Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 3 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १८



फीर दोनोही कुछ प्लानींग करते वापस घरकी ओर चल देते हे.. आज मंजुने धिरेनसे सब बाते खुलके बतादी थी.. अब उसे सीर्फ चंदासे इस बारेमे बात करनी थी.., दोनोही जब गयेथे तब उनके जातेही चंदा मंजुके रुममे सबसे छुपके चली गइ, तब दया ओर रजीया दोनोही उपरकी मंजीलमे घरके काममे लगी हुइ थी.. तो चंदाने अंदर जातेही दरवाजा बंध करलीया ओर जटसे मंजुके कपडे अलमारीमे रखेथे उसे खंगालने लगी....अब आगे

वो अ‍ेक अ‍ेक सारीकी घडी खोलके देखने लगी तची अचानक उसे अ‍ेक सारीकी घडीमे मंजुके कागजात मील गये तो वो उसे लेके सब सारीको अच्छेसे सम्हालके रखने लगी फीर धीरेसे अलमारी बंध करके सब पेपर लेके अपने रुममे आगइ ओर दरवाजा बंध करके बेडपे बेठ गइ ओर सब रीपोर्ट देखने लगी.. तब वो रीपोर्ट देखके उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेती रही.. फीर पेपर सम्हालके रख दीये ओर मुह साफ करके लेट गइ ओर मंजुसे बात करनेके बारे मे सोचती रही.. तबतक धिरेन ओर मंजुभी घरकी ओर आ रहे थे..

तो दुसरी ओर देवायत ओर भानु सहेर पहोच गये तब भानु देवायतको होस्पीटल छोडके अपना सामान लेने चला गया ओर देवायत अंदर आगया तो रश्मी उनको अपने रुममे अकेले देखतेही दोड पडी ओर आंसु बहाते उनके गले लग गइ.. तब उनके पती राघवकोभी होंस आ चुकाथा बस वो हील नही सकताथा तो टेडी आंख करते देवायत ओर अपनी बीवीको गले मीलते देखता रहा.. ओर अंदरसे जलता रहा..

रश्मी : (धीरेसे) देवु.. आगये आप.. अब हम आजाद होगये.. अब इस कमीना कुछ नही कर सकता..

देवायत : भाभी.. बस तु अपना खयाल रखना मे घरपे आता जाता रहुगा..

रश्मी : देवु.. मेने अ‍ेक बात सोची हे पुरा प्लान तैयार करके रखा हे.. बस आप दो तीन दीनमे ही आजाना मे समय जानेसे पहेलेही सब खत्म कर देना चाहती हु..

देवायत : भाभी केसा प्लान..? कही इनको मारनेकी तो नही सोच रही..?

रश्मी : (जटसे) अरे नही नही.., सुनोतो.. इस कमीना केह रहा था कमी मुजमे नही तुजमे हे मुजे बांज कहेताथा.. अब इस कमीनेको दीखा दुगी मे बांज नही हु.. बस अब इनको बच्चा पैदा करके दीखा दुगी.. ओर ये सब इस कमीनेके सामनेही करना हे.. (धीरेसे सरमाते) बस.. आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो..

देवायत : (लंड खडा होगया तो अ‍ेडजेस्ट करते) भाभी क्या ये सही हे.. लोग क्या कहेगे..? इनमे आपकीही बदनामी होगी.. लोग तरेह तरेहकी बाते बनायेगे..

रश्मी : इसीलीये केह रहीथी हमारे पास टाइम नही हे.. सब सही समयपे होजाये तो सबको केहतो सकुगी आपके भाइनेही मुजे प्रेगनेन्ट कीया हे.. जब मे प्रेगनेन्ट थी तबही ये हादसा होगया.. समज गये..

देवायत : (कातील मुस्कानके साथ धीरेसे) ठीक हे भाभी तो फीर घर जातेही चुदनेके लीये तैयार होजाइअ‍े.. इनके सामनेही पुरा दीन हम सुहागदीन मनायेगे.. आप दुल्हन बन जाना.. हें..हें..हें..

रशमी : (सरमाके हसते) अरे अ‍ेक बार घरतो जानेदो.. फीर आप जब चाहे तब हम सुहागदीन ओर सुहागरात मनाते रहेगे.. बस अबतो मुजे सीर्फ आपसे मतलब हे.. मेने आपको अपना पती मानलीया हे..




कहेते अपनेही नैनसे सहमती देते होठोको अपने दातोसे दबाके देवायतके सामने हसने लगी तब बेडपे लेटे राघव उन दोनोकी बात सुनते अपनीही बीवीका रंडीपन रुप देखके गुसेसे आग बबलुला होने लगा.. लेकीन उनकी मजबुरीथी वो कीसीकी मददके बगैर अपना हाथ तक नही हीला सकता.. ओर नाही पैर हीला सकता.. उनका मुहभी टेडा हो चुकाथा ओर अपनी जीभ मेभी लकवा मार चुका था.. वो बस देखता रहा..

फीर दोनोही बहार चले गये ओर कांउन्टर पर आके खडे होगये तब वहाकी लेडीने कहा..

लडकी : मेम.. आगये आपके हस्बन्ड तो आपके भाइको डीस्चार्ज करदे..

रश्मी : (देवायतकी ओर सरमाके हसते धीरेसे) हां आगये.. यही हे वो.. आप फोर्मालीटी पुरी करदे..

कहातो देवायत रश्मीके सामनेही देखता रहा तब रश्मी उनके सामने देखते सरमाते हसती रही तब देवायतभी उनके सामने देखके हसने लगा ओर लेडीने सब फोर्मालीटी पुरी करते पेपर देदीये..

लडीस : लीजीये मेम यहा साइन कर दीजीये.. ओर ये पेपर वहाकी नर्सको दीजीयेगा फीर आप अपने भाइको घर लेजा सकती हे..

फीर रश्मीने साइन करदीया ओर दोनोही वापस रुममे आगये ओर सब पेपेर वहाकी नर्सको दे देदीये तब नर्सने वहाके कर्मचारी राघवको घरके कपडे पहेनाने लगे ओर सब रेडी करदीया ओर अ‍ेक स्ट्रेचरभी लेकर आगये तबतक भानुभी आगया था ओर होस्पीटल वालोने अ‍ेम्ब्युलन्सका इन्तजाम करदीया ओर राघवको लेके बहार आगये फीर राघवको अ‍ेम्ब्युलन्स मे सुला दीया ओर साथमे रश्मीकोभी बीठा दीया..

देवायत : भाभी आरामसे बेठीये हम दोनो आपके साथही चल रहे हे..

रश्मी : (कातील स्माइल करते) हां अब साथमे ही रहीयेगा..(डबल मीनींग बोलते हसने लगी)

फीर वो अ‍ेम्ब्युलन्स मे बेठ गइ ओर सब अपने गांवकी ओर चल पडे ररश्मीने अपनी पुरी लाइफके बारेमे सोच लीयाथा वो अब देवायतकी इलीगल बीवी बनकेही पुरी जींदगी बीताना चाहती थी वो देवायतके बच्चेभी पैदा करना चाहती थी.. उनको अब कीसीका डर नहीथा वो पुरी तराह बीन्दास हो चुकी थी.. जेसे वहा मुनीमकी बीवी चंपा होगइ थी.. वोतो अपने पतीके मोतके बाद दुसरे ही दीन देवायतसे सरीरसुख भोगनेमे कामयाब भी होगइ थी.. इसी तराह सब गांवमे आगये तो सब गांव वाले इकठा हो गये..

फीर सब रश्मीसे राघवकी खबर पुछने लगे ओर राघवको उनके रुममे जाके सुला दीया.. तब देवायत ओर भानुभी वापस खेतोपे चले गये तो गांवकी सब लेडीस रश्मीको राघवकी खबर पुछती रही.. तब बातो बातोमे ही रश्मीने कुछ लेडीसको केह दीयाकी उनके पेटमे सरपंचका बच्चा पल रहा हे ओर वो पेटसे हे.. तो सब लेडीस उसे सांत्वना देके घरकी ओर चली गइ ओर इस बातको दुसरी लेडीससे सेर करने लगी..

लेडीस १ : बेचारी.. कीतने दीनोके बाद पेटसे हुइ ओर अब ये पतीका हादसा होगया.. पता नही अब पुरी जींदगी केसे काटेगी..

लेडीस २ : होनीको कोन टाल सकता हे.. जब सुख आया तब पती कामका नही रहा.. सब कीस्मतका खेल हे.. सब अपना नसीब लेके आते हे ओर चले जाते हे.. वहा चंपाकाभी वही हाल हे..

लेडीस १ : भगवान भला करे इन ठाकुरसाबका दोनोही उनके दुस्मन होते हुअ‍ेभी उनकी मदद कर रहे हे..

अ‍ेसीही बाते पुरे गांवमे होने लगी.. देवायतको अब नइ चुतके साथ इजतभी मीलने लगी फीर भानु वही खानेपे बेठ गया उनको मालती खानेकी थाली देगइ तो देवायतभी उनको कहेके घरपे आगया तब सभी खाना खाके होलमे बेठे थे.. सबको पता था देवायत सहेर गया हे तो देर लगेगी तो सबने खा लीया था फीर देवायत फ्रेस होके खाना खाने बेठता हे.. तब दया उनको खाना परोसती हे..

तब आज पहेली बार धिरेन देवायतको दुसरी नजरसे देखता रहा.. ओर सोचता रहा.. की मम्मी जीजुके साथ खुस रहेगी.. जीस तराह देवायत सबके साथ बाते कर रहाथा तब धिरेनको कही नही लगाकी उनकी दुसरी सादीके बारमे उनको पता हो.. तब धिरेनको उनकी मम्मीके लीये देवायत परफेक्ट लगा.. तभी खाना खाते देवायत सबसे सरपंचके बारेमे बाते करता रहा तभी उसे अचानक पुनमकी बात याद आगइ..

देवायत : (खाना खाते मंजुकी ओर देखते) मंजु.. आज पुनमका फोन आया था..

मंजुला : (खुसीसे हसते) तो क्या उनकी परीक्षा खतम हो गइ..?

देवायत : हां.., आज उनका लास्ट पेपर हे.., कल उनको लेने जाना हे तो सोचताहु सबकी खरीदी करकेही आये.. क्या कहेती हो..?

मंजुला : हां देवु.. कहा दो दो बार सहेरका चकर काटना.. मे ओर भावुतो इस हालतमे नही आ सकते आप मौसी ओर धिरनको लेकेही चले जाइअ‍े मौसी सबकी खरीदारी करवा देगी.. ओर वो लताकोभी तो साथ लेजाना हे.. भानुभाइको कहेना लताको सुबह इधर छोड जाये..

चंदा : (सरमाके हसते) मंजु.. मे..केसे.. जाउगी..

मंजुला : मौसी सगुनकी सारीया हीतो लेनी हे.. उनमे इन बच्चोको कहा सब मालुम होगा.. धिरेनभी साथ चल रहा हे.., इसीलीये आपको भेज रही हु.. बाकी बच्चोके कपडेतो वोही अपनी पसंदके ले लेगे.. क्यु धिरेन..

धिरेन : (सरमाके हसते) जी.. दीदी..,

देवायत : ठीक हे मंजु मे भानुसे बात करलुगा वो लताको छोड जाये.. तुमभी भावुसे फोनपे बात करलेना..

फीर देवायत खाना खा लेता हे ओर सब अपने अपने रुममे आराम करने चले जाते हे.. बस अब चंदाको इन्तजार थातो मंजुसे अकेले बात करनेका.., ओर वो मौका उसे आजही मील गया जब चार बजे तक आराम करके सब फ्रेस होगये फीर चाइ नास्ता करके धिरेनको लेकर देवायत खेतोकी ओर चला गया तब मंजु ओर चंदा दोनोही बात कर रहेथे तब दयाने आके कहा..

दया : दीदीजी.. कुछ सब्जीया लेनी हे ओर कुछ सामानभी लाना हेतो मे ओर रजीया जरा गांवमे जाते हे..

मंजुला : (पैसे देते) ठीक हे येले पैसे लेके जा.. जोभी कम हे जरा ज्यादा लेकर आना.. अब बच्चोभी आ रहे हे.. ओर सुन.., तुम दोनोके लीयेभी कपडे लेने हे.. तो अपनी पसंद मौसीको बता देना..

दया : (खुस होते) जी दीदी.. दोनोको डड्ढेस हीतो लेनी हे.. नाप दे दुगी.. चलो हम चलती हे..

कहेके दोनो बहार चली गइ तब चंदा जटसे खडी होगइ.. ओर फटाफट बहारका गेइट बंध करके वापस आगइ ओर मंजुका हाथ पकडके उसे अपने कमरेमे लेगइ तब मंजु उसे यंत्रवत देखती ही रही.. तभी अंदर जातेभी चंदाने रुमका दरवाजा बंध करदीया तो मंजु थोडीसी गभराते देखने लगी.. तभी चंदा मंजुके सामने आगइ ओर सब पेपर नीकालके उनके हाथमे थमा दीया ओर अदब लगाके सामने खडी रही.. जब मंजुने सब पेपर देखा तो सब समज गइकी मेरी बीमारीका मौसीको सब पता चल गया हे.. तो..

मंजुला : (पेपेर देखते आंखे नम करली) जी.., मौसी.., मे.. मे.. आपको..

चंदा : क्या मे..मे.., मे जान सकती हुकी ये सब रीपोर्ट कीसके हे..? नाम लीखा हे उसपे..

मंजुला : (गभराते सर जुकाके) जी.. वो.. वो.. मेरे.. हे..

तभी चंदाने अ‍ेक तमाचा मंजुके गालपे जड दीया.. तो मंजु गालपे हाथ रखते सोक्ट होगइ ओर उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे तो दुसरी ओर चंदाभी आंसु बहाके जोरोसे रोने लगी ओर उसने जोरोसे मंजुको गले लगा लीया ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके कंधेपे सर रखके फुटफुटके रोने लगी..








चंदा : (जोरोसे रोते) क्या अ‍ेकही पलमे अपनी मौसीको पराया कर दीया..? जो इतनी बडी बात मुजसे छुपाइ..

मंजुला : (रोते) नही मौसी.. आप सीर्फ मेरी मौसी थोडी हो मेरी सहेलीभी हो ओर.. बडी बहेन..भी..

चंदा : (रोते) तो फीर इतनी बडी बात तुमने मुजसे क्यु छुपाइ..?

मंजुला : (रोते) मौसी सब बताउगी.. सब बताउगी.. प्ली..ज.. मुजे माफ करदो..

तब चंदा मंजुका चहेरा अपने हाथोसे पकड लेती हे ओर उनकी आंखोमे देखते उनके आंसु पोछने लगती हे.. तो मंजुभी चंदाके आंसु पोछने लगती हे.. तो अ‍ेक बार फीर चंदा उसे जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे फीर उनका सर चुमते उनका दोनो हथ पकडके बेडकी ओर लेजाती हे ओर दोनोही बेठ जाती हे तब मंजु चंदाको सब कुछ बताने लगती हे.. ओर चंदा चुपचाप मंजुकी सब बाते सुन रही हे..




मंजुला : मौसी जब मेरी सादी नही हुइथी उनसे पहेलेही ये सब रीपोर्ट करवाइथी जब पीरीयडमे होतीथी तब नोर्मलसेभी बहुत ज्यादा खुन आने लगाथा तो मेरी कोलेजकी सहेली जो आज अ‍ेक लेडीकी डोक्टर हे डो.सृती मेरी सादीमेभी आइथी.. उनको दीखाके आइ फीर हमने सब रीपोर्ट कीया तो पता चला मेरे बच्चेदानीमेही अ‍ेक गांठ जेसा कुछ हे.. तब उसने मुजसे सादी नही करनेकी सलाह दी ओर तबतक मे देवुसे प्यार कर बेठी थी..

चंदा : पहेतो तुम मुजे मौसी मत कहे.. आजके बाद मे तेरी बडी बहेन हु.. मुजे दीदी केह सकती हे ओर रही बात प्यारकी तो फीर तबही मुजे बता देती.. हम कुछ इलाज करवाते..

मंजुला : नही मौसी..(हसते) सोरी.. दीदी.. मेरा इलाज नही हो सकता.. क्युकी इलाजमे वो बच्चेदानी ही नीकाल देते.. ओर वो मे कतइ नही चाहती थी.. क्युकी मे देवुको क्या कहेती.. की तुम अ‍ेक बांजसे सादी कर रहे हो.., इसीलीये मे ये बात कीसीको नही बताना चाहतीथी.. क्युकी मे मेरी पुरी जींदगी जीलेना चाहती थी.. ओर मेने उसी दीन फैसला करलीया चाहे जो कुछभी हो मे वो हर सुख बटोरना चाहती थी जो अ‍ेक ओरत या लडकीको मीले.. क्युकी मेरेभी बहुत सारे अरमान थे.. मे देवुको खोना नही चाहती थी..

चंदा : अगर देवु तुमको सच्चा प्यार करताहे तो ये सचभी स्वीकार करलेता.. उसे सचाइ क्यु नही बताइ..

मंजुला : (हसते) अ‍ेक बारतो मुजेभी लगा उसे सब सच बतादु.. फीर सोचा.. सचाइ बताके मे क्या साबीत करना चाहती हु.. क्या प्यारमेभी परीक्षाये ली जाती हे..? तो मेने नही बताया ओर उसी दिन मेने अपना कौमार्य देवुको सोंप दीया.. ओर सादी तक हम कइ बार सेक्स कर चुकेथे.. हम दोनोही अ‍ेक दुसरेके प्यारमे पागल थे.. दोनोही हमेसा अ‍ेक दुसरेमे समा जानेकी कोसीस करते थे.. देवु मुजे इतना चाहता हे..

चंदा : (हसते सरमाते) तो क्या कीसीको पता नही चला..?

मंजुला : (हसते) नही दीदी.. ये साली प्यारकी आगही अ‍ेसी जीच हे जीसमे लडका ओर लडकी दोनोही जलनेके लीये बेताब रहेते हे.. हें..हें..हें.. फीर धीरे धीरे समय बीत गया ओर दोनोकी सादीभी होगइ.. ओर आखीर जींदगीकी हकीकत सामने आही गइ.. देवुनेतो नही कहा.. पर मेरे अरमान फीर से जागने लगे.. वोभी मां.. बननेका.. जब मे सादीके बाद पहेली बार मायके गइ.. तब आप उस दीन तबीयतकी वजहसे नही आइ..

चंदा : (सरमाते) हां.. उसी दीन तबीयत खराब थी.. फीर..?

मंजुला : उसी दीन मे धिरेनकी बाइकमे उनको लेके सबसे छुपके सहेर चली गइ मेरी फ्रेन्डके पास उनकी सलाह ली तो मना करदीया.. ओर कहा की बच्चा ठहेरभी गया तो तेरी जान मुस्कीलमे आजायेगी ओर तुजे बच्चा होनेके बाद धीरे धीरे कमजोरी आने लगेगी ओर अ‍ेक दो सालमेही तेरा कार्यक्रम खतम..

चंदा : फीरभी तुने बच्चा ठहेराया..?

मंजुला : हां दीदी.. सब सोच समजकेही कीया हे.. भलेही मेरी अल्प आयुहो.. मे ओरत ओर बीवीका हर सुख मेरे देवुको देना चाहती थी.. बस इतना समजलो वो मेरे प्यारमे नही.. मे उनके प्यारमे पागल हु..

चंदा : तुने कभी ये सोचाकी तेरे जानेके बाद तेरे देवुका क्या होगा..? क्या वो तेरे बीना जी पायेगा..?

मंजुला : (हसते) नही.. पहेले तो नही सोचाथा.. लेकीन अब सोच लीया हे.. की क्या करना हे..

चंदा : (हसते) क्या करेगी..?

मंजुला : (सीरीयस होते) दीदी जबतक जीन्दा हु.. सोचती हु मेरी मौजुदगीमे ही उनकी दुसरी सादी करवादु.. ताकी वो मेरे देवुको सम्हाल सके..

चंदा : (हसते) अच्छा..? कोन होगी वो लडकी.. जो तेरे होते हुअ‍े देवुसे सादी करेगी.. क्या कोइ मील गइ..?

मंजुला : (हसते) नही.. पहेलेतो नही मीलीथी.. लेकीन अब मील गइ हे..

चंदा : (अंदाजातो हो गयाथा की मेरा नाम लेगी फीरभी सीरीयस होते) कोन हे वो.. लडकी..?

मंजुला : (चंदाकी ओर देखते हसते) आप.., आपही हो वो लडकी जो मेरे देवुको सम्हाल सकती हे..

चंदा : (गुसा होकर) व्होट रबीस.. क्या बक रही हो..? तुजे कुछ अंदाजाभी हे तु क्या केह रही हे..

मंजुला : हां दीदी.. सायद पहेले अंदाजा नही था.. लेकीन अब अंदाजा नही यकीन हे.. वो आपही हे.., जो मेरे देवुको सम्हाल लेगी.., ओर मेरे देवुको मुजसेभी ज्यादा प्यार देगी..

चंदा : (दोनो हाथ कानपे रखते चीलाते) ओह.. स्टोप इट.. बंध कर अपनी बकवास.. ये नही हो सकता..

मंजुला : क्यु नही..दी..? क्या आप मेरे देवुसे प्यार नही करती..? मेने देखा हे दोनोकी आंखोमे अ‍ेक दुसरेका प्यार.. (मुह घुमाके) ओर मे वो सब कुछ देख चुकी हु.. आपके कमरेमे.. ओर कीचनमे..

कहातो चंदा सोक्ट होगइ ओर अपनेही दोनो हाथ घुटनोपे टीकाके हाथोमे अपना चहेरा छुपा लीया ओर फुट फुटके रोने लगी.., चंदाको अंदाजाही नही थाकी देवु ओर उनके बीचकी सारी रासलीला मंजु देख चुकी हे.. ओर उसे इन बातोको फेस करना पडेगा..

तभी मंजुने उसे बेठेही अपनी बाहोमे भरलीया तो चंदा उनके कंधेपे सर रखके रोने लगी तबतक मंजुनेभी उनके सरको सहेलाते रोने दीया फीर थोडी देरके बाद चंदा रोते थक गइ तब मंजुने उनके चहेरेको दोनो हाथमे थाम लीया ओर हसते हुअ‍े उनकी आंखोमे देखती रही तब पहेली बार चंदाने अपनी नजर जुकाली..

मंजुला : (हसते) दीदी अ‍ेसे सर्मीन्दा होनेकी जरुरत नही.. मेतो खुस हु की मेरे देवुको कोइ मुजसेभी ज्यादा प्यार करती हे.. ओर इनसे मुजे कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. क्युकी प्यार करना या होना हमारे बसमे हे ही नही..

चंदा : (रुआसी आवाज मे) मंजु मुजे माफ करदे.., मे मेरा अकेलापन नही सम्हाल पाइ, मुजे अ‍ेक सचे दीलसे प्यार करनेवाले साथीकी सख्त जरुरत थी.. ओर मे देवुसे प्यार कर बेठी..

मंजुला : (हसते) मुजे पता हे.. प्यार अ‍ेसेही होता हे.. जब हमारा मन पसंद साथीको देखलेती हे तब हमारा दील हमारे काबुमे नही रहेता.. वोही मेरे साथ हुआ.. ओर अब आपके साथभी हुआ..

चंदा : (मंजुकी ओर देखते) लेकीन मंजु.. फीर भी मे देवुसे सादी नही कर सकती.., हम धिरेनकी सगाइ करने जा रहे हे.., ओर अबतो वोभी जवान ओर जीमेदार होगया हे.. अब सादीका वक्त चला गया हे..

मंजुला : नही दीदी.. कोइ वक्त नही गया.., रही बात धिरेनकी.. तो मेने उनसेभी बात करली हे..

चंदा : (चोंकते) व्होट..? तु पागलतो नही होगइ..? अब मे उनसे केसे नजरे मीलाउगी.. सोचा हे..?

मंजुला : (हसते) दीदी वोतो खुद आपकी सादीके पक्षमे हे.. मुजे कहेता था मम्मीको पहेलेसेही सादी करलेनी चाहीये थी.. उनकोभी पता हे अकेली ओरतकी जींदगी कैसे विरानकी तराह होती हे.. दीदी उसे कोइ अ‍ेतराज नही.. ओर उसेतो आपकी सरमींदगीका भी खयाल हे.., कहेताथा मम्मी सादी करेगीतो मेरी हाजरीसे सरर्मीदगी महेसुस करती रहेगी ओर अपनी लाइफ खुलके नही जी पायेगी इसीलीये सादीके बाद मेरे ही घरमे रहुगा.. हें..हें..हें.. दीदी हमारा धिरेन बहुत समजदार लडका हे..

चंदा : (आस्चर्र्यसे देखते) क्या.. ये सब धिरेन ने कहा..? आइ कान्ट बीलीव..

मंजुला : (हसते खुसीसे हां मे सर हीलाते) हां दीदी.. कहेताथा जीजासे बहेतर मेरी मम्मीको कोइ अच्छा जीवनसाथी नही मीलेगा.. मोम बहुत खुस रहेगी..

कहातो चंदा मंजुके कंधेपे सर रखते फीरसे आंसु बहाने लगी तब मंजु हसते हुअ‍े उनके सरको सहेलाने लगी.. इस बार चंदाके खुसीके मारे आंसु नीकल रहेथे.. वो मनही मन भगवानका सुक्रिया अदा कर रही थी.. फीर भी उसने कुछ सोचके तैय करलीया ओर अपने दीलकी बात मंजुके कंधेपे सर रखकेही कहेने लगी..

चंदा : मंजु.. इस बारेमे मुजे कुछ वक्त चाहीये.. ओर जोभी करना हे हम धिरेनकी सादीके बादही सोचेगे.. ओर वोभी सीर्फ हम दोनो.. अभी ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रखनी हे.. अब धिरेनको कुछ मत बताना.. सब समयपे छोडदे.. जब जरुरत पडेगी तब आजाउगी ओर हमारे देवुका हाथ थाम लुगी..

मंजुला : (खुस होते) ठीक हे दीदी जेसी आपकी मरजी.. मेरे लीयेतो यही काफी हे आपने हां कहेदी..

चंदा : मंजु तुमेसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. हम बाबाको मीलने गयेथे.. उनको तुम्हारे बारेमे सबकुछ पता हे.. ओर मेरे बारेमेभी कहाकी मे देवुके साथ जुड जाउगी.. उनकी सब बाते सच साबीत हुइ..

मंजुला : दीदी वो हमारे कुलगुरु हे.. पता नही वो कोन हे.. कीस मक्सदसे आये हे.. देवु कहेताथा वो अ‍ेक खास मक्सदसे आये हे.. उन्होने हमारे पौतेके बारेमे भविष्यवाणी की हे.. वो अ‍ेक इ--का अंस होगा.. ओर हमारे यहा रीस्तोमे बहोत बडा बदलाव आयेगा.. ओर इनकी सुरुआत हमारी पीढीसे ही होगी..

चंदा : (कंधेसे सर उठाते मंजुकी ओर आस्चर्यसे देखते) कैसा बदलाव..?

मंजुला : दीदी बाबा कहेते थे वो लोग प्रकृतीको मानते होगे.. कीसीभी रीस्तेको नही मानेगे उनका बस अ‍ेकही रीस्ता होगा.. स्त्री ओर पुरुषका रीस्ता.. आपने वो मंदिर देखा हेना जो हिमाचलमे हे.. जो राजाने अपनी बहेनो दादी ओर चाचीसे सादी करलीथी.. बस वोही राजा हमारे घर पौतेके रुपमे जन्म लेकर आरहा हे.. ओर उनकी सब रानीयाभी हमारे ही परीवारमे कीसीना कीसी रीस्तोमे जन्म लेके फीरसे वही राजाकी रानी हो जायेगी.. बस मुजे इतनाही बाबाने कहा हे.. पता नही हम कोन हे..

चंदा : कीतना अजीब हेनां..? हमारे गांवमे आज विधवाकीभी सादी नही करते.. ओर इतना बडा बदलाव.. तु उन बाबाको कीतनी बार मीली हो..?

मंजुला : दीदी जब मे देवुके संपर्कमे आइ ओर मेने देवुसे प्यारका इजहार कीया उसी दीन देवु मुजे लेके बाबाको मीलने ले गयाथा.. तब बाबाको पहेली बार मीली जो मुजे देखतेही वो बहुत खुस हो गयेथे..

चंदा : (हसते) अच्छा..? लेकीन तुमतो पहेली बार मीलीथीना.. क्या कहाथा उसने..

मंजुला : पहेली बार गइ तबतो कुछ खास बात नही हुइ.. लेकीन दुसरी बार गइ तब उसने देवुको कामके बहाने अंदर आश्रममे भेज दीया ओर बाबाने मेरा पुरा भुतकाल भविस्यकाल केह दीया.. पीछले जन्ममे मे कोन थी इस जन्ममे ओर इनके बादके जन्ममे मेरा क्या रोल होगा मुजे सब बतादीया ओर कीसीको ना बतानेका वचनभी लीया ओर मेने इस बारेमे देवुसेभी बात नहीकी.. आज सीर्फ आपको थोडा बता रहीहु..

चंदा : (हसते) कीतना अजीब हेना.. तुजे सब ज्ञात हे.. सायद इसीलीये तेरे मनमे मोतका कोइ भय नही हे.. क्या मुजे बता सकतीहे की तुम कोन हो ओर आगे कोन होगी.. मीन्स..कहा जन्म होगा..

मंजुला : (हसते) दीदी अभीतो मुजे पुरा ज्ञात नही लेकीन अगले जन्ममे मुजे सब ज्ञात होजायेगा.. बस इतना पता हे आप सब मेरीही संतान होगे.. ओर मजेकी बात जीस लडकेको मे जन्म दुगी इनसेही मेरी सादी होगी ओर इनके साथ पुरी जींदगी बीतादुगी ओर मेरीही लडकेके बच्चेकी मां बनुगी..

चंदा : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? हम सब तेरी संतान..? मे समजी नही.. इश्रवरभी हमसे केसे केसे रीस्तेके बंधनमे बांधते हे.. देखोना मेभी मेरेही जमाइकी बीवी बनुगी.. कीतना अजीब रीस्ता होगा..

मंजुला : दीदी सच कहु तो मुजेभी अ‍ैसे रीस्तोमे कोइ बुराइ नही लगती.. सब प्रकृतीके हीसाबसे जीयेगे.. ना कीसी चंकोच, ना कोइ क्षोभ, सब अपनी मस्तीमे रहेते होगे.. ओर सायद इसेभी प्यार कहेते हे.. जब आपको देवुसे प्यार हुआ तब आपके दीमागमे ये थाकी ये मेरा जमाइ हे..? फीरभी प्यार हो गया ने..?

चंदा : (हसते) हां.. बाततो तेरी सही हे.. सायद हम प्रकृतीको नही पहेचान पाये.. बस हमभी जीते हेतो उसी प्रकृतीसे..

मंजुला : (सरमाके हसते) दीदी अ‍ेक बात कहु.. जब मे ओर देवु संभोग करते हे तब वो क्षण आता हे.. तब मे मेरे देवुमे इ--को देखती हु.., मुजे यही लगता हे यही मेरे परमात्मा हे जो मुजे स्वर्गकी सेर करता हे..

चंदा : (सरमो हसते) हां.., हां.. मंजु.., मेभी यही फील करती हु.. सायद इसीलीये पतीको परमेश्वर कहेते होगे.. आज तुमसे बाते करते बडाही सुकुन मील रहा हे.. बस.. मे जल्दही हमारे पतीको स्महालने आजाउगी..

अ‍ेसीहो बाते करते दोनो आगेकी सब प्लानींग करते बाते करती रही.. उधर देवायतके साथ आज धिरेनभी खेतोपे चला गया तो अभीतक भानु नही आयाथा तो देवायत धिरेनको अपने सब खेतो ओर गोडाउन दीखाने लगा.. धिरेनभी इतनी सारी जमीन देखके बहुत प्रभावीत ओर खुस होगया.. तभी भानुभी आ गयातो धिरेनको देखतेही खुस होगया ओर गर्मजोसीसे उनके गले लग गया..

भानु : (हसते) अरे सालेसाब आप कब आये..? दिखाइ ही नही देते..

धिरेन : जीजु बस कलहीतो आया.. कहीये केसीहे मेरी भावुदीदी..?

भानु : वोतो तुम्हे वहा आके देखना पडेगा.. सब यहीसे खबर पुछ लेगा क्या..? हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) नही.. अभीतो हम यही हे..मोमभी आइ हेतो अ‍ेक दीन आजायेगे..

देवायत : (हसते) सुन भानु.. कल सुबह मुजे इन सबको लेके सहेर जाना हे.. कुछ कपडे बपडे ओर सगाइका सामान लेना हे.. तो सुबह तुम लताको घर छोड जाना.. अगर माजी साथमे आयेतो अच्छा हे.. मौसीभी साथ चल रही हे.. वरना मे धिरेन लता ओर मौसीतो चल ही रहे हे..

भानु : (हसते) भाइ मे लताको छोड जाउगा अब बा कहा आयेगी.. कहेतीथी सब घरकेही लोग हेतो सीर्फ लताको भेज देना.. उनको जो लेना हे ले लेगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : जीजु लता दीदी केसी हे.. क्या वोभी साथ आ रही हे..?

भानु : हां.. अब तेरे सालेसाहेबकी बीवीजो हो जायेगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या जीजु आप भी.. चलो ठीक हे मे कल ही मील लुगा..

देवायत : भानु तुम लोग बाते करो मे वो रमेशको मीलके आता हु अब सरपंचका कुछ करना पडेगा..

भानु : (हसते) ठीक हे यार जो तैय कीया हे वोही करना.. मे ओर धिरेन यही हे.. जाओ..

देवायत : (धिरेनकी ओर देखते) चल धिरेन तुजे आना हे गांवमे..

धिरेन : (हसते) नही जीजु आपही होआओ.. मे ओर जीजु यही बेठे हे.. बडा मजा आता हे इधर..

फीर देवायत गांवमे चला जाता हे ओर सीधेही रमेशकी दुकानपे चला जाता हे तब रमेश देवायतके आते देख उनके सामने हसने लगता हे तब देवायतभी मुस्कराने लगता हे.. दोनोकी हसीका राज सीर्फ ये दोनोही जानते थे.. देवायतको देखतेही रमेश अपने नोकरको सब सोंपके देवायतको सीधे अपने घरमेही लेजाता हे.. ओर दोनो होलमे आके बेठ जाते हे तब..

रमेश : आइअ‍े ठाकुरसाब..हें..हें..हें.. सब काम नीपट गया नां..? हें..हें..हें..

देवायत : हां यार.. पहेलेतो मुजे ठाकुर मत कहे.. हम दोनो दोस्त हे यार.. सीर्फ नामसे बुला.. क्या चाइ बाइ नही पीलायेगा..? हें..हें..हें..

रमेश : अरे नेकी ओर पुछ पुछ अभी मंगवाता हु.. (कीचनकी ओर देखते) चारु.. ओ.. चारु.. देख कोन आया हे.. मेरा दोस्त आया हे जरा दो कप चाइतो बना..

चारु कुछ इस तराह दीखती हे




तभी चारु जटसे बहार आतीहे.. ओर देवायतको देखतेही सरमाके नमस्ते करते कातील स्माइल करते कीचनमे चली जाती हे ओर फटाफट चाइ बनाने लगती हे.. ओर चाइ बनाते सोचने लगती हे..

चारु : (मनमे) जालीम.., कैसा आदमी हे कीतने दीनोके बाद देखनेको मीला.. अबतो आताभी नही हे.. बस.. मतलब नीकल गया.., उस दीन घर आया जब वंदनाके पापा नहीथे.. तब इनको देखते मे केसे बहेक गइथी.. वोभीतो मुजे देखके बहेक गयाथा.. पता नही इनको देखके मुजे क्या होजाता हे.. इनमे कीतना आकर्सण हे.. जबभी यहा आता हे मुजे अजीब नीगाहोसे देखता रहेता हे.. मे खुदही बहेकते इनको बेडरुममे ले गइथी.. ओर उसदीन सबकुछ होगया.. जालीमने मुजे केसे रगड रगडके चोदलीया था.. दो दीन ठीकसे चलभी नही पाइथी.. कीतना दमदार लंड हे उनका.. पता नही अ‍ैसी चुदाइका मौका अब कब मीलेगा..




इधर बहार होलमे देवायत रमेशको सरपंच बननेकी बात करता हे तब रमेश मनही मनमे बहुत खुस हो जाता हे ओर साथमे जब राघवकी बीवी रश्मीको मुनीमका पद देनेकी बातकी तबतो रमेशकी खुसी दोगुनी हो गइ ओर वो मनमे रश्मीको चोदनेका सपना देखने लगा ओर उसने फोरन देवायतका प्रस्ताव स्वीकार करलीया..

तब रमेशको नही पताथाकी अंदर कीचनमे उनकी बीवी चारु केसे देवायतसे चुदाइके बारेमे सोच रही थी.. जबसे देवायत घर आया ओर उनको देखा तबसे चारुकी चुतमे हलचल तेज होगइथी ओर लगातार उनकी चुत पानी छीडक रही थी.. अबतक चारु देवायतसे तीन बार चुदाइ करवा चुकी थी.. तबसे देवायतकी दीवानी हो चुकीथी तभी चाइ उबलके बहार आने लगीतो वो तंद्गसे जाग गइ ओर चाइ नीकालने लगी..

