे.. क्या पता सायद हमारी बेटीके साथभी.. जो बेटी हुइ तो.., कीतना अजीब होगानां.. वोही राजा इघर जन्म लेके आयेगा.. सुनाहे उसने अपनी सभी बहेने चाची यहा तक उनकी दादीसे भी सादी करली थी..

देवायत : हां.. क्युकी वो सब पीछले कइ जन्मोसे उनकी रानीया थी जो इस जन्ममे भी इनकी कइ रानीया होगी जो कोइ बहेन बनके तो कोइ बुआ होगी. क्या पता इनमे तुमभी हो..

रश्मी : (सरमसे पानीपानी होगइ) क्या आपभी.. कुछभी बोलते हो.. क्या तुम्हे अच्छा लगेगा..?

देवायत : बेबी बात अच्छे बुरेकी नही हे.. यही समजलो मेरे बीजसे ही सुरुआत होगी.. ओर इनके लीये मेरे जीवनमे कुछ ओरते ओर लडकी आभी गइ हे.. क्या पता कीसकी कोखसे कोन जन्म लेगी.. अ‍ैसा बाबाका कहेना हे.. तभीतो मे कीसीभी ओरत या लडकीको मना नही करपाता..

रश्मी : (आस्चर्यसे) जानु.. ओरत तो समजी.., लेकीन लडकीभी..? क्या आपके जीवनमे कोइ लडकी आइ हे..? आइ मीन उनके साथ रीलेशन..

देवायत : (हसते) हां.. लेकीन अभीतक रीलेशन नही हुअ‍े.. लेकीन आगे क्या होगा ये नही पता.. बस इनके लीये तेरी मदद चाहीये.. ताकी समाजसे हमारा रीस्ता छुपा सकु.., ओर इनके लीये मुजे मेरी इस बीवीपे ही सबसे ज्यादा भरोसा हे जो मेरा सब रीलेशन छुपायेगी.. क्या तुम इसके लीये तैयार हो..?

रश्मी : (आकर देवायतको बाहोमे भरते) जानु.. सुक्रिया.. मुजपे इतना विस्वास करनेके लीये.. कहो क्या करना हे मेरे जानुके लीये कुछभी कर सकती हु.. ओर ये राज हमारे तक ही सीमीत रहेगा.. कोन हे वो खुसनसीब लडकी.. जीनका दील मेरे जानुपे आगया.. हें..हें..हें..(अबभी बाहोमे खडीथी)

देवायत : हे.. अ‍ेक लडकी जो मुजसे बहोत प्यार करती हे ओर जबसे बडी होके समजदार हुइहे तबसे मुजेही पती मानती हे.. बस ये बात कीसीको मालुम नही होनी चाहीये..

रश्मी : (होंठ चुमते) नही होगी बाबु.. अब बताभी दो वो खुसनसीब लडकी कोन हे..

देवायत : (धीरेसे) पुनम.. मेरी बहेन..

रश्मी : (जटसे अलग होते आस्चर्यसे) क्या..? पु..न..म.., हमारी पुनम..? आपकी बहेन..?

देवायत : (सरमसे) हां.. हमारी पुनम.. वो मुजसे बहोत प्यार करती हे.. ओर कलही मुजसे अपने प्यारका इजहार करलीया.. बस सादी सीर्फ दुनीयाको दीखानेके लीये कर रही हे ताकी दुनीयासे हमारा रीस्ता छुपा सके ओर अ‍ेक बात.. बाबाके मुताबीक हम दोनोकाही वो अंस होगा ओर हम दोनोसेही उनकी सुरुआत होगी..

रश्मी : (सरमाते हसते) क्या तुम दोनो रीलेशनमे.. आइ मीन.. सेक्स.. कुछ आगे बढे..

देवायत : नही.. अभी तक नही.. लेकीन मुजे लगता हे हम दोनो जल्दी मील जायेगे.., बाबाके केहेनेके मुताबीक हम दोनो पीछले कइ जन्मोसे भाइ बहेनके रुपमेही जन्म लेते हे ओर आपसमे सादी करते पती पत्नीकी तराह जीवन बीताते हे.. पीछले जन्ममेभी हम दोनो उन राजाके दादा दादी थे..जो असलमे दोनोही सगे भाइ बहेन थे.. जो इस जन्ममेभी हमे वोही रीस्ता कायम करना हे..

रश्मी : (हसते) अच्छा अब मे सारा माजरा समज गइ.. आप फीकर मत करो.. आप दोनोको जबभी मीलना हो इधर मेरे घरके दरवाजे खुले हे.. आप इनको यहा मील लेना कीसीको सकभी नही होगा..

देवायत : (हसते बाहोमे भरते) बस.. यही मे तेरे मुहसे सुनना चाहता था.. लव यु बेबी..

रश्मी (होंठ चुमते) लव यु टु.. चलो अब खाना बन गया हे.. फीर कुछ आरामभी करलो.. थके होगे..

दुवायत : नही आज कोइ आराम नही.. भला सादीके दीनभी कोइ आराम करता हे..? हें..हें..हें..

रश्मी : (बुरी तराह सरमाते हसते) देवु.. प्लीज.. मेरा पुरा सरीर दर्द कर रहा हे.. तुम कीतना जोसमे करतेथे मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया..फीर कभी करेगेनां..

देवायत : नही मतलब नही.. आज मे मेरी बीवीको तृप्त करदुगा.. उनको आज बच्चा देना ही हे..बस खाना खाके तु वापस रुममे आजा फीर पता नही कब तुजे दोबारा मीलनेका मौका मीलेगा..