देवायत : भाइ अभीतो मे बीजी रहुगा.. मेरे लखन ओर पुनमकी सगाइ हे सबको आना हे.. फीर हम उनमे फ्रि होतेही सहेर जायेगे ओर जीलाकी पंचायतमे सब रजीस्टर करवाके आजायेगे.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (खुस होते) क्या दोनो बहेन भाइकी साथमेही सगाइ हे..? दोनोका रीस्ता मील गया..?

देवायत : हां यार लखनकीतो भानुकी बहेनसेही सगाइ हे ओर पुनमके लीयेभी पढा लीखा ओर मेरी मौसीजी का लडका मील गया हे.. दोनोही घरके हे तो रीस्ता पका करलीया..

चारु (चाइ लाते दोनोको देते) लीजीये देवरजी.. चाइ पीजीये.. आपतो दीखतेही नही..? हें..हें..हें..

रमेश : (खुसीसे) सुन चारु.. हमारे लखन ओर पुनमका रीस्ता तैय हो गया हे.. दोनोकी सगाइ हे.. तो उनमे ही बीजी हे हमेभी बुलाया हे..

चारु : (खुस होते) हां हां..जरुर.. हम जरुर आयेगे.. मेरी अ‍ेकलोती ननंद ओर देवरकी सगाइ हेतो आनातो पडेगाही.. ओर देवरजी अभी भाभीजीकी डीलेवरीका टाइम हेतो घरमेभी कुछ काम होतो हमे बुला लीजीयेगा.. इनमे क्या हे? हम घरकेही लोग हे.. (कहेते देवायतकी ओर कातील स्माइल करती हे)

देवायत : (चारुकी बात समज जाता हे) हां.. हां.. भाभीजी जरुर बुला लुगा.. सबकी सगाइ इधर हवेलीपेही रखी हे.. बस आप फ्रि हो तब मंजुके पास चली जाइअ‍े.. वहा मेरी मौसीजीभी आइ हे..

चारु : (थोडा सेड होते) ठीक हे.. आपके यहातो रीस्ता तैय होगया पता नही हमारी वंदनाका क्या होगा..

देवायत : क्यु.. रमेश.. क्या हुआ वंदनाको..? कुछ हुआ क्या..?

रमेश : (नीराश होते) पता नही भाइ.. इनकी मम्मीको कहेतीथी मुजे सादी नही करनी.. पता नही उसे क्या प्रोबलेम हे.. हम उसे फोर्सभीतो नही कर सकते.. चारुने उसे खुब समजाया..

देवायत : (हसते) भाभी वेसे.. मेने उनके लीये भी कुछ सोचा हे.. अगर आपकी इजाजत होतो मे उपर बात करलु..?

चारु : देवरजी आपने वंदनाके लीये क्या सोचा हे.. कहीयेनां..

देवायत : (हसते) भाभी वेसेभी वो यहा सबको ट्युशनतो पढाती ही हे.. तो क्युना हम उसे हमारी स्कुलमेही नोकरी दीलवादे.. सरकारी नोकरी होजायेगी.. ओर लडकीभी हमारे सामनेही रहेगी.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (खुस होते) भाइ तबतो सोनेपे सुहागा.. क्या अ‍ैसा हो सकता हे..?

चारु : हां देवरजी आप देख लीजीये.. हो सरकता हे सरकारी नोकरीकी वजहसे ही हमे कोइ अच्छा पढालीखा लडका मील जाये.. आप बात करीये..

देवायत : देख यार.. अगर वंदनाकी नोकरी होगइ तो तुमसे पार्टी लुगा.. हें..हें..हें..

चारु : (मोका मीलतेही) हां.. हां.. जरुर आपके भाइ नही देगेतो मे पार्टी दुगी.. हें..हें..हें..

कहेके चारु देवायतके सामने कामुक मुस्कानसे हसती रही.. ओर रमेशकी नजर बचाते देवायतको मीलनेका इसाराभी करलीया तब देवायत सरमाके हांमे गरदन हीलाके खडा होगया.. ओर कहेने लगा..

देवायत : चल यार नीकलता हु.. मेरा साला मेरे साथ आया हे खेतपे हे.. उसे लेनेभी जाना हे..

चारु : (हसते) ठीक हे देवरजी कभी कभी आते रहीये.. अबतो इधरका रास्ता भुलही गये हे.. हें..हें..हें..

रमेश : हां भाइ आपकी भाभी सही केह रही हे.. हें..हें..हें..

देवायत : भाभीजी अबतो आना जाना लगाही रहेगा.. ये महासय सरपंचजो बन रहे हे.. हें..हें..हें..

चारु : (आस्चर्यसे खुसीसे हसते) क्या.. ये सरपंच बनने वाले हे..?

रमेश : (खुसीसे) हां चारु भाइ वोही कहेनेतो आये थे.. हें..हें..हें..

देवायत : (बहार नीकलते) चलो मे चलता हु..

कहेके वो वहासे सीधेही राघवके घर चला गया वहा कोइ नजर नही आ रहाथा तो देवायत सीधेही राधवके कमरेमे चला गया तो रश्की राधवके पास बेठके उसे ज्युस पीला रहीथी.. तो देवायतको देखतेही खुसी से हसने लगी ओर इसारा करते वहा पलंगके पास रखा सोफेपे बेठनेको कहातो देवायत हसते बेठ गया तब उसने राघवको हाल चाल पुछा तब राघवको गुसा आने लगा ओर उसने अपना मुह फेर लीया तो ज्युस नीचे गीरने लगा तब रश्मीने ग्लास साइडमे रखके उनका मुह पोछ दीया ओर कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९

कहेके वो वहासे सीधेही राघवके घर चला गया वहा कोइ नजर नही आ रहाथा तो देवायत सीधेही राधवके कमरेमे चला गया तो रश्की राधवके पास बेठके उसे ज्युस पीला रहीथी.. तो देवायतको देखतेही खुसी से हसने लगी ओर इसारा करते वहा पलंगके पास रखा सोफेपे बेठनेको कहातो देवायत हसते बेठ गया तब उसने राघवको हाल चाल पुछा तब राघवको गुसा आने लगा ओर उसने अपना मुह फेर लीया तो ज्युस नीचे गीरने लगा तब रश्मीने ग्लास साइडमे रखके उनका मुह पोछ दीया ओर कहा....अब आगे

रश्मी : देखा.. हीलनेकी ताकात नही हे.. ओर गुसातो अ‍ेसे कर रहेहे.. बीस्तरमे पडे हे फीर भी अकड नही जाती.. देखो.. देखो.. कोन आया हे.., आपकी बीवीका यार.. मुजपे बहुत सक करते थेनां..? अब देखना तुम्हारे सामनेही इनसे चुदवाउगी ओर इनका बच्चाभी पैदा करुगी..

कहेके बहार चली गइ ओर मेइन गेइट लोक करके देवायतके लीये पानी लेके वापस अंदर आगइ ओर उसने देवायतको पानी पीलाया फीर ग्लासको सखके उसने अपने सब कपडे नीकाल दीये ओर सीर्फ टु पीसमे रेह गइ ओर आके देवायतकी गोदमे बेठ गइ तब देवायतभी थोडा पीछे होगया ओर रश्मीको अपने दोनो पैर फैलाके उसे आगेकी ओर बीठा दीया तो रश्मीभी जगाह बनामे दोनो पैरके बीच बेठ गइ..

तभी देवायतने पीछेसे दोनो हाथ आगे लेजाते उनके दोनो बुब्स पकड लीये ओर ब्राके उपरसेही हल्का हल्का दबाने लगा तब रश्मी मदहोस होने लगी ओर आख बंध करते देवायतका अ‍ेक हाथ पकड लीया.. फीर अपने बुब्सपे दबाके हाथको धीरे धीरे नीचे लेजाने लगी ओर देवायतके हाथोसे अपनी चुतको सहेलवाती रही.. तब वो बहुतही कामारतुर होके प्यारकी आगमे जलने लगी ओर उसने देवायतका हाथ अपनी पेन्टीमे घुसा दीया तब देवायत उसकी चुतको सहेलाते हाथकी मीडल फींगरको चुतमे घुसाने लगा..

रश्मी : (मदहोसीमे) सीसीसीइइइइइ..आआहहहह ससससससइइइइ बाबु इनके सासामममनेनेने चोचोचोदददलोलोलो मुमुमुमुजेजेजेज...सीसीसीइइइइइइ करदोदोदो.. पेपेपेटटटसेसेसे सीसीसीइइइ आह..इइइइ




जबसे चारुभाभीको देखा ओर उसने मीलनेका इसारा कीया तबसे देवायतका लंड फटा जा रहाथा उनके लंडको चुतकी सख्त जरुरत थी वो कीसीभी तराह कीसीभी ओरतकी चुतमे जानेके लीये बेकरार था ओर यहा देवायतको अपने लंडके लीये चुतका इन्तजाम हो गयाथा.. तबसे देवायतभी काफी उतेजीत था फील हाल उसे रश्मीको राघवके सामने चोदना उचीत नही लगा ओर वो रश्मीको गोदमे उठाके दुसरे रुममे ले गया..

ओर वहा रश्मीको बेडपे सुलाते अपने कपडे नीकालने लगा तब रश्मीनेभी अपनी ब्रा ओर पेन्टी नीकाल दी ओर वो पैर फेलाके पीठके बल लेट गइ.. तभी देवायत उनके पैरके बीच आगया.. ओर लंडको चुतपे घीसते धीरे धीरे पुरा लंड चुतमे उतार दीया तब रश्मी ओर देवायतने राहतकी सांस ली ओर देवायत रश्मीके उपर जुकके लेट गया तब रश्मीने उनकी कमरपे दोनो हाथ रखदीये ओर अपनी चुतपे दबाव बनाने लगी तब देवायत उनके होंठ चुमते धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते रश्मीको चोदने लगा..




फीर धीरे धीरे दोनोने अपनी रफ्तार पकडली ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी इस बीच रश्मी अ‍ेक बार जड चुकीथी ओर दुसरी बार जडनेकी कगारपे थी तब अचानक देवायने लंडको रश्मीकी चुतमे जड तक घुसा दीया ओर रुक गया फीर फोरन रश्मीसे चीपकते उसे बाहोमे भरलीया तो रश्मीने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते होंठोपे लीपलोक करलीये तभी देवायत रुकरुक के कमरको जटके देने लगा..




तभी रश्मीको अपने गर्भासयपे देवायतके गरम लावेकी बौछार महेसुस हुइ ओर वो अ‍ेकदम उतेजीत होके कांपने लगी ओर अ‍ेक हल्की चीखके साथ वोभी देवायतके साथ जडने लगी तब वो आंख बडी करते देवायतके चहेरेको देखती ही रही.. ओर तुफान सांत होगया तब दोनोही पसीनेसे भीग चुके थे ओर अपनी सांस दुरस्त कर रहेथे तबतक रश्मी देवायकी पीठ सहेलाती रही.. ओर दोनो सांत होके अ‍ेसेही पडे रहे..

रश्मी : (सरमाते) देवु..कीतने दीनोके बाद मजा आया.. आज आपने मुजे तृप्त करदीया.. बाबु बस अ‍ेसेही आया करो ओर अपनी इस बीवीकी चुदाइ करते रहो.. वरना आप वहा अकेले हो तब मुजे बुला लीया करो मे आजाउगी.. अब कीसका डर.. अबतो जींदगी भर आपसेही चुदवाना हे..

देवायत : (लंड अबभी चुतमे हे) बस.. बेबी.. सांत होजा.. अबतो मेही तेरा खयाल रखुगा.. चल आजा साथमे नहा लेते हे फीर जानाभी हे.. ओर हां.. अब तु मुनीमकी जगाह काम करेगी.. तेरी नोकरी पकी.. वो रमेशको सरपंच बना रहा हु.. यहा राघवके पास कीतने पेपर पडे हे..?

रश्मी : पता नही.. देखलुगी.. जीतनेभी पेपर नीकलेगे आपको दे दुगी.. अब उतरना नही हे क्या..? की ओर चोदना हे..?

देवायत : (उपरसे उतरते) बेबी चोदनातो चाहता था पर जानाभी हे फीर कभी पुरा दिन चुदाइ करेगे..

इतना कहेके दोनोही बाथरुममे चले जातेहे ओर मस्तीया करते दोनो साथमे नहा लेते हे फीर बहार आके दोनोही कपडे पहेनके तैयार होजातेहे तब रश्मी देवायतकी बाहोमे समा जाती हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे




फीर देवायत बहार नीकल जाता हे ओर रश्मी दरवाजा बंध करते वापस उसी रुममे जाके सोने लगती हे.. उनकी चुतमे देवायतकी दमदार चुदाइकी वजहसे थोडी जलन हो रहीथी तो वो आराम करने लगी.. ओर उधर देवायतभी खेतोपे चला जाता हे वहा भानु धिरेनको जीपमे बीठाके दुर तक अपने खोतेमे घुमा रहा था जब मुजे देखलीया तो दोनोही वापस आगये ओर अ‍ेसेही साम ढल गइ तब देवायतने कहा..

देवायत : चल भानु अब घर चलते हे.. अब तुभी घर जा.. कल सुबह लताको हवेलीपे छोड जाना.. हम वो हमारी बडी गाडी ही लेकर जायेगे उनसे ७ आदमीतो आजायेगे.. क्या तुभी चलेगा..?

भानु : नही भाइ आपही सब लेकर आओ.. मे इधर हुनां.. अब दोनोको साथमे कही नही जाना पता नही कब कीसीको लेजाना पडे.. आपही चले जाओ..

तब भानु ओर धिरेन अ‍ेक बार फीर गले मीले ओर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. तब देवायत ओर धिरेनको नही मालुमथा की मंजु ओर चंदाका रीस्ता बदल गया हे.. अब वो मौसी भांजी नही रहे.. अब वो बडी दीदी ओर छोटी दीदी बन गयेथे यानी अ‍ेक दुसरेको सौतनके रुपमे स्वीकार करलीया था.. दोनोही खुस नजर आ रही थी ओर हस हसके बाते कर रहीथी.. अभी तक चंदाने मंजुको नही बताया थाकी देवायत ओर उनकी सादी हो चुकी हे.. दोनोही अभी ये बात सबसे छुपाके रखना चाहती थी..




तभी देवायत ओर धिरेन फ्रेस होके अंदर आगये तो दोनोके चहेरेपे रोनक आ गइ ओर हसने लगी तब धिरेन उनकी मम्मी चंदासे चीपकके बेठ जाता हे ओर उसे बेठेही हग करता हे तो मंजु हसने लगती हे..

मंजुला : क्यु भाइ आज मम्मीपे बहोत प्यार आ रहा हे..? हें..हें..हें..

धिरेन : क्या दीदी.., वोतो बस युही.., (चंदाकी ओर देखते धीरेसे) मोम.. कल आप आ रही हेना..?

चंदा : (उनका सर सहेलाते) हां.. आ रही हु.., तु कहेतो नही आउगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाके हसते) मोम.., मेने अ‍ेसातो नही कहा.. क्या हेना वो कपडे लेने हे..तो..

चंदा : तो क्या हुआ.. अभी तक मोमकी पसंदका पहेनता था अब बीवीकी पसंदका पहेननेकी आदत डालले.. हें..हें..हें..

तो धिरेन मुह बीगाडते सरमा गया ओर उपर रुममे भाग गया तो सब हसने लगे.. फीर रजीयाने आवाज लगाइ ओर सब डीनरके लीये बेठ गये ओर खाना खाते कलकी खरीदीकी बाते करते रहे की क्या क्या लेना हे दुसरी ओर सहेरमे पुनम ओर लखनभी बहोत खुसथे क्युकी कलसे उनका वेकेशन लग रहा थातो दो महीनेकी छुटी.. अबतो वेसेभी वो लोग हमेसाके लीये धरही जाने वाले थे तो दोनोही अपना अपना पेकींग करने लगे ओर रात मे सब फ्रेन्डने विदाइकी पार्टी रखीथी तो दोनोही भाइ बहेन पार्टीमे बीजी थे..

तब दुसरी ओर भानु घर आगया तो सबने खाना खाने बेठ गये तब भावना लताको सब बता रहीथी की क्या क्या लेना हे तब सरलाने उसे अपनी मौसी चंदासे फोनपे बात करलेनेको कहा.. तब लता बार बार भानुकी ओर नजर चुराते देखती रही.. जीस तराह भानुने उनके साथ कीया ओर उनके रुममे बीना संकोच आताथा ओर बात करताथा तो उसे अब भानुसे थोडा डर लगने लगाथा की भानु कुछ गलत कदम ना उठाले..

क्युकी वो अब लखनकी ओर काफी ढल चुकीथी ओर दीनमे अ‍ेक बार उनसे फोनपे बात करलीया करती थी.. तब दो बारतो दोनोही उतेजीत होकर फोन सेक्सभी कर चुके थे.. बस अब सीर्फ मीलनेकी ही देरी थी.. वो अब काफी कामुक लडकी हो चुकीथी यहा तककी लखनसे सादीसे पहेले सेक्स करनेकोभी तैयार थी.. तब उसने भावनाने टोकाकी क्या सोच रहीहे तो वो चुपचाप सर जुकाके खाने लगी..

वो खाना खातेभी काफी अ‍ेक्साइटेड थी क्युकी कल उनकी लखनके साथ मुलाकातजो होने वालीथी तभी भानु उसे सुबह ज्लदी तैयार होनेको कहेता हे तो वो खाना खाते उठ जाती हे ओर सब खालेते हे तब फटाफट सभी काम नीपटाके अपने रुममे घुस जाती हे तभी भावना उसे भावेसको थमा देतीहे वो भावेसको सुलाके अपना रुम लोक करके सोनेकी कोसीस करने लगती हे..

उधर सब खानेकी पार्टीके साथ अ‍ेक दुसरेको गले मीलते अपने अपने रुमकी ओर जाने लगतेहे तब पुनमके मनमे घमासान युध्ध चल रहा हे अ‍ेक तरफ लडकेको मीलनेकी तम्मनाथी की कोन होगा वो लडका जो भाइने रीस्ता तैय कीया हे.. ओर दुसरा अपने भाइ देवायतसे मीलनेकी खुसी अंदर जातेही वो दरवाजा बंध करके लोक कर देती हे ओर अपने बेडपे पेटके बल लेट जाती हे फीर मोबाइलमे देवायतका फोटो रखके हसने लगती हे.. ओर देखतेही मनमे उसे बाते करती हे

पुनम : (मनमे) भाइ अब सीर्फ आजकी रात आपके यादोमे काटनी हे.. बस कलतो आपकी पुनम आपके साथ होगी.. पता नही आपने कोनसा लडका मेरे लीये चुना हे.. बस मुजेतो सीर्फ आपसे मतलब हे.. क्या मस्त बोडी हे आपकी.. कइ बार मेने आपका हथीयारभी देखलीया हे तबसे आपने मुजे पागल करके रखा हे.. भाइ आपको नही पता मेने कुछ डीसाइड करलीया हे जो मे आपसे राखीके दीन मांग लुगी..

कहेते वो उतेजीत होगइ ओर सब लाइट बंध करके अपने सब कपडे फटाफट नीकाल दीये सीर्फ टु पीसमेही बाथरुममे चली गइ ओर पेन्टी नीचे करके कमोडपे बेठ गइ ओर अपनी ब्रा भी उची करलीया ओर अपने हाथोसेही अपने बुब्सको मसलने लगी.. तब उनको कुछ याद आया तो उने देवायतको फोन लगा दीया.. ओर अ‍ेक हाथकी उंगली अपनी चुतमे घुसादी ओर धीरे धीरे अंदर बहार करने लगी तभी देवायत ओर मंजु सभी होलमे बेठे थे जेसेही पुनमका फोन आया तो देवायत फोन लेके आंगनमे चला गया ओर टहेलते फोन उठालीया तो फोनपे..




देवायत : हां छुटकी बोल क्यु फोन कीया..? क्या कर रही हे..? हम कल आ रहे हे..

पुनम : (कामुक आवाजमे) भाइ.. प्लीज.. जल्दी आजाओ.. मुजे वहा आना हे..

देवायत : (हसते धीरेसे) अरे हम कल आतो रहे हे.. ओर सुन.. कल तु उसे देखभी लेना क्या मस्त लडका हे..

पुनम : भाइ.. आजकी रात कटना बहोत मुस्कील हे.. प्लीज.. आजही आओनां.. सीसीसीइइइइइ

तभी देवायत उनकी सीसकारीया सुनतेही समज जाता हे की पुनम क्या कर रही हे.. तो सोचमे पड जाता हेकी मुजेही फोन क्यु कीया.. क्या वो मुजे.. इमेजींगतो.. नही नही.. सायद मुजे गलतफेमी हुइ हे..

देवायत : सुन छुटकी कल तेरी भाभीभी आ रही हे.. तु अपनी खरीदीकी पुरी लीस्ट बना लेना मे तुजे सब दीलवाउगा..

पुनम : पता हे.. लीस्ट.. बनाली..भाइ.. आह..सीसीइइइ भाइ.. मेरे मेरे.. कपडे.. आप.. चोइस.. करना.. ससससइइइ..

पुनम : (धीरेसे) बेबी.. क्या कर रही हे.. अब सोजा कल मीलके बात करेगे..

पुनम : भाइ.. कुछ.. नही.. बस.. बस.. सीइइइ उउउ गगगइइइइससस रखती हु..सीसीइइइ

कहेके पुनम जड गइ तब उसे होस आयाकी वो क्या कर रहीथी तो उसने फोरन गभराते फोन काट दीया ओर खुब सर्मीन्दा हुइ ओर हसने लगी.. अब वो देवायतसे बात करनेमे बीन्दास होने लगी थी तब देवायतभी सोचमे पड गया की पुनम क्या कर रही होगी.. जरुर उनको अमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली कर रही होगी.. आवाजतो अ‍ेसेही आ रहीथी.. लगता हे मुजे पुनमको समजाना पडेगा.. आजकल वो मुजसे ज्यादाही बाते कर रही हे ओर उनका मेरे प्रती लगावभी काफी बढ गया हे जो उनके लीये सही नही हे.. तो क्या बाबाने जो कहाथा वो सब सच हो रहा हे.. मुजेभीतो कहाथाकी तुभी अ‍ेसे रीस्तोसे बंधा होगा.. तो क्या वो पुनम ओर मेरे बारेमे केह रहे थे..? नही नही.. मे गलत सोच रहा हु.. तभी..

मंजुला : देवु कीसका फोन था.. जो तुम सोचमे पड गये..

देवायत : (अंदर आते) अरे कुछ नही वो छुटकीका फोन था कहेतीथी कल कब आ रहे हो आज दोस्तोने पार्टी रखीथी ओर दोनोने अपना सब बोरीया बीस्तरा पेक करलीया हे उनको बडी जल्दीहे इधर आनेकी..हें..हें..हें..

कहातो सब हसने लगे तभी चंदाने सुबह जल्दी जानेका कहेके धिरेनको सोनेके लीये उपर भेज दीया तो धिरेन हसते खडा हो गया ओर सबको गुडनाइट कहेते उपर अपने रुममे चला गया.. क्युकी वोभी कल पुनमको मीलनेके लीये बडाही उत्साहीत था अंदर जातेही चेन्ज करलीया ओर अपने बेडपे आके लेट गया ओर अपना मोबाइल नीकालके पुनमकी तस्वीर देखने लगा ओर उसे देखतेही रोमांचीत हो गया..




ओर पुनमके साथ सोनेकी कल्पना करते उतेजीत होने लगा.. उनके लोअरमे तंबु होने लगा तो उसने लोअर नीचे करके अपना लंड बहार नीकाल लीया ओर अ‍ेक हाथसे मोबाइलमे पुनमको सामने रखते दुसरे हाथसे अपने लंडको सहेलाने लगा ओर धीरे धीरे मुठीमे पकडते हाथ उपर नीचे करने लगा तब थोडीही देरमे उनके लंडने जवाब देदीया.. ओर लंडसे पीचकारीया नीकलके उनकेही सीनेमे गीरने लगी..

फीर वो बाथरुममे चला गया ओर नहाके सोने लगा.. तो उधर नीचे अब चंदा मंजु ओर देवायतही बेठे थे.. तब थोडी देरके बाद देवायतभी साने चला गया तब मंजु ओर चंदाही रेह गये तब मंजुने कहा..

मंजुला : (हसके धीरेसे) दीदी अब आपभी सो जाओ.. कल अपने पतीके साथ जाना हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे पानीपानी होते मंनुको मुका मारदीया) क्या मंजु.. कुछभी बोलती हे.. अभी कहा हे पती..

मंजुला : (हसते) अरे देखो केसे गालपे लाली छागइ.. हें..हें..हें.., दीदी पती नही हेतो हो जायेगा.. कल अच्छा मौका हे.. आप उनसे बात करलो.. क्युकी मे जल्दसे जल्द आपको इस घरमे देखना चाहती हु..

चंदा : (धीरेसे सरमसे) मंजु.. क्या ये सही होगा.., ओर अभीतक देवुको तुम्हारी बीमारीके बारेमे भी तो नही पता..ठीक हे मे उसे मौका मीलतेही बात करलुगी उसे सम्हालनाभी तो पडेगा.. वोतो सुनके टुट ही जायेगा..

मंजुला : नही दीदी अभी उनको कुछ मत बताना पहेले मेरी डीलीवरी हो जाने दो फीर हम दोनो मीलके उसे बतायेगे.. हम दोनोको ही उसे सम्हालना हे.. पता नही मेरा देवु.. सम्हल पायेगाके नही..

चंदा : चल ठीक हे मे अभी नही बताउगी.. चलजा अब सोजा.. कल जानाभी हे..

मंजुला : (खडी होते सरारतसे) दीदी.. क्या उनको आपके पास भेजदु.. हें..हें..हें..

चंदा : (खडी होते सरमसे पानीपानी होगइ ओर अ‍ेक मुका मारते) चल ..हट.. बडी बदमास होगइ हे तु..

फीर दोनोही हसते अपने अपने कमरेमे चली जाती हे.. अंदर जातेही मंजुने चेन्ज करलीया ओर गाउन पहेनके देवायतसे लीपटके सोने लगी तब देवायतने उसे पीछेसे अपनी ओर खीचलीया तो मंजु देवायतके सीनेपे सर रखके उसे देखने लगी तभी देवायतने उनके होंठ चुमलीये ओर मंजुको प्यारसे देखने लगा..




मंजुला : जानु अ‍ेसे क्या देख रहे हो.. मुजे पता हे आपको प्यार करना हे पर मे आपको अभी कुछ नही दे सकती.. मेरा बेबी.. नाराज तो नही..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते बाहोमे भीचते) नही.. मुजे पता हे.. अब हमारा बेबी आजायेगा.. फीर तुजे जी भरके प्यार करुगा.. चल सोजा..

मंजुला : जानु आपतो राजा हो.. आप दुसरी सादी क्यु नही कर लेते.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आप मौसीसेही सादी करलो.. बेचारीकी जींदगीभी सवर जायेगी..

देवायत : (उनकी ओर देखते) बेबी मे देख रहा हु पीछले चार दीनसे तुम मौसीके पीछेही क्यु पडी हे.. ओर तुजे क्या हुआ हे..? बता.. जो बार बार तुम दुसरी सादीकी बात क्यु कर रही हो..?

मंजुला : देवु.. बुरा मत मानना.. मेने आप दोनोकी आंखोमे अ‍ेक दुसरेके लीये प्यार देखा हे.., मुजे अ‍ेसा लगता हे मौसी आपको प्यार करती हे.. इसीलीये केह रहीथी.. ओर मुजे इस बातका दुखभी नही हे.. क्युकी मेभी मौसीके साथ रहेना चाहती हु.. इनको इस विधवाके रुपको नही देख सकती.. ओर अभी इनकी उमरही क्या हे.. इसीलीये केह रही थी..

देवायत : कभी धिरेनके बारेमे सोचा हे..? जब पता चलेगाकी उनकी माने दुसरी सादी करली ओर वोभी अपने जीजा के साथ तो उनपे क्या बीतेगी सोचा हे..? ओर अबतो हमारा जमाइ होने जा रहा हे..

मंजुला : (कुछ सोचते) जानु बुरा मत मानना.. मेने धिरेनसे इस बारेमे बात करली हे.. उसे कोइ अ‍ेतराज नही

देवायत : (चोंकते) क्या..? पागलतो नही होगइ तुम.. अ‍ैसी बातेभी कोइ पुछता हे..?

मंजुला : जानु पलीज.. गुसा मत हो.., धिरेन इस मामलेमे बहोत परीपकव हे.. उनकोभी पता हे मम्मीकी उमरभी नही हे ओर ओरतकी जरुरतके बारेमे जानता हे.. उसने मुजे परमीशन देदी हे बस अ‍ेकही सर्त पर..

देवायत : (उत्सुक्तासे) कोनसी सर्त..?

मंजुला : देवु.. वो चाहता हे मम्मी सादी करलेगी तो मेरे सामने खुलके जही जी पायेगी ओर सर्मींदा होती रहेगी.. इसीलीये वो अपनी सादीके बाद पुनमके साथ अपनेही घरमे रहेना चाहता हे.. अकेला..

देवायत : (हसते) बेबी तेरी बातोसे लगता हे तुम पुरी तैयारीया करके मुजसे बात कर रही हो.. तबतो येभी बतादो तुमने मौसीेस भी बात करली होगी.. बताओ क्या कहा उसने..

मंजुला : (खुसीसे चुमते) ओह.. हाउस्वीट मेरे अच्छे बेबी.. देखा पकडलीयानां मुजे.., हें..हें..हें.., सुनो.. मौसीभी तैयार हे.. लेकीन अभी नही.. कहेतीथी धिरेनकी सादीके बाद सोचेगे.. जब सही वक्त आजायेगा तब मे तेरे पास आजाउगी.. बस इतना ही कहा.. उनको मेरी सौतन बननेके लीये बडी मुस्कीलसे मनाया हे..

देवायत : ओ..हो.. तभी इतनी जीद कर रही हे.. अब येभी बतादो तुम मेरी दुसरी सादी क्यु करवाना चाहती हो..? क्या हे इनका रीजन..? बेबी मुजे इतनातो पता हे कोइभी अपने पतीकी दुसरी बीवी बरदास्त नही कर सकती.. ओर तुम खुद मेरी दुसरी सादी करजाना चाती हो.. कुछ तो रीजन होगा..

मंजुला : (सीरीयस होते सीनेमे सर रखदीया) जानु.. रीजन हे.. बस अभी मे वो आपको नही बता सकती..

देवायत : (मंजुके सरको सहेलाते) बेबी.. कुछतो गंभीर बात हे.. ठीक हे तो कब बताओगी..?

मंजुला : जानु बस.. मेरी डीलीवरी तक ठहेरजाओ फीर मे आपको सबकुछ बता दुगी..

देवायत : ठीक हे.. चल सोना नही हे क्या..? सुबह जाना भी हे.. आजा..

कहेके देवायत उसे बाहोमे भरके सोने लगता हे.. तब मंजुभी खुस थी.. ओर वोभी सोने लगी.. उधर आज चंदाभी मंजुकी बातोसे अ‍ेक्साइटेड थी ओर कलही देवुके साथ जाना था उसेभी कब नींद आगइ पता नही चला.. तब देर रात देवायत चंदाके रुममे आजाता हे तो चंदा अपने बेडपे चदर डालके उनका वेइट कर रहीथी.. देवायत धीरेसे दरवाजा बंध करके चंदाके पास आगया.. ओर चदर हटाली..

तभी चंदा सरमसे पानीपानी होके अपने हाथोसे अपना चहेरा छुपालीया क्युकी वो सब कपडे नीकालके पुरी तराह नंगी होके देवायतका वेइट कर रहीथी वो जानतीथी देर रात देवायत उनके पास उनकी चुदाइ करने जरुर आयेगा तो सब तैयारीया करकेही लेटीथी चंदाको नंगी देखतेही देवायतका लंड जटके मारने लगा ओर देवायत सीधाही उनके पैरके बीच बैठ गया तब चंदा ने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैला दीये..

चंदा : जानु पहेले इसे अंदर डालदो फीर मेरे उपर आजाओ.. आज जल्दी सोना हे..

देवायत : (हसते धीरेसे) डार्लींग अब कोइ जल्दी नही.. अबतो मंजुनेभी सब छुट देदी हे.. तुजे आरामसे चोदुगा.. आजतो सुबह तक चोदना हे..

चंदा : (सरमाते हसते धीरेसे) पागल होगये हो क्या..? जानु सुबह हमे जानाभी हे.. बस अ‍ेक बार चोदलो..

देवायत : (चुतपे लंड घीसते) नही कमसे कम दो बार चोदुगा.. नहीतो मे चला..

चंदा : (बुरी तराह सरमाते) आप बहुत नोटीहो नही मानोगे.. ठीक हे लेकीन सीर्फ दो बार ओर ज्यादा नही..

देवायत : (लंड चुतमे फसाते चंदाके उपर लेटते) चल ठीक हे.. दो बारही करुगा बस.. आजा..

कहेते वो चंदाके उपर जुक जाता हे ओर चंदाके होंठ चुमने लगता हे तब चंदाभी मदहोसीमे छाने लगी.. उनकी चुतकी नाजुक चमडीपे देवायतका सख्त लंड महेसुस हो रहाथा तब चंदाकी चुत हरकतमे आके फडफडाने लगी ओर देवायतके सांपको अपने बीलमे घुसानेकी कोसीस करने लगी तभी देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड चंदाकी चुतमे उतार दीया तो चंदाकी चीख देवायतके मुहमेही दब गइ ओर वो देवायतके सीनेपे मुके मारने लगी.. तब देवायत उसे जटके मारते चोदने लगा.. ओर चंदाकी आहे नीकलने लगी..




दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी आज देवायत पुरे जोसमे चंदाकी चुदाइ कर रहाथा तो चंदाभी कमर उछाल उछालके देवायतका चुदाइमे साथ दे रहीथी दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. ओर काफी देरके बाद दोनोही अकडने लगे ओर अ‍ेक दुसरेको जोरोसे बाहोमे भीचते साथमे जडने लगे.. तब देवायतने चंदाकी पुरी चुत अपने पानीसे भरदी.. ओर चंदाके सीनेपे ढेर होगया ओर चंदा उनकी पीठ सहेलाती रही..

कुछ देरके बाद दोनोके बीच अ‍ेक बार फीर जबरदस्त चुदाइ होने लगी इस बार चंदा पुरी तराह थक गइथी देवायत इतना जोस ओर ताकातसे चंदाको चोद रहाथा की चंदाके सरीरकी अ‍ेक अ‍ेक नब्स ढीली करदी ओर अ‍ेक बार फीर दोनो जड गये तब चंदाकी चुतसे देवायतका विर्य बहार नीकलने लगा.. तब देवायत उसे गोदमे उठाके बाथरुममे ले गया ओर दोनो नहाने लगे तब देवायतने अ‍ेक बार वहाभी चंदाको खडे खडे चोद लीया तब चंदा थकके चकनाचुर हो चुकी थी.. ओर देवायतको हसते हुअ‍े धके मारके बहार भेज दीया..




दोनोने नाइटके कपडे पहेनलीये तब देवायत चंदाको बाहोमे भरके होंठ मीलाके प्यार देता हे पुरी रात दोनोके बीच तीन बार जमकर चुदाइ हो चुकीथी हे.. तब चंदा बहुत खुस होगइ ओर देवायत ४ बजे वापस मंजुके पास चला गया ओर उनसे चीपकके सो गया तब मंजुभी देवायतसे चीपकके खुस होते सोने लगी.. वो जान चुकीथी उनका पती उनकी सौतनकी बजाके आया हे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २०

दोनोने नाइटके कपडे पहेनलीये तब देवायत चंदाको बाहोमे भरके होंठ मीलाके प्यार देता हे पुरी रात दोनोके बीच तीन बार जमकर चुदाइ हो चुकीथी हे.. तब चंदा बहुत खुस होगइ ओर देवायत ४ बजे वापस मंजुके पास चला गया ओर उनसे चीपकके सो गया तब मंजुभी देवायतसे चीपकके खुस होते सोने लगी.. वो जान चुकीथी उनका पती उनकी सौतनकी बजाके आया हे....अब आगे

सुबह मंजुने सबको जगा दीया ओर लास्टमे देवायतके पास बेडपे बेठ गइ ओर उसे होंठोपे कीस करते जगाने लगी तब देवायत जागते उसे बाहोमे भरलीया ओर उनको फीरसे अपने उपर जुकाके चुम लीया..




तभी दुसरी ओर भानुके घरभी सब जल्दी उठ गये ओर तैयार होके चाइ नास्ता करने लगे तभी भानुने लताके हाथमे पैसे थमा दीये ओर उनको जोभी लेना हो लेनेके लीये कहेने लगा तब भावना उसे क्या क्या लेना हे बताती रही ओर आखीर भानु कार लेके नीकलने लगा तब लता उनके साथ ना बेठते पीछली सीटमे बेठ गइ ओर भानु हवेलीकी ओर चल पडा.. तब दोनोही रास्तेमे खामोस बेठे रहे.. तब भानुने चुपी तोडी..

भानु : लता.. उस दीन जोभी हुआ उसे भुलजा ओर मुजे माफ करदे.., आइन्दा अ‍ैसी गलती नही करुगा.., ओर तुभी ध्यान रख.. सब दरवाजा बारी अच्छेसे बंध रखा कर..

लता : (सरमसे पानीपानी होते) जी भैया..

भानु : (हसते) तो क्या मुजे माफ नही कीया..?

लता : (सरमाते हसते) जी.. करदीया.., भाइ छोडीये इन बातोको.. आइन्दा खयाल रखीयेगा.. अब मे कीसी ओरकी अमानत हु..

तब भानुने राहतकी सांसली की चलो लताने मुजे माफ करदीया हे.. फीर दोनो पुरे रास्ते कुछ नही बोले ओर हवेलीपे आगये ओर दोनोही अंदर चले गये तब वहा सब चाइ नास्ता कर रहेथे तो देवायतने दोनोको बहुत आग्रह कीया परंतु दोनोही चाइनास्ता करके आयेथे तो नही बेठे.. तब भानु सबकी इजाजत लेके नीकल गया.. इसी बीच चंदा बारबार देवायतकी ओर देखते सरमा रही थी ओर नजर चुरा रहीथी

ये बात धिरेनकी नोटीसमे आगइ तो वोभी मनमे खुस होने लगाकी चलो उनकी मां यहा खुस रहेगी.. ओर सबने चाइ नास्ता करलीया तब मंजु चंदाको सब बताने लगी की दोनोके लीये कोनसी सगुनकी सारी लेनी हे.. फीर मंजु चंदा ओर लताको गले मीली ओर सब बहारकी ओर जाने लगे.. आज देवायतने उनकी बडी कार लेली जो कभी कभारही नीकालता हे जब सब फेमीलीको साथमे जाना हो तब..

देवायत बेठ गया तब उनके पास धिरेन बेठ गया.. ओर चंदा लता उनके पीछे बेठ गइ ओर देवायतने कारको सहेरकी ओर चला दी.. सब खुस थे देवायत ओर धिरेन बाते करने लगे तो पीछे चंदा ओर लताभी हस हसके बाते कर रहीथी तब बीच बीचमे चंदाके कुछ पुछनेसे लता सरमाके हसने लगती थी.. तब थोडी ही देरमे लता सबके साथ घुल मील गइ आज वो लखनसे तो धिरेन पुनमको मीलनेके लीये बेताब थे..

उधर सुबह पुनम जल्दी उठ गइ क्युकी वो अपने भावी भरथारको मीलने वालीथी जो उसे अभी तक नही पताथा की वो कोन हे.. दुसरी ओर उनके मीलनेकी खुसीसे ज्यादा इस बातकी खुसीथी की उनका चहीता भाइ ओर उनका ड्रिमबोय उसे लेने आ रहाथा जो रोज रातको उनके नामकी उंगलीसे अपने आपको सांत करती थी तो लखनभी लताको मीलनेके लीये बेकरार था ओर वोभी सुबह तैयार होके सबका वेइट कर रहा था..

सब बाते करते सहेर पहोंच गये तब सुबह नव बज रहेथे जेसेही कार आके रुकी तो लखन ओर पुनम दोनोही भागते नीचे आगये ओर उत्सुक्तासे देखने लगेकी कोन कोन आया हे तभी सबसे पहेले देवायत उतर गया ओर इधर चंदा उतर गइ तो साथमे लता को उतरते देखातो लखनका चहेरा लाल होगया.. तब दरवाजा खोलके जेसेही धिरेन उतरा.. तब उसे देखके पुनम अपने दोनो हाथ मुहपे रखके खुसीसे सोक्ट होगइ..

पुनम : (जोरोसे) धिरेन.. तुम..?

कहातो सब जोरोसे हसने लगे..तब पुनमको रीयेलाइज हुआकी उनका भावी पती धिरेनही होगा तोवो सरमसे पानीपानी होगइ ओर दोडके देवायतके गले लग गइ ओर उनके सीनेमे सर छुपालीया तो देवायत उनके सरको सहेलाते हसने लगा तब दुसरी ओर चंदा लता लखनभी दोनोको देखते हसते रहे तभी देवायतने पुनमके दाढीपे हाथ रखके उनका चहेरा उपर कीया ओर धीरेसे हसते कहा..

देवायत : क्यु.. लडका पसंद आया..? हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते फीरसे सीनेमे सर रख दीया) क्या.. भाइ.. आप भीनां..

तभी पुनमके मनमे घमासान विचारोका युध्ध होने लगा ओर वो सोचने लगी.. की अगर यही लडका हेतो भाइके घर अक्सर आना जाना लगा रहेगा ओर वो धिरेनको अच्छेसे जानतीभी थी ओर उसे पसंदभी करतीथी तो धिरेनसे हां कहेदु तो घरके नजदीक ही रहुगी वरना पता नही कोनसे गांवमे दे देते.. इनसेतो ये बेटर हे ओर उसने फोरन फैसला लेलीयाकी मे हां केह दुगी..

देवायत : (पुनमका चहेरा पकडते) अरे ओ छुटकी.. बतानां.. लडका पसंद आया..?

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते नजर जुकाके धीरेसे) हां भाइ.. पसंद हे..

कहातो चंदा धिरेन ओर देवायतके चहेरेपे खुसी छागइ ओर सब हसने लगे.. तभी चंदा पुनमके पास आतीहे तो पुनमको खयाल आयाकी मेरी सास ये मौसीजी हे तो उनके पैर छुने लगी..

तभी चंदाने उसे दोनो कंधेसे पकडके खडा करदीया ओर उनकी आंखोमे देखते हसती रही फीर उनका सर चुमलीया ओर दोनो गले मील गये.. फीर लखननेभी चंदाके पैर छुअ‍े ओर अपने भाइ ओर धिरेनको गले मीला फीर लताकी ओर देखते सरमाके हसने लगा तो लताभी लखनको देखती रही ओर सरमाते हसती रही.. फीर पुनम ओर लखन दोनोही अपनी होस्टेलमे जाके अपना अपना सामान लेकर आगये ओर सब कारमे रखके बेठ गये तब पुनम ओर लखन दोनोही पीछे बेठ गये ओर देवायतने कार सीटीमे लेली.. तब..

चंदा : देवायतजी कार पहेले कोइ अच्छी सारीकी दुकानपे लेलो पहेले सगुनकी सारी लेनी हे फीर सब बच्चोके कपडे लेने जायेगे..

देवायत : जी मौसीजी..

कहातो चंदाको मनमे हसी आगइ की बीवीको मौसीजी कहेना पड रहा हे तो दुसरी ओर धिरेनभी आज मनमे हसने लगाकी जीजुको मालुमही नही हेकी अपनी होने वाली बीवीको मौसीजी.. केह रहे हे.. दोनोही मंद मंद मुस्करा रहेथे.. फीर सब लोग अ‍ेक बडी सारीकी दुकानमे चले गये तो वहा पुनम लता ओर चंदा सब सारीया देखने लगे फीर दोनोके लीये चंदाने तीन तीन सारीया लेली.. तो सब पेमेन्ट देवायतने करदीया..

चंदा : (बहार नीकलते) अरे आपने सबका पेमेन्ट क्यु कीया..? कमसे कम पुनमकी सारीकातो हमे करने देते..

देवायत : (हसते) क्या मौसीजी अब आप ओर हम अलग थोडीना हे.. सब अ‍ेकही हे.. क्यु धिरेन..

धिरेन : (हसते) हां मोम.. अबतो सब अ‍ेकही हे.. जीजु दे या आप.., हें..हें..हें..

कहातो चंदा जेंप गइ ओर धिरेनकी ओर अ‍ेक नजरसे देखती रही तो धिरेन मंद मंद मुस्कराते चंदाकी ओर देखता रहा.. तब चंदा सरमाके आगे चली गइ ओर देवायतभी कारकी ओर चला गया तब चारो बच्चे आपसमे हस हसके बाते करने लगे ओर कारमे बेठने लगे फीर देवायतने कारको अ‍ेक बडे मोलमे लेली तो सब खुस होगये ओर कारको पार्कींगमे पार्क करके देवायत आगया ओर सब मोलमे चले गये..

वहा चंदा ओर धिरेन अपने कपडे लेने लगे तो दुसरी ओर लखन ओर लता दोनोही अ‍ेक दुसरेकी चोइसके कपडे पसंद करने लगे तब पुनम देवायतको लेके उनकी पसंदके कपडे सीलेक्ट करवाने लगी..

देवायत : (धीरेसे) बेबी.. तुम धिरेनकी पसंदकाभी लेलो अबतो उनकीही पसंदका पहेनना पडेगा..

पुनम : (हसते) नही भाइ कपडेतो मे आपकी पसंदका ही लुगी.. छोटीथी तबसे आपहीकी पसंदकातो पहेनती आइ हु.. ओर आगेभी आपही लेआना.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) लेकीन पुनम अब तु बडी होगइ हे.. अभीभी मुजसे चीपकी रहेगीतो केसे चलेगा अब तेरी सादी होने वाली हे.. कुछतो धिरेनकी पसंदका लेले..

पुनम : (सरमाके हसते धीरेसे) भाइ उनकी पसंदकातो मे नही कहुगी तबभी लेलेगा.. क्या आप भाभीके लीये नही लाते..? हें..हें..हें.. बस मुजेतो आपकी चोइस पसंद हे ओर आगेभी रहेगी..

देवायत : (हसते) बेबी अबतु बहोत बदमास होगइ हे, क्या मुजसे अ‍ेसी बात करनेमे सरम नही आती..?

पुनम : (सीरीयस होते) नही भाइ.. आपको नही पता आप मेरे लीये कोन हो.. भाइ आप मेरा ड्रिमबोय हो.. ओर जींदगी भर रहोगे.. पता हे मेने धिरेनको क्यु पसंद कीया हे..?

देवायत : (सीरीयस होते धीरेसे) क्यु..?

पुनम : (धीरेस) भाइ वो भाभीका भाइ हे ओर हमारे गांवके बीलकुल नजदीक हे.. तो मे हमेसा आपसे मीलती रहुगी.. अ‍ैसा नही हेकी वो मुजे पसंद नही हे.. लेकीन मेरी पहेली पसंद आप हो.. मेने हमेसा आपको अपना बोयफ्रेन्ड माना हे, आइ लव यु भाइ.. मे आपसे बहोत प्यार करती हु.. ओर हमेसा करती रहुगी..

देवायत : (सोकट होते) छुटकी तु ये क्या बोल रही हे..? प्यारतो मेभी तुजसे करता हु.. पर वो वाला नही..

पुनम : भाइ प्यारतो प्यार होता हे.. इसमे ये वाला ओर वो वाला नही होता.. ओर यही सचहे.. ओर ये बात हम बादमे डीस्कश करेगे अभी यहा बात करना उचीत नही हे.. चलीये मेजु बताइअ‍े कोनसे कपडे लेने हे..

तब देवायतको ओर बहेस करना उचीत नही लगा वो बडीही कस्म कसमे फसाथा अ‍ेक तरफ आज पुनमको जीवनसाथी मीलाथा ओर दुसरी ओर अपनीही बहेनने उनसे प्यारका इजहार करलीया.. उनको पहेलेसेही आसंकाथीकी उनकी बहेन उनकी ओर कुछ ज्यादाही ढल रही हे.. ओर आज आसंकाये यकीनमे बदल गइ.. ओर वो पुनमके लीये कपडे लेने लगा.. कुछ कपडे पुनमने खुदने सीलेक्ट कीया..

तब चंदा ओर धिरेन दुसरी दुकानमे कुछ खरीद रहेथे तो लखनभी लताके हाथोमे अ‍ेक दुसरेका पंजा फसाके लताको दुसरी दुकानमे लेजा रहा था तो मौका देखते पुनम देवायतको लेके सबसे दुर अ‍ेक अंडर गार्मेन्टकी दुकान मे चली गइ तो देवायत उसे मना करने लगातो पुनम उनका हाथ पकडके जबरदस्ती लेगइ..

देवायत : छुटकी तु ये क्या कर रही हे कीसीने देख लीयातो क्या सोचेगे..?

पुनम : भाइ आप बीलकुल फंटुस हो.. सब लेलीया तो इसमे क्या दीकत हे..?

देवायत : लेकीन बेबी इसमे मे क्या कर सकता हु इनकोतो तुजेही चोइस करना होगा..

पुनम : (काउन्टरपे जाते) पता हे मुजे.. बस आप सीर्फ हां या ना कहेके अपनी चोइस बताना.. मे सब आपकी चोइसका लेना चाहती हु.. मुजे कीसी ओर की चोइस नही चाहीये.. जो मेरा बोयफ्रेन्ड कहेगा वोही मुजे लेना हे.. यही समजलो आज आपके साथ आपकी बहेन नही आपकी गर्लफ्रेन्ड हे..

तभी पुनम फटाफट छे सात टुपीस अंडर गार्मेन्ट नीकलवाती हे ओर देवायतको दीखाने लगती हे तो देवायत आजु बाजु देखते उसे इसारोमे हां या ना कहेता रहेता हे ओर पुनमने पांच सेट लेलीये ओर उसे फटाफट पेक करवाके पेमेन्ट देकर बहार आजाते हे.. आज देवायत बुरा फसा था ओर सोचने लगाकी मुजमे अ‍ेसी क्या बात हे जो सब ओरते उनसे सबंध बनानेके लीये रेडी ही रहेती हे.. ओर तो ओर आज उनकी बहेन भी उनकी ओर ढल चुकीथी.. ओर उसे बाबाकी बात याद आगइ ओर उसने वापस जाते समयही बाबाको मीलनेका फैसला करलीया..

तब धिरेन आगया ओर पुनमको मम्मी बुला रही हे कहेके लेगया तब देवायतने राहतकी सांस ली.. तभी उसे पीछेसे चंदाकी आवाज आइ देखा तो चंदा उनके पासही खडीथी तो देवायत समज गयाकी धिरेन जुठ बोलके पुनमको लेगया हे तो उसे हसी आगइ तो चंदा उसे पुछने लगी..

चंदा : (धीरेसे) क्या हस रहे हो कुछ हुआ क्या..?

तभी देवायत उसे सब बताता हे तो दोनोही हसने लगते हे.. ओर धीरे धीरे चलते बाते करने लगे..

चंदा : देवु.. आज मे बहोत खुस हु.. पुनमने हां कहेदी.. कीतनी प्यारी लडकी हे.. हमारे धिरेनके लीये परफेक्ट हे..

देवायत : (हसते) हां.. जेसे तुम ओर मंजु मेरे लीये हो.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा सरमसे पानीपानी होने लगी.. ओर अपने बालोकी लटको सही करते हसने लगी ओर कहा..




चंदा : (सरमाके हसते) देखना.. यहा बच्चोके सामने कोइ सरारत मत करना.. क्या तुम्हे कुछ नही लेना..?

देवायत : नही.. आज मेरी मंजु मेरे साथ नही हे.. फीर कभी ले लेगे..

चंदा : (आंखे नम करली हाथ पकडलीया) तो क्या मुजे अपनी बीवी नही मानते..?

देवायत : (हसते) अरे अफकोर्स मानता हु.. तुम मेरी बीवी ही हो.. बस येतो अ‍ेसेही मुहसे नीकल गया..

चंदा : (हाथ पकडके खीचते) अब चुपचाप चलो मेरे साथ.. कुछ मत बोलना..

कहेते चंदा देवायतका हाथ पकडके अ‍ेक दुकानकी ओर चलने लगी तब वो दुकानके सामने गुजरे जहा धिरेन ओर पुनम काउन्टर पर खडेथे तो दोनोने देख लीया ओर जटसे बहार आके देखने लगे.. तो चंदा देवायतको अ‍ेक दुकानमे लेजाती नजर आइ तब धिरेन खुस होने लगा ओर उसने पुनमका हाथ पकड लीया.. तो पुनमको कुछ अजीब लगा.. ओर उसे चंदासे ज्वेलेसी फील होने लगी..

पुनम : धिरेन मौसी भाइको कहा ले गइ..

धिरेन : (हसते) पता नही.. सायद जीजुके कपडे लेने गये होगे.. छोड सब चल अंदर बोल क्या चाहीये..?

पुनम : (हसते अंदर आते) मुजे क्या पता.. बस आपकी चोइस लेलो.. आप जोभी लोगे मुजे पसंद होगा..

धिरेन : (धीरेस) अरे ये कपडे नही.. अंदरके कपडेका केह रहा हु..

पुनम : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) मुजे नही पता.. कुछभी लेलो.. आप बहोत नोटी हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (उतेजनामे हाथ पकडते) यार लेतो लुगा.. पर साइजतो बतादो..

पुनम : (सरमाते हसते) २६ २८ ३०.. ओर आपके लोअरकी साइज क्या हे.. मुजेभी लेना हे..

धिरेन : पुनम अ‍ेक बात कहु.. तुजे ये रीस्ता मंजुर तो हेना..?

पुनम : (सरमाते) बुध्धु.. तभीतो आपके साथ इधर आइ हु.. ओर पता हे.. मे आपको सुरुसेही पसंद करती थी.. लेकीन भाइने नही बतायाकी वो आपथे.. वरना मे रोज आपको फोन करती.. लताभाभीका फोन रोज आताथा लखनभाइको.. अब करना.. मेने नंबर सेव करलीया हे..

धिरेन : (सरमाते धीरेसे) यार.. वोसरुम जाना हे.. तुम चलोगी..

पुनम : (सरमाते) नही.. यहा सब हे यार.. हम घरहीतो चलतेहे.. वहा मीलेगे..

तब दोनोही कुछ कपडे लेते हे फीर दोनो अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके बहार आजाते हे तब चंदा ओर देवायतभी बहार आगये तब उनके हाथमे तीन केरी बेग थी चंदाने देवायतको जबरदस्तीसे दो टीसर्ट ओर जीन्स दीलवायेथे जो पुरी पेमेन्ट चंदाने पे करदीथी.. दोनोही हस हसके बात कर रहेथे ओर अ‍ेसे चले आ रहेथे जेसे कोइ प्रेमी हो तब पुनमको चंदाको देखते फीरसे ज्वेलसी होने लगी.. तब उधर लखन ओर लताभी दुरसे धीरे धीरे अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके बाते करते आ रहे थे..

लखन : लता अब हमारी सादी होजायेतो अच्छा हे.. अब तेरे बीना रात काटना मुस्कील लगता हे..

लता : (सरमाते हसते) क्या आपभी.. लखन.. अ‍ेक बात कहु.. मेरीभी हालत कुछ अ‍ैसीही हे.. जबसे आपने मुजे वो विडीयोकोल सीखाया हे.. तबसे आप मेरी हालत खराब करते हो.. पता नही मुजे फोनमे क्या क्या करवाते हो.. बस अब जल्द हमारा मीलन होजाये.. आपके बीना नही रहा जाता..

लखन : लता हमारी सादी नही होजाती तबतक हम कही ओर नही मील सकते..?

लता : (सरमाके हसते) मील सकते हे.. लेकीन वो सब आपको देखना पडेगा ..वरना घरमेतो मेरी मां सांप बनके बेठी रहेती हे.. बस अबतो अ‍ेकही मोका हे.. भाभीको डीलेवरी होगी तो मां उनके साथ जायेगी होस्पीटल.. तब भाइभी नही होगा.. तो मे फोन करुगी आजाना..वरना कही ओर जगाह ढुंढलो..

लखन : हां ये आइडीया अच्छा हे.. वरना मे कुछ जुगाड कर लुगा.. अब नही रहा जाता यार..

लता : (सरमाते) बस कुछ दीन इन्तजार करलो.. फीरतो हम साथमेही रहेगे..

पुनम : (जोरोसे) ओ भाभी.. चलोना दोनोने बहोत बाते करली.. भुख नही लगी क्या..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) चुप कर चीबावली हम आही रहेथे.. भुखड कहीकी.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) ओ लखन.. मेरी बहुतको भुखड मत कहे.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम सरमाते हसने लगी तो सबकी हसी नीकल गइ.. फीर सब अ‍ेक जगाह अ‍ेकठे हो गये तब सबके हाथोमे पांच पांच छे छे केरी बेग थी फीर सब वहा अ‍ेक रेस्टोरंन्टमे चले गये ओर सब खानेके लीये बेठ गये.. तब चंदाने कहा..

चंदा : पुनम बेटा.. क्या तुने कपडे लेलीये..? कुछ मुजेभी लेने दे..

पुनम : (सरमाते हसते) मौसी..ओह.. सोरी.. (सरमा गइ) मम्मी.. कुछ ड्रेसीस लेलीये.. भाइ थानां..

चंदा : (हसते) हां पता हे तेरा ओर मंजुके कपडे यही तो लाते हे..हें..हें..हें.., कपडोके मामलेमे इनकी चोइस मस्त हे.. मेने देखीहे मंजुकी सारी.. अ‍ेकसे बढकर अ‍ेक हे.. मेनेभी पहेनी हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरारतसे) लताभाभी क्या आपने लेलीये..? आपकी पसंदका लीया की लखनभाइ की पसंदका? हें..हें..हें..

कहतो लता सरमसे पानी पानी होगइ तो लखनने सरमाके अ‍ेक टपली पुनमके सरमे मारदी तो सब हसने लगे.. तब धिरेनतो सीर्फ पुनमको देखताही रहा.. ओर हसता रहा.. तभी पुनमकी नजरभी धिरेनसे मील गइ तो सरमाके नजर चुराते हसने लगी ओर उनकोभी लगने लगाकी थोडा धिरेनकी ओरभी ध्यान देना चाहीये.. बाकी भाइसेतो मे घरपे नीपट लुगी.. अ‍ेसाही सोचते वो मुस्कराती रही..

फीर सबने खाना खालीया ओर बहार आगये सबका पेमेन्ट देवायतही करता रहा लताको भानुने पैसे दीयेथे लेकीन देवायतने नही लीया ओर लताको वापस देदीया ओर सब अ‍ेक दुसरे मोलमे चले गये वहा सब लेडीसने अपने लीये कोस्मेटीकका सामान लेलीया तो चंदाने पुनम ओर लताको चुडीया दीलवाइ सब लेडीस अपना सामान ले रहीथी तो लखन ओर धिरेनभी अपने लीये अंडरवेयर परफ्युम वगेरे सब सामान ले रहेथे..

तब देवायत सबसे छुपके अ‍ेक सारीकी दुकानमे चला गया वहा उसने चंदा ओर मंजुके लीये दो दो सारी ओर दोदो ड्रेस खरीद लीये फीर दोनोके लीये टु पीस अंडरगार्मेन्ट सेट ओर दोनोके लीये ट्रान्फरन्ट नाइटी भी लेली.. ओर सब पेक करवाके वो कारमे जाके अलगसे रखके वापस आगया.. तब सबलोग अपनी खरीदी करके आगये फीर वहा आइसक्रिम पार्लरमे जाके सबने आइसक्रिम खाइ.. ओर कारमे आगये.. तब ४ बज गयेथे ओर सब अपना सामन रखके बेठने लगे..

तो धिरेनने अपनी मम्मीको देवायतके पास बीठा दीया तो चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर वो कुछ नही बोली चुपचाप देवायतकी बाजुकी सीटमे बेठ गइ तो उनके पीछे लखन ओर लता बेठ गये तो चंदा ओर देवायत सब समज गये ओर अ‍ेक दुसरेके सामने देखके हसने लगे तो सबसे पीछे धिरेन ओर पुनम बेठ गये.. सब बेठ गये तब देवायत कारको सहेरके बहारकी ओर लेजाने लगा.. तब चंद बार बार नजर चुराते देवायतको देखने लगी.. जेसे वो अपने पतीके साथ बेठी हो.. वो अबने बालोकी लटको कानके पीछे लेजाते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखती हे..




धिरेन जान बुजके दोनोको नजदीक आनेका पुरा चान्स दे रहा था.. तब उसे क्या मालुम थाकी उनकी मम्मी अब हर दीन देवायतका बीस्तर गरम कर रही हे.. तब दुसरी ओर कार चलतेही लखन ओर लताने अ‍ेक दुसरेका हाथ नीचेसे ही पकडलीया ओर दोनो अपने पैर आपसमे रगड रहेथे तो पीछे धिरेनभी अपने पैरसे पुनमका पैर सहेलाने लगा तब पुनमकी सांसे तेज चलने लगी.. उसे अब धिरेन अच्छा लगने लगा था..

तभी लखनने धीरेसे अदब लगाली ओर हाथकी उंगलीसे लताके बुब्सको टच कने लगातो लता सरमसे पानीपानी होगइ ओर कामोतेजनामे जलने लगी ओर वो थोडी खीसकके लखनके पास आगइ तो लखनने पुरा पंजा लताके बुब्सपे रखदीया ओर हल्का हल्का दबाने लगा तब लताने अपना सर पीछे सीटपे टीका दीया ओर आंख बंध करली तभी उनको अपनी चुतपे लखनका हाथ महेसुस हुआ तो वो सकपका गइ..

ओर अपने पैर सीकुड लीये ओर आागे पीछे देखने लगीकी कोइ देखतो नही रहा.. तो सब अपनी मस्तीमे लगे हुअ‍ेथे तो थोडी राहतकी सांस लेली ओर बीन्दास होके अपने पैर फैला दीये तब लखन उनके पायजामेमे हाथ धुसानेकी कोसीस करने लगा लेकी हाथ अंदर नही जा पा रहाथा तब उसने लताकी ओर देखा.. तो लता सरमा गइ ओर वो अपने पायजामेका नाडा थोडा ढीला करने लगी..

तभी पीछेकी ओर धिरेन ओर पुनमभी अ‍ेसीही मस्तीमे डुबे थे धिरेनने पैर सीधा करके पुनके दोनो पैरके बीचही घुसा दीया था ओर पगके अंगुठेसे पुनमकी चुतको सहेला रहाथा तब पुनम आंख बंध करते अ‍ेकदम कामातुर हो चुकीथी उनसे कंट्रोल करना मुस्कील हो गयाथा ओर वो अपने हाथसे धिरेनके पैर हटानेकी नाकाम कोसीस कर रहीथी.. ओर अ‍ेक हाथसे अपने बुब्सको मसल रही थी..

तभी लखनने पेन्टकी जीप खोलके धीरेसे अपना लंड बहार नीकाल दीया तो लताने टेडी नजरसे देखलीया ओर अ‍ेकदम सरमाके नजर घुमाली ओर मंदमंद मुस्कराती रही.. वेसेतो लखन ओर लता कइ बार फोन सेक्स करते अ‍ेक दुसरेको अपना पार्ट दीखा चुकेथे लेकीन लताका आज लखनके लंडसे रुबरु होगइ.. ओर लखनने लताका हाथ पकडके सीधेही अपने लंडपे रख दीया

तो अ‍ेक दो बार लताने सरमसे हाथ हटानेकी कोसीस की लेकीन लखनने उसे जबरदस्ती अपना लंड पकडा दीया ओर लता उसे धीरे धीरे सहेलाने लगी.. तब लखननेभी लताके पायजामेमे हाथ घुसादीया ओर उनकी पेन्टीमे हाथ घुसाके उंगलीसे लताकी चुतको खरोदने लगा फीर धीरेसे उंगली लताकी चुतमे घुसादी तब लताकी हालत पतली होगइ ओर उसने लखनका लंड सख्तीसे पकडलीया ओर जोरोसे हीलाने लगी..

देवायत ओर चंदा दोनोकी सीट लंबीथी तो उसे पीछे क्या हो रहा हे दीखाइ नही देताथा तो इस बातका देवायतभी फायदा उठाना चाहता था उसनेभी अपना लंड ड्राइवींग करते बहार नीकाल दीया तो चंदा देखते गभरा गइ ओर पीछे देखने लगी.. जब उसे देखातो पता चला आगे कोइ नही देख पायेगा तब उसने राहतकी सांसली ओर देवायतके जांगपे सरमाके हसते अ‍ेक चपत लगादी..

तो देवायतने उनका हाथ पकडलीया ओर अपने लंडपे रख दीया तब वो सरमसे पानीपानी होगइ ओर धीरेसे लंडको मुठीमे भरलीया ओर हल्का हल्का सरहेलाने लगी.. तो पीछे लखन ओर लता दोनोही कामातुर हो गयेथे.. तभी लखनने लताकी गरदनमे हाथ डालके उसे अपने लंडकी ओर जुका दीया ओर अपना लंड लताके मुहमे ठुस दीया तब लताकी हालत पतली होगइ फीर धीरे धीरे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लग..




तो पीछेकी ओर पुनमभी लखनकी हरकतोकी वजहसे पुरी तराह कामोतजना मे जलने लगी ओर उसने अपना टोप नीचे करलीया तो उनके दोनो बुब्स बहार आगये तो धिरेन आहीस्तासे उनके पैरके पास नीचे बेठ गया ओर उनका स्कट उचा करके पुनमकी पेन्टीमे हाथ घुसा दीया ओर उनकी चुतको खरोदते पुनमकी चुतको मुहमे लेलीया ओर चुसने लगा तब पुनम धिरेनके सरमे हाथ रखके सहेलाते छटपटाने लगी..




आधेसे ज्यादा रास्ते बस यही वासनाका तांडव चलता रहा.. सबको अंदाजाथा की अंदर क्या हो रहा हे लेकीन कोइ अ‍ेक दुसरेको डीस्टर्ब करना नही चाहते थे.. ओर बारी बारी सब जडके संतुस्ट हो ते रहे.. तब चंदानेभी देवायतके जडतेही उनका लंड अपने रुमालसे साफ कीया ओर देवायत लंड अंदर करके सही होगया तो लता लखनभी अपने सब कपडे सही करते ठीकसे बेठ गये..

आज पुनमकी हालत दो बार जडके वाकइ पतली हो चुकीथी वोभी अपने कपडे सही करके अपने बालोको सवारने लगी तब धिरेनभी अपने लंडको अपने रुमालसे साफ कर रहाथा ओर अपनी पेन्ट सही करके बेठ गया तभी अ‍ेक रेस्टोरन्ट दीखा तो देवायतने कार वही रोकदी तो सब फटाफट उतरके बाथरुमकी ओर भागने लगे जीसे देखके चंदा ओर देवायत हसने लगे..

अंदर जातेही सब अ‍ेक अ‍ेक बाथरुममे घुस गये ओर अपने अपने पार्टको पानीसे साफ करने लगे फीर मुह हाथ धोके सब फ्रेस होगये.., फीर सब लोग होटेलमे चले गये वहा सबने चाइ नास्ता कीया.. ओर वापस कार लेके चलने लगे तो थोडीही आगे जाके देवायतने कारको जंगलकी ओर मोडदी तो चंदा उसे देखने लगी तब देवायतने हसके उसे बाबाको मीलनेकी बात कही.. तब जाके चंदाके चहेरेपे स्माइल आगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २१

अंदर जातेही सब अ‍ेक अ‍ेक बाथरुममे घुस गये ओर अपने अपने पार्टको पानीसे साफ करने लगे फीर मुह हाथ धोके सब फ्रेस होगये.., फीर सब लोग होटेलमे चले गये वहा सबने चाइ नास्ता कीया.. ओर वापस कार लेके चलने लगे तो थोडीही आगे जाके देवायतने कारको जंगलकी ओर मोडदी तो चंदा उसे देखने लगी तब देवायतने हसके उसे बाबाको मीलनेकी बात कही.. तब जाके चंदाके चहेरेपे स्माइल आगइ....अब आगे

जेसेही आश्रम पहोचे तो पुनम खुस होगइ सब उतर गये ओर अंदर जाने लगे , सब अंदर चले गये तो बाबा सबको देखके हसने लगे.. फीर सबने बाबाको दंडवत कीया ओर वही बेठ गये तब बाबा देवायत ओर पुनमकी ओर देखके हसने लगे तो पुनम सरमा गइ ओर हसने लगी.. तभी बाबाने उनको पुछा..

बाबा : (हसते) हां छुटकी.. हो गइ तेरी परीक्षा पुरी..? अब सादी करले.. हें..हें..हें.. कीतनी बडी होगइ.. देख लडका कीतना अच्छा हे तुजे रानी बनाके खुस रखेगा..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) जी बाबा.. आपतो सब जानते हो..

बाबा : (देवायतकी ओर देखते) सहेर गये थे क्या..? हो गइ सब खरीदी..?

देवायत : हां बाबा.. ये दोनोको लेनेभी जाना थातो सब काम नीपटाके आगये.. अब घरही जा रहेथे.. तो सोचा आपको मीलके जाये तो सब आगये..

बाबा : अच्छा कीया.. सब सुबहसे थके होगे.. चंदा बेटी.. सब बच्चोको लेजाओ.. सब भोजन करलो..

चंदा : (सरमाके हसते) बाबा बस अभी घर पहोचही जायेगे.. वहा करलेगे..

बाबा : (हसते) बेटा प्रसादका मना नही करते.. जा सबको लेजा.. ये भलेही यही बैठा.. मुजे इनसे काम हे.. फीर येभी आजायेगा.. सब भोजन खंड मे चले जाओ..

कहातो चंदा उठ गइ तो सब बच्चेभी उठ गये ओर चंदाके पीछे जाने लगे तब बाबा देवायतकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखते हसने लगे ओर तो देवायत समज गया ओर अपने दीलकी बाते कहेदी..

देवायत : बाबा आपतो सब जानते हे.. जेसा आपने कहा वेसाही सब होने लगा हे.. मुजेतो बहोत अजीब लग रहा हे, कुछ गलतभी हो रहा हे.., क्या येसब जायज हे..?

बाबा : (हसते) बेटा अभीतो तुने देखाही क्या हे.. येतो सुरुआत हे सब तुमसेही सुरु होगा.. जब तेरा पौता आयेगा तबतो सब चरमोपे होगा.., तब इस बातकी कोइ चर्चा भी नही करेगा, ओर जोभी कुछ होरहा हे होने दे, कोइ संकोच मत कर.. क्युकी ये सब प्रकृतीका खेल हे.. उनमे बाधा मत डाल.. समज गयाकी नही..?

देवायत : (सरमाते हसते) जी.. लेकीन दीलके अ‍ेक कोनेमे कुछ गलत होरहा हे उनका अहेसास होता हे..

बाबा : मे तेरी बात समज गया.. आज तेरी बहेनने कुछ कहाहे.. इसीलीये तु मुजे मीलने आया हे.., सुन.. वो जो कर रहीहे वो उसेभी ज्ञात हे.. ओर सब होके रहेगा तो आत्मग्लानी मत करना.. वास्तवमे उनका पुरा जीवन तुमसेही जुडा हे.. ओर वो आज कलसे नही कइ जन्मोकी बात हे.. वो सब जानती हे मेरी मुलाकात इनसे होती रहेती हे..

देवायत : (आस्चर्यसे) कइ जन्मोसे..? मतलब मे कुछ समजा नही..

बाबा : सुन बेटा तुम दोनो कइ जन्मोसे भाइ बहेनके रीस्तेमे होते हुअ‍ेभी अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जींदगी गुजारते हो.. ओर कइ जन्मोमे तो तुम दोनोने आपसमे सादी करते पती पत्नी बनके रहेते थे तेरी बहेननेही तुजे हर जन्मके लीये पतीके रुपमें मांगती हे वो हीमाचलके राजा याद हेना..? बस वोही राजाके दादा दादी तुम दोनो भाइ बहेन पती पत्नी थे जो इस जन्ममे भी वो राजा तेरे पोतेके रुपमे आरहा हे.. सीर्फ यही नही.. तेरे हाथसेही अ‍ेसे कइ काम होगे.. तु सोचभी नही सकता.. सबका आने वाला जीवन तेरी बहेनसेही सुरु होगा.. बस यही समजले रीस्तोमे प्यारकी सुरुआत उन्हीसे सुरु होगी, तो क्या सबके बारेमे बात करने यही दोडा आयेगा..?

देवायत : (चोंकते) क्या.. मतलब.. इसका मतलब ओर रीस्तेभी..

बाबा : हां बेटा.. ओर सबकी भावनाओका तुजे खयाल रखना हे खास करके तेरी बहेनका.. यही समजले वो सादी सीर्फ इस लडकेसे नामकीही कर रही हे.. बाकी उनका पुरा जीवन तेरी बीवी बनकेही बीतायेगी.. वो बहुत ही सेन्सेटीव हे.. ओर तुजसे बहुत प्यार करती हे.. ओर ये सीर्फ अभीसे नही.. जबसे वो समजदार हुइ तबसेही तुजे प्यार करती हे.. बस तब उसे प्यारकी अहेमीयतका नही पताथा लेकीन जबसे जवान हुइ तबसे सीर्फ तुजेही प्यार करती हे.. ओर तुजेही अपना पती मानती हे.. ओर यही सचाइ हे..

देवायत : हां बाबा मेने देखा हे.. वो छोटी छोटी बातोसे मुजसे रुठ जातीहे ओर मुजसे अपनी हर मांग पुरी करवाती हे.. आजही मुजसे अपने प्यारका इजहार कर चुकी हे.. मतलब मुने उनको बीवीके रुपमे स्वीकार करना पडेगा..

बाबा : हां.. तो फीर, तभीतो कीसीको मना नही करना.. क्या पता कीसकी कोखसे कोन जन्म लेगा.. सब तैय हे.. ओर सुन तेरी बहेनके बारेमे इतनाही केह सकता हु.. जब वक्त आयेगा तब मेही तुम दोनोकी सादी करवाउगा, आगे जाके तुजेही उनको सम्हालना होगा.. ओर उनकी बच्चीकी बच्चीही तेरे पोतेकी बीवी हे ओर सब शक्तीया उन्हीकी माध्यमसेही मीलने वाली हे.. ओर सभी तेराही अंस होगा.. बस इतनाही केह सकता हु..

देवायत : (हसते) जी बाबा सब समज गया.. यानी मुजे बहुत कुछ करना हे ओर आगे देखनाभी हे मुजे सब रीस्तोको अ‍ेक्सेप्ट करना होगा यहीनां..? अच्छा कीया बता दीया वरना दीलके कोनेमे अ‍ेक क्षोभ हो रहाथा..

बाबा : बेटा कोइ क्षोभ मत कर.. ओर तेरी इस बीवी (चंदा) कोभी जल्द घरपे लेआ बच्चोकी सादी होतेही इसे घरमे लाना ओर सुन.. तुम दोनोकी अ‍ेक बच्चीभी होगी.. पर वो अभी नही बहुत देर हे.. जा अब तुभी भोजन करले.. सगाइ कब रखी हे..?