कहातो रश्मी सरमसे पानीपानी होगइ ओर वो जटसे अलग होके दोनोके लीये खाना नीकालने लगी आज उसने अ‍ेकही थालीमे दोनोका खाना नीकाला ओर दोनो अ‍ेक साथ डाइनींगपे आगये.. तब देवायतने रश्मीको अपनी गोदमे बीठाया ओर अपने हाथोसे खीलाने लगा, तो रश्मीभी सरमाते देवायतको खीलाती रही.., आज दोनोही पती पत्नीका हर धर्म नीभाते थे.. इससे रश्मी बहुत खुस हो रहीथी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३५

कहातो रश्मी सरमसे पानीपानी होगइ ओर वो जटसे अलग होके दोनोके लीये खाना नीकालने लगी आज उसने अ‍ेकही थालीमे दोनोका खाना नीकाला ओर दोनो अ‍ेक साथ डाइनींगपे आगये.. तब देवायतने रश्मीको अपनी गोदमे बीठाया ओर अपने हाथोसे खीलाने लगा तो रश्मीभी सरमाते देवायतको खीलाती रही.., आज दोनोही पती पत्नीका हर धर्म नीभाते थे.. इसे रश्मी बहुत खुस हो रहीथी....अब आगे

दोनोही बाते करते खाना खा रहेथे तब देवायत रश्मीको सब बता देताहे की उनका कीसके साथ रीलेशन हे.. बस कुछ ओरतोके बारेमे नही बताता जेसेकी भानुकी मां सरला ओर खुदकी सांस नीर्मला जो देवायत उनके ससुरको मीलने जाता था तबसेही दोनोकी आंख मील गइथी जो देवायत उसे मंजुकी सादीसे पहेले तीन बार चोद चुका था लेकीन देवायतको उनकी बेटी बहुतही पसंद आगइ ओर उनसे सादी करली..

सादीके बाद देवायत अपने ससुराल कमही जाने लगा वो इनके बारेमे रश्मीको बताके उनकी इजतके साथ नही खेलना चाहता था ओर इनमे मंजु ओर भानुको धोखा देनेकी भी बातभी थी.. तब रश्मी देवायतको अपने घरकी अ‍ेक चाबीही देनेकी बात करने लगी.. तो देवायतने उसे दुसरी जगाह गांवके बहारकी ओर घर बनाके रहेने को कहा.. तो रश्मी मान गइ.. उसेतो सीर्फ देवायतका प्यारही चाहीये था.. जो इनके बच्चे पेदा करके पुरी जींदगी इनकी जोगन बननेको तैयार थी..

दोनोने खाना खालीया ओर रश्मी सब बर्तन समेटके साफ करने लगी तब देवायत राघव वाले रुममे चला गया.. ओर बेडपे लेट गया तो राघर उसे टेडी नजर करके घुरने लगा.. तभी रश्मी राधवका खाना लेके आइ ओर उसे खीलाने लगी तो आज गुसेसे राधवने अपना मुह नही खोला ओर खाना ही नही खाया तो रस्मी खाना वापस लेके चली गइ.. ओर सब काम समेटके वापस रुममे आगइ ओर राघवको सुनाने लगी..

रश्मी : खानेपे क्यु गुसा कर रहे हो.. मत खाओ मेरी जुती.. जो तुमसे जबरदस्ती खीलाउगी.. अब वो दीन चले गये.. देखो.. ये हे मेरा पती.. जो मुजे अपने हाथोसे खीला रहा हे.. ओर अ‍ेक तुम हो.. जो कभी प्यारसे मेरे साथ खानेभी नही बेठे.. अबतो यही मेरे पती हे ओर हमेसा इनसेही चुदवाउगी देखना तुम्हारे सामनेही इनका बच्चा पैदा करुगी.. बडे आये.. खाना नही खाना.. बीसतरमे पडे हे फीरभी अकड नही जाती..

देवायत : बेबी छोड उसे इधर आजा.. मुजे प्यार करना हे..

रश्मी : (सरमाते अपने बाल खुला करते) आती हु बाबा.. पहेले इनसे तो नीपटलु..

कहेते रश्मी देवायतके पास चली जातीहे ओर बेडपे आते देवायतके पास लेटते उनसे चीपक जातीहे तो देवायत उनकी कमरमे हाथ डालके अपने पास खीच लेता हे ओर रश्मीको बाहोमे भरते उनके सरको चुम लेता हे तब रश्मीको बडा सुकुन मीलता हे.. वो देवायतके सीनेमे सर रखते उनकी बाहोमे सोने लगती हे तो देवायत उनके गाउनको नीकालने लगता हे तो रश्मी सरमसे पानीपानी होने लगी..

रश्मी : (सरमाते) देवु.. प्लीज सोजाओनां.. अभी तक थके नहीहो क्या.. कीतना करना हे..?

देवायत : बेबी मुजे सामको जाना हे तबतक मेरी इस बीवीको जीभरके प्यार देना चाहता हु..

रश्मी : (सामने देखते) जाना हे..? रुक नही सकते क्या..?

देवायत : नही बेबी.. सायद सामको मंजुको लेके होस्पीटल जाना पडे..

रश्मी : क्या उनके साथ कोइ हे..? क्या मे आजाउ..?

देवायत : नही वो मौसी आगइ होगी.. वोही इनके साथ होस्पीटल रहेगी..

रश्मी : (हसते) अच्छा आपकी नइ बीवी.. हें..हें..हें.., देवु क्या मस्त दीखती हे.. कीसी हीरोइनकी तराह..

देवायत : (हसते) तुमभी तो कम नही हो.. देखा नही सुबहसे मुजे पागल करके रखा हे.. चल आजा..

कहतो रश्मीने सरमाते देवायतके सीनेमे सर छुपालीया ओर थोडीही देरमे दोनोके जीस्मपे अ‍ेकभी कपडे नही थे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ स्मुच कर रहेथे ओर धीरे धरीे करते कामोत्जेनाकी ओर बढने लगे..





जेसेही देवायतने रश्मीके बुब्सपे मुह लगाया रश्मी मदहोस होने लगी ओर आधी आंख चडाके देवायतके बाजुुको पकडते अपने उपर खीचते अपने उपर चडाने लगी ओर देवायतभी अ‍ेक पैर उनकी कमरपे डालके रश्मीके उपर चड गया तभी रश्मीने दोनो हाथ देवायतके नीतंबपे रख दीया ओर अपनी चुतकी ओर दबाने लगी तो देवायतका लंड रश्मीकी चुतपे ठोकर मारने लगा ओर थोडीही देरमे लंडने अपना रास्ता ढुंढ लीया.. ओर देवायतने कमरको जटके देते पुरा लंड रश्मीकी चुतमे घुसा दीया..तब रश्मीकी चीख नीकल गइ..

ओर रश्मीने राहतकी सांस ली जेसे वो हमेसाके लीये देवायतका लंड अपनी चुतमे ही रखना चाहती हो, तभी देवायतने अपनी कमर उची करली रश्मीके दोनो पैरमे हाथ फसाके पैरको पुरा घुटनोसे मोडलीया ओर पुरा लंड नीकालके वापस चुतमे जडतक घुसाने लगा वो रश्मीके उपर जुकते उनके गलेमे मुह डालके गलेको चुमता रहा ओर लंबा लंबा सोट मारते ररश्मीको चोदने लगा तभी रशमीकी बच्चेदानीपे देवायतका लंट टकराने लगातो रश्मीकी चीखे नीकलने लगी ओर देवायतके हर धकेके साथ उनकी आहे नीकलने लगी..





दोनोके बीच धमाकेदार चुदाइका दौर चल पडा ओर देवायत उछल उछलके रश्मीको चोदता रहा..तभी रश्मीने अचानक देवायतको बाहोमे भीचके लीपलोक करलीया ओर जडने लगी.. फीर नीढाल होके पडी रही तबभी देवात उसे जोरोसे चोदे ही जा रहाथा तभी रश्मीको अपनी चुतमे दर्द महेसुस होने लगा ओर वो दर्दके मारे मुह बीगाडने लगी ओर देवायतके दमदार लंडको अपनी चुतमे जेलती रही.. उनकी चुतमे काफी घर्सण महेसुस होने लगा जेसे चुतकी नाजुक चमडी छील गइ हो..ओर चुतमे जलन होने लगी..

आज रश्मी देवायतसे वो चोथी बार चुद रहीथी तभी देवायत रश्मीकी गरदनमे अपना दांत गडाने लगता हे ओर बुब्सको चुमते उनके होंठ भीचलेता हे तो रश्मी देवायतको कसके बाहोमे भीचलेती हे क्युकी उनको पताथा अब देवायत जडने वाला हे तभी देवायत लंडको जडतक घुसाते अपना विर्य रश्मीकी बच्चचेदानीपे गीराते उनकी चुतको भरने लगता हे ओर थोडे ही जटकेमे रश्मीके सीनेमे ढेर होके गीर जाता हे..

तब रस्मी उनके सर ओर पीठ सहेलाती रही.. फीरभी रश्मी देवायतका लंड अभीभी अपनी चुतमे कडक महेसुस कर रहीथी.. रश्मीने अपने दोनो पेर अभीभी उपरकी ओर करके रखाथा ताकी देवायतका बीज उनके गर्भ तक पहोंच जाये.. वो अपने बच्चेके लीये आज हर तकलीफ सहेन कर रहीथी.. थोडी देर अ‍ैसे पडे रहेने बाद देवायत रश्मीका पैर अ‍ेक तरफ कर देता हे तब रश्मी करवट लेके साइडमे मुह करते लेटी रही..

ओर देवायत उनके पीछे चीपकके लेट गया ओर लंडको पकडके रश्मीके पीछेसेही उनकी चुतमे घुसा दीया.. तब रश्मीकी आह.. नीकल गइ अभी चुदाइ खत्म हुइ उसे दस मीनीटभी नही हुआथा ओर देवायत वापस रश्मीको पीछेसे लंड डालके चोदने लगा.. तब रश्मीकी हालत खराब होने लगी.. वो देवायतको मनाभी नही कर सकतीथी क्युकी देवायत अब उनका पती था ओर वो देवायतसे खुब प्यार करती थी..

देवायत चोदते हुअ‍े रश्मीकी कमरमे हाथ डालके उनके बुब्सको पकड लेता हे ओर जोरोसे मसलने लगता हे तब रशमीकोभी अपने बुब्समे दर्द होने लगा आज देवायत उसे बडे ही बेहरहेमीसे चोद रहा था तभी थोडी ही देरमे देवायतने अपनी स्पीड बढादी ओर रश्मीको जोरोसे चोदने लगा तब रश्मी दर्दके मारे चीलाती रही ओर चीखती रही..उनकी आंखोसे आंसुकी धारा बहेने लगी.. तब राधव दोनोकी कामलीला देखता रहा.. ओर अपनी कीस्मतको कोसता रहा..

चुदाइ करवाते करवाते रश्मी लगभग बेहोसीकी हालतमे चली गइ उनका पुरा सरीर दर्द करने लगा देवायतने चोद चोदके उनकी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको ढीली करदी.. अब रश्मीके मुहसे आवाजभी नही नीकल रहीथी ओर देवायत फुल स्पीडसे चोदने लगा तब रश्मीके बुब्स उछलने लगे उनको कोइ होंस नही था वो देवायतके लंडको बेहोसी जेसे हालतमे जेलती रही ओर अपचानक देवायत जडने लगा..





ओर रश्मीकी चुतको भरने लगा.. जब जड गया तब फटसे लंडको नीकाल दीया ओर रश्मी दर्दके मारे आहे भरते करवट लेके पलट गइ ओर बेहोसीकी हालमे अ‍ेसेही लेटी रही उनमे बोलनेकी भी ताकात नही थी तब देवायत उठके बाथरुममे चला गया तबभी रश्मी अ‍ेसेही पडी रही उनको अपनी चुत साफ करनेकीभी ताकात नहीथी उनकी चुतसे दोनोका काम रस चुतसे बहेते अपने पैरसे होते बेडपे गीरता रहा..