देवायत : बाबा सोचता हु सब अ‍ेक दो दीनमे नीपटालु.. क्युकी मंजुकी डीलीवरीका वक्तभी नजदीक हे..

बाबा : (गंभीर होते) बेटा इनके बारेमे मेने तेरी इस बीवीसे बात करलीहे ये सब जानती हे कभी फुरसतमे पुछ लेना.. बस इतना कहुगा आगे तुजे तेरी इस बीवीही सम्हालेगी..

देवायत : जी बाबा.. अब कुछ बाते समजमे आ रही हे.. की वो क्यु मुजे चंदाके साथ दुसरी सादीका फोर्स कर रही हे.. क्या उसे कोइ गंभीर बीमारी तो नही..?

बाब : बेटा इनके बारेमे अभी मत सोच.. अभी वक्त हे.. बस फुरसतमे तेरी इस बीसीसे पुछ लेना वो सब जानती हे.. अभी तुजे बस इतनाही केह सकता हु.. अब ओर कोइ सवाल नही.. जा जाके भोजन करले..

फीर देवायत बाबाको नमन करके भोजनकी ओर चल देता हे तब उनके मनमे मंजुको लेके विचारोका धमासान युध्ध चलने लगा क्युकी वो मंजुसे बहोत प्यार करताथा.. उनको इतनातो पता चलही गया की बाबाने अ‍ेसा क्यु कहाकी चंदाही तुजे सम्हालेगी..? इसका मतलब तब मंजु मेरे साथ नही होगी.. इनको मंजुकी बीमारीको लेके कइ सवाल उठने लगे ओर इस बारेमे चंदासे अकेलेमे बात करनेकी ठानली..

फीर वो भोजनमे आगया ओर सबके साथ भोजन करने बेठ गया तभी चंदाने उनका मायुस चहेरा देखलीया तो वोभी देवायतको लेके चीन्ता करने लगी इसी तराह सबने भोजन करलीया ओर बाबासे सब मीलके वापस गांवकी ओर चल दिये तब पुरा रास्ते देवायतने कीसीसे बात नही की.. ओर सभी बच्चेभी आपसमे मस्तीया करते रहे.. तब चंदा केवल देवायतकोही देखती रही.. ओर सभी हवेलीपे आगये..

तो सबके हाथमे तीन तीन चार चार केरी बेगथी देवायतने अपनी बेग अभी कारमेही रखीथी वो सबसे छुपके लेने वाला था तब मंजुभी हसते हुअ‍े बहार आगइ ओर चंदा फीर लताको गले मीली तब पुनमतो उसे देखतेही लीपट गइ ओर मंजुने उसे गाल चुमते खुब प्यार दीया तब लखनभी मंजुके पैर छुने लगातो मंजुने उनका सर चुमलीया ओर सभी होलमे आके बेठ गये ओर सभी अपने नये कपडे मंजुको दीखाने लगे..

तब मंजु सबके कपडे देखके खुस होने लगी तो चंदानेभी लताकी ओर पुनमकी सारी दीखाइ जीसे देखके मंजु बहुतही खुस होगइ फीर उसने चंदाको अपने कपडे दीखानेको कहा तो सब नीरास होने लगे क्युकी सब अपनी खरीदीमे व्यास्त थेतो कीसीने चंदा ओर मंजुके बारेमे सोचाही नही.. उस बातका चंदाकोभी दीलके अ‍ेक कोनेमे दुख हुआ.. तभी देवायत बहार चला गया ओर कारसे चेक करके चंदा मंजुकी सीर्फ सीरीया ओर ड्रेस लेकर आगया..

ओर हसते हुअ‍े दोनोको देदीया तो सबके चहेरे खुसीसे खील उठे.. जब चंदा ओर मंजुने अपने लीये दोदो सारी ओर दोदो ड्रेस देखातो दोनोकी खुसीके मारे आंख गीली होगइ ओर चंदा उठकर देवायतको गले लग गइ तो सब हसने लगे ओर ताली बजाने लगे तो मंजु खुब सरमाइ ओर देवायतके पासही चीपकके बेठ गइ ओर उनके कंधेपे सर रखके हसने लगी.. तब चंदाभी भाव विभोर होके देवायतको आभार वस देखती रही.. ये सब बाते धिरेन नोटीस कर रहाथा.. ओर वोभी मनही मन खुस होने लगा..

मंजुला : देवु.. थेन्कयु वेरी मच..क्या तुम्हे याद था सब..?

देवायत : हां मंजु.. मुजे पता था मौसीभी सबकी खरीदीमे अपने कपडे भुल जायेगी.. ओर ये ले इनमे दो सारीया ओर अ‍ेक अ‍ेक ड्रेस हे.. तु रजीया ओर दयाको अ‍ेक अ‍ेक सेट दे देना..

मंजुला : देवु अच्छा कीया उन दोनोके लीयेभी लेलीया.. बेचारी दोनोही सारा दीन घरके कामेही लगी रहेती हे.. ओर दोनोका हमारे सीवा हेभी कोन..?

देवायत : मंजु बस अ‍ेक दो दीनमे वो चंपाभाभीभी आजायेगी.. वो सीर्फ तेरी देखभाल करेगी..

पुनम : (सरारतसे) देखा भाभी.. पती होतो अ‍ैसा.. अपनी बीवीका कीतना खयाल रखता हे, हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) ननंदबा आप चीन्ता मत करो.. हमारा धिरेनभी आपका अ‍ैसे ही खयाल रखेगा..

कहतो सब ठहाका मारते हसने लगे..तब पुनम ओर धिरेन खुब सरमा गये ओर अ‍ेक दुसरेकी ओंखोमे नजर चुराते हसते रहे.. तब पुनमने सरमाते मंजुकी पीठमे अ‍ेक मुकाभी मार दीया ओर दोडके कीचनमे चली गइ..तब अ‍ेक बार फीर सब हसने लगे.. तभी मंजुने लताको सुबह अपने घर जानेकी बातकी ओर भावनाको फोन करके बता दीया फीर दोनोको आज नीचेही अ‍ेकही रुममे सोनेको केह दीया.. तभी..

धिरेन : लखनभाइ आप उपरही मेरे रुममे आजाओ.. दोनो वही सो जायेगे..

मंजुला : (हसते) अरे उपर बहोत सारे कमरेहे ओर लखनभाइका रुमतो हे ही.. वो वही सोजायेगे.. मेने आजही पुनम ओर लखनका रुम कंपलीट साफ करवा लीया हे.. बेचारी रजीया ओर दया उन्हीमे लगी थी.. पुरा दीन काम कीया तो थकके दोनोही सो गइ.. जाओ अब सब अपने अपने रुममे चले जाओ..

देवायत : मंजु.. बाबाने सब अ‍ेक दो दीनमेही सगाइ नीपटानेको कहा हे.. तो क्या हम परसो सगाइ रखदे..?

चंदा : हां देवुजी.. हमे बुलानाभी कीसको हे.. सब घरकेही लोगतो हे.. ओर हमने पुरी तैयारीया करली हे..

मंजुला : हां देवु.. हम सुबह ही सबको फोन करके केह देगे.. फाइनल.. हम परसो सगाइ कर देगे आप सुबह भानुभाइसे बात करलेना.. ओर हो सकेतो आप ओर मौसी लताको उनके घर छोडके आजाइअ‍े ओर वहा मौसीजी से बात कर लीजीये.. कहीयेगा सब परसो सुबह ही वहा जल्दी आजाये..

चंदा : (सरमाते हसते) मंजु.. मे..?

मंजुला : (हसते) मौसी अब इस हालतमे मेतो देवुके साथ नही जा सकती.. आपही चले जाओ.. अब आदत डाललो..

कहतो चंदा ओर देवायत दोनोही जेंप गये ओर अ‍ेक नजरसे मंजुकी ओर देखते रहे.. तब मंजुको अ‍ेकसास हुआकी वो क्या बोल गइ.. तो गभराते खडी होगइ ओर सोनेको कहेते सरमाती अपने रुममे जाने लगी तबतक देवायत ओर चंदा उसे देखतेही रहे.. तब होलमे सीर्फ चंदा ओर देवायतही बेठेथे.. तो दोनोभी खडे होगये.. तो देवायतने धीरेसे कहा..

देवायत : चंदा मुजे तुमसे अकेलेमे बात करनी हे.. मंजुके बारमे.., बाबाने मुजे तुमसे बात करनेको कहा हे..

चंदा : देवु कल हम दोनो लताको छोडने जाही रहे हे तब हम बात कर लेगे अभी बात करना उचीत नही हे.. अब आप जाके सोजाओ.. थके होगे.. ओर हां.. बी केरफुल.. अब आज मत आना.. सोरी.. बच्चे लोग हे..

देवायत : (मायुस होते) चल ठीक हे..

कहेके वो बीना मुडे अपने रुमकी ओर जाने लगा तो चंदा उसे देखतीही रेह गइ.. उनको देवायतको अपने पास आनेको मना करदीया तो उनका मायुस चहेरा देखते बडाही दुख हुआ.. ओर वो अपने आपको मनही मन कोसने लगी.. की मेने मेरे पतीको क्यु मना करदीया.. ओर हकीकततो यहीथी की वो खुद अब देवायतसे दुर नही रेह सकती थी.. तब उनकी आंखमे गीलापना आगया ओर वो अपने रुममे चली गइ..




रुमका दरवाजा बंध करते वही खडे रहेके आंसु बहाने लगी.. फीर चेन्ज करके पेटके बल लेट गइ ओर देवायतके बारेमे सोचती रही तब उनकी आंखोमे आंसुकी धारा बहेती रही.. तब पता चलाकी वो देवायतको कीतना प्यार करतीहे ओर वो उनके बीना नही रेह सकती.. दुसरी ओर देवायत अंदर जाके जेन्च करलेता हे ओर मंजुके पास लेट जाता हे तो मंजु सरकके उनकी ओर करवट लेते देवातको बडीही मासुमीयत नजरसे देखती रही.. ओर उनके गालको सहेलाते आंख गीली करली..तब देवायतकेभी आंसु छलकने लगे..




मंजुला : (अ‍ेक हाथसे देवायतके आंसु पोछते) जानु क्या हुआ..? क्या मुजसे कोइ गलती होगइ..?

देवायत : (उनके सरको सहेलाते) नही बेबी.. सायद मेरे प्यारमेही कुछ कमी रेह गइ.. तभीतो तुम मुजसे बहोत कुछ छीपा रहीहो.., मंजु आज मे बाबाको मीलके आगया.. तेरे बारेमे बातकी.. तो कहा तुम चंदासे पुछ लेना..

तभी मंजु सब समज जातीहे ओर आंख गीली करते देवायतके सीनेमे सर चीपकाके आंसु बहाने लगती हे फीर अचानक अपने आंसु पोछते देवायको देखते कहेने लगी..

मंजुला : जानु मे सब समज गइ.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे आपको अभी ये सब बताना नही चाहती थी.. क्युकी मे मेरे देवुको टुटते हुअ‍े नही देख सकती.. मुजे माफ करदो..

देवायत : (आंसु बहाते) नही बेबी.. मत बता मुजे.. वरना तेरे मुहसे सुनके मे वाकइ टुट जाउगा.. ओर तुजे इस हालतमे परेसानीमे नही देख सकता.. पहेले तेरी डीलीवरी होजाये फीर हम बात करेगे.. सायद इसीलीये तुम मुजे मौसीसे सादीके लीये फोर्स कर रही थी.. यहा तक अपनी कसम भी देदी..

मंजुला : (उनका सीना सहेलाते) हां जानु.. वेसेभी आपको सब अंदाजातो होही गया हे.., तो मे चाहतीहु मेरी हाजरी मेही मेरे पतीको सम्हालने वाली मील जाये.. जो मुजसेभी ज्यादा आपको प्यार करती हे..

देवायत : मंजु.. मे कल मौसीके साथ लताको छोडने जा रहा हु.. तब उनसे बात कर लुगा..

मंजुला : हां देवु.. सायद मे आपको सब खुलके नही बता पाउगी.. ओर आपको रोते हुअ‍े भी नही देख पाउगी.. तो मौसी सब सम्हाल लेगी.. अगर आपको दुखी देखलीया तो पता नही मुजे क्या होजाये.. तो हमारे बच्चेपे असर पडता.. बस मे इतना चाहती हु.. मे आपको हमारा वारीस बहादुर ओर स्वच्छ नीरोगी बच्चा दे सकु..

देवायत : बेबी क्या हमारे अ‍ेक वारीसके लीयेतो तुने इतना बडा रीस्क तो नही लेलीया..?

मंजुला : जानु पलीज.. आप पुरे दीनकी भागदोडसे थके होगे.. हम इस बारेमे कल बात करेगेनां.. अब आप सोजाओ.., आपकी आगोसमे कीतना अच्छा लगता हे.. ओर नींदभी मस्त आती हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (बाहोमे भीचते हसते) देखा कीतनी सीफततासे तुने बातको टाल दीया..चल कोइ बात नही हम कल बात करेगे.. बस मेरी बीवी खुस रहेनी चाहीये.. आजा..

कहेते वो मंजुको अपनी बाहोमे भरलेता हे तो मंजुभी सरकके उनके पास आके उनसे चीपक जाती हे ओर उनकी अ‍ेक बाजुमे अपना सर रखते चीपकेते सोने लगती हे तब देवायतभी आंख बंध करके सोनेकी अ‍ेकटींग करता रहा.. ओर अपनी दिमागमे हो रहे घमासान विचारोके युध्धको समजनेकी कोसीस करता रहा..




वो मंजुको उनकी बीमारीके बारेमे सबकुछ पुछ सकता था.. लेकीन.. वो उनको बहोत प्यार करता था तो हो सकताथाकी मंजु उसे सब बताके पुरी तराह टुटके बीखर जाये.. तो नाही वो मंजुको सम्हाल पाता ओर नाही मंजु इस हालतमे देवायतको सम्हाल पाती.. दोनोही हकीकतसे भागनेकी कोसीस कर रहे थे.. ओर सो गये..

तो दुसरी ओर लखन ओर धिरेन दोनोही देर रात अपनी फ्रियांसी के पास जाना चाहते थे.. लेकीन नही जापाये.. क्युकी धिरेनको पुनमसे मीलनेमे लताको मालुम होजानेका डर था तो दुसरी ओर लखनकोभी यही डर सता रहाथा की लताके पास गया तो वहा पुनमदी होगी.. तो क्या सोचेगी.. वही सब उलजनमे दोनोभी सो गये.. सबलोग आज देर तक सोते रहे.. ओर अ‍ेसेही सुबह होगइ..

आज सुबहका सुरज अपने रथपे सवार होके अपने नीधारीत समयपे धोडे दोडा रहेथे.. इसी समयपे हवेलीपे सब उठ गये ओर नहा धोके होलमे आके इकठे होने लगे.. तब कीसीको अपनी मासुकाका चहेरा देखनेकी तम्मनाथी तो कोइ अपने रुटीन काममे बीजी थी तब मंजु सबके लीये चाइनास्तेका इन्तजाम करवा रहीथी तभी चंदाके रुममे नहा धोके रेडी हो गइथी फीरभी इनकी बहार जानेकी हींमत नही हो रहीथी..

वो रातको देवायतको मना करके बहोत पछता रहीथी ओर देर रात तक रोती रही तभी मंजुने दरवाजा खटखटाया तो भारी मनसे दरवाजा खोलके बहार आगइ ओर सबके साथ बेठ गइ तब वहा देवायतको ना देखते थोडी दुखी होगइ.. सब बच्चे बेठे बाते कर रहेथे तो कीसीको पुछभी नही सकतीकी देवायत उठ गयाकी नही.. तभी देवायत को जगाने मंजु जा रहीथी तो पुनमने कहा..

पुनम : भाभी आप बेठो मे भाइको जगाके आती हु अब आप बेठे रहो इधर उधर दोडना बंध करो..

मंजुला : (हसते) हां मेरी मां.. नही दोडुगी जा जगादे तेरे भाइको.. कीतनी देर सोते रहेगे..

तभी पुनम देवायतके रुममे चली गइ तो देवायत गहेरी नींदमे सोयाथा तब पुनम इनके पास चली गइ ओर उनके सरके पास बेठ गइ ओर देवायतके चहेरेको देखती रही उनका भाइ बडाही मासुम लग रहाथा तो उनको देखतेही पुनमको वो सब बाते याद आने लगी नो उनके ओर देवायतके बीच हुइ थी.. तब उसने अ‍ेक बार फीर मनही मन कुछ तैय करलीया जो पहेले तैय कर चुकीथी तो वो सोचतेही रोमांचीत होने लगी..




ओर देवायतके चहेरेकी ओर जुकने लगी.. ओर अ‍ेक बार दरवाजेकी ओर देखते धीरेसे देवायतके गलेमे हाथ रखते उनके होंठ हल्केसे चुम लीये तो देवायतने नींदमेही होंठोपे गीलापन महेसुह हुआ ओर उनके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर वो नींदमेही पुनमको मंजु समजके बाहोमे भरलेता हे ओर उसे बेडपे खीचके अपने साथ सुला देता हे ओर पीछेसे बाहोमे भरके उनकी गरदनमे दात गडाके मस्ती करने लगता हे तभी पुनमकी हसीकी आवाज आने लगती हे..




तो देवायत चोंक जाता हे ओर जटसे दुर होते बेडसे उतरके खडे होजाता हे ओर पुनकी ओर देखने लगता हे तबभी पुनम पीठके बल लेटते देवायतकी ओर हसती रहेती हे.. तब देवायतने कहा..

देवायत : (सरमसे) छुटकी तु..? मेतो समजा तेरी भाभी होगी.., तु यहा क्या कर रही हे..?

पुनम : (हसते) क्या भाइ.. मेतो आपको जगाने आइथी.. मुजे नही पताथा आप इतना रोमांन्टीक हो.. खडे क्यु होगये..? आइअ‍ेना.. अच्छा मौकाहे थोडा प्यार अपनी बहेनकोभी देदो..

देवायत : रोमान्टीक की बच्ची.. मेने सोचा तेरी भाभी होगी.. चल जा भेज उनको..

पुनम : (बेडपे बेठते) जी नही.. भाइ अब भाभीको छोडो इस हालतमे वो कहा इधर उधर दोडती रहेगी.. अब जबतक उनकी डीलेवरी नही होजाती ओर वो ठीक नही होजाती तबतक आजसे आपकी सब जीम्वेवारी मेरी..

देवायत : लेकीन छुटकी..

पुनम : लेकीन बेकीन कुछ नही अब जोभी कामहो मुजसे कहीयेगा.. भाभीका हर काम मे करुगी..(डबल मीनींग धीरेसे सरमते) मतलब.. सब काम.. आप समज गयेनां..?

देवायत : (हसते) चल चल जा.. सब काम करेगी.., हें..हें..हें.. जा मेरे कपडे रखदे मे चला नहाने..

पुनम : (सरारतसे) क्या भाइ अपने आप नहाते हो..? भाभी नही नहेलाती.., हें..हें..हें.., चलो मे नहेलाती हु

देवायत : (हसते) बदमास.. इधर आतो.., अपने भाइकी मस्ती करती हे..

कहेके देवायत उनको पकडने जाता हे तब पुनम बेडसे जंप लगाते जोरोसे हसती हुइ बहार भाग जाती हे तब देवायतभी हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस जाता हे ओर अपना सब नीत्यक्रम करके नहालेता हे तबतक पुनम मंजुसे कपडेका पुछके देवायतके कपडे अलमारीसे नीकालके बेडपे रख देती हे ओर बहार सबके पास चली जाती हे तबतक देवायतभी बहार आके तैयार होगया फीर होलमे सबके पास जाके बेठ गया..

तब चंदा देवायतको देखती रहेती हे लेकीन आज देवायतने उनकी ओर नही देखा.. क्युकी कल चंदाने मना कीयातो वो जान बुजके चंदाको थोडा तडपाना चाहता था.. तब चंदा बहुतही नीरास होगइ.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तबभी देवायतने चंदाकी ओर नही देखा.. तभी लताने अपने सब कपडे ओर सामान लेलीया तब वो लखनकी ओर देखती मुस्कराने लगी.. ओर सरमाती रही.. तभी मंजुने कहा..

मंजुला : देवु.. अब आप लताको छोडके आओ.. ओर माजीसे बात करलेना.. सब सुबह जल्दी आजाये.. जाओ मौस्ी आपभी मांजीसे सब बात कर लेना..ओर भावुको कहेना अच्छेसे सम्हलके आये..

देवायत : अरे क्यु चीन्ता करती हो.. भानु हेना ओर हमारी कारतो लेगया हे उनमे आरामसे आजायेगी..

कहेके वो कारमे बेठ जाता हे तब लताके हाथसे कुछ बेग लेते चंदाके साथ कारकी ओर चल देती हे तब लखन उनको देखते रहेता हेतो मंजु उनके सामने देखते जोरोसे हसने लगी.. तब लखन सरमाके हसते हुअ‍े अंदर चला गया तो पुनम ओर धिरेनभी हसने लगे ओर चंदा लता दोनोही सब सामान रखके पीछेही बेठ गये ओर देवायतने कारको भानुके गांवकी ओर दोडादी पंदर बीस मीनीटमेही सब भानुके धर आगये..

तब लता ओर चंदा सब सामान लेके उतरने लगेतो देवायत दोनोके बीच बीना देखेही अंदर चला गया तब भानु ओर सरला दोनोही बहार खटीयापे बेठे थे ओर भावना कीचनमे कुछ कर रहीथी जेसेही देवायतको देखा भानुके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर सरलाभी देवायतको देखके खुस होगइ ओर उसे आवकार देने लगी तभी भावनाभी सबकी आवाज सुनके बहार आगइ तब चंदा ओर लता बेग लेके अंदर आ रहीथी..

जेसेही भावनाने चंदाको देखा खुसीसे उनसे लीपट गइ तब चंदाने बडेही सावधानीसे भावनाको हग कीया तब लता सब बेग लेके अपने रुममे चली गइ तो भावनाने चंदाको बेठनेके लीये खुरशी लगादी ओर वो सबके पास बेठ गइ तबतक लताभी कीचनसे सबके लीये पानी लेके आगइ ओर सबको पानी पीलाया ओर वापस कीचनमे चली गइ ओर सबके लीये चाइ बनाने लगी तबभी चंदा चोर नजरसे देवायतको देखती रही..

भानु : कहो भाइ होगइ सब खरीदारी.. आ गये लखन ओर पुनम..?

देवायत : हां यार सुबह ही चले गयेथे दोनोको लेके सब खरीदी करने चले गये ओर बाबाको मीलके वापस आगये.. इसमेही रात होगइ.. फीर मंजुने लताको वही रोक लीया.. रातमे कहा इनको छोडने आता..

सरला : (हसते) अच्छा कीया.. चंदा बेटी तुमभी गइ थीनां..? सब सगुनका लेलीया..?

चंदा : हां मौसी.. ज्यादा नही दोनोके लीये सीर्फ तीन तीन सारी लेली.. बाकी सब ड्रेस लेलीये..

सरला : (हसते) हां भाइ अब जमाना बदल गया हे.. हमारे जमानेमे कहा ये ड्रेस फ्रेस थे.. अब तो लडकीया ससुरालमेभी पहेनके घुमती हे.., हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) मौसी चलो इतना तो बदलाव हुआ.. अभीभी कइ गांवोमे पुराने रीवाज चल रहे हे..

भावना : (बहार आते) लता जा सारीया लेकेतो आ देखुतो सही कोनसी ली हे..

चंदा : भावु हमने तेरे लीयेभी दो सारी लेलीहे.. लताने चोइस कीहे देखले पसंद तो हेनां..?

भावना : अरे मौसी.. लताने ली हेतो अच्छीही होगी.. इनकी चोइस बहोत मस्त होती हे.., हें..हें..हें..

तभी लता कुछ बेग छोडके सभी लाके भावनाको देती हे ओर वापस कीचनमे चली जाती हे.. तबतक भावना अ‍ेक अ‍ेक सारी नीकालते सरलाको दीखाने लगती हे तबतक लताभी चाइ लेके सबको देती हे तो सब कपडे देखके सरला ओर भावना बहुतही खुस होजाती हे फीर सब चाइ पीने लगते हे.. इसी दौरान अ‍ेक बारभी ना भानुने लताकी ओर देखा ओर नाही लताने भानुकी ओर देखा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको इग्नोर कर रहे थे..

देवायत : भानु कल सुबह तु सबको लेके जल्दी आजाना हमने कलही सबकी सगाइ रखी हे ओर तुजे जीसको बुलाना हे उसे आजही फोन करदे.. बाबाने कहा हे कलही सगाइ करना..

भानु : भाइ बस मामाके घरके लोग हे बाकीतो हम दोनोके ससुराल वालेतो अ‍ेकही हे.. फीरभी फोन करदुगा..

चंदा : भानुभाइ कार धीरे चलाना क्युकी यहाके रास्ते कच्चेहे.. ओर भावुभी आ रही हे..

भानु : अरे मौसीजी इनकी चीन्ता मत करना.. मे कारको धीरे चलाउगा.. हम सब सुबह जल्दी आजायेगे..

देवायत : चल यार नीकलता हु.. कुछ गांवके लोगोकोभी कहेना हे.. तो आज बीजी रहुगा..

भानु : भाइ मेभी सहेर जा रहा हु.. फीर इधरकी तैयारीया करलु.. कल मीलते हे..

तभी चंदाभी खडी होगइ.. तो देवायत बहार नीकल रहाथा तो वोभी पीछे पीछे चली गइ ओर देवायतके पास वाली सीटपे बेठ गइ ओर देवायतने कारको जाने दी.. तब उसे चंदाकी ओर देखा तो चंदाके दोनो गालपे आंसुओकी धारा बेह रही थी ओर वो रो रही थी..




तब देवायतने गांवके बहार अ‍ेक दो कीमी दुर अ‍ेक मंदीरके पास कार जानेदी जो रास्तेसे आधे कीमी. अंदर था वहा जाके देवायतने कार रोकदी ओर अपना रुमाल लेके चंदाके आंसु पोछने लगा तो चंदाने देवायतकी ओर रोते देखा तो उनकीभी आंख गीलीथी तभी चंदा कारके अंदर बेठेही देवायतसे लीपट गइ ओर जोरोसे रोते देवायतकी माफी मांगने लगी..

चंदा : (रोते) देवु आइ अ‍ेक सोरी.. मुजे माफ करदो.. मुजे कल आपको मना नही करना चाहीये..था..

देवायत : बस.. बेबी.. सांत होजा.. बस..बस.. ओर मत रो.. वरना कसम दुगा..

चंदा : (आंसु पोछते) नही नही.. कसम मत दो नही रोउगी.. देवु क्या करु.. बच्चोकी वजहसे मना कीया.. ओर अबमे आपके बीना रेहभीतो नही सकती.. क्या करु.. आपही बताओ.. मे आपके बीना केसे जी पाउगी

देवायत : बस बेबी.. मे कोइ नाराज नही हु..अब बता.. मेरी मंजुको क्या हुआ हे.. सावद वो मुजसे नही बता पायेगी.. क्युकी वो मुजे टुटते हुअ‍े नही देख पायेगी.. मुजे मंजुकी पुरी सचाइ जाननी हे जो तुजे बाबाने कही हे.. ओर उनकी बीमारीके बारेमे भी सब जानना हे..

चंदा : (देवायतके कंधेपे सर रखते) जानु.. अब हमारी मंजु.. हमारे बीच सायद अ‍ेक दो सालही हे.. जेसेही डीलीवरी होगी.. उसे वो बीमारी उनपे हावी होजायेगी..ओर हमारी मंजु दीनभर दीन कमजोर होती जायेगी.. ओर अ‍ेक दीन हमे छोडके..

देवायत : (आंसुओकी धाराके साथ रुहासी आवाजमे) चंदा..उसे.. क्या हुआ हे..

चंदा : (देवायतके आंसु पोछते) नही जानु अ‍ेसे कमजोर मत होना.. मेरी मंजुने मुजे कसम दीहे की मेरे देवुके आंसु नही नीकलने चाहीये.. साद इसीलीये आपको वो नही बताना चाहती थी..

देवायत : चंदा मेरी मंजुने मुजसे इतनी बडी बात छुपाइ.. लेकीन उसे हुआ क्या हे..? येतो बताओ..

तब चंदा देवायतको सब कुछ बता देतीहे.. जीसे सुनके देवायतको अपने आपसे नफरत होने लगी की मेने मंजुको क्यु गर्भवती कीया..? वो अपने आपको कोसने लगा.. ओर कहेने लगाकी मेने मंजुको प्रेगनेन्ट नही कीया होतातो मंजु हमारे साथ पुरी जींदगी बीता सकती थी लेकीन मंजुने बातभी छुपाइ ओर जान बुजके प्रेगनेन्टभी हुइ इस बातको लेके देवायतका मंजुके पेटमे पल रहे बच्चेसे लगाव कम होने लगा..

चंदा : जानु.. वो सब जानतीथी.. जीस दीन उनकी रीपोर्ट आइ उसी दीन उसने तैय करलीया थाकी वो पुरी जींदगी अ‍ेकसाथ जी लेना चाहती थी.. ओर उसी दीन उसने अपना कौमार्य आपको सोंप दीया.. ओर जब तक आप दोनोकी सादी नही हुइ तबतक आपसे खुलके सेक्स करने लगी ओर अपनी जींंदगीकी सब खुसीया बटोरने लगी.. वो चाहतीथी.. इस हवेलीके वारीसको वो अपनी कोखसे ही जन्म देगी..

देवायत : लेकीन चंदा वो जानतीथी फीरभी इतना बडा रीस्क क्यु लीया..?

चंदा : बस जानु इसेही तो प्यार कहेते हे.. जो प्यारका अ‍ेहसास मेने कल कीया वो अहेसास वो पहेले कर चुकीथी.. मुजे कल पता चला अपने प्यारको दुख देना हमारे लीये कीतना दुख दायक हे.. जानु.. अब मे आपको कीसीभी बातका मना नही करुगी.. इनके लीये मुजे धिरेनकी नजरसेही क्यु गीरना ना पडे..मेरी मंजु आपको बहोत प्यार करती हे ओर इसीलीये प्यारमे कुरबानी देनेभी पीछे नही हटी.. इसे कहेते हे सच्चा प्यार..

देवायत : नही चंदा.. कल तुम गलत नही थी.. ओर धिरेनकी नजरसे गीरनेकी कोइ जरुरत नही.. मुजे मेरी इस बीवीकी इजतका आजभी इतनाही खयाल रखना हे.. इस बारेमे मेने तुमसे वादाजो कीया हे..

चंदा : (देवायतको हग करते) ओह.. आइ लव यु जानु.. आइ लव यु सोमच.. मेतो धन्य होगइ आपको पाकर.., जानु मंजुभी यही चाहती हे.. की मेभी आपसे सादी करलु ओर इस घरमे आजाउ.. ओर इनके लीये उसने धिरेनकोभी बात करके मनालीया हे.. अब धिरेनकीभी कोइ टेन्शन नही हे.. मुजसे सादी करलो..

देवायत : (चोंकते) क्या.. धिरेनको सब पता हे..? मान गया वो..? ओर वेसेभी चंदा सादीतो हमारी होही गइ हे तो अब क्या सादी करना..

चंदा : (अलग होते सामने देखते) नही देवु.. अ‍ेसी गलती कभी मत करना.. हमने सादी कीहे पर सबसे छुपके.. इस बारेमे आजतब कीसीको नही पता.., ओर अब हम कहेगेकी हमने सादी करलीथी तो धिरेन ओर मंजु क्या सोचेगे? वोतो यही सोचेगेकी हमने उन दोनोको धोखा दीया हे.. ओर दोनोके धोखेमे रखके हमने सादी की हे..

देवायत : हां वोभी ठीक हे.. चलो देखते हे.. अब मेरी मंजु कहे वोही मुजे करना हे.. चंदा मे उसे दुनीयाकी सारी खुसीया देना चाहता हु.. अबतो बच्चेका वक्तभी हो गया हे वरना मे बच्चेका नीकाल करवा देता, नही चाहीये मुजे बच्चा.. जो मेरी मंजुको मुजसे छीन लेगा.. नफरत हे मुजे इस बच्चेसे..

चंदा : नही देवु.. ये गलती कभी मत करना.. जीस बच्चेके लीये मंजुने अपनी जान जोखीममे डाली उसी बच्चेको तुम नफरत करोगे..? तबतो हमारी मंजुकी कुरबानी बेकार होजायेगी.. क्या तुम यही चाहते हो..?

देवायत : (आंसु बहाते) चंदा तो फीर मे क्या करु? मेरातो दीमागही काम नही कर रहा..

चंदा : (आंसु पोछते) नही जानु तुम कुछ मत करो.. मे हुनां..? सब सम्हाल लुगी.. ओर हमारे बच्चेकोभी सम्हाल लुगी.. देखना उनकोभी मे आपके जेसाही बना दुगी.. मेरी मंजुने मुसे बहुत सारे वादे लेलीये हे.. ओर येभी कहा हे मेरे देवुको मुजसेभी ज्यादा प्यार करना.. जानु मे सबकुछ करुगी..




देवायत : बेबी पता नही अगर तुम मेरी जींदगीमे नही आइ होतीतो मेरा क्या हसर होता मुजेभी नही पता..

चंदा : देवु.. आज मेभी आपसे अ‍ेक वादा करती हु.., जबतक हमारे मंजुके बच्चेको पढा लीखाकर काबील नही बना देती तबतक मेरे कोइ बच्चेके बारेमे सोचुगीभी नही.. बस.. ये पढ लीखके काबील होजाये.. फीर भगवानने चाहा तोही हम हमारे बच्चेके बारेमे सोचेगे..

देवायत : नही.. बेबी.. अब तुभी इतनी बडी कुरबानी मत दे.. अ‍ेकतो हाथसे नीकलते नजर आने लगीहे.. अब मे तुमको खोना नही चाहता.. मत कर अ‍ेसा कोइ वादा.. अब में मेरी पुरी जींदगी तुम दोनोके हवाले करता हु.. अब मेरा पुरा जीवन तुम दोनोही नीर्धारीत करोगी.. बस मुजे इतनाही कहेना हे..




इतना कहेतेही चंदाने देवायतके गाल चुम लीये ओर उनके कंधेपे सर रख दीया.. आज उनके दीलमे देवायतके लीये इजत ओर बढ गइ ओर उसने जल्द से जल्द देवायतके पास आनेका फैसला करलीया.. फीर दोनोही वापस हवेलीकी ओर आने लगे तबतक चंदा देवायतके सामने देखते हसती रही.. आज उसे बडाही सुकुन मील रहाथा.. क्युकी उसे डर थाकी जब देवायतको सब सचाइ बतादेगी तो वो देवायतको केसे सम्हाल पायेगी.. ओर उसने सब बातेभी करली ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके ओर करीबभी आगये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २२

इतना कहेतेही चंदाने देवायतके गाल चुम लीये ओर उनके कंधेपे सर रख दीया.. आज उनके दीलमे देवायतके लीये इजत ओर बढ गइ ओर उसने जल्द से जल्द देवायतके पास आनेका फैसला करलीया.. फीर दोनोही वापस हवेलीकी ओर आने लगे तबतक चंदा देवायतके सामने देखते हसती रही.. आज उसे बडाही सुकुन मील रहा था.. क्युकी उसे डर थाकी जब देवायतको सब सचाइ बतादेगी तो वो देवायतको केसे सम्हाल पायेगी.. ओर उसने सब बातेभी करली ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके ओर करीबभी आगये....अब आगे

दोनोही हवेली पहोंच गये तब देवायत ओर चंदा अंदर आगये तो मंजु दोनोको देखके बहुतही खुस हो रहीथी.. देवायतको अभी बच्चोके सामने मंजुसे बात करनेका उचीत नही लगा तब वो मंजुकी ओर प्यार भरी नजरोसे देखता रहा.. उनको लगाकी आंख गीली होने लगी हे तो जटसे मुडके बहार चला गया ओर कार लेके गांवमे रमेशके यहा चला गया.. तो रमेश उसे देखतेही खुस होगया..

क्युकी उनके सरपंच बननेका देवायत अ‍ेकही जरीया था वो उनका हाथ पकडके उसे घरके अंदर लेगया ओर अपनी बीवी चारुको चाइके लीये बोला.. तो चारुभी बहार आतेही देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर चाइ बनाने कीचनमे चली गइ.. ओर देवायतके बारेमे सोचते चुत गीली करने लगी.. अब वोभी जल्दसे जल्द अ‍ेक बार फीर देवायतसे चुदना चाहती थी.. क्युकी उसे देवायतसे चुदवाया उसे काफी टाइम होगया था..

तब वोभी फटाफट चाइ बनाके दोनोके देते वही बेठ गइ ओर देवायतके सामने देखते हसती रही तब देवायतने चाइ पीते सबको सगाइमे आनेका न्योता दीया तो चारु सुनके खुस होगइ तभी उनकी लडकी वंदना ट्युशन पढाके घर आगइ तो देवायतको देखतेही सरमा गइ ओर नमस्ते करके अंदर चली गइ.. फीर देवायतने चाइ पीलीतो कप लेनेके बाहाने चारुने देवायतके हाथ छुलीया तब उसके सरीरमे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ जब देवायत जानेके लीये खडा होगया तो रमेश आगे नीकल गया तब चारुने पीछेसे देवायतका हाथ पकडलीया ओर दबाके छोड दीया ओर उनके सामने देखके हसने लगी..