देवायत नहाके बहार आगया ओर अपने कपडे पहेनने लगा तबभी रश्मी आंख बंध करते दर्दके मारे मुहको बीगाडती लेटी रही.. तब देवायत कंपलीट होगया तो रश्मीपे जुकके उनके होंठ चुमलीये..

देवायत : बेबी बहुत दर्द हो रहा हे..? क्या पेइनकीलर देदु..?

रश्मी : (गरदन नां मेहीलाते) नही जानु..मुजे थोडी देर अ‍ेसेही सोनेदो अभी ठीक होजाउगी..

देवायत : तो फीर मे जाउं..?

रश्मी : (हां मे गरदन हीलाते धीरेसे) हां.. दरवाजा बंध करते जाना..

ओर देवायत वो बक्सा लेके नीकलने लगा तब जाते समय सब दरवाजे अच्छेसे बंध करते हवेलीकी ओर चला गया.. इधर रश्मी अ‍ेसेही हालमे पडी रही उसे पताही नही चला वो कब नींदकी आगोसमे चली गइ आज देवायतके आनेके बाद रश्मीको अ‍ैसे चोदाथा की रश्मी अगले दो दीनतक ठीकसे चलभी नही सकती.., रश्मीको पताथा भलेही देवायतने चोद चोके उनकी हालत खरब करदी लेकीन आज वो बहुतही खुस थी..

आज उनको बडाही सुकुन मील रहाथा..बस वो अ‍ेक बातसे अन्जान थी.., ओर वो यहीकी आज वो देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकीथी.. जो कही महीनोसे इस पलका इन्तजार कर रहीथी..ओर देवायतकोभी नही मालुमथा की वो रश्मीके गर्भ अपना बीज स्थापीत कर चुका हे.. वो खुदको अयास कीसमका आदमी समजताथा लेकीन उनको पताही नहीथा की इनका जीवन उनके हाथोमे थाही नही जो ये बात सीर्फ मंजु ओर बाबाही जानते थे..

तभीतो देवायतमे इतना आकर्सण था जो हर कोइ ओरत होया लडकी इनको देखतेही इनको पानेकी कामना करतीथी ओर उनसे वो हर सुख पाना चाहतीथी जो सादीके बाद उनका पतीसे वो सुख पाती हे क्युकी मंजुके माध्यमसे बाबाने उनको छुपकेसे वो जडी बुटी पीलाइथी जीनके बारेमे सीर्फ मंजु ओर बाबाही जानते थे.. लेकीन बाबाने मंजुको कसम खीलवाके उसे कुछभी नही बतानेको कहाथा..

देवायत घरपे आगया तब होलमे आके देखातो मंजु चंदा धिरेन ओर पुनम हस हसके बाते कर रहेथे जेसेही मंजुने देवायतको देखातो खुसीसे खडी होगइ ओर सबको भुलके देवायतकी ओर जाके उसे हग करती खडी रही तभी चंदा धिरेन ओर पुनमभी सरमाते हसने लगे तभी मंजुको पता चलाकी वो देवायतकी बाहोमे हे..

तब वो सरमाके हसने लगी ओर देवायतका हाथ पकडके सबके पास आके बेठ गइ ओर देवायतभी उनसे चीपकके बेठ गया.. तभी पुनम तीरछी नजरसे देवायतकी ओर देखती रही.. ओर सुबहकी घटनाको याद करते सरमाती रही.. तभी देवायतका ध्यान धिरेनकी ओर गया तो उसे सब पुछने लगा..

देवायत : कहो धिरेन.. कब जोइन्ट करना हे..? कुछ मीठाइ बीठाइ लायाकी नही.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते खुस होते) जीजु मीठाइ नही लाउगा तबभी आप लेलोगे.. बस कल जोइन्ट करना हे..

कहातो धिरेनकी डबल मीनींग बात सुनके चंदा धिरेनकी ओर नजर चुराते देखती रही.. ओर सरर्मसार होती रही.. वो धिरेनके कहेनेका मतलब भलीभांती जानती थी ओर उसे सक होने लगाकी कही धिरेनको हमारी चुदाइके बारेमे पतातो नही चल गया.. यही सोचते वो अपने पैरके नाखुनसे जमीनपे खरोदने लगी..

मंजुला : पुनो अब तुम्हारे भाइ आ गयेहे तो तुम दोनोको घुमने जाना होतो जाओ.. अब ये यही हे..

चंदा : (सरमाते हसते) हां बेटा तुम दोनो इधर घुमके आजाओ अभी खाना बन जायेगा फीर खाके चले जाना..

मंजुला : (हसते) अरे सुबह जल्दी नही जाना तो यहीसे चले जाना.. यही रुक जाओ..

धिरेन : (खडा होते) नही दीदी.. पहेले दीनही लेट होजाउगा.. फीर आउगानां..

धिरेन खडा हुआतो पुनम ना चाहते हुअ‍े भी खडी होगइ ओर धिरेनके साथ बहार चली गइ वो दोनोही घुमते पीछे गार्डनकी ओर बाते करते चले गये.. तब इधर चंदा आज पहेलीबार देवायतको हसते हुअ‍े देखने लगी.. तब मंजुको सरारत सुजी.. तो उसने चंदाको भी हसते हुअ‍े केह दीया..

मंजुला : (हसते) मौसी अप दोनोकोभी घुमने जाना होतो जाओ.. हें..हें..हें..

चंदा : (बुरी तराह सरमाते) मंजु.. अ‍ेक दुगीनां.. क्या बोल रही हे.. सरमभी नही आती..

मंजुला : (हसते) मौसी बुरा मत मानना.. लेकीन मे सच केह रही हु.. अ‍ेक दीनतो इधर आनाही हे..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) चुप कर.. बहुत बोलती हे.. देवुकी तो सरम कर.. अभी कहा.. हमने..

मंजुला : ओ कम ओन मौसी.. अभी सादी नही कीतो होजायेगी.. मेने क्या गलत बोल दीया..? ठीक हे नही कहुगी..

कहातो देवायत उठके अपने रुममे चला गया ताकी दोनो खुलके बात कर सके तब चंदा मंजुके पास आके बेठ गइ ओर उनका चहेरा अपनी दोनो हाथोसे थाम लीया ओर उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही तभी मंजुने नजर जुकाली ओर दो बुंद आंसुके नीकल गये तब चंदाने उनका सर अपने सीनेपे रख दीया ओर प्यारसे मंजुके बाल सहेलाती रही..

चंदा : बेबी आइ अ‍ेम सोरी.., लेकीन देवुके सामने मुजे बहुतही सरम आ रहीथी.. सोरी..

मंजुला : (धीरेसे) दीदी सोरी मत बोलो मेनेही थोडी जल्दबाजी की सोरी.. अब नही कहुगी..

चंदा : (मंजुका चहेरा पकडते) मुजे दीदी कहेती हेनां.. तो बहेनमे नो सोरी.. चल ठीक हे.. मे जाउगी.. लेकीन अभी नही.. पहेले तेरा सब नीपट जाये फीरतो मुजे इधरही आना हे.. तब हम घुमेगे.. हम तीनो.. बस..?

मंजुला : (हसते) हंममम.. ठीक हे.., लेकीन इस रीस्तेसे आप खुस तो हेनां..?

चंदा : (हसते) हां.. बहुत खुस हु.. अरे पगली तुने तो मेरी विरान जेसी जींदगी सवरदी.. तो केसे खुस नही हु्रगी.. बस सादी तक रुकजा.. फीर हमभी सादी कर लेगे.. ओके..?

इधर देवायत फीरसे बहार नीकला ओर दोनोकी ओर देखते बहार चला गया ओर अपने बुलेटसे बंधा वो बक्सा लेके वापस अपने रुममे चला गया.. ओर बेडपे रखके खोलने लगा ओर अ‍ेक अ‍ेक कागजात देखने लगा.. तो बुहत सारे मजदुर ओर गरीबो के जमीनके कागजात थे.. जो गांवके हीसाबसे अलग करने लगा.. ओर खुदकी जमीनके भी सारे कागजात देखने लगा.. तब उसने बहुत कुछ नया देखा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३६

इधर देवायत फीरसे बहार नीकला ओर दोनोकी ओर देखते बहार चला गया ओर अपने बुलेटसे बंधा वो बक्सा लेके वापस अपने रुममे चला गया.. ओर बेडपे रखके खोलने लगा ओर अ‍ेक अ‍ेक कागजात देखने लगा.. तो बुहत सारे मजदुर ओर गरीबो के जमीनके कागजात थे.. जो गांवके हीसाबसे अलग करने लगा.. ओर खुदकी जमीनके भी सारे कागजात देखने लगा.. तब उसने बहुत कुछ नया देखा....अब आगे

इधर धिरेन ओर पुनम गार्डनमे जाके बेठ गये.. तब दोनोही अपने फ्युचरकी बाते करने लगे थोडी देर बाते करते खडे होगये तब पुनमने धिरेनके गलेमे हाथ डालके धीरेसे उनके होंठ चुम लीये..




क्युकी वो धिरेनसे दुर रहेना नही चाहतीथी ताकी धिरेनको कोइ सकना हो.. उनको भी पताथा अ‍ेक बार धिरेनसे सादी होजायेगी तब धिरेन उनकी रोज लेगा.. ओर इनके लीये वो तैयारभी थी लेकीन अपना कौमार्य सीर्फ अपने भाइकोही सोंपना चाहती थी.. वो अपनी पहेली चुदाइ देवायतसेही करवाना चाहती थी इसके लीये पुनमने पुरा इन्तजाम करलीया था.. फीलहाल वो दोनोकी ओर बेलेन्स बनाके रहेना चाहतीथी ताकी कीसीकोभी अपने भाइके साथ रीलेशनका पता नाचले, दोनो बाते करते वापस घरकी ओर चलने लगे..

इधर देवायतने सब पेपर देखलीये तब उनकी जानकारीमे बहुत कुछ नया नीकला जो उसे सोचनेके लीये मजबुर कर रहा था.. कुज पेपर रहस्य भरेथे.. उनकोभी बडा आस्चर्य हुआकी इतनी सारी जानकारी राघव ओर मुनीमके पास कहासे आइ? लेकीन आज उनका जवाब देनेके लीये वो दोनोही सक्षम नही थे.. तभी मंजु कमरेमे आगइ ओर सब पेपर देखके खुसीसे हसने लगी ओर देवायतसे पुछने लगी..

मंजुला : इतने सारे कागजात? जानु क्या मील गये सब कागजात..? कोइ कामका नीकला..?

देवायत : हां मंजु बहुत सारे कागजात नीकले जीसके बारेमे हमेभी नही मालुमथा भला हो रश्मीभाभीका जो सब हमे सोंप दीया..

मंजुला : जानु वो बहुतही अच्छी हे.. मेरी सहेली बन गइ हे.. कहेतीथी कोइ ना होतो मुजे बोलना मे होस्पीटल साथमे आउगी बेचारी अपने पतीको बीस्तरमे छोडके साथ आनेको तैयार होगइ.. वो चारुभाभीनेभी कहेलवाया था लेकीन अबतो मौसी आगइ..

देवायत : मंजु जरासा भी अ‍ैसा कुछ लगेतो बोलना हम फौरन चले जायेगे..

मंजुला (हसते) अरे हां बाबा.. अबतो मौसी आगइ हे अब कोइ दीकत नही.. चलो खाना नही खाना क्या? पता नही दोपहरको खाया होगाकी नही.. क्या भाभीने खीलाया..?