फीर देवायत बहार नीकलने लगा तबभी वो उसे बहार दरवाजे तब छोडने उनके पतीके साथ आगइ ओर बहार नीकलतेभी देवायतको वापस छुलीया ओर देवायतकी ओर नैन नााते कुछ इसारा कीया.. तब देवायत सब कुछ समज गया ओर चारुकी ओर कामुक स्माइल करते कुछ हाथका इसारा करते नीकल गया तो चारुभी इनके इसारोको समज गइ ओर खुस होगइ..

फीर देवायत सरपंच राघवके धर चला गया तो रश्मी उनको देखके खुस होगइ लेकीन इस वक्त उनके कुछ रीस्तेदार राघवकी खबर पुछने आयेथे तो देवायत उसे खडे खडे ही सगाइका नीमंत्रण देके नीकल गया तब रश्मी खुब नीरास होगइ.. फीर देवायत तीन चार ओर जगह नीमंत्रण देके सीधेही चंपाके घर चला गया तो चंपा अंदर टीवी देख रहीथी जेसेही देवायतको देखा तो पहेले उठके दरवाजा बंध करलीया ओर आके टीवी बंध करलीया ओर देवायतसे लीपटके उनके पुरे चहेरेको चुमने लगी ओर हाथ पकडके रुममे लेगइ..

देवायत : (हसते) अरे पहेले सुनोतो सही.. मे सगाइका नीमंत्रण देने आया हु.. हें..हें..हें..

चंपा : (हसते) पता हे मुजे.. मे सुबह ही हवेली गइथी मालकीनने मुजे देदीया.. अभी कुछ नही पहेले मुजे ठंडी करो.. जबसे आप बडे लंडका चस्का लगाके गयेहे तबसे कही चेइनही नही मीलता.. आजाओ..

कहेते वो सब कपडे नीकालके लेट गइ ओर पैर मोडके अपना नीकर नीकालके पैर फैलाके लेट गइ तब देवायतभी समज गयाकी सालीको बहुत आग लगी हुइ हे तो वोभी पेन्ट सरकाके चडी नीचे कर लेता हे तो देवायतका लंड चंपाकी चुतको देखतेही फडफडाने लगा ओर खडा होके जटके मारने लगा तब देवायत चंपाके पेरके बीच बेठ गया ओर लंड पकडके चंपाकी चुतपे दो तीन बार घीसके सेट करलीया.. ओर जुक गया..




तो चंपाने ही अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते देवायतका लंड पकडके अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया फीर देवायतकी गरदनमे दोनो हाथ डालके उसे अपने आपसे चीपका लीया तभी देवायतने कमर उची करते अ‍ेक जटका दीया तो देवायतका लंड सीधेही चंपाकी चुतके बीलमे घुस गया जेसे कोइ सांप अपने बीलमे चला जाता हे तब चंपाकी अ‍ेक हल्कीसी चीख नीकल गइ ओर वो मदहोस होते आधी आंख चडाली..




तभी देवायत चंपाको उचा होते चंपाकी चुतपे लंबे लंबे सोट मारते चंपाको चोदने लगा तब चंपाकी भी हर सोटपे आहे नीकलती रही ओर देवायतकी पीठमे हाथ रखके देवायतको अपनी चुतपे दबाव बनाते चुदवानेमे मदद करती रही २० मीनीटकी धकापेनी चुदाइके बाद चंपा अकडने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचके अपने आपसे चीपका लीया तब देवायतनेभी अपने लंडको चंपाकी चुतमे जड तक घुसा दीया ओर अपना लावा छोडते चंपाकी चुतको हरी भरी करता रहा तब चंपाभी साथमे जडने लगी..

दोनोही सांत होगये तब देवायत चंपाके उभारोपे सर रखके ढेर होगया.. ओर चंपा उनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही.. वो आज अ‍ेकही बारमे ढेर होचुकीथी.. फीर कुछ देरके बाद दोनोही साथमे नहाने चले गये तो वहाभी दोनोने साथमे नहाते मस्तीया करने लगे ओर देवायतने अ‍ेक बार फीर चंपाको खडे खडे चोद लीया फीर दोनो नहाके बहार आगये ओर कपडे पहेनके तैयार होगये..




चंपा : ठाकुरसाब आजतो आपने मुजे पुरी नीचोड ली.. अ‍ैसा मजा कभी नही आया.. आते रहीयेगा..

देवायत : (हसते) चंपा अबतो तुजे अ‍ैसा मजा आयेदीन मीलता रहेगा.. बस अबतो मुजे ही तेरा खयाल रखना हे.. चल नीकलता हु.. कल टाइमपे आजाना..(कहेते देवायत वहासे नीकल गया)

जब देवायत हवेलीसे गया तो मंजु उसे देखतीही रही.. उसे अंदाजा होगया थाकी मौसीने उनकी सारी सचाइ बतादी हे.. तो वो चंदाकी ओर देखने लगी तो चंदा उनके पास चली गइ ओर उसे लेकर बहारकी ओर चली गइ तब पुनम ओर धिरेन दोनोही टीवी देखते मस्तीया कर रहेथे.. लखन खेतोकी ओर घुमने गया था.. तब चंदा ओर मंजु दोनोही टहेलते बाते करने लगी तब चंदाने उसे सब घटनाक्रम सुना दीया..




तबतक दोपहर खानेका समय होगया था तो देवायत सीधेही हवेलीपे पहोंच गया.. तब तक चंदा ओर मंजु दोनोही अंदर जा चुकीथी जेसेही देवायत अंदर आगया तब दोनोही खडी होगइ ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही तभी देवायत भारी मनसे अपने रुममे चला गया तो मंजु आनेवाले वक्तके बारेमे सोचते गभराने लगी की देवायतका सामना केसे करेगी.. ओर वोभी धीरे धीरे देवायतके पास जाने लगी..

अंदर जाते देखातो देवायत अपने बेडपे सर जुकाके बेठा हुआ था तब मंजु रुमका दरवाजा बंध करके देवायतकी ओर जाने लगी.. अब उनके सब्रका बांध टुट रहा था तभी देवायतने उनकी ओर देखा ओर जटसे खडा होगया.. फीर मंजुकी ओर देखते स्मालइ करने लगातो मंजुने देखा देवायत आंसुओकी धारा बहाते उनकी ओर जबरदस्ती हस रहाथा तब मंजु दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर उनकी पीठमे हाथ रखते सरको देवायतके कंधेपे रख दीया ओर जोरोसे फुट फुटके रोने लगी..




मंजुला : (रोते हुअ‍े) प्लीज.. जानु मुजे माफ करदो.., आइ अ‍ेम सोरी.. जानु.. हमारा.. बच्चा..

देवायत : (जोरोसे रोते) क्यु कीया.. मं..जु.., नही चाहीयेथा मुजे बच्चा.., हे भगवान.., क्यु अपनी जींदगी दावपे लगा दी.. मंजु.. अब मे कैसे.. जी पाउंगा.. कभी सोचा हे..? अ‍ैसा क्यु कीया..?

मंजुला : (देवायतके आंसु पोछते खुद रोते) सोरी.. जानु.. मे.. आपको अपनी कोखसे.. वारीस देना चाहती थी.. मुजे माफ करदो.. आइ प्रोमीस.. अगले जन्ममे हम फीर मीलेगे.. जानु.. मे आपको अकेला छोडके नही जाउगी.. मुजे.. माफ करदो.. प्लीज..प्लीज..

देवायत : (रोते मंजुके आंसु पोछते) बस.. बेबी.. ओर मत रो.. हमारे बच्चा दुखी होगा.. अब मे इस बच्चेको पालुगा.. अपनी जानसेभी ज्यादा.. तु फीकर मत करना.. बस.. सांत होजा तुजे मेरी कसम..

कहतो मंजुने फटाफट अपने आंसु पोछ दीये ओर अपनी सारीके पलुसे देवायतके आंसुभी पोछने लगी.. फीर देवायतका चहेरा अपनी दोनो हथेलीसे पकड लीया ओर उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तब देवायतभी उसे देखते अ‍ेक बार फीरसे मंजुको अपनी बाहोमे भरलेता हे.. ओर उनके सरको चुम लेता हे.. तब मंजु देवायतकी आगोसमे समा जातीहे ओर उनसे चीपकके खडी रहेती हे दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर खडे रहे..




जब दोनोही सांत होगये तब मंजु देवायतके होंठ चुमते अलग होगइ ओर देवायतको लेके बाथरुममे चली गइ ओर देवायतका मुह साफ करके खुदकाभी मुह साफ करलीया फीर देवायतको लेकर बहार आगइ ओर बेडपे बेठ गइ उनके दोनो हाथ अपने हाथमे लेके उनकी आंखोमे देखती रही फीर नजर जुकाके कहा..

मंजुला : जानु आप मौसीको अपनालो.. यही समजलो ये मेरी आखरी ख्वाहीस हे.. क्युकी मे चाहती हुं.. मेरे जानुको सम्हालने वाली मेरी मौजुदगीमे ही आजाये.. क्या मेरी इतनी बात नही मानोगे..

देवायत : नही जानु.. अबतो मे तेरी हर बात मानुगा मे तुजे दुनीयाकी सारी खुसीया देना चाहता हु..

मंजुला : (खुसीसे बेठेही हग करते) ओह.. थेन्कयु जानु.., मे चाहती हु हमारी पुनम धिरेनकी सादी होनेके बाद मौसी इस घरमे आजाये.. मे चाहतीहु हमारा बच्चा अभीसे उनको अपनी मां मानके प्यार करे..

देवायत : ठीक हे मंजु जैसा तुम चाहती हो अ‍ैसाही करेगे.. बस..? अबतो खुस..?

मंजुला : (सरमाके हसते) हां.. अब खुस.. चलो अब भुख नही लगी क्या..? बहार सब हमारा वेइट करते होगे.., मुजेतो जोरोसे भुख लगी हे.., हें..हें..हें..

कहेते हसती हुइ देवायतका हाथ पकडके उसे बहार लेजाती हे.. जब दोनोही बहार आते हे तब चंदा उनकी ओर देखती ही रहेती हे तो मंजुने उनकी ओर खुसीसे स्माइल करदीया ओर चंदाकी ओर अ‍ेक आंख मारदी.. तो चंदाभी सरमाके हसने लगी.., वो सब समज गइकी मंजुने देवुको सब अच्छी तराह समजा दीया हे.. तभी पुनम इन दोनोकी हरकत देख लेती हे तो उसे बडाही आस्चर्य हुआ तभी चंदाभी खडी होते पुनम धिरेनको खानेके लीये बुलाती हे तबतक लखनभी आजाता हे..

फीर सब साथमे खाना खाने लगते हे तो आज पहेली बार बीच बीचमे मंजु देवायतको खीला रहीथी जीसे देखके चंदातो सरमा गइ लेकीन पुनमको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो दोनोकी ओर देखती रही.. लेकीन धिरेन सब कुछ जानता था तो वो खुस हो रहाथा.. ओर पुनमकी मनोदसा देखते हसते हसते खाना खाने लगा तो पुनम उनकी ओर देखने लगी.. फीर सबने खाना खालीया.. ओर सब होलमे बेठ गये..

मंजुला : पुनम तुजे वंदनाके पास जाना हे मेने उनसे बात करली हे.. जा वो तुजे मेकअपके लीये वेक्सीन बेक्सीन जोभी करवाना हो करवाले.. वो बहुत अच्छा करती हे..

पुनम : (हसते) भाभी मुजे सब पता हे.. मेरीतो सहेली हे.. मेनेही उनसे कहा था.., वो आपकोभी इधर आके करदेगी.. मम्मीजी आपभी सब करवा लेना..

चंदा : (सरमाते हसते) मे..? अब मे क्या करुगी..? मुजे नही करना कुछ..

मंजुला : (हसते) मौसी करवालो.. आपके अ‍ेकलोते बेटीकी सगाइ हे.. इतनातो चलता ही हे..

चंदा : (हसते) मंजु.. तुमभी नां.. अब ये सब करुगी.. लोग क्या कहेगे..?

मंजुला : (गुसा होते) भाडमे जाये लोग.. हम ये सब नही मानते क्यु देवु..?

देवायत : (हसते) हां.. मौसी मंजु ठीक केह रही हे अपने बेटेकी सगाइ हे फुल अ‍ेन्जोय कीजीये.. हमे लोगोसे क्या लेना देना.. अब आपभी ये सब पुराने खयालातोसे बहार आजाइअ‍े.. क्या कहेतेहो धिरेन..

धिरेन : हां मोम.. जीजु ठीक केह रहे हे.. ये पुराने खयालोने ही आपकी जींदगी बरबाद करदी.. अबतो अच्छा मौका हे अपनी लाइफ फुल अ‍ेन्जोय कीजीये.. हें..हें..हें..

कहतो चंदा चोंकते धिरेनको देखती रही.. तब जाके धिरेनको रीयेलाइज हुआकी वो क्या बोल गया.. तो सरमाते सर जुकाके बेठ गया तभी लखनने धिरेनको कहा..

लखन : चल धिरेन थोडा गांवकी ओर जाते हे.. की तुजे आराम करना हे..?

लखन : नही यार कोइ आराम नही करना चलो.. घुमके आते हे..

मंजुला : (हसते) लखनभैया अबतो धिरेन आपके जीजु हो गयेहे अबतो इनको अ‍ेसे ना बुलाओ..

लखन : (हसते) भाभी जीजुतो कलसे होगा तबतकतो दोस्तीका मजा लेने दो.., हें..हें..हें.., चल लखन..

तभी लखन चला जाता हेतो पुनमभी अपने रुममे जाके सोनेकी कोसी करने लगती हे लेकीन उनकी आंखसे आज नींद कोसो दुरथी क्युकी आज उनके भाइ भाभीका व्यवहार देखके उनको कुछ अजीब लगा क्युकी इस हवेलीपे अ‍ेसा करते उसे कभी दीखनेको नही मीलाथा तो दुसरी ओर मंजु ओर चंदाके इसारोने भी उसे परेसान करके रखाथा.. की दोनो मौसी भांजीके बीच क्या खीचडी पक रही हे.. वो यही सब सोचती रही..

तब दुसरी ओर चंदाभी अपने रुममे चली गइतो देवायत मंजुभी अपने रुममे आगये ओर दोनोही आके बेडपे सोने लगे तब मंजु देवायतकी ओर पीठ करते बाहोमे आते चीपक गइ ओर देवायतका हाथ पकडके अपने सीनेपे रखके सोने लगी.. तो देवायतनेभी उसे कसके अपने साथ चीपका लीया..




मंजुला : (पीछे देवायतकी ओर देखते) जानु तुम ज्यादा मत सोचो मुजे कुछ नही होने वाला.. बस अ‍ेक बार हमारा बच्चा आनेदो फीर मे मेरे जानुको खुब प्यार करुगी.. चलो सोजाओ..

देवायत : (हसते) हं.. चल ठीक हे.. आजा..

कहेते देवायत उनको बाहोमे भरके सोने लगता हे तो मंजुभी सोने लगती हे.. दोनोही नींदकी आगोस मे चले गये.. तब उनकी खीडकीसे दो आंखे उन दोनोके प्यारको देखती रही.. जब दोनो सो गयेतो वापस अपने रुममे जाके सोने लगी.. वोथी पुनम.. जो पीछली बार आइथी तो कइ बार अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देख चुकीथी.. वो देवायतकी बोडी ओर उनके लंडको कइ बार देख चुकीथी तभीभो उनकी ओर ढल चुकी थी..

चंदाभी देवायतके बारेमे सोचते सोगइ.. सभी लोग साम ४ बजे तब आराम करते रहे.. सभी उठके फ्रेस होगये ओर सबने चाइनास्ता करलीया तभी देवायत खेतोकी ओर नीकलही रहाथा की उसे पुनमने रोक लीया ओर वंदनाके घर यानी रमेशके घर छोडनेको कहा तो देवायतने उसे फटाफट आनेको कहा तो पुनम खुस होगइ.. ओर मंजुको कहेके देवायतके साथ चली गइ.. तब मोका देखके पुनमने देवायतसे कहा..

पुनम : भाइ क्या कुछ प्रोबलेम हे..? मे देख रही हुं.. जबसे आप लताको छोडके आयेहो आपका मुड ठीक नही हे.. ओर आतेही सीधे अंदर चले गयेथे ओर बहार नीकले तब देखा. दोनोही रो के आये थे..

देवायत : (हसते) अरे छुटकी अ‍ैसा कुछभी नही हे जो तु सोच रही हे.. तु टेन्शन मत ले..

पुनम : भाइ.. बुरा मत मानना.. मेने आपको अपने दीलमे खास जगाह दी हे.. आपकी कोइ बात मुजसे छुप नही सकती.. मुजे आपका पुरा खयाल रखना हे.. ओर हमेसा रखती रहुगी..

देवायत : (सीरीयस होते) छुटकी क्यु अ‍ैसा कर रही हे..? तु जो सोच रही हे अ‍ैसा नही हो सकता..

पुनम : भाइ.. अभीभी कुछ नही बीगडा.. अगर आप नही चाहते तो मे सारी जींदगी कुआरी रहुगी.. मे सादी सीर्फ आपके लीये कर रही हु.. ताकी हमारा रीलेशन हमेसा बना रहे.. आप अ‍ेक बार फीर सोचलो.. मे आपको फोर्स नही करुगी.. अगर आप मुजे नही चाहते तो मुजे ये सगाइ करनेकी कोइ जरुरत नही.. मे हमेसाके लीये आपसे दुर चली जाउगी.. ओर सीर्फ यही नही.. सादीके पहेलेभी आपको मेरा अ‍ेक काम भी करना हे..

देवायत : छुटकी येतो ब्लेक मेइल हे.. क्यु अ‍ैसा कर रही हे.. तु मेरी बहेन हे.. मत करवा अ‍ेसा काम..

पुनम : ठीक हे भाइ.. आप मुजे घर छोडदो.. मुजे कुछ नही करवाना.. सायद मेरी कीस्मतमे यही लीखा हे..

देवायत : पागल हे क्या..? (मनमे - लगता हे बाबाने कहाहे अ‍ेसा होकरही रहेगा) चल ठीक हे.. तु जो कहेगी वोही करुगा अबतो खुस..? ओर मुजसे सादीसे पहेले क्या काम करना हे..?

पुनम : (हसते) भाइ.. वो बादमे बता दुगी.. बस यही समजलो आपकी ओरसे मुजे बेस्ट गीफ्ट हे.. यही समजना मुजे राखीके बदले आप यही तोहफा दे रहे हो..

देवायत : हां.. लेकीन बता तो सही.. मुजे क्या काम करना हे.. तुजे क्या चाहीये..

पुनम : (सरमाके हसते) नही भाइ अभी नही.. जो चाहीये सादीसे पहेले मांग लुगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) लगता हे मुने तेरी सादी जल्द करवा देनी पडेगी.. तेरी डीमान्ड बढतीही जा रही हे..

पुनम : (हसते) भाइ फीकर मत करो.. सादीके बादभी आपको छोडने वाली नही हु.. हें..हें..हें..

तभी रमेशका घर आजाता हे तो रमेशतो नही था लेकीन चारु बहार खडीथी जेसेही देवायत ओर पुनमको देखा उनके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर दोनोको अंदर बुलाने लगी तो देवायतको जाना था.. तो मना करदीया तब चारु कुछ नीरास होगइ लेकीन पुनमकी हाजरीसे अपने चहेरेपे जाहीर नही होने दीया..




पुनम : भाइ अब आप जाओ मेरा होजायेगा तब मे लखनभैया यातो धिरेनको बुला लुगी मुजे लेजायेगा..

देवायत : चल ठीक हे.. चलो भाभी चलता हु कल सब टाइमपे आजायेगा..

चारु : (कातील स्माइल करते) ठीक हे तो आप नही रुकोगे.. वरना आपको मस्त चाइ पीलाती..

पुनम : (सरारतसे हसते) रहेने दीजीये भाभी.. भाइको चाइ नही दुध पसंद हे, हें..हें..हें..

चारु : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका पुनमको मारते) चल बदमास.. सरमभी नही आती.. जा अंदर वंदना वेइट कर रही हे..

कहतो पुनम हसते हुअ‍े अंदर चली गइ तब देवायतभी हसते हुअ‍े चला गया.. जब पुनम अंदर गइतो वंदना अपने रुममे पेटके बल लेटे कुछ पढ रहीथी.. जेसेही दरवाजेपे पुनम आके खडी रही तो वंदना जटसे बेडसे उतर गइ ओर खुसीके मारे हसती हुइ दोडके पुनमके गले लग गइ.. तब चारुभी दोनोको देखके हसने लगी तो वंदनाने पुनमका हाथ पकडके उसे अंदर खीचलीया ओर दरवाजा बंध करलीया..

तब अ‍ेक बार फीर दोनो गले लग गइ.. दोनोही पकी सहेलीथी जब पुनम सहेर चली गइ तब वंदना खुब रोइथी.. वो कीसीसे ज्यादा बात नही करतीथी.. ओर नाही उनकी ओर कोइ सहेली थी, दोनोही बचपनसे साथ खेलते साथही बडी हुइथी बस पुनम ओर वंदनाकी उमरमे कोइ ज्यादा फर्क नही था वंदना पुनमसे महज तीन चार सालही बडी थी फीरभी दोनो खास सहेलीथी.. तब वंदना पुनमको बेडपे बीठाती हे..

पुनम : (हसते) क्युरी कुती.. मे दो दीनसे आइ हु.. मीलने नही आ सकती..

वंदना : (हसते) तो कमीनी तुजे मीलना आना चाहीयेनां मेतो यही हु.. मुजे कहा पताथा की तुम आगइ हो.. येतो कल तेरे भाइ इधर तेरी सगाइका न्योता देने आये तब पता चला.. की तु आगइ हे.. वो सब छोड पहेले ये बता क्या पीयेगी.. चाइ पीनी हेकी कुछ ठंडा..

पुनम : (हसते) यार चाइही पीलादे.. कीतने दीनोके बाद तेरे घरकी चाइ पीउगी..

वंदना : (हसते धीरेसे) कमीनी तुतो कहेतीथी जबतक मेरा यार हां नही कहेता तबतक सगाइ फगाइ नही करनी.. तो क्या उसने हां केह दीया.. कोन हे वो..? (जोरोसे आवाज देते) मम्मी दो कप चाइ बना देना प्लीज..

पुनम : (सरमाते) हां यार बडी मुस्कीलसे बात करपाइ अभीतो सीर्फ कन्वीसही करपाइ.. तभीतो सगाइकी हां कहेदी.. मेरी छोड ये बता अभीतक तुने कोइ फसायाकी नही.. मेरा मतलब कीसीसे टाकाबाका भीडाकी नही?

वंदना : (नीरास होते फीकी स्माइलसे) नही यार.. अब मे कीसीसे सादी नही कर रही.. जीनको चाहतीथी.. उनकी सादी होगइ.. अब नही करनी मुजे सादी.. बस उनकी यादमे जींदगी गुजार दुगी..

पुनम : (धीरेसे) क्या यार.. तुभी.. कभी सोचाहे अकेले जींदगी केसे गुजारेगी.. वंदना कुछ समय तो तु अकेली रेह लेगी.. जब सरीरकी नीड बढेगी तब तु क्या करेगी..? तुमतो पढी लीखी लडकी हो जब तेरा सरीर ओर दिमाग तेरा साथ नही देगा तब तुम क्या करोगी..?

वंदना : (हाथकी बीच वाली उंगली दीखाते जोरोसे हसते) क्यु.. ये मेरा साथ नीभायेगीनां.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) कमीनी.. तु नही सुधरेगी.. ये सब छोड अबतो बता तेरा यार कोन था, जो कही ओर सादी करली.. कमीनी तुने कभी बयाताभी तो नही.. वरना मे कुछ हेल्प करदेती..

वंदना : (नीरास होते) छोड यार.. अब बताके क्या फायदा.. मेरीही हीमत नही हुइ.. जब तुने कहाथा तबही मुजे अपने प्यारका इजहार करदेना चाहीयेथा.. गलती मेरी ही हे.. जो मे उसे बात नही करपाइ..

पुनम : हं.. लेकीन अबतो बतादे तेरे दीलमे कोन था..? मे कीसीसे नही कहुगी..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) यार देखना.. कीसीको मत बताना.. अब उनकी सादी होगइ हे उनको अच्छी बीवी मील गइ हे.. दोनोही प्यार करतेथे.. बस मेही लेइट होगइ.. वो.. वो.. तेरा भाइ देवायत ही हे..

पुनम : (चोंकते धीरेसे) क्या..? भाइ..? आयु सीरीयस..? तुम उनको प्यार करतीथी..?

वंदना : हां यार.. तु कीसीको कहेना मत..

तब पुनम सोचमे डुब जाती हे.. वो वंदनाको अपने यारके बारेमे बताने वालीथी लेकीन अब वो बताना नही चाहतीथी.. की उनका यारभी उनकाही भाइ हे.. तब वंदनाको सुनके बहोत दुख होता.. उसी वक्त उसने फैसला करलीया की अब मे अपने यारके बारेमे कीसीसे बात नही करुगी जोभी करना हे सबसे छुपके करना हे.. अब मुजे वंदनाको जुठ बोलना पडेगा तब उसने कुछ सोचलीया ओर चहेरेपे स्माइल आगइ.. तभी..

वंदना : (धीरेसे) कीमीनी मेरी सब बात उगलवाली.. अब तुतो बता तेरा यार कोन हे..?

पुनम : (सरमाते) वोही जीनके साथ मेरी सगाइ हो रही हे.. भाभीका भाइ हे.. उनकी मौसीका लडका धिरेन नाम हे उनका.. कलतो तुभी आ रही हे.. वही देखलेना..

वंदना : (खुस होते) वाव..पुनो.. तु बडी नसीब वाली हे.. तु जीसे चाहतीथी उसे ही पालीया.. खैर छोड ये सब बाते.. ये बता क्या क्या करना हे.. सीर्फ वेक्सीन बेक्सीनकी कुछ ओरभी.. मतलब सब सफाइ..

पुनम : (सरमाते हसते) कमीनी सगाइ हो रही हे सादी नही.. जो नीचे सफाइ करवाउगी.. क्या क्या पुछती हे.. चल सुरु होजा.. फीर जाना भी हे..

वंदना : यार यही रुकजाना तुजे सुबह तैयार करदुगी.. फीर हम दोनो चली जायेगी..

पुनम : (सरमाते) नही यार.. वो धिरेन.. घरपेही रुका हे.. नाराज होगा.. सुबह आउगीनां..

वंदना : (हसते) क्या.. घरपे हे..? तो फीर कुछ कीया बीयाकी नही.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते) कीतनी कमीनी हो.. नही यार कुछ नही कीया.. सब घरपे होते हे.. ओर वेसेभी जोभी करना हे सादीके बाद.. अभी कुछभी नही..

वंदना : (धीरेसे) यार पुनो.. अ‍ेक बात बता.. क्या अ‍ेक बार प्यारका इजहार होजाये.. तो क्या लडके हमसे बीना मीले रेह सकते हे..? कुछतो.. मतलब कीस वीस.. या.. बुब्स टच..

पुनम : (सरमाते) हां यार.. कीस बीस तक ठीक हे लेकीन आगे नही.. सब सादीके बाद.., क्या तुने कभी कीसीका लीया हे.. मतलब तुम वर्जीन हो..?

वंदना : (सरमातते) हां यार.. अब कोइ लडकेमे इन्ट्रेसही नही हे.. बस जरुरत होती हे तब उंगलीसे काम चला लेती हु.. ओर सुन.. तेरे भाइने मेरी सरकारी नोकरी पकी करदी हे.. अब मे यही स्कुलमे पढाउगी..

पुनम : (खुस होते) चल.. ये ठीक हुआ.. अब तुजे कीसी ओरपे डीपेन्ड नही रहेना पडेगा.. यार मेरी मान तु कीसी अच्छे लडकेसे सादी करले.. केसे पुरी जींदगी काटेगी..

चारु : (चाइ लाते) हां पुनम.. तेरी सहेलीको कुछ समजा.. जब देखो मना ही करती रहेती हे..

वंदना : (चाइ लेते) मोम.. आप फीरसे सुरु होगइ.. कीतनी बार कहा नही करनी मुजे सादी.. धेट्स ओल..

पुनम : (हसते) आंटी रहेनेदो.. आपकोतो पता हे कीतनी जीदी हे.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते) ओर तुम..? तुभी कुछ कम नही हो.. तुमभी इतनीही जीदी हो.. मंजुभाभी केह रहीथी..

दोनो ही सहेली बाते करते अपना काम कर रहीथी.. तभी हवेलीसे सब चले गयेतो मंजु ओर चंदाही रेह गये तब दोनोही होलमे बेठे धीरेसे दोपहरकी बाते करने लगी.. तब मंजुने चंदाको सबकुछ बता दीया..

चंदा : (हसते धीरेसे) तो क्या देवायत सादीके लीये माान गया..?

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. मेने कहाकी ये मेरी आखरी ख्वाहीस समजके मान जाओ तो फोरन हां कहेदी.., दीदी मे चाहती हु हमारा बच्चा अभीसे आपकोही मां मानके प्यार करे..

चंदा : (सरमाते हसते) चल ठीक हे हम सादीके बाद सोचेगे.. अबतो खुस..? लेकीन तुम धिरेनको क्या कहोगी.. अभीतक वो पुनमकोभी नही पता..

मंजुला : दीदी वो सब मुजपे छोड दीजीये.. मे सबको हेन्डल करलुगी.. बस आप दोनोने हां कहेदी.., ओर हां दीदी आप दोनो चाहोतो अपनाभी बच्चा पैदा करलेना..

चंदा : (सरमाते) मजु.. कीतना कुछ सोचती हे.. अरे बाबा पहेले हमारी सादीतो होजानेदो.. ओर हां मेने कुछ डीसाइड कीया हे.. जबतक तेरा बच्चा बडा नही होजाता ओर पढ लीखके काबील नही होजाता तबतक कुछभी नही.. हमे नही चाहीये बच्चे.. ओर अगर देवु कहेगातो तब सोचेगे..

मंजुला : लेकीन दीदी तबतक तो आपकी उमरभी नीकल जायेगी.. क्या तब मुमकीन होगा..?

चंदा : छोड ये सब.. तबकी तब सोचेगे.. ये बता कुछ सादीका डीसाइड कीया हे..? बाबा केह रहेथे दोनोकी जल्द सादी करवा देना.., ओर तेरी डीलेवरीका भी टाइम होगया हे..

मंजुला : दीदी डीलेवरीके बाद तुरंतही कर देगे.. बस अ‍ेक महीना.. बादमे कर देगे.. क्या कहेती हो..?

चंदा : चलो ठीक हे कल वो सरलाजी से ओर भानुजीसे भीतो पुछना पडेगा.. कल देखते हे..

दोनो अ‍ेसीही बात कर रहीथी तो इधर देवायतभी अपने खेतोपे आगया तब उसने कल रामुकाकाको भी आनेको कहा.. ओर हरीया मालती.. ओर जमीलाकोभी सगाइमे आनेका न्योता दीया तब खेतोमे कोइ ओर मजदुर नही थे.. तो वो उन मजदुरके घर चला गया जीनकी टांग सरपंचने तोडीथी वो अपने रुममे खटीयापे बेठाथा ओर उनका लडका उनके पास खेल रहा था उनकी बीवी कुछ खानेके लीये बना रहीथी तो देवायतको देखतेही सरमा गइ ओर खडी होके उसे पानी देने लगी तब देवायतने पानी पीया ओर मजदुरका हालचाल पुछा.. फीर कुछ पैसे भी दीये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २३

दोनो अ‍ेसीही बात कर रहीथी तो इधर देवायतभी अपने खेतोपे आगया तब उसने कल रामुकाका कोभी आनेको कहा.. ओर हरीया मालती.. ओर जमीलाकोभी सगाइमे आनेका न्योता दीया तब खेतोमे कोइ ओर मजदुर नही थे.. तो वो उन मजदुरके घर चला गया जीनकी टांग सरपंचने तोडीथी वो अपने रुममे खटीयापे बेठाथा ओर उनका लडका उनके पास खेल रहा था उनकी बीवी कुछ खानेके लीये बना रहीथी तो देवायतको देखतेही सरमा गइ ओर खडी होके उसे पानी देने लगी तब देवायतने पानी पीया ओर मजदुरका हालचाल पुछा.. फीर कुछ पैसे भी दीये....अब आगे

फीर वो गोडाउनमे अपनी ओफीसमे आके बेठ गया ओर आने वाले वक्तके बारेमे सोचने लगा.. आज पुनमकी बातोसे उसे यकीन हो गया की इस रीस्तेको कीतनाभी रोकनेकी कोसीस करले ये सब होकेही रहेगा.. उसे बाबाकी अ‍ेक अ‍ेक बात सच होती नजर आ रहीथी.. ओर मानसीक तोरपे वाले वक्तके बारेमे सोचते अपने मनको मजबुत करने लगा, उनके लीये जोभी करना पडे करनेके लीये मनको तैयार करने लगा..

देवायत सोचता रहा की चाहे अपनी बहेनको कीतनीभी रोकनेकी कोसीस करे वो मानने वाली नही थी.. क्युकी देवायत उनकी सब जीदको भलीभांती जानता था.. अब उसे पुनमको अ‍ेक बहेनकी नजरसे नही अ‍ेक ओरतकी नजरसे देखना पडेगा तबही वो पुनमके प्यारको समज पायेगा.. अब उसे पुनम अच्छी लगने लगी.. उनको इस बातकी चीन्ता होने लगीकी पुनम सादीसे पहेले मुजसे क्या चाहतीहे..? यहा तककी उसने राखीका तोहफा पहेलेही मांग लीया.. वो तोहफे मे क्या मांगेगी इस बातकी चीन्ता होने लगी..

यही सब सोच रहाथा तब उसे पताही नही चलाकी उनके पेन्टमे लंड खडा होने लगा जीनकी वजहसे पेन्टमे तंबु बन गया हे.. तब वो पेन्टमे हाथ डालके लंडको अ‍ेडजेस्ट करने लगा तभी जमीला आगइ जो देवायतकी इस हरकतको देखते सरमा गइ ओर सरमाते मंद मंद मुस्कराने लगी.. जब देवायतने उनकी ओर देखातो कातील नजरसे देखते देवायतके सामने अंगडाइ लेते अपने बालोको सही करते खडी होगइ..





जमीला कबीलेमे रहेतीथी वो हरीयासे पहेले सरदारकी लडकीथी जो उनको देवायतने दुसरे कबीलेवालो से बचाया था तबसेही जमीलाको देवायत बहुतही अच्छा लगता था ओर उनको प्यार करने लगीथी तब देवायतभी इनको प्यार करने लगा अबतक दोनो कीतनी बार चुदाइ कर चुकेथे..

जमीला अब देवायतकोही अपना पती मानतीथी ओर उनसे बच्चा चाहतीथी ताकी वो अपने बच्चेके साथ देवायतकी पत्नी बनके रेह सके लेकीन देवायत इनकी बातको हर बार टाल देताथा इसीलीये जमीला मन बनाके इनके खेतोपे काम करने आगइ ताकी वो देवायतसे रोज मील सके ओर देवायत उनको प्रगनेन्ट करदे..

जमीला : ठाकुरसाब.. लगता हे आपको मुजसे ज्यादा मालती अच्छी लगती हे.. जबसे यहा आइहु आपने मुजे अ‍ेकबारभी नही बुलाया.. ओर मे यहा सीर्फ आपके लीयेही आइ हु.. क्या अब मे आपको अच्छी नही लगती?

देवायत : अरे जमीला अ‍ैसा क्यु सोच रही हे.. चल आजा.. मेने सीर्फ अपने नजदीक वाले लोगोकोही सगाइमे बुलाया हे.. तभीतो तुजे नीमंत्रण दीया हे.. क्युकी मे तुजे अपनी बीवीही मानता हु.. मुजे पता हे तुमने सीर्फ मेरे लीये ही सादी नही कीहे.. तो तेरा खयालतो रखनाही पडेगा.. बस कुछ काममे उलजा हुआ हु.. अब मे तेरा काम करदुगा.. क्युकी मुजे कबीलेमे भी मेरी रानी चाहीये..

जमीला : (देवायतके पास आते घुटनो बल बैठते) तबतो अच्छा हे बाबा मेनेतो सोचा क्या मेरा बाबु मुजे भुल गया..? लगता हे आपका मुड कुछ ठीक नही हे.. चलो मे ठीक कर देती हु..

कहेते वो देवायतकी खुरसीके पास घुटनोके बल बेठ गइ ओर देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलके उनके लंडको बहार नीकाल दीया ओर अपने हाथकी मुठीमे भरलीया तब देवायतका लंडभी जटके मारने लगा.. तभी जमीलाने खडी होके अपने सब कपडे नीकलदीये ओर वापस बेठ गइ ओर लंड पकडके अपनी जीभ नीकालके चाटने लगी.. जीससे देवायतने अपनी आंख बंध करली ओर वो मदहोसीमे छाने लगा..




तभी देवायत खडा होगया ओर जमीलाका सर पकडके अपना लंड उनके मुहमे ठुस दीया ओर उसे कमर हीलाके चोदने लगा तो लंड सीधेही जमीलाके हलकमे चला गया था तब जमीलाकी हालत पतली होगइ ओर वो छटपटाते लंडको मुहसे बहार नीकालनेकी नाकाम कोसीस करती रही लेकीन देवायतने उनका सर सख्तीसे पकड रखाथा ओर वो कमरको जटके मारते जमीलाके मुहमे चोदेही जा रहागा तभी जमीलाके आंखमे आंसु आगये तो देवायत उसे गोदमे उठाके वही सोफेपे पटक दीया..




ओर जमीलाके पैरके बीच आके अपने लंडको जमीलाकी चुतपे सेट कीया.. ओर उनपे जुकके अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड जमीलाकी चुतमे उतार दीया तब जमीलाकी हल्की चीख नीकल गइ.. उसने अपने दोनो पैर घुटनसे मोडके फैलादीये तब देवायत उनसे चीपकके जोरोसे कमर हीलाते जमीलाको चोदने लगा तब जमीलाकी देवायतके हर धकेके साथ आहे नीकलने लगी, वो कीतने दीनोके बाद देवायतसे चुद रहीथी..

ओर देवायत उसे जबभी चोदता उनकी चीखे नीकलवा देता.. वो देवायतको अ‍ेक बारसे ज्यादा बरदास्त नही कर पातीथी.., लेकीन आज देवायत कुछ अलगही मुडमे था उसे बार बार अपनी बहेन पुनमका खयाल आ रहाथा आज उसे जमीलामेभी अपनी बहेन पुनमका चहेरा नजर आ रहाथा.. ओर जमीलाको पुनम मानते बडेही जोसमे चोदे जा रहाथा.. आज जमीलाभी जोसमे चुदते कुछ ज्यादाही चीख रहीथी उसे समयका पताही नही चलाकी वो जमीलाको कबसे चोदेही जा रहा हे..




अबतक जमीला दो बार जड चुकीथी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. क्युकी इनका रीजन अ‍ेकही था.. पुनमकी बातोने उसे बहुत गरम कर दीयाथा ओर वो जमीलामे पुनमको इमेजींग करतेही चोद रहाथा ओर उनके आस्चर्यकी सीमा नही रही क्युकी जमीलाको दो बार जडाके अभीभी वो जमीलाको चोदे ही जारहा था.. देवायतके दीमागमे सीर्फ अ‍ेकही बात घुम रहीथी की वो अपनी बहेन पुनमको चोद रहा हे.. तब उनका जोस कइ गुना बढ गयाथा ओर वो उछल उछलके बडेही जोसमे जमीलाको चोदेही जा रहाथा..




तभी अचानक देवायतने जमीलाकी चुतमे लंडको जड तक घुसा दीया.. ओर जमीलाकी गरदनमे मुह डालके उनसे चीपक गया तो जमीलाने भी उसे कसके बाहोमे भीच लीया.. तभी जमीलाको अपने बच्चेदानी पे पहेली बार कुछ गरम महेसुस हुआ ओर वो बहुतही उतेजीत होगइ ओर देवायतके साथही जडने लगी.. वो देवायतसे कीतनी बार चुद चुकीथी लेकीन आज उसे देवायतसे चुदनेमे अ‍ेक अलग ही अहेसास हुआ ओर वो देवायतके नीतंबपे दोनो हाथ रखके अभीभी देवायतको अपनी चुतसे चीपकानेकी कोसीस करती रही..

तब देवायतभी चुतमें लंड डालते अ‍ेसेही जमीलाके सीनेपे ढेर होगया था.. ओर जमीलाने लंडको अभीभी चुतके अंदरही दबाके देवायतकी पीठ सहेला रहीथी.. दोनोही थकके चकनाचुर हो चुकेथे ओर पसीनेसे भीग गयेथे.. आज जमीलाका पुरा सरीर चुद चुद के दर्द कर रहाथा उनके सरीरकी अ‍ेक अ‍ेक नब्स ढीली हो चुकीथी.. उसने देवायतको कइ बार प्रेगनेन्ट करनेको कहाथा.. लेकीन देवायत उसे हर बार मनाही करता रहेता था..

लेकीन आज उसे पता नहीथा की देवायतका बीज उनके गर्भकी ओर उनके बीजका मीलन करनेके लीये दोड रहथा ओर थोडीही देरमे दोनोके बीजका मीलन होगया.. ओर देवायतका अंस जमीलाके गर्भमे स्थापीत होगया.. इस बातसे देवायत ओर जमीला दोनोही अनजान थे.. काफी देर अ‍ेसेही पडे रहे काफी देर बाद देवायत जमीलाके उपरसे उतर गया तब लंड जमीलाकी चुतसे फच.. अवाजके साथ बहार आगया..

तबभी जमीला बेसुध जेसी हालतमे पडी रही.. उनको अभीभी अपने पेटके अंदर कुछ अलगही गरम महेसुस होरहा था.. देवायत बाथरुममे चला गया ओर सब साफ करके मुह हाथ धोके फ्रेस होगया ओर बहार आगया तब जमीला धीरेसे सोफेसे उतर रहीथी ओर खडी होगइ ओर बाथरुमकी ओर जाने लगी तब वो अ‍ेकदम थकी हुइ लडखडाते चल रहीथी आज वाकइ देवायतने उनकी हालत खराब करके रखदी थी..

फीर जमीलाभी अच्छेसे रगडके नहाने लगी.. ओर अपनी चुतपे खुब पानी डाला तब जाके उसे कुछ राहत महेसुस हुइ फीर बहार आके अपने कपडे पहेनने लगी तबतक देवायतभी कंपलीट हो चुकाथा.. जब जमीलाने कपडे पहेन लीये तब देवायत उनके पीछे चला गया ओर उनको पीछेसे अपनी बाहोमे भरलया तब जमीला प्यारसे अ‍ेक बार फीर मदहोस होगइ ओर देवायतके गालसे अपना गाल रगटते खडी रही फीर पलटके देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोके होंठ मील गये तब देवायतने उसे रुम तक छोडनेकी बात कहीतो सरमाके मना कर दीया..




फीर जमीला धीरे धीरे चलते गेइट खोलके चलने लगी तब उनकी चुतमे बहुतही जलन हो रहीथी ओर वो अपने रुमकी ओर चली गइ.. तभी देवायतने घडीकी ओर देखातो चोंक गया.. तब उसे अहेसास हुआकी वो जमीलाके साथ दो घंटे तक रहा.. तो वोभी फटाफट हवेलीकी ओर नीकल गया तो सबलोग होलमे बेठते कलकी सगाइकी चर्चा कर रहेथे.. तो देवायतभी सबके साथ जाके बेठ गया..

मंजुला : देवु.. कल सुबह जल्दी उठजाना.. वो भानुभाइ मांजी सब सुबह ही जल्दी आजायेगे..

चंदा : (हसते) चलो सुबह जल्दी उठनाहे तो फीर सब जल्दी सो जाओ.. कल तैयारीया भी करनी हे..

कहेतेही सब उठने लगे.. तब लखन ओर धिरेन उपर सोनेके लीये जाने लगे तब धिरेनने सबसे छुपके पुनमको कुछ इसारा कीया तो पुनम सरमा गइ ओर गरदनको नां मे हीलाते अपने रुममे चली गइ तो चंदाभी अपने रुममे जाने लगी तब देवायत ओर मंजुभी अपने रुममे आगये ओर दोनोने चेन्ज करलीया तो मंजु देवायतकी बाहोमे आके समा गइ ओर दोनो खडे रहे..

देवायत : (हसते) क्या बात हे बेबी.. आज सबको जल्दी सुला दीया..? इरादातो नेक हेनां..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाके हसते) क्या आपभी.., आपकोभी पता हे मे इस हालतमे कुछ नही कर सकती.. बस येतो युही.. आपकी बाहोमे बडा सुकुन मीलता हे.. चलीये सोना नही हे क्या..?

देवायत : (मंजुको गोदमे उठाते बेडपे लीटाते) अरे मेरी अच्छी बीबी.. आजा..




फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी ओगोसमे चीपकके सोने लगते हे.. तभी उपर लखनके फोनपे लताका फोन आता हे तो वो फोन लेके बहार टेरेसपे चला जाता हे तभी धिरेनभी पुनमको फोन करता हे.. तब दोनोही कपल प्यार भरी बाते करते रहेते हे.. सब अ‍ेक दुसरेको मीलना चाहतेथे लेकीन अ‍ेक दुसरेकी हाजरीसे सबकी हीमत नही होपा रहीथी ओर वेसेभी पुनम सादीसे पहेले धिरेनको अकेलेमे कमही मीलना चाहती थी.. उधर..

लखन : (हसते) लता आखीर कल हम मीलही जायेगे.. अभी क्या कर रही हो..?

लता : (फोनपे सरमाते) क्या करुगी.. भावेशको सुलाके सोनेही वालीथी.. सोचा अ‍ेक बार आपसे बात करलु

लखन : (लंड दबाते) बस अ‍ेक बार सादी होजाये.., फीर सारा दीन तुजे बाहोमे भरके पडा रहु ओर तुजे..

लता : (सरमसे हसते) बस.. इनके आगे कुछ मत बोलीयेगा.. हें..हें..हें.., हालत तो मेरीभी कुछ आपके जेसी ही हे.. पता नही कब हमारा मीलन होगा.. लखन क्या हम सादीसे पहेले नही मील सकते..? कुछ जुगाड करोना बाबा.. अब नही रहा जाता.. मुजसे.., मे जल्द आपके पास आना चाहती हु..

लखन : (हसते) अरे कहातोथा.. भावनाभाभीको डीलेवरीके लीये जानेदे.. तब मीलेगे..

लता : (सरमाते चुत सहेलाते ) सुनो.. तब वो.. वो.. पेइनकीलर ओर आइपील लेते आना.., सुना हे बहुत दर्द होता हे..

लखन : (लंड हीलाते) अरे फीकर मत कर बहोत मामुली दर्द होता हे.. वोभी सीर्फ अ‍ेक बार.. फीरतो मजेही मजे हे.. , बताना क्या कर रही हे.. वो उंगली डाली हुइ हे..? तो जोरोसे हीलानां..

लता : (सरमसे पानीपानी होते) धत्.. हां.. पता नही क्या जादु कर देते हो.. आजाओना.. सीइइ गइ..इइइ

लखन : (जोरोसे लंड हीलाते) अरे..कल.. मीलतेतेते.. हेहेहे.. आइइइइइ..ओह..ओह..सीइइइइ बेबीइइइ..

लता : (सरमाते) क्या..नीकल गया..? मेराभी.., चलो अब सोजाओ.. कलतो मीलही रहे हे..हो सकेतो कल कुछ जुगाड करना.. चलो बाय..मुं..हां.. लव यु जानु..

लखन : बुच..बुच..मु..हा.., हां कुछ करता हु.. लव यु टु बेबी..

दोनो अ‍ेसी बाते करते सोने लगे तो इधर पुनम ओर धिरेनने सीर्फ कीस तकही कीया.. क्युकी पुनमने कुछ ओरही सोच लीयाथा.. उनको धिरेनसे ज्यादा अपने भाइ देवायतमे ज्यादा इन्ट्रेस था वो धिरेनसे इसलीये सादी कर रहीथी ताकी समाजके आगे धिरेनको ढाल बनाके रख सके बाकी सब तराह वो देवायतको हमेसाके लीये पुरी समर्पीत होना चाहती थी.. वो धिरेनसे बात करतेभी देवायतको इमेजींग करके बात करती थी..

पुनम अब देवायतकी ओर काफी ढल चुकीथी क्युकी, वो देवायतसे जल्द से जल्द मीलन करना चाहती थी अब उनको देवायतके बगैर रहेना मुस्कील लग रहाथा वो जबभी देवायतको देखती तब इनकी चुत फडफडाते पानी छोडने लगती थी अब उसे कीसीभी हालमे अपनी चुतमे अपने भाइका लंड चाहीये था.. वो दीन भर दीन कामातुर होती जा रहीथी, इनका रीजन सीर्फ वोही जानतीथी ओर अ‍ेक जानतेथे बाबा..

जो पुनम स्कुलमे थी तब सबसे छुपके बाबाको हप्तेमे अ‍ेक बार लखनके साथ मीलने जातीथी जो बाबाने उसे सारी सचाइ बतादी थी.., बाबाने उसे कीसीको ना कहेनेकी बातभी कीथी आने वाले वक्तमे उसे धिरेनकी विधवा होते हुअ‍े भी देवायतकी सुहागन बनके हर रात देवायतका बीस्तर गरम करनाथा उसे पता चल गयाथा की अब उसे दोहरी जींदगी जीनी पडेगी.. इनके लीये वो तैयारथी..




सबलोग सोगये तब केवल चंदाकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. आज देवायतको मीलना मुमकीन नही था तो वो करवटे बदलती रही.. ओर अ‍ेसेही सुबह होगइ.. सबलोग जल्दी उठ गये तो मंजुनेभी देवायतको सुबह जल्दी उठा दीया.. ओर सब तैयार होगये ओर चाइनास्ता करने बेठ गये.. तभी कार आके रुकीतो सरला भावना लता ओर भानुके साथ उनकी मामी रमा ओर उनकी बेटी नीलमभी आगये लताने भावेसको अपने पास रखा था..

जेसेही अंदर आये देवायतने सबको जबरदसती चाइ नास्तेके लीये बीठा दीया तो सरला भानुने सीर्फ चाइ पीली ओर लता भावनाने नास्ताभी कीया.. लता बार बार लखनकी ओर देखते नजरे चुराते सरमा रही थी.. जब सबने चाइ नास्ता करलीया तो रमेश चारु ओर वंदनाभी आगये.. तब देवायत चारुको देखताही रेह गया ओर उसे चारुके साथ बीताये वो रंगीन पल याद आने लगे तो चारु देवायतकी मनोदसा समज गइ ओर सबसे छुपके अपने होंठ दांतोसे दबाके देवायतको रमेश ओर वंदनाकी ओर नजर करते कुछ इसाराभी करदीया..




तो देवायत सबकुज समजगया ओर मुस्कराने लगा.. तभी पुनम अपने रुममे चली गइ ओर देवायतको इसारोसे बुलाया.. तो देवायत सबकी नजर बचाते इधर उधर बाते करते घुमते पुनमके पास चला गया तो पुनम तीन अंडरगार्मेन्टके सेट लेके बेडपे बेठीथी तब देवायत उसे देखते सोक्ट होगया ओर धीरेसे कहा..

देवायत : (धीरेसे) छुटकी जट बोल क्या काम हे..? बहार सब लोग आगये हे..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ सीर्फ इतना बतादो मे कोनसा सेट पहेनु..

देवायत : (थोडा गुसेसे) पागल होगइ हे क्या..? येभी कोइ पुछनेकी बात हे.. जो मरजी आये पहेनले.. तुजे सब अच्छे लगेगे..

पुनम : (सीरीयस होते) भाइ आपने मुजे कुछ वादा कीया था.. ओर मे आपके चोइसकेही कपडे पहेनुगी.. जल्दी बतादो वरना कोइभी आजायेगा..

देवायत : पुनो.. क्यु जीद कर रही हे.. कोइभी पहेनले.. इनको कोन देखेगा.. सीर्फ तुजेही दीखेगा.. बताके क्या फायदा..

पुनम : (सरमाते) ठीक हे मे सगाइके बाद आपको अकेलेमे मीलना चाहती हु.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. फीर आप जानो ओर धिरेन.. आप जाइअ‍े.. ओर इनको में कीसे दीखाउगी..? आपही तोहो जो मे आपको सब दीखाना चाहती थी.. भाइ आप जाओ मेरा मुड ठीक नही हे.. हम फीर बात करेगे..

देवायत : (हार मानते) ठीक हे.. ये वाइट वाला पहेनले.. इनमे तु मस्त सेकसी दीखेगी.. अब खुस..? अब चलु.. की ओर कुछ पुछना हे..?

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. अब खुस.. जाइअ‍े..

देवायत : (जाते फीरसे पीछे मुडते) ओर हां.. मुजे तेरा सब सेट देखना हे.. वोभी पहेना हुआ.., हें..हें..हें..

पुनम : (अ‍ेकदम खुस होते) हां..भाइ.. जरुर दीखाउगी.. आजाना.. जब हम अकेलेहो.. तब..

कहेते पुनम सरमसे पानीपानी होगइ आज उसने देवायतको अपने साथ प्यार करनेके लीये बजबुर करलीया था जब देवायत बहार चला गया तब पुनमभी बहार आगइ फीर लता ओर वंदनाको अपने रुममे लेगइ ओर दरवाजा बंध करलीया तो वंदना दोनोको तैयार करने लगी.. तभी इधर महेमान आना सुरु होगये तभी रश्मी ओर चंपाभी आगये ओर आतेही सीधे कीचनमे चली गइ ओर दया रजीयाकी हेल्प करने लगी..

तो मंजुला ओर चंदा सब महेमानोके आवभगतमे वही खडी रही.. तभी गांवसे कुछ ओर महेमान ओर अपने खतोसेभी रामुकाका हरीया मालती जमीला सब आगये ओर अ‍ेसेही अ‍ेक घंटा बीत गया तब नीलम मंजु ओर चंदाको भी तैयार होनेके लीये बुलाने आगइ तो वंदनाने मंजु चंदा भावना रमा ओर नीलमकोभी तैयार करदीया.. ओर बहारभी सगाइकी तैयारीया सुरु होगइ..





आज पुनम ओर लता अ‍ैसी तैयार हुइथी जैसे आसमानसे कोइ परीया उतरके आइहो.. सभी लोग पुनम ओर लताको देखतेही रेह गये तब लता लखनसे नजर चुराते सरमा रहीथी तब पुनम धिरेनसे ज्यादा देवायतपे नजर गडाये सरमा रहीथी.. ओर बीच बीचमे धिरेनकोभी देखती रहेती थी.. फीर होलमे चार खुर्शीया रखदी गइ दो दो करके बीचमे थोडी जगाह रखदी फीर रमा ओर चंदा दोनोही वहा आगइ.. मंजु ओर भावनाको वही दो खुरशी रखके बीठा दीया ताकी सगाइकी सब वीधीपे बरोबर ध्यान रख सके

तब पुम ओर लताकी बीठाया तो रमा ओर चंदाने सब वीधीया सुरु करदी फीर लखन ओर धिरेनकोभी बुलाया ओर लखनको लताके पास तो धिरेनको पुनमके पास बसठा दीया तब लता ओर पुनम खुब सरमाइ फीर चारोके हाथमे जल ओर श्रीफल दीया ओर सगाइकी वीधी सुरु होगइ सबने चारोको आशीर्वाद दीया फीर चारोकी अंगुठी पहेनानेकी वीधी हुइ ओर दोनोने केक भी काटा ओर अ‍ेक दुसरेको खीलाया..

तभी पुनमने देवायतको इसारोसे बुलाया ओर अ‍ेक दुसरेको केक खीलाया फीर बाकी सबने केक खीलाइ अ‍ेसेही सगाइकी सब वीधी संपन हुइ इसी बीच वंदनाभी बार बार देवायतको देखती रही.. ओर अ‍ेक दो बारतो अपनी आंखभी गीली करली ये बात पुनमनेभी नोटीस करली.. तब दुसरी ओर चंपा चारु ओर रश्मीभी देवायतके उपर बरोबर नजर गडाये बेठीथी.. सब चाहतीथी देवायत अ‍ेक बार उनके सामने देखले..

लेकीन देवायत सब जेन्टके साथ बातोमे मसगुल था आज भानु रमेश ओर गांवके दुसरे लोगभी बेठे गांवकी बाते कर रहेथे तब देवायतने मौका देखतेही सरपंचकी बात छेडदी ओर रमेशको सरपंच ओर रश्मीको मुनीमकी जगाहपे रखनेकी बात कहेदी तो सब गांव वालोने खुस होते अपनी सहमती जतादी.. तब रमेश बहुतही खुस होगया.. फीर सबका फोटो सेसन हुआ ओर आखीर सब भोजन करने बेठ गये..

तो मालती जमीला दया रजीया चंपा चारु ओर रश्मीने सबको भोजन परोसा.. ओर सब खाने लगे.. तबतक दोनो नये कपल अ‍ेक रुममे घुस गये ओर आपसमे बाते करने लगे तब वहा नीलम ओर वंदनाभी आके बेठ गइ तबतक सब जेन्टने भोजन करलीया फीर सब लेडीस बेठ गइ ओर उसनेभी भोजन करलीया ओर लास्टमे नीलम वंदना ओर दोनो कपल बेठ गये.. सबने भोजन करलीया तो सब गांव वाले जाने लगे..

तब चंपा रश्मीभी जाते समय देवायतको घर आनेका इसारा करती गइ तो चारुनेभी अ‍ेक दो बार मोका देखते देवायतको छुलीया ओर अ‍ेक बार हाथभी पकडलीया तभी देवायत समज गयाकी चारुकी ठरक काफी बढ गइ हे तो वंदनाभी देवायतके सामने सरमाते मुस्कराते देखती रही ओर सभी लोग चले गये तब सीर्फ भानुके धर वालेथे तो सब होलमे बेठ गये ओर आगे सादीकी तारीखकी बात करने लगे..

सरला : बेटा अब आपने सादीके बारेमे क्या सोचा हे.., मे चाहतीहु ये सादी जल्द हो जाये..

चंदा : मौसी लेकीन मंजु ओर भावुकी डीलेवरीकाभी देखना हे.. इतने छोटे बच्चे होगे.. केसे मेनेज करेगे..?

भावना : मौसी हमेतो सादीमे कोइ खास तामजाम नही करनी.. हमारे रीस्तेदार ही कोन हे..? बस ये मामी लोग ही हे.. बाकीतो दोनोके ससुर अ‍ेकही हे ओर अपभीतो होगी..

मंजुला : देवु मे चाहतीहु जीस तराह ये सगाइ हुइ इसी तराह हम सादीभी रखदे..? सब अ‍ेकही जगाह रहेगे.. ओर इतनी सारी लेडीस होगी तो हम दोनोके बच्चेभी सम्हल जायेगे.. फीर यहा चंपाभाभी रश्मीभाभी ओर चारुभाभी भीतो आती जाती रहेगी.. क्या कहेते हो..

चंदा : हां ये सही हे.. मेभी हमारे गांवमे सादी रखना नही चाहती.. सब यहा नीपट जायेतो बहेतर हे..

देवायत : (हसते) हां ठीक हे तो सब तैय रहा हम सबकी सादी यही करते हे..

भानु : भाइ वो सबतो ठीक हे लेकीन कोइ डेट तो फीक्स करो.. वेसेभी १५ दीनके बाद राखी हे.. तो उनके बाद ही करदेते हे..

मंजुला : भानुभाइ फीरभी अ‍ेक देढ महीनातो लगही जायेगा.. तबतक हम दोनोकाभी नीपट जायेगा.. क्यु भावु.. क्या कहेती हो..?

भावना : दीदी इतना वक्ततो अ‍ेसेभी लग जायेगा.. सादीकी खरीदीभी तो करनी हे..

सरला : चलो तो यही ठीक रहेगा.. देवु बेटा तु फुरसतमे अ‍ेक महीनेके बादकी तारीख पंडीतजीसे नीकलवाले वो जो तारीख देगे उनमेही कर देगे..

देवायत : (हसते) अरे तारीख क्या नीकलवाना.. हम बाबासेही पुछ लेगे.. वोजो कहेगे फाइनल करदेगे..

भानु : (खुस होते) हां भाइ ये सही हे.. आप बाबाको ही पुछ लेना..

सरला : चलो तो सब तैय होगया.. तो भानु बेटा हम चले..? फीर तुजे तेरी मामीको भी छोडने जाना हे..

भावना : (हसते) नीलम अब तु यही रुकजा जबतक लताकी सादी नही होजाती.. ओर कहेतो तेरीभी सादी करवादे..? हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाके हसते) क्या भाभी आपभी.. अभी बहुत देर हे.. नही करनी सादी मुजे.. ओर इतने दीन नही रुक सकती.. हां सादीसे अ‍ेक हप्ते पहेले आजाउगी.. देखती हु अब..

सरला : (हसते) अरे रुकजा वेसेभी तेराभीतो वेकेशन लग गया हे..

देवायत : नीलम अब तु अपना बीस्तरा बोरीया बांधले.. तु अब सहेरमे होस्टेलमे रहेके पढेगी..

रमा : (सरमाते हसते) नही.. अब नही करवानी कोलेज.. पढके क्या करेगी..

भानु : अरे पढने दीजीये लडकी पढ लीखके काबील बनेगी तभीतो अपने पैरपे खडी रहेगी.. क्यु नीलम..?

नीलम : (खुस होते) हां भैया मुजे कोलेज करनी हे.. लेकीन इनमे खर्चा भीतो..

देवायत : वो सब तु चीन्ता मत कर सब होजायेगा.. तेरे दोनो भाइ हे.. बस तु पढाइमे ध्यान दे..

नीलम : (खुस होते) थेन्कयु भैया..

कहातो सब हसने लगे तब रमा तीरछी नजरसे भानुकी ओर देखते हसती रही.. तब खुसीसे हसते उनकी आंखमे गीलापन आगया.. सब साम तक अ‍ेसेही बाते करते रहे तभी चाइ नास्ताभी करलीया तब भानु सबको लेके जाने लगा.. तो सब गले मीलने लगे ओर लखनको अपने ससुराल आनेका न्योता देने लगे तब लखन खुब सरमाया तो लताभी लखनकी ओर तीरछी नजरसे हसती रही.. ओर सब चले गये.. अब हवेलीपे सब घरके लोग ही बचेथे तो चंदाने मौका देखते केह दीया..

चंदा : मंजु.. सब अच्छेसे नीपट गया तो अब मेभी चलु.. कीतने दीन होगये घरही नही गये..

मंजुला : (नीरास होते) मौसी रुकीयेना.. सब चले जाओगे..तो घरतो खाली होजायेगा.. ओर पता नही मुजेभी कब जाना पडे.. तो आपकोभीतो आना हे..

पुनम : (सरमाते) हां मम्मी रुक जाइअ‍ेनां..

चंदा : (हसते) हां अबतो तु रुकनेका बोलेगी ही.., हें..हें..हें.., लेकीन बेटी घरमे सब अ‍ेसेही पडा हे.. कीतने दीन होगये.. कुछ सफाइ बफाइ कर लेगे तबतक मंजुका टाइम होजायेगा तब आउगीनां.. तब रुकुगी..

देवायत : (हसते) मौसी रुक जाइअ‍ेना.. आपकी बहु इतने प्यारसे केह रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते देवुको मुका मारते) भैया.., आपभीनां..

कहेते अ‍ेक बार फीर देवायतके पीठमे मुका मारते अपने रुममे सरमाती हसती हुइ चली गइतो सब हसने लगे तब धिरेनभी हसते उनको जाते देखता रहा.. तभी मंजुने नोटीस करलीया ओर कहा..

मंजुला : (हसते) देख भाइ हम सब पुराने खयालके नही हे.. आजही सगाइ हुइ हे अबतो तुजे लाइसन्स मील गया हे.. हें..हें..हें.., तो जा पुनमको लेके कही बहार घुमके आ.. यहा पीछे ही गार्डन जेसा हे दोनो चले जाओ.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही क्यु देवु..?

देवायत : (हसते) हां साले साब अबतो आपभी मेरे जीजा हो गयेहे जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते) जीजु.. हमारा रीस्ता कुछभी होजाये.. मे रीस्ता नही चेन्ज करुगा.. आपही मेरे जीजा रहोगे..

कहातो अ‍ेक बार फीर चंदा जेंप गइ ओर वो अ‍ेक नजरसे धिरेनकी ओर देखती रही.. फीर सरमा गइ ओर अपनी नजर नीचे करली.. तब मंजु पुनमको आवाज देके बुलाती हे ओर धिरेनके साथ उसे बहार घुमने भेज देती हे.. तो दोनोही सरमसे पानीपानी होगये तब मंजुने दोनोको जबरदस्ती बहार भेज दीया ओर दोनोही सरमाके हसते बहार चले गये.. फीर बहार जाके दोनोही गार्डनकी ओर बाते करते चलने लगे..

धिरेन : पुनो.. आखीर तुम मुजे मीलही गइ.. देखना मे तेरा साथ जींदगीभर नीभाउगा..

पुनम : (सरमाते हसते) मे भी.. वेसे आपकी जोब कब लग रही हे..?

धिरेन : बस अ‍ेपलीकेशन दीयातो हे.. देखतेहे कोल लेटर कब आता हे.. वरना कुछ बीजनेस करुगा..

पुनम : धिरेन ये नोकरी मीजायेती वोही करना.. मेने सुना हे बेंककी नोकरी बहुतही अच्छी होती हे..

धिरेन : हां लेकीन मुजे सहेरसे अप डाउन भीतो करना पडेगा.. अगर हम दोनो सहेरमे रहेने गयेतो मम्मी इधर अकेली होजायेगी.. पता नही उनका टाइम केसे नीकलता हे..

पुनम : धिरेन.. अ‍ेक बात कहु.. बुरा मत माना.. ये मेरे अपने विचार हे.. सीर्फ आपको बता रही हु..

धिरेन : (हसते) पुनो अब तु मेरी होने वाली बीवी हे.. तेरा क्या बुरा मानना.. बता क्या बात हे..

पुनम : धिरेन मेरे खयालसे मम्मीको तबही सादी करलेनी चाहीये थी.. तुजे नही पता अकेली ओरतकी जींदगी कैसी होती हे.., मुजेतो पता नहीथा की मेरी सगाइ तुमसे होने वाली हे वरना मे तुजे रोज फोन करती.. तो मम्मी अकेली केसे रेह पाती हे.., ओर वेसे देखा जायेती अभीभी बहुत छोटी लग रही हे..

धिरेन : (दोनोही गार्डनमे जाते) पुनो अब तु मेरी अर्धांगीनी होने जा रही हे.. पता नही तुमसे बात करनी चाहीयेकी नही.. लेकीन दीदीने मुजे कसम दीहे तो मे नही बता सकता..

पुनम : (सीरीयस होते दोनो अ‍ेक बेचपे बेठते) धिरेन क्या मुजे पराया समजते हो.. तो मत बता.. क्या बात हे जो तुम इतना हीचकीचाते हो.. मे फोर्स नही करुगी तुम्हारी मरजी हे..

धिरेन : नही पुनो तुजे पराइ नही मानता.. अबतो तु मेरी अपनी हे.. तुजे नही बताउगा तो कीससे बताउगा.. लेकीन मुजे प्रोमीस कर की ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी.. कीसीको नही बतानी.. मम्मीकोभी नही ओर दीदीकोभी नही की मेने तुजे बताया हे..

पुनम : धिरेन आइ प्रोमीस मे वादा करतीहु कीसीको नही बताउगी.. बोलो क्या बात हे..

धिरेन : पुनो.. दीदी यानी तुम्हारी भाभी अब अ‍ेक दो सालकी ही महेमान हे.. उसने जीजुके वारीसके लीये अपना बलीदान देदीया.. दोनो अ‍ेक दुसरेको इतना चाहतेहे की दीदीने अपनी जानकीभी परवाह नहीकी..

पुनम : (चोंकते आंखमे आंसुके साथ) क्या केह रहे हो आप..? ये नही होसकता.. भाभी कीतनी प्यारी हे..

फीर धिरेन पुनमको सब कुछ बता देता हे जो उसे मंजुलाने बताया था यहा तक उनकी मम्मीकी सादीके बारेमेभी बात बतादी जीसे सुनके पुनमको जोरोका जटका लगा.. क्युकी वो देवायतको बहोत चाहती थी.. ओर उनकी सास उनकी भाभी ओर सौतन बनने वालीथी तो पुनमको ज्वेलेसी फील होने लगी.. फीर उसने काफी कुछ सोचा ओर अ‍ेक नीर्णय लीयाकी वो अब अपने ससुराल वाले घरमेही रहेगी.. ओर धिरेन जोबपे चला जायेगा तब वो घरपे अकेली होगी.. ओर देवायतको बडी आसानीसे मील सकेगी यही सब सोचके उसनेभी चंदा ओर देवायतकी सादीकी सहमती देदी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २४

फीर धिरेन पुनमको सब कुछ बता देता हे जो उसे मंजुलाने बताया था यहा तक उनकी मम्मीकी सादीके बारेमेभी बात बतादी जीसे सुनके पुनमको जोरोका जटका लगा.. क्युकी वो देवायतको बहोत चाहती थी.. ओर उनकी सास उनकी भाभी ओर सौतन बनने वालीथी तो पुनमको ज्वेलेसी फील होने लगी.. फीर उसने काफी कुछ सोचा ओर अ‍ेक नीर्णय लीयाकी वो अब अपने ससुराल वाले घरमेही रहेगी.. ओर धिरेन जोबपे चला जायेगा तब वो घरपे अकेली होगी.. ओर देवायतको बडी आसानीसे मील सकेगी यही सब सोचके उसनेभी चंदा ओर देवायतकी सादीकी सहमती देदी....अब आगे

धिरेन : पुनो.. सायद हमारी सादीके बाद मम्मी ओर जीजुकी सादी होजाये.. लेकीन दोनोही अभी नही मानते..

पुनम : धिरेन येतो बहुतही अच्छा हे.. मम्मीकी जींदगीभी सवर जायेगी.. हम उसे मनायेगे..

धिरेन : पागल हो क्या..? पुनो हम उसे केसे बात करेगे.. की आप जीजुसे सादी करलो.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) धिरेन आप जुदाइकी तडपको नही जानते.. मेरे खयालसे मम्मी ओर भाइको अभी साथमे रहेनेका मौका दो.. जब दोनोकी अच्छेसे जमने लगे तब दोनोको जुदा करदो तब मम्मी ओर भाइ दोनोही अ‍ेक दुसरेको मीलनेके लीये तडपेगे.. तब हम उनको सादीके लीये कहेगे.. क्या कहेते हो..?

धिरेन : (हसते) इन बातमे ओरतोका दीमाग बहुत चलता हे.. बस हम पुरुषोको तो सीर्फ प्यार करना ही आता हे.. क्या दीमाग हे तेरा..

पुनम : (खुस होते जुकके) सुक्रिया.. जनाब.. हें..हें..हें.., लेकीन धिरेन भाभीने इतनी बडी बात केसे छुपाइ..

धिरेन : पुनो.. सायद इसेही सच्चा प्यार कहेते होगे.. दोनोका प्यार बहुतही गहेरा हे.. पता नही जीजुपे क्या गुजरेगी.. मुजे लगता हे जीजुको पता चल गया लगता हे तभीतो दो दीनसे उनका मुड ठीक नही हे.. ओर देखती नही दो दीनसे दीदीका कीतना खयाल रखते हे.. भगवान उसे दुख सहेन करनेकी सक्ती दे..

पुनम : (मनमे सोचते) धिरेन मे मेरे देवुको सम्हालुगी.. उसे वो हर सुख दुगी जो भाभी देतीहे.. बल्की उनसेभी ज्यादा प्यार करुगी.. मे तुमसे सादी सीर्फ दीखावेकी कर रही हु ताकी मुजे दुनीयाके सामने सर्मींदा ना होना पडे.. धिरेन मेने कसम खाइहे.. मेरा कौमार्य सीर्फ भाइकोही सोपुगी.. फीर तुम मुजे छु सकोगे..

धिरेन : (पुनका हाथ पकडते) पुनो.. पुनो.. क्या सोचमे पड गइ.. क्या यहा सीर्फ हम बाते करने आये हे..

पुनम : (सरमाते नजर चुराते) तो फीर.. ओर क्या करना हे..

धिरेन : पुनो बस अ‍ेक कीस बीस..

पुनम : (सरमाते हसते) मुजे नही पता.. इधर कोइभी आ सकता हे..

धिरेन : (उनकी गरदनमे हाथ डालते) अरे अजाना कोइ नही देखेगा.. तु नखरा बहुत करती हे.. पता नही लखन भैया ओर लताभाभीने तो क्या क्या करलीया.. चलना..

पुनम : (सरमते धीरेसे) बस सीर्फ कीस ही.. ओर कुछ नही.. बाकी सादीके बाद..

धिरेन : (अपने मुहकी ओर खीचते) अरे अ‍ैसा थोडी चलता हे.. ठीक हे कीस ही सही..

कहेते धीरेसे धिरेनने अपने होंठ पुनमके होंठोपे रख दीये ओर दोजोही मदहोसीमे छाने लगे तब स्मुच करते धिरेनने अ‍ेक हाथ पुनमके बुब्सपे रख दीया तो पुनमके सरीरमे अ‍ेक बीजलीसी करंट दोड गइ ओर वो सरसे पांव तक कांप गइ वो अ‍ेसे कीसी लडकेके साथ पहेली बार कर रहीथी.. ओर धिरेनके मुहमे अपनी जीभ डालने लगी ओर दोनोकी जीभ अ‍ेक दुसरेके मुहमे जानेके लीये पेच लडाने लगी..




धिरेन : (होंठ चुमते) ओह..पुनो.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..( हाथ चुतपे रखता हे)

पुनम : (सरमाते धीरेसे) आइ लव यु टु.. बस.. बस.. वहा नही.. प्लीज..प्लीज..धिरेन.. नही नही..नही..

कहेते पुनम जटसे खडी हो जाती हे ओर धिरेनको वापस जानेके लीये कहेती हे.. तब धिरेन भारी मनसे खडा होगया.. तब उनके पेन्टमे तंबु हो गयाथा.. तो पुनमने देखलीया ओर नजर घुमाते सरमा गइ ओर मुस्करातने लगी.. तब धिरेन पेन्टमे हाथ डालके लंडको अ‍ेडजेस्ट करने लगा.. ओर पुनमसे कहा...

धिरेन : सीर्फ उपरसे ही छुआथा.. देख लेना उसका बदला जरुर लुगा.. सब हमारी सुहागरातमे वसुल कर लुगा.. तुने मुजे बहोत तडपाया हे..

पुनम : (सरमाते) तब देखते हे.. आपमे कीतना दम हे.. लेकीन अभी चलो.. हें..हें..हे..