देवायत : हां मजु मे पेपर देखता रहा ओर उसने खाना बना लीया ओर वही खाके सब अलग कर दीया..

मंजुला : (हाथ पकडते) अब चलो चलो.. मुजेतो भुख लगी हे.. सब आगये हे..

कहेते मंजु देवायतको हाथ पकडके बहार लेगइ ओर सब डाइनींगपे आगये.. आज ना चाहते हुअ‍ेभी पुनमको धिरेनके साथ बेठना पडा ओर चंदा देवायतके पास बेठ गइ तब देवायतकी पुनमकी ओर देखते ही हसी छुट गइ तो पुनम देखते चीड गइ ओर मुह बीगाडते देवायतको देखती रही.. सबने बाते करते खाना खालीया तो धिरेन सबको गले मीलके अपने घरकी ओर नीकल गया.. ओर जाते पुनमको फोनका इसारा करते गया..

उधर रश्मीके घर देर तक रश्मी सोती रही तभी उनकी आंख खुल गइ ओर वो सोती रही उनकी नजरके सामने सारा दीनका घटना क्रम अ‍ेक फील्मकी तराह चलने लगा.. आज देवायतसे उनकी सादीभी होगइ ओर देवायतने पुरा दीन उसे जमकर चोदभी लीया पुरे दीनमे देवायतसे पांच बार चुद चुकीथी तब उसे खानेके बादकी चुदाइ याद आने लगी केसे देवायत उसे बडेही बेहरहीमे से चोदताथा.. वो सहेनभी नही कर पा रहीथी क्या मे देवायतको इतनी पसंद आगइ हु.. यही सब सोतचे वो बेडपे पडी रही..

फीर कुछ देरके बाद वो बेडपे बेठ गइ तब उनकी चुतमे बहोत जलन होने लगी.. तब रश्मीने जुकके अपनी चुतकी ओर देखातो सुजके चौडी होगइथी उनकी चुतका मुख पुरा खुला हुआथा तो वो देखके सरमा गइ ओर बेडसे उतरके बाथरुमकी ओर जाने लगी तब उसे चला नही गया ओर वो बेडपे वापस बेठ गइ.. अब इनकी मदद करनेवाला देवायतभीतो नही था.. तब वो अ‍ेक प्लास्टीककी चेर खीचके उनके सहारे चलने लगी..

वो धीरे धीरे चलते बाथरुममे घुस गइ ओर टबमे बेठते नहाने लगी फीर उपरका नल चालु करके पानीकी धार अपनी चुतपे गीराते बैठी रही तभी कुछ देरके बाद उसे राहत महेसुस हुइ..




फीर चैरके सहारे बहार आके अपना नाइट गाउन पहेनके कीचनकी ओर चली गइ फीर खाना बनाके राघवको खीलाने आइ तबभी राघवने नही खाया तो रश्मीको कोइ अफसोस नही हुआ ओर वो खाना लेके वापस चली गइ ओर खुद खाने बेठ गइ फीर सब काम धीरे धीरे नीपटालीया ओर सभी दरवाजे अच्छेसे लोक करके वापस अपने रुममे चली गल ओर सो गइ..

उधर भानुके गांवभी आज सब खाना खाने बेठे थे तो आज भावुको बहुत बेचेनी लग रहीथी वो आज ठीकसे खानाभी नही खा पाइ ओर अपने रुममे जाके लेट गइ तो सरला सब समज गइ..

सरला : बेटा वो कार तैयार रखना.. उनमे प्रेट्रोल तो हेना नहीतो अभी जाके भरवाले मुजे लगताहे हमे रातकोही कभीभी बहुको लेके जाना पड सकता हे.. देखा नही कैसे बैचेन हो रही हे..

भानु : मांइ सब रेडीही हे.. आप फीकर रमत करो.. अगर अ‍ैसा होगा तो मे आपको जगा दुगा हम लेके चले जायेगे..

सरला : (लताकी ओर) बेटी तु यहा भावेशका खयाल रखना.. सुबहतो कोइना कोइ आही जायेगा.. वरना मामीको फोन करदेना वो मां बेटी चली आयेगी..

लता : नही मां मे अकेली रेह लुगी.. वेसेभी कइ बार अकेलीही रही हु.. ओर जरुरत पडीतो बुला लुगी..

सरला : चल ठीक हे जेसे तेरी मरजी.. दरवाजा बंध करके रखना हम दो दीनमेही वापस आजायेगे..

भानु : माइ तुम लताकी चीन्ता मत करो.. वो समजदार हे.. वहा भाभीकोभी कभीभी लेजाना पडे.. वरना मौसीको इधरही बुला लेते.. वेसे वो लोगभीतो वही आयेगे..

अ‍ेसीही बाते करते सबने खानाभी खालीया ओर सोने चले गये तो भानुभी अपने रुममे आगया ओर कपडे बदलके सोने लगा वो भावनासे चीपके सोने लगा तब भावनाने उनका हाथ जटक दीया तो भानुको थोडा गुसा आगया.. ओर बेडपे बेठ गया ओर भावनाकी ओर देखते उसे पुछने लगा..

भानु : भावु क्या हे सब.. मे पीछले कुछ दीनोसे देख रहा हु तु मेरे साथ बोलतीभी नही ओर रातकोभी मुजसे बेरुखीसा व्यवहार करती हे तेरी प्रोबलेम क्या हे..

भावना : (दुसरी ओर करवट लेते गुसेसे) कुछ नही आप सोजाओ मेरी तबीयत ठीक नही हे..

भानु : देख भावु तु तबीयतका बहाना मत बना मे इतनाभी भोला नही हु की तेरा व्यवहार समज ना सकु..

भावना : (चीडके) भानु मे तुमसे अभी बहेस करना नही चाहती सोजाओ.. मुजे नींद आ रही हे..

भानु : (सोते) ठीक हे अभीतो सो जाता हु.. लेकीन तुजे मुजसे बात करनी पडेगी.. पहेले तेरा सब नीपट जाये तब हम बात करेगे..

भावना : ठीक हे.. लेकीन अभी सोजाओ.. हम बादमे बात करेगे..

कहेते वो आंख बंध करते लेट जाती हेतो भानुभी सोने लगता हे तब भावनाकी आंखमे आसु नीकलने लगे ओर वो भानुकी ओर पीठ करते सोचती रही..

भावना : (मनमे सोचते) भानु तुम मुजे प्यार नही करते.. तो मुजे दो दो बच्चा क्यु देदीया..? क्या गलती थी मेरी जो तुमने अपनी मामीके साथ नाजायज रीसता रखा हे.. अगर उनसेही रीस्ता रखनाथा तो मुजसे सादी क्यु की? ओर दोदो बच्चेभी देदीये.. पहेले पता होतातो नही करती तुमसे सादी.. इसमे जीजु ओर दीदीको भी क्या दोष दु.. मेरा नसीबही खराब हे अ‍ेकतो मुजे अपना प्यार नही मीला ओर दुसरा पती मीलातो वोभी अपनी मामीके साथ लगा हुआ हे.. इससे अच्छातो मे जीजुकी रखैल बनके रहेती.. कमसे कम जीनको प्यार करतीथी उनके साथ रीलेशनमेतो रहेती.. अब दीखा दुगी.. जोभी हो अब मुजे जीजुके साथ रीलेशनमे आनाही हे चाहे कुछभी होजाये..

यही सब सोचते नाजाने कब नींदकी आगोसमे चली गइ उसे पताही नही चला उधर हवेलीमे भी सब सोने चले गये आज चंदाभी वोही रुममे सोइ थी ओर सोच रहीथी..

चंदा : (मनमे सोचते) उसदीन देवायत उसे छोडने आयाथा तब केसे उसे रगड रगडके चोद लीयाथा..तब उनकी हालत खराब करदी थी दो दीन ठीकसे चलभी नही पाइ.. कीतना जालीम हे.. मुजसे प्यारभीतो बहुत करता हे.. पता नही उनको देखतेही मुजे क्या होजाता हे उनसे चुदे बीना रेहभीतो नही सकती.. लेकीन आज उनसे मीलना मुस्कील हे.. पुनम इधरही नीचे सोती हे.. मेरी बहु हे.. अगर हमे देखलीया तो मेरी क्या इजत रेह जायेगी.. अब तो ये सादी होजायेतो अच्छा हे कमसे कम इधर आके देवुसे खुलके चुदवातो सकती हु..

यही सब सोचते उसेभी नींद आगइ तब दुसरी ओर पुनम बार बार कीचनकी ओर देखने आतीथी की देवायत अ‍ेक बारतो पानी पीने आयेगा.. वो दो बारतो देवायतके रुमकी खीडकीसे भी देखके आगइ केसे देवायत मंजुसे चीपकके सोयाथा ओर मंजुभी उनकी बाहीमे सो गइथी कास मंजुभाभीकी जगाह मे होती वही सोचते वो वापस आके अपने बेडपे करवटे बदलती रही.. ये दो दीनमे उसे बहुत कुछ करना था..

तभी उसे कीचनमे कुछ आहट सुनाइदी तो जटसे खडी होगइ ओर धीरेसे दरवाजा खोलके देखने लगी तो देवायत उसे पानी पीते दीख गया तब वो जटसे दरवाजा बंध करके आजु बाजु सब देखते कीचनकी ओर चली गइ देखातो देवायत पानी पी रहाथा जेसेही देवायतने पानी पीकर फ्रीजको बंध कीया तो पुनम जटसे देवायतके पास चली गइ ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालके देवायतको दिवालकी ओर धकेलते दीवालसे सटालीया ओर उनके होंठोपे होंठ रखते पागलोकी तराह चुंबनोकी बारीस करने लगी..




तभी देवायतभी उसे अपनी बाहोमे भीच लेताहे ओर चुंबन करतेही पुनमके बुब्सको दबाने लगता हे दोनोही कामाग्नीमे जलते पागल जेसे होगये थे अबतो देवायतकोभी अपनी बहेन पुनममे उनकी मासुका दीख रहीथी तभी पुनम देवायतका हाथ पकडके उसे उपरकी ओर टेरेसमे लेजाने लगी ओर दोनोही टेरेसमे चले गये ओर अ‍ेक दुसरोको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर होंठ मीलाके स्मुच करने लगे..




ओर स्मुचसे वाइल्ड कीस यानी फ्रेन्च कीस करने लगे दोनोनेही अपना मुह खोलदीया ओर अ‍ेक दुसरेके मुहको पुरी तराह मीलाके दोनोही अ‍ेक दुसरेके रसको पीने लगे तभी देवायतने पुनमका बुब्स मसल दीया तब पुनम मदहोस होने लगी.. ओर देवायतके पेन्टके उभारको पकडके मसलने लगी तो देवायतनेभी पुनमकी चुतपे हाथ लगाके लंहेगेके उपरसेही भीचलीया तब पुनम सरसे पांव तक कांप गइ ओर सीसकारीया करने लगी..फीर जोरोसे देवायतको बाहोमे भीच लेती हे ओर अ‍ेसेही खडी रही ओर देवायतका हाथ पकडते चुतसे हटाने लगी..

पुनम : (धीरेसे हाथ पकडते) बस..बस..नही नही..भाइ.. अभी नही.. बस अ‍ेक दो दीन रुक जाइअ‍े.. फीर ये पुनम हमेसाके लीये आपकी होजायेगी.. मे आपको सब कुछ दुगी.. मतलब सब कुछ समज गयेनां..

देवायत : (पुनका चहेरा होथोमे थामते) हां डार्लींग अब तेरे बीना नही रहा जाता.. सादी करले मुजसे..