धिरेन : (दोनो साथ चलते) हसले बच्चु.. देखना फीर केसे चीलाती हे.. मे चीख नीकलवा दुगा..

पुनम : (सरमाते हसते) हां तबकी तब देखेगे..कोन चीलाता हे.. अब चलोभी मजनुजी.. हें..हें..हें..

तब पुनम मनमे सोचती हेकी तु क्या चीख नीकलवायेगा कभी मेरे भाइका लंड देखा हे..? कीतना बडा ओर मोडा हे तेरी दीदीकी चीख मेने कइ बार सुनीहे ओर तेरी दीदीको चोदवाते हुअ‍े कइ बार देख चुकी हु.. बस अब मेरी चीखतो मेरे भाइही नीकलवायेगे.. देखना.. फीर तेरी गैर मौजुदगीमे मे भाइसे कैसे चुदवाती हु..

धिरेन : यार तु हर बार क्या सोचमे डुब जाती हे..?

पुनम : (बातको घुमाते) धिरेन मे भाभीके बारेमे सोचती हु.. फीर भाइका क्या होगा..? क्या मम्मी मान जायेगी..? वरना हम दोनो कोसीस करेगे..

धिरेन : अरे तु इनकी चीन्ता मत कर.. सायद दीदीने मम्मीसेभी बात करली हे.. मुजे लगता हे पहेले हमारी सादी होजायेगी.. फीर कुछ करेगे.. मे दीदीसे पुछ लुगा..

पुनम : धिरेन इनमे मेरी कुछ हेल्प चाहीये तो कहेना.. ओर हां अगर बाय चान्स दोनो सादी करभी ले तोभी हम हमारे धरमे ही रहेगे..

धिरेन : हां पुनो.. मेनेभी यही डीसाइड कीया हे वरना मम्मी हमारी हाजरीमे खुलके नही जी सकेगी.. ओर सरर्मीन्दा होती रहेगी.. तो हम हमारे घरमेही रहेगे.. कभी मीलनेका मन करेतो आजायेगे..

पुनम : (खुस होते) हां ये सही हे..

कहेते दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते चलने लगे.. इधर जब पुनम ओर धिरेन बहार नीकल गये तब केवल चंदा मंजु ओर देवायतही थे.. तब मंजुने मौका देखके बात छेड दी..

मंजुला : (हसते) मौसी अब आप दोनोभी कुछ डीसाइड करलो.. धिरेनतो मानही गया हे..

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते) मंजु.. क्या ये अभी सही हे.. पुनमकोभी नही पता.. ओर वो धिरेनसे भी बात करनी हे.. तभीतो घर जा रही हु.. क्युकी यहा बात करना उचीत नही हे..

मंजुला : मौसी मेने धिरेनसे कहा हे वो पुनोसे बात करलेगा.. आपभी धिरेनसे बात करलो.. वो मना नही करेगा.. बस मे चाहती हु आप जल्द से जल्द इस घरमे आजाये.., देवु आपतो कुछ बोलो..

देवायत : मंजु अब मुजे क्या बोलना हे.. बस आप दोनोही सब डीसाइड करलो.. आप जो कहेगे मंजुर हे..

चंदा : (सरमाते) मंजु.. हम कल घर जा रहेहे.. इस बारेमे फीर बात करेगे.. पहेले तेरी डीलीवरीतो हो जानेदे.. हमारे पास काफी टाइम हे.. तो धिरेन पुनमकी सादीके बाद डीसाइड करते हे..

मंजुला : (हसते) ठीक हे मौसी.. देवु आप दोनोको कल सुबह घर छोड देगा.. जब डीलीवरीका टाइम आये तो आपको बुलवा लुगी..

तब चंदा नजर चुराते बार बार देवायतकी ओर देख रही हे.. दीलतो उनकाभी कहेताहे की वो जटसे इस घरमे आजाये.. क्युकी अब उसेभी देवायतके बीना अच्छा नही लगताथा फीरभी वो अ‍ेक बार धिरेनसे बात करना चाहतीथी तभी धिरेन ओर पुनमभी आजाते हे.. तो आतेही पुनम अपनी भाभी मंजुकी ओर देखती हे तो उनकी आंखसे आंसु नीकलने लगते हे.. तब वो अपने आंसु छुपाते अपने रुममे दोडके भाग जाती हे..

चंदा : (पुनमको देखते) अरे बेटा इसे क्या हुआ..? तुम दोनोके बीचतो कुछ अनबनतो नही हुइ..?

धिरेन : नही मोम.. बस.. वो दीदीको देखते.. थोडा इमोस्नल होगइ..दीदीको लेकर हमारी बात हुइथी..

मंजुला : (गभराते) क्या..? धिरेन तुमभीनां.. मे आरामसे उसे बात करतीनां..? चल मुजे जाना पडेगा वरना रोती ही रहेगी..

कहेते वो जटसे उठ गइ ओर पुनमके रुमकी ओर जाने लगी तब देवायतकी आंखभी गीली होगइ तो वोभी जटसे बहार चला गया.. ओर अपनी कार लेके खेतोपे आगया.. उधर मंजु पुनमके पास चली गइ.. तो पुनम उल्टी पेटके बल लेटते तकीयेमे मुह छुपाके रो रहीथी तब मंजु उनके सरके पास बेठ गइ ओर उनके सरपे हाथ रखते धीरे धीरे सहेलाती रही तब पुनमने सर उचा करके मंजुको देखातो फोरन मंजुकी गोदमे सर रख दीया.. ओर वापस फुटफुटके रोने लगी..

पुनम : (रोते हुअ‍े) भाभी क्या हुआ हे आपको..? क्या मुजेभी बताना जरुरस नही समजा..?

मंजुला : (सर सहेलाते) नही पुनो.. मेने कीसीको नही बताया था.. वो धिरेनसे भी तीन दीन पहेले बात हुइ..

पुनम : भाभी क्या हम पराये हे.. कमसे कम मुजेतो कहेती.. भाइकोभी नही बताया.. ओर आप जानती थी.. फीरभी क्यु बच्चा कीया..? येभी नही सोचा भाइका क्या होगा.. कोन सम्हालेगा.. उसे..?

मंजुला : (हसते) सुन.. मे चाहती थी इस हवेलीके वारीसको मे अपनी कोखसे जन्म दु.. बस.. ओर कुछ नही.. ओर मेरे देवुको सम्हालनेके लीये.. मेने इन्तजाम करलीया हे.. क्या धिरेनने तुजे नही बताया? मेने उसे कहा था.. तुजे बतानेको.., जो बहार बेठी हे तेरी सास वोही तेरी भाभी होजायेगी.. ओर वेसेभी तुमतो हो.. तेरा भाइ तुमको बहोत मानता हे.. तुम सास बहु सम्हाल लेना मेरे देवुको.. हें..हें..हें..

पुनम : (रोते हुअ‍े हसती हे मुका मारते) भाभी आप बहुत गंदी हो.. वो मेरा भाइ हे..

मंजुला : अरे पगली भाइ हेतो क्या हुआ.. बीवीका प्यारतो वो तेरी सास देगी.. बस तुम उसे कभी अकेला मत छोडना.. देखना मेरा देवु कभी नीरास ना हो..

पुनम : (मंजुको हग करते) भाभी आप भाइको कीतना चाहती हो..? मेभी आपसे वादा करतीहु.. भाइको कभी नीरास नही होने दुगी.. उनकी हर जरुरतका खयाल रखुगी.. आप फीकर मत करना.. मे हुनां..

मंजुला : (पुनमका सर चुमते) चल ठीक हे.. जा हुलीया साफ करले.. ओर सुन.. तुम दोनोकी सादी होतेही तेरी सासको हम यही बुला लेगे.. सब तैय हो गया हे.. बस उनको सीर्फ धिरेनसे बात करनी हे..

पुनम : (हसते) भाभी आप धिरेनकी चीन्ता मत करना.. हम दोनो चाहते हे मम्मीजीकी सादी भाइसे होजाये.. उनकीभी जींदगी सवर जायेगी.. लेकीन हम दोनोने डीसाइड कीया हे.. सादीके बाद हम दोनो हमारे घरही रहेगे यहा नही.. वरना मम्मीजी खुलके नही रेह पायेगी ओर सर्मीन्दा होती रहेगी..

मंजुला : (हसते) अरे वाह.. मेरी ननंद नेतो काफी कुछ सोच लीया हे.. चलो ठीक हे.. जेसे आपकी मरजी..

फीर पुनम मुह धोके फ्रेस होजातीहे फीर दोनोही हसती बहार आके बेठ जातीहे तब चंदाके मुहपे स्माइल आजाती हे तब पुनम चंदासे चीपकके बेठ जातीहे ओर उसे बेठेही हग करते हसने लगती हे.. तब चंदा काफी कुछ समज जाती हे.. ओर पुनमके सरको चुम लेती हे ओर सब आपसमे बाते करने लगती हे उघर देवायतभी खेतोपे चला गयातो वहा कोइ नही दीखा तो वो अपनी ओफीसमे आके बेठ गया..

तभी वहा जमीला आगइ ओर आतेही दरवाजा बंध करलीया ओर देवायतको लेके उनके रुममे चली गइ, आजभी जमीलाको देवायतने जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया, जमीलाको दो बार जडाके भी दोनोके बीच धमासान चुदाइ जारी रही.. ओर आखीर जमीलाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके दोनही जडने लगे ओर देवायतने अ‍ेक बार फीर जमीलाकी चुतको अपने पानीसे भरके हरी भरी करदी..




दोनोही साथमे नहाये बहार आके तैयार होगये तब जमीला लडखडाती चालसे अपने रुमकी ओर चली गइ.. ओर अपने बेडपे जातेही गीर गइ ओर गहेरी नींदमे चली गइ.. वो दो दीनसे जान बुजके देवायतसे जुदवानेके लीये आती थी.. क्युकी उनको बच्चेकी तडप बहुत बढ गइ थी.. वो चाहतीथी की उनकी कोखमे अपने यारका बच्चा आजाये वो बस इसी मक्सदसे ही यहा खेतोपे काम कर रही थी..

फीर अंधेरा होतेही देवायत हवेलीपे आगया फीर सब खानेके लीये बेठ गये तब चंदा बहुतही सरमाती रही ओर देवायतको नजर चुराते देखती रही.. जबभी दोनोकी नजरे मीलती चंदा सरमाके मुस्करा देती ओर नजर घुमा लेती.. तब पुनम सीर्फ चंदाकोही तीरछी नजरसे देखती रही ओर उनकी हर हरकतोपे नजर रख रही थी तभी देवायतको अपने पैरपे कीसीका पैर महेसुस हुआ जो उनका पैर सहेला रहाथा..

तभी देवायतने थोडा पीछे हटते नजरको नीचेकी ओर करते देखा तो ये पैर पुनमका था जो अनजान बनके अपने भाइके पैरको सहेला रही थी.. तो देवायतनेभी धीरेसे अपने पैर पीछे करलीये.. तब पुनमने उनकी ओर थोडी नाराजगीसे देखा.. ओर खाने लगी.. सबने डीनर करलीया ओर सब होलमे सोफेपे आके बेठ गये.. फीर सबने थोडी देर बस अ‍ेसेही बाते की ओर ओर अपने अपने रुममे सोने चले गये..

उस रात लखन ओर लताने हमेसाकी तराह फोन सेक्स कीया तो धिरेनभी पुनमसे सब कपडे नीकलवा के अपने आप लंड हीलाके सांत होजाता हे ओर सोजाता हे.. तो दुसरी ओर चंदाभी करवटे बदलती रही.. वो अ‍ेक दो बार बहार आके देखभी गइ की देवायत पानी पीनेही आजाये.. तब दुसरी ओर मंजु ओर देवायत दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे प्यारभरी बाते करते रहे ओर बीच बीचमे होंठ चुमते रहे.. देवायतभी जमीलाकी जमकर चुदाइ करके आयाथा तो वोभी ज्यादा कुछ नही करना चाहता था..




अ‍ेसेही सब सो गये.. तभी उधर भानुके गांवमेभी सब खाना खाते बेठे थे तभी भानु ओर उनकी मामी रमाने दोनोही इसारोमे बात करने लगे तब भावनाकी नजर उनकी ओर चली गइ ओर वो सर नीचा करते तीरजी नजरसे देखते खाना खाती रही उनको कुछ अजीब लगा.. ओर वो भानु ओर रमापे सक करने लगी.. तो भानु ओर रमानेभी इसारोसे देर रात कीचनमे मीलनेका तैय कीया फीर सभी सोने लगे..

भानुभी सुबह अपनी मामी ओर उनकी बेटीको अपने घर छोडने जाने वालाथा तो आज रमाभी अपने माने हुअ‍े पतीसे जीभरके चुदवा लेना चाहती थी.. कइ दीन हो गयेथे जो मामी ओर भांजेका मीलन नही हुआ था.. तो वोभी भानुको अकेलेमे मीलनेके लीये तडप रहीथी.. ओर सोनेका नाटक करने लगी तब दुसरी ओर भावु ओर भानुभी अपने बेडपे आके लेट गये तब भावुभी सोनेका नाटक करने लगी..

तब दुसरी ओर सरलाभी आज देवायतको देखते उतेजीत हो गइथी उसने सुबहसे ही अपने आपको बडीही मु्सकीलसे कंट्रोल करके रखाथा.. तब अपने रुममे जातेही वो नंगी होगइ ओर अपने अ‍ेक हाथसे अपना बुब्स मसलते दुसरे हाथकी उंगली अपनी चुतमे घुसादी ओर आंख बंध करते देवायतको इमेजींग करने लगी ओर अपनी चुतमे उंगलीको तेजीसे अंदर बहार करने लगी फीर थोडीही देरमे उनकी चुतसे पानी नीकल गया ओर वो सांत होगइ फीर अपनी चुतको साफ करके कपडे पहेनके सो गइ..




जब सभी सोगये तब भानु धीरेसे उठके बहार आगया फीर वो लताकी खीडकीसे देखने लगा तो लताभी हमेसाकी तराह नंगी होके सो गइथी तो लताके रुमका दरवाजा बहारसे बंध करदीया तब वो धीरेसे कीचनमे चला गया तो वहा पहेलेसे ही रमा खडी थी.. तब वो धीरेसे उनके पीछे चला गया ओर पीछेसे ही रमाको बाहोमे भरलीया ओर उनकी गरदनको चुमने लगा..




तभी रमा पलट गइ ओर भानुको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी तो भानुभी उनके बुब्स पकडते मसलने लगा ओर रमाके चहेरेको पकडके उनके होंठ चुमने लगा.. दोनोही कामाग्नीमे जलने लगे.. रमाकी चुत लगातार पानी छोडने लगी.. वो भानुके सर्टके बटन खोलने लगी तब भानुभी उनकी सारीका पलु गीराके रमाके ब्लाउसका हुक खोलने लगा तो थोडीही देरमे दोनोने अ‍ेक दुसरेको बीलकुल नंगा करदीया.. तभी भानु रमाको वही नीचे फर्सपे लीटा देता हे ओर खुद उनके उपर जुकके रमाकी गरदनको चुमने लगता हे तो रमा अ‍ेकदम उतेजीत होगइ ओर भानुके सरको सहेलाते अपनेही होंठ आपसमे दबाने लगी..




तभी भानु अपनी अ‍ेक टांग रमाके उपर डालते उनके उपर चड जाता हे तब रमा नीचे हाथ लेजाते भानुका लंड पकड लेतीहे.. फीर चार पांच बार हीलाके अपनी चुतके लव होलमे सेट कर देती हे.. ओर भानुको अपनी बाहोमे भर लेतीहे तभी भानु अ‍ेक जटका मारता हे तो रमाके मुहसे आह.. नीकल गइ ओर वो पुरी तराह मदहोस होगइ तभी भानु रमाकी गरदनको चुमते धीरे धीरे कमर हीलाके रमाको चोदने लगता हे..




तो रमाभी धीरे धीरे कमर हीलाते भानुका साथ देने लगी भानुके हर धकेके साथ वो सातवे आसमानमे जाने लगी आधी नसीली आंखसे वो चुदाइका पुरा आनंद ले रहीथी.. जो इनके पतीसे नही मील रहाथा.. तभीतो भानुसे सबंध बनाके उनको ही पती मानलीया था अब वो हर दीन भानुके नामका सींदुर अपनी मांगमे भर रही थी यहा तक अपने गलेमे पेंडलमेभी उनकी ओर भानुकी तस्वीर लगाइ थी..




तभी थोडीही देरमे भानुने अपनी स्पीड बढाइ तब रमाकी सीसकारीया जोरोसे नीकलने लगी तब दो आंखे भानु ओर रमाकी चुदाइकी रास लीला देख रहीथी जब भानुको अपनी जगाह नही देखातो उनको ढुढते हुअ‍े वो धीरेसे बहार आगइ.. ओर उसे कीचनमे जोरोकी कीसीकी सीसकारीया सुनाइ देने लगी तब वो धीरेसे कीचनकी ओर आगइ ओर छुपकेसे भानु ओर रमाकी चुदाइ देखने लगी.. वोथी भावना.. भानुकी बीवी..

इनको आज भानुकी करतुत देखते भानुसे सादीका बहुत पछतावा होने लगा.. अब क्या हो सकताथा.. अभी भानुका दुसरा बच्चाभी आजायेगा.. लेकीन आज भावनाको अपने पुराने प्यारको पानेका रास्ता मील गया.. अब उसे भानुकी कोइ परवा नही थी.. वो भलेही भानुके साथ रहेगी लेकीन अब हमेसाके लीये भानुसे सबंध नही रखनेकी कसम खाली.. ओर वो चुपचाप वापस अपने रुममे चली गइ ओर सोगइ..

इधर भानु ओर रमा दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगीथी तभी भानु अ‍ेकदमसे रमासे चीपक गया तो रमानेभी अपने दोनो पैर उपर करते भानुको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होंठ आपसमे जुड गये तभी रमाको अपनी चुतमे भानुका वीर्य महेसुस हुआ ओर वोभी उतेजीत होके साथमे जडने लगी ओर थोडीही देरमे दोनोही सांत होगये तब भानु रमाके सीनेपे सर रखके ढेर होगया ओर रमा उनकी पीठ सहेलाती रही.. जब दोनोही सांत हुअ‍े तबभी भानु रमाकी चुतमे लंड डालके पडाथा जो चुतमे मुरजा गया था..

रमा : (धीरेसे) भानु.. अबतो आप आतेही नही.., ओर क्या जरुरतथी नीलमपे इतना खर्चा करनेकी..

भानु : (होंठ चुमते) अरे डार्लींग ये खर्भा देवु दे रहा हे.. तुम फीकर मत कर..

रमा : (आस्चर्यस देखते) लेकीन वो इनका खर्या क्यु दे रहेहे..? कही आपनेतो उनको नही कहा..?

भानु : नही डार्लींग.. वो मेरा बचपनका यार हे.. हमने आज तक अ‍ेक दुसरेकी बात नही छुपाइ.. जब उनको पता चलाकी अब तु मेरी बीवीहे ओर नीलम हमारी बेटी हे तो उसने फोरन पढनेको केह दीया.. लताकोभी तो उन्होनेही पढाया हे..

रमा : (थोडा गभराते) लेकीन उनको बताया कीसने..? कही आपनेतो नही..

भानु : (बीचमेही) हां.. मेनेही बताया हे.. ओर तु फीकर मत कर ये बात सीर्फ उनके तक ही सीमीत रहेगी.. वोतो सुनके बहोत खुस होगया की चलो.. अ‍ेक दुखी ओरतको तुने सहारा दीया.. वो बहुत अच्छा हे..

रमा : भानु प्लीज उनको कहेना ये बात कीसीको ना कहे.. वरना हम दोनोकी जींदगी खराब होजायेगी.. ओर वेसेभी जबतक नीलमके पापा हे तबतकतो मुजे वही रहेना पडेगा.. अब बहोत पीने लगे हे..

भानु : रमा तु फीकर मत कर.. वो अब ज्यादा जीन्दा नही रहेगे.. तब मे तुजे यही लेकर आउगा ओर अपने साथ रखुगा.. मेरी दुसरी बीवी बनाके..

रमा : पागलहो क्या..? भावना क्या कहेगी..? ओर बुआका भी सोचा हे..?

भानु : बुआकोतो पता हे.. उनका भाइ कैसा हे.. ओर भावनाको मे मना लुगा.. वो मान जायेगी..

रमा : (सरमाते धीरेसे) ध्यान रखना.. कही गडबड ना होजाये.. वेसे नीलमको मे समजा दुगी.. अब उतरो.. मेरी पुरी चुत भरदी.. अच्छा हे ओपरेशन करवा लीया हे.. वरना तुमतो पका मुजे पेटसे कर देते..

भानु : (हसते) तो अच्छा हेना.. नीलमका भाइ या बहेन आजाते.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) हसो मत.. कोइ सुनलेगा.. ओर बच्चा चाहीये.. सरम करो.. बस मुजे इसी तराह खुस करो यही मेरे लीये बहोत हे.. चलो हटो.. वरना कोइ इधर आजायेगी..

तब भानु उपरसे हट जाता हेतो रमाकी चुतसे दोनोका कामरस उनकी चुतसे उनके पैरमे उतरने लगता हे तब रमा जटसे अपनी पीन्टीसे चुतको साफ करने लगती हे.. फीर भानुके लंडकोभी साफ करदीया ओर वो खडी होके अपने कपडे पहेनने लगी.. तब भानुभी अपने कपडे पहेनने लगा जब कपडे पहेनलीये तब रमाने अपने खुले बालका जुडा बनालीया तब भानुने अ‍ेक बार फीरसे रमाको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमलीया तब रमानेभी उनका साथ दीया.. ओर वो भानुको धका मारते अपने रुमकी ओर जाने लगी..

तब भानुभी हसते हुअ‍े अपने रुममे चला गया ओर भावनासे चीपकके सो गया.. तब तो भावनाने सीफततासे भानुका हाथ अपने उपरसे हटा दीया.. वो जाग रहीथी.. लेकीन अभी इस बारेमे वो भानुसे बात करना नही चाहतीथी.. वरना उनका घर बीखर जाता यही सोचते वो चुपचाप पडी रही.. ओर अ‍ेसेही सब सो गये..

सुबह सब आरमसे उठे आज कीसीको कोइ जल्दी नही थी.. बस दीनथा तो सीर्फ बीछडनेका भाजुसे रमा बीछड रहीथी तो देवायतसे चंदा.. ओर धिरेनसे पुनम.. सबके दीलके अ‍ेक कोनेमे बीछडनेका गम था.. हवेलीपे सब नहा धोके बहार आगये.. ओर सब चाइ नास्ता करने बेठ गये तब कोइ कुछ नही बोल रहाथा.. मंजु नही चाहतीथी की चंदा इस घरसे जाये.. ओर नाही चंदा इस घरको छोडना चाहती थी..

बस सभीको कुछ समयकी राह देखनी थी.. उधर भानुके घरभी आज सनाटा छाया लगता था.. आज भावना बहुतही नीरास दीख रहीथी.. मानो उनकी पुरी दुनीया उजड गइहो.. तब दुसरी ओर रमाकोभी भानुसे बीछडेका गम था.. नीलम ओर लता दोनोही चुपचाप चाइनास्ता कर रहीथी.. तभी सरलाने बात छेडदी..

सरला : रमा.. अब तेरे पतीको केह कुछ काम धंधा करले अभी लडकी जवान होजायेगी.. सादीमेभी खर्चा होगा कहासे नीकालेगा.. सारा दीन दारु पीके पडा रहेता हे..

रमा : (भानुकी ओर देखती रही) दीदी.. अबतो पहेलेसेभी ज्यादा पीने लगे हे.. सोचतीहु अब मेही कही कामपे लग जाउ.. हमारातो जीना हराम करके रखा हे.. कुछ बोलोतो मारनेके लीये दोडता हे.. अबतो नीलमपे भी हाथ उठाता हे.. येभी नहीकी लडकी अब जवान होती जा रही हे.. क्या करु में..

भानु : (गुसेसे) क्या.. नीलमपे हाथ उठाता हे..? तो आप कुछ कहेती नही..? साला..

सरला : लगता हे अब नही सुधरेगा.. तु अ‍ेक काम कर.. अब तुम दोनो मां बेटी यही रहेने आजाओ.. वो भलेही वहा सडता रहे.. कमसे कम यहा काम करके दो रोटीतो चेइनसे खा सकोगी..

भानु : (खुस होते) हां मामी.. बा ठीक केह रही हे.. आप इधर आजाओ..

कहातो भावना भानुकी ओर घुरते देखने लगी.. हालाकी ये बात कीसीने नोटीस नही की.. लेकीन अब उसे भानुसेभी कोइ वास्ता नही था.. वो अपना मन बना चुकीथी.. वो अपनी जींदगी अब अपने तरीकेसे जीना चाहती थी.. ओर भानुसे सबसे छुपके बदला लेना चाहती थी.. उसने रातमे जागते काफी कुछ सोचके रखाथा.. अब उसे कीसीभी हालमे अपने प्यारको पानाथा जो प्यार उसे नही मील पाया..

जब नास्ता करलीया तब भानु अपनी कारमे रमा ओर नीलमको छोडने चला गया तब नीलम साथमेथी तो दोनो ज्यादा बातचीतभी नही करपाये.. नीलम आगे बेठीथी तब भानु सेन्ट्रल मीररसे पीछे बेठी रमाको देखता रहा.. ओर दोनोही मीररसे आंखोके इसारेसे बात करते रहे तभी भानुने नीलमकी ओर इसारा कीया तब रमाने उसे आंखोसे ही मीलनेका आस्वासन दीया तब भानुके चहेरेपे स्माइल आगइ..

उधर हवेलीपेभी सबने चाइनास्ता करलीया तब धिरेन उपरसे अपना सामन नीचे लेकर आगया.. तो चंदानेभी अपने सब कपडे पेक कर लीयेथे जब जानेका टाइम आया तब चंदा मंजुके गले लग गइ तब दोनोही फुटफुटके रोने लगी बडाही गमगीन वातावरण होगया तब पुनमकी आंखमेभी आंसु छलकने लगे.. वोभी चंदासे लीपटके रोने लगी.. तब चंदाने दोनोके आंसु पोछे ओर पुनमका सर चुमलीया.. तब..

पुनम : मम्मीजी.. बस जल्दी आजाइअ‍े..

चंदा : (दोनो गाल सहेलाते) हां मेरी बच्ची.. बस कुछ दीनकीतो बात हे..

तभी धिरेन मंजुके गले लग गया तो धिरेनभी जोरोसे रोने लगा.. मानो वो अपनी चहीती दीदीसे हमेसाके लीये बीछड रहा हो.. तभी मंजुनेभी धिरेनका सर चुमलीया ओर उसे यहा आते रहेनेको कहा.. फीर धिरेन ओर लखनभी गले मीले.. तो दया ओर रजीयाभी चंदाको गले मीली.. फीर देवायत कारमे बेठ गया तो धिरेनभी अपना सब सामान रखके आगे बेठ गया तब चंदाभी भारी मनसे पीछे बेठ गइ, मंजु पुनम दया रजीया सब चंदाको कार तक छोडने आये ओर देवायतने कारको बहारकी ओर जानेदी..

पुरे रास्ते चंदा सीर्फ देवायतको देखती रही तब धिरेन बीच बीचमे देवायतसे हस हसके बात कर रहाथा ओर तीनो अपनी मंजील यानी चंदाके धर पहोंच गये.. तो देवायत बहारसे ही दोनोको उतारके नीकल रहाथा तो धिरेनने उसे जबरदस्ती अंदर आनेको कहा.. तो देवायतभी हसते हुअ‍े कारसे उतर गया तब चंदा घरके दरवाजेका ताला खोल रहीथी.. जेसेही दरवाजा खोलके अंदर गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५

पुरे रास्ते चंदा सीर्फ देवायतको देखती रही तब धिरेन बीच बीचमे देवायतसे हस हसके बात कर रहाथा ओर तीनो अपनी मंजील यानी चंदाके धर पहोंच गये.. तो देवायत बहारसे ही दोनोको उतारके नीकल रहाथा तो धिरेनने उसे जबरदस्ती अंदर आनेको कहा.. तो देवायतभी हसते हुअ‍े कारसे उतर गया तब चंदा घरके दरवाजेका ताला खोल रहीथी.. जेसेही दरवाजा खोलके अंदर गये....अब आगे

दरवाजेके पासही अ‍ेक धिरेनके नामका (लीफाफा) कवर पडाथा.. तो धिरेनने जटसे उठालीया ओर लीफाफा खोलके देखने लगा तो अ‍ेक लेटर था.. जीसे पढके धिरेन खुसीके मारे उछलने लगा ओर अपनी मम्मी चंदाको गोदमे उठालीया ओर गोल गोल घुमने लगा तब चंदा ओर देवायत दोनोही हस रहेथे चंदा कीतने दीनोके बाद धिरेनको अ‍ेसे खुस देख रहीथी.. तभी चंदाको नीचे उतारा ओर कहा..

धिरेन : (खुसीसे) मोम.. आपको पता हे ये क्या हे..? अरे मेरा कोल लेटर हे मेरी नोकरी पकी होगइ..

चंदा : (खुसीसे सोकट होते) क्या..? वो अप्लीकेशन दीयाथा वो..? बेंक की थी नां..?

धिरेन : (खुसीसे) हां मोम वही हे..देखता हु कब जोइन करना हे..

कहेते वो फीरसे लेटर पढने लगता हे तब उनके चहेरेकी हवा नीकलने लगती हे ओर वो परेसान होने लगता हे तब लेटर पढतेही उपर अपने कमरेकी ओर भागता हे.. तो चंदा ओर देवायत दोनोही उसे हेरानीसे देखते रहेते हे तभी चंदाको याद आता हे तो वो देवायतको सोफेपे बेठनेके लीये कहेती हे ओर इनके लीये पानी लेने कीचनमे चली जाती हे..

आज दोनोही अ‍ेक दुसरेसे बात नही कर रहेथे.. जबसे धिरेनको पता चला.. तबसे चंदा देवायतसे बहुतही सरमा रहीथी.. वो पानी लेके आइ ओर देवायतको देदीया तब देवायत पानी पीते उनकी ओर देखता रहा तो वो सरमसे पानीपानी होने लगी.. जब देवायतने ग्लास वापस दीया तो वो लेके सरमाते जटसे कीचनमे चली गइ तब देवायतकोभी कुछ अजीब लगा..ओर उसे देखता रहा.. तभी उपरसे धिरेन आगया..

धिरेन : (जोरोसे) मोम.. मुजे आजही जोइन करना हे.. ओह गोड.. लेटर इधर थातो पताही नही चला.. अच्छा हुआ हम इधर टाइमपे आगये.. वरना ये जोबतो गइथी हाथसे.. मुजे अभी नीकलना हे..

चंदा : (बहार आते) बेटा तेरे सब पेपर बेपर तो लेले..

धिरेन : मोम.. उपर वोही लेने गयाथा सब लेलीया जीजु.. आप बैठो मुजे अरजन्ट जाना होगा.. मे दोपहरको आके मीलता हु..

देवायत : धिरेन मेभी चलता हु.. तु मुजे रास्ते पे छोडदे ओर मेरी कार लेके चलाजा..

धिरेन : अरे नही जीजु पासके सहेरमे तो हे.. अभी आधे घंटेमे पहोच जाउगा ओर सहेरमे ट्राफीक बहुत होता हे कार कहा लेजाउ.. मेरी बाइक ही काफी हे अभी पहोच जाउगा आप बेठना.. चलो मोम बाय.. बाय जीजु..

कहेते अपने सब पेपर समेटते जटसे बाइककी ओर भागा ओर बाइक लेके जाने लगा तब चंदाने कहा..

चंदा : बेटा पहोंचतेही फोन करदेना..

धिरेन : (जाते) हां मोम फीकर नोट.. बाय..

कहेके धिरेन बाइक लेके चला गया तब चंदाने राहतकी सांसली.. तभी उसे देवायतका खयाल आया ओर उसने फटाकसे दरवाजा बंध करलीया ओर पलटके देवायतकी ओर देखने लगी.. तो देवायत अभीभी सर जुकाके सोफेपे बेठा था.. तभी उसे अपने पेरके पास चंदाके पांव देखे ओर उसने सरको उचा करते चंदाको देखा.. तब चंदाकी आंखसे अश्रुओकी धारा बेह रहीथी.. उसने देवायतका हाथ पकडके उसे खडा करदीया..

चंदा : (जोरोसे बाहोमे भरते) जानु आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजसे आपके बीना नही रहा जाता आप कुछ बोलते क्यु नही..? दो दीनसे मीलनेभी नही आये.., मुजसे क्या गलती होगइ..




देवायत : (उनके होंठोपे उगली रखते) सीसीसी.. बस.. सांत होजा.. कुछ गलती नही हे.. सब सही होगया हे.. बस अ‍ेक डरसा लग रहाथा.. वो धिरेन थातो.. तुम्हे कैसे मीलता..?

चंदा : (कंधेपे सर रखते) जानु.. अबतो धिरेनको सब पता चल गया हे.. मंजुने उसे बात करली हे.. ओर सायद अब पुनमभी सब जान चुकी हे.. लेकीन अब मुजे कीसीकी परवा नही हे.. मुजे सीर्फ आप चाहीये..

देवायत : (पीठ सहेलाते हसते) तो फीर वहा रुकी क्यो नही..? वही रेह जाती.. मंजुभीतो यही चाहती हे..

चंदा : अभी नही.. पहेले धिरेन पुनमकी सादी होजानेदो.. फीर मे खुद चली आउगी.. आइ प्रोमीस..

देवायत : (अलग होते चहेरेको थामते) चल ठीक हे.. अब मे चलु..?

कहेते बहारकी ओर जाने लगता हे तभी अचानक चंदाने उनका चहेरा पकडलीया ओर देवायतकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखती रही फीर अचानक उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमते आखीरमे उनके होंठ चुमने लगी.. फीर उनकी आंखोमे देखते नजर जुकाली ओर सरमाते धीरेसे कहा..




चंदा : क्या अपनी बीवीको अ‍ेसेही छोडके जाओगे..? जानु.. अब मुजे हर दीन हर रात आपका प्यार चाहीये.. नही रेह सकती आपके बीना.. मत जाओ.. प्लीज.. रुक जाओ..

तभी देवायत उनकी ओर देखता हे ओर चंदाको बाहोमे भरते उसे अपनी गोदमे उठा लेता हे तो चंदा सरमाते अपने दोनो हाथ देवायतकी गरदनमे डालते कामुक मुस्कान करने लगती हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखतेही रहेते हे तब देवायत चंदाको उठाते धिरे धिरे सीडीयोपे चडने लगता हे तब चंदाकी चुतमे जोरोसे हलचल सुरु होगइ ओर वो देवायतके लंड लेनेको फडफडाने लगी ओर पानी छोडने लगी..

तभी देवायत चंदाको उनके बेडरुममे लेजाता हे ओर बेडपे सुलातेही खुद उनके उपर चडके लेट जाता हे तब चंदा उसे जोरोसे बाहोमे भरलेती हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे ओर पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते अपनी जीभका पेच लडाने लगते हे.. दोनोही पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगे..




अब दोनोसे अ‍ेक दुसरेको मीले बीना रहा नही जाता तभी देवायत चंदाके उपरसे हट जाता हे.. तो चंदाभी जटसे बेडसे उतर जाती हे ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते कपडे फटाफट नीकालने लगते हे तब थोडीही देरमे दोनोके कपडे अ‍ेक कोनेमे साथ पडेथे.. तभी चंदा वापस बेडपे लेट जाती हे ओर देवायतको अपने उपर खीच लेती हे.. तभी देवायत उनकी साइडमे चीपकके चंदाकी गरदनको चुमने लगता हे..




तब चंदा पुरी तराह मदहोस होने लगती हे तभी दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहको खोलते चुमने लगते हे ओर अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगते हे..दोनोही पुरी तराह कामातुर हो गयेथे तभी देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकते चंदाके बुब्स मसलने लगता हे ओर अपना मुह चंदाकी चुतपे रखते अपनी जीभ चंदाकी चुतमे घुसा देता हे तब चंदा पुरी तराह मदहोस होते छटपटाने लगती हे..ओर देवायतके सरके बालोको खीचने लगती हे..




चंदा देवायतकी इस हरकतको ज्यादा देरतक बरदास्त नही करपाइ ओर वो कमरको जटके देने लगी तभी इनकी चतुसे पानीका फवारा नीकलके देवायतके मुहपे छा गया.. ओर चंदा कमर पटकते सांत होगइ.. तब देवायत फटाफट बाथरुममे जाके मुहको साफ करके वापस आगया ओर चंदाके पेरकी ओर अपना सर रखके लेट गया तब चंदाभी समज गइ

ओर वो धीरेसे करवट लेते देवायतके उपर अ‍ेक पेर डालके उनके उपर चड गइ ओर उनका लंड पकडके धीरे धीरे सहेलाते अपना मुह लगा दीया ओर लंड चाटते चाटते लंडको मुहमे भरलीया.. तभी देवायतभी वापस चंदाकी चुतमे मुह लगाते उसे चुसने लगा.. ओर दोनोही सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेके लंड चुतको खरोदने लगे..




जब देवायतका लंड तनके फुल गया ओर चंदाको अपने मुहमे सख्त महेसुस होने लगा तब वो जटसे देवायतके उपरसे उतर गइ ओर पीठके बल लेटते देवायतको खीचके अपने उपर चडाने लगी.. अब वो देवायतके लंडको अपनी चुतमे जल्दसे जल्द डलवाना चाहतीथी..जब देवायत उनके उपर लेट गयातो चंदाने आधी आंख नसीली करते देवायतका लंड पकडलीया ओर अपनी चुतपे घीसने लगी ओर तीन चार बार घीसके लंडको गीला करदीया आखीर अपनी चुतके लव होलमे थोडा फसा दीया..