पुनम : हां भाइ.. हम सादी करेगे.. ओर इसी धरमे हमारी सुहागरात होगी बस दो दीन ठहेरजाओ..फीर मे आपकी बीवी बनजाउ तब हम खुब प्यार करेगे सब कुछ करेगे जो हम दोनो चाहते हे..

देवायत : लेकीन बेबी हम सादी कहा करेगे..? कुछतो प्लान करना पडेगा..

पुनम : भाइ वो सब आप मुजपे छोडदो हम हम मंदिरमे जाके सादी कर लेगे बस यही कहेने आइ थी.. अब आप जाइअ‍े वरना मुजसे कंट्रोल करना मुस्कील होजायेगा ओर इधर कोइभी आ सकता हे.. मे नही चाहती हमारे रीस्तेके बारेमे कीसीको पता चले.. प्लीज..

तब देवायत अ‍ेक बार फीरसे पुनमको जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जातेहे काफी देर चुबन करनेके बाद देवायत पुनमका सर चुम लेता हे तब पुनम जटसे नीचे भाग जाती हे ओर देवायतभी जाके मंजुसे चीपकके सो जाता हे.. अब देवायतकी पुनमके प्रती चाहत ओर बढ गइथी उसे अब अपनी बहेनमे अपनी मासुका दीख रहीथी जो कीसी हिरोइनसे कम नही थी.. वो अब पुनमका अ‍ेक अ‍ेक अंग छुना चाहताथा वो पुनमको बीना कपडोमे देखनेके लीये बेताब हो रहाथा..

तब दुसरी ओर पुनमने अपने रुममे आकर दरवाजा बंध करलीया ओर सोफेपे बेठ गइ तब उनके फोनमे वाइब्रेट होने लगा.. पुनमने देखातो धिरेनके आठ मीस्डकोल थे उसने जटसे फोन उठालीया.. धिरेनने उसे पुछातो बाथरुममे होनेका बहाना बनालीया.. ओर वो धिरेनसे बात करने लगी वेसेभी वो काफी गरम होगइथी तो धिरेनके साथ फोन सेक्स करते अपनी चुतमे उंगली करने लगी ओर जडके सांत होगइ..




वो फोन सेक्स करते बाततो धिरेनसे कर रहीथी लेकीन अपने बेडपे सामने देवायतका फोटो रखा हुआथा ओर चुतमे उंगली करतेभी देवायतकोही इमेजींग कर रहीथी.. अ‍ेसेही बात करते सांत होगइ ओर सोगइ.. आज सब सुबह देर तक सोते रहे..

उधर भानुके घरभी सब सुबह उठ गये तब भानुने देखा भावुकी आंख लाल होचुकीथी तो समज गयाकी भावु देर रात तक रोती रही होगी.. सब नहा धोके कंपलीट होगये ओर चाइ नास्ता करने बेठ गये चाइ नास्ता करलीया तब लताने चाइनास्ता अपनी भाभीको उनके रुममे दीया क्युकी अब वो नीचे नही बेठ सकतीथी तब चाइनास्ता कर रहेथे तभी भावनाको पेटमे दर्द होने लगा ओर वो बेडपे सोते तडपने लगी..

भावना : (दर्दसे तडपते) प्लीज.. जीजुको फोन करदो लता.. कीसको बुलाओ.. जीजको बुलालो..

लता : (गभराते) हां भाभी मे फोन करती हु..

कहेके लता बहारकी ओर दोडके अपनी मां सरलाको आवाज देने लगी.. तभी भानुभी दोडके आगया ओर सीचुअ‍ेशन समज गया तब भावनाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बहार कारकी ओर दोड पडा तब सरलाकी कुछ कपडे लेके बहारकी ओर दोड पडी भानुने भावनाको पीछे सुलादीया तो सरलाभी उनके पास बेठ गइ ओर लताको घरका खयाल रखनेकी नसीहत देती रही ओर भानुने कार सहेरकी ओर दोडादी.. तब सरलाने भानुको कार धीरे चलानेकी नसीहत दी..

आधेही घंटेमे वो डो. सृतीकी क्लीनीकपे आगये जहा भावना ओर मंजु उसे सब चेकअप करवाती थी.. ये वही डोक्टरहे जो मंजुकी बेस्ट फ्रेन्ड हे ओर मंजुको बच्चा ना करनेकी सलाह दीथी.. तब होस्पीटलके सब स्टाफ भावनाको अंदर ओटीमे ले गये.. तब भानु देवायतको फोन करके भावनाको होस्पीटल लेके आनेकी बात करता हे..

भानु : भाइ भावुको लेके हम होस्पीटल आयेहे..

देवायत : भानु क्या मे आजाउ..?

भानु : नही यार तु वहा रहे.. तुजेभी भाभीको कभीभी लेके आना पड सकताहे.. मे यहीहु अगर कुछ बात होगीतो तुजे फोन कर दुगा.. मांइ भी साथ आइ हे.. बस तेरी जानकारीके लीये फोन करदीया..

देवायत : चल ठीक हे जरुरत पडेतो फोन करना.. ओर हां वहा पैसे मत देना वो सब मे देख लुगा सृतीको कहेना.. ओके..? चल रखता हु..

इधर देवायत मंजु चंदा पुनम लखन सब चाइ नास्ता कर रहेथे तभी भानुका फोन आगया तो सब गोरसे सुन रहेथे सबको इतना तो पता चल ही गयाकी भावनाको डीलीवरीके लीये होस्पीटल लेके गये हे.. तब लखनके मनमे लडु फुटने लगे क्युकी इस वक्त लता घरपे अकेली होगी.. ओर इनसे अच्छा मौका दोनोको कहा मीलने वाला था.. तब लखनभी जल्दी जल्दी चाइ नास्ता करने लगा....

कन्टीन्यु
 
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