तब देवायतने चंदाके दोनो हाथ पंजेसे कसके पकडलीये ओर कमरको अ‍ेक जटका दीया तब लंड सीधाही चंदाकी चुतमे जड तक घुस गया तो चंदाकी चीख नीकल गइ ओर वो मदहोस होगइ ओर आधी आंख चडाके राहतकी सांस लेने लगी..




तभी देवायत धीरे धीरे करते कमरको हीलाने लगा ओर चंदाकी चुदाइ करने लगा आज चंदा बहुतही कामातुर होगइ थी मानो जींदगीमे वो देवायतसे पहेली बार चुदाइका आनंद लेरही हो.. वो देवायतसे दो दीनसे नही मीलीथी तो चुदवानेके लीये पागल हो रहीथी.. ओर आज उसे मौका मील गया.. देवायतने चंदाका अ‍ेक हाथ अभीभी पकडके रखाथा तब चंदाने दुसरा हाथ देवायतकी पीठमे रखदीया ओर बहुतही उतेजनाकी वजहसे वो देवायतके कंधोको अपने दातोसे काट रहीथी तब देवायत उसे धीरेसे चोदने लगा..




चंदा : (कामुक आवाजमे) सीसीसीइइइ देदेदेवुउउउउ आजजज चोददद डालोअअ अपपपनीनीनी चंदादाआआ कोओओओ आह आहह आहह सससससइइइइ नीनीनीचोचोडडडडाडाआआलोलोलो मुउउजेजेजे..

देवायत : चंदाआआ.. पुरा..डालदु..हां..बोलना..

चंदा : (कामुक सीसकारीया लेते) सीसससइइइ हां..हा..हा.. डाल..दो..आह..इइइइससससउउउहहहह

देवायत : बच्चा..आआआ आह.. डाल..दु..हां.. सीसीसस हां.. बोल..हां..

चंदा : हां... डाल..दो.. बबबहोहोहोततत.. मन.. हे..तो..ससससइइइइ आह.. आह..इइइइइससससस

देवायत : तुजे.. रोज.. चुदनानानाना हेहेहे..ससस..क्यु..नही..हीहीही रुकीइइइ..ससस

चंदा : सादीदीदीदीइइइ..सससइइइ ले..चलो..मुमुजेजेअ‍ेअ‍ेअ‍ेइइइइ मे... आजा..उउउगीगीगीसससइइ

देवायत : रोज..चुदवायेगीइइइ..हां..? बोल..नां.. मंजु..के..सामने.. हां..

चंदा : सीसीइइइआह..इइइइ हां.. चुदवाउउउगीइइ.. चोददलेलेनां..ससइइइइससस आह..ससइइ गइइइ..

कहेते चंदा जडने लगी तब उनका जोस थोडा ठंडा होगया तब देवायत हाथके बल उचा होते बेठ गया ओर चंदाकी कमर पकडते अपनी ओर खीच लीया तब चंदानेभी अपने दोनो पैर फैलादीये तब देवायत उसे जोरोसे चोदने लगा तो मंजु फीरसे उतेजीत होने लगी ओर जोरोसे सीसकारीया करते देवायतके दोनो पैर पकडलीये तो उनके बुब्स उछलने लगे ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी..




दोनोही अपना होस खो चुकेथे चंदाको अपनी चुतमे देवायतका लंड बहुतही सख्त लग रहाथा तो उनकी चुत लगातार पानी छोड रहीथी रुममे अ‍ेकदम सनाटा छाया हुआथा बस आवाज आ रहीथी तो चंदाकी चुडीयोकी खनखनाहट ओर फच..फच..फच..फच.. देवायतका लंड चंदाकी चुतमे तेजीसे अंदर बहार हो रहथा ओर चंदाके दोनो बुब्स चुदाइके तालमेलमे उछल रहेथे जेसे वोभी इस चुदाइका हीसा हो..

तभी अचानम देवायत चंदाके उपर जुक गया ओर चंदाको जोरोसे बाहोमे भीचते अपना सर चंदाकी गरदनमे छुपालीया ओर लंडको चंदाकी चुतमे जडतक घुसा दीया तो चंदाभी समज गइ ओर उसने देवायतको पीठसे अपने आपसे जोरोसे चीपका लीया ओर आंख चडाली.. तभी अपनी चुतमे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ जो अपनी बच्चेदानीपे पीचकारीया मारते महेसुस करने लगी ओर अ‍ेकदम उतेजीत होगइ ओर उनका पुरा तन कांपने लगा ओर देवायतको भाहोमे भीचते हल्की चीखके साथ जडने लगी..

दोनोही अ‍ेक साथ जड गये तब देवायत अपनी सांस दुरस्त करते अ‍ेसेही चंदाके उपर ढेर होगया तो चंदाभी देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. उनको अपनी चुतमे अभीभी देवायतका सख्त लंड महेसुस हो रहाथा वो सरमके मारे देवायतसे नजर नही मीला पा रहीथी वो अपना मुह इधर उधर करते अ‍ेसेही पडी रही ओर देवायतके सर ओर उनकी पीठ सहेलाती रही.. आज वो पुरी तराह तृप्त हो चुकीथी..

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६

दोनोही अ‍ेक साथ जड गये तब देवायत अपनी सांस दुरस्त करते अ‍ेसेही चंदाके उपर ढेर होगया तो चंदाभी देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. उनको अपनी चुतमे अभीभी देवायतका सख्त लंड महेसुस हो रहाथा वो सरमके मारे देवायतसे नजर नही मीला पा रहीथी वो अपना मुह इधर उधर करते अ‍ेसेही पडी रही ओर देवायतके सर ओर उनकी पीठ सहेलाती रही.. आज वो पुरी तराह तृप्त हो चुकीथी....अब आगे

चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आज वाकइ मुजे थका दीया.. अब उतरना नही हे क्या..?

देवायत : (सर उचा करते) नही चंदा.. मुजे आज तुमपे बहोत प्यार आ रहा हे.. अ‍ेसेही रहे.. मे तुजे अ‍ेक बार ओर चोदना चाहता हु.. भलेही कुछ देर लगे..

चंदा : (सरमाते हसते) देवु.. तुजे देर होजायेगी.. ओर धिरेनभीतो आजायेगा..

देवायत : (हसते) क्यु.. तुजेभी तो आना हे.. अभी नही केह रहीथी.. ले चलो मुजे.., हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) वोतो अ‍ेसेही.. ना जाने मुजसे क्या क्या पुछते थे.. मे जोसमे बोल गइ..हें..हें..हें..

देवायत : नही चंदा तुमने जोभी जोसमे आके बोला सब सच हे.. तुने अपनी दीलकी बात बतादी.. तो क्या मेरा बच्चाभी..

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते) देवु.. प्लीज.. वो हम दोनो बादमे सोचेगे.. मेने मंजुसे कुछ वादा कीया हे.. मुजे उनके बच्चेको पालना हे फीर हम कुछ सोचेगे.., अब उतरना नही हे..? अभीभी अंदर सख्त लग रहा हे..

देवायत : (हसते) नही चंदा.. येतो अ‍ेसेही अंदर रहेगा जबतक तुजे दो बार चोद नही लेता चल आजा..

कहेथे देवायत लंड अंदर रखतेही बेठ गया ओर चंदाके दोनो हाथ खीचके उसेभी अपनी गोदमे बीठालीया तब चंदा देवायतके दोनो पैरपे अपना पैर फैलाते बेठ गइ ओर देवायतसे चीपकके उनके कंधेपे सर रखदीया तभी देवायत उनको जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे ओर अपनी कमरको धीरे धीरे बेठेही आगे पीछे करने लगता हे.. तब चंदाभी उनसे चीपकते बेठे बेठेही देवायतसे चुदवाने लगी.. तब..




देवायत : (लडखडाती आवाजमे) चंदा.. तुजे चोदने मे बहोत मजा आता हे..क्या सेक्सी लग रही हे तु..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) तो चोदोनां.. मुजे चोदतो रहे हो.. तो फीर आजाते.. मीले ही नही..मेने कीतना वेइट कीया..

देवायत : यार.. वो धिरेनकी वजहसे.. ओर मंजुके बारेमे जानके डीस्टर्ब होगया था..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) अबतो धिरेनकोभी पता हे तो उसे क्या डरना.. ओर मंजु.. मेरी सौतन.. मेरी बहेन.. बहुत प्यारी हे.. देखना.. अ‍ेक दीन हम तीनो ही अ‍ेकही बीस्तरमे साथ में..

देवायत : (धीरे धीरे चोदते हसते) क्या अ‍ेक दीन.. पुरा बोलनां..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) तुम बहोत गंदे हो.. बेसरम.. मुजे नही बोलना..

देवायत : (हसते) अरे बोलनां.. क्यु सरमा रही हे..

चंदा : (सरमाते देवायतसे चीपकके) नही.. नही बोलना.. बेसरम.. आप बहोत बदमास हो..

कहेते हसने लगी तो देवायतभी कामुक होगया ओर चंदाको अपनी बाहोमे भीचते जोरोसे लंड अंदर बहार करते चंदाको चोदने लगा तब चंदाभी काफी गरम होगइ ओर मदहोस होने लगी.. देवायतके कंधेपे सर रखते उनकी गरदन चुमने लगी ओर कंधेपे अपने दांत गडाके देवायतको ओर उतेजीत करने लगी.. तब देवायतको बहोत जोस चड गया ओर वो तेजीसे कमर आगे पीछे करते चंदाकी जोरोसे चुदाइ करने लगा..

तब दोनोकी चुदाइकी वजहसे पुरे कमरेमे फच..फच..फच..फच.. आवाज आने लगी तभी चंदा खुब सरमाइ ओर देवायतको बाहोमे भीचते उसे अपने उपर खीचलीया ओर वो पीठके बल लेट गइ अपने दोनो पैर घुटनोसे मोड लीया तभी देवायत हाथके बल उचा होगया ओर चंदाके दोनो हाथ सख्तीसे पकडलीया ओर तेजीसे कमर हीलाते चंदाको जोरोसे चोदने लगा ओर दोनोके बीच अ‍ेक बार फीर घमासान चुदाइ होने लगी.. चंदाकोभी बहुत जोस चडा हुआथा मानो वो स्वर्गमे पहोच गइ हो.. तब देवायत उसे चोदते हुअ‍े पुछता हे..




देवायत : (कामुक आवाजमे) हां अब बोल.. क्या केह रहीथी हम तीनो अ‍ेक.. बीस्तरमे.. क्या..?

चंदा : (जोरोसे चुदवाते मदहोसीमे) नहीइइ पताआआ सीइइइ आहह आहह आहह सीसससइइइ उउउउमममम हहममममम

देवायत : (जोसमे) हांआआ बोललललनांनांनां हहहसससस तुम दोनो कोकोको..चोचोदुदुगागागा..

चंदा : (जोसमे) हांहहवोहीइइइ हम दोदोनोनोनोकोकोको साथथथमेमेअ‍ेअ‍े चोचोचोदददलेलेलेनानानां..

देवायत : चंदादादा.. मेरारारा बच्चा पैदादादा करेगीगीइइ हां...बोबोबोलललनानानां.. हं..हहहइइ

चंदा : (नसीली आंखसे लडखडाते) हंहं हाहाहा ककरुरुउउगीगीगी डाल दोदोदो बच्चा ससससइइइइइहह देदेदेवुवुवु ओररर जोजोरोरोसेसेसे चोचोचोदोदोदो सीसीसी अअअअहहहमममइइइइइ आह आह उउउउउइइ

देवायतने चंदाके दोनो हाथ सख्तीसे पकड रखेथे ओर वो कमरको जोरोसे जटके मारते चंदाकी चुतमे जडतक लंड को घुसाते सोट मारने लगा तो चंदाको अपनी बच्चेदानीके मुखपे देवायतका लंड टकराते महेसुस होने लगा तब वो कामातुर होगइ देवायतका हर धकेसे लंड बच्चेदानीसे टरकरा रहाथा तब चंदाकी आहे नीकल जाती थी.. उनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ आज तक नही हुइथी ओर वोभी लगातार दो बार बीना लंड बहार नीकालेही.. चंदाका पुरा सरीर टुट चुकाथा उनकी अ‍ेक अ‍ेक नब्स देवायतने ढीली करदी..




दोनोके बीच चुदाइका काफी लंबा दौर चला, तभी देवायत चंदाके उपर पुरी तराह चीपकते लेट जाता हे तब चंदा देवायतको जोरोसे कसके बाहोमे भीच लेती हे ओर देवातसे होंठ मीलाते लीपलोक करलेती हे, तभी देवायतको अपने लंडके उपर चंदाके पानीकी बोछार महेसुस होने लगी तो उनकी वजहसे देवायतके लंडमेभी जुरजुरी होने लगी ओर देवायतने कांपते सरीर से अपना लंड चंदाकी चुतमे जडतक घुसा दीया ओर उनसे चीपक गया तो लंड सीधाही चंदाकी बच्चेदानीसे जाके टकराया..

ओर गरम पानीकी पीचकारीया मारते बच्चेदानीपे विर्यकी बौछार करने लगा, तब चंदाकी जोरोकी चीख नीकल गइ.. ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर अपने होंठ देवायतके होंठसे चीपकालीये.. तब दोनोही पसीनेसे तरबर हो चुके थे.. देवायत चंदाके उपर अ‍ेसेही ढेर होके पडा रहा तो चंदाभी उनकी पीठ सहेलाती अ‍ैसेही पडी रही दोनोही नीसब्द काफी देर पडे रहे.. चंदाकी चुत ओर देवायतके लंडके पास काफी कुछ चीपचीपासा होगया.. ओर चंदाको अपनी चुतमे हल्कासा दर्द होने लगा..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आजतो आपने मुजे तोडके रख दीया मे हीलभी नही सकती बहुत थक गइ हु उतरो.. प्लीज..

देवायत : (थकी आवाजमे) चंदा.. बस.. पडे रहेने देनां.. बहोत मजा आता हे..

चंदा : (सरमाते) क्या मजा आता हे..? अरे बाबा आजतो मुजे पुरी नीचोडली, अभी कीतना मजा करना हे? हटो यार नीचे दर्द कर रहा हे.. पता नही आज कीतना जोसमे करते थे.. प्लीज.. हटो बाबु.. धिरेन कभीभी आ सकता हे..

देवायत : (घडीकी ओर देखते) ओ बापरे.. हमे तीन घंटे हो गये..?

चंदा : (सरमाके हसते) ओर नही तो क्या.. आप दो घंटेसेतो मेरे उपर पडे हो.. जनाबको दो बार करनाजो था.. हटो मेरी चुतकीतो धजीया उडादी पता नही कैसी हालत होगी.. मुजे बाथरुममे ले चलो प्लीज..

देवायत : हां चलो अबतो उतरनाही पडेगा.. देखना वहा तुजे छोडने वाला नही हु.. पुरी रात करुगा..

कहातो चंदा सरमसे पानीपानी होगइ तभी देवायत उतके उपरसे उतर गया तब उनका लंड फच.. आवाजके साथ बहार आगया.. तब चंदा खुब सरमाइ ओर देवायतने उसे गोदमे उठालीया ओर बाथरुमकी ओर चल पडा तब चंदाकी चुतसे दोनोका कामरस नीचेकी ओर फर्सपे टपकने लगा.. ओर दोनो बाथरुममे घुस गये ओर फटाफट नहाने लगे.. तब अंदरभी देवायतने चंदाकी खुब छेडखानीकी लेकीन चंदाने ओर चुदवानेके लीये मना करदीया क्युकी उनकी चुत सुज के पांव जैसी होगइ थी..

फीर दोनो बहार आके तैयार होने लगे तब चंदा सरमाती देवायतको कामुक तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. ओर कपडे पहेनके मीररके सामने अपने बाल बनाने लगी.. ओर बाल बनाते मीररसेही देवायतको सरमाते देखती रही.. दोनोही तैयार होगये तब देवायत चंदाके पास चला गया तो चंदा जटसे खडी होगइ ओर पलटके देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके होंठ मील गये, फीर देवायतके सीनेमे सर रखके खडी होगइ तभी देवायतने उनका सर चुमलीया..




तभी देवायतने उसे गोदमे उठालीया ओर दोनो नीचे चलने लगे तब चंदा देवायतको गीली आंखसे बस देखती ही रही उसे अब देवायतसे बीछडना बीलकुलही अच्छा नही लग रहाथा.. देवायतने उसे सोफेपे बीठाया ओर उनकी इजाजत लेके पलटके जाने लगा तब चंदा अ‍ेक बार फीर जटसे खडी होगइ ओर देवायतका हाथ खीचते अपनी ओर खीचलीया ओर उनकी बाहोमे समा गइ.. ओर होंठ चुमलीये फीर देवायत जटसे चला गया.. तब चंदा भारस मनसे धीरे धीरे चलते कीचनकी ओर जाने लगी, आज देवायतने इनकी हालत खराब करदी थी..

वो अभी कीचनमे खाना बनानेकी तैयारीया करही रहीथी की कीसीने दरवाजा खटखटाया तो वो जटसे लंगडाके आके दरवाजा खोलने लगी जेसेही दरवाजा खोला तो सामने धिरेन खडा था तो चंदाको देखतेही इतना खुस होगया की बहारही चंदाका मुह पकडके उनके गालमे चुमा लेलीया..




तो चंदा बडी आंख करते खुस होके हसने लगी.. ओर धिरेनने वहीसे चंदाको गोदमे उठालीया फीर अंदर होलमे आके खुसीके मारे गोल गोल घुमने लगा तब चंदाभी खुस होके हसती रही.. फीर धिरेनने उनको सोफेपे बीठाया ओर खुदभी उनसे चीपकके बैठ गया ओर चंदाको बेठेही हग करलीया..

चंदा : (हसते) क्या मेरे बेटेकी नोकरी पकी होगइ..?

धिरेन : (हसते आस्चर्यसे) मोम.. आपको केसे पता..?

चंदा : (जोरोसे हसते) अरे आतेही अपनी मोमको चुमाचाटी करने लगा ओर मुजे पुरे धरमे गोल गोल घुमा दीया तो इतनातो समजही गइकी खुसी बहोत बडी हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) वेरी स्मार्ट.., मोम.. मेरी जोब पकी होगइ.. अच्छा हुआ मे टाइमपे पहोच गया..

चंदा : (हसते) हं.. ये बता तुजे कब जोइन करना हे..?

धिरेन : (हसते) बस मोम दो दीनके बाद पहेली तारीखसे..

चंदा : (हसते) चल ठीक हे.. जा फ्रेस होजा तबतक मे खाना बनालेती हु.. ओर सुन.. (हसते) अपनी मंजु दीदी ओर अपनी बीवीकोभी फोन करके बता देना.. जा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या मोम.. आपभी.. अरे हां..जीजु कीधर गये क्या चले गये..?

चंदा : (हसते) हां उनको कुछ कामथा तो चले गये.. जा..

तब धिरेन अपना पेपर लेके उपर भाग गया तब चंदा कीचनकी ओर जाते सोचते हसती रही की..

चंदा : (मनमे) तेरे जीजुने आज तेरी मांकी पुरी बेन्ड बजादी हे.. ठीकसे चलभी नही सकती.. कही धिरेनको पता ना चल जाये.. कीतना जोसमे करतेथे.. इतने जोसमेतो मे कभी नही चुदी..चोद चोदके मेरी हालतही खराब करदी पता नही धीरेन मुजे अ‍ेसे देखके क्या सोचेगा? उनको जरुर पता चल जायेगाकी उनकी मा चुद गइ हे हें..हें..हें..

उधर धिरेन पहेले नहाने चला गया फीर बहार आके तैयार होगया ओर मंजुको फोन करके उनसे सब बताने लगा तो सुनके मंजु बहोत खुस होगइ ओर उनको कोन्ग्रेच्युलेशन दीया फीर मंजुने धिरेनसे पुनमकीभी बात करवाइ तो उसनेभी खुस होके धिरेनको कोन्ग्रेच्युलेशन कहा, फीर काफी देर बात करनेके बाद धीरेसे रातको फोनमे बात करेगे कहेते फोन काटदीया ओर धिरेन नीचेकी ओर जाने लगा तभी वो अपनी मम्मी चंदाके रुमके पास से गुजरने लगा तो....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७

उधर धिरेन पहेले नहाने चला गया फीर बहार आके तैयार होगया ओर मंजुको फोन करके उनसे सब बताने लगा तो सुनके मंजु बहोत खुस होगइ ओर उनको कोन्ग्रेच्युलेशन दीया फीर मंजुने धिरेनसे पुनमकीभी बात करवाइ तो उसनेभी खुस होके धिरेनको कोन्ग्रेच्युलेशन कहा, फीर काफी देर बात करनेके बाद धीरेसे रातको फोनमे बात करेगे कहेते फोन काटदीया ओर धिरेन नीचेकी ओर जाने लगा तभी वो अपनी मम्मी चंदाके रुमके पास से गुजरने लगा तो....अब आगे

उनकी मोमके बेडको देखके कुछ अजीब लगा पुरा बेड अस्त व्यस्त था लेकीन अंदर जानेकी हींमत नही हुइ ओर वो सोचते हुअ‍े नीचे आगया की (उनकी मम्मी ओर जीजु दोनोने मीलके कुछ..नही नही.. मे गलत सोच रहा हु.. मम्मी अ‍ैसी नही हे.. यही सोचते वो नीचे आके बेठ जाता हे ओर अपने पेपर देखने लगता हे उधर देवायतभी कार लेके अपने गांवकी ओर चला गया वो सीधाही सरपंच राधवके घर चला गया..

जेसेही अंदर गया तो रश्मी होलमे बेठीथी देवायतको देखतेही खुसीसे दोड पडी ओर फटाफट दरवाजा बंध करलीया ओर दोडके देवायतसे लीपट गइ, दोनोही अ‍ेक दुसरेको पागलकी तराह चुमने लगे ओर देवायतका हाथ पकडके सोफेपे बीठाते उनकी गरदनमे दोनो हाथ डालके गोदमे बेठ गइ..




रश्मी : (हसते होंठ चुमते) आखीर मेरे जानुको मेरी याद आही गइ.. बहुत तडपाया हे आपने मुजे, क्या यहा आनेका टाइम नही मीलता..?

देवायत : (बुब्स दबाते) नही डार्लींग अभी बहोत बीजी था बोल क्या काम था.. सब नीपट गया..?

रश्मी : हां अब जाके सांती मीली हे.. अरे बाबा बहोत रीस्तेदार इनको देखेने आते थे.. मेने तो सबको केह दीयाकी मेरे पेटमे इनका बच्चा हे.. मे पेटसे हु, अरे बाबा मुजे जटसे प्रेगनेन्ट करदो.. वरना टाइम नीकल जायेगा कहो कब आ रहे हो? पुरा दीन इधर रहेना पडेगा.. मे सब तैयारीया कर लुगी..बस मुजे अ‍ेक बच्चा देदो..

देवायत : (हसते) कल आउगा.. कल तेरा काम होजायेगा.. ओर सुन तुजे मेरे साथ अ‍ेक बार सहेरभी आना हे.. तुजे मुनीमकी जगाह रखना हे तो पंचायतकी ओफीसमे जाना पडेगा ताकी तुजे घर चलानेमे कोइ तकलीफ नाहो, बाकीतो मे हु ही.. तुजे मेरी बीवी बनकेही इधर रहेना हे.. समज गइनां..

रश्मी : (खुस होते होंठ चुमते) अरे बीवी क्या मुजे अपनी रखैल बनाके रखोगे तोभी चलेगा.. अब मुजेतो सीर्फ आपसे मतलब हे.. मे हमारे बच्चेको पालुगी.. ओर इनके सहारेही जी लुगी.. ओर हां.. आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. इधर कुछ कागजात पडे हे सायद सब आपकी जमीनके हे.. तो आप लेजाइअ‍ेगा..

देवायत : नही रश्मी.. तुजे रखैल बनके नही मेरी बीवी बनकेही रहेना हे बस इस बातको कीसीको पता नही चलना चाहीये.. ओर सुन ये कागजातसे मुजे याद आया आज तुजे अ‍ेक काम करना पडेगा.. मेरे घर आना पडेगा.. ओर मेजो कहु उसे मंजुको जाके कहेना..

कहेते देवायत पुरा प्लान रश्मीको सुना देता हे, तो रश्मीभी सुनके बहोत खुस होजाती हे ओर सामको मंजुको मीलनेका तैय करती हे.. ओर देवायतके लीये कुछ ठंडा लाने कीचनमे चली जातीहे तब देवायतभी उनके पीछे कीचनमे चला गया ओर रश्मीके पीछे जाके उसे बाहोमे भीचलीया ओर दोनो हाथसे उनके बुब्सको मसलने लगा तब रश्मीभी उतेजीत होगइ ओर पलटके देवायतकी ओर होगइ तब दोनोके होंठ मील गये..

फीर हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको पेन्टके उपरसेही हाथमे पकडते मसलने लगी फीर अचानक नीचे घुटनोके बल बेठ गइ ओर देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलदी ओर उनकी चडी नीचे करते लंडको बहार नीकाल लीया तब देवायतका लंड रश्मीको देखतेही जटके मारने लगा ओर हवामे सलामी देने लगा तभी रश्मीने उसे मुठीमे भरलीया ओर उनपे जीभ फीराते धीरेसे अपने मुहमे लेलीया..




फीर धीरे धीरे मुहमे लंडको अंदर बहार करने लगी तो देवायतने उनका सर पकडलीया ओर कमर आगे पीछे करते रश्मीके मुहमे चोदने लगा तो लंड रश्मीके गलेमे हलक तक चला जाता था तब रश्मी गं..गं..गं.. करती रही.. ओर थोडीही देरकी मुह चुदाइके बाद देवायत रश्मीके मुहमेही जड गया ओर रश्मीका पुरा मुह भर गया तो काफी पानी उनके हलकमे उतर गया ओर रश्मी पुरा पानी पीगइ ओर देवायतके लंडको चाटते हुअ‍े साफ करने लगी फीर बाथरुममे भाग गइ..




जब मुह साफ करते वापस आइतो बडीही सरमाते हसती हुइ आइ ओर आतेही देवायतकी बाहोमे समा गइ फीर दोनोने वही कीचनमेही ठंडा पीया ओर देवायतने अ‍ेक बार फीर रश्मीको समजा दीया ओर वापस महेलमे आगया तब मंजु अपने रुममे कुछ कर रहीथी तो पुनमभी अपने रुममे धिरेनसे बात कर रहीथी..

तो देवायत धीरेसे अपने रुममे घुस गया ओर दरवाजा बंध करके मंजुके पीछे चला गया ओर उसे पीछेसेही अपनी बाहोमे भरलीया.. तब मंजु चोंकते पलट गइ.. जेसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर देवायतको कसके बाहोमे भरते उनके होंठ चुम लीये फीर अलग होते उनकी आंखोमे देखती रही.. तब देवायतने हसते पुछा..




देवायत : (हसते) बेबी क्या देखके हस रही हो.. कुछ हुआ हे क्या..?

मंजुला : (हसते) हां.. जानु सुना आपने..? वो धिरेनका फोन आयाथा.. तब आप क्या वहा थे..?

देवायत : (हसते) नही मेतो छोडके आगया था..

मंजुला : (खुस होते) जानु वो धिरेनकी नोकरी लग गइ.. उनको बेंकमे जोब मील गइ..

देवायत : (खुस होते) क्या..? मील गइ..? बेचारेका कोल लेटर घरके अंदर पडाथा देखतेही सब लेटर लेके जो भागा..हें..हें..हें.. अच्छा हुआ टाइमपे चला गया.. चलो अच्छा हुआ.. अब पुनमकी चीन्ता नही हे..

मंजुला : (सरारतसे हसते) जानु.. धिरेन चला गया तो.. कुछ.. करते.. आप दोनोही अकेले थे..

देवायत : (सरमाते हसते मंजुके सरपे अ‍ेक टपली लगाते) चल हट.. कैसी बाते करती हे.. क्या मे वहा रोमान्स करने गया था..? बात करती हे..

मंजुला : (हसते) जानु आज अच्छा मौका था कुछ आगे बढते.. वेसेही अब वो आपकी बीवी होने वाली हे..

देवायत : नही मंजु जब तक तु हे मुजे कीसीकी जरुरत नही.. तुही मेरे लीये काफी हे..

मंजुला : नही बाबु.. मे चाहतीहु मौसी जल्दसे जल्द इस घरमे आजाये.. मेभी कुछ महीने इनके साथ रेह लुगी.. वो मेरी सीर्फ मौसीही नही मेरी बडी दीदीभी हे आपकी साली.. (हसते) आधी घरवाली..हें..हें..हें.., जानु इनको पुरी घरवाली बनादो.. फीर देखो हम दोनो मीलके आपको कीतना प्यार करती हे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे बादमे देखेगे.. अब तुजे भुख नही लगी क्या..? कहा गया वो लखन ओर पुनम.. दीखाइ नही देते..

मंजुला : (हसते) आपकी लाडलीतो फीनपे बीजी हे.. लगता हे धिरेनका फोन हे.. ओर लखनतो सुबसे ही खेतोपे चला गया हे.. इनको वहा बहुत अच्छा लगता होगा.. वही पडा रहेता हे..

तभी लखनभी आजाता हे तो मंजु पुनमको आवाज देके बुलालेती हे जेसेही पुनम बहार आइ देवायतको देखते उनके चहेरेपे रोनक आगइ.. ओर सभी डाइनींग टेबलपे बेठ गये देवायतके बाजुमे पुनम बेठ गइ तो मंजु टेबलके सेन्टरमे देवायतके पास बेठीथी ओर देवायतके सामने लखन बेठ गया तब दया ओर रजीया सबको खाना परोसने लगी तभी पुनम अपना पैर देवायतके पैरपे रख देती हे..

तो देवायत उनके सामने देखता हे तो वो चुपचाप खाना खाने लगी देवायतने पैर हटाना चाहा लेकीन पुनमने उनके पैरको सख्तीसे दबाके रखाथा तो अपना पैर नही हटा पाया ओर वेसेही रहेने दीया तब पुनम थोडी देरके बाद धीरे धीरे देवायतके पैर सहेलाने लगी तो देवायतकोभी बाबाकी सब बाते याद आने लगी जीनकी वजहसे देवायतको अब पुनमकी इस हरकत अच्छी लगने लगी..

वो पुनमको अपनी बहेन ना मानते अपनी मासुका मानते मजा लेने लगा तभी इस हरकतसे देवायतका लंड अपनी हरकत दीखाते धीरेसे खडा होने लगा जीनकी वजहसे पेन्टमे तंबु होने लगा तो पुनमने तीरछी नजर करते देवायतकी पेन्टकी ओर देखलीया ओर सरमाती मंद मंद मुस्कराने लगी..

तभी वो चोंक गइ क्युकी उनके पैरोपे देवायतका पैर महेसुस हुआ जो देवायत सहेला रहा था जीनकी वजहसे पुनम सरमके मारे पानीपानी होने लगी..ओर उनकी चुतभी हरकतमे आगइ जो होंठोकी तराह फडफडाते पानी छोडने लगी तब वो खुसीके मारे मुस्कराने लगी.. प्यारके मामले मे अब दोनोही थोडा खुलने लगेथे तो मंजुने पुनमको हसते हुअ‍े देख लीया तो पुछ लीया..

मंजुला : (मुस्कराते) क्यु ननंंदबा मनमे क्या लडु फुट रहे हे.. जो मुस्करा रही हो, हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) क्या भाभी.. आपभी.. कुछ नही.. सोच रही हु इस साल राखीपे भाइसे क्या गीफ्ट मांगु.. अभी अ‍ेक हप्तेके बाद ही हे.. हें..हें..हें.. देखना इस साल कुछ बडीयासी स्पेसीयल गीफ्ट लुगी..

मंजुला : हां भाइ.. कोइ तगडा गीफ्ट मांग लेना.. वेसेभी तुजे अ‍ेक गीफ्टतो दे ही दीया हे.. धिरेन.., हें..हें..हें.. अब तुजे ओर क्या चाहीये..?

पुनम : (सरमाते) क्या भाभी वोकोइ थोडीना गीफ्ट हे.. बस इस साल कुछ अ‍ैसा लेना हे भाइ जींदगीभर याद रखेगे.. हें..हें..हें.., इतनी महेंगी गीफ्ट लुगी.. देखना.. (देवायतकी ओर सरारतसे) क्यु भाइ दोगे नां मेरा गीफ्ट..? देखना फीर मुकर मत जाना..(तीरछी नेरोसे हसते)

देवायत : (हसते) हां भाइ पहेले बोलतो सही तुजे क्या चाहीये तभी तो दे सकुगा..

मंजुला : (हसते) पुनो तुजे आजतक तेरे भाइने मना कीया हे क्या..? अरे तु मांगले बीन्दास ये दे देगे..

पुनम : (देवायतकी ओर तीरछी नजरसे हसते) भाइ तैयार रहीयो.. समय आनेदो मांग लुगी..

देवायत : वो सब छोड पहेले ये बता तुम दोनोका रीजल्ट कब हे.. क्या कोलेजमे अ‍ेडमीशन मील गया..?

पुनम : भाइ पहेले रीजल्टतो आनेदो.. अभी देर लगेगी फीर अ‍ेडमीशनका देखेगे.. अभी अ‍ेक महीना लग जायेगा.. तब लेने जाना पडेगा आप साथमे चलीयेगा.. हम युनीर्वसीटीभी जायेगे..

मंजुला : (हसते) पुनो तुजे जीतना पढना हे पढना.. मौसीसे बात होगइ हे.. वो तुजे पढायेगी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. ससुरालमे केसे पढुगी..? कोइ कुछ कहेगातो..? यही रहुगी में..

मंजुला : (पुनमकी ओर देखते) क्या..? सादीके बादभी इधर रहेगी..? बेबी अ‍ैसा नही होता.. ओर भाडमे जाये लोग.. हमे कीसीका नही देखना जीनको जो सोचना हे भले सोचे.. हमे अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनी हे.. ओर हम कीसी पुराने रीवाजकोभी नही मानेगे.. पुछलो अपने भैयाको हम दोनोने तो यही डीसाइड कीया हे.. क्यु देवु..?

देवायत : हां बेबी.. मौसीने सामनेसे कहा हे ओर वो बहुतही अच्छी हे.. मेरी इनसे बात होगइ हे.. तु सादीके बादभी पढेगी.. वरना मे तुजे पढाउगा.. बस.. अब चुपचाप खाना खाले बहोत बाते होगइ..

अ‍ेसीही बाते करते सबने खाना खालीया ओर अपने अपने रुममे जाके आराम करने लगे देवायत आज सुबहसे दो बार चंदाको चोदके ओर अ‍ेक बार रश्मीके मुहको चोदके तीन बार खाली हो चुकाथा तो वो काफी थकायट महेसुस कर रहाथा बेडपे सोतेही नींदकी आगोसमे चला गया ओर सांम पांच बजेतक सोता रहा.. तो पुनम ओर मंजुभी बाते करते सोगइ पताही नही चला..

उधर भानुभी अपनी मामीको सुबह घर छोडने गया तब भानु ओर रमाने इसारोमे काफी कुछ बाते करलीथी जेसेही घर पहोचे.. रमाने घरका ताला खोला ओर सब अंदर आगये तब रमाने भानुको पानी भरके दीया ओर बहार घरमे सब ठीक करने लगी ओर काम करते नीलमसे कहेने लगी..

रमा : बेटी तु हमारे खेतोपे जाके कुछ सब्जी बब्जी लेके आ ओर गायको चारा डाल देना फीर थोडा दुध लेकर आजा तेरे भाइ इधर खाना खाकेही जायेगे.. पता नही तेरे बापु कहा होगे गायोको कुछ खीलायाभी हे या नही..

भानु : (हसते) अरे मामी क्यु नीलमको तकलीफ देते हो.. मेतो घर जा रहा हु..

नीलम : (हसते) नही भैया आप रुक जाओ मे अभी आधे पोने घंटेमे ही आजाउगी तबतक आप मामी भांजा बाते करो.. मे अभी लेके आइ.. आप जाना मत.. खाना खाके ही जाना..

देवायत : नीलु खेतभी तो दुर हे क्या मे साथ चलु..? वहा अकेली जायेगी..?

नीलम : अरे नही भैया मे अभी बीचमेसे ही जाउगी देर नही लगेगी वहा कहा कार चलाओगे.. सब कीचड हे..ओर वेसे यहा कोइ अकेली जानेमे डर नही हे.. मेतो अ‍ेसे कइ बार जाती हु..

रमा : (हसते) अब जाभी बहुत बाते करली ओर जल्दी आना.. वो दुधके लीये बरतन लेतीजा..




कहातो नीलम अ‍ेक बरतन लेके चली गइ, इनके जातेही रमाने दरवाजा बंध करलीया ओर भानुका हाथ पकडके उसे अपने रुममे लेगइ तब रुममे जातेही भानु लगभग रमाके उपर टुटही पडा फीर दोनोही आपसमे लीपट गये ओर अ‍ेक दुसरेको पागलोकी तराह चुमने लगे फीर रमा अपनी सारी कमर तक उची करके बेडपे लेट गइ क्युकी कपडे नीकालनेका टाइम नही था तब भानु भी पेन्टको नीचे करते चडी नीची करलेता हे ओर रमाके पैरके बीच बेठने लगता हे तो रमाने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैला दीये.. ओर भानुके सामने कामुक नजरोसे सरमाते देखने लगी....

कन्टीन्यु
 
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